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Episode:29
दक्ष : ठीक है अब उठ जाओ तुम दोनों.
मेरा कहा हर एक शब्द रुपाली के लिए ऑर्डर था. फ़ौरन उठ कर कड़ी हो गयी. साथ hi ऋचा भी उठ कड़ी हुई.
मैं सोफे पर बैठा हुआ था.
दक्ष : बताओ अपनी बेटी को तुम मेरी कोण हो.
रुपाली : ऋचा! ये मेरे मालिक हाँ और मैं मालिक की घुलम, उनकी दासी.
दक्ष : आगे बोलो रुपाली.
रुपाली : मेरा धरम मेरे मालिक की सेवा करना है ऋचा. आज से तुम भी मेरी तरह मेरे मालिक की दासी और घुलम हों. तुम भी आज से मालिक की सेवा करोगी.
ऋचा शॉकेड हो गयी : न्यू मूमममम! मैं एक आज़ाद कंट्री की आज़ाद सिटीजन हों माँ.
मैं किसी की स्लेव नहीं बन सकती. आप बनना चाहें तोह शोक से बन सकती हाँ, पर मैं---- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माँ आपने मुझे थप्पड़ मारा.. माँ एक अनजान के लिए आपने मुझे थप्पड़ मारा.. व्हाई! माँ! व्हाई!
रुपाली ग़ुस्से से ऋचा को देखते हुए : तुझे कहा न, ये मेरे hi नहीं तेरे भी मालिक हाँ. मालिक की शान में गुस्ताखी की इजाज़त मैं तुझे तोह क्या, अपने पुरे खंडन को भी नहीं दे सकती.
मैं रुपाली को स्माइल से देख रहा था. मेरे ट्रांस में रहते हुए कैसे शेरनी बनकर दहाड़ रही थी. शेरनी तोह नहीं थी वह, एक कुत्तिया थी, जिसे काटने की बड़ी आदत थी. एक नागिन थी, जिसे डसने की बड़ी आदत थी. मुझे hi नहीं दसा था इस नागिन ने. मेरे साथ साथ मेरे पुरे परिवार को दस गयी थी. मुझे डसने के बाद पूरा परिवार hi बिखर कर रह गया था. एक साथ रहते हुए भी सब एक दूसरे के लिए पुरे मैं से नहीं जी प् रहे थे. परिवार का एक मर्द घर से धुत्कार कर निकल दिए गया था. सिर्फ और सिर्फ एक नागिन के कारण. बेपनाह नफरत हो गई थी मुझे रुपाली से.
ऋचा बेबसी के आंसू बहाने लगी. उसका गाल लाल हो चूका था. रुपाली को उसपर ज़रा भी तरस नहीं आया था.
रुपाली : आंसू मत बहा मेरे सामने. तेरे आंसू मेरे सामने कोई हैसियत नहीं रखते.
दक्ष : रुपाली चल इसे दिखा तू अपने मालिक के लिए कुछ भी कर सकती है. चल अपने कपडे उतार और दिखा मुझे अपने बदन के जलवे वह भी अपनी बेटी के सामने.
रुपाली खुश हो गयी. अपने मालिक की और से मिले आर्डर पर खुश हो गई थी. ऋचा रोना भूल कर हैरानगी से अपनी माँ को देखने लगी. जो बड़े चाओ के साथ अपने कपडे उतर रही थी. धीरे धीरे एक एक करके उसके बदन से सरे कपडे अलग होने लगे. कुछ hi देर में रुपाली मेरे सामने नुदे कड़ी हुई थी.
दक्ष : रुपाली तू आज भी बहुत सुंदर है. आज भी तोह जवान लड़कियों को परे करती है.
रुपाली अपने मालिक की और से अपने सुंदरता बारे सुनकर और भी छकाने लगी थी.
रुपाली : शुक्रिया मालिक! जो आपको दासी का बदन पसंद आया.
