Incest The Tiger - Page 11 - SexBaba
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Incest The Tiger

अपडेट 70

नेक्स्ट डे मॉर्निंग में पटल लोक से आने के बाद थकन के कारन आज मई 8बजे तक सोया नीलम उठ चुकी थी और बाथरूम से पानी की आवाज आ रही थी सायद नीलम नहा रही थी कुछ देर बाद नीलम टॉवल लपेट क्र बाथरूम से निकली मई तो देकते hi खो गया क्या संगेमरमर की तरह तराशा हुआ बदन और बालो से झड़ते पानी मोतियों की तरह प्रतीत हो रहे थे कुल मिलकर नीलम अप्सरा से काम नहीं लग रही थी.

नीलम - ओह hello ऐसे क्या देख रहे हो.

मई होस में आते हुए - देख रहा हु तुम कितनी सुन्दर लग रही हो टॉवल निकलने पर और कितनी सुन्दर लगोगी, कास मई रात को hi सुहागरात मन लेता.

नीलम - मई तो तैयार hi थी मगर तुमने hi खा की अपनी सुहागरात स्पेशल तरीके से मनाएंगे.

मई - कास मैंने ऐसा न खा होता तो अपनी सुहागरात अभी तक चलती रहती .

नीलम - जो हो गया सो हो गया अब चलो उठो और फ्रेश हो क्र आ जाओ हमे घर भी जाना है.

मई - यार एक गुड मॉर्निंग किश तो दे दो .

नीलम - बहन वाली दू या पत्नी वाली .

मई - इस रोमांटिक माहौल में क्या मई अपनी बहन से किश लू नहीं पत्नी वाला चाहिए.

फिर नीलम ने अपने होठ मेरे होठो पर रखा और हमारी किश स्टार्ट हो गयी हम अभी किश में खोय हुए hi थे की गेट के पास किसी के होने की आहात हुई तब मैंने किश तोड़ क्र गेट की तरफ देखा तो वह पर सिद्धि कड़ी मुस्कुरा रही थी. उसे देख क्र नीलम भी शर्मा गयी.

सिद्धि - वो मई आप लोगो को चाय देने आयी थी मगर आप लोग तो कुछ और hi क्र रहे थे हीहीहीही.

नीलम - है ठीक है उस टेबल में रख दो और जाओ यह से.

मई - क्यों बेचारी को डट रही हो ऐसे भी वो भी जवान हो गयी थी है.

नीलम - तुम न लड़कियों की जवानी को नापना बंद क्र दो नहीं तो कभी लेने के देने न पद जाये.

मई - जो आज्ञा रानी साहिबा .

ये बोल क्र मई बिस्तर से उठा और बाथरूम में चला गया और नाहा धो क्र जब मई बहार आया तो नीलम वह पर नहीं थी मई भी तैयार हो क्र बहार आये तो देखा की एक सोफे पर मल्लिका और नीलम बैठे हुए बात क्र रहे थे और सिद्धि मल्लिका के बेटे के साथ खेल रही थी.

मई भी उन दोनों के सामने जाकर बैठ क्र बाटे करने लगा कुछ देर में नास्ता भी आ गया फिर हम सब ने नास्ता ख़तम किया और फिर कुछ देर बाद मई और नीलम को निकलना था तो नीलम ने इस लेडीज और बाकि लोगो को समझा दिया की मल्लिका अब से यही रहेंगी तो उन्हें कोई तकलीफ न हो मैंने भी मल्लिका को आते रहने का वादा किया फिर हम दोनों फार्म हाउस से पैदल निकले और कुछ दूर जाने के बाद उड़ते हुए चले गए अपने सहर की तरफ.

अपने सहर पहुंच क्र झा मैंने अपनी साइकिल पार्क की थी वह पर पहुंच क्र नीलम को समझाया की सदी की बात किसी को पता न चले और नार्मल hi रहे फिर वो वह से अपने घर की तरफ निकल गयी और मई अपने घर की तरफ निकल गया.

घर पहुंच क्र मैंने देखा की दरवाजा खुला हुआ है और जब मई अंदर गया तो देखा की वह पर सामान बिखरा हुआ है मैंने बरी बरी से सभी को आवाज लगाई सभी के कमरों में जाकर देखा मुझे कोई नहीं मिला मेरा दिल घबराने लगा मान में कुक अनहोनी की आशंका होने लगी

मई अभी सोच हु रहा था की टेलीफोन की घंटी बजी मैंने देर न करते हुए टेलीफोन रिसीव किया तो

मई - hello

मुन्ना भाई - hello मर टाइगर हमे तुम्हारे आने का hi इंतजार था तुम्हारी बुआ और बाकि के सभी लोग मेरे पास है .

मई - क्या चाहिए तुम लोगो को.

मुन्ना भाई - वह तुम तो सीधा काम की बात पर आ गए ी लिखे आईटी, मुझे तुम से हाउ काम hai.maine तुम्हारे मोबाइल नंबर पर एड्रेस सेंड क्र दिया है चुप चाप चले आप और जायदा होश्यारी दिखने की किसिस की तो यद् रहे तुम्हारी प्रेग्नेंट बुआ का मई यही ऑपरेशन मई यही पर क्र दूंगा और बाकि की लड़कियों को नीलम क्र दूंगा.

मई गुस्से से- देखो उनलोगो को कुछ भी नहीं होना चाहिए तुम्हे मुझसे काम है न तो मई आ रहा हु.

फिर मई मोबाइल पर दिए गए एड्रेस पर गया तो देखा की कोई पुराणी बंद पड़ी मिल जैसी लग रही थी.

मई छुप क्र देखने लगा मिल के बहार भी मुन्ना भाई जे आदमियों का पहरा लगा हुआ था, अब मेरे दूसरी सकती के इस्तमाल करने का समय आ गए था .

मई उड़ते हुए मिल के ऊपरी भाग में जा पंहुचा और वह से चारो तरफ देखा की खा पर कितने आदमी है , मुझे सब से पहले अपनी फॅमिली को प्रोटेक्ट करना था तो मई उड़ते हुए पालक झपकने से पहले hi गुंडों को उसके मुँह की दबा क्र उठा क्र दूर ले ले जा क्र उचाई से निचे छोड़ देता. मिल के बहार जितने भी गुंडे थे उन सब के साथ मैंने वैसा hi किया किसी को कुछ समझ नहीं आया की उनके साथ क्या हुआ एक आदमी जैसे hi दूसरी तरफ देखता दूसरा आदमी गायब हो जाता इस तरह मैंने मिल के बहार खड़े सभी आदमी को मर दिया फिर मई मिल के ऊपर पहुंच गया और अपनी फॅमिली के लोगो को ढूंढने लगा मिल के अंदर भी अच्छे खासे आदमियों की बरमार थी एक जगह पर मुझे मेरी फॅमिली के लोग मिल गए उनलोगो को एक कमरे में बंद क्र के रखा गया था मई चुप चाप वह पहुंच गया मुझे वह पहुंचने में कोई परेशानी नहीं हुई क्यों की मिल की छत टूटी हुई थी .

मई वह से अंदर गया तो उनलोगो को सही सलामत देख क्र मुझे खुसी हुई और उन्हें भी मुझे वह पाकर रहत महसूस हुई तो मैंने उन्हें संत रहने को खा.

मई - आप लोगो को घबराने की कोई जरुरत नहीं है मई आ गया हु आप लोगो को मई एक एक क्र के बहार ले जाऊंगा

बुआ पहले आप चलिए .

फिर मैंने बुआ को गॉड में उठाया उन्हें समझ नहीं आ रहा था की मई क्या करने वाला हु ,मई बुआ को गॉड में ुहता क्र उस गया बुआ मुझे हैरानी से देख रही थी और उड़ते समय कास क्र मुझे पकड़ लिखे थी.

मई बुआ को घर में ले है क्र छोड़ा बुआ मुझसे कुछ पूछना चाहती थी.

मई - बुआ आपको जो भी पूछना है वो बाद में पूछ लेना अभी मुझे उन्हें भी बचाना है .

ये बोल क्र मई फिर उस गया और फिर काव्य और कविता को लेकर घर में छोड़ दिया और जब मई वापस आया तो देखा की एक आदमी समिति के सामने गन को तने खड़ा है मैंने तलवार को यद् किया और उड़ते हुए गया जिस हाथ से उसने गन तानी थी उस हाथ को hi काट दिया फिर वो चिल्ला पता उस से पहले उसकी गर्दन धड़ से अलग क्र दिया.

फिर मई समिति को लेकर घर में छोड़ दिया और वापस आ क्र मैं दूर से नार्मल पैदल hi वह पहुंच गया मुन्ना भाई को कुछ खबर hi नहीं हुई की उसके कई आदमी मरे जा चुके है और मेरी फॅमिली भी उनके सिकंजे से मुक्त है.

