Raju – Sab kaa Rakhwala aur Khushiyaan dene waala - Page 6 - SexBaba
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Raju – Sab kaa Rakhwala aur Khushiyaan dene waala

अपडेट 47: Ratna…akhir राजू की हो hi गयी..

ठाकुर के मौत के कुछ दिनों बाद सब थोड़ा नार्मल हो जाता है और सब अपने काम में बिजी रहने लग जाते है..

अब राजू को कोई फ़िक्र नहीं tha..aur वह भी मजे में अपने दिन गुज़ारने लगता है..

दिन में खेत में जाकर काम करता है और रात को घर आकर अपनी तीनो बीवियों से ढेर सारा प्यार करता hai…jismein तीनो भी बहुत संतुठ रहती है और उनका चेहरा हमेशा खिला खिला रहता है..

वहीँ रत्न भी आग में जल रही होती hai…use पता था की रोज़ रात को राजू अपनी बीवियों के साथ मजे कर रहा है (या फिर कहे की रोज़ रात को उनको अच्छे से छोड़ता tha…)..kyunki अब वह सब उसकी बीवियां thi..aur घर में कोई “राज़” बाकी नहीं tha..to उनके “प्रेम मिलान” की आवाज़ रत्न को भी सुनाई देती thi..aur रत्न अपने आपको ऊँगली कर के शांत करती थी..

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कभी कबार माला और काम्य भी राजू को अपने घर बुला कर उससे छुड़वा कर वह भी शांत हो जाती थी…

एक हफ्ते बाद…

ऐसे hi एक हफ्ते baad…Sudha किचन में काम कर रही होती है तो रत्न उसे पास आती hai…uske चेहरे पे थोड़ी झिझक thi..jo सुधा देख कर पहचान लेती hai..aur रत्न से पूछती है..

सुधा: didi..kya हुआ? कुछ उलझन है क्या? आपके चेहरे पे साफ़ दिख रहा है..

रत्न: han..waisa hi कुछ hai…samajh में नहीं आ रहा है..

सुधा: क्या हुआ? मुझे bataao..shayad मैं तुम्हारी मदत कर सकती हूँ..

रत्न: haan..tu hi मेरी मदत कर सकती hai…isiliye तुझे यहाँ देख कर आयी हूँ..

सुधा: बोलो..

रत्न; थोड़ा झिझकते hue…woh क्या है naa..main सोच रही थी की आज रात को मैं राजू के पास जाऊं…

Sudha:matlab?

रत्न: समझना…

सुधा: अपनी आँखें थोड़ा बड़ा करती hui..jab उसे रत्न की बात समझ में आती है to…arre…yeh तो अच्छी बात है naa…waise भी तूने जो शर्त रखा था राजू के liye..usne तो पूरा कर दिया hai…ab ठाकुर भी नहीं raha..aur जीजाजी और रवि का बदला भी पूरा हो गया है..

रत्न: haan..main भी एहि सोच रही thi..jab तक राजू ने अपना वादा पूरा नहीं kiya..mujhse कभी ज़बरदस्ती नहीं kiya..aur हर बार मेरी बात मानता tha…mujhe भी अब उससे शादी कर के उसकी बाहों में जाने का मन है…

सुधा: रत्न को अपनी बाहों में lekar..didi…subah सुबह इतनी खुश खबर दी hai…aur उसका चेहरा पकड़ कर हलके से उसके होंठों पे किश करती है..

सुधा: फिर तो आज मैं आपको एकदम दुल्हन की तरह सजाऊँगी…

रत्न: dhat..kehte हुए सुधा को हल्का सा चपत मारती है और शर्मा जाती है..

सुधा: यह बात मैं मेरी दोनों सौतन को भी बताती हूँ…

रत्न: लेकिन राजू को अभी मत बताना…

सुधा जल्दी से अपना काम ख़तम कर के यह बात उन दोनों को भी बताती है तो दोनों भी बहुत खुश हो जाते है..

राजू को कुछ पता नहीं चलता और वह अपने काम से सुबह hi खेत की तरफ निकल जाता है..

घर में सुबह सब अपना काम कर के सब रत्न के कमरे में जाते है जहाँ रत्न जस्ट नाहा कर आयी thi..aur सिर्फ एक टॉवल पहन कर अपने बार सवार रही थी..

वह तीनो कमरे में आते है तो संध्या पीछे से रत्न को देख कर कहती है आज तो राजू काम से गया…

सिर्फ टॉवल में रत्न बहुत hi सेक्सी लग रही thi…thoda से पीछे से उठा हुआ gand…towel जो सिर्फ जाँघों तक hi tha..ekdum चिकनी और बलखाती jaanghen..peeche से भी एकदम कातिल लग रही थी रत्न..

ारु रत्न के पीछे आकर धीरे से उसके कान mein…aap “नीचे” भी साफ़ और चिकना रखा है naa…Raju को चिकना hi पसंद hai..aur प्यार से ारु रत्न की गाल चूम लेती है..

सुधा रत्न से: chalo..ab यहाँ (बिस्तर पे) आ jaao..hum आपको सजायेंगे..

संध्या पहले रत्न को मेहँदी लगाती hai..haath और पाँव पे भी…

जब मेहँदी लगाना ख़तम हो जाता है तो सुधा को मस्ती छूती है और कहती है

सुधा: दीदी (रत्न) राजू की सबसे चाहती hai…to फिर कुछ स्पेशल हो जाए…

सुधा जब यह बात कहती है तो तीनो उसकी तरफ देखते hai…to सुधा कहती hai…special याने सच में special…aur ऐसा कहते हुए रत्न को बिस्तर पे सुला कर उसके बदन से कपडे निकल देती है…

रत्न शर्मा जाती है और कहती ha..kya कर रही हो chhotti…kuch तो शर्म कर..

सुधा: Didi..ab क्यों sharam..aaj आप राजू से शादी करने वाली हो और हम सब की सबसे बड़ी sautan..aisa कहते हुए सुधा है देती है तो ारु और संध्या भी है देते hai…unki हसी देख कर रत्न शर्म से एकदम लाल हो जाती है…

सुधा: और वैसे bhi…aapke पास जो hai..wahi हमारे पास भी hai…aur ऐसे कहते हुए सुधा रत्न पे झुक कर उसकी चूचियां दबा देती hai…aur बेशरम हो कर अपना हाथ उसकी छूट पे रख देती है और कहती hai..yeh भी…

फिर सुधा मेहँदी लेकर रत्न की पैरों के बीच आकर छूट के ऊपर कुछ डिज़ाइन बनाती hai..jismein रत्न को गुदगुदी होती है..

रत्न: क्या कर रही है तू?

सुधा: थोड़ा रुको और सबर करो…

सुधा फिर 10-15 मं बाद उठती है और अपने डिज़ाइन को देख कर कहती hai…ab सही है…

जब वह रत्न के ऊपर से उठती है तो सामने का डिज़ाइन ारु और संध्या भी देख लेते है और अपनी आँखें बड़ी कर ke…ekdum सही बनाया है Sudha…dono एक साथ कहते है..

रत्न को कुछ समझ नहीं आता तो वैसे hi लेते हुए ारु से पूछती है तो वह उठ कर एक आइना लाती है और उसको तिरछी करके रत्न को दिखाती है..

रत्न जब वह पढ़ती है तो उसका मुँह भी खुला रह जाता hai…kyunki सुधा ने बड़े प्यार और आहिस्ता से एक लव सिग्न (विथ ा दोनवार्ड एरो) बना कर लिखा tha..…”Raju की अमानत”…

रत्न उसे देख कर एकदम शर्मा जाती है और शर्म के मारे अपना चेहरा देख लेती hai..is पल का तीनो मजे लेते है और जब मेहँदी जब सूख जाता है तो एकदम लाल हो कर क़यामत लग रहा था…

उसको देख कर सुधा से रहा नहीं जाता और झुक कर वहां पर हल्का सा चूम लेती hai..to पाती है की रत्न एकदम गरम हो गयी है और उसकी छूट पानी बहा रही है..

सुधा: वाह didi..abhi से पानी निकल रही हो…

रत्न: क्या karoon..tum लोग जो सब मुझे परेशान कर रहे ho..aur है देती है..

ारु और संध्या भी उस डिज़ाइन को देख कर एकदम मंत्रमुग्ध हो जाते है और वह दोनों भी रत्न को वहां पर चूम लेते है..

रत्न के बदन को अच्छे से साफ़ कर के पहले एकदम ट्रांसपेरेंट ब्रा और पंतय पहनाते है जिसमें से रत्न की आधी चुकी एकदम बहार hi रहती है और पंतय भी एकदम छोटी हो उसकी सिर्फ छूट को hi देखती है..

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और फिर लाल कलर का लेहंगा चोली पहना कर रत्न को किसी पारी की तरह तैयार करती hai..aur उसमें रत्न भी एकदम सुन्दर दिखती है और क़यामत धा रही थी..

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संध्या रत्न को सजा कर धीरे से उसके कान में कहती hai…Maaji…jab आप राजू के पास जाओगी तो एकदम बेशरम बन jaana…aur फिर देखना कितना मजा aayega….yeh सब सोच कर तो मैं अभी से गीली हो रही हूँ maaji…aur ऐसा कहते हुए संध्या रत्न का हाथ पकड़ कर अपने छूट पे रख के दबा देती है…

रत्न: dhat..besharam…

संध्या: बेशरम hi तो बनना है आपको…

शाम को…

राजू शाम को अपना काम कर के घर आता है तो देखता hi की आज घर कुछ अलग hi सजा हुआ है..

राजू ारु से पूछता है तो ारु कुछ नहीं कहती और बात को ताल देती hai..lekin उसके चेहरे पे आज एक अलग hi चमक tha…yehi हाल सुधा और संध्या के साथ भी tha…Raju को कुछ समझ नहीं aata..lekin वह इस बात पे ज़्यादा ध्यान नहीं देता..

रात को खाने के वक़्त रत्न नहीं आती तो राजू पूछता है तो संध्या कहती है की माजी आज दिन भर काम करके थक गयी hai…isiliye आज वह अपने कमरे में hi है..

राजू: लेकिन माँ तो रोज़ काम करती है…

ारु: haan..lekin माजी ने आज कुछ ज़्यादा hi काम किया hai…dekh नहीं रहे ho..ghar आज कितना प्यारा और सजा हुआ लग रहा है..

राजू: haan…maine भी देखा hai..lekin तुम सब भी थी naa…maa को इतना ज़्यादा काम क्यों करने दिया..

ारु: हमने (बहाना बनाते हुए) मन किया था माजी ko..lekin वह हमारी बात नहीं मानी और खुद भी काम करती rahi…isiliye आज वह बहुत थक गयी है…

वहीँ कमरे में बैठे दोनों रत्न और सुधा उनकी बातें सुन रही थी और है भी रही थी..

सुधा: ारु ने राजू को अच्छा बेवक़ूफ़ बनाया है..

रत्न: धीरे से उस चपत लगाते hue..chup kar..kya बोल रही hai…woh तेरा पति भी है..

सुधा भी मजाक mein…Ratna की कमर पे हलके से चिमटी लेते hue…woh कुछ देर बाद आपका भी पति बनने वाला hai…yeh बात सुनकर रत्न भी शर्मा जाती है..

सुधा: देखो (प्यार से) हमारी gudiya..yaa फिर दुल्हन ko..kaise शर्मा रही है…

राजू फिर खाना खा कर किचन में देखता है की संध्या वहां काम कर के साफ़ सफाई कर रही है..

राजू किचन में उसके पीछे जाकर उसकी चुकी दबाते hue…jaldi करो ना…

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संध्या: kyun..kya हुआ?

राजू: बताओं kya…aur ऐसा कहते हुए संध्या को पलटा कर उसके होंटो पे गहरा किश करते hue..tum तो दिन बी दिन एकदम गदरायी हुई जा रही हो..

संध्या: haan…kyun नहीं hongi…roj जो तुम मुझपे इतनी म्हणत जो करते ho…gadraaongi ना..

राजू: haan..aur ऐसा कहते हुए संध्या की गांड को एक हाथ से दबाता है तो दुसरे हाथ से उसकी चुकी मसल देता है..

Sandhya:aaah…karte hue…isiliye तो अब यह इतने बड़े हो गए hai..aajkal मेरी ब्रा और पंतय भी छोटी लग रही है..

राजू: कोई nahi..nayi ब्रा और पंतय ले lo…infact मैं तो एहि कहूंगा की उनको लेने की ज़रुरत hi नहीं hai…ghar में बिना ब्रा और पंतय के hi rehna…mujhe फिर तुम्हारे कपडे खोलने में आसानी hogi…aur ऐसा कहते हुए संध्या को आँख मार देता है..

संध्या: चुप karo…bahut बदमाश हो रहे हो…

राजू: ठीक hai..main कमरे में जा रहा hoon…jaldi आ जाओ…

संध्या राजू से अलग हो कर धीरे से मुस्कुराते हुए (क्यूंकि उसे पता था की आज रत्न उसके पास जाने वाली है) हाँ कहती है और राजू अपने कमरे में चला जाता है..

रात को राजू के कमरे में…

राजू अपने बिस्तर पे सोये हुए संध्या और ारु का इंतज़ार कर रहा होता hai…aur अपने मोबाइल पे कुछ देख रहा होता है…

कुछ देर बाद सुधा कमरे में आती hai..dheere से चल कर..

राजू उसे देखता है तो कहता hai..kahan thi…shaam से दिखी नहीं…

Sudha:tumhaare लिए hi काम कर रही थी…

राजू: मतलब?

इतने में संध्या भी कमरे में आती hai…lekin इस बार उसके साथ रत्न भी thi…jo एक शादी के जोड़े पहने हुए एकदम कमाल की लग रही थी…

राजू रत्न को देख कर एकदम मंत्रमुग्ध हो जाता hai…aur आँखें फाड़े रत्न को देखता रहता है और उसे पता भी नहीं चलता की कब उसके हाथ से मोबाइल भी नीचे गिर जाता है…

राजू: अपनी आँखें मसल kar…kya मैं कोई सपना तो नहीं देख रहा हूँ??

सुधा: सपना nahi..aur एकदम सच hai…bolo…mera (हमारा) काम कैसा है?

रत्न भी राजू को देख कर एकदम शर्मा जाती hai…aur संध्या भी धीरे से रत्न को कमरे में ला कर…

सुधा: ले लो अपनी अमानत..

राजू: रत्न को देखते hue…kya माँ?? रत्न भी धीरे से अपना सर उठा कर हाँ कहती है…

राजू भी उठ कर उसके पास जाता है और रत्न को बाहों में लेने की कोशिश करता hai..lekin सुधा कहती है..

सुधा: ऐसे nahi..abhi nahi…pehle दीदी से शादी करो और उसे हमारी सौतन बनाओ…

राजू: shaadi.aur abhi…kahan? अभी कहाँ से मंदिर और पुजारी को बुलाएंगे..

सुधा: चिंता मत karo..humne सब तैयारी कर ली hai…aur फिर दोनों को घर में बने एक छोटे मंदिर में ले जाते है

सुधा कहती hai..logon को जान्ने की ज़रुरत नहीं hai..bus तुम भगवान् को मान कर दीदी की मांग भर do..yehi काफी है..

लेकिन पहले तुम नाहा कर जल्दी से नए कपडे पेहेन लो..

राजू को कुछ समझ नहीं आ रहा tha…lekin वह फिर जल्दी से बाथरूम भाग जाता है और नाहा कर नए कपडे पहन कर आता है..

राजू को बाथरूम में भागे हे देख कर संध्या उसे चिढ़ाती hai…dekho कितना उतावला हो रहा है और सब है देते है..

थोड़ी देर बाद राजू नए कपडे पहन कर घर में बने मंदिर में आता है और भगवान् को साक्षी मान कर सब के सामने रत्न की मांग भर देता है और उससे शादी कर लेता hai..aur रत्न को बाहों में लेकर उसे देखते हुए प्यार से उसके माथे को चूम लेता है..

राजू: अब क्या??

Aaru:kyun..bahut जल्दी पड़ी hai….apne कमरे में जाओ और 10 मं बाद माजी के कमरे में आना..

राजू बिना कुछ कहे कमरे में चले जाता है और 10-15 मं वेट करता hai…use यह 10-15 मं बरसों के माफ़िक़ लगते है..

15 मं बाद ारु आती है और राजू के होंठों को चूम कर कहती hai..jaao ..आज माजी की बारी hai…aur धीरे से राजू के कान mein…tumhaari रतनी की…

राजू भी ख़ुशी से ारु को चूम kar…tum सब ने तो मुझे इतना ख़ुशी दी है..

ारु: अब ज़्यादा कुछ नहीं karo..aur जाओ…

राजू रत्न के कमरे में जाता है तो देखता है की रत्न अपना घूंघट ओढ़े हुए बिस्तर पे बैठी राजू का इंतज़ार कर रही होती है..

लेकिन कमरे में जाने से पहले सुधा उसको बहार पकड़ के राजू को अच्छे से किश कर के उसके कान में कहती hai…andar तुम्हारे लिए बहुत “कीमती तोहफा” hai…dekh कर कल बताना की तुम्हे तोहफा कैसे लगा..

राजू अंदर जाता है तो कमरा एकदम फूलों से सजा हुआ tha…jaise की सुहागरात में कमरे को सजाया जाता hai..aur रत्न बिस्तर के बीच में अपना घूंघट दाल के बैठी हुई थी..

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राजू कमरे को देख कर एकदम खुश हो जाता है और धीरे से रत्न के पास आकर बैठ जाता है..

राजू: आज मैं बहुत खुश हूँ maa…tumne जो मुझे इतना अच्छा तोहफा दिया hai..aur धीरे से रत्न का घूंघट उठा देता hai…aur देखता है की रत्न एकदम सुन्दर लग रही थी..

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रत्न: यह तो मुझे करना hi tha…tumne मेरी हर बात और शर्त मानी है और उसे पूरा भी किया है..

राजू: वह तो मुझे करना hi था..

रत्न: जब तुमने अपनी शर्त पूरा किया है तो मैं कैसे अपनी बात से मुकर सकती हूँ..

राजू: maa…aur ऐसा कहते हुए राजू रत्न को अपनी बाहों में ले लेता hai…aur फिर राजू रत्न का सर पकड़ कर उसकी आँखों में गहराई से देखता है…

रत्न भी उसकी आँखों में डेक्टि है और पाती है की राजू की आँखों में उसके लिए बहुत प्यार tha…Ratna भी राजू को देखते हुए आँखों से इशारा करती है तो दोनों एक दुसरे के नज़दीक चले आता है और देखते hi देखते राजू अपने होंठ रत्न के होंठ से जोड़ लेता है और प्यार से चूमता है रत्न ko…Ratna भी उसका साथ देती है और देखते hi देखते दोनों का चुम्बन एकदम गहरा हो जाता है और दोनों एक दुसरे की जुबां को चूसने लग जाते hai..dono की सांसें उखाड़ने लगती है…

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रत्न: थोड़ी देर baad…Raju..mujhe अपने प्यार में समा le…main भी बहुत तरसी हूँ तेरे प्यार के liye…mujhe भी वह ख़ुशी दे जो तू अपनी बाकी बीवियों को देता है..

राजू: हाँ maa…tum तो मेरी जान ho…tumhe अपनी जी जान से भी ज़्यादा प्यार करता hoon…aur तुम्हे इतने प्यार में डूबा दूंगा की कभी बहार नहीं आना चाहोगी…

और ऐसा कहते हुए राजू फिर से रत्न को गहरा चुम्बन करता है और दोनों फिर से एक दुसरे के लार को जातक लेते है..

राजू रत्न को किश करते hue…maa…Sudha कह रही थी की मेरे लिए कमरे में एक तोहफा hai…mujhe तो दिख नहीं रहा है…

रत्न: मिल जाएगा मेरे राजू को..

राजू फिर धीरे से रत्न की साडी निकाल देता है और रत्न की चुकी को दबाता है जो की उसके ब्लाउज से बहार निकलने को बेताब थे…

रत्न: हाँ beta…aur ज़ोर से dabaao..aur उसका पूरा रास निचोड़ लो..

राजू: हाँ maa….ekdum रास से भरा हुआ hai..aur ऐसा कहते हुए राजू अपना मुँह उसकी चूचियों की घाट में घुसा देता है और हाथ से दबाते हुए चूमता रहता hai…aur अपना हाथ पीछे ले जाकर ब्लाउज की डोरी खोल देता है…

राजू अपना मुँह उठा के रत्न की आँखों में देखते हुए ब्लाउज निकल देता है और जब नज़र नीचे करता है तो उसकी जुबां से लार टपकने लगता hai…kyunki रत्न की आधे से ज़्यादा चुकी उसकी ब्रा से बहार thi…Bra भी बहुत hi सेक्सी tha….Raju फिर से उसकी चुकी दबाते हुए इस बार उसके निप्पल को भी अपनी उँगलियों से दबाता है तो रत्न के मुँह से aah..aahh…nikal जाती है..

रत्न: थोड़ा धीरे से dabaana…kahin भाग नहीं जा रहे है…

राजू: kya..kahan भाग नहीं रहे है..

रत्न: वही जो तेरे हाथ में है..

राजू: क्या?

रत्न: पता नहीं…

राजू: तुमको बाकी तीनो ने तो बताया होगा..

रत्न: क्या?

राजू: यही की मेरे सामने शर्माना नहीं..

रत्न: हाँ..

राजू: तो क्या है मेरे हाथ में..

रत्न: तू मानेगा nahi…to sun….tere हाथ में मेरे चुकी और निप्पल्स hai..dono को धीरे से दबा…

राजू: यह हुई ना baat…aur फिर से रत्न को चूम kar..aise hi खुल कर मजे लो maa..tabhi मुझे और तुम्हे भी मजा आएगा..

और राजू फिर से झुक कर इस बार अपने दांत से उसकी निप्पल को फिर से kaat-ta है तो रत्न फिर से aah…kar के आहें भर्ती है…

इस बार राजू उसकी ब्रा भी निकल देता है और फिर से उसकी चूचियों पे टूट पड़ता है और 10 मं तक बारी बारी से दोनों को चूस के लाल कर देता है और 1-2 जगह पे लव बिट्स भी देता है..

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राजू के ऐसा करने से रत्न से भी रहा नहीं जाता और हु भी बहुत कामातुर हो जाती है और उसकी छूट एकदम गीली हो जाती है और रास बहाने लगती है..

राजू रत्न की चुकी चूसते हुए रत्न ज़ोर से ाँहें भर्ती है और पहली बार झाड़ जाती है…

राजू: क्या हुआ? अच्छा नहीं लग रहा है क्या?

रत्न: तू बहुत बदमाश हो गया hai..main तो ऐसे hi झाड़ gayi…aur शर्मा के राजू के सीने में अपना सर छुपा लेती है..

राजू: maa..bataao naa..mera तोहफा कहाँ है?

रत्न: मिल jaayega…dekhte जाओ…

राजू फिर रत्न की साडी भी उतार देता है और साथ में उसका पेटीकोट भी निकल कर फेंकता है…

रत्न अब सिर्फ एक छोटी से पंतय में hi रह जाती है और जब राजू अपनी नज़र नीचे करता है तो उसे वह मेहँदी का डिज़ाइन (“राजू की अमानत”) नज़र आता है…

राजू उसे देख kar….kya बात hai..yehi मेरा तोहफा है क्या?

रत्न: haan…tumhe पसंद आया?

राजू: pasand….iske लिए तो मैं नरक भी जाने के लिए तैयार हूँ..

रत्न: तुरंत उसके मुँह पे हाथ रख kar…aise अच्छे मौके पे ऐसे गन्दी बातें नहीं करते..

राजू रत्न का हाथ को मुँह में लेकर चूसते हुए हु फिर से उस डिज़ाइन को देखते रहता hai..aur फिर झुक कर उसकी नाभि को चूमते हुए उस डिज़ाइन को भी चूमता है और कहता hai..haan…Sudha भी एहि कह रही thi..ab से यह सच में मेरी hi अमानत है और उसको चूमते हुए रत्न की पंतय भी निकल देता है और रत्न को पूरा नंगा कर के फिर उसकी रास से भरी हुई छूट को देख कर एकदम टूट पड़ता है और ऊपर से नीच तक उसकी छूट को chaat-ta है..

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रत्न भी ाँहें भर्ती हुई सिसकारियां लेती है और अपना हाथ राजू के सर के ऊपर रख कर उसे दबा देती है..

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रत्न: haan..aise hi चाट मेरी छूट ko..bahut परेशान किया है isne..aaj इसकी पूरी कसार निकल de…aur ऐसे hi कहते हुए बक्ति रहती है जब की राजू पूरी शिद्दत से रत्न की छूट चाटने में लगा रहता है..

देखते hi देखते रत्न फिर से अपना पानी निकल कर झाड़ जाती है और राजू भी बड़े मगन से उसका पूरा पानी पी जाता है..

1 मं बाद राजू रत्न की तरफ देखते हुए उसके होंठों पे ज़ुबार फेरते hue..bahut मीठा पानी है तुम्हारा maa..aur उसके ऊपर आकर रत्न के होंठ चूम लेते है और कहता hai..tum भी अपना पानी टास्ते करो…

5 मं बाद थोड़ी सांसें संभालने के बाद राजू रत्न का हाथ पकड़ कर उसके लुंड पे रक् देता है जो की अब तक रोड की तरह पूरा तन गया था…

राजू: देखो maa..tumhaare प्यार के लिए मेरे यह लुंड कितना तड़प रहा है..

अब रत्न भी थोड़ा खुल जाती है और कहती hai…main हूँ naa..pyaar करने के liye..aur फिर राजू के कपडे निकल कर उसे भी पूरा नंगा कर देती hai..aur उसे देखते hue..yeh तो बहुत लम्बा और मोटा है..

राजू: लम्बा और मोटा hai..tabhi तो यह मज़ा भी उतना देता है और फिर प्यार से रत्न का सर पकड़ के उसके लुंड भी झुका देता है और पहले रत्न धीरे से उसके टोपे पे हल्का से चूमती है और फिर धीरे धीरे उसका लुंड मुँह में लेने लगती hai…aur देखते hi देखते राजू का पूरा लुंड मुँह में ले लेती है और अंदर बहार करने लगती है…

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रत्न ऐसा करते हुए वह भी अपने एक हाट से अपनी छूट मसलते रहती है और उसकी छूट फिर से पानी पानी हो जाती है…

राजू भी किसी जन्नत में चले जाता है और उसे भी बड़ा मजा आता है..10-15 तक अच्छे से चूसै के बाद राजू को लगता है की वह भी झाड़ jaayega..to रत्न को रुकने को कहता है और उसको फिर से चूमते hue…tumne तो मुझे जन्नत की सैर कर दी hai..ab तुम्हारी बारी है जन्नत की सैर करने की..

राजू रत्न को सुला देता है और उसकी आँखों में देखता है..

रत्न भी समझ जाती है और अब उसको भी छोड़ने का मन होता है..

रत्न: थोड़ा आराम से beta..bahut साल हो गए है…

राजू: जानता हूँ maa…ekdum प्यार से karoonga…phir से एक बार झुक कर उसकी छूट को चूम कर अपना लुंड उसकी छूट पे रगड़ता hai…pehle रत्न को भी थोड़ा मजा आता है लेकिन जब वह भी गरम हो जाती है तो कहती hai..kyun तड़पा रहा है beta..daal दे जल्दी और बुझा दे मेरी प्यास..

राजू को भी लगता है की अब और देर करना ठीक नहीं है और उसके सुपाड़ी को अंदर डालने की कोशिश करता hai…lekin रत्न की छूट बहुत दिनों से बंद थी तो एकदम टाइट रहता है..

राजू: तुम्हारी छूट तो एकदम बंद hai..ekdum कुंवारी की तरह..

रत्न: कहा था ना maine…bahut दिनों से सूखी पड़ी हुई है..

राजू फिर से इस बार थोड़ा दम लगाता है और इस बार फक की आवाज़ से उसका सुपाड़ा घुस जाता है और रत्न से भी सहा नहीं जाता और ज़ोर के चिल्लाती hai…aah…aah….aur उसकी आँखों से आंसूं आने लगते है..

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राजू को भी थोड़ा दर लगता है ..और ऐसे hi रहता है और झुक कर रत्न की आंसूं चाट लेता hai..aur कहता hai…jo दर्द होना तो हो गया maa..ab दर्द नहीं hoga…aur ऐसे hi चुपड़ी चुपड़ी बातों से रत्न को उलझा कर अपना लुंड धीरे धीरे अंदर करता है और लगभग आधा लुंड घुसा देता है…

राजू रत्न की आँखों में देखते hue..jhuk कर उसको चूमता है और फिर एक ज़बरदस्त धक्का मारता है और इस बार उसका पूरा लुंड रत्न की छूट में जड़ तक समां जाता है…

रत्न को बहुत दर्द होता है जो राजू को समझ आ जाता hai..aise hi 2 मं रहता hai…Ratna को जब थोड़ा रहत महसूस होता है तो राजू को आँखों से इशारा करती hai..Raju फिर धीरे से लुंड अंदर बहार करने लगता है और 2-3 मं में hi पूरे ज़ोर से रत्न को पेलने लग जाता है…

रत्न भी अब खुल के आवाज़ निकलते हुए छोड़ने लगती है और पूरे कमरे में दोनों की आवाज़ें गूंजती है…

रत्न: हाँ beta..aise hi chod…poori खुजली मिटा दे आज iski…bahur परेशान करती है..

