Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi - Page 9 - SexBaba
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Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi

इतनी गर्मी और हवसी बन गयी थी रौशनी की वह रात भर इन दोनों बुद्धों के साथ रास लीला का खेल, खेलने बिलकुल तैयार थी और दोनों के साथ रात भार छोड़ना चाहती थी… बड़ी कामुक बना दिया था रौशनी को इन दो बुद्धों ने … उसके मियां ने , आखिर रौशनी उनकी बेगम बन गयी hi थी …

असलम और सलीम अब रुक जाते हैं और सलीम कहता हैं

सलीम “अरे रौशनी अपने दोनों मियां को दारु नहीं पिलाओगी … तुम्हारी हुस्न का नशा हैं सही लेकिन दारू के नशे से और भी मस्त लगेगा तुम्हारा नशा .. चलो आओ हमें दारू पिलाओ और थोड़ी खातिरदारी करो..

रौशनी के आँखें वासने से भरे हुए थे . वह इस वक़्त जो सलीम और असलम कहेंगे वह करने वाली थी … वह उठी और नग्न hi एक एक गिलास में एक एक पेग बना दिया ..

फिर अपने बड़े चूचियों को हिलाते हुए दारू के गिलास दोनों असलम और सलीम के पास लेकर गांड मटकाकर चलने लगी. उसकी चुहियाँ आगे झूल रही थी और पीछे गांड मटक रही थी … उसे इस स्तिथि में देख सलीम और असलम के लोडे पुरे अटेंशन में मनो रौशनी को सलामी दे रहे थे … रौशनी भी बड़ी कामुकता से आगे झुकी और दोनों गिलास असलम और सलीम के हाथों में थमा दी .. असलम और सलीम बस रौशनी के सामने झूलते हुए बड़ी कासी हुयी चूचियों को देख और गरम हो रहे थे और उनके लोडे बड़े झटके मार रहे थे और उनके लोदों से काफी प्रेकम भी उगल रहा था ..

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रौशनी उन दोनों के मोठे खड़े लुन्डों को देख एक आह भरी .. उफ्फ्फ इतनी काळा और मोठे सांड जैसे लुंड थे दोनों के … कैसे बड़े लुंड वाले मर्दों की बेगम बानी थी रौशनी उफ्फ्फ … उनका लुंड तोह वह चूसना , चाटना और अपनी छूट और गांड में भी लेना चाहती थी .. इस सब सोच से उसकी बुर से काफी रास टपक रहा था उसकी अंदरूनी झंघों पर .. जो अब चमक रहे थे ..

अब जैसे उसने गिलास दोनों को दिया .. दोनों ने उसे खिंच लिया और वह दोनों के बिच जा फांसी … उसके बाल सलीम के चेहरे पर और असलम के चेहरे पर छाए हुए थे .. दोनों असलम और सलीम एक हाथ से दारू पि रहे थे और दूसरे हाथ से रौशनी की दायी और बायीं झंगहों को शेला रहे थे और बिच बिच में उन्हें दबोच रहे थे ,, इस हरकत से और खुद की बढ़ती गर्मी से रौशनी बड़ी सिसकियाँ मार रही थी और बिना रूकावट उसके भी दोनों हाथ असलम ुर सलीम के मोठे काळा लुंड पर गए और उन्हें वह मस्ती में सेहला रही थी .. उनके लुंड के चमड़े को उनके लुंड के सर पर लेजाती फिर निचे .. फिर ले जाती और फिर निचे .. अब असलम और सलीम की बरी थी कराहने की ..

“अहह उफ्फ्फ मम बेगम साली क्या मुलायम हतः हैं तेरे आह उफ्फ्फ मममम मस्त लग रहा हैं उफ्फ्फ्फ़ मममम

असलम -‘“हाँ बड़ी मस्त हैं तू उफ्फ्फ मम ऐसे hi हिला हमारे लुंड उफ्फ्फ…

अब सलीम और असलम दोनों रौशनी के दाएं और बाएं चुकी को दबाने लगे और दबोचने लगे .. दोनों दारू पीते रहे ….

दोनों फिर जल्दी से अपनी दारु ख़तम करके रौशनी को ऊपर खड़ा कर लिया और खुद खड़े होकर दोनों ने रौशनी को अपनी बांहो हेर आगे और पीछे से दबोच लिया, एक उसकी मोती गांड और छूट को अपने हाथो हेर भर रहा था तो दूसरा उसके मोठे मोठे दूध को दबोच रहा था,

सलीम- “है रौशनी तेरी गांड बड़ी मस्त और गोल मटोल है.

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उफ्फ्फ्फ़ फिर क्या, दोनों ने अपनी जीभ से रौशनी के एक एक अंग को चूसना चेतना शुरू कर दिया

और रौशनी बस “आह आह ओह ओह आह आह ओह ममममम सिसकियाँ मारती रही और बोलती रही

“ज़ोर से चाट को चुसो मेरे बदन को मेरे मियां और ज़ोर से …में आप दोनों के मोठे लुंड चाहती हूँ .. हमेशा के लिए अपना बनाना चाहती हूँ …. उफ्फफ्फ्फ़ मियां अब ये लुंड आप मेरी छूट हेर दाल दो नहीं तो मैं मर जाउंगी, अब देरी न करो मियां .. उफ्फ्फ मममम आह आह मेरी चुदाई करिये मेरे दोनों मियां अहह उफ्फ्फ…”

सलीम और असलम ने रौशनी को अपने कन्धों पर उठा लिया और फिर से बिस्तर की तरफ ले जाकर उसे निचे साइड पोज़ में लिटा दिया. तभी असलम ने रौशनी की चूतड़ों के बिच के उसके गांड के छेड़ हेर अपनी दो उंगलिया अपने थूक से गीली करके

घुसेड़ दी …असलम की उंगलिया रौशनी की गांड को काफी टाइट महसूस करा …

सलीम ने अपनी उँगलियों को थूक लगा कर रौशनी की बुर में डाली और उसकी बुर के दाने को अपने उँगलियों से खुरदने लगा … रौशनी बस ऐसे दोनों के हमले से आह उफ्फ्फ ममम की hi सिसकियाँ मार सकीय.

असलम ने रौशनी की चूतड़ों के बिच में अपने चेहरे को सीधा घुसाया और अपना चेहरा रौशनी की गांड की दरार में डुबो दिया. रौशनी की गांड की सेक्सी तीखी गंध ने असलम के लुंड के झटके बढ़ा दिए … असलम ने अपने हाथों से रौशनी की गांड के गालों को फैलते हुए उसकी गांड के छेड़ को चाटना जार रखा.

असलम रौशनी की गांड को मिन्हाशा चाट रहा था, अपनी जीभ को ghuma-ghuma कर उसकी गांड के छेद को छठा रहा था .. फिर kabhi-kabhi अपनी जीभ उसकी गांड के छेद के अंदर डालने की कोशिश करने लगता. रौशनी अब पूरी तरह से अपने होश में नहीं थी और वह jor-jor से सिसकियाँ लेने लगी.

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दिस्री तरह सलीम ने dhire-dhire अपना ध्यान रौशनी की छूट पर केंद्रित करे. उसने अपना चेहरा रौशनी की छूट के करीब ले गया और पीछे से उसकी छूट को सूंघने लगे. रौशनी की छूट की मीठी पसीने वाली खुशबु सलीम को काफी कामुक बना रही थी. फिर उसने अपनी जीभ से रौशनी की छूट के निचले होंठों को चाटना शुरू करे. वह अपनी जीभ रौशनी की छूट के अंदर डाली और एक से अधिक बार उसके बुर के रास को टास्ते करने लगे. यह सब , असलम की द्वारा उसकी गांड की चूसै और सलीम से उसकी बुर की चूसै .. होते हुए रौशनी मुश्किल से अपनी उत्तेजना कण्ट्रोल कर प् रही थी.

सलीम रौशनी की छूट को छाते जा रहा था .. असलम ने उसकी गांड की चटाई रोकी और अपने कठोर लोडे को रौशनी के मुँह के तरफ ले गया ..

रौशनी ने असलम का लोढ़ा उसके मुँह के सामने देखि और कोई समय बर्बाद नहीं करि और उसके लोडे को ऊपर से निचे तक चेतना शुरू कर दी. रौशनी ने अपने हाथों से उसके लोडे के गोटियों से खेलते हुए असलम के लोडे के सर को चाटने लगी. कुछ 5 मं ऐसी चूसै के बाद सलीम वापस दारु पिने चला गया और अब बस असलम और रौशनी थे बिस्तर पर. रौशनी ने असलम को लेटने बोली .. फिर रौशनी dhire-dhire असलम के पैरों के बिच चली गई और उसके लुंड के एक बॉल को अपने मुंह में ले ली. असलम ने भी dhire-dhire उसके लुंड के बॉल्स को रौशनी के चहरे पर टिका दिए और अपने लोडे के बॉल्स को रौशनी के मुँह पर रख उसे वहां और चूसने को उत्साह से कहने लगा .. रौशनी की गर्मी पूरी बढ़ चुकी थी और वह ऐसी अश्लील हरकत करती रही और असलम के बॉल्स का पूरा स्वाद चख ली … फिर रौशनी असलम के ऊपर चढ़ गयी और उसका मुँह असलम के लोडे पर था और उसका बुर असलम के चेहरे पर. . रौशनी और असलम , दोनों अब 69 की स्थिति में थे. रौशनी असलम के लोडे और उसके लोडे के बॉल्स को चूस रही थी और असलम उसकी छूट चाट रहा था. असलम ने अपने झंघों से रौशनी के चेहरे को जकड लिया और स्थिति में रौशनी अपने आप असलम के लोडे को चूसते चूसते बाहर नहीं निकाल प् रही थी इसीलिए अब असलम का लोढ़ा मनो पूरा उसके गले में उतर गया और वह उसके लोडे को दिप थ्रोट करने लगी ..

ऐसे hi कुछ चला 5 मं के लिए और फिर बस पोजीशन बदल दी .. रौशनी की नहीं सलीम की .. सलीम अब 69 पोजीशन में था रौशनी के साथ और असलम दारु का एक पेग बनाने और पिने के लिए चला गया.

कुछ 5 मं सलीम के साथ 69 पोजीशन में मस्ती करने पर अब दोनों मियां उसके सामने खड़े हो जाते हैं और रौशनी नंग लेती हुयी हैं बिस्तर पर.

दोनों सलीम और असलम उसके गदराए बदन को घूरने लगते हैं .. दोनों के मन में मनो एक hi बात दौड़ रही थी

( उफ्फ्फ इतनी गदराई और मस्त नंगी औरत उन्होंने अपनी जिंदगी में रौशनी से पहले कभी नहीं देखि थी)

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दोनों फिर नंगी पड़ी रौशनी के बदन से चिपक जाता है.

सलीम- “उफ़ रौशनी मेरी बेगम ममम तेरी बड़ी मस्तानी छूट है उफ्फ्फ मममम तेरी जैसी छूट देख कर दुनिया का हर असल मर्द तेरी जैसी गदराई माल को काम से काम 4 बार रोज़ नंगी

करके छोड़ेगा.”

ा - “ रौशनी मममम तेरा पूरा बदन इतना भर गया हैं उफ्फ्फ्फ़ … अब हम दोनों अपने लोडे से तुम्हे लिटा कर

या फिर घोड़ी बना कर hi तेरी चुदाई करेंगे ….

रौशनी अब अपने बदन को इन दो बुड्ढे वासना में भरे पागलों को दिखने में कोई झिझक महसूस नहीं कर रही .. बस उसके चेहरे पर एक मुस्कराहट छायी हुयी तिह दोनों के मोठे लटकते लोदों को देख.

रौशनी अब उठ बैठ जाती हैं और दोनों के मोठे लुंड के बबल्स को सहलाने लग जाती हैं ..

सलीम “उफ्फ्फ्फ़ रौशनी ममम तू हम दोनों मियां का लुंड एक साथ लोगी तोह तुम्हे कितना मज़ा ाजेगा”

रौशनी सिसकियाँ मारती हुयी कहती हैं ..

“उफ्फ्फ्फ़ मेरे दोनों मियां अब मेरी छूट से नहीं रहा जा रहा हैं . आप दोनों अपने ये मोठे लोडे मेरी बुर में दाल कर इसकी चुदाई करो उफ्फ्फ ममममम,

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दोनों फिर से रौशनी को पेट के बल लिटा कर उसकी मोती मोती जाँघों को दोनों बारी बारी अपने मुँह से दबा दबा कर सूंघते है और फिर अपनी लम्बी जीभ निकाल कर रौशनी की फूली हुई बुर की फोल्ड्स को फैला कर उसकी गुलाबी छूट के छेड़ में अपनी जीभ दाल कर चूसने लगते हैं.

रौशनी बस सिसकियाँ मारती हुई असलम के तोह कभी सलीम के सर पर हाथ फिरती हैं ..

दोनों बारी बारी उसकी बुर की चूसै करते हैं और कुछ पलों में फिर से रौशनी को साइड पर लिटा कर दोनों उसकी गांड के छेड़ को तोह kabhi-kabhi उसकी छूट के छेड़ को चाटने लग जाते है और रौशनी पूरी तरह से अपनी कमर हिला हिला कर अपनी छूट को

उठा उठा कर अपने मियां के मुँह पर मारती हैं.

रौशनी अपने दोनों मियां के मोठे मोठे लुंड को पकड़ पकड़ के मसलते हुए दबाने लगती है, और आह आह करते हुए उनका लुंड हिलने लगती है, तभी दोनों उसके मियां रौशनी के आगे और पीछे बैठ जाते है एक उसकी पहली हुई बुर मई मुँह लगा देता है तोह एक रौशनी की मोती गदराई गांड को फैला फैला कर चाटने लगता है . दोनों और से अपनी गांड और पहली छूट

की चूसै से रौशनी सिसकियाँ मरने लगती है, दोनों उसके मियां सपद सपद रौशनी की मस्तानी गांड और छूट को अपना पूरा मुँह भर भर कर चाटने लगते है, सलीम रौशनी के खड़े हुए डेन को अपने मुँह मई भर भर कर उसका रास चूसने लगता है . दोनों उसके मियां उसकी नंगी छूट और गांड चाट चाट के उसका सारा पानी निकलने लग जाते है,

फिर दोनों खड़े होकर अपने अपने लुंड को माँ को दिखते है रौशनी नीचे बेथ कर दोनों के लुंड को चाटने लगती है और बरी बरी से उनके मोठे लुंड को अपने मुँह मई भर भर कर चूसने लगती है.

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उफ्फ्फ्फ़ ममम हाँ रौशनी मममम ऐसे hi तू दोनों के लोडे बड़े अच्छे से चूस, आह आह उफ्फ्फ्फ़”

ये सुन रौशनी की उत्तेजना की सिमा पार हो जाती हैं और वह उन दोनों के लुंड को पूरा अपने मुँह मई भर भर कर चूसने लगती है.

दोनों उसे उठा कर उस बैडरूम में रखे एक आईने के पास ले गए.

आईने में रौशनी सब देख प् रही थी , कैसे वह सलीम का लुंड सेहला रही थी की और कैसे असलम उसकी साइड में आकर उसकी बाहें ऊपर कर ली और उसकी बगलों को चूसने लगा. असलम ने 2 मं तक लगातार रौशनी की बगलों को बुरी तरह से चूसा, कुतर दिया, और उन्हें काट भी लिया हलके से . फिर उसने रौशनी का चेहरा घुमाया और उसे बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया.

रौशनी ने भी उसे चूमा, अपनी जीभ उसके मुंह में दाल दी और उसे अपनी पीठ और गांड पर हाथ रगड़ने दिया.

“oooooooooooooooooooo तुम तोह एक बड़े जंगली मर्द हो असलम”

“रौशनी तुम एक मस्त सेक्सी और छुडासी महिला हो जो मेरे बड़े लुंड की भूखी भी हो” असलम कराहते हुए कहा.

उसके शब्द ने रौशनी के शरीर में उत्तेजना और बढ़ा दी और उसे एक बहुत hi छुडासी महिला की तरह महसूस कराया. सलीम रौशनी की की गर्दन को चुम रहा था और उसका हाथ उसके चूचियों को सेहला रहा था और दूसरा उसके पेट और योनि क्षेत्र को घेर रख लिया था.

रौशनी इस सब हरकतों से जोरों से सिसकियाँ मारती रही

“oooooooooooooooooooooooooooo सलीम मैं अब और नहीं सह सकती, कृपया मेरी बुर छोड़िये”

रौशनी के खुल कर चुदाई की मांग से सलीम का हौसला बढ़ा और उसने कहा “तुम्हे बहुत छोडूंगा रौशनी बेगम, मेरी जान” और उसने उसके होठों पर चूमा. रौशनी और सलीम लम्बे समय तक एक दूसरे को फ्रेंच किश कर रहे थे, और असलम उसकी बगलों को hi बस chaat-ta रहा. रौशनी महसूस करि की चूमते समय सलीम के लुंड से और बगलों को चूसते हुए असलम के लुंड से बहुत सारा pre-cum निकल रहा था.

इसके बाद असलम ने एक हाथ से रौशनी के पेट को पकड़ा और फिर से उसके पीछे गया. फिर उसने रौशनी को आईने में देखने के लिए कहा .. वह दिखाना चाहता था की कैसे वह अपनी ऊँगली उसकी नाभि पर घुमा रहा हैं और एक हाथ से उसके चकहियों को रगड़ रहा हैं. अब उसने उसकी पीठ और गर्दन को चूमा.... रौशनी डबल हमले से बहुत कामुक महसूस कर रही थी..

इसके बाद असलम ने उसका चेहरा अपनी और घुमाने के लिए फुसफुसाया. जैसे hi वह मुड़ी, उसने उसके होंठों पर लगभग एक मिनट तक एक लम्बा चुम्बन दिया.... और उसके गुलाबी होंठों को चबाने भी लगा... रौशनी पूरी तरह से उत्तेजित थी और बस असलम की बाहों में पिघल गयी.

आईने के सामने एक छोटा सा सोफे दोनों ने रख दिय्या और सलीम ने रौशनी को अपनी गॉड में बिठाकर और अपने लोडे को उसकी छूट पर निशाना कर लगाया. रौशनी उसके लोडे पर बैठ गई और उसका लुंड उसकी छूट में बड़ी आसानी से फिसल गया. सलीम के बड़े मोठे लुंड की वजह से, जैसे hi उसका लुंड उसके अंदर गहराई तक गया, रौशनी को लगा की सलीम का बड़ा मोटा लुंड पूरी अंदर तक पेल चूका था.

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असलम बोलै "रौशनी तुम आईने में एक असली माले की तरह लग रही हो."

रौशनी खुद को आईने में देखि और वह उत्तेजित हो गई. उसे आईने में जो दिख रहा था वह उसे पसंद आ रहा था और वह देख सकीय की वह सलीम के लुंड पर oopar-neeche हो रही थी. रौशनी बस सिसकियाँ मारती रही अहह उफ्फ्फ मममम क्या छोड़ रहे हो राजा उफ्फ्फ मममम”:

फिर सलीम खड़ा हो गया और उसका लुंड जो अभी भी रौशनी की छूट में गहराई तक दबा हुआ था , उसे ऊपर उठाकर उसने उसे दीवार से चिपका दिया और ऐसे hi मुद्रा में उसकी छूट को जोर से छोड़ रहा था.

रौशनी कराह उठी "ओह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़ सलीम मियाँ ममममम ईएसस ममममममम"

सलीम ने उसे लम्बे और जोरदार झटके देने शुरू कर दिए. वह उसे तेजी से और तेजी से छोड़ने लगा. रौशनी की पीठ और चूतड़ पीछे की दीवार से टकरा रहे थे क्योंकि वह पूरी तरह से इस चुदाई के आनंद में डूबी हुई थी. बगल से वह देख सकती थी की असलम उसे घूर रहा था और अपना लुंड रगड़ रहा था उसे चुड़ते हुए देखकर लुंड हिलाते हुए.

“ ऊऊफफफफ रौशनी क्या मस्त है तेरी छूट मेरी बेगम”, सलीम ने उसे जोर से छोड़ते हुए कहा. सलीम के शब्दों से रौशनी को और उत्तेजना महसूस हुई. रौशनी साइड में मुड़ी और असलम को अपने पास आने का इशारा करि. जैसे hi असलम उसके पास आया रौशनी ने असलम के सर को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसे अपनी और खींच लूसे जोरों से चूमने लगी, और उसकी जीभ असलम के मुंह के अंदर घुस गई और उसके हर हिस्से को तलाशने लगी.

“वह तुम बहुत मस्त चुम्बन ज्यादा देती हो रौशनी” असलम ने चुम्बन जड़ते समय कराहते हुए कहा.

सलीम रौशनी को सोफे पर बिठा कर उसे छोड़ने में व्यस्त था और असलम ने रौशनी की गर्दन को पीछे से पकड़ लिया और अपना लोढ़ा उसके चेहरे के पास ले आया. रौशनी ने असलम के लुंड को चूसने के लिए अपना मुंह खोला. और असलम ने dheere-dheere अपना लुंड उसके मुंह में दाल चुसवाने लगा. असलम अपने लोडे से रौशनी के मुँह की चुदाई करने लगा.

असलम ने कराहते हुए कहा “उफ्फ्फफ्फ्फ़ हाँ रौशनी मेरा लोढ़ा चूसो आह्हः उफ्फ्फ्फ़ ममममम तुम ऐसी चूसै में माहिर हो.” रौशनी ने उसकी मर्दानगी को महसूस की और वह असलम के लुंड की ताकत को महसूस कर सकती थी जो बड़े झटके मार रहा था उसके मुँह में.

"oooooooooooooooooooo" वह चूसते हुए कराह उठी.

सलीम ने रौशनी को निचे से छोड़ते हुए कहा "उफ्फफ्फ्फ़ रौशनी बेगम, चुदाई के समय तुम्हारे चहरे का नजारा बहुत सेक्सी और कामुक है. रौशनी तुम बहुत सेक्सी माल हो... तुम एक सेक्स बम हो.”

“ असलम बोलै “ममम, हाँ रौशनी जब तुम चुद रही हो तो तुम और भी सेक्सी लगती हो".

रौशनी दोनों के शब्दों से और वाइल्ड हुयी.

सलीम ने अपने लुंड को रौशनी के छूट से निकलकर उसे एक बड़ी चुम्मी दी. सलीम की जगह असलम ने ली और वह अब रौशनी को अपने लैप पर रख उसकी बुर की निचे से कुटाई करने लगा ..

अब रौशनी असलम को फेस कर उसके लुंड से छोड़ने लगी .. और रौशनी, असलम को कसकर गले लगायी और असलम, रौशनी के गुलाबी होठों को बेतहाशा चूमने लगा और उसके होठों को काट लिए.

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असलम उसकी चुदाई करते हुए रौशनी को चूम रहा था और उसकी गर्दन और पूरे शरीर को जोश के साथ चाट रहा था. रौशनी ने कभी भी उसके पति से इस तरह का प्यार या उत्तेजना कभी महसूस नहीं की थी. ये दो काळा बुद्धों ने तोह उसकी उत्तेजना सबसे बढ़ा दी थी.

असलम और रौशनी की चुदाई चल रही थी और सलीम बहार हॉल में एक बैग से तेल को एक कटोरे में दाल कर लता हैं .. असलम अपना लोढ़ा रौशनी की बुर से निकलता हैं और पानी पीकर आता हैं और रौशनी को भी पिलाता हैं. फिर दोनों उसके सामने खड़े होते हैं.

सलीम उस तेल की कटोरी रौशनी को देता हैं और रौशनी बड़े प्यार से उन दोनों के लुंड पर खूब तेल लगा कर मसलने लगती है, और फिर उनका लुंड तेल से चमकने लगता है और रौशनी दोनों के लुंड को खूब मसलती है.

