Episode:32
संजना के गिर्द मेला लगा हुआ था. पूरा स्कूल उसे घेर कर खड़ा था.
सेफ होने के बाद कोई भी स्टूडेंट वहां से घर के लिए रवाना नहीं हुआ था. बच्चू के पेरेंट्स भी वही आ गए थे.
मीडिया वाले भी एक मजमा की सूरत वही मौजूद थे, संजना को लाइव दिखा रहे थे.
संजना पहले भी एक कॉंफिडेंट गर्ल थी. माला की रे के कारण वह साडी hi बदल गयी थी. उसका कॉन्फिडेंस लावेल आस्मां की बुलंदियों को छूने लगा था. उसके चेहरे पर आया ग्लो सभी को सम्मानीय खड़े होने पर भी मजबूर कर गया था.
सब जो पहले ये जानते थे, संजना एक टीचर है, एक अनाथ लड़की है. अब वहीँ सब समझ रहे थे. संजना एक देवी है. उसके चेहरे की चमक भी लोगों के दिलों में उसके लिए ऐसे hi विचार ले कर आई थी.
संजना एक न्यूज़ रिपोर्टर के पूछे गए प्रश्न के उत्तर कुछ ऐसे बोली.
संजना : हर नारी एक माँ भी होती है. हर माँ अपने बच्चू के लिए अपनी जान भी दे सकती है. एक नारी कमज़ोर हो सकती है, पर एक माँ कभी कमज़ोर नहीं हो सकती. जब जब एक माँ के बेटे की जान खतरे में आयी है. माँ ने अपनी जान की परवा न करते हुए अपने बेटे की जान बचाई है. एक नारी लड़ना नहीं जानती पर एक माँ दुन्या के हर खतरे से लड़ना जाती है. अपने बेटे को बचने के लिए हर वह हथियार इस्तेमाल कर जाती है, जिसका इस्तेमाल उसे नहीं भी आता. (हाथ जोड़ कर ऊपर की और देख कर) एक माँ दूसरी माँ को हिम्मत और ताक़त क्यों नहीं देगी. एक माँ दूसरी माँ के दर्द को बहुत अच्छे से समझती है. एक माँ दूसरी माँ के कलेजे को छलनी होते हुए कैसे देख सकती है. मेरे बारे में सब जानते हाँ. मैंने होश संभाला तोह खुद को अनाथाश्रम में पाया. वहीँ पाली बढ़ी, वहीँ पढाई लिखे की. मेरी ज़िन्दगी का एक एक दिन एक एक लम्हा सब की जानकारी में है. मैंने अपनी पूरी लाइफ में कभी कोई हथियार नहीं उठाया. कभी कोई गन नहीं चलाई. चलना तोह दूर की बात है, मैंने कभी कोई गन हाथ में भी नहीं पड़की. इस बात के हज़ारों गवाह मिल जायेंगे आप मीडिया वळून को. सब्ज़ी काटने के लिए एक छुरी तोह मैंने उठाई है. पर कभी कोई हथियार नहीं उठाया..
निचे कुछ फैसले पर पड़ी गन को उठा कर वह फिरसे बोली..
एकककक गुणनण क्याआआआआ!! माँ काली मुझे इस दुन्या का हर हथियार चलने की हिम्मत और ताक़त दे सकती है. जय हो माँ काली की.. जय माँ काली.. जय माँ काली..
संजना की आवाज़ में ऐसी गूँज आ गयी थी. सबको अपने दिलों में वह आवाज़ उतरती हुई महसूस होने लगी थी.
संजना खामोश हुई तोह उसी पल पूरा स्कूल, पुलिस फाॅर्स और मीडिया सब एक साथ बोल पड़े..
जय माँ काली..
जय माँ काली..
जय माँ काली..
जय माँ काली..
सबके एक साथ बोलने पर ऐसी गूँज हुई. स्कूल के डरो दीवार लरज़ उठे. फर्श ऐसे हिलने लगा, जैसे भूकाम्ब आ गया हो.
बच्चों की आवाज़ सबसे बढ़कर थी.
फिर बच्चों ने एक नयी आवाज़ में बोलना शुरू कर दिए.
संजना माँ की जय हो.....
संजना माँ की जय हो.....
फिर तोह सब hi बच्चू की आवाज़ में आवाज़ मिलाने लगे..
संजना माँ की जय हो.....
संजना माँ की जय हो.....
