Parivartan ( badlaav) - Page 2 - SexBaba
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Parivartan ( badlaav)

अपडेट-6

सुबह देर से आँख खुली दीदी के बीएड की तरफ देखा तो वो वह नहीं थी तो में भी उठा और नाहा धो कर फ्रेश हुआ और निचे गया और हॉल में बैठ गया माँ किचन में थी उन्होंने एक नज़र मुझे देखा और थोड़ी देर में मेरे लिए नास्ता लेकर आयी मैंने भी कोई बात नई और चुप चाप नास्ता करके बहार निकल गया पूरा दिन ऐसे hi घूमता रहा और रात को घर पंहुचा तो देखा दोनों मेरा वेट कर रही थी

माँ- ये क्या टाइम है घर आने का सुबह से कहा था न खाना न पीना पोरे दिन आवारागर्दी

में- में बस अपने दोस्तों से मिलने गया मोदी को तो में चला जाऊंगा फिर पता नई कब मिलना होगा उनसे

माँ- ठीक चल खाना खा ले फिर हम ने मिल के खाना खाया और में अपनी आदत के अनुसार टहल ने के लिए चला गया जब वापस आया तो माँ ने गेट खोला पैर बोली कुछ नहीं और में भी चुप चाप अपने रूम में गया अंदर जैसे hi गया तो देखा दीदी ने मेरा और अपना बीएड मिला के एक कर दिया था में तो शोक में था की ये सब क्या है

दीदी- अब आँखे फाड़े देखता hi रहेगा या लाइट बंद कर के सोयेगा भी

में- ये बीएड एक करने का मतलब

दीदी - ज्यादा दिमाग मत चला मैंने सोचा वह तो अपने अलग रूम है तो 2/ 4 दिन के लिए बीएड को एक कर दिया ताकि बाते करनी हो तो दिक्कत न हो

में- ओह्ह्ह शुक्रिया पैर इसकी कोई जरुरत नहीं है अलग करो बीएड

दीदी- तुझसे बड़ी हु हर वक़्त ये ढोस मत दिखाया कर समझा न चुप चाप सो जा

फिर मैंने भी जयादा बहस नहीं की और चुप लाइट बंद कर के अपनी साइड पे लेत गया

अभी थोड़ी देर hi हुई थी की दीदी मेरे पास सरक के आयी

दीदी- नाराज़ है क्या अभी तक

में- क्यों नाराज़ किस लिए आपकी ज़िन्दगी है आप जैसे मर्ज़ी जियो

दीदी- समझ न भाई ये गलत है हमारा रिश्ता इस सब की इज़्ज़ज़त नहीं देता

में- तो यार में कब आप से कह रहा हु की आप कुछ करो

दीदी- ाचा देख किश कर लिया कर बस बाकि और कुछ नई प्ल्ज़ समझा कर न

में- नहीं जी किश की भी जरुरत नहीं है अब आप सो जाओ मुझे भी नींद आ रही है प्ल्ज़ और में नाराज़ नहीं हु आज के बाद इस बारे में कोई बात नहीं होगी

दीदी- युवी समझता क्यों नहीं अगर किसी को पता चला तो कितनी बदनामी होगी

में- क्यों आप बता रे क्या और जब आपका मैं नहीं है तो क्यों बोल रे हो मैंने बोलै क्या

दीदी - क्युकी तेरी बाते मुझे चैन से जीने नहीं दे रही की तू मुझसे प्यार करता है और मेरी वजह से तू उदास रहने लगा है न खाता है न पिता है

में- तो आप भूल जाओ न सब कुछ क्यों याद कर रही

दीदी- ऐसे कैसे भूल जाओ युवी तूने एक आग लगा दी है मेरे अंदर

में- ये आग तो बहुत पहले से जल रही है दीदी बस आप महसूस नहीं करना चाहती या फिर सब कुछ जान कर भी अनजान बन रही हो इस जिस्म की भी कुछ जरूरते होती जिसे आप 8 महीने से नज़र अंदाज़ कर रही हो

