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Update-63(B) (मेघा अपडेट)
अपनी निकाह से पहले वो अक्सर टॉप और जीन्स अक्सर पहना करती थी मगर निकाह के बाद शायद अख्तर को ये मॉडर्न ड्रेसेस पसंद नहीं थी तो वो उसे पहनने नहीं देता tha...............aur सना भी अपने शौहर की ख़ुशी के लिए उसके हिसाब से वैसी hi रहती thi.............jaisa अख्तर उसे देखना चाहता ttha...................ya पसंद करता tha.....................arrange मैरिज होने से सना की शादी थोड़ी जड़ली हो गयी thi.............waise वो शादी के मूड में नहीं थी मगर घरवालों की वजह से उसे झुकना पड़ा....................
जैसा सना को अपने शौहर की चाह थी वैसा hi अख्तर उसे मिला tha................bus कमी एक रह गयी थी की वो अपने पति के साथ ज़्यादा समय नहीं बीता पायी thi..............ya जवानी का मज़ा सही ढंग से नहीं ले पायी thi.............wahin अख्तर उसे जड़ली छोड़कर विदेश चला गया tha................magar वो ये भी जानती थी की अख्तर उसे एक न एक दिन विदेश अपने साथ ज़रूर ले jayega..............bus कुछ दिन की hi बात थी..............
सना हमेशा बल खुले रखती थी जिससे उसकी छोटी उसकी कमर तक लटकती thi.............bal थोड़े करले होने की वजह से उसके चेहरे पर कुछ बाल हमेशा लटटके rehtey...........jo उसके नरम और नाजुक से गलों को छूटे रहते they...............aankhein बड़ी बड़ी थी जो किसी को भी अपने तरफ आखरषित karti.............honth रूस से भरे गुलाबी थे जब वो बोलती तो लगता जैसे होंठों से रूस टपक रहे ho.........chehra थोड़ा लुम्बा था जिससे उसकी सुराही जैसी गुर्दें और भी ाची लगती thi..............kanon में बड़े बड़े झुमके हमेशा लटकते rehtey.................kul मिलजुलकर वो एक सेक्स बम thi...............aisi सेक्स बम जिसे हर कोई पाना चाहता tha............usey जी भर के भोगना चाहता tha......................uske जवानी का रूस पीना चाहता था...................23 साल की उम्र होने के बावजूद वो अभी भी 16 साल की लड़की लगती...............
" ये तुझे क्या हुआ kavya.................teri तबियत तो ठीक हैं न..............." और सना अपनी दोनों आँखों को गोल गोल नाचते हुए काव्य के चेहरे की तरफ एक तुक देखने लगती हैं वहीँ काव्य फ़ौरन अपनी निगाहें नीचे की तरफ झुका लेती हैं.............
" wo...........sana............meri तबियत ठीक नहीं hain.........bus..........." और काव्य आहिस्ता से बोल पड़ती हैं वहीँ सना इस बार काव्य के पास आती हैं और उसके कान में धीरे से बोल पड़ती हैं.............
" तबियत नहीं ठीक हैं ...........या फिर कुछ aur............kahin तेरी बुर गांड में किसी ने कुछ दाल तो नहीं दिया na............jo तेरी चाल बदली बदली सी लग रही हैं................" और सना मुस्कुराते हुए धीरे से हंस पड़ती हैं वहीँ काव्य राम की तरफ पहले देखती हैं और फिरर सना की तरफ बड़े गौर से देखने लगती हैं...........
" तू भी na.............kuch भी कहीं भी बोल देती hain..........ram खड़ा हैं इस कमरे mein......agar वो तेरी बातें सुन लेता तो............" और काव्य हौले से सना के कान में कहती हैं वहीँ सना धीरे से मुस्कुरा पड़ती हैं..............
