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बेटी क्या मैं गीता से मिल सकती हुईं गेट पर hi कड़ी रागनी ने शीतल से पूछा जो शीतल को मुस्कुराते हुवे देख कर रागनी को अजीब तो लगा मगर रागनी ने अभी शीतल पर ज्यादा धयान नहीं दिया अभी रागनी को किसी तरह गीता से मिलना था मगर अभी शीतल ने रागनी को रुकने को बोल कर जल्दी से गेट बंद कर दिया आवर जल्दी से भगति हुयी पायल के पास आ गयी जो पायल अभी भी रो hi रही थी पायल प्लीज तुम अभी के अभी रोना बंद आवर मेरी बात को धयान से अभी बहार रागनी आंटी आई है गीता से मिलने के लिए तुम सब को रट देख कर सायद उनेह अच्छा न लगे आवर सायद वह कुछ बोले hi चली जाएगी तो प्लीज पायल अभी रोना बंद करो आवर उनेह अच्छे से अंदर लेकर आओ तब तक मैं जाकर गीता को भी ये खुसखबरी दे देती हुईं वह भी खुश हो जाएगी पायल को बोल कर शीतल गीता की रूम की तरफ जल्दी चली गयी आवर पायल गेट खोलने चली गयी पायल जो अभी तो रही थी अब उसके आँखों मैं आंसू के बदले चहरे पर ख़ुशी था पायल ने गेट खोला तो रागनी अभी भी गेट पर hi कड़ी थी पायल अचानक गिराने की एक्टिंग करते हुवे रागनी के गले लग गयी पायल ने रागनी को पूरी मज़बूती से पकड़ लिया पायल को अपने बहन मैं गिरते हुवे प् कर रागनी ने भी पायल को अपने सीने से लगा ली रागनी के दिल को तो बहुत hi सकूँ मिल रहा था रागनी पायल के पीठ पर अपना हाँथ भी फेरने लगी थी पायल भी रागनी के गले लग कर उसे भी बहुत ख़ुशी हो रही थी सॉरी आंटी वह गलती से गिर गयी आप अंदर आ जाइये पायल अलग होकर रागनी को घर के अंदर आने को कहा रागनी तो अभी पायल से अलग नहीं होना चाहती थी मगर खुद hi अलग हो गयी तो रागनी भी कुछ नहीं कहा आवर पायल के साथ अंदर चली आई हॉल मैं आकर बैठ गयी !
पायल : आंटी आप एहि पे बैठिये मैं अभी कुछ खाने को लती हुईं आप के लिए
बोल कर पायल किचेन की तरफ भागी चली गयी !
तब तक शीतल जाकर गीता को बता दी थी गीता तो रूम मैं hi रह गयी क्यू गीता अभी ऊपर से निचे नहीं आ सकती थी उसे बहुत परेशां होती मगर अभी शीतल के साथ शांति भी नीच आ गयी रागनी शांति को देख कर हाँथ जोड़े दी बदले मैं शांति भी हस्ते हुवे रागनी को गले लगा ली दीदी वह गीता कहा पे है मुझे अभी कुछ बताना है उसे बाबा ने भेजा है मुझे रागनी शांति के गले लगे hi बोलने लगी मगर शांति मुस्कुरा रही थी !
शांति : ठीक है बहन रागनी गीता बेटी एहि है बैठो तुम अभी थक गयी होगी पहले कुछ खा लो फिर गीता बेटी से भी मिल लेना देखो पायल ने तुम्हारे लिए ला भी दिया खाना चलो पहले कहते है बोल कर शांति रागनी को लेकर बैठ गयी साथ मैं शीतल आवर पायल भी बैठ गयी रागनी बहुत भूखी भी थी वह रात भर चलती हुयी जंगल से भगति हुयी आई थी सहर तक रागनी खाना खा रही थी आवर शांति आवर पायल उसे कहते हुवे देख रही थी जल्दी जल्दी खाने से रागनी को खासी आ गयी जो पायल ने जल्दी से रागनी को पानी दी रागनी पानी का गिलास लेकर कर पायल को देखने लगी क्यू पानी देते समय पायल ने रागनी को माँ बोल दिया था जो रागनी का दिल ख़ुशी से मचल गया आवर रागनी की आँखें भी भर आई थी मगर रागनी ने पानी पि कर अपनी आँखों से आंसू पोछा लिया रागनी को लगा किसी ने देखा नहीं है मगर उसे क्या पता सब ने देखा था रागनी को अपने आंसू पोछते हुवे मगर कुछ बोलै hi नहीं पायल आवर शांति ने मगर पायल उठ कर किचेन की तरफ चली गयी तो रागनी भी खा कर उठ गयी ! दीदी वह मैं गीता से मिल लेती तो रागनी ने शांति से कहा जो अभी सब हॉल मैं बैठी थी फिर मुझे जाना भी है !
