- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 143,726
रौशनी के बदन पर असलम का माल गिरा हुआ था .. वह उसे साफ़ करने बाथरूम चली जाती हैं और नाहा कर बस एक तोलिये को लपेटे बहार कमरे में आ जाती हैं.
तभी असलम अभी हुयी चुदाई के बाद बाथरूम चले जाता हैं पिशाब करने.
कमरे से जाते जाते असलम रौशनी की चूचियों को दबोचता हैं और रौशनी भी बे झिझक असलम के लोडे को दबोचती हैं..
अब रौशनी उस कमरे मई ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठी अपने होंठो पर लिपस्टिक लगा रही थी. उसे पता था की असलम उसे रात भर छोड़ने वाला हैं .. वह असलम को और गरम करना चाहती थी इसीलिए जरा सा सवारने लग जाती हैं .
रौशनी कड़ी हो जाती हैं और अपने तोलिये को अपने मुलायम बदन से निचे फिसलने देती हैं ..
वह अब सामने के टेबल पर आईने को अपने गदराये हुस्न को ऊपर से निचे देख , निहार रही थी और मन hi मन सोच रही थी, (मई अब भी कितनी सेक्सी और कामुक दिखाई देती हु ) और रौशनी मिरर मई निहारती हुई अपनी मुलायम और गदरायी चूचियों पर अपने हाथ फेरने लगी फाई मिरर के
सामने अपने मस्ताने फिगर को निहारते हुए वह कभी अपनी चूचियों को अपने हाथो से
उठा उठा कर देखती कभी अपनी गहरी नाभि और अपनी फिट वाली पेट को देखती हैं और फिर रौशनी अपनी पहली हुई छूट पर हाथ फेरते हुए, सोचती हैं (है मेरी छूट कितनी पहली हुई है, वाकई में मेरा लाजवाब बदन हैं जो नग्न इतना गजब दिख रहा था ) रौशनी की जांघें, उसकी पेट का उठाव और मोठे मोठे चूचियां और उन पर एक लम्बी लकीर की गहराई उसके हुस्न को बड़ा मादक बना रहे थे.
फिर रौशनी पीछे घूम कर अपनी मोती चूतड़ों को मिरर में निहारने लगी और वह अपनी उभरी हुयी चूतड़ों को मिरर के सामने और उभर कर देखने लगी ( उफ्फ्फ्फ़ है कितनी बड़ी और मोती गांड है मेरी, तभी तो इस मतवाली गांड को देख कर असलम जैसा बुद्धा भी मेरी गदराई गांड मरने को तड़प रहा होगा उफ्फफ्फ्फ़ आज तोह मेरी गांड की चुदाई होनी निश्चिंक्ट हैं और में भी यही चाहती हूँ),
असलम वापस कमरे में आता हैं और रौशनी को नग्न देख बस एक लाल लिपस्टिक लगाए चमके हुए देख उसके लोडे में जान आने लग जाती हैं और वह बिना कण्ट्रोल किये उसे अपने बाँहों में भर लेता हैं .. रौशनी भी रेस्पोंद करती हैं और अब दोनों एक दूसरे के बाँहों में बाहें डेल एक दूसरे के होठों को चूमने लगते हैं और एक गहरी चुम्बन में लग जाते हैं .. रौशनी के हटोहों को चूमते हुए असलम अपने हाथों से उसकी चूतड़ों को जोरों से मसलता हैं और रौशनी चूमों के बीच बीच hi सिसकियाँ मारने लग जाती हैं .. इससे असलम और गरम होता हैं और उसका कला मोटा लोढ़ा खड़ा होने लग जयते हैं जो अब रौशनी के गोल आकर वाली नाभि से टकराता हैं .. उसके लोडे से ऑरेकम निकलते हुए रौशनी की नाभि को गीली करने लग जाता हैं और दोनों लम्बी और गहरी चुम्बन में लग जाते हैं … असलम फिर से रौशनी के चूतड़ों को मसलता हैं ..
“उफ़ रुकसाना ममम क्या चूतड़ हैं तेरे .. उफ्फ्फ पहले से भी और मस्त और गोल हैं .. उफ्फ्फ इतनी मुलायम .. मन करता हैं मसलता hi राहु मममम”
उफ़ असलम मियाँ आपके हाथों से मेरी चूतड़ों को मसलते हुए अलग hi मज़्ज़ा आरा अहइँ उफ्फ्फ मममम अब तोह यह आपके hi हैं जितना चाहे उन्हें मसलिये … ममम उफ्फ्फ्फ़”
असलम ने कमरे में तेल की डिब्बी लायी होती हैं और उसे अपने हाथों में लिए अब तेल से रौशनी की चकहियों की मालिश करते हुए वह उसकी चूचियों को हाथों में लिए मसलता हैं .. और उसके निप्पल्स मुँह में लिए चुस्त हैं “उफ्फ्फ रुकसाना बेगम तुम्हारी इन चूचियों ने मुझे कब से दीवाना बना दिया हैं ममम क्या मुलायम और रसीली चूचियां हैं तेरी ममममम दुकनिया की सबसे मस्त चूचियां हैं मेरी बेगम की मममम ..”
रौशनी भी असलम के सर को पकड़ते हुए उसे अपनी चकहियों पर दबती हैं .. “आह मियाना ममम चूसिये न उन्हें मम आप hi की हैं ममम आपके मुँह में लीजिये और चूसिये ममम एस अह्ह्ह उफ्फ्फ मममम”
रौशनी की चूचियों की निप्पल्स पूरी तन कर कड़ी थी मनो दो पहाड़ियों की शिखर हो .., और असलम अब दोनों निप्पल्स को मुँह में लिए चुस्त हैं और हलके से दबाता हैं .. रौशनी की गर्मी बहुत बढ़ रही थी और वह अपनी बड़ी मुलायम चूचियों को पकड़े अपनी चकुचिओं को उसे खिलाती हैं… और असलम भी बड़े मज़्ज़े से उसे चूसते जाता हैं,.
अब फिर वह रौशनी को उसके पेट पर बिस्तर पर लिटा देता हैं और तेल की बोतल उठाकर बिस्तर पर बैठ जाता हैं ,रौशनी अपने दोनों घुटने मोड पड़ी हुई थी और उसकी मदमस्त चूचियां उसकी सांसो के साथ ऊपर नीचे हो रही थी. अब असलम तेल लेकर रौशनी की मस्तानी गोरी चूतड़ों पर लगाने लगा, और रौशनी की नंगी टैंगो को अपने हाथो से सहलाने लगा. रौशनी इस सब का आँखे बंद किये मज़ा ले रही थी उसकी छूट रास से भीगने लगी थी. असलम अब जोरों से रौशनी की जांघों को दबोचने लगा और बीच बीच में रौशनी की छूट को दबोचता हैं और फिर उसकी जांघों को दबोचने लगता हैं … रौशनी की गर्मी बढ़ती जा रही थी और वह अपनी दोनों जांघों को और फैला देती हैं .. असलम रौशनी की चूतड़ों को फैलाई हुए देख कण्ट्रोल नहीं कर पता और अपनी नक् ले जाकर रौशनी की पहली हुई बुर को सूंघने लगता है. रौशनी की ुबाहृ हुयी मटकती चूतड़ों को देख असलम सोचता हैं (उफ्फ्फ्फ़ आज रौशनी को ऐसा मज़ा दूंगा की वह खुद कहने लगेगी असलम मियां अपनी बेगम की गांड मई अपना मोटा लोढ़ा दाल कर मुझे खूब कास के छोड़ दे.
