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- Dec 5, 2013
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आरती खुद को hi समझा रही थी ...उसके मन में नवाज़ के लिए प्यार की कालिया फुट रही थी और उसका दिमाग ये मान नहीं रहा था.. उसी यही रति रटाई लाइन्स यद् आयी …. एवरीथिंग इस फेयर इन लव न वॉर … और एक प्यारी सी मुस्कराहट आ गयी उसके भोले मुखड़े पर …
आरती सोचने लगी ..क्या करूऊऊऊ मई बहार जाऊ kya..par अब इसने आपने बहन और जीजाजी के सामने hi फ़्लर्ट करना शुरू कर दिया तो.. नहीं नहीं आरती नवाज़ ऐसा नहीं करेगा.. क्या ऐसा नहीं करेगा.. तू जानती नहीं क्या वो कितना बत्तमीज़ है .. ये तो बत्तमीज़ो का भी लीडर है .. है भगवन बचा ले muje..aur बहार से आती उन लोगो की आवाज़ ने उसे सोच से बहार निकल दिया …
नवाज़ के जीजाजी ने कहा
शेठ जी नहीं है
बहार है
बहार कहा
पीछे के साइड
तभी नवाज़ के बहन ने कहा
मेमसाब नहीं दिख रही है
तब नवाज़ ने किचन की तरफ इशारा किया
किचन मई है क्या??
उसके बहन ने कहा
तब नवाज़ ने हाँ मई इशारा किया.. उसका पति हाल मई के तस्वीर देख रहा था तब नवाज़ के नज़दीक जेक उसके बहन ने कहा
मेमसाब अन्दर होते हुई तुम ये सब कर रहे थे भाभी के साथ
तब नवाज़ कहता है
कुछ नहीं होगा
क्या कुछ नहीं होगा
नफीसा ने गुस्से मई कहा
तू टेंशन मत ले कुछ नहीं होगा
क्या मतलब? क्या मेमसाब को पता है क्या तुम दोनों का..
तब नवाज़ कुछ नहीं बोलता
तब नफीसा फिर से कहती है.. नवाज़ कुछ नहीं बोलता तब फिर से कहती है.. तब नवाज़ कहता है..
मई कुछ नहीं कर रहा था.. उसके साथ..
तब नफीसा हस्ते हुई कहते है..
मई क्या तुजे चुटिया देखते हु..
आपने पति की तरफ देखते हुई कहते है..
मैंने देखा भाभी के तरफ तभी पता चल गया था तुम दोनों के बीच कुछ चल रहा था.. मुझे सच बता..
क्या बताना है..
नवाज़ गुस्से मई आपने बहन से कहता है..
यही की तुम दोनों का मेमसाब को पता है क्या..
मुझे नहीं मालूम
तुजे नहीं मालूम.. मतलब
उन ये पता है या नहीं.. ये मुझे नहीं मालूम ..
नफीसा कुछ कहते उससे पहले hi उसके पति ने कहा
क्या चल रहा है तुम दोनों बहन भाई का
इतने देर तक नीता का ध्यान इन् दोनों पर नहीं था.. वो निचे गर्दन करके कड़ी थी.. शर्म के मरे.. और अन्दर आरती को ज्यादा कुछ पता नहीं था.. पर उसके ऐसे कहने से उसको भी पता चला.. कुछ न कुछ ये दोनों कर रहे है.. वो सोचते है.. अब बहार जाना पड़ेगा hi..
तभी नफीसा थोड़ा पीछे हैट के कहते है..
आप को क्या करना है.. हम दोनों भाई बहन है के बीच कुछ भी चल रहा हो..
वो भी सही बात है.. मुझे क्या करना है..
तभी बहार से शेठ जी की आवाज़ आते है..
नीता कहा हो.. इधर आओ जरा..
वैसे hi नीता कहती है..
आये शेठ जी..
ऐसा कह के वो बहार चली जाते है.. तभी हाल के दूर पाई शेठ जी आते है.. और उन्दोनो को देखते हुई कहते है..
