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- Dec 5, 2013
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अपडेट:-20 ( बैक तो ट्रैक
)
हम लोग वह से निकले हमे रोहतक पहुंचने में 6 हॉर्स लगने थे, लेकिन बिच में मनीषा ने बोलै की उसके घर चलो सुबह निकलेंगे. मैंने भी उसकी बात मान ली और कार को उसके घर की तरफ मोड़ दिया.
30 मिनट की ड्राइव के बाद हम एक अचे से घर के सामने रुके वह पे एक टाला लगा हुआ था जिसके चाबी हममे से किसी के पास भी नहीं थी, इसलिए पत्थर से वो टाला तोडा और हम अंदर आये पैसे का और गन्स का बैग भी अंदर लेके आये.
हम लोग हॉल में आये तो वह मनीषा और उसकी फॅमिली की पिछ थी जिसे देख मनीषा साद हो गयी और सायद आंसू भी आ गए उसकी आँखों मैंने लेकिन मैंने उसके कंधो पे हाथ रखा और उसे तसल्ली दी तो वो मेरे गले लग गयी.
मनीषा:- तुम तो मुझे नहीं छोड़ डोज न?
मैं:- तुम्हे क्या लगता है.
मनीषा:- मुझे नहीं पता, प्रॉमिस करो मुझे.
मैं:- ोकक Devil's प्रॉमिस.
मनीषा:- नू! God's प्रॉमिस.
मैं:- भगवन भी एक बार को अपना वडा तोड़ दे, लेकिन डेविल नेवर ब्रेक हिज प्रॉमिस.
मनीषा:- ोककक, ी लव यू.
मैं:- मनीषा छोड़ो मुझे और जाके सो जाओ देखो रात के 2 बजने वाले है.
मनीषा:- मैं तुम्हारे साथ सोऊंगी.
मैं:- नहीं नहीं बिलकुल नहीं तुम सो जाओ.
मनीषा ने बुरा सा मुँह बनाया और चली गयी किरण को लेके और उसे उसके रूम में छोड़के मुझे एक लुक देके रूम में घुस गयी.
कितनी क्यूट है बस मैं करता है इसकी आँखों से इसके दिल की गेहराईओ में उतर जाओ, मान करता है इसके सागर रुपी नैनो में डूब के मर जाओ, अगर ये बार केहड़े की एक मुझे अपना दिल दे दो, कसम से अभी सीना फाड़ के इसके हाथ में रख दू.
अभय:- ोू मजनू गयी भाभी , अब चले.
एक्चुअली मैं एक जगह खड़ा होक बस ये बाते सोच रहा था पागल की तरह, भेनचोद ये क्या हो रहा है मुझे चुतियो वाले काम क्यों कर रहा हु.
मैं:- चल- चल.
हम दोनों भी एक रूम में आये और वो पैसो का बैग रखा और उस सूटकेस को टेबल पे रख के खोला, वाओ भेनचोद ग्लोक 17गेन 4 17+1 शॉट 9मम लूजर पिस्टल्स थी वो चारो
मैं:- 2 तेरी 2 मेरी.
अभय:- सिल्वर वाली मेरी, ब्लैक तेरी
मैं:- दोने!
अभय:- नूब चलनी आती है.
मैं:- लौड़े खुद को तीसमारखाँ न समझ तूने भी स्कूल में शूटिंग सीखी है.
अभय:- अबे तुझे तो रीलोड भी न करनी आती होगी.
मैं:- भसडक मुझे वैसे भी कन्फेस पसंद है ये गन तो सिर्फ डरने के लिए और तू भसडक कब काम आएगा सीखा मेरे को.
अभय:- गुरूजी बोल.
मैं:- लौड़ा मेरा.
उसके बाद अभय ने मुझे रीलोड करना, लॉक- अनलॉक और भी कई तरीके बताये की एआईएम कैसे करते ेट्स. उसके बाद हमने सिगग्रेटे फुकी और सो गए.
रात को लेट सोये तो लेट तो उठना hi था. इसलिए सुबह के 9 बजे थे और कोई मुझे झकझोर के उठा रहा था.
