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सुबह हुयी और रौशनी उठ कर नहाने जा hi रही थी की उसे मोबाइल पर एक मैसेज आया. मैसेज था उसके पति रोनित का. रोनित ने अपने दोस्तों के साथ बहार कही जाने का प्लान बनाया था और उसी के बारे में बस एक मैसेज भेज दिया था रौशनी को. पहले ऐसे होता तोह रौशनी ग़ुस्सा करती, रोनित को कॉल करती और पूछती कहाँ जा रहे थे हु , नाराज़ भी होती उनपर . लेकिन आजकल उसे ऐसे कुछ नहीं फील होता था. हु तोह रेलिएवेद महसूस कर रही थी की रोनित नहीं हैं आज तोह हु शाम असलम के साथ वाया मस्ती हु भी बिना उसके पति के नोक झोंक से. वैसे भी क्यों , कहाँ, क्या ऐसे सवालों के जवाब उसे रोनित को देने hi नहीं थे. उसे अब अपनी इंडिपेंडेंस पसंद आने लगी थी. वह अब चाहती थी की वह ज्यादा समय रमेश जी के साथ बिताये . या फिर अब्दुल के साथ जैसे हु आज करने वाली थी हु भी उसकी बेगम की नक़ल कर. उसने अपनी एक बैग पाकक करि और उसमें दो सरिस डेल, दो ब्लौसेस. असलम ने कहा था की उसकी बेगम स्लीवलेस ब्लौसेस ज्यादातर पहनती थी और बुर्का के अंदर भी वैसी साड़ी और ब्लौसेस हु पहनती थी . उसने मेक उप का सामान भी पैक करि .. आज उसने स्लीवलेस बीज रंग की साड़ी पहनी थी जो उसके गोर मखमल बदन को और खिला कर दिखा रही थी. हल्का सा मेकअप भी लगाई और आँखों में काजल क्यूंकि असलम की बेगम काजल काफी लगाती थी. हु पूरी तरह से असलम के साथ उसके बेगम के जैसे hi सज धज कर वक़्त बिताना चाहती थी ताकि असलम जल्द से जल्द ठीक हो जाए और फिर उसे यह सब करने की कोई जरूररत नहीं पड़ेगी और न hi आगे जाकर असलम की बेगम जैसे बर्ताव करना पड़ेगा आज.
रौशनी निचे चली गयी तोह रोज़ जैसे रमेश को पायी उसकी रिक्शा में बैठा हुआ. रौशनी को आते देख रमेश बहार आकर खड़ा हुआ . रौशनी उसके नज़दीक आयी और मुस्कुरायी.. वह रमेश के साथ की गए साड़ी मस्तियों एक बारे में सोचकर काफी शर्मा रही थी. रमेश के चेहरे पर भी एक बड़ी मुस्कान थी. वह तोह यकीन नहीं कर प् रहा था की ऐसी मस्त कर्तव्य बदन वाली, अच्छे घर की गोरी आइटम उससे पत् hi नहीं लेकिन चूस भी गयी थी.. रमेश से रहा नहीं गया और उसने रौशनी की गोरी सी नाज़ुक कमर पर हाथ दाल देय अपने पास खिंच लिया . उफ्फ्फ रमेश जी यह आप क्या कर रहे हो उफ्फ्फ छोड़िये न उफ़ सब देखेंगे उफ्फ्फ छोड़िये बा.
“ओह रौशनी सुबह सुबह कोई नहीं हैं देखो .. उफ्फ्फ मेरी डार्लिंग तुम्हे बहुत मिस किया .. उस रात के बाद तोह मैं जी नहीं करता तुनंमहे चोर्ने का .. उफ्फ्फ्फ़ तुम्हारी आदतें , अदाएं, बिस्तर पर नखरे .. तुम्हारी चंचलता उफ्फ्फ्फ़ मन कर्तव्हीन फिर से अपने वहां ले जा आकर ढेर सारा प्यार दू .. ी लव यू…
“उफ़ रमेश जी आप भी न .. ओह गॉड उस .. उस रात जो हुआ वापस नहीं हो पाएगा उफ़ आप भूल जाइये हु बात उफ्फ्फ… “
“ओह रौशनी मेरी डालरिंग अब ऐसे कैसे भूल जाऊ .. तुम्हे भी वह रात रंगीन लगी थी मुझे पता हैं .. कल भी बड़ी मस्तियाँ करि हमें .. उसे भी भूल जाऊ .. नहीं हरकीज़ नहीं अब में कुछ नहीं भूल पाउँगा .. मुझे तुम बड़ी अच्छी लगती हो .. ी लव यू रौशनी .. तुम न लव करो लेकिन मेरा लव काफी स्ट्रांग हैं तुम्हारे लिए .. ी लव ोुउउउउ..
“ओह गॉड रमेश जी आप भी न धत्त्त..” रौशनी अपनी नजूल गोर से हाथों को रमेश के साइन पर मारती हैं .. रमेश उसके हाथों को पकड़ता हैं और फिर उन्हें चूमने लगता हैं .. “उफ़ रमेश जी लोग देखेंगे प्लीज छोड़िये हमें .. लेट भी हो रहा हैं आज प्ल्ज़ उफ्फ्फ्फ़ ..” रमेश एक आखिर बार कसकर रोष्नी को दबोचता हैं और उसकी मलाई जैसे गोरी सी कमर पर लाल निशाँ छोर देता है. फिर दोनों रिक्शा में बैठ कर निकलते हैं.