दोनों सलीम और असलम रौशनी को कड़ी कर एक आगे से और पीछे से रौशनी के बदन से सेट हो जाते हैं. असलम और सलीम अपने लुंड को रौशनी की बुर और गांड पर एआईएम करते हैं. पहले सलीम अपना तेल से कैसा हुआ मोटा लोढ़ा धीरे से रौशनी के गांड में उतरने लगता हैं .. रौशनी जोरों से सिसकियाँ मारती हुयी “आठ उफ्फ्फ मम सलीम मियां धीरे से दर्द होता हैं तुम्हारे इस मोठे लुंड को लेते हुए अपनी टाइट गांड में उफ्फफ्फ्फ़…”

अपनी गांड को सलीम के लोडे पर 2 मं बाद एडजस्ट कर अब सलीम उसकी गांड धीरे से मारने लगता हैं. तभी असलम अपने लोडे को रौशनी की बुर में आगे से अंदर धकेलने लग जाता हैं.

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अब दोनों सलीम एयर असलम , रौशनी की छूट और गांड मई अपने मोठे लोदों को उतरने लगते है, और धीरे धीरे आगे पीछे करने लगते है. धीरे धीरे दोनों रौशनी की छूट और गांड मई अपने लुंड के झटके तेज करते हुए रौशनी की छूट और गांड को छोड़ने लगते है और दोनों उसकी चूचियों को कास कास कर मसलने लगते है. असलम आगे से दाए चुकी को और सलीम पीछे से बाएं चुकी को.

अब रौशनी की छूट और गांड मई दोनों और से तगड़े झटके पड़ने लगते है, और वह “आह आह आह आह ओह ओह है है मियां और तेज और तेज और मर मियां खूब छोड़ मेरी बुर. खूब कास कास कर छोड़ो मेरी गांड और छूट आह आह और छोड़ो सलीम .. ले अपनी बेगम की गांड…”

रौशनी की दोनों और से जबरदस्त ठुकाई होने लगती है , दोनों रौशनी को अपने बीच दबोचे हुए उसके नंगे बदन से चिपक कर रौशनी की छूट और गांड मई लुंड पेलने लग जाते है और करीब 15 मिनट तक दोनों खड़े खड़े रौशनी को कास कर छोड़ते है. फिर असलम नीचे लेट जाता है और रौशनी अपनी छूट उसके लुंड मई फसकर बेथ जाती है और असलम का पूरा लुंड सात से रौशनी की छूट मई पूरा गहराई तक जाता है, और सलीम रौशनी की गांड के पीछे आकर अपने लुंड को उसकी गांड के छेड़ मई लगा कर एक

जबरदस्त धक्का मरता है और उसका मोटा लुंड उसकी गांड के चीक्स को फैलता हुआ पूरा उसकी गांड मई फिर हो जाता है.

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दोनों तरफ से सलीम और असलम, रौशनी की छूट और गांड को ठोकने लगते है, और दोनों उसके चूचियों को मसलते रहते हैं . असलम आगे से रौशनी के निप्पल को मसलता है तोह सलीम पीछे से उसकी गांड मई थप्पड़ मरते हुए उसे छोड़ने लगता है, रौशनी पूरी मस्ती मई अपनी छूट और गांड मरवाते हुए आह आह करती हुई शाबाश मियां और छोड़ो आह आह और तेज सलीम और असलम रौशनी के ऐसे खुल कर दोनों से एक साथ सामूहिक चुड़ते हुए और उसे कास कास कर रौशनी की छूट और गांड की ठुकाई चालू कर देते है. तभी तीनो खूब सिसकियाँ मारते हुए अब सलीम जो पीछे से रौशनी की गांड की चुदाई आकर रहा था वह बीएड पर लेत जाता हैं , अपने लुंड को रौशनी की गांड में फिट रखते हुए .. रौशनी उसके ऊपर सो जाती है और असलम रौशनी की छूट ऊपर से अपना लुंड फसाये फसाये सो जाता है और फिर तीनो बिलकुल मनो एक अंग बनकर सलीम निचे से अपनी अपनी गांड को हिलाते हुए खूब रगड़ रगड़ कर रौशनी की गांड मारता हैं और असलम ऊपर से निचे पेलते पेलते हुए रौशनी की छूट मारने लगता हैं. रौशनी की अब तक की 4तह ओर्गास्म आ गयी थी …

दोनों असलम और सलीम अब उनके पहले ओर्गास्म के बिलकुल करीब थे और दोनों अपने लोदों को रौशनी की छूट और गांड से निकलते हुए उसके चेहरे के सामने हिलने लगे ..

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अपने लुंड का गधा छुम सारा रौशनी के चूचियों पर, चेहरे पर, पेट पर … झंघों पर सब जगह उतार देते हैं .. रौशनी का बदन सलीम और असलम के छुम से भरा हुआ था … तीनो अब एक दूसरे के साइड पर लेट गए ….. पुरे कमरे में उनकी चुदाई की सुगंध च चुकी थी ..
 
रौशनी उस वादियों में असलम और सलीम से की गयी चुदाई अपनी ज़िन्दगी की सबसे मस्त चुदाई का एहसास हो रहा था . अब वह वापस अपने घर आयी थी और बस उन दो चुदाई भरे दिनों की hi सोच में मग्न थी. वह उस दिन अपने चेहरे पैर दोनों का गधा सफ़ेद माल ले चुकी थी और अभी भी वह उस क्रीम की सोच में अपनी बुर गीली कर बैठ टी …

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खैर उसी में और 3 दिन चले गए और रौशनी ंगो के कामों में फिर से पूरी व्यस्त हुयी ..

फिर तीसरे दिन उसे रमेश का मश्ग आया की वह वापस शहर आ चूका था .. रौशनी तोह अपने तीसरे दीवाने के बारे में तोह भूल hi चुकी थी. रमेश का मश्ग पढ़ रौशनी की बुर में फिर से हलचल होने लगी … ऐसी पहली बार हुआ था की बस रमेश के मैसेज से hi रौशनी गरम हो चुकी थी .. वह मिलेंगे तोह क्या होगा .. क्या पता ,..

अगली सुबह रौशनी पूरी तैयार हो चुकी रमेश से मिलने .. रौशनी एक लास्ट लिपस्टिक का कोट लगा कर बहार निकल पड़ी. रौशनी भी सुबह रमेश का इंतज़ार करि और वह नहीं आये तोह दूसरे रिक्शा में चली गयी ंगो. ंगो में सलीम और असलम भी एक हफ्ते के लिए नहीं थे क्यूंकि उन्हें अपने पाने पर्सनल कुछ काम थे. रौशनी फिर अपने काम में लग गयी और उसी में दिन भर खो गयी.

करीब 6 बजे उसके ंगो के कर्मचारी आये और रौशनी से बोले की आज वह सब एक मेले में जाने वाले तह और वापस 8 बजे लौंटेंगे और उसे भी उन्होंने इन्विते किया .. और रौशनी भी हैं बोली ..

फिर 6 बजे काम के बाद सब निकल गए मेले के लिए … रौशनी मेले में गयी थी बहुत सालों बाद. काफी बड़ा मेला था .. बहुत सारे राइड्स थे और खाने के भी काफी सारे स्टाल्स थे .. 30 मीन्स सब के साथ घूमने के बाद रौशनी को भूक लगी थी .. बाकी सब लोगों को राइड्स पर जाना था इसीलिए बस रौशनी अकेले फ़ूड स्टाल के तरफ चल पड़ी. वहां ढेर सारे स्टाल्स थे खाने के और काफी बिजी भी .. बस कोने में एक स्टाल था जो बिलकुल बिजी नहीं था .. बस एक hi कस्टमर था वहां … रौशनी ने ऊपर देखा क्या स्टाल हैं की व्वाहन भीड़ इतनी काम थी. वह एक मोमो का स्टाल था … रौशनी को तोह मोमोस काफी पसंद थे … और एक स्टाल था वहां भी मोमोस थे लेकिन वह स्टाल बिजी था .. रौशनी उस कारबन एम्प्टीस स्टाल के पास गयी तब उसे पता चला की उस स्टाल में बस वेग मोमोस hi थे इसीलिए गर्दी काम थी ल्यूकीन दूसरे स्टाल पर नॉन वेग मोमोस काफी थे. रौशनी को तोह वेग मोमोस hi पसंद थे इसीलिए वह उस काम बीहड़ वाले स्टाल पर चली गयी . स्टाल पर एक बुद्धा बैठा था .. काळा रंग का था लेकिन काफी मज़बूत शरीर वाला था . रौशनी बोली. “भाईसाब एक मोमोस देना …”

वह बुद्धा पहले तोह ऊपर नहीं देखा .. रौशनी फिर से बोली तब वह उसे रेस्पेंड करने ऊपर देख hi लिया की उसने जो नज़र देखा उसके सामने यह देख वह खुश हुआ .. रौशनी जैसी इतनी मस्त गोरी और सेक्सी महिला उसके मोमो स्टाल पर आयी थी ..

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बुद्धा बस रौशनी को सर से पाँव तक ताकता hi रहा और कुछ शब्द hi नहीं बोल पाया .. रप्शनि उससे पूसी फिर से. :भाईसाब मोमोस का एक प्लेट लगाना “ भाईसाहब….”

“ओह हो माफ़ करिये में बस … हाँ आपको क्या चाहिए मोहतरमा …

“भाईसाहब अगर मोमोस स्टाल पर आयी हूँ तोह मंचूरियन तोह नहीं मानूंगी न .. एक प्लेट मोमोस लगाना …”

“हाँ माफ़ करिये ,.. हाँ दो मं रुकिए अभी एक ताज़ा प्लेट लगता हूँ …”

कुछ सेकंड वह फिर से बस रौशनी को ताकता रहा और उसकी आँखें अब उसकी मसल गोरी नाभि पर चली गयी .. जिसे वह कुछ पल घूरता रहा ..

रौशनी मन में सोची .. (उफ्फ्फ यह बुद्धा टाक रहा हैं मेरे बदन को .. उफ्फ्फ इन बुद्धों को में इतनी पसंद क्यों आने लगी हूँ उफ्फ्फ्फ़. )

बुद्धा एक प्लेट मोमोस लगा दिया और रौशनी को थमा दिया ..

रौशनी प्लेट लेन लगी तब उसका हाथ उसकी गोरी सॉफ्ट से हाथों पर टच हुआ तोह उसके बदन में एक करंट सा दौड़ा .. उसके लोडे में भी हलचल होने लगी …

भाईसाहब मेयोनेज़ तोह डालिये .. मुझे मेयोनेज़ बहुत पसंद हैं मोमोस के साथ ..

बुड्ढे ने थोड़ा मेयोनेज़ डाला .. लेकिन रौशनी बोली .. और डालिये न मेयोनेज़ मुझे बहुत hi पसंद हैं .. और डालिये …

बुद्धा मुस्कुराया और मेयोनेज़ और दाल दिया प्लेट में.

रौशनी मोमोस को अच्छे से मेयोनेज़ में डूबा डूबा कर खाने लगी ..

“उफ्फ्फ बेहिसाब गरम नहीं हैं मोमोस .. काफी ठन्डे हैं और ुए मेयोनेज़ भी काफी फीका हैं .. लगता हैं लौ क्वालिटी का हैं मेयोनेज़ … “

“उफ़ माफ़ करिये .. आप जैसी गर …. नहीं में करता हूँ गरम आपके लिए .. और मेयोनेज़ अच्छे क्वालिटी का हैं मैडम …”

“मुझे तोह नहीं लगा , खैर .. आप मुझे गरम और फर्श मोमोस दीजिये …”

‘मैडम फिर तोह मुझे फिर से शुरुवात करनी होगी .. आप को 10-15 मं रुकना पड़ेगा …”

“ओह हो उफ्फ्फ ममम ठीक हैं रूकती हूँ …” तब तक रौशनी को किसी ने बुला लिया तोह वह वहां चली गयी बात करने .. . बुद्धा अभी भी रौशनी के पुरे बदन को देख प् रहा था और घूरे जा रहा था … रौशनी भी यह बात नोटिस की लेकिन कुछ रिएक्शन न दी बस बातें जारी राखी …

वहां रौशनी के बदन का आकर देख और उसके टच का एहसास से उसके लोडे में जान आने लगी थी … बहुत दिनों से अपनी बीवी की चुदाई भी नहीं करा था इसलिए उसके अंदर की गर्मी काफी भड़क रही थी .. धीरे से उसका 6 इन का मोटा लोढ़ा पूरा टाइट हुआ और वह अपने लुंगी में से उसे खुजलाने लगा …”

फिर उसे एकदम से एक आईडिया आया … मोमोस तैयार हुए थे .. वह स्टाल के पीछे के हिस्से में मेयोनेज़ लेने चला गया .. उसने फिर अपने लोडे को बहार निकला और अपने लोडे को हिलने लगा जपोरोन से … और कुछ मं में उसके लोडे से उसके सेह के सफ़ेद और घड़ा रास निकला और उसने उसे मायोनीज़ में उतर दिया .. उसका माल तोह मेयोनेज़ से ज्यादा था और गधा भी .. उसने उसे ाचे से मिक्स किया .. लेकिन ऊपर से एक बूँद और अपने लुंड से निकला माल उस मेयोनेज़ पर डाला जिससे उसने मिक्स नहीं किया .. फिर एक प्लेट में मॉम्स डालने और साइड में मेयोनेज़ अपने लुंड के माल से मिक्स हुआ वाला ..

रौशनी फिर से स्टाल पर aayi”bhaisaahab हो गए मोमोस ….”

“हाँ मैडम लाया … यह लो फ्रेश मोमोस और फ्रेश मेयोनेज़ .. मेयोनेज़ कहने पर वह रौशनी को देख अपने पीले डाट दिखा कर मुस्कुराया ..”

रौशनी ने मोमोस लिए और मेयोनेज़ में दिप कर उसे खाने लगी .. पहले के मेयोनेज़ से और भी गधा था यह मेयोनेज़ और एक अलग hi सालती टास्ते था उसमें लेकिन रौशनी को बहुत पसंद आया ..

“उफ़ भाईसाहब मोमोस भी फ्रेश हैं और यह मेयोनेज़ तोह उफ़ ममम बहुत hi थिक क्रीमी … मममम इसे कहते हैं असली मेयोनेज़…”

बुद्धा मुस्कुराया , उसे पता था मेयोनेज़ को गधा तोह उसके माल ने बनाया था जो यह सेक्सी महिला चख कर मज़्ज़े ले रही थी.

“हाँ मैडम जी फ्रेश और सबसे गधा मेयोनेज़ हैं” और बुद्धा d=sidhe रौशनी की आँखों में देख अपने लोडे को उसकी धोती के ऊपर से खुजलाने लगा …

कुछ पल में रौशनी की नज़र उसकी ऐसी हरकत पर चली गयी .. वह हरकत देख उसने और एक मोमोस मेयोनेज़ में डूबा कर खाया … फिर और एक … और फिर एकदम से उसकी दिमाग की बत्ती जाली .. उफ्फ्फ यह इतना गधा मेयोनेज़ एकदम से .. उफ्फ्फ क्या इस बुड्ढे ने अपने hi गधा माल उसमें मिला दिया था उफ्फ्फ्फ़… इतना गन्दा उफ्फ्फ लेकिन हैं तोह काफी टेस्टी मेयोनेज़ उफ्फ्फ्फ़ और खाने का मन r=kar रहा हैं लेकिन अगर उसने पाना hi माल उसमें मिला दिया हैं तोह उफ्फ्फ ,,,

रौशनी की गर्मी बढ़ रही थी और इस सोच से की वह उस बुड्ढे का माल चख रही हैं उसे सलीम, असलम और रमेश के लोडे की माल की याद आयी …

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और दीजिये मेयोनेज़ भाईसाहब … बुद्धा तोह काफी खुश हुआ और उसने उसके माल से मिक्स हुआ और मायोनेसे अब मोमोस पर सीधे से दाल दिया …

रौशनी मज़्ज़ा में पूरा मॉम्स खा गयी और उसके ऊपर वाला मेयोनेज़ भी …. उसके इस सोच से की उस मेयोनेज़ में इस बुड्ढे का गधा माल मिला हुआ हैं इससे और मस्ती च रही थी .. उसकी बुर उस सोच से गीली हो चुकी थी …

“भाईसाहब बढ़िया मोमोस और आपका मेयोनेज़ तोह स्पेशल टास्ते था उफ्फ्फ..”

“हाँ मैडम जी आप रोज़ स्टाल पर आइये यही पास में hi रहता हूँ हर शाम को …. और सारा मोमोस और स्पेशल मेयोनेज़ भी बहुत दूंगा आपको रोज़ रोज़ चख कर उसके स्वाद का आनंद लीजिये …”

“हाँ भाईसाहब आपके स्पेशल मेयोनेज़ को तोह रोज़ आकर चखूंगी … मस्त गधा मोयोनेसे था .. और रौशनी कुछ वाइल्ड करि .. वह यह बात बुड्ढे के लोडे पर निशाने जैसे देख बोली .. और अपने निचे होठों काट लिए …..

बुद्धा यह देख समझ गया की रौशनी सब जान चुकी थी और फिर भी उसे बहुत मज़्ज़ा आया था और उसके स्पेशल मेयोनेज़ को चखना चाहती थी …

“अच्छा भाईसाहब कल ज़रूर आउंगी आपने स्टाल पर आपने मेयोनेज़ को चखने .. रौशनी ने उसे पैसे दिए और रौशनी बोल्ड होकर उसे आंख मार

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ी और अपनी चूतड़ों को जानबूझ कर हिलाते हुए ( ताकि मोमोस वाला बुद्धा देख सके ) आगे चली गयी. वहां बुद्धा अपने फिर से सख्त होते लोडे को खुजलाने लगा .. उफ्फ्फ्फ़ मेयोनेज़ के साथ कभी मेरा बैंगन भी खिलाऊंगा तुम्हे मैडम ….

रौशनी उस छोटे से एडवेंचर के बाद बाकी के ंगो स्टाफ के साथ मेले के बाकी चीज़ों को देखने घूमने चली गयी..

मेले में गुब्बारे शूट करने वाला एक खेल था , वह एक कोने में था सबसे थोड़ा छिपा हुआ क्यूंकि शूटिंग का गेम था न बाकी को चोट पहुँच सकती हैं इसीलिए दूर था, रौशनी को बचपन में वह बहुत पसंद आता था मेले में खेलना इसीलिए फिर वहां चली गयी ंगो के लोगों का साथ छोर.

वहां एक जवान लड़का बाकी के लोगों को गुब्बारे शूटिंग का खेल सुपरवाइज़ कर रहा था .. रौशनी वहां पहुंची तोह सबका शूटिंग का गेम ख़तम हुआ था और लड़का सब पैक कर रहा था. रौशनी ने उससे बोलै की उसे भी खेल खेलना हैं तोह लड़का बोलै की अब वह सब पैक कर जाने वाला हैं .. रौशनी निराश थी और वापस जा hi रही थी की उस जवान लड़के के पापा बोले “अरे मैडम को खेल खेलना हैं तोह और थोड़ी देर रखेंगे न ओपन स्टाल. लड़का बोलै की वह तोह जाने वाला हैं क्यूंकि उसे उसके फ्रेंड्स के साथ जाना था तोह वह बुद्धा बोलै “मैडम जी में आपको खिलाऊंगा .. खेल अआप रुकिए में सेट उप करता हूँ.

“ओह हो शुक्रिया भाईसाहब”

“ओह भाईसाहब न बुलाइये, हुज़ूर का नाम हैं फ़िरोज़” .. फ़िरोज़ एक बुड्ढे था कुछ 55 उम्र के होगा .. काळा रंग का काफी भर भरकम शरीर वाला .. उसके हाथों पर काफी बाल थे और छाती पर भी बाल उसके शार्ट जिसके ऊपर के दो बटन टूटे थे इसीलिए खुले थे वहां से साफ़ दिखाई दे रहे थे.

अब शाम का वक़्त होने लगा था , अँधेरा शुरू होने वाला था और मेले के फ्लड लाइट्स बस ों हो hi रहे थे .. बुद्धा काफी होशियार था उसने जान बुझ कर सेटअप और कोने में ओपन कर दिया जहाँ कोई आता जाता नहीं था और भीड़ भी दूर था.

रौशनी तोह बस खुश थी उसे शूटिंग का खेल , कहल प् रही थी.

रौशनी ने एक गन ली और शूटिंग करने लगी , पहली चांस में वह सब निशाना चुकी .. गन काफी भरी थी , उस बुड्ढे ने जान बुझ कर सबसे भरी वाला गन दिया था रौशनी को .. उस ेपता था रौशनी को उस गन से शूट करने में बड़ी दिक्कत होगी और उसकी मदत वह मांगेगी.

बुद्धा तोह पूरी तरह से रौशनी की बदन , रंग रूप पर लट्टू हो चूका था ..

रौशनी सब मिस करि निशान तोह साद हो गयी .. वहां गन बुड्ढे को वापस दे रही थी की बुद्धा बोलै

“अरे मैडम खेलिए न और .. बस इतना hi.”

“फ़िरोज़ जी वह काफी भरी गन हैं और निशाना सब मिस करि हूँ , मज़्ज़ा नहीं आ रहा हैं इसीलिए”

“रे रौशनी मैडम में मदत करता हूँ न , लगता हैं बहुत सैलून से नहीं खेली हो यह खेल.”

“हाँ फर्ज़ जी बचपन में खेली थी उसके बाद नहीं , तब भी पापा मदत करते थे मुझे.”

“चलो रौशनी मैडम में करूँगा मदत .. आप बस गन पकड़िए ..

फ़िरोज़ रौशनी के पीछे आ जाता हैं और शूटिंग का गेम शुरू करते हैं.

अब रौशनी के पास बन्दूक थी, फ़िरोज़ उसकी मदद करने के लिए उसके पीछे आया

फ़िरोज़ बुड्ढे को रौशनी की चिकनी गोरी पीठ दिख रहा था और उसका लुंड उभरने hi वाला था.

रौशनी ने महसूस करि की फ़िरोज़ बुड्ढे के मज़बूत हाथ उसकी पीठ को छू रहे हैं... उसकी चिकनी और गोरी पीठ को... उसे उस मोमो के माल की मस्ती और अब इस बुड्ढे की मर्दानी टच से उसकी शरीर में एक झुनझुनी सी महसूस हुई... कितने मज़बूत हाथ थे इस बुड्ढे के ... अब फ़िरोज़ के हाथ रौशनी के चारों और थे और वह बन्दूक पकड़े हुए था, और साथ hi रौशनी के मुलायम गोरी से हाथ भी पकड़े हुए था...

“रौशनी मैडम... देखो अब तुमने बन्दूक पकड़ ली है... अब गुब्बारों पर ध्यान दो... बड़े गुब्बारे नहीं हैं फिर फिर अच्छे साइज के हैं और वह हसने लगा.

रौशनी समझ गई उसकी दोहरी मतलबी बातें और वह शर्माने लगी... फिर उसने गुब्बारों पर ध्यान केंद्रित किया और दो शॉट लिए जिसमें से एक हिट हुआ और एक मिस. रौशनी गुब्बारे शूट करने पर ध्यान देना चाहती थी लेकिन उसका ध्यान इस बात पर थी की वह बुद्धा फ़िरोज़ उसके चिकने हाथों को अपने खुरदुरे बड़े हाथों में कैसे पकड़े हुए था... उसे उसकी मर्दाना गंध महसूस हो रही thi…jisse उसकी ज़्यादा झुनझुनी महसूस करा रही थी

लेकिन रौशनी फिर से कंसन्ट्रेट करि शूटिंग पर और फ़िरोज़ के मदद से वह बन्दूक से एक गोली चलाई... और दो तीन गुब्बारे हिट हुए और रौशनी काफी खुश हुयी … अब जैसे hi बन्दूक चली, रौशनी पीछे हैट गयी... लेकिन फ़िरोज़ के मज़बूत हाथों ने उसे गिरने से रोक लिया... अब उस बुड्ढे के हाथ उसके चारों और थे... रौशनी को उसकी मर्दाना बाहों में बहुत अच्छा लग रहा था. फिर दोनों ने और गोलियां चलाईं और हर गोली एक गुब्बारे को हिट हुयी और उसके साथ बुद्धा रौशनी को और ज़ोर से पकड़ रहा था.. और इस बात से प्यासी रौशनी में मस्ती च रही थी..

