Raju – Sab kaa Rakhwala aur Khushiyaan dene waala - SexBaba
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Raju – Sab kaa Rakhwala aur Khushiyaan dene waala

hotaks

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Dec 5, 2013
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फ्रेंड्स,

मैं इस फोरम में बहुत दिनों से हूँ और शायद आपने मेरे बहुत सी कमैंट्स भी देखे होंगे. सोचा मैं भी एक स्टोरी लिखूं.

मुझे स्टोरी राइटिंग का ज़्यादा एक्सपीरियंस नहीं hain...but टेकिंग इंस्पिरेशन फ्रॉम माय फ्रेंड्स , , ,

ी मैनोट रीच थेइर स्टैंडर्ड्स ऑफ़ स्टोरी writing..but जस्ट ा तरय एंड होप तो विन थेइर अप्प्रोवल्स (ों माय स्टोरी राइटिंग).

स्टोरी विल बे रिटेन इन Hinglish..even थौघ ी लिखे हिंदी fonts..but उसमें लिखने में बहुत टाइम लगता हैं.

स्टोरी मैनली इन्सेस्ट hi hoga...aur शायद थोड़ा अडुल्टेरी भी..

1सत अपडेट विल के टुमारो.

थैंक यू.
 
डिस्क्लेमर: थिस इस पुरेली ा फिक्शनल स्टोरी बेस्ड ों वरिटेरस इमेजिनेशन एंड नथिंग तो दो विथ रियलिटी. थिस स्टोरी इस जस्ट फॉर एंटरटेनमेंट purposes..so, स्टोरी पढ़िए और मज़ा lijiye..nothing मोरे नथिंग लेस्स.

फ्यू पॉइंट्स:

1) अस विथ आल इतर वरिटेरस, मैं भी थोड़ा बिजी रहता hoon...kaam, घर, फॅमिली, etc..so, डेली उपदटेस नहीं दे sakta..yes, वीकली वन्स ज़रूर देने की कोशिश करूंगा.

2) थिस इस माय फर्स्ट story..so, िनीतिकल्ली, उपदटेस लम्बा ना ho...(ho सकता hain)...but होपफ़ुल्ली अस थे स्टोरी प्रोग्रेस्सेस, उपदटेस का लेंथ भी बढ़ाने की कोशिश करूंगा.

2) पिक्स एंड गिफ्स ऐड करने में टाइम लगता hain...but अस मच अस पॉसिबल, विल तरय तो ऐड थे pics/gifs (बीइंग प्रैक्टिकल). होप यू आल अंडरस्टैंड.

लुक फॉरवर्ड तो योर सपोर्ट एंड तरय तो एन्जॉय थे राइड अलोंग विथ यू आल. सो, हेरे आईटी बेगिंस....

चरक्टेर्स इंट्रोडक्शन

यह कहानी एक गाँव में रहने वाले सदस्य की हैं जो अपने परिवार के साथ रहता hain/tha.

चरक्टेर्स इंट्रोडक्शन:

दादा (65 यरस) – no मोरे

हरिया- 45 यरस (हीरो का बाप बूत ज़्यादा रोले नहीं)

रत्न – 41 यरस (फिग: 34/32/36) (हीरो की माँ) (थोड़ा सावला रंग बूत मस्त फिगर वाली और कामुकता से भरपूर)

रवि – 22 यरस (हीरो का भाई और ज़्यादा रोले नहीं)

राजू – 22 यरस (रवि का जुड़वाँ भाई एंड हीरो ऑफ़ थे स्टोरी) (लुंड: 8 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा)

आराधना – 21 यरस (फिग: 32/32/36) (राजू की भाभी)

संध्या – 32 यरस (फिग: 34/32/36) (आराधना की सौतेली माँ) (इन दोनों के सम्बन्ध बहुत अच्छे हैं)

सुधा – 38 यरस (फिग: 34/32/36) (राजू की मौसी और तलाकशुदा) ..रत्न जैसे hi मस्त फिगर और बहुत प्यासी

ठाकुर ज़ालिम सिंह – गाँव का ठाकुर और जैसा नाम, वैसा hi kaam…zaalim और क्रूर

ठकुराइन काम्य – 30यरस (फिग: 32/32/36) – ठाकुर की दूसरी बीवी (अच्छे स्वाभाव की)

बाकी और चरक्टेर्स जो आएंगे तो उनका ज़िक्र उस समय में होगा.

आल लेडीज मेंशनएड इन थे स्टोरी हैवे गुड role..except हीरो (राजू) आल मेल मेंबर्स हैवे लिमिटेड रोले ओनली ज

घर की सभी महिलायें कामुकता से भरी हुई hain….aur बहुत छुडासी भी हैं

मोरे चरक्टेर्स विल बे एडेड अस थे स्टोरी प्रोग्रेस्सेस.

अपडेट 1:

फ्लैशबैक:


यह कहानी तब शुरू होती हैं जब हरिया 20 साल पहले रत्न से शादी कर के उसे अपने घर लाया था..

उस वक़्त हरिया का बाप भी उन्ही के साथ रहता था.. (माँ नहीं थी)

हरिया खेतो में काम करता tha…unki गाँव में बहुत अच्छी ज़मीन thi…aur उन खेतो की फसल से अच्छी आमदनी हो जाती थी जिसकी वजह से उनका गुज़ारा बहुत अच्छे से होता था..

वह लोग अपने मकान में hi रहते थे…2 मंज़िल का मकान था…

हरिया रत्न से बहुत प्यार करता tha..aur रोज़ रात को उसको बहुत छोड़ ता tha..jinme दोनों को बहुत मज़ा भी आता था.

शादी के दो साल बाद भी रत्न को जब बच्चा नहीं hua..to दादा थोड़ा परेशान हो गए..

तो दादा उनके गाँव के एक ऋषि मुनि से मिलने गए (जिनका दादा पे बहुत विश्वास था).

ऋषि जाने मने व्यक्ति थे और गाँव के लोग उनको बहुत मानते थे…

उनकी कही बाते काफी हद तक सच भी हो जाती thi…jab भी गाँव के लोगों को कोई समस्या आती थी तो उनका समाधान के लिए लोग उनके पास जाते the…Rishi उनके लिए वक़्त निकल कर उन्ही सहायता करते थे.

इसीलिए सब उन्हें मानते थे और उनका आदर भी करते the..(jinme हीरो का परिवार भी था).

सो, एक दिन दादाजी उनसे मिलने उनके कुटिया में gaye..us वक़्त ऋषि थोड़े बिजी the..to दादा ने उनका वेट kiya…jab ऋषि फ्री हुए तो दादा उनसे मिले और उनका हाल चाल पुछा.

ऋषि: बीटा, कैसे हो और यहाँ कैसे आना हुआ..

दादा: ठीक हु ऋषि ji..ek समस्या hai..uske खातिर आपसे मिलने आया hoon..ho सके तो समाधान भी बताइये.

ऋषि: ठीक हैं beta..samasya क्या हैं?

दादा: बेटे की शादी को दो साल हो गए है और अब तक उनको कोई बच्चा नहीं हुआ हैं..

ऋषि: तो समस्या क्या हैं? ऐसे बहुत लोग हैं जिनको जल्दी बच्चा नहीं hota…ismein परेशानी की कोई बात नहीं हैं.

दादा: आपकी बात सही hain..lekin कहीं ऐसा नहीं हैं के किसी में दोष हो. अगर ऐसा हैं तो मैं फिर ट्रीटमेंट भी करा सकता हूँ.

ऋषि: हम्म…1-2 साल और देख lijiye…phir भी बच्चा नहीं हुआ तो आप फिर अपने bête, बहु से बात कर लीजिये.

ऋषि: फिर bhi..ek काम kijiye..aap अपने bête और बहु की कुंडली एक बार ले आईये..

दादा: जी Rishiji..mujhe लगा शायद आप कुछ ऐसा हो kahenge..isiliye उन दोनों की कुंडली भी ले आया हूँ.

ऋषि: तो देखने दीजिये..

और ऋषि दोनों की कुंडली देखने लगता हैं..

कुंडली देखने के बाद उनके चेहरे के रंग बदल जाते hain..jise देख कर दादा भी बहुत परेशां हो जाते हैं..

दादा: क्या बात है गुरूजी? आपके चेहरे का रंग कुछ और hi बता रहा हैं

गुरूजी: बात तो सही hain…kundli देख कर यह तो पक्का हैं की आप जल्दी hi दादा बनने वाले ho..aur आपकी बहु को 4 बच्चों का सुख प्राप्त होगा.

लेकिन यह भी है की उसकी जीवन में काफी कठिनायों भी aayega…aur उनसे लड़ कर निकलना होगा.

और मैं उस दिन का वेट करूंगा जब आपका पोता मुझसे मिलने आएगा. जब यह बात गुरूजी ने कहा तो दादा को कुछ समझ नहीं aaya…par उस बात पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया.

दादा: जी Guruji..aur उनको प्रणाम कर के निकला जाते hai..is ख़ुशी में की वह शायद जल्दी hi दादा बन जाए.

फ्लैशबैक एंड्स
 
अपडेट 2:

प्रेजेंट टाइम:


दादाजी अभी 65 यरस के है और अपनी दिनचर्या में व्यस्त हैं और शायद अपनी आकृ साँसों की गिनती कर रहे हैं. (उनकी तबियत ठीक नहीं रहती थी).

जैसे की गुरूजी ने कहा था…(20 साल पहले)

गुरूजी के आश्रम से आने के baad..kuch दिनों में रत्न पेट से हो गयी और देखते देखते उनको जुड़वे बच्चे (लड़के) पैदा हुए

घर में खुशियों का माहौल आ गया और सभी खुश थे..

लड़कों का नाम रवि और राजू रखा गया था.

माँ बाप बन कर हरिया और रत्न बहुत खुश the...aur सबसे ज़्यादा खुश हरिया का बाप (दादाजी) खुश the...bhagwaan और गुरूजी का मन में बहुत शुक्रिया ऐडा किया.

समय का पहिया बढ़ता gaya…Ravi और राजू बड़े हो गए….

