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- Dec 5, 2013
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ऋतू- कहा से शुरू करू कुछ समाज नहीं आ रहा.. क्यों की तुम्हारे बारे में बताने की कहानी hi अलग है.. और जितना बताऊ उतना काम...
Mai-Kuch भी बताओ मुझे मेरे पिछले जनम के बारे में.................................
आगे............................
Ritu-(Jor से) तुम्हारा कोई भी पिछले जनम नहीं है जो भी है यही है तुम्हारा सिर्फ एक hi जनम है कोई दूसरा तीसरा नहीं समजे....
ऋतू के इस बात से मई शॉक हो गया था क्या कहु और क्या नहीं कुछ सूझ नहीं रहा था..
बल्कि मई कुछ देर के लिए तो स्टेचू बांके खड़ा हो गया था...
ऋतू ने जो कहा मुझे उसपर भरोसा hi नहीं हो रहा था.. क्यों की उसने कहा hi कुछ ऐसा था जिसपे भरोसा करना तो दूर उससे मन्ना भी असंभव था...
मई तो फुल शॉक में खड़ा tha...Mujhe तो तब होश आया जब ऋतू ने मुझे हिलाया...
Ritu-kaha खो गए थे तुम.. मई यहाँ कुछ कह रही थी तुमसे...
मई- Tttt.....tum...Tumne अभी क्या कहा मेरा......
Ritu-(Serious) है सच hi तो कहा है मैंने...
मई- नहीं तुम मुझसे मजाक कर रही हो न ये सच नहीं है न.. यार मई तुमसे सच बोलने को कह रहा हु और तुमसे मजाक कर रही हो...
Ritu-(Serious) मई तुमसे मजाक नहीं कर रही हु अभी दीपू. ये सच है...
ये सुनकर मेरे आँखों में आंसू आ गए थे पता नहीं क्यों पर मैंने रट हुए hi ऋतू से कहने लगा...
मई- तो क्या मई बचपन से यहाँ रह रहा हु वो सब झूठ है.. मुझे माँ ने जनम दिया वो सब झूठ है..
तुम मेरी जुड़वाँ हो क्या वो hi झूठ है... अब तक मई जिनको माँ डैड कह रहा था क्या वो भी मेरे माँ डैड नहीं है....
मेरी इस परिवार के साथ जो बचपन की यादे है क्या वो भी झूठी है...
मेरा रोना देख ऋतू के भी आँखों में आंसू आ गए थे तो वो भी रो रही थी..
और मेरे ऐसे सवाल करने से कुछ गुस्सा भी तो तो वो कुछ जोर से मुझसे कहती है...
Ritu-(Rote हुए जोर से) है है नहीं है तुम्हारा कोई भी यहाँ... नहीं माँ नहीं डैड और मई भी तुम्हारी कोई जुड़वाँ- तुड़वा नहीं हु..
नहीं है हमारा कोई खून का Rishta...nahi hai....nahi है..... नहीं है....
ये कहने के बाद तो वो और भी रोने लगी.. और मेरा तो ये सुनने के बाद बहुत hi बुरा हाल हो गया था...
क्यों की अगर आप कभी जान जाये की बचपन से आप जिसके साथ रह रहे है वो तुम्हारे असली माँ- बाप नहीं है तो क्या हाल होता होगा उस बचे पर...
कुछ वैसा hi हाल हो रहा था रूद्र पर .. वो ये बात सहन hi नहीं कर प् रहा था..
और करे भी तो किस मुँह से करे.. उसे तो अब क्या करे और क्या न करे ऐसा हाल होते जा रहा था...
उसके आँखों में आंसू थे.. पर अभी वो किसी अंगार से काम नहीं लग रहे थे..
मेरे अंदर एक गुस्सा बढ़ता जा रहा था और वो भी खुद पर ...
इसके चलते मेरा इतना गुस्सा बढ़ गया की मई ऊपर मुँह करते हुए और अपने दोनों हाथ फैलये इतने जोर से चिल्लाया की....
