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अपडेट-08 (बी) (मेघा अपडेट)
" jeetu........aacha नाम hain........waise एक बात bolun.........malik का तो पता nahin.......magar अपनी मेमसाहेब बहुत कमल की चीज़ hain............bahut खूबसूरत hain...........poori तरह जवान hain.........usey देखकर अभी तक मेरे लुंड में सुरसुराहट सी हो रही हैं........" रघु के मुँह से ऐसी घटिया बात सुनकर जीतू जैसे रघु पर भड़क सा उठता हैं.........
" कुछ तो शर्म kar.......jisney तुझे नौकरी पर rakha........jisney तुझे सर छुपाने को चाट दी ...............तू उन्ही के बारे में गन्दा बोल रहा hain.......kaisa इंसान हैं तू........" और जीतू के चेहरे पर थोड़ी सी नाराज़गी साफ़ नज़र आने लगती hain.......wahin रघु उसकी बाटिओं को सुनकर थोड़ा नुम हो जाता हैं और अपनी गलती मान लेता hain..........galti इस लिए मान लेता हैं क्यों की उसने अपना गन्दा इरादा बहुत जल्दी जीतू के सामने ज़ाहिर कर दिया था.........
" ाचा माफ़ कर de.........juban hi तो हैं ...........फिसल जाती हैं........." और रघु फ़ौरन अपनी जगह से उठ जाता हैं और बहार की तरफ जाने लगता हैं......
" तो अपनी जुबान को काबू में रखना सीख ले raghu........warna तेरा यहाँ पर रहना मुश्किल हो jayega.........main मालकिन के बारे में ऐसी घटिया बात कभी न सोच सकता hoon......aur न सुन सकता हूँ......" और जीतू हामी भरते हुए अपनी बात कहता hain........wahin रघु दुबारा से हंस पड़ता हैं........
" wafadari..........imandari......vishwaas........dhokha........hahahahahahahhh.......tu बस देखा जा तुझे मैं अपने रंग में एक दिन पूरा न रंग दिया तो मेरा नाम भी रघु nahin........tune अभी मुझे ाचे से जाना कहाँ hain.........aabhi तूने मेरा कमीनापन देखा hi कहाँ hain..........aurat तो मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी hain............isi औरत के लिए तो मैं हर वक़्त पागल सा रहता hoon..........kuch भी कर सकता hoon........aur जब इस घर में इतनी खूबसूरत औरत हैं तो मैं भला उसे पाने के लिए क्यों नहीं पागल rahunga...............khel तो अब शुरू हो चूका hain.............aab देखना ये हैं की मेरी मेमसाहेब आखिर कब तक मुझसे बचती firegi............ek न एक दिन तो वो मेरे नीचे आएगी hi...............aur जिस दिन अगर ऐसा हो गया ...............समझो सब कुछ मेरी मुट्ठी mein........hahahahahhhhh " और रघु ठहाका लगाकर ज़ोरों से हस्ता हुआ बहार की तरफ निकल जाता हैं..........................................
****************************************************************
शाम के करीब 4 बजे जब राहुल घर पर आता हैं तो काव्य हॉल में बैठी हुई t.v देख रही thi...........rahul को देखकर उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर जाती hain......rahul वहीँ जाकर्र काव्य के बगल में बैठ जाता हैं........
" राम कहीं दिख नहीं raha...........kahan हैं वो......." राहुल सोफे पर बैठते hi बोल पड़ता hain............wahin काव्य बुरा सा मुँह बना लेती हैं........
" मर्द होगा तब न वो मेरे पास baithega..........bhagwan ने उसे गलती से लड़का बना diya.......usey तो लड़की होना चाइये tha........aur कहाँ होगा wo............hoga वही अपने कमरे mein..........uska इस घर में रहना न रहना एक बराबर hain..........agar उसे भूख भी लगी हो तो भी वो मुझसे खाना तक नहीं मांग sakta..........kya मैं कोई भूत हूँ जिसे देखकर उसकी हमेशा फटती रहती हैं............" और काव्य के चेहरे पर गुस्सा झलक पड़ता hain.......wahin राहुल बस चुप चाप काव्य की बातें सुनता रहता hain.........wo जनता था की काव्य का इस तरह से उसके ऊपर छिड़ना आम बात हैं.............
