Meri Aashiqui Tumse hi (Bhai aur Behen) - Page 19 - SexBaba
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Meri Aashiqui Tumse hi (Bhai aur Behen)

मेरी आशिकी तुमसे hi.....

अपडेट 170.... (वर्ड काउंट 7500)

सुलतान : ये मेरे अपने हैं.... इन को एक खरोच भी आ जाए ये मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता... गुस्से से मेरा दिमाग फटने लगता है.... जी चाहता है की उसे फ़ौरन जान से मार दूँ.... यहाँ तो तुम सब ने मिल के इनके साथ इतनी ज़लील हरकत करनी चाही.... अब तुम सब को मेरे केहर से कोई नहीं बचा सकता....

ये कह के सुलतान आगे बढ़ता है और बाकी सब को भी बुरी तरह से अपनी तलवार से काट ते हुए मौत के घात उतार देता है.... तब कहीं जा के उसका गुस्सा शांत होता है.... तभी किसी की आवाज़ सुनके सुलतान पलट के उस ततफ देखता है..... वो बीएड पे पूरी तरह से नंगी लेती मचल रही है.... उसकी आँखों में सेक्स की भूख साफ़ नज़र आ रही है.... यहाँ तक की उसके मुँह से भी कामुक सिसकारी निकल रही है.... सुलतान फ़ौरन अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लेता है.... और अपने जादू से उसे कपडे पहना देता है.... बाकी लड़कियों का हाल भी कुछ ऐसा hi है.... फर्क सिर्फ इतना है की बाकी की लड़कियों के जिस्म पे कपडे मौजूद है.... सुलतान अपनी टीम को यहाँ सब साफ़ करने को कह के सब को ले के हॉस्पिटल निकल लेता है....

वहां डॉ फ़ौरन सब का इलाज करने लगते हैं.... इलाज के बाद जो बात डॉ सुलतान को बताती है उसे सुन के सुलतान के पैरों टेल से ज़मीन निकल जाती है.... उसे समझ नहीं आ रहा है की आखिर वो करे तो क्या करे....?

अब आगे....

सब का इलाज होने के बाद सुलतान वार्ड में जा के डॉ से बात करता है....

सुलतान : डॉ अब कैसी हैं सब....?

डॉ : मैंने सब को इंजेक्शन लगा दिया है अब काफी हद तक अब सब ठीक हैं.... कुछ देर में आप इन्हे ले जा सकते हैं...

डॉ की बात सुन के सुलतान को थोड़ा सुकून आ जाता है.... फिर वो मुद के उन दोनों की तरफ देख के उनसे उनका हाल पूछता है....

सुलतान : कैसी हो तुम दोनों....?

ये और कोई नहीं ऐना और मीणा हैं....

सुलतान की आवाज़ सुनते दोनों दौर के उसके करीब जा के कास के उसके सीने से लिपट के रोने लगती हैं....

सुलतान : ये क्या पगली तुम दोनों रो रही हो....? अब सब ठीक है.... देखो तुम्हे कुछ नहीं हुआ....

दोनों नाम आँखों से सुलतान को देख के कहती है....

दोनों : अगर कुछ हो जाता तो....?

सुलतान : जब तक सुलतान ज़िंदा है उसकी परियों को कुछ नहीं हो सकता....

ऐना : उस दिन भी और आज भी जो हुआ उसके बाद से हम इतना दर गए हैं की अब तो लगता है जैसे की अब तो हम अपने घर में भी सेफ नहीं हैं.... आज हम घर से कॉलेज जाने के लिए निकले hi थे की तभी एक कार आ के हमारे सामने रुकी... और उसमे से कुछ गुंडे निकले.... इस से पहले की हम कुछ समझ पाते उन लोगों ने हम को बेहोश कर के कार में दाल दिया और ले गए....

ऐना की बात सुन के सुलतान उनके सर पे हाथ रख के उनके जिस्म पे सुरक्षा शैलद एक्टिवटे कर देता है.... दोनों को अपने जिस्म में कुछ अलग सा एहसास होता है.... वो सुलतान से कुछ पूछने hi वाली होती हैं की तभी सुलतान की बात सुन के उनके उदास और परेशां चेहरे पे सुकून आ जाता है.... दोनों खुश हो के सुलतान के सीने से लिपट जाती हैं.....

सुलतान : आज से बल्कि अभी से कोई भी तुम दोनों को बिना तुम्हारी इजाज़त के छू भी नहीं पायेगा.... अगर किसी ने भी तुम दोनों को गलत इरादे से चुवा भी तो समझ लो की उसकी मौत पक्की है.... तुम दोनों अब सेफ हो.... तुम्हे कुछ नहीं हो सकता.... और हाँ एक बात याद रखा तुम दोनों मेरी पारी हो.... सुलतान की परियां.... जो डरा नहीं करती.... बल्कि डराया करती हैं.... समझी.....

दोनों : हाँ में अपनी गर्दन हिला के कास के सुलतान के सीने से लिपट जाती हैं....

कुछ देर ऐसे hi सुलतान के सीने से लिपटे रहने के बाद अचानक से ऐना को कुछ याद आता है जिस से वो बेहद परेशान हो जाती है.... उसके मुँह से एक लफ्ज़ निकलता है....

ऐना : माँ....

ये कह के वो इधर उधर नज़रें घुमा के अपनी माँ हुस्ना को ढूढ़ने लगती है.... जब वो उसे नज़र नहीं आती तो उसकी आँखें नाम हो जाती हैं.... उसकी आँखों से आंसू बहने लगते हैं....

ऐना : सुलतान... माँ कहाँ है....? वो कैसी हैं... वो ठीक तो हैं न....? बोलो सुलतान....

ऐना की बात सुन के सुलतान फ़ौरन दोनों को ले के उस वार्ड की तरफ जाता है जहाँ हुस्ना चची को एडमिट किया गया है.... वहां पहुँच के वो डॉ से हुस्ना चची के बारे में पूछता है....

सुलतान : डॉ.... हुस्ना चची की तबीयत कैसी है....?

डॉ : मैंने इंजेक्शन तो दे दिया है मगर जल्द से जल्द अगर इनका इलाज नहीं किया गया तो इन की हालत और बिगड़ सकती है.... शायद इन की जान भी जा सकती है....

डॉ की बात सुन के सुलतान को गुस्सा आ जाता है....

सुलतान : जब चची की हालत इतनी खराब है तो उनका इलाज करने के बजाये आप यहाँ कड़ी कड़ी बातें क्यों बना रही है....? जा के उनका इलाज कीजिये....

डॉ : हम जो कर सकते थे वो हम कर चुके हैं..... इनके जिस्म में फैले वियाग्रा को निष्क्रिय करने के लिए हम पहले hi इन को हैवी दोसे एंटीडोट दे चुके हैं मगर उस से भी कोई असर नहीं हो रहा है... और ज़्यादा एंटीडोट देने पे इनका दिमाग पहात सकता है.... और अगर नहीं दिया तो भी सेक्स न करने की वजह से इनका दिमाग पहात सकता है.... अब सिर्फ एक hi रास्ता है इनके अंडर के वायग्रा के पावर को ख़तम करने का.... सेक्स... सेक्स के ज़रिये hi इनके अंडर फैले वियाग्रा को धीरे धीरे काम किया जा सकता है.... मगर उसमे भी वक़्त लगेगा.... काम से काम 5 दिन तक इन्हे रोज़ सेक्स करना होगा.... ताकि इनके अंडर की सेक्स नीड पूरी हो सके.... अब ये तो सिर्फ इनके पति कर सकते हैं.... तो अब जितनी जल्दी हो सके आप इन्हे इनके पति के पास ले जाइये....

ये कह के डॉ वहां से चली जाती है....

सुलतान : ऐना हम चची को साथ ले के घर चलते है तुम जल्दी से चाचा को कॉल करके घर आने को कहो.... अब वो hi चची का इलाज कर सकते हैं.... चलो जल्दी....

ये कह के सुलतान हुस्ना चची को गॉड में उठा के बहार ला के कार की पिछली सीट पे लिटा देता है.... फिर ऐना और मीणा को कार में साथ बैठा के घर की तरफ चल देता है....

सुलतान : ऐना तुमने चाचा को कॉल कर दिया न.... वो घर आ रहे हैं न....

ऐना : नहीं....

सुलतान : नहीं मतलब....?

ऐना : मैं पापा को कॉल नहीं किया....

सुलतान हैरत से : मगर क्यों....?

ऐना : वो इस लिए क्यों की पापा माँ का इलाज नहीं कर सकते....

ऐना की बात सुन के सुलतान झटके से कार को ब्रेक मार देता है.... फिर ऐना की तरफ ऐसे देखता है जैसे की पूछना छह रहा हो की उसने ऐसा क्यों कहा....

ऐना : क्यों तुम्हे नहीं पता की पापा माँ का इलाज क्यों नहीं कर सकते....? उन्हें अगर कोई ठीक कर सकता है तो वो तुम हो.... और कोई नहीं....

सुलतान : ऐना तुम पागल तो नहीं हो गयी हो.... ये क्या बकवास किये जा रही हो....?

ऐना : मैंने वो hi कहा जो सच है.... माँ का इलाज इस पूरी दुनिया में अगर कोई कर सकता है तो वो सिर्फ और सिर्फ तुम हो.... भूल गए वो श्राप जो हमारे पूरे खानदान को दिया गया है.... उस श्राप की वजह से हमारे पूरे खानदान के मर्द.... नामर्द बन चुके हैं... वो इस काबिल नहीं की सेक्स कर सके.... तो बताओ एक नामर्द इंसान सेक्स कैसे कर सकता है.... एक तुम hi हो जो हमारे पूरे खानदान की हर औरत और लड़की के साथ सेक्स कर सकते हो.... तुम hi हो जो माँ के साथ सेक्स कर के उन्हें ठीक....

अभी ऐना ने इतना hi कहा था की सुलतान गुस्से में उसे एक थप्पड़ मार देता है....

Chataaaaaaaaaak.....

सुलतान गुस्से में : तुम्हे ज़रा भी शर्म नहीं आयी ये सब कहते हुए... वो कोई गैर नहीं माँ है तुम्हारी.... तुम उनके बारे में ऐसा कैसे कह सकती हो....?

मीणा : ऐना ने कुछ गलत नहीं कहा....

सुलतान : ऐना तो पागल हो गयी है मगर मीणा तुम भी....

मीणा : हाँ मैं भी वो hi कह रही हूँ जो ऐना कह रही है....

सुलतान : तुम दोनों अपनी माँ के बारे में ऐसा कैसे कह सकती हो....?

दोनों : ये कह ते हुए हम को भी अच्छा नहीं लग रहा है मगर जो सच है उसे भी तो बदला नहीं जा सकता है न.... तुम hi बताओ क्या हम ने जो कहा वो गलत है.... माँ इस वक़्त जिस हाल में है... उन्हें तुम्हारे अलावा कोई और ठीक कर सकता है क्या.... नहीं न... तो फिर तुम hi बताओ की हम क्या करें.... क्या माँ को इस हाल में मरते हुए देखें.... ये हम से नहीं होगा.... हम अपनी माँ को इतना चाहती है की की उनकी जान बचने के लिए जो ज़रूरी है वो हम सब करने को तैयार हैं मगर हम छह के भी उन्हें ठीक नहीं कर सकते... एक तुम hi हो जो माँ का इलाज कर के उन्हें ठीक कर सकता है... प्लीज हमारी बात मान लो और जल्द से जल्द माँ का इलाज करो इस से पहले की कोई उन्होनी हो जाए....

सुलतान : जी नहीं ऐसा मैं हरगिज़ नहीं कर सकता.... ये मुझसे नहीं होगा.....

सुलतान के मुँह से न सुन के ऐना और मीणा रोने लगती हैं.... सुलतान से उनका रोने देखा नहीं जाता मगर जो वो कह रही हैं वो भी तो गलत hi है....

सुलतान : मैं चची को ऐसे ठीक नहीं कर सकता तो क्या अपनी पावर्स के ज़रिये तो उनका इलाज कर hi सकता हूँ....

सुलतान की बात सुन के दोनों हैरत से उसकी तरफ देखती हैं.... इस से पहले की वो उस से कुछ पूछ पाती सुलतान आगे बढ़ के अपनी चची के पास जाता है और अपनी पावर्स से उन्हें ठीक करने hi वाला होता है की तभी वहां बाबा आ जाते हैं और वो फ़ौरन सुलतान को रोक देते हैं....

बाबा : नहीं सुलतान ये गलती मत करना.... अगर तू ने हुस्ना पे अपनी पावर्स का इस्तेमाल किया तो उसके अंडर जो शैतान का काला जादू है वो और तेरी पावर्स आपस में टकरा के हुस्ना के जिस्म को नष्ट कर देंगी..... हुस्ना ठीक होने के बजाये मर जायेगी....

बाबा की बात सुन के सब शॉक हो जाते हैं....

सुलतान : ये आप क्या कह रहे हैं बाबा.... हुस्ना चची को तो उन कामेनो ने वियाग्रा का हैवी दोसे दिया था.... उनके जिस्म में शैतान का काला जादू कहाँ से आ गया....

बाबा : ये तब हुआ था जब बाकी सब के साथ साथ तू हुस्ना को बचने वहां गया था.... शैतान के इशारे पे hi हुस्ना को वियाग्रा का हैवी दोसे दिया गया था... साथ hi उसी शैतान ने हुस्ना के जिस्म को काले जादू से बाँध दिया.... अघुरा को ये पता है की श्राप की वजह से वजह से तुझे hi हुस्ना को ठीक करना होगा.... मगर तू ऐसा करना नहीं चाहेगा.... उसे ठीक करने के लिए तू अपनी पावर्स का इस्तेमाल करेगा.... जैसे hi तेरी पावर्स हुस्ना के जिस्म में जा के काले जादू से टकराएगी जिसे हुस्ना का जिस्म बर्दाश्त नहीं कर पायेगा और हुस्ना की मौत हो जायेगी... हुस्ना के मरते hi तेरे अपने तेरे खिलाफ हो जाएंगे.... जिस से तुझे बेइन्तेहाँ तकलीफ होगी.... तू इस सब में उलझ के रह जाएगा और शैतान अपने अगले चाल की तरफ बढ़ जाएगा... ताकि वो तुझे और तकलीफ पहुंचा सके.....

बाबा की बात सुन के जहाँ ऐना और मीणा हैरान हो रही हैं वहीँ सुलतान को शैतान पे बेहद गुस्सा आने लगता है... बड़ी मुश्किल से वो अपने गुस्से को दबा के कहता है....

सुलतान : तो बाबा अब आप hi बताइये की चची को कैसे ठीक किया जाए....?

बाबा : न चाहते हुए भी तुझे वो hi करना पड़ेगा जो तू नहीं करना चाहता है.... इस के सिवाए हुस्ना को बचने का और कोई रास्ता नहीं है....

सुलतान : बाबा ये आप क्या कह रहे हैं....? ये चची है मेरी मैं इन के साथ.... नहीं बाबा नहीं....

बाबा : सुलतान तू इस बात को गलत तरीके से क्यों देख रहा है.... तू ये क्यों नहीं समझ रहा है की तू जो भी करने वाला है वो सिर्फ और सिर्फ हुस्ना का इलाज करके उसकी जान बचने के लिए कर रहा है....

सुलतान : बाबा आप जो कह रहे हैं वो सच है मगर फिर भी है तो वो मेरी चची hi न..... मैं कैसे....

बाबा : सुलतान अब ये फैसला तुझे करना है की तू क्या चाहता है..... हुस्ना का इलाज करके उसकी जान बचाना या फिर उसे तड़पते हुए मौत के मुँह में जाने देना चाहता है.... हुस्ना की ज़िन्दगी और मौत अब तेरे हाथ में है.... तू उसे ज़िन्दगी देता है या मौत....

ये कह के बाबा वहां से चले जाते हैं.... बाबा के जाने के बाद जब सुलतान की नज़र सामने जाती है तो कार में बैठी ऐना मीणा को अपनी माँ के जिस्म से लिपटे रट हुए पाटा है.... उन्हें इस हाल में देख के उसे बेहद तकलीफ होती है.... वो हुस्ना की मदत करने के लिए न आगे बढ़ पा रहा है और न उन्हें मरते हुए देख पा रहा है.....

तभी अचानक से हुस्ना चची की आवाज़ सुन के उसकी तंत्र टूट टी है....

चची : सुलताआआआआ.....

आवाज़ सुन के सुलतान सामने देखता है.... चची उसकी तरफ अपना हाथ बढ़ा के उसे मदत के लिए पुकार रही हैं....

सुलतान : च... च... चची कैसी हो आप....?

हुस्ना चची जो सेक्स की आग में जल रही है.... वो सुलतान की आवाज़ सुन के पलट के सेक्स के नशे में बोझिल आँखों से उसे देखती है.... सुलतान को देखते hi उसकी कामाग्नि और तेज़ी से भड़क उठती है.... उसकी छूट तेज़ी से रास चोर्ने लगती है.... वो कामुक भरी नज़रों से सुलतान को देखने लगती है....

हुस्ना : सुलतान मेरी मदत कर.... मुझे इस तकलीफ से निजात दिला दे..... अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा है... जल्दी कुछ कर सुलतान इस से पहले की ये तकलीफ मेरी जान ले ले....

सुलतान : चची आप को पता है की आप मुझे से किस तरह की मदत छह रही हैं... आप को ठीक करने के लिए मुझे आप के साथ S...S... सेक्स करना होगा... वो भी लगातार 5 दिन तक.... तब कहीं जा के आप पूरी तरह से ठीक होंगी.....

हुस्ना : हाँ मुझे पता है जो मैं तुझे करने को कह रही हूँ वो गलत है.... मगर फिर भी मैं तुझे वो करने को कह रही हूँ... उस की सब से बड़ी वजह है मेरी दोनों बेटियां... मेरे मरने के बाद इनका क्या होगा....? जो परिवार घर के एक लौटे बेटे को जान से मारने से नहीं चूका वो मेरे मरने के बाद मेरी बेटियों का क्या ख़याल रखेगा.... वो सब मिल के मेरी बेटियों को भी जान से मार देंगे....

सुलतान : मेरे रहते कोई मेरी परियों को छू भी नहीं सकता....

मीणा जो काफी देर से सुलतान की बातें सुन रही थी वो बेहद गुस्से में कहती है....

मीणा : जब तू हमारी मदत करना hi नहीं चाहता तो फिर यहाँ हमारे पास क्यों खड़ा है जा चला जा यहाँ से.... या फिर कहीं ऐसा तो नहीं की तू माँ को मरते हुए देखना चाहता है.... हाँ शायद ये hi बात है हम को तकलीफ में देख के तुझे ख़ुशी हो रही है....

सुलतान : मीणा ये तू क्या कह रही है..... मुझे चची को इस हाल में देख के ख़ुशी नहीं बल्कि कितनी तकलीफ हो रही है ये मैं और मेरा दिल hi जानता है.... मैं छह के भी चची की मदत नहीं कर पा रहा हूँ....

ऐना : वो इस लिए क्यों की तू माँ की मदत करना चाहता hi नहीं है....

सुलतान : ये तू क्या कह रही है.... ऐसा बिलकुल नहीं है.....

ऐना : ऐसा hi है.... सब कुछ जान ने के बाद भी तू मदत करने को तैयार नहीं है..... तू ये क्यों नहीं समझ रहा है की उस श्राप की वजह से हमारे पूरे खानदान की औरत हो या लड़की तुझे न चाहते हुए भी सब के साथ सेक्स करना hi होगा.... ये hi हम सब की किस्मत में लिखा है.... जिसे तू तो क्या ऊपर वाला भी नहीं बदल सकता.....

फिर ऐना कार से बहार निकल के आगे बढ़ के सुलतान का गिरेबान पकड़ के उस से बेहद गुस्से में कहती है....

ऐना : अब अगर तू माँ की जान बचाना चाहता है तो वो कर वर्ण हम को मरने के लिए चोर के चला जा यहाँ से....

ऐना की बात सुन के सुलतान न चाहते हुए भी वो करने के लिए राज़ी हो जाता है जो वो नहीं करना चाहता.... वो ये समझ चूका है की ये hi उसकी किस्मत है.. और किस्मत के लिखे को वो तो क्या दुनिया का कोई भी शख्स नहीं बदल सकता....

सुलतान : हम को जल्द से जल्द यहाँ से चलना होगा ताकि चची का इलाज फ़ौरन हो सके....

ऐना : मतलब....

सुलतान : मतलब की तेरी बात मेरी समझ में आ गयी है... जो किस्मत में लिखा है वो हो के hi रहता है.... मुझे चची का अलाज कर के उन्हें जल्द से जल्द ठीक करना है....

ऐना : तू सच कह रहा है.... तू माँ का इलाज करने को तैयार है...

ऐना की बात सुन के सुलतान हाँ में अपना सर हिला देता है.... जिसे देख ऐना ख़ुशी में कास के सुलतान के सीने से लिपट जाती है...

सुलतान : अबे क्या कर रही है चोर मुझे.... तू तो ऐसे खुश हो के लिपट रही है जैसे मैंने चची के इलाज की नहीं बल्कि तेरे इलाज की बात की हो....

ऐना : मेरा इलाज....!!!! मगर मैं तो ठीक हूँ...

फिर जब ऐना को सुलतान की बात का मतलब समझ आता है तब वो गुस्से में उसके सीने में प्यार से मुक्का मार के कहती है....

ऐना : तू न सुलतान बहुत बिगड़ गया है.... पहले माँ का इलाज तो कर ले फिर मेरे बारे में सोचना..... चल अब....

ऐना की बात सुन के सुलतान हंस देता है... फिर वो लोग कार में बैठ के चल देते हैं दें की तरफ....

वहां सुलतान ऐना और मीणा को एक रूम में चोर के हुस्ना चची को ले के दूसरे रूम में चला जाता है.... वहां से पोर्टल खोल के वो हुस्ना को अपने साथ ले के जादुई झील में डुबकी लगता है ताकि चची के जिस्म में जो काला जादू है उसे निष्क्रिय किया जा सके.... फिर वो वहां से वापिस रूम में आ जाता है.... अपने जादू से वो अपने और चची के कपडे बदल देता है..... फिर चची के करीब जा के उनके पास बैठ जाता है और प्यार से उनकी आँखों में देखते हुए कहता है....

सुलतान : चची मैं ये जो भी कर रहा हूँ वो आपकी जान बचने के लिए कर रहा हूँ.... आप कोई गैर नहीं बल्कि मेरी अपनी हैं.... और अपने क्या होते हैं.... ज़िन्दगी में अपनों की और उनके प्यार की क्या एहमियत होती है ये मुझसे बेहतर कौन जान सकता है.... बचपन से मैं जिन अपनों के साथ और प्यार के लिए तड़पता रहा हूँ वो आज मेरे पास हैं.... अब चाहे मुझे कुछ भी क्यों न करना पड़े मैं मेरे अपने को और उनके प्यार को कभी खुद से अलग नहीं होने दूंगा.... जिसकी शुरुवात आज मैं आप के साथ करने जा रहा हूँ..... जो श्राप हमारे पूरे खानदान को दिया गया था उसे मैं दूर कर के रहूँगा....