असलम की मालिश जारी रहती हैं और वह अब अपने हांथो मई तेल लेकर रौशनी की कमर पर तेल लगाने लगता है और धीरे धीरे अपनी उँगलियों को रौशनी की चूतड़ों के बन्स के बीच मई चलने लगता है .. फिर अपने अंगूठे को तेल में भिगोए एकदम से रौशनी की गांड के छेद में उतरने लग जाता हैं .. रौशनी इससे एकदम से चौंकती हैं लेकिन उसे पता था की यह बात तोह होने hi वाली थी .. असलम भी धीरे से अपने अंगूठे को रौशनी की गांड में अंदर बहार करने लगता हैं और आगे रौशनी बड़ी सी बड़ी सिसकियाँ मारती रहती हैं .. हे भगवान् उफ्फ्फ मेरी गांड में आपने उफ्फ्फ ममममम हाहहननन मम एससससस>”
असलम इस सब में बड़ा माहिर था और वह इस तरह मालिश करता है की उसकी ऊँगली रौशनी की गांड की गहरी मई सरकने लगता है और रौशनी बस आह आह करने लगती है और असलम अपनी ऊँगली जो अभी भी रोशनीकी गांड के छेद में फांसी हुयी थी - उसपर और तेल लगता हैं और अपने अंगूठे को रौशनी की गांड की गहराई मई ऊँगली थोड़ा दबा कर नीचे की और प्रेशर देता है जिससे उसका अंगूठा अब रौशनी की गांड के छेड़ मई पूरी अंदर तक सरक जाती है और रौशनी लेते हुए बॉइस्टर के बेडशीट को जकड़े हुए बस बड़ी सी बड़ी ाहुफ्फ मममम ऊईम्माए की सिसकियाँ मारती रहती हैं. असलम भी रौशनी के गांड के छेड़ पर अपने अंगूठे का दबाव देता हुआ अब उसके अंगूठे को अंदर बहार करने लगता हैं मनो अंगूठे से रौशनी की गांड की चुदाई कर रहे हो.
असलम बस रौशनी की गोरी गोरी गांड देखते हुए और पागल हो जाता है और खूब सारा तेल रौशनी की चिकनी गांड पर दाल कर अब अपने दोनों हांथो से रौशनी की चूतड़ों को दबोच दबोच कर मसलने लगता है और वहां रौशनी बस आह आह करके सिसकियाँ hi मारने में लुफ्त रहती हैं.
असलम फिर से रोशननि के गांड के छेड़ को सूंघता है और पागल हो जाता है और अपनी जीभ से रौशनी की गांड के छेड़ को चाटने लगता है और रौशनी बस आह आह करने लगती है. और दो बार रौशनी की गांड की जीभ से चाटने के बाद असलम फिर से अपनी ऊँगली रौशनी के गांड के छेड़ मई पेल देता है जिससे उसकी ऊँगली रौशनी की गांड मई आधी से ज्यादा उतर जाती है. असलम बस मन hi मन सोचते हैं की (आअज तोह इस घोड़ी की गांड मर मर के लाल कर दूंगा.)
असलम अपनी ऊँगली को रौशनी की गांड में रखते हुए उसके साइड में आ जाता हैं और उसके लोडे को रौशनी झट से पकड़ लेती हैं और वह और भी जोश मई आकर असलम के लुंड के बॉल्स को अपने हाथो से सहलाते हुए असलम के मोठे लोडे के गुलाबी सुपडे को चूसने लग जाती है
असलम फिर तेल मई अपनी इस बार दो उँगलियों को डुबो कर रौशनी की गांड मई पूरी भर देता है, थोड़ी देर बाद असलम रौशनी को फिर से घोड़ी बना कर अपने लोढ़ा पर ढेर सारा तेल लगा कर रौशनी की मोती गांड मई अपना लोढ़ा लगा कर एक तगड़ा झटका मरता है और इस हमले से रौशनी के मुँह से एक चीख hi निकल जाती है .
इतना सारा तेल लगा कर जो लोढ़ा अंदर घुसाया था असलम ने रौशनी की गांड में , अब वही असलम आधे से ज्यादा रौशनी की गांड मई फँस जाता है.
रौशनी चिहक्ति हुयी सिसकियाँ मारती हुयी .. “उफ्फ्फ असलम मममम दर्द कर रहा है अपना लोढ़ा बहार निकल ले … उफ्फ्फ मममममम आआआआह आआआआह.
असलम फिर कहता हैं “ ठीक है रुकसाना अभी निकलता हु लेकिन आप थोड़ा अपनी गांड को ढीली करो न. रौशनी असलम की बार मान कर अपनी गांड को ढीली करती है लेकिन असलम उसका लोढ़ा रौशनी की गांड से बहार निकलने के बजाय फिर से एक कास कर एक धक्का देता हैं जिससे उसका लोढ़ा रौशनी की गांड मई और घुस जाता है और रौशनी “ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फ़ मममम मर गई रे उईईई माआआ आह आह” चीखने लगती हैं. असलम अब अपना लोढ़ा धीरे धीरे आगे पीछे करने लगता है रौशनी आह आह मत कर beta....aa आह आह फिर असलम अपने लोढ़ा को एक डैम झटके से बहार तक खींचता है और फिर से एक और तगड़ा झटका रौशनी की गांड मई मर देता है और अबकी बार उसका लोढ़ा एक hi झटके मई अब रौशनी की गांड के और गहराई में चला जाता है. रौशनी उस झटके के साथ hi बीएड पर पेट के बल पूरा गिरती है और असलम भी उसकी गांड के ऊपर गिर जाता है जिससे असलम का लोढ़ा पूरा रौशनी की गांड मई बहुत गहराई तक चला जाता है और रौशनी की आवाज धीमी हो जाती है. असलम समझ गया था की उसे अपने जोश को काबू में लाना होगा … इसलिए अब इस मुद्रा में कुछ देर असलम अपना मोटा लोढ़ा रौशनी की गांड मई फसाये रौशनी के ऊपर पड़ा रहता है और झटके मारना बंद कर देता हैं ताकि रौशनी उसके लोडे को अपनी गांड में लिए एडजस्ट कर सके.
असलम फिर रौशनी के बदन नीचे हाथ लेजाकर उसके चूचियों को पकड़ कर दबाने लगता है और अब धीरे धीरे लेकिन गहरे धक्के रौशनी की गांड मई मरते हुए रौशनी की मोती गांड को छोड़ने लगता है. असलम कुछ 5 मं ऐसे चुदाई करता हैं और रौशनी अब असलम के मोठे लोडे को अपनी गांड में लिए एडजस्ट होने लगती हैं और उसकी आवाज़ें और कंट्रोल्ड और सिसकियाँ और प्लेअसुरे में निकलने लगती हैं.
रौशनी अब अपनी गांड की चुदाई के मज़्ज़े और लेने लगश हैं . असलम फिर साइड से रौशनी के गोर गलो को चूमने लगता है, और रौशनी के मुँह से धीरे धीरे से मस्ती वाली सिसकियाँ निकलती हैं. असलम रौशनी की गांड छोड़ते छोड़ते “उफ्फ्फ रुकसाना मेरी बेगम ममम, कैसा लग रहा है आपको मेरा लोढ़ा तुम्हारी गांड में फंसा हुआ …” , रौशनी सिसकियाँ और मारती हुयी “उफ्फ्फ मममममम अह्ह्ह हैं मममम अच्छा लग रहा है मियां … आप अब और जरा तेज़ी से छोड़िये मेरी गांड ममम बहुत मज़्ज़ा आ रहा हैं अह्ह्ह ममममम उफ्फ्फ मममममम.”