दोनों दिखने में बहुत सुन्दर the…kale घने बाल, आकर्षक chehra..neeli aankhen..aur क्यूंकि दोनों जुड़वाँ the..dono में अंतर करना थोड़ा मुश्किल tha…sirf हरिया और रत्न hi दोनों बेटों को पहचान लेते थे..

दोनों व्यस्क हो चुके थे.. दोनों लड़के बहुत मेहनती और अच्छे स्वाभाव के the..aur राजू रवि के मामले में थोड़ा होशियार भी tha..ghar में ख़ुशी का माहौल था.

घर में हरिया, उसका बाप, दोनों bête, बीवी रत्न, रत्न की बहिन सुधा मिल कर रहते थे.

ठाकुर के घर:

जैसे लिखा गया tha..thakur बहुत हरामी और रंडीबाज tha…uski पहली बीवी मर गयी थी और उसने दूसरी शादी काम्य से कर ली thi…dono में उम्र का काफी फर्क था…

काम्य एक अच्छे घर की महिला thi…aur अच्छे परिवार से आती थी.

ठाकुर की (गन्दी) नज़र काम्य पर पड़ी और उसने काम्य से शादी करने का सोच liye..use यह भी पता किया की उसके पिताजी के पास अच्छी खासी ज़मीन भी hain..so, उसे भी हड़पने का सोच लिया था.

इसीलिए उसने काम्य के माता पिता की ज़मीन हड़प li…apne गुंडे और पुलिस की मदद se..aur उन लोगों को कर्ज़े में डूबा दिया.

कर्ज़े में दुबे रहने के कारण, ठाकुर ने उन पर दबाव डाला और उनको अपने कर्ज़े से मुक्ति दिलाने के लिए काम्य से शादी कर ली. (ठाकुर के दबाव में). (यह सब बातें काम्य को पता नहीं था उस waqt..baad में पता चलेगा).

काम्य को यह शादी पसंद नहीं thi..but अपने माता पिता के कारण उसको मन्ना पड़ा..

काम्य के माता पिता यह सेह नहीं पाए और वह चल बेस थोड़े दिनों के बाद.

देखते hi देखते काम्य ठाकुर के घर आ गयी और ठकुराइन बन gayi…lekin उसका घर में कोई चलता नहीं tha...thakur का रुतबा hi ज़्यादा था.

ठाकुर उनकी ज़मीन हड़प कर और भी घमंड हो gaya..usko सिर्फ ज़मीन और पैसे से मतलब tha..aur काम्य से नहीं.

लेकिन वह तेहरा बहुत हवसी.. उसको जब भी ठरक चढ़ती thi..to वह रंडियों को बुला कर अपनी हवस मिटा लेते tha..yeh बात काम्य को भी पता tha..but ठाकुर के दर से वह कुछ भी नहीं कर पाती thi..aur अपनी hi आग में जलती thi…aur अपनी उँगलियों से hi संतुष्ट कर लेती thi…lekin उंगलियां कितने काम आएगा? उसको भी लुंड और सेक्स की भूख thi..but ठाकुर उसे इग्नोर कर देता tha..kaamya वैसे hi जल कर रह जाती थी.

एक दिन ठाकुर एक रंडी को घर बुला liya..aur उसकी ठुकाई कर रहा था….

चल randi…mera लुंड choos….aur ठाकुर ने रंडी के मुँह में अपना लुंड घुसा diya..aur रंडी भी मज़े से लुंड चूसती रही.

लुंड चूसै के बाद, ठाकुर ने उसे पलट दिया और उस पर चढ़ कर चुदाई करने laga…randi भी aah..aah..karne lagi…yeh आवाज़ काम्य को भी सुनाई दे रहा tha..but वह कुछ नहीं कर सकती thi..thakur के दर से वह भी चुप रही.

नेक्स्ट 10 मं तक ठाकुर ने रंडी को खूब छोड़ा और अपना पानी उसमें निकल दिया और उसके बगल में बेसुध हो कर गिर गया.

ठाकुर: क्यों रे रंडी, मज़ा आया क्या?

रंडी: हाँ ठाकुर मज़ा आया (लेकिन उसे मज़ा नहीं आया tha)…thakur सिर्फ चुदाई में hi मज़ा लेते tha…aur फोरप्ले में नहीं. और वैसे भी, ठाकुर को “अपने हतियार” में गुरूर tha..jo ज़्यादा बड़ा नहीं tha..but लोगों को बताने में दर लगता था.

ठाकुर: यह ले paise..aur दफा हो जा..

इसी तरह ठाकुर भी थक कर सो गया.

अगले दिन, ठाकुर किसी काम से गाँव के लिए निकला tha….aur रास्ते में उसे आराधना दिखी जो अपने घर के आँगन में काम कर रही thi…Aaradhna को देख कर ठाकुर को ठरक चढ़ी और उसने अपना लुंड मसलते हुए socha..isko तो पेलना है हैं..

ठाकुर जब अपने घर आ गया तो उसने अपने आदमी से आराधना को उठा (अगवाह) कर लाने की हिदायत दी..

अगले दिन ठाकुर के आदमी आराधना को ढूंढ़ने निकले…

उसी वक़्त रवि भी अपने काम से गाँव से बाहर जा रहा tha…thakur के आदमियों को आराधना दिखी और उसका पीछा करके उठा कर ले जाने laga…aaradhna चीकने लगी..

आराधना की चीक रवि की सुनाई दी और वह उसी दिशा में bhaaga..jab उसने देखा की ठाकुर के आदमी आराधना को उठा कर ले जा रहे हैं तो उनको रोका…

उनमें से एक गुंडे ने kaha…abe तो जानता हैं हम कौन hain…thakur के आदमी हैं. रास्ता छोड़ और अपना काम कर.

रवि: होगा तो ठाकुर का aadmi..lekin पहले यह लड़की को छोड़…

लेकिन ठाकुर के आदमी कहाँ मानने वाले थे..

उनमें से एक गुंडे ने चाक़ू निकल कर रवि पर हुम्ला kiya..lekin रवि सतर्क था..

अपने आप को बचा liya..phir जैम के लड़ाई हुई और ठाकुर के आदमियों को मार पीठ कर भेज दिया और आराधना को बचा लिया..

दोनों के नैन मिले और इज़हार hua…Ravi ने आराधना को उसके घर छोड़ दिया और उसकी सौतेली माँ (संध्या) से भी मिल लिया जो की पताका लग रही थी.

ठाकुर के आदमी जब हवेली जा कर ठाकुर को यह बात बताई तो वह बहुत बौखला gaya…lekin वह अभी कुछ नहीं कर सकता tha…usi दिन से ठाकुर को हरिया और उसके परिवार से खुन्नस और दुश्मनी हो गयी thi...aur वह समय का वेट करने लगा की कब वह उनसे बदला लेगा.

रवि जब घर आया तो उसने ठाकुर के आदमियों से लड़ने वाली बात batayi…Hariya, रत्न और राजू तीनो घबरा gaye..lekin रवि ने कहा की उसको कुछ भी नहीं हुआ hai..aur उसने usladki(Aaradhna) के बारे में भी बता दिया.

फिर 2 दिन बाद रवि और उस लड़की की मुलाक़ात हुई..

रवि: कैसी हो? अब तो कोई दर नहीं हैं ना..

वो लड़की: nahi..theek हूँ.

Ravi…bura ना मानो तो तुम्हारा नाम क्या हैं?

वह लड़की: आराधना

रवि: बहुत अच्छा नाम हैं. मेरा नाम रवि हैं और मेरा घर गाँव के दूसरी तरफ हैं.

इतनी छोटी मोती बातों के बाद, दोनों अपने रास्ते निकल जाते hain…aise hi उन दोनों की मुलाक़ात 2-3 बार गाँव में होती हैं और दोनों एक दुसरे को पसंद करने लगते हैं.

हरिया और रत्न को यह बात का पता चल gaya…woh दोनों भी समझ आ gayi..aur वह दोनों संध्या से मिलने उसके घर gaye..Sandhya और आराधना घर पर hi थी.

उनका भी छोटा घर hi था…

जब उन दोनों (हरिया और रत्न) ने आराधना को देखा तो उन्हें बहुत पसंद aayi…sundar जो थी hi..

हरिया: नमस्ते behanji..mera लड़का hi आपकी बेटी को ठाकुर के आदमियों से बचाया था.

संध्या: Ji..mujhe पता chala…beti ने बताया tha..aapka बीटा उस दिन मेरी बेटी को बचता नहीं तो अनर्थ जो jaata...aur उस दिन आपका बीटा आराधना को घर छोड़ कर गया tha..so, उनसे मुलाक़ात भी हो गयी.

हरिया: और यह रत्न रवि की माँ.

संध्या: जी Namaste…main आराधना की (सौतेली) माँ हूँ.

ऐसे hi थोड़ा हाल चाल पूछने के बाद

हरिया: बहनजी, रवि और आराधना एक दुसरे को पसंद करते हैं.

संध्या: थोड़ा आश्चर्य se..mujhe पता नहीं हैं.

हरिया: कोई बात nahi..aap एक बार अपनी बेटी से भी पूछ लीजिये.

संध्या: ठीक हैं.

हरिया: हम चाहते हैं की रवि की शादी आराधना से हो..

संध्या: जी थोड़ा वक़्त दीजिये mujhe…aapne hi मुझे बताया हैं की वह दोनों एक दुसरे को चाहते hain...lekin मुझे भी अपनी बेटी से बात करनी हैं और उसकी राय भी लेनी हैं.

हरिया: ok behanji…jaldi से बात कर के हमें बताइये.

संध्या: ठीक हैं.

और फिर हरिया और रत्न चले गए.

उनके जाने के बाद, संध्या ने आराधना से बात ki..to आराधना भी बहुत खुश हो गयी क्यूंकि रवि ने hi उसकी इज़्ज़त बचाइए थी ठाकुर के आदमियों से और उसे रवि भी बहुत पसंद था…(2-3 बार जो मिल चुके थे) और उसकी सहमति दे दी.

संध्या ने हरिया को बात बता di…aur कुछ hi दिनों में दोनों की शादी भी हो गयी. यह बात ठाकुर को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा और आग बबूला हो गया.
 
अपडेट 3:

शादी और सुहागरात:

शादी गाँव में hi हो गयी और गाँव के कुछ लोगों भी उस शादी में शामिल हुए.