हुस्ना : मैं यहाँ तड़प रही हूँ और तू है की तुझे मेरी ज़रा भी फ़िक्र नहीं है....

सुलतान : आप तो मेरी अपनी हो.... आप की फ़िक्र नहीं करूँगा तो किसकी करूँगा....

हुस्ना : जा जा ज़्यादा नाटक मत कर अगर तुझे मेरी इतनी फ़िक्र होती तो क्या तू मुझे इतना इंतज़ार करवाता और अब भी देख यहाँ आने के बाद भी मुझे प्यार करने के बजाये दूर खड़ा बातें बना रहा है....

सुलतान आगे बढ़ के हुस्ना को कास के अपने सीने लगा के कहता है....

सुलतान : आज मैं आप की साड़ी तकलीफ दूर कर दूंगा.... जिस से आप की साड़ी शिकायतें दूर हो जाएंगी और आप मेरी दीवानी बन जाएंगी.... आज मैं अपनी प्यारी चची जान को जन्नत की सैर करवाने वाला हूँ... बस एक बार आप ने मेरे मूसल जैसे लुंड की सवारी कर ली न तो फिर कभी मेरे लुंड को अपनी छूट से निकलने नहीं डौगी....

सुलतान की बात सुन के हुस्ना का चेहरा और उनकी रसीली छूट शर्म से पानी पानी हो जाती है....

हुस्ना : तू न बहुत बेशर्म हो गया है... ऐसे खुलेआम भी कोई कहता है क्या..?

सुलतान : हाय मेरी चची जान मेरा बस चले तो बातें hi क्या मैं तो खुलेआम अपनी आप को नंगी कर के आप की रसीली छूट और मदमस्त मखमली गांड का बाजा बजा दूँ.... हाय क्या मस्त सेक्सी गांड है आपकी.... इसे देख के दिल इसका दीवाना हुआ जाता है...

हुस्ना शर्माते हुए : तू न बड़ा शैतान हो गया है..... ऐसा भी कोई कहता है क्या.....? एक बात तो बता.... मेरी छूट का तो समझ में आता है मगर आखिर मेरी ग.... गए.... गांड में ऐसा क्या है.... जिसका तू दीवाना बना हुआ है.....

सुलतान : आप की मदमस्त गांड में वो कशिश है जिसे देख किसी का लुंड भी खड़ा हो जाए.....

हुस्ना : तुझे गांड की पड़ी है और यहाँ मेरी छूट कब से चुदाई के लिए तड़प के रास बहा रही है.....

सुलतान : आज मैं आपकी और आप की छूट की पूरी प्यास बुझा दूंगा.... मैं जी भर के आप के तीनो छेद में अपना लुंड डालूंगा.....

हुस्ना शरमाते हुए : जी नहीं अभी तीसरा छेद तेरे लुंड के लिए तैयार नहीं है.... पहले उसे थोड़ा फैल जाने दे फिर जी भर के मेरी गांड भी मार लेना....

ये कह के हुस्ना उठ के जाने लगती है....

सुलतान : अरे कहाँ चली....? अभी तो चुदाई के लिए तड़प रही थी... चूड़े बिना कहाँ जा रही हो.....?

सुलतान की बात सुन के हुस्ना अपनी कानि ऊँगली उसे दिखा के शरमाते हुए बाथरूम में भाग जाती है.... और अपनी साड़ी उठा के सीटी बजाते हुए मूतने लगती है.... सुलतान भी कहाँ मान ने वाला था.... हुस्ना की छूट से निकल रही सीटी की मधुर आवाज़ सुन के वो भी उनके पीछे पीछे बाथरूम में चला जाता है....

हुस्ना गांड उठा के मूट रही है.... उस की मदमस्त गांड देख के सुलतान का लुंड खड़ा हो के पूरे जोश में आ जाता है....

सुलतान को अपने पीछे खड़े देख हुस्ना शर्मा जाती है.....

हुस्ना : बहार जा.... देख नहीं रहा मैं मूट रही हूँ.....

सुलतान : वो hi तो देख रहा हूँ... हाय क्या मस्त नज़ारा है....

हुस्ना शरमाते हुआ : अरे बेशर्म कुछ तो चोर दे....

सुलतान : हाय चची जान कैसे चोर दूँ.... आप की सेक्सी गांड और छूट ने मुझे आपका दीवाना जो बना रखा है.... जी चाहता है.... अपना लुंड इसमें डाले उम्र भर आप को छोड़ता रहूं....

हुस्ना शर्माते हुए : छोड़ लेना... मैंने कौनसा तुझे रोका है... मगर अभी तो बहार जा.... पहले मुझे मूट तो लेने दे....

सुलतान : आप मुतो न मैंने कहाँ आप को रोका है.... आप अपना काम करो और मुझे अपना काम करने दो....

ये कह के सुलतान अपनी गीली कर के उसे हुस्ना की गांड के छेद पे फिरने लगता है.... सुलतान की ऊँगली अपनी गांड के छेद पे महसूस होते hi हुस्ना उछाल पड़ती है..... लाइफ में आज पहली बार उसने अपनी गांड के छेद पे किसी और की ऊँगली को महसूस किया है....

हुस्ना : हाय... ये क्या कर रहा है.....?

सुलतान : आप की गांड मारने की तैयारी कर रहा हूँ.....

ये कह के वो धीरे से अपनी एक ऊँगली हुस्ना की गांड के छेद में घुसा देता है.... ऊँगली गीली होने की वजह से वो हुस्ना की गांड के टाइट में घुस जाती है.... जिस से हुस्ना एक सिसकारी लेते हुए उछाल पड़ती है.....

Aaaaaaaaaagggghhhhhh......

हुस्ना : सुलतान क्या कर रहा है... निकाल ऊँगली.....

सुलतान हुस्ना की बात को उन सुना कर के एक हाथ से उनकी पिशाब करती छूट को रगड़ते हुए ऊँगली को उनके गांड के छेद में अंडर बहार करने लगता है.....

सुलतान की इस हरकत पे हुस्ना को मज़ा भी आ रहा है और गांड में मीठा मीठा दर्द भी हो रहा है.... वो सुलतान को रोकने की बहुत कोशिश करती है..... मगर सुलतान कहाँ मान ने वाला था.... हुस्ना को अपनी बाहों में जकड के उनकी छूट को रगड़ते हुए अपनी ऊँगली उनकी कमसिन वर्जिन गांड में अंडर बहार कर रहा है....

मस्ती में हुस्ना के मुँह से मादक सिसकारी निकल रही है....

Sssssssssss...... Aaaaaaaaaahhhhh.... ममममममममम... ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह.....

मज़े और दर्द के मीठे मीठे एहसास को महसूस करके हुस्ना की छूट कॉमर्स की नदी बहा रही है..... धीरे धीरे वो झड़ने के करीब पहुँच जाती है.... उसका जिस्म अकड़ने लगता है.... मस्ती में वो सुलतान के होंठों को अपने मुँह में ले के चूसने लगती है..... अचानक से उनका जिस्म अकड़ने लगता है और वो झड़ने लगती है...

ठीक तभी सुलतान अपनी पूरी ऊँगली हुस्ना की गांड में धीरे से घुसा देता है..... ठीक तभी हुस्ना मस्ती में झाड़ जाती है उसे पता hi नहीं चलता की कब सुलतान ने अपनी ऊँगली उनकी कमसिन ुंचुड़ी गांड के छेद में घुसा दिया.... वो कास के सुलतान के जिस्म से लिपट जाती है.... और सुलतान के होंठों को चूसते हुए झड़ने का मज़ा लेने लगती है....

कुछ देर बाद जब हुस्ना की मस्ती थोड़ी शांत होती है तब वो शरमाते हुए सुलतान से कहती है....

हुस्ना : पूरा दिन यहीं ऐसे hi गुज़ारना है क्या.....?

सुलतान : जी नहीं..... मेरी तो कुछ और hi चाहत है..... फिलहाल आप बताओ की आप क्या चाहती हो.....?

मस्ती में हुस्ना सुलतान के होंठों को चूम के कहती है....

हुस्ना : मैं चाहती हूँ की तू जल्दी से मुझे बीएड पे ले जा के जैम के मेरी चुदाई कर....

सुलतान : नेक काम में देर नहीं करनी चाहिए.... चलो जल्दी चलो.....

हुस्ना शर्माते हुए : पहले अपनी ऊँगली तो मेरी गांड से निकाल.....

हुस्ना की बात सुन के सुलतान अपने दोनों हाथ हुस्ना को दिखा के कहता है..... वो तो मैं कब का निकाल चूका हूँ.....

सुलतान की बात पे हुस्ना चौंक के कहती है.....

हुस्ना : तो फिर इस वक़्त मेरी गांड में क्या घुसा हुआ है....?

सुलतान : आप की गांड में इस वक़्त वो डिलडो है ये मेरी तरफ से आप को हमारी पहली मिलान का तोहफा है....

हुस्ना अपनी गांड पे हाथ लगा के महसूस करती है..... तो पाती है की वाकई में उनकी गांड के छेद में डिलडो घुसा हुआ है..... वो हैरत से सुलतान की तरफ देखती है..... जैसे पूछना छह रही हो... की ये तू ने कब और कैसे घुसाया.....?

सुलतान : जिस वक़्त आप झड़ने का मज़ा ले रही थी..... ठीक उसी वक़्त मैंने इसे आपकी गांड में घुसा दिया..... अब इसे अपनी गांड में hi रहने दीजिये..... जिस से जल्द hi आप की गांड मेरा लुंड लेने लायक बन जायेगी..... बस लैट्रिन करने के लिए hi आप इसे बहार निकालेंगी..... इसमें आप को बेहद मज़ा भी आएगा..... चलते वक़्त..... उठते बैठते वक़्त... बस मज़ा hi मज़ा.... साथ hi हर पल आपको मेरी याद दिलाता रहेगा.... और हर गुज़रते पल के साथ मेरे लिए आपकी दीवानगी और प्यार बढ़ता hi जाएगा...

सुलतान की बात सुन के हुस्ना शर्माते हुए कहती है.....

हुस्ना : तू न बड़ा कमीना हो गया है.... ऐसा भी कोई तोहफा किसी को देता है क्या....? अपने मज़े के लिए मेरी गांड मारने पे लगा हुआ है..... अगर तू ने मेरी गांड मारी तो मेरी बंद बज जायेगी.....

हुस्ना की बात सुन के सुलतान उन्हें आँख मार के कहता है.....

सुलतान : बंद नहीं मैं तो पूरा ऑर्केस्ट्रा बजने की सोच रहा हूँ.....

सुलतान की बात सुन के हुस्ना उसके गाल पे प्यार से चपत लगा के कहती है..... पहले मेरी छूट तो बजा ले..... गांड का ऑर्केस्ट्रा बाद में कभी बजाते रहना.... यहाँ वियाग्रा की वजह से मेरी जान जा रही है और तू है की मेरी चुदाई करने के बजाये मेरी निगोड़ी गांड में घुसना छह रहा है....

सुलतान : दिल तो नहीं छह रहा आप के सेक्सी चूतड़ों को चोर्ने का..... मगर अभी इसमें वक़्त है..... जल्द hi मैं इसमें अपना लुंड दाल के इसे छोडूंगा.....

ये कह के सुलतान आगे बढ़ के हुस्ना के चूतड़ को प्यार से चूमता है और अपनी हथेली उसकी रास चोरटी छूट पे रख देता है.....

सुलतान की इस हरकत पे सुलतान के साथ साथ हुस्ना का जिस्म भी मस्ती में गंगना जाता है..... सुलतान की हथेली हुस्ना के छूट रास से सराबोर हो जाती है..... सुलतान इसे अपनी नाक के पास ला के सूंघता है फिर अपनी जुबां बहार निकाल के अपने हाथ पे लगे हुस्ना के छूट रास को चाट ता है.... हुस्ना की छूट की खुशबु और उसका टास्ते सुलतान के लुंड को उछलकूद मचने पे मजबूर कर देता है....

सुलतान हुस्ना की छूट पे प्यार से हाथ फेरने लगता है साथ hi उसकी गांड को चूम भी रहा है.... सुलतान की इस हरकत पे हुस्ना मस्ती के आसमान में उड़ने लगती है उसके मुँह से मादक सिसकारी निकलने लगती है.....

Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa..... Mmmmmmmmmm.... ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह....

जिसे सुनके सुलतान थोड़ा नीचे झुक के हुस्ना की छूट को चूम लेता है.... फिर अपनी जुबां निकल के उसे चाटने लग जाता है..... सुलतान की इस हरकत से हुस्ना की छूट से तेज़ी से कॉमर्स बहने लगता है और वो ाँहें भरते हुए सुलतान को प्यार से अपनी छूट छत्ते हुए देखने लगती है..... सुलतान हुस्ना की छूट को फैला के उसके दाने को अपनी मुँह में ले के मज़े से चूसने लगता है साथ hi अपनी एक ऊँगली उस की छूट में दाल के उसे अंडर बहार करने लगता है..... हुस्ना के हाथ सुलतान के सर पे चले जाते हैं और वो उसे अपनी छूट पे दबाते हुए मस्ती में सिसकारी लेने लगती है...

हुस्ना : Mmmmmmmmmm..... Aaaaaaaaaaahhhhh..... और ज़ोर से chaaaaaaaaaaaaattt.... ममममममममम.... बड़ा माज़आआआ... आ रहा है..... oooooooooohhh.... मममममममम...

हुस्ना की बात सुनके सुलतान और तेज़ी से उसकी छूट में ऊँगली अंडर बहार करते हुए उसकी छूट चाटने लगता है.... पूरे कमरे में हुस्ना की मस्ती भरी सिसकारी गूंजने लगती है....

हुस्ना : Aaaaaaaaaaaaaaaaa..... मममममममम.... Ooooooooooohhhh.... हानन.... ऐसे hi..... ऊऊऊऊओह्ह्ह्ह.... मममममममम... बड़ा मज़ा अअअअअअअ राहाआआआ है और कास के छाअअअअअअअत.... खा jaaaaaaaaaa.... मेरी छूट को.......

धीरे धीरे हुस्ना का जिस्म अकड़ने लगता और झड़ने के करीब पहुँच जाती है.... और एक मादक सिसकारी के साथ उसकी छूट से कॉमर्स की नदी बह के सुलतान के मुँह में जाने लगती है.... सुलतान हुस्ना की छूट से निकले कामर्स को चाट चाट के पीने लगता है.... झड़ने के बाद हुस्ना सुलतान को ऊपर की तरफ खींचती है और उसके होंठ अपने मुँह में ले के उसे चूसने लगती है....

करीब 10 मिनट्स तक उसके होंठों को चूसने के बाद हुस्ना उसके जिस्म से लिपट जाती है....

हुस्ना : ऐसा मज़ा मुझे आज तक नहीं आया.... जो मज़ा आज तू ने मुझे दिया hai....mmmmmmm.... मज़ा आए गया.....

हुस्ना की बात सुन के सुलतान उसे अपनी बाहों में कास लेता है.... और प्यार से उसके होंठों को चुम के कहता है....

सुलतान : असली मज़ा तो अब शुरू होगा...

ये कह के सुलतान हुस्ना को अपनी गॉड में उठता है और लेजा के बीएड पे लेता देता है और उसकी ठोस चूचियों को अपने हाथों में ले के मसलने लगता है.... हुस्ना के मुँह से मस्ती भरी सिसकारी निकलने लगती है....

ममममममम.... aaaaaaaaaaaaahhh.... ऊऊऊऊओह्ह्ह्ह....

फिर सुलतान झुक के हुस्ना के निप्पल को अपने मुँह में ले के चूसने लगता है.... साथ hi दूसरी चूची को मस्ती में दबाने लगता है... सुलतान का लुंड और भी लम्बा और मोटा नज़र आ रहा है.... जिसे देख हुस्ना का मुँह खुल जाता है और उसकी दिल की धरकन बढ़ जाती है.... साथ hi मस्ती में उसकी छूट और गांड का छेद फड़फड़ाने लगता है....

सुलतान हुस्ना के हाथ में अपना खड़ा लुंड थमा देता है..... दर के मारे हुस्ना उसे चोर देती है....

हुस्ना : आज तो मेरी सच में फटने वाली है....

सुलतान : चची जान आप दर क्यों रही हैं...?

हुस्ना : हाथ में एनाकोंडा थमा के पूछ रहा है मैं दर क्यों रही हूँ....?

सुलतान : ये आज आपको इतना मज़ा देगा की आपका सारा दर हवा हो जाएगा...

हुस्ना आगे बढ़ के सुलतान के लुंड को अपने मुँह में ले के मज़े से चूसने लगती है.....

फिर कुछ देर बाद सुलतान झुक के हुस्ना की छूट को चाटने लगता है.... और साथ hi अपनी दो ऊँगली उसकी छूट में दाल के अंडर बहार करने लगता है....

हुस्ना मस्ती में सिसकारी लेते हुए मचलने लगती है.... उसकी छूट कॉमर्स से सराबोर हो जाती है....

और उस से एक पल भी और बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है.... छूट की गर्मी के आगे मजबूर होक वो अपनी साड़ी शर्मा हाय भुला के कहती है.....

हुस्ना : सुलतान कुछ कर न.... प्लीज....

हुस्ना को चरने की नीयत से सुलतान जान के भी अनजान बांके के उस की छूट में तेज़ी से ऊँगली अंडर बहार करते हुए उस से पूछता है....

सुलतान : क्या करूँ चची जान....?

हुस्ना : ममममम..... oooooooooooohhh.... है.... क्यों तडपाआआ रहा है...? कर नाआआ जल्दी...?

सुलतान : बताओगी नहीं तो कैसे पता चलेगा की क्या करना है....?

हुस्ना : तू जान के मुझे तड़पा रहा है न..... तू यही चाहता है न की मैं अपने मुँह से कहूं... तो ले मैं कहती हूँ.... अपना मूसल जैसा लुंड मेरी छूट में दाल के छोड़ मुझे....

हुस्ना के मुँह से चुदाई की बात सुन सुलतान का दिल ख़ुशी से झूम उठता है.... और वो अपना मूसल जैसा लुंड हुस्ना की छूट पे सेट करता है.... सुलतान का लुंड अपनी छूट पे महसूस करके हुस्ना के मुँह से मस्ती भरी सिसकारी निकल जाती है.....

Aaaaaaaaaaaaaaahhhhh....

सुलतान अपना लुंड हुस्ना की छूट पे घूमने लगता है.... हुस्ना की छूट मस्ती में कामर्स बहाने लगती है....

हुस्ना : सुलतान क्यों तड़पा रहा है.... अब दाल भी दे.... मगर ज़रा प्यार से करना.... कहीं ऐसा न हो तेरा ये मूसल जैसा लुंड मेरी नन्ही सी छूट का भोसड़ा बना के रख दे.....

सुलतान : घबराओ मत चची जान.... मैं और मेरा लुंड अपनी प्यारी पारी का भोसड़ा नहीं बनने देगा....

ये कह के सुलतान हुस्ना के होंठों को अपने मुँह में ले के अपना लुंड हुस्ना की रास चोरटी छूट पे सेट करके एक झटका मारता है.... जिस से उसके लुंड का सूपड़ा हुस्ना की छूट में घुस के अटक जाता है....

दर्द के मारे हुस्ना की चीख निकल जाती है... उसकी चीख सुलतान के मुँह में डाब के रह जाती है.....

सुलतान : चची जान दर्द तो नहीं हो रहा है न....?

हुस्ना : कमीने मेरी छूट पहाड़ दी और कहता है दर्द तो नहीं हो रहा.... साले अब तेरा मूसल जैसा लुंड मेरी नन्ही सी छूट में जाएगा तो दर्द तो होना hi है.... मगर मज़े लेना है तो दर्द तो सहना hi पड़ेगा..... तू मेरे दर्द की चोर और चुदाई पे ध्यान दे....

हुस्ना की बात सुन के सुलतान आगे झुक के उसके होंठ अपने मुँह में ले के एक करारा शॉट मारता है.... 4 इंच लुंड हुस्ना की छूट में घुस जाता है.... दर्द के मारे उस की चीख निकल जाती है.... मगर सुलतान के मुँह में उसके होंठ होने की वजह वो वहीँ डाब के रह जाती है....

सुलतान हुस्ना की चूची को दबाये हुए उसके निप्पल को चूसने लगता है.... धीरे धीरे हुस्ना का दर्द काम होने लगता है और उसके जिस्म में मस्ती चढ़ने लगती है.... वो इशारे से सुलतान को आगे बढ़ने को कहती है.... सुलतान इस बार भी हुस्ना के होंठों को अपने मुँह में ले के एक करारा शॉट मारता है.... जिस से उसका 9" लम्बा और 3" मोटा लुंड हुस्ना की छूट को चीरता हुआ उसकी बच्चेदानी से जा टकराता है.... मस्ती में हुस्ना का पूरा जिस्म मदहोश हो जाता है..... मस्ती में उसका जिस्म ैठने लगता है.... वो नीचे से झटके देने लगती है....

हुस्ना के मुँह से मस्ती भरी सिसकारी निकलने लगती है.....

Aaaaaaaaaaagggghhhhh.... ममममममम.... oooooooooohhhhhhh....

अब सुलतान के हर झटके के साथ हुस्ना को मज़ा आने लगता है... और वो धीरे धीरे झड़ने के करीब पहुँच जाती है.... उसकी छूट से कॉमर्स का सैलाब सा बह निकलता है....

सुलतान मस्ती में हुस्ना की चुदाई करने लगता है.... करीब एक घंटे तक वो उसकी छूट में अपना मूसल जैसा लुंड अंडर बहार करते हुए उसे छोड़ने लगता है.... इस बीच हुस्ना 4 बार झाड़ जाती है....

सुलतान पलट के नीचे आ जाता है हुस्ना को अपने ऊपर बैठा लेता है...

मस्ती में हुस्ना भी उसके मूसल जैसे लुंड पे बाथ के उस से छुड़वाने लगती है.... उसे ऐसा लगने लगता है जैसे सुलतान उसे नहीं बल्कि वो सुलतान को छोड़ रही है.... छूट में लुंड और गांड में डिलडो उसे जन्नत का मज़ा दे रहा है..... मस्ती में वो सिसकारी लेते हुए सुलतान के लुंड पे उछलने लगती है.....

सुलतान को भी बेहद मज़ा आने लगता है.... कुछ hi देर में हुस्ना एक बार फिर से झड़ने के करीब पहुँच जाती है.... उसका जिस्म अकड़ने लगता है और वो झड़ने लगती है.... झड़ने के बाद वो सुलतान के जिस्म पे गिर के निढाल हो जाती है....

सुलतान फ़ौरन पलट के उसके ऊपर आ जाता है.... उसकी छूट में सत्ता सात अपना लुंड पेलने लगता है....

हुस्ना से अब और बर्दाश्त नहीं होता.... उसकी छूट में जलन सी होने लगती है....

हुस्ना : सुलतान अब बस भी कर.... मेरी छूट में जलन सी हो रही है....