दक्ष : कभी फैशन शो देखा है रुपाली तुमने.
रुपाली : जी मालिक! देखा है. बहुत बार देखा है.
दक्ष : तोह चल के दिखा न मुझे उन फैशन गर्ल्स के जैसे. दिखा मुझे अपने जिस्म के जलवे. मुझपर अपने हुसैन की बिजलियाँ गिरा, मेरा मूड बना. फिर तेरे साथ मज़े भी करने हाँ मुझे.
रुपाली : जी मालिक!
रुपाली ख़ुशी ख़ुशी चलती हुई कुछ फैसले पर गई. हम ड्राइंग रूम में थे और ड्राइंग रूम काफी खुला था.
ऋचा आप अपनी लाइफ का सबसे शॉकिंग सन देख रही थी. नुदे तोह एक बेटी अपनी माँ को अक्सर देखती hi रहती है. पर किसी गैर के सामने किसी किसी को देखना नसीब होता है. आज ऋचा भी अपनी माँ को मेरे सामने नुदे देख रही थी. वह भी अपने जिस्म के जलवे दिखते हुए. एक नुमायशी औरत बनकर.
रुपाली मुझे मस्त नज़रों से देखती हुई मेरी और चल कर आने लगी. अपनी और से अपनी चाल को बहुत मस्त बना कर, अपने कोल्हे मटका कर चली आ रही थी. सच में रुपाली के मस्त फिगर और चाल का जवाब नहीं था. रंडी नहीं थी. मेरे लिए, मुझे फंसने के लिए एक बार अपने पति के बाद मुझसे चुद गयी थी. वर्ण वो बाज़ारो औरत नहीं थी. कमल की सुंदरता की मालिक थी रुपाली.
उसे देख मेरे लुंड ने भी अंगड़ाई लेनी शुरू कर दी thi.jaagon के जोड़ में कैद उसकी छूट मुझे उसके चलने से क्या hi कामुकता का एहसास करा रही थी.
मैं बदल गया था, मेरे अंदर बहुत से बदलाव आ गए थे. मैं पहले जैसा होता तोह बदला लेने के लिए कुछ और सोचता. पर अब मेरे अंदर का सब सिस्टम सोचों के साथ साथ बदल कर रह गया था.
रुपाली होंटो पर दिलफरेब मुस्कान सजाये, अपनी चाल को कातिलाना बनाये मेरी और चल कर आने लगी. एक बार भी उसने मेरी आँखों से अपनी ऑंखें नहीं हटाई थी. ऋचा को भी नहीं देखा था उसने. जो शॉकिंग फेस लिए अपने मोह पर हाथ रखे अपनी माँ को असली रंडी बनते देख रही थी.
रुपाली : कैसा लगा मालिक! आपको अपनी दासी का जलवा.
दक्ष : मस्त! एक दुम्म मस्त. तुम्हारे जलवे ने तोह मेरी पंत में तम्बू hi बना दिए है.
रुपाली की नज़र मेरे तम्बू पर पड़ी तोह होंटो पर आई मुस्कान और भी गहरी हो गई.
रुपाली : मालिक एक राउंड और लगाएं क्या.
दक्ष : नहीं! बाकि का फिर सही. ऐसा कर अपनी बेटी के सुंदर शरीर के भी जलवे मुझे दिखला.
रुपाली : जी मालिक!
रुपाली ऋचा की और पलट गई.
रुपाली : चल ऋचा उतार अपने कपडे, और खुश कर मेरे मालिक को.
ऋचा दो कदम पीछे को हैट गई.
रुपाली : मुझे इंकार सुनने की आदत नहीं है ऋचा. क्या तुम मेरे बारे में सब भूल गई हो.
ऋचा आंसू बहते हुए : माँ मैं कैसे---
रुपाली : तेरे लिए ये कोई नयी बात नहीं है. पहले कभी तू किसी मर्द के सामने नंगी नहीं हुई. मुझे सब पता है तेरे बारे में. चल देर न कर और उतार कपडे.
