Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi - Page 11 - SexBaba
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Mrs.Roshni - Buddhon Ke Jaal me Phasi

रमेश ने अब उसकी जांघों को चौड़ा किया और अपना मुँह नीचे ले जाकर उसकी गीली बुर को चाटने लगा. उसकी जीभ उसकी क्लीट पर घूम रही थी. रौशनी का शरीर एक झटके से उठ गया.

हलके से वह मोअन करि ..आआह्ह्ह… मां… जी… उम्म्म…

वह झट से रुक गयी. उसका दिल ज़ोर से धड़क रहा था. रमेश ने कुछ नहीं सुना. वह अब भी उसकी बुर को zor-zor से चूस रहा था.

रौशनी अब और नहीं सेह पायी. उसने रमेश को धीरे से ऊपर की तरफ धकेला और खुद नीचे की तरफ सरक गयी. अब वह उसके लुंड के बिलकुल सामने थी.

उसने रमेश के मोटा, काला और गीला लुंड दोनों हाथों में पकड़ लिया. उसका सुपाड़ा अब भी चमक रहा था. रौशनी ने धीरे से उसके बड़े मशरुम हेड को अपने होठों से छुआ और एक गहरा चुम्मा दिया.

फिर उसने अपनी जीभ निकाल कर उसके लुंड को ऊपर से नीचे तक एक लम्बी लीक दी. उसका सारा लुंड उसके थूक से गीला हो गया. रौशनी ने अब उसके सुपाड़ी को अपने मुँह में ले लिया और dheere-dheere चूसने लगी — गहराई से, प्यार से, लेकिन ज़ोर से.

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“उम्म्म्म… मममहह…” उसके मुँह से मदहोश सी आवाज़ें निकल रही थी.

वह अब लुंड को पूरा मुँह में ले रही थी — upar-neeche करती हुई, जीभ से सुपाड़ी को chat-ti हुई, कभी हलके दांतों से ragad-ti हुई. Beech-beech में वह मोअन करती रही.

रमेश का शरीर काँप रहा था. उसने रौशनी के बाल पकड़ लिए और धीरे से सिसकारियां भर रहा था, “उफ्फ्फ्फ़ मेरी जान… कितने अच्छे से चूस रही हो… आज तू बहुत गरम है…”

लेकिन रौशनी के दिमाग में अब भी मां जी का लुंड था. वह सोच रही थी की अगर मां जी का लुंड उसके मुँह में होता… तोह वह कितना मज़ा लेती.

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वह और तेज़ हो गयी. उसका मुँह अब रमेश के लुंड पर upar-neeche हो रहा था. थूक की धार उसके लुंड से नीचे की तरफ बह रही थी. वह लुंड को चूसती हुई धीरे से फुस्कुरा रही थी, “मममहह… आपका लुंड बहुत प्यारा है पति जी… उम्म्म…”

रमेश अब बिलकुल पागल हो रहा था. उसका लुंड उसके मुँह में फड़क रहा था और रौशनी zor-zor से सिसकारियां भर रही थी.

रौशनी अब रमेश के लुंड को और गहराई से मुँह में ले रही थी. उसका मुँह upar-neeche हो रहा था, जीभ उसके सुपाड़ी को zor-zor से चाट रही थी. थूक की धार उसके लुंड से नीचे की तरफ बह रही थी और उसके हाथों में भी गीली हो रही थी.

लेकिन उसके दिमाग में अब सिर्फ मां जी का लुंड था.

उफ्फ्फ्फ़… मां जी का लुंड कितना बड़ा और मोटा होगा… जब मैंने उनके बॉल्स चूसे थे तब भी वह इतना बड़ा था… उनका सुपाड़ा भी शायद इतना hi बड़ा और लाल होगा… उनका लुंड का स्वाद कैसा होगा? शायद थोड़ा कड़वा, थोड़ा नमकीन… लेकिन बहुत गरम और मरदाना…

इस गंदे ख्याल से रौशनी और वाइल्ड हो गयी. उसने रमेश के लुंड को और गहराई से मुँह में ले लिया. उसका लुंड अब उसके गले तक जा रहा था. वह zor-zor से चूस रही थी — upar-neeche, जीभ से लोल्लिपोप की तरह chat-ti हुई, कभी हलके दांतों से ragad-ti हुई.

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“उम्म्म्म… मममहह… आअह्ह्ह…” उसके मुँह से मदहोश आवाज़ें निकल रही थी.

वह सोच रही थी — अगर मां जी का लुंड मेरे मुँह में होता… तोह मैं कितना गहरा चूसती… उनका मोटा सुपाड़ा मेरे गले तक जाता… उनका प्रेकम का स्वाद कैसा होता… शायद थोड़ा कड़वा और गरम… लेकिन मैं पूरा पि लेती…

इस इमेजिनेशन ने उसको और भूखा बना दिया. रौशनी ने अब रमेश के लुंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया और और तेज़ और गहराई से चूसने लगी. उसका मुँह बिलकुल गीला हो गया था. वह लुंड को चूसती हुई धीरे से मोअन कर रही थी.

रमेश का शरीर काँप रहा था. उसने रौशनी के बाल पकड़ लिए और सिसकारियां भर रहा था, “उफ्फ्फ्फ़ मेरी जान… आज तू बहुत hi अच्छे से चूस रही हो… कितना मज़ा आ रहा है… उफ्फ्फ्फ़…”

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लेकिन रौशनी के दिमाग में अब भी मां जी का बड़ा, मोटा लुंड था. वह सोच रही थी की उनका लुंड शायद रमेश से भी मोटा होगा… और उनका स्वाद अलग होगा… शायद ज़्यादा मरदाना और गरम.

वह और सेंसुअल हो गयी. उसने लुंड को मुँह से निकाल कर उसके सुपाड़ी को जीभ से chat-a और फिर पूरा लुंड मुँह में ले लिया — गहरा, गीला और बहुत hi प्यार से. Beech-beech में वह धीरे से फुस्कुरा रही थी, “मममहह… आपका लुंड बहुत गरम है पति जी… उम्म्म…”

रमेश अब कण्ट्रोल में नहीं था. उसका लुंड उसके मुँह में फड़क रहा था और वह zor-zor से सिसकारियां भर रहा था.

रौशनी आँखें बंद किये हुए, मां जी के लुंड की कल्पना में खोई हुई, रमेश के लुंड को और गहराई और सेन्सुअली चूस रही थी — जैसे वह असल में मां जी के मोठे लुंड चूस रही हो.

रौशनी आँखें बंद किये हुए रमेश के लुंड को गहराई से चूस रही थी, लेकिन उसके दिमाग में अब सिर्फ मां जी का लुंड घूम रहा था.

अब बस मां जी की थॉट्स hi रौशनी के मन में डोमिनाते होने लगी.

उफ्फ्फ्फ़… मां जी का लुंड कितना बड़ा और मोटा होगा… जब मैंने उनके बॉल्स चूसे थे तब भी वह इतना भारी था… उनका सुपाड़ा शायद इतना hi बड़ा, लाल और चमक्दा होगा… अगर वह अभी यहाँ होते और अपना मोटा लुंड मेरे मुँह के पास ले आते तोह मैं क्या करती?

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वह सोच रही थी की मां जी का लुंड शायद रमेश से भी ज़्यादा मोटा होगा. उनका सुपाड़ा इतना बड़ा होगा की उसके मुँह में पूरा नहीं आ पायेगा. उनका लुंड का रंग शायद गहरा काला होगा और ऊपर से एक मोटा सा सुपाड़ा होगा जो उसके होठों को पूरा फैला देगा.

उनका लुंड का स्वाद कैसा होगा?वह सोचने लगी — शायद थोड़ा कड़वा, थोड़ा नमकीन… लेकिन बहुत गरम और मरदाना. उनका प्रेकम शायद रमेश से ज़्यादा गीला और चमक्दा होगा… और उसका स्वाद भी अलग होगा… थोड़ा कड़वा लेकिन इतना मज़ा आएगा की मैं पूरा पि लुंगी…

रौशनी के मुँह से लुंड निकल कर वह धीरे से सोचने लगी, अगर मां जी का लुंड मेरे गले तक जाता… तोह मैं कैसी आवाज़ निकलती? शायद मैं घूँट भर के सिसकारियां भर्ती… उनका मोटा लुंड मेरे गले को फैला देता… और मैं फिर भी और गहरा चूसती…

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इस गंदे और फोर्बिडन ख्याल ने उसको और भूखा बना दिया. वह रमेश के लुंड को और ज़ोर से और गहराई से चूसने लगी. उसका मुँह अब बिलकुल गीला हो चूका था. थूक की धार उसके लुंड से नीचे की तरफ बह रही थी और उसके हाथों पर भी लग रही थी.

उफ्फ्फ्फ़… अगर मां जी अभी यहाँ होते और अपना बड़ा लुंड मेरे मुँह में दाल देते… तोह मैं क्या करती? क्या मैं उनके लुंड को इतना प्यार से चूसती जितना अब रमेश जी का चूस रही हूँ? या फिर और भी ज़्यादा वाइल्ड हो जाती?

वह सोच रही थी की मां जी शायद उसके बाल पकड़ कर उसका मुँह अपने लुंड पर ज़ोर से दबाते… और वह उनके लुंड को चूसती हुई उनकी मोती जांघों को हाथों से पकड़ लेती. उनकी हेयरी मोती जांघें उसके गालों पर रगड़ती… और उनका लुंड उसके गले तक जाता.

रौशनी के शरीर में एक अलग hi करंट दौड़ रहा था. उसका मुँह और तेज़ हो गया. वह लुंड को चूसती हुई धीरे से मोअन कर रही थी, लेकिन उसके दिमाग में अब भी सिर्फ एक hi थॉट था —

मैं चाहती हूँ… मां जी का लुंड… उनका बड़ा, मोटा, गरम लुंड… मेरे मुँह में… अभी…

वह और वाइल्ड हो गयी और रमेश के लुंड को इतनी गहराई और सेन्सुअली चूसने लगी की रमेश का शरीर काँप उठा.

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वहां दूसरी और रमेश को रौशनी के इन भावनाओं का वह भी उसके मां जी के प्रति .. उसका आईडिया भी नहीं था , वह बस अपने hi लस्ट में डूबा हुआ था

रमेश चारपाई पर बैठा था और रौशनी उसके लुंड को गहराई से चूस रही थी. उसका मुँह upar-neeche हो रहा था, जीभ उसके सुपाड़ी पर zor-zor से चल रही थी. थूक की धार उसके लुंड से नीचे की तरफ बह रही थी.

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रमेश ने आँखें बंद कर ली थी. उसका शरीर काँप रहा था.

उफ्फ्फ्फ़… आज मेरी बीवी कितनी वाइल्ड हो गयी है… पहले कभी ऐसे नहीं चूसा था उसने… आज तोह जैसे भूखी हो… कितने प्यार से, कितने गहरे से चूस रही है…

वह सोच रहा था की आज रौशनी में कुछ अलग hi बात है. उसकी आँखें बंद थी, लेकिन उसके मुँह से निकलने वाली आवाज़ें और उसका जोश पहले से काफी ज़्यादा था. रमेश को लगा की शायद आज उसकी बीवी बहुत ज़्यादा गरम है.

शायद उसको आज मेरा लुंड बहुत पसंद आ रहा है… या फिर वह मुझसे बहुत प्यार कर रही है… कितने अच्छे से चूस रही है… जैसे पूरा पि लेना चाहती हो…

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रमेश ने रौशनी के बाल पकड़ लिए और धीरे से उसके सर को upar-neeche करने लगा. उसका लुंड उसके मुँह में फड़क रहा था. वह धीरे से सिसकारियां भर रहा था.

उफ्फ्फ्फ़ मेरी जान… आज तू मुझे पागल कर देगी… इतना मज़ा आ रहा है… तेरी जीभ… तेरे होठ… सब कुछ इतना गरम और गीला है…

लेकिन रमेश को यह नहीं पता था की उसकी बीवी के दिमाग में अब सिर्फ उसका मां जी है. वह नहीं जानता था की रौशनी उसके लुंड को चूसती हुई मां जी के बड़े, मोठे लुंड की कल्पना में खोई हुई है.

रमेश ने आँखें खोल कर नीचे देखा. रौशनी की आँखें बंद थी, उसके गाल लाल हो रहे थे, और वह उसके लुंड को इतनी प्यार और जोश से चूस रही थी की रमेश का दिल खुश हो गया.

कितनी प्यारी लग रही है मेरी बीवी… आज उसमें कुछ और hi बात है… शायद वह मुझसे इतना प्यार करती है की आज इतनी वाइल्ड हो गयी…

रमेश ने धीरे से उसके बाल में हाथ घुमाया और प्यार से बोलै, “मेरी जान… तू आज बहुत अच्छे से चूस रही है… बहुत मज़ा आ रहा है…”

लेकिन रौशनी ने सिर्फ एक धीमी सी सिसकारी भरी और और गहराई से उसके लुंड को मुँह में ले लिया. उसका दिमाग अब भी मां जी के लुंड में खोया हुआ था.

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रमेश को लगा की आज उसकी बीवी उससे बहुत ज़्यादा प्यार कर रही है… लेकिन असल में रौशनी का दिमाग किसी और के लुंड के ख्यालों में था.

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रमेश अब पूरी तरह से लुस्टि हो चूका था. उसका लुंड अब भी गीला और सख्त खड़ा था. उसने रौशनी को धीरे से पलट दिया. अब वह पेट के बल लेती हुई थी. रमेश ने उसकी टाइट ट्रांसपेरेंट पंतय को दोनों तरफ से पकड़ कर एक झटके में नीचे खिंच दिया. पंत य उसकी मोती झंघों से सरकती हुई बहार आ गयी.

रौशनी अब बिलकुल नंगी लेती हुई थी. उसकी भारी, गोरी और मुलायम गांड सामने थी. रमेश ने उसके दोनों अस्स चीक्स पर अपने हाथ रख कर उन्हें ज़ोर से दबाया. फिर उसने अपना मुँह नीचे किया और उसकी एक गांड के चेहरे पर गहरा चुम्मा दिया.

रौशनी के मुँह से एक लम्बी सिसकारी निकली, “आआह्ह्ह…”

रमेश ने उसकी दोनों गांड के चीक्स को चौड़ा किया और अपनी जीभ निकाल कर उसके गांड के छेद पर रख दिया. पहले तोह उसने halke-halke से लीक किया, फिर जीभ को ज़ोर से रगड़ते हुए उसके गांड के छेद को चाटने लगा. उसकी जीभ उसके टाइट छेद पर घूम रही थी — कभी अंदर की तरफ धकेलती, कभी बहार से लम्बा लीक करती.

रौशनी का शरीर एक झटके से काँप उठा. उसकी टांगें अपने आप कर्ल हो गयी. उसने चारपाई की चादर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसमें मुँह दबा दिया.

“आआह्ह्ह… पति जी… यह… उम्म्म… आह्हः…”

रमेश ने उसके सर को हलके से नीचे दबा दिया और अपनी जीभ और ज़ोर से उसके गांड के छेद पर रगड़ने लगा. वह उसके गांड के चीक्स को हाथों से मसलता हुआ जीभ से उसके गांड के छेद को चाट रहा था.

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रौशनी के मुँह से लगातार सिसकारियां निकल रही थी. उसकी टांगें चौकोर हो रही थी और वह चारपाई की चादर को और टाइट से पकड़ रही थी.

इस पल के लिए रौशनी के दिमाग से मां जी का चेहरा गायब हो गया. अब सिर्फ रमेश की जीभ उसके गांड की छेद पर थी और वह उसमें खो गयी थी.

उफ्फ्फ्फ़… यह कैसा मज़ा है… पति जी मेरी गांड को ऐसे चाट रहे हैं… उनकी जीभ मेरी गांड की छेद पर… बहुत अच्छा लग रहा है…

रौशनी के मुँह से धीमी और मदहोश आवाज़ें निकल रही थी. उसका सर चारपाई में दबा हुआ था, हाथ चादर को जकड रखे थे, टांगें कर्ल हो रही थी और वह पूरी तरह से रमेश के मुँह के हवाले हो चुकी थी.

रमेश अब भी उसके गांड के छेद को जीभ से रगड़ रहा था — कभी हलके से, कभी ज़ोर से — और रौशनी के मुँह से लगातार सिसकारियां निकल रही थी.

माहौल नहुत hi गरम हो चूका था ...

रमेश अब पूरी तरह से रौशनी के ऊपर चढ़ चूका था. उसने उसकी दोनों बड़ी चूचियों को baari-baari से मुँह में ले लिया था और zor-zor से चूस रहा था. कभी वह उनके निप्पल्स को जीभ से छत्ता, कभी हलके दांतों से kaat-ta. उसका एक हाथ नीचे उसकी गीली बुर में दो उँगलियाँ घुसा कर andar-bahar कर रहा था.

रौशनी की आँखें बंद थी. उसका शरीर तड़प रहा था, लेकिन उसके दिमाग में अब सिर्फ मां जी का चेहरा घूम रहा था.

उफ्फ्फ्फ़… मां जी… आप भी ऐसे hi मेरी चूचियों को चूसते… आपकी दादी मेरी स्किन पर रगड़ती… आपके हाथ मेरी बुर में उँगलियाँ घुसा कर मुझे तड़पाते… आप मुझे चारपाई पर लेटकर ऐसे hi चूसते…

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इस इमेजिनेशन के असर से उसकी बुर और भी ज़्यादा गीली हो गयी. रमेश की उँगलियाँ अंदर जाते hi “chhap-chhap” की आवाज़ आ रही थी. रौशनी के मुँह से लगातार zor-zor से सिसकारियां निकल रही थी.

“आआह्ह्ह… उम्म्म… पति जी… बहुत मज़ा आ रहा है… आह्हः…”

लेकिन उसके दिमाग में अब भी मां जी उसकी बुर को ऊँगली से छोड़ रहे थे. वह सोच रही थी की अगर मां जी अभी यहाँ होते और उनका मोटा लुंड उसके मुँह के पास होता… तोह वह क्या करती.

रमेश ने रौशनी को फिर से सीधा लेटाया. अब वह उसके सामने घुटनो के बल बैठा था. उसका मोटा, लम्बा और सख्त लुंड उसके हाथ में था. वह उसको अपनी बीवी की गीली बुर के बिलकुल सामने ले आया था. उसका सुपाड़ा चमक रहा था और थोड़ा सा प्रेकम अब भी से निकल रहा था.

रौशनी लेती हुई थी. उसकी टांगें थोड़ी सी खुली हुई थी. उसकी आँखें रमेश के लुंड पर टिक्की हुई थी. उसका दिल ज़ोर से धड़क रहा था.

रमेश ने अपना लुंड उसकी बुर के ऊपर रगड़ते हुए धीरे से कहा, “मेरी जान… अब मैं अंदर जाने वाला हूँ…”

जैसे hi रौशनी ने ऊपर देखा, उसके सामने रमेश नहीं… मां जी खड़े थे.

उसका गहरा, घाना और बालों वाला सीना सामने था. उसकी मोती छाती के बाल चमक रहे थे. उसका बड़ा, मोटा लुंड उसके हाथ में था और वह उसको रौशनी की बुर के बिलकुल पास ले आया था. उसकी दादी, उसकी ृस्टिक हरयाणवी आवाज़… सब कुछ एक पल के लिए बिलकुल असली लगा.

रौशनी की सांस रुक सी गयी. उसकी आँखें पल भर के लिए खुली रह गयी.

उफ्फ्फ्फ़… मां जी… आप… यहाँ… आपका लुंड… मेरी बुर के सामने… आप मुझे छोड़ने वाले हैं…

उसके दिमाग में एक hi थॉट घूम रहा था — अगर मां जी अभी मुझे छोड़ेंगे… तोह कैसा लगेगा? उनका मोटा लुंड मेरी टाइट बुर को कैसे फैलाएगा…

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लेकिन यह पल सिर्फ कुछ सेकण्ड्स का था. जैसे hi रमेश ने अपना लुंड उसकी बुर पर रगड़ना शुरू किया, वह वापस हकीकत में आ गयी. रमेश उसके सामने था, लेकिन उसके दिमाग में अब भी मां जी का गहरा, बालों वाला सीना और उनका बड़ा लुंड चमक रहा था.

रौशनी ने आँखें बंद कर ली. उसका शरीर काँप रहा था. उसका मुँह खुला था लेकिन कोई आवाज़ नहीं निकल रही थी.

रमेश ने अपना लुंड उसकी गीली बुर के मुँह पर रख दिया और धीरे से अंदर धकेलने की तयारी करने लगा.

रौशनी के दिमाग में अब भी एक hi चेहरा था — मां जी.
 
थैंक्स सो मच डिअर .. मीन्स ा लोट तो में. एंड यस लॉट्स मोरे तो के !!!!

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रमेश ने अपना मोटा लुंड रौशनी की गीली बुर के मुँह पर रख दिया. उसका सुपाड़ा उसकी टाइट बुर को dheere-dheere फैलता हुआ अंदर घुसने लगा. रौशनी की आँखें बंद थी. जैसे hi उसका लुंड अंदर धकेलने लगा, रौशनी के दिमाग में मां जी का चेहरा साफ़ आ गया.

मन hi मन (उफ्फ्फ्फ़… मां जी… आपका मोटा लुंड मेरी बुर में घुसने जा रहा है… आप मुझे छोड़ने वाले हैं…)

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रौशनी के शरीर में एक तेज़ सी लहार दौड़ गयी. उसकी बुर और भी ज़्यादा गीली हो गयी. रमेश का लुंड dheere-dheere अंदर जा रहा था, लेकिन रौशनी के दिमाग में मां जी का बड़ा, मोटा और गरम लुंड उसकी बुर को फैलता हुआ अंदर घुस रहा था.

रमेश ने धीरे से धक्का मारा और उसका पूरा लुंड रौशनी की बुर में उतर गया. रौशनी के मुँह से एक लम्बी सिसकारी निकली, “आआह्ह्ह…”

रमेश ने उसके ऊपर झुक कर उसके होठों पर किश किया और धीरे से बोलै, “मेरी जान… आज तेरी बुर कितनी ज़्यादा गीली है… पहले से भी ज़्यादा… इतनी गीली और टाइट… उफ्फ्फ्फ़ कितना मज़ा आ रहा है…”

रौशनी ने आँखें बंद hi राखी. उसका दिमाग अब भी मां जी के साथ था. वह सोच रही थी की मां जी का लुंड शायद इससे भी मोटा होगा… और उनका लुंड उसकी बुर को और ज़्यादा फैला देता.

रमेश ने dheere-dheere andar-bahar करना शुरू कर दिया. उसका लुंड रौशनी की बुर में आराम से जा रहा था क्यूंकि वह बहुत गीली हो चुकी थी. रौशनी के मुँह से लगातार सिसकारियां निकल रही थी.

“आआह्ह्ह… उम्म्म… पति जी… आह्हः…”

लेकिन उसके दिमाग में अब भी एक hi बात चल रही थी — मां जी… आपका लुंड… मेरी बुर में… आप मुझे ऐसे hi छोड़ रहे होते तोह मैं क्या करती…

रमेश को लगा की आज उसकी बीवी बहुत hi गरम और गीली है. वह धीरे से उसके कान में बोलै, “तेरी बुर आज इतनी गीली क्यों है मेरी जान… इतनी पानी वाली… मैं अंदर जाते hi फिसल रहा हूँ… उफ्फ्फ्फ़ बहुत मज़ा आ रहा है…”

रौशनी ने सिर्फ एक और लम्बी सिसकारी भरी और रमेश के सीने से चिपक गयी. उसका दिमाग अब भी मां जी के मोटा लुंड और उनके गहरे, बालों वाले सीने से भरा हुआ था.

रमेश ने अपना मोटा लुंड dheere-dheere अंदर धकेलना शुरू किया. इंच बी इंच उसका लुंड रौशनी की बुर को फैलता हुआ अंदर जा रहा था. साथ hi उसने उसकी दोनों बड़ी चूचियों को अपने हाथों में पकड़ लिया और zor-zor से दबाने लगा.

रौशनी की आँखें अब भी बंद थी. उसका दिमाग अब भी मां जी के साथ था. जैसे hi रमेश का लुंड अंदर घुस रहा था, रौशनी के दिमाग में मां जी का बड़ा, मोटा लुंड उसकी बुर को फैलता हुआ अंदर जा रहा था.

(उफ्फ्फ्फ़… मां जी… आपका मोटा लुंड मेरी बुर को पूरा भर रहा है… आप मुझे dheere-dheere छोड़ रहे हैं… आपकी उँगलियाँ मेरी चूचियों को दबा रही हैं…)

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रौशनी के मुँह से एक ज़ोर की सिसकारी निकली, “आआह्ह्ह… उम्म्म… पति जी… आह्हः…”

रमेश ने उसकी चूचियों को और ज़ोर से दबाया. उसके निप्पल्स अब बिलकुल सख्त हो चुके थे — जैसे दो छोटे से माउंटेन पैक्स उभर आये हों. वह उन्हें अपने हाथों से मसलता हुआ और लुंड को अंदर धकेल रहा था.

रौशनी की टांगें चौकोर हो गयी थी. उसका शरीर तड़प रहा था. रमेश का पूरा लुंड अब उसकी बुर में उतर चूका था. वह dheere-dheere andar-bahar करने लगा.

रौशनी के मुँह से लगातार zor-zor से सिसकारियां निकल रही थी. उसकी आँखें बंद hi रही, लेकिन उसके दिमाग में अब भी मां जी का मोटा लुंड उसकी बुर को छोड़ रहा था.

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(उफ्फ्फ्फ़… मां जी… आपका लुंड इतना बड़ा है… मेरी बुर को पूरा भर रहा है… आप मेरी चूचियों को ऐसे hi दबा रहे हैं… आपकी उँगलियाँ मेरे निप्पल्स को मसल रही हैं…)

रमेश ने उसके निप्पल्स को अपने हाथों से पिंच किया और ज़ोर से दबाया. रौशनी का शरीर एक और झटके से उठ गया.

ेओह हलके सेमीयन करि “आआह्ह्ह… मां… जी… उम्म्म…”

वह झट से रुक गयी. उसका दिल ज़ोर से धड़क रहा था. रमेश ने कुछ नहीं सुना. वह अब भी उसकी चूचियों को दबाता हुआ dheere-dheere उसको छोड़ रहा था.

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रौशनी ने फिर से आँखें बंद कर ली. उसका दिमाग अब भी मां जी के साथ था — उनका मोटा लुंड, उनकी मोती उँगलियाँ और उनका गहरा, बालों वाला सीना.

रौशनी ने धीरे से आँखें खोली. उसकी नज़र सीधा रमेश के चेहरे पर पड़ी. वह उसकी आँखों में देखते हुए एक पल के लिए चुप रही, फिर उसके होठों से एक रॉ और इंटेंस आवाज़ निकली.

“पति जी… मुझे गहरा छोड़िये… डीप… बहुत गहरा… आज मुझे आपका पूरा लुंड अपनी बुर में फील करना है…”

रमेश ने उसकी आँखों में देखा. उसकी आँखों में भी पूरी हवस चमक रही थी. उसने अपना लुंड और ज़ोर से अंदर धकेला और धीरे से बोलै,

“उफ्फ्फ्फ़ मेरी जान… तू आज कितनी गरम है… तेरी बुर इतनी गीली और टाइट है… मैं पूरा लुंड अंदर दे रहा हूँ… देख कितना गहरा जा रहा है…”

रौशनी ने अपनी टांगें उठा कर रमेश की कमर के अराउंड लपेट ली. उसने अपनी जांघों को और टाइट से उसके कमर से लगा लिया और धीरे से कहा,

“ज़ोर से… और ज़ोर से छोड़िये न पति जी… आज मैं आपका लुंड अपनी बुर में पूरा फील करना चाहती हूँ… आपका मोटा लुंड मेरी बुर को फैला रहा है… आह्हः…”

रमेश ने उसकी टांगें और ज़ोर से पकड़ ली और एक तेज़ी से धक्का मारा. उसका पूरा लुंड रौशनी की बुर में उतर गया. रौशनी के मुँह से एक ज़ोर की सिसकारी निकली.