दीदी- तो और क्या करती किसी के भी आगे अपनी टाँगे खोल देती और पापा को और तुझे दुनिया के सामने बदनाम कर देती तू hi बता न में क्या करती कैसे कहती की मेरा जिस्म तप रहा है

में- तो अब क्यों कह रही हो अब क्या हो गया

दीदी- क्युकी अब तूने इस जलती आग में प्यार की चीते मार दिए है और ये अब कबूल hi नहीं करना चाहती की में इस आग में और जलु ये ( परिवर्तन ( बदलाव) तू लाया है मेरी ज़िन्दगी में

में- तो छोड़ क्यों नहीं देती ये झूटी ज़िद्द जो तुम्हे जला के रख देगी

दीदी- मुझे सोच ने लिए कुछ वक़्त दे प्ल्ज़

गुड़ नाईट अब सो जा

में- सोच लो जितना सोच न है तुम्हारा जो भी फैसला होगा मुझे मंज़ूर है

दोनों बहिन भाई सो गए एक नए दिन की छह में
 
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अपडेट-7

सुबह आँख खुली तो दीदी सो रही थी और सोते हुए बहुत hi प्यारी लग रही थी दिल कर रहा था की बस देखता राहु पैर फिर न जाने क्या सोच कर में खड़ा हुआ और नाहा धो कर हॉल में बैठ के टीवी देख ने लगा थोड़ी देर बाद माँ नास्ता लायी और आमने सामने बैठ के नास्ता करने लगे पैर बोल कोई नहीं रही रहा था ऐसे hi चुप चाप नास्ता करके में उठा hi था की मेरा फ़ोन बजा देखा तो पापा का कॉल था

में- hello नमस्त्य पापा जी कैसे हो आप

पापा- नमस्त्य बीटा ाचा सुनो तुम्हे कल निकल न है वह घर कम्पलीट हो गया है मिस्त्री का फ़ोन आया था तो तुम सब सामान पैक करो और कल सुबह निकल जाओ और वह तुम्हारे लिए सरप्राइज भी है एक ok

में- जी पिता जी आप माँ को भी बोल दो

पापा- हां में बोल देता हु और ये दोनों परसो ट्रैन से आ जाएँगी ठीक है अब अपनी माँ से बात कराओ

फिर मैंने माँ को फ़ोन दिया तब तक दीदी भी निचे आगयी एक लोअर और टी- शर्ट पहन के जिस में उसकी चुकी बहार आने को बेताब थी उफ्फ्फ और उसकी गांड तो बस मेरा लुंड खड़ा होने लगा था पैर नहीं चाहता था की कोई देखे इसलिए मैंने नज़ारे होता ली बात ख़तम होते hi माँ बोली

माँ- सुषमा तुम जल्दी से नास्ता करो और फिर सब सामान पैक करो

दीदी- क्यों माँ अभी से अभी तो टाइम है न

माँ- नहीं बीटा तेरे पापा का फ़ोन आया मकान तैयार हो गया है और परसो तक ये मकान भी खली करना है कल युवी सामान के साथ निकल जायेगा सुबह hi

