Parivartan ( badlaav) - Page 3 - SexBaba
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Parivartan ( badlaav)

माँ

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अपडेट -11

यही सुब सोचते हुए आखिर 1 बजे में अपने नए घर पहुंच गया घर वाकई बहुत सूंदर बना था हमारे घर से 200 मीटर की दुरी पे एक और मकान था बाकि सब दूर दूर थे सब से ाचा मुझे अपने मकान के साथ वो आम का पेड लगा जो काफी फैला हुआ था और उसका एक तना हमारी चाट की तरफ भी था खैर गाड़ी से निचे उतर के मैंने पापा को फ़ोन किया

में- पापा जी में पहुंच गया हु और घर तो बहुत सूंदर है

पापा- बस बीटा तुम्हारा लिए hi बनाया है अब और कही जाना नहीं है तो यही बना दिया स्टेशन भी नज़दीक है यहाँ से

में- जी पापा वैसे कोई है यहाँ पैर या चाबी कोई लेके आएगा

पापा- बेटे अंदर मेरा एक जूनियर होगा बेल्ल बजाओ और सामान सेट करो कुछ आदमी भेजे है मैंने और वो नया सामान भी आने वाला होगा उसके साथ बाँदा भी आएगा फिटिंग के लिए ठीक तो देख कर व लेना सब और हां बड़े वाला a.c हॉल में बाकि कमरों 3no कमरों में जो तुम्हे पसंद आये

में- ठीक है पापा जी

फिर मैंने बेल्ल बजे तो एक अंकल बहार आये उन्हें अपना परिचय देकर मैं सामान उतरवाने लगा अभी तक ने घर में नहीं गया था सामान उतार ने के बाद में घर में गया वाह जैसा सोचा था उस से भड़कर घर बनाया था पापा ने फिर ऊपर की फ्लोर पे गया और अपना रूम सेलेक्ट किया फिर छत्त पे गया जो की मेरी पसंदीदा जगह है हमेसा से वह जाकर देखा तो घर के पीछे प्लॉटिंग के बाद सब जंगल hi नज़र आ रहा था तभी मेरी नज़र दूसरी तरफ गयी तो में उस पेड की टहनी की ूत में चुप गया जो हमारे घर के साथ लगा था दरसल वो दूसरा घर जो हम से 200 म दूर था उस घर की छत्त पे एक आंटी जो की बिलकुल गोरी थी वो छत्त पे स्टोर रूम जैसा कुछ वह घोड़ी बनी हुई थी और एक मुझसे काम उम्र का लड़का उन्हें पीछे से छोड़ रहा था ओह्ह्ह क्या मोती गांड थी साली ऐसी गांड की चाहे तो झुका के मेहमानो को चाय नास्ता परोस दो उस लड़के ने मुश्किल से 10/ 15 धक्के मारे होंगे की ढेर हो गया तभी मुझे ख्याल आया में क्यों चुप रहा हु तो में भी सामने आके उन्हें देखने लगा आंटी थोड़ी मोती थी पैर चीज़ कमाल लग रही साली की गांड से नज़र hi नहीं हैट रही थी तभी वो लड़का खड़ा हुआ और कपडे ठीक करके निचे भाग गया और उस आंटी ने पेटीकोट से अपनी छूट साफ़ की और निचे जाने के लिए जैसे hi घूमी तो मुझे अपनी तरफ देखते पाया पता नई मुझे क्या सुझा की मैंने हाथ से मस्त का इशारा कर दिया अभी में उन्हें देख hi रहा था की मुझे एक गाड़ी आती दिखाई दी में समझ गया की ये वो hi गाड़ी जिस में सामान आना था हमारा तो में bye का इशारा करता निचे चला गया और वो गाड़ी वाला मेरे पास आया और बिल मुझे दिया और बोलै

आदमी- तो साब बताइये कहा फिट करना है ये सब मैंने गाड़ी में देखा तो 1बड़ा और 3 छोटे स्प्लिट a.c और 2 लेद थी

में- भैया दो तो निचे लगेंगे और दो ऊपर

निचे पापा वाला कमरा और हॉल दिखा के मैंने उसे अपने रूम्स भी दिखा दिया अभी ये सब हो hi रहा था की निचे एक गाड़ी और आगयी वो ाचा हुआ के आदमी अभी गए नहीं थे वार्ना में तो मर जाता उस गाड़ी में 3 नए डबल बीएड थे और एक डाइनिंग टेबल और हॉल के लिए प्यारा सा सोफे तो मैंने उसे उतार ने का बोल के पापा के रूम में गया और पुराण बीएड लेके गेस्ट रूम में गया 2 आदमी साथ थे तो दिक्कत नहीं थी ज्यादा पैर जैसे hi गेस्ट रूम खोला मजा आज्ञा निचे चम् सहमति बाइक कड़ी थी तो ये था मेरा सरप्राइज गिफ्ट हीरो की क्रिज़्म बाइक में बहुत खुश था पैर अभी टाइम काम था तो पहले सारे काम ख़तम किये इस सब में मुझे लगभग 6 बज गए थे और भूक भी जोरो से लगी थी सब के जाने के बाद मैं बाथरूम में गया और शावर लिया और फिर बाइक निकली और मार्किट की तरफ चल दिया घर का ताला लगा के
 
अपडेट -12

जब घर से निकला तो 7 बज रहे थे जैसे hi में थोड़ा आगे गया तो वो दिन वाली आंटी घर में घुस रही थी उन्हें देख के मजे लेने की सूझी तो बाइक उनके पास hi रोकी

में- आंटी जी ये बाजार कितनी दूर होगा यहाँ से

आंटी- वो नए मकान तुम hi आये हो न

में- जी आंटी वैसे आप ने बताया नहीं

आंटी- 5 कम दूर है पैर छोटा बाजार भी है उस से पहले यहाँ से कोई 1.5 के करीब

में- शुक्रिया होटल वग़ैरा तो होगा न वह कोई

आंटी- नहीं होटल तो नहीं है क्यों

में- वो अभी अकेला hi आया हु घरवाले कल तक आएंगे इस खाना लाना था

आंटी- ाचा तो एक काम करो मेरे यहाँ खा लो अब पडोसी तो बन्न hi गए हो कहा रात को इतनी दूर जाओगे वैसे भी नए हो सेहर में

में- नहीं आंटी आपको क्यों तकलीफ दू वैसे भी कल शाम तक घर वाले आ जायेंगे

आंटी- तभी तो कह रही हु चलो आ जाओ में भी अकेली हु इस बहाने से मेरा भी टाइम पास हो जायेगा

में- पैर आंटी में

आंटी- अरे पैर वॉर कुछ नहीं आओ अंदर आओ

में- ok आंटी में बाइक कड़ी करके आता हु बस

आंटी- ठीक है गेट ऐसे हो झुका होगा जब आओ तो गेट बंद करके आ जाना जब तक तुम आते हो में चाय बनती हु

में- ok आंटी बस अभी आया

फिर में वापस घर गया और बाइक अंदर करके घर का ताला लगाया और आंटी के घर की तरफ चल मन में सोचते हुए यार माल तो साली मस्त है और दिन की घटना से लगता है की चालू भी है क्या पता छूट नसीब हो जाये है भी तो अकेली चलो चल के देखते है

में जल्दी से चलता हुआ उनके घर पंहुचा गेट तो पहले hi खुला था तो अंदर आ के बंद कर दिया इधर आधार नज़र दोड़ै तो सामने दीवार पे एक मस्त सी भाभी के साथ लुल्लु सा बाँदा था तस्वीर में

आंटी- ये मेरा बीटा और बहु है बीटा दुबई में जॉब करता है तो 1 साल में एक बार hi आता है और बहु हॉस्पिटल में डॉक्टर है बड़े सेहर में तो सैटरडे संडे रहती है मेरे पास लो चाय पीओ

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में उनकी आवाज़ सुनके hi खो गया क्यों की उन्होंने इस वक़्त निघ्त्य पहनी थी और ऊपर के दो बटन खुले हुए थे ऐसा लग रहा था मनो कह रही हो की लो डायरेक्ट थानों से दूध पियो और उनकी चूचियों को घूरता रहा होश में तब आया जब वो दोबारा बोली लो चाय पिलो तो ध्यान दिया

में- और कोई नहीं रहता यहाँ ( मेरा मतलब उस दिन वाले लड़के से था जो वो भी समझ गयी थी)

आंटी- नहीं जिस के बारे में तुम सोच रहे हो वो मेरी जेठानी का लड़का अभी था क्सक्सक्स साल का है छुट्टी में आया था चला गया उसी को तो स्टेशन बिठा के आयी थी अभी

में- ओह्ह यानि आपका भतीजा था फिर भी ( आगे कुछ नहीं बोलै मैंने और उनके जवाब का वेट किया)

आंटी- अब क्या बोलू आज के बच्चो को नुन्नी कड़ी हुई नहीं की छोड़ने की ीचा पहले रखते है उसने अपने मम्मी पापा को देख लिया था करते हुए तो मुझसे ज़िद्द करने लगा की मुझे भी वैसे hi करना है पहले मैंने बहुत समझाया पैर मान hi नहीं रहा था हाथ काट ने को बोल रहा था अगर कुछ हो जाता तो इलज़ाम मुझ पे आता और वैसे भी वो अब उसे शिफ्ट हो जायेंगे तो मैंने करने दिया वैसे तुम्हे शर्म नहीं आती किसी को ऐस देखते हुए

में- चलो ये तो ाचा किया आप ने की उसे मरने नहीं दिया और में तो आज hi आया था तो घर देख रहा था तभी आपकी हसीं सुंदरता के दर्शन हो गए वैसे आप सच में लगती नहीं हो की आपका इतना बड़ा बीटा भी होगा ऊपर से इतनी गोरी हो के नज़र हैट hi नहीं रही थी

आंटी- पैर फिर भी देख रहे थे तो चुप चाप देख लेते इशारा करने की क्या जरुरत थी

में- माफ़ करना पैर क्या कृ आपको उस पोज़िशन में देख के hi जलन हो रही थी की आपकी प्यास भुजने के लिए तो मेरे जैसा हथ्यार होना चाहिए जो आपको रगड़ सके मसल सके और एक वो मरियल सा 10/12 धक्को में लुढ़क गया

आंटी- ाचा तो तुम्हे यकीं है की तुम मुझे संभल सकते हो कही ऐसा न हो की पटाखा फूस हो जाए हाहाहा

में- एक बार आजमा के तो देखो की ये पटाखा फूस होता है या फाड़ता है

आंटी- देख लेंगे कभी अभी तो कप दो फिर खाना भी बनाना है तब तक तुम टीवी देखो

और कप लेके वो चली गयी उनका किचन भी हमारी तरह hi था खुला हुआ और हॉल से वो मुझे नज़र आ रही थी तभी वो कुछ लेने के लिए या जान बुझ कर झुकी तो मेरा सब्र टूट गया क्युकी अब तक ये तो पता चल hi चूका था की ये छूट तो देगी hi बस पहल नहीं कर रही तो में भी हिम्मत करके किचन में गया और अपने दोनों हाथो से उनकी मोती गांड को दबोच लिया

आंटी- आठ क्या कर रहे हो आराम से बैठो न खाना बनाना है

में- अब तो पहले आपका भोग लगेगा उसके बाद hi पेट पूजा होगी

और उसे घुमा के उसके होठो को चूसने लगा वो भी शायद दिन से hi छुडासी घूम रही थी जो की जल्द hi साथ देने लगी और मेरा हाथ पकड़ के अपने रूम में ले गयी और मुझे बीएड पे धक्का दिया और कड़ी होक अपनी निघ्त्य एक झटके में उतार दी अंदर से वो बिलकुल नंगी थी में तो उसे नंगी देखते hi पागल हो गया साली सच में मस्त माल थी एक दम गोरी और चूचिया भी टाइट hi थी उम्र के हिसाब से और उसने भी जल्दी से मेरा लोअर खींच के उतार दिया जैसे की कितने दिनों की प्यासी हो और टूट पड़ी मुझ पे अब हालत ऐसी थी की हम दोनों hi जैसे जीतना चाहते थे एक दूसरे से कभी वो मेरे होठो चुस्ती तो कभी में करीब 10 मं तक यही चलता रहा फिर वो धीरे निचे आयी और लुंड को मुँह में ले लिया लुंड मोटा था तो उसे चूसने में दिक्कत हो रही थी पैर फिर भी वो लगी रही थोड़ी देर लुंड चुसवाने के बाद मैंने उसे पलटा और उसकी पाँव रोटी जैसी फूली हुई छूट को मुँह में भर लिया और चुने लगा

आह्हः माँ ऐसे hi चाटो आज कितने दिनों बाद सकूं मिला है सोचा था की वो साला मेरी प्यास भुजायेगा पैर वो मादरचोद भी भड़का कर चला आठ हां ऐसे hi उफ्फ्फ्फ़ लड़के जादू है तेरी जुबान में तो उम् उसकी छूट से मुँह हटा के बोलै

