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अपडेट-: 91
मनीषा भाभी के घर आते hi विभु को वो दिख गया जो वो देखना नहीं चाहता था
सामने प्रिय दी कड़ी थी वो भी थोड़ा सतलए में जिस कारन विभु की नजर न चाहते हुवे भी वह चली गयी और विभु को प्रिय की गांड दिख गयी जिसका सीधा इफ्फेक्ट उसके लुंड पर हुआ जो बिना सोचे एक डैम तन क्र खड़ा हो गया
विभु-: (यहाँ आ क्र hi गलती क्र दी अब घूमो खड़ा लुंड लेके जब तक की इसका पानी नहीं निकल जाता यहाँ से निकल लेता हु )
विभु जैसे hi मुदा उसको प्रिय दी ने देख लिया
प्रिय दी-: विभु तू कहा जा रहा ह रुक
विभु उसकी आवाज सुन क्र रुक गया
प्रिय -: इधर आ खाना खा क्र जाना तू अब
विभु ने अपना लुंड अपनी जीन्स में एडजस्ट किया मगर इतना विशाल लुंड कैसे नहीं दीखता
विभु वह से जल्दी आ क्र सोफे पर बेथ गया
प्रिय दी-
ये इसको क्या हुआ कुछ बोल नहीं रहा ह ) क्या हुआ मेरे हीरो को कुछ बोल नहीं रहा
विभु-: वो दी सर दर्द क्र रहा ह
प्रिय दी-: रुको में बाम लगा देती हु
में सोफे पर बेथ गया और दी अपने रूम में गयी इतने मेने भाभी को कॉल किया भाभी ने फोन नहीं उठाया
फिर प्रिय दी आ गयी और सोफे पर बेथ गयी
प्रिय -: आ मेरी गोदी में सर रख ले में तेरी मालिश क्र देती हु
में-: नहीं दी ाशे hi क्र दो
प्रिय-: (गांड तो देखता रहता ह और यहाँ शर्मा रहा ह) रख दे
फॉर प्रिय दी ने हाथ पकड़ क्र मुझे गोदी में सुला लिया ये सब इस प्रकार हुआ की मुजेव सँभालने का मौका नहीं हुआ और मेरे लोअर पहने होने के कारन मेरा मोठे लुंड का उभर दिखने लगा
प्रिय दी की नजर वह नहीं गयी उसने बाम लिया अपनी गोरी उंगली में और विभु के सर पर मालिश करने लगी प्रिय दी बड़ी आहिस्ता से मालिश करने लगी
मालिश के कारन उसे हिलना पड़ता था जिस कारन उसके चुके विभु के टच हो जाते जिस कारन विभु का लुंड और झटका खाने लगा जाता
विभु-: ( लोडे लग गए आज तो अब ये देखेगी इसको क्या जवाब दूंगा और आँखे खोली तो चुके दिख जायेंगे और खुद को रोक नहीं पाउँगा )
प्रिय दी मालिश करते हुवे दरवाजे की तरफ देखने लगी और जैसे hi उसकी नजर विभु की लोअर पर गयी उसका हाथ उसके मुँह पर चला गया
पप्रिया-: ( बाप रे ये क्या ह अभी क्यों खड़ा हो गया इसका फिर उसने निचे देखा तो उसके चुके जस्ट मुँह के पास थे )
प्रिय फिर हलकी से मालिश करने लगी मगर अब इसका डयम केवल उस बलशाली लुंड पर था
प्रिय ने 1-2बार देखा और फिर उसने सोचा की अगर ये यूँही रहा तो मनीषा भाभी आने वाली ह कही देख न ले वार्ना वो मुझे गलत समझेगी
प्रिय-: हो गयी विभु
विभु उठ गया और प्रिय दी जल्दी से उठ क्र अपने रूम में गयी और कुछ देर साँस ली
प्रिय-: ( मेरे भाई का आअज फिर खड़ा हो गया मगर आज तो कुछ ज्यादा hi बड़ा लग रहा था उसका चलो थोड़े मज़े लेती हु )
प्रिय बहार आ गयी और विभु के पास बेथ गयी
प्रिय;: चाय पियेगा भाई तू तेरा सर दर्द हो रहा ह तो में अच्छी कड़क चाय बना देती हु
विभु-: है दी जरूर
प्रिय दी उठ कर जाने लगी विभु फिर उसकी गांड को देखने लगा और प्रिय दी ने मुद क्र देखा तो विभु उसकी गांड hi देख रहा था
प्रिय-: चाय के साथ और कुछ भी लेना ह क्या भाई
विभु-: नहीं दी
प्रिय+: मुझे लगा कुछ चाहिए तुजे और इतना बोलकर रसोई में चली गयी
विभु-
क्या हे आशा इस गांड में आशा तो मेरे साथ और किसी की देखता हु तो नहीं होता इनके साथ क्यों होता हे)
मन की आवाज-: भाई इसकी खोज में भी क्र रहा हु कुछ पता नहीं चल रहा ह
इधर प्रिय चाय बनाने लगी और सोचने लगी
प्रिय-
क्यों देखता ह भाई इतनी अच्छी लगती ह तो मांग ले न मन नहीं करूंगी तुजे तेरे लिए hi बचा के रखा ह सबसे क्यों परेशान होता ह मुझे अच्छा नहीं लगता में सामने से बोल नहीं सकती तू hi मांग ले भाई)
इधर अपनी जादुई गांड वाली प्रिय चाय बना रही थी उधर मनीषा भाभी बहार से तबेले में से दूध निकल क्र आयी और उसने देखा यहाँ तो उसकी दिल की धड़कन विभु बैठा था
विभु की भी निगाह उधर गयी और उसने देखा की उसकी भाभी आ गयी उसके चेहरे पर एक स्माइल आ गयी और वो दौड क्र मनीषा भाभी के पास गया उन्हें गले लगाया
म भाभी-: क्या हुआ आपको
विभु -; मुझे नहीं इसे देखो कबका आशा hi ह
खड़ा ह न बेथ रहा ह
भाभी-: ओह्ह्ह्हह मतलब ये लाया मेरे पास अभी रुको रत को करते हे
विभु-: और रत तक में इसे ाशे hi ले क्र घुमु क्या
म भभाई-; है घुमा
फिर मनीषा भाभी हस्ते हुवे रसोई में गयी वह प्रिय दी चाय बना रही थी
म भाभी--: विभु के लिए चाय बन रही ह क्या
प्रिय दी-: है उसका सर दर्द क्र रहा ह
म भाभी-: ( मेरी नानन्द रानी उसका सर नहीं निचे का डंडा दर्द क्र रहा ह और इसका इलाज मुझे hi करना ह मगर आप यहाँ हो तो अभी नहीं क्र सकती )ok बनाओ फिर में खाना बनती हु
इधर विभु बहार बैठा था की उसको कुछ सूज नहीं रहा था की अब क्या करे वो यहाँ आया hi क्यों. उसे पता था अगर प्रिय दी की गांड पर नजर गयी तो फिर उसके लोडे लग जायेंगे फिर भी अब क्या करे यही सोच रहा था की मनीषा भाभी ने भी लेट का बोलै ह और कही अभी जा नहीं सकता तभी उसके मन की आवाज आयी
मन की आवाज-: भाई मेरे पास एक आईडिया हे
विभु-: जल्दी बता मेरे भाई
मन की आवाज-: तू प्रिय को बोल की तुजे सुमन ने भुलाया ह वो वह चली जाएगी उसे आने में 1 घंटा तो लगेगा इतने तेरा काम हो जायेगा
विभु-: वव ग्रेट आईडिया मेरे भाई चल अब बोलता हु
मनीषा भाभी प्रिय के पास कड़ी थी प्रिय और मनीषा भाभी चाय बनने के बाद लेके हल में आये और विभु को चाय दी और खुद भी पिने लगे
विभु-: वो दी आपको सुमन ने भुलाया था अभी उसे कुछ अर्जेन्ट काम था में तो भूल गया
