RUDRADIP- The God And Devil - Page 6 - SexBaba
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RUDRADIP- The God And Devil

थैंक्स भाईलोग...

कीप सपोर्टिंग....

भाई अब वक़्त के साथ साथ स्टोरी भी आगे बढ़ती hi है न.. एक hi जगह तो नहीं चलेगी... इसलिए कभी अपडेट काम इंटरेस्टेड तो कभी ज्यादा ऐसा होता hi रहता है.. पर उसमे लिखा हुवा भी अचे उपदटेस को ज्वाइन hi करता है...

अब ये Part पहले की तरह नहीं चल रहा है तो कोई बात नहीं पर मई पूरी कोशिश करूँगा की आगे आने वाले उपदटेस आप सबको अचे से पसंद ए....
 
अपडेट 48

लेकिन दित्य के आंसुओ की बजह से hi वो दर्द भी कही गायब हो गया और मई ठीक हो गया..

मैंने उसकी तरफ देखा तो दित्य रो रही है मुझे गले लगाकर...

और तब मुझे याद आया की मई यहाँ पर क्यों आया हु और मुझे दित्य से क्या कहना था...

ये याद एते hi मैंने खुद को दित्य की बहो से अलग किया और उसे प्यार से कहने लगा..................................

आगे............................

मई-(आंसू पोछते हुए) क्या हुवा दित्य क्या हुवा मेरी बची तुम रो क्यों रही हो...

मेरी गुड़िया तो रट हुए बिलकुल भी अछि नहीं लगती हमेशा तुम हस्ते हुए hi अछि लगती हो...

Ditya-(Rona कण्ट्रोल करते हुए) Wooo...Apkko... क्या हुवा tha..Aap ये अचानक निचे क्यों गिर गए थे और आप पुरे पसीने से भीग गए थे...

मुझे लगा आपको कुछ हुवा है या शायद पहले की तरह hi आप बेहोश हो गए hai.Isliye मुझे आपको इस हालत में देख रोना आ गया...

दित्य को प्यार से समजते हुए पर सच तो नहीं बता सकता इतने से hi दर्द से वो रोने लगी सच बताऊंगा तो.... इसलिए मई उससे कहने लगा..

Mai-Are मेरी गुड़िया... वो तो तुमने मुझे इतना हसाया की मेरे पेट में भी बहुत दर्द हो रहा था...

उसी की बजह से मई निचे गिर गया और कोई बात nahi.aur तुम्हारे भाई को कभी कोई ची सकता है क्या..

और ऐसे छोटे से दर्द से तुम्हारा ये भाई दर जायेगा क्या उससे...

ये कहकर मैंने दित्य को गले लगाया तो दित्य कहने लगी...

Ditya-Sach न भैया ... मुझे तो लगा की आपके दिल में दर्द हो रहा है और वो भी बहुत तेज..

ऐसा मुझे महसूस huva.Par अगर आप कह रहे हो तो ये कोई मेरा भरम होगा...

Mai-(Man में) सच में दित्य तुम मेरी सबसे प्यारी और बहुत hi क्यूट बहन हो...

जो मेरे बिना बताते hi मेरे दर्द भी जान गयी. तुम तो मेरी दुआ भी हो और दवा भी...

कुछ hi दिन में तुम मेरी जान बन चुकी हो.. तुम्हारा रोना देख मेरा दर्द भी कही गायब हो गया कुछ पता hi नहीं चला...

पर वो दर्द था कैसा. बहुत hi तेज था वो दर्द... लगता है मेरे दिल के पास रहने वालो में से hi कोई है वो और वो बहुत hi बड़ी संकट में है पर कोण...

मैंने एक बार आंखे बंद करके उसे ढूंढ़ने की कोशिश की पर नाकाम रहा...

लगता है कोई बहुत hi बड़ी शक्ति मुझे अपने पास आने से रोक रही है उसी की बजह से मई देख नहीं प् रहा हु और नहीं उन्हें ट्रैक कर प् रहा हु..

लगता है अब मुझे जल्द से जल्द धरती पर जाना होगा कोई अनर्थ हो उसे पहले...

लग रहा था जैसे कोई मेरे जान से hi मेरी जान खींच रहा ho..Lekin मई ऐसा नहीं होने दूंगा...

पर वह जाने के लिए इसे कैसे मनौ..

ये तो मेरा छोटा सा दर्द सह न सकीय और मई इसका...

देखो न कैसे खुश होकर मेरे बहो में आ गयी है पर जाना तो होगा hi और दित्य को तो मानना तो होगा hi लेकिन कैसे.........

मई यही सब सोच रहा था तभी दित्य ने मुझे हिलाया और वो मुझसे कहने लगी...

दित्य- क्या हुवा भैया आप क्या सोचने लग गए..

मई- कुछ नहीं बीटा मई तो तुम्हारे hi बारे में सोच रहा था...

दित्य- मेरे बारे में बताओ न क्या सोच रहे थे आप...

Mai-Wo तो मई ये सोच रहा था की तुम कितनी प्यारी हो और कितनी अछि...

तुम्हारे पास आकर मेरा सारा दर्द कही छूमंतर हो गया कुछ पता hi नहीं चला...

तुम्हारे पास आकर तो किसी का भी दिल ख़ुशी में झूमने और नाचने का कर जाये...

किसी के भी दुःख को तुम पल भर में hi ख़तम कर सकती हो...

इन सब को ध्यान में रखते हुए मुझे तुम्हारे बारे में एक बात पता चल गयी है...

दित्य मेरी बातो को सुनकर बहुत खुश हो रही थी.. क्यों की इस जहाँ में कोण लड़की ऐसी होगी...



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जो अपनी टैरिफ सुनकर खुश और शर्माएगी नहीं..

पर कोई भी इंसान हो उसे अपने बारे में अछि बाते दुसरो के मुँह से सुनकर बहुत hi ाचा लगता है...

पर आखिर में मेरे रुक जाने और उसके बारे में और जानने के लिए वो मुझे सवाल करती है...

Ditya-Kya भैया... आप मेरे बारे में कोनसी बात जान चुके है.. जरा मुझे भी तो बताओ...

मई- यही की नानाजी ने तुम्हारा नाम भी बहुत सोच समझकर hi रखा है प्रकृति...

सच में तुम जब भी खुश होती हो तो हर समय हर जगह बस ख़ुशी hi खसुहि hi रहती है...

और जब तुम दुखी होती हो तो हर जगह बस दर्द hi Dard..Khushiya जैसे कही हो hi नहीं...

Ditya-(Apne चहरे पर हसी लेट हुए) ऐसा है तो भैया मई हमेशा खुश hi रहोगी... मुझे बाकियो का तो पता नहीं पर जब आप खुश तो मई खुश...

(मुँह उतरते हुए) और जब आपको दर्द होगा तो मुझे भी होगा... इसलिए अब ये आप पर hi निर्भर है इस प्रकृति को खुश रखना है दुखी...

Mai-(Man में) वह... रे गुड़िया तूने तो मेरी hi बातो में मुझे hi फसा दिया...

पर कोई बात नहीं मई भी तुम्हारा बड़ा भाई hu.Aise hi हार नहीं मानूंगा...

और तभी मुझे इसे मानाने का आईडिया मेरे दिमाग में आ गया तो मई दित्य से कहता हु...

Mai-Waise गुड़िया तुम्हे पता है हमारे नानाजी का काम क्या है.. और वो दिन भर क्या करते है...

दित्य- है पता है उनकी एक यहाँ से बहुत दूर एक बहुत hi शांत और बहुत hi सुन्दर जगह है...

जो मैंने अब तक तो नहीं देखि पर माँ से सुना जरूर है की...

वो वह जाकर इस पुरे विश्व (जहाँ) को संतुलित और स्थिर रखते है..

मई- ये तो बहुत hi अछि बात है की तुम्हे ये बात पता है पर जहा तक तुम्हे नानाजी के बारे में पता है...

तो तुम्हे ये भी पता होगा की हमारे मामाजी दिन भर कहा रहते है...

Ditya-(Kuch सोचते हुए) नहीं ये बात तो मुझे नहीं पता और नहीं माँ ने मुझे कुछ कहा इस बारे में...

आप hi बताओ मैंने तो कभी इस बारे में सोचा hi नहीं...

मई- गुड़िया इस दुनिया (विश्व) में हर एक का कर्मा अलग होता है हर एक का कार्य अलग होता है..

सब अपने कर्मा से hi इस दुनिया में जीते hai..aur उसी से उनकी पहचान भी होती है...

जैसे हमारे नानाजी उनको सभी थे लार्ड के नाम से जानते है..

दित्य- है पता है माँ ने एक बार कहा था पर उसका मतब नहीं बताया था...

Mai-The लार्ड का मतलब है विश्वम... यानि इस पुरे विश्व की सँभालने वाला... उसकी रक्षा करने वाला...

हर तरह से इसको संतुलित रखने Wala...Sab जगह शांति और ख़ुशी लेन वाला..

और तुम्हे पता है इस विश्व में जहा पर भी जीवन है उन सबको हमारे नानाजी अपने बचो की तरह hi मानते है...

इसलिए वो जैसे हमारा ख्याल रखते है वैसा भी उनका भी...

दित्य- लेकिन भैया मैंने तो अब तक हमारे परिवार को छोड़कर किसी को भी नहीं देखा..

तो मई ये कैसे मान लू की बहार सच में जीवन है और उन्हें कैसे जान सकती हु...

लेकिन अगर आप बता रहे हो तो होगा hi. और है इसके बारे मैंने पढ़ा जरूर है...

Mai-Ye तो बहुत hi अछि बात है तो जिस तरह नानाजी का एक अलग कार्य है एक उनकी अलग पहचान है...

उसी तरह मामाजी की भी है, मेरी भी hai.hum सबकी एक अलग पहचान है एक अलग कार्य...

और हर कर्मा सही समय आने पर hi करना चाहिए वार्ना वो कर्मा सफल नहीं मन जाता...

दित्य मेरी बातो को समझने की कोशिश कर रही थी और मई उसे सीधी और आसानी से अपनी बात मानाने का प्रयत्न कर रहा था...

और ये सब किस लिए चल रहा है ये सब आपको तो पता hi है तो चलो आगे मई उससे फिर कहता हु...

मई- उसी तरह अब मेरा समय आ गया है की मई अपने कर्मा को करू.. लेकिन इसी लिए मुझे यहाँ से कही दूर जाना होगा...

जहा पर मई भी अपनी एक नानाजी की तरह hi पहचान बढ़ाऊ और उन्ही की तरह Hi उनके बचो और अपने Bhai-bandhu की रक्षा करू..

उन्हें हर तरह से सक्षम बनाऊ की वो अपना कार्य बिना किसी दर और किसी दर्द से करे...

मेरी दूर जाने की बात से दित्य एक पल के लिए तो उसका चेहरा उतर गया था...

और उसकी आँखों में हलके हलके आंसू भी आ गए थे. बस रोना hi काफी था तो उसी तरह मुझसे कहती है..

Ditya-iska मतलब आप यहाँ से जाना चाहते है कही दूर हमे छोड़कर...

दित्य को प्यार से सहलाते हुए और उसे प्यार से अपने बहो में लिए हुए मई कहता हु...

मई- नहीं मेरी बची... मई तुम लोगो को और मेरी सभी प्यारी बहनो को खास कर तुम्हे छोड़कर कही नहीं जाऊंगा..

लेकिन इस दुनिया में हर एक को अपना कर्मा करना चाहिए न...

क्या तुम नहीं चाहती की लोग मुझे यानि तुम्हारे भाई को पहचाने...

या मई उनकी हर तरह से मदद करू अपना कर्मा न करू..

अगर ऐसा न करू तो मुझे बहार कोई नहीं पहचानेगा और तुम्हारा भाई बस बिना किसी पहचान के hi रह जायेगा...

फिर न hi मेरा कोई महत्त्व होगा इस विश्व में और नहीं कही और क्या तुम यही चाहती हो...

लड़किया अगर आपकी बात मान नहीं रही हो तो यही एक शास्त्र होता है लड़को के पास इमोशनल अत्याचार बस मई वही कर रहा था...

दित्य- Nahi...Nahi...Bhaiya मई ये कभी भी नहीं चाउंगी की ऐसा हो.. आप हमेशा तरक्की करे..

आप को ये विश्व hi क्या सब जहाँ के लोग आपको पहचाने..

(फिर से साद फेस करके) लेकिन इसके लिए आपको ये महल छोड़ना जरुरी है क्या हमे छोड़ना जरुरी है क्या...

आप यहाँ रहकर भी वो सब कर सकते है न...

ये लो सच कहा था किसी ने लड़कियों को समजना मतलब पत्थर पर सर फोड़ने के सामान है..

न जाने किस भगवन ने उन्हें ऐसा बनाया है. लेकिन मानना तो था hi तो मई उसे आगे कहता हु...

Mai-Maine पहले hi कहा था की मई तुम लोगो को छोड़कर कही नहीं जाऊंगा...

तुम जब भी मुझे प्यार से याद करोगी मई तुम्हारे पास दौड़ा दौड़ा चला आऊंगा...

तुम जब भी अपनी आंखे बंद करके मुझे याद करोगी मई तुम्हारे आंखे खोलने से पहले hi तुम्हारे सामने आ जाऊंगा...

दित्य- (आपने बचो जैसी अबाज में कहती है) ऐसा है तो आप यहाँ रहकर hi अपना कर्मा क्यों नहीं करते.

मुझे आपको याद करने का मौका भी नहीं मिलेगा फिर क्यों की खुद आप hi मेरे साथ रहोगे...

मई- मई ऐसा जरूर करता.. पर मई अभी जहा से आया हु.. मतलब मई इतने दिन जहा रह रहा था वह भी मेरा एक परिवार है..

और उन्हें मेरी इस तक़द के बारे में नहीं पता ..और नहीं उन्हें इसकी कोई भनक भी है...

और उनके ऊपर हमेशा किसी न किसी तरह का संकट रहता है अभी भी वो संकट है...

तो मुझे बताओ उन्हें बचने वाला तो मई hi हु न यहाँ तो हर एक पास पावर्स है..

सब अपना ख्याल खुद रख सकते है... बल्कि यहाँ तो खुद नानाजी है इसलिए यहाँ पर कोई भी कुछ नहीं कर सकता...

पर वह तो मेरे सिवा कोई भी नहीं है.. और वह पर नानाजी ने खुद मुझे hi भेजा है...

इसलिए नानाजी भी उनकी मदद या उनके तरह के लोगो की मदद नहीं कर सकते क्यों की उन्होंने मुझे भेजा है..

वही मेरा कर्मा है.. वही मेरी पहचान hai..Unhe भी तो मेरी जरुरत है..

वो सब भी मुझे इसी तरह प्यार करते है. जैसे तुम और बाकि यहाँ सब लोग करते है...

अभी भी तुम्हारे मन में कोई सवाल है तो पूछो मई तुम्हारे हर सवाल का जवाब दूंगा...

दित्य- है एक सवाल अभी भी मेरे मन में है...

मई- (मन में) अरे मेरी माँ इतना सब कुछ तो इतने प्यार से तुम्हे समजा तो दिया और अब क्या सवाल रह गया है पूछने का....

Mai-Pucho बीटा क्या पूछना है तुम्हे...

वैसे मैंने बोल तो दिया था पर वो क्या सवाल करेगी इससे मई दर रहा था..

पर उसने जो सवाल किया उससे तो मई और भी ज्यादा खुश हो गया और उसके बाद मैंने उसे टाइट हुग कर दिया...

Ditya-(Apne आँखों में आंसू लेट हुए) क्या आप मुझे या बाकियो को वह जाकर भूलेंगे तो नहीं न.. मुझसे अभी जितना प्यार करते हो उतना hi करोगे न..

Mai-(Ditya को जोर से हुग करते हुए) अरे मेरी Gudiya...Ye भी कोई पूछने वाली बात है...

मई तुम्हे और इस परिवार को मरते डैम तक नहीं भूलूंगा..

और भूल भी कैसे पाउँगा तुम सब मेरा एक परिवार जो हो..

तुम को और यहाँ रहने वाले हर एक शक्श को भूल जाना मतलब मेरे दिल के धड़कन को भूल जाना जैसे होगा...

और जब तक इस दिल में धड़कन है तब तक मई तुम्हे प्यार करूँगा और इस परिवार को भी...

और उस धड़कन के बाद भी मई तुम सबसे प्यार करूँगा...

ये सुनने के बाद तो दित्य ने भी मुझ जोर से हुग कर Diya..wo मेरे ऐसे जवाब देने से बहुत hi खुश हो गयी थी...

उसने मुझे कुछ देर ऐसे hi अपनी बहो में रखा और फिर मुझसे दूर होकर कहने लगी...

दित्य- वैसे भैया अभी भी 1-2 सवाल मेरे मन में है क्या उसको भी पूछ लू आपसे...



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दित्य ने बात इतने प्यार से कही थी की उसकी बात कहने पर मुझे उसपर बहुत प्यार आ गया और हसी भी आ गयी गहि जिस तरह उसने ये कहा था...

Mai-Pucho जो भी पूछना है बेझिझक होकर कहो...

Ditya-Aapne कहा की ये आपका कर्मा है तो मेरा कर्मा क्या है... मई कब आपके साथ चलूंगी..

मुझे भी आपका वो परिवार देखना है.. मुझे भी आप जहा रहते हो वो जगह देखनी है..

और त्रि दी और शाट दी उन दोनों का कार्य क्या है.. क्या वो भी आपके साथ...

मई- पहिलाल तो मई इस बात का जवाब नहीं जनता पर है जब वक़्त आएगा तब...

नानाजी खुद तुम्हे तुम्हारा कार्य बता देंगे और तुम्हारा कार्य क्या होगा वो भी...

और रही मेरे साथ चलने की बात तो सही समय आने पर मई खुद तुम्हे वह ले जाऊंगा...

अभी तुम सिर्फ माँ के साथ बैठकर इस विश्व के बारे में और यहाँ पर रहने वाले हर एक सजीव जीवन के बारे में जान लो...

जब मुझे लगेगा की तुम सब जान चुकी हो तब मई तुम्हे वह ले जाऊंगा...

दित्य- ठीक है भैया जैसा आप कहे मई वैसा hi करुँगी.. लेकिन आप कब जा रहे हो...

Mai-Mujhe अभी जाना होगा गुड़िया.. क्यों की मुझे ऐसा महसूस हो रहा है की वह पर कोई खतरा आ गया है..

और वो सब एक बहुत बड़े खतरे में फसने वाले hai..Ya शायद फस भी गए है..

इसलिए मुझे अब यहाँ से वह जल्द से जल्द जाना होगा...

Ditya-Thik है भैया अगर आप अभी जाना चाहते हो मई आपको रोकूंगी नहीं..

लेकिन आपको मुझसे वडा करना होगा की जब भी मई आपको याद करू आपको मुझसे मिलने आना होगा और मेरी हद बात आपको माननी होगी...

मई- ये भी कोई पूछने की बात है.. तुम मेरी जान हो और मई अपने जान की बात न सुनु ऐसा कभी हो सकता है क्या...

ये कहकर मैंने मेरी गुड़िया को हुग कर Diya...waise उसे यहाँ पर छोड़ जाने का तो मेरा भी मन नहीं कर रहा था..

पर क्या करू जाना तो पड़ेगा hi na..ye सोचते हुए मेरे भी आँखों में आंसू आ गए थे...

पर दित्य के देखने से पहले hi वो मैंने पॉच दिए थे.. वार्ना वो फिर से सवाल करती...

मैंने उसको बहुत जोरो से हुग किया हुवा था.. उसको अपनी बहो में लेकर मेरे दिल की एक अलग hi सुकून आ रहा था...

और तभी फिर से उसी समय मेरे दिल में और एक दर्द मेहुश हुवा मेरे साइन में...

ये दर्द भी उतना hi तेज था जितना की पहले का था पर दित्य ने मुझे गले लगाया हुवा था...

इसलिए मुझे इतना ज्यादा दर्द नहीं हुवा जितना पहली बार हुवा था बस उस दर्द ी फीलिंग हुयी मुझे और एक आहत सी लगी मेरे दिल में...

अब ये कैसा दर्द है ये तो जल्द से जल्द देखना hi होगा मुझे...

उससे पहले कोई अनहोनी न हो जाये... मई यही सब दित्य को गले लगाए सोच रहा था............................................
 
मेगा अपडेट 49

मैंने उसको बहुत जोरो से हुग किया हुवा था.. उसको अपनी बहो में लेकर मेरे दिल की एक अलग hi सुकून आ रहा था...

और तभी फिर से उसी समय मेरे दिल में और एक दर्द मेहुश हुवा मेरे साइन में...

ये दर्द भी उतना hi तेज था जितना की पहले का था पर दित्य ने मुझे गले लगाया हुवा था...

इसलिए मुझे इतना ज्यादा दर्द नहीं हुवा जितना पहली बार हुवा था बस उस दर्द ी फीलिंग हुयी मुझे और एक आहत सी लगी मेरे दिल में...

अब ये कैसा दर्द है ये तो जल्द से जल्द देखना hi होगा मुझे...

उससे पहले कोई अनहोनी न हो जाये... मई यही सब दित्य को गले लगाए सोच रहा था............................................

आगे............................

इधर धरती पर उसी जंगल में तो माहौल अब और भी बहुत भयानक और दर्दनाक हो गया था...

पर हम चलते है उससे पहले जहा पर वो अघोरी तांत्रिक रितिका के सब पावर्स छीनने के बाद सोनम और रसिका के पास जा रहा था...

वो अघोरी उन दोनों के सामने जाकर खड़ा हो गया..

और उन दोनों सुंदरियों को अपनी हवसी नजर से ताकने लगा...

अघोरी- (खुश होते हुए) वहहह.... क्या रूप दिया है इन दोनों ko...Sach में अगर इनकी मुझे जरुरत नहीं होती तो मई इन दोनों को अपनी रखैल बना देता...

इन दोनों को hi क्या (रितिका की तरफ देखते हुए) उसे भी.. पर मुझे अभी उससे भी बहुत जरुरी कुछ काम है उसके बाद तुम सब को देख लेंगे...

ये कहकर वो अघोरी तांत्रिक बहुत hi जोर जोर से हसने laga...usi के तरह hi उसकी हसी भी बहुत hi खतरनाक थी..

जो उस जंगल में रहते दूसरे जानवरो को भी दरकार रक् देती थी...

तभी उस तांत्रिक ने अपने राइट हाथ में कुछ भस्म लिया और कुछ मंत्र पढ़ने लगा...

और उसके बाद वो भस्म उसने रसिका और सोनम के बॉडी पर फेक दिया...

वो भस्म उनके बॉडी पर पड़ते hi वो दोनों होश में आ गयी.. वैसे उन्होंने सब देखा तो था...

पर वो दोनों कुछ समाज नहीं प् रही थी पर जैसे hi उन दोनों की चेतना वापस आ गयी..

वैसे hi वो दोनों समाज गयी की उस अघोरी तांत्रिक ने उनकी रितिका दी के साथ क्या किया है...

इसकी बजह से वो दोनों भी बहुत क्रोधित हो गयी थी उस तांत्रिक par..Aur उसी गुस्से में सोनम कहने लगी...

Sonam-(Gusse में) कमीने तांत्रिक तूने हमारे ऋतू दी के साथ ये कर ाचा काम नहीं किया..

अब हम दोनों तुम्हे नहीं छोड़ेंगे जलाकर रख कर देंगे तुझे.. मौत से भी बदतर हालत हो जाएगी तेरी...

रसिका-(गुस्से से) तुझे क्या लगा तू हुम्हे वाश में कर के कुछ भी कर सकता है..

पर ये तेरी सबसे बड़ी भूल hai..Tu हमे छू भी नहीं सकता..

क्यों की जब भी तूने हमे चुने की कोशिश करि तो तेरा काल तेरे सामने आ जायेगा समाज गया..

और मई एक जिन हु जो चाहे कर सकती hu..Aur तू अब मेरे हाथो से बच नहीं सकता...

इतना कहकर वो दोनों भी उस तांत्रिक की तरफ आने लगी.. पर ये क्या वो दोनों तो अपनी जगह से हिल भी नहीं प् रही थी..

हिल क्या वो दोनों तो अपने बॉडी का एक भी Part मूव नहीं कर प् रही थी...

और ये देखकर वो तांत्रिक तो बहुत जोर जोर से हसने लगता है और हस्ते हुए...