“आआह्ह्ह… हाँ… ऐसे hi… गहरा… और गहरा… आपका लुंड मेरी बुर के सबसे अंदर तक जा रहा है… उम्म्म…”

रमेश ने उसके होठों पर एक ज़ोर से चुम्मा दिया और उसके कान में गरम सांस छोड़ते हुए कहा,

“तू आज बहुत hi वाइल्ड है मेरी बीवी… तेरी बुर आज मेरा लुंड पूरा निगल रही है… देख कितना गीला कर दिया तूने मेरा लुंड… मैं तुझे आज पूरी रात ऐसे hi छोडूंगा…”

रौशनी ने अपनी टांगें और टाइट से उसकी कमर में लपेट ली और उसके सीने पर हाथ रख कर धीरे से बोली,

“पति जी… आपका लुंड बहुत गरम और मोटा है… मेरी बुर को पूरा भर रहा है… आज मुझे आपका लुंड और गहरा फील करना है… ज़ोर से धक्के मारिये न… आह्हः…”

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रमेश ने उसकी टांगें और ज़ोर से पकड़ कर तेज़ी से andar-bahar करना शुरू कर दिया. दोनों के मुँह से अब सिर्फ रॉ और इंटेंस आवाज़ें निकल रही थी.

रौशनी के दिमाग में अब भी एक छोटा सा हिस्सा मां जी के लुंड की याद में था, लेकिन अब वह फिर से खुद को रमेश के साथ पायी — उसके लुंड, उसके धक्कों के साथ रदम मिलते हुए

रमेश ने रौशनी की टांगें और ज़ोर से पकड़ ली और एक तेज़ी से, गहरा धक्का मारा. उसका पूरा मोटा लुंड रौशनी की बुर में उतर गया. रौशनी के मुँह से एक ज़ोर की सिसकारी निकली.

“आआह्ह्ह… हाँ पति जी… ऐसे hi… और गहरा… और ज़ोर से…”

रमेश ने उसके होठों पर किश किया और धीरे से उसके कान में गरम आवाज़ में बोलै,

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“उफ्फ्फ्फ़ मेरी जान… तेरी बुर आज मेरा लुंड पूरा निगल रही है… देख कितना गहरा जा रहा है… हर धक्के के साथ तेरा अंदर तक जा रहा हूँ… कितनी टाइट और गीली है तू आज…”

रौशनी ने अपनी टांगें और टाइट से उसकी कमर में लपेट ली और उसके सीने पर हाथ रख कर मदहोश हो कर बोली,

“ज़ोर से छोड़िये न पति जी… आपका लुंड मेरी बुर को पूरा फैला रहा है… हर बार जब आप ज़ोर से धक्का मारते हैं न… मेरी बुर अंदर से काँप जाती है… आह्हः… और ज़ोर से… और गहरा…”

रमेश ने अब और तेज़ी से andar-bahar करना शुरू कर दिया. उसका लुंड हर बार पूरा बहार निकल कर एक झटके से अंदर तक उतर रहा था. रौशनी की बुर से “chhap-chhap” की गीली आवाज़ आ रही थी.

रमेश ने उसकी चूचियों को ज़ोर से दबाते हुए कहा,

“ले मेरी बीवी… ले मेरा पूरा लुंड… देख कितना मोटा लुंड है तेरा पति का… तेरी बुर को आज मैं पूरी तरह से छोडूंगा… हर धक्के में तेरा अंदर तक जाऊंगा… उफ्फ्फ्फ़ कितना मज़ा आ रहा है… तेरी बुर मेरा लुंड कितने प्यार से पकड़ रही है…”

रौशनी के मुँह से लगातार रॉ और इंटेंस आवाज़ें निकल रही थी,

“आआह्ह्ह… हाँ… ऐसे hi… और ज़ोर से धक्के मारिये… आपका लुंड मेरी बुर के सबसे अंदर तक जा रहा है… उम्म्म… और गहरा… और तेज़ी से… आज मेरी बुर आपके लुंड के लिए बिलकुल तैयार है… छोड़िये मुझे… ज़ोर से छोड़िये न पति जी…”

रमेश ने उसकी कमर पकड़ कर और तेज़ी से धक्के मरने शुरू कर दिए. हर बार जब उसका लुंड अंदर धकेल ता था, रौशनी की टांगें उसकी कमर को और टाइट से पकड़ लेती थी.

रौशनी की आँखें ख़ुशी और मस्ती से बंद हो गयी. उसका शरीर रमेश के हर धक्के पर काँप रहा था. लेकिन जैसे hi उसने आँखें बंद की, उसके दिमाग में फिर से मां जी का चेहरा आ गया — उनका गहरा, बालों वाला सीना और उनका बड़ा, मोटा लुंड जो उसकी बुर को छोड़ रहा था.

रौशनी ने अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठा कर रमेश के धक्के का साथ देने लगी. वह अपनी हिप्स को zor-zor से हिला रही थी — जैसे वह असल में मां जी के लुंड पर अपनी बुर को रगड़ रही हो.

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रमेश ने उसकी कमर पकड़ कर और तेज़ी से धक्के मरने शुरू कर दिए. उसका लुंड हर बार गहराई से अंदर तक जा रहा था.

रौशनी के मुँह से लगातार सिसकारियां निकल रही थी, लेकिन उसके दिमाग में अब भी मां जी का लुंड था.

उफ्फ्फ्फ़… मां जी… आपका मोटा लुंड मेरी बुर को पूरा छोड़ रहा है… आपके गहरे धक्के… आपका लुंड मेरी बुर के अंदर तक जा रहा है… आप मुझे ऐसे hi ज़ोर से छोड़ रहे हैं…

रमेश ने उसके होठों पर किश किया और धीरे से कहा,

“ले मेरी जान… ले मेरा लुंड… देख कितना गहरा जा रहा है… तेरी बुर मेरा लुंड पूरा निगल रही है… उफ्फ्फ्फ़ कितना मज़ा आ रहा है…”

रौशनी ने अपनी टांगें और टाइट से उसकी कमर में लपेट ली और अपनी हिप्स को और ज़ोर से हिलाते हुए मदहोश हो कर बोली,

“आआह्ह्ह… हाँ… ऐसे hi… और ज़ोर से… और गहरा… आपका लुंड मेरी बुर को पूरा भर रहा है… उम्म्म… आपके हर धक्के से मेरी बुर अंदर से काँप रही है… छोड़िये मुझे… और ज़ोर से छोड़िये न पति जी…”

लेकिन उसके दिमाग में अब भी मां जी का मोटा लुंड उसकी बुर को zor-zor से छोड़ रहा था. वह अपनी हिप्स को हिलाती हुई, आँखें बंद किये हुए, मां जी के लुंड की कल्पना में खोई हुई थी — जबकि असल में रमेश उसको छोड़ रहा था.

रमेश को लगा की आज उसकी बीवी बहुत hi वाइल्ड और गरम है. वह और तेज़ी से धक्के मर रहा था, लेकिन रौशनी का दिमाग अब भी मां जी के साथ था.

जैसे hi रमेश ने अपना मुँह उसके होठों पर झुकाया, रौशनी ने अपनी आँखें बंद hi राखी और अपने होठों को उसके होठों से मिला दिया. लेकिन उसके दिमाग में वह मां जी को किश कर रही थी.

वह रमेश के होठों को ज़ोर से चूसने लगी — गहरा, इंटेंस और बहुत hi प्यार भरा लिप लॉक. उसकी जीभ रमेश की जीभ से लिपट गयी, लेकिन उसके दिमाग में मां जी के मोठे होठ और उनकी दादी उसके गाल पर रगड़ रही थी.

रमेश ने भी उसके होठों को ज़ोर से चूसा और गहरा किश किया. दोनों के मुँह एक दूसरे में ghul-mil गए. साथ hi रमेश ने उसकी कमर पकड़ कर एक और तेज़ी से, गहरा धक्का मारा.

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रौशनी के मुँह से किश के बीच से एक मदहोश सिसकारी निकली. उसकी टांगें रमेश की कमर को और टाइट से पकड़ ली.

उफ्फ्फ्फ़… मां जी… आप मुझे किश कर रहे हैं… आपके होठ मेरे होठों पर… आपका मोटा लुंड मेरी बुर में गहरे धक्के मार रहा है… आप मुझे ऐसे hi छोड़ रहे हैं…

रौशनी ने किश को और गहरा कर दिया. उसकी जीभ रमेश की जीभ को ज़ोर से चूस रही थी, लेकिन उसके दिमाग में अब भी मां जी के गहरे धक्के उसकी बुर को पूरा भर रहे थे.

रमेश ने उसके होठों को चूसते हुए धीरे से कहा,

“मेरी जान… कितना गहरा किश कर रही हो… उफ्फ्फ्फ़… तेरी बुर भी मेरा लुंड कितने प्यार से पकड़ रही है…”

रौशनी ने सिर्फ एक और लम्बी सिसकारी भरी और अपने होठों को और ज़ोर से उसके होठों से मिला दिया. उसकी आँखें अब भी बंद थी और वह पूरी तरह से अपनी इमेजिनेशन में खोई हुई थी — जहां मां जी उसको किश कर रहे थे और उनका मोटा लुंड उसकी बुर को zor-zor से छोड़ रहा था.

रमेश को लगा की आज रौशनी उससे इतना गहरा और इंटेंस किश कर रही है जैसे कभी नहीं किया था.

—————————————-

रमेश रौशनी के ऊपर था. उसका मोटा लुंड उसकी बुर में गहरे धक्के मार रहा था. रौशनी उसके होठों को ज़ोर से चूस रही थी और उसकी टांगें उसकी कमर को टाइट से पकड़ राखी थी.

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रमेश के दिमाग में अब भी एक hi बात चल रही थी.

उफ्फ्फ्फ़… आज रौशनी मेरी बीवी बनकर कितनी वाइल्ड हो गयी है… पहले कभी ऐसे नहीं किया उसने… आज वह मुझे इतना गहरा किश कर रही है… जैसे मुझे पूरा निगल लेना चाहती हो… उसकी बुर भी आज इतनी गीली और टाइट है… हर धक्के के साथ वह मुझे अंदर खिंच रही है…

वह सोच रहा था की आज रौशनी में कुछ अलग hi बात है. उसकी आँखें बंद थी, लेकिन उसके होठ और उसकी टांगें इतनी जोश से उसको पकड़ राखी थी की रमेश का दिल खुश हो रहा था.

शायद आज वह मुझसे बहुत ज़्यादा प्यार कर रही है… या फिर उसको मेरा लुंड आज बहुत पसंद आ रहा है… देख कितने प्यार से वह मुझे अपनी बुर में ले रही है… हर बार जब मैं ज़ोर से धक्का मारता हूँ न, वह अपनी कमर ऊपर उठा लेती है… उफ्फ्फ्फ़ कितना मज़ा आ रहा है…

रमेश ने उसके होठों को और ज़ोर से चूसा और धीरे से उसके कान में कहा,

“मेरी जान… आज तू मुझे पागल कर देगी… कितना गहरा किश कर रही हो… तेरी बुर भी मेरा लुंड पूरा निगल रही है…”

लेकिन अंदर hi अंदर वह सोच रहा था — आज उसकी आँखें बंद क्यों हैं इतनी देर से? और वह इतनी मदहोश क्यों हो रही है? जैसे कोई और चेहरा उसके दिमाग में हो… लेकिन नहीं… शायद वह सिर्फ मुझसे इतना प्यार करती है…

रमेश ने उसकी कमर को और ज़ोर से पकड़ लिया और एक और तेज़ी से, गहरा धक्का मारा. उसका लुंड रौशनी की बुर के सबसे अंदर तक उतर गया.

उफ्फ्फ्फ़… आज रौशनी मुझे इतना मज़ा दे रही है… मैं आज उसको पूरी रात ऐसे hi छोडूंगा… उसकी हर सिसकारी मुझे और गरम कर रही है…

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रौशनी के मुँह से लगातार सिसकारियां निकल रही थी, लेकिन रमेश को यह नहीं पता था की उसके दिमाग में अब भी मां जी का चेहरा और उनका मोटा लुंड चल रहा था.

—————————————-

तो बे कॉन्टिनोएड…

रमेश ने रौशनी को पलट कर डोगग्य स्टाइल में कर दिया. अब वह चारपाई के किनारे झुकी हुई थी, उसकी बड़ी गांड ऊपर की तरफ थी और उसके हाथ चारपाई की लकड़ी को पकड़ रखे थे. रमेश ने पीछे से उसकी कमर पकड़ ली और एक झटके में अपना पूरा मोटा लुंड उसकी बुर में उतर दिया.

रौशनी के मुँह से एक ज़ोर की सिसकारी निकली, “आआह्ह्ह…”

रमेश ने अब तेज़ी से धक्के मरने शुरू कर दिए. उसका लुंड हर बार पूरा बहार निकल कर एक ज़ोर के झटके से अंदर तक उतर रहा था. रौशनी की गांड के चीक्स पर उसके जांघों की thap-thap की आवाज़ आ रही थी.

लेकिन रौशनी की आँखें बंद थी और उसका दिमाग अब पूरी तरह से मां जी के साथ था.

जब रमेश ने उसके कान के पास झुक कर कहा,

“ले मेरी जान… ले मेरा पूरा लुंड… देख कितना गहरा जा रहा है तेरा अंदर…”

रौशनी के दिमाग में यह आवाज़ मां जी में बदल गयी —

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“अरे बहु रे… ले मां का पूरा लुंड… तेरी बुर को आज मैं पूरी तरह से छोडूंगा रे… देख कितना मोटा लुंड है तेरा ससुर का…”

रौशनी के मुँह से एक और लम्बी सिसकारी निकली. उसका शरीर काँप रहा था. वह अपनी गांड को पीछे की तरफ धकेल कर रमेश के धक्कों का साथ दे रही थी, लेकिन उसके दिमाग में मां जी उसकी गांड पकड़ कर zor-zor से छोड़ रहे थे.

रमेश ने उसकी कमर को और ज़ोर से पकड़ कर कहा,

“उफ्फ्फ्फ़… तेरी बुर आज मेरा लुंड पूरा निगल रही है… कितनी गीली है तू मेरी जान…”

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रौशनी के दिमाग में यह आवाज़ फिर से बदल गयी —

“अरे बहु… तेरी बुर तोह मां के लुंड को पूरा निगल रही है रे… कितनी रसीली और गीली है तेरी यह बुर… आज मैं तुझे पूरी तरह से छोड़ के रखूँगा…”

रौशनी के मुँह से धीरे से निकला, “आआह्ह्ह… मां जी… उम्म्म…”

वह झट से रुक गयी. उसका दिल ज़ोर से धड़क रहा था. रमेश ने कुछ नहीं सुना. वह अब भी उसको zor-zor से पीछे से छोड़ रहा था.

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रौशनी ने फिर से आँखें बंद कर ली और अपनी गांड को पीछे धकेल कर और तेज़ी से धक्कों का साथ देने लगी — अब पूरी तरह से अपनी इमेजिनेशन में खोई हुई, जहां मां जी उसको डोगग्य स्टाइल में zor-zor से छोड़ रहे थे.

रौशनी की आँखें बंद थी. उसका शरीर हर धक्के पर काँप रहा था, लेकिन उसके दिमाग में अब मां जी hi थे.

जब रमेश ने उसके कान के पास झुक कर कहा —

“ले मेरी जान… ले मेरा पूरा लुंड… देख कितना गहरा जा रहा है…”

रौशनी के दिमाग में यह आवाज़ बदल गयी —

“अरे बहु रे… ले मां का पूरा लुंड… तेरी बुर को आज मैं पूरी तरह से छोडूंगा रे… देख कितना मोटा लुंड तेरे अंदर तक जा रहा है…”

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रमेश ने उसकी कमर को और टाइट पकड़ कर एक और तेज़ी से, गहरा धक्का मारा. उसका लुंड रौशनी की बुर के सबसे अंदर तक उतर गया. साथ hi उसने उसकी चूचियों को और ज़ोर से मसल दिया.

रौशनी के मुँह से एक ज़ोर की सिसकारी निकली, “आआह्ह्ह…”

लेकिन उसके दिमाग में अब भी मां जी की ृस्टिक आवाज़ गूंज रही थी —

“अरे बहु… तेरी यह badi-badi चूचियां कितनी मस्त हैं रे… मां इनको ऐसे hi दबा रहा हूँ… और तेरा लुंड तेरी बुर को पूरा छोड़ रहा है… देख कितना गीला कर दिया तूने मां के लुंड को…”

रौशनी अपनी कमर को पीछे धकेल कर रमेश के धक्कों का साथ दे रही थी, लेकिन उसके दिमाग में यह मां जी hi थे जो उसकी कमर पकड़ कर उसको zor-zor से छोड़ रहे थे और उसकी चूचियों को दबा रहे थे.

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रमेश ने उसके कान में कहा,

“उफ्फ्फ्फ़ मेरी जान… तेरी बुर मेरा लुंड कितने प्यार से पकड़ रही है… आज तू बहुत hi गरम है…”

रौशनी के दिमाग में यह आवाज़ फिर से बदल गयी —

“अरे बहु रे… तेरी बुर तोह मां के लुंड को पूरा निगल रही है… कितनी रसीली और गीली है तेरी यह बुर रे… आज मैं तुझे ऐसे hi ज़ोर से छोडूंगा…”

रमेश अब तेज़ और गहरे धक्कों के साथ छोड़ रहा था. उसका लुंड रौशनी की बुर में पूरा उतर रहा था. उसकी सांसें तेज़ हो चुकी थी. वह धीरे से उसके कान के पास झुक कर बोलै,

“मेरी जान… मैं झड़ने वाला हूँ… बहुत सारा माल निकलने वाला हूँ…”

रौशनी की आँखें अब भी बंद थी. उसका दिमाग अब सिर्फ मां जी के साथ था. जब रमेश ने यह कहा, उसके दिमाग में यह आवाज़ बदल गयी —

“अरे बहु रे… मां अब झड़ने वाला हूँ… तेरा मुँह खोल रे… मैं तेरा चेहरा अपने गरम माल से भर दूंगा…”

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रमेश ने अपना लुंड बहार निकाला और रौशनी को जल्दी से पलट कर उसके सामने ला लिया. उसने अपना मोटा लुंड उसके चेहरे के बिलकुल पास ले आया. कुछ hi सेकण्ड्स में उसका लुंड फड़का और garam-garam, गहरा, मोटा माल उसके चेहरे पर zor-zor से निकलने लगा — उसके होठों पर, गालों पर, आँखों के पास और थोड़ी सी उसके बालों में भी.

रौशनी ने आँखें बंद hi राखी. उसका चेहरा रमेश के गरम छुम से भर चूका था.

रमेश धीरे से उसके पास लेट गया. दोनों सांस लेते हुए चारपाई पर लेट गए. रौशनी का चेहरा अब भी गीला था. वह धीरे से अपनी आँखें बंद किये हुए लेती रही.

जैसे hi उसने आँखें बंद की, उसके दिमाग में अब सिर्फ मां जी के मेमोरीज आ गए.

वह सोचने लगी —

उफ्फ्फ्फ़… मां जी ने मुझे आज छोड़ दिया… उनका मोटा लुंड मेरी बुर को पूरा फैला दिया… उनके गहरे धक्के… उनकी आवाज़… उनका गरम माल मेरे चेहरे पर… यह रमेश नहीं… यह मां जी थे… उनका लुंड… उनका सीना… उनकी दादी… सब कुछ उनका था…

रौशनी के चेहरे पर अब भी रमेश का छुम लगा हुआ था, लेकिन उसके दिमाग में अब सिर्फ मां जी का गरम माल उसके चेहरे पर लगा हुआ था. वह सोच रही थी की अगर मां जी असल में उसको ऐसे hi छोड़ते और अपना गरम माल उसके चेहरे पर छोड़ते… तोह वह कितनी खुश होती.

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रौशनी ने धीरे से अपना चेहरा रमेश की तरफ किया, लेकिन उसकी आँखें अब भी बंद थी. उसका दिमाग अब पूरी तरह से मां जी के साथ था — जैसे की आज रात उसको मां जी ने hi छोड़ दिया था, न की रमेश ने.

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रौशनी लेती हुई थी. उसका चेहरा अब भी रमेश के गरम छुम से गीला था. दोनों सांस लेते हुए चारपाई पर लेट गए. रमेश उसके पास लेट कर उसकी कमर पर हाथ रख कर धीरे से सांस ले रहा था.

लेकिन रौशनी के अंदर कुछ बदल रहा था.

पहले उसके अंदर सिर्फ हवस थी — मां जी के लुंड की तड़प, उनके धक्कों की याद, उनकी आवाज़ की कल्पना.

वह सोचने लगी —

मैं क्या कर रही हूँ? रमेश जी मुझे इतना प्यार करते हैं… आज भी उन्होंने मुझे इतना गहरा छोड़ा… उनका छुम मेरे चेहरे पर लगा है… और मैं उनके साथ लेती हुई भी मां जी के लुंड की याद में खोई हुई हूँ… यह गलत है… यह बहुत गलत है…

उसको महसूस हो रहा था की उसने आज रमेश जी के साथ सेक्स किया, लेकिन असल में वह किसी और के साथ थी. उसका शरीर रमेश के लुंड से छुड़ा था, लेकिन उसका दिल और दिमाग मां जी के साथ था.

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रौशनी के अंदर अब दो alag-alag आवाज़ें लड़ रही थी.

एक आवाज़ कहती थी — मैं एक अच्छी बीवी नहीं हूँ… मैं अपने पति को धोखा दे रही हूँ… यह फंतासी मुझे रोकनी चाहिए…

दूसरी आवाज़ कहती थी — लेकिन यह मज़ा… यह गन्दा, फोर्बिडन मज़ा… मैं इसको छोड़ नहीं पा रही… मां जी का लुंड अब मेरी याद में बस गया है… मैं उनको और चाहती हूँ…

वह रमेश की तरफ देखती हुई सोचने लगी —

वह मुझे कितना प्यार करते हैं… लेकिन मैं उनके लिए पूरी तरह से मौजूद नहीं थी आज… मेरा जिस्म उनके साथ था… लेकिन मेरी रूह किसी और के लुंड के साथ थी… यह बात उनको कभी नहीं पता चलनी चाहिए…

रौशनी के एहसास dheere-dheere बदल रहे थे. पहले सिर्फ हवस थी… अब उसके अंदर गिल्ट, खली पैन और एक गहरी तड़प पैदा हो रही थी — मां जी के लुंड के लिए और भी ज़्यादा गहरी तड़प.

वह धीरे से आँखें बंद किये हुए सोचने लगी —

मैं बदल रही हूँ… और यह बदलाव मुझे डरा भी रहा है… लेकिन रोक नहीं पा रही

___________________________________________


रौशनी की आँखें dheere-dheere बंद हो गयी. उसका शरीर अब भी थकान और मस्ती से भरा हुआ था, लेकिन दिमाग में एक गरम सेक्सी सपना उतर आया.

सपने में वह फिर से उसी पुराने लकड़ी के चारपाई पर लेती हुई थी. अचानक अँधेरे से मां जी आ गए. उनका चौड़ा, मज़बूत सीना सामने था — घने काले बाल उसपर चमक रहे थे. उनकी धोती में उनका लुंड का बड़ा, मोटा सा उभर साफ़ दिखाई दे रहा था, जैसे वह उनके लिए बिलकुल तैयार हो रहा हो. उनकी आँखों में उसके लिए एक गहरा, नशा भरा लस्ट चमक रहा था. वह धीरे से उसके पास आये, उसके चेहरे को अपने बड़े, गरम हाथों में लिया और धीरे से कहा,

“अरे बहु रे… आज तू मेरी हो जायेगी. तेरी यह मुलायम चूचियां और गीली बुर आज मैं अपनी बना लूंगा.”

रौशनी सपने में काँप गयी, लेकिन उसके शरीर में एक तेज़ गरम लहार दौड़ गयी. वह धीरे से बोली, “मां जी… यह गलत है… रमेश जी…”

लेकिन मां जी ने मुस्कुराते हुए उसके होठों पर अपना मुँह रख दिया और गहरा, भूखा किश करने लगे. उनकी जीभ उसके मुँह में घुस गयी, साथ hi उनका एक हाथ उसकी badi-badi चूचियों पर चला गया और zor-zor से दबाने लगा. उनकी धोती में उनका लुंड और भी उभर गया, जैसे वह अभी उसके ऊपर चढ़ने को तैयार हो.

रौशनी के मुँह से एक मदहोश सिसकारी निकली…

रौशनी के दिमाग में सपना और गहरा होता गया. मां जी dheere-dheere उसके और करीब आ रहे थे. उनका चौड़ा, मज़बूत सीना उसके बिलकुल सामने था. उन्होंने अपनी badi-badi बहन फैला कर रौशनी को अपने सीने से चिपका लिया. उसकी मुलायम बॉडी उनके गरम सीने से लग गयी. उनकी धोती में उनका लुंड का बड़ा उभर अब भी साफ़ दिखाई दे रहा था, जो अब उसकी जांघों से रगड़ रहा था.

मां जी ने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और धीरे से उसके होठों की तरफ अपना मुँह ले आये. दोनों के होठ एक दूसरे के बिलकुल करीब आ गए… सिर्फ एक इंच की दूरी रह गयी थी. रौशनी की सांस रुक सी गयी थी. वह सपने में भी काँप रही थी. मां जी के होठ उसके होठों को छू hi जाने वाले थे…

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लेकिन तभी…

सुबह की तेज़ रौशनी अंदर आ गयी. सपना एक डैम से टूट गया.

रौशनी की आँखें झट से खुल गयी. उसका सीना zor-zor से उछाल रहा था. पूरा शरीर पसीने से भीगा हुआ था. उसने जल्दी से चारपाई पर बैठ कर अपने आप को देखा — वह अब भी बिलकुल नंगी थी, रमेश के गरम छुम के निशाँ अब भी उसके चेहरे पर हलके से चमक रहे थे.

वह सांस लेते हुए सोचने लगी, “उफ्फ्फ्फ़… यह सपना… मां जी… वह मुझे पकड़ रहे थे… उनके होठ मेरे होठों के इतने करीब थे…”

उसका दिल अब भी तेज़ धड़क रहा था. सपने की याद उसके शरीर में अब भी गरम लहार छोड़ गयी थी. उसकी बुर अब भी हलकी सी गीली महसूस हो रही थी.

रौशनी ने धीरे से अपना चेहरा हाथों से धक् लिया और धीरे से फुस्कुराई, “यह सपना… कितना गन्दा था… लेकिन… इतना मज़ा क्यों आ रहा था…

रौशनी की आँखें अब भी सपने की याद से भारी हुई थी. सुबह होते hi रमेश उठ कर तैयार हो गया. उसने धीरे से रौशनी के गाल पर किश किया और बोलै, “मैं कुछ दोस्तों से मिलने जा रहा हूँ… कुछ काम की बात करनी है. शाम तक आ जाऊंगा.” रौशनी ने सिर्फ सर हिला दिया. वह अभी भी सपने में खोई हुई थी.

रमेश जाते hi रौशनी ने सोचा की आज नदी में नहाने जाना है. गर्मी बढ़ रही थी और वह थक भी गयी थी. उसने सोचा गीता को साथ ले जाए. वह धीरे से बहार निकली और गीता के कमरे की तरफ बढ़ी.

लेकिन जैसे hi वह पीछे वाले कमरे के पास पहुंची, उसकी कदम रुक गए.

गीता और मां जी वहां अकेले थे. गीता मां जी के बिलकुल करीब कड़ी थी. दोनों बातें कर रहे थे — धीमी, गहरी आवाज़ में. मां जी का हाथ गीता की कमर पर था और गीता मुस्कुराते हुए उनके सीने से चिपकी हुई थी. उनकी करीबी देख कर रौशनी के अंदर एक अजीब सा शक पैदा हो गया.

फिर जो हुआ, उसने रौशनी को अंदर तक हिला दिया.

मां जी ने गीता को अपनी बाँहों में खिंच लिया और उसके होठों पर एक गहरा, भूखा चुम्बन कर दिया. गीता ने भी उनके गले में हाथ दाल कर उन्हें और करीब खिंच लिया. दोनों एक दूसरे के होठों में खो गए. मां जी का हाथ गीता की पीठ पर घूम रहा था और गीता की उँगलियाँ उनके सीने के बालों में उलझ गयी थी.

रौशनी की सांस रुक गयी.

पहले **शॉक** — उसके पैरों टेल ज़मीन हिल गयी. उसके मुँह से कोई आवाज़ नहीं निकली. उसके दिल ने ज़ोर से एक ढक्की मारी.