संजना माँ की जय हो.....
संजना ने भी किसी को मन नहीं किया. उसे समझ आ गया था, उसे अब कैसे जीना है. उसे उसका लक्ष नज़र आ गया था. एक माँ ने उसे पुरे देश की, पुरे वर्ल्ड की माँ बना दिए था.
उसी समय ऊपर से 2 हेलिकोप्तेर्स शोर मचाते सुनाई देने लगे. देखते hi देखते उन हेलिकोप्तेर्स के लिए जगा खली कर दी गयी. कुछ देर में दोनों हेलिकोप्तेर्स लैंड हुए तोह एक हेलीकाप्टर से एजुकेशन मिनिस्टर जो कह एक महिला थी, वह िग पुलिस के साथ आते हुए दिखाई दी.
दूसरे हेलीकाप्टर से कम और कुछ दूसरे मिनिस्टर्स भी उतरने लगे..
सब संजना के सामने पोहंच कर हाथ जोड़ कर खड़े हो गए. जब वह हेलीकाप्टर से उतरे तोह उनके चेहरों पर भाव और थे. जैसे hi वह संजना के सामने पोहंचे तोह उनके भाव बदलते चले गए थे.
वह सब भी संजना के सामने हाथ जोड़ कर सम्मानीय खड़े हो गए थे.
फिरसे "संजना माँ की जय हो" से पूरा स्कूल गूँज उठा.
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अलका एक प्राइवेट प्लेन में बैठी इंडिया लौट रही थी.
दो घंटे तक सब शांत रहा. अलका सुकून से बैठी हुई इंडिया पोहचने के इन्तिज़ार में थी. इंडिया में कोई उसका ख़ास इंतज़ार करने वाला नहीं था. एक दक्ष था, वह भी उसका नहीं रहा था. बाकि किसी से उसे कोई ज़यादा ग़र्ज़ नहीं रही थी. देश अपना था, तोह उसके लिए तड़प और मोहबब्त थी अलका के अंदर. इसलिए जल्द से जल्द अपने देश पोहंच जाना चाहती थी.
वह भूल गयी थी जिन घट्टिया लोगों के हाथ वह लगी है. वह किस नेचर के लोग हाँ. सांप, बिच्छू पर ऐतबार किया का सकता है. पर इन ऑर्ग वळून कर कभी नहीं. जो पावर प्राप्त करके धरती के भगवन बन बैठते हाँ. कैसे वह अब माला को हाथ से जाने दे सकते थे. अलका भी ख़ास थी बाओ के लिए, पर जो वैल्यू माला की थी वह अलका की नहीं थी.
अलका ने पीछे मुद कर देखा तोह उसे प्लान में कोई भी दिखाई नहीं दिए.. पहले तोह अलका ने इसे नोर्मल्ली समझा. पर कुछ देर तक उसे कोई भी नहीं दिखा तोह उसे गड़बड़ का एहसास हुआ. अलका ने शीशे से बहार देखा तोह बादलों के ऊपर से उड़ रहा प्लेन समुद्र के ऊपर था. दूर दूर तक पानी hi पानी था.
एक बार देख कर तोह अलका में पुरे बदन में hi सनसनी दौड़ गयी. उसने सोचा अगर ऐसे hi प्लेन क्रैश हो जाये तोह------ इसके आगे वह नहीं सोच सकीय.
अलका उठी और प्लेन में दूसरे एजेंट्स और एयर होस्टेस को देखने लगी. पर उसे कोई भी दिखाई नहीं दिए. पायलट केबिन की और बढ़ी और दूर नॉक कर दिए. पर कोई रिस्पांस नहीं मिला.
अलका को यकीं हो गया कुछ तोह गड़बड़ है. अलका ने माला की मदद से दूर लॉक को पिघला कर अंदर घुस गयी.
पर ये क्या.....
अंदर कोई नहीं था. प्लेन बिना पायलट के उड़ रहा था. उसी समय प्लेन ने भी एक झटका खाया, थोड़ा सा लहरा गया. अलका ने खुद को गिरने से बचने के लिए लटक रही एक हुक को थाम लिया. फ़ौरन अलका वापिस पलटी और पैराशूट अपनी पीठ पर बांधने लगी.
