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रमेश ने अब उसकी जांघों को चौड़ा किया और अपना मुँह नीचे ले जाकर उसकी गीली बुर को चाटने लगा. उसकी जीभ उसकी क्लीट पर घूम रही थी. रौशनी का शरीर एक झटके से उठ गया.
हलके से वह मोअन करि ..आआह्ह्ह… मां… जी… उम्म्म…
वह झट से रुक गयी. उसका दिल ज़ोर से धड़क रहा था. रमेश ने कुछ नहीं सुना. वह अब भी उसकी बुर को zor-zor से चूस रहा था.
रौशनी अब और नहीं सेह पायी. उसने रमेश को धीरे से ऊपर की तरफ धकेला और खुद नीचे की तरफ सरक गयी. अब वह उसके लुंड के बिलकुल सामने थी.
उसने रमेश के मोटा, काला और गीला लुंड दोनों हाथों में पकड़ लिया. उसका सुपाड़ा अब भी चमक रहा था. रौशनी ने धीरे से उसके बड़े मशरुम हेड को अपने होठों से छुआ और एक गहरा चुम्मा दिया.
फिर उसने अपनी जीभ निकाल कर उसके लुंड को ऊपर से नीचे तक एक लम्बी लीक दी. उसका सारा लुंड उसके थूक से गीला हो गया. रौशनी ने अब उसके सुपाड़ी को अपने मुँह में ले लिया और dheere-dheere चूसने लगी — गहराई से, प्यार से, लेकिन ज़ोर से.
“उम्म्म्म… मममहह…” उसके मुँह से मदहोश सी आवाज़ें निकल रही थी.
वह अब लुंड को पूरा मुँह में ले रही थी — upar-neeche करती हुई, जीभ से सुपाड़ी को chat-ti हुई, कभी हलके दांतों से ragad-ti हुई. Beech-beech में वह मोअन करती रही.
रमेश का शरीर काँप रहा था. उसने रौशनी के बाल पकड़ लिए और धीरे से सिसकारियां भर रहा था, “उफ्फ्फ्फ़ मेरी जान… कितने अच्छे से चूस रही हो… आज तू बहुत गरम है…”
लेकिन रौशनी के दिमाग में अब भी मां जी का लुंड था. वह सोच रही थी की अगर मां जी का लुंड उसके मुँह में होता… तोह वह कितना मज़ा लेती.
वह और तेज़ हो गयी. उसका मुँह अब रमेश के लुंड पर upar-neeche हो रहा था. थूक की धार उसके लुंड से नीचे की तरफ बह रही थी. वह लुंड को चूसती हुई धीरे से फुस्कुरा रही थी, “मममहह… आपका लुंड बहुत प्यारा है पति जी… उम्म्म…”
रमेश अब बिलकुल पागल हो रहा था. उसका लुंड उसके मुँह में फड़क रहा था और रौशनी zor-zor से सिसकारियां भर रही थी.
रौशनी अब रमेश के लुंड को और गहराई से मुँह में ले रही थी. उसका मुँह upar-neeche हो रहा था, जीभ उसके सुपाड़ी को zor-zor से चाट रही थी. थूक की धार उसके लुंड से नीचे की तरफ बह रही थी और उसके हाथों में भी गीली हो रही थी.
लेकिन उसके दिमाग में अब सिर्फ मां जी का लुंड था.
उफ्फ्फ्फ़… मां जी का लुंड कितना बड़ा और मोटा होगा… जब मैंने उनके बॉल्स चूसे थे तब भी वह इतना बड़ा था… उनका सुपाड़ा भी शायद इतना hi बड़ा और लाल होगा… उनका लुंड का स्वाद कैसा होगा? शायद थोड़ा कड़वा, थोड़ा नमकीन… लेकिन बहुत गरम और मरदाना…
इस गंदे ख्याल से रौशनी और वाइल्ड हो गयी. उसने रमेश के लुंड को और गहराई से मुँह में ले लिया. उसका लुंड अब उसके गले तक जा रहा था. वह zor-zor से चूस रही थी — upar-neeche, जीभ से लोल्लिपोप की तरह chat-ti हुई, कभी हलके दांतों से ragad-ti हुई.
“उम्म्म्म… मममहह… आअह्ह्ह…” उसके मुँह से मदहोश आवाज़ें निकल रही थी.
वह सोच रही थी — अगर मां जी का लुंड मेरे मुँह में होता… तोह मैं कितना गहरा चूसती… उनका मोटा सुपाड़ा मेरे गले तक जाता… उनका प्रेकम का स्वाद कैसा होता… शायद थोड़ा कड़वा और गरम… लेकिन मैं पूरा पि लेती…
इस इमेजिनेशन ने उसको और भूखा बना दिया. रौशनी ने अब रमेश के लुंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया और और तेज़ और गहराई से चूसने लगी. उसका मुँह बिलकुल गीला हो गया था. वह लुंड को चूसती हुई धीरे से मोअन कर रही थी.
