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- Dec 5, 2013
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अपडेट 8
गीता अपने ऑफिस के गेट पे थी आवर गार्ड ने उसे गेट पे hi रोक दिया था
गीता : प्लीज मुझे अंदर जाने दीजिये मुझे नौकरी की बहुत ज़रूरत है
गार्ड : चलो मैं तुमेह अंदर जाने दूंगा तो मुझे के मिले गए
गीता के आधी नंगी चूंकि को खा जाने वाली नज़रों से घोरते हॉवे कहा
गीता : मेरे पास अभी कुछ भी नहीं है जो मैं तुमेह दे सकती हुईं मगर जब मेरी नौकरी लग जाएगी तो उसमे से कुछ पैसे मैं देती रहूंगी
गार्ड : नहीं मुझे पैसे नहीं चाहिए मुझे बस एक बार अपनी कबूतर को देखा दो
गीता को गुस्सा तो बहुत आ रहा था मगर इस वकत वह अपने गुस्से की घूंट पि रही थी
गीता : प्लीज मुझे जाने दीजिये मैं अच्छे घर की लड़की हुईं मगर अभी हम बड़ी मुसीबत मैं है मेरी माँ हॉस्पिटल मैं है आवर इलाज के लिए मुझे नौकरी करनी पड़े रही है आवर मेरी माँ के अलउआ मेरा कोई नहीं प्लीज जाने दो
गीता वह अपनी बहुत सी मज़बूरी बया गार्ड को मगर उसे कोई दया नहीं आया उसे फिर गीता वह से घर चली गयी
नैना : दीदी आप कहा गयी थी मैं कब से ढूंढ रही थी
गीता : अरे मेरी राजकुमारी मुझे क्यू ढूंढ रही थी
नैना : दीदी मैं कब से कह रही थी पायल दीदी से मुझे माँ के पास जाना है मगर वह मुझे नहीं ले जा रही है
गीता : ओह इस लिए ढूंढ रही थी चलो मैं अपनी राजकुमारी को ले चलती हुईं
फिर दुनो हॉस्पिटल के लिए निकल रहे थे तभी गीता का फ़ोन बाज़ा
hello : मुन्ना के हुवा बोलो कुछ पता चला कहा है रहीम चाचा
मुन्ना नया ड्राइवर था आवर गीता सुबह hi उसे रहीम का पता करने के लिए भेजा था
मुन्ना : जी मेम शाहब रहीम का पता चला गया है वह अभी अपने घर पे है
गीता : ठीक है मुन्ना तुम घर पे आ जाओ ..... पायल पायल
पायल : जी दीदी
गीता : अभी मुझे एक काम याद आयी है तो तुम अभी नैना को हॉस्पिटल ले जाउंगी
पायल :ठीक है दीदी
पायल के जाने के बाद गीता भी रहीम चाचा के घर पे चली गयी रहीम चाचा भी घर पे hi थे
रहीम : अरे बिटिया तुम कितनी बड़ी हो गयी हो तुम जब मेरे साथ यह आती थी तो कितना डर्टी थी आवर आज इतनी बड़ी हो गयी हो की अकेली आगयी
रहीम चाचा के आप सरब पि कर ड्राइव कर रहे थे गीता कॉफ़ी पिटे हुवे पूछा
रहीम नहीं बिटिया तुम जानती हो मैं सरब पीना तो दूर मैं देखना भी पसंद नहीं करता
गीता : तो जो रिपोर्ट विक्रम फूफा ने दिखाया वह के था आवर आप ने माँ को सचाई बताया क्यू नहीं
रहीम : बिटिया मैं नहीं चाहता की तुम्हारे परिवार वाले को कुछ हो मैंने तुम्हारा नमक खाया था आवर मेरा फ़राज़ था सचाई जानना आवर मेरा पहला साख विक्रम पे गया तब से उस पे नज़र रखने लगा
गीता : फिर भी चाचा ये बात माँ को बता सकते थे आवर के पता चला विक्रम फूफा के बारे मैं
रहीम : एक दिन बड़ी मालकिन यह आई थी मुझसे मिलाने आवर मैंने सब कुछ उनेह बताया तो वह विक्रम से पूछने की बात करने लगी तो मैंने उनेह मन कर दिया कुछ भी पूछने से क्यू एक वही था जो कंपनी का देख भल कर सकता था .....आवर विक्रम के पीछे करते ये पता चला है की विक्रम बस एक मोहरा है