पैराशूट बांधने के बाद माला की मदद से बहरी दूर पिघला कर अलका प्लेन से कूद गयी. अब तब प्लेन में हो रहे झटके बहुत बढ़ चुके थे. जैसे hi अलका प्लेन से कूदि, प्लेन बड़ी स्पीड से राइट साइड में टेढ़ा हो कर निचे समुद्र की और गिरने लगा.
अलका को ऐसा कोई एक्सपेरिंस नहीं था. वह तोह अपनी जान बचने के लिए प्लेन से कूद गयी थी. माला ने भी उसे बड़ी हिम्मत दी थी.
अलका भी बड़ी स्पीड के साथ निचे की और आ रही थी. प्लेन अब अलका से बहुत दूर हो चूका था.
कुछ देर में अलका के होश कुछ ठिकाने आये तोह अलका ने देखा, बहुत निचे एक और प्लेन भी उड़ रहा था. अब अलका बाओ वळून की चाल समझ गयी थी. अलका को बड़ा ग़ुस्सा आने लगा. कमीनो ने बड़ी कमल की चाल चली थी.
अलका अब समझ गई थी. क्यों प्लेन में उसे कोई भी दिखाई नहीं दिए था. सब के सब कूद कर दूसरे प्लेन में जा पोहंचे होंगे. इस बात का यकीं अलका को हो गया था. अलका को दूसरा प्लान भी दिखाई दे गया था. जो बड़ी स्पीड के साथ समुद्र में गिर रहा था.
अलका भी उसी स्पीड के साथ निचे की और जा रही थी. अलका को दूर दूर तक कोई भी आइलैंड भी दिखाई नहीं दे रहा था. अलका को समझ नहीं आ रही थी. वह खुद को कैसे बचाये. समुद्र में गिरी तोह समुद्री जीव उसका कीमा बना देंगे.
उसी समय पर माला चमकने लगी. अलका को सुकून मिला. वह समझ गई, माला के रहते उसे कुछ नहीं हो सकता.
अलका बड़ी स्पीड के साथ दूसरे बाओ के प्लेन के पास पोहंचती जा रही थी. दूसरे प्लेन के ऊपरी हिस्से में बने एक मिरर केबिन में तीन एजेंट्स हैवी गन्स लिए मौजूद थे. उन्हें आर्डर था, अलका को शूट कर दिए जाए. माला किसी भी हाल में हाथ से निकलने नहीं चाहिए.
जैसे hi अलका रेंज में आई. एजेंट्स अलका को शूट कर देना चाहते थे. अलका कुछ और करीब पोहंची तोह तीनो ने अलका की और गन्स सीधे करते हुए ट्रिगर दबा दिए.
उसी समय पर अलका को भी एक ज़ाब्रदास्त झटका लगा और अलका अपनी जगा से सेंकडो मीटर दूर जा पोहंची. कोई भी गोली अलका को छू नहीं सकीय थी. सभी एजेंट्स हैरान रह गए थे. ऐसे कैसे एकदुम्म से वह मुखालिफ साइड में दूर हो गई थी.
प्लेन के अंदर बैठा एक लीडर और कुछ एजेंट्स कैमरा व्यू देख रहे थे, वह भी चीख पड़े.
"ye..ye इतनी स्पीड से कैसे जा रही है"
कोई और चीखा
"ओह्ह्ह ये कैसे मुमकिन है... कैसे एक hi सेकंड में हमारी नज़रों से ओझल हो सकती है"
"इम्पॉसिबल"
हैरान तोह अलका भी हो गयी थी. उसे ऐसा लगा, जैसे किसी ने उसे थाम लिया हो. अपने बहन में जकड लिया हो. अलका बड़ी हैरान थी. पर दूसरे hi पल जब अलका फ़्लैश स्पीड के साथ उस एरिया से दूर होने लगी तोह अलका के लिए खुद को संभालना मुश्किल होने लगा.
अलका जानना चाहती थी, वह किसकी बहन में है. पर वह कुछ नहीं पूछ सकीय. उसके हवास काम छोड़ने लगे थे. माला उसके गले में न होती तोह शायद वह बेहोश हो चुकी होती. इतनी स्पीड के कारण उसका ब्लड प्रेशर उसकी रगों को पहाड़ भी चूका होता. पर वह सेफ रही थी.
जाने कितनी देर गुज़री.. अलका जो अपनी ऑंखें बंद कर चुकी थी. ऑंखें खोल कर देखने लगी तोह खुद को एक पेड़ की छाओं में लेते देख कर झटके से उठ कड़ी हुई.