रमेश का शरीर काँप रहा था. उसने रौशनी के बाल पकड़ लिए और सिसकारियां भर रहा था, “उफ्फ्फ्फ़ मेरी जान… आज तू बहुत hi अच्छे से चूस रही हो… कितना मज़ा आ रहा है… उफ्फ्फ्फ़…”
लेकिन रौशनी के दिमाग में अब भी मां जी का बड़ा, मोटा लुंड था. वह सोच रही थी की उनका लुंड शायद रमेश से भी मोटा होगा… और उनका स्वाद अलग होगा… शायद ज़्यादा मरदाना और गरम.
वह और सेंसुअल हो गयी. उसने लुंड को मुँह से निकाल कर उसके सुपाड़ी को जीभ से chat-a और फिर पूरा लुंड मुँह में ले लिया — गहरा, गीला और बहुत hi प्यार से. Beech-beech में वह धीरे से फुस्कुरा रही थी, “मममहह… आपका लुंड बहुत गरम है पति जी… उम्म्म…”
रमेश अब कण्ट्रोल में नहीं था. उसका लुंड उसके मुँह में फड़क रहा था और वह zor-zor से सिसकारियां भर रहा था.
रौशनी आँखें बंद किये हुए, मां जी के लुंड की कल्पना में खोई हुई, रमेश के लुंड को और गहराई और सेन्सुअली चूस रही थी — जैसे वह असल में मां जी के मोठे लुंड चूस रही हो.
रौशनी आँखें बंद किये हुए रमेश के लुंड को गहराई से चूस रही थी, लेकिन उसके दिमाग में अब सिर्फ मां जी का लुंड घूम रहा था.
अब बस मां जी की थॉट्स hi रौशनी के मन में डोमिनाते होने लगी.
उफ्फ्फ्फ़… मां जी का लुंड कितना बड़ा और मोटा होगा… जब मैंने उनके बॉल्स चूसे थे तब भी वह इतना भारी था… उनका सुपाड़ा शायद इतना hi बड़ा, लाल और चमक्दा होगा… अगर वह अभी यहाँ होते और अपना मोटा लुंड मेरे मुँह के पास ले आते तोह मैं क्या करती?
वह सोच रही थी की मां जी का लुंड शायद रमेश से भी ज़्यादा मोटा होगा. उनका सुपाड़ा इतना बड़ा होगा की उसके मुँह में पूरा नहीं आ पायेगा. उनका लुंड का रंग शायद गहरा काला होगा और ऊपर से एक मोटा सा सुपाड़ा होगा जो उसके होठों को पूरा फैला देगा.
उनका लुंड का स्वाद कैसा होगा?वह सोचने लगी — शायद थोड़ा कड़वा, थोड़ा नमकीन… लेकिन बहुत गरम और मरदाना. उनका प्रेकम शायद रमेश से ज़्यादा गीला और चमक्दा होगा… और उसका स्वाद भी अलग होगा… थोड़ा कड़वा लेकिन इतना मज़ा आएगा की मैं पूरा पि लुंगी…
रौशनी के मुँह से लुंड निकल कर वह धीरे से सोचने लगी, अगर मां जी का लुंड मेरे गले तक जाता… तोह मैं कैसी आवाज़ निकलती? शायद मैं घूँट भर के सिसकारियां भर्ती… उनका मोटा लुंड मेरे गले को फैला देता… और मैं फिर भी और गहरा चूसती…
इस गंदे और फोर्बिडन ख्याल ने उसको और भूखा बना दिया. वह रमेश के लुंड को और ज़ोर से और गहराई से चूसने लगी. उसका मुँह अब बिलकुल गीला हो चूका था. थूक की धार उसके लुंड से नीचे की तरफ बह रही थी और उसके हाथों पर भी लग रही थी.
उफ्फ्फ्फ़… अगर मां जी अभी यहाँ होते और अपना बड़ा लुंड मेरे मुँह में दाल देते… तोह मैं क्या करती? क्या मैं उनके लुंड को इतना प्यार से चूसती जितना अब रमेश जी का चूस रही हूँ? या फिर और भी ज़्यादा वाइल्ड हो जाती?
वह सोच रही थी की मां जी शायद उसके बाल पकड़ कर उसका मुँह अपने लुंड पर ज़ोर से दबाते… और वह उनके लुंड को चूसती हुई उनकी मोती जांघों को हाथों से पकड़ लेती. उनकी हेयरी मोती जांघें उसके गालों पर रगड़ती… और उनका लुंड उसके गले तक जाता.
रौशनी के शरीर में एक अलग hi करंट दौड़ रहा था. उसका मुँह और तेज़ हो गया. वह लुंड को चूसती हुई धीरे से मोअन कर रही थी, लेकिन उसके दिमाग में अब भी सिर्फ एक hi थॉट था —
मैं चाहती हूँ… मां जी का लुंड… उनका बड़ा, मोटा, गरम लुंड… मेरे मुँह में… अभी…
वह और वाइल्ड हो गयी और रमेश के लुंड को इतनी गहराई और सेन्सुअली चूसने लगी की रमेश का शरीर काँप उठा.
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वहां दूसरी और रमेश को रौशनी के इन भावनाओं का वह भी उसके मां जी के प्रति .. उसका आईडिया भी नहीं था , वह बस अपने hi लस्ट में डूबा हुआ था
रमेश चारपाई पर बैठा था और रौशनी उसके लुंड को गहराई से चूस रही थी. उसका मुँह upar-neeche हो रहा था, जीभ उसके सुपाड़ी पर zor-zor से चल रही थी. थूक की धार उसके लुंड से नीचे की तरफ बह रही थी.
