KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION - Page 18 - SexBaba
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KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION

ऐसा कह के आरती उसको दवा दिखा देती है .. तब सरिता आरती को दवा के बारे मई सब बता देती है और कहते है..

सर को होश मई आने मई और 2-3 घंटे लगेंगे.. मई अब निकलते हु..

ऐसा कह के नवाज़ को गुस्से से देखते हुई वह से चली जाती है..

नवाज़ सरिता के ऐसे बर्ताव के कारन खुश नहीं था .. अब उसे ाचा नहीं लग रहा tha..idhar आरती भी ये सोच कर खुश थी की सरिता ने उसे भाव नहीं diya.jate टाइम सरिता ने उसे देखा तक नहीं.. अब नवाज़ का मु देखने लायक tha...idhar नवाज़ सरिता के पास आने पर खुश था.. उसे लगने लगा था की सरिता उस के निचे ाअब आ जाएगी ...वो सरिता को पहले भोगने की सोचता है.. और बाद में घर जाने के बाद आरती को पटाने की सोचता hai..par सरिता ने उसके इस ख्याल पर सब पानी फेर दिया था.. वो वही सोच मई था.. तभी आरती उसे कहते है

क्या हुआ नवाज़ तुम इतने उदास कियो हो किसी ने कुछ कहा क्या..

मुझे कोई कुछ कोयन कहेगा.. बस तोड़ा सर दर्द है..

गोली दू क्या..

दे दीजिये.. अब गोली से hi काम चलना पड़ेगा..

तब स्माइल करते हुई आरती नवाज़ को गोली देते है ..

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और नवाज़ वो गोली खा लेता है.. तब आरती कहती है..

वो तुम्हारे माशूका के लिए कुछ शॉपिंग करनी है.. पापाजी सो रहे है तब तक जेक आते है..

हाँ चलिए मेमसाब

चलो..

तो बताओ… शहर के कोनसे साइड नीता ने बताया हुआ मटेरियल मिलेगा

मुझे क्या पता

आप को नहीं पता

नहीं

बच्ची नहीं हो आप मेमसाब

तुम भी कोनसे बच्चे हो नवाज़.. और तुमने नीता को पहले चीज़े दिलाये होगी न

उसकी और देखते हुई आरती कहते है ..

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हाँ दिलाये है

मुझे पता था

मुझे एक जगह पता है पर

पर क्या

पर वह कार से जाना बहुत मुश्किल है

मतलब

कार से नहीं जा सकते.. छोटे छोटे रोड है.. रोड पाई hi ठेला दाल के लोग बैठे हुई रहते है..

फिर जायेंगे कैसे

बाइक से

अब यहाँ बाइक कहा से लाये..

हाँ…

करो कुछ.. मेरा कुछ नहीं पर तेरे माशूका तेरा दीमक खायेगे.. मई तो कह दंगे तेरा आशिक़ मुझे लेके नहीं गया ..

तब नवाज़ स्माइल करता है..

मई आता हु ऐसा कह के वह से चला जाता है और कुछ 10-15 मं बाद आके नवाज़ आरती को कहता है

चलिए मेमसाब

बाइक मिल गए

हाँ

तब उसकी और देखते हुई कहती है..

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मुझे पता था तुम कहा न कहा से जुगाड़ कर के बाइक लाओगे

मेमसाब चलिए चलते है..

चलो .. एक मिनट मई बाथरूम से आती हु..

बाथरूम मई जाने के बाद वो आईने के सामने कड़ी हो जाती है.. फिर वो अपने बालो को खुला चोर देती hai..apni साड़ी का पल्लू वो खुला चोर देती hai..aur पल्लू भी बूब्स के साइड से hi लेती hai..fir वो आपने पर्स से सामान निकल कर हल्का सा मेकअप करती है.. अब वो रेड्डी होकर अपने आप को आईने में देखती है..

तो खुद को देख कर शर्मा जाती है…

फिर बहार आकर कहती है

चलो

उसे देखकर नवाज़ कुश हो जाता hai..aur उसको hi देखते रहता है..

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अब आरती नवाज़ के साथ लिफ्ट से ग्राउंड फ्लोर पर आके बाइक के पास पहुँच गयी थी ..निचे आते हुई एक उल्जन थी उसके मन मई.. उल्जन में hi चलते हुए वो निचे आ गयी थी.. जब वो निचे पहुंची तो वो निचे का जायजा लेने लगी..

उसके चहरे पर मायूसी थी पर जब नवाज़ ने उसको देखा तब आरती उसकी और देख कर वो मुस्कुरायी.. अब नवाज़ बाइक पाई बैठ गया था .. पर आरती नहीं बैठे थी अब तक .. आरती बड़े गौर से नवाज़ को देखती है ..तब नवाज़ आरती की तरफ देखता है..

memsaheb....kya हुआ आपको..

तब आरती अपनी नज़ारे नीचे की तरफ झुकाये बस वह कड़ी रहती है .....पर कोई जवाब नहीं देती है ...... आरती के मुन्न में क्या चल रहा था .. उसके बारे मई नवाज़ को कुछ पता नहीं चल रहा था ......तब नवाज़ फिर से कहता है..

नहीं चलना है क्या मेमसाब

तब आरती उसके पीछे एक साइड से बैठ गयी.. उसने सदी पहने थी इस वजह से.. आरती बैठते hi नवाज़ निकल पड़ा..

वैसे आप क्या सोच रही थी मेमसाब

नवाज़ इस शहर मई मेरे ससुर जी के मतलब पापाजी के और अरविन्द जी की बहुत पाचन है.. और मई कॉलेज मई यही पड़ी हु तो मुझे भी बहुत लोग जानते है.. और यहाँ तेरे साथ मई खुले मई बाइक पाई जाउंगी तो मेरे लिए मुश्किल बन जायेगी

आप चिंता मत करो. ..

चिंता न कैसे करू.. किसी ने देख लिया तो..

कोण देखेगा..

कोई भी.. बहुत सरे रिश्तेदार है मेरे यहाँ

नवाज़ हस्ते हुई कहता है

फिर मास्क लेक देता हु आपको

देखो नवाज़ किसी ने देख लिया तो बड़ा खतरनाक हो सकता है.. मेरे रिश्तेदार जितने संस्कारी है उतने hi खतरनाक भी है .. पैसे वाले है.. मुझे डर है. .. मेरे साथ तुम देखकर कहीं तुम कोई नुकसान न पहुंचा दे

नवाज़ को कोई कुछ नहीं कर सकता है.. उसको हानि पहुँचानेवाला अभी पैदा hi नहीं हुआ है .. कहा न आप चिंता मत करो..

लग रहा है ज्यादा पिक्चर देखते हो

हाँ

फेवरेट हीरो कोण है

हीरो नहीं विल्लिअन पसंद है आपुन को

इसलिए तो विलन वाले काम करते हो

और हँसाने लगी.

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आप कुछ भी कहो.. आपुन को विलन hi पसंद है..

कोनसा विलन पसंद है

शक्ति कपूर.. आओ.. ललिता..

तब आरती हस्ते हुई कहते है

इसलिए शक्ति कपूर वाले काम करते हो

ऐसा hi कुछ

तब गद्दा सामने आते hi वो ब्रेक दबा देता है.. वैसे hi आरती उसको चिपक जाती है..

अह्ह्ह..

ोूहो मेरी मेमसाब मज़े ले रही है..

नवाज़ हस्ता हुआ बाइक आगे बढ़ाने लगा..

तब आरती नवाज़ की पीठ पर एक धप्प मारती है.

कैसे मज़े…

जो मज़े एक लड़के एक लड़के के साथ लेते है.

न hi मई वो लड़की हु और न hi तुम वो लड़का हो.. और मई ऐसा कुछ करने देने वाली भी नहीं हों.. समझे तुम..

मुझे तो मिल रहे है ..😂🤣

तुम तो मिलेंगे hi न.. तुम तो इसमे माहिर हो..

माहिर…

हाँ

माहिर से एक बाद याद आयी मेमसाब

क्या??

बिना सोचे आरती ने झट से कहा

आप को पता है क्या मैंने एक दिन मई दो लड़के से मज़े किये थे.

मुझे कैसे पता होगा

मई बता रहा हु.. मज़े मतलब उसके शरीर के साथ खेला हु..

तब बाइक झटका खा gai…aur बाइक के साथ आरती भी झटका खा गयी.. 2-3 बार उसके मम्मी ने नवाज़ के पिट को धक्का दिया..

गिर न पडूँ मई ..

नवाज़ ने तब बाइक रोड किनारे रोक दी..

पीची मुद के आरती को देखा और बोलै -

क्या हुआ ??

आरती घबराकर कहती है..

ये तुम कैसे बाइक चला रहे हो..

आप चिंता मत karo...aab ठीक से चलाऊंगा..

और ये क्या कह रहे हो तुम

क्यों बुरा लगा क्या

बुरा लगने वाली बात है तो बुरा लगेगा hi न. .

ऐसा कह के वो मैं मई कहते है..

नवाज़ कैसे बेशरमी से मेरे सामने ऐसी बातें कर रहा है . एक तो मई उससे बड़ी हु.. दूसरे मई उसकी मालकिन.. वो मुझे मेमसाब कहता है... कैसे वो मेरे साथ ऐसे बाते कर सकता है और मई कैसे ऐसी बाते सुन रही हु.. .

तब वो झट से कहती है..

नवाज़ तुम बाइक मार्किट मई लेलो.. हम नीता के चीज़े लेके जल्दी से वापिस हॉस्पिटल चलते है..

ठीक है मेमसाब
 
बुरा लगने वाली बात है तो बुरा लगेगा hi न. .

ऐसा कह के वो मैं मई कहते है..

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नवाज़ कैसे बेशरमी से मेरे सामने ऐसी बातें कर रहा है . एक तो मई उससे बड़ी हु.. दूसरे मई उसकी मालकिन.. वो मुझे मेमसाब कहता है... कैसे वो मेरे साथ ऐसे बाते कर सकता है और मई कैसे ऐसी बाते सुन रही हु.. .

