Intehah................(A टेल ऑफ़ लस्ट) - SexBaba
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Intehah................(A टेल ऑफ़ लस्ट)

hotaks

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इस साइट पर मेरी ये पहली कहानी hain........umeed करूँगा की ये स्टोरी आप सबको बहुत पसंद aayegi..........kyon की इसमें वो सरे रंग देखने को मिलेंगे जो एक रीडर स्टोरी में पढ़ना चाहता hain.........umeed करूँगा की हमेशा की तरह आप सब का फुल सपोर्ट मुझे milega.......ye कहानी एडुटेरी और इन्सेस्ट बेस्ड hain......aagey चलकर सब कुछ इसमें देखने को milega.......is कहानी का पहला अपडेट शाम को आएगा..........

इन्तेहाह (ा स्टोरी ऑफ़ हाउसवाइफ)
 
इन्तेहाह (स्टोरी ऑफ़ लिमितलेस लव, रिवेंज, एंड लस्ट)

अपडेट -01

डेट- 14-फेब-2015

शाम का वक़्त tha...........poori दुनिया जहाँ खुशियां मन रही thi.........valentine डे के उस ख़ास दिन ki............jahan सरे प्रेमी अपनी अपनी प्रेमिकाओं को ढेर सरे तोहफे दे रहे they..........phool दे रहे they........kahin अपने प्यार का इज़हार कर रहे they.........wahin कुछ अनकही बातें भी खामोश लबों पर उनके दरमियान ज़ाहिर हो रही thi..........jahan कई चेहरे पर खुशियां झलक रही थी वही एक साक्ष ऐसा भी था जिसके चेहरे पर केवल मायूसी थी.......

आँखों में ढेर सरे आंसूं लिए hue............wo इस वक़्त अपने बिस्टेर पर बिलकुल खामोश बैठा हुआ tha..........bilkul अकेला sa........gumsum...........nakaami साफ़ उसके चेहरे पर झलक रही thi..........jaise किसी चीज़ को पाने की उसे चाह हो और वो चीज़ उसे न मिली ho.........ya चीन ली गयी ho...........zubaan पूरी तरह से खामोश थे मगर दिल में जैसे कोई बहुत बड़ा सा तूफ़ान उठा हुआ tha...........itna बड़ा तूफ़ान जिसे रोकना अब शायद उसके बस में भी नहीं tha.........aur अब वो तूफ़ान बहुत जल्द किसी न किसी रूप में आकर उसकी ज़िन्दगी में दस्तक देने वाला tha.......shayad उसकी मौत के रूप में..................

कमरे की साडी खिड़कियाँ पूरी तरह से बंद thi.........darwaza भी बराबर लगा हुआ tha.........na hi अब उस कमरे में किसी प्रकार की कोई आहात thi........aur न hi कोई awaaz........magar इस गहरी ख़ामोशी में एक चीज़ जो पल पल उस ख़ामोशी को तोड़ रही thi........wo थी उसकी दिल की dhadkhan..........jo वक़्त के साथ साथ अब बहुत तेज़ी से धड़कते जा रही thi.........kuch नफरत की वजह se..........to कुछ प्रतिष्शोध की वजह se............kuch देर तक वो साक्ष बिस्टेर पर यु hi खामोश बैठा रहता हैं और अपने बीते हुए ात्तेतः के बारे में सब कुछ सोचने लगता हैं...........

साडी घटना एक एक कर किसी फिल्म की तरह उसकी आँखों के सामने घूमने लगती hain.........aur आख़िरकार एक आखरी शब्द उसके दिमाग को पूरी तरह से झंकझोड़कर रख देता हैं........." jawo........agar तुम मुझसे इतना hi प्यार करते हो तो जाकर कहीं अपनी जान क्यों नहीं दे dete...........hain तुममें वो himmat............jaan देने के लिए कलेजा chahiye............is सीने में दम होना chahiye........yahan लोग बातें बहुत बड़ी बड़ी किया करते हैं मगर यहाँ कोई किसी के लिए कुछ करता कुछ nahin.........tum भी उन्ही सब में से एक ho.........aur मुझे प्यार जैसी चीज़ों पर बिलकुल भी भासः nahin.........aur ये रहा मेरा jawab............tumhare इस प्यार का..........." लव लेटर के कई सरे टुकड़े करके उस लड़की ने उस साक्ष के मुँह पर दे मारा tha..........jo चोट उसके दिल में अब नासूर बन गया tha..........kabhi न भरने वाला ज़ख्म वो पल उसे अब दे गया था.........

आंसूं अब भी लगातार उसकी आँखों से बरस रहे they..........wahin दिल में छुपा दर्द अब बढ़ता जा रहा tha.........beetatay वक़्त के साथ saath...........aur अब ये दर्द इस हुड्ड तक बढ़ चूका था की उस दर्द का इलाज़ उस साक्ष के पास मौजूद नहीं tha.........kuch देर तक वो चुप चाप यु hi रोटा रहता hain........fir सामने टेबल पर राखी हुई एक छोटी सी शीशी पर जब उसकी नज़र जाती हैं उसकी ांककों से आंसूं धीरे धीरे सूखने लगते hain...........aab शायद वो कुछ फैसला कर चूका tha..........aab वो घडी आ चुकी थी कुछ कर गुज़र जाने ki..........apna प्यार को सही साबित कर पाने की..........

उसके होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान तैर gayi.........aur हाथ खुद बा खुद उस शीही की तरफ बढ़ते चले gaye..............aankhein हौले से बंद होने lagi...........aur जो होंठ सिले थे वो खुद बा खुद खुलते चले gaye............aur तब तक खुले रहे जब तक वो ज़हर की शीशी की आखरी बूँद उसके हलक में पूरी तरह से उतर नहीं gayi.............kuch देर तक उस कमरे में गहरी ख़ामोशी rahi..........fir उस साक्ष की आँखों में आंसूं फिर से बरस pade..........shayad अपनी हार की वजह se..........ya फिर अपनी ज़िन्दगी से मिली उस शिकश्त se.............jo जीते जी वो कभी उसे नहीं भुला सकता था.............

कुछ देर बाद उसके जिस्म में जैसे जैसे ज़हर का असर बढ़ने laga.......uski तकलीफें भी वक़्त के साथ साथ धीरे धीरे बढ़ने lagi...........aankhein धीरे धीरे बंद होती चली गयी...........

" मैं बुज़दिल नहीं hoon...........buzdil नहीं हूँ.........." शायद ये उसका आखरी शब्द था aur..........................uski जुबां हमेशा के लिए खामोश हो चुकी thi..........takleef अब इस हुड्ड तक बढ़ चुकी थी की अब उसके लिए वो दर्द सहना बर्दास्त के बहार tha...........aur शायद अब उसे इस तकलीफ से मुक्ति भी मिल चुकी thi.............kamrey में एक बार फिर से गहरी ख़ामोशी thi............magar इस बार न hi कहीं कोई शोर थी.............. और न दिल की धड़कने की कोई awaaz............kyon की अब वो दिल की धड़कन भी हमेशा हमेशा के लिए कहीं अब बंद हो चुकी thi...........................ya शायद अब उस दिल ने धड़कना अब बंद कर दिया था........................................................

कंटिन्यू...................................................................................
 
अपडेट 02

" मैं बुज़दिल नहीं hoon...........buzdil नहीं हूँ.........." शायद ये उसका आखरी शब्द था aur..........................uski जुबां हमेशा के लिए खामोश हो चुकी thi..........takleef अब इस हुड्ड तक बढ़ चुकी थी की अब उसके लिए वो दर्द सहना बर्दास्त के बहार tha...........aur शायद अब उसे इस तकलीफ से मुक्ति भी मिल चुकी thi.............kamrey में एक बार फिर से गहरी ख़ामोशी thi............magar इस बार न hi कहीं कोई शोर थी.............. और न दिल की धड़कने की कोई awaaz............kyon की अब वो दिल की धड़कन भी हमेशा हमेशा के लिए कहीं अब बंद हो चुकी थी.........................................................................

अब आगे........................................................................

आफ्टर 4 मोनथस.................

गुडगाँव सेहर में स्तिथ एक 15 मंज़िल बुलिडिंग पर एक साक्ष रात के करीब 10 बजे अकेला ........गुमसुम sa..........apni यादों में खोया हुआ tha............nashe की वजह से उसकी आंखें सुर्ख लाल thi........magar कहीं न कहीं उन आँखों में आंसूं की चाँद बूँदें भी नज़र आ रही thi............aur दिल में ढेर सारा gum............jo उसकी आँखें पल पल उसके दिल में छुपे हुए उस दर्द को बयां कर रही thi............aisa लग रहा था मनो वो अपनी ज़िन्दगी से हार गया ho.........ya उसे अब जीने की इच्छा ख़तम हो गयी हो...........

वो फ़ौरन अपने कदम आगे की तरफ बढ़ता हैं और जब उसकी नज़र नीचे जमीन की तरफ जाती हैं उसके दिल में दुर्र की एक तेज़्ज़ लहर दौड़ जाती hain.........agle hi पल वो मरने का ख्याल अपने दिल से निकल देता hain..........magar ख्याल निकलते hi फिर से उसके दिल में दबा दर्द धीरे धीरे उसपर हावी होने लगता hain..........aur गुज़रते वक़्त के साथ साथ उसका दर्द फिर से बढ़ता चला जाता hain..........kadam एक बार फिर से लड़खड़ा पड़ते hain..........aur वो फिर कुछ सोचकर उस बिल्डिंग के आखिरी चोर की तरफ दुबारा चल पड़ता हैं.........

अब वो एक बार फिर से दोराहे पर खड़ा tha..........jahan एक तरफ उसकी ज़िन्दगी thi..................to दूसरी तरफ उसकी maut.......chunana फिर से उसे किसी एक को tha...........waise तो वो मरने के इरादे से वहां गया था मगर शायद दुर्र की वजह se.......wo अपने कदम आगे नहीं बड़ा पा रहा tha..........wo कुछ देर तक इसी असमंजश में डूबा रहता hain........fir वो अपने आँखों से बहते आंसूं पूछता hain......aur अपने इरादे को और मज़बूत करता hain............himmat तो उसके अंदर ज़रा भी नहीं थी मगर दिल में ज़ख्म इतना गहरा था की इस बार उसके कदम खुद बा खुद अपनी मौत के तरफ बढ़ते चले जाते hain...........shayad अब उसने मरने का पूरा इरादा बना लिया tha..........ya फैसला कर चूका था..........

वो एक नज़र अपने चरों तरफ देखता hain..........raat के अँधेरे में वहां गहरी ख़ामोशी तो थी मगर नीचे गाड़ियों का शोरगुल भी सुनाई दे रहा tha...........wo कुछ सोचकर हौले से अपनी दोनों आँखें बंद करता hain........aur गहरी लुम्बी सांस छोड़ता hain..........ek बार फिर से उसकी दिल की धड़कनें गुज़रते वक़्त के साथ तेज़्ज़ होती चली जाती hain...........aur अगले hi पल उसके कदम खुद बा खुद बढ़ते चले जाते hain............apni मौत के तरफ.............

फिर उसका जिस्म हवा में कुछ पल तक लेहरारा हैं और...............15 मंज़िल बिल्डिंग से उसका जिस्म नीचे फर्श पर बिखेर जाता hain.............aab शायद उसकी सांस टूट चुकी thi......aur जिस्म के कई हिस्सों से खून बह रहा tha......sir में इतनी घेरि चोट आयी थी की उसकी दोनों आँखें बहार की तरफ निकल आयी thi.............aab सब कुछ पल भर में शांत हो गया tha..........sansein bhi..........aur धड़कन bhi............bheed कुछ hi देर में वहां जमा हो गयी thi...........wahan खड़े लोग बस तमाशा hi देख सकते they.............kar कुछ नहीं सकते they............aur वैसे भी अब करने को कुछ रह कहा गया था..............

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वैसे तो बड़े सेहर में इस तरह की घटना हर रोज़ होती रहती hain.......aur इस तरह की घटना वहां के लिए आम बात hain..........aur इस घटना से ज़्यादातर लोगों को फर्क भी नहीं padta...........magar एक साक्ष ऐसा भी था जो इस हुए हादसे से पूरी तरह टूट गया tha.........aankhein उसकी भी नुम थी मगर कहीं न कहीं उसे एक गहरा ढाका ज़रूर लगा tha...........pratishosh की भावना लिए वो काफी देर तक यु hi खामोश रहता हैं और फिर अचानक से कहीं उठकर चल पड़ता hain...........in सब से कहीं door...........shayad अब उसे अपनी मंज़िल की तलाश thi............ya फिर उसे अपनी मज़िल नज़र आ रही थी.............................................

