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उपडेट _ 81
एक घर मैं एक लड़का अभी नंगा सो रहा था आवर उसके आस पास गीता की कई सरे फोटो थी जो उसके बीएड पर बिखड़ी पड़ी थी लड़का की अचानक hi नींद खुली तो लड़का उठ कर गीता की एक फोटो को उठा कर अपने लैंड पर बड़े hi प्यार से रगने लगा जैसे की अभी उसके सामने गीता hi उसके लैंड कुश रही हो आअह्ह्ह तुम सिर्फ मेरी हो हहहहहह तुमेह कोई जुड़ा नहीं कर सकता है मुझसे लड़का बोलते हुए गीता की फोटो अपने लैंड पर खूब रगडते जा रहा था आवर गीता के बारे में सोचते हुवे वह झाड़ गया जो सारा उसके लैंड के पानी गीता के फोटो पर hi गिरा दिया लड़का जब झड़ने के बाद संत हुवा तो गीता की फोटो को चाटने लगा जो खुद hi गीता की फोटो खड़ा था जो अपने hi लैंड के पानी को चाट रहा था जैसे गीता की छूट hi चाट रहा हो जब अपने hi लैंड का सारा पानी चाट गया तो गीता की साडी फोटो बीएड पर से उठा कर अपने अलमारी मैं रख दिया आवर बाथरूम मैं चला गया बाथरूम से आने के बाद तैयार होकर अपने रूम से बहार आया तो सामने एक ोुरत की मोती गांड देख कर लड़का का दिल मचल गया मगर लड़के ने उस औरत की गांड से अपनी नज़र हटा ली कांटा नास्ता लगा दो जल्दी से लड़के के कहा आवर वही टेबल पर बैठ गया जो औरत ने जल्दी से नास्ता लगा दिया आवर लड़के के बगल मैं hi कड़ी हो गयी आवर अपनी गांड लड़के के जिसम पर hi टाच करने लगी जो लड़के की हालत ख़राब होने लगा जो लड़के ने अपनी आँखे बंद कर लिया कुछ देर के लिए फिर कुछ सोच कर hi औरत को दूर कर दिया कांटा तुम मुझे तंग मत करो अभी मेरा मुंड नहीं है आवर मुझे ऑफिस भी जाना है लड़के ने औरत से गुस्से मैं लड़के की आँखे भी लाल हो गया था जिसे औरत देख कर थोड़ी देर के लिए दर गयी थी आउट किचेन की तरफ चली गयी जो लड़का भी नास्ता कर के जल्दी से निकल गया !
वही किचेन मैं औरत अपनी आँखे बंद कर के रो रही थी जैसे उसे बहुत दुःख हुवा हो लड़के के मन करने से बाटी आज भी मैं नाकाम हो गयी तुम मुझे मनाफ़ कर देना बेटी तेरी माँ आज भी नाकाम हो गयी है आवर औरत वही किचेन मैं बैठ कर रोने लगी !
कांटा एक देहात की रहने वही है कांटा का पति दिन भर सिर्फ सरब के नशे मैं रहता है आवर कांटा को नशे मैं बहुत मरता भी था कांटा को फिर भी कांटा उसके साथ hi रहती थी अपनी एक बेटी के साथ कांटा गाँव में एक ठाकुर के घर पे नौकरानी की काम करती थी कांटा बहुत hi खूबसूरत थी आवर बहुत अच्छी भी आवर वही उसका पति कला आवर बदसूरत के साथ शराबी भी था कांटा को लड़के वाले पसंद तो कर लेते थे फिर दहेज़ की वजह से पीछे हैट जाते थे इस लिए एक सराबी से मज़बूरी मैं कांटा की माँ बाप ने शादी कर दी !
कांटा जिस ठाकुर के घर काम करती थी उसका hi ठाकुर के बेटे की नज़र कांटा पर पड़ी आवर वह कांटा की जिसम देख कर कांटा को सहर लेकर आ गया नौकरी के लिए कांटा भी अपने ठाकुर के कहने पर सहर आगयी आवर यह आकर ठुकरा के बेटे ने कांटा को जबरदस्ती छोड़ने लगा आवर कांटा कुछ नहीं कर सकती थी जो धीरे धीरे कांटा भी उसके साथ देने लगी क्यू के लड़का कांटा को बहुत पैसे भी देता था जिससे कांटा अपनी बेटी को हॉस्टल मैं पढ़ा रही थी आज भी कांटा को पैसे की ज़रूरत थी जो कांटा आज लड़के को रिझा रही थी जो उसने साफ मन कर दिया !