तब वो झट से कहती है..

नवाज़ तुम बाइक मार्किट मई लेलो.. हम नीता के चीज़े लेके जल्दी से वापिस हॉस्पिटल चलते है..

ठीक है मेमसाब

फिर वो दोनों चुपचाप मार्किट जाते है.. नीता ने जैसा बोलै था वैसे उसके लिए आरती सामान लेते है.. 2-3 बार नवाज़ बात करने का तरय करता है पर आरती ज्यादा रिस्पांस नहीं देती.. फिर वो सामान लेके हॉस्पिटल आ जाते है.. उनके आने तक शेठ जी को होश आ गया था.. फिर वो तीनो घर चले जाते है.. साथ मई शेठ जी थे इस वजह से दोनों ने एकदूसरे से बात नहीं की.. घर आने के बाद नवाज़ ने शेठ जी को उनके रूम मई पहुंचा दिया और आरती गयी आपने रूम मई..

फ्रेश होकर कुछ देर उसने आराम किया.. फिर बहार आके नीता के लिए उसने जो शॉपिंग आरती ने की थी वो सामान उसे देती है.. वो देख कर नीता ख़ुशी से चहक उठती हैं वहीँ आरती के चेहरे पर भी एक अजीब सी मुस्कान आ जाती हैं.......... फिर वो आपने बैडरूम मई जेक नीता और नवाज़ के बारे मई सोचने लगी..

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अब श्याम हो गयी थी.. आरती किचन मई कुछ काम कर रही थी.. वह नीता आ जाती है.

दीदी मेरा काम हो गया है में जा रही हु..

ठीक है तुम चली जाओ..

क्या हुआ दीदी जी आप इतनी उदास कियो हो किसी ने कुछ कहा क्या..

मुझे कोई कुछ क्यों कहेगा..

फिर नवाज़ ने कुछ कहा क्या

तब उसकी और बड़े आचार्य से देखते हुई कहते है

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वो भला मुझे क्यों कुछ कहेगा.. वो तो तेरा आशिक़ है.. मेरा नहीं.. तुजे hi कहेगा.. मुझे नहीं

वो बात भी सही है .. पर मुझे आप का चेहरा थोड़ा उदास लगा..

कुछ नहीं बस थोड़ा सर दर्द है..

अरे दीदी बोलना था न लाओ मई आप का सर दबा देती हु..

अरे नहीं .. कोई जरुरत नहीं है वो बस ऐसे hi ठीक हो जायेगा..

अरे सरदर्द है.. ऐसे hi थोड़ा ठीक हो जायेगा.. अरे लाओ दीदी जी सर दबा देती हु.. ज्यादा टाइम तोड़ी न लगेगा…

ऐसा कह के नीता आरती का सर दबा ने लगती है..

दीदी एक बात पुछु आप से..

है पूछो …

दीदी आप साहब से बहुत प्यार करते हो लेकिन कभी किसी और मर्द ने आप को देखा hai..matlab क्या कभी किसी ने आप को छुआ है…

ये क्या सवाल है..

अरे बताइये न दीदी ji..suna है पति के अलावा किसी और ने छुआ तो बहुत मज़ा अत है…

तू कैसे पागल औरत है पति के होते हुई कोई किसी और के साथ ये सब क्यों करेगा ..

अरे दीदी जी मेरे एक सहेली कह रही थी जब और किसी का वो अपनी उस मई टच होता है... क्या बताऊ कितना मज़ा अत hai..hum तो कही और hi खोने लगते है..

लग रहा है तू और तेरी सहेली पूरी पागल हो गयी है .. पता नहीं क्या क्या अजीब बाटे कर रही है…

दीदी जी आप मेरे मेमसाब हो.. दीदी हो.. और दोस्त भी ho..to दोस्त से ऐसी बाटे तो की जा सकती है.. अब आप बताइये क्या आप मेरी सहेली नहीं हो…

वो तो हु.. लेकिन ऐसी बाटे..

हाँ.. ऐसे बाते दोस्ती मई चलती है न..

ठीक है

बताइये न फिर ऐसा हुआ था क्या आप के sath..kisi ने चुवा था क्या आप को साहब के अलावा..

नीता ने ऐसे कहते hi आरती को नवाज़ की याद आ गयी.. जब उसने हॉस्पिटल मई आरती को चुवा था... उस के मन में बहुत खुश चलने लगता है…

क्या हुआ दीदी जी.. किसी की याद आ गयी क्या..

नीता ने अब डायरेक्ट पूछ लिया ..

तब आरती कुछ नहीं खट्टी पर उसकी और देखने लगी..

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बताओ न दीदी जी ऐसा कुछ हुआ था क्या ..

ऐसा कुछ नहीं हुआ था न करने का मूड है..

वैसे आप इतनी सुन्दर हो ... मई ये बात तो नहीं मन सकती की ऐसा कुछ नहीं हुआ होगा.. कभी तो ऐसा कुछ हुआ होगा..

भले आप मत बताइये लेकिन एक बार सोचिये तो जब किसी ने आप को छुआ हो तो कितना ाचा लगा होगा आप को...

नीता के ऐसे कहते hi आरती नवाज़ को यद् करती है.. उस के बदन में सनसनी सी दौड़ने लगती है.. ऊपर से ये चुने की बात नीता कर रही thi…baar बार पूछ रही थी.. इस वजह से आरती को अजीब बेचैनी होने लगती है..

क्यों दीदी जी आप तो सोच में दुब गयी.. जरूर कुछ ऐसा हुआ होगा आप के साथ ..मस्त फिलिंग आयी होगी न आप को...

नहीं

जब मुझे किसी ने छुआ था तो मुझे भी ऐसा कुछ हुआ tha..aisa लगता था की वो मुझे पलंग पर ले जाये और मुझे बहुत प्यार करे..

क्या बोल रही है tu..nawaz के होते हुई तू और किसी के साथ

आप को क्या लगता है नवाज़ मेरे अलावा किसी और के बारे मई ऐसा कुछ सोचता नहीं होगा क्या

तब आरती कुछ सोच कर कहते है

चल अब जा तू.. कल सुबह को जल्दी आना..

तब नीता मुस्कुराते हुई कहते है ...

है है दीदी जी जा रही hu..par कल आप से जवाब लेकर rahugi..pakka कुछ तो है...

तब शरमाते हुई स्माइल करती है आरती..

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पागल है तू.. जा अब मुझे परेशां मत कर....

नीता अब चली जाती है.. लेकिन आरती के मन में आपने बातो से ढेर सरे तूफान ला देती है..

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और आरती वही सोचती रहती है..
 
नीता अब चली जाती है.. लेकिन आरती के मन में आपने बातो से ढेर सरे तूफान ला देती hai..aur आरती वही सोचती रहती है..

अब आगे

भले hi नीता वहां से चली तो गयी थी मगर कहीं न कहीं आरती के दिमाख में बस नीता के एक एक बात घूम रही थी ..वो नीता के बातो को याद करके उसे अचे तरह से समझने लगी थी . नीता के बाटे अब उसे परेशां कर रही थी ...नीता के बात याद आते hi उसके आँखों के सामने नवाज़ का चेहरा आ गया ..

वैसे hi उसके चहरे पर स्माइल आ जाती है..

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और उसके दिल की धड़कनें तेज़्ज़ हो गयी .. और उसके बेचैनी भी बढ़ती जा रही thi.........dekhna था की उसकी ये बेचैनी कब और कहाँ जाकर उसे दो पल का सुकून देती hain....................ye तो बस आने वाला वक़्त hi बता सकता था..............

अब उसे आज रात का खाना बनाने का भी मैं नहीं हो रहा था ……. वो अब नवाज़ के बारे मई सोचने लगी ..

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और वो खुद पर hi हँसाने लगी.. फिर जब वो नवाज़ के बारे मई ज्यादा सोचने लगी तब उसका दिल बार बार यही कहने लगा की नवाज़ उतना बुरा नहीं है जितना वो सोचती थी … अब वक़्त गुज़रता जा रहा था ......... नीता को जेक करीब 1 घंटा हो चूका था .......... घर मई इस वक़्त कोई नहीं था .. उसका पति फैक्ट्री मई गया था और ससुर बहार कही गए हुई थे और नवाज़ का कुछ पता नहीं था .. अब उसके दिमाग में बहुत सी चीज़ें इस वक़्त घूम रही thi.............na जाने क्यों उसे बार बार नवाज़ की याद आ रही थी .. .................जब उसने मोबाइल मई देखा तो इस वक़्त 5 बजे थे .. .............. फिर वो आपने बीएड पर लेट जाती है..

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और फिर वो नवाज़ के बारे में सोचते सोचते सो जाती है...

2-3 घंटे सोने के बाद आरती उठ जाती है ..अब उतने के बाद आरती का दिल कहीं नहीं लग रहा था.............. पर क्यों .. उसका पता तो आरती को भी नहीं था ....... फिर वो आपने चारा मिरर मई देखते है तो उसके चहरे पर मायूसी क्लियर दिख रही थी ..

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वो अपनी मायूसी आपने पति और ससुर के सामने नहीं लाना चाहती थी ....... उसे पता था पापाजी उसे पूछेंगे की तुम उदास क्यों हो तब उसका जवाब आरती के पास नहीं था .. इस वजह से वो नार्मल होती हुई सीधा बहार आ जाती है ..

बहार आके वो सोफे पाई बैठ जाती है..