रिक्शा में रमेश बोलता हैं "रौशनी जी एक बात कहूंगा आपसे … आप उस रात को न भूलना .. वह सबसे यादगार रात थी मेरे ज़िन्दगी की जो मैंने आप जैसी खूबसूरत महिला के सतह वह पल बिताए ..आप चाहती हो तोह फिर से में आपसे कभी बात नहीं करूँगा , न hi मिलूंगा लेकिन उस रात को और हमने बिताये पलों को कभी न भूलना … तुम मेरी जान हो और ऐसे करोगी तोह मुझे काफी बुरा लगेगा..”
रौशनी भी इमोशनल हो जाती हैं. उसे तोह उस राटा के सपने रोज़ आते हैं .. वह चाहती हैं की वह फिर से रमेश जी के सतह वैसे hi पल बिता.. रात और शाम बिताए … न जाने क्यों लेकिन रमेश जी बुड्ढे होकर भी उसे बहुत पसंद थे .. उनका प्यार करने का अंदाज़ तोह यंग मर्दों जैसे hi था और बिस्तर पर स्टैमिना तोह उफ्फ्फ्फ़ .. बुद्धा होकर बुइ रमेश जी मेरे पति रोनित से और अच्छी से और खूब मस्ती के साथ चुदाई करे थे .
रौशनी मुस्कुराती हैं “रमेश जी नहीं भूलूंगी वह पल .. आप न दुखी होना .. बस वह आप ने पब्लिक में मुझे ऐसे दबोचा .. उफ्फ्फ प्लीज वह सब न करना आप जो चाहे वह … जैसी hi रौशनी वह सब्द बोली वह खुद को रोकी .. रमेश मन hi मन मुस्कुरा रहा था .. उसका इमोशनल एंगल अच्छे से चला था और तीर सही निशाने पर लगा था .. अब वह रौशनी को और चिढ़ाना चाहता था.
“और क्या क्या करू आपके साथ … जो चाहे वह करू .. अच्छा क्या आप वह सब झेल पाओगी रौशनी जी …”
रौशनी शर्माने लगती हैं , उसके गाल लाल हो जाते हैं .. उफ्फ्फ वह क्या बोल बैठी थी … अब रमेश जी को क्या जवाब दे .. इसी सोच में वह थी और कुछ बोली नहीं. रमेश वहां और प्रेस करने लगा.
“बताइये न रौशनी जी और जो चाहे करुनाग तोह इंकार नहीं करोगी न .. और झेल पाओगी क्या .. बताइये … में तोह बहुत कुछ करने को तैयार हूँ आपके जैसी हुस्न की पारी के साथ..”
“उफ़ रमेश जी आप भी न .. बड़े hi बदमाश हो उफ्फ्फ्फ़”
“रौशनी जी .. अब बदमाश तोह आपने बना दिया हैं .. में तोह रहा सीधा साधा रिक्शा चलने वाला .. आप hi हो हुस्न की पारी जजों मेरे ज़िन्दगी में एक तूफ़ान बन कर आयी हो .. अब में उस तूफ़ान में बह गया हूँ तोह मेरा क्या कसूर.. कहे तोह जान दो मेरी ..
“उफ़ रमेश जी यह ड्रामा करना बंद करिये .. व्हाट इस थिस नॉनसेंस जान दू और सब .. आप यह सब बातें न करिये .. आपकी दोस्त हूँ और हमेशा रहूंगी..” “अच्छा बस दोस्ती hi करोगी या फिर कुछ और .. अब तोह बस दोस्ती से मन नहीं भरेगा मुझे .. मुझे आपका प्यार चाहिए .. मुझे आप चाहिए .. आपका मखमल बदन , आपकी कामुक ादाएँ आपका दिल, आपका हुस्न .. आपका सब कुछ ..”
“उफ़ रमेश जी आप भी न .. उफ़ ममम ठीक हैं बस दोस्ती नहीं और भी .. उफ्फ्फ अब चलिए मुझे देर हो रही हैं.” “रौशनी जी बहाना मत बनाइए .. आज जल्दी निकल गए थे हम आपके ऑफिस के लिए .. मुझे बस आप चाहिए .. आज मत जाओ ऑफिस और औ मेरे साथ .. दिखाऊंगा में आपसे कितना ज्यादा प्यार करता हूँ ..” “उफ़ नहीं नहीं आज बड़ी इम्पोर्टेन्ट मीटिंग हैं”
अब रमेश को क्या पता रौशनी की शाम की मीटिंग एक दूसरे ठरकी बुड्ढे के साथ थी जिसका नाम था असलम और वह भी रौशनी को अपनी बेगम बनाने के सपने देख रहा था और आज रौशनी को बेगम बना कर ढेर साड़ी मस्ती करना चाहता था.
“अच्छा लेकिन अब रहा नहीं जा रहा हैं , आपको एक बा तोह चूमना चाहता हूँ, दबोचना चाहता हूँ .. “ रमेश ने फिर रिक्शा एक छोटे से देतौर पर ले गया और कही रोक दी रिक्शा.
“उफ़ रमेश जी रिक्शा क्यों रोक दी और रास्ता क्यों बदल दिया ..