दीदी - ओह्ह्ह ठीक है माँ में जल्दी से नास्ता कर लू तब तक आप लोग करो

फिर में और माँ लग गए पैकिंग करने पे और माँ ने भी मैले कपडे मशीन में दाल दिए ताकि तब तक वो भी धूल जाये इस दौरान कई बार मेरा हाथ माँ की गांड और चूचियों से टच हुआ पैर हम दोनों ने hi कोई ध्यान नहीं दिया लगभग दोपहर तक सारा सामान पैक हो चूका था माँ ने बस 2 जोड़ी कपडे छोड़ सब पैक कर दिया था अब लंच का टाइम था और सब थक चुके थे तो मैंने फ़ोन करके खाना मंगवा लिया था फिर हम सब ने खाना खाया और अपने 2 रूम में चले गए अपने रूम में पहुंच कर मैंने कपडे चेंज किये और लेट गया थका होने के कारन जल्द hi नींद ने घेर लिया शाम को 6 बजे आँख खुली मौसम बहुत सुहाना हो चूका था शायद वो भी मुझे आखिरी बिदाई देना चाहता था तो में भी उठ के सीधा चाट पे चला गया ऊपर आसमान में काले 2 बदल छाए थे और हल्का हल्का अँधेरा हो रहा था हवाएं भी बहुत तेज़ चल रही और फिर हलकी हलकी बुँदे गिरने लगी तो मैंने अपनी टीशर्ट उतार के स्टोर रूम में रख दी और हलकी बारिश का मजा लेने लगा इस वक़्त चाट पे हल्का अँधेरा था और में एक कोने में खड़ा होक बारिश का मजा ले रहा था की तभी माँ भी ऊपर आगयी क्युकी उन्हें बारिश में नहाना बहुत पसंद था और इस वक़्त वो एक पतली सी निघ्त्य में थी और अंदर से बिलकुल नंगी जिसका पता मुझे बाद में चला अभी तक उनकी नज़र मुझ पे नहीं गयी थी और तभी बारिश तेज़ तेज़ होने लगी में और माँ पूरा भीग चुके थे और भीगने की वजह से माँ की निघ्त्य उनके बदन सी चिपक गयी थी और उनका पूरा भूगोल साफ़ नज़र आरहा था जिसे देख लुंड महाराज भी खड़े हो चुके थे और अपने पूरे शबाब पे थे माँ का ऐसा रूप देख के जाने क्यों में उनकी तरफ खींचा जा रहा था और में बिलकुल माँ के पास पहुंच गया और जैसे hi माँ की नज़र मुझ पे पड़ी तो एक बार तो उन्हें झटका लगा पैर खुद को नार्मल करते हुए बोली

माँ- तुम कब आये

में- में तो बहुत पहले hi ऊपर आज्ञा था( और माँ के बदन को स्कैन करने लगा इस वक़्त माँ बिलकुल कामदेवी लग रही थी)

माँ- मेरी नज़र देख के निचे जाने लगी

में- माँ क्या आज रेन डांस नहीं करोगी मेरे साथ जैसे हमेशा करती थी( दरसल जब भी बारिश होती थी तो में और माँ रेन डांस करते थे)

माँ- आज मैं नहीं फिर कभी करेंगे

में- माँ आज यहाँ मेरी लास्ट नाईट है प्ल्ज़ माँ एक लास्ट डांस यहाँ

फिर न जाने क्या आया माँ के मैं में और मान गयी में तो पहले से hi ऊपर से नंगा था और मेरी छोड़ी छाती बारिश के पानी से और बिजली की चमक में अलग से hi चमक रही थी जिसको देखते हुए माँ मेरे पास आयी और एक हाथ मेरी कमर पे और एक हाथ मेरे कंधे पे रख लिया मैंने भी देर न करते हुए शामे पोजीशन ली और माँ से चिपक के डांस करने लगा माँ की निघ्त्य आगे से छूट पे चिपकी हुई थी जिस से उसकी शेप साफ़ नज़र आ रही थी और हमारे चिपकने से मेरा लुंड कई बार उसकी छूट से रगड़ खा रहा था माँ की आँखों में लाल डोरे दौड रहे और उनकी साँसे भी तेज़ चलने लगी थी और में ें सबका आनंद ले रहा था बारिश पुरे जोर से बर्ष रही थी तभी माँ बोली
 