फिर उसके शरीर में एक **तेज़ गर्मी** दौड़ गयी. उसकी बुर में एक हलकी सी नमी महसूस हुई. सपने की याद अब भी उसके दिमाग में थी और अब असल में यह सन देख कर उसका शरीर अपने आप गरम हो रहा था. उसकी चूचियां सख्त हो गयी थी और सांस तेज़ हो गयी थी.

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लेकिन उसके साथ hi उसके अंदर **जेएलओसी** की तेज़ आग भड़क उठी.

*गीता… यह गीता क्यों? मैं यहाँ हूँ… मैं उसकी बहु हूँ… फिर भी वह गीता को अपनी बाँहों में ले रहे हैं? उनके होठ गीता के होठों पर हैं?*

रौशनी के अंदर एक तेज़, कड़वी जेएलओसी उठी. वह चाहती थी की मां जी उसको hi अपनी बाँहों में लेते. वह चाहती थी की उनका गहरा चुम्बन उसके होठों पर हो. गीता को देख कर उसके दिल में एक तेज़ जलन हुई — *मैं उनके इतनी करीब क्यों नहीं हो सकती? मैं उनके लुंड को अपने मुँह में ले चुकी हूँ… फिर भी यह गीता उनके सीने से चिपकी हुई है?*

रौशनी ने जल्दी से पीछे मुद कर अपने कमरे की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया. उसका दिल zor-zor से धड़क रहा था. शरीर गरम था, लेकिन दिल में जेएलओसी और तड़प का अजीब सा मिक्सचर था.

वह सोचने लगी — *मैं चाहती हूँ… मां जी मुझे अपनी बाँहों में लें… उनका चुम्बन मुझे मिले… गीता नहीं… मैं…*

रौशनी रुक गयी. उसकी सांस रुक सी गयी. वह धीरे से पीछे की तरफ हैट कर एक पेड़ के पीछे छुप गयी, लेकिन उसकी नज़र अब भी उन दोनों पर टिक्की हुई थी.

मां जी ने गीता को और करीब खिंच लिया था. दोनों एक दूसरे के होठों में गहरा चुम्बन कर रहे थे. मां जी का एक हाथ गीता की कमर पर था और दूसरा उसकी मोती गांड पर — ज़ोर से दबाते हुए, मसलते हुए. गीता के मुँह से धीमी सिसकारियां निकल रही थी, “उम्म्म… मां जी…”

मां जी ने गीता की गांड को और ज़ोर से पकड़ लिया और उसको अपने सीने से चिपका लिया. उनकी धोती में उनका लुंड का बड़ा, सख्त उभर साफ़ दिख रहा था — वह गीता की जांघों से रगड़ रहा था. गीता की आँखें बंद थी और वह धीरे धीरे मोअन कर रही थी.

रौशनी की आँखें खुली रह गयी. उसका दिल ज़ोर से धड़क रहा था.

पहले **शॉक** था… फिर उसके शरीर में एक तेज़ **गर्मी** दौड़ गयी. उसकी बुर में एक हलकी सी नमी फिर से महसूस हुई. उसके निप्पल्स सख्त हो गए. वह देख रही थी की मां जी गीता की गांड को मसल रहे हैं, उनका लुंड धोती में उभर रहा है और गीता मोअन कर रही है… और उसके अंदर एक अजीब सी **लस्ट** जग उठी.

लेकिन उसके साथ hi **जेएलओसी** ने उसको अंदर से जला दिया.

*गीता… यह गीता क्यों? उनके हाथ उसकी गांड पर हैं… उनका लुंड उसके सीने से रगड़ रहा है… मैं यहाँ हूँ… मैं उनकी बहु हूँ… फिर भी वह मुझे नहीं… गीता को अपनी बाँहों में ले रहे हैं?*

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रौशनी के मुँह से एक हलकी सी सिसकारी निकल आयी, लेकिन उसने जल्दी अपना मुँह हाथ से दबा लिया. वह कुछ पल और छुप कर देख टी रही — मां जी गीता को किश कर रहे थे, उनका हाथ उसकी गांड पर घूम रहा था, और गीता उनके सीने से चिपकी हुई मोअन कर रही थी.

रौशनी के अंदर एक तेज़ तड़प उठी. वह चाहती थी की वह गीता की जगह होती. वह चाहती थी की मां जी उसकी कमर और गांड को ऐसे hi ज़ोर से दबाते, उसके होठों पर ऐसे hi गहरा चुम्बन करते, और उनका सख्त लुंड उसके सीने से रगड़ता.

लेकिन यह देख कर उसके अंदर जेएलओसी और बढ़ गयी. उसकी आँखों में गर्मी आ गयी — न सिर्फ शरीर की, बल्कि दिल की भी.

रौशनी थोड़ी देर तक पेड़ के पीछे छुप कर देख टी रही. उसका दिल जलन और गर्मी दोनों से भर गया था. वह और नहीं सेह पायी. उसने अपना पल्लू ठीक किया, चेहरे पर नार्मल एक्सप्रेशन लाने की कोशिश की और धीरे से आगे बढ़ गयी.

“गीता…” उसने आवाज़ दी, जैसे कुछ नार्मल बात हो.

दोनों झट से अलग हुए. गीता ने जल्दी से अपना चेहरा ठीक किया और मुस्कुराते हुए बोली, “अरे भाभी! आप यहाँ?”

मां जी ने भी धीरे से गीता को छोड़ा, लेकिन उनकी नज़र अब रौशनी पर थी. रौशनी उनकी आँखों में कुछ अलग सी चमक देखि — जैसे उन्होंने उसकी जेएलओसी को पकड़ लिया हो.

रौशनी ने धीरे से कहा, “मैं नदी में नहाने जा रही थी… गीता को साथ ले जाने सोचा था. आप दोनों यहाँ क्या कर रहे हो?”

मां जी मुस्कुराये. उन्होंने धीरे से अपना हाथ गीता की कमर पर रख दिया और उसको अपनी तरफ खिंच लिया — बिलकुल करीब. गीता उनके सीने से लग गयी. मां जी ने रौशनी से बात करते हुए भी गीता की कमर को धीरे से पकड़ रखा था.

“अरे बहु …” मां जी आवाज़ में कहा, “हम दोनों बात कर रहे थे… कुछ पुराणी बातें. गीता को कुछ काम था इसलिए यहाँ बुला लिया था.”

रौशनी ने देखा की मां जी का हाथ अब भी गीता की कमर पर था और उन्होंने उसको और थोड़ा करीब खिंच लिया. गीता शर्मा कर मुस्कुरायी. रौशनी के अंदर जेएलओसी की आग फिर से भड़क उठी.

मां जी ने रौशनी की तरफ देखते हुए धीरे से कहा, “तू भी आ जाती तोह बात और अच्छी हो जाती… लेकिन तू तोह सुबह से hi बिजी थी न?”

रौशनी ने उनकी आँखों में देखा. उनकी नज़र में एक तेज़ी थी — जैसे वह jaan-bujh कर उसकी जेएलओसी को बढ़ा रहे हों. उन्होंने गीता को अपनी कमर से और चिपका लिया और रौशनी से बात करते रहे, जैसे कुछ हुआ hi न हो.

रौशनी के अंदर गर्मी और जलन दोनों बढ़ गयी. वह चाहती थी की वह गीता की जगह होती — मां जी के हाथ उसकी कमर पर होते, वह उनके सीने से चिपकी होती.

लेकिन वह कुछ बोल नहीं पायी. सिर्फ धीरे से बोली, “मैं… नदी जा रही थी. अगर गीता आये तोह साथ चलती.”

मां जी ने मुस्कुराते हुए कहा, “जा, नाहा ले बहु. गीता थोड़ी देर बाद आएगी… अभी कुछ बात बाकी है.”

रौशनी ने उन दोनों को देखा. मां जी अब भी गीता को अपनी कमर से चिपकाये हुए थे. उसकी जेएलओसी और बढ़ गयी.

ोषनी के सामने मां जी का हाथ अब भी गीता की कमर पर था. गीता का चेहरा लाल हो गया था. वह शर्मा गयी थी. मां जी के हाथ की गर्मी उसकी कमर पर महसूस हो रही थी और वह धीरे से अपनी कमर को पीछे की तरफ हटाने की कोशिश करने लगी.

गीता धीरे से बोली, “मां जी… छोड़िये न… भाभी यहीं कड़ी हैं…”

मां जी ने मुस्कुराते हुए उसको थोड़ा और करीब खिंच लिया, लेकिन गीता ने हिम्मत करके उनके हाथ को धीरे से अपनी कमर से हटाया और एक कदम पीछे हैट गयी. उसका चेहरा अब भी लाल था.

गीता ने रौशनी की तरफ देखते हुए कहा, “भाभी… आप रुकिए न. मैं भी आती हूँ आपके साथ नदी. बस दो मिनट लगेगा… कपडे और टॉवल ले आती हूँ.”

रौशनी ने सर हिला दिया. गीता जल्दी से अंदर चली गयी कपडे लेने. मां जी अब भी वहां खड़े थे. उन्होंने रौशनी की तरफ देखा और धीरे से कहा, “बहु… तू भी नहाने जा रही है? गीता के साथ जा… मैं यहीं बात कर रहा था इससे.”

रौशनी ने कुछ नहीं कहा, सिर्फ उनकी तरफ देखती रही. उसकी आँखों में अब भी हलकी सी जलन थी.

कुछ देर बाद गीता कपडे और दो टॉवेल्स ले कर बहार आ गयी. दोनों लड़कियां नदी की तरफ चल पड़ी. रास्ता थोड़ा सुनसान था. गीता अब भी थोड़ी शर्मा रही थी, लेकिन रौशनी के साथ chalte-chalte धीरे धीरे नार्मल होने लगी.

रौशनी ने थोड़ी देर बाद धीरे से पुछा, “गीता… तुम मां जी के इतने करीब क्यों थी? और वह… वह तुम्हे ऐसे क्यों पकड़ रहे थे?”

गीता रुक गयी. उसका चेहरा फिर से हल्का लाल हो गया. वह कुछ देर चुप रही, फिर धीरे से बोली,

“भाभी… आप मॉडर्न हो इसलिए मैं आपको सच बता देती हूँ. मैं… मां जी को पसंद करती हूँ. वह मुझे बहुत अच्छे लगते हैं. पहले से hi उनकी तरफ मेरा दिल खींचता था… और धीरे धीरे… हम दोनों में यह बात चल पड़ी. वह मुझे अपनी बाँहों में लेते हैं, मुझे किश करते हैं… मैं भी उनके करीब रहना चाहती हूँ.”

गीता ने रौशनी की तरफ देखा और धीरे से कहा, “आपको बुरा तोह नहीं लगा न भाभी? मैं आपको पसंद करती हूँ. आप बहुत मॉडर्न हो… आप जैसे भाभी हो तोह मैं आपकी दोस्त बनना चाहती हूँ. आपको कुछ भी छुपाना नहीं चाहती.”

रौशनी चुप रही. ऊके अंदर alag-alag फीलिंग्स आ रही थी — जेएलओसी की वजह से गीता के साथ थोड़ी जलन, लेकिन साथ hi गीता की सीढ़ी बात ने उसको थोड़ा चमका भी दिया.

गीता ने धीरे से कहा, “आप भी… अगर चाहें तोह हम दोनों बात कर सकते हैं. मैं आपको सब बताउंगी… और आप भी मुझे बताइयेगा अगर कुछ हो तोह.”

**तो बे कॉन्टिनोएड...**

रौशनी और गीता नदी की तरफ चलते हुए थोड़ी देर चुप रही. फिर रौशनी ने धीरे से पुछा, “गीता… मां जी के बारे में कुछ और बता. उनका पास्ट कैसा रहा है? उनकी बीवी… मतलब रमेश जी की मम्मी के बाद उनका क्या हुआ?”

गीता थोड़ी सी शर्मा गयी, लेकिन फिर धीरे से बोलने लगी,

“भाभी… मां जी की बीवी (रमेश जी की मम्मी) बहुत साल पहले चल बसी थी. उसके बाद मां जी बहुत बदल गए. पहले वह बहुत सीरियस और गुस्से वाले थे, लेकिन धीरे धीरे वह और खुल गए. गाओं में उनकी इज़्ज़त बहुत है इसलिए लोग कुछ नहीं कहते, लेकिन… उनके बारे में कुछ बातें छुपी नहीं हैं.”

गीता ने एक गहरी सांस ली और आगे बोली,

“उन्होंने do-tin औरतों के साथ रिश्ते बनाये थे… एक विधवा थी गाओं की, उसके साथ काफी टाइम तक चल रहा था. फिर एक shaadi-shuda औरत के साथ भी उनका चक्कर चला था… लेकिन वह बहुत छुपा के रखा गया था. मां जी को छोटी उम्र की लड़कियां पसंद हैं. वह कहते हैं की उनमें ज़िन्दगी होती है, वह उनको खुश कर सकती हैं. इसलिए जब मैं यहाँ आयी थी न… धीरे धीरे उनकी नज़र मुझ पर पड़ने लगी. पहले सिर्फ बातें होती थी… फिर धीरे धीरे वह मुझे अपनी बाँहों में लेने लगे. मैं भी उनकी तरफ खींचती चली गयी.”

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रौशनी chup-chap सुन रही थी. उसका दिल तेज़ धड़क रहा था.

गीता ने धीरे से कहा, “मां जी बहुत एक्सपीरियंस वाले हैं भाभी. वह जानते हैं की औरत को क्या पसंद आता है. उनके हाथ… उनकी बातें… सब कुछ अलग है. वह कभी ज़ोर से पकड़ते हैं, कभी धीरे से प्यार करते हैं. और उनकी आवाज़… जब वह हरयाणवी में कुछ कहते हैं न… दिल हिल जाता है.”

रौशनी के मुँह से निकला, “तोह… तुम्हे उनके साथ दर नहीं लगता? इतने बड़े उम्र के आदमी…”

गीता मुस्कुरायी और बोली, “दर तोह लगता है… लेकिन उसके साथ मज़ा भी बहुत आता है. वह मुझे अपनी प्रॉपर्टी जैसा फील करवाते हैं. जैसे मैं उनकी हूँ. और यह फीलिंग मुझे पसंद है.”

गीता ने रौशनी की तरफ देखा और धीरे से कहा, “आप भी उनके बारे में सोचती हैं न भाभी? मैं देख सकती हूँ आपकी आँखों में. अगर आप चाहें तोह मैं आपको और बता सकती हूँ… उनके पुराने वक़्त की बातें, वह कैसे औरतों को अपनी तरफ खींचते थे… सब कुछ.”

रौशनी के चेहरे पर लाली आ गयी. उसको समझ नहीं आ रहा था की वह क्या बोले.

गीता ने धीरे से कहा, “मैं आपकी दोस्त बनना चाहती हूँ भाभी. आप मॉडर्न हो… आप मुझे समझ सकती हैं. अगर आप भी मां जी के बारे में सोचती हैं तोह… मैं आपको कुछ नहीं रोकूंगी.”

रौशनी थोड़ी देर चुप रही. गीता की बातें सुन कर उसके अंदर कुछ हलचल मच रही थी. वह धीरे से बोली,

“गीता… मैं भी कुछ सोच रही हूँ… लेकिन यह सब बहुत उलझा हुआ है.”

गीता ने उसकी तरफ देखा और धीरे से कहा, “बोलो भाभी… मैं सुन रही हूँ. मैं किसी से नहीं बताउंगी.”

रौशनी ने अपना पल्लू थोड़ा टाइट किया और धीरे से शुरू किया,

“पहले तोह मैं सोचती थी की मां जी सिर्फ एक बुज़ुर्ग हैं… रमेश जी के पापा जैसा. लेकिन धीरे धीरे… जब वह बात करते हैं, जब वह मुझे देख के मुस्कुराते हैं… कुछ अलग सा फील होता है. उनकी आवाज़ में एक अजीब सी ताकत है. जब वह मुझे ‘बहु’ बोलते हैं न… दिल में कुछ होता है. और जब वह किसी और लड़की के करीब होते हैं… जैसे अभी तुम्हारे साथ… तोह मुझे बुरा लगता है. बहुत बुरा.”

गीता chup-chap सुन रही थी.

रौशनी ने आगे कहा, “मैं जानती हूँ यह गलत है. मैं रमेश जी की बीवी हूँ. उनके लिए मुझे सिर्फ उन्ही के बारे में सोचना चाहिए… लेकिन फिर भी दिमाग में मां जी के बारे में ख्याल आते रहते हैं. उनका सीना… उनकी बातें… उनकी नज़र… सब कुछ. जब वह मुझे करीब से बात करते हैं तोह मेरा दिल तेज़ धड़कने लगता है. और जब मैं उनको किसी और के साथ देखती हूँ… जैसे अभी तुम्हारे साथ… तोह अंदर से जलती हूँ. मैं चाहती हूँ की वह सिर्फ मुझ पर ध्यान दें… लेकिन यह सोचना भी गलत है न?”

गीता धीरे से मुस्कुरायी और बोली, “भाभी… यह नार्मल है. आपको शर्म आ रही होगी इसलिए आप रोक रही हैं. लेकिन मैं समझ सकती हूँ. मां जी ऐसे hi हैं… उनकी पर्सनालिटी ऐसी है की लड़कियां उनकी तरफ खींचती हैं. आप भी खींच रही हैं न?”

रौशनी ने सर झुका लिया और धीरे से कहा,

“हाँ… खींच रही हूँ. लेकिन मैं कुछ नहीं कर सकती. मैं रमेश जी की बीवी हूँ. फिर भी… जब मां जी मुझे देखते हैं… लगता है जैसे वह मुझे अपनी तरफ खिंच रहे हैं. और मैं… मैं रोक नहीं पा रही खुद को. यह सब बहुत उलझा हुआ है गीता.”

गीता ने रौशनी का हाथ पकड़ लिया और धीरे से कहा,

“भाभी… आप टेंशन मत लीजिये. मैं आपकी दोस्त बन सकती हूँ इसमें. आप जो भी फील करती हैं… मुझे बता सकती हैं. मैं किसी से नहीं कहूँगी. और हाँ… मां जी आपको भी पसंद करते हैं. मैं देख सकती हूँ उनकी नज़र आप पर कैसे रहती है.”

रौशनी ने गीता की तरफ देखा. उसको थोड़ा सा सुकून मिला की काम से काम किसी से बात कर पायी, लेकिन साथ hi उसके दिल में अब भी कन्फूसिओं और गिल्ट दोनों थे.

रौशनी और गीता दोनों नदी से नाहा कर वापस घर आये. गीता ने कपडे बदले और अपनी कुछ सहेलियों के साथ बहार जाने का प्लान बना लिया. उसने रौशनी से कहा, “भाभी, मैं थोड़ी देर के लिए बहार जा रही हूँ सहेलियों के साथ. आप आराम कीजिये.” रौशनी ने सर हिला दिया.

गीता जाते hi घर में अब सिर्फ मां जी और रौशनी hi रह गए थे.

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रौशनी अपने कमरे में कपडे बदल रही थी जब मां जी अंदर आ गए. उन्होंने दरवाज़ा धीरे से बंद किया और रौशनी की तरफ बढे. रौशनी ने उनको देखा और थोड़ी सी शर्मा गयी.

मां जी ने बिना कुछ बोले उसको अपनी बाँहों में खिंच लिया. उन्होंने उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर ज़ोर से स्क्वीज़ किया. रौशनी के मुँह से एक हलकी सी सिसकारी निकल आयी, “उम्…”

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मां जी ने उसको और करीब खिंच लिया. अब दोनों के सीने एक दूसरे से लग रहे थे. उन्होंने अपना मुँह उसके होठों के बिलकुल करीब ले आये और धीरे से कहा,

“अरे बहु रे… आज तू बहुत सुन्दर लग रही है. तेरी यह कमर इतनी पतली और नरम है… हाथ लगते hi मन नहीं भर रहा.”

रौशनी की सांस तेज़ हो गयी. वह कुछ बोल नहीं पा रही थी. मां जी ने उसकी कमर को और ज़ोर से दबाया और उसके होठों पर अपना मुँह रख दिया. दोनों के बीच एक गहरा, रास भरा चुम्बन हो गया. मां जी ने उसके होठों को ज़ोर से चूसा और अपनी जीभ उसके मुँह में दाल दी.

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साथ hi उनका एक हाथ नीचे चला गया और उसकी मोती चूतड़ को ज़ोर से पकड़ कर दबाने लगा. रौशनी के मुँह से किश के बीच से एक और मदहोश सिसकारी निकली.

मां जी ने उसके होठों को चूसते हुए धीरे से कहा,

“तेरी यह गांड भी कितनी भारी और मुलायम है बहु… हाथ में आती hi नहीं… और यह चूचियां… इतनी बड़ी और उभरी हुई… बिलकुल दूध जैसी. आज तू बहुत मस्त लग रही है रे…”

रौशनी के शरीर में एक तेज़ गरम लहार दौड़ रही थी. वह मां जी के सीने से चिपकी हुई थी और उनके गहरे चुम्बन का जवाब दे रही थी. मां जी उसकी चूतड़ को मसलते हुए और उसके होठों को चूसते रहे.

दोनों के बीच अब कोई दूरी नहीं रही थी. सिर्फ गहरा, गर्म और रास भरा चुम्बन चल रहा था.

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मां जी ने रौशनी के होठों को अपनी उँगलियों से दबाते हुए ...

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“अरे बहु रे… आज मैं तुझे एक और खेत दिखाता हूँ. वहां कोई नहीं जाता… बहुत सुनसान जगह है.”

रौशनी की बुर अभी भी गीली थी. उसकी सांसें तेज़ चल रही थी. उसका दिमाग लस्ट से भरा हुआ था. वह कुछ बोल नहीं पा रही थी, सिर्फ धीरे से सर हिला दिया — हाँ में.

मां जी मुस्कुराये और उसके गाल पर एक हल्का सा चुम्मा देकर बहार चले गए.

रौशनी जल्दी से अपने कमरे में गयी. उसको पता था की आज कुछ अलग होने वाला है. उसने एक मस्त सेक्सी पीच कलर की साड़ी निकली — वही जो गीता ने उसको दी थी. साड़ी बहुत पतली और ट्रांसपेरेंट थी. उसने अंदर एक ब्लैक नेट ब्लाउज पहना जो बहुत टाइट था. ब्लाउज की गहरी नेकलिने से उसकी badi-badi चूचियों का गहरा क्लीवेज साफ़ दिख रहा था. ब्लाउज के नीचे से उसके निप्पल्स का उभर भी हल्का सा दिखाई दे रहा था.

उसने साड़ी को बहुत नीचे पेटीकोट के ऊपर बाँधा, जिससे उसकी पतली कमर और गहरी नाभि साफ़ दिख रही थी. पल्लू को उसने एक तरफ से डाला था, लेकिन इतना लूसेली की उसकी एक कुछ का उभर और क्लीवेज क्लेअर्ल्य दिखाई दे रहा था.

फिर उसने मेकअप किया —

  • डीप रेड ग्लॉसी लिपस्टिक लगायी, जो उसके होठों को और भी जूसी दिखा रही थी.
  • हैवी काजल और थोड़ा स्मोकी ेयेशादौ डाला, जिससे उसकी आँखें और बड़ी और सेडक्टिव लग रही थी.
  • गालों पर हल्का सा ब्लश और थोड़ा हाइलाइटर लगाया.
  • बाल को खोल कर हलके वेव्स दिए, जो उसकी पीठ पर गिर रहे थे.
  • थोड़ी सी महक वाली बॉडी मिस्ट भी लगा ली.

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अब वह बिलकुल जवान, गरम और सेक्सी लग रही थी — जैसे कोई shaadi-shuda औरत अपने पति के लिए नहीं, बल्कि किसी और के लिए तैयार हो रही हो.

मां जी बहार इंतज़ार कर रहे थे. जैसे hi रौशनी बहार आयी, उनकी नज़र उसपर अटक गयी. उन्होंने धीरे से कहा,

“अरे वह बहु… आज तू बहुत hi मस्त लग रही है. चल, अब चलते हैं उस खेत की तरफ.”

रौशनी ने सर झुका लिया, लेकिन उसके चेहरे पर हलकी सी लाली थी. दोनों घर से निकल कर उस सुनसान खेत की तरफ चल पड़े. रास्ता थोड़ा लम्बा और सुनसान था. रौशनी की हर कदम के साथ उसकी साड़ी की लहरें उसकी जांघों से टकरा रही थी और उसकी बुर अब भी हलकी सी गीली थी.

रास्ता थोड़ा लम्बा और सुनसान था. मां जी ने धीरे से रौशनी को अपनी तरफ खिंच लिया. अब दोनों बिलकुल करीब चल रहे थे. मां जी का एक हाथ उसकी कमर पर था और दूसरा कभी उसकी मोती चूतड़ों पर चला जाता. वह धीरे से उसकी गांड को सहलाता और कभी ज़ोर से दबाता. रौशनी के मुँह से हलकी सी सिसकारी निकल आती,

“उम्… मां जी…”

मां जी ने उसकी कमर को भी ज़ोर से स्क्वीज़ किया और धीरे से उससे गर्मी भरी बातें करने लगे,

“अरे बहु रे… तेरी यह moti-moti गांड कितनी मस्त है… हाथ लगते hi मन नहीं भर रहा. आज तू इतनी सेक्सी साड़ी पेहेन के आयी है न… तेरी यह पतली कमर और भारी गांड देख के मेरा लुंड खड़ा हो रहा है रे…”

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रौशनी का चेहरा लाल हो गया था. वह शर्मा रही थी, लेकिन उसने अपना सर धीरे से मां जी के कंधे पर रख दिया. उसकी सांस तेज़ चल रही थी. वह उनके बिलकुल करीब चल रही थी, जैसे उनके सीने से चिपकी हुई हो.

मां जी ने उसकी गांड को फिर से ज़ोर से दबाया और कहा,

“तेरी यह गांड देख के दिल करता है की तुझे यहीं खेत में लेता के तेरी साड़ी ऊपर कर दूँ… और तेरा लुंड तेरी बुर में घुसा दूँ. कितनी गीली होती होगी तेरी बुर आज… हाँ न बहु?”

रौशनी के मुँह से एक और धीमी सिसकारी निकली. उसका सर अब भी मां जी के कंधे पर टिका हुआ था. वह कुछ बोल नहीं पा रही थी, सिर्फ उनके हर अश्लील शब्द सुन रही थी और उसकी बुर और भी गीली हो रही थी.

मां जी ने उसकी कमर को और कास कर पकड़ लिया और धीरे से कहा,

“अरे वह रे… तेरी कमर भी कितनी नरम और पतली है. हाथ फेरते hi दिल करता है की तुझे अपनी बाँहों में उठा के ले जॉन. आज तू बहुत hi मस्त लग रही है बहु… बिलकुल जवान और गरम.”

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रौशनी ने धीरे से अपना सर उनके कंधे पर और दबा दिया. उसका शरीर गरम हो रहा था. मां जी की हर बात और हर टच उसके अंदर की आग को और भड़का रही थी.

दोनों अब उस सुनसान खेत की तरफ बढ़ रहे थे, बिलकुल करीब… मां जी के हाथ उसकी कमर और गांड पर घूम रहे थे, और उनकी अश्लील बातें रौशनी के कानों में गूँज रही थी.

रस्ते में मां जी के हाथ अब रुकने का नाम नहीं ले रहे थे. उन्होंने धीरे से अपना हाथ रौशनी के ब्लाउज के अंदर दाल दिया. उनकी उँगलियाँ उसकी ब्रा के ऊपर से उसकी चूचियों को सहलाने लगी. फिर उन्होंने ब्रा के अंदर हाथ दाल कर उसके निप्पल्स को उँगलियों से छेड़ना शुरू कर दिया. रौशनी के मुँह से लगातार धीमी सिसकारियां निकल रही थी,

“आह्हः… उम्म्म… मां जी…”

मां जी ने उसकी कमर को और कास कर पकड़ रखा था. थोड़ी देर बाद उनका दूसरा हाथ नीचे चला गया. उसने साड़ी के अंदर हाथ दाल कर उसकी मोती गांड को ज़ोर से पकड़ लिया और मसलने लगा. उनकी उँगलियाँ उसकी गांड के बीच तक पहुँच रही थी. रौशनी अब सिर्फ मोअन कर रही थी, कुछ बोल नहीं पा रही थी. उसका शरीर गरम हो चूका था.