" तुम क्यों अपना मूड ख़राब करती ho........main बात करूँगा ussey........samjhunga उसे main..........mummy पापा के जाने के बाद वो एकदम अकेला हो गया hain......thoda तो टाइम लगेगा hi.......sab कुछ धीरे धीरे सही हो जायेगा......" और राहुल फिर से अपनी सफाई देता hain........wahin काव्य अभी भी राहुल को घूरे जा रही थी........
" ये तो भगवान् hi बस जनता hain.........aacha मैं एक चीज़ आपको बताना तो भूल hi gayi..........maine एक नौकर को अपने यहाँ रख लिया hain.........uska नाम रघु hain.......bechara बहुत गरीब hain........uska इस दुनिया में कोई nahin........aur तो वो गुडगाँव का रहने वाला हैं........" और काव्य साडी बातें राहुल को बताती चली जाती हैं वहीँ राहुल के चेहरे पर मुस्कान तैर जाती हैं......
" अब अगर मैं कुछ कहूं तो ..........लगेगी न तुम्हें भी mirchi...........tumne एक पल में कैसे जान लिया की वो इंसान सही hain.........khair........jane do...........jab हम मार्किट करने जाएंगे तो मैं उन दोनों से मिल लूँगा और तुम्हें भी मिलवा dunga..........aab इसी बात पर एक किश तो बनता hi हैं......" इतना कहकर राहुल फ़ौरन काव्य के लबों को चूम लेता हैं और अपना एक हाथ काव्य के चूचियों पर रख देता हैं और उसे हौले हौले से मसलने लगता hain..........wahin काव्य इधर उधर देखने लगती हैं और राहुल को अपने से दूर धकेलने लगती हैं........
" पागल हो गए हो kya..........jab देखो कहीं भी शुरू हो जाते ho........sharam आराम हैं की नहीं aapko.....agar राम ने ये सब देख लिया तो क्या सोचेगा वो हमलोगों के बारे में.........." और काव्य फ़ौरन राहुल का हाथ अपनी चूचियों से हटती हैं और राहुल से दूर हो जाती hain.........wahin राहुल काव्य को देखर हंसी लगता हैं........
करीब 6 बजे राहुल तैयार होकर हॉल में जाकर बैठ जाता हैं और काव्य के आने का इंतज़ार करता hain...........kareeb 15 मिनट बाद काव्य तैयार होकर नीचे सीढ़ियों से उतरती hain..........laal साडी में लिपटी काव्य गोल्डन कलर की ब्लाउज वो भी डीप लौ cut........jismein उसकी पीठ काफी हुड्ड तक नंगी thi.........aur पीछे दो डोर बंधी हुई थी जो उसकी नंगी पीठ को और भी अत्त्रक्ट कर रही thi..........high हील्स की वजह से उसकी गांड काफी मटक रही थी और उसने साधी अपनी नैवेल के दो इंच नीचे बंधा हुआ था जिससे उसका गोरा पेट और भी क़हर ध रहा tha..........yahan तक राहुल भी कुछ देर तक काव्य को देखता रह जाता हैं......
होंठ पर लगा हल्का लाल लिपस्टिक और भी कातिलाना बना रहा tha.....bal खुले से they........balkhati......ithlati......wo पल पल सीढ़ियों से नीचे की तरफ उतर रही thi.......aur जब वो राहुल के करीब आती हैं राहुल उसे देखकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं......
" आज किसपर ये बिजली गिराने का इरादा hain.........kabhi कभी तो मुझे तुम्हारी इस खूबसूरती से दुर्र सा लगता hain.......ki कहीं तुम्हें मुझसे कोई चीन न le............tum हो hi ऐसी की हर कोई तुम्हें पाने को बेचैन रहता हैं.........." और राहुल अपने दिल में जो बात थी वो अपनी जुबान पर ला देता hain........wahin काव्य राहुल को देखकर हौले से हंस पड़ती हैं.......