अपने शिष्य की तरफ देखते हुए कुछ इशारा करता है. ये वही शिष्य थे जो कुछ अजीब तरह का संगीत और मंत्र पढ़कर यज्ञ में आहुति दे रहे थे...

अघोरी का इशारा पते hi उसके सरे शिष्य ने अपना संगीत बजने का और मंत्र पढ़कर आहुति देने के कार्य को तीव्र गति से बढ़ाते है..

मतलब वो अब और जोर जोर से और बहुत hi स्पीड से अपना कार्य कर रहे थे...

पर उसका असर ये हुवा की रसिका और सोनम दोनों अपना होश फिर से खोने लगे...

और उनके माधुरी संगीत और उस मंत्र शक्ति में वो दोनों वाश होने लगी...

पर फिर भी वो दोनों अपने आप को सँभालते जा रही थी...

Aghori-(Jor जोर से हस्ते हुए) तुम दोनों अपने आप को अपनी जगह से हिल भी नहीं प् रही हो और चली हो मुझसे लड़ने...

कुछ भी कहो तुम दोनों में हिम्मत बहुत है पर क्या करे ज्यादा देर तक नहीं...

क्यों की तुम्हारे is(Ritu की तरफ इशारा करते हुए) बूढी की तरह hi तुम दोनों का भी मई वही हसरा करूँगा...

ये कहकर वो फिर से अपने कामिनी हसी हसने लगा और ये देखकर वो दोनों बहुत hi गुस्से में आ गयी..

वैसे वो अपनी जगह से हिल तो नहीं सकती पर अपनी शक्तिया तो उसे कर सकती है इसलिए उन्होंने वही रास्ता अपनाया...

सोनम-( गुस्से से) कमीने तांत्रिक ये देख.....

ये कहकर सोनम ने अपने मुँह से एक बहुत hi बड़ी आग उस तांत्रिक के ऊपर फेक दी..



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एक ड्रैगन के मुँह से निकली आग बहुत hi भयानक और खतरनाक होती है..

उससे न जलने वाली चीज भी ऐसे जल जाती है जैसे कुछ हो hi न....

और सोनम के मुँह से आग निकलते hi रसिका ने भी अपने आँखों से बहुत से तीर निकले जो सीधा जाकर अघोरी की तरफ जाने लगे...

वैसे उस अघोरी ने आग को तो देख लिया था पर उसके पीछे निकले तीर कमान को नहीं..

इसलिए वो अपनी शक्तियों से सोनम की आग को तो रोकने में सफल हो गया..

पर उसके पीछे से निकलते अग्नि में जलकर और भी खूंखार हुए तीर को नहीं..



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और वो तीर जाकर सीधा उसके बॉडी पर ऊपर से निचे तक लगे...

उस आग से तपते हुए और उस आग में लिपटे हुए तीर जाकर सीधा उसके हाथ और Pet,Chati पेअर सभी जगह पर लगे...

उस तीर लगने के कारन वो बहुत hi जोर जोर से दर्द के मरे चिल्लाने लगा..

क्यों की सच में वो इन तिरो के लिए तैयार hi नहीं था.. पर आखिर वो भी एक अघोरी तांत्रिक hi था न...

और ऊपर से उसे ऋतू की साडी तकादे जो हासिल हो गयी थी.. इसीलिए वो अपने आप को हीलिंग करने में सफल हो गया...

उसे वो दर्द ज्यादा देर सहन नहीं करना पड़ा. क्यों की उसने अपने बॉडी को इस तरह गरम किया...

अपने अंदर की हीट को उसने बहार लाया की वो सभी तीर उसमे जलकर पिघल गए और कही गायब hi हो गए...



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और उसकी बॉडी भी पहले जैसी हो गयी.. जहा पर पहले उस तांत्रिक का ऐसा हाल देखकर...

रसिका और सोनम हसने लगी थी और हस्ते हुए कह भी रही थी...

Rasika-Dekha न हमसे पन्गा लेने का Hasra..ye तो छोटा सा नमूना है अभी नहीं रुका तो बहुत कुछ होगा तेरे....

पर इसके आगे वो कुछ बोल hi नहीं पायी क्यों की तभी उस तांत्रिक ने अपने आप को ठीक कर दिया था...

ये देखकर तो वो दोनों दर तो नहीं गयी पर कुछ शॉक जरूर हुयी थी...

अब हसने की बरी फिर से तांत्रिक की थी और ऊपर से वो दोनों अपना होश भी खोते जा रही थी...

अघोरी- क्या कह रही थी तुम दोनों. मुझे हराओगी पर पहले अपने आप को तो बचके दिखाओ..

ये कहकर वो फिर से हसने लगा पर इस बार बहुत hi गुस्से से उन दोनों से कहने लगा...

अघोरी- पर अब बस... बहुत हुवा ये खेल अब वक़्त नजदीक आ गया है वो देखो अमावश्या भी शुरू हो चुकी है...

तुम दोनों की बलि देकर मई सैतान को खुश करूँगा. पर उससे पहले मई तुम दोनों की साडी तकादे चीन लूंगा..

जिसकी बजह से मई और भी बलशाली और शक्तिशाली भगवन बन जाऊंगा...

पर तुम्हारी साडी शक्ति लेने के बाद भी मई सिर्फ एक चीज तुम्हारे अंदर रहने दूंगा...

और वो है तुम्हारा ये अप्रतिम और दिल को मोह लेने वाला सौंदर्य..

क्यों की इसके बगैर तो मुझे आगे का कार्य करने में बिलकुल भी मजा नहीं आएगा और मेरा सारा मजा किरकिरा हो जायेगा...

ये कहकर वो फिर से हसने लगा पर इस बार की उसकी हसी देखकर सच में वो दोनों भी दर गयी थी..

क्यों की उसने कहा hi कुछ ऐसा था और उन्होंने ये सब पहले देखा भी था उनके ऋतू दी के साथ...

इसलिए उन्हें अब पता चल गया था की सच में अघोरी तांत्रिक बहुत hi ज्यादा खतरनाक और शक्तिशाली हो गया है...

वो दोनों तो उसका कुछ भी नहीं कर नहीं sakte..Aur अब उनका भी वही हसरा होने वाला है..

पर वो दोनों अंत तक अपनी हिम्मत नहीं हरने वाली थी.. यही तो उन्होंने रद से सीखा था..

तभी फिर से उस तांत्रिक ने अपने हाथ में एक भस्म लिया और कुछ मंत्र पढ़ने लगा...

और वो भस्म उन दोनों के बॉडी पर फेक दिया और आंखे बंद कर अपने दोनों हाथ फैलाये वही पर खड़ा रहा...

और ये क्या वही पर एक बहुत hi बड़ी रौशनी चमकने लगी..

और वो रौशनी कही और की नहीं रसिका और सोनम के बॉडी के अंदर की थी..

उनके बॉडी में से निकलती रौशनी सीधा जाकर उस अघोरी तांत्रिक के अंदर घुस रही थी..

ऐसे कुछ hi देर में वो साडी रौशनी उस तांत्रिक के अंदर जाने के बाद hi वो रौशनी काम होने लगी और अब सब पहले की तरह Hi नार्मल हो गया...

लेकिन इस वक़्त एक चीज वह पर नार्मल नहीं थी वो है वह का नजारा...

क्यों की वो नजारा अब कुछअलग hi दिख रहा था. जहा पर रसिका और सोनम अपने आधे जिन और आधे ड्रैगन के रूप में कड़ी थी...

तो वही पर अब एक नार्मल लड़कियों की तरह hi कड़ी थी लेकिन है एक बात और हो गयी थी...

वह पर उनके सुंदरता को हाथ भी नहीं लगा था वो पहले की तरह अट्रैक्टिव और सुन्दर थी...



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रसिका

है पर एक बात थी उनकी शक्तिया जाने की बजह से उनका तेज पहले जितना नहीं था वो उससे अब बहुत काम हो गया था...



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सोनम

बस उनके तेज जाने की बजह से वो दोनों पहले से कुछ काम सुन्दर दिख रही थी...

वैसे उन दोनों की जब शक्तिया जा रही थी तब उन दोनों को दर्द तो बहुत हो रहा था..

और वो दर्द से तिलमिलाकर चिल्ला भी रही थी जैसे कुछ देर पहले रितिका चिल्ला रही थी..

पर वह पर उनकी ये चीखे सुनने वाला कोई भी नहीं था...

और यही वो समय था यही वो दर्द था जो रद को महसूस हुवा था जब उसने दित्य को गले लगाया हुवा था...



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और कुछ सोच रहा था.. इसी दर्द के बजह से उसके दिल में भी एक तेज दर्द हो रहा था...

क्यों की उन सब का रद से दिल hi दिल का रिश्ता जो हो गया था.. पर ये बात अभी तक रद को शायद पता नहीं चली थी...

वो सब रद से एक हो गए थे मतलब रद की जान में इनकी जान बस्ती है ऐसा कहना गलत नहीं होगा...

पर वह दित्य के गले लगने की बजह से उसे ये दर्द उतना महसूस नहीं हुवा था...

जितना पहले हुवा था अब इसका कारन क्या है वो तो मैंने आपको बता दिया है.. बस अब आगे चलते है ..

यहाँ पर वो अघोरी एक जीन और एक ड्रैगन की शक्तिया पाकर बहुत hi शक्तिशाली और खतरनाक हो गया था...

उसका इन शक्तियों के कारन उसका रूप भी पूरी तरह से चेंज हो गया था...

और वो एक हैवानियत के रूप में एक सैतान की तरह उनके सामने खड़ा हो गया था...

ड्रैगन की शक्ति पाने की बजह से उसका रूप कुछ कुछ ड्रैगन की तरह hi दिख रहा था पर जीन की तकादे तो उसे अंदर से मिल गयी थी...



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और यहाँ रसिका और सोनम की तक़द जाने की बजह से वो दोनों कुछ देर के लिए बेहोश हो गयी थी..

क्यों की उनकी शक्तिया जाने की बजह से उन्हें बहुत कमजोरी फील हो रही थी...

वही वो अघोरी अब इस मिले हुए नए शक्ति से बहुत hi खुश हो रहा था..

उसने इसी ख़ुशी में अपने दोनों पर जो ड्रैगन की शक्तियों से मिले हुए थे वो पहलीलाये हुए थे..

और अपने मुँह से आग निकलते हुए वो चारो और के पेड़ जला रहा था...



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उन पेड़ की आग की बजह से वह पर अब सब बहुत हिबसाफ दिखआयी दे रहा था...

उसने अपनी तक़द आजमाने के लिए वह पर बहुत कुछ किया.. जिसकी बजह से वो जगह चारो और से जल कल खाक हो गयी थी..

धरती बिच में से पहात गयी थी.. और बहुत कुछ हो गया था वह पर जो शब्दों में बया करना असंभव लग रहा है मुझे...

और एक बात हो गयी थी जब उस अघोरी तांत्रिक ने रसिका और सोनम की शक्ति ले ली थी..

उसके बाद वो तांत्रिक कुछ यंग दिख रहा था था जैसे कुछ 40 के करीब...

उसके बाद वो इतना खुश हुवा की उसने अपने शक्तियों की मदद से वह पर...

करीब दस हज़ार के करीब सेना कड़ी कर दी. क्यों की अगर उसके इस आगे के कार्य में अगर कोई ए...

तो ये सब उसे मार डेल और उसका ये कार्य बड़ी आसानी से hi पूरा हो जाये...

ये सब करते हुए वो बहुत hi खुश हो गया था और अब आखिर वो वक़्त आ hi गया...

जब वो अघोरी रसिका और सोनम की बलि देकर सैतान को खुश करना चाहता था..

और वो भी ऐसी वैसी बलि नहीं जैसे पहले दी थी ठीक वैसे hi अब ये तो आपको पता hi है न....

ये सब होने तक रसिका और सोनम दोनों को होश तो आ गया था पर वो कुछ नहीं प् रही थी..

क्यों की अघोरी तांत्रिक ने अपनी शक्तियों से उन्हें अभी भी हिलने नहीं दे रहा था मतलब वो अपना हाथ पेअर सर कुछ भी नहीं हिला प् रही थी...

और रितिका की तो ऐसी हालत हो गयी थी की वो चाहकर भी कुछ नहीं कर प् रही थी..

बस जो है रहा है वो बस बेबस होकर देख रही थी...

तांत्रिक- चलो अब वक़्त आ गया है (जोर से चिल्लाते हुए) कन्ट्रा.... उन दो लड़कियों को मेरे सामने लाओ और उन्हें जल्द से जल्द मेरे सामने नंगा करो..

अब मई भी उन दोनों की खूबसूरती देखकर नियंत्रण नहीं कर प् रहा हु...

इतना सुनते hi कन्ट्रा रसिका और सोनम की तरफ अपनी कामिनी हसी हस्ते हुए जा रहा था...

क्यों की उसे अपने मालिक अपने गुरु की बजह से उन दो ड्रैगन राजकुमारी और जीन राजकुमारी को नंगा करने का और उन्हें ऐसी हालत में देखने का अवसर जो प्राप्त हुवा था...

कन्ट्रा को अपने पास आता देख चिल्ला तो वो दोनों रही थी की ऐसा मत करो.. उन्हें नंगा मत करो.. उनकी इज्जत मत उतरो...

उन दोनों की ये सोचकर hi आँखों में आंसू आ गए थे.. बहुत दर्दनाक और कभी न सोचा हुवा पल था उनके लिए...

कन्ट्रा अब बहुत hi पास चला गया था उन दोनों ke..aur अब वो हाथ बढ़ाकर दोनों के कपडे को हाथ लगाने hi वाला था की तभी...

रसिका और सोनम दोनों एक साथ एक hi नाम से अपनी आंखे बंद करके चिल्लाती है...

Dono-(Ek साथ) ररूद्रादडीएप्पपपप.................................

और तभी चारो और बहुत hi तेज हवाएं चलने lagi..Badal भी बहुत जोर जोर से गरजने लगे थे...



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बिजलिया तो जैसे जोर जोर से शोर करते हुए चमक hi रही थी...

जैसे कोई भूचाल आ गया हो कोई अंधी आ गयी हो... इस अचानक बदलते हुए वातावरण को देख...



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कन्ट्रा भी कुछ दो पल रुक सा गया था और वो कुछ पल पीछे हैट गया था...

वह पर खड़े सभी लोगो ने अपनी आंखे बंद कर दी थी क्यों की उन्हें साइड अंधी तूफान में देखना असंभव था...

वही पर जब उस अघोरी तांत्रिक ने रुद्रदीप का नाम सुना तो एक पल के लिए उसके चहरे के एक्सप्रेशन जरूर चेंज हो गए थे...

पर उसकी बजह क्या थी वो तो आगे hi पता chalega..aur इस बदलते हुए वातावरण का भी..

और तभी ऊपर से एक बिजली के रफ़्तार से भी ज्यादा तेज लेकिन बिजली के साथ hi कोई एक ऐसा शक्श निचे आया..



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वो शक्श इतने तेजी से निचे आया था की उसे कोई भी देख भी न सका और नहीं उसके साथ आने वाले खतरे को महसूस कर सका...

और बिजली के रफ़्तार के साथ hi उस शक्श ने रसिका और सोनम के सामने खड़े कन्ट्रा को उसके साथ ए हुए बिजली से hi जलकर खाक कर दिया...

कन्ट्रा को तो उफ़.. करने का मौका तक नहीं दिया उस शक्श ने.. एक झटके में hi कन्ट्रा जैसे हवा में गायब हो गया...

और वो शक्श सीधा वह खड़ा हो गया जहा पर कुछ देर पहले कन्ट्रा खड़ा था..

लेकिन उस शक्श की पीठ अभी भी उस अघोरी तांत्रिक के तरफ थी इसलिए उसको अब तक किसी ने नहीं देखा था रसिका और सोनम ने भी नहीं..

और ऊपर से उस शक्श का मुँह पहले तो किसी मास्क के साथ ढाका हुवा था जिससे कोई उसका चेहरा देख नहीं प् रहा था...



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उस अंधी तूफान में सबको देखना असंभव हो गया था वही पर वो अघोरी भी आराम से तो नहीं...

पर जितना था उतना जरूर देख प् रहा था और वो भी इस अचानक बदलते हुए वातावरण से दर तो नहीं...

लेकिन शॉक जरूर हो गया था और जब उसने देखा की एक बिजली के रफ़्तार का वार उसके शिष्य कन्ट्रा पर हुवा...

और उसके शिष्य कही गायब सा हो गया और उसके जगह बिजली के रफ़्तार से भी ज्यादा तेज वह पर कोई और खड़ा है...

ये जानकर और कुछ देर पहले सुने शक्श का नाम ये दोनों उससे वो कुछ दर सा गया था...

ये सब इतने जल्दी हुवा की उसे कुछ सम्नजने और सोचने का वक़्त भी नहीं मिला..

लेकिन कन्ट्रा को धुएं में परिवर्तित होता वह खड़े हर एक शक्श ने देखा था...

जो ये नजारा देख बहुत hi ज्यादा दर और खौफ में चला गया था..

और उसकी जगह अब एक ऐसा शक्श खड़ा है जिसके बारे में किसी को भी कुछ नहीं पता था...

और उसे किसी ने भी नहीं देखा अब तक.. वो है कोण कहा से आया है ये भी किसी को नहीं पता चला...

और ये सब इतना अचानक से होगा ये भी किसी ने सोचा तक नहीं था...

लेकिन एक बात थी कुछ देर पहले कही रसिका की बात अब उस अघोरी तांत्रिक के दिमाग में जरूर घूम रही थी की....

अगर तुमने हमें चुने की भी कोशिश की तो तू हमे छू तो नहीं पायेगा लेकिन तेरा काल और तेरी मृत्यु जरूर तेरे सामने आ जाएगी..

और ये उस जीन की कही हुयी बात उसे सच होते हुए दिखाई दे रही थी. पर वो ऐसे hi हार मैंने वाला नहीं था...

वही रसिका और सोनम उन दोनों ने तो अपनी आंखे पहले hi बंद करके राखी थी..

तो उन्होंने ये सब देखने का सवाल hi नहीं उठता स्पेशलय उस शक्श का चेहरा...

और रही बात रितिका की तो वो पहले से hi इतनी बेबस थी की कुछ कर hi नहीं प् रही थी...

और इस अंधी तूफान में तो उसे खुद की आंखे भी खोल पाना असंभव लग रहा था...

वो अघोरी तांत्रिक अपने सबसे प्यारे और नजदीक शिष्य को इस तरह जान जाते देख...

बहुत hi गुस्से में आ गया था उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा था.. वो उसी गुस्से के चलते उस शक्श से कहता है...

अघोरी- कोण हो तुम... और यहाँ कैसे ए... तुम्हे पता है न ये मेरा इलाका है..

और यहाँ मेरे मर्जी के खिलाफ कोई नहीं आ सकता और तुमने एते hi मेरे सबसे प्रिय शिष्य को ऐसे hi मार डाला...

ये करके तूने अपने मौत को दावत दी है. इसकी सजा तो तुम्हे मिलनी hi चाहिए...

ये कहकर उस तांत्रिक ने अपने मुँह से एक आग निकली जो सीधा उस शक्श की तरफ बढ़ रही थी...

उस शक्श ने उस अघोरी की बात को अनसुना कर दिया उसी तरह वो उसके पीछे से एते हुए खतरे से भी अनजान था...

या ऐसा भी हो सकता है की वो जानकार भी उस खतरे से अनजान बनकर रहना चाहता हो...

पर ज्यादा देर वो शक्श चुप नहीं रह सका वो अपने फुल जोश में अपना राइट हाथ ऊपर किये और जोर से चिल्लाया.....

शक्श- Veeeeeerrrrrrrrrrr...........................

ये कहते hi उस शक्श के ऊपर आकाश से एक बहुत hi जोर की बिजली गिरी जो सीधा जाकर उस शक्श के हाथ पर hi...

पर जैसे hi वो बिजली गिरी उसी में से एक बिजली की तरह चमकते हुए hi एक तलवार उसके हाथ में आ गयी...



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और जैसे hi वो तलवार उसके हाथ में आ गयी उस तांत्रिक के मुँह से निकलती आग की बजह से वो अचानक एक ढाल में चेंज हो गयी...



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और उस तांत्रिक के मुँह से आग को रोककर उसे अपने अंदर सामने लगी.. और कुछ hi देर में वो साडी आग उस ढल में समां गयी...

और उसके बाद फिर से वो उसी तलवार में चेंज हो गयी जैसे उस शक्श के हाथ में आयी थी...

लेकिन इस बार वो तलवार उस आग में जल जरूर रही थी और लगता है वो तलवार भी चारो और के नजरो के देख...



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बहुत गुस्से में है और अपनी गर्मी दिखाकर जाताना चाहती हो की वो भी अब तैयार है हर हमले के लिए...

ये देखकर तो वो तांत्रिक के साथ साथ वह पर खड़े उसके सभी शिष्य भी ये देखकर बहुत hi दर गए...

क्यों की उन्होंने ऐसा सोचा तक क्या कभी देखा तक नहीं था उनके गुरु से भी तकद्वर कोई यहाँ पर ऐसे आ जायेगा...

और वो भी उसकी सिर्फ तलवार hi ऐसी शक्तिशाली की वो वक़्त के नजाकत को ध्यान रखते हुए अपना रूप चेंज कर के अपने मालिक की रक्षा करती है...

और फिर अपने मूल रूप में लौट अति है ये देखकर तो उस अघोरी को भी बहुत बड़ा शॉक लगा था...

वही तांत्रिक ने भी नहीं सोचा था की ऐसा भी ये शक्श बिना उसकी तरफ देखे या बिना उसके मुँह से फेके हुए आग को देखे साइड रोक सकता है...

और उसकी ये तलवार ऐसे उसके वार को अपने अंदर इतने आसानी से ले सकती है..

ये सब उसने देखा इस पर उसे विश्वास रखना बहुत hi हार्ड था...

पर ये तो कुछ भी नहीं था अभी ये तो शुरुवात भी नहीं हुयी है इसके आगे ऐसा कुछ होने वाला था...

जो उसके सोच के और उसके समाज से भी बहार का था.. क्यों की उसकी सोच वह तक पहुंच hi नहीं सकती थी चाहे वो कितनी भी बड़ी शक्तिया हासिल क्यों न कर ले...

अब यहाँ पर रसिका और सोनम को ये तो महसूस हो गया था की यहाँ पर चारो और अंधी तूफान चल रहा है...

और वो भी बहुत जोरो शोरो से.. पर उन्हें इस बात का आचर्य जरूर हो रहा था अभी तक कन्ट्रा ने उन्हें हाथ भी नहीं लगाया...

और उसके ऊपर उन्हें अघोरी के मुँह से ऐसी बातें सुनकर बहुत hi शॉक लगा की ये ऐसा किसे और क्यों कह रहा है..

और यहाँ पर कोण ऐसा शक्श आ गया जो इस अघोरी तांत्रिक को ललकार रहा है..

वो दोनों यही सोच रही थी की तभी उन्होंने एक जोर सर चिक सुनी जो वीर के नाम की थी...

और ये वीर नाम की चीख सुन और जिसने भी ये कहा उसकी अबाज सुन वो दोनों तो उससे भी ज्यादा शॉक हो गयी...

क्यों की उन्हें वो अबाज कुछ जनि पहचानी सी लगी..

जनि पहचानी क्या ये दोनों किसी भी हालत में हो ये अबाज कभी नहीं भूल सकती..

और उस शक्श की अबाज सुन वो दोनों ख़ुशी से और आनंद से पहले नहीं समां रही थी...

और उन्होंने उस शक्श को देखने के लिए झट से आंखे खोली और जब इन दोनों ने उस शक्श को देखा...

तो सच में उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था की वो शक्श वह आ जायेगा...

पर उन्हें ये भी जरूर मालूम था की उन्हें ऐसे संकट में देख वो शक्श आराम से तो कभी रह hi नहीं सकता...

वो दोनों उस शक्श को देख वह पर देख बहुत hi खुश हो रही थी...

जैसे उन्हें पुरे जहाँ की ख़ुशी मिल गयी हो पर वही वो अघोरी भी बहुत गुस्सा हो गया था उस शक्श को देख....

और यहाँ ऋतू ने जब उस अघोरी के मुँह से वही बाते और उस शक्श के मुँह से वीर नाम सुन...

रितिका भी उस शक्श को पहचान तो गयी थी.. उस शक्श की अबाज सुन उसके भी इतने बेजान पड़े हुए बॉडी में जैसे जान आ गयी हो...