तुम दोनों कब आये
तब नफीसा का पति कहता है
आदाब मालिक..
आदाब आदाब
अभी आया था… 5 मिनट पहले..
ठीक है.. तुम दोनों रुको.. मई आता हु अभी
जी मालिक
फिर शेठ जी कहते है
आरती बीटा
किचन से आरती कहते है
जी पापाजी
इन् लोंगो को पानी देदो
जी पापाजी
और शेठ जी चले जाते hai..uske ससुर ने पानी देने को बोलै tha…Isliye कुछ सोचकर वो एक ट्रे मई तीन गिलास पानी रख कर कंपते दिल के साथ बहार जाने लगी .. उसकी नज़र सिर्फ और सिर्फ नवाज़ के बहन और जीजाजी पर thi..wo नवाज़ को देखना नहीं चाहती thi..wo बस दुआ कर रही थी की नवाज़ कुछ गलत न करदे वो भी उसके बहन और जीजाजी के samne….aur वो कंपते हाथो से ट्रे को पहले नवाज़ के जीजाजी के सामने ले गयी.. फिर उसके बहन के सामने.. उन्दोनो ने पानी का गिलास उठाया.. आखरी मई नवाज़ के सामने गयी..
वो नवाज़ को पानी देके अंदर जाने वाली थी .. वो नवाज़ के सामने जेक कड़ी हो गयी और अपनी नज़रे निचे ज़ुका ली.. वो चाहती नवाज़ पानी का गिलास जल्दी से उठा ले और अन्दर जल्दी से चली जय.. पर ऐसा कुछ नहीं हुआ.. नवाज़ ने पानी का गिलास नहीं उठाया और उसको देखते रह गया..
आरती न चाहते हुए भी वह रुकी और नज़रे निचे ज़ुका ली तब नवाज़ ने उसे देख कर कहा..
नमस्ते मेमसाब जी .. कैसी ho….lagta है मेरे बहन और जीजाजी के वजह से आपको तकलीफ हुई …
आरती ने उसे देखा और मैं में सोचने लगी .. कितना बड़ा नाटकबाज़ है ये ऐसा नमस्ते कर रहा है जैसे पहले बार मिल रहा है ….और न चाहते हुए भी आरती की मुँह से निकल गया ..
नमस्ते ..
तभी उसके बहन ने कहा
हाँ हमारे वजह से मेमसाब आप को तकलीफ हुई..
तभी उसके पति ने कहा
हाँ न.. खेमका.. मालिक ने हमारे लिए पानी लेन को कहा..
तब आरती ने कहा
ऐसे कोई बात नहीं है
तब नवाज़ कहता है
ये मेरे बड़ी बहन नफीसा है
तब नफीसा उसे कहते है..
आदाब मेमसाब.. हम आप के फैक्ट्री मई काम करते है..
जी.. आदाब..
आरती ने जवाब दिया..
नवाज़ उसकी और देखते हुई कहता है..
ये हमारे जीजै है.. सैफू जीजाजी..
तब सैफू कहता है..
आदाब मेमसाब..
और आदाब करने लगा.. आरती ने भी आदाब कहा.. तब नफीसा कहती है..
ये कारगर है.. फर्नीचर का काम करते है..
जी
ऐसा आरती कहते है..
नफीसा - खेमका हमारे वजह से आप को..
उसकी बात पूरी होने से पहले hi आरती कहते है..
नहीं नहीं ऐसे कोई बात नहीं है.. घर आये मेहमान की तो खातिरदारी करने hi पड़ती और आप तो नवाज़ के घर के लोग है तो आप की खातिरदारी करने मई कैसे तकलीफ..
ऐसा कह के नवाज़ की और देखने लगी.. तब नफीसा उसके हाथ मई का ट्रे लेते हुई कहते है..
मुझे दीजिये.. मई करती हु..
तब आरती कहते है..