दोनों धीरे धीरे उस पुराने पंप हाउस के पास पहुँच गए. यह जगह बिलकुल सुनसान थी. मां जी ने रौशनी को अंदर खिंच लिया और दरवाज़ा बंद कर दिया. जैसे hi अंदर पहुंचे, उन्होंने रौशनी को अपनी बाँहों में ज़ोर से खिंच लिया और उसके होठों पर अपना मुँह रख दिया.

एक गहरा, भूखा और रास भरा चुम्बन हो गया. रौशनी अब पूरी तरह से किश में खो चुकी थी. उसकी जीभ मां जी की जीभ से लिपट गयी. वह उनके गले में हाथ दाल कर उन्हें और करीब खिंच रही थी.

मां जी के हाथ अब भी उसकी गांड को मसल रहे थे. रौशनी ने धीरे से अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उनकी धोती के ऊपर से उनका लुंड पकड़ लिया. उसका लुंड बहुत सख्त और गरम था. रौशनी ने महसूस किया की यह रमेश के लुंड जितना लम्बा नहीं था, लेकिन उससे काफी मोटा था. उसकी उँगलियाँ उसके लुंड को पकड़ नहीं पा रही थी पूरी तरह से.

रौशनी के दिमाग में एक ख्याल आया — उफ्फ्फ्फ़… यह तोह रमेश जी से भी मोटा है…

मां जी ने उसके होठों को चूसते हुए धीरे से कहा,

“अरे बहु… तेरा हाथ लग गया न… पसंद आया तुझे?”

रौशनी ने सिर्फ एक और गहरी सिसकारी भरी और उनके लुंड को और ज़ोर से पकड़ लिया. दोनों अब एक दूसरे के होठों में खोए हुए थे. पंप हाउस के अंदर सिर्फ उनकी सांसें और चुम्बन की आवाज़ गूँज रही थी.

पंप हाउस के अंदर का माहौल बिलकुल अलग था. यह जगह बहुत पुराणी थी. अंदर हल्का सा अँधेरा छाया हुआ था. Chhote-chhote जंगलों वाले झरोखों से बहार की रौशनी अंदर आती थी, जिससे पूरा कमरा एक धीमी, सुनहरी रौशनी में नाहा रहा था. हवा में पुराने लकड़ी, जंग और थोड़ी सी नमी की खुशबू थी.

कोने में एक पुराण पंप मशीन पड़ा हुआ था, जिसके ऊपर धुल की मोती लेयर जैम चुकी थी. ज़मीन पर भी jagah-jagah धुल और पुराने पानी के निशाँ थे. पंप हाउस के अंदर की हवा थोड़ी सी भरी और गरम थी, जैसे बहार की गर्मी अंदर आ कर फँस गयी हो.

लेकिन सबसे बड़ी बात यह थी की यह जगह बिलकुल सुनसान थी. कोई aata-jaata नहीं था. सिर्फ रौशनी और मां जी की सांसें, उनके होठों के चुम्बन की हलकी सी आवाज़ और kabhi-kabhi बहार से पेड़ों की पत्तियों की हलकी सी सरसराहट सुनाई दे रही थी.

रौशनी अब भी मां जी के सीने से चिपकी हुई थी. उसका चेहरा उनके गले में दबा हुआ था. मां जी के हाथ अब भी उसकी गांड को मसल रहे थे. पंप हाउस के अंदर की धीमी रौशनी उनके चेहरों पर पद रही थी. रौशनी के होठ अब भी गीले थे उनके चुम्बन से.

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यह जगह उन दोनों के लिए बिलकुल परफेक्ट थी — न कोई देखने वाला, न कोई आने वाला. सिर्फ उनकी गरम सांसें, उनका गहरा चुम्बन और मां जी के हाथ रौशनी के बदन पर घूम रहे थे. पंप हाउस के पुराने, भरे हुए माहौल ने उन दोनों के इस फोर्बिडन मिलान को और भी गहरा और गुप्त बना दिया था.
 
पंप हाउस के अंदर की धीमी रौशनी में दोनों एक दूसरे से चिपके हुए थे. मां जी ने रौशनी को दिवार से सत्ता कर उसके होठों पर अपना मुँह रख दिया और एक गहरा, भूखा किश शुरू कर दिया. उनकी जीभ उसके मुँह में घुस गयी और dheere-dheere उसके मुँह के हर हिस्से को एक्स्प्लोर करने लगी. रौशनी भी अपनी जीभ उनकी जीभ से मिला कर उनका पूरा मुँह चूसने लगी. दोनों की जीभें एक दूसरे के मुँह में घूम रही थी, थूक मिल रही थी और किश इतना गहरा था की दोनों की सांसें एक दूसरे के मुँह में hi जा रही थी.

मां जी के हाथ अब पूरी तरह से रौशनी के बदन पर घूम रहे थे. एक हाथ उसकी स्मूथ, गोरी और नंगी पीठ पर फिर रहा था — ऊपर से नीचे तक, धीरे से सहलाता हुआ. दूसरा हाथ नीचे चला गया और उसकी बड़ी, मोती चूतड़ को ज़ोर से पकड़ लिया. उन्होंने उसकी गांड को इतनी ज़ोर से दबाया की रौशनी के मुँह से किश के बीच से एक हलकी सी सिसकारी निकल आयी — “उम्म्म…”

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लेकिन रौशनी ने किश नहीं तोडा. वह अब भी मां जी के होठों को ज़ोर से चूस रही थी. उसकी जीभ उनकी जीभ से लिपट रही थी. मां जी ने उसकी दोनों चूतड़ों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर और ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया. उनकी उँगलियाँ उसकी गांड के अंदर तक पहुँच रही थी और वह dheere-dheere उसको अपनी तरफ खिंच रहे थे.

रौशनी के शरीर में एक तेज़ गरम लहार दौड़ रही थी. उसकी आँखें बंद थी और वह पूरी तरह से किश में खो चुकी थी. किश इतना गहरा और गन्दा हो गया था की दोनों की थूक एक दूसरे के होठों पर चमक रही थी.

रौशनी ने अपना एक हाथ धीरे से नीचे ले जाकर मां जी की धोती के ऊपर से उनके लुंड को पकड़ लिया. उसका लुंड बहुत सख्त और गरम था. उसने उसको dheere-dheere सहलाना और रगड़ना शुरू कर दिया. उसकी उँगलियाँ उसके मोटा लुंड को upar-neeche कर रही थी. मां जी के लुंड का उभर उसके हाथ में साफ़ महसूस हो रहा था.

मां जी ने उसकी गांड को और ज़ोर से दबाया और उसके मुँह में hi एक गहरी सिसकारी भरी. दोनों अब एक दूसरे के होठों में, जीभ से जीभ से, हाथ से बदन से, पूरी तरह से लिपटे हुए थे. पंप हाउस के अंदर सिर्फ उनकी सांसें और चुम्बन की गीली आवाज़ गूँज रही थी.

रौशनी ने मां जी के लुंड को धोती के ऊपर से hi zor-zor से रगड़ना शुरू कर दिया. उसकी उँगलियाँ upar-neeche हो रही थी, धीरे धीरे ज़ोर बढाती जा रही थी. मां जी के मुँह से एक गहरी सिसकारी निकली जो रौशनी के मुँह में hi चली गयी.

मां जी ने उसके होठों को चूसते हुए धीरे से कहा,

“उफ्फ्फ… हाँ बहु रे… ज़ोर से रगड़… बिलकुल ज़ोर से… जैसे अपना जिन निकालने के लिए रगड़ रही हो… यह बड़ा और मोटा है रे… और बहुत hi दोस्ताना भी है…”

फिर वह हल्का सा हंस पड़े, लेकिन उनका हाथ अब भी उसकी मोती गांड को ज़ोर से मसल रहा था. उन्होंने उसकी गांड को और कास कर पकड़ लिया और धीरे से कहा,

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“Arre wah re… kitne pyar se ragad rahi hai tu… lagta hai tera haath bhi mera lund pasand kar raha hai… zor se kar… aur zor se…”

Roshni ke muh se kiss ke beech se ek aur madhosh siskari nikli. Uska haath ab bhi Mama ji ke lund ko zor-zor se ragad raha tha. Uska lund dhoti ke andar aur bhi sakht hota ja raha tha. Roshni ko clearly mehsoos ho raha tha ki yeh Ramesh ke lund se kaafi mota hai.

Mama ji ne uski peeth par haath ghumate hue aur gehra kiss kiya. Unki jeebh uske muh mein ghum rahi thi aur woh dheere dheere uski gaand ko masalte hue bolte rahe,

“Haan… aise hi… ragad zor se… tera haath bahut achha lag raha hai re bahu… ab toh yeh lund tera ho gaya lag raha hai…”

Roshni ab poori tarah se unke kiss aur unke lund ko ragadne mein kho chuki thi. Uska sharir garam ho raha tha aur uske muh se lagatar halki siskariyan nikal rahi thi.

Pump house ke andar ki dheemi roshni mein dono ek dusre se chipke hue the. Roshni ke liye har ehsaas ab bahut tez aur gehra ho gaya tha.

Mama ji ke hoth uske hothon par zor se dab rahe the. Unki jeebh uske muh mein ghum rahi thi — garam, geeli aur bhookhi. Roshni ko apni jeebh par unki jeebh ki garmi aur thook ki geelapan saaf mehsoos ho raha tha. Unka saans uske muh mein aa raha tha — thoda garam aur tez.

Mama ji ke dono haath uske badan par ghum rahe the. Uski peeth par unke haath ki khurkhuri aur garmi uski nangi, mulayam skin par ragad rahi thi. Jab woh uski peeth ko neeche ki taraf sehlाते hue uski gaand tak pahunchte, toh Roshni ke sharir mein ek halki si siharan daud jaati thi.

Lekin sabse tez ehsaas uski **moti gaand** par tha. Mama ji uski dono chutadon ko apne bade, garam haathon se pakad kar zor se daba rahe the. Unki ungliyan uski gaand ke andar tak dab rahi thi, jaise woh usko apni taraf aur kheenchna chahte hon. Har baar jab woh zor se dabate, Roshni ke muh se ek halki si siskari nikalti — jo unke muh mein hi chali jaati thi. Usko apni gaand mein unki ungliyon ka dabav aur garmi dono mehsoos ho rahi thi.

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नीचे, रौशनी का अपना हाथ मां जी के लुंड पर था. धोती के ऊपर से भी उसको उसका मोटा, सख्त और गरम लुंड साफ़ महसूस हो रहा था. जब वह उसको ज़ोर से रगड़ती, तोह उसके हाथों में उसका लुंड फड़कने जैसा एहसास होता. यह लुंड रमेश के जितना लम्बा नहीं था, लेकिन उससे काफी **मोटा** था — इसलिए उसके हाथ में पूरा नहीं आ रहा था. उसको उसकी गर्मी और सख्ताई दोनों हाथों में महसूस हो रही थी.

रौशनी के अपने शरीर में भी बहुत कुछ चल रहा था. उसकी चूचियां मां जी के सीने से रगड़ रही थी और उनके निप्पल्स सख्त हो चुके थे. उसकी बुर गीली हो चुकी थी और पंतय के अंदर हलकी सी नमी महसूस हो रही थी. हर बार जब मां जी उसकी गांड को दबाते, उसकी बुर में एक हलकी सी झनझनाहट होती.

मां जी के लिए भी एहसास तेज़ थे. उनको रौशनी की मुलायम पीठ, उसकी भारी और नरम गांड, और उसके होठों की गीलापन सब कुछ एक साथ महसूस हो रहा था. उनका लुंड उसके हाथ में रगड़ते हुए और भी सख्त होता जा रहा था.

दोनों अब एक दूसरे के बदन की गर्मी, गीलापन और दबाव में पूरी तरह से खो चुके थे.

रौशनी की आँखें बंद थी. मां जी ने उसके चेहरे को दोनों हाथों में पकड़ लिया और धीरे से उसके गाल पर अपनी जीभ फेरने लगे. पहले एक गाल, फिर दूसरा गाल, फिर उसके माथे पर, फिर उसकी थोड़ी पर. उनकी जीभ गरम और गीली थी.

फिर वह उसके होठों पर आये और उनको भी चाटने लगे. रौशनी के मुँह से हलकी सिसकारी निकल रही थी. मां जी ने उसके कान को भी अपनी जीभ से चाट लिया.

लेकिन फिर उनकी जीभ उसकी नाक के पास ले गयी और धीरे से उसके नाक के छेड़ में दाल दी.

रौशनी के मुँह से एक ज़ोर की सिसकारी निकली, “उफ़ मां जी… नाक के अंदर मत… उफ़… आप बहुत बेशरम हो… ममहह…”

मां जी ने उसकी नाक के अंदर जीभ घुमाई और फिर वापस उसके गाल पर आ गए. वह धीरे से उसके कान के पास मुँह ले आये और कहा,

“तू सबसे सुन्दर और सेक्सी औरत है जो मैंने अब तक देखि है रे बहु. तेरा हर हिस्सा अलग है. मैं तेरा पूरा बदन चखना चाहता हूँ… हर एक हिस्सा… हर एक जगह अपनी जीभ घूमना चाहता हूँ.”

रौशनी का शरीर काँप रहा था. उसका चेहरा अब भी मां जी के हाथों में था और उनकी जीभ उसके चेहरे पर घूम रही थी. उसकी सांस तेज़ हो गयी थी.

मां जी ने उसके गाल को अपनी जीभ से छत्ते हुए धीरे से कहा,

“तेरा चेहरा इतना नरम और मुलायम है… मैं इसको ऐसे hi पूरा दिन छत्ता रहूं तोह भी दिल नहीं भरता.”

रौशनी के मुँह से एक और धीमी सिसकारी निकली, लेकिन उसने किश नहीं तोडा. वह अब भी उनके सीने से चिपकी हुई थी.

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रौशनी की आँखें बंद थी. मां जी ने उसको धीरे से घुमा दिया. अब उसकी पीठ उनके सामने थी. उन्होंने अपनी जीभ उसकी नंगी पीठ पर रख दी और धीरे से ऊपर से नीचे तक चाटने लगे.

उनकी जीभ गीली और गरम थी. वह उसकी पीठ पर गीले और स्लॉपी चुम्बन दे रहे थे. उनकी जीभ उसकी मुलायम स्किन पर घूम रही थी और पीठ पर गीला निशान छोड़ती जा रही थी. रौशनी के मुँह से हलकी सिसकारियां निकल रही थी लेकिन उसने मन नहीं किया.

मां जी ने उसकी पूरी पीठ को अपनी जीभ से गीला कर दिया. उनकी थूक की गीली लकीर उसकी पीठ पर चमक रही थी. वह उसकी पीठ को छत्ते हुए नीचे की तरफ बढ़ रहे थे. रौशनी का शरीर काँप रहा था. उसकी बुर और भी गीली हो गयी थी और पंतय के अंदर से हलकी सी पानी की नमी निकलने लगी थी.

रौशनी के दिमाग में एक ख्याल आया — मैं कभी नहीं सोच सकती थी की मैं किसी और बुड्ढे के इतनी करीब आ जाउंगी… और वह भी रमेश जी के मां जी… लेकिन अब उनकी जीभ मेरी पीठ पर घूम रही है और मुझे और भी गर्मी आ रही है…

मां जी ने उसकी पीठ को पूरी तरह गीला कर दिया. उनकी जीभ उसकी नंगी स्किन पर रगड़ रही थी और गीले चुम्बन देते हुए नीचे की तरफ बढ़ रहे थे. रौशनी के मुँह से धीमी सिसकारियां निकल रही थी. उसका बदन गरम हो चूका था और वह उनके हर टच का इंतज़ार कर रही थी.

मां जी ने उसकी पीठ को छत्ते हुए धीरे से कहा, “तेरी यह पीठ इतनी नरम और मुलायम है बहु… मैं इसको ऐसे hi पूरा दिन छत्ता रहूं तोह भी मेरा दिल नहीं भरता…”

रौशनी ने सिर्फ एक और गहरी सिसकारी भरी और अपनी पीठ को उनकी जीभ के हवाले कर दिया.

रौशनी की पीठ अब भी गीली थी मां जी की जीभ से. मां जी ने धीरे से अपनी बनियान उतर दी. उनका चौड़ा सीना सामने आ गया. उनकी छाती पर सफ़ेद बाल भरे हुए थे जो उम्र के साथ और भी घने हो गए थे. उनके दोनों हाथ बड़े और मज़बूत थे जैसे वह जवानी में कुश्ती खेलते थे.

मां जी ने रौशनी के पल्लू को अपने हाथों में पकड़ लिया और धीरे धीरे खींचने लगे. पल्लू उनके हाथ से सरकता हुआ धीरे धीरे नीचे की तरफ आने लगा. रौशनी का बदन काँप रहा था. पल्लू धीरे धीरे उसके सीने से, फिर उसकी कमर से और लास्ट में उसकी जांघों से सरक कर नीचे गिर गया.

अब रौशनी सिर्फ अपनी स्लीवलेस गहरी बैक वाली ब्लाउज और पंतय में कड़ी थी. उसकी पीठ ऑलमोस्ट नंगी थी क्यूंकि ब्लाउज बहुत गहरी बैक वाला था. उसकी बड़ी चूचियां ब्लाउज के अंदर से उभर रही थी और उसकी मोती गांड पंतय में टाइट थी.

रौशनी का चेहरा लाल हो गया था. उसको बहुत शर्म आ रही थी. वह सोच रही थी की एक और बुद्धा आदमी उसके इस तरह के सेक्सी और गंदे शरीर को देखने वाला है. पहले रमेश जी के अलावा किसी ने उसको इतना नंगा नहीं देखा था और अब यह मां जी उसके सामने खड़े थे.

मां जी ने उसके नंगे बदन को धीरे से देखा और अपनी जीभ से होठ गीले किये. उन्होंने धीरे से कहा,

“अरे बहु रे… तू सच में बहुत hi सुन्दर और जवान लग रही है… तेरा यह नंगा बदन देख के दिल खुश हो गया रे…”

रौशनी ने अपनी आँखें झुका ली थी. उसकी सांस तेज़ चल रही थी और उसकी बुर अब भी गीली थी. वह शर्मा के मारे कुछ बोल नहीं पा रही थी.

रौशनी के इंटरनल थॉट्स इस वक़्त बहुत उलझे हुए और तेज़ थे. उसका दिमाग एक तरफ शर्म से भर गया था, लेकिन दूसरी तरफ उसमें एक गहरी गर्मी और हवस भी चल रही थी.

जब मां जी ने उसकी पल्लू खींची और वह सिर्फ ब्लाउज और पंतय में रह गयी, तोह उसके दिमाग में पहला थॉट यह आया — **"अब क्या होगा? यह बुद्धा मेरा पूरा बदन देख लेगा..."** उसको बहुत शर्म आ रही थी की एक और आदमी, वह भी रमेश जी का मां, उसके नंगे बदन को इतनी करीब से देख रहा है. उसको लग रहा था जैसे वह बिलकुल बेशरम हो गयी है.

लेकिन उसके साथ hi उसके अंदर एक और आवाज़ चल रही थी — **"लेकिन यह भी तोह वही है जिसके बारे में मैं इतने दिन से सोच रही थी... जिसका लुंड मैं अपने मुँह में ले चुकी हूँ सपने में..."** उसको अपने आप पर गुस्सा भी आ रहा था और मज़ा भी आ रहा था. उसको यह एहसास हो रहा था की उसने खुद hi इस सिचुएशन को इतना आगे बढ़ने दिया है.

रौशनी के दिमाग में यह भी चल रहा था की **"अगर रमेश जी को पता चल गया तोह? मैं उनकी बीवी हूँ... फिर भी मैं उनके मां के सामने ऐसे कड़ी हूँ..."** यह गिल्ट उसके अंदर गहरा था, लेकिन उसके साथ hi उसमें एक और चीज़ थी — **फोर्बिडन मज़ा**. यह सोचना की एक बुद्धा आदमी उसके सेक्सी और गंदे शरीर को देख रहा है, उसको और भी गरम कर रहा था.

उसको अपनी चूचियों और गांड का एहसास हो रहा था की अब वह मां जी के सामने कितनी एक्सपोज्ड है. उसको यह भी ख्याल आ रहा था की **"मैं कभी नहीं सोच सकती थी की मैं किसी और बुड्ढे के लिए इतनी बेशरम हो जाउंगी... और वह भी रमेश जी के मां जी..."**

सबसे बड़ी बात यह थी की उसके अंदर अब **शर्म और हवस** दोनों साथ में चल रहे थे. उसको शर्म आ रही थी की वह यहाँ कड़ी है, लेकिन साथ hi उसके अंदर एक तेज़ तड़प भी थी की मां जी उसके बदन को और करीब से देखें, छुएं और उसके साथ कुछ और करें.

रौशनी के दिमाग में अब यह बात चल रही थी — **"मैं रुक सकती थी... लेकिन मैंने नहीं रोका. मतलब मैं भी चाहती हूँ यह सब..."**

रौशनी की आँखें अब भी बंद थी. मां जी ने उसको धीरे से घुमा दिया. अब उसकी पीठ उनके सामने थी. उन्होंने उसके कन्धों पर हाथ रख कर हल्का सा दबाव दिया और उसको नीचे की तरफ झुकने का इशारा किया.

रौशनी समझ गयी. वह धीरे धीरे घुटनो के बल बैठने लगी. उसकी सांसें तेज़ चल रही थी. जैसे hi वह घुटनो के बल बैठ गयी, उसने अपने हाथों से मां जी की धोती के ऊपर से उनकी अंडरवियर की इलास्टिक पकड़ ली और धीरे धीरे नीचे की तरफ खींचने लगी.

धोती नीचे सरकती हुई गिर गयी. अब मां जी सिर्फ अपनी बड़ी वाइट अंडरवियर में थे. उनका मोटा लुंड अंडरवियर के अंदर से साफ़ उभर रहा था. यह पहली बार था जब रौशनी ने इतने करीब से उनका लुंड देखा था. वह मोटा था, सख्त था और अंडरवियर को अंदर से फैला रहा था.

रौशनी के मुँह से एक हलकी सी सिसकारी निकली. उसने अपने होठों को काट लिया. उसकी आँखें अभी भी उनके लुंड पर टिक्की हुई थी. उसको देख कर उसके अंदर एक और गर्मी आ गयी. उसकी बुर और भी गीली हो गयी थी.

मां जी ने उसके सर पर हाथ रख कर धीरे से कहा, “अरे बहु रे… देख रही है न? यह तेरा इंतज़ार कर रहा था…”

रौशनी कुछ बोल नहीं पा रही थी. सिर्फ अपने होठों को काट कर धीमी सिसकारियां भर रही थी. उसका चेहरा लाल हो गया था और वह अब भी उनके लुंड को देख रही थी जो उनकी अंडरवियर में उभर रहा था.

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मां जी के दिमाग में इस वक़्त बहुत सारे ख्याल एक साथ चल रहे थे. रौशनी जब उनके सामने घुटनो के बल बैठ गयी और धीरे से उनकी धोती नीचे की तरफ खींची, तब उनके अंदर एक गहरी ख़ुशी और गरम हवस दोनों जग उठी.

उनके दिमाग में पहला ख्याल यह था — *अरे वह… यह तोह सच में मेरे सामने घुटनो के बल बैठ गयी. रमेश की बीवी… मेरी बहु… और अब यह मेरे लुंड को इतने करीब से देख रही है. उसकी आँखें कितनी भूखी लग रही हैं.*

उन्हें यह देख कर और भी मज़ा आ रहा था की रौशनी शर्मा रही थी लेकिन फिर भी उसने अपने आप को रोक नहीं पाया. मां जी सोच रहे थे — *यह लड़की अंदर से कितनी गरम है. बहार से तोह शर्मा रही है लेकिन इसकी आँखों में वही नशा है जो मैंने पहले भी कई औरतों में देखा है. लेकिन यह अलग है… यह मेरी hi बहु है.*

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उनके दिमाग में यह भी चल रहा था की रौशनी का बदन कितना सुन्दर और जवान है. उसकी बड़ी चूचियां, उसकी मोती गांड और उसकी नंगी पीठ — सब कुछ उन्हें पसंद आ रहा था. वह सोच रहे थे — *आज तक मैंने कई औरतों को छुआ है… लेकिन यह लड़की अलग है. इसकी शर्म और उसके अंदर की हवस का कॉम्बिनेशन बहुत मस्त है. मैं इसको और तड़पना चाहता हूँ.*

मां जी के दिमाग में एक और बात भी थी — *अगर यह सच में मेरे लुंड को चूसने लगे तोह कैसा लगेगा? यह रमेश की बीवी है… लेकिन अब यह मेरे सामने इतनी बेशरम हो चुकी है. उसका हाथ अभी भी मेरे लुंड पर है… लगता है यह भी चाहती है.*

उन्होंने धीरे से अपने आप से सोचा — *मैं इसको आज पूरी तरह से अपना बना लूंगा. यह सिर्फ एक बार नहीं… मैं इसको बार बार चाहता हूँ. इसकी यह शर्म और यह उसकी आँखों का नशा… दोनों चीज़ मुझे बहुत पसंद आ रही है.*

मां जी के अंदर अब सिर्फ एक hi चीज़ चल रही थी — **रौशनी को और करीब लाना और उसके हर हिस्से को अपना बनाना.**

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रौशनी घुटनो के बल बैठी हुई थी. उसकी सांसें तेज़ चल रही थी. उसका चेहरा मां जी के बिलकुल सामने था. जब उन्होंने अपनी धोती नीचे की तरफ खींची, तोह उसके सामने सिर्फ उनकी बड़ी वाइट अंडरवियर रह गयी थी. उसके अंदर उनका मोटा लुंड साफ़ उभर रहा था — इतना करीब की वह उसको देख भी सकती थी और महसूस भी कर सकती थी.

उसको अपने अंदर एक तेज़ गर्मी महसूस हो रही थी. उसकी बुर अभी भी गीली थी और पंतय के अंदर हलकी सी पानी की नमी अब भी थी. उसको लगा जैसे उसका दिल ज़ोर से धड़क रहा है. उसकी आँखें उनके लुंड पर अटक गयी थी. यह पहली बार था जब उसने किसी और आदमी का लुंड इतने करीब से देखा था.

रौशनी के दिमाग में एक hi बात चल रही थी — *उफ्फ्फ्फ़… यह इतना मोटा है… रमेश जी के लुंड से भी ज़्यादा मोटा लग रहा है… मैं कभी नहीं सोच सकती थी की मैं किसी और बुड्ढे के सामने ऐसे बैठूंगी… और वह भी मां जी… लेकिन अब यह मेरे बिलकुल सामने है…*

उसको शर्म आ रही थी, लेकिन साथ hi उसके अंदर एक और चीज़ भी थी — **हवस**. उसको देख कर उसके होठ खुद बा खुद खुल गए थे. उसने अपने होठों को काट लिया. उसको लगा जैसे उसका बदन गरम हो गया है. उसकी चूचियां ब्लाउज के अंदर सख्त हो चुकी थी और उसकी बुर में एक हलकी सी झनझनाहट हो रही थी.

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वह सोच रही थी — *मैं यहाँ बैठी हूँ… उनके लुंड के बिलकुल सामने… और मैं कुछ नहीं कर पा रही… सिर्फ देख रही हूँ… लेकिन अंदर से मैं और कुछ चाहती हूँ… यह गलत है… लेकिन मैं रुक नहीं पा रही…*

उसको अपने आप पर गुस्सा भी आ रहा था और मज़ा भी आ रहा था. उसको यह एहसास हो रहा था की अब वह बिलकुल बेशरम हो चुकी है. एक और बुद्धा आदमी उसके सामने खड़ा है और वह उसके लुंड को देख रही है… और उसके अंदर से आवाज़ आ रही थी की वह और करीब जाना चाहती है.

रौशनी के मुँह से एक और हलकी सी सिसकारी निकली. उसका चेहरा लाल हो गया था. उसको लगा जैसे उसका पूरा शरीर अब मां जी के लुंड की तरफ खींच रहा है.