जब यह बात ठाकुर को पता लगा तो उसके कानो से खून निकलने लगा (अस ा मेटाफर फॉर बीइंग वैरी एंग्री).

शादी के समपन्न के बाद आराधना और रवि को रत्न और सुधा दोनों ने अच्छे से स्वागत करते हैं और साड़ी फॉर्मलिटीज पूरी करते हैं.

रवि के कुछ दोस्त भी उसके साथ घर आये थे.

दोस्त 1: तेरे तो मजे हैं आज यार..

दोस्त 2: bhai…bhabhi का ख्याल रखना..

रवि: अबे चुप करो बे…

ऐसे hi छेड़ छड़ के बाद वह लोग भी चले जाते हैं और घर में सिर्फ घर वाले hi रह जाते हैं.

रात को सब लोग मिलकर खाना खाते हैं और रत्न और सुधा आराधना को उसके कमरे में ले जाते हैं जो की फूलों से सजा हुआ tha…kyunki आज उनकी सुहागरात थी..

आराधना सुहाग के लाल जोड़े में बहुत सुन्दर दिख रही thi…jheel सी नशीली आँखें, लाल सुर्ख होंठ जो लिपस्टिक में बहुत खूबसूरत लग रहे the…laal रंग की साड़ी, टाइट ब्लाउज जो उसकी चूचियों को और भी कामुक बना रहे the…aur बिस्तर पर बिठा कर दोनों चले जाते हैं. आराधना अपना पल्लू सर पे रख कर अपना चेहरा छुपा लेती हैं. आराधना का दिल जोरो से धड़क रहा tha…use कुछ समझ थी की सुहागरात में क्या होता hain..uski कुछ सहेलियों ने बातों में बताया था.

थोड़ी देर बाद रवि भी कमरे में आता हैं और दरवाजा बंद कर देता हैं और पलंग पर जा कर आराधना के पास बैठ जाता हैं…

आराधना बहुत शर्मा रही थी..

रवि: जान, तुम तो खुश हो naa..is शादी से..

आराधना: जी haan..bahut खुश हूँ.

रवि उसकी आँखों में देखते हुए उसका माथा चूम लेता hain..aur उसकी गाल पे एक चुम्मी देता hain…Aaradhna सिसक पड़ती हैं और aah…ki सिसकी निकल जाती हैं..

रवि: Jaan..abhi तो शुरू हुआ hain..aur अभी से सिसकी…

आराधना: dhat..aap भी naa…yeh बोल कर आराधना अपना चेहरा रवि के सीने में छुपा लेती हैं.

रवि आराधना की कान की बाली निकल देता हैं और कान की लौ को चूम लेता hain…Aaradhna सिसक पड़ती हैं.

कान की दोनों बाली निकल कर रवि अपने हाथों से आराधना का चेहरा पकड़ता hain..aaradhna आँखें बंद कर लेती हैं.

रवि: Jaan..aankhen खोलो ना…

आराधना: शर्मा जाती हैं पर अपनी आँखें खोल लेती हैं..

रवि: क्या क़यामत लग रही ho…main तो मर jaaoon..tere हुस्न की देदार पे..

आराधना: अपना हाथ रवि की मुँह पर रख kar..mare आपके दुश्मन.

रवि मुस्कुरा देता हैं और अपने होंठ आराधना के होंठ से मिला देता हैं. यह किश दोनों का पहला किश tha..aur दोनों उसमें मगन हो जाते hain..jaanu दिल करता हैं तुम्हारे होंठों का रास पी lo…bahut रसीले लग रहा हैं..

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आराधना: तो पी लो naa…kisne मन किया hain…yeh तो अब तुम्हारे hi हैं.

रवि कभी ऊपर के होंठ तो कभी नीचे को होंठ चूसता hain…Aaradhna भी उसका साथ देती hain..yeh किश 5-10 मं तक चलता हैं..

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जब वह दोनों अलग होते हैं तो दोनों को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी…

15 सेक् नज़ारे मिलाने के बाद फिर से दोनों के होंठ जुड़ जाते हैं और इस बार रवि अपनी जीभ ाआराधना की मुँह में दाल देता hain..aaradhna की उसकी जीभ का स्वागत करती हैं और अपनी जीभ से मिला लेती हैं.

रवि अपना एक हाथ ब्लाउज के ऊपर से चुकी मसल देता हैं तो आराधना की सिसकारी निकल जाती हैं… आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… पलज़्ज़ज़ आराम से…..

रवि: jaanu…aaj के दिन (रात) आराम हराम हैं..

आराधना यह बात सुन कर शर्मा जाती हैं.

Jaanu…aaraam से hi तो कर रहा hoon…aur आराधना अपनी आँखें बंद कर लेती हैं.

रवि फिर उसकी गार्डन को चूमते हुए नीचे की तरफ बढ़ता हैं..

और फिर धीरे धीरे ब्लाउज के हुक्स खोल देता हैं और लाल ब्रा को देख कर जिसमे उसकी चूचियां बाहर आने को तड़प रही thi..Ravi भी आहें भरने लगता हैं..

रवि ब्रा के ऊपर से hi बूब्स को किश करता है और आराधना भी तड़प उठती हैं..

रवि उसकी ब्रा को भी खोल कर बदन से अलग कर देता हैं और उसकी चूचियों पर टूट पड़ता hain..pehle एक चुकी पर जीभ फेर कर किश करता हैं और उसको चूमता hain…uttejna में उसके निप्पल खड़े हो जाते हैं जिसे देख कर रवि हलके से उसे काट लेता हैं. आराधना ज़ोर से चिल्लाती हैं… aaaaahhhhhhhhh…aur उसकी छूट भी गीली होने लग जाती hain…uttejna के मारे..

आराधना भी मदहोश होने लगती हैं और रवि उसकी चुकी पर अपना काम कर रहा था..

2 मं बाद आराधना रवि से कहती hain..jaanu..doosri चुकी तुम्हारी सौतें हैं क्या? उसे भी प्यार करो naa….ravi इसकी बात सुन कर चेहरे पर मुस्कान आ जाती हैं और फिर दूसरी चुकी पर भी उसका वही हाल करता हैं…5 मं तक रवि बारी बारी से दोनों चूचियों का रास निचोड़ कर चूसता हैं. फिर अपना मुँह अलग करता हैं तो आराधना देखती हैं की उसकी चुकियाँ लाल हो गयी हैं और उस पर निशान भी पढ़ गए hain..Ravi देख कर मुस्कुराता हैं और कहता hain..baby यह तो लव बिट्स hain..hamaare प्यार की nishani..aaradhna यह बात सुन कर शर्मा जाती hain..aur रवि फिर से अपने होंठ उसके होंठ से जोड़ देता हैं और दोनों में एक ज़बरदस्त डीप किसिंग होती हैं.

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5 मीन्स के किसिंग के बाद रवि नीचे की और बढ़ता hain…aur बढ़ते बढ़ते साड़ी भी उसके बदन से निकल देता hain….aur नाभि पे आ कर चाट था hain….Aaradhna की आअह्ह्ह सिसक निकल जाती hain…aur आराधना रवि के सर पर हाथ रख कर उसे उसके पेट पर दबा देती hain…phir से नाभि पर एक गहरा चुम्बन कर देता hain…aur आराधना की छूट गीली हो जाती हैं…

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रवि और फिर नीचे बढ़ता है और उसकी पेटीकोट का नाडा खोल कर उसे अलग कर देता हैं…

आराधना अभी बिस्तर पर सिर्फ एक सेक्सी पंतय में रह जाती hain..jab रवि उसकी पंतय में छुपी छूट देखता हैं तो वह भी आह भर लेता hain…woh छूट को पंतय के ऊपर से चूम लेता hain…aur जीभ से ऊपर से नीचे तक चाट ता hain…Aaradhna सिहर उठती hai…aur… aaaaahhhhhhhhh…ki आवाज़ निकल जाती हैं आराधना के मुँह से..

रवि: jaanu…mast खुंभु आ रही hain…aur एकदम रसीली लग रही हैं.

आराधना कए बात सुन कर शर्मा जाती हैं और अपना चेहरा हाथों में छुपा लेती हैं.

रवि फिर से छूट को पंतय के ऊपर से चाटने के बाद पंतय को निकलने की कोशिश करता हैं. आराधना उसकी मदद करती हैं और अपनी गांड उठा के उसकी पंतय निकलने में मदद करती हैं.

एकदम साफ़ और चिकनी छूट देख कर रवि के मुँह में पानी आ जाता हैं और अपनी जीभ लगा कर फिर से चूम लेता हैं… (साथ में उसका लुंड भी एकदम टाइट हो जाता हैं).

आराधना: aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh…………. ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह......

रवि छूट चाट ते समय अपनी ऊँगली डालने की कोशिश करता hain..but ऊँगली घुस नहीं पाती क्यूंकि छूट बहुत टाइट थी..

रवि पूरी शिद्दत के साथ छूट ऊपर से नीचे तक उसे अपने होंठ में भर लेता hain…Aaradhna ज़ोरो से सिस्क्यान लेती हैं… रवि का सर पकड़ केर जोर से टैंगो के बीच दबा देती और जोर चिल्लाती हैं.. oooohhhhhhhhhhhh....,

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रवि आराधना की छूट को कहते जा रहा था और वह उत्तेजना से कामुक अंदाज मैं आवाजे निकल रही थी और 5 मीन्स में उसका पानी निकल जाता hain…Ravi पूरा पानी पी जाता हैं और जीभ से चाट भी लेता हैं.

फिर आराधना के ऊपर आ कर एक गहरा किश करता हैं और उसका स्वाद आराधना को चकता hain..aur पूछता हैं की तुम्हारा टास्ते कैसा हैं? आराधना शर्मा जाती है और अपनी आँखें नीचे कर लेती हैं क्यूंकि यह पहली बार था उसके लिए..

रवि: अपना अंडरवियर निकल के फेक देता हैं और कथा हैं जानू अब मुझे भी थोड़ा खुश कर दो

आराधना: क्या मतलब?

रवि आराधना का सर पकड़ कर अपने खड़े लुंड के तरफ ले जाता हैं..