कुछ दिएर बाद असलम ने रौशनी को उठा लिया और फिर बिस्तर पर उसके पीठ पर रख उसके लोडे को रौशनी की गांड के छेद पर रब करने लगा .. अब वह आगे से छोड़ने वाला था रौशनी की गांड … रौशनी की आँखें हवस भरे नज़रों से असलम को देख रही थी .. असलम अब रौशनी की टाँगूं क बीच था और मोटा लोढ़ा रौशनी की टाइट गांड के छेद पर रख इस बार आराम से अंदर ज़ोर देकर अपना लोढ़ा रौशनी स्वीट बहुत टाइट गांड के अंदर चला गया.
रौशनी वहां मज़्ज़े में सिसकियाँ लेती हुयी चुद रही थी असलम के लोडे से उसकी गांड में. अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ असलम मियां ममममम आराम से नहीं अब ज़ोर से छोड़िये मेरी गांड अहह उफ्फ्फ मम असलम मियानन्णन”
रौशनी की गांड मैं अभी असलम का लोढ़ा पूरा भी नहीं गया था. असलम ने फिर अपना लोढ़ा रौशनी की गांड के अंदर बहार करना शुरू कर दिए . वह अपने लोडे को थोड़ा सा बहार निकलता और फॉर से ी दोबारा रौशनी की गांड में दाल देता.
असलम ने रौशनी के हिलते चूचियों को मुँह में भर कर चूसने लगा और रौशनी क पूरे जिस्म पे हाथ फेरने लगा.
“उफ़ असलम मममम एस ममम और छोड़िये मेरी गांड ममम अह्ह्ह्ह ममम हे भगवान् मस्त फीलिंग हैं उफ्फ्फ ममममम ममम नहीं रुको नहीं थोड़ा और ज़ोर दो आह हाँ मियंन्त्र ऐसे hi ज़ोर दो और छोड़िये मुझे ममममम और मेरे निप्पल्स भी सूचक करिये मियंन्त्र उफ्फ्फ्फ़ ूऊई ममममआ मममम मुझे मज़ा आरा है ाः में ममममम और छोड़िये मेरी गांड मममम”
असलम आराम आराम से अपना लोढ़ा रौशनी के गांड में हिलता रहा और कुछ hi दिएर मैंवह रौशनी की निप्पल्स को भी सूचक करने लगा.
क़रीब 10 मिनट बाद असलम ने अपने होठों को रौशनी की गुलाबी होठों पर रखे और लूँ को आराम से उसकी गांड में हिलता रहुआ उसे जोरों से चूमने लगा .. रौशनी भी अपनी तरफ से पूरा चुम्मे का साथ दे रही थी ..
असलम ने फॉर अपने लोडे को बहार निकल क फिर पहले से कुछ ज़ियादा hi ज़ोर दिए और इस बार उसका लोढ़ा रौशनी की छोटी टाइट गांड को चीरता हुआ फरता हुआ अंदर घुस गया.
“उफ्फ्फ असलम मिन्न अहह मम ऐसे hi छोड़िये मेरी गांड आठ मम उफ्फ्फ ममम क्या छोड़ते हो मियां आआह्ह्ह ममम मज़्ज़ा आ रहा हैं बहुत ममममम एस सीएस अह्हह्ह्ह्ह.
असलम की रफ़्तार बढ़ती गयी और रौशनी की सिसकियों की गूंज भी बढ़ती गयी .. दोनों एक दूसरे की चुदाई में खो गए थे .. कुछ और देर बार रौशनी को मूतने की फीलिंग आयी और उसने असलम को यह बात बता दी. असलम उसकी चुदाई रोकना नहीं चाहता था तोह उसने एक तरकीब बनायीं.
असलम मुशकरते हुए रौशनी को अपनी बाँहों में बाहर उठ खड़ा हुआ.. ….रोशननि ने अपने दोनों पैरों को असलम की कमर में फसा के … और असलम रौशनी की दोनों छुटद को दोनों हाथ के सहारे पकड़ लिया ...और रौशनी ने भी अपनी दोनों हाथों को मिला के असलम के गले एक इर्द गिर्द दाल उसे पकड़ लेती है...
इसी पोजीशन में रौशनी अपनी गांड से असलम के लोडे को दबा रही थी...
“उफ्फ्फ अस्काम मियां मममम देखो कैसे दिन ला दिए हो मेरी गांड की छोड़ छोड़ के ऐसी हाल क्र दिए हो की अब मूतने तक खुद चल के नहीं जा सकती..
असलम बोलै “आआह मम रुकसाना डार्लिंग ऐसा सब दिन कहाँ होता है असली मज़्ज़ा तो यही है..”
“ हाँ असलम मियां ऐसे मज़्ज़ा तोह बरसो में नहीं दी किसी ने .. मममम सच में बहुत मज़्ज़ा आ रही है...
असलम अपनी गोदी में hi रौशनी को लिए बाथरूम पहुँच जाता है...
“उफ़ असलम मियां ममम मुझे थोड़ा निचे करो न उफ्फ्फ बहुत जोर की लगी है...
असलम मुस्कुटराते हुए - “नहीं जानू निचे उतरने का कोई ऑप्शन नहीं..”
रौशनी भी असलम को देख मुस्कराते हुए.. “अच्छा फिर ऐसे हिन् karungi..mein ठीक हैं न .. आपके ऊपर आएगी पिशाब ः.”
“हाँ रुकसाना बेगम तुम्हे ऐसे hi करना होगा .. .”.
उफ़ असलम मियां ाः मममम अब बर्दास्त नहीं हो रहा है ...
रौशनी ऐसे बोलती हुयी पिशाब करने लग जाती हैं … जो अब असलम के लोडे पर गिरने लगती हैं.
असलम भी रौशनी की आँखों में देखते हुए अपनी लुंड पे गर्म पेशाब महसूस करते हुए “ाआअह रुकसाना बेगम कितना अच्छा लग रहा है ...असली मज़्ज़ा तो इन सब में है ..” बोल रहा था
असलम फिर अपनी हाथ से रौशनी की गांड को पीछे धकेलता हैं तजिससे रौशनी की बुर से निकलती पिशाब की धार उसके लुंड पे नहीं आ रही थी ..
ऐसे इरोटिक सन था जब रौशनी की गोरी झंघ से होते हुए पेशाब निचे गिर रहा था ......
असलम फिर इसी तरह अपने गोदी में रौशनी को रखते हुए... 2 जग पानी बिलकुल लुंड और बुर के बिच में दाल देता है और वहां लगी हुई पेशाब बिलकुल साफ़ हो जाती hai....fir अपनी गोदी में रखे हुए रौशनी को छोड़ने लगता हैं …. वह बाथरूम के वाल पर उसे सत्ता के अब उसकी गांड की चुदाई करने वापस शुरू करता हैं और जोरों से उसकी गांड की ठुकाई करता हैं और रौशनी बस अहह उफ़ मम की सिसकियों की गूंज hi निकलती रहती हैं.
उफ़ असलम मियां ममममम ओह्ह्ह्ह आप तो मुझे आसानी से उठा लिए हो वह भी इतनी वक़्त के लिए उफ्फ्फ्फ़ में तोह पुरे 62 कग हूँ… उफ्फ्फ मियां अआप बुढ़ापे में भी इतने स्ट्रांग हैं ..” और रौशनी असलम को देख मुस्कुराती हैं और आँख मारती हैं.