मई मुन्ना भाई के पास गया और पूछा की मुझे यह क्यों बुलाया है और मेरी फॅमिली को क्यों किडनैप किया गया है .

मुन्ना भाई - इतनी जल्दी भी क्या है अभी तो पूरा हिसाब मई तुम से लूंगा लेकिन कोई और भी है जिन्हे तुम से हिसाब चुकता करना है .

उसके बाद मुन्ना भाई ने दो फ़ोन कॉल्स किये और दोनों को मिल में आने की खा कुछ hi देर में वह पर पुलिस कमिश्नर और मला वह पर आ गए.

मुन्ना भाई - तो कमिश्नर साहब और मला जी मिलिये टाइगर से जिन्होंने आपके बेटो को मारा है.

कमिश्नर - क्या इसने मारा है लगता तो नहीं है .

मुन्ना भाई - कमिश्नर साहब इस लड़के की उम्र पे मत जाइये ये बहुत hi खतरनाक लड़का है .

मुन्ना भाई - पहले हम इस की फॅमिली को इसके आखो के सामने मरेंगे तब इसको पता चलेगा की अपनों को खोने का दर्द क्या होता है, लाओ रे इसकी फॅमिली को दो आदमी उस कमरे की तरफ गए झा उन लोगो ने मेरी फॅमिली को रखा था पर जैसे hi वो वह पहुंचे तो वो लोग देखते है की मेरी फॅमिली का कोई भी सदस्य वह पर नहीं है और उनके आदमी का हाथ और सर कटा हुआ है वो दोनों तुरंत hi मुन्ना भाई की बताते है.

आदमी- भाई वह पर कोई नहीं है उल्टा अपने आदमी का सर और हाथ कटा हुआ मिला है .

उनकी बात सुन क्र मई हसने लगा.

मई - क्यों मुन्ना भाई खा गयी मेरी फॅमिली जब तुम्हे मालूम है मई खतरनाक लड़का हु तो ये सब अच्छे से देखना चाहिए था न .

मला - मुन्ना देखते क्या हो मर दो सेल को.

मला अभी बीएस इतना hi बोल पाया था की ुकि गर्दन धड़ से अलग hi गयी थी, मई समझ गया था की अब कुछ ऐसा hi होने वाला है इस लिए मई पहले hi तैयार था और शुरुआत मैंने hi क्र दी मुन्ना भाई और कमिश्नर ने अपनी अपनी गन निकल क्र मुझ पर फायर क्र दी मई उड़ते हुए दूसरी तरफ आ गया तो उनके आदमियों ने भी फायर सुरु क्र दी मई उड़ते हुए सभी आदमियों को मरने लगा वह पर जितने भी आदमी थे वो सब के मन में आश्चर्य और दर की भावना आ गयी थी क्यों की मई उस उड़ क्र सभी को मर रहा था मुन्ना भाई के कुछ आदमियों ने मुझ पर ग्रेनेट भी फेके पे मेरी स्पीड जायदा hi थी मुझ वो लगती hi नहीं थी उल्टा उनके hi आदमी मर रहे थे कुछ hi देर में वह पर चीख पुकार मच गयी मौका देख क्र कमिश्नर मिल से बहार निकल गया और मुन्ना भाई भी दूर के पास पंहुचा क्र मिल में खतरनाक गैस की टैंक थे उस पर गोली चला क्र भाग निकला .

गोली लगते hi एक जोर दार धमाका हुआ और पुरे मिल में आग लग गयी मई भी मौका प् क्र तेजी से मिल के बहार आ गया और मुन्ना भाई के पीछे लग गया

मुन्ना भाई मुझ पर गोली चलते हुए भाग रहा था और मई भी गोली से बचते हुए उसका पीछा क्र रहा था जब मुन्ना भाई की गोली ख़त्म हो गयी तो मैंने मुन्ना को पकड़ क्र उठा लिया और उड़ते हुए मिल के ऊपर ले आया उचाई भी बहुत जायदा थिओर उतने hi उचाई से मैंने मुन्ना को छोड़ दिया. मुन्ना जलती हुई मिल के ऊपर गिरा िर उसके गिरते hi एक और जोर दर धमाका हुआ जिसमे पूरा मिल के परखचचे उस गए

फिर मैंने ऊपर से hi देखें की कमिश्नर अपनी गाड़ी से भाग रहा है ,मैंने सोचा की अगर मैंने अभी इसे छोड़ दिया तो हो सकता है की बाद में ये फिर मुझे या मेरी फॅमिली की नुकसान पहुचाये इस से अच्छा है की अभी इसे ख़त्म क्र दो .

ये सोच क्र मई उड़ते हुए चले गया कमिश्नर के गाड़ी की तरफ और उस से आगे निकल क्र जा क्र रोड पर खड़ा हो गया कमिश्नर ने कुछ दुरी पर अपनी गाड़ी रोकी फिर फुल रेस देते हुए मेरी तरफ बढ़ गया मई भी तैयार हो गया और उड़ते हुए तलवार लेकर सीधा कमिश्नर के गले को निशाना बनाया जब उनकी गाड़ी मेरे पास आयी तब मेरी तलवार गाड़ी के शीशे के पर होते हुए कमिश्नर के गले के पर हो गया ,फिर मई वह से तुरंत निकल गया और कमिश्नर की गाड़ी एक पेड़ से टकरा गयी और धमाके के साथ उड़ गया.

फिर मई वह से उड़ते हुए अपने घर आ गए वह पर मुझे सभी के सवालों के जवाब देने होंगे.
 
अपडेट 71

जब मई घर पंहुचा उस से पहले hi मैंने सोच लिया था की घर में सभी को क्या बताना है ,

जब मई अंदर गया तो देखा की पूरी मण्डली हॉल में hi बैठे हुए है .

मुझे देखते hi सभी का एक hi सवाल ये सब तुम ने कैसे किया, मई तो सोच क्र hi आया था की क्या बताना है इस लिए मैंने बता दिया की मेरे पास कुछ सकती है जिसके कारन मई उड़ सकता हु सभी ये जान क्र बहुत खुस हुई उनको मैंने मनगढ़त कहानी सुना दी तब जाकर वो लोग संत हुए.

उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ नेक्स्ट डे मॉर्निंग में मई वाक के लिए रेडी होकर रूम से बहार आया तो काव्य भी रेडी थी तो हम दोनों साथ में निकल गए रनिंग करते हुए पार्क की तरफ वह पहुंच क्र मई दिव्या को ढूंढने लगा और वो मुझे मिल hi गयी लग रहा था की वो भी मुझे hi धुंध रही थी तब मई काव्य को समझा दिया की जैसे मई कहु वो वैसा hi करे .

मई और काव्य जा क्र दिव्या से मिले , दिव्या मुझे देख क्र खुस हो गयी, मैंने काव्य का परिचय बुआ की बेटी के रूप में कराया दोनों ने एक दूसरे को hi hello किया तब मई काव्य को रनिंग करने के लिए कह क्र वह से खिसकाया और फिर मई और दिव्या व्ही बैठ क्र बात करने लग गए .

दिव्या ने मुझे दो दिनों तक न दिखने का कारन पूछा तब मैंने कह दिया की मई अपने फ्रेंड के साथ कही बहार घूमने गया था क्यों तुम्हारी छोटी बहन ने नहीं बताया है क्या घर में.

दिव्या - है वो भी यही कह रही थी , ओह्ह्ह इसका मतलब तुम मेरी बहन को जानते हो.

मई - है वो मेरे साथ hi कॉलेज में पढ़ती है.

फिर और इधर उधर की बाटे करने के बाद काव्य भी आ गयी और हम निकल गए घर की तरफ.

घर की तरफ पहुंच क्र फ्रेश हुआ और निकल गए कॉलेज की तरफ वह भी सभी दोस्तों का व्ही सवाल की दो दिन क्यों नहीं आये मैंने उन्हें भी व्ही इधर उधर की बाटे बता दी.

कॉलेज ख़तम होने के बाद मई अपने अड्डे पर पहुंच क्र सोचने लगा की मां को क्या हुआ था की वो मुझे मरने पर उतारू हो गए थे खा से पता चलेगा, तभी मेरे दिमाग की घंटी बजी, कोना मई मुझे मरने के लिए आये हुए उन लोगो से hi पूछ टाच की जय है ये hi सही रहेगा .

उन लोगो से मई जान सकता हु की मां जी ने मुझे मरवाने की कोसिस क्यों की और इसके लिए मुझे अपने सहर जाना होगा, अब तो मेरे पास उड़ने की सकती भी आ गयी है तो मई कभी भी आ जा सकता हु.

एक दिन मैंने नीलम को खा की वो दीपिका को अपने साथ पार्क में लाये.

उसी दिन शाम को दोनों बहाने पार्क में आकर मुझे से मिली.

मुझे देख क्र दीपिका नीलम के ऊपर भड़क गयी.