इधर लड़का ऑफिस मैं बैठा था तभी वह कुछ बन्दे आ गए क्या हुवा भाई आज भी तू कही गीता की याद मैं तो नहीं है न एक ने हस्ते हुवे कहा आवर दोनों बन्दे हसने लगे जो लड़का दोनों पर गुस्सा हो गया मगर चुप hi रहा दोनों कुछ देर तक लड़के से मज़ा मस्ती कर के चले गए लड़का अभी अपने ऑफिस मैं बैठा था की उसका फ़ोन बाज़ा जो लड़के ने उठा कर देखा तो उसके बॉस का फ़ोन था hello सर आज आप ने मुझे फ़ोन किया मुझे बहुत खुसी हो रही है लड़के ने कहा!
बॉस : सुधीर मैं तुमेह फिर एक मक्का दे रहा हुईं के तुम अपनी बहादुरी शाबित कर सको इस बार फ़ैल हुवे तो इस बार तुम अपने घर जा सकते हो तुम्हारा कोई जगह नहीं होगा यह पर !
सुधीर : थैंक्स सर इस बात मैं अपनी बहादुरी शाबित कर के hi रहूँगा क्या करना होगा सर !
बॉस : तुमेह कुछ नहीं करना है जो भी करेगी no 1 कर देगी तुमेह बस उसके साथ जाना है समझ गए !
सुधीर : जी सर मैं समझ गया मगर सर no 1 तो अभी बीमार है न सर फिर वह कैसे जाएगी सुधीर तो no1 को अपने साथ जाने को सुन कर hi वह बहुत खुश हो गया था फिर सुधीर को अभी झटका भी लगा की no1 इतनी जल्दी ठीक कैसे हो गयी !
बॉस : no1 बिलकुल ठीक है उसने hi फ़ोन किया था तुमेह कल hi निकलना है उसके साथ तुम तैयार रहना वह तुम्हारे घर पर आ जाएगी !
अपने बॉस के फ़ोन रखने पर लड़के के चेहरे पर एक कमीना मुस्कान आगयी एहि मक्का है सुधीर जो तू गीता को हासिल कर सकता है सुधीर के मन से आवाज़ आई जो सुधीर हसने लगा की गीता को हासिल कर लेगा उसके साथ जाकर !
गीता आज कितने दिन के बाद आज अपने घर के बहार गार्डन में निकली थी जो गीता का दिल बहुत hi खुश था गीता गार्डन मैं बैठ कर कॉफ़ी पिटे हुए ठंडी हवा की मज़ा ले रही थी गीता बेटी कैसे लग रहा है तुझे आज कितने दिन के बाद बहार आकर रागनी ने कहा गीता के बगल बैठते हुवे !
गीता : माँ मुझे बहुत ाचा लग रहा है अब मैं बिलकुल ठीक हो गयी ये सब आप की वजह से हुवा है आप अगर नहीं आती तो सायद मैं इतनी जल्दी ठीक नहीं होती !
आवर गीता रागनी के गाल पर किस कर दिया खुश होते हुवे उह मेरी बच्ची ये सब तो तेरे भाई की वजह से हुवे है बेटी मैं एक बात पुछु अगर तुझे बुरा न लगे तो रागनी ने कहा !
गीता: माँ आप क्या बोल रही हो मैं क्यू आप की बात पर गुस्सा होने लगी आप मुझसे कुछ भी पूछ सकती है बोलिये क्या जानना है आप को !
रागनी : गीता बेटी तुझे बुरा तो नहीं लगा न अपनी भाई के साथ तू समझ रही है न मैं क्या बोल रही हुईं बेटी आवर रात को क्या हुवा था तेरे साथ आवर तेरा भाई कैसे आया वह पर रागनी ने शर्मा कर कहा जो गीता भी अपनी माँ की बात समझ कर शर्मा गयी !
