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अपडेट 47: Ratna…akhir राजू की हो hi गयी..
ठाकुर के मौत के कुछ दिनों बाद सब थोड़ा नार्मल हो जाता है और सब अपने काम में बिजी रहने लग जाते है..
अब राजू को कोई फ़िक्र नहीं tha..aur वह भी मजे में अपने दिन गुज़ारने लगता है..
दिन में खेत में जाकर काम करता है और रात को घर आकर अपनी तीनो बीवियों से ढेर सारा प्यार करता hai…jismein तीनो भी बहुत संतुठ रहती है और उनका चेहरा हमेशा खिला खिला रहता है..
वहीँ रत्न भी आग में जल रही होती hai…use पता था की रोज़ रात को राजू अपनी बीवियों के साथ मजे कर रहा है (या फिर कहे की रोज़ रात को उनको अच्छे से छोड़ता tha…)..kyunki अब वह सब उसकी बीवियां thi..aur घर में कोई “राज़” बाकी नहीं tha..to उनके “प्रेम मिलान” की आवाज़ रत्न को भी सुनाई देती thi..aur रत्न अपने आपको ऊँगली कर के शांत करती थी..
कभी कबार माला और काम्य भी राजू को अपने घर बुला कर उससे छुड़वा कर वह भी शांत हो जाती थी…
एक हफ्ते बाद…
ऐसे hi एक हफ्ते baad…Sudha किचन में काम कर रही होती है तो रत्न उसे पास आती hai…uske चेहरे पे थोड़ी झिझक thi..jo सुधा देख कर पहचान लेती hai..aur रत्न से पूछती है..
सुधा: didi..kya हुआ? कुछ उलझन है क्या? आपके चेहरे पे साफ़ दिख रहा है..
रत्न: han..waisa hi कुछ hai…samajh में नहीं आ रहा है..
सुधा: क्या हुआ? मुझे bataao..shayad मैं तुम्हारी मदत कर सकती हूँ..
रत्न: haan..tu hi मेरी मदत कर सकती hai…isiliye तुझे यहाँ देख कर आयी हूँ..
सुधा: बोलो..
रत्न; थोड़ा झिझकते hue…woh क्या है naa..main सोच रही थी की आज रात को मैं राजू के पास जाऊं…
Sudha:matlab?
रत्न: समझना…
सुधा: अपनी आँखें थोड़ा बड़ा करती hui..jab उसे रत्न की बात समझ में आती है to…arre…yeh तो अच्छी बात है naa…waise भी तूने जो शर्त रखा था राजू के liye..usne तो पूरा कर दिया hai…ab ठाकुर भी नहीं raha..aur जीजाजी और रवि का बदला भी पूरा हो गया है..
रत्न: haan..main भी एहि सोच रही thi..jab तक राजू ने अपना वादा पूरा नहीं kiya..mujhse कभी ज़बरदस्ती नहीं kiya..aur हर बार मेरी बात मानता tha…mujhe भी अब उससे शादी कर के उसकी बाहों में जाने का मन है…
सुधा: रत्न को अपनी बाहों में lekar..didi…subah सुबह इतनी खुश खबर दी hai…aur उसका चेहरा पकड़ कर हलके से उसके होंठों पे किश करती है..
सुधा: फिर तो आज मैं आपको एकदम दुल्हन की तरह सजाऊँगी…
रत्न: dhat..kehte हुए सुधा को हल्का सा चपत मारती है और शर्मा जाती है..
सुधा: यह बात मैं मेरी दोनों सौतन को भी बताती हूँ…
रत्न: लेकिन राजू को अभी मत बताना…
सुधा जल्दी से अपना काम ख़तम कर के यह बात उन दोनों को भी बताती है तो दोनों भी बहुत खुश हो जाते है..
राजू को कुछ पता नहीं चलता और वह अपने काम से सुबह hi खेत की तरफ निकल जाता है..
घर में सुबह सब अपना काम कर के सब रत्न के कमरे में जाते है जहाँ रत्न जस्ट नाहा कर आयी thi..aur सिर्फ एक टॉवल पहन कर अपने बार सवार रही थी..
वह तीनो कमरे में आते है तो संध्या पीछे से रत्न को देख कर कहती है आज तो राजू काम से गया…
सिर्फ टॉवल में रत्न बहुत hi सेक्सी लग रही thi…thoda से पीछे से उठा हुआ gand…towel जो सिर्फ जाँघों तक hi tha..ekdum चिकनी और बलखाती jaanghen..peeche से भी एकदम कातिल लग रही थी रत्न..
ारु रत्न के पीछे आकर धीरे से उसके कान mein…aap “नीचे” भी साफ़ और चिकना रखा है naa…Raju को चिकना hi पसंद hai..aur प्यार से ारु रत्न की गाल चूम लेती है..
सुधा रत्न से: chalo..ab यहाँ (बिस्तर पे) आ jaao..hum आपको सजायेंगे..
संध्या पहले रत्न को मेहँदी लगाती hai..haath और पाँव पे भी…
जब मेहँदी लगाना ख़तम हो जाता है तो सुधा को मस्ती छूती है और कहती है
सुधा: दीदी (रत्न) राजू की सबसे चाहती hai…to फिर कुछ स्पेशल हो जाए…
सुधा जब यह बात कहती है तो तीनो उसकी तरफ देखते hai…to सुधा कहती hai…special याने सच में special…aur ऐसा कहते हुए रत्न को बिस्तर पे सुला कर उसके बदन से कपडे निकल देती है…
रत्न शर्मा जाती है और कहती ha..kya कर रही हो chhotti…kuch तो शर्म कर..
सुधा: Didi..ab क्यों sharam..aaj आप राजू से शादी करने वाली हो और हम सब की सबसे बड़ी sautan..aisa कहते हुए सुधा है देती है तो ारु और संध्या भी है देते hai…unki हसी देख कर रत्न शर्म से एकदम लाल हो जाती है…
सुधा: और वैसे bhi…aapke पास जो hai..wahi हमारे पास भी hai…aur ऐसे कहते हुए सुधा रत्न पे झुक कर उसकी चूचियां दबा देती hai…aur बेशरम हो कर अपना हाथ उसकी छूट पे रख देती है और कहती hai..yeh भी…
फिर सुधा मेहँदी लेकर रत्न की पैरों के बीच आकर छूट के ऊपर कुछ डिज़ाइन बनाती hai..jismein रत्न को गुदगुदी होती है..
रत्न: क्या कर रही है तू?
सुधा: थोड़ा रुको और सबर करो…
सुधा फिर 10-15 मं बाद उठती है और अपने डिज़ाइन को देख कर कहती hai…ab सही है…
जब वह रत्न के ऊपर से उठती है तो सामने का डिज़ाइन ारु और संध्या भी देख लेते है और अपनी आँखें बड़ी कर ke…ekdum सही बनाया है Sudha…dono एक साथ कहते है..
रत्न को कुछ समझ नहीं आता तो वैसे hi लेते हुए ारु से पूछती है तो वह उठ कर एक आइना लाती है और उसको तिरछी करके रत्न को दिखाती है..
रत्न जब वह पढ़ती है तो उसका मुँह भी खुला रह जाता hai…kyunki सुधा ने बड़े प्यार और आहिस्ता से एक लव सिग्न (विथ ा दोनवार्ड एरो) बना कर लिखा tha..…”Raju की अमानत”…
रत्न उसे देख कर एकदम शर्मा जाती है और शर्म के मारे अपना चेहरा देख लेती hai..is पल का तीनो मजे लेते है और जब मेहँदी जब सूख जाता है तो एकदम लाल हो कर क़यामत लग रहा था…
उसको देख कर सुधा से रहा नहीं जाता और झुक कर वहां पर हल्का सा चूम लेती hai..to पाती है की रत्न एकदम गरम हो गयी है और उसकी छूट पानी बहा रही है..
सुधा: वाह didi..abhi से पानी निकल रही हो…
रत्न: क्या karoon..tum लोग जो सब मुझे परेशान कर रहे ho..aur है देती है..
ारु और संध्या भी उस डिज़ाइन को देख कर एकदम मंत्रमुग्ध हो जाते है और वह दोनों भी रत्न को वहां पर चूम लेते है..
रत्न के बदन को अच्छे से साफ़ कर के पहले एकदम ट्रांसपेरेंट ब्रा और पंतय पहनाते है जिसमें से रत्न की आधी चुकी एकदम बहार hi रहती है और पंतय भी एकदम छोटी हो उसकी सिर्फ छूट को hi देखती है..
और फिर लाल कलर का लेहंगा चोली पहना कर रत्न को किसी पारी की तरह तैयार करती hai..aur उसमें रत्न भी एकदम सुन्दर दिखती है और क़यामत धा रही थी..