मैं:- अबे सोने दे न.
और इतना बोलके मैंने आँख खोली तो मनीषा मुझे हिला हिला के उठा रही थी. मेरा तो दिन hi बन गया सबसे पहले उसे देखके, काश मेरी और मनीषा की अलग दुनिया होती जहा रोज़ वो मुझे ऐसे hi उठती मैं ऑफिस जाता वह से थक हार के घर आता फिर मनीषा मुझे प्यार से पानी पिलाती (लौड़े खियाली पुलाव न पका ये इस जनम में पॉसिबल न है)
मैं:- तुमने तकलीफ क्यों की, अभय उठा देता न.
मनीषा:- क्यों मैं नहीं उठा सकती क्या?
मैं:- उठा सकती हो, बिलकुल उठा सकती हो.
मनीषा:- जल्दी से फ्रेश होक आओ ब्रेकफास्ट रेडी है फिर निकलना भी है.
मैंने हां में मुंडी हिल्लायी और उसने आगे बढ़ के मेरे गाल पे किश की और भाग गयी.
हाय कितनी मासूम है और मैं कितना बड़ा दरिंदा क्या ये मेरे साथ रह भी पायेगी, अब तो रह लेगी मतलब बाद में अपने साथ नहीं रख पाउँगा क्युकी कंडीशन चेंज हो जाएगी, लेकिन मैं अभी क्यों फ्यूचर प्लान कर रहा हु, अभी मुझे जाके नहाना चाहिए.
मैं बाथरूम में घुसा और नहाया और वो hi कपडे दुबारा पहने क्युकी और कपडे थे hi नहीं बस, मैंने रूम में आके रेडी हुआ और एक गन अपनी जीन्स में डाली ऐसे hi हवाबाज़ी के लिए :रोल: .
फिर हम सब ने ब्रेकफास्ट किया और कार में बैठ के निकल लिए, मैंने 2 घंटे में दिल्ली पंहुचा दिया था सबको क्युकी एक तो फोर्टनेर और उप्पेर से मैं ड्राइवर :कूल:
Manisha:-chalo शॉपिंग करते है अब तो तुम क्रोरेपति हो.
बस ये क्या बोल रही है, वो किरण क्या सोचेगी की मेरे बाप से पैसा चीन के क्रोरेपति बने घूम रहे :सिघ:
अभय:- हां भाई चल हमने भी कभी मॉल से शॉपिंग नहीं की है
मैं:- ोकक तो चलो.
अभय ने मुझे रास्ता बताया और मैंने भी पंहुचा दिया कार को मॉल में, हमने बैग में से पैसे निकले और चल दिए मॉल में, अभय को किसी का साथ ज्यादा पसंद नहीं आता, वो अकेला रहना ज्यादा पसंद करता है इसलिए वो निकल गया अकेला कुछ पैसे लेके. मनीषा ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे खींच के ले गयी बॉयज सेक्शन में और किरण बिचारि फ़ूड कोर्ट में चली गयी.
मैं:- वैसे तुम्हारी चॉइस ख़राब है फिर भी तुम hi पसंद कर लो.
मनीषा:- व्हाट दो यू मैं बी चॉइस ख़राब है?
वो आँखे मटकती हुयी बोली
मैं:- तुम्हारी चॉइस हु मैं और मुझमे ऐसा कोई फीचर नहीं है जो कोई लड़की मुझे पसंद करे, इवन तुम भी मुझसे नफरत करती थी लेकिन अचानक से प्यार.
मनीषा:- बताती हु बाद में.
मैं:- इंतज़ार रहेगा ma'am.
भेनचोद क्या क्या करना पद रहा है लड़की के पीछे, शॉपिंग, जी हुज़ूरी ऐसे तो लौड़े लग जायेंगे.
