Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge - Page 12 - SexBaba
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Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge





Episode:29


दक्ष : ठीक है अब उठ जाओ तुम दोनों.

मेरा कहा हर एक शब्द रुपाली के लिए ऑर्डर था. फ़ौरन उठ कर कड़ी हो गयी. साथ hi ऋचा भी उठ कड़ी हुई.

मैं सोफे पर बैठा हुआ था.

दक्ष : बताओ अपनी बेटी को तुम मेरी कोण हो.

रुपाली : ऋचा! ये मेरे मालिक हाँ और मैं मालिक की घुलम, उनकी दासी.

दक्ष : आगे बोलो रुपाली.

रुपाली : मेरा धरम मेरे मालिक की सेवा करना है ऋचा. आज से तुम भी मेरी तरह मेरे मालिक की दासी और घुलम हों. तुम भी आज से मालिक की सेवा करोगी.

ऋचा शॉकेड हो गयी : न्यू मूमममम! मैं एक आज़ाद कंट्री की आज़ाद सिटीजन हों माँ.

मैं किसी की स्लेव नहीं बन सकती. आप बनना चाहें तोह शोक से बन सकती हाँ, पर मैं---- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह माँ आपने मुझे थप्पड़ मारा.. माँ एक अनजान के लिए आपने मुझे थप्पड़ मारा.. व्हाई! माँ! व्हाई!

रुपाली ग़ुस्से से ऋचा को देखते हुए : तुझे कहा न, ये मेरे hi नहीं तेरे भी मालिक हाँ. मालिक की शान में गुस्ताखी की इजाज़त मैं तुझे तोह क्या, अपने पुरे खंडन को भी नहीं दे सकती.

मैं रुपाली को स्माइल से देख रहा था. मेरे ट्रांस में रहते हुए कैसे शेरनी बनकर दहाड़ रही थी. शेरनी तोह नहीं थी वह, एक कुत्तिया थी, जिसे काटने की बड़ी आदत थी. एक नागिन थी, जिसे डसने की बड़ी आदत थी. मुझे hi नहीं दसा था इस नागिन ने. मेरे साथ साथ मेरे पुरे परिवार को दस गयी थी. मुझे डसने के बाद पूरा परिवार hi बिखर कर रह गया था. एक साथ रहते हुए भी सब एक दूसरे के लिए पुरे मैं से नहीं जी प् रहे थे. परिवार का एक मर्द घर से धुत्कार कर निकल दिए गया था. सिर्फ और सिर्फ एक नागिन के कारण. बेपनाह नफरत हो गई थी मुझे रुपाली से.

ऋचा बेबसी के आंसू बहाने लगी. उसका गाल लाल हो चूका था. रुपाली को उसपर ज़रा भी तरस नहीं आया था.

रुपाली : आंसू मत बहा मेरे सामने. तेरे आंसू मेरे सामने कोई हैसियत नहीं रखते.

दक्ष : रुपाली चल इसे दिखा तू अपने मालिक के लिए कुछ भी कर सकती है. चल अपने कपडे उतार और दिखा मुझे अपने बदन के जलवे वह भी अपनी बेटी के सामने.

रुपाली खुश हो गयी. अपने मालिक की और से मिले आर्डर पर खुश हो गई थी. ऋचा रोना भूल कर हैरानगी से अपनी माँ को देखने लगी. जो बड़े चाओ के साथ अपने कपडे उतर रही थी. धीरे धीरे एक एक करके उसके बदन से सरे कपडे अलग होने लगे. कुछ hi देर में रुपाली मेरे सामने नुदे कड़ी हुई थी.

दक्ष : रुपाली तू आज भी बहुत सुंदर है. आज भी तोह जवान लड़कियों को परे करती है.

रुपाली अपने मालिक की और से अपने सुंदरता बारे सुनकर और भी छकाने लगी थी.

रुपाली : शुक्रिया मालिक! जो आपको दासी का बदन पसंद आया.

दक्ष : कभी फैशन शो देखा है रुपाली तुमने.

रुपाली : जी मालिक! देखा है. बहुत बार देखा है.

दक्ष : तोह चल के दिखा न मुझे उन फैशन गर्ल्स के जैसे. दिखा मुझे अपने जिस्म के जलवे. मुझपर अपने हुसैन की बिजलियाँ गिरा, मेरा मूड बना. फिर तेरे साथ मज़े भी करने हाँ मुझे.

रुपाली : जी मालिक!

रुपाली ख़ुशी ख़ुशी चलती हुई कुछ फैसले पर गई. हम ड्राइंग रूम में थे और ड्राइंग रूम काफी खुला था.

ऋचा आप अपनी लाइफ का सबसे शॉकिंग सन देख रही थी. नुदे तोह एक बेटी अपनी माँ को अक्सर देखती hi रहती है. पर किसी गैर के सामने किसी किसी को देखना नसीब होता है. आज ऋचा भी अपनी माँ को मेरे सामने नुदे देख रही थी. वह भी अपने जिस्म के जलवे दिखते हुए. एक नुमायशी औरत बनकर.

रुपाली मुझे मस्त नज़रों से देखती हुई मेरी और चल कर आने लगी. अपनी और से अपनी चाल को बहुत मस्त बना कर, अपने कोल्हे मटका कर चली आ रही थी. सच में रुपाली के मस्त फिगर और चाल का जवाब नहीं था. रंडी नहीं थी. मेरे लिए, मुझे फंसने के लिए एक बार अपने पति के बाद मुझसे चुद गयी थी. वर्ण वो बाज़ारो औरत नहीं थी. कमल की सुंदरता की मालिक थी रुपाली.

उसे देख मेरे लुंड ने भी अंगड़ाई लेनी शुरू कर दी thi.jaagon के जोड़ में कैद उसकी छूट मुझे उसके चलने से क्या hi कामुकता का एहसास करा रही थी.

मैं बदल गया था, मेरे अंदर बहुत से बदलाव आ गए थे. मैं पहले जैसा होता तोह बदला लेने के लिए कुछ और सोचता. पर अब मेरे अंदर का सब सिस्टम सोचों के साथ साथ बदल कर रह गया था.

रुपाली होंटो पर दिलफरेब मुस्कान सजाये, अपनी चाल को कातिलाना बनाये मेरी और चल कर आने लगी. एक बार भी उसने मेरी आँखों से अपनी ऑंखें नहीं हटाई थी. ऋचा को भी नहीं देखा था उसने. जो शॉकिंग फेस लिए अपने मोह पर हाथ रखे अपनी माँ को असली रंडी बनते देख रही थी.

रुपाली : कैसा लगा मालिक! आपको अपनी दासी का जलवा.

दक्ष : मस्त! एक दुम्म मस्त. तुम्हारे जलवे ने तोह मेरी पंत में तम्बू hi बना दिए है.

रुपाली की नज़र मेरे तम्बू पर पड़ी तोह होंटो पर आई मुस्कान और भी गहरी हो गई.

रुपाली : मालिक एक राउंड और लगाएं क्या.

दक्ष : नहीं! बाकि का फिर सही. ऐसा कर अपनी बेटी के सुंदर शरीर के भी जलवे मुझे दिखला.

रुपाली : जी मालिक!

रुपाली ऋचा की और पलट गई.

रुपाली : चल ऋचा उतार अपने कपडे, और खुश कर मेरे मालिक को.

ऋचा दो कदम पीछे को हैट गई.

रुपाली : मुझे इंकार सुनने की आदत नहीं है ऋचा. क्या तुम मेरे बारे में सब भूल गई हो.

ऋचा आंसू बहते हुए : माँ मैं कैसे---

रुपाली : तेरे लिए ये कोई नयी बात नहीं है. पहले कभी तू किसी मर्द के सामने नंगी नहीं हुई. मुझे सब पता है तेरे बारे में. चल देर न कर और उतार कपडे.

ऋचा अपनी माँ से बहुत डर्टी थी. रुपाली से सब डरते थे. ऋचा कुछ देर इंकार करती रही, रुपाली उसे बार बार कहती रही. फिर जब रुपाली ने उसका दूसरा गाल भी लाल कर दिए तोह रट हुए ऋचा अपने कपडे उतरने लगी.

कुछ देर में ऋचा भी मेरे सामने नंगी थी.

दक्ष : चल आ रुपाली कुत्तिया बहुत देर से मेरा लुंड तेरे और तेरी बेटी के जलवे देख कर मुझे परेशान कर रहा है. चल अब इसे शांत कर.

रुपाली ऋचा का हाथ थम कर मेरे पैरों में बेथ गयी.