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रौशनी अब भी घुटनो के बल बैठी हुई थी. उसका चेहरा मां जी के बिलकुल सामने था. उनका मोटा लुंड अंडरवियर के अंदर से साफ़ उभर रहा था. मां जी ने उसके सर पर हाथ रख कर धीरे से उसके बाल में उँगलियाँ घुमाई और कहा,

“अरे बहु रे… तू सोच रही होगी की मैं पहले भी कई औरतों के साथ रह चूका हूँ न?”

रौशनी ने आँखें ऊपर उठा कर उनकी तरफ देखा. उसका चेहरा लाल था. मां जी धीरे से बोलने लगे,

“मेरी बीवी के जाने के बाद मैं अकेला रह गया था. पहले तोह बहुत टाइम तक कुछ नहीं किया. लेकिन धीरे धीरे दिल ने माँगा. गाओं में एक विधवा थी… उम्र में मुझसे छोटी. उसके साथ मेरा रिश्ता चला था काफी सालों तक. वह भी शर्माती थी पहले… लेकिन बाद में वह भी मेरे लुंड की आदि हो गयी थी.”

रौशनी की सांस तेज़ हो गयी. वह chup-chap सुन रही थी.

मां जी ने आगे कहा, “उसके बाद एक और औरत थी… shaadi-shuda थी. उसका पति बहार रहता था. वह रात में चुपके से मेरे पास आती थी. उसको भी यह फोर्बिडन मज़ा बहुत पसंद था. मैं उसको अपनी बाँहों में लेता था और उसको छोड़ता था… बिलकुल ऐसे hi जैसे अब तुझे छोड़ना चाहता हूँ.”

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रौशनी के मुँह से एक हलकी सी सिसकारी निकल आयी. उसको यह बातें सुन कर शर्म भी आ रही थी और गर्मी भी बढ़ रही थी.

मां जी ने उसके गाल को अपने हाथ से सहलाया और धीरे से कहा,

“मैं हमेशा छोटी उम्र की औरतों को पसंद करता रहा हूँ. उनमें ज़िन्दगी होती है… वह मुझे खुश कर सकती हैं. गीता भी ऐसी hi है… लेकिन तू अलग है बहु. तू मेरी hi बहु है… यह बात और भी गरम करती है मुझे.”

रौशनी का चेहरा अब और लाल हो गया था. उसको यह सुन कर अंदर से कुछ हुआ. मां जी ने उसके सर पर हाथ रखा हुआ था और धीरे से बोल रहे थे,

“मैं बहुत सी औरतों के साथ रह चूका हूँ… लेकिन तुझे देख कर लग रहा है की तू सबसे अलग है. तेरी शर्म और तेरी हवस दोनों एक साथ हैं. यह चीज़ मुझे बहुत पसंद आती है.”

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रौशनी कुछ बोल नहीं पा रही थी. उसका दिमाग अब भी मां जी की बातों में उलझा हुआ था. उसको यह सोच कर और भी गर्मी आ रही थी की मां जी इतनी औरतों के साथ रह चुके हैं… और अब वह उसके सामने बैठी है.

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पंप हाउस के अंदर की हवा थोड़ी सी पुराणी और भरी सी थी. बहार से आती हुई हलकी रौशनी अंदर के अँधेरे को थोड़ा सा चीयर रही थी. पुराने लकड़ी और जंग की हलकी सी खुशबू हवा में फैली हुई थी. पंप हाउस के कोने में पड़ा पुराण पंप मशीन धुल से भरा पड़ा था. ज़मीन पर भी जगह जगह धुल और पुराने पानी के निशाँ थे.

यह जगह बिलकुल अलग थी — न कोई आता था, न कोई देख सकता था. सिर्फ उन दोनों की सांसें और उनके बदन की गर्मी इस पुराने, सुनसान कमरे में गूँज रही थी. इस माहौल ने उन दोनों के इस पल को और भी गहरा और छुपा हुआ बना दिया था.

मां जी ने रौशनी को धीरे से उठाया और उसकी पीठ को अपने सीने से लगा लिया. उनके हाथ उसकी नंगी पीठ पर धीरे से घूम रहे थे. रौशनी का सर उनके कंधे पर टिक गया था. उसकी सांस उनके गले के पास आ रही थी.

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पंप हाउस के अंदर की धीमी रौशनी उनके दोनों के चेहरों पर पद रही थी. मां जी ने उसकी पीठ पर हाथ घूमते हुए धीरे से कहा,

“अरे बहु रे… यह जगह भी बिलकुल हमारे लिए बानी हुई लग रही है. कोई नहीं आता यहाँ… सिर्फ हम दोनों.”

रौशनी कुछ बोल नहीं पा रही थी. उसका बदन उनके सीने से चिपका हुआ था. मां जी ने उसकी पीठ को अपने हाथों से सहलाया और धीरे से कहा,

“तेरा बदन अब भी इतना गरम है… जैसे यह पुराणी जगह भी तुझे अपने अंदर ले रही हो.”

रौशनी के मुँह से एक हलकी सी सिसकारी निकल आयी. पंप हाउस के अंदर की सन्नाटा और उन दोनों की सांसें एक दूसरे से मिल रही थी. यह जगह उनके इस पल को और भी गहरा और रुकने लायक बना रही थी.

मां जी ने धीरे से अपनी अंडरवियर नीचे की तरफ खींची. उनका मोटा लुंड बहार आ गया. यह इतना मोटा था की देख कर hi आँख खुल जाती थी — बिलकुल बोतल जैसा मोटा. रौशनी के मुँह से एक हलकी सी सिसकारी निकल आयी.

वह लुंड उसके मुँह के बिलकुल करीब था. उसकी मोटाई देख कर रौशनी की आँखें खुल गयी. यह रमेश, सलीम या असलम के लुंड जैसा लम्बा नहीं था, लेकिन उन सबसे काफी मोटा था. उसका रंग गहरा था और ऊपर का हिस्सा बड़ा और चमक्दा था.

रौशनी के होठ हलके हलके काँप रहे थे. उसका मुँह उसके लुंड के इतने करीब था की सिर्फ थोड़ी सी दूरी रह गयी थी. उसको लगा जैसे यह लुंड अभी उसके मुँह में आ जाएगा. उसकी आँखें उसके लुंड पर अटक गयी थी.

रौशनी के दिमाग में एक hi ख्याल घूम रहा था — यह लुंड इतना मोटा है… अगर यह अंदर गया तोह… मैं इसका हो जाउंगी… यह मुझे अपना बना लेगा…

उसको अपने आप पर भी गुस्सा आ रहा था की वह इस लुंड को इतने करीब से देख रही है और उसके अंदर से कुछ और hi आवाज़ आ रही थी. उसकी बुर अब भी गीली थी और वह धीरे धीरे अपने होठों को काट रही थी.

मां जी ने उसके सर पर हाथ रख कर धीरे से कहा, “अरे बहु रे… देख रही है न… यह तेरा इंतज़ार कर रहा था.”

रौशनी कुछ बोल नहीं पा रही थी. सिर्फ अपने होठों को काट कर उनके लुंड को देख रही थी जो उसके मुँह के बिलकुल सामने था.

रौशनी अब भी घुटनो के बल बैठी हुई थी. उसका चेहरा मां जी के लुंड के बिलकुल सामने था. मां जी ने उसके सर पर हाथ रख कर धीरे से कहा,

“अरे बहु रे… छू इसे… चुम ले इसे… चाट ले… मुँह में ले ले… धीरे धीरे…”

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रौशनी की सांस तेज़ हो गयी. उसको शर्म आ रही थी, लेकिन उसके अंदर की गर्मी उसको रोक नहीं पा रही थी. उसने धीरे से अपने होठों को उसके मोटा सुपाड़ी पर रख दिया और एक लम्बी, गरम चुम्बन दी. उसका सुपाड़ा उसके होठों के नीचे गरम महसूस हो रहा था.

फिर उसने धीरे धीरे उसके लुंड की लम्बाई पर chhote-chhote चुम्बन दिए — ऊपर से नीचे तक. हर चुम्बन के साथ उसके होठ उसके लुंड की गरम स्किन से लग रहे थे. मां जी के मुँह से एक गहरी सिसकारी निकली.

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रौशनी ने अब धीरे से उसके सुपाड़ी को अपने मुँह में ले लिया. सिर्फ सुपाड़ा hi मुँह में था. उसने धीरे धीरे चूसना शुरू किया — हलके से, प्यार से, लेकिन पूरा लुंड अंदर लिए बिना. उसकी जीभ उसके सुपाड़ी के ऊपर घूम रही थी. वह jaan-bujh कर धीरे धीरे चूस रही थी, ताकि मां जी और तड़पे.

रौशनी के दिमाग में एक hi बात चल रही थी — *जब किसी आदमी का लुंड मेरे मुँह में होता है… तब मैं उस आदमी को अपने कण्ट्रोल में ले लेती हूँ… और अभी मां जी मेरे कण्ट्रोल में हैं…*

वह धीरे धीरे सुपाड़ी को चूसती रही, कभी हलके से जीभ से chat-ti, कभी होठों से कास कर चूस लेती. मां जी के हाथ उसके बालों में थे और उनकी सांसें गहरी हो चुकी थी. रौशनी अब भी सिर्फ उसके सुपाड़ी को hi मुँह में लिए हुए थी, और धीरे धीरे चूस रही थी — जैसे वह उनको और तड़पना चाहती हो.

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रौशनी अब भी घुटनो के बल बैठी हुई थी. उसने मां जी के लुंड के सुपाड़ी को अपने मुँह में ले लिया और एक गहरा, लम्बा चूस लिया. उसका लुंड उसके मुँह में फड़कने लगा. जैसे hi वह लुंड को मुँह से बहार निकली, वह देख रही थी की वह अभी भी ज़ोर से हिल रहा था.

फिर उसने अपनी जीभ से उसके लुंड के नीचे वाले हिस्से को हलके हलके से चेतना शुरू किया — धीरे धीरे ऊपर से नीचे तक. मां जी के मुँह से एक गहरी सिसकारी निकली. रौशनी ने फिर से सुपाड़ी पर अपनी जीभ फेरी और धीरे से उसको अपने मुँह में ले लिया. इस बार भी सिर्फ सुपाड़ा hi मुँह में था. उसने हलके हलके चूसना शुरू किया, अपनी थूक से उसको गीला करते हुए.

मां जी के हाथ उसके बालों में थे. उनके मुँह से धीमी सिसकारियां निकल रही थी. रौशनी ने लुंड को फिर से मुँह से बहार निकला और सिर्फ सुपाड़ी को अपनी जीभ से चाटने लगी. उसकी थूक उसके लुंड पर चमक रही थी.

मां जी अब कण्ट्रोल नहीं कर पा रहे थे. उनके मुँह से आवाज़ निकल आयी,

“बहु रे… और चूस न… मत तड़पा… पूरा मुँह में ले ले… उफ्फ्फ्फ़…”

रौशनी ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया. वह अब भी सिर्फ सुपाड़ी को hi चूस रही थी — धीरे धीरे, प्यार से, लेकिन पूरा लुंड मुँह में लिए बिना. उसको पता था की जब किसी आदमी का लुंड उसके मुँह में होता है, तब वह उस आदमी को अपने कण्ट्रोल में ले लेती है. और अभी मां जी उसके कण्ट्रोल में थे.

मां जी के मुँह से फिर से आवाज़ निकली,

“रौशनी… बस कर… चूस ले… मत ऐसे तड़पा… मैं और नहीं सेह पा रहा…”

रौशनी ने हलके से उनके लुंड के सुपाड़ी को अपनी जीभ से छत्ते हुए धीरे से कहा,

“अभी नहीं… अभी मैं ऐसे hi करुँगी…”

वह फिर से सुपाड़ी को अपने मुँह में ले लिया और धीरे धीरे चूसने लगी. मां जी के हाथ उसके बालों में कास रहे थे, लेकिन वह अब भी सिर्फ सुपाड़ी को hi चूस रही थी — उनको और तड़पाते हुए.

जब उसने मां जी के लुंड को सिर्फ सुपाड़ी तक hi मुँह में लिया और पूरा अंदर नहीं लिया, तब उसके दिमाग में एक बात साफ़ थी — जब किसी आदमी का लुंड उसके मुँह में होता है, तब वह उस आदमी को अपने कण्ट्रोल में ले सकती है. यह उसके लिए सिर्फ फिजिकल नहीं, बल्कि मैं का खेल भी था.

वह jaan-bujh कर धीरे धीरे और हलके से चूस रही थी, ताकि मां जी और तड़पे. उसको यह देख कर मज़ा आ रहा था की एक बुज़ुर्ग, मज़बूत आदमी जैसे मां जी भी उसके हाथों में आ चुके हैं. उनके मुँह से निकलने वाली सिसकारियां और उनका हाथ उसके बालों में कसना — यह सब उसको यह एहसास दे रहा था की अब वह उनको अपने हिसाब से चला रही है.

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रौशनी के दिमाग में यह भी चल रहा था की यह उसका अपना तरीका है अपनी शक्ति दिखने का. बहार से वह घुटनो के बल बैठी हुई थी, लेकिन अंदर से वह कण्ट्रोल में थी. वह उनको इतना तड़पा रही थी की वह उससे मांगने लगे. यह उसके लिए एक तरह का छुपा हुआ नशा था — की वह एक ऐसे आदमी को भी अपने कण्ट्रोल में ले सकती है जो उम्र में उससे काफी बड़ा था.

लेकिन साथ hi उसके दिमाग में एक छोटा सा हिस्सा यह भी सोच रहा था — मैं यह सब क्यों कर रही हूँ? क्या मैं सच में उनको कण्ट्रोल कर रही हूँ… या फिर मैं खुद hi उनके लुंड की आदि हो चुकी हूँ?

फिर भी वह अभी के लिए अपनी स्ट्रेटेजी पर कायम थी. वह धीरे धीरे और प्यार से सुपाड़ी को चूस रही थी, उनको और तड़पाते हुए, क्यूंकि उसको यह एहसास पसंद आ रहा था की अभी के लिए

मां जी के घोड़े की लगाम उसके होठों में थी !!!

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रौशनी अब भी घुटनो के बल बैठी हुई थी. उसने धीरे से मां जी के लुंड के मोटा सुपाड़ी पर अपने होठों से एक लम्बी चुम्बन दी. फिर उसने अपनी जीभ निकाल कर उसके पूरे लुंड पर धीरे धीरे ऊपर से नीचे तक चेतना शुरू किया. उसकी जीभ उसके लुंड की गरम नसों पर घूम रही थी.

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वह ऊपर की तरफ देखते हुए उनके लुंड को चूस रही थी. उसकी आँखें मां जी की तरफ उठी हुई थी. मां जी ने उसके सर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और धीरे से उसके मुँह को अपने लुंड पर दबा दिया. रौशनी के मुँह में उनका लुंड गहराई तक चला गया.

रौशनी के दोनों हाथ मां जी की मोती और बालों वाली जांघों पर थे. उसकी लाल नेल पोलिश वाली उँगलियाँ उनकी जांघों को पकड़ कर सपोर्ट ले रही थी. उसका मुँह अब उनके लुंड पर ऊपर नीचे हो रहा था. वह गहरा चूस रही थी, लेकिन कभी कभी सांस लेने के लिए लुंड को थोड़ा बहार निकाल लेती थी.

मां जी के हाथ उसके सर पर थे और वह धीरे धीरे उसके मुँह को अपने लुंड पर दबा रहे थे. रौशनी के मुँह से हलकी सी आवाज़ें निकल रही थी. उसका गाला उनके लुंड से भर गया था. उसकी आँखें पानी से भरी हुई थी लेकिन वह रुक नहीं रही थी.

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मां जी के मुँह से धीमी सिसकारियां निकल रही थी. वह उसके बाल पकड़ कर उसके मुँह को अपने हिसाब से मूव करा रहे थे. रौशनी अपनी लाल नेल पोलिश वाली उँगलियों से उनकी जांघों को पकड़ कर गहरा चूस रही थी.

रौशनी अब भी घुटनो के बल बैठी हुई थी और मां जी के लुंड को गहरा चूस रही थी. मां जी ने धीरे से अपने हाथ उसकी पीठ पर ले जाकर उसके ब्लाउज के हुक खोल दिए. हुक खुलते hi ब्लाउज धीरे से उसके कन्धों से सरक गया और उन्होंने उसको एक तरफ फेंक दिया.

अब रौशनी सिर्फ अपनी पतली ब्लैक ब्रा में थी. उसकी दूध जैसी गोरी और मुलायम स्किन पर वह पतली ब्लैक ब्रा की पट्टी साफ़ दिख रही थी. ब्रा उसकी बड़ी चूचियों को कास कर पकड़ रही थी और ऊपर से उसका गहरा क्लीवेज साफ़ नज़र आ रहा था.

मां जी ने जब यह सन देखा तोह उनका लुंड रौशनी के मुँह में और भी सख्त और मोटा हो गया. रौशनी को तुरंत एहसास हो गया. उसका लुंड उसके गले में और भी गहरा जाने लगा और वह धीरे धीरे फड़कने लगा. उसको लगा जैसे वह लुंड अब उसके मुँह में और बड़ा होता जा रहा है.

रौशनी के मुँह से एक हलकी सी सिसकारी निकल आयी. उसकी बुर और भी गीली हो गयी. वह और भी लस्ट में खो गयी. उसको लगा जैसे उसका पूरा बदन गरम हो रहा है. उसकी आँखें ऊपर उठी हुई थी और वह मां जी के लुंड को और गहरा चूसने लगी.

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मां जी ने उसके बाल पकड़ कर धीरे से उसके मुँह को अपने लुंड पर और दबा दिया. रौशनी के मुँह से अब हलकी सी आवाज़ें निकल रही थी लेकिन वह रुक नहीं रही थी. उसका हाथ अब भी उनकी मोती जांघों पर था और वह उनके लुंड को अपने मुँह में गहरा ले रही थी.

मां जी ने अपने दोनों हाथ उसकी ब्रा के अंदर दाल दिए और उसकी बड़ी चूचियों को ज़ोर से दबाने लगे. उनकी उँगलियाँ उसके मुलायम और गरम चूचियों को मसल रही थी. रौशनी के मुँह से एक धीमी और दबा हुआ सिसकारी निकली, लेकिन वह अपने मुँह से उनका लुंड नहीं निकाल रही थी.

मां जी के हाथ अब भी उसकी ब्रा के अंदर थे और वह धीरे धीरे उसकी चूचियों को दबा रहे थे. रौशनी के मुँह से अब भी हलकी सिसकारियां निकल रही थी, लेकिन वह लुंड को गहरा चूस रही थी.

मां जी के दिमाग में इस पल यह चल रहा था:

अरे वह… यह बहु सच में अलग है. मेरे लुंड को मुँह में लिए हुए है और मैं उसकी चूचियों को दबा रहा हूँ… और यह मुझे और भी गरम कर रही है. उसकी आँखें ऊपर की तरफ उठी हुई हैं और वह मेरे लुंड को चूस रही है जैसे यह उसका हो. उसकी यह शर्म और उसके अंदर की हवस का कॉम्बिनेशन बहुत मस्त है. मैं इसको और तड़पना चाहता हूँ… लेकिन अभी यह सन देख कर मेरा लुंड और भी सख्त हो रहा है.

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रौशनी के मुँह से फिर से एक धीमी सिसकारी निकली. उसका गाला अब भी उनके लुंड से भरा हुआ था और वह धीरे धीरे चूस रही थी. मां जी के हाथ उसकी चूचियों को मसलते हुए और भी नीचे की तरफ बढ़ रहे थे.

रौशनी के शरीर में अब बहुत तेज़ रिएक्शंस हो रहे थे. उसका गाला मां जी के लुंड से भरा हुआ था, इसलिए उसकी सांसें थोड़ी रुक रही थी और उसके मुँह से धीमी, दबा हुई सिसकारियां निकल रही थी. हर बार जब मां जी उसकी चूचियों को ज़ोर से दबाते, उसका बदन हल्का सा काँप जाता था.

उसकी टांगें थोड़ी सी काँप रही थी. उसको अपनी जांघों के बीच हलकी सी गर्मी और नमी महसूस हो रही थी. उसकी बुर अब भी गीली हो चुकी थी और पंतय के अंदर हलकी सी पानी की नमी अब भी थी. जब मां जी उसकी चूचियों को मसलते थे, तब उसके निप्पल्स और भी सख्त हो जाते थे और वह अपने मुँह में उनके लुंड को और गहरा ले लेती थी.

उसकी आँखें पानी से भरी हुई थी. हर बार जब उनका लुंड उसके गले तक जाता, उसकी आँखों से हलके से आंसू निकल आते. ऊके दोनों हाथ मां जी की मोती जांघों पर थे और उँगलियाँ उनकी जांघों को पकड़ कर कास रही थी, जैसे वह सपोर्ट ले रही हो.

उसका गाला अब भी उनके लुंड से भरा हुआ था, इसलिए जब भी वह सांस लेने की कोशिश करती, उसके मुँह से हलकी सी आवाज़ निकल आती. उसकी पीठ थोड़ी सी आर्च हो रही थी और उसका बदन धीरे धीरे आगे की तरफ झुक रहा था. उसको अपने अंदर एक तेज़ गर्मी और तड़प महसूस हो रही थी.

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रौशनी के होठ अब भी गीले थे उनके लुंड और उसकी थूक से. उसकी जीभ अब भी उनके लुंड के सुपाड़ी पर घूम रही थी. उसको अपने मुँह में उनके लुंड की गरम और सख्त फील हो रही थी, जो धीरे धीरे और बड़ा होता जा रहा था.

मां जी से अब रहा नहीं गया. उन्होंने उसके रेशम जैसे बाल अपनी मुट्ठी में पकड़ लिए और धीरे से उसके सर को अपने लुंड पर दबा दिया. अब वह अपने आप को रोक नहीं पा रहे थे.

उन्होंने अपने कमर को आगे पीछे करते हुए रौशनी के मुँह की चुदाई शुरू कर दी. उनका मोटा लुंड उसके गले तक जा रहा था. रौशनी ने आँखें बंद कर ली और उनके लुंड को अपने मुँह में लिए हुए hi धीरे धीरे चूसने की कोशिश करती रही. उसका गाला अब भी उनके लुंड से भरा हुआ था.

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रौशनी के मुँह से अब धीमी और दबा हुई सिसकारियां निकल रही थी. उसकी सांसें फूली हुई थी. हर बार जब मां जी अपना लुंड उसके मुँह में गहरा डालते, उसके मुँह से हलकी सी आवाज़ निकल आती. उसकी बुर से अब काफी रास टपक रहा था. उसकी पंतय गीली हो चुकी थी और उसकी जांघों के बीच से हलकी सी नमी निकलने लगी थी.

मां जी के हाथ उसके बालों में कास रहे थे और वह धीरे धीरे लेकिन ज़ोर से उसके मुँह में धक्के मार रहे थे. रौशनी ने उनकी मोती और बालों वाली जांघों को अपने दोनों हाथों से पकड़ रखा था. वह उनके लुंड को अपने मुँह में लिए हुए hi उनके धक्कों को झेल रही थी.

रौशनी के दिमाग में एक hi बात चल रही थी — यह उनका यह ज़ोर और यह उनका कण्ट्रोल… मुझे बहुत अच्छा लग रहा है. अभी के लिए मैं उनकी हूँ… किसी और की नहीं. यह पंप हाउस, यह खेत… अभी सिर्फ हम दोनों हैं यहाँ.

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उसकी सांसें और गहरी होती जा रही थी. उसका गाला उनके लुंड से भर गया था लेकिन वह रुक नहीं रही थी. उसको यह एहसास हो रहा था की अब वह बिलकुल उनके हवाले हो चुकी है.

रौशनी अब भी घुटनो के बल बैठी हुई थी और मां जी उसके मुँह की चुदाई कर रहे थे. कुछ देर तक यह चलता रहा. मां जी के हाथ उसके बालों में कास रहे थे और वह धीरे धीरे लेकिन ज़ोर से उसके मुँह में धक्के मार रहे थे. रौशनी उनके लुंड को अपने मुँह में लिए हुए उनके धक्कों को झेल रही थी.

थोड़ी देर बाद मां जी ने उसके बाल छोड़ दिए. उन्होंने धीरे से उसके कन्धों पर हाथ रख कर उसको ऊपर उठा लिया. रौशनी अब भी सिर्फ ब्रा और पंतय में थी. मां जी ने उसको पंप हाउस के पुराने लकड़ी के छोत पर लेता दिया.

रौशनी लेती हुई थी. उसकी सांसें अब भी तेज़ चल रही थी. मां जी ने उसके ऊपर झुक कर देखा. उनके लुंड अब भी सख्त और मोटा खड़ा था. उन्होंने धीरे से उसकी पंतय के दोनों तरफ हाथ डाला और एक झटके में उसको पहाड़ दिया. पंत य उसकी जांघों से सरकती हुई अलग हो गयी.

रौशनी के मुँह से एक हलकी सी सिसकारी निकल आयी. उसको थोड़ा शॉक लगा था की उन्होंने उसकी पंतय इतनी जल्दी पहाड़ दी. उसकी बुर अब बिलकुल नंगी हो गयी थी. उसको थोड़ी सी शर्म भी आ रही थी और साथ hi उसके अंदर एक तेज़ गर्मी भी दौड़ गयी. उसकी बुर अब भी गीली थी और थोड़ी सी रास उसकी जांघों पर टपक रहा था.

रौशनी ने अपनी टांगें थोड़ी सी चौकोर कर ली. उसका चेहरा लाल हो गया था. वह मां जी की तरफ देखते हुए धीरे से बोली, “मां जी… आपने यह क्यों पहाड़ दिया…”

मां जी ने उसके ऊपर झुक कर उसके होठों पर एक गहरा चुम्बन दिया और धीरे से कहा, “अरे बहु रे… अब इसकी ज़रूरत नहीं रही. मैं तुझे ऐसे hi चाहता हूँ.”

रौशनी के शरीर में अब भी गर्मी थी. उसको यह एहसास हो रहा था की अब वह बिलकुल नंगी हो चुकी है उनके सामने. उसकी आँखें बंद हो गयी और वह धीरे से सांस लेने लगी.

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रौशनी अब पुराने लकड़ी के छोत पर लेती हुई थी. उसकी पंतय पहाड़ दी गयी थी और वह सिर्फ ब्रा में थी. उसकी टांगें थोड़ी सी खुली हुई थी. पंप हाउस के अंदर की हवा गरम और भरी सी थी. बहार की धुप अंदर की डार्क और पुराणी लकड़ी की खुशबू के साथ मिक्स हो रही थी. यह जगह बिलकुल अलग थी — न कोई आता था, न कोई देख सकता था. सिर्फ उन दोनों की सांसें और उनके बदन की गर्मी इस पुराने कमरे में गूँज रही थी.

रौशनी के दिमाग में अब बहुत कुछ चल रहा था. पहले उसको सिर्फ शर्म आ रही थी, लेकिन अब धीरे धीरे उसके अंदर कुछ बदल रहा था. उसको लगा जैसे वह अपने आप को धीरे धीरे मां जी के हवाले करती जा रही है. उसका मैं अब भी थोड़ा सा उलझा हुआ था — एक तरफ वह जानती थी की यह गलत है, लेकिन दूसरी तरफ उसके शरीर में एक गहरी तड़प थी जो रोक नहीं पा रही थी.

उसको यह एहसास हो रहा था की अब वह बिलकुल नंगी हो चुकी है उनके सामने. उसकी बुर अब खुली हुई थी और थोड़ी सी रास अब भी उसकी जांघों पर चमक रहा था. उसको लगा जैसे उसका बदन अब उसके लिए तैयार हो चूका है. उसको यह भी ख्याल आ रहा था की पहले कभी उसने किसी को इतना अपने ऊपर हक़ नहीं दिया था जितना अब वह मां जी को दे रही थी.

पंप हाउस के गरम माहौल ने उसके इस एहसास को और भी गहरा कर दिया था. अंदर की सन्नाटा, पुराणी लकड़ी की खुशबू, और उन दोनों के बदन की गर्मी — यह सब मिलकर एक ऐसा माहौल बना रहे था जिसमें वह अपने आप को रोक नहीं पा रही थी. उसको लगा जैसे यह जगह उसको और भी बेशरम बना रही है.

रौशनी ने आँखें बंद कर ली. उसका दिमाग अब भी थोड़ा सा लड़ रहा था — एक तरफ वह सोच रही थी की यह सब गलत है, लेकिन दूसरी तरफ उसके शरीर में एक ऐसी आग लग चुकी थी जो अब बुझ नहीं रही थी. उसको लगा जैसे वह धीरे धीरे अपने आप को उनके लिए खोलती जा रही है.