खैर हम दोनों ने शॉपिंग की एक्चुअली शॉपिंग नहीं पूरी शॉप hi खरीद ली 15 जीन्स 15 शर्ट्स ,t-shirts, शॉर्ट्स, स्नीकर्स भेनचोद इतने कपडे मैंने अपनी जिंदगी में नहीं ख़रीदे थे और वो भी इतने महंगे. खैर हमारी शॉपिंग ख़तम हुयी और हम बिल पाय करके फ़ूड कोर्ट में आये तो वह अभय और किरण कुछ बाते कर रहे थे आपस में और हमे देख के वो दोनों चुप हो गए मुझे अजीब लगा क्युकी अभय जल्दी से किसी से बात नहीं करता और लड़की से तो बहुत hi रेयर बात करता है खैर मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया इस तरफ. हमने वह पे लंच किया और निकल पड़े हरयाणा के लिए.
हम हमारी सिटी में घुसे hi थे की अभय ने मुझे एक तरफ इशारा किया और मैंने उस तरफ देखा तो मेरी आँखे बड़ी हो गयी, क्युकी वह वो राजेश और उसके साथ 3 4 लोग खड़े थे, लेकिन हम अभी कुछ नहीं कर सकते थे क्युकी मनीषा साथ थी हमारे.
और मैं प्रॉब्लम थी की अब हम रहेंगे कहा क्युकी उस रूम में तो मैं मनीषा को रख नहीं सकता और गाओं में भी नहीं लेके जा सकता इसलिए मैंने एक प्रॉपर्टी डीलर के पास फ़ोन किया जो की हमारे जान पहचान का hi है.
मैं:- hello लोंदे.
वो:- और चौधरी साहब कैसे हो?
मैं:- सुन 4 रूम, 1 किचन, और हॉल प्लस पार्किंग हो ऐसा फ्लैट चाहिए 15 मिनट में मैसेज कर मुझे.
वो:- अभी करता हु और पेमेंट.
Main:-tu उधर hi मिलियो, दे दूंगा.
वो:- ठीक है भाई और कोई सेवा.
मैं:- है एक काम लेकिन वो बाद में.
और इतना बोलके मैंने फ़ोन कट किया और कार को साइड लगा के उस राजेश एंड पार्टी को देखने लगा. वो लोग कुछ नहीं कर रहे थे बस has-has के बाते कर रहे थे.
15 मिनट में मैसेज आया और लोकेशन मिलते hi मैंने कार दौड़ा दी और वो लोकेशन 15 मिनट की hi दुरी पे था.
हम उधर पहुंचे तो वो एक सोसाइटी टाइप था एंड वह के फ्लैट्स शामे hi थे और सूंदर भी, हम हमारे फ्लैट के पास पहुंचे और वह बहार hi वो डीलर मिल गया. हम कार से उतरे वो मुझ से गले मिला और हमे घर वगैरह दिखाया इतने में अभय ने उसे पैसे लाके दिए और उसे चलता किया क्युकी वो पका रहा था.
वैसे तो सब चीज़ थी फ्लैट में बस khaane-peene की चीज़ो को छोड़ के, उसके लिए मैंने किरण को पैसे दे दिए थे और बोल दिया था की अर्रंगे कर ले वो सब चीज़. उसके बाद सब अपने अपने सिलेक्टेड रूम्स में गए. मेरा और मनीषा का रूम उप्पेर था वही अभय और किरण का नीचे फ्लोर पे. मेरे रूम में लाकर था मतलब अब मैं पैसे रख सकता हु इसमें. अब पैसे मिले है तो अमीरी तो दिखानी है इसलिए 3 ीफोने बुक करे मैंने अपने फ़ोन से. और रूम में जाके तैयार हुआ एक गन पेंट में डाली और कार की कीस लेके अभय के रूम में आया और निकल पड़े हम कुछ सम्मान िक्खता करने. लेकिन मैं इन सब में विवेक को भूल चूका था पता नहीं क्यों बूत अभी दिमाग में उसका ख्याल नहीं था. हम दोनों एक बाइक के शोरूम में गए एक ढुके खरीदी और उसकी डिलीवरी घर करवा के फिर दो नाइफ लिए बिलकुल रामपुरी टाइप एंड और भी कई इक्विपमेंट्स लिए जो काम आ सकते थे कभी भी और फिर निकल दिए उस जगह पे जहा राजेश को देखा था.
