Raju – Sab kaa Rakhwala aur Khushiyaan dene waala - Page 2 - SexBaba
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Raju – Sab kaa Rakhwala aur Khushiyaan dene waala

अपडेट 9:

अगली सुबह…

अगली सुबह, सब लोग अपने काम में बिजी हो जाते hai…raju भी अपने काम से खेत चला जाता hai…Ratna भी अपना काम कर के घर साफ़ कर के नहाने के लिए सोचती है.

घर का काम पूरा हो गया tha..sirf राजू का कमरा hi रह गया tha..sochti है वह कमरा भी साफ़ कर के नाहा कर आती हूँ.

रत्न राजू के कमरे में जाती हेयर और साफ़ सफाई में जुट जाती है.

जब वह राजू का बिस्तर ठीक कर रही होती है तो एक छिति नीचे गिर जाती hai…(Raju दादाजी का छिति पढ़ कर डिस्ट्रॉय करना भूल जाता है और तकिये के नीचे रख देता है).

आउट ऑफ़ क्यूरोसिटी, रत्न वह छिति उठाती है और उसे खोल कर पढ़ने लगती hai…jaise hi वह छिति पड़ती है, उसके चेहरे के रंग उड़ जाते है. उसे समझ में नहीं आता की जो वह छिति में पढ़ रही है सही या गलत है.

वह चुपचाप छिति अपने पास रख लेती है और बाकी का काम करके नाहा कर के अपने बाकी कामों में व्यस्त हो जाती है.

अननोन तो राजू, वह अपने काम में और दोस्तों से गप्पे मारने में लगा रहता hai..aur शाम को घर वापस आ जाता है.

रात को डिनर के बाद जब सब सोने चले जाते है तो

रत्न: राजू एक बार मेरे कमरे में आना तो ज़रा

राजू: जी आया..

कमरे में आने के बाद रत्न वह छिति निकलती है और राजू की आँखों में देखते हुए कहती hai…kya है यह?

राजू की हालत बिगड़ जाती hai..usko भी पसीना आने लगता hai..but वह कुछ नहीं कहता.

जब रत्न ज़ोर देती है तो राजू कहता hai..haan यह छिति सही hai..dadaji जाने से पहले मुझे बता कर गए थे और मैंने hi उसे अपने कमरे में रखा था.

रत्न: तो क्या तो गुरूजी से मिलने गया था? उस दिन जब मैंने पुछा तो तूने बात ताल दिया था.

राजू: हाँ, गया tha..unse मिलने.

रत्न: तो क्या कहा गुरूजी ने?

राजू: मैं बता नहीं sakta..bahut मुश्किल है.

रत्न गुस्सा करती है और बहुत तरय करती है लेकिन राजू बताता नहीं है. फिर दोनों सो जाते है.

रत्न को चिंता हो जाती है की राजू गुरूजी से क्यों मिलने gaya..aur गुरूजी ने राजू से क्या कहा..

अगली सुबह भी रत्न बहुत तरय करती hai..lekin राजू बताता नहीं hai…Ratna भी गम शूम से रहती है जो ारु और सुधा भी नोटिस करती है.

जब वह दोनों पूछती है तो बात को ताल देती hai…woh राजू से बात भी नहीं karti…raju भी परेशान हो जाता है और उसे भी चिंता लगने लगती है की रत्न उससे बात क्यों नहीं कर रही है.

ऐसे hi दो दिन गुज़र जाते है लेकिन कोई कुछ बात नहीं करता.

तीसरे दिन:

Raju..theek है maa..ek काम karo..main खेत के निकल रहा hoon..tu भी वहां आ जा…

रत्न: क्यों…

राजू: तुम आओ तो sahi..phir बताता हूँ.

रत्न भी अपना काम करके राजू से मिलने खेत जाती है. रत्न को देख कर राजू अपने आदमियों से कहता है की वह कुछ घंटे के बाद aayega..aur वह सब अपना काम करते रहे और राजू रत्न को लेकर निकल जाता है.

रत्न को समझ में नहीं आता की राजू क्या कर रहा है. रत्न राजू से पूछती है की उसे वह कहाँ लेकर जा रहा है.

राजू कुछ नहीं बताता और उसे लेकर निकल पड़ता है.

रत्न: कहाँ जा रहे है?

राजू: chalo..sahi जगह ले जा रहा हूँ…

रत्न रास्ते भर चिंता करते रहती है लेकिन उसे पता नहीं चलता की राजू कहाँ ले जा रहा है उसे..

2-3 घंटे के सफर के बाद

राजू और रत्न गुरूजी के पास जाते है. रत्न को समझ में नहीं आता और कहती है हम कहाँ आ गए है? (Remember…sirf दादाजी hi मिलने गुरूजी से यहाँ मिलने आये the…naa हरिया, ना रत्न, ना रवि…)

राजू कहता है…5 min…sab पता चल जाएगा..

5 मं बाद जब गुरूजी आते है तो दोनों उनको प्रणाम करती है. रत्न जब पूछती है तो राजू कहता hai..yehi गुरूजी है जिनसे मैं मिलने आया था. (इसके पहले रत्न कभी भी गुरूजी से मिली नहीं थी)

राजू की बात सुन कर रत्न आश्चर्य चकित हो जाती hai..lekin फिर भी गुरूजी को प्रणाम करती है.

गुरूजी: उनको बिठा था है और पूछता है की उनका यहाँ (गुरूजी के पास) कैसे आना हुआ..

राजू: गुरूजी, 3 दिन पहले माँ को पता चल गया था की मैं आपसे मिलने आया hoon..aur जानना चाहती है की मेरी आपसे क्या बात हुई hai…mujh में बताने की हिम्मत नहीं हुई तो मैं hi उसे यहाँ आपके पास लेकर आया.

रत्न: जी Guruji..raju की बात सही hai…main जान ना चाहती थी की आपने उनको क्या कहा है और क्या समाधान दिया है हमारे समस्याओं का..

गुरूजी फिर सब बातें रत्न को विस्तार से बताते है (जो गुरूजी ने राजू को बताया tha)…Ratna उनकी बातें सुन कर लाल पीली हो जाती है और उसे कुछ समझ नहीं आता.

रत्न: गुरूजी, यह कैसे हो सकता है? समाज वाले क्या कहेंगे? हमें समाज में रहना है और लोगों से मिलना भी होता है.

गुरूजी: मैं जानता hoon..doosra रास्ता यह है की तुम अपनी ज़मीन जायदाद बेच कर कहीं और चले jaao..aur खुश रहो. लेकिन क्या pata…doosri जगह जा कर भी तुम लोग खुश रह पाओगे?

रत्न: यह ना मुमकिन hai..yeh ज़मीन हमारे पुरखों की hai..aur बहुत कड़ी म्हणत की बाद हमने उसे संभाल कर रखा है और वही हमारे आम दानी का साधन है.

गुरूजी: सही कहा beti…Raju को अपने परिवार के साथ ज़मीन की भी रक्षा करनी होगी वह ठाकुर की गन्दी नज़र से.

गुरूजी: एक और बात याद रखो beti…tum और तुम्हारे घर वाले hi राजू की देखभाल करोगी जब यह संकट में आएगा …रत्न को कुछ समझ नहीं आता है तो गुरूजी से पूछ hi लेती है..

गुरूजी: मैं इतना hi कहूंगा और आगे कुछ नहीं. मेरा आशीर्वाद तुम सब लोगों के साथ hai..khush रहो और खुशियां पाओ.

रत्न और राजू गुरूजी को प्रणाम करके उनका आशीर्वाद लेकर घर के लिए निकलने को होते है.

गुरूजी: राजू बीटा, तुम बहार jaao…aur रत्न को रुकने को कहता है.

थोड़ी देर बाद रत्न भी बहार जाती hai…aur राजू और रत्न घर की और निकल जाते है.

रास्ते mein….maa अब तो समझ गयी naa…maine तुम्हे घर में क्यों नहीं bataaya…haan..aur सच bataana…agar यह बात मैं तुम्हे घर में बताता तो क्या तुम विश्वास करती?

रत्न राजू की तरफ देख kar…bilkul nahi…lekin अब गुरूजी की बातें सुन कर विश्वास करना मुश्किल है लेकिन उनकी बात को ठुकरा भी नहीं सकती. हम लोग भी उन्हें मानते the..Ab हम यह घर, गाँव, ज़मीन तो छोड़ कर नहीं जा सकते naa…jo भी करना है, हमें यहीं रह करना है… और जो भी मुसीबत आएगी उसे मिल कर सामना करना पड़ेगा.

जब तू और रवि पैदा हुए थे (यह बात कह कर रत्न की आँखों में आसूं आ जाते है क्यूंकि अब रवि नहीं raha)…raju समझ जाता है और उसे अपने गले से लगा लेता है.

