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सब कुछ जायज़ है....
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अभी सब लोग पुलिस वाले की बाते hi सुन रहे थे की तभी रचना का ध्यान कुसुम की तरफ गया. कुसुम अपनी जगह से गायब थी. पता नहीं कब वो उठ कर बाहर चली गयी थी और किसी को पता भी नहीं चल पाया था. ये देख कर रचना बुरी तरह घबरा गयी. उसने लगभग चीखते हुए माँ से कहा की कुसुम दीदी यहाँ नहीं हैं. रचना की इस बात से सब कोई दांग रह गया. तभी माँ ने कहा की उसे जहा जाना है जाने दो. मुझे उससे अब कोई मतलब नहीं है. उसी की वजह से मेरे बेटे की आज ये हालत हुयी है.
माँ की ये बाते सुन कर सब अवाक रह गए. कोई माँ अपनी बेटी के लिए ऐसा कैसे कह सकती थी.? दक्षिणा जल्दी से उठी और वेटिंग रूम के बाहर की तरफ तेज़ी से बढ़ चली. उसके पीछे पुलिस वाला भी चल पड़ा था. उन दोनों ले जाते hi प्रिय भी तेज़ी से बाहर की तरफ बढ़ गयी थी. जबकि रचना और पूजा माँ के पास उनको सम्हालने के लिए बैठी रही.
अब आगे पढ़िए....
दक्षिणा, पुलिस वाला और प्रिय तीनो ने हॉस्पिटल में हर जगह देख लिया था मगर कुसुम का कही कोई पता न चला था. पुलिस वाले को एक कॉल आया था तो वो चला गया था और अब दक्षिणा और प्रिय hi कुसुम को हर जगह खोज रहे थे. पूरा हॉस्पिटल छान मारा मगर कुसुम इन दोनों को कही नज़र न आयी थी. गुज़रते पालो के साथ दोनों की hi हालत खराब हुयी जा रही थी. प्रिय को अच्छी तरह समझ आ चूका था की कुसुम दीदी इस तरह क्यों चली गयी थी.
विक्की की आज जो हालत हुयी थी उसके लिए हर कोई कुसुम को hi जिम्मेदार मान रहा था. इस बात को ज़ाहिर रूप से सिर्फ माँ ने hi कहा था मगर बाकियो के मन में भी यही था की विक्की की हालत की जिम्मेदार कुसुम hi है. कुसुम खुद भी इस बात के लिए खुद को जिम्मेदार मान रही थी जिसका उसे अब भारी दुःख था. जिसकी वजह से उसने सोचा होगा की वो अब इन लोगो से कही दूर चली जाएगी.
कुसुम अपने होशो हवाश में नहीं थी. उसके दिल और दिमाग में तूफ़ान चल रहा था. उसने जब देखा की सब पुलिस वाले की बाते सुनने में बिजी हैं तो वो चुप चाप वेटिंग रूम से निकल गयी थी. उसे खुद नहीं पता था की वो कहा जा रही थी. बस वो कही खोयी हुयी बढ़ती hi चली गयी थी. उसे खुद भी पता नहीं चला की वो कब हॉस्पिटल से बाहर आयी और एक तरफ को बढ़ती चली गयी थी. बाहर सड़क पर भारी वाहनों का आना जाना लगा था जिसकी आवाज़ों से फ़िज़ा में शोर हो रहा था.
इधर दक्षिणा और प्रिय को जब कुसुम हॉस्पिटल में कही न मिली तो वो दोनों भागते हुए हॉस्पिटल से बाहर आ गयी. सड़क के दोनों तरफ दोनों ने देखा मगर कही पर भी उन्हें कुसुम नज़र न आयी. ये देख कर दोनों बुरी तरह घबरा गयी. प्रिय तो रोने hi लगी थी मगर दक्षिणा ने समझदारी से काम लिया. उसने सबसे पहले प्रिय को शांत रहने को कहा और उसे अंदर माँ के पास ये कह कर भेज दिया की वो कुसुम को खोज कर ले आएगी.
प्रिय से तो दक्षिणा ने कह दिया था की वो कुसुम को खोज कर लाएगी मगर वो इस काम में कामयाब होगी की नहीं इसका उसे खुद भी पता नहीं था. उसे टाइम का अहसास था इस लिए वो राइट साइड की तरफ तेज़ी से बढ़ती चली गयी. वो फुटपाथ पर hi चल रही थी और आस पास देखती भी का रही थी मगर काफी दूर आ जाने के बाद भी जब उसे कुसुम न दिखी तो उसके मन में तरह तरह की शंकाये उभरने लगी. उसे कुसुम की बहुत ज़्यादा चिंता होने लगी. वो जानती थी की कुसुम इस शहर के बारे में कुछ भी नहीं जानती है. अगर उसके साथ कुछ उल्टा सीधा हो गया तो वो विक्की को और उसकी फॅमिली को क्या जवाब देगी.?
दक्षिणा काफी दूर आ गयी थी. उसकी खुद की हालत काफी खराब हो गयी थी पैदल चलते चलते. उसका जिस्म पसीना पसीना हो गया था. अचानक उसे ख़याल आया की हो सकता है की कुसुम लेफ्ट साइड वाले रास्ते की तरफ गयी हो. ये सोच कर वो रुक गयी और सड़क को क्रॉस करके उसने एक ऑटो वाले को आवाज़ दी. ऑटो में बैठ कर उसने ऑटो वाले से कहा की वो आगे की तरफ चले मगर इस तरह की उसे किसी को खोजने में आसानी हो. उसकी इस बात से ऑटो वाले ने पूछा की मैडम बात क्या है तो दक्षिणा ने उसे बताया की वो एक लड़की को खोज रही है.
ऑटो वाला भला आदमी था. उसे बात समझ में आ गयी थी इस लिए उसने बड़ी ईमानदारी से ऑटो को आगे बढ़ा दिया और खुद भी आस पास नज़र दौड़ने लगा. दक्षिणा दोनों तरफ की सड़क पर देखती जा रही थी. करीब पांच मिनट बाद अचानक दक्षिणा की नज़र उस पार सड़क के किनारे फुटपाथ पर धीरे धीरे चलती कुसुम पर पड़ी. कुसुम को देखते hi दक्षिणा ने राहत की सांस ली और उसने ऑटो ड्राइवर को भी दिखाया कुसुम को. उसके बाद उसने ऑटो वाले से कहा की वो जल्दी से आगे चल कर सड़क के उस पार चले.
दक्षिणा की बात सुन कर ऑटो वाले ने ऑटो को तेज़ी से आगे बढ़ाया. दोनों तरफ की सड़क के बीच में एक फुट की दिवार बानी हुयी थी. यू टर्न लेने के लिए जगह hi नहीं दिख रही थी. काफी दूर आने के बाद एक रेड लाइट नज़र आयी तो ऑटो ड्राइवर ने बड़ी सावधानी से यू टर्न लिया और सड़क के उस तरफ आ कर ऑटो को फिर से तेज़ी से बढ़ा दिया.
सामे कुछ hi दूरी पर रेड लाइट बत्ती थी और इस वक्त वो ग्रीन hi थी मगर जैसे hi ऑटो वाला वह तक पंहुचा तो लाइट रेड हो गयी. ये देख कर दक्षिणा के चेहरे पर परेशानी और बढ़ गयी. वो सामने की तरफ hi देख रही थी मगर कुसुम उसे दिख नहीं रही थी. सड़क आगे जा कर लेफ्ट साइड को थोड़ा सा घूम गयी थी इस लिए उसे कुसुम नहीं दिख रही थी. रेड लाइट का टाइमर 80 से नीचे काउंट हो रहा था और उसी के साथ दक्षिणा के दिल की धड़कने भी डाउन होती जा रही थी.
आखिर लाइट ग्रीन हुयी तो आगे के वाहन चल पड़े और उनके पीछे ऑटो वाले ने भी ऑटो को आगे बढ़ा दिया. आगे सड़क पर जैसे hi ऑटो घूमा तो दक्षिणा की नज़र दूर से hi कुसुम पर पड़ी. उसने ऑटो वाले को थोड़ा और तेज़ चलने को कहा. ऑटो वाला पहले से hi तेज़ चल रहा था अब और चलने लगा.
दक्षिणा की नज़र बराबर कुसुम पर थी. वो कही खोयी हुयी धीरे धीरे इसी तरफ आ रही थी. पीले रंग के शलवार शूट में थी वो और उसके गले में पीले रंग का hi दुपट्टा था जो की इस वक्त अस्त ब्यस्त दिख रहा था. अभी दक्षिणा कुसुम को देख hi रही थी की तभी एक सफ़ेद रंग की ओमनी कार कुसुम के पास रुकी और उससे दो लोग बाहर निकले. वो दोनों आदमी आस पास देखते हुए सीधा कुसुम के पास गए. ये देख कर दक्षिणा के दिमाग में खतरे की घंटी बजी. उसने ऑटो वाले को और स्पीड से चलने को कहा.