शांति : रागनी अब तुमेह कही जाने की कोई ज़रूरत नहीं है तुम हम्हारे साथ रह सकती हो मेरी छोटी बहन बन के तुम चाहो तो शांति ने साफ साफ बोल दिया रागनी को अपनी माँ की बात को सुन के पायल तो खुश हो गयी आवर अब रागनी की तरफ एक तक देखने लगी की वह क्या कहती है !
रागनी : दीदी मैं समझी नहीं आप कहना क्या चाहती है मैं यह किसे रह सकती हुईं रागनी की तो दिल ख़ुशी से उछाल गया था रागनी तो एहि चाहती थी की वह अपने सभी बच्चों के साथ रहे जो शांति ने बोल भी दिया मगर रागनी सोच मैं पड़े गयी के ऐसा क्यू कहा शांति दीदी ने रागनी एक तक कभी शांति तो कभी पायल आवर शीतल को देखती रही मगर कुछ बोल नहीं रही थी सच तो ये था के रागनी को ख़ुशी के मरे आवाज़ hi नहीं निकल रहा था !
शांति : रागनी क्या सोच रही हो हम सब को मालूम चल गया है तुम कौन हो आवर तुम बार बार यह क्यू आती रहती हो तुम बस ये बोलो की क्या तुम अपने बच्चों के साथ रहना चाहती हो की नहीं मुझे कोई भी परेशानी नहीं है की मेरे बच्चे तुमेह भी माँ पुकारे मैं भी तुमेह अपनी छोटी बहन की तरह प्यार करुँगी
रागनी उठ कर शांति को दीदी कहते हुवे शांति के पैरों मैं गिर गयी हआ दीदी मैं अपने बच्चों के साथ मैं रहना चाहती हुईं मैं बहुत hi तदपि हुईं अपने बच्चों के लिए मैं आप की छोटी बहन बन के रहना चाहती हुईं दीदी रागनी शांति के पैरों मैं गिर कर रट हुवे कहने लगी मगर शांति ने रागनी को उठा कर अपने गले लगा ली पायल भी दौड़े कर अपनी दोनों माँ के गले लग गयी !
शांति : है चलो अब चुप हो जाओ हमेह सब कुछ मालूम है इस लड़की की वजह से ये तुम्हारी माँ से भी मिल चुकी है वह बहुत परेशां है तुम्हारे लिए हमेह उनेह फ़ोन कर के बताना होगा तुम ठीक हो शांति ने शीतल की तरफ इशारा कर के कहा पायल भी दोनों के गले लगे ख़ुशी से उसकी आंसू निकल रहे थे तभी उनेह बहार गाड़ी की आवाज़ सुनाई दी माँ लगता है बड़ी माँ आ गयी पायल बोल के जल्दी से घर के बहार भाग गयी !
इधर नैना गाड़ी से निकल कर hi दौड़े के घर के अंदर भागी चली आ रही थी जो पायल से तकरार गयी पायल दीदी क्या हुवा है गीता दीदी को वह रो क्यू रही थी नैना पायल से टकरा कर गिर गयी मगर जल्दी hi उठ कर पायल से पोछने लगी !
पायल : गुड़िया तुझे छोट तो नहीं लगी न देखा मुझे गीता दीदी ठीक है अअअअअअअ गुड़िया तेरे पेअर काट गया है तुझे दर्द तो नहीं हो रहा है पायल दीदी मैं ठीक हुईं ये छोटी सी काट है बोल कर नैना पायल के छूट कर जल्दी से गीता के रूम की तरफ भाग गयी !