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और सोचने लगती है .. अब तो रात हो गयी है .. अरविन्द और पापजी के लिए खाना बनाना पड़ेगा .. चलो पापाजी से पूछते है उन खाने मई क्या खाना है .. ऐसे सोचते हुई बहार जाने लगी ..क्यों की वो जानती थी की बहार गर्दन मई इस वक़्त उसके ससुर बैठते है .. इसलिए वो बहार आ जाते है .. और गर्दन मई आपने ससुर को ढूडने लगे .. तभी उसकी नज़र सर्वेंट क्वार्टर पर चली गए .. तब उसे याद आया की नवाज़ जब से यहाँ आया है यही रहता है .. फिर उसके मैं मई क्या आया की वो उस सर्वेंट क्वार्टर की तरफ जाने लगी .. जैसे जैसे वो सर्वेंट क्वार्टर की तरफ बाद रही थी वैसे वैसे उसकी दिल की बेचैनियां भी बढ़ती जा रही थी...... दूर पाई जेक वो कड़ी हो गए .. और सोचने लगी ..

मई क्या अन्दर जाऊ या दूर को नॉक करू .. नवाज़ होगा क्या अन्दर . नवाज़ अंदर होगा क्या.. और अगर होगा तो क्या कर रहा होगा.. सो रहा होगा या किसके साथ होगा क्या.. कोई उसके साथ होगी क्या.. नीता??? नहीं नहीं वो तो घर चली गयी है.. फिर क्या वंदना?? हाँ हां हो सकता है.. पर इतने रात मुखिया जी उसको बहार छोड़ेगे क्या.. नहीं नहीं मुझे नहीं लगता..

मुझे क्या करना है कोई भी hoga..aisa कह के नॉक करने लगती है तब दूर अंदर जाता है.. मतलब अंदर कोई नहीं था.. दूर खुलने की वजह से वो कमरे के अंदर जाती है..

जैसे hi वो कमरे के अंदर चले गयी तो उसे पूरा कमरा बिखरा हुआ नज़र आया .. सारा सामान इधर उधर पड़ा हुआ था .. कमरे का नज़ारा देख के पहले तो उसे बहुत गुस्सा आया ..और वो गुस्से से बोल पड़ी ..

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कमीने ने कमरा कैसे रखा है .. कितना गन्दा .. खुद के जैसे hi .. ये नहीं रख सकता तो कामचोर ने तो रखना था न ..

तभी उसकी नज़र सामने के चीज़ पाई गयी .. उस चीज़ को देख कर वो मुस्कुराते हुए कहने lagi..........aapne अड्डा के साथ..

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लगता है नवाज़ मिया के यहाँ मज़े चल रहे है .. दारू और कंडोम साथ मई .. शराब और shabab..ek साथ...

उसके चहरे पर कातिल हसी थी ..तब उसे नवाज़ की पंत उस दारू के बाजु मई राखी हुई नज़र आती है..

अब आरती पंत के करीब जाती हैं तब पंत से अजीब सी बदबू उठने लगती हैं जो आरती को आपने और आकर्षित करने लगी.. जैसे नवाज़ को देखकर वो आकर्षित होती है वैसे.. वो पंत के करीब जेक पंत को उठा लेती है.. पंत गंदे होने की वजह से उसके हाथ भी गंदे हो गए ...... पंत उतने की वजह से पंत की तेज़्ज़ बदबू उसको आती है..

ची कितने बाड़ू आ रही है इस पंत से ..

ऐसा कह के वो पंत निचे फेंक देती है..

और इस पंत की वजह से मेरे हाथ भी कितने गंदे हो गए है.. और ये कमरा भी कितना गन्दा है.. इस नीता की बची को आपने यार का कमरा भी ठीक करने नहीं आता क्या.. रुको मई नीता को कॉल लगाती हु वो उसे खरी खोटी सुनती हु.. उसे कहती हु आपने आशिक़ का कमरा भी ठीक नहीं कर सकती क्या?? पर उसने पूछा नवाज़ के कमरे मई दीदी आप क्यों गए हो तब??

अब वो सोचने लगी..

नहीं नहीं.. मई नहीं लगाती कॉल.. वो कमीने कुछ भी पूछेंगे.. कुछ गंदे बात करेगी.. इस से अच्छा है मई कॉल hi नहीं लगाती उसे..

ऐसा कह के आपने मोबाइल साइड मई रखती है और नवाज़ के कमरे का सामान ठीक थक करने लगती है.. फिर वो वह पाई जो एक छोटी सी चारपाई थी.. उसपे के बेडशीट ठीक करते है.. चद्दर ठीक करती है.. ठीक करते टाइम उसे तंबाकू की पाउच और उसको चुना की डब्बी मिल जाती है.. तब वो कहते है..

कमीना ये भी खता है क्या.. क्या क्या गंदे आदते है इसे.. लोंडिबाज है.. दारू पिता है.. पैन खता है.. बीड़ी पिता है.. सिगरेट पिता है और अब ये तंबाकू.. कुछ गन्दी आदत बाकि है क्या.. सब तो है इससे..

फिर वो रुख जाती है.. और पीछे घूम के दिवार पाई टंगे नवाज़ की तस्वीर की तरफ स्माइल करते हुई कहते है..

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और तू ऐसे आदमी पर फ़िदा…

नहीं नहीं मई क्यों होंगे इस कमीने पाई फ़िदा.. मई तो..

मई तो क्या?? आरती..

मई तो बस??

मई तो बास.. उसके और आकर्षित..

आकर्षित हो रही हु.. ऐसा

hi न ..

तब शरमाते हुई कहते है..

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न न मई क्यों होंगी उसकी और आकर्षित..

फिर उसका रूम क्लीन क्यों कर रही है

वो तो नीता ने नहीं किया

पक्का नीता ने नहीं किया इस वजह से

हाँ और ये मेरा बंगला है.. मेरे ससुर ने बनाया है तो इसको ठीक रखना मेरा फ़र्ज़ है.. इसलिए कर रही हु..

अच्छा तो तू ातरक्त नहीं हो रही है क्या

नहीं बिलकुल नहीं.. मई भला क्यों हिन्ज.... मेरा इतना अच्छा हस्बैंड है.. जो इस कमीने से काफी अच्छा है.. हैंडसम है.. इसके जैसे कोई बुरी आदत भी नहीं है

अच्छा ठीक है .. रूम भी साफ़..

बोलै न मेरे ससुर का बौंग्लोव है..

उसके तस्वीर को देखते हुई कहते है..

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मई भला क्यों इस कमीने का कमरा ठीक करू.. क्लीन करू.. ये क्या मेरा बॉयफ्रेंड है क्या या मेरा आशिक़ या मई उसकी माशूका.. ऐसा कुछ नहीं है..

और फिर वो नवाज़ का बचा हुआ रूम साफ़ करने लगी.. जादू लेके. . रूम पूरी साफ़ होने के बाद वो दिवार और चाट की और देखने लगते है.. तब उसे चाट पाई जलीय नज़र आती है तब आरती जादू हाट मई लेके जलीय निकलने लगती है.. पूरी जलीय निकलने के बाद आपने साडी को देखती है तब साडी पाई कही जगह धूल मिटटी गिरी हुई थी.. तब वो साडी का पल्लू हाट मई लेके साड़ी पर के धूल निकलने लगी.. निकलते टाइम नवाज़ के तस्वीर के और देखते हुई कहने लगी..

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इधर नन्ही देखना है.. मू दूसरी तरफ करो..

फिर व्वो मिररर के सामने जेक खड़े हो जाती है और अंगड़ाई लेते हुई कहने लगी..

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नवाज़ मिया तुमने बहुत काम करवलिया आपने आरती से.. सॉरी सॉरी आरती मेमसाब से.. इतना काम तो कभी आपके साहब ने भी नहीं करवाया.. बहुत चालू हो तुम.. तुमने जानबुज के आपने रूम गन्दी राकी ताकि आपने आरती मेमसाब से साफ़ करवा सको.. मई सब समजती हु..

ऐसा ककह के आपने बाल की हेयर पिन निकलने लगते है और फिर वह एक गन्दी से कंगी थी.. उसको आपने हाथ मैं लेते है और बुरा सा मू करते हुई कहते है..

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ये भी गंदे.. नवाज़ मिया चामरे कोई चीज़ साफ़ सुतरी है क्या??

फिर स्मिले करते हुई कहते..

तुम्हारे ये आरती मेमसाब को चोर के..

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और शर्माने लगी..

मई कहा तुम्हारी हु.. मई तो आपके साहब.. आपके छोटे मालिक अरविन्द जी के हु.. तुम्हारी नहीं.. समजे न नवाज़ मिया..

ऐसा उसके तस्वीर की तरफ देखते हुई कहने लगी और हँसाने लगी..
 
मई कहा तुम्हारी हु.. मई तो आपके साहब.. आपके छोटे मालिक अरविन्द जी के हु.. तुम्हारी नहीं.. समजे न नवाज़ miya..tumari तो नीता है.. वंदना है... तन्वी है.. और न जाने कितने है.. और हां वो कॉलोनी वाली दो औरते भी है..

ऐसा उसके तस्वीर की तरफ देखते हुई कहने लगी और हँसाने लगी..

तब उसकी नज़र वह रखे कंडोम पाई जाती है.. कंडोम के पैकेट पर.. कंडोम का पैकेट वो हाट मई उठाती है.. तभी उसे 2 दिन पहले की बात याद आयी..

सुबह का टाइम था.. किचन मई नीता और आरती काम कर रहे थी और बाते कर रही थी.. काम करते हुई नीता ोमिटिंग करती है.. बेसिन मई.. तब आरती उसके पिट पाई हाथ से धीरे से मालिश करती है..

सेफ्टी उसे नहीं करोगे तो यही होगा

क्या करू दीदी वो मनाता नहीं है न

वो मनाता नहीं है तो तू आपने ख्याल नहीं रख सकती क्या

उसे कंडोम से मज़ा नहीं आता

तो तू उसके मज़े की सजा ले ले

आप नहीं संजोगे दीदी.. वो कितना कमीना है.. जब आप के साथ करेगा तो आप को पता चलेगा

मेरे साथ भला क्यों करेगा.. मेरा यार नहीं है वो तेरे जैसा.. मेरा हस्बैंड मेरे बात सुनाता है

हस्बैंड अलग होता है और यार अलग होता है दीदी

पता है.. फिर भी मेरा अगर नवाज़ यार होता तो मई उसे करने hi नहीं देते और अगर करने भी देते तो बिना कंडोम का तो हरगिज़ नहीं

देखते है

देख ले..