सुलतान : बस चची जान थोड़ी देर और... मेरा बस निकलने hi वाला है....

हुस्ना : जितना मैं आज तेरे साथ एक चुदाई में झड़ी हूँ उतना तो मैं अपनी पूरी ज़िन्दगी में नहीं झड़ी.... बड़ा डैम है रे तुझमे और तेरे मूसल जैसे लुंड में..... जिस से तेरी शादी होगी वो वाक़ई में बेहद लकी होगी......

सुलतान : क्यों आप लकी नहीं हो....?

हुस्ना एक मादक सिसकारी लेते हुए कहती है....

हुस्ना : हाँ हूँ न.... आआआआअह्ह्ह्ह.... mmmmmmmmmm..... मैं तो बहोत लकी हूँ.... तभी तो तेरे मूसल जैसे लुंड से छुड़वा के जन्नत का मज़ा ले रही हूँ.... अब बातें काम कर और छोड़ मुझे....

हुस्ना की बात सुन के सुलतान राजधानी की स्पीड से अपना मूसल जैसा लुंड उस की छूट में अंडर बहार करने लगता है..... अब वो भी झड़ने के करीब पहुँच जाता है....

सुलतान : Aaaaaaaaaaaaaahhhh..... चची जान..... मैं झड़ने वाला हूँ.....

ये कह के वो एक मादक सिसकारी के साथ एक करारा शॉट हुस्ना की छूट में मारता है और अपने लुंड के सुपडे से वार्य की पिचकारी मार्के हुए उस की बच्चेदानी दानी में झड़ने लगता है.... करीब दो मिनट तक वो वार्य की पिचकारी हुस्ना की छूट में चोरता रहता है..... हुस्ना भी मस्ती में उसके साथ झड़ने लगती है.....

दोनों इस का मज़ा लेने लगते हैं... करीब 15 मिनट्स के बाद सुलतान हुस्ना की एक और बार जैम के चुदाई करता है.... दोनों थक के निढाल हो जाते हैं.... और एक दूसरे की बाहों में लिपट के सो जाते हैं.....

करीब 2 घंटे के बाद सुलतान उठ के हुस्ना के साथ फ्रेश होता है और उन्हें एक डीप किश कर के बाद प्यार से उन्हें कपडे पहना के उनसे पूछता है....

सुलतान : अब कैसा महसूस कर रही हैं चची जान....

हुस्ना : ऐसा लग रहा है जैसे अभी अभी मैं जन्नत की सैर कर के आयी हूँ.... ऐसा महसूस हो रहा है जैसे तेरा मूसल जैसा लुंड अभी भी मेरी छूट के अंडर hi है.... लाइफ में पहली बार मैंने ऐसा महसूस किया है की असली चुदाई किसे कहते हैं..... तेरे मूसल जैसे लुंड के सामने तेरे चाचा का लुंड मूंगफली जितना hi है... अगर उसमे जान होती तो तेरे साथ चुदाई के बाद अब तो वो महसूस भी नहीं होता... आज मैं तेरा लुंड पा के बेहद खुश हूँ.... मगर....

सुलतान : मगर क्या चची जान....

हुस्ना : मगर इस बात से डर्टी हूँ की अगर तू ने मुझे चोर दिया तो मेरा और मेरी छूट का क्या होगा.... दोनों तेरी दीवानी बन गयी है..... तेरे बिना दोनों तड़प के मर....

हुस्ना इस से आगे कुछ कह hi नहीं पाती सुलतान उनके होंठों को अपने मुँह ले के के उसे चूसने के बाद कहता है....

सुलतान : आज कह दिया मगर दोबारा मत कहना.... आज से बल्कि अभी से आप मेरी हो... और मैं कभी अपनों को नहीं चोरता... हमेशा उन्हें अपने पास संभाल के रखता हूँ.... आज से आप का जब दिल चाहे आप मुझसे और मेरे लुंड से जी भर के प्यार कर सकती हैं.... चाहे कुछ भी हो जाए सुलतान अब अपनी चची जान को कभी नहीं छोड़ेगा.... ये वादा है मेरा आप से....

सुलतान की बात सुन के चची बेहद खुश हो जाती है वो आगे बढ़ के उसके होंठों को चूमने के बाद कास के उसे अपने सीने से लगा लेती है....

सुलतान : हम को अब चलना चाहिए... 3 घंटे से ज़्यादा हो चुके हैं.... बगल वाले रूम में ऐना और मीणा इंतज़ार कर रही हैं...

अपनी बेटियों का नाम सुन के शर्म के मारे हुस्ना के गोर गुलाबी गाल लाल हो जाते हैं....

हुस्ना : म... म.... मैं कैसे उनके सामने जा पाउंगी.... नहीं सुलतान... मैं उनके सामने नहीं जा सकती....

सुलतान : वो दोनों आपकी बेटियां हैं उनसे कैसी शर्म.... और वैसे भी बेटियों जब बड़ी हो जाती हैं तो वो माँ की दोस्त बन जाती हैं....

हुस्ना कुछ कहने hi वाली होती है की तभी दरवाज़ा खुलता है और ऐना और मीणा रूम में आ के कहती हैं....

दोनों : सही कहा सुलतान तुमने.... हम माँ की दोस्त हैं और दोस्तों से कैसी शर्म....

ये कह के दोनों आगे बढ़ के कास के हुस्ना के सीने से लिपट जाती हैं....

ऐना : माँ हम दोनों आप को बता नहीं सकती की आप को ठीक देख के हम को कितनी ख़ुशी हो रही है.... शुक्र है ऊपर वाले का जो आप ठीक हो गयी....

सुलतान : जी इनके ठीक होने में ऊपर वाले के साथ साथ मेरे भी कुछ हाथ है....

सुलतान की बात सुन के मीणा जो कहती है उसे सुन के हुस्ना शर्म से पानी पानी हो जाती है... साथ hi उसकी छूट मस्ती में कॉमर्स की कुछ बूँदें टपका देती हैं....

मीणा : जी नहीं माँ के ठीक होने में तुम्हारा हाथ नहीं बल्कि तुम्हारा लू... मेरा मतलब है कुछ और hi शामिल है....

ऐना : हाय काश मैं भी माँ की तरह बीमार होती.... तो आज....

अभी ऐना इतना hi कह पायी थी की तभी हुस्ना उसके सर पे चपत लगा के कहती है....

हुस्ना : बहुत बोलने लगी है तू आज कल.... चल अब घर चल....

मीणा अपनी माँ को चरते हुए कहती है.....

मीणा : माँ ऐना ने कुछ गलत कहा क्या....?

मीणा की बात सुन के हुस्ना दोनों को आँखें दिखते हुए कहती है....

हुस्ना : तुम दोनों न बहुत बेशर्म हो गयी हो.... घर चलो आज मैं दोनों को अच्छे से ठीक करती हूँ....

दोनों एक साथ : काश आप हम को वैसे hi ठीक कर पाती जैसे सुलतान ने आपको ठीक किया है....

ये कह के दोनों हस्ती हुई बहार की तरफ डूअड़ जाती हैं....

हुस्ना बस उन्हें देखती hi रह जाती है.... इधर हुस्ना का चेहरा देख के सुलतान की हंसी छूट जाती है....

सुलतान को यूँ हस्ते देख हुस्ना चिढ़ते हुए कहती है....

हुस्ना : तू क्या यहाँ खड़े खड़े दांत दिखा के हंस रहा है चल घर चल....

सब कार में बैठ के घर की तरफ चल देते हैं.... कुछ देर में कार को घर के गेट के पास पार्क कर के सुलतान धीमी आवाज़ में तीनो से कहता है....

सुलतान : आज जो भी कुछ हुआ वो प्लीज किसी को मत बताइयेगा... बेकार में बात का बतंगड़ बन जाएगा..... साथ hi सब परेशान भी हो जाएंगे.... अभी आप लोग जा के आराम कीजिये मैं बाद में आप तीनो से मिलता हूँ....

सुलतान को हाँ कह के तीनो घर के अंडर चल देते हैं.... और सुलतान घर के अपने हिस्से की तरफ....

सुलतान घर में आ के सीधा रूम में जाता है और बीएड पे लेट ते hi गहरी नींद में चला जाता है....

काफी देर बाद जब उसकी नींद टूटी है तब वो अपनी आगोश में किसी को कास के लिपटे हुए पाटा है.... आज पहली बार किसी की आगोश में सुलतान को बेहद सुकून मिल रहा है.... ऐसा सुकून जो उसने आज से पहले कभी महसूस नहीं किया.... सुलतान बिना उसकी तरफ देखे उसे और ज़ोर से अपने सीने से लगा लेता है.... उसके जिस्म की खुशबु सुलतान को मदहोश करने लगती है... सुलतान की इस हरकत पे वो बुरी तरह से चौंक जाती है... वो खुद के उस से अलग करने की कोशिश करती है मगर सुलतान है की उसे चोर्ने को तैयार hi नहीं.... मदहोशी में वो अपनी आँखें खोले बिना उसके चेहरे के करीब अपने चेहरे को ले जाता है और प्यार से उसके होंठों को पाने मुँह में ले के उसे चूसने लगता है.... सुलतान की इस हरकत से वो बुरी तरह से चौंक जाती है... उसे समझ नहीं आ रहा है की वो क्या करे.... किश में सुलतान का साथ दे या फिर उस से दूर हो जाए.... अभी वो ये सोच hi रही होती है की तभी सुलतान के हाथ उसके जिस्म पे रेंगने लगते हैं.... धीरे धीरे वो उसकी पीठ से होते हुए उसके उभार की तरफ जाने लगते हैं.... सुलतान मदहोशी में उसके होंठों का अमृत पीते हुए उसके उभार को अपने हाथों में ले के उन्हें दबाने hi वाला होता है की तभी दरवाज़े की खुलने की आवाज़ सुन के उसकी तंत्र टूट टी है....

सुलतान मुद के दरवाज़े की तरफ देखता है.... वहां मुस्कान को हैरत से अपनी तरफ देखते हुए पा के उसे अजीब सा लगता है....

सुलतान : तुझे क्या हुआ तू इतनी हैरान परेशान क्यों है....? तू ने कोई भूत देख लिया क्या....?

ये कह के सुलतान उठने hi वाला होता है की तभी अपने आगोश में किसी को महसूस करके वो उसकी तरफ देखता है.... हैरत से सुलतान की आँखें बड़ी हो जाती है... वो हड़बड़ा के फ़ौरन उस से दूर हो के कहता है....


सुलतान : तुम...!!!!
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....



अपडेट 171.....

सुलतान मुद के दरवाज़े की तरफ देखता है.... वहां मुस्कान को हैरत से अपनी तरफ देखते हुए पा के उसे अजीब सा लगता है....

सुलतान : तुझे क्या हुआ तू इतनी हैरान परेशान क्यों है....? तू ने कोई भूत देख लिया क्या....?

ये कह के सुलतान उठने hi वाला होता है की तभी अपने आगोश में किसी को महसूस करके वो उसकी तरफ देखता है.... हैरत से सुलतान की आँखें बड़ी हो जाती है... वो हड़बड़ा के फ़ौरन उस से दूर हो के कहता है....

सुलतान : तुम...!!!!

अब आगे....

इस से पहली की वो कुछ कहती.....

मुस्कान हैरत से : सुलतान तुम यहाँ सोना के साथ उसके बीएड पे....!!!!

मुस्कान की बात सुन के सुलतान शॉक हो जाता है....

सुलतान : मैं तो अपने रूम में सो रहा था.....

मुस्कान : न hi तुम अपने रूम में हो और न hi अपने बीएड पे... ये सोना का रूम है और तुम उसके साथ बीएड पे उसके ऊपर लेते हुए उसे किश कर रहे थे और....

सुलतान शॉकेड : क्याआआआ....!!!!

मुस्कान : जी हाँ अब बताओ की ये सब क्या है....?

सुलतान : वो... मैं... वो.... पता नहीं कैसे... वो मैं....

सुलतान को समझ नहीं आ रहा है की वो मुस्कान की बात का क्या जवाब दे... उसे पता hi नहीं ये सब कैसे और क्यों हुआ....? वो तो अपने रूम सो रहा था अचानक से यहाँ कैसे आ गया और तो और सोना के साथ उसके बीएड पे उसे किश.... ये बात दिमाग में आते hi सुलतान हिल सा जाता है.... उसे समझ नहीं आता की वो इस सिचुएशन को कैसे डील करे.... वो बिना कुछ कहे फ़ौरन वहां से निकल ले ता है...

मुस्कान उसे आवाज़ देती रह जाती है... मगर सुलतान उसे अनसुना कर के घर से बहार चला जाता है.... बहार आ के जो भी कुछ हुआ उस के बारे सोच के उसके चेहरे पे एक रहस्मयी मुस्कान आ जाती है और वो मुस्कुराते हुए शानू के घर की तरफ चल देता है... उनकी आज की चुदाई करने के लिए....

ज़रूर कुछ तो ऐसा है जो सुलतान के दिमाग में चल रहा है मगर क्या....?????? वो उसके अलावा और कोई नहीं जानता.....

सुलतान के जाने के बाद मुस्कान सोना के करीब जा के हैरत से उसे देखते हुए उस से पूछती है....

मुस्कान : वाओ यार तू और सुलतान साथ में बीएड पे किश..... मतलब तुम दोनों के बीच पैच उप हो गया... और तुम दोनों ने वो सब भी कर लिया..... यार तू तो बड़ी चालु निकली.... मुझे बताया भी नहीं और....

सोना शर्माते हुए : नहीं यार ऐसी कोई बात नहीं है.... वो सब कैसे हुआ कब हुआ मुझे नहीं पता.... सच में... मैं तो खुद हैरान हूँ की ये जो भी कुछ हुआ वो सब हुआ कैसे....?

मुस्कान : तू मुझे पूरी बात बता की आखिर हुआ क्या था....?

सोना : मैं सुलतान को याद करते करते कब नींद की आगोश में चली गयी मुझे पता hi नहीं चला.... अचानक से मैंने अपने बेहद करीब किसी को महसूस किया.... कोई मुझे अपनी आगोश में ले के मेरे होंठों को चूस रहा है.... गुस्से से मेरा दिमाग फटने लगा.... मैं उसे मारने hi वाली थी की तभी उसके चेहरे को देख के मेरे होश उड़द गए.... मुझे हैरत के साथ साथ बेहद शर्म भी आने लगी.... साथ hi बेहद ख़ुशी भी... जो सपना मैं बचपन से देखती आ रही थी वो आज जा के पूरा हुआ है.... रोज़ सपने में सुलतान मेरे करीब आ के मुझे अपनी बाहों में ले के मुझे किश करता था.... आज जब मेरी जान सुलतान ने मुझे अपनी बाहों में ले के किश किया तो मैं बता नहीं सकती की मुझे कैसा महसूस हुआ.... ऐसा लगा जैसे की मेरी रूह मेरे जिस्म में लौट आयी हो.... उस किश में एक मदहोशी hi.... प्यार था... बेइन्तेहाँ प्यार.... जो मेरी रूह को भी सुकून पहुंचा गया.... ये मेरी लाइफ की पहली किश थी... वो भी अपनी जान सुलतान के साथ.... आज मैं इतनी खुश हूँ की अगर अब मुझे मौत भी आ जाए तो कोई गम नहीं.... मगर मैं जीना चाहती हूँ... अपनी जान के साथ उम्र भर प्यार का हर लम्हा जीना चाहती हूँ....

मुस्कान : मतलब तेरे और सुलतान के बीच सब ठीक हो गया....? उसने तेरी गलती को माफ़ कर के तुझे अपना लिया....

सोना : शायद हाँ.... (फिर कुछ देर रुक के आँखों में आंसू लिए) शायद नहीं....

मुस्कान : शायद नहीं बल्कि यकीनन सुलतान ने तुझे माफ़ करके तुझे अपना लिया है.... सोच अगर ऐसा न होता तो क्या वो यहाँ तेरे रूम में आ के तुझे अपनी बाहों में ले के यूँ किश करता.... उसका तुझे यूँ प्यार करना इस बात का सबूत है की उसने तुझे दिल से माफ़ कर दिया है और साथ hi तुझे अपना भी लिया है....

सोना : काश जो तू कह रही है वो सच हो....

शानू की जैम के चुदाई करने के बाद सुलतान दें की तरफ चल देता.... इस बात से अनजान की उस दिन की तरह आज भी दो आँखें चुप के उन दोनों को चुदाई करते हुए देख रही थी.... वो आँखें किसकी हैं ये आगे पता चलेगा....

इधर दें में शीना की टीम के साथ साथ बाकी भी फिघ्टर्स की ट्रेनिंग चल रही है.... कुल मिला के 100 फिघ्टर्स हैं... ट्रेनिंग इतनी सख्त है की सब की हालत खराब बानी हुई है.... आज की ट्रेनिंग शुरू hi हुई थी की तभी सुलतान वहां आ जाता है.... सुलतान को देखते hi ज़रा कास के उसके सीने से लिपट जाती है और उसके होंठों को अपने मुँह में ले के उसे चूसने लगती है.... ज़रा को यूँ सुलतान को किश करते देख वहां मौजूद सभी लड़कियां जल उठती हैं.... साथ hi वहां मौजूद लड़के भी दोनों को किश करते हुए देख के सुलतान से जलने लगते हैं.... अब ज़रा है hi इतनी हसीं खूबसूरत और सेक्सी की कोई करे भी तो क्या करे.... सुलतान बड़ी मुश्किल से ज़रा को खुद से अलग कर के कहता है....

सुलतान : क्या कर रही है पागल चोर मुझे.... न वक़्त देखती है और न hi जगह कहीं भी शुरू हो जाती है....

ज़रा : हाय जान क्या करूँ तू है hi इतना सेक्सी की तुझे देखते hi तुझे कास के अपने सीने से लगा के प्यार करने को दिल मचल उठता है....

सुलतान : वो सब बाद में यहाँ नहीं देख तूने क्या किया....? सब ट्रेनिंग चोर के हम को देख रहे हैं....

सुलतान की बात सुन के जैसे hi ज़रा उनकी तरफ देखती है सब दर के मारे फ़ौरन ट्रेनिंग में लग जाते हैं....

सुलतान : ये क्या यार.... तेरे बस एक बार देखने से सब फ़ौरन ट्रेनिंग में लग गए.... तू ने कहीं कुछ किया तो नहीं....

ज़रा : न... मैंने कुछ नहीं किया वो तो बस ऐसे hi....

मैक्स : क्या ऐसे hi....? सुलतान तुझे नहीं पता की इसने कल क्या किया....? कल ट्रेनिंग के वक़्त दो फिघ्टर्स इसे देख के इस की तारीफ कर रहे थे.... बस फिर क्या था इस ने जैम के उनकी धुलाई कर दी... उनकी हालत देख के सब इस से दर रहे हैं....

ज़रा : हाँ तो मैंने कुछ गलत नहीं किया... उनकी हिम्मत कैसे हुई मेरी तारीफ करने की....? मेरी तारीफ करने का हक़ मैंने सिर्फ और सिर्फ अपने सुलतान को दिया है.... उसके आलावा जो भी मेरी तारीफ करेगा वो ज़रूर मुझसे पिटेगा....

ज़रा की बात सुन के सुलतान अपना सर पीट लेता है....

सुलतान : इसका न कुछ नहीं हो सकता...

फिर वो गौर से सब की फाइटिंग स्किल्स को नोटिस करने लगता है.... फिर एक एक कर के किस्मे क्या कमी है कहाँ सुधार की ज़रुरत है वो सब ज़रा और शाइना उर्फ़ स्पेशल अफसर मर. खान को बताने लगता है.... सिर्फ मिया (शाइना की बेहेन) को चोर के....

शाइना : सुलतान तू ने सब के बारे में बता दिया मगर मिया.... तू ने उसके बारे में नहीं बताया....

शाइना की बात सुन के सुलतान शाइना की तरफ देखता है फिर एक कुटिल मुस्कान के साथ वो उठ के मिया की तरफ चल देता है.... जिसे देख शाइना का दिल घबराने लगता है....

शाइना : सुलतान तू मिया के साथ क्या करने वाला है बता मुझे....?

सुलतान पलट के : देखती जा मैं क्या करता हूँ उसके साथ... बड़ा शौक है न उसे गोली चलने का.... अब देख... आज क्या होता है....

सुलतान की बात सुन के शाइना का दिल घबराने लगता है....

शाइना : सुलतान वो मेरी मासूम छोटी बेहेन है....

सुलतान : अब वो सुलतान का शिकार है.... और सुलतान कभी अपने शिकार को नहीं चोरता.... जब तक उसका ऑर्केस्ट्रा न बड़ा दूँ मुझे चैन नहीं आएगा....

इस से पहले की शाइना सुलतान को रोक पाती सुलतान मैक्स को इशारा कर के ग्राउंड में पहुँच जाता है.... वो मिया को इशारे से अपने करीब आने को कहता है....

सब हैरत से सुलतान को देखने लगते हैं.... मिया को भी समझ नहीं आ रहा है की सुलतान मिया को क्यों बुला रहा है....

मिया सुलतान के पास जा के कड़ी हो जाती है.... वो उस से कुछ पूछने hi वाली होती है की तभी मैक्स एक बड़ा सा बैग ट्राली पे लाड के कुछ Trainer's के साथ वहां आ जाता है.... फिर बैग को खोल के उसमे का सामान बहार निकलता है.... सारे 100 100 ग्राम के वेइट्स हैं.... वहां मौजूद किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा है की आखिर ये सब है क्या....?

सुलतान अपनी शर्ट उतार के मैक्स को पकड़ा देता है.... सुलतान की मस्कुलर बॉडी को देख के सब उसमे खो से जाते हैं.... मिया भी एक तक सुलतान के सेक्सी और मज़बूत जिस्म को निहारने लग जाती है.... सुलतान की आवाज़ से उसकी तंत्र टूट टी है....

सुलतान : तुम्हे मुझे 20 हिट करना है.... तेरी हर हिट पे तुझे फायदा होगा और तेरी हर मिस पे तुझे नुक्सान.... हर हिट पे तुझे 100मल एनर्जी ड्रिंक मिलेगा और हर मिस पे तेरे जिस्म पे 100गम वज़न बाँध दिया जाएगा....

सुलतान की बात सुन के सब हैरत से कभी मिया को देखते हैं तो कभी सुलतान को.... किसी की समझ में नहीं आ रहा है की आखिर सुलतान मिया के साथ ऐसा क्यों कर रहा है.....?

दिया : यार ये सुलतान हम सब में से सिर्फ मिया के पीछे hi क्यों पड़ा हुआ है.... हम भी तो हैं इस टीम में.....

चिराग : तू क्या चाहती है की हम भी अपने जिस्म पे वज़न बंधवा लें....

दिया : वो तो तब होगा न जब सुलतान हमारे वार से बचेगा.... हम सब एक से एक बढ़ के फिघ्टर्स हैं.... सुलतान हमारे वार से बच hi नहीं पायेगा...