और उस हालत में मतलब जब उसे हसना भी दर्द लग रहा था उस हालत में भी उसके चहरे पर एक खुलकर हसी आ गयी..

हालाँकि उसने आंखे खोलकर उस शक्श को देहने की कोशिश जरूर की पर वो ऐसे अंधी में देखने में असफल रही...

अब इतने लोग उस शक्श को पहचान गए थे तो आप भी पहचान hi जाओगे..

की वो शक्श आखिर है कोण. अगर आपको तकलीफ हो रही है तो चलो मई hi बता देता हु...

उस शक्श को देख रसिका और सोनम इतने आनंदित हो गयी थी की ख़ुशी के मरे उन दोनों के मुँह से उस शक्श का नाम निकल गया...

वैसे ये वही नाम है जो उन्होंने कुछ देर पहले दर और खौफ के कारन और उन्हें इस बड़ी संकट में से बचने के लिए hi लिया था..

अब तो आप सब पहचान hi गए होंगे...

Dono-(Ek साथ और ख़ुशी से) ररूद्रादडीएप्पपपप....................



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जी है दोस्तों वो शक्श कोई और नहीं मई hi था पर मई वह पंहुचा कैसे..

ये तो जानना hi होगा न आपको तो चलो कुछ देर पहले रिवर्स में और किसी दूसरी जगह....

जहा पर रद दित्य को गले लगाकर वही सोच रहा था जो अभी आप सोच रहे हो...................................
 
मेगा अपडेट 50

अब तो आप सब पहचान hi गए होंगे...

Dono-(Ek साथ और ख़ुशी से) ररूद्रादडीएप्पपपप....................

जी है दोस्तों वो शक्श कोई और नहीं मई hi था पर मई वह पंहुचा कैसे..

ये तो जानना hi होगा न आपको तो चलो कुछ देर पहले रिवर्स में और किसी दूसरी जगह....

जहा पर रद दित्य को गले लगाकर वही सोच रहा था जो अभी आप सोच रहे हो...................................

आगे............................

मई दित्य को गले लगाए हुए मुझे अभी जो दर्द फील हुवा उसी के बारे में hi सोच रहा था की...

तभी अचानक से मेरे दिमाग में एक कही से अबाज आयी जिसे सुनकर मई एक पल के लिए तो चौंक hi गया...

अबाज- अबे ये चलना देर हो रही है....

ये अबाज सुनते hi मई दित्य से अलग हो गया और दित्य मुझे ऐसे अलग होने से मेरी तरफ देखने लगी और वो कहती है..

Ditya-Kya हुवा भैया आप ऐसे मुझसे अलग क्यों हो गए और ये आपके चहरे का रंग क्यों उदा हुवा है...

Mai-(Man में) ये अभी अभी जो मैंने सुनी वो अबाज कैसी और किसकी थी...

पर लगता ही ये अबाज दित्य ने नहीं सुनी होगी. पर क्यों सुनाई नहीं दी उसे वार्ना वो मुझे इस बारे में बात जरूर करती..

पर इस बारे में मई बाद में जरूर सोचूंगा पहले जो है वही तो देख लू...

फिर से दित्य मुझे ऐसे अपने hi सोचो में गम होता देख मुझे हिलती हुए कहती है...

Ditya-Kaha खो गए भैया मई आप से कुछ पूछ रही हो...

Mai-Kuch नहीं गुड़िया मई तो बस ऐसे hi मुझे अभी निकलना है न उसी के बारे में सोच रहा हु...

Ditya-Abhi... इतने जल्दी कुछ दिन रुक हेट न भैया हम सब मिलकर बहुत मस्ती करते यहाँ पर..

मई- मेरी गुड़िया मई जरूर रुक जाता पर मैंने तुम्हे अभी बताया न इसकी बजह तो मुझे जाना होगा...

दित्य- ठीक है भैया कोई बात नहीं आप चलो मई आपको निचे ले जाती हु..

ये कहकर उसने मेरा हाथ पकड़ा और हम दोनों निचे जाने lage..wo ख़ुशी से मेरा हाथ पकड़कर निचे ले जा रही थी..

वह पर अब सभी बैठे हुए कुछ बाटे कर रहे थे.. नानाजी और दोनों मामाजी भी वही आ गए थे...

जैसे उन्हें सब पता चल गया हो और वो सब जैसे मुझे यहाँ से अलविदा कहने hi ए हो...

वैसे माँ और बाकि सब लोग हम दोनों को ऐसे हस्ते हुए एते देख बहुत शॉक हो गयी थी ..

क्यों की उन्होंने ऐसा सोचा तक नहीं था की दित्य मुझे ऐसे हस्ते हुए और वो खुद मुझे अलविदा कहने आएगी...

न जाने मैंने ऐसा उससे क्या कहा या क्या जादू कर दिया. की वो इतने जल्दी मान गयी और वो भी ऐसे...

वह पर जाने के बाद मेरे कुछ बोलने से पहले hi दित्य बोल पड़ी...

Ditya-Aap हम दोनों को ऐसे क्यों देख रहे थे.. क्या आप सबको पता नहीं है क्या की भैया आज वापस जाने वाले है...

दित्य की बात से उन सबको हसी तो आयी पर सब अपनी हसी कण्ट्रोल कर रहे थे पर तभी बड़ी ममी कहती है ..

सौम्य ममी- क्या .. रूद्र सच में जा रहा है पर उसने तो हमे इसके बारे में कुछ भी नहीं बताया...

क्या रूद्र तुम भी कही जा रहे हो और हमे बताया भी नहीं...

तभी माँ बड़ी ममी को हलके से मरते हुए कहती है...

माँ- सौम्य... अगर मेरा बीटा जाना चाहता है तो जाने दो आखिर ये उसका कर्मा जो है और ये आखिर उसे hi पूरा करना है...

दित्य तो ये बात सुनकर हसी पर वही एक पल के लिए मई जरूर चौंक गया की ये हम दोनों की एक रूम की गयी बात कैसे जान सकती है...

पर मई उस वक़्त ये भूल गया था की ये भी और कोई नहीं मेरी माँ hi है.. तो मुझसे तो कुछ आगे hi होगी न और साथ में उनकी सोच भी....

फिर मैंने वह पर खड़े Mama-mami और माँ सबके पेअर छुए...

सबने मुझे पेअर चुने के बाद अपनी तरफ से अलग अलग तरह के आशीर्वाद दिए..

और फिर मुझे गले भी लगाया और आखिर मई मैंने नानाजी के पेअर छुए तो उन्होंने मुझे गले लगाया और फिर कहने लगे...

नानाजी- बीटा मुझे पता है तुम अपना कार्य अछि तरह से निभाओगे...

और किसी भी चीज संकट और समय का सामना तुम अपने बलबूते पर और हिम्मत के साथ आगे बडोगे और उनसे लड़ोगे..

मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ है बस यही कहूंगा की ध्यान करते रहना और अपने दिमाग और दिल को शांत रखना हर समय...

उसके बाद मुझे मेरी बहनो ने गले लगाया और मई उन सबसे फिर आने का वडा और प्यार भरा Bye कहके वह से जाने लगा...

लेकिन जाते समय मुझे मेरी माँ के आँखों में कुछ आंसू दिखे.. और कैसे न दीखते वो मेरी माँ है और मई उनका पुत्र...

माँ तो आखिर माँ hi होती है न उनका बीटा उनसे दूर जाते हुए कैसे देख सकती है वो फिर चाहे वो पल भर के लिए हो या हज़ारो सालो के लिए...

पर मई उन्हें अनदेखा करते हुए निकल पड़ा क्यों की मुझे भी पता था...

जब मई उन पर ध्यान दूंगा तो मई भी कमजोर पडूंगा और यहाँ से जा नहीं पाउँगा..

पर जाना तो था hi इसलिए मई झट से वह से गायब हो गया और वह से बहार आ गया...

ये वही जगह थी जहा पर मुझे अंश ने छोड़ा था जब मई यहाँ पर पहली बार आया था..

मैंने वह जाकर अपनी आंखे पोची और अपने आप को कण्ट्रोल किया.. और अंश को सिर्फ याद किया...

तो मेरे याद करते hi वो मेरे सामने पल भर में hi आ गया..

वैसे वो ऐसा पहले भी कर चूका है पर इस बार बात मुझे कुछ अलग लग रही थी तो मैंने सीधा उससे पूछ लिया...

मई- क्या बात है अंश तुम आज कुछ अजीब दिख रहे हो बात क्या है...

Ansh-(Apne चहरे पर हसी लेट हुए) ये सब आपको अभी अपनी पुराणी तकादे नए तरीके से मिली है न इसलिए लग रहा है भाई...

Mai-Baat को घुमाओ मत मुझे बताओ आखिर बात क्या है और अभी कुछ देर पहले...

मुझे बताओ ये मेरे दिल में जो इतना तेज दर्द उठा था वो कैसा था...

अंश- वैसा hi दर्द मैंने भी महसूस किया था था भाई पर मई आपको ये बात जरूर बताऊंगा क्यों की...

आपका अब वह जाने का वक़्त आ गया है और अगर आप अभी नहीं गए तो बहुत hi अनर्थ हो जायेगा...

मई अभी अंश से कुछ कहने hi वाला था की तभी अंश ने मेरे ऊपर अपने हाथ से एक बहुत hi छोटी सी रौशनी छोड़ी...

और जब वो अपने हाथ से वही छोटी सी रौशनी मुझे पर छोड़ रहा था...

तभी उसने झट से अपना हाथ पीछे खींच लिया जैसे इसके आगे वाले मतलब उसके बाद के निकलने वाले रौशनी को वो किसी भी हालत में रोकना चाहता था...

अंश ने ऐसा क्यों किया ये मई उससे पूछने hi वाला था की तभी उसकी फेकि हुयी रौशनी मेरे दिमाग में चली गयी...

और मेरी आंखे बंद हो गयी और अभी मई जो कुछ बह उसके बारे में सोच रहा था वो अचानक से भूल गया...

पर उसके बाद जो कुछ भी मुझे पता चला या मैंने देखा वो देखकर मई निचे से लेकर ऊपर तक थार थार कैंप रहा था...

पर वो कोई ऐसा थारकंप नहीं था वो तो मेरे गुस्से की बजह से मेरी पूरी बॉडी विबरते हो रही थी...



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मेरी पूरी बॉडी गरम हो गयी थी जो मई देख रहा था वो सोचकर hi लेकिन तभी मैंने अपनी आंखे खोल ली..

अभी कुछ देर पहले जो मेरी आंखे नार्मल और नीली थी और अब वो पूरी तरह से गुस्से की बजह से लाल हो गयी थी...



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और गुस्से की बजह से अंगारे भी निकल रहे थे मैंने उसी गुस्से से अंश से कहने लगा...

मई- अंश तुम्हे ऐसा नहीं करना चाहिए था.. और किया भी पर उसके साथ तुम्हे रहना चाहिए था...

अंश- पर भाई.....

मैंने अंश से कुछ बोलने hi नहीं दिया और उसे बिच में hi रोक दिया अपना हाथ आगे कर...

लेकिन मैंने वही गुस्से से कहने लगा...

Mai-(Gusse से) अग्घोररीी...... मई आ रहा हु.....

और फिर मई वह से सीधा गायब होकर उसी जगह चला गया जहा पर वो अघोरी उस जंगल में खड़ा था...

और उसका वही शिष्य कन्ट्रा सोनम और रसिका के सामने हाथ ऊपर करके आगे बढ़ रहा था उनके कपडे उतरने के लिए...

मई जैसे hi वह आया यहाँ का सारा माहौल चेंज हो गया था मेरी गुस्से की बजह से...

जैसे hi मैंने वो सन देखा मैंने तो पहले वह गरज रहे है एक बिजली को उस कन्ट्रा के ऊपर फेक दिया...

और उसके साथ hi अपने फुल स्पीड से उसके ऊपर पहुंच कर खड़ा हो गया मेरी दोनों जान की तरफ चेहरा करते हुए...

उसके बाद तो आप जानते hi हो की उस अघोरी का गुस्से से मुझे कहना और उसके बाद मेरा वीर को याद करना...

और फिर उसकी ढाल बनकर मेरी रक्षा करना उस आग से...

अब चलते है आगे जहा से सोनम और रसिका मेरा नाम खुशी से लेती है..

पर वो दोनों अभी भी अपना होश धीरे धीरे गवा रही थी ये मेरे सोच में एते hi मुझे समाज आ गया ये ऐसा क्यों कर रही है...

उसके बाद मई गुस्से से उस तांत्रिक की तरफ मुदा और उसने जब मेरा चेहरा देखा तो उसके पूरी तरह से एक्सप्रेशन hi चेंज हो गए...

अघोरी- Tum....Tum जिन्दा हो... पर कैसे.... लेकीन... यहाँ कैसे.... तुम तो...

वैसे ये बात कहते हुए उसकी टोन चेंज हो गयी थी जैसे उसके अंदर से कोई और hi आदमी बोल रहा हो....

Mai-Ha मई... क्यों की ये मेरा परिवार है और तूने मेरे hi परिवार पर हाथ उठाने की जरुरत की है ये तुझे बहुत hi महंगा पड़ेगा..

लेकिन तभी फिर से उसकी टोन चेंज हो गयी और वो फिर से कहता है...

तांत्रिक- ाचा तो तू इनके परिवार के साथ hi है.. वही तो सोचु की तू यहाँ क्या कर रहा है...

और वो भी इतने खतरनाक तरीके से कोण यहाँ आ सकता है और मेरे इतने प्यारे शिष्य को मार सकता है...

Mai-Tu चिंता मत कर उसके जैसा hi हसरा तेरा भी होगा..

इस बात से तांत्रिक जोर जोर से हसने लगा और फिर वो हस्ते हुए कहता है...

तांत्रिक- पहले अपनी साथियो का हाल तो देख उसके बाद मुझसे लड़ने की सोच और अगर तू मेरे बिच में आया तो उनके जैसा hi तेरा भी हसरा होगा...

उस तांत्रिक ने जिस तरफ इशारा किया था उस तरफ मैंने देखा तो उस तरफ एक औरत थी जो एक बहुत hi बूढी की तरह दिख रही थी.

और वो बूढी बहुत hi सुख गयी थी. उसे एक लकड़ी से बांध दिया गया था.. उसे तो इस अंधी तूफान में अपनी आंखे खोला भी नहीं जा रहा था...

बहुत hi बेजान और कमजोर हो गयी थी वो बूढी पर उसे इस लकड़ी से क्यों बंद दिया है..

लेकिन जब मैंने उसका चेहरा देखा तब तो मई पूरा हिल hi गया...

क्यों की वो बूढी और कोई नहीं मेरी ऋतू थी सिर्फ मेरी..

उसका ऐसा हाल देख मेरे दोनों आँखों में पानी आ गया था और साथ hi उस तांत्रिक पर गुस्सा भी...

मई- (अपने आप को रोने से रोकते huye)Ritu.....

ये अबाज सुनते hi उस लड़की के बेजान पड़े हुए शरीर में भी जान आ गयी हो और उसके चहरे पर हसी..



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तभी मुझे रसिका ने अबाज दिया और वो कहने लगी...

Rasika-RD उस अघोरी के जो शिष्य है न वो कुछ अजीब तरह का संगीत और मंत्र पढ़ रहे है...

उसकी बजह से हम उसकी तरफ अत्त्रक्ट होकर अपना होश गवा रहे है...

और बहुत कमजोर भी होते जा रहे है उनका कुछ करो न..

ये सुनते hi एक बार मैंने उन अघोरी के शिष्य की तरफ देखा तो वो सब...

मुझे ऐसा अपनी तरफ देखते हुए पाकर बहुत hi घबरा गए थे पर फिर मई उस अघोरी की तरफ देखते हुए कहता हु...

Mai-Tune मेरा परिवार मेरी जान के साथ ये बिलकुल भी ाचा नहीं किया...

और उनका ऐसा हाल कर तूने अपनी मौत को दावत दी है...

Aghori-(Haste हुए) मई इनकी शक्ति छीनने से पहले उनकी शक्तिया भी देखि थी...

तो चलो ये मौका तुम्हे भी देता हु वार्ना तुम फिर से कहोगे की मैंने तुम्हे ये मौका दिया नहीं...

मैंने एक बार उसकी बात पर कामिनी हसी हस्ते हुए देखा और वह से अपने फुल स्पीड से भागते हुए...

उसके शिस्य की तरफ चला गया और वह जाकर वो सब कुछ सोचते उससे पहले hi...



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उन्हें हर तरह से मैंने काटकर कभी किसी का तो पेअर कभी हाथ ऐसा मैंने वह पर खड़े हर एक शक्श के साथ किया था...

उनसे मरते हुए मई कहने लगा...

मई- तुम सबने मेरी जान को तकलीफ देने की कोशिश की है उन्हें मतलब तुमने मुझे तकलीफ दी है...

और अगर कोई मुझे तकलीफ दे तो मई उसे ऐसे तकलीफ देता हु की वो तकलीफ के नाम से भी डरने लगता है...

पर मई तुम सब सालो को ये मौका भी नहीं दूंगा...

ये कहकर मैंने उसके सरे शिया को मार दिया और फिर उसके सरे शिष्य को मरने के बाद मई अपनी जगह लौट आया और उसी तरह खड़ा हो गया...

अघोरी से मई अपनी वही कामिनी हसी हस्ते हुए फिर वे कहता हु...

मई- तू इनके बलबूते पर उड़ रहा है न पर ये देख मैंने तो बस 1 सेकंड में hi इनका ये हाल कर दिया...

ये कहकर मैंने उसके शिष्य की तरफ इशारा किया तो उसने उस तरफ देखा...

तभी उसके सरे शिष्यों की बॉडी कट कर इतनी छोटे छोटे टुकड़े हो गए थे की उनको गिना भी नहीं जा रहा था...

वह पर उनका चारो और खून और इन सबके छोटे छोटे टुकड़े गिरे थे.. .

ये देखकर उस तांत्रिक ने एक बार मेरी तरफ देखा तो उसकी नजर मेरे हाथ की तलवार पर गयी...

तो उसने देखा की उस तलवार पर खून लगा हुवा है.. और वो पूरी तलवार खून से नहायी हुयी है...



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ये देखकर उसे समझने की देर नहीं लगी की उसके शिष्य का हाल मैंने hi किया है..

पर ये देखकर और सिर्फ 1 सेकंड में hi इन सबका ऐसा हाल देखकर वो बहुत दर गया मुझसे और दर के मरे वो कुछ पीछे हैट गया..

क्यों की उसे इस बात पर विश्वास hi नहीं हो रहा था की मैंने ये सब सिर्फ 1 hi सेकंड में hi कर दिया hai...wo भी बिना किसी के नजर में ए...

पर कहते है न अपना ईगो और अहंकार बहुत hi कुट्टी और कामिनी चीज होती है...

जब मौत सामने हो तब भी अपना ईगो उसने साइड में नहीं रखा और उसे मिले हुए शक्तियों पर उसे गर्व होने लगा...

और उसी के साथ वो फिर से हस्ते हुए कहता है...

अघोरी- तूने क्या सोचा की तू मेरी शिष्यों को मरकर खुद को बहुत hi तकद्वर और शक्तिशाली समाज रहा है...

पर तू भूल रहा है की सबसे शक्तिशाली तो मई हु तेरे सामने यहाँ खड़ा.

और तू भूल मत मेरे पास अभी भी सेना है वो भी 10000 सेना इसलिए पहले तुझे उन्हें हराना होगा और फिर मुझे...

Mai-To फिर ठीक है तेरी यही ीचा है तो यही सही..

पर उसके सेना को मरने से पहले मैंने पीछे मुदा और रसिका और सोनम की तरफ देखने लगा...

तो वो दोनों कुछ नार्मल हो रही थी. पर अभी भी अपनी जगह से हिल नहीं प् रही थी...

तभी मैंने उनकी पैरो की तरफ देखा और मैंने अपनी आँखों से एक वाइट रौशनी उनके पैरो पर छोड़ दी...



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और वो रौशनी उनके पैरो से लेकर पुरे बॉडी में से सर तक घूम रही थी..

और फिर वापस आकर पैरो से hi इस धरती में गायब हो गयी...

उस रौशनी की बजह से वो वह से अब फ्री हो गयी थी यानि वो अब अपनी जगह से मूव कर प् रही थी...

और अपने पुरे बॉडी को मूव भी कर प् रही थी.. अब वो दोनों पहले से बेहतर फील कर रही थी तो मैंने उन दोनों से कहा...

मई- तुम दोनों जाओ ऋतू की तरफ और उसे आज़ाद करके उसका ख्याल रखो...

मई अभी आया उस अघोरी तांत्रिक को सबक सीखकर..

ये कहकर मई उसके सेना की पास पहुँच गया उन्हें मौत के घाट उतरने और वो दोनों ऋतू की तरफ उसे बचने...

वैसे वो सेना तो सिर्फ देखने में hi बहुत बड़ी दिख रही थी पर मेरे सामने कुछ भी नहीं था..

मुझे भी वो सब अपनी तरफ अत देख वो सब हथ्यार हाथ में लेकर मेरी तरफ भागते हुए आ रहे थे मुझ पर हमला करने के लिए...

और वही मई अपने स्पीड में उनके पास पहुंचकर वह खड़े उस अघोरी के हर एक सैनिक को अपनी तलवार से मरने लगा...

पर ये क्या मेरी तलवार का वार उनके बॉडी में से आरपार हो रहा था...

पर उन्हें कुछ भी नहीं हो रहा था.. पर जब वो अपना वार कर रहे थे तो...

उनके हमला करते वक़्त मुझे लगता नहीं पर मई अपने तलवार से रोक जरूर रहा था...

ये कैसे हो रहा है मुझे समाज hi नहीं आया और मई उन सबसे दूर आकर उन सबको देखने लगा...

और उन्हें देखकर मई यही सोच रहा था की ये आखिर है क्या...

इतनी सेना मुझे दिखाई देने के बाद भी मई उन्हें मार नहीं प् रहा हु.. उन्हें हाथ भी नहीं लगा प् रहा हु...

और उन सेना के पास जाकर भी मुझे उन्हें मरते हुए न देख और वो सब मुझे पर हमला करते हुए देख...

और इसी बिच में मुझे कही दूर जाकर खड़ा होता देखकर वो अघोरी तो बहुत खुश हो गया और वो अपने डरावनी हसी से हसने लगा था..

उसे लगा था की ये मुझसे नहीं हो पायेगा.. और मई उससे हार गया...

पर मई उन्हें कैसे मरू और कैसे उन्हें हरौ यही सब सोच रहा था तभी...

अचानक फिर से वही अबाज मेरे दिमाग में आ गयी जो कुछ देर पहले यहाँ आने से पहले सुनाई दी थी...

Abaj-Abe घोंचू... ये मायावी सेना है ये ऐसे hi नहीं मारेगी..

ये अगर आग और पानी दोनों के समपर्क में आ गयी तभी इन्हे मारा जा सकता है...

ये अबाज एते hi मई एक पल के लिए जरूर शॉक रहा और पर उस अबाज ने मुझे एक आईडिया मिल गयी थी इसलिए मैंने उसके बारे अभी के लिए नहीं सोचा...

और मैंने अपनी तलवार ऊपर कर उसको आकाश की तरफ किया तो उस तलवार से एक बिजली की तरह रौशनी आकाश में चली गयी..

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और उसी के साथ आकाश का पूरा रंग कला हो गया और वह से बहुत जोर से बिजलिया गरजते हुए ऊपर से जोर जोर से बारिश गिरने लगी...

और उस बारिश में वो साडी सेना भीगने लगी और उस पानी की बजह से hi उस साडी सेना को अपनी बॉडी मिल गयी...

और अब मई अपनी तलवार की तरफ देखने लगा तो वो आग से चमकने लगी.. वो तलवार एक फायर सोर्ड की तरह लग रही थी...

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वैसे ये सब देखकर उस अघोरी को तो कुछ समाज hi नहीं आ रहा था की मई क्या कर रहा हु..

और वो साडी सेना को मुझे फिर से मरने का आदेश देता है...

और उसके कहते hi फिर से वही सेना मेरी तरफ अब भागने लगे थी मुझे मरने के लिए..

वो मेरे पास पहुंचे hi थे की मई अपनी गति से चमकती हुयी तलवार लेकर उन पर टूट पड़ा...

और ये क्या पानी और आग से मिले जुले होने की बजह से वो साडी सेना वही मर रही थी..

और बॉडी पर मेरी तलवार का घाव भी लग रहा था और उनकी जाने भी जा रही थी..