गीता : मैं कुछ समझी नहीं छाछ विक्रम फूफा एक मोहरा है इस का के मतलब हुवा
रहीम : है बिटिया विक्रम ज़रूर इन सब मैं शामिल है वह भी तुम्हारी दुलत के लिए.... मगर कोई आवर है जो उस की मदद कर रहा है आवर क्यू ये मुझे पता नहीं चल रहा है
गीता : तो एक को मैं जानती हुईं छाछ जो हमारी सवालो का जवाब दे सकता है
रहीम : कौन बिटिया
गीता : मोहित
अअअअअ दीदी मैं किसी से नहीं बताऊंगा प्रॉमिस
के हुवा वीर फिर से सपना देखा जब मुस्कान आवर कारन टीवी देख रहे आवर कारन टीवी देखते hi सो गया आवर सपना देखने लगा एक लड़की की जब छिलने लगा तो मुस्कान ने पूछा
यह कारन को मुस्कान ने वीर नाम दिया है आवर स्कूल मैं भी वीर hi लिखा है
वीर : है मुस्कान वह लड़की hi है मगर अब कुछ कुछ पहले से जयादा उस का चेहरा दिख रहा है
नेक्स्ट मॉर्निंग
दीदी दीदी उठिये न आज आप को ऑफिस जाना है कोमल ने कहा
ओह है चुटी अभी टाइम के हुवा है गीता जल्दी से उठ कर बाथरूम जाती हुयी पूछा
कोमल : दीदी 7 ऍम बज रहे है
सब लोग नास्ता कर रहे थे तभी गीता का फ़ोन बजा उठ कर अपने रूम मैं जा कर बात करने लगी क्यू की ये फ़ोन रहीम का था
hello छाछ के मिल गया मोहित आप को
रहीम : है बिटिया वह अब हम्हरे कब्ज़े मैं है तुम बैश अभी अस जाओ
गीता : ठीक है चाचा अभी मैं ऑफिस जा रही हुईं ऑफिस से एते hi मैं वह आ करुँगी तब तक आप उसे जो चाहे करे सोचे जानने के लिए
गीता अपने ऑफिस के गेट पे थी आवर गार्ड ने उसे गेट पे hi रोक दिया था
गीता : प्लीज मुझे अंदर जाने दीजिये मुझे नौकरी की बहुत ज़रूरत है
गार्ड : चलो मैं तुमेह अंदर जाने दूंगा तो मुझे के मिले गए
गीता के आधी नंगी चूंकि को खा जाने वाली नज़रों से घोरते हॉवे कहा
गीता : मेरे पास अभी कुछ भी नहीं है जो मैं तुमेह दे सकती हुईं मगर जब मेरी नौकरी लग जाएगी तो उसमे से कुछ पैसे मैं देती रहूंगी
गार्ड : नहीं मुझे पैसे नहीं चाहिए मुझे बस एक बार अपनी कबूतर को देखा दो
गीता को गुस्सा तो बहुत आ रहा था मगर इस वकत वह अपने गुस्से की घूंट पि रही थी
गीता : प्लीज मुझे जाने दीजिये मैं अच्छे घर की लड़की हुईं मगर अभी हम बड़ी मुसीबत मैं है मेरी माँ हॉस्पिटल मैं है आवर इलाज के लिए मुझे नौकरी करनी पड़े रही है आवर मेरी माँ के अलउआ मेरा कोई नहीं प्लीज जाने दो
गीता वह अपनी बहुत सी मज़बूरी बया गार्ड को मगर उसे कोई दया नहीं आया उसे फिर गीता वह से घर चली गयी
नैना : दीदी आप कहा गयी थी मैं कब से ढूंढ रही थी
गीता : अरे मेरी राजकुमारी मुझे क्यू ढूंढ रही थी
नैना : दीदी मैं कब से कह रही थी पायल दीदी से मुझे माँ के पास जाना है मगर वह मुझे नहीं ले जा रही है
गीता : ओह इस लिए ढूंढ रही थी चलो मैं अपनी राजकुमारी को ले चलती हुईं
फिर दुनो हॉस्पिटल के लिए निकल रहे थे तभी गीता का फ़ोन बाज़ा