सिक्योरिटी अफसर स्टेशन......

" तूने आज का अखबार पढ़ा क्या gokhle...........har रोज़ साला वही घीसा पिता news...........sala कल रात फिर से एक लड़के ने 15 मंज़िल बिल्डिंग से कूदकर अपनी जान दे di.........hoga साला कोई प्यार का mara........bechara..........khaya होगा उसने कहीं प्यार में धोखा..........." और वो साक्ष इतना कहकर हौले से हंस पड़ता hain..........wahin सामने बैठा सुब इंस्पेक्टर भी धीरे से हंस पड़ता हैं..........

" सही कह रहा हैं तू diwakar...........ye साला आज का जनरेशन बहुत बेकार हो गया hain..........sala किसी पे भी भरोषा नहीं रहा aab..........main तो कहता हूँ लडकियां केवल छोड़ने की चीज़ होती hain..........unse दिल विल लगाना सब बेकार hain........sali सब एक जैसी होती hain...........do को ऊपर वाले जेब में रखती hain.......aur चार को नीचे..........." और गोखले हौले से अपनी आँख मार देता hain........wahin दिवाकर बड़े गौर से गोखले के चेहरे की तरफ देखकर मुस्कुराने लगता हैं.........

" तू तो ऐसे कह रहा हैं जैसे किसी लड़की ने तुझे भी धोखा दिया ho..........khair.........jo भी ho........aab बड़े साहेब को इस घटना की पूरी इनफार्मेशन और डिटेल्स देनी padegi.........chal चलते हैं.........." और इतना कहकर वो दोनों फ़ौरन सिक्योरिटी अफसर स्टेशन से बहार की तरफ निकल जाते हैं...........

इस घटना के एक हफ्ते बाद...............

" sir..........pichley हफ्ते जिस लड़के ने बिडिंग से कूदकर सुसाइड किया था और आज से करीब 4 महीना पहले एक लड़के ने ज़हर की शीशी पी ली thi..........un दोनों घटना में एक चीज़ तो कॉमन हैं sir...........aur वो चीज़ hain...........ladki........." इतना कहकर गोखले गहरी सांस छोड़ते हुए अपनी बात पर ज़ोर देता hain...........wahin कमरे में एक बार फिर से गहरी ख़ामोशी चा जाती hain.........samney बैठा इंस्पेक्टर बड़े गौर से गोखले के चेहरे की तरफ सवाल भरे नज़रियों से एक तुक देखने लगता हैं........

" ladki.........to इसमें कॉमन क्या hain.......dono मौत के पीछे कहीं एक hi लड़की तो नहीं.........." काफी देर तक सामने बैठा इंस्पेक्टर अपने दिमाग पर ज़ोर देते हुए अपनी बात कहता hain.......wahin गोखले का चेहरा खिल उठता हैं.......

" अब्सोलुतेल्य राइट sir..........in दोनों घटना के पीछे एक hi लड़की hain.........magar अभी तक ये क्लियर नहीं हुआ hain..........bus इतना पता चल पाया हैं की उस लड़की ने इन दोनों लड़कों के प्यार को ठुकरा दिया tha........shayad इस वजह से इन दोनों ने ऐसा कदम उठाया.........." और गोखले अपनी अधूरी बात ख़तम करता हैं.......

" अगर लड़की ने उन्हें मन कर दिया तो इसमें उस बेचारी लड़की का क्या dosh............waise उस लड़की का नाम क्या hain..........is बात से तो क्लियर हैं की वो लड़की लाखों में ज़रूर एक hogi........tabhi तो उसके इतने सरे आशिक़ hain...........aab तो लगता हैं उस लड़की से मुझे भी ज़रूर एक बार मिलना hi पड़ेगा..........

" उस लड़की का नाम हैं काव्य mehta.........magar अफोस की बात ये हैं सर की आप अब उस लड़की से मिल नहीं sakengey........kyon की अब वो लड़की इस सेहर में नहीं hain..........maine अगल बगल से उस लड़की के बारे में पता करवाया tha........aur ये बात भी तय हैं की अब उस लड़की की शादी फिक्स हो गयी hain...........kul मिला जुला कर ये केस क्लोज्ड हो चूका हैं sir........thats आईटी........" और गोखले वो फाइल वहीँ टेबल पर रख देता hain..........aur फ़ौरन बहार की तरफ निकल पड़ता हैं..........

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डेट 15 मार्च 2017

Ratnagiri..............ek खूबसूरत sehar.............charon तरफ पहाड़ और जंगल से घिरा hua...........usi सेहर से बहार बना एक बड़ा सा बंगलो और उसके चरों तरफ लगे बड़े बड़े ped..........un पेड़ों के बीच एक 9 फ़ीट की बाउंड्री थी जो उस बंगलो को पूरी तरह से घेरे हुए thi............us बाउंड्री के ऊपरी हिस्सों पर शीशे के बड़े बड़े टुकड़े लगे they.........aur सामने एक बड़ा सा gate.........aur उसी से सटे एक छोटा सा cabin.......jismein चौकीदार के लिए एक 8/10 का रूम बना हुआ था..........

अंदर का हिस्सा काफी बड़ा tha............aur सामने एक बड़ा सा गेस्ट रूम भी tha...................jismein उस घर के नौकर वहां रहते they..............aur बंगलो की साफ़ सफाई किया करते they........uske ठीक सामने कार पार्किंग की जगह thi...........halanki ये बंगलो अभी नया बना था इस वजह से आस पास ज़्यादा घर नहीं they.........aur नए पेंटिंग की वजह से उस बंगलो की खूबसूरती में चार चाँद लग गयी thi..........samney का काफी हिस्सा शीशे का बना हुआ tha..........aur सामने एक बड़ा सा मैं दरवाज़ा था.........

अंदर के फर्श पर सफ़ेद रंग का टाइल्स लगा हुआ tha.........aur सामने एक बड़ा सा हॉल tha.......jiske बीचों बीच एक बड़ा सा झूमर लटक रहा tha..........wahin कुछ दूर पर सोफे और सामने की दीवार पर 48 इंच की लेद t.v लगी thi.........thodi दूर पर एक बड़ा सा म्यूजिक सिस्टम भी tha..........ander करीब 4 बड़े बड़े कमरे they......aur ऊपर भी 4 बड़े बड़े रूम they........poora बंगलो टाइल्स और मार्बल्स से बना tha......jissey उसकी खूबसूरती में और भी इज़ाफ़ा हो रहा था...........

हर दो रूम के साथ आत्ताच में टॉयलेट बना tha.........do ऊपर ......दो neechay.........aur इस बड़े घर में रहता tha..............mehta parivaar......................yani की श्यामनन्द mehta..........jo था इस बंगलो का maalik..........ya यु कहो की इस पूरे परिवार का अकेला मालिक............

श्यामनन्द की उम्र करीब 65 साल thi........bal पूरे सफ़ेद हो चुके they.......aur चेहरे पर जगह जगह झुर्रियां दिख रही thi........haath में एक बड़ी सी छड़ी हमेशा रहती thi.......wahin उनकी वाइफ सुनीता मेहता भी अब बूढी हो चुकी thi.........jo कदम से कदम मिलकर उनके बुढ़ापे का सहारा बानी हुई thi.............waise तो श्यामनन्द के तीन औलाद they...........ek राहुल mehta........aur दूसरा राम mehta.........aur तीसरी उसकी खूबसूरत बेटी काजल मेहता...........

राहुल की शादी हो चुकी thi..........aur उसकी शादी हुए लगभग 6 महीने बीत चुके they.............waise राहुल ऑस्ट्रेलिया में बिल्डिंग कंस्टक्शन में जॉब करता tha.........aur ज़्यादातर वो इंडिया से बहार hi रहता tha............rahul की जिस लड़की से शादी हुई थी उस लड़की न नाम था..........................................." काव्य मेहता " ................................वो नाम जो एक अलग hi पहचान अब बयां कर रहा था...............

कंटिन्यू.....................................................................
 
अपडेट-03

राहुल की शादी हो चुकी thi..........aur उसकी शादी हुए लगभग 6 महीने बीत चुके they.............waise राहुल ऑस्ट्रेलिया में बिल्डिंग कंस्टक्शन में जॉब करता tha.........aur ज़्यादातर वो इंडिया से बहार hi रहता tha............rahul की जिस लड़की से शादी हुई थी उस लड़की न नाम था..........................................." काव्य मेहता " ................................वो नाम जो एक अलग hi पहचान अब बयां कर रहा था...............

अब आगे........................................................................................

सुबह का वक़्त tha.............har रोज़ की तरह श्यामनन्द हॉल में बैठा हुआ अखबार पढ़ रहा tha..........wahin दूसरी तरफ उसकी बीवी सरिता बैठी हुई सब्ज़ी काट रही thi...........shyamanand जब तक एकबार पूरा नहीं चाट लेता वो इस बीच किसी से बात नहीं किया करता tha.........usey अखबार से बहुत लगाव tha..........wahin सरिता उससे बातें किये जा रही थी और वो उसकी बाटिओं का बस हाँ ...hoon.....mein जवाब दे रहा था...........

" मालिक चाय........" ये आवाज़ सुनते hi श्यामनन्द अपनी नज़रें फ़ौरन ऊपर की ओरे उठता हैं और अपने सामने खड़े नौकर की तरफ बड़े गौर से एक तुक देखने लगता hain.........wahin उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान तैर जाती हैं.......... सामने खड़ा एक बूढा सा आदमी करीब 65 साल का चाय की ट्रे वहीँ टेबल पर रख देता हैं और फ़ौरन अपनी दोनों बाहें आपस में जोड़ लेता hain...........wahin सरिता भी उसे देखकर हौले से मुस्कुरा पड़ती हैं.........

" आज चाय लेन में आपने थोड़ी सी देर कर di............aapko मालूम हैं की मैं चाय पीते हुए अखबार पढ़ना ज़्यादा पसंद करता हूँ........." शायमण्ड चाय की चुस्की लेते हुए अपनी बात पूरी करता hain........aisa लग रहा था मनो जैसे वो अपने नौकर से शिकायत कर रहा ho.........wahin सामने खड़ा नौकर अपना सर झुकाये अब भी खामोश खड़ा था..........

" malik........galti हो गयी........." और वो नौकर दुबारा से अपना सर नीचे की तरफ झुका लेता hain.........wahin श्यामनन्द उसे देखकर दुबारा से हंस पड़ता हैं.........

" तुम्हें मैंने कितनी बार कहा हैं की तुम इस घर के एक सदसय ho.........is परिवार का एक हिस्सा ho..........na की naukar.........aayi बात समझ में रामु........." और इस बार श्यामनन्द एक तुक रामु के चेहरे की तरफ देखने लगता hain.........wahin रामु की नज़रें अभी भी फर्श को घूर रही थी..........

" ये तो आपका बड़प्पन हैं mailk.........jo आप ऐसा समझते hain..........nahin तो मैं kahan..........aur आप कहाँ........" रामु की बात पूरी होती तभी श्यामनद बीच में hi बोल पड़ता हैं.........

" कोई बड़ा छोटा नहीं होता ramu........ye तो बस अपने सोच का फर्क हैं.........." और शायमण्ड इस बार सुनीता के तरफ देखकर मुस्कुरा पड़ता hain.........wahin सुनीता भी हौले से हंस पड़ती हैं........

" malik........aapse एक गुज़ारिश thi...........agar आप नाराज़ न हो to.........main ......." और रामु इस बार अपनी बात अधूरी छोड़ देता hain........wahin श्यामनद एक तुक रामु के चेहरे की तरफ देखने लगता hain......jaise वो उसके चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रहा हो........

" क्या बात हैं ramu...........zara खुलकर kaho.........ismein नाराज़गी वाली बात कहाँ से आ गयी........" और श्यामनन्द फिर से बोल पड़ता hain.......wahin रामु कुछ देर तक खामोश रहता हैं फिर वो आगे बोलना शुरू करता हैं.........

" da-asal मिल्क अब मैं बूढा हो चूका hoon........pehle जैसी ताक़त अब मुझमें नहीं rahi..........jo मैं इस घर का और बोझ उठा sakun........is लिए अब मैं आराम करना चाहता hoon..........main अब अपने गांव हमेशा हमेशा के लिए लौट जाना चाहता hoon..........sochta हूँ की वहां रहकर कुछ दिन अपना घर परिवार भी देख loon.......maine पूरी ज़िन्दगी आपकी सेवा में गुज़र दी hain........aab मैं थक गया हूँ......." और रामु इतना बोलकर एक बार फिर से अपनी गार्डन नीचे की तरफ झुका लेता hain......na जाने क्यों उसका दिल दुर्र से ज़ोरों से धड़क रहा tha.........wahin श्यामनद के चेहरे पर उदासी के बदल साफ़ नज़र आने लगे थे........