उधर वो दोनों आदमी कुसुम के पास पहुंच कर उसके आगे खड़े हो गए और कुसुम से कुछ कहा. उसके बाद एक ने कुसुम का हाथ पकड़ा और उसे ओमनी की तरफ लेन लगा जबकि दूसरा कुसुम के पीछे था. दक्षिणा के देखते hi देखते उस आदमी ने कुसुम को ओमनी में बैठाया और खुद भी उसके साथ बैठ गया. जबकि दूसरा आदमी आगे वाली शीट पर बैठ गया. ओमनी का दरवाज़ा बंद होते hi ओमनी आगे बढ़ चली. बड़ी हैरत की बात थी की कुसुम ने उन आदमियों के साथ जाने से बिलकुल भी विरोध नहीं किया था.
दक्षिणा फटी आँखों से ये नज़ारा देखती रह गयी. उसकी आँखों के सामने कुसुम को उन लोगो ने अपहरण कर लिया था. दक्षिणा पूरी ताकत से ऑटो वाले पर चीख पड़ी. ऑटो वाला उस ओमनी से थोड़ा hi पीछे रह गया था. दक्षिणा ने ऑटो वाले से कहा की वो उस कार के पीछे hi फुल स्पीड से चले. उसे समझ नहीं आ रहा था की अब वो क्या करे. अगर वो लोग कुसुम को ले कर उसकी आँखों से ओझल हो गए तो फिर कुसुम को वापस पाना बहुत मुश्किल हो जाना था.
ऑटो वाला फुल स्पीड में ऑटो को दौड़ा रहा था मगर आगे जा रही ओमनी कार हर पल उससे और दूर होती जा रही थी. दक्षिणा के दिमाग ने एकदम से काम किया. उसने उस ओमनी का नंबर याद कर लिया. उसे याद आया की उसके पास अपना मोबाइल है और वो 100 नंबर पर कॉल करके पुलिस को सब कुछ बता सकती है. दक्षिणा ने फटाफट अपने पर्श से मोबाइल निकला और 100no पर लगा दिया.
कॉल लगने के बाद दक्षिणा ने पुलिस वालो को सब कुछ बता दिया और कहा की जितना जल्दी हो सके वो उस ओमनी कार से मेरी बहन को निकाल कर बचा ले. दक्षिणा ने यही बताया की कुसुम उसकी बहन है. कॉल पर पुलिस ने दक्षिणा को आश्वस्त रहने को कहा और बोले की वो जल्द से जल्द एक्शन ले रहे हैं.
दक्षिणा ने पुलिस को लोकेशन और उस ओमनी कार का नंबर वगैरा बता दिया था. आगे जा रही ओमनी कार एक मोड़ पर मुद चुकी थी. सड़क पर और भी बहुत से वाहन थे जिनके बीच कभी कभी वो ओमनी कार छुप जाती थी मगर दक्षिणा उस पर बराबर नज़र रखे हुए थी और ऑटो वाले को उसके पीछे लगाए हुए थी.
करीब दस मिनट बाद दक्षिणा ने देखा की लेफ्ट साइड की तरफ से एक ट्रैफिक पुलिस की कार आयी और उस ओमनी कार के पीछे लग गयी. अभी दक्षिणा उस तरफ देख hi रही थी की तभी पीछे से एक पुलिस गाडी निकली. सामने एक और रेड लाइट दिखी और सरे वाहन रुकने लगे. वो ओमनी कार भी रुक गयी थी. वो आगे की तरफ थी उसके कुछ दूरी पर वो ट्रैफिक पुलिस की कार थी. जैसे hi सरे वाहन रुके तो दक्षिणा ने देखा की ट्रैफिक पुलिस वाली कार से दो पुलिस वाले बाहर निकले और उस ओमनी कार की तरफ तेज़ी से बढ़ चले. अभी वो कुछ hi दूरी पर गए थे की सिग्नल ग्रीन हो गया और आगे के वाहन चल पड़े. उन वाहनों के साथ वो ओमनी कार भी चल पड़ी. ये देख कर वो दोनों पुलिस वाले वापस पालते और पुलिस कार में बैठ कर फिर से ओमनी कार के पीछे लग गए.
आगे की तरफ क्लीन सड़क थी इस लिए ओमनी फुल स्पीड से आगे बढ़ गयी थी. पुलिस की दोनों गाड़िया साईरन बजती हुयी दूसरे वाहनों को ओवरटेक करते हुए आगे निकल गयी. इधर ऑटो में दक्षिणा भी पीछे लगी हुयी थी. दक्षिणा को अब वो ओमनी कार दिखाई नहीं दे रही थी बल्कि पुलिस की गाड़िया ज़रूर उसे दिख रही थी. दक्षिणा के दिल की धड़कने कभी अचानक से तेज़ हो जाती तो कभी एकदम से रुक सी जाती थी.
आगे काफी दूर आ कर एक और रेड लाइट बत्ती आयी. आगे के सभी वाहन रुक गए थे. दक्षिणा ने देखा की पुलिस की दोनों गाड़िया काफी आगे थी. उसे वो ओमनी कार अब भी नज़र न आयी थी मगर उसने ये ज़रूर देखा की पुलिस गाडी से दो तीन पुलिस वाले उतरे और आगे की तरफ बड़ी तेज़ी से दौड़ते हुए जा रहे थे. दक्षिणा को समझते देर न लगी की वो पुलिस वाले उस ओमनी कार के पास hi जा रहे थे. कुछ hi देर में दक्षिणा ने देखा की वो पुलिस वाले एक जगह रुके और उस जगह कुछ करने लगे. ये देख कर दक्षिणा भी ऑटो से उतर गयी. उसने ऑटो वाले से कहा की वो अपने पैसो की फ़िक्र न करे और ऑटो को आगे ले जा कर साइड पर लगा ले.
ऑटो वाला भला आदमी था उसने कुछ नहीं कहा. दक्षिणा वाहनों के बीच से भागते हुए उन पुलिस वालो की तरफ बढ़ती चली गयी. कुछ hi पालो में उसे वो ओमनी कार दिखने लगी. दक्षिणा का पसीने से बुरा हाल था मगर वो खुद की कोई परवाह नहीं कर रही थी. उधर वो पुलिस वाले उस ओमनी कार के करीब पहुंच चुके थे. पुलिस वालो में से एक आगे की तरफ ड्राइवर के पास गया और हाथ दाल कर कार के इग्निशन से चाभी निकाल ली. तब तक पीछे से कुछ और पुलिस वाले भागते हुए आ गए थे.
दक्षिणा भी कुछ hi देर में उस ओमनी कार के पास पहुंच गयी और उसने पुलिस वालो को बताया की उसी ने फ़ोन किया था. पुलिस वालो ने ओमनी कार के अंदर से सबको बाहर निकला. उस गाडी में तीन आदमी थे. जिनमे से एक ड्राइवर था और बाकी दो वही थे जो कुसुम को ले कर ओमनी में बैठ गए थे. पहले तो वो लोग यही बोले की कुसुम उनकी रिश्तेदार है मगर जब दक्षिणा ने पुलिस वालो को बताया सब कुछ तो वो सब बगले झाँकने लगे.
पुलिस वालो ने उन तीनो को पकड़ लिया और कुसुम को कुछ पूछ तांछ के बाद दक्षिणा के हवाले कर दिया. कुसुम की हालत ऐसी थी जैसे वो किसी सदमे में हो. उस पर कोई रिएक्शन नहीं था. खेर लाइट ग्रीन हुयी तो सरे वाहन आगे बढ़ने के लिए हॉर्न देने लगे तो दक्षिणा कुसुम को ले कर ज़ेबरा क्रासिंग से चल कर किनारे साइड आ गयी.
दक्षिणा कुसुम को अपने से इस तरह छुपकाये हुए थी जैसे वो कोई छोटी सी बच्ची हो. उसकी आँखों में आँशु थे. वो जानती थी की बहुत बड़ा काण्ड होने से बचा था. अगर आज कुसुम को वो लोग अपने साथ ले जाने में कामयाब हो जाते तो शायद बहुत बड़ा अनर्थ हो जाता.
रोड के इस तरफ आ कर दक्षिणा ने ऑटो वाले की तरफ नज़र दौड़ाई तो उसने देखा की वो ऑटो वाला उसी कट से यू टर्न ले रहा था. कुछ hi पालो में वो ऑटो वाला आया तो दक्षिणा कुसुम को ले कर ऑटो में बैठ गयी. कुसुम एकदम शांत थी. जैसे वो इस दुनिया में थी hi नहीं. वो एकटक बस शून्य में देखे जा रही थी. दक्षिणा उसकी ये हालत देख कर उसे बार बार पुकार रही थी और उसको होश में लेन का प्रयास कर रही थी.