रत्न: जब तुम दोनों पैदा हुए the..to मैं और तुम्हारे बापू बहुत खुश the…laga हमें दुनिया की साड़ी खुशियां मिल गयी है.

राजू: haan…main समझ सकता हूँ.

रत्न: गुरूजी की बात भी सही hai…dekh naa…Aaru की अभी उम्र की क्या है? उसे तो अभी बहुत जीना hai..khushiyaan पाना hai..lekin इतनी काम उम्र में hi विधवा हो गयी है.

सुधा का भी एहि हाल hai…woh भी जवान hai..lekin उसके जीवन में भी बहुत कठिनायें hai…beta..tu hi कुछ कर सकता है उनके जीवन में खुशियां लाने के लिए.

राजू: जी देखता हूँ maa…kya कर सकता हूँ…

ऐसी hi बातें करते हुए रत्न और राजू अपने घर जाने लगते है.

रास्ते में ठाकुर अपनी गाडी में कहीं जा रहा होता है और वह उनको क्रॉस करता hai…dono (तीनो) की नज़र मिलती hai…raju और रत्न अनदेखा कर के निकल जाते है.

ठाकुर (सोचता hai)…saali यह हरिया के घर में सब एक से बढ़ कर एक माल hai…unko किसी भी हाल में छोड़ना hi hoga…kuch करना padega…aur अपने लुंड को मसल देता है..

ऐसे hi गंदे ख्यालों से वह आगे निकल जाता है और राजू और रत्न घर आ जाते है.

रास्ते में जब राजू ठाकुर को देखता है तो उसे थोड़ा उनकंफर्टबले फील होता है.

घर आ कर सब अपने काम में लग जाते है..

रात को जब सो रहे होते है तो राजू को बहुत उनकंफर्टबले फील होता hai…aur करवटें लेते रहता hai…use बहुत उलझन होती hai…achanak उसे कुछ याद है और “nahiiiiiiiiiiiiiiii” चीक कर उठ जाता hai…uske चेहरे पर पसीना आ जाता है और बदन कांपने लग जाता है.

उसकी चीक सुन कर चारो महिलायें दौड़ कर राजू के पास आती है और उसकी हालत देख कर परेशान हो जाते है.

रत्न दौड़ कर राजू को अपने बाहों में लेती है (प्यार और ममता se…koi वासना nahi)..aur उसके सर पर उंगलियां चलती है..

ारु से कहती है की वह पानी laaye…Sudha और संध्या भी परेशान हो जाते है.

रत्न जब पूछती है तो राजू कहता है की उसने कोई बुरा सपना dekha..aur वह उठ गया था. रत्न उसे प्यार से समझाती hai…aur थोड़ी देर बाद सब नार्मल हो जाते है.

ा स्माल बैक स्टोरी:

राजू को सोते समय उसे ठाकुर के घर में “वह कपडा” याद आता है जब वह उसके कमरे में गया था जब वह काम्य से मिल कर बहार निकल रहा था और उसको देखता hai…actually, वह “कपडा” रवि के शर्ट के पॉकेट का हिस्सा tha..jisme “र” टाइप का निशाँ था (र एम्ब्रायडरी ों शर्ट पॉकेट).

Author’s नोट: नॉट सूरे हाउ मान्य एग्री और हैवे observed..but ी हैवे सीन तहत गेनेराल्ल्य, ट्विन्स लिखे तो वियर थे शामे टाइप ऑफ़ क्लोथ्स एंड मेक (& इतर एक्सेसरीज अस well..like शूज, स्कूल बैग्स, टिफ़िन बॉक्स, ेट्स).. थिस इस माय पर्सनल रियल लाइफ एक्सपीरियंस. पेरेंट्स विथ ट्विन्स कैन अंडरस्टैंड थिस.

बैक तो स्टोरी:

उसी टाइप का “र” वर्ड का शर्ट उसके पास भी tha…jab उसे यह याद आता है तो वह झटके से उठ जाता hai…uska चेहरा और बदन पूरा पसीने से भर जाता है.

एन्ड ऑफ़ बैक स्टोरी.

सिचुएशन जब शांत हो जाता है तो रत्न कहती है की वह आज रात राजू के पास hi सोयेगी (और वाईस वर्सा). बाकी तीनो भी सहमति देते है और चले जाते hai..aur रेज जाते है राजू और रत्न…

राजू को फिर भी नींद नहीं आती hai…Ratna यह जानती है और राजू से कहती है की सो जा beta..sab ठीक हो jaayega…bhagwaan पे भरोसा करो.

लेकिन फिर भी राजू को नींद नहीं आती है तो रथा उसे अपने बाहों में ले लेती hai…dheere धीरे दोनों की आँख मिलती hai..aur रत्न अपने होंठ राजू के होंठ पर रख कर एक गहरा चुम्बन देती hai..Raju थोड़ा सरप्राइज हो जाता है बूत जल्दी hi समझ जाता है और वह भी रत्न के किश का जवाब देता है. वह धीरे से हाथ बढ़ा कर उसकी चुकी पर रखने की कोशिश करता है बूत रत्न उसका हाथ वहां से हटा देती है और धीरे से कहती hai…abhi nahi…shaant हो jaa…sab समय सही होगा तो सब दिखाउंगी तुझे..



रवि भी बात मान जाता है और फिर दोनों की आँख लग जाती है…
 
अपडेट 10:

अगली सुबह….

रत्न किचन में चाय बना रही होती hain….is वक़्त वह बहुत सेक्सी लग रही थी. बहार को निकली हुई chuchiyaan..aur क्यूंकि शायद वह ब्रा नहीं पहनी हुई thi…uske निप्पल्स भी एकदम सख्त थे और नज़र आ रहे the..jo की उसको और बहुत कामुक बना रही थी. राजू पीछे से आकर उसकी कमर में हाथ रख कर गले पर किश करता hain…aur उसका लुंड रत्न की गांड में चुभ जाता है. (मॉर्निंग इरेक्शन)



रत्न आह कर के सिसकी लेती है और कहती hain…chhod ना बहुत बेशरम हो गया है तू..

राजू: छोड़ने के लिए नहीं पकड़ा हूँ माँ…

रत्न यह बात सुन कर थोड़ा इमोशनल हो जाती है और पलट के कहती hain…chhodega तो नहीं naa…beta अब तू hi हमारा सहारा हैं…

राजू भी समझ जाता है और कहता hain…marte डैम तक nahi…Ratna हाथ उसके मुँह पर रख kar…subah सुबह शुभ बोलै कर बीटा..

राजू प्यार से उसका माथा चूम लेता है..

मूड को हल्का करने के लिए रत्न के कान में धीरे से कहता hain…sharam बची hai..isiliye कमर पे हाथ रखा hain…agar बेशरम होता तो हाट 4-5 इंच ऊपर होता..

रत्न यह बात समझ कर उसे घूरती है और प्यार से उसके छाती पर हल्का सा मुक्का मारती है..

राजू: माँ आज ारु को दोपहर को खाना देकर bhejna..tab तक मैं कुछ सोचता हूँ.

इतने में सुधा भी किचन के तरफ आ kar…kya बात hai..maa bête में बहुत प्यार हो रहा है..

रत्न: क्या मैं अपने bête को प्यार नहीं कर सकती क्या?

राजू भी पलट कर सुधा को देखता है ..वो भी बहुत सेक्सी नज़र आती hai…tani हुई chuchyiaan..saadi एकदम बदन से चिपका hua….qayamat लग रही थी वह भी..

राजू: कहो तो आपको भी प्यार करता हूँ..

सुधा यह बात सुन कर थोड़ा शर्मा जाती है और आँखें नीचे कर लेती है जो रत्न भी जान लेती है..

राजू वहां से निकलता है और जाने से पहले सुधा को गले से लगा कर कान में कहता है (jhoot)…mausi, मैंने माँ को बताया है की आप कितनी सेक्सी हो…

सुधा यह बात सुन कर उसे होश उड़ जाते है.

रत्न पूछती है तो सुधा किसी तरह बात को ताल कर घुमा देती है.

राजू अपने खेत चला जाता है और उसे कल रात की बात याद आती है और सोच में डूब जाता है.

राजू सोचता है की अगर उसे पता करना है की ठाकुर के कमरे में और क्या मिल सकता है तो उसे काम्य की मदद करनी hi padegi…warna उसे उस घर में घुसना मुश्किल होगा.

इसी सोच विचार में दोपहर जो जाती है और वह डेक्था है की ारु उसी तरफ डब्बा लेकर आ रही हैं…

ारु बड़े सेक्सी अंदाज़ में चल कर उसके पास आ रही होती है.