ाँ जुंग का मैदान दूर नहीं है

मतलब

कुछ नहीं दीदी

क्या खहने का मतलब है तेरा

कुछ नहीं दीदी

बताताटी है या नहीं

कुछ नहीं दीदी गलती से मू से निकल गया

फिर मुझे भी तेरे को गलती से नौकरी से निकलना पड़ेगा

नहीं नहीं दीदी नौकरी से मत निकालो

तो फिर बता

दीदी ये सच है या मेरे मिसुन्दरस्टण्डींग है मुझे पता नहीं है

तू बता पहले

आरती थोड़े गुस्से से बोलते है

बात ये है की दीदी नवाज़ की आप पर गन्दी नज़र है शयद..

आरती इस बात पर नीता को गुस्से से देखने लगे

शायद ये मेरे गलतफैमी भी हो सकते है

तुजे क्यों लगा

ऐसे hi लगा

तुजे कुछ कहा मेरे बारे मई उसने

कहा तो कुछ नहीं पर वो जिस तरीके से आप को देखता है.. जो मायने 2-3 बार देखा उस वजह से मुझे लगा

देखने दे.. उसके देखने से क्या होता है..

बहुत कुछ हो सकता है

मतलब

वो बहुत कमीना है..

वो तो मुझे पता है ..

वैसे मर्द लोग देखते hi है..

और मर्दो मई और इस मई फरक है दीदी

क्या फरक है

ये जो एक बार थम लेता है वो हासिल कर के रहता है

नीता के ऐसे कहने से आरती उसको घर के देखने लगती है..

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और फिर कुछ सोच कर कहते है

मुझे डरा रही है क्या

डरा नहीं बता रही हु

मई नवाज़ जैसे मर्दों को अच्छी से जानती हु.. कॉलेज मई इससे अच्छे बहुत सरे लड़के मेरे पीछे पड़े पर मई किस के हाट मई नहीं आये और अब मई नवाज़ के हाथ में क्यों आउंगी..

हाँ भाभी आपकी बात सही है पर उन कॉलेज वाले लड़को मई और नवाज़ मई बहुत फरक है

क्या फर्क है

आरती गुस्सी मई बोलती है

आप जल्द hi समाज जाओगे

क्या समाज जाउंगी मई.. नवाज़ कितना भी तरय कर ले मई उसके हाथ मई नहीं आउंगी.. नवाज़ क्या किस के भी हाथ मई नहीं आउंगी.. अरविन्द से मई बहुत प्यार करती हु और मई उनको धोका क्यों दंगे.. और अरविन्द को धोखा देना है तो मई किसी अच्छे लड़के के साथ कुछ कर सकते हु

नवाज़ क्या अच्छा लड़का नहीं है क्या दीदी

अच्छा है

भ गया क्या आप को

कुछ भी मत बोल.. वो तेरा आशिक़ है.. मई उसके साथ

तब नीता बीच मई बोलती है

मुझे कोई आपत्ति नहीं है

पर मुझे है

फिर आपने ने उसे अच्छा लड़का क्यों कहा

फिर क्या बुरा कहु

मुझे कुछ समाज नहीं आ रहा है आपका दीदी.. एक बार कह रही हो नवाज़ अच्छा लड़का है और फिर कह रही हु छोटे मालिक के साथ आप धोका करोगे तो किसी अच्छे लड़के के साथ पर नवाज़ के साथ नहीं

मैं पहले तो ऐसा कुछ नहीं करुँगी और करुँगी तो भी नवाज़ जैसे एक नौकर के साथ नहीं .. छी कभी नहीं..

अगर वो नौकर नहीं होता तो

तब आरती झट से बोलती है..

सोच सकती थी..

मई यहीं सुनना चाहती थी..

No तुम गलत मत संजो.. मई उसके साथ कभी नहीं करुँगी..

क्यों

न वो हैंडसम.. न उसके पास पैसा है.. न hi वो बॉडी बिल्डर है.. और न लेडीज लोंगो के साथ बात करने की उसे तमीज है.. और सबसे बड़े बात वो हमारा नौकर है.. मई ऐसा गन्दा काम किसी के साथ नहीं कर सकती और नौकर के साथ तो हरगिज़ hi नहीं.. नीता तुमने ये सोचा भी कैसे की मई उसके साथ ये सब करूंगी..

आप नहीं karoge…Wo करेगा..

उसके अकेले के करने से क्या होगा.. मेरे भी मर्ज़ी होने चाहिए न

आप की मर्ज़ी बाद मई आटोमेटिक आ जायेगे

मतलब..

लेडीज लोंगो के मर्ज़ी के बारे मई नवाज़ नहीं सोचता दीदी

मतलब क्या मई वो सब उसके साथ करने को रेडी नहीं होंगे तो क्या वो मेरे साथ जबरदस्ती करेगा क्या

नहीं दीदी वो जबरदस्ती नहीं करता कभी

तो

वो आपने जाल मई ऐसे फसता है की कैसे भी लेडीज क्यों न हो वो आटोमेटिक राज़ी हो जाते है

.

तब आरती गुस्से से कहती है..

तुम आपने नवाज़ पुराण बंद करो और चले जाओ यहाँ से .. खमा का मेरा दीमक मत खाओ..

तब नीता वह से चली जाती है..

(ये सब किचन के बहार खड़े होक नवाज़ सुन रहा था.. एक्चुअली नवाज़ ने hi नीता को आरती से ये सब बाते करने को कहा था.. उसे आरती की रिएक्शन देखने थी.. नीता को उसने बताया था की अगर आरती आपने हाथ मई आये तोह आपने दोनों की ाईश है.. तुम अच्छा पैसा मिलेगा.. काम भी ज्यादा करना नहीं पड़ेगा.. और जिंदगीभर के जॉब का प्रॉब्लम सोल्वे हो जायेगा..)

ये सब याद करके वो कुछ सोचने लगी..

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और फिर नवाज़ को देख के कहने lagi..matlab उसके तस्वीर को..

क्या तुम मेरे पीछे पड़े हो.. मुझे तो नहीं लगता..

ऐसा कहके कंडोम का पैकेट खोलती है.. तब बुरा सा मू करते हुई कहते है..

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ची गंदे कही के..

क्यों की उसे लगा था ये उनुसेड कंडोम का पैकेट hai..par कंडोम का पैकेट खोलते hi उसे झटका laga..cover खोलते उसे एक दो बाल दिखे.. बाल देख के वो कहते है..

पक्का ये उस कमीने के बाल है और वह के..

की करके कंडोम फेक देती है..

तब पैकेट मई से कंडोम बहार आता है.. वो कंडोम ुसेड कंडोम था.. पूरा स्पेर्म्स से भरा हुआ.. फेंकने की वजह से थोड़ा बहुत स्पर्म बहार गिरता है.. वो देखते हुई एआरटी कहते है..

साला ककमीना कितना गन्दा है.. कोई ऐसे ुसेड कंडोम को रखता है क्या.. मुझे तो लगा उनसेड कंडोम का पैकेट है.. और मुझे भी क्या सुजा पता नहीं मैंने इस गंदे कंडोम को हाट मई पकड़ा..

की मई भी इस कमीने जैसे गंदे बनती जा रही हु.. कोई कपड़ा देखना पड़ेगा.. हाट पोछने के लिए.. पर अच्छा से कपड़ा यहाँ कहा मिलेगा.. मुझे..

ऐसा कह के इधर उधर देखने लगे.. उसे वह एक छोटी सी अलमारी दिखी.. जो दिवार के अंदर थी.. उसे देखते हुई खाने लगी

यहाँ हो सकता है

ऐसा कह के अलमारी मई झाकने लगी.. उप्पर नहीं दिखा तो निचले शेल्फ मई जरा जुख के देखने लगी.. वह के गंदे कपडे देख के बुरा सा मू करती है..

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इस कमीने के तो सरे hi कपडे गंदे है और कैसे रखे है.. रखे क्या फेंक दिए hai..aab क्या इतने सरे कपडे इस कमीने के मुझे ठीक करने होंगे क्या.. मई तो मर hi जाउंगी ये सब करते करते.. मई नहीं करुँगी बाबा.. इतने कपडे तो मैंने कभी अरविन्द जी के भी नहीं रखे है..

तब स्माइल करते हुई कहते है..

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आरती मंसाब जो अब तक आपने आपके पति के काम नहीं किये है वो सरे गंदे वाले काम आपको आपके नवाज़ मिया के लिए करने होंगे

हरगिज़ नहीं .. मई ऐसा कुछ भी गन्दा काम नहीं करुँगी इस कमीने के लिए

फिर रूम साफ़ क्यों किया

रूम साफ़ करना क्या गन्दा काम है क्या.. वो मुझे क्लीन रहना पसंद है इसलिए किया

अच्छा तो अब ये कपडे भी कर ले ये भी तो साफ़ सफाये है..

नहीं मुझसे नहीं होगा

करके तो देख होगा या नहीं ये बाद मई देखेंगे

ठीक है वैसा करती हु

ऐसा कह के वो नवाज़ के कपडे ठीक करने लगी ..
 
फिर रूम साफ़ क्यों किया

रूम साफ़ करना क्या गन्दा काम है क्या.. वो मुझे क्लीन रहना पसंद है इसलिए किया

अच्छा तो अब ये कपडे भी कर ले ये भी तो साफ़ सफाये है..