रुपाली : ऋचा अब मालिक की सेवा का समय शुरू होने जा रहा है तोह आंसू बहाना बंद कर. नहीं तोह तुम मुझे अच्छे से जानती हो. मालिक की सेवा में कमी आई न तो फिर तेरा मैं वह हाल करुँगी तुम सोच भी नहीं सकती.

रुपाली ने पहले मेरी पंत की बेल्ट खोली, फिर बटन खोल कर उसे लूसे किया. मैंने भी उठ कर अपनी पंत निचे कर दी. साथ hi अंडरवियर भी. मेरा लुंड फनफनाता हुआ सामने आया तोह रुपाली बड़े शोक से उसे थाम गई.

ऋचा टुकर टुकर मेरे लुंड को ताकने लगी.

मैं ऋचा में दिमाग में था. वह अपना दुःख दर्द भूल कर मेरे लुंड के बारे में सोचने लगी थी.

ऋचा : इतना बड़ा.. उफ्फफ्फ्फ़ मैंने ऐसे hi एक लुंड की तोह कल्पना की थी.

मैंने उसकी सोच में सवाल कर दिए और बोलै मुझे भी तोह कबसे ऐसे hi एक लुंड की छह थी. ऋचा की सोच.. हाँ पर इसका मतलब ये तोह नहीं मैंने इसे लेने की छह भी दिल में पाल लोन. पता नहीं कोण है ये. माँ को देखो कैसे पागल होने लगी है. कितनी खुश दिख रही है अपने बेकार किसम के मालिक की सेवा के लिए. मैं ऐसे hi तोह नहीं किसी को भी अपनी विर्जिनिटी दे सकती. पहले इसके बारे में जाँऊगी. मैं को भय तोह इसके साथ hi सब कर जाऊँगी. पर पहले इसे जानना भी ज़रूरी है. पता नहीं कोण है. और माँ का मालिक बन बैठा है.

दक्ष : रुपाली क्या ऐसे hi देखती रहेगी. इसे प्यार कर, तेरे मालिक का लुंड है. देख कितना बेताब हो रहा है. ऋचा को भी साथ मिला. मिलकर सेवा कर मेरी और मेरे लुंड की.

रुपाली ने ऋचा को बस घूरा hi था. ऋचा एक हाथ अपने गाल पर रख कर दूसरे हाथ से फ़ौरन hi मेरे लुंड को थाम गई.

रुपाली : तू भी इस काम में एक्सपर्ट है. चल मेरे साथ मिलकर मालिक की सेवा कर.

रुपाली ऋचा के साथ झुकी और मेरे लुंड को चाटने लगी. मैंने फिरसे ऋचा के दिमाग में जा घुसा.

ऋचा की सोच : उम्मम्मम कितना देलीकॉउस है. कितना गरम है. इसका टास्ते कितना अलग कितना मज़े वाला है. आह्हः ऋचा क्या करना है इसे परख के. माँ ने भी तोह मुझे फ्रीहैण्ड दे दिए है. भूल जा सब कुछ और मौका का फायदा उठा ले. पता नहीं फिर तेरे नसीब में ऐसा लुंड आये क न आये. पहले hi एक तगड़े लुंड के लिए बहुत समय निकल चुकी हों.

मैं मुस्कुरा पड़ा ऋचा की सोच पर.

ऋचा धीरे धीरे मस्त होने लगी. लुंड को चाटने के साथ साथ मोह में लेने के लिए उतावली होने लगी.

दक्ष : रुपाली तू मेरे तत्तो को चूस, ऋचा को मेरा लुंड चूसने दे. मैं ऋचा के चेहरे को hi देख रहा था. मुझे उसके चेहरे पर ख़ुशी दिखी. रुपाली मेरे आर्डर को फॉलो करते हुए मेरे टट्टे चूसने लगी तोह ऋचा मेरे लुंड के सुपड को मोह में भर गयी. नज़र उठा कर मुझे देखा. ऐसे एक्सप्रेशन देने लगी. जैसे वह ये सब मजबूरन कर रही हो. पर अब उसका पूरा पूरा मैं बनने लगा था. उसकी छूट रिसने लगी थी. ऋचा को और भी गर्माने के लिए मैंने अपने बूट की नोक को उसकी छूट पर लगा दिए. ऋचा पीछे को सरकने लगी. तोह रुपाली जिसका मोह निचे hi था. मेरे टट्टे मोह से निकल पर ऋचा से बोली

रुपाली : ऋचा तू अभी भी पूरी तरह से खुद को मालिक की सेवा के लिए तैयार नहीं कर पाई है. लगाओ एक और थप्पड़ या--

ऋचा मोह से लुंड निकल कर : माँ कर तोह रही हों आपके मालिक की सेवा. वहां कुछ भी टच हो तोह बॉडी में मूवमेंट तोह होगी hi.

दक्ष : ठीक है. अब चुसू फिरसे मोह में लेकर.

ऋचा ने एक नज़र मुझे देखा और मेरे लुंड को चूसने लगी. मैं बूट की नोक से ऋचा की छूट को कुरेदने लगा.

रुपाली भी रिलैक्स होकर मेरे टट्टे चूसने लगी. धीरे धीरे ऋचा की बेचैनी रुपाली से भी ज़यादा बढ़ने लगी. मेरे बूट की नोक और लुंड की गर्मी ने उसे बेहाल करना शुरू कर दिए था.

मैं और मेरा लुंड दोनों मस्त मूड में आ गए थे. ऐसे समय पर मैं रुपाली के दिमाग में गया और उसके दिमाग में बोलै.. 090078601

बस फिर क्या था. रुपाली मेरे ट्रांस से बहार आ गई. उसे एक झटका लगा. मेरे टट्टे उसके मोह से निकल गए थे. वह लड़खड़ा गई थी. 2-4 सेकंड के बाद वह खुद को, मुझे और ऋचा को देखने लगी. बेपनाह हैरत भरे भाव उसके चेहरे पर आ गए थे. खुद को और ऋचा को नुदे देख कर उसे अनलिमिटेड झटके लग रहे थे. फिर वह ड्राइंग रूम में चरों और देखने लगी.

ऋचा मेरे लुंड चूसते हुए हैरानगी से अपनी माँ को देखने लगी. वह मेरा लुंड मोह से निकल कर अपनी माँ से पूछना चाहती थी. माँ क्या बात है. पर वह सिर्फ सोच कर hi रह गयी. मैं अपना हाथ उसके सर पर रख कर लुंड निकलने से रोक दिए. वह एक तिरछी नज़र से मुझे देख कर फिरसे मेरे लुंड को चूसने लगी. अब वह मेरी स्लेव काम और हवस की स्लेव ज़यादा बन चुकी थी. उसकी छूट को अब भी मेरे बूट की नोक कुरेद रही थी. ऋचा बहुत आगे निकल चुकी थी. उस सीमा पर पोहंच चुकी थी जहाँ छूट का पानी न निकले तोह ऋचा क़यामत कड़ी करदे.

रुपाली झटकों से बहार आई तोह चीख पड़ी.

रुपाली : riiiiiiiiichchchaaaaaaaaaa.. ये सब क्या है. ये कोण है और तुम क्या कर रही हो. मैं क्या कर रही थी. ye..ye..ye तोह किसी कोठी का ड्राइंग रूम दिख रहा है. हम तो हवेली में थे न. किसी कोठी के ड्राइंग रूम में कैसे आ गए.

रुपाली पहले तोह चीखी थी. फिर धीरे धीरे वह शांत पड़ती चली गई. उसकी आवाज़ नीची होने लगी थी. लगने वाले झाकते उससे सहन नहीं हो रहे थे. हज़ारों तरह के प्रश्न उसके दिमाग में गूंजने लगे थे. उसे कुछ समझ नहीं आ रही थी.

ऋचा ने फिरसे मेरे लुंड को मोह से निकलने की कोशिश करि तोह मैंने उसके दिमाग को अपने कण्ट्रोल में लेकर अपना लुंड उसके मोह से निकलवा दिए.

उसे अपनी राइट साथ सोफे पर बिठा दिए. वह बोलना तोह चाहती थी. पर बोल नहीं प् रही थी. उसे अपने कंडीशन पर हेरात होने लगी थी.

मैंने ऋचा के होंटो पर ऊँगली फेरने लगा : तू कुछ बोली तोह एक hi झटके में तेरी सील खोलूँगा. आराम से रहेगी तोह प्यार से खोलूँगा. ऋचा दर गयी. अपनी माँ को देख कर, उसकी हालत और बदली सिचुएशन पर वह भी हैरत में आ गई थी. पर मुझसे दर भी गई थी.