लेकिन हम वह पहुंचे तो कोई नहीं था लेकिन सोचा पूछताछ hi करले थोड़ी इसलिए हम जहा वो बैठे थे वह गए और उस दुकान वाले से पूछा की वो लोग कहा है तो उसने बताया पता नहीं साहब कहा गए लोग.
तभी मेरी नज़र थोड़ी दूर एक आदमी पे पड़ी जो फ़ोन पे किसी बात कर रहा था और उसका थोबड़ा देख के में पहचान गया की ये राजेश के साथ था अभी.
मैं:- वो रहा एक तो चल इसे hi धरती है.
अभय:- चल.
हम दोनों ऐसे hi मस्ती मसरते हुए उसके बिलकुल पास पहुंच गए.
मैं:- ू भाईसाहब टाइम क्या हुआ है?
वो:- नहीं पता मुझे.
मैं:- तो फ़ोन में देख के बताओ न.
वो:- अबे बोलै न नहीं पता.
और वो पीछे मुद्दा और पीछे मुझे देख के शॉक हो गया, ी क्नोव वो मुझे जनता होगा लेकिन शॉक होने की क्या बात है उसमे.
वो:- तू तू जिन्दा कैसे है, तुझे तो किडनैप कर ले गए थे न.
मैं:- उन सब को निपटा दिया मैंने, चल अब तू राजेश का पता बता.
वो:- कभी नहीं बताऊंगा.
अब वह लोग इखट्टा होते इससे पहले अभय ने गन निकल के उसके माथे पे राखी और बोलै.
अभय:- अबे लौड़े चल कार में बैठ कब से pak-pak किये जा रहा है.
वो बिचारा दर गया और चुपचाप कार में बैठ गया और अभय उसके साथ बैठ गया. मैंने कार स्टार्ट करि और उस जगह ले ली जहा हम इन सबको ठिकाने लगते है जहा कोई नहीं धुंध सकता इन्हे. बस इस वक़्त मुझे अभय का बिहेवियर थोड़ा विएर्ड लग रहा था जैसे वो कोई चीज़ छठा हो और उसे न मिली हो.
तो बे कॉन्टिनोएड ??
हम लोग वह से निकले हमे रोहतक पहुंचने में 6 हॉर्स लगने थे, लेकिन बिच में मनीषा ने बोलै की उसके घर चलो सुबह निकलेंगे. मैंने भी उसकी बात मान ली और कार को उसके घर की तरफ मोड़ दिया.
30 मिनट की ड्राइव के बाद हम एक अचे से घर के सामने रुके वह पे एक टाला लगा हुआ था जिसके चाबी हममे से किसी के पास भी नहीं थी, इसलिए पत्थर से वो टाला तोडा और हम अंदर आये पैसे का और गन्स का बैग भी अंदर लेके आये.
हम लोग हॉल में आये तो वह मनीषा और उसकी फॅमिली की पिछ थी जिसे देख मनीषा साद हो गयी और सायद आंसू भी आ गए उसकी आँखों मैंने लेकिन मैंने उसके कंधो पे हाथ रखा और उसे तसल्ली दी तो वो मेरे गले लग गयी.
मनीषा:- तुम तो मुझे नहीं छोड़ डोज न?
मैं:- तुम्हे क्या लगता है.
मनीषा:- मुझे नहीं पता, प्रॉमिस करो मुझे.
मैं:- ोकक Devil's प्रॉमिस.
मनीषा:- नू! God's प्रॉमिस.
मैं:- भगवन भी एक बार को अपना वडा तोड़ दे, लेकिन डेविल नेवर ब्रेक हिज प्रॉमिस.
मनीषा:- ोककक, ी लव यू.
मैं:- मनीषा छोड़ो मुझे और जाके सो जाओ देखो रात के 2 बजने वाले है.
मनीषा:- मैं तुम्हारे साथ सोऊंगी.
मैं:- नहीं नहीं बिलकुल नहीं तुम सो जाओ.
मनीषा ने बुरा सा मुँह बनाया और चली गयी किरण को लेके और उसे उसके रूम में छोड़के मुझे एक लुक देके रूम में घुस गयी.