रमेश ने आँखें बंद कर ली थी. उसका शरीर काँप रहा था.
उफ्फ्फ्फ़… आज मेरी बीवी कितनी वाइल्ड हो गयी है… पहले कभी ऐसे नहीं चूसा था उसने… आज तोह जैसे भूखी हो… कितने प्यार से, कितने गहरे से चूस रही है…
वह सोच रहा था की आज रौशनी में कुछ अलग hi बात है. उसकी आँखें बंद थी, लेकिन उसके मुँह से निकलने वाली आवाज़ें और उसका जोश पहले से काफी ज़्यादा था. रमेश को लगा की शायद आज उसकी बीवी बहुत ज़्यादा गरम है.
शायद उसको आज मेरा लुंड बहुत पसंद आ रहा है… या फिर वह मुझसे बहुत प्यार कर रही है… कितने अच्छे से चूस रही है… जैसे पूरा पि लेना चाहती हो…
रमेश ने रौशनी के बाल पकड़ लिए और धीरे से उसके सर को upar-neeche करने लगा. उसका लुंड उसके मुँह में फड़क रहा था. वह धीरे से सिसकारियां भर रहा था.
उफ्फ्फ्फ़ मेरी जान… आज तू मुझे पागल कर देगी… इतना मज़ा आ रहा है… तेरी जीभ… तेरे होठ… सब कुछ इतना गरम और गीला है…
लेकिन रमेश को यह नहीं पता था की उसकी बीवी के दिमाग में अब सिर्फ उसका मां जी है. वह नहीं जानता था की रौशनी उसके लुंड को चूसती हुई मां जी के बड़े, मोठे लुंड की कल्पना में खोई हुई है.
रमेश ने आँखें खोल कर नीचे देखा. रौशनी की आँखें बंद थी, उसके गाल लाल हो रहे थे, और वह उसके लुंड को इतनी प्यार और जोश से चूस रही थी की रमेश का दिल खुश हो गया.
कितनी प्यारी लग रही है मेरी बीवी… आज उसमें कुछ और hi बात है… शायद वह मुझसे इतना प्यार करती है की आज इतनी वाइल्ड हो गयी…
रमेश ने धीरे से उसके बाल में हाथ घुमाया और प्यार से बोलै, “मेरी जान… तू आज बहुत अच्छे से चूस रही है… बहुत मज़ा आ रहा है…”
लेकिन रौशनी ने सिर्फ एक धीमी सी सिसकारी भरी और और गहराई से उसके लुंड को मुँह में ले लिया. उसका दिमाग अब भी मां जी के लुंड में खोया हुआ था.
रमेश को लगा की आज उसकी बीवी उससे बहुत ज़्यादा प्यार कर रही है… लेकिन असल में रौशनी का दिमाग किसी और के लुंड के ख्यालों में था.
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रमेश अब पूरी तरह से लुस्टि हो चूका था. उसका लुंड अब भी गीला और सख्त खड़ा था. उसने रौशनी को धीरे से पलट दिया. अब वह पेट के बल लेती हुई थी. रमेश ने उसकी टाइट ट्रांसपेरेंट पंतय को दोनों तरफ से पकड़ कर एक झटके में नीचे खिंच दिया. पंत य उसकी मोती झंघों से सरकती हुई बहार आ गयी.
रौशनी अब बिलकुल नंगी लेती हुई थी. उसकी भारी, गोरी और मुलायम गांड सामने थी. रमेश ने उसके दोनों अस्स चीक्स पर अपने हाथ रख कर उन्हें ज़ोर से दबाया. फिर उसने अपना मुँह नीचे किया और उसकी एक गांड के चेहरे पर गहरा चुम्मा दिया.
रौशनी के मुँह से एक लम्बी सिसकारी निकली, “आआह्ह्ह…”
रमेश ने उसकी दोनों गांड के चीक्स को चौड़ा किया और अपनी जीभ निकाल कर उसके गांड के छेद पर रख दिया. पहले तोह उसने halke-halke से लीक किया, फिर जीभ को ज़ोर से रगड़ते हुए उसके गांड के छेद को चाटने लगा. उसकी जीभ उसके टाइट छेद पर घूम रही थी — कभी अंदर की तरफ धकेलती, कभी बहार से लम्बा लीक करती.
रौशनी का शरीर एक झटके से काँप उठा. उसकी टांगें अपने आप कर्ल हो गयी. उसने चारपाई की चादर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसमें मुँह दबा दिया.
“आआह्ह्ह… पति जी… यह… उम्म्म… आह्हः…”
रमेश ने उसके सर को हलके से नीचे दबा दिया और अपनी जीभ और ज़ोर से उसके गांड के छेद पर रगड़ने लगा. वह उसके गांड के चीक्स को हाथों से मसलता हुआ जीभ से उसके गांड के छेद को चाट रहा था.
रौशनी के मुँह से लगातार सिसकारियां निकल रही थी. उसकी टांगें चौकोर हो रही थी और वह चारपाई की चादर को और टाइट से पकड़ रही थी.