में- लड़का नहीं युवी नाम है मेरा और अब तुम प्यासी नहीं रहोगी

आंटी- मेरा नाम सविता है आठ करो न

सविता नाम सुनते hi मुझे माँ की याद आगयी और गुस्सा भी तो मैंने उसे थोड़ा निचे खींचा और छूट पे लुंड सेट करके एक जोरदार शॉट मारा और आधा लुंड अंदर

आठ कामिनी फ्री की मिली है तो क्या जान लेगा आराम से करना तेरा बहुत मोटा है काफी टाइम बाद थांग से अंदर गया है कुछ

पैर मेरा ध्यान तो अब भी उसके नाम पे था और मुझे कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था और मैंने 1 के बाद1 कई शॉट मारे तेज़ तेज़ उसकी तरफ जब ध्यान गया तो उसकी आँखों में पानी था

में- सॉरी सविता जोश जोश में कर गया अब प्यार से करूँगा

और उसकी चूचियों सहलाने लगा अब वो भी कुछ नोर्मा हुई तो साथ देने लगी

आठ युवी ूफ बहुत मजा ारः है ऐसा लग रहा है किसी लोहे की गरम रोड घुसा दी हो बहुत मोटा है तेरा आठ अब तेज़ तेज़ कर न उफ्फ्फ माँ अब तो रोज़ तेरा लुंड खाउंगी आठ सच में युवी चुदाई का मजा तभी जब छोड़ने वाला दुमदार हो तू सही था मुझे तेरे जैसा hi संभल सकता है आह निचोड़ दे ें चूचियों को मसल दे आह माँ में गयीईइ

अभी नहीं सविता अभी नहीं अभी तो खेल शुरू हुआ तुझे तो कसके छोडूंगा इतनी उम्र भी तेरी टाइट छूट मजा आज्ञा कसम से इस सेहर ने तो आते hi जन्नत दिखा दी उफ्फ्फ

सविता झाड़ चुकी थी और हाफ रही थी

चल घोड़ी बंजा फिर मुश्किल से घूम के घोड़ी बानी उसकी गोरी गांड देख के मैंने कास के 3/4 थप्पड़ लगाए जिस उसकी गांड टमाटर की तरह लाल हो गयी

सविता- आह मार क्यों रहा है यार दर्द होता है

अरे पगली दर्द में hi तो मजा है ये कह 2 थप्पड़ और मारे और तेज़ तेज़ छोड़ने लगा 20 मं छोड़ने के बाद अब मेरा भी लावा निकल ने वाला था

में- कहा निकालू सविता डार्लिंग

सविता- अंदर hi भर दे में भी गयी

5/7 धक्को के बाद में भी आंटी के अंदर hi झड़ने लगा

आह युवी तेरा तो माल भी तेरी hi तरह गरम है उफ्फ्फ कसम से आज तो मजा आज्ञा

अब तो रोज़ छोड़ना मुझे

में- हां सविता रोज़ छोडूंगा मुझे भी बहुत ाचा लगा और जो चीज़ अछि लगे उसे छोड़ना नहीं चाहिए वैसे भी इस से हम दोनों को hi सुख मिला है

सविता- सच कह रहे हो अब हटो और हॉल में बैठो में फ्रेश हो के खाना बनती हु फिर साथ में खाएंगे

में- फ्रेश तो मुझे भी होना है

आंटी- तुम बहार फ्रेश हो जाओ राइट साइड में मेरे लड़के का बाथरूम है

में- ok

फिर में खड़ा हुआ और बहार आके बाथरूम में घुस गया आह क्या बाथरूम था बाथटब भी था शायद बहु काफी मॉडर्न है आंटी की तभी मेरी नज़र कहती पे तंगी पेंटी पे गयी वो भी काफी हॉट पेंटी थी वो भी नाम मात्र आगे बस छूट को ढकती होगी पीछे तो कुछ था hi नहीं सिर्फ एक पट्टी के खैर इसको कभी फिर देखेंगे फिलहाल तो भूख लगी थी इसलिए जल्दी से नाहा के बहार आया और टीवी चालू किया थोड़ी देर में hi आंटी भी आगयी और हम दिंनिंग टेबल पे बैठ गए आंटी ने खाना प्लेट में डाला और हम ने खाना खाना शुरू किया और कहते वक़्त मेरी नज़र फिर से उसकी बहु की फोटो पे गयी जिसे आंटी ने भी देख लिया

आंटी- बहोत गरम चीज़ है वो युवी इतनी जल्दी हाथ नहीं आएगी

में- आप साथ हो तो क्या पता किस्मत खुल जाये कभी

आंटी- वाह्ह बच्चू मुझे छोड़ लिया और चाहते हो की अपनी बहु को भी छुड़वाओ

में- अगर आप को बुरा लगा तो रहने दो मेरे लिए आप hi काफी हो

आंटी- हाय इतना प्यार वो भी एक hi दिन फिर तो कुछ करेंगे

और ऐसे hi बातो बातो में खाना फिनिश हुआ और में आंटी से विदा लेकर घर आज्ञा कमरे में आके a.c ों किया और चैन की नींद सो गया
 
अपडेट -13

कल रात की चुदाई के बाद a.c में इतनी मस्त नींद आयी की पता hi नहीं चला कब सुबह हुई

आँख पापा के फ़ोन से खुली

में- गुड़ मॉर्निंग पापा जी कैसे है आप

पापा- गुड़ मॉर्निंग कब से फ़ोन कर रहा हु सो रहे थे क्या

में- जी पापा कल काम की वजह से लेट सोया था इसलिए सुभह आँख नई खुली बोलिये आप

पापा- कोई बात नहीं ाचा सुनो तुम्हारी मम्मी और दीदी को ले आना स्टेशन से शाम को 6 बजे आस पास ट्रैन पहुंच जाएगी अपने घर से लेफ्ट साइड को 2कम के आस पास है स्टेशन

में- जी में चला जाऊंगा टाइम से

पापा- चलो तिल है अब उठ के चाय नास्ता कर लो कुछ

में- वो थैंक यू सो मच पापा फॉर लवली बाइक

पापा- ाचा ाचा ठीक है अब में रखता हु bye

कॉल कट होने के बाद में जल्दी से उठा और बाथरूम में जा के फ्रेश हुआ और कपडे पहन के गेट खोल hi रहा था की घर की बेल्ल बजी

गेट खोला तो सामने सविता आंटी थी

में- क्या बात है आप और यहाँ वो भी सुबह सुबह

सा- हां चाय लायी थी मुझे पता था तुम तो अभी कुछ लाये नहीं होंगे इसलिए में hi आगयी

में- आईये अंदर आईये

फिर हम दोनों हॉल में आगये और आंटी ने टेबल बैग रखा और चाय और पराठे निकले हम दोनों के लिए और एक कप मेरी तरफ बढ़ा दिया और एक कप खुद लेके साथ में hi पिने लगी और बोली

सा- घर तो काफी ाचा बनाया है और किचन हमारे जैसे hi है बस थोड़ा बड़ा है

में- जी पापा का ट्रांफर हुआ है तो अब यहाँ से कही जाना भी नहीं है तो इसलिए अचे से बनाया है थोड़ा

सा- इसे थोड़ा कह रहे हो हॉल में भी a.c है और कितना ाचा झूमर है मुझे तो बहुत पसंद आया तुम्हारा घर एक दम खुला खुला

में- शुक्रिया वैसे खुले हुए से याद आया अगर आप कहे तो राउंड खुले में भी हो जाये

सा- नहीं अभी नहीं अभी मुझे सेहर जाना है काम से वो तो बस तुम्हे चाय देने आगयी अब चलती हु वैसे भी कल रात से मीठा मीठा दर्द हो रहा है

में- ok जी जैसी आपकी मर्ज़ी

फिर वो बर्तन लेके चली गयी और में घर पे ताला लगा के स्टेशन की तरफ चल दिया पैदल hi घूमते हुए करीब 20 मं में स्टेशन पे पहुंच गया एक छोटा सा स्टेशन था खेरी नाम से थोड़ी देर वह सब देख भल के वापसी के लिए मुद गया घर पहुंचने hi वाला था की घर से कोई 400 मीटर पहले hi एक पग डंडी दिखाई दी जो की जंगल की तरफ जा रही थी तो में भी उसी पे चल दिया जंगल काफी घाना सा था कोई 15/20 मं चलने के बाद ऐसा लगा जैसे आस पास hi कोई नदी बह रही हो अब तो उत्साह और बढ़ गया और में भी उस आवाज़ के पीछे चल बस थोड़ा hi चला था की सामने एक बड़ी सी नदी बह रही थी वह क्या नज़ारा था नदी का साफ़ पानी और ये ठंडी हवा शायद इसे hi जन्नंत कहते है अभी में ये सब देख hi रहा था की थोड़ी दूर से एक 30 /32 साल की सवाली सी लेडी नज़र आयी जो बकरियों चारा रही थी देखने से hi बाग्दान टाइप लग रही उस ने घागरा टाइप स्कर्ट पहन राखी थी जिस में से उसकी उभरी हुई गांड कुछ जायदा hi बड़ी लग रही थी और ऊपर एक छोटा सा ब्लाउज पहना था जिस में चूचियों के स्थान पे नोक सी बानी हुई थी पैर जो उसे ख़ास बनता था वो था उसका चेहरा नशीली आँखे पतले होठ जो की गोरा न होने पैर भी उसका आकर्षण बढ़ा रहा था जहा में खड़ा था वह मोटा सा पेड था तो में उसकी ूत में हो गया और उसे देखने लगा पहले तो वो वही एक पत्थर पैर बैठ गयी और थोड़ी देर बाद अपना ब्लाउज उतार के वही पत्थर पे रख दिया उफ्फ्फ साली के चुके तो बिना ब्रा के भी एक दम टाइट और सीधे खड़े थे तूफ़ान तो तब आया जब घागरा खुला उफ्फ्फ क्या मस्त गांड थी साली किम करदीआं की तरह बहार को निकली हुई फिर वो धीरे 2 पानी में उतर गयी ऐसा लग रहा था जैसे की काली नागन पानी में तैर रही लुंड पूरा 90 डिग्री पे खड़ा हो चूका था अब कण्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा था तो लुंड को बहार निकाल लिया और धीरे धीरे मसल ने वो भी पानी में शायद ऊँगली कर रही थी क्युकी उसकी आँखे मजे में बंद हो चुकी थी में अभी ये सब देख मजे ले hi रहा था की मेरा फ़ोन बजने लगा जिसकी वजह से हम दोनों चौक गया और उसने जैसे hi मुझे देखा पानी में बैठ गयी ये सब इतनी जल्दी हुआ की मुझे कुछ ध्यान hi नहीं रहा और में ये भी भूल गया की मेरा लुंड अभी भी बहार hi है और फ़ोन निकल के देखा तो कंपनी वालो का था भगवान् कसम इतना गुस्सा आया की पूछो मत फ़ोन काट के मैंने उसकी तरफ देखा तो वो एक तक मेरे लुंड को घूरे जा रही थी ये सब देख के मैंने भी थोड़ी हिम्मत जुताई

में- इतना hi पसंद है तो छू कर देख लो काटेगा नहीं

लड़की- तू तुम कोण हो और यहाँ क्या कर रहे हो

में- भरा हु फूल की खुसबू सूंघते हुआ आया था पैर यहाँ तो जल पारी के दर्शन हो गए एक बार दीदार करवा दो अपने भी हुसैन का कब से मेरा hi देखे जा रही हो वैसे नाम क्या है तुम्हारा

लड़की- देखो हमारे पास मत आना वर्ण हम शोर मचा देंगे और पहले इसे अंदर करो और भाग जाओ यहाँ से

में- मुझे जबरदस्ती पसंद नहीं है वो तो बस तुम्हारी सुंदरता में इतना खो गया की ध्यान hi नहीं रहा( ये बोल के लुंड अंदर कर लिया)

लड़की-( अपनी तारीफ सुनके खुसी हुई थी जो पता भी चल रही थी) हम काले है हमारा मज़ाक मत उड़ाओ और कजरी नाम है हमारा

में- बहुत सुन्दर नाम है बिलकुल तुम्हारी तरह और मज़ाक नहीं कर रहा तुम सच में बहुत सुन्दर हो कसम से यकीं न हो तो मेरी आँखों में देख लो कहते है आँखे कभी झूट नहीं बोलती( इतना सुनके वो एक तक मेरी आँखों को देखने लगी और फिर बोली)

कजरी- हमे नहीं देखना आँखों में तुम जाओ यहाँ से हम ठण्ड लग रही है हमे बहार आना है

में- तो आ जाओ रोका किसने है वैसे अभी तो तुम खुद पानी में आग लगा रही थी

कजरी- बड़े बेशरम हो हम बहार कैसे आये जब तुम यहाँ हो तो

में- अरे तो इस में क्या हुआ वैसे भी सब तो देख hi लिया मैंने अब कोण सा कुछ नया दिखेगा हां नयन सुख जरूर मिल जायेगा