ारु भी पहुँच जाती है और हलकी फुल्की बात कर के दोनों मिलकर खाना खाते हैं…

खाते वक़्त मौसम बदल जाता hain…kaale घने बादल चा जाते है और ज़ोरो से बारिश होने लगती है. बारिश में दोनों भीग जाते है.. और दौड़ कर पास में बने झोपडी में चले जाते hain…lekin तब तक दोनों के कपडे गीले हो जाते हैं…

ारु थोड़ा काम्पटी रहती hai..aur जब राजू ारु को देखता है तो उसके होश उड़ जाते hain…aur पंत में तम्बू बन जाता हैं…

ारु सेफ साडी में बहुत hi कामुक नज़र आ रही thi…geela badan..khule गीले बाल, तप तप करती पानी की boonden..geela होने की वजह से सफ़ेद ब्लाउज में काली ब्रा नज़र आती hain…aur काली पंतय लाइन bhi…jo राजू को और परेशान करती हैं…





राजू धीरे से ारु के पीछे जाता है और उसे कास के पीछे से बाहों में भर लेता है..

थोड़ा ठण्ड और मौसम की वजह से ारु की सिसकी निकल जाती है और कहती हैं

ारु: राजू, क्या कर रहा hai..chhod ना..

राजू: नहीं Aaru…tum तो क़यामत लग रही ho…sach कहूँ तो मेरा मैं बहुत कुछ करने को कह रहा hain…aur ज़ोर से उसके पेट को दबा देता है..

राजू धीरे से उसके कान में कहता hai..maine तुम्हे देखा है रात ko..jab तुम ऊँगली कर रही थी रवि का नाम लेकर..

ारु सरप्राइज हो जाती hai..aur कहती है.. …काश रवि होता…

राजू: ारु को पलटा kar..dekh mujhe…tujhko मुझ में रवि नज़र aayega…(as यू क्नोव बोथ वेरे ट्विन्स)…

ारु शर्मा जाती है और दोनों इमोशनल हो जाते है..

ारु: हाँ राजू, तू सही कह रहा hain…main रवि को बहुत मिस करती हूँ और अब यह तन्हाई बर्दाश्त नहीं होती…

राजू ारु को गले लगा लेता है और उसकी गांड को हलके से दबा kar…main यह तन्हाई दूर करूंगा ारु..

मैं जानता hoon…jo hua…sab गलत हुआ हम सब के liye..tumhe भी ख़ुशी से रहने और जीना का अधिकार hai..aur वह तुम्हे मैं देना चाहता hoon..tum भी खुश raho..maa भी एहि चाहती है…

ारु राजू को सवालिया नज़र से देखती है तो राजू हाँ में सर हिला देता है..

यह कह कर राजू ारु के होंटो को किश करने hi वाला होता है तो ारु को थोड़ा होश आता हैं और अपने आपको संभालते हुए उसे अलग कर देती हैं और कहती हैं नहीं Raju..yeh गलत है.

राजू: हो सकता हैं बूत मेरी आँखों में झाँक कर dekho..tumhe अपने लिए इन आँखों में बेशुमार प्यार नज़र आएगा.

ारु: नहीं, यह तुम्हारा प्यार नहीं, वासना बोल रही है.

जब राजू यह बात ारु से सुनता है तो उसे छोड़ देता हैं और कहता hai..theek hai..ab मैं तुम्हे हाथ भी नहीं lagaaunga..jab तक तुम खुद मेरे पास नहीं आओगी और मेरा प्यार स्वीकार नहीं करोगी और तुम्हे पता चलेगा की यह वासना नहीं सच में तुम्हारे लिए प्यार है. यह बोल कर वह भी दूर हो जाता हैं.

इतने में बारिश भी रुक जाती hai..aur वहां से ारु भाग जाती हैं…

ारु चले जाती है और राजू भी सोच में डूब जाता है.

ारु जब घर चली जाती है और कपडे बदल कर कमरे में आती है तो उसे उसका और रवि का फोटो नज़र आता है. उसे उस चेहरे में राजू भी नज़र आता है और फिर वह सोचती है की राजू सही कह रहा था. उसको भी ख़ुशी से जीने का हक़ है और वह अब से खुश hi रहने की कोशिश करेगी.

राजू अपने काम में लग जाता hai..aur फिर सोचता है की वह एक बार काम्य से मिल ले..

इसी सोच से राजू काम्य के घर की और निकल जाता है और पीछे के रास्ते से घर में जाने की कोशिश करता है..

लेकिन उसे नौकरों की आवाज़ आती है और उसे समझ में आ जाता है की ठाकुर घर में hi है और अभी इस वक़्त घर में जाना खतरे से खाली नहीं hain…yahi सोच कर वह पलट जाता है और अपने खेत की और निकल जाता है और अगले दिन काम्य से मिलने के बारे में सोचता हुआ चला जाता है.

रात को सब खाना खा कर अपने कमरे में चले जाते है. ारु भी दुविधा में रहती है और बार बार वह रवि की तस्वीर भी डेक्टि रहती है और सोचती है काश रवि होता…

उधर राजू के कमरे में राजू भी सुबह की बातें सोच कर सोच में डूब जाता है और उसे कब नींद आती हैं पता hi नहीं चलता. वह गहरी नींद में सपना डेक्था है…

सपने में:

राजू भी अपने कमरे में बेसब्री से ारु का इंतज़ार करता है. जब वह बहुत देर तक नहीं आती तो सोने की तैयारी कर रहा होता है.

थोड़ी देर में ारु एक सेक्सी मैक्सी पहन कर राजू के कमरे में मटकते हुए चले जाती hai..jahan राजू सोने की तैयारी कर रहा था.

ारु: मैंने पहले hi सोच लिया था की मुझे भी ख़ुशी से जीने का अधिकार हैं और मैं आज यहाँ आऊँगी…

राजू जा कर दरवाज़ा अंदर से बंद कर देता है और ारु को बिस्तर पर बिठा कर उसके बगल में बैठ जाता है…

ारु: मुझे लगा तुम सो जाओगे अब तक..

राजू: haan..main सोने hi वाला tha..aur तुम आ gayi..uska हाथ पकड़ कर बात nahi..tumse प्यार करना है …और उसका हाथ चूम लेता हैं

ारु: धत पगले..

राजू: मैं जानता hoon..tum बहुत दुखी हो और तुम्हे प्यार की ज़रुरत hai..jo मैं दिल से देना चाहता हूँ

ारु: हाँ Raju..main भी प्यार के लिए तड़प रही hoon..jab से रवि गया hain…main भी जल रही hoon..aur उसके आँखों से आंसू आ जाते है..

राजू उसके आंसू पोछता है और कहता hai..ab दुखी रहने के दिन गए..

यह कहते हुए राजू ारु के होंठ चूम लेता hain…pehle धीरे se…phir किश गहरा हो जाता है और ारु भी उसका साथ देती है.. मुहह्ह्ह्ह ममममममम ुंहःहःह मममममम ममममममम.....



5-10 मं तक गहरा फ्रेंच किश करते है जहाँ दोनों एक दुसरे की जीभ भी चूसते hai..thodi देर बाद दोनों अलग होते है और दोनों की आँखों में नशा च जाता है.

दोनों के होंठ फिर से मिल जाते है और इस बार राजू उसकी चुकी दबा देता है..

"अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह सीईईई राजूउउउउउ इतनी जोर से नहीं..... ahhhhhhhhhh".

ारु की सिसकी राजू के होंठों में डाब जाती हैं…

चुकी दबाते हुए उसके गले की किश करते हुए नीचे आता hai..aur ब्लाउज के ऊपर से चुकी को किश करते हुए दबाता है..

ारु मचल जाती hai..aur उसका सर पकड़ कर चुकी पर दबा देती hain…Raju फिर उसकी ब्लाउज के हुक खोल कर बदन से अलग कर देता hai..aur लाल ब्रा में बंद कैद चुकी को देख कर उसका पारा उड़ जाता है और उस पर टूट पड़ता है..

उसके ब्रा को खोल कर उसे ऊपर से नंगा कर देता है.. राजू तुरंत hi अपना मुँह को सीधा ारु के निप्पल पर ले जाता है

और जबरदस्त तरीके से ारु के निप्पल को चूसने लगता गई है और बिच बिच में वो उसके निप्पल को दातो से काट लेता है

10 मं तक दोनों चूचियों को बारी बारी चूसने और हलके से काटने के बाद नीचे जाता है और नाभि पे गहरा किश देता है और पेटीकोट का नाडा भी खोल देता hain…Aaru भी उसकी मदद करते हुए अपनी गांड उठती है..

वह काले रंग की छोटी पंतय में बहुत की कामुक लग रही thi..jo अब तक पूरी गीली हो चुकी थी.