“ अब ऐसी मस्त गदराई बेगम को अपनी गोदी में लिए हुआ हूँ तोह और ताक़त लग रही हैं.. ममम तेरी इस गांड को छोरना नहीं चाहता मममम”.
रौशनी मुस्कुराते हुए “अच्छा असलम मियां मई गदराई हूँ वो कैसे..
“रुकसाना बेगम तुम तो ऊपर से निचे तक गदराई हो “ गांड को मसलते हुए असलम बोलता हैं “ उफ्फ्फ ममम और सबसे ज्यादा तो तुम्हारी गांड गदराई है..
असलम मियां वो तो आप अपने लोडे से मेरी गांड को पेल पेल के और बड़ी बनाओगे उफ्फफ्फ्फ़”
ऐसे बातें करते हुए असलम और रौशनी बैडरूम तरफ चलते है और बीएड के पास पहुँचते हुए असलम अब रौशनी को बीएड पे लिटाते हुए बोलता है “ अब तोह बीएड पर रख कर तेरी गांड और भी मस्ती में छोडूंगा ..”
रौशनी असलम के आँखों में आखें दाल बड़े ऐटिटूड के साथ कहती हैं “ सुनिए मेरे असलम मियां , अगर आप मुझे रात भर छोड़ोगे तब भी मेरी छूट और गांड आपका मोटा लोढ़ा झेल legi..samjhe मियां.”
असलम फिर से रौशनी की गांड में अपने लोडे को पेलते हुए “ाआअह मम रुकसाना बेगम उफ्फ्फ्फ़ ममममम यही ऐडा पे मई मरता हूँ तुमपर … अब ये ले मेरा लोढ़ा तेरी टाइट गांड में …”
असलम अब धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ने लगता है और रौशनी अपने पैरो को थोड़ा और फैला देती है, इससे अब असलम के धक्को मई जैसे जैसे तेज़ी आती जाती है और रौशनी भी मस्ती मई सिसकियाँ मरने लगती है. ऐसे अब करीब आधे घंटे तक असलम रौशनी की मोती गांड मर मर कर लाल कर देता है उसका लोढ़ा रौशनी की मोती गांड मई सटासट सटासट आने जाने लगता है. असलम अपना हाथ रौशनी की छूट के नीचे लेजाकर छूट मई दो ऊँगली दाल कर और कास कास कर रौशनी की गांड मरने लगता है. रौशनी की गांड की चुदाई का एहसास और अपनी छूट की खिलवाड़ का एहसास .. ऐसे दोगुने मस्ती वाले एहसासों से अब. रौशनी का मज़ा दोगुना हो जाता है और वह चिल्लाना बड़ा काम और प्यार की सिसकियाँ और लगाने लगती है. “उफ्फ्फ मममम असलम मियां आह्हः ममम छोड़िये और जोर से छोड़िये आह आह मममम उफ्फ्फ्फ़ मममम हाँ एस ममममम आह और जोर से छोड़िये मियां मममममम. अपनी रुकसाना बेगम की गांड खूब कास कास कर छोड़ और छोड़ जोर से छोड़ मियंन्त्र आह आह सी सी आह उफ्फ्फ हे भगवान् क्या सुखद फीलिंग हैं मेरी गांड की चुदाई तुम्हारे जैसे विद्वान से अह्ह्ह उफ्फ्फ मममममम.” रौशनी को ऐसे बातें करते देख और सिकियाँ मारते देख असलम में एक नया जोश आ जाता हैं और फिर असलम एक करारा झटका मरता है और फिर से रौशनी आह्ह्ह्हह उईईई मायआ मममम उफ्फ्फ करके बीएड से चिपक जाती है और अब इस बार बेझिझक असलम रौशनी की गांड की गहराई मई अपना लोढ़ा दबा दबा कर उसकी गांड मारता हैं और रौशनी भी और मज़्ज़े लेते हुए असलम के मोठे लोडे से चुदती हुयी सिसकियाँ मारती हुयी बेडशीट पकड़ी हुयी मज़्ज़े लेने लग जाती हैं …
असलम और रौशनी की गांड चुदाई अब एक घंटे से ऊपर चल रही होती हैं और रौशनी आह उफ्फ्फ मम करते हुए जहर जाती हैं और असलम का भी लोढ़ा अपना माल छोड़ने तैयार हो जयते हैं और वह अपने लोडे को रौशनी की गांड से बहार निकलते हुए अपना सारा सफ़ेद गाढ़ा मॉल रौशनी की चूतड़ों पर छोर देता हैं और रौशनी के चूतड़ उसके लुंड के सफ़ेद माल से भर जाता हैं.
दोनों फिर अगल बगल लेते हुए हफ़्ते हुए लेट जाते हैं. रौशनी फिर से बाथरूम जाकर अपने गांड पर लगे असलम के गाढ़े माल को वाश करती हैं और फिर दोनों अगल बगल एक दूसरे के बाहों में लेट जाते हैं. 15 मं के रेस्ट के बाद असलम रौशनी के रसीले होंठो को अपने होंठो से दबा कर एक गहरा चुम्बन लेता है जिससे रौशनी भी आँखे खोल देती है और असलम उसे अपनी बांहो मई लेकर उसके चेहरे को अपने बिलकुल करीब लता है और एक और गहरा चुम्बन उसके होंठो पर कर के उसकी आँखों को एक कामुक नजर से देख कर मुस्कुराता है तोह गीता को एक पल के लिए शर्म आ जाती है और वह अपनी गर्दन झुका लेती है असलम के साइन मई अपना मुँह छुपाने लगती है.
असलम अब रौशनी के चेहरा ऊपर उठता है और ओके गलो पर अपने गलो को हलके हलके रगड़ता हुआ रौशनी के कण मई कहता हैं “उफ़ रुकसाना बेगम मममममममम इतना शर्मा क्यों रही हो, तेरी जैसी गदराई और जवान माल ……”
असलम कुछ और कहने से पहले रौशनी अपने सर को उठाते हुए असलम के आक्न्हों में आँखें दाल अपने रसीले होंठो को असलम के होठों के करीब लाती हैं और असलम उसके रसीले होठों को अपने मुँह मई भर कर चूसने लगता है. दोनों गहरी चुम्बन में लगे हुए एक दूसरे के बाँहों में लेते रहते हैं और फिर थकन से एक दूसरे के बाँहों में सो जाते हैं.
सुबह रौशनी उठकर अपने कपडे पहनती हैं और असलम के घर से बहार निकलती हैं और ऑफिस के तरफ चली जाती हैं .. तभी …. उसे सामने सलीम दिखाए देता हैं उसके ऑफिस के बहार. रौशनी अब पीछे मुद कर देखती हैं असलम के घर के तरफ , फिर आगे सलीम के तरफ और आखिर में गेट के तरफ जिसके बहार रमेश हैं ..
वह मन में सोचती हैं (उफ्फ्फ रौशनी … मुझे यकीन नहीं हो रहा हैं की में .. में एक शादीशुदा महिला तीन बुद्धों का बिस्तर गरम कर चुकी हूँ .. उफ्फ्फ मैंने जीवन में रोनित को छोर किसी से शारीरिक सम्बन्ध नहीं राखी थी और अब कुछ hi महीनों में तीन बुड्ढों के साथ चुद चुकी हु .. उफ्फफ्फ्फ़ अब क्या करू में .. मुझे तीनो बुद्धों से लगाव भी बहुत हैं … रमेश, असलम और सलीम तीनो ने मुझे शारीरक सुख दिया हैं जो मेरे पति कभी न दे सके . हे भगवान् में यह कहाँ फांसी हुयी हूँ इन तीन बुद्धों के साथ !!!!!!!!