दीपिका - नीलम ये तूने ठीक नहीं किया आखिर छीन hi लिया न तुम मुझ से टाइगर को , आखिर क्या बिगाड़ा था मैंने tera,Kya तुझे कोई और नहीं मिला जो मेरा hi प्यार को मुझ से छीन लिया.

टाइगर - है दीपिका और जबरदस्ती इस ने मुझ से शादी भी क्र ली.

दीपिका - क्या इस ने तुम से शादी भी क्र ली, ये तुम ने ठीक नहीं किया नीलम मई तुम्हे कभी माफ़ नहीं करुँगी.

नीलम - टाइगर अब तुम भी सुरु हो गए जिस काम लिए तुम ने दीदी को यह लेन को खा था पहले वो काम करो ,नहीं तो दीदी मेरा खून hi पि जाएगी.

फिर मैंने दीपिका को सुरु से आखिरी तक सब कुछ बताया मई और नीलम कोण है और मैंने क्यों नीलम से शादी की और क्यों मैंने तुमसे प्यार का नाटक किया.

दीपिका - मतलब तुमने मुझे प्यार का नाटक किया और मई इसे सच्चा प्यार समझती रही

मई - नहीं दीपिका ऐसा नहीं है मई तुम से प्यार का नाटक करते हुए कब तुम से प्यार हो गया पता hi नहीं चला.

नीलम - है दीदी ये सही कह रहे है अगर इन्हे नाटक hi करना होता तो हम ये सब बात तुम्हे नहीं बताते.

दीपिका - पर मई कैसे मन लू की ये भी मुझ से सच्चा प्यार करता है.

मई - तो तुम्हे कैसे यकीं दिलो.

दीपिका - तुम मुझ से भी शादी क्र लो वो भी आज hi .

मई - आज hi ! नीलम तुम क्या कहती हो.

नीलम - मैंने तो तुम्हे पहले hi कह दिया था की मेरी बहन को भी उसका प्यार मिलना चाहिए.

मई - तो फिर ठीक है चलो आज hi किसी मंदिर में शादी क्र लेते है.

फिर मई दोनों को लेकर उड़ गया मंदिर की तरफ वह पहुंच क्र पुजारी को पैसे देकर पटाया और फिर बाकि सब सामान लेकर हम ने शादी क्र ली.

नीलम - तो मेरी सौतन दीदी अब ये मत कह देना की सुहागरात भी आज hi माननी hai,or ये मई होने भी नहीं दूंगी.

दीपिका - अब शादी हुई है तो सुहागरात भी तो होगा न , और क्यों नहीं होने देगी मेरी सुहागरात, तूने भी तो मनाई hi होगी.

नीलम - यही तो रोना है मेरी शादी तो हो गयी मगर सुहागरात नहीं हुआ है इस लिए मई आपको भी नहीं मानाने दूंगी समझी मेरी सौतन दीदी.

मई - चलो ये सब छोड़ो तुम दोनों को जो चाहिए वो मिल गया अब तुम दोनों मेरी मदद करो तुम्हारे पिताजी तक पहुंचने में और तुम बहन दिव्या को पटाने में.

दीपिका - क्या अब तुम हमारी दीदी को भी पटाने की सोच रहे हो.

नीलम - वो इस लिए दीदी क्यों की दिव्या दीदी hi पापा के बहुत करीब है वो जो भी पापा से कह दे वो पापा को करना hi पड़ता है ये आप भी जानती हो.

दीपिका - लेकिन तुम्हे उसे भी अपनाना होगा क्यों की उसका भी ये पहला प्यार होगा अगर उसने इसमें धोखा खाया तो वो जरूर अपने आप को कुछ क्र लेगी.

मई - मतलब ये खो न की तीनो बहन मेरे hi गले पड़ेगा.

चलो ठीक है उसे भी तुम दोनों की सौतन बना डेंगेअब खुस .

दोनों एक साथ - है .

मई - अब सुनो शादी को अभी छुपा क्र hi रखना और सुहागरात भी बाद में क्र लेंगे पहले तुम्हारे पिताजी तक मुझे पहुंच दोनों परिवारों को एक करना है.

फिर कुछ दिन ऐसे hi निकलने लगे इस बिच मई दिव्या से रोज मिलता और उसके नजदीक जाने की कोसिस करता और इस काम में नीलम और दीपिका मेरी मदद भी करती.

एक दिन की बात है मुझे रात चुदाई करने का बड़ा मन हुआ तो मई सब के सोने के बाद पहले पंहुचा बुआ के पास लेकिन उस ने ये कह क्र मन क्र दिया की बच्चे को नुकसान हो सकता है अभी लास्ट मंथ चल रहा है.

फिर मई बुआ के रूम से निकल क्र समिति के रूम में आया .

मई धीरे से दरवाजा खोल क्र देखा तो समिति किसी से फ़ोन पर बात क्र रही है मुझे देखते hi मुझे भी आने को खा और स्पीकर खोल क्र बात करने लगी तब मुझे भी पता चला की ये सीतल से बात क्र रही है.

सीतल लंदन में सेट हो गयी थी ऊपर से उस ने ये खबर भी सुना दी की वो प्रेग्नेंट है और वो इस बच्चे को जन्म देगी.

वो समिति को भी व्ही बुला रही थी अपने साथ काम करने के लिए लेकिन समिति ने बुआ की प्रेगनेंसी के बाद आने को कह दिया.

कुछ देर और इधर उधर की बात करने के बाद समिति ने फ़ोन ढाखा .
 
अपडेट. 72

कुछ देर और बात करने के बाद समिति ने सीतल को bye और बाद में बात करने को बोल क्र फ़ोन रखा.

समिति - तो इतने दिनों बाद आ hi गयी मेरी यद् तुम कहि भूल तो नहीं गए हो न की मई तुम्हारी बीवी भी हु .

मई - नहीं मेरी जानेमन मई कुछ नहीं भुला बीवी हो इसी लिए तो आया हु तुम्हारे पास.

समिति - जरूर कुछ काम होगा तभी आये हो यही तो कभी नहीं आते अब बोलो क्या काम है .

मई - वो वो समिति वो न मुझे कुछ करने का मन क्र रहा है.

समिति - क्या करने का मन है ?.

मई - ओह हो यार बीवी होक इतना भी नहीं समझती की पति देव को क्या चाहिए, क्या बीवी हो यार तुम.

समिति - समझ गयी समझ गयी की मेरे पति देव को क्या चाहिए मुझे भी बहुत मन हो रहा था लेकिन क्या कृ तुम मेरे पास आते hi नहीं थे .

समिति कुछ और hi बोलती उस से पहले hi मैंने समिति को किश करना स्टार्ट क्र दिया और धीरे धीरे हम दोनों के कपडे कब निकलने लगे पता hi नहीं चला फिर एक तूफान उठा और जैम के समिति की चुदाई की समिति की भी इतने दिनों की प्यास बुझ गयी .

हम दोनों ऐसे hi नंगे लेते हुए बात करने लगे .

मई - ये सीतल भी न क्या जरुरत है इसको अभी से बच्चा पैदा करने की , अपने घर वालो को क्या बताएगी कहि मेरे बारे में न बता दे .

समिति ऐसा कुछ भी नहीं होगा तुम फ़िक्र मत करो वो सब सम्हाल लेगी और मई भी सोच रही हु के यह भी बच्चा पैदा होने के बाद मई भी सीतल के पास लंदन चली जाऊ मई भी वह तुम्हारे बच्चे को पैदा कृ और जब तक हमारे बारे में तुम अपने फॅमिली को नहीं बता देते तब तक उसी के सहारे रह लुंगी.

मई - और कोई इस बिच तुम से पूछे की इस बच्चे का बाप कोण है तो क्या जवाब डौगी.

समिति - कह दूंगी की लंदन में किसी लड़के से मैंने शादी क्र ली है.

तभी अचानक रूम का दूर खुला और काव्य और कविता रूम में दाखिल हुई , कविता तो तो रही थी मगर काव्य बहुत hi गुस्से में थी .

काव्य - वह वह वह हमसे प्यार का नाटक किया और भी लड़कियों को फसा के यह रंगरलिया मनाया जा रहा है और बात तो बच्चे तक भी पहुंच गयी.

मई - काव्य में बात सुनुऊ..

मई कुछ और बोल पता उस से पहले hi मेरे गाल पे एक थप्पड़ पड़ा .

काव्य- इतना कुछ करने के बाद भी तुम सफाई देना चाहते हो धोकेबाज .

मई - कविता तुम तो मेरी बात सुनो .

कविता - इतना कुछ देखने और सुनने के बाद और बचा hi क्या है कुछ सुनने को आज के बाद कभी अपना चेहरा भी मुझे मत दिखाना .

ये बोल क्र वो रट हुए अपने रूम में चली गयी , मुझे कविता से ये उम्मीद नहीं थी.

समिति - देखो काव्य टाइगर तुम लोगो से भी सच्चा प्यार करता है.