दक्ष : चल फिर से मेरे लुंड को चूस. इस बार मैं तेरे सर को नहीं दबाओगे. तूने लुंड निकलने की सोची तोह फिर--

ऋचा : nnn..nahi..nahi निकलूंगी.

दक्ष : (स्माइल के sath)chal फिर चूस मेरे लुंड को. देख तेरे होंटो की गर्मी के लिए कितना मचल रहा है.

ऋचा मेरा लुंड फिरसे मोह में ले गई. रुपाली कुछ नार्मल हो गई थी. मैंने उसे अपने कण्ट्रोल में लिया और अपने दूसरी साइड बिठा दिए. पीछे से हाथ घुमा कर उसका चुका पकड़ लिया. फिर उसके दिमाग को आज़ाद छोड़ दिए. वह खुद को मुझसे चिकपी देख कर दर गई.

रुपाली : ममम.. मैं यहाँ कैसे आई. मम.. मैं तोह वहां कड़ी थी. एकदुम्म से कैसे यहाँ आ गई.. रुपाली की हैरत हर लम्हा बढ़ती hi जा रही थी.

दक्ष : ठीक वैसे hi. जैसे मैं भी नहीं जनता था. तेरे कमरे में कैसे पोहंचा था. तुझे कैसे छोड़ रहा था. कैसे पायल दी और अलका आ कर मुझे तुझे छोड़ते हुए देख गयी थी. ठीक वैसे hi तू भी यहाँ पर मौजूद है.

रुपाली के साथ साथ ऋचा को भी झटका लगा. ऋचा मेरा लुंड अपने मोह से निकल कर मुझे देखना चाहती थी. मैंने कसके उसके चुत्तड़ पर एक थप्पड़ मार दिए.

रुपाली के चुके को दबा दिए. वह चीख padi.uska चुका कुछ लाल पद गया था. पर मैंने छोड़ा नहीं.

रुपाली : तुम कोण हो. ये सब तोह दक्ष के साथ हुआ था. तुम तोह दक्ष नहीं हो.

दक्ष : हाहाहा मैं hi दक्ष हों रंडी चची.. मेरी आवाज़ पर घोर नहीं किया तुमने. मेरी आँखों में मौजूद आग देख कर भी नहीं समझी हो रंडी चची.. हैरत की बात है, इतना सब करके भी तुम मुझे भूल गई. तेरे जैसी मास्टरमाइंड औरत ऐसा काण्ड करके भला कैसे भूल सकती है.

रुपाली पुरे ज़ोर से अपना चुका मुझसे छुड़वा कर उठ कड़ी हुई. मैंने भी उसे ढील दे दी.

ऋचा ने भी सर उठाने की कोशिश करि. अब उसका मंद दिरवेर्ट हो चूका था. छूट गीली भी थी. फिर भी उसकी छूट की आग मेरे बारे में जान जाने पर ठंडी पड़ने लगी थी.

मैंने भी उसे मोह से लुंड निकलने दिए.. वह भी झाकते से उठ कड़ी हुई और अपनी माँ के बराबर कड़ी होकर मुझे हेरात से देखने लगी. ऋचा इस बार बहुत ज़यादा दर गई थी. वह समझ गई थी, मैं बदला लेने के लिए लौट आया हों.

रुपाली मेरे ट्रांस से बहार निकली तोह पुराने वाली रुपाली बन गयी. पहले जो मेरे लिए अपनी बेटी पर बरस रही थी. जितनी आग मेरी वफादारी में उसके मोह से ऋचा पर बरस रही थी. अब वही आग रुपाली मेरे बारे में जान जाने पर मुझपर बरसाने लगी थी.

रुपाली : टूउऊउउउउ! तू लौट आया है दक्ष! बड़ी ढीट मिटटी का बना है तू. इतना सब तेरे साथ कर दिए. फिर भी तू लौट कर आ गया.

दक्ष : क्या करता रंडी चची. तुझसे और तेरे पुरे खंडन से बदला जो लेना था मुझे.

रुपाली हैरान हो गयी : खंडन..?? तुम नहीं जानते क्या..?? मैं अपने माँ बाप की इकलौती बेटी थी. मेरे माता पिता नहीं रहे थे. अपने खंडन में मैं अकेली hi बची थी. तू किस खंडन से बदला लेने की सोच रहा है.

दक्ष : हाहाहा!! क्यों ऋचा तू भी नहीं जानती क्या अपनी माँ के खंडन के बारे में.

हाहाहाहा. बहुत बड़ी रंडी है तू रुपाली. तू hi नहीं तेरा पूरा खंडन hi रंडी खाना है. रंडी खाने से आई है तू.. समझी तू रंडी औरत. तू रंडी है रंडी, तेरी माँ रंडी, तेरी बहने रंडी. तेरे भाई दलाल. तेरे भाई बहनो के बेटियां रंडी. उनके बच्चे दलाल.. तुम सब के सब एक रंडियों और दलालों के खंडन से हो. हाहाहाहा

रुपाली की ऑंखें इस बार सच में आग उगलने लगी थी. आज सही मानो में वह एक डायन नज़र आ रही थी. ऐसी डायन जो किसी का भी खून चूस ले. किसी को भी ज़िंदा दर्गोर कर दे. उसकी ऑंखें अपनी जगा से बाहर आने को बेताब हो रही थी. ऋचा अपनी माँ को देख कर बहुत दर गई. वह 4 कदम पीछे को हैट कर कड़ी हो गई.

रुपाली : नहीं हों मैं रंडी. समझाआआआआ tuuuuuuuuuuuuu.. नहीं है रंडी मेरी माँ. नहीं है दलाल मेरा बाप. कोई भी नहीं है रंडी मेरे खंडन में. कोई भी दलाल नहीं है मेरे खंडन में. सबके सब महान पुरुष हाँ. बहुत बड़ा नाम है उनका. उनका नाम सुनकर सब थार थार कांपने लगते हाँ. मेरे खंडन के मर्द किसी को घूर कर भी देख लें तोह सामने वाले की आत्मा उसके शरीर को छोड़ दे.

ऋचा कभी मुझे तोह कभी अपनी माँ को देख रही थी.

दक्ष : हाहाहा.. तू तोह लावारिस है न रंडी.. हाहाहा अभी क्या कह रही थी तू. तू अपने माता पिता की इकलौती औलाद थी. वह मरे तो तू दुन्या में अकेली रह गई थी. हाहाहा रंडी खुद से hi अपने घट्टिया खंडन के बारे में बता गयी.

रुपाली को एक और झटका लगा और इस बार वह फिरसे मुझ खोजती नज़रों से देखने लगी.

उसका ग़ुस्सा कमज़ोर पड़ने लगा. मेरे लिए दर उसका अंदर से ख़तम हो गया था. मैं जैसा भी था. पर रुपाली अपने मायके परिवार के मर्दों को भी परे करती थी. बहुत डेरिंग वीमेन थी रुपाली. उसका कोई भी बीटा उसपर नहीं गया था. शायद मेरे चुटिया चाचा के लुंड में, जिगर में वह पावर नहीं होगी. वर्ण राजा ठाकुर का खून इतना बुज़दिल और घट्टिया नहीं निकल सकता था.

दक्ष : तुम ये सब कैसे जानते हो. ये बात तोह कोई भी नहीं जनता. सिवाए मेरे बच्चू के. विक्रम भी नहीं जनता तू कैसे जान गया. मेरे बच्चे मेरे साथ गद्दारी नहीं कर सकते.. फिर तुझे किस ने बताया.

ऋचा बोल पड़ी : माँ विनय भाई की शादी को लेकर जो घटना घाटी थी. मुझे तब hi कुछ भी सही नहीं लग रहा है.

रुपाली कुछ नहीं जानती थी.

रुपाली : विनय की शादी की बात का यहाँ क्या मतलब निकलता है ऋचा..

ऋचा : माँ आप भी तोह सब जानती हाँ न. आपको बताया तोह था. आपने तोह कहा था. अब्ब से परची और विनय भाई एक साथ रहेंगे. दोनों की शादी हो चुकी है. अब से दोनों हस्बैंड वाइफ बनकर रहेंगे..

रुपाली गिरते गिरते बची. अपने सर को झटकने लगी.. जो सुना था, वह सहन नहीं कर पा रही. वो नंगी हालत में चलती हुई ऋचा के सामने जा पोहंची और एक कस के थप्पड़ फिरसे उसके गाल पर मार दिए.

अब न रुपाली स्लेव थी और न hi ऋचा.. इस बार ऋचा खुल कर रट हुए चीख कर बोलने.