"असंभव"
"ये कैसे मुमकिन है.. दूर दूर तक तोह पानी hi पानी था. फिर मैं कैसे इतनी जल्दी खुश्की पर आ गई"
अलका घूम फिर कर चरों और देखने लगी. उसे कुछ समझ नहीं आई तोह वह एक साइड में चल दी..
वही बाओ का एक प्लेन खुद से समुद्र में गिर कर डूब चूका था, तोह दूसरे प्लेन को उसी अननोन व्यक्ति ने अलका को साफल्य एक आइलैंड पर छोड़ कर ब्लास्ट कर दिए था. कोई भी बाओ एजेंट जीवट नहीं बचा था. प्लेन के टुकड़ो के साथ उसके भी टुकड़े समुद्र में गिर कर समुद्री जीवो के पेट में उतर चुके थे.
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वहीँ नताशा अपने आइलैंड पर थी.. उसे आइलैंड पर पोहंचे कुछ hi समय हुआ था. वह बहुत खुश थी. उसे गुरु जी की और से एक काम मिला था. जिसे अच्छे से अंजाम देकर उसे बेपनाह ख़ुशी प्राप्त हुई थी.
अलका को वही बचा कर एक आइलैंड पर छोड़ आई थी. किसकी मदद उसने की थी. नताशा नहीं जानती थी. वह नताशा के सम्राट की रानी अलका है. ये भी नहीं जानती थी. पर अलका को थमने हुए उसे बेहद सुकून महसूस हुआ था. अपनेपन का एहसास हुआ था.
अभी तक वह अलका के लम्स को महसूस कर प् रही थी. अपनी साँसों में उतर चुकी अलका की खुशबु को महसूस कर प् रही थी.
नताशा मसरूर हालत में बीएड पर लेती हुई छत को टेक जा रही थी. सोच रही थी, कैसी अजीब, कितने सुकून वाली लाइफ उसे मिल गयी है. एंटी अच्छी लाइफ के बारे में तोह उसने कभी सोचा भी नहीं था.
ऐसा सब सोचते हुए नताशा फिर अपने परिवार को सोचने लगी. उसी समय वह उठी और फैसला करने लगी. अब उसे अपने परिवार को एक नज़र देख लेना चाहिए. जैसे वह तड़प रही है. वैसे hi वह भी तोह बरसों से उसके लिए तड़प रहे होंगे.
और फिर उसके परिवार का दुश्मन भी तोह है. उसे भी तोह ख़तम करना था. जितना दर्द उस दुश्मन ने दिए था. उसे भी तोह उतना hi दर्द देना था.
दुश्मन के बारे में सोचते हुए नताशा के खून की रफ़्तार बढ़ने लगी. उसकी मुट्ठियां कस्ती चली गयी. बहुत ज़यादा ग़ुस्से में आ गयी थी वह. कैसा घट्टिया दुश्मन था उसके परिवार का. जो उसके परिवार को इतना बड़ा घाव दे गया था.
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विक्रम सिंह, विनय और परची दिल्ली वाली कोठी में थे. सब परेशान बैठे हुए थे.
रुपाली के चले जाने के बाद परची विनय से दूरी बना गई थी. विनय भी बहुत गिलटी फील कर रहा था. उसे अब तक यकीं नहीं आया था, उसने अपनी hi बेहेन को छोड़ दिए था. कभी कभी वह तेनसेद हो जाता था. घबरा जाता था. कभी कभी उसे ग़ुस्सा भी आने लगता था. पायल उसके हाथ आते आते रह गति थी. पायल उसके मंद से निकल hi नहीं रही थी.
पहले जो परची को छोड़ कर, उसकी दोनों सील्स खुली जान कर पायल सिंह पर ग़ुस्से था. अब ये सोच कर "पायल सिंह के दोनों छेड़ अभी भी सेलेड हाँ" विनय बहुत खुश भी था. एक बार फिरसे वह पायल सिंह को सोचने लगा था.
दिल्ली पोहंच कर विनय और परची दोनों एक दूसरे से दूर hi रहे थे.
विक्रम सिंह : मुझे समझ नहीं आ रही, रुपाली ने हम तीनो को दिल्ली आने को hi क्यों बोलै था. ऋचा के साथ वह खुद कहाँ गयी है.
परची : डैड! माँ अपना मोबाइल भी साथ नहीं ले गयी हाँ.