इस पल के लिए रौशनी के दिमाग से मां जी का चेहरा गायब हो गया. अब सिर्फ रमेश की जीभ उसके गांड की छेद पर थी और वह उसमें खो गयी थी.
उफ्फ्फ्फ़… यह कैसा मज़ा है… पति जी मेरी गांड को ऐसे चाट रहे हैं… उनकी जीभ मेरी गांड की छेद पर… बहुत अच्छा लग रहा है…
रौशनी के मुँह से धीमी और मदहोश आवाज़ें निकल रही थी. उसका सर चारपाई में दबा हुआ था, हाथ चादर को जकड रखे थे, टांगें कर्ल हो रही थी और वह पूरी तरह से रमेश के मुँह के हवाले हो चुकी थी.
रमेश अब भी उसके गांड के छेद को जीभ से रगड़ रहा था — कभी हलके से, कभी ज़ोर से — और रौशनी के मुँह से लगातार सिसकारियां निकल रही थी.
माहौल नहुत hi गरम हो चूका था ...
रमेश अब पूरी तरह से रौशनी के ऊपर चढ़ चूका था. उसने उसकी दोनों बड़ी चूचियों को baari-baari से मुँह में ले लिया था और zor-zor से चूस रहा था. कभी वह उनके निप्पल्स को जीभ से छत्ता, कभी हलके दांतों से kaat-ta. उसका एक हाथ नीचे उसकी गीली बुर में दो उँगलियाँ घुसा कर andar-bahar कर रहा था.
रौशनी की आँखें बंद थी. उसका शरीर तड़प रहा था, लेकिन उसके दिमाग में अब सिर्फ मां जी का चेहरा घूम रहा था.
उफ्फ्फ्फ़… मां जी… आप भी ऐसे hi मेरी चूचियों को चूसते… आपकी दादी मेरी स्किन पर रगड़ती… आपके हाथ मेरी बुर में उँगलियाँ घुसा कर मुझे तड़पाते… आप मुझे चारपाई पर लेटकर ऐसे hi चूसते…
इस इमेजिनेशन के असर से उसकी बुर और भी ज़्यादा गीली हो गयी. रमेश की उँगलियाँ अंदर जाते hi “chhap-chhap” की आवाज़ आ रही थी. रौशनी के मुँह से लगातार zor-zor से सिसकारियां निकल रही थी.
“आआह्ह्ह… उम्म्म… पति जी… बहुत मज़ा आ रहा है… आह्हः…”
लेकिन उसके दिमाग में अब भी मां जी उसकी बुर को ऊँगली से छोड़ रहे थे. वह सोच रही थी की अगर मां जी अभी यहाँ होते और उनका मोटा लुंड उसके मुँह के पास होता… तोह वह क्या करती.
रमेश ने रौशनी को फिर से सीधा लेटाया. अब वह उसके सामने घुटनो के बल बैठा था. उसका मोटा, लम्बा और सख्त लुंड उसके हाथ में था. वह उसको अपनी बीवी की गीली बुर के बिलकुल सामने ले आया था. उसका सुपाड़ा चमक रहा था और थोड़ा सा प्रेकम अब भी से निकल रहा था.
रौशनी लेती हुई थी. उसकी टांगें थोड़ी सी खुली हुई थी. उसकी आँखें रमेश के लुंड पर टिक्की हुई थी. उसका दिल ज़ोर से धड़क रहा था.
रमेश ने अपना लुंड उसकी बुर के ऊपर रगड़ते हुए धीरे से कहा, “मेरी जान… अब मैं अंदर जाने वाला हूँ…”
जैसे hi रौशनी ने ऊपर देखा, उसके सामने रमेश नहीं… मां जी खड़े थे.
उसका गहरा, घाना और बालों वाला सीना सामने था. उसकी मोती छाती के बाल चमक रहे थे. उसका बड़ा, मोटा लुंड उसके हाथ में था और वह उसको रौशनी की बुर के बिलकुल पास ले आया था. उसकी दादी, उसकी ृस्टिक हरयाणवी आवाज़… सब कुछ एक पल के लिए बिलकुल असली लगा.
रौशनी की सांस रुक सी गयी. उसकी आँखें पल भर के लिए खुली रह गयी.
उफ्फ्फ्फ़… मां जी… आप… यहाँ… आपका लुंड… मेरी बुर के सामने… आप मुझे छोड़ने वाले हैं…
उसके दिमाग में एक hi थॉट घूम रहा था — अगर मां जी अभी मुझे छोड़ेंगे… तोह कैसा लगेगा? उनका मोटा लुंड मेरी टाइट बुर को कैसे फैलाएगा…
लेकिन यह पल सिर्फ कुछ सेकण्ड्स का था. जैसे hi रमेश ने अपना लुंड उसकी बुर पर रगड़ना शुरू किया, वह वापस हकीकत में आ गयी. रमेश उसके सामने था, लेकिन उसके दिमाग में अब भी मां जी का गहरा, बालों वाला सीना और उनका बड़ा लुंड चमक रहा था.
रौशनी ने आँखें बंद कर ली. उसका शरीर काँप रहा था. उसका मुँह खुला था लेकिन कोई आवाज़ नहीं निकल रही थी.
रमेश ने अपना लुंड उसकी गीली बुर के मुँह पर रख दिया और धीरे से अंदर धकेलने की तयारी करने लगा.
