Kya Govind yunhi tarasta rahe ga - SexBaba
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Kya Govind yunhi tarasta rahe ga

hotaks

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दोस्तों ये मेरी पहली स्टोरी हे किसी भी फोरम पे….

कोई कोताही या ग़लती हो तो माफ़ कीजिये गए…

काल्पनिक स्टोरी हे….. किसी जीवट या मुर्दा इंसान से कोई सम्बन्ध या लिंक नही….

यह अमर भी समझना ज़रूरी हे के अगर रियल लाइफ मैं इन्सेस्ट होता हे तो ओपन नहे हे… गुप्त हे और टाइम लगता हे रिश्तों के परदे उठने में… झिझक दूर होने में… तो प्लीज स्टार्ट से hi इंसिस्ट मत कीजिये गए के भाई बहिन सेक्स करें…

सब से इम्पोर्टेन्ट दोस्तों… अभी मेरी रियल लाइफ में संघर्ष हे और नई जॉब हे जिस के लिए ज़यादा एफर्ट करनी पार्टी हे तो स्पेयर टाइम इतना नहे होता…. इसलिए अपडेट वीकली 1 या 2 से ज़यादा नहे होंगे….

प्लीज बर्दाश्त कीजिये गए और अपने कमैंट्स, अप्प्रेसिअशन या फिर क्रिटिसिज्म ज़रूर पोस्ट कीजिये गए ता के कहानी को इम्प्रूव कर सकूं….

थैंक्स….
 
डिस्क्लेमर:

थिस स्टोरी इस एंटीरेलय बेस्ड ों फंतासी एंड इस ा वर्क ऑफ़ फिक्शन एंड है बीन प्रेसेंटेड इन गुड फेथ फॉर एंटरटेनमेंट purpose(s) ओनली. नेम्स, चरक्टेर्स, बिज़नेस, इवेंट्स एंड इन्सिडेंट्स अरे थे प्रोडक्ट्स ऑफ़ थे author’s इमेजिनेशन. अन्य रेसेम्ब्लेंस तो एक्चुअल पर्सन्स, लिविंग और डेड, और एक्चुअल इवेंट्स इस पुरेली कोइन्सिडेंटल. थिस फिक्शनल वर्क इस नॉट प्रेसेंटेड तो ऑफेंड एनीवन और सपोर्ट अन्य स्पेसिफिक कॉज और प्रोपेगेट अन्य मिंडसेट और सपोर्ट अन्य ओरिएंटेशन और अन्य थिंकिंग पैटर्न. लाइफ इस नॉट फिक्शन एंड ओने शुड नॉट बे इन्फ्लुएंस्ड बी फिक्शनल इवेंट्स और चरक्टेर्स; रियल लाइफ सक्सेस इस अचीवेद थ्रू हार्ड वर्क, ट्रुथफुलनेस, इंटीग्रिटी, फेयरनेस एंड लिविंग तो थे फुल्लेस्ट पोटेंशियल. लइकइसे रिलेशनशिप्स कैन बे प्रेसेर्वेद थ्रू एम्पथी एंड सेंस ऑफ़ बेलोगिंग्नेस एंड नॉट बी फैंटसीज. तेरे इस no शॉर्टकट इन थे लाइफ.


रेगार्ड्स एंड बेस्ट विशेष
 
सम इंटरेस्टिंग फैक्ट्स एंड

मेस्सगेस / कोट्स / पोएट्री ऑफ़ थिस स्टोरी

Episode - 68

Spoiler: Brothels inhibit bodies; void of soul.

“Veshyaalay me bas jism baste hein; aatma se rahit.”

“Brothels inhibit bodies; void of soul.”

“वेश्यालय शरीरों से भरे हुए हैं; आत्मा से रहित।”

Spoiler: Body can be sold

“jism to bik sakte hein magar jazbaat nhi…”

“Body can be sold but the emotions are not…”

“जिस्म तो बिक सकते हैं मगर जज़्बात नही…”

Spoiler: Brothels are graveyards of decency of reputables.

“Kothe to qabrustan hote he shareefo ki sharaft ke…”

“Brothels are graveyards of decency of reputables.”

“कोठे तो क़ब्रस्तान होते हे शरीफों की शराफत के…”

Spoiler: Men do not also make anyone cry.

“Aik aadamee ko bachapan se sikhaaya jaata hai ki purush rote nahin hain, lekin ek Maan apane bachchon ko ye kyon nahin sikhaatee ki purush bhee kisee ko rulaate nahin hain.”

“A man is taught from childhood that men do not cry, but why doesn't a mother teach her children that men do not also make anyone cry.”

“एक आदमी को बचपन से सिखाया जाता है कि पुरुष रोते नहीं हैं, लेकिन एक माँ अपने बच्चों को क्यों नहीं सिखाती कि पुरुष भी किसी को रुलाते नहीं हैं।“

Spoiler: Mesmerizing Eyes!!!

"Hum Haseen Hone Ka Daava to Nahi Karte,

Par Aankh Bhar Dekh le jise Usse Uljhan Mai Daal De"

Episode - 69

Spoiler: She is also a woman; she longs for respect too.

"Wo bhi aik aurat he… samaan ki chahat usse bhi to hogi…"

"She is also a woman; she longs for respect too."

"वो भी एक औरत है… सामान की चाहत उसे भी तो होगी…"

Spoiler: Before a man introduces himself, his behavior represents him to the world and introduces him.

"Isase pahale ki koee vyakti apana parichay de, usaka vyavahaar use duniya ke saamane prastut karata hai aur usaka parichay deta hai."

"Before a man introduces himself, his behavior represents him to the world and introduces him."

"इससे पहले कि कोई व्यक्ति अपना परिचय दे, उसका व्यवहार उसे दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है और उसका परिचय देता है।"

Spoiler: Whatever is given to a woman; she returns it back.

"Purush apana beej stree ke garbh mein rakhata hai aur vah us beej ko apane rakt, prem aur garmajoshee se grahan karatee hai. 9 maheene ke baad, vah ek adbhut rachana ko janm detee hai; ek pyaara bachcha.

Navajaat shishu apane garbh mein daale gae beej kee tulana mein aur aakaar ke maamale mein bahut bada hota hai, sabase mahatvapoorn baat yah hai ki yah jeevan aur jeevit hai.

Aik mahila ko jo kuchh bhee diya jaata hai, vah duniya ko adhik parimaan, maatra aur teevrata mein aur kabhee-kabhee prakrti mein vaapas detee hai."

