My Complete Intentions - The Beginning - Page 4 - SexBaba
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My Complete Intentions - The Beginning

अपडेट:-14 (It's एक टाइम :रोल: )

मैं फ़ोन उठाया जो की किरण का था और वो थोड़ी घबराई हुयी थी.

मैं:- हां बोलो क्या हुआ.

किरण:- उस आदमी को किसी ने स्टेशन के बीचो बिच मार दिया.

मैं:- व्हाट थे फ़क! ऐसे कैसे मार दिया, पुलिस वाले क्या गांजा फुक के बैठे थे.

किरण:- नहीं वो सब बेहोश थे 2 हवलदार जब राउंड से वापस आये तब सब बेहोश थे और वो मारा हुआ था.

मैं:- ma'am मानो न मानो पर ये पुलिस भी मला की है. अब बस एक काम करो कल उस मला के पास जाओ और उसे शो करो की तुम उसके साइड हो तुम उसे एक लाके डौगी उसे बिलीव करवाओ मुझे नहीं पता कैसे पर करवाओ.

इतना बोलके मैंने फ़ोन काट दिया और सोचने लगा बस अब क्या करे ऐसे तो गांड मर जाएगी, कल तक तो रोहित को भी वो सेव कर लेगा, तो आज hi मार देते है, हां ये सही रहेगा. मैंने अभय के पिछवाड़े पे दी लात वो चौक के खड़ा हो गया.

अभय:- अबे गांडू सोने दे न.

मैं:- मेरे लौड़े पे सजा आजा.

अभय:- क्या हुआ बस रात के 12 बहे क्यों भड़क रहा है.

मैं:- सुन बकचोदी न काट जल्दी से रोहित की इनफार्मेशन दे.

अभय:- वो अभी इस वक़्त अपने फार्महाउस पे मिलेगा, जो की सिटी से निकल के थोड़ा खेतो में है, ज्यादा आदमी नहीं है मुश्किल से 8 आदमी है और उसका एक दोस्त है उसके साथ, उसके बन्दे त्रिनेड नहीं है बस लेथ वगैरह है बस उस रोहित के पास गन मिल सकती है, फार्महाउस 2 फ्लोर का है.

मैं:- चल तो उठ और ब्लूटूथ ले ले और दोनों रामपुरी जो तूने बनवायी है.

अभय:- ओह्ह्ह बस आज मजा आने वाला है.

मैं:- चल जल्दी बाइक स्टार्ट कर और चल.

हम दोनों ने सामान उठाया जरूरत का, मैंने एक ब्लैक हुड डाला ास्सास्सिन वाला, और बाइक पे बैठ के हो लिए उस तरफ. 45 मिनट का रास्ता था लेकिन ड्राइवर मैं था और रोड एक दम खली भेनचोद बाइक का एयरोप्लेन बना दिया, थॉट्स व्हाई ी लव पल्सर बस चोर बाइक है क्या भगति है.

हमने बाइक उस फार्महाउस से दूर कड़ी की और पैदल हो लिए घूमके ताकि उस फार्महाउस के पीछे की साइड जा पाए. हम जा रहे थे पर गांड फैट रही थी बन्दों से नहीं बे भूतो से.

मैं:- ोयी तुझे चुड़ैल दिखी तो क्या करेगा.

अभय:- उसके मुँह पे मुठ मार दूंगा.

मैं:- :युक: बस!

अभय:- और तू क्या करेगा अगर चुड़ैल मिली तो.

मैं:- मैं तो पंत में मूट दूंगा.

अभय हसने लगा, भेनचोद मुझपे हस्ता है रुक साले.

मैं:- ाचा तुझे एक शायरी सुनौ, मैंने लिखी है.

अभय:- इरशाद! इरशाद!

मैं:- " कच्ची में कच्ची, कच्ची में कच्चा"

अभय:- वाह! वाह!

मैं:- "कच्ची में कच्ची, कच्ची में कच्चा", "मैं तेरा बाप तू मेरा बचा".

ये बोलके मैं हसने :रोफ्लोल: लगा और अभय ने गांड जैसा मुँह बना लिया, खैर हम लोग बकचोदी करते हुए पहुंच गए उस फार्महाउस के पीछे, फार्महाउस काम एक मिडिल क्लास घर लग रहा था.

अभय:- अब क्या करना है.

मैं:- बन्दों की पोजीशन पता है?

अभय:- हां.

मैं:- तो मेरे मरने के बाद बताएगा क्या?

अभय:- अबे 8 बन्दे है 5 निचे ग्राउंड फ्लोर पे जिसमे से 1 गेट पे होगा और एक स्टैर्स पे और एक मिडिल स्टैर्स पे और 2 सो रहे होंगे, और उप्पेर टेरेस पे एक होगा और उप्पेर स्टैर्स पे एक और एक सो रहा होगा. और वो रोहित और उसका दोस्त एक रूम में होंगे फर्स्ट फ्लोर पे.

मैं:- गे है क्या दोनों.

अभय:- मजाक करने आया है क्या यहाँ पे.

मैं:- नाना सोचा मर गए तो मजाक करके तो मरे.

अभय:- तेरे सादे जोक्स हो गए तो प्लान बोल.

मैं:- सिंपल है बस, लेथ वाले बन्दे है तू इस पेड़ से चाहड़ के टेरेस वाले, स्टैर्स वाले और जो सो रहा उनको टपका, सिंपल बोलू तो ास्सास्सिनाते कर दे, निचे के मैं देख लूंगा, और सुन भसडक हीरो मत बनियो रोहित के सामने अकेला जाके.

अभय:- ोकक बॉस! गुड़ लक! मिलते है अगले जनम में .

मैं:- भाग लौड़े.

वो भाग के पेड़ पे चाहड़ा और मैं हो लिया गेट की तरफ, पता नहीं कैसे मारेगा अभय पर वो मार लेगा इतना पता था मुझे क्युकी वो मेरे जैसा hi है बस उसमे मेरे जैसा ब्रेन, एंगर, पागलपन और पत्थर दिल नहीं है जो मुझे डेडली बनती है.

ये सब सोचते हुए मैं गेट के पास आया तो आँखों में चमक आ गयी की वो लोदु गॉर्ड मूट रहा था गेट के पास दूसरी तरफ मुँह करके, इससे ाचा मौका क्या मिलेगा, मैं सिलेंटली बूत फ़ास्ट उसके पास पहुंच और पीछे से उसका मुँह दबाके वो नाइफ उसकी गार्डन पे लगाया और लगते hi वो नाइफ मुझे उसके अंदर जाता हुआ फील हुआ, भेनचोद गाँडफाँड रामपुरी है ये तो और मैंने थोड़ा सा जोर लगाके वो नाइफ दबाया और झटके से खींच दिया और और उसकी बॉडी को सहारा देके लिटाया और चेक किया तो वो मर गया.

मैं:- बस 1 डाउन!

अभय:- मेरा भी.

मैं:- लेटस मूव बीच.

मैं चुपके से अंदर गुसा बिलकुल दबे पेअर और अब उस स्टैर्स वाले को लपेटना था जो थोड़ा मुश्किल था, लेकिन जैसे hi स्टैर्स के पास पंहुचा तो देखा की वो लीचर फुल तैनात खड़ा है. इसका ध्यान भटकना जरूरी था.

अभय:- 2 डाउन!

:wtf: बस ये क्या कर रहा है लोदु इतनी जल्दी.

मैं एक कोने में खड़ा होक ये सोच hi रहा था की गलती से मेरा था वह राखी किसी चीज़ पे लग गया और तभी मुझे आवाज़ सुनाई दी उनके जो सायद उप्पेर स्टैर्स वाले की थी.

आदमी:- जा के देख बिली होगी.

वो निचे वाला आदमी मेरी तरफ आया बस यही तो चाहिए था, जैसे hi वो मेरे नजदीक आया लेकिन वो बस झुक गया और मैं उसके उप्पेर से उस साइड गिर गया. वो भी सतर्क हुआ और लेथ घुमाया मेरे सर के उप्पेर से लोडे लोग एक स्टाइल आता है बस. मैं निचे झुका और दूसरी साइड हैट के सीधा नाइफ मारा उसके तइस में लेकिन वो चिल्ला पता उससे पहले hi मेरा नाइफ उसकी थिगह से निकला और उसकी चीन से घुसता हुआ पूरा अंदर चला गया, डेड भेनचोद पर उसकी बॉडी संभालता उससे पहले वो निचे गिरा धाम से.

आदमी :- कोण है बे!

मैं ( आवाज़ भरी करके) :- बिल्ली!

और मैं हो लिए उस उप्पेर वाले की तरफ उसको मरना इजी था अँधेरे में उसे लगेगा की उसका साथी उसके पास आ रहा है और जब तक वो पहचानेगा इतने तो उप्पेर होगा वो.

मैं उसके पास पंहुचा तो वो लोढ़ा बीड़ी पि रहा था वह चेयर पे बैठके. मैंने आगे हाथ किया तो बीड़ी पकड़ा दी उसने मुझे. लौड़ा नशे में है क्या मैं वो बिड्डी अपने मुँह में डाली और वो चाकू उसके गले में, वो लौड़ा प्रोसेस भी न कर पाया. मैंने उसको सुंघा तो बस ने देसी चाहड़ा राखी थी. मैंने उस बीड़ी का एक सत्ता मारा और फेक दी.

अभय:- 3 दोने.

मैं:- नाउ वेट!

और ये बोलके मैं हो लिया उस रूम की तरफ जहा वो सो रहे थे दारू पाइक, मैंने ज्यादा टाइम न वास्ते किया दोनों के मुँह पे हाथ रखके गाला काट दिया, और पहले hi बता दू ग्लव्स पेहेन रखे थे इतने भी चूतिये नहीं है बस हम.

मैंने इन 2 को मारा hi था की आवाज़ आयी.

अभय:- देख रोहित गन निचे कर ले, चल जाएगी.

रोहित:- तुझे क्या लगा तू अकेला सबको मार्के मेरे को भी मार देगा हहहह.

मैं:- अभय लोडे 1 मिनट रोक ले बस.

मैं वह से भगा उप्पेर और इस टाइम मुझे रोहित के भोकने की hi आवाज़ आ रही thi.main जैसे hi सामने पंहुचा तो मेरे एक साइड रोहित गन ताने खड़ा था और दूसरी तरफ अभय हाथ उप्पेर किये और वो रोहित का दोस्त पेट पकडे पड़ा था सायद अभय ने नाइफ मारा होगा, मैं गेट पे hi रुक गया उन्दोनो का hi ध्यान मेरी तरफ नहीं था. रोहित की ऊँगली ट्रिगर की तरफ बढ़ रही थी इसलिए मैं भी वर्किंग मोड में आया और रोहित की तरफ भगा उसकी ऊँगली ट्रिगर पे पहुंची और ट्रिगर दबा लेकि उससे जस्ट 0.11 सेकंड या 0.12 सेकंड पहले मेरी किक उसके हाथ पे पड़ी और गन से निकली हुयी बुलेट ठीक अभय की खोपड़ी के कुछ 1 फ़ीट उप्पेर से गयी. लेकिन मेरे अंदर का जानवर जाग गया था ये देख के इसलिए रोहित कुछ समझ पता उससे पहले मैंने पंच दिया उसके राइट साइड के गाल पे जिससे उसकी मुंडी मुद गयी और मुंडी मुड़ते hi मैंने एक किक दी उसकी चेस्ट में जिससे वो दिवार में लगा लेकिन एक और पंच मैंने जैसे hi मरना चाहा तो वो बचा और एक फ्लाइंग किक चिपका दी मेरे थोबड़े पे, बस मैं तो सुन्न हो गया और पीछे की तरफ हुआ. मेरे को गिरता देख अभय ने अपना नाइफ उठाया और उसको मारा लेकिन बस वो जल्लाद झुका और एक पंच दिया अभय की रिब्स पे अभय घुटनो पे आ गया और नाइफ गिर गया उसका, जो रोहित ने उठा लिया, अब मुझे hi करना था कुछ और ये सोच के मैं खड़ा हुआ और हम दोनों आमने सामने थे उसके हाथ में भी नाइफ और मेरे हाथ में भी दोनों एक दुसरे की तरफ बढे लेकिन मैंने दिमाग लगाया और एक दम से रुक गया, उसने ये एक्सेप्ट नहीं किया था इसलिए वो सिद्धता मेरे ऊपर hi आ गया और मैंने बस अपनी बॉडी को पीछे करके अपना घुटना दिया उसके पेट में, लेकिन उसने भी घूम के किक दी मुझे, बस बराबर का लोंदा है ये तो ऐसा नहीं मार पाउँगा इसे.