ऋचा : आप भी वह वहीँ मौजूद थी माँ. पापा भी वहीँ थे. वहीँ सब बातें हुई थी. पायल की शादी भाई से नहीं हुई थी. परची के साथ हुई थी. पायल तोह हवेली से ग़ायब हो गई थी. आपने hi सब जान्ने के बाद कहा था. भाई की शादी परची से हो गई है तोह अब से दोनों एक साथ रहेंगे. परची कभी भी भाई को छोड़ कर किसी और के साथ सम्बन्ध नहीं बना सकती.

दक्ष : हाहाहा.. कुछ आया समझ में. या मैं बताओं रंडी औरत.

रुपाली नागिन के जैसे पलट कर मुझे देखने लगी.

मैं भी उठ कर चलता हुआ उसके सामने जा पोहंचा और उसके चुके को दबा दिया.

आअह्ह्ह्ह वह सिसक पड़ी. उसे दर्द भी हुआ था. अब सही मानो में उसे अपने और ऋचा के नुदे होने का एहसास हुआ था. वह नज़रें घुमा कर अपने कपडे देखने लगी.


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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


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थैंक्स भाई

अगली बार कोशिश करूँगा भाई. सिचुएशन के हिसाब से पिक्स मिलनी मुश्किल हो जाया करती हाँ.

थैंक्स भाई

थैंक्स भाई

थैंक्स बट्टू भाई.. दक्ष इंडिया पोहंच चूका है. अब शुरू होने जा रहा है उस का बदला.. साथ में चलेगी लोक सेवा भी.

संजना बारे डिटेल आगे चलकर मिलेगी

थैंक्स भाई

ट्विस्ट के बिना मज़ा नहीं आता भाई 😃

चल जायेगा उनके बारे में भी आगे चल के पता चल जायेगा. सब स्टेप बी स्टेप सामने आता जाएगा.

थैंक यू मित्रो सपोर्टिंग के लिए!
 
बहुत शुक्रिया भाई. आपके hi लिख रहा हूँ भाई. आपको पढ़कर मज़ा आया जान कर अच्छा लगा..

उम्मीद है आगे भी आपको ऐसे hi मस्त मस्त पढ़ने को मिलता रहेगा.


थैंक ु भाई

शुक्रिया कारन भाई

सम्राट के लिए कोई ऑप्शन नहीं छोड़ता चाहता था वह इसलिए मार दिए.

कुछ लोगों को बिना प्रैक्टिकल के समझ नहीं आती.

ये तोह होना hi था..

येह.. लॉन्ग वे तो जो.. थैंक्स फॉर सपोर्टिंग भाई

शुक्रिया भाई

ऐसा तोह उसे करना hi था. अपने जैसो को क्यों मरती वह

एक जान गँवा कर भी अकाल तिनके नहीं आयी बाओ वळून की.

माला के अलका तक पोहचने के बाद चार और लड़कियों की भी किस्मत खुल गई. नताशा के साथ साथ margaret(KOMAL) षिमुना और संजना के लिए ये बेस्ट हुआ है.

एअर्थ पर आने के बाद षिमुना को पहली और सबसे बड़ी ख़ुशी मिल गयी.. साथ hi उसे इनाम भी मिल गया.

रुपाली दक्ष के ट्रांस में रहते हुए विक्रम, विनय और परची को आर्डर देती चली गई.

अब तोह मनोरंजन के साथ साथ खूब धमाल भी होगी.. अब से कहानी एक नयी दिशा में मुद जाएगी.

बहुत बहुत शुक्रिया भाई


शुक्रिया भाई..

शुक्रिया आप सब का साथ बने रहने के लिए और रेवोस देते रहने के लिए. ✨
 
शुक्रिया भाई.

शुक्रिया भ

थैंक्स भाई

शुक्रिया भाई.

सॉरी आपकी न मानने के लिए.. पूरी कोशिश करूँगा..

थैंक्स

सुक्रिया महाकाल बीआरओ

बहुत बहुत शुक्रिया स्मिथ भाई..

अब तोह कैयो के साथ मज़े करेगा.. :लाफ:

हम्म ये तोह देखने वाला होगा. बदला की पहली क़िस्त तोह दक्ष ने वसूल कर ली.

शुक्रिया भाई.

शुक्रिया भाई.

थैंक U..Thank ु..

आप सब का बहुत बहुत शुक्रिया साथ बने रहने के लिए और प्यारे रेविएवस देते रहने के लिए... ✨
 
Episode:30

दक्ष : हाहाहा! स्ट्रेंज. अति स्ट्रेंज.. एक रंडी को भी अपनी नुदितय का एहसास है.

रुपाली : बकवास बंद कर कुत्ते... तुझे तोह जान मार देना चाहिए. मार देती तोह आज ये सब न देखने को मिलता..

दक्ष : ओह्ह्ह सो साद चची जी. आप बड़ी चतुराई से प्लान बना कर भी पूरी तरह से सफल नहीं हो पायी. किसी धंदे करने वाली रंडी के जैसे अपना शरीर मुझे सौंप गयी. सफल होकर भी आप पूरी तरह से सफलता प्राप्त नहीं कर पायी. कितना गिरना पड़ा था आपको चची जान. एक महान परिवार की देवी सम्मान महिला होकर आपको एक रंडी बनना पड़ा. फिर भी आप और आपका परिवार अपने मकसद में सफल नहीं हो पायेगा.

बड़ा दुःख होता है चची, जब अनथक म्हणत करने के बाद भी इंसान को पूरी कामयाबी न मिले. कामयाबी पाने के लिए आपने खुद को भी दो पर लगा दिए था. पर अफ़सोस आपका मिशन पूरा नहीं हो सका.

कई कोशिशें करने के बाद भी आप राजा ठाकुर को मार नहीं पायी.. राजा ठाकुर मारा जाता तोह फिर कोई भी आपकी, आपके परिवार की राह में आने लायक न बचता. एक मैं था, जिसे आपने बड़ी पालननिंग से घर से निकलवा दिए. ऐसे हालत पैदा कर दिए, मैं कभी लौट कर भी न आ सकूँ.

पर फिर भी आपको पूरी सफलता नहीं मिली.. बहुत अफ़सोस है मुझे आपकी नाकामी पर पायरी चची जान.

अलका का मामला बीच में आया तोह अपने मकसद में चेंज ले आये आप लोग. राजा ठाकुर से बदला लेने के साथ साथ उनकी बेपनाह दौलत के साथ साथ अलका के खानदानी ख़ज़ाने की छह भी मैं में पाल बैठी. वाह्ह्ह्ह चची वाह्ह्ह्ह.. कितनी महान हाँ आप. कितना महान है आपका परिवार..

बदले का लिए दौलत के लिए क्या कुछ नहीं कर गयी आप. आपका परिवार न जाने क्या कुछ कर गया होगा. क्या कुछ करने की सोच रहा होगा.

पर अब मैं ा गया हों न. तोह आपके साथ साथ आप सब की उलटी गिनती शुरू हो गयी है. बड़ा दर्द दिए था मुझे चची जान आपने. ऐसा दर्द जिसके कारण मैं बरसों अपने घर की और नज़र भी नहीं कर सका.

आज भी न करता तोह जल्द hi आप सबका मिशन पूरा हो जाना था.

पर मुझे बेहद अफ़सोस है चची जान. अब आप या आपके परिवार का कोई भी सदस्य कभी सफल नहीं हो सकता. मैं होने hi नहीं दूंगा. मैं लौट आया हों न. और मेरा सामना करने के लिए आपके खंडन में कोई भी मर्द नहीं होगा. ऐसा मुझे 100% यकीं है. राजा ठाकुर के रहते हुए सबके सब चूहे की तरह बिलो में छुप कर बैठे हुए थे.

मैदान मारने के लिए आपको जिस्म फरोशी के धंदे कर उतरना पड़ा. आपके परिवार वाले सब जानते हुए भी चुप रहे.

इसका एक hi मतलब है चची जान. वहां कोई मर्द है hi नहीं. मर्द हाहाहा चची आपके परिवार में कोई मर्द नहीं है. और आधे मर्द हाँ, अब वह भी मैं नहीं रहने दूंगा.

रुपाली की तो बोलती hi बंद हो गई thi.woh सोच भी नहीं सकती थी. मैं इतनी डिटेल से सब जान सकता हों. ऐसे चेतावनी भी दे सकता हों.

ऋचा ज़यादा शॉकेड थी, वह इतनी साडी बातें नहीं जानती थी.

रुपाली पुरे दिनों की थी. उसने फ़ौरन hi खुद पर काबू पाया और अपने कपडे उठाने लगी.