नहीं नहीं आप को कैसे करने दे.. आप तो नवाज़ की बहन है.. हमारी गेस्ट है.. आप की तो अच्छे से मेहमान नवाज़ी करने पड़ेगे न हमें
ऐसा कह के ट्रे मई का गिलास उतके नवाज़ के हाट मई देते है..
और वो मुद के किचन तरफ जाने लगी और जाते वक़्त उसने फिर एक बार मुद के नवाज़ को देखा तो वो उसके बहा के साथ बात कर रहा था …
आरती किचन में आके थोड़ी रिलैक्स हो गयी क्यों की नवाज़ ने नहीं उसे गन्दी नाज़ा से देखा और नहीं उसके साथ कोई फ़्लर्ट करने की कोशिश ki..isliye वो थोड़ी खुश हुई… उसे लगा नवाज़ आपने बहन या जीजाजी से डरता है या उनके सामने ये कुछ नहीं करना चाहता है.. ये साब सोच कर आरती कुश हो गयी.. वो सोचने लगी काम से काम इन् लोंगो के होते हुई नवाज़ कुछ नहीं करेगा.. पहले तो नवाज़ के बहन और जीजाजी का आना उसे अच्छा नहीं लग रहा था पर अब उसे अच्छा लग रहा था..
इधर नफीसा नवाज़ को कहते है
ऐसा क्यों कहा इसने
मुझे क्या पता
हम नौकर है.. फिर मेहमान कैसे हुई
किचन मई जा और पूछ ले उनसे..
तब नफीसा नवाज़ की तरफ देखने लगे.. शक की निघाओ से..
तू…
तब नवाज़ गुस्से मई कहता है..
मई क्या.. शक मत कर..
तू शक करने पाई मज़बूर मत कर..
ऐसा कुछ नहीं करूँगा मई
पक्का न..
हाँ.. वैसे तुम लोग यहाँ हवेली मई कैसे..
पता नहीं शेठ जी ने बुलाया है..
ऐसा क्या..
हाँ मेरे भैया
ठीक है..
क्या.. हमरे आने से डिसट्रब हुआ
अब डिस्टर्ब किया है तो अब तुम्हारे कहने से क्या होगा..
अच्छा.. मुझे लगा hi था.. इसलिए खेत से इधर आया..
आया नहीं शेठ ने बुलाया है
अच्छा..
आरती सोचने लगी ..क्या करूऊऊऊ मई बहार जाऊ kya..par अब इसने आपने बहन और जीजाजी के सामने hi फ़्लर्ट करना शुरू कर दिया तो.. नहीं नहीं आरती नवाज़ ऐसा नहीं करेगा.. क्या ऐसा नहीं करेगा.. तू जानती नहीं क्या वो कितना बत्तमीज़ है .. ये तो बत्तमीज़ो का भी लीडर है .. है भगवन बचा ले muje..aur बहार से आती उन लोगो की आवाज़ ने उसे सोच से बहार निकल दिया …
नवाज़ के जीजाजी ने कहा
शेठ जी नहीं है
बहार है
बहार कहा
पीछे के साइड
तभी नवाज़ के बहन ने कहा
मेमसाब नहीं दिख रही है
तब नवाज़ ने किचन की तरफ इशारा किया
किचन मई है क्या??
उसके बहन ने कहा
तब नवाज़ ने हाँ मई इशारा किया.. उसका पति हाल मई के तस्वीर देख रहा था तब नवाज़ के नज़दीक जेक उसके बहन ने कहा
मेमसाब अन्दर होते हुई तुम ये सब कर रहे थे भाभी के साथ
तब नवाज़ कहता है
कुछ नहीं होगा
क्या कुछ नहीं होगा
नफीसा ने गुस्से मई कहा
तू टेंशन मत ले कुछ नहीं होगा
क्या मतलब? क्या मेमसाब को पता है क्या तुम दोनों का..
तब नवाज़ कुछ नहीं बोलता
तब नफीसा फिर से कहती है.. नवाज़ कुछ नहीं बोलता तब फिर से कहती है.. तब नवाज़ कहता है..
मई कुछ नहीं कर रहा था.. उसके साथ..