कितनी क्यूट है बस मैं करता है इसकी आँखों से इसके दिल की गेहराईओ में उतर जाओ, मान करता है इसके सागर रुपी नैनो में डूब के मर जाओ, अगर ये बार केहड़े की एक मुझे अपना दिल दे दो, कसम से अभी सीना फाड़ के इसके हाथ में रख दू.
अभय:- ोू मजनू गयी भाभी , अब चले.
एक्चुअली मैं एक जगह खड़ा होक बस ये बाते सोच रहा था पागल की तरह, भेनचोद ये क्या हो रहा है मुझे चुतियो वाले काम क्यों कर रहा हु.
मैं:- चल- चल.
हम दोनों भी एक रूम में आये और वो पैसो का बैग रखा और उस सूटकेस को टेबल पे रख के खोला, वाओ भेनचोद ग्लोक 17गेन 4 17+1 शॉट 9मम लूजर पिस्टल्स थी वो चारो
मैं:- 2 तेरी 2 मेरी.
अभय:- सिल्वर वाली मेरी, ब्लैक तेरी
मैं:- दोने!
अभय:- नूब चलनी आती है.
मैं:- लौड़े खुद को तीसमारखाँ न समझ तूने भी स्कूल में शूटिंग सीखी है.
अभय:- अबे तुझे तो रीलोड भी न करनी आती होगी.
मैं:- भसडक मुझे वैसे भी कन्फेस पसंद है ये गन तो सिर्फ डरने के लिए और तू भसडक कब काम आएगा सीखा मेरे को.
अभय:- गुरूजी बोल.
मैं:- लौड़ा मेरा.
उसके बाद अभय ने मुझे रीलोड करना, लॉक- अनलॉक और भी कई तरीके बताये की एआईएम कैसे करते ेट्स. उसके बाद हमने सिगग्रेटे फुकी और सो गए.
रात को लेट सोये तो लेट तो उठना hi था. इसलिए सुबह के 9 बजे थे और कोई मुझे झकझोर के उठा रहा था.
मैं:- अबे सोने दे न.
और इतना बोलके मैंने आँख खोली तो मनीषा मुझे हिला हिला के उठा रही थी. मेरा तो दिन hi बन गया सबसे पहले उसे देखके, काश मेरी और मनीषा की अलग दुनिया होती जहा रोज़ वो मुझे ऐसे hi उठती मैं ऑफिस जाता वह से थक हार के घर आता फिर मनीषा मुझे प्यार से पानी पिलाती (लौड़े खियाली पुलाव न पका ये इस जनम में पॉसिबल न है)
मैं:- तुमने तकलीफ क्यों की, अभय उठा देता न.
मनीषा:- क्यों मैं नहीं उठा सकती क्या?
मैं:- उठा सकती हो, बिलकुल उठा सकती हो.
मनीषा:- जल्दी से फ्रेश होक आओ ब्रेकफास्ट रेडी है फिर निकलना भी है.
मैंने हां में मुंडी हिल्लायी और उसने आगे बढ़ के मेरे गाल पे किश की और भाग गयी.
हाय कितनी मासूम है और मैं कितना बड़ा दरिंदा क्या ये मेरे साथ रह भी पायेगी, अब तो रह लेगी मतलब बाद में अपने साथ नहीं रख पाउँगा क्युकी कंडीशन चेंज हो जाएगी, लेकिन मैं अभी क्यों फ्यूचर प्लान कर रहा हु, अभी मुझे जाके नहाना चाहिए.
मैं बाथरूम में घुसा और नहाया और वो hi कपडे दुबारा पहने क्युकी और कपडे थे hi नहीं बस, मैंने रूम में आके रेडी हुआ और एक गन अपनी जीन्स में डाली ऐसे hi हवाबाज़ी के लिए :रोल: .
फिर हम सब ने ब्रेकफास्ट किया और कार में बैठ के निकल लिए, मैंने 2 घंटे में दिल्ली पंहुचा दिया था सबको क्युकी एक तो फोर्टनेर और उप्पेर से मैं ड्राइवर :कूल:
Manisha:-chalo शॉपिंग करते है अब तो तुम क्रोरेपति हो.