रवि: Aaru…yeh कहते हुए पंतय के ऊपर से hi चूम और चाट ता हैं…

ारु ज़ोर की सिसकियाँ लेते हुए उसका सर अपनी छूट पर उसका सर रख देती है..

राजू के होंठ गीले हो जाते hai..uski गीली पंतय की वजह se..aur धीरे से उसकी पंतय भी निकल कर उसे पूरा नंगा कर देता है और देखता है की छूट एकदम चिकनी और मुलायम लग रही hain…Raju सर उठा कर आँखों से पूछता है तो ारु भी आखों से hi इशारा कर के हाँ बोल देती hain…phir kya…Raju उस चिकनी छूट पर टूट पड़ता hain…upar से लेकर नीचे tak..chaat ते जाता hai..aur अपनी जुबां को नुकीली कर के छूट के गुफा में घुसा देता hain…Aaru सिसक पड़ती हैं…





रवि फिर उसकी क्लीट को लेकर धीरे से काट ता hain…Aaru एकदम से झटके से उत्तेजना के मारे उठती है और ज़ोर से उसका सर अपनी छूट पे दबा देती hair…aur ढेर सारा पानी छोड़ देती है..

राजू बड़े चाव से पानी चाट जाता है और ऊपर आ कर ारे के होंठ चूम लेता hai..aur धीरे से कान में कहता hain…tum बहुत मीठी ho…aur रास भी उतना hi मीठा.

ारु शर्मा जाती है और अपना चेहरा राजू की छाती में छुपा लेती है.

राजू अपना पायजामा और अंडरवियर निकल कर फ़ेंक देता है और वह भी नंगा हो जाता है.

राजू: अब ज़रा छोटे राजू को भी अपने प्यार से नेहला दो ना..

ारु: धत badmaash…aisa भी कोई कहता है क्या.. और उसके मजबूत सीने पे एक चपत लगी और अपना मुँह छुपा की राजू के मजबूत चौड़े सीने पे छुपा लेती है और कहती है तू बड़ा बदमाश हो गया है.....

राजू धीरे से उसके पास आकर कान में कहता hai..to ज़रा लुंड को मुँह में लेकर चूस लो ना…

ारु शर्मा जाती है लेकिन फिर भी वह झुक कर लुंड के टोपे को हल्का सा चुम्बन देती हैं…

राजू एक्ससिटेड हो जाता hai..aur अपना हाट उसके सर के पीछे ले जाकर लुंड को उसके मुँह में धीरे धीरे धकेलता है और ऐसा करते करते पूरा लुंड मुँह में भर देता है..



ारु भी उसको लोल्लयपोप की तरह चूस रही होती है और राजू भी आहें भर देता हैं…

5 मं चूसने के बाद राजू धीरे से कहता hain…gotiyon से तुम्हारी दुश्मनी है kya..usko भी चूस लो ना…

ारु तिरछी नज़र से उसको देखती है और मुस्कुरा कर गोटियों को भी चूसने लगती है..

रवि सातवें आसमान में चला जाता है..5-10 और दोनों को चूसने के बाद राजू लुंड मुँह से निकल लेता है और ारु से कहता है की तुम लुंड मस्त चूसती हो…

ारु हल्का सा है kar….Ravi ने सिखाया हैं…

राजू: फिर तो उसने एकदम सही सिखाया है तुम्हे और आंख मार देता है..

राजू का लुंड फुल टाइट हो जाता है और ारु को सुला कर उसके ऊपर आ जाता है और होंठों को चूमते हुए अपने लुंड को एडजस्ट करके एक झटका मारता hain…Aaru आअह्ह्ह कर के सिसकी लेती hai..aur उसे तकलीफ होती hain…ravi थोड़ा आराम से करो naa…abhi तक पूरा खुला नहीं हैं…

राजू को शरारत सूजती है और पूछता hai..kya खुली नहीं hain…woh भी ारु को पूरा खोलना चाहता tha..taaki दोनों को मजा आये….

ारु धीरे से उसके कान में कहती hai..choot अभी तक पूरी खुली नहीं hai..Ravi को ज़्यादा टाइम भी मिला नहीं था खोलने के लिए…

राजू एकदम खुश हो जाता है..

चिंता मत करो Aaru..main अच्छे से खोल दूंगा…

और राजू धीरे से धक्का मारता है और 2 इंच अंदर चले जाता hai..Aaru सिसकी लेती है.. राजू दो मं रुक कर उस होंटो को ज़ोर से चूमते हुए एकदम तगड़ा धक्का लगता है और उसका पूरा 8 इंच जड़ तक घुस जाता hain….Aaru की चीख राजू के मुँह में hi डाब जाती है.



थोड़ी देर रुख कर राजू फिर धीरे धीरे लुंड अंदर बहार करता hain….Aaru भी पानी पानी हो चुकी thi…aur उसकी छूट से पानी निकलने की वजह से अच्छा फ्रिक्शन पैदा होता है और आसानी से उसे छोड़ने लगता हैं…10-15 मं तक जैम कर उसे उसी पोजीशन में छोड़ता hai..aaru इस बीच 2 बार अपना पानी निकल चुकी थी..



राजू धीरे से उसके कान में कहता hain…Aaru, घोड़ी बन जाओ…

ारु कहती hai..woh क्या हैं?

राजू उसके ऊपर से उठ कर ारु को उसके घुटनो के बल झुका देता hain….jiski वजह से उसकी गांड भी उभर आती हैं…

राजू मन में सोचता hain…ek दिन इस छेद को भी खोलना पड़ेगा…

राजू उसके पीछे आकर लुंड घुसा देता hain…Lund और छूट गीला होने की वजह से आराम से अंदर बहार होता hain…Raju उसकी चुकी दबाते hue..uske कान में कहता है..

Aaru…kaisa लग रहा हैं? मजा आ रहा है की नहीं?

ारु पीछे देख कर हाँ में सर हिला देती hain…Raju उसके कान के पास आ कर कहता hain…isi पोजीशन को घोड़ी बनना कहते hai..Aaru हल्का सा है देती hai..aur राजू उसके होंठ चूमते हुए धक्के जारी रखता है..

10 मं की दुमदार चुदाई चलती hain…saath hi राजू ारु की चूचियां भी मसलते रहता है ..इस दुमदार चुदाई से दोनों थक जाते हैं और आखिर में राजू कहता है मेरा निकलने वाला hai..andar hi निकालूँ क्या?

ारु कहती hai..nahi..baahar hi निकालो…2-3 धक्के और मार कर राजू लुंड निकल कर अपना पानी उसकी पीठ पर निकल देता हैं…

दोनों थक जाते hai..Raju उसके बगल में लेट जाता है और ारु उसके सीने में सर रख देती है..

राजू: ारु, कैसा लगा?

ारु: accha…aise hi मुझे प्यार करोगे ना?

राजू: मरते डैम tak…tumko ऐसे hi प्यार karoonga..aur दुनिया भर की खुशियां दूंगा तुम्हे. तुम्हारे चेहरे में हमेशा ख़ुशी देखना चाहता हूँ.

ारु है कर उसके छाती में अपना चेहरा छुपा लेती hai..aur कहती hai..main इसी सुख केलिए प्यासी थी..

<एन्ड ऑफ़ ड्रीम>

रात के सन्नाटे में घर में कुछ गिरने की आवाज़ आती हैं जिसकी वजह से राजू के नींद टूट जाती hain…aur सोचता hain..dhat..oohh…tere ki…yeh तो सपना hain….yaane मैं सपना देख रहा tha…Sapna hi इतना अच्छा हैं तो सच होगा तो कैसे रहेगा…

एहि सब सोचते हुए वह कमरे के बहार जाता है और देखता है की शायद कोई बिल्ली होगी जिसने बर्तन गिरा दिए होंगे. घर को एक बार फिर से चेक करके सोने चला जाता है…
 
अपडेट 11: एक नयी सुबह

अगली सुबह…

रोज़ की तरह सब लोग अपने काम में व्यस्त हो जाते है. कल की वजह से राजू का आज मन नहीं होता है खेत में जाने के लिए तो वह घर पर hi रह जाता है.

ारु भी नाहा कर आँगन में आती है तो राजू उसे अनदेखा कर देता है.

संध्या भी नाहा कर अपने कमरे में कपडे बदलने जाती है. गीले पाँव और फर्श भी थोड़ा गीला होने की वजह से कमरे में उसका पाँव फिसल जाता हैं और वह धड़ाम से गिर जाती है और ohhhh..maaa…ki ज़ोर की चीख निकल जाती है.

घर के सब लोग दौड़ते हुए उसके कमरे में जाते हैं और संध्या को ज़मीन में गिरा पड़ा देख कर परेशान हो जाते है. रत्न और ारु उसे उठाने की कोशिश करते hain..Sandhya उठ तो जाती है पर उससे चला नहीं जा रहा था..

