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- Dec 5, 2013
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अपडेट 9:
अगली सुबह…
अगली सुबह, सब लोग अपने काम में बिजी हो जाते hai…raju भी अपने काम से खेत चला जाता hai…Ratna भी अपना काम कर के घर साफ़ कर के नहाने के लिए सोचती है.
घर का काम पूरा हो गया tha..sirf राजू का कमरा hi रह गया tha..sochti है वह कमरा भी साफ़ कर के नाहा कर आती हूँ.
रत्न राजू के कमरे में जाती हेयर और साफ़ सफाई में जुट जाती है.
जब वह राजू का बिस्तर ठीक कर रही होती है तो एक छिति नीचे गिर जाती hai…(Raju दादाजी का छिति पढ़ कर डिस्ट्रॉय करना भूल जाता है और तकिये के नीचे रख देता है).
आउट ऑफ़ क्यूरोसिटी, रत्न वह छिति उठाती है और उसे खोल कर पढ़ने लगती hai…jaise hi वह छिति पड़ती है, उसके चेहरे के रंग उड़ जाते है. उसे समझ में नहीं आता की जो वह छिति में पढ़ रही है सही या गलत है.
वह चुपचाप छिति अपने पास रख लेती है और बाकी का काम करके नाहा कर के अपने बाकी कामों में व्यस्त हो जाती है.
अननोन तो राजू, वह अपने काम में और दोस्तों से गप्पे मारने में लगा रहता hai..aur शाम को घर वापस आ जाता है.
रात को डिनर के बाद जब सब सोने चले जाते है तो
रत्न: राजू एक बार मेरे कमरे में आना तो ज़रा
राजू: जी आया..
कमरे में आने के बाद रत्न वह छिति निकलती है और राजू की आँखों में देखते हुए कहती hai…kya है यह?
राजू की हालत बिगड़ जाती hai..usko भी पसीना आने लगता hai..but वह कुछ नहीं कहता.
जब रत्न ज़ोर देती है तो राजू कहता hai..haan यह छिति सही hai..dadaji जाने से पहले मुझे बता कर गए थे और मैंने hi उसे अपने कमरे में रखा था.
रत्न: तो क्या तो गुरूजी से मिलने गया था? उस दिन जब मैंने पुछा तो तूने बात ताल दिया था.
राजू: हाँ, गया tha..unse मिलने.
रत्न: तो क्या कहा गुरूजी ने?
राजू: मैं बता नहीं sakta..bahut मुश्किल है.
रत्न गुस्सा करती है और बहुत तरय करती है लेकिन राजू बताता नहीं है. फिर दोनों सो जाते है.
रत्न को चिंता हो जाती है की राजू गुरूजी से क्यों मिलने gaya..aur गुरूजी ने राजू से क्या कहा..
अगली सुबह भी रत्न बहुत तरय करती hai..lekin राजू बताता नहीं hai…Ratna भी गम शूम से रहती है जो ारु और सुधा भी नोटिस करती है.
जब वह दोनों पूछती है तो बात को ताल देती hai…woh राजू से बात भी नहीं karti…raju भी परेशान हो जाता है और उसे भी चिंता लगने लगती है की रत्न उससे बात क्यों नहीं कर रही है.
ऐसे hi दो दिन गुज़र जाते है लेकिन कोई कुछ बात नहीं करता.
तीसरे दिन:
Raju..theek है maa..ek काम karo..main खेत के निकल रहा hoon..tu भी वहां आ जा…
रत्न: क्यों…
राजू: तुम आओ तो sahi..phir बताता हूँ.
रत्न भी अपना काम करके राजू से मिलने खेत जाती है. रत्न को देख कर राजू अपने आदमियों से कहता है की वह कुछ घंटे के बाद aayega..aur वह सब अपना काम करते रहे और राजू रत्न को लेकर निकल जाता है.
रत्न को समझ में नहीं आता की राजू क्या कर रहा है. रत्न राजू से पूछती है की उसे वह कहाँ लेकर जा रहा है.