फ़िरोज़ बोलै - “अब में मदत काम करूँगा बस आप शूट करिये में आपके कन्धों को पकड़ लेता हूँ ताकि जर्क न बैठे.

फ़िरोज़ धीरे से अपने हाथों को रौशनी के पीठ पर फेरने लगा .. रौशनी अपनी चिकनी पीठ पर फ़िरोज़ हाथों की टच का आनंद ले रही थी... उफ़, उसने अपने aas-paas बहुत दिनों से इतना मर्दाना बाहें महसूस नहीं की थी. लेकिन जैसे फ़िरोज़ ने कण्ट्रोल छोरा रौशनी गुब्बारे मिस करने लगी. फ़िरोज़ बुद्धा बोलै “मैडम आप फिर से मिस कर रही हो रुकिए में फिर से मदत करता हूँ.” और रौशनी कुछ बोलने से पहले उसने फिर से पीछे से रौशनी के हाथों को और बन्दूक जकड ली.

फ़िरोज़ वहां, रौशनी जैसी माल को इतनी कसकर पकड़ने का आनंद ले रहा था... वह उसके हाथों और उसकी बाहों को कस्ते रहा... उसका लैंड सख्त होता जा रहा था और रौशनी अब उसके लुंड को अपने नितम्बों पर चुभता हुआ महसूस कर सकती थी... dheere-dheere उसने उसके बाएं और फिर दाएं नितम्बों को दबाने लगा... 10तह शॉट के बाद उसका लैंड असल में रौशनी की दोनों गांड की दरार के बीच जा रहा था जिससे रौशनी को गर्मी का एहसास हो रहा था...

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(उफ़ इस बुड्ढे का वह बड़ा चीज़ मुझे नीचे चुभ रही है, उफ़, कैसे बताऊँ इसे उफ्फफ्फ्फ़ मममम) रौशनी महसूस करती रही लेकिन शर्म के कारण कुछ कह नहीं पाई. फ़िरोज़ जानता था की वह क्या कर रहा है और उसका आनंद ले रहा था... हर शॉट के साथ उसका लुंड अब रौशनी के नितम्बों को और भी ज़्यादा चुभता...

हर शॉट पर फ़िरोज़ बुड्ढे का लुंड रौशनी को चुभ रहा था और यह सब अब उन दोनों के लिए ये बहुत ज़्यादा हो रहा था... ऐसा लग रहा था जैसे वो दोनों ड्राई हुम्पिंग कर रहे हों... फ़िरोज़ के बड़े लुंड के चुंबन से महसूस हुए 12 शॉट और 12 धक्कों के बाद, रौशनी की पंतय गीली हो गई थी.

फ़िरोज़ जी अब छोड़िये न मुझे खेल ख़तम हुआ हैं .. फ़िरोज़ अलग होने लगा रौशनी से लेकिन जैसे hi फ़िरोज़ ने रौशनी से अपने हाथ हटाने शुरू किये, उसने अपने हाथों से उसकी चिकनी पीठ पर सहलाये और उसकी पीठ और बाँहों को भी एक बार कसकर दबाकर चोर दिया…. रौशनी इन सब स्पर्शों का आनंद ले रही थी... इस सब कहे ने उसे गर्म कर दिया था...

रौशनी स्लीवलेस साड़ी में. पसीने से तर बतर, उसकी बाँहें बेहद सेक्सी लग रही थी... रौशनी को इस स्तिथि में देखकर फ़िरोज़ का लुंड उसकी ुंडेरवेअर में झटके खाने लगा…

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यह सब अब बहुत हो चूका था .. रौशनी ने फ़िरोज़ को कुछ पैसे दिए और फिर वहां से चली गयी. फ़िरोज़ उसे पुकारता रहा लेकिन रौशनी न पलटी न उसे ध्यान दी और वहां से चली गयी. उसकी छूट में काफी नमी हुयी थी उस बुड्ढे फ़िरोज़ के साथ उस मस्ती के वजह से .. रौशनी की गर्मी काफी बढ़ चुकी थी और वह घर जाकर इन सब हादसों की सोच कर अपने घर होनी छूट से खेलने का सोची.. … रौशनी ने ंगो के लोगों से बोलकर वह मेले के बहार जा hi रही थी की उसे रमेश दिखे मेले के जस्ट बहार.

रौशनी को रमेश की रिक्शा और रमेश खुद दिखे .. कुछ सेकंड में दोनों की नज़रे मिली .

आखिर कर उसे रौशनी इतने दिनों बाद दिखी और जो उसने देखा उसके होश उड़द गए .. रौशनी ने एक पूरी स्लीवलेस थिंग मटेरियल वाली साडी पहनी थी , जैसे वह करीब आयी रमेश उसकी सारे की लौ वैस्ट देख अपया जिसमें से उसकी नाभि चमक रही थी .. पहले से और भी फिट लग रही थी रौशनी .. लेकिन उसकी हिप्स और चूतड़ अतः और बड़े बड़े लग रहे थे .. रौशनी ने जो ब्लाउज पहन तिह वह काफी मात्रा में पीछे से डीप कट थी और आगे से भी व् शेप की ब्लाउज थी जिस में से उसकी गोरी चूचियों की दरार अब साफ़ दिखाई दे रही थी .. रौशनी के कानों में बड़े झुमके पहने थे जो पहले वह कभी नहीं पहनती थी … उसने लिपस्टिक भी काफी लाल वाली पहनी थी .. रौशनी तोह बिलकुल एक सेक्स पारी लग रही थी .. इतने दिनों बाद रमेश ने रौशनी को देखा था और वह बिलकुल बदल गयी थी .. उसकी चाल में भी मटक और भी मस्त थी और बड़ी चूतड़ों को काफी हिला रही थी .. रौशनी को ऐसे देख रमेश का लुंड हलचल करते हुए झटके मारने लगा और काफी सख्त हुआ था उसकी चड्डी में. आखिर कर रौशनी उसके काफी करीब आ चुकी थी .. उसुअल्ल्य रौशनी उससे हाथ मिलती थी लेकिन रौशनी एकदम से उससे चिपक गयी थी और उसे एक तीग़ हुग देने लगी …रमेश ने भी मौका नहीं गवाया और उसने भी रौशनी की टोघट हुग देकर अपने बदन को उसकी बाद चूचियों से चिपका दिय्या और अपने हाथो को उसके नंगी गोरी पीठ पर फिरने लगा .. आस पास में लोग देख रहे थे लेककन न रौशनी , न रमेश पीछे हेट और कुछ पल ऐसे hi चिपके रहे जैसे बिछड़े हुए दो प्रेमी बहुत सालों से मिले हो .. रमेश का सख्त लुंड रौशनी की चुतर पर टकरा रहा था और रौशनी के मुँह से उस एहसास से आह निकल गई .. फिर रमेश ने और बोल्ड होकर एक झटका मारा और उसका सख्त लोढ़ा सीधे रौशनी की चुत्तर पर जा टकराया .. और रौशनी के मुँह से और भी जोर से आह निकल गयी.

आखिर कार दोनों जुड़ा हुए और रमेश रौशनी की आँखों में आँखे दाल खड़ा रहा और रौशनी भी अपनी नज़र निचे नहीं हटाई … उसकी बुर जिसमें नमी हो गयी थी , अब गीली भी हो चुकी थी ….

खैर दोनों रिक्शा में बैठ गए और रवाना हुए .. रस्ते में रमेश बोले रौशनी जी आप तोह चा गयी हो … आप बड़ी सेक्सी लग रही हो ..

रौशनी शरमाते हुए कहती हैं .. उफ्फ्फ शुक्रिया रमेश जी आप भी काफी स्मार्ट लग रहे हो … आप ने तोह बढ़िया सा सफ़ेद शर्ट और पंत पहना हैं ..

“शुर्किये रौशनी जी .. आपकी ऐसी तारीफ को सुन बहुत खुश हुआ हूँ ..”

वैसे आप भी इस स्लीवलेस डीप बैक बलोसुए में तोह मस्त माँ … “

“अरे आगे बताओ रमेश जी आप रुकिए नहीं …”

“रौशनी जी आप पूरी माल लग रही हो .. उफ़ बड़ी सेक्सी और कामुक लग रही हैं आप .. आपके इस खिल उठने का राज़ क्या हैं हमें भी बताइये.”

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रौशनी सोच में पड़ी .. (उफ्फ्फ इन्हे कैसे बोलू कीटने दिनों में दो बड़े ठरकी और मस्त गबरू जवान बुद्धों की बदौलत हैं .. उफ्फ्फ रगड़ रगड़ के निचोड़ निचोड़ के दोनों सलीम और असलम ने मेरी ठुकाई करि हैं कई दी न .. उफ्फ्फ्फ़ मेरी चूचियां और चूतड़ उनके hi लगातार मस्ती के बदौलत इतनी मस्त हो गयी हैं इतने बड़े और उभरे से हुए हैं) और असलम और सलीम की काळा लुन्डों का दृश्य उसके सामने आया कैसे दोनों के लुंड झूल रहे हैं और कैसे दोनों ने उसकी छूट और गांड की बुरी तरह से रात भर कुटाई करि थी … उसकी बुर भी पूरी गीली हो चुकी थी और उसकी थोंग स्टाइल पंतय भी काफी गीली हो चुकी थी.)

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रौशनी जी किन ख्यालों में आप खो गयी हो ….”

रौशनी फिर से खुद को संभालती हैं और उसके चेहरे पर एक मुस्कान और लाली च जाती हैं. “कुछ नहीं रमेश जी … बस आप ने hi उस दिन इतने मस्ती दी थी उसी की याद कर रही थी …”

“अच्छा मम रौशनी जी फिर से वही रात भर मस्ती करनी हैं तोह बताइये … और भी मस्ती करेंगे बहुत दिनों से भूके हैं एक रगड़ रगड़ कर ठुकाई के लिए ..”

रमेश पुरे बोल्ड बातें कर रहे थे जिससे रौशनी की गर्मी और हवस और बढकने लगी थी..

“उफ्फ्फ रमेश जी आप तोह बस वही सोचिये .. औरत क्या बस उसके लिए hi हैं क्या ..”

“रौशनी जी आप औरत नहीं अप्सरा हैं और आपको तोह रानी बन कर रखने का मन करता हैं .. आप से मस्ती बस चुदाई नहीं बल्कि आपसे बातें , आपसे फ्लिर्टिंग आपकी चहकींग सब कुहक तोह हैं … बहुत मिस किया आप की सेक्सी जवानी को रौशनी जी … मेरे घोड़े में अब जान आ गयी हैं आपको अपने पास देख ..”

“मम अपना घोडा काबू में लाइए अब चुदाई की सोच भूल जाइये …”

“घोडा तोह दौड़ने का मन hi हमेश रखता हैं रौशनी जी .. मेरे घोड़े की लगाम तोह आपके हाथों में हैं .. “

उफ्फ्फ रमेश जी कैसी अश्लील बातें कर रहे हैं उफ्फ्फ ममम बड़ा मज़्ज़ा आने लगा हैं इनकी ऐसी अश्लील बातें सुनकर..”

रौशनी जी आपको आज शाम टाइम हैं तोह चौलिये हमारे साथ पार्क ..”

“ओह्ह अच्छा कौनसा वही पार्क जहाँ आप ले गए थे पहली बा र…”

“नहीं जानेमन और एक नया पार्क ढूंढा हूँ हम … यहाँ से 20 कम दुरी पर हैं .. और भी बड़ा और भी मज़ेदार …”

“उफ्फ्फ ममम अच्छा इंटरेस्टिंग … फिर अब ले जाने का प्लान हैं क्या वहां ..”

रौशनी जी मेरा प्लान होता तोह सीधे अपनी कुटिया में ले जाता आपको …”

“उफ्फ्फ रमेश जी आप भी न … नहीं नहीं पार्क चलेंगे …”

“उफ़ सच ममम अच्छा तोह चलिए … बड़ा मज़्ज़ा आएगा .. बहुत बड़ा पार्क हैं और शाम में तोह और भी मज़ेदार … रमेश रक्षा के ीाने में देख ापखं मारता हैं और रौशनी वह देख मुस्कराती हैं … जान बुझ कर अपना पल्लू और निचे सरकती हैं ताकि रमेश उसकी गोरी चूचियों की दरार साफ़ साफ़ आईने में से देखे ..

उफ्फ्फ बड़ी बोल्ड बानी थी रौशनी … सीधे सीधे निमंत्रण दे रही थी रमेश को उसके साथ पूरी मस्ती करने की …

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रमेश बहुत खुश था और उस पार्क के लिए रस्ते पर निकल पड़ा … उसे आईने से रौशनी की मुलायम चूचियों की दरार दिख रही थी और उसकी गर्मी बढ़ रही थी .. रौशनी भी जान बुझ कर अपना क्लीवेज इतना दिखा रही थी ताकि रमेश गर्म हो जाए .. और वह खुद बहुत गरमी फील कर रही थी बदन में .. कुछ 20 मं बाद पार्क आ गया .. पार्क ऐसे इलाके में था जहाँ पार्क को चूर कुछ नहीं था .. ऐसा पार्क तोह जरूर कपल्स के लिए hi बना हो … इस बात से रौशनी शर्मा रही थी .. वह और रमेश तोह एक कपल hi हैं न ः ..

दोनों रिक्शा से उतर गए और पार्क की और चल दिए .. पार्क में 5 रे की फी थी जो रमेश ने दे दी और दोनों अंदर चले गए .. पार्क में काफी साड़ी झाड़ियां थी … बहुत hi सुन्दर ग्रीन पार्क था … ठंडी हवा भी चल रही थी जिससे और भी मस्त माहौल बना लिया था पार्क में … पहले पहले तोह सिंपल पार्क लग रहा था लेकिन अंदर धीरे धीरे रौशनी को कपल्स दिखने लगे .. कपल्स एक दूसरे में मग्न , हाथ पकडे हुए .. कोई कोई किसिंग में लगे हुए .. बहुत hi इंटिमेट माहौल था ..

पहली बार ऐसी पार्क में रौशनी रमेश के साथ गयी थी तोह उनके दूर कड़ी चल रही थी लेकिन आग उनके काफी करीब होकर चल रही थी … रमेश जान बुझ कर पीछे से चल रहा था ताकि वह रौशनी की हिलती चूतड़ों को देख सके .. उसका लोढ़ा सालामी देने की तैयारी में था ..

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रौशनी समझ गयी रमेश क्यों पीछे चल रहा था और जान बुझ कर अपनी कमर और हिलाते हुए अपनी चूतड़ों को हिला हिला कर चल रही थी .. उसकी बुर में नमी काफी हो चुकी थी और प्यार भरे कपल्स को देख और नमी बढ़ती रह रही थी उनकी बुर से ..

फिर एक छोटा सा ब्रिज आया और उसके बाद तोह झाड़ियां और भी घने होते गए ,… और भी कपल्स दिखे उसे और वह कपल्स और भी नज़दीक बैठे थे .. एक मर्द का सर उसकी लवर के झंघों पर तोह एक मर्द अपनी लवर की चूचियों को उसकी टॉप पर से दबा रहा था. निचोड़ रहा था …फिर एक कपल तोह उसका मर्द उस लेडी की टॉप में अंदर हाथ डाले उसकी चकहियों को दबोच रहा था … कपल्स सब तरह के थे , जवान, ार्ड उम्र के और बुड्ढे भी .. लेकिन कोई कपल ऐसा नहीं था जैसे वह और रमेश. एक जवान खूबसूरत महिला और उसका प्रेमी एक कला बुद्धा जो उसके उम्र से ऑलमोस्ट दुगने उम्र का था …

कुछ और चलने के बाद तोह जो रौशनी ने देख वह देखती रही … अब तोह एक लेडी सिर्फ ब्रा में थी और उसका प्रेमी उसकी चूचियों को उसकी ब्रा से निकल कर दबा रहा था और चूस भी रहा था ..

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(उफ्फ्फ्फ़ यह तोह कितने बेशर्मी से लगे हुए हैं उफ्फ्फ्फ़ , पहले पार्क में इतनी भी बेशर्म नहीं थे कपल्स उफ्फ्फ्फ़, यह तोह रमेश कुछ अलग hi कपल्स के पार्क में ले आये हैं उफ्फफ्फ्फ़ , और तोह और एक उफ्फ्फ्फ़ एक लेडीज उस मर्द के झंघों में सर रखे हैं उफ्फ्फ .. )

कुछ और गौर कर रौशनी देखि की वह लेडी तोह उसके प्रेमी का लुंड चूस रही थी उफ्फ्फ ,,, मममम आईसीए पार्क हैं उफ़ खुले में लुंड चूसै चल रही थी . उफ्फफ्फ्फ़ यह देख रौशनी की नमी और काफी बढ़ गयी की रास की बुँदे मनो निकल रही हो उसकी बुर से …

जैसे जैसे रौशनी यह सब देख रही थी वह अब रमेश के काफी नज़ज़दीक चल रही थी … उनके बीच काफी काम फैसला रह गया था .. रमेश देख प् रहा था की रौशनी कपल्स को देख गर्म हो रही हैं ..

दोनों अब ek-doosare के लिए गर्म हो रहे थे... रमेश अब और भी ज़्यादा बोल्ड हो गया और उसने रौशनी के ऊपर हाथ रख दिए और उसकी चिकनी बाँहों को कसकर पकड़ लिया और उन्हें दबाते हुए पार्क में आगे बढ़ाते गए.

रौशनी अब रमेश के उसे कसकर पकडे हुए सहज हो गई थी... चलते हुए रौशनी ने अपना सर रमेश के कन्धों पर थोड़ा टिका लिया... ऐसा लग रहा था जैसे वे एक रोमांटिक कपल हैं... रौशनी ने अपनी उँगलियों को भी अब रमेश की उँगलियों में उलझ ली और अब दोनों के उँगलियाँ एक दूसरे में उलझ गए थे…. रौशनी की गोरी हाथ जिन पर लाल नेल पोलिश था रमेश के खुरदुरे हाथों में... वे पार्क का आनंद लेते हुए चल रहे थे... पार्क में लाइट्स थी लेकिन जान बुझ कर धीमी इंटेंसिटी की थी .. इसलिए अँधेरा च चूका था तक़रीबन.

“रौशनी, मैं तुम्हारे साथ बहुत अच्छा समय बिता रहा हूँ..”

“हाँ रमेश जी, मैं भी... कितना प्यारा माहौल है…”

“हाँ रौशनी जी प्यार से भरपूर माहौल हैं ….” इतना कह कर रमेश ने रौशनी की कमर और जोर से जकड ली और पूरा पास उसे खिंच दोनों चलते रहे …

अब रमेश और रौशनी saath-saath टहलते हुए पार्क के एक सुनसान जगह पर चले गए थे जहां बहुत काम लोग थे.. दोनों ek-doosre की बाहों में, उंगलियां आपस में गुंथी हुई थीं... अब रमेश और रौशनी ek-doosare को देख रहे थे...

रमेश का लुंड zor-zor से धधक रहा था... रौशनी और उसके गुलाबी होंठ रमेश के बहुत पास थे...

रमेश फिर धीरे से आगे झुका.. रौशनी भी थोड़ा सा आगे झुकी.. वे बहुत पास थे.. रौशनी के गुलाबी होंठ और रमेश के काले बड़े होंठ.. बहुत पास.. 4 इंच पास.. फिर 3 इंच, फिर 2 इंच और अब बस 1 इंच पास...

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उनके हाथ अभी भी ek-doosare में थे.. लगभग अँधेरा था और दोनों वहीँ थे, उनके होंठ ek-doosare के बहुत पास थे.. रौशनी की आँखें अब बंद हो गेन और वह महसूस की की रमेश के काले और बड़े होंठ लगभग उसके मुलायम और गुलाबी होंठों को अब छू hi रहे थे ……….

रौशनी रमेश की बाहों में थी.. दोनों ek-doosare के इतने करीब थे.. उनके होंठ लगभग ek-doosare को छू रहे थे..

रौशनी ने अपनी आँखें बंद कर ली थीं क्योंकि वह रमेश के बड़े होंठों के स्पर्श की प्रतीक्षा कर रही थी...

रमेश को कोई जल्दी नहीं थी.. वह अपने हाथों से रौशनी की चिकनी नंगी पीठ को उसके गहरे ब्लाउज में रगड़ रहा था...

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उसके हाथ अब उसके ब्लाउज के अंदर थे और उसकी ब्रा को महसूस कर रहे थे..

रौशनी ने अपने ब्लाउज में रमेश की उँगलियों को अपनी ब्रा को छूटे हुए महसूस करि.. इससे वह और भी कामुक हो गई और चुम्बन की प्रतीक्षा कर रही थी..

आखिरकार ऐसा hi हुआ, रमेश ने रौशनी के होंठों पर चुम्बन दिया.. पहले हलके से, फिर अपने बड़े होंठों को उसके कोमल होंठों पर दबाकर, ज़ोर से और ज़ोर से, जब तक की उसके कोमल होंठ खुल नहीं गए और रमेश उसे ज़ोर से चूमने में सक्षम नहीं हो गए... रौशनी ने अपने हाथ उसके सर पर रखे हुए थे और रमेश उसे गहराई से चूम रहा था... उसकी जीभ रौशनी के होंठों की और बढ़ी और उसने अपने होंठ खोले ताकि उसकी जीभ उसके मुंह के अंदर आ जाए और उसकी जीभ रमेश की जीभ से मिल गई और वे ek-doosare के साथ lip-lok में पुरे लग जाए..

वक़्त मानो रुक सा गया था..: ऐसा लग रहा था जैसे उस जगह सिर्फ वो दोनों hi हों और aas-paas कोई न हो... रमेश , रौशनी के कोमल होंठों का आनंद ले रहा था.. रमेश का लुंड इतना कड़ा हो गया था की उसके अंडरवियर और पंत से टकरा रहा था और आज़ाद होने का इंतज़ार कर रहा था... अब वो रौशनी के कोमल पेट से भी सत्ता हुआ था.. रौशनी ने इसे महसूस किया और मन hi मन गर्मी में दुब रही थी... वो रमेश के साथ इतने गहरे lip-lok में थी

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एकदम से रौशनी ने चुम्बन तोड़ दिया क्योंकि उसे एहसास हुआ की उस सुनसान जगह में कुछ कपल्स आ रहे हैं.. रौशनी ने अब अपनी आँखें खोली और रमेश की आँखों में देखने लगी .. उसके मन में थोड़ी शर्म और थोड़ी कामुकता थी..

रमेश बस रौशनी को, उसके होंठों को, उसके प्यारे चहरे और उसकी badi-badi आँखों को देखते रहा..

रौशनी और रमेश उस जगह से निकल पड़े ..

रौशनी बोली “रमेश जी माफ़ करिये लेकिन ऐसे पब्लिक पार्क में मुझे नहीं करना यह सब … चलिए जाते हैं.”

रमेश बोले “अरे नहीं रुकिए तोह सही डिअर … पार्क तोह और ख़तम नहीं हुआ .. एक जगह ऐसे हैं प्रियवत यहीं जहाँ कोईपुब्लिक न देखेगा न डिस्टर्ब करेगा .. आपो बस मेरे साथ आइये ,.

रौशनी बस मुस्कुराई और दोनों चल पड़े

दोनों कुछ 10 मं चले तब पार्क में ऐसा एक एरिया था जो सेपेरेटेड था और उसके बहार एक गार्ड था ..

रमेश जी यह कहाँ ले आये , यहाँ तोह एरिया सेपरेट हो रहा हैं और एक गार्ड भी हैं..

रौशनी जी यह भी पार्क का hi एरिया हैं. यहाँ पर अलग अलग रूम्स हैं जहाँ कपल्स कुछ जानते के लिए बुक कर सकते हैं ..

रप्शनि यह सुन शर्मा उठी .. “उफ़ क्या मतलब आप मुझे यहाँ इस रूम में ले जाकर .. उफ्फफ्फ्फ़ रमेश जी आप भी न “

“हाँ रौशनी जी आपको पब्लिक में मस्ती नहीं करनी तोह प्राइवेट में करेंगे …उसमें क्या हैं .. क्या आपको मस्ती नहीं करनी हैं मेरे साथ !!??..”