दीदी आप रो क्यू रही थी आप को कहा छोट लगी है नैना गीता के रूम मैं जाकर hi गीता से बोलने लगी गीता बस नैना को चूमते hi जा रही थी कुछ देर के बाद दोनों संत हो गयी गुड़िया तू ठीक है न मैं बस दर गयी थी मुझे कुछ नहीं हुवा है मैं ठीक हुईं !
शाम मैं शांति माया आवर काजल कोमल रूम मैं बैठी थी आवर शांति माया को रागनी के बारे मैं सब बता रही थी जो माया को यकीन तो नहीं हो रहा था लेकिन शांति की बात भी माया को यकीन करने पर मज़बूती कर रही थी छोटी अगर ये सच है तो मुझे भी कोई भी परेशानी नहीं है हमहारी परिवार मैं रागनी की भी स्वागत है वह भी यह पे रह सकती है हमहारी छोटी बहन बन के वैसे भी गीता को भी सब याद आ गया है तो हमेह मन्ना hi होगा की रागनी भी इन सब की माँ है माया ने शांति से कहा काजल आवर कोमल भी अपनी माँ रागनी की कहानी को सुन कर वह दोनों तो रो रो कर माया के गॉड मैं गिर गयी थी कुछ देर के बाद पायल ने सब को खाने को बोलने आई !
दीदी मुझे गीता बेटी से मिलना है शांति दीदी कारन नहीं दिख रहा है वह नहीं आ या क्या रागनी ने शांति से कहा
शांति : रागनी वह कारन मुस्कान के घर पे hi आज रुक गया है वह सुबह तक आ जायेगा बोल कर शांति ने रागनी को गीता के रूम मैं ले वह नैना पहले से थी रागनी नैना आवर गीता को hi देखे जा रही थी अरे अब मिल भी ले बस तू देखे hi जा रही है जा मिल ले अपनी दोनों बेटी से मैं चलती हुईं बोल कर शांति चली गयी रागनी अभी भी वही कड़ी बस दोनों को देखे hi जा रही थी रागनी का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था आवर वही हल गीता आवर नैना का भी था नैना रागनी को देख नैना का सर चकराने लगा गीता दीदी मेरा सर दुःख रहा है मैं आंटी को जब भी देखती हुईं मुझे कुछ याद आता है आवर मेरे आँखों के सामने hi कई चेहरे आने लगते है मगर दीदी मुझे वह सब चहरे धुंधली नज़र आती है दीदी ये आंटी कौन है नैना अपनी सर को पकड़े बोल रही थी रागनी नैना को अपनी गॉड मैं लेली नैना बेटी तुम जयादा मत सोचो बस तुम अभी सो जाओ आवर फिर रागनी नैना के सर दबाने लगी नैना भी कुछ hi देर मैं सो गयी रागनी के गॉड मैं रागनी नैना को सुला दी बीएड पर जो गीता भी रागनी के गॉड मैं अपना सर को रख दिया माँ आप पहले क्यू नहीं बताया की मैं आप की बेटी हुईं गीता ने रागनी से कहा !
रागनी : गीता बेटी मैं बताने वाली थी जब मुझे पता चला के तुम लोग यह पे मगर बाबा ने मुझे अभी तुम सब को बताने से मन कर दिए था आवर मैं आज यह उनके hi कहने पर आई हुईं बेटी ताकि मेरे बेटे को कुछ हो नहीं !
गीता: माँ क्या होगा मेरे कारन को भाई को माँ बाबा ने ऐसा क्यू किया आवर आज आप को क्यू बताने को यहाँ भेजा है माँ बाबा ने क्यू भेजा है आप को आवर मेरे कारन को क्या होगा बोलिये न माँ मैं कारन को कुछ नहीं होने दूंगी कौन मेरे कारन को नुकसान पहुँचाना चाहता है माँ मैं उसकी जान ले लुंगी बोलिये न मास !