संध्या रत्न को सजा कर धीरे से उसके कान में कहती hai…Maaji…jab आप राजू के पास जाओगी तो एकदम बेशरम बन jaana…aur फिर देखना कितना मजा aayega….yeh सब सोच कर तो मैं अभी से गीली हो रही हूँ maaji…aur ऐसा कहते हुए संध्या रत्न का हाथ पकड़ कर अपने छूट पे रख के दबा देती है…
रत्न: dhat..besharam…
संध्या: बेशरम hi तो बनना है आपको…
शाम को…
राजू शाम को अपना काम कर के घर आता है तो देखता hi की आज घर कुछ अलग hi सजा हुआ है..
राजू ारु से पूछता है तो ारु कुछ नहीं कहती और बात को ताल देती hai..lekin उसके चेहरे पे आज एक अलग hi चमक tha…yehi हाल सुधा और संध्या के साथ भी tha…Raju को कुछ समझ नहीं aata..lekin वह इस बात पे ज़्यादा ध्यान नहीं देता..
रात को खाने के वक़्त रत्न नहीं आती तो राजू पूछता है तो संध्या कहती है की माजी आज दिन भर काम करके थक गयी hai…isiliye आज वह अपने कमरे में hi है..
राजू: लेकिन माँ तो रोज़ काम करती है…
ारु: haan..lekin माजी ने आज कुछ ज़्यादा hi काम किया hai…dekh नहीं रहे ho..ghar आज कितना प्यारा और सजा हुआ लग रहा है..
राजू: haan…maine भी देखा hai..lekin तुम सब भी थी naa…maa को इतना ज़्यादा काम क्यों करने दिया..
ारु: हमने (बहाना बनाते हुए) मन किया था माजी ko..lekin वह हमारी बात नहीं मानी और खुद भी काम करती rahi…isiliye आज वह बहुत थक गयी है…
वहीँ कमरे में बैठे दोनों रत्न और सुधा उनकी बातें सुन रही थी और है भी रही थी..
सुधा: ारु ने राजू को अच्छा बेवक़ूफ़ बनाया है..
रत्न: धीरे से उस चपत लगाते hue..chup kar..kya बोल रही hai…woh तेरा पति भी है..
सुधा भी मजाक mein…Ratna की कमर पे हलके से चिमटी लेते hue…woh कुछ देर बाद आपका भी पति बनने वाला hai…yeh बात सुनकर रत्न भी शर्मा जाती है..
सुधा: देखो (प्यार से) हमारी gudiya..yaa फिर दुल्हन ko..kaise शर्मा रही है…
राजू फिर खाना खा कर किचन में देखता है की संध्या वहां काम कर के साफ़ सफाई कर रही है..
राजू किचन में उसके पीछे जाकर उसकी चुकी दबाते hue…jaldi करो ना…
संध्या: kyun..kya हुआ?
राजू: बताओं kya…aur ऐसा कहते हुए संध्या को पलटा कर उसके होंटो पे गहरा किश करते hue..tum तो दिन बी दिन एकदम गदरायी हुई जा रही हो..
संध्या: haan…kyun नहीं hongi…roj जो तुम मुझपे इतनी म्हणत जो करते ho…gadraaongi ना..
राजू: haan..aur ऐसा कहते हुए संध्या की गांड को एक हाथ से दबाता है तो दुसरे हाथ से उसकी चुकी मसल देता है..
Sandhya:aaah…karte hue…isiliye तो अब यह इतने बड़े हो गए hai..aajkal मेरी ब्रा और पंतय भी छोटी लग रही है..
राजू: कोई nahi..nayi ब्रा और पंतय ले lo…infact मैं तो एहि कहूंगा की उनको लेने की ज़रुरत hi नहीं hai…ghar में बिना ब्रा और पंतय के hi rehna…mujhe फिर तुम्हारे कपडे खोलने में आसानी hogi…aur ऐसा कहते हुए संध्या को आँख मार देता है..
संध्या: चुप karo…bahut बदमाश हो रहे हो…
राजू: ठीक hai..main कमरे में जा रहा hoon…jaldi आ जाओ…
संध्या राजू से अलग हो कर धीरे से मुस्कुराते हुए (क्यूंकि उसे पता था की आज रत्न उसके पास जाने वाली है) हाँ कहती है और राजू अपने कमरे में चला जाता है..
रात को राजू के कमरे में…
राजू अपने बिस्तर पे सोये हुए संध्या और ारु का इंतज़ार कर रहा होता hai…aur अपने मोबाइल पे कुछ देख रहा होता है…
कुछ देर बाद सुधा कमरे में आती hai..dheere से चल कर..
राजू उसे देखता है तो कहता hai..kahan thi…shaam से दिखी नहीं…
Sudha:tumhaare लिए hi काम कर रही थी…
राजू: मतलब?
इतने में संध्या भी कमरे में आती hai…lekin इस बार उसके साथ रत्न भी thi…jo एक शादी के जोड़े पहने हुए एकदम कमाल की लग रही थी…
राजू रत्न को देख कर एकदम मंत्रमुग्ध हो जाता hai…aur आँखें फाड़े रत्न को देखता रहता है और उसे पता भी नहीं चलता की कब उसके हाथ से मोबाइल भी नीचे गिर जाता है…
राजू: अपनी आँखें मसल kar…kya मैं कोई सपना तो नहीं देख रहा हूँ??
सुधा: सपना nahi..aur एकदम सच hai…bolo…mera (हमारा) काम कैसा है?
रत्न भी राजू को देख कर एकदम शर्मा जाती hai…aur संध्या भी धीरे से रत्न को कमरे में ला कर…
सुधा: ले लो अपनी अमानत..
राजू: रत्न को देखते hue…kya माँ?? रत्न भी धीरे से अपना सर उठा कर हाँ कहती है…
राजू भी उठ कर उसके पास जाता है और रत्न को बाहों में लेने की कोशिश करता hai..lekin सुधा कहती है..
सुधा: ऐसे nahi..abhi nahi…pehle दीदी से शादी करो और उसे हमारी सौतन बनाओ…
राजू: shaadi.aur abhi…kahan? अभी कहाँ से मंदिर और पुजारी को बुलाएंगे..
सुधा: चिंता मत karo..humne सब तैयारी कर ली hai…aur फिर दोनों को घर में बने एक छोटे मंदिर में ले जाते है
सुधा कहती hai..logon को जान्ने की ज़रुरत नहीं hai..bus तुम भगवान् को मान कर दीदी की मांग भर do..yehi काफी है..
लेकिन पहले तुम नाहा कर जल्दी से नए कपडे पेहेन लो..
राजू को कुछ समझ नहीं आ रहा tha…lekin वह फिर जल्दी से बाथरूम भाग जाता है और नाहा कर नए कपडे पहन कर आता है..
राजू को बाथरूम में भागे हे देख कर संध्या उसे चिढ़ाती hai…dekho कितना उतावला हो रहा है और सब है देते है..
थोड़ी देर बाद राजू नए कपडे पहन कर घर में बने मंदिर में आता है और भगवान् को साक्षी मान कर सब के सामने रत्न की मांग भर देता है और उससे शादी कर लेता hai..aur रत्न को बाहों में लेकर उसे देखते हुए प्यार से उसके माथे को चूम लेता है..
राजू: अब क्या??
Aaru:kyun..bahut जल्दी पड़ी hai….apne कमरे में जाओ और 10 मं बाद माजी के कमरे में आना..
राजू बिना कुछ कहे कमरे में चले जाता है और 10-15 मं वेट करता hai…use यह 10-15 मं बरसों के माफ़िक़ लगते है..
15 मं बाद ारु आती है और राजू के होंठों को चूम कर कहती hai..jaao ..आज माजी की बारी hai…aur धीरे से राजू के कान mein…tumhaari रतनी की…
राजू भी ख़ुशी से ारु को चूम kar…tum सब ने तो मुझे इतना ख़ुशी दी है..
ारु: अब ज़्यादा कुछ नहीं karo..aur जाओ…
राजू रत्न के कमरे में जाता है तो देखता है की रत्न अपना घूंघट ओढ़े हुए बिस्तर पे बैठी राजू का इंतज़ार कर रही होती है..
लेकिन कमरे में जाने से पहले सुधा उसको बहार पकड़ के राजू को अच्छे से किश कर के उसके कान में कहती hai…andar तुम्हारे लिए बहुत “कीमती तोहफा” hai…dekh कर कल बताना की तुम्हे तोहफा कैसे लगा..
राजू अंदर जाता है तो कमरा एकदम फूलों से सजा हुआ tha…jaise की सुहागरात में कमरे को सजाया जाता hai..aur रत्न बिस्तर के बीच में अपना घूंघट दाल के बैठी हुई थी..