रौशनी बस शरमाई और कुछ न बोली … उसकी आँखें साफ़ साफ़ यह रही थी की सूए रमेश के साथ ढेर सार मस्ती करनी हैं आज रात …

रमेश और रौशनी उस गार्ड के पास जाते हैं. गार्ड की उम्र होगी लगभग 30 की .. वह रमेश को फिर रौशनी को देखता हैं और स्तब्ध रहता हैं की इस बुड्ढे के हाथ ऐसी जवान लेडी कैसे .. क्या दोनों लवर्स हैं ..

क्या मस्त माल हैं ह्येह औरत , उफ़ रात भर मिल जाए तोह जन्नत की सैर रात भर करवाऊंगा इसे उफ्फ्फ … कैसे इस साल बुड्ढे की हाथ लगी हैं ऐसी माल उफ्फ्फ.)

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यह सोचते रहता हैं गार्ड की रमेश बोलता हैं..

“सुन भाई .. रेट बता do-teen घंटे का इन रूम्स के लिए …

“भाईसाहब .. इस साइड गेट के पास का लोगे तोह रस 500 होगा हर घंटे का और दूर वाला अंदर की और का लोगे तोह हर घंटे का रस 1000.

रमेश को तोह अंदर का hi लेना था कर्मा .. उसे पता था चुदाई के वक़्त रौशनी कितनी मोअन करती हैं और उसे भी बे झिझक उसकी बुर की कुटाई करनी थी आज …

“अच्छा मुझे लास्ट का देना रूम और उसके 1500 हर घंटे लेना ..

गार्ड - “अच्छा फिर 2 घंटे के लिए होगा 3000.”

यह सब बातें रौशनी सुन रही थी और शर्म से लाल हो रही थी .. (इस गार्ड को तोह समझ आयी होगी की में रमेश जैसे बुड्ढे के साथ छोड़ने उस कमरे में जाने वाली हूँ .. क्या हुआ था उसे … वह रमेश एक रिक्शा ड्राइवर बुड्ढे के साथ छुड़वाने ऐसे कमरे में जाना भी चाहती हैं … ऐसे तोह उसने पहले ज़िन्दगी में कभी सोचा न होगा …

इन बुद्धों से चुद कर उसकी आग शांत नहीं बल्कि और भी बढ़ गयी थी …)

रमेश 1500 देता हैं और रौशनी बाकी के 1500.. फिर रमेश बोल्ड होकर रौशनी के कमर में हाथ फढाल उसे अपने पास खींचता हैं और उसकी चुर्तदों को भी दबाता हैं .. जिससे रौशनी के मुँह से हलकी सी आह निकलती हैं जो गार्ड देख और सुन और भी स्तब्ध रहता हैं ..

“उफ़ रमेश जी इस गार्ड के सामन तोह ऐसे न करिये उफ्फ्फ पलज़्ज़ज़ …”

रमेश बस रौशनी को देखता हैं और एक आखरी कटड़ों के दबोच से फिर रौशनी को छोर आगे चलता हैं.

वहां गार्ड बुदबुदाता हैं हलके से लेकिन रौशनी को सुनाई दे ऐसे ..

मैडम जी यह बुद्धा 2 घंटे से पहले फ़िराक़ हो जाये तोह मुझे बुलाना में और दो घंटे मस्ती करूँगा आपके साथ..

रौशनी उस गार्ड को देखती हैं और बोलती हैं “भाईसाहब , इन्हे तोह दो घंटे भी काम पड़ेंगे और रौशनी मुस्कुराती हैं और गार्ड को आँख मार रमेश के पीछे चलने लगती हैं.

गार्ड मन hi मन बुदबुदाता हैं (साला बुड्ढे को इस उम्र में भी ऐसी जवान घोड़ी मिली हैं, हमें तोह जवानी में ऐसी रापचिक माल नहीं मिलती …)

वहां रमेश के हाथों में हाथ डाले रौशनी कमरे के तरफ जा रही थी , उसकी बुर से काफी रास अब टपकने लगा था कमरे में रमेश के मोठे काळा लुंड से 2 घंटे की भयंकर चुदाई की सोचते हुए



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वहां रमेश के हाथों में हाथ डाले रौशनी कमरे के तरफ जा रही थी , उसकी बुर से काफी रास अब टपकने लगा था कमरे में रमेश के मोठे काळा लुंड से 2 घंटे की भयंकर चुदाई के अपेक्षा से …

दोनों कमरे के अंदर चले गए और रमेश ने दरवाज़े को अंदर से लॉक कर दिया …

फिर दोनों एक दूसरे को एक मूषकराहट के साथ देखते हुए पास आगे और अपनी बाँहों में एक दूसरे को लेते हुए धीरे धीरे दोनों

के होठं आपस में चिपक गए. और दोनों चुम्बन का आनंद उठाने. उनका

चुम्बन काफी लम्बा था. दोनों एक दूसरे के होठ चूसते चूसते अपनी

जीभों का पेच लड़ने लगे.

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चूमते हुए रौशनी रमेश के चड्डी में खड़े लुंड को उसके पंत के ऊपर से

hi सहलाने लगी.

चुम्बन लेते लेते रमेश ने रौशनी की ब्लाउज निकाल फेंकी. रौशनी की ब्रा के हुक भी निकल उसने ब्रा को उस कमरे के ज़मीन पर फ़ेंक दिए. रौशनी के अब गोर-

गोर मुम्मे खुली हवा में सांस लेने लगे. रमेश एक हाथ से रौशनी

की गर्दन संभाले हुए उसके नाजुक और गुलाबी होठो का रूस पि रहा

था साथ hi अपने दूसरे हाथ से उसके कड़क हो रहे निप्पल को सहलाने

लगा. रौशनी के पूरे बदन में करंट दौड़ रहा था. हवस का नशा

तो चढ़ा हुवा था hi और वासना का रंग पूरे बदन में चढ़ने

लगा.

रौशनी और रमेश दोनों बस इसी में ऐसे hi उन्हें मजा आरहा था. रमेश ने अपना हाथ नीचे कर रौशनी के एक मचलते हुए मुम्मे को पकड़ लिया. फिर अपना दूसरा हाथ

बढाकर अपने रौशनी के दूसरे खुले मुम्मे को पकड़ लिया. दोनों अपने हाथ से उसके

मुम्मे को मसल रहा था रमेश. कभी धीरे तो कभी जोरसे. कभी पूरे मुम्मे तो कभी केवल चुकी.

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फिर, रमेश ने अपने होठो को उसके होठो से फ्री करके उसके गाल और

गर्दन पर चुम्बनों की बौछार करते हुए उसके मुम्मो को जोरों से चूसने लगा. अपने मुम्मो पर रमेश के गरम होठो की टच पड़ते hi

रौशनी "एससससस" कहकर सिसकारी भरली. अपने होठो को दबाकर वह इसका

आनंद उठा रही थी. रमेश ने अपने होठो के sath-sath अपनी जीभ से

उसके भरे मुम्मो को चाटना शुरू कर दिया. नीचे से ऊपर चाटने से

रौशनी की सिसकारियां जोर पकड़ने लगी. "ओह्ह्ह.. छतो… मेरे चूचियों को….

आह्ह्ह्ह… बड़ा मज़ा आ रहा है… एस… एस… इनको जोर जोर से अपनी जीभ

से रगड़ो…. मेरे जिस्म में …. उफ्फ्फ …. क्या हो रहा है…. एस छतो

इन्हे."

रौशनी ने रमेश के मुस्टंडे लुंड को अपने मुहं में लेकर चूसने

लगी. रमेश का लुंड मस्त हो कर उसके मुहं में भंगड़ा करने लगा. अपनी

जीभ और होठो से उसको चूसने लगी. रमेश के पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ रही थी. वह छह रहा था की रौशनी उसके लुंड को चूसती रहे, चूसती रहे बस चूसती रहे. उसके मुहं से सिसकारी निकली, "ओह्ह्ह बेबी,

चूसो.. मेरे लुंड को चूसो … जोर से … हाँ .. हाँ … स्पीड से ….

चूसो …. चूसो मेरे लुंड को …. बड़ा मज़ा आरहा है … जैसे

तुम्हारे होठ नहीं बल्कि naram-naram छूट में मेरा लुंड घुसा हुवा

है… चूस … मेरे लुंड को मेरी रानी."

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रमेश चाटने के साथ साथ रौशनी के बड़े बड़े संतरों को अपने मुहं

में भरकर उनको चूसता जारहा था. इस बूब्स चुसाई से रौशनी इतनी

उत्तेजित हो गयी की अपने हाथ बढाकर उसने रमेश की शर्ट खोलने

लगी. अपने हाथ बढ़ा कर

रमेश की पंत के बेल्ट और चैन को खोल दिया. रौशनी ने उसकी पंत और अंडरवियर

को झटके से नीचे खींच लिया. और सामने आगे रमेश का लुंड. काफी

कला मोटा और दुमदार. अपने हाथ को बढाकर रौशनी ने रमेश के लुंड को अपने नाज़ुक हाथों में लपक लिया और लगी

उसको सहलाने. अपने हाथ से उसके लुंड को घूमती और ट्विस्ट करती हुयी उसके मोठे काळा केले को लगी सहलाने.

रमेश ने रौशनी को अपने बाँहों में उठाकर वहां कमरे के एक सोफे पर से उसे पेट के बल लिटा दिया और अपने पूरे कपडे निकल दिए और

नीचे लेट कर अपने मुहं को रौशनी के चूतड़ से लगा दिया. रमेश के

होठ के टच होते hi रौशनी के पूरे बदन में गुदगुदी होने लगी. वह

कराहते हुए बोली "उफ्फ्फ्फ़ …

क्या कर रहे हो …. मुझे गुदगुदी हो रही है … छोड़ा न … प्लीज़ीए …

छोडो … गुदगुदी हो रही है न …. प्लीज़ …. "

रमेश ने अपनी होठो को आगे बढ़ाते हुए उसकी छूट का नीचे वाला

हिस्सा चूम लिया और आगे बढ़ते हुए उसकी छूट को चाटने लगा.

छूट को छत्ते hi रौशनी की छूट उतावली होकर जूस से भर गयी.

उसकी छूट रमेश की जीभ की चूसै में पागल हो गयी. उसने अपना

वजन रमेश के मुहं पर बढ़ा दिया और रमेश जोरों से उसकी बुर की चूसै करता रहा …

रमेश अब रौशनी की छूट को चाट और चूस कर उसको फुल उत्तेजित

कर दिया. उसकी चटाई से पागल होकर रौशनी फिर रमेश से मिन्नतें करने लगी, "उफ्फ्फ .. रमेश जी … प्लीज़..

अब मेरी मुझे आपका लुंड फिर से मुँह में चाहिए …

क्कुह मस्त ऐसी hi चूसै बाद फिर अब रमेश और रौशनी छूटे हुए अब रौशनी, रमेश के लुंड को कुछ पल सहलाने लगी ..

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रौशनी ने लुंड को सहलाने के बाद अपनी जीभ बहार निकल कर

रमेश के बॉल्स को अपने मुहं में भर लिया. अंगूरों को मुहं में भरकर

उसके सुपर को हाथ से रगड़ने लगी. उसके इस एक्शन से रमेश के मुहं

से सिसकारी निकली, "एस…. रौशनी… लो और छतो मेरे बॉल्स को… लेकिन

साथ में मेरे केले को भी चूसो…. इसे और मत तड़पाओ…. चूसो मेरी

रानी… मेरे लुंड को भी चूसो.”

यह कहकर उसके रौशनी के सर को बाल सहित पकड़ लिया. रमेश की तड़फड़ाहट देखकर रौशनी ने अपना मुहं खोला और gap-se उसके लुंड को अंदर भर लिया.

रौशनी ने रमेश के मोठे लुंड को अपने मुहं में लेकर चूसने

लगी. रमेश का लुंड मस्त हो कर रौशनी के मुहं में झटके मारने लगा. रौशनी और भी मस्ती से अपनी

जीभ और होठो से उसके लुंड को चूसने लगी. रमेश के पूरे बदन में एक

सिहरन दौड़ रही थी. वह छह रहा था की रौशनी ऐसे hi इसे चूसती रहे,

चूसती रहे, चूसती रहे. उसके मुहं से सिसकारी निकली, "ओह्ह्ह रौशनी डार्लिंग,

चूसो.. मेरे लुंड को चूसो … जोर से … हाँ .. हाँ … स्पीड से ….

चूसो …. चूसो मेरे लुंड को …. बड़ा मज़ा आरहा है … जैसे

तुम्हारे होठ नहीं बल्कि naram-naram छूट में मेरा लुंड घुसा हुवा

है… चूस … मेरे लुंड को मेरी लुंड की रानी.”

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Ufffffffffff रमेश का लम्बा कला लुंड रौशनी के फेस क इतने करीब था और उसे उसके लुंड को अब अपने *मुह्ह में लेना था .. कुछ महीने पहले तोह ऐसे काळा रिक्शा वाले के लुंड को मुँह में लेने की नौबत आती तोह उसे वह चीज़ से बोहत hi गन्दी सी फीलिंग आती की वह एक लौ क्लास बुड्ढे मर्द जिससे वह तब कभी हाट भी न मिलायु अभी उसी जैसे बुड्ढे रमेश के लुंड को लेने के लिए वह बहुत तड़प रही थी और उसकी बर ढेर सार रास छोर रही थी उफ्फ्फ … ख़ुशी से रौशनी के मुह्ह में अब वह रमेश का लुंड लेने वाली थी और वह उस लुंड को उसके हाट म ले कर रौशनी के लबो पर फेरने लगी और वह रमेश के काळा मोठे लुंड की टॉप को थोड़ा थोड़ा कर फील करने लगी

उफ्फ्फ्फ़ बोहत अचे रौशनी ममममम चुसो इसे ममम… अब ज़रा रौशनी मेरे लुंड को अपने मुह्ह की गर्मी तो दे , मेरे लुंड को अपने मुह्ह क अंदर लेले डार्लिंग …”

रौशनी रमेश को तैसे करना चाहती थी इसीलिए वह काफी सारा वक़्त बस उसके मोठे काळा प्रेकम निकलते लुंड को चूमती रही ..

रमेश बोले .. उफ्फ्फ रोशिनी ममम अब मेरे इस लुंड को अपने मुह्ह में दाल उफ्फ्फ ,ममममम.

रौशनी ने फिर झट से अपना मुह्ह खोल कर रमेश का लुंड अपने मुह्ह क अंदर ले ली और अब रमेश के मोठे काळा लुंड का टॉप रौशनी के प्यारे प्यारे पिंक लबो से होते हुए रौशनी के मुह्ह में एंटर करने लगा

Ufffffffffff हयययय रमेश का इतना बड़ा लुंड … सोचती हुयी रौशनी की आँखें बंद हुयी और वह रमेश के लुंड को अपने मुह्ह में ले कर चुंहोने लगी.

रमेश ने रौशनी के सर पे अपना हाट रखा और रौशनी के मुह्ह को लुंड की तरफ पुश कर चुसवाने लगा .. उम्मम्मम्मम्मम रमेश का लुंड अब सिर्फ टॉप तक नहीं अब थोड़ा और रौशनी के मुह्ह क अंदर चला गया था.

पर रमेश का दिल अब तक भरा नहीं था उन्होंने लुंड को और मुह्ह क अंदर दाल कर चुंहोने कहा उन्होंने लुंड अपने हाट में लिया और एक हाट रौशनी के सर पे और ज़ोर से लुंड को रौशनी के मुहहह में पुश कर दिया उम्मम्मम्मम्मम ओमममम लुंड काफी रौशनी के मुह्ह क अंदर चला गया एक hi झट के में

रमेश को तोह इस बात की प्राउड फीलिंग थी क हु रौशनी जैसी जवान और इतने बड़े घर की लेडी को अपना लुंड फिर से चुसवा रहा है

अब कुछ बोल रौशनी की ज़ुबानी ——

हु बड़े hi प्यार से अपना लुंड अंदर बहार कर रहा था जिस स मुझे कोई तकलीफ न हो और में उनका मोटा लुंड चुंहोने में कम्फर्टेबले हो गयी थी और आराम से उनका मोटा लुंड अपने मुह्ह क अंदर बहार ले रही थी

थोड़ी चूसै के बाद उन्होंने अपना लुंड बोहत ज़ोर से मेरे मुह्ह में पुश कर दिया और उनका लुंड आधा मेरे मुह्ह क अंदर चला गया उम्मम्मम्मम्मम रमेश जी अपने लुंड को फुल फाॅर्स में मेरे मुह्ह में दाल रहा था और अपने लुंड से मेरे मुह्ह को छोड़ने लगे

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मेरे पिंक पिंक लिप्स पर उनका कला गन्दा सा लुंड बोहत hi अजीब लग रहा था जैसे कोई शैतानने किसी पारी क मुह्ह में अपना लुंड लड़ दिया हो. उन्होंने अपने लुंड का मोमेंटम काम कर दिया और मेरे गाल सहेला रहा था बड़े hi प्यार से और उनका लुंड अभी भी मेरे मुह्ह में hi था और मई कुछ वक़्त रुक गयी और अगले कुछ सेकण्ड्स ने hi मेरा हेड अपने उनके लुंड के आगे पीछे आप मूव करने लगा और मई खुद उनका लुंड बिना उनके मोमेंटम क खुद अपने मुह्ह क अंदर बहार करने लगी

रमेश बोले : “बोहत अचे मेरी जान मेरे लुंड को अचे से चूस आज ये hi तेरी तड़प दूर करने वाला हूँ, बता मुझे क तू कितनी प्यासी है लुंड क लिए

उसकी ये बाते मुझे एक्साइट कर रही थी और मई उनके लुंड को अचे से चूस रही थी मेरे दिल में भी जी बेचैनी थी और मुझे तो उनके लुंड को चूसने में मज़ा भी आह रहा था*

मुझे उसके लुंड का नशा *सा च गया था मई उसके बिना किसी फाॅर्स क लुंड को जैड़ा से जैड़ा अंदर ले रही थी कोई शर्म कोई लग सोसाइटी की फ़िक्र मुझे नहीं सत्ता रागी थी मुझे सिर्फ ये कला लुंड दिख रहा था जो क मेरे अंदर की जिस्म की प्यास को बुझा सकता था और मई उसी पूरी तरह खुश करने में लग गयी

मई यहाँ अपने आशिक़ क सात रंग रलिया मन रही थी और अपनी हवस पूरी कर रही थी रमेश के साथ और उनके लुंड से थोड़ा थोड़ा पानी निकल रहा था जो क मेरे मुह्ह में जा रहा था उनका टास्ते मुझे बड़ा ाचा लग रहा था और मुझे पूरा मज़ा लेना था और मई उसके लुंड को अपने मुह्ह में फुल अंदर लेने लगी और रमेश की कृषि का कोई तीखाना नहीं था

हे : ओह्ह्ह्हह्हह वह मेरी डार्लिंग उफ्फ्फ्फ़ क्या चूस रही है मज़ा आह गया उफ़ क्या गरम मुह्ह है आपका…. उफ्फ्फ मम पूरा क पूरा लुंड खा गयी तू वह तुहि एक महिला हैं जिसने मेरा लुंड पूरी तरह अपने मुह्ह में लिया है तू बोहत बड़ी माल हैं डार्लिंग .

में बेशरमी की तरह एक पार्क में एक छोटे से कमरे में एक बुड्ढे का लुंड चुस्ती रही थी उम्म्म उफ्फ्फ्फ़

रमेश बोले उफ्फ्फ रौशनी डार्लिंग मम अब अब मेरे लुंड को चाट

“जी कैसे चतु समाज नहीं आह रहा”

फिर मैंने अपनी आँखे बंद की और उसके लुंड की टॉप और फिर पुरे शाफ़्ट पर अपने ज़ुबान फेरने लगी

मुझे देख कर ऐसा लग रहा था मनो किसी ने कोई जादू कर अपने बस में कर रखा हो और मई हिप्नोतिसे हो कर उसका हर हुकुम मान रही थी मई उसके लुंड को मस्ती में होकर चाटने लगी

और में उनके लुंड क निचे हिस्से से ऊपर तक ज़ुबान फेर रही थी उनके काळा लुंड पर मई अपनी पिंक लिप्स और ज़ुबान पूरी खुमारी से चला रही थी.

फिर रमेश बोले . उफ्फ्फ मम तुम तोह यही चूसते हुए पानी निकलोगी डिअर उफ्फ्फ .. अब कुछ और चूसै के बाद मई उठ कर कड़ी हो गयी और चलते हुए बिस्तर की और जाने लगी और रमेश मुझे देख गंदे गंदे कमेंट कर रहे थे

वहहह रौशनी क्या मटक कर चलती है पलट कर अपनी गांड तो दिखा मुझे .. मई शरमाते हुए पलट गयी और अपनी गांड ऊपर कर उससे अपनी गांड की शेप दिखा ने लगी

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वहहह क्या गांड है तेरी चल अब नाच दिखा अपना जलवा . हु मेरे पास आह कर उसके मेरी गांड पर एक थपड लगाया और मैंने शरमाते हुए अपना जिस्म मूव करना शुरू किया और मई हल्का हल्का जिस्म हिला क मूव करने लगी

एक पड़ी लिखी वीमेन होते हुए भी मई मेरे लवर रमेश जी के लिए एक भोजपुरी गाने पर डांस करने लगी और नाचते नाचते अपनी चूतड़ हिला रही थी.

उसके आखो क सामने मेरी गोरी गोरी मुलायम गांड थी हु भी सिर्फ पंतय से छुपी हुई उसने अपना लुंड फिर अपने हाट लिया और लुंड सहलाने लगा मुझे रमेश जी को तैसे करने में मज़ा आह रहा था

मई पलट कर बिस्तर पर सेक्सी पोज़ में बैठ गयी और अपनी बॉडी मूव कर रही थी

मई उस बिस्तर पर ऐसे अपनी बॉडी मूव करने लगी जैसे कोई प्रोफेशनल स्ट्रिप डांसर करती हो और मुझे देख रमेश जी का लुंड मुझे सलामी दे रहा था

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उसने अपना लुंड ज़ोर ज़ोर से हिला ते हुए मेरा hi नाम ले रहा था ufffffffffff रौशनी मज़ा आ गया आह उफ्फ्फ .. अब मुझे बाकि जिस्म तो दिखा कितना तड़पायेगी अपने यार को .. उफ्फ्फ्फ़ .”

मई बिस्तर से उठ कर कड़ी हुई और उससे इशारे से पूछते हुए क क्या मई अपनी पंतय उतारू अपनी पंतय में हाट दाल कर पंतय ज़रा निचे की

उससे लगा क मई अपनी पंतय उतर कर उससे अपनी गुलाबी छूट क दर्शन अब दे hi दूंगी

हु उठ कर मेरे पास आने लगे तब मैंने अपनी पंतय थोड़ा और निचे की पर इससे पहले उससे मेरी गुलाबी छूट दिख जाये मई पलट गयी और मैंने उसके सामने अपनी गोरी और गोल गोल गांड hi दिखाई.

मेरी ब्रा उतर चुकी थी और में अब सिर्फ अपनी पंतय में उसके सामने रणदीव की तरह डांस कर रही थी जिससे में उसे इतना गरम कर रही थी क हु मुझे बुरी तरह छोड़ दे और मेरी छूट की आग को आज अपने काळा मोठे लुंड से बुझा दे

अपने गंदे गंदे लुस्टि एक्सप्रेशन क सात मई उससे अपने जिस्म दिखा रही थी मेरे नंगे पिंक बूब्स उससे मज़े क हर हुड से पर ले जा रहे थे

में और भी एक्ससिटेड होती रही थी और मैंने अपनी पंतय फाइनली उतर दी और अपनी पंतय उतर कर उसके पास फेक दी.

मेरा जिस्म अब पूरा नंगा हो चूका था और मेरे जिस्म पर कपडे का कोई नाम नहीं था . में अब मेरे जिस्म पर हाट मॉल रही थी मेरा हाट मेरी छूट पर गया और मई खुद को रोक न सकीय और रमेश जी के सामने hi अपनी छूट सहलाना शुरू कर लिया.