विनय : डैड क्या कुछ जादू शादू वाला मटर नहीं हो सकता. जैसा सब हुआ है, मेरी शादी को लेकर के, मुझे लगता है, कुछ बहुत बड़ी गड़बड़ है डैड.
परची का सुनकर चेहरा लाल हो गया.
विक्रम ने परची को देखा तोह बोलै : मुझे सब शुरू से बताओ
परची विक्रम सिंह को सब बताने लगी.
विक्रम सिंह : विनय तुम कन्फर्म हो, शादी के समय पायल hi थी. और रूम में भी तुम्हरे साथ पायल थी.
विनय जो सोच चूका था, पायल सिंह कभी भी किसी मर्द के करीब नहीं गई. परची की दोनों खुली हुई सील्स याद आयी तोह वह बोल पड़ा
विनय : डैड मुझे लगता है, रूम में पायल सिंह नहीं थी. फेस वाला मामला मुझे कंफ्यूज कर रहा है. पर बाकि का कुछ भी मुझसे पायल सिंह वाला नहीं लगा.
परची ग़ुस्से से चीखते हुए : वह मैं थी. समझे, अब बोल रहे हो कुछ भी पायल का नहीं लगा था. जब लगा था तोह बोल देते, मेरे साथ इतना घट्टिया तोह न होता. पि कर भी तुम होश में थे तोह फिर क्यों किया मेरे साथ ये सब..
विनय शर्मसार हो गया.. विक्रम ने परची को चुप करवा दिए
विक्रम : कोई बहुत बड़ी बात है, जो हमारी समझ में नहीं आ रही. तुम दोनों की कोई गलती नहीं है.
परची लम्बी लम्बी साँसे लेकर खुद पर काबू पाते हुए विनय को ग़ुस्से से देखने लगी.
परची : माँ के बिहेवियर को लेके भी मुझे डाउट हो रहा है डैड. प्ल्ज़ कुछ कीजिये. सतीश भाई और अलका भाभी का भी कोई अत पता नहीं है.
विक्रम : चलो हम तुम्हारे नाना की हवेली चलते हाँ. अब वहीँ इस मटर को सोल्वे करना सही रहेगा. यहाँ रहे तोह कोई और गड़बड़ हो सकती है.
कुछ देर में सब गाडी में बैठे रुपाली के मायके की हवेली की और जा रहे थे.
गाडी विनय ड्राइव कर रहा था. पीछे वाली सीट्स पर बैठे परची और विक्रम सिंह को नींद आने लगी. वह बैठे बैठे hi सो गए.
गाडी जब हवेली पोहंची तोह दोनों की आंख खुल गयी.
गाडी रुक चुकी थी. विनय गाडी से उतर चूका था.
विक्रम सिंह और परची भी गाडी से उतरे तोह बहार निकल पर दोनों शॉकेड हो गए.
परची घबरा कर : डैड ये विनय हमें कहाँ ले आया है.
विक्रम भी खुद को राजा ठाकुर की हवेली में देख कर शॉकेड था..
कुछ फैसले पर एक बड़ी चेयर पर बैठे हुए राजा ठाकुर विक्रम सिंह को देख रहे थे.
विक्रम सिंह उन्हें देख कर परेशान हो गया.
विक्रम सिंह : विनय तुम हमें राजा ठाकुर के पास क्यों लेकर आये हो.
विनय जैसे होश में आ गया : ेंन! ओह्ह्ह्ह! mmm..main नहीं जनता डैड.. मैं यहाँ कैसे पोहंचा.
परची बहुत दर गयी थी. गाड़ी के दूर हैंडल को थाम कर खोलते हुए वह बोली.
"mmm..mujhe भी अब यकीन होने लगा है डैड. ज़रूर कोई भूत प्रीत का चक्कर है. mmm..mujhe यहाँ से जाना ha..mm.. मैं यहाँ नहीं रह सकती.. यहाँ पायल सिंह मेरी जान ले लेगी."
विनय भी पायल सिंह का सोच कर दर गया. यहाँ वह खुद को बचा नहीं सकता था. पायल वहां से ग़ायब थी तोह ज़रूर वह हवेली में hi होगी.. विनय हवेली की बिल्डिंग की और देखने लगा..