राजू कमरे को देख कर एकदम खुश हो जाता है और धीरे से रत्न के पास आकर बैठ जाता है..
राजू: आज मैं बहुत खुश हूँ maa…tumne जो मुझे इतना अच्छा तोहफा दिया hai..aur धीरे से रत्न का घूंघट उठा देता hai…aur देखता है की रत्न एकदम सुन्दर लग रही थी..
रत्न: यह तो मुझे करना hi tha…tumne मेरी हर बात और शर्त मानी है और उसे पूरा भी किया है..
राजू: वह तो मुझे करना hi था..
रत्न: जब तुमने अपनी शर्त पूरा किया है तो मैं कैसे अपनी बात से मुकर सकती हूँ..
राजू: maa…aur ऐसा कहते हुए राजू रत्न को अपनी बाहों में ले लेता hai…aur फिर राजू रत्न का सर पकड़ कर उसकी आँखों में गहराई से देखता है…
रत्न भी उसकी आँखों में डेक्टि है और पाती है की राजू की आँखों में उसके लिए बहुत प्यार tha…Ratna भी राजू को देखते हुए आँखों से इशारा करती है तो दोनों एक दुसरे के नज़दीक चले आता है और देखते hi देखते राजू अपने होंठ रत्न के होंठ से जोड़ लेता है और प्यार से चूमता है रत्न ko…Ratna भी उसका साथ देती है और देखते hi देखते दोनों का चुम्बन एकदम गहरा हो जाता है और दोनों एक दुसरे की जुबां को चूसने लग जाते hai..dono की सांसें उखाड़ने लगती है…
रत्न: थोड़ी देर baad…Raju..mujhe अपने प्यार में समा le…main भी बहुत तरसी हूँ तेरे प्यार के liye…mujhe भी वह ख़ुशी दे जो तू अपनी बाकी बीवियों को देता है..
राजू: हाँ maa…tum तो मेरी जान ho…tumhe अपनी जी जान से भी ज़्यादा प्यार करता hoon…aur तुम्हे इतने प्यार में डूबा दूंगा की कभी बहार नहीं आना चाहोगी…
और ऐसा कहते हुए राजू फिर से रत्न को गहरा चुम्बन करता है और दोनों फिर से एक दुसरे के लार को जातक लेते है..
राजू रत्न को किश करते hue…maa…Sudha कह रही थी की मेरे लिए कमरे में एक तोहफा hai…mujhe तो दिख नहीं रहा है…
रत्न: मिल जाएगा मेरे राजू को..
राजू फिर धीरे से रत्न की साडी निकाल देता है और रत्न की चुकी को दबाता है जो की उसके ब्लाउज से बहार निकलने को बेताब थे…
रत्न: हाँ beta…aur ज़ोर से dabaao..aur उसका पूरा रास निचोड़ लो..
राजू: हाँ maa….ekdum रास से भरा हुआ hai..aur ऐसा कहते हुए राजू अपना मुँह उसकी चूचियों की घाट में घुसा देता है और हाथ से दबाते हुए चूमता रहता hai…aur अपना हाथ पीछे ले जाकर ब्लाउज की डोरी खोल देता है…
राजू अपना मुँह उठा के रत्न की आँखों में देखते हुए ब्लाउज निकल देता है और जब नज़र नीचे करता है तो उसकी जुबां से लार टपकने लगता hai…kyunki रत्न की आधे से ज़्यादा चुकी उसकी ब्रा से बहार thi…Bra भी बहुत hi सेक्सी tha….Raju फिर से उसकी चुकी दबाते हुए इस बार उसके निप्पल को भी अपनी उँगलियों से दबाता है तो रत्न के मुँह से aah..aahh…nikal जाती है..
रत्न: थोड़ा धीरे से dabaana…kahin भाग नहीं जा रहे है…
राजू: kya..kahan भाग नहीं रहे है..
रत्न: वही जो तेरे हाथ में है..
राजू: क्या?
रत्न: पता नहीं…
राजू: तुमको बाकी तीनो ने तो बताया होगा..
रत्न: क्या?
राजू: यही की मेरे सामने शर्माना नहीं..
रत्न: हाँ..
राजू: तो क्या है मेरे हाथ में..
रत्न: तू मानेगा nahi…to sun….tere हाथ में मेरे चुकी और निप्पल्स hai..dono को धीरे से दबा…
राजू: यह हुई ना baat…aur फिर से रत्न को चूम kar..aise hi खुल कर मजे लो maa..tabhi मुझे और तुम्हे भी मजा आएगा..
और राजू फिर से झुक कर इस बार अपने दांत से उसकी निप्पल को फिर से kaat-ta है तो रत्न फिर से aah…kar के आहें भर्ती है…
इस बार राजू उसकी ब्रा भी निकल देता है और फिर से उसकी चूचियों पे टूट पड़ता है और 10 मं तक बारी बारी से दोनों को चूस के लाल कर देता है और 1-2 जगह पे लव बिट्स भी देता है..
राजू के ऐसा करने से रत्न से भी रहा नहीं जाता और हु भी बहुत कामातुर हो जाती है और उसकी छूट एकदम गीली हो जाती है और रास बहाने लगती है..
राजू रत्न की चुकी चूसते हुए रत्न ज़ोर से ाँहें भर्ती है और पहली बार झाड़ जाती है…
राजू: क्या हुआ? अच्छा नहीं लग रहा है क्या?
रत्न: तू बहुत बदमाश हो गया hai..main तो ऐसे hi झाड़ gayi…aur शर्मा के राजू के सीने में अपना सर छुपा लेती है..
राजू: maa..bataao naa..mera तोहफा कहाँ है?
रत्न: मिल jaayega…dekhte जाओ…
राजू फिर रत्न की साडी भी उतार देता है और साथ में उसका पेटीकोट भी निकल कर फेंकता है…
रत्न अब सिर्फ एक छोटी से पंतय में hi रह जाती है और जब राजू अपनी नज़र नीचे करता है तो उसे वह मेहँदी का डिज़ाइन (“राजू की अमानत”) नज़र आता है…
राजू उसे देख kar….kya बात hai..yehi मेरा तोहफा है क्या?
रत्न: haan…tumhe पसंद आया?
राजू: pasand….iske लिए तो मैं नरक भी जाने के लिए तैयार हूँ..
रत्न: तुरंत उसके मुँह पे हाथ रख kar…aise अच्छे मौके पे ऐसे गन्दी बातें नहीं करते..
राजू रत्न का हाथ को मुँह में लेकर चूसते हुए हु फिर से उस डिज़ाइन को देखते रहता hai..aur फिर झुक कर उसकी नाभि को चूमते हुए उस डिज़ाइन को भी चूमता है और कहता hai..haan…Sudha भी एहि कह रही thi..ab से यह सच में मेरी hi अमानत है और उसको चूमते हुए रत्न की पंतय भी निकल देता है और रत्न को पूरा नंगा कर के फिर उसकी रास से भरी हुई छूट को देख कर एकदम टूट पड़ता है और ऊपर से नीच तक उसकी छूट को chaat-ta है..
रत्न भी ाँहें भर्ती हुई सिसकारियां लेती है और अपना हाथ राजू के सर के ऊपर रख कर उसे दबा देती है..
रत्न: haan..aise hi चाट मेरी छूट ko..bahut परेशान किया है isne..aaj इसकी पूरी कसार निकल de…aur ऐसे hi कहते हुए बक्ति रहती है जब की राजू पूरी शिद्दत से रत्न की छूट चाटने में लगा रहता है..
देखते hi देखते रत्न फिर से अपना पानी निकल कर झाड़ जाती है और राजू भी बड़े मगन से उसका पूरा पानी पी जाता है..
1 मं बाद राजू रत्न की तरफ देखते हुए उसके होंठों पे ज़ुबार फेरते hue..bahut मीठा पानी है तुम्हारा maa..aur उसके ऊपर आकर रत्न के होंठ चूम लेते है और कहता hai..tum भी अपना पानी टास्ते करो…
5 मं बाद थोड़ी सांसें संभालने के बाद राजू रत्न का हाथ पकड़ कर उसके लुंड पे रक् देता है जो की अब तक रोड की तरह पूरा तन गया था…
राजू: देखो maa..tumhaare प्यार के लिए मेरे यह लुंड कितना तड़प रहा है..
अब रत्न भी थोड़ा खुल जाती है और कहती hai…main हूँ naa..pyaar करने के liye..aur फिर राजू के कपडे निकल कर उसे भी पूरा नंगा कर देती hai..aur उसे देखते hue..yeh तो बहुत लम्बा और मोटा है..