तेजस : मेरी माँ चुप हो जा.... क्यों बेकार के अपने साथ साथ हम सब की भी बंद बजवाने पे तुली हुई है.... सुलतान पे वार करना तो दूर हम में से कोई उसे छू भी नहीं सकता.... याद नहीं कैसे उसने हमारे सीक्रेट बेस में अकेले हम सब की बंद बजायी थी.....

इधर ये सब बातें hi कर रहे थे की तभी मिया जो कहती है उसे सुन के शाइना अपना सर पीट लेती है....

शाइना : ये मिया भी न.... बेकार में सुलतान को गुस्सा दिला रही है...

मिया सुलतान से : अगर मैं इस सब से इंकार करूँ तो....?

सुलतान : तो फिर तुम्हारी यहाँ कोई ज़रुरत नहीं.... तुम अभी यहाँ से जा सकती हो.... तुम्हे इस टीम में शामिल होना है तो जैसा मैं कहूं वैसा करना होगा..... जिस पल तुमने इंकार किया उसी पल से तुम इस टीम से बहार होगी....

मिया मरती क्या न करती उसे सुलतान की बात मान नई पड़ती है.... वो पोजीशन ले के सुलतान को हिट करने को तैयार हो जाती है.... सब गौर से दोनों को देखने लगते हैं....

मिया आगे बढ़ के सुलतान को एक पंच मारती है... जिसे सुलतान एक तरफ हो के उस से खुद को बचा लेता है.... पहली हिट मिस हो जाती है.... जिसे देख सुलतान के चेहरे पे कुटिल मुस्कान आ जाती है..... सुलतान के इशारे पे ट्रेनर मिया के हाथ पे 100 गम वज़न बांध देता है....

मिया अपना हाथ हिला दुला के उस वज़न को महसूस करते हुए खुद को उस के हिसाब से एडजस्ट करती है फिर आगे बढ़ के सुलतान पे फिर से वार करती है.... इस बार भी उसका वार खाली जाता है.... जिसकी वजह से उसके दूसरे हाथ पे भी 100 गम वज़न बढ़ जाता है.... मिया बार बार कोशिश करती है मगर उसका सुलतान पे किया हुआ हर वार खाली जाता है.... सुलतान पे वार करना तो दूर वो उसे छू भी नहीं पाती.... हाथ और पेअर पे वज़न बढ़ने की वजह से उस से वार करना मुश्किल हो ता जा रहा है.... देखते hi देखते मिया के दोनों हाथ और पैरों पे 2 कग वज़न बांध जाता है.... मिया थक के ज़मीन पे बैठ जाती है.... और हांफने लगती है....

सुलतान : बस इतना hi दम है तुम में..... (फिर पलट के शाइना की तरफ देख के कहता है) मर. खान तुम तो बहुत तारीफ कर रहे थे इसकी की ये बहुत बड़ी फाइटर है.... इसकी तो 20 हिट में hi हवा निकल गयी....

इस से पहले की शाइना कुछ कहती मिया जो कहती है उसे सुन के सुलतान के चेहरे की मुस्कान और गहरी हो जाती है.....

मिया : बातें करना बहुत आसान है जब बात खुद पे आये तब पता चले.... खुद पे वज़न बाँध के लड़ के दिखाओ तब मैं भी मान लुंगी की तुम जो कह रहे हो वो ठीक है और फिर जो तुम कहोगे मैं वो करुँगी.... ये वादा रहा...

सुलतान के इशारे पे उसके जिस्म पे ट्रेनर 50 कग वज़न बाँध देते हैं.... सुलतान ज़रा को अपने करीब आने का इशारा करता है फिर उसे उठा के अपनी पीठ पे लाड के उसे भी अपने जिस्म से बांध लेता है....

फिर आगे बढ़ के सबसे जो कहता है उसे सुन के सब हैरत से बस उसे देखते रह जाते हैं.....

सुलतान ग्राउंड के बीच में जा के सब से कहता है.....

सुलतान : जिसे जो भी हथियार पसंद हो उसे ले के मुझपे वार करो.... चलो आ जाओ सब एक साथ....

सुलतान की बात सुन के सब आगे बढ़ने के बजाये दर के मारे पीछे हटने लगते हैं.... उन्हें वो दिन याद आ जाता है जब सुलतान ने मर. खान की टीम की बंद बजायी थी.....

सुलतान : घबराओ मत मैं किसी पे पलट के वार नहीं करूँगा बस तुम सब के वार को रोकूंगा.... चलो शुरू हो जाओ....

सुलतान की बात सुन के भी किसी की हिम्मत नहीं होती आगे बढ़ने की....

सुलतान मैक्स की तरफ देख के कहता है....

सुलतान : मैक्स अगर इन सब ने अभी मुझपे वार करना शुरू नहीं किया तो इन्हे गोली मार देना....

सुलतान की बात सुन ते hi वहां मौजूद सारे सिक्योरिटी गार्ड्स सब पे गन तान देते हैं.... एक तरफ सुलतान है जिसपे वार करना तो दूर उसका एक वार भी खुद पे झेलना मुमकिन नहीं.... लेकिन अगर उन्होंने सुलतान पे वार नहीं किया तो सिक्योरिटी गार्ड्स उन सब को मौत के घात उतार देंगे.... मरते क्या न करते.... दर के मारे सब हथियार ले के सुलतान पे वार करने के लिए आगे बढ़ते हैं....

सुलतान निहत्था सब के वार को बड़ी आसानी से रोकने लगता है.... जिसे देख मिया के साथ साथ वहां मौजूद सभी को बेहद हैरानी होती है.... एक पल के लिए ये मान भी लिया जाए की एक फाइटर बिना हथियार के सब के साथ लड़ के खुद को उनके वार से बचा सकता है.... मगर यहाँ तो बात hi अलग है.... न सिर्फ सुलतान निहत्था है बल्कि उसकी जिस्म पे लगभग 105 कग (50 कग वेट और 55 कग तक ज़रा का वेट) वेट बाँधा हुआ है.... इतने वेट को अपने जिस्म पे लाड के 100 फिघ्टर्स का निहत्थे मुकाबला करना काफी हैरतअंगेज़ बात है....

कोई भी सुलतान पे वार नहीं कर पाटा सुलतान बड़ी आसानी से सब के वार को रोक रहा है... धीरे धीरे सब थकने लगते हैं.... सब की हालत खराब होने लगती है.... थक के सब ज़मीन पे गिर जाते हैं.... तभी अचानक से गोली चलने की आवाज़ सुन के सब की जान सूख जाती है.... सब फ़ौरन सुलतान के आगे अपने हाथ जोड़ लेते हैं.....

चिराग (ये मर. खान की टीम में हर तरह की फाइट में एक्सपर्ट है) सुलतान के आगे हाथ जोड़ के कहता है....

चिराग : बस सुलतान.... अब और नहीं.... हम में इतनी भी ताक़त नहीं की हम हिल भी सकें.... प्लीज हम को बक्श दो.... मिया की गलती की सजा हम को मत दो प्लीज.....

सब चिराग की हाँ में हाँ मिलते हैं....

सुलतान मिया की तरफ देखता है जो अभी भी हैरत से उसकी तरफ देख रही है.... उसे यकीन hi नहीं आ रहा है की अभी जो भी कुछ उसने देखा वो सच है.... वो अभी इस सब से उभर hi नहीं पायी थी की तभी सुलतान उसके करीब जा के उस से कहता है....

सुलतान : अगर इंसान को खुद पे यकीन हो तो वो कुछ भी कर सकता है.... रही बात सुलतान की तो सुलतान बातें बनाने में नहीं बल्कि कर दिखने में यकीन रखता है.... अभी जो भी कुछ तुमने देखा उस से तुम्हे तुम्हारे सवाल का जवाब यकीनन मिल गया होगा.... तो अब दोबारा सुलतान को चैलेंज करने के बजाये... अपनी फाइटिंग प्रैक्टिस पे ध्यान डौगी तो वो तुम्हारे लिए बेहतर होगा....

ये कह के सुलतान वहां से जाने लगता है.... कुछ दूर जा के वो पलट के मिया से कहता है.....

सुलतान : जितना वज़न इस वक़्त तुम्हारे जिस्म पे बंधा है.... उसके साथ hi तुम्हे कल से प्रैक्टिस करनी है.... और हर 5 दिन के बाद तुम्हारा टेस्ट होगा.... जो ये फैसला करेगा की तुम्हारे जिस्म पे वज़न बढ़ेगा या फिर काम होगा....

ये कह के सुलतान अपने जिस्म का वज़न और ज़रा को उतार के ज़रा और मैक्स के साथ वहां से चल देता है....

चिरज : दिया आज तेरे और मिया के चक्कर में हमारी बंद बजने वाली थी.... वो तो शुक्र हुआ ऊपर वाले का की सुलतान ने हम को बस इतने में hi चोर दिया.... कहीं गलती से भी उसका एक पंच भी पद जाता न तो हम यहाँ ये मज़ेदार खाना खाने के बजाये हॉस्पिटल के बीएड पे अपना इलाज करवाते नज़र आते....

दिया : हाँ यार बात तो तेरी ठीक है.... मगर मेरी ये समझ नहीं आ रहा है की सुलतान मिया के साथ वो सब क्यों कर रहा है.....?

मिया : गुस्से और नाराज़गी की वजह से.... उस दिन जो उसके ऊपर गोली चली थी उसकी वजह से वो मुझसे नाराज़ है.... बस इसी वजह से वो मेरी बंद बजने पे तुला हुआ है....

अन्य : यार प्लीज आगे से कोई भी कभी सुलतान को कुछ मत कह देना.... कहीं ऐसा न हो की वो मिया की तरह हम से भी नाराज़ हो जाए.... मिया का तो सिर्फ वो बंद बजा रहा है मगर मुझे लगता है की हमारा वो पूरा ऑर्केस्ट्रा बजायेगा....

सुलतान दोनों को घर जाने को कह के ज़ोया और उसकी बहनो से मिलने चल देता है....

सुलतान ज़ोया के घर पहुँच के बेल्ल बजता है.... दरवाज़ा खोलते hi बहार खड़े सुलतान को देखते hi ज़ोया चौंक जाती है.... उसे सुलतान के इस वक़्त आने की उम्मीद नहीं थी.... बस फिर क्या था सुलतान पे उसके सवालों की बौछार शुरू हो जाती है.... जिसे सुन के सुलतान अपना सर पीट लेता है....

सुलतान : यार तुम और तुम्हारे ये सवाल.... सच सच बताओ यार इतने सवाल तुम्हारे दिमाग में आते कहाँ से हैं.... तुम्हारे दिमाग में सवाल बनाने की कोई मशीन फिट है क्या....? जो मुझे देखते hi मुझपे बरसाने लगती हो....?

यहाँ ज़ोया को दरवाज़े पे खड़े काफी देर से किसी के साथ बात करते देख नोहा वहां आ जाती है....

नोहा : दी आप यहाँ दरवाज़े पे कड़ी किस से बात कर रही हैं....

फिर जैसे hi उसकी नज़र सुलतान पे पड़ती है वो खुश हो जाती है....

नोहा : सुलतान तुम यहाँ... वाओ व्हाट ा प्लीजेंट सरप्राइज.... मगर तुम यहाँ दरवाज़े पे क्यों खड़े हो अंडर आओ न....

सुलतान : पहले ज़ोया के सवाल तो ख़तम हो जाए.... तभी न अंडर आऊंगा....

नोहा : वो तो ख़तम होने से रहे.... तुम आओ अंडर....

ज़ोया यहाँ भी चुप नहीं रहती... फिर से एक सवाल सुलतान पे दाग देती है....

ज़ोया : मैंने कहाँ तुम्हे रोका था.... वो तो तुम खुद hi बहार खड़े मुझसे बात कर रहे थे.... वैसे तुमने बताया नहीं की यूँ अचानक से कैसे आ गए....?

ज़ोया ने अभी ये कहा hi था की तभी सुलतान अंडर आने के बजाये पलट के वापिस जाने लगता है.... जिसे देख नोहा फ़ौरन आगे बढ़ के सुलतान को रोक के कहती है....

नोहा : सुलतान घर में आने के बजाये बहार कहाँ जा रहे हो...? और दी आप भी न...

ज़ोया : मैंने कहाँ कुछ कहा.... मैं तो बस ये पूछ रही थी की ये अचानक से यहाँ कैसे....?

सुलतान : बस कर मेरी माँ... मुझे बक्श दे.... अब और सवाल नहीं... मैं यहाँ तेरे सवाल सुन ने नहीं आया था बल्कि ये देखने आया था की तुम लोगों को यहाँ कोई तकलीफ तो नहीं हो रही.... मगर लगता है मेरा यहाँ आना hi तुम्हे पसंद नहीं आया.... बस इसलिए मैं जा रहा था....

ज़ोया : मैं कब तुमसे जाने को कहा मैंने तो बस इतना पुछा थे की तुम अचानक से यहाँ कैसे....? अब जब आ hi गए हो तो अंडर भी आ जाओ... वैसे भी ये घर भी तो तुम्हारा hi है....

सुलतान अंडर आते हुए जो कहता है.... उसे सुन के ज़ोया के साथ साथ नोहा भी चौंक जाती है.....

सुलतान : ये घर कल तक मेरा था मगर जब से तुम तीनो बहने यहाँ रहने आयी तब से ये घर तुम तीनो का हो गया....

ज़ोया : मगर....

सुलतान : बस कर मेरी माँ.... अब और कोई अगर मगर नहीं.... ये घर तुम तीनो बहनो का है तो है....

नोहा खुश होते हुए : क्या सच में....?

सुलतान : हाँ ये सच है.... (फिर ज़ोया की तरफ देख के) इस से पहले की तुम मुझपे अपने सवालों के तीर चलाओ.... मैं तुम्हे ये पहले hi बता दूँ की मैं तुम तीनो की मदत कर के या तुम्हे अपना ये घर दे के तुम पे कोई एहसान नहीं कर रहा हूँ..... न hi ये मैं इस लिए कर रहा हूँ की इस सब के बदले में मुझे तुम तीनो बहनो से कुछ चाहिए... बल्कि इस लिए कर रहा हूँ की मुझे मेरा ये दिल कह रहा है की तुम तीनो की ज़िन्दगी बेहतर बनाने के लिए जो भी बन पड़े मैं वो करूँ.... मेरा दिल ये क्यों छह रहा है मैं नहीं जानता.... मगर इतना ज़रूर जानता हूँ की कुछ तो ऐसा है जिसकी वजह से मुझे मेरा दिल करने को कह रहा है.... ज़रूर कोई तो रिश्ता है हमारे बीच... कुछ तो ऐसा है जिस से मैं अनजान हूँ.... वो क्या है मैं नहीं जानता... मगर मुझे ये यकीन है की एक न एक दिन मैं वो बात वो रिश्ता जान लूंगा.... उस दिन मैं तुम्हे खुद आ के बताऊंगा.... फिलहाल के लिए मुझे गलत समझे बिना मैं जो भी कर रहा हूँ वो प्लीज मुझे करने दो....

ये कह के सुलतान ख़ामोशी से उनके जवाब का इंतज़ार करने लगता है....

सुलतान की पूरी बात सुन ने के बाद दोनों हैरत से उसे देखने लगती हैं... उन्हें समझ नहीं आ रहा है की वो सुलतान की बात का क्या जवाब दे.... उस से क्या कहे.... काफी देर तक सुलतान को देखने और सोचने के बाद ज़ोया कहती है....

ज़ोया : सुलतान जो तुम कह रहे हो.... उसपे यकीन करना मुश्किल है.... क्यों की दुनिया में शायद hi कोई ऐसा हो जो किसी अपने के लिए निस्वार्थ एक रूपया भी खर्च करे और तुम हो की गैर हो के भी हम पे मेहरबानियां किये जा रहे हो.... मगर ये भी उतना hi सच है की अभी तक तुम ने हमारे साथ जो भी किया है वो अच्छा hi किया है.... तो इस वजह से जो तुम कह रहे हो उसे एक पल के लिए मैं मान लेती हूँ.... मगर.... हाँ मगर जब भी कभी मुझे इस बात का ज़रा सा भी एहसास हुआ की तुम हमारे साथ कुछ गलत करना छह रहे हो तो उस दिन hi नहीं बल्कि उसी पल से हम तुमसे इतने दूर हो जाएंगे की तुम फिर कभी हमारे पास तो क्या हमारी परछाई को भी नहीं ढूंढ पाओगे... और हाँ तुम्हे प्लीज कहने की ज़रुरत नहीं है.... हाँ अभी के लिए मुझे तुमपे यकीन है... मगर वो भी उतना hi जितना पहली बार किसी अनजान से मिलने पे होता है.... आगे चल के ये मज़बूत होता है या फिर कमज़ोर हो के टूट जाता है... ये तो आने वाला वक़्त hi बताये....

ज़ोया की बात सुन के सुलतान बस थैंक्स कह के उठ के वहां से जाने लगता है.... उसे यूँ जाते देख नोहा उसे रोक के कहती है....

नोहा : क्या हुआ यूँ अचानक से उठ के जाने क्यों लगे....?

सुलतान : जिस काम से मैं यहाँ आया था वो हो गया.... तो बस अब मैं जा रहा हूँ....

नोहा : नहीं ऐसे नहीं.... आये हो तो खाना खा के जाओ...

सुलतान : खाना तो मैं ज़रूर खाऊंगा मगर आज नहीं फिर कभी....

ज़ोया : कहीं तुम मेरी बात का बुरा मान के तो नहीं जा रहे....?

सुलतान : जो बात तुमने महसूस की और कही वो किसी भी तरह से गलत नहीं है तो उसका क्या बुरा मान न....

ज़ोया : अगर ऐसा है तो फिर खाना खा के जाओ.... कुछ नहीं तो काम से काम हम को इस नए घर के मिलने की ख़ुशी में hi हमारे साथ खाना खा के हमारी ख़ुशी में शरीक हो जाओ.... हम को भी अच्छा लगेगा...

सुलतान : मुझे नहीं पता था की तुम इतनी कंजूस निकलोगी.... इतना बड़ा घर मिला है बड़ी जॉब मिली है पार्टी देने के बजाये तुम तो मुझे घर का खाना खिला के टालने की कोशिश कर रही हो.... ऐसा नहीं चलेगा हाँ बोल देता हूँ... मुझे पार्टी चाहिए वो भी एक बड़े से होटल में समझी....

नोहा : सही कहा सुलतान तुमने... पार्टी तो बनती है...

सुलतान : हाँ देख न नोहा तेरी दी है की मुझे बहार पार्टी देने के बजाये घर का खाना खिला के तर्कणा चाहती है... मैं भी बता दूँ की इस से काम नहीं चलेगा....

ज़ोया : हाँ समझ गयी.... बाबा... पार्टी भी दे दूंगी... फिलहाल के लिए आज खाना हमारे साथ खाओ....

सुलतान : आज नहीं फिर कभी साथ में लंच क्या डिनर भी करेंगे.... वो भी तब जब तुम्हे मुझपे पूरा यकीन आ जाएगा.... उस दिन... फिलहाल के लिए मुझे जाना होगा....

ये कह के सुलतान पलट के बहार की तरफ चल देता है.... दरवाज़े के पास पहुँच के वो मुद के कहता है....

सुलतान : मुझे पार्टी चाहिए भूलना मत.... कब और कहाँ ये अपने हिसाब से तये करके मुझे कॉल कर देना.... मैं ख़ुशी से तुम्हारी ख़ुशी में शरीक होने आ जाऊँगा....

ये कह के सुलतान वहां से चल देता है....

ज़ोया सुलतान को जाते हुए देखती रह जाती है.... वो ये तये नहीं कर पा रही है की वाकई में सुलतान वैसा है जैसा वो खुद को दिखा रहा है.... या फिर वो बस अच्छे बन ने का नाटक कर रहा है....

यहाँ ज़ोया के दिल और दिमाग में सवालों का भूचाल सा आया हुआ है... वहीँ नोहा अपनी बेहेन सोहा को कॉल करके घर मिलने की बात उसे बता के अपनी ख़ुशी उसके साथ बाटने लगती है....

सुलतान कार ले के घर की तरफ जा hi रहा होता है की तभी एक लड़की भागते हुए उसके करीब आ टी है इस से पहले की वो सुलतान की कार से टकराती सुलतान फ़ौरन ब्रेक मार देता है.... उस लड़की के सर से खून बह रहा है.... उसके जिस्म पे भी चोट के काफी निशाँ हैं.... उसकी हालत बहुत खराब बानी हुई है.... सुलतान फ़ौरन कार से बहार उतर के उसे संभालता है और अपना रुमाल कास के उस लड़की के सर पे बाँध देता है ताकि खून बहना बंद हो जाए.....

सुलतान : तुम कौन हो और ये सब कैसे हुआ....???

सुलतान के सवाल के जवाब में वो बदहवासी में रट हुए सामने की तरफ इशारा कर के कहती है....

मेरे दादू को बचाओ... वो लोग उन्हें मार देंगे..... प्लीज मेरे दादू को बचा लो....

उसकी बात सुन के सुलतान फ़ौरन उसे कार में अपनी बगल में बैठता है और तेज़ी से कार को उस तरफ दौड़ा देता है जहाँ उसने इशारा किया.... कुछ दूर जाने के बाद सामने का नज़ारा देख के वो लड़की दाहाआडूउऊउउउ.... कह के ज़ोर से चीख उठती है.... सामने कुछ गुंडे 3 बॉडीगार्ड और एक बूढ़े आदमी को मार रहे हैं.... ये देख वो लड़की रोटव हुए फ़ौरन सुलतान के आगे अपने हाथ जोड़ के कहती है...

प्लीज मेरे दादू को बचा लो... वो लोग उन्हें जान से मार देंगे....

उसकी आँखों से बहते आंसुओं को देख के जाने क्यों सुलतान का दिल तड़प जाता है... वो उसकी आँखों से बहते आंसू को पॉच के उसकी आँखों के देखते हुए पूरे यकीन से कहता है....

सुलतान : जब तक मैं ज़िंदा हूँ... कोई तुम सब का कुछ नहीं बिगाड़ सकता....

सुलतान की बात सुन के वो लड़की सुलतान से कुछ कहने hi वाली होती है की तभी सुलतान कार का दरवाज़ा खोल के स्पीड से उनके करीब जाता है और जैम के उन गुंडों की धुलाई करने लग जाता है.... ये देख उनका लीडर...

साले तू है कौन और हमारे मामले में दखल देने की तेरी हिम्मत कैसे हुई....?

अभी उसने इतना hi कहा था की तभी एक ज़ोरदार मुक्का उसके मुँह पे पड़ता है और वो उड़ता हुआ दूर जा गिरता है.... उसके सामने के पूरे दांत टूट के उसके पेट में चले जाते हैं साथ hi मुँह से बेतहाशा खून बहने लगता है....

वो बड़ी मुश्किल से खुद को संभाल के उठ के बेहद गुस्से में सुलतान से कहता है....

साले तू जानता नहीं की तू ने किसपे हाथ उठाया है.... गजराज ठाकुर नाम है मेरा.... तू ने मुझपे हाथ उठा के अपनी मौत को दावत दी है.... अभी वो इतना hi कह पाया था की तभी सुलतान उसके एक गुंडे को उठा के उसके ऊपर फ़ेंक के मारता है....