राजू कुछ नहीं बताता और उसे लेकर निकल पड़ता है.
रत्न: कहाँ जा रहे है?
राजू: chalo..sahi जगह ले जा रहा हूँ…
रत्न रास्ते भर चिंता करते रहती है लेकिन उसे पता नहीं चलता की राजू कहाँ ले जा रहा है उसे..
2-3 घंटे के सफर के बाद
राजू और रत्न गुरूजी के पास जाते है. रत्न को समझ में नहीं आता और कहती है हम कहाँ आ गए है? (Remember…sirf दादाजी hi मिलने गुरूजी से यहाँ मिलने आये the…naa हरिया, ना रत्न, ना रवि…)
राजू कहता है…5 min…sab पता चल जाएगा..
5 मं बाद जब गुरूजी आते है तो दोनों उनको प्रणाम करती है. रत्न जब पूछती है तो राजू कहता hai..yehi गुरूजी है जिनसे मैं मिलने आया था. (इसके पहले रत्न कभी भी गुरूजी से मिली नहीं थी)
राजू की बात सुन कर रत्न आश्चर्य चकित हो जाती hai..lekin फिर भी गुरूजी को प्रणाम करती है.
गुरूजी: उनको बिठा था है और पूछता है की उनका यहाँ (गुरूजी के पास) कैसे आना हुआ..
राजू: गुरूजी, 3 दिन पहले माँ को पता चल गया था की मैं आपसे मिलने आया hoon..aur जानना चाहती है की मेरी आपसे क्या बात हुई hai…mujh में बताने की हिम्मत नहीं हुई तो मैं hi उसे यहाँ आपके पास लेकर आया.
रत्न: जी Guruji..raju की बात सही hai…main जान ना चाहती थी की आपने उनको क्या कहा है और क्या समाधान दिया है हमारे समस्याओं का..
गुरूजी फिर सब बातें रत्न को विस्तार से बताते है (जो गुरूजी ने राजू को बताया tha)…Ratna उनकी बातें सुन कर लाल पीली हो जाती है और उसे कुछ समझ नहीं आता.
रत्न: गुरूजी, यह कैसे हो सकता है? समाज वाले क्या कहेंगे? हमें समाज में रहना है और लोगों से मिलना भी होता है.
गुरूजी: मैं जानता hoon..doosra रास्ता यह है की तुम अपनी ज़मीन जायदाद बेच कर कहीं और चले jaao..aur खुश रहो. लेकिन क्या pata…doosri जगह जा कर भी तुम लोग खुश रह पाओगे?
रत्न: यह ना मुमकिन hai..yeh ज़मीन हमारे पुरखों की hai..aur बहुत कड़ी म्हणत की बाद हमने उसे संभाल कर रखा है और वही हमारे आम दानी का साधन है.
गुरूजी: सही कहा beti…Raju को अपने परिवार के साथ ज़मीन की भी रक्षा करनी होगी वह ठाकुर की गन्दी नज़र से.
गुरूजी: एक और बात याद रखो beti…tum और तुम्हारे घर वाले hi राजू की देखभाल करोगी जब यह संकट में आएगा …रत्न को कुछ समझ नहीं आता है तो गुरूजी से पूछ hi लेती है..
गुरूजी: मैं इतना hi कहूंगा और आगे कुछ नहीं. मेरा आशीर्वाद तुम सब लोगों के साथ hai..khush रहो और खुशियां पाओ.
रत्न और राजू गुरूजी को प्रणाम करके उनका आशीर्वाद लेकर घर के लिए निकलने को होते है.
गुरूजी: राजू बीटा, तुम बहार jaao…aur रत्न को रुकने को कहता है.
थोड़ी देर बाद रत्न भी बहार जाती hai…aur राजू और रत्न घर की और निकल जाते है.
रास्ते mein….maa अब तो समझ गयी naa…maine तुम्हे घर में क्यों नहीं bataaya…haan..aur सच bataana…agar यह बात मैं तुम्हे घर में बताता तो क्या तुम विश्वास करती?