"उसे योर नाइफ बीच" ये आवाज़ आयी मेरे दिमाग से और अगले hi पल मैं उसके सामने घुटनो पे बैठा और वो नाइफ उसकी थिगह में घुसा दिया उसने ये एक्सेप्ट नहीं किया था वो लोदु सोच रहा था की मैं गले पे मारूंगा लेकिन मैं बैठ गया. खैर उसकी जांघ में नाइफ लगने से वो चीखने को हुआ उससे पहले उसके मुँह पे एक पंच पड़ा जो अभय का था और उसकी चीख बंद हुयी तो मैंने वो नाइफ उसके कंधे में घुसा दिया वो फिर से अपना कन्धा पकड़के चीखने को हुआ लेकिन उससे पहले एक और पंच अभय का. वो बिचारा अपना दर्द भी बहार नहीं निकल पा रहा था.

मैंने और अभय ने कुछ देर तक उसे ऐसे hi तड़पाया मैंने उसे नाइफ से दर्द देता और अभय उसका मुँह बंद करवा के उस दर्द को अंदर hi रहने देता, लेकिन अब उसकी आँखों में आंसू आ गए थे वो बर्दास्त नहीं कर पा रहा था, हाथ जोड़ने लग गया था.

रोहित:- bhàaaii छोड़ दू ममज्जी

मैं:- पकड़ा कब था तुझे.

अभय:- अबे ड्रग्स दिमाग पे चाहड़ गया क्या तेरे जो हर टाइम मस्ती सूझ रही.

रोहित:- भाई आऍप तू अक्केल्ले थेय्य ना.

मैं:- मैं अकेला hi हु भसडक,

रोहित:- तू जांवररर है, तुझी सरराम नही आइए सोटती हुएए गऊरर्ड्स को मार्र्णी में.

Main:-nahi आयी सरम, और तूने मेरे अंदर का असली जानवर नहीं देखा है, अब तक ने देखा है और उसे इतनी बुरी मौत मिली थी की वो नरक में भी रोटा होगा, वैसे कोई नहीं मिल लियो उससे वह पे और बहुत लोग आएंगे इन्ही हाथो से मरे हुए कुछ तेरे अपने भी.

Main:-ab टाइम नहीं है मेरे पास और न तेरे पास अपने भाई और भाभी से मिलियो नरक में, ब्यय

और ये बोले मैंने उसका भी गाला काट दिया. अभय ने वो नाइफ उठाया और रोहित का दोस्त जो की बेहोश था उसके गले पे फेक मारा वो भी डेड.

मैं:- भसडक हीरो बनने को कोण बोलै था तेरे को, मन करने के बाद भी घुस गया.

अभय:- अबे मैं सोचा इसको पकड़ लेता हु फिर तू पेल दियो.

मैं:- भड़वे में 1 सेकंड भी लेट होता न तो वो बुलेट तेरे भेजे में होती और बिलीव में फिर इस पुरे देश को आग लगा देता मैं.

अभय कुछ नहीं बोलै क्युकी गलती थी उसकी.

मैं:- चले अब, मज़ा आ गया आज तो.

अभय:- अब पकडे गए तो.

मैं:- कल सुबह धमक होगा भाई कोई शक नहीं करेगा हमपे, बस सबूत मिटा दे.

अभय ने सबूत मिटाये जो की थे hi नहीं, उसका हाथ थोड़ा इन्जुरेड हुआ था नहीं तो हम दोनों ने मिलके 10 बन्दे टपका दिए थे अब चैन की नींद सोयेंगे लेकिन चैन कहा हम वह से निकले और रूम पे पहुंचे तो सुबह के 4 बज रहे थे, इसलिए रूम में पहुँचते hi सो गया मैं.

आँख खुली तब देखा की मेरा फ़ोन बज रहा था, उठाया मैंने बिना देखे.

मैं:- hello कोण?

किरण:- hello के बचे जो 10 आदमी मारे है न तुमने मला के जिसमे उसका बीटा भी है, वो पागल हो रहा है उसे पता है तुमने मारा है उसे इसलिए वो कभी भी कुछ भी कर सकता है तुम्हारी फॅमिली के साथ.

मैं:- ी हैवे प्लान जिससे वो फॅमिली की तरफ देखेगा भी नहीं और ना hi मेरी तरफ, बस उसकी लोकेशन बता दो मुझे.

किरण:- ोकक, ी विल सेंड यू.

मैं:- और हां मेरे वह पहुंचने के ठीक 5 मिनट बाद वह मीडिया आ जानी चाहिए फिर मैं संभल लूंगा.

किरण:- ोकक! जो भी करो ध्यान से करना.

मैंने बिना कोई जवाब दिए कॉल काट दिया और सोचने लगा क्या करू कैसे करू ऐसे तो चुद जायेंगे हम.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
अपडेट:-15 (प्लान :रोल: )

मैं बीएड से उठा और नाहा धो के रेडी हुआ अभय को नहीं उठाया मैंने सोचा सोने देता हु इसे. मैंने फ़ोन देखा तो मला की लोकेशन आ चुकी थी और वो सायद उसका ऑफिस था.

मैंने भी निकलते टाइम किरण को मस्सग कर दिया था की मीडिया को ठीक 35 मिनट बाद वह भेजे. और मैं निकल लिया उसकी लोकेशन पे बिना किसी को बताये अगर मीडिया थोड़ी सी भी लेट हुयी तो मेरी गांड टूट सकती है और इसमें कोई शक भी नहीं है लेकिन रिस्क तो लेना hi होगा क्युकी किसी ने कहा है नाम बनते है रिस्क से ( अबे वो अद्वेर्तिसेमेन्ट है लौड़े उनके चक्कर में गांड न टुडे लियो अपनी).

ये सब सोचते हुए मैं सिटी में एंटर किया और ठीक 30 मिनट में उस ऑफिस के सामने बाइक रोकी. भेनचोद बहुत पैसा है इसके पास तो क्या शानदार ऑफिस है, मैंने दूर से देखा तो सायद वह ऑफिस के बहार लॉन में shok-shabha चल रही थी फिर याद आया इसका बीटा मर गया तो शोक- षभा hi चलेगी :रोल: . कैसी कैसी बाते सोच रहा हु मैं लेकिन अंदर जाओ या न जाओ कही बुढऊ ने गोली मरवा दी तो देखते hi, मरवा भी सकता है बेटे के गम में, लेकिन जाना तो पड़ेगा.

एक ऐसा डरना अछि बात नहीं दर के आगे जीत है ( अबे एक तो ये अद्वेर्तिसेमेन्ट की इंस्पिरेशन वाली लाइन न बोल ). खैर मैंने अपने सारा हौसला जुटाया और बाइक से उतर के उधर चला गया, shok-shabha चल रही थी तो गेट खुला hi था और इसीलिए मैं अंदर हो लिया. लेकिन अंदर आया तो नर्वस हो गया क्युकी अंदर विप आदमी थे सारे और माल माल औरते, किरण भी वही थी बस क्या माल लग रही थी वो एक मौका मिल जाए बस किरण को चोदे बिना नहीं छोडूंगा. (हवस के पुजारी ये सब बकचोदी बंद कर और अपने अंदर के शैतान को जगा के कूद जा मैदान में ).

इतना दिमाग ख्याल में आते hi, ओह्ह सॉरी इतना ख्याल दिमाग में आते hi मैंने अपने सीना फुलाया और जोर से आवाज़ लगायी "मला सर".

और इतना बोलना था की वह खड़े हर गॉर्ड ने वो auto-rifles और पिस्टल्स मेरे पे तान दी, भेनचोद कितना hi बड़ा सुरमा बेशक हु मैं लेकिन मेरी गांड फैट गयी थी ( भेनचोद तेरी गांड है या कागज़ जो फाटे hi जा रही है) मैंने अपने अंदर की इस आवाज़ पे ध्यान नहीं दिया और उन लोगो को शो भी नहीं किया की मैं डरा हुआ हु.

इतने वो बुढऊ मला मेरे पास आया, सॉरी बुढऊ नहीं लग रहा था वो, रौबदार चेहरा, आँखों में गुस्सा hatta-katta सरीर. लेकिन हमे क्या हम तो इसकी भी गांड तोड़ देंगे.

मला:- ओह्ह्हू नादाँ बालक तुझे जरा भी दर नहीं लगा मेरी जगह पे आते हुए.

मैं:- सुन बुढऊ ये पुराणी फिल्मो के विलेन की तरह बात मत कर मुझसे और डरता तो मैं खुद के बाप से भी नहीं.

हम दोनों जो बाते कर रहे थे वो किसी को सुनाई नहीं दे रही थी क्युकी एक तो हम दोनों धीरे बोल रहे थे दूसरा हम लोग थोड़ा दूर थे उनसे.

मला:- अब तो तू मरेगा.

मैं:- no वे बीच! एक नेवर केस अलोन.

और मेरे इतना बोलते hi 6 7 कार्स कूदती हुयी लॉन में आयी और उन कार्स को देख के मला की गांड फैट गयी, फैट तो मेरी भी गयी थी क्युकी मैंने तो बस 2 कार एक्सपेक्ट की थी. मैंने किरण की तरफ देखा तो उसने मुझे आँख मार दी. देखा भसडक लाइन दे रही है वो मुझे ( अबे वो तुझे बोल रही है की अब आगे संभल इस राइट को जो तू फैला रहा है).

वो मीडिया वाले कार्स से उतरे और अपना मिछ, कैमरा मुझपे और उस मला पे तान दिया. मला तो अभी भी शॉक में था इसलिए मैंने hi जवाब देना सही समझा और मैं hi आगे आ गया.

रिपोर्टर1:- एक जी जैसा की हम सब जानते है आपने किस तरह जान पे खेलके उस ड्रग सप्लायर को पकड़ा था और इन्ही दिनों मला साहब के दोनों बेटो और उनके दोस्त की बेटी की मौत हो गयी और अब आप मला साहब के पास आये है. आखिर बात क्या है?