राजू भी अब लगातार धक्के लगता रहता है और 5 मं में hi रत्न फिर से झाड़ जाती है…

राजू फिर रत्न को उठाता है और उसे घोड़ी बनने को कहता है तो रत्न अपने घुटनों के बल हो जाती है और राजू उसके पीछे आकर फिर से पीछे से लुंड पूरी जड़ तक घुसा के छोड़ने लगता है…

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उसे इस पोजीशन में रत्न की गांड की छेद भी दिखती है जो राजू को बहुत प्यारा लता hai…aur रत्न को छोड़ते हुए एक ऊँगली को अपने थूक से गीला कर के उसकी गांड में ऊँगली करने की कोशिश करता hai…lekin वह बहुत hi टाइट था और ऊँगली अंदर नहीं जा paati…apni गांड पे ऊँगली का एहसास होते hi रत्न राजू की तरफ मुद kar…naa कर beta..main वहां कभी नहीं लिया है..

राजू: जैसी तुम्हारी मर्ज़ी maa..main तुम्हारे खिलाफ कभी नहीं jaaonga…Ratna भी यह बात सुनके खुश हो जाती है…

रत्न: मुझे भी थोड़ा टाइम de…phir मैं hi तुम्हे कह doongi..jab तुम मेरी गांड maarna…aaj के लिए छूट से hi काम चला लो…

राजू भी अब मस्त हो कर पीछे से ठोकने लगता है…

थोड़ी देर बाद रत्न कहती है की उसके घुटने दुःख रहे है तो राजू इस बार सो जाता है और रत्न उसके ऊपर चढ़ जाती है और उसके लुंड पे कूदने लगती है..

इसी पोजीशन में राजू फिर से उसको छोड़ते हुए उसकी चुकी दबाता है और इसमें दोनों को मजा आता है…

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5 मं की दमदार चुदाई के बाद राजू कहता है की वह भी झड़ने वाला hai…to रत्न कहती है की उसके अंदर मत झड़ना…

राजू फिर निकल कर उसके मुँह के पास ले जाता है और फिर 1 मं में hi हु भी झाड़ जाता है और बहुत सारा पानी निकलता hai…jise रत्न भी पूरा पी जाती है..

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रत्न: बाप re….itna पानी निकलता है तेरा…

राजू उसे देख कर है देता hai…phir दोनों ऐसे hi एक दुसरे की बाहों में लेट जाते hai..aur फिर चादर से अपने आप को साफ़ कर लेते है..

रत्न: तू खुश तो है ना..

राजू: बता नहीं सकता कितना खुश हूँ..

राजू: accha..aapse एक बात पूछना था..

रत्न: बोलो

राजू: याद hai..Guruji ने कहा था की आपको 4 संतानों की प्राप्ति hai..to आप क्या चाहते हो?

रत्न: haan..yaad hai…lekin अब मैं इस उम्र में माँ नहीं बनना chahti…meri उम्र भी ढल रही hai…teri बाकी बीवियां है naa…unki झोली भर de..main अपने पोते, पोतियों के साथ ज़िन्दगी गुज़ार लूंगी..

राजू: ठीक है maa..main आपकी सोच समझ सकता hoon…jaisa आप चाहते hai..waisa hi होगा..

5 मं में कमरे का दरवाज़ा खुलता है और बाकी तीनो भी तालियां बजाते हुए कमरे में आते है…

ारु: दोनों को बधाई हो…

रत्न शर्मा जाती है तो राजू पूछता hai..tum लोगब तक सोये नहीं

सुधा: सोते kaise…itni ज़ोर ज़ोर से आवाज़ जो कर रहे the…aur रत्न को अपने गले लगा लेती hai…Ratna भी एकदम शर्मा जाती है..

संध्या: वैसे bhi..jab तक आप हमे प्यार नहीं karte…humein नींद कहाँ आती है..

सुधा: अब क्यों शर्माना didi..ab तो तुम हम सब की बड़ी सौतन बन गयी हो..

सुधा राजू की तरफ देख kar…kyun re…”tohfa” पसंद आया क्या??

राजू तुरंत सुधा को अपनी तरफ खींच कर उसको चूमते hue…ekdum बढ़िया tha..aur तुम्हे कल इसका इनाम भी दूंगा..

सुधा सवालिया नज़र से राजू को देखती है तो राजू अपना ऊँगली उसकी गांड में दाल kar..yahan..kehta है और आंख मार देता है…

राजू: वैसे भी तुम लोग आने से पहले मैं माँ से बात कर रहा tha..usko भी जल्दी hai..dadi बनने की…

राजू की बात सुन कर तीनो शर्मा जाते है…

रत्न: haan..Raju सही कह रहा hai…bolo…mujhe जल्दी दादी बनाएगी ना..

तीनो: haan..kyun nahi…jis तरह से राजू हमें प्यार करता hai…lagta hai…jaldi hi हम सब भी आपको खुश खबर देंगे..

ऐसे hi सब ख़ुशी से बात करते है और नींद की आग़ोश में चले जाते है…

दिन ऐसे hi मज़े से गुज़रते है…

15 दिन बाद….
 
फ्रेंड्स, लेटेस्ट अपडेट पोस्टेड bhai...look फॉरवर्ड तो योर कमैंट्स. थैंक्स.
 
फ्रेंड्स, सॉरी फॉर थे delay...been एक्सट्रेमेली busy...will पोस्ट थे अपडेट इन ा डे और two...actually ी हैवे रिटेन थे update..but लुकिंग फॉर एप्रोप्रियेट फोटोज..

िफ़ आईटी इस ok विथ यू आल, ी कैन पोस्ट थे अपडेट टुमारो इटसेल्फ विथाउट थे photos..else विथ फोटोज विल डेफिनिटेली पोस्ट आईटी बी Friday...pls लेट में क्नोव. थैंक्स.
 
अपडेट 48: काम्य को राजू का तोहफा..

इनफैक्ट इन 15 दिनों में बहुत कुछ होता है…

ठाकुर के मरने के कुछ दिन बाद काम्य ठाकुर के कुछ आदमियों को उसके घर से निकल देती hai..lekin कुछ रह जाते है…

एक दिन राजू उसके घर जाता है और काम्य से कहता है की ठाकुर ने गांव वालों की ज़मीन हड़प ली hai…aur अच्छा होगा अगर वह उनकी ज़मीन के कागज़ात वापस कर दे तो..

काम्य: सोचती हूँ इस बारे mein..ek बार माला से भी बात करना पड़ेगा..

काम्य राजू के नज़दीक aakar…agar मैंने गाँव वालों के ज़मीन के कागज़ात वापस कर दिया तो मुझे क्या मिलेगा?

राजू: एक तो pehle..woh ज़मीन ठाकुर की नहीं thi…aur अगर उनको उनकी ज़मीन वापस मिल जायेगी तो वह सब लोग भी आपको दवाएं देंगे..

काम्य: यह तो कुछ भी नहीं है…

राजू: तो और क्या चाहिए??

काम्य: अपना हाथ राजू के कुंड के ऊपर रख kar…mujhe यह chahiye…aur राजू का हाथ उसकी साडी के ऊपर से छूट पे रख kar…uski आँखों में देखती है..

राजू है देता hai…aur कहता hai..yeh भी कोई कहने की बात hai…ek बार इशारा कर दो तो मैं खुद hi आ jaaonga…Raju को भी थोड़ा शरारत सूझता hai..aur कहता hai..is बार “एक के साथ एक फ्री”..

काम्य: मतलब?

राजू: याने मैं आप दोनों (काम्य और माला) को एक साथ bajaaonga….bolo..manzoor है?

काम्य भी है देती है और कहती hai…yeh बात सुन कर hi मेरी छूट गीली हो रही है..

राजू: जिस दिन आप गाँव वालों को उनके पेपर्स दे doge…us दिन hi मई आ jaaonga….aise कहते हुए उसकी एक चुकी को दबा देता है और वहां से निकल जाता है..

वहीँ दूसरी तरफ अजय भी सोच में पद जाता है की कुछ तो गड़बड़ है ठाकुर की मौत में..

अजय को यह बात पता चलता है की ठाकुर के कुछ आदमियों को काम्य ने नौर्की से निकल दिया tha..aur जो कुछ आदमी वहां काम करते है वह उसके (ठाकुर) hi वफादार the..Ajay उनमें से 2 को चुपके से बुलाता है और कहता है की वह वहां की हालत और बातों में थोड़ा नज़र rakhe..aur पता कर की ठाकुर की मौत कैसे हुई है..

काम्य भी माला को राजू की बात बताती hai…Mala भी सोच में पद जाती hai..phir काम्य से कहती है..

माला: हमें भी अब यह गाँव छोड़ के जाना chahiye..ab ठाकुर नहीं है तो हमारा भी यहाँ रहने में कोई मतलब नहीं है…

काम्य: haan..sahi कह रही ho…hum लोग मेरे गाँव चले जाते hai..aur वहां फिर से अपनी ज़िन्दगी नए सिरे से शुरू करते hai..mere माँ बाप तो नहीं hai….isiliye अब वहां मुझे भी कोई नहीं जानता hai..isiliye आराम से रह सकते hai..aur वैसे bhi…jab तक ठाकुर जिन्दा था वह मुझे कभी घर जाने नहीं देता tha…so, अभी वक़्त बहुत गुज़र गया है और शायद लोग मुझे जानते भी नहीं होंगे..

माला को भी यह बात अच्छी लगती है और वह भी मान जाती है..

काम्य: तो फिर जल्दी से यह काम निपटाके अगले महीने hi चले जाते hai…gaanv वालों की ज़मीन उनको दे kar..apni जो ज़मीन hai..usko भी बेच कर जो पैसे milenge..unse हम आराम से नए सिरे से ज़िन्दगी शुरू करते है..

माला: ठीक है..

काम्य: माला के पास आकर धीरे से उसके कान mein…jaane से पहले एक बार मैं राजू से छुड़वा कर उसका बीज अपने अंदर लेना चाहती hoon..ek और baar…aur मई भी प्रेग्नेंट हो jaaoon..taaki मैं भी माँ बनने का सुख प्राप्त कर sakoon..agar वहां कोई पूछे तो बता दूँगी की ठाकुर ने जाने से पहली अपनी निशानी मेरे अंदर छोड़ के गए थे..

माला: हाँ re…ekdum सही बात कहा है तुमने..

तो दोनों इस बात पे राजी हो जाते है की वह लोग भी गाँव छोड़ के चले जाएंगे..

इन दोनों के जाने बिना अजय के 2 आदमी घर की कामो पे चुपके से नज़र रखते hai..lekin अब तक उनको कोई गड़बड़ नहीं लगता…

एक हफ्ते बाद…

काम्य सब गाँव वालों को अपने घर बुलाती है और उनसे कहती है की उनके ज़मीन के कागज़ात वपर कर देगी..

यह बात सुनके गाँव वाले बहुत खुश हो जाते है और सब काम्य के पाँव चुकार उसको और माला को दवाएं देते है..

राजू को जब यह बात पता चलता है तो हु भी बहुत खुश हो जाता है और घर में सब को यह बात बताता है..

उसकी बीवियां भी बहुत खुश हो जाती hai…lekin राजू को पता था की बदले में उसे क्या करना है..

वह इस बारे में सौथा hai…use इस बात का अहसास था की अब तक उसने घर में कोई बात नहीं छुपाया tha..to इस बारे में भी बताने का निर्णय लेता है..

राजू जब यह बात सब से कहता है तो उसकी बीवियां भी थोड़ा नखरे करती hai…lekin फिर रत्न कहती hai..chalo..ek अच्छे काम के बदले में तुम्हे मन नहीं करूंगी.. लेकिन अब और ज़्यादा nahi…is बात पे राजू भी मान जाता है…

अजय को जब यह बात पता चलता है तो वह बहुत गुस्सा हो जाता है लेकिन कुछ नहीं कर paata…kyunki यह निर्णय (वापस करने का) काम्य ने लिया था..

काम्य सब को उनके कागज़ात देकर भेज देती है और राजू को फ़ोन कर के घर पे बुलाती है..

राजू जब घर में दाखिल होता है तो देखता है की दोनों काम्य और माला एकदम सज कर सेक्सी लग रहे थे…

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राजू उनको देखते hi उसका लुंड भी एकदम तन जाता hai..aur थोड़ा लालच भरी नज़र से उन दोनों को देखता है..

काम्य: ऐसे क्या देख रहे हो? तुमने हमें पहले भी बहुत बार देखा है…

राजू: देखा hai..lekin इतना सेक्सी कभी नहीं देखा…

काम्य माला की तरफ देखती है तो माला भी है देती है और काम्य को पकड़ कर उसके होंठों पे एक गहरा चुम्मा लेती है और उसकी चुकी दबाते हुए राजू से कहती hai..aise hi देखते रहोगे क्या?

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माला की बात सुन कर राजू भी होश में आता है और जल्दी hi अपने कपडे उतर कर एकदम नंगा हो जाता है और उसका लुंड भी एकदम तना हुआ दोनों को सलामी देता है..

राजू: lo..maine तो कपडे निकल दिए hai..lekin आप दोनों तो अभी भी कपडे में hi हो..

काम्य: हम तो ऐसे hi rahenge…tum hi आकर हमारे कपडे निकल दो..

राजू भी फिर उनके नज़दीक आ कर उनको भी जल्दी hi उनकी साडी, ब्लाउज और पेटीकोट निकल देता हेयर दोनों सिर्फ ब्रा ापुर पंतय में hi मस्त सेक्सी लग रही थी..

ऐसे hi उन दोनों को चूमता है..

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और फिर देखते hi देखते दोनों को निर्वस्त्र कर देता है और वह दोनों भी राजू की तरह एकदम नंगी हो जाती है..

राजू से अब सहा नहीं जाता और उन दोनों पर टूट पड़ता hai..pehle उन दोनों को चूमता है और फिर बारी बारी से दोनों के दूध को भी पिता है…

दोनों भी उत्तेजित हो जाते है और राजू का लुंड पकड़ कर मुठियाने लगते है..

राजू: सिर्फ मुठियाने से काम नहीं chalega..aur थोड़ा हैट के दोनों के सामने आ जाता है और अपना लुंड हिलाते हुए उनके मुँह की तरफ बढ़ता है..

दोनों भी उसके लुंड पे टूट पड़ती hai..ek लुंड चूसती है तो दूसरी उसकी गोटियां..

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राजू तो जैसे जन्नत पे चले जाता है..

5-10 की मस्त लुंड चूसै के बाद राजू दोनों से अलग होता है और काम्य को सुला देता hai..aur उसकी टांगें चौड़ी कर के उसकी छूट पे टूट पैदा है और वहीँ माला भी काम्य के मुँह पे बैठ जाती hai…aur फिर दोनों तरफ छूट चूसै चलता hai..dono hi (राजू और काम्य) बड़ी शिद्दत से छूट चूसने लग जाते है और 5 मं की अंदर दोनों झाड़ जाते है और अपना पानी छोड़ देते है..

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अब राजू से भी रहा नहीं जाता और माला को लिटा कर अपना कड़क लुंड उसकी छूट पे रक्तः है और काम्य से कहता है की वह माला के मुँह पे baithe..Kaamya भी हफ्ते हुए माला के मुँह पे बैठ जाती है और काम्य को किश करने लग जाती है.. फिर राजू एक करारा शॉट मारता है और उसका पूरा लुंड माला की छूट में जड़ तक चला जाता है..

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माला भी इस हमले से सिहर जाती है और ज़ोर के चिल्लाती hai..lekin उसकी आवाज़ काम्य की छूट में hi डाब जाती है…

राजू फिर झुक कर माला की चूचियां दबाते हुए धीरे धीरे माला को छोड़ने लगता hai…ab माला को थोड़ा आराम मिलता है तो वह भी मजे से चुदवाती hai..aur वैसे hi काम्य की छूट भी चूसने लगती है..

5 मं की धुआंदार चुदाई में माला ना जाने कितनी बार झाड़ जाती है और उसका पानी भी निकल जाता है..

पानी की चिकनाहट से अब राजू का लुंड भी आसानी से अंदर बहार होता है..

कुछ देर बाद माला कहती है की वह थक गयी है …तो राजू अपना लुंड निकल कर काम्य से कहता है..

राजू: Kaamya..aapne इतना अच्छा काम किया hai..logon की ज़मीन वापस कर दी है तो इसका इनाम तो आपको मिलना चाहिए..

Chaliye..ab आप घोड़ी बन जाओ..

काम्य भी उसकी बात मानते हुए राजू के सामने घोड़ी बन जाती hai..lekin उसे पता नहीं था की आगे क्या होने वाला है..

काम्य को अपने सामने घोड़ी बनते देख राजू भी हस्ता है और फिर अपना लुंड काम्य की गांड पे घिसते हुए कहता hai..ho जाए तैयार अपने इनाम के liye..aur ऐसा कहते हुए राजू काम्य की गांड में अपना लुंड घुसाने की कोशिश करता है..

काम्य की गांड अभी भी बहुत टाइट thi..lekin राजू को तो काम्य को इनाम देना hi था..

तो थोड़ा म्हणत कर के राजू फिर से एक करारा धक्का मारता है और उसका आधा लुंड काम्य की गांड में घुस जाता है…

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काम्य को इस प्रहार से उसकी आँखों में आंसू आ जाते है तो माला उसके सामने आकर उसके आंसू के पीते हुए एक बार फिर से उसके होंठों को चूमती hai….Raju यह देखते hi फिर से तगड़ा शॉट मारता है और इस बार उसका पूरा लुंड काम्य की गांड में जड़ तक चला जाता है..

काम्य को बहुत तकलीफ होती है लेकिन माला उसके होंठों को छोड़ी नहीं hai…jiski वजह से काम्य की चीख भी माला के होंठों पे डाब के रह जाती है..

2 मं बाद काम्य हफ्ते hue…thoda गुस्से se…saale बोल के तो डाला hota…tune तो मेरी जान hi निकल di..(Raju से).

राजू भी हस्ते हुए झुक कर उसकी चूचियों को दबाते hue…maaf karna..lekin मुझे तो आपको यह इनाम देना hi tha…aur फिर धीरे धीरे अपने लुंड को आगे पीछे करते हुए काम्य की गांड मारता hai…jab काम्य का दर्द थोड़ा काम हो जाता है तो वह भी मजे से गांड मरवाती है..

थोड़ी देर काम्य की गांड मारने के बाद काम्य राजू से कहती hai…ab छूट की खुजली भी मिटा de…bahut गांड मार लिया..

राजू भी फिर अपना लुंड काम्य की गांड से निकल कर छूट में थोक देता है और दाना दान छोड़ने लगता है काम्य ko…yeh नज़ारा देख कर माला फिर से गरम हो जाती है और काम्य के ऊपर बैठ जाती है..

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काम्य को भी इसमें मजा आता है और वह भी बहुत बार अपना पानी निकल देती है..

काम्य राजू से: ऐसे hi chod…aur अपना माल मेरी छूट में hi girana…mujhe भी तेरे पानी अपने अंदर लेना hai…bol..giraaye gaa..aur मुझे अपने बच्चे की माँ बनाएगा ना..

राजू भी हाँ में सर हिलाते हुए रफ़्तार से उसे छोड़ते हुए कहता hai…maaaiiiinnnn भहहभीई आआ राहा hoooon..aur फिर 3-4 धक्कों के बाद अपना माल भी काम्य के अंदर hi निकल देता है और फिर हफ्ते हुए वह भी बगल में लुढ़क कर गिर जाता है…

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थोड़ी देर बाद जब तीनो अपनी साँसों को दुरुस्त करते है तो दोनों उसके बगल में सो कर राजू के कंधे पर सर रखते है…

काम्य राजू से कहती है: अच्छा किया की तूने ठाकुर को मार diya..warna ऐसा सुख मैं कभी नहीं महसूस कर पाती…

राजू कहता है: वह तो मुझे उसे मारना hi tha..kyunki उसने मेरे बाप और भाई को मारा tha..to बदला तो मुझे लेना hi tha...aise कहते हुए काम्य को चूम लेता hai..jaise बताना छह रहा हो की ठाकुर को मार कर उसने कोई गलत नहीं किया है..

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ठीक उसी वक़्त ठाकुर का नौकर (अजय का आदमी) उनकी आवाज़ (चुदाई के समय) सुनकर दरवाज़े के पास आकर धीरे से दरवाज़ा खोलता hai…teeno चुदाई में इतने मस्त मगन थे की इस बात को भूल जाते है की दरवाज़ा ठीक से बंद नहीं hai..aur थोड़ा खुला हुआ है..

नौकर अंदर का नज़ारा देख कर अपनी आँखें फाड़े देखता रहता है और उस नज़ारे को देख कर उसका लुंड भी तन जाता hai…lekin वह कुछ नहीं कर paata…kamre में चल रहे कारनामे देख कर अपना लुंड मसलने के सिवा कुछ नहीं कर पाटा…

उसे दर लगता है की कहीं वह लोग उसे देख ना le…lekin उसे लगता है की वह तीनो मजे में है तो वह भी निश्चिंत हो जाता है..

चुदाई के बाद वह दरवाज़ा धीरे से बंद कर के जाने को होता है तो उसे काम्य की बात उसके कान में padti….Thakur को राजू ने hi मारा है….

वह नौकर भी इस बात को सुनकर चौंक जाता hai…aur फिर धीरे से दरवाज़े पर कान लगा कर उनकी पूरी बात सुन लेता है और दुसरे दिन अजय के पास जा कर उसको सब बातें बताता है…

अजय मन में: मुझे लगा hi था की कुछ तो लोचा hai…aur मन में ठान लेता है की राजू से बदला लेकर hi रहेगा…
 
मेगा अपडेट 49: राजू की chaal…uspar hi bhaari…lekin अंत में जीत उसीकी….

अजय को जब पता चलता है की राजू ने hi ठाकुर को मारा है तो अजय को बहुत गुस्सा आता hai..aur सोचता है की राजू से बदला लेना है..

अजय एक शातिर दिमाग वाला आदमी tha…nashedi तो था hi..lekin उसका दिमाग भी बहुत चलता था…

उसको लगता है की यह काम (राजू से बदला) उसे hi करना है और वो अपने किसी आदमी पे यह काम नहीं छोड़ना चाहता था..

एक दिन अजय बिना किसी को बताये राजू के गाँव आता है और राजू पर नज़र रखता hai…Ab राजू को कोई दर नहीं tha..to वो भी लापरवाह रहने लगता hai…uski तो जैसे चांदी निकल आयी thi..ghar में 4 biwiyaan..jo रोज़ उसे मजे देती thi..kabhi कभी वो माला और काम्या को भी खुश कर देता था..

अजय चुपके से राजू पे ध्यान रखता है और उसके दिनचर्या पे भी ध्यान देता है..

उसे सिर्फ राजू से मतलब tha..naa की उसके परिवार वालों se…(abhi के लिए).

इसीलिए वो उसे hi अपना ध्यान केंद्रित करता है..

कुछ दिन उसको ध्यान से देखने के बाद उसे पता चलता है की रोज़ वो अपने काम से खेत चला जाता है और शाम को घर वापस आ जाता hai..aise hi 2 दिन वो उसके खेत पे भी चुपके से जाता है और पाटा है की दोपहर को खाने के बाद वो 1-2 घंटे खेत में बने एक झोपडी में सोता hai..jo की एक छोटा सा कमरे टाइप tha..halka द्वार और एक खड़की टाइप कमरा tha….phir उठके काम करके अपने घर चला जाता है..

अजय वापस अपने गाँव चला जाता है और 1-2 दिन बाद अपने कुछ ख़ास आदमी को लेकर वापस राजू के गाँव आता hai..aur उसपर नज़र रखता है..

अजय अपने आदमियों को राजू के दिनचर्या के बारे में भी बता देता है..

एक दिन राजू सुबह घर से निकल जाता hai..lekin एक गलती कर देता है (जो बाद में बहुत काम आता hai..wo galti)..jaate वक़्त वो अपने फ़ोन ले जाना भूल जाता hai…aur मस्ती में अपने काम के लिए निकल जाता है..

दोपहर को रोज़ की तरह खाना खा कर झोपडी में सोता hai…aur ठीक उसी वक़्त अजय और उसके आदमी धीरे से दरवाज़ा खोल कर अंदर आते है. उस वक़्त राजू हलके से सोया हुआ tha..aur जब उसे लगता है की कमरे में कोई आया है तो अपनी आँख धीरे से खोलता hai..lekin तब तक बहुत देर हो चुकी थी और अजय उसके सर पे ज़ोर का डंडा मारता है. हुम्ला ज़बरदस्त tha..aur राजू वहीँ अपना सर पकड़ कर गिर जाता hai..Ajay के बाकी आदमी भी वहां आ जाते है और राजू के हाथ पेअर बांड देते hai…ek मोती तगड़ी रस्सी से…

अजय के आदमी उसे उठाते hai…aur चुपके से उसे अपने गाडी में दाल कर वहां से रफू चक्कर हो जाते hai…in सब में राजू को कुछ पता नहीं चलता क्यों की वो एकदम बेहोश हो गया tha…Ajay के हमले से..

गाडी रफ़्तार से अजय अपने गाँव में अड्डे में ले जाता hai..use इस बात की ख़ुशी थी की आखिर राजू उसके हाथ आ hi गया है..

जब गाडी अपनी मंज़िल पर पहुँच जाती है तो वो लोग राजू को उठा के एक कमरे में ले जाते है और उसे चेयर पे अच्छे से बांध देते hai..taki वो हिल ना sake..kamre के लाइट्स ऑफ कर देते है जिससे कमरा पूरा अँधेरा जो जाता है और वहां कुछ नज़र नहीं आता..

अजय अपने आदमियों se…is कुत्ते पे नज़र rakho..dekho..kuch होशियारी की तो उसके हाथ पेअर तोड़ दो साले ko…aur अजय अपने घर के लिए निकल जाता है..

राजू के घर…

यहाँ राजू के गर में सब अपने काम और मस्ती में रहते है…

ारु संध्या se..maaji आज मैं राजू के साथ सोती hoon..aap भी आओगे क्या?

संध्या: अरे, माजी को भेजते है naa…unhe और थोड़ा एन्जॉय करने दो ना..

ारु: वो तो ठीक hai..lekin थोड़ा शर्माते hue..ab मुझसे भी रहा नहीं जाता…

संध्या: क्या रहा नहीं jaata?ab तो खुल jaa…souten जो बन गए है hum…aur उसकी गाल पे धीरे से चिमटी काट टी है..

ारु: संध्या के पास आकर धीरे से उसके कान mein…mujhe अब रहा नहीं जाता जब तक राजू मुझे अच्छे से चोदे ना..

संध्या: मेरा भी एहि हाल है gudiya..lekin राजू सब को खुश रखता है तो माजी (रत्न) को भी खुश रहना चाहिए ना..

ारु: haan..aap ठीक कह रही हो..

और ऐसे hi हलकी फुल्की बातों से उनका दिन गुज़र जाता है..

रोज़ की तरह उस एक दिन शाम को राजू घर नहीं aata..Ratna का ध्यान इस बात पर जाता है लेकिन अपने काम में रहने की वजह से ज़्यादा ध्यान नहीं देती..

शाम को 6.00-6.30 बजते है और थोड़ा अँधेरा छाने लगता है और फिर भी राजू घर नहीं आता तो रत्न परेशान हो जाती hai..uski परेशानी देख कर बाकी लोगों के भी ध्यान में आता है की राजू अब तक घर नहीं आया है.

रत्न ारु से: beta…Raju अब तक घर नहीं आया hai…mera जी घबरा रहा hai..zara उस एक बार फ़ोन तो kar…abhi तक राजू कभी इतना लेट नहीं हुआ है..

ारु: जी maaji..phone कर के आती hoon…humein भी अभी ध्यान आया की राजू अब तक घर नहीं आया है..

ारु पास के दूकान पे जाकर फ़ोन करती hai..(jaise आप सब को पता hai..sirf राजू के पास hi फ़ोन था उस घर mein..aur किसी के भी पास नहीं).

फ़ोन रिंग होता है और सब लोग चौक जाते है की फ़ोन रिंग घर से hi बज रहा है..

सुधा दौड़ते हुए राजू के कमरे में जाती है जहाँ राजा का फ़ोन बज रहा था…

सुधा फ़ोन पिक करती है…

ारु: राजू….

सुधा: नहीं beta…Raju फ़ोन घर पे hi छोड़ के गया hai..main सुधा बात कर रही hoon..tu जल्दी से घर आ जा..

अब ारु और सुधा को भी परेशानी होती है और उसके चेहरे से पसीने छूटने लगता है..

इतने में रत्न और संध्या भी आ जाते है और सुधा की हालत को देख कर वो दोनों भी घबरा जाते है..

सुधा: didi..Raju का फ़ोन तो यहीं hai..shayad वो ले जाना भूल गया है..

इतने में ारु भी घर आ जाती है और सब परेशान हो जाते है..

तभी रत्न कहती है संध्या से..

रत्न: Sandhya..chalo मेरे साथ..

संध्या: कहाँ…

रत्न सुधा se…Chhoti..Aaru का ध्यान rakh..hum अभी आते है..

सुधा: कहाँ जा रही हो दीदी?

रत्न: ठाकुर के घर…

रत्न और संध्या जल्दी से ठाकुर के घर जाते है और जहाँ माला और काम्या अपना काम कर के टीवी देख रहे थे..

रत्न: मालकिन…

काम्या: अरे behanji..aap yahan..sab ठीक तो है ना?

रत्न थोड़ा डरते hue…Raju यहाँ आया है क्या?

काम्या थोड़ा उदास मन se…nahi…Raju तो यहाँ नहीं आया hai..aaj कल तो वो बहुत काम hi यहाँ आता hai…hum भी उसका इंतज़ार करते रहते hai…kyun…kya हुआ?

रत्न: राजू सुबह से अपने काम के लिए खेत गया tha..lekin अब तक घर नहीं aaya..kabhi ऐसा नहीं हुआ की राजू इतना देर घर से बहार rahe..agar कहीं जाना होता तो हमें बता कर jaata..Socha शायद यहाँ आया hoga..humne उसे फ़ोन किया tha..lekin वो फ़ोन घर पे hi भूल gaya..aise कहते हुए रत्न काम्या को उसका फ़ोन दिखाती है..