बस ये क्या बोल रही है, वो किरण क्या सोचेगी की मेरे बाप से पैसा चीन के क्रोरेपति बने घूम रहे :सिघ:
अभय:- हां भाई चल हमने भी कभी मॉल से शॉपिंग नहीं की है
मैं:- ोकक तो चलो.
अभय ने मुझे रास्ता बताया और मैंने भी पंहुचा दिया कार को मॉल में, हमने बैग में से पैसे निकले और चल दिए मॉल में, अभय को किसी का साथ ज्यादा पसंद नहीं आता, वो अकेला रहना ज्यादा पसंद करता है इसलिए वो निकल गया अकेला कुछ पैसे लेके. मनीषा ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे खींच के ले गयी बॉयज सेक्शन में और किरण बिचारि फ़ूड कोर्ट में चली गयी.
मैं:- वैसे तुम्हारी चॉइस ख़राब है फिर भी तुम hi पसंद कर लो.
मनीषा:- व्हाट दो यू मैं बी चॉइस ख़राब है?
वो आँखे मटकती हुयी बोली
मैं:- तुम्हारी चॉइस हु मैं और मुझमे ऐसा कोई फीचर नहीं है जो कोई लड़की मुझे पसंद करे, इवन तुम भी मुझसे नफरत करती थी लेकिन अचानक से प्यार.
मनीषा:- बताती हु बाद में.
मैं:- इंतज़ार रहेगा ma'am.
भेनचोद क्या क्या करना पद रहा है लड़की के पीछे, शॉपिंग, जी हुज़ूरी ऐसे तो लौड़े लग जायेंगे.
खैर हम दोनों ने शॉपिंग की एक्चुअली शॉपिंग नहीं पूरी शॉप hi खरीद ली 15 जीन्स 15 शर्ट्स ,t-shirts, शॉर्ट्स, स्नीकर्स भेनचोद इतने कपडे मैंने अपनी जिंदगी में नहीं ख़रीदे थे और वो भी इतने महंगे. खैर हमारी शॉपिंग ख़तम हुयी और हम बिल पाय करके फ़ूड कोर्ट में आये तो वह अभय और किरण कुछ बाते कर रहे थे आपस में और हमे देख के वो दोनों चुप हो गए मुझे अजीब लगा क्युकी अभय जल्दी से किसी से बात नहीं करता और लड़की से तो बहुत hi रेयर बात करता है खैर मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया इस तरफ. हमने वह पे लंच किया और निकल पड़े हरयाणा के लिए.
हम हमारी सिटी में घुसे hi थे की अभय ने मुझे एक तरफ इशारा किया और मैंने उस तरफ देखा तो मेरी आँखे बड़ी हो गयी, क्युकी वह वो राजेश और उसके साथ 3 4 लोग खड़े थे, लेकिन हम अभी कुछ नहीं कर सकते थे क्युकी मनीषा साथ थी हमारे.
और मैं प्रॉब्लम थी की अब हम रहेंगे कहा क्युकी उस रूम में तो मैं मनीषा को रख नहीं सकता और गाओं में भी नहीं लेके जा सकता इसलिए मैंने एक प्रॉपर्टी डीलर के पास फ़ोन किया जो की हमारे जान पहचान का hi है.
मैं:- hello लोंदे.
वो:- और चौधरी साहब कैसे हो?
मैं:- सुन 4 रूम, 1 किचन, और हॉल प्लस पार्किंग हो ऐसा फ्लैट चाहिए 15 मिनट में मैसेज कर मुझे.
वो:- अभी करता हु और पेमेंट.
Main:-tu उधर hi मिलियो, दे दूंगा.
वो:- ठीक है भाई और कोई सेवा.
मैं:- है एक काम लेकिन वो बाद में.
और इतना बोलके मैंने फ़ोन कट किया और कार को साइड लगा के उस राजेश एंड पार्टी को देखने लगा. वो लोग कुछ नहीं कर रहे थे बस has-has के बाते कर रहे थे.