मैं:- हां मैं ये चीज़ ज़रूर शेयर करना चाहूंगा की मला सर कितने महान है. सिलसिला सुरु होता है मेरे उस ड्रग डीलर को पकड़ने और मला सर का पुलिस का आर्डर देना सायद उस ड्रग डीलर राजेश को पसंद नहीं आया इसीलिए उसने hi इनके बेटो को मरवा दिया और मेरी फॅमिली को भी धमकी दी है. लेकिन मला सर इतने महान है की इन्होने खुद के दुःख को साइड में करके मुझे यहाँ बुलाया है और कहा है की जब तक राजेश पकड़ा नहीं जाता या मारा नहीं जाता तब तक मेरी फॅमिली की और मेरी सुरक्षा की जिम्मेदारी इनकी होगी. अगर हमे कुछ हो जाता है तो ये इस चीज़ का दोषी खुद को मान लेंगे. अब आप hi बताइये कोई इतना महान कैसे हो सकता है. मला साहब की जय हो.

मेरे इस स्पीच से मला और उसके बन्दों की गांड के साथ आँखे भी फैट गयी thi,maine किरण की तरफ देखा तो वो भी शॉकेड थी क्युकी उसने भी ये एक्सेप्ट नहीं किया था.

रिपोर्टर 2:- लेकिन मला साहब के छोटे बेटे और उनके दोस्त की बेटी की डेथ तो पहले hi हो गयी थी और उनकी तो डेड बॉडी भी नहीं मिली.

मैं:- क्युकी मला साहब तो पहले से hi राजेश के पीछे पड़े हुए थे, अपने पर्सनल गॉर्डस को उनके पीछे लगा रखा था इतने महान जो है.

मैंने ये कहके मला को आँख मार दी उसकी आँखों में मुझे नफरत गुस्सा साफ़ दिख रहा था लेकिन वो बुढऊ कुछ नहीं कर सकता था फ़िलहाल.

मैं:- अब आप इनसे बात करिये मुझे जाना होगा.

इसके बाद मला को भी ये सब बाते मजबूरन दुबारा से दोहरानी पड़ी क्युकी उसके पास कुछ रास्ता नहीं था लेकिन इस काण्ड से दो चीज़ नहीं नहीं तीन चीज़े हुयी.

मैं और मेरी फॅमिली सेफ हो गए थे जब तक राजेश जिन्दा है या पकड़ा नहीं जाता.

मला को अगर मुझे मरना है या मेरी फॅमिली को तो उसे सबसे पहले राजेश को मरना होगा लेकिन वो उसे क्यों मरेगा क्युकी वो तो उसी का बाँदा है.

मला चिढ चूका था मेरे से उसके अंदर गुस्सा, नफरत सब कुछ दूगनी भड़क चुकी थी और वो इन सब चीज़ो में अपना दिमाग नहीं लगा पायेगा एक जगह और ये मेरे लिए अछि बात है.

खैर मैं वह से अपनी बाइक के पास पंहुचा तो अभय का कॉल आ गया. मैंने कॉल पिक किया...

अभय:- अबे लौड़े क्या काण्ड कर रहा है तू, मरवाएगा क्या?

फिर मैंने उस छोटे दिमाग के इंसान को इस काण्ड के फायदे बताये तब जा के वो शांत हुआ.

मैं:- ये सब छोड़ तू खाना बना ले, भूक लगी है बहुत तेज़.

अभय:- तेरी लुगाई न हु मैं जो खाना बनाऊ अपने पिया के लिए. बहार से लेता ाइयो मुझे भी भूक लगी है.

मैं:- लुंड खा ले मेरा.

और मैंने कॉल कट की तो किरण का कॉल आ गया. भेनचोद जाने न देना मुझे भूक लग रही है, इस गरीब को बक्श दो.

मैं:- hello ma'am.

किरण:- शाम को फ्री हो क्या?

मैं:- फ्री hi हु मुझे कोनसे काम है.

किरण:- तो मेरे घर आ जाना शाम को डिनर पे.

मैं:- हम आ जायेंगे.

किरण:- सब नहीं सिर्फ तुम.

और ये कहके उसने कॉल कट कर दी. इसके दिमाग में क्या चल रहा है कही मारने वर्ण का प्लान तो नहीं. ( लौड़े अपनी लेने को बुला रही है तुझे). ओह्ह्ह्ह ऐसा है तो ी ऍम रेडी.

मैंने विवेक को कॉल की और उसे बोलै की स्कूल से सीधा आजा रूम पे खाना लेके.

मैंने भी बाइक उठायी और रूम की तरफ हो लिया, बाइक चलते हुए अब एक चीज़ दिमाग में चल रही थी की राजेश का क्या किया जाए अगर उसे अभी पकड़ लेंगे तो मला परिवार को नहीं छोड़ेगा और अगर राजेश के पीछे न पड़े तो आगे कैसे बढ़ेंगे और आगे नहीं बढ़ेंगे तो मुठ मारेंगे क्या. अब ऐसा प्लान चाहिए था जिससे मला और राजेश एक साथ निपट जाए फिर चैन की सांस आएगी और फिर आराम से 12तह पूरी करूँगा :स्वेट: .

ये सब सोचते सोचते मैं पहुंच गया रूम पे जहा विवेक और अभय पहले से मौजूद मेरा hi वेट कर रहे थे. मैं अंदर आया और उनके पास बैठ गया.

मैं:- वसुप बीचेस :पीस:

विवेक:- अबे अँगरेज़ के चोदे क्या करता घूम रहा है मुझे भी ले चलता अपने साथ.

मैं:- भंडारा नहीं था वह जो सब को ले चालू, भेनचोद उसके बन्दों ने जाते hi खोपड़ी पे एक-47 तान दी थी.

विवेक:- तू उसी लायक है.

अभय:- अबे तुम दोनों चुप करो बे खाना खाने दो.

हमने उसकी बात मानी और टूट पड़े खाने पे, खाना खाके हाथ मुँह धोके सत्ता जलके बैठे फिर.

मैं:- वैसे राजेश का क्या करे अब?

अभय:- हमे क्या पूछ रहा है, जो तू बोलेगा वो hi तो करेंगे.

मैं:- कल संडे है कल आएगा वो सप्लाई लेके, जैसा वो हमेसा करता है लेकिन सायद इस बार ना आये क्युकी पूरी डिस्ट्रिक्ट में उसका नाम उछाल रहा है.

विवेक:- मुझे तो लगता है वो कल आएगा ये सोच के की तुम लोगो को पता नहीं है उसके बारे में इसलिए वो आएगा पैसो की भूक सबको होती है.

मैं:- मेरे बेटे में दिमाग तो है अभय.

अभय:- जा बे गांडू.

मैं:- अबे एक बात तो बताना भूल hi गया, उस किरण ने मुझे डिनर पे बुलाया है आज.

विवेक:- नहीं! नहीं! तू नहीं जायेगा किरण सिर्फ मेरी है.

मैं:- अबे पगला गया है क्या वो बस मुझे भाव देती है क्युकी तेरे से ज्यादा स्मार्ट हु मैं.

विवेक:- मेरा लोढ़ा तुझसे ज्यादा स्मार्ट है.

मैं:- तो खुद की गांड में दाल ले उसे.

अभय:- अबे तुम दोनों क्या बचो की तरह लड़ते रहते हो हमेसा, और एक कोई दिक्कत हुयी तो.

मैं:- अबे मैं संभल लूंगा, वो प्यार करने के लिए बुला रही है मुझे.

विवेक:- भेनचोद हाथ मत लगा दियो उसे नहीं तो मर जायेगा तू, और मेरी माने तो जा hi मत नहीं तो वो तुझे मार देगी.

मैं:- ओह्ह्हो जेम्स बांड के चोदे अब रीज़न भी बता दो हमे.

विवेक:- वो अपनी छूट में ज़हर लगा के रखेगी और तू घुसायेगा तो तेरे लोडे पे ज़हर लग जायेगा.

और ये बोलके वो हसने लगा :डी , मैंने और अभय ने उसे घर के देखा भसदक़ा क्या बोल रहा है ये.

विवेक:- अबे ऐसे न घूरो मैंने कल b-grade मूवी में देखा था ऐसा.

मैं:- अभय इस लौड़े को भगा दे नहीं तो, जान से मार दूंगा.

अभय:- तुम दोनों गांड मारो मैं चला सोने.

विवेक:- मैं भी मुठ :शैग: मारने जा रहा.

मैं:- मैं क्या करू, सो जाता हु.

और मैं भी अभय के बगल में सो गया.

श्याम के टाइम अभय ने मुझे उठाया और बताया की किरण के घर जाना है मुझे.

मैं भी अचे बचे की तरह खड़ा हुआ और नाहा धो के chaka-chak रेडी हुआ, परफ्यूम वगैरह लगा के "टिगों" की थैली उठायी तो पता चला की ये ख़तम होने वाला है और नया ैसिलय नहीं मिलेगा.

मैं:- इस राजेश को कल hi धरना पड़ेगा अभय, माल ख़तम हो गया.

अभय:- ोकक बॉस! बेस्ट ऑफ़ लक.

मैं :- भाग भसडक वॉर लड़ने थोड़ी न जा रहा हु..

मैं बहार आया और निकल लिया किरण के घर की तरफ.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
अपडेट:-16 (फुकेद उप)

मैंने बाइक उठायी और हो लिया किरण के घर की तरफ रस्ते में सोचा चलो कंडोम ले लेता हु फिर सोचा जब खुद बुला रही है तो इंतज़ाम भी खुद hi कर रखा होगा.

ऐसे hi बकचोदी करते हुए मैं उनके बताये हुए एड्रेस पे पंहुचा तो सामने एक बंगलो था न छोटा न बड़ा मध्यम साइज का बूत था बड़ा प्यारा.

मैंने बेल्ल का घर बजाय,,, ओह्ह सॉरी घर की बेल्ल बजायी, (भेनचोद कुछ भी बोलने लगा हु आजकल, क्या चक्कर है ये?) ड्रग्स के साइड इफ़ेक्ट है ये और ले ले "टिगों".

मैं अपने खयालो में से बहार आया जब दूर खुला और दूर खुलते hi मेरा सब कुछ खुल गया क्युकी किरण ने एक ब्लैक कलर की निघ्त्य पेहेन राखी थी घुटनो तक की और उप्पेर से स्लीवलेस.

किरण:- घूरना हो गया हो तो अंदर आ जाओ.

मैं:- अब आप लग hi इतनी खूबसूरत रही हो की हम जैसे लड़के क्या करे?

किरण:- ज्यादा मक्खन न लगाओ और अंदर आ जाओ.

हम दोनों अंदर हो लिए, मैं तो किरण के पीछे पीछे चल रहा था पीछे से तो और भी माल लग रही थी. उसने मुझे अंदर हॉल में सोफे पे बिठाया और बियर लाने चली गयी फ्रीज से, ( बियर तो बचे पिटे है भेनचोद) कोई नहीं पि लेंगे किरण के लिए.

वो दो बियर की बॉटल्स लायी खोल के और एक मुझे दी और एक खुद लेके बैठ गयी.

किरण:- और बताओ अपने बारे में?

मैं:- कुछ नहीं बताने को.

किरण:- तुम हर्ष के पीछे क्यों पड़े हो?

मैं:- मैं तो हर्ष के पीछे नहीं पड़ा अभी, और उसके पीछे पड़के वो भी अभी से मुझे क्या मिलेगा "नरकवास"

किरण:- वैसे तुम्हारे जैसे दोस्त सबको मिले, तुम कैसे विवेक की बेहेन का बदला ले रहे हो.

मैं:- बदला! बदला छोटे बचे लेते है, मला को तो वैसे भी मरना था ma'am क्युकी यहाँ से मुझे मिलेगा पैसा जो आगे जाके बहुत काम आने वाला है.