ऋचा अपनी माँ से बहुत डर्टी थी. रुपाली से सब डरते थे. ऋचा कुछ देर इंकार करती रही, रुपाली उसे बार बार कहती रही. फिर जब रुपाली ने उसका दूसरा गाल भी लाल कर दिए तोह रट हुए ऋचा अपने कपडे उतरने लगी.
कुछ देर में ऋचा भी मेरे सामने नंगी थी.
दक्ष : चल आ रुपाली कुत्तिया बहुत देर से मेरा लुंड तेरे और तेरी बेटी के जलवे देख कर मुझे परेशान कर रहा है. चल अब इसे शांत कर.
रुपाली ऋचा का हाथ थम कर मेरे पैरों में बेथ गयी.
रुपाली : ऋचा अब मालिक की सेवा का समय शुरू होने जा रहा है तोह आंसू बहाना बंद कर. नहीं तोह तुम मुझे अच्छे से जानती हो. मालिक की सेवा में कमी आई न तो फिर तेरा मैं वह हाल करुँगी तुम सोच भी नहीं सकती.
रुपाली ने पहले मेरी पंत की बेल्ट खोली, फिर बटन खोल कर उसे लूसे किया. मैंने भी उठ कर अपनी पंत निचे कर दी. साथ hi अंडरवियर भी. मेरा लुंड फनफनाता हुआ सामने आया तोह रुपाली बड़े शोक से उसे थाम गई.
ऋचा टुकर टुकर मेरे लुंड को ताकने लगी.
मैं ऋचा में दिमाग में था. वह अपना दुःख दर्द भूल कर मेरे लुंड के बारे में सोचने लगी थी.
ऋचा : इतना बड़ा.. उफ्फफ्फ्फ़ मैंने ऐसे hi एक लुंड की तोह कल्पना की थी.
मैंने उसकी सोच में सवाल कर दिए और बोलै मुझे भी तोह कबसे ऐसे hi एक लुंड की छह थी. ऋचा की सोच.. हाँ पर इसका मतलब ये तोह नहीं मैंने इसे लेने की छह भी दिल में पाल लोन. पता नहीं कोण है ये. माँ को देखो कैसे पागल होने लगी है. कितनी खुश दिख रही है अपने बेकार किसम के मालिक की सेवा के लिए. मैं ऐसे hi तोह नहीं किसी को भी अपनी विर्जिनिटी दे सकती. पहले इसके बारे में जाँऊगी. मैं को भय तोह इसके साथ hi सब कर जाऊँगी. पर पहले इसे जानना भी ज़रूरी है. पता नहीं कोण है. और माँ का मालिक बन बैठा है.
दक्ष : रुपाली क्या ऐसे hi देखती रहेगी. इसे प्यार कर, तेरे मालिक का लुंड है. देख कितना बेताब हो रहा है. ऋचा को भी साथ मिला. मिलकर सेवा कर मेरी और मेरे लुंड की.
रुपाली ने ऋचा को बस घूरा hi था. ऋचा एक हाथ अपने गाल पर रख कर दूसरे हाथ से फ़ौरन hi मेरे लुंड को थाम गई.
रुपाली : तू भी इस काम में एक्सपर्ट है. चल मेरे साथ मिलकर मालिक की सेवा कर.
रुपाली ऋचा के साथ झुकी और मेरे लुंड को चाटने लगी. मैंने फिरसे ऋचा के दिमाग में जा घुसा.
ऋचा की सोच : उम्मम्मम कितना देलीकॉउस है. कितना गरम है. इसका टास्ते कितना अलग कितना मज़े वाला है. आह्हः ऋचा क्या करना है इसे परख के. माँ ने भी तोह मुझे फ्रीहैण्ड दे दिए है. भूल जा सब कुछ और मौका का फायदा उठा ले. पता नहीं फिर तेरे नसीब में ऐसा लुंड आये क न आये. पहले hi एक तगड़े लुंड के लिए बहुत समय निकल चुकी हों.