उसकी पंतय पहाड़ दी गयी थी और उसकी बुर बिलकुल नंगी थी. उसको देख कर उसके अंदर एक तेज़ तड़प जग उठी. वह धीरे से अपनी टांगें और चौकोर कर के मां जी की तरफ देखते हुए बोली,

“मां जी… आप भी मुझे छतो न… मुझे भी आपकी जीभ फील करनी है…”

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मां जी थोड़ा रुक गए. उन्होंने कभी किसी औरत की बुर नहीं छाती थी. गाओं के मर्द अक्सर ऐसा नहीं करते. उनको यह बात थोड़ी अजीब लगी. लेकिन जब उन्होंने रौशनी की बुर को देखा, तोह उनका दिल और तेज़ धड़कने लगा.

उसकी बुर बिलकुल मस्त और चिकनी थी. ऊपर बहुत काम बाल थे — बिलकुल हलके और पतले. उसकी बुर के होठ हलके गुलाबी रंग के थे और बीच से वह फुदक रही थी, जैसे वह उनको अंदर खिंच रही हो. थोड़ी सी गीली भी थी, जिससे उसके होठ चमक रहे थे. यह देख कर मां जी के अंदर भी एक तेज़ हवस जग उठी.

उन्होंने धीरे से रौशनी की जांघों को अपने हाथों से पकड़ लिया और अपना मुँह उसकी बुर के पास ले आये. उनको उसकी बुर की हलकी सी खुशबू आ रही थी — थोड़ी सी मीठी और बहुत hi आकर्षक. रौशनी की बुर इतनी साफ़, इतनी मुलायम और इतनी इंविटिंग लग रही थी की मां जी को रोकना मुश्किल हो गया.

रौशनी ने अपनी कमर थोड़ी सी ऊपर उठा कर उनकी तरफ बढ़ा दी और धीरे से कहा,

“मां जी… प्लीज… आपकी जीभ से छतो न… मुझे बहुत मज़ा आएगा…”

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मां जी ने धीरे से अपनी जीभ निकाली और उसकी बुर के होठों पर रख दी. पहले हलके से छत्ते हुए, फिर धीरे धीरे अंदर की तरफ बढ़ने लगे. रौशनी के मुँह से एक लम्बी सिसकारी निकली. उसकी बुर अब भी गीली थी और उसका रास मां जी की जीभ पर लग रहा था.

रौशनी अब छोत पर लेती हुई थी. उसकी टांगें थोड़ी सी खुली हुई थी. मां जी ने धीरे से अपनी जीभ उसकी बुर के होठों पर रख दी. पहले एक हल्का सा लीक दिया. रौशनी के मुँह से एक लम्बी सी आहें निकली, “आआअह्ह्ह…”

मां जी ने फिर से एक हल्का सा लीक दिया. इस बार रौशनी की आहें थोड़ी और गहरी हो गयी. उसकी बुर हलके से फुदक उठी. मां जी ने अब दो लीक दिए, फिर तीनो लीक. हर बार उनकी जीभ उसकी बुर के ऊपर से घूमती जा रही थी.

रौशनी के मुँह से अब लगातार धीमी सिसकारियां निकल रही थी. उसकी बुर धीरे धीरे और गीली होती जा रही थी. मां जी को उसका रास हल्का सा मीठा और साफ़ टास्ते करने लगा. उनको यह एहसास हो रहा था की उसकी बुर बहुत क्लीन और हलकी सी मेढक खुशबू वाली है. यह उनको और भी पसंद आ रहा था.

अब मां जी ने अपनी जीभ और जोरों से उसकी बुर पर घुमानी शुरू कर दी. वह अब धीरे धीरे उसकी बुर को चूसने लगे. उनकी दादी उसकी नरम जांघों और बुर के ऊपर रगड़ रही थी. यह एहसास रौशनी को और भी गरम कर रहा था. उसकी बुर के होठ अब और जोरों से फुदक रहे थे.

रौशनी के मुँह से अब और गहरी सिसकारियां निकल रही थी. उसका बदन हल्का सा काँप रहा था. उसको अपनी बुर में एक तेज़ झनझनाहट महसूस हो रही थी. मां जी अब भी उसकी बुर को ज़ोर ज़ोर से चूस रहे थे और उनकी जीभ अंदर बहार हो रही थी.

रौशनी ने अपनी कमर थोड़ी सी ऊपर उठा कर उनके मुँह की तरफ बढ़ा दी. उसकी सांसें अब और तेज़ हो गयी थी. उसको लगा जैसे उसकी पूरी बॉडी अब उनके मुँह के हवाले हो चुकी है.

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रौशनी अब छोत पर लेती हुई थी. मां जी उसकी बुर को और जोरों से चूस रहे थे. उनकी जीभ अंदर बहार हो रही थी और वह ज़ोर ज़ोर से उसकी बुर के होठों को भी चूस रहे थे. रौशनी के मुँह से लगातार गहरी सिसकारियां निकल रही थी. उसकी कमर ऊपर उठ रही थी और उसकी बुर अब और भी गीली हो चुकी थी. मां जी की दादी उसकी नरम जांघों पर रगड़ रही थी, लेकिन यह एहसास उसको और भी गरम कर रहा था.

लेकिन रौशनी के दिमाग में अब एक और चीज़ चल रही थी. उसको उनका मोटा लुंड फिर से अपने मुँह में लेना था. वह और इंतज़ार नहीं कर पा रही थी.

वह धीरे से बोली, “मां जी… आप मेरी बुर को चूस रहे हैं… लेकिन मैं भी आपका लुंड अपने मुँह में लेना चाहती हूँ… दोनों साथ में… आप ऊपर आओ न…”

मां जी थोड़ा रुक गए. उनको यह बात समझ नहीं आयी. वह धीरे से पूछे, “अरे बहु रे… दोनों साथ में कैसे? यह क्या बात है?”

रौशनी ने हल्का सा हंस दिया. उसको यह देख कर मज़ा आ रहा था की मां जी को यह नहीं पता. वह धीरे से उठी और मां जी को लेटने को कहा. फिर वह खुद उनके मुँह की तरफ मुद कर बैठ गयी और अपनी बुर उनके मुँह के बिलकुल सामने कर दी. अब उनका लुंड उसके मुँह के बिलकुल सामने था.

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रौशनी ने धीरे से कहा, “आप मेरी बुर चूसो… और मैं आपका लुंड मुँह में लूंगी… दोनों साथ में. समझ आया?”

उन्होंने धीरे से कहा, “अरे वह रे… यह भी कोई तरीका है… तू तोह मुझे नए नए तरीके सीखा रही है बहु…”

रौशनी ने उनके लुंड को अपने हाथों में पकड़ लिया और धीरे से उसके सुपाड़ी पर अपने होठ रख दिए. अब दोनों एक दूसरे के मुँह के सामने थे. रौशनी ने अपनी बुर उनके मुँह के और करीब कर दी और धीरे से उनके लुंड को अपने मुँह में ले लिया.

वह सोच रही थी — यह बुद्धा अभी भी पुराने तरीके से hi सब कुछ करता है… लेकिन मैं इसको नए नए मज़ा सिखाऊंगी… और मुझे यह पसंद आ रहा है की मैं उनको कुछ नया सीखा रही हूँ.

रौशनी ने धीरे से मां जी को छोत पर लेता दिया. अब वह उनके ऊपर आ गयी. वह धीरे धीरे उनके ऊपर चढ़ने लगी. पहले वह उनके सीने के पास आयी, फिर धीरे से अपनी बॉडी को घुमा कर उनके मुँह की तरफ बैठ गयी. अब उसकी गांड और बुर मां जी के मुँह के बिलकुल सामने थी, और उनका मोटा लुंड उसके मुँह के सामने आ गया.

मां जी ने उसकी कमर पकड़ ली. उनके हाथ उसकी जांघों पर थे. रौशनी की बुर अब उनके मुँह के इतने करीब थी की वह उसकी हलकी सी गीली खुशबू महसूस कर सकते थे. रौशनी ने भी अपना मुँह उनके लुंड के पास ले जाकर धीरे से उसके मोटा सुपाड़ी पर अपने होठ रख दिए.

दोनों अब रोक नहीं पा रहे थे.

मां जी ने अपनी जीभ निकाल कर रौशनी की बुर के होठों पर रख दी और धीरे धीरे चाटने लगे. उन्होंने उसकी बुर के होठों को अपनी जीभ से गहराई से चेतना शुरू कर दिया. रौशनी के मुँह से एक लम्बी सिसकारी निकली.

रौशनी ने भी मां जी के मोटा सुपाड़ी को अपने मुँह में ले लिया और धीरे धीरे चूसने लगी. फिर वह धीरे से उनके लुंड की पूरी लम्बाई पर अपनी जीभ फेरने लगी. उसका लुंड उसके मुँह में गरम और सख्त महसूस हो रहा था. वह धीरे धीरे उसके लुंड को और गहरा अपने मुँह में ले रही थी.

मां जी अब भी उसकी बुर को ज़ोर ज़ोर से चाट रहे थे. उनकी जीभ उसके अंदर तक जा रही थी. रौशनी की बुर अब और भी गीली हो चुकी थी. दोनों एक दूसरे के मुँह में खो चुके थे. सिर्फ उनकी सांसें और चुम्बन की आवाज़ें पंप हाउस के अंदर गूँज रही थी.

रौशनी ने अपने हाथ मां जी की मोती जांघों पर रख दिए थे और वह उनके लुंड को अपने मुँह में गहरा ले रही थी. मां जी भी उसकी बुर को और जोरों से चाट रहे थे.

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रौशनी अब मां जी के ऊपर 69 पोजीशन में थी. उसकी बुर उनके मुँह के बिलकुल सामने थी और उनका मोटा लुंड उसके मुँह के सामने. दोनों एक दूसरे को चूस रहे थे.

मां जी ने रौशनी की बुर को ज़ोर ज़ोर से छत्ते हुए धीरे से कहा,

“अरे बहु रे… यह क्या नया तरीका है रे… उफ्फ्फ्फ़… तुझे चूस रहा हूँ और तू मेरा लुंड चूस रही है… बहुत मज़ा आ रहा है रे… तेरा यह गीला और रास भरा चीज़ इतना अच्छा टास्ते कर रहा है…”

रौशनी ने उनके लुंड को अपने मुँह में लिए हुए धीरे से सिसकारी भरी और उनके लुंड को और गहरा चूसने लगी. उसकी जीभ उनके सुपाड़ी पर घूम रही थी.

मां जी ने फिर से बोलै, “अरे वह रे… यह दोनों तरफ से मज़ा लेने का तरीका बहुत मस्त है… मैं तुझे चूस रहा हूँ और तू मेरा लुंड मुँह में लिए हुए है… उफ्फ्फ्फ़… तेरा यह चीज़ कितना स्वादिष्ट है बहु… मैं तोह इसको और जोरों से चाट रहा हूँ…”

रौशनी ने उनके लुंड को थोड़ा बहार निकला और धीरे से कहा,

“मां जी… आप भी बहुत अच्छे से चूस रहे हैं… आपकी जीभ मेरी बुर में इतनी अच्छी लग रही है… आप और जोरों से छतो न…”

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मां जी ने उसकी बुर के होठों को और ज़ोर से चूसा और अपनी जीभ अंदर घुसा दी. फिर वह धीरे से बोले,

“अरे बहु… यह नया पोज़ बहुत hi मस्त है रे… मैं तुझे चूस रहा हूँ और तू मेरा लुंड चूस रही है… दोनों को मज़ा आ रहा है… उफ्फ्फ्फ़… तेरा यह रास कितना अच्छा लग रहा है… मैं तोह इसको और गहरा चूसना चाहता हूँ…”

रौशनी ने उनके लुंड को अपने मुँह में लिए हुए hi उनकी जांघों को अपने हाथों से पकड़ लिया और धीरे धीरे उनके लुंड को चूसने लगी. दोनों अब एक दूसरे को पूरी तरह से चूस रहे थे. पंप हाउस के अंदर सिर्फ उनकी सिसकारियां और चूसने की आवाज़ें गूँज रही थी.

रौशनी ने अपनी कमर को नीचे की तरफ दबाया और अपनी बुर को मां जी के मुँह पर ज़ोर से रगड़ना शुरू कर दिया. अब वह उनके मुँह में अपनी बुर को गहराई तक दबा रही थी. मां जी के लिए सांस लेना मुश्किल हो रहा था लेकिन वह भी रुक नहीं रहे थे. उन्होंने अपनी जीभ और जोरों से उसकी बुर के अंदर दाल दी और तेज़ तेज़ अंदर बहार करने लगे.

रौशनी के मुँह से अब आवाज़ें और तेज़ हो गयी, “आआह्ह्ह… उम्म्म… मां जी… और जोरों से… आह्हः…”

उसकी सिसकारियां अब धीमी नहीं रही थी. वह ज़ोर ज़ोर से मोअन कर रही थी. उसकी बुर अब भी गीली थी और उसका रास मां जी के मुँह पर लग रहा था. मां जी ने अपनी जीभ और भी तेज़ कर दी. वह अब बिलकुल पागल कुत्ते की तरह उसकी बुर को चाट रहे थे — अंदर बहार, ज़ोर ज़ोर से, बिना रुके.

रौशनी के मुँह से अब लगातार आवाज़ें निकल रही थी, “आआह्ह्ह… हाँ… ऐसे hi… और गहरा… उम्म्म… आपकी जीभ… आह्हः… बहुत अच्छी लग रही है…”

वह अपनी कमर को और नीचे दबा रही थी ताकि मां जी उनकी बुर को और गहरा चूस सके. उसकी सिसकारियां अब और भी तेज़ और गहरी हो गयी थी. दोनों अब एक दूसरे को पूरी तरह से खोल कर चूस रहे थे.

पूरा दिन छत्ता रहूं तोह भी मेरा दिल नहीं भरता… कितनी मस्त खुशबू है तेरी यह चीज़ की रे…”

रौशनी ने उनके लुंड को अपने मुँह में लिए हुए hi एक गहरी सिसकारी भरी. मां जी ने फिर से बोलै,

“हाँ रे… ऐसे hi अपनी बुर मेरे मुँह में दबा… ज़ोर से रगड़… मैं तुझे और गहरा चूसूंगा… तेरी यह फुदकती हुई बुर देख के मेरा लुंड और भी सख्त हो रहा है रे…”

रौशनी ने उनके लुंड को थोड़ा बहार निकला और धीरे से कहा,

“मां जी… आप भी बहुत अच्छे से चूस रहे हैं… मेरी बुर आपकी जीभ से तड़प रही है… और जोरों से छतो न…”

मां जी ने उसकी बुर के होठों को और ज़ोर से चूसा और अपनी जीभ अंदर घुसा दी. फिर वह धीरे से बोले,

“अरे वह रे बहु… तेरा यह रास कितना स्वादिष्ट है… मैं तोह इसको पि जाऊं… तू अपनी बुर इतनी अच्छे से मेरे मुँह में रगड़ रही है न… बिलकुल पागल कर देगी तू मुझे आज… उफ्फ्फ्फ़… तेरी यह चीज़ देख के दिल करता है की मैं इसको पूरी रात चतु…”

रौशनी के मुँह से अब और तेज़ सिसकारियां निकल रही थी. वह उनके लुंड को और गहरा अपने मुँह में ले रही थी. मां जी ने फिर से कहा,

“हाँ रे… ऐसे hi चूस मेरा लुंड… तू भी बहुत मस्त तरीके से चूस रही है… दोनों तरफ से मज़ा आ रहा है रे… तेरा यह नया वाला पोज़ बहुत hi मस्त है बहु… मैं तोह इसमें खो गया हूँ…”

रौशनी ने अपनी कमर और नीचे दबा दी और धीरे से कहा,

“मां जी… आप और जोरों से छतो… मेरी बुर आपके लिए बिलकुल खुली हुई है… और गहरा छतो न…”

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मां जी ने उसकी बुर को और जोरों से चेतना शुरू कर दिया. दोनों अब एक दूसरे को पूरी तरह से खोल कर चूस रहे थे.

रौशनी अब भी मां जी के ऊपर 69 पोजीशन में थी, लेकिन मां जी अब पूरी तरह से जोश में आ चुके थे. उन्होंने उसको धीरे से ऊपर उठाया और छोत पर झुका दिया. अब रौशनी आगे की तरफ झुकी हुई थी, उसके दोनों हाथ छोत की लकड़ी पकड़ रखे थे और उसकी मोती गांड ऊपर की तरफ थी.

मां जी ने उसकी दोनों चूतड़ों को अपने हाथों से पकड़ लिया और ज़ोर से दबा दिया. फिर उन्होंने अपना मुँह उसके पीछे ले जाकर उसकी बुर के बिलकुल करीब कर दिया. अब वह उसकी बुर को पीछे से चूसने लगे. उनकी जीभ उसके बुर के होठों पर ज़ोर ज़ोर से घूमने लगी और धीरे धीरे वह अपना मुँह उसके बुर के बीच में घुसा लिया.

रौशनी के मुँह से एक ज़ोर की सिसकारी निकली, “आआह्ह्ह… मां जी… उफ्फ्फ्फ़…”

मां जी अब बिलकुल पागल कुत्ते की तरह उसकी बुर को चाट रहे थे. उनकी जीभ अंदर तक जा रही थी और वह ज़ोर ज़ोर से चूस भी रहे थे. उनका मुँह उसके बुर के रास से गीला हो चूका था. रौशनी की बुर अब भी गीली थी और उसका रास उनके मुँह पर लग रहा था. वह उसकी बुर को इतनी गहराई से और इतनी जोरों से चाट रहे थे की रौशनी का बदन काँप रहा था.

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रौशनी के मुँह से अब लगातार तेज़ सिसकारियां निकल रही थी. उसका गाला अब भी गीला था उनके लुंड से, लेकिन अब वह अपनी आवाज़ रोक नहीं पा रही थी. ऊके दोनों हाथ छोत की लकड़ी को ज़ोर से पकड़ रखे थे. उसको लगा जैसे उसकी पूरी बॉडी हिल रही है.

उफ्फ्फ्फ़… यह क्या कर रहे हैं… इतनी जोरों से… इतनी गहराई से… न सलीम ने ऐसे किया था, न रमेश जी ने, न असलम ने… यह फीलिंग अलग hi है… मेरी बुर उनके मुँह में पिघल रही है… मैं अब बिलकुल उनकी हो चुकी हूँ…

रौशनी के मुँह से अब और तेज़ आवाज़ें निकल रही थी. उसकी बुर के होठ अब और जोरों से फुदक रहे थे. मां जी ने उसकी दोनों चूतड़ों को और ज़ोर से पकड़ कर अपना मुँह और गहरा उसके बुर में घुसा दिया और ज़ोर ज़ोर से चाटने लगे.

रौशनी का बदन अब बिलकुल उनके हवाले हो चूका था. उसको लगा जैसे अब वह पूरी तरह से मां जी के लिए तैयार हो चुकी है.

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रौशनी अब भी छोत पर झुकी हुई थी. मां जी ने उसकी बुर को इतनी जोरों से और गहराई से चूसा था की उसका बदन अब भी हल्का सा काँप रहा था. थोड़ी देर बाद वह धीरे से पलट गयी. अब वह सीढ़ी लेती हुई थी और मां जी उसके सामने खड़े थे.

उनका भरी और मज़बूत शरीर उसके बिलकुल सामने था. उनकी छाती पर सफ़ेद बाल चमक रहे थे. नीचे उनका मोटा लुंड खड़ा था, जिसके सुपाड़ी पर चमक्दा प्रेकम लगा हुआ था. यह लुंड अब भी गीला था उसकी थूक और प्रेकम से.

रौशनी ने धीरे से अपनी आँखें ऊपर उठायी. उसकी नज़र सीधा मां जी की आँखों से मिल गयी. उसका चेहरा लाल हो चूका था. उसको शर्म आ रही थी, लेकिन उसके अंदर की गर्मी अब भी काम नहीं हुई थी. वह सोच रही थी की यह वही मां जी हैं जिनके बारे में उसने कभी वाइल्ड इमेजिनेशन में भी नहीं सोचा था की वह उनके साथ यह सब करेगी. लेकिन अब यह सब कुछ hi पलों में सच होने वाला था.

उसका दिमाग घूम रहा था. मैं रमेश जी की बीवी हूँ… और अब मैं उनके मां के सामने लेती हुई हूँ… उनका लुंड मेरे सामने है… और मैं उनको अपनी बुर में लेने वाली हूँ… यह कभी सपने में भी नहीं सोचा था मैंने…

मां जी ने उसके ऊपर झुक कर धीरे से कहा, “अरे बहु रे… अब तू तैयार है न?”

रौशनी ने आँखें झुका ली. उसका दिल ज़ोर से धड़क रहा था. उसको शर्म भी आ रही थी और उसके अंदर एक तेज़ तड़प भी थी. उसका बदन अब भी गरम था. उसको लगा जैसे अब कुछ रुक नहीं सकता.

मां जी ने अपना मोटा लुंड उसकी बुर के बिलकुल पास ले आया. उसका सुपाड़ा उसके गीले होठों से हल्का सा टच कर रहा था. रौशनी ने अपनी टांगें थोड़ी सी और खोल दी. उसको लगा जैसे अब यह पल रुक नहीं सकता.

मां जी ने उसकी बुर को इतनी जोरों से और गहराई से चूसा था की उसका बदन अब भी हल्का सा काँप रहा था. थोड़ी देर बाद वह धीरे से पलट गयी. अब वह सीढ़ी लेती हुई थी और मां जी उसके सामने खड़े थे.

उनका भरी और मज़बूत शरीर उसके बिलकुल सामने था. उनकी छाती पर सफ़ेद बाल चमक रहे थे. नीचे उनका मोटा लुंड खड़ा था, जिसके सुपाड़ी पर चमक्दा प्रेकम लगा हुआ था. यह लुंड अब भी गीला था उसकी थूक और प्रेकम से.

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रौशनी ने धीरे से अपनी आँखें ऊपर उठायी. उसकी नज़र सीधा मां जी की आँखों से मिल गयी. उसका चेहरा लाल हो चूका था. उसको शर्म आ रही थी, लेकिन उसके अंदर की गर्मी अब भी काम नहीं हुई थी. वह सोच रही थी की यह वही मां जी हैं जिनके बारे में उसने कभी वाइल्ड इमेजिनेशन में भी नहीं सोचा था की वह उनके साथ यह सब करेगी. लेकिन अब यह सब कुछ hi पलों में सच होने वाला था.

उसका दिमाग घूम रहा था. मैं रमेश जी की बीवी हूँ… और अब मैं उनके मां के सामने लेती हुई हूँ… उनका लुंड मेरे सामने है… और मैं उनको अपनी बुर में लेने वाली हूँ… यह कभी सपने में भी नहीं सोचा था मैंने…

मां जी ने उसके ऊपर झुक कर धीरे से कहा, “अरे बहु रे… अब तू तैयार है न?”

रौशनी ने आँखें झुका ली. उसका दिल ज़ोर से धड़क रहा था. उसको शर्म भी आ रही थी और उसके अंदर एक तेज़ तड़प भी थी. उसका बदन अब भी गरम था. उसको लगा जैसे अब कुछ रुक नहीं सकता.

मां जी ने अपना मोटा लुंड उसकी बुर के बिलकुल पास ले आया. उसका सुपाड़ा उसके गीले होठों से हल्का सा टच कर रहा था. रौशनी ने अपनी टांगें थोड़ी सी और खोल दी. उसको लगा जैसे अब यह पल रुक नहीं सकता.

मां जी ने बहु को अपनी बाहों में जाकर लिया और अपने होंठ बहु के रसीले होंठों पे रख दिए. रौशनी भी मां जी से लिपटी हुई थी. उसकी छूट बुरी तरह गीली थी. छूट के रूस में सनी पंतय उसके

पैरों में पारी हुई थी. रौशनी ने पैरों पे उचक के मां जी के तने हुए लुंड को अपनी टांगों के बीच में इस तरह एडजस्ट किया की वो उसकी छूट पे ठीक से रैगर सके. मां जी बहु की छूट की गर्मी और

रौशनी मां जी के विशाल लुंड की गर्मी अपनी छूट पे महसूस कर रही थी. चुदाई से ोेहले मां जी फिर से एक बार अपने बहु रौशनी के गुलाबी होठों का रसपान लरना चाहते थे .. उन्होंने झुक कर उसे जोरों से चूमा और रौशनी भी पुरो वाइल्ड होलार साथ देने लगी. काफी देर रौशनी के होंठों का रसपान करने के बाद मां जी

रौशनी से अलग हो गया और थोड़ी दूर से उसकी मस्त जवानी को निहारने लगा. क्या बाला की खूबसूरत थी बहु. गोरी गोरी मांसल चूचीऑन. पतली कमर और उसके नीचे फैलते हुए विशाल चूतड़.

ऐसी जवानी देख के मां जी मदहोश हो गया.

" ूफ.. मां जी अपनी बहु को नंगी करते आपको ज़रा भी शर्म नहींआई. अब ऐसे घूर घूर के क्या देख रहे हैं ?" रौशनी शर्मा कर

“अब बहु तेरी इस मस्तानी बुर को छोड़ने का टाइम आ गया हैं.”

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मां जी ने रौशनी के टांगें मोर के उसकी छाती से लगा दी. बहु की छूट उभर आयी थी और मुंह फारे लुंड का इंतज़ार कर रही थी. मां जी ने अपने फौलादी लुंड का सुपर बहु की खुली हुई छूट के

मुंह पे टिका दिया और धीरे धीरे दोनों फांकों के बीच में रगड़ने लगा. रौशनी से अब और सहन नहीं हो रहा था.

" Isssssssssss. ... मां जी क्यों तुंग कर रहे हैं ? आपका वो तो हमारी उसका रूस पीना चाहता है न. अब दाल भी दीजिये अंडर ".

रौशनी का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा था. जिस लुंड के वो रात दिन सपने लेती थी अब उसका मोटा सुपर रौशनी की छूट के दरवाज़े पे दस्तक दे रहा था.

बहु तुम्हारी छूट तो बिलकुल डबल रोटी की तरह फूली हुई है."

" आपको अच्छी लगी ?"

" बहुत."

" तो फिर ले लीजिये na..Ab डालिये न प्लीज..." रौशनी अपने बुर को उचका के लुंड अपनी छूट में लेने की कोशिश करते हुए बोली.. मां जी ने लुंड के सुपर को बहु की छूट की दोनों फांकों के बीच के

कटाव में थोड़ा और रगड़ा और फिर हल्का सा धक्का लगा दिया. छूट इतनी गीली थी की लुंड का मोटा सुपर गुप्प से अंडर फिसल गया.

" एआईईईई.... ..आआह मां जी ..aaaa...aaapka तो बहुत ..आआ मोटा है. मैं मर्डर जाउंगी."

" कुछ नहीं होगा बहु." मां जी ने बहु की चूचीऑन मसलते हुए इस बार एक करारा सा धक्का लगा के एक चौथाई लुंड अंडर कर दिया. oooi...maaaa. .ाआअह.. ..आआआआईईईई iiiiiiiiiiiiii. ......... आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह. .पिताजी

आप तो आह... हमें छोड़ रहे हैं. इस्सस...."

" अच्छा नहीं लूग रहा तो निकाल लें बहु."

" बहुत अच्छा लूग रहा hai..aaaaa.. . मां जी ने लुंड को सुपारी तक बाहर खींचा और फिर एक ज़बरदस्त

धक्का लगा दिया. इस बार करीब 8 इंच लुंड बहु की छूट में समां गया.

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रौशनी

" Aaaaaaaaaaaaaaaaaa. ......... ..पलायआजसे. ...आआआ. ah..ah..ah. .यह अआप्का तो बहुत बड़ा है मां जी. Aaa......aah. ...अभी और कितना बाकी है ? आठ." " बस बहु अब तो बहुत थोड़ा सा hi बाहर है."