सुलतान : साले.... तू ठाकुर है तो मैं सुलतान हूँ... सुना तूने सुलतान हूँ मैं.... जिसकी मार खा के सामने वाला उठ नहीं पाटा.... अपनी जान की खैरियत चाहता है तो फ़ौरन अपने चमचों को ले के फूट ले यहाँ से इस से पहले की मैं मार मार के तेरी जान निकाल दूँ....

सुलतान की दहाड़ सुन के ठाकुर के साथ साथ वहां मौजूद सभी दर जाते हैं.... ठाकुर खिसियाते हुए वहां से निकल लेता....

ठाकुर : तुझे तो मैं बाद में देख लूंगा....

सुलतान फ़ौरन उस लड़की के दादू के करीब जा के उन्हें देखता है.... उनकी हालत बहुत खराब बानी हुई है.... वो फ़ौरन उन्हें कार में बैठा के कार को तेज़ी से हॉस्पिटल की तरफ दौड़ा देता है.... उस शख्स के बोडीगार्ड्स को भी काफी चोट आयी हुई है सुलतान के सिक्योरिटी गार्ड्स फ़ौरन वहां आ जाते हैं और उन बोडीगार्ड्स को साथ ले के सुलतान के पीछे पीछे हॉस्पिटल की तरफ चल देते हैं.....

हॉस्पिटल में डॉ उनका इलाज करने से मन कर देते हैं....

डॉ : ये पुलिस केस है जब तक पुलिस नहीं आ जाती हम इनका इलाज नहीं कर सकते....

सुलतान : वो सब मैं देख लूंगा.... आप प्लीज इनका इलाज शुरू कीजिये.... देखिये इनकी हालत हर गुज़रते पल के साथ बिगड़ती जा रही है.... इस से पहले की कुछ गलत हो जाए प्लीज इनका इलाज कीजिये....

डॉ : नहीं कहा न.... पहले पुलिस आएगी तब जा के इनका इलाज शुरू होगा... अगर तुम्हे इतनी hi जल्दी है तो इन्हे किसी और हॉस्पिटल में ले जाओ....

सुलतान के लाख समझने पे भी जब डॉ नहीं मानता तो सुलतान गुस्से में आ के डॉ का गिरेबान पकड़ के खींच के उसके कान के नीचे एक मारता है.... डॉ को दिन में तारों के साथ साथ पूरा ब्रह्माण्ड नज़र आ जाता है....

सुलतान : कान खोल के सुन ले डॉ अगर जल्द से जल्द तू ने इन का इलाज शुरू नहीं किया और गलती से भी इन्हे कुछ हुआ तो फिर यहाँ न तू रहेगा और न hi तेरा ये हॉस्पिटल... पहले मैं तेरे हलक में हाथ दाल के तेरी जान निकालूंगा और फिर तेरे इस हॉस्पिटल को आग लगा दूंगा..... तो अगर तू मरना नहीं चाहता है तो जल्दी से इनका इलाज शुरू कर....

सुलतान की दहाड़ सुन के डॉ के साथ साथ वहां मौजूद सभी की पहात के हाथ में आ जाती है.... वो फ़ौरन उनका इलाज शुरू कर देता है.... कुछ देर में एक नर्स सुलतान के करीब आ के डरते डरते कहती है.....

नर्स : जी वो... वो... वो... इन पेपर्स पे आपके सिग्न चाहिए और इलाज के लिए 5 लोगों के 5 लाख डिपाजिट करवा दीजिये....

नर्स की बात सुन के सुलतान उसे अपना डेबिट कार्ड निकाल के देता है....

सुलतान : ये लो मेरा कार्ड इसमें से 20 लाख रस डेबिट कर लो.... और हाँ ये बात याद रखना और साथ hi अपने उस डॉ से भी कह देना की इनकी स्पेशल ट्रीटमेंट होनी चाहिए....

नर्स सुलतान के कार्ड से 20 लाख रस डेबिट कर के उसे कार्ड लौटा के वो पेपर्स मांगती है जो उसने सुलतान को सिग्न करने को दिया था....

नर्स : जी आप ने तो फॉर्म फइलल hi नहीं किया.... पेशेंट का नाम पता और बाकी सब....

सुलतान : मैं इनको जानता नहीं तो इनके बारे में कैसे लिख सकता हूँ.... जब ये होश में आ जाए तो इनसे इनके बारे में पूछ लेना....

सुलतान की बात सुन के नर्स हैरत से उसे देख के कहती है....

नर्स : आप इन्हे जानते नहीं तब आप ने इनके लिए हॉस्पिटल को सर पे उठा लिया.... अगर ये आपके अपने होते तो आप जाने क्या करते....!!!!

सुलतान : यहाँ बात अपने या पराये की नहीं बल्कि इंसानियत की है.... ये तकलीफ में थे तो मैंने इनकी मदत कर दी.... वो अलग बात है की ये मुझे अपने से लगते हैं....

अभी ये लोग बात कर hi रहे होते हैं की तभी डॉ आ के कहता है....

डॉ : उनका इलाज हो चूका है अब वो सब खतरे से बहार हैं.... मगर उन्हें काम से काम 3 दिन तक हॉस्पिटल में रहना होगा.... आप इलाज का पैसा हॉस्पिटल में जमा करवा दीजिये....

नर्स : वो तो इन्होने पहले hi करवा दिया है.... 5 लाख की जगह 20 लाख रस....

डॉ हैरत से : 20 लाख... मगर इलाज में तो 5 से 6 लाख तक hi लगेंगे...

सुलतान : वो उनके स्पेशल ट्रीटमेंट के लिए है.... उन्हें यहाँ किसी भी तरह की कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए..... और हाँ मैंने दिग पुलिस को बता दिया है.... वो आके इनका बयान ले लेंगे....

अभी सुलतान ने इतना कहा hi था की तभी दिग खुद अपनी टीम ले के वहां आ जाते हैं....

दिग : Hello सुलतान सर.... अब कैसे हैं वो सब....? ये कैसे हुआ....? कहाँ हुआ...?

सुलतान उन्हें पूरी बात बताता है... और खास हिदायत देता है की जब तक ये यहाँ हैं इनकी सिक्योरिटी का पूरा इंतज़ाम होना चाहिए....

दिग : जी सर आपने जैसा कहा है हो जाएगा.... मैं अपने बेस्ट अफसर को इनकी हिफाज़त के लिए यहाँ फ़ौरन तैनात कर देता हूँ....

सुलतान : बाकी आप उनसे पूछ लीजियेगा...

सुलतान और दिग की बात सुन के डॉ को बड़ी हैरानी होती है.... इंस्पेक्टर के बजाये डायरेक्ट दिग पुलिस.... मतलब बाँदा मामूली इंसान नहीं बल्कि कोई बड़ी हस्ती है....

सुलतान : डॉ क्या मैं उनसे मिल सकता हूँ....

डॉ : जी अभी मिलना तो मुश्किल है क्यों की वो बेहोश हैं... उन्हें होश में आने में 2 से 3 घंटे तो लग hi जाएंगे... तब आप उनसे मिल सकते हैं..... जल्द hi हम उन्हें यहाँ के स्पेशल वार्ड में शिफ्ट करवा देंगे.... साथ hi उनका स्पेशल ट्रीटमेंट भी शुरू हो जाएगा.... आप इस के लिए बेफिक्र रहिये....

सुलतान : मैं उनसे मिल नहीं सकता मगर देख तो सकता हूँ न....

डॉ : हाँ हाँ ज़रूर...

सुलतान बहार से उन्हें देखता है उस लड़की पे नज़र पड़ते hi सुलतान के चेहरे पे रहमयी मुस्कान आ जाती है.... वो अपना हाथ उस लड़की की तरफ बढ़ता है.... सुलतान के हाथ से गुलाबी रौशनी निकल उस लड़की के जिस्म में जाने लगती है.... उस लड़की का पूरा जिस्म गुलाबी रौशनी से नाहा जाता है.... उसके जिस्म में काफी बदलाव आने लगते हैं... उसका रंग और भी ज़्यादा गोरा हो जाता है साथ hi उसकी खूबसूरती भी बढ़ जाती है इसके साथ और भी बहुत कुछ होता है जो आगे पता चलेगा.... सुलतान कुछ देर तक उसे यूँ hi देखता है.... जल्द hi फिर मुलाक़ात होगी कह के वो अपने घर की तरफ चल देता है....

घर आ के सुलतान सब के साथ खाना खता है फिर एक एक करके अपनी सभी दीवाणियों को प्यार भरा किश करके रूही के रूम में जा के उसके बीएड पे लेत जाता है.....

सुलतान के बीएड पर लेट ते hi रूही उसके हाथ को तकिया बना के उसके बगल में लेट जाती है और प्यार से सुलतान के चेहरे को देखने लगती है... दोनों के चेहरे एक दूसरे के इतने करीब हैं की उन्हें एक दूसरे की साँसों की गर्माहट अपने चेहरे पे महसूस हो रही है....

रूही : मैं तुम्हारे ऊपर लेत जाऊं....

रूही की बात सुन के सुलतान मुस्कुराते हुए हाँ में अपना सर हिला देता है....

रूही : ऐसे नहीं बल्कि तुम खुद मुझे अपने ऊपर लेता लो....

सुलतान : जो हुकुम मेरी कुटी पाई...

ये कह के सुलतान प्यार से रूही की कमर को पकड़ के उसे अपने जिस्म पे लेता ले ता है....

रूही : चलो अब अपनी आँखें बंद करो....

सुलतान : वो क्यों भला....

रूही : सवाल नहीं.... बस मैं जो कह रही हूँ वो करो....

रूही की बात मानते हुए सुलतान अपनी आँखें बंद कर लेता है....

सुलतान : लो कर ली अब....

फिर इस से पहले की रूही कुछ कहती सुलतान जो कहता है उसे सुन के रूही को हंसी आ जाती है... बड़ी मुश्किल से वो अपनी हंसी दबती है.....

सुलतान : लगता है आज मेरी इज़्ज़त लूटने वाली है.... जान मैंने सही कहा न...

रूही : पहली बार देखा है किसी को इज़्ज़त लूटने की बात को इतना खुश हो के बताते हुए....

सुलतान : यार जब इज़्ज़त लूटने वाली जन्नत की पारी से भी हसीं खूबसूरत और सेक्सी हो न तो खुश होना लाज़मी है...

सुलतान के मुँह से अपनी तारीफ सुन के रूही बेहद खुश हो जाती है....

रूही : ज़्यादा खुश होने की ज़रुरत नहीं है.... अब और कुछ मत कहना वर्ण मुझे तुम्हारा मुँह खुद बंद करना पड़ेगा...

रूही की बात सुन के सुलतान मुस्कुराते हुए कहता है....

सुलतान : वो कैसे....

रूही : पहले अपनी आँखें बंद करो फिर बताती हूँ....

सुलतान : आँखें बंद करूँ वो क्यों भला....

रूही : ऐसे मुझे शर्म आएगी न....

सुलतान : ऐसा क्या करने वाली हो जो तुम्हे इतना शर्म आ रही है....?

रूही : आँखें बंद करो न जान....

रूही ने इतने प्यार से कहा था की सुलतान उसकी बात से इंकार नहीं कर पाटा... वो फ़ौरन अपनी आँखें बंद कर लेता है.... रूही प्यार से अपने मदभरे होंठों में सुलतान के होंठों को ले के उसे चूसने लगती है.... सुलतान भी किश में उसका पूरा साथ देने लगता है.... करीब 10 मिनट्स तक दोनों प्यार से एक दूसरे के होंठों को चूसते रहते हैं.... फिर रूही सुलतान के चेहरे को अपने हाथों में ले के उसकी दोनों आँखों को चूमती है फिर उसकी नाक को

फिर उसके दोनों गाल को फिर वो अपना हाथ सुलतान की आँखों पे रख देती है.... कुछ पल के इंतज़ार के बाद सुलतान को अपने होंठों पे गीलेपन का एहसास होने लगता है.... उसे ऐसा महसूस होता है जैसे की कोई गीली सी बेहद मुलायम सी चीज़ उसके होंठों को गीला कर रही है.... सुलतान देखना चाहता है की वो कौनसी चीज़ है जो उसके होंठों पे घूम घूम के उसे जन्नत का मज़ा दे रही है... जैसे hi रूही को इस बात का एहसास होता है वो फ़ौरन अपना हाथ सुलतान की आँखों पे से हटा लेती है.... रूही की जुबां पे नज़र पड़ते hi सुलतान के जिस्म में मस्ती की एक तेज़ लेहेर सी दौड़ जाती है.... मस्ती में उसकी आँखें बंद हो जाती हैं.... साथ hi उसका मुँह खुल के रूही की जुबां को अंडर आने का रास्ता दे देता है.... रूही को जैसे इसी पल का इंतज़ार था... वो फ़ौरन अपनी जुबां सुलतान के मुँह में दाल देती है... जिसे सुलतान बड़े प्यार से मज़े ले के चूसने लगता है.... साथ hi वो अपने हाथ रूही की कमर पे फिरने लगता है... जो एहसास सुलतान इस लम्हे में महसूस कर रहा है वैसा उसने आज से पहले कभी महसूस नहीं किया.... ये एहसास रूही के लिए भी नया था... दोनों hi इस अनोखे एहसास में डूबे मस्ती के आसमान में उड़ रहे हैं.... काफी देर तक एक दूसरे की जुबां को चूसने के बाद दोनों अलग होते है.... रूही मदहोशी में सुलतान की आँखिन में देखती है फिर कास के ऐसे उसके सीने से लिपट जाती है जैसे की वो अभी उसमे समां जायेगी.... एक बार फिर से दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगते हैं.... इस बार की उसकी किश बेहद वाइल्ड है... दोनों मस्ती में एक दूसरे के होंठों को काट ते हुए चूस रहे हैं.... पूरे रूम में दोनों के किश की आवाज़ गूँज रही है.... जहाँ सुलतान का लुंड मस्ती में खड़ा होक उछाल कूद मचा रहा है वहीँ रूही की छूट भी मस्ती में कॉमर्स की कुछ बूँदें उसकी पंतय में टपका के उसे भिगो रही है.... मस्ती में सुलतान का लुंड पूरी तरह से खड़े हो के रूही की छूट पे ठोकर मार रहा है... जिसे महसूस करते hi रूही कास के सुलतान के लुंड को अपनी जाँघों के बीच छूट के पास कास के दबा रही है....

इस एहसास से सुलतान अच्छी तरह से वाकिफ है.... मगर आज रूही के साथ उसे कुछ अलग hi मज़ा आ रहा है.... उसके जिस्म में एक अलग तरह की मदहोशी छायी हुई है.... वो इस एहसास में पूरी तरह से खोया हुआ है.... अचानक से रूही उसकी बाँहों से निकल के उठ के बैठ जाती है साथ hi वो सुलतान को भी अपने साथ बैठा लेती है.... फिर उसकी आँखों में देखते हुए मदहोशी से वो सुलतान का चेहरा अपने हाथों में ले के उसे होंठों के अपनी गर्दन से सत्ता के उसे आगे बढ़ने का इशारा करती है... उसका इशारा पा के सुलतान उसकी गर्दन और गले को चूमते हुए उसे अपनी जुबां से चाटने लगता है.... रूही मस्ती में सिसकारी लेते हुए सुलतान की शर्ट के बटन को खोलने लगती है.... फिर उसकी शर्ट उतार के उसके नंगे मज़बूत सीने से कास के लिपट जाती है.... फिर उसके सीने पे जंगली बिल्ली की तरह टूट पड़ती है साथ hi उसके सीने को चूमने और काटने लगती है...

पहले वो काट टी है फिर मज़े से उस जगह को अपनी जुबां से चाट के चूस भी लेती है.... नीचे वो बार बार मस्ती में अपनी छूट सुलतान के खड़े लुंड पे दबती तो कभी रगड़ देती.... इस सब में उसे बड़ा मज़ा आ रहा है.... मस्ती में उसकी छूट कॉमर्स बहा के उसकी पंतय के साथ साथ उसकी सलवार को भी पूरी तरह से भिगो रही है.... उसकी छूट का गीलापन सुलतान को अपने लुंड पर महसूस हो रहा है.... कुछ देर तक इसी तरह करने के बाद रूही सुलतान के पीछे की तरफ धकेल के बीएड पे लेता देती है.... और एक बार फिर से वो सुलतान के जिस्म पे लेत कर उसके पूरे सीने को चूमने लगती है...

रूही की इस हरकत सुलतान को बहुत मज़ा आ रहा है.... अब उस से बर्दाश्त करना मुश्किल होता जा रहा है.... वो रूही के चेहरे को अपनी हाथों से पकड़ के उसे अपने चेहरे के बेहद करीब लाता है फिर उसकी आँखों में देखते हुए कास के उसके होंठों को चूस लेता है.... फिर उसके पलट के बीएड पे लेता देता है और खुद उसके ऊपर आ जाता है.... सुलतान की इस हरकत से रूही को ये एहसास हो जाता है की अब कमान सुलतान ने खुद थाम ली है.... जिसे देख के रूही के चेहरे पे प्यारी और सेक्सी मुस्कान फैल जाती है.... जिसे देख सुलतान कुछ ज़्यादा hi उत्तेजित हो जाता है... वो ठीक वैसे hi रूही की गर्दन और गले को चूमने और चाटने लगता है जैसे कुछ देर पहले रूही ने किया था... साथ hi वो रूही के दोनों उभारों को अपने हाथों में ले उसे दबाने लगता है.... मस्ती में रूही के मुँह से सिसकारी निकल रही है... वो सुलतान के बालों में अपने हाथ फिरा रही है.... सुलतान उसकी कमीज को उसके कंधे की तरफ से हटा के उसके कंधे चूमने और काटने लगता है.... सुलतान के ऐसा करते hi रूही के मुँह से मस्ती भरी सिसकार निकल जाती है....

रूही : आआआअह्ह्ह्ह... सुलताआआं... ममममममम.... आअह्ह्ह्हह... ऊऊह्ह्ह्ह.... ममममम.... बड़ा मज़ा आ रहा है... हाय ऐसा मज़ा मैं पहले कभी महसूस नहीं किया.... ये मज़ा पिछली बार से भी कई ज़्यादा है.... जान मेरी कमीज उतायआर दो नाआआआ....

बड़ी मुश्किल से वो अपनी मस्ती को काबू कर के इतना कह पायी थी.... उसकी बात सुन ते hi सुलतान उसे बीएड पे बैठा के उसकी कमीज उतार देता है.... अब रूही सिर्फ ब्रा और सलवार में उसके सामने बैठी है.... उसकी कमीज के उतारते hi वो कास के सुलतान के सीने से लिपट जाती है.... मस्ती में उसके मुँह से सिसकारी निकल जाती है.... दोनों के हैट एक दूसरे के जिस्म पे घूमने लगते हैं.... सुलतान के हाथ बार बार रूही की ब्रा की पत्तियों पे लग रहे हैं.... वो फ़ौरन उन्हें खोल के उसकी पीठ से दूर कर देता है.... रूही की ब्रा अब उसके कंधे के सहारे उसके जिस्म से जुडी हुई है... सुलतान अब उसकी नंगी पीठ पे अपने हाथ घूमने लगता है... रूही भी मस्ती में अपनी छूट बार बार सुलतान के खड़े लुंड पे रगड़ रही है....

रूही धीरे से सुलतान के कान के करीब अपने मुँह को ले जाती है फिर उसकी कान की लौ को अपने मुँह में ले के उसे चूसने के बाद उसके कान में धीरे से कहती है....

रूही : जान जल्दी से कुछ करो न... अब मुझसे और बर्दाश्त नहीं हो रहा....

ये कह के वो सुलतान के जिस्म से अलग हो के जल्दी से अपने जिस्म के बाचे हुए कपडे यानी कंधे पे अटकी ब्रा... कमर पे बंधी सलवार और साथ hi अपनी पंतय भी उतार के ज़मीन पे फेक देती है.... फिर गौर से सुलतान को अपने कपडे उतारते हुए देखने लगती है.... साथ hi ऐसे मुस्कुरा रही है जैसे की वो अभी सुलतान को कच्चा hi खा जायेगी.... जैसे hi सुलतान अपनी पंत उतारने के बाद अपनी अंडरवियर उतारता है वैसे रूही उसके ऊपर टूट पड़ती है.... साथ hi सुलतान के होंठों को अपने मुँह में ले के उसे वाइल्ड तरीके से चूसने लगती है.... वो थोड़ा ऊपर हो के अपना उभर सुलतान के मुँह पर दबा रही है... उसका इशारा पाते hi सुलतान उसके उभर को मज़े ले चूसने लगता है साथ hi उसके निप्पल को काट भी रहा है.... रूही मस्ती में सुलतान के सर को अपने उभर पे दबाते हुए ाँहें भर रही है.... सुलतान का उसके निप्पल को काटना रूही को एक अलग hi मज़ा दे रहा है....

रूही : मममममम.... ऊऊऊह्ह्ह्ह... सुलतान हाँ और ज़ोर से काटो... चबा जाओ.... बड़ा मज़ा आ रहा है.... ममममम... हाँ इसे hi और कास के दबाते हुए इन्हे चूसो....

सुलतान उसके दोनों उभारों को चूस और काट के गुलाबी से पूरा लाल बना देता है.... जगह जगह पे सुलतान के दांतों के निशाँ (लव बिट्स) पद गए थे.... अपने उभारों पे लव बिट्स को देख के रूही बेहद खुश हो जाती है.... वो उसे अपने उभर पे बने लव बिट्स को सुलतान को दिखा के कहती है....

रूही : जान जब शुरुवात में इतना मज़ा आ रहा है आगे जाने क्या होगा.... आज मुझे वो हर मज़ा लेना है जिस से आज तक मैं महरूम रही हूँ.... अब तक तुमने मुझे मज़ा दिया है आज मैं खुद के साथ साथ तुम्हे भी एक अलग hi मज़ा दूंगी.....

सुलतान : न मज़ा... वो क्या है भला....?

रूही : उसे बता के नहीं लिया जा सकता बल्कि महसूस किया जा सकता है.... रुको अभी तुम्हे महसूस करवाती हूँ....

रूही की बात सुन के सुलतान उस मज़ा का इंतज़ार करने लगता है जो रूही खुद के साथ साथ उसे भी महसूस करवाने वाली थी.... सुलतान को ज़्यादा इंतज़ार न करवाते हुए रूही उसके सीने को चूमते हुए नीचे की तरफ जाने लगती है... सुलतान के निप्पल को मुँह में ले वो चूसती है फिर अपनी दाँतों के बीच में ले के उसे काटने के साथ साथ खींचने भी लगती है.... रूही की इस हरकत से सुलतान का पूरा जिस्म सिहर जाता है उसके मुँह से दर्द भरी आह के साथ साथ मस्ती भरी सिसकार भी निकल जाती है.... वो अभी इस से उभर भी नहीं पाया था की रूही उसपे दूसरा हुम्ला बोल देती है....