पर ऐसे hi नहीं वो मेरे तलवार से Hi जलकर रख हो रहे थे...

ये देखकर तो वो अघोरी पल भर के लिए बहुत hi शॉक हो गया...

और वो कुछ सोचने लगा इन सबके बारे में और वही मई अब कुछ और hi करने वाला था...

मैंने पहले तो अपने वीर से कहकर वो एक वेपन में चेंज हो गया जो दिखने में तो धनस्य की तरह hi दिख रही थी...

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पर जब मैंने वो धनस्य हाथ में लेकर चलाया तो उसमे से सीधा फायर बीम निकल कर आयी जो कुछ लाइट रेज़ की तरह hi दिख रही थी...

और फिर उसके बाद आग के तीर ऐसे hi वो बिच में फायर तीर तो कभी ऐसे hi लेज़र बीम उस सेना पर छोड़ रहा था..

और वो साडी सेना उस फायर बीम के टच होते hi जलकर रख हो रही थी..

उस धनुष्य से बहुत hi आसानी से और बहुत hi फ़ास्ट सेना रख होते जा रही थी..

उसके बाद मैंने अब वीर को आधी सेना के ऊपर फेक दिया और उसके बाद वो एक ऐसे चक्र में चेंज हो गया...

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जो बहुत hi बड़ा था और वो भी पूरी तरह से आग से भड़के हुए...

और फिर वो चारो और घूमते हुए जो भी उसके रस्ते में आता उसे मरकर आगे बढ़ने लगा..

और इधर मैंने भी अपना रूप चेंज कर Diya..Aur पूरी तरह से फायर मन हो गया और टूट पड़ा उन सब पर...

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कभी मई एक बड़ा सा फायर बॉल बनता और उन सब पर फेक देता तो कभी अपने हाथो से hi उन सबको उठाकर कर फाटक देता...

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हम दोनों के ऐसे वार से और ऐसे अकर्मक रूप से वो साडी सेना बस कुछ hi देर में मिटटी का ढेर बनकर रह गयी...

और उसके बाद वीर मेरे हाथ में एक तलवार बनकर और...

मई अपने पहले का रूप में आकर उस अघोरी तांत्रिक के सामने जाकर खड़ा हो गया...

मेरा ये सहस और मेरी ये तक़द देखकर वो अघोरी सच में मुझसे बहुत hi इम्प्रेस हो गया था...

और साथ में मेरे दिमाग को भी मैंने लगा था तो और उसी के साथ उसको मुझसे दर भी लग रहा था तो वो कहता है..

अघोरी- मन्ना पड़ेगा तुम्हे की तुम सच में तकद्वर हो अकाल से भी और अपनर शक्तियों से भी...

पर मई ये सब तो बस तुम्हारी तक़द तुम्हारी हिम्मत और तुम्हारी अक्कल देखना चाहता था...

और सच में तुम इस दुनिया में सबसे काबिल और शक्तिशाली भी हो...

पर ज्यादा देर रह नहीं पाओगे क्यों की जो तुम्हारे अंदर शक्तियों है न वो अब मुझे चाहिए....

Mai-Meri शक्तिया (हस्ते हुए) कोई हलवा है क्या जो तुम्हे चाहिए और तुम ले लो गए..

अब तो तुम सिर्फ एक hi चीज ले पाओगे अपने अंदर और वो है तुम्हारी मौत...

.

Aghori-Dekhte है पर मई तुम्हारी साडी तकादे लेने के बाद hi अपने मकसद में पूरी तरह से कामयाब हो पाउँगा...

ये कहते hi उसने अपने राइट हाथ में फिर से वही भस्म लाया जो उसने रितिका, रसिका और सोनम की तक़द अपने अंदर लेने के लिए लाया था...

उसने फिर से कोई मंत्र पढ़े और वो भस्म मेरे ऊपर फेक दिया...

अब आप सब सोच रहे होंगे की मई कुछ कर क्यों नहीं रहा तो भाई दुश्मन को भी कभी चांस देना चाहिए न...

उसकी शक्तिया और उसकी काबिलियत आजमाने का वो भले hi उसकी शक्तिया न हो प् फिर भी...

और वैसे भी मुझे देखना था की वो क्या करता है.. पर जैसे hi उसने मेरे ऊपर भस्म फेका...

वैसे hi मुझे ऐसे लगने लगा जैसे मेरे अंदर से मेरी पूरी जान मेरी आत्मा...

मेरी शक्ति मेरा साथ छोड़ रही हो और धीरे धीरे वो मेरी बॉडी से बहार निकल रही हो...

इन सब बातो में सच में मुझे बहुत hi दर्दनाक पीड़ा हो और दर्द होने लगा...

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जिसके चलते मुझे छीलने का भी मौका नहीं मिल प् रहा था इतना असहनीय दर्द हो रहा था मुझे...

पर क्या करे उसकी शक्ति देखने की ीचा से मई अपने hi दर्द को बुलावा दिया था ये तो भूल hi गया...

और तभी मेरे अंदर से एक तेज रौशनी निकली जो सीधा जाकर मेरे सामने खड़े और हाथ फैलाये अघोरी तांत्रिक के बॉडी में जाने लगी...

और वो भी हाथ पहिलाये उसे अपनाने लगा और वो इन सबमे बहुत hi ज्यादा खुश हो रहा था...

पर जैसे जैसे मेरे अंदर से वो रौशनी निकल रही थी वैसे वैसे वह का माहौल चेंज हो रहा था...

और मेरे अंदर की जो रौशनी थी वो बहुत तेज हो रही थी..

वो रौशनी अब बहुत hi ज्यादा मात्रा से सभी और फैलते जा रही थी...

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उसकी बजह से वो पूरा जंगल साथ में आकाश धरती वह की साडी जादुई दुनिया hi सब बहुत hi प्रकाशमय हो गया था....

इतना की वह के सूर्य की तेज किरणों से भी नहीं हो रहा था...

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इसलिए जितनी रौशनी उसके अंदर जा रही थी वो काम hi लग रही थी जैसे अभी उसके अंदर मेरी शक्ति का कुछ भी हिस्सा गया hi नहीं हो...

उस दर्द के चलते मेरे पाओ डगमगा गए और मेरा बैलेंस बिगाड़कए मई घुटनो पर निचे बैठ गया...

और मेरी दोनों आंखे बंद थी इसलिए वो सब मई कुछ भी देख नहीं प् रहा था...

और सिंपल सी बात है ये तेज रौशनी में तो उन तीनो ने भी अपनी आंखे पूरी तरह से बंद करके राखी होगी...

पर एक बात जरूर हो रही थी की उस अघोरी के अंदर मेरी शक्ति जा तो रही थी पर ख़तम नहीं हो रही थी..

जैसे बाकियो अंदर लेते वक़्त हो रही थी बल्कि मेरी तो बढ़ते hi जा रही थी...

ऐसे की मेरे अंदर से रौशनी निकलकर उस पुरे जूदयी दुनिया में फैल गयी थी..

और जैसे रह देख रही हो की कब मेरा नंबर ए और कब मई उस अघोरी तांत्रिक के अंदर जाऊ...

पर क्या करे उस अघोरी तांत्रिक की जो बॉडी थी न वो मेरी शक्तिया सहन करने के या उन सरे शक्तियों को धारण करने के काबिल hi नहीं थी...

जितनी रौशनी उस अघोरी तांत्रिक के अंदर जा रही थी उतना hi उसका शरीर फूल रहा था...

और वो साला ज्यादा कुश हो रहा था पर कुछ hi देर में उसके अंदर मेरी शक्तिया मेरा तेज जाने की बजह से उसे बहुत hi पीड़ा और दर्द होने लगा...

जिसकी बजह से वो भी चिल्लाना तो चाहता था पर चिल्ला नहीं प् रहा था...

और वही मेरा दर्द अचानक से काम होता चला गया और वही दर्द धीरे धीरे उस अघोरी तांत्रिक का बढ़ने लगा...

उसने जितना दर्द मेरी जान और मुझे दिया था उससे कही ज्यादा दर्द उसे हो रहा था...

और उसका शरीर मेरे शक्तियों की बजह से फूलने लगा.. उसका शरीर इतना फूल गया था की...

उससे देखकर लग रहा था की वो कभी भी पहात सकता है...

और तभी एक बहुत जोर का धमाका हुवा जिससे उसका सारा शरीर पहात गया...

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और उसके बॉडी के सरे टुकड़े न जाने कहा चले गए या कही गायब हो गए कुछ पता hi नहीं चला...

और उसके बाद उस अघोरी का क्या हाल हुवा होगा या हो गया था ये कुछ भी बता पाना मुश्किल लग रहा था...

पर मरते वक़्त उसे इस पूरी दुनिया का दर्द जरूर महसूस हुवा था...

और फिर मेरे साडी शक्तिया जो इस पूरी जादुई दुनिया में फैल गयी थी...

वो धीरे धीरे मेरे अंदर सामने लगी और फिर चारो और की रौशनी भी धीरे धीरे काम होती चली गयी...

कुछ hi देर में मई भी ठीक हो गया और अभी कुछ देर पहले जो कुछ हुवा वो सब मुझे पता चला और मैंने अपनी आंखे खोल दी...

मैंने देखा तो चारो और का माहौल जैसे का वैसा hi था...

बस वो अघोरी तांत्रिक कही दिखाई नहीं दे रहा था तो मैंने पहले अपने आप को शांत किया...

मतलब मेरी बॉडी जो गुस्से से रेड हो गयी थी वो पहले के जैसी हो गयी मेरे आंखे भी नीली हो गयी...

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उसके बाद मई सीधा मेरी तीनो जान के तरफ जाने लगा.. मुझे उनकी तरफ अत देख वो सब भी बहुत खुश हो रही थी..

वैसे एक बात मई बताना चाहूंगा हिज तरह उस अघोरी तांत्रिक के ख़तम हो जाने के बाद मेरी शक्तिया लौट आयी थी उस तरह इन सबकी लौट नहीं आयी थी...

अभी मई यही सोच रहा था की उनकी शक्तिया अभी तक कैसे लौटी नहीं और उसके लिए मुझे क्या करना होगा पर तभी...

मुझे फिर से एक अबै सुनाई दी जो मुझे मेरे hi नाम से पुकारने लगा...

पर इस बार वो अबाज मेरे दिमाग की नहीं थी वो अबाज इस पुरे दुनिया में घूम रही थी...

और वो अबाज बहुत hi गुस्से से और दर्द का मिला जुला हुवा संगम था...

अबाज- ररूद्रादडीएप्पपपप...............

ये अबाज सुनते hi मेरे साथ hi उन तीनो ने भी उसी तरफ देखा जिस तरफ वो अबाज आयी थी..

और हम सब यही सोच रहे थे की ये कोण आ गया अब अपनी मौत लेकर...

मुझे अबाज देते हुए कही वो फिर से वही अघोरी तांत्रिक तो नहीं आ गया...

पर मैंने देखा की अभी जहा पर वो अघोरी तांत्रिक खड़ा था...

वही पर अब एक काळा रौशनी का गोला बढ़ने लगा और उस काळा रौशनी के घेरे में से...

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एक कला किसी आदमी का साया बहार आ गया और उसके बहार एते hi वो कला घेरा भी बंद हो गया...

पर जैसे hi वो कला साया बहार आया था पूरा माहौल hi बहुत भयानक और डरावना हो गया था...

पुरे आकाश में जैसे काळा बदल च गए थे.. जहा पर भी उजाला था वो पूरी तरह से ख़तम हो गया था...

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उस जंगल की आग ख़तम हो गयी थी.. जो भी रौशनी थी वो सब मेरे hi तेज के कारन आ रही थी...

मतलब अभी कुछ देर पहले जो मेरी शक्तिया इस जहाँ में फैल गयी थी उसका hi अभी तक कुछ अंश बचा था इसलिए कुछ रौशनी जरूर थी...

ऐसा भयानक और डरावना माहौल देखकर किसी की भी निकल जाये और अचे अचे सिर्फ ये देखकर hi बेहोश हो जाये...

जैसे की ये माहौल देखकर कुछ पल के लिए वो तीनो बेहोश हो गयी थी.. क्यों की उनके पास अपनी शक्तिया और अपनी हिम्मत जो नहीं थी...

न जाने उस अघोरी तांत्रिक के साथ hi उन सबकी शक्तिया भी कहा गायब हो गयी थी...

मई तो बस यही सोच रहा था की अब ये कोण आ गया मुझे ऐसे पुकारते हुए.......................

 
अपडेट 51

उस जंगल की आग ख़तम हो गयी थी.. जो भी रौशनी थी वो सब मेरे hi तेज के कारन आ रही थी...

मतलब अभी कुछ देर पहले जो मेरी शक्तिया इस जहाँ में फैल गयी थी उसका hi अभी तक कुछ अंश बचा था इसलिए कुछ रौशनी जरूर थी...

ऐसा भयानक और डरावना माहौल देखकर किसी की भी निकल जाये और अचे अचे सिर्फ ये देखकर hi बेहोश हो जाये...

जैसे की ये माहौल देखकर कुछ पल के लिए वो तीनो बेहोश हो गयी थी.. क्यों की उनके पास अपनी शक्तिया और अपनी हिम्मत जो नहीं थी...

न जाने उस अघोरी तांत्रिक के साथ hi उन सबकी शक्तिया भी कहा गायब हो गयी थी...

मई तो बस यही सोच रहा था की अब ये कोण आ गया मुझे ऐसे पुकारते हुए.......................

आगे............................

Mai-Kon हो तुम.. क्या मई तुम्हे जनता हु मैंने तुम्हे इससे पहले नहीं देखा...

तो फिर तुम मुझे कैसे जानते हो. तुम मेरा नाम कैसे जानते हो...

तभी उस काळा साये की अबाज आयी जो बहुत hi डरावनी और खतरनाक थी..

और उसके अबाज के साथ एक भयानक बेजान बैकग्राउंड म्यूजिक भी बज रहा था...

जो सुनने वालो को किसी कफनभूमि को अनुभूति दे रहा था..

कला साया- मई कोण हु ये बात तुमसे बेहतर कोण जनता है रूद्र...

और तुम मुझे या मई तुझे कैसे जनता हु ये बात तो हम दोनों से बेहतर कोई भी नहीं जानता होगा...

मई- वो सब छोड़ो ये तो मई पता करके hi रहूँगा की तू है कोण पहले ये बताओ यहाँ किस लिए ए हो...

कला साया- अभी तुमने जिस अघोरी तांत्रिक को मारा है न वो मेरा बहुत hi बड़ा भक्त था..

वो मुझे खुश करने के लिए ये सब कर रहा था और उसके बाद तो मई मेरी शक्ति पूरी तरह से हासिल कर लेता...

जो तूने मुझसे चीनी है और दूसरी बात वो भी अमर हो जाता पर तूने आकर सब खेल बिगड़ दिया..

और मेरे अरमानो पर पूरी तरह से पानी फेर दिया...

वो तो साला मर गया तूने उसको मार दिया पर मेरा भी इस सब में कुछ भी नहीं हुवा..

Mai-Ye तो फिर मेरे लिए बहुत hi अछि और ख़ुशी की बात है मैंने तो एक तीर से दो निशान कर दिए फिर..



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ये कहकर मई हलके से मुस्कुराया तो वो आगे गुस्से से कहता है...

कला साया- ज्यादा खुश होने की जरुरत नहीं hai..Mujhe तो अपनी शक्तिया अभी भी नहीं मिली...

पर बाद में कही से भी किसी भी तरह से मई हासिल करके hi रहूँगा और वो भी जो तूने मुझसे छिना है...

पर तेरा क्या होगा रे तू ये बात भूल मत की तेरा हाल तो मुझसे भी बदत्तर है...

मेरी शक्तिया मेरे अंदर न हो तो क्या हुवा पर मुझे सब याद तो है...

पर तुझे तो वो भी नहीं है... और तेरे पास तो तेरी शक्तिया भी नहीं है...

इस बात से मई शांत hi हो गया क्यों की उसने सच hi कहा था मेरा तो बहुत hi बुरा हाल है..



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क्यों की इस बजह से hi मुझे पता भी नहीं चला रहा की कोण मेरा दोस्त है और कोण दुश्मन मेरा पुराण...

किसके साथ मेरा क्या रिश्ता है और कोण कोण मेरा प्यार...

पर फिर भी मई उसे कमजोर न दिखते हुए कहता हु...

मई- मेरे पास जितना भी है मई अभी के लिए उससे बहुत संतुष्ट हु क्यों की सब मुझसे और मई उन सबसे बहुत प्यार करता हु...

और वक़्त के साथ साथ मुझे वो सब भी मिल जायेगा और याद भी अस जायेगा जो कुछ भी मुझसे बिछड़ गया है

जो भी मई भूल चूका हु. तू मेरी चिंता मत कर तू पहले अपना देख...

इस बार वो साया मेरी इस बात से बहुत गुस्सा हो गया और गुस्से से वो मुझे कहता है...

कला साया- क्या है रे तेरे पास अगर इतना hi घमंड है न तो तेरे अंदर...

तो मेरे एक hi वार से बच के दिखा और उसे रोक सके तो रोक के दिखा फिर मई मनु...

तू सोच रहा होगा की इसके पास कोई शक्तिया नहीं है तो मई बहुत कमजोर हु...

लेकिन ये मत भूल की मई कोण हु मुझ में अभी भी उतनी तक़द है की...

तुझे अभी जैसा है वैसा hi तुझे मौत के घाट उतर दू...

Mai-Apne शक्ति पे इतना भी घमंड ाचा नहीं है क्यों की उसकी बजह से दुसरो के अलावा खुद के मौत को hi न ललकार दे...

इसलिए जहा से आया है वही चला जा ये तेरे लिए hi ाचा होगा...

हमारे यही बाते चल रही थी तो इसी बिच इन तीनो को होश तो आ गया था...

क्यों की उनकी बॉडी में अभी भी उनके शक्तियों का कुछ अंश बचा था...

इसलिए तो वो तीनो इस माहौल में होश में आ गयी थी पर उससे ज्यादा वो इस माहौल से लड़ नहीं सकती थी...

वो तीनो उठकर हम दोनों को देखे और हमारी बातो के साथ साथ इस माहौल को समझने की कोशिश भी कर रही थी...

इसलिए वो वही से सिर्फ हमे देख रही थी और हम दोनों की बाटे सुन रही थी...

पर उसके बाद जो हुवा वो देखकर तो इन तीनो की भी चीख निकल गयी पर हलक के अंदर.. यानि मन में hi...

उस काळा साये को मेरी बात से बहुत गुस्सा आ गया था इसलिए वो मुझ पर बहुत hi ज्यादा गुस्सा हो रहा था...

उसने इसी गुस्से में अपने एक ऐसे शक्ति एक ऐसे अस्त्र का उपयोग किया...

जिसे मैंने आज तक कही नहीं देखा था और नहीं किसी ने उसके जैसा कुछ किया था...



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उस काळा साये ने बहुत hi गुस्से में अपने सामने एक बहुत hi बड़ा कला गोला बनाया...

गोला क्या वो एक तरह का ब्लैक होल hi था.. जो उसने बनाया था..



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उस ब्लैक होल की पावर इतनी थी की वो चारो और के पेड़ पौधों को अपने अंदर सामने लगा था..

और जैसे जैसे वो बाकि चीजों को अपने अंदर समाते जा रहा था...



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वैसे वैसे वो ब्लैक होल बढ़ता hi जा रहा था और धीरे धीरे मेरी और भी बढ़ रहा था...

जैसे वो बाकि चीजों को खा रहा है वैसे मुझे भी खाना चाहता हो और फिर चाहे तो इस पुरे धरती को भी...

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दिखने में तो वो ब्लैक होल बहुत hi भयानक दिख रहा था पर वो बहुत hi छोटा था...

लेकिन जैसे जैसे उसके अंदर चीजे समाते जा रही थी वैसे वैसे उसका आकर बढ़ते जा रहा था..

मुझे तो उसे देखकर क्या करे और उसे कैसे रोके कुछ भी समाज नहीं आ रहा था ..

मुझे ऐसे परेशां होते हुए देख और कुछ न करते हुए देख वो कला साया...

अपनी डरावनी हसी लेकर बहुत hi जोर जोर से हसने लगा.. जैसे उसे सिर्फ इसी पल का इंतज़ार हो...

कला Saya-Kya हुवा सभी हेकड़ी निकल gayi.Sirf ये देखकर hi.. तू तो बहुत hi बड़े बड़े ढींगे हक़ रहा था...

फिर क्या हुवा तेरी तो इसे देखकर hi पतली हो गयी और पहात गयी तू क्या मुझसे ladega.Ab तो सिर्फ तेरी मौत hi तुझे बचा सकती है...

इतना कहकर वो फिर से अपनी hi स्टाइल में हसने laga.Aur उसके हसने से माहौल भी और hi खतरनाक होते जा रहा था...

उस ब्लैक होल को तो वो तीनो भी देखकर बहुत hi दर गयी थी पर उन्हें मुझ पर बहुत भरोसा था..

इसलिए उनके चहरे से कुछ झलक नहीं रहा tha...aur वो कुछ एक्सप्रेशन दे इसके काबिल भी नहीं थी...

मई क्या करू वही सोच रहा था तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया तो...

मैंने वीर( तलवार) के साथ साथ अपना एक हाथ भी ऊपर उस ब्लैक होल की तरफ कर दिया...

और मैंने मन hi मन में वीर से कहने लगा...

Mai-(Man में) वीर हमे कैसे भी करके इस ब्लैक होल को रोकना है...

तभी मेरे हाथो की चारो और एक अजीब सो रौशनी घेरा बन गया...

और वो शक्ति कुछ अजीब hi दिख रही थी जिसे मई समाज hi नहीं पाया...



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पर उसके साथ hi उस तलवार से बिजली की तरह वाइट और कुछ ग्रीन रौशनी निकलने लगी...

और उस बिजली के साथ साथ मेरे हाथ से भी एक ब्लू कलर की लाइट निकलने लगी...



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जो सीधा जाकर उस ब्लैक होल के अंदर जाने लगी. पर अंदर जाने से पहले वो दोनों शक्ति एक होकर जा रही थी...

पर उस वीर और मेरे हाथ से निकले उस तेज लाइट के वार से भी उस ब्लैक होल को कुछ भी नहीं हो रहा था..

बल्कि उसे देखकर ऐसे लग रहा था की उस वीर को शक्तिशाली बिजली भी उस ब्लैक होल में जाकर ख़तम हो रही थी...

और वो उसको भी अपने अंदर खींच कर अपना आकर और बड़ा कर रहा था...

जैसे ये शक्ति भी उसके सामने कुछ भी न हो...

अब तो मुझे भी कुछ समाज नहीं आ रहा था क्या करू और क्या नहीं...

अब तो मुझे भी लग रहा था की मई भी उस ब्लैक होल में hi चला जाऊंगा और...

फिर न जाने वो ब्लैक होल क्या क्या नहीं करेगा और फिर क्या होगा...

वो ब्लैक होल अब मेरे बहुत पास आ चूका था और अब मुझे भी ऐसा अहसास हो रहा था की...

वो मुझे अपने अंदर खींचने की कोशिश कर रहा है मुझे अपने अंदर ले रहा है.. पर मई अपने आप को किसी तरह रोके हुए था...

मैंने अपने वीर से उसके ऊपर और भी 2-3 वार किये पर सब बेकार...

एक भी वार उस ब्लैक होल को ख़तम कर नहीं कर प् रहा था और नहीं उसे इसकी बजह से कोई प्रॉब्लम हो रही थी...

बल्कि वो तो उसे लेकर और भी ज्यादा बड़ा होते जा रहा था...

वैसे तो पहले hi उस ब्लैक होल और उस काळा साये जैसे सैतान को आकर यहाँ पर बहुत जोर जोर से हवाएं चल रही थी...

और बिजलिया भी जोर जोर से शोर कर रही थी बदल भी गरज रहे थे पर अचानक से उन हवाओ का रुख बदल गया...

बदल और भी जोर जोर से गरज और बरस रहे थे...

माहौल पूरी तरह अचानक चेंज हो गया और ये सिर्फ मुझे hi महसूस हो रहा था...

पर जैसा भी अहसास तय जाना पहचाना लग रहा था.. जैसे मेरा खुद का hi हो याने.......

तभी मेरे सामने एक छोटी सी लाइट आ गयी लेकिन धीरे धीरे उसका साइज भी बढ़ने लगा...

