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अपडेट 18
नैना : गीता दीद के आज मैं करें भैया में साथ सोने जा रही हुईं ...
गीता : नहीं मेरी राजकुमरि मेरे साथ hi सोएगी
नैना : दीदी पहले प्रॉमिस करो आप मुझे टाच नहीं करेंगी आप सोने के बाद मेरी बूब्स को पकडती है
गीता : चल प्रॉमिस नहीं करुँगी आवर आज तो मुझे चोट भी लगी है तो तू भी आराम से सोना
शांति : बीटा पायल तुम मुस्कान को अपने साथ सोने ले जा यह सैयद अकेली इसे निनाद न आये
पायल : ठीक है माँ चलो मुस्कान मेरे रूम मैं
दीदी कितना हैंडसम हो गया है न कारन कोमल बाथ पे सोते हुवे काजल से कहा डीईई जो काजल किसी सपने मैं थी
काजल : हां चुटी मैं सून रही हुईं चिल्ला क्यू नहीं है
माया : शांति ज़रा मेरे रूम मैं आना तू ..... आज भी माया ने देखा शांति की आँख लाल है तो उसे बात करना hi सही शमझा आवर शांति कुछ hi वकत मैं माया के रूम चली गयी
माया : छोटी ये के तेरी आँखे लाल रहती है आज कल के हुवा है तुझे
शांति : दीदी पता नहीं कुछ दिन से मेरी नीचे से बहुत आग जैसी गरम रहती है कभी कभी लगता है इस मैं बेलन दाल दू दीदी प्लीज कोई दवा है तो दे दो न प्लीज वर्ण इस की गर्मी से मैं मर जाउंगी
माया : छोटी मगर तेरी अंदर इतनी गर्मी कहा से आ गयी के तो देवर जी से रोज़ करती थी के
शांति : नहीं दीदी वह तो हफ्ते मैं 1 2 दिन करते थे
माया : मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है तो कहा तो गीता से इस बारे मैं बात करूँ
शांति : नहीं दीदी गीता के सोचे जो मेरे बारे मैं की उस की आंटी बुध्दि होने में बाद भी सेक्स करना चाहती है दीदी प्लीज के आप मेरी आज भी मदद करेंगी ...... शांति बात तो कर रही थी माया से मगर उस की आँखे श्रम से मायुश थी शांति कुछ कहना तो नहीं चाहती थी मगर भीड़ भी कहा ....... आवर माया ने भी देखा शांति सोचे मैं अपनी छूट की गर्मी से दुखी है तो उसने शांति की हेल्प करना सही शमझा
अरे ये के दाल रही हो ढूढ मैं कविता जब ममता ( दादी) किचन मैं पानी पिने गयी तो देखा कविता ढूढ मैं कुछ मिला रही थी
कविता : वह वह दादी मालकिन वह ..... कविता के समझे मैं नहीं आ रहा था के जवाब दे इतने दिन से वह शांति को दवा दे रही थी मगर कभी किसी ने नहीं देखा मगर आज उसे दादी ने पकड़ लिया था
ममता : वह के कह रही है मुझे बता दूध मैं तूने के डाला है रूल्स अभी गीता को बोलती वह तुझसे पूछ लेगी geeeeeeeee.....bechari दादी अभी गीता बोल भी नहीं पायी थी कविता ने उन के सर पे मर दिया ममता वही पे गिर गयी उस के सर से खून बाह रहा था
ट्रिंग ट्रिंग ट्रिंग ..... hello मैं बोल रहा है
कविता : विकर्म मैं कविता बोल रही हुईं मुझे आज शांति मैडम के दूध मैं दवा मिलते हुवा बड़ी मालकिन ने देख लिया वह घर मैं बताने जा रही थी तो मैंने उनके सर पे मर दिया आवर वह से भाग गयी प्लीज मुझे बचा लो मैं जेल नहीं जाना चाहती
विक्रम : साली ये के कर दिया ठीक है ये नंबर पे फ़ोन कर देना वह तुझे छिपा देगा जब टेक मैं कुछ न कहु तुम वही रहना साली रंडी
इधर हरिया रम्य को बचते हुवा सहर की तरफ जा रहा था आवर इधर समशेर सिंह के आदमी राजेंदर को पकड़ लिए थे
भीमा : मालिक वह हरिया इस की बहु को ले कर भाग गया जब हम गए तो बस राजेंदर hi मिला
शमसेर : ठीक है इसे अभी मरना नहीं है इसे अभी छिपा कर रखो ये अभी हम्हरा बहुत काम करेगा
नैना : गीता दीद के आज मैं करें भैया में साथ सोने जा रही हुईं ...