" चल chal...........badi आयी सटी सावित्री कहीं ki...........tu तो ऐसे बोल रही हैं जैसे तूने अभी तक कुछ किया hi नहीं.............." और सना फिर से हौले से बोल पड़ती हैं वहीँ काव्य इस बार उसकी बाटिओं को सुनकर मुस्कुरा पड़ती हैं.........
" बाटिओं से तुझसे कोई नहीं जीत sakta................main तेरे लिए अभी मार्किट से चिकन मंगवा देती hoon..........tera favorite............fir आराम से बातें hongi............tu जाकर पहले फ्रेश हो jaa...........aur ram...........tum जाकर बाजार से सामान लेकर आवो..............." और काव्य अपने पर्स से कुछ रुपये निकलकर राम को देती हैं वहीँ सना उसके हाथों को फ़ौरन रोक लेती हैं और अपने पर्स में रखा पैसा निकलकर राम के हाथों में थमा देती हैं.............
" ये तेरा घर नहीं हैं kavya.............aaj से अब मेरा भी hain............is लिए इस घर पर जितना तेरा हक़ hain......utna hi मेरा...................." और सना मुस्कुराते हुए काव्य के तरफ बड़े गौर से देखने लगती हैं व्वहिं काव्य भी जवाब में धीरे से मुस्कुरा देती हैं............
" ाचा baba.......jaisi तेरी मर्ज़ी.............." और काव्य अपने दोनों हाथों को उसके सामने जोड़ती हुई राम को मार्किट जाने का इशारा करती हैं वहीँ सना भी जवाब में मुस्कुरा पड़ती hain..........ram के जाते hi काव्य सना का एक हाथ उसके हाथों पर हौले से रखती हैं और बड़े गौर से सना की आँखों में आँखें डेल बस देखती रहती हैं.............
" sana......................tujhse एक बात कहती थी ........बहुत ज़रूरी..........." और काव्य धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ सना बड़े गौर से कववया के तरफ देखने लगती हैं.............
" बात क्या हैं kavya...............any थिंग सीरियस................" और सना लुम्बी सांस छोड़ती हुई काव्य की तरफ बड़े गौर से एक तुक देखने लगती hain..............wahin काव्य कुछ देर तक चुप रहती हैं फिर वो आगे बोलना शुरू करती हैं..........
" मैं कल गुडगाँव जा रही hoon................aab तू ये मुट्ठ पूछना की क्यों!!!!!!!! क्यों की कुछ अधूरे सवाल अब भी हैं जो मेरे अतीत में............ जो आज भी मुझे परेशां कर रहे hain.........aur अगर मुझे अपने अतीत से अगर पीछा छुड़ाना हैं तो मुझे एक बार उसी सेहर फिर से जाना hoga.............aur उन सरे सवालों के जवाब को ढूढ़ना hoga...............yaad हैं वो दो लड़कों की maut.............yu समझ ले की मैं उसी सिलसिए में वहां कुछ पता लगाने जा रही hoon..........aur बस एक या दो हफ्ते में मैं वहां से लौट ावुंगी,..............." और काव्य सना की आँखों में देखती हुई अपनी बात ख़तम करती हैं वहीँ सना आँखें फाड़े काव्य के चेहरे को अजीब सी नज़रियों से देखने लगती hain..........usey ज़रा भी यकीन नहीं हो रहा था की काव्य उससे ऐसा कुछ डिमांड करेगी.............
" magar.......kavya.............." और सना आगे कुछ पूछती काव्य बीच में hi बोल पड़ती हैं...........
" प्लीज sana..............bus कुछ दिन की बात hain..........main जल्द लौट aawungi..............mera विश्वास करो............" और काव्य सना के हाथों पर अपने हाथ रखते हुए फिर से बोल पड़ती हैं वहीँ सना धीरे से मुस्कुरा देती हैं..........
" वो तो ठीक हैं काव्य मगर तुम अब वहां किसी को जानती भी nahin........agar तुम्हारे साथ कुछ उल्टा सीधा हो गया to..........aur अगर तुम्हें वहां तुम्हारे सवालों के जवाब न मिले to..............aur अगर मिले भी तो अगर तुम्हें कुछ करना पड़े to............mera मतलब............." और सना धीरे से बोल पड़ती hain.......wahin काव्य उसकी बाटिओं को सुनकर मुस्कुरा पड़ती हैं................