रौशनी के दिमाग में अब भी एक hi चेहरा था — मां जी.
हलके से वह मोअन करि ..आआह्ह्ह… मां… जी… उम्म्म…
वह झट से रुक गयी. उसका दिल ज़ोर से धड़क रहा था. रमेश ने कुछ नहीं सुना. वह अब भी उसकी बुर को zor-zor से चूस रहा था.
रौशनी अब और नहीं सेह पायी. उसने रमेश को धीरे से ऊपर की तरफ धकेला और खुद नीचे की तरफ सरक गयी. अब वह उसके लुंड के बिलकुल सामने थी.
उसने रमेश के मोटा, काला और गीला लुंड दोनों हाथों में पकड़ लिया. उसका सुपाड़ा अब भी चमक रहा था. रौशनी ने धीरे से उसके बड़े मशरुम हेड को अपने होठों से छुआ और एक गहरा चुम्मा दिया.
फिर उसने अपनी जीभ निकाल कर उसके लुंड को ऊपर से नीचे तक एक लम्बी लीक दी. उसका सारा लुंड उसके थूक से गीला हो गया. रौशनी ने अब उसके सुपाड़ी को अपने मुँह में ले लिया और dheere-dheere चूसने लगी — गहराई से, प्यार से, लेकिन ज़ोर से.
“उम्म्म्म… मममहह…” उसके मुँह से मदहोश सी आवाज़ें निकल रही थी.
वह अब लुंड को पूरा मुँह में ले रही थी — upar-neeche करती हुई, जीभ से सुपाड़ी को chat-ti हुई, कभी हलके दांतों से ragad-ti हुई. Beech-beech में वह मोअन करती रही.
रमेश का शरीर काँप रहा था. उसने रौशनी के बाल पकड़ लिए और धीरे से सिसकारियां भर रहा था, “उफ्फ्फ्फ़ मेरी जान… कितने अच्छे से चूस रही हो… आज तू बहुत गरम है…”
लेकिन रौशनी के दिमाग में अब भी मां जी का लुंड था. वह सोच रही थी की अगर मां जी का लुंड उसके मुँह में होता… तोह वह कितना मज़ा लेती.
वह और तेज़ हो गयी. उसका मुँह अब रमेश के लुंड पर upar-neeche हो रहा था. थूक की धार उसके लुंड से नीचे की तरफ बह रही थी. वह लुंड को चूसती हुई धीरे से फुस्कुरा रही थी, “मममहह… आपका लुंड बहुत प्यारा है पति जी… उम्म्म…”
रमेश अब बिलकुल पागल हो रहा था. उसका लुंड उसके मुँह में फड़क रहा था और रौशनी zor-zor से सिसकारियां भर रही थी.
रौशनी अब रमेश के लुंड को और गहराई से मुँह में ले रही थी. उसका मुँह upar-neeche हो रहा था, जीभ उसके सुपाड़ी को zor-zor से चाट रही थी. थूक की धार उसके लुंड से नीचे की तरफ बह रही थी और उसके हाथों में भी गीली हो रही थी.
लेकिन उसके दिमाग में अब सिर्फ मां जी का लुंड था.
उफ्फ्फ्फ़… मां जी का लुंड कितना बड़ा और मोटा होगा… जब मैंने उनके बॉल्स चूसे थे तब भी वह इतना बड़ा था… उनका सुपाड़ा भी शायद इतना hi बड़ा और लाल होगा… उनका लुंड का स्वाद कैसा होगा? शायद थोड़ा कड़वा, थोड़ा नमकीन… लेकिन बहुत गरम और मरदाना…
इस गंदे ख्याल से रौशनी और वाइल्ड हो गयी. उसने रमेश के लुंड को और गहराई से मुँह में ले लिया. उसका लुंड अब उसके गले तक जा रहा था. वह zor-zor से चूस रही थी — upar-neeche, जीभ से लोल्लिपोप की तरह chat-ti हुई, कभी हलके दांतों से ragad-ti हुई.
“उम्म्म्म… मममहह… आअह्ह्ह…” उसके मुँह से मदहोश आवाज़ें निकल रही थी.
वह सोच रही थी — अगर मां जी का लुंड मेरे मुँह में होता… तोह मैं कितना गहरा चूसती… उनका मोटा सुपाड़ा मेरे गले तक जाता… उनका प्रेकम का स्वाद कैसा होता… शायद थोड़ा कड़वा और गरम… लेकिन मैं पूरा पि लेती…
इस इमेजिनेशन ने उसको और भूखा बना दिया. रौशनी ने अब रमेश के लुंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया और और तेज़ और गहराई से चूसने लगी. उसका मुँह बिलकुल गीला हो गया था. वह लुंड को चूसती हुई धीरे से मोअन कर रही थी.
रमेश का शरीर काँप रहा था. उसने रौशनी के बाल पकड़ लिए और सिसकारियां भर रहा था, “उफ्फ्फ्फ़ मेरी जान… आज तू बहुत hi अच्छे से चूस रही हो… कितना मज़ा आ रहा है… उफ्फ्फ्फ़…”
लेकिन रौशनी के दिमाग में अब भी मां जी का बड़ा, मोटा लुंड था. वह सोच रही थी की उनका लुंड शायद रमेश से भी मोटा होगा… और उनका स्वाद अलग होगा… शायद ज़्यादा मरदाना और गरम.