राजू: लम्बा और मोटा hai..tabhi तो यह मज़ा भी उतना देता है और फिर प्यार से रत्न का सर पकड़ के उसके लुंड भी झुका देता है और पहले रत्न धीरे से उसके टोपे पे हल्का से चूमती है और फिर धीरे धीरे उसका लुंड मुँह में लेने लगती hai…aur देखते hi देखते राजू का पूरा लुंड मुँह में ले लेती है और अंदर बहार करने लगती है…
रत्न ऐसा करते हुए वह भी अपने एक हाट से अपनी छूट मसलते रहती है और उसकी छूट फिर से पानी पानी हो जाती है…
राजू भी किसी जन्नत में चले जाता है और उसे भी बड़ा मजा आता है..10-15 तक अच्छे से चूसै के बाद राजू को लगता है की वह भी झाड़ jaayega..to रत्न को रुकने को कहता है और उसको फिर से चूमते hue…tumne तो मुझे जन्नत की सैर कर दी hai..ab तुम्हारी बारी है जन्नत की सैर करने की..
राजू रत्न को सुला देता है और उसकी आँखों में देखता है..
रत्न भी समझ जाती है और अब उसको भी छोड़ने का मन होता है..
रत्न: थोड़ा आराम से beta..bahut साल हो गए है…
राजू: जानता हूँ maa…ekdum प्यार से karoonga…phir से एक बार झुक कर उसकी छूट को चूम कर अपना लुंड उसकी छूट पे रगड़ता hai…pehle रत्न को भी थोड़ा मजा आता है लेकिन जब वह भी गरम हो जाती है तो कहती hai..kyun तड़पा रहा है beta..daal दे जल्दी और बुझा दे मेरी प्यास..
राजू को भी लगता है की अब और देर करना ठीक नहीं है और उसके सुपाड़ी को अंदर डालने की कोशिश करता hai…lekin रत्न की छूट बहुत दिनों से बंद थी तो एकदम टाइट रहता है..
राजू: तुम्हारी छूट तो एकदम बंद hai..ekdum कुंवारी की तरह..
रत्न: कहा था ना maine…bahut दिनों से सूखी पड़ी हुई है..
राजू फिर से इस बार थोड़ा दम लगाता है और इस बार फक की आवाज़ से उसका सुपाड़ा घुस जाता है और रत्न से भी सहा नहीं जाता और ज़ोर के चिल्लाती hai…aah…aah….aur उसकी आँखों से आंसूं आने लगते है..
राजू को भी थोड़ा दर लगता है ..और ऐसे hi रहता है और झुक कर रत्न की आंसूं चाट लेता hai..aur कहता hai…jo दर्द होना तो हो गया maa..ab दर्द नहीं hoga…aur ऐसे hi चुपड़ी चुपड़ी बातों से रत्न को उलझा कर अपना लुंड धीरे धीरे अंदर करता है और लगभग आधा लुंड घुसा देता है…
राजू रत्न की आँखों में देखते hue..jhuk कर उसको चूमता है और फिर एक ज़बरदस्त धक्का मारता है और इस बार उसका पूरा लुंड रत्न की छूट में जड़ तक समां जाता है…
रत्न को बहुत दर्द होता है जो राजू को समझ आ जाता hai..aise hi 2 मं रहता hai…Ratna को जब थोड़ा रहत महसूस होता है तो राजू को आँखों से इशारा करती hai..Raju फिर धीरे से लुंड अंदर बहार करने लगता है और 2-3 मं में hi पूरे ज़ोर से रत्न को पेलने लग जाता है…
रत्न भी अब खुल के आवाज़ निकलते हुए छोड़ने लगती है और पूरे कमरे में दोनों की आवाज़ें गूंजती है…
रत्न: हाँ beta..aise hi chod…poori खुजली मिटा दे आज iski…bahur परेशान करती है..
राजू भी अब लगातार धक्के लगता रहता है और 5 मं में hi रत्न फिर से झाड़ जाती है…
राजू फिर रत्न को उठाता है और उसे घोड़ी बनने को कहता है तो रत्न अपने घुटनों के बल हो जाती है और राजू उसके पीछे आकर फिर से पीछे से लुंड पूरी जड़ तक घुसा के छोड़ने लगता है…
उसे इस पोजीशन में रत्न की गांड की छेद भी दिखती है जो राजू को बहुत प्यारा लता hai…aur रत्न को छोड़ते हुए एक ऊँगली को अपने थूक से गीला कर के उसकी गांड में ऊँगली करने की कोशिश करता hai…lekin वह बहुत hi टाइट था और ऊँगली अंदर नहीं जा paati…apni गांड पे ऊँगली का एहसास होते hi रत्न राजू की तरफ मुद kar…naa कर beta..main वहां कभी नहीं लिया है..
राजू: जैसी तुम्हारी मर्ज़ी maa..main तुम्हारे खिलाफ कभी नहीं jaaonga…Ratna भी यह बात सुनके खुश हो जाती है…
रत्न: मुझे भी थोड़ा टाइम de…phir मैं hi तुम्हे कह doongi..jab तुम मेरी गांड maarna…aaj के लिए छूट से hi काम चला लो…
राजू भी अब मस्त हो कर पीछे से ठोकने लगता है…
थोड़ी देर बाद रत्न कहती है की उसके घुटने दुःख रहे है तो राजू इस बार सो जाता है और रत्न उसके ऊपर चढ़ जाती है और उसके लुंड पे कूदने लगती है..
इसी पोजीशन में राजू फिर से उसको छोड़ते हुए उसकी चुकी दबाता है और इसमें दोनों को मजा आता है…
5 मं की दमदार चुदाई के बाद राजू कहता है की वह भी झड़ने वाला hai…to रत्न कहती है की उसके अंदर मत झड़ना…
राजू फिर निकल कर उसके मुँह के पास ले जाता है और फिर 1 मं में hi हु भी झाड़ जाता है और बहुत सारा पानी निकलता hai…jise रत्न भी पूरा पी जाती है..
रत्न: बाप re….itna पानी निकलता है तेरा…
राजू उसे देख कर है देता hai…phir दोनों ऐसे hi एक दुसरे की बाहों में लेट जाते hai..aur फिर चादर से अपने आप को साफ़ कर लेते है..
रत्न: तू खुश तो है ना..
राजू: बता नहीं सकता कितना खुश हूँ..
राजू: accha..aapse एक बात पूछना था..
रत्न: बोलो
राजू: याद hai..Guruji ने कहा था की आपको 4 संतानों की प्राप्ति hai..to आप क्या चाहते हो?
रत्न: haan..yaad hai…lekin अब मैं इस उम्र में माँ नहीं बनना chahti…meri उम्र भी ढल रही hai…teri बाकी बीवियां है naa…unki झोली भर de..main अपने पोते, पोतियों के साथ ज़िन्दगी गुज़ार लूंगी..
राजू: ठीक है maa..main आपकी सोच समझ सकता hoon…jaisa आप चाहते hai..waisa hi होगा..
5 मं में कमरे का दरवाज़ा खुलता है और बाकी तीनो भी तालियां बजाते हुए कमरे में आते है…
ारु: दोनों को बधाई हो…
रत्न शर्मा जाती है तो राजू पूछता hai..tum लोगब तक सोये नहीं
सुधा: सोते kaise…itni ज़ोर ज़ोर से आवाज़ जो कर रहे the…aur रत्न को अपने गले लगा लेती hai…Ratna भी एकदम शर्मा जाती है..
संध्या: वैसे bhi..jab तक आप हमे प्यार नहीं karte…humein नींद कहाँ आती है..
सुधा: अब क्यों शर्माना didi..ab तो तुम हम सब की बड़ी सौतन बन गयी हो..
सुधा राजू की तरफ देख kar…kyun re…”tohfa” पसंद आया क्या??
राजू तुरंत सुधा को अपनी तरफ खींच कर उसको चूमते hue…ekdum बढ़िया tha..aur तुम्हे कल इसका इनाम भी दूंगा..
सुधा सवालिया नज़र से राजू को देखती है तो राजू अपना ऊँगली उसकी गांड में दाल kar..yahan..kehta है और आंख मार देता है…
राजू: वैसे भी तुम लोग आने से पहले मैं माँ से बात कर रहा tha..usko भी जल्दी hai..dadi बनने की…
राजू की बात सुन कर तीनो शर्मा जाते है…
रत्न: haan..Raju सही कह रहा hai…bolo…mujhe जल्दी दादी बनाएगी ना..
तीनो: haan..kyun nahi…jis तरह से राजू हमें प्यार करता hai…lagta hai…jaldi hi हम सब भी आपको खुश खबर देंगे..
ऐसे hi सब ख़ुशी से बात करते है और नींद की आग़ोश में चले जाते है…
दिन ऐसे hi मज़े से गुज़रते है…
15 दिन बाद….