उदासी की बात तो थी hi.........kyon की उसका बरसों का वफादार नौकर अब यहाँ से हमेशा के लिए जाने की बात कर रहा tha.........jo की अब श्यामनद को बिलकुल मंज़ूर नहीं tha........magar वो अपने स्वार्थ की वजह से उसका दिल नहीं दुखाना चाहता tha...........na चाहते हुए भी वो रामु को मन नहीं कर पता.........

" ठीक हैं ramu.........barson से तुमने जो इस घर की सेवा की हैं अब मैं आज से तुम्हें हमेशा हमेशा के लिए उससे मुक्त करता hoon..........tum अब आज़ाद हो........" और इतना कहकर श्यामनन्द अपनी जगह से उठ जाता hain..........wahin रामु फ़ौरन उनके पवन में गिर पड़ता hain.......wahin श्यामनद फ़ौरन रामु को उठता हैं और उसे अपने सीने से लगा लेता हैं..........

" तुम्हारी जगह मेरे पैरों में nahin.....is दिल में hain........main भी सोच रहा हूँ की बाकि के बचे दिन हम भी गांव में जाकर गुज़र dein..........yahan इस सेहर में रखा कुछ नहीं hain..........humein भी अपने गांव की बहुत याद आती hain.........aur अब तुम भी यहाँ नहीं रहोगे तो हम लोग यहाँ रहकर क्या करेंगे.........." और श्यामनन्द अपने दिल की बात अपनी जुबान पर ला देता hain........wahin रामु बड़े गौर से एक तुक अपने मालिक के चेहरे की तरफ देखने लगता hain...........magar कहता कुछ नहीं.........

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जाते जाते श्यामनन्द उसे एक लाख रुपये nagad........barson से उसने जो धन जमा किया था वो सब कुछ उसे ईमानदारी से लौटा देता hain.......aur कुछ खाने पीने का सामान भी देता hain.......ramu का यु जाना उसे अंदर hi अंदर खाये जा रहा tha.......magar वो अब अपने नौकर को मायूस नहीं करना चाहता था.........

शाम का वक़्त tha.........shyamanad का दिल बहुत बेचैन हो चला tha.........usey अब वहां बिलकुल ाचा नहीं लग रहा tha.........shaam को उसका बीटा राहुल घर आता हैं और आकर अपने पिताजी के पास जाकर बैठ जाता hain........shayamanand के चेहरे पर जो उदासी के बदल थे वो राहुल की नज़रियों से नहीं छुपे थे..........

" क्या बात हैं papa...........aaj आप इतने उदास दिख रहे hain.........baat क्या hain.......aur रामु काका कहीं दिख नहीं rahe...........kahin गए क्या वो......" राहुल के मुँह से ऐसे सवाल सुनकर श्यामनन्द एक तुक राहुल के चेहरे की तरफ देखने लगता hain........kuch देर की गहरी ख़ामोशी के बाद वो अपनी चुप्पी तोड़ता हैं.......

" haan........maine उनकी छुट्टी कर di...........wo अब हमेशा के लिए अपने गांव लौट गए hain.........aur beta.........hum भी अब अपने गांव लौट जाना चाहते hain........yahan अब हम लोगों का दिल नहीं lagta...........ye सेहर हमारे लिए नहीं hain........isey तुम hi अब सम्भालो.........." और श्यामनन्द अपने दिल की बात अपने बेटे से बोल देता हैं जिससे सुनकर राहुल के चेहरे पर भी उदासी के बदल चा जाते hain.........waise तो वो अपने पापा की बहुत इज़्ज़त करता tha.......magar वो अपने पापा की कोई भी बात काट नहीं सकता tha......aur न hi कभी उनका दिल तोडना चाहता था........

" मगर papa..........aap ऐसे कैसे जा सकते hain.........main कैसे यहाँ सब कुछ अकेले sambhalunga.........kavya को कौन dekhega.............ram का भी तो एडमिशन यहाँ हो गया hain........uski पढ़ाई पर कौन ध्यान dega..........aur कुछ hi दिनों में काजल भी यहाँ आने वाली hain.......aur मैं भी अगले हफ्ते ऑस्ट्रेलिया जा रहा hoon........aur to.......is घर में नौकर भी अब नहीं hain...........kaise होगा ये सब..........." और राहुल अपने दोनों हाथ अपने सर पर रख देता hain..........wahin श्यामनन्द एक तुक उसके चेहरे की ओरे देखे जा रहा था.......

" सब कुछ हो जायेगा beta...........humari बहु सब कुछ संभल legi........wo बहुत समझदार hain........padhi लिखी hain......sushil hain........aur खूबसूरत bhi...........ram की पढ़ाई की तुम फ़िक्र मुट्ठ karo.........main बहु से बोल दूंगा तो उसे खली टाइम में पढ़ा दिया karegi........aur कुछ hi दिनों में काजल बिटिया भी यहाँ आ jayegi.......fir सब कुछ समय के साथ सही हो jayega............bus.......aab तुम हमें जाने की इज़्ज़ज़त दे दो..........." और श्यामनन्द फिर से मनो अपने बेटे के सामने फर्याद करने लगता hain.........wahin इस बार राहुल अपने ख्यालों में डूबता चला जाता hain........dekhna था की आयने वला वक़्त क्या करवट बदलने वाला था...............................................

कंटिन्यू.............................................................................
 
अपडेट-04

" सब कुछ हो जायेगा beta...........humari बहु सब कुछ संभल legi........wo बहुत समझदार hain........padhi लिखी hain......sushil hain........aur खूबसूरत bhi...........ram की पढ़ाई की तुम फ़िक्र मुट्ठ karo.........main बहु से बोल दूंगा तो उसे खली टाइम में पढ़ा दिया karegi........aur कुछ hi दिनों में काजल बिटिया भी यहाँ आ jayegi.......fir सब कुछ समय के साथ सही हो jayega............bus.......aab तुम हमें जाने की इज़्ज़ज़त दे दो..........." और श्यामनन्द फिर से मनो अपने बेटे के सामने फर्याद करने लगता hain.........wahin इस बार राहुल अपने ख्यालों में डूबता चला जाता hain........dekhna था की आने वाला वक़्त क्या करवट बदलने वाला था...............................................

अब आगे...............................................................................................

श्यामनन्द तो जाने का जैसे पूरा इरादा बना लिया tha...........wahin सरिता भी उसके कदम से कदम मिला रही thi...........aab सब कुछ भाग्य के भरोसे था............

राहुल.......... करीब 26 साल ka..........aachi पर्सनालिटी का malik..........waise वो कोई ज़्यादा मोटा नहीं tha.......aur न hi ज़्यादा patla........haan रंग थोड़ा सावला ज़रूर tha...........shuru से hi वो नरम स्वाभाव का था और दूसरों की ख़ुशी में अपनी ख़ुशी ढूढ़ता tha.........waise तो वो शादी करने के इरादे में बिलकुल नहीं था मगर जब उसने पहली बार काव्य को देखा था वो शादी से खुद को रोक नहीं पाया tha.........pehli hi नज़र में काव्य उसे भा गयी thi........uski खूबसूरती उसे दीवाना बना गयी थी............

वैसे राहुल के अंदर पैसे कमाने की भूख thi............paise के लिए वो जैसे पागल रहता tha............har वक़्त उसके दिमाग में पैसा घूमता रहता tha...........is वजह से काव्य और राहुल के बीच हल्का सा फासला बढ़ चूका था..........

राम..........18 साल का खूबसूरत naujawan............aabhi वो जवानी के दहलीज़ पर अपने कदम रखा tha........duniyadari क्या होती हैं उसे इन सब के बारे में कुछ पता नहीं tha...........waise राहुल और राम में काफी फर्क tha..........ram दिखने में बहुत सूंदर था और वहीँ उसका बदन गोरा tha........aur हाइट भी ाची खासी thi...........ram जितना शरीफ और सीधा था उतना hi भोला भला था...........

कॉलेज में भी वो सबसे अलग रहता tha...........class में उसके एक भी दोस्त नहीं they........shayad शर्म की वजह से वो ज़्यादा किसी से बात नहीं करता tha...........khaas कर लड़कियों se...........ladkiyon से तो वो ऐसे दूर भागता था जैसे वो उसे खा jayengi.........aur कभी उसका किसी लड़की से अकेले में सामना हो जाता तो वो थार थार कम्पनी lagta............is वजह से कॉलेज के टीचर्स भी श्यामनन्द से कई बार उसकी शियाकत कर चुके they.........magar उसके अंदर कभी कोई बदलाव नहीं aaya..........agar उसे कोई डाउट भी होता और क्लास में अगर मैडम पढ़ा रही होती तो भी वो शर्म से नहीं पूछ पता.........

Kavya.....................jitni बाला की खूबसूरत thi......utni hi तेज़्ज़ भी thi..............bhagwaan ने उसे बड़ी hi फुर्सत में तराशा tha..........shadi के पहले भी उसके पीछे हज़ारों लड़कों की लाइन रहती thi........aur शादी के बाद भी ये सिलसिला अभी तक नहीं थमा tha.........kavya न ज़्यादा मोती थी और न hi ज़्यादा patli.............badan उसका ऐसा था जो एक नज़र देख ले तो बस देखता रह jaye..........jis गली से वो गुज़ारे मर्द लाख कोशिश करने के बावजूद भी उसे पलटकर एक नज़र ज़रूर देखता था.......

जिस्म गोरा होने की वजह से उसकी खूबसूरती और भी क़हर ढाती thi........aankhein बड़ी badi.......bilkul हिरणी के jaisi..........ek नज़र जिसको वो देख ले वो वहीँ उसका दीवाना बन jaye..........kanon में बड़े बड़े jhumkey.........jo लगातार उसके नंगे शोल्डर को टच करते they.........maathey पर एक छोटी सी बिंदी जो उसकी खूबसूरती को और भी चार चाँद लगाती thi.............aankhon में काजल हर वक़्त लगा रहता tha..........naak में एक गोल्ड रिंग thi..........aur होंठ रास से भरे हुए बिलकुल गुलाबी और naram..............aisa लगता था जैसे उसमें से सेहद टपक रहा हो........

गार्डन सुराही की तरह lumbi...........aur गले में काळा रंग का मोतियों से पिरोया हुआ mangalsutra.........maathey पर लाल रंग का sindoor..........aur हाथों में खनकती choodiyaan..........bal बड़े बड़े जो उसकी कमर तक लटके रहते they..........waise तो काव्य पढ़ी लिखी थी मगर उसे वेस्टर्न कपड़े का शौक नहीं tha..........ghar हो या बहार वो अक्सर सूट पहनना ज़्यादा कम्फर्टेबले फील करती thi.........aur शादी हो जाने के बाद हमेशा saadi............kyon की पिछले 6 महीने से उसके सास ससुर घर पर hi उसके साथ रहते आये थे इस वजह से उसने साडी के अलावा कोई और कपडा तरय नहीं किया था.........

काव्य में जो चीज़ सबसे ज़्यादा किसी को अपने तरफ अत्त्रक्ट करती थी तो वो थी उसकी बड़ी बड़ी 36 साइज की चूचियां और उसकी थिरकती gand........chuchiyaan जो हमेशा पहाड़ की तरह तानी रहती thi........jinhein कोई भी मर्द अपने कठोर हाथों से उन्हें बेरहमी से मसलना चाहता tha.............kamar पतला होने की वजह से उसकी गांड और भी क़हर ढाती thi.........jo पूरे गोल शेप में thi........aur उठी हुई bhi...........pairon में पायल जो हमेशा उसके चलने पर चम् चम् की आवाज़ करते they.........kul मिला जुलकर वो एक जीती जगती क़यामत thi..........aisa क़यामत जिसे हर कोई पाना चाहता tha............kavya वो तितली थी जिसे हार्ड मर्द अपनी मुट्ठी में कैद करना चाहता tha............magar उस तितली को अपने वश में करना शायद किसी के लिए इतना आसान नहीं था........

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" Babuji..............aap यहाँ पर कुछ दिन और रह जाते तो ाचा hota............yahan मैं अकेली बोर हो jawungi..........itne बड़े घर में अकेले रहना सोचकर भी बहुत अजीब सा लगता हैं........." काव्य जो इतने देर से खामोश थी अचानक अपने सास ससुर को ऐसे जाता हुआ देखकर हौले से बोल पड़ती hain.........wahin श्यामनन्द काव्य के तरफ देखता हुआ हौले से मुस्कुरा पड़ता hain.........thode दूर पर राहुल खड़ा tha.......aur उसके बाजु में राम भी था.........