दक्षिणा ने ऑटो वाले को हॉस्पिटल का पता बताया और उसे हॉस्पिटल hi चलने को कहा. ऑटो वाला बिना कुछ कहे हॉस्पिटल की तरफ चल दिया. काफी देर बाद ऑटो उसी हॉस्पिटल के सामने रुका जिसमे विक्की को भर्ती किया गया था. ऑटो से उतर कर दक्षिणा ने ऑटो वाले को दो हज़ार का एक नोट पकड़ाया. ऑटो वाला दो हज़ार पाया तो वो खुश हो कर चला गया.
कुसुम को ले कर दक्षिणा हॉस्पिटल के अंदर की तरफ चल पड़ी. जैसे hi वो गेट के पास पहुंची तो उसे प्रिय पूजा मिल गयी. वो दोनों कुसुम को देख कर उससे लिपट गयी और फुट फुट कर रोने लगी.
"कहा चली गयी थी आप.? आपको पता है आपके इस तरह चले जाने से हमारी जान निकल गयी थी. ऐसा क्यों किया आपने दीदी.?" पूजा बुरी तरह सिसक उठी तो दक्षिणा ने उन दोनों को शांत रहने को कहा और फिर कुसुम के साथ साथ उन दोनों को भी हॉस्पिटल के अंदर ले आयी.
वेटिंग रूम में रचना और माँ एक लम्बी सी चेयर पर बैठी हुयी थी. दोनों के hi चेहरे से लग रहा था की वो कितना रोई थी. जैसे hi दक्षिणा कुसुम को ले कर वेटिंग रूम में दाखिल हुयी तो रचना और माँ की नज़र उस पर पड़ी. दक्षिणा के साथ कुसुम को देखते hi रचना उठ कर कुसुम के पास आयी और उसे अपने साथ ले जा कर चेयर पर बैठाया. यहाँ हैरानी की बात ये थी की माँ ने कुसुम की तरफ देखा ज़रूर मगर उसने कुसुम से कहा कुछ नहीं. शायद वो अब भी कुसुम से बहुत गुस्सा थी.
रचना और प्रिय पूजा के पूछने पर दक्षिणा ने बस यही कहा की कुसुम रास्ते में hi उसे मिली थी और वो काफी दूर निकल गयी थी. उसने ये नहीं बताया की आज कुसुम के साथ कितना बड़ा काण्ड हो गया था. खेर दक्षिणा कही से पानी ले कर आयी और कुसुम को ज़बरदस्ती पिलाया और हलके से उसका चेहरा भी धोया. कुसुम कुछ बोल नहीं रही थी बल्कि वो अभी भी सदमे जैसी हालत में hi थी.
अभी ये लोग यहाँ बैठे hi थे की तभी वह पर एक नर्स आयी और उसने कहा की मरीज की फॅमिली में से जो भी हैं उन्हें डॉ साहब ने बुलाया है. नर्स की बात सुन कर दक्षिणा चेयर से उठ कर कड़ी हो गयी और उसके साथ रचना भी. नर्स के साथ दक्षिणा गयी. उसने रचना को मन कर दिया था ये कह कर की वो यहाँ सबका ध्यान रखे. वैसे ये बड़ी अजीब बात थी की अभी तक इन लोगो ने दक्षिणा से उसके बारे में कुछ भी नहीं पूछा था या फिर शायद ऐसे हालात hi नहीं थे की उससे उसके बारे में कुछ पूछा जाये.
डॉ ने दक्षिणा से कहा की मरीज के इलाज़ में जो भी खर्चा लगा उसकी रसीद वो बनवा ले. डॉ ने ये भी बताया की विक्की को दोपहर तक होश आ जायेगा. डॉ से मिलने के बाद दक्षिणा वापस वेटिंग रूम में आ गयी थी. उसने रचना और माँ से बताया की विक्की को दोपहर तक होश आ जायेगा.
दक्षिणा को पता था की इन लोगो ने कल से कुछ नहीं खाया पिया था. पूजा ने उसे साडी कहानी बता दी थी की क्या हुआ था. दक्षिणा ने इन लोगो के खाने के लिए इंतजाम किया. वो बाहर से सबके लिए खाना ले के आयी. मगर कोई भी खाना खाने के लिए राज़ी नहीं था. दक्षिणा ने सबको समझाया की खाना न खाने से क्या हो जायेगा. भगवन का शुक्र मनाओ की विक्की को ज़्यादा कुछ नहीं हुआ वर्ण जिस तरह का उसका एक्सीडेंट हुआ था उसमे से उसकी जान भी जा सकती थी.
आखिर दक्षिणा के बहुत समझने पर सबने थोड़ा बहुत खाया. दक्षिणा ने अपने हाथो से कुसुम को भी ज़बरदस्ती खिलाया. अब वो पहले से ठीक थी मगर बोल वो अब भी किसी से नहीं रही थी. रह रह कर उसकी आँखों में आँशु आ जाते थे. खाना कहते वक्त hi माँ ने दक्षिणा से उसके बारे में पूछा था और ये भी कहा की वो उसकी अहसानमंद है की इस हालत में उसने उनकी इतनी मदद की.
माँ की इन बातो से दक्षिणा को बहुत राहत मिली थी. उसने माँ से बताया की शुरू शुरू में विक्की उसके यहाँ hi रहता था और उसी की फैक्ट्री में काम करता था. दक्षिणा ने उतना hi बताया जितना उसे इस वक्त ज़रूरी लग रहा था.
दोपहर को नर्स ने बताया की मरीज को होश आ गया है और ये लोग उससे मिल सकते हैं. नर्स की ये बात सुन कर सब के सब वेटिंग रूम से भाग पड़े विक्की से मिलने के लिए. सबसे आगे माँ थी. कुसुम नहीं जाना चाहती थी इस लिए दक्षिणा उसके पास hi रह गयी थी.
जिस कमरे में विक्की को बीएड पर लेटाया गया था ये सब वह पहुंचे. विक्की के हाथो पैरो में पत्तिया बढ़ी हुयी थी और उसके सर में भी. माँ ने जैसे hi मुझे इस हाल में देखा तो वो फुट फुट कर रोने लगी. सब मुझे इस हालत में देख कर दुखी थे और रोने लगे थे. डॉ और नर्स ने माँ और बाकी सबसे कहा की वो लोग मुझे ज़्यादा डिस्टर्बे न करे.
मैं होश में आ चूका था मगर मैं हिल नहीं सकता था और न hi अपनी गर्दन को इधर उधर कर सकता था. माँ मेरे चेहरे के पास hi झुकी हुयी रो रही थी और बार बार झुक कर मेरे माथे पर चूम रही थी और साथ hi जाने क्या क्या बोलती जा रही थी.
"क्यों किया तूने ऐसा.? क्या तूने एक बार भी ये नहीं सोचा की तेरे बिना हम सबका क्या होगा.? इस नयी जगह पर हम कैसे जियेंगे.?" माँ मुझसे बोलती जा रही थी और मैं चुप चाप उनकी तरफ देख रहा था. मैं बहुत कुछ बोलना चाहता था मगर मेरे होठ बस कांप कर hi रह जाते थे. मेरे सर में दर्द होने लगा. जिससे मेरा चेहरा बिगड़ने लगा था. ये देख कर डॉ ने माँ को मुझसे कुछ भी बोलने या पूछने से मन कर दिया और सबको ज़बरदस्ती बाहर भेज दिया.
कुछ देर बाद मेरे पास एक पुलिस वाला आया. उसने मुझे बड़े ध्यान से देखा और फिर उसने डॉ की तरफ देखते हुए कहा.
"अब कैसी कंडीशन है इसकी.?" पुलिस वाले ने डॉ से ये कहा तो डॉ ने कहा.
"कंडीशन तो बेटर hi है अफसर बूत ु क्नोव व्हाट खून बहुत ज़्यादा बाह गया था और छोटे भी काफी गहरी थी इस लिए रिकवर होने में इन्हे ज़रा टाइम लगेगा. वैसे ये हैरत की बात है की इतने खतरनाक एक्सीडेंट के बाद भी ये सलामत बच गए." डॉ ने ये कहा तो पुलिस वाला मेरी तरफ देख कर मुस्कुराया फिर बोलै.
"सुना है जब तक किसी के दिन पुरे नहीं हो जाते तब तक मौत नाम की बाला आ hi नहीं सकती." पुलिस वाले ने ये कहा तो डॉ ने कहा.
"यस यू अरे राइट अफसर. अन्य्वयस थैंक्स ा लोट. आप इन्हे टाइम से ले आये थे यहाँ इस लिए इन्हे बचा लिया गया वर्ण यू क्नोव.?" डॉ ने ये कहा तो पुलिस वाले ने एक बार फिर से मेरी तरफ देखा और फिर वो मेरी तरफ झुका और मुझसे बोलै.