आराधना: मैंने कभी पहले नहीं किया है

रवि: तो क्या हुआ jaanu…zindagi में हर चीज़ पहली बार करना पड़ता हैं.

आराधना: ठीक hain…aaj के शुभ दिन में आपको निराश नहीं करना चाहती hoon..yeh बोल कर आराधना तरय करती हैं. बड़ी मुश्किल से लुंड के टोपे पर एक हल्का सा किश करती हैं.

रवि: haan..aise hi करो और थोड़ा मुँह के अंदर लो ना जानू..

आराधना हिचकिचाती हैं पर कोशिश करती hai…Ravi देख कर अपना लुंड उसके मुँह में ठूसने की कोशिश करता hai…Aaradhna ख़ास देती है और अपना मुँह हटा लेती है.

रवि: सॉरी jaanu…main बहक गया tha…phir से लो लो…

आरधना इस बार अच्छे से लुंड को मुँह में लेकर चूसती hai…aur देखते hi देखते पूरा लुंड मुँह में ले लेती हैं और खूब मजे से चूसती हैं.

रवि: jaanu..kya मस्त चूसती ho…aise hi karo…a aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh…………. ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह......

ऐसे hi करीब 10 मं तक लुंड चूसै के बाद रवि कहता हैं…

मेरा निकलने वाला hain…yeh बोल कर रवि आराधना के मुँह में अपना वीर्य छोड़ देता हैं.

आराधना खास्ती हैं और अपना मुँह हटाने की कोशिश करती है लेकिन रवि अपना हाथ उसके सर के पीच ले जाकर उसका सर लुंड में दबा देता hain…aur आराधना को पूरा पानी पी जाना पड़ता हैं.

आराधना अपना मुँह साफ़ करते हुए और थोड़े गुस्से se…kya कोई ऐसा भी करता हैं क्या?

रवि थोड़ा हस्ते hue..maja आया ना tumhe….aaradhna अपना सर नीचे कर के है देती है..

और वह उसके छाती के ऊपर सर रख कर सो जाती है और उसके छाती पर हल्का सा चपेट मारती हैं.

रवि फिर से उसके होंठ चूमता hai…choomte हुए चुकी दबा देता है और आराधना का हाथ पकड़ कर अपने लुंड पर रख देता हैं और आगे पीछे करने को कहता हैं..

फिर रवि आराधना के दोनों टांगो को अपने सर के तरफ कर के उसे अपने चेहरे पे बिठा लेता हैं और फिर से आराधना के छूट पर हुम्ला बोलता हुआ चाट लेता हैं…

आराधना: तुम्हे यह कैसे पता?

रवि: मतलब?

आराधना: यह पोजीशन

रवि: jaanu…sab कुछ बताया नहीं जाता hain…ho जाता हैं…

आराधना रवि का सर पकड़ कर अपनी छूट में दबा देती हैं और रवि मजे से चाटने में मगन हो जाता hain…isi बीच आराधना एक बार फिर से झाड़ जाती हैं और हांफने लगती हैं.

धीरे धीरे रवि का लुंड फिर से खड़ा हो जाता है और इस बार आराधना से कहता हैं की रेडी हो जाओ..

आराधना को सुला कर उसके ऊपर चढ़ जाता हैं और अपना लुंड आराधना की छूट पर रगड़ता hain…aaradhna सिसकियाँ लेती है और कहती han..jaanu अब सहा नहीं जा रहा hain…daal दो..

रवि: क्या डालूं और कहाँ डालूं

आराधना: jaanu..kyun तड़पा रहे हो..

रवि: बोलो naa…ab हमारे बीच कैसी शर्म?

आराधना: अच्छा baba…apna लललललूण्ड मेरी कक्कछूत में दाल दो.

रावो: यह हुई ना बात.

रवि लुंड घुसा ने की कोशिश करता हैं पर लुंड जाता नहीं और फिसल जाता हैं..

आराधना की छूट भी पानी पानी हो रही थी..

रवि फिर से तरय करता hai..lekin फिर भी अंदर नहीं जाता..

इस बार रवि अपने लुंड को पकड़ कर ठीक से सेट करता है और एक धक्का देता hain…lund 2 इंच अंदर चले जाता है और आराधना की चीख निकल जाती hai…oooh…aah…nikal lo..dard सहा नहीं जा रहा हैं..

रवि को पता था की पहली बारी दर्द hoga..so, इसीलिए इस बार रवि आराधना के होंठ जैम के चूसता हुआ एक ज़बरदस्त धक्का मारता है और लुंड और 3 इंच अंदर चला जाता hain..Aaradhna चीक नहीं पाती क्यों की रवि ने उसका मुँह जकड के रखा tha…usko बहुत दर्द होता हैं जो रवि को दीखता हैं…

ाआराधना: पूरा हो गया हैं क्या?

रवि: nahi..thoda और बचा हैं.

हु थोड़ी देर ऐसे hi रहता हैं और फाइनली फिर से एक जैम के शॉट मारता हैं और उसका लुंड पूरा अंदर चले जाता hai…aaradhna को बहुत दर्द होता है और उसकी आँखों से आसूं आ जाते hain..kyunki रवि ने उसका मुँह बंद किया हुआ tha..isiliye उसकी आवाज़ उसके गले में hi रह जाती है.

रवि थोड़ा देर रुक जाता और उसके आसूं पी जाता है और कहता hain..janu हो gaya..jo दर्द होना tha..ho gaya…ab मज़े hi मज़े हैं.

(आराधना को अब ारु कह कर लिखूंगा)

ारु भी अपने साँसें संभालती है और ऐसे hi रहती hain…Ravi से कहती हैं की वह ऐसे hi rahe…aur ना hile….kuch देर के बाद जब उसका दर्द थोड़ा काम होता हैं तो रवि की इशारा करती है और हाँ में साल हिला देती है.

रवि इशारा समझ जाता है और धीरे धीरे लुंड को अंदर बहार करना शुरू कर देता hain..choot गीली होने की वजह से लुंड भी थोड़ा आसानी से अंदर बहार होता रहता hain..thodi देर बाद ारु भी मजे लेने लगती हैं और धीरे धीरे चुदाई की राफ्तेर पकड़ लेता हैं ravi..uski छूट भी गीली होने के कारण लुंड आसानी से अंदर बहार हो जाता hain…aise hi 15 मं तक जैम के चुदाई कर्त है हैं.

उसके बाद रवि ारु को कहता हैं की वह उसके ऊपर आ jaaye…Aaru को समझ नहीं आता हैं तो रवि बगल में लेट जाता हैं और बड़े प्यार से ारु को उठा कर अपने लैंड पर रखता हैं. ारु को अब समझ आती हैं और थोड़ा थोड़ा कर के उसका लुंड अपने छूट में लेती हैं. जब सेट हो जाती हैं तो ऊपर नीछे होने लगती हैं. ऐसा करने से उसकी बड़ी बड़ी चूचियां हिलती रहती हैं जिसे देख कर रवि अपना मुँह एक चुकी पर रख कर चूसता हैं और दुसरे चुकी को दबाने लग जाता हैं.

10 मं की चुदाई के बाद रवि कहता हैं की उसका भी पानी निकलने वाला hain…isi बीच ारु 2-3 बार झाड़ जाती हैं.

रवि भी खुद को रोक नहीं पाटा और लुंड छूट से निकल कर उसके पेट पर झाड़ जाता हैं.

दोनों हफ्ते हुए बगल में लेट जाते है एंड ारु उसके सीने में अपना सर रख देती हैं.

रवि: मज़ा आया के नहीं?

ारु: मज़ा तो aaya…aur ख़ुशी भी हैं की आपने मुझे लड़की से औरत बना hi दिया हैं…

रवि: अभी कहाँ..

ारु: मतलब?

रवि: मतलब जब तक तुम्हारे तीनो छेद खुल ना जाए, तुम पूरी औरत नहीं बनोगी.

ारु को बात समझ नहीं आती तो रवि की तरफ अपना मुँह कर के सवालिया नज़रों से देखती हैं.

रवि हस्ता है और अपना हाथ उसके गांड पर रक् कर धीरे से कान में कहता hai..yeh वाला छेद.

ारु सेहम जाती है और कहती hain..naa बाबा naa..main नहीं करने doongi..bahut शरारती हो..

रवि कहता hai..dekhte हैं..

इसी तरह रात को एक बार रवि फिर से ारु को छोड़ता है और दोनों सो जाते हैं.
 
अपडेट 4:

सुबह ारु जल्दी से उठ जाती हैं और बाथरूम जाने के लिए जब चलती हैं तो उसे बहुत दर्द होता hain..kisi तरह वह बाथरूम जाती hain..aur फ्रेश हो कर नए साडी में रूम के बहार आ कर किचन में चली जाती हैं चाय बनाने के liye..langdaate हुए चलती हैं.

इसी बीच रत्न भी किचन आ जाती है और ारु को लंगड़ाता हुआ देख कर उसके चेहरे पर मुस्कान आ जाती हैं.

ारु से पूछती hai..beti कैसे हो? दर्द कैसा हैं…

ारु शर्मा जाती है और कुछ नहीं कहती.

ारु चाय लेकर कमरे में जाती हैं और रवि को जगाती hain..Ravi सोया रहता हैं और उठता नहीं हैं. ारु शरारत से उसकी हाथ की ऊँगली गरम चाय में रक्तही हैं. रवि आह कर के झट से उठ जाता हैं और ारु को देखता hain…aur उसको पकड़ कर अपने नीचे कर लेता हैं..

ारु सिसकियाँ लेती हैं और कहती हैं की रात को जो किया उससे मन नहीं भरा क्या.

रवि कहता hain…itna जल्दी मन कैसे भरेगा जब इतनी सेक्सी बीवी साथ में हो तो.

ारु शर्मा जाती हैं और छूटने की कोशिश करती हैं.

रवि उसको किश करने लगता हैं बूत वह कहती हैं की सुबह सुबह चालु हो gaye..pehle जा कर ब्रश करके आओ..

रवि नाराज़गी से बाथरूम जा कर फ्रेश होता हैं और रूम में आता हैं तो तब तक ारु भी जा चुकी होती हैं.

वह भी रूम से बहार आता हैं और सब के साथ मिल चाय नाश्ता करते हैं.