hello : मुन्ना के हुवा बोलो कुछ पता चला कहा है रहीम चाचा
मुन्ना नया ड्राइवर था आवर गीता सुबह hi उसे रहीम का पता करने के लिए भेजा था
मुन्ना : जी मेम शाहब रहीम का पता चला गया है वह अभी अपने घर पे है
गीता : ठीक है मुन्ना तुम घर पे आ जाओ ..... पायल पायल
पायल : जी दीदी
गीता : अभी मुझे एक काम याद आयी है तो तुम अभी नैना को हॉस्पिटल ले जाउंगी
पायल :ठीक है दीदी
पायल के जाने के बाद गीता भी रहीम चाचा के घर पे चली गयी रहीम चाचा भी घर पे hi थे
रहीम : अरे बिटिया तुम कितनी बड़ी हो गयी हो तुम जब मेरे साथ यह आती थी तो कितना डर्टी थी आवर आज इतनी बड़ी हो गयी हो की अकेली आगयी
रहीम चाचा के आप सरब पि कर ड्राइव कर रहे थे गीता कॉफ़ी पिटे हुवे पूछा
रहीम नहीं बिटिया तुम जानती हो मैं सरब पीना तो दूर मैं देखना भी पसंद नहीं करता
गीता : तो जो रिपोर्ट विक्रम फूफा ने दिखाया वह के था आवर आप ने माँ को सचाई बताया क्यू नहीं
रहीम : बिटिया मैं नहीं चाहता की तुम्हारे परिवार वाले को कुछ हो मैंने तुम्हारा नमक खाया था आवर मेरा फ़राज़ था सचाई जानना आवर मेरा पहला साख विक्रम पे गया तब से उस पे नज़र रखने लगा
गीता : फिर भी चाचा ये बात माँ को बता सकते थे आवर के पता चला विक्रम फूफा के बारे मैं
रहीम : एक दिन बड़ी मालकिन यह आई थी मुझसे मिलाने आवर मैंने सब कुछ उनेह बताया तो वह विक्रम से पूछने की बात करने लगी तो मैंने उनेह मन कर दिया कुछ भी पूछने से क्यू एक वही था जो कंपनी का देख भल कर सकता था .....आवर विक्रम के पीछे करते ये पता चला है की विक्रम बस एक मोहरा है
गीता : मैं कुछ समझी नहीं छाछ विक्रम फूफा एक मोहरा है इस का के मतलब हुवा
रहीम : है बिटिया विक्रम ज़रूर इन सब मैं शामिल है वह भी तुम्हारी दुलत के लिए.... मगर कोई आवर है जो उस की मदद कर रहा है आवर क्यू ये मुझे पता नहीं चल रहा है
गीता : तो एक को मैं जानती हुईं छाछ जो हमारी सवालो का जवाब दे सकता है
रहीम : कौन बिटिया
गीता : मोहित
अअअअअ दीदी मैं किसी से नहीं बताऊंगा प्रॉमिस
के हुवा वीर फिर से सपना देखा जब मुस्कान आवर कारन टीवी देख रहे आवर कारन टीवी देखते hi सो गया आवर सपना देखने लगा एक लड़की की जब छिलने लगा तो मुस्कान ने पूछा
यह कारन को मुस्कान ने वीर नाम दिया है आवर स्कूल मैं भी वीर hi लिखा है
वीर : है मुस्कान वह लड़की hi है मगर अब कुछ कुछ पहले से जयादा उस का चेहरा दिख रहा है
नेक्स्ट मॉर्निंग
दीदी दीदी उठिये न आज आप को ऑफिस जाना है कोमल ने कहा
ओह है चुटी अभी टाइम के हुवा है गीता जल्दी से उठ कर बाथरूम जाती हुयी पूछा
कोमल : दीदी 7 ऍम बज रहे है
सब लोग नास्ता कर रहे थे तभी गीता का फ़ोन बजा उठ कर अपने रूम मैं जा कर बात करने लगी क्यू की ये फ़ोन रहीम का था
hello छाछ के मिल गया मोहित आप को
रहीम : है बिटिया वह अब हम्हरे कब्ज़े मैं है तुम बैश अभी अस जाओ
गीता : ठीक है चाचा अभी मैं ऑफिस जा रही हुईं ऑफिस से एते hi मैं वह आ करुँगी तब तक आप उसे जो चाहे करे सोचे जानने के लिए