“रौशनी जी रहा नहीं जा रहा हैं .. ापर बहुत प्यार आ रहा हैं .. कुछ मिनट .. आपको देरी नहीं होगी. रमेश फिर पीछे की सीट आ जाता हैं और रौशनी को बाँहों में भर लकेता हैं .. उसके गालों को चूमने लगता हैं कभी उसके कानों को चबाने लगता हैं..
रौशनी भी गर्मी की आग बढ़ रही थी और वह बिना हिचकिचाए रमेश का साथ देने लगी और आठ उफ़ की आवाज़ों से रेस्पोंद करने लगी .. कुछ सेकंड के बाद रौशनी ने रमेश को अलग करि
“उफ़ रमेश जी कोई देख लेगा रास्ते पर से .. उफ्फफ्फ्फ़”
“अच्छा फिर चुपकसे प्यार करना चाहती हो .. रौशनी कुछ न बोली बस शरमाते हुए रमेश के साइन में अपने चेहरे को छुपाई. रमेश ने रिक्शा के साइड के कर्टेंस खोल दिए और अब अंदर जो हो रहा हाँ बहार से कोई नहीं देख पाएगा.. और रमेश फिर से रौशनी की चूचियों को उसके साड़ी ब्लाउज के ऊपर से दबाने लगा .. अब रमेश गुटका चबा रहा था .. वह रौशनी को चूमने आगे बढ़ा तोह रौशनी ने उसके अपने होठों को अपने हाथों से धक् ली.
“उफ़ रमेश जी अआप .. आप गुटका खा रहे हो .. उफ़ ऐसे कैसे चूमोगे उफ्फ्फ्फ़ .. ममम नहीं ..”
“तोह क्या हुआ .. उसमें के बुराई हैं .. उफ़ मेरी जानू रहा नहीं जा रहा हैं चूमने दो तुम्हारे गुलाबी होठों को ..”
“मम नहीं उफ्फ्फ रमेश जी ….” लेकिन रौशनी उसे रोक नहीं पायी .. रमेश ने रौशनी के हाथों को हटाया और अपने गुठके से भरे होठों को उसके गुलाबी होठों के पास लाने लगा .. रौशनी की गर्मी काफी बढ़ गयी थी अब वह नहीं रोकना चाहती थी खुद को .. फिर दोनों के होठों का मिलान हो hi गया .. रमेश के गुठके से स्टैनेड होठं अब रौशनी ी गुलाबी होठों से भीड़ गए और जोरों से भीड़ गए और फिर दोनों चुम्बन में मग्न हो गए … रौशनी की गर्मी काफी बढ़ रही थी और वह भी रमेश का साथ देने लगी .. उसे चूमने लगी उसके बालों पर अपने हाथों को फेरने लगी … रमेश के गुठके से स्टैनेड होठों से वह रौशनी की गुलाबी होठों को चबाने लगा .. और उसकी मुँह में अपनी जीभ दाल दी और रौशनी के मुँह की जीभ का रास पीने लगा .. उसका गुटका अब रौशनी के मुँह मं चला गया और दोनों बड़ी गहरी चुम्बन में लग गए .. रौशनी के हाथों को रमेश ने अपने हाथों में लिया और पानी क्रॉत्च क्षेत्र पर ले गया .. उसका हथ्यार मोटा हो गया था और उसके बुल्गे के स्पर्श से hi रौशनी की बूत पानी छोड़ने लगी..
रमेश ने अपनी ज़िप खोली और रौशनी के आहतों को अंदर गाइड करने लगा .. उसने आज चड्डी नहीं पहनी थी इसीलिए रौशनी एक हाथों में उसका मोटा लोढ़ा साइड से चला गया .. रौशनी उस इ चुम रही थी और निचे उसके लोडे को अपने नाज़ु मुलायम गोर हाथों से सहलाने लगी … उसकी गर्मी की आग बहुत बढ़ रही थी और उसकी बुर से काफी रास बह चूका था .. वह रमेश के मोठे लोडे को एक हाथस इ रगड़ने लगी और ऊपर उसकी गहरी सी चुम्बन में लगी रही … रामश का लोढ़ा काफी सारा प्रेकम चोर रहा था जिसने रौशनी के हाथों को वेट करि .. उस एहसास से तोह रौशनी की बुर और रास छोड़ने लगी..
रमेश फिर रौशनी की साड़ी के पल्लू को साइड में किये उसकी दूधियों को ब्लाउज के ऊपर से दबाने लगा .. फिर अपना एक हाथ ब्लाउज में डाला उसकी चुकी दबाने लगा .. रौशनी ऊपर चुम्बन में लगे मम फफम्फम्फम्फ की आवाज़ hi णिअक पायी … रमेशने रोशन ी की एक चुकी उसके ब्लाउज से निकली और उसकी चुकी कास कास कर दबाने लगा .. जितने जोरों से वह उसकी चुकी दबा रहा था उसी जोर से रौशनी भी उसके लोडे को दबाने लगी.. दोनों भूल गए थे की वह रिक्शा में थे कही रास्ते पर साइड में रुके हुए न की बिस्तर पर … रमेश फिर अपने हाथों को पीछे ले जाकर रौशनी की ब्लाउज को उन्हुक करने लगा ..
रौशनी उस एहसास से चुम्बन तोड़ी और बोली .. “उफ़ रमेश जी क्या कर रहे हो मम उफ्फ्फ्फ़ ..”