मई- Nnaaaahhhhhhiiiiiiiiiiiiiiiiii.........................................
मेरे ऐसे चिल्लाने से वह की पूरी धरती हिल गयी थी... यहाँ तक मेरे अंदर जितना भी गुस्सा लव्हा बनकर तड़प रहा था वो सब बहार आ गया..
और वह की पूरी धरती को जला दिया.. मेरी अबाज इतने जोर से थी जहा पर इतना सन्नाटा था अब वह पर चारो और मेरी hi अबाज घूम रही थी...
जहा पर कुछ देर पहले हरियाली hi हरियाली थी... जो जगह सबसे सुन्दर थी..
अब वो कब्रिस्तान बन चुकी थी.. मतलब सब रख में बदल चुकी थी... पानी सुख गया था वह ka.Charo तरफ आग hi आग थी..
लेकिन इस गुस्से में मैंने ऋतू की तरफ ध्यान hi नहीं दिया.. हालाँकि वो भी मेरे गुस्से की आग में जल जाती..
पर उसको इसका पहले से अंदाज़ा था ऐसा hi कुछ होगा तो उसने पहले hi अपने चारो और कवच बनाया हुवा था..
अब मई फिर से रोने लगा.. लेकिन तभी ऋतू मेरे पास आयी और उसने मेरे सर के ऊपर से हाथ फिकराय..
मेरी नजर उसकी तरफ गयी.. उसको मेरी तरफ देखा भी नहीं जा रहा था.. क्यों की मेरी दोनों आंखे आग में जल रही थी...
मेरी पूरी बॉडी किसी सूरज की तरह तप रही थी.. लेकिन फिर भी जैसे hi मैंने ऋतू को देखा...
तो कुछ हद तक मेरा गुस्सा शांत हो गया.. और मेरी जो लाल आंखे थी वो अब धीरे धीरे नीली होती जा रही थी...
मतलब वह का पूरा माहौल शांत होते जा रहा tha...Shayad इसीलिए ऋतू ने मुझे लाया होगा..
और उसने इसीलिए कहा होगा की हमारी बजह से किसी और को डिस्टर्ब न हो...
वैसे मई तो अपने घर से बहुत दूर था.. पर मेरे ऐसे चिल्लाने से थोड़ी सी धरती तो हिल गयी थी.. पर वह ज्यादा महसूस न हुवा...
मैंने ऋतू को देखते hi उसके गले में लगकर फिर से रोने लगा.. जब मेरा गुस्सा शांत हुवा..
तब मुझे अहसास हुवा की असल में यहाँ हुवा क्या.. तब मैंने ऋतू के गले से चुटककर उसे मुँह को और उसे चारो तरफ से देखने लगा...
मई- तुम्हे कुछ हुवा तो नहीं न ऋतू मेरी बजह से कही चोट तो नहीं न आयी...
Ritu-Nahi फ़िक़र की कोई बात नहीं है मई ठीक हु मुझे कुछ भी नहीं हुवा..
मुझे पता था ऐसा hi कुछ होगा इसलिए मई पहले hi साइड हो गयी थी...
मई- ये सब मेरी बजह से हुवा मुझे इतना गुस्सा नहीं करना चाहिए था पर क्या करू मई अपने आप को रोक न सका..
तुमने जो बताया उसके लिए मेरा दिमाग मान hi नहीं रहा है...
ऋतू- वो इसलिए क्यों की तुम्हे जो दिख रहा है तुम उसे hi सच मान रहे हो.. बल्कि सच तो कुछ और है..
मई- मई कैसे मान लू सब कुछ समाज नहीं आ रहा है..
Ritu-Pahle तुम अपने दिमाग को शांत करो.. उसके बाद hi तुम सब समाज पाओगे और उसे असेप्ट कर पाओगे...