रवि वापस रूम में जाता हैं और ारु को बुलाता हैं की उसे कुछ चीज़ मिल नहीं रही हैं.

ारु कमरे में आती हैं तो रवि उसको पीछे से पकड़ लेता हैं और शरारत भरी अंदाज़ में कहता हैं मुझे जो चीज़ नहीं मिल रही हैं अब मिल गयी hai…use बाहों में भर लेता हैं और दोनों के बीच में गहरा किश होता हैं.

दोनों की साँसें उखड जाती हैं जब वह अलग होते हैं तो. ारु भाग कर बहार चले जाती हैं.

इसी तरह लोग अपने काम में व्यस्त हो जाते hai…Ravi और राजू खेत में काम करने चले जाते हैं और हरिया भी अपने काम पर निकल जाता हैं.

रत्न, ारु और सुधा भी अपने घर के काम में व्यस्त हो जाते हैं.

एक हफ्ते बाद हरिया और रवि कुछ सामान लेन के लिए शहर की तरफ चल देते hain..yeh कहकर की वह शाम तक घर आ जाएंगे…

राजू अपने दोस्तों से मिलने बहार चला जाता हैं.

राजू अपने दोस्तों से गप्पे मार रहा होता हैं और दोहपर को एक लड़का भागता हुआ राजू के पास आता हैं और कहता हैं की bhaiyya…tumhaare पिताजी और भाई का एक्सीडेंट हो गया हैं और जल्दी चलो.

राजू और उसके दोस्त अपना सब काम छोड़ कर शहर की और भागते हैं…

जब वह रास्ते में जा रहा होता हैं तो बहुत भीड़ दिख रही होती हैं..

राजू घबराते हुए जाता हैं तो देखता हैं की हरिया और रवि की लाश पड़ी हुई hai..aur उन दोनों के जिस्म पर बहुत चोट भी दिखाई देते हैं.

राजू का दिल टूट जाता हैं और रट हुए उन लाशों को देखता हैं.

गाँव में वह लड़का भी राजू के घर जा कर यह समाचार देता hain…ghar वाले बहुत परेशां हो जाते हैं और उनको भी बहुत चिंता होती हैं.

गाँव वाले राजू की मदद करते हैं और दोनों की लाशें घर ले आते हैं..

उन लाशों को देख कर रत्न और ारु जोर जोर से चिक्ति चिल्लाती हैं और खूब रोटी हैं. (और सुधा भी).

राजू और उसके दादाजी का भी एहि हाल tha…ghar में मातम चा जाता हैं

राजू को समझ में नहीं आता हैं की क्या करना hai..kaise करना hain..aur यह सब कैसे hua…uska दिमाग काम करना बंद कर देता हैं..

किसी तरह गाँव वाले उनको संभालते है और आखिर में उनका क्रिया करम कर देते हैं.

ारु की सौतेली माँ भी यह सुन कर यहाँ आ जाती हैं और वह भी बहुत दुखी हो जाती है और सब को पकड़ कर खूब रोटी हैं. लेकिन होनी को कोई नहीं ताल सकता…

उन दोनों का क्रिया करम कर के राजू घर वापस आ जाता हैं और घर में दुःख के बदल चा जाते हैं…

किसी को कोई काम करने का मन नहीं करता हैं…

ऐसे hi कुछ दिन बीत जाते हैं…

इसी बीच ारु को उसकी सौतेली माँ फ़ोन कर के बताती हैं की उसके घर में हादसा हुआ हैं.

ारु एकदम घबरा जाती हैं और राजू को लेकर उसके घर चली जाती हैं..

घर जा कर देखते हैं की उसका घर जल गया हैं और सब कुछ राख हो गया हैं..

यह सब देख कर ारु और राजू को बहुत बुरा लगता हैं…

ारु जब अपनी माँ से पूछती हैं की यह सब कैसे hue..to संध्या कहती हैं की वह थोड़ा काम करने घर से बहार गयी thi..aur जब वापस आयी तो घर तब तक नष्ट हो चुक्का था..

राजू को यह बात ठीक नहीं lagi..lekin इस बात पर उसने ज़्यादा ध्यान नहीं दिया क्यों की अब तक वह भी हादसे से बहार नहीं आया था.

संध्या भी रोने लगती hain..aur ारु से कहती हैं की अब उसके लिए रहने के लिए घर भी नहीं हैं.

राजू कहता hain..maaji आप ऐसे बातें ना kijiye….ab से आप भी हमारे साथ, ारु के साथ हमारे पास hi rahegi..Sandhya की आँखें भर आती हैं और वह राजू को अपने गले से लगा लेती हैं.

संध्या को अच्छा नहीं लगता बूत वह कुछ नहीं कर पाती है और आखिर में मान जाती हैं.

संध्या के बचे कूचे सामान राजू ले लेता हैं और तीनो राजू के घर आ जाते हैं.

घर आने पर रत्न भी उसका स्वागत करती है और उसे अपने गले से लगा लेती hai..aur कहती hai..samdhan ji…bura hua..lekin हम हैं naa..aapko चिंता करने की ज़रुरत नहीं hain..ab से आप हमारे साथ hi रहोगी.

साध्य अपने आसूं पॉच कर हां में जवाब देती हैं.

दुसरे दिन राजू पुलिस कंप्लेंट करने की सोचता हैं बूत नहीं करता.

इन सब हादसाओं के कारन राजू के दादाजी की हालत ख़राब हो जाती हैं और उन्हें एक दिन दिल का दौरा पद जाता हैं.

राजू जल्दी से दादाजी को हॉस्पिटल में एडमिट करवाता हैं लेकिन उनकी तबियत ख़राब hi रहती hain..Ratna और बाकी घर वाले भी परेशान हो जाते हैं और हु भी हॉस्पिटल आ जाते hai…unka भी बुरा हाल था….

रात हो जाती हैं तो राजू रत्न से कहता हैं की maa..aap लोग घर jaao…yahan हॉस्पिटल में रुकना अच्छा नहीं hain…main रात को रुक जाता हूँ. डॉक्टर को कोई ज़रुरत होगी तो मैं देख लूँगा.

उनका जाने को दिल नहीं करता बूत राजू की बात मान कर सभी महिलायें घर चली जाती हैं और राजू वहीँ हॉस्पिटल में रह जाता हैं.

रात को उनकी हालत और ख़राब हो जाती हैं और डॉक्टर राजू से कहता हैं की दादाजी का बचना मुश्किल हैं और उनके पास कुछ चाँद लम्हे हैं..

डॉक्टर कहता हैं की तुम दादाजी से मिल लो…

राजू रोटा हुआ दादाजी के पास जाता हैं और उनका हाथ पकड़ लेता हैं.

दादाजी उसे इशारा करते हैं और उसके पास आने को कहते हैं.

राजू दादाजी के बिलकुल पास आ जाता hain…dadaji राजू के कान में कहते हैं: बीटा मेरे पास वक़्त बहुत काम हैं और अब मेरे जाने का समय आ गया हैं. घर में मेरे तकिये के नीचे एक चिट्टी (लेटर) hain..use पढ़ लेना और उसमे जो लिखा हैं वह करना…

दादाजी इतना बोल कर अपना डैम तोड़ देते हैं.

राजू डॉक्टर को बुलाता हैं. डॉक्टर भी जांच कर के राजू को बताते हैं की दादाजी दुनिया छोड़ कर चले गए हैं.

जब यह बात घर में पता चलता हैं तो सब लोगों की हालत और भी ख़राब हो जाती हैं…

घर का माहौल और भी ग़म के साये में डूब जाता हैं..

राजू के कुछ दोस्त भी उसके घर आकर उन सब को संभालते हैं…

दिन ऐसे hi गुज़र जाते हैं लेकिन घर में एकदम मायूसी चा जाती hain…kisi को कोई काम करने की इच्छा नहीं hoti..lekin कुछ किया भी नहीं जा सकता था…

समय अपने रफ़्तार से चलने लगता हैं और धीरे धीरे सिचुएशन थोड़ा नार्मल होता हैं.

एक दिन जब राजू खेतों में काम कर रहा होता hain..to उसे अपने दादाजी की बात एकदम से याद आती hain…aur वह दौड़ते हुए घर आ जाता हैं.

रत्न और घर की बाकी महिलायें उसे दौड़ते हुए घर आते देख कर उन सबका भी दिल घबराने लगता हैं.

रत्न जब उससे पूछती हैं तो राजू कुछ नहीं kehta..aur अपने कमरे में चला जाता हैं.

जब घर थोड़ा शांत हो जाता हैं तो राजू चुपके से दादाजी के कमरे में जाता हैं और उनके तकिये से वह चीटी लेकर अपने रूम में आ जाता हैं.

छिट्टि में क्या लिखा hain..woh अगले अपडेट में जानेंगे..
 
अपडेट 5:

राजू वह खत को लेकर अपने रूम में जाता हैं और रात को जब सब सो जाते हैंतो छिट्टि निकल कर पढ़ना शुरू करता हैं. कंटेंट्स ऑफ़ थे लेटर: (रिटेन बी दादाजी)

बीटा, यह खत मैं बहुत समझदारी और जिम्मेदारी के साथ लिख रहा हूँ. जब तू यह खत पड़ेगा तो मैं इस दुनिया में नहीं rahoonga….mujhe पता hain..ghar में बहुत समस्याएं hain…aur दुःख में सब डूबे हुए हैं.

तुम एक काम karo…yahan से क्सक्स कंस में गुरूजी रहते hain..jaa कर उनसे मिलो.

उस गुरूजी को हम सब (तुम्हारे माता पिता भी) मानते hain…woh hi तुम्हारी समस्याओं का समाधान भी बताएँगे..

तुम शायद विश्वास नहीं karoge..lekin मेरी यह आकृ बात मान लो और उस गुरूजी से मिल लेना.

मेरी एहि आखरी इच्छा हैं की तुम घर के लोगों को सम्भालो, उनको प्यार और “खुशियां” दो. (दादाजी ने यह “खुशियां” वर्ड नोर्मल्ली लिखा tha..jo नार्मल वे में सब मीनिंग समझते हैं) और उनकी रखवाली करना.