दक्ष : क्या करना है इस शरीर को छुपा कर. मैं तोह इसे एक बार इस्तेमाल भी कर चूका हों. अपने होश में न सही, पर मई आपके इस शरीर को इस्तेमाल तो कर hi चूका हों. रहने दें ऐसे hi अपने शरीर को.. वैसे आप बिना कपड़ो के कसम से बहुत क़यामत लग रही हाँ. बड़ी मुश्किल से आपके इस सूंदर शरीर के सूंदर जलवे देख कर खुद पर काबू पाए हुआ हों.

मैं कामिनी स्माइल से बोलै तोह रुपाली नागिन की तरह फुँकारते हुए बोली.

रुपाली : बस्सस! बहुत हुआ. अब एक भी शब्द और अपने मोह से मत निकलना दक्ष. वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा. तुम पहले भी कुछ नहीं थे, अब भी कुछ नहीं हो. पहले राजा ठाकुर के कारण हम अपना मकसद पूरी तरह से हासिल नहीं कर पाए थे. पर अब राजा ठाकुर की सल्तनत तबाह ो बर्बाद हो चुकी है. अब तुझे, राजा ठाकुर को या तेरे पुरे परिवार को कोई भी नहीं बचा सकता. तू न भी सामने आता, तो भी तुझे कहीं से भी ढूंढ कर सामने ले आया जाया. अब hi तोह खुल कर बदला लेने का समय आया था दक्ष. अब हम दिखाएंगे राजा ठाकुर को अपनी असली पावर. अब कोई नहीं बचेगा. कोई भी नहीं. पायल सिंह, परिधि सिंह, तेरी माँ, तेरी बुआ, उसकी बेटियां कोई भी नहीं बचेगी. मर्द हिजड़े बनेगे तोह औरतें रंडियां.

दक्ष : रंडियां... हाहाहा.. चची तुम मसखरी बहुत करती हो. शादी से पहले किसी नाटक कंपनी में काम तोह नहीं करती थी. वहीँ से सीखी होंगी ऐसी हँसाने वाली बातें. तुम यहाँ, इस कोठी में कैसे पोहंची हो. अब से पहले कुछ भी याद क्यों नहीं था. कैसे अपने साथ साथ अपनी बेटी को भी नंगा करके मेरा लुंड चूस रही थी. सब भूली हुई हो क्या चची. सब याद करो, फिर डायलाग बोलना.

मैं हस्ता चला गया

और.....

रुपाली सब सोचती चली गई. जैसे hi साडी बातें उसकी समझ में आयी तोह चक्र कर सोफे पर गिर पड़ीं.

मैंने ऋचा को देखा वह परेशान कड़ी मुझे, अपनी माँ को देख रही थी. मैं आगे बढ़ा और ऋचा के चुके को पकड़ कर मसल दिए.

ऋचा : आह्हः दक्ष भाई प्ल्ज़ ऐसा मत करो. मेरी कहीं भी कोई गलती नहीं थी. मैंने कुछ भी नहीं किया था. मेरे साथ ऐसा मत करो. मैं आपकी छोटी बेहेन हों..

दक्ष : हाहाहा! भाई!! बेहेन!! हाहाहा... कितनी नादाँ बन रही हों तुम ऋचा. गलतियां तोह बहुत सी की हाँ तुमने. अब तुम्हे कुछ भी याद नहीं आ रहा है तोह मामला तुम्हारी मेमोरी का है. कोई नहीं, धीरे धीरे सब याद आता जायेगा. मेमोरी भी सही से काम करने लगेगी. जल्दी किस बात की है. याद है मैंने क्या कहा था. शांत रहूगी तोह तू प्यार से करूंगा, शांत नहीं रहोगी तोह एक hi झटका और------ हाहाहा

ऋचा दर गयी.

ऋचा : भाई! तुम तोह मेरे भाई हो. कैसे मेरे साथ ऐसा कर सकते हो. नहीं भाई प्ल्ज़ नहीं मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हों.

दक्ष : ये तोह कुछ भी नहीं है. मेरे साथ उस समय कितना कुछ किया गया था. मैंने तोह कुछ भी गलत नहीं किया था. सब तुम्हारी माँ ने किया था. तुम तोह सब जानती थी न. फिर भी मैंने अपनी सफाई में कितना बोलै था. किसी ने मेरी सुनी थी.

तुम्हे हमेशा के लिए अब मेरी बांके रहना होगा ऋचा. अपनी मर्ज़ी या बिना मर्ज़ी से. वह भी सबकी नज़रों के सामने. तेरी माँ भी मेरी दासी बनकर रहेगी. पहले जो बोलै था, वह सब सच था. अब तुम्हारी मर्ज़ी है, मन मर्ज़ी से मेरी दासी बनकर रहोगी या बिना मर्ज़ी के. अब्ब से तुम कभी भी किसी और की नहीं बन सकती. बनने की सोच भी नहीं सकती. सोचोगी तोह तुम्हारे साथ सख्ती से पेश आऊँगा मैं.

ऋचा सर झुकाये फिरसे आंसू बहाने लगी. वह जान गयी थी, उसकी सुनने वाला दक्ष नहीं रहा मैं. पहले तोह मैं सबके लिए कुछ भी कर जाया करता था. कुछ भी मान लिया करता था. किसी की भी आंख में ानुस नहीं देख सकता था. पर अबका दक्ष टोटली चेंज्ड था.

दक्ष : चल जा कर अपनी माँ के सर के बाल पकड़ कर खेंच, उसे थप्पड़ मार. सबत कर तू मेरी घुलम है.

ऋचा : नहीं दक्ष! मैं ऐसा नहीं कर सकती.

दक्ष : वह तो तुझे करना hi पड़ेगा.

ऋचा इंकार करती रही. मैंने उसके दिमाग को अपने कण्ट्रोल में लिया. पूरी तरह से नहीं, वह सब समझ रही थी. पर उसका खुद पर कोई अख्तियार नहीं रहा था. न चाहते हुए भी वह अपनी माँ की और बढ़ने लगी. रुपाली भी तेनसेद हालत में मुझे और ऋचा को देख रही थी. बाद की बातें वह भी सुन चुकी थी.

ऋचा रुपाली के सामने पोहंची और रुपाली के बाल पकड़ने hi वाली थी. रुपाली तुरंत उठ कड़ी हुई और ऋचा की कलाई पकड़ ली.

रुपाली : तू मेरी बेटी होकर मेरे सर के बाल खेंचेगी.

ऋचा : कोण बेटी, एक रंडी की भी कोई बेटी होती है क्या...???

ऋचा मेरी मन मर्ज़ी से बोली तोह रुपाली झटका खा गयी. मोह फाड़े ऋचा को देखने लगी. उसकी ऑंखें ग़ुस्से से उबलने लगी.

रुपाली : रीछा! मैं तेरी ज़ुबान खेंच लुंगी. अपनी माँ से ऐसी बात करती है

ऋचा ने ज़ोर लगा कर अपनी कलाई छुड़वाई और उल्टा हाथ रुपाली के मोह पर मार दिए. रुपाली चीखती हुई सोफे पर गिर पड़ी.

रुपाली अपने होंटो से उमड़ आने वाला खून को अपनी हाथ से पूंछते हुए बोली.

रुपाली : ऋचा तूने अपनी हद पार कर दी है. उस कुत्ते के लिए मुझे थप्पड़ मार दिए तूने. मेरे साथ ऊंचा बोलने वाले को मैं नहीं छोड़ती, तूने तोह फिर भी मुझे थप्पड़ मार दिए. अपनी माँ को थप्पड़ मर दिए. रुपाली सिंह को थप्पड़ मार दिए.

ऋचा : सुन रंडी! तुझे मेरे मालिक की दासी बनना होगा. तुझे मेरे मालिक की सेवा करनी होगी. तुझे मेरे मालिक के कहे हर एक शब्द पर सर झुकना होगा.

अब रुपाली को अंदाज़ा हुआ कह बात कुछ और है. वह मुझे देखने लगी तोह मैं उसे देख कर कमीनेपन से हसने लगा.

दक्ष : हाहाहा! कैसा लगा अपनी बेटी का ये रूप रुपाली डार्लिंग... ऋचा के दिमाग से मुझे निकलना पड़ा था. वह दोनों हाथ मोह पर रखे रोने लगी थी.

ऋचा : माँ मैंने खुद से आपको थप्पड़ नहीं मारा. मैं नहीं जानती मुझे क्या हो गया था. ऐसा hi कुछ भाई और परची के साथ भी हुआ था. वह दोनों भी कुछ नहीं जान पाए थे. नहीं जान पाए थे दोनों भाई बेहेन होकर सुहागरात मन रहे हाँ.