" मैं समझ रही हूँ की तू कहना क्या चाहती hain............agar मुझे मेरे सवालों के जवाब के लिए कुछ भी करना पड़े तो मैं उससे पीछे नहीं hatungi...........chahe जो ho.............aur हाँ एक बात तो मैं तुझे बताना भूल gayi...............yahan के नौकर बड़े हरामखोर hain............unse ज़रा बचके रहना..............." और काव्य धीरे से गहरी सांस छोड़ती हुई अपनी बायत ख़तम करती हैं वहीँ सना टकटकी लगाए काव्य के चेहरे को देखे जा रही thi........................usey कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो अब काव्य से क्या kahe...............kya पूछे.................
दोपहर के खाना खाने के बाद सना और काव्य आपस में बाटें करते हैं और काव्य सना को सब कुछ समझती जाती hain.............wahin दूसरी तरफ रघु के चेहरे पर कमीनी मुस्कान फिर से तैर जाती हैं जब उसने सना को यहाँ आते देखा tha...............wo भी बैग lekar...............itna तो वो जनता था की सना यहाँ पर रहने आयी hain............aur अब उसका दिमाग कुछ ज़्यादा hi तेज़्ज़ चलने लगा tha............wo घंटों बैठा एहि सोच रहा था की ऐसा क्या करे की वो काव्य को अपनी क़दमों पर नीचे झुका de..............aur काफी सोचने के बाद आखिर उसके दिमाग में कुछ ऐसा आईडिया आता हैं जिससे उसके चेहरे पर फिर से एक कमीनी मुस्कान तैर जाती hain........................jo शायद काव्य के लिए कहीं न कहीं फिर से घातक साबित होने वाली थी..................................
टिल कॉन्टिनोएड................................................
अपनी निकाह से पहले वो अक्सर टॉप और जीन्स अक्सर पहना करती थी मगर निकाह के बाद शायद अख्तर को ये मॉडर्न ड्रेसेस पसंद नहीं थी तो वो उसे पहनने नहीं देता tha...............aur सना भी अपने शौहर की ख़ुशी के लिए उसके हिसाब से वैसी hi रहती thi.............jaisa अख्तर उसे देखना चाहता ttha...................ya पसंद करता tha.....................arrange मैरिज होने से सना की शादी थोड़ी जड़ली हो गयी thi.............waise वो शादी के मूड में नहीं थी मगर घरवालों की वजह से उसे झुकना पड़ा....................
जैसा सना को अपने शौहर की चाह थी वैसा hi अख्तर उसे मिला tha................bus कमी एक रह गयी थी की वो अपने पति के साथ ज़्यादा समय नहीं बीता पायी thi..............ya जवानी का मज़ा सही ढंग से नहीं ले पायी thi.............wahin अख्तर उसे जड़ली छोड़कर विदेश चला गया tha................magar वो ये भी जानती थी की अख्तर उसे एक न एक दिन विदेश अपने साथ ज़रूर ले jayega..............bus कुछ दिन की hi बात थी..............
सना हमेशा बल खुले रखती थी जिससे उसकी छोटी उसकी कमर तक लटकती thi.............bal थोड़े करले होने की वजह से उसके चेहरे पर कुछ बाल हमेशा लटटके rehtey...........jo उसके नरम और नाजुक से गलों को छूटे रहते they...............aankhein बड़ी बड़ी थी जो किसी को भी अपने तरफ आखरषित karti.............honth रूस से भरे गुलाबी थे जब वो बोलती तो लगता जैसे होंठों से रूस टपक रहे ho.........chehra थोड़ा लुम्बा था जिससे उसकी सुराही जैसी गुर्दें और भी ाची लगती thi..............kanon में बड़े बड़े झुमके हमेशा लटकते rehtey.................kul मिलजुलकर वो एक सेक्स बम thi...............aisi सेक्स बम जिसे हर कोई पाना चाहता tha............usey जी भर के भोगना चाहता tha......................uske जवानी का रूस पीना चाहता था...................23 साल की उम्र होने के बावजूद वो अभी भी 16 साल की लड़की लगती...............