" papa.........kavya ठीक hi तो कह रही hain........aap यहाँ कुछ और दिन रह जाते to.........aacha होता......." और राहुल बीच में hi बोल पड़ता hain.........wahin श्यामनन्द हौले से दुबारा मुस्कुरा पड़ता हैं........

" नहीं bahu...........sach तो ये हैं की हमें अब यहाँ मुन्न नहीं lagta.........main जनता हूँ की हमें यहाँ किसी चीज़ की कोई कमी नहीं hain........aur तुमने हमारी सेवा में कोई कमी नहीं की hain..........aur तुम तो वैसे भी समझदार और पढ़ी लिखी ho..........sab कुछ तुम खुद hi संभल logi.........waqt सब कुछ ठीक कर dega...........aab हमें इज़ाज़त दो..........." और इतना बोलकर श्यामनन्द अपना बैग उठता हैं और बहार की तरफ जाने लगता hain.............wahin सरिता भी पीछे पीछे चल पड़ती hain......magar कुछ दूर जाते hi वो फ़ौरन रुक जाती हैं और पीछे मुड़कर अपनी बहु को बड़े गौर से एक तुक देखने लगती हैं.......

" bahu............aurat घर की लाज होती hain.............chahe तो वो घर को स्वर्ग बना सकती hain........ya तो पल भर में उसे बर्बाद कर सकती hain............aab इस घर की बागडोर तुम्हें सम्भालनि hain...........faisla तुम्हें करना hain..........aagey जो भी करना बहुत सोच समझकर karna.............aur haan..........apni मर्यादा कभी मुट्ठ bhoolna...........chalti hoon.........apna ख्याल रखना......" और सरिता एक नज़र अपने बहु को बड़े गौर से एक तुक देखने लगती हैं वहीँ काव्य फ़ौरन अपनी नज़रें नीचे की तरफ झुका लेती hain........mano वो सरिता की नज़रियों का सामना न करना चाहती हो..............

दोनों भाई श्यामनन्द और सरिता को बहार तक छोड़ने जाते hain..........wahin राहुल एक कार बुक करता हैं और अपने पापा मम्मी को गांव भेज देता hain...........aab घर में केवल तीन मेंबर बचे they.........ek rahul.......jo एक हफ्ते के अंदर वो भी बहार जाने वाला tha..........dusara ram..........jisey वहां रहकर पढ़ाई करनी thi..........aur आखरी में बची kavya..........jisey अब सब कुछ अकेले संभाला tha.........is घर ko.........aur पूरे परिवार को................................

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श्यामनन्द के जाने के बाद राहुल और राम दोनों आकर हॉल में बैठ जाते hain.........wahin काव्य कुछ दूर पर कड़ी चुप चाप उन दोनों को एक तुक देख रही thi...........ander hi अंदर उसे अपनी सासु माँ पर गुस्सा भी आ रहा tha..........na जाने कितनी बार उसकी सास ये डायलाग उसके सामने बोल चुकी thi............aur हर बार काव्य बस सुनकर चुप रह jati............sarita के जाने से एक तरह से वो थोड़ी रिलैक्स फील कर रही thi.........aur थोड़ी आज़ाद भी.............

अब उसे बंदिशों में नहीं रहना padega.........aab वो जैसा चाहे वैसा कपडा पहन सकती hain......apni मर्ज़ी से पूरे घर में कहीं भी घूम सकती hain..........kuch भी कर सकती hain..........kahin भी आ जा सकती hain..........ek तरह से वो अब सरे बंधनों से मुक्त हो गयी thi..........aab वो अपने आपको किसी परिंदों की तरह हवा में उड़ता हुआ आज़ाद महसूस कर रही thi.............kavya को ऐसे सोच में डूबा हुआ देखकर राहुल अचानक से बोल पड़ता हैं........

" क्या हुआ kavya.........tum किस सोच में डूब gayi...........are haan.......main तो एक चीज़ भूल hi gaya...........ram तुम ऐसा करो मेरे साथ अभी प्रेस पर chalo...........badhiya नौकर के लिए इश्तिहार देनी hain...........kum से कम इस घर में दो नौकर तो चाहिए hi..........jo एक बहार के काम संभल lega.......aur दूसरा घर के अंदर का सारा काम देख lega............aab तो आप खुस हैं न मैडम........." और राहुल इतना कहकर काव्य के तरफ धीरे से अपनी एक आँख मार देता hain.......wahin काव्य बड़े गौर से एक तुक राहुल के चेहरे की तरफ देखने लगती hain.............magar कहती कुछ nahin..........dekhna था की आने वाला वक़्त कौंन सा मोड़ लेकर उन सब की ज़िन्दगी में आने वाला था.........................................................

कंटिन्यू...................................................................
 
अपडेट-05 ( मेघा अपडेट )

" क्या हुआ kavya.........tum किस सोच में डूब gayi...........are haan.......main तो एक चीज़ भूल hi gaya...........ram तुम ऐसा करो मेरे साथ अभी प्रेस पर chalo...........badhiya नौकर के लिए इश्तिहार देनी hain...........kum से कम इस घर में दो नौकर तो चाहिए hi..........jo एक बहार के काम संभल lega.......aur दूसरा घर के अंदर का सारा काम देख lega............aab तो आप खुस हैं न मैडम........." और राहुल इतना कहकर काव्य के तरफ धीरे से अपनी एक आँख मार देता hain.......wahin काव्य बड़े गौर से एक तुक राहुल के चेहरे की तरफ देखने लगती hain.............magar कहती कुछ nahin..........dekhna था की आने वाला वक़्त कौन सा मोड़ लेकर उन सब की ज़िन्दगी में आने वाला था.........................................................

अब आगे..................................................................................................

राहुल राम को अपनी कार में बैठकर सीधा प्रेस की तरफ चल पड़ता hain.........aur वहां दो नौकर का इश्तेहार अखबार में देता hain.........uska एक काम तो हो चूका था अब एक काम और रह गया था ............वो था राम का वहीँ नज़दीक कॉलेज में एडमिशन karwana........issey पहले राम अपने गांव में रखकर पढता tha......rahul वहीँ पास के कॉलेज में जाता हैं और राम का एडमिशन क्लास 11तह में करवा देता hain..........college का फॉर्म सबमिट और फीस जमा करने के बाद वो सीधा अपने घर के तरफ चल पड़ता hain........jahan उसकी खूबसूरत वाइफ इस वक़्त इतने बड़े घर में बिलकुल अकेली थी..........

घर आते hi राम अपने कमरे में चला जाता हैं और राहुल सीधा अपनी बीवी के paas.........wahin काव्य घर में अकेली बैठी हुई t.v देख रही thi........rahul को आता हुआ देखकर उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर जाती हैं........

" आप बैठिये मैं आपके लिए पानी लेकर आती hoon...........aur राम कहाँ hain.......wo कहीं दिख नहीं raha.......subeh से उसने कुछ खाया की नहीं.........." और काव्य हौले से बोल पड़ती hain.......wahin राहुल के चेहरे पर शरारती मुस्कान तैर जाती hain.........rahul वहीँ धाम से सोफे पर जाकर काव्य के बगल में बैठ जाता हैं और काव्य जैसे hi पानी लेने के लिए उठती हैं राहुल फ़ौरन काव्य के हाथ थम लेता हैं और उसे कसकर अपनी तरफ खींचता hain............jissey काव्य उसके सीने पर गिरती चली जाती hain...........wahin राहुल काव्य को कसकर अपनी बाँहों में जकड लेता हैं.........

" क्या बात हैं darling............devar से इतना pyaar.........mere लिए बस पानी और उसके लिए khana.........ye तो na-insafi hain...........tumne एक भी बार मेरे बारे में ये नहीं पुछा की मैंने सुबह से कुछ खाया हैं की nahin..........chalo अब ाचा हैं अगले हफ्ते से इस घर में तुम दोनों hi rahogey...........chaho तो उसे अपनी गॉड में sulana.......ya फिर तुम उसकी गॉड में खुद बैठकर उसे अपने हाथों से khilana........main कुछ नहीं बोलूंगा.........." और राहुल इतना बोलकर काव्य के कंधे पर अपने हाथ रख देता हैं और उसे सरकते हुए नीचे उसके बूब्स के तरफ ले जाने लगता hain.......issey पहले काव्य कुछ समझती वो कसकर काव्य के राइट बूब्स को अपनी मुट्ठी में मसला देता hain.........wahin काव्य के मुँह से एक हल्की सी सिसकारी फुट पड़ती हैं और वो कसकर राहुल के सीने पर मुक्के मरने लगती hain..........wahin राहुल दुबारा से हंस पड़ता हैं.......

" तुम na...........bahut गंदे ho.........zara भी ये नहीं सोचते की क्या बोलना hain...........dewar हैं वो mera..........koi दिलबर nahin...........aur आपने अपना हाथ कहाँ रखा हुआ hain...........agar इस बीच राम आ गया to.........wo क्या sochega...........aab जाने भी do...........aapke मूड का कुछ पता nahin.........kabhi कभी तो मेरे लिए ये प्यार जगता hain..........nahin तो हर वक़्त बूझा बूझा सा रहता हैं.........." और काव्य इस बार अपना हाथ अपने सीने पर ले जाती हैं और राहुल के हाथों को वहां से हटा देती hain..........wahin राहुल बस मुस्कुराता रहता हैं...........

" उससे क्या hua..........dewar और दिलबर में ज़्यादा फर्क थोड़ी न होता hain...........waise मैंने राम का एडमिशन सत- जोशेप कॉलेज में करवा दिया hain............aur नौकर के लिए भी इस्तिहार दे दिया hain........aab देखना ये हैं की हमारे यहाँ नौकर कब तक आते hain..........mere रहते तक आ जाये तो ये और भी ाची बात hain..........chalo इसी बात पर एक किश तो मिल hi सकता हैं........." और राहुल अपना चेहरा काव्य के चेहरे के करीब ले जाता हैं और उसके नाजुक नरम होंठों को चूमने के लिए जैसे hi अपना होंठ आगे बढ़ता हैं काव्य फ़ौरन अपना चेहरा हटा लेती hain.........wahin राहुल बस एक तुक काव्य को देखता रह जाता हैं.......

" ये सब अभी नहीं रात mein........aur दिलबर तो मेरा वो तब बनेगा ना जब वो मुझसे कोई बात karega..........pichley 6 महीनों में ऐसा एक भी दिन नहीं बीता जिस दिन उसने मुझसे खुलकर एक भी शब्द कुछ कहा ho...........ladkiyon से तो वो ऐसे घबराता हैं जैसे वो उसे कच्चा चबा jayegi.........pata नहीं वो मेरे साथ इस घर में कैसे अकेले rahega..............mujhe तो सोचकर hi अजीब लगता हैं......... उसका तो भगवान् hi मालिक हैं..............." और काव्य फ़ौरन अपनी जगह से उठ जाती हैं और सीधा किचन के तरफ चल पड़ती hain...........wahin राहुल कुछ देर तक राम के बारे में सोचने पर मज़बूर हो जाता हैं.........

वो बहुत ाचे से राम के नेचर को जनता tha..........kavya झूठ नहीं बोल रही thi............wo बहुत शर्मीला किसम का tha.........is वजह से जहाँ वो पहले पढ़ाई करता था वहां कॉलेज से कई बार इस बारे में उसकी कम्प्लेन भी आ चुकी thi............agar उसका एहि नेचर रहा तो आगे चलकर फिर से प्रॉब्लम आ सकती thi..........magar अब सवाल ये था की उसका ये नेचर बदलेगा कौन?????? राहुल इसी उधेरबुन में डूबा हुआ था तभी काव्य पानी लेकर आती हैं और वहीँ टेबल पर रख देती hain..........aur एक तुक राहुल के तरफ देखने लगती hain...........rahul को ऐसे सोच में डूबा हुआ देखकर वो भी असमाजश में पढ़ जाती हैं.......

" क्या hua........aap किस सोच में डूब गए.........." और काव्य अपना एक हाथ राहुल के कंधे पर हौले से रख देती hain.......wahin राहुल अपने सोच से बहार आता हैं...........

" तुम सही कह रही हो kavya............ram को अब बदलना hi hoga.........warna आगे चलकर बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो jayegi.........agar एहि उसका नेचर रहा तो वो कभी शादी भी नहीं karega...........khair जो भी ho..........main चाहता हूँ की तुम राम को बदल do........usey एक काबिल इंसान बनाना अब तुम्हारी जिम्मेदारी hain...........mere लिए क्या तुम इतना नहीं कर सकती kya......kavya........." और राहुल जैसे काव्य के सामने फर्याद करने लगता hain.......wahin काव्य हौले से मुस्कुरा पड़ती हैं और एक तुक राहुल की आँखों में देखने लगती hain.......mano उससे कह रही हो की क्या तुम्हें अब मुझपर भरोषा नहीं रहा..........