Mai-Kaise करू मेरे मन पर मेरा काबू hi नहीं हो प् रहा है... मुझे लगता है मई कुछ देर के लिए अकेला रहना चाहता हु...
ऋतू- पर दीपू....
मैंने उसकी तरफ ऐसे नजर से देखा की वो शांत हो गयी और कहने लगी
ऋतू- ठीक है पर सुबह होने से पहले घर आ जाना...
ये कहकर वो वह से चली गयी पर जाने से पहले वो जगह जैसे थी वैसे करके चली गयी..
और अब सिर्फ वह थे मई और मेरा अकेलापन. जो मैंने एक्सेप्ट किया था...
कब रात से सुबह हो गयी कुछ पता hi नहीं चला.. जब सूरज की किरणे मेरे चहरे पर पड़ी...
तब मुझे अहसास हुवा की सुबह हो गयी है और मुझे घर चलना चाहिए...
पर कोनसे घर जो मेरा कभी था hi नहीं.. मई किस हक़ से वह जाऊ जो मेरा कभी था hi नहीं..
किस मुँह से जाऊ मई उस घर... पर आखिर मेरे पेअर उसी घर की तरफ चल पड़े...
सुबह सुबह सब अपने काम में लगे हुए थे.. माँ ने मुझे बहार से एते हुए देखा..
तो उन्हें लगा की मई कसरत करके आया हु तो उन्होंने भी कुछ नहीं बोलै..
और मेरा तो कुछ कहने का hi मूड नहीं था.. मई जैसे तैसे अपने रूम में गया..
फ्रेश हुवा और फिर से किसी को कुछ न कहते हुए चल पड़ा घर से बहार...
सुबह का ब्रेकफास्ट भी नहीं किया वैसे hi एक ऐसे जगह चला गया जहा पर मुझे कोई ढूंढे न और मुझे कोई डिस्टर्ब न करे...
इधर माँ परेशां थी क्यों की पहली बार मई घर से सुबह जल्दी निकल गया था और वो भी नाश्ता न करके..
हालाँकि ऋतू को ये बात समाज आ गयी थी मैंने ऐसा क्यों किया और मुझ पर क्या बिट रही है..
उसने मुझसे कांटेक्ट करने की कोशिश की पर मैंने सभी कांटेक्ट बंद किये हुए थे यहाँ तक दिमाग के भी..
यहाँ तक रसिका ने भी मुझे कांटेक्ट और अपने मैजिक से मुझे ढूंढ़ने की कोशिश की पर वो मुझे ढूंढ नहीं पायी..
क्यों की आज हम दोनों को वह पर जाना था जहा पर चिका थे..
मई एक सुनशान जगह बैठा था जहा पर कोई भी नहीं था.. और वह पर बैठे बैठे अपने hi बारे में सोच रहा था...
मुझे कुछ याद क्यों नहीं है Phir..Mera तो एक hi जनम था तो ऐसा कैसे हो सकता है...
मई बचपन से कैसे यहाँ पर hu..Mujhe तो सिर्फ धरती की यादे याद अति है उससे पहले की क्यों नहीं.
ये सब मेरे जिंदगी में क्या हो रहा है वो सब सच है या कोई सपना..
कुछ समाज नहीं आ रहा था.. कितनी अछि लाइफ थी मेरी पर जिनको मई अपना मंटा था..
वो मेरे अपने hi नहीं है और जिनको मैंने कभी देखा hi नहीं नहीं वो मेरे अपने है और वो भी कहा है कुछ पता नहीं..
.
न जाने कैसे वक़्त बिट गया और सुबह से रात हो गयी..
अब तो मेरे पेट में भी चूहे दौड़ रहे थे.. और घर जाऊ भी तो किस मुँह से.. तो मई बहार से hi कुछ खाकर चला गया...
घर गया तो सब लोग मेरी बजह से परेशां थे.. क्यों की सुबह से मई गायब था..
और अब आया हु तो बहार से खाकर आया हु.. सबने मुझसे पूछने की बहुत कोशिश की..