नहीं मुझसे नहीं होगा

करके तो देख होगा या नहीं ये बाद मई देखेंगे

ठीक है वैसा करती हु

ऐसा कह के वो नवाज़ के कपडे ठीक करने लगी.. पहले वो नवाज़ के सरे कपडे उस रैक मई से निकल देती है.. रैक को अच्छे से जादू से साफ़ करती है और फिर नवाज़ के कपड़ो को अच्छे से फोल्ड करके रखती है.. फोल्ड करते टाइम नवाज़ के कपड़ो से उसे तेज़्ज़ बदबू आ रही थी..

बहुत तेज़्ज़ बदबू आ रही है..

फिर मिरर मई देखते हुई कहते है..

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बिलकुल उस कमीने जैसे.. मई जब भी उसके पास जाती हु.. मई क्यों जाने लगी भला .. वो जब मेरे पास आता है तब उसके बदन से ऐसे hi बदबू आती है.. उस दिन उस स्टोर रूम मई जब हम दोनों अकेले थे तब ऐसे hi बदबू आ रही थी उसके बदन से.. शयद इससे से तेज़्ज़ थी वो बदबू.. पर क्यों आ रही थी वो बदबू .. अरविन्द की तो कभी नहीं आती.. शायद उस के जिस्म से निकलने वाले पसीने की वजह से ये बदबू आ रही थी ..... पर इसका अहसास मुझे उसदिन क्यों नहीं हुआ और आज हो रहा है..

वो कुछ सोकहने लगी..

नहीं नहीं.. ऐसा नहीं.. वो उस दिन साथ मई खड़ा था इस वजह से मुझे अहसास नहीं हुआ और अब वो यहाँ नहीं है इस वजह से अहसास हो रहा है उसके बदन के बदबू का.. नहीं नहीं ऐसे कैसे हो सकता है.. मतलब मई इस कमीने के तरफ अत्तरकट हो गयी थी उस दिन.. या अब ातरक्त हो रही हु.. पर ऐसे कैसे..

पर कुछ भी कहो एक अजीब सी मदहोशी थी उस बदबू mein.........jo बार बार मुझे उसके तरफ खींच रही थी ....... शायद इसे वजह से जब भी उसके करीब जाती मुझे अजीब सा आनंद milata..na जाने क्यों मई उस बदबू को जितना हो सके अपने संसनों के जरिये अपने बदन के अंदर उतरना चाहती thi.............issi वजह से मेरी आँखे बंद हो जाती और मई लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लग jati..uff क्या अहसास था वो..

ऐसा कह के अपनी आँखे बंद करके अह्ह्हा करने लगी..

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अरविन्द जी आप मई क्यों नहीं है ये अहसास.. आप ने क्यों नहीं दिलाया ये अहसास अभी तक मुझे..

फिर खाने लगी ..

शयद वैसा करके मई उस बदबू को अपने अंदर उतर रही थी............ क्या वो बदबू मेरे अंदर घुलने लगी थी क्या .. और अब क्या इस गंदे कपडे की तेज़्ज़ बदबू मेरे सांसो मई घुलने लगी है क्या ..

तभी उसे एक डेरी मिली.. उसी दिन वाली.. जो उससे पड़ने रह गयी थी..

हाँ यार ये तो वही डेरी है जो मैंने कुछ पड़ी थी..

हाँ आरती वही है..

अब मई इसे पूरी पद लुंगी..

ऐसा कह के डेरी पड़ने लगी.. डायरी में लास्ट पोस्ट आज की थी और उसके निचे एक दर्दनाक ग़ज़ल की चाँद पंक्तिया लिखी हुयी थी…………..

चमकते चाँद को टुटा हुआ तारा बना डाला

मेरी आवारगी ने मुझको आवारा बना डाला

ये पड़के आरती कहते है

हाउ स्वेट !!!!

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उसके आँखें फिर से चमक उठती है......

मेरे मालिक, मेरा दिल क्यों तड़पता है, सुलगता है

तेरी मर्ज़ी , तेरी मर्ज़ी पे किसका ज़ोर चलता है

किसी को गुल, किसी को तूने अंगारा बना डाला

चमकते चाँद .........

एहि आगाज़ था मेरा, एहि अंजाम होना था

मुझे बर्बाद होना था, मुझे नाकाम होना था

मुझे तक़दीर ने तक़दीर का मारा बना डाला

चमकते चाँद.............

मेरा अंजाम यही होना tha………..Mai हार गया तन्वी ………अब और लड़ने का दिल नहीं karta…..…bahut यद् आ रही है tumhari……………bas एक बार आ जाओ न…… plzzzzzzzzzzzzz…

…… नवाज़

तब आरती कहते है

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साली ये तन्वी कितने खुशनसीब है.. इसके नीचे से कितने साडी लड़किया गयी होंगे पर हर श्यारी मई सिर्फ इसका hi नाम होता है.. शयद इस कमीने का पहला प्यार होगा..

आरती ने पूरी डायरी पढ़ li..Diary मई नवाज़ ने अपने बचपन से लेकर अभी तक की कहानी लिखी थी …ज्यादातर बातें बचपन से जवानी तक के सफर के बारे लिखा था.. पड़ने के बाद चुपचाप बंद करके वापस उसी तरह से रख दी….. और बच्चे हुई कपडे फोल्ड करके रखने लगी.. तभी एक पंत मई से एक कार्ड बहार आता है.. ये बर्थडे कार्ड था.. आरती ने उसे खोलके देखा.. ये तन्वी ने नवाज़ को लिखा था.. तब आरती की नज़र डेट ऑफ़ बिरथ पाई चली गयी.. ….यानि कल नवाज़ का बर्थडे hai…….ye सोच के आरती कुश हो जाती है …… वैसे खुद के बर्थडे का कोई खास वैल्यू उसके लाइफ मई नहीं था.. उसे सेलिब्रेशन ज्यादा पसंद नहीं था.. इस से पहले उसने आपने लाइफ मई किसी का बर्थडे सेलिब्रेट नहीं किया था.. पर नवाज़ के बर्थडे के बारे मई सोच के वो कुश हो गए थी.. वो सोचने लगे..

कल इस कमीने का बर्थडे है.. पर मुझे ये पता नहीं है की वो सेलिब्रेट करता है या नहीं.. वैसे मई ये नीता को पूछ सकते हु पर फिर वो कामचोर बहुत सरे सवाल पूछेगी.. इस समय आरती नवाज़ के रूम में गुमसुम बैठी thi…………nawaz के बर्थडे के बारे में hi सोच रही थी…

कुछ ददर सोचने के बाद वो कहते है..

बहुत हो गया सोचना इस कमीने के बारे मई.. मुझे यहाँ पसीना भी बहुत आ रहा है और इसकी रूम साफ़ करने से बहुत साडी धूल मिटटी भी लगी हुई है.. मुझे अब जेक बाथ करना पड़ेगा hi..

ऐसा सोचते हुई वो चारपाई से उठ जाती है.. इतने देर तक वो नवाज़ के चारपाई पाई बैठ कर सोच रही थी.. उतने के बाद वो मिरर के सामने जेक कड़ी हो जाती है और वह जो कंगी थी वो हाट मैं लेके आपने बालो मई घूमने लगते है.. फिर कुछ देर तक मिरर मई देखा और नवाज़ का रूम बंद करके वापस आ गयी…… आपने घर..
 
ऐसा सोचते हुई वो चारपाई से उठ जाती है.. इतने देर तक वो नवाज़ के चारपाई पाई बैठ कर सोच रही थी.. उतने के बाद वो मिरर के सामने जेक कड़ी हो जाती है ...

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और वह जो कंगी थी वो हाट मैं लेके आपने बालो मई घूमने लगते है.. …………और आपने आप को कहते है..

गंदे कंगी है ये.. इस कमीने के जैसे hi..

फिर कुछ देर तक मिरर मई देखती है और नवाज़ का रूम बंद करके वापस आ गयी……….. आपने घर..

आपने घर मई आने के बाद वो पहले आपने बैडरूम मई जाते है.. और आपने बीएड पाई लेत जाती है.. और नवाज़ के बारे मई सोचने लगती है.. उसके दिमाख मई बार बार वो ुसेड कंडोम और उससे बहार आटा हुआ स्पर्म याद आने लगा.. उसके आँखों के सामने आने लगा.. करीब 30 मिनट बाद आरती हिम्मत जूता कर बिस्तर से उठती है और वाशरूम में जाकर शावर के निचे कड़ी हो जाती hai.aarti की जाँघे कांप रही थी. उसके पैरो में खुद का वजन भी संभल पाने की हिम्मत नहीं हो रही thi.Kisi तरह शावर के निचे खड़े होने के बाद वो धीरे से अपनी पीठ दिवार के सहारे लगाकर निचे बैठने लगती है. अपने सरे बदन को भिगोने के बाद उसे थोड़ी बहुत रहत महसूस होने लगती है.

आरती हौले से अपना हाथ अपनी छूट पर ले जाती है है... जैसे hi आरती का हाथ उसकी छूट पर आता है आरती सिसक पड़ती है और साथ hi हल्का सा पानी उसकी छूट से चालक पड़ता है... आरती को ऐसा महसूस हो रहा था की वो कुछ गलत कर रही है.. ... लेकिन अब उस को खुद को रोक पाना मुश्किल हो रहा था..… आरती का एक हाथ जहाँ उसके उन्नत उरोजों को सहला रहा था वही दूसरा हाट उसके छूट के उप्पर था.. आरती की आँखे इस वक़्त बंद थी और एक अलग hi ख्वाबों के दुनिया में आरती का अस्तित्व था.. वो अब कैसे तो खुद को कण्ट्रोल करते हुई बाथ कर लेती है ..

बाथ करने के बाद वो अच्छे से साड़ी पहन लेती है.. और खुद को कहती है..

अब खाना बनाना पड़ेगा.. 4 लोगो का.. पापाजी.. अरविन्द , मई और नवाज़..

फिर कुछ सोच कर कहते है..