तभी असलम अभी हुयी चुदाई के बाद बाथरूम चले जाता हैं पिशाब करने.
कमरे से जाते जाते असलम रौशनी की चूचियों को दबोचता हैं और रौशनी भी बे झिझक असलम के लोडे को दबोचती हैं..
अब रौशनी उस कमरे मई ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठी अपने होंठो पर लिपस्टिक लगा रही थी. उसे पता था की असलम उसे रात भर छोड़ने वाला हैं .. वह असलम को और गरम करना चाहती थी इसीलिए जरा सा सवारने लग जाती हैं .
रौशनी कड़ी हो जाती हैं और अपने तोलिये को अपने मुलायम बदन से निचे फिसलने देती हैं ..
वह अब सामने के टेबल पर आईने को अपने गदराये हुस्न को ऊपर से निचे देख , निहार रही थी और मन hi मन सोच रही थी, (मई अब भी कितनी सेक्सी और कामुक दिखाई देती हु ) और रौशनी मिरर मई निहारती हुई अपनी मुलायम और गदरायी चूचियों पर अपने हाथ फेरने लगी फाई मिरर के
सामने अपने मस्ताने फिगर को निहारते हुए वह कभी अपनी चूचियों को अपने हाथो से
उठा उठा कर देखती कभी अपनी गहरी नाभि और अपनी फिट वाली पेट को देखती हैं और फिर रौशनी अपनी पहली हुई छूट पर हाथ फेरते हुए, सोचती हैं (है मेरी छूट कितनी पहली हुई है, वाकई में मेरा लाजवाब बदन हैं जो नग्न इतना गजब दिख रहा था ) रौशनी की जांघें, उसकी पेट का उठाव और मोठे मोठे चूचियां और उन पर एक लम्बी लकीर की गहराई उसके हुस्न को बड़ा मादक बना रहे थे.
फिर रौशनी पीछे घूम कर अपनी मोती चूतड़ों को मिरर में निहारने लगी और वह अपनी उभरी हुयी चूतड़ों को मिरर के सामने और उभर कर देखने लगी ( उफ्फ्फ्फ़ है कितनी बड़ी और मोती गांड है मेरी, तभी तो इस मतवाली गांड को देख कर असलम जैसा बुद्धा भी मेरी गदराई गांड मरने को तड़प रहा होगा उफ्फफ्फ्फ़ आज तोह मेरी गांड की चुदाई होनी निश्चिंक्ट हैं और में भी यही चाहती हूँ),
असलम वापस कमरे में आता हैं और रौशनी को नग्न देख बस एक लाल लिपस्टिक लगाए चमके हुए देख उसके लोडे में जान आने लग जाती हैं और वह बिना कण्ट्रोल किये उसे अपने बाँहों में भर लेता हैं .. रौशनी भी रेस्पोंद करती हैं और अब दोनों एक दूसरे के बाँहों में बाहें डेल एक दूसरे के होठों को चूमने लगते हैं और एक गहरी चुम्बन में लग जाते हैं .. रौशनी के हटोहों को चूमते हुए असलम अपने हाथों से उसकी चूतड़ों को जोरों से मसलता हैं और रौशनी चूमों के बीच बीच hi सिसकियाँ मारने लग जाती हैं .. इससे असलम और गरम होता हैं और उसका कला मोटा लोढ़ा खड़ा होने लग जयते हैं जो अब रौशनी के गोल आकर वाली नाभि से टकराता हैं .. उसके लोडे से ऑरेकम निकलते हुए रौशनी की नाभि को गीली करने लग जाता हैं और दोनों लम्बी और गहरी चुम्बन में लग जाते हैं … असलम फिर से रौशनी के चूतड़ों को मसलता हैं ..
“उफ़ रुकसाना ममम क्या चूतड़ हैं तेरे .. उफ्फ्फ पहले से भी और मस्त और गोल हैं .. उफ्फ्फ इतनी मुलायम .. मन करता हैं मसलता hi राहु मममम”
उफ़ असलम मियाँ आपके हाथों से मेरी चूतड़ों को मसलते हुए अलग hi मज़्ज़ा आरा अहइँ उफ्फ्फ मममम अब तोह यह आपके hi हैं जितना चाहे उन्हें मसलिये … ममम उफ्फ्फ्फ़”
असलम ने कमरे में तेल की डिब्बी लायी होती हैं और उसे अपने हाथों में लिए अब तेल से रौशनी की चकहियों की मालिश करते हुए वह उसकी चूचियों को हाथों में लिए मसलता हैं .. और उसके निप्पल्स मुँह में लिए चुस्त हैं “उफ्फ्फ रुकसाना बेगम तुम्हारी इन चूचियों ने मुझे कब से दीवाना बना दिया हैं ममम क्या मुलायम और रसीली चूचियां हैं तेरी ममममम दुकनिया की सबसे मस्त चूचियां हैं मेरी बेगम की मममम ..”
रौशनी भी असलम के सर को पकड़ते हुए उसे अपनी चकहियों पर दबती हैं .. “आह मियाना ममम चूसिये न उन्हें मम आप hi की हैं ममम आपके मुँह में लीजिये और चूसिये ममम एस अह्ह्ह उफ्फ्फ मममम”
रौशनी की चूचियों की निप्पल्स पूरी तन कर कड़ी थी मनो दो पहाड़ियों की शिखर हो .., और असलम अब दोनों निप्पल्स को मुँह में लिए चुस्त हैं और हलके से दबाता हैं .. रौशनी की गर्मी बहुत बढ़ रही थी और वह अपनी बड़ी मुलायम चूचियों को पकड़े अपनी चकुचिओं को उसे खिलाती हैं… और असलम भी बड़े मज़्ज़े से उसे चूसते जाता हैं,.
अब फिर वह रौशनी को उसके पेट पर बिस्तर पर लिटा देता हैं और तेल की बोतल उठाकर बिस्तर पर बैठ जाता हैं ,रौशनी अपने दोनों घुटने मोड पड़ी हुई थी और उसकी मदमस्त चूचियां उसकी सांसो के साथ ऊपर नीचे हो रही थी. अब असलम तेल लेकर रौशनी की मस्तानी गोरी चूतड़ों पर लगाने लगा, और रौशनी की नंगी टैंगो को अपने हाथो से सहलाने लगा. रौशनी इस सब का आँखे बंद किये मज़ा ले रही थी उसकी छूट रास से भीगने लगी थी. असलम अब जोरों से रौशनी की जांघों को दबोचने लगा और बीच बीच में रौशनी की छूट को दबोचता हैं और फिर उसकी जांघों को दबोचने लगता हैं … रौशनी की गर्मी बढ़ती जा रही थी और वह अपनी दोनों जांघों को और फैला देती हैं .. असलम रौशनी की चूतड़ों को फैलाई हुए देख कण्ट्रोल नहीं कर पता और अपनी नक् ले जाकर रौशनी की पहली हुई बुर को सूंघने लगता है. रौशनी की ुबाहृ हुयी मटकती चूतड़ों को देख असलम सोचता हैं (उफ्फ्फ्फ़ आज रौशनी को ऐसा मज़ा दूंगा की वह खुद कहने लगेगी असलम मियां अपनी बेगम की गांड मई अपना मोटा लोढ़ा दाल कर मुझे खूब कास के छोड़ दे.