" आप उसकी फ़िक्र मुट्ठ kijiye..........main राम को काबिल इंसान बना dungi..........haan उसे बदलने में कुछ वक़्त तो लगेगा hi.........uske लिए मुझे जो करना पड़े मैं karungi..........aab तो आप खुस हैं ना......" और काव्य अपने हाथों से पानी का गिलास उठती हैं और राहुल के हाथों में धीरे से थमा देती hain..........wahin इस बार राहुल धीरे से मुस्कुरा देता हैं..............

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दो दिन गुज़र चुके थे मगर अब तक कोई भी नौकर नहीं आया tha...........rahul से कहीं ज़्यादा चिंता अब काव्य को होने लगी thi........kyon की इतने बड़े घर की साफ़ सफाई करना अकेले उसके बस का नहीं tha............wahin वो सारा दिन काम करते थक जाती thi..........ghadi में इस वक़्त शाम के 4 बज रहे they.......kavya हॉल में बैठी हुई t.v देख रही थी और राम बहार अपने भैया के साथ बैठा हुआ tha...........tabhi किसी की गेट पर आवाज़ सुनाई di............rahul फ़ौरन उठकर गेट के तरफ चल पड़ता हैं और जाकर मैं गेट खोलता हैं.........

सामने एक भिकारी जैसी हालत में एक करीब 45 साल का साक्ष खड़ा tha...........uska पूरा जिस्म कोयले की तरह बिलकुल कला tha...........jism पर उसने काळा रंग का कम्बल लपेटा हुआ tha..........aur उस कम्बल से अजीब तरह की गन्दी सी स्मेल आ रही thi.........aisa लग रहा था जैसे उसने बरसों से नहाया न ho...........aur वो कम्बल जगह जगह से फटा हुआ था जिसमें उसके नंगे बदन कहीं कहीं नज़र आ रहे they...........bal घुंगराले से थे और उसपर खूब सारा तेल लगा हुआ tha............bal में उलटी मांग से कंघी किया गया tha.........waise तो उसकी दाढ़ी नहीं थी मगर मूछ उसने बड़ी बड़ी राखी हुई thi.........jism उसका भरा हुआ गठीला और मज़बूत tha...........aisa लग रहा था जैसे वो पहलवानी भी करता हो............

धीरे धीरे वो अपने मुँह चला रहा tha......shayad उसने मुँह में कुछ खैनी वगैरह रखा हुआ tha..............dahiney हाथ में उसने एक बड़ा सा लाठी पकड़ा हुआ tha..............aur पवन में एक फटा सा चापाल पहना था जो की कई जगहों से सिला tha..........pet उसके थोड़े से बहार की तरफ निकले हुए they............aur दो ऊँगली में उसने लोहे की रिंग पहनी हुई thi.........kul मिलकर वो किसी भिकारी से कम तो बिलकुल भी नहीं लग रहा tha...........wahin राहुल अभी भी उसके तरफ अजीब नज़रियों से देख रहा था............

" नमस्ते saheb............mujhe प्रेस वाले मालिक ने आपके पास भेजा hain...........unhone कहा था की जब मैं आपके पास पहुँच जावून तो मैं आपको उनसे बातें करवा दूँ.........." इतना बोलकर वो साक्ष अपने कम्बल के अंदर से एक कीपैड वाला मोबाइल निकलता हैं और एक नंबर डायल करके राहुल के हाथों में धीरे से पकड़ा देता hain........wahin राहुल हैरत से उसके तरफ देखे जा रहा tha..........aisi हालत में भी उस बंदी के पास एक मोबाइल फ़ोन था ये सोचने वाली बात थी..........

" मैं राहुल बोल रहा हूँ ......जो उस दिन मैं आपके पास आया था नौकर का इश्तिहार देने के liye........main wahi..........ek बाँदा आया हुआ हैं मेरे paas........magar आपने किस बन्दे को मेरे पास भेज diya...........shakal सूरत से तो ये भिकारी मालूम पड़ता हैं............" राहुल अपनी परेशानी उस प्रेस वाले को बताता हैं वहीँ सामने खड़ा साक्ष अजीब नज़रियों से राहुल को देखे जा रहा tha.........aur मंद मंद मुस्कुराये जा रहा था.........

" आप उसकी हुलिए पर मुट्ठ जाइये ............वो शुरू से hi ऐसा hain............kaha था सेल को की वो वहां नहाकर जाये मगर ये साला बहुत ज़िद्दी जो hain..........karta अपने वाली hi हैं......... आप फ़िक्र मुट्ठ कीजिये बाँदा जैसा दिख रहा हैं वैसा हैं nahin...........kaam इतनी सफाई से करता हैं की आप खुद उसकी तारीफ karengey...........aabhi तक जहाँ भी इसने काम किया हैं लोग इसकी सफाई की तारीफ बहुत करते hain..........bus इसे दो वक़्त की रोटी दे दीजियेगा इसे और कुछ नहीं chahiye........aapke छोटे से कमरे में ये कहीं पड़ा रहेगा........" और इतना कहकर प्रेस वाला फ़ोन रख देता hain.........wahin राहुल ठीक हैं बोलकर फ़ोन कट कर देता हैं..........

अभी भी राहुल की नज़रें उस बिक्री जैसे दिखने वाली साक्ष पर thi......wo इसी असमानजश में डूबा हुआ था की वो इस बन्दे को काम पर रखे की nahin..........kyon की वो प्रेस वाला इंसान उसकी ाची जान पहचान का था और राहुल ये बात जनता था की वो गलत इंसान को कभी उसके दरवाज़े पर नहीं bhejega...........magar अब सवाल ये था की वो हाँ कैसे bole.........agar वो उसे हाँ बोलता हैं तो काव्य उसपर ज़रूर भड़क jayegi.......kyon की काव्य इस तरह के लोगों को बिलकुल भी पसंद नहीं करती thi...........dekhna था की आगे राहुल का क्या फैसला होता hain.........haan .............................या फिर .............................ना........................................

कंटिन्यू.........................................................................
 
अपडेट-06 (ा) (मेघा अपडेट)

अभी भी राहुल की नज़रें उस बिक्री जैसे दिखने वाली साक्ष पर thi......wo इसी असमानजश में डूबा हुआ था की वो इस बन्दे को काम पर रखे की nahin..........kyon की वो प्रेस वाला इंसान उसकी ाची जान पहचान का था और राहुल ये बात जनता था की वो गलत इंसान को कभी उसके दरवाज़े पर नहीं bhejega...........magar अब सवाल ये था की वो हाँ कैसे bole.........agar वो उसे हाँ बोलता हैं तो काव्य उसपर ज़रूर भड़क jayegi.......kyon की काव्य इस तरह के लोगों को बिलकुल भी पसंद नहीं करती thi...........dekhna था की आगे राहुल का क्या फैसला होता hain.........haan .............................या फिर .............................ना........................................

अब आगे...........................................................................................

राहुल को ऐसे अपने सोच में डूबा हुआ देखकर सामने खड़ा वो साक्ष धीरे से बोल पड़ता हैं..........

" जीतेन्द्र नाम हैं मेरा............ saheb.................log प्यार से मुझे जीतू कहकर बुलाते hain...........aap भी चाहे तो मुझे उसी नाम से पुकार सकते हैं..............." सामने खड़ा वो साक्ष बहुत बोहलेपन से अपनी बात कहता हैं वहीँ राहुल टकटकी लगाए अब भी उसके चेहरे की ओरे देखे जा रहा tha............usey कुछ नहीं सूझ रहा था की वो उसे काम पर रखे या nahin..........rahul कुछ देर की चुप्पी के बाद आखिर बोल पड़ता हैं.......

" तुम्हें यहाँ पर रखने की कोई खास वजह भी तो होनी chahiye...........kya क्या काम कर सकते ho..........aur महीने की सैलरी कितनी लोगे......." राहुल बिना सोचे समझे सामने खड़े उस साक्ष से सवाल कर बैठता hain..........wahin जीतू राहुल की बाटिओं को सुनकर धीरे से हंस पड़ता हैं..........

" salary.............sach कहूं तो साहेब मुझे आपकी सैलरी में कोई दिलचस्पी नहीं hain........kyon की इस दुनिया में मेरा न कोई आगे हैं ........और न hi peechay...........to मैं कमाऊंगा किसके liye...........haan बस दो वक़्त की रोटी चाहिए इस पापी पेट के liye...........ye आपके ऊपर निर्भर करता हैं की आप मुझे क्या dengey..........aur रहा काम का सवाल तो आप मुझे एक मौका तो देकर dekhiye..........agar आपको ज़रा भी शिकायत मिला तो आप मुझे काम से बेशक निकल dijiyega............main झाड़ू पुछा से लेकर घर के छोटे मोठे सरे काम भी कर लेता hoon.........tel मालिश से लेकर जोड़ का दर्द सब चीज़ का कला हैं मेरे paas..........plumber से लेकर छोटे मोठे रिपेयर का भी थोड़ा बहुत काम जनता हूँ........." और जीतू इतना बोलकर फिर से खामोश हो जाता हैं और टकटकी लगाए राहुल के तरफ ऐसे देखने लगता हैं जैसे वो उससे पूछ रहा हो की और भी मैं अपनी अंदर की क्वालिटीज़ बतावूं या इतना hi काफी हैं.....

" ठीक hain..........bus .......bus.....rehne do..........tum चाहो तो यहाँ पर रह सकते ho.............samney वो जो बड़ा सा कमरा दिखा रहा hain........aab से वो तुम्हारा hain.........bahar की साफ़ सफाई से लेकर अंदर तक का सारा काम आज के बाद तुम्हें hi देखने hain...........aur.............." राहुल इतना बोलकर फिर से खामोश हो जाता हैं वहीँ जीतू फिर से उसकी तरफ सवाल भरे नज़रियों से देखने लगता hain.........jaise अब भी उसके इकरार में कहीं इंकार छुपा हुआ हो........

" मगर क्या साहेब........" जीतू धीरे से बोल पड़ता हैं........

" सबसे पहले तुम्हें अपना ये हुलिया ठीक करना hoga...........bal तुम्हें कटवाने padengey.......aur कपड़े भी चेंज करने hongey.........aur मैं तुम्हें महीने का 5000रस dunga.........khana और रहना बिलकुल free...........aur ये लो 1000 rupayee.........sabse पहले जाकर तुम अपने कपड़े चेंज कर lo.........aur हाँ उसके बाद आकर ाचे से नाहा lena.......wo भी साबुन se........agar किसी चीज़ की तुम्हें अगर कोई परेशानी हो तो तुम मुझसे बेझिझक कह सकते हो......." और राहुल इतना बोलकर सीधा अपने बंगले की तरफ चल पड़ता hain.......wahin जीतू के चेहरे पर एक मुस्कान तैर जाती hain.........wo टकटकी लगाए अब भी राहुल के तरफ देखे जा रहा था......

" एक बात कहूं saheb...........aap सच में बहुत भले इंसान hain..........mere मालिक ठीक hi कह रहे थे आपके बारे में............." और जीतू इतना कहकर हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं वहीँ राहुल के चेहरे पर भी एक मुस्कान तैर जाती हैं...........

जैसे hi राहुल अंदर पहुँचता हैं काव्य किचन में अपना काम कर रही thi.........rahul काव्य के ठीक पीछे जाकर खड़ा हो जाता हैं इससे पहले काव्य कुछ समजह्ती वो हौले से काव्य के गार्डन को बड़े प्यार से चूम लेता hain.....wahin काव्य हौले से सिसक और चिहुँक पड़ती हैं ........जैसे hi वो पीछे की तरफ मुड़ती हैं उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर जाती hain.......wahin राहुल उसे देखकर मुस्कुरा रहा tha......wo फ़ौरन आगे बढ़ता हैं और काव्य को अपने मज़बूत हाथों के गिरफ्त में कैद कर लेता हैं........

" क्या बात हैं देख रही हूँ मुझपर अब आपका प्यार दिन बा दिन बढ़ता hi जा रहा hain.........aise मस्का लगाने की कोई ख़ास wajah........kya मैं जान सकती हूँ......." काव्य बड़ी ऐडा से मुस्कुराते हुए बोल पड़ती हैं वहीँ राहुल उसकी बाटिओं को सुनकर हौले से हंस पड़ता हैं.........

" वजह तो ख़ास हैं madam.........maine तुम्हारी एक प्रॉब्लम थोड़ी सी कम कर दी hain........maine एक नौकर को रख लिया hain........aaj से वो वहीँ सामने के कमरे में rahega........aur इस पूरे घर की साफ़ सफाई कर दिया karega..........yakeen मनो बाँदा बहुत hi नेक और शरीफ हैं..........." राहुल की बातों को सुनकर काव्य राहुल के तरफ ऐसे देखने लगती हैं जैसे उसने कोई भूत देख लिया हो.........