उसका तो बनाना hi पड़ेगा.. वो बेचारा कहा जायेगा इतनी रात खाने के लिए.. या मई पापा से पूछ लू.. पर आरती वो आपने घर भी जा सकता है न.. खाने के लिए.. घर भी तो यही है न इसी गाँव मई उसका.. है हां इसी गाँव का है.. इसी गाँव का है तो रोज यहाँ hi क्यों खता है.. क्या करू मई.. बना hi लेती हु..

ऐसा कहते हुई वो किचन मई आ जाती है .. .. किचन मई रात का खाना बनाने लगती है.. तभी उसे किचन सिंक के पास एक कंगी दिख जाती है.. उसे देख के वो कहते है..

ये कैसे आयी यहाँ .. क्या मैंने लायी.. पर कैसे.. मैंने लायी और मुझे hi पता नहीं..

फिर हस्ते हुई कहते है..

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आरती लगता है तू सच मई पागल हो जाएगी.. ये नवाज़ के बारे मई सोच सोच कर..

फिर रात को खाना खाके पति से बाते करती है बूत नवाज़ hi दिमाख मई tha..uska ध्यान नवाज़ की तरफ hi था..

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पति से बात करते करते वो सोकहति है..

ये लड़का गया कहा hai..Aabhi तक खाने खाना नहीं आया hai..kya आपने घर गया होगा क्या या आपने किसी माशूका के पास.. कोनसी माशूका.. इसकी तो बहुत साड़ी माशूका है.. अब वो किस के पास गया होगा.. आरती तुजे क्या पड़ी है.. ये सब जाना ने की.. गया होगा किस के पास.. आ जायेगा जब भूख लगेंगे तो या रात मई तो आ hi जायेगा.. अब मई क्या करू.. सो जाऊ या उसके लिए जगु.. तू भी न आरती.. तेरा क्या वो पति है क्या जो उसके लिए जगती रहेंगे.. पति तो सामने बैठा है.. पति के लिए कभी जगती नहीं है और इसके लिए वेट करने वाली है... क्या हो गया है आरती तुजे..

अब आरती का पति सो जाता है बूत उसे नींद नहीं आ रही थी तब वो गाने सुनाने लगती है.. ेअर्बुद लगाके.. गाने सुनते हुई उसके चहरे पर हसी आ जाती है..

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 कुछ बात को याद करके वो हँसाने लगी.. वो कहती है..

कमीने के साथ पहले hi दिन मई बाइक पाई बैठके गयी थी..

ये कहते हुई शर्माने lagi..aur निचे देखने लगी..

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पर मई ैसिलय कैसे गयी.. कुछ सोचा क्यों नहीं.. क्या सोकहति.. सिचुएशन hi ऐसे थी..

फिर वो उसदिन जो हुआ उसको याद करने लगी..
 
पर मई ैसिलय कैसे गयी.. कुछ सोचा क्यों नहीं.. क्या सोकहति.. सिचुएशन hi ऐसे थी..

फिर वो उसदिन जो हुआ उसको याद करने lagi..Tabhi उसको उसके मम्मी का कॉल आता है तब वो आपने यादो से बहार आती है..

मम्मी - कैसे हो बीटा

ठीक हु मम्मी

सोई हुई हो क्या

नहीं मम्मी हॉल मई बैठी हु

अच्छा.. दामादजी नहीं आये क्या

आ भी गए और सो भी गए

फिर हॉल मई क्या कर रही हो

तब मैं मई कहती है

अब तुम क्या बताऊ मम्मी

आरती??

हां मम्मी

मई कुछ पूछ रही हु बीटा तुम

कुछ नहीं मम्मी याददो को तजा कर रही हु

तब उसकी मम्मी स्माइल करते हुई कहते है

कोनसे यादे.. मइके के

हाँ मइके के hi कर सकती हु..

हाँ बेटी मैरिड औरत को मइके की याद बहुत आती है ..

तभी रात के कुछ 12-12:30 बजे उसे मैं गेट खुलने का आवाज़ आता है.. तब वो हाल मई के विंडो से देखते है .

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तब नवाज़ चलते हुई उसे रूम मई जाते हुई दिखता है.. तब कहते है

ये इस वक़्त कहा से आ रहा है..

कोण बेटी

और ये ठीक से चल भी नहीं पा रहा है.. क्या?? मतलब ये पाइक आ रहा है और इतने रात.. और कितने ज्यादा पाइक आया है..

कोण बेटी .. दामाद जी.. पिटे है क्या..

नहीं वो तो सो रहे है

फिर तू किस की बात कर रही है

नौकर की

बेटे नौकर लोग तो ऐसे hi होते है.. उनके ज्यादा मू नहीं लगाना चाहिए..

नहीं नहीं मम्मी मई क्यों मू लगूंगी और ये अच्छा नौकर है

अच्छा है तो पिए क्यों है

वही तो मई समाज नहीं प् रही हु

समाज नहीं प् रही हो तो ज्यादा मत सोचो

हाँ वही सही रहेगा.. मई रखती हु..

हाँ बीटा रात बहुत हुई है.. अब सो जा तुम

हां मम्मी

बहार मत जा

मई क्यों जाउंगी भला बहार मम्मी

उस नौकर के बारे मई सोचकर और उसे पूछने

मम्मी आप भी न भला मई क्यों सोचूंगी और उसे क्या पूछूँगी और क्यों

मुझे पता है तुम दारू पिने वालो का गुस्सा आता है.. तुम पसंद नहीं कराती पक्कड़ लोंगो को

हाँ वो तो सही है

मुझे लगा गऊसे मैं उसको पूछोगे

मम्मी आप भी न.. मई क्यों puchungi..Uski जिंदगी hai..wo पिए या न पिए

सही है

ठीक है मम्मी मई रखती हु

हां रख लो बीटा..

तब आरती कॉल कट कर देती है
 
नवाज़ काफी रत हुई वापस आया था ……….मैं गेट खुलने की आवाज़ से आरती ने खिड़की से बहार देखा …. नवाज़ की चाल देखकर ऐसा लग रहा था की उसने शराब पी राखी hai………lekin आरती के पास कोई तरीका नहीं था कन्फर्म करने ka……..usne चुपके से अपना दरवाज़ा खोला और चलते हुई बहार आ gyi……..hath में मोबाइल था उसके.. अगर किसी ने पूछा तो कह देगी की कुछ पूछना था…… उसे फिर भी दर लग रहा tha……lekin क्या करती दिल के हाथो मजबूर थी…

आरती अब जब नवाज़ के दरवाजे के पास पहुंची तब दरवाजा नॉक करने की सोचती है लेकिन फिर वो सोचती है.. इस वक़्त इतने रात एक नौकर के रूम मई जाना ठीक नहीं है.. वो क्या सोचेगा मेरे बारे मई.. यही सोचकर वो वापस घूम कर जाने लगते hai.thoda चल के आपने घर की और जाने लगती है पर उसे क्या होता है उसे भी पता नहीं और फिर वापस नवाज़ के दरवाजे के पास आते है और हलके हांतो से उसके दरवाजे को कनक करती hai.par इस वक़्त नवाज़ अपने बीएड पर लेता हुआ था …… पैरो में अभी भी शूज थे और उसके हाथ में एक तस्वीर थी जिसे वो देख रहा tha……us तस्वीर के खयालो मई खोया हुआ था.. उसे दूर की नॉक सुनाई नहीं दी.. वैसे भी वो नॉक बहुत धीरे थी.. वैसे नॉक वो 2-3 बार करती है परन्तु जब नवाज़ कोई जवाब नहीं देता तब वो दरवाज़े को अंदर पुश करके नवाज़ के रूम मई एंटर करती है..

आरती अब नवाज़ के रूम में पहुंची थी ....नवाज़ अभी भी अपने बीएड पर लेता हुआ था …….. पैरो में अभी भी शूज थे और उसके हाथ में एक तस्वीर थी जिसे वो देख रहा था……. आरती के आने के आहात से वो उठ बैठा …… और दरवाज़ा की और देखने लगा ..उसने देखा की आरती सामने कड़ी है…

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एआरटी को देखते हे उसने मुस्कुराकर नमस्ते kiya..Aarti ने भी धीमी आवाज़ में नमस्ते किया..

फिर नवाज़ बोलै

अरे मेमसाब आप यहाँ अचानक

तब आरती बोली ..

तुम्हारी खैरियत लेने आयी हूँ..

मुझे क्या हुआ मई ाचा भला हु

वो देख रही हु मई

वैसे मेमसाब इस वक़्त आप यहाँ.. कुछ काम था क्या..

नवाज़ की आवाज़ से साफ पता चल रहा था की उसने पी राखी है …. आरती नवाज़ जिस बीएड पाई बैठा था उस बीएड के पास एक टेबल था. (थोड़ा दूर) उस टेबल के पास जेक बैठ गयी और बैठते हुई बोली.

मई क्या तुम्हारे पास सिर्फ काम से hi आ सकती हु क्या..

नहीं.. वैसे भी आ सकती हो आप

ी मैं तुम्हारे रूम मई

हाँ वैसे भी आ सकती हो.. वैसे भी ये तो आप का hi रूम मई.. मतलब बड़े साहब ने तो दिया है रहने को

पर अब ये तुम्हारा रूम मई.. जब तक तुम यहाँ रहना चाहते हो तब तक रह सकते हो

ऐसा कैसे मेमसाब.. मई जब तक चाहौ यहाँ कैसे रह सकता हु..

तब उसकी और देखते हुई कहते है..

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हाँ रह सकते हो

साहब ने फिर से वापिस खेत मई जाने को बोलै तो जाना पड़ेगा न वापिस खेत मई

अगर तुम्हारा मैं खेती मई वापस जाने का नहीं है तो नहीं जाओ.. रहो यही..

ऐसे कैसे.. बड़े साहब की बात मई कैसे ताल सकता हु

मई मन लुंगी पापा को..