"The man puts his seed into woman's womb and she embeds that seed with her blood, love and warmth. After nine months, she gives birth to a wonderful creation; a sweet and lovely child.

The newborn child is much greater in terms of size in comparison to the seed that was put into her womb an dmost importantly it is full of life and alive.

Whatever is given to a woman, she gives it back to the world greater in magnitude, quantity and intensity and sometimes in nature."

"पुरुष अपना बीज स्त्री के गर्भ में रखता है और वह उस बीज को अपने रक्त, प्रेम और गर्मजोशी से ग्रहण करती है। नौ महीने के बाद, वह एक अद्भुत रचना को जन्म देती है; एक प्यारा और प्यारा बच्चा। नवजात शिशु अपने गर्भ में डाले गए बीज की तुलना में आकार के मामले में बहुत बड़ा होता है, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह जीवन और जीवित है। एक महिला को जो कुछ भी दिया जाता है, वह दुनिया को अधिक परिमाण, मात्रा और तीव्रता में और कभी-कभी प्रकृति में वापस देती है।"

Episode - 70

स्पोइलर: हे इस माइन!!!

जो मेरा है मैं किसी और को क्यों दूँ ...!!!

मैं अपनी मोहब्बत में बच्चों की तरह हूँ...!!



Spoiler: Your beauty ha staken over entire world

Hai Aks Tera Mayasar Jis Simt Bhe Daikhon

Kia Har Koi Tum Sa Hai, Ya Saara Jahan Tum Ho..!

Spoiler: Tears washed away her miseries

“Us ke aansoo the ke bahe ja rahe the… har behte aansoo ke sath zindagi ki talkhiyan bhi kam ho rahee thee… dil ke ghubaar dhul rahe the… jese aik roshan subah ho rahi thee….”

“Tears were flowing down her cheeks. With each dropping tear; agonies and miseries of her life were diminishing, vexation of heart was fading away. A bright day was rising through.”

“उसके गालों से आंसू बह रहे थे। हर आंसू के साथ; उसके जीवन के कष्ट और कष्ट कम हो रहे थे, हृदय का क्लेश दूर हो रहा था। के माध्यम से एक उज्ज्वल दिन बढ़ रहा था।”

Spoiler: Transformation of a prostitute to a mother

“Aik tawaif ko aik Maa ban kar aisa lag raha tha ke jesse aaj hi us ne janam liya ho…”

“Transformation from a prostitute to a mother; felt like a new birth.”

“एक वेश्या से एक माँ में परिवर्तन; एक नए जन्म की तरह महसूस किया।”
 
EPISODE - 1

साधु महाराज गरज कर बोले….

“बालक, तो फिर ठीक हे अगर तू अपनी इच्छा मुझे नहे बता रहा तो परन्तु में तुम्हें अपनी मर्ज़ी से शक्ति दे रहा हूँ… जैसा के…”

तू सब का ख़याल रखे गए और तुझे यह शक्ति प्राप्त हो गयी हे के तू और लोगों के एहसास और ख़याल जान ले और उन की हर तरह की सहयता करे…

ये कह कर साधू महाराज पलट कर एक दिशा की तरफ चल दिए और देखते hi देखते, जंगल में कहीं गायब हो गए….

“गोविन्द” बट बना ये सब देख रहा था, न कुछ बोल प् रहा थान ा कुछ समझ प् रहा था….

ये “गोविन्द” के साथ आखिर क्या माजरा हुआ???

“गोविन्द” इक 18 साल का सेहत मंद नौजवान हे… एक ग़रीब फॅमिली से तालुक रखता हे…. इक छोटे से गाँव “स्वार्म्शेर” में रहते हैं…

कभी कभी मामूल से हैट कर, गोविन्द, खेतों से वापसी नदी की तरफ से करता हे. उस रस्ते का कुछ हिस्सा जंगल से हो कर गुज़रता हे…

आज जब गोविन्द जंगल के करीब पोहंचा तो उससे बौहत खौफनाक आवाज़ें आने लगी… पहले तो गोविन्द घबराया मगर फिर उस ने सोचा के शैयद कोई मुसीबत में हो तो उस की मदद की जये…

गोविन्द नेचर वाइज बोहत शरीफ, एक, सच्चा, खरा, दूसरों की मदद करने वाला, ज़हीन, और दिलेर नौजवान हे…

गोविन्द ने जब आवाज़ों की तरफ कदम बढ़ाये तो देखा क ीक साधु महाराज के सामने एक बोहत बारे नाग हे जो साधु की तरफ बढ़ रहा हे और महाराज कुछ मंतर पढ़ रहे हैं…

गोविन्द ने फ़ौरन एक पत्थर उठाया और टाक के नाग के सर का निशाना बंधा…

गोविन्द ने पत्थर पूरी ताक़त से नाग के सर की तरफ दे मारा….

कोशकिस्मती से पत्थर अपने निशाने पर लगा और देखते hi देखते जिस जगह नाग था वहां धुवां उठा और नाग की जगा एक इन्ताही बदसूरत काळा रेंज के शख्स की लाश आ गए और फिर वो लाश भी ग़ायब हो गई…

ये सब माजरा देख कर गोविन्द दर के मारे थार थार कंपनी लगा…

भले हे गोविन्द एक दिलेर नौजवान था पर था तो सिर्फ 18 साल का और समझ गया था के ये जादू और अकाल से मावरा शक्तियों का खेल था…

गोविन्द अपनी जगा जैसे जम कर रह गया और न कुछ बोल पा रहा था और न अपनी जगा से हिल रहा था…

साधु महाराज ने अपनी नज़र गोविन्द की तरफ की और गरज कर बोले…

“बालक, तुम्हारा धनयवाद के तुम ने मेरी सहयता की… ये मेरा पुराण दुश्मन था और बोहत शक्ति शैली था… अगर आज तुम ने इस पर वार न किया होता तो मेरी लिए इस को मरना मुश्किल था…”

“बोलो बालक, में तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ”

महाराज की आवाज़ बोहत गूंजदार और roa’ab से भरपूर थी…

मगर गोविन्द को तो सकता तरी हो चुक्का था… न वो कुछ बोल प् रहा था न hi हरकत कर रहा था…

साधु महाराज उस की स्थिति समझते हुए…. ज़ोर से गूंजदार आवाज़ में बोले….