कजरी- देखो प्यार से चले जाओ वर्ण अगर हम ने शोर मचा दिया तो बहुत मार पड़ेगी

में- ाचा वैसे यहाँ है कोण तुम्हारी चीख सुन ने वाला और अगर तुम्हारे जैसी सुंदरता को देखने के लिए जान भी चली जाये तो मंज़ूर है( मेरी बात सुनके पहली बार वो थोड़ा मुस्कुराई)

कजरी- देखो तुम मुझे अचे इंसान लगते हो मान लो हमारी बात चले जाओ हमें कपडे पहन ने है

में- जाता नहीं हु घूम जाता हु तुम कपडे बदल लो में देखूंगा नहीं पक्का

कजरी - न जी क्या भरोषा अगर पलट गए

तो

में- अब इतना विश्वाश तो करना hi पड़ेगा वैसे भी में दोस्ती में जहर नहीं बोलता

कजरी- हे राम हम कब आप के दोस्त बने

में- अब तुम आती हो या में औ पानी ( ये बोलके अपने कपडे उतार ने लगा

कजरी- नहीं नहीं ाचा हम निकलते है तुम उधर मुँह करो

में- ये हुई न बात आ जाओ में नहीं देखूंगा तुम्हे तुम्हारी कसम और अब रुकूंगा भी नहीं क्युकी धुप तेज़ है तो जल्दी करो ( और फिर में घूम गया)

थोड़ी देर बाद पानी में चलने की आवाज़ आयी और फिर कुछ सरसराहट हुई और थोड़ी देर बाद वो बोली

कजरी- हां तो आपको शर्म नहीं आयी किसी को ऐसे देखते हुए

में- ( बस एक तक उसे देखता रहा मुझे यु खुद को ऐसे देखते हुए वो शर्मा गयी और फिर से बोली)

कजरी- अब देखना हो गया हो तो कुछ बोलोगे

में- पहले इस चाँद से चेहरे को तो थांग से निहार लेने दो

कजरी- बस भी करो हम इतने भी सुन्दर नहीं है वैसे तुम्हे पहले कभी नहीं देखा यहाँ

में- हां में नया हु यहाँ पैर मुझे पता होता की आप जैसी परिया भी यहाँ रहती है तो पहले hi आ जाता वैसे अब तो दोस्त हु न देख लो मैंने कोई भी शरारत नहीं की न hi तुम्हे देखा कपडे पहनते हुए हां वो अलग बात है की उतारते हुए देखा था( मेरी बात सुन के वो शर्मा गयी )

कजरी- अब बस हो गया न जो होना था और अगर ऐसी बात करोगे तो हम दोस्ती नहीं करेंगे वैसे तुम बहुत अचे हो कोई और होता तो टूट पड़ता हम पे

में- में प्यार से करने में विश्वाश रखता हु कजरी ताकि दोनों को मजा आये वैसे एक बात बोलू अगर बुरा न मनो तो

कजरी- हां बोलो

में- क्या एक बार पास से नहीं दिखाओगी अपनी सुंदरता जिसका में घायल हो गया( ये सुनके सावले रंग में भी उसके गाल लाल हो गए थे)

कजरी- नहीं हम ऐसे नहीं वो तो यहाँ कोई नहीं आता इसलिए हम बिना कपड़ो के नाहा लेते है

में- ाचा तुम पानी क्या कर रही थी आंखे बंद करके

कजरी- वही जो तुम कर रहे थे बेशरम कही के

में- ाचा जी हम करे तो बेशरम और तुम्हारा क्या वैसे शादी नहीं हुई क्या तुम्हारी जो ये करने की जरुरत पड़ी

कजरी- शादी तो हो गयी है पैर मरद किसी काम का नहीं है दिन भर शराब पीकर पड़ा रहता है और कभी करता भी है तो डालते hi झाड़ जाता है

में- ओह्ह्ह तो ये बात है वैसे में डालते hi नहीं झाड़ता चाहो तो हम दोनों एक दूसरे की कमी पूरी कर सकते है

कजरी- वो तो आपका देख के hi पता चल गया था कितना बड़ा है पैर हम ऐसी नहीं है वर्ण ऊँगली क्यों करते किसी के साथ न कर लेते

में- ठीक है मर्ज़ी है तुम्हारी मैंने पहले hi कहा था जबरदस्ती मुझे पसंद नहीं अब में चलता हु धुप भी तेज़ हो रही है

कजरी- क्यों सिर्फ उसी चीज़ के लिए दोस्त बनाया था तुम ने और धुप लग रही है तो चलो तुम्हे अपना अरंघर दिखती हु

फिर वो मुझे एक बेरी के पेड की तरफ लेके जाने लगी वो पेड बहुत घाना था और उसकी टहनिया ज़मीन पैर झुकी हुई थी फिर उस ने एक झाड़ उठाया तो वह इग्लू जैसा रास्ता था उसे दिखते हुए बोली

कजरी- चलो अंदर पैर थोड़ा ध्यान से झुक कर जाना थोड़ा

तो भी बिना कुछ बोले अंदर को घुसा थोड़ा सा अंदर जा के देखा तो अंदर बिस्टेर लगा था पानी का मटका वही पेड की जड़ में रख्हा था और झाड़ियों के बिच में घास को साफ़ करके गोबर से लीप रखा था कमाल की जगह थी साला बहार से कोई नहीं कह सकता था की अंदर रहने का भी इंतज़ाम है

में- वह कजरी ये तो बहुत सूंदर जगह है

कजरी- हां ये हमने काट काट के बांया हाउ इसके चारो तरफ घनी झाडिया है और हम ने साफ़ करके तारो से बंद दिया है ताकि कोई भी जानवर न आ सके वैसे भी इनमे काटे है तो कोई नहीं आता और जब धुप तेज़ होती है तो यही आराम कर लेती हु

में- बहुत ाचा है अब में जाऊ

कजरी - क्यों कोई काम है क्या वैसे तुम बहुत अचे हो पहली बार में hi ऐसा लगा जैसे कब से जान पहचान है सच में वर्ण हम किसी से बात नहीं करते

में- नहीं काम नहीं है पैर तुम्हे देख के कुछ कुछ होता है इसलिए डरता हु कही कुछ गलत न कर बेतहु और तुम्हारे जैसा दोस्त खो दू

कजरी- ाचा इतनी पसंद आयी में तुम्हे

में- क्या बताऊ कजरी तुम्हे देख के क्या हुआ तुम्हारे ये पतले से होठ( होठो पे ऊँगली फिरते हुए) तुम्हारी ये( बोल के चुप हो गया) तुम मुझे जाने दो अभी कल फिर आऊंगा मिलने( ये बोल के में जाने के लिया खड़ा हुआ )

कजरी- ऐसे hi चले जाओगे पास से देखे बिना( और अपना ब्लाउज खोल दिया और अपनी दोनों चूचियों को हाथ से सहलाया )

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अपडेट -14

कजरी की बात सुनके में जैसे hi घुमा तो बस मंत्रमुग्ध सा उसकी तरफ चल दिया और उसके पास पहुंच कर मैंने अपने हाथो को उसकी दोनों गदरायी हुई चूचियों पे रख दिया हाथ लगते hi हम दोनों को hi जैसे एक झटका लगा उसका तो शायद मर्द का हाथ लगने से ऐसा हुआ था लेकिन मुझे तो उसकी चूचियों को प्रेस करके लगा था वो सच में बहुत टाइट थी आह यकीं hi नहीं हो रहा था को ऐसी चुकी भी हो सकती है

कजरी- कैसी लगी तुम्हे हाथ में लेकर

में- शब्द नहीं है कजरी मेरे पास बया करने के लिए बस में इनमे खो जाना चाहता हु इनका सारा रास पीना चाहता हु बोलो पिने डौगी न

कजरी- अब मना करने लायक कुछ बचा है क्या हम दोनों के बिच जो अभी भी तुम पूछ रहे खा जाओ इन्हे करलो जो करना चाहते हो बस मुझे संतुस्ट कर दो मुझे आज औरत बना दो

में- उफ्फ्फ कजरी ये बोलके तुम आज युवी को खरीद लिया और क्या सच में पैर तुम तो शादी शुदा हो

कजरी - हां तो बताया तो था वो छूट के पास आते hi झाड़ जाता था अब देर न करो जल्दी से ये आग बुझा दो अब और इंतज़ार न करवाओ

में- इंतज़ार में hi मजा है कजरी और वैसे भी तुम जैसी चीज़ को तो इत्मीनान से प्यार करना चाहिए और जब तुम कुंवारी हो तो करना भी ध्यान से पड़ेगा क्युकी अब में तुम्हे दर्द में भी तो नहीं दे सकता आखिर अब से पक्के वाले दोस्त जो बन ने जारी ( बोलके उसकी चूचियों पे टूट पड़ा वाकई में बहुत मोती चूचिया थी उसकी

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उफ्फ्फ कजरी तुम्हारा तो हर आंग खिला हुआ है आज तो भरा बन के चूसूंगा इनका रास

आठ जो करना है करलो युवी आज ये कजरी तुम्हारी हुई आठ पैर अगर एक बार जल्दी से करते तो मजा आ जाता

नहीं कजरी आज तुम्हे हर तरह से प्यार देना है तुम बस अपनी टाँगे सीधी करो

उसकी टैंगो को छोड़ा कर मैंने उसकी छूट पे मुँह टिका दिया और जोर से चाट ने लगा

उफ्फ्फ ये क्या कर रहे तुम वो गन्दी जगह है आह्हः माँ क्या जादू कर रहे हो युवी बहुत ाचा लग रहा है कसम से आठ माँ खा जाओ एड निगोड़ी को बहुत तंग किया है इस ने आह

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आह ये क्या हो रहा है मुझे तुम तो मुझे मार डालोगे ऊफ्फ में पागल हो जाउंगी युवी छोड़ दो मुझे आअह्ह्ह्ह नही

और तेज़ तेज़ मेरे मुँह पे hi झड़ने लगी उसकी तो सांसें भी ऐसे चल रही थी जैसे कितनी दूर से दौड लगा कर आयी हो

में- क्यों मजा आया न मेरी जान

कजरी- मजा पूछो मत ऐसा लग रहा था जैसे की में हवाओ में हु सच में तुम सच में कमाल के हो

में - अभी कहा जान असली मजा तो अभी बाकि पहले तुम जरा इसे मुँह में लो

कजरी- ची मुझसे नई होगा या समझो मेरी बात

में- कोई नई तुम उड़ा मत हो बस अब तैयार हो जाओ असली मजा लेने के लिए

कजरी- उसके लिए तो में बिलकुल तैयार हु

फिर मैंने भी देर नहीं की और छूट पे लुंड को सेट किया छूट तो वैसे भी गीली थी क्युकी अभी भी उसका काम रास बह के बहार आ रहा था तो एक जोरदार शॉट लगाया और लुंड छूट को फाड़ता हुआ अंदर और उसकी दर्द भरो चीख बहार

आठ मा युवी बहार निकाल लो इसे बहुत दर्द हो रहा है मुझे नहीं छोड़ना तुमसे आह माँ सत्यानाश कर दिया मेरी छूट

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का माँ

में- कुछ नई होगा कजरी बस इतना hi दर्द होना था अब आगे बस मजा hi मजा

कजरी- इतना सा कह रहे यहाँ मेरी जान निकल रही है

मुझे पता था जितना बोलूंगा उतना देर होगी तो मैंने उसकी दोनों टैंगो को पकड़ के छूट में लुंड अंदर बहार करना शुरू किया

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वो बस आह उठ कर रही थी और सच तो ये भी था की दर्द मुझे भी हुआ छूट वाकई में बहुत टाइट थी पैर कुछ भी हो मजा बहुत ारः था अब तक कजरी भी कुछ नार्मल हो चुकी थी और वो भी अब चुदाई का पूरा मजा ले रही थी

कजरी- आठ हाय युवी एक बार को तो तुम ने मार hi डाला था आह्हः अब कुछ मजा आया थोड़ा तेज़ करो यार तुमने तो आज कजरी को अपना गुलाम बना लिया रे और तेज़ तेज़ आठ माआ उफ्फ्फ तुम्हारा हर धक्का अंदर जा के लग रहा है आअह्ह्ह ऐसे hi मेरी जान फाड़ दो इसे आह्हः ऐसे hi प्यार करना युवी कसम से एक hi दिन में में तो गुलाम हो गयी आठ

