रिकैप फ्रॉम Episode - 2...
गोविन्द को साधु महाराज की तरफ से मिली शक्ति का अंदाज़ा हो चूका हे के उससे कैसे इस शक्ति को इस्तेमाल करते हुए दूसरों के ख़य्याक जानने हैं और कैसे उन की सहयता करनी हे....
गोविन्द को सेक्सुअल फीलिंग्स का भी पता चलता हे के लोगों की सेक्सुअल नीड्स क्यों ज़रूरी हैं ...
गोविन्द के बापू, कैलाश नाथ, के साथ "दौलत पुर" शहर के बोपारी ने कैसे धोका देकर सारा माल हड़प कर गया और कैलाश को कंगाल कर दिया... और गोविन्द की दोनों बहनो की शादियां कैसे हुईं...
गोविन्द फॅमिली के साथ कनेक्ट हो रहा हे और अपनी माँ और जुड़वाँ बहिन ेषणा के साथ कैसे कनेक्ट हो रहा हे...
EPISODE – 3
(अब कुछ गोविन्द की फॅमिली और घर के बारे में…)
“गोविन्द” के पिता, कैलाश नाथ… 45 साल के हैं… गाँव के ज़मींदार राणा वीर सिंह के यहाँ काम करते हैं, और उन के माल मवेशी की देख भाल करते हैं… ज़मींदार बदले में, कैलाश नाथ को खाने के लिए अनाज और सब्ज़ी और हर तेहवार पर कुछ पैसे और कपड़े देते हैं… कैलाश की माली हालत अछि नहे….
कैलाश नाथ की पत्नी रजनी 40 साल की महिला हे… घर के देख भाल करती he…Kailash नाथ और रजनी की शादी काम उम्र में हुई और 5 बचे भी हैं… 3 बेटियां और 2 बेटे…
पहली (1) बेटी, वर्षा, 22 साल की, मैरिड हे…
वर्षा
दूसरी (2) बेटी, अक्षरा, 21 साल की, मैरिड हे…
अक्षरा
तीसरे (3) नंबर पे पहला बीटा, प्रकाश, 20 साल का और ुनमर्रिएद… वैसे तो घर काफी बारे हे पर सारा कच्चा हे और सिर्फ दो रूम हैं… रात को इक कमरे में कैलाश और उस की पत्नी सोते हैं और दुसरे कमरे में ेषणा सोती हे… प्रकाश और गोविन्द बहार सहन में चारपाई दाल कर सोते हैं…
चौथे (4) नंबर पे दूसरा बीटा, गोविन्द, 18 साल का, (काफी ज़िक्र हो चुक्का हे..)
पांचवें (5) नंबर पर, ेषणा, (गोविन्द की जुड़वाँ, 5 मिनट बाद पैदा हुई) घर की राज दुलारी… सब की आँख का तारा…
ेषणा
अगले रोज़, मामूल के मुताबिक़, सब अपने अपने काम को रवाना हो गए… पिछली शाम को गोविन्द हवेली न जा सका था इस लिए वो सीधा हवेली पोहंचा…
वहां पर ज़मींदार की बीवी “
शकंतुला देवी” गोविन्द पर बरस पारी और उस को पिछली शाम हवेली न आने पर काफी बातें सुनायी… शकुंतला देवी और ज़मींदार दोनों काफी गरम मिज़ाज के थे और मुलिज़्मों की बेइज़्ज़ती का कोई मौक़ा हाथ से नहे जाने देते थे… शकुंतला देवी की आगे 45 साल के करीब और ज़मींदार की आगे 50 साल हे… दोनों खासे सेहतमंद और किसी हद तक मोठे हैं…
ज़मींदार का एक बीटा राणा सिमर सिंह और एक बेटी हे, किआरा…
ज़मींदार का बीटा, राणा सिमर सिंह, 30 साल का जवान हे… मैरिड हे… 1 साल हुआ हे शादी को… सिर्फ मेट्रिक पास हे… बद्तमीज़ और झगड़ालू हे मगर गोविन्द का काफी ख़याल करता हे…
मल्टी भाभी (सिमर सिंह की बीवी), 20 साल आगे, बोहत खूबसूरत, पास के गाँव के ज़मींदार की संतान हे और खासी एडुकेटेड हे… सुसराल से खुश नहे… बोहत बाइख़लाक़ लड़की हे सब के साथ ाचा सलूक करती हे… गोविन्द को बोहत मान देती हे…
मल्टी भाभी
भाभी अपने शोहर से खुश नहे उस के 2 कारन हे… 1) ुनेदुकातेड़ हे और बद्तमीज़ हे 2) रोज़ रात को शराब पि कर धुत हो जाता हे और फिर उससे होश नहे होता के वो क्या कर रहा हे… कभी भाभी पर हाथ भी उठा देता हे और कभी गरम करके जिस्मानी सुख नहे देता और भाभी तमाम रात तृप्ति रहती हे…
ज़मींदार की बेटी, किआरा, 18 साल आगे, शहर के कॉलेज में पढ़ती हे, रोज़ाना गाँव से सुबह कॉलेज जाती हे और शाम को शहर से वापिस आती हे… मेट्रिक गोविन्द के साथ गाँव के स्कूल से किया हे और गोविन्द को सिलेंटली लिखे करती हे… कभी अपनी फीलिंग्स का इज़हार नहे कर सकीय… बोहत शर्मीली सी हे…
किआरा
गोविन्द भी मल्टी भाभी और किआरा की बोहत रेस्पेक्ट करता हे… और जनता हे के दोनों उस का ख़याल रखती हैं…
वापिस आते हैं शकुंतला देवी की तरफ जो के गोविन्द पे बरस रही हे…
गोविन्द… सर झुकाये, ख़ामोशी से सुनता रहा… जब शकुंतला देवी का ग़ुस्सा काम हुआ तो उस ने कहा “जाओ स्टोर में गंदुम राखी हे उससे साफ़ कर दो”
स्टोर में पोहचने पर गोविन्द ने देखा के… राजन काका वहां पहले से मौजूद हैं और कुछ पुराण सामान उठा कर बहार निकाल रहे हैं ताकि उससे जाया कर दें या किसी को दे दें… कुछ सामान काफी वज़नी हे और राजन काका 60 साल के हैं… मगर शकुंतला देवी को उन पर कोई तरस नहे आता… काका का आगे पीछे कोई और हवेली में hi नोकरो के लिए बने कमरे में रहते हैं…
गोविन्द कोने में बेथ कर गंदुम साफ़ करने लग जाता हे… उस का दिल बोहत मलाल में हे क्यों के वो राजन काका की कोई मदद नहे कर सकता…
अपने आप… गोविन्द का धयान लग जाता हे राजन काका की तरफ… और उन की सोच पढ़ कर उस के पाऊँ टेल से ज़मीन निकल जाती हे…
राजन काका जो की नोर्मल्ली गोविन्द के साथ बोहत प्यार से पेश आते हैं और उस को बीटा कहते हैं मगर….