काव्य- ये कैसा प्यार है बुआ और आप भी तो इसी का साथ डौगी न इतनी hi आग लगी थी तो कोई और देख लेती हमारे hi प्यार पर डाका दाल दिया अपने .

मई - काव्य समिति को कुछ मत खो जो भी कहना है मुझ से खो .

काव्य - वह क्या याराना है खैर अब मई तुम से बीएस इतना hi कहूँगी की माँ को कुछ पता नहीं चलना चाहिए इस बारे में और तुम अब अपना चेहरा भी हमे मत दिखाना तुम चले जाओ अपने घर हम लोगो की जिंदगी से दूर मई माँ को क्र दूंगी की वो जरुरी काम आने पर अपने घर चला गया, और माँ भी पूछे तो तुम भी यही जवाब देने.

ये बोल क्र वो भी रट हुए अपने रूम में निकल गयी आंसू तो मेरे भी आँखों से निकल रहे और समिति के भी .

मई उठ क्र अपने कपडे पहन लिए और अपने रूम की तरफ निकल गया ,वह पहुंच क्र अपने कपडे और जरुरी सामान बैग में पैक करने लगा उतने में समिति भी अपने कपडे पहन क्र मेरे रूम में आ गयी.

समिति- टाइगर मई भी तुम्हारे साथ चलूंगी.

मई - नहीं समिति तुम बुआ का यही रह के ख्याल रखना मई भी आस पास hi रहूँगा, जरुरत पड़ेगी तो मई आ जाउगा.

मई अपना सामान पैक क्र के निकल गया घर से एक बार पलट क्र घर की तरफ देखा फिर निकल गया उड़ते हुए नीलम के फार्महाउस की तरफ.

वह पहुंच क्र देखा तो सभी सो रहे थे, मई उड़ते हुए टेर्रिस से घर में घुस गया और एक रूम में गया ये व्ही रूम था झा मई और नीलम रुके हुए थे मई सामान को एक तरफ रखा और सो गया.

सुबह मई मल्लिका के मुन्ने की आवाज से मेरी नींद खुली सायद वो खेल रहा था मई उठा और बैग से कपडे निकल क्र चल दिया बाथरूम में नाहा दो क्र फ्रेश हुआ और तैयार हो क्र बहार आये तो सभी लोग मुझे देख क्र आश्चर्य चकित हो गए.

मल्लिका - टाइगर जी आप कब आये , हमे पता hi नहीं चला.

मई - वो मई रात को आया हु यह जब आप लोग सो रही थी इस लिए मई उठाया नहीं .

मल्लिका - ठीक है आ जाइये नास्ता कीजिये .

मई जाकर डाइनिंग टेबल पर जा क्र बैठ गया और सिद्धि ने मुझे नास्ता दिया.

मई - और मल्लिका जी कोई तकलीफ तो नहीं हो रही है यह पर.

मल्लिका - सुरु सुरु में थोड़ी दिक्कत जरूर हुई वो क्या है की हमारे यह और यह में बहुत अंतर है ,अब सब ठीक है सिद्धि और इसकी माँ बहुत ख्याल रखती है मेरा .

नास्ता करने के बाद मैंने मल्लिका को बताया की मई कॉलेज जा रहा हु और कॉलेज के बाद वापस यही पर आऊंगा .

फिर मई टेर्रिस पे गया सोचा की नीलम को फ़ोन क्र के बता दू फिर सोचा की कॉलेज तो जा hi रहा हु , मई उड़ते हुए निकल गया कॉलेज की तरफ.
 
अपडेट 73

कॉलेज के पास hi सुनसान जगह देख क्र मई रुका और फिर कॉलेज गेट से अंदर जा hi रहा था की उसी समय काव्य और कविता की भी एंट्री हुई दोनों बहने मुझे थोड़े देर आश्चर्य से देख रही थी सोच रही होंगी की मई अपने घर चला गया होऊंगा, लेकिन मई तो कॉलेज आया था कविता तो मुझे देख hi रही थी मगर काव्य ने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा दिया और कविता का भी हाथ पकड़ क्र उसे कॉलेज के अंदर ले जा रही थी.

कविता की आखो में आंसू थे जब वो दोनों अंदर चली गयी तब मई भी अंदर गया और अपने दोस्तों से मिला फिर जाकर कैंटीन में जाकर बैठ गए.

जिस टेबल पर हम बैठे हुए थे व्ही पास की hi टेबल पर काव्य, दीपिका और कविता भी बैठी हुई थी .

संधया - क्या बात है आज काव्य तुम्हारे साथ न होकर अपनी सिस्टर के पास बैठी हुई है.

मई - है वो हम लोगो के भींच थोड़ी झगड़ा हो गया है , कुछ दिन बाद सब ठीक हो जायेगा.

इधर दीपिका भी काव्य से पूछती है क्या हुआ है तुम लोगो को यार आज कुछ उखड़ी उखड़ी सी लग रही हो.

काव्य- वो दी टाइगर से हमारा झगड़ा हो गया है तो हम लोगो ने उसे कह दिया की वो ये घर छोड़ क्र अपने घर चला जाये लेकिन फिर भी नहीं गया और कही और रुका हुआ है.

दीपिका - क्या तुम लोगो ने टाइगर को निकल दिया घर से ये क्या किया तुम लोगो ने .

ये बोल क्र वो उन लोगो के पास से मेरे पास आयी.

दीपिका - टाइगर थोड़ा देर के लिए आओगे मुझे तुम से कुछ बात करनी है.

मई उठ क्र दीपिका के पीछे पीछे साइड में गया.

मई - है बोलो दीपिका क्या बात करनी है.

दीपिका - टाइगर काव्य कह रही थी की तुम लोगो का झगड़ा हुआ और उनलोगो ने तुम्हे घर से निकल दिया तो तुम अभी खा रह रहे हो.

मई मजाक करते हुए- अब तो तुम से शादी की है तो अब तुम्हारे घर पर hi रहूँगा.

दीपिका - क्या ! अभी नहीं पापा मुझे मर डालेंगे.

मई - तो मुझे से शादी क्यों की अगर अपने पापा से इतने डर्टी हो तो .

दीपिका- मई इस लिए दर रही हु क्यों की तुम मेरे घर रहने की बात क्र रहे हो अगर तुम कहोगे की मेरे संग कहि भाग चलो तो मई खुसी खुसी तुम्हारे संग भाग जाउंगी

हम अभी बात hi क्र रहे थे की नीलम वह आ गयी.

नीलम - ओह hello तुम दोनों यह अकेले में कहि सुहागरात मानाने की प्लानिंग तो नहीं क्र रहे हो न .

दीपिका - तुम्हे सुहागरात के आलावा कुछ और नहीं सूझता है क्या यह टाइगर अपने घर से अलग रह रहा है पगली कहि की.

नीलम - सॉरी टाइगर मई मजाक क्र रही थी तो ये सब हुआ कैसे और टाइगर तुम खा रह रहे हो.

मई - वो मेरा कुछ झगड़ा हो गया काव्य और कविता से इस लिए मई अपने जान पहचान के यह रुका हुआ हु और दीपिका तुम कविता के साथ hi रहना उसे कुछ तकलीफ न हो ये धयान देना.

फिर दीपिका वापस कविता के पास चली गयी और मैंने नीलम को बताया की मई तुम्हारे फार्महाउस में hi रह रहा हु.

नीलम - इतनी दूर तुम रुके हुए हो और व्ही से आ भी रहे हो है अब तो तुम उस भी सकते हो तुम्हारे लिए तो कोई प्रॉब्लम नहीं hogi,fir भी यही आस पास कोई रूम ढूंढने की कोसिस करती हु तब तक तुम व्ही रो.

मई - चलो ठीक है बाद की बाद में देखेंगे चलो अभी क्लास में चलते है.

फिर हम लोग सब क्लास में आ गए आज काव्य की जगह नीलम हमारे साथ बैठी हुई थी और काव्य हम लोगो से अलग दूसरे बेंच पर बैठी हुई थी.

फिर ऐसे hi सभी प्रोफेसर आये और चले गए लास्ट में अपनी मिस अलका आयी आज जब मई उनको देखता तो वो भी मुझे देख क्र मुस्कुरा देती, है आज तो मिस बहुत hi सूंदर लग रही थी और जब मुस्कुराती तो और भी कमल की लगती मई तो उसमे खो hi गया था तब नीलम ने अपने पेअर से मेरे पेअर पर मारा तब जा क्र मुझे होस आया तब भी मिस मुस्कुरा रही थी.

नीलम - तुम अब शादी सुदा हो क्र भी नहीं सुधरे जो अब मिस पे लाइन मर रहे हो.

मई - नहीं मई तो ये देख रहा था की मिस की आखें भी हमारी तरफ नीली है और वो कुछ अपनी जैसी लगती है.