" ये तुझे क्या हुआ kavya.................teri तबियत तो ठीक हैं न..............." और सना अपनी दोनों आँखों को गोल गोल नाचते हुए काव्य के चेहरे की तरफ एक तुक देखने लगती हैं वहीँ काव्य फ़ौरन अपनी निगाहें नीचे की तरफ झुका लेती हैं.............
" wo...........sana............meri तबियत ठीक नहीं hain.........bus..........." और काव्य आहिस्ता से बोल पड़ती हैं वहीँ सना इस बार काव्य के पास आती हैं और उसके कान में धीरे से बोल पड़ती हैं.............
" तबियत नहीं ठीक हैं ...........या फिर कुछ aur............kahin तेरी बुर गांड में किसी ने कुछ दाल तो नहीं दिया na............jo तेरी चाल बदली बदली सी लग रही हैं................" और सना मुस्कुराते हुए धीरे से हंस पड़ती हैं वहीँ काव्य राम की तरफ पहले देखती हैं और फिरर सना की तरफ बड़े गौर से देखने लगती हैं...........
" तू भी na.............kuch भी कहीं भी बोल देती hain..........ram खड़ा हैं इस कमरे mein......agar वो तेरी बातें सुन लेता तो............" और काव्य हौले से सना के कान में कहती हैं वहीँ सना धीरे से मुस्कुरा पड़ती हैं..............
" चल chal...........badi आयी सटी सावित्री कहीं ki...........tu तो ऐसे बोल रही हैं जैसे तूने अभी तक कुछ किया hi नहीं.............." और सना फिर से हौले से बोल पड़ती हैं वहीँ काव्य इस बार उसकी बाटिओं को सुनकर मुस्कुरा पड़ती हैं.........
" बाटिओं से तुझसे कोई नहीं जीत sakta................main तेरे लिए अभी मार्किट से चिकन मंगवा देती hoon..........tera favorite............fir आराम से बातें hongi............tu जाकर पहले फ्रेश हो jaa...........aur ram...........tum जाकर बाजार से सामान लेकर आवो..............." और काव्य अपने पर्स से कुछ रुपये निकलकर राम को देती हैं वहीँ सना उसके हाथों को फ़ौरन रोक लेती हैं और अपने पर्स में रखा पैसा निकलकर राम के हाथों में थमा देती हैं.............
" ये तेरा घर नहीं हैं kavya.............aaj से अब मेरा भी hain............is लिए इस घर पर जितना तेरा हक़ hain......utna hi मेरा...................." और सना मुस्कुराते हुए काव्य के तरफ बड़े गौर से देखने लगती हैं व्वहिं काव्य भी जवाब में धीरे से मुस्कुरा देती हैं............
" ाचा baba.......jaisi तेरी मर्ज़ी.............." और काव्य अपने दोनों हाथों को उसके सामने जोड़ती हुई राम को मार्किट जाने का इशारा करती हैं वहीँ सना भी जवाब में मुस्कुरा पड़ती hain..........ram के जाते hi काव्य सना का एक हाथ उसके हाथों पर हौले से रखती हैं और बड़े गौर से सना की आँखों में आँखें डेल बस देखती रहती हैं.............
" sana......................tujhse एक बात कहती थी ........बहुत ज़रूरी..........." और काव्य धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ सना बड़े गौर से कववया के तरफ देखने लगती हैं.............
" बात क्या हैं kavya...............any थिंग सीरियस................" और सना लुम्बी सांस छोड़ती हुई काव्य की तरफ बड़े गौर से एक तुक देखने लगती hain..............wahin काव्य कुछ देर तक चुप रहती हैं फिर वो आगे बोलना शुरू करती हैं..........