रत्न राजू की तरफ देख kar…bilkul nahi…lekin अब गुरूजी की बातें सुन कर विश्वास करना मुश्किल है लेकिन उनकी बात को ठुकरा भी नहीं सकती. हम लोग भी उन्हें मानते the..Ab हम यह घर, गाँव, ज़मीन तो छोड़ कर नहीं जा सकते naa…jo भी करना है, हमें यहीं रह करना है… और जो भी मुसीबत आएगी उसे मिल कर सामना करना पड़ेगा.
जब तू और रवि पैदा हुए थे (यह बात कह कर रत्न की आँखों में आसूं आ जाते है क्यूंकि अब रवि नहीं raha)…raju समझ जाता है और उसे अपने गले से लगा लेता है.
रत्न: जब तुम दोनों पैदा हुए the..to मैं और तुम्हारे बापू बहुत खुश the…laga हमें दुनिया की साड़ी खुशियां मिल गयी है.
राजू: haan…main समझ सकता हूँ.
रत्न: गुरूजी की बात भी सही hai…dekh naa…Aaru की अभी उम्र की क्या है? उसे तो अभी बहुत जीना hai..khushiyaan पाना hai..lekin इतनी काम उम्र में hi विधवा हो गयी है.
सुधा का भी एहि हाल hai…woh भी जवान hai..lekin उसके जीवन में भी बहुत कठिनायें hai…beta..tu hi कुछ कर सकता है उनके जीवन में खुशियां लाने के लिए.
राजू: जी देखता हूँ maa…kya कर सकता हूँ…
ऐसी hi बातें करते हुए रत्न और राजू अपने घर जाने लगते है.
रास्ते में ठाकुर अपनी गाडी में कहीं जा रहा होता है और वह उनको क्रॉस करता hai…dono (तीनो) की नज़र मिलती hai…raju और रत्न अनदेखा कर के निकल जाते है.
ठाकुर (सोचता hai)…saali यह हरिया के घर में सब एक से बढ़ कर एक माल hai…unko किसी भी हाल में छोड़ना hi hoga…kuch करना padega…aur अपने लुंड को मसल देता है..
ऐसे hi गंदे ख्यालों से वह आगे निकल जाता है और राजू और रत्न घर आ जाते है.
रास्ते में जब राजू ठाकुर को देखता है तो उसे थोड़ा उनकंफर्टबले फील होता है.
घर आ कर सब अपने काम में लग जाते है..
रात को जब सो रहे होते है तो राजू को बहुत उनकंफर्टबले फील होता hai…aur करवटें लेते रहता hai…use बहुत उलझन होती hai…achanak उसे कुछ याद है और “nahiiiiiiiiiiiiiiii” चीक कर उठ जाता hai…uske चेहरे पर पसीना आ जाता है और बदन कांपने लग जाता है.
उसकी चीक सुन कर चारो महिलायें दौड़ कर राजू के पास आती है और उसकी हालत देख कर परेशान हो जाते है.
रत्न दौड़ कर राजू को अपने बाहों में लेती है (प्यार और ममता se…koi वासना nahi)..aur उसके सर पर उंगलियां चलती है..
ारु से कहती है की वह पानी laaye…Sudha और संध्या भी परेशान हो जाते है.
रत्न जब पूछती है तो राजू कहता है की उसने कोई बुरा सपना dekha..aur वह उठ गया था. रत्न उसे प्यार से समझाती hai…aur थोड़ी देर बाद सब नार्मल हो जाते है.
ा स्माल बैक स्टोरी:
राजू को सोते समय उसे ठाकुर के घर में “वह कपडा” याद आता है जब वह उसके कमरे में गया था जब वह काम्य से मिल कर बहार निकल रहा था और उसको देखता hai…actually, वह “कपडा” रवि के शर्ट के पॉकेट का हिस्सा tha..jisme “र” टाइप का निशाँ था (र एम्ब्रायडरी ों शर्ट पॉकेट).