लेकिन रमेश ने न सुनी और फिर से रौशनी के होतोहं पर पाने होतोहं को टिका दिया और चूमने लगा .. अब उसने सब हुक खोल दिए और झट से ब्लाउज निकल दिया .. रौशनी के कुछ समझने से पहले .. उसकी चुकी तोह ब्रा के बहार hi थी और अब दूसरी भी बहार निकल उसे रमेश दबोचने लगा … "उफ़ क्या चूचियां हैं उफ्फ्फ ममममम बहुत मिस कर्रा हूँ इन्हे अहह उफ़ मेरी जान … मेरी डार्लिंग उफ्फ्फ फमास्ट गोरी सी और मुलायम चूचियां हैं तेरी अहह ममममम…
“उफ़ रमेश जी छोड़िये न उफ़ फममम नहीं ..” रमेश फिर से अपने हतोहं को रौशनी के होठों पर टिका दिए और उसे चूमने लगा .. रौशनी के आँखें बंद हुयी और वह रमेश के चूमों का और भी जोरों से साथ देने लगी .. रमेश रौशनी की चकहियों को दबाते गया और उसके निप्प्लेसे से खेलते रहा .. रौशनी की बुर तोह अब बहुत रास छोर चुकी थी .. उसकी गर्मी बहुत बढ़ गयी थी.. रौशनी ने भी रमेश के लोडे से अपने हाथों को हटाई नहीं थी .. उसके मोठे लुंड से खेलती रही दबती रही और रमेश भी आह उफ़ मम करता रहा और उसकी आह िफ्फ़ अब रोशनीकी ममम उफ्फ्फ की सिसकियों से मेल करने लगी और अब तोह दोनों बिलकुल hi भूल गए थे वह किसी घर में नहीं थे बल्कि रिक्शा में बीच रास्ते कही थे. ऐसे hi 5 मं तक दोनों की मस्तियाँ चली और फिर रमेश ने चुम्बन तोड़ते हुए रौशनी की सर को पकड़ अपने लोडे के तरफ ले जाने लगा .. रौशनी की हवस इतनी बढ़ चुकी थी की वह कुछ न बोली और अपने मुँह को रमेश के गर्म लोडे के पास पायी .. उसे वह चूमने लगी .. उसके लोडे का टोपा चाटने लगी … रमेश ने उसके सर को हॉक्स से पकडे रखा था और अपना लोढ़ा रौशनी से चुसवा रहा था ..
उसकी चुच्चियों से अपने हाथों को हटाए बिना उन्हें निचोड़ रहा था दबोच रहा था .. रौशनी अब रमेश के लोडे को चूस रही थी उसकी चूचियां उनके हाथों में डाब रही थी और उसकी बुर काफी रिस रही थी और ढेर सारा पानी चोर्ने लगी थी …रौशनी और जोरों से रमेश का लोढ़ा चूसने लगी , चाटने भी लगी … रमेश उसकी निप्पल्स को दबाता रहा और रौशनी आउच करि … वह सर ऊपर उठाने लगी की रमेश ने उसके सर को पकड़ अपने लोडे को अब रौशनी के मुँह में hi पेलने लगा .. रौशनी अब बस रमेश के लोडे को चूसने में मग्न थी .. रमेश उसकी मुँह में अपने लोडे को पेलते रहा और रौशनी उसके मोठे लोडे को चुस्ती रही .. पहली बारे चूसी थी उसके मोठे लोडे को तोह वह आधे तक hi पहुँच पायी थी .. लेकिन अब उसके लोडे के जड़ तक वह पहुंची और चूसने लगी .. उसके मुँह से लार टपकने लगी जो रमेश के लोडे को और चिकना कर रही थी जिससे रौशनी सके लोडे के जड़ तक चूस पर रहित hi .. रमेश जोरों स रौशनी की छकःकिओयों को दबोचने लगा .. अब उससे रहा नबी जा रहा था और वह अपने लोडे से माल निकलने के चार्म सिमा पर पहुँच गया … उसने रौशनी के सर को और जोर से पकड़ लिया और अपने लोडे को उसके मुँह में और पेलने लगा .. कुछ और सेकंड बाद अब रमेश को रहा नहीं जा रहा था .. वह झड़ने वाला था … उसका गृप रौशनी के सर पर लूसे हुआ और रौशनी ने अपने मुँह को उसके लोडे से निकलते हुए उसके लोडे को दबाने लगी और कुछ पलों में रमेश के मुँह से एक बड़ी अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ मममममममम निकल गया ुर उसके लोडे से उसका लावा झरने लगा … किसी वोल्केनो जैसे उसके लुंड से उसका लावा ेरुपत होने लगा … उसका सारा सफ़ेद माल रौशनी के हाथों पर फ़ैल गया …
रौशनी बिना सोचे उसकी ऊँगली चाटने लगी जिस पर रमेश के लुंड का गधा सफ़ेद माल लगा हुआ था ..
“ओह गॉड रौशनी उफ्फ्फ मममम क्या मज़्ज़ा आया आज अहह उफ्फ्फ तुम हो hi बड़ी मस्त चीज़ .. उफ्फ्फ्फ़ क्या हो तुम मममममम चूस चूस कर hi माल निकल दिया मेरे लोडे से अहह उफ़ पहली बार ऐसे हुआ हैं अह्ह्ह ममममममम.” रौशनी को एहसास हुआ की वह कहा हैं.. अभी अभी क्या कर रहे थे और वह चुप बैठी ..