“बालक, तो फिर ठीक हे अगर तू अपनी इच्छा मुझे नहे बता रहा तो परन्तु में तुम्हें अपनी मर्ज़ी से शक्ति दे रहा हूँ के…”

तू सब का ख़याल रखे गए और तुझे यह शक्ति प्राप्त हो गयी हे के तू और लोगों के एहसास और ख़याल जान ले और उन की हर तरह की सहयता करे…

ये कह कर साधू महाराज पलट कर एक दिशा की तरफ चल दिए और देखते hi देखते, जंगल में कहीं ग़ायब हो गए….
 
रिकैप फ्रॉम Episode - 1...

गोविन्द, 18 साल का ग़रीब नौजवान एक साधु महाराज की हेल्प करता हे और साहू उस को इक शक्ति से प्राप्त करता हे...

शक्ति यह हे के गोविन्द किसी के भी ख़य्यल जान सकता हे और सोच पढ़ सकता हे...

अब आगे क्या होता हे देखिये....

EPISODE – 2

गोविन्द काफी देर के बाद जैसे किसी खवाब से बेदार हुआ… और ये सब उससे कोई अफसाना या ख़याली वाक़िअ लग रहा था… मगर उस का ज़हन कुछ बोझल सा हो चुक्का था… जैसे कोई बोझ सा हो दिमाग़ पर और जिस्म पर…

गोविन्द गाँव के स्कूल से मेट्रिक कर चुक्का था… एजुकेशन आगे बढ़ाना छठा था मगर बापू की माली हालत कुछ अछि नहे थे… मेट्रिक भी, गोविन्द ने स्कालरशिप से किया tha…ek मेहनती और ज़हीन स्टूडेंट था…

कॉलेज शहर में था और इतने पैसे नहे थे के कॉलेज में एडमिशन ले कर शहर में रह सके…

पिछले 1 साल से, गोविन्द ज़मींदार के पास नौकरी कर रहा था… इस के ज़िम्मे कुछ काम खेतों पर, और कुछ हवेली में था…

साथ साथ जब ड्राइवर छुट्टी पे होता तो ज़मींदार की या उस के बेटे की कार भी गोविन्द चलता था… कभी कभी मुंशी जी के साथ बेथ कर हिसाब किताब भी देख लेता हे…

गोविन्द का बारे भाई, “प्रकाश” भी ज़मींदार के खेत पर काम करता हे पिछले 2 साल से… प्रकाश को एजुकेशन में कोई दिलचस्पी नहे हे… वो सिर्फ 5 क्लास तक पढ़ सका… गोविन्द का बापू भी ज़मींदार के पास हे काम करता हे… गोविन्द, उस का बापू और उस का भाई तीनो काम करते हैं फिर भी घर का खर्च मुश्किल से चलता हे और काफी तंगी रहती हे…

गोविन्द का बापू हमेशा से ग़रीब नहे था… और न हे इस गाँव का बासी… वो कहाँ से आया था इस बात का खुलासा आगे चल कर होगा…

कैलाश नाथ (गोविन्द का बापू) ने दो (2) साल पहले जब उस के पास कुछ पैसे थे… उस ने “दौलत पुर”, सेहहर, के एक बारे बोपारी, सेठ गिरधारी लाल, के साथ पार्टनरशिप की… दोनों के दरमियान रिटेन एग्रीमेंट हुआ और सारा पैसा इन्वेस्ट किया गया और बोहत सरे मॉल मवेशी ख़रीदे गए… शहर के पास एक फार्म हाउस पे सरे मॉल मवेशी रखे गए… कैलाश खुद सरे मॉल मवेशी की निगरानी करता था और वही फार्म हाउस पे रहता था… उन्ही दिनों उस को गाँव से एक लेटर आया जिस में लिखा था के उस की वाइफ सख्त बीमार हे… वो फ़ौरन सब कुछ चोर कर गाँव की तरफ चल निकला… गाँव पोहंच कर पता चला के वो लेटर फेक था… वो एक दिन गाँव में थेर कर फार्म हाउस वापिस पोहंचा तो सरे मॉल मवेशी ग़ायब थे… वहां मौजूद मुअलज़िम ने बताया के डाकू आये थे और सरे मॉल मवेशी ट्रैक में लोड कर के ले गए…

सेठ गिरधारी लाल ने सारा इलज़ाम कैलाश नाथ (गोविन्द के बाप) पर धार दिया… सेठ का शहर में बारे असर रसूख था उस ने पुलिस के पास कैलाश को अरेस्ट करा दिया… और कैलाश को कहा गया के वो दस लाख (1,000,000) जुरमाना भरे… कैलाश अपनी साडी रक़म पहली hi सेठ गिरधारी को दे चुक्का था और अब उस के पास कुछ भी न था… इस बात के फैसले के लिए एक जिरगा बिठाया गया… जिरगे के लोगों पर भी सेठ गिरधारी लाल का असर था… और उन्होंने ने ये फैसला किया के कैलाश नाथ अपनी दो बेटियों वर्षा और अक्षरा की शादी सेठ गिरधारी लाल के बेटों से करे गए… सेठ के दो बेटे हैं और एक बेटी… बारे बेटे, चेतन लाल, की उम्र 40 साल थी और उस की पहले शादी हुई थी जिस में तलाक़ हो गयी…. दुसरे बेटे, बिपिन लाल, की उम्र 38 साल थी वो आयाश था उस ने शादी नहे की थी… मजबूरन, कैलाश को अपनी बेटियों से बात करनी पारी और उस की बेटियों ने अपने बाप की इज़्ज़त की खातिर अपने से 20 साल बारे मर्दों से शादी की हामी बाहर ली… सेठ गिरधारी लाल ने शर्त राखी थी के ये कैलाश और उस की फॅमिली से वर्षा और अक्षरा का शादी के बाद कोई मेल जॉल और सम्बन्ध न होगा… और यूँ ये शादियां हो गयी…

अब आते हैं गोविन्द की तरफ… देखें उस के साथ क्या हो रहा हे, महाराज से मिलने के बाद??