ठाकुर के मौत के कुछ दिनों बाद सब थोड़ा नार्मल हो जाता है और सब अपने काम में बिजी रहने लग जाते है..
अब राजू को कोई फ़िक्र नहीं tha..aur वह भी मजे में अपने दिन गुज़ारने लगता है..
दिन में खेत में जाकर काम करता है और रात को घर आकर अपनी तीनो बीवियों से ढेर सारा प्यार करता hai…jismein तीनो भी बहुत संतुठ रहती है और उनका चेहरा हमेशा खिला खिला रहता है..
वहीँ रत्न भी आग में जल रही होती hai…use पता था की रोज़ रात को राजू अपनी बीवियों के साथ मजे कर रहा है (या फिर कहे की रोज़ रात को उनको अच्छे से छोड़ता tha…)..kyunki अब वह सब उसकी बीवियां thi..aur घर में कोई “राज़” बाकी नहीं tha..to उनके “प्रेम मिलान” की आवाज़ रत्न को भी सुनाई देती thi..aur रत्न अपने आपको ऊँगली कर के शांत करती थी..
कभी कबार माला और काम्य भी राजू को अपने घर बुला कर उससे छुड़वा कर वह भी शांत हो जाती थी…
एक हफ्ते बाद…
ऐसे hi एक हफ्ते baad…Sudha किचन में काम कर रही होती है तो रत्न उसे पास आती hai…uske चेहरे पे थोड़ी झिझक thi..jo सुधा देख कर पहचान लेती hai..aur रत्न से पूछती है..
सुधा: didi..kya हुआ? कुछ उलझन है क्या? आपके चेहरे पे साफ़ दिख रहा है..
रत्न: han..waisa hi कुछ hai…samajh में नहीं आ रहा है..
सुधा: क्या हुआ? मुझे bataao..shayad मैं तुम्हारी मदत कर सकती हूँ..
रत्न: haan..tu hi मेरी मदत कर सकती hai…isiliye तुझे यहाँ देख कर आयी हूँ..
सुधा: बोलो..
रत्न; थोड़ा झिझकते hue…woh क्या है naa..main सोच रही थी की आज रात को मैं राजू के पास जाऊं…
Sudha:matlab?
रत्न: समझना…
सुधा: अपनी आँखें थोड़ा बड़ा करती hui..jab उसे रत्न की बात समझ में आती है to…arre…yeh तो अच्छी बात है naa…waise भी तूने जो शर्त रखा था राजू के liye..usne तो पूरा कर दिया hai…ab ठाकुर भी नहीं raha..aur जीजाजी और रवि का बदला भी पूरा हो गया है..
रत्न: haan..main भी एहि सोच रही thi..jab तक राजू ने अपना वादा पूरा नहीं kiya..mujhse कभी ज़बरदस्ती नहीं kiya..aur हर बार मेरी बात मानता tha…mujhe भी अब उससे शादी कर के उसकी बाहों में जाने का मन है…
सुधा: रत्न को अपनी बाहों में lekar..didi…subah सुबह इतनी खुश खबर दी hai…aur उसका चेहरा पकड़ कर हलके से उसके होंठों पे किश करती है..
सुधा: फिर तो आज मैं आपको एकदम दुल्हन की तरह सजाऊँगी…
रत्न: dhat..kehte हुए सुधा को हल्का सा चपत मारती है और शर्मा जाती है..
सुधा: यह बात मैं मेरी दोनों सौतन को भी बताती हूँ…
रत्न: लेकिन राजू को अभी मत बताना…
सुधा जल्दी से अपना काम ख़तम कर के यह बात उन दोनों को भी बताती है तो दोनों भी बहुत खुश हो जाते है..
राजू को कुछ पता नहीं चलता और वह अपने काम से सुबह hi खेत की तरफ निकल जाता है..
घर में सुबह सब अपना काम कर के सब रत्न के कमरे में जाते है जहाँ रत्न जस्ट नाहा कर आयी thi..aur सिर्फ एक टॉवल पहन कर अपने बार सवार रही थी..
वह तीनो कमरे में आते है तो संध्या पीछे से रत्न को देख कर कहती है आज तो राजू काम से गया…
सिर्फ टॉवल में रत्न बहुत hi सेक्सी लग रही thi…thoda से पीछे से उठा हुआ gand…towel जो सिर्फ जाँघों तक hi tha..ekdum चिकनी और बलखाती jaanghen..peeche से भी एकदम कातिल लग रही थी रत्न..
ारु रत्न के पीछे आकर धीरे से उसके कान mein…aap “नीचे” भी साफ़ और चिकना रखा है naa…Raju को चिकना hi पसंद hai..aur प्यार से ारु रत्न की गाल चूम लेती है..
सुधा रत्न से: chalo..ab यहाँ (बिस्तर पे) आ jaao..hum आपको सजायेंगे..
संध्या पहले रत्न को मेहँदी लगाती hai..haath और पाँव पे भी…
जब मेहँदी लगाना ख़तम हो जाता है तो सुधा को मस्ती छूती है और कहती है
सुधा: दीदी (रत्न) राजू की सबसे चाहती hai…to फिर कुछ स्पेशल हो जाए…
सुधा जब यह बात कहती है तो तीनो उसकी तरफ देखते hai…to सुधा कहती hai…special याने सच में special…aur ऐसा कहते हुए रत्न को बिस्तर पे सुला कर उसके बदन से कपडे निकल देती है…
रत्न शर्मा जाती है और कहती ha..kya कर रही हो chhotti…kuch तो शर्म कर..
सुधा: Didi..ab क्यों sharam..aaj आप राजू से शादी करने वाली हो और हम सब की सबसे बड़ी sautan..aisa कहते हुए सुधा है देती है तो ारु और संध्या भी है देते hai…unki हसी देख कर रत्न शर्म से एकदम लाल हो जाती है…
सुधा: और वैसे bhi…aapke पास जो hai..wahi हमारे पास भी hai…aur ऐसे कहते हुए सुधा रत्न पे झुक कर उसकी चूचियां दबा देती hai…aur बेशरम हो कर अपना हाथ उसकी छूट पे रख देती है और कहती hai..yeh भी…
फिर सुधा मेहँदी लेकर रत्न की पैरों के बीच आकर छूट के ऊपर कुछ डिज़ाइन बनाती hai..jismein रत्न को गुदगुदी होती है..
रत्न: क्या कर रही है तू?
सुधा: थोड़ा रुको और सबर करो…
सुधा फिर 10-15 मं बाद उठती है और अपने डिज़ाइन को देख कर कहती hai…ab सही है…
जब वह रत्न के ऊपर से उठती है तो सामने का डिज़ाइन ारु और संध्या भी देख लेते है और अपनी आँखें बड़ी कर ke…ekdum सही बनाया है Sudha…dono एक साथ कहते है..
रत्न को कुछ समझ नहीं आता तो वैसे hi लेते हुए ारु से पूछती है तो वह उठ कर एक आइना लाती है और उसको तिरछी करके रत्न को दिखाती है..
रत्न जब वह पढ़ती है तो उसका मुँह भी खुला रह जाता hai…kyunki सुधा ने बड़े प्यार और आहिस्ता से एक लव सिग्न (विथ ा दोनवार्ड एरो) बना कर लिखा tha..…”Raju की अमानत”…
रत्न उसे देख कर एकदम शर्मा जाती है और शर्म के मारे अपना चेहरा देख लेती hai..is पल का तीनो मजे लेते है और जब मेहँदी जब सूख जाता है तो एकदम लाल हो कर क़यामत लग रहा था…
उसको देख कर सुधा से रहा नहीं जाता और झुक कर वहां पर हल्का सा चूम लेती hai..to पाती है की रत्न एकदम गरम हो गयी है और उसकी छूट पानी बहा रही है..
सुधा: वाह didi..abhi से पानी निकल रही हो…
रत्न: क्या karoon..tum लोग जो सब मुझे परेशान कर रहे ho..aur है देती है..
ारु और संध्या भी उस डिज़ाइन को देख कर एकदम मंत्रमुग्ध हो जाते है और वह दोनों भी रत्न को वहां पर चूम लेते है..
रत्न के बदन को अच्छे से साफ़ कर के पहले एकदम ट्रांसपेरेंट ब्रा और पंतय पहनाते है जिसमें से रत्न की आधी चुकी एकदम बहार hi रहती है और पंतय भी एकदम छोटी हो उसकी सिर्फ छूट को hi देखती है..
और फिर लाल कलर का लेहंगा चोली पहना कर रत्न को किसी पारी की तरह तैयार करती hai..aur उसमें रत्न भी एकदम सुन्दर दिखती है और क़यामत धा रही थी..