माला: नहीं behanji..Raju तो यहाँ नहीं है…

रत्न: फिर कहाँ गया होगा?

रत्न को इतना सीरियस देख कर काम्या और माला भी परेशान हो जाते है..

माला: सुनिए behanji..lagta है राजू कहीं गया hoga…aaj आप लोग आज रात के लिए यही रुक जाईये…

रत्न: नहीं maalkin..hum घर जाते है..

रत्न संध्या se…chalo bahu…ghar जाते है..

वहां से निकलने से पहले…

रत्न: आपके पास कोई लालटेन या टोर्च है क्या?

माला: क्यों?

रत्न: एक बार खेत भी जा कर देख लेते hai…andhera हो गया hai..to इसीलिए लालटेन के बारे में पुछा है..

काम्या: टोर्च hai…chalo..main भी आपके साथ आती हो..

रत्न के मन करने पर भी काम्या नहीं मानती और वो तीनो खेत की तरफ चल देते है..

खेत में जाकर कमरे में भी जाते hai…lekin वहां कुछ नहीं dikhta…sab ठीक hi लगता है उनको…

क्यूंकि अँधेरा हो गया था और खेत के कमरे में कोई रौशनी नहीं thi…thoda टोर्च ों कर के देखते hai..andhera होने की वजह से उनको यह नज़र नहीं आता की वहां कमरे में कुछ खून के धब्बे ज़मीन पे the..(Raju की वार की वजह से)…

जब वहां उन्हें कुछ नज़र नहीं आता तो परेशान हो कर सब अपने घर चले जाते है..

घर आकर रत्न और बाकी सब की बुरी हालत thi…kisiko रात को नींद नहीं आता और परेशानी में hi रात गुज़ारते है..

वहीँ माला और काम्या भी परेशान हो जाते है की राजू कहाँ गया होगा कर के…

अजय के अड्डे पे…

शाम को करीब 7.00 बजे अजय वहां फिर आता है और कमरे में दाखिल होता है..

ठीक उसी वक़्त राजू को भी थोड़ा होश आता है और उसे कुछ समझ नहीं aata…uthne की कोशिश करता है लेकिन हाथ पाँव बंधे रहने की वजह से वो हिल नहीं paata,,,aur दर्द के मारे कराहता है..

इतने में अजय वहां आता hai…ek आदमी कमरे में लाइट्स जला कर एक बाल्टी से पानी राजू के चेहरे पे मारता hai…to राजू को कुछ होश आता है और हड़बड़ा जाता hai…nazar उठा कर देखता है तो उसे सामने अजय नज़र आता hai…jo एक खतरनाक तरीके से एक नशा का सिगरेट पीते हुए राजू को देख कर है रहा था..

अजय: क्यों बे chutiye…hosh आ गया है क्या?

राजू: अपनी आँख खोल कर अजय को देखता है तो उसे कुछ समझ आता है..

अजय राजू के पास आकर एक ज़ोरदार तमाचा उसके गाल पे देता है और साथ hi 3-4 मुक्के भी मारता है जिससे राजू का सर झन्ना जाता hai…aur वो कुर्सी से गिरते गिरते बच जाता hai…Raju की आँखें लाल हो जाती है और उसके गाल पे अजय के पंजे के निशाँ पद जाते है..

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अजय: क्यों बे saale..tujhe क्या laga..ki तू मेरे चाचा को मार देता और मुझे पता नहीं चलेगा?

मुझे उतना चुटिया समझ रखा है क्या? देख मैं तेरी क्या हालत करता hoon..tujhe भी चाचा की तरह hi मौत doonga…chinta मत कर..

चाचा एक हफ्ते तक मर कर जिया hai..tu भी वैसे hi rahega…haan..ek हफ्ता nahi..lekin एक दिन तू भी ऐसे hi मर कर जियेगा और फिर तुझे इस दुनिया से रवाना कर doonga..phir मेरा बदला पूरा होगा..

यह कहते हुए अजय फिर से राजू पे वार करता है और उसे खूब मारता hai…kabhi हाथ से तो कभी डंडे se…aur राजू के पूरे बदन से खून निकलने लगता hai…Raju लगभग अपनी आधी जान गवा चुक्का था…

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अजय ने उसकी ये हालत कर दी थी..

लेकिन अजय को फिर भी सुकून नहीं मिलता…

अजय अपने एक आदमी से कह कर एक नशे का इंजेक्शन लेता है और वो इंजेक्शन राजू को लगाता hai…injection के लगते है राजू की लगभग जान निकल जाती hai…bahut की काम जान उसमें रह गयी थी अब…

अजय: तू चिंता मत कर bhosadike…main तुझे इतनी जल्दी नहीं मरने doonga…yeh इंजेक्शन तुझे tadpaayega…tujhe इसकी आदत लग jaayegi..aur फिर ठीक 2 दिन में फिर से यह इंजेक्शन नहीं मिला तो अपना दम तोड़ dega…tab जाकर मेरा बदला पूरा होगा..

अजय अपने आदमियों se…abe haraamiyon..aise क्या देख रहे ho…chalo..lights बंद कर do..aur कमरे को ताला लगा कर इस पर पूरी रात नज़र रखना…

यह अभी उठेगा nahi..phir भी इस पर ध्यान रखना…

ऐसा बोल कर अजय अपने घर निकल जाता है..

अजय के घर और अगली सुबह..

आज अजय बहुत खतरनाक और वहशी मूड में था..

वो नशा कर के घर आता है और रात को खाने के बाद कुसुम पर अपनी हवस मिटा hai..kusum के ना कहने पर bhi..lekin अजय कुसुम पे कोई रेहम नहीं करता और उस पर चढ़ कर अपना काम ख़तम करता है..

कुसुम बेचारी अपनी किस्मत पैर रो कर रात गुज़ारती hai..Wahin उसकी माँ गौरी भी उदास हो जाती hai..kyun की कुसुम के चिल्लाने की वजह से उसे सब समझ आ जाता hai..lekin वो बेचारी भी कुछ नहीं कर पाती..

अगले दिन सुबह सब नार्मल दीखता hai…Ajay अपना काम करके जल्दी hi घर से निकलने के लिए रेडी हो जाता hai..(kyunki उसे राजू की खबर जो लेनी थी)

कुसुम रोज की तरह अपना काम कर के अजय के कपडे धोने के लिए उसके कपडे लेती hai..jab वो उसका शर्ट भिगोती है तो देखती है की उसके शर्ट के कल्लोर के पीछे काफी खून के दाग लगे हुए the…usne आज से पहले कभी ऐसे दाग नहीं देखे the…use शक होता hai..wo अजय से पूछना चाहती thi..lekin उसे पता था की अजय को बहुत गुस्सा aayega…isiliye वो अपनी माँ को भी ना बता कर अजय जब अपने अड्डे पे निकल जाता है तो कुसुम भी धीरे से अपने चेहरे को अच्छे से धक् कर अजय का पीछा करती है..

अजय जल्दी से अड्डे पे पहुँच जाता hai…Kusum की एक ऑटो में बैठ कर उसका पीछा करती है और वो भी बिना किसीके दिखे वहां पहुंच जाती है..

अजय फिर राजू के पास जाकर उसकी हालत देखता है तो उसके चेहरे पे एक कातिल मुस्कान आ जाती hai..kyunki राजू की हालत वैसे hi thi..jaise पिछले रात को..

अजय के बाकी आदमी भी है देते है और कहते है की राजू तो अध् मारा पड़ा हुआ है..

अजय: उसे ऐसे hi रहने do…aaj भी उसे तड़पने ko…kal इस समय तक जब उसको फिर से इंजेक्शन नहीं मिलेगा तो धीरे धीरे अपना दम एक घंटे में तोड़ dega…uske पास सिर्फ 24 घंटे बचे है जीने के लिए..

अजय को फिर भी सुकून नहीं मिलता तो फिर वो राजू पे अपना गुस्सा निकलता है और खूब धुनाई करता है राजू की…

कुसुम बेचारी बहार से यह सब देख कर उसके होश उड़ जाते है और दांग रह जाती hai..use कुछ समझ नहीं आता की क्या kare…yaa क्या ना kare…wo अजय की सब बातें सुन पाती है क्यों की कमरा खाली tha..aur सिर्फ अजय और उसके आदमी hi थे वहां par…us सुनसान कमरे में बातें सब सुन सकते थे..

कुसुम अपना सैय्याम रखते हुए वहां से निकल जाती है और फिर गाँव में आकर उसकी माँ को चुपके से फ़ोन करती है..

कुसुम: maa..tumhaare पास माला सास का फ़ोन नंबर है क्या?

गौरी: हाँ hai…kyun? क्या हुआ? तू कहाँ है? बिना बताये चली गयी

कुसुम: अभी मैं कुछ नहीं कह sakti..ghar आकर सब बता doongi…jaldi से माजी का नंबर दो…

गौरी उसे माला का फ़ोन नंबर दे देती है और कुछ पूछने से पहले hi कुसुम फ़ोन कट कर देती है और माला को फ़ोन करती है..

कुसुम: (माला) maaji..main कुसुम बात कर रही hoon..mujhe जल्दी से राजू के घर वालों से बात कराओ..

माला: क्या हुआ बेटी? तू कहाँ hai..aur सब तो ठीक है ना?

कुसुम: नहीं maaji…theek नहीं hai..abhi सब बताने का वक़्त नहीं hai..jaldi से मुझे उनसे बात करवाइये..

माला: ठीक hai…tera नंबर मुझे de..main बात करवाती हूँ..

कुसुम: नहीं maaji..philhaal मई बता नहीं सकती और मेरे पास अभी टाइम नहीं hai..jaldi कुछ करो..

माला: ठीक hai..tu मुझे 10 मं बाद फ़ोन kar..main उनसे बात करवाती hoon…itna कहते hi कुसुम फ़ोन कट कर देती है और अपने आजु बाजू देखती है की कोई उसको देख तो नहीं रहा है..

यहाँ माला के भी पसीने छूट जाते hai..kyun की उसे भी शक हो जाता है की मामला बहुत सीरियस है..

माला काम्या को बुला कर जल्दी से अपने कार में रत्न के घर निकल जाते है..

काम्या (माला से): क्या हुआ? इतना क्यों घबरा रही हो?

माला: अभी कुछ मत pooch…Raju के घर चलते hai..phir सब बताती हूँ..

और फिर दोनों जल्दी से अपनी कार अगले 5 मं में रत्न के घर पहुंच जाते है..

रत्न उन दोनों को एक साथ देख कर घबरा जाती है..

रत्न: क्यों हुआ? आप दोनों एक साथ? राजू का कुछ पता चला क्या?

माला: राजू के बारे में कुछ पता नहीं चला लेकिन कुसुम बहु ने फ़ोन किया hai…aur माला सब को कुसुम के फ़ोन के बारे में बताती है तो सब के होश उड़ जाते है..

फिर ठीक अगले 5 मं के बाद कुसुम का फिर से फ़ोन आता है..

माला: कुसुम beti..main राजू के घर में hoon..uski माँ और बाकी सब यहीं hai…bata..kya hua..tu कहाँ है..

कुसुम फिर उन सब को बताती है की वो कहाँ है और राजू कहाँ है और उसकी क्या हालत hai..maaji..Raju के पास ज़्यादा वक़्त नहीं hai..jo भी करना है जल्दी कीजिये..

कुसुम की बात सुन कर सब रोने लग जाते hai…sab का बुरा हाल था..

रत्न: beti..tune अच्छा किया बता कर…

कुसुम: maaji..abhi टाइम बहुत काम hai..main यहाँ ज़्यादा देर नहीं रह sakti..unke आदमी अगर मुझे देख लिए तो वो मुझे छोड़ेगा nahi..main घर के लिए निकल रही हूँ..

आपसे जो हो सकता hai..aap kijiye..aur फिर फ़ोन कट कर के चुपके से कुसुम अपने घर के लिए निकल जाती है..

यहाँ राजू के घर में सब का बुरा हाल tha…kya kare..kuch समझ में नहीं आ रहा था..

रत्न फिर अपना सैय्याम संभालते हुए माला से कहती है..

रत्न: मालकिन., मुझे अभी उसी जगह जाना hai…mujhe ले चलोगे क्या?

माला: haan..kyun nahi…Raju भी हमारा hi hai…hum उसे कैसे अकेले छोड़ सकते है..

इतने में ारु भी जिद करती है तो माला, काम्या, रत्न और ारु उनकी कार में जल्दी अजय के गाँव के लिए निकल जाते है..

जाते वक़्त रत्न सुधा और संध्या को अपना ध्यान रखने को कहती है…

1-2 घंटे में सब अजय के गाँव पहुँच जाते है…

वहां पहुँच कर रत्न माला से कहती है की वो अब अपने घर चले जाए…

माला और काम्या दोनों मन करती है लेकिन रत्न उनको समझाती है की उनकी कार अगर अजय ने देख लिए तो मुश्किल हो jaayega…aur सब मुसीबत में फस जाएंगे..

माला मानती नहीं लेकिन रत्न उनको कन्विंस कर के वहां से भेज देती hai…aur माला का फ़ोन अपने पास रख कर उनसे कहती है की सुधा और संध्या को अपने घर में रखे और वो राजू के फ़ोन पे उनको जानकारी देती रहेगी…

इसी बीच…

अजय राजू को फिर से मारने के बाद वहां से निकलने लगता hai…kyunki अब उसे पता चल गया था की राजू सिर्फ 24 घंटे का मेहमान है..

जब वो निकल रहा होता है तो उसके आदमी भी कहते है की पिछली राति से वो सब वहीँ है और उन्हें भी थोड़ा आराम की ज़रुरत है..

अजय को अपनी होशियारी पे कुछ ज़्यादा hi विश्वास था (राजू की हालत पे) तो बिना कुछ ज़्यादा सोचे वो अपने आदमियों को भी घर जाने को कहता है और कहता है की शाम को एक बार वहां आकर चेक कर ले…

सब हाँ में सर हिला कर सब अपने घर चले जाते hai…Raju को अकेला और अध् मारा छोड़ कर..

वहीँ कुसुम भी छुपके से रत्न से फ़ोन पे बात कर के अपने घर के लिए निकल जाती है..

घर पहुंच कर गौरी उसे देख कर राहत की सांस लेती hai…phir कुसुम गौरी को पूरा किस्सा सुना देती है..

गौरी ये सुन कर उसके भी होश उड़ जाते hai..lekin कुसुम उससे कहती है की अजय को बिलकुल इसके बारे में पता नहीं चलना चाहिए की हमें सब पता है..

वर्ण वो हम दोनों को भी मार देगा और 1 सेकंड भी इसके बारे में सोचेगा नहीं..

गौरी को कुसुम की बात सही लगती है और दोनों नार्मल हो कर अपना काम करती है (लेकिन दिल और दिमाग में दोनों की फटी पड़ी हुई थी की राजू का क्या होगा कर के और अजय के दर से भी)..

इतने में अजय भी घर आ जाता hai…usko देख कर दोनों दर जाते है लेकिन फिर नार्मल रहने की कोशिश करते hai…jo इतना आसान काम नहीं था..

वापस गाँव में..

माला और काम्या के जाने के बाद रत्न एक गहरी सांस लेती है और ारु के साथ उस अड्डे पे जाती है जिसका जीकर कुसुम ने फ़ोन पे किया था..

थोड़ी देर बाद वहां जाकर दोनों पाते है की वो एरिया एकदम सुनसान है और एकदम सन्नाटा छाया हुआ है..

धीरे से छुपके से दोनों धड़कते दिल से उस कमरे में जाते है तो एकदम अँधेरा छाया हुआ tha…dono किसी तरह अँधेरे में खोजते हुए स्विच ों कर के लाइट जला देते है..

कमरे में रौशनी चा जाती है और दोनों राजू के देख कर एकदम दांग रह जाते है…

राजू एकदम खून से लथपथ अध् मारा पढ़ा हुआ है और दोनों हाथ और पाँव कुर्सी पे रस्सी से बंधे hue…uski हालत देख कर दोनों एकदम सो रो देते है और दौड़ कर दोनों राजू को अपने गले लगा लेते है…

कुछ देर बाद रत्न को लगता है की अब यहाँ ज़्यादा देर रहना ठीक नहीं hai..Ajay के आदमी कभी भी आ सकते है..

रत्न ारु को भी संभालती है और फिर दोनों काफी म्हणत से राजू के रस्सी को खोल कर उसे थोड़ा आज़ाद करते hai…lekin राजू उठने और चलने की हालत में नहीं था…

दोनों बड़ी मुश्किल से अपने कंधे पे रख कर उसे बहार लाते hai…bahar आने से पहले ारु उस कमरे के सभी लाइट्स बंद कर देती है और कमरा पहले जैसा tha..waise hi रहता hai…sirf राजू नहीं था उस कमरे में…

रत्न: अच्छा किया beti..tu भी मेरे साथ आ gayi..warna मैं अकेली उसे उठा नहीं पाती..

ारु कुछ नहीं कहती और अपनी आंसू पॉच लेती है..

दोनों राजू को उठा कर कमरे से बहार लाते hai…is वक़्त शाम ढल रहा tha..aur उन्हें दर भी था की कहीं अजय की आदमी ना आ जाए…

उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या kar…Ratna को इतना मालूम था की अगर वो राजू को उसके गाँव ले गए तो अजय को ज़रूर पता चल जाएगा और फिर अजय इस बार और बुरा हाल करेगा..

रत्न एक बार राजू को देखती है तो उसे कुसुम की बात भी याद आती है की अभी राजू के पास ज़्यादा वक़्त नहीं है..

रत्न कुछ सोच में पद जाती है..

ारु: माजी, क्या सोच रही हो? कुछ तो जल्दी करना पड़ेगा वर्ण वो लोग आ जाएंगे..

रत्न: haan..tu सही कह रही हो beti..aur फिर रत्न को कुछ याद आता है…

(नोट: इन अपडेट 9 (Revelation)..jab राजू और रत्न गुरूजी से मिलने जाते है और लास्ट में गुरूजी रत्न से बात करते hai…to रत्न से कहता है की beti..jab भी तुझे मेरी मदत की ज़रुरत पड़ेगी या लगे की मैं तुम्हारे कोई काम आ सकता hoon..to बेझिझक तुम मेरे पास आ सकती हो…

मैं यह लाइन उस अपडेट में लिखना भूल गया था..)

रत्न: चल…

ारु: कहाँ..

रत्न: बताती हूँ…

रत्न ारु को वहीँ पे रख कर ध्यान रखने को कहती है और10 मं में फिर गाँव से एक ऑटो ला करराजु को उसमें बिठा कर निकल जाते है..

ारु रत्न से पूछती है तो रत्न कुछ नहीं कहती और चुप रहने को कहती है..

1-2 घंटे के बाद तीनो गुरूजी के आश्रम से कुछ दूर में पहुंच जाते है और रत्न ऑटो वाले को भेज देती है….

ारु रत्न की तरफ देखती है तो रत्न कहती है..

रत्न: ऐसे ना dekho..kuch देर में सब बता doongi…ab मेरी मदत कर और राजू को ले चल मेरे साथ..

ारु वही करती है और कुछ देर बाद तीनो गुरूजी की आश्रम में पहुँच जाते है जहाँ गुरूजी विश्राम कर रहे होते है…

गुरूजी उनको देख कर है देता hai…Ratna उनको देख कर प्रणाम करती है और ारु को भी बोल देती है..

ारु को कुछ समझ नहीं आता और रत्न जैसे करती hai..Aaru भी वैसे hi करती है..

गुरूजी: आओ beta…kaise आना हुआ?

फिर रत्न गुरु को सब बता देती है की राजू के साथ क्या हुआ है और कैसे हुआ है..

इसी बीच ारु को कुछ समझ नहीं आता तो गुरूजी उसकी तरफ देख कर..

गुरूजी: यह कौन है?

रत्न: यह राजू की पत्नी hai…naam आराध्य hai..hum इसे ारु कह कर बुलाते है..

फिर रत्न ारु को सब कुछ बता देती है …ारु सब सुन कर आश्चर्य हो जाती है..

गुरूजी राजू को देखते है जो अध् मारा पढ़ा हुआ था…

गुरूजी: इसे तो बहुत चोट आयी hai…lagta है किसीने इसे बहुत मारा है..

रत्न: जी हाँ..

गुरूजी फिर राजू को देकते है और कहते है की इसे बहुत गहरी चोट लगी हुई hai…aur ठीक होने में बहुत टाइम लगेगा…

रत्न: जितना भी टाइम lagega..lagne dijiye..lekin इसे आप hi ठीक कर सकते ho…main इसे गाँव नहीं ले जा सकती thi…isiliye मैं इसे आपके पास ले आयी hoon…aap hi हमारा आकृ सहारा हो..

और फिर रत्न गुरूजी को कुसुम की बात भी बताती है की इसके पास ज़्यादा वक़्त नहीं है..

गुरूजी फिर से उसे देखते है और उसे ज्ञात होता है की राजू के बदन में नशा भर दिया गया है (इंजेक्शन के द्वारा) और इसीलिए इसके पास बहुत काम टाइम है..

गुरूजी रत्न से कहते है की राजू को ठीक होने में काफी वक़्त lagega..agar वो चाहे तो घर जा सकती hai…jab राजू ठीक हो जाएगा तो वो उसे बुला लेंगे…

लेकिन दोनों रत्न और ारु नहीं मानते और जब तक राजू ठीक नहीं होता, वो उसके साथ hi रहेंगे..

गुरूजी भी इस बात को मान जाते है और राजू को ठीक करने में लग जाते है..

रत्न को फिर कुछ याद आता है और वो माला को फ़ोन करती hai..use यह नहीं बताती की वो अभी कहाँ है लेकिन उसे इतना ज़रूर बताती है की राजू सही जगह पहुँच गया है और वो जल्दी hi ठीक हो जाएगा..

फिर वो सुधा से बात कराने को कहती है …

रत्न: सुन chhoti..hum ठीक hai…tu एक काम kar…tu और संध्या चुपके से बिना किसी को बताये रानी की घर चले jaao…aur जब तक मैं ना kahoon..wahan से निकलना मत..

सुधा: क्या हुआ दीदी? सब ठीक तो है ना?

रत्न: haan..sab ठीक hai…Raju को थोड़ी गहरी चोट पड़ी hai..lekin वो जल्दी ठीक हो जाएगा और हम सब के सामने पहले की तरह hi रहेगा…

लेकिन मैं और ारु अभी कहाँ hai..kya कर रहे hai..yeh सब मत pooch…main बता नहीं सकती..

सुधा: वो तो ठीक hai..lekin रानी के घर क्यों? हम यहाँ भी तो ठीक hi है..

रत्न: तुम अभी के लिए ठीक ho…lekin ज़्यादा दिन nahi…jab अजय को पता चलेगा की राजू वहां नहीं है तो उसे बहुत गुस्सा aayega..aur शायद वो माला के घर भी आ सकता है..

जब वो तुमको देखेगा तो गुस्से में तुम पर भी हुम्ला कर सकता hai..to, इसीलिए चांस मत le..aur जैसे में कहती हूँ वैसे hi कर..

सुधा को भी इस बात पे ध्यान जाता है और वो भी रत्न की बात मान लेती है…

रत्न: sun…tu माला से केहड़े की तुम दोनों को कुछ कपडे लेने है और घर जाना hai..to उसी बहाने से उसके घर से निकल jaao…apne कपडे लो और चुपके से रानी के घर jaao..bina किसीके बताये hue..main माला से बात करती हूँ…

सुधा: ठीक है didi..aur ऐसे कहते हुए सुधा माला को फ़ोन दे देती है..

रत्न माला को कहती है की राजू को ठीक होने में थोड़ा वक़्त lagega..aur तब तक दोनों सुधा और संध्या उनके साथ रहेंगे..

माला को भी ये बात अच्छी लगती hai..aur फिर सुधा और संध्या वहां से निकल जाते है अपने घर की और… “कपडे लेने के लिए”..

दोनों सुधा और संध्या कपडे लेने के लिए अपने घर निकल जाते है और फिर लौटकर नहीं आते..

इसी बीच…

शाम को करीब 7-8 बजे अजय के आदमी उस कमरे में जाते है..

कमरे के लाइट्स ों कर के देखते है तो उनके होश उड़ जाते hai…kyun की वहां सिर्फ रस्सी और कुर्सी hi tha…lekin राजू gayab..un सब के पसीने छूट जाते hai..unhe समझ में नहीं आता की क्या हो गया है..

एक आदमी तुरंत अजय को फ़ोन करता hai…Ajay फ़ोन पे ये बात सुनते hi भाउक्ला जाता है और तुरंत वो भी वहां आ जाता hai…lekin उसे सब खाली नज़र आता है…

अजय को अपनी गलती पे बहुत गुस्सा आता है लेकिन कुछ नहीं कर पाटा..

उसे भी समझ में नहीं आता की राजू कहाँ गया है और उसे कौन उठा ले गया hai..kyunki पिछली बार जब अजय ने राजू को देखा tha..to वो अध् मारा पड़ा हुआ था और उसमें उठने की भी ताक़त नहीं थी..

अजय एकदम गुस्से में घर जाता है और अपना गुस्सा कुसुम और गौरी पे उठाता hai..unhe खूब गालियां देता है…

वो दोनों कुछ नहीं कहती और बस चुप चाप उसकी बातें सुनती है..

गुरूजी के आश्रम में…

2 दिन तक गुरु राजू पे बहुत म्हणत करते hai…ab उसकी जान को खतरा नहीं tha…lekin वो बहुत कमज़ोर नज़र आता hai…teesre दिन वो अपनी आँख खोल कर डेक्था है की वो एक नयी जगह पे hai..aur सामने रत्न और ारु को देखता है..

राजू की आँख खुलते hi रत्न और ारु भी खुश हो जाते है और दोनों जाकर राजू को अपने गले से लगा लेते है और ज़ोर ज़ोर के रोने लग जाते है..

राजू बड़ी मुश्किल से रत्न से पूछता है की वो अब कहाँ है?

रत्न: चुप हो जा bête…aur फिर राजू को अपने गले लगा लेती है. राजू ारु की तरफ देखता है तो ारु भी राजू को अपने सीने से लगा लेती hai..aur रोने लगती है.

इतने में गुरूजी आते है और कहते hai…ise अब बहुत आराम की ज़रुरत hai..jaise मैंने कहा, इसे ठीक होने में टाइम लगेगा.

रत्न: जितना भी टाइम लगे, कोई परवाह nahi…bas मेरा राजू ठीक होना चाहिए..

गुरूजी: चिंता मत karo…bhagwaan पे भरोसा rakho…sab ठीक हो जाएगा..

यहाँ अजय के घर…

यहाँ गाँव में अजय बहुत कोशिश करता है राजू को ढूंढने ki..lekin सफल नहीं हो paata..use लगता है की को माला के घर जा कर पता करे…

तो वो माला के घर जाता है और थोड़ा गुस्से से माला से पूछता है की राजू को उन्होंने देखा है क्या..

माला: हमें क्या ज़रुरत है ऐसे 2 कौड़ी के आदमी को देखने की (जान बूझ कर राजू को गाली देती है ताकि अजय को शक ना हो). उससे हमारा कोई वास्ता नहीं है..

अजय: बात तो आप ऐसे कर रहे हो जैसे आप को कुछ पता नहीं.

माला: मैंने ऐसे क्या कह दिया? माला भी गुस्से se…zubaan संभाल के बात kar…tu उसका (ठाकुर) का भतीजा हो सकता hai…wo मेरा भाई tha…abhi तेरे से प्यार से बात कर रही hoon..warna तुझे यहाँ से लात मार के निकल doongi…samjha…

अजय: haan…sab समझता hoon…isiliye आप उस दो कौड़ी के आदमी से गुलछर्रे उदा रही थी..

माला (थोड़ा शॉकेड हो कर, फिर भी गुस्से se)…badtameez…dafa हो जा यहाँ se…warna मुझसे बुरा कोई नहीं hoga…aur आइंदा से इस घर में कदम भी मत रखना…

अजय भी गुस्से में वहां से निकल जाता है और बहार आकर सोचता है की अब क्या करें?

ये तो मुझसे कुछ बताने वाली नहीं hai..aur फिर ऐसे hi कुछ सोचते हुए अजय भी वहां से निकल जाता है..

माला काम्या को आवाज़ देती है..

माला: अजय को कैसे पता चला की राजू यहाँ आया tha..aur हम मजे कर रहे थे..

काम्या: मुझे भी नहीं पता…

माला: एक काम kar…jitne भी ठाकुर के बचे हुए आदमी hai..sab को निकल de…aur वैसे भी हमने सोच रखा था की हम यह घर और गाँव छोड़ कर चले जाएंगे…

पता नहीं राजू कहाँ और कैसे hai…agar फिर से वो यहाँ आ गया तो मुश्किल हो जायेगी..

काम्या: ठीक कह रही हो तुम bhi..main आज hi सब को निकल देती hoon…aur वैसे भी अच्छा हुआ की सुधा और संध्या यहाँ नहीं hai..warna अजय को सब पता चल जाता और फिर सब सत्यानाश हो जाता…

वैसे, वो दोनों कहाँ है? कुछ पता चला क्या? उस दिन घर से कपडे लाने के लिए यहाँ से गए the…lekin अब तक नहीं आये…

गुरूजी के आश्रम में…

गुरूजी राजू का अच्छे से ख्याल रखते है और देखते hi देखते करीब 1 महीने में राजू बिलकुल ठीक हो गया tha…aur उसे सब पता चल जाता है की उसे क्या हुआ hai/tha…

राजू को भी अब अजय से बदला लेना tha..aur वो उसी के बारे में सोच कर अपने दिन गुज़ारता है..

राजू ऐसे hi आराम करता है और अगले 15 दिन में वो पूरी तरह से ठीक हो जाता hai..isi 15 दिन में वो कसरत भी करता है और अपनी बॉडी को भी ठीक कर लेता है..