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अब आलम ये था की हम दोनों चुदाई में खो चुके थे और कजरी की चूचिया हर झटके के साथ ऊपर निचे हो रही थी हमें किसी की परवाह नहीं थी बस इस पल जो आनंद हमे मिल रहा था उसी में घूम थे सच hi कहा है किसी ने की मर्द औरत बिना और औरत मर्द बिना अधूरी है और अगर सेक्स को भी धर्ये के साथ किया जाए तो उस सुख का कोई मोल ये वो अनमोल चानन है की इस जब मर्द संखलित होता है तो यही वो एक पल होता जिस में कोई टेंशन नहीं होती सेक्स तो आंटी के साथ भी किया था पैर जो सुख मुझे अब मिल रहा था वो शायद उस वक़्त नहीं था

कजरी अब झड़ने के करीब थी और जल्द hi उसके सरीर ने झटका खाया और वो निढाल से मुझे देख रही थी उसे छोड़ते हुए

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और हर धक्के पे उसकी आह निकल रही थी वो थक चुकी थी जिसका एहसास उसकी तेज़ साँसों से हो रहा था पैर में लगा रहा क्युकी में भी बस अब करीब hi था क्युकी उसकी छूट इतनी टाइट थी की अब और उसकी पकड़ को झेल पाना मुश्किल हो रहा था और मुझे ख़ुशी थी की आज मैंने एक कुंवारी छूट को छोड़ा है

में- कजरी मेरा होने वाला है बता कहा निकलू छूट में या बहार

कजरी- आज तो इस बंज़र ज़मीन को अपने पानी से भर दो युवी और दाल दो अपना बोझ मेरे अंदर कब से इस सुख से वंचित हु मुझे पूरी औरत बना दो आठ भर

उसकी बात सुनके मैंने 10/12 जोरदार धक्के मारे और उसके ऊपर hi ढेर हो गया कुछ पल यही उसके ऊपर लेता रहा लुंड भी अब मुरझा के बहार आज्ञा और उसी के साथ मेरा और कजरी का प्रेम रास भी बह आया

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कजरी की आँखों में संतुस्ती साफ़ देखि जा सकती थी जिसे उस ने आखिर बोल कर hi बया किया

कजरी - तुम सच में एक पुराण मर्द हो युवी जो सिर्फ प्यार hi जानता है तुम चाहते तो उस वक़्त कुछ भी कर सकते मगर नहीं तुमने अपना सैयाम नहीं खोया और उसी वक़्त तुम मुझे पा चुके थे सच कहती आज से तुम जब भी मुझे कहोगे करने को में मन नहीं करुँगी कभी क्युकी तुम औरत की इज़्ज़त करना भी जानते हो और उसे प्यार से पाना भी

में- अरे में इतना ाचा भी नहीं हु कजरी आखिर हु तो में भी इंसान hi बस मुझे जोर जबरदस्ती पसंद नहीं क्युकी मजा रजामंदी में है वो जबरदस्ती में नहीं

कजरी- वो तो है वैसे तुम यहाँ आये कैसे यहाँ तो कभी कोई नहीं आता

में- वो में स्टेशन की तरफ गया था तो वापस घर आ रहा था की घर से पहले ये मोड़ दिखा तो में भी चलता चला आया पैर मुझे क्या पता था यहाँ मुझे रोज़ आने की एक सुन्दर सी वजह मिल जाएगी

कजरी- ाचा तो वो मोड़ से आगे जो नया मकान बना है वो तुम्हारा है

में- हां क्यों तुमने देखा है

कजरी- अरे मेरा मर्द बीमार पद गया था तो 2 दिन मैंने hi वह काम किया था पैर वह ठेकेदार गन्दा आदमी था एक दिन मुझे पकड़ के जबरदस्ती कर रहा था तो मैंने भी उसके ाँद पे कास के लात मारी और भाग गयी वह से

में- ाचा हुआ तुम भाग वर्ण में तो लुंड हिलता रह जाता

कजरी- ः तुम सच में जादूगर हो बातो से hi ख्याल कर देते हो और जान इस औज़ार से ले लेते हो

हम दोनों इस दूसरे में ऐसे खोये हुए थे जैसे न जाने कब से एक दूसरे को जानते हो फिर में उठा और कपडे पहन लिया कजरी भी कपडे पहन चुकी

में- तो अब चालू या अभी और बाते करनी है

कजरी- मैं तो नहीं कर रहा तुम्हे भेजने का पैर कोई बात नहीं कल तो आओगे न मुझसे मिलने

( एक उदासी थी उसके चेहरे पे इस वक़्त क्या सच में इतना लगाव हो सकता है किसी से कुछ hi पालो में )

में- पक्का अब तो तुमसे मिले बिना मुझे भी कहा आराम मिलेगा

कजरी-( एक दम से गले लग गयी और कुछ पल मुझे महसूस किया हो जैसे) में इंतज़ार करुँगी तुम्हारा मेरे दोस्त बस जाते वक़्त वो देखकर जाना ये जंगल है ठीक है और वो झाड़ वापस लगा देना

में- जी जलपरी ( इस बात पे वो मुस्कुरा दी )

फिर में वह से निकला और झाड़ को वापस वैसे hi रख दिया और गौर से देखा तो सच में कोई नहीं कह सकता की अंदर कोई रह भी सकता है वाह कजरी क्या दिमाग पाया है

यही सब सोचते हुए में घर को चल दिया और घर पहुंच के आराम से नहाया दोपहर के 3 बज चुके थे और अब भूख भी लगी थी तो बाइक उठायी और चल दिया मार्किट और जैसा की सविता आंटी ने बताया था छोटी मार्किट के बारे ये वैसी hi थी 2/ 3 राशन की छोटी दुकाने और कुछ कपडे और जूस की अब दिन था तो में आगे hi बढ़ गया और 15 मं बाद ये था सेहर और मार्किट भी अछि थी पहले तो एक होटल में गया और पेट भर के खाया और फिर घर के लिए कुछ सामान लिया जैसे सब्ज़ी अंडे फ्रूट्स ेट्स. बाकि तो लिस्ट बनेगी तब hi आएगा मैंने उस दूकान वाले से पूछा तो उसने बताया की वो होमर डिलीवरी भी करते है और ये भी की सविता आंटी के यहाँ भी यही से सामान जाता है सब कुछ लेने के बाद में घर में आया और हॉल का a.c ों किया और वही सोफे पे टीवी देखते हुए न जाने कब सो गया

6 बजे के करीब दीदी के फ़ोन से आंख खुली

में- hello दीदी

दीदी - दीदी के बच्चे एक बार भी फ़ोन नई किया वह जा के ( माँ की वजह से शायद पहले की तरह बात कर रही थी)

में- वो दीदी बस सामान सेट करने में थकान की वजह से सो गया था अभी भी आपके फ़ोन से उठा हु

दीदी- चल ठीक हम पहुंचने वाले है जल्दी से स्टेशन आ जाना और ऑटो वाले को पहले hi बोल दियो की रुकना भी पद सकता है( शायद दीदी को भी मेरी बाइक के बारे में नहीं पता था)

में- ठीक है अभी पहुँचता हु में

फिर जल्दी से वाशरूम में फ्रेश हुआ और बाइक उठा के निकल गया स्टेशन की और वह जा के इंतज़ार करने लगा कोई 10 मं बाद दीदी की ट्रैन आयी और थोड़ी देर बाद दोनों हाथ में एक बैग लिए मेरे पास आयी इस वक़्त दीदी ने एक ब्लैक कलर का सूट और माँ ने ब्लू साड़ी पहनी थी दोनों मस्त लग रही थी एक दम पैर माँ अभी भी मुझे नहीं देख रही थी तो मैंने भी आते hi बैग लिया और चलने को बोलै पैर वह ऑटो न देखकर दीदी बोली

दीदी- जायेंगे कैसे ऑटो तो है hi नहीं

में-( बाइक पे बैठते हुए ) इस पे जायेंगे दीदी हम आओ बैठो जल्दी

दीदी- वह क्या बात है बाइक तो बहुत मस्त है किसकी है

में- मेरी है पापा ने दी है ये

फिर कोई कुछ नहीं बोलै और दीदी दोनों तरफ बैठ गए बैठते hi उनके दोनों ख़रबूज़े मेरी कमर में धस गए क्युकी पीछे माँ भी थी और क्रिज़्म बाइक की सीट तो आप लोगो ने देखि hi होगी

अभी थोड़ी दूर hi आये थे की एक खरगोश बाइक के आगे से निकल गया जिस वजह से एक दम ब्रेक लगनी पड़ी और इसी चक्कर में बाइक गिर गयी वैसे तो बहुत आराम से गिरे थे क्युकी बाइक कड़ी थी मगर माँ के हिल ने से बैलेंस ख़राब हुआ था और इस चक्कर में माँ के गिरते hi माँ का पेटीकोट कमर तक ऊपर और बिना पेंटी की छूट मेरी आँखों के सामने जिसे माँ ने भी देख लिया था मुझे देखते हुए तभी माँ गुस्से में कड़ी हुई मुझे पता था थप्पड़ मारेगी पैर इस पहले की वो मारती दीदी बोल पड़ी

दीदी- माँ क्या है ये उस ने जान के आपको नहीं गिराया सामने खरगोश आज्ञा था और ये हर वक़्त आपका उसको मर न मुझे ाचा नहीं लगता अपने हाथ काबू में रखना सीखो समझी न आप ( शायद दीदी पहले भी देख चुकी थी)

माँ- अब तू बताएगी मुझे

दीदी- हां क्युकी आप हद पर करने लगी हो आने दो पापा को इसका जवाब उनके सामने hi लुंगी में आप से

में- क्या है ये दीदी वो माँ है हमारी उन्हें लगा होगा की ध्यान से नहीं चला रहा है तो इसलिए गुस्से में आगयी मार ने अब चलो बैठो किसी को चोट तो नहीं लगी न

फिर सब बाइक पे बैठे और मैंने तेज़ी से बाइक घर की तरफ डोडा दी घर सामने जाते hi जैसे बाइक रोकी दीदी जोर से चिल्लाये

दीदी- वाऊ क्या घर बनाया है अब की बार

फिर मैंने गेट खोला और हम 3no अंदर आगये दीदी तो घर देखते hi पागलो की तरह इधर उधर जा के देखने लगी माँ भी कुश थी ऐसा घर देख के फिर मैंने दीदी को उनका रूम दिखाया और वो रूम में a.c देख के बहुत खुश हुई दीदी घर देखने मगन थी तो में निचे गया और माँ को सामान दिखाया जो में लाया था और जो 12000 रस बचे थे वो वापस दे दिए

उसके बाद में सविता आंटी के घर की तरफ निकल गया और वही बैठ के उनसे बाते करने लगा तो उन्होंने बातो बातो में बताया की उनके पिता जी की तबियत कुछ ठीक नहीं है तो वो दो चार दिन के लिए बहार जा रही है ऐसे कुछ बात करते हुए कब रात के 10 बज गए पता hi नहीं चला आंटी से एक गहरा चुम्मा लेके में घर की और चल चुदाई के लिए उन्होंने कहा की दर्द है तो में भी चुप चाप घर आज्ञा गेट माँ ने खोला तो में चुप चाप ऊपर जाने लगा तभी माँ बोली

माँ- ये कोई टाइम है घर आना का वो भी नयी जगह पैर

में- नयी आपके लिए होगी मेरे लिए नहीं और अभी 10 hi बजे है सिर्फ

माँ- हां तो ये घर है कोई धरमसाला नहीं समझे न और घर में टाइम से hi आया जाता है

( अब तक हमारी बाते सुनके दीदी भी निचे आगयी थी)

में- तो मैंने कब कहा की ये घर नहीं है और आपको प्रॉब्लम क्या है अगर आप चाहती में यहाँ न राहु तो कोई बात नहीं में सुबह होते hi चला जाऊंगा यहाँ से

दीदी- ये क्या बकवास हो रही है घर में और कहा जायेगा तू और माँ तुम्हे क्या हो गया है जब से आयी हो तब से उसके पीछे पड़ी हो

माँ- तू चुप रह समझी न बहुत बोलने लगी है और तू क्या बोल रहा है चला जाऊंगा तो सुबह क्यों अभी निकल मेरे घर से पता लग जायेगा जब एक रात बहार गुज़रेगा

दिल को बहुत चोट लगी थी पैर अब रुकना मेरे बस में भी नहीं था तो में चुप चाप अपने कमरे में गया कपडे पर्स और अपने डॉक्यूमेंट्स लिए और बाइक की चाबी माँ के हाथ में दी निचे आकर

में- ये लो आपकी बाइक की चाबी और रहो इस घर में ये आपको hi मुबारक हो

दीदी- ये क्या है युवी चुप चाप ऊपर जा ( इतने hi देर में दीदी ने पापा को फ़ोन लगा दिया और उन्हें सब कुछ बता भी दिया पता नहीं क्या बात हुई और दीदी ने फ़ोन काट दिया)