रागनी : बेटी ये वही है जो इस घर मैं किसी को बीटा नहीं होने दे रहा था वह कई सल्ल से जंगल मैं शिव कर रहा था जो पूरा हो गया है वह कारन को मार कर कारन की साडी सकती उससे चिन्ना छठा है आवर बाबा ने कहा है वह बहुत सकती साली भी है वह मेरे कारन को मार भी देगा अब तुम hi अपने भाई को बचा सकती है गीता बेटी ! है माँ मैं अपने कारन भाई को कुछ नहीं होने दूंगी मैं उस ढोंगी पापी को जान से मार दूंगी अगर वह मेरे कारन के पास भी आया तो गीता की आँखे लाल होने लगी थी गीता को बहुत गुस्सा आ रहा था आवर गीता गुस्से मैं रागनी की जांघ को मसल रही थी जो रागनी को दर्द हो रहा था मगर रागनी कुछ बोल नहीं रही थी !
रागनी : बेटी तू उससे अकेली नहीं लड़ सकती है उसे तुम दोनों भाई बहन hi मिल के मार सकती हो मगर पहले तुमेह अपनी सकती हासिल करनी होगी तभी तुम दोनों उस पापी को मार पाओगी !
गीता : माँ मैं अपने भाई को बचने के लिए सकती हासिल करुँगी चाहे कितनी भी मुश्किल क्यू न हो मैं सकतिया हासिल कर के hi रहूंगी क्या करना है मुझे सकती हासिल करने के लिए माँ आप बस मुझे बता दीजिये !
रागिनी : बेटी पहले तू मुझसे वडा कर की तू कुछ भी करेगी कारन के लिए तभी hi मैं तुझे बताउंगी की शक्तियों को हासिल कैसे करना है !
माँ मैं वडा करती हुईं मैं कुछ भी करुँगी अपने भाई के लिए आवर आप को पता भी है मैं क्या कर सकती हुईं आप से बेहतर मुझे कौन जान सकता है तो आप मुझे बताइये मुझे क्या करना है !
रागनी : बेटी तुझे कारन के साथ सम्भोग करना होगा तभी तुझे आवर कारन को अपनी सकतिया मिलेगी रागनी बोल तो गयी मगर गीता का जिसम सुन पद गया
बेटी क्या मैं गीता से मिल सकती हुईं गेट पर hi कड़ी रागनी ने शीतल से पूछा जो शीतल को मुस्कुराते हुवे देख कर रागनी को अजीब तो लगा मगर रागनी ने अभी शीतल पर ज्यादा धयान नहीं दिया अभी रागनी को किसी तरह गीता से मिलना था मगर अभी शीतल ने रागनी को रुकने को बोल कर जल्दी से गेट बंद कर दिया आवर जल्दी से भगति हुयी पायल के पास आ गयी जो पायल अभी भी रो hi रही थी पायल प्लीज तुम अभी के अभी रोना बंद आवर मेरी बात को धयान से अभी बहार रागनी आंटी आई है गीता से मिलने के लिए तुम सब को रट देख कर सायद उनेह अच्छा न लगे आवर सायद वह कुछ बोले hi चली जाएगी तो प्लीज पायल अभी रोना बंद करो आवर उनेह अच्छे से अंदर लेकर आओ तब तक मैं जाकर गीता को भी ये खुसखबरी दे देती हुईं वह भी खुश हो जाएगी पायल को बोल कर शीतल गीता की रूम की तरफ जल्दी चली गयी आवर पायल गेट खोलने चली गयी पायल जो अभी तो रही थी अब उसके आँखों मैं आंसू के बदले चहरे पर ख़ुशी था पायल ने गेट खोला तो रागनी अभी भी गेट पर hi कड़ी थी पायल अचानक गिराने की एक्टिंग करते हुवे रागनी के गले लग गयी पायल ने रागनी को पूरी मज़बूती से पकड़ लिया पायल को अपने बहन मैं गिरते हुवे प् कर रागनी ने भी पायल को अपने सीने से लगा ली रागनी के दिल को तो बहुत hi सकूँ मिल रहा था रागनी पायल के पीठ पर अपना हाँथ भी फेरने लगी थी पायल भी रागनी के गले लग कर उसे भी बहुत ख़ुशी हो रही थी सॉरी आंटी वह गलती से गिर गयी आप अंदर आ जाइये पायल अलग होकर रागनी को घर के अंदर आने को कहा रागनी तो अभी पायल से अलग नहीं होना चाहती थी मगर खुद hi अलग हो गयी तो रागनी भी कुछ नहीं कहा आवर पायल के साथ अंदर चली आई हॉल मैं आकर बैठ गयी !