अब वो पहले की तरह नार्मल राजू बन जाता hai..chust, दुरुस्त और tandurust…ismein रत्न और ारु भी राजू का अच्छे से ख्याल रखते है और वो भी उसे नार्मल होने में पूरी मदत करते है..

अब राजू को लगता है की उन सब को अब यहाँ से निकल जाना chahiye..to एक दिन राजू गुरूजी से कहता है..

राजू: गुरूजी, अब हमें आज्ञा dijiye..humaare निकलने का वक़्त आ गया hai…main एकदम ठीक hoon..aapka मैं ज़िन्दगी भर आभारी rahoonga…mujhe सहारा दे कर मुझे संभालने और ठीक करने के लिए..

गुरूजी: ठीक है putra…jaao और अपना और अपने बीवियों का ख्याल rakhna..unhe सब का अब तुम hi सहारा हो..

राजू: जी Guruji..jaise आपने kaha..waisa hi hoga..main अपने सब घर वालों का ध्यान रखूंगा…

गुरूजी: मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ हमेशा रहेगा..

राजू, रत्न और ारु तीनो गुरूजी का आशीर्वाद लेकर उसके आश्रम से निकल जाते है अपनी घर की और…

आश्रम से बहार आकर..

राजू: वैसे सुधा और संध्या कहाँ है? मैं उनके बारे में पूछना hi भूल gaya…tum दोनों में मुझे उनके बारे में सोचने का वक़्त hi नहीं दिया..

रत्न: उन्हें मैंने सब बता दिया hai..wo भी बहुत खुश है की तू ठीक हो गया hai..wo भी तेरा hi राह देख रहे है..

राजू: कहाँ है वो दोनों?

ारु: रानी के ghar…aur फिर रत्न उसे फिर से सब बता देती है…

राजू: अच्छा किया की उन्हें रानी के घर भेज दिया.

रत्न: chalo…Rani के घर चलते है..

राजू: haan..yehi ठीक rahega..aur फिर तीनो वहां से रानी के घर चले जाते है..

रानी के घर पहुँचते hi…Sudha और संध्या दौड़ के राजू के गले लग जाते है और रट हुए उसके पूरे चेहरे पे छुम्मियों की बरसात कर देते है..

वही रानी भी अपने भारी पेट ले कर (वो प्रेगनेंसी के एडवांस्ड स्टेज पेट hi) राजू को देख कर रट हुए उससे गले मिलती है..

रानी: कहाँ चले गए the…agar तुम्हे कुछ हो जाता तो मैं इसे (खुद का और राजू का हाथ अपने पेट पे रख के) क्या बोलती??

राजू: कुछ nahi..majaak mein…yehi की उसका बाप बहुत बहादुर tha…aur 5 बीवियों का देखभाल करता tha…aise कहते हुए रानी को आँख मारता है और उसके होंठ चूम लेता है..

बाकी सब भी फिर से राजू को अपने गले लगा लेते है…

रात को सब लोग राजू के पास hi सोते hai..lekin कोई उससे चुदाई नहीं करवाते (जब की सब की चाह थी की राजू उन्हें प्यार kare)..kyunki सब को लगता है की राजू को अभी और थोड़ा टाइम देना चाहिए..

कुछ दिन बाद राजू रत्न से कहता है की वो गाँव जा रहा है और अपना काम कर के जल्दी hi लौटेगा…

रत्न: कहाँ जा रहा है beta..aur क्या काम है तुझे?

राजू: तुझे पता है maa…Ajay को उसके ठिकाने लगाना hai…mujhpe भरोसा rakho..is बार मैं और भी सावधान rahoonga..aur 2-3 दिन में hi लौट aaonga..yeh मेरा वादा है..

और haan..is बार फ़ोन नहीं भूल रहा hoon..tum तुम सब लोगों से हर रोज़ बात करते रहूंगा..

रत्न और बाकियों का दिल नहीं मंटा लेकिन राजू को अजय से बदला लेना hi tha..Ratna को भी लगता है की उन्हें अजय से बहुत मुश्किलें आ सकती है. इस बार तो उसने अपना दिमाग लगा कर काम चलाया लेकिन हर बार यह संभव नहीं होगा और अजय कभी भी फिर से हुम्ला कर सकता है. इसीलिए वो भी राजू की बात मान जाती है की अजय उनके लिए खतरा बन सकता है आगे जाकर.

अजय का अंत..

राजू पहले अपने गाँव आता है और चुपके से काम्या के घर जाता है. काम्या और माला दोनों उस को देख कर एकदम खुश हो जाते है और उससे बहुत प्रश्न पूछती hai…Raju कुछ जवाब देता और कुछ nahi…bas उतना hi जितना उसे वो देना चाहता था.

राजू: पहले मुझे सब बताओ उस दिन से आज तक क्या हुआ है..

काम्या उसे पूरा सब जो पिछले 1-2 महीने में हुआ tha…sab बता देती है.

राजू की सोच सही थी की अजय यहाँ पर भी आकर उनके परेशान किया था.

लेकिन उन्हें इस बार यह पता नहीं था की अब अजय कहाँ है और क्या कर रहा है.

राजू उनको भी बोल देता है की वो गाँव अजय से बदला लेने के लिए hi आया है.

राजू फिर वहां से अजय के गाँव के लिए निकल जाता hai…wahan पहुँच कर पहले वो सीधा अजय के अड्डे पे जाता है लेकिन इस वक़्त वहां कोई नहीं होता.

फिर वो चुपके से अजय के घर जाता है और इस बार उसकी किस्मत अच्छी होती है की अजय घर पे नहीं होता है.

राजू को देख कर दोनों गौरी और कुसुम भी बहुत खुश हो जाते hai..Gauri और कुसुम भी उसे बताती है अजय ने उन्हें कैसे परेशान किया है…

इन सब की बातें सुन कर राजू को भी बहुत गुस्सा आता है और मन में सोचता है की अजय का काम जल्दी hi तमाम करना पड़ेगा..

राजू: (गौरी और कुसुम se)…mujhe पता है की अजय कैसा लड़का hai..lekin मैं आप दोनों से सुन्ना चाहता हूँ की अभी मैं अजय का क्या करून…

कुसुम दुखी मन से (क्यूंकि अजय रिश्ते में उसका पति tha)…mujhe पता nahi…main तो हर वक़्त अपनी किस्मत को कोसती हूँ की अजय मेरे ज़िन्दगी में क्यों आया…

वो सिर्फ नाम का hi पति है लेकिन कभी मुझे (या मेरी मम्मी को) प्यार से नहीं देखा और हमेशा हम दोनों को बहुत दुःख दिया है..

गौरी: हाँ beta…Kusum ठीक कह रही hai…bhale hi वो मेरा दामाद है लेकिन हमारा जीना हराम कर दिया है.

राजू: ठीक hai…mujhe एहि जानना tha..aap से..

कुसुम: kyun..jaan कर क्या करोगे?

राजू: 1-2 दिन में पता चल जाएगा…

और ऐसा कहते हुए राजू वहां से जल्दी निकल जाता है. अजय की तलाश में…

राजू मन में सोच के hi आया था की अजय को कहाँ और कैसे मारना है..

1-2 घंटे बाद फिर से राजू अजय के अड्डे पे जाता है और इस बार उसे अजय के कुछ आदमी वहां दीखते है को बकचोदी करते हुए सत्ता मार रहे थे…

राजू फुर्ती दिखाते हुए उनका ध्यान हटाता है और एक एक कर के सब को मार देता है शिव एक को छोड़ के..

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वो आदमी कुछ समझ pata..tab तक बहुत देर हो चुकी था और उसके सभी साथी वहां ढेर पड़े हुए रहते है.

राजू उस बचे हुए आदमी को पकड़ कर खूब धुनाई करता है और उसे ये जानकारी लेता है की अजय कहाँ है और कब वहां आ रहा है..

राजू: बोल saale…Ajay कहाँ मिलेगा मुझे?

आदमी: डरते hue..mujhe पता नहीं sahib…wo कह रहा था की एक घंटे में वो हमसे मिलने यहाँ आएगा और कुछ काम बताएगा.

राजू: ठीक hai…ab ये बता की वो अपने नशे के पदार्थ कहाँ रखता है..

आदमी उसे दूरसे एक और अड्डे के बारे में बताता है जहाँ अजय अपना नशीला माल दुनिया से बचा कर रखता hai..jab राजू को लगता है की उस आदमी से और कोई जानकारी नहीं मिल सकती तो उसे भी मार देता है और जल्दी से दुसरे अड्डे पे जाता है जहाँ अजय ने अपना माल रखा हुआ था.

माल लेकर वापस यहाँ 30 मं आता है और अजय का इंतज़ार करता है…

आदमी ने जैसा बताया tha..theek वैसे hi अजय 1 घंटे बाद अड्डे पे आता है…

अजय अड्डे पे आकर देखता है की लाशें बिछी हुई है और उसे समझने में देर नहीं लगती की यह राजू का hi किया कराया है…

राजू जो अजय का hi इंतज़ार कर रहा tha..theek उसी वक़्त पीछे से आकर अजय पे एक रोड से उसके सर पे हुम्ला करता hai…Ajay सर पकड़ कर चक्र जाता hai…aur वहीँ गिर जाता है..

राजू उसे उठाके कुर्सी पे उसे अच्छे से बाँध देता है और उसके होश आने का इंतज़ार करता है..

30 मं बाद उसे जब होश आता है और देखता है की उसके सामने राजू बैठा hai…uske हाथ पाँव बंधे होने की वजह से अजय कुछ नहीं कर पाटा…

राजू: क्यों बे saale…tujhe क्या laga..ki मुझे मार्के बाकी सब को परेशान करेगा??

अजय: चुप saale..tune मेरे चाचा को मारा tha…to तुझे भी मरना hi था…

राजू: मैं तुझे बताता hoon…kaun मरने वाला hai..aur ऐसे कहते हुए अजय के पास आकर उसकी भी बहुत धुनाई करता है..

अजय का चेहरा पूरा खून में रंग जाता है..

राजू: अब देख मैं क्या करता हूँ…

और ऐसा कहते हुए वो अजय के पास आता hai..aur उसकी नाक पकड़ कर ज़ोर से मरोड़ता है…

दर्द की वजह से अजय चीक पड़ता है और चीकने की वजह से उसका मुँह खुल जाता hai…aur ठीक उसी वक़्त राजू अपने पॉकेट से अजय के नशीले पदार्थ के 2 थोड़े बड़े पैकेट निकल कर उसके मुँह में ठूस देता है…

अजय ये एक्सपेक्ट नहीं कर रहा tha…aur ज़ोर ज़ोर के खांसने लगता hai…Raju फिर से 2 और पैकेट उसके मुँह में ठूस देता hai…aur जबरन उसका सर और नाक पकड़ कर उसका मुँह दबा देता hai…aur ऐसे hi राजू 10 मं तक अजय का मुँह और नाक बंद कर के दबाता है.

यह सब इतना जल्दी होता है की अजय को बिलकुल पता hi नहीं chalta…aur इतना सारा नशीला पदार्थ उसके मुँह में रहने की वजह से (और मुँह बंद रहने की वजह से) उसकी आँखें एकदम लाल हो जाती है और चेहरे का रंग भी बदल जाता hai…Ajay वैसे hi तड़पते हुए हाथ पाँव हिलता है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी thi…thodi hi देर में अजय भी अपना दम तोड़ देता है और वहीँ पे उसकी मौत हो जाती है…

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हिंदी फॉण्ट अपडेट (फर्स्ट टाइम)

अपडेट ४९: राजू की चाल…उसपर ही भारी…लेकिन अंत में जीत उसीकी….

अजय को जब पता चलता है की राजू ने ही ठाकुर को मारा है तो अजय को बहुत गुस्सा आता है..और सोचता है की राजू से बदला लेना है..अजय एक शातिर दिमाग वाला आदमी था…नशेड़ी तो था ही..लेकिन उसका दिमाग भी बहुत चलता था…उसको लगता है की यह काम (राजू से बदला) उसे ही करना है और वो अपने किसी आदमी पे यह काम नहीं छोड़ना चाहता था..

एक दिन अजय बिना किसी को बताये राजू के गाँव आता है और राजू पर नज़र रखता है…अब राजू को कोई दर नहीं था..तो वो भी लापरवाह रहने लगता है…उसकी तो जैसे चांदी निकल आयी थी..घर में ४ बीवियां..जो रोज़ उसे मजे देती थी..कभी कभी वो माला और काम्या को भी खुश कर देता था..अजय चुपके से राजू पे ध्यान रखता है और उसके दिनचर्या पे भी ध्यान देता है..उसे सिर्फ राजू से मतलब था..ना की उसके परिवार वालों से…(अभी के लिए).इसीलिए वो उसे ही अपना ध्यान केंद्रित करता है..कुछ दिन उसको ध्यान से देखने के बाद उसे पता चलता है की रोज़ वो अपने काम से खेत चला जाता है और शाम को घर वापस आ जाता है..ऐसे ही २ दिन वो उसके खेत पे भी चुपके से जाता है और पाटा है की दोपहर को खाने के बाद वो १-२ घंटे खेत में बने एक झोपडी में सोता है..जो की एक छोटा सा कमरे टाइप था..हल्का द्वार और एक खड़की टाइप कमरा था….फिर उठके काम करके अपने घर चला जाता है..

अजय वापस अपने गाँव चला जाता है और १-२ दिन बाद अपने कुछ ख़ास आदमी को लेकर वापस राजू के गाँव आता है..और उसपर नज़र रखता है..अजय अपने आदमियों को राजू के दिनचर्या के बारे में भी बता देता है..एक दिन राजू सुबह घर से निकल जाता है..लेकिन एक गलती कर देता है (जो बाद में बहुत काम आता है..वो गलती)..जाते वक़्त वो अपने फ़ोन ले जाना भूल जाता है…और मस्ती में अपने काम के लिए निकल जाता है..दोपहर को रोज़ की तरह खाना खा कर झोपडी में सोता है…और ठीक उसी वक़्त अजय और उसके आदमी धीरे से दरवाज़ा खोल कर अंदर आते है. उस वक़्त राजू हलके से सोया हुआ था..और जब उसे लगता है की कमरे में कोई आया है तो अपनी आँख धीरे से खोलता है..लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और अजय उसके सर पे ज़ोर का डंडा मारता है. हुम्ला ज़बरदस्त था..और राजू वहीँ अपना सर पकड़ कर गिर जाता है..अजय के बाकी आदमी भी वहां आ जाते है और राजू के हाथ पेअर बांड देते है…एक मोती तगड़ी रस्सी से…अजय के आदमी उसे उठाते है…और चुपके से उसे अपने गाडी में दाल कर वहां से रफू चक्कर हो जाते है…इन सब में राजू को कुछ पता नहीं चलता क्यों की वो एकदम बेहोश हो गया था…अजय के हमले से..गाडी रफ़्तार से अजय अपने गाँव में अड्डे में ले जाता है..उसे इस बात की ख़ुशी थी की आखिर राजू उसके हाथ आ ही गया है..जब गाडी अपनी मंज़िल पर पहुँच जाती है तो वो लोग राजू को उठा के एक कमरे में ले जाते है और उसे चेयर पे अच्छे से बांध देते है..ताकि वो हिल ना सके..कमरे के लाइट्स ऑफ कर देते है जिससे कमरा पूरा अँधेरा जो जाता है और वहां कुछ नज़र नहीं आता..अजय अपने आदमियों से…इस कुत्ते पे नज़र रखो..देखो..कुछ होशियारी की तो उसके हाथ पेअर तोड़ दो साले को…और अजय अपने घर के लिए निकल जाता है..

राजू के घर…

यहाँ राजू के गर में सब अपने काम और मस्ती में रहते है..

आरु संध्या से..माजी आज मैं राजू के साथ सोती हूँ..आप भी आओगे क्या?

संध्या: अरे माजी को भेजते है ना…उन्हें और थोड़ा एन्जॉय करने दो ना...

आरु: वो तो ठीक है..लेकिन थोड़ा शर्माते हुए..अब मुझसे भी रहा नहीं जाता…

संध्या: क्या रहा नहीं जाता?अब तो खुल जा…सौतें जो बन गए है हम…और उसकी गाल पे धीरे से चिमटी काट टी है..

आरु: संध्या के पास आकर धीरे से उसके कान में…मुझे अब रहा नहीं जाता जब तक राजू मुझे अच्छे से चोदे ना..

संध्या: मेरा भी एहि हाल है गुड़िया..लेकिन राजू सब को खुश रखता है तो माजी (रत्ना) को भी खुश रहना चाहिए ना.

.आरु: हाँ..आप ठीक कह रही हो..

और ऐसे ही हलकी फुल्की बातों से उनका दिन गुज़र जाता है..

रोज़ की तरह उस एक दिन शाम को राजू घर नहीं आता..रत्ना का ध्यान इस बात पर जाता है लेकिन अपने काम में रहने की वजह से ज़्यादा ध्यान नहीं देती..शाम को ६.००-६.३० बजते है और थोड़ा अँधेरा छाने लगता है और फिर भी राजू घर नहीं आता तो रत्ना परेशान हो जाती है..

उसकी परेशानी देख कर बाकी लोगों के भी ध्यान में आता है की राजू अब तक घर नहीं आया है.

रत्ना आरु से: बीटा…राजू अब तक घर नहीं आया है…मेरा जी घबरा रहा है..ज़रा उस एक बार फ़ोन तो कर…अभी तक राजू कभी इतना लेट नहीं हुआ है..

आरु: जी माजी..फ़ोन कर के आती हूँ…हमें भी अभी ध्यान आया की राजू अब तक घर नहीं आया है..आरु पास के दूकान पे जाकर फ़ोन करती है..(जैसे आप सब को पता है..सिर्फ राजू के पास ही फ़ोन था उस घर में..और किसी के भी पास नहीं).फ़ोन रिंग होता है और सब लोग चौक जाते है की फ़ोन रिंग घर से ही बज रहा है..सुधा दौड़ते हुए राजू के कमरे में जाती है जहाँ राजा का फ़ोन बज रहा था…सुधा फ़ोन पिक करती है…

आरु: राजू….

सुधा: नहीं बीटा…राजू फ़ोन घर पे ही छोड़ के गया है..मैं सुधा बात कर रही हूँ..तू जल्दी से घर आ जा..

अब आरु और सुधा को भी परेशानी होती है और उसके चेहरे से पसीने छूटने लगता है..

इतने में रत्ना और संध्या भी आ जाते है और सुधा की हालत को देख कर वो दोनों भी घबरा जाते है..

सुधा: दीदी..राजू का फ़ोन तो यहीं है..शायद वो ले जाना भूल गया है..इतने में आरु भी घर आ जाती है और सब परेशान हो जाते है..तभी रत्ना कहती है संध्या से.

.रत्ना: संध्या..चलो मेरे साथ..

संध्या: कहाँ…

रत्ना सुधा से…छोटी..आरु का ध्यान रख..हम अभी आते है..

सुधा: कहाँ जा रही हो दीदी?

रत्ना: ठाकुर के घर…

रत्ना और संध्या जल्दी से ठाकुर के घर जाते है और जहाँ माला और काम्या अपना काम कर के टीवी देख रहे थे..

रत्ना: मालकिन…

काम्या: अरे बहनजी..आप यहाँ..सब ठीक तो है ना?रत्ना थोड़ा डरते हुए…राजू यहाँ आया है क्या?काम्या थोड़ा उदास मन से…नहीं…राजू तो यहाँ नहीं आया है..आज कल तो वो बहुत काम ही यहाँ आता है…हम भी उसका इंतज़ार करते रहते है…क्यों…क्या हुआ?

रत्ना: राजू सुबह से अपने काम के लिए खेत गया था..लेकिन अब तक घर नहीं आया..कभी ऐसा नहीं हुआ की राजू इतना देर घर से बहार रहे..अगर कहीं जाना होता तो हमें बता कर जाता..सोचा शायद यहाँ आया होगा..हमने उसे फ़ोन किया था..लेकिन वो फ़ोन घर पे ही भूल गया..ऐसे कहते हुए रत्ना काम्या को उसका फ़ोन दिखाती है..

माला: नहीं बहनजी..राजू तो यहाँ नहीं है…

रत्ना: फिर कहाँ गया होगा?रत्ना को इतना सीरियस देख कर काम्या और माला भी परेशान हो जाते है..

माला: सुनिए बहनजी..लगता है राजू कहीं गया होगा…आज आप लोग आज रात के लिए यही रुक जाईये…

रत्ना: नहीं मालकिन..हम घर जाते है..

रत्ना संध्या से…चलो बहु…घर जाते है..

वहां से निकलने से पहले…

रत्ना: आपके पास कोई लालटेन या टोर्च है क्या?

माला: क्यों?

रत्ना: एक बार खेत भी जा कर देख लेते है…अँधेरा हो गया है..तो इसीलिए लालटेन के बारे में पुछा है..

काम्या: टोर्च है…चलो..मैं भी आपके साथ आती हो..रत्ना के मन करने पर भी काम्या नहीं मानती और वो तीनो खेत की तरफ चल देते है..

खेत में जाकर कमरे में भी जाते है…लेकिन वहां कुछ नहीं दीखता…सब ठीक ही लगता है उनको…

क्यूंकि अँधेरा हो गया था और खेत के कमरे में कोई रौशनी नहीं थी…थोड़ा टोर्च on कर के देखते है..अँधेरा होने की वजह से उनको यह नज़र नहीं आता की वहां कमरे में कुछ खून के धब्बे ज़मीन पे थे..(राजू की वार की वजह से)…

जब वहां उन्हें कुछ नज़र नहीं आता तो परेशान हो कर सब अपने घर चले जाते है..

घर आकर रत्ना और बाकी सब की बुरी हालत थी…किसीको रात को नींद नहीं आता और परेशानी में ही रात गुज़ारते है..

वहीँ माला और काम्या भी परेशान हो जाते है की राजू कहाँ गया होगा कर के…

अजय के अड्डे पे…

शाम को करीब ७.०० बजे अजय वहां फिर आता है और कमरे में दाखिल होता है..

ठीक उसी वक़्त राजू को भी थोड़ा होश आता है और उसे कुछ समझ नहीं आता…उठने की कोशिश करता है लेकिन हाथ पाँव बंधे रहने की वजह से वो हिल नहीं पाटा दर्द के मारे कराहता है..

इतने में अजय वहां आता है…एक आदमी कमरे में लाइट्स जला कर एक बाल्टी से पानी राजू के चेहरे पे मारता है…तो राजू को कुछ होश आता है और हड़बड़ा जाता है…नज़र उठा कर देखता है तो उसे सामने अजय नज़र आता है…जो एक खतरनाक तरीके से एक नशा का सिगरेट पीते हुए राजू को देख कर है रहा था..

अजय: क्यों बे चूतिये…होश आ गया है क्या?

राजू: अपनी आँख खोल कर अजय को देखता है तो उसे कुछ समझ आता है..

अजय राजू के पास आकर एक ज़ोरदार तमाचा उसके गाल पे देता है और साथ ही ३-४ मुक्के भी मारता है जिससे राजू का सर झन्ना जाता है…और वो कुर्सी से गिरते गिरते बच जाता है…राजू की आँखें लाल हो जाती है और उसके गाल पे अजय के पंजे के निशाँ पद जाते है..

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अजय: क्यों बे साले..तुझे क्या लगा..की तू मेरे चाचा को मार देता और मुझे पता नहीं चलेगा?

मुझे उतना चुटिया समझ रखा है क्या? देख मैं तेरी क्या हालत करता हूँ..तुझे भी चाचा की तरह ही मौत दूंगा…चिंता मत कर..चाचा एक हफ्ते तक मर कर जिया है..

तू भी वैसे ही रहेगा…हाँ..एक हफ्ता नहीं..लेकिन एक दिन तू भी ऐसे ही मर कर जियेगा और फिर तुझे इस दुनिया से रवाना कर दूंगा..फिर मेरा बदला पूरा होगा..

यह कहते हुए अजय फिर से राजू पे वार करता है और उसे खूब मारता है…कभी हाथ से तो कभी डंडे से…और राजू के पूरे बदन से खून निकलने लगता है…राजू लगभग अपनी आधी जान गवा चुक्का था…

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अजय ने उसकी ये हालत कर दी थी..

लेकिन अजय को फिर भी सुकून नहीं मिलता…

अजय अपने एक आदमी से कह कर एक नशे का इंजेक्शन लेता है और वो इंजेक्शन राजू को लगाता है…

इंजेक्शन के लगते है राजू की लगभग जान निकल जाती है…बहुत की काम जान उसमें रह गयी थी अब…

अजय: तू चिंता मत कर भोसड़ीके तुझे इतनी जल्दी नहीं मरने दूंगा…यह इंजेक्शन तुझे तड़पाएगा…तुझे इसकी आदत लग जायेगी..और फिर ठीक २ दिन में फिर से यह इंजेक्शन नहीं मिला तो अपना दम तोड़ देगा…तब जाकर मेरा बदला पूरा होगा..

अजय अपने आदमियों से…अबे हरामियों..ऐसे क्या देख रहे हो…चलो..लाइट्स बंद कर दो..और कमरे को ताला लगा कर इस पर पूरी रात नज़र रखना…

यह अभी उठेगा नहीं..फिर भी इस पर ध्यान रखना…

ऐसा बोल कर अजय अपने घर निकल जाता है..

अजय के घर और अगली सुबह..

आज अजय बहुत खतरनाक और वहशी मूड में था..

वो नशा कर के घर आता है और रात को खाने के बाद कुसुम पर अपनी हवस मिटा है..कुसुम के ना कहने पर भी..लेकिन अजय कुसुम पे कोई रेहम नहीं करता और उस पर चढ़ कर अपना काम ख़तम करता है..

कुसुम बेचारी अपनी किस्मत पैर रो कर रात गुज़ारती है..वहीँ उसकी माँ गौरी भी उदास हो जाती है..क्यों की कुसुम के चिल्लाने की वजह से उसे सब समझ आ जाता है..लेकिन वो बेचारी भी कुछ नहीं कर पाती..

अगले दिन सुबह सब नार्मल दीखता है…अजय अपना काम करके जल्दी ही घर से निकलने के लिए रेडी हो जाता है..(क्यूंकि उसे राजू की खबर जो लेनी थी)

कुसुम रोज की तरह अपना काम कर के अजय के कपडे धोने के लिए उसके कपडे लेती है..जब वो उसका शर्ट भिगोती है तो देखती है की उसके शर्ट के कल्लोर के पीछे काफी खून के दाग लगे हुए थे…उसने आज से पहले कभी ऐसे दाग नहीं देखे थे…उसे शक होता है..वो अजय से पूछना चाहती थी..लेकिन उसे पता था की अजय को बहुत गुस्सा आएगा…इसीलिए वो अपनी माँ को भी ना बता कर अजय जब अपने अड्डे पे निकल जाता है तो कुसुम भी धीरे से अपने चेहरे को अच्छे से धक् कर अजय का पीछा करती है..

अजय जल्दी से अड्डे पे पहुँच जाता है…कुसुम की एक ऑटो में बैठ कर उसका पीछा करती है और वो भी बिना किसीके दिखे वहां पहुंच जाती है..

अजय फिर राजू के पास जाकर उसकी हालत देखता है तो उसके चेहरे पे एक कातिल मुस्कान आ जाती है..क्यूंकि राजू की हालत वैसे ही थी..जैसे पिछले रात को..

अजय के बाकी आदमी भी है देते है और कहते है की राजू तो अध् मारा पड़ा हुआ है..

अजय: उसे ऐसे ही रहने दो…आज भी उसे तड़पने को…कल इस समय तक जब उसको फिर से इंजेक्शन नहीं मिलेगा तो धीरे धीरे अपना दम एक घंटे में तोड़ देगा…उसके पास सिर्फ २४ घंटे बचे है जीने के लिए..

अजय को फिर भी सुकून नहीं मिलता तो फिर वो राजू पे अपना गुस्सा निकलता है और खूब धुनाई करता है राजू की…

कुसुम बेचारी बहार से यह सब देख कर उसके होश उड़ जाते है और दांग रह जाती है..उसे कुछ समझ नहीं आता की क्या करे…या क्या ना करे…वो अजय की सब बातें सुन पाती है क्यों की कमरा खाली था..और सिर्फ अजय और उसके आदमी ही थे वहां पर…उस सुनसान कमरे में बातें सब सुन सकते थे..

कुसुम अपना सैय्याम रखते हुए वहां से निकल जाती है और फिर गाँव में आकर उसकी माँ को चुपके से फ़ोन करती है..

कुसुम: माँ..तुम्हारे पास माला सास का फ़ोन नंबर है क्या?गौरी: हाँ है…क्यों? क्या हुआ? तू कहाँ है? बिना बताये चली गायी

कुसुम: अभी मैं कुछ नहीं कह सकती..घर आकर सब बता दूँगी…जल्दी से माजी का नंबर दो…

गौरी उसे माला का फ़ोन नंबर दे देती है और कुछ पूछने से पहले ही कुसुम फ़ोन कट कर देती है और माला को फ़ोन करती है..

कुसुम: (माला) माजी..मैं कुसुम बात कर रही हूँ..मुझे जल्दी से राजू के घर वालों से बात कराओ..माला: क्या हुआ बेटी? तू कहाँ है..और सब तो ठीक है ना?

कुसुम: नहीं माजी…ठीक नहीं है..अभी सब बताने का वक़्त नहीं है..जल्दी से मुझे उनसे बात करवाइये..

माला: ठीक है…तेरा नंबर मुझे दे..मैं बात करवाती हूँ.

कुसुम: नहीं माजी..फिलहाल मई बता नहीं सकती और मेरे पास अभी टाइम नहीं है..जल्दी कुछ करो..

माला: ठीक है..तू मुझे १० मं बाद फ़ोन कर..मैं उनसे बात करवाती हूँ…इतना कहते ही कुसुम फ़ोन कट कर देती है और अपने आजु बाजू देखती है की कोई उसको देख तो नहीं रहा है..