पर मई उन्हें इग्नोर करते हुए सीधा अपने रूम में चला गया..
और अंदर से रूम लॉक कर दिया क्यों की कोई मैजिक से भी मेरे रूम में नहीं ए....
ऐसे hi कुछ दिन बिट गए न मई किसी सर अचे से बात करता था और नहीं दिन भर घर में रहता था..
सुबह होते hi घर से बहार और रात होने के बाद घर में.. मेरे इस रवैये से सब परेशां थे..
और सबने मुझे पूछने की भी कोशिश की पर मैंने किसी को भी कुछ जवाब नहीं दिया. बल्कि सबको टालता चला गया..
मुझे उन सबसे बात करने की हिम्मत hi नहीं हो रही थी...
कभी कभी तो मुझे बहुत रोना आता था ऋतू को लगता था ये सब उसके hi कारन हो रहा है उसे बताना hi नहीं चाहिए था..
पर कभी न कभी मुझे पता तो चलता न तभी भी कुछ ऐसा hi होता...
इन सबके बिच मई अपने घरवालों से बहुत दूर हो गया था मई उन सबसे दूरिया बढ़ने लगा न जाने क्यों...
अकेले hi मई सोचने लग जाता की मेरे माँ बाबा कोण है कहा होंगे कैसे होंगे लेकिन इन सवालो के जवाब मेरे पास नहीं थे...
और इन सवालो के जवाब में ढूंढ़ना चाहता था..
तो मुझे इन सवालो के जवाब सिर्फ एक hi पर्सन दे सकता है और वो है रितिका..
क्यों की अंश से मैंने एक बार कोशिश की थी पर वो मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं बताना चाहता था...
और आज के दिन मई किसी भी हाल में रितिका से मेरे सवालो जे जवाब चाहता hi था...
तो मैंने उसे उसी जगह बुलाया जहा पर हमारी पिछली बाते अधूरी रह गयी थी.................................
ऋतू- कहा से शुरू करू कुछ समाज नहीं आ रहा.. क्यों की तुम्हारे बारे में बताने की कहानी hi अलग है.. और जितना बताऊ उतना काम...
Mai-Kuch भी बताओ मुझे मेरे पिछले जनम के बारे में.................................
आगे............................
Ritu-(Jor से) तुम्हारा कोई भी पिछले जनम नहीं है जो भी है यही है तुम्हारा सिर्फ एक hi जनम है कोई दूसरा तीसरा नहीं समजे....
ऋतू के इस बात से मई शॉक हो गया था क्या कहु और क्या नहीं कुछ सूझ नहीं रहा था..
बल्कि मई कुछ देर के लिए तो स्टेचू बांके खड़ा हो गया था...
ऋतू ने जो कहा मुझे उसपर भरोसा hi नहीं हो रहा था.. क्यों की उसने कहा hi कुछ ऐसा था जिसपे भरोसा करना तो दूर उससे मन्ना भी असंभव था...
मई तो फुल शॉक में खड़ा tha...Mujhe तो तब होश आया जब ऋतू ने मुझे हिलाया...
Ritu-kaha खो गए थे तुम.. मई यहाँ कुछ कह रही थी तुमसे...
मई- Tttt.....tum...Tumne अभी क्या कहा मेरा......
Ritu-(Serious) है सच hi तो कहा है मैंने...
मई- नहीं तुम मुझसे मजाक कर रही हो न ये सच नहीं है न.. यार मई तुमसे सच बोलने को कह रहा हु और तुमसे मजाक कर रही हो...
Ritu-(Serious) मई तुमसे मजाक नहीं कर रही हु अभी दीपू. ये सच है...
ये सुनकर मेरे आँखों में आंसू आ गए थे पता नहीं क्यों पर मैंने रट हुए hi ऋतू से कहने लगा...