पायल : आंटी आप एहि पे बैठिये मैं अभी कुछ खाने को लती हुईं आप के लिए
बोल कर पायल किचेन की तरफ भागी चली गयी !
तब तक शीतल जाकर गीता को बता दी थी गीता तो रूम मैं hi रह गयी क्यू गीता अभी ऊपर से निचे नहीं आ सकती थी उसे बहुत परेशां होती मगर अभी शीतल के साथ शांति भी नीच आ गयी रागनी शांति को देख कर हाँथ जोड़े दी बदले मैं शांति भी हस्ते हुवे रागनी को गले लगा ली दीदी वह गीता कहा पे है मुझे अभी कुछ बताना है उसे बाबा ने भेजा है मुझे रागनी शांति के गले लगे hi बोलने लगी मगर शांति मुस्कुरा रही थी !
शांति : ठीक है बहन रागनी गीता बेटी एहि है बैठो तुम अभी थक गयी होगी पहले कुछ खा लो फिर गीता बेटी से भी मिल लेना देखो पायल ने तुम्हारे लिए ला भी दिया खाना चलो पहले कहते है बोल कर शांति रागनी को लेकर बैठ गयी साथ मैं शीतल आवर पायल भी बैठ गयी रागनी बहुत भूखी भी थी वह रात भर चलती हुयी जंगल से भगति हुयी आई थी सहर तक रागनी खाना खा रही थी आवर शांति आवर पायल उसे कहते हुवे देख रही थी जल्दी जल्दी खाने से रागनी को खासी आ गयी जो पायल ने जल्दी से रागनी को पानी दी रागनी पानी का गिलास लेकर कर पायल को देखने लगी क्यू पानी देते समय पायल ने रागनी को माँ बोल दिया था जो रागनी का दिल ख़ुशी से मचल गया आवर रागनी की आँखें भी भर आई थी मगर रागनी ने पानी पि कर अपनी आँखों से आंसू पोछा लिया रागनी को लगा किसी ने देखा नहीं है मगर उसे क्या पता सब ने देखा था रागनी को अपने आंसू पोछते हुवे मगर कुछ बोलै hi नहीं पायल आवर शांति ने मगर पायल उठ कर किचेन की तरफ चली गयी तो रागनी भी खा कर उठ गयी ! दीदी वह मैं गीता से मिल लेती तो रागनी ने शांति से कहा जो अभी सब हॉल मैं बैठी थी फिर मुझे जाना भी है !
शांति : रागनी अब तुमेह कही जाने की कोई ज़रूरत नहीं है तुम हम्हारे साथ रह सकती हो मेरी छोटी बहन बन के तुम चाहो तो शांति ने साफ साफ बोल दिया रागनी को अपनी माँ की बात को सुन के पायल तो खुश हो गयी आवर अब रागनी की तरफ एक तक देखने लगी की वह क्या कहती है !
रागनी : दीदी मैं समझी नहीं आप कहना क्या चाहती है मैं यह किसे रह सकती हुईं रागनी की तो दिल ख़ुशी से उछाल गया था रागनी तो एहि चाहती थी की वह अपने सभी बच्चों के साथ रहे जो शांति ने बोल भी दिया मगर रागनी सोच मैं पड़े गयी के ऐसा क्यू कहा शांति दीदी ने रागनी एक तक कभी शांति तो कभी पायल आवर शीतल को देखती रही मगर कुछ बोल नहीं रही थी सच तो ये था के रागनी को ख़ुशी के मरे आवाज़ hi नहीं निकल रहा था !