यहाँ माला के भी पसीने छूट जाते है..क्यों की उसे भी शक हो जाता है की मामला बहुत सीरियस है..

माला काम्या को बुला कर जल्दी से अपने कार में रत्ना के घर निकल जाते है..

काम्या (माला से): क्या हुआ? इतना क्यों घबरा रही हो?

माला: अभी कुछ मत पूछ…राजू के घर चलते है..फिर सब बताती हूँ..

और फिर दोनों जल्दी से अपनी कार अगले ५ मं में रत्ना के घर पहुंच जाते है..

रत्ना उन दोनों को एक साथ देख कर घबरा जाती है..रत्ना: क्यों हुआ? आप दोनों एक साथ? राजू का कुछ पता चला क्या?

माला: राजू के बारे में कुछ पता नहीं चला लेकिन कुसुम बहु ने फ़ोन किया है…और माला सब को कुसुम के फ़ोन के बारे में बताती है तो सब के होश उड़ जाते है..

फिर ठीक अगले ५ मं के बाद कुसुम का फिर से फ़ोन आता है..

माला: कुसुम बेटी..मैं राजू के घर में हूँ..उसकी माँ और बाकी सब यहीं है…बता..क्या हुआ..तू कहाँ है..

कुसुम फिर उन सब को बताती है की वो कहाँ है और राजू कहाँ है और उसकी क्या हालत है..माजी..राजू के पास ज़्यादा वक़्त नहीं है..जो भी करना है जल्दी कीजिये..कुसुम की बात सुन कर सब रोने लग जाते है…

सब का बुरा हाल था..

रत्ना: बेटी..तूने अच्छा किया बता कर…

कुसुम: माजी..अभी टाइम बहुत काम है..मैं यहाँ ज़्यादा देर नहीं रह सकती..उनके आदमी अगर मुझे देख लिए तो वो मुझे छोड़ेगा नहीं..मैं घर के लिए निकल रही हूँ..

आपसे जो हो सकता है..आप कीजिये..और फिर फ़ोन कट कर के चुपके से कुसुम अपने घर के लिए निकल जाती है..

यहाँ राजू के घर में सब का बुरा हाल था…क्या करे..कुछ समझ में नहीं आ रहा था..रत्ना फिर अपना सैय्याम संभालते हुए माला से कहती है..

रत्ना: मालकिन. मुझे अभी उसी जगह जाना है…मुझे ले चलोगे क्या?

माला: हाँ..क्यों नहीं…राजू भी हमारा ही है…हम उसे कैसे अकेले छोड़ सकते है..

इतने में आरु भी जिद करती है तो माला काम्या रत्ना और आरु उनकी कार में जल्दी अजय के गाँव के लिए निकल जाते है..

जाते वक़्त रत्ना सुधा और संध्या को अपना ध्यान रखने को कहती है…

१-२ घंटे में सब अजय के गाँव पहुँच जाते है…

वहां पहुँच कर रत्ना माला से कहती है की वो अब अपने घर चले जाए…माला और काम्या दोनों मन करती है लेकिन रत्ना उनको समझाती है की उनकी कार अगर अजय ने देख लिए तो मुश्किल हो जाएगा…और सब मुसीबत में फस जाएंगे..

माला मानती नहीं लेकिन रत्ना उनको कन्विंस कर के वहां से भेज देती है…

और माला का फ़ोन अपने पास रख कर उनसे कहती है की सुधा और संध्या को अपने घर में रखे और वो राजू के फ़ोन पे उनको जानकारी देती रहेगी…

इसी बीच…

अजय राजू को फिर से मारने के बाद वहां से निकलने लगता है…क्यूंकि अब उसे पता चल गया था की राजू सिर्फ २४ घंटे का मेहमान है..

जब वो निकल रहा होता है तो उसके आदमी भी कहते है की पिछली राति से वो सब वहीँ है और उन्हें भी थोड़ा आराम की ज़रुरत है..

अजय को अपनी होशियारी पे कुछ ज़्यादा ही विश्वास था (राजू की हालत पे) तो बिना कुछ ज़्यादा सोचे वो अपने आदमियों को भी घर जाने को कहता है और कहता है की शाम को एक बार वहां आकर चेक कर ले…

सब हाँ में सर हिला कर सब अपने घर चले जाते है…राजू को अकेला और अध् मारा छोड़ कर..

वहीँ कुसुम भी छुपके से रत्ना से फ़ोन पे बात कर के अपने घर के लिए निकल जाती है..

घर पहुंच कर गौरी उसे देख कर राहत की सांस लेती है…फिर कुसुम गौरी को पूरा किस्सा सुना देती है..

गौरी ये सुन कर उसके भी होश उड़ जाते है..लेकिन कुसुम उससे कहती है की अजय को बिलकुल इसके बारे में पता नहीं चलना चाहिए की हमें सब पता है..

वर्ण वो हम दोनों को भी मार देगा और १ सेकंड भी इसके बारे में सोचेगा नहीं..

गौरी को कुसुम की बात सही लगती है और दोनों नार्मल हो कर अपना काम करती है (लेकिन दिल और दिमाग में दोनों की फटी पड़ी हुई थी की राजू का क्या होगा कर के और अजय के दर से भी)..

इतने में अजय भी घर आ जाता है…उसको देख कर दोनों दर जाते है लेकिन फिर नार्मल रहने की कोशिश करते है…जो इतना आसान काम नहीं था..

वापस गाँव में..

माला और काम्या के जाने के बाद रत्ना एक गहरी सांस लेती है और आरु के साथ उस अड्डे पे जाती है जिसका जीकर कुसुम ने फ़ोन पे किया था..

थोड़ी देर बाद वहां जाकर दोनों पाते है की वो एरिया एकदम सुनसान है और एकदम सन्नाटा छाया हुआ है..धीरे से छुपके से दोनों धड़कते दिल से उस कमरे में जाते है तो एकदम अँधेरा छाया हुआ था…

दोनों किसी तरह अँधेरे में खोजते हुए स्विच ों कर के लाइट जला देते है..

कमरे में रौशनी चा जाती है और दोनों राजू के देख कर एकदम दांग रह जाते है…

राजू एकदम खून से लथपथ अध् मारा पढ़ा हुआ है और दोनों हाथ और पाँव कुर्सी पे रस्सी से बंधे हुए…उसकी हालत देख कर दोनों एकदम सो रो देते है और दौड़ कर दोनों राजू को अपने गले लगा लेते है…

कुछ देर बाद रत्ना को लगता है की अब यहाँ ज़्यादा देर रहना ठीक नहीं है..अजय के आदमी कभी भी आ सकते है..

रत्ना आरु को भी संभालती है और फिर दोनों काफी म्हणत से राजू के रस्सी को खोल कर उसे थोड़ा आज़ाद करते है…लेकिन राजू उठने और चलने की हालत में नहीं था…

दोनों बड़ी मुश्किल से अपने कंधे पे रख कर उसे बहार लाते है…बहार आने से पहले आरु उस कमरे के सभी लाइट्स बंद कर देती है और कमरा पहले जैसा था..वैसे ही रहता है…

सिर्फ राजू नहीं था उस कमरे में…रत्ना: अच्छा किया बेटी..तू भी मेरे साथ आ गयी..वर्ण मैं अकेली उसे उठा नहीं पाती..आरु कुछ नहीं कहती और अपनी आंसू पॉच लेती है..दोनों राजू को उठा कर कमरे से बहार लाते है…

इस वक़्त शाम ढल रहा था..और उन्हें दर भी था की कहीं अजय की आदमी ना आ जाए…

उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या कर…रत्ना को इतना मालूम था की अगर वो राजू को उसके गाँव ले गए तो अजय को ज़रूर पता चल जाएगा और फिर अजय इस बार और बुरा हाल करेगा..

रत्ना एक बार राजू को देखती है तो उसे कुसुम की बात भी याद आती है की अभी राजू के पास ज़्यादा वक़्त नहीं है..

रत्ना कुछ सोच में पद जाती है..

आरु: माजी क्या सोच रही हो? कुछ तो जल्दी करना पड़ेगा वर्ण वो लोग आ जाएंगे..

रत्ना: हाँ..तू सही कह रही हो बेटी..और फिर रत्ना को कुछ याद आता है…

(नोट: इन अपडेट ९ (रेवेलशन)..जब राजू और रत्ना गुरूजी से मिलने जाते है और लास्ट में गुरूजी रत्ना से बात करते है…तो रत्ना से कहता है की बेटी..जब भी तुझे मेरी मदत की ज़रुरत पड़ेगी या लगे की मैं तुम्हारे कोई काम आ सकता हूँ..तो बेझिझक तुम मेरे पास आ सकती हो…मैं यह लाइन उस अपडेट में लिखना भूल गया था..)

रत्ना: चल…

आरु: कहाँ..

रत्ना: बताती हूँ…

रत्ना आरु को वहीँ पे रख कर ध्यान रखने को कहती है ौर१० मं में फिर गाँव से एक ऑटो ला करराजु को उसमें बिठा कर निकल जाते है..

आरु रत्ना से पूछती है तो रत्ना कुछ नहीं कहती और चुप रहने को कहती है..

१-२ घंटे के बाद तीनो गुरूजी के आश्रम से कुछ दूर में पहुंच जाते है और रत्ना ऑटो वाले को भेज देती है….

आरु रत्ना की तरफ देखती है तो रत्ना कहती है..

रत्ना: ऐसे ना देखो..कुछ देर में सब बता दूँगी…

अब मेरी मदत कर और राजू को ले चल मेरे साथ..

आरु वही करती है और कुछ देर बाद तीनो गुरूजी की आश्रम में पहुँच जाते है जहाँ गुरूजी विश्राम कर रहे होते है…

गुरूजी उनको देख कर है देता है…रत्ना उनको देख कर प्रणाम करती है और आरु को भी बोल देती है..

आरु को कुछ समझ नहीं आता और रत्ना जैसे करती है..आरु भी वैसे ही करती है..

गुरूजी: आओ बीटा…कैसे आना हुआ?फिर रत्ना गुरु को सब बता देती है की राजू के साथ क्या हुआ है और कैसे हुआ है..इसी बीच आरु को कुछ समझ नहीं आता तो गुरूजी उसकी तरफ देख कर..

गुरूजी: यह कौन है?

रत्ना: यह राजू की पत्नी है…नाम आराध्य है..हम इसे आरु कह कर बुलाते है..

फिर रत्ना आरु को सब कुछ बता देती है …

आरु सब सुन कर आश्चर्य हो जाती है..

गुरूजी राजू को देखते है जो अध् मारा पढ़ा हुआ था…

गुरूजी: इसे तो बहुत चोट आयी है…लगता है किसीने इसे बहुत मारा है..

रत्ना: जी हाँ..गुरूजी फिर राजू को देकते है और कहते है की इसे बहुत गहरी चोट लगी हुई है…और ठीक होने में बहुत टाइम लगेगा…

रत्ना: जितना भी टाइम लगेगा..लगने दीजिये..लेकिन इसे आप ही ठीक कर सकते हो…मैं इसे गाँव नहीं ले जा सकती थी…इसीलिए मैं इसे आपके पास ले आयी हूँ…आप ही हमारा आकृ सहारा हो..

और फिर रत्ना गुरूजी को कुसुम की बात भी बताती है की इसके पास ज़्यादा वक़्त नहीं है..

गुरूजी फिर से उसे देखते है और उसे ज्ञात होता है की राजू के बदन में नशा भर दिया गया है (इंजेक्शन के द्वारा) और इसीलिए इसके पास बहुत काम टाइम है..

गुरूजी रत्ना से कहते है की राजू को ठीक होने में काफी वक़्त लगेगा..अगर वो चाहे तो घर जा सकती है…जब राजू ठीक हो जाएगा तो वो उसे बुला लेंगे…

लेकिन दोनों रत्ना और आरु नहीं मानते और जब तक राजू ठीक नहीं होता वो उसके साथ ही रहेंगे..

गुरूजी भी इस बात को मान जाते है और राजू को ठीक करने में लग जाते है..रत्ना को फिर कुछ याद आता है और वो माला को फ़ोन करती है..

उसे यह नहीं बताती की वो अभी कहाँ है लेकिन उसे इतना ज़रूर बताती है की राजू सही जगह पहुँच गया है और वो जल्दी ही ठीक हो जाएगा..फिर वो सुधा से बात कराने को कहती है …

रत्ना: सुन छोटी..हम ठीक है…तू एक काम कर…तू और संध्या चुपके से बिना किसी को बताये रानी की घर चले जाओ…और जब तक मैं ना कहूँ..वहां से निकलना मत..

सुधा: क्या हुआ दीदी? सब ठीक तो है ना?रत्ना: हाँ..सब ठीक है…राजू को थोड़ी गहरी चोट पड़ी है..लेकिन वो जल्दी ठीक हो जाएगा और हम सब के सामने पहले की तरह ही रहेगा…

लेकिन मैं और आरु अभी कहाँ है..क्या कर रहे है..यह सब मत पूछ…मैं बता नहीं सकती..

सुधा: वो तो ठीक है..लेकिन रानी के घर क्यों? हम यहाँ भी तो ठीक ही है..

रत्ना: तुम अभी के लिए ठीक हो…लेकिन ज़्यादा दिन नहीं…जब अजय को पता चलेगा की राजू वहां नहीं है तो उसे बहुत गुस्सा आएगा..और शायद वो माला के घर भी आ सकता है..

जब वो तुमको देखेगा तो गुस्से में तुम पर भी हुम्ला कर सकता है..तो इसीलिए चांस मत ले..

और जैसे में कहती हूँ वैसे ही कर..सुधा को भी इस बात पे ध्यान जाता है और वो भी रत्ना की बात मान लेती है…

रत्ना: सुन…तू माला से केहड़े की तुम दोनों को कुछ कपडे लेने है और घर जाना है..तो उसी बहाने से उसके घर से निकल जाओ…अपने कपडे लो और चुपके से रानी के घर जाओ..बिना किसीके बताये हुए..मैं माला से बात करती हूँ…

सुधा: ठीक है दीदी..और ऐसे कहते हुए सुधा माला को फ़ोन दे देती है..रत्ना माला को कहती है की राजू को ठीक होने में थोड़ा वक़्त लगेगा..और तब तक दोनों सुधा और संध्या उनके साथ रहेंगे..माला को भी ये बात अच्छी लगती है..और फिर सुधा और संध्या वहां से निकल जाते है अपने घर की और… “कपडे लेने के लिए”..

दोनों सुधा और संध्या कपडे लेने के लिए अपने घर निकल जाते है और फिर लौटकर नहीं आते..

इसी बीच…

शाम को करीब ७-८ बजे अजय के आदमी उस कमरे में जाते है..

कमरे के लाइट्स on कर के देखते है तो उनके होश उड़ जाते है…क्यों की वहां सिर्फ रस्सी और कुर्सी ही था…लेकिन राजू गायब..उन सब के पसीने छूट जाते है..उन्हें समझ में नहीं आता की क्या हो गया है..

एक आदमी तुरंत अजय को फ़ोन करता है…अजय फ़ोन पे ये बात सुनते ही भाउक्ला जाता है और तुरंत वो भी वहां आ जाता है…लेकिन उसे सब खाली नज़र आता है…

अजय को अपनी गलती पे बहुत गुस्सा आता है लेकिन कुछ नहीं कर पाटा..

उसे भी समझ में नहीं आता की राजू कहाँ गया है और उसे कौन उठा ले गया है..

क्यूंकि पिछली बार जब अजय ने राजू को देखा था..तो वो अध् मारा पड़ा हुआ था और उसमें उठने की भी ताक़त नहीं थी..

अजय एकदम गुस्से में घर जाता है और अपना गुस्सा कुसुम और गौरी पे उठाता है..उन्हें खूब गालियां देता है…वो दोनों कुछ नहीं कहती और बस चुप चाप उसकी बातें सुनती है..

गुरूजी के आश्रम में…

२ दिन तक गुरु राजू पे बहुत म्हणत करते है…अब उसकी जान को खतरा नहीं था…लेकिन वो बहुत कमज़ोर नज़र आता है…तीसरे दिन वो अपनी आँख खोल कर डेक्था है की वो एक नयी जगह पे है..और सामने रत्ना और आरु को देखता है..

राजू की आँख खुलते ही रत्ना और आरु भी खुश हो जाते है और दोनों जाकर राजू को अपने गले से लगा लेते है और ज़ोर ज़ोर के रोने लग जाते है..

राजू बड़ी मुश्किल से रत्ना से पूछता है की वो अब कहाँ है?

रत्ना: चुप हो जा बेटे…और फिर राजू को अपने गले लगा लेती है. राजू आरु की तरफ देखता है तो आरु भी राजू को अपने सीने से लगा लेती है..और रोने लगती है.

इतने में गुरूजी आते है और कहते है…इसे अब बहुत आराम की ज़रुरत है..जैसे मैंने कहा इसे ठीक होने में टाइम लगेगा.

रत्ना: जितना भी टाइम लगे कोई परवाह नहीं…बस मेरा राजू ठीक होना चाहिए..

गुरूजी: चिंता मत करो…भगवान् पे भरोसा रखो…सब ठीक हो जाएगा..

यहाँ अजय के घर…

यहाँ गाँव में अजय बहुत कोशिश करता है राजू को ढूंढने की..लेकिन सफल नहीं हो पाटा..उसे लगता है की को माला के घर जा कर पता करे…

तो वो माला के घर जाता है और थोड़ा गुस्से से माला से पूछता है की राजू को उन्होंने देखा है क्या..

माला: हमें क्या ज़रुरत है ऐसे २ कौड़ी के आदमी को देखने की (जान बूझ कर राजू को गाली देती है ताकि अजय को शक ना हो). उससे हमारा कोई वास्ता नहीं है..

अजय: बात तो आप ऐसे कर रहे हो जैसे आप को कुछ पता नहीं.

माला: मैंने ऐसे क्या कह दिया?

माला भी गुस्से से…जुबां संभाल के बात कर…तू उसका (ठाकुर) का भतीजा हो सकता है…वो मेरा भाई था…अभी तेरे से प्यार से बात कर रही हूँ..वर्ण तुझे यहाँ से लात मार के निकल दूँगी…समझा…

अजय: हाँ…सब समझता हूँ…इसीलिए आप उस दो कौड़ी के आदमी से गुलछर्रे उदा रही थी..माला (थोड़ा शॉकेड हो कर फिर भी गुस्से से)…बद्तमीज़…दफा हो जा यहाँ से…वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा…और आइंदा से इस घर में कदम भी मत रखना…

अजय भी गुस्से में वहां से निकल जाता है और बहार आकर सोचता है की अब क्या करें?ये तो मुझसे कुछ बताने वाली नहीं है..और फिर ऐसे ही कुछ सोचते हुए अजय भी वहां से निकल जाता है..

माला काम्या को आवाज़ देती है..

माला: अजय को कैसे पता चला की राजू यहाँ आया था..और हम मजे कर रहे थे..

काम्या: मुझे भी नहीं पता…

माला: एक काम कर…जितने भी ठाकुर के बचे हुए आदमी है..सब को निकल दे…और वैसे भी हमने सोच रखा था की हम यह घर और गाँव छोड़ कर चले जाएंगे…

पता नहीं राजू कहाँ और कैसे है…अगर फिर से वो यहाँ आ गया तो मुश्किल हो जायेगी..

काम्या: ठीक कह रही हो तुम भी..मैं आज ही सब को निकल देती हूँ…और वैसे भी अच्छा हुआ की सुधा और संध्या यहाँ नहीं है..वर्ण अजय को सब पता चल जाता और फिर सब सत्यानाश हो जाता…

वैसे वो दोनों कहाँ है? कुछ पता चला क्या? उस दिन घर से कपडे लाने के लिए यहाँ से गए थे…लेकिन अब तक नहीं आये…

गुरूजी के आश्रम में…

गुरूजी राजू का अच्छे से ख्याल रखते है और देखते ही देखते करीब १ महीने में राजू बिलकुल ठीक हो गया था…और उसे सब पता चल जाता है की उसे क्या हुआ है/था…

राजू को भी अब अजय से बदला लेना था..और वो उसी के बारे में सोच कर अपने दिन गुज़ारता है..

राजू ऐसे ही आराम करता है और अगले १५ दिन में वो पूरी तरह से ठीक हो जाता है..इसी १५ दिन में वो कसरत भी करता है और अपनी बॉडी को भी ठीक कर लेता है..

अब वो पहले की तरह नार्मल राजू बन जाता है..चुस्त दुरुस्त और तंदुरुस्त…इसमें रत्ना और आरु भी राजू का अच्छे से ख्याल रखते है और वो भी उसे नार्मल होने में पूरी मदत करते है..

अब राजू को लगता है की उन सब को अब यहाँ से निकल जाना चाहिए..तो एक दिन राजू गुरूजी से कहता है..

राजू: गुरूजी अब हमें आज्ञा दीजिये..हमारे निकलने का वक़्त आ गया है…मैं एकदम ठीक हूँ..आपका मैं ज़िन्दगी भर आभारी रहूंगा…मुझे सहारा दे कर मुझे संभालने और ठीक करने के लिए..

गुरूजी: ठीक है पुत्र…जाओ और अपना और अपने बीवियों का ख्याल रखना..उन्हें सब का अब तुम ही सहारा हो..

राजू: जी गुरूजी..जैसे आपने कहा..वैसा ही होगा..मैं अपने सब घर वालों का ध्यान रखूंगा…

गुरूजी: मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ हमेशा रहेगा..

राजू रत्ना और आरु तीनो गुरूजी का आशीर्वाद लेकर उसके आश्रम से निकल जाते है अपनी घर की और…

आश्रम से बहार आकर..

राजू: वैसे सुधा और संध्या कहाँ है? मैं उनके बारे में पूछना ही भूल गया…तुम दोनों में मुझे उनके बारे में सोचने का वक़्त ही नहीं दिया..

रत्ना: उन्हें मैंने सब बता दिया है..वो भी बहुत खुश है की तू ठीक हो गया है..वो भी तेरा ही राह देख रहे है..

राजू: कहाँ है वो दोनों?

आरु: रानी के घर…और फिर रत्ना उसे फिर से सब बता देती है…

राजू: अच्छा किया की उन्हें रानी के घर भेज दिया.

रत्ना: चलो…रानी के घर चलते है..

राजू: हाँ..एहि ठीक रहेगा..और फिर तीनो वहां से रानी के घर चले जाते है..

रानी के घर पहुँचते ही…सुधा और संध्या दौड़ के राजू के गले लग जाते है और रट हुए उसके पूरे चेहरे पे छुम्मियों की बरसात कर देते है..

वही रानी भी अपने भारी पेट ले कर (वो प्रेगनेंसी के एडवांस्ड स्टेज पेट ही) राजू को देख कर रट हुए उससे गले मिलती है..

रानी: कहाँ चले गए थे…अगर तुम्हे कुछ हो जाता तो मैं इसे (खुद का और राजू का हाथ अपने पेट पे रख के) क्या बोलती??

राजू: कुछ नहीं..मजाक में…एहि की उसका बाप बहुत बहादुर था…और ५ बीवियों का देखभाल करता था…ऐसे कहते हुए रानी को आँख मारता है और उसके होंठ चूम लेता है..

बाकी सब भी फिर से राजू को अपने गले लगा लेते है…

रात को सब लोग राजू के पास ही सोते है..लेकिन कोई उससे चुदाई नहीं करवाते (जब की सब की चाह थी की राजू उन्हें प्यार करे)..क्यूंकि सब को लगता है की राजू को अभी और थोड़ा टाइम देना चाहिए..

कुछ दिन बाद राजू रत्ना से कहता है की वो गाँव जा रहा है और अपना काम कर के जल्दी ही लौटेगा…

रत्ना: कहाँ जा रहा है बेटा..और क्या काम है तुझे?

राजू: तुझे पता है माँ…अजय को उसके ठिकाने लगाना है…मुझपे भरोसा रखो..इस बार मैं और भी सावधान रहूंगा..और २-३ दिन में ही लौट आऊँगा..यह मेरा वादा है..

और हाँ..इस बार फ़ोन नहीं भूल रहा हूँ..तुम तुम सब लोगों से हर रोज़ बात करते रहूंगा..

रत्ना और बाकियों का दिल नहीं मंटा लेकिन राजू को अजय से बदला लेना ही था..

रत्ना को भी लगता है की उन्हें अजय से बहुत मुश्किलें आ सकती है. इस बार तो उसने अपना दिमाग लगा कर काम चलाया लेकिन हर बार यह संभव नहीं होगा और अजय कभी भी फिर से हुम्ला कर सकता है. इसीलिए वो भी राजू की बात मान जाती है की अजय उनके लिए खतरा बन सकता है आगे जाकर.

अजय का अंत..

राजू पहले अपने गाँव आता है और चुपके से काम्या के घर जाता है. काम्या और माला दोनों उस को देख कर एकदम खुश हो जाते है और उससे बहुत प्रश्न पूछती है…राजू कुछ जवाब देता और कुछ नहीं…बस उतना ही जितना उसे वो देना चाहता था.

राजू: पहले मुझे सब बताओ उस दिन से आज तक क्या हुआ है..

काम्या उसे पूरा सब जो पिछले १-२ महीने में हुआ था…सब बता देती है.

राजू की सोच सही थी की अजय यहाँ पर भी आकर उनके परेशान किया था.

लेकिन उन्हें इस बार यह पता नहीं था की अब अजय कहाँ है और क्या कर रहा है.

राजू उनको भी बोल देता है की वो गाँव अजय से बदला लेने के लिए ही आया है.

राजू फिर वहां से अजय के गाँव के लिए निकल जाता है…वहां पहुँच कर पहले वो सीधा अजय के अड्डे पे जाता है लेकिन इस वक़्त वहां कोई नहीं होता.

फिर वो चुपके से अजय के घर जाता है और इस बार उसकी किस्मत अच्छी होती है की अजय घर पे नहीं होता है.

राजू को देख कर दोनों गौरी और कुसुम भी बहुत खुश हो जाते है..गौरी और कुसुम भी उसे बताती है अजय ने उन्हें कैसे परेशान किया है…

इन सब की बातें सुन कर राजू को भी बहुत गुस्सा आता है और मन में सोचता है की अजय का काम जल्दी ही तमाम करना पड़ेगा..

राजू: (गौरी और कुसुम से)…मुझे पता है की अजय कैसा लड़का है..लेकिन मैं आप दोनों से सुन्ना चाहता हूँ की अभी मैं अजय का क्या करून…

कुसुम दुखी मन से (क्यूंकि अजय रिश्ते में उसका पति था)…मुझे पता नहीं…मैं तो हर वक़्त अपनी किस्मत को कोसती हूँ की अजय मेरे ज़िन्दगी में क्यों आया…

वो सिर्फ नाम का ही पति है लेकिन कभी मुझे (या मेरी मम्मी को) प्यार से नहीं देखा और हमेशा हम दोनों को बहुत दुःख दिया है..

गौरी: हाँ बेटा…कुसुम ठीक कह रही है…भले ही वो मेरा दामाद है लेकिन हमारा जीना हराम कर दिया है.

राजू: ठीक है…मुझे एहि जानना था..आप से..

कुसुम: क्यों..जान कर क्या करोगे?राजू: १-२ दिन में पता चल जाएगा…

और ऐसा कहते हुए राजू वहां से जल्दी निकल जाता है. अजय की तलाश में…

राजू मन में सोच के ही आया था की अजय को कहाँ और कैसे मारना है..१-२ घंटे बाद फिर से राजू अजय के अड्डे पे जाता है और इस बार उसे अजय के कुछ आदमी वहां दीखते है को बकचोदी करते हुए सुट्टा मार रहे थे…

राजू फुर्ती दिखाते हुए उनका ध्यान हटाता है और एक एक कर के सब को मार देता है सिवा एक को छोड़ के..

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वो आदमी कुछ समझ पता..तब तक बहुत देर हो चुकी था और उसके सभी साथी वहां ढेर पड़े हुए रहते है.

राजू उस बचे हुए आदमी को पकड़ कर खूब धुनाई करता है और उसे ये जानकारी लेता है की अजय कहाँ है और कब वहां आ रहा है..

राजू: बोल साले…अजय कहाँ मिलेगा मुझे?

आदमी: डरते हुए..मुझे पता नहीं साहिब…वो कह रहा था की एक घंटे में वो हमसे मिलने यहाँ आएगा और कुछ काम बताएगा.

राजू: ठीक है…अब ये बता की वो अपने नशे के पदार्थ कहाँ रखता है..

आदमी उसे दूरसे एक और अड्डे के बारे में बताता है जहाँ अजय अपना नशीला माल दुनिया से बचा कर रखता है..

जब राजू को लगता है की उस आदमी से और कोई जानकारी नहीं मिल सकती तो उसे भी मार देता है और जल्दी से दुसरे अड्डे पे जाता है जहाँ अजय ने अपना माल रखा हुआ था.

माल लेकर वापस यहाँ ३० मं आता है और अजय का इंतज़ार करता है…

आदमी ने जैसा बताया था..ठीक वैसे ही अजय १ घंटे बाद अड्डे पे आता है…

अजय अड्डे पे आकर देखता है की लाशें बिछी हुई है और उसे समझने में देर नहीं लगती की यह राजू का ही किया कराया है…

राजू जो अजय का ही इंतज़ार कर रहा था..ठीक उसी वक़्त पीछे से आकर अजय पे एक रोड से उसके सर पे हुम्ला करता है…अजय सर पकड़ कर चक्र जाता है…और वहीँ गिर जाता है..

राजू उसे उठाके कुर्सी पे उसे अच्छे से बाँध देता है और उसके होश आने का इंतज़ार करता है..