" मुझसे पूछे bagair.............aap ये बात ाचे से जानते हैं की आज कल के नौकर भरोसे के लायक बिलकुल नहीं hain.......itna जल्दी आपने उसके बारे में सब कुछ कैसे जान liya............aur उसपर भरोसा भी कर liya.........mujhse मिलवाया तक नहीं........." काव्य के चेहरे पर थोड़ी सी नाराज़गी के भाव उमड़ पड़ते हैं वहीँ राहुल काव्य के तरफ बस देखे जा रहा था..........

" तो जाकर खुद hi ढूढ़ lo........aab मैं इतनी जल्दी कहाँ से नौकर का इंतेज़ाम karun.......jo मिल रहा हैं उसी से काम chalawo......nahin तो खुद hi करो सारा kaam.......aur haan........ab कोई नया नौकर आये तो खुद hi जाकर उसे देख परख lena........mujhse पूछने की अब कोई ज़रुरत नहीं......" और राहुल इस बार गुस्से से उस कमरे से बहार की तरफ निकल जाता हैं वहीँ काव्य बस राहुल को अपने से दूर जाता हुआ एक तुक देख रही thi...........baat तो उसकी भी बिलकुल सही thi.......magar राहुल भी अपनी जगह पर गलत नहीं था........

थोड़े देर बाद काव्य खुद राहुल के कमरे की तरफ चल पड़ती हैं वहीँ राहुल बिस्टेर पर लेता हुआ tha.......aabhi भी उसके चेहरे पर गुस्सा साफ़ नज़र आ रहा tha........kavya राहुल को देखर धीरे से मुस्कुरा पड़ती हैं और जाकर वहीँ बीएड पर राहुल के पास बैठ जाती हैं और बड़े प्यार से अपना एक हाथ उसके सर पर फेरने लगती हैं.......

कॉन्टिनोएड.......................................................................
 
अपडेट-06 (बी) (मेघा अपडेट)

" नाराज़ हो गए kya..........aacha baba.........main तुम्हारे आगे हाथ जोड़ती hoon.......kaan पकड़ती hoon.....iam सॉरी.........." और काव्य इतना कहकर हौले से राहुल के लबों को बड़े प्यार से चूम लेती hain.........wahin राहुल काव्य से अपनी नज़रें दूसरी तरफ फेर लेता hain........magar कहता कुछ नहीं.........

" देखो rahul..........rehna मुझे हैं अकेले इस घर mein.........is लिए नौकरों का बैकग्राउंड पता करना आज के ज़माने में बहुत ज़रूरी hain..........maine तो बस ऐसे hi बोल दिया था मुझे क्या पता था की आप मुझपर ऐसे भड़क jayengey..........iam सॉरी बाबा......." और काव्य इस बार राहुल से लिपट जाती हैं वहीँ राहुल न चाहते हुए भी हौले से मुस्कुरा पड़ता hain.........aur उसका सारा गुस्सा पल भर में कहीं गायब हो जाता हैं.........

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कहीं दूर रत्नागिरी सेहर में..........

अप्रैल का महीना था और दोपहर का समय tha..........is कड़कती धुप में एक साक्ष करीब 42 साल ka..........jism उसका बिलकुल कला सा tha............kapdey उसके कई जगह से फाटे हुए they..........bal लम्बे लम्बे जो उसकी कंधे पर लटक रहे they...........chehrey पर लुम्बी सी दाढ़ी और घनी moochein..........dekhney से ऐसा लग रहा था जैसे उसने कई महोनों से नहाया न ho...........chehra काफी डरावना सा लग रहा tha........pawn में फाटे हुए jootey........aur कंधे पर उसने एक बड़ा सा थैला लटकाया हुआ tha........aur उसके हाथ में थी एक tasveer...........jisey वो लिए इस सेहर में दर दर भटक रहा tha........mano उस तस्वीर के बारे में सबसे पूछ रहा ho.......aur सब उसे भिकारी समझकर अपने से उसे दूर भगा रहे they.........fatkaar रहे they...........dutkaar रहे थे.........

उस फोटो में जो तस्वीर थी वो थी एक लड़की ki...........aur वो लड़की न उसकी कोई अपनी थी और न hi उसके परिवार ki..........magar जो भी था उसका उस लड़की से बहुत पुराण और गहरा रिश्ता tha..........is वजह से वो उस तस्वीर को अपनी जान से ज़्यादा संभलकर रखा हुआ tha...........aur उस लड़की की तलाश में भटकते हुए शायद अब उसकी ऐसी हालत हो गयी thi.......pichley 1 महीनों से वो इस सेहर का हर गली हर चप्पा ढूढ़ चूका था मगर अब तक उसे सफलता नहीं मिली thi............magar उम्मीद थी की वो उसे एक दिन ज़रूर ढूंढ lega........aur उसे पूरा यकीन था की वो लड़की हैं तो इसी सेहर में...........

सामने से एक साक्ष उसे आता हुआ दिखाई देता हैं और हमेशा की तरह वो साक्ष उस तस्वीर को लिए अपने सामने आ रहे आदमी को दिखते हुए उस लड़की के बारे में पूछने लगता hain.........wahin वो आदमी जब उस तस्वीर की तरफ देखता हैं उसकी दोनों आँखें चमक सी जाती hain.........fir वो उस भिकारी जैसे इंसान के तरफ बड़े गौर से देखने लगता hain...........aur उसे देखकर ज़ोरों से हंस पड़ता हैं.....

" कौन हैं ये ladki.........sali हैं तो बहुत मस्त maal.......tumhein कहाँ से mili........kya ये तेरी बेटी hain.......magar देखने से तो ऐसा नहीं लगता की ये तेरी बेटी hogi.......kahan tu.........aur कहाँ ये......." वो आदमी उस भिकारी जैसे दिखने वाले साक्ष को देखकर तने मरने लगता hain.......wahin उसके चेहरे पर नाराज़गी झलक पड़ती हैं........

" तुमने क्या इस लड़की को कहीं देखा hain..........bus मुझे मेरे इस सवाल का जवाब chahiye.....nahin देखा तो यहाँ से चलता बन......." और वो साक्ष इतना कहकर आगे के तरफ चल पड़ता hain..........aakhir कुछ दूर चलकर वो वहीँ थक हार कर एक पेड़ के चाव ताले जाकर बैठ जाता hain........aur एक तुक उस तस्वीर के तरफ बड़े गौर से देखने लगता हैं...........

" तुम्हें तो मैं कहीं से भी एक दिन ढूंढ निकलूंगा mrs.............kavya mehta..........aur जिस दिन तू मुझे मिल गयी ........उस दिन मैं तेरी ऐसी हालत करूँगा की तुझे अपनी परछाई से भी दुर्र lagega..........ghinn आएगा तुझे अपने आपस se........apni इस खूबसूरती se..........tujhe सरे आम बीच बाजार में नंगा न घुमाया तो मेरा नाम भी रघु नहीं..........." और वो साक्ष अपने बैग में से एक ब्रेड का टुकड़ा निकलता हैं और उसे ऐसे hi खाने लगता hain........bread के टुकड़े पर उसके गंदे हाथ लगने से उसका रंग भी कला पढ़ गया था मगर वो उसे ऐसे hi खाये जा रहा tha.........uske हाथ में जिस लड़की की तस्वीर थी वो लड़की कोई और नहीं बल्कि काव्य मेहता hi thi..........na जाने उस साक्ष की उससे क्या दुश्मनी thi.........jiski तलाश में वो इस सेहर का ख़ाक छान रहा था......

तभी सामने से एक छोटा सा लड़का आता हुआ उसे दिखाई देता hain.........ummed की एक फिर किरण उसके अंदर जाग उठती hain......wo फिर से उस तस्वीर को अपने हाथों में लिए एक तुक देखने लगता hain.........tabhi वो लड़का चाय की केतली लिए हुए वो उस साक्ष के पास जाता हैं और बड़े गौर से उसकी तरफ देखने लगता हैं.........

" चाय चाहिए क्या baba...........kaho तो एक कप पीला दूँ......." वो लड़की उसी तरफ देखते हुए धीरे से बोल पड़ता hain........wahin वो साक्ष ललचायी हुई नज़रियों से उस केतली की तरफ देखे जा रहा tha........to कभी उस लड़के के taraf...........mano कहना चाह रहा हो की .......बीटा थोड़ी सी पीला दो तो मेहरबानी hogi........magar पैसे तो थे nahin.........is वजह से वो थोड़ा झिझक रहा था.............

" ले लीजिये baba...........aap दूरिया मुट्ठ मैं आपसे इसके पैसे नहीं loonga.........chotu के हाथ की जो चाय एक बार पी लेता हैं वो बार बार पीटा hain...........aap देखने से तो बहुत गरीब लगते hain.......aur आपने कई दिनों से कुछ खाया पिया भी नहीं हैं......." वो लड़का बहुत भोलेपन से अपनी बात कहता हैं और एक कप चाय उस साक्ष के तरफ धीरे से बढ़ा देता hain.......wahin रघु उस लड़के के तरफ टकटकी लगाए बस देखे जा रहा था........

" हाँ beta.........teen दिन हो गए मुझे कुछ खाये hue............ye गरीबी बहुत बुरी चीज़ हैं........" और तभी उस लड़के की नज़र उस तस्वीर पर जाती हैं और वो उसे बड़े गौर से देखने लगता हैं..........

" ये तस्वीर किसी हैं baba........kya ये आपकी बेटी hain........jo कहीं गम हो गयी hain..........ya फिर इसकी तलाश में आप यहाँ आये हैं.........." और वो लड़का फिर से बोल पड़ता hain.........wahin रघु की नज़रें अभी भी उसपर तिकी हुई थी........

" हाँ बीटा .......कुछ ऐसा hi समझ lo.........aur वो लड़का उस तस्वीर को अपने हाथों में लेकर बड़े गौर से एक तुक देखने लगता hain........jaise hi उसकी नज़रें उस तस्वीर को पहचानती हैं उसकी आँखें हैरत से फैलती चली जाती हैं.........

" तो ये हैं आपकी beti...........isey तो मैंने कहीं पर तो देखा hain.......kuch याद नहीं आ रहा .........कहाँ देखा hain..........is लड़की ने मुझसे बात भी की hain.........maine इसे अपने हाथों से चाय भी पिलाया hain..........kahan देखा हैं....." और वो लड़की अपने दिमाग पर ज़ोर डालने लगता हैं वहीँ रघु के चेहरे पर चमक सी आ जाती hain.......aisa लगता हैं जैसे उसकी मुन्न की मुराद पूरी हो गयी हो........

" beta........zara अपने दिमाग पर ज़ोर dalo..........main इससे मिलने के लिए बहुत परेशां हूँ........." और रघु अपनी बात ख़तम करता तभी वो लड़का बीच में hi बोल पड़ता हैं........

" arey........ye तो वही हैं अपनी काव्य madam...........yahin पास के घर में रहती hain..........pichley 6 महीनों से यहाँ एक बड़े से बंगलो में रह रही hain...........aur उसके पति कहीं बहार रहते hain..........bahut पैसा कमाते hain.........bahut बड़े आदमी हैं wo.........aur दो दिन पहले hi तो उनके सास ससुर यहाँ से गांव लौट gaye..........main तो हमेशा उनको अपने हाटों से जाकर साहेब को चाय पिलाता hoon........aur अभी तो उन्हें दो नौकर की तलाश hain.......pata नहीं मिले की नहीं........." और वो लड़की अपनी बात ख़तम करता हैं वहीँ रघु की आँखें चमक जाती हैं........

" naukar.........beta.......mera एक काम karogey..........kya तुम मुझे उनका घर बता सकते ho.............da-asal वो मेरे गांव की हैं और मैं यहाँ काम की तालाश में आया hoon.........unke यहाँ रहकर मैं नौकरी करूँगा तो मेरी साडी परेशानी दूर हो जाएगी......." और रघु का दिल ज़ोरों से धड़कने लगता hain.........wahin वो लड़की हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं.........

" बस इतनी सी baat..........ye तो मेरे बाये हाथ का काम hain..........aap चलिए मेरे saath........main आपको वहां तक छोड़ देता हूँ......." और रघु उस लड़के के साथ अपने मंज़िल के तरफ चल पड़ता hain.......jsiki उसे न जाने कब से तलाश thi........jaise hi वो कुछ दूर जाता हैं एक बड़ा सा बंगलो उसे नज़र आता hain.........jiske ठीक सामने एक बड़ा सा गेट tha..........wo दोनों जाकर उस गेट के पास खड़े हो जाते हैं तभी वो लड़का अपना एक हाथ अंदर करके गेट का लॉक खोलता हैं........