अचानक से वो सुलतान के लुंड को अपना हाथ में पकड़ के उसे कास के मड़ोड़ने लगती है.... मस्ती में सुलतान पागल सा होने लगता है.... कुछ देर तक उसके लुंड को अपने हाथ से मसलते हुए रूही उसके लुंड की तरफ हैरत से देखती है... उसे सुलतान का लुंड पहले के मुताबिक आज कुछ ज़्यादा hi बड़ा नज़र आ रहा है....

रूही : जान ये इतना बड़ा कैसे हो गया.... बड़ा ये पहले से hi है मगर आग ये पहले के मुताबिक कुछ ज़्यादा hi बड़ा और मोटा नज़र आ रहा है....

सुलतान : ये तो मेरी जान के हाथों का जादू है जिसने इसे इतना बड़ा कर दिया है....

रूही : उस दिन तो इसने मेरी जान hi निकाल दी थी.... 2 दिन तक मैं और मेरी छूट हिल भी नहीं पा रही थी....

सुलतान : जान इसने तुम्हे मज़ा भी तो उतना hi दिया था.... बोलो हाँ की ना....

रूही : हाँ वो तो है.... सजा के साथ साथ मज़ा भी बहुत आया था.... मगर आज इसका ये विकराल रूप देख के लग रहा है की आज तो मेरी छूट पूरी तरह से पहात जायेगी.... (सुलतान के लुंड को घूर के देखती है फिर उसे अपने हाथ से मरोड़ के कहती है) आज चाहे ये मेरी छूट का बजा hi क्यों न बजा दे मगर आज मैं इस का पूरा मज़ा लुंगी.... बहुत तड़पाया है इसने मुझे आज मैं अपनी छूट की तड़प और प्यास दोनों मिटा के रहूंगी....

रूही की बात सुन के सुलतान मुस्कुराते हुए कहता है....

सुलतान : तो रोका किसने है.... कर लो इसकी सवारी ले लो मज़ा....

सुलतान की बात सुनते hi रूही उसके होंठों को कास के चूसने के बाद चूमते हुए नीचे की तरफ जाने लगती है... साथ hi अपने हाथ में उसका लुंड पकड़ के ऊपर नीचे करते हुए उसे मुठियाने लगती है.... अचानक से सुलतान को अपने लुंड पे कुछ गीले गीला सा महसूस होता है... जिस से उसके मुँह से मस्ती भरी सिसकारी निकल जाती है....

सुलतान : आआआह्ह्ह्ह.... ममममममम...

यह सुन ते hi रूही एक दम से रुक जाती है और सुलतान का लुंड अपने मुँह से निकाल के कहती....

रूही : जान डिस्टर्ब मत करो... देख नहीं रहे मैं छोटे सुलतान को मन रही हूँ की आज वो मुझे सजा नहीं बल्कि सिर्फ मज़ा दे....

रूही की बात सुन के सुलतान हैरत से उसकी तरफ देखता है जैसे की वो पूछना छह रहा हो की आखिर वो छह क्या रही है... जो वो कर रही है उसमे सुलतान के मुँह से मस्ती भरी सिसकारी न निकले ये मुमकिन नहीं....

अभी वो उसे कुछ कहने hi वाला होता है की तभी रूही अपनी ऊँगली उसके होंठों पे रख के उसे चुप करा देती है... फिर एक शरारती मुस्कान के साथ वो एक बार फिर से उसके लुंड के सुपडे को अपनी जुबां से चाटने के बाद उसे अपने मुँह में ले के चूसने लगती है.... जहाँ तक वो उसके मुँह में जा रहा था वहां तक वो उसे मज़े से चूस रही है.... रूही का सुलतान के लुंड को यूँ चूसना उसे एक अलग hi मज़ा दे रहा है.... वो बिना पंख के hi मस्ती के आसमान में उदा जा रहा है.... काफी देर तक रूही उसके लुंड को चूसती रहती है.... फिर उसके लुंड को अपने मुँह से निकाल के मदहोशी में कहती है....

रूही : अब तुम्हारी बारी है....

रूही की बात सुनते hi सुलतान उसे बीएड पे लेता देता है और उसकी खूबसूरत टांगों को फैलाते हुए उसकी गुलाबी हसीं सी छूट को प्यार से चूम लेता है... फिर अपनी जुबां निकाल के उसे चाटने लगता है... मस्ती में रूही के मुँह से सिसकारी निकलने लगती है.... वो सुलतान के सर को पकड़ के कास के अपनी छूट पे दबाते हुए मज़ा लेने लगती hai....Dheere धीरे उसकी मस्ती चतम सीमा पार कर जाती है और वो एक तेज़ सिसकारी के साथ सुलतान के मुँह में झाड़ जाती है.... सुलतान उसकी छूट से निकले अमृत को चाट जाता है... फिर कुछ देर बाद वो अपना लुंड रूही की छूट में घुसाने hi वाला होता है की तभी....

रूही : जान थोड़ा आहिस्ते से करना प्लीज....

सुलतान : जान फ़िक्र मत करो आज मैं तुम्हे इतना प्यार दूंगा की तुम किसी भी तरह की तकलीफ नहीं होगी....

सुलतान की बात सुन के रूही उसकी होंठों को चूम के कहती है....

रूही : जान अब बस दाल दो.... मगर हाँ थोड़ा आराम से डालना वर्ण मेरी चीख निकल जायेगी...

सुलतान : क्यों न ऐसा करें की आज तुम खुद अपने हिसाब से करो इस से तुम्हे तकलीफ भी नहीं होगी और मज़ा भी आएगा....

रूही : हाँ एहि ठीक रहेगा... रुको मैं ऊपर आती हूँ.... (फिर शरारती मुस्कान के साथ कहती है) और हाँ खबरदार जो निचे से झटका मारा तो....

सुलतान भी मुस्कुरा के हाँ का इशारा करते हुए नीचे लेट जाता है... रूही उसके ऊपर आ जाती है एक बार फिर से उसके लुंड को चूस के अच्छे से गीला करके उसके सुपडे को अपनी छूट के छेद पे लगा के सांस रोक के धीरे धीरे लुकड़ पर बैठने लगती है.... अभी उसकी छूट में आधा लुंड भी नहीं जा पाया था की उसे दर्द का एहसास होने लगा जो उसके चेहरे से साफ़ पता चल रहा है.... उसे आगे बढ़ने में काफी परेशानी हो रही है इसलिए जितना लुंड उसकी छूट के अंडर गया है उतने से hi वह ऊपर नीचे होने लगी.... हर झटके के साथ वह थोड़ा ज़्यादा लुंड अंडर ले रही है..... कुछ hi देर में उसने सुलतान का पूरा लुंड अपनी छूट के अंडर उतार लिया और ऊपर निचे होने लगी साथ hi उसने सुलतान के हाथ पकड़कर अपने उभारों ले उन्हें दबाने का इशारा किया... रूही का िसहरा पाते hi सुलतान उसके उभारों को दबाने लगा साथ hi उसके निप्पल को भी अपनी उँगलियों में ले के मोरोद देता....

सुलतान की इस हरकत से रूही के जिस्म में मस्ती की तेज़ लेहेर दौर जाती... साथ hi उसे और भी ज़्यादा मज़ा आने लगा... मस्ती में वो अपनी गांड को ऊपर नीचे करते हुए सुलतान के लुंड को अपनी छूट के अंडर बहार करने लगी.... एक बार फिर से उसका जिस्म ऐंठने लगा और वो मस्ती मस्ती में सिसकारी लेते हुए फिर से झड़ने लगी.... झड़ने के बाद वो निढाल होक सुलतान के सीने पे लुढ़क गयी....

सुलतान ने प्यार से उसके जिस्म को अपनी बाँहों में कास लिया और पलट के उसके ऊपर आ के कमान अपने हाथ में ले ते हुए उसकी चुदाई करने लगा....

रूही भी मस्ती में अपनी मदमस्त गांड उठा के नीचे से धक्का लगते हुए चुदाई में सुलतान का साथ देने लगती है.... रूही की इस हरकत पे सुलतान अपनी रफ़्तार तेज़ कर देता है... और जैम के उसकी छूट में अपना मूसल जैसा लुंड पेलने लगता है.... रूही अपनी गर्दन उठा के सुलतान के होंठों को अपने मुँह में ले के चूसने लगती है... सुलतान को शायद इसी मौके का इंतज़ार था वो फ़ौरन एक करारा शॉट मारता है जिस से उसका पूरा लुंड जड़ तक रूही की छूट में समां जाता है.... रूही की चीख निकल जाती है मगर उसके मुँह सुलतान के मुँह में होने की वजह से उसकी चीख डाब के रह जाती है....

सुलतान उसके उभारों को दबाते धीरे धीरे उसे छोड़ने लगता है.... कुछ hi देर में रूही की छूट पानी छोड़ने लगती है... छूट में गीला पैन होने की वजह से लुंड आसानी से उसकी छूट में जाने लगता है.... धीरे धीरे सुलतान अपनी स्पीड बढ़ा देता है....

रूही मस्ती में जाने क्या क्या बड़बड़ाये जा रही है... वो सुलतान को और तेज़ तेज़ धक्के मारने को कहती है... सुलतान भी अब पूरे जोश में उसकी चुदाई करने लगता है.... पूरे रूम में उसकी सिसकारी और चुदाई की पहच पहच की आवाज़ें गूंजने लगती हैं....

रूबी : सुलतान और तेज़ करो और तेज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ मैं अब झड़ने के करीब हूँ....

कुछ hi धक्कों में वो अपनी मंज़िल के करीब पहुंच जाती है.... रुकना मत जोर से करो tezzz.....or tezzzz....main अब करीब hi हूँ.... रूही का जिस्म पूरी तरह से हवा में उठा जाता है और एक तेज़ मदभरी सिसकारी के साथ वो झड़ने लगती है.... झड़ने के बाद वो तेज़ तेज़ साँसें ले ते हुए खुद को काबू करने लगती है...

सुलतान अभी भी उसकी छूट में लुंड पेलने में लगा हुआ है.... जिसे देख रूही मदहोशी भरी आँखों से उस से पूछती है...

रूही : तुम्हारा हुआ नहीं अभी तक....

सुलतान : नहीं जान... मगर जल्द hi होने वाला है.... आज पता नहीं क्या हुआ है 1 घंटे से ऊपर हो गया है मगर ये है की झड़ने का नाम hi नहीं ले रहा है.... लगता है की मेरा लुंड तुम्हारी छूट से बहार hi नहीं आना चाहता है.... शायद इसी लिए....

ये कह के सुलतान तेज़ तेज़ उसकी चुदाई करने लगता है.... रूही की छूट एक बार फिर से मस्ती में गीली होने लगती है.... वो भी चुदाई में उसका साथ देने लगती है.....

कुछ hi देर में दोनों चरम सीमा पे पहुँच जाते हैं और एक तेज़ सिसकारी के साथ झड़ने लगते हैं.....

सुलतान के वार्य की पिचकारी रूही की छूट की गहराई में जाने लगती है.... वार्य की 10 से 15 पिचकारी रूही की छूट में मारने के बाद सुलतान उसके जिस्म पे लुढ़क जाता है....

दोनों अपनी साँसों को काबू करते है फिर एक दूसरे के जिस्म से लिपट के सो जाते हैं...



इधर हॉस्पिटल में इलाज के करीब 3 घंटे के बाद उस लड़की को होश आ जाता है.... वो दादू कह के चीख उठती है साथ hi पूरे रूम में उन्हें ढूंढने लगती है.... उस लड़की की चीख सुन के फ़ौरन डॉ नर्स के साथ साथ पुलिस वाले जो उसकी सिक्योरिटी के लिए रखे गए थे रूम में आ जाते हैं....
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....



अपडेट 172.....

एक बेहद hi आलिशान बंगलो के बहार एक कार आ के रूकती है.... दरवाज़ा खुलता है और एक बेहद hi हसीं और खूबसूरत लड़की कार से उतर के बेहद hi गुस्से में बंगलो के अंडर दाखिल होती है.... अंडर जाते hi वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगती है....

दी.... दी.... दी....

उसकी तेज़ आवाज़ सुन के सब दौड़ के हॉल में आते हैं.... लड़की की माँ....

माँ : क्या हुआ जानू....? इस तरह से क्यों चिल्ला रही है....

जानू : माँ दी कहाँ है....? उन्होंने मुझसे वादा किया था की वो आज मेरे साथ शॉपिंग करेंगी.... मैं पिछले 3 घंटे से मॉल में उनका इंतज़ार करती रही न तो दी आयी न hi उनका फ़ोन.... मेरे कॉल करने पे भी वो कॉल नहीं उठा रही हैं.... आप hi बताइये अपनी प्यारी छोटी बेहेन के साथ ऐसा भी कोई करता है क्या.....?

माँ : बीटा वो किसी काम में फस गयी होगी.... वर्ण वो ऐसा कभी नहीं करती.... तू तो जानती है की तेरी दी तुझसे कितना प्यार करती है.....

जानू : प्यार करती है नहीं माँ बल्कि प्यार करती थी.... एक वक़्त था जब दी भी मुझसे बेहद प्यार करती थी.... मगर अब नहीं अब दी मुझसे नहीं बल्कि अपने काम से ज़्यादा प्यार करती है.... अब उनके लिए काम मुझसे बढ़ के हो गया है....

माँ : ऐसा नहीं है मेरा बच्चा.... तू गलत सोच रही है.... साथ hi अपनी दी को गलत समझ रही है....

जानू : नहीं माँ मैं बिलकुल ठीक समझ रही हूँ.... दी अब मुझसे बिलकुल भी प्यार नहीं करती.... उनको मेरी परवाह नहीं है तो अब मैं भी उनकी परवाह नहीं करुँगी.... अब मैं दी से कभी बात नहीं करुँगी.... कभी भी नहीं....

ये कह के वो गुस्से में अपने रूम की तरफ जाने लगती है.... उसकी माँ उसे रोकने की बेहद कोशिश करती है मगर वो सुन hi नहीं रही.... वो गुस्से में अपने रूम का दरवाज़ा खोल के अंडर जा hi रही होती है की तभी किसी की चीख सुन के उसके पेअर वहीँ रुक जाते हैं....

मननननननत....

ये चीख किसी और की नहीं बल्कि उसकी बड़ी बेहेन जन्नत की है.... जो अपनी जुड़वाँ बेहेन मन्नत का नाम ले के चीख रही है....

सब फ़ौरन दर्द के उसके पास आते हैं...

माँ (नादिरा) : क्या हुआ जन्नत तू इतनी दरी हुई क्यों है....? और ये तू इस तरह से रो क्यों रही है....? तू मन्नत का नाम ले के क्यों चीखी....? बता मुझे आखिर बात क्या है....?

जन्नत रट हुए : म.... माँ.... वो Man...nat की कार का एक्सीडेंट हो गया है.... इस वक़्त वो बेहद तकलीफ में है बेहद तकलीफ में....

जन्नत की बात सुन के सब शॉक हो जाते हैं....

जानू शॉकेड : ये आप क्या कह रही हैं दी.... मन्नत दी की कार का एक्सीडेंट....!!!!

जन्नत : हाँ मैंने अभी अभी देखा की मन्नत दादा जी के साथ घर आ रही थी की तभी रस्ते में उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया.... एक्सीडेंट गजराज ठाकुर ने अपने गुंडों के ज़रिये करवाया है.... इस से भी जब उसका दिल न भरा तो उसने अपने गुंडों के साथ मिल के दादा जी और मन्नत को जान से मारने की कोशिश की....

सब : Kyaaaaaaaaaa....?

जन्नत : एक शख्स ने फ़रिश्ते की तरह से बीच में आ के उन गुंडों से दादाजी और मन्नत की जान बचा के उन दोनों को हॉस्पिटल में एडमिट करवा दिया है.... इस वक़्त दादाजी और मन्नत हॉस्पिटल में एडमिट हैं.... वहां उनका इलाज चल रहा है...

जहाँ जन्नत की बात सुन के सब शॉक हो जाते हैं वहीँ घर की दो नौकरानी आपस में बात कर रही हैं....

नौकरानी 2 : ये तो ऐसे सब बता रही है जैसे की एक्सीडेंट के वक़्त ये वहीँ थी....

नौकरानी 1 : जन्नत बेटी भले hi वहां नहीं थी मगर उन्होंने अभी जो भी कुछ कहा उसका एक एक लफ्ज़ सच है....

नौकरानी 2 : क्यों वहां कोई कैमरा लगा था जिसके ज़रिये वहां जो हो रहा था ये उसका लाइव टेलीकास्ट देख रही थी....?

नौकरानी 1 : ऐसा hi कुछ समझ लो....

नौकरानी 2 : मतलब....???

नौकरानी 1 : मतलब ये की जन्नत बेटी अपनी आँखों से नहीं बल्कि मन्नत बेटी की आँखों के ज़रिये सब देख रही थी....

नौकरानी 2 : जन्नत मनात की आँखों से देख रही थी मतलब....? ये कैसे मुमकिन है की एक बेहेन की आँखों के सामने जो हो रहा है उसे दूसरी बेहेन देख सके... कोई जादू है क्या....?

नौकरानी 1 : जादू hi समझ लो.... बात ऐसी है की जन्नत और मन्नत दोनों जुड़वाँ बहने हैं.... ये दोनों नाम की hi नहीं बल्कि वाकई में ये एक दूसरे से जुडी हुई है.... एक के साथ अगर कुछ होता है तो वो दूसरे को फ़ौरन पता चल जाता है.... चाहे वो कुछ भी हो.... ख़ुशी हो या गम... या फिर कोई एहसास.... इन दोनों का बस जिस्म अलग सा नज़र आता है मगर असल में ये दोनों एक hi जिस्म के दो हिस्से हैं.... एक को जो एहसास होता है ठीक वैसा hi एहसास दूसरी को भी होता है... एक जो महसूस करती है दूसरी भी वैसा hi महसूस करती है.... एक को जो नज़र आता है दूसरी को भी वो hi नज़र आता है.... बस इतना समझ लो की दोनों के अंडर एक जान बस्ती है....

नौकरानी 2 : अच्छा अगर ऐसी बात है तो क्या ये दोनों एक से hi प्यार और शादी भी एक से hi करेंगी... क्यों की जैसा आपने अभी बताया उस हिसाब से तो दोनों को प्यार भी एक hi शख्स से होगा और जब प्यार एक से हुआ है तो शादी भी एक hi शख्स से होगी.... मतलब दोनों बहने एक दूसरे की सौतन बन के रहेंगी.... ये कह के वो हंस देती है....

नौकरानी 1 : ये बात तू ने मेरे सामने तो कर दी..... सो कर दी... उन दोनों के खिलाफ कभी भी गलती से भी कुछ जानू बिटिया के सामने न कहना वर्ण वो उसी वक़्त तेरी जान ले लेगी.... जानू बिटिया के लिए वो दोनों सब से बढ़ के है.... जिस तरह वो दोनों कभी भी जानू बिटिया के खिलाफ कभी कुछ नहीं सुन सकती ठीक उसी तरह जानू बिटिया भी कभी भी उन दोनों के खिलाफ कुछ नहीं सुन सकती.... तीनो 3 जिस्म एक जान हैं.... एक बार गलती से स्कूल की टीचर ने मन्नत बेटी को होमवर्क न करके लाने की वजह से दांत दिया था... जब ये बात जानू बिटिया तो पता चली थी तब उन्होंने उस टीचर की ऐसे जैम के धुलाई की की अगले 1 महीने तक वो टीचर स्कूल में आने के लायक न रही.... पूरा एक महीना उसे हॉस्पिटल में अपना इलाज करवाते हुए गुज़ारना पता.... तू भी अगर हॉस्पिटल नहीं जाना चाहती तो गलती से भी कुछ भी गलत बाय उन तीन के खिलाफ अपनी जुबां से न निकाल न.... अगर तू ने गलती से भी गलती की तो फिर तो तेरे ऊपर वाला hi मालिक है....

नौकरानी 2 : न बाबा न मुझे अपनी हड्डियां तुडवाके हॉस्पिटल जाने का कोई शॉक नहीं है.... मेरी तौबा मेरे बाप की तौबा.... मैं सपने में भी ऐसा करने के बारे में नहीं सोचूंगी...

जन्नत की बात सुन के जानू और उसकी माँ और बाकी घर वाले भी शॉक हो जाते हैं....

जानू : ये आप क्या कह रही हो जन्नत दी...?

जन्नत : मैंने वो भी कहा वो सच है....

ज दादी : जानू देख क्या रही है.... जल्दी से गाडी निकाल हम अभी के अभी हॉस्पिटल जाएगने.... नादिरा (जन्नत की माँ) तू और जन्नत जल्दी से मेरे साथ हॉस्पिटल चल.... और राणीअ ( मझली बहु) जल्दी से अज़ीज़ नफीस और अमिन को कॉल कर के हॉस्पिटल आने को बोल....

नई चरक्टेर्स :

अज़ीज़ : मन्नत के डैड

नादिरा : मन्नत की माँ

मन्नत : ये और जन्नत जुड़वाँ हैं...

जन्नत : ये मन्नत से 5 मिनट्स छोटी है

जानू : ये दोनों से 1 साल छोटी है....

नफीस : मझला बीटा

राणीअ : मझली बहु

निदा बड़ी बेटी

नदिअ छोटी बेटी

अमिन : छोटा बीटा

नौशाद : छोटी बहु

सब फ़ौरन कार में बैठते हैं और जानू कार को हॉस्पिटल की तरफ दौड़ा देती है....

इधर हॉस्पिटल में इलाज के करीब 3 घंटे के बाद उस लड़की को होश आ जाता है.... वो दादू कह के चीख उठती है साथ hi पूरे रूम में उन्हें ढूंढने लगती है.... उस लड़की की चीख सुन के फ़ौरन डॉ नर्स के साथ साथ पुलिस वाले जो उसकी सिक्योरिटी के लिए रखे गए थे रूम में आ जाते हैं....

मन्नत और दादा जी को ठीक देखने के बाद जब सब राहत की सांस लेते हैं तब....

अज़ीज़ : नफीस जा के देखो की हॉस्पिटल का बिल कितना हुआ है और वो जितना कहें उतना भर देना....

नफीस : जी भाई....

ये कह के नफीस जा hi रहे होते हैं की डॉ उन्हें रोक के जो कहते हैं उसे सुन के सब शॉक हो जाते हैं....

डॉ : जी उसकी कोई ज़रुरत नहीं है.... हॉस्पिटल की पूरा बिल पहले hi भरा जा चूका है....

डॉ की बात सुन के सब शॉक हो जाते हैं....

अज़ीज़ : बिल भरा जा चूका है.... मैं कुछ समझा नहीं.... बिल कितना हुआ और किसने बारे....?

डॉ : क्या नाम था उनका.... ममम.....

नर्स : सुलतान....