मैं मुस्कुरा पड़ा ऋचा की सोच पर.
ऋचा धीरे धीरे मस्त होने लगी. लुंड को चाटने के साथ साथ मोह में लेने के लिए उतावली होने लगी.
दक्ष : रुपाली तू मेरे तत्तो को चूस, ऋचा को मेरा लुंड चूसने दे. मैं ऋचा के चेहरे को hi देख रहा था. मुझे उसके चेहरे पर ख़ुशी दिखी. रुपाली मेरे आर्डर को फॉलो करते हुए मेरे टट्टे चूसने लगी तोह ऋचा मेरे लुंड के सुपड को मोह में भर गयी. नज़र उठा कर मुझे देखा. ऐसे एक्सप्रेशन देने लगी. जैसे वह ये सब मजबूरन कर रही हो. पर अब उसका पूरा पूरा मैं बनने लगा था. उसकी छूट रिसने लगी थी. ऋचा को और भी गर्माने के लिए मैंने अपने बूट की नोक को उसकी छूट पर लगा दिए. ऋचा पीछे को सरकने लगी. तोह रुपाली जिसका मोह निचे hi था. मेरे टट्टे मोह से निकल पर ऋचा से बोली
रुपाली : ऋचा तू अभी भी पूरी तरह से खुद को मालिक की सेवा के लिए तैयार नहीं कर पाई है. लगाओ एक और थप्पड़ या--
ऋचा मोह से लुंड निकल कर : माँ कर तोह रही हों आपके मालिक की सेवा. वहां कुछ भी टच हो तोह बॉडी में मूवमेंट तोह होगी hi.
दक्ष : ठीक है. अब चुसू फिरसे मोह में लेकर.
ऋचा ने एक नज़र मुझे देखा और मेरे लुंड को चूसने लगी. मैं बूट की नोक से ऋचा की छूट को कुरेदने लगा.
रुपाली भी रिलैक्स होकर मेरे टट्टे चूसने लगी. धीरे धीरे ऋचा की बेचैनी रुपाली से भी ज़यादा बढ़ने लगी. मेरे बूट की नोक और लुंड की गर्मी ने उसे बेहाल करना शुरू कर दिए था.
मैं और मेरा लुंड दोनों मस्त मूड में आ गए थे. ऐसे समय पर मैं रुपाली के दिमाग में गया और उसके दिमाग में बोलै.. 090078601
बस फिर क्या था. रुपाली मेरे ट्रांस से बहार आ गई. उसे एक झटका लगा. मेरे टट्टे उसके मोह से निकल गए थे. वह लड़खड़ा गई थी. 2-4 सेकंड के बाद वह खुद को, मुझे और ऋचा को देखने लगी. बेपनाह हैरत भरे भाव उसके चेहरे पर आ गए थे. खुद को और ऋचा को नुदे देख कर उसे अनलिमिटेड झटके लग रहे थे. फिर वह ड्राइंग रूम में चरों और देखने लगी.
ऋचा मेरे लुंड चूसते हुए हैरानगी से अपनी माँ को देखने लगी. वह मेरा लुंड मोह से निकल कर अपनी माँ से पूछना चाहती थी. माँ क्या बात है. पर वह सिर्फ सोच कर hi रह गयी. मैं अपना हाथ उसके सर पर रख कर लुंड निकलने से रोक दिए. वह एक तिरछी नज़र से मुझे देख कर फिरसे मेरे लुंड को चूसने लगी. अब वह मेरी स्लेव काम और हवस की स्लेव ज़यादा बन चुकी थी. उसकी छूट को अब भी मेरे बूट की नोक कुरेद रही थी. ऋचा बहुत आगे निकल चुकी थी. उस सीमा पर पोहंच चुकी थी जहाँ छूट का पानी न निकले तोह ऋचा क़यामत कड़ी करदे.