और फिर उस रेड एंड ब्लू लाइट का एक बड़ा गोल बना जैसे उस काळा साये के आने से पहले बना था..



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पर ये वैसे नहीं बल्कि इसका अहसास hi अलग tha..Aur दिखने में भी वो तेज रौशनी से चमकने लगा था..



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और तभी उस रौशनी में से एक बिजली के साथ वह पर एक शक्श आ गया...

और उस शक्श के एते hi वह पर जो कुछ भी अँधेरा था वो सब कही गायब सा हो गया...



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और पहले जैसा उजाला कायम हो Gaya..Us शक्श के तेज से उसकी बॉडी से निकलते हुए रौशनी से ये नेचर पहले की तरह ठीक हो गया..

बल्कि उससे भी कही ज्यादा खुशनुमा लग रहा था..

अब चाँद की रौशनी में सब कुछ साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था...

बल्कि ये रौशनी भी कुछ ज्यादा hi थी जिससे सब कुछ सबको दिखाई दिए..

पर जब मैंने उस शक्श को देखा तो मई भी कुछ पल के लिए शॉक हो गया...

क्यों की उस शक्श का यहाँ इस तरह आना ये मेरे लिए भी अनएक्सपेक्टेड था...

क्यों की इस वक़्त मैंने उसके बारे में कुछ सोचा hi नहीं था.. और इसके पहले ऐसे माहौल में वो शक्श कभी भी नहीं आया था...

पर मेरे दिल में उस शक्श को यहाँ ऐसे देखकर एक ख़ुशी भी आ गयी थी की वो शक्श यहाँ आ गया..

और एक घबराहट भी की यहाँ पर ये आ क्यों गया क्या मेरे सामने ये जो संकट है क्या वो सच में इतना बड़ा है...

की इस शक्श की यहाँ ऐसे आना पड़ा पहली बार सबके सामने...

पर और एक बात थी वो ये की मई मेरी तलवार से (वीर से) कुछ नहीं कर पाया तो ये क्या कर पायेगा...

जिस तरह मेरा उस शक्श को देखकर हाल चेंज हुवा था...

शामे वैसा hi हाल उन तीनो का मतलब रसिका सोनम और रितिका का भी था..

जहा तक ऋतू का सवाल है तो वो उस शक्श को देखकर पल भर के लिए शॉक तो हो गयी थी...

पर उससे ज्यादा खुश भी.. पर मेरे साथ उसके लिए भी उस शक्श का ऐसे आना अनएक्सपेक्टेड था.

उस काळा साये ने अब तक उस शक्श को नहीं देखा था इसलिए वो कुछ नहीं बोल पाया और नहीं कुछ सोच पाया...

पर उसे कुछ अलग जरूर महसूस हुवा था जो उसके समाज से परे था...

और वही सोनम और रसिका कभी मुझे देखती तो कभी उस शक्श को...

क्यों की वो शक्श हूबहू मेरी hi तरह दिख रहा था दिख क्या बल्कि मई Hi था मतलब मेरा अंश.....

है सही सुना आपने मेरे सामने जो शक्श खड़ा था वो और कोई नहीं अंश hi था...



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पर वो इस वक़्त क्या कर रहा है ये तो मेरे लिए भी सवाल था..

जल्द hi उस सवाल का जवाब भी मुझे क्या हम सबको मिल गया...

क्यों की जिसको देख हम सब दर रहे थे उसको इसने पल भर में hi ख़तम कर दिया. मतलब उस ब्लैक होल को...

अंश ने उस ब्लैक होल को एक बार देखा और फिर अपने दोनों हाथ फैलाये...



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उसके हाथो में से कुछ अजीब सो रौशनी निकलने लगी जो इस पुरे माहौल में फैलने लगी..

और कुछ hi देर में उसने अपनी हाथो से और अपने बॉडी से निकलती रौशनी अपना तेज कुछ ज्यादा कर दिया...



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की यहाँ का पूरा अँधेरा और वो ब्लैक होल उस प्रकाश में उस रौशनी में समां जाये.. और हुवा भी कुछ वैसा hi...

उस ब्लैक होल के साथ साथ चारो और का जो अँधेरा उस काळा साये के आने के साथ साथ फैला हुवा था...

वो सब उस रौशनी में समां गया और फिर वो ब्लैक होल उस रौशनी में समां गया...

और फिर धीरे धीरे वो पूरी रौशनी सीधा जाकर अंश के अंदर चली गयी...

और फिर सारा माहौल पहले की तरह शांत हो गया. और उस ब्लैक होल की बजह से जो भी पेड़ और पौधे उखड गए थे...

और जो भी कुछ ख़राब हो गया था वो सब कुछ पहले की तरह ठीक हो गया.. और ऐसा हो गया जैसे कुछ हुवा की नहीं...

उस काळा साये ने जैसे hi देखा उस ब्लैक होल की उस तरफ यानि मेरी तरफ कोई रौशनी तेज हो रही है...

तो वो भी कुछ शॉक हो गया और उस तेज रौशनी के चलते वो कला साया तड़पने लगा...

और फिर अचानक से वो ब्लैक होल और वो रौशनी कही गायब सी हो गयी...

तब जाकर उसे रहत महसूस हुयी पर जब उसने आंखे खोली तो उस काळा साये ने जो आगे देखा...

तो बस वो आँखे फाड़ते हुए देखता hi रह गया और एक hi नजर से हमें देखता रह गया...

क्यों की उसे यकीं hi नहीं हो रहा था की मेरे जैसा hi शक्श कोई और यहाँ पर ऐसे खड़ा होंगे...



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वो कभी मुझे देखता तो कभी मेरे अंश को रसिका और सोनम के हाल जैसा hi उसका भी हाल हो गया था..................................
 
अपडेट 52

और फिर अचानक से वो ब्लैक होल और वो रौशनी कही गायब सी हो गयी...

तब जाकर उसे रहत महसूस हुयी पर जब उसने आंखे खोली तो उस काळा साये ने जो आगे देखा...

तो बस वो आँखे फाड़ते हुए देखता hi रह गया और एक hi नजर से हमें देखता रह गया...

वो कभी मुझे देखता तो कभी मेरे अंश को रसिका और सोनम के हाल जैसा hi उसका भी हाल हो गया था......................

आगे............................

वैसे अंश के पावर्स की बजह से पूरा अँधेरा तो ख़तम हो गया था...

पर जहा पर वो साया खड़ा था वह पर अभी भी माहौल खतरनाक और डरावना hi था...



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और वह पर अभी भी अँधेरा hi था जो सिर्फ और सिर्फ उसके पास hi था...



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उस कला साये को मुझे और अंश को साथ में देखकर बहुत hi बड़ा शॉक लगा था...

और वो उस सिचुएशन को और हम दोनों को समझने की कोशिश करने लगा...

कला साया- तुम.... तुम कोण हो.. अगर तुम वही हो जो मई सोच रहा हु...

तो फिर वो कोण है अगर वो ये है तो फिर तुम कोण हो...

Ansh-Mai वही हु जो तुम सोच नहीं रहे हो और जो तुम सोच रहे हो ये वो है...

पर वो भी मेरे बिना अधूरे है इसलिए मई मई हु और वो वो...

पर सबसे खास तो वो hi है क्यों की उनके बिना मई कुछ भी नहीं हु...

अंश की बात से तो खुद मई भी कन्फ्यूज्ड हो गया था की मई कोण हु और वो कोण है...

अगर मेरा ये हाल है तो उस काळा साये का क्या हाल हो रहा होंगे...

वैसे तो वो अंश के यहाँ ऐसे आ जाने से पहले hi गुस्सा था...

और अभी तो उसकी ऐसी बातो से और भी ज्यादा तो इसलिए वो और भी गुस्से में कहता है...

कला Saya-Ye क्या लगा रखा है मई और वो और ये... वो सब छोड़ तूने मेरा ये जादू रोका कैसे....

अंश- पहले तो ये जिससे बचे खेलते है. उसको खुद का अस्त्र बुलाना बंद कर...

और ऐसी बचकानी हरकते छोड़ दे क्यों की ये जादू नहीं हमारे यहाँ के बचो का खेल है...

और रही बात इसको हज़म करने की तो ये तो बस इतना सा था उससे भी कोई भी और कितना भी बड़ा भी आ जाता न

तब भी मेरा कुछ नहीं बिगड़ सकता और इसके पीछे का कारन तो तुझसे बेहतर कोण जान सकता है... है न...

अंश ये कहकर और उसकी तरफ देखकर हलके से मुस्कुराया जैसे उसको चिड़ा रहा हो...

पर अंश की इस बात से वो कुछ सकते में आ गया था मतलब वो कुछ हड़बड़ा सा गया इसलिए वो अंश से कहता है....

कला साया- है है पता है और अब मुझे अछि तरह से पता चल गया है की...

अब मेरी बाकि शक्तिया कब मुझे मिलने वाली है और सबसे बड़ी बात तूने मेरा वो कहा छोड़ा है...

पर तू फ़िक्र मत कर मई इतने जल्दी (मेरी और देखते हुए) तेरा पीछा नहीं छोडूंगा...

ये आज तो आ गया पर अगली बार नहीं आएगा ऐसा खेल खेलूंगा की बस तू.. और ये सोच भी नहीं पाएंगे...

मई- वैसे भी सोचने का काम तेरा नहीं है और वो तेरे बस का भी नहीं है...

अगर तू सच में सोचता होता तो हर समय तुझे हार नहीं मिलती...

कला साया मेरी इस बात से बहुत hi गुस्सा हो गया था पर वो कुछ भी नहीं कर सकता था अभी...

क्यों की उसे भी अब पता चल गया था की मेरे पास शक्तिया नहीं तो क्या हुवा...

पर अंश तो है और उसके पास तो अपना कुछ भी नहीं है...

जिसके डैम पर वो उड़ सके. पर तभी उसे एक बात याद अति है तो वो कहता है...

कला साया- मई तो अभी जा रहा हु पर जल्द hi लौट के आऊंगा...

पर तेरे पास मेरी एक चीज है वही तेरे सर्वनाश का कारन बनेगी और तू उसका कुछ बिघड भी नहीं पायेगा...

ये कहकर वो कला साया अपनी कामिनी और डरावनी हसी हस्ते हुए जैसे आया था वैसे hi गायब हो गया..

मुझे भी उससे पूछना था पर वो तो कुछ सुनने से पहले hi गायब हो गया...

मुझे जानना था वो किस चीज के बारे में बात कर रहा है इसलिए उसके जाने के बाद मैंने अंश से पूछने का सोचा...

उससे पहले जानते है उसके जाते hi माहौल पहले जैसा ठीक हो गया और वो तीनो भी अब पहले से बेहतर हो गयी थी...

पर एक बात थी उन तीनो में से किसी को भी अभी तक कोई भी अपनी शक्ति हासिल नहीं हुयी थी..

और वो तीनो कड़ी होकर ऋतू को अपने कंधो का सहारा देकर मेरे और अंश के पास आ रही थी तभी मई अंश से पूछता हु...

Mai-Tum यहाँ कैसे आये और ये अचानक से ऐसे सबको कैसे दिख सकते हो...

तुम तो सिर्फ मुझे hi दिख सकते थे और सिर्फ मुझसे hi बात करते थे न फिर...

और ये जो कोई भी था वो कोण था और ये किस चीज के बारे में बात कर रहा था...

Ansh-Bhai आप उसकी बात छोड़ो वो सिर्फ आपको बहकाने के लिए ऐसी बात कर रहा था...

और अगर मई बताना भी चहु तो आपको पता hi है मई समय से पहले आपको कुछ भी नहीं बताता तो ये कैसे...

और रही बात मेरे यहाँ ऐसे आने की तो वो जो ब्लैक होल उसने पैदा किया था...

था तो वो बहुत छोटा आपके तरफ देखा जाये तो पर अभी के लिए आप उसके लिए तैयार नहीं थे..

और नहीं उसको सह सकते थे और आप उसका कुछ बिघड भी नहीं पते अभी इसलिए मुझे यहाँ सबके सामने ऐसे आना पड़ा...

क्यों की वो ब्लैक होल धीरे धीरे इस पुरे धरती को hi खा जाता यह एक था और एक बजह है जिसके लिए मुझे यहाँ आना पड़ा...

मई- और वो क्या....

अभी अंश कुछ कहने hi वाला था तभी वह पर सोनम और रसिका ऋतू को अपने साथ लेकर आ जाते है और सोनम मुझे पूछती है...

सोनम- रद ये कोण है ये तो हूबहू तुम्हारे तरह hi दिख रहा है तुम दोनों में से असली कोण है..

Mai-Sonam हम दोनों भी असली है और अपने अपने जगह सही भी है...

बस ये मेरा अंश है ये समाज लो इसको मैंने Hi जनम दिया है किसी काम के लिए कब पता नहीं...

पर बस यही समाज लो की इसके hi मदद से मई अपनी पूरी शक्ति हासिल कर पाउँगा...

Rasika-Acha तो फिर इसको सब आपका पास्ट याद होगा न.. तो फिर आप इसके मदद से...

कुछ क्यों याद नहीं कर लेते और पहले की जैसे तकद्वर क्यों नहीं हो जाते...

मई- (अंश की तरफ देखते हुए) ये तो नहीं हो सकता न.. मई सिर्फ इसकी मदद से अपनी पूरी शक्ति प् सकता हु...

इसके बाद hi अपना पास्ट याद कर सकता हु पर ये खुद मुझे सब कुछ याद नहीं दिला सकता..

Sonam-Kyu ऐसा क्यों रद ये आपका अंश होकर भी ऐसा क्यों नहीं कर सकता...

बल्कि हमने कुछ देर पहले उनकी तक़द का एक नमूना देखा था...

Mai-Kyu की इसको पास्ट के बारे में बताने के लिए मैंने hi मन किया है और ऐसा करने के लिए कहा है और सकत वार्निंग देकर ये भी कहा है की...

अगर आज का मई भी कहु तो भी नहीं तो ये और मई क्या कर सकते है...

Rasika-Thik है ये बात तो समाज में आ गयी पर ये बात समाज नहीं आयी की वो कोण था...

जो अभी कला साया बनकर यहाँ खड़ा था और सबसे बड़ी बात उस अघोरी तांत्रिक के मर जाने के बाद भी...

हमारी शक्तिया क्यों नहीं लौट आयी है ऐसा क्यों हुवा और फिर हमारी शक्तिया कब लौट आएगी उसके लिए क्या करना होगा...

ये तो मेरे भी मन में सवाल था की ऐसा क्यों हुवा पर कुछ समाज नहीं आया तो मैंने अंश से hi उस बारे में पूछ लिया...

अब तक आप सोच रहे होंगे की ऋतू कुछ क्यों बोल नहीं प् रही है तो उसके अंदर कुछ भी तक़द नहीं बची थी की वो कुछ कर सके..



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उसकी आंखे भी बहुत म्हणत से खुल रही थी पर वो पगली अपनी वही तक़द उसे कर सिर्फ और सिर्फ मुझे hi देखे जा रही थी...

ये मेरे ध्यान में एते hi और ऋतू की ऐसी हालत देखकर मेरे दिल में एक तीज सी उठी...

और मेरे आँखों में आंसू भी आ गए इसलिए मई उसके पास गया और उसको जोर से गले लगाया...

तो मेरे जोर से गले लगते hi उसके मुँह से एक हलकी सी आह निकली..

जिससे मुझे ये महसूस हुवा की उसे इस हुग से दर्द महसूस हुवा है..

मई तभी उससे दूर हुवा उसका दर्द महसूस कर मेरे भी आँखों में आंसू आ गए थे..

पर क्या करू ये सब मेरे hi बजह से था तो इस बार मैंने उसके चहरे को अपने हाथ में लेकर...

उसके आँखों में जो दर्द की बजह से जो आंसू निकले थे उन्हें पॉच दिया और ऋतू को अपनी नाम हुयी आँखों से कहने लगा...

मई- तुम ठीक तो हो न ऋतू... ी ऍम रियली सॉरी.. मई वक़्त पर आकर तुम्हे इस हालत में जाने से पहले बचा नहीं सका..

और तुम या मेरे पुरे परिवार को पूछे बिना hi और तुम सबके बारे में कोई बात बिना जाने hi मई अपने महल चला गया...

पर अब मई आ गया हु न तो मई सब कुछ ठीक कर दूंगा तुम भी पहले की तरह मुझसे झगड़ा करोगी...

और प्यार भी करोगी.. हम सब अपने परिवार के साथ हसी ख़ुशी रहेंगे...

ऋतू ने ये सब सुना पर कहा कुछ नहीं सिर्फ इशारो में hi आंख झपकाकर मुझे जैसे है का इशारा कर दिया...

तो मैंने भी अपनी आंखे पोची उसके माथे पर एक किश किया और पीछे हटा और फिर अंश की और देखकर अंश से कहने लगा...

Mai-Ansh क्या तुम इन तीनो को ठीक कर सकते हो...

Ansh-Bhai मेरे यहाँ आने का यही दूसरा रीज़न था और ये तो मेरा फ़र्ज़ है इसलिए...

इन तीनो को अपनी शक्ति देकर इन्हे अभी ठीक कर देता hu.Par उससे पहले आप तीनो को एक काम करना होगा...

Sonam-Aur वो क्या...

अंश- ज्यादा कुछ नहीं बस आप जिस हालत में हो उसी हालत में खड़े होकर अपना मन शांत करके ध्यान लगाना होगा...

और सबको अपनी कुण्डलिनी शक्ति जागृत करनी होगी... जब आपकी वो शांत मन से ध्यान करेंगी तो आप तीनो की वो शक्ति जरूर जागृत होगी...

क्यों की आप तीनो में अभी भी आपके शक्तियों का कुछ अंश है..

इसलिए आपकी वो शक्ति जागृत होते hi मई अगला स्टेप ले लूंगा और आप तीनो को अपनी अपनी शक्तिया मिल जाएगी...

भाई आप जरा पीछे हैट जाओ. और( उन तीनो की तरफ देखते हुए) आप तीनो यहाँ मेरे सामने एक लाइन में खड़े होकर वो सब करलो...

रसिका- पर RD(Meri तरफ देखते हुए) ऋतू दी कैसे ध्यान लगा पाएंगी वो भी खड़े होकर उनको तो खुद का hi होश नहीं है...

Ansh-Sab हो जायेगा बस मई जितना कह रहा हु उतना करो.. और है रितिका को भी अपने सहारे से खड़े करो...

तुम तीनो को अपना हाथ पकड़कर hi ध्यान करना है ये मत भूलो...

फिर क्या था अंश के कहे अनुसार वो तीनो लग गयी ध्यान करने में...

और बहुत जल्दी वो तीनो मन शांत कर योग में भी चली गयी.. और धीरे धीरे इन तीनो को कुण्डलिनी शक्ति भी जागृत होने लगी...

धीरे धीरे उनके बॉडी का तेज बढ़ रहा था और साथ hi उनके पीठ पर योग से कुण्डलिनी शक्ति की रौशनी भी...



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फिर अंश ने एक बार उन तीनो को देखा और अपने काम में लग गया...

अपने दोनों हाथ साइड में फैलाये और चारो तरफ मतलब एक बार क्लॉकवीसे तो एक बार एंटी क्लॉकवीसे ऐसे एक बार घुमाया...



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उस टाइम उसके चारो तरफ एक अलग hi कबच जैसा कुछ बन गया जो दिखने में कुछ अलग hi दिख रहा था...



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और उससे कुछ रौशनी भी निकल रही थी. फिर अंश ने अपने दोनों हाथ साइड में फैलाये...

तो उसके दोनों हाथो में से वही सफ़ेद नीली रौशनी निकलने लगी जो चारो तरफ फैल रही थी...



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और उसके बाद अंश ने अपने दोनों हाथ जो फैलाये थे वो दोनों अपने आगे लेकर एक कर दिए...



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जैसे किसी चीज को जो इस एयर में कही गायब हो गयी थी उन्हें एक कर रहा हो ऐसा लग रहा था...

और हुवा भी कुछ वैसा hi चारो और जो सफ़ेद रौशनी फैली थी वो पूरी रौशनी हमारे सामने आकर एक बॉडी जैसे आकर लेने लगी...

और साथ Hi चारो और बहुत तेज हवाएं भी चलने लगी थी..

साथ hi ऊपर आकाश में बदल और बिजलिया भी गरज रहे थे और शोर कर रहे थे...

तभी हमारे सामने ए उस रौशनी ने चारो और फैले हुए किसी चीज को एकत्रत्रित कर दिया...

और हमारे सामने एक रौशनी में ताप्ती हुयी एक बॉडी रेडी होकर सामने आ गयी..

जिसे देखकर मई एक पल के लिए चौंक hi गया पर शायद इसके बिना ये होना अधूरा hi होगा...

और इसने hi तो ये सब किया है इसलिए इसकी बॉडी तो जरुरी hi थी..



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इसलिए शायद अंश ने अपने जादू से उस अघोरी तांत्रिक की बॉडी बनवायी थी जो रद की पावर्स की बजह से...

इस वातावरण में कही गायब सी हो गयी थी.. उसने अपने रौशनी से उसके बॉडी के पार्ट्स को एक कर...

उसकी पूरी बॉडी बनायीं और उसे अघोरी तांत्रिक का रूप दिया...

पर एक बात थी उसकी बॉडी उसको उन तीनो की पावर्स मिलने के बाद जैसी थी वैसी hi अंश ने हमारे सामने लायी थी...

उस अघोरी तांत्रिक की बॉडी हमारे सामने हवा में hi लटक रही थी न उसमे कोई जान थी...

न कुछ बस बेजान सी वो हमारे सामने हवा में लटक रही थी..

वैसे उस बॉडी को वो तीनो देख नहीं पायी क्यों की वो तीनो तो योग में लीन थी..

पर फिर अंश ने उस बॉडी को एक करने के बाद अपने लेफ्ट हाथ को एक बार छाती से लगाया...

और अपनी आंखे बंद की और फिर जल्द hi खोल ली और अपना दूसरा हाथ याने राइट हैंड आगे कर...



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उस अघोरी तांत्रिक के बॉडी के ऊपर अपने हाथ में से एक अजीब सी रौशनी छोड़ने लगा...

जैसे hi अंश के हाथो में से निकलती वो रौशनी उस अघोरी तांत्रिक के बॉडी को छुई...



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वैसे hi उसके बॉडी की दूसरी और से वो रौशनी 3 हिस्सों में बात गयी और साथ hi वो रौशनी तीन कोर्स में भी...



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और वो रौशनी सीधा जाकर उन तीनो पे जा गिरी जो उस और कड़ी थी यानि रसिका ऋतू और सोनम पर...

और वो रौशनी उनके ऊपर गिरते hi उनकी बॉडी उस रौशनी से चमकने लगी...

और उन तीनो के चारो और उस रौशनी का घेरा बन गया और कुछ hi देर में वो तीनो उस रौशनी से जगमगा उठी...

कुछ देर रौशनी छोड़ने के बाद अंश ने अपने हाथ से रौशनी छोड़ना बंद किया...

और जैसे उसने उस अघोरी तांत्रिक के बॉडी को लाया था वैसे hi अपने दोनों हाथ फैलाये हुए उस बॉडी को इस वातावरण में कही गायब कर दिया..

छोटे छोटे पार्टिकल्स में जो कहा चली गयी वो किसी को कुछ नहीं पता चला..

पर बॉडी के उस और अब माहौल कुछ अलग था... वो रौशनी इतनी बाद गयी थी की वह पर क्या हो रहा है किसी को भी कुछ पता नहीं चल रहा था..

लेकिन धीरे धीरे जब रौशनी काम होने लगी तो वैसे hi आगे का नजारा दिखाई देने लगा...

और फिर वो आगे का नजारा बहुत hi अचे से दिखाई देने लगा..

जिसे देखकर मई तो क्या सब बहुत खुश थे क्यों की मेरे आगे वो तीनो अपने असली रूप में...

अपने रूप के साथ और अपना तेज रौशनी में ताप्ती हुयी शरीर के साथ सब चीजों को धारण कर...



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मेरे सामने कड़ी थी कड़ी क्या कुछ कुछ हवा में hi लटकी हुयी थी...

रसिका अपने जीन वाले रूप में सोनम अपने आधे ड्रैगन वाले रूप में...



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तो रितिका का तो कुछ नया hi अंदाज था कुछ पुराने रूप के साथ hi कुछ नया रूप...



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जिसे देखकर मई भी उसमे कुछ देर के लिए खो hi गया और उसे पहचान भी नहीं पाया...