किरण:- ओह्ह ऐसा है क्या? वैसे हर्ष के बाद क्या प्लान है तुम्हारा?

मैं:- पता नहीं! और तुम क्या मेरे फ्यूचर की बाते लेके बैठ गयी. खाना खिलाओ भूख लगी है.

किरण ने हाँ में गार्डन हिल्लायी और डिनर लगाने चली गयी. और फिर हम दोनों ने बैठ के खाना खाया और खाना खाके फिर से सोफे बैठे लेकिन इस बार बियर की जगह सिगग्रेटे थी दोनों के हाथो में, और दोनों की आँखों में एक नशा था. हम दोनों ने सिगग्रेटे पि और फिर किरण मेरे पास आके बैठ गयी.

मैं कुछ बोलने को हुआ उससे पहले उसने अपनी एक ऊँगली मेरे होठो पे रख दी और ना बोलने का इशारा किया, मैंने भी आँखों से hi सहमति दिखा दी और चुप हो गया, तभी किरण ने आगे बढ़ के अपने होठ मेरे होठो पे रख दिए मैं तो इंतज़ार hi इसी चीज़ का कर रहा था.

वो बड़े सेडक्टिव वे में किश कर रही थी मुझे और मैं भी उसका पूरा साथ दे रहा था, वो किश करते करते मेरे बालो में अपनी उंगलिया घुमा रही थी और मेरे दोनों हाथ उसकी सिल्क की निघ्त्य के उप्पेर से उसकी मुलायम कमर को सेहला रहे थे. हमारा किश धीरे धीरे वाइल्ड होता जा रहा था अब हम दोनों ने एक दुसरे के होठो को चूसने के साथ साथ चबाना भी सुरु कर दिया था और मैं बात ये थी की ी लूसे माय कण्ट्रोल और इसीलिए मैंने उसे उठाया और सोफे पे पटक के उसके बूब्स पे हाथ लगाया hi था की दूर बेल्ल बज गयी.

मैं:- फुकककक!

किरण:- it's ोकक तुम उस रूम में जाओ मैं देख के आती हूँ.

भेनचोद खड़े लुंड पे लात मार दी दूर बेल्ल बजा के मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था बहार वाले इंसान पे, मैं कर रहा था अभी माँ छोड़ दू उसकी बहार जाके लेकिन नहीं कर सकता था और गुस्से को शांत करना जरूरी था क्युकी फिर मूड बिगड़ गया तो दुबारा नहीं बनेगा इसलिए मैंने उस गिलास की टेबल पे अपनी जेब से निकला हुआ "टिगों" फैलाया, जो की रोज़ की मात्रा से दुगना था, लेकिन मैंने नाक लगायी और सत् से खींच गया एक सांस में और पूरा, "टिगों" मुझे अपनी खोपड़ी के अंदर फैलता हुआ महसूस हुआ और ये फीलिंग सबसे अमेजिंग लगती है मुझे, एक बार को तो मैं भूल hi गया था की कोई दरवाज़े पे आया है, लेकिन याद आते hi मैं सोफे से उठा और लड़खड़ाते हुए उसके बैडरूम की तरफ चल दिया, लड़खड़ा इसलिए रहा था क्युकी अभी अभी टिगों लिए था वो भी डबल, इसलिए ये नशा हो रहा था लेकिन ये नशा सुकून देता था. ( अबे कितनी बकचोद बाते करता है खुद से hi).

मैं इस आवाज़ को छोड़ा और रूम का गेट खोल के अंदर को हुआ लेकिन निचे चौखट से पेअर टकराया और मैं आगे की तरफ झुकता हुआ गिरा लेकिन ये झुकना बिल्किल सही था क्युकी आगे को झुकने से मेरा सरीर रूम के अंदर आया और एक डंडा या पता नहीं क्या था मेरे सर के उप्पेर से निकला सैंण करके, भेनचोद अगर आज झुकता नहीं तो खोपड़ी में घुस जाता ये जो भी था, लेकिन मैं निचे से झटके से खड़ा हुआ और मुड़के देखा तो गांड फैट गयी और दिमाग भी क्युकी मेरे सामने धोती कुरता पहने हुए 5 पहलवान खड़े थे जिनमे से दो के पास लेथ थे और 3 के पास दुनाली ( अरे वो देसी बन्दूक).

अब मैंने ड्रग्स ले रखे थे मतलब साफ़ था मैं छोड़ने वाला हु लेकिन ये किरण कहा है बस.

पर भेनचोद ये जानवर मुझे सोचने भी नहीं देना चाहते थे इसलिए एक ने आगे बढ़ के मुझे लेथ मरना चाहा लेकिन मैं स्टिल बचा और उसके रिब्स पे एक खींच के पंच दिया और वो आदमी निचे बैठ गया. मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था और गुस्से की वजह थी धोका. लेकिन मैं उसको पंच मार के जैसे hi सीधा हुआ मेरे पेअर पे डंडा पड़ा, भेनचोद क्या तेल लगा के लाये है डाँडो में. मेरा दिमाग एक जगह नहीं फोकस हो पा रहा था और इसलिए मैं पीटने वाला था लेकिन इतनी आसानी से थोड़ी न.

मैंने उस डंडा मरने वाले का गाला पकड़ा और दिवार पे फेंका और लड़खड़ते हुए एक किक मारी उसे जो मुझपे गन तानने वाला था लेकिन मैं कितनो को संभालता, तभी पीछे से एक भरी भरकम चीज़ पड़ी सर पे और मैं घुटनो पे आ गया और तभी एक हाथ आया और उस हाथ में कुछ था वो मेरे नाक पे लगा और मैं बेहोश. ये क्या था भेनचोद ( क्लोरोफॉर्म hi होगा भसडक, ओवरएक्टिंग न कर).

मैं बेहोश हो गया था मतलब मुझे नहीं पता था अब मेरे साथ क्या होने वाला है लेकिन मेरा दिमाग अभी भी चल रहा था. वैसे कितनी चुटिया बात है न ये की बॉडी बंद पड़ी है और दिमाग स्टिल चालू है. लेकिन होता है ऐसा जिसके दिमाग की एक नस कटी हुयी हो.

वैसे ये आदमी कोण हो सकते है:-

  1. मला! नहीं नहीं उसके बन्दे ऐसे नहीं है और न hi उसके बन्दों के पास ऐसी देसी बन्दूक ही.
  2. हर्ष! ाजी लौड़ा मेरा, वो मला का भी बाप है उसके तो बन्दे भी ऐसे नहीं होंगे बन्दूक तो दूर की बात है.
  3. राजेश! हां ये हो सकता है, इस गांडू के बारे में ज्यादा नहीं पता मुझे.
  4. या कोई नया करैक्टर आ गया स्टोरी मैं. मई भी आ गया हो पता नहीं देखते है.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
:थैंक्स: फॉर योर ब्यूटीफुल एंड वैल्युएबल रिव्यु बरोथेर

एंड विवेक की बेहेन जरूर मरी है लेकिन वो एक को उससे भी भड़के मंटा है एंड एक एक कोल्ड हेअरटेड इंसान है तो उसे फर्क नहीं पड़ता की विवेक के अंदर क्या चल रहा है और वो मला से अंजलि के बदले के लिए नहीं बस खुद की पर्सनल रिवालरी निकलने के लिए भिड़ेगा. :पीस:
 
अपडेट:-17 (नई तुरंस)

कोई मुझे झिंझोर के उठा रहा था और मुझे गर्मी भी बहुत लग रही थी इसलिए मैंने अपनी आँखे खोल के देखा तो साइड में अभय बैठा हुआ मुझे उठा रहा था.

मैं:- अबे लोडे सोने दे न मुझे क्यों गांड में ऊँगली कर रहा है.

अभय कुछ नहीं बोलै बस मुझे मेरे राइट साइड देखने को बोलै.

और मैं जैसे hi राइट साइड पलटा मेरी गांड, आँख, मुँह, कान, नाक, सारे छेद फैट गए क्युकी सामने एक परिवार और काम से काम 70 बन्दे मान लो, नहीं 68 मान लो, मान hi रहे तो 69 मान लो बिकॉज़ आईटी साउंड्स कूल :कूल:.

और तभी मुझे मेरे सर में दर्द होने लगा और फिर फ्लैशबैक चलने लगा आँखों के सामने की कैसे मुझे कुछ लोग ने बेहोश कर दिया था किरण के घर पे, किरण से याद वो भें की लौड़ी कहा है और ये कोण है और मैं कहा हु? भेनचोद दिमाग फैट जायेगा ऐसे तो.

अब मेरे दिमाग में एक चीज़ आ रही थी वो थी किरण को मरना है, क्युकी उसने धोखा दिया है, धोखा और वो भी एक को नहीं छोडूंगा.

इसलिए मैं थोड़ा चिल्ला के अभय से बोलै.

मैं:- वो किरण कहा है भसडक और तू यहाँ क्या कर रहा है?

अभय:- पता नहीं बे गाओं के अड्डे पे सिगग्रेटे पि रहा था किसी ने पीछे से कीच सुंघा के बेहोश कर दिया और आँख खुली तो यहाँ था और किरण का मुझे नहीं पता.

मैंने उसकी बात सुनके पीछे देखा तो और ज्यादा गांड फैट गयी क्युकी वह एक बहुत बड़ी हवेली अबे हवेली नहीं महल था भेनचोद और हरयाणा में हमारे aas-paas ऐसी हवेली नहीं थी मतलब हम हरयाणा में नहीं थे और फिर मैंने उन बन्दों की तरफ देखा जहा एक फॅमिली विथ 69 ओठेर्स कड़ी थी.

मैं:- अबे घूरते hi रहोगे या बताओगे भी यहाँ क्या माँ छुड़ाने लाये हो अपनी?

ऐसे वर्ड्स सुनके वो लोग मुझे और घूरने लगे.

अभय:- भसडक ज्यादा मत उछाल ये अपना इलाका न है जहा तू बकचोदी करके बच जायेगा, अबे इलाका छोड़ हमे तो ये न पता की हम देश के कोनसे कोने में है.

मैंने अभय की बात को इग्नोर मारा और फिर से चिल्ला के बोलै

मैं:- अबे बता भी दो या पंडित आएगा बताने.

तभी उनका फॅमिली हेड, हां हेड hi होगा क्युकी एक तो बुद्धा था वो और दूसरी बात वो शकल से गुस्से वाला और अमीर लग रहा था, वो बोलै किसी को,,

हेड:- इस लौंडे का मुँह बंद करवाओ रखा.

तभी एक आदमी मेरी तरफ आया तो मैं भी खड़ा हो गया, अभय समझ गया था क्या होने वाला है इसलिए वो मुझे मन कर रहा था लेकिन उसकी सुनेगा कोण.

वो आदमी मेरे पास आया और मेरी कलर पकड़ ली.

मैं:- तू तो वो hi न जिसने मुझे पीछे से डंडा मार्के बेहोश किया था.

इस बात पे वो हँसा मुझे बस कन्फर्मेशन चाहिए था, मैंने दिया उसकी नाक पे अपना सर खींच के वो पीछे हुआ नाक पकड़ के मैंने लात दी उसके ांडो पे और झुका और झुकते hi सीधा एक लात दी उसके सर के बीचो बिच वो वही लेट के तडफने लगा. पर इससे उन सबकी गांड नहीं फटी बल्कि उन 69 ओठेर्स ने गन तान दी हमपे जो देसी दुनाली थी लेकिन अब वो 69 नहीं 68 थे, लेकिन अगेन मन्ना है तो 69 hi मानूंगा मैं तो, मैं तो 1बन्दे को भी 69 hi मानूंगा.