" आप यहीं पर rukiye..........main मालकिन को अभी लेकर आता हूँ.........." इतना कहकर वो लड़का फ़ौरन अंदर की तरफ चल पड़ता हैं वहीँ रघु बड़े गौर से उस आलीशान बिल्डिंग की तरफ देख रहा tha.............kuch सोचकर उसका एक हाथ अपने पेण्ट के ऊपर अपने विशाल लुंड पर चला जाता हैं और चेहरे पर उसके एक अजीब सी गन्दी मुस्कान तैर जाती hain...........aab देखना ये था की वो यहाँ जिस मकसद के लिए आया था क्या वो पूरा होता hain...................ya nahin..............................ye तो बस आने वाला वक़्त hi बता सकता था......................................................................

कंटिन्यू............................................................
 
अपडेट-07

" आप यहीं पर rukiye..........main मालकिन को अभी लेकर आता हूँ.........." इतना कहकर वो लड़का फ़ौरन अंदर की तरफ चल पड़ता हैं वहीँ रघु बड़े गौर से उस आलीशान बिल्डिंग की तरफ देख रहा tha.............kuch सोचकर उसका एक हाथ अपने पेण्ट के ऊपर अपने विशाल लुंड पर चला जाता हैं और चेहरे पर उसके एक अजीब सी गन्दी मुस्कान तैर जाती hain...........aab देखना ये था की वो यहाँ जिस मकसद के लिए आया था क्या वो पूरा होता hain...................ya nahin..............................ye तो बस आने वाला वक़्त hi बता सकता था......................................................................

अब आगे.................................................................................

जैसे hi छोटू अंदर जाता हैं रघु की नज़रें एक बार फिर से उस बंगलो पर जाकर ठहर जाती hain..........wo आपने सोच में डूबता चला जाता hain..........wahin छोटू जैसे hi अंदर पहुँचता हैं उसकी नज़रें राहुल को तलाश करने लगती हैं मगर राहुल उसे कहीं नज़र नहीं aata.........kuch देर तक इधर उधर ताकने के बाद वो मैं दूर का बेल्ल धीरे से दबा देता hain.........thode देर बाद दरवाज़ा ओपन होता हैं और सामने काव्य कड़ी हुई नज़र आती hain.......brown साडी mein..........muskurate हुए.........

" क्या बात हैं chotu......tum इस वक़्त yahan...........ye कोई वक़्त हैं चाय पीने ka..........aur तुम्हारे मालिक इस वक़्त घर पर नहीं हैं.........." काव्य छोटू को देखकर धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ छोटू काव्य को देखकर हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं.........

" नहीं memsaheb..........main यहाँ पर चाय देने के लिए नहीं आया hoon..........koi हैं जो बहुत दूर से आपसे मिलने आया hain........aur वो इस वक़्त बहार खड़ा आपका इंतज़ार कर रहा hain........aur वो कह रहा था की उसे नौकरी की सख्त ज़रुरत hain..........agar आपके यहाँ नौकर की जगह खली हो तो उसे काम पर रख lijiyega..........dekhney से तो वो बहुत गरीब और भला इंसान मालूम पड़ता hain.........aap खुद hi चलकर उससे मिल लीजिये........" और छोटू अपनी बात पूरी करके फ़ौरन पीछे की तरफ मुड़ता हैं और काव्य भी उसके पीछे पीछे चल पड़ती हैं......

कदम जैसे जैसे काव्य के आगे की तरफ बढ़ रहे थे वैसे वैसे उसके दिमाग में हज़ारों सवाल जनम ले रहे they..........wo बस एहि सोच रही थी की आखिर कौन हैं ये साक्ष जो मुझसे मिलने यहाँ इतनी दूर से आया hain..........aur मुझे वो कैसे जनता hain..........laakh सोचने के बावजूद काव्य को जब अपने सवालों का कोई जवाब नहीं मिलता तो वो सब कुछ आने वाले वक़्त पर छोड़ देती हैं और जैसे hi वो मैं गेट के पास पहुँचती हैं सामने खड़ा साक्ष उसे देखकर हौले से मुस्कुरा पड़ता hain......aur वो फ़ौरन अपने दोनों हाथ काव्य के सामने जोड़ लेता हैं.......

" एहि हैं wo.............aacha memsaheb.........aab मैं चलता hoon.........mujhe देर हो रही हैं......" और छोटू इतना कहकर फ़ौरन बहार की तरफ निकल जाता hain..........reh जाती हैं पीछे तो बस kavya........aur वो अंजना सा saksh........jiski नज़रें अब भी काव्य के खूबसूरती को परख रही thi...........photo में जैसी काव्य दिख रही थी उससे लाख सूंदर वो इस वक़्त नज़र आ रही thi.........sahi कहा था उस इंस्पेक्टर ने की काव्य हज़ारों में नहीं लाखों में एक thi..........kuch पल के लिए तो रघु उसकी खूबूसरती में मनो खो सा गया tha.........wahin काव्य अजीब नज़रियों से उसे hi देखे जा रही थी.......

" कौन हैं aap........aur आपको मुझसे क्या काम हैं......." काव्य के मुँह से आणण्यास hi बोल फुट पड़ते हैं जिसे सुनकर रघु अपने सोच से बहार निकलता hain........magar नज़रें अभी भी काव्य के चेहरे पर तिकी हुई थी..........

" आप मुझे नहीं जानती होंगी memsaheb..........main raghuveer..........pyaar से लोग मुझे रघु कहकर बुलाते hain.........main गुडगाँव का रहने वाला hoon...........main वहीँ पर काम करता था मगर कुछ दिन पहले मेरे घर पर एक घटना हो गयी जिसके वजह से मेरा पूरा परिवार बिखेर gaya.......aab मैं इस दुनिया में बिलकुल अकेला हूँ और वहां की साडी जमीन घर सब कुछ मुझे बेचना pada.........bura वक़्त आने से मैं अब पूरी तरह से बर्बाद हो गया hoon........aab न hi मेरा कहीं कोई घर hain.....aur न hi कोई अपना......." और रघु इतना कहकर काव्य के तरफ आस लगाए एक तुक देखने लगता हैं वहीँ काव्य के चेहरे का रंग कुछ फीका सा पढ़ चूका tha..........kyon की उसने गुडगाँव सेहर का नाम जो लिया tha............wahi सेहर जहाँ वो पहले रहती thi...........aur उस सेहर से उसकी कुछ यादें जुडी हुई थी.......

इतनी दूर आने के बाद भी वो उस सेहर को पूरी तरह से भूला नहीं पायी thi........kuch बीती यादें आज भी उसका पीछा कर रही thi..........wahin काव्य कुछ सोचकर फ़ौरन अपनी नज़रें नीचे की तरफ झुका लेती हैं वहीँ रघु बड़े गौर से काव्य के चेहरे को तो kabhi........uske बदन के एक एक हिस्से को ाचे से स्कैन कर रहा tha.........jo भी था काव्य को देखकर उसके 10 इंच लौड़े में हलचल ज़रूर होने लगी थी........

" memsaheb.........main बहुत गरीब hoon...........mera अब इस दुनिया में कोई ऐसा नहीं जो मुझे अपना kahe.........wo छोटा सा लड़का बता रहा था की आपके यहाँ नौकर का जगह खली hain.......aap मुझे अपने यहाँ रख लेंगी तो आपकी बड़ी मेहरबानी hogi..........main आपका ये एहसान ज़िन्दगी भर नहीं bhoolunga.......ye एहसान होगा आपका मुझ गरीब पर......." और इतना कहकर रघु फ़ौरन काव्य के क़दमों में गिर पड़ता हैं और उसके नरम और नाजुक पवन को अपने गांधी और कठोर हाथों से पल पल महसूस करने लगता हैं........

काव्य के पवन गोर और साफ़ सुथरे थे मगर अब रघु के गंदे हाथ पड़ने से वो भी अब मैले से हो गए they.......wahin काव्य चिहुँक सी पड़ती हैं और अपने दो कदम पीछे की तरफ सरका लेती hain......wahin रघु अभी भी जमीन पर पेट के बल लेता हुआ था.......

" ये आप क्या कर रहे hain...........aap उम्र में मुझसे बहुत बड़े hain.........bhala ये सब चीज़ें आपको शोभा देती हैं क्या!!!!!! आप उठिये..........." और काव्य अचानक से बोल पड़ती hain........wahin रघु अभी भी जमीन पर पेट के बल लेता हुआ था......

" गरीब अगर उम्र में कितना भी बड़ा क्यों न रहे वो हमेशा अमीरों से छोटा hi रहता हैं......" और रघु की आँखें नुम सी पढ़ जाती hain......do चार आंसूं की बूँदें उसकी आँखों में चालक पड़ते hain.......jo काव्य की नज़रियों से नहीं चुप pate........wo कुछ फैसला करती तब तक रघु अपना इमोशनल वाला जाल फेंक चूका tha.......usey वहां किसी भी हाल में नौकरी चाहिए thi.......so चाहिए थी.......

काव्य को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या फैसला le.........agar वो इंकार करती हैं तो उस बेचारे का दिल पूरी तरह से टूट jayega..........aur सबसे बड़ी बात वो उसी के सेहर का रहने वाला था तो कुछ तो अपनापन उसके अंदर जागेगा hi............aur थोड़ी सी उसके प्रति हमदर्दी bhi..........aur तो और उसे उसकी गरीबी पर तरस जो आ रहा tha.........waise भी उसके यहाँ एक नौकर की जगह खली thi.......to क्यों न वो इसे एक मौका देकर तो dekhein...........magar इतने गन्दा साक्ष से वो कोसों दूर भगति thi.........kavya अभी भी असमाजश में थी वो कोई फ़ासिला नहीं कर पा रही थी की वो आखिर क्या करे......................

" tum........kya क्या काम कर सकते ho..........mera मतलब......." काव्य के मुँह से बोल अचानक से फुट पड़ते हैं जिसे सुनकर रघु की आँखों में चमक सी आ जाती hai........wo अपने आँखों से आंसूं पूछता हैं और फिर धीरे से अपनी बात कहता हैं.....

" memsaheb............main ज़्यादा पढ़ा लिखा तो नहीं हूँ मगर मुझे घर के सरे काम आते hain.......khana बनाने से लेकर साफ़ safayi...sab kuch........main कर सकता hoon.......aap मुझे एक मौका तो देकर देखिये मैं आपको कभी किसी चीज़ की शिकायत नहीं होने dunga..........aur तो मुझे डॉक्टरी भी आती hain.........agar घर में किसी का तबियत ख़राब हो तो मैं सुई दवा भी कर सकता हूँ........" और रघु एक hi साँस में सब कुछ बोलता चला जाता हैं वहीँ काव्य न चाहते हुए भी हौले से मुस्कुरा पड़ती हैं.........

" ठीक hain........agar मुझे तुम्हारे तरफ से कोई भी शिकायत मिला तो मैं तुम्हें इस घर से बहार निकल dungi........tum सामने के कमरे में रह सकते ho..........aur haan........sabse पहले जाकर अपने ये हुलिए badlo..........apne ये दाढ़ी और सर के बल katwawo........aur जाकर फिर ाचे से नाहा lena.............tumhare जिस्म से बहुत गन्दी स्मेल आ रही हैं..........." और काव्य इतना बोलकर फ़ौरन पीछे की तरफ मुड़ती हैं वहीँ रघु एक तुक काव्य को अजीब सी नज़रियों से घूरने लगता हैं.......

डीप लौ कट ब्लाउज पहनने की वजह से जब उसकी नज़र काव्य की नंगी पीठ की तरफ जाती हैं ........उसके गोर जिस्म को देखकर रघु का लुंड तेज़ी से अंगड़ाई लेने लगता hain........na जाने आज कितने दिनों के बाद उसके लुंड में थोड़ी सी हलचल हुई thi..........wo अपने नज़रियों से पल पल काव्य का बलात्कार कर रहा tha..........aur एहि सोच रहा था की वो जब पूरी तरह से नंगी होगी तो उस वक़्त कैसी lagegi.......ye ख्याल आते hi उसके चेहरे पर एक गन्दी सी मुस्कान तैर जाती हैं.........

" मेमसाहेब.........." और रघु फिर से बोल पड़ता hain...........wahin काव्य दो कदम चलकर फ़ौरन रुक जाती हैं और पीछे मुड़कर रघु को सवाल भरे नज़रियों से एक तुक देखने लगती हैं.......