शांति : रागनी क्या सोच रही हो हम सब को मालूम चल गया है तुम कौन हो आवर तुम बार बार यह क्यू आती रहती हो तुम बस ये बोलो की क्या तुम अपने बच्चों के साथ रहना चाहती हो की नहीं मुझे कोई भी परेशानी नहीं है की मेरे बच्चे तुमेह भी माँ पुकारे मैं भी तुमेह अपनी छोटी बहन की तरह प्यार करुँगी
रागनी उठ कर शांति को दीदी कहते हुवे शांति के पैरों मैं गिर गयी हआ दीदी मैं अपने बच्चों के साथ मैं रहना चाहती हुईं मैं बहुत hi तदपि हुईं अपने बच्चों के लिए मैं आप की छोटी बहन बन के रहना चाहती हुईं दीदी रागनी शांति के पैरों मैं गिर कर रट हुवे कहने लगी मगर शांति ने रागनी को उठा कर अपने गले लगा ली पायल भी दौड़े कर अपनी दोनों माँ के गले लग गयी !
शांति : है चलो अब चुप हो जाओ हमेह सब कुछ मालूम है इस लड़की की वजह से ये तुम्हारी माँ से भी मिल चुकी है वह बहुत परेशां है तुम्हारे लिए हमेह उनेह फ़ोन कर के बताना होगा तुम ठीक हो शांति ने शीतल की तरफ इशारा कर के कहा पायल भी दोनों के गले लगे ख़ुशी से उसकी आंसू निकल रहे थे तभी उनेह बहार गाड़ी की आवाज़ सुनाई दी माँ लगता है बड़ी माँ आ गयी पायल बोल के जल्दी से घर के बहार भाग गयी !
इधर नैना गाड़ी से निकल कर hi दौड़े के घर के अंदर भागी चली आ रही थी जो पायल से तकरार गयी पायल दीदी क्या हुवा है गीता दीदी को वह रो क्यू रही थी नैना पायल से टकरा कर गिर गयी मगर जल्दी hi उठ कर पायल से पोछने लगी !
पायल : गुड़िया तुझे छोट तो नहीं लगी न देखा मुझे गीता दीदी ठीक है अअअअअअअ गुड़िया तेरे पेअर काट गया है तुझे दर्द तो नहीं हो रहा है पायल दीदी मैं ठीक हुईं ये छोटी सी काट है बोल कर नैना पायल के छूट कर जल्दी से गीता के रूम की तरफ भाग गयी !
दीदी आप रो क्यू रही थी आप को कहा छोट लगी है नैना गीता के रूम मैं जाकर hi गीता से बोलने लगी गीता बस नैना को चूमते hi जा रही थी कुछ देर के बाद दोनों संत हो गयी गुड़िया तू ठीक है न मैं बस दर गयी थी मुझे कुछ नहीं हुवा है मैं ठीक हुईं !
शाम मैं शांति माया आवर काजल कोमल रूम मैं बैठी थी आवर शांति माया को रागनी के बारे मैं सब बता रही थी जो माया को यकीन तो नहीं हो रहा था लेकिन शांति की बात भी माया को यकीन करने पर मज़बूती कर रही थी छोटी अगर ये सच है तो मुझे भी कोई भी परेशानी नहीं है हमहारी परिवार मैं रागनी की भी स्वागत है वह भी यह पे रह सकती है हमहारी छोटी बहन बन के वैसे भी गीता को भी सब याद आ गया है तो हमेह मन्ना hi होगा की रागनी भी इन सब की माँ है माया ने शांति से कहा काजल आवर कोमल भी अपनी माँ रागनी की कहानी को सुन कर वह दोनों तो रो रो कर माया के गॉड मैं गिर गयी थी कुछ देर के बाद पायल ने सब को खाने को बोलने आई !