असलम की मालिश जारी रहती हैं और वह अब अपने हांथो मई तेल लेकर रौशनी की कमर पर तेल लगाने लगता है और धीरे धीरे अपनी उँगलियों को रौशनी की चूतड़ों के बन्स के बीच मई चलने लगता है .. फिर अपने अंगूठे को तेल में भिगोए एकदम से रौशनी की गांड के छेद में उतरने लग जाता हैं .. रौशनी इससे एकदम से चौंकती हैं लेकिन उसे पता था की यह बात तोह होने hi वाली थी .. असलम भी धीरे से अपने अंगूठे को रौशनी की गांड में अंदर बहार करने लगता हैं और आगे रौशनी बड़ी सी बड़ी सिसकियाँ मारती रहती हैं .. हे भगवान् उफ्फ्फ मेरी गांड में आपने उफ्फ्फ ममममम हाहहननन मम एससससस>”
असलम इस सब में बड़ा माहिर था और वह इस तरह मालिश करता है की उसकी ऊँगली रौशनी की गांड की गहरी मई सरकने लगता है और रौशनी बस आह आह करने लगती है और असलम अपनी ऊँगली जो अभी भी रोशनीकी गांड के छेद में फांसी हुयी थी - उसपर और तेल लगता हैं और अपने अंगूठे को रौशनी की गांड की गहराई मई ऊँगली थोड़ा दबा कर नीचे की और प्रेशर देता है जिससे उसका अंगूठा अब रौशनी की गांड के छेड़ मई पूरी अंदर तक सरक जाती है और रौशनी लेते हुए बॉइस्टर के बेडशीट को जकड़े हुए बस बड़ी सी बड़ी ाहुफ्फ मममम ऊईम्माए की सिसकियाँ मारती रहती हैं. असलम भी रौशनी के गांड के छेड़ पर अपने अंगूठे का दबाव देता हुआ अब उसके अंगूठे को अंदर बहार करने लगता हैं मनो अंगूठे से रौशनी की गांड की चुदाई कर रहे हो.
असलम बस रौशनी की गोरी गोरी गांड देखते हुए और पागल हो जाता है और खूब सारा तेल रौशनी की चिकनी गांड पर दाल कर अब अपने दोनों हांथो से रौशनी की चूतड़ों को दबोच दबोच कर मसलने लगता है और वहां रौशनी बस आह आह करके सिसकियाँ hi मारने में लुफ्त रहती हैं.
असलम फिर से रोशननि के गांड के छेड़ को सूंघता है और पागल हो जाता है और अपनी जीभ से रौशनी की गांड के छेड़ को चाटने लगता है और रौशनी बस आह आह करने लगती है. और दो बार रौशनी की गांड की जीभ से चाटने के बाद असलम फिर से अपनी ऊँगली रौशनी के गांड के छेड़ मई पेल देता है जिससे उसकी ऊँगली रौशनी की गांड मई आधी से ज्यादा उतर जाती है. असलम बस मन hi मन सोचते हैं की (आअज तोह इस घोड़ी की गांड मर मर के लाल कर दूंगा.)
असलम अपनी ऊँगली को रौशनी की गांड में रखते हुए उसके साइड में आ जाता हैं और उसके लोडे को रौशनी झट से पकड़ लेती हैं और वह और भी जोश मई आकर असलम के लुंड के बॉल्स को अपने हाथो से सहलाते हुए असलम के मोठे लोडे के गुलाबी सुपडे को चूसने लग जाती है
असलम फिर तेल मई अपनी इस बार दो उँगलियों को डुबो कर रौशनी की गांड मई पूरी भर देता है, थोड़ी देर बाद असलम रौशनी को फिर से घोड़ी बना कर अपने लोढ़ा पर ढेर सारा तेल लगा कर रौशनी की मोती गांड मई अपना लोढ़ा लगा कर एक तगड़ा झटका मरता है और इस हमले से रौशनी के मुँह से एक चीख hi निकल जाती है .
इतना सारा तेल लगा कर जो लोढ़ा अंदर घुसाया था असलम ने रौशनी की गांड में , अब वही असलम आधे से ज्यादा रौशनी की गांड मई फँस जाता है.
रौशनी चिहक्ति हुयी सिसकियाँ मारती हुयी .. “उफ्फ्फ असलम मममम दर्द कर रहा है अपना लोढ़ा बहार निकल ले … उफ्फ्फ मममममम आआआआह आआआआह.
असलम फिर कहता हैं “ ठीक है रुकसाना अभी निकलता हु लेकिन आप थोड़ा अपनी गांड को ढीली करो न. रौशनी असलम की बार मान कर अपनी गांड को ढीली करती है लेकिन असलम उसका लोढ़ा रौशनी की गांड से बहार निकलने के बजाय फिर से एक कास कर एक धक्का देता हैं जिससे उसका लोढ़ा रौशनी की गांड मई और घुस जाता है और रौशनी “ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फ़ मममम मर गई रे उईईई माआआ आह आह” चीखने लगती हैं. असलम अब अपना लोढ़ा धीरे धीरे आगे पीछे करने लगता है रौशनी आह आह मत कर beta....aa आह आह फिर असलम अपने लोढ़ा को एक डैम झटके से बहार तक खींचता है और फिर से एक और तगड़ा झटका रौशनी की गांड मई मर देता है और अबकी बार उसका लोढ़ा एक hi झटके मई अब रौशनी की गांड के और गहराई में चला जाता है. रौशनी उस झटके के साथ hi बीएड पर पेट के बल पूरा गिरती है और असलम भी उसकी गांड के ऊपर गिर जाता है जिससे असलम का लोढ़ा पूरा रौशनी की गांड मई बहुत गहराई तक चला जाता है और रौशनी की आवाज धीमी हो जाती है. असलम समझ गया था की उसे अपने जोश को काबू में लाना होगा … इसलिए अब इस मुद्रा में कुछ देर असलम अपना मोटा लोढ़ा रौशनी की गांड मई फसाये रौशनी के ऊपर पड़ा रहता है और झटके मारना बंद कर देता हैं ताकि रौशनी उसके लोडे को अपनी गांड में लिए एडजस्ट कर सके.
असलम फिर रौशनी के बदन नीचे हाथ लेजाकर उसके चूचियों को पकड़ कर दबाने लगता है और अब धीरे धीरे लेकिन गहरे धक्के रौशनी की गांड मई मरते हुए रौशनी की मोती गांड को छोड़ने लगता है. असलम कुछ 5 मं ऐसे चुदाई करता हैं और रौशनी अब असलम के मोठे लोडे को अपनी गांड में लिए एडजस्ट होने लगती हैं और उसकी आवाज़ें और कंट्रोल्ड और सिसकियाँ और प्लेअसुरे में निकलने लगती हैं.
रौशनी अब अपनी गांड की चुदाई के मज़्ज़े और लेने लगश हैं . असलम फिर साइड से रौशनी के गोर गलो को चूमने लगता है, और रौशनी के मुँह से धीरे धीरे से मस्ती वाली सिसकियाँ निकलती हैं. असलम रौशनी की गांड छोड़ते छोड़ते “उफ्फ्फ रुकसाना मेरी बेगम ममम, कैसा लग रहा है आपको मेरा लोढ़ा तुम्हारी गांड में फंसा हुआ …” , रौशनी सिसकियाँ और मारती हुयी “उफ्फ्फ मममममम अह्ह्ह हैं मममम अच्छा लग रहा है मियां … आप अब और जरा तेज़ी से छोड़िये मेरी गांड ममम बहुत मज़्ज़ा आ रहा हैं अह्ह्ह ममममम उफ्फ्फ मममममम.”