डॉ : जी हाँ सुलतान.... सुलतान सर ने बिल भरा.... बिल तो 5 लाख का हुआ था मगर उन्होंने पूरे 20 लाख जमा किये ताकि इन्हे कोई ताक़िफ़ न हो.... और तो और सुलतान सर ने ये भी कहा की इन दोनों का अच्छे से अच्छा ख़याल रखा जाए.... इस लिए उनके कहने पे हम ने इन दोनों पेशेंट्स को यहाँ के सब से स्पेशल वार्ड में एडमिट किया है.... उनके कहने पे दिग पुलिस खुद यहाँ आ ये थे और पुलिस को यहाँ दोनों पेशेंट्स की हिफाज़त के लिए चोर गए.... इतना hi नहीं इस पूरे फ्लोर में जो ये हाई टेक सिक्योरिटी गार्ड्स नज़र आ रहे हैं वो भी सुलतान सर के hi हैं.... यहाँ बिना इजाज़त के कोई नहीं आ सकता....

डॉ की बात सुन के सब शॉक हो जाते हैं....

अज़ीज़ : कौन है ये सुलतान....? और उसने इतना सब क्यों किया....?

अब शॉक होने की बारी डॉ की थी...

डॉ : क्या कहा आप ने आप सुलतान सर को नहीं जानते....?

अज़ीज़ : जी नहीं.... मैं किसी सुलतान को नहीं जानता... बल्कि आज पहली बार ये नाम सुन रहा हूँ....

डॉ : हैरत है.... एक अनजान हो के भी सुलतान सर ने वो किया जो कोई अपना भी न करे.... यहाँ आने के बाद उन्होंने पूरे हॉस्पिटल को सर पे उठा लिया था.... ये मार पीट का केस था... तो पहले तो मैंने मन कर दिया.... मगर वो न माने वो बार बार मुझे इन का इलाज करने को कहने लगे.... आखिर तक जब मैं नहीं माना तो वो गुस्से से पागल हो गए.... उन्होंने मुझे जान से मारने तक की धमकी दे दी.... यहाँ तक की गुस्से में उन्होंने इस हॉस्पिटल तक को उड़ने की बात तक कह दी.... उनका गुस्सा देख के दर्द के मारे मेरी हालत खराब हो गयी.... और मैं दोनों का इलाज करने को राज़ी हो गया.... पुलिस इंस्पेक्टर को इत्तिला करने के बजाये उन्होंने खुद दिग ऑफ़ पुलिस को यहाँ बुलवा लिया ताकि इन दोनों को आगे चल के कोई परेशानी न हो.... यहाँ तक की दोनों के लिए स्पेशल सिक्योरिटी तक का इंतज़ाम भी कर दिया... इतना hi नहीं सिक्योरिटी और पुलिस की स्पेशल टीम से ये तक कह दिया की अगर कोई खतरा नज़र आये तो फ़ौरन बिना सोचे समझे गोली मार देना... मगर गलती से भी दोनों को कुछ नहीं होने देना.... सुलतान ने एक गैर हो के जो किया वो तो आज के ज़माने में कोई अपना भी न करे.... वो किसी फ़रिश्ते की तरह यहाँ आये और इन दोनों का इलाज करवा के इनकी सिक्योरिटी के लिए टॉप सिक्योरिटी गार्ड्स और पुलिस के स्पेशल अफसर की टीम यहाँ खड़ा कर दिया....

सब हैरत से बस डॉ की बात सुने जा रहे हैं....

अज़ीज़ : क्या मैं सुलतान से मिल सकता हूँ.....

डॉ : वो तो चले गए.....

नफीस : चले गए....!!!! कहाँ चले गए...?

डॉ : पता नहीं.... जाने से पहले उन्होंने एक बार आप के पिताजी को देखा फिर उस लड़की (मन्नत) को देख के मुस्कुराते हुए कहा.... "जब तक सुलतान जिन्दा है मन्नत को कुछ नहीं हो सकता" फिर हम को इन दोनों का ख़याल रखने को कह के वो यहाँ से चले गए....

नफीस : आखिर है कौन ये सुलतान.... वो अचानक से आया.... उसने इतना सब किया.... और बिना हम से मिले hi यहाँ से चला गया.... वो भी बिना किसी मतलब के.... हैरत है.... आज तक मैंने ऐसा इंसान नहीं देखा जो बिना किसी मतलब के किसी गैर के लिए इतना सब करे....

स्डडी : फरिश्ता.... वो कोई आम इंसान नहीं बल्कि एक नेक दिल फरिश्ता है.... उसने वो hi किया जो फ़रिश्ते अक्सर करते हैं.... चुप चाप आ ते हैं... और मदत कर के चुप चाप चले जाते हैं.... वैसा hi उस फ़रिश्ते ने किया.... जिसका नाम है सुलतान....

जानू : अब तो इस फ़रिश्ते से मिलना hi पड़ेगा.... उसने मेरी जान से प्यारी दी और दादू की जान जो बचायी है.... मैं भी तो देखूं की आखिर कौन है वो.... कैसा दीखता है वो नेक दिल फरिश्ता जिसका नाम है "सुलतान"....

हॉस्पिटल से निकल के सुलतान अपनी कंपनी में जाता है.... वो बेहद hi धीरे से रूही के केबिन का दरवाज़ा खोल के अंडर देखता है.... रूही सामने चेयर पे बैठी फाइल्स में बिजी है.... सुलतान धीरे से उसके पास जा के बैठ जाता है और बड़े hi प्यार से इसे निहारने लगता है....

ठीक तभी दरवाज़ा खुलता है और ज़रा अंडर आती है.... सुलतान को वहां से के उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता वो दौर के सुलतान के पास जाती है और उछाल के उसके जिस्म से लिपट जाती है इस से पहले की सुलतान कुछ सोच समझ पाटा ज़रा सुलतान के होठों को अपने मुँह में ले के बेहद वाइल्ड तरीके से उसे चूसने लगती है.... सुलतान उसे अपनी गॉड में लिए किश में उसका साथ देने लगता है.... इस वक़्त रूम में और भी 2 लोग मौजूद हैं जो इन दोनों को देख रहे हैं.... ये दोनों और कोई नहीं बल्कि रूही और ज़ोया है.... ज़ोया ज़रा के पीछे पीछे केबिन में आयी है.... जहाँ रूही प्यार से दोनों को देख रही है वहीँ ज़ोया को पहले तो बेहद हैरानी सी होती है फिर वो बेहद गुस्से में उन्हें देखने लगती है....

सुलतान और ज़रा एक दूसरे को किश करने में इतना खोये हुए हैं.... उन्हें होश hi नहीं की इस वक़्त इस केबिन में वो अकेले नहीं हैं बल्कि 2 लोग और भी हैं जिनमे से एक उन्हें बेहद प्यार से देख रही है तो दूसरी बेहद गुस्से में.... करीब 10 मिनट्स तक एक दूसरे के होंठों का रास चूसने के बाद जब वो एक दूसरे से अलग होते हैं.... तब उनकी नज़र सामने कड़ी रूही और ज़ोया पे पड़ती है.... इस से पहले की कोई कुछ कहता रूही आगे बढ़ के सुलतान के होंठों को अपने मुँह में ले के उसे बड़ी शिद्दत के साथ चूसने लगती है.... ये देख ज़ोया को बहुत hi बड़ा झटका लगता है.... गुस्से से उसका दिमाग फटने लगता है.... वो सुलतान को क्या समझती थी और वो क्या निकला.....

सुलतान को किश करने के बाद जब रूही उस से अलग होती है.... तब ज़ोया को गुस्से में देख के उसे बड़ी हैरानी सी होती है....

रूही : क्या हुआ ज़ोया तुम इतनी गुस्से में क्यों हो....?

ज़ोया : जब किसी धोकेबाज़ के चेहरे पे से शराफत का नकाब उतर के उसका घिनोना चेहरा सब के सामने आता है तो उसे देख ने वाले को उसपे गुस्सा नहीं तो क्या प्यार आएगा....

रूही : धोकेबाज़.... कौन है धोकेबाज़....? किसने दिया तुम्हे धोका....? तुम क्या कह रही हो....? कुछ समझ नहीं आया.... जो भी कहना है साफ़ साफ़ कहो....

ज़ोया : सुन्ना hi चाहती हो तो सुनो.... मैं जिस धोकेबाज़ की बात कर रही हूँ वो और कोई नहीं बल्कि सुलतान है....

ज़ोया की बात सुन के सब को उसपे बेहद गुस्सा आ जाता है.... ज़रा तो गुस्से से जैसे पागल सी हो जाती है... वो गुस्से में आगे बढ़ के ज़ोया को थप्पड़ मारने hi वाली होती है की तभी सुलतान उसे बीच में hi रोक लेता है.... तभी रूही ज़ोया को मारने के लिए उसपे झपट पड़ती है....

इस से पहले की रूही ज़ोया को थप्पड़ मारती सुलतान आगे बढ़ के उसे भी रोक लेता है....

सुलतान : ज़रा रूही ये तुम दोनों क्या कर रही हो पागल तो नहीं हो गयी....

दोनों : सुलतान चोर दो मुझे... इस कमीनी की हिम्मत कैसे हुई तुझे धोकेबाज़ कहने की....

ज़ोया : मैंने वो hi कहा जो देखा.... खुद को बड़ा शरीफ बता रहा था.... अब जा के इस कमीने की साड़ी सच्चाई सामने आ गयी.... ये कमीना तुम दोनों को एक साथ बेवक़ूफ़ बना रहा है.... जाने तुम्हारे जैसी इसकी और कितनी hi Girlfriend's होंगी... जाने और कितनी लड़कियों को ये धोका दे रहा है....

ज़ोया की बात सुन के रूही और ज़रा गुस्से से पागल हो जाती हैं.... दोनों उसे मारने के लिए एक बार फिर से आगे बढ़ती हैं मगर इस बार भी सुलतान उन्हें रोक देता है.....

दोनों : कमीनी तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे सुलतान को धोकेबाज़ कहने की.... तू जानती क्या है सुलतान के बारे में.... जो इसे धोकेबाज़ कह रही है.... ये वो है जो हथेली पे सूरज ले के ढूंढने से भी न मिले.... इस जैसा नेक इंसान पूरी दुनिया में नहीं....

ज़ोया : तुम दोनों बात को समझ नहीं रही हो.... इस ने तुम दोनों को अपने प्यार के जाल में इस तरह फसा लिया है की तुम्हे इसके अलावा और कुछ नज़र hi नहीं आ रहा है....

रूही : सिर्फ हम दो hi नहीं बल्कि सुलतान की और भी कई दिवानियाँ हैं.... जिनसे सुलतान दिल की गहराइयों से प्यार करता है.... सुलतान किसी को धोका दे ये मुमकिन hi नहीं.... इसकी हर दीवानी को इस के हर रिश्ते के बारे में पता है.... सुलतान ने आज तक एक भी झूठ नहीं बोलै है.... उसका किसी को धोका देना तो बहुत दूर की बात है.... सुलतान जिसको चाहे उस से किस्मत वाली और कोई नहीं.... और तुम ऐसे इंसान पे धोकेबाज़ी का इलज़ाम लगा रही हो.... मुझे भी तो बताओ सुलतान ने तुझे कब और क्या धोका दिया है....

रूही की बात सुन के ज़ोया खामोश सी हो जाती है.... उसके पास रूही के सवाल का कोई जवाब नहीं है.... रूही ने गलत भी तो नहीं कहा.... सुलतान ने उसके साथ गलत करना तो दूर गलत नज़र से भी उसे या उसकी बहेनो को नहीं देखा.... बल्कि उसने तो हमेशा उनकी मदत hi की है.... पहले गुंडों से उसकी और उसकी बेहेन की इज़्ज़त बचायी फिर उन्हें रहने को आलिशान घर दिया.... बिना किसी सर्टिफिकेट्स के उसे इतनी बड़ी जॉब और सैलरी दी... उसकी बहनो का बड़े कॉलेज में एडमिशन करवाया.... उनकी हर ख़ुशी का ख़याल रखा.... साथ hi इस बात का भी ख़ास ख़याल रखा की आगे चल के उन्हें कोई तकलीफ न हो.... और बदले में उसे क्या मिला.... ज़लालत.... धोकेबाज़ होने का इलज़ाम.... इतना करने के बाद भी ज़ोया ने कभी भी सुलतान पे भरोसा नहीं किया.... एक पल के लिए भी नहीं....

जब पूरी बात ज़ोया को समझ में आती है तो शर्म से उसकी आखें झुक जाती हैं.... ुड़की आँखों से पछतावे के आंसू बहने लगते हैं... इस से पहले की वो सुलतान से माफ़ी मांगती सुलतान बेहद गुस्से में उस से कहता है....

सुलतान : थक गया हूँ मैं तुम्हारे इस शक्की पैन से.... बहुत बर्दाश्त कर लिया मैंने.... अब और नहीं.... अब से तुम अपने रस्ते और मैं अपने रस्ते.... आज से बल्कि अभी से मैं तुम्हे नहीं जानता....

रूही गुस्से में : सुलतान अभी के अभी इस कमीनी एहसान फरामोश को जॉब से निकाल दो....

सुलतान : नहीं.....

रूही : नहीं... क्यों नहीं....?

सुलतान : वो इस लिए क्यों की अगर मैंने इसे जॉब से निकला तो इसकी दोनों मासूम और निर्दोष बहेनो पे भी इसका असर पड़ेगा.... इस सब में उन दोनों की कोई गलती नहीं है.... मैं नहीं चाहता की इसके किये की सजा उन मासूमो को भुगतनी पड़े.... इसे यहीं रहने दो बस आज के बाद से ये मेरे लिए अजनबी है....

अब चलो शाम हो गयी है हम को घर चलना चाहिए....

ये कह के सुलतान ज़ोया को वहीँ चोर के ज़रा और रूही को साथ ले के घर की तरफ चल देता है....



घर पहुँच के वो अपनी हर एक दीवानी से मिलता है सब के साथ प्यार भरा कुछ लम्हे गुजरने के बाद वो किचन में जा के एक प्लेट में खाना ले के सोना के रूम की तरफ चल देता है.... अंडर का नज़ारा देख के उसके होश उड़द जाते hain....Wo फ़ौरन खाने की प्लेट को टेबल पे रख के सोना की तरफ दौड़ जाता है....
 
मेरी आशिकी तुमसे hi.....



अपडेट 173.....

रूही गुस्से में : सुलतान अभी के अभी इस कमीनी एहसान फरामोश को जॉब से निकाल दो....

सुलतान : नहीं.....

रूही : नहीं... क्यों नहीं....?

सुलतान : वो इस लिए क्यों की अगर मैंने इसे जॉब से निकला तो इसकी दोनों मासूम और निर्दोष बहेनो पे भी इसका असर पड़ेगा.... इस सब में उन दोनों की कोई गलती नहीं है.... मैं नहीं चाहता की इसके किये की सजा उन मासूमो को भुगतनी पड़े.... इसे यहीं रहने दो बस आज के बाद से ये मेरे लिए अजनबी है....

अब चलो शाम हो गयी है हम को घर चलना चाहिए....

ये कह के सुलतान ज़ोया को वहीँ चोर के ज़रा और रूही को साथ ले के घर की तरफ चल देता है....

घर पहुँच के वो अपनी हर एक दीवानी से मिलता है सब के साथ प्यार भरा कुछ लम्हे गुजरने के बाद वो किचन में जा के एक प्लेट में खाना ले के सोना के रूम की तरफ चल देता है.... अंडर का नज़ारा देख के उसके होश उड़द जाते hain....Wo फ़ौरन खाने की प्लेट को टेबल पे रख के सोना की तरफ दौड़ जाता है....

सोना बीएड पे लेती अपने ख्यालों में खोयी हुई है.... उसे इस बात तक का एहसास नहीं है की उसके हाथ पे लगे टांकों से खून बह रहा है.... जिसे देख सुलतान का दिल तड़प जाता है.... वो खाने की प्लेट को साइड टेबल पे रख के फ़ौरन कप्बोर्ड की तरफ दौड़ जाता है और वहां से फर्स्ट अिध बॉक्स ला के सोना के हाथ पे लगी पट्टी को निकाल के उसके घाव से बह रहे खून को साफ़ करने लगता है... ये करते वक़्त उसकी आँखों से आंसू बह रहे हैं साथ hi उसके होंठों पे बड़ी सी मुस्कान है.... जिसे देख सोना को बड़ी हैरानी होती है.... वो सुलतान के इन दोनों एक्सप्रेशन को समझ नहीं पा रही है.... उसे ये समझ नहीं आ रहा है की इस वक़्त सुलतान हंस रहा है या रो रहा है.... उसे समझ नहीं आ रहा है की उसके हाथ पे लगी चोट से निकल रहे खून को देख के सुलतान को ख़ुशी हो रही है या दुःख.... क्यों की ख़ुशी में इंसान मुस्कुराता है और अगर उसे दुःख हो तो उसकी आँखों से आंसू बहते हैं..... मगर ये दोनों hi एक साथ सुलतान के चेहरे पे नज़र आ रहे हैं..... वो रो भी रहा है और हंस भी रहा है.....

अभी सोना ये सब सोच hi रही है की तभी सुलतान की बात सुन के उसकी आँखें नाम हो जाती है....

सुलतान : तुम्हे याद है सोना.... जब भी मुझे चोट लगती थी या मेरी पीट को लोहे के गरम चिमटे या फिर सलाख से जलाया जाता तो मेरे मुँह से दर्दनाक चीख निकलती थी.... जिसे सुन की इस घर का ज़र्रा ज़र्रा भी तड़प जाता था.... वहीँ दूसरी तरफ घर में मौजूद सभी को मुझे दर्द में तड़पते देख बेहद ख़ुशी होती थी.... बस एक तुम hi थी जिसे मेरी तकलीफ देख के बेहद दुःख होता था.... तुम्हे इतना दुःख होता था की तुम्हारे होंठों पे बड़ी सी मुस्कान उभर आती थी.... और देखते hi देखते वो मुस्कान ज़ोरदार हंसी में बदल जाती थी....

सुलतान उसके हाथ में दवा भी लगा रहा है.... साथ hi उसे बीती बातें भी याद दिला राह है.... मुझे तकलीफ में देख के तुम दुःख में जी भर हंसती थी.... फिर जैसे hi मेरी तकलीफ कुछ काम होती तुम फ़ौरन भाग के किचन में जा के ख़ास तौर से वहां से मेरे ज़ख़्म पे लगाने के लिए अपने नाज़ुक हाथों से चुन चुन के स्पेशल मरहम ले के आती और बड़े hi इत्मीनान से तुम वो दोनों मरहम मेरे घाव पे लगाती.... क्या नाम था उन दोनों मरहम का....?

सोना ख़ामोशी से बस आँखों से आंसू बहते हुए सुलतान को देखे जा रही है साथ hi उसकी बातें भी सुन रही है.... उसके मुँह से ज़रा भी आवाज़ नहीं निकल रही है.... उसे कुछ न कहते देख...

सुलतान : तुम भी न सोना.... तुम्हे कुछ भी याद नहीं रहता.... वैसे भूल तो मैं भी गया था.... मगर तुम्हे देखते hi मुझे बीता सब याद आ गया.... वो कहते हैं न की किसी अपने का दिया हुआ ख़ास तोहफा कोई कैसे भूल सकता है.... अब जब तोहफा और उसे देने वाला बेहद ख़ास हो तो उसे इंसान छह के भी नहीं भूल सकता.... चलो मैं hi याद कर के बता देता हूँ.... मममम.... हाँ याद आया लाल मिर्ची का पाउडर और नमक.... ज़ख्म पे लाल मिर्च और नमक के लगते hi जब मेरे मुँह से दर्दनाक चीख निकलती थी तब उसे सुन के तुम्हारे दिल को बड़ा सुकून मिलता था.... तुम्हारे चेहरे पे बड़ी सी मुस्कान आ जाती थी.... मुस्कान आये भी क्यों न.... किसी अपने के ज़ख्मों पे दवा लगा के जो सुच मिलता है वैसा सुख पूरी दुनिया में और कोई नहीं..... देखो न जैसे इस वक़्त तुम्हारे ज़ख्मों पे दवा लगा के जितना सुख मुझे मिल रहा है उस से कहीं ज़्यादा सुख और ख़ुशी तुम्हे होती थी.... जहाँ तुम्हारे ज़ख्मों से बहे खून को देख के मेरी आँखें नाम हैं ठीक ऐसा hi हाल तुम्हारा भी होता था.... तुम्हे इतना दुःख होता था की दुःख के मारे तुम ज़ोर ज़ोर से हसने लगती थी.... तुम दुःख में ज़ोर ज़ोर से हँसते हुए वो दोनों मरहम तब तक मेरे ज़ख्मों पे लगाती रहती जब तक मैं बेहोश नहीं हो जाता था.... मेरे बेहोश होने के बाद भी तुम काफी देर तक उन दोनों मरहम को मेरे ज़ख्मो पे लगाती रहती.... फिर जब तुम्हे इस बात का यकीन हो जाता की मैं अब नहीं उठूंगा तब न चाहते हुए भी तुम्हे मेरे ज़ख्मों से अपने हाथ हटाने पड़ते.... उस वक़्त छोटी सी उम्र में भी तुम्हे मेरा कितना ख़याल रहता था.... मुझे तकलीफ में देख के तुम्हे भी बेहद तकलीफ होती थी.... तकलीफ में तुम दिल खोल के हंसा करती थी.... और एक मैं हूँ जिसे तुम्हारी ज़रा भी फ़िक्र नहीं है.... जाने कब से तुम्हारे हाथ पे लगी चोट से खून बह रहा है.... यहाँ तुम्हारे पास रह के तुम्हारा ख़याल रखने के बजाये मैं बहार घूम रहा था.... कितनी गलत बात है न.... ऐसा भी कोई करता है क्या....?

फिर उसके घाव पे दवा लगा के दुबारा से पट्टी बाँध के उस से प्यार से पूछता है....

सुलतान : देखो मैं तुम्हारे घाव पे दवा लगा के पट्टी कर दी है.... उतनी अच्छी तरह से नहीं कर पाया जिस तरह से तुम अक्सर किया करती थी..... क्या करूँ अनादि हूँ न.... मुझे कभी किसी ने तुम्हारे जैसे स्पेशल दवा लगा के पट्टी करना नहीं सिखाया.... न hi तुमने मुझे अपने जैसा दवा लगाना सिखाया.... तो जैसे मुझे आता था मैं वैसे दवा लगा के पट्टी कर दी..... हाँ मगर दवा वो नहीं लगायी जो तुम मुझे लगाती थी....

सोना बस एक तक सुलतान को देखते हुए उसकी बातें सुन के बस ख़ामोशी से रोये जा रही है..... उसकी जुबां से एक भी लफ्ज़ नहीं निकल पा रहा है.... वो कहे भी तो क्या कहे.... सुलतान कुछ गलत भी तो नहीं कह रहा है.... बस अपने दिल का दर्द उसे बयान कर रहा है....