संध्या रत्न को सजा कर धीरे से उसके कान में कहती hai…Maaji…jab आप राजू के पास जाओगी तो एकदम बेशरम बन jaana…aur फिर देखना कितना मजा aayega….yeh सब सोच कर तो मैं अभी से गीली हो रही हूँ maaji…aur ऐसा कहते हुए संध्या रत्न का हाथ पकड़ कर अपने छूट पे रख के दबा देती है…
रत्न: dhat..besharam…
संध्या: बेशरम hi तो बनना है आपको…
शाम को…
राजू शाम को अपना काम कर के घर आता है तो देखता hi की आज घर कुछ अलग hi सजा हुआ है..
राजू ारु से पूछता है तो ारु कुछ नहीं कहती और बात को ताल देती hai..lekin उसके चेहरे पे आज एक अलग hi चमक tha…yehi हाल सुधा और संध्या के साथ भी tha…Raju को कुछ समझ नहीं aata..lekin वह इस बात पे ज़्यादा ध्यान नहीं देता..
रात को खाने के वक़्त रत्न नहीं आती तो राजू पूछता है तो संध्या कहती है की माजी आज दिन भर काम करके थक गयी hai…isiliye आज वह अपने कमरे में hi है..
राजू: लेकिन माँ तो रोज़ काम करती है…
ारु: haan..lekin माजी ने आज कुछ ज़्यादा hi काम किया hai…dekh नहीं रहे ho..ghar आज कितना प्यारा और सजा हुआ लग रहा है..
राजू: haan…maine भी देखा hai..lekin तुम सब भी थी naa…maa को इतना ज़्यादा काम क्यों करने दिया..
ारु: हमने (बहाना बनाते हुए) मन किया था माजी ko..lekin वह हमारी बात नहीं मानी और खुद भी काम करती rahi…isiliye आज वह बहुत थक गयी है…
वहीँ कमरे में बैठे दोनों रत्न और सुधा उनकी बातें सुन रही थी और है भी रही थी..
सुधा: ारु ने राजू को अच्छा बेवक़ूफ़ बनाया है..
रत्न: धीरे से उस चपत लगाते hue..chup kar..kya बोल रही hai…woh तेरा पति भी है..
सुधा भी मजाक mein…Ratna की कमर पे हलके से चिमटी लेते hue…woh कुछ देर बाद आपका भी पति बनने वाला hai…yeh बात सुनकर रत्न भी शर्मा जाती है..
सुधा: देखो (प्यार से) हमारी gudiya..yaa फिर दुल्हन ko..kaise शर्मा रही है…
राजू फिर खाना खा कर किचन में देखता है की संध्या वहां काम कर के साफ़ सफाई कर रही है..
राजू किचन में उसके पीछे जाकर उसकी चुकी दबाते hue…jaldi करो ना…
संध्या: kyun..kya हुआ?
राजू: बताओं kya…aur ऐसा कहते हुए संध्या को पलटा कर उसके होंटो पे गहरा किश करते hue..tum तो दिन बी दिन एकदम गदरायी हुई जा रही हो..
संध्या: haan…kyun नहीं hongi…roj जो तुम मुझपे इतनी म्हणत जो करते ho…gadraaongi ना..
राजू: haan..aur ऐसा कहते हुए संध्या की गांड को एक हाथ से दबाता है तो दुसरे हाथ से उसकी चुकी मसल देता है..
Sandhya:aaah…karte hue…isiliye तो अब यह इतने बड़े हो गए hai..aajkal मेरी ब्रा और पंतय भी छोटी लग रही है..
राजू: कोई nahi..nayi ब्रा और पंतय ले lo…infact मैं तो एहि कहूंगा की उनको लेने की ज़रुरत hi नहीं hai…ghar में बिना ब्रा और पंतय के hi rehna…mujhe फिर तुम्हारे कपडे खोलने में आसानी hogi…aur ऐसा कहते हुए संध्या को आँख मार देता है..
संध्या: चुप karo…bahut बदमाश हो रहे हो…
राजू: ठीक hai..main कमरे में जा रहा hoon…jaldi आ जाओ…
संध्या राजू से अलग हो कर धीरे से मुस्कुराते हुए (क्यूंकि उसे पता था की आज रत्न उसके पास जाने वाली है) हाँ कहती है और राजू अपने कमरे में चला जाता है..
रात को राजू के कमरे में…
राजू अपने बिस्तर पे सोये हुए संध्या और ारु का इंतज़ार कर रहा होता hai…aur अपने मोबाइल पे कुछ देख रहा होता है…
कुछ देर बाद सुधा कमरे में आती hai..dheere से चल कर..
राजू उसे देखता है तो कहता hai..kahan thi…shaam से दिखी नहीं…
Sudha:tumhaare लिए hi काम कर रही थी…
राजू: मतलब?
इतने में संध्या भी कमरे में आती hai…lekin इस बार उसके साथ रत्न भी thi…jo एक शादी के जोड़े पहने हुए एकदम कमाल की लग रही थी…
राजू रत्न को देख कर एकदम मंत्रमुग्ध हो जाता hai…aur आँखें फाड़े रत्न को देखता रहता है और उसे पता भी नहीं चलता की कब उसके हाथ से मोबाइल भी नीचे गिर जाता है…
राजू: अपनी आँखें मसल kar…kya मैं कोई सपना तो नहीं देख रहा हूँ??
सुधा: सपना nahi..aur एकदम सच hai…bolo…mera (हमारा) काम कैसा है?
रत्न भी राजू को देख कर एकदम शर्मा जाती hai…aur संध्या भी धीरे से रत्न को कमरे में ला कर…
सुधा: ले लो अपनी अमानत..
राजू: रत्न को देखते hue…kya माँ?? रत्न भी धीरे से अपना सर उठा कर हाँ कहती है…
राजू भी उठ कर उसके पास जाता है और रत्न को बाहों में लेने की कोशिश करता hai..lekin सुधा कहती है..
सुधा: ऐसे nahi..abhi nahi…pehle दीदी से शादी करो और उसे हमारी सौतन बनाओ…
राजू: shaadi.aur abhi…kahan? अभी कहाँ से मंदिर और पुजारी को बुलाएंगे..
सुधा: चिंता मत karo..humne सब तैयारी कर ली hai…aur फिर दोनों को घर में बने एक छोटे मंदिर में ले जाते है
सुधा कहती hai..logon को जान्ने की ज़रुरत नहीं hai..bus तुम भगवान् को मान कर दीदी की मांग भर do..yehi काफी है..
लेकिन पहले तुम नाहा कर जल्दी से नए कपडे पेहेन लो..
राजू को कुछ समझ नहीं आ रहा tha…lekin वह फिर जल्दी से बाथरूम भाग जाता है और नाहा कर नए कपडे पहन कर आता है..
राजू को बाथरूम में भागे हे देख कर संध्या उसे चिढ़ाती hai…dekho कितना उतावला हो रहा है और सब है देते है..
थोड़ी देर बाद राजू नए कपडे पहन कर घर में बने मंदिर में आता है और भगवान् को साक्षी मान कर सब के सामने रत्न की मांग भर देता है और उससे शादी कर लेता hai..aur रत्न को बाहों में लेकर उसे देखते हुए प्यार से उसके माथे को चूम लेता है..
राजू: अब क्या??
Aaru:kyun..bahut जल्दी पड़ी hai….apne कमरे में जाओ और 10 मं बाद माजी के कमरे में आना..
राजू बिना कुछ कहे कमरे में चले जाता है और 10-15 मं वेट करता hai…use यह 10-15 मं बरसों के माफ़िक़ लगते है..
15 मं बाद ारु आती है और राजू के होंठों को चूम कर कहती hai..jaao ..आज माजी की बारी hai…aur धीरे से राजू के कान mein…tumhaari रतनी की…
राजू भी ख़ुशी से ारु को चूम kar…tum सब ने तो मुझे इतना ख़ुशी दी है..
ारु: अब ज़्यादा कुछ नहीं karo..aur जाओ…
राजू रत्न के कमरे में जाता है तो देखता है की रत्न अपना घूंघट ओढ़े हुए बिस्तर पे बैठी राजू का इंतज़ार कर रही होती है..
लेकिन कमरे में जाने से पहले सुधा उसको बहार पकड़ के राजू को अच्छे से किश कर के उसके कान में कहती hai…andar तुम्हारे लिए बहुत “कीमती तोहफा” hai…dekh कर कल बताना की तुम्हे तोहफा कैसे लगा..
राजू अंदर जाता है तो कमरा एकदम फूलों से सजा हुआ tha…jaise की सुहागरात में कमरे को सजाया जाता hai..aur रत्न बिस्तर के बीच में अपना घूंघट दाल के बैठी हुई थी..