मई- तो क्या मई बचपन से यहाँ रह रहा हु वो सब झूठ है.. मुझे माँ ने जनम दिया वो सब झूठ है..
तुम मेरी जुड़वाँ हो क्या वो hi झूठ है... अब तक मई जिनको माँ डैड कह रहा था क्या वो भी मेरे माँ डैड नहीं है....
मेरी इस परिवार के साथ जो बचपन की यादे है क्या वो भी झूठी है...
मेरा रोना देख ऋतू के भी आँखों में आंसू आ गए थे तो वो भी रो रही थी..
और मेरे ऐसे सवाल करने से कुछ गुस्सा भी तो तो वो कुछ जोर से मुझसे कहती है...
Ritu-(Rote हुए जोर से) है है नहीं है तुम्हारा कोई भी यहाँ... नहीं माँ नहीं डैड और मई भी तुम्हारी कोई जुड़वाँ- तुड़वा नहीं हु..
नहीं है हमारा कोई खून का Rishta...nahi hai....nahi है..... नहीं है....
ये कहने के बाद तो वो और भी रोने लगी.. और मेरा तो ये सुनने के बाद बहुत hi बुरा हाल हो गया था...
क्यों की अगर आप कभी जान जाये की बचपन से आप जिसके साथ रह रहे है वो तुम्हारे असली माँ- बाप नहीं है तो क्या हाल होता होगा उस बचे पर...
कुछ वैसा hi हाल हो रहा था रूद्र पर .. वो ये बात सहन hi नहीं कर प् रहा था..
और करे भी तो किस मुँह से करे.. उसे तो अब क्या करे और क्या न करे ऐसा हाल होते जा रहा था...
उसके आँखों में आंसू थे.. पर अभी वो किसी अंगार से काम नहीं लग रहे थे..
मेरे अंदर एक गुस्सा बढ़ता जा रहा था और वो भी खुद पर ...
इसके चलते मेरा इतना गुस्सा बढ़ गया की मई ऊपर मुँह करते हुए और अपने दोनों हाथ फैलये इतने जोर से चिल्लाया की....
मई- Nnaaaahhhhhhiiiiiiiiiiiiiiiiii.........................................
मेरे ऐसे चिल्लाने से वह की पूरी धरती हिल गयी थी... यहाँ तक मेरे अंदर जितना भी गुस्सा लव्हा बनकर तड़प रहा था वो सब बहार आ गया..
और वह की पूरी धरती को जला दिया.. मेरी अबाज इतने जोर से थी जहा पर इतना सन्नाटा था अब वह पर चारो और मेरी hi अबाज घूम रही थी...
जहा पर कुछ देर पहले हरियाली hi हरियाली थी... जो जगह सबसे सुन्दर थी..
अब वो कब्रिस्तान बन चुकी थी.. मतलब सब रख में बदल चुकी थी... पानी सुख गया था वह ka.Charo तरफ आग hi आग थी..
लेकिन इस गुस्से में मैंने ऋतू की तरफ ध्यान hi नहीं दिया.. हालाँकि वो भी मेरे गुस्से की आग में जल जाती..
पर उसको इसका पहले से अंदाज़ा था ऐसा hi कुछ होगा तो उसने पहले hi अपने चारो और कवच बनाया हुवा था..
अब मई फिर से रोने लगा.. लेकिन तभी ऋतू मेरे पास आयी और उसने मेरे सर के ऊपर से हाथ फिकराय..
मेरी नजर उसकी तरफ गयी.. उसको मेरी तरफ देखा भी नहीं जा रहा था.. क्यों की मेरी दोनों आंखे आग में जल रही थी...
मेरी पूरी बॉडी किसी सूरज की तरह तप रही थी.. लेकिन फिर भी जैसे hi मैंने ऋतू को देखा...
तो कुछ हद तक मेरा गुस्सा शांत हो गया.. और मेरी जो लाल आंखे थी वो अब धीरे धीरे नीली होती जा रही थी...