सदा सुखी raho…mera आशीर्वाद तुम्हारे साथ हमेशा रहेगा.

एन्ड ऑफ़ थे लेटर.

राजू यह लेटर पढ़ कर उसका दिमाग चक्र जाता hain…use समझ नहीं आता की क्या सच हैं और क्या jhoot…usko यह डाउट भी आता हैं के कहीं उसके दादाजी उसका चूतिया तो नहीं काट दिए hain…lekin जब वह खत का 1सत लाइन याद करता हैं (“ज़िम्मेदारी”) तो उसका मन थोड़ा शांत हो जाता hain..lekin फिर भी यह डाउट उसके मन में रह जाता हैं.

वह लेटर बार बार पड़ता hain..aur यह कन्फर्म करने के लिए की दादाजी ने सही कहा हैं, उसको एक आईडिया आता हैं.

अगले दिन वह घर में खेत जा रहा हैं बोल कर निकल जाता hain…shaam को जब वह घर आता hain..to फ्रेश हो कर अपनी माँ से चाय मांगता hain….Ratna भी चाय बना कर उसको देती hain..uska चेहरा भी थोड़ा उदास hi tha…aakhir वह हरिया के दूर हो जाने के ग़म से उभर कर नहीं आयी थी.

राजू कुछ सोचता हैं और अपनी माँ से कहता हैं..

राजू: माँ, यह गुरूजी कौन हैं?

रत्न: रत्न यह प्रश्न सुन कर एकदम सरप्राइज हो जाती hain..usne कभी नहीं सोचा था की राजू कोई ऐसी बात पूछेगा..

Ratna:ji beta..yeh कैसा सवाल हैं?

राजू: nahi…aise hi पूछ liya…aaj दोस्तों के साथ बैठा था तो उस गुरूजी का जिक्र हुआ. दोस्त कह रहे थे की गाँव के लगभग सभी लोग उनको मानते hain…isiliye आप से पूछ रहा हूँ.

रत्न: हम उन्हें जानते hain..woh क्सक्स जगह पर रहते hain..tumhaare बापू और मैं भी उन्हें मानते हैं. लेकिन अचानक यह बात तुमने कैसे पूछ लिया?

रत्न: लेकिन उनके बारे में इस घर में बात करके बहुत दिन हो गए…

राजू: जी maa…koi nahi…mujhe अचानक याद आया तो पूछ liya..isse ज़्यादा और कुछ नहीं.

रत्न: जी बीटा..

और फिर रत्न और राजू अपने कमरे में सोने चले जाते हैं.

राजू को अब विश्वास हो गया था की उसके दादाजी ने वह खत सही में लिखा हैं (खत में लिखा था की राजू के माता पिता उस गुरूजी पर विश्वास करते हैं). एहि आईडिया राजू को आया था की अपने माँ से कन्फर्म kare…(maanne वाली baat)..ab उसे कन्फर्म हो गया tha…aur उसने सोच लिया था की वह गुरूजी से जल्दी hi मिलने जाएगा.

2-3 दिनों के बाद वह घर में कुछ काम हैं बोल कर गुरूजी से मिलने चला जाता हैं.
 
अपडेट 6:

2-3 घंटे का सफर तय करने के बाद राजू गुरूजी के आश्रम पहुँच जाता हैं.

गुरूजी थोड़ी देर बाद राजू से मिलने आते हैं.

गुरूजी: आओ beta…main तुम्हारा hi इंतज़ार कर रहा था.

राजू यह बात सुन कर सरप्राइज हो जाता हैं.

राजू: ji..main समझा नहीं.

गुरूजी: एहि की मैं जानता हूँ (था) की तुम मुझसे ज़रूर मिलने आओगे.

राजू: आपको कैसे पता था?

गुरूजी: खैर, वह छोडो और कहो, कैसे हो?? क्या समस्या हैं?

राजू: ji….mere दादाजी अब इस दुनिया में नहीं rahe..aur उन्होंने मुझे बताया था की मैं आपसे मिलने आऊं.

गुरूजी: सुन कर बहुत दुःख हुआ…

राजू: पिछले 1-2 महीनों से घर में सब बहुत दुखी हैं और घर में सब पर मायूसी छायी हुई हैं. पिताजी और भाई भी अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं. समझ में नहीं आ रहा हैं की मैं क्या करून.

गुरूजी: देखो beta…mujhe पता हैं की तुम समस्या से जूझ रहे ho…aur उस समस्या का समाधान भी हैं.

राजू: क्या है वह समाधान?

गुरूजी: समाधान थोड़ा मुश्किल हो सकता हैं लेकिन तुम कर सकते हो.

राजू: क्या?

गुरूजी: दो ऑप्शन hain...pehla यह की तुम अपना घर, ज़मीन बेच कर अपने परिवार के साथ कोई दुसरे गाँव चले जाओ...

राजू: कुछ सौथा hua...aur दूसरा समाधान?

गुरूजी: दूसरा समाधान यह हैं की तुम यहीं raho..apni समस्याओं का मुक़ाबला करो और उनसे उभर कर आओ...

गुरूजी: तुमको सब का ध्यान रखना हैं, उनको दुश्मनो से बचाना हैं और उनको “खुशियां” भी देना हैं.

राजू: ध्यान और रक्षा तो मैं करूंगा hi…aur समझता भी hoon..aakhir वह सब मेरे परिवार के लोग hain..lekin खुशियां कैसे दे सकता हूँ?

गुरूजी: देखो beta…tum घर के सब लोगों से सम्भोग karo..unhe खूब सारा प्यार do..unko अपने बच्चे का माँ banaao…kushiyaan अपने आप आ jaayega….yaad rakho…aurat को सब से ज़्यादा कृषि तब होती हैं जब वह माँ बन जाए.

राजू: यह कैसे संभव हैं? वह सब मेरे घर के लोग हैं और मैं hi उनसे सम्भोग करून? यह तो समाज के खिलाफ हैं और ऐसा होता भी नहीं हैं.

गुरूजी: हाँ beta..tumne सही सोचा hain…..lekin तुम (और घर वाले) जिस समय से अभी गुज़र रहे ho..raasta अपने आप निकल आएगा...

राजू: फिर भी..

गुरूजी: उनको मन की शान्ति तब होगी जब उनके ज़िन्दगी में अच्छा बदलाव aayega..doosre गाँव जा kar...wahan बस कर दिन तो गुज़र jaayenge..lekin उन्हें हमेशा चिंता भी सताते rahegi...lekin बदलाव कुछ नहीं होगा..

गुरूजी: उनके ज़िन्दगी में बदलाव तब होगा जब वह माँ banegi..chehre पे रौनक aayegi..main जानता hoon…thoda मुश्किल हो सकता hain..lekin तुम्हे भी आभास होगा जब तुम खुशियां उनके चेहरे पर dekhoge…ki तुमने उन्हें खुशियों से आबाद कर दिया हैं.

गुरूजी: और दूसरी baat…yeh भी याद रखो की जब भी तुमको परेशानी होगी या फिर तुम कोई मुसीबत से गुज़र रहे honge..to तुम्हारे घर वाले hi तुम्हे सहारा देंगे. दुनिया में ऐसे बहुत hi काम खुश नसीब होते है जिनको “समाज” सहायता करता हैं उनके बुरे दिन में.

गुरूजी: जब घर में खुशियों और शांति का माहौल रहेगा तो तुम्हे भी मन की शान्ति मिलेगी और तुम अच्छे से सोच समझ कर अपना आगे के कदम ले सकते हो.

राजू: “आगे के कदम” से क्या मतलब हैं?

गुरूजी: मैंने कहा था naa…ki तुम्हे अपने घर वालों की रक्षा करना hain…isi लिए तुम्हे वह कदम भी सोच समझ कर लेना हैं.

राजू: मैं समझा nahi..thoda खुल के विस्तार से बता सकोगे क्या गुरूजी?

गुरूजी: विस्तार से तो नहीं कह sakta..but इतना ज़रूर कहूंगा की तुम्हे अपने परिवार को ठाकुर के चंगुल से बचाना hain…tumhe उस से खतरा हो सकता hain..wahi तुम्हारे खुशियों में बाधा डालने वाला हैं और घर के लोगों को नुक्सान पहुंचा सकता हैं.

राजू: जी Guruji…main पूरी कोशिश करूंगा की अपने परिवार वालों की हर समय रक्षा करून.

गुरूजी: और कोई समस्या हो तो मुझे bataana…tumhaari मदद करने की कोशिश करूंगा. मुझे अभी बहार जाना हैं कोई काम से.

राजू: जी Guruji..aagya dijiye..aur उनके पेअर छु कर आशीर्वाद लेता हैं

गुरूजी: सदा सुखी raho..aur हमेशा लोगों की भलाई करो.

राजू: जी गुरूजी

और यह कह कर राजू वहां से निकल जाता हैं..

राजू: सोचता hua..main इस गाँव से तो दूर और बहार जा नहीं sakta...ghar वाले भी राज़ी नहीं hone...hamari इस गाँव में बहुत यादें बसी हुई हैं...

वहां से निकल कर उसे (राजू) अपने समस्याओं का समाधान तो मिल gaya..lekin समस्या जितना कठिन समाधान भी उतना hi कठिन था…

उसका सर चक्र जाता hain…apne आप को संभालते हुए वह अपने घर की और निकल जाता हैं.

Author’s ओपिनियन: अस पैर माय एक्सपीरियंस, व्हेन (मैरिड) कपल बिकम पेरेंट्स ेस्पेशलय फॉर थे फर्स्ट टाइम, थे कंसीडर आईटी तो बे “ओने ऑफ़ थेइर” हैप्पीएस्ट मोमेंट्स एंड डेज इन लाइफ एंड ट्रूली ब्लेस्ड तो बिकम पेरेंट्स (इन नार्मल सरकमस्टान्सेस). ी हैवे ुसेड तहत अस ा रिफरेन्स पॉइंट फॉर माय स्टोरी.

होवेवेर, वोउल्ड लिखे तो क्नोव योर ोपीनियंस एंड थॉट्स ों थिस. इवन क्रिटिकल कमैंट्स अरे फाइन. थैंक्स.
 