राजू भी उसके पास आ जाता हैं और जब वह संध्या को मुश्किल में देखता हैं तो तुर्रंत hi उसे अपने गॉड में उठा कर बिस्तर पे ले जाता है.

गिरने की वजह से उसका पाँव एकदम सूझ गया tha..jiski वजह से उसे बहुत तकलीफ हो रही थी.

राजू फिर एक क्रीम ला कर संध्या के पेअर में लगा कर मालिश करता है. संध्या थोड़ा सरप्राइज हो जाती है और अपना पाँव हटा लेती है लेकिन राजू उसका पाँव अपनी तरफ खींच कर क्रीम लगा कर मालिश करता है.

संध्या को थोड़ा आराम मिलता है लेकिन उसे अभी भी परेशानी हो रही थी दर्द के वजह से.

दोपहर तक जब उसका दर्द काम नहीं होता हैं तो राजू उसे हॉस्पिटल लेकर जाने की बात करता है. संध्या मन करती है बूत राजू और रत्न की ज़िद की वजह से उसे जाना hi पड़ता हैं.

हॉस्पिटल में डॉक्टर उसे जांच कर कहता है की सिर्फ मोच hai…dawa और क्रीम देकर कहता हैं की दर्द ठीक हो जाएगा..

जब वह घर आ रहे होते है तो ठाकुर भी अपने घर जा रहा होता है. उन्दोनो को देख कर ठाकुर को फिर से ठरक पड़ती हैं और सोचता है की यह लौंडिया भी अभी इनके साथ रह रही है. जल्दी hi कुछ जुगाड़ करना padega…aur यह सोचते हुए घर चला जाता है.

राजू और संध्या घर आ जाते है. ारु भी राजू से थोड़ा इम्प्रेस हो जाती है की उसने माजी (संध्या) की इतनी सेवा जी है जब की कोई ज़रुरत नहीं थी.

संध्या भी मन में: काश मेरा पति भी ऐसा मेरी मदद karta..woh तो भादवा और शराबी nikla…Raju सच में मेरी इतनी मदद कर रहा हैं जब की ज़रुरत भी नहीं था..

एहि सोच में उसके आँखों में आसूं आ जाते हैं जिसे रत्न देख लेती है.

रात को नार्मल होने के बाद रत्न संध्या के कमरे में जाती है और पूछती है की वह क्यों रो रही थी. संध्या कहती है की राजू ने उसकी इतनी मदद की है और वह उसे बहुत खुश हैं और उसके दिल में राजू ने पनाह ले लिया था.

रत्न उसे गले लगा लेती है और कहती है की राजू ने जो किया, उसमें कोई अलग बात नहीं हैं…

रत्न उसे कुछ और बातें कर की अपने कमरे में चले जाती है.

संध्या को ठीक होने में 2-3 दिन और लग जाते है और इन 2-3 दिनों में राजू उसकी बहुत मदद और देखभाल करता hain..jab भी संध्या को चलने में तकलीफ होती है तो राजू उसको सहारा देता hai…har बार वह (राजू) उसकी (नंगी) कमर पर अपना एक हाथ रख कर संध्या को चलने में मदद करता hai..Raju जब उसकी कमर पर हाथ रखता है तो संध्या मुद कर उसकी आँखों में देखती है और हल्का सा मुस्कुरा देती hai..in 2-3 दिनों में संध्या राजू से बहुत खुश होती हैं की उसने उसकी इतनी मदद की और धीरे धीरे उस पर प्यार आने लगता है.

वही दूसरी तरफ ारु भी राजू से बहुत खुश हो जाती है की वह घर में सब की देखभाल कर रहा है. वह भी इन 2-3 दिनों में राजू को रिझाने की कोशिश करती hai..jab भी उसके पास से जाती हैं तो अपनी गांड मटकाते हुए जाती hai…use चाय देने के बहाने कुछ ज़्यादा hi झुकती है जिसकी वजह से 1-2 बार उसकी साडी का पल्लू गिर जाता है और क्लीवेज से झांकती हुई चूचियां राजू को नज़र आती hai…..Woh यह भी महसूस करती है की इन सब हरकतों की वजह से राजू ने एक बार भी उसकी तरफ नज़र नहीं daala…yeh सोच कर उसके होंठों में एक कातिल मुस्कान आ जाती है.



अगली सुबह…

ारु फिर नाहा कर सेक्सी ऐडा से चलते हुए राजू के पास से गुज़रती हैं..

उसके नहाने के बाद राजू भी नहाने चला जाता है..

जब वह बाथरूम में जाता है तो मैले कपडे एक बास्केट में रखे हुए है लेकिन एक छोटी पंतय फर्श पर पड़ी हुई दिखती hai..usko देख कर उसका मन भी मचल उठता है और उठा कर सोचता हैं की किसकी hogi…usko सूंघता हुआ आहें भरता hai..sochta है की खुस्भु कितनी अच्छी hain…sochte और सूंघते हुए मूठ मारता है और नाहा कर बहार आ जाता है.



राजू फिर भी ारु को इग्नोर करता हैं और अपने काम में बिजी हो जाता है और खेत चला जाता है.

दोपहर को ारु उसके लिए खाना लेकर खेत में उसके पास जाती है. उसे देख कर राजू थोड़ा सरप्राइज हो जाता है लेकिन कुछ नहीं कहता.

दोनों खाना खाने के बाद ारु राजू से कहती है..

ारु: राजू, उसदिन मैंने जो किया शायद थोड़ा गलत था.

राजू: नहीं..

ारु: तुमने माजी के लिए जो भी किया, वह मुझे बहुत अच्छा laga..aur जैसे तुमने कहा tha…main तुम में रवि को देखती हूँ. मुझे विश्वास हो गया है की उसदिन तुमने जो किया वह वासना नहीं था.

राजू: तुम्हे ऐसे क्यों लगता है?

ारु: अगर वासना होता तो शायद तुम इन 2-3 दिनों में मुझे अनदेखा ना karte…aur शायद मुझसे मिलने या छेड़ कानि ज़रूर karte..maine भी तुम्हे रिझाने की कोशिश ki..lekin तुमने ऐसा कुछ गलत नहीं किया जिससे मेरे मन को ठेस पहुंचे. मुझे भी लगा की तुम उस दिन सही थे.

ारु: तुम्हे इसका इनाम मैं दूँगी तुम्हे..

राजू: मतलब? समझा नहीं

ारु: समझ jaaoge…thoda इंतज़ार karo…kehte हैं ना ..इंतज़ार का फल मीठा होता हैं.. …और आंख मार देती है.

यह कह कर ारु वहां से अपनी गांड मटकाते हुए घर के लिए निकल जाती है. ारु भी बहुत दिनों से प्यासी थी और उसे अब लगा की यह hi सही समय है अपनी आग को बुझाने का..

राजू कुछ सोचता है और वह काम्य से मिलने उसके घर चला जाता है.

ठाकुर के घर:

वह काम्य के कमरे में जा कर देखता है तो देखता है की कमरा खाली hain…phir थोड़ी देर बाद काम्य बाथरूम से नाहा कर बाहर आती है तो राजू उसको देख कर चक्र जाता है.. (और पंत में तम्बू भी बन जाता हैं)..



नाहा कर खुले और गीले बालों में और सिर्फ सेक्सी ब्लाउज और पेटीकोट में काम्य बहार आती hain…use पता नहीं था की राजू आ जाएगा…



काम्य उसे देख कर हलकी से चीक निकल जाती हैं…

राजू अपना चेहरा घुमा कर थोड़ा दूर जो जाता हैं…

काम्य उसको बहार वेट करने को बोल कर अपने कपडे पेहेन लेती है..

राजू जब वापस कमरे में आता है तो देखता है की काम्य एक सुन्दर साडी में बाला की खूबसूरत लग रही thi…woh उसकी तारीफ़ करने से रुक नहीं पाटा और कहता hai..malkin आप बहुत खूबसूरत लग रही हो…



काम्य थोड़ी शर्मा जाती hain…(kaamya की बेरुखी ज़िन्दगी में यह पहली बार था की किसीने उसकी तारीफ़ की थी) और पूछती है की राजू वहां क्यों आया..

राजू: 2 दिन पहले जब आपने मुझसे मदद माँगा tha..to मैं सोच में पद गया tha…bahut सोचने के बात निर्णय लिया की आपकी मदद करूंगा और आपको उस ठाकुर से मुक्ति दिलाऊँगा..

राजू: लेकिन यह मैं कैसे मान लून की आप मुझ से सचमुच में ठाकुर से बचाने के लिए बोल रही हो और यह ठाकुर की कोई चाल तो नहीं है.