३० मं बाद उसे जब होश आता है और देखता है की उसके सामने राजू बैठा है…उसके हाथ पाँव बंधे होने की वजह से अजय कुछ नहीं कर पाटा…

राजू: क्यों बे साले…तुझे क्या लगा..की मुझे मार्के बाकी सब को परेशान करेगा??

अजय: चुप साले..तूने मेरे चाचा को मारा था…तो तुझे भी मरना ही था…

राजू: मैं तुझे बताता हूँ…कौन मरने वाला है..और ऐसे कहते हुए अजय के पास आकर उसकी भी बहुत धुनाई करता है..

अजय का चेहरा पूरा खून में रंग जाता है..

राजू: अब देख मैं क्या करता हूँ…और ऐसा कहते हुए वो अजय के पास आता है..और उसकी नाक पकड़ कर ज़ोर से मरोड़ता है…

दर्द की वजह से अजय चीक पड़ता है और चीकने की वजह से उसका मुँह खुल जाता है…और ठीक उसी वक़्त राजू अपने पॉकेट से अजय के नशीले पदार्थ के २ थोड़े बड़े पैकेट निकल कर उसके मुँह में ठूस देता है…

अजय ये एक्सपेक्ट नहीं कर रहा था…और ज़ोर ज़ोर के खांसने लगता है…

राजू फिर से २ और पैकेट उसके मुँह में ठूस देता है…और जबरन उसका सर और नाक पकड़ कर उसका मुँह दबा देता है…और ऐसे ही राजू १० मं तक अजय का मुँह और नाक बंद कर के दबाता है.

यह सब इतना जल्दी होता है की अजय को बिलकुल पता ही नहीं चलता…और इतना सारा नशीला पदार्थ उसके मुँह में रहने की वजह से (और मुँह बंद रहने की वजह से) उसकी आँखें एकदम लाल हो जाती है और चेहरे का रंग भी बदल जाता है…

अजय वैसे ही तड़पते हुए हाथ पाँव हिलता है लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी…थोड़ी ही देर में अजय भी अपना दम तोड़ देता है और वहीँ पे उसकी मौत हो जाती है…

Note:

1) This is the longest update of my story..almost 18 pages. I wanted to end the story with this update only..but you all have waited patiently for my last 2 updates for last few months. Hence will end the story with another (sex-filled) update...:)

2) The story will end with a round 50 updates...

3) I have created a poll for this story. Pls participate and vote.

Look forward to the votes and once again much thanks for your patience.
 
अपडेट 50: (लास्ट Update)..The क्लाइमेक्स!!!

अजय की मौत के बाद…

राजू अजय को मार के घर आते वक़्त पुलिस को फ़ोन कर के बताता है की फलाना जगह में बहुत नशीले पदार्थ रखे हुए है और उन्हें वो ज़प्त कर ले.

पुलिस जब पूछती है की कौन बात कर रहा है तो राजू फ़ोन कट कर के वहां से निकल जाता है.

राजू घर आकर अपने आप को सैय्याम में रखते हुए आराम करता है और आज की घटनाओं के बारे में सोचते हुए सो जाता है और उसे पता भी नहीं लगता कब उसे नींद आ जाती है.

पुलिस को जब खबर मिलती है नशीले पदार्थ के बारे में तो वहां पर छापा मार के सब ज़प्त कर लेती hai..aur वहां कुछ बचे हुए अजय के आदमी को गिरफ्तार कर लेती है. पुलिस को अब भी पता नहीं चलता की उन्हें किसने खबर दी है. पुलिस भी कुछ छान बीन करती है और आखिर में अजय के अड्डे पे आ hi जाती है और देखती है की अजय मारा पड़ा हुआ है और उसके मुँह में ढेर सारा नशीला पदार्थ ठूसा हुआ है.

कुछ पुकथाच के बाद पुलिस अजय के घर पहुँच जाती है और कुसुम और गौरी को अजय की मौत की खबर देती है. कुसुम और गौरी को ये jaan-ne में वक़्त नहीं लगता की अजय को राजू ने hi मारा hai…wo दिखावे के लिए पुलिस के सामने थोड़ा रोना धोना करती है लेकिन अंदर hi अंदर दोनों थोड़े खुश थे की उनकी नरक ज़िन्दगी में शायद थोड़ी रौशनी आ जाए..

ये बात वहां पूरे गाँव में फ़ैल जाती है की अजय की मौत हो गयी hai..Khabar काम्य और माला को भी मिलती है तो वो दोनों भी गौरी के पास पहुँच जाते है.

पुलिस भी ड्रग्स का केस समझ कर वहां से निकल जाती है..

जब घर में सिर्फ ये 4 hi रह जाते है तो काम्य गौरी से पूछती है तो गौरी बताती है की शायद राजू ने hi अजय को मारा hai…lekin उनके पास कोई सबूत नहीं है. ये बात सुन के दोनों को कोई आश्चर्य नहीं होता और राजू को फ़ोन करते है..

लेकिन फ़ोन उस वक़्त रत्न के पास tha…unmein कुछ बात होती है और आखिर में रत्न और बाकियों को भी पता चल जाता है की अजय की मौत हो गयी है.

राजू नींद से उठ कर रत्न को फ़ोन करता है तो रत्न भी उसे बता देती है की उन्हें खबर मिल चुकी hai..wo बहुत खुश हो जाती है की उन्हें अब अजय से कोई दर नहीं है.

राजू कुछ नहीं कहता और सिर्फ हाँ में सर हिला देता है और कहता है की अब वो सब घर आ जाए. अब उन्हें कोई खतरा नहीं है. रत्न भी इस बात को मान जाती है और सब आ जाते hai..aur साथ में रानी को भी ला लेते है क्यों की उसे अब कभी भी बच्चा होने वाला था.

कुसुम की शादी का प्रस्ताव..

घर आने के बाद फिर सब नार्मल हो जाता है क्यूंकि अब ना तो ठाकुर था ना Ajay…jo इनके पीछे पड़े हुए थे. लेकिन राजू अभी भी थोड़ा सावधान रहता hai..wo फिर से कोई और गलती नहीं करना चाहता tha..jo की बात भी सही थी.

वहीँ गौरी और कुसुम भी अब थोड़ा उदास रहने लगते hai…kyunki भले hi वो दोनों अजय से नफरत करते the..lekin रिश्ते में उसका पति और दामाद tha..so, ज़ाहिर था की वो लोग थोड़ा उदास rahenge..jiska अहसास काम्य को भी था..

काम्य को लगता है की उसे गौरी और कुसुम को अपने घर ले जाना chahiye..taaki उनको भी कुछ चेंज हो.

तो काम्य के मनाने पर काम्य दोनों को अपने घर (गाँव) ला लेती है और अभी चारो एक साथ रहने लगते है..

कुछ दिन बाद…

गौरी: (काम्य से) Didi..dekho naa..Kusum का क्या हाल हो गया hai..bechaari के ज़िन्दगी में शायद दुखी hi रहना लिखा हुआ hai..aajkal बहुत गुमसुम सी रहती है और ज़्यादा बात भी नहीं करती.

काम्य: haan..main भी देख रही hoo..lekin इसका भी इलाज है..

गौरी चौंकते hue..kya इलाज है?

काम्य: क्यों ना कुसुम की फिर से शादी करा de..abhi उसकी उम्र hi क्या है? वो तो अभी भी जवानी से भरपूर hai.use भी अच्छी ज़िन्दगी जीना का हक़ है.

गौरी: बात तो आप सही कह रही ho..lekin इस विधवा से कौन शादी करेगा?

काम्य: वही जिसने इसे विधवा किया है.

गौरी: यह कैसे मुमकिन है? मुझे नहीं लगता की राजू मानेगा इसके साथ शादी करने के लिए.

काम्य: मैं उसे और उसकी माँ से बात करती hoon…dekhte है कुछ बन सकता है kya…aur एहि बात काम्य माला से भी कहती है तो माला को भी ये बात सही लगता है.

गौरी: बात तो आपकी सही hai..lekin मैं सोचती हूँ की एक बार इस बारे में कुसुम से भी बात करनी चाहिए..

काम्य: haan..aap ठीक कह रही हो..

फिर तीनो मिलकर कुसुम से इस बारे में बात करते है तो पहले वो मन कर देती hai..lekin इन तीनो की ज़िद और ज़ोर देने पर आखिर में हाँ कह देती hai..ab इनको राजू और उसकी माँ को मनाना था..

कुछ दिन बाद…

काम्य रत्न को फ़ोन करती है और उसे अपने घर बुलाती है..

रत्न दर जाती है की कहीं कुछ गड़बड़ तो फिर से नहीं हो गया..

रत्न: kyun..kya हुआ? राजू ने फिर से कोई गलती हुआ है क्या?

काम्य: नहीं behanji..aisi कोई बात नहीं hai..just आपसे कुछ बात करना था..

रत्न: ठीक hai..main आती हूँ..

रत्न ये बात जब घर में बताती है तो बाकी भी थोड़ा सोच में पद जाते है..

रत्न राजू से कहती है की वो सुधा लो लेकर jaayegi…Raju सोच में पद जाता है की काम्य ने उन्हें क्यों बुलाया है..

काम्य के घर..

वहां जाने के बाद काम्य रत्न से कहती है की चिंता की कोई बात नहीं hai…Raju ने कुछ गड़बड़ नहीं किया hai…balki उनसे hi कुछ मांगने के लिए hi बुलाया है..

रत्न ये बात सुन कर चौंक जाती है की काम्य को उनसे क्या चाहिए..

रत्न: मालकिन, हमसे क्या चाहिए आपको?

काम्य कुछ नहीं कहती और गौरी से कहती है की कुसुम को उसके पास लाये..

रत्न जब कुसुम को देखती है तो उसे बहुत बुरा लगता है क्यूंकि कुसुम का रंग एकदम फीका पढ़ गया tha..aur उसकी हालत भी ठीक नहीं थी..

कुसुम को देख कर रत्न पूछती है की बेटी (कुसुम) को क्या हुआ है..

गौरी: आप को तो पता है बहनजी…

माला: इसीलिए हमने आपको यहां बुलाया है..

सुधा उसकी तरफ नज़र उठाके देखती है तो काम्य कहती है की कुसुम के चेहरे पे रौनक सिर्फ आप लोग hi ला सकते हो…

रत्न: कैसे?

गौरी: मैं जो बात कह रही hoon..shayad आपको बुरा और आश्चर्य lage..lekin हम चाहते है की कुसुम की फिर से शादी हो जाए..

रत्न: इसमें बुरा लगने की क्या बात है? आप तो सही कह रही ho…beti की अभी उम्र भी बहुत काम है और इसे तो अभी अपनी पूरी ज़िन्दगी जीनी है..

गौरी: सही कहा aapne..aur ऐसा कहते हुए गौरी काम्य की तरफ देखते हुए कहती hai…hum चाहते है की राजू कुसुम से शादी कर ले और कुसुम की ज़िन्दगी में थोड़ी रौशनी भी दे..

रत्न को थोड़ा एहसास था की बात कुछ ऐसा hi hai..(kyunki उसे मालूम था की राजू ने hi अजय को मारा hai)..lekin फिर भी कहती है की शायद ये मुश्किल hai…Raju शायद ना मने..

काम्य: राजू को हम मन lenge..humein आपकी तरफ से मंज़ूरी chahiye..kyunki आप उसकी माँ हो..

काम्य: वैसे एक बात kahoon…bura मत manna…aapko भी पता है की अगर कुसुम नहीं होती तो हम आज यहाँ बैठ के राजू के बारे में बात नहीं karte..to बस ये समझ लीजिये की राजू की ज़िन्दगी के बदले हम कुसुम की खुशियां चाहते है..

रत्न: आप जो बात कर रही ho..sahi है लेकिन बात उतना आसान भी नहीं है..

माला: क्यों??

रत्न सुधा के तरफ देख कर माला से कहती hai..ek राज़ है जो सिर्फ हमको hi पता hai..lekin आपको पता चलेगा तो शायद आप आश्चर्य हो जाए..

गौरी: ऐसी क्या बात है?

तो सुधा कहती है …राजू की शादी हो गयी है…

सुधा की बात सुन कर तीनो अपनी आँखें बड़ी कर ke…kya? और ये सब कब हुआ?

सुधा: इतना hi nahi…Raju की एक नहीं बल्कि चार बीवियां है..

ये झटका तीनो के लिए और भी ज़बरदस्त tha…kya कहना hai..unhe समझ में नहीं आता…

काम्य: एक नहीं chaar…kaun है?

रत्न थोड़ा शर्माते hue…Raju ने हम सब (यानी मई, मेरी बहिन सुधा, ारु और संध्या) से शादी कर ली है..

कुछ समय पहले तक हम भी कुसुम बेटी की तरह हमारी ज़िन्दगी भी सूनी पड़ी thi…lekin ये तो राजू का प्यार और हम सब पे विश्वास tha…ki उसने हम सब से शादी कर ली है..

ये बात मंदिर के सिर्फ पुजारी hi जानते hai..aur कोई नहीं..

काम्य: ये तो बड़ी अच्छी बात है behanji..ki राजू को आप सब की इतनी चिंता hai..shayad मैं गलत बोल doon…lekin इतना अच्छा और अपने परिवार को प्यार करने वाला राजू hi कुसुम के लिए बेहतर hoga..agar वो भी कुसुम को उतना hi प्यार de..to उसकी ज़िन्दगी भी रंगीन हो जायेगी..

ये बात सुन कर इस बार रत्न को शॉक लगने की बारी थी की काम्य ऐसे बोल सकती है..

रत्न और कुछ नहीं कह पाती और बस इतना hi कहती है की राजू से एक बार वो बात karegi…haan..lekin वो अगर मन कर देता है तो फिर मैं बात आगे नहीं बढ़ाऊँगी..

Kahiye..aapko मंज़ूर है?

गौरी: haan..ek बार आप भी राजू से बात कर लीजिये..

काम्य हस्ते हुए: अगर राजू नहीं मानता तो हमें पता है राजू को कैसे मनाना है..

और फिर ऐसे hi कुछ और बातें कर के रत्न और सुधा अपने घर के लिए निकल जाती है..

रास्ते में रत्न सुधा से कहती hai..Malkin ठीक hi कह रही thi..agar कुसुम नहीं होती तो पता नहीं राजू का क्या hota..sach में उसी ने हमारे राजू की जान बचाई है.

सुधा: सच कहती हो दीदी. अब तो हम राजू के बिना जी भी नहीं सकते. अब तो वो हमारा सुहाग भी है..

रत्न: मज़ाक mein…lo..ek और सौतें आ रही है हमारे घर mein..aur ऐसा कहते हुए दोनों है देते है और घर चले जाते है.

राजू के ghar..aur उसकी सेक्सी शर्त…

जब रत्न और सुधा दोनों वापस आते है तो बाकी तीनो भी इनका बेसब्री से इंतज़ार करते है..

उन दोनों के आते hi तीनो प्रश्नो की झड़ी लगा देते है..

रत्न: अरे bhai…thoda सांस तो लेने do…sab बताते है…

फिर कुछ देर बाद जब सब नार्मल हो जाते है तो रत्न कहती है..

रत्न: तुम लोग जो सोच रहे ho..waisa कुछ नहीं hai..tumhe सब पता hai..pichle 1-2 महीने में क्या हुआ tha…to शायद ये भी पता होगा की कुसुम ने hi हमारे राजू की जान बचिआई hai..agar वो हमें अजय के बारे में ना बताती तो पता नहीं हमारा क्या हाल होता.

ारु: आप सही कह रही हो माजी.

रत्न: तो बात ये है की राजू की जान के बदले में वो लोग कुसुम की खुशियां मांग रहे है..

राजू: मैं समझा नहीं..

सुधा: हमने देखा है की कुसुम की हालत थोड़ी खराब है और वो अब एकदम गुमसुम और शांत रहती hai..jaise उसकी ज़िन्दगी में कोई ख़ुशी hi ना हो.

ये सब देख कर उनको बहुत दुःख हो रहा है और वो चाहते है की तुम कुसुम से शादी कर lo…ye उनके तरफ से hi प्रस्ताव है..

ये बात सुनके तीनो चौंक जाते है और राजू भी थोड़े गुस्से में कहता है..

राजू: तुमने उनकी बात मान ली है क्या? अगर वो इस घर में आएगी तो आपको कैसे लगेगा?

रत्न: नहीं beta..main कैसे मान सकती हूँ? मैंने उन्हें सिर्फ इतना hi बताया है की तुमसे बात कर के उन्हें बताऊंगी.

राजू: अच्छा kiya…unhe बता दो की मैं ऐसा नहीं कर sakta…unhe क्या पता की मेरी अब 4 बीवियां है..

रत्न: मैंने उन्हें ये बात भी बतायी है..

राजू: क्या? उन्हें बताने की क्या ज़रुरत थी?

रत्न: बीटा, बताना पड़ा..

वो लोग ये जान कर भी कुसुम की शादी तुमसे करवाना चाहते है..

रत्न: मैं इतना hi कहूँगी की तुम इस बारे में एक बार सोच lo..aur जवाब कल दे dena..lekin एक बात ये भी सच है की तुमने hi उसे विधवा बनाया hai..bhale hi हमारी जान बचाने के खातिर..

और फिर कोई कुछ नहीं kehta…phir सब लोग रात में खाना खा कर सो जाते hai…aaj के हुई बातों से किसी का भी मन नहीं tha…sab लोग अपनी अपनी सोच में डूबे हुए थे..

राजू को रात भर रत्न की बात याद आती है की वो hi कुसुम के विधवा होने का जिम्मेदार hai..aur उसे इस बात पर भी ग्लानि होती है.

फिर कुछ सोचता है और उसे हसी आ जाती है और मन में हस्ते हुए सो जाता है.

अगली सुबह…

सब लोग अपने काम में लगे हुए रहते है तो रत्न भी थोड़ा डरते हुए राजू से ये बात छेड़ती है..

राजू सब को बुला कर कहता hai…main कल रात को बहुत सोचा इस बारे mein..aur मुझे आपकी बात hi सत्ता रही थी की मैं hi जिम्मेदार हूँ…

तो सोचा पहले मैं आप सब लोगों से पूछ लून की आपकी क्या राय है..

रत्न: शायद हमें अच्छा ना lage..lekin उस मासूम बच्ची को देख कर दिल पिघल जाता hai..aur मैं ये भी जानती हूँ की अगर तू उससे शादी करेगा तो हमारी तरह वो भी बहुत खुश रहेगी और तू भी उसे बहुत खुश रखेगा..

राजू बाकी तीनो से: आपकी क्या राय है?

ारु: जैसे माजी chahegi..waise hi हमें मंज़ूर hai…aur इस बात पे सुधा और संध्या भी हाँ कह देती है.

राजू: तो ठीक hai..main शादी कर loonga..lekin मेरी कुछ शर्त है..

शर्त की बात सुन कर सब चौंक जाते है और पूछते है की क्या शर्त है..

राजू: अरे, घबराने वाली कोई बात नहीं है..

रत्न: तो फिर?

राजू हस्ते हुए सुधा को पास बुलाता है और तीनो के सामने उसे बाहों में भर के उसके होंठ चूमता है और एक हाथ पीच ले जाकर उसकी गांड भी दबा देता है और फिर कहता hai..shaadi तो करूंगा लेकिन सुहागरात सब के साथ manaaonga…aur वो भी उनके hi घर mein…aur खुल kar….aur वो लोग भी शामिल होंगे… वैसे तुम्हे तो सब पता है की माला और काम्य के साथ मेरे पहले भी सम्बन्ध रह चुके hai..lekin अब nahi..lekin इस अवसर पे चाहूंगा की उन्हें भी पता चले की हम सब कितने खुश hai..(chaaron से शादी कर के) तो उन्हें भी सुहागरात में शामिल करूंगा. बोलो मंज़ूर है..

संध्या: थोड़ा शर्माते hue…ye क्या शर्त hui…suhaagraat तो तुमने हम सब के साथ मन भी लिया है..

राजू: हाँ सही कह रही ho…lekin उनको भी तो पता चलना चाहिए naa…ki मेरी 5 बीवियां है तो मैं कैसे उन्हें खुश रखता hoon..ye बात सुनकर सब शर्मा जाते है..

Lo…ismein शर्माने की क्या बात hai..aur ऐसा कहते हुए ारु को भी अपने पास खींच लेता है और उसके होंठ को भी चूम लेता है..

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इतने में राजू का फ़ोन आता है तो काम्य उसे फ़ोन करती है..

काम्य: राजू, क्या सोचा है तुमने कुसुम के बारे में?

राजू: माँ ने बताया hai..main राज़ी हूँ लेकिन मेरी कुछ शर्त है..

काम्य: क्या शर्त है?

राजुल फ़ोन पे nahi..wahan आ कर बताता हूँ..

काम्य ये बात सुन के खुश हो जाती है और राजू को जल्दी आने को कहती है..

राजू को याद करते hi काम्य की छूट गीली हो जाती hai,,,kyunki बहुत दिनों से वो यहाँ नहीं आया था..

कुछ देर बाद राजू काम्य के घर पहुँच जाता है तो काम्य उसे देख कर एकदम खुश हो जाती है और उसे अपने गले से लगा लेती है और बड़े प्यार से उसकी आँखों में देखती hai..aur उसे कमरे में ले जाती है.

काम्य: क्यों मेरे होने वाले बच्चे के baap…itne दिनों बाद हमारी याद आयी क्या तुम्हे?

राजू चौंकते hue..kya कह रही हो मालकिन? आप भी माँ बनने वाली हो?

काम्य: पता nahi…lekin जिस तरह से तुमने मेरी चुदाई की है और अपने बीज मेरे अंदर डाला hai..to लगता है जल्दी hi खुश खबर तुमको देनी पड़ेगी..

राजू भी उसी नज़र से उसे देखता है और दोनों के बिना जाने hi दोनों के होंठ मिल जाते है और एक गहरी किश में डूब जाते है…

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किश करते waqt….Raju काम्य se..apna मुँह kholo…Kaamya भी अपना मुँह खोल देती है तो राजू उसकी जुबां अपने मुँह में लेकर ज़बरदस्त फ्रेंच किश करता है और साथ hi अपना हाथ पीछे ले जाकर उसकी गांड मसल देता है..

वो दोनों इतने गहरे किश में डूबे रहते है की उन्हें पता hi नहीं चलता और 2 मं बाद खांसने की आवाज़ उन्हें सुनाई देती है..

माला खांसते और हस्ते hue..kyun..dono से रहा नहीं जा रहा है क्या?

काम्य: नहीं Mala..itne दिनों बाद राजू को देखा तो मुझसे भी रहा नहीं गया..

माला भी राजू के पास आकर उसे गले मिलती है और वो भी अपने होंठ राजू के होंठ से मिला देती hai…aur राजू भी उसकी गांड मसल देता है..

इस वक़्त सिर्फ वो तीनो hi वहां रहते hai..Kusum और गौरी दुसरे कमरे में रहते है और उन्हें राजू की आने का पता नहीं चलता..

कुछ देर बाद…

काम्य: तो क्या शर्त है तुम्हारी?

राजू: kyun..bahut जल्दी है शर्त जान्ने की?

माला: हाँ..

राजू: तो suno…shart ये है की शादी तो karoonga..lekin सुहागरात आप सब के साथ manaaonga..yahan par..aur आप सब को भी सुहागरात में शामिल होना है..

काम्य और माला दोनों एक दुसरे को देख kar…Raju se…humein पता नहीं था की तुम इतने ठरकी hoge…lekin हमें तुम्हारी ये शर्त बहुत अच्छी lagi..aur ऐसा कहते हुए दोनों है देते है..

लेकिन तुम्हारी बाकी बीवियों को पता चलेगा तो?

राजू: वो भी यहाँ पर hi रहेंगी और वो लोग भी शामिल हो जाएंगे..

राजू: एक और शर्त है..

दोनों आश्चर्य se…kya??

तुम दोनों की गांड तो मरूंगा hi..lekin साथ में गौरी माजी की गांड भी maroonga…kya कहती हो?

इस बात पे दोनों है देती है और माला काम्य को इशारा करती है तो काम्य वहां से चली जाती है और कुछ देर बाद काम्य गौरी को लेकर उस कमरे में आ जाती है..

गौरी राजू को देख कर शर्मा जाती है और काम्य कहती है राजू से..

काम्य: तुम hi अपनी शर्त बताओ माजी से..

राजू: nahi..main नहीं bataaonga..aap hi bataao…aur उनकी जुबां से hi जानना चाहता हूँ.

काम्य है देती है और धीरे से गौरी के कान में राजू की शर्त बताती है.

गौरी शर्त सुनकर शर्मा जाती है और हस्ते हुए अपनी आँखें नीचे कर लेती है..

काम्य: लो bhai..maine तो इन्हे बता दिया है..

राजू: लेकिन मैं इनके मुँह से सुन्ना चाहता hoon..to कहिये maaji…aapko मंज़ूर है?

गौरी: धीरे से शर्माते हुए हाँ में सर हिला देती है.

राजू: ऐसे nahi…baat खुल कर kahiye…ki मालकिन ने आपसे क्या कहा है और आपका क्या जवाब है..

इतने mein..Kaamya राजू se…Raju..jab हम अकेले इस घर में है तो हमें अपने नाम से बुलाया karo..aur नाकि मालकिन कह कर.

गौरी: काम्य ने जो शर्त राखी है वो मुझे (मेरी बेटी के लिए) मंज़ूर है..

राजू: क्या मंज़ूर है?

गौरी: एहि की तुम मेरी गांड मारना चाहते ho…aur शर्मा के अपनी आँखें झुका लेती है..

राजू: ये हुई ना baat..aur ऐसा कहते हुए अपनी बाहें खोल देता hai…Kaamya देख कर गौरी को इशारा करती है तो गौरी भी राजू के पास जाकर उसके बाँहों में चली जाती है और राजू भी उसके होंठ पे एक जबरदस्त किश करता है..

गौरी धीरे से राजू के कान mein…tumhaara हथियार बहुत दुमदार hai..pichli बार जब तुमने किया था तो दो दिन ठीक से चल नहीं पायी…

राजू भी धीरे se…ab जब गांड मारूंगा तो ज़रूर 2-3 दिन लँगड़ाके chalogi…aur उसको आँख मार देता है..

काम्य: और कोई शर्त है क्या?

राजू: nahi…waise कुसुम दिखाई नहीं दे रही है?

माला: nahi..tum उसे सिर्फ शादी के दिन hi देखोगे…

काम्य फिर राजू का फ़ोन डायल करती है (ासुमे की राजू अपना फ़ोन घर पे hi छोड़ के आया tha)…aur फिर रत्न को भी बता देती है की उन्होंने राजू की सब शर्त मान ली है..

रत्न काम्य से शर्त के बारे में पूछती है तो कहती है की उसे बाद में बता देगी.

शादी और सुहागरात…

कुछ दिन बाद पूरे धूम धाम से राजू और कुसुम की शादी मंदिर में हो जाती है. कुसुम भी इस शादी से खुश thi..kyunki उस शायद एहसास था की राजू भी उसे वो ख़ुशी देगा जो वो अपनी बाकी बीवियों को देता था..

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शादी समाप्त होने के बाद सब लोग काम्य के घर आ जाते है और उस घर को पूरा अच्छे से सजाया जाता है…

घर आने के बाद राजू ारु को थोड़ा अकेले ले जाता है और उसको बाहों में लेते हुए कहता hai…aaj तो तुम नहीं बच पाओगी..

ारु: मतलब?

राजू: उसकी गांड दबाते hue…ab तक तो तू मन करती आ रही hai…lekin आज तेरी गांड लेकर hi रहूंगा..

ारु: dhat..aise कोई कहता है क्या?

राजू: kyun…aisa नहीं तो फिर सब को बुला के कह देता hoon..theek है?

ारु ये बात सुनके शर्मा जाती है और उसकी बाहों से अलग हो कर भाग जाती है…

वो कुसुम के पास जाती है और उसे भी बाहों में लेकर..

ारु: तू खुश तो है ना कुसुम?

कुसुम: शर्माते हुए… हाँ didi…aisa लगता है भगवान् को मुझ पर दया आ गयी hai..ab तक मैं नरक में जी रही थी..

ारु: अब वो दिन gaye..ab तो तू स्वर्ग का मजे le..tu राजू को जितना खुश rakhegi..Raju तुम्हे उतना hi खुश rakhega…to अब ज़िन्दगी के मजे kar..aur धीरे से उसके होंठ चूम लेती है..

कुसुम के लिए ये पहली बार था की किसी ladki/aurat ने पहली बार उसे चूमा था..

ारु: अब तुम इसकी आदत दाल lo…sab एक hi घर में रहेंगे और एक hi बिस्तर पे soyenge..to एक दुसरे को भी खुश करते rehenge..samjhi??

कुसुम शर्माते hue…ji..

ारु कुसुम के कपडे के ऊपर से उसकी छूट पे हाथ रख कर धीरे से उसके कान में कहती hai…tumne यहाँ पे साफ़ कर लिया है naa….Raju को एकदम चिकना पसंद है…

कुसुम भी शर्माते हुए हाँ कहती है…

ारु: chalo…ab तुमको तैयारी करने का समय आ गया hai..itne में गौरी भी वहां आ जाती है और दोनों मिलकर कुसुम को अच्छे से तैयार करते है सुहागरात के लिए..

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सब को राजू की शर्त याद थी तो बाकी सब भी दुसरे कमरे में जाकर सज धज के तैयार हो जाते है…

राजू को पता था की आज सब से साथ सुहागरात मनाना hai..to रात तो कमरे में आने से पहले वो एक वायग्रा गोली खा लेता है…

राजू कमरे में चले जाता है तो वहां कोई नहीं dikhta…thodi देर बाद सब लोग एकदम दुल्हन की तरह सज कर कमरे में आते hai…sab को देख कर राजू के मुँह में भी लार टपकने लगता hai…kyunki सभी बहुत सुन्दर और सेक्सी लग रहे थे..

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ारु और गौरी कुसुम को पकड़ कर राजू के पास ले आती hai..aur कहती है की सब से पहले इससे सुहागरात मनाओ..

ऐसा कहते हुए कुसुम को राजू के पास छोड़ कर दोनों थोड़ा अलग हो जाते हैं और बाकी सब के पास चले जाते है जो वहीँ कमरे में the..kyunki राजू ने जो शर्त राखी थी..

राजू धीरे से कुसुम को अपने बाहों में लेता है और पूछता है..

राजू: Kusum..tum खुश तो हो ना?

कुसुम: हाँ…

राजू: तो ख़ुशी का इज़हार करो…

कुसुम को कुछ समझ में नहीं आता तो कुछ नहीं करती..

राजू उसका चेहरा पकड़ कर उसकी आँखों में देखते हुए अपने होंठ उसके होंठ के पास ले जाता है तो कुसुम समझ जाती है और राजू के होंठ चूम लेती है और देखते hi देखते दोनों एक गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है..

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उन दोनों को देख कर बाकी भी उत्तेजित होने लग जाते है और सब को अपनी टांगों के बीच गीलापन महसूस होता है..

राजू फिर कुसुम को बिस्तर पे ले जाकर सुला देता है और उसी तरह चूमते हुए उसकी चुकी दबाने लग जाता hai…Kusum की सिसकारी राजू के मुँह में hi डाब जाती है..

राजू फिर धीरे से कुसुम का ब्लाउज और ब्रा खोल देता है और वो ऊपर से नंगी हो जाती hai..aur उसके होंठों को छोड़ कर चुकी पर टूट पड़ता hai…ek को दबाते है तो दुसरे को मुँह में लेकर चूसता hai..Kusum भी अब थोड़ा मजे लेने लगती है और उसकी भी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंजने लगती है..

जहाँ राजू का मुँह अपना काम कर रहा tha..to वहीँ उसके हाथ भी अपना काम कर रहे the…wo अपने हाथ नीचे ले जाकर उसकी साडी खोल देता है जिसका एहसास कुसुम को भी होता hai..to राजू की मदत करते हुए अपना साडी निकाल देती hai..aur फिर राजू उसकी पेटीकोट भी निकालने की कोशिश करता है तो कुसुम भी उसका साथ देते हुए अपनी गांड ऊपर उठाती है तो राजू उसकी पेटीकोट के साथ उसकी छोटी पंतय भी निकल देता है और उसे पूरा नंगा कर देता है..

राजू नीचे जाता है तो देखता है की उसकी छूट एकदम पानी से भीगा हुआ है और उत्तेजना के मारे उसकी छूट से पानी टपक रहा है और एकदम चिकना और गीला लग रहा था..

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राजू से भी रहा नहीं जाता और उसकी छूट पे टूट पड़ता है और एकदम शिद्दत से चूसने लग जाता hai…ab कुसुम भी एकदम उत्तेजित थी तो ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां लेते हुए राजू का सर अपनी छूट पे दबा देती है…

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7-8 मं तक राजू ऐसे hi उसकी छूट चूसने में लगा रहता है और कुसुम ना जाने कितने बार झाड़ जाती hai…jiski गिनती उसे भी नहीं thi…Kusum की ज़िन्दगी में ये पहली बार था की किसीने उसे इस तरह से खुश कर दिया था. (अजय ने उसे इस प्रकार की ख़ुशी कभी नहीं दी थी).

राजू भी उसका पूरा पानी पी जाता है और ऊपर आकर कुसुम को भी अपना पानी का स्वाद दिलाते hai…ek गहरे किश के द्वारा.

राजू प्यार se..chalo..ab अपने छोटे दोस्त को भी खुश करो..

कुसुम को कुछ समझ नहीं आता तो राजू को सवालिया नज़र से देखती है..

राजू फिर पलट कर… इशारे से ारु को अपने पास बुलाता है तो वो भी अपनी गांड मटकाते हुए राजू के पास आती है..

ारु भी बड़ी बेताबी से राजू के पास आती है और कुसुम से कहती hai..chhota दोस्त याने ye..aur ऐसा कहते हुए राजू का लुंड पकड़ लेती hai..(Raju भी बीच में hi कब का अपने कपडे निकल कर नंगा हो जाता है).

वियाग्रा का असर अब राजू के लुंड पे भी दिखने लगता hai…Aaru उसके लुंड को देख kar…kya बात hai..ye जनाब तो आज कुछ ज़्यादा hi बड़ा लग रहा है..

राजू: इसको खुश करो और कुसुम को भी बता दो की कैसे खुश करते hai..aur फिर dekhna..ye और भी बड़ा लगेगा…

राजू का इतना कहना hi था की ारु उसके लुंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगती है और कुसुम की तरफ देख kar…Raju ये करने को कह रहा tha..aur फिर चूसने लग जाती है..

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थोड़ी देर ऐसे hi चूसने के बाद कुसुम को भी चूसने को बोलती है तो कुसुम भी थोड़ा झिझकते हुए और शर्माते हुए उसका लुंड अपने मुँह में ले लेती hai…aur फिर ारु अपना हाथ उसके सर के पीछे रख कर सर को आगे बढ़ा देती है तो राजू का पूरा लुंड कुसुम के मुँह में चले जाता hai….aur फिर मस्त लुंड चूसै में लग जाती है कुसुम भी…

अब राजू का लुंड भी दोनों के चूसै और थूक से सना हुआ एकदम कड़क लम्बा और चिकना हो जाता है..

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थोड़ी देर बाद राजू कुसुम se..chalo..ab जन्नत की सैर के लिए तैयार हो जाओ…

कुसुम भी समझ जाती है और कहती hai..thoda धीरे से करना….

राजू: चिंता मत karo..ekdum प्यार से karoonga…Raju भी ारु को इशारा करता है तो वो भी कुसुम के बगल में आ जाती है और उससे चिकनी चुपड़ी बातें करते हुए उसका ध्यान भटकाती है..

राजू भी अब देर नहीं करता और अपने तने हुए लुंड को कुसुम की बंद पड़ी छूट के मुँह के पास रख कर धीरे से अंदर डालने की कोशिश करता hai…lekin छूट एकदम टाइट होने की वजह से उसका लुंड फिसल कर बहार hi रह जाता hai…Raju ऐसे हे 2-3 बार तरय करता है लेकिन अंदर नहीं दाल पाटा…

राजू फिर सोचता hai..aise नहीं hoga..to फिर वो इस बार ज़बरदस्त तरीके से धक्का मारता है तो उसका आधा लुंड कुसुम की छूट को चीरता हुआ अंदर चले जाता hai..kusum का ध्यान भटका हुआ था तो उसे पता नहीं chalta..lekin इस ज़बरदस्त प्रहार से ज़ोर से चिल्लाती है..

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Aahmn......ohh...uhhfhh....aaahmmn...aamm...hmmn...ommm...

Umm.....aahhmmmm...ummm....ahh...uhh....Raaaajjjjjjjjjuuuuuuuuuuuuuuuuuu…

ारु भी समझ जाती है की इसका काम भी तमाम हो गया hai..to उसके सर को पकड़ kar..chup हो जाओ Kusum…jo दर्द होना tha..ho gaya..ab तो मजे का समय आ गया है..

राजू को पता था की उसका सिर्फ आधा hi लुंड गया hai…to फिर से उसके लुंड को बहार निकल कर ऐसे hi फिर से एक और धक्का मारता है और इस बार उसका पूरा लुंड कुसुम की छूट की जड़ तक चला जाता है…

कुसुम की आँखों से अब आंसू आने लग जाते hai..Aaru भी उसको चुप करते हुए उसके होंठ चूम लेती है और वहीँ गौरी भी उसके पास आकर उसे समझाती है की beta…thoda दर्द सेहन कर lo..ye हर लड़की को करना पड़ता है…

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राजू भी ऐसे hi थोड़ी देर के लिए रुक जाता है और जब कुसुम का रोना थोड़ा काम होता है तो फिर धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू करता है..

थोड़ी देर बाद कुसुम को भी राहत मिलती है और उसे भी अब मजा आने लगता है..

और फिर शुरू होता है चुदाई का सिलसिला जो आधे घंटे तक चलता है और उसमें ना जाने कितनी बार कुसुम झाड़ जाती है…

राजू पे वायग्रा का असर tha..to वो इतनी जल्दी झाड़ता नहीं..

ारु उसे देख के कहती hai…aadhe घंटे से लगे ho..lekin तुम्हारा लुंड तो रुकने का नाम hi नहीं ले रहा है..

राजू: आज नहीं रुकेगा ye…maine पहले hi कहा था naa..tum सब के साथ सुहागरात मनाऊँगा…

जहाँ ये तीनो घमासान चुदाई में लगे हुए the..to वहीँ बाकी भी एक दुसरे को शांत करने में लगे हुए the….sab एक दुसरे की छूट को चूस चूस कर शांत कर रहे थे..

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कुसुम भी बेचारी थक जाती है और ाँहें भरने लगती hai…Raju को भी एहसास होता है और ारु से कहता है की अब उसकी बारी hai…aur उसे घोड़ी बनने को कहता है..

ारु भी एक आज्ञाकारी बीवी की तरह उसके सामने घोड़ी बन जाती है और फिर राजू झुक कर उसकी गांड चाटने लग जाता है..

ारु: क्या कर रहे ho…gandi जगह है..

राजू: प्यार और सेक्स में कोई गन्दा नहीं होता Aaru…dekho..thodi देर में तुम hi मेरे लुंड पे uchlogi…aur फिर से उसकी गांड चाट के अच्छे से गीला कर देता है

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राजू सुधा को बुला लेता है और उसे इशारा करता है तो वो समझ जाती है और ारु के सामने लेट जाती हैं और उसका सर अपनी छूट में दबा देती hai…Aaru भी बड़ी शिद्दत से सुधा की छूट चूसने में लग जाती है और मौका देख कर राजू अपना लुंड ारु की गांड में दाल देता hai..Aaru को इसका एहसास tha…lekin सुधा उसका सर पकड़ कर अपनी छूट पे दबा देती है और फिर राजू भी ज़बरदस्त झटके से उसका पूरा लुंड ारु की गांड में उतार देता है…

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ारु भी एकदम ज़ोर से चीक पड़ती है…

Aahmn......ohh...uhhfhh....aaahmmn...aamm...hmmn...ommm...

Umm.....aahhmmmm...ummm....ahh...uhh....Raaaajjjjjjjjjuuuuuuuuuuuuuuuuuu…

ारु को भी अब बहुत दर्द हो रहा tha..lekin राजू जानता था की ये दर्द कुछ hi समय के लिए rahega..wo भी थोड़ी देर ऐसे hi रहता है और जब ारु थोड़ा शांत हो जाती है तो फिरसे सुधा उठ कर ारु को चूमते hue…beta…sab ठीक हो जाएगा…

राजू को भी लगता है की ारु शांत है तो फिर से वो उसकी गांड मारने लग जाता है और फिर से लग जाता है…5-10 मं में अब वो भी झड़ने के करीब आ जाता है और आखिर में वो भी चीक कर ारु की गांड में hi झाड़ जाता है और वी भी बगल में लुढ़क कर लेट जाता है और गहरी सांसें लेने लग जाता है..

ारु भी धीरे से उठ कर अपना सर राजू के कंधे पे रख kar…aakhir तुमने अपनी मनमानी कर hi ली (राजू से).

राजू: कैसे नहीं करता jaan..tumhaari गांड hi इतनी प्यारी hai…ek ना एक दिन तो लेना hi tha..aur इससे अच्छा दिन क्या हो सकता है..

5 मं ऐसे hi लेते रहने के बाद जब सब थोड़ा थक जाते है तो फिर से राजू के लुंड में जान आने लगती है (वियाग्रा की वजह से).

उसके उठते हुए लुंड को देख कर संध्या कहती hai..kyun re…ek घंटे से तुमने दोनों को बजा दिया hai..phir भी यह झुकने का नाम नहीं ले रहा है..

राजू: नहीं jaan..aaj यह झुकेगा nahi…balki सबको झुकायेगा और rulaayega..aur ऐसा कहते हुए है देता है तो बाकी सब भी है देते है..

राजू फिर गौरी को भी इशारा करता है तो वो भी शर्माते हुए राजू के पास आ जाती है और इस बार संध्या और गौरी राजू के लुंड को मुँह में लेकर फिर से उसे तना देते है…

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राजू इस बार गौरी को लेता है और इस बार सीधा उसकी गांड मारने लग जाता hai..Gauri थोड़ा ना नुकुर करती है लेकिन राजू कहाँ मानने वाला tha..aur संध्या भी उसे मदत करती hai…Gauri भी मजे से गांड मरवाती hai…saath hi संध्या की भी गांड मारता है…

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इसी तरह उस रात राजू सब की गांड मारता है (रत्न को छोड़ kar)..kyunki रत्न उसे मन करती है और राजू कभी भी रत्न की बात मन नहीं करता था…

उस रात उस घर में बहुत घमासान चुदाई चलता है और सब की छूट और गांड खुल जाते hai…aakhir में सुबह सब लोग थक के सो जाते hai…aur दोपहर को सब उठते है तो सब लंगड़ाते हुए चलते hai…sab लोग एक दुसरे को देख कर शर्मा जाते hai..lekin शाम तक सब नार्मल हो जाता है..

2 दिन बाद जब काम्य सब से कहती है की वो ये गाँव छोड़ के चले जाएंगे तो रत्न राजू और सब मन करते है और कहते है की वो दोनों भी उनके साथ hi रहे…

अब कुसुम भी राजू की बीवी बन गयी है तो एक तरह से वो (काम्य और माला) भी उनके रिश्तेदार हो गए है...

आखिर में दोनों मान जाते है और उन्ही के साथ यहीं गाँव में रहना का निर्णय ले लेते hai..lekin इस कंडीशन के साथ की सब लोग साथ रहेंगे..

लेकिन इस बीच काम्य ठाकुर से सब नौकर को निकल देती hai…ab उन्हें उनकी ज़रुरत नहीं padti…ab घर में सिर्फ एहि लोग रहते है…

ऐसे hi दिन ख़ुशी से beet-te hai…jahan राजू सब को खुश रखता है तो उसकी बीवियां भी उसको खुश रक्तति hai..(aur साथ में माला, काम्य और गौरी भी)…2 महीने बाद रानी एक छोटी लड़की को जनम देती hai…is प्यारी सी गुड़िया को देख कर सब लोग बहुत खुश हो जाते है…

तीसरे mahine..is घर में खुशियों की भरमार लग जाती है…

काम्य, माला, सुधा और संध्या भी खुश खबर देते है की वो भी प्रेग्नेंट हो गयी hai..Aaru और कुसुम इतनी जल्दी माँ नहीं बनना चाहती थी..

अगले एक साल के अंदर काम्य और सुधा को लड़का और माला और संध्या को लड़की पैदा होती है..

रत्न भी अपने पोते और पोती को पा कर एकदम खुश हो जाती है..

अब घर में बच्चों की किलकारी गूंजने लगती है और घर एकदम हरा भरा रहता है..

2 साल बाद ारु और कुसुम भी प्रेग्नेंट हो जाते hai….aur वक़्त आने पर दोनों को जुड़वे बच्चे पैदा होते hai…Aaru को लड़के और कुसुम को लडकियां…

राजू और रत्न को खुशियों का कोई ठिकाना नहीं था…

जुड़वाँ बच्चों के पैदा होने के 6 महीने बाद सुधा और संध्या फिर से प्रेग्नेंट हो जाती हैं और उन्हें भी समय पे bête पैदा होते है (सुधा और संध्या को पहला बच्चा पैदा होने के बाद वो राजू से कहते है की उन्हें एक और बच्चा चाहिए…)

अब उनका संसार पूरा हो गया tha….sab लोग बहुत खुश the…aur अच्छे से ज़िन्दगी जीते है

जहाँ पे सिर्फ प्यार hi प्यार tha..aur नफरत की कोई जगह नहीं थी…

थे एन्ड…

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लास्ट अपडेट इन हिंदी फोंट्स अस वेल...

अपडेट ५०: The क्लाइमेक्स!!!

अजय की मौत के बाद…

राजू अजय को मार के घर आते वक़्त पुलिस को फ़ोन कर के बताता है की फलाना जगह में बहुत नशीले पदार्थ रखे हुए है और उन्हें वो ज़प्त कर ले. पुलिस जब पूछती है की कौन बात कर रहा है तो राजू फ़ोन कट कर के वहां से निकल जाता है.

राजू घर आकर अपने आप को सैय्याम में रखते हुए आराम करता है और आज की घटनाओं के बारे में सोचते हुए सो जाता है और उसे पता भी नहीं लगता कब उसे नींद आ जाती है.

पुलिस को जब खबर मिलती है नशीले पदार्थ के बारे में तो वहां पर छापा मार के सब ज़प्त कर लेती है..और वहां कुछ बचे हुए अजय के आदमी को गिरफ्तार कर लेती है. पुलिस को अब भी पता नहीं चलता की उन्हें किसने खबर दी है. पुलिस भी कुछ छान बीन करती है और आखिर में अजय के अड्डे पे आ ही जाती है और देखती है की अजय मरा पड़ा हुआ है और उसके मुँह में ढेर सारा नशीला पदार्थ ठूसा हुआ है.

कुछ पूछताछ के बाद पुलिस अजय के घर पहुँच जाती है और कुसुम और गौरी को अजय की मौत की खबर देती है. कुसुम और गौरी को ये जान-ने में वक़्त नहीं लगता की अजय को राजू ने ही मारा है…वो दिखावे के लिए पुलिस के सामने थोड़ा रोना धोना करती है लेकिन अंदर ही अंदर दोनों थोड़े खुश थे की उनकी नरक ज़िन्दगी में शायद थोड़ी रौशनी आ जाए..

ये बात वहां पूरे गाँव में फ़ैल जाती है की अजय की मौत हो गयी है..खबर काम्या और माला को भी मिलती है तो वो दोनों भी के गौरी पास पहुँच जाते है. पुलिस भी ड्रग्स का केस समझ कर वहां से निकल जाती है..

जब घर में सिर्फ ये ४ ही रह जाते है तो काम्या गौरी से पूछती है तो गौरी बताती है की शायद राजू ने ही अजय को मारा है…लेकिन उनके पास कोई सबूत नहीं है. ये बात सुन के दोनों को कोई आश्चर्य नहीं होता और राजू को फ़ोन करते है.. लेकिन फ़ोन उस वक़्त रत्ना के पास था…उनमें कुछ बात होती है और आखिर में रत्ना और बाकियों को भी पता चल जाता है की अजय की मौत हो गयी है.

राजू नींद से उठ कर रत्ना को फ़ोन करता है तो रत्ना भी उसे बता देती है की उन्हें खबर मिल चुकी है..वो बहुत खुश हो जाती है की उन्हें अब अजय से कोई दर नहीं है.

राजू कुछ नहीं कहता और सिर्फ हाँ में सर हिला देता है और कहता है की अब वो सब घर आ जाए. अब उन्हें कोई खतरा नहीं है. रत्ना भी इस बात को मान जाती है और सब आ जाते है..और साथ में रानी को भी ला लेते है क्यों की उसे अब कभी भी बच्चा होने वाला था.

कुसुम की शादी का प्रस्ताव..

घर आने के बाद फिर सब नार्मल हो जाता है क्यूंकि अब ना तो ठाकुर था ना अजय…जो इनके पीछे पड़े हुए थे. लेकिन राजू अभी भी थोड़ा सावधान रहता है..वो फिर से कोई और गलती नहीं करना चाहता था..जो की बात भी सही थी.

वहीँ गौरी और कुसुम भी अब थोड़ा उदास रहने लगते है…क्यूंकि भले ही वो दोनों अजय से नफरत करते थे..लेकिन रिश्ते में उसका पति और दामाद था..सो ज़ाहिर था की वो लोग थोड़ा उदास रहेंगे..जिसका अहसास काम्या को भी था..

काम्या को लगता है की उसे गौरी और कुसुम को अपने घर ले जाना चाहिए..ताकि उनको भी कुछ चेंज हो.

तो काम्या के मनाने पर काम्या दोनों को अपने घर (गाँव) ला लेती है और अभी चारो एक साथ रहने लगते है..

कुछ दिन बाद…

गौरी: (काम्या से) दीदी..देखो ना..कुसुम का क्या हाल हो गया है..बेचारी के ज़िन्दगी में शायद दुखी ही रहना लिखा हुआ है..आजकल बहुत गुमसुम सी रहती है और ज़्यादा बात भी नहीं करती.

काम्या: हाँ..मैं भी देख रही हूँ..लेकिन इसका भी इलाज है..

गौरी चौंकते हुए..क्या इलाज है?

काम्या: क्यों ना कुसुम की फिर से शादी करा दे..अभी उसकी उम्र ही क्या है? वो तो अभी भी जवानी से भरपूर है.उसे भी अच्छी ज़िन्दगी जीना का हक़ है.

गौरी: बात तो आप सही कह रही हो..लेकिन इस विधवा से कौन शादी करेगा?

काम्या: वही जिसने इसे विधवा किया है.

गौरी: यह कैसे मुमकिन है? मुझे नहीं लगता की राजू मानेगा इसके साथ शादी करने के लिए.

काम्या: मैं उसे और उसकी माँ से बात करती हूँ…देखते है कुछ बन सकता है क्या…और यही बात काम्या माला से भी कहती है तो माला को भी ये बात सही लगता है.

गौरी: बात तो आपकी सही है..लेकिन मैं सोचती हूँ की एक बार इस बारे में कुसुम से भी बात करनी चाहिए..

काम्या: हाँ..आप ठीक कह रही हो..

फिर तीनो मिलकर कुसुम से इस बारे में बात करते है तो पहले वो मना कर देती है..लेकिन इन तीनो की ज़िद और ज़ोर देने पर आखिर में हाँ कह देती है..अब इनको राजू और उसकी माँ को मनाना था..

कुछ दिन बाद…

काम्या रत्ना को फ़ोन करती है और उसे अपने घर बुलाती है..रत्ना दर जाती है की कहीं कुछ गड़बड़ तो फिर से नहीं हो गया..

रत्ना: क्यों..क्या हुआ? राजू ने फिर से कोई गलती हुआ है क्या?

काम्या: नहीं बहनजी..ऐसी कोई बात नहीं है..जस्ट आपसे कुछ बात करना था..रत्ना: ठीक है..मैं आती हूँ..

रत्ना ये बात जब घर में बताती है तो बाकी भी थोड़ा सोच में पढ़ जाते है..रत्ना राजू से कहती है की वो सुधा लो लेकर जायेगी…राजू सोच में पढ़ जाता है की काम्या ने उन्हें क्यों बुलाया है..

काम्या के घर..

वहां जाने के बाद काम्या रत्ना से कहती है की चिंता की कोई बात नहीं है…राजू ने कुछ गड़बड़ नहीं किया है…बल्कि उनसे ही कुछ मांगने के लिए ही बुलाया है..

रत्ना ये बात सुन कर चौंक जाती है की काम्या को उनसे क्या चाहिए..

रत्ना: मालकिन हमसे क्या चाहिए आपको?

काम्या कुछ नहीं कहती और गौरी से कहती है की कुसुम को उसके पास लाये..

रत्ना जब कुसुम को देखती है तो उसे बहुत बुरा लगता है क्यूंकि कुसुम का रंग एकदम फीका पढ़ गया था..और उसकी हालत भी ठीक नहीं थी..कुसुम को देख कर रत्ना पूछती है की बेटी (कुसुम) को क्या हुआ है..

गौरी: आप को तो पता है बहनजी…

माला: इसीलिए हमने आपको यहां बुलाया है..

सुधा उसकी तरफ नज़र उठाके देखती है तो काम्या कहती है की कुसुम के चेहरे पे रौनक सिर्फ आप लोग ही ला सकते हो…

रत्ना: कैसे?

गौरी: मैं जो बात कह रही हूँ..शायद आपको बुरा और आश्चर्य लगे..लेकिन हम चाहते है की कुसुम की फिर से शादी हो जाए..

रत्ना: इसमें बुरा लगने की क्या बात है? आप तो सही कह रही हो…बेटी की अभी उम्र भी बहुत काम है और इसे तो अभी अपनी पूरी ज़िन्दगी जीनी है..

गौरी: सही कहा आपने..और ऐसा कहते हुए गौरी काम्या की तरफ देखते हुए कहती है…हम चाहते है की राजू कुसुम से शादी कर ले और कुसुम की ज़िन्दगी में थोड़ी रौशनी भी दे..

रत्ना को थोड़ा एहसास था की बात कुछ ऐसा ही है..(क्यूंकि उसे मालूम था की राजू ने ही अजय को मारा है)..लेकिन फिर भी कहती है की शायद ये मुश्किल है…राजू शायद ना मने..

काम्या: राजू को हम मना लेंगे..हमें आपकी तरफ से मंज़ूरी चाहिए..क्यूंकि आप उसकी माँ हो..

काम्या: वैसे एक बात कहूँ…बुरा मत मानना…आपको भी पता है की अगर कुसुम नहीं होती तो हम आज यहाँ बैठ के राजू के बारे में बात नहीं करते..तो बस ये समझ लीजिये की राजू की ज़िन्दगी के बदले हम कुसुम की खुशियां चाहते है..

रत्ना: आप जो बात कर रही हो..सही है लेकिन बात उतना आसान भी नहीं है..

माला: क्यों??

रत्ना सुधा के तरफ देख कर माला से कहती है..एक राज़ है जो सिर्फ हमको ही पता है..लेकिन आपको पता चलेगा तो शायद आप आश्चर्य हो जाए..

गौरी: ऐसी क्या बात है?

तो सुधा कहती है …राजू की शादी हो गयी है…सुधा की बात सुन कर तीनो अपनी आँखें बड़ी कर के…क्या? और ये सब कब हुआ?

सुधा: इतना ही नहीं…राजू की एक नहीं बल्कि चार बीवियां है..ये झटका तीनो के लिए और भी ज़बरदस्त था…क्या कहना है..उन्हें समझ में नहीं आता…

काम्या: एक नहीं चार…कौन है?रत्ना थोड़ा शर्माते हुए…राजू ने हम सब (यानी मैं , मेरी बहिन सुधा, आरु और संध्या) से शादी कर ली है..कुछ समय पहले तक हम भी कुसुम बेटी की तरह हमारी ज़िन्दगी भी सूनी पड़ी थी…लेकिन ये तो राजू का प्यार और हम सब पे विश्वास था…की उसने हम सब से शादी कर ली है..

ये बात मंदिर के सिर्फ पुजारी ही जानते है..और कोई नहीं..

काम्या: ये तो बड़ी अच्छी बात है बहनजी..की राजू को आप सब की इतनी चिंता है..शायद मैं गलत बोल दूँ…लेकिन इतना अच्छा और अपने परिवार को प्यार करने वाला राजू ही कुसुम के लिए बेहतर होगा..अगर वो भी कुसुम को उतना ही प्यार दे..तो उसकी ज़िन्दगी भी रंगीन हो जायेगी..

ये बात सुन कर इस बार रत्न को शॉक लगने की बारी थी की काम्या ऐसे बोल सकती है..रत्ना और कुछ नहीं कह पाती और बस इतना ही कहती है की राजू से एक बार वो बात करेगी…हाँ..लेकिन वो अगर मना कर देता है तो फिर मैं बात आगे नहीं बढ़ाऊँगी..

कहिये..आपको मंज़ूर है?

गौरी: हाँ..एक बार आप भी राजू से बात कर लीजिये..

काम्या हस्ते हुए: अगर राजू नहीं मानता तो हमें पता है राजू को कैसे मनाना है..और फिर ऐसे ही कुछ और बातें कर के रत्ना और सुधा अपने घर के लिए निकल जाती है..

रास्ते में रत्ना सुधा से कहती है..मालकिन ठीक ही कह रही थी..अगर कुसुम नहीं होती तो पता नहीं राजू का क्या होता..सच में उसी ने हमारे राजू की जान बचाई है.

सुधा: सच कहती हो दीदी. अब तो हम राजू के बिना जी भी नहीं सकते. अब तो वो हमारा सुहाग भी है..

रत्ना: मज़ाक में…लो..एक और सौतें आ रही है हमारे घर में..और ऐसा कहते हुए दोनों है देते है और घर चले जाते है.

राजू के घर..और उसकी सेक्सी शर्त…

जब रत्ना और सुधा दोनों वापस आते है तो बाकी तीनो भी इनका बेसब्री से इंतज़ार करते है..

उन दोनों के आते ही तीनो प्रश्नो की झड़ी लगा देते है..

रत्ना: अरे भाई…थोड़ा सांस तो लेने दो…सब बताते है…

फिर कुछ देर बाद जब सब नार्मल हो जाते है तो रत्ना कहती है..

रत्ना: तुम लोग जो सोच रहे हो..वैसा कुछ नहीं है..तुम्हे सब पता है..पिछले १-२ महीने में क्या हुआ था…तो शायद ये भी पता होगा की कुसुम ने ही हमारे राजू की जान बचिआई है..अगर वो हमें अजय के बारे में ना बताती तो पता नहीं हमारा क्या हाल होता.

आरु: आप सही कह रही हो माजी.

रत्ना: तो बात ये है की राजू की जान के बदले में वो लोग कुसुम की खुशियां मांग रहे है..

राजू: मैं समझा नहीं..

सुधा: हमने देखा है की कुसुम की हालत थोड़ी खराब है और वो अब एकदम गुमसुम और शांत रहती है..जैसे उसकी ज़िन्दगी में कोई ख़ुशी ही ना हो.

ये सब देख कर उनको बहुत दुःख हो रहा है और वो चाहते है की तुम कुसुम से शादी कर लो…ये उनके तरफ से ही प्रस्ताव है..

ये बात सुनके तीनो चौंक जाते है और राजू भी थोड़े गुस्से में कहता है..राजू: तुमने उनकी बात मान ली है क्या? अगर वो इस घर में आएगी तो आपको कैसे लगेगा?