गोविन्द को इस वक़्त खेत से हवेली की तरफ जाना था और वहां से फिर अपने घर की तरफ रवाना होना था… मगर अभी जंगल में हुए वाक़ये के बाद वो परेशानी के आलम में घर की तरफ चल पारा…

घर से कुछ पहले वो एक दरख़्त के नीचे बेथ गया और फिर सोचने लगा के क्या ये सब हकीकत थे और साधु माहारज ने उस से जो कुछ कहा क्या वो सच था और क्या गोविन्द को किसी किस्म की कोई शक्ति प्राप्त हो चुकी हे… मगर ये शक्ति क्या हे और इस को इस को और इस की फॅमिली को क्या फ़ायदा हो गए…

गोविन्द काफी देर एहि सोचता रा और फिर उससे दूर से अपना बापू घर के दरवाज़े से निकलता हुआ दिखा… गोविन्द फ़ौरन उठ खरा हुआ और घर की तरफ रुख किया… रस्ते में अपने बापू से मिला और उस के पैर छुए… बापू ने आर्शीवाद दिया…

गोविन्द ने बापू की तरफ देखा तो बापू को कुछ परेशां पाया… गोविन्द ने जेसे हे बापू की तरफ ग़ौर किया और धयान लगाया तो उससे ऐसा लगा जेसे वो बापू की आवाज़ सुन रहा हे… मगर उस के बापू का मुंह तो बंद था… ये आवाज़ कहाँ से आ रही हे…

गोविन्द को फ़ौरन ये ख्याल आया के क्या सच में वो बापू की सोच को जान प् रहा हे… जैसा के साधु महाराज ने कहा था??

गोविन्द ने फिर धयान लगाया बापू की तरफ जो की अब आगे की तरफ क़दम बढ़ा चुक्का था… अब की बार जब गोविन्द ने धयान लगाया तो महसूस हुआ के उस का बापू ये सोच रहा हे के घर का दरवाज़ा रिपेयर होना हे और संडे के दिन दरवाज़े को ठीक करे गए…

गोविन्द अपने घर के दरवाज़े के तरफ बढ़ा तो वाक़ई ग़ौर करने पर देखा के दरवाज़े के इक तरफ का लकड़ी दीमक खा रही हे…. हु हैरान रह गया के वाक़ई उस को शक्ति प्राप्त हो गई हे के वो लोगों की सोच पढ़ सके…

गोविन्द को ये तो पता चल गया के वो किसी का ख़याल जान सकता हे और सोच पढ़ सकता हे… मगर सहयता कैसे करे गए ये उससे अभी मालूम नहे था और ये ख़याल उससे परेशां कर रहा था…

बहरहाल… गोविन्द घर में दाखिल हुआ …. माँ का आशीर्वाद लिया…

माँ… “बीटा, आज जल्दी आ गए… ख़ैर तो हे”

गोविन्द अपनी माँ को परेशां न करते हुए, बहाना बनाया के माँ घर का दरवाज़ा ठीक करना हे… और किचन में जा कर केरोसिन आयल लिया और एक पुराण कपड़ा उठाया और जहाँ जहाँ दीमक थी वहां उस ने केरोसिन आयल में भीगा कपड़ा लगता गया…. साडी दीमक साफ़ कर दी… उस के बाद… गोविन्द ने कुछ एतमाद महसूस किया… और बोझल पैन दूर हो गया…

गोविन्द को लगा के उस को ये एक बरी शक्ति मिली हे के वो अपने प्यारो के ख़याल जान कर उन की मदद कर सकता हे…

गोविन्द ने सहन में लगे नलके से हाथ मुंह धोया और कमरे की तरफ बढ़ा जहँ उस की जुड़वाँ प्यारी बहन ेषणा पढ़ रही थी… ेषणा, गोविन्द की जुड़वाँ बहन हे… मेट्रिक की स्टूडेंट हे…. बोहत प्यारी और सुशील लड़की हे…

ेषणा… गोविन्द को देखते हे उछाल पारी और भाई के गले लग गयी… गोविन्द ने अपनी प्यारी बहना का माथा चूमा… और न चाहते हुए भी धयान लगाना शुरू कर दिया…

ेषणा की सोच… “बहिया कितनी म्हणत करते हैं.. भैया के हाथ कितने सख्त हैं… भरपूर मरदाना हाथ…” एक और सोच उभरी …

“यह मैथ्स कितनी फज़ूल हे… क्वाड्रटिक ेकशन समझ में हे नहे आ रहे…”

गोविन्द, अपनी बहन की सोच पढ़ कर मुस्कराया…

Govind…“kya पढ़ रही हो… कुछ समझ न ए तो पूछ लो…”

ेषणा… “हाँ भैया, यह क्वाड्रटिक ेकशन समझा दो…”

गोविन्द, ेषणा को पढ़ाने लगा… ेषणा बारे धयान से समझ रही थी और बोहत जल्दी उस ने पिक कर लिया…. कमरे से निकल कर… गोविन्द अपनी माँ के पास किचन में चला गया… जहाँ पर माँ रात का खाना बना रही थी….

गोविन्द ने माँ को ज़ेहन में लेट हुए धयान लगाया…

माँ की सोच… “पैर बारे दर्द कर रहे हैं… ेषु पढ़ ले तो उस को कहती हु के तेल की मालिश कर दे…”

गोविन्द चुपके से उठा और सरसों का तेल एक छोटी कटोरी में ले कर उस को थोड़ा गरम किया…

माँ… “बीटा, ये तेल क्यों गरम कर रहे हो…”

गोविन्द चुप रहा और तेल हल्का सा गरम कर के … माँ के पास बेथ गया और माँ के पाऊँ पर तेल लगाने लगा… गोविन्द को मालूम था के माँ खुद से कभी उस को तकलीफ का नही कहे गई…

माँ… “बीटा, तू रहने दे… थका हुआ आया हे… ेषु लगा दे गई मुझे तेल…”

“और यह तुझे किस ने कहा के मेरे पाऊँ में दर्द हे???”

गोविन्द… “माँ, में तेरा हे हिस्सा हूँ … तुम से जुड़ा नही हूँ… तेरी तकलीफ मह्सूस कर सकता हूँ…”

माँ के आँखें नुम हो गयीं और ढेर साडी दुआएं देने लगी… जब गोविन्द मालिश कर चुक्का तो… माँ ने उस के हाथ चूम लिए…

गोविन्द को बोहत ाचा लगा… उस ने अपनी माँ को बैठे बैठे गले लगा लिया…. इक अजीब सी ख़ुशी और इत्मीनान था इस प्यार में…
 
रिकैप फ्रॉम Episode - 2...