गीता : माँ मैं समझ गयी माँ मुझे बुरा नहीं लगा भाई के साथ मैं खुश हुईं भाई के वजह से आज मैं कितने दिन के बाद ठीक हो गयी मगर माँ कल क्या हुवा मुझे कुछ भी समझ मैं नहीं आया मुझे खिड़की के बहार से कुछ आवाज़ सुनाई दिया मैं देखने गयी तो लगा की खिड़की से अंदर आकर कुछ मुझसे टकराया आवर मुझे ठण्ड लगने लगी जो मैं वही पर कंपनी लगी फिर जब मुझे होश आया तो देखा मैं बिलकुल नंगी ज़मीन पर लेती थी कारन के साथ आवर रूम मैं पायल कड़ी थी जो मुझे बहुत सरम आ रही थी पायल के सामने माँ कारन कैसे आया मुझे नहीं पता मगर कारन के वजह से मेरी जिसम मैं गर्मी हुयी थी !
रागनी : सायद गीता बाटी कारन को तेरे दर्द का अहसास हुवा हो जो कारन तेरे पास आ गया हो
माँ कही ऐसा तो नहीं मेरी दर्द भाई को पता चल रहा है तो क्या भाई आवर मेरा जिसम एक हो गए है जो कारन को पता चल गया मेरी दर्द का गीता हरण होते हुयी कही
रागनी : बेटी मुझे भी एहि लग रहा है सायद तेरी जिसम की दर्द को कारन अहसास कर के तेरे पास आ गया हो इसका मतलब हुए के कारन आवर तेरी सम्बन्ध के कारन तुम दोनों को सकती hi नहीं मिली तुम दोनों का जिसम भी एक दूसरे से जुड़ चूका है जो बहुत अच्छा भी है हम सब के लिए ठीक है बेटी चल नास्ता करते है तू सुबह से एहि बैठी है !
गीता : माँ आप चलिए मैं अभी आयी ये क्या हो गया अब तो यकीनन hi भाई जान जायेगा मैं कौन सा काम करती हुईं आवर कल तो मुझे जाना भी है क्या इसके बारे मैं भी मेरे भाई को पता चल जायेगा गीता ने मन मैं सोचा आवर उठ कर रूम की तरफ चल दी
एक घर मैं एक लड़का अभी नंगा सो रहा था आवर उसके आस पास गीता की कई सरे फोटो थी जो उसके बीएड पर बिखड़ी पड़ी थी लड़का की अचानक hi नींद खुली तो लड़का उठ कर गीता की एक फोटो को उठा कर अपने लैंड पर बड़े hi प्यार से रगने लगा जैसे की अभी उसके सामने गीता hi उसके लैंड कुश रही हो आअह्ह्ह तुम सिर्फ मेरी हो हहहहहह तुमेह कोई जुड़ा नहीं कर सकता है मुझसे लड़का बोलते हुए गीता की फोटो अपने लैंड पर खूब रगडते जा रहा था आवर गीता के बारे में सोचते हुवे वह झाड़ गया जो सारा उसके लैंड के पानी गीता के फोटो पर hi गिरा दिया लड़का जब झड़ने के बाद संत हुवा तो गीता की फोटो को चाटने लगा जो खुद hi गीता की फोटो खड़ा था जो अपने hi लैंड के पानी को चाट रहा था जैसे गीता की छूट hi चाट रहा हो जब अपने hi लैंड का सारा पानी चाट गया तो गीता की साडी फोटो बीएड पर से उठा कर अपने अलमारी मैं रख दिया आवर बाथरूम मैं चला गया बाथरूम से आने के बाद तैयार होकर अपने रूम से बहार आया तो सामने एक ोुरत की मोती गांड देख कर लड़का का दिल मचल गया मगर लड़के ने उस औरत की गांड से अपनी नज़र हटा ली कांटा नास्ता लगा दो जल्दी से लड़के के कहा आवर वही टेबल पर बैठ गया जो औरत ने जल्दी से नास्ता लगा दिया आवर लड़के के बगल मैं hi कड़ी हो गयी आवर अपनी गांड लड़के के जिसम पर hi टाच करने लगी जो लड़के की हालत ख़राब होने लगा जो लड़के ने अपनी आँखे बंद कर लिया कुछ देर के लिए फिर कुछ सोच कर hi औरत को दूर कर दिया कांटा तुम मुझे तंग मत करो अभी मेरा मुंड नहीं है आवर मुझे ऑफिस भी जाना है लड़के ने औरत से गुस्से मैं लड़के की आँखे भी लाल हो गया था जिसे औरत देख कर थोड़ी देर के लिए दर गयी थी आउट किचेन की तरफ चली गयी जो लड़का भी नास्ता कर के जल्दी से निकल गया !