रुपाली झटकों से बहार आई तोह चीख पड़ी.
रुपाली : riiiiiiiiichchchaaaaaaaaaa.. ये सब क्या है. ये कोण है और तुम क्या कर रही हो. मैं क्या कर रही थी. ye..ye..ye तोह किसी कोठी का ड्राइंग रूम दिख रहा है. हम तो हवेली में थे न. किसी कोठी के ड्राइंग रूम में कैसे आ गए.
रुपाली पहले तोह चीखी थी. फिर धीरे धीरे वह शांत पड़ती चली गई. उसकी आवाज़ नीची होने लगी थी. लगने वाले झाकते उससे सहन नहीं हो रहे थे. हज़ारों तरह के प्रश्न उसके दिमाग में गूंजने लगे थे. उसे कुछ समझ नहीं आ रही थी.
ऋचा ने फिरसे मेरे लुंड को मोह से निकलने की कोशिश करि तोह मैंने उसके दिमाग को अपने कण्ट्रोल में लेकर अपना लुंड उसके मोह से निकलवा दिए.
उसे अपनी राइट साथ सोफे पर बिठा दिए. वह बोलना तोह चाहती थी. पर बोल नहीं प् रही थी. उसे अपने कंडीशन पर हेरात होने लगी थी.
मैंने ऋचा के होंटो पर ऊँगली फेरने लगा : तू कुछ बोली तोह एक hi झटके में तेरी सील खोलूँगा. आराम से रहेगी तोह प्यार से खोलूँगा. ऋचा दर गयी. अपनी माँ को देख कर, उसकी हालत और बदली सिचुएशन पर वह भी हैरत में आ गई थी. पर मुझसे दर भी गई थी.
दक्ष : चल फिर से मेरे लुंड को चूस. इस बार मैं तेरे सर को नहीं दबाओगे. तूने लुंड निकलने की सोची तोह फिर--
ऋचा : nnn..nahi..nahi निकलूंगी.
दक्ष : (स्माइल के sath)chal फिर चूस मेरे लुंड को. देख तेरे होंटो की गर्मी के लिए कितना मचल रहा है.
ऋचा मेरा लुंड फिरसे मोह में ले गई. रुपाली कुछ नार्मल हो गई थी. मैंने उसे अपने कण्ट्रोल में लिया और अपने दूसरी साइड बिठा दिए. पीछे से हाथ घुमा कर उसका चुका पकड़ लिया. फिर उसके दिमाग को आज़ाद छोड़ दिए. वह खुद को मुझसे चिकपी देख कर दर गई.
रुपाली : ममम.. मैं यहाँ कैसे आई. मम.. मैं तोह वहां कड़ी थी. एकदुम्म से कैसे यहाँ आ गई.. रुपाली की हैरत हर लम्हा बढ़ती hi जा रही थी.
दक्ष : ठीक वैसे hi. जैसे मैं भी नहीं जनता था. तेरे कमरे में कैसे पोहंचा था. तुझे कैसे छोड़ रहा था. कैसे पायल दी और अलका आ कर मुझे तुझे छोड़ते हुए देख गयी थी. ठीक वैसे hi तू भी यहाँ पर मौजूद है.
रुपाली के साथ साथ ऋचा को भी झटका लगा. ऋचा मेरा लुंड अपने मोह से निकल कर मुझे देखना चाहती थी. मैंने कसके उसके चुत्तड़ पर एक थप्पड़ मार दिए.
रुपाली के चुके को दबा दिए. वह चीख padi.uska चुका कुछ लाल पद गया था. पर मैंने छोड़ा नहीं.
रुपाली : तुम कोण हो. ये सब तोह दक्ष के साथ हुआ था. तुम तोह दक्ष नहीं हो.