" memsaheb.......aapka बहुत बहुत shukriya........aapko नहीं मालूम की आपने मुझ गरीब पर कितना बड़ा एहसान किया hain.........ek और एहसान आप मुझ गरीब पर कर dijiye............main तीन दिनों से बहुत भूखा hoon.......kuch खाने को अगर मिल जाये तो आपकी बड़ी मेहरबानी होगी.........." और रघु इतना कहकर फिर से अपने दोनों हाथ काव्य के सामने जोड़ लेता हैं वहीँ काव्य न चाहते हुए भी हौले से मुस्कुरा पड़ती हैं.........

" ठीक hain......aawo मेरे saath.......main तुम्हें कुछ खाने को देती हूँ........" और काव्य इतना बोलकर फिर से अपने बंगलो की तरफ चल पड़ती हैं वहीँ रघु भी धीरे धीरे उसके पीछे चल पड़ता hain..........kavya के चलने से उसकी गांड ऊपर नीचे थिरक रही थी वहीँ रघु बिना पलकें झपकाए बस उसकी गांड को घूरे जा रहा tha........uski गांड के बीच दरार को वो ललचायी हुई नज़रियों से घूर रहा tha.........jee तो चाह रहा था की वो अपना एक हाथ लेकर अपने लुंड को ाचे से मसल de........magar ये सब अभी करना ठीक नहीं tha.........aab तो वो उसकी नयी मालकिन जो थी........

जैसे hi वो मैं दूर पर जाता हैं वो फ़ौरन वहीँ रुक जाता हैं और एक तुक उस बंगलो के तरफ बड़े गौर से देखने लगता hain.........fir वो कुछ सोचकर अंदर की तरफ चल पड़ता hain..........aur जाकर वहीँ हॉल में नीचे फर्श पर जाकर बैठ जाता hain,........bunglow की खूबसूरती उसे बार बार अपनी तरफ खींच रही thi..........jahan जहाँ उसके क़दमों के निशान पड़े थे सफ़ेद टाइल्स पर उसके गंदे पवन साफ़ नज़र आ रहे they..........samney जैसे hi उसकी नज़र राहुल और काव्य के तस्वीर पर पड़ती हैं वो बिना अपनी पलकें झापकए उस फोटो के तरफ ऐसे देखने लगता हैं जैसे उसने कोई अजूबा देख लिया हो.........

" तो ये हैं वो खुसनसीब इंसान जिसकी शादी काव्य से हुई hain...........aab इसे मैं तेरी खुसनसीब समझूँ या badnaseeb............kyon की अब तेरी ज़िन्दग़गी में शनि आ चूका hain......yani की main.........tu बस देखता जा आज के बाद धीरे धीरे मैं तेरा सब कुछ तुझसे चीन lunga........tera ये आलीशान ghar...........teri ये साडी property.........aur तेरी ये हसीं और कमसिन biwi........................jo तेरी होकर भी कभी तेरी नहीं हो सकेगी............................."

कंटिन्यू.......................................................................
 
अपडेट-08 (ा) (मेघा अपडेट)

" तो ये हैं वो खुसनसीब इंसान जिसकी शादी काव्य से हुई hain...........aab इसे मैं तेरी खुसनसीब समझूँ या badnaseeb............kyon की अब तेरी ज़िन्दगी में शनि आ चूका hain......yani की main.........tu बस देखता जा आज के बाद धीरे धीरे मैं तेरा सब कुछ तुझसे चीन lunga........tera ये आलीशान ghar...........teri ये साडी property.........aur तेरी ये हसीं और कमसिन biwi........................jo तेरी होकर भी कभी तेरी नहीं हो सकेगी............................."

अब आगे...........................................................................

रघु वहीँ फर्श पर बैठा हुआ अपने ख्यालों में कहीं गम था तभी काव्य के पायलों की चम् चम् उसके कानों में गूंजती हैं और वो बिना पलकें झपकाए काव्य के तरफ एक तुक देखने लगता hain........uski पायलों की चमचमाहट से उसका दिल ज़ोरों से धड़क उठा tha.........jaise hi काव्य आती हैं उसके हाथों में एक प्लेट थी जिसमें ब्रेड में लगा मक्खन और दो बॉयल्ड अंडे they.........saath में शीशे की गिलास में फ़िल्टर का pani.........wo वहीँ रघु के पास प्लेट रख देती हैं और जैसे hi वो नीचे की तरफ झुकती हैं रघु बड़े गौर से काव्य के चेहरे के तरफ देखने लगता हैं........

उसकी नज़रें एक बार फिर से काव्य के क्लेवराज के तरफ चली जाती hain.....jo नीचे की तरफ झुकने की वजह से थोड़ी सी एक्सपोज़ हो रही thi.......tight ब्लाउज में बड़े बड़े चूचियां संभाले नहीं संभल रहे they.........jisey रघु ललचायी हुई नज़रियों से देखे जा रहा tha..........raghu का इस तरह से देखना काव्य के चेहरे पर शर्म लेन के लिए काफी tha.......wo फ़रूअन अपनी नज़रें दूसरी तरफ फेर लेती हैं वहीँ रघु के चेहरे पर एक गन्दी सी मुस्कराहट फ़ैल जाती हैं.........

" आपका बहुत बहुत शुक्रिया मेमसाहेब..........." और इतना कहकर रघु अपने गांडेय हाथों से उस ब्रेड को उठता हैं और बिना हाथ धोये वो वहीँ किसी जानवरों की तरह उस खाने पर टूट पड़ता hain..........wahin काव्य कुछ दूर पर जाकर सोफे पर बैठ जाती हैं और सामने बैठा उस जाहिर गंवार को अजीब सी नज़रियों से देखने लगती hain..........aisa लग रहा था जैसे वो जन्मों से भूखा ho.......gande हाथ पर लगे धुल और मिटटी अब सफ़ेद ब्रेड पर भी लगने लगे थे मगर वो उसकी परवाह किये मज़े से खाये जा रहा था..........

कुछ खाने के बाद वो सामने रखा पानी का गिलास अपने हाथों में उठता हैं और उसे पीने लगता hain...........aur आधा बचा पानी वहीँ फर्श पर फिर से रख देता hain........jo पानी गिलास में अब बचा था वो पूरी तरह से मैला हो चूका tha.........jismein ब्रेड के छोटे छोटे तड़के तैरते हुए से नज़र आ रहे they......aur उसके मुँह का कुछ गन्दगी भी उसपर थोड़ा सा लगा हुआ tha...........bread ख़तम होते hi वो एक नज़र काव्य के चेहरे की तरफ देखने लगता hain......mano उससे कह रहा हो की इतने से मेरा क्या होगा........

" memsaheb........thodi सी क्या और milegi..........bahut ज़ोरों की भूख लगी हैं......." और रघु एक नज़र काव्य के तरफ देखने लगता hain.......wahin काव्य एक नज़र रघु को अजीब सी नज़रियों से देखने लगती हैं और बिना कुछ बोले सीधा किचन के तरफ चल पड़ती hain..........jaise hi काव्य जाती हैं रघु की नज़रें फिर से काव्य के थिरकती हुई गांड पर जाकर ठहर जाती hain.......wo फिर से उसकी गांड को प्यासरी नज़रियों से देखने लगता hain.........aur तब तक देखता हैं जब तक काव्य उसकी नज़रियों से ओझल नहीं हो jati............thode देर बाद काव्य फिर से कुछ ब्रेड लेकर आती हैं और रघु के खली प्लेट्स में रख देती हैं........

फिर से झुकने की वजह से उसकी क्लेवराज थोड़ी सी झलक पड़ती हैं और इस बार रघु अपनी नज़रें नहीं हटाता और ऐसे hi काव्य के चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से घूरता रहता hain........kavya की गोरी चमड़ी बार बार उसे अपनी तरफ खींच रही thi.........wahin काव्य का इस बार शर्म से चेहरा लाल हो चूका tha......wo अपनी नज़रें नीचे की तरफ झुकाये हुए फिर से उस सोफे पर जाकर बैठ जाती hain........raghu हौले से मुस्कुरा पड़ता हैं और फिर से जानवरों की तरह उस ब्रेड पर टूट पड़ता hain...........bread पूरा ख़तम होते hi वो दोनों अंडे को अपने हाथों में लेता हैं और उसे अपने गंदे हाथों से पूछने लगता hain........ye नज़ारा देखकर काव्य की हंसी चूत जाती हैं मगर वो बहुत मुश्किल से अपने आपको रोक पति हैं..........

जो अंडा अभी कुछ देर पहले साफ़ सुथरा था ........चमक रहा tha.......raghu के गंदे हाथ पड़ने से अब उसका भी रंग कुछ कला सा पढ़ गया tha..........wo बिना सोचे समझे उस अंडे को एक hi बार में पूरा अपने मुँह में ठूस लेता हैं और किसी जानवर की तरह चपर...... chapar.......ki आवाज़ के साथ खाने लगता hain..........wahin काव्य उसे अजीब सी नज़रियों से देखे जा रही thi........pehla अंडा ख़तम होते hi वो दूसरा अंडा भी उसी अंदाज़ में खता hain.......aur एक hi बार में गिलास में रखा बाकि पानी पी जाता हैं..........

" आपका बहुत बहुत शुक्रिया memsaheb...........aap सच में बहुत ाची hain........bahut सूंदर भी........." और रघु इतना कहकर अपनी जगह से उठ जाता हैं और अपना थैला कन्धों पारर उठाते हुए सीधा बहार की तरफ जाने लगता hain.........tabhi काव्य बीच में hi बोल पड़ती हैं.........

" suno..........ye तो 1000rs.........aur सबसे पहले तुम जाकर अपना ये हुलिया badlo...........kapdey नए ले लो और बल कटवा aawo..........fir जाकर ाचे से साबुन से नाहा lena...........kuch आराम करने के बाद मैं तुम्हें काम dungi.........aab तुम जा सकते हो........." और काव्य जैसे रघु को हुकुम सुनती हैं वहीँ रघु आगे बढ़कर 500 रस के दो नोट काव्य के हाथों से लेता हैं और शुक्रिया मेमसाहेब कहता हुआ बहार की तरफ चला जाता hain...........wahin काव्य उसे hi जाता हुआ देख रही थी........

रघु के जाते hi वो फ़ौरन उस प्लेट को उठती हैं और साथ में रखा गिलास bhi..........wo उस गिलास को अजीब सी नज़रियों से देखने लगती hain.........aab वो सफ़ेद प्लेट भी मैला सा हो चूका था और ब्रेड के छोटे छोटे टुकड़े वहीँ टाइल्स पर गिरे पड़े they.........raghu के पवन के गंदे निशान जहाँ जहाँ भी उस टाइल्स पर पड़े थे वो साफ़ नज़र आ रहे they.......saath hi साथ उस कमरे में एक अजीब तरह की बदबू भी फ़ैल गयी थी.........

" सच में पूरा जानवर hain........isey तो किसी भी चीज़ की कोई तमीज नहीं........" और काव्य बर्तन उठती हैं और वाइपर लेकर पूरा फर्श ाचे से साफ़ करती hain..........aab भी रघु का गन्दा सा चेहरा उसकी नज़रियों के सामने घूम रहा tha.........khas कर उसकी वो नज़रें जो उसके चूचियों को जब घूर रही thi......wo उसे पल भर के लिए भी नहीं भूला पा रही thi..........aur उसका गंदे अंदाज़ में यु तारीफ करना bhi.........rahul और काव्य दोनों ने अपने अपने पसंद से नौकरों को रख तो लिया था मगर देखना था की कौन नौकर कितना अपने मालिक के प्रति वफादार होता hain.......aur कौन क्या गुल खिलता hain......ye तो बस आने वाला वक़्त hi बता सकता था........

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रघु जैसे hi अपने कमरे के पास जाता हैं सामने का दरवाज़ा थोड़ा सा खुला हुआ tha...........ander जीतू पलंग पर बैठा हुआ आराम कर रहा tha..........raghu को देखकर वो फ़ौरन अपनी जगह से उठ जाता हैं और उसे अजीब इस नज़रियों से देखने लगता हैं........

" तुम कौन हो भाई..........." जीतू अगले hi पल रघु को देखकर सवाल कर बैठता hain.......wahin रघु के चेहरे पर एक मुस्कान तैर जाती हैं............

" मैं कोई भी हूँ ये जानना तेरे लिए ज़रूरी नहीं hain.......bus तू इतना जान ले की आज के बाद मैं यहाँ इसी घर में rahunga........wo भी तेरे saath.......koi शक......." और रघु वहीँ जाकर पलंग पर बैठ जाता हैं..........

" ये तो ाची बात hain..........waise मेरा नाम जीतू hain.......main यहाँ कल hi आया हूँ.........." और जीतू जैसे अपनी बात पर ज़ोर देते हुए कहता हैं वहीँ रघु उसे देखकर हौले से हंस पड़ता हैं........

कॉन्टिनोएड...........................................................
 
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