में- प्ल्ज़ दीदी हैट जाओ मुझे जाने दो मुझे नहीं रहना है यहाँ

दीदी - देख भाई इतना गुस्सा नहीं करते आखिर माँ hi तो है बोल दिया तो क्या हुआ

तभी दूर बेल्ल बजी दीदी ने दोड़कर गेट खोला तो सामने पापा थे और उन्होंने आते hi मुझे जोर से थप्पड़ मारा

पापा- मैंने सोचा था अचानक आके सरप्राइज दूंगा पैर यहाँ तो महाभारत हो रहा है और कहा जायेगा तू ये सब किसके लिए कर रहा हु में दिन रात तुम सब लिए hi भागदौड करता हु न क्या सिर्फ ये दिन देखने के लिए और तुम सविता( माँ) तुम्हे क्या दिक्कत है क्यों हाथ उठती हो इस पैर बार बार और अगर गाड़ी गिर गयी और ये थोड़ा लेट आया तो क्या घर से निकाल डौगी तुम

माँ- में तो बस समझा रही थी की ये घर से जाने लगा

दीदी- झूट मत बोलो माँ तुमने hi उकसाया था युवी को और पापा आप ने भी इसे hi मारा आते hi

पापा- तो क्या हुआ ये ऐसी फ़िज़ूल बात करेगा तो इनाम दूंगा( तभी पापा की नज़र माँ के हाथ पैर गयी जिसमे बाइक की चाबी थी) और तुम ये चाबी इधर दो लो युवी बाइक बहार निकालो और मुझे भी सेहर घुमा के लाओ और तू क्या खायेगी बता क्या लौ तेरे लिए और खाना तो नहीं खाया न अभी

दीदी- नहीं पापा पैर 10.30 हो रहे है अब क्या मिलेगा

पापा- सब कुछ मिलेगा 12.00 बजे बंद होता है मार्किट सेहर का ( और मेरे हाथ से मेरा बैग लिया और दीदी को पकड़ा दिया) ले इसे ऊपर इसके रूम में रख दियो

में चाहे जैसा भी हु पैर पापा के आगे कभी बोलता था इसलिए में चुप चाप बाइक की चाबी ली और बहार निकाल के पापा का वेट करने लगा अंदर देखा तो 3no कुछ बात कर रहे थे तो मैंने ध्यान नहीं दिया क्युकी इतना तो मुझे पता माँ उस सब के बारे में तो बताने से रही और फिर पापा आये और हम सेहर के लिए निकल गए वह पहुंच कर पापा डोसा छोले भठूरे और मिल्क केक लिया सब पैक लार्वा के हम चल दिए घर के लिए तो रस्ते में पापा बोले

पापा- देख बीटा इतना गुस्सा नहीं करते तुझे पता है न ज्यादा घर पैर नहीं रहता और अगर ऐसे में तू भी कही चला जायेगा तो घर का ध्यान कोण रखेगा मैंने आज तक तुझे जॉब के लिए भी नहीं कहा कभी मेरी 3 साल की नौकरी रह गयी फिर तू कहेगा तो तुझे चाँद पे भी भेज दूंगा बस तब तक कोई गलत कदम नहीं उठाना है ये सब तेरे लिए hi है बोल नहीं करेगा न ऐसा कुछ भी

में- नहीं करूँगा पापा जी प्रॉमिस ी लव यू सो मच पापा

पापा- ये हुई न बात मेरा ाचा बीटा और हां कल तेरी बुआ आ रही है क्युकी परसो हवन रखा है मैंने तो सब तैयारी करनी है तो कल हम बाजार आएंगे ठीक है

में- जी पापा जी

(नई इंट्रो

किरण- बुआ जी

इनके दो बच्चे है बड़ी लड़की है और छोटा बीटा ये रामपुर रहती है इनके शिव पापा का कोई भी रिश्तेदार नहीं है और ये बहुत hi कामुक है चुकी तो इनकी विद्या बालन जैसी और गांड हुमा क्वेरसी जैसी मुझे बहुत प्यार करती है)

ऐसे hi बात करते हुए हम घर पहुंचे बेल्ल बजे तो दीदी ने दूर खोला फिर सब ने एक साथ खाया और पापा ने हवन की और बुआ के आने की खबर सबको दी फिर में उठ के अपने कमरे में गया और चुप चाप सो गया
 
अपडेट -15

सुबह दीदी के उठाने से आँख खुली वो झुक कर मुझे उठा रही थी और उसकी टी- शर्ट लूसे होने की वजह से उसकी बिना ब्रा की चूचिया साफ़ दिख रही थी ये नज़ारा पहले भी देखा था मैंने पैर आज दीदी ने भी मुझे देखते हुए देख लिया पैर में नज़र अंदाज़ करता हुआ वह से बाथरूम में घुस गया तब तक दीदी भी निचे चली गयी में फ्रेश हो के बहार आया अपना कमरा ठीक किया और निचे चला गया पापा और माँ कुछ बात कर रहे थे तो मैंने सिर्फ गुड मॉर्निंग बोलै और चुप चाप बैठा गया माँ के ोप्पसीते ताकि उनका फेस न दिखे

पापा- उठ गए और बताओ आज का क्या प्लान है

में- जो आप कहो पापा जी

पापा- तो अभी मुझे स्टेशन पे छोड़ तो दोपहर तक चलते है सभी सामान ले आते है तब तक तुम्हारी माँ भी घर के सामान की लिस्ट बना लेगी

में- जी जैसा आपको ठीक लगे

तब तक दीदी भी नास्ता ले आयी सबके लिए सब को नास्ता देने के बाद वो मेरे सामने hi बैठ गयी पैर अब में उन्हें नहीं देख रहा था और ये बात उन्होंने भी नोट की थी शायद

दीदी- थैंक यू सो मच पापा ऐसी लाइफ देने के लिए में तो कंजूस समझती थी आपको पैर आप ने तो कमाल कर दिया उफ़ a.c में सो के इतना मजा आया न की बस पूछो मत

पापा- बीटा ये चीज़े में पहले भी कर सकता था पैर बार बार के ट्रांसफर में सब सामान ख़राब हो जाता इसलिए नहीं किया पैर अब हम सेटल हो गए तो हर चीज़ मिलेगी मेरे बच्चो को

दीदी- थैंक यू सो मच पापा ी ऍम रियली सो हैप्पी ये मेरा ड्रीम हाउस है

पापा- ी क्नोव बीटा और युवी चले बीटा अगर नास्ता हो गया हो

में- जी चलिए

फिर मैंने बाइक निकाली और पापा को स्टेशन छोड़ कर आया बाइक कड़ी की और कजरी के पास जाने के लिए निकल ने लगा तो दीदी ने आवाज़ दी

दीदी- युवी कहा जा रहा है

में- बस यही टहल कर आता हु क्यों कोई काम था

दीदी- हां वो मुझे मटकत से कुछ सामान लाना था

में- तो दोपहर जब पापा और में जायेंगे तब चलना

दीदी- नहीं युवी एक बाइक 3 मुझसे नहीं होगा और पापा साथ होंगे प्ल्ज़ अभी चल न

में-( मैंने टाइम देखा तो 9.30 हो रहे थे 1 घंटे में जायदा से जयादा आ hi जायेंगे) ok चलो जल्दी फिर

दीदी दौड के अपने रूम गयी और फटाफट से एक ग्रीन कलर का पटियाला पहर कर आयी में तो बस देखता hi रह गया उफ़ क्या मस्त माल लग रही थी दिल तो किया की अभी चुम लू उन्हें पैर फिर नज़र हटा ली वो मुझ तक आती की माँ ने दीदी को रोका और कुछ कहा तो दीदी ने हां में सर हिला दिया फिर दीदी मेरे पास आयी

दीदी- कैसी लग रही हु युवी

में तो उनकी आवाज़ सुनके बस उन्हें देखता hi रहा सच में यार वो बहुत सुन्दर थी वो माथे पे हलकी सी काली बिंदी वो छोटी सी कान की बालिये हाय किसका न मैं मोह ले और वैसे भी अभी उम्र थी hi कितनी 25 की तो थी वो सच में साला सुरेश गांडू hi था में ये सब सोच hi रहा था की दीदी ने मुझे पकड़ के हिलाया

दीदी- अरे बता भी कैसी लग रही हु

में- बहुत सुन्दर लग रहे हो अब बैठो

फिर दीदी बैठ गयी हम दोनों जा hi रहे थे की सविता आंटी बहार निकली एक ऑटो पहले से वह खड़ा था आंटी ने मुझे स्माइल किया तो मैंने भी जवाब में स्माइल किया आंटी शायद अपने मायके जा रही थी जो उन्होंने मुझे बताया अब ऑटो बिच में था तो मुझे रुकना तभी अंदर से कामदेवी की तरह दिखने वाली उनकी बहु बहार आयी

बहु- माँ जी ये बैग भी रख लो

इस वक़्त उसने एक टाइट पजामी सूट पहना था ओरंगे कलर का और मसल जाँघे साफ़ दिख रही थी तभी आंटी मेरी तरफ देख के बोली

सा- आगये घरवाले युवी

में- जी आंटी आप कही बहार जा रहे हो क्या

सा- हां बताया तो था तुम्हे मैंने और ये सुन्दर सी बच्ची कोण है

में- जी ये दीदी है मेरी ( दीदी ने भी उन्हें नमस्त्य किया)

सा- जीती रहो आ के मिलती हो तुम से और युवी तुम भाभी का भी हाल चाल लेते रहना मेरे पीछे से अकेली है तो कोई सामान मंगवाए तो ला देना वैसे तो मैंने no दे दिया है फिर भी थोड़ा ध्यान रखना

में- जी बिलकुल ( और भाभी की तरफ देख के स्माइल की तो वो भी मुझे देख hello का इशारा किया) आप चिंता न करे आप आराम से जाइये

फिर आंटी ऑटो में बैठी और ऑटो चला तो मैंने भी बाइक आगे बढ़ा दी अब ऑटो को स्टेशन जाना था तो उसने थोड़ा आगे बढ़ के मुझे जगह दी और हम निकले वह से अभी थोड़ी दूर hi आये थे की दीदी बोली

दीदी- क्या बात है बड़ी जल्दी जान पहचान बना ली और भाभी भी सुन्दर है

में- ऐसा नहीं है वो तो कल भूख लगी थी बहुत तेज़ और मुझे पता नहीं था तो आंटी से रास्ता पूछा था तो उन्होंने मुझे अपने घर hi खाना खिलाया था और भाभी तो यहाँ रहती भी नहीं वो तो आंटी अपने पापा के पास गयी है इसलिए ये आयी होंगी में तो मिला भी नहीं हु अभी उनसे

दीदी- ाचा बड़ी ीचा हो रही है मिलने की

में- बस भी करो दीदी क्यों बीवी की तरह शक कर रही हो ऐसा कुछ भी नहीं है

दीदी- ाचा ाचा ठीक है बड़ा आया बीवी वाला

और बातो बातो में कब हम वह पहुंचे पता hi नहीं चला मैंने बाइक कड़ी की और दीदी एक कॉस्मेटिक की दूकान में घुस गयी करीब 10 मं बाद वो बहार आयी तो दो बैग थे उनके पास

में- चले या कुछ और भी लेना है

दीदी- नहीं लेना तो कुछ नहीं बस गोल गप्पे खिला दे सामने होटल के स्टाल की तरफ इशारा करते हुए

चलो फिर जल्दी इतना सुनते hi दीदी बच्चे की तरह खुश हुई और मेरा हाथ पकड़ कर चल दी

में- भैया गोल गप्पे खिलाना एक प्लेट

दीदी- एक क्यों तू नहीं खायेगा क्या

में- नहीं मेरा मैं नहीं है

दीदी- रहने दे फिर मुझे भी नहीं खाने

में- ाचा बाबा आप की प्लेट से hi खा लूंगा बस नौटंकी बंद करो

फिर दीदी गोल गप्पे खाने लगी और एक गोल गप्पा मेरे मुँह में डालने लगी तो मैंने मुँह खोल दिया तभी पीछे से आवाज़ आयी

लड़का1- हाय क्या मस्त माल है अपने सेहर की तो नहीं लगती अरे मैडम हमे भी गोल गप्पे खिला दो अपने सुन्दर हाथो से

लड़का2- क्या भाई वो इतने मस्त आम लेके घूम रही है और आपको गोल गप्पे खाने है

में कुछ बोलता इस से पहले दीदी ने hi चप्पल उतर के उसके मुँह पे मारी जिस से वो गुस्से झुंझला गया और दीदी को गली देता आगे बढ़ा पेट इस से पहले की वो दीदी को हाथ भी लगता मैंने एक जोरदार छाता उसके गाल पे मारा जिस से उसके होठो से खून निकल ने लगा अपने साथी को मार कहते देख दूसरा लड़का मेरी तरफ जैसे hi आया मैंने एक जोरदार किक उसके अंडो पे मारी वो तो वही लेत गया अपने ाँद पकड़ के

में- साले और खाने है या बस

लड़का1- भाई गलती हो गयी माफ़ करदे और नई खाने

फिर मैंने दीदी को बाइक पे बिठाया और हम घर को चल दिए तो रस्ते में दीदी बोली

दीदी- तुझे क्या जरुरत थी बिच में पड़ने की भूल गया क्या में भी ब्लैक बेल्ट हु

में- मुझे याद है पैर आप भूल गयी की उस वक़्त आप पतली होती थी

दीदी- तेरे कहने का क्या मतलब है की में मोती हु

में- नहीं मोती नहीं हो बस आपका...