दीदी मुझे गीता बेटी से मिलना है शांति दीदी कारन नहीं दिख रहा है वह नहीं आ या क्या रागनी ने शांति से कहा
शांति : रागनी वह कारन मुस्कान के घर पे hi आज रुक गया है वह सुबह तक आ जायेगा बोल कर शांति ने रागनी को गीता के रूम मैं ले वह नैना पहले से थी रागनी नैना आवर गीता को hi देखे जा रही थी अरे अब मिल भी ले बस तू देखे hi जा रही है जा मिल ले अपनी दोनों बेटी से मैं चलती हुईं बोल कर शांति चली गयी रागनी अभी भी वही कड़ी बस दोनों को देखे hi जा रही थी रागनी का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था आवर वही हल गीता आवर नैना का भी था नैना रागनी को देख नैना का सर चकराने लगा गीता दीदी मेरा सर दुःख रहा है मैं आंटी को जब भी देखती हुईं मुझे कुछ याद आता है आवर मेरे आँखों के सामने hi कई चेहरे आने लगते है मगर दीदी मुझे वह सब चहरे धुंधली नज़र आती है दीदी ये आंटी कौन है नैना अपनी सर को पकड़े बोल रही थी रागनी नैना को अपनी गॉड मैं लेली नैना बेटी तुम जयादा मत सोचो बस तुम अभी सो जाओ आवर फिर रागनी नैना के सर दबाने लगी नैना भी कुछ hi देर मैं सो गयी रागनी के गॉड मैं रागनी नैना को सुला दी बीएड पर जो गीता भी रागनी के गॉड मैं अपना सर को रख दिया माँ आप पहले क्यू नहीं बताया की मैं आप की बेटी हुईं गीता ने रागनी से कहा !
रागनी : गीता बेटी मैं बताने वाली थी जब मुझे पता चला के तुम लोग यह पे मगर बाबा ने मुझे अभी तुम सब को बताने से मन कर दिए था आवर मैं आज यह उनके hi कहने पर आई हुईं बेटी ताकि मेरे बेटे को कुछ हो नहीं !
गीता: माँ क्या होगा मेरे कारन को भाई को माँ बाबा ने ऐसा क्यू किया आवर आज आप को क्यू बताने को यहाँ भेजा है माँ बाबा ने क्यू भेजा है आप को आवर मेरे कारन को क्या होगा बोलिये न माँ मैं कारन को कुछ नहीं होने दूंगी कौन मेरे कारन को नुकसान पहुँचाना चाहता है माँ मैं उसकी जान ले लुंगी बोलिये न मास !
रागनी : बेटी ये वही है जो इस घर मैं किसी को बीटा नहीं होने दे रहा था वह कई सल्ल से जंगल मैं शिव कर रहा था जो पूरा हो गया है वह कारन को मार कर कारन की साडी सकती उससे चिन्ना छठा है आवर बाबा ने कहा है वह बहुत सकती साली भी है वह मेरे कारन को मार भी देगा अब तुम hi अपने भाई को बचा सकती है गीता बेटी ! है माँ मैं अपने कारन भाई को कुछ नहीं होने दूंगी मैं उस ढोंगी पापी को जान से मार दूंगी अगर वह मेरे कारन के पास भी आया तो गीता की आँखे लाल होने लगी थी गीता को बहुत गुस्सा आ रहा था आवर गीता गुस्से मैं रागनी की जांघ को मसल रही थी जो रागनी को दर्द हो रहा था मगर रागनी कुछ बोल नहीं रही थी !
रागनी : बेटी तू उससे अकेली नहीं लड़ सकती है उसे तुम दोनों भाई बहन hi मिल के मार सकती हो मगर पहले तुमेह अपनी सकती हासिल करनी होगी तभी तुम दोनों उस पापी को मार पाओगी !
गीता : माँ मैं अपने भाई को बचने के लिए सकती हासिल करुँगी चाहे कितनी भी मुश्किल क्यू न हो मैं सकतिया हासिल कर के hi रहूंगी क्या करना है मुझे सकती हासिल करने के लिए माँ आप बस मुझे बता दीजिये !
रागिनी : बेटी पहले तू मुझसे वडा कर की तू कुछ भी करेगी कारन के लिए तभी hi मैं तुझे बताउंगी की शक्तियों को हासिल कैसे करना है !
माँ मैं वडा करती हुईं मैं कुछ भी करुँगी अपने भाई के लिए आवर आप को पता भी है मैं क्या कर सकती हुईं आप से बेहतर मुझे कौन जान सकता है तो आप मुझे बताइये मुझे क्या करना है !
रागनी : बेटी तुझे कारन के साथ सम्भोग करना होगा तभी तुझे आवर कारन को अपनी सकतिया मिलेगी रागनी बोल तो गयी मगर गीता का जिसम सुन पद गया