" आपने क्या मुझे ऐसा वैसा समझ रखा हैं जो मुझे कोई आपसे यु चीन lega........kavya इतनी आसानी से किसी के हाथ नहीं आने wali.........aur अगर कोई मुझपर मरता हैं तो mare.......mujhe उससे कोई फर्क नहीं पड़ने wala........ye काव्य किसी और के बहकावे में इतनी आसानी से कभी नहीं आने वाली........" और काव्य राहुल को देखर हौले से हंस पड़ती हैं वहीँ राहुल भी मुस्कुरा पड़ता hain.........na जाने क्यों काव्य की ऐसी बाटिओं को सुनकर राहुल को उसपर अटूट विश्वास तो था मगर उसका दिल ये सब नहीं मान रा था..........
" अब चले.........." और काव्य हौले से बोल पड़ती hain.........wahin राहुल मुस्कुराता रहता hain.........aur चलने का इशारा करता हैं........
" अरे छोटे मालिक जी को बता तो दीजिये की हम मार्किट जा रहे hain............wo तो बहार निकलने से रहे......." और काव्य एक बार फिर से राम को ताने मरने लगती हैं वहीँ राहुल कुछ नहीं बोलता और सीधा राम के पास चला जाता hain.......thode देर बाद राम भी उसके साथ बहार निकलता हैं और जब उसकी नज़रें काव्य के तरफ जाती हैं एक बार फिर से उसकी नज़रें नीचे की तरफ झुक जाती hain...........kavya को ऐसे हॉट कपड़े में देखकर राम का शर्म से बुरा हाल tha........wahin काव्य तिरछी नज़रियों से राम के तरफ देखे जा रही थी.........
" ram.........humare यहाँ दो नौकर रह रहे hain.......chalkar तुम भी उनसे मिल lo..........kal को अगर कोई काम उनसे करवाना पड़े तो तुम्हें भी कोई दिक्कत नहीं होगी......." और राहुल इतना कहकर चल पड़ता hain.......uske पीछे पीछे ram.......aur सबसे पीछे kavya..........dekhna था की आने वाला वक़्त उन सब की ज़िन्दगी में क्या मोड़ लेकर आने वाला था..........................
कंटिन्यू....................................................................
" jeetu........aacha नाम hain........waise एक बात bolun.........malik का तो पता nahin.......magar अपनी मेमसाहेब बहुत कमल की चीज़ hain............bahut खूबसूरत hain...........poori तरह जवान hain.........usey देखकर अभी तक मेरे लुंड में सुरसुराहट सी हो रही हैं........" रघु के मुँह से ऐसी घटिया बात सुनकर जीतू जैसे रघु पर भड़क सा उठता हैं.........
" कुछ तो शर्म kar.......jisney तुझे नौकरी पर rakha........jisney तुझे सर छुपाने को चाट दी ...............तू उन्ही के बारे में गन्दा बोल रहा hain.......kaisa इंसान हैं तू........" और जीतू के चेहरे पर थोड़ी सी नाराज़गी साफ़ नज़र आने लगती hain.......wahin रघु उसकी बाटिओं को सुनकर थोड़ा नुम हो जाता हैं और अपनी गलती मान लेता hain..........galti इस लिए मान लेता हैं क्यों की उसने अपना गन्दा इरादा बहुत जल्दी जीतू के सामने ज़ाहिर कर दिया था.........
" ाचा माफ़ कर de.........juban hi तो हैं ...........फिसल जाती हैं........." और रघु फ़ौरन अपनी जगह से उठ जाता हैं और बहार की तरफ जाने लगता हैं......
" तो अपनी जुबान को काबू में रखना सीख ले raghu........warna तेरा यहाँ पर रहना मुश्किल हो jayega.........main मालकिन के बारे में ऐसी घटिया बात कभी न सोच सकता hoon......aur न सुन सकता हूँ......" और जीतू हामी भरते हुए अपनी बात कहता hain........wahin रघु दुबारा से हंस पड़ता हैं........