मां जी ने बहु की छूट के रूस में सना हुआ लुंड पूरा बाहर खींच लिया और उसकी मोती मोती चूचीऑन पाकर के एक बहुत hi ज़ोर का धक्का लगा दिया. इस बार मां जी का मोटा लुंड रौशनी की छूट को बरी बेरहमी से चीरता हुआ पूरा जार तक अंडर समां गया. मां जी के सांड जैसे बारे बारे बॉल्स रौशनी के ऊपर की और उठे हुए विशाल चूतड़ों से चिपक गए

" आआआईईईई. ...ाःह. .आअह्ह्ह.. .... मां

jeeeeeeeeee. .....issssssssss s......mar गयी मैं.. ोोोूह, मेरी छूट ने तो आपका

पूरा लुंड खा लिया hai.mama जी आपने इतनी बेरहमी से मेरी बुर में आपका फौलादी लुंड पािल दिया. उफ्फ्फफ्फ्फ़. ....."

मां जी ने हलके हलके धक्के लगाने शुरू कर दिए. रौशनी बिलकुल मस्त हो गयी थी.

" आआअह्ह्ह.... िस्स्सस्स... ोुह्ह्ह्हआआआ. ..मां जी. .ाः अआप तो हमें सचमुच

hi छोड़ने लूग गए."

" कहो तो न छोड़ें बहु."

" सुच आप बहुत hi खराब हैं. औरत को फुसला के छोड़ना तो कोई आपसे सीखे. अपना हमारे अंडर आपका मोटा लुंड पािल दिया , और अब कह रहे हैं, कहो तो न छोड़ें?"

" तुम्हें अच्छा नहीं लूग रहा बहु ?"

मां जी आधा लुंड बाहर निकाल के फिर जार तक पेलता हुआ बोलै.

" Aaaaaiii...issss. .जी बहुत अच्छा लूग रहा है. हम आज जी भर के आपसे छोडूंगी.."

" देखो बहु तुम्हें मज़ा आ रहा है और हमने भी ऐसी जवान और खूबसूरत औरत को कभी नहीं छोड़ा.

"

बोलिये अब भी हम आपकी बेटी हैं ? "

" हाँ बेटी , तुम अब भी हमारी बेटी हो और हमेशा हमारी बेटी रहोगी." मां जी एक ज़ोर का धक्का मारता हुआ बोलै.

" aaaaaa....h. .अच्छा जी ! अपनी बेटी को छोड़ते हुए आपको ज़रा भी शर्म

नहीं आ रही ? लेकिन पिताजी आपका बहुत मोटा है. मेरी बुर चौरी

कर देगा. चौरी हो गयी तो रमेश जी पता लग जाएगा. हम कहीं के नहीं

रहेंगे." " किसको चौरी कर देगा बहु?"

" हटिये भी आपको पता तो hai.Humaari जिस चीज़ में ये मूसल घुसा हुआ है उसी को तो चौरी करेगा न." रौशनी मां जी के लौड़े को अपनी छूट से दबाती हुई बोली.

“उफ्फ्फ मां जी अगर रमेश मेरे पति जी ने पूछा की मेरी बुर इतनी चौरी कैसे हो गयी तो उन्हें कह दू क्या की रास्ते में एक गधा hi तो छोड़ रहा है. "

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" सुच बहु तुम बातें बहुत मीठी मीठी करती हो.. आज तो जी भर के छोडूंगा तुम्हे. ऐसी छूट छोड़ के तो हम धन्य हो जाएंगे.

आआह्ह्ह… मां जी… उफ्फ्फ्फ़…”

मां जी ने उसकी कमर पकड़ ली और एक तेज़ी से धक्का मारा. उसका पूरा मोटा लुंड रौशनी की बुर में उतर गया. रौशनी का बदन एक झटके से उठ गया.

मां जी धीरे से बोलने लगे, “अरे बहु रे… तेरी बुर कितनी टाइट और गीली है रे… बिलकुल निगल रही है मेरा लुंड… देख कितना गहरा जा रहा है अंदर…”

रौशनी के मुँह से लगातार सिसकारियां निकल रही थी. उसकी टांगें अपने आप मां जी की कमर में लपेट गयी. वह धीरे से बोली,

“ज़ोर से… और ज़ोर से छोड़िये न मां जी… आपका लुंड मेरी बुर को पूरा भर रहा है… आह्हः…”

मां जी ने उसकी कमर को और कास कर पकड़ लिया और अब तेज़ी से धक्के मरने शुरू कर दिए. हर बार उनका लुंड पूरा बहार निकल कर एक झटके से अंदर तक उतर रहा था. पंप हाउस के अंदर उनकी जांघों की thap-thap और रौशनी की सिसकारियां गूँज रही थी.

“ले मेरी बहु… ले पूरा लुंड… तेरी बुर आज मेरा लुंड पूरा निगल रही है रे… कितनी मस्त और रसीली है तेरी यह बुर… उफ्फ्फ्फ़ मैं आज तुझे ऐसे hi छोडूंगा…”

रौशनी के मुँह से अब और तेज़ आवाज़ें निकल रही थी. वह अपनी कमर को ऊपर उठा कर उनके धक्कों का साथ दे रही थी.

“आआह्ह्ह… हाँ मां जी… और गहरा… और ज़ोर से… आपका लुंड मेरी बुर के अंदर तक जा रहा है… उम्म्म… आप मुझे ऐसे hi छोड़ते रहिये… मैं आपकी हूँ आज…”

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मां जी ने उसकी चूचियों को ज़ोर से पकड़ लिया और धीरे से कहा,

“अरे वह रे… तेरी यह बुर तोह मेरा लुंड पूरा खा रही है… कितनी प्यासी है तू आज… बोल न बहु… तेरा पति तुझे ऐसे नहीं छोड़ता न? आज मैं तुझे दिखाता हूँ असली मज़ा क्या होता है…”

रौशनी के मुँह से एक और गहरी सिसकारी निकली. उसका बदन अब बिलकुल उनके हवाले हो चूका था.

“आआह्ह्ह… हाँ… आप hi छोड़िये मुझे… आपका लुंड बहुत मोटा और गरम है… मेरी बुर आपके लुंड के लिए बिलकुल खुली हुई है… छोड़िये न… और ज़ोर से छोड़िये…”

मां जी अब और तेज़ हो गए थे. वह उसकी कमर पकड़ कर झटके से धक्के मार रहे थे और धीरे से बोल रहे थे,

“ले… ले मेरी बहु… आज तेरा यह बदन मेरा हो गया… तेरी बुर अब सिर्फ मेरे लुंड के लिए है रे… बोल… बोल की तू मेरी है आज…”

मां जी के गहरे और तेज़ धक्के चल रहे थे. रौशनी की टांगें अब भी उनकी कमर में लपेट हुई थी. उसका बदन हर धक्के के साथ हिल रहा था. मां जी के मुँह से लगातार अश्लील बातें निकल रही थी.

रौशनी ने अपनी कमर को ऊपर उठा कर उनके धक्के का साथ दिया और धीरे से, लेकिन गहरे से बोली,

“मां जी… मैं आपकी हूँ… सिर्फ आपकी… आज से मैं आपकी hi हूँ… आप मुझे जितना चाहें ज़ोर से छोड़ सकते हैं… जितना चाहें गहरा छोड़ सकते हैं… मैं आपके लिए तैयार हूँ…”

मां जी ने उसकी कमर को और ज़ोर से पकड़ लिया और एक और तेज़ी से धक्का मारा. रौशनी के मुँह से एक और लम्बी सिसकारी निकली.

वह फिर से बोली, “आप मुझे आज पूरी तरह से अपनी बना लीजिये… यह पंप हाउस में आज मुझे जितना चाहें छोड़िये… मैं आपके लुंड के लिए बिलकुल तैयार हूँ… आप मेरी बुर को आज अपना बना लीजिये… मुझे अपनी औरत बना दीजिये… आपके लुंड से मुझे असली औरत बना दीजिये…”

मां जी के मुँह से एक गहरी सिसकारी निकली. वह उसकी कमर को और कास कर पकड़ कर और झटकों से धक्के मरने लगे.

“अरे बहु रे… तू सच में मेरी हो गयी न आज? बोल… बोल की तू मेरी है… बोल की तेरा यह बदन अब सिर्फ मेरा है…”

रौशनी ने आँखें बंद करके और ज़ोर से कहा,

“हाँ मां जी… मैं आपकी हूँ… सिर्फ आपकी… आज से मेरी बुर आपकी है… आप जितना चाहें ज़ोर से और गहरा छोड़िये मुझे… मैं आपके साथ पूरा दिन यहीं रहना चाहती हूँ… आप मेरी बुर को अपने मोठे लुंड से पूरी तरह से पंप कीजिये… मुझे आज असली औरत बना दीजिये… प्लीज… और ज़ोर से छोड़िये न…”

मां जी अब और भी जोश में आ गए. वह उसकी कमर पकड़ कर तेज़ी से धक्के मार रहे थे और धीरे से बोल रहे थे,

“ले मेरी बहु… ले पूरा लुंड… आज मैं तुझे ऐसे hi छोडूंगा… तेरी यह बुर अब मेरी हो गयी रे… तू मेरी hi रहेगी आज से…”

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रौशनी के मुँह से अब लगातार तेज़ सिसकारियां निकल रही थी. उसका बदन बिलकुल उनके हवाले हो चूका था.

मां नई और रोष ी के बीच मि चुदाई को बस शुरू hi हुयी थी , कहल बहुत लम्बा चलने वाला था ..

पुम्फोसे में रौशनी की बुर में पम्पिंग मां जी और भी लम्बाई से और गहराई से करने वाले थे !!!

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रौशनी अब छोत पर लेती हुई थी. उसकी टांगें मां जी के कमर के अराउंड लपेट हुई थी. मां जी ने उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और एक ज़ोर का धक्का मारा. उनका मोटा लुंड उसकी बुर में गहराई तक उतर गया.

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रौशनी के मुँह से एक लम्बी सिसकारी निकली, “आआह्ह्ह… मां जी… बहुत गहरा… उफ्फ्फ्फ़…”

मां जी ने उसके कान के पास मुँह ले आये और धीरे से कहा,

“अरे बहु रे… अब तोह मैं तुझे पूरा छोडूंगा… तेरी यह बुर आज से मेरी हो गयी… ले… ले पूरा लुंड… कितनी टाइट और गीली है तेरी बुर रे…”

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उन्होंने और ज़ोर से धक्के मरने शुरू कर दिए. हर बार उनका लुंड पूरा बहार निकल कर एक झटके से अंदर तक उतर रहा था. रौशनी की बुर से “छाप छाप” की गीली आवाज़ आ रही थी. उसकी चूचियां ऊपर नीचे हो रही थी.

रौशनी ने अपनी टांगें और टाइट से उनकी कमर में लपेट ली और धीरे से बोली,

“हाँ मां जी… ऐसे hi… और ज़ोर से छोड़िये… मेरी बुर आपके लुंड के लिए बिलकुल खुली हुई है… आप जितना चाहें छोड़ सकते हैं… मैं आपकी हूँ आज… पूरी तरह से आपकी…”

मां जी ने उसकी चूचियों को ज़ोर से पकड़ लिया और धीरे से कहा,

“अरे वह रे… तेरी यह बुर तोह मेरा लुंड पूरा खा रही है… कितनी प्यासी है तू आज… बोल न बहु… तेरा पति तुझे ऐसे नहीं छोड़ता न? आज मैं तुझे दिखाता हूँ असली मज़ा क्या होता है… ले… ले और गहरा… आज तुझे पूरा छोड़ के रख दूंगा रे…”

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रौशनी के मुँह से अब लगातार तेज़ सिसकारियां निकल रही थी. वह अपनी कमर को ऊपर उठा कर उनके धक्कों का साथ दे रही थी. उसकी बुर अब बिलकुल उनके लुंड के हिसाब से खुल चुकी थी. उसको लगा जैसे उनका लुंड उसके अंदर तक पहुँच रहा है.

“आआह्ह्ह… हाँ मां जी… और ज़ोर से… और गहरा… आपका लुंड मेरी बुर को पूरा भर रहा है… उम्म्म… आप मुझे ऐसे hi छोड़ते रहिये… मैं आपके लिए सब कुछ करुँगी… आज से मैं सिर्फ आपकी हूँ…”

मां जी अब और तेज़ हो गए थे. वह उसकी कमर पकड़ कर झटके से धक्के मार रहे थे और धीरे से बोल रहे थे,

“ले मेरी बहु… ले पूरा लुंड… तेरी यह बुर आज से मेरी प्रॉपर्टी है रे… बोल… बोल की तू मेरी रंडी बन गयी है आज… मैं तुझे ऐसे hi छोड़ता रहूँगा… हर रोज़… हर बार जब मैं करेगा…”

रौशनी के मुँह से अब और गहरी सिसकारियां निकल रही थी. उसका बदन अब बिलकुल उनके हवाले हो चूका था. पंप हाउस के अंदर सिर्फ उनकी सांसें, thap-thap की आवाज़ और उनके अश्लील शब्द गूँज रहे थे.

रौशनी अब छोत पर लेती हुई थी. मां जी ने चुदाई रोक कर उसको अपने सीने से चिपका लिया. उन्होंने उसके होठों को अपने होठों से कास कर चुम लिया. दोनों के होठ एक दूसरे से लिपट गए. मां जी ने अपनी जीभ उसके मुँह में दाल दी और उसकी जीभ से अपनी जीभ को लड़ने लगे. रौशनी भी उनके साथ गहरा किश करने लगी. दोनों के मुँह में थूक मिल रहा था.

रौशनी की बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हिल रही थी. मां जी ने उसको अपने ऊपर बिठा लिया. अब रौशनी उनके खड़े लुंड पर बैठ गयी. उनका मोटा लुंड धीरे से उसकी बुर में अंदर घुस गया. रौशनी के मुँह से एक लम्बी सिसकारी निकली, “आआह्ह्ह…”

मां जी ने उसकी चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ लिया और ज़ोर से दबाते हुए धीरे से ऊपर से धक्के मरने शुरू कर दिए. हर धक्के के साथ रौशनी की पपीता जैसी बड़ी चूचियां ऊपर नीचे हिल रही थी. मां जी उनको पकड़ कर और ज़ोर से दबाते हुए बोल रहे थे,

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“अरे बहु रे… तेरी यह बड़ी चूचियां कितनी मस्त हिल रही हैं… हाथ में आती hi नहीं… मैं इनको ऐसे hi दबाता रहूं तोह भी दिल नहीं भरता…”

रौशनी ने अपनी कमर को ऊपर नीचे करते हुए उनके धक्कों का साथ दिया. उसकी सिसकारियां अब और तेज़ हो गयी थी. उसकी चूचियां हर धक्के के साथ ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी और मां जी उनको पकड़ कर और जोरों से दबाते हुए छोड़ रहे थे.

रौशनी के मुँह से धीरे से निकल आया, “मां जी… आप बहुत अच्छे से छोड़ रहे हैं… मेरी चूचियां आपके हाथों में बिलकुल फिट हैं… और ज़ोर से दबाइये न…”

मां जी ने उसकी कमर पकड़ कर और गहरा धक्का मारा और धीरे से कहा,

“ले मेरी बहु… ले पूरा लुंड… तेरी यह पपीता जैसी चूचियां देख कर मेरा लुंड और भी सख्त हो रहा है रे… आज मैं तुझे ऐसे hi छोडूंगा… तेरी बुर और चूचियां दोनों मेरा लुंड के लिए तैयार हैं…”

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रौशनी की सिसकारियां अब और तेज़ हो गयी थी. उसकी चूचियां हर धक्के के साथ ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी और वह उनके लुंड पर अपनी कमर को और जोरों से हिला रही थी.

________________________

गाँव में गीता अपनी सहेलियों के साथ बहार घूम रही थी. थोड़ी देर बाद उसने सोचा की घर वापस चलती हूँ. जब वह घर पहुंची तोह उसने देखा की मां जी और रौशनी दोनों घर पर नहीं थे. उसने इधर उधर ढूँढा लेकिन दोनों कहीं नहीं मिले.

तभी एक महिला ने पास आकर कहा, “गीता बीटा… मैंने मां जी को रौशनी के साथ पंप हाउस की तरफ जाते देखा था. दोनों बहुत करीब चल रहे थे.”

गीता के दिल में एक झटका लगा. उसको एक डैम से यह बात समझ नहीं आयी. वह मन hi मन सोचने लगी,

क्या मां जी और रौशनी के बीच कुछ चल रहा है? उफ्फ्फ्फ़… ऐसे नहीं हो सकता… मां जी तोह मुझे इतना प्यार करते हैं… और भाभी तोह रमेश जी की बीवी है… यह कैसे हो सकता है? लेकिन फिर भी… वह पंप हाउस की तरफ गए हैं… …

गीता के अंदर एक तेज़ जलन उठी. उसको जेएलओसी भी हो रही थी और साथ hi एक अजीब सी क्यूरोसिटी भी. वह कुछ देर सोचती रही, फिर अपने आप से बोली,

“नहीं… मैं यह नहीं होने दूंगी… मैं देखूंगी क्या चल रहा है.”

________________-

वह पंप हाउस की तरफ चल पड़ी. उसकी सांसें तेज़ हो रही थी. उसको यह सोच कर बहुत बुरा लग रहा था की मां जी और रौशनी अकेले टाइम स्पेंड कर रहे हैं. उसकी आँखों में अब शक और जलन दोनों थे.

गीता पंप हाउस के पास पहुँच गयी. अंदर से हलकी सी आवाज़ आ रही थी. उसकी दिल की धड़कन और तेज़ हो गयी.

पंप हाउस में अब चुदाई की मस्ती और भी गरम हो गयी थी. रौशनी छोत पर लेती हुई थी और मां जी उसके ऊपर थे. उनका मोटा लुंड उसकी बुर में ज़ोर ज़ोर से अंदर बहार हो रहा था. हर धक्के के साथ छोत की लकड़ी हिल रही थी. दोनों के बदन पसीने से बिलकुल लथपथ हो चुके थे लेकिन लस्ट अब भी बढ़ता hi जा रहा था.

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मां जी ने उसकी कमर पकड़ कर और तेज़ धक्के मरने शुरू कर दिए. उनके मुँह से धीरे से आवाज़ निकल रही थी,

“अरे बहु रे… तेरी यह बुर अब मेरा लुंड पूरा निगल रही है… देख कितना गहरा जा रहा है… उफ्फ्फ्फ़… आज तुझे पूरा छोड़ के रख दूंगा रे…”

रौशनी के मुँह से अब लगातार तेज़ सिसकारियां निकल रही थी. उसकी टांगें मां जी की कमर में लपेट हुई थी और वह अपनी कमर को ऊपर उठा कर उनके धक्कों का साथ दे रही थी.

“आआह्ह्ह… हाँ मां जी… और ज़ोर से… और गहरा… आपका लुंड मेरी बुर को पूरा भर रहा है… उम्म्म… आप मुझे ऐसे hi छोड़ते रहिये…

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दोनों के बदन पसीने से चमक रहे थे. मां जी की छाती के बाल रौशनी की चूचियों पर रगड़ रहे थे. हर धक्के के साथ छोत की आवाज़ और तेज़ हो रही थी. पंप हाउस के अंदर सिर्फ उनकी सांसें, thap-thap की आवाज़ और उनके अश्लील शब्द गूँज रहे थे.

रौशनी के मुँह से अब और गहरी आवाज़ें निकल रही थी. उसकी बुर अब बिलकुल उनके लुंड के हिसाब से खुल चुकी थी. उसको लगा जैसे अब यह मस्ती रुकने वाली नहीं है.

मां जी ने उसकी चूचियों को ज़ोर से पकड़ कर धीरे से कहा,

“ले मेरी बहु… ले पूरा लुंड… तेरी यह बुर अह्ह्ह्हह

गीता पंप हाउस के पास पहुँच गयी. अंदर से आवाज़ें आ रही थी. मां जी की गहरी और गुत्तुराल सिसकारियां और रौशनी की सॉफ्ट और कामुक मोअन मिक्स हो रही थी. गीता का दिल ज़ोर से धड़कने लगा. वह धीरे से दरवाज़े के पास गयी और एक छोटे से छेड़ से अंदर झाँकने लगी.

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अंदर मां जी रौशनी को ज़ोर ज़ोर से छोड़ रहे थे. उनका मोटा लुंड रौशनी की बुर में गहराई से अंदर बहार हो रहा था. रौशनी की टांगें उनकी कमर में लपेट हुई थी और वह अपनी कमर को ऊपर उठा कर उनके धक्कों का साथ दे रही थी. दोनों के बदन पसीने से लथपथ थे और छोत की लकड़ी हर धक्के के साथ हिल रही थी.

गीता के मुँह से हलकी सी सिसकारी निकल आयी. उसको शॉक लगा था. उसकी आँखें फैल गयी. उसकी बुर में एक हलकी सी नमी महसूस होने लगी. वह सोचने लगी,

उफ्फ्फ्फ़… यह सच में हो रहा है… मां जी भाभी को छोड़ रहे हैं… इतनी जोरों से… भाभी भी उनके साथ इतनी मस्ती में है… उनकी सिसकारियां… उनके धक्के… यह सब देख कर मेरा दिल जल रहा है… लेकिन साथ hi… मुझे भी गरम कर रहा है…

गीता की आँखें अब भी अंदर की तरफ लगी हुई थी. उसको जेएलओसी बहुत तेज़ हो रही थी. वह सोच रही थी की यह जगह उसके लिए थी, लेकिन अब रौशनी वहां है. उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी और उसकी बुर अब भी हलकी सी गीली हो चुकी थी.

गीता पंप हाउस के बहार छुप कर देख रही थी. अंदर का नज़ारा उसको अंदर तक हिला रहा था.

रौशनी मां जी के ऊपर बैठी हुई थी. वह अपनी कमर को ऊपर नीचे कर रही थी. उसका सेक्सी और कर्तव्य बदन पसीने से बिलकुल लथपथ था. उसकी बड़ी चूचियां हर धक्के के साथ ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे हिल रही थी. उसकी पतली कमर और मोती गांड मां जी के ऊपर हिल रही थी. मां जी का मोटा लुंड उसकी बुर में गहराई से अंदर बहार हो रहा था. हर बार जब रौशनी नीचे बैठती, उनका लुंड उसकी बुर में पूरा उतर जाता था.

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गीता की आँखें फैल गयी. उसको पहली बार मां जी का मोटा लुंड इतने करीब से और इतनी साफ़ तौर पर दिख रहा था. उसका लुंड इतना मोटा और गहरा था की देख कर hi उसकी बुर में नमी महसूस होने लगी. गीता ने कभी मां जी का लुंड इतने करीब से नहीं देखा था. अब वह उसको बहुत करीब से देखना चाहती थी.

उसको जेएलओसी भी हो रही थी और साथ hi एक तेज़ हवस भी जग रही थी. उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी. वह सोच रही थी,

उफ्फ्फ्फ़… मां जी का लुंड इतना मोटा है… भाभी उसपर बैठी हुई है और ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे हो रही है… उनकी चूचियां इतनी बड़ी और हिल रही हैं… और उनका लुंड उसकी बुर में गहरा जा रहा है… मैं भी ऐसे hi उनके लुंड पर बैठना चाहती हूँ…

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गीता की आँखें अब भी अंदर की तरफ लगी हुई थी. उसको यह देख कर बहुत गरम हो रहा था. उसकी बुर अब भी हलकी सी गीली हो चुकी थी. वह और करीब से देखने के लिए थोड़ा और आगे बढ़ गयी.

_______________________

गीता पंप हाउस के बहार छुप कर देख रही थी. उसकी आँखें अंदर की तरफ लगी हुई थी. उसको अंदर का नज़ारा देख कर अंदर से बहुत कुछ चल रहा था.

उफ्फ्फ्फ़… यह सच में हो रहा है… मां जी भाभी को छोड़ रहे हैं… इतनी जोरों से… भाभी उनके ऊपर बैठी हुई है और उनके लुंड पर ऊपर नीचे हो रही है… उनकी चूचियां इतनी बड़ी और हिल रही हैं… और मां जी का लुंड उसकी बुर में गहरा जा रहा है… मैं कभी नहीं सोच सकती थी की यह सब होगा…

गीता के अंदर एक तेज़ जलन उठ रही थी. उसको जेएलओसी बहुत बढ़ रही थी. वह सोच रही थी की यह जगह उसके लिए थी, मां जी उसके साथ ऐसे करते थे, लेकिन अब भाभी वहां है. उसकी आँखों में आंसू आ गए थे लेकिन साथ hi उसकी बुर में भी हलकी सी नमी महसूस हो रही थी.

यह भाभी क्यों? मैं उनके साथ इतनी करीब थी… उनके लुंड को मैंने भी महसूस किया था… फिर भी अब वह भाभी को छोड़ रहे हैं… भाभी को इतना मज़ा आ रहा है… उनकी सिसकारियां… उनका बदन… सब कुछ… मैं भी ऐसे hi उनके ऊपर बैठना चाहती हूँ…

गीता की सांसें तेज़ हो गयी थी. उसको यह देख कर बहुत गरम हो रहा था. उसकी बुर अब भी हलकी सी गीली हो चुकी थी. वह सोच रही थी की अगर वह अंदर जाकर उनको रोक देती तोह क्या होता… लेकिन उसके अंदर एक और चीज़ भी थी — एक अजीब सी क्यूरोसिटी और हवस. उसको मां जी का लुंड इतने करीब से देखने का मैं कर रहा था.

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यह सब गलत है… लेकिन मैं यहाँ से हैट नहीं पा रही… मैं भी उनके लुंड को अपनी बुर में फील करना चाहती हूँ… भाभी को देख कर मुझे और भी तड़प हो रही है…

गीता की आँखें अब भी अंदर की तरफ लगी हुई थी. उसकी जेएलओसी और हवस दोनों साथ में बढ़ रही थी.

रौशनी अब मां जी के ऊपर बैठी हुई थी. उनका मोटा लुंड उसकी बुर में गहरा था. मां जी ने धीरे से उसको ऊपर से उठाया और उसको घुटनो के बल बैठने को कहा. रौशनी ने उनकी बात मानी और घुटनो के बल बैठ गयी.

वह धीरे से मां जी के लुंड के पास आयी. पहले उसने उसके मोटा सुपाड़ी पर एक लम्बी चुम्बन दी. फिर उसने अपनी जीभ निकाल कर सुपाड़ी के ऊपर से चेतना शुरू किया. मां जी के मुँह से एक गहरी सिसकारी निकली.

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रौशनी ने फिर से सुपाड़ी को अपने होठों से चूमा और धीरे से उसके लुंड की पूरी लम्बाई पर अपनी जीभ फेरने लगी. उसकी जीभ उसके लुंड के नीचे वाले हिस्से से लेकर ऊपर तक घूम रही थी. मां जी के हाथ उसके बालों में थे और वह उसके सर को अपने लुंड पर दबा रहे थे.

रौशनी ने अब उनके पूरे लुंड को अपने मुँह में ले लिया. वह धीरे धीरे चूस रही थी. उसकी जीभ उनके लुंड पर घूम रही थी और वह उनके लुंड को अपने मुँह में गहरा ले रही थी. उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी और उसके मुँह से धीमी सिसकारियां निकल रही थी.

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मां जी के मुँह से अब ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां निकल रही थी. उन्होंने उसके सर को और ज़ोर से पकड़ लिया और धीरे से कहा,

“अरे बहु रे… कितने प्यार से चूस रही है तू… उफ्फ्फ्फ़… मेरा लुंड तेरा मुँह में बहुत अच्छा लग रहा है रे… और चूस न… और गहरा ले ले…”

रौशनी ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया. वह अब भी उनके लुंड को अपने मुँह में लिए हुए चूस रही थी. उसकी जीभ उनके सुपाड़ी पर घूम रही थी और वह उनके लुंड को गहरा चूस रही थी. उसकी आँखें ऊपर उठी हुई थी और वह मां जी की तरफ देख रही थी.

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मां जी के मुँह से अब और तेज़ सिसकारियां निकल रही थी. उनका लुंड उसके मुँह में फड़क रहा था और वह उसके बाल पकड़ कर उसके मुँह में धीरे धीरे धक्के मार रहे थे.
 
गीता पंप हाउस के बहार छुप कर देख रही थी. उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी. उसकी दिल की धड़कन बहुत तेज़ चल रही थी. उसकी बुर में हलकी सी नमी महसूस हो रही थी. यह पहली बार था जब उसने मां जी का मोटा लुंड इतने करीब से और इतनी साफ़ तौर पर देखा था. उनका लुंड इतना मोटा और सख्त था की देख कर hi उसकी आँखें फैल गयी.