उसी समय पायल सिंह जो अपने कमरे की खिड़की में कड़ी हुई थी. उसकी नज़र भी तीनो पर पर गयी.. वह चीखते हुए गार्ड्स से : विनय कुत्ते को जाने मत देना.
विनय समझ गया वह चूहे दान में फस चूका है. विक्रम और परची गार्ड्स को भागते देख कर समझ गए.. वह अब यहाँ से नहीं जा सकते..
राजा ठाकुर बस तीनो को घूरे hi जा रहा था. वह कुछ भी नहीं बोल रहा था.. कुछ hi देर में गार्ड्स ने तीनो को घेर लिया..
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एक मंत्री अपने एक दोस्त के साथ अपने फार्महाउस पर बैठा हुआ था.
मंत्री : यार नंदू! हमारा खेल तोह बिगड़ hi गया. उस दो टेक की छोकरी ने हमारा सारा खेल बिगड़ दिए. वर्ण कुछ hi देर में हमारे साथी जेल से बहार होते. अगले कुछ दिनों में hi हम होते इस देश के मुख्य मंर्ती..
नंदू : वह तो तुम अब भी बनोगे. देख लूंगा मैं उस छोकरी को भी. साडी गेम ख़राब कर दी उस हरामज़ादी ने. छोडूंगा नहीं मैं उसे.
मंत्री : धीरज.. मेरे मित्र धीरज.. देखा नहीं था, कैसे कम, िग और दूसरे मिनिस्टर्स उसके सामने हाथ जोड़ कर खड़े हो गए थे. वह लड़की कोई साधारण लड़की नहीं है नंदू. वर्ण हमारे इतने ख़ास आदमियों को वह अकेली छोकरी नहीं मार सकती थी.
नंदू ये सुनकर ठंडा हो गया.. वह भी संजना के बारे में घोर करने लगा. उसे लगा, संजना के मामले में जल्दबाज़ी सही नहीं रहेगी. जल्दी करेगा तोह कोई न कोई गड़बड़ हो जाएगी. अगर वह भी मारा गया तोह फिर कैसे वह अपना मिशन कैसे पूरा कर सकता था.
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धनञ्जय ठाकुर अपने कमरे में परेशान बैठा हुआ था. उसे अभी तक समझ नहीं आई थी. क्यों उसका आदमी उसके खिलाफ हो गया था. कैसे पुलिस उसके गुप्त स्थान पर जा पोहंची थी.
ऐसे समय पर मैं उसके दिमाग में था. साडी जानकारी मैंने उसके गंदे दिमाग से प्राप्त कर ली थी. धनञ्जय ठाकुर मेरे किसी काम का नहीं था. हाँ धरती पर बोझ था. जब तक ज़िंदा रहता, ऐसे hi घिनोने काम करता रहता. उसका मरना ज़रूरी थी. उसके जैसो का मरना ज़रूरी था.
वह एक सप्लायर था. उससे बड़े बड़े मौजूद थे. मुझे धनञ्जय को मार कर आगे बढ़ना था. धनञ्जय जिसे बच्चे और लड़कियां बेचा करता था. धनञ्जय से उसका नंबर डायल करवाया. फिर उसके दिमाग में पोहंच कर उसके बारे में जाना. उसका नाम विकास था.
मैं वापिस धनञ्जय के दिमाग में आया. वह कुर्सी पर बैठा हुआ सोचों में गम था. मैंने उसे अपने कण्ट्रोल में लिया. उसके कपडे उतरवा कर उसे नंगा किया. उसके कमरे में मौजूद एक अलमारी में एक मिनी मशीन गन मौजूद थी. धनञ्जय ने उस मशीन गन को उठा लिया.
कमरे के सेण्टर में पोहंचा तोह मैंने उसे आज़ाद छोड़ दिए. वह अपने हाथ में गन देख कर हैरान हुआ. जैसे hi उसे अपने नंगे होने का एहसास हुआ तोह मशीन गन फ़ेंक कर हैरानगी से खुद को देखने लगा. अपने हथु से अपने गंदे शरीर को छूने लगा.
"yy..ye मैं एकदुम्म से नंगा कैसे हो गया. मम.. मैं तोह कुर्सी पर बैठा हुआ था"
सम्राट.....
सम्राट का नाम नहीं सुना क्या तुमने धनञ्जय ठाकुर..
वह स्टुपिड कमरे में घूम घूम कर देखने लगा. मेरी आवाज़ सुनकर फ़ौरन झुक कर वह मशीन गन उठा गया था. मशीन गन हथु में लिए कमरे में घूम घूम कर देखने लगा.