गोविन्द को साधु महाराज की तरफ से मिली शक्ति का अंदाज़ा हो चूका हे के उससे कैसे इस शक्ति को इस्तेमाल करते हुए दूसरों के ख़य्याक जानने हैं और कैसे उन की सहयता करनी हे....

गोविन्द को सेक्सुअल फीलिंग्स का भी पता चलता हे के लोगों की सेक्सुअल नीड्स क्यों ज़रूरी हैं ...

गोविन्द के बापू, कैलाश नाथ, के साथ "दौलत पुर" शहर के बोपारी ने कैसे धोका देकर सारा माल हड़प कर गया और कैलाश को कंगाल कर दिया... और गोविन्द की दोनों बहनो की शादियां कैसे हुईं...

गोविन्द फॅमिली के साथ कनेक्ट हो रहा हे और अपनी माँ और जुड़वाँ बहिन ेषणा के साथ कैसे कनेक्ट हो रहा हे...

EPISODE – 3

(अब कुछ गोविन्द की फॅमिली और घर के बारे में…)

“गोविन्द” के पिता, कैलाश नाथ… 45 साल के हैं… गाँव के ज़मींदार राणा वीर सिंह के यहाँ काम करते हैं, और उन के माल मवेशी की देख भाल करते हैं… ज़मींदार बदले में, कैलाश नाथ को खाने के लिए अनाज और सब्ज़ी और हर तेहवार पर कुछ पैसे और कपड़े देते हैं… कैलाश की माली हालत अछि नहे….

कैलाश नाथ की पत्नी रजनी 40 साल की महिला हे… घर के देख भाल करती he…Kailash नाथ और रजनी की शादी काम उम्र में हुई और 5 बचे भी हैं… 3 बेटियां और 2 बेटे…

पहली (1) बेटी, वर्षा, 22 साल की, मैरिड हे…

वर्षा

Varsha.jpg


दूसरी (2) बेटी, अक्षरा, 21 साल की, मैरिड हे…

अक्षरा

Akshara.jpg



तीसरे (3) नंबर पे पहला बीटा, प्रकाश, 20 साल का और ुनमर्रिएद… वैसे तो घर काफी बारे हे पर सारा कच्चा हे और सिर्फ दो रूम हैं… रात को इक कमरे में कैलाश और उस की पत्नी सोते हैं और दुसरे कमरे में ेषणा सोती हे… प्रकाश और गोविन्द बहार सहन में चारपाई दाल कर सोते हैं…

चौथे (4) नंबर पे दूसरा बीटा, गोविन्द, 18 साल का, (काफी ज़िक्र हो चुक्का हे..)

पांचवें (5) नंबर पर, ेषणा, (गोविन्द की जुड़वाँ, 5 मिनट बाद पैदा हुई) घर की राज दुलारी… सब की आँख का तारा…

ेषणा

Eshana.jpg



अगले रोज़, मामूल के मुताबिक़, सब अपने अपने काम को रवाना हो गए… पिछली शाम को गोविन्द हवेली न जा सका था इस लिए वो सीधा हवेली पोहंचा…

वहां पर ज़मींदार की बीवी “शकंतुला देवी” गोविन्द पर बरस पारी और उस को पिछली शाम हवेली न आने पर काफी बातें सुनायी… शकुंतला देवी और ज़मींदार दोनों काफी गरम मिज़ाज के थे और मुलिज़्मों की बेइज़्ज़ती का कोई मौक़ा हाथ से नहे जाने देते थे… शकुंतला देवी की आगे 45 साल के करीब और ज़मींदार की आगे 50 साल हे… दोनों खासे सेहतमंद और किसी हद तक मोठे हैं…

ज़मींदार का एक बीटा राणा सिमर सिंह और एक बेटी हे, किआरा…

ज़मींदार का बीटा, राणा सिमर सिंह, 30 साल का जवान हे… मैरिड हे… 1 साल हुआ हे शादी को… सिर्फ मेट्रिक पास हे… बद्तमीज़ और झगड़ालू हे मगर गोविन्द का काफी ख़याल करता हे…

मल्टी भाभी (सिमर सिंह की बीवी), 20 साल आगे, बोहत खूबसूरत, पास के गाँव के ज़मींदार की संतान हे और खासी एडुकेटेड हे… सुसराल से खुश नहे… बोहत बाइख़लाक़ लड़की हे सब के साथ ाचा सलूक करती हे… गोविन्द को बोहत मान देती हे…

मल्टी भाभी

Malti-Bhabhi.jpg


भाभी अपने शोहर से खुश नहे उस के 2 कारन हे… 1) ुनेदुकातेड़ हे और बद्तमीज़ हे 2) रोज़ रात को शराब पि कर धुत हो जाता हे और फिर उससे होश नहे होता के वो क्या कर रहा हे… कभी भाभी पर हाथ भी उठा देता हे और कभी गरम करके जिस्मानी सुख नहे देता और भाभी तमाम रात तृप्ति रहती हे…

ज़मींदार की बेटी, किआरा, 18 साल आगे, शहर के कॉलेज में पढ़ती हे, रोज़ाना गाँव से सुबह कॉलेज जाती हे और शाम को शहर से वापिस आती हे… मेट्रिक गोविन्द के साथ गाँव के स्कूल से किया हे और गोविन्द को सिलेंटली लिखे करती हे… कभी अपनी फीलिंग्स का इज़हार नहे कर सकीय… बोहत शर्मीली सी हे…

किआरा

Kiara.jpg



गोविन्द भी मल्टी भाभी और किआरा की बोहत रेस्पेक्ट करता हे… और जनता हे के दोनों उस का ख़याल रखती हैं…

वापिस आते हैं शकुंतला देवी की तरफ जो के गोविन्द पे बरस रही हे…

गोविन्द… सर झुकाये, ख़ामोशी से सुनता रहा… जब शकुंतला देवी का ग़ुस्सा काम हुआ तो उस ने कहा “जाओ स्टोर में गंदुम राखी हे उससे साफ़ कर दो”

स्टोर में पोहचने पर गोविन्द ने देखा के… राजन काका वहां पहले से मौजूद हैं और कुछ पुराण सामान उठा कर बहार निकाल रहे हैं ताकि उससे जाया कर दें या किसी को दे दें… कुछ सामान काफी वज़नी हे और राजन काका 60 साल के हैं… मगर शकुंतला देवी को उन पर कोई तरस नहे आता… काका का आगे पीछे कोई और हवेली में hi नोकरो के लिए बने कमरे में रहते हैं…

गोविन्द कोने में बेथ कर गंदुम साफ़ करने लग जाता हे… उस का दिल बोहत मलाल में हे क्यों के वो राजन काका की कोई मदद नहे कर सकता…

अपने आप… गोविन्द का धयान लग जाता हे राजन काका की तरफ… और उन की सोच पढ़ कर उस के पाऊँ टेल से ज़मीन निकल जाती हे…

राजन काका जो की नोर्मल्ली गोविन्द के साथ बोहत प्यार से पेश आते हैं और उस को बीटा कहते हैं मगर….