तब नफीसा हस्ते हुई कहते है..
मई क्या तुजे चुटिया देखते हु..
आपने पति की तरफ देखते हुई कहते है..
मैंने देखा भाभी के तरफ तभी पता चल गया था तुम दोनों के बीच कुछ चल रहा था.. मुझे सच बता..
क्या बताना है..
नवाज़ गुस्से मई आपने बहन से कहता है..
यही की तुम दोनों का मेमसाब को पता है क्या..
मुझे नहीं मालूम
तुजे नहीं मालूम.. मतलब
उन ये पता है या नहीं.. ये मुझे नहीं मालूम ..
नफीसा कुछ कहते उससे पहले hi उसके पति ने कहा
क्या चल रहा है तुम दोनों बहन भाई का
इतने देर तक नीता का ध्यान इन् दोनों पर नहीं था.. वो निचे गर्दन करके कड़ी थी.. शर्म के मरे.. और अन्दर आरती को ज्यादा कुछ पता नहीं था.. पर उसके ऐसे कहने से उसको भी पता चला.. कुछ न कुछ ये दोनों कर रहे है.. वो सोचते है.. अब बहार जाना पड़ेगा hi..
तभी नफीसा थोड़ा पीछे हैट के कहते है..
आप को क्या करना है.. हम दोनों भाई बहन है के बीच कुछ भी चल रहा हो..
वो भी सही बात है.. मुझे क्या करना है..
तभी बहार से शेठ जी की आवाज़ आते है..
नीता कहा हो.. इधर आओ जरा..
वैसे hi नीता कहती है..
आये शेठ जी..
ऐसा कह के वो बहार चली जाते है.. तभी हाल के दूर पाई शेठ जी आते है.. और उन्दोनो को देखते हुई कहते है..
तुम दोनों कब आये
तब नफीसा का पति कहता है
आदाब मालिक..
आदाब आदाब
अभी आया था… 5 मिनट पहले..
ठीक है.. तुम दोनों रुको.. मई आता हु अभी
जी मालिक
फिर शेठ जी कहते है
आरती बीटा
किचन से आरती कहते है
जी पापाजी
इन् लोंगो को पानी देदो
जी पापाजी
और शेठ जी चले जाते hai..uske ससुर ने पानी देने को बोलै tha…Isliye कुछ सोचकर वो एक ट्रे मई तीन गिलास पानी रख कर कंपते दिल के साथ बहार जाने लगी .. उसकी नज़र सिर्फ और सिर्फ नवाज़ के बहन और जीजाजी पर thi..wo नवाज़ को देखना नहीं चाहती thi..wo बस दुआ कर रही थी की नवाज़ कुछ गलत न करदे वो भी उसके बहन और जीजाजी के samne….aur वो कंपते हाथो से ट्रे को पहले नवाज़ के जीजाजी के सामने ले गयी.. फिर उसके बहन के सामने.. उन्दोनो ने पानी का गिलास उठाया.. आखरी मई नवाज़ के सामने गयी..
वो नवाज़ को पानी देके अंदर जाने वाली थी .. वो नवाज़ के सामने जेक कड़ी हो गयी और अपनी नज़रे निचे ज़ुका ली.. वो चाहती नवाज़ पानी का गिलास जल्दी से उठा ले और अन्दर जल्दी से चली जय.. पर ऐसा कुछ नहीं हुआ.. नवाज़ ने पानी का गिलास नहीं उठाया और उसको देखते रह गया..
आरती न चाहते हुए भी वह रुकी और नज़रे निचे ज़ुका ली तब नवाज़ ने उसे देख कर कहा..
नमस्ते मेमसाब जी .. कैसी ho….lagta है मेरे बहन और जीजाजी के वजह से आपको तकलीफ हुई …
आरती ने उसे देखा और मैं में सोचने लगी .. कितना बड़ा नाटकबाज़ है ये ऐसा नमस्ते कर रहा है जैसे पहले बार मिल रहा है ….और न चाहते हुए भी आरती की मुँह से निकल गया ..