अपडेट-8

माँ- अब बस कर बहुत डांस हो गया अब निचे चलते है बहुत देर से भीग रहे है

में- बस थोड़ी देर और माँ फिर चलते है और अभी तो बारिश भी हो रही है

फिर माँ कुछ न बोली और हम डांस करने लगे और निचे मेरा लुंड बगावत पे उतर आया था तो मैंने एक कदम आगे बढ़ते हुए अपना हाथ माँ की गांड के पास घूमना चालू कर दिया और निचे से लुंड को माँ की छूट पे हल्का हल्का पुश कर ने लगा उसका असर ये हुआ की माँ ने अपना सर मेरी छाती पे टिका लिया और अपना हाथ मेरी छाती पे फिरते हुए डांस करने लगी उनकी साँसे बहुत तेज़ चलने लगी थी जो मुझे मेरी छाती पे महसूस हो रही थी उनका ऐसे करने से मुझे में भी थोड़ी हिम्मत आयी और मैंने अपने दोनों हाथ उनके चूतड़ पे रख दिए और उनकी गांड को पीछे से लुंड पे दबाने लगा मैंने महसूस किया की जब में अपना लुंड उनकी छूट पे घिसता तो वो भी जवाब में अपना दबाव दाल रही थी ये मेरे लिए एक और कदम आगे जाने के लिए सही समय था चाट पैर घोर अँधेरा हो चूका था कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था और ऊपर से बारिश की गिरती बुँदे एक अलग hi समै बना रही थी तो मैंने भी अपने होठ माँ की गर्दन पे रख दिया और माँ ने एक सिसकी सी ली और अपनी छूट को मेरा लुंड पे दबाया उफ़ बता नहीं सकता कितना सकूं था पैर अब रुकने का तो कोई मतलब hi नहीं था तो मैंने माँ की गर्दन को चाट न और चूमना शुरू कर दिया माँ बस मुझे घुसे जा रही थी और में बस उसे चूमे जा रा रहा था की तभी माँ ने अपनी जीव से मेरी छाती को छाता उउउफ एक झटका सा लगा क्या आनंद था बता नहीं सकता माँ के ऐसा करना था की मैंने जो हाथ माँ की गांड पे थे उन्हें कास के दबोचा और माँ की गांड मसल ने लगा अब माँ भी गरम हो चुकी वो भी पागलो की तरह मेरी छाती को चूमे जा रही थी

अब मुझे भी कोई दर नहीं था तो में भी धीरे धीरे माँ की निघ्त्य ऊपर उठाने लगा और मदहोशी में बस मुझे चूमे जा रही थी और पता भी नहीं चला की कब उनकी निघ्त्य ने साथ छोड़ दिया में भी अपना लोअर उतार चूका था और मेरा खड़ा लुंड माँ की दोनों टैंगो के बिच फसा हुआ था इतना सुखद एहसास मुझे कभी नहीं हुआ इस आनंद को आगे बढ़ाते हुए मैंने को धीरे 2 चाट पे लिटा दिया और उनकी दोनों टैंगो के बिच में आते hi आज तक जितनी पोरंस देखि थी उनका सारा ज्ञान लाते हुए माँ की छूट को मुँह में भर लिया और मेरे ऐसा करते hi माँ की पहली बार आवाज़ आयी

माँ-- आह्हः माआ

पैर मुझे उस किले पे आज फ़तेह हासिल करनी थी तो मैंने भी पुरे दिल से छूट को चाट ता और चूस ता रहा ऊऊफफफ बारिश का पानी और माँ की छूट से निकलता वो काम रास ऊऊफफफ ऐसा लग रहा जैसे की अमृत पि रहा हु अब माँ के हाथ भी मेरे सर पे आ चुके थे जो मुझे दोनों टैंगो में दबा रहे थे जैसे कह रहे हो की खा जाओ इसे और मुझे आज़ाद कर दो हर दर्द से माँ कभी इधर मुँह करती तो कभी उधर अपने होठो को अपने दांतो से दबाये बस वो इस लम्हे में खो कर आनंद की पर्पटी करना चाहती और अब मुझसे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो फाइनल स्टेप लेने के लिए मैंने माँ के पैरो अपने कंधो पे रखा तो माँ भी समझ गयी की अब क्या होने वाला है तो उन्होंने अपने दोनों हाथो से अपना चेहरा धक् लिया और मैंने अपने लुंड को उनकी छूट पे सेट किया और ऊपर निचे करके उनकी छूट पे रगड़ ने लगा अभी दो तीन बार hi रगड़ा होगा की माँ का सरीर अकड़ ने लगा शायद वो इतनी देर की चूसै और मेरे लुंड की रगड़ सहन नहीं कर पायी और तेज़ साँसों के साथ झड़ने लगी अब और देर करना मेरे लिए गलत हो सकता था तो मैंने भी माँ के निकलते रास से अपने लुंड को भिगो के छेद पे सेट किया और कर्रारा शॉट मारा और मेरा आधा लुंड माँ की छूट फाड़ ता हुआ अंदर घुस गया माँ ने बहोत कण्ट्रोल किया था अपने ऊपर पैर फिर भी उनकी दबी सी चीख निकल hi गयी