दक्ष : हाहाहा मैं hi दक्ष हों रंडी चची.. मेरी आवाज़ पर घोर नहीं किया तुमने. मेरी आँखों में मौजूद आग देख कर भी नहीं समझी हो रंडी चची.. हैरत की बात है, इतना सब करके भी तुम मुझे भूल गई. तेरे जैसी मास्टरमाइंड औरत ऐसा काण्ड करके भला कैसे भूल सकती है.
रुपाली पुरे ज़ोर से अपना चुका मुझसे छुड़वा कर उठ कड़ी हुई. मैंने भी उसे ढील दे दी.
ऋचा ने भी सर उठाने की कोशिश करि. अब उसका मंद दिरवेर्ट हो चूका था. छूट गीली भी थी. फिर भी उसकी छूट की आग मेरे बारे में जान जाने पर ठंडी पड़ने लगी थी.
मैंने भी उसे मोह से लुंड निकलने दिए.. वह भी झाकते से उठ कड़ी हुई और अपनी माँ के बराबर कड़ी होकर मुझे हेरात से देखने लगी. ऋचा इस बार बहुत ज़यादा दर गई थी. वह समझ गई थी, मैं बदला लेने के लिए लौट आया हों.
रुपाली मेरे ट्रांस से बहार निकली तोह पुराने वाली रुपाली बन गयी. पहले जो मेरे लिए अपनी बेटी पर बरस रही थी. जितनी आग मेरी वफादारी में उसके मोह से ऋचा पर बरस रही थी. अब वही आग रुपाली मेरे बारे में जान जाने पर मुझपर बरसाने लगी थी.
रुपाली : टूउऊउउउउ! तू लौट आया है दक्ष! बड़ी ढीट मिटटी का बना है तू. इतना सब तेरे साथ कर दिए. फिर भी तू लौट कर आ गया.
दक्ष : क्या करता रंडी चची. तुझसे और तेरे पुरे खंडन से बदला जो लेना था मुझे.
रुपाली हैरान हो गयी : खंडन..?? तुम नहीं जानते क्या..?? मैं अपने माँ बाप की इकलौती बेटी थी. मेरे माता पिता नहीं रहे थे. अपने खंडन में मैं अकेली hi बची थी. तू किस खंडन से बदला लेने की सोच रहा है.
दक्ष : हाहाहा!! क्यों ऋचा तू भी नहीं जानती क्या अपनी माँ के खंडन के बारे में.
हाहाहाहा. बहुत बड़ी रंडी है तू रुपाली. तू hi नहीं तेरा पूरा खंडन hi रंडी खाना है. रंडी खाने से आई है तू.. समझी तू रंडी औरत. तू रंडी है रंडी, तेरी माँ रंडी, तेरी बहने रंडी. तेरे भाई दलाल. तेरे भाई बहनो के बेटियां रंडी. उनके बच्चे दलाल.. तुम सब के सब एक रंडियों और दलालों के खंडन से हो. हाहाहाहा
रुपाली की ऑंखें इस बार सच में आग उगलने लगी थी. आज सही मानो में वह एक डायन नज़र आ रही थी. ऐसी डायन जो किसी का भी खून चूस ले. किसी को भी ज़िंदा दर्गोर कर दे. उसकी ऑंखें अपनी जगा से बाहर आने को बेताब हो रही थी. ऋचा अपनी माँ को देख कर बहुत दर गई. वह 4 कदम पीछे को हैट कर कड़ी हो गई.
रुपाली : नहीं हों मैं रंडी. समझाआआआआ tuuuuuuuuuuuuu.. नहीं है रंडी मेरी माँ. नहीं है दलाल मेरा बाप. कोई भी नहीं है रंडी मेरे खंडन में. कोई भी दलाल नहीं है मेरे खंडन में. सबके सब महान पुरुष हाँ. बहुत बड़ा नाम है उनका. उनका नाम सुनकर सब थार थार कांपने लगते हाँ. मेरे खंडन के मर्द किसी को घूर कर भी देख लें तोह सामने वाले की आत्मा उसके शरीर को छोड़ दे.