विभु का इतना बोलना था की मनीषा भाभी ने विभु को तरफ अजीब नजरो से देखा
प्रिय-: ओह्ह्ह्ह है उसने मुझे जाने के पहले बोलै था की मुझे ये डायग्राम बनाना सीखा देना में आती hi भाभी जा क्र
मनीषा bhabhi-:thik ह आराम से सीखा क्र आना में इतने खाना बना लेती हु
प्रिय-; अभी गयी और अभी आयी भाभी जी
विभु-: ठीक ह में भी खेत पर जा क्र आता हु
मनीषा भाभी-; मेरा ये सामान लेके आ जाओ दुकान से पहले
इतने प्रिय दी निकल गयी वह से सुमन के घर
प्रिय के बहार जाते hi विभु ने मनीषा भाभी का हाथ पकड़ा और उठा क्र रसोई में ले गया
मनीषा-: बहाना अच्छा बनाया वैसे थोड़ी देर और साबरा क्र लेते
में-: अब नहीं होता इसे साबरा
उसने मनीषा भाभी को पीछे से पकड़ लिया और उनकी गर्दन पर किश करने लगा मनीषा भाभी की साड़ी को निचे क्र दिया जिससे उनके बूब्स ब्लाउज में से दिखने लगे
इधर प्रिय बहार गयी थी की उसे यद् आया की सुमन ने तो उसने जो ड्रॉयिंग बनायीं थी वो भी ले जाना था वो अंदर आयी और अपने कमरे में चली गयी और ड्रॉयिंग ले क्र निचे आयी
उसने सोचा भाभी को बोल दू की में वह से उसकी सहेली चंदा से मिल क्र आउंगी तो थोड़ा लेट भी हो सकती हु
वो जैसे hi रसोई के गेट के पास पहुंची उसने जो देखा वो देख क्र उसके होश उड़ गए
सामने उसका भाई उसकी सगी भाभी से किश क्र रहा था
प्रिय ये देख क्र वह से हैट गयी और सोफे पर आ गयी
प्रिय-: ये क्या ह क्या ये सुच ह भाभी और विभु एक दूसरे को किश क्र रहे हे क्यों आशा क्यों ये किश hi करते हे की आगे कुछ करते हे देखती हु में
प्रिय वापस आयी और रसोई के गेट की दिवार से चुप क्र देखने लगी
मनीषा भभ-: मेरे पतिदेव किश करने में hi रह जाओगे तो बाकि काम रह जायेगा इतने प्रिय आ जाएगी
विभु-: है मेरी मनीषा रानी
विभु ने किश करते हु भाभी के कपडे खोलने लगा
मनीषा-: नहीं जान ाशे hi कोई आ गया तो दिक्कत हो जाएगी
((बहार प्रिय उनकी साडी बाटे सुन रही थी ))))
विभु ने मनीषा भाभी के दूध को ब्लाउज के बटन खोल क्र बहार निकला और मुँह में लेके चूसने लगा
mmanisha bhabhi- : aahahhaa janaaaaaa dhireeee chusskooo naaaaaa kahaaaaa inmeeee dudh heeee jlddiiii keooooooo priyaaaaaa aaaa jayegiiii [/URL]
[URL=']
मअनिशा भाभी ने में उनके हाथ से विभु का मुँह अपनी छूट में दबा क्र चुसवा रही थी
इधर बहार उनकी नानन्द कड़ी ये सब देख रही थी जिस कारन उसकी भी आग भड़क गयी और वो अंदर देखते हुवे अपने 32 साइज के चुका को बाबाने लगी
इधर मनीषा ने जल्दी से अलग हो क्र विभु की लोअर को निकला और उसके लुंड को निकल क्र देखने लगी और अगले hi पल उसे मुँह में ले क्र गिला करने लगे
इधर प्रिय ने जब ये देखा तो उसको समझ आया की भाभी ने विभु से क्यों करवाने लगी लुंड hi आशा ह एक बार तो प्रिय भी देख क्र दर गयी उस विशाल लुंड को
कुछ देर चूसने के बाद मनीषा भाभी कड़ी हो गयी और विभु उसके पीछे आ गया
मनीषा -: जल्दी दाल दो अब मेरे से सहन नहीं होता
विभु-: मेरे होने वाले बच्चो की. गदरायी माँ
विभु ने लुंड छूट पर रखा और एक धक्का लगाया एक बार में hi पूरा लुंड अंदर चला गया
मनीषा -: आहहहहहहहह marrrrrrrrrrrrr दल्लाआआआ आपकूऊऊओ कीत्नीईईई बररररर बोलाआआआ अअअअअअअम्मम्म सीईई दल्लाआआआ kroooooooooo maaaaaaaaaaaa
विभु-: अब जान तू हे hi इतनी कातिलाना की क्या कृ ये गांड ये दूध देख क्र रुका नहीं जाता जान
अब विभु मनीषा भाभी को पीछे से जोर जोर से धक्के लगाने लगा
manisha&-ahahaha जान छोड़ो अपनी घोड़ी को ाहाःहाहा जोरररर सीई बना दोऊ मुझे अपने बचोऊ को माआआआ ाहाःहाह जल्दीईई प्रियाआआआ कभीई भीई अअअअअ सकतीई हहहहह
.विभु ने जब प्रिय का नाम सुना तो उसने जोर से धक्का मारा मनीषा भाभी की छूट में क्योकि ये लुंड उनकी गांड को देख क्र hi खड़ा हुआ था
मनीषा-: आहहह धीरे जन्न्नन दर्डदब होताआ हीइ अपकाआअ लुंडडडड बहुत बड़ाआ हेबेई मर्डर डालाअ रीई
चुदाई के दौरान मनीषा भाभी के चुके बड़े मज़े से भूले होली हिल रहे थे
इधर रसोई में भयंकर चुदाई चल रही थी उधर दरवाजे पर प्रिय अपनी भाबी के मुँह से सिसकारियां सुन और गन्दी गन्दी बाटे सुन क्र कब अपना हाथ अपनी छूट को सहलाने लगा उसे पता hi नहीं चला वो भी अंदर चुदाई समारोह देख के अपनी छूट की आग को ठंडी करने लगी
बहार प्रिय अपने हाथ से आग को ठंडा कर्नल ागि अंदर उसकी भाभी मुसल जैसे बड़े लुंड को अपने अंदर लेके मज़े ले रही थी
भाभी लुंड से अपनी आग को ठंडा क्र रही थी तो नानन्द अपनी छूट में ऊँगली करके अपनी आग को भड़का रही थी
इन सब के बिच विभु अपने लुंड का पानी निकलने में बिजी था वो अपनी भाभी काम पत्नी को अब सीधा बेसिन पर बिठाया और छोड़ने लगा जोर जोर से हचक हचक से
इधर प्रिय का पानी दो बार निकल चूका था उसने टाइम देखा तो 50 मिनिट से विभु. उसकी भाभी को छोड़ रहा था वो सोचने लगी की भाबी इतनी देर से इतने बड़े लुंड की झले कैसे रही ह
अंदर विभु को अब लगने लगा की उसका पानी निकलने वाला हे वो जोर जोर से धक्के लगाने लगा
मनीषा-: आहहह विभू मेरा पानी फिर से निकलने वाला हहहह आहहहहहहहह माआआ गयीईइ
विभु-: मनीषा मेरा भी निकलने वाला हेबेई ाःहाहाबा
ये ले तेरी छूट में मेरा पानी
मनीसा-: दाल दो अंदर मुझे आपका बच्चा अपनी गॉड में चाइये आहहहहहह माहाँ गयी
दोनों देवर भाभी ने एक साथ चिल्ला के अपना अपना पानी चोर दिया दोनों hi निढाल हो क्र व्ही बेसिन पर पड़े रहे