"वेलकम तो नई लाइफ यंग बॉय. मैं उम्मीद करता हु की फ्यूचर में अब ऐसी ड्राइविंग नहीं करोगे तुम." पुलिस वाले ने मुझसे ये कहा तो मैंने अपनी पालक झपका कर हाँ कहा. उसके बाद वो डॉ के साथ बाहर चला गया.
कमरे में बीएड पर पड़ा मैं इस सबके बारे में सोचने लगा तो फिर से मेरे सर में दर्द उठा तो मैंने सोचना hi बंद कर दिया. मगर होश में आने के बाद ऐसा कैसे हो सकता था की मैं किसी चीज़ के बारे में न सोचु.? मेरे मन में एक hi बात आ रही थी की सब मुझे देखने आये थे मगर दीदी नहीं आयी थी. क्या मेरे साथ इतना कुछ होने के बाद भी वो मुझे देखना नहीं चाहती थी या फिर कोई और बात थी.?
मुझसे मिलने के बाद पुलिस वाला तो शायद चला गया था मगर डॉ मेरी फैमिकय को समझा रहा था की अब चिंता की कोई बात नहीं है. मरीज को अभी काम से काम दो से तीन हप्ते तक यही पर रखना ज़रूरी है. उसके बाद आप लोग उन्हें ले जा सकते हैं. डॉ के ऐसा कहने पर माँ ने कहा की वो अपने बेटे के पास hi रहेगी. उनकी इस बात से डॉ ने कहा की इसकी कोई ज़रूरत नहीं है क्यों की यहाँ पर उनका बहुत अच्छे से ख़याल रखा जायेगा मगर माँ मानने को तैयार न हुयी तो डॉ ने कहा की ठीक है एक ब्यक्ति यहाँ रुक सकता है.
उसके बाद यही तय हुआ की माँ मेरे पास hi रुकेगी और बाकी लोग घर जायेगे. दक्षिणा ने माँ से कहा की वो शाम तक यही रहे उसके बाद वो यहाँ आ जाएगी. दक्षिणा की इस बात से माँ ने कहा की नहीं इसकी कोई ज़रूरत नहीं है. वो अपने बेटे के पास तब तक रहेगी जब तक वो पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता. माँ की इस बात से दक्षिणा ने उन्हें समझाया की कुछ टाइम की hi तो बात है उसके बाद तो विक्की को वैसे भी घर hi ले आएंगे. बड़ी मुश्किल से माँ मानी और फिर दक्षिणा सबको ले के घर चली गयी.
रास्ते में दक्षिणा कुसुम से थोड़ी बहुत बाते करती जा रही थी. तभी कुसुम ने उससे कहा की वो अब उस घर में नहीं रहना चाहती है और न hi वो अपने भाई को अपनी मनहूस शकल दिखाना चाहती है. उसकी इस बात से बाकी सब दुखी हो गए थे. प्रिय पूजा और रचना ने बहुत समझने की कोशिश की मगर वो न मानी, तब दक्षिणा ने कहा की वो कुसुम को अपने घर ले जाएगी. दक्षिणा की इस बात से कुसुम ने भी कह दिया की हाँ अब से वो उसके घर में hi रहेगी.
टैक्सी घर के सामने रुकी तो प्रिय पूजा और रचना टैक्सी से उतर गयी. उन तीनो ने एक बार फिर से कुसुम को घर चलने के लिए कहा मगर वो टैक्सी से न उत्तरी. ये देख कर दक्षिणा ने उन तीनो को जाने का इशारा किया तो वो तीनो स्टील वाले गेट को खोल कर अंदर की तरफ चली गयी. उनके जाते hi दक्षिणा ने टैक्सी वापस मोड़ने को कहा. कुछ hi देर में टैक्सी दक्षिणा के घर के सामने रुकी.
टैक्सी वाले को उसका पैसा दे कर दक्षिणा कुसुम को ले कर घर के अंदर आ गयी. घर के अंदर ड्रिंग रूम में रखे सोफे पर सविता की बेटी नैना बैठी हुयी बगल की दिवार पर लगी एक बड़ी सी लेद टीवी पर फिल्म देख रही थी. दक्षिणा को आया देख कर उसने जल्दी से टीवी बंद कर दिया.
दक्षिणा ने कुसुम को एक सोफे पर बैठाया और फिर उसने सविता को आवाज़ दी. जब सविता आयी तो उसने उससे पूछा की खाना गर्म है या नहीं. दक्षिणा के पूछने पर सविता ने कहा की वो जब तक फ्रेश होंगी तब तक वो गरमा गरम खाना बना देगी.
"चलो कुसुम तुम भी फ्रेश हो जाओ. उसके बाद हम दोनों साथ में खाना खायेगे." दक्षिणा ने बड़े प्यार से ये कहा तो कुसुम ने उसकी तरफ बड़ी मासूमियत से देखते हुए कहा.
"मुझे भूख नहीं है. आप खा लीजिये." कुसुम ने ये कहा तो दक्षिणा में कहा.
"हर बात में ज़िद अच्छी नहीं होती कुसुम. मुझे पता है तुम थोड़ा ज़िद्दी हो मगर मैं भी काम ज़िद्दी नहीं हु. अगर तुमने नहीं खाया तो मैं भी नहीं खाओगी." दक्षिणा ने एकदम से बच्चियों जैसे लहजे में ये कहा तो कुसुम ने कहा.
"मैं ज़िद नहीं कर रही. मुझे सच में भूख नहीं है." कुसुम ने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.
"अच्छा चलो फ्रेश तो हो लो. देखो तो क्या हुलिया बना रखा है तुमने.? चलो उठो अब." दक्षिणा ने ये कहा और इस बार बिना कुसुम की कोई बात सुने कुसुम का हाथ पकड़ कर उठाया.
कुसुम ने भी ज़्यादा विरोध नहीं किया. शायद उसे भी इतना पता था की दूसरे के घर में दूसरे की बात भी मानना चाहिए. दक्षिणा कुसुम को ले कर अपने कमरे में गयी और फिर उसने कुसुम को कमरे में अटैच बाथरूम में भेज दिया.
कुसुम जब फ्रेश हो कर निकली तो दक्षिणा ने देखा की उसने वही कपडे पहन लिए थे जो उसने पहले पहने थे. ये देख कर दक्षिणा ने आलमारी से अपना एक शलवार शूट निकला और कुसुम की तरफ बढ़ाते हुए कहा की वो इन्हे पहन ले क्यों की उसके कपडे बहुत खराब हो चुके थे. खेर दक्षिणा के कहने पर कुसुम ने उससे कपडे ले लिए और बाथरूम के अंदर जा कर दरवाज़ा बंद कर लिया.
कुछ देर बाद जब कुसुम बाहर निकली तो दक्षिणा उसे देखती रह गयी. विक्की ने उसे बताया की उसकी कुसुम दीदी दुनिया की सबसे सुन्दर और मासूम हैं मगर इस वक्त वो अपनी आँखों से देख रही थी उसे और उसकी सुंदरता को. दक्षिणा को एकदम से ख़याल आया की ये वही लड़की है जिसकी विक्की इबादत करता है. उसने विक्की के मुख से बहुतो बार कुसुम की बाते सुनी थी.
दक्षिणा का शलवार शूट कुसुम की बॉडी पर फिट तो नहीं आ रहा था क्यों की दक्षिणा का जिसम कुसुम के जिसम से थोड़ा भारी था मगर इसके बाद भी वो कपडे उस पर काफी जांच रहे थे.
"वाह तुम तो एकदम पारी लग रही हो कुसुम. तुम सच में बहुत सुन्दर हो मगर इस सुंदरता में तुमने एक ग्रहण लगाया हुआ है और वो ये है की तुमने अपने इस चाँद से चेहरे पर उदासियों की चादर धमफ राखी है." दक्षिणा ने ये कहा तो कुसुम को थोड़ा शर्म तो आयी मगर फिर उसने जैसे इस पर ध्यान hi नहीं दिया था.
"अच्छा अब तुम यही बीएड पर बैठो मैं भी फ्रेश हो लेती हु. उसके बाद दोनों साथ में hi चलेंगे. ठीक है न.?" दक्षिणा ने ये कहा तो कुसुम ने हाँ में सर हिला दिया. उसके बाद दक्षिणा भी बाथरूम में घुस गयी मगर उसे नहीं पता था की उसके बाथरूम से वापस आने के बाद कमरे में क्या होने वाला है.
भाई लोग....
आज के लिए इतना hi....
रीड एन्जॉय & गिव योर फीडबैक....
कीप सपोर्टिंग & स्टे विथ....