दीदी- आपका क्या बोल न

में- यही की आप का

सामान बढ़ गया है

दीदी- क्या मतलब कोण सा सामान बढ़ गया मेरा खुल के बोल

में- मतलब ये की आपकी चुकी और गांड बढ़ गयी है

दीदी- शट उप कितने चीप वर्ड बोलता है गन्दा कही का

अभी कुछ और कहता की घर आज्ञा था तो दीदी उतर के अंदर चली गयी मैंने भी बाइक कड़ी की और कजरी के पास निकल गया
 
अपडेट -16

में जल्दी से चलते हुए कजरी के पास पंहुचा तो वह उसकी बकरिया चार रही थी पैर वो कही भी नज़र नहीं आ रही थी काफी देर उसे ढूंढ़ता रहा पैर वो मिल hi नहीं रही थी तभी दिमाग की बत्ती जाली और उस झड़ी के पास जा कर झाड़ हटाया और अंदर घुस के उसे वापस लगा दिया और जैसे hi घूम के अंदर दाखिल हुआ तो अंदर का नज़ारा तो पूरा कामुकता से भरा हुआ था 1 की जगह 2 गद्दे थे और और उस पे चद्दर भी बिछी हुई थी और उसके ऊपर कजरी बिलकुल नंगी लेती हुई शायद मेरे इंतज़ार में लेते लेते सो गयी थी तो मैंने भी चुप चाप अपने कपडे उतारे और दोनों हाथो से उसकी चूचियों को मसलते हुए उसकी छूट चाट ने लगा जिस से की उसके सरीर ने एक झटका खाया

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और वो खुद hi ऊपर को ऊपर को धक्का मर कर अपनी छूट चटवाने लगी आज वो सच में शायद बहुत गरम थी क्युकी उसका सरीर भी किसी भट्टी की तरह तप रहा था और गरम छूट चाट ने में एक अलग hi मजा आरहा था उफ्फ्फ दिल कर रहा था की आज इसकी छूट को खा hi जाऊ

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वो भी पुरे मजे ले रही थी जैसे सदियों से प्यासी हो इतनी देर से में उसकी छूट चाट रहा था पैर वो कुछ नहीं बोली थी पैर अब उसका सब्र टूट गया था और आखिर उसकी आवाज़ निकली

कजरी- ऊऊफफफफफ युवी अपना लुंड दाल दो और मत तड़पाओ ये प्यास सिर्फ तुम्हारे लुंड से hi भुझेगी मान जाओ न

में- आज इतनी गरम कैसे हो की पहले से hi नंगी लेती हुई थी कोई और आ जाता तो

कजरी- यहाँ कोई नहीं आ सकता युवी 2साल से में hi हु यहाँ तुम भी पता नहीं कैसे आगये शायद भगवान् ने hi भेजा है तुम्हे मेरे लिए अब दाल तो जल्दी से

उसकी तड़प को देखते हुए मैंने भी देर नहीं की और एक hi धक्के में छूट को चीरता हुआ लुंड अंदर घुस गया

कजरी- आठ माँ आराम से युवी मार hi डालोगे क्या पहले अपना साइज तो देख लिया करो आठ

पैर अब मुझे बस छूट दिख रही थी तो मैंने उसकी टाँगे उठाई और तेज़ तेज़ छोड़ने

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लगा आठ हां ऐसे hi में आने वाली हु युवी उफ्फ्फ तेज़्ज़ तेज़्ज़

आज इतनी जल्दी कैसे कजरी

आज सुबह से hi बहुत गरम हु युवी और ऊँगली करके मजा ख़राब नहीं करना चाचती थी इसलिए ऊँगली नहीं की आअह्ह्ह और न अब कभी करुँगी आठ मा में गयी और उसका सरीर अकड़ ने लगा पैर मेरी स्पीड काम नहीं हुई थी में अभी भी चालू था आज सच में वो बहुत गरम थी और उसका सबूत था मेरे हर धक्के के साथ निकलता उसका पानी जिसे वो भी गर्दन ुटहाए देख रही थी

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कजरी- आठ माँ युवी क्या जादू कर दिया है तुमने उउउउउफफ इतना मजा और इतना प्यार मुझे दिया है तुमने की बस पूछो मत में तो दीवानी हो गयी आह्हः तुम्हारी माँ

उसकी बातो से मुझे और भी मजा आ रहा था जिस वजह से में उसे तेज़ तेज़ छोड़ने लगा जिस उसकी हालत और ख़राब होती जा रही थी

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में- क्यों कजरी मेरी जान मजा आ रहा है न

बहुत मजा आ रहा है तुम तो मेरी जान ले लोगे आठ धीरे में मर जाउंगी

पैर उसकी बात सुनके मेरी स्पीड और बढ़ गयी और वो पागलो की तरह चिल्ला रही थी

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आह्हः मा युवी आठ में गयीईई ऊऊफफफ धीरे करो अब दर्द हो रहा है 25 मं की इस चुदाई में कजरी 2 बार झाड़ चुकी थी और में भी अब झड़ने के करीब था और 10 12 धक्को में उसके अंदर hi झाड़ गया और उसके ऊपर hi लेता रहा और वो एक मेहबूबा की तरह प्यार से मेरी पीठ सेहला रही थी थोड़ी देर ऐसे hi रहने के बाद मैंने लुंड उसकी छूट से निकाला तो उसका और मेरा पानी बहार आने लगा

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हमारी साँसे अभी तेज़ चल रही थी पैर एक बात जो की ये थी की कजरी साथ देती पूरा आज पता नहीं क्यों वो भी बहुत प्यार से मुझे देख रही थी और फिर जब उसने मुझे खुद को देखते पाया तो अपना चेहरा मेरी छाती में छुपा लिया उसका ऐसा करना मुझे भी पता नहीं क्यों बहुत ाचा लगा और मैंने उसे और जोर से अपने से चिपका लिया एक अलग hi सकूं था आज और न जाने कब उसकी बाहो में मुझे नींद आगयी
 
अपडेट -17

जब आँख खुली तो कजरी वह नहीं थी फ़ोन में टाइम देखा तो 2.बज रहे थे यानि की मुझे 3 घंटे से ऊपर टाइम हो गया था तो मैंने जल्दी जल्दी कपडे पहने और बहार आज्ञा झाड़ को वैसे hi लगा कर बहार आकर कजरी को ढूंढा तो वो मुझे नदी के पास बैठी मिली और उसके 4/5 बड़ी बड़ी मछली थी

में- ये क्या कर रही हो तुम यहाँ

कजरी- उठ गए आप में तो बस मछली पकड़ रही हु आप भी ले जाओ घर बना लेना

में- वो सब तो ठीक है पैर ये आप कहा से आज्ञा हमारे बिच में

कजरी- अम्मा कहती थी पति की इज़्ज़त करनी चाहिए पैर पति तो इस लायक है नहीं तो जिस ने मुझे खुसी दी इतना प्यार दिया वो इज़्ज़त के काबिल तो है hi वैसे नींद बहुत गहरी आपकी

में- नहीं यार ऐसी बात नहीं है बस तुमसे चिपक के पता hi नहीं चला कब नींद आयी

कजरी- आप सच में बहुत अचे हो

में- देखो पहले तो ये आप कहना छोड़ो मुझे ाचा नहीं लग रहा और अगर तुम नहीं मानी तो में नहीं आऊंगा यहाँ

कजरी-( दौड के मेरे पास आयी और गले लग गयी ) ऐसा न करना युवी अभी तो खुसियो का मतलब समझा है मैंने

में- तो फिर ठीक है अब में चलो पापा को सेहर लेके जाना है वो तो तुमसे रोज़ मिलने का वादा किया था इसलिए निकल आया

कजरी - ठीक है जाओ और ये मछली भी लेते जाओ

में-( पहले तो में मन कर रहा था पैर फिर मुझे याद आया की पापा और माँ को बहुत पसंद है तो ले ली) ाचा लाओ दो

फिर कजरी ने एक पन्नी में दाल वो मुझे दी और बड़े प्यार से देखा उसका देखना ऐसा था जैसे कह रही हो की मत जाओ फिर मुझे न जाने क्या सुझा की मैंने जेब से 2000 रस निकाल के उसे दिए तो उसने मना कर दिया

में- लेती हो या नहीं

कजरी- पैसे देके मेरे प्यार को गली मत दो

में- अभी तुम ने कहा था न की तुम पति की जगह मुझे देखती हो तो ये समझ लो की ये में अपनी पत्नी को दे रहा ताकि वो नए कपडे ले अपने लिए और इसे पैसे नहीं मेरा प्यार समझो plz(ye सुनके उसकी आँखों में ासु आगये और उस ने चुप चाप पैसे लेके अपनी चूचियों में रख लिए) और अब ये रोना किस लिए हस्ती रहा करो और पैसे बिच बिच में देख लेना कही तुंहारी चूचियों की गर्मी से जल न जाये

kajri-hatt बदमाश उस में कोई आग थोड़ी है

में- तुम्हे क्या पता तुम तो सर से पाँव तक आग हो पैर आज टाइम नहीं है वार्ना अचे से बताता फिर में एक जोरदार किश की और घर की तरफ चल दिया वो मुझे जब तक देखती रही जब तक की में उसकी आँखों से ओझल नहीं हो गया

घर पंहुचा तो सब हॉल में बैठे थे शायद पापा भी अभी आये थे

पापा- कहा गए थे युवी तुम्हारी माँ कह रही थी की मेरे जाते hi तुम गायब हो गए थे

इस से पहले की में कोई जवाब देता दीदी बोल पड़ी

दीदी- नहीं पापा माँ झूट बोल रही है आपके जाने के बाद में और भाई सेहर गए सामान लेन और माँ ने भी अपना सामान मंगवाया था

पापा- ाचा कोई बात नहीं लड़ो मत और ये तुम्हारे हाथ में क्या है

में- ये वो पापा घर के पीछे वाले जंगल में एक छोटी सी नदी है उस में से आपके लिए मछली पकड़ के लाया हु

पापा- पैर ये तो बड़ी बड़ी लग रही है ाचा है रात को तेरी बुआ भी आ रही है तो उसी से बनवाते है वो मछली बहुत अछि बनती है

में- जी ठीक है ( अभी तक मैंने माँ की तरफ नहीं देखा था न hi वो कुछ बोली थी) पैर अब सेहर चले सामान लाना है

पापा- चलते है बस रुक जा कोई आने वाला है वो आजाये फिर चलते है

में- तो तब तक निकाल लू बहार

पापा- नहीं बीटा तू आराम से बैठ और सुषमा तो कफ बना ला

दीदी- जी पापा अभी लायी

फिर दीदी कॉफ़ी बनाने चली गयी तो मैंने एक नज़र माँ की तरफ देखा तो माँ मुझे hi देख रही थी पैर जैसे hi हम दोनों की नज़र आपस में मिली तो माँ ने नज़र टीवी की तरफ कर घुमा ली हम बैठे hi हुए थे की पापा का फ़ोन बजा और उठ के बहार चले गए और 5 मं बाद अंदर आये और चिल्ला के बोले

पापा- सुषमा बीटा एक पूजा की थाली सजाना तो

माँ- पैर हुआ क्या कुछ बताओगे भी के नहीं

पापा - अभी सब को बताता हु पूजा की थाली तो आने दो

तभी दीदी बहार आयी एक पूजा की थाली लिए

दीदी- किसकी पूजा करनी है पापा बोलिये

पापा ने इशारे से बहार चलने को कहा जब हम बहार आये तो सब चौक गए क्युकी बहार हमारे गेट पे एक नई हौंडा एमजे कड़ी थी ब्लैक कलर की

में- वावू पापा ये कब ली आप ने

पापा- पहले पूजा करो फिर सेहर चलते वक़्त बताता हु

इतना सुनते hi दीदी ने फटाफट गाड़ी की पूजा आरती की और पापा ने दीदी को 2100 रस दिए शगुन के

दीदी- पापा अब तो में भी चलूंगी आप लोगो के साथ

पापा- हां क्यों नहीं बीटा सब चलते है पैर पहले कॉफ़ी तो पीला दे जो बनाई है तूने

दीदी- जी पापा अभी लायी

फिर हम सब ने कॉफ़ी पि और सब चल दिए सेहर सामान लाने

में- तो पापा अब बताओ

पापा- बीटा ये मैंने पहले hi बुक कर दी थी और सुबह में अपने जूनियर के साथ शोरूम पे hi गया था लेने पैर मुझे चलनी नहीं आती तो उसी ने ड्राइवर दिया था घर तक छोड़ने के लिए फिर वो मुझे छोड़ के स्टेशन चला गया और ड्राइवर अब इसे घर छोड़ गया बस