ऋचा कभी मुझे तोह कभी अपनी माँ को देख रही थी.
दक्ष : हाहाहा.. तू तोह लावारिस है न रंडी.. हाहाहा अभी क्या कह रही थी तू. तू अपने माता पिता की इकलौती औलाद थी. वह मरे तो तू दुन्या में अकेली रह गई थी. हाहाहा रंडी खुद से hi अपने घट्टिया खंडन के बारे में बता गयी.
रुपाली को एक और झटका लगा और इस बार वह फिरसे मुझ खोजती नज़रों से देखने लगी.
उसका ग़ुस्सा कमज़ोर पड़ने लगा. मेरे लिए दर उसका अंदर से ख़तम हो गया था. मैं जैसा भी था. पर रुपाली अपने मायके परिवार के मर्दों को भी परे करती थी. बहुत डेरिंग वीमेन थी रुपाली. उसका कोई भी बीटा उसपर नहीं गया था. शायद मेरे चुटिया चाचा के लुंड में, जिगर में वह पावर नहीं होगी. वर्ण राजा ठाकुर का खून इतना बुज़दिल और घट्टिया नहीं निकल सकता था.
दक्ष : तुम ये सब कैसे जानते हो. ये बात तोह कोई भी नहीं जनता. सिवाए मेरे बच्चू के. विक्रम भी नहीं जनता तू कैसे जान गया. मेरे बच्चे मेरे साथ गद्दारी नहीं कर सकते.. फिर तुझे किस ने बताया.
ऋचा बोल पड़ी : माँ विनय भाई की शादी को लेकर जो घटना घाटी थी. मुझे तब hi कुछ भी सही नहीं लग रहा है.
रुपाली कुछ नहीं जानती थी.
रुपाली : विनय की शादी की बात का यहाँ क्या मतलब निकलता है ऋचा..
ऋचा : माँ आप भी तोह सब जानती हाँ न. आपको बताया तोह था. आपने तोह कहा था. अब्ब से परची और विनय भाई एक साथ रहेंगे. दोनों की शादी हो चुकी है. अब से दोनों हस्बैंड वाइफ बनकर रहेंगे..
रुपाली गिरते गिरते बची. अपने सर को झटकने लगी.. जो सुना था, वह सहन नहीं कर पा रही. वो नंगी हालत में चलती हुई ऋचा के सामने जा पोहंची और एक कस के थप्पड़ फिरसे उसके गाल पर मार दिए.
अब न रुपाली स्लेव थी और न hi ऋचा.. इस बार ऋचा खुल कर रट हुए चीख कर बोलने.
ऋचा : आप भी वह वहीँ मौजूद थी माँ. पापा भी वहीँ थे. वहीँ सब बातें हुई थी. पायल की शादी भाई से नहीं हुई थी. परची के साथ हुई थी. पायल तोह हवेली से ग़ायब हो गई थी. आपने hi सब जान्ने के बाद कहा था. भाई की शादी परची से हो गई है तोह अब से दोनों एक साथ रहेंगे. परची कभी भी भाई को छोड़ कर किसी और के साथ सम्बन्ध नहीं बना सकती.
दक्ष : हाहाहा.. कुछ आया समझ में. या मैं बताओं रंडी औरत.
रुपाली नागिन के जैसे पलट कर मुझे देखने लगी.
मैं भी उठ कर चलता हुआ उसके सामने जा पोहंचा और उसके चुके को दबा दिया.
आअह्ह्ह्ह वह सिसक पड़ी. उसे दर्द भी हुआ था. अब सही मानो में उसे अपने और ऋचा के नुदे होने का एहसास हुआ था. वह नज़रें घुमा कर अपने कपडे देखने लगी.
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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..
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