मतलब वह का पूरा माहौल शांत होते जा रहा tha...Shayad इसीलिए ऋतू ने मुझे लाया होगा..
और उसने इसीलिए कहा होगा की हमारी बजह से किसी और को डिस्टर्ब न हो...
वैसे मई तो अपने घर से बहुत दूर था.. पर मेरे ऐसे चिल्लाने से थोड़ी सी धरती तो हिल गयी थी.. पर वह ज्यादा महसूस न हुवा...
मैंने ऋतू को देखते hi उसके गले में लगकर फिर से रोने लगा.. जब मेरा गुस्सा शांत हुवा..
तब मुझे अहसास हुवा की असल में यहाँ हुवा क्या.. तब मैंने ऋतू के गले से चुटककर उसे मुँह को और उसे चारो तरफ से देखने लगा...
मई- तुम्हे कुछ हुवा तो नहीं न ऋतू मेरी बजह से कही चोट तो नहीं न आयी...
Ritu-Nahi फ़िक़र की कोई बात नहीं है मई ठीक हु मुझे कुछ भी नहीं हुवा..
मुझे पता था ऐसा hi कुछ होगा इसलिए मई पहले hi साइड हो गयी थी...
मई- ये सब मेरी बजह से हुवा मुझे इतना गुस्सा नहीं करना चाहिए था पर क्या करू मई अपने आप को रोक न सका..
तुमने जो बताया उसके लिए मेरा दिमाग मान hi नहीं रहा है...
ऋतू- वो इसलिए क्यों की तुम्हे जो दिख रहा है तुम उसे hi सच मान रहे हो.. बल्कि सच तो कुछ और है..
मई- मई कैसे मान लू सब कुछ समाज नहीं आ रहा है..
Ritu-Pahle तुम अपने दिमाग को शांत करो.. उसके बाद hi तुम सब समाज पाओगे और उसे असेप्ट कर पाओगे...
Mai-Kaise करू मेरे मन पर मेरा काबू hi नहीं हो प् रहा है... मुझे लगता है मई कुछ देर के लिए अकेला रहना चाहता हु...
ऋतू- पर दीपू....
मैंने उसकी तरफ ऐसे नजर से देखा की वो शांत हो गयी और कहने लगी
ऋतू- ठीक है पर सुबह होने से पहले घर आ जाना...
ये कहकर वो वह से चली गयी पर जाने से पहले वो जगह जैसे थी वैसे करके चली गयी..
और अब सिर्फ वह थे मई और मेरा अकेलापन. जो मैंने एक्सेप्ट किया था...
कब रात से सुबह हो गयी कुछ पता hi नहीं चला.. जब सूरज की किरणे मेरे चहरे पर पड़ी...
तब मुझे अहसास हुवा की सुबह हो गयी है और मुझे घर चलना चाहिए...
पर कोनसे घर जो मेरा कभी था hi नहीं.. मई किस हक़ से वह जाऊ जो मेरा कभी था hi नहीं..
किस मुँह से जाऊ मई उस घर... पर आखिर मेरे पेअर उसी घर की तरफ चल पड़े...
सुबह सुबह सब अपने काम में लगे हुए थे.. माँ ने मुझे बहार से एते हुए देखा..
तो उन्हें लगा की मई कसरत करके आया हु तो उन्होंने भी कुछ नहीं बोलै..
और मेरा तो कुछ कहने का hi मूड नहीं था.. मई जैसे तैसे अपने रूम में गया..
फ्रेश हुवा और फिर से किसी को कुछ न कहते हुए चल पड़ा घर से बहार...
सुबह का ब्रेकफास्ट भी नहीं किया वैसे hi एक ऐसे जगह चला गया जहा पर मुझे कोई ढूंढे न और मुझे कोई डिस्टर्ब न करे...
इधर माँ परेशां थी क्यों की पहली बार मई घर से सुबह जल्दी निकल गया था और वो भी नाश्ता न करके..