यू अरे अब्सोलुतेल्य राइट Madam...that's व्हाई ी "स्ट्रेस्ड" ों "मैरिड कपल्स" एंड "नार्मल सरकमस्टान्सेस"..

नाउ ा डेज हैविंग ा चाइल्ड आउटसाइड ऑफ़ वेडलॉक और देय तो ra*e और फॉर जस्ट फन (मय्बे) है बिकम किते prevalent..but (इन माय ओपिनियन) सुच सरकमस्टान्सेस दो नॉट गेट थे "फीलिंग" ऑफ़ ेलशन ों बिकमिंग पेरेंट्स...(& थे सबसेकेंट स्टिग्मा, िफ़ ी मई ऐड थौघ नाउ ा डेज, पीपल हार्डली केयर अबाउट आईटी) अस कपरेड़ तो मन एंड वीमेन (और वाइफ) इन ा वेडलॉक एंगेजिंग इन म्यूच्यूअल कंसेंट/ मैटिंग एंड एंजोयिंग थे फ्रूट्स.

रेस्ट ी कैन असुरे तहत माय स्टोरी विल हैवे म्यूच्यूअल कंसेंट एंड फीलिंग ऑफ़ लव बिटवीन थे चरक्टेर्स.

थैंक्स वैरी मच फॉर योर वैल्युएबल कमैंट्स एंड कॉन्टिनोएड सपोर्ट .
 
अपडेट 7:

राजू दुविधा के साथ आश्रम से निकल कर घर जाने लगता hain…uske मन में बहुत uthal-puthal हो रहा था. क्या करना hain…kaise करना हैं ..उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

Khair..jab वह घर जा रहा tha..to रास्ते में उसने देखा की ठकुराइन का गाडी ख़राब हैं और वह रास्ते में गाडी रुका हुआ हैं और कोई मदद करने वाला नहीं था.

वह फिर भी (बिकॉज़ हे वास् गुड नटुरेद) उनके पास जाता हैं और प्रॉब्लम पूछता हैं. ठकुराइन उस को पहचान जाती हैं (राजू भी पहचान जाता हैं) और उसे कार की प्रॉब्लम बताती हैं. वह किसी तरह प्रॉब्लम समझ जाता हैं और ड्राइवर की मदद से कार को ठीक कर करता हैं. ठकुराइन उस से थोड़ा इम्प्रेस हो जाती हैं और धन्यवाद कह कर वह अपने काम से निकल जाती हैं और राजू भी अपने घर चला जाता हैं.

ठाकुर के घर:

ठकुराइन (अब से उनका नाम hi लिखूंगा काम्य) अपना काम कर के घर चली जाती हैं और अपने काम में अस उसुअल थोड़ा बिजी हो जाती हैं.

ठाकुर गुस्से से घर आता हैं और काम्य को गाली देता हैं और मारता हैं..

ठाकुर: Saali..tumhe किसने कहा था की उस लड़के की मदद le…aur कोई नहीं मिला क्या? (जैसे स्टोरी में लिखा tha…Thakur को राजू के परिवार से खुन्नस hain/thi).

काम्य को कुछ समझ नहीं आता और पूछती हैं की उसने क्या गलती की हैं..

ठाकुर: साली, तू उस छोकरे (राजू) से मदद ली hain..aur कोई नहीं मिला क्या तुझे मदद लेने के लिए.

काम्य कुछ कहना चाहती thi..lekin ठाकुर बहुत गुस्सा हो जाता हैं और उसकी कुछ नहीं सुनता.. मार पीट कर के गाली देकर कमरे से निकल जाता हैं..

काम्य रोटी रहती हैं और अपने किस्मत को कोसती हैं. उसे यह भी पता चल जाता हैं की उस घर में उसकी कोई सुनने वाला नहीं हैं और सब नौकर ठाकुर से डरे हुए हैं और उनके खिलाफ कोई नहीं जाने वाला hain…but उनमे से एक नौकर tha…jise काम्य पर थोड़ा तरस आता हैं और उसकी हालत को समझता था…

काम्य को भी अब लगता हैं की राजू hi उसे बचा सकता hain..is हैवान (ठाकुर) के चुंगल se…lekin kaise….yehi सवाल उसके मन में आता hain..aur वह भी सोचने लगती हैं.

राजू के घर:

राजू वापस घर आ जाता हैं और रत्न जब पूछती हैं इतनी देरी के लिए तो कोई बहाना बना कर फ्रेश होने चला जाता hain…fresh हो कर जब आँगन में बैठा होता हैं तो उस वक़्त घर में सब औरतें अपना काम कर रही होती हैं.

आज पहली बार राजू घरके महिलाआओं को थोड़ा “अलग नज़र” से देखता हैं.. वासना नहीं उसका उनको देखने का नजरिया थोड़ा बदल जाता हैं..

देखता हैं की सब एकदम सुन्दर hain…mast बदन hain…blouse से थोड़ी झांकती हुई chuchiyaan…sapat pet…aur मस्त पिछवाड़ा..

उसके बदन में सिरहन से उठी हैं बूत वह नार्मल hi दिखने की कोशिश करता हैं.

रात को जब रत्न और ारु किचन में खाना बना रही होती हैं तो राजू वहां पानी पीने जाता hain…us वक़्त उसे दोनों बहुत कामुक नज़र आती hain…kaam करते समय थोड़े हिलते हुए chuchiyan..pasine से भीगा हुआ badan…balkhaati हुई kamar…Ratna जब उसकी नज़र ताड़ती हैं तो उसे भी कुछ अलग महसूस होता hain..jab वह राजू के नज़र का पीछा करती हैं तो वह भी सिहर उठी hain…after आल, वह भी बहुत दिनों से प्यासी जो thi…kyunki वह देखती हैं की राजू थोड़ी ललचाई नज़र से उन दोनों के बदन को घूर रहा tha…jo पहले कभी नहीं हुआ था.

रत्न इस बात को नज़र अंदाज़ करती हैं और दोनों अपने काम करने में लग जाते हैं.

रात को जब सब खाने के लिए मिलते हैं तो राजू ारु की सौतेली माँ और मौसी को भी उसी नज़र से देखता hain…dono भी बहुत कामुक नज़र आती हैं. रत्न फिर से नोटिस करती हैं और वह भी थोड़ी काम अग्नि में जलती हैं क्यों की से फिर से राजू का उन लोगों को देखने का नजरिया अलग लगता हैं.

सब खाना खा कर अपने कमरे में सोने चले जाते हैं.

आधी रात को राजू को प्यास लगती हैं तो पानी पीने किचन में जाता hain…woh रत्न की कमरे से गुज़रता हैं तो उसे रत्न के कमरे से कुछ आवाज़ आती हैं.

जब वह धीरे से कमरे में झाँक कर देखता हैं तो उसके होश उड़ जाते हैं. रत्न अपना साड़ी और पेटीकोट उठा कर अपने एक हाथ से छूट को मसलते हुए और दुसरे हाथ से चुकी को दबाते हुए बड़बड़ा टी hai…raju के baapu…itni जल्दी क्यों चले gaye…aur मुझे प्यासी छोड़ gaye…ab मैं क्या करून…

राजू को देख कर उसकी काम ज्वाला भी भड़क उठी हैं.

भले hi रत्न धीरे से बड़बड़ा रही thi..lekin रात के सन्नाटे में राजू को क्लेअर्ल्य बात सुनाई दे रही tha…..raju को गुरूजी के बात याद आती hain…use पता था की घर के महिलायें बहुत दिनों से सम्भोग नहीं किये hain…yaa फिर देसी भाषा में लिखा जाए तो बहुत दिनों से कोई भी चूड़ी नहीं hain..aur सब प्यासी हैं.

फिर उसे कुछ सूझता हैं और वह ारु के कमरे की तरफ चला जाता हैं और वहां भी देखता हैं की सन कुछ ऐसा hi tha...Aaru भी अपने तन की अग्गं में जल रही थी और अपनी चुकी और छूट मसलते हुए रवि का नाम ले रही थी...

राजू के चेहरे पर मुस्कान आ जाती हैं और उसे यह भी आभास होता हैं की गुरूजी की बातों का पालन करने का समय नज़दीक आ गया हैं.

थे सेडक्टिव बेगिंस…
 
अपडेट 8:

अगली सुबह:

अगली सुबह सब अपने कार्य में बिजी the…lekin राजू की “नज़र” में कोई फरक नहीं था..

थोड़ी देर में ारु नाहा कर बहार आती hain…usko देख कर राजू के दिल की धड़कनें रुक जाती hain…woh बहुत hi सेक्सी नज़र आती hai..thoda भीगा बदन, खुले baal..tight blouse..uska थोड़ा मटक कर chalna…lekin राजू को यह देख कर थोड़ा दुःख भी होता है की वह सफ़ेद साडी पहनी हुई है (विधवा जो thi)..use लगता hain…abhi तो वह जवान hai..acche अच्छे रंगों की साडी पहनी chahiye…lekin उसको भी दुःख होता है की उसका भाई अब इस दुनिया में नहीं रहा. वह और पक्का निश्चय कर लेता है की वह घर की हालत को सुधारेगा और सब को खुशियों से भर देगा.

ऐसा hi कुछ दृश्य उसके मौसी का tha…woh भी घर में साड़ी, टाइट blouse…aur बलखाती kamar…Raju के तो होश hi उड़ जाते hai..kyunki वह तलाकशुदा thi…mast मस्त साड़ियां पहनती थी..

रत्न की तीखी नज़र राजू पर पड़ती hain…use समझ में नहीं आता की ऐसा क्यों हो रहा है.

वह अपने कमरे में जाती है और अंदर से राजू को आवाज़ दे कर बुलाती है.

राजू जब अंदर जाता है तो रत्न उसे पूछती है की वह ऐसा क्यों कर रहा हैं?

राजू थोड़ा “भोला” बनते हुए पूछता है..

क्या हुआ माँ? आप क्या पूछ रही हो? मुझे पता नहीं है.

रत्न: झूट मत बोल. मैं तेरी माँ hoon…teri नज़र सब जानती हूँ.

राजू चुप रहता hain…kuch नहीं कहता.

रत्न फिर से पूछती hain…to इस बार राजू के चेहरे पर एक कातिल मुस्कान आ जाती है.