"kkk..kon सम्राट"
HAHAHA...SAMRAT को तोह पूरी दुन्या जान चुकी है. तुमने भी तोह न्यूज़ सुनी थी. तुम्हारे पार्टनर्स ने तुम्हे खबर भी तोह दी थी. भूल गए क्या धनञ्जय ठाकुर.
"kk..kahan हो तुम.. ttt..tum नज़र क्यों नहीं आ रहे हो"
धनञ्जय ठाकुर पसीना में नहाने लगा था. वह बहुत दर गया था. उसे आवाज़ तोह सुनाई दे रही थी. पर कोई दिखाई नहीं दे रहा था.
HAHAHA...SAMRAT दिखाई नहीं देकता मूर्ख ठाकुर.. सम्राट की आवाज़ और कारनामे hi दिखाई देते हाँ. अमरीका में जो हुआ था. क्या तुमने वह देखा नहीं था.
"NNN..NNN..nahi...HHHHH...haaan देखा tha..PPP...par वह सच कैसे हो सकता ha.SAMRAT जैसा कुछ नहीं हो सकता.. ये सब मैं घडत है."
हाहाहा... तुम फिर गन तुम्हारे हाथ में है. मेरी आवाज़ तुम सुन रहे हो. शूट में.. देखो मैं कहीं तुम्हे दिखाई दे रहा हों तोह भून दो मुझे गोलियों से. पूरी दुन्या में बोल दो. तुमने सम्राट को मार दिया है. फिर पूरी दुन्या में तुम्हारे नाम का टूटी बोलने लगेगा.. तुम दुन्या के सबसे बड़े सूरमे बन जाओगे. के ों! शूट में!
धनञजय ठाकुर अब भी कमरे में चरों और घूम घूम कर मुझे तलाश कर रहा था. अब वह इन्तहा की दहशत में आया हुआ था. उसका पूरा वजूद कांपने लगा था. दिखाई देने वाले को मार कर शेर तोह बन सकता था धनञ्जय ठाकुर. पर दिखाई ने देने वाले को कैसे मारता.
"BHBH....BHOOOT..BHOOOOOOOOOOOOOTTT"
हाहाहाहा..
धनञ्जय ठाकुर मुझे भूत समझने लगा था.
मैंने फिरसे उसे अपने कण्ट्रोल में ले लिया. धनञ्जय सब समझ रहा था. उसके साथ क्या हो रहा था. वह क्या कर रहा था. ये भी जान प् रहा था. पर उसका खुद पर कण्ट्रोल नहीं रहा था. अपनी आँखों से सब देख कर बहुत ज़यादा बौखलाया हुआ था. बहुत ज़यादा दहशत में आया हुआ था.
मैं धनञ्जय ठाकुर को लेकर उसके परिवार के सामने ले गया. सब उसे नंगा देख कर चीख पड़े..
धनञ्जय ठाकुर ने अपने बेटे की और मशीन गन सीढ़ी कर दी. धनञ्जय की पत्नी चीख पड़ी.
"पागल हो गए हो क्या.. अपने hi बेटे को क्यों मारना चाहते हो तुम"
धनञ्जय : हाहाहा... मैं पापी हों, मैं हथियार हों. तुम सब भी पापी हो, हथियार हो. पहले मैं तुम सब को मारूंगा, फिर खुद मर जाऊँगा. किसी को भी ज़िंदा नहीं छोडूंगा.
धनञ्जय ठाकुर बोल तोह रहा था. पर उसके अंदर हलचल मच उठी थी. वह कुछ भी अपनी मर्ज़ी से नहीं कर रहा था. मैं सब उससे करवा रहा था. न वह खुद मरना चाहता था, और न hi अपने परिवार में से किसी को मारना चाहता था.
धनञ्जय ठाकुर का बीटा भी बहुत बड़ा हरामी था. बहुत सी लड़कियों का रपे वह कर चूका था. वह अपने बाप के हथु में मशीन गन देख कर बहुत ज़यादा दर गया था. शायद मशीन गन देख कर न डरता. पर नंगा देख कर वह समझ गया था. उसका बाप पागल हो चूका है. पागल आदमी किसी को भी मार सकता है.