मुझे अपनी छूट मसल ता देख हु भी एक्ससिटेड होने लगा. उफ्फ्फ्फ़ वहहह रौशनी जी ममम ऐसे hi मसलो अपनी छूट मममम . मई सोफे पर उलटी पलट गयी और अपनी गांड उसकी तरफ कर ली और गांड ऊपर कर मैंने अपनी छूट को सहलाते सहलाते मैंने छूट में फिंगर दाल दी और बिना कुछ भी सोचे हुए रमेश जी के सामने मई अपनी छूट को फिंगरिंग करने लगी.

मुझे फिंगरिंग करते देख रमेश जी अपने आप को रोक नहीं पाए और उठ कर सीधा मेरे पास आया और मुझे अपनी बहो में भर करवौ मेरी गांड पर हाट मसल ने लगे और हु पागलो की तरह मुझे किश करने लगे. मई खुद उनका लुंड पकड़ क सहलाने लगी और हु मुझे किश करते हुए मेरी गांड सेहला रहे थे

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हु मेरी गोरी गोरी मुलायम गांड दबाते हुए मेरी नैक पर किश करने लगे और मई खुद पूरी तरह उसकी बहो में थी और हु जैसे चाहे वैसे मेरे जिस्म को छू रहे थे और मेरी गांड फिर मेरी छूट और आखिर में मेरे बूब्स दबा रहे थे. रमेश मुझसे लम्बे हैं और वह एक काळा मर्द हैं और मई उनके सामने एक गोरी चिति महिला हूँ .. वह मुझे किश करते हुए उसने अपनी फिंगर्स मेरी छूट में दाल दी और मई मोअन कर पड़ी… अह्ह्ह्हह्हह उम्मम्मम्मम ufffffffffff इसको मत निकालिये मममम न न न उम्मम्मम्मम्मम मममम. रमेश मेरी छूट में फिंगर्स अंदर बहार करता रहे और मुझे उनके फिंगर्स से मज़ा आने लगा और मेरी अब सिसकिया बढ़ गयी,…. अह्ह्ह उफ्फ्फ मममम उम्मम्मम्मम्मम.

मई भी अब मज़े में उनकी मर्दानी और बालों वाली छाती को किश करने लगी और बिना रुके उनकी चेस्ट की हु गन्दी निप्पल्स भी लीक करने लगी.

बिना रुके अब रमेश जी ने मुझे अपनी बाँहों में उठा कर बिस्तर पर लिटा दिया … में पूरी नंगी थी और रमेश जी भी नग्न .. उनका मोटा कला लुंड हवे में झूल रहा था…

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रमेश बोलते हैं “रौशनी मैं आज तुजे नहीं छोडूंगा बल्कि आज तू मुझसे छुडवाएगी … आज तुम मुझसे अपनी छूट छुडवाओगी .........

रौशनी के चेहरे पर शर्म की लाली आती है रमेश जी के मुँह से ऐसी बात सुनकर .......

अब इस वक़्त रौशनी छूट पूरी तरह से गीली थी ...... रौशनी फिर अपना एक हाथ रमेश के लुंड पर ले जाती हैं और उसके लुंड को अपने छूट के छेद पर एडस्ट करती हैं और उसे फिर अंदर ढ़ाके मरने का इशारा करती हैं .......

रमेश धीरे धीरे धक्के मरने लगता है और आपने होंटो को रौशनी के होंठों पर रख देता हैं और उसे चूसने लगता हैं … वहीँ अपने दोनों हाथों से रौशनी के दोनों बूब्स को बेरहमी से मसलने लगता हैं ........ फिर वो अपना लुंड पर धीरे धीरे दबाव डालने लगता हैं ....... रौशनी के मुँह से सिसकारी और तेज़्ज़ हो जाती हैं जब वो रमेश का लुंड अपने छूट पर फील करती हैं .......

रमेश फिर बिना एक पल की देरी किये एक ज़ोर का धक्का देता हैं और इस बार रमेश का लुंड रौशनी की छूट को चीरता हुआ अंदर करीब 3 इंच तक समां जाता हैं ...... इस वक़्त उसका सूपड़ा उसके छूट में पूरा उतर गया था .....

रौशनी - aaaaaaaaaaaaaaa .......... sssssssssssssss ........... hhhhhhhhhhhhhhhhh ......... iiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

रौशनी न मुँह तोह पूरा खुल जाता हैं मगर रमेश वैसे hi उसके मुँह में अपना होंठ रखकर चूसे जा रहा था ........ फिर से वो अपना लुंड थोड़ा सा बहार की ओरे निकलता हैं और फिर उतनी hi तेज़ी के साथ एक करारा धक्का मरता हैं जिस से उसका लुंड रौशनी के छूट को चीरता हुआ करीब 6 िन्छ तक और अंदर उसके छूट में समां जाता हैं .......

इस बार उसके छूट में हल्का सा दर्द होता हैं मगर मज़े की कोई सीमा नहीं थी. और उसज़ इस चुदाई के वक़्त उसे खूबसूरत चेहरे पर अलग अलग कामुक एक्सप्रेशंस छह गए थे ...

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कुछ पल तक रमेश ऐसे hi अपने लुंड को वहीँ रोके रखता हैं फिर वो अबकी बार अपना पूरा लुंड तेज़ी से बहार निकलता हैं और इस बार उतने hi तेज़ी से अपना लुंड रौशनी के छूट में पूरी गहराई तक उतरता चला जाता हैं ....... रौशनी इस बार न चाहते हुए भी चीख पड़ती हैं

रौशनी- मां...... mmmiiiiiiiiii……

aaaaahhhhhhhhhhhaaaaaaaaaa…..

Rameshmmmmmmmmmmmmmmm….

Jarrrrrrrrrrrraaaaaaaaa……..

Dhireeeeeeeeeee..seeeeeeeeeee…..

उसके छूट के अंदर रखा अंगूर रमेश के लुंड के हमले से फैट गया था जिस से उसका रूस उसके छूट से बहार की ओरे टपक रहा था ........ जो नीचे बिस्टेर को पूरा गिला कर रहा था ....... रौशनी को मनो ऐसा लगता हैं जैसे किसी ने उसके छूट में गरम लोहा दाल दिया हो .......

रमेश कुछ डियर तक वैसे hi रौशनी के छूट में अपना लुंड डेल रखता हैं ...... आज उसे सच में बहुत मज़ा आ रहा था ....... सुबह तो जल्दबाजी कई वजह से वो ऐसा मज़ा नहीं ले पाया था मगर अभी वो पूरा पूरा मज़ा लेना चाहता था ......... फिर कुछ डियर तक जब रौशनी देखती हैं की रमेश कुछ नहीं कर रहा तब वो खुद hi अपनी गांड उसके लुंड पर धीरे धीरे आगे पीछे करने लगती हैं ....... रमेश इस वक़्त उसके दोनों निप्पल्स को बड़ी hi बेरहमी से मसल रहा था ....... जिस से उसके दोनों निप्पल्स पर लाल निशान पढ़ गए थे ....... और उधर रौशनी वैसे hi रमेश के होंठों को चूसे जा रही थी ........

इधर रौशनी तेज़ी से अपनी कमर ऊपर नीचे हिलना शुरू करती हैं ....... और उधर रमेश का लुंड पूरा उसकी छूट की गहराई में तेज़ी से अंदर बहार होने लगता हैं .......

रौशनी - उफ्फ्फ्फ़ .... मममम ... oiiiiiiiiiiiiiiiiiiii मायआ ......... मममम

ऐसे आवाज़ें रौशनी के मू से निकल रही थी ......

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रौशनी एक नज़र रमेश को देखती हैं फिर वह खुद बनी तेज़ी से अपनी कमर आगे पीछे हिलने लगती हैं ......

इस समय कमरे में ..... फूऊछ की आवाज़ें गूँज रही थी और ऊपर से रौशनी और रमेश के मुँह से सिसकारी से जो इस माहोल को और भी रंगीन बना रहा था ......... रमेश और रौशनी का जिस्म इस वक़्त पसीने से पूरी तरह से भीग गया था ......

रमेश भी रौशनी के छूट की गर्माहट को अपने लुंड पर पल पल महसूस कर रहा था ....... रमेश ये देखकर मुस्कुरा देता हैं फिर वो रौशनी को वहीँ बिस्टेर पर सुलाता हैं और उसके दोनों पवन उसके सर के पास कर देता हैं ...... अब रौशनी की छूट और गांड रमेश को न्योता दे रहे थी ..... इस पोजीशन में उसकी छूट और गांड पूरी तरह से खुल गयी थी ........

वो फिर अपना लुंड रौशनी के छूट पर रखता हैं और इस बार बिना रुके तेज़ी से एक hi झटके में अपना पूरा लुंड अंदर पेल देता हैं ....... रौशनी के मुँह से फिर से चीख निकल पड़ती हैं ........

रौशनी- ahhhhhhhhhhhhhhhhhaaaaa..

रमेश को इस वक़्त बहुत मज़ा आ रहा था रौशनी की छूट छोड़ने में ..... उसकी छूट एक दम टाइट थी ……. और दोनों की घमासान चुदाई जारी रही …

कुछ 20 मं ऐसी hi मस्त चुदाई बाद रमेश , रौशनी की बुर की कुटाई करते हुए और उसके होठों को चूमते हुए बोले //

"अब बोल, और लुंड चाहिए तुझे?”

"हाँ," रौशनी बोली “मुझे अलग तरह से छोड़ो मेरे

राजा." “चुदाई तोह कर hi रहा हूँ रौशनी डार्लिंग और किस जगह और कहाँ छोड़ू … रमेश अब रौशनी को तैसे करते हुए बोले ..

"इन माय अस्स, राजा," रौशनी अंग्रेजी में बोली

“ मममम क्या मुझे अंग्रेजी नहीं समझ आती इतनी डार्लिंग …

रौशनी शरमाई .. उसे पता चला की रमेश उसके साथ खेल रहा हैं … और वह बोली शरमाते हुए लेकिन बॉडी भी. …

”रमेश डार्लिंग मममम ी लव आईटी जब तुम मेरी

गांड मरते हो.. उफ्फ्फफ्फ्फ़.”

रमेश बोले .. “अच्छा लेकिन पहले थोड़ा तेल लगा लो." फिर खुद बोले “उफ्फ्फ रौशनी जी तेल तोह नहीं हैं …

"कोई नहीं डार्लिंग .. अब में, थूक लगा… कर पेलता हूँ तेरी गांड…”

रौशनी कुछ न बोली बस आने वाले अपनी गांड की भयानक चुदाई की इंतज़ार में लेती रही.

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रमेश अब रौशनी की आँखों में देखे और कहे, "रौशनी, घुटनों के बल बैठ जाओ." बिना कुछ कहे, वह अपनी गांड ऊपर करके घुटनों के बल बैठ गयी. रमेश उसके ठीक पीछे था. उसने झुक कर उसे उठाया, उसे घुमाया ताकि उसकी गांड उसकी तरफ हो. उसने उसके नितम्बों पर चुम्मानों की बौछार कर दी, अपना चेहरा उसकी गांड की दरार में समेत दिया. जब उसने महसूस किया की उसका मुंह उसकी छूट के नीचे से लेकर उसकी गांड के ऊपर तक उसे चाट रहा है, तोह वह थोड़ी हैरान और उत्तेजित हो गयी. उसने अपनी गीली, गरम जीभ उसकी छूट में गहराई तक दाल दी. वह उसकी गांड के छेड़ को चाटने लगा और उसने उससे कहे; "वहां मत चाटो, यह गन्दा है." "ऐसा मत कहो, तुम्हे नहीं पता की यह परम सुख की जगह है?"

रौशनी और ज़ोर लगाना चाहती थी, लेकिन वह बिलकुल स्थिर रही, उस अनुभूति का आनंद ले रही थी.

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Woh ghutnon ke bal baith gaya aur apne lund ka supada uski choot ki taraf le gaya. Uske lund ne chhed pa liya, uski choot ke honth phail gaye, uska swagat karte hue. Usne dheere se lund ka sir andar dala aur phir aage ki aur dhakka diya. Roshni ne gehri saansein li aur lambi aur tez karahne lagi. Usne uske kulhon ko pakda aur dheere-dheere bahar nikala, phir ek baar phir poori tarah se uske andar ghus gaya, uske ek stan ko apne haathon mein liya, use dabaya aur apni aur khecha aur gehrai tak dhakke lagaye. Ab usne apni gati tez kar di aur uske kulhon aur pet ke nichle hisse se thapthapane jaisi gehri aawaz aane lagi. Phir usne use kamar se upar khecha aur use aisi sthiti mein laya jahan se uska lund use aur bhi behtar tareeke se, lambe aur zordar dhakko se bhed sake. Phir aage jhuk kar usne uske dono stanon ko pakad liya aur unhe zor se dabane laga, nipplon ko bheenchte laga. Use uske chodne ka tareeka bahut pasand aaya; woh sirf lund ka sir apni jagah par rakhte hue apna lund bahar nikal raha tha, aur phir use poori tarah se neeche tak dhakel raha tha. Phir usne uski gaand ke chhed mein thooka aur usne uski ungli ko apni guda par daba hua mehsoos kiya. "Kya tumhe yahan accha lag raha hai?" "Shayad ya shayad nahi..." Bahut dheere se, usne apni laar se sani ungli dheere-dheere uski guda mein daali. Uska lund aadha uske andar tha kyuki woh is naye anveshan par dhyan kendrit kar raha tha. Ramesh ne dheere se apni ungli uske malashay mein daali, apni kalai ghumate hue jab tak ki woh uski gaand mein gehrai tak nahi pahunch gaya. Jaise hi uski moti ungli uski guda mein ghusi, woh uchal padi. " हाय!" Dheere-dheere usne uski gaand aur choot dono mein ek saath ungli se chudai shuru kar di aur jald hi woh utsukta se apne kulhon ko ghumane lagi. Woh karahne lagi thi, aur jab uski ungli dusri anguli tak pahunch gayi, toh woh apne nitambon se uske dhakko ka saamna karne lagi, peeche ki aur jhukti aur phir piche hat jaati. Jald hi woh uski ungli aur uske lund ko ek saath sokhne lagi. Usne use kuch minute tak isi tarah, zor-zor se aur berahmi se choda, phir usne apna lund bahar nikal liya. "Kya kar rahe ho, Ramesh?" Usne adheerata se uski aankhon mein dekhte hue pucha. "Mujhe kuch naya karne do, Roshni." Woh apne lund ke supade ko uski chikni hui jagah par upar-neeche ragad raha tha. Use laga ki woh apna lund usi jagah par gada dega. Lekin use hairani hui ki isse pehle ki woh kuch samajh paati, usne uske gaalon ke beech thook ki ek badi si boond tapka di aur apne dhadakte hue lund ko uski chhoti si bur ke dwar par tika diya. Usne lund ke supade ko uski gaand ki maanspeshiyon se aage badhaya aur dheere-dheere use wahin chodne ki koshish karne laga. "Ramesh! Tum kya kar rahe ho?" "Mai tumhari gaand marna chahta hoon."Usne uski aankhon mein dekhe aur kahe, "Roshni, ghutnon ke bal baith jao." Bina kuch kahe, woh apni gaand upar karke ghutnon ke bal baith gayi. Ramesh uske theek peeche tha. Usne jhuk kar use uthaya, use ghumaya taki uski gaand uski taraf ho. Usne uske nitambon par chummanon ki bouchar kar di, apna chehra uski gaand ki daraar mein samet diya. Jab Roshni mehsoos ki ki uska munh uski choot ke neeche se lekar uski gaand ke upar tak use chaat raha hai, toh woh kafi uttejit ho gayi. Ramesh ne apni geeli, garam jeebh uski choot mein gehrai tak daal di.

Ramesh uski gaand ke chhed ko chaatne laga aur usne usse kahe; "Wahan mat chaato, yeh ganda hai."

"Aisa mat kaho, tumhe nahi pata ki yeh param sukh ki jagah hai?"

Roshni aur zor lagana chahti thi, lekin woh bilkul sthir rahi, us anubhooti ka aanand le rahi thi. Ramesh ghutnon ke bal baith gaya aur apne lund ka supada uski choot ki taraf le gaya. Uske lund ne chhed pa liya, uski choot ke honth phail gaye, uska swagat karte hue. Usne dheere se lund ka sir andar dala aur phir aage ki aur dhakka diya. Roshni ne gehri saansein li aur lambi aur tez karahne lagi. Ramesh ab Roshni ki kulhon ko pakde aur dheere-dheere poori tarah se apne lund ko uske andar ghusa diya. Ramesh ne Roshni ke ek stan ko apne haathon mein le use dabaya niche se gehrai tak apne lund se dhakke lagaye. Ab usne apni gati tez kar di aur uske kulhon aur pet ke nichle hisse se thapthapane jaisi gehri aawaz aane lagi. Phir usne use kamar se upar khecha aur use aisi sthiti mein laya jahan se uska lund use aur bhi behtar tareeke se, lambe aur zordar dhakko se bhed sake. Phir aage jhuk kar usne uske dono stanon ko pakad liya aur unhe zor se dabane laga, nipplon ko kheenchte hue.

Ramesh ke chudai ka tareeka Roshni ko bahut pasand aa raha tha ;

Ramesh sirf lund ka sir apni uski chut mein rakhte hue bahar nikal raha tha, aur phir use poori tarah se andar tak dhakel raha tha.

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अब रमेश ने रौशनी की गांड के छेड़ में थूका और उसने उसकी ऊँगली को रौशनी गुदा पर दबा दिया और बोले

. "रौशनी, क्या तुम्हे यहाँ अच्छा लग रहा है?" "रौशनी बस मम उफ्फ्फ मम की आवाज़ें निकल पायी.

फिर रमेश ने बहुत धीरे से, उसने अपनी लार से सनी ऊँगली dheere-dheere रौशनी की गुदा में डाली. रमेश ने धीरे से अपनी ऊँगली उसके गांड में डाली, अपनी कलाई घूमते हुए जब तक की वह उसकी गांड में गहराई तक नहीं पहुँच गया. जैसे hi रमेश की मोती ऊँगली उसकी गुदा में घुसी, रौशनी उछाल पड़ी.

Dheere-dheere उसने उसकी गांड और छूट दोनों में एक साथ ऊँगली से चुदाई शुरू कर दी और इसे महसूस कर रौशनी उत्सुकता से अपने कूल्हों को घूमने लगी. वह कराहने लगी थी. रमेश ने उसे कुछ मिनट तक इसी तरह, zor-zor से और बेरहमी से छोड़ा, फिर उसने अपना लुंड रौशनी की गांड के छेद पर टीला दिया. फॉर रमेश ने अपने लुंड के सुपडे को उसकी चिकनी गांड के छेद पर upar-neeche रगड़ने लगे.

रमेश ने रौशनी के गांड के गालों के बीच थूक की एक बड़ी सी बूँद टपका दी और अपने धड़कते हुए लुंड को उसकी छोटी सी गांड के द्वार पर टिका दी. उसने लुंड के सुपडे को उसकी गांड की मांसपेशियों से आगे बढ़ाया और dheere-dheere उसे वहीँ छोड़ने की कोशिश करने लगा. "रमेश! उफ्फ्फ्फ़ ममम हैं में तैयार हूँ ममम एस्सस.

रमेश बोले " हाँ रौशनी ममम अब मई तुम्हारी गांड की ज़ोरों से कुटाई करने वाला हूँ …."

उसने अपने हाथ उसके हिप्स पे रखे, उसको हिप्स से कण्ट्रोल कर रहा था और अपना लुंड उसकी गांड के होल तक ले गया. जब उसका लुंड अंदर गया तोह ऐसा लगा जैसे कोई उससे चीयर रहा हो, मानो कोई बड़ा सा खम्बा उसकी गांड में घुस रहा हो.

रमेश ने अपना लुंड उसके गांड के छेद के अंदर धकेल रहा था और चिकनाई के तौर पे अपनी सलीवा भी दाल रहा था. रौशनी दूर हटने की कोशिश कर रही थी लेकिन रमेश पीछे से और आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा था और आखिरकार वह सफल हो गया और अब उसका लुंड पूरी तरह रौशनी की गांड में चला गया था.

रमेश ने अपने लुंड का प्रेशर बनाये रखा रोहणी निचे लेती करहाने लगी.. "ओह, रमेश, ओह रमेश, ओह रमेश, मज़्ज़ा आआ है!"

यह बात सुन रमेश का जोश बढ़ गया और कुटाई जारी रखा.. रौशनी ने भी गर्मी में उसकी तइस को कास कर पकड़ ली और उसकी गांड को ऊपर उठा दी.

रौशनी के पेअर लड़खड़ा रहे थे, उसकी आर्म्स फड़फड़ा रही थी, क्यूंकि उसकी गांड पर वार रमेश करता रहा.

रमेश का लुंड उसकी गांड के होल में इतनी गहराई तक अंदर तक धसा हुआ था की रौशनी को यह जानकार सचमुच अपने बॉडी में एक थ्रिल का एहसास हुआ की रमेश का मोटा कला लुंड अब उसकी गांड में धंसा हुआ है.

रमेश ने अब रौशनी को zor-zor से छोड़ना शुरू कर दिया.

"आआआसआस …पहले तोह रौशनी दर्द से कराह उठी, फिर jaise-jaise रमेश अपना सलीवा उसकी गांड के छेद पर डालता रहा, और lambe-lange धक्कों में उससे छोड़ता रहा, दर्द पर प्लेअसुरे हावी होता गया.

अब रमेश कोंस्तांतली उसकी गांड मार रहा था और वह भी अपनी गांड hila-hila कर उसका जवाब दे रही थी. वह पूरी तरह से इसमें डूब रही थी. वह चिल्लाने लगी, "मुझे छोड़ो रमेश, और ज़ोर से छोड़ो."

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“रौशनी क्या अब दर्द हो रहा है?" उसने पुछा. "हाँ, हो रहा hai…lekin रुकना नहीं, रुकना nahi…bilkul nahi…rukna!" उसने धीरे से कहा.

रमेश लुंड अब उसकी गांड में andar-bahar हो रहा था, और कुछ मिनट्स के बाद, वह भी उससे पीछे धकेलने लगी. जब रमेश देखा की रौशनी उसके लुंड को होने गांड में पा कर काफी कम्फर्टेबले है, तोह उसने थोड़ी स्पीड बढ़ानी शुरू कर दी. उसका लुंड उसकी गांड में गहराई तक समां गया था और उसकी रमेश की मज़बूत झंगें रौशनी की गांड के चीक्स से चिपकी हुई थी. उसके टेस्टिकल्स उसकी छूट से चिपके हुए थे और वह dheere-dheere अपने हाथों को ऊपर पहुंचा और अपने हाथों से रौशनी के लटकते चूचियों को थाम उसके फिंगर्स dheere-dheere उसके हार्ड निप्पल्स को अपने थंब और इंडेक्स फिंगर के बीच घुमाने लगा.

फिर उसके हैंड्स नीचे सरक कर उसकी पुसी पर आ गए. वह अपनी दो फिंगर्स से छूट के दोनों साइड प्रेशर दाल रहा था और उसके छूट के दाने से खेलने लगा.

साथ hi उसने अपना लुंड andar-bahar करना जारी रखा.

अब रौशनी इस गांड की चुदाई में हवस से पागल हो गयी. उसने उससे रिक्वेस्ट की. "ओह करो, haan…mujhe और तेज़ी से छोड़िये Ramesh…meri गांड में और तेज़ी से लुंड डालिये!" यह बोलते हुए रौशनी बिस्तर की पिलो में कराह उठी.

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रमेश ने रौशनी की गांड पकड़ी और तेज़ी से andar-bahar करने लगा, और वह सचमुच इसमें पूरी तरह से राम गयी थी.

कुछ मिनट्स की चुदाई के बाद, जब भी रमेश आगे एक धक्का देता, रौशनी अपनी गांड पीछे धकेलती, और उसकी कराहें अब चीखों और स्क्रीम्स में बदल गयी थी. "Chodo…chodo…haan…yeh बहुत अच्छा hai…mujhe यकीन नहीं हो रहा की आप अपने मोठे लुंड से मेरी गांड की चुदाई कर रहे हो .. अह्ह्ह उफ्फ्फ मममम मुझे और ज़ोर से छोड़ो, मुझे तुम्हारी ज़रुरत है."