नीलम - ओह है मैंने भी नोटिस किया था और जब भी मई उन्हें देखती हु तब न मुझे भी ऐसा लगता है की वो मेरी माँ है देखो न फेस भी हम लोगो की कितनी मिलती है.

मई - है चेहरा तो मिलता जुलता है मगर तुम्हे माँ वाली फिलिंग क्यों आती है .

नीलम - वो तो जब भी मई उन्हें देखती हु तब तब मेरे अंदर से माँ वाली फिलिंग आती है.

मई - चलो ये सब बाद में देखेंगे अभी तो छुट्टी हो गयी.

फिर हम लोग बहार आये तब बाकि सब दोस्तों से रूम की बात कहि तब संध्या ने खा की एक महीने बाद हमारे घर में रूम खली हो जायेगा तब टाइगर हमारे यह रह सकता है.

फिर ये बात फिक्स हो गयी की एक महीने बाद मई संध्या के घर पर hi रहूँगा.

अभी मई फार्महाउस से hi आना जाना करूँगा.
 
अपडेट 74

छुट्टी होने के बाद सभी लोग अपने अपने घर चले गए काव्य और कविता भी घर चली गयी मई नीलम और दीपिका के साथ उसके कार में बैठ क्र कॉफ़ी शॉप चले गए वह बैठ क्र हम लोगो का बात चित सुरु हुआ .

मई - तुम्हारे दीदी के दिल में मेरे लिए क्या फीलिंग है कुछ पता चला.

नीलम - दीदी कुछ बताती नहीं है तो जब भी मई उनसे पूछती हु की दीदी आपका कोई बॉयफ्रेंड है क्या तो वो हमे डट क्र भगा देती है..

मई - तुम लोग भी कोई काम ढंग सी नहीं क्र सकती सुनो मई बताता हु तुम्हे क्या करना है, सबसे पहले तुम दोनों अपने बॉयफ्रेंड मतलब मेरे बाटे में उसे बताओगे फिर धीरे से उनके बॉयफ्रेंड के बारे में पूछना फिर भी वो नहीं बताये तो तुम लोग कहना की हम वक्त पड़ने पर आप की मदद भी क्र सकते है इस लिए बता दो देखना वो जरूर बता देगी.

दीपिका - ठीक है फिर आज हम ये भी तरय क्र के देखते है.

फिर हम ने कॉफ़ी पि और मई दोनों को bye बोल क्र निकल गया फार्महाउस की तरफ.

फार्महाउस में पहुंच क्र मई फ्रेश हुआ और गर्दन में आज्ञा सूरज ढल चूका था मल्लिका भी गर्दन में बैठी हुई थी और सिद्धि मल्लिका के मुन्ने के साथ खेल रही थी.

मई जाकर मल्लिका के पास बैठ गया.

मई - और क्या हॉल है मल्लिका जी.

मल्लिका - ओह तुम कब आये और मई तो ठीक हु .

मई - बीएस अभी अभी तो आया हु और लगता है ये पृथ्वी लोक आपको भ गया है.

मल्लिका - है अब तो यही hi रहना है तो यही के टूर तरीके सिख रही हु, और यह के लोग भी अच्छे है.

मई - मल्लिका जस्ट अब तो आप भी यही है और मई भी तो कुछ हो सकता है क्या.

मल्लिका - सच पूछो तो मई भी तुमसे यही बात करने वाली थी मुझे भी बहुत मन हो रहा है जब से तुम्हारा साथ मेरा ये जिस्म जुड़ा है तब से ये सिर्फ तुम्हारे hi जिस्म में मिल जाना चाहता है.

मई - तो फिर आज रात को क्या क्यायल है.

मल्लिका - आपका ख्याल तो नेक है बाकि देखते है रात को .

फिर हम दोनों इधर उधर की बाटे करते रहे जब तक के रात के खाने का बुलावा न आ गया हो.

सिद्धि की माँ ने खाने के लिए बुलाया तो हम ने खाना खाया फिर अपने अपने रूम में आगये मई और इंतजार करने लगा मल्लिका के आने का आज मैंने कुछ और सोच रखा था .

सब के सो जाने के बाद मल्लिका मेरे रूम में आयी और गेट बंद क्र के मेरे बीएड पर बैठ गई.

मई - क्यों जानेमन इतनी देर क्यों लगा दी .

मल्लिका- वो क्या है की सिद्धि भी मेरे hi रूम में सोती है तो उसको भी देखना पड़ता है की वो सोइ है या नहीं.

मई - ओह हो वो जाग भी जाएगी तो क्या क्र लेगी.

मल्लिका - तुम्हे नहीं मालूम अब. वो भी जवान hi गयी है सब समझती है मैंने पूछा था तब उसने बताया की उसका भी मन करता है ये सब करने का तब मैंने hi उसे खा की मई hi उसे किसी अच्छे लड़के से मिलाऊँगी , वि मन गयी.

मई- ओह तो वो अब तुम्हारे hi मुठी में है लेकिन वो लड़का कोण है.

मल्लिका - वो लड़का कोई और नहीं आप hi मई आपको hi तो जानती हु.

मई - ठीक है उसे भी देख लेंगे पहले अभी जो मिल रहा है उससे तो निपट लू .

ये बोल क्र मई मल्लिका के होठो को चूसने लगा वो भी मेरा भरपूर साथ दे रही थी फिर मैंने किश तोड़ी और मल्लिका को सरसो का तेल दिया और अपने लुंड पर मालिश करने को खा तो वो तेल लेकर मेरे लुंड पर तेल दाल क्र मेरे लुंड की मालिश करने लगी वो मेरे लुंड को ऊपर निचे क्र के पूरा खड़ा क्र दिया था और मेरा लुंड तेल से चमक रहा tha.Mera लैंड तम्बू की तरह खड़ा था. मल्लिका उसमे सरसो का तेल लगाने लगी.

मुझसे बर्दास्त नहीं हो रहा था, मैंने मल्लिका को बीएड पर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. मल्लिका ने मुझे कास कर पकड़ लिया और बोली टाइगर जी आज मेरी प्यास बुझा दो. मैंने मल्लिका का निघ्त्य पेअर की तरफ से पकड़ कर ऊपर तक उठा दिया. वो निचे पूरी नंगी थी.

मैंने मल्लिका के गुलाबी बुर के पास हाथ फेरा तो वहां सूखा लग रहा था. बस मैंने झट से अपना जीभ मल्लिका के बुर में दाल कर लिस्केरिंग करने लगा. मल्लिका ने अपने दोनों जांघो के बिच मेरा सर दबा लिया और बीएड पर कूदने लगी.

फिर मल्लिका ने मेरा बल पकड़ लिया और बोली अब बर्दास्त नहीं होता, फाड् डालो मेरी बुर को , अब तक मल्लिका का बुर पूरा गिला हो चूका था. तभी मल्लिका उल्टा सो गयी और बोली टाइगर जी मेरे बुर में पीछे से लैंड डालो, हमको बहुत मजा आता है. फिर मैं मल्लिका को घोडा बनके उसके बुर में पीछे से लैंड डाला और मैंने मल्लिका के चूचियों को कास कर पकड़ रखा था और मल्लिका अपने बुर को खुद आगे पीछे कर रही थी.

ऐसा करने में बहुत मजा आ रहा था, एक तो मल्लिका की सुन्दर चूचिया पूरी पूरी हाथ में भी नहीं आ रही थी ऊपर से लैंड भी अच्छा खासा अंदर जा रहा था. ऐसे चुदाई करते करते हमलोगो लगभग 15 मिनट हो गए थे फिर हम ने पोजीशन चेंज की.

लेकिन उस से पहले hi मल्लिका ने मुझे बीएड पर पटक दिया और मेरे लुंड को मुंह में लेकर चूसने लगी. फिर मल्लिका बोली अब मुझे सामने से छोड़ो जान. फिर मैंने सामने से लैंड डाला, मल्लिका बीएड पे जम्प कर रही थी और मेरा पूरा लुंड गप गैप अंदर ले रही थी. इस पोजीशन में मैंने मल्लिका को खूब छोड़ा और अंत में उसकी छूट में झाड़ गया.

लेकिन अभी चुदाई ख़तम नहीं हुई थी अभी तो और बाकि है.
 
अपडेट 75

कुछ देर तक हम दोनों ऐसे से लेते रहे फिर मई उठा और बाथरूम चला गया वह से फ्रेश होने के बाद मई बहार आया तब मल्लिका भी बाथरूम में फ्रेश होने चली गयी और बाथरूम से आकर वो भी बीएड पर लेट गयी.

मई- मल्लिका जी मई आपके इन बड़े बड़े बूब्स का दीवाना तो पहले से hi था लेकिन अब तो अपने इन बड़े और निकली हुई गांड ने भी मुझे दीवाना क्र दिया है तो क्यों न एक बार और हो जाये.

मल्लिका - मुझे भी बहुत दिन हो गए थे आज रात बर मई तुम्हारी हु जो चाहे क्र लो.