दीदी- पापा और कोई सरप्राइज भी है तो वो भी बता दो

पापा- बस अब जादूगर का पिटारा खली हो गया है अब कुछ नई है अब सब है हमारे पास

ऐसे hi बातो में सेहर आज्ञा और फिर दीदी ने दिल खोल के शॉपिंग की जिस में 2 घंटे बीत गए

पैर अभी भी न तो में माँ से बोलै था और न hi माँ मुझसे शायद हम दोनों hi नहीं चाहते थे की किसी को कुछ भी पता चले

पैर अब देर हो रही थी क्युकी बुआ को भी लाने जाना था

में- पापा कितना टाइम और लगेगा अभी

पापा- बस बीटा घर के लिए राशन पैक हो रहा है बस फिर चलते है बाकि सामान तो सब ले लिया है

में- ok पापा जी

इस सब में भी 1/2 घंटा लग hi गया फिर हम सब घर के लिए चल दिए थोड़ी देर में hi हम घर पहुंच गए फिर मैंने गाडी से सामान उतार के सब सामान किचन में रख दिया और हॉल में पापा के पास hi बैठ गया और टीवी देखने लगा जब की माँ और दीदी अपने रूम्स में चली गयी चेंज करने

में- पापा गाड़ी बहुत मस्त है वैसे पापा मैंने जो बैंक का फॉर्म भरा था उसके बारे में पता किया आप ने कुछ

पापा- नहीं युवी बस भाग दौड में भूल गया इस बार पता करूँगा अब बिलकुल फ्री हो गया हु

में- ठीक है पापा वैसे बुआ को कितने बजे लेने जाना है

पापा - उसकी ट्रैन लेट है तो 7.30 तक आएगी

में- ठीक है पापा में तब तक टहल के आता हु 1 घंटा है अभी तो

पापा- हम्म ok

फिर में बहार निकला और सविता आंटी की तरफ चल दिया सोचा एक बार चक्कर लगा आता हु घर पहुंच बेल्ल बजे तो थोड़ी देर बाद उनकी बहु ने गेट खोला

में- भाभी में युवी सुबह मिला था

भाभी- हांजी पहचान लिया आइये

में- नहीं बस पूछने आया था कोई काम तो नहीं है

भाभी- नहीं अभी तो कोई काम नहीं

में- ाचा तो में चलता हु ( साली ने घर पैर भी खुद को धक् के रखा था पैर थी सॉलिड चीज़)

भाभी- ok

साली ने एक बार झूठे मुँह से भी रुकने को नहीं बोलै कसम से गांड सुलग गयी और में भी चुप चाप घर आ गया और अपने रूम में चला गया और कपडे चेंज करके वापस अपने बीएड पे लेट गया थोड़ी देर बाद hi पापा ने आवाज़ लगा दी तो भागता हुआ निचे गया

में- हांजी पापा

पापा- जाओ बुआ को ले आओ

में- जी अभी जाता हु

और बाइक लेके निकल गया ट्रैन आ चुकी थी तभी मेरी नज़र बुआ पैर पड़ी उन्होंने लाइट ग्रीन साड़ी पहन राखी थी और पहले से और भी मस्त हो गयी थी वो आते hi मेरे गले लग गयी जिस से उनकी चूचियों का एहसास प् कर मेरे हाथ खुद hi उनके मस्त कूल्हों पर चले गए

में- क्या बात है बुआ आप तो और भी जवान हो गयी हो और सामान भी बढ़ गया है( हम दोनों में इतना हसी मज़ाक चलता था)

बुआ- हां तो तू भी बड़ा हो गया है और मेरे सामान पे नज़र क्यों लगा रहा है

में- अरे जब इतना मस्त माल सामने होगा तो कोण नहीं देखेगा

बुआ- तू नई सुधरने वाला पहले जैसा hi है आते hi शुरू हो गया पैर अभी मुझे बहुत तेज़ पेशाब आयी है जल्दी से कही जगह देख

में- अरे तो टॉयलेट में कर लो न

बुआ- अरे बहुत गन्दा है में गयी थी

में- तो चलो घर hi कर लेना 2 मं का रास्ता है

फिर मैंने उनको बाइक पे बिठाया और चल दिया पैर शायद उन्हें सच में बहुत तेज़ आयी थी की वो रुकने को बोली

बुआ- यहाँ तो झाडिया hi है यही कर लेती हु तो थोड़ी बाइक की लाइट दिखा उधर

फिर मैंने बाइक लाइट दिखाई और वो जगह देख कर बोली

बुआ - अब हटा भी लाइट

तो मैंने लाइट बंद कर दी और वो वही बैठ के पेशाब करने लगी मेरा तो ये सोच कर hi खड़ा हो रहा था की बुआ कुछ दुरी पे hi अपनी नंगी गांड लिए बैठी है इस जंगल में उनकी मूट की सिटी भी साफ़ सुन रही थी उसके बाद वो सिटी बंद हो गयी मुझे लगा पेशाब कर लिया होगा तो मैंने लाइट जला दी उफ्फ्फ क्या नज़ारा था बुआ अपनी कच्ची ऊपर कर रही थी और सामने उनकी मोती गांड थी की तभी बुआ चिल्लाई

बुआ- युवी लाइट बंद कर

में एक दम हड़बड़ा गया और लाइट बंद कर दी फिर वो मेरे पास आगयी और बोली

बुआ- युवी लाइट क्यों जलाई

में- सॉरी बुआ वो मुझे लगा कर लिया होगा

बुआ- तुझे क्यों लगा की कर लिया होगा

में- वो आपकी सिटी की आवाज़ बंद हो गयी थी इसलिए

बुआ- की गंदे अगर कोई और देख लेता तो

में- यहाँ और कोण है मैंने hi तो देखि है वैसे बड़ी मस्त एक दम गोरी

बुआ-( हास्के मुक्का मरते हुए) चल घर चल घर चल भैया को बताती हु तेरी करतूत)

में-( मुझे लगा शायद बुआ सच में गुस्सा हो गयी है) सॉरी बुआ पैर प्ल्ज़ पापा को कुछ मत बोलना दोबारा ऐसा नहीं होगा

बुआ ये सुनके हसने लगी और बोली

बुआ- तू सच में दर गया अरे में तो मज़ाक कर रही भला में अपने चाँद से बच्चे की शिकायत करुँगी क्या पागल तू भूल गया में तो तेरे सामने hi कपडे बदल लेती थी

में- ओह थैंक यू मुझे लगा था नाराज़ हो गयी वैसे अब भी बदल लोगे मेरे सामने कपडे

बुआ- जी नहीं अब तो तू जवान हो गया और अब जल्दी चल

फिर हम चुप चाप घर को निकल गए और कोई 2 मं में घर पहुंच गए और घर पहुंचते hi बुआ बहार से hi घर को देखने लगी

बुआ - वाह्ह अबकी बार तो मस्त घर बनाया है भैया ने

में- जी क्युकी अब कही नहीं जाना है यहाँ से इसलिए

और फिर हम दोनों अंदर गए तो में तो सीधा अपने रूम में चला गया
 
अपडेट -18

रात के 8 बज रहे थे और कर ने कुछ था नहीं तो छत्त पे घूम ने के लिए चला गया और अपने जीवन में आये परिवर्तन के बारे में सोच ने लगा की कैसे इस सेहर में आते hi मुझे छूट मिली नयी गाड़ी बाइक सब कुछ मिल गया क्या सेहर लकी है या फिर दुःख भरे दिन बीत गए है और अब बस खुसियो की बारिश hi होगी जो भी हो अब छूट को नहीं तरसेगा मेरा लुंड ये सब ख्याल hi चल रहे थे दिमाग और पता hi नहीं चला कब 10 बज गए पता जब चला जब दीदी का फ़ोन आया

में- क्या हुआ दीदी

दीदी- कहा है तू सब तेरा इंतज़ार कर रहे है खाने पैर

में- अभी आया दीदी ऊपर छत्त पैर हु

फिर में निचे गया तो सब दिंनिंग टेबल पैर बैठे थे

पापा- आजा भाई तेरा hi इंतज़ार हो रहा है

बुआ- कहा चला गया था पहले तो मेरे पास hi रहता था जब भी आती थी

में- अरे बुआ यही था छत्त पे सोचा थोड़ा टहल लू

पापा- हां ये तो ाचा है की घर पे hi था वर्ण साहब कब कहा चले जाये पता नहीं चलता

माँ- अब खाना भी खा ले अगर बाते हो गयी हो

बुआ- क्या बात है भाभी जब से आयी हु देख रही हु आप कुछ उखड़ी उखड़ी लग रही है

माँ- ऐसा कुछ नहीं किरण में तो बस इसलिए कह रही थी की लेट हो रहा है

बुआ- बच्ची नहीं हु भाभी में अगर मेरा आना ाचा नहीं लगा तो में कल hi चली जाती हु

पापा- किरण पागल हो तुम आज तक सविता ने तुम्हे सुषमा से काम समझा है क्या

बुआ- तो फिर क्या बात है

दीदी- दरसल बुआ ( और फिर दीदी वो सब बता देती है की कैसे में घर छोड़ के जारहा था)

बुआ- ओह्ह मुझे लगा भाभी मेरे आने से नाराज़ है पैर भाभी अब आपको भी देखना चाहिए की बच्चे जवान हो गए है

पापा- ाचा सब छोड़ो और खाना खाओ

फिर सब ने चुप चाप खाना खाया

बुआ ने मछली सच में बहुत स्वाद बनायीं थी पैर कुछ बोलना नहीं चाहता था इसलिए चुप चाप अपना खाना फिनिश किया और उठने लगा तो बुआ बोली

बुआ- तेरा कमरा कहा है युवी

में- ऊपर है बुआ

बुआ- ठीक है तू चल में अभी आयी में भी तेरे कमरे में hi सोयुनगी

में- ok बुआ आजाओ मेरे रूम a.c भी है

बुआ- क्या भैया सब रूम a.c लगवाया तो गेस्ट रूम में भी लगवा देते

पापा- ाचा बाबा लगवा दूंगा खुश

बुआ- में अपने लिए नहीं कह रही में तो वैसे भी हमेसा युवी के साथ hi सोती हु वो तो इसलिए कहा की जब पुरे घर में a.c है तो एक रूम क्यों छोड़ना

माँ- पैर किरण युवी अब बड़ा हो गया है अब कैसे तुम उसके साथ सो पाओगी

बुआ- मुझे पता है बड़ा हो गया है पैर है तो मेरा लाडला hi आप फ़िक्र न करो में एडजस्ट कर लुंगी हाहाहा

में तो पहले hi अपने रूम में आज्ञा था और कपडे चेंज किये और रूम से निकल के छत्त पे जाने लगा तो दीदी अपने रूम में घुस रही थी पैर मुझे देख के रुक गयी

दीदी- कहा चले साहबज़ादे

में- छत्त पे और कहा

दीदी- ाचा चल में भी आती हु

मैंने कोई जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ गया और छत्त पे जाके टहल ने लगा थोड़ी देर बाद दीदी ऊपर आयी एक निघ्त्य पहने हुए और मेरे साथ टहल ने लगी

दीदी- कितनी शांति है न युवी यहाँ और कितना अँधेरा भी

में- हां वो जंगल है न पीछे इसलिए

दीदी- हां जंगल से याद आया मुझे भी नदी देखनी है दिखा प्ल्ज़

में- आप क्या करोगी वो बहुत दूर है

दीदी- तो क्या हुआ तू भी तो साथ होगा न

में- ठीक है जब जाऊंगा तब ले चलूँगा

दीदी- तू इतनी रूडली बात क्यों कर रहा है नाराज़ है मुझसे

में- में क्यों नाराज़ होने लगा आप से आप की वजह से तो में घर में हु

दीदी- वो तो तेरी बातो से पता चल hi रहा है पैर तू खुद सोच अगर किसी को पता चल गया तो क्या होगा माँ तो जान से मार देगी

में- वैसे कैसे पता चलेगा माँ को वो तो ऊपर आती नहीं है और हम बाटने से रहे

दीदी- फिर भी यार ये गलत तो है न

में- देखो दीदी मैंने तुमसे ये बात करने को नहीं कहा है और न मैंने उसके बाद आपको टच किया सोऊ प्ल्ज़ इन फालतू बातो से मेरा दिमाग मत ख़राब करो

अभी हम ये बाते कर hi रहे थे की बुआ भी ऊपर आगयी

बुआ- कोनसी बाते से दिमाग ख़राब हो रहा है भाई

दीदी-( बात बदलते हुए) देखो न बुआ में ये कह ऋ हु की इतना गुस्सा मत किया कर सब ाचा hi होगा