Author’s नोट: नॉट सूरे हाउ मान्य एग्री और हैवे observed..but ी हैवे सीन तहत गेनेराल्ल्य, ट्विन्स लिखे तो वियर थे शामे टाइप ऑफ़ क्लोथ्स एंड मेक (& इतर एक्सेसरीज अस well..like शूज, स्कूल बैग्स, टिफ़िन बॉक्स, ेट्स).. थिस इस माय पर्सनल रियल लाइफ एक्सपीरियंस. पेरेंट्स विथ ट्विन्स कैन अंडरस्टैंड थिस.
बैक तो स्टोरी:
उसी टाइप का “र” वर्ड का शर्ट उसके पास भी tha…jab उसे यह याद आता है तो वह झटके से उठ जाता hai…uska चेहरा और बदन पूरा पसीने से भर जाता है.
एन्ड ऑफ़ बैक स्टोरी.
सिचुएशन जब शांत हो जाता है तो रत्न कहती है की वह आज रात राजू के पास hi सोयेगी (और वाईस वर्सा). बाकी तीनो भी सहमति देते है और चले जाते hai..aur रेज जाते है राजू और रत्न…
राजू को फिर भी नींद नहीं आती hai…Ratna यह जानती है और राजू से कहती है की सो जा beta..sab ठीक हो jaayega…bhagwaan पे भरोसा करो.
लेकिन फिर भी राजू को नींद नहीं आती है तो रथा उसे अपने बाहों में ले लेती hai…dheere धीरे दोनों की आँख मिलती hai..aur रत्न अपने होंठ राजू के होंठ पर रख कर एक गहरा चुम्बन देती hai..Raju थोड़ा सरप्राइज हो जाता है बूत जल्दी hi समझ जाता है और वह भी रत्न के किश का जवाब देता है. वह धीरे से हाथ बढ़ा कर उसकी चुकी पर रखने की कोशिश करता है बूत रत्न उसका हाथ वहां से हटा देती है और धीरे से कहती hai…abhi nahi…shaant हो jaa…sab समय सही होगा तो सब दिखाउंगी तुझे..
रवि भी बात मान जाता है और फिर दोनों की आँख लग जाती है…
अगली सुबह…
अगली सुबह, सब लोग अपने काम में बिजी हो जाते hai…raju भी अपने काम से खेत चला जाता hai…Ratna भी अपना काम कर के घर साफ़ कर के नहाने के लिए सोचती है.
घर का काम पूरा हो गया tha..sirf राजू का कमरा hi रह गया tha..sochti है वह कमरा भी साफ़ कर के नाहा कर आती हूँ.
रत्न राजू के कमरे में जाती हेयर और साफ़ सफाई में जुट जाती है.
जब वह राजू का बिस्तर ठीक कर रही होती है तो एक छिति नीचे गिर जाती hai…(Raju दादाजी का छिति पढ़ कर डिस्ट्रॉय करना भूल जाता है और तकिये के नीचे रख देता है).
आउट ऑफ़ क्यूरोसिटी, रत्न वह छिति उठाती है और उसे खोल कर पढ़ने लगती hai…jaise hi वह छिति पड़ती है, उसके चेहरे के रंग उड़ जाते है. उसे समझ में नहीं आता की जो वह छिति में पढ़ रही है सही या गलत है.
वह चुपचाप छिति अपने पास रख लेती है और बाकी का काम करके नाहा कर के अपने बाकी कामों में व्यस्त हो जाती है.
अननोन तो राजू, वह अपने काम में और दोस्तों से गप्पे मारने में लगा रहता hai..aur शाम को घर वापस आ जाता है.
रात को डिनर के बाद जब सब सोने चले जाते है तो
रत्न: राजू एक बार मेरे कमरे में आना तो ज़रा
राजू: जी आया..
कमरे में आने के बाद रत्न वह छिति निकलती है और राजू की आँखों में देखते हुए कहती hai…kya है यह?
राजू की हालत बिगड़ जाती hai..usko भी पसीना आने लगता hai..but वह कुछ नहीं कहता.
जब रत्न ज़ोर देती है तो राजू कहता hai..haan यह छिति सही hai..dadaji जाने से पहले मुझे बता कर गए थे और मैंने hi उसे अपने कमरे में रखा था.