"मुझे पता था की तुम्हे अपनी गांड मारवणी थी, लेकिन तुम बता नहीं प् रहे थी, क्यों?" रमेश धक्के देते देते बोले.

“रमेश, हाँ में चाहती थी की आप मेरी गांड मारिये."

"रौशनी, तुम मुझसे कहाँ मेरे लुंड का माल निकालना चाहती हो?"

"प्लीज, रमेश, अपना माल मेरी गांड में hi निकाल दो."

वह नीचे पंहुचा और उसके चूचियों को दबाने लगा. इससे वह बहुत गरम हो गयी और फिर वह सचमुच ज़ोर से चिल्लाने लगी.

"अपने बड़े लुंड से मेरा और छोड़ो ममम और , अपना मालमेरे अंदर hi निकाल दो!"

वह अब उसकी गांड को zor-zor से छोड़ रहा था, एक hi झटके में पूरा अंदर तक धकेल रहा था और baar-baar ऐसा कर रहा था. अचानक रौशनी को hi लगा की वह झड़ने वाली है.

"ओह मेरे रमेश, मैं झड़ने वाली हूँ, यह बहुत मज़ेदार है, मैं झड़ने वाली हूँ!"

वह तकिये में चीखी, और रमेश ने अपना लुंड उसकी गांड में जितना हो सके ज़ोर से घुसा दिया. वह चीखी और कड़ाही और उसे पता था की वह ज़िन्दगी का सबसे बेहतरीन चरम सुख पा रही है.

"ओह उफ्फ्फफ्फ्फ़ एस्सस ... मैं झाड़ रही हूँ... मैं झाड़ रही हूँ!" रौशनी चिल्लाई.

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"चुदाई करते रहो, रमेश!" वह कराह उठी रौशनी अपनी वासना की चरम पर थी, फिर चरम पर, फिर चरम पर, फिर चरम पर, फिर चरम पर, फिर चरम पर, रौशनी के तोह इस गांड मि चुदाई से मल्टीप्ल ओर्गास्म हुए थे ..

जैसे hi वह लगातार तीसरी बार झड़ी, उसकी आँखें चरमसुख में बड़ी हो गयी, लेकिन रमेश तोह अभी भी अपने लुंड से उसकी गांड में धक्के मार रहा था.

लेकिन रमेश भी कुछ hi पलों में अपने झुंड के ओर्गास्म पर आ गया और फिर वह झाड़ गया. जैसे hi उसके लुंड से उसका माल रौशनी की गांड के अंदर विस्पोट हुआ, रमेश का धड़कता हुआ लुंड रौशनी की गांड में गरम लावा उगल रहा है.

रमेश ने एक आखरी बार रौशनी की कासी हुई गांड में धक्का मारा और फिर अपना सारा माल, किसी भड़कते ज्वालामुखी की तरह, पूरा अंदर पेल दिया. ऐसा लगा जैसे उसने अपने लुंड के वीर्य का एक लीटर रौशनी की गांड में उदा दिया हो!

रौशनी अपनी गांड की मांसपेशियों को उसके गरम प्रेम रास को घटकते हुए महसूस कर सकती थी. थक कर रमेश सीधे रौशनी के शरीर पर गिर पड़ा फॉर भी उसका लुंड अभी भी रौशनी के गांड में था

कमरे में सेक्स की गंध फ़ैल गयी, और उनका बिस्तर गन्दा हो गया था, रौशनी की छूट के ठीक नीचे एक बड़ा सा गड्ढा बन गया था.

आख़िरकार जब रमेश ने अपना लुंड धीरे से रौशनी की गांड के बहार निकला और वह उसकी तरफ मुड़ी, उसे देखते हुए, वह भी उतना hi थका हुआ था जितना वह थी. रौशनी की तोह रमेश ने इतनी मस्त लेकिन बेहरहमी से छूट सुर फिर गांड की चुदाई की थी

की रौशनी को चलना भी मुश्किल होने वाला था ..

रमेश रौशनी की तरफ देख बोले रौशनी उफ़ मम यह गांड अब सिर्फ मेरी हैं .. सिर्फ मेरी!!?" "हाँ! मेरी गांड अब सिर्फ तुम्हारे लिए है. मैं नहीं चाहता की कोई और मुझे वहाँ चोदे."

(रौशनी तोह झूट बोल रही थी .. वह तोह अपनी यह मस्त गांड असलम और सलीम को भी दे राखी थी …)

वो बिस्तर पे साथ लेते हुए थे; दोनों एक सच्चे कपल की तरह किश करने लगे और एक दूसरे से लिपटे हुए थे. दोनों एक दूसरे के देख रहे थे. रमेश का लुंड अब नरम हो गया था और उसकी जाँघों के बीच ढीला और मासूम सा पड़ा था.

रौशनी का हाथ उसके लुंड पर हलके से टिका हुआ था, उसके बूब्स रमेश की छाती से सटे हुए थे, और रौशनी की बाहें उसके चारों और थी उनके लिप्स ऑलमोस्ट टच कर रहे थे. रमेश का लुंड उसकी जाँघों के बीच पड़ा था लेकिन रोषनिनके मुलायम हाथों के स्पर्श से उसका लुंड फिर से नीचे फड़क उठा.

उफ्फ्फ रमेश जी ममम , ओह, लगता है मुझे इसे फिर से हैंडल करना पड़ेगा." रौशनी हाँफते हुए कही, ये देखते हुए की ये कुछ hi मिनट्स में रमेश का लुंड फिर से टाइट हो गया था;

“उफ्फ्फ रमेश ममम आप अभी भी एक जवान लड़के की तरह बेहवे करते हो,"

"तुम क्या कह रहे हो? क्या तुम्हे लगता है की मैं बुद्धा हूँ ? और रमेश है पड़े.

रमेश ने अपनी ऊँगली रौशनी की लिप्स पर दबाई. "शठ," नहीं, ऐसा मत सोचो, तुमने प्रोवे कर दिया, आप अभी भी जवान हो और हॉट मर्द हो”

"आपने मुझे एक खुश औरत बना दिया है, रमेश”.

"रौशनी! तुम नहीं जानती की मैं तुम्हे इन कई महीनो से कितना चाहने लगा हूँ."

मममम में भी आपको बहुत चाहने लगी हूँ रमेश जी ..” रौशनी के आँखों में हलके से नमी भरी हुयी थी.

रमेश ने यह देख लिया और रौशनी को बाँहों में कास कर एक गहराई से चुम्बन देने लगे ..

“रौशनी ी लव यू !!” रमेश बोल दिया ..

“रमेश जी ी लव यू तू.”

फिर दोनों फिर से एक गहरी चुम्बन में लग गए.

(रौशनी तोह अब तक तीनो असलम, रमेश और सलीम को ी लव यू बोल दी थी .. लेकिन किस्से रौशनी ससे ज्यादा प्यार करती थी .. उसे भी नहीं मालूम थी यह बात)

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शुक्रिया डिअर ... आप सब के लिए जनहोने मेरे कहानी की उपदटेस के लिए ीनता इंतज़ार कर लिया था ... लव ु आल .

..

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रमेश और रौशनी एक दूसरे के बाँहों में लेते थे .. तब रमेश अब रौशनी की तरफ मुद कर बोलता हैं ..

“रौशनी जी तुमसे कुछ ख़ास बात करनी हैं.”

“हाँ रमेश जी बताइये ..” दोनों एक दूसरे के चुम्मों के बीच बातें कर रहे थे …

रौशनी जी इस हफ्ते के बाद के हफ्ते में मुहे अपने पुराने एक जायंट जाना हैं जहाँ हम कभी बहुत टाइम पहले रहिरे थे .. वहां मेरी एक पुश्तैनी छोटी सी ज़मीन हैं , उसके बेचना हैं .. थोड़े पैसे आवेंगे तोह ज़िन्दगी कटेगी गरम से और कुछ पैसे मेरी बीवी को फुमारे गाँव भेजूंगा.”

“ओह अच्छा , अच्छी बात हैं .. लेकिन मुझे आप यह ह्युं बता रहे हो..”

“बस में चर्ता था आप मुझे वान कंपनी दीजिये .. बस शनिवार को निकलेंगे और सोमवार सुबह वापस .. गाँव कुछ 6 ग्रांडे की दुरी पर हैं और हमें वहń ट्रैन से जाना होगा .. क्या आप आओगी ह्यूमेन सातé”

रौशनी सोच में पड़ी .. सोमवार को तोह काम का दिन हैं , वह छुट्टी तोह नहीं ले पाएगी , पहले से hi काफी छुटियाँ हुयी थी उसकी…

“रमेश जी में सोचूंगी .. सोमवार का ंगो वर्क दिवस मिस नहीं कर सकती , बहुत छुट्टियां ली हैं पहले से hi.”

“कोई बात नहीं आप इस पर सोचिये और कुछ 3 दिन में बताइये … अगर आप ागोगिए तोह सफर भी मस्त कटेगी और मेरा पुराण गाँव भी पापको दिखाऊंगा …”

(रमेश ने एक बहुत इम्पोर्टेन्ट बात छुपा ली थी रौशनी से जो वह रौशनी के हाँ के बाद hi उसे बताने वाला था … वह बात सुन उसे ताकें था रौशनी हाँ नहीं कहेगी.)

“शुक्रिया .. में आपको बुधवार को बताउंगी …”

दोनों फिर से गेरी चुंबन में लगे रहे …

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रौशनी की छूट ऐसी चुदाई से मस्त होती थी … कुछ hi पलों में रमेश का मोटा लोढ़ा फिर से पूरी तरह खड़ा गया था. ोोूफ बहुत भयंकर लूग रहा था उसका मोटा लोढ़ा. 1 गलांट से ऊपर वह रौशनी की छूट का रास पि लिया था,

रौशनी बोली .. “ उफ़ रमेश जी , ये तो फिर से खरा हो गया. अब क्या इरादा है ?इतनी छोड़ने के बाद भी मन नहीं भरा आपके इस मोटा लोढ़ा का?”

“ रौशनी उफ्फ्फ्फ़ आप को छोड़ के किसी का मन भर सकता है क्या? ”

“ हे भगवन ! आप तोह सांड hi हो . पता नहीं कितना और छोड़ोगे आप .

रौशनी बिना झिझक के रमेश के मोठे सुपर को पागलों की तरह चूसने लगी.

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“ ठीक है रौशनी अब इस बार एक लग मुद्रा में छोडूंगा तुम्हे .. मैं चालोमें लेता हूँ और आप मेरे मोटा लोढ़ा पर बाहत जाओ .. आआ अब राइड करो मेरे मोटा लोढ़ा को … उफ्फ्फ्फ़ रौशनी को तोह इस मुद्रा में बहुत अच्छा लग था .. उसकी बुर भी तैयार थी और वह रमेश के मोठे मोटा लोढ़ा पर बैठने hi वाली , उसकी चूतरें बाद रमेश को मोठे मोटा लोढ़ा के टोपे को छुई hi थी की … केबिन का दरवाज़ा किसी ने खटखटाया..

वह था वहां का गार्ड .. वह बोलै. “गुरु , आप को अपने प्रेमिका के सतह निकलना पड़ेगा .. पुलिस की राइड पड़ने वाली हैं यहाँ पर …”

रौशनी शॉक से देखि रमेश को … रमेश बस बोलै “शुक्रिया दोस्त … रौशनी चलो अभी टाइम हैं उन्हें aúne में वल्दी से साडी पहनिए और निकलते हैं यहाँ से ..”

रौशनी दर्री हुयी थी , हड़बड़ा कर साडी पेन्नी उसने और दोनों वहां से पिछले एक रास्ते से भाग निकले .. रौशनी रमेश के हाथों को पकडे उसके पीछे बॉड रही थी .. पुलिस के साईरन उसे सुनाई दिए और पीछे मुड़ी तोह दिल्ली एक पुलिस किसी कपल को पकडे हुए थे …

वह वापस आगे देख रमेश के सपथ भागती घाली गयी और दोनों रिक्शा में बैठ कर वान से रवाना हुए ..

रौशनी और रामश रिक्शा में कुछ न बोले बस रिक्शा चलती रही और सन्नाटा चाय था ..

रौशनी घर पहुंची और बिना रमेश से कुछ बोले चली गयी.

वहां रमेश अभी भी अपसोस में था की वाओ रौशनी कप अपने मोटा लोढ़ा को राइड नहीं कर्मा पापाया और सोचा की कब वापस उसे मौका मिलेगा ताकि रौशनी उसके मोटा लोढ़ा की सवारी करेगी …

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वहां रूम में रौशनी खुद को संभाली .. उफ्फ्फ बाल बाल बची थी आह वह तोह …. उफ्फ्फ्फ़ कितना रिस्क था .. उफ्फ्फ्फ़ लेकिन मज़े भी ऐसी hi रिस्क में उसे भी आने लगा था …

उसे रमेश से भी नाराज़गी थी की वह उसे ऐसी जगह ले गया था और जुटु बोलै था की पुलिस का राइड नहीं होता और वह सब पुलिस ने hi कण्ट्रोल में रखा हैं पार्क को..

अगले दिन ंगो के लिए रौशनी निकली तोह रमेश की रिक्शा में रैथ काली गयी लेकिन रमेश से कुछ बाईं न की .. कल के इंसिडेंट से वाओ अभी फाई नाराज़ थी .. रमेश भी कुछ न बोलै बस उसे ंगो चोर निकल गया.

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ंगो का काम ख़तम हुआ और शाम हो गयी थी .. आज सलीम और असलम दोनों में से कोई एक वापस गाँव से आने वाला था .. बस रौशनी को यद् नहीं था कौन आएगा .. उसने तोह सलीम और असलम को कॉल भी करि थी लेकिन दोनों में से किसी ने भी फ़ोन नहीं उठाया था .. फिर भी रौशनी सोची की उनके घर जाकर hi तरय करे अकुन आया होगा तोह. वह उनके घर के तरफ चल पड़ी .. घर पहुंची तोह घर बंद था मतलब दोनों में से कोई एक भी नहीं आ hi चुके थे ??.. रौशनी ने दरवाज़े की घंटी बजे और दोनों को आवाज़ लगाई लेकिन किसी ने जवाब नहीं दी ..

(अब कहानी में असलम के नज़रिये से बताउंगी )

इस दुराण रौशनी के 5-6 बार कॉल आ चूका था. मैं उसके कॉल पिक नहीं करा tha….ghar की घंटी बजी तोह में ने दरवाज़ा खोला तब रौशनी बहार hi कड़ी थी….

येलो कलर के साडी पहने वो क़यामत ध रही thee…uska हुसैन अप्सराओं को भी मात दी रहा था….

उसके येलो कलर के ट्रांसपेरेंट ब्लाउज मैं उसके येलो कलर के ब्रा भी साफ़ दिखाई दी रही thee…ek बार तोह दिल किया की, उसको वही बाहों मैं भर loon..uske आंग का रसपान karun….bahon मैं लेकर उसके मांसल डुल बदन को मसलों…..

असलम आप कहा thee…itni कॉल के कॉल भी नहीं उठा रहे thee….aur आप वापस आए हो इन्फॉर्म क्यों नहीं किया…”

मई: वह मेरी तबयात ठीक नहीं थी….

रौशनी: नाराज़ हो मुझसे…..?

मई: नहीं तोह…..

रौशनी: तोह फिर मेरे कॉल का आंसर क्यों नहीं दिया….

मई: वो मई कही बिजी था…..

रौशनी: हम्म ठीक है मत batao….par मुझे पता है तुम मुझे नाराज़ हो….

मई: तुम्हे गलत फेहमी है…

रौशनी: अच्छा अगर मुझसे नाराज़ नहीं ho….toh मुझे आज डिनर पर लेकर चलो….

मई: मेरा मूड नहीं है….

मई बिना कुछ बोले अपने रूम मैं चला gaya….ander आकर अपने कपड़े उतरे और टीशर्ट और शॉर्ट्स पहन कर बेथ gaya……piche रौशनी कड़ी thee….wah मेरे तरफ देखि और हरिजन से होती हुए बोली…” उफ्फ्फ असलम . अपने कपड़े क्यों उतर diye…aap को मुझे डिनर पर नहीं ले जाना है क्या…?”

मई: मैंने कहा था ना मेरा मूड नहीं है….

रौशनी: (रौशनी का चेहरा एक दम से उतर गया था मेरे बात सुन कर…) असलम ठीक hai….mat चलो मेरे साथ…

मई बिना कुछ बोले आकर सोफे पर बेथ gaya….Roshni ने घर का दूर बंद क्या और मेरे पास आकर सोफे पर बेथ gaye…”chalo ना असलम ….देखो मई कितना तैयार होकर ए hun….abb क्या karun…aapko मानाने के lye…galati हो गए mujse….abb चलो भी….” मैंने रौशनी को ऊपर से नीचे तक dekha…uske बदन का हर कटाव देख कर मान दोल जाता….”

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में बोलै “ाचा क्या कर सकती हो तुम मुझे मन्नने के लये…”

रौशनी: कुछ भी लेकिन पर तुम अपना मूड ठीक करो पहले….

मई: ठीक hai….tum यही ड्रेस बिना ब्रा के पहन कर मेरे सामने आ सकती हो….

रौशनी मेरे बात सुन कर एक दम से चौंक gaye….wo मेरे फेस को ऐसे देख रही thee…jaise मैंने उसके जान मांग ली ho…wo कुछ देर ऐसे hi बैठी rahi…aur फिर एक दम से कड़ी hui….maine सोचा अब्ब ये चली jayege….shayad मैंने कुछ जयादा hi बोल diya..par अब्ब मुझे उसके कोई परवाह नहीं thee….muje जो पता करना tha….wo मैंने कर लिया था…. पर ये kya….wo तोह मेरे बैडरूम के तरफ जाने लगी थी…

वो जैसे hi मेरे बैडरूम के अंदर gayi….aur मुझे अपने बैडरूम के दरवाज़े के बंद होने के आवाज़ ए तोह, मेरा मोटा लोढ़ा मेरे शॉर्ट्स के अंदर से उछाल पढ़ा….

मैं ढकते हुए दिल के साथ रौशनी के बहार ऐनी का वेट कर रहा tha…kareeb 5 मिनट बाद दूर खुलने के आवाज़ ए तोह, मेरा दिल और तेजी से धड़कने लगा. रौशनी रूम से बहार ayi…room के दूर के तरफ हल्का अँधेरा था... वो धीरे मेरे तरफ बढ़ने lagee…usne अपने दोनों हाथो के उंगलयों को अप्प्स मैं फंसा रखा tha….aur अपने हाथो के उंगलयों को अप्प्स मैं मसलते हुए सेहमी से मेरे तरफ बढ़ रही थी…

फिर जैसे hi वो मेरे तरफ badhi….toh उससे देखते hi मैं एक दम से सोफे से खड़ा हो gaya….Roshni नीचे सर झुकाये हुए कड़ी thee….uske ट्रांसपेरेंट साडी और ब्लाउज मैं उसके गोर रंग के 38 साइज के बड़ी चुच्यां साफ़ दिखाई दी रही थी….

मेरे पाजामे मैं मेरा मोटा लोढ़ा तोह ऐसे खड़ा हो gaya…jaise उससे किसी ने करंट का शॉक दी दया ho…Roshni ने सहमे हुए अपने सर को उठा कर मेरे तरफ dekha….aur घबराये से हुई आवाज़ मैं boli….”abb तोह नाराज़ नहीं हो ना…?”

मैंने ना मैं सर हिलने लगा और रौशनी के तरफ badha…uske चहरे से साफ़ पता चल रहा tha…ki वो किश हद तक नर्वस फील कर रही hai…jaise hi मैं उसके तरफ बढ़ा तोह, वो थोड़ा सा पीछे hui…bhot धीरे se…maine अग्गे के बढ़ कर उसके दोनों हाथो को अपने हाथो मैं पकड़ liya…aur मैंने फिर से एक बार उसके चूचियों के और jhanka…toh उसने अपने सर को फिर से झुका liya…”ufff असलम जी …..अब्ब तोह चलोगे ना डिनर पर….” रौशनी लड़खड़ती हुई आवाज़ मैं बोली…

मई: नहीं आज डिनर बहार nahi….yahi karenge….main आर्डर कर देता हूँ. बोलो क्या खाओगे….

रौशनी मेरे तरफ चौंकाते हुए देखि और फिर पलट कर वापिस जाने lagee….toh मैंने पीछे से उसके साडी का पालू पकड़ लिया…” कहा जा रही हो….” उसने अपने कंधे से अपने साडी के पल्लू को पकड़ लिया और पीछे के तरफ फेस करते हुए धीरे से boli….”Aslam आपने जो कहा tha…wo मैंने कर diya…abb मुझे अपनी ब्रा पहन कर जानने दो…”

मई उसके साडी को थामे हुए उसके तरफ badha….aur उसके दोनों कंधो पर हाथ रख कर उससे पीछे के तरफ खेंचा तोह, उसके पीठ मेरे छाती से आ लगी… “आग लगा कर ऐसे तोह ना Jo…jal कर मर जाऊंगा मैं….”

मैंने रौशनी के कंधो को पकड़ कर उसको अपनी तरफ घुमाया तोह, वो अपनी नशीली आँखों से मेरे आँखों मैं देखने lagi…isse पहले की वो कुछ और bolti…mai फिर से बोलै…

“जानती हो Roshni….jab भी मैं तुम्हे देखता हूँ तोह दिल करता hai…ki ये वक़्त यही थम jaye….aur मई तुम्हारे हुसैन का दीदार यूँ hi करता रहूं…”

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उसकी नशीली आंखें चमक रही थी... मैंने रौशनी के कंधो को छोड़ा और अपने हाथों को सरकते हुए, उसके दोनों गालों पर ले गया… और उसके फेस को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर अपने फेस को उसके फेस के बिलकुल पास ले गया…. उसके गुलाबी होंठ मेरे सामने थे… जब मेरी साँसे उसके चेहरे पर चली.

"रौशनी…." मैंने उसके होंठो के तरफ देखते हुए कहा…. तोह वह थोड़ी सी झिझकते हुए मेरी तरफ देखि और कही…. "हूँ…."

“रौशनी मैं तुम्हारी साँसों को आज दिल भर के महसूस करना चाहता हूँ… जब भी तुम्हारी साँसों का एहसास मुझे अपने चेहरे पर होता है. तोह मई इस दुनिया में होकर भी इस दुनिया में नहीं रहता… आज मैं तुम्हारी साँसों के नशे में डूब जाना चाहता हूँ…

रौशनी चुप चाप मेरी बातें सुन रही थी… फिर मैंने जैसे hi अपने होंठो को उसके होंठो के तरफ बढ़ाया… तोह उसने अपने दोनों हाथों से मेरी दोनों कलाइयों को पकड़ लिया… और हल्का सा जोर लगा कर मेरे हाथों को अपने फेस से हटाने की कोशिश की… और फिर अगले hi पल उसने कलाइयों को हटाने के बजाये उनके ऊपर अपनी पकड़ को कसना शुरू कर दिया… रौशनी एक बार फिर से मेरी आँखों में देखि… और फिर धीरे अपनी आंखें बंद कर ली…

मैंने वक़्त जाया किये बिना रौशनी के गुलाबी होंठो को अपने होंठो में भर लिया… जैसे hi मैंने रौशनी के होंठो को अपने होंठो में लेकर हल्का सा दबाया… और फिर उसके नीचे वाले होंठ को अपने दोनों होंठो में लेकर चूसना शुरू कर दिया.. उसके हाथ मेरी कलाइयों से खिसकते हुए मेरे बाइसेप्स पर आ चुके थे… और फिर अगले hi पल उसके दोनों होंठो का दबाव मेरे ऊपर वाले होंठ पर पढ़ने लगा… और फिर धीरे रौशनी मेरा साथ देने लगी थी…. हर बीतते हुए पल के साथ हम दोनों एक दूसरे के होंठो को और जोर से दबा कर चूसने लगे थे…. बीच में कभी रौशनी अपने होंठो को मेरे होंठो से अलग करती, तोह मैं उसके फेस को पकड़ कर अपनी तरफ खींचता तोह, वह फिर से अपने होंठो को मेरे होंठो पर लगा देती….