धनञ्जय का दूसरा बीटा कुछ दूरी पर खड़ा था. वह अपना पिस्तौल निकल कर धनञ्जय के हाथ पर फायर करने वाला था. उसका इरादा था, मशीन गन को धनञ्जय ठाकुर के हाथ से गिरा दे. फिर धनञ्जय ठाकुर को काबू में करना मुश्किल नहीं रहेगा.
पर उसी लम्हे धनञ्जय ठाकुर ने अपने हाथ को घुमा और मशीन गन का मिनी राउंड चला दिया.. कई गोलियां मशीन गन से निकली..
TAD.....TAD.....TAD.....TAD.....TAD.....TAD.....TAD.....TAD.....TAD.....TAD.....
की भयंकर आवाज़ के साथ AAAAAAAAAhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh की आवाज़ भी निकली और धनञ्जय ठाकुर के दूसरे बेटे के शरीर में अनगिनत छेड़ बन गए.
सब चीख पड़े तोह धनञ्जय ठाकुर ज़ोर ज़ोर से हसने लगा..
हहहहहहह..... कोई नहीं बचे, हराम का माल खा कर जीने वालो! सबको मार दूंगा मैं.
धनञ्जय ठाकुर का बड़ा बीटा कुछ भी नहीं कर पाया था. उसके पास कोई गन नहीं थी. धनञ्जय ठाकुर ने फिर उसे भी भूनना शुरू कर दिया. घर की औरतें गहरे सदमे में आने लगीं. पर ये भी ऐसी औरतें थी, जो ज़ुल्म की इन्तहा कर जाया करती थी. धनञ्जय ठाकुर उन सभी को भी शूट करने लगा.
किसी के सीने में तोह किसी के पैरों में फायर करने लगा..
धनञ्जय की एक बेटी काम आगे की थी. वह दर के वहीँ गिर पड़ी थी. उसे गोली नहीं मारी थी धनञ्जय ठाकुर ने.
हवेली में जितने भी बुरे थे. धनञ्जय ठाकुर ने सबको शूट कर दिए. ऐसे समय पर हवेली के कुछ नौकर और गार्ड्स दूर खड़े हुए ठाकुर को देख रहे थे. वह भी बहुत डरे हुए थे. उन्हें कुछ समझ नहीं आ रही थी. धनञ्जय ठाकुर ऐसा क्यों कर रहा था. कोई भी ठाकुर को रोक भी तोह नहीं सकता था.
ठाकुर फिर वापिस अपने आदमियों की और पलटा और मशीन गन का रुख उनकी और करते हुए एक सुपर एजेंट के जैसे स्टंट करता हुआ फायर करने लगा. देखते hi देखते कई नौकर और गुंडे खून में नहाने लगे..
ठाकुर फिर हवेली में घूम घूम कर मौत का खेल खेलने लगा.
मौत का नंगा नाच ख़तम हुआ तोह मैंने धनञ्जय ठाकुर को आज़ाद छोड़ दिए..
वह मशीन गन फ़ेंक कर वहीँ गिर पड़ा.. उसकी दिमागी हालत बहुत ज़यादा ख़राब थी. अपने hi हथुन से वह अपने परिवार को मूट के घात उतर चूका था. बहुत बड़ा झटका लगा था उसे..
मैं धनञ्जय ठाकुर के दिमाग में था. धनञ्जय ठाकुर ये सब सहन नहीं कर पा रहा था. मुझे लग गया था. वह पागल हो गया है. मैं धनञ्जय ठाकुर को फिर भी नहीं छोड़ सकता था. ऐसे घटिया इंसान को छोड़ कर मैं कोई गलती नहीं करना चाहता था. क्या पता, कभी ये ठीक हो जाए और फिर से पहले से भी बढ़कर बुरे करम करने लगे. हो सकता है, तब तक मैं इसे भूल जाऊं. मेरा मकसद बहुत बड़ा था. हो सकता था, मैं पलट कर न लौट सकूँ.. तब धनञ्जय ठाकुर कुछ ऐसा जुगाड़ भी कर सकता था. जिससे वह मेरी टेलिपाथी से बच सकता था.
उसी मशीन गन को उठा कर धनञ्जय ठाकुर ने अपनी चीन के निचे रखा और ट्रिगर दबा दिए..
हवेली में एक बच्ची के शिव कोई भी ज़िंदा नहीं बचा था. बचे थे तोह कुछ नौकर और कुछ महिलाएं बची थी.
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