मई बीएड पर तक क्र बैठ गया तो मल्लिका मेरे लुंड को पकड़ के हिलने लगी, और दुसरे हाथों से मेरे दोनों बॉल्स से खेलने लगी, फिर उसने मेरे दोनों बॉल्स को जोर से दबा दिया, मैं थोड़ा दर्द के मरे चीख पड़ा, और मल्लिका हंस पड़ी और कहा ‘जब मेरे निप्पल्स को दबाते हो तो हमें भी ऐसे हे होता हे’ फिर उन्होंने मेरे लुंड को अपने मुँह में ले लिया और मस्त चूसने लगी, फिर जोर जोर से अंदर बहार करने लगी, एक बार मैंने अपने लुंड को जैसे मल्लिका ने अपने गले में लिया तो मैंने मल्लिका का सर पकड़ के मैंने अपना पूरा लुंड को पूरे गले में उतर लिया और मल्लिका को लुंड बहार नहीं निकलने दे रहा था, हु छटपटाने लगी थी. मैंने मल्लिका की और देखा, उनकी आँखों में दर्द दिख रहा था, पर फिर वो बाद में अपने आप जोर लगाकर छूती और गुस्सा दिखने लगी, अब मेरा लुंड रॉक सॉलिड हो चुक्का था, इसीलिए मैंने मल्लिका के गुस्से की पर्व न करते हुए मल्लिका के पांव को पूरा फैला दिया और उनकी छूट पे अपना लुंड रक्खा, थोड़ी देर लुंड छूट पे घिसने के बाद मैंने मल्लिका के छूट में अपना लुंड दाल दिया, आधा लुंड चला गया और दूसरे झटके में पूरा लुंड अंदर दाल कर एआरएम से मल्लिका पर लेट कर धीरे धीरे छोड़ने लगा.

थोड़ी देर आराम से छोड़ने के बाद मैं बीएड पर बैठ गया और मल्लिका को जोर लगा के छोड़ने लगा, मैंने मल्लिका के इतने दिनों की जस्ट की प्यास को मिटा देने का सोचा था, फिर मैंने मल्लिका को डोगग्य स्टाइल में खड़ा किया और छोड़ने लगा.

मल्लिका भी जान चुकी थी की मैं उन्हें जोर से छोड़ना चाहता हूँ क्यूंकि मई उसकी तड़प को मिटाना चाहता था इसीलिए वो भी और जोर से और जोर से कह कर मुझे उकसा रही थी, हालाँकि उनके मुँह से दर्द के मरे आवाज़ें आ रही थी पर वो मुझे उकसाने में लगी हुई थी. फिर मैंने मल्लिका को दस मिनट तक छोड़ने के बाद, मल्लिका को एक साइड से पाँव उठा के छोड़ने शुरू किया और उनके बूब्स भी पिने लगा, थोड़ी देर ऐसे छोड़ने के बाद फिर से मैं मिशनरी स्टाइल में आ गया और मल्लिका की कमर को पकड़ के उठा के जोर जोर से छोड़ने लगा, अब मल्लिका से रहा नहीं जा रहा था, वो अब जोर जोर से मॉनिंग कर रही थी, और अकडने भी रही थी इसीलिए मुझे लगा की अब वो झड़ने वाली हे तो मैंने अपना लुंड मल्लिका के छूट में से निकल दिया, वो फिर से नाराज़ हो गयी पर मैंने मल्लिका के छूट में अपनी ऊँगली दाल दी और उसे अंदर बहार करके छोड़ने लगा, फिर मैंने मल्लिका के g-spot में मस्त जोर से चूसा तो मल्लिका के छूट में से एक दम वाइट सा लिक्विड निकला और मल्लिका शांत हो गयी. मैं समझ गया की अब मल्लिका सटिस्फी हो गयी हे.

फिर मैंने मल्लिका को आफ्टर प्ले में फिर से सडके करना स्टार्ट किया और मल्लिका के पूरे बॉडी पर किश करने लगा. अब वो भी जानती थी की मैं अब तक ोरस्म पर नहीं पहुंचा तो वो भी मुझे सीओ ऑपरेट करने लगी, मैंने फिर से मल्लिका के मुँह में अपना लुंड रख दिया और मल्लिका भी चूसने लगी. मल्लिका अपना हाथ आगे पीछे करके फिर से मेरे लुंड को रॉक सॉलिड बना रही थी, फिर मैंने मल्लिका के सर को दोनों हाथों से पकड़ा और जैसे mouth-fucking करने लगा. मल्लिका के मुँह में पूरा लुंड डालने लगा और लुंड मल्लिका के मुँह में पूरी तरह जा रहा था और मेरे दोनों बॉल्स मल्लिका की चीन को भी छू रहे थे, मल्लिका भी यह पहली बार महसूस कर रही थी.

फिर मैंने मल्लिका के मुँह को छोड़ने के बाद मल्लिका को फिर से डोगग्य स्टाइल में बिठाया और मल्लिका की छूट को चाटने लगा, मल्लिका अब पूरी तरह थक चुकी थी, उनके बाल पसीने से बेहाल चेहरे पर चिपक गए थी, उनकी साँसे एक दम तेज़ चल रही थी. ऐसे में उन्होंने मुझसे अब बस करने को कहा पर मैंने मन कर दिया. फिर मैंने मल्लिका के दोनों हिप्स को थोड़ा ऊपर उठाया और मल्लिका के फेस को निचे तकिये पर रक्खा इस वजह से मल्लिका के अस्स चिक्स मेरे सामने खुल गए, फिर मैंने मल्लिका की छूट को छत्ते हुए मल्लिका की गांड के छेड़ में अपनी मिडिल फिंगर अंदर डाली. मल्लिका एक दम से सनक गयी, उन्हें अब पता चल गया की मैं उनकी गांड मरना चाहता हूँ. हु उठना चाहती थी पर मैंने उठने नहीं दिया और उठकर मल्लिका की बैक दबाकर मल्लिका को फाॅर्स से रोक दिया, मल्लिका का मुँह वाइट तकिये पर दर्द और थकावट से परेशां लग रहा था.

मल्लिका : टाइगर, यह नहीं करना मुझे…

मई : मल्लिका जी एक बार करो,

मल्लिका : नहीं मैंने कहा naa..mujhe छोड़ दो, मैं थक गयी हूँ

मई : ऑफ़ कोर्स मल्लिकाजी बस थोड़ा टाइम और दे दो मुझे

और मैंने ऐसा कहते हुए पास में रक्खी तेल की बोतल उठाई और मल्लिका की गांड पर थोड़ा तेल डाला और अपनी मिडिल फिंगर अंदर बहार करने laga..pehle तो पूरी फिंगर hi अंदर नहीं जा रही थी पर तीन चार बार तरय करने से अब मेरी पूरी फिंगर अंदर बहार होने लगी थी.

मल्लिका भी मन करते हुए गिड़गिड़ा रही थी. मैंने मल्लिका को आराम से नया एक्सपीरियंस करने को कहा. फिर अपनी दूसरी ऊँगली भी अंदर दाल दी, पहले थोड़ी तकलीफ हुई पर वो अंदर जाने में कामयाब रही. लेकिन जैसे hi मैंने अपनी ऊँगली अंदर डाली की मल्लिका दर्द के मरे एक दम से चीख पड़ी वोट क दम से उठ gayi..maine यह सोचा नहीं था, लेकिन मैंने भी दूसरे hi सेकंड में एक झटके से फिरसे मल्लिका को लेता दिया और मल्लिका के बूब्स दबाने लगा.

फिर मैं मल्लिका के बिलकुल ऊपर आ गया और मल्लिका को किश करने लगा और मल्लिका के बूब्स दबाने लगा. मल्लिका मेरी उंगलियां बहार निकल जाने से अब रिलीफ में थी. लेकिन उस दर्द से मल्लिका की निप्पल्स फिर से कड़क हो गयी थी, लेकिन मैंने अपना लुंड मल्लिका की गांड पर घिसना शुरू कर दिया और मल्लिका को फिर से गर्म करने लगा. फिर मैंने बड़े आराम से कहा

मई : मल्लिका जी प्लीज एक बार करते हे ना..

मल्लिका : नहीं, तुम पागल तो नहीं हो गए ना.. अब तक मैंने एक बार भी नहीं किया हे..

मई : प्लीज मल्लिकाजी एक बार बस 5 मिनट के लिए

मल्लिका : नहीं टाइगर, मैं 5 मं तो क्या 5 सेकंड के लिए भी यह दर्द नहीं सेह पाऊँगी.

मई : मल्लिका जी कुछ नहीं hoga..main बैठा हूँ ना.

मल्लिका : नहीं मैंने ना कहा न

मई : मई समझ गया औरतों की ना hi हां होती हे.