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"मैंने अब रौशनी के होठों का रास निचोड़ना शुरू कर दिया था... अब कभी मैं उसके नीचे वाले होंटो को अपने होंठों में लेकर एक सिरे से दुसरे सिरे तक चूसता तोह कभी ऊपर वाले होंठ को... रौशनी अब बिलकुल भी विरोध नहीं कर रही थी... जब सांस उखाड़ने लगी तोह, मैंने रौशनी के होंठों से अपने होंटो को अलग किया और उसका हाथ पकड़ कर सोफे पर लेजाकर बिठा दिया...

"ी लव यू रौशनी... प्लीज कभी मेरा साथ न छोड़ना..."

(अब बेचारी रौशनी क्या करें... फँस गयी थी जाल में...) उसने अपना एक हाथ उठाया और मेरे सर के बालों को सहलाती हुई लड़खड़ाती हुई आवाज़ में बोली, "मममम असलम..." मैंने उसके झांग से अपने सर को उठाकर और उसकी आँखों में देखते हुए बोलै, "दुनिया की नज़र में तुम भले hi मेरे नहीं हो सकती... पर क्या तुम दुनिया की नज़रों से दूर होकर मेरी नहीं हो सकती... जैसे आज हो... रौशनी यकीन करो... मैं कभी तुम्हारी और तुम्हारी फॅमिली लाइफ में आधे नहीं आऊंगा... सिर्फ इतना चाहता हूँ की, अपनी लाइफ के कुछ पल कभी मुझे भी दे दिया करो... और अपना प्यार भी...."

रौशनी थोड़ी इमोशनल भी हो गयी थी... इसीलिए मैंने टॉपिक चेंज करा... "अच्छा बोलो क्या आर्डर करूँ...." वह मेरी आँखों में देखि और फिर मेरा हाथ पकड़ कर मुझे सोफे पर बिठाते हुए बोली, "कुछ भी आर्डर कर दो..."

मई: चिकन चलेगा... और साथ में बियर...

रौशनी बोली “जैसे तुम्हारी मर्ज़ी... असलम जी”

फिर मैंने चिकन और बियर आर्डर कर दी.... रौशनी अपने सर को मेरे कंधे पर राखी और फिर थोड़ी देरर बाद बोली... "असलम जो तुमने कहा क्या वह सच है...." मैंने रौशनी की तरफ अपने मुँह करते हुए उसकी आँखों में देखा और फिर हलके से मुस्कुराते हुए बोलै... "हाँ सच है..."

डिलीवरी बॉय थोड़ी hi देरर में आर्डर लेकर आ गया... मैंने उससे पैसे दिए और वापिस भेज दिया... मैंने चिकन और बीयर्स की बोतल सोफे के सामने टेबल पर रखा और किचन में चला गया.... वहां से दो गिलास, दो प्लेट्स और आइस ट्रे लेकर बहार आया.... चिकन को दोनों प्लेट्स में डाला और फिर बियर की बोतल खोल कर दोनों ग्लासों में भर दी..... बीच में जब मैंने उसकी साड़ी और ब्लाउज में झलकती हुई उसकी चूचियों को देखता तोह, वह शर्मा कर अपना फेस दूसरी तरफ कर लेती...

मैंने उसके बियर का गिलास उसकी तरफ बढ़ाया तोह, उसने गिलास वापिस टेबल पर रख दिया... और सोफे से उठ कर कड़ी हुई और मेरे बैडरूम के तरफ जाने लगी, तोह मैंने फिर से उसका हाथ पकड़ लिया... "क्या हुआ....?" रौशनी ने पीछे मूढ़ कर मेरी तरफ देखा और फिर शरमाते हुए बोली... "असलम कब तक मुझे ऐसे बिठाये रखोगे...." मैंने रौशनी का हाथ पकड़ कर जोर से अपनी तरफ खेंचा तोह, वह मेरे ऊपर आकर झुक गयी.... मैंने उसके नंगी कमर को अपने दोनों हाथों से जैसे hi पकड़ा तोह, उसका बदन एक बार फिर से कनाप गया..... "सीईई असलम......" और अगले hi पल मैंने उससे खेंच कर अपनी गोद में बैठा लिया.... "आज रात तक तुम्हे मेरे साथ रहना है... याद है ना....?"

रौशनी मेरे झांगों पर बैठी कसमसाई और फिर अपने फेस को दूसरी तरफ करके मुस्कुराती रही

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मैंने उससे अपनी झंगो पर बैठाये हुए, उसका गिलास उठाया और उसके तरफ बढ़ा diya…Roshni शरमाते हुए मेरे गोद से नीचे उतरी और सोफे पर बेथ कर बियर पीने lagee…aise छेद चढ़ करते हुए हमने तीन बोतल बियर पि ली thee….Roshni तोह पहले hi भोत काम ड्रिंक करती thee…isslye उससे अब्ब बियर का सरूर होना शुरू हो गया tha…maine खली प्लेट्स और गिलास को वापिस किचन मैं रख कर वापस aaya…toh रौशनी उठ कर सीधे मेरे बैडरूम मैं चली गए paayi…mai भी उसके पीछे बीएड रूम मैं gaya….toh देखा रौशनी बाथरूम के अंदर thee…wo अपने हाथ धो रही थी…

मई बाथरूम मैं gaya….aur रौशनी के पीछे जकड कर खड़ा हो गया… रौशनी ने जब मिरर मैं मेरे तरफ देखा तोह एक दम से सकपका से गए. "ओह्ह्ह असलम आपने तोह डरा hi दिया था…." मैंने पीछे से रौशनी को अपनी बाँहों मैं भर के उसके ब्लाउज के बीच नंगी पीठ पर अपने तरसते हुए होंटो को लगा diya….jaise hi मैंने अपने होंटो को उसके पीठ पर लगाया तोह, रौशनी एक दम से सिसक uthi…"siiiiiiii ओह्ह्ह्हह्ह जी की.. की.. क्या कर रहे प्लीज ऐसा मत करिये…."

मैंने अपने होंटो को उसके पीठ पर रगड़ते हुए kaha…."ohhh प्लीज रौशनी आज ना रोको…." और फिर अपने दोनों हाथो को उसके पेट से ऊपर उसके चूचियों के तरफ ले जाने laga….jaise मेरे हाथ उसके नंग पेट पर थिरक रहे thee….waise उसका बदन झटके खाने लगा था. उसके आँखों के पलके अब्ब भरी होकर बंद होने लगी थी…" उफ्फ्फ ममम असलम उफ्फ्फ्फ़ …."जैसे hi मेरे हाथ रौशनी के ब्लाउज से तकार्ये तोह, मैंने रौशनी के साडी का पल्लू पकड़ कर सरकना चाहा तोह, रौशनी एक दम से पलट कर मेरे तरफ घूम gaye…uske चहरे पर वासना और दारु के नशे का मिला जुला असर साफ़ दिखाई दे रहा था….

और फिर जैसे hi रौशनी ने कुछ बोलने के लये मू खोलना चाही मैंने उसके होंटो पर अपने होंटो को रख कर उसका मुँह बंद कर दिया और मई उसके होंटो को पागलो के तरह चूसने laga….wo मेरे बाँहों मैं एक दम से कसमसा सी gaye….iss जोरजामिश मैं उसके साडी का पल्लू उसके कंधे से सरक कर नीचे आ चुक्का tha…main उसके होंटो को अपने होंटो मैं भरे हुए उसके होंटो का रास निचोड़ कर पि रहा था…. रौशनी के गोर रंग के गाल एक दम लाल सेब जैसे हो गए थे…. मैंने रौशनी के होंटो से अपने होंटो को अलग क्या और फिर एक दम से थोड़ा सा झुकते हुए रौशनी को अपनी बाँहों मैं उठा liya…maine उसके आँखों मैं देख बोलै …."तुम भोत खूबसूरत लग रही हो Roshni...maine तुम्हारे हुसैन मैं बह जाना चाहता हूँ…"

रौशनी ने शर्माते हुए मेरे आँखों में देखा और फिर अपनी आँखें बंद कर li...main उसको बाथरूम से लाकर बाहर aaya...aur बीएड पर लिट्ā दिया... वह आँखें बंद किये हुए बीएड पर मेरे सामने लेती thi...gaalon पर शर्म की लाली लिए हुए, और होंठों पर सदियों की प्यास लिए हुए, वह जब तेज़ सांसें ले रही thi...uske चूचियां उसके येलो कलर के ब्लाउज में ऊपर नीचे हो रही thi....maine जल्दी से अपनी टीशर्ट utaari.....aur फिर अपना पजामा उतरने laga...Roshni ने कपड़ों की सरसराहट सुन कर आँखे खोल कर मेरे तरफ dekhi....aur फिर एक नज़र मेरे चेस्ट पर दाल कर फिर से आँखे बंद कर ली और करवट लेकर मेरे तरफ पीठ करके बेथ गयी...

अब मई सिर्फ अंडरवियर में tha....main धीरे से बीएड पर चढ़ा और रौशनी के ठीक पीछे जाकर घुटनो के बल बेथ gaya....maine रौशनी के कन्धों को पकड़ा और उसकी पीठ अपनी चेस्ट से सताते हुए, उसके फेस को पीछे की तरफ घुमा कर ऊपर की तरफ उठाया तोह, उसने अपनी नशीली आँखों को खोल कर मेरे तरफ dekha...uski आँखों में वासना के गुलाबी डोरे तैर रहे the....honto थरथरा रहे the....maine झुक कर उसके होंटो को अपने होंटो में भर लिया और फिर से उसके रसीले होंटो का रसपान करने लगा...

मैंने अपने हाथों को सरकते हुए, इस बार सीधा उसके ब्लाउज के ऊपर से उसके चूचियों पर रख diya...aur उसके चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से जैसे hi मसला, रौशनी अपने होंटो को मेरे होंटो से अलग करते हुए सिसक uthi....usne मदहोशी से भरी आँखे से मेरे आँखों में dekha...maine उसके चूचियों को छोर उसके ब्लाउज के हुक्स खोलने शुरू कर दिए जैसे मई उसके ब्लाउज के हुक्स खोल रहा tha...waise रौशनी के हाथ अपनी चूचियों को कवर करने के कोशिश करते जा रहे the...kuch hi पालो मैं मैंने उसके ब्लाउज के सरे हुक्स खोल दिए थे...

मैंने रौशनी के ब्लाउज के हुक्स खोल कर उसके ब्लाउज को उसके बाहों से निकलना शुरू कर diya....Roshni के हलके से विरडोह के बाद मैंने उसके ब्लाउज को उसके बदन से अलग करके ज़मीन पर फ़ेंक diya....Roshni अपनी 38 इंच के चूचियों को अपने हाथों और बाहों से छुपाने के कोशिश करने lagee....maine रौशनी के चेहरे को फिर से अपनी तरफ ghumaya...aur उसके होंटो पर अपने होंटो को रख कर उसके बड़ी चूचियों को अपने हाथो मैं भर liya...aur अपने हाथो के उँगलियों से उसके चूचियों के निप्पल्स को ऐसे मसलने और छेड़ने laga....jaise कोई अपनी उगंलों से सितार बजा रहा हो.....

रौशनी के तेज होती सांसें से उसके चूचियां किसी गुब्बारे के तरह कभी फूलती तोह, कबि ऐसे लगता के वह नीचे के और बेथ रही hai...maine रौशनी के होंटो को चूसते हुए, उसे बीएड पर पीठ के बल लेता diya..aur खुद उसके ऊपर आ gaya...Roshni ने अपने दोनों हाथो से मेरे कंधो को थम liya...uske उँगलियों के नाख़ून मुझे अपने कंधो पर चुब्ते हुए महसूस हो रहे थे.

इतना गरम माहौल चल रहा था की चणक से बहार दूर बेल्ल baji...maine रौशनी को होंटो से अपने होंटो को अलग किये तोह वह अपनी वासना से भरी आँखों को खोल कर मेरे तरफ देखि...

"मई अभी आता हूँ देख कर...." मैं मुस्कुराते हुए kaha....aur बीएड से नीचे उतर कर अंडरवियर मैं ही बहार चला gaya....uss टाइम मई भोत जयादा एक्ससिटेड tha..islye मई पजामा पेहेनना भी भूल गया....

बहार जाकर जैसे ही मैंने मैं दूर खोला तोह, देखा मीनल एक शार्ट ड्रेस मैं सामने कड़ी thee....muje इस हालत मैं देख कर वह एक दम से झेंप gaye...phir एक बार मेरे चेस्ट के तरफ नज़र मरते हुए मुस्कराई और धीमी से आवाज़ मैं boli...."woh सलीम मियां कही गए hai...kya उन्होंने आपको बताया की कब वापस आ रहे हैं वह? …."

मई: पता नहीं शायद कल या परसो. और कुछ?

मीनल: ok यही पूछना था.....

फिर मीनल मुद कर वापस जाने lagee...aur फिर एक दम से मेरे तरफ पलटी और मेरे बॉडी को निहारने लगी ..…..

“असलम जी. आप ने डिनर कर लिया है....?" उसके होंटो पर भोत ही पायरी सी मुस्कान थी....."

में बोलै “हाँ डिनर कर लिया hai...aur मुझे भी अब किसी काम से बहार जाना tha......kyon कोई काम था...."

मीनल: नहीं ऐसे ही पुछा लिया....

मई: ठीक हैं....

मीणा फिर से मेरे लोडे के वहां नज़र राखी और एक मुस्कराहट देकर मुद कर जाने लगी .. में देख सकता था की वह जांबुघ कर अपनी चूतड़ों को हिलाते हुए जा रही थी .. में मन hi मन सोचा .. उफ्फ्फ यह साला सलीम , पाकी हुयी घोड़ी रौशनी की भी लेता हैं और ऐसी कमसिन जवान लड़की मीनल की भी …. चलो आज रात को वह नहीं हैं तोह पूरी रात रौशनी के साथ hi मस्ती करूँगा अकेले में) और यह सोच कर मैं फिर से दूर को अंदर से लॉक क्या और बीएड रूम मैं चला gaya...jab वह पहुंचा तोह, देखा रौशनी बीएड पर पेट के बल लेती हुई thee....usne साड़ी के पालू से अपनी चुच्यों को कवर कर रखा tha....aur उसकी पीठ मेरे तरफ thee....matlab के उसने मेरे जाने के बाद भी ब्लाउज नहीं पहना tha....ufff मम रौशनी भी छोड़ने के लये अब्ब पूरी तरह से तैयार thee....ye सोचते ही मेरे लोडे मैं मनो जैसे नए जान आ गयी ho....mera मोटा लोढ़ा पाजामे और अंडरवियर मैं एक दम लोहे के रोड के तरह खड़ा हो चुक्का था...

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मैंने अपने पाजामे को फिर से utara.....aur फिर इस बार अपने अंडरवियर को भी उतर दी..

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."कोण था बहार...?"

रौशनी ने वैसे ही लेते मेरे तरफ देखे बिना कहा...."

में सोचा साला सलीम दोनों के सपथ मज़्ज़े लेता हैं ... रौशनी को मीनल अवे थी बोल दूंगा .. रौशनी बाद में सलीम से पूछताछ करेगी की रात को मेनर क्यों आयी थी उस्ले båre में पूछने .. उनका झगड़ा हुआ तोह वाओ पहला कदम हो सकता हैं रौशनी को सिर्फ अपना बनाने के लिए...

वह मीनल आयी थी सलीम के बारे में पूछने ..."

(वहां रौशनी सोच में पड़ी की देर रात को क्यों मीनल ऐसे घर आकर पूछ रही हैं.. सुबह के लिए यही रुक सकती होगी न, क्या सलीम अभी बनी उस मीनल की चुदाई करते होंगे ... उफ़ देखना पड़ेगा यह मामला क्या हैं)

रौशनी सोच में पड़ी बैठी रही और कुछ न बोली .. मेरा पैतरा चल रहा था ... देख्नेगे आगे क्या होता हैं .. अभी तोह इसके साथ मस्ती करनी हैं...

जैसे ही रौशनी फेस घुमा कर मेरी तरफ देखि, तोह मेरा मोटा लोढ़ा एक दम तना हुआ झटके खा रहा था... में कुछ न बोलै और अगले hi पल में बीएड पर चढ़ा और उसकी कमर पर हाथ रखते हुए उससे सीधा लिटाने के लिए हल्का सा ज़ोर लगाया तोह, वह खुद hi पीठ के बल सीढ़ी होकर लेत गयी... मैंने रौशनी की साड़ी का पल्लू पकड़ा और नीचे की तरफ खींचने लगा तोह रौशनी ने अपनी साड़ी के पल्लू को अपने हाथो से पकड़ लिया... पर में उसके पल्लू को नीचे के तरफ खेंचता रहा... उसने खुद hi अपने हाथो के पकड़ अपने साड़ी के पल्लू पर ढीली कर दी... धीरे उसके साड़ी का पल्लू उसकी चूचियों से नीचे सरक गया... वह आँखे बंद किये जब साँसे ले रही थी... तब उसकी बड़ी मस्त चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी... जिससे वह अपने हाथो से छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी... मैंने थोड़ा सा आगे के तरफ झुक कर रौशनी का राइट हैंड पकड़ लिया और फिर उसके उस हाथ को उसकी चुकी से हटते हुए अपनी चेस्ट पर रख लिया... न वह कुछ बोल रही थी... और न hi में... फिर डेरे से रौशनी की हथेली मेरे चेस्ट पर राखी.... और मैंने उसके हाथ को पकड़ रखा था... मैंने उसके हथेली को अपनी चेस्ट से सरकते हुए धीरे नीचे पेट के तरफ ले जाना शुरू कर दिया और फिर जैसे hi उसकी हथेली मेरे पेट पर आकर मेरे तने हुए मोटा लोढ़ा से टकराई तोह, उसने अपनी हथेली को बंद कर लिया... फिर मैंने उसकी बंद मुट्ठी को अपने मोटा लोढ़ा पर रखा और दूसरे हाथ से उसकी बंद मुट्ठी के उँगलियों को खोलना शुरू कर दिया... हल्का सा ज़ोर लगते hi उसने अपनी बंद मुट्ठी खोल दी... और मैंने उसकी उँगलियों को अपने 4 इंच मोठे मोटा लोडे पर लप्पेट लिया... फिर उसकी उँगलियों को बाहरी तरफ से अंदर के तरफ दबाया तोह उसने खुद hi अपनी मुट्ठी बंद करते हुए मेरे तने हुए मोटा लोढ़ा को अपनी मुट्ठी में भर लिया... यह सब करते हुए भी उसका बदन बुरी तरह कनाप गया था... मैंने उसके हाथ से अपने दोनों हाथो को हटाया और उसके पेट पर नाभि के पास हाथ फेरा तोह उसकी कमर ने फिर से झटका खाया... उसने आपने फेस दूसरी तरफ कर लिया... मैंने उसके पेट से हाथ को सरकते हुए ऊपर उसकी चूचियों के तरफ ले जाना शुरू कर दिया... रौशनी मेरे हाथ को अपनी चूचियों के तरफ बढ़ता हुआ महसूस करके कसमसाने लगी... उसके होंठ ऐसे खुले हुए थे... जैसे उससे सांस लेने में तकलीफ हो रही हो... फिर मैंने दूसरा हाथ उसकी कमर पर रखा और उसकी चूचियों के ऊपर झुकते हुए, उसके राइट निप्पल को अपने होंटो में भर कर जैसे hi हल्का सा चूसा तोह रौशनी ने एक दम से सिसकते हुए मेरे सर के बालों को कस के पकड़ लिया... "ुम्मःहः siiiiiiiiiiiii असलम...."

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रौशनी ने मेरे बात सुन कर अपनी आंखे kholi….aur मेरे झटके कहते मोटा लोढ़ा के तरफ dekha….aur फिर वो एक दम से उठ कर बेथ gaye….maine रौशनी का हाथ पकड़ा और बीएड पर खड़े होते हुए, उसके हाथ को अपने मोटा लोढ़ा पर रख diya….abb मेरा मोटा लोढ़ा उसके हाथ मैं ठीक उसके होंटो के सामने था…. वो मेरे सामने घुटनो के बल बिकुल नंगी बैठी हुई thee….usne मेरे मोटा लोढ़ा के िरद गिरद अपनी उंगलयों को कास लिया और फिर मेरे आँखों मैं झांकते हुए मेरे मोटा लोढ़ा पर अपना सर झुकाते हुए, मेरे मोटा लोढ़ा के सुपड अपने रसीले होंटो मई भर liya….Roshni अब्ब मेरे मोटा लोढ़ा के सुपड को अपने रसीले होंटो मैं लिया हुए चूस रही thee…”ohhhh रौशनी हाँ चुसस्स मेरा मोटा लोढ़ा अह्ह्ह्हह भोत मज़ा आ रहा है….”

रौशनी तोह जैसे मेरे ये बात सुन कर एक दम जोश मैं आ gaye….usne मोटा लोढ़ा को हाथ मैं पकड़ तेजी से मुठ मरते हुए चूसने शुरू कर दिया.

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मैं एक दम मस्त हो चूका था. और रौशनी के सर को पकड़ कर अपनी कमर को हिलने लगा. जैसे मैं उसके मुँह को ही छोड़ रहा था. रौशनी ने मेरे मोटा लोढ़ा को अपने मुँह से निकला. और फिर अपने सर को थोड़ा सा और झुकाते हुए मेरे बॉल्स को अपने मुँह मैं भर liya…”shiiii अह्ह्ह्ह रौशनी….” मैंने रौशनी के सर को पकड़ कर एक दम से सिस्का utha…mere बॉल्स को उसने पूरा मुँह मैं भर लिया tha….mera मोटा लोढ़ा मैं आज तक ऐसा सख्त तनाव कभी नहीं आया tha….jo उस दिन आया tha….phir रौशनी ने मेरे बॉल्स को मुँह से बहार nikala….aur मेरे आँखों मैं अपनी नशीली आँखों से देखते हुए, मेरे मोटा लोढ़ा को पकड़ लाया. और मेरे मोटा लोढ़ा को पकड़े हुए बीएड पर लेत gaye….sath ही मैं भी उसके खुली हुई झंगो के बीच मैं आ gaya….jaise ही मैं उसकी झंगो के बीच मैं आया तोह उसने मेरे मोटा लोढ़ा को पकड़ कर अपनी छूट के छेद पर लगा दया.

जैसे ही मेरे मोटा लोढ़ा का देखता हुआ सुपड उसकी छूट के छेद पर लगा तो, उसकी ऑंखें बंद होने लगी. और वो धीरे अपनी छूट को मेरे मोटा लोढ़ा पर दबाने लगी. “अह्ह्ह्हह असलमर तुम्हारे मोटा लोढ़ा ने मुझे पागल कर दया है.” और वो लगतार मेरे मोटा लोढ़ा के ऊपर अपनी छूट दबती रही. जिससे मेरा मोटा लोढ़ा उसकी छूट के दीवारों को फैलता हुआ धीरे अंदर घुसाने laga….mere मोटा लोढ़ा का सुपड रौशनी के छूट के छेद पर समां चुक्का tha…Roshni के गांड बिस्तर से 3-4 इंच ऊपर उठी हुई thee….aur वो आंखे बंद कए हुए अपनी गांड को और ऊपर उठा कर मेरे मोटा लोढ़ा को अपनी छूट मैं लेने के लये कोशिश करते हुए मचल रही थी…..

रौशनी: ुंहःहः असलमरर पलासी अब्ब ग़ुस्सा दो ना…..