रत्न: तो क्या तो गुरूजी से मिलने गया था? उस दिन जब मैंने पुछा तो तूने बात ताल दिया था.
राजू: हाँ, गया tha..unse मिलने.
रत्न: तो क्या कहा गुरूजी ने?
राजू: मैं बता नहीं sakta..bahut मुश्किल है.
रत्न गुस्सा करती है और बहुत तरय करती है लेकिन राजू बताता नहीं है. फिर दोनों सो जाते है.
रत्न को चिंता हो जाती है की राजू गुरूजी से क्यों मिलने gaya..aur गुरूजी ने राजू से क्या कहा..
अगली सुबह भी रत्न बहुत तरय करती hai..lekin राजू बताता नहीं hai…Ratna भी गम शूम से रहती है जो ारु और सुधा भी नोटिस करती है.
जब वह दोनों पूछती है तो बात को ताल देती hai…woh राजू से बात भी नहीं karti…raju भी परेशान हो जाता है और उसे भी चिंता लगने लगती है की रत्न उससे बात क्यों नहीं कर रही है.
ऐसे hi दो दिन गुज़र जाते है लेकिन कोई कुछ बात नहीं करता.
तीसरे दिन:
Raju..theek है maa..ek काम karo..main खेत के निकल रहा hoon..tu भी वहां आ जा…
रत्न: क्यों…
राजू: तुम आओ तो sahi..phir बताता हूँ.
रत्न भी अपना काम करके राजू से मिलने खेत जाती है. रत्न को देख कर राजू अपने आदमियों से कहता है की वह कुछ घंटे के बाद aayega..aur वह सब अपना काम करते रहे और राजू रत्न को लेकर निकल जाता है.
रत्न को समझ में नहीं आता की राजू क्या कर रहा है. रत्न राजू से पूछती है की उसे वह कहाँ लेकर जा रहा है.
राजू कुछ नहीं बताता और उसे लेकर निकल पड़ता है.
रत्न: कहाँ जा रहे है?
राजू: chalo..sahi जगह ले जा रहा हूँ…
रत्न रास्ते भर चिंता करते रहती है लेकिन उसे पता नहीं चलता की राजू कहाँ ले जा रहा है उसे..
2-3 घंटे के सफर के बाद
राजू और रत्न गुरूजी के पास जाते है. रत्न को समझ में नहीं आता और कहती है हम कहाँ आ गए है? (Remember…sirf दादाजी hi मिलने गुरूजी से यहाँ मिलने आये the…naa हरिया, ना रत्न, ना रवि…)
राजू कहता है…5 min…sab पता चल जाएगा..
5 मं बाद जब गुरूजी आते है तो दोनों उनको प्रणाम करती है. रत्न जब पूछती है तो राजू कहता hai..yehi गुरूजी है जिनसे मैं मिलने आया था. (इसके पहले रत्न कभी भी गुरूजी से मिली नहीं थी)
राजू की बात सुन कर रत्न आश्चर्य चकित हो जाती hai..lekin फिर भी गुरूजी को प्रणाम करती है.
गुरूजी: उनको बिठा था है और पूछता है की उनका यहाँ (गुरूजी के पास) कैसे आना हुआ..
राजू: गुरूजी, 3 दिन पहले माँ को पता चल गया था की मैं आपसे मिलने आया hoon..aur जानना चाहती है की मेरी आपसे क्या बात हुई hai…mujh में बताने की हिम्मत नहीं हुई तो मैं hi उसे यहाँ आपके पास लेकर आया.
रत्न: जी Guruji..raju की बात सही hai…main जान ना चाहती थी की आपने उनको क्या कहा है और क्या समाधान दिया है हमारे समस्याओं का..
गुरूजी फिर सब बातें रत्न को विस्तार से बताते है (जो गुरूजी ने राजू को बताया tha)…Ratna उनकी बातें सुन कर लाल पीली हो जाती है और उसे कुछ समझ नहीं आता.