रुपाली ने ऋचा को थाम कर अपने गले से लगा लिया. और उसकी पीठ सहलाने लगी. मेरी और देखते हुए उसकी आँखों में एक बार फिरसे आग दहकने लगी थी.

रुपाली : ये सब क्या है. कहाँ रहे हो तुम इतने समय तक. कैसे कर रहे हो तुम ये सब. या तोह तुम दक्ष नहीं हो या...... तुम इतने बदल कैसे सकते हो. कैसे मुझे और मेरी बेटी कुछ भी समझ नहीं प् रही हाँ. कैसे मैं और मेरी बेटी यहाँ आयी हाँ.

दक्ष : हाहाहा! काला जादू.. काला जादू सीख कर आया हों मैं अफ्रीका से.. इसी काले जादू से तेरे पुरे खंडन का विनाश करूँगा मैं. सबको रंडी बनाओगे मैं. एक भी मर्द मरेगा नहीं. सब ज़िंदा रहेंगे, सब के सब अपने खंडन की औरतों को धंदा करते देखेंगे.

दुश्मन को लरज़ने के लिए ऐसे hi डायलाग बोलने पड़ते हाँ. बाद में मैं पता नहीं क्या कुछ करने वाला था रुपाली के खंडन के साथ. अभी सब नहीं सोचा था मैंने. पर रुपाली को पूरी तरह से तोडना चाहता था मैं. इतना ख़ौफ़ज़दा कर देना चाहता था. उसके परिवार वाले देख कर दहशत में आ जाते.

जो रुपाली अब तक नहीं दरी थी. कन्फ्यूज्ड थी. काले जादू का ज़िक्र आया तोह सच में बहुत ज़यादा दर गयी थी. औरतें जल्द hi काले जादू पर विश्वास कर लेती हाँ. रुपाली भी कर गयी थी.

उसे यकीं की परसेंटेज बढ़ने के लिए मैंने उसे टेलिपाथी द्वारा ऋचा से अलग किया. फिर ऋचा को अपने कण्ट्रोल में लेकर थप्पड़ मार मार कर रुपाली का दोनों गाल लाल करवा दिए. बहुत सी गालियां भी दी थी ऋचा ने अपनी माँ को.

अब सही मानो में दरी थी रुपाली कुत्तिया. दहशत ज़ादा होकर वह मुझे देखने लगी थी. वह मुझे ऐसे देखने लगी थी. जैसे भूत को देख रही हों. उसका सारा दमखम निकल गया था.

मैं सोफे पर बेथ चूका था.

दक्ष : तुम दोनों चाहो तोह कपडे पहन कर यहाँ से जा सकती हो. मैं तुम दोनों को नहीं रोकूंगा. जाओ वो पड़े हाँ कपडे..

रुपाली और ऋचा कुछ नहीं समझी. पर मेरी और से परमिशन मिलने पर अपने कपडे उठा कर पहनने लगी. मैंने दोनों को बारी बारी कण्ट्रोल में लेकर दोनों के कपडे पहाड़ दिए. दोनों ने अपने अपने हथु में अपने फटे हुए कपडे देखे तोह बेबसी से एक दूसरे को देखने लगी.

दक्ष : जाना चाहो तोह जा सकती हो. दुन्या के किसी भी कोने में जा छुपा {मैं चुटकी बजाते हुए} दूसरे hi लम्हे तुम दोनों फिरसे मेरे सामने होगी. यकीं नहीं आया होगा न अभी तुम दोनों को. चलो यकीं करवाता हों.

दोनों चीख पड़ी : nahi..nahi..humen यकीं आ गया है.

दक्ष : तोह तुम दोनों मेरी कोण हो.

रुपाली ने पहले अपने होंटो ज़ोर से bhenche..fir बड़ी मुश्किल से अपने होंठ खोल कर धीमे से बोली : आप हम दोनों के मालिक हाँ.

मैंने ऋचा को देखा जो अपने एक हाथ से दूसरे हाथ को दबा रही थी. अपनी माँ को थप्पड़ मारने पर उसका हाथ दर्द करने लगा था.

दक्ष : ऋचा कोण हो तुम मेरी.

ऋचा भी अपनी माँ के जैसे कश्मकश में रहते हुए धीरे से बोली

दक्ष : तुम दोनों की आवाज़ मुझे खोलनी पड़ेगी..

दोनों एक साथ ऊंची आवाज़ में : हम दोनों आज से आपकी घुलम हाँ.

दक्ष : गुड! ऐसे hi वफादार बानी रहना. मुझसे दग़ा करने की सोचना भी मत.. आज दिन भर तुम दोनों ऐसे hi बिना कपड़ों के रहोगी. वैसे भी कपडे तुम दोनों पर सूट नहीं करते. रंडियों को क्या ज़रूरत है कपड़ों की. तुम दोनों तोह फिर भी मेरी दासी हो. अपने मालिक की सेवा तुम दोनों का धरम है.

चलो मेरे लिए पहले कॉफ़ी का इंतेज़ाम करो. फिर खाने का. चाहो तो मेरा काम तमाम करने के लिए कॉफ़ी या खाने में ज़हर भी मिला सकती हो. मैं डेविल स्माइल से बोलै तोह रुपाली शॉकेड हो गयी.

उसने तोह मैं में सोचा था, किचन में कुछ तोह ऐसा मिलेगा, जिससे दक्ष को मारा जा सकता हो. फिर दोनों को वहां से निकल भागने में आसानी बन जाएगी.

दक्ष : तुम दोनों अभी दिल से मेरी घुलम नहीं बानी हो. मुझे शक है, तुम दोनों मुझे मारने की कोशिश कर सकती हो. इसलिए अभी से वारं कर रहा हों. ऐसा सोचा भी तोह वह ज़हर खुद से तुम दोनों के खाने में शामिल हो जायेगा. कहा न ाफिरका से काला जादू सीख कर आया हों. अफ्रीका का जादू पूरी दुन्या में सबसे खतरनाक जादू माना जाता है.

जाओ अब कितेचेन में.. मैं उठा कमरे की और बढ़ने लगा. अपनी पंत मैं पहले hi सही कर चूका था. लुंड तोह नहीं बैठा था. मैंने फिर भी उसे कवर कर लिया था. कमरे में पोहचते hi मैं निक्केर में होकर बीएड पर लेट गया. एक हाथ से अपने लुंड को मसलने लगा.

मुझे षिमुना की याद आने लगी थी. लास्ट टाइम उसके साथ hi मज़े किये थे. रुपाली और ऋचा के कारण खड़ा हुआ लुंड मुझे षिमुना की याद दिला गया था.

मैं षिमुना के दिमाग में पोहंचा तोह फ़ौरन hi वापिस भी लौट आया. मैं झटके से उठ बैठा. मैं बड़ा हैरान हुआ था, षिमुना के दिमाग में जा के.

एकदुम्म से hi षिमुना बदल कर रह गई थी. कामिनी अपने प्लेनेट पर जवान बाद में हुई थी. छूट पहले खुलवा ली थी उसने. षिमुना भी एक एक पवित्र लड़की सबत हुई थी. मैं सोच कर हैरान रह गया था.

उसी समय मेरे दिमाग में गुरु जी की आवाज़ गूंजी

"जो भी सच्चे मैं से तुमसे जुड़े गए. उसकी आत्मा पवित्र हो जाएगी"

गुरु जी इतना बोल कर फ़ौरन hi चले गए थे. मैं अभी कुछ देर पहले रुपाली और ऋचा को झटके देकर आया था. यहाँ कमरे में आते hi, षिमुना के दिमाग में घुसते hi मैं भी झटको की लपेट में आ गया था. कितने हैरान कर देने वाले इन्सिडेंट्स मेरी लाइफ में आ रहे थे.

मैं फिरसे षिमुना के दिमाग में गया तोह

षिमुना : ेहेहेहेहे! दक्ष क्या हुआ. भाग क्यों गए थे मेरे दिमाग से.

दक्ष : तुम है रही हो शिमि डार्लिंग.

षिमुना : हाए! दक्ष! इतने प्यार से क्यों बात कर रहे हो तुम मुझसे. शिमि भी प्यार भरे धीमे अंदाज़ में बोली तोह उसकी आवाज़ में बढ़ चुकी मिठास से मैं सहारजादा होने लगा. उसके दिमाग में रहते हुए भी मुझे अब मज़ा आने लगा था. बड़े सुकून का सा एहसास मुझे होने लगा था.

दक्ष : तुम पल भर में इतनी बदल गई हो. मेरा खुद से ऐसे बोलने का मैं होने लगा.