राजन काका की soch…“mujh बूढ़े पर कोई रेहम नहे करता… यह लौंडा गोविन्द भी चुपके से आ कर बेथ गया हे गंदुम साफ़ करने… मादरचोद… इतना नहे हुआ के काका से पूछ ले… और मदद कर दे… फिर गंदुम साफ़ करे…”
राजन काका की soch…“wo मोती शकुंतला … मोठे मम्मों को ऊपर नीचे हिलती रहती हे और हर वक़्त ज़लील करती हे… और मोती गांड को आगे पीछे मटकती रहती हे… ग़लती हुई जब जवानी थी तो इस को टाँगे उठा कर छोड़ देता तो आज मुझ से इज़्ज़त से बात करती… अब तो साला लुंड भी खरा नहे होता… सुकर के चूहा बन गया हे… सर्दी के दिनों में ढूंढना परता हे के कहाँ हे…”
गोविन्द… राजन काका की सोच जान कर हैरान परेशां रह गया… साथ साथ यह भी समझ रहा था के सामान वज़नी हे और काका को उठाने में तकलीफ हो रही हे इसी लिए ऐसा सोच रहे हैं…. और गोविन्द इतनी शिद्दत से सोचने लग गया के काका की मदद के लिए एक पल को उस को ऐसा लगा जैसे वो वहां बैठे बैठे गंदुम भी साफ़ कर रहा हे और बायक वक़्त काका के अंदर समा कर उन के साथ सामान उठा रहा हे…
काका को ऐसा लगा जैसे उन के अंदर इक अंजनी ताक़त आ गई हे और वज़नी संदूक उन्हों ने एक हाथ से उठा लिया और इसी तरह चाँद पलों में सारा सामान बहार रख दिया… और परेशान खरे हो गए के ये क्या माजरा हुआ….
गोविन्द, अपनी जगह पे बैठे बैठे सारा माजरा समझ गया और उस को अपनी शक्ति के दुसरे part का अंदजा भी हो गया के…
एक तो वो किसी के ख़याल या सोच को जान या पढ़ सकता हे और अगर कोशिश करे तो दुसरे के अंदर समां कर उस के साथ मिल कर उस के काम में उस का हाथ बता सकता हे…
गोविन्द बेहद खुश था…. और साधु महाराज को दुआयें देने लगा…
उसी वक़्त गोविन्द को इक और बात का भी इदराक हुआ….
के वो अपने काम को ज़यादा तेज़ी, फुर्ती से नहे कर सकता और चाहे भी तो अपनी ताक़त में अपने काम के हवाले से इज़ाफ़ा नहे कर सकता…. इस बात ने जहाँ इस को मायूस किया वहां इस बात की ख़ुशी भी थी के चलो कोई नहे हु किसी और के तो काम आ सकता हे….
गोविन्द को इस बात का भी पता चला के लोग जिस अंदाज़ में सोचते हैं उस अंदाज़ में बात का इज़हार मुंह से नहे करते…
जैसा के उस ने देखा के राजन काका सब के सामने शकुंतला देवी को इतनी इज़्ज़त देते हैं मगर सोचते बोहत गन्दा हैं उस के बारे में… आज पहली बार गोविन्द को अंदाज़ा हुआ के मर्द औरत को छोड़ना चाहता हे भले उस का इज़हार न करे… ऐसा नहे था के गोविन्द को सेक्स का पता नहे था… गाँव में काफी बार कुत्ते को कुटिया पर और गधे को गाढ़ी पर और बैल को भैंस पर चढ़े हुए देख चुक्का था… और इक बार तो उस के जिगरी दोस्त (जो के गाँव में hi रहता हे और शहर में एक कार शोरूम पे सेल्समेन हे) ने जो के शहर आता जाता रहता हे मोबाइल पे एक इंग्लिश एडल्ट वीडियो क्लिप भी दिखाया था मगर गोविन्द इन चीज़ों पर ज़यादा नहे सोचता था… गोविन्द के लिए उन के घर के माली हालात और उस की अधूरी एजुकेशन बोहत बारे प्रॉब्लम थे…
मगर आज गोविन्द के लिए यह भी एक नया ज़ाविया सामने आ रहा था के लोग ख़ुशी और ग़ुस्से को सेक्स के साथ जोरते हैं…. इन्ही ख्यालों में गम, गोविन्द ने तकरीबन 2 घंटे में गंदुम साफ़ करदी… और बहार सेहन में आ गया…