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सिर्फ उसमे hi क्या मेरी आंखे तो मचलने लगी थी सबको देखने के लिए इसे देखे या फिर उसे..



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इन तीनो के ऊपर से मेरी आंखे हैट hi नहीं रही थी इतनी ब्यूटीफुल चार्मिंग सुन्दर और अट्रैक्टिव सेक्सी दिख रही थी वो तीनो...



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जिसे देखकर मई तो जैसे बूत hi बन गया था और आखिर में मेरा hi अंश होने के खातिर...

अंश का भी कुछ ऐसा हाल होता अगर वो उन तीनो को देखता पर वो तो उन्हें देखने के बजाय निचे hi देख रहा था...

जैसे उसने अपना काम इतने अछि तरह से ख़तम कर दिया अब आप देखलो..

एक सच्चे और अचे सेवक की तरह.. और ये बात कहनी गलत नहीं होगी की...

इस जगत का वो पहला ऐसा है जो वो खुद खुद का hi सेवक है यानि स्वयं सेवक...........................
 
दोस्तों.... देरी के लिए ी ऍम रियली सॉरी पर क्या करू यहाँ पर सिर्फ खाने के लिए वक़्त मिल रहा है.. तो अब आप समाज hi गए होंगे की मुझे वक़्त नहीं मिल रहा है स्टोरी लिखने के लिए...

इसलिए मई स्टोरी में कुछ दिन का ब्रेक लेने की सोच रहा हु पर सोचा आपसे पहले पूछ लू...

तो दोस्तों मई आपको दो ऑप्शन देता हु एक ये है की मई कुछ दिन का ब्रेक ले लू और जब सब सेट हो जाये तो फिर से स्टोरी लिखना स्टार्ट कर दू...

और दूसरा ये है की एव्री वीक में मई सिर्फ एक hi अपडेट दूंगा और वो भी मेगा अपडेट बस संडे को....

तो अब आपको डीडे करना है की मई क्या करू... तो जल्द से जल्द मुझे बताईये प्लीज...
 
अपडेट 53

इन तीनो के ऊपर से मेरी आंखे हैट hi नहीं रही थी इतनी ब्यूटीफुल चार्मिंग सुन्दर और अट्रैक्टिव सेक्सी दिख रही थी वो तीनो...

जिसे देखकर मई तो जैसे बूत hi बन गया था और आखिर में मेरा hi अंश होने के खातिर...

अंश का भी कुछ ऐसा हाल होता अगर वो उन तीनो को देखता पर वो तो उन्हें देखने के बजाय निचे hi देख रहा था...

जैसे उसने अपना काम इतने अछि तरह से ख़तम कर दिया अब आप देखलो..

एक सच्चे और अचे सेवक की तरह.. और ये बात कहनी गलत नहीं होगी की...

इस जगत का वो पहला ऐसा है जो वो खुद खुद का hi सेवक है यानि स्वयं सेवक.................

आगे............................

कुछ देर बाद उन तीनो ने अपनी आंखे खोल दी तो उन तीनो को मई उनकी तरफ hi देखता पाया...

तो वो तीनो कुछ शर्मा गयी पर जल्द hi संभाला गयी और निचे धरती पर पेअर रख कर कड़ी हो गयी...

उसके बाद उन तीनो ने फिर से अपनी आंखे बंद की और अपने आप को नार्मल किया और मेरे सामने कड़ी हो गयी...

तब तक तो मई बस उन तीनो को देखता hi रह गया पर क्या करू वो दिख hi कुछ ऐसी रही थी की...

मेरी नजरे hi उनसे हैट नहीं रही थी. और वो कब अपने नार्मल रूप में आयी वो भी कुछ पता नहीं चला...

पर मुझे तो होश तब आया जब वो वक़्त निकल चूका था मतलब जो होना था वो हो गया था..

यानि ऋतू ने ठीक होते hi अपने नार्मल रूप में आकर 1 सेकंड की भी देर न करते हुए मेरे पास आ गयी..

और सीधा मेरे दोनों गाल पर पूरी तक़द से जोर जोर से दो थप्पड़ लगा दिए..

वैसे वो दोनों थप्पड़ मुझे लगे तो नहीं पर उन दो थप्पड़ो की बजह से मई होश में जरूर आया..

पर ये क्या ऋतू ने थप्पड़ लगते hi उसके दोनों आँखों में से आंसू निकलने लगे...

और उसने वैसे hi मुझे जोर से अपने गले लगा लिया... और जोर जोर से रोने लगी..

ये बहुत अजीब था न की उसने hi मुझे इतनी जोर से मारा और फिर मेरे hi गले लगाकर जोर जोर से रोने लगी..

पर फिर वो रट हुए कहती है...

रितिका- क्यों हमे तुम यु छोड़कर गए थे.. तुम्हे पता है न तुम्हारे बिना हम नहीं रह सकते..

तो तुम वह गए क्यों... मन की तुम्हारा वह पर अपना परिवार है पर.....

देखो न रट हुए भी बहुत बोल रही थी तो मैंने उसकी बोलती hi बंद कर दी वो भी ऐसे वैसे नहीं सीधा लिप लॉक देकर..

रितिका तो मेरे ऐसे करने से शॉक hi रह गयी.. पहले तो उसने कुछ भी नहीं किया और मुझसे दूर होने के लिए झटपटाने लगी...

जब उसे लगा की मई उसे अब नहीं छोड़ने वाला तो वो भी सब भूलकर अपने होठ चलने लगी और मेरा साथ देने लगी..

और वह पर वो दोनों हमे ऐसे करते हुए देख कभी शर्मा रही थी तो...

कभी हमे नजरे चुराते हुए देखे जा रही थी पर वो दोनों कुछ कह नहीं प् रही थी...

आखिर किस लड़की को ये बात बर्दास्त होती है की उसके जैसे हसीं लड़की को छोड़...

उसके सामने उसके जैसे hi किसी और लड़की को किश करे और वो भी उसका दिल वाला इसलिए दोनों ने एक बार खासा...

जिसकी बजह से हमारा 5 मिनट्स से चल रहा ये किश टूट गया और ऋतू होश में आ गयी..

वैसे मुझे तो कोई प्रॉब्लम नहीं थी पर ऋतू को अब ज्यादा शर्म आ रही थी..

इसलिए वो मुझसे नजरे चुराकर निचे या कभी इधर उधर देखने लगी...

तभी मेरे दिमाग में एक अचानक से अबाज आयी..

अबाज- वाह्ह्ह्ह.... क्या रसीले होठ थे यार ऐसा लग रहा था जैसे कहते hi जाऊ.

पर सेल तेरी तो पुरे मूड का कबाड़ा कर Diya...Itni जल्दी क्या थी बे तेरे को....

मई तो पल भर के लिए बहुत hi दर गया की ये अबाज अब कहा से आने लगी और वो भी सीधा मुझे hi सुनाई देने लगी..

और ऊपर दे कोई दिखाई भी नहीं दे रहा पर उनसे कुछ कह भी नहीं सकता था..

इसलिए इसका मई घर जाकर hi कुछ करता हु तब तक चलो रितिका से मामला निपटा कर अभी घर भी जाना है...

ये सोचकर मई रितिका के पास गया और उसका चेहरा अपने हाथ में लेकर उसकी आँखों में देखने लगा...

और वो भी बिना आंख झपकाए मुझे hi देखते जा रही थी..

मुझे उसकी आँखों में मेरे लिए बहुत hi बेइन्तिहाँ प्यार दिख रहा था.. और मेरे लिए तड़प bhi..Ye मुझे अहसास होते hi मई उससे कहता हु...

Mai-Ritika ी ऍम रियली रियली सॉरी... मुझे माफ़ kardo...Mai ऐसे तुम लोगो को ऐसे इस हाल में छोड़कर जाना नहीं चाहता था...

पर क्या करू तुम्हारे मुझे सचाई बताने के बाद मेरा यहाँ डैम घुट रहा tha.aur किसी काम में मेरा मन hi नहीं लग रहा था...

और मुझे भी देखना था की मेरा असली परिवार कोण है क्या सच में वो मेरा असली है या नहीं..

यही सब मेरे मन में चल रहा था एक बड़ा सा भूचाल आया हुवा था मेरे मन में...

तो इसी सोच में दुबे हुए मई तुम सबको, अपने प्यार को और अपने फॅमिली के प्रेम को भूल गया था..

और तुम तीनो मेरे hi बजह से इस दलदल में फस गयी. पर मई आ गया हु न अब मई सब ठीक कर दूंगा...

ये कहते कहते न जाने मेरे आँखों से कब आंसू निकलने लगे थे..

पर ऋतू ने वो आंसू पि लिए अपने होठ मेरे गाल पर लगाकर...

तभी रसिका और सोनम भी मेरे पास आ गयी.. तो मैंने ऋतू से अलग होकर उनसे कहने लगा...

Mai-Ab तुम दोनों भी मुझे माफ़ कर देना मई तुम्हारा भी गुन्हेगार हु...

रसिका- नहीं रद जी.. आपको हमसे माफ़ी मांगने की कोई जरुरत नहीं है..

हमे पता था आप एक न एक दिन जरूर लौट आएंगे पर इस तरह आएंगे ये नहीं पता था...

Sonam-Aur वो भी अपने अंश को साथ लेकर...

उन दोनों की ऐसे बातो से हम सब हसने लगे.. चलो इसने माहौल तो ाचा कर दिया वार्ना बहुत साद हो गया था. तभी ऋतू कहती है...

रितिका- तुम्हे तो मई बाद में देखूंगी घर में जाने के बाद पर पहले घर चले...

बाकि बातें वह पर अभी सुबह होने hi वाली है और अगर हमे घर पर न सोया देख...

वो और भी परेशां होंगे उनको तुम्हारी परेशानी जो काम थी क्या...

Mai-(Is बात पर मई कुछ नहीं बोलै पर अब विषय चेंज करने के लिए बोलै) है क्यों नहीं हम सब अब घर चलते है... अंश....

ये कहकर मैंने अंश की तरफ देखा तो वो कब का गायब हो चूका था हमारे इस प्रेम मिलाप में कुछ पता hi नहीं चला..

Mai-(Un सबकी और देखते हुए) चलो कोई बात नहीं अब मई Hi तुम सबको ले चलता हु पर है उससे पहले...

(रसिका की तरफ देखते हुए) रसिका तुमने जो जादू किया है न सब पर वो और कुछ दिन के लिए रहने दो..

वार्ना वो फिर से सब दुखी होंगे मेरे जाने की और लौट आने की खबर सुनकर...

और जब तक माहौल ठीक नहीं होता तब तक तुम ऐसे hi कंटिन्यू करोगी...

मेरे रूटीन में आने के बाद उन्हें उतना फील नहीं होगा तब तुम अपना मैजिक निकल सकती हो...

वह पर खड़े तीनो भी मेरे इस बात से कुछ देर के लिए शॉक रह गयी थी की...

मेरा दिमाग वह se(Mahal) आने के बाद कुछ ज्यादा hi स्पीड दे काम कर रहा था...

और मुझे यहाँ पर न होते हुए भी सबके बारे में सबकुछ पता चलना ये उनके लिए नयी बात थी...

क्यों की इससे पहले मुझे हर एक बात बतानी पड़ती थी.. और अगर मुझे किसी बात का पता लगाना हो तो मुझे ध्यान करना पड़ता था...

पर अब ऐसे नहीं था बस देखते hi मई सब जान hi गया था और सब माहौल में बारे में पहचान भी गया था...

Mai-(Unko अपने सोच से बहार लेट हुए) चलो अब मेरे हाथ पकड़ो वार्ना कस्ब तक ऐसे hi अपनी सोच में गम शूम रहोगी...

मेरे ऐसे कहने से तीनो भी होश में आयी और फिर मेरा हाथ पकड़ा..

और मई उन्हें वह से गायब कर सीधा उन्हें उनके रूम में भेज दिया और मई आ गया मैं गेट के सामने...

वो तीनो तो बस सोचती रह गयी की उन्हें अब पता चल गया था वह से आने के बाद..

मेरी पावर्स कुछ बाद चुकी है वो क्या है ये बात वो समाज नहीं प् रही थी...

हम तो वह से चले ए पर कोई था जो अभी भी वही था और उसने वह पर जो कुछ भी हुवा वो सब कुछ देख लिया था...

और अब उसके हमारे जाने के बाद वो भी कुछ देर वह रुका जैसे किस बारे में कुछ सोच रहा हो...

फिर वो भी वह से कही गायब हो गया और कही चला गया अब वो कोण था और आगे जाकर क्या करेगा ये तो बस आगे का वक़्त hi बताएगा...

सुबह के कुछ 7 बजे थे तो सूरज निकल के आया था और मुझे देखते hi वॉचमन ने सलाम कर गेट खोल दिया तो मई आगे चला गया पैदल hi...

और फिर मैं दूर पर जाकर नॉक करने hi वाला था की तभी दूर खुला..

और जिसने वो दूर खुला उसे देखते hi मई वही पर स्टैटेचु हो गया और उसको देखने लगा...

ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें पहले से hi पता चल गया हो की मई आ गया हु..



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और उन्होंने सिर्फ मेरे लिए hi दूर खोल दिया. वैसे वो और कोई नहीं मेरी अछि सी प्यारी सी दी थी...

मुझे दूर पर ऐसे अचानक से खड़े देख दी भी कुछ देर के लिए वो भी स्टैटेचु हो गयी..

और फिर उनकी आँखों में से भी आंसू निकलने लगी और तभी दी आकर सीधा मेरे गले लग गयी वही दूर पर hi...

और मुझे गले लगते hi जोर जोर से रोने लगी और कहने लगी...

दी- Dipuu....Tu आ गया... मुझे तो लगा की तू पहले की तरह इस बार भी कही चला गया और तेरे साथ.....

ऐसा कह वो फिर से रोने लगी.. पर यहाँ पर तो मेरा हाल कुछ अलग hi था क्यों की बहुत दिनों बाद...

मई उनके गले लगा था और इतने दिनों बाद की जो हम दोनों की जो दुरी थी वो मुझे उनके गले लगते hi महसूस हो रही गहि...

उनका दर्द मुझे महसूस हो रहा tha..Unki मेरे बजह से रोना अपनी सेहत का ख्याल न रखना...

मेरी बेरुखी ये सब मुझे महसूस हो रहा था मुझे ऐसे लग रहा था जैसे वो उनका नहीं खुद मेरा Hi दर्द हो...

पर अलग बात तो ये थी की रसिका के मैजिक करने के बाद भी उन्हें दर्द महसूस हो रहा था...

जैसे उन्हें इस बात का कोई फरक hi नहीं पड़ा हो या पड़ा भी हो पर उन्हें वो ज्यादा इफ़ेक्ट नहीं कर पाया दी पे...

उनके इस दर्द को महसूस कर मेरे भी आँखों में से आंसू निकलने लगे और मई भी अपने आप को रोने से रोक न सका और उन्हें जोर से गले लगा कर रोने लगा...

जब मेरा रोना कुछ काम हुवा तब मुझे महसूस हुवा की हम कहा है और कितनी देर से है...

तो मैंने उन्हें छोड़ने की कोशिश की पर वो तो छोड़ hi नहीं रही थी तो मई उनसे कहने लगा...

मई- ी ऍम रियली रियली सॉरी दी.. पर कुछ अर्जेंट काम आ गया था इसलिए मुझे बहार जाना पड़ा...

पर मई सबकुछ आपको बाद में बता दूंगा अभी आप अंदर चलो देखो हम कब से यही दूर पर खड़े है..

तब उन्हें महसूस हुवा तो वो मुझसे अलग हुयी.. तो अपने आंसू छुपाने लगी...

तो मैंने उनका मुँह अपने हाथो में लिया और उनसे कहने लगा...

Mai-(Unke आंसू पोछते हुए) देखो अब मई आ गया हु न तो अब रोने का नहीं ok...

और मई फ्रेश होने के बाद आपके रूम में आ जाऊंगा फिर मई आप से ढेर साडी बाटे करूँगा..

पर अब नार्मल हो जाओ क्यों की आप नार्मल हो गयी तो सब नार्मल hi रहेंगे...

दी ने कुछ कहा नहीं पर उन्होंने अपने आप को कण्ट्रोल किया और फिर मेरा हाथ पकड़कर अंदर ले गयी..

और मुझे अंदर लेट वक़्त सबको अबाज देते जा रही थी... की कोण आ गया बोलकर ..

दी के अबाज से सब इतनी सुबह नींद से उठकर हॉल में आ गए वो तीनो भी आ गयी ऊपर से अपने रूम में से..

और जब उन्होंने मुझे देखा तो वो खुश हो गयी पर शायद ऋतू को मुझे पिटवाना hi था..

तो वो ऐसा एक्सप्रेशन लेकर आयी थी जैसे आज मेरी कोई खैर नहीं...

और वही पर जब सब लोग ए और उन्होंने जब मुझे देखा तो वो सब ख़ुशी से पागल hi हो गए..

सबसे पहले माँ तो वो दौड़कर आते हुए मेरे गले लग गयी और रोने लगी...

अब ये रोना कॉमन हो गया है न पर क्या करे लड़कियों को आदत hi ऐसी होती है फिर चाहे वो गफ हो या बहन हो या माँ..

माँ- बीटा कहा गया था तू पता है हम सबने तुझे कितना याद किया..

मोनू तो तू जब से गया है तब से ढंग से खाना hi नहीं खा रही है..

मई- माँ मई अब आ गया हु न अब मई आप सबको छोड़कर कही नहीं जाऊंगा पर है उससे पहले मई आपसे कुछ बात करना चाहता हु...

माँ- है बीटा बोल क्या बात करनी है...

Mai-mom अब आपको भी पता है की मेरे पास कोई शक्तिया है कोई पावर्स है..

तो अगर भगवन ने किसी को पावर्स भी दी है तो किसी मकसद से hi दी होंगी न और उसे इस समाज के लिए कुछ ाचा करना चाहती हो..

माँ- तुम कहना क्या चाहते हो बीटा साफ़ साफ़ कहो...

Mai-Mom मई ये कहना चाहता हु की इस बजह से मुझे कही भी किसी काम के लिए अर्जेंट जाना पढ़ सकता है...

तो मई ये कहना चाहता हु की आप मेरी फ़िक्र मत करा कीजिये.. क्यों की अगरआप मेरी इतनी फ़िक्र करोगे...

तो मेरा ध्यान न इधर रहेगा न उधर.. और आपको भी पता है...

आपका बीटा कभी गलत काम कर hi नहीं सकता सो प्लीज मई जो कर रहा हु वो करने दुजीये...

Mom-Thik है कोई बात नहीं हम तुझे नहीं रोकेंगे पर तुझे फिर मेरी भी एक बात माननी होगी...

मई- मुझे आपकी सब बाटे मंजूर है माँ... मई आपसे वडा करता हु की आगे से आपसे पूछे बिना...

कही नहीं जाऊंगा और नहीं कुछ करूँगा... जो भी है मई आपसे पूछूंगा जरूर...

माँ तो मेरी बात से हैरान hi हो गयी और सुरप्रीसेड होकर कहने लगी पर वो कहते कहते अचानक से रुक गयी...

माँ- तुम... मेरे मन की बात.... ाचा अब सामजी तो तुमने मेरे मन की बात भी पढ़ ली अपने पावर्स से.. ये गलत बात है बीटा...

मई- माँ पता नहीं ये कैसे हुवा मैंने ये जान बुझ कर नहीं किया ये तो बस...

पता नहीं अपने आप मेरे मुँह से निकल गया जैसे मुझे पता लग गया की आप क्या बोलना चाहती हो...

ऋतू- इसलिए तो कह रही हु जरा अपनी पावर्स का काम इस्तेमाल करो वार्ना...

हम सब के सीक्रेट भी ये आसानी से जान पायेगा और फिर उसे किसी बात का सरप्राइज देना भी सरप्राइज नहीं रहेगा...

Mai-Are मेरी छिपकली तू मेरी इतनी फ़िक्र मत कर उस वक़्त मई जान कर भी अनजान रहूँगा जैसे तू रहती है...

ये कहकर मई हसने लगा और वो गुस्से से मुझे देखने लगी..

जैसे सच में वो कुछ छुपाना चाहती हो मुझसे सबसे ... और मई जान गया...

दी- बस.. बस.. अब तुम दोनों फिर से मत शुरू हो जाना और दीपू तुम जाओ फ्रेश होकर आ जाओ..

आज माँ तो नहीं पर मई तुम्हे अपने हाथो से खाना खिलाऊंगी.. और बनाउंगी भी...

Ritu-Acha... कभी हमारे लिए भी तो ऐसा किया करो न मेरी दीदी....

दी ऋतू का कान पकड़ते हुए कहने लगी...

दी- ाचा मेरी रानी तो तुझे भी लड़ चाहिए मेरा तो तुम भी..

फ्रेश होकर आ जाओ और फिर मई तुम्हे भी जी भरके खाना खिलाऊंगी...

वैसे ऋतू को दर्द तो नहीं पर वो एक्टिंग करते हुए कहने लगी..

ऋतू- ohh...Di.. दर्द हो रहा है प्लीज छोड़ो न ..(दी ने उसका कान छोड़ दिया तो वो आगे कहने लगी...)

ाचा खिलाओ अपने लादले को बहुत दिन से भुक्का होगा ये पेटूराम.. जा जेक खले मोठे...

Mai-iski तो मई...

ये कहकर मई उसके पीछे भागने लगा और वो मुझसे बचकर अपने रूम में भाग गयी..

और अंदर से दूर भी लॉक कर दिया.. तो मुझे उसको पकड़ने का मौका hi नहीं मिला..

मई- तू खाने के टाइम मिल फिर मई तुझे बताता हु चिपकू...

ये कहकर मई अपने रूम में चला गया और बहुत hi अचे से फ्रेश होने लगा..

और अचे से रेडी होकर निचे आ गया तो दी खाना लगा रही थी और रसिका उसकी हेल्प कर रही थी...

बाकि तो मुझे दिखाई नहीं दिए वैसे भी पापा भैया और भाबी तो मुझे यहाँ आकर भी दिखाई नहीं दिए..

तो मई सोचने लगा की ये तीनो कहा चले गए...

अभी मई ये सोच hi रहा था तभी मेरे दिमाग में अचानक से एक अबाज आयी जो पहले जैसे आयी थी शामे वैसे hi...

अबाज- अबे घोंचू... तेरी सामने इतने बड़े माल पड़े है और तू उनके बारे में छोड़कर किसी और के hi बारे में सोच रहा है...

तेरा बाप बिज़नेस मीटिंग के लिए आउट ऑफ़ सिटी है और तेरा भाई और भाबी न्यूयोर्क में है..

सेल तूने hi तो छोड़ा है उन दोनों को वह. इधर ध्यान दे जरा अबे जो यहाँ है ..

वो हर एक आइटम को देख कितने सेक्सी है सब... और सब तुझे प्यार भी करते है... तेरी जगह मई होता न तो...

अभी ये अबाज कुछ बोलता उससे पहले hi मई जोर से चिल्लाया जिसकी बजह से मुझे जो अबाज आ रही थी वो बंद हो गयी...

पर मई इतना भी जोर से नहीं चिल्लाया की दी तक मेरी अबाज जाये...

Mai-(jor से चिल्लाते हुए) कोण... है be...Samne आओ... जल्दी मई कह रहा हु..

वार्ना अगर अगली बार मिल गए न तो वही पे जलाकर रख कर दूंगा...

लेकिन अब मेरे चिल्लाने से जो अबाजे आ रही थी वो भी बंद हो गयी.. अब मुझे कोई अबाज सुनाई नहीं दे रही थी... पर उस अबाज ने मुझे सोच में दाल दिया...

मई- साला मई जब से उस महल से वापस आया हु ये अजीब सी अबाज मुझे सुआनयि देने लगी है..

इसके बारे में मुझे अंश से बात करनी hi होगी.. साला कब तक इस अबाज की बकबक को हज़म कर लू...

मई अभी अपने रूम में जाकर अंश को बुलाने hi वाला था की तभी मुझे दी की निचे से अबाज आयी...

जो मुझे खाने के लिए बुला रही थी.. तो मैंने सोचा इसे खाने के बाद देखता हु मई...

मई यही सब सोचते हुए निचे चला गया अपने दी के पसस........................
 
अपडेट 54

मई अभी अपने रूम में जाकर अंश को बुलाने hi वाला था की तभी मुझे दी की निचे से अबाज आयी...

जो मुझे खाने के लिए बुला रही थी.. तो मैंने सोचा इसे खाने के बाद देखता हु मई...