अंदर मां जी रौशनी को ज़ोर ज़ोर से छोड़ रहे थे. उनका मोटा लुंड रौशनी की बुर में गहराई से अंदर बहार हो रहा था. रौशनी के मुँह से लगातार सिसकारियां निकल रही थी. उसकी टांगें मां जी की कमर में लपेट हुई थी और वह अपनी कमर को ऊपर उठा कर उनके धक्कों का साथ दे रही थी.

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गीता के मुँह से हलकी सी सिसकारी निकल आयी. उसको शर्म आ रही थी क्यूंकि वह अब तक वर्जिन थी. लेकिन उसकी आँखें अंदर की तरफ लगी हुई थी. वह देख रही थी की मां जी रौशनी की बुर को कितने जोरों से छोड़ रहे हैं. उनके बीच गंदे और अश्लील शब्द भी सुनाई दे रहे थे.

मां जी धीरे से बोल रहे थे, “अरे बहु रे… तेरी यह बुर कितनी टाइट और गीली है… मैं तुझे ऐसे hi छोडूंगा रे… ले पूरा लुंड…”

रौशनी के मुँह से सिसकारी निकल रही थी, “हाँ मां जी… और ज़ोर से… मेरी बुर आपके लुंड के लिए खुली हुई है… आह्हः…”

गीता की बुर अब भी गीली हो रही थी. उसको यह देख कर बहुत गरम हो रहा था लेकिन साथ hi उसके अंदर एक तेज़ जलन भी हो रही थी. वह सोच रही थी की यह सब देख कर उसको भी ऐसा मज़ा लेना है लेकिन वह अब तक वर्जिन थी. उसकी आँखें अब भी अंदर की तरफ लगी हुई थी और वह धीरे धीरे अपने हाथ अपनी बुर पर रखने लगी.

गीता अब भी पंप हाउस के बहार छुप कर देख रही थी. उसकी सांस रुक सी गयी जब मां जी ने अपना मोटा लुंड रौशनी की बुर से बहार निकाला. उनका लुंड अब बिलकुल सामने चमक रहा था — मोटा, नशेदार, गहरे रंग का, और रौशनी की बुर के रास से पूरा गीला और चमकता हुआ. गीता की आँखें फैल गयी. यह पहली बार था जब उसने मां जी का लुंड इतना साफ़ और इतना करीब से देखा था.

उसकी बुर में एक और हलकी सी नमी आ गयी. पंतय के अंदर से रास टपकने लगा. गीता के दिमाग में एक hi बात घूम रही थी — उफ्फ्फ्फ़… यह इतना मोटा और नशेदार है… मैंने कभी नहीं सोचा था की लुंड इतना बड़ा भी होता है… और भाभी इसको अपने मुँह में ले रही है… उफ्फ्फ्फ़… मुझे तोह लगता था सिर्फ चुदाई होती है इससे… लेकिन यह तोह चूस भी सकते हैं…

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रौशनी ने धीरे से मां जी के लुंड को अपने हाथों में पकड़ लिया. उसका लुंड अब भी गीला था उसकी बुर के रास से. रौशनी ने पहले सुपाड़ी पर एक गहरा चुम्बन दिया, फिर अपनी जीभ से उसके नीचे वाले हिस्से को धीरे धीरे चाटने लगी. मां जी के मुँह से एक गहरी सिसकारी निकली.

रौशनी अब धीरे धीरे पूरे लुंड को अपने मुँह में लेने लगी. उसकी जीभ उनके लुंड पर घूम रही थी और वह धीरे धीरे चूसने लगी. उसका गाला अब भी गीला था, लेकिन वह उनके लुंड को पूरा अपने मुँह में ले रही थी. मां जी ने उसके बाल पकड़ लिए और धीरे से उसके सर को अपने लुंड पर दबा दिया.

गीता की बुर अब और भी गीली हो गयी थी. उसको देख कर उसके अंदर एक तेज़ हवस जग रही थी. वह सोच रही थी — उफ्फ्फ्फ़… लुंड को चूसा भी जाता है… मैं तोह सिर्फ चुदाई के बारे में सोचती थी… लेकिन यह इतना मोटा लुंड… अगर मैं भी ऐसे किसी दिन… उफ्फ्फ्फ़…

रौशनी अब जोश में आ चुकी थी. वह मां जी के लुंड को ज़ोर ज़ोर से चूस रही थी, अपनी जीभ से उसके सुपाड़ी को चाट रही थी. उसकी आँखें ऊपर की तरफ उठी हुई थी और वह मां जी की तरफ देख रही थी.

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रौशनी अब भी कुटिया पोज़ में थी — हाथ और घुटनो के बल छोत पर झुकी हुई. उसकी मोती गांड ऊपर की तरफ थी और मां जी पीछे से उसको पकड़ कर छोड़ रहे थे. उनका मोटा लुंड उसकी बुर में गहराई से अंदर बहार हो रहा था. हर धक्के के साथ उनकी जांघों की thap-thap की आवाज़ पंप हाउस के अंदर गूँज रही थी.

रौशनी के मुँह से लगातार zor-zor से सिसकारियां निकल रही थी. उसका बदन हर धक्के के साथ आगे की तरफ हिल रहा था.

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“आआह्ह्ह… मां जी… आपका लुंड कितना मोटा और गरम है… मेरी बुर को पूरा फैला रहा है… उफ्फ्फ्फ़… इतना गहरा जा रहा है अंदर… आपका यह बड़ा लौड़ा मेरी छूट को बिलकुल पहाड़ रहा है… हाँ… और ज़ोर से… और गहरा… आह्हः…”

मां जी ने उसकी कर्तव्य कमर को दोनों हाथों से पकड़ रखा था और zor-zor से, गहरे और लम्बे स्ट्रोक्स दे रहे थे. उनका लुंड हर बार पूरा बहार निकल कर एक झटके से अंदर तक उतर रहा था.

“अरे बहु रे… तेरी यह बुर कितनी मस्त है… मेरा लुंड पूरा निगल रही है… देख कितना गहरा जा रहा है… उफ्फ्फ्फ़… आज तुझे मैं ऐसे hi छोडूंगा… तेरी यह रसीली छूट आज मेरी हो गयी रे…”

रौशनी की सिसकारियां और तेज़ हो गयी थी. उसकी गांड हर धक्के के साथ हिल रही थी और उसके मुँह से लगातार कामुक आवाज़ें निकल रही थी.

“आआह्ह्ह… हाँ मां जी… आपका मोटा लुंड मेरी बुर के सबसे अंदर तक जा रहा है… कितना बड़ा है आपका लौड़ा… मेरी छूट को ऐसे hi फाड़ते रहिये… उफ्फ्फ्फ़… बहुत मज़ा आ रहा है… और ज़ोर से धक्के मारिये न… मैं आपकी हूँ… आप मुझे जितना चाहें छोड़ सकते हैं…”

मां जी ने उसकी कमर को और कास कर पकड़ लिया और अपनी स्पीड बढ़ा दी. अब वह बहुत तेज़ और गहरे स्ट्रोक्स दे रहे थे. रौशनी का बदन आगे की तरफ हिल रहा था और वह छोत की लकड़ी को ज़ोर से पकड़ कर संभल रही थी.

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पंप हाउस के अंदर सिर्फ उनकी सांसें, thap-thap की तेज़ आवाज़, रौशनी की तेज़ सिसकारियां और मां जी के अश्लील शब्द गूँज रहे थे. दोनों के बदन पसीने से लथपथ हो चुके थे लेकिन चुदाई की मस्ती अब भी बढ़ती जा रही थी.

रौशनी अब छोत पर कुटिया पोज़ में झुकी हुई थी. उसका पूरा बदन पसीने से बिलकुल लथपथ हो चूका था. मां जी पीछे से उसको ज़ोर ज़ोर से छोड़ रहे थे. उनका मोटा लुंड उसकी बुर में गहराई से अंदर बहार हो रहा था. हर धक्के के साथ रौशनी की गांड हिल रही थी.

मां जी ने उसकी कमर को ज़ोर से पकड़ कर कहा,

“अरे बहु रे… तेरी यह बुर आज मेरा लुंड पूरा निगल रही है… कितनी प्यासी है तू आज… ले… ले पूरा लुंड… तेरी यह रसीली बुर अब मेरी हो गयी रे…”

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रौशनी के मुँह से तेज़ सिसकारी निकल रही थी. उसकी सांस फूली हुई थी. वह अपनी कमर को पीछे धकेल कर उनके धक्कों का साथ दे रही थी और धीरे से बोली,

“हाँ मां जी… आपका मोटा लुंड मेरी बुर को पूरा भर रहा है… आह्हः… और ज़ोर से छोड़िये… मेरी बुर आपके लुंड के लिए खुली हुई है… आप जितना चाहें छोड़ सकते हैं… उफ्फ्फ्फ़… बहुत मज़ा आ रहा है…”

मां जी ने उसकी कमर को और कास कर पकड़ लिया और और तेज़ धक्के मरने लगे. उनके मुँह से अश्लील शब्द निकल रहे थे,

“ले मेरी बहु… ले मेरा पूरा लुंड… तेरी यह बुर कितनी टाइट और गीली है रे… मैं तुझे ऐसे hi छोडूंगा… तेरी बुर को आज पूरी तरह से छोड़ के रख दूंगा… बोल… बोल की तू मेरी हो गयी है आज से…”

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रौशनी के मुँह से अब लगातार तेज़ सिसकारियां निकल रही थी. उसकी चूचियां नीचे लटक रही थी और हर धक्के के साथ हिल रही थी. उसकी बुर से रास टपक रहा था. वह धीरे से बोली,

“हाँ मां जी… मैं आपकी हूँ… सिर्फ आपकी… आपका मोटा लुंड मेरी बुर में बहुत गहरा जा रहा है… आह्हः… और ज़ोर से… और गहरा… मेरी बुर आपके लुंड के लिए तैयार है… छोड़िये मुझे… पूरी तरह से छोड़िये…”

गीता बहार छुप कर देख रही थी. उसकी बुर अब बहुत गीली हो चुकी थी. वह सोच रही थी,

उफ्फ्फ्फ़… मां जी में तोह है hi दम… लेकिन रौशनी भाभी में छोड़ने की इतनी स्टैमिना… उफ्फ्फ्फ़… मां जी का मोटा लुंड लिए जा रही है… क्या और मर्दों से चूड़ी होगी यह भाभी?

गीता की आँखें अंदर की तरफ लगी हुई थी. उसकी जेएलओसी और हवस दोनों बढ़ रही थी.

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गीता पंप हाउस के बहार छुप कर देख रही थी. उसकी आँखें अंदर की तरफ लगी हुई थी. उसको देख कर उसके दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था.

उफ्फ्फ्फ़… यह भाभी कितनी सेक्सी है… उसका बदन कितना सुन्दर और जवान है… उसकी बड़ी चूचियां… मोती गांड… और यह सब देख कर मां जी को कितना मज़ा आ रहा है… मैं तोह सोचती थी की सिर्फ मैं hi उनकी फेवरेट हूँ… लेकिन यह भाभी तोह और भी तेज़ है…

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(अब गीता को क्या पता … एक तरफ रमेश जी… दूसरी तरफ मां जी… और पहले असलम और सलीम… इन सबके साथ चूड़ी है… और अब यह मां जी के मोटा लुंड को अपनी बुर में ले रही है… रौशनी भाभी तोह बुद्धों से छोड़ने में इतनी एक्सपीरियंस वाली हैं… उसकी बुर कितनी प्यासी है मोठे तगड़े लुन्डों के लिए…)

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वहां गीता सोच रही थी की अगर वह भी ऐसे किसी दिन मां जी के साथ ऐसी मस्ती कर पाती तोह कैसा होता…

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रौशनी अब छोत पर लेती हुई थी. उसकी दोनों हाथ छोत की रस्सी को ज़ोर से पकड़ रखे थे. मां जी उसको ज़ोर ज़ोर से छोड़ रहे थे. उनका मोटा लुंड उसकी बुर में गहराई से अंदर बहार हो रहा था. हर धक्के के साथ छोत की लकड़ी हिल रही थी.

रौशनी की आँखें ऊपर चली गयी थी. उसकी सांसें बहुत तेज़ हो गयी थी. उसको लगा जैसे उसका ओर्गास्म अब आने वाला है. उसकी बुर अब बहुत तेज़ फुदक रही थी और मां जी के लुंड को कास कर पकड़ रही थी.

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“आआह्ह्ह… मां जी… मैं… मैं आ रही हूँ… उफ्फ्फ्फ़… आपका लुंड… बहुत गहरा… आह्हः…”

रौशनी की सिसकारियां अब और तेज़ हो गयी थी. उसकी टांगें काँप रही थी. उसकी बुर से रास टपक रहा था. उसको लगा जैसे उसका पूरा बदन एक तेज़ लहार में आ गया है. उसकी आँखें ऊपर चली गयी थी और वह ज़ोर ज़ोर से मोअन कर रही थी.

लेकिन मां जी का लुंड अभी भी सख्त था. उनका लुंड अब भी उसकी बुर में गहरा जा रहा था. वह धीरे से बोल रहे थे,

“अरे बहु रे… तू आ रही है न… लेकिन मैं अभी नहीं आऊंगा… तेरी यह बुर अभी और तडपेगी मेरे लुंड पर… ले… ले और गहरा…”

रौशनी के मुँह से अब और गहरी सिसकारियां निकल रही थी. उसकी ओर्गास्म उसपर हावी होता जा रहा था. उसकी बुर अब बहुत तेज़ फुदक रही थी और उसका रास मां जी के लुंड पर लग रहा था. उसकी टांगें काँप रही थी और वह छोत की रस्सी को और ज़ोर से पकड़ रही थी.

उसको लगा जैसे उसका पूरा बदन अब बिलकुल उनके लुंड के हवाले हो चूका है. उसकी आँखें ऊपर चली गयी थी और वह ज़ोर ज़ोर से मोअन कर रही थी.

रौशनी अब छोत पर लेती हुई थी. उसकी टांगें मां जी के कमर के अराउंड लपेट हुई थी. मां जी का मोटा लुंड उसकी बुर में गहराई से अंदर बहार हो रहा था. हर धक्के के साथ उसकी बुर और भी गीली होती जा रही थी. उसको लगा जैसे उसका पूरा बदन एक तेज़ लहार में आ गया है.

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पहला ओर्गास्म उसको बहुत तेज़ आया. उसकी बुर मां जी के लुंड को कास कर पकड़ ली. उसकी आँखें ऊपर चली गयी. उसकी सांसें रुक सी गयी. उसको लगा जैसे उसके शरीर में बिजली दौड़ गयी हो. उसकी बुर से रास निकल रहा था और मां जी के लुंड पर लग रहा था. उसकी सिसकारियां अब बहुत तेज़ हो गयी थी.

“आआह्ह्ह… मां जी… मैं आ रही हूँ… उफ्फ्फ्फ़… बहुत गहरा… आपका लुंड मेरी बुर को पूरा भर रहा है… आह्हः…”

लेकिन मां जी ने रुकने का नाम नहीं लिया. उन्होंने उसकी कमर को पकड़ कर और तेज़ धक्के मरने शुरू कर दिए. रौशनी का बदन अब भी उनके धक्कों के साथ हिल रहा था. उसको अभी भी ओर्गास्म की लहार महसूस हो रही थी लेकिन मां जी का लुंड अब भी सख्त था और गहरा जा रहा था.

थोड़ी देर बाद उसका दूसरा ओर्गास्म आ गया. इस बार और भी तेज़. उसकी बुर फिर से कास कर उनके लुंड को पकड़ ली. उसकी टांगें काँप रही थी. उसकी चूचियां ऊपर नीचे हिल रही थी. उसको लगा जैसे उसका पूरा शरीर पिघल रहा है. उसकी आँखें बंद हो गयी थी और उसके मुँह से सिर्फ सिसकारियां निकल रही थी.

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“आआह्ह्ह… फिर से… मां जी… मैं फिर से आ रही हूँ… उफ्फ्फ्फ़… आपका लुंड इतना मोटा है… मेरी बुर को पूरा फैला रहा है… आह्हः… मैं और नहीं सेह पा रही… लेकिन आप अभी भी नहीं आ रहे…”

रौशनी के दिमाग में अब सिर्फ एक hi बात चल रही थी. उसको लगा जैसे मां जी का लुंड उसको अंदर से पूरा भर रहा है. उसको शर्म भी आ रही थी की वह दो बार झाड़ चुकी है लेकिन मां जी अभी भी उसको छोड़ रहे हैं. उसको यह एहसास हो रहा था की मां जी उसको पूरी तरह से अपना बना रहे हैं. उसकी बुर अब भी उनके लुंड के हिसाब से खुल चुकी थी. हर धक्के के साथ उसको एक नया मज़ा मिल रहा था.

उसकी सांसें अब बहुत तेज़ हो गयी थी. उसकी चूचियां पसीने से चमक रही थी. उसकी बुर से अब भी रास टपक रहा था. वह अपनी कमर को ऊपर उठा कर उनके धक्कों का साथ दे रही थी लेकिन उसको लगा जैसे अब उसकी ताकत ख़तम हो रही है.

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लेकिन मां जी का लुंड अब भी सख्त था. वह उसको ज़ोर ज़ोर से छोड़ रहे थे और धीरे से बोल रहे थे,

“अरे बहु रे… तू दो बार आ चुकी है… लेकिन मैं अभी नहीं आऊंगा… तेरी यह बुर अभी और तड़पेगी मेरे लुंड पर… ले… ले और गहरा…”

रौशनी के मुँह से सिर्फ सिसकारियां निकल रही थी. उसको लगा जैसे अब वह पूरी तरह से उनके लुंड के हवाले हो चुकी है. उसकी बुर अब भी उनके लुंड को कास कर पकड़ रही थी लेकिन वह अब भी उनके धक्कों को झेल रही थी.

उसको यह एहसास हो रहा था की मां जी उसको और भी गहरा छोड़ रहे हैं और वह उनके लुंड के लिए बिलकुल तैयार हो चुकी है.

रौशनी अब छोत पर लेती हुई थी. मां जी उसके ऊपर थे और उनका मोटा लुंड उसकी बुर में गहराई से अंदर बहार हो रहा था. हर धक्के के साथ उसको यह एहसास हो रहा था की अब वह बिलकुल उनके कण्ट्रोल में है.

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पहले जब वह मां जी के लुंड को मुँह में ले रही थी तब उसको लगा था की वह उनको कण्ट्रोल कर रही है. लेकिन अब जब मां जी उसको छोड़ रहे थे, तब पावर कम्प्लीटली उनके हाथ में था. उनकी कमर पकड़ कर वह उसको जितना चाहें ज़ोर से और गहरा छोड़ सकते थे. रौशनी की टांगें उनकी कमर में लपेट हुई थी लेकिन वह उनके धक्कों को सिर्फ झेल रही थी. उसको लगा जैसे उसका बदन अब सिर्फ उनके लुंड के लिए बना है.

उसको यह भी महसूस हो रहा था की मां जी उसको अपना बना रहे हैं. उनकी आँखों में वह गहरा नशा था जो कह रहा था की अब तू मेरी है. रौशनी के दिमाग में यह बात बार बार आ रही थी की यह वही मां जी हैं जिनके साथ उसने कभी सपने में भी यह सब नहीं सोचा था. लेकिन अब वह उनके लुंड के नीचे लेती हुई थी और हर धक्के के साथ उसकी बुर उनके लुंड को कास कर पकड़ रही थी.

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रौशनी के अंदर एक गहरा कनफ्लिक्ट चल रहा था. एक तरफ उसको गिल्ट हो रहा था की वह रमेश जी की बीवी है और उनके मां के साथ यह सब कर रही है. दूसरी तरफ उसको यह एहसास बहुत मज़ा दे रहा था की एक बुज़ुर्ग आदमी उसको इतनी जोरों से छोड़ रहा है और वह उसके कण्ट्रोल में है. उसको यह भी लग रहा था की मां जी उसको पूरी तरह से अपना बना रहे हैं — उसकी बुर, उसकी चूचियां, उसका पूरा बदन अब उनके लिए है.

जब मां जी ने उसकी कमर को और ज़ोर से पकड़ कर गहरा धक्का मारा तोह रौशनी के मुँह से सिर्फ सिसकारी निकल आयी. उसको लगा जैसे उसका पूरा शरीर उनके लुंड के हिसाब से खुल चूका है. उसको यह भी एहसास हो रहा था की अब वह उनके लिए कुछ भी कर सकती है. यह पावर शिफ्ट उसको बहुत गरम कर रहा था.

रौशनी के दिमाग में अब यह बात बार बार आ रही थी — अब मैं उनकी हो चुकी हूँ… उनके लुंड के नीचे… उनके कण्ट्रोल में… और मुझे यह पसंद आ रहा है…

मां जी ने अपना मोटा लुंड रौशनी की बुर से बहार निकाल लिया. रौशनी की बुर अब भी गीली थी और थोड़ा सा खुली हुई थी. मां जी उसके ऊपर चढ़ गए. उन्होंने अपना लुंड उसकी बड़ी चूचियों के बीच रख दिया और धीरे से रगड़ने लगे.

रौशनी ने अपनी दोनों हाथों से अपनी चूचियों को पकड़ लिया और उनको मां जी के लुंड के ird-gird कास कर दबा दिया. अब मां जी उसकी चूचियों के बीच अपना लुंड अंदर बहार कर रहे थे. उनका मोटा लुंड उसकी मुलायम और गरम चूचियों के बीच रगड़ रहा था. रौशनी की चूचियों के बीच से उनका सुपाड़ा बहार निकल रहा था.

रौशनी के मुँह से हलकी सी सिसकारी निकली. उसको यह एहसास बहुत मज़ा दे रहा था. उसकी चूचियों के बीच मां जी का लुंड गहराई से अंदर बहार हो रहा था.

मां जी धीरे से बोलने लगे,

“अरे बहु रे… तेरी यह बड़ी चूचियां कितनी मस्त हैं… मैं इनके बीच अपना लुंड छोड़ रहा हूँ… उफ्फ्फ्फ़… कितनी नरम और गरम हैं… आज मैं इनको भी छोडूंगा रे…”

रौशनी ने अपनी चूचियों को और ज़ोर से पकड़ कर उनके लुंड को अपने बीच में रगड़ने लगी. उसकी सिसकारियां अब धीमी धीमी निकल रही थी. उसको यह नया एहसास बहुत पसंद आ रहा था.

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गीता बहार छुप कर देख रही थी. उसकी आँखें फैल गयी. उसको यह देख कर बहुत हैरानी हो रही थी. वह सोच रही थी,

उफ्फ्फ्फ़… चुदाई में यह भी होता है… सिर्फ छूट और लुंड का खेल नहीं… पूरे बदन का इस्तेमाल… भाभी अपनी चूचियों के बीच उनका लुंड ले रही है… उफ्फ्फफ्फ्फ़… यह सब देख कर मेरा दिल और भी गरम हो रहा है…

गीता पंप हाउस के बहार छुप कर देख रही थी. उसकी आँखें अंदर की तरफ लगी हुई थी. उसको अंदर का नज़ारा देख कर उसके दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था.

उफ्फ्फ्फ़… छोड़ना कोई सीखे तोह रौशनी भाभी से… ऐसी दुमदार चुदाई तोह मैंने कभी नहीं देखि… उस दिन मेरी सहेली ने पोर्न दिखाया था… वहां पर भी वह महिला इतनी मस्ती से नहीं चुद रही थी जितनी भाभी अब चुद रही है… मां जी का मोटा लुंड उसकी बुर में गहरा जा रहा है और भाभी उसको अपनी टांगें लपेट कर लेकर जा रही है… उफ्फ्फ्फ़… कितनी गरम है यह भाभी जी…

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गीता की बुर अब बहुत गीली हो चुकी थी. उसकी पंतय के अंदर से रास टपक रहा था. उसको यह देख कर बहुत जलन हो रही थी लेकिन साथ hi उसके अंदर एक तेज़ हवस भी जग रही थी. वह सोच रही थी की अगर वह भी ऐसे किसी दिन मां जी के साथ ऐसी मस्ती कर पाती तोह कैसा होता.

यह भाभी तोह सच में बहुत तेज़ है… मां जी को इतना तड़पा रही है और खुद भी इतनी मस्ती में है… मैं तोह अब तक सिर्फ सोचती थी की चुदाई सिर्फ एक बार होती है… लेकिन यह तोह लग रहा है जैसे दोनों एक दूसरे को पूरा खा जाना चाहते हैं… उफ्फ्फ्फ़… मैं भी ऐसे hi तड़पना चाहती हूँ…

मां जी अब पूरी तरह से जोश में आ चुके थे. उन्होंने रौशनी को ज़ोर से पकड़ लिया और और तेज़ धक्के मरने शुरू कर दिए. उनका मोटा लुंड उसकी बुर में गहराई से अंदर बहार हो रहा था. रौशनी की सिसकारियां अब और तेज़ हो गयी थी. दोनों के बदन पसीने से लथपथ थे.

मां जी के मुँह से एक बड़ी सी आह निकली. उनका लुंड अब बहुत तेज़ फड़क रहा था. उन्होंने अपना लुंड बहार निकाल कर रौशनी की चूचियों पर रख दिया और ज़ोर ज़ोर से झड़ने लगे. उनका मोटा, सफ़ेद और गधा माल उसकी बड़ी चूचियों पर ढेर सारा निकलने लगा. कुछ रस्से उसकी चूचियों के बीच से नीचे की तरफ बह रहे थे. एक दो रस्से उसके होठों और गाल पर भी गिर गए थे.

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रौशनी का पूरा बदन और चेहरा मां जी के छुम से भरा हुआ था. उसकी चूचियां अब बिलकुल गीली और चमक रही थी. उसकी बुर अब भी गीली थी और थोड़ी सी खुली हुई थी. उसकी सांसें अब भी तेज़ चल रही थी.

मां जी ने धीरे से उसके ऊपर झुक कर उसके होठों पर एक चुम्बन दिया और कहा,

“अरे बहु रे… आज तुझे पूरी तरह से छोड़ दिया… तेरा यह बदन अब मेरा हो गया रे…”

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रौशनी कुछ बोल नहीं पा रही थी. उसको यह एहसास हो रहा था की अब वह पूरी तरह से उनके छुम से भरी हुई है. उसकी आँखें बंद थी और वह धीरे से सांस ले रही थी.

गीता अब पंप हाउस के बहार छुप कर देख रही थी. उसको यह सब देख कर बहुत गरम हो रहा था लेकिन साथ hi उसके अंदर एक डर भी जग रहा था. वह सोचने लगी की अब यहाँ से जाना चाहिए. उसकी सांसें तेज़ थी. वह धीरे से पीछे हटने लगी.

लेकिन जैसे hi वह पीछे हटी, उसका पेअर एक पुराने कप पर पद गया. कप ज़ोर से गिर गया और एक तेज़ आवाज़ हुई — “तंत्र…”

अंदर मां जी और रौशनी दोनों झट से रुक गए. मां जी ने तुरंत अपना लुंड बहार निकाल लिया और ज़ोर से चिल्लाया,

“कौन है बहार? कौन है वहां?”

रौशनी की आँखें फैल गयी. उसको बहुत डर लग गया. वह जल्दी से छोत पर पड़ी चद्दर को अपने बदन पर लपेट लिया. उसका चेहरा लाल हो चूका था और उसकी सांसें तेज़ चल रही थी. उसको लगा जैसे उसका दिल बहार आ जायेगा.

मां जी ने जल्दी से अपनी धोती ठीक की और दरवाज़े की तरफ बढ़ने लगे. उनके चेहरे पर गुस्सा और शक था.

रौशनी ने चद्दर को अपने बदन पर और टाइट से लपेट लिया. उसकी बुर अब भी गीली थी और उसके बदन पर अब भी मां जी का माल लगा हुआ था. उसको बहुत डर लग रहा था की अगर कोई देख लेगा तोह क्या होगा.

गीता बहार कड़ी थी. उसकी सांसें रुक सी गयी थी. उसको लगा जैसे अब सब ख़तम हो गया. वह वहां से भागने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसके पेअर काँप रहे थे और मनो वह हिल hi नहीं प् रही थी ...

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अब गीता की मौजूदगी पता चलने वाली हैं मां जी और रौशनी को .. अब क्या होगा ..
 
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