गीता : नहीं मेरी राजकुमरि मेरे साथ hi सोएगी
नैना : दीदी पहले प्रॉमिस करो आप मुझे टाच नहीं करेंगी आप सोने के बाद मेरी बूब्स को पकडती है
गीता : चल प्रॉमिस नहीं करुँगी आवर आज तो मुझे चोट भी लगी है तो तू भी आराम से सोना
शांति : बीटा पायल तुम मुस्कान को अपने साथ सोने ले जा यह सैयद अकेली इसे निनाद न आये
पायल : ठीक है माँ चलो मुस्कान मेरे रूम मैं
दीदी कितना हैंडसम हो गया है न कारन कोमल बाथ पे सोते हुवे काजल से कहा डीईई जो काजल किसी सपने मैं थी
काजल : हां चुटी मैं सून रही हुईं चिल्ला क्यू नहीं है
माया : शांति ज़रा मेरे रूम मैं आना तू ..... आज भी माया ने देखा शांति की आँख लाल है तो उसे बात करना hi सही शमझा आवर शांति कुछ hi वकत मैं माया के रूम चली गयी
माया : छोटी ये के तेरी आँखे लाल रहती है आज कल के हुवा है तुझे
शांति : दीदी पता नहीं कुछ दिन से मेरी नीचे से बहुत आग जैसी गरम रहती है कभी कभी लगता है इस मैं बेलन दाल दू दीदी प्लीज कोई दवा है तो दे दो न प्लीज वर्ण इस की गर्मी से मैं मर जाउंगी
माया : छोटी मगर तेरी अंदर इतनी गर्मी कहा से आ गयी के तो देवर जी से रोज़ करती थी के
शांति : नहीं दीदी वह तो हफ्ते मैं 1 2 दिन करते थे
माया : मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है तो कहा तो गीता से इस बारे मैं बात करूँ
शांति : नहीं दीदी गीता के सोचे जो मेरे बारे मैं की उस की आंटी बुध्दि होने में बाद भी सेक्स करना चाहती है दीदी प्लीज के आप मेरी आज भी मदद करेंगी ...... शांति बात तो कर रही थी माया से मगर उस की आँखे श्रम से मायुश थी शांति कुछ कहना तो नहीं चाहती थी मगर भीड़ भी कहा ....... आवर माया ने भी देखा शांति सोचे मैं अपनी छूट की गर्मी से दुखी है तो उसने शांति की हेल्प करना सही शमझा
अरे ये के दाल रही हो ढूढ मैं कविता जब ममता ( दादी) किचन मैं पानी पिने गयी तो देखा कविता ढूढ मैं कुछ मिला रही थी
कविता : वह वह दादी मालकिन वह ..... कविता के समझे मैं नहीं आ रहा था के जवाब दे इतने दिन से वह शांति को दवा दे रही थी मगर कभी किसी ने नहीं देखा मगर आज उसे दादी ने पकड़ लिया था
ममता : वह के कह रही है मुझे बता दूध मैं तूने के डाला है रूल्स अभी गीता को बोलती वह तुझसे पूछ लेगी geeeeeeeee.....bechari दादी अभी गीता बोल भी नहीं पायी थी कविता ने उन के सर पे मर दिया ममता वही पे गिर गयी उस के सर से खून बाह रहा था
ट्रिंग ट्रिंग ट्रिंग ..... hello मैं बोल रहा है
कविता : विकर्म मैं कविता बोल रही हुईं मुझे आज शांति मैडम के दूध मैं दवा मिलते हुवा बड़ी मालकिन ने देख लिया वह घर मैं बताने जा रही थी तो मैंने उनके सर पे मर दिया आवर वह से भाग गयी प्लीज मुझे बचा लो मैं जेल नहीं जाना चाहती
विक्रम : साली ये के कर दिया ठीक है ये नंबर पे फ़ोन कर देना वह तुझे छिपा देगा जब टेक मैं कुछ न कहु तुम वही रहना साली रंडी
इधर हरिया रम्य को बचते हुवा सहर की तरफ जा रहा था आवर इधर समशेर सिंह के आदमी राजेंदर को पकड़ लिए थे
भीमा : मालिक वह हरिया इस की बहु को ले कर भाग गया जब हम गए तो बस राजेंदर hi मिला
शमसेर : ठीक है इसे अभी मरना नहीं है इसे अभी छिपा कर रखो ये अभी हम्हरा बहुत काम करेगा