तभी मैं उस हेड की आवाज़ से होश में आया.

Head:-mandeep इन दोनों को दरबार में पेश करो.

इतना बोलकर वो पूरी फॅमिली हवेली की तरफ हो ली और हम उनके piche-piche और वो 69 ओठेर्स हमारे पीछे.

मैं:- :wtf: बस पास्ट मैं तो नहीं आ गए हम लोग..

अभय:- अबे बकचोदी न कर भाई तू अपने साथ मेरी भी गांड तुड़वा देगा.

मैं:- अबे ये है कोण भेनचोद हिंदी फिल्मो के विलेन की तरह उठवा लाया हमे अबे हमने क्या बिगाड़ा है इसका.

अभय:- मुझे क्या पता कोण है मैं तो खुद तेरे से 5 मिंट पहले होश में आया था.

मैं:- लौड़े तूने दिल्ली में तो कोई लड़की वड़की का काण्ड न कर दिया हो.

अभय:- तुझे भी पता है मैं लड़कियों मैं कोई इंटरेस्ट नहीं लेता.

मैं:- हां क्युकी तो गे है :गे:

अभय:- भाग लौड़े और अब शांत रहियो.

मैंने सामने देखा तो हम एक बहुत बड़े हॉल में थे, हॉल इतना बड़ा था की मेरे दो घर खली हॉल मैं बन जाए.

तभी उसने उस मनदीप नाम के आदमी को कुछ इशारा क्या, भेनचोद जान से मारने को तो नहीं बोल रहा गांड तोड़ दूंगा एक एक की ( शांत रह बे लौड़े हाइपर क्यों हो रहा है).

मैंने अपने दिमाग को शांत किया तो वो मनदीप बोलने लगा.

मनदीप:- तुम दोनों के मैं में बहुत सवाल होंगे की तुम दोनों यहाँ क्या कर रहे हो, हम लोग कोण है, तुम्हे क्यों उठाया, कैसे उठाया? और ऐसे बहुत से सवाल होंगे तुम्हारे मैं में.

मुझे उसकी बातो मैं लौड़ा इंट्रेस्ट नहीं था लेकिन उनलोगो को दिखने के लिए बहुत ध्यान से सुन रहा था जैसे वो फिजिक्स का लेक्चर दे रहा हो.

मनदीप:- तो पहले मैं तुम्हे इन के बारे में बता दू, ये हमारे मुखिया, राजा, हमारी सर्कार, हमारे अन्नदाता, हमरा सबकुछ, ठाकुर सूर्य सिंह. ये इस डिस्ट्रिक्ट के राजा है, यहाँ के हुकुम के बिना सर्कार सांस तक नहीं लेती.

मनदीप:- ये है ठाकुर रितेश सिंह इनके बड़े बेटे, ये ठाकुर खंडन का बुसिनेस्स सँभालते है.

ये ठाकुर रितेश सिंह तो मुझे सकल से hi सरीफ बाँदा लग रहा था बिलकुल सरीफ, पता नहीं इन ठाकुरो के यहाँ क्या कर रहा था.

मनदीप:- ये है इस ठाकुर खंडन की बड़ी बहु, ठाकुर मितली सिंह.

ये भी मुझे सरीफ लगी शकल से लेकिन भरी माल थी भेनचोद फुल मैनटैनेड फिगर देखते hi झाड़ जाए.

मनदीप:- ये है इस घर के चिराग ठाकुर अवि सिंह, ये रितेश जी के बेटे है और दिल्ली में कॉलेज कर रहे है.

अगेन ये भी सरीफ लगा मुझे एक दम चम्पू टाइप पढ़ने वाला. और बस सब के इंट्रो क्यों दे रहा है क्या शादी करेगा मेरी, मुझे लौड़ा इंट्रेस्ट नहीं था लेकिन मैं दिखावा कर रहा था क्युकी टाइमपास भी करना था.

मनदीप:- ये है इस घर की बेटी ठाकुर कृतिका सिंह ये अभी 12तह क्लास में है और ये रितेश जी की बेटी है.

मैंने उस लड़की की तरफ देखा तो मुँह मैं पानी आ गया क्युकी ये अपने माँ से भी ज्यादा माल लग रही थी, एक दम दूध सी गोरी लेकिन ये शकल से मुझे सरीफ नहीं लगी, उसके फेस पे ठाकुरो का घमंड और वो कमीनापन साफ़ दिख रहा था.

मनदीप:- और तुम ठाकुर किरण सिंह से तो मिल चुके होंगे, वो है ठाकुर साहब की एकलौती बेटी, कुछ साल पहले एक हादसे में विधवा हो गयी मालकिन.

भेनचोद इसे कैसे भूल सकता हु लेकिन जब ये इतने बड़े घर की लड़की तो मेरे पीछे क्यों पड़ी थी ये, और नकली पुलिस बानी हुयी थी भें के लौड़े सब दिमाग में घुस जाओ मेरे, ये 1500 ग्राम का दिमाग है लौड़ा ताज होटल थोड़ी न है.

मैं:- भाई तेरा हो गया हो तो हम जाए या और कुछ बचा है तो वो भी बता दे लेकिन एक सिगग्रेटे दे मुझे.

उसने उस बुढऊ की तरफ देखा, उसने हाँ में सर हिलाया तो उसने अपनी जेब से मलबोरो का पैकेट निकला, मैंने पूरा पैकेट उसके हाथ से चीन और एक निकल के जेब में दाल लिया और उस लाइटर लेके सिगग्रेटे जलाई और 3 4 लम्बे लम्बे काश लिए तब जाके थोड़ा दिमाग शांत हुआ, लेकिन इस सब में मैंने नोटिस किया की सब मुझे घर रहे थे और वो कृतिका लौड़ी ललचायी नज़रो से देख रही थी मुझे.

मैं:- हां अब कंटिन्यू कर

लेकिन वो कुछ बोलने को हुआ उससे पहले एक 30 साल का आदमी एंटर हुआ, उसने दारू पि राखी थी और गली बकते हुए अंदर आ रहा था, मैंने उस मनदीप से इशारे से पूछा की कोण है ये.

मनदीप:- ये है हमारे ठाकुर साहब के प्यारे और छोटे बेटे ठाकुर रतन सिंह इन्होने अभी तक शादी नहीं की थी क्युकी इन्हे कोई पसंद नहीं आयी थी, लेकिन अब इन्हे एक लड़की पसंद आ गयी है और अब इनकी शादी उससे होगी.

मैं कुछ बोलता उससे पहले वो रतन मनदीप के पास आया और उसके एक थप्पड़ दिया और थप्पड़ खाके मनदीप झुक गया तो उस रतन ने उसकी गांड पे लात दी और फिर ताली बजाते हुए वह से भाग गया.

मैंने फिर मनदीप को सवालिया नज़रो से देखा तो उसने फिर बोलना सुरु किया.

मनदीप:- इनको एक हादसे में सर पे चोट आयी थी इसलिए इनका दिमागी संतुलन कभी कभार हिल जाता है. और मैं हु मनदीप यहाँ का मैनेजर.

मैं:- भाई पानी वाणी तो पीला दो और हम है कहा?

मनदीप ने एक आदमी की तरफ पानी लाने का इशारा किया और बोलै.

मनदीप तुम लोग अभी उप में हो.

:wtf: उप में कोण रिश्तेदार आ गए हमारे, मैं तो कभी उप भी नहीं आया भेनचोद हमे क्यों उठा लाये यहाँ.

मैं:- अभय यहाँ से जाते वक़्त दो गन लेके चलेंगे सुना है सस्ती मिलती है.

अभय:- अबे बकचोद पहले बच तो जाए यहाँ से मुझे तो ये पागलो का परिवार ठीक नहीं लग रहा.

अभय बोलता बोलता रुक गया क्युकी पानी आ गया था हमदोनो पानी पे भी टूट पड़े क्युकी बहुत प्यास लगी थी पानी पाइक हमारे लिए चेयर्स आयी और हम उनपे बैठे.

मैं:- मनदीप भाई हम कितने टाइम से बेहोश थे.

मनदीप:- 36 घंटो से.

भेनचोद एक और झटका, लेकिन मैं झेल गया इसको.

मैं:- अब रीज़न भी बता दो हमे मेहमान बनाने का ताकि हम लोग उसे सुलझा के जा सके.

मनदीप:- जो रतन जी है न उनको एक लड़की पसंद आ गयी है और वो उससे शादी करना चाहते है लेकिन वो लड़की बोल रही है की वो तुमसे प्यार करती है और तुम उसे बचा लोगे क्युकू उसके प्यार मैं ताकत है और हमारी किरण जी को तुम पसंद आ गए हो इसलिए वो तुम शादी करना चाहती है.

भें के लाडो साउथ की मूवी चल रही है क्या जो इसकी शादी उससे और उसकी शादी इससे, फ़क! मैं ये सब सुनके खुद को शांत किया क्युकी ये सब प्रोसेस करने के लिए दिमाग काम नहीं कर रहा था. लेकिन कुछ देर में सब समझ लेने के बाद मैंने एक बार अभय की तरफ देखा जो की मुँह फाड़े मेरी तरफ hi देख रहा था फिर मैंने उस मनदीप की तरफ देखा और बोलै

मैं:- भाई बात सुन मुझे लुंड फर्क नहीं पड़ता की तेरा बॉस जो भी है वो किसी से सदी कर इ, मुझसे कोई लड़की प्यार नहीं करती. और रही बात किरण की तो अपने कान और गांड के छेद दोनों खोल के सुन ले उसे तो जान से मरूंगा क्युकी शी चेअट्स में.

किरण के बारे में वो ऐसे सब्द सुनके वो मनदीप झुंझला सा गया और खड़ा होक मुझे मारने को हुआ इससे पहले मैं भी खड़ा हुआ और मनदीप के आ रहे पंच को पकड़ा और घुमा के एक पंच दिया उसके रिब्स पे जिससे वो झुका और मैंने दी उसकी चाहती पे लात जिससे वो दूर जा गिरा लेकिन मनदीप फिर से उठ के पीटने आता इससे पहले वो बुढऊ चिल्लाया,

ठाकुर:- आए लड़के तू उप के सबसे खतरनाक खंडन के सामने खड़ा होक उनके आदमी को मार रहा है.

मैं:- अबे बुढऊ पागल, वागल हो गया है क्या? ये जो ठाकुर गिरी है न वो गांड में दाल दूंगा तेरे.

लेकिन फिर कोई कुछ बोलता उससे पहले किसी ने मेरे कंधे पे हाथ रखा और उन दोनों को देख के मुझे एक झटका और लगा, अबे झटका नहीं इस बार गांड फैट गयी फिरसे. ( लौड़े गांड है वो कोई कागज़ या पॉलिथीन नहीं जो फाटे hi जा रही hai).Kiran थी और उसके साथ थी?????

लेकिन मैं आगे कुछ बोलता या उस शख्स की तरफ बढ़ता, या उसके बारे में सोचता उससे पहले मेरे दिमाग में आवाज़ आयी ी नीड ड्रग्स और लौड़ा ड्रग्स तो है नहीं, अब तो गांड मर गयी भेनचोद. मुझे अंदर से फीलिंग आने लगी थी अब मैं बेहोश होने वाला हु क्युकी न तो एनर्जी थी सरीर में और न ड्रग्स, इसलिए थोड़ी हिम्मत जूता के मैं चिल्लाया.