राजन काका की soch…“mujh बूढ़े पर कोई रेहम नहे करता… यह लौंडा गोविन्द भी चुपके से आ कर बेथ गया हे गंदुम साफ़ करने… मादरचोद… इतना नहे हुआ के काका से पूछ ले… और मदद कर दे… फिर गंदुम साफ़ करे…”

राजन काका की soch…“wo मोती शकुंतला … मोठे मम्मों को ऊपर नीचे हिलती रहती हे और हर वक़्त ज़लील करती हे… और मोती गांड को आगे पीछे मटकती रहती हे… ग़लती हुई जब जवानी थी तो इस को टाँगे उठा कर छोड़ देता तो आज मुझ से इज़्ज़त से बात करती… अब तो साला लुंड भी खरा नहे होता… सुकर के चूहा बन गया हे… सर्दी के दिनों में ढूंढना परता हे के कहाँ हे…”

गोविन्द… राजन काका की सोच जान कर हैरान परेशां रह गया… साथ साथ यह भी समझ रहा था के सामान वज़नी हे और काका को उठाने में तकलीफ हो रही हे इसी लिए ऐसा सोच रहे हैं…. और गोविन्द इतनी शिद्दत से सोचने लग गया के काका की मदद के लिए एक पल को उस को ऐसा लगा जैसे वो वहां बैठे बैठे गंदुम भी साफ़ कर रहा हे और बायक वक़्त काका के अंदर समा कर उन के साथ सामान उठा रहा हे…

काका को ऐसा लगा जैसे उन के अंदर इक अंजनी ताक़त आ गई हे और वज़नी संदूक उन्हों ने एक हाथ से उठा लिया और इसी तरह चाँद पलों में सारा सामान बहार रख दिया… और परेशान खरे हो गए के ये क्या माजरा हुआ….

गोविन्द, अपनी जगह पे बैठे बैठे सारा माजरा समझ गया और उस को अपनी शक्ति के दुसरे part का अंदजा भी हो गया के…

एक तो वो किसी के ख़याल या सोच को जान या पढ़ सकता हे और अगर कोशिश करे तो दुसरे के अंदर समां कर उस के साथ मिल कर उस के काम में उस का हाथ बता सकता हे…

गोविन्द बेहद खुश था…. और साधु महाराज को दुआयें देने लगा…

उसी वक़्त गोविन्द को इक और बात का भी इदराक हुआ….

के वो अपने काम को ज़यादा तेज़ी, फुर्ती से नहे कर सकता और चाहे भी तो अपनी ताक़त में अपने काम के हवाले से इज़ाफ़ा नहे कर सकता…. इस बात ने जहाँ इस को मायूस किया वहां इस बात की ख़ुशी भी थी के चलो कोई नहे हु किसी और के तो काम आ सकता हे….

गोविन्द को इस बात का भी पता चला के लोग जिस अंदाज़ में सोचते हैं उस अंदाज़ में बात का इज़हार मुंह से नहे करते…

जैसा के उस ने देखा के राजन काका सब के सामने शकुंतला देवी को इतनी इज़्ज़त देते हैं मगर सोचते बोहत गन्दा हैं उस के बारे में… आज पहली बार गोविन्द को अंदाज़ा हुआ के मर्द औरत को छोड़ना चाहता हे भले उस का इज़हार न करे… ऐसा नहे था के गोविन्द को सेक्स का पता नहे था… गाँव में काफी बार कुत्ते को कुटिया पर और गधे को गाढ़ी पर और बैल को भैंस पर चढ़े हुए देख चुक्का था… और इक बार तो उस के जिगरी दोस्त (जो के गाँव में hi रहता हे और शहर में एक कार शोरूम पे सेल्समेन हे) ने जो के शहर आता जाता रहता हे मोबाइल पे एक इंग्लिश एडल्ट वीडियो क्लिप भी दिखाया था मगर गोविन्द इन चीज़ों पर ज़यादा नहे सोचता था… गोविन्द के लिए उन के घर के माली हालात और उस की अधूरी एजुकेशन बोहत बारे प्रॉब्लम थे…

मगर आज गोविन्द के लिए यह भी एक नया ज़ाविया सामने आ रहा था के लोग ख़ुशी और ग़ुस्से को सेक्स के साथ जोरते हैं…. इन्ही ख्यालों में गम, गोविन्द ने तकरीबन 2 घंटे में गंदुम साफ़ करदी… और बहार सेहन में आ गया…
 
रिकैप

कुछ खुलासा पिछली उपदटेस का….

गोविन्द, 18 साल का इक बहादुर और सब की सहायता करने वाला नौजवान हे… इक साधू महाराज ने उस की हेल्प से खुश हो कर उस कोई क शक्ति प्राप्त की हे जिस के अनुसार गोविन्द किसी भी व्यक्ति के विचार जान सकता हे और उन की सहायता कर सकता हे…

इन सब बातों के चलते… गोविन्द को सेक्स का अनोखा अनुभव होता हे और खुद भी सेक्सुअली अत्त्रक्टेड हो जाता हे, अपनी बहिन, माँ और दूसरो की और…

गोविन्द की 3 बहने और 1 भाई हे…

गोविन्द ज़मींदार की हवेली में काम करता हे और वहां मल्टी भाभी और किआरा उस को पसंद करती हैं…

अब देखते हैं गोविन्द के साथ हवेली में क्या हो रहा हे…

EPISODE – 4

सेहन में गोविन्द को सिमर सिंह दिखाए दिए तो उन को नमस्ते किया… सिमर सिंह उस वक़्त नींद से उठे थे…

सिमर… “गोविन्द, क्या तू अभी खेतों पर जये गए…”

गोविन्द… “जी, छोटे मालिक”

सिमर… “चल अंदर आ, पहले भाभी से पूछ ले उस को कोई काम तो नहे… फिर तू खेतों पर चले जाना…”

गोविन्द, सिमर के पीछे पीछे उस के कमरे में दाखिल हुआ… तो मल्टी भाभी कहीं नहे दिखी…. बाथरूम का दरवाज़ा बंद था…

सिमर… “शायद बाथरूम में होगी…” और वहीँ से आवाज़ लगाई… “मल्टी, गोविन्द खेतों पर जा रहा हे, तुझे कोई काम तो नहे…???”