और उठकर मल्लिका के अस्स क्रैक को फैला लिया और अपना लुंड का सूपड़ा मल्लिका के गांड पर रक्खा. मल्लिका अभी भी ना ना कर रही थी. पर मैंने अपने लुंड को जोर लगा कर मल्लिका के गांड के अंदर डाला लेकिन वो जा नहीं रहा था.

फिर मैंने अपने लुंड पर तेल लगाया और मल्लिका की गांड पर भी. और फिर से तरय किया और इस बार मल्लिका के गांड में मेरा सूपड़ा चला गया. मैंने सोचा था की मल्लिका अभी दर्द के मरे रोने लगेगी पर मल्लिका के मुँह से कोई आवाज़ नहीं निकली तो मैंने और जोर लगा कर लुंड को पुश किया और जैसे hi मेरा लुंड अंदर गया की मल्लिका के मुँह से ooooohhh……tiger..….kya कर रहे होओओओओ? कृपा क्र के इसे निकालो , पर मैंने मल्लिका के कमर को पकड़ा और अपनी और खिंचा और इधर अपने लुंड को फिर से पुश किया, मेरा लुंड अब शायद आधा अंदर था, लेकिन इधर मल्लिका रोने लगी थे, मई ये भी सोच रहा था की मल्लिका की आवाज कोई सुन न ले वो अपने हाथ बीएड पे पछाड़ रही थे और कह रही थी की मुझे यह नहीं करना हे. लेकिन मैं मल्लिका को गर्म करने के लिए मल्लिका के ग स्पॉट पे हाथ फेरने लगा और मल्लिका पे अपना जोर बढ़ता गया. अब मल्लिका की सिचुएशन दोनों तरफ से फसने वाली थी, वो गर्म भी हो रही थी और दर्द तो बहोत सारा हो रहा था. उनके मुँह से ommmh…..ommmhh……ki आवाज़ें बंद होने का नाम नहीं ले रही थी. लेकिन मैं एक बात जनता था की कल फिर से शायद मल्लिका नाटक करेगी की अब से यह सब नहीं करना और मुझे मल्लिका से अस्स फूकिंग करना था इसीलिए मैं तो बड़ा बेक़रार था.

मैंने फिर मल्लिका की गोरी गोरी कमर को चूमा और मल्लिका को लगा की अब मैं थोड़ी देर फोरप्ले करूँगा इसीलिए उन्होंने सोचा की अब दर्द नहीं होगा और मैंने जोर से एक और पंच लगाया और मल्लिका के गांड में अपना लुंड पूरा दाल दिया. शायद इतनी जल्दी लुंड जाता नहीं पर मल्लिका ने सोचा नहीं था की मैं अभी धक्का लगाऊंगा और मैंने जोर लगा के एक झटके में अंदर घुसा दिया, मल्लिका भी चौक गयी और मैं भी की अब तक मल्लिका चिल्लाई क्यों नहीं? और पहले तो मल्लिका को पता नहीं चला पर जैसे hi उन्होंने समझ में आया तो उन्हें दर्द होने लगा. हु अब मेरे बस में नहीं थी और बीएड पर बैठने को बेताब होने लगी पर मैंने मल्लिका को कनी से बंद कर के पूरा लिटा दिया और खुद मल्लिका पर hi लेट गया ता की वो मेरा मुश्किल से गया हुआ लुंड बहार कहीं न निकल दे.. उनकी आँखों से आंसू बहार बह रहे थे और वो मुझे मनो नफरत और गुस्से से देख रही थी, पर मैंने आराम से मल्लिका को किश करना शुरू किया, वो अब अपने लेफ्ट साइड से लेती थी और मैं उनसे चिपका हुआ था. अब मैंने मल्लिका के कंधे पर प्यार से किश किया फिर मल्लिका नैक पर और फिर मल्लिका चीन को पकड़ के मल्लिका के फेस को अपनी और किया और मल्लिका को किश करने लगा, अब शायद उनका दर्द काम हो रहा था और वो अब कराह काम रही थी. अब मैंने उन्हें किश करते हुए मल्लिका को फिर से धीरे धीरे डोगग्य स्टाइल में उठाया और उनके बोओब्स दबाने लगा और बूब्स दबाते दबाते अब मैंने हलके हलके से छोड़ना शुरू किया और साथ hi साथ मैं मल्लिका के बूब्स और छूट को रब करने लगा. अभी तो वो दर्द के मरे चीख नहीं रही थी पर एन्जॉयमेंट के मरे मुँह से aahhhh..aaahhh की आवाज़ें निकल रही थी.

फिर मैंने मल्लिका को कम्पलीट डोगग्य स्टाइल में बिठाया और धक्के लगाने लगा और वो भी अब अपने आप hi आगे पीछे हो रही थी और हम दोनों की साँसों की आवाज़ें, एन्जॉयमेंट की आवाज़ें और हमारी थिगह के मिलने की ावज़ों से पूरा रूम भर गया था. उनके सारे बाल बिखरे हुए थे और पूरा बदन तीन घंटे की लम्बी चुदाई से एक दम भीग चुक्का था और वो सचमुच थकन से बेहाल हो चुकी थी, इसीलिए मैंने अपने धक्को की स्पीड बधाई और अब मल्लिका को दर्द भी होने लगा और वो अब oooooohh.ooooooommm कर के जोर जोर से चीखने लगी और मैं भी अब बहोत देर तक अपने आप को कण्ट्रोल नहीं कर सकता था इसीलिए मैंने मल्लिका के g-spot को फिर से सहलाना चालू किया और साथ साथ अपनी स्पीड भी बधाई. अब मैं झड़ने वाला था इसीलिए मैंने मल्लिका को जैसे चीयर hi डेल ऐसे फात फात स्पीड से धक्के लगाने लगा, अब मल्लिका की गांड भी मेरे साथ टकराने से लाल हो गयी थी और उसे देखकर मैंने जोर से मल्लिककी गांड पर एक स्लैप भी जड़ दिया और वो एक सेकंड में खून से भर गया, फिर अब मेरे से रहा नहीं जा रहा था और मैंने भी

aaahhhhh…..aaa..h……..aaaaahhhhh..karte हुए मल्लिका की गांड में अपने लुंड से पिचकारियां मरने लगा और मल्लिका की गांड मेरे वाइट माल से भर गयी और मैंने अपना लुंड जैसे hi बहार निकला तो मल्लिका भी अपना माल भी फिर से छोड़ा और ढाडम से बीएड पर गिर पड़ी, वो बस पेट के बल पर जैसे hi पड़ी तो मनो सा भूल hi गयी, मैं भी काफी थक चुक्का था और मैं भी मल्लिका पर hi लेट गया, और मल्लिका को सहलाने लगा , लेकिन मल्लिका अब कुछ रिस्पांस नही दे रही थी, अब शायद वो बेहोश सी हो गयी थी, मैंने मल्लिका के लिप्स पर भी किश किया पर मल्लिका की और से कोई भी रिस्पांस नहीं मिला. मैं भी अब मल्लिका के साइड में hi लेट गया और मैंने देखा तो मेरा लुंड भी काफी छील गया था, और दर्द भी हो रहा था, तो मैं उठा और बाथरूम में पहुँच कर अपना लुंड साफ़ किया और किचन में से पानी की बोतल ले कर बीएड रूम में आया और पानी पीते पीते लगा की चलो मल्लिका की अस्स भी साफ़ कर दूँ, तो मैं मल्लिका के पास बैठा और पास से टिश्यू पेपर उठाया और मल्लिका के गांड पर से अपना सारा माल मिटाया और साफ़ कर के देखा तो वो काफी लाल हो गया था और शायद कहीं से हल्का सा चीयर भी गया और सुझ भी गया था, तभी मैंने मल्लिका गांड पर बोतल से हल्का पानी डाला और मल्लिका को अच्छे से पोछा, लेकिन तभी आईडिया आया की क्यों न मल्लिका की गांड में यह बोतल डाली जाये, और इस गंदे और वीयर्ड आईडिया पर मैं हंस पड़ा, फिर मैंने मल्लिका की गांड पर दवा लगाई और मल्लिका के पास में hi सो गया.

सुबह जब उठा तो मल्लिका उठ चुकी थी और सिद्धि के साथ किचन में थी सब ब्रेक फ़ास्ट के लिए रेडी थे, दोनों दिंनिंग टेबल पर थे, मैं भी फ्रेश हो कर ब्रेक फ़ास्ट के लिए बैठा और देखा तो मल्लिका ने गाउन पहना था, जो की मल्लिका को कभी पहने नहीं देखा था और अंदर कुछ नहीं पहनने से सब कुछ दिख रहा था, फिर मैं उठकर किचन में गया, तो सिद्धि की माँ मल्लिका से बोले “मल्लिका बेटी, यह गाउन कैसा पहना है, प्लीज चेंज करो. बहोत गन्दा लग रहा हे और, टाइगर भी तुम्हे देख रहा था, जवान लड़का हे कुछ ख्याल करो. ” मल्लिका भी शर्मिंदा थी और मल्लिका ने शर्म से निचे देख कर कहा की वो अभी चेंज कर देगी फिर सिद्धि और उसकी माँ चली गयी फिर जैसे hi मैं बहार आया तो मल्लिका दिंनिंग टेबल पर से उठ रही थी और वो जैसे hi उठी तो दर्द के मरे उठ नहीं पेयी और गिरने जैसे हो गयी और उसने टेबल पकड़ा और मल्लिका का दूसरा हाथ मैंने पकड़ लिया और पूछा ‘मल्लिका जी आप ठीक तो है ना?’ और जोर से मेरा हाथ झटका और गुस्से में मेरी और देखने लगी , और कहा ‘यह कैसी हालत मेरी कर के रख दी हे? मेरे से चला भी नहीं जा रहा मई क्या कृ अभी भी दर्द है .