" मैं कल गुडगाँव जा रही hoon................aab तू ये मुट्ठ पूछना की क्यों!!!!!!!! क्यों की कुछ अधूरे सवाल अब भी हैं जो मेरे अतीत में............ जो आज भी मुझे परेशां कर रहे hain.........aur अगर मुझे अपने अतीत से अगर पीछा छुड़ाना हैं तो मुझे एक बार उसी सेहर फिर से जाना hoga.............aur उन सरे सवालों के जवाब को ढूढ़ना hoga...............yaad हैं वो दो लड़कों की maut.............yu समझ ले की मैं उसी सिलसिए में वहां कुछ पता लगाने जा रही hoon..........aur बस एक या दो हफ्ते में मैं वहां से लौट ावुंगी,..............." और काव्य सना की आँखों में देखती हुई अपनी बात ख़तम करती हैं वहीँ सना आँखें फाड़े काव्य के चेहरे को अजीब सी नज़रियों से देखने लगती hain..........usey ज़रा भी यकीन नहीं हो रहा था की काव्य उससे ऐसा कुछ डिमांड करेगी.............
" magar.......kavya.............." और सना आगे कुछ पूछती काव्य बीच में hi बोल पड़ती हैं...........
" प्लीज sana..............bus कुछ दिन की बात hain..........main जल्द लौट aawungi..............mera विश्वास करो............" और काव्य सना के हाथों पर अपने हाथ रखते हुए फिर से बोल पड़ती हैं वहीँ सना धीरे से मुस्कुरा देती हैं..........
" वो तो ठीक हैं काव्य मगर तुम अब वहां किसी को जानती भी nahin........agar तुम्हारे साथ कुछ उल्टा सीधा हो गया to..........aur अगर तुम्हें वहां तुम्हारे सवालों के जवाब न मिले to..............aur अगर मिले भी तो अगर तुम्हें कुछ करना पड़े to............mera मतलब............." और सना धीरे से बोल पड़ती hain.......wahin काव्य उसकी बाटिओं को सुनकर मुस्कुरा पड़ती हैं................
" मैं समझ रही हूँ की तू कहना क्या चाहती hain............agar मुझे मेरे सवालों के जवाब के लिए कुछ भी करना पड़े तो मैं उससे पीछे नहीं hatungi...........chahe जो ho.............aur हाँ एक बात तो मैं तुझे बताना भूल gayi...............yahan के नौकर बड़े हरामखोर hain............unse ज़रा बचके रहना..............." और काव्य धीरे से गहरी सांस छोड़ती हुई अपनी बायत ख़तम करती हैं वहीँ सना टकटकी लगाए काव्य के चेहरे को देखे जा रही thi........................usey कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो अब काव्य से क्या kahe...............kya पूछे.................
दोपहर के खाना खाने के बाद सना और काव्य आपस में बाटें करते हैं और काव्य सना को सब कुछ समझती जाती hain.............wahin दूसरी तरफ रघु के चेहरे पर कमीनी मुस्कान फिर से तैर जाती हैं जब उसने सना को यहाँ आते देखा tha...............wo भी बैग lekar...............itna तो वो जनता था की सना यहाँ पर रहने आयी hain............aur अब उसका दिमाग कुछ ज़्यादा hi तेज़्ज़ चलने लगा tha............wo घंटों बैठा एहि सोच रहा था की ऐसा क्या करे की वो काव्य को अपनी क़दमों पर नीचे झुका de..............aur काफी सोचने के बाद आखिर उसके दिमाग में कुछ ऐसा आईडिया आता हैं जिससे उसके चेहरे पर फिर से एक कमीनी मुस्कान तैर जाती hain........................jo शायद काव्य के लिए कहीं न कहीं फिर से घातक साबित होने वाली थी..................................
टिल कॉन्टिनोएड................................................