हालाँकि ऋतू को ये बात समाज आ गयी थी मैंने ऐसा क्यों किया और मुझ पर क्या बिट रही है..
उसने मुझसे कांटेक्ट करने की कोशिश की पर मैंने सभी कांटेक्ट बंद किये हुए थे यहाँ तक दिमाग के भी..
यहाँ तक रसिका ने भी मुझे कांटेक्ट और अपने मैजिक से मुझे ढूंढ़ने की कोशिश की पर वो मुझे ढूंढ नहीं पायी..
क्यों की आज हम दोनों को वह पर जाना था जहा पर चिका थे..
मई एक सुनशान जगह बैठा था जहा पर कोई भी नहीं था.. और वह पर बैठे बैठे अपने hi बारे में सोच रहा था...
मुझे कुछ याद क्यों नहीं है Phir..Mera तो एक hi जनम था तो ऐसा कैसे हो सकता है...
मई बचपन से कैसे यहाँ पर hu..Mujhe तो सिर्फ धरती की यादे याद अति है उससे पहले की क्यों नहीं.
ये सब मेरे जिंदगी में क्या हो रहा है वो सब सच है या कोई सपना..
कुछ समाज नहीं आ रहा था.. कितनी अछि लाइफ थी मेरी पर जिनको मई अपना मंटा था..
वो मेरे अपने hi नहीं है और जिनको मैंने कभी देखा hi नहीं नहीं वो मेरे अपने है और वो भी कहा है कुछ पता नहीं..
.
न जाने कैसे वक़्त बिट गया और सुबह से रात हो गयी..
अब तो मेरे पेट में भी चूहे दौड़ रहे थे.. और घर जाऊ भी तो किस मुँह से.. तो मई बहार से hi कुछ खाकर चला गया...
घर गया तो सब लोग मेरी बजह से परेशां थे.. क्यों की सुबह से मई गायब था..
और अब आया हु तो बहार से खाकर आया हु.. सबने मुझसे पूछने की बहुत कोशिश की..
पर मई उन्हें इग्नोर करते हुए सीधा अपने रूम में चला गया..
और अंदर से रूम लॉक कर दिया क्यों की कोई मैजिक से भी मेरे रूम में नहीं ए....
ऐसे hi कुछ दिन बिट गए न मई किसी सर अचे से बात करता था और नहीं दिन भर घर में रहता था..
सुबह होते hi घर से बहार और रात होने के बाद घर में.. मेरे इस रवैये से सब परेशां थे..
और सबने मुझे पूछने की भी कोशिश की पर मैंने किसी को भी कुछ जवाब नहीं दिया. बल्कि सबको टालता चला गया..
मुझे उन सबसे बात करने की हिम्मत hi नहीं हो रही थी...
कभी कभी तो मुझे बहुत रोना आता था ऋतू को लगता था ये सब उसके hi कारन हो रहा है उसे बताना hi नहीं चाहिए था..
पर कभी न कभी मुझे पता तो चलता न तभी भी कुछ ऐसा hi होता...
इन सबके बिच मई अपने घरवालों से बहुत दूर हो गया था मई उन सबसे दूरिया बढ़ने लगा न जाने क्यों...
अकेले hi मई सोचने लग जाता की मेरे माँ बाबा कोण है कहा होंगे कैसे होंगे लेकिन इन सवालो के जवाब मेरे पास नहीं थे...
और इन सवालो के जवाब में ढूंढ़ना चाहता था..
तो मुझे इन सवालो के जवाब सिर्फ एक hi पर्सन दे सकता है और वो है रितिका..
क्यों की अंश से मैंने एक बार कोशिश की थी पर वो मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं बताना चाहता था...
और आज के दिन मई किसी भी हाल में रितिका से मेरे सवालो जे जवाब चाहता hi था...
तो मैंने उसे उसी जगह बुलाया जहा पर हमारी पिछली बाते अधूरी रह गयी थी.................................