इधर प्रिय ने देखा की जब इनका हो गया तो दौड के अपने रूम में चली गयी उसने जा क्र देखा की उसके हाथ पुरे गीले थे उसके पानी से कपडे भी गंदे हो गए उसनेबपने कपडे चेंज किये और थोड़ी देर लेट गयी
इधर विभु अभी भी मनीषा भाभी के ऊपर था
मनीषा-: उठो अब जल्दी कपडे पहनो और जाओ प्रिय आ सकती ह
.विभु-: है में निकलता हु उनके आने से पहले नहीं तो फिर लुंड खड़ा हो जायेगा
मनीषा bhabi-:mtlb
विभु-: कुछ नहीं भाभी जान बाद में बता ता हु
विभु ने अपनी भाबी जान को किश किया और फिर वह से निकल गया
मनीषा अपने कमरे में गयी और अपनी हालत ठीक करके रसोई में आ गयी और खाना बनाने लगी
प्रिय ने देखा की विभु निकल गया कुछ देर में वो निचे आयी और रसोई में गयी
प्रिय-: भाभी अब खाना बना रही हो इतनी देर क्या क्र रही थी
म bhbhai-:wo में सो गयी थी थोड़ा
प्रिय-
है विभु के निचे मेने देखा था) ok जल्दी बनाई मुझे भूक लगी हे
.म भ्भा-: आप बैठो में अभी बना देती हु
.प्रिय वह से बहार आ गयी
इधर विभु अपनी मनीषा भाभी की अच्छे से चुदाई करके बहार ायबोर मोबाइल देखा तो उसमे 3 मिस कॉल थे एक पीहू का और 2 रेखा भाबी के
vibhu-:inko क्या हुआ में बात करता हु
रेखा भाभी-: है विभु कहा हो तुम
में-: घर हु भाभी क्या हुआ
रेखा भाभी-: नहीं वो आओ कॉल नहीं उठा रहे न
में-: वो में बिजी था आप किसी हो और भैया की तबियत किसी ह अब
रेखा-: ठीक ह अब में यही बोल रही थी की ा में वह आ जाऊ क्या जल्दी काम ख़तम क्र देंगे
में-: नहीं रुको 5-6 दिन में कुछ करता हु ..
रेखा भभाई-: ठीक ह आप कॉल क्र देना जब भी आओ
में-: ोकक अपना दयँ रखना
फिर कॉल कट हुआ और विभु सोचने लगा की भाभी को तो के औ मगर वो ताल घर में अकेली कैसे रहेगी उसका कुछ करता हु यरररर कुछ समझ नहीं आ रहा ह क्या कृ पूल की तरफ जाता हु वह जा क्र सुच सोचता हु
विभु पूल की तरफ गया तो वह दिनेश अजय और विक्की तीनो बैठो थे
.विक्की- ये आ गया लवडे तुजे कबका कॉल क्र रहे ह कहा बिजी था
में-: तेरी ज्योति से बात क्र रहा था
विक्की-: देख अजय इसे समझा के गफ को बिच में मत ला
में-: आबे गांडू मजाक कर रहा था ये बता आज तीनो इधर क्या बात ह
अजय-: वो विक्की बोल रहा ह की तू इन्हे हरिया काका की बहु की छूट दिलवाएगा
में-: है तो तुजे भी लेना ह क्या
अजय-: है उसमे क्या ह
में-: क्यों माला नहीं देती ह क्या तुजे
अजय-: अरे उससे तो अभी किश hi हुआ ह बाकि कुछ नहीं
me-:ho जायेगा सब और तुन दोनों लावड़ो का कुछ हुआ ..
दिनेश-: है विभु पूजा से मेने 2 बार किया और इस विक्की ने तो 4 दिन से रोज तबेले में जा क्र छोड़ता हे
में-: व रे किस्मत हे ीरर्र तुम्हारी
अजय-: वो चोर पालक भाभी की कब दिला रहा ह
में-: देखो जब वो मुझसे पैट जाएगी और में छोड़ लूंगा वडा रहा तुम सब को 1 बार करने दूंगा
.विक्की-: तो लवदु जल्दी पता न कितना टाइम लगेगा
में-: भोसड़ी के वो कोई रंडी नहीं ह जो जेक छोड़ दिया आएगी लाइन पर धीरे धीरे
ऐसे hi 4 रो बार करने लगे और कुछ टाइम बाद अपने अपने घर चले गए
घर जा के विभु ने धीरज भाभी से 1 घण्टे तक ाशे hi बात की फिर कुछ देर निधि भाभी से और पारो का मस्सगे आया तो उसने रिप्लाई नहीं दिया उसने सोचा इसे अगर लुंड लेना ह तो मेरे सामने आना hi होगा
रत को सब सो गए बस 1 को चोर क्र वो हे अपनी हीरो की जान सुमन
सुमन रत को अपने रूम में थी उसे नींद नहीं आ रही थी वो उठ क्र विभु के कमरे में गयी तो देखा विभु सोया था थोड़ी देर अपनी जान को देख क्र वो जाने लगी तो विभु ने देख लिया
.विभु-: जान
सुमन उसकी आवाज सुन क्र रुक गयी
विभु-: क्या हुआ मेरी जान
सुमन-: कुछ नहीं जाना नींद नहीं आ रही थी तो आपके पास आयी मगर आप सो रहे हो तो सो जाओ
विभु-: जान आज मेरे पास सो जा आज
सुमन-: न बाबा न रत को मुझे परेशान करोगे आप
विभु-: मेरी जान. को परेशान भी नहीं क्र सकता क्या में
सुमन-; क्र सकते हो जान और अभी नहीं टाइम आने पर
विभु-: ok जब मेरी जान चाहेगी तब परेशान करूँगा आ जाओ सो जाओ न मुझे बहो में लेके ..सुमन-: में अपने रूम का गेट लगा क्र आती हु
सुमन कुछ देर में आयी और विभु की बहो में एक चद्दर में सो गए दोनों कुछ न बोले बस इस पल का मज़ा लेके सो रहे थे दोनों के जिस्म की गर्मी को दोनों महसूस कर रहे थे और दोनों को कब नींद आ गयी पता hi नहीं चला एक दूसरे की बहो में
इधर प्रिय मनीषा भाभी को पूछना चाहती ह की आपने मेरे भइया को धोका क्यों दिया उसको रहा नहीं जा रहा था उसका दिल जोरो से धडकत रहा था की भाभी ने आशा क्यों किया इधर मनीसा भाभी इस सब से बेखबर अपनी चुदाई विभु से करवा क्र खाना बना रही थी कुछ देर में खाना बन गया मनीषा भाभी ने बहार हॉल में खाना लगाया और प्रिय जो टीवी देख रही थी उसे भुलाया
म भभाई-: प्रिय आ जाओ खाना तैयार ह
प्रिय-: आयी भाभी
प्रिय वह से बाथरूम में गयी टॉयलेट करके हाथ धो क्र बहार आयी और भाभी के पास जा कर खाना खाने लगी कुछ देर तो दोनों चुप रही कुछ देर चुप रहने के बाद प्रिय बोली
प्रिय -: भाभी ाषा क्यों किया आपने
म भाभी--: मतलब प्रिय
प्रिय-: वो में सुमन के घर जा रही थी वापस आयी मुझे कुछ सामान लेना था मगर में रसोई में आपको और विभु देखा
ये सुन कर मनीषा भाभी के पसीना हो गया और वो दर गयी कुछ न बोल सकीय
प्रिय-: अआप कितनी अच्छी रहती थी भोली भली दिखती थी और उसके पीछे ये गुल खिला रही मेरे भइया को धोका दे रही
म भाभी-: वो प्रिय वो वो
प्रिय-: बात मत करो आप मुझसे
मनीषा भाभी ने खाना कहते हुवे उठ गयी उनकी आँखों में आंसू थे प्रिय भी उठ गयी और अपने कमरे में गयी
मनीषा भाभी ने सारा खाना वापस रसोई में रखा रट हुवे और अपने कमरे में चली गयी
कुछ देर रोटी रही और कुछ सोच क्र उठी मैं गेट लॉक लगाया और प्रिय के रूम की तरफ चली गयी
अंदर प्रिय बीएड पर लेती थी और कुछ सोच रही थी
मनीषा भाभी अंदर गयी और प्रिय के पास बेथ गयी प्रिय ने देखा और मुँह दूसरी तरफ देख लिया
म bhbahi-priya मेरे बात तो सुनो उसके बाद आपको जो करना ह क्र लेना में ये घर चोर के चली जाउंगी
प्रिय-: क्या बोलो
म भभाई-: ये सब करना मेरी मज़बूरी थी प्रिय
प्रिय-: आआआ अपने देवर से मज़े लो और फिर बोलो ये मेरी मज़बूरी थी
म भ्बहि--: सुनो तुम्हारे भैया में डैम नहीं ह की मुझे छोड़ भी सके है उनका खड़ा नहीं होता ह
प्रिय-: मतलब
म भाबी-: है प्रिय उन्होंने मुझे सधी के 1.टी दाल तक कुछ नहीं किया केवल गरम करके चोर देते थे एक दिन आपके भैया ने hi मुझे बोलै की अब मुझसे कुछ नहीं होता तू मुझे चोर के चली जा मगर में उन्हें चोर नहीं सकती थी
एक दिन मेने विभु को देखा की वो मेरी पंतय रोज ले जाने लगा बाथरूम से ये बात मेने आपके भैया को बताई तो उन्होंने गुस्से नहीं किया और उल्टा मुझे ये बताया की तू विभु से करवा के बच्चा पैदा क्र जिससे किसी को शक न होगा
तेरे भैया का इलाज भी करवाया मेने तो अब उनका वो खड़ा होता ह मगर वो कभी बाप नहीं बन सकते हे उन्हें सब पता ह विभु और मेरे बारे में आप चाहो तो ये सुनो
मनीषा भाभी ने अपने पति दिलीप भैया को कॉल किया ये सब प्रिय दी बड़े दयँ से सुन रही. थी
दिलीप भैया--: है मेरी जान बोलो
म भ्बहि-: कैसे हो आप
दिलीप भैया-: ठीक हु तू किसी ह
म भभाई-: मुझे आपकी यद् आ रही ह
दिलीप भैया-: विभु कहा ह वो दयँ नहीं रखता क्या तेरा
म भाभी- रखता ह अभी आया था करके गया ह वो मेरे
दिलीप भैया-: जल्दी से मुझे बाप बनाने की खुसी देदो तुम दोनों
म भभाई--: ोकक जान आप कब आ रहे हो
दिलीप भैया-: वैसे तो कल आने का था मगर कुछ काम ह यहाँ तो 3-4 दिन और लग जायेंगे
म भभाई- ok में आपको फ्री हो क्र कॉल करती हु
फिर भाभी ने कॉल रखा और प्रिय उठ क्र भाभी के पास चली गयी मनीषा भाभी की आँखों में आंसू फिर आ गए प्रिय ने उन्हें चुप करवाया
प्रिय-: सॉरी भाभी वो मेने आपको गलत समझा
म भाभी--: आपकी गलती नहीं ह कोई भी देखेगा तो गलत hi समझेगा
.प्रिय-: आप अब चुप हो जाओ चलो में आपको खाना खिलाती हु मेरी प्यारी भाभी
अब आप चिंता मत करो आपने जो किया इस परिवार के लिए किया अपने लिए किया
फिर दोनों नानन्द भाभी वह से निचे रसोई में गए और इस बार प्रिय ने खाना रखा अब दोनों में बड़े आराम से खाना खाया
प्रिय-: भाभी आज में मेरी प्यारी भाभी के पास सोऊंगी
म भभाई--: जा जरूर क्यों नहीं
फिर दोनों में खाना खाया और रूम में सोने चले गए
प्रिय-: भाभी आप विभु के लिए मन कैसे गयी
म भाभी--: मेने बोलै न की वो मेरी पंतय उठा के ले जाता था और आपके भैया को भी पता था उन्होंने बोलै और फिर धीरे धीरे मेने भी उसे सडके किया और ये सब हो गया
प्रिय-: मतलब आपके साथ फर्स्ट' टाइम करने वाला विभु hi हे
म भाभी--: हाआआ मुझे उससे सेफ कोई नहीं लगा अगर दूसरा कोई होता तो मुझे बदनाम भी करता और बालक मेल भी क्र सकता
प्रिय-: है ये बात तो ह विभु हे तो कुछ टेंशन नहीं किसी को कुछ नहीं बोलेगा हमें अपना मंटा हे
म भाभी-: है तभी आपके भैया और मेने उनका hi सोचा
प्रिय-
में भी भाभी को अपनी बात बताती हु सायद मेरा काम हो जाये मुझे भी विभु मिल जाये)-: भाभी वो मुझे भी कुछ बताना हे
म भ्बहि-: है बोलो नानन्द दी
प्रिय-: भाभी वो विभु मुझे भी उस नजर से देखता ह खास क्र मेरी गांड को
म भाभी-: सुच में
प्रिय-: है बहुत बार तो मेने देखा उसका वो खड़ा हो जाता ह मेरी गांड देख क्र और है आज भी वही हुआ मेरी गांड देख क्र hi उसका खड़ा हुआ
म bhabhi-;(hanste हुवे) मतलब इस मतवाली गांड की साडी भड़ास मेरे ऊपर निकल गयी
प्रिय-: भाभी आप भी न
म भाभी--: ok में समझा दूंगी उसे की अब वो नहीं देखेगा
प्रिय-
एक डैम से बोल पड़ी) नहीं भाभी मेरा वो कहना नहीं था
म भाभी-: तो मेरी प्यारी गुड़िया का क्या कहना ह
प्रिय-: वो भाभी मुझे भी विभु से प्यार हो गया इतना बोलकर प्रिय ने अपना मुँह छुपा लिया
म भाभी-: ओह्हू मेरी गुड़िया को अपने भाई से प्यार हो गया
प्रिय-: भाभी हो गया अब में क्या कृ
म भभाई--: आप क्या चाहती हो
प्रिय-: वो भी मुझे प्यार करे
म भाभी--: किसी को पता चल गया तो दिक्कत हो जाएगी आपको
प्रिय-: वैसे आप हो न मुझे कुछ नहीं होने डौगी
म भ्भा--: मानती हु मगर दयँ ेखना प्रिय-: मगर भाभी आपने तो बताया hi नहीं की वो भी मुझे कैसे प्यार करेंगे
म भ्बहि--: आप बोली की वो आपकी गांड देखते हे तो यही गांड आपके पास लाएंगी उन्हें
प्रिय-: मतलब
म भाभी--: मतलब की अपन जलवे बताओ और बाकि सारा में कल क्र दूंगी और है उन्हें ये पता नहीं लग्न चाहिए की आप को मेरे और उनके बारे में पता ह
प्रिय-: नहीं चलेगा ठनक ु भाभी
फिर दोनों ननाद भाभी खुस हो कर सो गयी
प्रिय को खुसी थी की अब भाभी भी उसकी मदद करेगी उसका प्यार पाने में और इधर मनीषा को खुसी थी की उसके प्यार को एक नयी नवेली छूट मिलेगी और साथ में उसे भी एक घर में अच्छा दोस्त मिल गया
मनीषा भाभी के घर आते hi विभु को वो दिख गया जो वो देखना नहीं चाहता था
सामने प्रिय दी कड़ी थी वो भी थोड़ा सतलए में जिस कारन विभु की नजर न चाहते हुवे भी वह चली गयी और विभु को प्रिय की गांड दिख गयी जिसका सीधा इफ्फेक्ट उसके लुंड पर हुआ जो बिना सोचे एक डैम तन क्र खड़ा हो गया
विभु-: (यहाँ आ क्र hi गलती क्र दी अब घूमो खड़ा लुंड लेके जब तक की इसका पानी नहीं निकल जाता यहाँ से निकल लेता हु )
विभु जैसे hi मुदा उसको प्रिय दी ने देख लिया
प्रिय दी-: विभु तू कहा जा रहा ह रुक
विभु उसकी आवाज सुन क्र रुक गया
प्रिय -: इधर आ खाना खा क्र जाना तू अब
विभु ने अपना लुंड अपनी जीन्स में एडजस्ट किया मगर इतना विशाल लुंड कैसे नहीं दीखता
विभु वह से जल्दी आ क्र सोफे पर बेथ गया
प्रिय दी-
विभु-: वो दी सर दर्द क्र रहा ह
प्रिय दी-: रुको में बाम लगा देती हु
में सोफे पर बेथ गया और दी अपने रूम में गयी इतने मेने भाभी को कॉल किया भाभी ने फोन नहीं उठाया
फिर प्रिय दी आ गयी और सोफे पर बेथ गयी
प्रिय -: आ मेरी गोदी में सर रख ले में तेरी मालिश क्र देती हु
में-: नहीं दी ाशे hi क्र दो
प्रिय-: (गांड तो देखता रहता ह और यहाँ शर्मा रहा ह) रख दे
फॉर प्रिय दी ने हाथ पकड़ क्र मुझे गोदी में सुला लिया ये सब इस प्रकार हुआ की मुजेव सँभालने का मौका नहीं हुआ और मेरे लोअर पहने होने के कारन मेरा मोठे लुंड का उभर दिखने लगा
प्रिय दी की नजर वह नहीं गयी उसने बाम लिया अपनी गोरी उंगली में और विभु के सर पर मालिश करने लगी प्रिय दी बड़ी आहिस्ता से मालिश करने लगी
मालिश के कारन उसे हिलना पड़ता था जिस कारन उसके चुके विभु के टच हो जाते जिस कारन विभु का लुंड और झटका खाने लगा जाता
विभु-: ( लोडे लग गए आज तो अब ये देखेगी इसको क्या जवाब दूंगा और आँखे खोली तो चुके दिख जायेंगे और खुद को रोक नहीं पाउँगा )
प्रिय दी मालिश करते हुवे दरवाजे की तरफ देखने लगी और जैसे hi उसकी नजर विभु की लोअर पर गयी उसका हाथ उसके मुँह पर चला गया
प्रिय फिर हलकी से मालिश करने लगी मगर अब इसका डयम केवल उस बलशाली लुंड पर था
प्रिय ने 1-2बार देखा और फिर उसने सोचा की अगर ये यूँही रहा तो मनीषा भाभी आने वाली ह कही देख न ले वार्ना वो मुझे गलत समझेगी
प्रिय-: हो गयी विभु
विभु उठ गया और प्रिय दी जल्दी से उठ क्र अपने रूम में गयी और कुछ देर साँस ली
प्रिय-: ( मेरे भाई का आअज फिर खड़ा हो गया मगर आज तो कुछ ज्यादा hi बड़ा लग रहा था उसका चलो थोड़े मज़े लेती हु )
प्रिय बहार आ गयी और विभु के पास बेथ गयी
प्रिय;: चाय पियेगा भाई तू तेरा सर दर्द हो रहा ह तो में अच्छी कड़क चाय बना देती हु
विभु-: है दी जरूर
प्रिय दी उठ कर जाने लगी विभु फिर उसकी गांड को देखने लगा और प्रिय दी ने मुद क्र देखा तो विभु उसकी गांड hi देख रहा था
प्रिय-: चाय के साथ और कुछ भी लेना ह क्या भाई
विभु-: नहीं दी
प्रिय+: मुझे लगा कुछ चाहिए तुजे और इतना बोलकर रसोई में चली गयी
विभु-
मन की आवाज-: भाई इसकी खोज में भी क्र रहा हु कुछ पता नहीं चल रहा ह
इधर प्रिय चाय बनाने लगी और सोचने लगी
प्रिय-
इधर अपनी जादुई गांड वाली प्रिय चाय बना रही थी उधर मनीषा भाभी बहार से तबेले में से दूध निकल क्र आयी और उसने देखा यहाँ तो उसकी दिल की धड़कन विभु बैठा था
विभु की भी निगाह उधर गयी और उसने देखा की उसकी भाभी आ गयी उसके चेहरे पर एक स्माइल आ गयी और वो दौड क्र मनीषा भाभी के पास गया उन्हें गले लगाया
म भाभी-: क्या हुआ आपको
विभु -; मुझे नहीं इसे देखो कबका आशा hi ह
खड़ा ह न बेथ रहा ह
भाभी-: ओह्ह्ह्हह मतलब ये लाया मेरे पास अभी रुको रत को करते हे
विभु-: और रत तक में इसे ाशे hi ले क्र घुमु क्या
म भभाई-; है घुमा
फिर मनीषा भाभी हस्ते हुवे रसोई में गयी वह प्रिय दी चाय बना रही थी
म भाभी--: विभु के लिए चाय बन रही ह क्या
प्रिय दी-: है उसका सर दर्द क्र रहा ह
म भाभी-: ( मेरी नानन्द रानी उसका सर नहीं निचे का डंडा दर्द क्र रहा ह और इसका इलाज मुझे hi करना ह मगर आप यहाँ हो तो अभी नहीं क्र सकती )ok बनाओ फिर में खाना बनती हु
इधर विभु बहार बैठा था की उसको कुछ सूज नहीं रहा था की अब क्या करे वो यहाँ आया hi क्यों. उसे पता था अगर प्रिय दी की गांड पर नजर गयी तो फिर उसके लोडे लग जायेंगे फिर भी अब क्या करे यही सोच रहा था की मनीषा भाभी ने भी लेट का बोलै ह और कही अभी जा नहीं सकता तभी उसके मन की आवाज आयी
मन की आवाज-: भाई मेरे पास एक आईडिया हे
विभु-: जल्दी बता मेरे भाई
मन की आवाज-: तू प्रिय को बोल की तुजे सुमन ने भुलाया ह वो वह चली जाएगी उसे आने में 1 घंटा तो लगेगा इतने तेरा काम हो जायेगा
विभु-: वव ग्रेट आईडिया मेरे भाई चल अब बोलता हु
मनीषा भाभी प्रिय के पास कड़ी थी प्रिय और मनीषा भाभी चाय बनने के बाद लेके हल में आये और विभु को चाय दी और खुद भी पिने लगे
विभु-: वो दी आपको सुमन ने भुलाया था अभी उसे कुछ अर्जेन्ट काम था में तो भूल गया
विभु का इतना बोलना था की मनीषा भाभी ने विभु को तरफ अजीब नजरो से देखा
प्रिय-: ओह्ह्ह्ह है उसने मुझे जाने के पहले बोलै था की मुझे ये डायग्राम बनाना सीखा देना में आती hi भाभी जा क्र
मनीषा bhabhi-:thik ह आराम से सीखा क्र आना में इतने खाना बना लेती हु
प्रिय-; अभी गयी और अभी आयी भाभी जी
विभु-: ठीक ह में भी खेत पर जा क्र आता हु
मनीषा भाभी-; मेरा ये सामान लेके आ जाओ दुकान से पहले
इतने प्रिय दी निकल गयी वह से सुमन के घर
प्रिय के बहार जाते hi विभु ने मनीषा भाभी का हाथ पकड़ा और उठा क्र रसोई में ले गया
मनीषा-: बहाना अच्छा बनाया वैसे थोड़ी देर और साबरा क्र लेते
में-: अब नहीं होता इसे साबरा
उसने मनीषा भाभी को पीछे से पकड़ लिया और उनकी गर्दन पर किश करने लगा मनीषा भाभी की साड़ी को निचे क्र दिया जिससे उनके बूब्स ब्लाउज में से दिखने लगे
इधर प्रिय बहार गयी थी की उसे यद् आया की सुमन ने तो उसने जो ड्रॉयिंग बनायीं थी वो भी ले जाना था वो अंदर आयी और अपने कमरे में चली गयी और ड्रॉयिंग ले क्र निचे आयी
उसने सोचा भाभी को बोल दू की में वह से उसकी सहेली चंदा से मिल क्र आउंगी तो थोड़ा लेट भी हो सकती हु
वो जैसे hi रसोई के गेट के पास पहुंची उसने जो देखा वो देख क्र उसके होश उड़ गए
सामने उसका भाई उसकी सगी भाभी से किश क्र रहा था
प्रिय ये देख क्र वह से हैट गयी और सोफे पर आ गयी
प्रिय-: ये क्या ह क्या ये सुच ह भाभी और विभु एक दूसरे को किश क्र रहे हे क्यों आशा क्यों ये किश hi करते हे की आगे कुछ करते हे देखती हु में
प्रिय वापस आयी और रसोई के गेट की दिवार से चुप क्र देखने लगी
मनीषा भभ-: मेरे पतिदेव किश करने में hi रह जाओगे तो बाकि काम रह जायेगा इतने प्रिय आ जाएगी
विभु-: है मेरी मनीषा रानी
विभु ने किश करते हु भाभी के कपडे खोलने लगा
मनीषा-: नहीं जान ाशे hi कोई आ गया तो दिक्कत हो जाएगी
((बहार प्रिय उनकी साडी बाटे सुन रही थी ))))
विभु ने मनीषा भाभी के दूध को ब्लाउज के बटन खोल क्र बहार निकला और मुँह में लेके चूसने लगा
mmanisha bhabhi- : aahahhaa janaaaaaa dhireeee chusskooo naaaaaa kahaaaaa inmeeee dudh heeee jlddiiii keooooooo priyaaaaaa aaaa jayegiiii [/URL]
[URL=']
इधर बहार उनकी नानन्द कड़ी ये सब देख रही थी जिस कारन उसकी भी आग भड़क गयी और वो अंदर देखते हुवे अपने 32 साइज के चुका को बाबाने लगी
इधर मनीषा ने जल्दी से अलग हो क्र विभु की लोअर को निकला और उसके लुंड को निकल क्र देखने लगी और अगले hi पल उसे मुँह में ले क्र गिला करने लगे
इधर प्रिय ने जब ये देखा तो उसको समझ आया की भाभी ने विभु से क्यों करवाने लगी लुंड hi आशा ह एक बार तो प्रिय भी देख क्र दर गयी उस विशाल लुंड को
कुछ देर चूसने के बाद मनीषा भाभी कड़ी हो गयी और विभु उसके पीछे आ गया
मनीषा -: जल्दी दाल दो अब मेरे से सहन नहीं होता
विभु-: मेरे होने वाले बच्चो की. गदरायी माँ
विभु ने लुंड छूट पर रखा और एक धक्का लगाया एक बार में hi पूरा लुंड अंदर चला गया
मनीषा -: आहहहहहहहह marrrrrrrrrrrrr दल्लाआआआ आपकूऊऊओ कीत्नीईईई बररररर बोलाआआआ अअअअअअअम्मम्म सीईई दल्लाआआआ kroooooooooo maaaaaaaaaaaa
विभु-: अब जान तू हे hi इतनी कातिलाना की क्या कृ ये गांड ये दूध देख क्र रुका नहीं जाता जान
अब विभु मनीषा भाभी को पीछे से जोर जोर से धक्के लगाने लगा
.विभु ने जब प्रिय का नाम सुना तो उसने जोर से धक्का मारा मनीषा भाभी की छूट में क्योकि ये लुंड उनकी गांड को देख क्र hi खड़ा हुआ था
मनीषा-: आहहह धीरे जन्न्नन दर्डदब होताआ हीइ अपकाआअ लुंडडडड बहुत बड़ाआ हेबेई मर्डर डालाअ रीई
चुदाई के दौरान मनीषा भाभी के चुके बड़े मज़े से भूले होली हिल रहे थे
इधर रसोई में भयंकर चुदाई चल रही थी उधर दरवाजे पर प्रिय अपनी भाबी के मुँह से सिसकारियां सुन और गन्दी गन्दी बाटे सुन क्र कब अपना हाथ अपनी छूट को सहलाने लगा उसे पता hi नहीं चला वो भी अंदर चुदाई समारोह देख के अपनी छूट की आग को ठंडी करने लगी
बहार प्रिय अपने हाथ से आग को ठंडा कर्नल ागि अंदर उसकी भाभी मुसल जैसे बड़े लुंड को अपने अंदर लेके मज़े ले रही थी
भाभी लुंड से अपनी आग को ठंडा क्र रही थी तो नानन्द अपनी छूट में ऊँगली करके अपनी आग को भड़का रही थी
इन सब के बिच विभु अपने लुंड का पानी निकलने में बिजी था वो अपनी भाभी काम पत्नी को अब सीधा बेसिन पर बिठाया और छोड़ने लगा जोर जोर से हचक हचक से
इधर प्रिय का पानी दो बार निकल चूका था उसने टाइम देखा तो 50 मिनिट से विभु. उसकी भाभी को छोड़ रहा था वो सोचने लगी की भाबी इतनी देर से इतने बड़े लुंड की झले कैसे रही ह
अंदर विभु को अब लगने लगा की उसका पानी निकलने वाला हे वो जोर जोर से धक्के लगाने लगा
मनीषा-: आहहह विभू मेरा पानी फिर से निकलने वाला हहहह आहहहहहहहह माआआ गयीईइ
विभु-: मनीषा मेरा भी निकलने वाला हेबेई ाःहाहाबा
ये ले तेरी छूट में मेरा पानी
मनीसा-: दाल दो अंदर मुझे आपका बच्चा अपनी गॉड में चाइये आहहहहहह माहाँ गयी
दोनों देवर भाभी ने एक साथ चिल्ला के अपना अपना पानी चोर दिया दोनों hi निढाल हो क्र व्ही बेसिन पर पड़े रहे
इधर प्रिय ने देखा की जब इनका हो गया तो दौड के अपने रूम में चली गयी उसने जा क्र देखा की उसके हाथ पुरे गीले थे उसके पानी से कपडे भी गंदे हो गए उसनेबपने कपडे चेंज किये और थोड़ी देर लेट गयी
इधर विभु अभी भी मनीषा भाभी के ऊपर था
मनीषा-: उठो अब जल्दी कपडे पहनो और जाओ प्रिय आ सकती ह
.विभु-: है में निकलता हु उनके आने से पहले नहीं तो फिर लुंड खड़ा हो जायेगा
मनीषा bhabi-:mtlb
विभु-: कुछ नहीं भाभी जान बाद में बता ता हु
विभु ने अपनी भाबी जान को किश किया और फिर वह से निकल गया
मनीषा अपने कमरे में गयी और अपनी हालत ठीक करके रसोई में आ गयी और खाना बनाने लगी
प्रिय ने देखा की विभु निकल गया कुछ देर में वो निचे आयी और रसोई में गयी
प्रिय-: भाभी अब खाना बना रही हो इतनी देर क्या क्र रही थी
म bhbhai-:wo में सो गयी थी थोड़ा
प्रिय-
.म भ्भा-: आप बैठो में अभी बना देती हु
.प्रिय वह से बहार आ गयी
इधर विभु अपनी मनीषा भाभी की अच्छे से चुदाई करके बहार ायबोर मोबाइल देखा तो उसमे 3 मिस कॉल थे एक पीहू का और 2 रेखा भाबी के
vibhu-:inko क्या हुआ में बात करता हु
रेखा भाभी-: है विभु कहा हो तुम
में-: घर हु भाभी क्या हुआ
रेखा भाभी-: नहीं वो आओ कॉल नहीं उठा रहे न
में-: वो में बिजी था आप किसी हो और भैया की तबियत किसी ह अब
रेखा-: ठीक ह अब में यही बोल रही थी की ा में वह आ जाऊ क्या जल्दी काम ख़तम क्र देंगे
में-: नहीं रुको 5-6 दिन में कुछ करता हु ..
रेखा भभाई-: ठीक ह आप कॉल क्र देना जब भी आओ
में-: ोकक अपना दयँ रखना
फिर कॉल कट हुआ और विभु सोचने लगा की भाभी को तो के औ मगर वो ताल घर में अकेली कैसे रहेगी उसका कुछ करता हु यरररर कुछ समझ नहीं आ रहा ह क्या कृ पूल की तरफ जाता हु वह जा क्र सुच सोचता हु
विभु पूल की तरफ गया तो वह दिनेश अजय और विक्की तीनो बैठो थे
.विक्की- ये आ गया लवडे तुजे कबका कॉल क्र रहे ह कहा बिजी था
में-: तेरी ज्योति से बात क्र रहा था
विक्की-: देख अजय इसे समझा के गफ को बिच में मत ला
में-: आबे गांडू मजाक कर रहा था ये बता आज तीनो इधर क्या बात ह
अजय-: वो विक्की बोल रहा ह की तू इन्हे हरिया काका की बहु की छूट दिलवाएगा
में-: है तो तुजे भी लेना ह क्या
अजय-: है उसमे क्या ह
में-: क्यों माला नहीं देती ह क्या तुजे
अजय-: अरे उससे तो अभी किश hi हुआ ह बाकि कुछ नहीं
me-:ho जायेगा सब और तुन दोनों लावड़ो का कुछ हुआ ..
दिनेश-: है विभु पूजा से मेने 2 बार किया और इस विक्की ने तो 4 दिन से रोज तबेले में जा क्र छोड़ता हे
में-: व रे किस्मत हे ीरर्र तुम्हारी
अजय-: वो चोर पालक भाभी की कब दिला रहा ह
में-: देखो जब वो मुझसे पैट जाएगी और में छोड़ लूंगा वडा रहा तुम सब को 1 बार करने दूंगा
.विक्की-: तो लवदु जल्दी पता न कितना टाइम लगेगा
में-: भोसड़ी के वो कोई रंडी नहीं ह जो जेक छोड़ दिया आएगी लाइन पर धीरे धीरे
ऐसे hi 4 रो बार करने लगे और कुछ टाइम बाद अपने अपने घर चले गए
घर जा के विभु ने धीरज भाभी से 1 घण्टे तक ाशे hi बात की फिर कुछ देर निधि भाभी से और पारो का मस्सगे आया तो उसने रिप्लाई नहीं दिया उसने सोचा इसे अगर लुंड लेना ह तो मेरे सामने आना hi होगा
रत को सब सो गए बस 1 को चोर क्र वो हे अपनी हीरो की जान सुमन
सुमन रत को अपने रूम में थी उसे नींद नहीं आ रही थी वो उठ क्र विभु के कमरे में गयी तो देखा विभु सोया था थोड़ी देर अपनी जान को देख क्र वो जाने लगी तो विभु ने देख लिया
.विभु-: जान
सुमन उसकी आवाज सुन क्र रुक गयी
विभु-: क्या हुआ मेरी जान
सुमन-: कुछ नहीं जाना नींद नहीं आ रही थी तो आपके पास आयी मगर आप सो रहे हो तो सो जाओ
विभु-: जान आज मेरे पास सो जा आज
सुमन-: न बाबा न रत को मुझे परेशान करोगे आप
विभु-: मेरी जान. को परेशान भी नहीं क्र सकता क्या में
सुमन-; क्र सकते हो जान और अभी नहीं टाइम आने पर
विभु-: ok जब मेरी जान चाहेगी तब परेशान करूँगा आ जाओ सो जाओ न मुझे बहो में लेके ..सुमन-: में अपने रूम का गेट लगा क्र आती हु
सुमन कुछ देर में आयी और विभु की बहो में एक चद्दर में सो गए दोनों कुछ न बोले बस इस पल का मज़ा लेके सो रहे थे दोनों के जिस्म की गर्मी को दोनों महसूस कर रहे थे और दोनों को कब नींद आ गयी पता hi नहीं चला एक दूसरे की बहो में
इधर प्रिय मनीषा भाभी को पूछना चाहती ह की आपने मेरे भइया को धोका क्यों दिया उसको रहा नहीं जा रहा था उसका दिल जोरो से धडकत रहा था की भाभी ने आशा क्यों किया इधर मनीसा भाभी इस सब से बेखबर अपनी चुदाई विभु से करवा क्र खाना बना रही थी कुछ देर में खाना बन गया मनीषा भाभी ने बहार हॉल में खाना लगाया और प्रिय जो टीवी देख रही थी उसे भुलाया
म भभाई-: प्रिय आ जाओ खाना तैयार ह
प्रिय-: आयी भाभी
प्रिय वह से बाथरूम में गयी टॉयलेट करके हाथ धो क्र बहार आयी और भाभी के पास जा कर खाना खाने लगी कुछ देर तो दोनों चुप रही कुछ देर चुप रहने के बाद प्रिय बोली
प्रिय -: भाभी ाषा क्यों किया आपने
म भाभी--: मतलब प्रिय
प्रिय-: वो में सुमन के घर जा रही थी वापस आयी मुझे कुछ सामान लेना था मगर में रसोई में आपको और विभु देखा
ये सुन कर मनीषा भाभी के पसीना हो गया और वो दर गयी कुछ न बोल सकीय
प्रिय-: अआप कितनी अच्छी रहती थी भोली भली दिखती थी और उसके पीछे ये गुल खिला रही मेरे भइया को धोका दे रही
म भाभी-: वो प्रिय वो वो
प्रिय-: बात मत करो आप मुझसे
मनीषा भाभी ने खाना कहते हुवे उठ गयी उनकी आँखों में आंसू थे प्रिय भी उठ गयी और अपने कमरे में गयी
मनीषा भाभी ने सारा खाना वापस रसोई में रखा रट हुवे और अपने कमरे में चली गयी
कुछ देर रोटी रही और कुछ सोच क्र उठी मैं गेट लॉक लगाया और प्रिय के रूम की तरफ चली गयी
अंदर प्रिय बीएड पर लेती थी और कुछ सोच रही थी
मनीषा भाभी अंदर गयी और प्रिय के पास बेथ गयी प्रिय ने देखा और मुँह दूसरी तरफ देख लिया
म bhbahi-priya मेरे बात तो सुनो उसके बाद आपको जो करना ह क्र लेना में ये घर चोर के चली जाउंगी
प्रिय-: क्या बोलो