माँ- आअह्ह्ह माआ मार्गयीईइ

और इस पहले की में दूसरा शॉट मरता निचे से दीदी की आवाज़ आयी

दीदी- माँ ू माँ कहा हो आप

दीदी की आवाज़ सुनते hi माँ ने मुझे धक्का दिया और अपनी निघ्त्य उठा के पहनी और मुझे देख के मेरी तरफ बढ़ी और खेंच के एक छठा मारा

माँ- कमीने मुझसे बात मत करना कभी

ये बोलै और निचे चली पैर जाते वक़्त उनकी नज़र मेरे लुंड पे hi थी और फिर मैंने भी अपने कपडे पहने और चाट के एक कोने में खड़ा हो के सोच ने लगा की ऐसा मैंने क्या किया जो फिर मुझे थप्पड़ पड़ा खुद hi तो साथ दे रही थी अगर इतना hi गलत था तो तभी छठा मारती जब छूट चाट रहा था तब तो बड़े प्यार से अपनी छूट चटवा रही थी और इस दीदी की छूट मारु ऐसे भी अभी आना था अपनी माँ छुड़वाने खुद देती नहीं और इतनी मुश्किल से मिली तो उस में भी आगयी ऊँगली करने साला खड़े लुंड पे चोट भी हम खाये और गाल पे छाता भी चलो युवी बाबू काम से काम आज प्रवेश तो किया स्वर्गधाम में देखते है कल का सूरज क्या गुल खिलता है पहले तो निचे चलते है यही सब सोचते हुए में निचे आया तो दीदी नहीं थी वह तो मैंने भी जल्दी से कपडे चेंज किये और चुप चाप घर से बहार निकल बारिश तो रुक hi चुकी थी और ऐसे hi सड़क पे घूमते हुए अपनी ज़िन्दगी में आये कुछ दिनों के परिवर्तन के बारे में सोचता हुआ घर पंहुचा तो दीदी ने गेट खोला माँ तो कही भी नज़र नहीं आयी न किचन में न हॉल में
 
अपडेट -9

में अंदर आके ऊपर जाने लगा तो दीदी hi बोली

दीदी- खाना तो खले युवी सुबह तुझे जाना भी है और मैंने भी नहीं खाया जल्दी आ

मैं तो नहीं था पैर दीदी के कहने पे में खाने बैठ गया और फिर हम दोनों खाना खाने लगे

में- माँ ने खा लिया क्या

दीदी- हां उन्होंने खा लिया उनकी तबियत ख़राब है तो जल्दी hi खाना खा के सो गयी है

में- ok

फिर हम दोनों ने खाना खाया और दीदी बर्तन उठा के किचन में चली गयी और में अपने कमरे में ऊपर जा कपडे चेंज किये और निचे फर्श पे बिछे गद्दे पे लेत गया क्युकी बीएड तो सब निचे थे ले जाने के लिए

पता नई माँ क्यों ऐसा कर रही करना भी है और बुरा भी लगता है पता नई कब तक ऐसे hi नखरे करेगी और ये दीदी भी कोई हां या न नहीं कर रही है चलो देखते है क्या होता है यही सोचते हुए आंख बंद करके लेट गया अभी थोड़ी देर hi हुई थी की दीदी आगयी

दीदी- सो गया क्या भाई

में- नहीं दीदी बस सो ने वाला था बताओ कोई काम है

दीदी - ाचा भाई मेरा सामान भी न ऊपर hi सेट करना अपने कमरे के बराबर में

में- आपको क्या पता की ऊपर कितने कमरे है

दीदी- मेरी पापा से बात हुई थी वो hi बता रहे थे ऊपर दो कमरे और निचे भी दो कमरे हॉल और एक बड़ा सा किचन है