वह और सेंसुअल हो गयी. उसने लुंड को मुँह से निकाल कर उसके सुपाड़ी को जीभ से chat-a और फिर पूरा लुंड मुँह में ले लिया — गहरा, गीला और बहुत hi प्यार से. Beech-beech में वह धीरे से फुस्कुरा रही थी, “मममहह… आपका लुंड बहुत गरम है पति जी… उम्म्म…”
रमेश अब कण्ट्रोल में नहीं था. उसका लुंड उसके मुँह में फड़क रहा था और वह zor-zor से सिसकारियां भर रहा था.
रौशनी आँखें बंद किये हुए, मां जी के लुंड की कल्पना में खोई हुई, रमेश के लुंड को और गहराई और सेन्सुअली चूस रही थी — जैसे वह असल में मां जी के मोठे लुंड चूस रही हो.
रौशनी आँखें बंद किये हुए रमेश के लुंड को गहराई से चूस रही थी, लेकिन उसके दिमाग में अब सिर्फ मां जी का लुंड घूम रहा था.
अब बस मां जी की थॉट्स hi रौशनी के मन में डोमिनाते होने लगी.
उफ्फ्फ्फ़… मां जी का लुंड कितना बड़ा और मोटा होगा… जब मैंने उनके बॉल्स चूसे थे तब भी वह इतना भारी था… उनका सुपाड़ा शायद इतना hi बड़ा, लाल और चमक्दा होगा… अगर वह अभी यहाँ होते और अपना मोटा लुंड मेरे मुँह के पास ले आते तोह मैं क्या करती?
वह सोच रही थी की मां जी का लुंड शायद रमेश से भी ज़्यादा मोटा होगा. उनका सुपाड़ा इतना बड़ा होगा की उसके मुँह में पूरा नहीं आ पायेगा. उनका लुंड का रंग शायद गहरा काला होगा और ऊपर से एक मोटा सा सुपाड़ा होगा जो उसके होठों को पूरा फैला देगा.
उनका लुंड का स्वाद कैसा होगा?वह सोचने लगी — शायद थोड़ा कड़वा, थोड़ा नमकीन… लेकिन बहुत गरम और मरदाना. उनका प्रेकम शायद रमेश से ज़्यादा गीला और चमक्दा होगा… और उसका स्वाद भी अलग होगा… थोड़ा कड़वा लेकिन इतना मज़ा आएगा की मैं पूरा पि लुंगी…
रौशनी के मुँह से लुंड निकल कर वह धीरे से सोचने लगी, अगर मां जी का लुंड मेरे गले तक जाता… तोह मैं कैसी आवाज़ निकलती? शायद मैं घूँट भर के सिसकारियां भर्ती… उनका मोटा लुंड मेरे गले को फैला देता… और मैं फिर भी और गहरा चूसती…
इस गंदे और फोर्बिडन ख्याल ने उसको और भूखा बना दिया. वह रमेश के लुंड को और ज़ोर से और गहराई से चूसने लगी. उसका मुँह अब बिलकुल गीला हो चूका था. थूक की धार उसके लुंड से नीचे की तरफ बह रही थी और उसके हाथों पर भी लग रही थी.
उफ्फ्फ्फ़… अगर मां जी अभी यहाँ होते और अपना बड़ा लुंड मेरे मुँह में दाल देते… तोह मैं क्या करती? क्या मैं उनके लुंड को इतना प्यार से चूसती जितना अब रमेश जी का चूस रही हूँ? या फिर और भी ज़्यादा वाइल्ड हो जाती?
वह सोच रही थी की मां जी शायद उसके बाल पकड़ कर उसका मुँह अपने लुंड पर ज़ोर से दबाते… और वह उनके लुंड को चूसती हुई उनकी मोती जांघों को हाथों से पकड़ लेती. उनकी हेयरी मोती जांघें उसके गालों पर रगड़ती… और उनका लुंड उसके गले तक जाता.
रौशनी के शरीर में एक अलग hi करंट दौड़ रहा था. उसका मुँह और तेज़ हो गया. वह लुंड को चूसती हुई धीरे से मोअन कर रही थी, लेकिन उसके दिमाग में अब भी सिर्फ एक hi थॉट था —
मैं चाहती हूँ… मां जी का लुंड… उनका बड़ा, मोटा, गरम लुंड… मेरे मुँह में… अभी…
वह और वाइल्ड हो गयी और रमेश के लुंड को इतनी गहराई और सेन्सुअली चूसने लगी की रमेश का शरीर काँप उठा.
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वहां दूसरी और रमेश को रौशनी के इन भावनाओं का वह भी उसके मां जी के प्रति .. उसका आईडिया भी नहीं था , वह बस अपने hi लस्ट में डूबा हुआ था
रमेश चारपाई पर बैठा था और रौशनी उसके लुंड को गहराई से चूस रही थी. उसका मुँह upar-neeche हो रहा था, जीभ उसके सुपाड़ी पर zor-zor से चल रही थी. थूक की धार उसके लुंड से नीचे की तरफ बह रही थी.