“उफ़ रमेश जी आपने आज उफ्फ्फ …. यह आपने फिर से मुझे बहका दिया उफ्फ्फ्फ़ … हे भगवान् उफ्फ्फ लेट हुआ हैं उफ्फ्फ चलिए जाना होगा मुझे .. चलिए रमेश जी जल्दी करिये …”
रमेश बहार गए और रिक्क्ष्व में पानी था उससे अपने लोडे को साफ़ कर वापस रिक्शा में बैठ वह निकल गए. अब दोनों से कुछ बातें हो नौई रही थी.. रौशनी बहार देख रही थी ,, अभी जो भी हुआ उसके बारे में सोचते हुए उसकी गर्मी अभी भी शांत नहीं हुयी थी और बढ़ चुकी थी ..
अब रौशनी को तोह आज शाम को असलम की भी बेगम बनना था .. असलम अपने घर में था .. वह तोह आज पूरा का पूरा मूड में था की वह आज आखिर कार रौशनी को निचोड़ निचोड़ कर उससे ढेर साड़ी रात भर मस्ती करने वाला था. आअज रात वह रौशनी के साथ उसे अपनी बेगम बना कर , सुहागरात मानाने के सपने देख रहा था.
रौशनी निचे चली गयी तोह रोज़ जैसे रमेश को पायी उसकी रिक्शा में बैठा हुआ. रौशनी को आते देख रमेश बहार आकर खड़ा हुआ . रौशनी उसके नज़दीक आयी और मुस्कुरायी.. वह रमेश के साथ की गए साड़ी मस्तियों एक बारे में सोचकर काफी शर्मा रही थी. रमेश के चेहरे पर भी एक बड़ी मुस्कान थी. वह तोह यकीन नहीं कर प् रहा था की ऐसी मस्त कर्तव्य बदन वाली, अच्छे घर की गोरी आइटम उससे पत् hi नहीं लेकिन चूस भी गयी थी.. रमेश से रहा नहीं गया और उसने रौशनी की गोरी सी नाज़ुक कमर पर हाथ दाल देय अपने पास खिंच लिया . उफ्फ्फ रमेश जी यह आप क्या कर रहे हो उफ्फ्फ छोड़िये न उफ़ सब देखेंगे उफ्फ्फ छोड़िये बा.
“ओह रौशनी सुबह सुबह कोई नहीं हैं देखो .. उफ्फ्फ मेरी डार्लिंग तुम्हे बहुत मिस किया .. उस रात के बाद तोह मैं जी नहीं करता तुनंमहे चोर्ने का .. उफ्फ्फ्फ़ तुम्हारी आदतें , अदाएं, बिस्तर पर नखरे .. तुम्हारी चंचलता उफ्फ्फ्फ़ मन कर्तव्हीन फिर से अपने वहां ले जा आकर ढेर सारा प्यार दू .. ी लव यू…
“उफ़ रमेश जी आप भी न .. ओह गॉड उस .. उस रात जो हुआ वापस नहीं हो पाएगा उफ़ आप भूल जाइये हु बात उफ्फ्फ… “
“ओह रौशनी मेरी डालरिंग अब ऐसे कैसे भूल जाऊ .. तुम्हे भी वह रात रंगीन लगी थी मुझे पता हैं .. कल भी बड़ी मस्तियाँ करि हमें .. उसे भी भूल जाऊ .. नहीं हरकीज़ नहीं अब में कुछ नहीं भूल पाउँगा .. मुझे तुम बड़ी अच्छी लगती हो .. ी लव यू रौशनी .. तुम न लव करो लेकिन मेरा लव काफी स्ट्रांग हैं तुम्हारे लिए .. ी लव ोुउउउउ..
“ओह गॉड रमेश जी आप भी न धत्त्त..” रौशनी अपनी नजूल गोर से हाथों को रमेश के साइन पर मारती हैं .. रमेश उसके हाथों को पकड़ता हैं और फिर उन्हें चूमने लगता हैं .. “उफ़ रमेश जी लोग देखेंगे प्लीज छोड़िये हमें .. लेट भी हो रहा हैं आज प्ल्ज़ उफ्फ्फ्फ़ ..” रमेश एक आखिर बार कसकर रोष्नी को दबोचता हैं और उसकी मलाई जैसे गोरी सी कमर पर लाल निशाँ छोर देता है. फिर दोनों रिक्शा में बैठ कर निकलते हैं.
रिक्शा में रमेश बोलता हैं "रौशनी जी एक बात कहूंगा आपसे … आप उस रात को न भूलना .. वह सबसे यादगार रात थी मेरे ज़िन्दगी की जो मैंने आप जैसी खूबसूरत महिला के सतह वह पल बिताए ..आप चाहती हो तोह फिर से में आपसे कभी बात नहीं करूँगा , न hi मिलूंगा लेकिन उस रात को और हमने बिताये पलों को कभी न भूलना … तुम मेरी जान हो और ऐसे करोगी तोह मुझे काफी बुरा लगेगा..”
रौशनी भी इमोशनल हो जाती हैं. उसे तोह उस राटा के सपने रोज़ आते हैं .. वह चाहती हैं की वह फिर से रमेश जी के सतह वैसे hi पल बिता.. रात और शाम बिताए … न जाने क्यों लेकिन रमेश जी बुड्ढे होकर भी उसे बहुत पसंद थे .. उनका प्यार करने का अंदाज़ तोह यंग मर्दों जैसे hi था और बिस्तर पर स्टैमिना तोह उफ्फ्फ्फ़ .. बुद्धा होकर बुइ रमेश जी मेरे पति रोनित से और अच्छी से और खूब मस्ती के साथ चुदाई करे थे .