मैं:- सुन बे बुढऊ अगर मुझे यहाँ रखना है तो "टिगों" माँगा ले मेरे उठने से पहले नहीं तो इस हवेली को समसान घाट बनने से कोई नहीं रोक पायी .....

और इतना बोलते hi मैं वही कटी पतंग की तरह लुढ़क कर बेहोश हो गया.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
एक्चुअली किरण कोई पुलिस वाली नहीं है इसलिए उसे ऐसा नूब दिखाया है वो क्या है आगे आने वाले अपडेट में दे चूका हु मैं. :डी

अभय इस टाइप ऑफ़ लोअर वर्शन ऑफ़ एक एंड अभय और एक बहुत अचे दोस्त है और उन्दोनो ने जो भी करना है साथ करना है ऐसी कसम वसं खायी होगी :डी

और दोस्त मुसीबत में हो तो दूसरा दोस्त आ hi जाता है वो फिर कोई चीज़ नहीं देखता

एडिक्शन ज्यादा तर बुरी चीज़ो की hi लगती है, कभी सुना है की उसे मंदिर जाने की लत्त लग गयी या उसे दुसरे की मदत करने की लत्त लग गयी, हां ये जरूर सुना होगा, की उसे, दारू, सिगग्रेटे, सेक्स, नशा इन सब की लत्त लग गयी और इंसान को लत्त उसी चीज़ की लगती है जिस चीज़ को करने में मज़ा आता है एंड एक को ाचा करैक्टर तो है नहीं तो उसे बुरी लत्त hi लगेगी.

Btw,

:थैंक्स: फॉर योर ब्यूटीफुल एंड वैल्युएबल रिव्यु
 
अपडेट18:- (लूसे कंट्रोल्स)

मेरी आँख खुली और मैंने अपने चारो साइड देखा तो मैं एक बड़े से आलीशान कमरे में था ( भेनचोद मर तो नहीं गया और मर भी गया तो स्वर्ग में क्या कर रहा hu)(lawde याद कर कुछ)

और मैंने जब अपने दिमाग पे जोर डाला और मुझे याद आया क्या क्या बकचोदी हुयी थी एयर वो यहाँ क्या कर रही है और ये किरण का क्या चक्कर और उसके घरवाले कहा है जो ये उठलाये उसे (दिमाग फैट जायेगा ऐसे तो)

इतने में अभय रूम में आया बालकनी से, सायद उसने मुझे उठा हुवा देख लिया होगा.

अभय:- उठ गया, खाना मंगवा दू.

मैं:- दया होगी सर्कार.

अभय रूम से बहार गया और कुछ देर बाद खली हाथ आया और बोलै चल निचे hi बुला रहे है हमे.

मैं:- अबे उप्पेर hi ले आ यार निचे ाचा नहीं लगेगा उनके बिच में.

अभय:- अबे नौटंकी ना कर और मुझे अपनी गांड में गोली खाने का कोई शौक न है.

मैं न चाहते हुए भी खड़ा हुआ और बाथरूम में गुस्सा और नहाया मज़े से, 2 दिन हो गए बिना नहाये, मैं बहार आया तो बहार अभय ने मुझे एक पजामा और t-shirt दिया मैंने भी कोई नखरे न दिखाए और पेहेन लिया चुपचाप, वैसे दिमाग में कुछ चल रहा था जो मुझे नहीं समझ में आ रहा था और न पता था मुझे क्या हो रहा है मेरी खोपड़ी में लेकिन कुछ अजीब सा हो रहा था. मैंने इन सब थॉट्स को एक साइड किया और अभय के साथ निचे दिंनिंग हॉल में गया.

वह पहुंच के एक बार मेरा माथा ठनका और दिल की धड़कन भी तेज़ हो गयी क्युकी वह सामने मनीषा बैठी थी और उसकी सकल और उसकी हेल्थ देख के साफ़ लग रहा था की वो खूब रोई है और उसने ठीक से कुछ खाया भी नहीं होगा , और उसकी ऐसी हालत देख मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था लिखे बहुत ज्यादा और ज्यादा हो गया जब मैंने किरण की खिलखिलाती हुयी हसी देखि. लेकिन मैं इस गुस्से को अपने अंदर स्टोर कर रहा था मुझे पता था जब ये गुस्सा बहुत ज्यादा हो जायेगा तो एक एक्सप्लोसिव होगा मेरे अंदर और फिर इन ठाकुरो की ठकुरगिरि इनकी गांड मैं दाल दूंगा मैं. मेरा ध्यान उस मनदीप की आवाज़ से टुटा.

मनदीप:- आइए आइये बैठिये,

उसने हम दोनों को एक एक चेयर पे बिठाया मेरे सामने वाली चेयर पे वो पागल लौड़ा रतन बैठा था और उसके राइट साइड में किरण और फिर मनीषा. लेकिन मुझे लगी थी भूक इसलिए मैं हप्सी माफिक टूट पड़ा खाने पे, ाहहए कुछ भी हो खाना एक नंबर का बना था. मेरा लगभग कम्पलीट हो hi चूका था की तभी मैंने नज़र उठा के देखा तो सब मुझे hi घूर रहे थे, चलो सब तो घूर रहे थे लेकिन ये लौड़ा अभय क्यों घूर रहा था मुझे.

मैं:- अबे मुझे क्या देख रहा है खाना खाके उप्पेर आजा मैं चला.

मैंने अभय की आवाज़ बिना सुने उठने को हुआ लेकिन उस बुढऊ की गांड में चल मची.

ठाकुर:- इस टेबल से सब एक साथ उठते है कोई पहले या कोई बाद मैं नहीं.

मैं कुछ न बोलै बस बैठ गया और सोचने लगा कैसे लौड़े रूल है इनके, झात जैसे लोग है. लेकिन फिर भी एस्केप तो मारना पड़ेगा, मनीषा को भी ले जाना पड़ेगा उसे यहाँ नहीं छोड़ सकता. मुझे मेरी सोच में एक रुकावट महसूस हुयी और ये रुकावट वो पागल लौड़ा रतन चक्को जैसे ताली बजा के कर रहा था, मतलब अजीब चुटिया है खाना खाते खाते hi ताली बजने लगा. और वो जिस तरह के मुँह बना रहा था उससे मुझे बहुत इर्रिटेशन हो रही थी.

और ये इर्रिटेशन मुझसे सही न गयी इसलिए मैं फिरसे खड़ा हुआ लेकिन वो बुढऊ कुछ बोलने को हुआ लेकिन मैं पहले hi बोल पड़ा.

मैं:- लुक इन तो माय आईज अंकल, मुझे जरा सा भी फर्क पड़ेगा तुम्हारी बातो से.

इसके बाद वो कुछ न बोलै और मैं भी उठ के उप्पेर आ गया और थोड़ी देर में अभय भी आ गया.

इस टाइम हम दोनों मस्त बीएड पे बैठे थे

मैं:- अब बता ये क्या बकचोदी चल रही है.

अभय:- बकचोदी नहीं बे फिल्म चल रही है फिल्म.

मैं:- भाई जो भी चल रहा है प्लीज बता दे नहीं तो इन ठाकुरो की गांड फाड़ दूंगा मैं.

अभय:- तू चिल मार के सुन, देख सुरु से बताता हु तुझे, ये जो रतन है न वो पागल है ये तो तूने देख hi लिया, जब मनीषा यहाँ आयी तो उसी दिन इसकी नज़र मनीषा पे पद गयी और ये तेरे ठाकुर के लोंदे उठवा लिया मनीषा को मनीषा का बाप छुड़ाने आया तो उसको काट के कहा डलवा दिया ये भी पता नहीं और फिर मनीषा की माँ का भी यही हाल किया और मनीषा को एक तरीके से यहाँ जेल में बंद कर दिया.

मुझे मनीषा के बारे में सुनके बहुत दुःख हुआ इतना दुःख तो मुझे कभी नहीं हुआ था लेकिन क्या कर सकते है जो हो गया सो हो गया.

अभय:- लेकिन कहानी में एक और ट्विस्ट है इनके बगल वाले गाओं में एक राजपूत है जो की इनकी तकर का है और उसके लोंदे को भी मनीषा पसंद आ गयी.

माँ की छूट भेनचोद मनीषा न होक मिस वर्ल्ड हो गयी भेनचोद सबको hi पसंद आये जा रही है.

मैं:- वो भी इस की तरह पागल है क्या?

अभय:- नहीं वो तो अपने जैसा लोंदा है.

मैं:- हां अब और बता

अभय:- किरण को जैसे पता लगा मनीषा हरयाणा की है और वो तुझसे प्यार करती है इसलिए वो हरयाणा आ गयी अब उसके बाप ठाकुर है तो पुलिसवाली बनना उसके लिए कोनसी बड़ी बात है, वो तो बस तुझपे नज़र रखने के लिए आयी थी लेकिन उसे भी तुझसे प्यार हो गया.

मैं:- भाई क्या हो रहा है ये सब मेरे सर के उप्पेर से जा रहा भेनचोद ाचा भला मला को मारने का प्लान बना रहा था लेकिन इन लोगो ने यहाँ लाके बिठा दिया अब क्या लोढ़ा हिलाऊ यहाँ बैठ के

अभय:- तो कोई प्लान बना अब अपने तेज़ दिमाग से जिससे मैं, तू और भाभी यहाँ से उड़नछू हो जाये.

मैं:- सुन मेरा दिमाग नहीं चल रहा बिलकुल भी, ी नीड ड्रग्स और उस बुढऊ ने अभी तक मंगवाए क्यों नहीं.

अभय:- कल तक आ जायेगा तेरा माल, यहाँ नहीं मिलता वो.

मैं:- मुझे ऐसा लग रहा है वो बहार आना चाहता है.

और अभय की सिटी पित्ती गुल हो गयी ये लाइन सुनके

मैं:- ठीक है तू सो, मैं मनीषा से मिलके आता हु.

अभय:- ध्यान से जइयो गॉर्डस है.

मैं:- पापा को छोड़ना मत सीखा.

अभय:- जा बे पक्का मत.

मैं:- ाचा उसका रूम कहा है वैसे.

अभय:- पहले पापा बोल.

मैं:- मम्मी बोल दू, बता रहा है या नहीं.

अभय:- सेकंड फ्लोर पे है थर्ड room,kiran के बगल वाला.

मैं:- ठीक है मुझे पता था ये तो.

मैं उसको झूट बोलके अपने रूम से बहार बालकनी में झाँक के देखा तो कोई नहीं था इसलिए मैं भी दबे पेअर निकल लिया और सिडिया से उप्पेर वाले फ्लोर पे पहुंच गया लेकिन वह भी कोई नहीं था.

मैं थोड़ा सा आहे बढ़ा और फर्स्ट रूम के पास से गुज़र hi रहा था की उस रूम का गेट खुला और मैं वही के वही दिवार से चिपक गया लेकिन ये एक की लाइफ है इसमें लोडे नहीं लगे तो मजा कैसे आएगा.

वो रतन कूदता हुआ बहार आया और मुझे देख के खुस हो गया, मैं समझ गया इसे डोरा पड़ा है, बच गए.

रतन:- चलो मेरे साथ खेलो.

मैं:- भाग लौड़े.