में- ओह फिर तो लगता है अबकी बार पापा ने ाचा घर बनाया है

दीदी- हां बहुत ाचा बातो से तो यही लग रहा था ाचा अब सो जा

में- दीदी आप ने बताया नहीं अभी तक की आप ने क्या सोचा है

दीदी- नए घर पहुंच के बता दूंगी अभी में तये नहीं कर प् रही तो क्या करू

में- कोई बात नहीं जो आप तये करोगे वही होगा वैसे भी वह अलग रहेंगे तो आप को दिक्कत भी नहीं होगी

दीदी- दिक्कत कैसी मुझे कोई दिक्कत नई है बस ऐसा कभी सोचा नहीं था

में- पहले तो कोई भी नहीं सोचता वैसे कुछ कहु अगर बुरा न लगे तो

दीदी- हां बोल न युवी में बुरा नहीं मानूंगी

में- वो सुबह में चला जाऊंगा फिर तो परसो hi मिलेंगे तो क्या आज एक किश मिल सकती है

रूम में एकदम शांति चा गयी थी कोई भी कुछ नहीं बोल रहा था तो मैंने hi ख़ामोशी तोड़ते हुए बोलै

में- कोई बात नहीं दीदी अगर मैं नहीं है तो आप सो जाओ

में आगे कुछ कहता इस पहले hi दीदी के होठ मेरा मुँह बंद कर चुके थे और में तो उन मुलायम होठो के रसपान में खो चूका सच में दीदी के होठ बहुत प्यारे और उन्हें चूसते वक़्त में तो में हवा में खो जाता था उनके होठो का रास पिटे हुए मैंने उनकी एक चुकी पे हाथ रखा और मसल ने लगा पैर जैसे hi दीदी को एहसास हुआ वो तुरंत अलग हो गयी और तेज़ तेज़ सांस लेने लगी और यही हाल मेरा भी था जब कुछ नार्मल हुई तो बोली

दीदी- प्ल्ज़ युवी मुझे मजबूर मत कर अगर तुझे मेरा शरीर hi चाहिए तो बोल अभी नंगी हो जाती हो तेरे लिए कर ले तू अपने मैं की रोड दाल मेरे जिस्म को जैसे मर्ज़ी पैर फिर कभी उसके बाद में नहीं मिलूंगी तुझे

में- नहीं दीदी प्ल्ज़ ऐसा मत बोलो वो तो बस जोश जोश में गलती कर बैठा ी म सॉरी मुझे माफ़ कर दो आज के बाद ऐसा नहीं होगा अब में आपको तभी हाथ लगाऊंगा जब आप पुरे तन्न मैं से मेरे पास आओगी प्रॉमिस

दीदी- ठंकु भाई अब सो जा गुड नाईट

और फिर दीदी मेरी तरफ करवट लेके आंखे बंद कर ली तो मैंने भी लाइट बंद की और सो गया

रात को मुझे प्यास लगी और में पानी के लिया उठा तो देखा पानी नहीं है तो पानी लेने के लिए निचे चल दिया
 
अपडेट -10

में पानी लेने के लिए किचन की तरफ जा रहा था तो देखा माँ के कमरे से हलकी रौशनी आ रही थी क्युकी सारे सामान की पैकिंग हो चुकी थी इसलिए खिड़की पे आज पर्दा भी नहीं था और अंदर झांक कर देखा तो देखता hi रह गया अंदर माँ जन्मजात नंगी बीएड पे लेती थी और जोर जोर से अपनी छूट में ऊँगली कर रही थी और बाद बड़ा रही थी

माँ- आअह्ह्ह्ह माँ की इसकी खुजली की वजह से सब हुआ उफ्फ्फ अब तक ऐसा लग रहा है की जैसे अंदर घुसा हुआ उफ्फ्फ कितना मोटा था माँ काश अशोक मुझे पूरा टाइम देते तो ये न होता आह्हः माँ झाड़ जा न कामिनी और कितना तड़पायेगी पहले hi आज तेरी वजह से गलत कर बैठी आह माँ आह ऊऊफफफ आह्हः