रौशनी मुस्कुराती हैं “रमेश जी नहीं भूलूंगी वह पल .. आप न दुखी होना .. बस वह आप ने पब्लिक में मुझे ऐसे दबोचा .. उफ्फ्फ प्लीज वह सब न करना आप जो चाहे वह … जैसी hi रौशनी वह सब्द बोली वह खुद को रोकी .. रमेश मन hi मन मुस्कुरा रहा था .. उसका इमोशनल एंगल अच्छे से चला था और तीर सही निशाने पर लगा था .. अब वह रौशनी को और चिढ़ाना चाहता था.
“और क्या क्या करू आपके साथ … जो चाहे वह करू .. अच्छा क्या आप वह सब झेल पाओगी रौशनी जी …”
रौशनी शर्माने लगती हैं , उसके गाल लाल हो जाते हैं .. उफ्फ्फ वह क्या बोल बैठी थी … अब रमेश जी को क्या जवाब दे .. इसी सोच में वह थी और कुछ बोली नहीं. रमेश वहां और प्रेस करने लगा.
“बताइये न रौशनी जी और जो चाहे करुनाग तोह इंकार नहीं करोगी न .. और झेल पाओगी क्या .. बताइये … में तोह बहुत कुछ करने को तैयार हूँ आपके जैसी हुस्न की पारी के साथ..”
“उफ़ रमेश जी आप भी न .. बड़े hi बदमाश हो उफ्फ्फ्फ़”
“रौशनी जी .. अब बदमाश तोह आपने बना दिया हैं .. में तोह रहा सीधा साधा रिक्शा चलने वाला .. आप hi हो हुस्न की पारी जजों मेरे ज़िन्दगी में एक तूफ़ान बन कर आयी हो .. अब में उस तूफ़ान में बह गया हूँ तोह मेरा क्या कसूर.. कहे तोह जान दो मेरी ..
“उफ़ रमेश जी यह ड्रामा करना बंद करिये .. व्हाट इस थिस नॉनसेंस जान दू और सब .. आप यह सब बातें न करिये .. आपकी दोस्त हूँ और हमेशा रहूंगी..” “अच्छा बस दोस्ती hi करोगी या फिर कुछ और .. अब तोह बस दोस्ती से मन नहीं भरेगा मुझे .. मुझे आपका प्यार चाहिए .. मुझे आप चाहिए .. आपका मखमल बदन , आपकी कामुक ादाएँ आपका दिल, आपका हुस्न .. आपका सब कुछ ..”
“उफ़ रमेश जी आप भी न .. उफ़ ममम ठीक हैं बस दोस्ती नहीं और भी .. उफ्फ्फ अब चलिए मुझे देर हो रही हैं.” “रौशनी जी बहाना मत बनाइए .. आज जल्दी निकल गए थे हम आपके ऑफिस के लिए .. मुझे बस आप चाहिए .. आज मत जाओ ऑफिस और औ मेरे साथ .. दिखाऊंगा में आपसे कितना ज्यादा प्यार करता हूँ ..” “उफ़ नहीं नहीं आज बड़ी इम्पोर्टेन्ट मीटिंग हैं”
अब रमेश को क्या पता रौशनी की शाम की मीटिंग एक दूसरे ठरकी बुड्ढे के साथ थी जिसका नाम था असलम और वह भी रौशनी को अपनी बेगम बनाने के सपने देख रहा था और आज रौशनी को बेगम बना कर ढेर साड़ी मस्ती करना चाहता था.
“अच्छा लेकिन अब रहा नहीं जा रहा हैं , आपको एक बा तोह चूमना चाहता हूँ, दबोचना चाहता हूँ .. “ रमेश ने फिर रिक्शा एक छोटे से देतौर पर ले गया और कही रोक दी रिक्शा.
“उफ़ रमेश जी रिक्शा क्यों रोक दी और रास्ता क्यों बदल दिया ..
“रौशनी जी रहा नहीं जा रहा हैं .. ापर बहुत प्यार आ रहा हैं .. कुछ मिनट .. आपको देरी नहीं होगी. रमेश फिर पीछे की सीट आ जाता हैं और रौशनी को बाँहों में भर लकेता हैं .. उसके गालों को चूमने लगता हैं कभी उसके कानों को चबाने लगता हैं..
रौशनी भी गर्मी की आग बढ़ रही थी और वह बिना हिचकिचाए रमेश का साथ देने लगी और आठ उफ़ की आवाज़ों से रेस्पोंद करने लगी .. कुछ सेकंड के बाद रौशनी ने रमेश को अलग करि
“उफ़ रमेश जी कोई देख लेगा रास्ते पर से .. उफ्फफ्फ्फ़”
“अच्छा फिर चुपकसे प्यार करना चाहती हो .. रौशनी कुछ न बोली बस शरमाते हुए रमेश के साइन में अपने चेहरे को छुपाई. रमेश ने रिक्शा के साइड के कर्टेंस खोल दिए और अब अंदर जो हो रहा हाँ बहार से कोई नहीं देख पाएगा.. और रमेश फिर से रौशनी की चूचियों को उसके साड़ी ब्लाउज के ऊपर से दबाने लगा .. अब रमेश गुटका चबा रहा था .. वह रौशनी को चूमने आगे बढ़ा तोह रौशनी ने उसके अपने होठों को अपने हाथों से धक् ली.