राजू कमरे को देख कर एकदम खुश हो जाता है और धीरे से रत्न के पास आकर बैठ जाता है..
राजू: आज मैं बहुत खुश हूँ maa…tumne जो मुझे इतना अच्छा तोहफा दिया hai..aur धीरे से रत्न का घूंघट उठा देता hai…aur देखता है की रत्न एकदम सुन्दर लग रही थी..
रत्न: यह तो मुझे करना hi tha…tumne मेरी हर बात और शर्त मानी है और उसे पूरा भी किया है..
राजू: वह तो मुझे करना hi था..
रत्न: जब तुमने अपनी शर्त पूरा किया है तो मैं कैसे अपनी बात से मुकर सकती हूँ..
राजू: maa…aur ऐसा कहते हुए राजू रत्न को अपनी बाहों में ले लेता hai…aur फिर राजू रत्न का सर पकड़ कर उसकी आँखों में गहराई से देखता है…
रत्न भी उसकी आँखों में डेक्टि है और पाती है की राजू की आँखों में उसके लिए बहुत प्यार tha…Ratna भी राजू को देखते हुए आँखों से इशारा करती है तो दोनों एक दुसरे के नज़दीक चले आता है और देखते hi देखते राजू अपने होंठ रत्न के होंठ से जोड़ लेता है और प्यार से चूमता है रत्न ko…Ratna भी उसका साथ देती है और देखते hi देखते दोनों का चुम्बन एकदम गहरा हो जाता है और दोनों एक दुसरे की जुबां को चूसने लग जाते hai..dono की सांसें उखाड़ने लगती है…
रत्न: थोड़ी देर baad…Raju..mujhe अपने प्यार में समा le…main भी बहुत तरसी हूँ तेरे प्यार के liye…mujhe भी वह ख़ुशी दे जो तू अपनी बाकी बीवियों को देता है..
राजू: हाँ maa…tum तो मेरी जान ho…tumhe अपनी जी जान से भी ज़्यादा प्यार करता hoon…aur तुम्हे इतने प्यार में डूबा दूंगा की कभी बहार नहीं आना चाहोगी…
और ऐसा कहते हुए राजू फिर से रत्न को गहरा चुम्बन करता है और दोनों फिर से एक दुसरे के लार को जातक लेते है..
राजू रत्न को किश करते hue…maa…Sudha कह रही थी की मेरे लिए कमरे में एक तोहफा hai…mujhe तो दिख नहीं रहा है…
रत्न: मिल जाएगा मेरे राजू को..
राजू फिर धीरे से रत्न की साडी निकाल देता है और रत्न की चुकी को दबाता है जो की उसके ब्लाउज से बहार निकलने को बेताब थे…
रत्न: हाँ beta…aur ज़ोर से dabaao..aur उसका पूरा रास निचोड़ लो..
राजू: हाँ maa….ekdum रास से भरा हुआ hai..aur ऐसा कहते हुए राजू अपना मुँह उसकी चूचियों की घाट में घुसा देता है और हाथ से दबाते हुए चूमता रहता hai…aur अपना हाथ पीछे ले जाकर ब्लाउज की डोरी खोल देता है…
राजू अपना मुँह उठा के रत्न की आँखों में देखते हुए ब्लाउज निकल देता है और जब नज़र नीचे करता है तो उसकी जुबां से लार टपकने लगता hai…kyunki रत्न की आधे से ज़्यादा चुकी उसकी ब्रा से बहार thi…Bra भी बहुत hi सेक्सी tha….Raju फिर से उसकी चुकी दबाते हुए इस बार उसके निप्पल को भी अपनी उँगलियों से दबाता है तो रत्न के मुँह से aah..aahh…nikal जाती है..
रत्न: थोड़ा धीरे से dabaana…kahin भाग नहीं जा रहे है…
राजू: kya..kahan भाग नहीं रहे है..
रत्न: वही जो तेरे हाथ में है..
राजू: क्या?
रत्न: पता नहीं…
राजू: तुमको बाकी तीनो ने तो बताया होगा..
रत्न: क्या?
राजू: यही की मेरे सामने शर्माना नहीं..
रत्न: हाँ..
राजू: तो क्या है मेरे हाथ में..
रत्न: तू मानेगा nahi…to sun….tere हाथ में मेरे चुकी और निप्पल्स hai..dono को धीरे से दबा…
राजू: यह हुई ना baat…aur फिर से रत्न को चूम kar..aise hi खुल कर मजे लो maa..tabhi मुझे और तुम्हे भी मजा आएगा..
और राजू फिर से झुक कर इस बार अपने दांत से उसकी निप्पल को फिर से kaat-ta है तो रत्न फिर से aah…kar के आहें भर्ती है…
इस बार राजू उसकी ब्रा भी निकल देता है और फिर से उसकी चूचियों पे टूट पड़ता है और 10 मं तक बारी बारी से दोनों को चूस के लाल कर देता है और 1-2 जगह पे लव बिट्स भी देता है..
राजू के ऐसा करने से रत्न से भी रहा नहीं जाता और हु भी बहुत कामातुर हो जाती है और उसकी छूट एकदम गीली हो जाती है और रास बहाने लगती है..
राजू रत्न की चुकी चूसते हुए रत्न ज़ोर से ाँहें भर्ती है और पहली बार झाड़ जाती है…
राजू: क्या हुआ? अच्छा नहीं लग रहा है क्या?
रत्न: तू बहुत बदमाश हो गया hai..main तो ऐसे hi झाड़ gayi…aur शर्मा के राजू के सीने में अपना सर छुपा लेती है..
राजू: maa..bataao naa..mera तोहफा कहाँ है?
रत्न: मिल jaayega…dekhte जाओ…
राजू फिर रत्न की साडी भी उतार देता है और साथ में उसका पेटीकोट भी निकल कर फेंकता है…
रत्न अब सिर्फ एक छोटी से पंतय में hi रह जाती है और जब राजू अपनी नज़र नीचे करता है तो उसे वह मेहँदी का डिज़ाइन (“राजू की अमानत”) नज़र आता है…
राजू उसे देख kar….kya बात hai..yehi मेरा तोहफा है क्या?
रत्न: haan…tumhe पसंद आया?
राजू: pasand….iske लिए तो मैं नरक भी जाने के लिए तैयार हूँ..
रत्न: तुरंत उसके मुँह पे हाथ रख kar…aise अच्छे मौके पे ऐसे गन्दी बातें नहीं करते..
राजू रत्न का हाथ को मुँह में लेकर चूसते हुए हु फिर से उस डिज़ाइन को देखते रहता hai..aur फिर झुक कर उसकी नाभि को चूमते हुए उस डिज़ाइन को भी चूमता है और कहता hai..haan…Sudha भी एहि कह रही thi..ab से यह सच में मेरी hi अमानत है और उसको चूमते हुए रत्न की पंतय भी निकल देता है और रत्न को पूरा नंगा कर के फिर उसकी रास से भरी हुई छूट को देख कर एकदम टूट पड़ता है और ऊपर से नीच तक उसकी छूट को chaat-ta है..
रत्न भी ाँहें भर्ती हुई सिसकारियां लेती है और अपना हाथ राजू के सर के ऊपर रख कर उसे दबा देती है..
रत्न: haan..aise hi चाट मेरी छूट ko..bahut परेशान किया है isne..aaj इसकी पूरी कसार निकल de…aur ऐसे hi कहते हुए बक्ति रहती है जब की राजू पूरी शिद्दत से रत्न की छूट चाटने में लगा रहता है..
देखते hi देखते रत्न फिर से अपना पानी निकल कर झाड़ जाती है और राजू भी बड़े मगन से उसका पूरा पानी पी जाता है..
1 मं बाद राजू रत्न की तरफ देखते हुए उसके होंठों पे ज़ुबार फेरते hue..bahut मीठा पानी है तुम्हारा maa..aur उसके ऊपर आकर रत्न के होंठ चूम लेते है और कहता hai..tum भी अपना पानी टास्ते करो…
5 मं बाद थोड़ी सांसें संभालने के बाद राजू रत्न का हाथ पकड़ कर उसके लुंड पे रक् देता है जो की अब तक रोड की तरह पूरा तन गया था…
राजू: देखो maa..tumhaare प्यार के लिए मेरे यह लुंड कितना तड़प रहा है..
अब रत्न भी थोड़ा खुल जाती है और कहती hai…main हूँ naa..pyaar करने के liye..aur फिर राजू के कपडे निकल कर उसे भी पूरा नंगा कर देती hai..aur उसे देखते hue..yeh तो बहुत लम्बा और मोटा है..