माँ गयईईई

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आआह्ह्ह्हह

जब माँ की तसल्ली हो गयी तो में भी किचन की तरफ चल दिया और पानी पिया पानी पि के वापस एक नज़र माँ के कमरे में डाली जो आँखे बंद करके जोर जोर से सांसें ले रही थी तो में भी जांबुजः के खडका किया और ऊपर जा के अपनी जगह पे सू वही निचे खडका सुनके माँ को होश आया और वो निघ्त्य पहन के बहार आयी

माँ- हे भगवान् कोण था ये छूट और इसकी खुजली न जाने क्या करवा के रहेगी पैर अगर कही सुषमा हुई तो नहीं नहीं वो तो रात को निचे कभी नहीं आती यानि युवी था कही उस ने मुझे सब करते हुए तो नहीं देख लिया क्या करू में इसकी आग के कारन याद hi नहीं रहा की खिड़की पे पर्दा भी नहीं है इस ाचा होता की युवी से छुड़वा hi लेती वैसे कितना आनंद आया था जब उसका टोपा अंदर गया था उफ्फ्फ हिला के रख दिया था अगर आज सुषमा न आती तो शायद में चुद hi जाती ( अन्तेर्मन्न ये क्या कह रही है सविता वो बीटा है तेरा तू ऐसा सोच भी कैसे सकती भूल जा जो हुआ और सू जा) उसके बाद माँ भी अपने कमरे में चली गयी ये रात आज कुछ तो नया लायी थी जो ें सब की ज़िन्दगी में एक नया परिवर्तन( बदलाव) लाने वाली थी

सुबह 5 बजे अलार्म से मेरी आँख खुली और मेरे उठते hi दीदी भी उठ गयी

में- आप तो सो जाओ दीदी आप क्यों परेशान हो रहे हो

दीदी - नहीं युवी रस्ते के लिए खाना बनाना है तेरे लिए वह जा के कोनसा कोई तुझे बना के देगा तू जल्दी से फ्रेश हो जा तब तक में चाय नास्ता बनती हु

में- ठीक है दीदी जैसा आपको ठीक लगे

फिर में भी नाहा धोके फ्रेश हुआ तब तक 5.30 हो गए थे तो पापा को फ़ोन किया

में- गुड़ मॉर्निंग पापा जी

पापा- गुड़ मॉर्निंग बीटा मुझे बहुत खुसी हुई की तुम्हे अपनी ज़िम्मेवारी का ख्याल है बोलो

में- पापा वो लोग कब तक आएंगे यहाँ सब तैयार है

पापा- वो बस पहुंचने वाले होंगे अभी उनका फ़ोन आया था ाचा सुनो शाम को कुछ नया सामान भी आएगा तो ठीक से रखवा लेना और हां तुम्हारा और सुषमा का बीएड वो ट्रैक वाले को hi बेच दिया है तो वो चढ़ाना वो उसे खुद ले जायेगा अब में रखता हु ठीक है

फिर में किचन में hi चला गया और वही खड़ा हो के नास्ता करने लगा हमारी आवाज़े सुन के माँ भी उठ चुकी जब तक मैंने नास्ता फिनिश किया तब तक गाड़ी भी आगयी थी तो जल्दी से सब सामान सेट किया जिस में मुझे 7.30 बज गए थे तो में दीदी से कहा की माँ से पैसे ला दो तो दीदी बोली खुद लिया भाई में इन लोगो भी चाय दे दू तब तक तो में माँ के कमरे में गया

में- वो मुझे निकल न है पैसे दे दो लेट हो रहा है

तो माँ चुप उठी और 15000 रस दे दिए जैसे hi में मुदा तो माँ बोली

माँ- शर्म तो नहीं न तुझे ये भी नहीं की सॉरी hi बोल दे

में-( गुस्सा तो मुझे शाम से hi था) किस लिए सॉरी माँ जो हो रहा था दोनों की मर्ज़ी से हो रहा था क्युकी दोनों को उसकी जरुरत थी क्या तुम्हे ाचा नहीं लग रहा था या फिर में बीटा हु तो अपनी हर गलती मेरे सर मध् देना चाहती हो