मई यही सब सोचते हुए निचे चला गया अपने दी के पसस........................

आगे............................

निचे जाते hi दी ने मुझे अपने पास बुलाया और अपने हाथो से बड़े प्यार से खाना खिलाया..

अब ऋतू की भी यही ीचा थी पर वो ऐसे सबके सामने खिला तो नहीं सकती थी..

अब क्या करे पहले से hi ऐसी इमेज उसने बनायीं थी तो उसे निभाना तो था hi..

और सब लोगो को मेरे और दी के प्यार के बारे में तो पता hi था इसलिए कोई बिच में नहीं आता था..

और सबको पता है दी मेरे बारे में कितना पोस्सेस्सिवे है.. पर ये प्यार आगे क्या मोड़ लेने वाला था वो तो वक़्त hi बताएगा..

दी का ऐसा प्यार और इनका ऐसे प्यार से खिलते देख मुझे उनके प्यार की अनुभूति हो रही थी..

न जाने पर ये प्यार और गहरा होते जा रहा था दी का मेरा...



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और उसी वक़्त अचानक से मेरे जहाँ में कही सी धुंदली सो यादें आ गयी...

कुछ तो दिख रहा था मुझे कोई लड़की दिखाई दी जो किसी लड़के के बहो में समायी हुयी है...

वो दोनों दुनिया से बेखबर अपने Hi प्यार में एक दूसरे में hi खोये हुए है..

जैसे उन दोनों को दुनिया की कोई परवाह hi नहीं है... पर ये सिर्फ मुझे धुंदली सी याद थी...

और तभी मुझे दी ने हिलाया तब मुझे होश में आया.. और जो भी मैंने अभी देखा था वो पूरा ब्लेंक हो गया..

जैसे दो पल के लिए मेरे मंद ब्लॉक हो गया हु.. मतलब जिस तरह वो धुंदली यादें मेरे दिमाग में आयी थी..

जिस तरह वो मुझे दिखी थी उसी तरह धुंदली सी होकर मेरी यादो से और मेरे दिमाग से गायब हो गयी और मई भी उसे भूल hi गया...

दी- कहा खो गए हो दीपू... तुम्हारे सामने निवाला होकर भी खा क्यों नहीं रहे हो...

Mai-Bas मई यही सोच रहा था की मई आपके इसी प्यार के लिए कितना मिस Kiya..Aur आपको भी मेरे बजह से तड़पाया...

Mom-Beta तो फिर ऐसा करते hi क्यों हो तुम... जाया hi मत करो न हमे छोड़कर...

Mai-Kya करे माँ... मैंने तो आपको पहले hi बताया अब उस बात से मुकर तो नहीं सकते न.. और अगर मई जाता नहीं तो हिज तरह मुझे प्यार मिल रहा है क्या वैसे मिलता...

Ritu-Ha तो जार महीने जाया करो न बहार.. और जल्दी आया hi मत Karo...Phir ये क्या मई भी तुम्हे प्यार करुँगी.. और वो भी अपने तरीके से...

वैसे ये बात ऋतू के सामने बहुत hi ऐटिटूड और गुस्से से कही थी.. पर उस गुस्से के पीछे कितना प्यार छुपा था वो सिर्फ मई hi महसूस कर पाया...

Mai-Ha क्यों नहीं नकचढ़ी.. पर मई ऐसा होने hi नहीं दूंगा क्यों की मई अगली बार तुम्हे hi साथ लेके जाऊंगा...

ऋतू- न बाबा... न.. मई नहीं आउंगी.. वह जाकर किसी जानवर के सामने मुझे फेक दिया तो... वैसे भी तुम मेरी कहा फ़िक्र करते हो...

मई- अरे.. तुमने तो मेरे मन की बात चीन ली मई बिलकुल ऐसे hi करने वाला था...

ये कहकर मई जोर जोर से हसने लगा और साथ में सब लोग...

ऋतू भी एक्टिंग रेडी रखते हुए मुझसे कहती है..

ऋतू- करके तो देखो... नहीं उस जानवर की hi तुमसे पिटवाया और उसे hi तुमसे खिलवाया तो नाम चेंज कर देना Mera...Aur मार मार के चूरमा कर देंगे फिर वो तुम्हारा...

मई- ाचा तो फिर.. तुम्हारा नाम चेंज करने में अल्वा मेरे पास कोई चारा नहीं.. तो फिर क्यों न तुम्हारा नाम सससस...........

मई नाम लेने hi वाला था की तभी ऋतू ने मुझे आंखे दिखते हुए अपने मैजिक से मेरा मुँह बंद कर दिया...

और तभी मुझे भी समाज आ गया की मई क्या बोलने वाला था.. तो मई भी चुप हो गया..

लेकिन बाकि के लोग कैसे शांत बैठे.. उन्हें तो हमारा ये प्ले देखते हुए मजा आता है न...

दी- क्या नाम रख देते दीपू तुम फिर...

मई- रखना क्या है दी.. पहले hi रख दिया है बस उसे अलग तरीके से कहना है छिपकली...

ये कहते hi ऋतू ने अपने थाली में रखा हुवा गाजर मुझे फेक के मारा.. तो मैंने उसे चूका दिया और मई फिर से हसने लगा...

ऐसे hi हसी मजाक करते हुए हमारा खाना चल रहा था.. और मेरे और ऋतू के बिच नोकझोक...

पूरा खाना होने तक हमारा बस ऐसे hi चल रहा था..

लेकिन खाना होने के बाद मुझे धीरे धीरे मेरे अधूरे काम याद लगे...

जिन्हे मई करने वाला था पर अब सबसे बड़ा तो वो काम है जो मुझे अभी करना है..

इसलिए मई ब्रेकफास्ट होने के बाद सीधा अपने रूम में चला गया...

वैसे दी तो मुझे अपने रूम में ले जाने वाली थी पर मैंने hi उन्हें कुछ काम बताकर...

और थोड़ी देर में आने का कहकर अंश से बाटे करने चला गया...

और अंश तो मेरे वह बुलाने से पहले hi मेरे रूम में था जैसे वो भी जनता हो की मुझ पर क्या बिट रही है..

अंश- आओ भाई आपका hi इंतज़ार हो रहा था यहाँ पर बोलो मुझे किस लिए याद किया..

Mai-Ab तुम मेरे बुलाने से पहले hi यहाँ आ गए हो तो...

उस तरह तुम्हे ये भी पता होगा की मैंने तुम्हे यहाँ किस लिए बुलाया है ...

अंश- चलो फिर कोई बात नहीं आप वो अबाज वाली hi बात कर रहे है न तो सुन लीजिये...

वो कोई और नहीं आपकी hi अबाज है जो आपके मन से आ रही है और आपको अछि तरह से और इतने क्लेअर्ल्य सुनाई दे रही है...

Mai-(Chonkte हुए) ये कैसे हो सकता है मेरी अबाज मुझे खुद सुनाई दे रही है और वो भी इतने गंदे तरीके से...

Ansh-Waise आपको तो पता hi होंगे की नानाजी ने आपको कोई शक्ति दी है मतलब आपके दिमागी शक्ति को जो दिवार रोक रही थी बस वो तोड़ दी है..

मई- है पता है पर उसका अब क्या...

अंश- ये वही तो है.. मतलब ये वही शक्ति है जिसे आप अभी कण्ट्रोल नहीं कर प् रहे है..

अभी आपकी कंट्रोलिंग पावर उस हद तक अभी नहीं गयी है की उस दिमागी शक्ति को अपने तरह चला सको..

एक तरह का साइड इफ़ेक्ट है ऐसा भी आप कह सकते हो...

मई- फिर ये अबाज कभी काम नहीं होगी क्या.. अगर होगी तो फिर कैसे वो भी बता दो...

अंश- उस अबाज के काम होने के मतलब ख़तम होने के दो तरीके है जो आपको करने hi होंगे..

वार्ना वो शक्ति आपके ऊपर हबी होकर कुछ भी कर सकती है.. अब ये आपकी परीक्षा है यही समाज लो आप...

Mai-Thik है कोई बात नहीं मई वो देने के लिए तैयार हु... बताओ वो दोनों तरीके क्या है...

जिसे मई ये शक्ति को कण्ट्रोल और उस अबाज को ख़तम कर सकता हु...

Ansh-Ek तो है आपका डेली योग करना, कसरत करना... और डेली ध्यान करना...

जिसके आप खुद का मन केंद्रित होकर उस शक्ति को कण्ट्रोल करना और अपनी दिमागी पावर और हालत भी और ज्यादा बढ़ाना...

मई- और दूसरा...

Ansh-Ye आपके लिए नया है.. पर ये भी आप कर hi चुके हो..

Mai-Saaf साफ़ कहो क्या कहना चाहते हो...

अंश- आपको उस अबाज की साडी बातें माननी पड़ेगी फिर चाहे वो कुछ भी कहे...

अगर अपने उसकी बात नहीं मणि तो फिर वो आपके दिमाग के ऊपर हावी होकर...

कुछ भी कर सकता है और सब हो जाने के बाद आपको पता लगेगा की आप वो काम कर चुके हो....

मई- ये क्या बात हुयी की मुझे उसकी साडी बातें माननी padegi...Nahi बिलकुल नहीं मई नहीं मानूंगा उसकी बात... उसकी बातें सुनी तुमने कभी...

Ansh-Aap अगर ऐसा नहीं चाहते हो तो एक रास्ता है की आप उसे अपना ाचा सा दोस्त बना लो..

और फिर तुम दोनों में कुछ बातें फिक्स कर दो.. जैसे की वो ऐसा वैसा कुछ नहीं करेगा..

बिना आप Jane..aur उसके बदले आप उसे जो चाहे वो दे सकते हो लेकिन कुछ रेस्ट्रिक्शन्स देकर...

मई- लेकिन एक बात बताओ की मुझे उसकी किस तरह की बातें माननी पड़ेगी..

Ansh-Bhai वो... सेक्स की...

Mai-(Pura शॉक) क्या..... मतलब....

अंश- भाई इस समय में आप जितनी उसकी बात मानोगे जितना सेक्स करोगे..

उतनी hi आपकी दिमागी शक्ति जागृत होगी और फिर आप धीरे धीरे उस अबाज को अपना दोस्त बनाकर...

उसपर कण्ट्रोल पाकर आपके दिमाग का आपके शक्ति का बॉस बन सकते हो..

और एक बार आप बॉस बन गए तो फिर आप खुद महसूस करेंगे की आप क्या कर सकते हो.....

मई- लेकिन कैसे... मतलब... हर किसी के साथ... नहीं नहीं.. ऐसा नहीं हो सकता..

उसको मुझे कुछ तो कहना hi पड़ेगा... लेकिन अभी वो हम दोनों की साडी बातें सुन रहा होगा...

Ansh-Nahi भाई अभी वो सोया हुवा है क्यों की मई आपके पास हु और मई उसको कण्ट्रोल कर सकता हु... इसलिए मैंने उसको सुला दिया है..

Mai-To फिर क्यों न तुम hi वो काम क्यों नहीं कर देते.. इसको हमेशा के लिए मेरे कण्ट्रोल में ले आओ फिर...

अंश- भाई अगर मुझे ये सब करना hi था तो मई पहले hi कर देता.. लेकिन फिर वो शक्ति हासिल कर...

आपको कोई फायदा भी नहीं होता और मजा भी नहीं आएगा..

बल्कि ऐसे करने से आपको उस शक्ति की अहमियत भी मालूम हो जाएगी.. और उसका महत्व भी..

और आपको पता है हमेशा अचे करनी का फल धीरे धीरे hi मिलता है और वो भी मीठा...

मई- समाज गया भाई तुम क्या कहना चाहते हो चलो Bye..(Tabhi मुझे एक बात याद आयी तो मई उससे कहने लगा..)

अरे है याद आया वैसे तुमने मुझे बताया नहीं वो जो कला साया हमे मिला था वो किसका था.. और वो हमे क्यों और कैसे जनता है...

Ansh-Bhai इन सरे सवालो में से मई सिर्फ आपके एक सवाल का जवाब दूंगा..

और वो भी आधा hi क्यों की अभी आप सिर्फ एक काम पर hi फोकस करो...

मई- ठीक है भाई उतना hi बता दो की तुम क्या कहना चाहते हो...

अंश- भाई आपको याद है.. जब आप आपकी तीसरी शक्ति यानि वो Talwaar(Veer) आप हासिल कर रहे थे..

तो वो तलवार निकलने के बाद जो कला साया उसके बाद निकला था न तो वो यही है...

जो उसमे से निकलने के बाद आपको चुकार आपको दर्द देकर चला गया था...

ये वही साया है और कोई hi नहीं और वो वह कैसे पंहुचा...

किसने डाला इन सरे सवालो के जवाब मई आपको अगली बार दूंगा जब....

मई- सही समय आएगा.. पता है तुम्हारा ये डायलाग...

पता नहीं ये मेरे साथ hi ऐसा क्यों होता है.. चलो जाने ..Bye...

मई चलता हु मुझे कुछ काम भी करने है अब आ hi गया हु तो...

उसके बाद अंश चला जाता है और मई भाई को फ़ोन कर देता हु..

उनसे बात करते वक़्त पहले तो वो मुझे बहुत डांटने लगे की ऐसे कही चला गया बोलके वो भी बिना बताये..

पर फिर मैंने उनको संजय तो वो मान गए.. तो फिर प्यार से बोलने लगे..

तो मैंने उन्हें यहाँ आने को कह दिया तो वो बोले रात को आ जाओ फिर हम साथ में जायेंगे..

भाई- पर भाई मई रात को तो आ जाऊंगा आपको लेने लेकिन याद है न कल सुबह हम सबको...

पुरे परिवार के साथ चलना है.. उस नए ऑफिस का इनॉगरेशन करने के लिए...

Bhai-Ha चलेगा कोई बात नहीं लेकिन पुरे परिवार के साथ क्यों.. क्या तुम वो जगह सबको दिखने वाले जो..

मई- नहीं भाई आप उसकी चिंता मत करो आप यहाँ आओ मई आपको सब समजा देता हु उनको क्या दिखाना है और क्या नहीं..

ठीक है आप रेडी रहो मई रात को आपको लेने आऊंगा...

और है पापा को भी बोल देना की आज hi घर ए कल उन्हें भी तो आना है.

भाई- तो फिर तू hi क्यों नहीं फ़ोन करके बोल देता उन्हें..

मई- नहीं भाई मई कैसे.. अपने तो सिर्फ डांटा उनको पता चला तो वो मुझे वह बुलाकर मरेंगे..

इसलिए कह रहा हु आप hi बताइये.. मुझे अभी किसी काम से बहार जाना है...

ये कहकर मैंने फ़ोन रख दिया. और आराम से अपने बीएड पर बैठी गया...

तभी मुझे मेरे दोस्तों की याद आ गयी तो मई वह जाने के लिए रेडी हो गया और निचे आ गया...

निचे आते hi माँ मुझे किचन में कुछ करते हुए दिखी...

तो मई पीछे से चुपके से जाकर उन्हें गले लगाया.. तो वो भी पहचान गयी और कहने लगी...

Mom-Kya हुवा मेरा बचा.. आज यहाँ कैसे और इतना प्यार कुछ कहना है क्या..

मई- है माँ... ी लव यू....

माँ- पीछे मुँह कर मेरे गलो को चूमते हुए.. ी लव यू मेरा बचा... बोलो क्या बात है...

Mai-Kuch नहीं माँ बहुत दिन हुए मई मेरे दोस्तों से नहीं मिला तो बस उनसे hi मिलने जा रहा हु...

तो जाते वक़्त आप मुझे यहाँ मिल गयी तो यहाँ चला आया...

Mom-Thik है बीटा जाना है तो चले जाओ... पर दोपहर तक लौट आना... याद है न लंच तुम्हे घर में hi करना है...

Mai-Ha माँ याद है. मई जल्दी लौट कर आऊंगा...

ये कहकर मई बहार अपने पार्किंग में चला गया जहा पर एक से बढ़ कर एक बाइक्स और कार्स मेरा इंतज़ार कर रही थी..



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की मुझे साथ ले जाओ.. पर आज मेरा बाइक चलने के मन था तो मई अपने कुछ फेवरेट में से चुनकर एक बाइक को उठाया और वह से निकल गया मेरे फ्रेंड के घर..

यहाँ पर एक अलग hi जगह जिस जगह के बारे में मैंने आपको पहले भी बताया था...

पर शायद लम्बा गैप होने की बजह से आपको याद नहीं होगा.. तो मई आपको कुछ झलकियों के साथ वो पल याद भी दिला देता हु...

एक ऐसा ठिकाना जिसके बारे में कोई भी बता नहीं सकता की वो जगह इस धरती पर कहा है..

पर वो जगह दिखने में बहुत hi बड़ी थी.. और उसके अंदर एक से बढ़ कर एक नए नए टेक्नोलॉजी के इंस्ट्रूमेंट्स..

जिसके बारे में आज तक न किसी ने सुना होगा और नहीं आज तक किसी ने देखा होगा...

बस ऐसा समाज लो यहाँ पर जो भी काम होता था वो सबसे छुपकर होता था..

और वह पर करीब हज़ारो के करीब डॉक्टर्स कहो या साइंटिस्ट काम कर रहे थे.. एक ऐसी लैब जो फुल टेक्नोलॉजी से भरी हुयी थी..

आपको याद तो होगा hi की एक बार मैंने इस जगह के बारे में आपको बताया था..

और वह पर कुछ एक्सपेरिमेंट चल रहे थे उसके बारे में भी...

तो बस ये वही जगह है और अभी भी उन्होंने जो एक्सपेरिमेंट किया था किसी एक रोबोट पर और एक इंसान पर..

और 1-2 जानवर थे उनपर भी.. लेकिन अभी तक उस एक्सपेरिमेंट के बाद सब बेहोश थे कोई भी अभी तक बेहोशी से जग नहीं पाया...

सब उनके उठने की hi रह देख रहे थे.. और उन्होंने वो एक्सपेरिमेंट लोगो के भलाई के लिए hi बनाया था..

पर इन साइंटिस्ट में भी कुछ ऐसे थे जिनके मन में तो कुछ और hi चल रहा था...

और उन्होंने चुपके से उस एक्सपेरिमेंट में कुछ चंगेस किये थे जो उन्हें भी पता नहीं था..

की उसका असर उन पर और साडी दुनिया पर कैसा होगा और क्या होगा...

लेकिन तभी वह पर एक जानवर की धड़कन बढ़ जाती है अचानक से और वह पर अलार्म बजने लगता है...

अलार्म बजने की बजह से सब लोग दौड़ कर वह चले आते है देखने क्या हो रहा है..

पर उस जानवर के हिलने से पहले कुछ ऐसा हुवा था की वह पर जिसके बारे में...

उस लैब में से किसी ने भी और नहीं उनके लगाए हुए सेंसर ने भी उसे कैच नहीं कर पाए...

और वो क्या था वो तो आपके सामने आ hi जायेगा की वह पर हुवा क्या था..

पर अब सब उस जानवर की धड़कन में कुछ चंगेस होने की बजह से उस और hi देखने लगे ..

लेकिन ये क्या धीरे धीरे वह पर जितने भी जानवर थे और जो एक इंसान और रोबोट था...

उन सबकी भी शामे कंडीशन होने लगी जैसे उस जानवर की थी...

सबको लगा की ये अभी उठ जायेंगे... लेकिन तभी उनके बड़े वाले स्क्रीन पर एक टाइमआउट आ गया..

जिस पर 24 हॉर्स जैसे कुछ क्लॉक दिखाई दी.. और वो धीरे धीरे अपने टाइम से चलने लगी...

पर ये क्या वो टाइम धीरे धीरे बढ़ने नहीं मतलब काम होते hi जा रहा था...

यानि ये 24 घंटे पुरे होने के बाद वह पर कुछ ऐसा होने वाला था...

जो कोई भी नहीं जनता था क्या होगा क्या ये जितने भी अभी नींद के बेहोशी में है वो सब उठकर खड़े हो जायेंगे...

लेकिन उसके साथ hi वह पर खड़े एक सीनियर साइंटिस्ट के दिमाग में कुछ अनहोनी की शंका आने लगी...

इसलिए वह पर जितने भी बड़े साइंटिस्ट थे उन सबको लेकर वो एक ऐसी जगह ले गया जहा पर उनकी एक बहुत hi सीक्रेट मीटिंग होने लगी..

अब उस मीटिंग में क्या होना था और उनका क्या डिस्कशन हुवा वो हम बाद में देख्नेगे hi..

पर उसके बाद वो क्या डिसिशन लेते है उसके लिए हम फिर से वापस आएंगे..

तब तक चलो देखते है हमारा हीरो क्या कर रहा है अपने फ्रेंड के घर जाकर...

आपको मेरे फ्रेंड का नाम तो याद है न नहीं हो तो मई बता देता हु..

अभी के लिए सिर्फ मई मेरे फ्रेंड श्याम के घर जा रहा हु जो मेरा बचपन का दोस्त है.. तो बस मई चला उसके घर...

और सीधा जाकर उसके घर के सामने hi गाड़ी रोक दी... और जाने लगा अंदर..

उसके घर के सामने जाकर मैंने 2-3 बार दूर बजाय.. पर कोई भी नहीं आया और नहीं अंदर से कोई अबाज...

अब आपको तो पता है है हम तो ठैरे रडप साहब.. हम सब खोल सकते है तो फिर ये दूर का लॉक क्या चीज है..

इसलिए हमने सिर्फ उस दूर के लॉक को हाथ लगाया तो वो आराम से अंदर से खुल गया और दूर भी आराम से ओपन होने लगा...

वैसे ये दूर मैंने इसलिए खोला क्यों की अंदर तो कोई नहीं था और ऊपर से दूर भी कोई खोल नहीं रहा था..

पर फिर भी अंदर से मुझे म्यूजिक की अबाज आ रही थी...

इसलिए शायद उस म्यूजिक के शोर की बजह से दूर बजने की अबाज नहीं सुनाई गयी होगी इसलिए मैंने सोचा चलो हम hi खोल देते है..

अंदर गया तो वह पर कोई भी नहीं था और म्यूजिक की अबाज तो मुझे ऊपर से आ रही थी.. इसलिए मई चला ऊपर उस शोर की तरफ...

उस शोरी की तरफ जाये हुए धीरे धीरे उस म्यूजिक का शोर बढ़ने लगा..

और मई एक रूम के सामने आकर खड़ा हो गया...

अब मई इतने दिनों बाद यहाँ आया था इसलिए मुझे याद hi नहीं था की ये रूम किसका था..

मैंने सोचा होगा श्याम का hi इसलिए दूर को खोल अंदर चला गया...

पर जैसे hi मैंने दूर खोला और मेरी नजर सामने चली गयी..

वैसे hi मेरी नजर मेरी आंखे खुली की खुली hi रह गयी... दिल की धड़कन hi बढ़ गयी...

और उसके साथ अचानक से मेरा मुँह बिना पानी के तड़पने लगा... जैसे मेरे पुरे तनबदन में आग लगी हो...

ऐसा क्या देख लिया रद ने तो चलो जानते है अगले अपडेट में...........................
 
अपडेट 55

मैंने सोचा होगा श्याम का hi इसलिए दूर को खोल अंदर चला गया...

पर जैसे hi मैंने दूर खोला और मेरी नजर सामने चली गयी..

और उसके साथ अचानक से मेरा मुँह बिना पानी के तड़पने लगा... जैसे मेरे पुरे तनबदन में आग लगी हो...

ऐसा क्या देख लिया रद ने तो चलो जानते है अगले अपडेट में...........................

आगे............................

सामने एक लड़की टॉवल अपने बॉडी पर चढ़ाकर नाच रही थी..



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और उसे देखकर लग रहा था जैसे वो अभी अभी नहाकर आयी ho..Kyu की उसकी पूरी बॉडी शावर में भीगी हुयी थी..

और उस लड़की के ऐसे पानी में भीगे हुए बॉडी को देख मेरा टेम्परेचर बढ़ने लगा...



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उसको ऐसा नंगा नाच देख मेरे पुरे बॉडी में एक अलग सी झुरझुरी हो रही थी...

पर जब वो पलटी और मैंने उसका चेहरा देखा तब मुझे याद आया की ये कोण है..

अरे ये तो श्याम की बड़ी सिस्टर मृणाली है.. जो अभी मेरे सामने कड़ी नाच रही है...



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वैसे आपको तो याद नहीं होगा मई पुरे यकीं से कहता हु...