रमेश ने आँखें बंद कर ली थी. उसका शरीर काँप रहा था.
उफ्फ्फ्फ़… आज मेरी बीवी कितनी वाइल्ड हो गयी है… पहले कभी ऐसे नहीं चूसा था उसने… आज तोह जैसे भूखी हो… कितने प्यार से, कितने गहरे से चूस रही है…
वह सोच रहा था की आज रौशनी में कुछ अलग hi बात है. उसकी आँखें बंद थी, लेकिन उसके मुँह से निकलने वाली आवाज़ें और उसका जोश पहले से काफी ज़्यादा था. रमेश को लगा की शायद आज उसकी बीवी बहुत ज़्यादा गरम है.
शायद उसको आज मेरा लुंड बहुत पसंद आ रहा है… या फिर वह मुझसे बहुत प्यार कर रही है… कितने अच्छे से चूस रही है… जैसे पूरा पि लेना चाहती हो…
रमेश ने रौशनी के बाल पकड़ लिए और धीरे से उसके सर को upar-neeche करने लगा. उसका लुंड उसके मुँह में फड़क रहा था. वह धीरे से सिसकारियां भर रहा था.
उफ्फ्फ्फ़ मेरी जान… आज तू मुझे पागल कर देगी… इतना मज़ा आ रहा है… तेरी जीभ… तेरे होठ… सब कुछ इतना गरम और गीला है…
लेकिन रमेश को यह नहीं पता था की उसकी बीवी के दिमाग में अब सिर्फ उसका मां जी है. वह नहीं जानता था की रौशनी उसके लुंड को चूसती हुई मां जी के बड़े, मोठे लुंड की कल्पना में खोई हुई है.
रमेश ने आँखें खोल कर नीचे देखा. रौशनी की आँखें बंद थी, उसके गाल लाल हो रहे थे, और वह उसके लुंड को इतनी प्यार और जोश से चूस रही थी की रमेश का दिल खुश हो गया.
कितनी प्यारी लग रही है मेरी बीवी… आज उसमें कुछ और hi बात है… शायद वह मुझसे इतना प्यार करती है की आज इतनी वाइल्ड हो गयी…
रमेश ने धीरे से उसके बाल में हाथ घुमाया और प्यार से बोलै, “मेरी जान… तू आज बहुत अच्छे से चूस रही है… बहुत मज़ा आ रहा है…”
लेकिन रौशनी ने सिर्फ एक धीमी सी सिसकारी भरी और और गहराई से उसके लुंड को मुँह में ले लिया. उसका दिमाग अब भी मां जी के लुंड में खोया हुआ था.
रमेश को लगा की आज उसकी बीवी उससे बहुत ज़्यादा प्यार कर रही है… लेकिन असल में रौशनी का दिमाग किसी और के लुंड के ख्यालों में था.
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रमेश अब पूरी तरह से लुस्टि हो चूका था. उसका लुंड अब भी गीला और सख्त खड़ा था. उसने रौशनी को धीरे से पलट दिया. अब वह पेट के बल लेती हुई थी. रमेश ने उसकी टाइट ट्रांसपेरेंट पंतय को दोनों तरफ से पकड़ कर एक झटके में नीचे खिंच दिया. पंत य उसकी मोती झंघों से सरकती हुई बहार आ गयी.
रौशनी अब बिलकुल नंगी लेती हुई थी. उसकी भारी, गोरी और मुलायम गांड सामने थी. रमेश ने उसके दोनों अस्स चीक्स पर अपने हाथ रख कर उन्हें ज़ोर से दबाया. फिर उसने अपना मुँह नीचे किया और उसकी एक गांड के चेहरे पर गहरा चुम्मा दिया.
रौशनी के मुँह से एक लम्बी सिसकारी निकली, “आआह्ह्ह…”
रमेश ने उसकी दोनों गांड के चीक्स को चौड़ा किया और अपनी जीभ निकाल कर उसके गांड के छेद पर रख दिया. पहले तोह उसने halke-halke से लीक किया, फिर जीभ को ज़ोर से रगड़ते हुए उसके गांड के छेद को चाटने लगा. उसकी जीभ उसके टाइट छेद पर घूम रही थी — कभी अंदर की तरफ धकेलती, कभी बहार से लम्बा लीक करती.
रौशनी का शरीर एक झटके से काँप उठा. उसकी टांगें अपने आप कर्ल हो गयी. उसने चारपाई की चादर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसमें मुँह दबा दिया.
“आआह्ह्ह… पति जी… यह… उम्म्म… आह्हः…”
रमेश ने उसके सर को हलके से नीचे दबा दिया और अपनी जीभ और ज़ोर से उसके गांड के छेद पर रगड़ने लगा. वह उसके गांड के चीक्स को हाथों से मसलता हुआ जीभ से उसके गांड के छेद को चाट रहा था.
रौशनी के मुँह से लगातार सिसकारियां निकल रही थी. उसकी टांगें चौकोर हो रही थी और वह चारपाई की चादर को और टाइट से पकड़ रही थी.
इस पल के लिए रौशनी के दिमाग से मां जी का चेहरा गायब हो गया. अब सिर्फ रमेश की जीभ उसके गांड की छेद पर थी और वह उसमें खो गयी थी.