" wafadari..........imandari......vishwaas........dhokha........hahahahahahahhh.......tu बस देखा जा तुझे मैं अपने रंग में एक दिन पूरा न रंग दिया तो मेरा नाम भी रघु nahin........tune अभी मुझे ाचे से जाना कहाँ hain.........aabhi तूने मेरा कमीनापन देखा hi कहाँ hain..........aurat तो मेरी सबसे बड़ी कमज़ोरी hain............isi औरत के लिए तो मैं हर वक़्त पागल सा रहता hoon..........kuch भी कर सकता hoon........aur जब इस घर में इतनी खूबसूरत औरत हैं तो मैं भला उसे पाने के लिए क्यों नहीं पागल rahunga...............khel तो अब शुरू हो चूका hain.............aab देखना ये हैं की मेरी मेमसाहेब आखिर कब तक मुझसे बचती firegi............ek न एक दिन तो वो मेरे नीचे आएगी hi...............aur जिस दिन अगर ऐसा हो गया ...............समझो सब कुछ मेरी मुट्ठी mein........hahahahahhhhh " और रघु ठहाका लगाकर ज़ोरों से हस्ता हुआ बहार की तरफ निकल जाता हैं..........................................
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शाम के करीब 4 बजे जब राहुल घर पर आता हैं तो काव्य हॉल में बैठी हुई t.v देख रही thi...........rahul को देखकर उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर जाती hain......rahul वहीँ जाकर्र काव्य के बगल में बैठ जाता हैं........
" राम कहीं दिख नहीं raha...........kahan हैं वो......." राहुल सोफे पर बैठते hi बोल पड़ता hain............wahin काव्य बुरा सा मुँह बना लेती हैं........
" मर्द होगा तब न वो मेरे पास baithega..........bhagwan ने उसे गलती से लड़का बना diya.......usey तो लड़की होना चाइये tha........aur कहाँ होगा wo............hoga वही अपने कमरे mein..........uska इस घर में रहना न रहना एक बराबर hain..........agar उसे भूख भी लगी हो तो भी वो मुझसे खाना तक नहीं मांग sakta..........kya मैं कोई भूत हूँ जिसे देखकर उसकी हमेशा फटती रहती हैं............" और काव्य के चेहरे पर गुस्सा झलक पड़ता hain.......wahin राहुल बस चुप चाप काव्य की बातें सुनता रहता hain.........wo जनता था की काव्य का इस तरह से उसके ऊपर छिड़ना आम बात हैं.............
" तुम क्यों अपना मूड ख़राब करती ho........main बात करूँगा ussey........samjhunga उसे main..........mummy पापा के जाने के बाद वो एकदम अकेला हो गया hain......thoda तो टाइम लगेगा hi.......sab कुछ धीरे धीरे सही हो जायेगा......" और राहुल फिर से अपनी सफाई देता hain........wahin काव्य अभी भी राहुल को घूरे जा रही थी........
" ये तो भगवान् hi बस जनता hain.........aacha मैं एक चीज़ आपको बताना तो भूल hi gayi..........maine एक नौकर को अपने यहाँ रख लिया hain.........uska नाम रघु hain.......bechara बहुत गरीब hain........uska इस दुनिया में कोई nahin........aur तो वो गुडगाँव का रहने वाला हैं........" और काव्य साडी बातें राहुल को बताती चली जाती हैं वहीँ राहुल के चेहरे पर मुस्कान तैर जाती हैं......
" अब अगर मैं कुछ कहूं तो ..........लगेगी न तुम्हें भी mirchi...........tumne एक पल में कैसे जान लिया की वो इंसान सही hain.........khair........jane do...........jab हम मार्किट करने जाएंगे तो मैं उन दोनों से मिल लूँगा और तुम्हें भी मिलवा dunga..........aab इसी बात पर एक किश तो बनता hi हैं......" इतना कहकर राहुल फ़ौरन काव्य के लबों को चूम लेता हैं और अपना एक हाथ काव्य के चूचियों पर रख देता हैं और उसे हौले हौले से मसलने लगता hain..........wahin काव्य इधर उधर देखने लगती हैं और राहुल को अपने से दूर धकेलने लगती हैं........
" पागल हो गए हो kya..........jab देखो कहीं भी शुरू हो जाते ho........sharam आराम हैं की नहीं aapko.....agar राम ने ये सब देख लिया तो क्या सोचेगा वो हमलोगों के बारे में.........." और काव्य फ़ौरन राहुल का हाथ अपनी चूचियों से हटती हैं और राहुल से दूर हो जाती hain.........wahin राहुल काव्य को देखर हंसी लगता हैं........
करीब 6 बजे राहुल तैयार होकर हॉल में जाकर बैठ जाता हैं और काव्य के आने का इंतज़ार करता hain...........kareeb 15 मिनट बाद काव्य तैयार होकर नीचे सीढ़ियों से उतरती hain..........laal साडी में लिपटी काव्य गोल्डन कलर की ब्लाउज वो भी डीप लौ cut........jismein उसकी पीठ काफी हुड्ड तक नंगी thi.........aur पीछे दो डोर बंधी हुई थी जो उसकी नंगी पीठ को और भी अत्त्रक्ट कर रही thi..........high हील्स की वजह से उसकी गांड काफी मटक रही थी और उसने साधी अपनी नैवेल के दो इंच नीचे बंधा हुआ था जिससे उसका गोरा पेट और भी क़हर ध रहा tha..........yahan तक राहुल भी कुछ देर तक काव्य को देखता रह जाता हैं......
होंठ पर लगा हल्का लाल लिपस्टिक और भी कातिलाना बना रहा tha.....bal खुले से they........balkhati......ithlati......wo पल पल सीढ़ियों से नीचे की तरफ उतर रही thi.......aur जब वो राहुल के करीब आती हैं राहुल उसे देखकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं......
" आज किसपर ये बिजली गिराने का इरादा hain.........kabhi कभी तो मुझे तुम्हारी इस खूबसूरती से दुर्र सा लगता hain.......ki कहीं तुम्हें मुझसे कोई चीन न le............tum हो hi ऐसी की हर कोई तुम्हें पाने को बेचैन रहता हैं.........." और राहुल अपने दिल में जो बात थी वो अपनी जुबान पर ला देता hain........wahin काव्य राहुल को देखकर हौले से हंस पड़ती हैं.......
" आपने क्या मुझे ऐसा वैसा समझ रखा हैं जो मुझे कोई आपसे यु चीन lega........kavya इतनी आसानी से किसी के हाथ नहीं आने wali.........aur अगर कोई मुझपर मरता हैं तो mare.......mujhe उससे कोई फर्क नहीं पड़ने wala........ye काव्य किसी और के बहकावे में इतनी आसानी से कभी नहीं आने वाली........" और काव्य राहुल को देखर हौले से हंस पड़ती हैं वहीँ राहुल भी मुस्कुरा पड़ता hain.........na जाने क्यों काव्य की ऐसी बाटिओं को सुनकर राहुल को उसपर अटूट विश्वास तो था मगर उसका दिल ये सब नहीं मान रा था..........
" अब चले.........." और काव्य हौले से बोल पड़ती hain.........wahin राहुल मुस्कुराता रहता hain.........aur चलने का इशारा करता हैं........
" अरे छोटे मालिक जी को बता तो दीजिये की हम मार्किट जा रहे hain............wo तो बहार निकलने से रहे......." और काव्य एक बार फिर से राम को ताने मरने लगती हैं वहीँ राहुल कुछ नहीं बोलता और सीधा राम के पास चला जाता hain.......thode देर बाद राम भी उसके साथ बहार निकलता हैं और जब उसकी नज़रें काव्य के तरफ जाती हैं एक बार फिर से उसकी नज़रें नीचे की तरफ झुक जाती hain...........kavya को ऐसे हॉट कपड़े में देखकर राम का शर्म से बुरा हाल tha........wahin काव्य तिरछी नज़रियों से राम के तरफ देखे जा रही थी.........
" ram.........humare यहाँ दो नौकर रह रहे hain.......chalkar तुम भी उनसे मिल lo..........kal को अगर कोई काम उनसे करवाना पड़े तो तुम्हें भी कोई दिक्कत नहीं होगी......." और राहुल इतना कहकर चल पड़ता hain.......uske पीछे पीछे ram.......aur सबसे पीछे kavya..........dekhna था की आने वाला वक़्त उन सब की ज़िन्दगी में क्या मोड़ लेकर आने वाला था..........................
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