बुआ- हां तो ये तो अछि बात है युवी इतना गुस्सा नहीं करते

फिर ऐसे hi बात करते हुए हम टहलते रहे और थोड़ी देर बाद में और बुआ मेरे रूम में आगये

बुआ- इतना गुस्सा क्यों करता है तू

में- अब कहा किया गुस्सा आपको देख के तो प्यार आता है

बुआ इस वक़्त एक हॉट निघ्त्य में थी जो की ऊपर छत्त पे पता नहीं लग रहा था

बुआ- आते hi शुरू हो गया फिर से आखिर मुझ बुद्धि में क्या दीखता है तुझे तेरे पहुपा तो देखते भी नहीं है अब

में- उन्हें क्या पता हीरे की कीमत क्या होती है असल जवान तो अब हुई हो आप

बुआ- हां तभी तो मुझे पेशाब करते हुए घर रहा था तू

में- झूट मत बोलो बुआ मैंने पेशाब करते वक़्त नहीं देखा था आपको वो तो जब आप अपने खजाने को कच्ची के अंदर छुपा रही थी तब देखा था वो भी हलकी सी झलक दिखी थी

बुआ- बदमाश और उसे पेंटी बोलते है समझा न और कोण सा खज़ाना हां शर्म कर बुआ हु तेरी गफ नहीं अब जा पानी ले आ अब निचे से प्यास लग रही है

में- आके बताता हु पहले पानी लेके आता हु

फिर में निचे उतर कर किचन में गया और पानी की बोतल लेके ऊपर जा hi रहा था की माँ की आवाज़ कानो में पड़ी तो में माँ पापा के कमरे के पास गया और के होल से अंदर देखा तो अंदर माँ नंगी घोड़ी बानी हुई थी और पापा पीछे से उन्हें छोड़ रहे थे

माँ- ाजी और तेज़ करो न मजा नहीं आ रहा है

पापा- और कितना तेज़ करू कर तो रहा हु

और माँ की कमर को पकड़ के तेज़ तेज़ छोड़ने लगे आठ सविता मेरा होने वाला है

माँ- ये क्या अभी से अभी तो मजा आने लगा था क्या हो गया है तुम्हे ऐसे प्यासी मत छोड़ो जोर जोर से करो न

पैर पापा ज्यादा देर नहीं ठीक पाए और माँ के ऊपर hi लुढ़क गए

माँ- अब मेरा क्या होगा आप तो शांत हो गए

पापा- रुक जा अभी फिर से करूँगा थोड़ी देर में

माँ- बस रहने दो ( ये बोल के माँ उठ कर बाथरूम में चली गयी और में ऊपर अपने रूम )

बुआ- इतनी देर कई लगा दी क्या कर रहा था( और तभी बुआ की नज़र मेरे पेण्ट में बने तम्बू पे पड़ी) काफी बड़ा हो गया है

में- वो आपके खजाने को याद करने में खो सा गया था और क्या बड़ा हो गया

बुआ- तू बड़ा हो गया है और क्या और क्या खज़ाना है (फिर बुआ ने पानी पिया और में भी उनके बराबर में लेट गया लैंप ों करके)

अब में और बुआ एक दूसरे की तरफ करवट लेके लेट हुए थे और निफगती का गाला बड़ा होने के कारण उनकी चूचियों के दरसन हो रहा था तो में भी उन्हें देखते हुए hi बोलै

में- वही खज़ाना जो आपकी कच्ची मतलब पेंटी में मुश्किल से आ रहा था

बुआ-( मेरी नज़र को भाप चुकी थी की में कहा देख रहा हु पैर उन्हों ने उसे छुपाने की कोसिस नहीं की) गंदे वो खज़ाना तो अब लूट चूका है और जिसका वो है अब तो वो भी नहीं लूट ता कम्बल ले ले न कोई पतला सा

फिर मैंने अलमीरा में से कम्बल लेके बुआ और अपने ऊपर दाल लिया बस उनकी चूचियों को नहीं ढाका पैर कम्बल की वजह से अब हम दोनों और भी करीब हो गए थे

में- वो मालिक शायद अँधा होगा जो ख़ज़ाने को नहीं पहचान रहा मुझे मिल जाये तो पूरा इस्तमाल करता

बुआ- तू पागल हो गया है जो ऐसी बाते कर रहा है

में- पागल समझो चाहे कुछ भी पैर आप का खज़ाना तो मेरी आँखों में छप्प गया है काश एक बार महसूस कर पाटा

ऐसी बाते सुनके बुआ भी गरम होने लगी थी जिसका सबूत उनकी आँखों में दिख रहा था जो की बिन पिए नशीली हो रही थी

बुआ- और महसूस करके क्या करता और वैसे भी तूने दूर से देखा था इसलिए ऐसा बोल रहा है पास से देखेगा तो ाचा नहीं लगेगा

में- ऐसा हो hi नहीं सकता मेरी नज़रे धोका नहीं खा सकती और वैसे भी ये तो महसूस करके hi पता चलेगा न

तभी बुआ ने एक गहरी सांस ली और कम्बल के अंदर से hi मेरा हाथ पकड़ के अपनी नंगी गांड पे रख दिया और बोली

बुआ- ले करले महसूस ( और अपनी आँखे बंद कर्ली)

( ो तेरी की यानि बुआ ने कंबसल के अंदर hi अपनी निघ्त्य कमर तक चढ़ा ली थी )

और जैसे hi मैंने उनकी गांड को छुआ तो मेरे लुंड ने भी ठुमका मार के नयी छूट का स्वागत किया इसी जोश में मैंने बुआ की गांड को मसल दिया जिस से बुआ की एक आह्हः निकल गयी जिसे सुन के मैंने अपने हाथ को उनकी हलके बालो वाली छूट पे रख दिया जो की पहले से hi गीली थी और मेरा हाथ छूट पे लगते hi बुआ मुझसे चिपक गयी

बुआ- आअह्ह्ह युवी अब हाथ हटा ले न अब तो महसूस कर लिया होगा

में- हां बुआ महसूस तो कर लिया पैर अब ये खज़ाना मेरा होना चाहता देखो मेरे हाथ में आते hi कितना खुश है की हाथ में hi पिंघल रहा है( ये कहते hi मैंने एक ऊँगली बुआ की छूट में घुसा दी)

बुआ- ाःह नहीं युवी ये गलत है बीटा में बुआ हु तेरी अगर किसी को पता चल गया तो में बदनाम हो जाऊँगी आह

में- किसी को कुछ पता नहीं चलेगा बुआ की बंद कमरे में क्या हुआ अब ज़रा चख कर देख ने दो की नमकीन कितना है

इतना कहते hi मैंने कम्बल हटा दिया और सामने थी मसल जांघो के बिच में छुपी हुई बुआ की वो छूट जो शायद लुंड का स्वाद भी भूल चुकी थी अब देर न करते हुए में दोनों टैंगो के बिच में आज्ञा और अपना सर घुसेड़ दिया दोनों टांगो के बिच और जैस hi मेरी जीब उस छेद से टकराई बुआ की तो जैसे जान निकल ने लगी जिस्म से

बुआ- आठ युवी बीटा मत कर में मर जाउंगी ऊऊफफफ ये क्या कर रहा ही माँ इतना मज्जा तो कभी नई आया आठ

और मेरे बालो में ऊँगली घूमने लगी और एक हाथ से अपनी चुकी दबाने लगी पैर इतने दिनों से न छोड़ने के कारण ज्यादा देर न टिक सकीय और तेज़्ज़ तेज़्ज़ सांसे लेके झाड़ ने लगी और मेरे सर को दोनों टैंगो के बिच में भींच लिया जब थोड़ी देर बाद नार्मल हुई तो टाँगे ढीली हुई उनकी तो मैंने भी खड़ा होक सारे कपडे उतारे और बुआ की निघ्त्य भी उतार दी जैसे hi बुआ की नज़र लुंड पे पड़ी तो एक दम बोल पड़ी

बुआ- युवी इस में तो बहुत दर्द होगा ये तो फाड़ देगा

में- ओह्ह मतलब आप तैयार हो छोड़ने के लिए

बुआ-( प्यार से छाती में मुक्का मरते हुए बोली) तो तू कोण सा मुझे बिना चुदाई के छोड़ने वाला है

में- तो बुआ तैयार हो एक्शन के लिए

बुआ- हम्म पैर धीरे से दाल न

फिर बुआ की टांगो को उठा के लुंड को उस रास बहती छूट पे सेट किया और एक कर्रारा शॉट मारा और आधा लुंड अंदर बुआ वाकई में टाइट थी

बुआ- आआअह्ह्हम्मअअअअ कमीने आराम से बोलै था न इतनी तेज़ क्यों किया

में- वो बुआ तुम्हारी प्यारी सी छूट देख के कण्ट्रोल नहीं हुआ

और फिर से एक तेज़ शॉट मारा इस बार पूरा लुंड जड़ तक अंदर पैर इस बार चीख नहीं निकली बुआ की क्युकी झटका मारते hi मैंने अपने होठ बुआ के होठो से जोड़ लिए थे वर्ण घर में सब जग जाते बुआ की आँखों में आंसू आगये थे और वो बड़े गुस्से से मुझे देख रही उनको ऐसा देख में चुप यही थोड़ी देर पड़ा रहा और एक हाथ से उनकी चूचिया सहलाने लगा जब मुझे लगा की अब कुछ नोर्मा है तो मैंने धीरे 2 अंदर बहार करने लगा अब बुआ भी साथ देने लगी थी हल्का हल्का तो मैंने उनके होठ चोदे और थोड़ा तेज़ तेज़ करने लगा

बुआ- आह कमीने तूने तो मेरी जान hi निकल दी थी हाय भैया बचा लो अपनी बहिन को कितनी जोर से फाड़ रहा है आपका बीटा मेरी छूट को आठ एएएस युवी आठ

में- आज तो मजा आज्ञा बुआ अब तो जब तक तू है तुझे हर रात छोडूंगा बड़ा टाइट माल है तू और अभी तो तेरी गांड का छेद भी बाकी ही

बुआ- हाससस आह्हः जोर से बीटा जोरसे फाड़ दे मेरी छूट ुउउइइमा इतना मजा तो जब भी नई जब तेरे पहुपा ने पहली बार किया था आह्हः ईस आह्हः माँ आज पता चला क्या चीज़ होती है चुदाई करता रह

में- गांड का जवाब नहीं दिया बुआ

बुआ- अभी कुछ मत बोल बस छोड़ता रह युवी में इस मजे खो जाना चाहती हु आठ मा

पुरे कमरे में बुआ की सिसकिया गूंज रही थी जब भी लुंड अंदर जजाता थप थप की आवाज़ आती अब तो बुआ भी निचे से अपनी गांड उठा उठा के मार रही थी और मजे में पता नई क्या बोलती जा रही

बुआ- आठ तेज़ तेज़ मेरे लाल तेरी बुआ आने वाली है आठ माआ युवी मेरे बच्चे( जोर जोर से मुँह चूमने लगी) ऊऊफफफ आठ और एक दम से अकड़ गयी और अपनी टांगो को मेरी कमर पे कास लिए पैर चुदाई चालु

ये मेरी ज़िन्दगी की 2श्री शादी सुदा टाइट छूट थी पहली तो माँ की थी और माँ ख्याल आते hi मेरी स्पीड बढ़ गयी और बुआ को कास कास के छोड़ने लगा बुआ बेचारी बस आह उठ किये जा रही थी वो समझ hi नहीं पा रही थी की आखिर हो क्या गया की इतनी बुरी तरह से छोड़ ने लगा पैर ये तूफ़ान जब रुका जब में झाड़ा और आज पहली बार मेरी चीख निकली आआआहहह ऐसा लग रहा था जैसे की लुंड में कुछ फस गया था और वो एक दम से उछाल के बहार आया हो उफ्फ्फ्फ़ काफी देर में यही बुआ की चूचियों में सर रखे लेता रहा

बुआ- क्या हुआ युवी थक गया क्या

में- नहीं बुआ वो तो तुम्हारी छूट की गर्मी लुंड पे महसूस करके ाचा लग रहा था इसलिए

बुआ- अब तो खुश है तू अब तो तुझे खज़ाना मिल गया न

में- अभी कहा बुआ अभी पीछे का दरवाज़ा भी तो खोल के देखना है

बुआ- खोल लियो बस जो तेरा दिल करे वो कर लियो अपनी बुआ के साथ वैसे भी आज तूने अपनी बुआ को वो सुख दिया है जो तेरे पहुपा ने भी नहीं दिया

फिर बुआ न मेरा माथा चूमा और मेरे सर को अपनी छाती में छुपा लिया और बालो सहलाने लगी और उनके प्यार से पता hi नहीं चला कब मेरी आँख लग गयी
 
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