“उफ़ रमेश जी अआप .. आप गुटका खा रहे हो .. उफ़ ऐसे कैसे चूमोगे उफ्फ्फ्फ़ .. ममम नहीं ..”
“तोह क्या हुआ .. उसमें के बुराई हैं .. उफ़ मेरी जानू रहा नहीं जा रहा हैं चूमने दो तुम्हारे गुलाबी होठों को ..”
“मम नहीं उफ्फ्फ रमेश जी ….” लेकिन रौशनी उसे रोक नहीं पायी .. रमेश ने रौशनी के हाथों को हटाया और अपने गुठके से भरे होठों को उसके गुलाबी होठों के पास लाने लगा .. रौशनी की गर्मी काफी बढ़ गयी थी अब वह नहीं रोकना चाहती थी खुद को .. फिर दोनों के होठों का मिलान हो hi गया .. रमेश के गुठके से स्टैनेड होठं अब रौशनी ी गुलाबी होठों से भीड़ गए और जोरों से भीड़ गए और फिर दोनों चुम्बन में मग्न हो गए … रौशनी की गर्मी काफी बढ़ रही थी और वह भी रमेश का साथ देने लगी .. उसे चूमने लगी उसके बालों पर अपने हाथों को फेरने लगी … रमेश के गुठके से स्टैनेड होठों से वह रौशनी की गुलाबी होठों को चबाने लगा .. और उसकी मुँह में अपनी जीभ दाल दी और रौशनी के मुँह की जीभ का रास पीने लगा .. उसका गुटका अब रौशनी के मुँह मं चला गया और दोनों बड़ी गहरी चुम्बन में लग गए .. रौशनी के हाथों को रमेश ने अपने हाथों में लिया और पानी क्रॉत्च क्षेत्र पर ले गया .. उसका हथ्यार मोटा हो गया था और उसके बुल्गे के स्पर्श से hi रौशनी की बूत पानी छोड़ने लगी..
रमेश ने अपनी ज़िप खोली और रौशनी के आहतों को अंदर गाइड करने लगा .. उसने आज चड्डी नहीं पहनी थी इसीलिए रौशनी एक हाथों में उसका मोटा लोढ़ा साइड से चला गया .. रौशनी उस इ चुम रही थी और निचे उसके लोडे को अपने नाज़ु मुलायम गोर हाथों से सहलाने लगी … उसकी गर्मी की आग बहुत बढ़ रही थी और उसकी बुर से काफी रास बह चूका था .. वह रमेश के मोठे लोडे को एक हाथस इ रगड़ने लगी और ऊपर उसकी गहरी सी चुम्बन में लगी रही … रामश का लोढ़ा काफी सारा प्रेकम चोर रहा था जिसने रौशनी के हाथों को वेट करि .. उस एहसास से तोह रौशनी की बुर और रास छोड़ने लगी..
रमेश फिर रौशनी की साड़ी के पल्लू को साइड में किये उसकी दूधियों को ब्लाउज के ऊपर से दबाने लगा .. फिर अपना एक हाथ ब्लाउज में डाला उसकी चुकी दबाने लगा .. रौशनी ऊपर चुम्बन में लगे मम फफम्फम्फम्फ की आवाज़ hi णिअक पायी … रमेशने रोशन ी की एक चुकी उसके ब्लाउज से निकली और उसकी चुकी कास कास कर दबाने लगा .. जितने जोरों से वह उसकी चुकी दबा रहा था उसी जोर से रौशनी भी उसके लोडे को दबाने लगी.. दोनों भूल गए थे की वह रिक्शा में थे कही रास्ते पर साइड में रुके हुए न की बिस्तर पर … रमेश फिर अपने हाथों को पीछे ले जाकर रौशनी की ब्लाउज को उन्हुक करने लगा ..
रौशनी उस एहसास से चुम्बन तोड़ी और बोली .. “उफ़ रमेश जी क्या कर रहे हो मम उफ्फ्फ्फ़ ..”
लेकिन रमेश ने न सुनी और फिर से रौशनी के होतोहं पर पाने होतोहं को टिका दिया और चूमने लगा .. अब उसने सब हुक खोल दिए और झट से ब्लाउज निकल दिया .. रौशनी के कुछ समझने से पहले .. उसकी चुकी तोह ब्रा के बहार hi थी और अब दूसरी भी बहार निकल उसे रमेश दबोचने लगा … "उफ़ क्या चूचियां हैं उफ्फ्फ ममममम बहुत मिस कर्रा हूँ इन्हे अहह उफ़ मेरी जान … मेरी डार्लिंग उफ्फ्फ फमास्ट गोरी सी और मुलायम चूचियां हैं तेरी अहह ममममम…
“उफ़ रमेश जी छोड़िये न उफ़ फममम नहीं ..” रमेश फिर से अपने हतोहं को रौशनी के होठों पर टिका दिए और उसे चूमने लगा .. रौशनी के आँखें बंद हुयी और वह रमेश के चूमों का और भी जोरों से साथ देने लगी .. रमेश रौशनी की चकहियों को दबाते गया और उसके निप्प्लेसे से खेलते रहा .. रौशनी की बुर तोह अब बहुत रास छोर चुकी थी .. उसकी गर्मी बहुत बढ़ गयी थी.. रौशनी ने भी रमेश के लोडे से अपने हाथों को हटाई नहीं थी .. उसके मोठे लुंड से खेलती रही दबती रही और रमेश भी आह उफ़ मम करता रहा और उसकी आह िफ्फ़ अब रोशनीकी ममम उफ्फ्फ की सिसकियों से मेल करने लगी और अब तोह दोनों बिलकुल hi भूल गए थे वह किसी घर में नहीं थे बल्कि रिक्शा में बीच रास्ते कही थे. ऐसे hi 5 मं तक दोनों की मस्तियाँ चली और फिर रमेश ने चुम्बन तोड़ते हुए रौशनी की सर को पकड़ अपने लोडे के तरफ ले जाने लगा .. रौशनी की हवस इतनी बढ़ चुकी थी की वह कुछ न बोली और अपने मुँह को रमेश के गर्म लोडे के पास पायी .. उसे वह चूमने लगी .. उसके लोडे का टोपा चाटने लगी … रमेश ने उसके सर को हॉक्स से पकडे रखा था और अपना लोढ़ा रौशनी से चुसवा रहा था ..