रत्न: गुरूजी, यह कैसे हो सकता है? समाज वाले क्या कहेंगे? हमें समाज में रहना है और लोगों से मिलना भी होता है.
गुरूजी: मैं जानता hoon..doosra रास्ता यह है की तुम अपनी ज़मीन जायदाद बेच कर कहीं और चले jaao..aur खुश रहो. लेकिन क्या pata…doosri जगह जा कर भी तुम लोग खुश रह पाओगे?
रत्न: यह ना मुमकिन hai..yeh ज़मीन हमारे पुरखों की hai..aur बहुत कड़ी म्हणत की बाद हमने उसे संभाल कर रखा है और वही हमारे आम दानी का साधन है.
गुरूजी: सही कहा beti…Raju को अपने परिवार के साथ ज़मीन की भी रक्षा करनी होगी वह ठाकुर की गन्दी नज़र से.
गुरूजी: एक और बात याद रखो beti…tum और तुम्हारे घर वाले hi राजू की देखभाल करोगी जब यह संकट में आएगा …रत्न को कुछ समझ नहीं आता है तो गुरूजी से पूछ hi लेती है..
गुरूजी: मैं इतना hi कहूंगा और आगे कुछ नहीं. मेरा आशीर्वाद तुम सब लोगों के साथ hai..khush रहो और खुशियां पाओ.
रत्न और राजू गुरूजी को प्रणाम करके उनका आशीर्वाद लेकर घर के लिए निकलने को होते है.
गुरूजी: राजू बीटा, तुम बहार jaao…aur रत्न को रुकने को कहता है.
थोड़ी देर बाद रत्न भी बहार जाती hai…aur राजू और रत्न घर की और निकल जाते है.
रास्ते mein….maa अब तो समझ गयी naa…maine तुम्हे घर में क्यों नहीं bataaya…haan..aur सच bataana…agar यह बात मैं तुम्हे घर में बताता तो क्या तुम विश्वास करती?
रत्न राजू की तरफ देख kar…bilkul nahi…lekin अब गुरूजी की बातें सुन कर विश्वास करना मुश्किल है लेकिन उनकी बात को ठुकरा भी नहीं सकती. हम लोग भी उन्हें मानते the..Ab हम यह घर, गाँव, ज़मीन तो छोड़ कर नहीं जा सकते naa…jo भी करना है, हमें यहीं रह करना है… और जो भी मुसीबत आएगी उसे मिल कर सामना करना पड़ेगा.
जब तू और रवि पैदा हुए थे (यह बात कह कर रत्न की आँखों में आसूं आ जाते है क्यूंकि अब रवि नहीं raha)…raju समझ जाता है और उसे अपने गले से लगा लेता है.
रत्न: जब तुम दोनों पैदा हुए the..to मैं और तुम्हारे बापू बहुत खुश the…laga हमें दुनिया की साड़ी खुशियां मिल गयी है.
राजू: haan…main समझ सकता हूँ.
रत्न: गुरूजी की बात भी सही hai…dekh naa…Aaru की अभी उम्र की क्या है? उसे तो अभी बहुत जीना hai..khushiyaan पाना hai..lekin इतनी काम उम्र में hi विधवा हो गयी है.
सुधा का भी एहि हाल hai…woh भी जवान hai..lekin उसके जीवन में भी बहुत कठिनायें hai…beta..tu hi कुछ कर सकता है उनके जीवन में खुशियां लाने के लिए.
राजू: जी देखता हूँ maa…kya कर सकता हूँ…
ऐसी hi बातें करते हुए रत्न और राजू अपने घर जाने लगते है.
रास्ते में ठाकुर अपनी गाडी में कहीं जा रहा होता है और वह उनको क्रॉस करता hai…dono (तीनो) की नज़र मिलती hai…raju और रत्न अनदेखा कर के निकल जाते है.
ठाकुर (सोचता hai)…saali यह हरिया के घर में सब एक से बढ़ कर एक माल hai…unko किसी भी हाल में छोड़ना hi hoga…kuch करना padega…aur अपने लुंड को मसल देता है..