म भभाई-: ये सब करना मेरी मज़बूरी थी प्रिय
प्रिय-: आआआ अपने देवर से मज़े लो और फिर बोलो ये मेरी मज़बूरी थी
म भ्बहि--: सुनो तुम्हारे भैया में डैम नहीं ह की मुझे छोड़ भी सके है उनका खड़ा नहीं होता ह
प्रिय-: मतलब
म भाबी-: है प्रिय उन्होंने मुझे सधी के 1.टी दाल तक कुछ नहीं किया केवल गरम करके चोर देते थे एक दिन आपके भैया ने hi मुझे बोलै की अब मुझसे कुछ नहीं होता तू मुझे चोर के चली जा मगर में उन्हें चोर नहीं सकती थी
एक दिन मेने विभु को देखा की वो मेरी पंतय रोज ले जाने लगा बाथरूम से ये बात मेने आपके भैया को बताई तो उन्होंने गुस्से नहीं किया और उल्टा मुझे ये बताया की तू विभु से करवा के बच्चा पैदा क्र जिससे किसी को शक न होगा
तेरे भैया का इलाज भी करवाया मेने तो अब उनका वो खड़ा होता ह मगर वो कभी बाप नहीं बन सकते हे उन्हें सब पता ह विभु और मेरे बारे में आप चाहो तो ये सुनो
मनीषा भाभी ने अपने पति दिलीप भैया को कॉल किया ये सब प्रिय दी बड़े दयँ से सुन रही. थी
दिलीप भैया--: है मेरी जान बोलो
म भ्बहि-: कैसे हो आप
दिलीप भैया-: ठीक हु तू किसी ह
म भभाई-: मुझे आपकी यद् आ रही ह
दिलीप भैया-: विभु कहा ह वो दयँ नहीं रखता क्या तेरा
म भाभी- रखता ह अभी आया था करके गया ह वो मेरे
दिलीप भैया-: जल्दी से मुझे बाप बनाने की खुसी देदो तुम दोनों
म भभाई--: ोकक जान आप कब आ रहे हो
दिलीप भैया-: वैसे तो कल आने का था मगर कुछ काम ह यहाँ तो 3-4 दिन और लग जायेंगे
म भभाई- ok में आपको फ्री हो क्र कॉल करती हु
फिर भाभी ने कॉल रखा और प्रिय उठ क्र भाभी के पास चली गयी मनीषा भाभी की आँखों में आंसू फिर आ गए प्रिय ने उन्हें चुप करवाया
प्रिय-: सॉरी भाभी वो मेने आपको गलत समझा
म भाभी--: आपकी गलती नहीं ह कोई भी देखेगा तो गलत hi समझेगा
.प्रिय-: आप अब चुप हो जाओ चलो में आपको खाना खिलाती हु मेरी प्यारी भाभी
अब आप चिंता मत करो आपने जो किया इस परिवार के लिए किया अपने लिए किया
फिर दोनों नानन्द भाभी वह से निचे रसोई में गए और इस बार प्रिय ने खाना रखा अब दोनों में बड़े आराम से खाना खाया
प्रिय-: भाभी आज में मेरी प्यारी भाभी के पास सोऊंगी
म भभाई--: जा जरूर क्यों नहीं
फिर दोनों में खाना खाया और रूम में सोने चले गए
प्रिय-: भाभी आप विभु के लिए मन कैसे गयी
म भाभी--: मेने बोलै न की वो मेरी पंतय उठा के ले जाता था और आपके भैया को भी पता था उन्होंने बोलै और फिर धीरे धीरे मेने भी उसे सडके किया और ये सब हो गया
प्रिय-: मतलब आपके साथ फर्स्ट' टाइम करने वाला विभु hi हे
म भाभी--: हाआआ मुझे उससे सेफ कोई नहीं लगा अगर दूसरा कोई होता तो मुझे बदनाम भी करता और बालक मेल भी क्र सकता
प्रिय-: है ये बात तो ह विभु हे तो कुछ टेंशन नहीं किसी को कुछ नहीं बोलेगा हमें अपना मंटा हे
म भाभी-: है तभी आपके भैया और मेने उनका hi सोचा
प्रिय-
म भ्बहि-: है बोलो नानन्द दी
प्रिय-: भाभी वो विभु मुझे भी उस नजर से देखता ह खास क्र मेरी गांड को
म भाभी-: सुच में
प्रिय-: है बहुत बार तो मेने देखा उसका वो खड़ा हो जाता ह मेरी गांड देख क्र और है आज भी वही हुआ मेरी गांड देख क्र hi उसका खड़ा हुआ
म bhabhi-;(hanste हुवे) मतलब इस मतवाली गांड की साडी भड़ास मेरे ऊपर निकल गयी
प्रिय-: भाभी आप भी न
म भाभी--: ok में समझा दूंगी उसे की अब वो नहीं देखेगा
प्रिय-
म भाभी-: तो मेरी प्यारी गुड़िया का क्या कहना ह
प्रिय-: वो भाभी मुझे भी विभु से प्यार हो गया इतना बोलकर प्रिय ने अपना मुँह छुपा लिया
म भाभी-: ओह्हू मेरी गुड़िया को अपने भाई से प्यार हो गया
प्रिय-: भाभी हो गया अब में क्या कृ
म भभाई--: आप क्या चाहती हो
प्रिय-: वो भी मुझे प्यार करे
म भाभी--: किसी को पता चल गया तो दिक्कत हो जाएगी आपको
प्रिय-: वैसे आप हो न मुझे कुछ नहीं होने डौगी
म भ्भा--: मानती हु मगर दयँ ेखना प्रिय-: मगर भाभी आपने तो बताया hi नहीं की वो भी मुझे कैसे प्यार करेंगे
म भ्बहि--: आप बोली की वो आपकी गांड देखते हे तो यही गांड आपके पास लाएंगी उन्हें
प्रिय-: मतलब
म भाभी--: मतलब की अपन जलवे बताओ और बाकि सारा में कल क्र दूंगी और है उन्हें ये पता नहीं लग्न चाहिए की आप को मेरे और उनके बारे में पता ह
प्रिय-: नहीं चलेगा ठनक ु भाभी
फिर दोनों ननाद भाभी खुस हो कर सो गयी
प्रिय को खुसी थी की अब भाभी भी उसकी मदद करेगी उसका प्यार पाने में और इधर मनीषा को खुसी थी की उसके प्यार को एक नयी नवेली छूट मिलेगी और साथ में उसे भी एक घर में अच्छा दोस्त मिल गया