:थैंक्यू:
अपडेट = 48
अभी सब लोग पुलिस वाले की बाते hi सुन रहे थे की तभी रचना का ध्यान कुसुम की तरफ गया. कुसुम अपनी जगह से गायब थी. पता नहीं कब वो उठ कर बाहर चली गयी थी और किसी को पता भी नहीं चल पाया था. ये देख कर रचना बुरी तरह घबरा गयी. उसने लगभग चीखते हुए माँ से कहा की कुसुम दीदी यहाँ नहीं हैं. रचना की इस बात से सब कोई दांग रह गया. तभी माँ ने कहा की उसे जहा जाना है जाने दो. मुझे उससे अब कोई मतलब नहीं है. उसी की वजह से मेरे बेटे की आज ये हालत हुयी है.
माँ की ये बाते सुन कर सब अवाक रह गए. कोई माँ अपनी बेटी के लिए ऐसा कैसे कह सकती थी.? दक्षिणा जल्दी से उठी और वेटिंग रूम के बाहर की तरफ तेज़ी से बढ़ चली. उसके पीछे पुलिस वाला भी चल पड़ा था. उन दोनों ले जाते hi प्रिय भी तेज़ी से बाहर की तरफ बढ़ गयी थी. जबकि रचना और पूजा माँ के पास उनको सम्हालने के लिए बैठी रही.
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दक्षिणा, पुलिस वाला और प्रिय तीनो ने हॉस्पिटल में हर जगह देख लिया था मगर कुसुम का कही कोई पता न चला था. पुलिस वाले को एक कॉल आया था तो वो चला गया था और अब दक्षिणा और प्रिय hi कुसुम को हर जगह खोज रहे थे. पूरा हॉस्पिटल छान मारा मगर कुसुम इन दोनों को कही नज़र न आयी थी. गुज़रते पालो के साथ दोनों की hi हालत खराब हुयी जा रही थी. प्रिय को अच्छी तरह समझ आ चूका था की कुसुम दीदी इस तरह क्यों चली गयी थी.
विक्की की आज जो हालत हुयी थी उसके लिए हर कोई कुसुम को hi जिम्मेदार मान रहा था. इस बात को ज़ाहिर रूप से सिर्फ माँ ने hi कहा था मगर बाकियो के मन में भी यही था की विक्की की हालत की जिम्मेदार कुसुम hi है. कुसुम खुद भी इस बात के लिए खुद को जिम्मेदार मान रही थी जिसका उसे अब भारी दुःख था. जिसकी वजह से उसने सोचा होगा की वो अब इन लोगो से कही दूर चली जाएगी.
कुसुम अपने होशो हवाश में नहीं थी. उसके दिल और दिमाग में तूफ़ान चल रहा था. उसने जब देखा की सब पुलिस वाले की बाते सुनने में बिजी हैं तो वो चुप चाप वेटिंग रूम से निकल गयी थी. उसे खुद नहीं पता था की वो कहा जा रही थी. बस वो कही खोयी हुयी बढ़ती hi चली गयी थी. उसे खुद भी पता नहीं चला की वो कब हॉस्पिटल से बाहर आयी और एक तरफ को बढ़ती चली गयी थी. बाहर सड़क पर भारी वाहनों का आना जाना लगा था जिसकी आवाज़ों से फ़िज़ा में शोर हो रहा था.
इधर दक्षिणा और प्रिय को जब कुसुम हॉस्पिटल में कही न मिली तो वो दोनों भागते हुए हॉस्पिटल से बाहर आ गयी. सड़क के दोनों तरफ दोनों ने देखा मगर कही पर भी उन्हें कुसुम नज़र न आयी. ये देख कर दोनों बुरी तरह घबरा गयी. प्रिय तो रोने hi लगी थी मगर दक्षिणा ने समझदारी से काम लिया. उसने सबसे पहले प्रिय को शांत रहने को कहा और उसे अंदर माँ के पास ये कह कर भेज दिया की वो कुसुम को खोज कर ले आएगी.
प्रिय से तो दक्षिणा ने कह दिया था की वो कुसुम को खोज कर लाएगी मगर वो इस काम में कामयाब होगी की नहीं इसका उसे खुद भी पता नहीं था. उसे टाइम का अहसास था इस लिए वो राइट साइड की तरफ तेज़ी से बढ़ती चली गयी. वो फुटपाथ पर hi चल रही थी और आस पास देखती भी का रही थी मगर काफी दूर आ जाने के बाद भी जब उसे कुसुम न दिखी तो उसके मन में तरह तरह की शंकाये उभरने लगी. उसे कुसुम की बहुत ज़्यादा चिंता होने लगी. वो जानती थी की कुसुम इस शहर के बारे में कुछ भी नहीं जानती है. अगर उसके साथ कुछ उल्टा सीधा हो गया तो वो विक्की को और उसकी फॅमिली को क्या जवाब देगी.?
दक्षिणा काफी दूर आ गयी थी. उसकी खुद की हालत काफी खराब हो गयी थी पैदल चलते चलते. उसका जिस्म पसीना पसीना हो गया था. अचानक उसे ख़याल आया की हो सकता है की कुसुम लेफ्ट साइड वाले रास्ते की तरफ गयी हो. ये सोच कर वो रुक गयी और सड़क को क्रॉस करके उसने एक ऑटो वाले को आवाज़ दी. ऑटो में बैठ कर उसने ऑटो वाले से कहा की वो आगे की तरफ चले मगर इस तरह की उसे किसी को खोजने में आसानी हो. उसकी इस बात से ऑटो वाले ने पूछा की मैडम बात क्या है तो दक्षिणा ने उसे बताया की वो एक लड़की को खोज रही है.
ऑटो वाला भला आदमी था. उसे बात समझ में आ गयी थी इस लिए उसने बड़ी ईमानदारी से ऑटो को आगे बढ़ा दिया और खुद भी आस पास नज़र दौड़ने लगा. दक्षिणा दोनों तरफ की सड़क पर देखती जा रही थी. करीब पांच मिनट बाद अचानक दक्षिणा की नज़र उस पार सड़क के किनारे फुटपाथ पर धीरे धीरे चलती कुसुम पर पड़ी. कुसुम को देखते hi दक्षिणा ने राहत की सांस ली और उसने ऑटो ड्राइवर को भी दिखाया कुसुम को. उसके बाद उसने ऑटो वाले से कहा की वो जल्दी से आगे चल कर सड़क के उस पार चले.
दक्षिणा की बात सुन कर ऑटो वाले ने ऑटो को तेज़ी से आगे बढ़ाया. दोनों तरफ की सड़क के बीच में एक फुट की दिवार बानी हुयी थी. यू टर्न लेने के लिए जगह hi नहीं दिख रही थी. काफी दूर आने के बाद एक रेड लाइट नज़र आयी तो ऑटो ड्राइवर ने बड़ी सावधानी से यू टर्न लिया और सड़क के उस तरफ आ कर ऑटो को फिर से तेज़ी से बढ़ा दिया.
सामे कुछ hi दूरी पर रेड लाइट बत्ती थी और इस वक्त वो ग्रीन hi थी मगर जैसे hi ऑटो वाला वह तक पंहुचा तो लाइट रेड हो गयी. ये देख कर दक्षिणा के चेहरे पर परेशानी और बढ़ गयी. वो सामने की तरफ hi देख रही थी मगर कुसुम उसे दिख नहीं रही थी. सड़क आगे जा कर लेफ्ट साइड को थोड़ा सा घूम गयी थी इस लिए उसे कुसुम नहीं दिख रही थी. रेड लाइट का टाइमर 80 से नीचे काउंट हो रहा था और उसी के साथ दक्षिणा के दिल की धड़कने भी डाउन होती जा रही थी.
आखिर लाइट ग्रीन हुयी तो आगे के वाहन चल पड़े और उनके पीछे ऑटो वाले ने भी ऑटो को आगे बढ़ा दिया. आगे सड़क पर जैसे hi ऑटो घूमा तो दक्षिणा की नज़र दूर से hi कुसुम पर पड़ी. उसने ऑटो वाले को थोड़ा और तेज़ चलने को कहा. ऑटो वाला पहले से hi तेज़ चल रहा था अब और चलने लगा.
दक्षिणा की नज़र बराबर कुसुम पर थी. वो कही खोयी हुयी धीरे धीरे इसी तरफ आ रही थी. पीले रंग के शलवार शूट में थी वो और उसके गले में पीले रंग का hi दुपट्टा था जो की इस वक्त अस्त ब्यस्त दिख रहा था. अभी दक्षिणा कुसुम को देख hi रही थी की तभी एक सफ़ेद रंग की ओमनी कार कुसुम के पास रुकी और उससे दो लोग बाहर निकले. वो दोनों आदमी आस पास देखते हुए सीधा कुसुम के पास गए. ये देख कर दक्षिणा के दिमाग में खतरे की घंटी बजी. उसने ऑटो वाले को और स्पीड से चलने को कहा.