उसकी चुच्चियों से अपने हाथों को हटाए बिना उन्हें निचोड़ रहा था दबोच रहा था .. रौशनी अब रमेश के लोडे को चूस रही थी उसकी चूचियां उनके हाथों में डाब रही थी और उसकी बुर काफी रिस रही थी और ढेर सारा पानी चोर्ने लगी थी …रौशनी और जोरों से रमेश का लोढ़ा चूसने लगी , चाटने भी लगी … रमेश उसकी निप्पल्स को दबाता रहा और रौशनी आउच करि … वह सर ऊपर उठाने लगी की रमेश ने उसके सर को पकड़ अपने लोडे को अब रौशनी के मुँह में hi पेलने लगा .. रौशनी अब बस रमेश के लोडे को चूसने में मग्न थी .. रमेश उसकी मुँह में अपने लोडे को पेलते रहा और रौशनी उसके मोठे लोडे को चुस्ती रही .. पहली बारे चूसी थी उसके मोठे लोडे को तोह वह आधे तक hi पहुँच पायी थी .. लेकिन अब उसके लोडे के जड़ तक वह पहुंची और चूसने लगी .. उसके मुँह से लार टपकने लगी जो रमेश के लोडे को और चिकना कर रही थी जिससे रौशनी सके लोडे के जड़ तक चूस पर रहित hi .. रमेश जोरों स रौशनी की छकःकिओयों को दबोचने लगा .. अब उससे रहा नबी जा रहा था और वह अपने लोडे से माल निकलने के चार्म सिमा पर पहुँच गया … उसने रौशनी के सर को और जोर से पकड़ लिया और अपने लोडे को उसके मुँह में और पेलने लगा .. कुछ और सेकंड बाद अब रमेश को रहा नहीं जा रहा था .. वह झड़ने वाला था … उसका गृप रौशनी के सर पर लूसे हुआ और रौशनी ने अपने मुँह को उसके लोडे से निकलते हुए उसके लोडे को दबाने लगी और कुछ पलों में रमेश के मुँह से एक बड़ी अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ मममममममम निकल गया ुर उसके लोडे से उसका लावा झरने लगा … किसी वोल्केनो जैसे उसके लुंड से उसका लावा ेरुपत होने लगा … उसका सारा सफ़ेद माल रौशनी के हाथों पर फ़ैल गया …
रौशनी बिना सोचे उसकी ऊँगली चाटने लगी जिस पर रमेश के लुंड का गधा सफ़ेद माल लगा हुआ था ..
“ओह गॉड रौशनी उफ्फ्फ मममम क्या मज़्ज़ा आया आज अहह उफ्फ्फ तुम हो hi बड़ी मस्त चीज़ .. उफ्फ्फ्फ़ क्या हो तुम मममममम चूस चूस कर hi माल निकल दिया मेरे लोडे से अहह उफ़ पहली बार ऐसे हुआ हैं अह्ह्ह ममममममम.” रौशनी को एहसास हुआ की वह कहा हैं.. अभी अभी क्या कर रहे थे और वह चुप बैठी ..
“उफ़ रमेश जी आपने आज उफ्फ्फ …. यह आपने फिर से मुझे बहका दिया उफ्फ्फ्फ़ … हे भगवान् उफ्फ्फ लेट हुआ हैं उफ्फ्फ चलिए जाना होगा मुझे .. चलिए रमेश जी जल्दी करिये …”
रमेश बहार गए और रिक्क्ष्व में पानी था उससे अपने लोडे को साफ़ कर वापस रिक्शा में बैठ वह निकल गए. अब दोनों से कुछ बातें हो नौई रही थी.. रौशनी बहार देख रही थी ,, अभी जो भी हुआ उसके बारे में सोचते हुए उसकी गर्मी अभी भी शांत नहीं हुयी थी और बढ़ चुकी थी ..
अब रौशनी को तोह आज शाम को असलम की भी बेगम बनना था .. असलम अपने घर में था .. वह तोह आज पूरा का पूरा मूड में था की वह आज आखिर कार रौशनी को निचोड़ निचोड़ कर उससे ढेर साड़ी रात भर मस्ती करने वाला था. आअज रात वह रौशनी के साथ उसे अपनी बेगम बना कर , सुहागरात मानाने के सपने देख रहा था.