काम्य: अगर ऐसा होता तो मैं तुम्हे मुझसे मिलने के लिए छुप के से क्यों बुलाती?

राजू: बात तो सही है फिर भी मुझे कुछ गड़बड़ लग रहा है.

काम्य: nahi..koi गड़बड़ नहीं hain…mera विश्वास karo…mujhe यहाँ से निकल lo..tumhe जिस तरह की मदद चाहिए तो वह मैं करने को तैयार हूँ.

राजू: ठीक main..maan लेता hoon…lekin अगर आपने कुछ गलत किया और मुझे फ़साने की सोची तो मुझ से बुरा कोई नहीं hoga…main जितना अच्छा hoon…utna बुरा भी हो सकता हूँ.

काम्य: haan…main समझ सकती हूँ तुम्हारे विचारों के बारे में.

राजू: आपकी मदद के बदले में मुझे क्या मिलेगा?

काम्य: कातिल निगाहों से उसे देख कर क्या चाहिए तुम्हे

राजू: वह भी काम्य को थोड़ा लालची नज़र से देखता hai…dekhta हैं की वह कितनी सेक्सी लग रही hain…sundar चेहरा, उठी हुई (और शायद ुनचुइ chuchiyaan)…ekdum सपाट और गोरा pet…abhi तो कुछ nahi..but वक़्त आने पर मांग लूँगा

काम्य: ठीक है.

राजू: ठीक hain…main कुछ सोचता हूँ और आपको बताता हूँ की आगे क्या और कैसे करना है.

काम्य: मैं इंतज़ार karoongi..aur थोड़ा जल्दी karna..mujhe यहाँ घुटन होती है और नरक जैसा लगता है यहाँ.

राजू: ठीक है.

राजू: accha..main एक बार ठाकुर का कमरा देख सकता हूँ क्या? (काम्य को पता नहीं था की पिछली बार राजू उसके कमरे में घुस गया था).

काम्य: क्यों, क्या हुआ?

राजू: कुछ nahi..ek बार देखना चाहता hoon..shayad कुछ काम की चीज़ मिल जाए..

काम्य: ठीक है..

राजू फिर धीरे और चुपके से ठाकुर के कमरे में जाता हेयर और सावधानी से कमरे की तलाश करता है..

कुछ ख़ास तो मिलता नहीं है लेकिन उसे गाँव वालों के ज़मीन के कागज़ात मिल जाते है..

उन्हें देख कर वहीँ पर रख देता है लेकिन उसे पता चल जाता है की ठाकुर ने गाँव के बहुत लोगों की ज़मीन गिरवी में रख ली है और उनके कागज़ात भी उसके पास hi है.

राजू सोचता है की वह कागज़ात भी ठाकुर से वक़्त आने पर निकल लेगा और गाँव वालों को भी मुक्ति देगा..

वह देखता रहता है तो उसे किसी के आने की आहात होती हैं…

वह जल्दी से भाग कर बहार आ जाता है और काम्य को बोल कर चुपके से निकल जाता है.

आने वाला (वाली) शख्स और कोई नहीं बल्कि ठाकुर की बहिन थी.

नई करैक्टर एंट्री:

नाम: माला , आगे 35 यरस, फिग : 34/26/34

थोड़ी घमंड है उसमे लेकिन ठाकुर के मुक़ाबले थोड़े अच्छे संस्कार और बहुत चुड़क्कड़ aurat..aur मस्त फिगर….
 
अपडेट 12: चिंगारी की पहली झलक..

अब आगे…

माला अपने पति से अलग रहती है और कोई बच्चा नहीं. उसे सीटुएशन्स को समझने की कला है और इसीलिए वह थोड़ा शार्प माइंडेड भी है.

माला को देख कर काम्य भी खुश हो जाती है और उसके गले लग जाती है..

अंदर आने के बाद माला काम्य से पूछती है की भाई (ठाकुर) कहाँ है..

काम्य कहती है की वह अपने काम से गए है..

थोड़ी देर बाद दोनों चाय पीने बैठे है तो माला पूछती है..

क्यों bhabhi..mujhe लगा आपका फिगर बढ़ गया hoga..waise hi hain…bhaiyya लेते नहीं है क्या?

काम्य कुछ जवाब नहीं देती और उदास हो जाती hain…aur कहती hai..tu hi रात को देख lena..pata चल जाएगा…

शाम को ठाकुर भी घर आ जाता है और माला को देख कर खुश हो जाता है..

फिर थोड़ी बात होती है और सब डिनर करते है.

रात को…

खाना खाने के बाद ठाकुर रूम में जाता है और दारु की बोतल निकल कर पीने लग जाता hain…Kaamya मन करती है बूत उसकी बात वह कब सुने..

उसे धिक्कारता hai..gaali देता है और अपने काम में (दारु पीने में) लग जाता है..

काम्य वैसे hi प्यासी की प्यासी रह जाती है.

माला यह सब कमरे के बाहर से नज़ारा देखती है और वह भी थोड़ा दुःख हो जाती hai..use भी समझ आता है की उसका भाई (ठाकुर) काम्य जैसी मस्त माल पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है.

राजू के घर:

इधर राजू के घर में रात को सब खाना खाने के बाद सोने चले जाते है..

राजू भी अपने कमरे में चला जाता है और बेसब्री से ारु का इंतज़ार करता है यह सोचते हुए की शायद ारु उसके कमरे में आएगी. लेकिन ारु आती नहीं है और राजू भी सो जाता है.

अगले दिन सुबह राजू जब उठ कर किचन में जाता है तो देखता हैं की ारु चाय बना रही हैं.

ारु उसे देख kar…uth gaye..chalo..baahar आँगन में baitho..chai लेकर आती हूँ.

राजू: माँ कहाँ है?

ारु: वह नाहा रही है

राजू उसकी चुकी को घूरता हुआ कहता hain..mujhe तो “दूध” पीना है. ारु को बात समझ नहीं आती और जब वह राजू के नज़रों का पीछा करती है तो समझ जाती है.
 
अपडेट 13: पहला मिलान..

अगली सुबह रत्न चाय बना रही होती है और ारु नाहा कर किचन में आती hai...par उसका चेहरा एकदम खिला खिला लग रहा था.

रत्न अपनी तीखी नज़र से जान लेती है की रात को कुछ हुआ है..

रत्न: ारु beti..kya बात hai..bahut खिली खिली सी लग रही हो..

ारु: कुछ नहीं माँ ji..abhi नाहा कर आयी हु naa..to थोड़ा अच्छा लग रहा है..

एहि बात संध्या और सुधा भी नोटिस करते है ारु के चेहरे पर..

रत्न है देती है और रत्न चाय बनाना में व्यस्त हो जाती है..

रत्न चाय बना कर राजू को देने उसके कमरे में आती है..

रत्न: उठ जा bête…chai पीले..

राजू: उठ कर थोड़ा सुस्ती लेते hue…maa..mujhe कुछ मीठा चाहिए..

रत्न: सुबह सुबह मीठा कहाँ से लाऊँ?

राजू: इधर aao…main बताता हूँ..

रत्न राजू के पास आती है तो राजू उसको बाहों में लेकर उसके होंठों पर एक गहरा किश करता है. रत्न पहले ना नुकुर करती है लेकिन फिर वह भी उसका साथ देती hain…kiss जैसा गहरा होता hai..Ratna भी सिसकी लेकर आहें भर्ती है और उसकी टांगों के बीच में उसे गीला पैन महसूस होता है.



किश तोड़ के राजू कहता hai..mujhe एहि मीठा चाहिए tha…aur मुझे रोज़ chahiye…dogi ना माँ?

रत्न: तू बहुत बदमाश हो रहा hai..aur झूटी गुस्से में कहती है. राजू हल्का सा है कर उठ जाता है और फ्रेश होने चला जाता है..

रत्न भी कमरे से आ जाती है.

राजू भी फ्रेश हो कर चाय पीने बहार आ जाता hai..itne hi वक़्त ारु नहाने चली जाती है

राजू जब चाय पी रहा होता हैं तो ारु नाहा कर इस बार अपनी साडी को नाभि के 2 इंच नीचे बाँध कर मटकते हुए राजू के सामने से निकल जाती है और उसे देख कर आँख मार देती है.



Raju: chinta mat karo..main kisi honth ko adhoora nahi chhodunga..

Aur yeh kehte hue Raju Aaru ko bistar pe lita kar uske upar chad jaata hai aur phir kiss shuru ho jaati hain dono ke beech.



Kiss karte karte Raju uski chuchi bhi dabaate rehta hai aur us par zor bhi badhaata hua chala jaata hai.

Kiss kar ke neeche gale mein kiss karte hue..blouse ke upar se hi uski chuchi ko kiss karta hai aur dheere dheere blouse ke hooks bhi khol deta hai.





Aaru jhadne ke baad jab thoda thanda hoti hai to Raju uske upar aakar use kiss karte hue..tum aur tumhaara ras to bahut meetha hai..Aaru sharma jaati hai aur apna chehra ghuma leti hai. Raju uske chehre ko pakad kar seedha karke uski aankhon mein dekh kar..maine kya galat kaha? Jo sahi hai wahi to kaha..aur usko halka saa kiss kar deta hai.

Raju: maja aaya naa? Maine kaha tha naa..ki tumhe jannat ki sair karooanga…yeh to 1st trip hai..abhi to bahut trips baaki hai aur aankh maar deta hai.

Raju bhi nanga hokar Aaru se kehta hai ki usko bhi jannat ke sair mein jaana hai..

Aaru samajh jaati hai aur uske lund ko mooh mein lekar badi shiddat se choosti hui chali jaati hai..



10 min ki lund chusai ke baad Raju aur Aaru 69 position mein aakar ek doosre ko acche se chooste hain.
 
अपडेट 14: काम्य और माला का संवाद

कुछ दिनों के बाद

सुबह रत्न किचन में चाय बना रही थी. राजू भी फ्रेश होकर आता है और रत्न को पीछे से कमर पकड़ कर कास लेता hai..aur उसके गले को चूमता है.

रत्न कहती hai..kya कर रहा है tu…din बी दिन तू बहुत बेशरम हो रहा है और परेशां कर रहा है..

जब रत्न यह बात बोलती है तो राजू अपना हाथ ऊपर कर के उसकी चुकी हो हलके से दबा देता है और कहता hain…ab तो ज़रूर बेशरम हो jaaonga..aur हसने लगता है.
 
अपडेट 15: थे पैशन कॉन्टिनुएस (विथ ा ट्विस्ट)

इसी तरह से सब लोग अपने काम में बिजी रहते है..

जहाँ राजू हमेशा ठाकुर के बारे में सोचता है की और ज़्यादा कुछ खबर मिल जाए उसके करतूतों के बारे में तो वह उसके खिलाफ कुछ कर सकेगा…

तो वहीँ दूसरी तरफ काम्य और माला भी ठाकुर से परेशान हो जाते है और सोचते है की कैसे उसे छुटकारा मिले (भले hi ठाकुर माला का भाई tha..lekin वह भी उससे परेशान हो जाती है).

रात को राजू के घर:

उस दिन रात को राजू धीरे से ारु के पास जाता है और दरवाजा बंद कर के उसको बाहों में लेकर चूमता है. ारु भी उसका पूरा साथ देती है..

ारु: बहुत दिनों के बाद आये ho..kya मेरे से मन भर गया क्या एक बार में hi?

राजू: तुमसे कभी मन भर सकता है क्या? बस आना नहीं हुआ और काम की वजह से थक भी जाता हूँ तो जल्दी नींद आ जाती है.

यह कहते हुए राजू फिर से उसके होंठ चूमते हुए उसकी चुकी दबाने लगता hai..pehle धीरे se..lekin फिर ज़ोर देने लगता है.

ारु: थोड़ा धीरे दबाओ naa…dard होता है..

राजू: यह तो दबाने की चीज़ है Aaru..jor के दबाने में hi तो मजा है..

फिर उसे बिस्तर पर ले जा कर सुलाता है और दोनों मजे करते रहते हैं…
 
अपडेट 16: थे फर्स्ट अटैक

होली के एक दिन पहले:

राजू सुबह अपने काम से खेत जाता है और वहां का काम देख कर काम्य से मिलने उसके घर चुपके से जाता है.

काम्य नाहा कर एक ट्रांसपेरेंट ब्लाउज और साडी में उससे मिलने आती है जिसे देख कर राजू के पंत में तम्बू बन जाता है. काम्य भी यह देख लेती है और हलकी सी मुस्कराहट के साथ राजू से पूछती है की वह क्यों आया है.
 
अपडेट 17: आफ्टरमाथ ऑफ़ 1सत अटैक

करीब 2-3 घंटे बाद ठाकुर उस खंडहर में जाता है और देखता है की उसके आदमी मरे पड़े हुए है और राजू और वह औरत (संध्या) भी नहीं थे उस खंडहर में. वह बहुत गुस्सा हो जाता है और गुस्से से घर निकल जाता है.

ठाकुर के घर:

जब ठाकुर घर पहुंचता है तो वह सीधा काम्य के पास जाता है जो उस वक़्त अपने काम में बिजी थी. वह बहुत गुस्से में tha…aur जा कर काम्य का बाल पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचता है. काम्य इस हमले से चौंक जाती है और उसे कुछ समझ में नहीं आता.

ठाकुर: साली रंडी की aulad..tu क्यों उस लौंडे के साथ गुलछर्रे उदा रही है? वह यहाँ क्या करने आया था?

काम्य: वह यह बात सुन कर चौक जाती है और अपने आप को संभालते hue…kya बात कर रहे हो? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है.

ठाकुर: अभी बताता hoon…aur यह कह कर उसके गाल पे एक ज़ोरदार तमाचा मारता है.

हरामज़ादी मुझसे जुबां लड़ती hai…aur फिर 2-3 तमाचे उसके गाल पे जमा देता hai…Kaamya अपने आप को संभाल नहीं पाती और गिर जाती है और ज़ोर से रो रो कर बचाओ बचाओ चिल्लाती है. पास में पड़े एक लकड़ी पकड़ कर ठाकुर काम्य पर बरस पड़ता है और उसे खूब मारता है.

उसकी आवाज़ सुन कर माला भी दौड़ते हुए कमरे में आती है और जब काम्य को ज़मीन पर गिरा हुआ और चेहरे पे थोड़ा खून देखती है तो ठाकुर से पूछती है की उसने काम्य को क्यों मारा?

ठाकुर: तू चुप कर Mala..yeh हम दोनों के बीच का मामला है

माला: तुम दोनों का मामला हो सकता है लेकिन तुम्हे भाभी को क्यों मारा? मारना नहीं चाहिए था..

ठाकुर अभी भी गुस्से में tha..aur वह भी माला पर हाथ उठाता hai..Mala फुर्ती से किसी तरह अपने आप को बचाती है और काम्य के पास जा कर उसे उठाती है.

माला को इस तरह का बर्ताव ठाकुर से उम्मीद नहीं थी. वह भी थोड़ा गुस्सा हो जाती hai..lekin कुछ नहीं कर सकती थी..

ठाकुर गुस्से से कमरे से निकल कर दुसरे कमरे में चला जाता है और शराब पीने लग जाता है. ठाकुर को हमेशा अपने मन मानी करने की आदत थी और उसे कोई रोकने वाला नहीं tha…lekin यह बात भी सच थी की अब तक ठाकुर को राजू जैसे लड़के का सामना नहीं हुआ tha..jo होशियार, बुद्धिमान और दिलेर था…

काम्य अपनी किस्मत पे रो रही थी. ठाकुर की बात सुन कर वह भी गुस्से में थी की कैसे उसने माला के सामने उसे अपमानित भी किया और उसको भी मारने की कोशिश की. वह इतने गुस्से में थी की बस चलता तो वह अभी ठाकुर को वही मार deti…lekin अभी उसमें इतनी हिम्मत और ताक़त नहीं थी.

लेकिन उसके चेहरे से खून निकलना काम नहीं hota…aur माला उसे हॉस्पिटल लेकर चले जाती है और एक नौकर को चुपके से राजू के घर भेज कर उसे बताने को कहती है.

राजू के घर:

राजू संध्या को लेकर घर पहुँचता hai..un दोनों को देख कर बाकी तीनो की आँख में आंसू और चेहरे पर दर के भाव आ जाते है और दौड़ कर दोनों के गले लग जाते है.

रत्न: राजू, यह क्या हाल है? चोट कैसे आयी तुम्हे? और संध्या को अपने गले लगा kar…kuch नहीं हुआ behenji..sab ठीक हो jaayega…ghabraane की कोई बात नहीं है

ारु एंड सुधा भी दौड़ कर दोनों को गले लगा लेते है..

घर में आने के बाद थोड़ी देर अपने आप को ठीक करते है और इतने में ारु पानी और चाय ले कर आती है.

रत्न: बोलो beta..kaise हुआ? क्या हुआ? और तुम्हे यह चोट कैसे आयी? और संध्या के फाटे कपडे देख कर उसको अपने कमरे में ले जाकर कपडे बदलवा कर सभी कमरे में इक्कट्ठा हो जाते है

राजू: nahi….baad में सब बातें bataaonga..pehle माजी को sambhaalo..unko बहुत तकलीफ हो रही hai…sadme में hai…pehle उसे सम्भालो…

ारु संध्या को लेकर कमरे में चली जाती है और उसके जख्मों पर थोड़ा मलहम लगा कर उसे सुला देती है.