सुलतान : हाँ पता है अब तुम यही कहोगी न की वो स्पेशल दवा जो तुम अक्सर मेरे ज़ख्मों पे लगाती थी वो सिर्फ और सिर्फ मेरे लिए hi थी.... अब जब इंसान इतना स्पेशल हो तो उसे दवा भी तो स्पेशल hi लगायी जाती है.... इस पूरी दुनिया में एक मैं hi हूँ जो तुम्हारे लिए सब से स्पेशल है.... है न.... मगर मैं तुम्हे वो स्पेशल दवा नहीं लगाऊंगा.... जानती हो क्यों....? क्यों की अगर मैंने तुम्हे वो स्पेशल दवा लगा दी तो फिर तुम में और मुझमे फर्क hi क्या रह जाएगा.... और वैसे भी स्पेशल इंसान एक hi होता है.... समझी.... अच्छा ये सब चोरो और ये बताओ तुम्हे दर्द तो नहीं हो रहा है न....

सुलतान सवाल तो सोना से कर रहा है मगर उसके जवाब देने से पहले अपने सवाल का जवाब वो खुद hi दे रहा है.....

सुलतान : हाँ हाँ मैं समझ गया की तुम्हे अपने घाव में दर्द नहीं हो रहा है.... अगर दर्द होता तो तुम ज़ोर ज़ोर से हंसती.... जैसे मुझे दर्द के देख के तुम दिल खोल के हंसती थी.... क्यों मैंने ठीक कहा न.... देखो मैं भी कितना पागल हूँ तुम्हे खाना खिलने के बजाये मैंने तुम्हे बातों में लगा रखा है.... अब मैं भी तुम्हे ठीक वैसे hi खाना खिलाऊंगा जैसे मेरे होश में आने के बाद तुम मुझे खिलाया करती थी....

फिर खाने से भरी थाली अपने हाथ में ले के उसे उसमे का खाना दिखा के कहता है.....

सुलतान : सॉरी यार सोना माफ़ करना.... ये खाना उतना अच्छा और टेस्टी नहीं है जैसा की तुम मुझे खाने को दिया करती थी.... ये देख न hi ये सूखी रोटी के टुकड़े हैं... और न hi ये लाल मिर्च में सनी आधे चम्मच से भी काम सब्जी.... मैं भी पागल जाने क्या क्या उठा लाया.... वो क्या है न की मुझे तुम्हारी तरह स्पेशल खाना बना के देने का एक्सपीरियंस नहीं है न.... तो जो मुझे ठीक लगा वो मैं तुम्हारे लिए ले आया..... अगर गलती से भी कोई गलती हो जाए तो मुझे मासूम समझ के माफ़ कर देना जैसे तुम बचपन में किया करती थी.... देखो तुम्हे खाना खिलने के बजाये मैंने तुम्हे फिर से बातों में लगा दिया.... सॉरी हाँ....

फिर खाने की प्लेट सोना को दिखा के कहता है....

सुलतान : खाने से पहले देखते हैं की खाना में क्या क्या है.... देखो देसी घी लगी रोटी है.... बकरे का कोरमा है.... साथ में मीठे में तुम्हारी फवौरीते रसमलाई भी है.... और ये केसर बादाम दूध भी.... सब कुछ वैसा hi है जैसे तुम्हे पसंद है.... मैंने तुम्हे कोई शिकायत का मौका नहीं छोरा है.... गौर से देख लो ये ठीक वैसा hi है जैसा तुम मुझे अपनी पसंद का खाना खाने को देती थी.... मैंने भी तुम्हारी पसंद का पूरा ख़याल रखा है.... कोई कमी नहीं आने दी.... बस एक आइसक्रीम रह गयी है.... वो मैं तुम्हे बाद में खिला दूंगा.... फिलहाल ये खाना खा लो....

ये कह के सुलतान निवाला तोड़ के बड़े प्यार से सोना को अपने हाथों से खाना खिलने लगता है....

दरवाज़े पे कड़ी सोना की माँ और मुस्कान गौर से सुलतान की बातें भी सुन रही है और उसकी हरकतों को भी देख रही हैं.... उन्हें सुलतान की बातों से उसके दिल में उठा रहा बेइन्तेहाँ दर्द साफ़ महसूस हो रहा है साथ hi ये भी एहसास हो रहा है की वो सोना से कितना प्यार करता है.... इतना सब होने के बाद भी उसने सोना को ज़रा सी भी तकलीफ नहीं होने दी.... खुद उसे अपने हाथों से खाना खिला रहा है साथ hi उसका पूरा ख़याल भी रख रहा है.... ऐसे नेक फ़रिश्ते पे सब ने मिल के इतने ज़ुल्म किये ये सोच के सोना की माँ और मुस्कान की आँखों से बेतहाशा आंसू बह रहे हैं.... उनका दिल दर्द से तड़प रहा है... वो छह के भी सुलतान के दर्द को काम नहीं कर पा रहे हैं.... बस आँखों से आंसू बहते हुए सुलतान को प्यार से सोना को खाना खिलते हुए देखे जा रहे हैं....

सोना को खाना खिलने के बाद सुलतान उसे बीएड पे लेता के सोने को कहता है....

सुलतान : बुरा मत मान न सोना आज मुझे यहीं तुम्हारे पास रुकना पड़ेगा....

सुलतान की बात सुन के सोना हैरत से सुलतान को देखने लगती है....

सुलतान : अरे नहीं नहीं मेरी बात का गलत मतलब मत लो.... मैं बस इस लिए यहाँ रुकना चाहता हूँ ताकि रात में कभी तुम्हे किसी चीज़ की ज़रुरत पद गयी तो कोई तो यहाँ होना चाहिए जो तुम्हारी ज़रुरत को पूरा कर सके. .. तुम्हारे हाथ में चोट लगी है न.... बस इसी लिए मैं यहाँ रुकने की बात कर रहा हूँ.... और कुछ नहीं.... (फिर अपना सर झुका के कहता है....) मुझे पता है तुम मुझे मनहूस मानती हो.... मेरा यहाँ तुम्हारे पास एक पल भी रुकना तुम्हे गवारा नहीं.... मगर मजबूरी है.... अगर तुम्हारे हाथ में चोट नहीं लगी होती तो मैं कभी यहाँ रुकने की बात नहीं करता... प्लीज मुझे यहाँ रुकने दो.... प्लीज.... मैं वादा करता हूँ मेरी वजह से तुम्हे ज़रा सी भी परेशानी नहीं होगी.... और अगर गलती से भी मेरी वजह से तुम्हे ज़रा सी भी परेशानी हुई तो तुम बिना झिझक मुझे वैसी hi सजा देना जैसी तुम बचपन में दिया करती थी.... चाहे तो मेरी पूरी पीठ लोहे की गरम सलाख से जला देना मैं उफ़ तक नहीं करूँगा.... अब मैं बड़ा हो गया हूँ न तू अब मुझे दर्द थोड़ा काम होगा.... प्लीज मुझे यहाँ रुकने दो प्लीज....

सुलतान की बातें और उसके दिल का दर्द सोना से बर्दाश्त नहीं हो रहा है.... उसका दिल तड़प रहा है.... वो छह के भी सुलतान के दिल का दर्द काम नहीं कर पा रही है... बस अपनी पलके झपका के उसे रुकने की इजाज़त दे देती है.... सोना का इशारा पा के सुलतान बेहद खुश हो जाता है....

सुलतान : थैंक यू सोना.... मैं बता नहीं सकता यहाँ रुकने की इजाज़त दे के तुमने मुझे कितनी ख़ुशी दी है.... यू रियली अरे ा डार्लिंग..... अब तुम आराम से सो जाओ.... मैं यहीं बैठा हूँ.... किसी भी चीज़ की ज़रुरत हो तो मुझे आवाज़ दे देना....

ये कह के सुलतान सोना की बगल में बैठ जाता है....

सोना आँखों में आंसू लिए बस एक तक सुलतान को देखते देखते कब सो जाती है उसे पता hi नहीं चलता....

सोना की माँ और मुस्कान भी आँखों में नमी और होंठों पे मुस्कान लिए वहां से अपने घर की तरफ चल देती हैं....

दोनों ये अच्छे से जान गयी हैं की सुलतान चाहे जो कहे मगर अपनी सोना के जिस्म पे एक खरोच भी सुलतान बर्दाश्त नहीं कर सकता.... दिल की गहराईयों से चाहता है वो सोना को.... वो न कभी खुद उसे कोई नुकसान पहुंचा सकता है और न hi किसी और को उसे नुक्सान पहुँचाने दे सकता है.... वो हमेशा सोना की ढाल बन के उसके आगे खड़ा रहेगा.... वो अपने जिस्म पे लाख ज़ख्म बर्दाश्त कर सकता है मगर उसकी सोना को एक खरोच भी आ जाए ये उसे कतई बर्दाश्त नहीं....

सुलतान सोना के बगल में बैठ प्यार से उसके प्यारे चेहरे को बड़े hi इत्मीनान से निहारता रहते है.... उसे कब नींद आ जाती है उसे पता hi नहीं चलता.... वो चैन से सोना के बगल में सो जाता है.... नींद में कब दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों में समेत लेते हैं उन्हें पता hi नहीं चलता.... दोनों एक दूसरे की बाहों में लिपटे चैन से सोये हुए हैं....

सुबह जब सुलतान की नींद टूटी है तब वो अपनी आगोश में किसी को कास के अपने जिस्म से लिपटे हुए पाटा है.... सुलतान को उस की आगोश में बेहद सुकून मिल रहा है.... ऐसा सुकून जो उसने आज से पहले कभी महसूस नहीं किया.... सुलतान बिना उसकी तरफ देखे उसे और ज़ोर से अपने सीने से लगा लेता है.... उसके जिस्म की खुशबु सुलतान को मदहोश करने लगती है... सुलतान की इस हरकत पे सोना बुरी तरह से चौंक जाती है... वो खुद के उस से अलग करने की कोशिश करती है मगर सुलतान है की उसे चोर्ने को तैयार hi नहीं.... मदहोशी में वो अपनी आँखें खोले बिना सोना के चेहरे के करीब अपने चेहरे को ले जाता है और प्यार से उसके होंठों को अपने मुँह में ले के उसे चूसने लगता है.... सुलतान की इस हरकत से वो बुरी तरह से चौंक जाती है... उसे समझ नहीं आ रहा है की वो क्या करे.... किश में सुलतान का साथ दे या फिर उस से दूर हो जाए.... अभी वो ये सोच hi रही होती है की तभी सुलतान के हाथ उसके जिस्म पे रेंगने लगते हैं.... धीरे धीरे वो उसकी पीठ से होते हुए उसके उभार की तरफ जाने लगते हैं.... सुलतान मदहोशी में उसके होंठों का अमृत पीते हुए उसके उभार को अपने हाथों में ले के उन्हें दबाने हुए उसे किश करने लगता है.... सोना भी किश में सुलतान का साथ देने लगती है....

सोना मन में : होश में न सही नींद में hi सही सुलतान अपनी सोना को प्यार तो कर रहा है....

ये सोच के सोना किश में उसका साथ देने लगती है....

सुलतान जाने कब तक प्यार से मदहोशी में सोना के होंठों का रास चूसता रहता है.... सोना भी किश में सुलतान का पूरा साथ दे रही है.... जब दोनों की सांस उखाड़ने लगती है तब कहीं जा के वो एक दूसरे से अलग होते हैं.... किश के टूट ते hi सुलतान कास के सोना को अपनी बाहों में समेत लेता है.... सोना भी अपने सुलतान के सीने से ऐसे लिपट जाती है जैसे की कभी अलग hi नहीं होगी....

सुलतान प्यार से उसके बालों में हाथ घूमने लगता है.... हर गुज़रते पल के साथ उसकी मदहोशी बढ़ती hi जाती है.... नील ज़हर और सोना के जिस्म की गर्मी को महसूस कर के सुलतान का लुंड खड़ा हो के एक प्यारा सा झटका सोना की कमसिन कुंवारी छूट पे मारता है.... जिसे महसूस करके सोना का पूरा जिस्म मस्ती में सिहर उठता है.... उसे सुलतान से ऐसी उम्मीद नहीं थी.... मस्ती और शर्म के मारे उसके गोर गुलाबी गाल लाल हो जाते हैं.... सुलतान भी मस्ती में अपने हाथों को सोना के चूतड़ों पे ले जा के उसे अपने लुंड की तरफ दबा के उसे मसलने लगता है... मस्ती में सोना की छूट से काम रास की बूँदें टपकने लगती है....

सोना मस्ती में सुलतान का चेहरे को पकड़ के उसके होंठों को अपने मुँह में ले के उसे वाइल्ड तरीके से किश करने लगती है.... किश क्या वो तो लगभग उसे चबा रही है.... सुलतान एक हाथ से उसके चूतड़ को दबा रहा है वहीँ दूसरे हाथ से उसके बूब्स को अपने मज़बूत पंजो में ले के उसे मसल रहा है.... सोना मस्ती के आसमान में उडी जा रही है..... ऐसा एहसास उसे पहली बार हो रहा है.... जल्द hi उसकी मस्ती चरम पे पहुँच जाती है और उसका जिस्म अकड़ने लगता है.... मस्ती में वो अपनी छूट को सुलतान के लुंड पे रगड़ते हुए झड़ने लगती है.... उसकी छूट से इतना काम रास बह रहा है की उसे देख के ऐसा लग रहा है जैसे की यहाँ बाढ़ आ गयी.... सुलतान को भी ऐसा एहसास पहली बार हुआ है.... वो अभी झड़ने hi वाला होता है की तभी दरवाज़े के खुलने की आवाज़ सुन के उसकी तंत्र टूट टी है....

सुलतान मुद के दरवाज़े की तरफ देखता है.... वहां मुस्कान को हैरत से अपनी तरफ देखते हुए पा के उसे अजीब सा लगता है....

सुलतान : यार तुझे भी अभी आना था कुछ देर बाद नहीं आ सकती थी क्या...? और ये तुझे क्या हुआ तू इतनी हैरान परेशान क्यों है....? जैसे तू ने कोई भूत देख लिया....?

ये कह के सुलतान उठने hi वाला होता है की तभी अपने आगोश में किसी को महसूस करके वो उसकी तरफ देखता है.... हैरत से सुलतान की आँखें बड़ी हो जाती हैं... वो हड़बड़ा के फ़ौरन उस से दूर हो के कहता है....

सुलतान : तुम...!!!!

मुस्कान : सुलतान कल का तो समझ आता है मगर आज भी तू सोना के साथ उसके hi बीएड पे उसके जिस्म से लिप्त हुआ है.... ये बात कुछ समझ नहीं आयी.... बताएगा आखिर ये हो क्या रहा है....

मुस्कान की बात सुन के सुलतान हड़बड़ा जाता है....

सुलतान : वो मैं वो.... हाँ... नहीं... मैंने कुछ नहीं किया.... ये सब अनजाने में हुआ है....

मुस्कान : अनजाने में मतलब...? अनजाने में कोई किसी के बीएड पे नहीं लेट ता.... अनजाने में कोई किसी के जिस्म से नहीं लिपट ता.... अनजाने में कोई किसी को किश नहीं करता.... ये सब उसी के साथ किया जाता है जिसे आप अपना मानते हो... जिसे आप दिल से चाहते हो.... तो बता की सच क्या है....?

सुलतान बिना कुछ कहे वहां से उठ के बहार की तरफ जाने लगता है.... मुस्कान उसे रोकने की कोशिश करती है मगर सुलतान उसे दिमाग के ज़रिये कांटेक्ट कर के कहता है....

सुलतान : मुस्कान प्लीज अभी इस बात को ले के कुछ भी मत कहना.... तुझे बाद में मैं खुद पूरी बात बताऊंगा... फिलहाल के लिए इस बात को यहीं ख़तम कर दे....

मुस्कान सुलतान की बात कुछ हद तक समझ जाती है.... साथ hi अपनी पलकें झपका के उसे हाँ का इशारा करती है....

वहां से निकल के सुलतान फ्रेश होने अपने रूम में चला जाता है.... वाश रूम में वो अपने कपडे उतर के शावर के नीचे खड़ा हो जाता है.... ज़रा जिसकी नज़र हर वक़्त सिर्फ सिर्फ सुलतान पे hi रहती है वो उसके पीछे पीछे वाशरूम में घुस जाती है.... और प्यार भरी नज़रों से सुलतान को देखने लगती है.... वो सुलतान के मज़बूत जिस्म में लगभग खो सी जाती है.... सुलतान का मज़बूत जिस्म देख के उसका पूरा जिस्म मस्ती में सिहर जाता है.... फिर जब उसकी नज़र सुलतान के खड़े लुंड पे जाती है.... तो उसे देख के उसके जिस्म के साथ साथ उसकी छूट में भी मस्ती की तेज़ लेहेर सी दौर जाती है.... उसकी छूट कॉमर्स की कुछ बूँदें टपका देती है.... ज़रा बिना वक़्त गवाए फ़ौरन अपने सारे कपडे उतार के सुलतान के करीब जाती है.... उसकी नज़रें सुलतान के लुंड पे hi तिकी हुई है.... वो जा के सुलतान के खड़े लुंड के करीब बैठ जाती है.... सुलतान अपने ख्यालों में खोया हुआ है उसे कुछ होश hi नहीं है.... ज़रा हाथ बढ़ा के सुलतान के खड़े लुंड को धीरे से छू के उसे महसूस करती है.... लुंड से निकल रही गर्मी को महसूस करके उसका पूरा जिस्म मस्ती में गंगना जाता है.... एक दो बार उसके लुंड को चुने के बाद ज़रा अपना चेहरा सुलतान के लुंड के सुपडे के बेहद करीब ले जा में उसे चुम लेती है.... सुलतान का लुंड इस एहसास को महसूस करते hi उछाल पड़ता है.... साथ hi मस्ती में आ के एक तेज़ झटका ज़रा के होंठों पे मारता है.... जैसे की कह रहा है हो.... जल्दी से मुझे अपने मुँह में ले के जी भर के चूसो.... ज़रा फ़ौरन उसकी बात मानते हुए फ़ौरन लुंड के गुलाबी सुपडे को अपने मुँह में ले के उसे चूसने लगती है.... इस से सुलतान की तंत्र टूट टी है और हैरत से नीचे अपने लुंड की तरफ देखता है.... ज़रा प्यार से उसके लुंड को अपने हाथों में पकड़ के मज़े से उसके सुपडे को लॉलीपॉप की तरह मज़े ले के चूस रही है साथ hi अपने दूसरे हाथ से तेज़ी से अपनी रास चोरटी छूट को भी मसल रही है.... ज़रा की इस हरकत पे सुलतान मस्ती के आसमान पे पहुँच जाता है.... वो छह के भी ज़रा को खुद से दूर नहीं कर पाटा... ज़रा को अपने लुंड को चूसते हुए देखता रहता है.... ज़रा मज़े से उसके लुंड को मुठियाते हुए चूस रही है.... ऊपर से नीचे तक पूरे लुंड पे जुबां फिरते हुए उसे चाट रही है.... साथ hi अपने दूसरे हाथ से अपनी छूट को भी मसल रही है.... सुलतान का पूरा जिस्म मस्ती में गंगना रहा है.... ठीक ऐसा hi हाल ज़रा का भी है.... ज़रा की इस हरकत पे सुलतान को उसपे बेहद प्यार आने लगता है.... वो फ़ौरन उसे अपनी गॉड में उठा के उसके होंठों को अपने मुँह में ले में चूसने लगता है.... ज़रा भी किश में सुलतान का पूरा साथ दे रही है.... दोनों एक दूसरे के होंठों के साथ साथ एक दूसरे की जुबां को मज़े ले के चूस रहे हैं.... धीरे धीरे दोनों की किश वाइल्ड हो ने लगती है.... उन्हें देख के ऐसा लग रहा है जैसे की ये किश नहीं कर रहे हैं बल्कि एक दूसरे की होंठों को मज़े ले के खा रहे हैं.... साथ hi मस्ती में एक दूसरे के जिस्म पे अपने हाथ घुमा रहे हैं.... जाने कब तक दोनों एक दूसरे को किश करते रहते हैं.... फिर जब उनकी मस्ती सीमा पार कर जाती है तब सुलतान ज़रा की कमर में हाथ दाल के उसके जिस्म को ऊपर से नीचे की तरफ घुमा देता है.... ज़रा की रास चोरटी छूट सुलतान के होंठों के ठीक सामने आ जाती है.... वहीँ सुलतान का खड़ा लुंड ज़रा के मुँह के सामने आ जाता है... दोनों खड़े खड़े hi एक दूसरे के सामने 69 पोजीशन में आ जाते हैं.... ज़रा की कमसिन कुंवारी क्लीन शेव पाव रोटी जैसी गोरी गुलाबी छूट से निकल रही कॉमर्स की खुशबु सुलतान को मदहोश किये जा रही है... वो अपने होंठों को आगे बढ़ा के उसकी छूट को चूम लेता है.... ज़रा को सुलतान से इस हरकत की ज़रा भी उम्मीद नहीं थी.... सुलतान के होंठों को अपनी छूट पे महसूस कर के मस्ती में उसका पूरा जिस्म गंगना जाता है.... साथ hi उसके होंठों से मस्ती भरी सिसकारी निकल जाती है.... मस्ती में वो सुलतान के खड़े लुंड को अपने हाथ में पकड़ के उसे दबोच लेती है.... करीब 2 से 3 बार ज़रा की छूट को चूमने के बाद सुलतान अपनी जुबां से ज़रा की छूट पे नीचे से ऊपर तक फिरते हुए चाट ता है.... इस एहसास को महसूस करके ज़रा को ऐसा लगता है जैसे की इस वक़्त वो जन्नत में है.... मस्ती में उसकी छूट से तेज़ी से काम रास बहने लगता है... जिसे सुलतान मज़े ले के चाट रहा है.... ज़रा भी सुलतान के लुंड को अपने मुँह में ले के उसे चूसने लगती है.... कुछ देर तक ज़रा की छूट को चाट न्र के बाद सुलतान उसकी छूट के दाने को अपने मुँह में ले के मज़े से चूसने लगता है.... इधर ज़रा भी मस्ती में आ के तेज़ी से सुलतान के लुंड को अपने मुँह में अंडर बाहर करते हुए अपनी छूट से कॉमर्स बहते हुए मज़े से चूस रही है.... सुलतान अपनी जुबां को उसकी छूट के छोटे से छेद में घुसा के उसे अंडर बहार करने लगता है.... बस तभी ज़रा के सब्र का बाँध टूट जाता है और वो मस्ती भरी सिसकारी के साथ सुलतान के मुँह में झड़ने लगती है.... सुलतान भी और संभाल नहीं पाटा वो भी ज़रा क्र मुँह में वार्य की पिचकारी चोर्ने लगता है.... सुलतान मज़े ले ज़रा की छूट से बह रहे कॉमर्स को चाट रहा है... वहीँ ज़रा भी सुलतान के लुंड से निकल रहे वार्य को पूरा का पूरा पी जाती है.... झड़ने के बाद दोनों कुछ हद तक संतुष्ट हो जाते हैं.... सुलतान फ़ौरन ज़रा को सीधा कर के उसके होंठों को अपने मुँह में ले के उसे चूसने लगता है... ज़रा भी किश में उसका पूरा साथ दे रही है....



अभी ये दोनों नंगे एक दूसरे के जिस्म से लिपटे किश कर hi रहे थे की तभी बाथरूम का दरवाज़ा खोल के कोई अंडर आता है.... जिसे देख दोनों शॉक हो जाते हैं....
 
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