कुछ दिएर बाद असलम ने रौशनी को उठा लिया और फिर बिस्तर पर उसके पीठ पर रख उसके लोडे को रौशनी की गांड के छेद पर रब करने लगा .. अब वह आगे से छोड़ने वाला था रौशनी की गांड … रौशनी की आँखें हवस भरे नज़रों से असलम को देख रही थी .. असलम अब रौशनी की टाँगूं क बीच था और मोटा लोढ़ा रौशनी की टाइट गांड के छेद पर रख इस बार आराम से अंदर ज़ोर देकर अपना लोढ़ा रौशनी स्वीट बहुत टाइट गांड के अंदर चला गया.
रौशनी वहां मज़्ज़े में सिसकियाँ लेती हुयी चुद रही थी असलम के लोडे से उसकी गांड में. अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ असलम मियां ममममम आराम से नहीं अब ज़ोर से छोड़िये मेरी गांड अहह उफ्फ्फ मम असलम मियानन्णन”
रौशनी की गांड मैं अभी असलम का लोढ़ा पूरा भी नहीं गया था. असलम ने फिर अपना लोढ़ा रौशनी की गांड के अंदर बहार करना शुरू कर दिए . वह अपने लोडे को थोड़ा सा बहार निकलता और फॉर से ी दोबारा रौशनी की गांड में दाल देता.
असलम ने रौशनी के हिलते चूचियों को मुँह में भर कर चूसने लगा और रौशनी क पूरे जिस्म पे हाथ फेरने लगा.
“उफ़ असलम मममम एस ममम और छोड़िये मेरी गांड ममम अह्ह्ह्ह ममम हे भगवान् मस्त फीलिंग हैं उफ्फ्फ ममममम ममम नहीं रुको नहीं थोड़ा और ज़ोर दो आह हाँ मियंन्त्र ऐसे hi ज़ोर दो और छोड़िये मुझे ममममम और मेरे निप्पल्स भी सूचक करिये मियंन्त्र उफ्फ्फ्फ़ ूऊई ममममआ मममम मुझे मज़ा आरा है ाः में ममममम और छोड़िये मेरी गांड मममम”
असलम आराम आराम से अपना लोढ़ा रौशनी के गांड में हिलता रहा और कुछ hi दिएर मैंवह रौशनी की निप्पल्स को भी सूचक करने लगा.
क़रीब 10 मिनट बाद असलम ने अपने होठों को रौशनी की गुलाबी होठों पर रखे और लूँ को आराम से उसकी गांड में हिलता रहुआ उसे जोरों से चूमने लगा .. रौशनी भी अपनी तरफ से पूरा चुम्मे का साथ दे रही थी ..
असलम ने फॉर अपने लोडे को बहार निकल क फिर पहले से कुछ ज़ियादा hi ज़ोर दिए और इस बार उसका लोढ़ा रौशनी की छोटी टाइट गांड को चीरता हुआ फरता हुआ अंदर घुस गया.
“उफ्फ्फ असलम मिन्न अहह मम ऐसे hi छोड़िये मेरी गांड आठ मम उफ्फ्फ ममम क्या छोड़ते हो मियां आआह्ह्ह ममम मज़्ज़ा आ रहा हैं बहुत ममममम एस सीएस अह्हह्ह्ह्ह.
असलम की रफ़्तार बढ़ती गयी और रौशनी की सिसकियों की गूंज भी बढ़ती गयी .. दोनों एक दूसरे की चुदाई में खो गए थे .. कुछ और देर बार रौशनी को मूतने की फीलिंग आयी और उसने असलम को यह बात बता दी. असलम उसकी चुदाई रोकना नहीं चाहता था तोह उसने एक तरकीब बनायीं.
असलम मुशकरते हुए रौशनी को अपनी बाँहों में बाहर उठ खड़ा हुआ.. ….रोशननि ने अपने दोनों पैरों को असलम की कमर में फसा के … और असलम रौशनी की दोनों छुटद को दोनों हाथ के सहारे पकड़ लिया ...और रौशनी ने भी अपनी दोनों हाथों को मिला के असलम के गले एक इर्द गिर्द दाल उसे पकड़ लेती है...
इसी पोजीशन में रौशनी अपनी गांड से असलम के लोडे को दबा रही थी...
“उफ्फ्फ अस्काम मियां मममम देखो कैसे दिन ला दिए हो मेरी गांड की छोड़ छोड़ के ऐसी हाल क्र दिए हो की अब मूतने तक खुद चल के नहीं जा सकती..
असलम बोलै “आआह मम रुकसाना डार्लिंग ऐसा सब दिन कहाँ होता है असली मज़्ज़ा तो यही है..”
“ हाँ असलम मियां ऐसे मज़्ज़ा तोह बरसो में नहीं दी किसी ने .. मममम सच में बहुत मज़्ज़ा आ रही है...
असलम अपनी गोदी में hi रौशनी को लिए बाथरूम पहुँच जाता है...
“उफ़ असलम मियां ममम मुझे थोड़ा निचे करो न उफ्फ्फ बहुत जोर की लगी है...
असलम मुस्कुटराते हुए - “नहीं जानू निचे उतरने का कोई ऑप्शन नहीं..”
रौशनी भी असलम को देख मुस्कराते हुए.. “अच्छा फिर ऐसे हिन् karungi..mein ठीक हैं न .. आपके ऊपर आएगी पिशाब ः.”
“हाँ रुकसाना बेगम तुम्हे ऐसे hi करना होगा .. .”.
उफ़ असलम मियां ाः मममम अब बर्दास्त नहीं हो रहा है ...
रौशनी ऐसे बोलती हुयी पिशाब करने लग जाती हैं … जो अब असलम के लोडे पर गिरने लगती हैं.
असलम भी रौशनी की आँखों में देखते हुए अपनी लुंड पे गर्म पेशाब महसूस करते हुए “ाआअह रुकसाना बेगम कितना अच्छा लग रहा है ...असली मज़्ज़ा तो इन सब में है ..” बोल रहा था
असलम फिर अपनी हाथ से रौशनी की गांड को पीछे धकेलता हैं तजिससे रौशनी की बुर से निकलती पिशाब की धार उसके लुंड पे नहीं आ रही थी ..
ऐसे इरोटिक सन था जब रौशनी की गोरी झंघ से होते हुए पेशाब निचे गिर रहा था ......
असलम फिर इसी तरह अपने गोदी में रौशनी को रखते हुए... 2 जग पानी बिलकुल लुंड और बुर के बिच में दाल देता है और वहां लगी हुई पेशाब बिलकुल साफ़ हो जाती hai....fir अपनी गोदी में रखे हुए रौशनी को छोड़ने लगता हैं …. वह बाथरूम के वाल पर उसे सत्ता के अब उसकी गांड की चुदाई करने वापस शुरू करता हैं और जोरों से उसकी गांड की ठुकाई करता हैं और रौशनी बस अहह उफ़ मम की सिसकियों की गूंज hi निकलती रहती हैं.
उफ़ असलम मियां ममममम ओह्ह्ह्ह आप तो मुझे आसानी से उठा लिए हो वह भी इतनी वक़्त के लिए उफ्फ्फ्फ़ में तोह पुरे 62 कग हूँ… उफ्फ्फ मियां अआप बुढ़ापे में भी इतने स्ट्रांग हैं ..” और रौशनी असलम को देख मुस्कुराती हैं और आँख मारती हैं.
“ अब ऐसी मस्त गदराई बेगम को अपनी गोदी में लिए हुआ हूँ तोह और ताक़त लग रही हैं.. ममम तेरी इस गांड को छोरना नहीं चाहता मममम”.