माँ- छी तेरी वजह से सब हुआ तूने जानबूझ के वो सब किया तू चाहता तो कुछ नहीं होता कमीने और अब मुझ पे hi इलज़ाम दाल रहा है तू

में- ाचा तो फिर निघ्त्य उतार ने के लिए साथ किस ने दिया जब में चाट रहा था तो मजे में मेरे सर को अपनी दोनों टांगो के बिच कोण दबा रहा था जब अंदर दाल ने लिए आपकी टाँगे उठाई तो आँखों पे हाथ किस ने रख लिया था तब नहीं पता था की कोण है और क्या होने वाला है

चात्तैक चातक कुत्ते चला जा

में- हर बात थप्पड़ से नहीं छुपती माँ और ये थप्पड़ तुमने इसलिए नहीं मारा की मैंने वो सब किया बल्कि इस लिए मारा क्युकी में सच बोल रहा हु और सच ये है की आप प्यासी हो मेरी तरह पापा अब आपको खुश नहीं कर पाते और जब आपको अपनी प्यास शांत होते दिखी तो आप खुद को रोक नहीं पायी ये सच है और आप खुद सोचो जब आप जैसी औरत जिस्म की आग में बहक सकती है तो में फिर भी अभी जवान हुआ हु तो बोलो में कहा गलत हु

मेरी बात सुनके माँ के चेहरे पे कई भावव आये और गए

माँ- मानती हो तू जो बोल रहा है वो सच है पैर किया तो पाप hi न

में- माँ जिस्म सिर्फ जिस्म देखता है आग सिर्फ पानी से बुझती है भूक सिर्फ खाने से मिट टी है उसी तरह जो जिस्म की भूक हम दोनों को है उसे जिस्म से hi बजाय जा सकता है और अगर ऐसा न होता तो रात को आप मुझे याद करके ऊँगली नहीं करती क्युकी मेरे साथ उस पल में आपको सुख की पर्पटी हुई थी अब में चलता हु और अगर आपको लगता है की में hi गलत हु तो मुझे एक बार बोल देना में आपकी नज़रो से भी दूर चला जाऊंगा

फिर में वह से माँ की बात सुने hi बहार निकल कर गाड़ी में बैठ गया और चल दिया एक नए सेहर में नए सपने लिए जहा ज़िन्दगी जन्नत बन ने वाली थी छूटो का सैलाब आने वाले था वो सुख मिलने वाला था जिसे रात को पाते पाते रह गया

वही मेरे जाने के बाद माँ बैठी हुई सोच रही थी

क्या गलत कहा उस ने कुछ भी तो नहीं सच hi तो है में चाहती तो उसे रोक सकती थी पैर नहीं रोका और सच तो ये है की थप्पड़ तो उसे इसलिए मारा क्युकी में आनंद से वंचित रह गयी थी पैर में भी क्या करती अगर सुषमा ऊपर आ जाती तो क्या होता हे भगवान् सब सही करना

वही अभी मुझे निकले 2 घंटे हुए थे और 3 घंटे और लगने थे पैर दीदी अपने कमरे में बैठी कुछ सोच रही थी

दीदी- ये मुझे क्या हो रहा है वो रोज भी तो बहार जाता था और फिर कल में भी तो पहुंच जाउंगी वही फिर ये बेचैनी क्यों कही मुझे सच में तो प्यार नहीं हो गया है और वो भी तो मेरी बात मंटा है वार्ना सुरेश( पति) तो कभी नहीं रुकता था पैर वो बेचारा हर बार रुक गया नहीं अब और नहीं में उसे हां कह दूंगी पैर क्या ये सही होगा हे भगवान् क्या करू क्या नहीं कुछ समझ नहीं आ रहा
 
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