और मैंने उसे उसके रूम में धकेला और बहार से रूम बंद कर दिया. और कोई बकचोदी हो इससे पहले मैं भाग के 3रद रूम के सामने आया और हलके से नॉक किया, लेकिन no रिस्पांस, फिर नॉक किया no रिस्पांस, तीसरी बार नॉक किया लेकिन इस बार चमत्कार हो गया और दूर खुला और सामने मनीषा कड़ी थी रेड नाईट सूट में, मेरा तो दिल hi जाम हो गया उसके चेहरे की मासूमियत देख के लेकिन उसने मेरा हाथ पकड़ के अंदर खींचा और गेट बंद किया.

मैं तो अभी भी उसकी खूबसूरत सी शकल में खोया हुआ था लेकिन मनीषा भाग के मेरे गले लग गयी वो भी बहुत कसके मतलब इतना कसके की उसकी पूरी बॉडी फील हो रही थी मुझे लेकिन कुछ देर बाद मेरे कंधे गीले होने लगे मैं समझ गया ये रो रही है.

मैंने उसे अपने से अलग किया और उसके आंसू पोछे.

मैं:- ऐसे रोने से कुछ नहीं होगा.

मेंशा:- क्यों न रौ थे किल्ड माय पेरेंट्स और मुझे इस जेल में बंद कर दिया उस पागल आदमी के लिए और यहाँ से बच गयी तो वो राजपूत पीछे पद जायेंगे. क्या करू मैं.

मैं:- कुछ नहीं होगा तुम्हे, मैं हु न तुमपे बस मेरा कॉपीराइट है.

मनीषा:- तुम मुझे प्यार भी करते हो?

मैं:- नहीं! मतलब हाँ करता हु न ये भी कोई पूछने की बात है.

मनीषा:- तो मुझे यहाँ से ले चलो अपने साथ.

मैं:- ी प्रॉमिस यू की तुम्हे यहाँ से जल्दी निकल दूंगा बिलीव में..

मनीषा फिर गले लग गयी मेरे, अब मैं भी ज्यादा बकचोदी सेह नहीं सकता था इसलिए उसके माथे पे एक किश की और उसको गुड नाईट बोलके रूम से बहार आ गया. आज कितने दिनों बाद मनीषा खुस हुयी है ये सोचते हुए आगे बढ़ hi रहा था की किरण के रूम के सामने मेरे पेअर अपने आप hi रुक गए और मैं झट से अपने घुटनो पे आ गया और मेरे अंदर से आवाज़े आने लगी जो मुझे सुन रही थी और ये आवाज़ सुनके गांड फैट गयी थी.

"Let's जो एंड किल हेर" " टेक रिवेंज" "ी वांट रिवेंज"

मैं बस no no hi बोले जा रहा था क्युकी मैं खुद पर से कण्ट्रोल खोता जा रहा था मुझे नहीं पता मेरे साथ क्या होता है लेकिन जो भी होता है मैं इस चीज़ से सबसे ज्यादा डरता हु.

मैं:- no लीव में अलोन, पलज़्ज़

और मैंने अपना सर उस किरण की दूर पे दे मारा, वो दूर वुडेन का था तो मुझे पका लगी होगी लेकिन मुझे कुछ फील नहीं हो रहा था.

"लेट थे डेविल केस आउट बेबी, ी वांट माय रिवेंज"

मैं:- no no no, मैं हाथ जोड़ता हु तू रहने दे मैं करूँगा न जो तू बोलेगा.

"शट थे फ़क, तू वीक है बहुत, मैं ऐसे नहीं रह सकता, ी वांट तो रूल पेओप्लेस"

मेरी ये हरकते ी थिंक सब देख रहे थे क्युकी मैं बहुत जोर जोर से बोल रहा था लेकिन मैं किसी को नहीं देख रहा था क्युकी मेरी आँखे बंद थी और दोनों हाथ सर पे थे.

मैं:- देख तू ऐसे नहीं आ सकता बिना कोई काण्ड हुए.

"धोका! धोका मिला है मुझे, और तुझे पता है मैं धोका देने वालो का क्या हाल करता हु, याद कर उस बन्दे के कितने टुकड़े कर दिए थे मैंने सिर्फ धोका देने पे"

मैं:- पलज़्ज़ इस बार मान जा, ी विल टेक योर रिवेंज.

"Bye-bye बीच"

और ये आवाज़ आते hi मेरी साँसे एक दम से तेज़ हो गयी मेरे दिमाग का ब्लड सर्कुलेशन एक दम से बढ़ गया मुझे अपने पास चलती हुयी हवा भी महसूस हो रही थी और एक हाथ महसूस हो रहा था मेरे कंधे पे जो की अभय का था मैंने अपनी आँखे खोली एयर अभय को घर के देखा वो दो कदम पीछे हैट गया मेरी आँखे देख के क्युकी वो इन आँखों को और इन आँखों द्वारा फैलाये गए आतंक को कैसे भूल सकता है वो क्या मैं खुद नहीं भूल सकता की कैसे मुझे एक छोटा सा धोका मिलने पे पता नहीं क्या हो गया था, मैं मेरे होश खो बैठा था और जब होश आया तो वह का हाल देख के बेहोश हो गया था क्युकी मैंने एक इंसान के सरीर के इतने टुकड़े कर दिए थी कोई गईं भी ना पाए और यहाँ किरण ने तो उससे लाख गुना बड़ा धोका दिया है और सबसे मैं बात इसने मुझे मेरे सपने से दूर ला दिया था और इसका खामियाज़ा इन्हे भुगतना था, अभी तक ड्रग्स की वजह से ये शांत था, लेकिन इन चूतिये लोगो से ड्रग्स भी नहीं मंगवाया गया.

मुझे नहीं पता क्या है ये लेकिन मैं hi हु ये, जब मेरे अंदर का गुस्सा, दर्द तकलीफ बढ़ जाती है, या मुझे धोका मिलता है, या मुझे रिवेंज लेना होता है तो मेरी एक नयी पर्सनालिटी बहार आ जाती है. मैं इस पुरे वर्ल्ड में किसी से नहीं डरता खुद के सिवा. लेकिन अब मुझे भी नहीं पता था क्या होने वाला है इनके साथ क्युकी मैं बेहोश था और मेरी दूसरी साइड आज़ाद थी, या रोले में थी.

अभय मुझसे दूर हुआ क्युकी वो समझ चूका था की ये सब छोड़ेंगे अब. मैंने भी उसे देख के स्माइल की और उस स्माइल ने उसे अंदर तक हिल्ला दिया, बाकी सब तो बस घूर रहे थे मुझे. मैंने किसी पे ध्यान न देते हुए किरण की तरफ बढ़ गया.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
:थैंक्स: फॉर योर रिव्यु बरोथेर

एंड अपडेट 2250 वर्ड्स का है कई बार इससे बड़ा होता है एंड रही बात अपडेट अधूरे की तो ये अपडेट पूरा है, इसमें कण्ट्रोल लूसे के बारे में बताना था वो बता दिया और जो लास्ट की 2 लाइन है वो नेक्स्ट अपडेट की

और जो वृत्तेर बड़े बड़े अपडेट देते है न वो एक छोड़ एक दिन देते है या फ्री होते है और मैं रोज़ अपडेट देता हु और 2500 वर्ड्स का अपडेट एक दम नार्मल है

थैंक्स
 
:थैंक्स: बरोथेर और आप और 2.0 :बाउ: का सन अलग है मतलब उन का चेंज होना ड्रग्स रिलेटेड है

वही एक को बीमारी है डबल पर्सनालिटी डिसऑर्डर जिसमे में उसने खुद की एक पर्सनालिटी बना राखी है अपनी इमेजिनेशन से जैसा वो बनना चाहता है लेकिन वो पर्सनालिटी उसपे हावी हो जाती है कई बार जिससे वो खुद को कुछ और समझने लगता है.

ी होप यू विल अंडरस्टैंड
 
अपडेट:-19 (दोने एंड दुस्टेड)

मैं किरण की तरफ बढ़ा hi था की 5 बन्दे मेरी तरफ बढे, सायद मुझे रोकने के लिए, ये लौड़े मुझे रोकेंगे, ाजजी कद्दू मेरा. और वो 5ों मेरे पास आये और एक ने जैसे hi हाथ पकड़ना चाहा मेरा मैंने उसकी तरफ बिना देखे हाथ हटाया और वह से khade-khade hi उसकी नैक पे कीच मारी , वो कटी पतंग की तरह निचे गिरा और उसका ये हाल देखके वह खड़े हर बन्दे मतलब हर बन्दे के बदन में सुरसुरी दौड़ गयी क्युकी मैंने बिना उसकी तरफ देखे उसे डॉज किया और एक किक में ख़तम, ये मेरा कंसंट्रेशन था मैं हवा को फील कर पा रहा था और साथ साथ हर मूविंग ऑब्जेक्ट को.

खैर वो बाकि के चारो ने एक दुसरे की तरफ देखा और मेरी तरफ बढ़ गए.

मैं:- आ जाओ बचो.

और इतना बोल के मैं तेज़ी से मूव हुआ और वो चारो भी मेरी तरफ भागे लेकिन वो लोग स्टिल हिंदी फिल्म के जैसे एक एक कर के आ रहे थे क्युकी एक तो वो बालकनी की चौड़ाई काम थी और उन बन्दों में कोई कोर्डिनेशन नहीं था.

इसलिए पहले एक आया उसने मुक्का मरना चाहा मेरे मुँह पे ( एक तो ये लौड़े मुँह पे hi क्यों मारते है) लेकिन मैं निचे झुका उसको कमर से पकड़ा और घुमा के ज़मीन पे पटक दिया उसका सर ज़मीन में बाज़ा और वो वही ढेर. मैं खड़ा हो पता उससे पहले तीसरे ने मुझे लात मारनी चाही लेकिन मैंने झुके-2 उसकी लात पकड़ी और अपनी तरफ खींचा लेकिन वो थोड़ा हैवी था इसलिए नहीं खींचा एक हाथ से इसलिए मैंने उसे ढाका दे दिया वो निचे गिरा अब मैं उसकी तरफ बढ़ा hi था की मुझे मेरे पीछे कुछ महसूस हुआ और मैं एक दम से निचे झुक गया और एक डंडा ठीक मेरे सर के उप्पेर से निकल गया में सेकण्ड्स में पलटा और पीछे देखा तो रतन खड़ा था इस टाइम वो पागल तो नहीं था फॉर सूरे.

अभय को पता नहीं क्या सुझा उसने मेरी तरफ एक नाइफ फेक दिया, मैंने उसे कैच किया और अपना हाथ पीछे ले जाके पीछे से आते हुए आदमी के सीने के बीचो बिच घोप दिया और वो पीछे को धड़ाम से गिरा और नाइफ मेरे हाथ में रह गया पर उससे खून अभी भी टपक रहा था. ये सन देख के वह कड़ी सभी लेडीज की चीख निकल ( रुक जाओ अभी तो खेल सुरु हुआ, बिना लुंड के गांड फाड़ूंगा तुम्हारी)

वो रतन भी चार कदम पीछे हुआ ये सन देखके लेकिन मैं थोड़ा सा आगे भाड़ा और दिवार पे एक पेअर रखे के पीछे जम्प मारी और पीछे से आते हुए दोनों बन्दों के थोबड़े पे किक दी जिससे वो दोनों साइड को गिरे. मैंने एक का हाथ पकड़ा और उसे खींच के खड़ा किया और वो खड़ा भी हुआ लेकिन बिच में दुसरे हाथ से नाइफ ला दिया मैंने और वो घुसा उसकी गार्डन में.

वो अभी भी झुका हुआ था क्युकी एक हाथ पकड़ा था मैंने, मुझे नाइफ निकलना था इसलिए मैंने उसकी बॉडी पे मारी लात और वो उस ठाकुर के पैरो में गिर गया. और वो 5व बाँदा भी उठा उसकी फटती पड़ी थी लेकिन लड़ना तो था hi उसे इसलिए वो आगे बढ़ा और फिर वो लाडो जैसे मुँह पे मुक्का मारना चाहा लेकिन इस बार में निचे नहीं झुका बल्कि उसका हाथ पकड़ लिया, उसका हाथ कांप रहा था और फिर वही कम्पन उसके बॉडी में भी होने लग गयी, उसके आँखों से आंसू आ गए जैसे वो भीख मांग रहा हो जिन्दा रहने की और ये सब देख के मुझे हसी आ गयी और मैंने वो नाइफ उसके चेस्ट के सेण्टर में डाला और खींच के निचे की तरफ सरका दिया.

बाकी की तरह उसकी चीख भी नहीं निकली और वो भी पीछे की तरफ गिर गया. अब मैंने पहले ठाकुर फॅमिली को घुरा जो मेरे सामने कड़ी थी, वो लोग डरे हुए थे मैं पीछे पलटा तो देखा रतन और किरण एक दुसरे का हाथ पकड़ के कांप रहे थे और वैसे भी विक्टिम तो वो hi है तो मैं उनकी तरफ बढ़ गया लेकिन फिर 10 लोग और भागके उस बालकनी में आये. मैं भी इनका hi वेट कर रहा था क्युकी माना रात को काम बन्दे होंगे हवेली पे लेकिन 5 इतने काम नहीं अब करीबन 10 बन्दे थे तो समझ गया की बस ये hi है अब जो है. और यहाँ से चीखने चिल्लाने की आवाज़ भी कोई नहीं सुनेगा क्युकी इस हवेली के आसपास कोई घर नहीं है.

मैंने अभय को तरफ देखा तो वो समझ गया क्या करना है, इतने वो 10 आदमी मेरी तरफ बढे लेकिन जैसे hi उन्होंने अभय को क्रॉस किया अभय ने पीछे से दो बन्दों का गाला पकड़ा और पीछे की तरफ खींच के पटक दिया और पास पड़ा डंडा उठा के पहले वाले के सर पे दिया और दूसरा वाला खड़ा हो पता उससे पहले उसके थोबड़े पे एक लात दी और फिर वो डंडा दिया उसके सर पे. और फिर पीछे से उन बचे हुए की तरफ हो लिया, इधर अभय ने 2 बन्दों को ख़तम किया इतने में वो सब भी मेरे पास पहुंच गए लेकिन अब खेलने का मूड बिलकुल भी नहीं था मेरा, इसलिए मैं भी उनकी तरफ बढ़ा और पहले वाले ने मुक्का मारा मैं निचे झुक के आगे निकल गया और दुसरे बन्दे के तइस में पूरा नाइफ घोप दिया और झटके से निकल के तीसरे बन्दे के गले में और फिर चौथे बन्दे के अंडो पे लात मारी और वो झुका और झुकते hi उसकी खोपड़ी में लात दी इतने में वो पहला बाँदा पलट के वापिस आया लेकिन मैंने बिना उसकी तरफ मुद्दे वो नाइफ उसकी गार्डन में दाल दिया हाथ घुमा के. अब मैंने देखा की बस 4 बन्दे hi पैरो पे खड़े है बाकि सब या तो मर गए या तड़प रहे है दर्द में. और ये चारो को मैंने इतनी जल्दी मारा था की सब की गांड चौक खा गयी मेरे रेफ्लेक्सेस और स्पीड देख के.

अब उन 4रो की भी गांड फैट चुकी थी उन्हें समझ नहीं आ रहा था की मुझपे ध्यान दे या अभय पे लेकिन मैं और अभय नहीं रुके हम दोनों आगे बढे लेकिन उनमे से एक कुछ ज्यादा hi बोखला गया और वो मेरी तरफ भगा चिल्लाते हुए, मैंने वो नाइफ फेक के मारा जो सीधा उसकी गले में घुस गया, और ये देख के उन तीनो का ध्यान इस तरफ हुआ इतने में अभय ने पीछे से दो बन्दों के गले में डंडा फसा के दबाने लग गया और वो फड़फड़ाने.

अब ये सन देख के वो आखिरी बाँदा घुटनो पे आ गया और हाथ जोड़ के रोने लगा की उसे छोड़, वो कुछ नहीं करेगा blah-blah.

मैं:- एक शर्त पे छोड़ दूंगा तुझे.

वो:- मंजूर है.

मैं:- इस रतन को मार दे?

और मैंने वो नाइफ उसकी तरफ फेक दिया जो उसने झट्ट से उठा लिया.

वो:- पक्का छोड़ डोज न.

मैं:- दिमाग घुमायेगा तो तेरी गांड में ये रामपुरी दाल के घुमा दूंगा.

वो तो जैसे खुस हो गया

वो:- रतन साहब माफ़ कर दो, हमे अपनी जान प्यारी है.

रतन:- तूने हमारा नमक खाया है.

मैं:- ोू भसडक ज्यादा डीएलओगे न मार, मरजा इससे नहीं तो मैं मारने लगा न तो यही नरक के दर्शन हो जायेंगे.

इतने वो ठाकुर आगे आया और मेरे पैरो में गिर गया और उसके पीछे पीछे बाकी फॅमिली भी, इतने में रतन की चीख सुनाई दी और सबने उसकी तरफ देख तो वो निचे पड़ा फड़फड़ा रहा था. साडी ठाकुर फॅमिली के आँखों में आंसू आ गए.

ठाकुर:- बीटा हमे माफ़ कर दो हमसे गलती हो गयी.

मैं:- गलती तो तुमसे हुयी है और मैं ऐसे hi माफ़ नहीं कर दूंगा, मुझे कीमत चाहिए इसकी.

ठाकुर:- कितनी.

मैं:- 25 करोड़ और 4 आटोमेटिक पिस्टल्स विथ मग्स एंड अम्मॉ और तेरी ये बेटी किरण.

ठाकुर:- भगवन के खातिर छोड़ दो, पैसा बेशक दुगना ले लो.

मैं:- सुन बुढऊ अब डील में चेंज आ गया पैसा 50कर हो गया है बाकी शामे .

रितेश:- हमे मंजूर है.

मैं:- तो जाओ और जल्दी से करो जुगाड़, और एक चीज़ तो रह गयी, वो ब्लैक फोर्टनेर और ले जाऊँगा मैं.

वो रितेश समझदार लगा मुझे उसने अपनी फॅमिली को बचाना ज्यादा इम्पोर्टेन्ट समझा और वैसे भी मैं इन्हे तो नहीं मारता. वो रितेश जाने लगा तो मैंने अभय को उसके साथ भेज दिया और किरण की तरफ मुद गया, वो समझ गयी की वो मरने वाली है इसलिए वो रोने लगी लेकिन मैं जैसे hi उसके पास पंहुचा तो मनीषा मेरे सामने आ गयी और रट हुए ना में गार्डन हिलने लगी.

मैं:- नहीं मरूंगा इसे, लेकिन कुछ बात करनी है मुझे इससे.

मनीषा ने हां में मुंडी हिल्लायी और आगे से हट गयी, मैंने किरण का हाथ पकड़ा और उसे उसके रूम में लेके गया और बहार से दरवाज़ा बंद किया.

किरण:- प्लीज मत मारो मुझे,

मैं:- देख पहले एक चीज़ क्लियर कर दू की तू मुझे कोई प्यार वयर नहीं करती तू बस अपनी हवस मिटने मुझे यहाँ लायी है.

किरण कुछ न बोली बस निचे देख के सुबकने लगी

मैं:- तुझे जिन्दा छोड़ दूंगा लेकिन बदले में मेरे लिए काम करना होगा तुझे मरते दम तक.

किरण:- मुझे मंजूर है.

मैं:- थें पैक योर बैग्स.

मैं बहार आया रूम से तो वो रतन मर चूका था और वो आदमी भाग चूका था, अभय ने भी एक बैग और एक सूटकेस ले रखा था.

मैं:- मनीषा अपना सामान पैक करो.

और वो जैसे hi गयी मैं गया ठाकुर के सामने और घुमा के पंच दिया उसके थोबड़े पे.

मैं:- ये था मुझे उठा के यहाँ लाने के लिए. और सुन उस राजपूत को या जो भी है वो उसे अचे से समझा दियो की, वो और तू मेरे पीछे न आये नहीं तो ऐसी हालत कर दूंगा की तू और वो राजपूत रेडलीगत एरिया में भीख मांगोगे और प्लान बनाओ तो ऐसा बनाना की मैं मर जाऊ, क्युकी मैं जिन्दा बचा तो तुम लोगो को मरने नहीं दूंगा, जिन्दा रखके hi इतना दर्द दूंगा की तुम दिन रात मरोगे.

और ये बोलके मैं अपने रूम में आया और नहाया क्युकी खून लग रखा था, मैं बहार आया और वो पजामा t-shirt उतर के खुद के कपडे पहने और पहनते hi बीएड पे गिर गया और बेहोश.

मेरी आँख खुली तो मैंने एक रहत की सास ली लेकिन सामने अभय बैठा था और उसके पास एक बैग था और एक सूटकेस. एक्चुअली मुझे कुछ याद नहीं था की क्या काण्ड किया है मैंने और ये बात अभय को भी पता थी इसलिए उसने मुझे सब कुछ बताया और उसकी बाते सुनके मुझे शॉक लगा क्युकी किरण को क्यों छोड़ दिया उसने और अपने साथ ले जा रहा है. लेकिन थोड़ी तस्सली भी थी की उसने फॅमिली को छोड़ दिया.

मैं:- बस ये गन्स का क्या करेंगे हमे तो चलनी नहीं आती.

अभय:- तुझे नहीं आती तो क्या हुआ उसे तो आती है न.

मैं:- उसे सब कुछ आता है पर वो इतनी आसानी से क्यों गया.

अभय:- उसका काम ख़तम तो गया और वो तेरे जैसा बकचोद तो है नहीं.

मैं:- वैसे जो भी हो ठाकुर की गांड फाड़ दी :डी

अभय:- अबे ठाकुर की छोड़ उसने मेरी भी फाड़ hi दी थी.

मैं:- चल ाचा है अब यहाँ से तो निकले.

अभय:- अब मला का क्या करना है.

मैं:- अबे माँ छुड़ाए मला हमे पैसे मिल गए हमे क्या चाहिए क्यों उसके पीछे टाइम वास्ते किया.

अभय:- तो अब क्या करना है.

मैं:- अब दिल्ली सेटल होंगे लेकिन पहले स्कूल से डाक्यूमेंट्स लाने होंगे.

अभय:- यार मला को टपका देते है तेरा ड्रग्स भी मिल जायेगा और वो बाद में दिक्कत भी नहीं देगा.

मैं:- चल तो फिर टपका hi देते है इसे भी.

और फिर हम कुछ और बात करते उससे पहले किरण और मनीषा आ गयी बैग लेके हम चारो निचे आये उस रितेश ने मुझे कीस दी कार की और हम सब ने बैग उसमे डाला और मैं आया ड्राइविंग सीट पे और अभय मेरे बगल में, मनीषा और किरण पीछे की सीट पे बैठे. मैंने लोकेशन सेट की दिल्ली की और हम निकल पड़े अपनी मंज़िल की और.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
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