ऐसे hi गंदे ख्यालों से वह आगे निकल जाता है और राजू और रत्न घर आ जाते है.
रास्ते में जब राजू ठाकुर को देखता है तो उसे थोड़ा उनकंफर्टबले फील होता है.
घर आ कर सब अपने काम में लग जाते है..
रात को जब सो रहे होते है तो राजू को बहुत उनकंफर्टबले फील होता hai…aur करवटें लेते रहता hai…use बहुत उलझन होती hai…achanak उसे कुछ याद है और “nahiiiiiiiiiiiiiiii” चीक कर उठ जाता hai…uske चेहरे पर पसीना आ जाता है और बदन कांपने लग जाता है.
उसकी चीक सुन कर चारो महिलायें दौड़ कर राजू के पास आती है और उसकी हालत देख कर परेशान हो जाते है.
रत्न दौड़ कर राजू को अपने बाहों में लेती है (प्यार और ममता se…koi वासना nahi)..aur उसके सर पर उंगलियां चलती है..
ारु से कहती है की वह पानी laaye…Sudha और संध्या भी परेशान हो जाते है.
रत्न जब पूछती है तो राजू कहता है की उसने कोई बुरा सपना dekha..aur वह उठ गया था. रत्न उसे प्यार से समझाती hai…aur थोड़ी देर बाद सब नार्मल हो जाते है.
ा स्माल बैक स्टोरी:
राजू को सोते समय उसे ठाकुर के घर में “वह कपडा” याद आता है जब वह उसके कमरे में गया था जब वह काम्य से मिल कर बहार निकल रहा था और उसको देखता hai…actually, वह “कपडा” रवि के शर्ट के पॉकेट का हिस्सा tha..jisme “र” टाइप का निशाँ था (र एम्ब्रायडरी ों शर्ट पॉकेट).
Author’s नोट: नॉट सूरे हाउ मान्य एग्री और हैवे observed..but ी हैवे सीन तहत गेनेराल्ल्य, ट्विन्स लिखे तो वियर थे शामे टाइप ऑफ़ क्लोथ्स एंड मेक (& इतर एक्सेसरीज अस well..like शूज, स्कूल बैग्स, टिफ़िन बॉक्स, ेट्स).. थिस इस माय पर्सनल रियल लाइफ एक्सपीरियंस. पेरेंट्स विथ ट्विन्स कैन अंडरस्टैंड थिस.
बैक तो स्टोरी:
उसी टाइप का “र” वर्ड का शर्ट उसके पास भी tha…jab उसे यह याद आता है तो वह झटके से उठ जाता hai…uska चेहरा और बदन पूरा पसीने से भर जाता है.
एन्ड ऑफ़ बैक स्टोरी.
सिचुएशन जब शांत हो जाता है तो रत्न कहती है की वह आज रात राजू के पास hi सोयेगी (और वाईस वर्सा). बाकी तीनो भी सहमति देते है और चले जाते hai..aur रेज जाते है राजू और रत्न…
राजू को फिर भी नींद नहीं आती hai…Ratna यह जानती है और राजू से कहती है की सो जा beta..sab ठीक हो jaayega…bhagwaan पे भरोसा करो.
लेकिन फिर भी राजू को नींद नहीं आती है तो रथा उसे अपने बाहों में ले लेती hai…dheere धीरे दोनों की आँख मिलती hai..aur रत्न अपने होंठ राजू के होंठ पर रख कर एक गहरा चुम्बन देती hai..Raju थोड़ा सरप्राइज हो जाता है बूत जल्दी hi समझ जाता है और वह भी रत्न के किश का जवाब देता है. वह धीरे से हाथ बढ़ा कर उसकी चुकी पर रखने की कोशिश करता है बूत रत्न उसका हाथ वहां से हटा देती है और धीरे से कहती hai…abhi nahi…shaant हो jaa…sab समय सही होगा तो सब दिखाउंगी तुझे..
रवि भी बात मान जाता है और फिर दोनों की आँख लग जाती है…