शिमि ये सब क्या है. अभी गुरु जी आये थे मेरे पास. कह रहे थे---

षिमुना : मेरी आत्मा भी अब अलका के जैसे पवित्र आत्मा में कन्वर्ट हो चुकी है दक्ष. मैं बता नहीं सकती दक्ष. मैं कितनी खुश हों. मुझे अपनी लाइफ में आज सबसे बड़ी ख़ुशी मिली है. तुम मेरे दिमाग में हो दक्ष. तुम तोह अच्छे से जान सकते हो मेरी फीलिंग्स को. जानो और देखो मैं कितनी खुश हों.

मैं ठंडी आह भरते हुए कुछ साद सा होक बोलै : नहीं! शिमि अब मैं तुम्हारे दिमाग में रहते हुए तुम्हारे दिमाग को तुम्हारी मर्ज़ी के बिना रीड नहीं कर सकता. अब तुम जो कुछ भी सोच रही हो, मैं नहीं जान प् रहा. मुझे केवल तुम्हारी आवाज़ hi सुनाई दे रही है. और कुछ नहीं. न hi मैं तुम्हारी आँखों से कुछ देख प् रहा हों.

मुझे ऐसा लगा जैसे षिमुना अपनी जगा से उछाल पड़ी हो. मैं दिमाग की दुन्या का खिलाडी षिमुना के बारे में अंदाज़ा भी लगा सकता था. समझ नहीं सकता था. वह पवित्र क्या हुई थी. मेरे लिए एक बंद किताब बन गई थी. जिसे मैं बिना उसकी मर्ज़ी जे खोल नहीं सकता था.

षिमुना : yaaaaaaaaaaaaaahoooooooooo!! एक और खुशखबरी.. मेरी ख़ुशी और भी बढ़ गई है दक्ष. फिर टोन बदलते हुए बोली... हँ! तो तुम मेरे दिमाग में रहते हुए मेरे विचार नहीं पढ़ सकते. मेरी आँखों से कुछ भी नहीं देख सकते.

दुखी अंदाज़ में : हाँ! शिमि डार्लिंग ऐसी hi बात है. कितनी गलत बात हुई है न. ऐसा नहीं होना चाहिए था शिमि.

षिमुना : क्यों नहीं होना चाहिए था (षिमुना कामिनी एकदुम्म से hi पटड़ी से उतरने लगी) हर लड़की अपने मैं में जाने क्या कुछ सोचे हुए होती है. वह नहीं चाहती उसकी सोचों को कोई और जाने. मैं भी उन्ही लड़कियों में से एक लड़की हों दक्ष. मैं भी नहीं चाहती तुम कभी मेरे दिमाग को मेरे मर्ज़ी के बिना पढ़ो.

अंत में षिमुना मुझे छेड़ते हुए बोली.

दक्ष : साली! मैं तुझसे इतने प्यार से बात कर रहा हों. और तुम हो कह अपना रेट hi बढ़ाये जा रही हो.

षिमुना : ेहेहेहे! जाली न.. हाहाहा लगी न आग.. होहोहो हेहेहे हाहाहा अब आएगा मज़ा.. बड़े सुपरमैन बनते थे न तुम. अब मेरे दिमाग में घुस कर अपनी मन मणि कर के दिखाओ.

दक्ष : कामिनी मैंने पहले कभी तेरे दिमाग में घुस के कोई बदमाशी की है क्या. जो अब करूँगा.

षिमुना : तुम इतने भी सीधे नहीं हो, जितने बनने की कोशिश करते हो. पहले तुम बिजी थे, सफर में थे. अब इंडिया पोहंच चुके हो, तोह ज़रूर कोई न कोई बदमाशी तुम नेरे साथ ज़रूर करते. अब तुम बदल भी गए हो न. मैं क्यों तुम पर पूरा पूरा भरोसा करों. सुना है मर्द बड़े वह होते हाँ. और तुम भी एक मर्द hi हो. हँ!

बड़ी देर से षिमुना की बातें सुनकर मैं खुद पर काबू बनाये हुए थे. अब खुद पर कण्ट्रोल नहीं हुआ. मैं खुल कर हसने लगा. षिमुना भी खिलखिलाने लगी.

षिमुना : कसम से दक्ष लाइफ बड़े मज़े की हो गई है. बड़ा सुकून सा मैं महसूस करने लगी हों. अपने प्लेनेट पर रहते हुए भी मैंने कभी ऐसा सुकून फील नहीं किया था.

दक्ष : अच्छा! चलो अच्छी बात है. अब मुझे साडी बात डिटेल में बताओ. ये सब क्या है. कितनी देर पहले ये घटना घाटी है.

षिमुना : ेहेहेहे ये घटना नहीं है. ये तोह गुड न्यूज़ है मेरे लिए भी और--

दक्ष : और..??

षिमुना नॉटी होते हुए : और........ तुम्हारे लिए भी.

दक्ष : मेरे लिए कैसे. तुम्हारे दिमाग में मन मणि करने की पावर मैं खो चूका हों. मेरे लिए गुड न्यूज़ कैसे हो गयी भला.

षिमुना : ेहेहेहे.. मन मानी तुम अब केवल मेरे hi दिमाग में नहीं कर सकते हो दक्ष. और भी कुछ दिमाग हाँ जिनके अंदर घुस कर तुम मन मणि नहीं कर सकते.

दक्ष : हैरान होक) क्या मतलब..? कुछ और ब्रेन्स से क्या मतलब है तुम्हारा

षिमुना : दक्ष अलका वाली बस्ती में जो गुफा वाला मटर था न.

दक्ष : हाँ! वहां की कोई बात है क्या.

षिमुना : सुनो तोह! गुफा से रिलेटेड माला वाला hi मटर है.

षिमुना फिर मुझे सब बताने लगी. सब सुनकर मैं बहुत सुरप्रीसेड हुआ.

पांच पांच पत्नियां......

ओह्ह्ह.. ये डायरेक्ट मुझे गुरु जी ने नहीं बताया था. मैं मैं में हसने लगा. मैं इस फील्ड का इंसान रहा hi कहाँ था. पांच पांच पत्नियों का पति बनने का मैं सोच भी कैसे सकता था. मेरे लाइफ के माईनिंग्स बदल गए थे. उस घाटी घटना से पहले मैं और इंसान था. प्यार करना और प्यार बनता मेरी सबसे बड़ी छह हुआ करती थी. पिछले 6 सालों ने मेरे अंदर और भी कई रंग भर दिए थे. एक आग भरी थी मेरे अंदर तोह मुझे सेक्स और नशे की भी लत लग गयी थी. अब ट्रैंनिंग के दौरान और बाद में अभी तक मैंने ड्रिंक नहीं करि थी. इसका मतलब ये नहीं था. मैं उसे छोड़ चूका था.

जो कुछ मुझे मेरे परिवार से मिला था. ज़रूरत पड़ने पर शराब hi तोह मेरे काम आया करती थी.

अब पांच पांच लड़कियां मेरी पत्नियों के रूप में आने वाली थी. और उन्ही पांचू में एक अलका भी थी. ये बड़ी अजीब न्यूज़ थी मेरे लिए. मेरे अंदर ऐसी फीलिंग्स अब रही hi कहाँ थी. मेरे अंदर तोह अब केवल आग hi आग थी. नफरत hi नफरत थी. रुपाली के लिए उसके परिवार के लिए और न जाने मेरे परिवार के लिए भी मेरे अंदर या नहीं.

पहले ज़रूर थी. अब सामना होता तोह सही से पता चलता.

षिमुना : क्या हुआ, एकदुम्म से कैसे खामोश हो गए तुम. ओह्ह मैं समझ गयी तुम्हारी फीलिंग्स बारे. अलका को लेकर साद हो गए हो न तुम.

दक्ष : जोके अच्छा सुना लेती हो तुम शिमि.

षिमुना : जोके...?? मैंने कोनसा जोके सुनाया है तुम्हे दक्ष.

दक्ष : यही! ये जोके नहीं तोह और क्या है. मैं क्यों साद होने लगा अलका को लेकर के. अब मेरा उससे नाता hi कहाँ रहा है. और फिर मुझे अब ज़रूरत भी महसूस नहीं होती उसकी. और न hi मैं उसे सोचना चाहता हों. तुमने पांच लड़कियों की खबर सुनाई है मुझे. रिलेशन्स तोह मैं कइयों से बना सकता हों पर शादी नहीं कर सकता. शादी करने के लिए फीलिंग्स की ज़रूरत होती है. और मेरे अंदर ऐसा कुछ नहीं है.

षिमुना : मतलब क्या है तुम्हारा..?? हैं! हमारे बीच जो कुछ हुआ था वह बिना फीलिंग्स के हुआ था. क्या वह सब हवस थी. बताओ मुझे. तब तुम्हरे अंदर हवस थी या मेरे अंदर.. मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी दक्ष.