उफ्फ्फ्फ़… यह कैसा मज़ा है… पति जी मेरी गांड को ऐसे चाट रहे हैं… उनकी जीभ मेरी गांड की छेद पर… बहुत अच्छा लग रहा है…
रौशनी के मुँह से धीमी और मदहोश आवाज़ें निकल रही थी. उसका सर चारपाई में दबा हुआ था, हाथ चादर को जकड रखे थे, टांगें कर्ल हो रही थी और वह पूरी तरह से रमेश के मुँह के हवाले हो चुकी थी.
रमेश अब भी उसके गांड के छेद को जीभ से रगड़ रहा था — कभी हलके से, कभी ज़ोर से — और रौशनी के मुँह से लगातार सिसकारियां निकल रही थी.
माहौल नहुत hi गरम हो चूका था ...
रमेश अब पूरी तरह से रौशनी के ऊपर चढ़ चूका था. उसने उसकी दोनों बड़ी चूचियों को baari-baari से मुँह में ले लिया था और zor-zor से चूस रहा था. कभी वह उनके निप्पल्स को जीभ से छत्ता, कभी हलके दांतों से kaat-ta. उसका एक हाथ नीचे उसकी गीली बुर में दो उँगलियाँ घुसा कर andar-bahar कर रहा था.
रौशनी की आँखें बंद थी. उसका शरीर तड़प रहा था, लेकिन उसके दिमाग में अब सिर्फ मां जी का चेहरा घूम रहा था.
उफ्फ्फ्फ़… मां जी… आप भी ऐसे hi मेरी चूचियों को चूसते… आपकी दादी मेरी स्किन पर रगड़ती… आपके हाथ मेरी बुर में उँगलियाँ घुसा कर मुझे तड़पाते… आप मुझे चारपाई पर लेटकर ऐसे hi चूसते…
इस इमेजिनेशन के असर से उसकी बुर और भी ज़्यादा गीली हो गयी. रमेश की उँगलियाँ अंदर जाते hi “chhap-chhap” की आवाज़ आ रही थी. रौशनी के मुँह से लगातार zor-zor से सिसकारियां निकल रही थी.
“आआह्ह्ह… उम्म्म… पति जी… बहुत मज़ा आ रहा है… आह्हः…”
लेकिन उसके दिमाग में अब भी मां जी उसकी बुर को ऊँगली से छोड़ रहे थे. वह सोच रही थी की अगर मां जी अभी यहाँ होते और उनका मोटा लुंड उसके मुँह के पास होता… तोह वह क्या करती.
रमेश ने रौशनी को फिर से सीधा लेटाया. अब वह उसके सामने घुटनो के बल बैठा था. उसका मोटा, लम्बा और सख्त लुंड उसके हाथ में था. वह उसको अपनी बीवी की गीली बुर के बिलकुल सामने ले आया था. उसका सुपाड़ा चमक रहा था और थोड़ा सा प्रेकम अब भी से निकल रहा था.
रौशनी लेती हुई थी. उसकी टांगें थोड़ी सी खुली हुई थी. उसकी आँखें रमेश के लुंड पर टिक्की हुई थी. उसका दिल ज़ोर से धड़क रहा था.
रमेश ने अपना लुंड उसकी बुर के ऊपर रगड़ते हुए धीरे से कहा, “मेरी जान… अब मैं अंदर जाने वाला हूँ…”
जैसे hi रौशनी ने ऊपर देखा, उसके सामने रमेश नहीं… मां जी खड़े थे.
उसका गहरा, घाना और बालों वाला सीना सामने था. उसकी मोती छाती के बाल चमक रहे थे. उसका बड़ा, मोटा लुंड उसके हाथ में था और वह उसको रौशनी की बुर के बिलकुल पास ले आया था. उसकी दादी, उसकी ृस्टिक हरयाणवी आवाज़… सब कुछ एक पल के लिए बिलकुल असली लगा.
रौशनी की सांस रुक सी गयी. उसकी आँखें पल भर के लिए खुली रह गयी.
उफ्फ्फ्फ़… मां जी… आप… यहाँ… आपका लुंड… मेरी बुर के सामने… आप मुझे छोड़ने वाले हैं…
उसके दिमाग में एक hi थॉट घूम रहा था — अगर मां जी अभी मुझे छोड़ेंगे… तोह कैसा लगेगा? उनका मोटा लुंड मेरी टाइट बुर को कैसे फैलाएगा…
लेकिन यह पल सिर्फ कुछ सेकण्ड्स का था. जैसे hi रमेश ने अपना लुंड उसकी बुर पर रगड़ना शुरू किया, वह वापस हकीकत में आ गयी. रमेश उसके सामने था, लेकिन उसके दिमाग में अब भी मां जी का गहरा, बालों वाला सीना और उनका बड़ा लुंड चमक रहा था.
रौशनी ने आँखें बंद कर ली. उसका शरीर काँप रहा था. उसका मुँह खुला था लेकिन कोई आवाज़ नहीं निकल रही थी.
रमेश ने अपना लुंड उसकी गीली बुर के मुँह पर रख दिया और धीरे से अंदर धकेलने की तयारी करने लगा.
रौशनी के दिमाग में अब भी एक hi चेहरा था — मां जी.