रौशनी मुस्कुराते हुए “अच्छा असलम मियां मई गदराई हूँ वो कैसे..
“रुकसाना बेगम तुम तो ऊपर से निचे तक गदराई हो “ गांड को मसलते हुए असलम बोलता हैं “ उफ्फ्फ ममम और सबसे ज्यादा तो तुम्हारी गांड गदराई है..
असलम मियां वो तो आप अपने लोडे से मेरी गांड को पेल पेल के और बड़ी बनाओगे उफ्फफ्फ्फ़”
ऐसे बातें करते हुए असलम और रौशनी बैडरूम तरफ चलते है और बीएड के पास पहुँचते हुए असलम अब रौशनी को बीएड पे लिटाते हुए बोलता है “ अब तोह बीएड पर रख कर तेरी गांड और भी मस्ती में छोडूंगा ..”
रौशनी असलम के आँखों में आखें दाल बड़े ऐटिटूड के साथ कहती हैं “ सुनिए मेरे असलम मियां , अगर आप मुझे रात भर छोड़ोगे तब भी मेरी छूट और गांड आपका मोटा लोढ़ा झेल legi..samjhe मियां.”
असलम फिर से रौशनी की गांड में अपने लोडे को पेलते हुए “ाआअह मम रुकसाना बेगम उफ्फ्फ्फ़ ममममम यही ऐडा पे मई मरता हूँ तुमपर … अब ये ले मेरा लोढ़ा तेरी टाइट गांड में …”
असलम अब धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ने लगता है और रौशनी अपने पैरो को थोड़ा और फैला देती है, इससे अब असलम के धक्को मई जैसे जैसे तेज़ी आती जाती है और रौशनी भी मस्ती मई सिसकियाँ मरने लगती है. ऐसे अब करीब आधे घंटे तक असलम रौशनी की मोती गांड मर मर कर लाल कर देता है उसका लोढ़ा रौशनी की मोती गांड मई सटासट सटासट आने जाने लगता है. असलम अपना हाथ रौशनी की छूट के नीचे लेजाकर छूट मई दो ऊँगली दाल कर और कास कास कर रौशनी की गांड मरने लगता है. रौशनी की गांड की चुदाई का एहसास और अपनी छूट की खिलवाड़ का एहसास .. ऐसे दोगुने मस्ती वाले एहसासों से अब. रौशनी का मज़ा दोगुना हो जाता है और वह चिल्लाना बड़ा काम और प्यार की सिसकियाँ और लगाने लगती है. “उफ्फ्फ मममम असलम मियां आह्हः ममम छोड़िये और जोर से छोड़िये आह आह मममम उफ्फ्फ्फ़ मममम हाँ एस ममममम आह और जोर से छोड़िये मियां मममममम. अपनी रुकसाना बेगम की गांड खूब कास कास कर छोड़ और छोड़ जोर से छोड़ मियंन्त्र आह आह सी सी आह उफ्फ्फ हे भगवान् क्या सुखद फीलिंग हैं मेरी गांड की चुदाई तुम्हारे जैसे विद्वान से अह्ह्ह उफ्फ्फ मममममम.” रौशनी को ऐसे बातें करते देख और सिकियाँ मारते देख असलम में एक नया जोश आ जाता हैं और फिर असलम एक करारा झटका मरता है और फिर से रौशनी आह्ह्ह्हह उईईई मायआ मममम उफ्फ्फ करके बीएड से चिपक जाती है और अब इस बार बेझिझक असलम रौशनी की गांड की गहराई मई अपना लोढ़ा दबा दबा कर उसकी गांड मारता हैं और रौशनी भी और मज़्ज़े लेते हुए असलम के मोठे लोडे से चुदती हुयी सिसकियाँ मारती हुयी बेडशीट पकड़ी हुयी मज़्ज़े लेने लग जाती हैं …
असलम और रौशनी की गांड चुदाई अब एक घंटे से ऊपर चल रही होती हैं और रौशनी आह उफ्फ्फ मम करते हुए जहर जाती हैं और असलम का भी लोढ़ा अपना माल छोड़ने तैयार हो जयते हैं और वह अपने लोडे को रौशनी की गांड से बहार निकलते हुए अपना सारा सफ़ेद गाढ़ा मॉल रौशनी की चूतड़ों पर छोर देता हैं और रौशनी के चूतड़ उसके लुंड के सफ़ेद माल से भर जाता हैं.
दोनों फिर अगल बगल लेते हुए हफ़्ते हुए लेट जाते हैं. रौशनी फिर से बाथरूम जाकर अपने गांड पर लगे असलम के गाढ़े माल को वाश करती हैं और फिर दोनों अगल बगल एक दूसरे के बाहों में लेट जाते हैं. 15 मं के रेस्ट के बाद असलम रौशनी के रसीले होंठो को अपने होंठो से दबा कर एक गहरा चुम्बन लेता है जिससे रौशनी भी आँखे खोल देती है और असलम उसे अपनी बांहो मई लेकर उसके चेहरे को अपने बिलकुल करीब लता है और एक और गहरा चुम्बन उसके होंठो पर कर के उसकी आँखों को एक कामुक नजर से देख कर मुस्कुराता है तोह गीता को एक पल के लिए शर्म आ जाती है और वह अपनी गर्दन झुका लेती है असलम के साइन मई अपना मुँह छुपाने लगती है.
असलम अब रौशनी के चेहरा ऊपर उठता है और ओके गलो पर अपने गलो को हलके हलके रगड़ता हुआ रौशनी के कण मई कहता हैं “उफ़ रुकसाना बेगम मममममममम इतना शर्मा क्यों रही हो, तेरी जैसी गदराई और जवान माल ……”
असलम कुछ और कहने से पहले रौशनी अपने सर को उठाते हुए असलम के आक्न्हों में आँखें दाल अपने रसीले होंठो को असलम के होठों के करीब लाती हैं और असलम उसके रसीले होठों को अपने मुँह मई भर कर चूसने लगता है. दोनों गहरी चुम्बन में लगे हुए एक दूसरे के बाँहों में लेते रहते हैं और फिर थकन से एक दूसरे के बाँहों में सो जाते हैं.
सुबह रौशनी उठकर अपने कपडे पहनती हैं और असलम के घर से बहार निकलती हैं और ऑफिस के तरफ चली जाती हैं .. तभी …. उसे सामने सलीम दिखाए देता हैं उसके ऑफिस के बहार. रौशनी अब पीछे मुद कर देखती हैं असलम के घर के तरफ , फिर आगे सलीम के तरफ और आखिर में गेट के तरफ जिसके बहार रमेश हैं ..
वह मन में सोचती हैं (उफ्फ्फ रौशनी … मुझे यकीन नहीं हो रहा हैं की में .. में एक शादीशुदा महिला तीन बुद्धों का बिस्तर गरम कर चुकी हूँ .. उफ्फ्फ मैंने जीवन में रोनित को छोर किसी से शारीरिक सम्बन्ध नहीं राखी थी और अब कुछ hi महीनों में तीन बुड्ढों के साथ चुद चुकी हु .. उफ्फफ्फ्फ़ अब क्या करू में .. मुझे तीनो बुद्धों से लगाव भी बहुत हैं … रमेश, असलम और सलीम तीनो ने मुझे शारीरक सुख दिया हैं जो मेरे पति कभी न दे सके . हे भगवान् में यह कहाँ फांसी हुयी हूँ इन तीन बुद्धों के साथ !!!!!!!!