क्यों की जब रद अपना खुद का वजूद जानने से पहले मतलब उसके अपने दादाजी के घर जाने से पहले का ये अपडेट है...

तो आप जरूर भूल गए होंगे.. पर क्या करे भाई उसके बाद इतना कुछ हुवा की...

इस तरफ ध्यान hi नहीं गया पर अब जब गया hi है तो ऐसा गया की...

मृणाली के पलटने के बाद भी उसने मुझे नहीं देखा था क्यों की मई दूर के एक साइड में छुपकर ये सब देख रहा था...

लेकिन तभी उसने अपना टॉवल खोल दिया.. और मुझे उसका पानी से भीगा हुवा और...

अभी सोवेर लेकर आने की बजह से आधा पानी भीगा हुवा हॉट और सेक्सी बदन मुझे पूरा दिख गया. ऊपर से लेकर निचे तक..

क्या संगमरमर की तरह बदन था उसका.. पूरी बॉडी गोरी इतनी उस पर डेग निकल पाना बहुत hi मुश्किल काम था..

वही पर उसके दो बड़े बड़े वक्ष.. जो सीना तानकर मेरी तरफ देख रहे हो..



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जैसे किसी ने नहीं पर उन्होंने जरूर मेरी चोरी पकड़ली है और इसलिए वो सीना तानकर खड़े है... और वो भी गुस्से में पुरे तरह पिंक गुलाबी होकर...



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थोड़ा निचे गया तो उसका वो नैवेल.. यार पूछो hi मत.. बस ऐसा लग रहा था जैसे जाकर सीधा उसे पूरा खा जाऊ...

और सबसे लास्ट में स्वर्ग का द्वार... वो भी इतनी साफ़.. और पूरी तरह से गुलाबी..

की ऐसा लग रहा था जैसे जाकर सीधा उसको छोड़ दालु.. और कुछ मत करू..

मई तो उसके इस पुरे बॉडी में खो hi गया था और वो तो बस अपने में hi खोयी हुयी नंगी नाच रही थी...

लेकिन तभी वही अबाज मुझे सुनाई दी.. वैसे वो अबाज अब कंटिन्यू रहेगी कुछ उपदटेस तक तो उसको किसी नाम से hi बुलाते है...

वैसे वो मेरा hi अंश है तो बस उसे बाद अंश कहते है इन शार्ट बी अंश..

बी अंश- अबे उस आइटम को बस देखता hi रहेगा की अंदर जाकर छोड़ेगा भी पटक पटक के...

उस बी अंश की अबाज से मई होश में आया तो मई दूर से पीछे हैट उससे बाटे करने लगा पर मन hi मन में है...

मई- अरे वो मेरे फ्रेंड की सिस्टर है और उसके लिए मई ऐसा कर तो क्या सोच भी नहीं सकता...

बी Ansh-Acha तो कुछ देर पहले कर रहा था वो क्या था जो सोच रहा थे उसे नंगी देख वो क्या था...

उसके ऐसी बात से मई चुप हो गया पर इस बात के लिए वो चिप नहीं हुवा.. तो वो आगे कंटिन्यू करते हुए बोलै..

बी Ansh-Ek बात बता उसके पास छूट नहीं है क्या.. या उसके पास चुके नहीं है...

या तेरे पास लावड़ा नहीं है.. क्यों की उसकी छूट तो मैंने देखि है...

वैसे है पर ऐसे लड़ाई करते हुए नहीं इसलिए चल अब ज्यादा सोच मत और मुझे ठंडा होने दे...

Mai-Nahi रे... मुझे ये बात अछि नहीं लग रही है और अभी कोई आ गया तो...

बी अंश- तेरी तो कोई नहीं आएगा यहाँ तेरा वो दोस्त अपने माँ के साथ गाओं गया है...

इसलिए तो ये ऐसी नंगी नाच रही है क्यों की ये आज रात अपने बर्फ के बुलाकर अपनी सील तोडना चाहती है..

अब देख इतना ाचा मौका तो मई हाथ से जाने नहीं दूंगा...

Mai-Matlab तू क्या करने वाला है...

बी Ansh-Iski सील तो मई hi लूंगा और वो भी पुरे सलिखे से.. फिर चाहे तेरी मर्जी हो या न हो..

क्यों की अगर तू नहीं मन तो मुझे पता है क्या करना है.. .

Mai-(Ghabrate हुए) क्या करने वाले हो तुम.. कही ऐसी वैसी बात मत कर देना तुम... सुन रहा है न तू... ये...

लेकिन तभी मेरा मंद ब्लॉक हो गया और फिर कुछ देर बाद अचानक से मेरी आंखे खुल गयी...

और इसी बिच क्या हुवा क्या नहीं कुछ भी पता नहीं चला बस सो गया था यही समाज लो...

पर इस बार सबकुछ अलग था.. यानि मई एक अलग hi जगह था वो भी अलग hi स्टाइल में...

मतलब मई ऊपर से निचे तक पूरा नंगा Hi सोया हुवा tha..Aur मेरे बहो में एक लड़की थी..

जिसका चेहरा उसके बालो से छुपा हुवा था... मुझे कुछ याद hi नहीं आया की मेरे साथ ऐसा क्या और क्यों हुवा...

और ये लड़की कोण है मेरे बहो में जो पूरी तरह से नंगी पड़ी है...

इसलिए मैंने देखने के लिए उसके बाल हटाए तो जैसे hi मैंने उसका चेहरा देखा...

तो बस मई वैसे hi शॉक hi hi गया और वही पे स्टैटेचु बन सिर्फ उसको hi देखने लगा...

क्यों की वो और कोई नहीं मृणाली hi थी जो मेरे बहो में सो रही थी.. तभी मुझे पूरी अबॉट याद आ गयी..

यानि उस बंश ने मेरा मंद ब्लॉक कर ये सब कर दिया होगा..

ये याद एते hi मैंने मेरे चारो और देखा तो पूरी बेडशीट ब्लड से भरी हुयी थी..

लगता है इस कमीने ने रहम hi नहीं किया होगा उस पर. पर क्या फायदा अब कुछ कहके..

क्यों की जो होना था वो तो हो गया और मई जो भी कुछ कह रहा हु वो सब मुझे hi कह रहा हु...

पर ये सब हुवा कैसे इसलिए मैंने उसको अबाज दी और उसे सब मुझे बताने के लिए कहा...

तो उसने तो पहले न नुकुर करने लगा उसकी बात न सुनने पर.. लेकिन अंत में मेरे अछि तरह से मानाने पर वो मान गया...

तो मई वैसे hi आंखे बंद कर वो सब महसूस करने लगा जो उसने मृणाली के साथ किया...

और आपके सामने भी आ रहा है की उस कमीने ने क्या क्या किया उस बेचारी के साथ....

मेरे सामने अभी भी मृणाली टॉवल में नंगी hi नाच रही थी. और तभी मई आगे बढ़ा...

और उसके सामने जाकर खड़ा हो गया.. जब वो पलटी और नाचते हुए मुझे देखि...

तो पल भर के लिए तो वो मुझे Hi कह फिर से नाचने लगी...

परजैसे उसे याद आया की वो नंगा नाच रही है टॉवल में और मई उसके सामने खड़ा हु...



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तो वो वही रुक गयी एक पल के लिए तो उसे समाज hi नहीं आया की ये क्या हुवा और कैसे... इसी दर में 2 मिनट्स तक वो वैसे hi रही...



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फिर जब उसे याद आया तो वो अपना टॉवल समेटने lagi...Jaise हर लड़की करती है...

अब मई और आगे बढ़ गया की वो खुद को सँभालते हुए कहने लगी...

मृणाली- दीपू... तुम. yaha..Maine तो दूर बंद किया हुवा था तो फिर..

Mai-Aaj तक इस रद को कोई दरवाजा रोक सके है क्या जो ये लकड़ी की दिवार रोक सकेगी..

मृणाली- लेकिन तुम.. (गुस्से से) पहले बहार जाओ.... और ऐसे किसी के रूम में घुसते हो क्या वो भी बिना बताये...

Mai-(Uski तरफ और आगे बढ़ते हुए) सस्शह्ह्ह्ह.... मई तो पहले hi चला जाता पर क्या करू तुम्हारे लिए यहाँ रुका हु..

और कोई अपने रूम में ऐसा करे तो मेरे जैसे अपने आप को कब्ब तक रोक सकता है...

पता नहीं पर तुमने मुझे पर क्या जादू कर दिया है. ये कैसा नशा चढ़ गया है तुम्हारा मुझ पर की उतर hi नहीं रहा है..

मेरे ऐसे डायलाग बजी और उसकी तारीफ करते देख वो भी शर्माने लगी..

और शरमाते हुए उसे कुछ याद आया तो वो फिर से वही गुस्से में कहने लगी..

मृणाली- दीपू कोई आ जायेगा . पहले तुम यहाँ से चले जाओ ..तुम्हारे साथ मुझे कोई ऐसे देखेगा तो बहुत बड़ा भूचाल आ जायेगा...

Mai-Koi नहीं आएगा आज यहाँ बस तुम.. और मई.. क्यों की मुझे पता है की...

कोण आज गाओं गया है और यहाँ आज कोण आने वाला है जो तुम इतना खुश हो रही हो...

Mrunali-(Shock से घबराते हुए) तुम्हे कैसे पता...

Mai-Maine तो पहले hi कहा था की तुम्हारे इन नशीली आँखों ने मुझे इस कदर घायल कर दिया है की...

तुम्हारी हर आँखों कही बातें और दिल की बातें मुझ तक पहुंच रही है...

ये मैंने उसके बाल सहलाते हुए कहा और उसे अचानक से अपने बहो में ले लिया...

Mrunali-Aauuuchhh....Dard हो रहा है... Dipu..ye सही नहीं है मुझेवछोड दो..

मई- मेरी आँखों में देखो क्या तुम्हे ये गलत लगता है...

उसने जब मेरे आँखों में देखा तो उसने मेरी आँखों की शक्ति से उसकी चाहत बढ़ा दी...

और वो भी मुझे प्यार से देखने लगी... पर जो लड़की पूरा गेम होने तक न नहीं कहे उसमे मजा hi नहीं आता...

इसलिए उसने बस थोड़ा hi वाश kiya.Jisse काम चल सके....

Mai-Kya दिखा तुम्हे मेरी आँखों में.. क्या मई तुम्हे प्यार नहीं करता... क्या तुम मुझे प्यार नहीं करती.. .

मृणाली ने न में सर हिलाया और धीरे से कहने लगी...

मृणाली- नहीं करती मई तुम्हे प्यार पर दीपू कोई ऐसे...

उसकी बात बस आधी hi रह गयी क्यों की मैंने उसे आगे बोलने का कुछ मौका hi नहीं दिया.

और सीधा उसका मुँह अपने मुँह से बंद कर दिया...



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वह... क्या रसीले होंठ थे उसके.. और अभी भी पानी की बुँदे उसके होंठो पर थी इसलिए और भी मजा आने लगा.

वो तो मुझसे दूर हटने की कोशिश कर रही थी .. किश तोड़ने की कोशिश कर रही थी पर मैंने उसे हिलने hi नहीं दिया...

और 5 मिनट्स तक उसे किश करता रहा.. स्टार्टिंग में तो वो न करती रही पर धीरे धीरे वो भी...

मेरा साथ दे रही थी किश लेने में.. और कभी ऊपर तो कभी निचे वाले होठ चूस रही थी...

इस किश में उसका टॉवल कब निचे गिर गया उसे कुछ पता hi नहीं चला.. वो तो बस मेरे किश में डूबी हुयी थी .

जब उसे सांसे थमने लगी तो मैंने उसे छोड़ दिया... तो वो जोर जोर से सबसे लेने लगी.

और मई उसके दोनों स्वर्ग की पहाड़ो को ऊपर निचे होते हुए देख रहा था...

जिसपर वो पिंक फ्लैग बहुत hi फड़क रहा था और शान से अब खड़ा भी हो गया था...

उसने जब मुझे अपनी बूब्स की तरफ और देखता पाया तो उसने अपने आप को...

छुपाने के लिए हाथ उठाये तो मैंने वो उसके हाथ बिच में hi रोक किया....

Mai-Kya हुवा जान मुझसे शर्मा रही हो...

मृणाली- कोण जान.. मई तुम्हारी जान वान कोई नहीं हु. जो देख लिए बहुत हुवा अब मुझे छोड़ो और जाओ यहाँ से... वार्ना...

उसके कुछ आगे बोलने से पहले hi मैंने उसको उठाया और बीएड की तरफ ले जाते हुए कहने लगा...

Mai-Are अभी कहा अभी तो बहुत कुछ देखना बाकि है और साथ में करना भी....

Mrunali-Are....Nahi... जो हुवा बस हुवा... अब और नहीं... दीपू प्लीज मेरी बात मनो न... ऐसा नहीं करते न प्लीज. कोई आ जायेगा....

मैंने उसकी एक बात न सुनी और सीधा उसे जाकर बीएड पर लिटा दिया... और उसके आगे कुछ कहने से पहले...

मई उसके ऊपर आकर उसके होंठ फिर से चूमने लगा. चूमने क्या टूट hi पद गया उसपर...



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और इसबार कुछ जोर से और होंठ चबाते हुए... वो भी न न कहते हुए मेरा पूरा साथ दे रही थी किश में...

पता नहीं ये मेरी जादू की बजह से था या और कुछ.... पर जो भी हो रहा था ाचा hi हो रहा था....

किश करते करते मेरे हाथ सीधा उसके छाती पर चले गए और धीरे धीरे से मैंने पहले उसके दोनों बूब्स को सहलाया जैसे उनका जायजा ले रहा हु...

वो बहुत hi मुलायम थे ,और बहुत hi चिकने भी.. जैसे की हाथ उसकी ऊपर घूमते हुए फिलहाल जरूर जा रहा था...

मेरे ऐसा प्यार से सहलाने से वो भी कुछ चहक गयी थी.. जैसे उसे कोई करंट सा लगा हो.



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पर इस बजह से उसकी किश लेने की स्पीड बढ़ जरूर गयी थी. जिसमे मुझे और भी मजा आ रहा था...

Mrunali-Aahhhh.....Diiippp......nnnnaahhhiii.....pplllease. मुझे कुछ हो रहा है....

धीरे धीरे मई स्पीड बढ़ाते हुए अब अपनी फुल स्पीड में उसके दोनों चुचो को दबा रहा था...

और वो दर्द की मरे चिल्लाना तो चाहती तो थी पर उसकी चीख मुँह में hi बंद होते जा रही थी...

अब मेरे साथ धीरे धीरे मेरे हाथ भी निचे आने लगे थे...

अब उसकी गले में किश करते हुए धीरे धीरे उसकी छाती की तरफ से चुके की तरफ बढ़ रहा था...

जिसकी बजह से उसकी सिसकिया और भी बढ़ते hi जा रही थी जैसे वो मुझे न भी कह रही थी...

और मेरा सर पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींच भी रही थी...

Mrunali-Aahhhh....Dipu....hhhhuuuuu.mmmm.... मत करो na....Please.... बहुत मजा आए रहा है ...

मई ये नहीं सह सकती मुझे कुछ हो रहा है ...दीपू... मई तुम्हारे बहन की तरह हु Diiipppyuuui.....hhhhhhaaaaaa.....

Mai-(Uski एक बूब्स को ऊपर से हलके से किश करते huye)Kuch भी मत bolo...bas इस पल को एन्जॉय करो....

ये कहते हुए मैंने उसके एक बूब्स को अपने मुँह में पकड़ लिया और जोर जोर से उसे चूसने लगा...



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और दूसरे को अपने हाथ से दबाने लगा.. जिससे उसकी चीखे और सिसकारियां और भी बढ़ गयी ...

Mrunali-Aahhhh.... काटो मत दीपू... दर्द हो रहा है.... धीरे... धीरे... मई कहा भाग रही हु... आउउउछह.... दीपू.....

तभी मेरा एक हाथ धीरे धीरे निचे बढ़ते हुए उसके छूट की तरफ बढ़ने लगा...

और वो मेरे हाथ को पकड़ने लगी जैसे मेरा हाथ वह पर न जाये...

पर मैंने भी जोर से उसकी छूट पर हाथ घुमाया तो उसे और भी करंट सा लगा..

अब क्या था इतने सरे वार से वो तो तड़पने लगी थी और चिल्ला भी रही थी...

और इसी हालत में उसका पानी भी निकल गया... अब वो कुछ शांत पड़ी थी.. पर उसके सिसकिया अभी भी शुरू hi थी...

उसके दोनों चुचो को खाने के बाद उसको पूरा लाल करने के बाद..

धीरे धीरे निचे बढ़ते हुए उसके कमर से होते हुए छूट की तरफ जाने लगा...

वैसे इसी बिच मेरा लुंड बहुत फुंकारे मार रहा था पर क्या करे..

मुझे तो बस तड़पते हुए छोड़ने में मजा अत है.. बस उसी को फॉलो करते हुए उसकी छूट की तरफ बढ़ने लगा...

और निचे जाकर सीधा उसके छूट पर अपना सर रख दिया... जिसे तो वो आधी हवा में hi उड़ने लगी थी...



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मृणाली- Nahi...Dipu...Vaha नहीं वो गन्दी जगह hai...Vaha नहीं....

aahhhhhaaa....hhhhmmmmmm......Bahut मजा आ रहा

hai...Aauch...Dipu...please.... नहीं ददीपपु....

ऐसे कहते हुए वो मुझे छूट पर दबा रही थी और ऊपर से न कह रही थी...

उसका दूसरी बार पानी निकलने वाला था तभी मई रुक गया क्यों की अभी सही समय आ गया है हथ्यार को सामने लेन का...

इतनी देर दे ट्रॉउज़र में बैठे बैठे अकड़ गया था उसको जरा फ्री करने का...

मैंने झट से अपने सरे कपडे उतरे पर उसको महसूस नहीं होने दिया और नहीं उसको मैंने दिखाया...

वार्ना न hi कहती और फिर उसे मानना पड़ता...

मैंने अपना लुंड सीधा उसके छूट के ऊपर लगाया... जैसे उसे भी पता चल गया था अब क्या होनेवाला है वो भी तैयार थी...

क्यों की पानी निकलने की बजह से पहले hi उसकी छूट गीली हो गयी थी...

और अब मई मेरा लुंड उसके छूट पर पूरी तरह से घुमा रहा था.. जिससे उसको और भी मजा आने लगा...

उसके पानी की बजह से मेरा लुंड पूरा फिसल रहा था और उसे भी बहुत मजा आ रहा था... और मुझे उसे तड़पने में..

और अब मेरा भी लुंड तैयार था उसके अंदर जाने के लिए क्यों की वो भी अब पूरी तरह उसके पानी में भीग गया था...

Mrunali-Aur मत तड़पाओ Dipu....Ab दाल भी दो....

Mai-Kya दालु .. और कहा....

मृणाली- मुझे नहीं पता बस दाल दो.

Mai-Aise कैसे... नहीं पता... ठीक है फिर अब जब तक तुम नहीं समाज जाती की...

कहा डालना है या कैसे डालना है मई तो ऐसा hi दूर पर घूमता रहूँगा ...

Mrunali-Please दीपू.. दाल दो न अंदर... बहुत तड़पते हो यार तुम.... ी लव यू न...

मई- aahhaaa...aise नहीं पहले पूरी तरह से बताओ की कहा और क्या...

Mrunali-(last में बता hi देती है...) मेरी स्व्छ्हूत्त... में तुम अपना Llluunnnddd...Daaallo....Aur वो भी जोर से...

ये सुनते hi मई झुककर उसके लबो को चुम लिया और किश करने लगा क्यों की बाद में वो दर्द होने के बाद वो चिल्ला न पाए...

अब क्या मैंने अपना लुंड सेट कर एक धक्का मारा जिससे उसके सील के झिल्ली तक तो अंदर चला गया...



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पर इसमें hi वो बहुत तड़पने लगी... और मुझसे छूटने की भी कोशिश कर रही थी ..

पर ऐसे कैसे मई छोड़ देता... क्यों की अभी तो सील टूटनी बाकि है.. बस उस दूर तक जाकर जस्ट टच हुवा है...

लेकिन ये धक्का भी मैंने बहुत जोर से लगाया था वार्ना सील पैक लड़की को पहले hi 4 इंच जाना असंभव था...

उसके आंखे बहार आ गयी थी उसकी इतना दर्द हुवा था उसे.. पर अभी भी आधे से ज्यादा तो बहार hi था....

अब मई उसे फिर से गरम करने laga...Kabhi उसके चुके को सहलाकर तो कभी छूट के डेन को सहलाकर...

कुछ देर ऐसे रहने क्र बाद जब वो शांत हुयी तो अब मैंने थान ह लिया अब तो बस पूरा hi डालना है ...

जब उसने छूट दिल्ली छोड़ दी.. तब मैंने थोड़ा पीछे लेकर सीधा 2-3 धक्के में पूरा दाल दिया...



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और इसी धक्के के साथ उसकी सील भी टूथ गयी और बीएड पर सीधा ब्लड बहार आ गया उसका...

पर इस धक्के से वो तो बेहोश hi हो गयी .. साला कोई इतने बेरहमी से छोड़ता है क्या वो भी सील पैक को...

पर क्या करे जब मई होश में होता तब मुझे समाज आता न...

और ये तो रुका hi नहीं बस फिर क्या छोड़ना शुरू hi कर दिया....

जोर से बहार निकलता और फिर पूरा अंदर डालता... ऐसे 5 मिनट्स करने के बाद जब उसका थोड़ा आसानी से अंदर जाने लगा...

तब उसने मृणाली को उठाया पानी दाल के...

वो होश में एते hi दर्द के मरे जोर जोर से चिल्लाने लगी और दूर हटने की कोशिश करने लगी...

पर इस बार फिर से मैंने उसके चुके को चूमते हुए और बेरहमी से दबाते हुए धक्के देने लगा...

पर इस बार कुछ धीरे से थे ... जिसे उसे भी मजा आ जाये... और वो भी इस बार मजे में अब सिसकिया लेने लगी थी...

और उसके साथ साथ अब मुझे भी मजा आने लगा था...

Mrunali-Aahhhhaa....Dipu ...मजा आ रहा hai...aur जोर से... अब मई सिर्फ तुम्हारी हो गयी re....Kato मत... बस चलते रहो....

Mai-Ha अब तुम्हे तो अब सिर्फ मई Hi छोडूंगा और वो भी हर दिन....

Mrunali-Ha दीपू... हर दिन जितना चाहे छोड़ना मई न नहीं कहूँगी... जहा कहोगे वह आउंगी... बस मुझे ऐसे hi छोड़ते रहो...

मैंने उसे घोड़ी बनाया आहे पीछे से जोर जो से धक्के देने लगा...



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वो भी मेरा बहुत साथ दे रही थी... पीछे धक्का मरते हुए.. और ऊपर से हवसी सिसकिया ले रही थी...

जिससे मुझे उसे छोड़ने में और भी मजा आ रहा था न जाने वो भी चुड़ते हुए क्या क्या बक बक कर रही थी उसे hi पता...

वो मुझे चुम रही थी.. और मई उसे छोड़ते हुए भी कोई भी जगह न छोड़ता था जहा पर मैंने अपने दन्त न गड़ाए हुए...



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कुछ आधे घंटे हर स्टाइल में छोड़ने के बाद मेरा पानी निकलने वाला था...

और उस वक़्त तक तो उसका न जाने कितनी बार पानी गिरा था उसे hi नहीं पता...

बस वो मजे से सिसकिया और आनंद ले रही थी... इस आधे घंटे में मैंने उसे हर तरह से और हर स्टाइल में छोड़ दिया...



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मेरे साथ उसका Hi पानी निकल गया... और मई पूरी तरह से उसके ऊपर गिर गया....

पुरे बीएड पर उसका खून hi हो गया था.. और उसके होंठ और बूब्स पर मेरे दन्त से कटाने वाले निशान...

और बेरहमी से दबाने के बजह से पुरे लाल हो गए थे...

थोड़ी देर बाद मई उसके साइड हो गया और वो मेरे बहो में समाकर वैसे hi सो गयी...

बहुत थक गयी थी वो.. और क्यों न थके आज उसकी सील जो टूथ गयी थी और साथ hi ऐसे बेरहमी से छोड़ने के बजह से कोण नहीं थकेगा...



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और यही वो वक़्त था जो उस बंश ने मेरा मंद ओपन कर दिया... और मई होश में आया..

और खुद को इस हालत में पाया.........................
 
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