क्यों

तब आरती उसको देख के शर्मा के नीचे देखने लगी

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तब नवाज़ उठ के उसके पास जाता है

मेरे लिए

तब आरती निचे गर्दन करके हाँ कहती है

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नवाज़ अब और उसके पास जाता है

और छोटे साहब ने फैक्ट्री मई बुलाया तो

तब गर्दन उप्पर उतके आरती कहती है

मैं नहीं है तो मत जाओ

आप उनको भी मानोगे

तब उसके आँखों मई देखते हुई हाँ मई गर्दन हिलाते है ..

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उसके नज़दीक आने से आरती को दारू की बदबू आने लगी.. उस का शक सही साबित hua…wo नवाज़ को देखते हुई कहने लगी..

“नवाज़ तुमने ड्रिंक की है क्या ???..शराब पी है क्या तुमने ???”

नवाज़ कुछ नहीं बोलै..

“नवाज़ कुछ पूछ रही हु मई”

उसे कुछ न बोलता देखकर आरती ने गुस्से से कहा…

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पि है क्या

हाँ

क्यों

पार्टी थी..

और इतनी ज्यादा.. यहाँ तक मुझे दारू की बदबू आ रही है.. पता है न दारू सेहत के लिए हानिकारक होती है..

वो आज जरा ज्यादा हो गयी.. दोस्तों ने जरा ज्यादा फाॅर्स किया.. इस वजह से जरा ज्यादा हो गयी..

दोस्तों ने पिलाया तो कुछ भी पिओगे और कितने भी पिओगे क्या .. मन नहीं कर सकते क्या..

जरा नखरे से कहते है

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वो मेरा बर्थडे था न तो मन नहीं कर पाया

जूथ मत बोलो

जूथ नहीं सच बोल रहा हु

मुझे पता है तुम्हारा बर्थडे आज नहीं है

कल है

फिर जूथ क्यों कहा

कल है पर दोस्तों ने आज पार्टी ली.. इसमे कहा मैंने जूथ बोलै आप को

तब जरा स्माइल करते हुई कहते है

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इसलिए तो खाना खाने नहीं आये न तुम

हां मेमसाब

हाँ मेमसाब के बचे.. खाने मई ऐसा इग्नोर करना अच्छी बात नहीं है.. खाने पाई हमेशा ज्यादा ध्यान रहना चाहिए

तब नवाज़ कहता है .. उसकी आँखों मई देखते हुई

मेरा हमेशा खाना खाने पाई hi ध्यान होता है

तब शरमाते हुई चहरे पर हसी लेट हुई कहते है

मई खाना खाने की बात कर रही हु

मई भी तो वही बोल रहा हु मेमसाब

तब स्माइल करते हुई कहते है

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मई जानती हु तुम किस खाने की बात कर रहे हो

कोनसे खाने की बात मेमसाब

तब शर्माके निचे देखते हुई कहते है

मई तुम्हारे लिए खाना लेके आती हु

ऐसा बोलकर वह से चले जाती hai..thodi देर बाद वो वापस आयी ……...उसके हाथ में प्लेट में खाने की कुछ चीजे और कुछ फ्रूट्स रखे the……….aur लिम्बु पानी भी लाया था उसने..
 
मई जानती हु तुम किस खाने की बात कर रहे हो

कोनसे खाने की बात मेमसाब

तब शर्माके निचे देखते हुई कहते है

मई तुम्हारे लिए खाना लेके आती हु

ऐसा बोलकर वह से चले जाती hai..thodi देर बाद वो वापस आयी ……...उसके हाथ में प्लेट में खाने की कुछ चीजे और कुछ फ्रूट्स रखे the……….aur लिम्बु पानी भी लाया था उसने..

प्यार ऐसा hi होता hai……..har दर ख़त्म कर देता है इंसान के अंदर se…duniya का समाज का …ज़िन्दगी का और मौत का bhi…jo आरती थोड़ी देर पहले नवाज़ के रूम मई जाने को दर रही थी .. सोच रही थी की कोई देख न le…nawaz क्या समजेगा .. वही आरती अब हाथ मई प्लेट लेकर बेख़ौफ़ आ गयी thi……..ye बात और थी की आरती सब कुछ जानते हुई भी मान नहीं रही थी की उसे भी इश्क़ का रोग लग गया है……………

आरती उसके सामने कड़ी हो gayi..haat मई प्लेट लेके..

ले लो प्लेट और खाना खाओ

तब नवाज़ उसकी और गौर से देखने laga.…….tab आरती भी उसकी और देखने लगी..

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और चहरे पर स्माइल लेट हुई कहती है..

ऐसा क्या देख रहे हो

कुछ नहीं

नहीं बोल रहे हो और देखे जा रहे हो.. जैसे की पहली बार मुझे देख रहे हो

नहीं वो बात नहीं है .. सोच रहा हु

क्या सोच रहे हो

छोटे मालिक कितने खुसनसीब है जिनको आप जैसे सुन्दर बीवी मिली..

तब आरती शर्मा जाते है..

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और कहती है..

तुम भी मिल जाएगी

तब उसकी और देखता है और फिर बोलता है

मेमसाब मई सोच रहा शादी करलु

तो आरती बोली

कर लो .. अच्छा होता है शादी करना

हाँ ..आप सही कह रही हो मेमसाब

तुमने शादी के लिए कोई लड़की देखि है क्या

तब वो उसकी आँखों मई देखते हुई कहता है

आजकल अच्छी लड़की मिलती कहा है.. सबलोग छोटे मालिक की तरह लकी थोड़ी न होते है

इस बात पर आरती शर्मा गयी और थोड़ा बाजु हैट गयी ..और फिर पलट कर आरती ने नवाज़ के आगे प्लेट बढ़ा दी…………

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खाना नहीं खाना है क्या

हां हां खाना खाना है न..

ऐसा बोल के थोड़ा आगे बाद के उसके हाट से प्लेट लेता है.. तब वो हल्का सा लड़खड़ाया और सहारे के लिए उसने आरती के कंधे पर हाथ रख दिया.. और उसकी और देखते हुई नवाज़ ने सॉरी बोलै ..

आरती बोली

कोई बात नहीं..

और स्माइल करते हुई कहा

सम्बल नहीं सकते तो इतने पिटे क्यों हो

क्या करे मेमसाब कभी कभी दर्द इतना होता है की पिने पड़ती है

तब उसकी और देखते हुई कहती है

ऐसा भी क्या दर्द जिसके लिए तुम इतना पिने पद रहा है

नवाज़ कुछ नहीं बोलै …….. और चुचाप खाने लगा …….. आरती वाही उसके सामने खड़े होक उसे कहते हुए देखने लगी…..…

फिर कुछ सोचते हुई वो कहते है..

मैंने कुछ पूछा था तुम नवाज़

तब नवाज़ उसको देखते हुई कहता है

मुहब्बत का दर्द मेमसाब..

ऐसा कह के बीएड के पास गया और हाट मई का प्लेट बीएड पाई रख दिया और वह पड़ा उस लड़की का फोटो उठा लिया..

मेमसाब ये मेरा पहला प्यार..

यही मेरा सबसे बड़ा दर्द है.. दारू तो बहाना है ये दर्द बुलाने का..

तब आरती उसके पास जेक उसके हाट से फोटो लेते है और फोटो देखते है..

काफी खूबसूरत लड़की थी वो ..

उस लड़की को देखते हुई कहती है

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कोण है ये
 
ऐसा कह के बीएड के पास गया और हाट मई का प्लेट बीएड पाई रख दिया और वह पड़ा उस लड़की का फोटो उठा लिया..

मेमसाब ये मेरा पहला प्यार.. यही मेरा सबसे बड़ा दर्द है.. दारू तो बहाना है ये दर्द बुलाने का..

तब आरती उसके पास जेक उसके हाट से फोटो लेते है और फोटो देखते है..

काफी खूबसूरत लड़की थी वो ..

उस लड़की को देखते हुई कहती है ..

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कोण है ये

तन्वी

और उठ खड़ा hua..tab आरती उसे देखने लगी..

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“मेमसाब .…मुझे उसकी यद् आती है…..”

कुछ होश और कुछ बेहोशी के आलम में नवाज़ ने कहा और आरती के गले से लगकर बेतहाशा रोने laga…use तो ये भी खबर नहीं थी की आरती को तन्वी के बारे में पता है भी या नहीं ……

नवाज़ के गले लगने से आरती के शरीर में जैसे झुरझुरी सी दौड़ gyi…….wo मनो बहुत बन गयी… फिर भी उसने कहा..

“क्या कर रहे हो तुम ”

आरती ने धीरे से बोलै पर मनो नवाज़ ने सुना hi nahi..usne आरती को नहीं छोरा..

आरती को समझ में नहीं आ रहा था की वो नवाज़ से क्या बोले …….वो उससे दूर हेट या वैसे hi कड़ी रहे उसे कुछ समाज मई नहीं आ रहा tha..uske छथि पर नवाज़ के छथि का प्रेशर बाद रहा था..

नवाज़ प्ल्ज़ …रुको

आरती अब कुछ नहीं कर पा रही थी…..

नवाज़ प्ल्ज़ .. रुको..

पर नवाज़ ने रोना नहीं छोरा.. तब उसने नवाज़ को रोने diya…..wo चाहती थी की वो रो ले और इस वजह से उसके दिल का दर्द शायद कुछ काम हो जाये,………..

कुछ पल वो वैसे hi कड़ी रही और फिर चुप चाप उसे अपने कंधे पर टिकाये हुई hi उसके सर पर हाथ रखती है …..

“नवाज़ चुप हो जाओ तुम …plz…..tumko बहुत मजबूत बनाना hai….bahut आगे बढ़ना है …..और वैसे भी तुम बहुत मज़बूत हो ”

“नहीं हु मई मजबूत …….. मुझे कुछ नहीं चाहिए …………मुझे नहीं बढ़ाना है आगे.. …मुझे बस मेरी तन्वी chaiye…mujhe मेरी तन्वी ला दो memsaab…plz…..bolo न उसे की वो आ जाये ….. मेरे पास.. प्ल्ज़….”