उधर वो दोनों आदमी कुसुम के पास पहुंच कर उसके आगे खड़े हो गए और कुसुम से कुछ कहा. उसके बाद एक ने कुसुम का हाथ पकड़ा और उसे ओमनी की तरफ लेन लगा जबकि दूसरा कुसुम के पीछे था. दक्षिणा के देखते hi देखते उस आदमी ने कुसुम को ओमनी में बैठाया और खुद भी उसके साथ बैठ गया. जबकि दूसरा आदमी आगे वाली शीट पर बैठ गया. ओमनी का दरवाज़ा बंद होते hi ओमनी आगे बढ़ चली. बड़ी हैरत की बात थी की कुसुम ने उन आदमियों के साथ जाने से बिलकुल भी विरोध नहीं किया था.
दक्षिणा फटी आँखों से ये नज़ारा देखती रह गयी. उसकी आँखों के सामने कुसुम को उन लोगो ने अपहरण कर लिया था. दक्षिणा पूरी ताकत से ऑटो वाले पर चीख पड़ी. ऑटो वाला उस ओमनी से थोड़ा hi पीछे रह गया था. दक्षिणा ने ऑटो वाले से कहा की वो उस कार के पीछे hi फुल स्पीड से चले. उसे समझ नहीं आ रहा था की अब वो क्या करे. अगर वो लोग कुसुम को ले कर उसकी आँखों से ओझल हो गए तो फिर कुसुम को वापस पाना बहुत मुश्किल हो जाना था.
ऑटो वाला फुल स्पीड में ऑटो को दौड़ा रहा था मगर आगे जा रही ओमनी कार हर पल उससे और दूर होती जा रही थी. दक्षिणा के दिमाग ने एकदम से काम किया. उसने उस ओमनी का नंबर याद कर लिया. उसे याद आया की उसके पास अपना मोबाइल है और वो 100 नंबर पर कॉल करके पुलिस को सब कुछ बता सकती है. दक्षिणा ने फटाफट अपने पर्श से मोबाइल निकला और 100no पर लगा दिया.
कॉल लगने के बाद दक्षिणा ने पुलिस वालो को सब कुछ बता दिया और कहा की जितना जल्दी हो सके वो उस ओमनी कार से मेरी बहन को निकाल कर बचा ले. दक्षिणा ने यही बताया की कुसुम उसकी बहन है. कॉल पर पुलिस ने दक्षिणा को आश्वस्त रहने को कहा और बोले की वो जल्द से जल्द एक्शन ले रहे हैं.
दक्षिणा ने पुलिस को लोकेशन और उस ओमनी कार का नंबर वगैरा बता दिया था. आगे जा रही ओमनी कार एक मोड़ पर मुद चुकी थी. सड़क पर और भी बहुत से वाहन थे जिनके बीच कभी कभी वो ओमनी कार छुप जाती थी मगर दक्षिणा उस पर बराबर नज़र रखे हुए थी और ऑटो वाले को उसके पीछे लगाए हुए थी.
करीब दस मिनट बाद दक्षिणा ने देखा की लेफ्ट साइड की तरफ से एक ट्रैफिक पुलिस की कार आयी और उस ओमनी कार के पीछे लग गयी. अभी दक्षिणा उस तरफ देख hi रही थी की तभी पीछे से एक पुलिस गाडी निकली. सामने एक और रेड लाइट दिखी और सरे वाहन रुकने लगे. वो ओमनी कार भी रुक गयी थी. वो आगे की तरफ थी उसके कुछ दूरी पर वो ट्रैफिक पुलिस की कार थी. जैसे hi सरे वाहन रुके तो दक्षिणा ने देखा की ट्रैफिक पुलिस वाली कार से दो पुलिस वाले बाहर निकले और उस ओमनी कार की तरफ तेज़ी से बढ़ चले. अभी वो कुछ hi दूरी पर गए थे की सिग्नल ग्रीन हो गया और आगे के वाहन चल पड़े. उन वाहनों के साथ वो ओमनी कार भी चल पड़ी. ये देख कर वो दोनों पुलिस वाले वापस पालते और पुलिस कार में बैठ कर फिर से ओमनी कार के पीछे लग गए.
आगे की तरफ क्लीन सड़क थी इस लिए ओमनी फुल स्पीड से आगे बढ़ गयी थी. पुलिस की दोनों गाड़िया साईरन बजती हुयी दूसरे वाहनों को ओवरटेक करते हुए आगे निकल गयी. इधर ऑटो में दक्षिणा भी पीछे लगी हुयी थी. दक्षिणा को अब वो ओमनी कार दिखाई नहीं दे रही थी बल्कि पुलिस की गाड़िया ज़रूर उसे दिख रही थी. दक्षिणा के दिल की धड़कने कभी अचानक से तेज़ हो जाती तो कभी एकदम से रुक सी जाती थी.
आगे काफी दूर आ कर एक और रेड लाइट बत्ती आयी. आगे के सभी वाहन रुक गए थे. दक्षिणा ने देखा की पुलिस की दोनों गाड़िया काफी आगे थी. उसे वो ओमनी कार अब भी नज़र न आयी थी मगर उसने ये ज़रूर देखा की पुलिस गाडी से दो तीन पुलिस वाले उतरे और आगे की तरफ बड़ी तेज़ी से दौड़ते हुए जा रहे थे. दक्षिणा को समझते देर न लगी की वो पुलिस वाले उस ओमनी कार के पास hi जा रहे थे. कुछ hi देर में दक्षिणा ने देखा की वो पुलिस वाले एक जगह रुके और उस जगह कुछ करने लगे. ये देख कर दक्षिणा भी ऑटो से उतर गयी. उसने ऑटो वाले से कहा की वो अपने पैसो की फ़िक्र न करे और ऑटो को आगे ले जा कर साइड पर लगा ले.
ऑटो वाला भला आदमी था उसने कुछ नहीं कहा. दक्षिणा वाहनों के बीच से भागते हुए उन पुलिस वालो की तरफ बढ़ती चली गयी. कुछ hi पालो में उसे वो ओमनी कार दिखने लगी. दक्षिणा का पसीने से बुरा हाल था मगर वो खुद की कोई परवाह नहीं कर रही थी. उधर वो पुलिस वाले उस ओमनी कार के करीब पहुंच चुके थे. पुलिस वालो में से एक आगे की तरफ ड्राइवर के पास गया और हाथ दाल कर कार के इग्निशन से चाभी निकाल ली. तब तक पीछे से कुछ और पुलिस वाले भागते हुए आ गए थे.
दक्षिणा भी कुछ hi देर में उस ओमनी कार के पास पहुंच गयी और उसने पुलिस वालो को बताया की उसी ने फ़ोन किया था. पुलिस वालो ने ओमनी कार के अंदर से सबको बाहर निकला. उस गाडी में तीन आदमी थे. जिनमे से एक ड्राइवर था और बाकी दो वही थे जो कुसुम को ले कर ओमनी में बैठ गए थे. पहले तो वो लोग यही बोले की कुसुम उनकी रिश्तेदार है मगर जब दक्षिणा ने पुलिस वालो को बताया सब कुछ तो वो सब बगले झाँकने लगे.
पुलिस वालो ने उन तीनो को पकड़ लिया और कुसुम को कुछ पूछ तांछ के बाद दक्षिणा के हवाले कर दिया. कुसुम की हालत ऐसी थी जैसे वो किसी सदमे में हो. उस पर कोई रिएक्शन नहीं था. खेर लाइट ग्रीन हुयी तो सरे वाहन आगे बढ़ने के लिए हॉर्न देने लगे तो दक्षिणा कुसुम को ले कर ज़ेबरा क्रासिंग से चल कर किनारे साइड आ गयी.
दक्षिणा कुसुम को अपने से इस तरह छुपकाये हुए थी जैसे वो कोई छोटी सी बच्ची हो. उसकी आँखों में आँशु थे. वो जानती थी की बहुत बड़ा काण्ड होने से बचा था. अगर आज कुसुम को वो लोग अपने साथ ले जाने में कामयाब हो जाते तो शायद बहुत बड़ा अनर्थ हो जाता.
रोड के इस तरफ आ कर दक्षिणा ने ऑटो वाले की तरफ नज़र दौड़ाई तो उसने देखा की वो ऑटो वाला उसी कट से यू टर्न ले रहा था. कुछ hi पालो में वो ऑटो वाला आया तो दक्षिणा कुसुम को ले कर ऑटो में बैठ गयी. कुसुम एकदम शांत थी. जैसे वो इस दुनिया में थी hi नहीं. वो एकटक बस शून्य में देखे जा रही थी. दक्षिणा उसकी ये हालत देख कर उसे बार बार पुकार रही थी और उसको होश में लेन का प्रयास कर रही थी.