रत्न देख कर हैरान हो जाती है और पूछती है की राजू क्यों है रहा हैं

राजू: सच में बताओं माँ (उसने गुरूजी से मिलने के बाद सोच लिया था की अब शर्म की कोई गुंजाइश नहीं hain…sharmaayega तो वह “आगे” नहीं बढ़ पायेगा).

रत्न: हाँ bata…aisa क्या हुआ है की मैं देख रही हूँ की कल से तेरी नज़र बदल गयी है.

राजू: क्या करून maa…bhagwaan ने तुम सब को बहुत सुन्दर और सेक्सी बनाया है.

रत्न: एकदम हैरानी के saath..yeh क्या कह रहा हैं? पहले तो तू ऐसा नहीं tha..aur ऐसी बातें भी नहीं करता था..

राजू: haan..lekin ab….itna बोल कर रुक जाता है.

रत्न परेशान हो जाती है और फिर से पूछती है राजू से.

राजू: सच में बताओं maa…mujhe थोड़ी शर्म आ रही है. (थोड़ा नाटक भी करता हैं).

रत्न यह बात सुन कर आश्चर्य हो जाती है और कहती है बता…

राजू: धीरे से उसके कान के पास आ kar…maa..maine कल रात ko….(itna बोल कर रुक जाता हैं)

रत्न जब ये बात सुनती है तो उसका मुँह खुला का खुला रह जाता है. पसीने छूटने लगता है उसके चेहरे से..

रत्न: बोल naa..raat को…

राजू: कल रात को पानी पीने जा रहा tha..to तुम्हारे कमरे से कुछ आवाज़ें आयी…

रत्न यह बात सुन कर उसकी दिल की धड़कन रुक जाती hain…kya कहना है उसे समझ में नहीं आता…

वह वहां से बहार आँगन में भाग जाती है और राजू कातिल मुस्कान के साथ वह भी बहार आ जाता है.

वह अपने खेत चला जाता है और काम में बिजी हो जाता है. घर में रत्न एकदम खोई खोई सी रहती है.

यह बात दोनों ारु और सुधा भी देखती है और रत्न से पूछती hai..lekin रत्न बात को ताल देती है.

उधर खेत में राजू जब काम कर रहा होता है तो उसका एक दोस्त उसके पास आता है और मिठाई देता है.

राजू: क्या हुआ? मिठाई किस लिए?

दोस्त: मैं मां बन गया hoon…didi को कल लड़का हुआ है..

राजू: badhiya..badhai हो..

दोस्त: ठीक hai..chal यार ghar..tu भी बच्चे को देख ले और दीदी से मिल ले.

राजू: नहीं यार chhod..phir कभी आता हूँ.

उसका दोस्त ज़िद करता है और उसे अपने घर ले जाता है.

वह उसके दोस्त के दीदी से मिलता है और बच्चे को भी देखता है..

आधा घंटे के बाद जब वह जाने को होता है तो उसे कुछ “स्ट्राइक” होता hai..aur उसके दिमाग की बिजली जल उठती है..

वह पलट कर देखता है की दोस्त की दीदी “बहुत खुश” दिख रही hai..chehre पे लाली और अपने bête को बड़े प्यार से देख और दुलार रही है.

उसे डेक्था है तो राजू के होश उड़ जाते हैं…

उसे सच में नज़र आता है की उसकी दीदी कितनी खुश hain…aur उसे गुरूजी की बात याद आती hain…(unko माँ banaao…khushiyaan अपने आप आ jaayegi…update 6).

राजू को उसके दोस्त की दीदी में बारी बारी से रत्न, ारु, सुधा और संध्या का चेहरा नज़र आता हैं…

तब वह और भी पक्का ठान लेता है की घर में सब को खुशियां देना हैं लेकिन कब और कैसे यह अभी उसे पता नहीं था.

ठाकुर के घर:

अगली सुबह ठाकुर अपने काम से शहर गया था..

काम्य अपने वफादार नौकर को बुला कर कहती है को वह राजू को उससे मिलने घर laaye..lekin ध्यान रहे की कोई ना देखे की राजू उससे मिलने आया है.

नौकर: जी मालकिन..

नौकर यह कह कर गाँव की और निकल जाता है राजू को ढूंढने…

राजू को नौकर उसके खेत में देख लेता है और उसके पास आ कर कहता है की मालकिन उसे बुला रही है.

राजू थोड़ा सरप्राइज हो जाता है की अचानक मालकिन को राजू से क्या काम है और उसे क्यों बुला रही है.

फिर भी राजू नौकर के साथ काम्य से मिलने चला जाता है. रास्ते में नौकर कहता है की वह ध्यान रखे की कोई उसे मकान में जाते ना देखे.

राजू बिना किसी को दिखे मकान चले जाता है और काम्य के कमरे में जाता है उसे मिलने.

राजू: नमस्ते मालकिन. आपने बुलाया mujhe..Kya काम हैं?

काम्य: नमस्ते Ramu..haan मैंने hi तुम्हे बुलाया tha..kisi ने देखा तो नहीं तुम्हे यहाँ आते हुए

राजू: जी नहीं, किसी ने नहीं देखा.

काम्य: ज़्यादा वक़्त नहीं hai..main सीढ़ी बात पर आती हूँ.

Raju:Ji कहिये..

काम्य: ठाकुर बहुत ज़ालिम और क्रूर आदमी है. मेरा यहाँ जीना हराम कर दिया hai..mujhe उनसे उनके चंगुल से बचा लो. मेरा यहाँ हमेशा दम घुटा hain..mujhe ऐसा लगता हैं की मैं एक पिंजरे में बंद हूँ. इसीलिए मैं तुमसे मदद माँगा रही हूँ की तुम मुझे यहाँ से बचा लो..

राजू: ठाकुर ऐसा क्यों करते hai..mujhe नहीं pata..lekin मैं कैसे आपकी मदद कर सकता हूँ?

काम्य: उस दिन जब तुम मेरे गाडी को ठीक किये the..us दिन जब मैं घर आयी तो थुकुर ने मुझे बहुत मारा (और अपना ज़ख़्म भी दिखती है राजू को)

राजू: मैं कैसे आपको बचा सकता हूँ? आप तो घर की मालकिन हो.

काम्य: मालकिन तो सिर्फ नाम की hoon..yahan मेरा कोई नहीं सुनता और सब ठाकुर से डरते है.

राजू: Ji..lekin फिर भी मुझे पता नहीं की आप मेरे से क्यों मदद मांग रही हो. (राजू को गुरूजी की बात याद आती है की ठाकुर से उसके परिवार वालों को खतरा हैं). इसीलिए वह बहुत सावधानी से बात कर रहा था.

काम्य: हाँ, मुझे पता hain…maine पता किया hai..tum बहुत अच्छे लड़के हो और लोगों की मदद भी करते हो. उस दिन, जब मेरी गाडी ख़राब हो गयी thi..tumhaare अलावा और कोई मदद करने नहीं आता (अगर पता भी चलता तो). तुम ने आकर मेरी मदद की जिसकी मैं बहुत आभारी हूँ.

राजू: फिर भी कन्विंस नहीं हो पाटा और ठीक है कह कर बात को ताल देता है.

राजू कहता है उसे काम है और वह मालकिन को बोल कर वहां से निकल जाता है. काम्य भी कहती है की जल्दी से निकल lo…Thakur के आने का वक़्त आ गया है.

जाते वक़्त काम्य कहती है की अगर तुम मुझसे मिलने आना चाहते हो तो पीछे वाले रास्ते से आना और इस दरवाजे से (एकदर्वाज़े की तरफ पॉइंट कर के) अंदर aana…tumhe कोई परेशानी नहीं होगी.

राजू घर से निकलते waqt….pata नहीं kyun..woh ठाकुर के रूम में जाता है और उसका मुवायना करता hain…kuch ख़ास तो दीखता नहीं बूत कुछ मैले कपडे उसे वहां पड़े हुए दीखते है जिसे वह अनदेखा कर देता है और चुपके से निकल जाता है.

रास्ते में फिर से वह सोच में पद जाता है की मालकिन उसी से क्यों मदद मांग रही है.

खैर, वह सब बाते भूल कर वह घर आ जाता है और संध्या और सुधा को ललचायी नज़र से देखता है जो साडी में बहुत सेक्सी लग रही थी.

सुधा: मुन्ना, ऐसा क्या देख रहा हैं?

राजू: मौसी, देख रहा हूँ की आप कितनी सेक्सी ho…aur कातिल मुस्कान देता है.

सुधा का मुँह खुला का खुला रह जाता है राजू की बात सुन कर. उसने कभी एक्सपेक्ट नहीं किया था.

सुधा थोड़ा शर्मा जाती है और कहती है ऐसी बहकी बहकी बातें क्यों कर रहा हैं?

राजू: मैं क्या बहकी बात कर रहा hoon…jo है सो कह रहा hoon..aur उधर dekho…kaise माजी (ारु की सास संध्या) भी मटकाते हुए चल रही है..

सुधा: है रे daiyya…tu बहुत बिगड़ गया है munna….teri माँ को बताना पड़ेगा..

राजू: तो बताओ naa..main भी तो देखूं की आप माँ को क्या bataaogi…ki तुम बहुत सेक्सी हो?

सुधा शर्मा कर वहां से भाग जाती है और राजू मुस्कुरा कर रह जाता है.

रात को रत्न को राजू की बातें याद आती है और चुप चाप सो जाती है बिना कोई “हरकत” किये.

लेकिन बाकी के कमरे में कल वाली (रत्न के कमरे) का हाल था..

तीनो अपनी छूट और चूची को मसलती हुई काम अग्नि में जल रही होती है.

सुधा को राजू की बात याद आती है और वह आईने के सामने खड़े हो कर अपने आप को निहार रही होती hain…woh देखती है की वह कितनी बाला की खूबसूरत है..

नशीली aankhen..blouse में मस्त छुपी हुई chuchiyaan…jo बहार आने को तड़पती है..

पलट कर देखती है तो थोड़ा उठा हुआ pichwada…uff..qayamat लग रही थी..

एहि सब सोच कर वह भी जलती हुई बिस्तर पर जाके सो जाती है.

अगली subah…(another twist)…(Spoiler अलर्ट) :)
 
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