राजू फिर तीनो को सब बातें बताता है और यह भी की वह उन गुंडों को (अब तक उसको कन्फर्म नहीं था की वह सब ठाकुर के आदमी थे) सब को मार दिया है.

राजू: अभी और कुछ nahi..mujhe भी थोड़ा आराम करने दो..1-2 दिन में सब विस्तार से bataaoonga..yeh कह कर राजू अपने कमरे में चले जाता है.

राजू कब अपने कमरे में जाता है तो इतने में वह नौकर आकर राजू को पुकारता है..

नौकर की आवाज़ सुन कर सभी आश्चयरा हो जाते है और राजू से पूछते है की कौन है yeh..aur तुम्हे क्यों बुलाने आया है.

राजू को देखते hi वह नौकर कहता है की साहिब मालकिन (काम्य) तो चोट आयी है और उसे हॉस्पिटल में लेकर गए है.

राजू: चुप रहो sab…main अभी हॉस्पिटल जा रहा hoon…aakar सब कुछ bataaonga…thoda सबर karo…mujhe कुछ नहीं होगा.

राजू हॉस्पिटल जाता है और पहले कन्फर्म करता है की ठाकुर के आदमी वहां नहीं है.

हॉस्पिटल जा कर राजू काम्य को देखता है तो वह भी थोड़ा दुखी हो जाता है क्यूंकि काम्य को बहुत चोट लगा हुआ था.

जब वह माला से मिलता है तो माला उसकी हालत देख कर परेशान हो जाती और पूछती है की उसको चोट कैसे आयी?

राजू: छोडो मेरे बारे mein..kisi और दिन bataaoonga…Woh माला से पूछता है की क्या हुआ और काम्य को चोट कैसी लगी.

माला उसे सब बता देती है. राजू को भी गुस्सा आता है लेकिन अपने गुस्से को काबू में रख कर डॉक्टर से मिलता है और काम्य के बारे में पूछता है.

सब पूछने के बाद वह वहां से निकलने से पहले माला से कहता है की कोई मदद की ज़रुरत हो तो उसे ज़रूर बताये. माला हाँ कहती है तो राजू वहां से घर के लिए निकल जाता है....
 
अपडेट 18: दिल की बात और राज़ का खुलासा

3-4 दिन बाद जब सब थोड़े नार्मल हो जाते है तो रत्न कुछ सुनने के मूड में नहीं थी और जबरदस्ती राजू से होली के दिन वाले हमले के बारे में पूछती है.

राजू कहता है की वह शाम को आकर सब कुछ विस्तार से बताएगा.

जब राजू वापस घर आता है तो घर की साड़ी महिलायें उसका बेसब्री से इंतज़ार कर रहे होते है.

वह घर पहुँचते hi सब उस पर टूट पड़ते है और जानकारी लेने की कोशिश करते है.

राजू कहता है की रात को आराम से बात करते है..

रात को खाना खा कर सब राजू के साथ उसके कमरे में जाकर बेसब्री से इंतज़ार करते है.

राजू: हाँ तो अब pooch…kya पूछना है

रत्न: पूछना क्या hai..Holi के दिन क्या हुआ? और वह ठाकुर का नौकर यहाँ क्यों आया और तू हॉस्पिटल क्यों गया? काम्य को तेरे बारे में कैसे पता है?

राजू: तो suno…main सब सच बता रहा hoon..aur तुम सब को मुझ पर विश्वास करना होगा.

राजू बताता है की कैसे उसने संध्या को ढूँढा tha..aur कैसे उसने सब को मार दिया था.

संध्या: राजू, फिर तुमने वहां पर ठाकुर की बात क्यों की?

राजू: मैं तो बस हवा में तीर चलाया tha…unka ध्यान बताने के liye…jo की वैसे hi हुआ और मैं आपको बचा लिया…

यह जान कर संध्या की आँखों में आँसू आ जाते है और वह राजू को अपने गले लगा कर उसके गाल चूम kar..tumne मेरी इज़्ज़त बचाई है Raju..warna मैं किसी की मुँह दिखाने लायक नहीं होती और शायद मर भी जाती.

राजू तुरंत उसके मुँह पे हाथ रख kar…mare आपके dushman…jab तक मैं hoon..tab तक आप सब को कुछ नहीं होगा और धीरे से वह संध्या का हाथ चूम लेता है.

यह सब देख कर बाकी तीनो के आँखों में भी आंसू आ जाते है और राजू को अपने गले लगा लेते है.

राजू फिर उन सब को पूरी कहानी बताता है (1सत कार इंसिडेंट से ले कर काम्य का उससे मदद माँगना….)

राजू: एक और बहुत एहम baat…aur यह बात फिलहाल हम पांचो के बीच hi रहना chahiye…baat बिलकुल और किसीको पता नहीं चलना चाहिए..

चारो सब अपने सहमति देते है.

राजू: मुझे लगता है बापू और रवि की एक्सीडेंट से मौत नहीं हुई है बल्कि ठाकुर की शायद कोई साज़िश है..

यह बात सुन कर चारो चौक जाते है और थोड़ा गुस्सा और उदासी से राजू को मुँह खोल कर देखते रहते है.

रत्न: तू क्या बोल रहा है बीटा? मुझे बहुत दर लग रहा है

ारु: राजू, क्या यह सच है?

राजू: मैं फिलहाल पक्का तो बता नहीं सकता लेकिन मुझे ऐसा शक है. फिलहाल मेरे पास कोई पक्का सबूत नहीं है.

रत्न: अगर सबूत नहीं है तो कैसे कह सकता है की ठाकुर की साज़िश है.

राजू: एक min…keh कर वह उठता है और अलमारी से “र” कपडा लाता है जो उसे ठाकुर के कमरे से मिला था.

वह कपडा देख कर ारु और रत्न ज़ोर ज़ोर से रोने लगती hai…dono को संध्या और सुधा अपनी बाहों में लेकर थोड़ा दिलासा देते है.

रत्न: अपने आंसू पॉच kar..tujhe यह कपडा कहाँ से मिला?

राजू उसे सब कुछ बता देता hai…aur रत्न और ारु को अपनी बाहों में ले लेता है.

राजू: इसीलिए कह रहा tha..ki मुझे ठाकुर पे शक है. और तुम सब लोग जानते हो की ठाकुर बहुत ताक़तवर और हरामी है और उसकी पहुंच दूर तक hai..isiliye जो भी करना है सोच समझ कर करना है.

और दूसरी baat…jaise तुम्हे पता hai…Thakur बहुत हरामी एंड रंडीबाज hai…usne काम्य का जीवन भी बर्बाद कर के रखा है. काम्य भी उस घर से निकल जाना चाहती है और इसीलिए वह मुझसे मदद माँगा है.

पहले तो मैं मन kiya..lekin जब मुझे यह कपडा मिला तो मुझे laga..mujhe भी उसको इस्तेमाल कर के कुछ जानकारी हासिल करना है जिससे पक्का सबूत मिल जाए…

रत्न: ठीक किया beta…kuch भी हो jaaye…sach जान कर रहना.

राजू: दो और baat…pehli बात: अब से ठाकुर की बात का इस घर में कोई ज़िकर नहीं karega..jaise hi मुझे कोई खबर मिलेगा मैं hi आप सब लोगों को बताऊंगा..

दूसरी बात: जो भी ho..hum सब को साथ रहना hai…dukh में और सुख mein…kya तुम सब लोग मुझ पर विश्वास करते हो और मेरा साथ दे सकते हो? और अपना हाट आगे कर देता है

Chaaro….Ratna, ारु, संध्या और सुधा भी अपना हाथ आगे बढ़ा कर राजू के हाथ के ऊपर रख कर कहते hai..ki वह सब मरते डैम तक उसका साथ देंगे…

राजू खुश हो जाता hai..aur मूड को थोड़ा हल्का करने के लिए कहता है…

मुझे विश्वास नहीं hai..chaaro मुँह खोल कर आश्चर्य से उसे देखते hue..kyun?

Raju…arre, मैं तो मज़ाक कर रहा tha..tum सब लोग मुझे गाल पर किश कर के कन्फर्म करोगे…

चारो यह बात सुन कर थोड़ा शर्मा जाते है…

राजू कहता hai..chalo maa…mujhe किसी दो…

रत्न शर्माते हुए उसके गालों पे किश करने जैसे hi उसके पास आती hai..to राजू उसी वक़्त अपना चेहरा उसकी तरफ घुमा लेता hai…aur होता यह है की वह किश उसके गाल पर पड़ने के बजाये उसके होंठों पर किश कर देती है रत्न अनजाने में..
 
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