दक्षिणा ने ऑटो वाले को हॉस्पिटल का पता बताया और उसे हॉस्पिटल hi चलने को कहा. ऑटो वाला बिना कुछ कहे हॉस्पिटल की तरफ चल दिया. काफी देर बाद ऑटो उसी हॉस्पिटल के सामने रुका जिसमे विक्की को भर्ती किया गया था. ऑटो से उतर कर दक्षिणा ने ऑटो वाले को दो हज़ार का एक नोट पकड़ाया. ऑटो वाला दो हज़ार पाया तो वो खुश हो कर चला गया.
कुसुम को ले कर दक्षिणा हॉस्पिटल के अंदर की तरफ चल पड़ी. जैसे hi वो गेट के पास पहुंची तो उसे प्रिय पूजा मिल गयी. वो दोनों कुसुम को देख कर उससे लिपट गयी और फुट फुट कर रोने लगी.
"कहा चली गयी थी आप.? आपको पता है आपके इस तरह चले जाने से हमारी जान निकल गयी थी. ऐसा क्यों किया आपने दीदी.?" पूजा बुरी तरह सिसक उठी तो दक्षिणा ने उन दोनों को शांत रहने को कहा और फिर कुसुम के साथ साथ उन दोनों को भी हॉस्पिटल के अंदर ले आयी.
वेटिंग रूम में रचना और माँ एक लम्बी सी चेयर पर बैठी हुयी थी. दोनों के hi चेहरे से लग रहा था की वो कितना रोई थी. जैसे hi दक्षिणा कुसुम को ले कर वेटिंग रूम में दाखिल हुयी तो रचना और माँ की नज़र उस पर पड़ी. दक्षिणा के साथ कुसुम को देखते hi रचना उठ कर कुसुम के पास आयी और उसे अपने साथ ले जा कर चेयर पर बैठाया. यहाँ हैरानी की बात ये थी की माँ ने कुसुम की तरफ देखा ज़रूर मगर उसने कुसुम से कहा कुछ नहीं. शायद वो अब भी कुसुम से बहुत गुस्सा थी.
रचना और प्रिय पूजा के पूछने पर दक्षिणा ने बस यही कहा की कुसुम रास्ते में hi उसे मिली थी और वो काफी दूर निकल गयी थी. उसने ये नहीं बताया की आज कुसुम के साथ कितना बड़ा काण्ड हो गया था. खेर दक्षिणा कही से पानी ले कर आयी और कुसुम को ज़बरदस्ती पिलाया और हलके से उसका चेहरा भी धोया. कुसुम कुछ बोल नहीं रही थी बल्कि वो अभी भी सदमे जैसी हालत में hi थी.
अभी ये लोग यहाँ बैठे hi थे की तभी वह पर एक नर्स आयी और उसने कहा की मरीज की फॅमिली में से जो भी हैं उन्हें डॉ साहब ने बुलाया है. नर्स की बात सुन कर दक्षिणा चेयर से उठ कर कड़ी हो गयी और उसके साथ रचना भी. नर्स के साथ दक्षिणा गयी. उसने रचना को मन कर दिया था ये कह कर की वो यहाँ सबका ध्यान रखे. वैसे ये बड़ी अजीब बात थी की अभी तक इन लोगो ने दक्षिणा से उसके बारे में कुछ भी नहीं पूछा था या फिर शायद ऐसे हालात hi नहीं थे की उससे उसके बारे में कुछ पूछा जाये.
डॉ ने दक्षिणा से कहा की मरीज के इलाज़ में जो भी खर्चा लगा उसकी रसीद वो बनवा ले. डॉ ने ये भी बताया की विक्की को दोपहर तक होश आ जायेगा. डॉ से मिलने के बाद दक्षिणा वापस वेटिंग रूम में आ गयी थी. उसने रचना और माँ से बताया की विक्की को दोपहर तक होश आ जायेगा.
दक्षिणा को पता था की इन लोगो ने कल से कुछ नहीं खाया पिया था. पूजा ने उसे साडी कहानी बता दी थी की क्या हुआ था. दक्षिणा ने इन लोगो के खाने के लिए इंतजाम किया. वो बाहर से सबके लिए खाना ले के आयी. मगर कोई भी खाना खाने के लिए राज़ी नहीं था. दक्षिणा ने सबको समझाया की खाना न खाने से क्या हो जायेगा. भगवन का शुक्र मनाओ की विक्की को ज़्यादा कुछ नहीं हुआ वर्ण जिस तरह का उसका एक्सीडेंट हुआ था उसमे से उसकी जान भी जा सकती थी.
आखिर दक्षिणा के बहुत समझने पर सबने थोड़ा बहुत खाया. दक्षिणा ने अपने हाथो से कुसुम को भी ज़बरदस्ती खिलाया. अब वो पहले से ठीक थी मगर बोल वो अब भी किसी से नहीं रही थी. रह रह कर उसकी आँखों में आँशु आ जाते थे. खाना कहते वक्त hi माँ ने दक्षिणा से उसके बारे में पूछा था और ये भी कहा की वो उसकी अहसानमंद है की इस हालत में उसने उनकी इतनी मदद की.
माँ की इन बातो से दक्षिणा को बहुत राहत मिली थी. उसने माँ से बताया की शुरू शुरू में विक्की उसके यहाँ hi रहता था और उसी की फैक्ट्री में काम करता था. दक्षिणा ने उतना hi बताया जितना उसे इस वक्त ज़रूरी लग रहा था.
दोपहर को नर्स ने बताया की मरीज को होश आ गया है और ये लोग उससे मिल सकते हैं. नर्स की ये बात सुन कर सब के सब वेटिंग रूम से भाग पड़े विक्की से मिलने के लिए. सबसे आगे माँ थी. कुसुम नहीं जाना चाहती थी इस लिए दक्षिणा उसके पास hi रह गयी थी.
जिस कमरे में विक्की को बीएड पर लेटाया गया था ये सब वह पहुंचे. विक्की के हाथो पैरो में पत्तिया बढ़ी हुयी थी और उसके सर में भी. माँ ने जैसे hi मुझे इस हाल में देखा तो वो फुट फुट कर रोने लगी. सब मुझे इस हालत में देख कर दुखी थे और रोने लगे थे. डॉ और नर्स ने माँ और बाकी सबसे कहा की वो लोग मुझे ज़्यादा डिस्टर्बे न करे.
मैं होश में आ चूका था मगर मैं हिल नहीं सकता था और न hi अपनी गर्दन को इधर उधर कर सकता था. माँ मेरे चेहरे के पास hi झुकी हुयी रो रही थी और बार बार झुक कर मेरे माथे पर चूम रही थी और साथ hi जाने क्या क्या बोलती जा रही थी.
"क्यों किया तूने ऐसा.? क्या तूने एक बार भी ये नहीं सोचा की तेरे बिना हम सबका क्या होगा.? इस नयी जगह पर हम कैसे जियेंगे.?" माँ मुझसे बोलती जा रही थी और मैं चुप चाप उनकी तरफ देख रहा था. मैं बहुत कुछ बोलना चाहता था मगर मेरे होठ बस कांप कर hi रह जाते थे. मेरे सर में दर्द होने लगा. जिससे मेरा चेहरा बिगड़ने लगा था. ये देख कर डॉ ने माँ को मुझसे कुछ भी बोलने या पूछने से मन कर दिया और सबको ज़बरदस्ती बाहर भेज दिया.
कुछ देर बाद मेरे पास एक पुलिस वाला आया. उसने मुझे बड़े ध्यान से देखा और फिर उसने डॉ की तरफ देखते हुए कहा.
"अब कैसी कंडीशन है इसकी.?" पुलिस वाले ने डॉ से ये कहा तो डॉ ने कहा.
"कंडीशन तो बेटर hi है अफसर बूत ु क्नोव व्हाट खून बहुत ज़्यादा बाह गया था और छोटे भी काफी गहरी थी इस लिए रिकवर होने में इन्हे ज़रा टाइम लगेगा. वैसे ये हैरत की बात है की इतने खतरनाक एक्सीडेंट के बाद भी ये सलामत बच गए." डॉ ने ये कहा तो पुलिस वाला मेरी तरफ देख कर मुस्कुराया फिर बोलै.
"सुना है जब तक किसी के दिन पुरे नहीं हो जाते तब तक मौत नाम की बाला आ hi नहीं सकती." पुलिस वाले ने ये कहा तो डॉ ने कहा.
"यस यू अरे राइट अफसर. अन्य्वयस थैंक्स ा लोट. आप इन्हे टाइम से ले आये थे यहाँ इस लिए इन्हे बचा लिया गया वर्ण यू क्नोव.?" डॉ ने ये कहा तो पुलिस वाले ने एक बार फिर से मेरी तरफ देखा और फिर वो मेरी तरफ झुका और मुझसे बोलै.