रत्ना: नहीं बेटा..मैं कैसे मान सकती हूँ? मैंने उन्हें सिर्फ इतना ही बताया है की तुमसे बात कर के उन्हें बताऊंगी.

राजू: अच्छा किया…उन्हें बता दो की मैं ऐसा नहीं कर सकता…उन्हें क्या पता की मेरी अब ४ बीवियां है..

रत्ना: मैंने उन्हें ये बात भी बतायी है..

राजू: क्या? उन्हें बताने की क्या ज़रुरत थी?

रत्ना: बेटा बताना पड़ा..वो लोग ये जान कर भी कुसुम की शादी तुमसे करवाना चाहते है..

रत्ना: मैं इतना ही कहूँगी की तुम इस बारे में एक बार सोच लो..और जवाब कल दे देना..लेकिन एक बात ये भी सच है की तुमने ही उसे विधवा बनाया है..भले ही हमारी जान बचाने के खातिर..

और फिर कोई कुछ नहीं कहता…फिर सब लोग रात में खाना खा कर सो जाते है…आज के हुई बातों से किसी का भी मन नहीं था…सब लोग अपनी अपनी सोच में डूबे हुए थे..

राजू को रात भर रत्ना की बात याद आती है की वो ही कुसुम के विधवा होने का जिम्मेदार है..और उसे इस बात पर भी ग्लानि होती है.फिर कुछ सोचता है और उसे हसी आ जाती है और मन में हस्ते हुए सो जाता है.

अगली सुबह…

सब लोग अपने काम में लगे हुए रहते है तो रत्ना भी थोड़ा डरते हुए राजू से ये बात छेड़ती है..

राजू सब को बुला कर कहता है…मैं कल रात को बहुत सोचा इस बारे में..और मुझे आपकी बात ही सत्ता रही थी की मैं ही जिम्मेदार हूँ…तो सोचा पहले मैं आप सब लोगों से पूछ लून की आपकी क्या राय है..

रत्ना: शायद हमें अच्छा ना लगे..लेकिन उस मासूम बच्ची को देख कर दिल पिघल जाता है..और मैं ये भी जानती हूँ की अगर तू उससे शादी करेगा तो हमारी तरह वो भी बहुत खुश रहेगी और तू भी उसे बहुत खुश रखेगा..

राजू बाकी तीनो से: आपकी क्या राय है?

आरु: जैसे माजी चाहेगी..वैसे ही हमें मंज़ूर है…और इस बात पे सुधा और संध्या भी हाँ कह देती है.

राजू: तो ठीक है..मैं शादी कर लूँगा..लेकिन मेरी कुछ शर्त है..

शर्त की बात सुन कर सब चौंक जाते है और पूछते है की क्या शर्त है..

राजू: अरे घबराने वाली कोई बात नहीं है..

रत्ना: तो फिर?

राजू हस्ते हुए सुधा को पास बुलाता है और तीनो के सामने उसे बाहों में भर के उसके होंठ चूमता है और एक हाथ पीच ले जाकर उसकी गांड भी दबा देता है और फिर कहता है..शादी तो करूंगा लेकिन सुहागरात सब के साथ मनाऊँगा…और वो भी उनके ही घर में…और खुल कर….और वो लोग भी शामिल होंगे…

वैसे तुम्हे तो सब पता है की माला और काम्य के साथ मेरे पहले भी सम्बन्ध रह चुके है..लेकिन अब नहीं..लेकिन इस अवसर पे चाहूंगा की उन्हें भी पता चले की हम सब कितने खुश है..(चारों से शादी कर के) तो उन्हें भी सुहागरात में शामिल करूंगा. बोलो मंज़ूर है..

संध्या: थोड़ा शर्माते हुए…ये क्या शर्त हुई…सुहागरात तो तुमने हम सब के साथ मन भी लिया है..

राजू: हाँ सही कह रही हो…लेकिन उनको भी तो पता चलना चाहिए ना…की मेरी ५ बीवियां है तो मैं कैसे उन्हें खुश रखता हूँ..ये बात सुनकर सब शर्मा जाते है..

लो…इसमें शर्माने की क्या बात है..और ऐसा कहते हुए आरु को भी अपने पास खींच लेता है और उसके होंठ को भी चूम लेता है..

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इतने में राजू का फ़ोन आता है तो काम्य उसे फ़ोन करती है..

काम्या: राजू क्या सोचा है तुमने कुसुम के बारे में?

राजू: माँ ने बताया है..मैं राज़ी हूँ लेकिन मेरी कुछ शर्त है..काम्य: क्या शर्त है?राजुल फ़ोन पे नहीं..वहां आ कर बताता हूँ.. काम्या ये बात सुन के खुश हो जाती है और राजू को जल्दी आने को कहती है..

राजू को याद करते ही काम्या की चूत गीली हो जाती है बहुत दिनों से वो यहाँ नहीं आया था..

कुछ देर बाद राजू काम्या के घर पहुँच जाता है तो काम्या उसे देख कर एकदम खुश हो जाती है और उसे अपने गले से लगा लेती है और बड़े प्यार से उसकी आँखों में देखती है..और उसे कमरे में ले जाती है.

काम्या: क्यों मेरे होने वाले बच्चे के बाप…इतने दिनों बाद हमारी याद आयी क्या तुम्हे?

राजू चौंकते हुए..क्या कह रही हो मालकिन? आप भी माँ बनने वाली हो?

काम्या: पता नहीं…लेकिन जिस तरह से तुमने मेरी चुदाई की है और अपने बीज मेरे अंदर डाला है..तो लगता है जल्दी ही खुश खबर तुमको देनी पड़ेगी..

राजू भी उसी नज़र से उसे देखता है और दोनों के बिना जाने ही दोनों के होंठ मिल जाते है और एक गहरी किस में डूब जाते है…

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किस करते वक़्त….राजू काम्या से..अपना मुँह खोलो…काम्या भी अपना मुँह खोल देती है तो राजू उसकी जुबां अपने मुँह में लेकर ज़बरदस्त फ्रेंच किस करता है और साथ ही अपना हाथ पीछे ले जाकर उसकी गांड मसल देता है..

वो दोनों इतने गहरे किस में डूबे रहते है की उन्हें पता ही नहीं चलता और २ मं बाद खांसने की आवाज़ उन्हें सुनाई देती है..

माला खांसते और हस्ते हुए..क्यों..दोनों से रहा नहीं जा रहा है क्या?

काम्या: नहीं माला..इतने दिनों बाद राजू को देखा तो मुझसे भी रहा नहीं गया..माला भी राजू के पास आकर उसे गले मिलती है और वो भी अपने होंठ राजू के होंठ से मिला देती है…और राजू भी उसकी गांड मसल देता है..

इस वक़्त सिर्फ वो तीनो ही वहां रहते है..कुसुम और गौरी दुसरे कमरे में रहते है और उन्हें राजू की आने का पता नहीं चलता..

कुछ देर बाद…

काम्या: तो क्या शर्त है तुम्हारी?

राजू: क्यों..बहुत जल्दी है शर्त जान्ने की?

माला: हाँ.

.राजू: तो सुनो…शर्त ये है की शादी तो करूंगा..लेकिन सुहागरात आप सब के साथ मनाऊँगा..यहाँ पर..और आप सब को भी सुहागरात में शामिल होना है..

काम्या और माला दोनों एक दुसरे को देख कर…राजू से…हमें पता नहीं था की तुम इतने ठरकी होंगे…लेकिन हमें तुम्हारी ये शर्त बहुत अच्छी लगी..और ऐसा कहते हुए दोनों है देते है..

लेकिन तुम्हारी बाकी बीवियों को पता चलेगा तो?

राजू: वो भी यहाँ पर ही रहेंगी और वो लोग भी शामिल हो जाएंगे..

राजू: एक और शर्त है..

दोनों आश्चर्य से…क्या??

तुम दोनों की गांड तो मरूंगा ही..लेकिन साथ में गौरी माजी की गांड भी मरूंगा…क्या कहती हो?

इस बात पे दोनों है देती है और माला काम्या को इशारा करती है तो काम्या वहां से चली जाती है और कुछ देर बाद काम्या गौरी को लेकर उस कमरे में आ जाती है..

गौरी राजू को देख कर शर्मा जाती है और काम्या कहती है राजू से..

काम्या: तुम ही अपनी शर्त बताओ माजी से..

राजू: नहीं..मैं नहीं बताऊंगा..आप ही बताओ…और उनकी जुबां से ही जानना चाहता हूँ.

काम्या हस देती है और धीरे से गौरी के कान में राजू की शर्त बताती है.गौरी शर्त सुनकर शर्मा जाती है और हस्ते हुए अपनी आँखें नीचे कर लेती है..

काम्या: लो भाई..मैंने तो इन्हे बता दिया है..

राजू: लेकिन मैं इनके मुँह से सुन्ना चाहता हूँ..तो कहिये माजी…आपको मंज़ूर है?

गौरी: धीरे से शर्माते हुए हाँ में सर हिला देती है.

राजू: ऐसे नहीं…बात खुल कर कहिये…की मालकिन ने आपसे क्या कहा है और आपका क्या जवाब है..

इतने में..काम्या राजू से…राजू..जब हम अकेले इस घर में है तो हमें अपने नाम से बुलाया करो..और नाकि मालकिन कह कर.

गौरी: काम्या ने जो शर्त राखी है वो मुझे (मेरी बेटी के लिए) मंज़ूर है..

राजू: क्या मंज़ूर है?

गौरी: यहीं की तुम मेरी गांड मारना चाहते हो…और शर्मा के अपनी आँखें झुका लेती है..

राजू: ये हुई ना बात..और ऐसा कहते हुए अपनी बाहें खोल देता है…काम्या देख कर गौरी को इशारा करती है तो गौरी भी राजू के पास जाकर उसके बाँहों में चली जाती है और राजू भी उसके होंठ पे एक जबरदस्त किस करता है..

गौरी धीरे से राजू के कान में…तुम्हारा हथियार बहुत दमदार है..पिछली बार जब तुमने किया था तो दो दिन ठीक से चल नहीं पायी…

राजू भी धीरे से…अब जब गांड मारूंगा तो ज़रूर २-३ दिन लँगड़ाके चलोगी…और उसको आँख मार देता है..

काम्या: और कोई शर्त है क्या?

राजू: नहीं…वैसे कुसुम दिखाई नहीं दे रही है?

माला: नहीं..तुम उसे सिर्फ शादी के दिन ही देखोगे…

काम्या फिर राजू का फ़ोन डायल करती है (समझो की राजू अपना फ़ोन घर पे ही छोड़ के आया था)…और फिर रत्ना को भी बता देती है की उन्होंने राजू की सब शर्त मान ली है.. रत्ना काम्या से शर्त के बारे में पूछती है तो कहती है की उसे बाद में बता देगी.

शादी और सुहागरात…

कुछ दिन बाद पूरे धूम धाम से राजू और कुसुम की शादी मंदिर में हो जाती है. कुसुम भी इस शादी से खुश थी..क्यूंकि उस शायद एहसास था की राजू भी उसे वो ख़ुशी देगा जो वो अपनी बाकी बीवियों को देता था..

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शादी समाप्त होने के बाद सब लोग काम्या के घर आ जाते है और उस घर को पूरा अच्छे से सजाया जाता है…

घर आने के बाद राजू आरु को थोड़ा अकेले ले जाता है और उसको बाहों में लेते हुए कहता है…आज तो तुम नहीं बच पाओगी..

आरु: मतलब?

राजू: उसकी गांड दबाते हुए…अब तक तो तू मन करती आ रही है…लेकिन आज तेरी गांड लेकर ही रहूंगा..

आरु: धत..ऐसे कोई कहता है क्या?

राजू: क्यों…ऐसा नहीं तो फिर सब को बुला के कह देता हूँ..ठीक है?

आरु ये बात सुनके शर्मा जाती है और उसकी बाहों से अलग हो कर भाग जाती है…

वो कुसुम के पास जाती है और उसे भी बाहों में लेकर..

आरु: तू खुश तो है ना कुसुम?

कुसुम: शर्माते हुए… हाँ दीदी…ऐसा लगता है भगवान् को मुझ पर दया आ गयी है..अब तक मैं नरक में जी रही थी..

आरु: अब वो दिन गए..अब तो तू स्वर्ग का मजे ले..तू राजू को जितना खुश रखेगी..राजू तुम्हे उतना ही खुश रखेगा…तो अब ज़िन्दगी के मजे कर..और धीरे से उसके होंठ चूम लेती है..

कुसुम के लिए ये पहली बार था की किसी लड़की/औरत ने पहली बार उसे चूमा था..

आरु: अब तुम इसकी आदत दाल लो…सब एक ही घर में रहेंगे और एक ही बिस्तर पे सोयेंगे..तो एक दुसरे को भी खुश करते रहेंगे..समझी??

कुसुम शर्माते हुए…जी..

आरु कुसुम के कपडे के ऊपर से उसकी चूत पे हाथ रख कर धीरे से उसके कान में कहती है…तुमने यहाँ पे साफ़ कर लिया है ना….राजू को एकदम चिकना पसंद है…

कुसुम भी शर्माते हुए हाँ कहती है…

आरु: चलो…अब तुमको तैयारी करने का समय आ गया है..इतने में गौरी भी वहां आ जाती है और दोनों मिलकर कुसुम को अच्छे से तैयार करते है सुहागरात के लिए..

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सब को राजू की शर्त याद थी तो बाकी सब भी दुसरे कमरे में जाकर सज धज के तैयार हो जाते है…

राजू को पता था की आज सब से साथ सुहागरात मनाना है..तो रात तो कमरे में आने से पहले वो एक वायग्रा गोली खा लेता है…

राजू कमरे में चले जाता है तो वहां कोई नहीं दीखता…थोड़ी देर बाद सब लोग एकदम दुल्हन की तरह सज कर कमरे में आते है…सब को देख कर राजू के मुँह में भी लार टपकने लगता है…क्यूंकि सभी बहुत सुन्दर और सेक्सी लग रहे थे..

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आरु और गौरी कुसुम को पकड़ कर राजू के पास ले आती है..और कहती है की सब से पहले इससे सुहागरात मनाओ..

ऐसा कहते हुए कुसुम को राजू के पास छोड़ कर दोनों थोड़ा अलग हो जाते हैं और बाकी सब के पास चले जाते है जो वहीँ कमरे में थे..क्यूंकि राजू ने जो शर्त राखी थी..

राजू धीरे से कुसुम को अपने बाहों में लेता है और पूछता है..

राजू: कुसुम..तुम खुश तो हो ना?

कुसुम: हाँ…राजू: तो ख़ुशी का इज़हार करो…कुसुम को कुछ समझ में नहीं आता तो कुछ नहीं करती..

राजू उसका चेहरा पकड़ कर उसकी आँखों में देखते हुए अपने होंठ उसके होंठ के पास ले जाता है तो कुसुम समझ जाती है और राजू के होंठ चूम लेती है और देखते ही देखते दोनों एक गहरे चुम्बन में जुड़ जाते है..

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उन दोनों को देख कर बाकी भी उत्तेजित होने लग जाते है और सब को अपनी टांगों के बीच गीलापन महसूस होता है..

राजू फिर कुसुम को बिस्तर पे ले जाकर सुला देता है और उसी तरह चूमते हुए उसकी चुची दबाने लग जाता है…कुसुम की सिसकारी राजू के मुँह में ही डाब जाती है..

राजू फिर धीरे से कुसुम का ब्लाउज और ब्रा खोल देता है और वो ऊपर से नंगी हो जाती है..और उसके होंठों को छोड़ कर चुची पर टूट पड़ता है…एक को दबाते है तो दुसरे को मुँह में लेकर चूसता है..कुसुम भी अब थोड़ा मजे लेने लगती है और उसकी भी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंजने लगती है..

जहाँ राजू का मुँह अपना काम कर रहा था..तो वहीँ उसके हाथ भी अपना काम कर रहे थे…वो अपने हाथ नीचे ले जाकर उसकी साडी खोल देता है जिसका एहसास कुसुम को भी होता है..तो राजू की मदत करते हुए अपना साडी निकाल देती है..और फिर राजू उसकी पेटीकोट भी निकालने की कोशिश करता है तो कुसुम भी उसका साथ देते हुए अपनी गांड ऊपर उठाती है तो राजू उसकी पेटीकोट के साथ उसकी छोटी पैंटी भी निकल देता है और उसे पूरा नंगा कर देता है..

राजू नीचे जाता है तो देखता है की उसकी चूत एकदम पानी से भीगा हुआ है और उत्तेजना के मारे उसकी चूत से पानी टपक रहा है और एकदम चिकना और गीला लग रहा था..

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राजू से भी रहा नहीं जाता और उसकी चूत पे टूट पड़ता है और एकदम शिद्दत से चूसने लग जाता है…अब कुसुम भी एकदम उत्तेजित थी तो ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां लेते हुए राजू का सर अपनी चूत पे दबा देती है…

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७-८ मं तक राजू ऐसे ही उसकी चूत चूसने में लगा रहता है और कुसुम ना जाने कितने बार झाड़ जाती है…जिसकी गिनती उसे भी नहीं थी…कुसुम की ज़िन्दगी में ये पहली बार था की किसीने उसे इस तरह से खुश कर दिया था. (अजय ने उसे इस प्रकार की ख़ुशी कभी नहीं दी थी).

राजू भी उसका पूरा पानी पी जाता है और ऊपर आकर कुसुम को भी अपना पानी का स्वाद दिलाते है…एक गहरे किस के द्वारा.

राजू प्यार से..चलो..अब अपने छोटे दोस्त को भी खुश करो..

कुसुम को कुछ समझ नहीं आता तो राजू को सवालिया नज़र से देखती है..

राजू फिर पलट कर… इशारे से आरु को अपने पास बुलाता है तो वो भी अपनी गांड मटकाते हुए राजू के पास आती है..

आरु भी बड़ी बेताबी से राजू के पास आती है और कुसुम से कहती है..छोटा दोस्त याने ये..और ऐसा कहते हुए राजू का लुंड पकड़ लेती है..(राजू भी बीच में ही कब का अपने कपडे निकल कर नंगा हो जाता है).वियाग्रा का असर अब राजू के लुंड पे भी दिखने लगता है…

आरु उसके लुंड को देख कर…क्या बात है..ये जनाब तो आज कुछ ज़्यादा ही बड़ा लग रहा है..

राजू: इसको खुश करो और कुसुम को भी बता दो की कैसे खुश करते है..और फिर देखना..ये और भी बड़ा लगेगा…

राजू का इतना कहना ही था की आरु उसके लुंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगती है और कुसुम की तरफ देख कर…राजू ये करने को कह रहा था..और फिर चूसने लग जाती है..

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थोड़ी देर ऐसे ही चूसने के बाद कुसुम को भी चूसने को बोलती है तो कुसुम भी थोड़ा झिझकते हुए और शर्माते हुए उसका लुंड अपने मुँह में ले लेती है…और फिर आरु अपना हाथ उसके सर के पीछे रख कर सर को आगे बढ़ा देती है तो राजू का पूरा लुंड कुसुम के मुँह में चले जाता है….और फिर मस्त लुंड चूसै में लग जाती है कुसुम भी…

अब राजू का लुंड भी दोनों के चूसै और थूक से सना हुआ एकदम कड़क लम्बा और चिकना हो जाता है..

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थोड़ी देर बाद राजू कुसुम से..चलो..अब जन्नत की सैर के लिए तैयार हो जाओ…कुसुम भी समझ जाती है और कहती है..थोड़ा धीरे से करना….

राजू: चिंता मत करो..एकदम प्यार से करूंगा…

राजू भी आरु को इशारा करता है तो वो भी कुसुम के बगल में आ जाती है और उससे चिकनी चुपड़ी बातें करते हुए उसका ध्यान भटकाती है..

राजू भी अब देर नहीं करता और अपने तने हुए लुंड को कुसुम की बंद पड़ी चूत के मुँह के पास रख कर धीरे से अंदर डालने की कोशिश करता है…लेकिन चूत एकदम टाइट होने की वजह से उसका लुंड फिसल कर बहार ही रह जाता है…राजू ऐसे हे २-३ बार तरय करता है लेकिन अंदर नहीं दाल पाटा…

राजू फिर सोचता है..ऐसे नहीं होगा..

तो फिर वो इस बार ज़बरदस्त तरीके से धक्का मारता है तो उसका आधा लुंड कुसुम की चूत को चीरता हुआ अंदर चले जाता है..कुसुम का ध्यान भटका हुआ था तो उसे पता नहीं चलता..लेकिन इस ज़बरदस्त प्रहार से ज़ोर से चिल्लाती hai..

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Aahmn......ohh...uhhfhh....aaahmmn...aamm...hmmn...ommm...

Umm.....aahhmmmm...ummm....ahh...uhh....Raaaajjjjjjjjjuuuuuuuuuuuuuuuuuu…

Aaru भी समझ जाती है की इसका काम भी तमाम हो गया है..तो उसके सर को पकड़ कर..चुप हो जाओ कुसुम…जो दर्द होना था..हो गया..अब तो मजे का समय आ गया है..

राजू को पता था की उसका सिर्फ आधा ही लुंड गया है…

तो फिर से उसके लुंड को बहार निकल कर ऐसे ही फिर से एक और धक्का मारता है और इस बार उसका पूरा लुंड कुसुम की चूत की जड़ तक चला जाता है…

कुसुम की आँखों से अब आंसू आने लग जाते है..आरु भी उसको चुप करते हुए उसके होंठ चूम लेती है और वहीँ गौरी भी उसके पास आकर उसे समझाती है की बेटा…थोड़ा दर्द सेहन कर लो..ये हर लड़की को करना पड़ता है…

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राजू भी ऐसे ही थोड़ी देर के लिए रुक जाता है और जब कुसुम का रोना थोड़ा काम होता है तो फिर धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू करता है..थोड़ी देर बाद कुसुम को भी राहत मिलती है और उसे भी अब मजा आने लगता है..और फिर शुरू होता है चुदाई का सिलसिला जो आधे घंटे तक चलता है और उसमें ना जाने कितनी बार कुसुम झाड़ जाती है…

राजू पे वायग्रा का असर था..तो वो इतनी जल्दी झाड़ता नहीं..

आरु उसे देख के कहती है…आधे घंटे से लगे हो..लेकिन तुम्हारा लुंड तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है..

राजू: आज नहीं रुकेगा ये…मैंने पहले ही कहा था ना..तुम सब के साथ सुहागरात मनाऊँगा…

जहाँ ये तीनो घमासान चुदाई में लगे हुए थे..तो वहीँ बाकी भी एक दुसरे को शांत करने में लगे हुए थे….सब एक दुसरे की चूत को चूस चूस कर शांत कर रहे थे..

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कुसुम भी बेचारी थक जाती है और आहें भरने लगती है…

राजू को भी एहसास होता है और आरु से कहता है की अब उसकी बारी है…और उसे घोड़ी बनने को कहता है..

आरु भी एक आज्ञाकारी बीवी की तरह उसके सामने घोड़ी बन जाती है और फिर राजू झुक कर उसकी गांड चाटने लग जाता है..

आरु: क्या कर रहे हो…गन्दी जगह है..

राजू: प्यार और सेक्स में कोई गन्दा नहीं होता आरु…देखो..थोड़ी देर में तुम ही मेरे लुंड पे उछलोगी…और फिर से उसकी गांड चाट के अच्छे से गीला कर देता है

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राजू सुधा को बुला लेता है और उसे इशारा करता है तो वो समझ जाती है और आरु के सामने लेट जाती हैं और उसका सर अपनी चूत में दबा देती है…

आरु भी बड़ी शिद्दत से सुधा की चूत चूसने में लग जाती है और मौका देख कर राजू अपना लुंड आरु की गांड में दाल देता है..आरु को इसका एहसास था…

लेकिन सुधा उसका सर पकड़ कर अपनी चूत पे दबा देती है और फिर राजू भी ज़बरदस्त झटके से उसका पूरा लुंड आरु की गांड में उतार देता है…

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आरु भी एकदम ज़ोर से चीक पड़ती हैं…

Aahmn......ohh...uhhfhh....aaahmmn...aamm...hmmn...ommm...

Umm.....aahhmmmm...ummm....ahh...uhh....Raaaajjjjjjjjjuuuuuuuuuuuuuuuuuu…

Aaru को भी अब बहुत दर्द हो रहा था..लेकिन राजू जानता था की ये दर्द कुछ ही समय के लिए रहेगा..वो भी थोड़ी देर ऐसे ही रहता है और जब आरु थोड़ा शांत हो जाती है तो फिरसे सुधा उठ कर आरु को चूमते हुए…बेटा…सब ठीक हो जाएगा…

राजू को भी लगता है की आरु शांत है तो फिर से वो उसकी गांड मारने लग जाता है और फिर से लग जाता है…५-१० मं में अब वो भी झड़ने के करीब आ जाता है और आखिर में वो भी चीक कर आरु की गांड में ही झाड़ जाता है और वी भी बगल में लुढ़क कर लेट जाता है और गहरी सांसें लेने लग जाता है..

आरु भी धीरे से उठ कर अपना सर राजू के कंधे पे रख कर…आखिर तुमने अपनी मनमानी कर ही ली (राजू से).राजू: कैसे नहीं करता जान..तुम्हारी गांड ही इतनी प्यारी है…एक ना एक दिन तो लेना ही था..और इससे अच्छा दिन क्या हो सकता है..

५-min ऐसे ही लेते रहने के बाद जब सब थोड़ा थक जाते है तो फिर से राजू के लुंड में जान आने लगती है (वियाग्रा की वजह से). उसके उठते हुए लुंड को देख कर संध्या कहती है..क्यों रे…एक घंटे से तुमने दोनों को बजा दिया है..फिर भी यह झुकने का नाम नहीं ले रहा है..

राजू: नहीं जान..आज यह झुकेगा नहीं…बल्कि सबको झुकायेगा और रुलाएगा..और ऐसा कहते हुए है देता है तो बाकी सब भी है देते है..

राजू फिर गौरी को भी इशारा करता है तो वो भी शर्माते हुए राजू के पास आ जाती है और इस बार संध्या और गौरी राजू के लुंड को मुँह में लेकर फिर से उसे तना देते है…

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राजू इस बार गौरी को लेता है और इस बार सीधा उसकी गांड मारने लग जाता है.. गौरी थोड़ा ना नुकुर करती है लेकिन राजू कहाँ मानने वाला था... और संध्या भी उसे मदत करती है…गौरी भी मजे से गांड मरवाती है…साथ ही संध्या की भी गांड मारता है…

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इसी तरह उस रात राजू सब की गांड मारता है (रत्ना को छोड़ कर)..क्यूंकि रत्ना उसे मना करती है और राजू कभी भी रत्ना की बात मना नहीं करता था…

उस रात उस घर में बहुत घमासान चुदाई चलता है और सब की चूत और गांड खुल जाते है…

आखिर में सुबह सब लोग थक के सो जाते है…और दोपहर को सब उठते है तो सब लंगड़ाते हुए चलते है…सब लोग एक दुसरे को देख कर शर्मा जाते है..लेकिन शाम तक सब नार्मल हो जाता है..

२ दिन बाद जब काम्य सब से कहती है की वो ये गाँव छोड़ के चले जाएंगे तो रत्ना राजू और सब मन करते है और कहते है की वो दोनों भी उनके साथ ही रहे…

अब कुसुम भी राजू की बीवी बन गयी है तो एक तरह से वो (काम्य और माला) भी उनके रिश्तेदार हो गए है...आखिर में दोनों मान जाते है और उन्ही के साथ यहीं गाँव में रहना का निर्णय ले लेते है..लेकिन इस शर्त के साथ की सब लोग साथ रहेंगे..लेकिन इस बीच काम्य ठाकुर से सब नौकर को निकल देती है…अब उन्हें उनकी ज़रुरत नहीं पड़ती…अब घर में सिर्फ यही लोग रहते है…

ऐसे ही दिन ख़ुशी से बीत-ते है…

जहाँ राजू सब को खुश रखता है तो उसकी बीवियां भी उसको खुश रखतीं है..(और साथ में माला काम्य और गौरी भी)…

२ महीने बाद रानी एक छोटी लड़की को जनम देती है…इस प्यारी सी गुड़िया को देख कर सब लोग बहुत खुश हो जाते है…

तीसरे महीने..इस घर में खुशियों की भरमार लग जाती है…काम्य माला सुधा और संध्या भी खुश खबर देते है की वो भी प्रेग्नेंट हो गयी है..

आरु और कुसुम इतनी जल्दी माँ नहीं बनना चाहती थी..अगले एक साल के अंदर काम्य और सुधा को लड़का और माला और संध्या को लड़की पैदा होती है..रत्ना भी अपने पोते और पोती को पा कर एकदम खुश हो जाती है..

अब घर में बच्चों की किलकारी गूंजने लगती है और घर एकदम हरा भरा रहता है..

२ साल बाद आरु और कुसुम भी प्रेग्नेंट हो जाते है….और वक़्त आने पर दोनों को जुड़वे बच्चे पैदा होते है…आरु को लड़के और कुसुम को लडकियां…राजू और रत्ना को खुशियों का कोई ठिकाना नहीं था…

जुड़वाँ बच्चों के पैदा होने के ६ महीने बाद सुधा और संध्या फिर से प्रेग्नेंट हो जाती हैं और उन्हें भी समय पे बेटे पैदा होते है (सुधा और संध्या को पहला बच्चा पैदा होने के बाद वो राजू से कहते है की उन्हें एक और बच्चा चाहिए…)

अब उनका संसार पूरा हो गया था….सब लोग बहुत खुश थे…और अच्छे से ज़िन्दगी जीते हैजहां पे सिर्फ प्यार ही प्यार था..और नफरत की कोई जगह नहीं थी…

थे एन्ड…
 
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