वही किचेन मैं औरत अपनी आँखे बंद कर के रो रही थी जैसे उसे बहुत दुःख हुवा हो लड़के के मन करने से बाटी आज भी मैं नाकाम हो गयी तुम मुझे मनाफ़ कर देना बेटी तेरी माँ आज भी नाकाम हो गयी है आवर औरत वही किचेन मैं बैठ कर रोने लगी !
कांटा एक देहात की रहने वही है कांटा का पति दिन भर सिर्फ सरब के नशे मैं रहता है आवर कांटा को नशे मैं बहुत मरता भी था कांटा को फिर भी कांटा उसके साथ hi रहती थी अपनी एक बेटी के साथ कांटा गाँव में एक ठाकुर के घर पे नौकरानी की काम करती थी कांटा बहुत hi खूबसूरत थी आवर बहुत अच्छी भी आवर वही उसका पति कला आवर बदसूरत के साथ शराबी भी था कांटा को लड़के वाले पसंद तो कर लेते थे फिर दहेज़ की वजह से पीछे हैट जाते थे इस लिए एक सराबी से मज़बूरी मैं कांटा की माँ बाप ने शादी कर दी !
कांटा जिस ठाकुर के घर काम करती थी उसका hi ठाकुर के बेटे की नज़र कांटा पर पड़ी आवर वह कांटा की जिसम देख कर कांटा को सहर लेकर आ गया नौकरी के लिए कांटा भी अपने ठाकुर के कहने पर सहर आगयी आवर यह आकर ठुकरा के बेटे ने कांटा को जबरदस्ती छोड़ने लगा आवर कांटा कुछ नहीं कर सकती थी जो धीरे धीरे कांटा भी उसके साथ देने लगी क्यू के लड़का कांटा को बहुत पैसे भी देता था जिससे कांटा अपनी बेटी को हॉस्टल मैं पढ़ा रही थी आज भी कांटा को पैसे की ज़रूरत थी जो कांटा आज लड़के को रिझा रही थी जो उसने साफ मन कर दिया !
इधर लड़का ऑफिस मैं बैठा था तभी वह कुछ बन्दे आ गए क्या हुवा भाई आज भी तू कही गीता की याद मैं तो नहीं है न एक ने हस्ते हुवे कहा आवर दोनों बन्दे हसने लगे जो लड़का दोनों पर गुस्सा हो गया मगर चुप hi रहा दोनों कुछ देर तक लड़के से मज़ा मस्ती कर के चले गए लड़का अभी अपने ऑफिस मैं बैठा था की उसका फ़ोन बाज़ा जो लड़के ने उठा कर देखा तो उसके बॉस का फ़ोन था hello सर आज आप ने मुझे फ़ोन किया मुझे बहुत खुसी हो रही है लड़के ने कहा!
बॉस : सुधीर मैं तुमेह फिर एक मक्का दे रहा हुईं के तुम अपनी बहादुरी शाबित कर सको इस बार फ़ैल हुवे तो इस बार तुम अपने घर जा सकते हो तुम्हारा कोई जगह नहीं होगा यह पर !
सुधीर : थैंक्स सर इस बात मैं अपनी बहादुरी शाबित कर के hi रहूँगा क्या करना होगा सर !
बॉस : तुमेह कुछ नहीं करना है जो भी करेगी no 1 कर देगी तुमेह बस उसके साथ जाना है समझ गए !
सुधीर : जी सर मैं समझ गया मगर सर no 1 तो अभी बीमार है न सर फिर वह कैसे जाएगी सुधीर तो no1 को अपने साथ जाने को सुन कर hi वह बहुत खुश हो गया था फिर सुधीर को अभी झटका भी लगा की no1 इतनी जल्दी ठीक कैसे हो गयी !
बॉस : no1 बिलकुल ठीक है उसने hi फ़ोन किया था तुमेह कल hi निकलना है उसके साथ तुम तैयार रहना वह तुम्हारे घर पर आ जाएगी !
अपने बॉस के फ़ोन रखने पर लड़के के चेहरे पर एक कमीना मुस्कान आगयी एहि मक्का है सुधीर जो तू गीता को हासिल कर सकता है सुधीर के मन से आवाज़ आई जो सुधीर हसने लगा की गीता को हासिल कर लेगा उसके साथ जाकर !
गीता आज कितने दिन के बाद आज अपने घर के बहार गार्डन में निकली थी जो गीता का दिल बहुत hi खुश था गीता गार्डन मैं बैठ कर कॉफ़ी पिटे हुए ठंडी हवा की मज़ा ले रही थी गीता बेटी कैसे लग रहा है तुझे आज कितने दिन के बाद बहार आकर रागनी ने कहा गीता के बगल बैठते हुवे !
गीता : माँ मुझे बहुत ाचा लग रहा है अब मैं बिलकुल ठीक हो गयी ये सब आप की वजह से हुवा है आप अगर नहीं आती तो सायद मैं इतनी जल्दी ठीक नहीं होती !
आवर गीता रागनी के गाल पर किस कर दिया खुश होते हुवे उह मेरी बच्ची ये सब तो तेरे भाई की वजह से हुवे है बेटी मैं एक बात पुछु अगर तुझे बुरा न लगे तो रागनी ने कहा !
गीता: माँ आप क्या बोल रही हो मैं क्यू आप की बात पर गुस्सा होने लगी आप मुझसे कुछ भी पूछ सकती है बोलिये क्या जानना है आप को !
रागनी : गीता बेटी तुझे बुरा तो नहीं लगा न अपनी भाई के साथ तू समझ रही है न मैं क्या बोल रही हुईं बेटी आवर रात को क्या हुवा था तेरे साथ आवर तेरा भाई कैसे आया वह पर रागनी ने शर्मा कर कहा जो गीता भी अपनी माँ की बात समझ कर शर्मा गयी !
गीता : माँ मैं समझ गयी माँ मुझे बुरा नहीं लगा भाई के साथ मैं खुश हुईं भाई के वजह से आज मैं कितने दिन के बाद ठीक हो गयी मगर माँ कल क्या हुवा मुझे कुछ भी समझ मैं नहीं आया मुझे खिड़की के बहार से कुछ आवाज़ सुनाई दिया मैं देखने गयी तो लगा की खिड़की से अंदर आकर कुछ मुझसे टकराया आवर मुझे ठण्ड लगने लगी जो मैं वही पर कंपनी लगी फिर जब मुझे होश आया तो देखा मैं बिलकुल नंगी ज़मीन पर लेती थी कारन के साथ आवर रूम मैं पायल कड़ी थी जो मुझे बहुत सरम आ रही थी पायल के सामने माँ कारन कैसे आया मुझे नहीं पता मगर कारन के वजह से मेरी जिसम मैं गर्मी हुयी थी !
रागनी : सायद गीता बाटी कारन को तेरे दर्द का अहसास हुवा हो जो कारन तेरे पास आ गया हो
माँ कही ऐसा तो नहीं मेरी दर्द भाई को पता चल रहा है तो क्या भाई आवर मेरा जिसम एक हो गए है जो कारन को पता चल गया मेरी दर्द का गीता हरण होते हुयी कही
रागनी : बेटी मुझे भी एहि लग रहा है सायद तेरी जिसम की दर्द को कारन अहसास कर के तेरे पास आ गया हो इसका मतलब हुए के कारन आवर तेरी सम्बन्ध के कारन तुम दोनों को सकती hi नहीं मिली तुम दोनों का जिसम भी एक दूसरे से जुड़ चूका है जो बहुत अच्छा भी है हम सब के लिए ठीक है बेटी चल नास्ता करते है तू सुबह से एहि बैठी है !
गीता : माँ आप चलिए मैं अभी आयी ये क्या हो गया अब तो यकीनन hi भाई जान जायेगा मैं कौन सा काम करती हुईं आवर कल तो मुझे जाना भी है क्या इसके बारे मैं भी मेरे भाई को पता चल जायेगा गीता ने मन मैं सोचा आवर उठ कर रूम की तरफ चल दी