राजू: लम्बा और मोटा hai..tabhi तो यह मज़ा भी उतना देता है और फिर प्यार से रत्न का सर पकड़ के उसके लुंड भी झुका देता है और पहले रत्न धीरे से उसके टोपे पे हल्का से चूमती है और फिर धीरे धीरे उसका लुंड मुँह में लेने लगती hai…aur देखते hi देखते राजू का पूरा लुंड मुँह में ले लेती है और अंदर बहार करने लगती है…
रत्न ऐसा करते हुए वह भी अपने एक हाट से अपनी छूट मसलते रहती है और उसकी छूट फिर से पानी पानी हो जाती है…
राजू भी किसी जन्नत में चले जाता है और उसे भी बड़ा मजा आता है..10-15 तक अच्छे से चूसै के बाद राजू को लगता है की वह भी झाड़ jaayega..to रत्न को रुकने को कहता है और उसको फिर से चूमते hue…tumne तो मुझे जन्नत की सैर कर दी hai..ab तुम्हारी बारी है जन्नत की सैर करने की..
राजू रत्न को सुला देता है और उसकी आँखों में देखता है..
रत्न भी समझ जाती है और अब उसको भी छोड़ने का मन होता है..
रत्न: थोड़ा आराम से beta..bahut साल हो गए है…
राजू: जानता हूँ maa…ekdum प्यार से karoonga…phir से एक बार झुक कर उसकी छूट को चूम कर अपना लुंड उसकी छूट पे रगड़ता hai…pehle रत्न को भी थोड़ा मजा आता है लेकिन जब वह भी गरम हो जाती है तो कहती hai..kyun तड़पा रहा है beta..daal दे जल्दी और बुझा दे मेरी प्यास..
राजू को भी लगता है की अब और देर करना ठीक नहीं है और उसके सुपाड़ी को अंदर डालने की कोशिश करता hai…lekin रत्न की छूट बहुत दिनों से बंद थी तो एकदम टाइट रहता है..
राजू: तुम्हारी छूट तो एकदम बंद hai..ekdum कुंवारी की तरह..
रत्न: कहा था ना maine…bahut दिनों से सूखी पड़ी हुई है..
राजू फिर से इस बार थोड़ा दम लगाता है और इस बार फक की आवाज़ से उसका सुपाड़ा घुस जाता है और रत्न से भी सहा नहीं जाता और ज़ोर के चिल्लाती hai…aah…aah….aur उसकी आँखों से आंसूं आने लगते है..
राजू को भी थोड़ा दर लगता है ..और ऐसे hi रहता है और झुक कर रत्न की आंसूं चाट लेता hai..aur कहता hai…jo दर्द होना तो हो गया maa..ab दर्द नहीं hoga…aur ऐसे hi चुपड़ी चुपड़ी बातों से रत्न को उलझा कर अपना लुंड धीरे धीरे अंदर करता है और लगभग आधा लुंड घुसा देता है…
राजू रत्न की आँखों में देखते hue..jhuk कर उसको चूमता है और फिर एक ज़बरदस्त धक्का मारता है और इस बार उसका पूरा लुंड रत्न की छूट में जड़ तक समां जाता है…
रत्न को बहुत दर्द होता है जो राजू को समझ आ जाता hai..aise hi 2 मं रहता hai…Ratna को जब थोड़ा रहत महसूस होता है तो राजू को आँखों से इशारा करती hai..Raju फिर धीरे से लुंड अंदर बहार करने लगता है और 2-3 मं में hi पूरे ज़ोर से रत्न को पेलने लग जाता है…
रत्न भी अब खुल के आवाज़ निकलते हुए छोड़ने लगती है और पूरे कमरे में दोनों की आवाज़ें गूंजती है…
रत्न: हाँ beta..aise hi chod…poori खुजली मिटा दे आज iski…bahur परेशान करती है..
राजू भी अब लगातार धक्के लगता रहता है और 5 मं में hi रत्न फिर से झाड़ जाती है…
राजू फिर रत्न को उठाता है और उसे घोड़ी बनने को कहता है तो रत्न अपने घुटनों के बल हो जाती है और राजू उसके पीछे आकर फिर से पीछे से लुंड पूरी जड़ तक घुसा के छोड़ने लगता है…
उसे इस पोजीशन में रत्न की गांड की छेद भी दिखती है जो राजू को बहुत प्यारा लता hai…aur रत्न को छोड़ते हुए एक ऊँगली को अपने थूक से गीला कर के उसकी गांड में ऊँगली करने की कोशिश करता hai…lekin वह बहुत hi टाइट था और ऊँगली अंदर नहीं जा paati…apni गांड पे ऊँगली का एहसास होते hi रत्न राजू की तरफ मुद kar…naa कर beta..main वहां कभी नहीं लिया है..
राजू: जैसी तुम्हारी मर्ज़ी maa..main तुम्हारे खिलाफ कभी नहीं jaaonga…Ratna भी यह बात सुनके खुश हो जाती है…
रत्न: मुझे भी थोड़ा टाइम de…phir मैं hi तुम्हे कह doongi..jab तुम मेरी गांड maarna…aaj के लिए छूट से hi काम चला लो…
राजू भी अब मस्त हो कर पीछे से ठोकने लगता है…
थोड़ी देर बाद रत्न कहती है की उसके घुटने दुःख रहे है तो राजू इस बार सो जाता है और रत्न उसके ऊपर चढ़ जाती है और उसके लुंड पे कूदने लगती है..
इसी पोजीशन में राजू फिर से उसको छोड़ते हुए उसकी चुकी दबाता है और इसमें दोनों को मजा आता है…
5 मं की दमदार चुदाई के बाद राजू कहता है की वह भी झड़ने वाला hai…to रत्न कहती है की उसके अंदर मत झड़ना…
राजू फिर निकल कर उसके मुँह के पास ले जाता है और फिर 1 मं में hi हु भी झाड़ जाता है और बहुत सारा पानी निकलता hai…jise रत्न भी पूरा पी जाती है..
रत्न: बाप re….itna पानी निकलता है तेरा…
राजू उसे देख कर है देता hai…phir दोनों ऐसे hi एक दुसरे की बाहों में लेट जाते hai..aur फिर चादर से अपने आप को साफ़ कर लेते है..
रत्न: तू खुश तो है ना..
राजू: बता नहीं सकता कितना खुश हूँ..
राजू: accha..aapse एक बात पूछना था..
रत्न: बोलो
राजू: याद hai..Guruji ने कहा था की आपको 4 संतानों की प्राप्ति hai..to आप क्या चाहते हो?
रत्न: haan..yaad hai…lekin अब मैं इस उम्र में माँ नहीं बनना chahti…meri उम्र भी ढल रही hai…teri बाकी बीवियां है naa…unki झोली भर de..main अपने पोते, पोतियों के साथ ज़िन्दगी गुज़ार लूंगी..
राजू: ठीक है maa..main आपकी सोच समझ सकता hoon…jaisa आप चाहते hai..waisa hi होगा..
5 मं में कमरे का दरवाज़ा खुलता है और बाकी तीनो भी तालियां बजाते हुए कमरे में आते है…
ारु: दोनों को बधाई हो…
रत्न शर्मा जाती है तो राजू पूछता hai..tum लोगब तक सोये नहीं
सुधा: सोते kaise…itni ज़ोर ज़ोर से आवाज़ जो कर रहे the…aur रत्न को अपने गले लगा लेती hai…Ratna भी एकदम शर्मा जाती है..
संध्या: वैसे bhi..jab तक आप हमे प्यार नहीं karte…humein नींद कहाँ आती है..
सुधा: अब क्यों शर्माना didi..ab तो तुम हम सब की बड़ी सौतन बन गयी हो..
सुधा राजू की तरफ देख kar…kyun re…”tohfa” पसंद आया क्या??
राजू तुरंत सुधा को अपनी तरफ खींच कर उसको चूमते hue…ekdum बढ़िया tha..aur तुम्हे कल इसका इनाम भी दूंगा..
सुधा सवालिया नज़र से राजू को देखती है तो राजू अपना ऊँगली उसकी गांड में दाल kar..yahan..kehta है और आंख मार देता है…
राजू: वैसे भी तुम लोग आने से पहले मैं माँ से बात कर रहा tha..usko भी जल्दी hai..dadi बनने की…
राजू की बात सुन कर तीनो शर्मा जाते है…
रत्न: haan..Raju सही कह रहा hai…bolo…mujhe जल्दी दादी बनाएगी ना..
तीनो: haan..kyun nahi…jis तरह से राजू हमें प्यार करता hai…lagta hai…jaldi hi हम सब भी आपको खुश खबर देंगे..
ऐसे hi सब ख़ुशी से बात करते है और नींद की आग़ोश में चले जाते है…
दिन ऐसे hi मज़े से गुज़रते है…
15 दिन बाद….