नमस्ते ..
तभी उसके बहन ने कहा
हाँ हमारे वजह से मेमसाब आप को तकलीफ हुई..
तभी उसके पति ने कहा
हाँ न.. खेमका.. मालिक ने हमारे लिए पानी लेन को कहा..
तब आरती ने कहा
ऐसे कोई बात नहीं है
तब नवाज़ कहता है
ये मेरे बड़ी बहन नफीसा है
तब नफीसा उसे कहते है..
आदाब मेमसाब.. हम आप के फैक्ट्री मई काम करते है..
जी.. आदाब..
आरती ने जवाब दिया..
नवाज़ उसकी और देखते हुई कहता है..
ये हमारे जीजै है.. सैफू जीजाजी..
तब सैफू कहता है..
आदाब मेमसाब..
और आदाब करने लगा.. आरती ने भी आदाब कहा.. तब नफीसा कहती है..
ये कारगर है.. फर्नीचर का काम करते है..
जी
ऐसा आरती कहते है..
नफीसा - खेमका हमारे वजह से आप को..
उसकी बात पूरी होने से पहले hi आरती कहते है..
नहीं नहीं ऐसे कोई बात नहीं है.. घर आये मेहमान की तो खातिरदारी करने hi पड़ती और आप तो नवाज़ के घर के लोग है तो आप की खातिरदारी करने मई कैसे तकलीफ..
ऐसा कह के नवाज़ की और देखने लगी.. तब नफीसा उसके हाथ मई का ट्रे लेते हुई कहते है..
मुझे दीजिये.. मई करती हु..
तब आरती कहते है..
नहीं नहीं आप को कैसे करने दे.. आप तो नवाज़ की बहन है.. हमारी गेस्ट है.. आप की तो अच्छे से मेहमान नवाज़ी करने पड़ेगे न हमें
ऐसा कह के ट्रे मई का गिलास उतके नवाज़ के हाट मई देते है..
और वो मुद के किचन तरफ जाने लगी और जाते वक़्त उसने फिर एक बार मुद के नवाज़ को देखा तो वो उसके बहा के साथ बात कर रहा था …
आरती किचन में आके थोड़ी रिलैक्स हो गयी क्यों की नवाज़ ने नहीं उसे गन्दी नाज़ा से देखा और नहीं उसके साथ कोई फ़्लर्ट करने की कोशिश ki..isliye वो थोड़ी खुश हुई… उसे लगा नवाज़ आपने बहन या जीजाजी से डरता है या उनके सामने ये कुछ नहीं करना चाहता है.. ये साब सोच कर आरती कुश हो गयी.. वो सोचने लगी काम से काम इन् लोंगो के होते हुई नवाज़ कुछ नहीं करेगा.. पहले तो नवाज़ के बहन और जीजाजी का आना उसे अच्छा नहीं लग रहा था पर अब उसे अच्छा लग रहा था..
इधर नफीसा नवाज़ को कहते है
ऐसा क्यों कहा इसने
मुझे क्या पता
हम नौकर है.. फिर मेहमान कैसे हुई
किचन मई जा और पूछ ले उनसे..
तब नफीसा नवाज़ की तरफ देखने लगे.. शक की निघाओ से..
तू…
तब नवाज़ गुस्से मई कहता है..
मई क्या.. शक मत कर..
तू शक करने पाई मज़बूर मत कर..
ऐसा कुछ नहीं करूँगा मई
पक्का न..
हाँ.. वैसे तुम लोग यहाँ हवेली मई कैसे..
पता नहीं शेठ जी ने बुलाया है..
ऐसा क्या..
हाँ मेरे भैया
ठीक है..
क्या.. हमरे आने से डिसट्रब हुआ
अब डिस्टर्ब किया है तो अब तुम्हारे कहने से क्या होगा..
अच्छा.. मुझे लगा hi था.. इसलिए खेत से इधर आया..
आया नहीं शेठ ने बुलाया है
अच्छा..