मैंने रौशनी के ऊपर झुकाते हुए फिर से उसके होंटो को अपने होंटो मैं भर लिया aur….mere ऊपर झुकाने से मेरा मोटा लोढ़ा थोड़ा और खिसका कर उसके छूट मैं चला गया tha….maine उसके होंटो को चूसते हुए एक जोर दर देखा mara…..”siiiiiiiiiiiii ओह्ह्ह्हह्हह असलमररर एस्सस फ़क मई….” जैसे ही मेरा मोटा लोढ़ा रौशनी के छूट के दीवारों से रगड़ खता हुआ अंदर ग़ुस्सा तोह, रौशनी मस्ती मैं सिसक uthi…..hum दोनों के होंठ अलग हो चुके thee…mai रौशनी के ऊपर लेता हुआ tha….aur मेरा पूरा का पूरा 8 इंच का मोटा लोढ़ा उसके छूट के गेहरों मैं समय हुआ tha…Apni छूट मैं मेरा 8 इंच का मोटा लोढ़ा ग़ुस्सा लेने के बाद उसके होंटो पर वो कामुक मुस्कान देखते ही बनती थी. उसने एक हाथ से मेरे कंधे को थम रखा था. और दूसरे हाथ से अपनी राइट वाली चुकी को मसल रही थी. उसने ने अपनी वासना और कामुकता से भरी नशीली आँखों को खोल कर मेरे तरफ देखा.

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और फिर रौशनी ने मेरे आँखों मैं देखते हुए अपनी लेफ्ट चुकी को पकड़ कर मेरे कंधे से हाथ हटा कर सर पर रखते हुए मेरे फेस को अपनी चुकी के ऊपर झुकाने लगी. और अपने चुकी के काळा मॉटे निप्पल को मेरे होंटो पर लगा दया.

रौशनी कराह उठी “ उफ्फ्फ मममम अहह Aslam….chuss मेरे मुम्मो को अह्ह्ह छोड़ दे अपनी रौशनी ko…..Roshni आज से तेरी गुलाम हो gaye…siiiiii ुंहःहः कर लो मुझे प्या….

मैं भी किसी भूखे भेड़िये के तरह उसके मुम्मो के मास्स पर टूट पढ़ा. मैं जितना हो सकता था एक ही बार मैं उसके एक चुकी मुँह मैं भर ली, और उसकी चुकी को चूसने लगा. उसका बदन एक दम अकड़ गया. उसने अपने सर को पीछे के तरफ लटका रखा था. उसकी कमर बीच मैं से मुड़ी हुई थी. उसकी ये दशा बता रही थी की वो किश कदर वासना के आग मैं जल रही थी.. रौशनी मेरे सर को अपनी बाँहों मैं कास कर अपनी चुकी पर दबाने लगा. मैं जितना हो सकता था, पूरे जोर से उसके चुकी के निप्पल को दबा कर चूस रहा था. उसने अपने कमर को झटके देने शुरू कर दये. मेरे मोटा लोढ़ा उसकी छूट से 1 इंच बहार अट्टा. और फिर से अंदर घुस कर उसके बच्चेदानी से टकरा जाता. उसकी सिसकियाँ बैडरूम मैं गूंज रही थी. मैं बीच मैं उसकी चुकी से होंठ हटा कर उसके होंटो को चूसने लगता.

फिर उसने मेरे होंटो से अपने होंटो को हत्या, और बोली, “असलम आज कोई जल्दी नहीं, आराम से करो. मैं आज के दिन का पूरा मजा लेना छथि हूँ.” मैं भी कोई जल्दबाजी करने के मूड मैं नहीं था. मैं उसके हरंग को चुम रहा था चाट रहा था. और धीरे से उसकी छूट मैं अपना मोटा लोढ़ा अंदर बहार कर रहा था. और रौशनी भी अपनी गांड को ऊपर नीचे करके मेरा पूरा साथ दी रही थी. हम दोनों तकरीबन उसी पोजीशन मैं 5 मिनट तक धीरे चुदाई का आनद लेते रहे. फिर रौशनी और गरम होने लगी. उसने एक दम से मेरे पीठ पर अपनी बाहों को कस्ते हुए, अपनी तनगो को उठा कर मेरे कमर पर लप्पेट liya….jisse उसके छूट के होठं ऊपर के तरफ खुल कर आ गए थी…..

रौशनी सिसकियाँ मारती हुयी बोली “उफ्फ्फ्फ़ असलम और जोर karo…..ahhh रगड़ दो मेरे बुर मैं अपना मोटा लोढ़ा…. मुझसे अब्ब और बर्दास्त नहीं होता. मेरी चुदाई करिये असलम ममम मेरी चुदाई करिये जोरों से उफ्फ्फ ममममम पलासी असलम जी ahhhhhhhhhh…..”

मैंने अपने मोटा लोढ़ा को सुपड तक रौशनी के छूट से बहार निकला और धना धन शॉट लगाने शुरू कर diye…”ohhhh ओह्ह्ह्हह असलम एसससस फ़क मी अह्ह्ह्ह ुंहःहःहः उन्घ्ठ्ह उन्घ्ठ्ह सीईईई siiiiiiiiii ुंहःहःह एसससस फ़क मी अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह Aslam….haan और जोर से ऐसी hee….Roshni ने पलागलो के तरह मेरे फेस को चूमना शुरू कर diya….mere ताबरतोड़ देखो से उसका पूरा जिस्म बीएड पर हिल रहा tha….mera मोटा लोढ़ा अब्ब उसके छूट से निकल रहे काम रास से सरोबार होकर आसानी से अंदर बहार हो रहा था….

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रौशनी कभी मेरे फेस को चूमने लगती, तोह कभी मस्ती मैं आकर अपने होंटो को दबाकर खुद ही अपनी चूचियों को मसलने lagti….”ohhh एसससस फ़क ओह्ह्ह्हह्ह बेबी एसससस एसससस ओह्ह्ह असलम ी ऍम क्युम्मिंग असलम ी ऍम cumming….ohhhhhhh फ़क….” रौशनी ने एक दम मदहोश हो चुकी thee…aur लगतार अपनी गांड को ऊपर के और उठाते हुए मेरे मोटा लोढ़ा को अपनी छूट के गेहरों मैं ले रही thee….main भी अपने मोटा लोढ़ा को सुपड तक बहार निकल कर उसके छूट के गहराइयों मैं ग़ुस्सा रहा था….

जैसे वो झड़ने के करीब आ रही thee…waise वो अपनी कमर को और तेजी से हिलने लगी thee….phir उसने एक दम से मेरे होंटो को अपने होंटो मैं भर liya….aur अपनी चीखो को मेरे मुँह के अंदर निकलते हुए उसके पूरा बदन थरथराने laga….”unghhhh ुंहःहःहःह अह्ह्ह्ह ुंहःहःहःह” फिर रौशनी का बदन एक दम से अकड़ना शुरू हो gaya…uske टंगे मेरे कमर पर कस्ती जा रही thee….abb मुझे अपने मोटा लोढ़ा अंदर बहार करने मैं दिक्कत होने लगी तोह, मैं रौशनी के ऊपर से उठा. और उसके टैंगो को अपनी कमर से उतर कर घुटनो से मोड़ते हुए, उसके चूचियों से उसके घुटनो से सत्ता diya….aur पूरी रफ़्तार से शॉट पर शॉट लगाने laga….mera मोटा लोढ़ा फातच फातच करता हुआ उसके छूट के अंधेर बहार हो रहा था….

फिर एक दम से रौशनी ने अपनी गांड को पागलो के तरह ऊपर के तरफ उठाना शुरू कर di….meri हालत भी ख़राब हो चली थी..

“ओह्ह्ह्ह उफ्फ्फ ममम असलम ुंहःहःहः ईई लो मैं तोह गयीईइ ओह्ह्ह्हह्ह…..” रौशनी की सिसकियाँ सुनते ही मेरे मोटा लोढ़ा नई भी उसके छूट मैं वीर्ये के बौछार करनी शुरू कर dee….jaise ही मैं झड़ते हुए रौशनी के ऊपर लेता तोह उसने अपनी टैंगो को फिर से मेरे कमर पर कास ली और अपनी छूट के अंदर मेरे मोटा लोढ़ा को झाड़ तक लेते हुए, अपनी छूट को मेरे झंगो पर सत्ता दी…..

हम दोनों बुरी तरह झाड़ रहे the….saanse लेने मैं दिक्कत होने के बावजूद भी मैं रौशनी के होंटो को अपने होंटो मई लिए हुए पागलो के तरह चूस रहा tha…aur रौशनी भी मेरा पूरा साथ दी रही थी….

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रौशनी के छूट के अंदर अभी भी मेरा मोटा लोढ़ा रह कर झटके खा रहा tha….kuch देर बाद जब हम दोनों ठन्डे पढ़े तोह, मई रौशनी के ऊपर से नीचे उतर कर बीएड पर लेत gaya….Roshni आंखे बंद कए हुए लम्बी साँसे ली रही thee….thodi देर बाद रौशनी uthi….apne चेहरे पर ए हुए अपने लम्बे काले रंग के बालो को अग्गे से हटते हुए मेरे तरफ देख कर मुस्कराने lagee….phir रौशनी बीएड से नीचे उतर कर गांड मटकती हुई बाथरूम मैं चली gaye……uske हिलाते हुए मोठे गोर चूतड़ों को देख कर मेरे बेजान मोटा लोढ़ा मैं मनो किसी ने जान फूंक दी हो. ऐसे मेरा मोटा फिर से लोढ़ा खड़ा होने लगा था…..

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अभी तोह रात बाकी हैं
 
इंटरेस्टिंग व्यू … रमेश इतने भी अच्छे नहीं हैं , तीनो बुड्ढे कमीने हैं , बस असलम और सलीम ंगो के पास hi रहते हैं तो आना जाना आसान हैं रौशनी का . रमेश घर क्यों न ले जाता उसका एक अलग सीक्रेट हैं जो आगे पता चलेगा !!! ❤️

: शुक्रिया आपके डिटेल्ड कमेंट के लिए ❤️
 
मई तोह अभी भी हांफ रही थी और बीएड पे लेती हुई थी. असलम ने जब मुझे हाँफते हुए देखा तोह वह मेरे पास आया. फिर उसने मेरी दूध जैसी गोरी चूचियों को सहलाना, चूसना, काटना शुरू कर दिया.

"उफ्फ्फ्फ़, निकाह तोह हमने कर लिया है रौशनी , लेकिन अब मई सचाई में भी तुम्हारा शौहर बनना चाहता हूँ," असलम ने मुझसे कहा.

मैं मुस्कुरायी और उसके गालों को और होठों को चूमती हुयी पूछी, "क्यों असलम जी?"

फिर वह मेरी पूरी बॉडी को किश करने लगे और बोले, "मुझे तुम्हारा शौहर इसलिए बनना है, ताकि मई तुम्हे दिन और रात छोड़ सकू. मई तुझे और तरीकों से रगड़ रगड़ कर छोड़ता."

मुझे बहुत एक्ससिटेमेंट हो रही थी और मैं अपने दोनों हाथो से उसका सर पकड़ ली और उसको अपनी तरफ खींच कर ज़ोर ज़ोर से गहरी चुम्बन दी, मेरी जीभ उसके मुँह के अंदर हर जगह ढूंढ रही थी.

"उफ्फ्फफ्फ्फ़, तुम तोह कमाल की किसर हो रौशनी!"

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दोनों के बीच एक लम्बी वाइल्ड किश के बाद मुझे पानी चाहिए था, लेकिन असलम तोह पुरे मूड में था, और उसने मुझे अपनी तरफ खेचा और कहा, "उफ़ रौशनी जल्दी पानी पि कर आना , मई चाहता हु की तुम मेरा लुंड चुसो, इससे पहले की मई तुम्हारी सबसे मस्त और ताबड़ तोड़ , पलांद तोड़ चुदाई करू."

मई शर्मा गयी और मैंने बस कुछ न बोली , और अपनी चूतड़ों को हिलाते किचन दौड़ गयी".

में वापस आयी तोग असलम ने बिना वक़्त जाया किये मुझे अपने और खींचा और मेरी गर्दन के पीछे से पकड़ा और अपना लुंड मेरे चेहरे के पास ले आये. मैंने उसके मोठे लुंड को चूसने के लिए अपना मुँह खोला. असलम बहुत खुश हुआ मुझे राज़ी देख कर, उसने धीरे धीरे अपना कला और मोटा लुंड मेरे मुँह में और अंदर तक डालने लगे. मुझे उसका बड़ा लुंड चूसना बहुत पसंद था.

जब मई उसको चूस रही थी तोह वह बोलै, "हैं उफ्फ्फ्फ़ मममम रौशनी, चूसो मुझे उफ्फफ्फ्फ़, तुझे तोह मेरे मलते लोडे की चूसै बहुत अचे से आती है."

मेरे हस्बैंड रोनित कभी भी बीएड में अडवेंचरउस नहीं थे. असलम ने एक्सपर्ट तरीके से मेरी मुँह के गहराई तक लुंड दाल कर मेरी मुँह की चुदाई कर रहे थे जिससे मुझे कठिनाई काम हो रही थी .. ऐसे कुछ चूसै के बाद उसने अपने लुंड को मेरे मुँह से बहार निकला और मेरे चेहरे पर अपना गीला लुंड रगड़ने लगे. मुझे उनकी बुड्ढे होकर भी मर्दानगी फील हो रही थी और उसके लुंड की ज़ोरदार धड़क फील कर रही थी.

"oooooooooooooo," मई सिसकियाँ मार रही थी .

मैं उनके लुंड के निचे लटके, बड़े अंगूरों के साथ खेलना शुरू कर दिया जब मई चूसती रही. "ओह्ह्ह आह्ह्ह्हह स्साली क्या छुस्सत्ती ह्हैई", असलम प्लेअसुरे में कराहने करने लगा.

इस बुड्ढे लेकिन मज़बूत मर्द को सिस्यते सुन मुझे एक्ससिटेमेंट हो रही थी, क्युकी मैं अब उसके बैलन से भरे अंगूरों को चूसना शुरू कर दिया था. वह अपने अंगूरों मो मेरे मुँह पर रगड़ने लगे .. मुझे उनका ऐसा मस्त दुमदार रूप बहुत turn-on कर रहा था.

उसने मेरे सर के पीछे पकड़ लिया और मेरे मुँह में फिर से अपने लुंड से चुदाई करना शुरू कर दिया, पहले स्लो लॉन्ग थ्रुस्तस से और फिर शार्ट फ़ास्ट झटकों से. जब उसके लुंड से उनके हलवे के ज्वाला फटा तोह उसने मेरे मुँह को अपने लुंड के गाढ़े माल से से भर दिया. में बस फिर से असलम के लुंड के टिप को बेतहशा चूमने लगी

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उसने अपना लुंड मेरे मुँह से निकला तब मेरे सेक्सी चेहरे, बालों, और शोल्डर्स पर आ गए थे.

हूँ ऐसे hi कुछ टाइम लेते . असलम जाकर दारु की कुछ पेग मार 15-20 मं बाद वापस आये

वह मेरे करीब ए और अपना लुंड अपने हाथ में लेकर मेरे चेहरे के करीब ले आये. मैंने अपना मुँह खोली यह एक्सपेक्ट करते हुए की वह अपने मोठे लुंड को मुँह के अंदर डालेगा लेकिन उसने मुझे तैसे कर अपने लुंड को मेरे मुँह पर रगड़ने लगे.

उसका लुंड फिर से सलामी देने लगा था ….

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"aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa फिर से डालो इसको मेरे मुँह में," मई सिसकियाँ मार रही थी.. मुझे सिस्यते हुए सुनकर वह मेरी उत्साह पर हसने लगा.

अब उसने मुझे उठाया और बिस्तर पे फ़ेंक दिया. असलम ने मुझे एक राग डॉल की तरह खेचा और मुझे अपनी गोद में बिठा लिया. वह मुझे किश करने लगे और मेरे सेक्सी फेस और हैवी बूब्स को काटने में बिजी हो गए.

"uuuuuuuuuuuuuuuu hahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaaaaaaa अस्स्सलामममम," मई मोअन कर रही थी.

असलम ने मुझे बताया की "मेरे सेक्सी फेस को ओर्गास्म के थ्रोएस में देखना बहुत सेक्सी है. रौशनी तुम बहुत ब्यूटीफुल हो और तुम दम्म सेक्सी लगती हो जब तुम गेटिंग फुकेद." उसने मुझे तिघ्टलय हुग किया और मेरे लिप्स को काटा क्युकी मई मोअन कर रही थी. वह मुझे किश करता रहा और मेरी गर्दन और पूरी बॉडी को पैशन से लीक कर रहा था. मैंने इस तरह का प्यार या एक्ससिटेमेंट किसी से पहले कभी फील नहीं किया था और मई इससे रियली एन्जॉय कर रही थी.

मई चुदाई से अभी भी एक्ससिटेड फील कर रही थी और मुझे पता था की मुझे इस बूढ़े आदमी से साडी रात यह सब मिलने वाला है.

"रौशनी इधर आओ और मेरी गोद में बैठो" असलम ने मुझे कहा. असलम ने मुझे अपने ऊपर खेच लिया, उसने मेरी लेग्स को अलग किया और अपने लुंड को मेरी ओपन लेग्स के थ्रू मेरी बुर के होठों पर मस्सगे करने लगे. मैंने उसके लुंड के मोठे पहाड़ी ालो जैसे टोपे को चाटने लगी. उनका लुंड तोह करीबन 8 तो 9 इनचेस का था.

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फिर अचानक से असलम मेरी आर्मपिट्स को चूसना शुरू कर दिए. उसे और वह मेरी आर्मपिट्स को पूरी तरह से चाटने लगे.

फिर वह मुझे पागलों की तरह होठों पर चूमने लगे और में भी उसे जकड कर चूमने लगी और मैं उसके बदन से लिपट कर बेतहाशा उसे चूमने लगी.

"oooooooooooooooo अआप बहुत वाइल्ड हो असलम जी"

"रौशनी तुम भी तोह एक बढ़िया सी मस्त माल हो जो मेरे बड़े लुंड के लिए भूखी हो," असलम रेतुर्न में बोले.

उसके वर्ड्स से मेरी बॉडी में एक एक्ससिटेमेंट आ गयी

उसने मुझे टर्न किया तोह मई अब उसके ड्रेसिंग टेबल के मिरर को फेस कर रही थी. वह मेरे नैक को चूमने लगे और एक हाथ मेरे बूब और इतर दूसरा मेरी कमर और फिर बुर को एक्स्प्लोर कर रहे थे और इससे मैं सिसकियाँ मारने शुरू कर दी "उफ्फ्फ्फ़ ममम असलममम मई अब और नहीं ले सकती मुझे छोड़ो प्लीज."

इससे उसे ेन्सॉरगेमेन्ट मिला और वह बोलै, " और एक राउंड की चुदाई के लिए तैयार हो जाओ रौशनी".

में मुस्कुरायी , शर्मायी .. “उफ्फ्फ्फ़ क्या मस्त है तेरी छूट रोषनीईई", असलम बोले

में हफ्ते हुए “असलम कितना मस्त लुंड है आपका मई कई दिनों से आपके इस मोठे डंडे से छोड़ने के लिए तड़प रही थी आज मई इससे रत भर छोडूंगी.”

मेरी उठी हुई छूट मई असलम अपने लुंड का एक जोर दर झटका मरता है की मेरे मुँह से आह की सिसकारी निकल जाती है, अह्ह्ह ुआठ छोड़ सेल बुड्ढे मिटा दे आज मेरी छूट की पियास अहह छोड़ छोड़ अपनी बेगम को अह्ह्ह अह्ह्ह है है है ऐसे hi छोड़िये आआआअह्ह्ह असलमममम ले अपनी बेगम को आज रात भर अह्ह्ह्ह ुह्ह्ह्हह्ह.”

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असलम अब ताबड़ तोड़ तरीके से मेरी छूट कूटने लगता है, उसके लुंड के हर धक्का इतना जोर से मरता है की उसका लुंड उसकी मेरी

बच्चेदानी से टकराने लगता है, में बस hay-hay करती हुई अपने भरी चूतड़ों को खूब उठाने लगती हूँ और असलम मेरी बुर में सटासट अपने लुंड को पेलने लगता है, . beech-beech मई असलम जब मेरी पहली हुई छूट देखता है तोह अपने लुंड को बहार निकल कर मेरी छूट बुरी तरह चाटने लगता है.

करीब आधे घंटे तक असलम मेरी छूट को कभी अपनी जीभ से छत्ता है कभी अपने लुंड से छोड़ता है,

असलम बोलते है “रौशनी तुझे छोड़ने मई मुझे सबसे ज्यादा मजा आ रहा है तेरी मस्तानी गांड और छूट दुनिया मई सबसे मस्त है. मन करता हैं तुम्हे अब मई दिन रत नंगी करके छोडूंगा और दिन रत तेरी मस्त गांड को मरता राहु अह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ और तेरी पहली हुई छूट को दिनभर चूसूंगा तू बहुत मस्त छोड़ने लायक माल है रोशनी.

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असलम मेरी छूट से अपने लुंड को बहार निकल कर उसे मेरे मुँह मई दे देता है और में असलम का लुंड फिर से पिने लगती हूँ,

असलम पास मई रखे तेल उठा कर मेरी गांड मई ऊँगली dal-dal कर तेल लगाने लगता है और अपने होंठो से मेरी

छूट भी चूसने लगता है, असलम की पहले एक फिर दो उंगलिया तेल मई भीगी होने से सात से उसकी माँ की मोती गांड के छेड़ मई घुसने लगती है, अब असलम अपने लुंड पर ढेर सारा तेल लगा कर अपने लुंड को धीरे से मेरी गुदा से लगा का dhire-dhire मेरी गांड मई पेलने लगता है,

में बस आह आह करती हुई रहती हिम और मेरी गांड नाचने लगती है जिससे असलम dhire-dhire

अपना आधा लुंड मेरी मोती गांड मई और फंसा देता है

अह्ह्ह उफ्फ्फ बहुत खुजला रही थी न तेरी ये गोल मटोल गांड …”

में बस आह आह की सिसकियाँ hi मारती रही..

असलम थोड़ा लुंड बहार खींच कर उस पर और तेल लगा

कर एक जोर दर धक्का जब मेरी मोती गांड मई मरता है तो उसका पूरा लुंड मेरी गदराई गांड मई पूरा का पूरा घुस जाता है और में बस आह मर गई रे आह करते हुए सीसीएनए लगती हूँ.

उफ्फ्फ्फ़ असलम का लुंड मेरी गांड मई फसा हुआ

और भी सख्त होकर फूलने लगता है और असलम मेरी गांड को cheer-cheer कर अपने मोठे लुंड को सटासट अंदर पेलने लगता है

में तोह बस अह्ह्ह ममम उफ्फ्फ अह्ह्ह्ह करते हुए सीसियति रहती हूँ और असलम dhire-dhire मेरी गांड जितना हो सकता था अपने हाथो से phaila-phaila कर छोड़ रहा था,

उसे तोह बहुत मज़ा आ रहा था और में भी मस्ती मई इस बुड्ढे असलम के मोठे लुंड को अपनी मस्तानी गांड मई भरे हुए खूब kas-kas कर मरवा रही थी.

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असलम के तोह और ताबड़ तोड़ विचार थे .. उसने कुछ देर बाद मेरी गांड पर chadh-chadh कर उसे छोड़ना शुरू कर दिया और इतना jor-jor से मेरी गांड की ठुकाई करने लगा की पुरे कमरे मई उनके

द्वारा की गई मेरी गांड की ठुकाई की आवाज गूंजने लगी,

असलम इतनी तगड़े स्ट्रोक्स मेरी गांड और छूट

पर कभी नहीं दी थी जितना तबियत से आज असलम मेरी गांड को छोड़ रहा था.

असलम तोह अब झरने की कगार पर थे .. में तोह पहले से hi 3 बार जहर चुकी थी .. लेकिन असलम पहली बहार झरने वाले थे .. एक बड़ी सी अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ ममम मेरे मोठे लोडे का तभी असलम के लुंड का पानी रुक्मणि की

गांड मई गहराई तक भर गया और रुक्मणि निढाल होकर पेट के बल लेट गई और असलम भी मेरी गांड मई अपना लुंड

phasaye-phasaye hi उसकी गांड पर लेट गया, करीब 5 मिनट तक असलम वैसे hi पड़ा रहा फिर असलम उठ कर एक तरफ लेट गया

और में चुदाई के नशे और मस्ती मई , हाफति हुई लेती रही.

हम दोनों फिर एक दूसरे के बाँहों में बाहें दाल गहरी नींद में सो गए .
 
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