मल्टी ने बाथरूम से जवाब दिया… “गोविन्द को रोकें, में अभी आयी…”

मल्टी भाभी जब बाथरूम से बहार निकली तो उस के चचरे पर झुंझलाहट और बे सकुनी थी…. गोविन्द, भाभी के परेशां चेहरे को देख कर खुद भी परेशां हो गया क्यों के भाभी उस का बोहत ख्याल रखती थी… सिमर सिंह बाथरूम में चला गया नहाने…

मल्टी Bhabhi…“Govind, चल मेरे साथ आ दुसरे कमरे में कैबिनेट साफ़ करना हे फिर तू चला जाना खेत पर…”

गोविन्द… “ठीक हे भाभी”

दुसरे कमरे में आ कर, मल्टी भाभी ने कैबिनेट खोली और उस में से सामान निकलने लगी…

गोविन्द ने भाभी की परेशानी के कारन उन पर धयान लगा दिया…

मल्टी भाभी की सोच… “भोस्डिका, न रात को सकूं देता हे न दिन को छूट में ऊँगली करने देता हे… अभी बाथरूम में गयी थी के सकूं से ऊँगली कर लून… हरामी को चैन न पारा और आवाज़ दे कर बुला लिया बहार… रात को भड़वे ने इतनी पि राखी थी के चूचियों की जगह, बग़ल को और बाज़ू को चूसता रहा, चट्टा रहा… हरामी से इतना होता नही… लुंड नहे दाल सकता छूट में तो काम से काम छूट चाट के ठंडी कर देता… रोज़ का रंडी रोना हो गया हे… बस अब में तंग आ गयी हूँ… अब तो कहीं और से लुंड मिले तो अपनी आग ठंडी करूँ… इस हरामी सिमर से तो कुछ होने वाला नहे… ऊपर से मोती गांड वाली सास अब रोज़ बचे का पूछने लगी हे… हए राम में क्या करून”

“हए राम” सोचते सोचते… भाभी की मुँह से “हए” निकल गया…. फिर गोविन्द का ख्याल कर के खुद हे शर्मिंदा होने लगी…

गोविन्द के लिए ये एक बिलकुल नया अनुभव था…. ऐसा भी होता हे…??? गोविन्द का दिमाग़ चक्र रहा था… उस ने अपने आप को कण्ट्रोल किया… और इक और अनहोनी बात हुई के उस का 8 इंच का लुंड तन गया… अब वो परेशां हो गया के इस को कैसे छुपाऊं… पयजामे में तम्बू बना हुआ साफ़ नज़र आ रहा था… गोविन्द ने एक डैम पुछा….

Govind…“Bhabhi, में ज़रा बहार वाशरूम से हो आता हूँ…”

मल्टी Bhabhi…“theek हे, जा, जल्दी हो आ”… साथ hi भाभी ने मुर कर उस की तरफ देखा…

जब तक गोविन्द मूर्ति… भाभी उस का तना हुआ उभार देख चुकी थी… गोविन्द को पता भी न चला के भाभी ने उस का खरा लुंड देख लिया हे….

मल्टी भाभी के लिए ये एक नयी बात थी उन्हों ने कभी भी गोविन्द को इस तरह नहे देखा था… वो सोच में पढ़ गयी के गोविन्द का लुंड क्यों खरा हुआ… क्या उस के लुंड में होशियारी मेरी वजा से आयी…?? इस बात ने भाभी की छूट को मज़ीद गीला कर दिया और भाभी की छूट से लबा लैब पानी निकलने लगा… एक जवान लौंडा उन के लिए लौड़ा खरा करता हे…. उफ़…

गोविन्द तकरीबन भागते हुए बाथरूम जा पोहंचा, जो के सेहन के एक कोने में था, और जल्दी से दरवाज़ा बंद किया और पेशाब करने लगा ताकि लुंड बेथ जाये… मगर पेशाब करने के बावजूद लुंड बैठने का नाम नहे ले रहा था…

Govind…“ye क्या मुसीबत हे…”

और न चाहते हुए भी उस का हाथ अपने आप लुंड पे चलने लगा और वो मस्टरबैशन करने लगा…. साथ साथ उस धयान भाभी की तरफ गया तो वो हैरान हो गया…

वो ये समझ रहा था के सिर्फ उस का धयान लगाया जा सकता हे जो सामने हो… अब उस को पता चला के अगर सामने न भी हो तो वो दुसरे के दिमाग़ में झाँक सकता हे और सोच पढ़ सकता हे…

मल्टी भाभी अपनी छूट पे शलवार के ऊपर से ऊँगली फेरते हुए… “हए गोविन्द… तेरा लुंड तो बोहत बारे हे… में तो तुझे बचा समझती थी… तू तो अपनी भाभी की गांड देख कर लौड़ा खरा करता हे”

(वाज़िह रहे के उस वक़्त मल्टी की बैक थी गोविन्द की तरफ और मल्टी ये समझी के गोविन्द का लुंड पीछे से उस की गांड देख कर खरा हुआ हे)

मल्टी भाभी बराबर अपनी छूट की फांकों में ऊँगली चला रही हे और अपने दाने को छेद रहे हे…. और गोविन्द बाथरूम में मुठ मर रहा हे और साथ साथ मल्टी की सोच भी पढ़ रहा हे…

मल्टी Bhabhi…“Hye… क्या गोविन्द मुझे चोदे गए… हए गोविन्द में तरप रही हूँ… मुझे छोड़… अगर मेरी गांड पसंद हे तो में तुझे वो भी दूँ गई… हए मेरी गांड कोरी हे… कभी उस में ऊँगली भी नहे गई…”

इधर मल्टी एक आह के साथ झरने लगी उधर गोविन्द की मणि का फुवारा छूट गया और साडी मलाई कमोड के ऊपर चली गयी…

मल्टी एक सकूं का साँस ले कर पास पारी कुर्सी पर बेथ गयी और अपने चेहरे पे ए हुए पसीने को साफ़ करने लगी…