षिमुना फूलन देवी बनने लगी. मैं जनता था, वह ऐसा अंदाज़ में क्यों बोल रही है.

दक्ष : तुम चाहती हो मेरे अंदर फीलिंग्स आ जाएँ.

षिमुना मेरे बदले लहजे और बात पर अपना ग़ुस्सा भूल गयी.

षिमुना : ऐसा करके मैं खुद को खुश नसीब समझूंगी.

दक्ष : उसके लिए तुम्हे वह काम करना पड़ेगा, जो तुम करना नहीं चाहती. तुम वह काम कर गयी तोह मुझे लगता है तुम मेरे अंदर फीलिंग्स को जगाने में सफल रहोगी.

षिमुना खुश हो गयी. चहकरते हुए बोली : दक्ष तुम्हारे लिए मैं आकाश से तारे भी तोड़ कर ला सकती हों. तुम बोलो मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर जाऊँगी. तुम्हारे दर्द को कम्प्लीटली ख़तम करने के लिए, तुम्हे फिरसे पुराने वका दक्ष बनाने के लिए कुछ भी कर जाऊँगी.

दक्ष : ऐसे नहीं तुम प्रॉमिस करो.

षिमुना ; प्रॉमिस की क्या बात है दक्ष. तुम एक बार कह दो तोह मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर जाऊँगी.

दक्ष : नहीं ऐसे नहीं. तुम प्रॉमिस करो.

षिमुना : मुझे आज मिली पवित्रता की कसम. मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर जाऊँगी. जो भी तुम्हारे मैं की छह है. मैं वह पूरी करुँगी. अब खुश! चलो बताओ क्या है वह बात. जिसके कारण तुम्हारे अंदर के मुर्दा जबज़ट ज़िंदा हो जायेंगे.

मैं साद होक : तुम्हे बहुत दर्द होगा षिमुना..

षिमुना हैरान होक : मुझे दर्द होगा.. ऐसे क्या बात है, जो मुझे दर्द देगी. चलो मुझे दर्द हुआ भी तोह तुम्हारे लिए वह भी सहन कर जाऊँगी. अब खुश.

दक्ष चाहतके हुए : ये हुई न बात.

षिमुना : अब बोल भी दो. क्या है वह बात.

पहले तोह मैंने षिमुना के दिमाग में रहते हुए hi एक किश करि. षिमुना स्माइल कर गयी.

दक्ष : मुझे लगता है, जिस दिन तुम मुझसे अपनी गांड की ओपनिंग करवा लोगी, उसी दिन मेरे मुर्दा जज़्बात बेदार हो जायेंगे.

Eeeeeeeeeeeeeeehhhhhh..........shimuna चीख पड़ी...

षिमुना : दक्ष कमीने तुम बाज़ नहीं आओगे न कभी. जब देखो यही एक baat.is एक बात के शिव तुझे कुछ और सुझाई भी देता है क्या.. कितनी बार कहा मैं वह तुम्हे नहीं दे सकती. उसे देने की हिम्मत मैं खुद में नहीं पाती. मेरा वह छेड़ खुलने लायक नहीं है. मैं मर जाऊँगी कसम से. तुम्हारी एअर्थ के हिसाब से नहीं है वह मेरी.

षिमुना बेबसी से बोली तोह मैं ज़ोर ज़ोर से हसने लगा..

हाहाहाःहाहा.. वडा करने से पहले, कसम खाने से पहले सोचना चाहिए था तुम्हे.

अब या तोह तुम अपनी कसम पूरी करोगी. या फिरसे मेरे अंदर की मर चुकी लव फीलिंग्स बारे कभी बात नहीं करोगी.

षिमुना की बोलती बंद हो चुकी थी. कुछ देर और षिमुना से बातें करने के बाद मैं उसके दिमाग से लौटा तोह बंद आँखों से hi मुझे कमरे में किसी के होने का एहसास हो गया..

मैं रुपाली और ऋचा के दिमाग में घुसा तोह पता चला. ऋचा हथुन में कॉफ़ी का कप पकडे कड़ी हुई मुझे हेरात से देख रही थी. सोच रही थी. कितनी देर से ऐसे hi स्टेचू बांके लेता हुआ है. कभी हसने लगता है. कभी सीरियस होने लगता है.

रुपाली कोठी में नहीं थी. मुझे ऐसे गुमसुम देख कर कोठी से भाग ली थी. चौकीदार से पास hi कुछ दूरी पर मौजूद के साधू का एड्रेस लेकर वह वहां के लिए निकल ली थी. उसने सोचा था. साधु के पास मेरे जादू का कोई न कोई तोड़ होगा.

कपडे उसे चौकीदार की बीवी से मिल गए थे. अपने हिसाब से वह मुझे धोका देने से सफल रही थी.

मैंने ऑंखें खोल कर देखा तोह ऋचा मुझे देख कर डरने लगी.

दक्ष : आओ! मेरे पास आओ. ऋचा डरते डरते मेरे पास आ गई. कप लेकर साइड में रख दिए. ऋचा को पकड़ कर अपने ऊपर गिरा लिया.

अब भी वो नंगी hi थी. मेरा लुंड जो षिमुना से बातें करके ढीला पद गया था. ऋचा के मस्त बदन की गर्मी पाते hi एक बार फिरसे अंगड़ाई लेने लगा.


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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


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शेर को तोह शेरनियां मिलनी बनती हाँ. अकेला राज कर भी कैसे सकता है. कोई उसे भी टक्कर देने वाला होना चाहिए.

पांचू स्पेशल हाँ तोह परिधि ने भी अपनी इम्पोर्टेंस शो कर दी है. अब बची पायल सिंह तोह उसका भी सामने आ जायेगा.

मार्गरेट बारे का कोई परिवार है भी या नहीं. ये आगे पता चलेगा.

बहुत बहुत शुक्रिया भाई 🙏🙏
 
संजना भी इम्प करैक्टर था स्टोरी का. पहले नहीं बताया. अब सामने आया है.

अब वह अपने बारे में जान गई है. जल्द hi अपने परिवार के जा शामिल होएगी


तारा की भी किस्मत खुल गयी.. एक साथ कई गुड न्यूज़ उसे भी मिल गयी. उसे भी अपना भुला परिवार यद् आ गया.

षिमुना ये जान कर खिल उठी. वह प्रॉपर दक्ष की बांके रह सकती है. अब उसे एक रियल क्वीन बनकर दक्ष के साथ जीना होगा. उसके लिए बड़ी ख़ुशी लाइ है.

हेहेहे... कुछ नहीं रह गया भाई. सब okay okay हो गया :)

भाई शुक्रिया ब्रेन वीकनेस के बाद भी आपके इतना प्यारा रिव्यु दिए 😆
 
बहुत बहुत शुक्रिया स्मिथ बीआरओ...

शुक्रिया भाई

परची के ब्रेन को कण्ट्रोल किया था. विनय के ब्रेन को नहीं. वह तोह साला वैसे hi गधे के दिमाग के माफिक था. पि कर कुछ भी धयान नहीं दे पाया 🤣

बहुत बहुत शुक्रिया भाई

:thank_you:

🙏🙏

शुक्रिया आप सब का भाइयो.. साथ बने रहे ✨
 
:thank_you:

ये तोह है.. आखिर गर्ल्स पावर भी कोई चीज है. वह कहती हाँ न..

हम भी किसी से काम नहीं....


रुकावट तोह खुद दक्ष hi है. उसे कहाँ अब प्यार शायर में दिलचस्पी रही है.

एक पत्नी बारे वह नहीं सोचता.. यहाँ तोह फिर भी पांच की न्यूज़ सामने आ रही है. कैसे वह पांचू को एक्सेप्ट करेगा. देखना मज़ेदार होगा.


रुपाली एंड परिवार के बुरे दिन शरू हो गए हाँ.

शुक्रिया भाई! साथ बने रहें ✨
 
:)

थैंक्स भाई. मुझे भी अगला उपदटेस को लेकर जल्दी रहती है :डी

ब्रेन मास्टर एक जल्लाद सिफत इंसान था. उसका ऐसा हशर तोह होना hi था. कोमल कैसे उसे छोड़ देती.

ब्यूरो के साथ तोह बुरा hi होता है.

शुक्रिया भाई

थैंक्स भाई.. टेक्स्ट अपडेट पोस्टेड मित्र

बहुत बहुत शुक्रिया भाई.

शुक्रिया भाई...

थैंक्स ा लोट ाल ऑफ़ यू ब्रोठेर्स!! साथ बने रहे ✨
 
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