15 मिनट में मैसेज आया और लोकेशन मिलते hi मैंने कार दौड़ा दी और वो लोकेशन 15 मिनट की hi दुरी पे था.
हम उधर पहुंचे तो वो एक सोसाइटी टाइप था एंड वह के फ्लैट्स शामे hi थे और सूंदर भी, हम हमारे फ्लैट के पास पहुंचे और वह बहार hi वो डीलर मिल गया. हम कार से उतरे वो मुझ से गले मिला और हमे घर वगैरह दिखाया इतने में अभय ने उसे पैसे लाके दिए और उसे चलता किया क्युकी वो पका रहा था.
वैसे तो सब चीज़ थी फ्लैट में बस khaane-peene की चीज़ो को छोड़ के, उसके लिए मैंने किरण को पैसे दे दिए थे और बोल दिया था की अर्रंगे कर ले वो सब चीज़. उसके बाद सब अपने अपने सिलेक्टेड रूम्स में गए. मेरा और मनीषा का रूम उप्पेर था वही अभय और किरण का नीचे फ्लोर पे. मेरे रूम में लाकर था मतलब अब मैं पैसे रख सकता हु इसमें. अब पैसे मिले है तो अमीरी तो दिखानी है इसलिए 3 ीफोने बुक करे मैंने अपने फ़ोन से. और रूम में जाके तैयार हुआ एक गन पेंट में डाली और कार की कीस लेके अभय के रूम में आया और निकल पड़े हम कुछ सम्मान िक्खता करने. लेकिन मैं इन सब में विवेक को भूल चूका था पता नहीं क्यों बूत अभी दिमाग में उसका ख्याल नहीं था. हम दोनों एक बाइक के शोरूम में गए एक ढुके खरीदी और उसकी डिलीवरी घर करवा के फिर दो नाइफ लिए बिलकुल रामपुरी टाइप एंड और भी कई इक्विपमेंट्स लिए जो काम आ सकते थे कभी भी और फिर निकल दिए उस जगह पे जहा राजेश को देखा था.
लेकिन हम वह पहुंचे तो कोई नहीं था लेकिन सोचा पूछताछ hi करले थोड़ी इसलिए हम जहा वो बैठे थे वह गए और उस दुकान वाले से पूछा की वो लोग कहा है तो उसने बताया पता नहीं साहब कहा गए लोग.
तभी मेरी नज़र थोड़ी दूर एक आदमी पे पड़ी जो फ़ोन पे किसी बात कर रहा था और उसका थोबड़ा देख के में पहचान गया की ये राजेश के साथ था अभी.
मैं:- वो रहा एक तो चल इसे hi धरती है.
अभय:- चल.
हम दोनों ऐसे hi मस्ती मसरते हुए उसके बिलकुल पास पहुंच गए.
मैं:- ू भाईसाहब टाइम क्या हुआ है?
वो:- नहीं पता मुझे.
मैं:- तो फ़ोन में देख के बताओ न.
वो:- अबे बोलै न नहीं पता.
और वो पीछे मुद्दा और पीछे मुझे देख के शॉक हो गया, ी क्नोव वो मुझे जनता होगा लेकिन शॉक होने की क्या बात है उसमे.
वो:- तू तू जिन्दा कैसे है, तुझे तो किडनैप कर ले गए थे न.
मैं:- उन सब को निपटा दिया मैंने, चल अब तू राजेश का पता बता.
वो:- कभी नहीं बताऊंगा.
अब वह लोग इखट्टा होते इससे पहले अभय ने गन निकल के उसके माथे पे राखी और बोलै.
अभय:- अबे लौड़े चल कार में बैठ कब से pak-pak किये जा रहा है.
वो बिचारा दर गया और चुपचाप कार में बैठ गया और अभय उसके साथ बैठ गया. मैंने कार स्टार्ट करि और उस जगह ले ली जहा हम इन सबको ठिकाने लगते है जहा कोई नहीं धुंध सकता इन्हे. बस इस वक़्त मुझे अभय का बिहेवियर थोड़ा विएर्ड लग रहा था जैसे वो कोई चीज़ छठा हो और उसे न मिली हो.
तो बे कॉन्टिनोएड ??