गोविन्द छूटने के बाद बोहत शर्मिंदगी महसूस करने लगा और सोचने लगा के में भाभी के सामना कैसे करूँ… फिर उस ने अपने दिल को दिलासा दिया के चाहे ये ग़लत हुआ मगर भाभी इस बारे में नहे जानती और उन के सामने में ने नार्मल रहना हे… लेकिन उस को ये भी परेशानी थे के भाभी को कैसे पता के मेरा लुंड खरा था… क्या उन्होंने देख लिया??? कुछ भी हो उस ने फैसला किया के वो ज़ाहिर नहे होने दे गए…

गोविन्द कमरे में वापिस पोहंचा तो मल्टी भाभी कुर्सी पे बैठी थीं और आधा सामान वो पहले hi निकाल चुकी थी कैबिनेट से…

मल्टी भाभी काफी शांत थीं… “गोविन्द, अभी फ़िलहाल आधी कैबिनेट साफ़ कार्डो बाक़ी बाद में करें गए…”

गोविन्द, कैबिनेट साफ़ करने लगा और उस की पीठ थी भाभी की तरफ… और साथ साथ धयान लगा दिया भाभी की तरफ…

मल्टी भाभी की soch…“Abhi भी गोविन्द का लुंड थोड़ा सा खरा हे और लग रहा हे के ये भी मुठ मर के आया हे… अब इस से बात कैसे करूँ… कैसे इस को राज़ी करूँ… वैसे तो ये बारे शरीफ बनता हे… नज़र उठा के भी नहे देखता और आज तो इस का लुंड मेरी गांड देख कर खरा हो गया… मेरी तो गांड इतनी बरी भी नही, चूचे बड़े ज़रूर है… मेरी फिगर 36-28-34 हे…. क्या इस को सिर्फ गांड पसंद हे…??”

गोविन्द ने फ़ौरन अपना धयान भाभी से हटाया क्यों के उससे लग रहा था के उस का लुंड फिर खरा हो रहा हे… गोविन्द जो थोड़ी देर पहले साधु महाराज को दुआएं दे रहा था अब कोसने लगा… किस मुसीबत में दाल दिया बाबा तुम ने…

उसी वक़्त बहार से सिमर सिंह की आवाज़ आयी…

सिमर सिंह… “मल्टी, नाश्ता लगवाओ”

मल्टी आवाज़ सुनते hi गोविन्द से… “तुम सफाई करो, में अभी आयी”

गोविन्द ने भाभी के बहार जाने पर शुक्र ऐडा किया… और जल्दी जल्दी सफाई करने लगा…

गोविन्द ने 15 से 20 मिनट के अंदर सफाई करदी और कमरे से बहार आ कर हवेली के मर्दाने में चला गया… वहां उस की मुलाक़ात काका से हुई जो क एक चारपाई पे बैठे आराम कर रहे थे…

गोविन्द अपने आप को न रोक सका और धयान लगा दिया काका पर…

राजन काका की soch…“aaj में ने कैसे अकेले इतना भरी सामान उठा लिया… क्या मेरी जवानी वापिस आ गयी हे… अगर ऐसा हे तो मुझे शकुंतला को मौक़ा देख कर छोड़ लेना चाहिए… मल्टी के चूचे भी बड़े हैं वो भी बारे माल हे… रुक्मणि (हवेली की नौकरानी, आगे 35 इयर्स) को न छोड़ दूँ… वो मुझे छेड़ती भी रहती हे… बहनचोद कहती हे, “काका तुम अब ख़तम हो गए हो”… ऐसा लुंड पळून गए… चीखें निकल दूँ गए…”

Govind…“ye राजन काका भी ना… पता नहे क्या क्या खुराफात सोचते रहते hein…mager ये एक नया तजरुबा होगा, ये देखना के काया में सेक्स करने में किसी की मदद कर सकता हूँ?”

Govind…“magar मुझे पता कैसे चले गए के राजन काका कब रुक्मणि के पास जाने का सोचते हैं… क्या में काका को अपने सोच के मुताबिक़ मजबूर कर सकता हूँ के जब में चहुँ उस वक़्त काका रुक्मणि के पास जाएँ?”

यह सोचते हुए, गोविन्द ने काका का धयान लगाया… और काका के दिमाग़ में सोच पढ़ने की जगा, इक सोच पैदा की “कब में रुक्मणि के पास जॉन गए?”

काका की सोच का जवाब… “रात को जब सब सो जयें गए तो में कोई बहाना बना कर रुक्मणि की तरफ जॉन गए, फिर देखते हैं अगर उस ने मुझे छेड़ा तो फिर में भी पूछूं गए उस से के सिर्फ बातें बनाना हैं या कुछ करना भी चाहती हे?”

गोविन्द को इक नयी बात पता चली के वो भी अगर चाहे तो किसी के दिमाग़ में कोई अलग विचार पैदा कर सकता हे और बग़ैर पता चले उस को अपनी सोच के मुताबिक़ किसी राह पे लगाया जा सकता हे….

फिर गोविन्द खुश हो गया और साधु महाराज को दुआएं देने लगा…
 
आदरणीय दोस्तों अपडेट तो दे दिया हे...

पर दोस्तों आप का प्यार और कमैंट्स चाहिए ताकि मुझे ये पता चले के कहानी आप को किसी लग रही हे और उसी तौर उस को आगे चलाया जा सके...

ुर कमैंट्स अरे लाइफलाइन फॉर ा राइटर....

प्लस इस में कंजूसी मत कीजिए... कमैंट्स विथ अप्प्रेसिअशन या क्रिटिसिज्म जिस आप मुनासिब समझें ज़रूर दीजिये... कृपा होगी...

नमस्कार....
 
बीआरओ... फ़ीर्स्तल्य ी ऍम हुंबलेड बी योर गेनेरोउस वर्ड्स ऑफ़ अप्प्रेसिअशन...

सेकन्ड्ली में मुंशी साहेब के पेअर की धुल भी नहे हूँ...

वो बारे महान इंसान थे... उन्हों ने हिंदी लिटरेचर को क्लासिक्स दिए..

बरोथेर प्लीज कीप पोस्टिंग ुर कमैंट्स अस आईटी प्रोविडेंस मोटिवेशन फॉर फुरदर राइटिंग अस वेल अस मेकिंग नेसेसरी अमेंडमेंटस.... थैंक्स अगेन...
 
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