मई - अभी अप्प आराम कीजिये मई कॉलेज से आते हुए पैन किलर ले आऊंगा.

मल्लिका - ये क्या होता है.

मई - मेरा मतलब है ओसधि ले आऊंगा.

फिर मई कॉलेज की तरफ निकल गया.
 
अपडेट 76

इधर जब दीपिका और नीलम घर पहुंची तब उन्होंने थान लिया था की आज तो दीदी से उसके दिल की बात निकल लेंगे.

इसलिए ये दोनों फ्रेश हो क्र पहुंच गयी दिव्या के रूम में , दिव्या कही खोई हुई थी, इस लिए दोनों ने पास में आकर जोर से चिल्ला दिया जिस से दिव्या अपने सपनो की दुनिया से बहार आयी.

दिव्या - ओह गॉड तुम दोनों ने तो मुझे डरा hi दिया था और तुम दोनों कब आयी

नीलम - जब आप अपने होने वाले राजकुमार के खयालो में खोई हुई थी तब बताओ न दीदी कोण है वो जिसने हमारी सीधी शादी दीदी को भी अपना दीवाना बना दिया है.

दिव्या- तुम दोनों फिर से सुरु हो गयी मई तुम दोनों को कई बार बोल चुकी हु की ऐसा कुछ भी नहीं है.

दीपिका - देखो दीदी मई आप को एक बात बताती हु , हम दोनों का लवर एक hi है और वो हम दोनों से बहुत प्यार करता है किसी को काम या जायदा नहीं और आगे कुछ भी हो गया तो नीलम भी हेल्प क्र सकती है, क्यों की उसको सब पता है और आप सोचो अगर आप हमे बताओगे तो सोचो अगर कुछ हो गया तो हम आपकी हेल्प क्र सकती है और आप हमे बता देंगी तो हम भी आपकी हेल्प क्र सकती है की लड़का कैसा है, क्या करता है हमे मालूम होगा तो हम आप को बता सकते है.

दिव्या कुछ देर तक सोचती रही और ये दोनों एक दूसरे को इसरा करते हुए मुस्कुरा रही थी.

दिव्या- है यार तुम दोनों सही कह रही हो .

नीलम - तो बताओ न दीदी,

दिव्या - जिस दिन तुम दोनों अपने बॉयफ्रेंड के लिए लड़ रही थी न तो मुझे उस रात मुझे नींद नहीं आयी तो मई सुबह जल्दी उठ क्र पार्क में चली गयी व्ही उस से मुलाकात हुई उसकी नीली आखो में मई खो सी गयी और तभी मुझे उस से प्यार हो गया लेकिन उस के मान में क्या है ये मुझे नहीं पता, पर जब भी मई उस से मिलती हु मुझे लगता है की वो भी मुझे चाहता है .

दीपिका - नाम क्या है दीदी उस चोर का.

दिव्या- ये चोर किसको बोल रही है तू.

दीपिका - ा रे जिस ने मेरी स्वीट दीदी का दिल चुरा लिया वो चोर hi कहलायेगा न .

दिव्या - है वो तो है और उसका नाम.... टाइगर है, है दीखता भी कितना स्मार्ट है ,मई तो दीवानी hi हो गयी यार .

नीलम और दीपिका ने आखिर कर दिव्या के मुँह से उगलवा hi लिया की वो टाइगर को चाहती है और इस बात से दोनों खुस थी .

फिर उन्दोनो ने ये बात मुझे फ़ोन करके बताई तो मई भी आगे के बारे में सोचने लगा की अब मुझे क्या करना है मई सोच लिया था की अब मुझे अपने सहर उनलोगो से मिलना है जिसने मुझे बचपन में मरने की कोसिस की थी.

इधर जब मई घर पंहुचा तो मैंने पैन किलर मल्लिका को दी फिर भी वो पहले से ठीक लग रही थी रात को हम ने एक राउंड और खेल खेला लेकिन सिर्फ आगे पीछे तो हाथ भी लगाने नहीं दिया ,तभी मैंने उसे बता दिया की मई कुछ दिनों के लिए बहार जाऊंगा.

फिर अगली सुबह मई जल्दी उठ क्र पार्क में गया तो मुझे वह दिव्या मिल गयी उसे भी मैंने बता दिया की मई कुछ दिन नहीं आ पाउँगा, मई सोच रहा था की अभी hi उसे प्रोपोज़ क्र दू फिर सोचा अपने सहर से वापस आने के बाद hi करूँगा.

फिर मैंने दीपिका नीलम और समिति को भी फ़ोन क्र बता दिया की मई अपने सहर जा रहा हु.

फिर मई फार्महाउस वापस आया कुछ जरुरी सामान पैक किये और मल्लिका और बाकि लोगो से विदा लेकर उड़ गया अपने सहर की तरफ मई अपने घर वालो को सरप्राइज देना चाहता था इस लिए किसी को कुछ नहीं बताया था.

आज मई कितने सालो बाद अपने घर जा रहा था मन में अलग hi उमंग था, ऊपर से उड़ते हुए निचे का नजारा भी कितना अचछा लग रहा था.

इतने सालो बाद कितना बदल गया था

मेरा सहर और जब मई अपने घर को देखा तो वो भी कितना बदल गया था.

मई सुन सं जगह पर जा क्र उतरा और अपने घर की तरफ चला गया, फिर अपने घर का दूर बेल्ल बजाय तो दूर किसी अनजान लड़की ने खोला लेकिन वो सदी पहने हुए थी और खूबसूरत भी थी पहले तो मई कुछ देर तक उसको देखता hi फिर उस ने मुझ से पूछा की कोण हो तुम और किस से मिलना है, लेकिन मई उसकी बातो को नजरअंदाज करते हुए अंदर घुस गया.

मई - माँ माँ माँ खा हो देखो मई आ गया.

लड़की - ये लड़के कोण हो तुम और अंदर खा घुसे जा रहे हो, यह कोई तुम्हारी माँ नहीं रहती, चलो बहार निकलो.

तभी ऊपर सीढ़ियों से मेरी माँ आती हुई नजर आयी.

आरती : कोण है आराधना किसे बहार निकल जाने की बोल रही है .

ओह तो इनका नाम आराधना है

आराधना : देखो न दीदी ये लड़का माँ माँ चिल्लाते हुए घर में hi घुस गया है.

तब माँ की नजर मुझ पर पड़ी तो वो दौड़ते हुए मेरे पास आयी और मुझे गले से लगा लिया फिर मेरे पुरे चेहरे को किश करने लगी.

आरती : तू आ गया मेरा बीटा बहुत दिनों से तुमसे मिलने का मन क्र रहा और देखो तुम खुद hi आ गए पर एक फ़ोन तो क्र देता बीटा.

मई : ओह माँ अगर मई बता देता तो आपको सरप्राइज कैसे देता.

आराधना : दीदी क्या यही टाइगर है

आरती : है यही टाइगर है मेरा बीटा और टाइगर ये है तेरे अर्चना चची की बहन और तेरे छोटे चाचा रवि की पत्नी आराधना.

आराधना : ओह सॉरी बीटा मैंने तुम्हे पहचान hi नहीं पाई कितना बड़ा हो गया है पूरा गबरू जवान लगता है .

ये बोल क्र आराधना चची ने भी मुझे गले से लग लिया और जरा कास क्र hi लगाया था जिससे उनकी दोनों बूब्स मेरे साइन में डाब गए थे, वह क्या कठोर चुकी थी मजा hi आ गया.

हमारी आवाज सुन क्र किचन से अर्चना चची भी निकल क्र आ गयी और उसने भी मुझे गले से लगा लिया चची का भी फिगर लाजवाब था, सच में दोनों बहने कमल की थी.

अर्चना : जाओ बीटा अपने रूम में जाओ और फ्रेश हो क्र आ जाओ हमारे साथ hi नास्ता क्र लेना.

फिर मई अपने रूम में आ गया जो पहले से hi मेरा था पर रूम की देख क्र ऐसा लग रहा था की कोई और मेरे रूम का उपयोग क्र रहा है.

तभी.......
 
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