आरती के कंधो से चिपक के वो किसी बच्चे की तरह बिलख रहा था…..

तब हस्ते हुई आरती कहते है

मई भला तुम्हारी आरती.. सॉरी सॉरी.. तन्वी को कैसे ला सकती हु

क्यों

मई तो उसे जानती भी नहीं वो कहा रहते है वो तो मुझे पता भी नहीं

मई एड्रेस दे देता हु उसका

तब नवाज़ के चहरे को उप्पर उतके उसे कहते है.. थोड़ा स्माइल करते हुई

एड्रेस देने से क्या होगा नवाज़.. अगर मई उससे मिलाने गयी और मैंने उससे कहा की तुम तुम्हारा नवाज़ याद कर रहा hai..tum चलो उसके पास तो क्या वो आएगी क्या

हाँ

क्यों

क्यों की वो आप जैसे hi सुन्दर है..

तब हस्ते हुई आरती कहती है

इसमे मेरे या उसके सुंदरता कहा आ गयी..

ये सुन्दर लड़की दूसरे सुन्दर लड़की की बात कैसे ताल सकती है

तब जरा शर्माके कहती है

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कुछ भी नवाज़.. ऐसा भी कब होता है क्या..

तब फिर से बुरा मू करके नवाज़ कहता है

फिर कैसे होगा

एक बात मुझे बताओ

पूछिए

तुम उसे प्यार करते हो वो तो पता है पर क्या वो भी करती है क्या प्यार तुमसे

हाँ पर लगता है अब नहीं लगता

और वो भला तुम क्यों लगता है

जबसे उसकी शादी हो गयी है तब से उसे क्या हो गया है पता नहीं मेमसाब.. वो पूरी बदल गयी है.. अब न वो मुझसे मिलते है और न hi कॉल करती है और न मैसेज.. और मई करता हु तो रिप्लाई भी नहीं देती

नवाज़ तुम मर्द लोग समजते नहीं पर औरत की जिंदगी बदल जाते है शादी के बाद

वो मई जनता हु पर

तब उसको देखते हुई कहते है

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पर भीड़ कुछ नहीं तुम उसे भूलना पड़ेगा जैसे उसने तुम भुलाया

पर मेमसाब मई उसे भूल नहीं सकता न मेमसाब

मई समाज सकती हु पर तुम उसे भूलना होगा

कोशिश कर रहा हु .. सिर्फ यही सहारा है बोल के दारू के बोतल को हाथ मई लेता है.. जो वह नीचे राखी थी

कोशिश करो नवाज़ पर इसका मतलब ये तो नहीं की आपने प्यार भुलाने के लिए तुम रोज दारू पिओगे..

तो क्या करू मेमसाब

तब थोड़ा स्माइल करते हुई उसके पास गयी और उसको कहने लगी..

नवाज़ दुनिया बहुत खूबसूरत है और ज़िनदगी उस से भी ख़ूबसूरत ………ज़िन्दगी में हर रंग होना चाहिए और तुम्हारे ज़िन्दगी में अब काळा रंगो का वक़्त ख़त्म हो gya…….nawaz तुम बहुत अच्छे हो और तुम्हारे लिए खुदा ने कुछ बहुत अच्छा सोचा होगा ……….. तुम्हारी ज़िन्दगी में कोई ऐसा आएगा जो इतनी खुसी देगा की तुम अपने सरे ग़म भूल jaoge…dekh लेना….

ये आरती ने कहा.. ….और आखिरी बात पर न चाहते हुए भी वो शर्मा गयी और उसके लाल गाल गुलाबी हो गए.

आप बहुत अच्छी हो.. इसलिए आप ऐसा सोच रही हो.. सब लोग ऐसा नहीं सोचते..

तब नखरे से कहती है..

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फिर तुम भी ऐसे लोंगो के बारे मई मत सोचो

ऐसा कहके उसके हाट से दारू की बोतल लेते है..

अब दारू नहीं खाना खाओ

थोड़ा पिने दो न

ऐसा कह के उसके हाथ से दारू की बोतल छीनने की कोशिश करता है

अभी दारू नहीं खाना खाओ

मेरा मैं नहीं है

मन नहीं हुआ तो भी खाना पड़ेगा

ऐसा बोल के दारू की बोतल साइड मई रख के बीएड पाई प्लेट जो थी खाने की वो आपने हाट मई लेते है और पलट के उसके और देखती हुई स्माइल करते हुई कहती है..

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अब खिलाना भी पड़ेगा क्या मुझे तुमको

ऐसा कहते हुई आरती ने अपने हाथ में एक निवाला उठाया और उसके होठो की और बढ़ा दिया …….. नवाज़ ने मुँह नहीं खोला….

“plzzzzzzzzzzz”

आरती ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा. तब नवाज़ ने चुपचाप मू खोला और उसके हाथ से निवाला खा लिया .तब बुरा सा मू करता है..

तब आरती कहती है

क्या हुआ ...सब्जी तीखी बानी है क्या ..

नहीं तो

तो फिर बुरा मू क्यों बनाया

नहीं वो तो ऐसे hi हुआ

तब दूसरा निवाला उसको खिलते है.. तब वो इस बार पहले से बुरा मू बनता है..

क्या हुआ मेरा खाना पसंद नहीं आया क्या तुम

नहीं न मेमसाब.. आप का खाना तो आप के जैसे hi मस्त होता है.

अच्छा फिर मू थेड़ा क्यों कर रहे हो

वो न इस बार लगता है नमक ज्यादा हो गया है

अच्छा नमक ज्यादा हुआ.. अरविन्द ने तो कुछ नहीं खाया

क्या साहब ने यही खाना खाया क्या

हाँ.. नहीं तो क्या मई क्या तुम्हारे लिए अलग थोड़ा hi बनाउंगी.. मुझे क्या ऐसा समझ रखा है क्या

नहीं न मेमसाब.. मुझे पता है आप मालिक और नौकर मई फरक नहीं करते हो

पता है तो बोलै क्यों

आप ने कहा न साहब ने कुछ नहीं कहा

हाँ उनोने कुछ नहीं कहा पर तुम कह रहे हो नमक ज्यादा हुआ है

तो क्या साहब जी को आपने आपने हटो से खिलाया क्या

नहीं तो

कभी भी

कभी भी नहीं ..

तब नवाज़ खुश होता है

क्यों

लगता है ये मौका मुझे hi मिला है

हाँ

साहब जी को नमक नहीं लगा और मुझे लगा तो लग रहा है फरक आपके हटो मई है

तब उसके सर पाई मरते है और बड़े अड्डा के साथ कहते है

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चल हटो बदमाश

आप को जूथ लग रहा है

नहीं तो

फिर मुज पर विश्वास नहीं है क्या

नहीं ये बात नहीं है

तो टेस्ट कर लो

नहीं कर सकती

क्यों

मेरा फ़ास्ट है

तो क्या आपने खाना नहीं खाया क्या आज

नहीं

अब तो 12 बज गए है.. दिन ख़तम हुआ.. अब दूसरा दिन सुरु हुआ है..

तो

फ़ास्ट चोर दो

ऐसा कह के एक निवाला उसके मू के पास नवाज़ ले जाने लगता है.. तब घूम के कहती है..

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नहीं नवाज़ मई ये नहीं कर सकती

फिर मुझे तो खिलाओ

तब घूम के कहती है

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क्या तुम नमक का खाना खाओगे

तो वो बोलै

अब हमारी प्यारी मेमसाब ने बनाया है तो हमें खाना पड़ेगा hi न ..

आरती ब्लश करने लगी "प्यारी मेमसाब" सुनकर और फिर कहती है

सॉरी..

किस बात के लिए…………

वो नमक के लिए

कुछ नहीं होगा खिलाओ मुझे .. आप के लिए हम ज़हर hi खा लेंगे नमक क्या चीज़ है

तब उसे आरती खाना खिलने लगी.. कुछ निवाले hi खाये थे उसने की उसे जोर की हिचकी आयी और आरती ने पानी का गिलास उठाकर उसके होठो से लगा दिया ………….

नवाज़ ने दो घूँट पानी पिया और उतने hi आंसू उसकी आँखों से निकल गया………

तब आरती कहती है

अब क्या हुआ

मुझे तन्वी की यद् आ गयी …इतनी केयर तो केवल तन्वी hi करती थी मेरी …………….

तब स्माइल करते हुई कहते है

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वैसे ये तन्वी तुम मिली कहा

शहर मई

शहर मई तुम क्या कर रहे थे..

उसको खाना खिलते हुई कहा

दोस्तों के साथ शादी मई गया था

वैसे कितने दिनों तक चला ये तुम्हारा

2-2. 5 साल

फिर तो सब कुछ किया होगा उसके साथ

हाँ वो भी क्या पूछने की बात है क्या मेमसाब

फिर उसके बाद नीता या वंदना

वंदना

और फिर नीता न

हाँ ..

तुम्हारे तो मज़े है

हाँ

नीता के बाद और कोई है

नीता के बाद न

कह के चुप हो गया..

आरती ने भी कुछ नहीं कहा और प्लेट ली और दरवाज़े की और बढ़ी …

मेमसाब

नवाज़ की आवाज़ उसके कानो में padi..wo फिर पीछे मुड़ी नवाज़ की और देखने लगी ………….

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फिर नवाज़ उसके पास जाते है.. उसके गले लग के कहती है

मेमसाब आप बहुत अच्छी हो

आरती मुस्कुरा देते है.. पर कहते कुछ नहीं

थैंक यू मेरी प्यारी मेमसाब

तब स्माइल करते हुई कहती है

“सुबह बात करेंगे””

उस ने ये कहा और बहार निकल गयी………
 
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