"वेलकम तो नई लाइफ यंग बॉय. मैं उम्मीद करता हु की फ्यूचर में अब ऐसी ड्राइविंग नहीं करोगे तुम." पुलिस वाले ने मुझसे ये कहा तो मैंने अपनी पालक झपका कर हाँ कहा. उसके बाद वो डॉ के साथ बाहर चला गया.
कमरे में बीएड पर पड़ा मैं इस सबके बारे में सोचने लगा तो फिर से मेरे सर में दर्द उठा तो मैंने सोचना hi बंद कर दिया. मगर होश में आने के बाद ऐसा कैसे हो सकता था की मैं किसी चीज़ के बारे में न सोचु.? मेरे मन में एक hi बात आ रही थी की सब मुझे देखने आये थे मगर दीदी नहीं आयी थी. क्या मेरे साथ इतना कुछ होने के बाद भी वो मुझे देखना नहीं चाहती थी या फिर कोई और बात थी.?
मुझसे मिलने के बाद पुलिस वाला तो शायद चला गया था मगर डॉ मेरी फैमिकय को समझा रहा था की अब चिंता की कोई बात नहीं है. मरीज को अभी काम से काम दो से तीन हप्ते तक यही पर रखना ज़रूरी है. उसके बाद आप लोग उन्हें ले जा सकते हैं. डॉ के ऐसा कहने पर माँ ने कहा की वो अपने बेटे के पास hi रहेगी. उनकी इस बात से डॉ ने कहा की इसकी कोई ज़रूरत नहीं है क्यों की यहाँ पर उनका बहुत अच्छे से ख़याल रखा जायेगा मगर माँ मानने को तैयार न हुयी तो डॉ ने कहा की ठीक है एक ब्यक्ति यहाँ रुक सकता है.
उसके बाद यही तय हुआ की माँ मेरे पास hi रुकेगी और बाकी लोग घर जायेगे. दक्षिणा ने माँ से कहा की वो शाम तक यही रहे उसके बाद वो यहाँ आ जाएगी. दक्षिणा की इस बात से माँ ने कहा की नहीं इसकी कोई ज़रूरत नहीं है. वो अपने बेटे के पास तब तक रहेगी जब तक वो पूरी तरह ठीक नहीं हो जाता. माँ की इस बात से दक्षिणा ने उन्हें समझाया की कुछ टाइम की hi तो बात है उसके बाद तो विक्की को वैसे भी घर hi ले आएंगे. बड़ी मुश्किल से माँ मानी और फिर दक्षिणा सबको ले के घर चली गयी.
रास्ते में दक्षिणा कुसुम से थोड़ी बहुत बाते करती जा रही थी. तभी कुसुम ने उससे कहा की वो अब उस घर में नहीं रहना चाहती है और न hi वो अपने भाई को अपनी मनहूस शकल दिखाना चाहती है. उसकी इस बात से बाकी सब दुखी हो गए थे. प्रिय पूजा और रचना ने बहुत समझने की कोशिश की मगर वो न मानी, तब दक्षिणा ने कहा की वो कुसुम को अपने घर ले जाएगी. दक्षिणा की इस बात से कुसुम ने भी कह दिया की हाँ अब से वो उसके घर में hi रहेगी.
टैक्सी घर के सामने रुकी तो प्रिय पूजा और रचना टैक्सी से उतर गयी. उन तीनो ने एक बार फिर से कुसुम को घर चलने के लिए कहा मगर वो टैक्सी से न उत्तरी. ये देख कर दक्षिणा ने उन तीनो को जाने का इशारा किया तो वो तीनो स्टील वाले गेट को खोल कर अंदर की तरफ चली गयी. उनके जाते hi दक्षिणा ने टैक्सी वापस मोड़ने को कहा. कुछ hi देर में टैक्सी दक्षिणा के घर के सामने रुकी.
टैक्सी वाले को उसका पैसा दे कर दक्षिणा कुसुम को ले कर घर के अंदर आ गयी. घर के अंदर ड्रिंग रूम में रखे सोफे पर सविता की बेटी नैना बैठी हुयी बगल की दिवार पर लगी एक बड़ी सी लेद टीवी पर फिल्म देख रही थी. दक्षिणा को आया देख कर उसने जल्दी से टीवी बंद कर दिया.
दक्षिणा ने कुसुम को एक सोफे पर बैठाया और फिर उसने सविता को आवाज़ दी. जब सविता आयी तो उसने उससे पूछा की खाना गर्म है या नहीं. दक्षिणा के पूछने पर सविता ने कहा की वो जब तक फ्रेश होंगी तब तक वो गरमा गरम खाना बना देगी.
"चलो कुसुम तुम भी फ्रेश हो जाओ. उसके बाद हम दोनों साथ में खाना खायेगे." दक्षिणा ने बड़े प्यार से ये कहा तो कुसुम ने उसकी तरफ बड़ी मासूमियत से देखते हुए कहा.
"मुझे भूख नहीं है. आप खा लीजिये." कुसुम ने ये कहा तो दक्षिणा में कहा.
"हर बात में ज़िद अच्छी नहीं होती कुसुम. मुझे पता है तुम थोड़ा ज़िद्दी हो मगर मैं भी काम ज़िद्दी नहीं हु. अगर तुमने नहीं खाया तो मैं भी नहीं खाओगी." दक्षिणा ने एकदम से बच्चियों जैसे लहजे में ये कहा तो कुसुम ने कहा.
"मैं ज़िद नहीं कर रही. मुझे सच में भूख नहीं है." कुसुम ने ये कहा तो दक्षिणा ने कहा.
"अच्छा चलो फ्रेश तो हो लो. देखो तो क्या हुलिया बना रखा है तुमने.? चलो उठो अब." दक्षिणा ने ये कहा और इस बार बिना कुसुम की कोई बात सुने कुसुम का हाथ पकड़ कर उठाया.
कुसुम ने भी ज़्यादा विरोध नहीं किया. शायद उसे भी इतना पता था की दूसरे के घर में दूसरे की बात भी मानना चाहिए. दक्षिणा कुसुम को ले कर अपने कमरे में गयी और फिर उसने कुसुम को कमरे में अटैच बाथरूम में भेज दिया.
कुसुम जब फ्रेश हो कर निकली तो दक्षिणा ने देखा की उसने वही कपडे पहन लिए थे जो उसने पहले पहने थे. ये देख कर दक्षिणा ने आलमारी से अपना एक शलवार शूट निकला और कुसुम की तरफ बढ़ाते हुए कहा की वो इन्हे पहन ले क्यों की उसके कपडे बहुत खराब हो चुके थे. खेर दक्षिणा के कहने पर कुसुम ने उससे कपडे ले लिए और बाथरूम के अंदर जा कर दरवाज़ा बंद कर लिया.
कुछ देर बाद जब कुसुम बाहर निकली तो दक्षिणा उसे देखती रह गयी. विक्की ने उसे बताया की उसकी कुसुम दीदी दुनिया की सबसे सुन्दर और मासूम हैं मगर इस वक्त वो अपनी आँखों से देख रही थी उसे और उसकी सुंदरता को. दक्षिणा को एकदम से ख़याल आया की ये वही लड़की है जिसकी विक्की इबादत करता है. उसने विक्की के मुख से बहुतो बार कुसुम की बाते सुनी थी.
दक्षिणा का शलवार शूट कुसुम की बॉडी पर फिट तो नहीं आ रहा था क्यों की दक्षिणा का जिसम कुसुम के जिसम से थोड़ा भारी था मगर इसके बाद भी वो कपडे उस पर काफी जांच रहे थे.
"वाह तुम तो एकदम पारी लग रही हो कुसुम. तुम सच में बहुत सुन्दर हो मगर इस सुंदरता में तुमने एक ग्रहण लगाया हुआ है और वो ये है की तुमने अपने इस चाँद से चेहरे पर उदासियों की चादर धमफ राखी है." दक्षिणा ने ये कहा तो कुसुम को थोड़ा शर्म तो आयी मगर फिर उसने जैसे इस पर ध्यान hi नहीं दिया था.
"अच्छा अब तुम यही बीएड पर बैठो मैं भी फ्रेश हो लेती हु. उसके बाद दोनों साथ में hi चलेंगे. ठीक है न.?" दक्षिणा ने ये कहा तो कुसुम ने हाँ में सर हिला दिया. उसके बाद दक्षिणा भी बाथरूम में घुस गयी मगर उसे नहीं पता था की उसके बाथरूम से वापस आने के बाद कमरे में क्या होने वाला है.
भाई लोग....
आज के लिए इतना hi....
रीड एन्जॉय & गिव योर फीडबैक....
कीप सपोर्टिंग & स्टे विथ....
:थैंक्यू: