Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge - Page 13 - SexBaba
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Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge

:thank_you:

येह सोफिए रानियों में शामिल नहीं है. सोफिए एक बाद करैक्टर है. उसी रूप में सामने आएगी.

उसका भी कुछ न कुछ होगा. उसका लेवल अलग है. इन पांचू का अलग है.

लौट तोह रहा है. समय तोह लग hi जाता है. बीच रस्ते में और भी बहुत से काम निकलते आ रहे हाँ.

बहुत बहुत शक्रिया भाई! साथ बने रहे ✨
 




Episode:31


दक्ष : ऋचा! रुपाली कहाँ है..??

ऋचा साद होक : कहाँ जाएँगी वह. होंगी किचन में. मुझे कॉफ़ी थमा कर बोली थी, आपको दे आऊं.

दक्ष : स्माइल से) जानती हो ऋचा! रुपाली तुम्हे छोड़ कर भाग गई है.

ऋचा : क्याआआआ..?? nnn..nahi..nahi..mom मुझे छोड़ कर कैसे जा सकती हाँ.

दक्ष : हस्ता हुआ) वह इसी इलाके में रह रहे एक साधु के पास गयी है. उसके पास जा पर मेरे काळा जादू का तोड़ करवाने गयी है.

ऋचा के चेहरे पर मुझे लेके दर के भाव आने लगे.

ऋचा : दक्ष भाई! प्ल्ज़! मेरी माँ को कुछ मत करना. मैं माँ को समझा दूंगी. वह फिरसे कोई ऐसी हरकत नहीं करेंगी.

मैं ऋचा के बालों से नाक लगा कर सूंघने लगा. मुझे मस्ती चढ़ने लगी थी. लुंड की अकड़न बढ़ने लगी थी. मैं होने लगा था, ऋचा को पटक पटक कर छोड़ने लागूं. पर ऐसा अभी करने का मैं नहीं था मेरा. मेरा मैं था, वहीँ ये खेल खेला जाए, जहाँ मेरे अपणु ने मुझे धित्कार कर निकला था. जो मुझे एक गिरा हुआ इंसान समझते थे.

मैं अब सबकी नज़रों में गिर hi गया था तोह फिर सब खुल कर करने में हर्ज hi क्या था.

उन्हें भी तोह दिखाना था. मुझपर विश्वास न करके मुझे क्या बनने पर मजबूर कर दिए था उन्हों ने. उनकी धित्कार ने मुझे कैसे ज़िन्दगी दे दी थी. उनके किये बर्ताव ने मेरे अंदर कितना ज़हर भर दिए था. कितना मुझे बदल कर रख दिए था उनके किये बर्ताव ने मुझे. मेरी माँ मुझपर यकीं नहीं कर पायी थी. एक बदचलन औरत के रचे षड्यंत्र पर अपनी कोख से जाने पर विश्वास नहीं कर पायी थी.

मेरी दीदी मेरी जान से पायरी बेहेन पायल सिंह. जो मुझपे जान निसार किया करती थी. उन्हें भी तोह दिखाना था. उनके मोह से निकले शब्दों ने कैसे मुझे एक ज़हरीला नाग बना दिए था. मेरी रगों में जो हर समय प्यार hi प्यार दौड़ा करता था. अब उन्ही रगों में ज़हर दौड़ रहा था. अब केवल नफरत hi नफरत थी मेरे विचारों में. प्यार शब्द से अपना नाता तोड़ देने के बाद मैं कैसा इंसान बन गया था. ये उसे भी पता चलना चाहिए था.

माँ और दीदी भी तोह औरतज़ाद hi थी. एक नारी कैसे सामने वाले की आँखों से देख कर उसके गंदे विचारों को नहीं जान सकती थी. मैं जब तक उनके साथ रहा था. कभी मेरी आँखों में उन्हों ने गंदगी नहीं देखि थी. फिर कैसे यकीं कर लिया, मैं ऐसा घट्टिया काम भी कर सकता था.

अलका को सोचने का मेरा मैं नहीं हो रहा था. जब कभी वह सामने आती तोह देखा जाता.

एक लम्बी सांस छोड़ते हुए मैं ऋचा से बोलै : चल मेरी निक्कर निचे करके मेरे लुंड को शांत कर. मोह में ले, अपनी छूट पर घिस. अपने बूब्स के बीच में ला के घिस. अब से तू मेरी दासी है, रखेल है. तो कर सेवा अपने मालिक की. देख कैसे तेरे निचे दबा हुआ मेरा लुंड बेचैनी की इन्तहा पर होने का बता रहा है. देख कैसे उसकी नसें तेरी इस सुंदर और गोर शरीर का एहसास पाते hi फटने को होने लगी हाँ.

ऋचा बेबसी से मेरी आँखों में देखते हुए बोली : भाई प्ल्ज़ मुझसे ये सब न करवाओ. एक बेहेन न तोह अपने भाई के सामने ऐसे बिना कपड़ो के रह सकती है और न hi वह सब कर सकती है, जो तुम बोल रहे हो. नहीं भाई प्ल्ज़ मुझे ये सब करने को मत कहो.

मुझे ग़ुस्सा आने लगा तोह वह दर गयी. मेरी आँखों में वैसे hi बड़ी कशिश आ गयी थी. मेरे घुसे में आने पर उनका रंग कुछ और भी डरावना होने लगता था. ऋचा जैसी कोमल बदन वाली, नन्हे से दिल वाली कैसे देख कर दहशत में न आती. झट से मेरी बहन से निकली और मेरी निक्कर खोल कर मेरे लुंड को हथु में थाम गई. वह कंपनी लगी थी. मैं माँ और दीदी को सोच कर जल्दी ग़ुस्से में आ गया था. उसी ग़ुस्से को देख कर ऋचा थार थार कंपनी लगी थी.

दोनों हथु से मसलने के बाद मेरे लुंड को मोह में भर कर चूसने लगी. मैं कॉफ़ी उठा कर पीने लगा. ठंडी हो चुकी थी. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा. ऐसे hi पीते हुए मैंने रुपाली के पास जा पोहंचा. वह साधू के सामने बैठी हुई थी. उसे साधु के पास पोहंचे कुछ hi पल हुए थे.

साधु : बोलो बेटी क्या पेरशानी है.

रुपाली साधु को मेरे बारे में बताने लगी. काले जादू के ज़िक्र पर साधु मुझे कुछ घबराया हुआ सा लगा. मैं फ़ौरन उसके दिगमग में घुसा तोह उसे मेरे आने का पता hi नहीं chala..saala पाखंडी था. दाल रोटी के लिए साधु बना हुआ था. कुछ जड़ीबूटियों के बारे में जनता था. उसी को काम में ला कर लोगों को बेवक़ूफ़ बना कर पैसे लुटता था.

साधु को कण्ट्रोल में लेते हुए मैंने रुपाली के मोह पर थप्पड़ मार दिए. रुपाली का मोह पहले hi ऋचा के थप्पड़ो से सुजा हुआ था. साधु के थप्पड़ पर उसके होंठ पहात गए और खून निकलने लगा. वहां 4 औरतें और दो मर्द और भी बैठे हुए थे. वो सब साधु को ग़ुस्से में देख कर दर गए. साधु पहले कभी ग़ुस्से में नहीं आया था.

साधु : साली छिनाल औरत एक मासूम को जान से मार देना चाहती है. काले जादू के नाम पर मुझसे उसकी हत्या करुणा चाहती है. चल भाग यहाँ से, नहीं तो मैं तेरी जान ले लूंगा.

रुपाली और भी दर गई और वहां से उठ कर जाने लगी. साधु वहीँ बैठी एक औरत से बोलै. तुझे क्या परेशानी है.

वह औरत अपना दुखड़ा सुनाने लगी. मैं साधु के अंदर था.

साधु : तेरे साथ लड़का कोण है.

औरत : मेरा बीटा है.

साधु : चल यही पर अपने कपडे उतार और अपने बेटे के साथ मिलकर मुझसे चुद. फिर तेरी परेशानी दूर हो जाएगी.

साधु की बात पर औरत, उसका बीटा और दूसरे सब ग़ुस्से से उठ खड़े हुए. वह चीखने लगे. साधु ऐसे hi गलत सलत बोलता रहा. फिर सब मिलकर उसे पीटने लगे. सबको पता चल गया, साधु पाखंडी है. साधु का अंजाम देख कर मैंने उसे छोड़ कर रुपाली के पास जा पोहंचा.

रुपाली एक बड़ी उम्र की महिला के सामने कड़ी हुई थी

रुपाली : दीदी मुझे किसी महँ ज्ञानी का पता चाहिए. नहीं तोह एक पापी काले जादू से मुझे और मेरी बेटी को बर्बाद कर देगा.

दूसरी महिला की आवाज़ सुनकर मैं उसके दिमाग में घुसा और उसके मोह से बोलै : जहाँ से आई है, वहीँ लौट जा. नहीं तोह तेरा अंजाम और भी भयानक होगा. वह महिला खूंखार लहजे में बोली तोह रुपाली और भी दहशत में आ गई. उसे समझ नहीं आ रही थी. सब को कैसे पता चल रहा है.

रुपाली वहां से आगे बढ़ने लगी तोह मैंने उसे अपने कण्ट्रोल में ले लिया. रुपाली वापिस कोठी की और पलटने लगी. वह जाना नहीं चाहती थी. पर मेरे कण्ट्रोल में रहते हुए वापिस कोठी की और चलने लगी.

एक गाडी सामने से आ रही थी. रुपाली उस गाडी के सामने जा कड़ी हुई. गाड़ी एक मर्द चला रहा था. उसने फ़ौरन ब्रेक लगा कर गाड़ी रोक दी. गाड़ी में एक औरत एक मर्द बैठे हुए थे.

औरत ग़ुस्से से : पागल है क्या..?? गाड़ी के निचे आ कर मरने का इरादा है क्या..??

रुपाली रट हुए : मेरे छोटे छोटे बच्चे हाँ. दो दिन से कुछ नहीं खाया मेरे बच्चू ने.. प्ल्ज़ मेरे बच्चू पर रेहम करें. कुछ मदद कर दें. भगवन आपको और देगा. रुपाली दुःख से बोली तोह औरत ग़ुस्से से चीखते हुए : शर्म करो, सूरत से तोह किसी बड़े घर की लगती हो. भीक मांग कर अपने बच्चू का पेट भरोगी. बड़े होकर वह भी भीक मांगते नज़र आएंगे.

मर्द कुछ ठरकी था. उसने 500 का नोट निकला और रुपाली के हाथ में थमा दिए. औरत उसे देख कर ग़ुस्सा करने लगी तोह रुपाली झुक कर सलाम करती हुई अपनी राह होली.

रुपाली बड़ी हैरान थी. उसका ऐसा करने का कोई इरादा नहीं था. कैसे वह भीक मांग सकती थी किसी से. किसी की इतनी औकात hi कहा थी. जो उसे भीक सकता. अपने हाथ के थामे हुए नोट को भी वह फ़ेंक देना चाहती थी. पर ऐसा कर नहीं प् रही थी.

कोठी वापिस लौटने तक रुपाली के दोनों हाथ भरे हुए थे नोटों से. जिस जिस से भी उसने भीक मांगी थी. उसे रुपाली को भीक देनी पड़ी थी. मेरे रहते कैसे न वह अपनी पॉकेट से पैसे निकल कर रुपाली को देता. रुपाली पहले वाले पैसे फ़ेंक दिए करती थी. जब भी मई दूसरे के दिमाग में घुस कर पैसे निकलवाता था. बाद में रुपाली को वहीँ फेंके पैसे फिरसे उठाने पद जाते थे.

इतनी ज़िल्लत का सामना पहले कभी रुपाली को नहीं करना पड़ा था. रुपाली को मुझपर बहुत ज़यादा ग़ुस्सा आ रहा था. वह समझ गयी थी. ये सब मेरी वजा से हो रहा था. मैं hi काले जादू से ऐसा कर रहा था. उसका बस नहीं चल रहा था, वर्ण मुझे कच्चा hi खा जाती.

दोनों हथु में पैसे थामे रुपाली कोठी में, फिर मेरे कमरे में दाखिल हुई तोह मैं उसके दिमाग से निकल आया. ऑंखें खोल कर उसे देखने लगा.

दक्ष : हाहाहा! कहा था न. कहीं भी चली जाओ. अगले hi पल तुम मेरे सामने होगी. वाह्ह क्या बात है. कमाई भी करके आई हो तुम तो. शहर भर से भीएक मांग कर आई हो. वाह्ह वाह्ह बहुत खूब, ऐसे तुम्हारा पारिवारिक ख़ज़ाने जल्दी भर जायेगा.

ऋचा मेरे लुंड से खेल खेल के पागल हुई जा रही थी. चूस चूस कर थक गई थी. मेरे लुंड का माल निकल पाने में फ़ैल हो गयी थी. अब मेरे लुंड पर बैठी हुई अपनी छूट को बड़े जोश के साथ घिस रही थी. अब वह मेरा लुंड ढीला नहीं कर रही थी. मेरे लुंड के माल की परवा वह भूल गई थी. अब वह अपनी छूट में बढ़ चुकी भयंकर आग को शांत करने में लगी हुई थी.

रुपाली ने ग़ुस्से से वह सरे पैसे फ़ेंक दिए. और चीखने लगी.

रुपाली : दक्ष! जितना ज़लील मुझे करना है करलो. एक दिन मेरा भी आएगा. तब मैं तेरा वह हाल करुँगी. तेरी हालत देख कर सब थार थार काँप उठेंगे.

दक्ष : बच्चे अपने माँ की छातियों में मोह छुपा लेंगे. माँ इतनी दहशत में आ जाएँगी मेरी हालत को देख कर. उनके वक्ष दूध निकलने से इंकार कर देंगे. दूध न मिलने पर बच्चे बिलक बिलक कर मर जायेंगे. मर्द अपनी अटक चुकी सांस लेना भूल जायेंगे. कभी ऐसा भयंकर खेल किसी ने पहले नहीं देखा होगा, मेरी हालत देख कर सब कहें, देखो हज़ारों बरसो पुराण ज़ुल्मो सितम का दौर वापिस लौट आया है..

हाहाहाःहाहा

ऐसा hi बोलना छह रही हो न तुम रंडी चची. वह खेल तोह बाद में होगा. अभी देखो, अपनी बेटी के खेल को देखो. इसकी छूट से भल भल बह रहे पानी को देखो. देखो कितनी शिद्दत से अपनी छूट को रगड़ रही है मेरे लुंड पर. देखो कैसे वह तुम्हारी हालत को भी नज़र अंदाज़ करते हुए सिर्फ और सिर्फ अपनी छूट में बढ़ चुकी भयंकर आग को शांत में मगन है.

मैंने ऋचा के दोनों चुके पकड़ कर मसल दिए.

सीईईईई अह्हह्ह्ह्ह ऋचा सिसक पड़ी : भाई प्ल्ज़ कुछ करो, मुझसे नहीं हो प् रहा है. आठ उफ्फफ्फ्फ़ मेरी आग मुझसे नहीं बुझ पायेगी

दक्ष : चल रुपाली रंडी आ और अपनी बेटी की छूट चाट..

रुपाली बेबसी से अपने होंठ काटने लगी. उसे कुछ समझ नहीं आ रही थी. वह मेरा क्या करे. कोई सलूशन नहीं था उसके पास. अब तक क्या कुछ देख लिया था उसने. मुझसे बचने की भी एक कोशिश भी कर डाली थी. पर कुछ हासिल नहीं हुआ था. उल्टा एक थप्पड़ के साथ साथ उसे भीक जैसा घिनोना काम करना पद गया था. ऐसी लचर वह पहले कभी नहीं हुई थी. अब तक डंके की चोट पर जीती आई थी.

दक्ष : रुपाली तेरे पास कोई और चारा नहीं बचा है. नंगी हो कर आ जा बीएड पर. अबसे यही तेरी ज़िन्दगी है. तू सांस भी अपनी मर्ज़ी से नहीं ले सकती. बहुत से मोके आएंगे तेरी ज़िन्दगी में. मुझसे बचने की कोशिश कर सकती है तोह कर लेना. अब तोह तुझे मेरी हर बात माननी होगी. हो जा नंगी और आ जा बीएड पर..

रुपाली मैं में सोचने लगी...

अभी इस कुत्ते की मान जाती हों. बाद में किसी मौका पर कोई और कोशिश करुँगी. अभी तोह इसके शिकंजे में जकड़ी हुई हों. कुछ नहीं कर सकती. ऐसे hi तोह नहीं मैं उम्र के लिए इसकी घुलम बांके रह सकती. मैं ग़ुलामी की ज़िन्दगी जीने के लिए तोह नहीं पैदा हुई हों. मैं तोह हुकूमत करने के लिए पैदा हुई हों. अभी बेबस हों, पर कभी न कभी तोह मुझे मौका ज़रूर मिलेगा. फिर देख लुंगी इस कुत्ते को भी और इसके परिवार को भी.

रुपाली बेमानन से नंगी होकर बीएड पर आ गयी. ऋचा ने मुझे देखा और बोली

ऋचा : भाई! कल भी तोह तुमने hi मुझे छोड़ना है. आज hi छोड़ दो न प्ल्ज़.

रुपाली ऋचा को देखती रह गई और मई हसने लगा. ऋचा अभी नशे में थी तोह ऐसा बोल रही थी. उसके विचार छूट की आग के बदल कर रख दिए थे. इतनी गरम न होती तोह कभी भी ऐसा न बोलती.

दक्ष : नहीं तुझे यहाँ नहीं, हवेली में छोडूंगा. वहीँ तेरी दोनों सील्स खोलूंगा. यहाँ मज़ा नहीं आएगा. चल उठ कर लेट जा. रुपाली रंडी चाट अपनी बेटी की छूट.

ऋचा लेती तोह रुपाली न चाहते हुए भी घोड़ी बनकर ऋचा की छूट चाटने लगी. मैं रुपाली के पीछे हुआ और उसके चुत्तड़ मसलने लगा. बड़ी गाड़ते गांड थी साली की. मसलने में खूब मज़ा आने लगा. मैं फिर हलके हलके थप्पड़ मारने लगा. रुपाली ने सर उठा कर मुझे देखा तोह. उसकी आँखों में बेपनाह नफरत थी. उसका बस चलता तोह मेरे हज़ारों टुकड़े करके कुत्तो को खिला देती.

दक्ष : चची! ये गलत है. इतना ग़ुस्सा करना सही नहीं है. इससे आपकी सेहत ख़राब हो सकती है. आपका जिस्म तोह मेरे इस्तेमाल में रह hi चूका है. अब इसी जिस्म पर मेरे हाथ पा कर आपकी आँखों में नफरत नहीं आणि चाहिए. प्रेम मिलान में सुख होता है.

बिना प्रेम के भी चुदाई का मज़ा ज़रूर मिलता है. अब से कुछ देर में तुम खुद से कहोगी. आह्हः YES.YES. ओह्ह फ़क फ़क. यू हैवे ा स्टोरंगल्य डिक.. यू अरे थे मास्टर.. यू अरे थे बेस्ट फुकेर. मोहन से शब्द निकलेंगे आठ ओह्ह्ह्ह फ़क में हार्ड लिखे के बीच..

रुपाली की आँखों में नफरत और भी बढ़ गयी. उसे ऐसे देख कर मुझे मज़ा आने लगा. मैं उसके दिमाग में गया तोह

"बोल ले जितना बोलना है कुत्ते.. करले जो भी करना है मेरे साथ.. मैंने हारना नहीं सीखा है. हर कुत्ते का दिन आता है, आज तेरा आया हुआ है तोह करके जो करना है मेरे साथ. आज तू मुझपर भरी पद रहा है. कर जा जो तेरे मैं में आ रहा है. जैसे hi मेरा समय शुरू होगा, फिर देखना तुझे अपना पालतू कुत्ता न बनाया मेरा नाम भी रुपाली सिंह नहीं.

एक कास के थप्पड़ और उसकी गांड पर मारा. वह चीख पड़ी.

दक्ष : चल चाट अपनी बेटी की छूट. देख कितनी देर से बेचैन है वह. निकाल उसकी छूट का पानी और कर उसे शांत. रुपाली ग़ुस्से में आते हुए अपनी बेटी की छूट चाटने लगी. अब मुझसे भी नहीं रहा जा रहा था. बदला तो लेना hi था. पर रुपाली साली की मस्त गांड देख कर मेरा मैं डोलने लगा था. गांड तो हवेली पर hi खोलनी सही रहती. वहीँ इसकी चीखें निकलता तोह मज़ा आता. बैक से रुपाली की छूट खूब क़हर बरपा कर रही थी. एक ऊँगली उसकी छूट में दाल में मैं अंदर बहार करने लगा. रुपाली अपनी गांड हिला गयी. छूट में ऊँगली मर्ज़ी से घुसे या बिना मर्ज़ी के. बेचैनी भी होती है और मज़ा भी आता है. ऊँगली या लुंड सज्जन का हो या दुश्मन का. मज़ा दे hi जाता है.

अभी ऊँगली घुसाई थी. जब लुंड घुसेगा, तब क्या हाल होगा रंडी चची का.

ऊँगली निकल कर अपने लुंड को थाम कर मैं रुपाली की छूट पर रगड़ने लगा. रुपाली और बी गांड हिलने लगी. उसका मन नहीं था, मेरे लुंड को अपनी छूट पर देखने का. कर भी क्या सकती थी. एक थप्पड़ और उसके चुत्तड़ पर पड़ा तोह शांत हो गई.

छूट की फांकें फड़फड़ाने लगी थी. पानी भी छोड़ने लगी थी रुपाली रंडी की छूट. छेड़ पर लुंड सेट करते हुए मैंने एकदुम्म से पुरे ज़ोर के साथ एक धक्का मार दिए.

aaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh रुपाली चीख पड़ी.

मेरा लुंड 6इंच तक एक hi धक्के में रुपाली की छूट में जा घुसा था. उसकी छूट मेरे लुंड के मामले में टाइट थी. सहन नहीं कर पायी और चीख पड़ी. बड़ी दिल दहला देने वाली चीख थी रुपाली थी. ज़रूर कोठी में गूँज गई होगी उसकी चीख. ऋचा भी दर कर अपनी माँ को देखने लगी थी.

मेरी पावर के आगे रुपाली की छूट की दीवारें फटती चली गई थी.

मैंने एक थप्पड़ और रुपाली के थप्पड़ पर मार दिए.

दक्ष : साली तू चीखी क्यों..?? पहले भी तोह तू मुझसे चुद चुकी है. मेरा लुंड पहले भी तोह तेरी छूट के घुस चूका है. तेरी छूट मेरे लुंड के लिए नयी थोड़ी न है.

रुपाली रोने लगी, मैंने एक धक्का और मार दिए. रुपाली पूरी जान से काँप उठी. उसकी चीख उसके मोह में hi घुट कर रह गई.

आज उसकी छूट की वह दीवारें भी खुल गई थी. जो पहले मेरा चाचा खोल नहीं पाया था. रुपाली बुरी तरह से कांटपे हुए अपनी गांड को हिलने लगी थी. उसका बस नहीं चल रहा था. अपनी छूट से मेरे लुंड को निकल ले.

रुपाली : आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कुत्ते दे ले मुझे जितना दर्द देना है. जितना मुझे दर्द देगा. उससे कहीं बढ़कर मैं तुझे दर्द दूंगी.

दक्ष : अब तोह मेरी और से मिलने वाले दर्द को झेल न. जब कभी मैं तेरे दाम में आया तोह पूरा पूरा बदला ले लेना मुझसे.

लुंड पीछे खेंच कर फिरसे एक धक्का मार दिए और पूरा लुंड रुपाली की छूट में.

रुपाली फिरसे चीख पड़ी. ऋचा की छूट का पानी अब नहीं निकल प् रहा था. वह भी तड़प रही थी. उसकी माँ उसकी छूट चेतना भूल कर अपने दर्द में डूबने लगी थी. उसकी कराहें कमरे में गूंजने लगी थी. दूर खुला हुआ था, ज़रूर बहार भी जा रही थी उसकी कराहें.. पर मुझे कोई फर्क नहीं पद रहा था.

मैं फिर पूरा पूरा लुंड निकल कर, रुपाली के मस्त चूतड़ों पर थप्पड़ मरते हुए स्पीड से छोड़ने लगा. कुछ देर रुपाली दर्द से तड़पती रही. फिर वह मज़े में होने लगी. जितना दर्द उसे मिल रहा था, मेरे लुंड से अब उसे उतना मज़ा भी आने लगा था. अपनी सिसकियों को दबाने के लिए अपनी बेटी की छूट चाटने लगी.

ऋचा : माँ प्ल्ज़ मुझे जल्दी से शांत कर दो. बहुत समय से मैं जल रही हों.

रुपाली ने ग़ुस्से से ऋचा को देखा..

ऋचा : माँ आप भाई की घुलम हाँ. अब मुझे ऐसे मत देखें. भाई माँ से कहु न मुझे ऐसे मत देखे.

दक्ष : खुद से समझ जाएगी. देखना कैसे तेरी छूट में गम होती है. मैं स्पीड बढ़ता चला गया. रुपाली अपनी छूट में बढ़ चुकी आग में जलने लगी.

सहन नहीं कर प् रही थी. जितना दर्द उसे मिला था, मिल रहा था. उतना अब उसे मज़ा भी आने लगा था. चुदाई का ऐसा मज़ा यक़ीनन रंडी ने पहले कभी प्राप्त नहीं किया होगा. पता नहीं षिमुना ने मुझे क्या क्या खिला दिए था. मेरा लुंड इंसानी लुंड रहा hi नहीं था. 10इंच से भी बड़ा लुंड एक लोहे के रोड जितना सख्त हो गया था. विक्रम चाचा का लुंड कहाँ इतनी पावर रखता था. रंडी चची मेरे लुंड से मिलने वाले मज़े से निहाल होने लगी.

उसकी छूट पानी पानी होने लगी. अपनी गांड हिलाते हुए ऋचा की छूट को मज़े से चाटने लगी.

ऋचा : उम्म्म्म भाई माँ को और भी स्पीड से छोड़ो. जितनी स्पीड से छोड़ोगे. उतना hi मस्त होक माँ मेरी छूट को चाटेगी.. आह्हः माँ मैं आने वाली हों, उफ्फ्फ माँ आठ माँ काट खाएं मेरी छूट को माँ.

मैं दोनों माँ बेटियों को रंडी बनते हुए देख रहा था. रंडी तो दोनों बहुत समय पहले hi बन गयी थी. न बनती तोह पायल दी के साथ ऐसे घट्टिया बर्ताव करने की कभी न सोचती.

ऋचा झाड़ गयी. कुछ देर में रुपाली भी झटके कहते हुए झाड़ गयी. पर मेरा लुंड माल छोड़ने के लिए तैयार नहीं था.

कुछ देर में रुपाली फिरसे गर्म हो गयी. ऋचा मेरे कहने पर साइड हो कर हमें देखने लगी थी. वह भी कुछ देर में और गर्म होने लगी. ऋचा मेरे लुंड की पावर देख कर, मेरा स्टैमिना देख कर पागल होने लगी थी.

कितनी देर से मैं एक जैसी hi स्पीड से उसकी माँ को चोदे जा रहा था. इतनी स्पीड से कोई भी मर्द किसी को चोदे तोह 5 मिंट से भी पहले झाड़ जाता है. पर मई नहीं झाड़ प् रहा था.

ऋचा मेरे लिए अपने मैं में विचार बदलने लगी. मेरे जैसे hi लुंड वाले की छह उसे थी. अंदर hi अंदर वह मेरे लिए वफादार बनने को मैं बना रही थी. अपनी माँ से उसे क्या मिलना था. मेरे साथ जैसा सलूक किया गया था. उसे अब हमेशा के लिए मुझसे नफरत मिलनी थी.

वो सोचने लगी. जब घुलम बांके भी छोड़ना hi है तोह अपने मैं से मेरे लिए सब गलत विचार निकल कर मेरे साथ एक हैप्पी सेक्स लाइफ जी सकती है. मेरे जैसा उसे कहीं और नहीं मिल सकता था.

मैं उसे देख कर स्माइल करने लगा. वह नहीं समझ पायी, मैं क्यों स्माइल कर रहा हों. मई उसका मैं पद सकता था. ये बात वह नहीं जानती थी.

कुछ देर में रुपाली सिसकने लगी, मस्त होने लगी. पुराने सरे विचार भूलने लगी.

रुपाली : आठ दक्ष बीटा तुम कितने स्ट्रांग हो. आठ ोुह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ सीईई आह्ह्ह्ह मा..... दक्ष बीटा तुम कितना मज़ा देते हो..

साला लुंड मूड में हो या छूट मूड में...

चुदाई का असीम आनंद प्राप्त हो रहा हो तोह विचार बदलने लगते हाँ. रुपाली मेरे लिए मन में बदले की भावना रखते हुए भी इस समय मेरे लुंड के मज़े लेने लगी थी. सब भूली हुई थी. मेरे लिए अब सब अच्छा hi उसमे मोह से निकल रहा था.

कुछ देर में फिरसे उसकी छूट में बाढ़ आ गयी. वह थक कर निचे सर गिरा गयी. मैंने उसकी कमर को कास के पकड़ा हुआ था. छोड़ नहीं रहा था.

रुपाली का शरीर अब थकने लगा था. एक hi पोज़ में रहते हुए चुदाई से अकड़ने लगा था. उसे दर्द होने लगा. पर मैं नहीं रुका और उसे उसी स्पीड से छोड़ता चला गया.

कुछ देर में रुपाली फिरसे गर्म हो गयी. थकन ग़ायब हो गयी. उसे फिरसे मज़ा आने लगा. फिरसे वह मज़े से छोड़ने लगी.

तीसरी बार वह झड़ी तोह और भी ज़यादा ढीली पद गयी. जब रिलैक्स हुई तोह उसे अपना बदन टूटता हुआ महसूस होने लगा. इतनी देर तक वह भी धमाकेदार चुदाई वह पहले कभी नहीं करि थी.

उसकी छूट में रेगुलर अंदर बहार हो रहा मेरा लुंड अब उसे मज़ा काम और जलन ज़यादा देने लगा.. उसके मोह कराहें निकलने लगी. जलन उससे सहन नहीं हो रही थी.

रुपाली : दक्ष बीटा छोड़ दो मुझे. मैं थक गई हों. बहुत जलन होने लगी है मुझे. आठ मेरा बदन अकड़ने लगा है. उफ्फ्फफ्फ्फ़ ऐसा लग रहा है, जैसे शरीर का जोड़ जोड़ अलग हो गया है.

मैंने थप्पड़ उसके चुत्तड़ पर मार कर उसके चुत्तड़ की लालजी को और भी बढ़ा दिए. फिर उसके सर के बाल पकड़ कर उसे खेंच दिए

दक्ष : रंडी चची इतनी जल्दी थक गई हो . अभी तोह पहला राउंड है. अभी तोह इसी पोजीशन में 2 राउंड और मुझे लगाने का मैं है.

रुपाली : nnn..nahi नहीं दक्ष बीटा. मुझे कुछ देर की रेस्ट कर लेने दो. फिर कर लेना. प्ल्ज़ अभी मुझे सीधा होना है. अब और ऐसे नहीं रहा जाता मुझसे.

सर के बाल खेंच कर उसके सर को झटका दिए और उसी स्पीड से उसे छोड़ने लगा..

रुपाली अब चीखने लगी थी. उसे अब मज़ा नहीं आ रहा था. अब उसे बहुत पैन होने लगा था. बदन में भी और छूट में भी.

रुपाली : छोड़ दे कुत्ते मुझे. aaahhhhhhhhhhh बड़ा पछतायेगा तू. तू मुझे जान कर भी अनजान बन रहा है. मत दे मुझे और दर्द.. आअह्ह्ह.. जितना दे चूका है, उसका बदला भी तू सहन नहीं कर पायेगा. ओह्ह्ह्ह आईईईई माआआआ.. नागिन हों मैं नागिन. एक बार का दसा तेरे पुरे परिवार को तुजसे नफरत करने पर मजबूर कर गया था. हाईटी मेरी छूट की जलन....... उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह ... दूसरी बार का दसा तुझे तेरे hi परिवार वळून के हथु मरने पर मजबूर कर देगा..

aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

मैंने रुपाली के सर को एक झटका और दिए.

दक्ष : मैं जनता हों, तू कभी नहीं सुधरेगी. रंडी चची तुझे सुधारना भी नहीं है मुझे. तेरा और तेरे परिवार का काउंटडाउन शुरू हो चूका है.

अगले 15 मिंट में रुपाली मरने जैसे हालत में हो गई थी. कभी मुझे गलियां देने लगती. बदले में मिलते थप्पड़, कभी मैं उसके बाल खेंच कर उसे झटका दे देता. उसकी गर्दन भी अब अकड़ने लगी थी.

कभी वह मेरी मिन्नतें करने लगती, रट हुए मुझसे माफियां मांगने लगती. जब मैं उसकी छूट से लुंड निकल कर उसकी बैक पर खली करने लगा तोह रुपाली धड़ाम से गिर पड़ी थी. ऐसे पड़ी थी, जैसे आधी मर चुकी हो. हआ हाय आए ोोूहः आआआआईई

की आवाज़ें उसके मोह से निकल रही थी. एक हाथ से वह अपनी छूट को दबा रही थी. जहाँ बहुत पानी था. वही उसे अपनी के अंदर बहुत ज़यादा जलन भी हो रही थी.

कुल मिला के मैंने रुपाली की हालत बहुत ज़यादा ख़राब कर दी थी.

ऋचा अपना मज़ा भूल कर अपनी माँ की हालत देख कर दहशत में आ गई थी.

दक्ष : क्या देख रही है. ऐसा hi हाल तेरा भी होने वाला है. झट से वह मेरे पेअर को थाम गयी.

ऋचा : नहीं भाई! मेरे साथ ऐसा मत करना प्ल्ज़. मैं कसम कहती हों, हमेशा आपकी दासी बनकर रहूंगी. माँ के जैसे कभी भी अपने मैं में आपके लिए बुरा नहीं लाऊँगी. ऋचा दरी सेहमी रोने जैसे आवाज़ में बोली.

दक्ष : तो सुन फिर, मुझे कभी भाई मत बोलना. भाई नहीं रहा हों मई तेरा. तू मुझे हमेशा मालिक बुलाया करेगी. अकेले में और सबके सामने. जल्द hi हम हवेली लौटने वाले हाँ. वहां तुझे मेरी दासी के रूप में सामने आना होगा. बोल कर पाएगी ऐसा. वहां के नौकरों के सामने सामने भी तुझे एक दासी बनकर रहना होगा. नौकरों के बीच मेरी दासी बन कर मिलने वाले अपमान को सहन कर पाएगी.

ऋचा अपने होंठ काटने लगी. बड़ी मुश्किल में पद गयी थी. ऐसे दिन भी देखने पद सकते थे. उसने सोचा नहीं था.

दक्ष : तेरी मर्ज़ी है. तुझे खुद से मेरी स्लेव नहीं बनेगी तोह फिर वैसे hi बनेगी. जैसे रुपाली खुद को भूल कर मेरी स्लेव बानी हुई थी.

ऋचा : नहीं.. bhai..mm..maalik.. मैं आपकी दासी बनकर रहूंगी. सभी बातें मानूगी.

ऋचा सर झुका कर आंसू बहाने लगी.

साली मेरी बेहेन की शादी अपने भाई के साथ करते समय कितनी खुश थी. अब खुद की बारी आई तोह रोने लगी.

मई वहां से उठ कर दूसरे कमरे में जा कर लेट गया. वहीँ से रुपाली के ब्रेन में कोडवर्ड बोल कर उसे फिरसे घुलम बना दिए. कभी भी कुछ भी कर सकती थी. नागिन थी साली, बच के रहना था मुझे. टेलिपाथी के कारण मुझे कई कई घंटे के लिए अचानक से कहीं बिजी भी होना पद सकता था. और इसी बीच वह कोई भी काण्ड कर सकती थी. अभी मैं घर में नहीं था. वर्ण ज़यादा टेंशन नहीं थी मुझे. रुपाली रंडी थी, तेज़ दिमाग की थी, तोह मुझसे बचने के लिए कुछ भी कर सकती थी.

नाहा धो कर फ्रेश हुआ और सोचने लगा अब किसके दिमाग में जाना सही रहेगा. पहले मैं कोठी के चौकीदार और उसकी बीवी के दिमाग में जा घुसा. वहां सब देखा, वहां सब सही था. चौकीदार की पत्नी रुपाली की चीखें सुनकर जान गई थी. कोठी के एक कमरे में चुदाई हो रही है. दूर खुला हुआ hi था. चीखें सुनकर वह वही आ गई थी. मेरी चुदाई देख कर जहाँ वह मस्त हो गई थी. वहीँ मेरी दरिंदगी देख कर दर गयी थी. फ़ौरन वहां से भाग भी गई थी.

वहां से निकल कर मैं परिधि के दिमाग में जा घुसा. वह अपने कमरे में hi थी. पायल दी उसके कमरे में आई हुई थी. और मेरे hi रोपिक पर बात कर रही थी.

पायल : परिधि तुझे क्या लगता है. दक्ष ने वह सब नहीं किया था.

पायल तीसरी बार ये शब्द दोहरा रही थी. परिधि बुक खोले पढ़ने का नाटक कर रही थी. वह पायल दी को जवाब नहीं देना चाहती थी. पर पायल दी के बार बार बोलने पर वह अंदर hi अंदर उबाल भी रही थी. एक लावे के जैसे पहात पड़ने बेताब होने लगी थी.

मैं उसके दिमाग में रहते हुए उसे शांत करने लगा.

"नहीं मुझे कुछ भी नहीं बोलना है दीदी से.. ये भाई का मटर है तोह वह खुद hi आ कर सोल्वे करेगा. भाई का हक़ भी बनता है. वही अपने हिसाब से साडी हक़ीक़त खोलेगा"

ऐसे प्रश्न मैंने परिधि के दिमाग में उतरा तोह परिधि सोचने मर मजबूर हो गई.

"हाँ मैंने ये पहले क्यों नहीं सोचा. मुझे ग़ुस्से में नहीं आना चाहिए. माँ, पापा, दीदी और सब भाई के कसूरवार हाँ. भाई अब जल्द hi लौटने वाले हाँ तोह भाई अपने हिसाब से अपने मटर को सोल्वे करेंगे. साडी सिचुएशन को अपने हिसाब से सबके सामने लाएंगे. मुझे कुछ भी ऐसा नहीं बोलना है, जिससे बाद में भाई को लगे, मैंने गलत किया है.. भाई तोह मेरा जणू है. मुझे अपने जणू की हर एक बात का पूरा पूरा धयान रखना चाहिए.. दीदी को इग्नोर करना hi सही है.. हाय जणू कब लौट के आ रहे हाँ आप.. आ जाओ न जणू.. कितना इंतज़ार करवाओगे और अपनी जान को.. खवाबो में मिलने से मैं को पूरा पूरा आनंद नहीं मिलता जणू.. प्ल्ज़ जल्दी से आ जाओ न. मुझे आपको लाइव देखना है"

परिधि तोह कुछ ज़यादा hi आगे का सोचने लगी थी. पायल रेगुलर अपनी वही बात रिपीट करे जा रही थी. पर परिधि ढीट बानी बुक पर नज़रें गड़ाए बैठी रही थी.

पायल दी का पारा चढ़ने लगा तोह वह परिधि की गॉड में धरी बुक उठा कर दूर फ़ेंक गई.

पायल : ग़ुस्से से) मैं कबसे तुमसे बात कर रही हों और तुम हो, मुझे इग्नोर hi किये जा रही हो.

परिधि मासूम बनते हुए : अरे दीदी आप कब आयी.. मैंने तोह आपको देखा hi नहीं.

मैं बड़ी मुश्किल से खुद को हसने से रोक पाया. वर्ण वह सोचती मेरे दिमाग में हसने वाला कोण है. पायल दी का पारा और भी चढ़ गया.

परिधि उसी टोन में नार्मल बैठी पायल दी को देखने लगी. मेरे लिए जैसा बाद में उसके सोचा था. वही सोच रखते हुए वह पायल दी को देख रही थी. वह मेरे बारे में पायल दी से कोई बात नहीं करना चाहती थी.

इसी बात पर पायल दी को और भी ग़ुस्सा आने लगा था. अब मेरा वहां कोई काम नहीं था. ज़यादा देर रहता तोह पायल के लिए कहीं मेरे अंदर कोई हलचल न शुरू हो जाये. इसलिए मैं परिधि के दिमाग से निकल आया.

पायल दी जैसी भी थी. मेरे दीदी थी. मेरी जान से बेस्ट दीदी थी. उसका मेरे साथ किया बुरा बर्ताव मुझे याद था तोह अच्छे यादों की भी कमी नहीं थी मेरी मेमोरी में.

बुरा याद करता तोह अच्छा भी याद आने लगता. इसलिए मैं वहां ज़यादा देर नहीं रहा. अपणु को तड़पना हो तोह अपणु को इग्नोर कर दो. िंगोरे किये जाने से बड़ी सजा कोई नहीं होती.

मैंने भी सोच लिया था. हवेली पोहंच कर मुझे कैसे रहना है. वहां किस किस को कैसे फेस करना है.


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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


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आप सभी को दिवाली की बहुत बहुत बधाई हो प्यारे मित्रो..... ऊपरवाला जितने भी Diwali,Holi और दूसरे इवेंट्स हमारे नसीब में लिखे.. तोह ऊपरवाला हमें हमेशा स्वस्त रखे.. बिना फिटनेस के ऐसे फेस्टिवल हमारे लिए फीके हो जाया करते हाँ. जैसे हर साल हॉस्पिटल्स में लोगों के फीके हो जाया करते हाँ.

ऊपरवाला सदा ऐसे Hi खुशियों भरे त्योहारों पर हर किसी को स्वस्त कर दिए करे....

मेरे दिल से बस यही एक दुआ निकला करती है.....

हैप्पी दिवाली......
 
:thank_you:

बहुत बहुत शुक्रिया कारन भाई.....

सहक्रिया भाई

शुक्रिया भाई

थैंक्स सुनिया जी...

शुक्रिया किंग भाई..

थैंक्स भाई

बहुत बहुत शुक्रिया भाई

शुक्रिया भाई.

थैंक्स.. 😍😍

थैंक्स ा लोट भाई...

रुपाली एक नागिन है. बिना बदले एक उसे चैन नहीं आएगा.. देखते हाँ वह कितनी सफल होती है..

थैंक्स भाई साथ बने रहने के लिए.


षिमुना के नसीब में था दक्ष का साथ. षिमुना तोह पूरी तरह से अब दक्ष पर लट्टू होने लगेगी.. किस्मत खुलती है या नहीं ये तो देखना पड़ेगा

यू अरे राइट बीआरओ... अलका ने बड़ी गलती करि थी. पर जो दिखा कैसे वह उसे गलत मान सकती थी. पायल और रोहिणी सिंह भी दक्ष पर अपना ऐतबार बना नहीं पायी..

रुपाली कहाँ तक भागेगी. लौटना तोह उसे दक्ष के पास hi है. जब तक दक्ष से बचने का कोई रास्ता नहीं मिलता.. तब तक वह दसख के शिकंजे में रहेगी..

शुक्रिया भाई साथ बने रहने के लिए और रिव्यु देने के लिए.


दक्ष का तांडव शुरू हो चूका है अब. रुपाली पिंजरे में कैद पंछी की तरह फड़फड़ाये गई hi..

कैसे वह दक्ष की घुलम बनकर रह सकती है. दक्ष की कोई वैल्यू भी तोह नहीं है उसकी नज़र में..

हाहाहा.. दसख को भी मौका चाहिए था.. षिमुना की बोलती बंद करने के लिए. अब बदल भी तोह बहुत गया है दसख...

हाँ दक्ष से कहाँ तक बच के भागेगी. लौटना तोह पड़ेगा hi उसे

शुक्रिया भाई

शुक्रिया भाई

दक्ष ने रुपाली को काळा जादू से डरा दिए. :लाफ:

और वह दर भी गयी..

थैंक्स नाइक भाई..


दिल को मज़बूत बना लें भाई. बहुत से हार्ट अटैक अभी रमैनिंग हाँ :लाफिंग:

बहुत बहुत शुक्रिया भाई..

थैंक्स भाई..

थैंक्स ा लोट आल ऑफ़ यू मित्रो... साथ बने रहे ✨
 
:thank_you:

बस हवेली पोहचने की देरी है. फिर उसे सही से पता चलेगा..

ऋचा आज की लड़की है. उसके अंदर ज़ायदा ज़हर नहीं है.. नफरत करती थी तोह अब डरने लगी है. मज़े भी उसे मिलेंगे. अगर वह दक्ष के साथ मिली तोह..

वह तोह उसने दिल से कबका दक्ष को जणू बनाया हुआ है... इंतज़ार तोह करेगी hi.

बहुत बहुत शुक्रिया नाइक भाई.. साथ बने रहे ✨
 
थैंक्स भाई..♥️

थैंक्स भाई.. ♥️

बहुत बहुत शुक्रिया जनाब..

शुक्रिया भाई

शुक्रिया एवं भाई.

शुर्किया एवं भाई..♥️♥️

थैंक्स

हाहाहा

शिमि भूल गई थी.. दक्ष बड़ी तेज़ी से बदल रहा है. जिस चीज के जलवे वह दक्ष को दिखा चुकी है. कैसे दक्ष अब वह भूल सकता है.


हैप्पी दिवाली...
 
:thank_you:

ऋचा नागिन की बेटी है. पर ज़हरीली नहीं है.

ऋचा एक पुरे नागिन है. कभी नहीं बदल सकती.. देखते हाँ, दक्ष उसका क्या हशर करता है..


जिस जिस ने गलती करि है. उसे अब आत्मग्लानि में जीना होगा..

:लाफ:

परिधि हीरोइन नहीं है बॉस.. अब परिधि का जैसा करैक्टर है. मुझे तोह वैसे hi दिखाना पड़ेगा.. वह ऐसे hi करैक्टर में फिर बैठती है. उसे लेके जो डाउट आपको हाँ. वह नहीं आएंगे मित्र..

बस देखते जाएँ.. जब दक्ष की एंट्री होती है तोह कैसे सीन्स बनते हाँ...

थैंक्स फॉर थे रिव्यु एंड सुग्गेस्ट.. कुछ भी कहीं भी लगे तोह ऐसे hi बता दिए करना.. अपने डाउट भी क्लियर कर लें और कहानी के मज़े को भी काम मत होने दें.

बाकी सब अछ्हा ही.. 😃
 
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Episode:32


संजना के गिर्द मेला लगा हुआ था. पूरा स्कूल उसे घेर कर खड़ा था.

सेफ होने के बाद कोई भी स्टूडेंट वहां से घर के लिए रवाना नहीं हुआ था. बच्चू के पेरेंट्स भी वही आ गए थे.

मीडिया वाले भी एक मजमा की सूरत वही मौजूद थे, संजना को लाइव दिखा रहे थे.

संजना पहले भी एक कॉंफिडेंट गर्ल थी. माला की रे के कारण वह साडी hi बदल गयी थी. उसका कॉन्फिडेंस लावेल आस्मां की बुलंदियों को छूने लगा था. उसके चेहरे पर आया ग्लो सभी को सम्मानीय खड़े होने पर भी मजबूर कर गया था.

सब जो पहले ये जानते थे, संजना एक टीचर है, एक अनाथ लड़की है. अब वहीँ सब समझ रहे थे. संजना एक देवी है. उसके चेहरे की चमक भी लोगों के दिलों में उसके लिए ऐसे hi विचार ले कर आई थी.

संजना एक न्यूज़ रिपोर्टर के पूछे गए प्रश्न के उत्तर कुछ ऐसे बोली.

संजना : हर नारी एक माँ भी होती है. हर माँ अपने बच्चू के लिए अपनी जान भी दे सकती है. एक नारी कमज़ोर हो सकती है, पर एक माँ कभी कमज़ोर नहीं हो सकती. जब जब एक माँ के बेटे की जान खतरे में आयी है. माँ ने अपनी जान की परवा न करते हुए अपने बेटे की जान बचाई है. एक नारी लड़ना नहीं जानती पर एक माँ दुन्या के हर खतरे से लड़ना जाती है. अपने बेटे को बचने के लिए हर वह हथियार इस्तेमाल कर जाती है, जिसका इस्तेमाल उसे नहीं भी आता. (हाथ जोड़ कर ऊपर की और देख कर) एक माँ दूसरी माँ को हिम्मत और ताक़त क्यों नहीं देगी. एक माँ दूसरी माँ के दर्द को बहुत अच्छे से समझती है. एक माँ दूसरी माँ के कलेजे को छलनी होते हुए कैसे देख सकती है. मेरे बारे में सब जानते हाँ. मैंने होश संभाला तोह खुद को अनाथाश्रम में पाया. वहीँ पाली बढ़ी, वहीँ पढाई लिखे की. मेरी ज़िन्दगी का एक एक दिन एक एक लम्हा सब की जानकारी में है. मैंने अपनी पूरी लाइफ में कभी कोई हथियार नहीं उठाया. कभी कोई गन नहीं चलाई. चलना तोह दूर की बात है, मैंने कभी कोई गन हाथ में भी नहीं पड़की. इस बात के हज़ारों गवाह मिल जायेंगे आप मीडिया वळून को. सब्ज़ी काटने के लिए एक छुरी तोह मैंने उठाई है. पर कभी कोई हथियार नहीं उठाया..

निचे कुछ फैसले पर पड़ी गन को उठा कर वह फिरसे बोली..

एकककक गुणनण क्याआआआआ!! माँ काली मुझे इस दुन्या का हर हथियार चलने की हिम्मत और ताक़त दे सकती है.
जय हो माँ काली की.. जय माँ काली.. जय माँ काली..



संजना की आवाज़ में ऐसी गूँज आ गयी थी. सबको अपने दिलों में वह आवाज़ उतरती हुई महसूस होने लगी थी.

संजना खामोश हुई तोह उसी पल पूरा स्कूल, पुलिस फाॅर्स और मीडिया सब एक साथ बोल पड़े..



जय माँ काली..

जय माँ काली..

जय माँ काली..

जय माँ काली..




सबके एक साथ बोलने पर ऐसी गूँज हुई. स्कूल के डरो दीवार लरज़ उठे. फर्श ऐसे हिलने लगा, जैसे भूकाम्ब आ गया हो.

बच्चों की आवाज़ सबसे बढ़कर थी.

फिर बच्चों ने एक नयी आवाज़ में बोलना शुरू कर दिए.




संजना माँ की जय हो.....

संजना माँ की जय हो.....




फिर तोह सब hi बच्चू की आवाज़ में आवाज़ मिलाने लगे..




संजना माँ की जय हो.....

संजना माँ की जय हो.....

संजना माँ की जय हो.....




संजना ने भी किसी को मन नहीं किया. उसे समझ आ गया था, उसे अब कैसे जीना है. उसे उसका लक्ष नज़र आ गया था. एक माँ ने उसे पुरे देश की, पुरे वर्ल्ड की माँ बना दिए था.

उसी समय ऊपर से 2 हेलिकोप्तेर्स शोर मचाते सुनाई देने लगे. देखते hi देखते उन हेलिकोप्तेर्स के लिए जगा खली कर दी गयी. कुछ देर में दोनों हेलिकोप्तेर्स लैंड हुए तोह एक हेलीकाप्टर से एजुकेशन मिनिस्टर जो कह एक महिला थी, वह िग पुलिस के साथ आते हुए दिखाई दी.

दूसरे हेलीकाप्टर से कम और कुछ दूसरे मिनिस्टर्स भी उतरने लगे..

सब संजना के सामने पोहंच कर हाथ जोड़ कर खड़े हो गए. जब वह हेलीकाप्टर से उतरे तोह उनके चेहरों पर भाव और थे. जैसे hi वह संजना के सामने पोहंचे तोह उनके भाव बदलते चले गए थे.

वह सब भी संजना के सामने हाथ जोड़ कर सम्मानीय खड़े हो गए थे.

फिरसे "संजना माँ की जय हो" से पूरा स्कूल गूँज उठा.



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अलका एक प्राइवेट प्लेन में बैठी इंडिया लौट रही थी.

दो घंटे तक सब शांत रहा. अलका सुकून से बैठी हुई इंडिया पोहचने के इन्तिज़ार में थी. इंडिया में कोई उसका ख़ास इंतज़ार करने वाला नहीं था. एक दक्ष था, वह भी उसका नहीं रहा था. बाकि किसी से उसे कोई ज़यादा ग़र्ज़ नहीं रही थी. देश अपना था, तोह उसके लिए तड़प और मोहबब्त थी अलका के अंदर. इसलिए जल्द से जल्द अपने देश पोहंच जाना चाहती थी.

वह भूल गयी थी जिन घट्टिया लोगों के हाथ वह लगी है. वह किस नेचर के लोग हाँ. सांप, बिच्छू पर ऐतबार किया का सकता है. पर इन ऑर्ग वळून कर कभी नहीं. जो पावर प्राप्त करके धरती के भगवन बन बैठते हाँ. कैसे वह अब माला को हाथ से जाने दे सकते थे. अलका भी ख़ास थी बाओ के लिए, पर जो वैल्यू माला की थी वह अलका की नहीं थी.

अलका ने पीछे मुद कर देखा तोह उसे प्लान में कोई भी दिखाई नहीं दिए.. पहले तोह अलका ने इसे नोर्मल्ली समझा. पर कुछ देर तक उसे कोई भी नहीं दिखा तोह उसे गड़बड़ का एहसास हुआ. अलका ने शीशे से बहार देखा तोह बादलों के ऊपर से उड़ रहा प्लेन समुद्र के ऊपर था. दूर दूर तक पानी hi पानी था.

एक बार देख कर तोह अलका में पुरे बदन में hi सनसनी दौड़ गयी. उसने सोचा अगर ऐसे hi प्लेन क्रैश हो जाये तोह------ इसके आगे वह नहीं सोच सकीय.

अलका उठी और प्लेन में दूसरे एजेंट्स और एयर होस्टेस को देखने लगी. पर उसे कोई भी दिखाई नहीं दिए. पायलट केबिन की और बढ़ी और दूर नॉक कर दिए. पर कोई रिस्पांस नहीं मिला.

अलका को यकीं हो गया कुछ तोह गड़बड़ है. अलका ने माला की मदद से दूर लॉक को पिघला कर अंदर घुस गयी.

पर ये क्या.....

अंदर कोई नहीं था. प्लेन बिना पायलट के उड़ रहा था. उसी समय प्लेन ने भी एक झटका खाया, थोड़ा सा लहरा गया. अलका ने खुद को गिरने से बचने के लिए लटक रही एक हुक को थाम लिया. फ़ौरन अलका वापिस पलटी और पैराशूट अपनी पीठ पर बांधने लगी.

पैराशूट बांधने के बाद माला की मदद से बहरी दूर पिघला कर अलका प्लेन से कूद गयी. अब तब प्लेन में हो रहे झटके बहुत बढ़ चुके थे. जैसे hi अलका प्लेन से कूदि, प्लेन बड़ी स्पीड से राइट साइड में टेढ़ा हो कर निचे समुद्र की और गिरने लगा.

अलका को ऐसा कोई एक्सपेरिंस नहीं था. वह तोह अपनी जान बचने के लिए प्लेन से कूद गयी थी. माला ने भी उसे बड़ी हिम्मत दी थी.

अलका भी बड़ी स्पीड के साथ निचे की और आ रही थी. प्लेन अब अलका से बहुत दूर हो चूका था.

कुछ देर में अलका के होश कुछ ठिकाने आये तोह अलका ने देखा, बहुत निचे एक और प्लेन भी उड़ रहा था. अब अलका बाओ वळून की चाल समझ गयी थी. अलका को बड़ा ग़ुस्सा आने लगा. कमीनो ने बड़ी कमल की चाल चली थी.

अलका अब समझ गई थी. क्यों प्लेन में उसे कोई भी दिखाई नहीं दिए था. सब के सब कूद कर दूसरे प्लेन में जा पोहंचे होंगे. इस बात का यकीं अलका को हो गया था. अलका को दूसरा प्लान भी दिखाई दे गया था. जो बड़ी स्पीड के साथ समुद्र में गिर रहा था.

अलका भी उसी स्पीड के साथ निचे की और जा रही थी. अलका को दूर दूर तक कोई भी आइलैंड भी दिखाई नहीं दे रहा था. अलका को समझ नहीं आ रही थी. वह खुद को कैसे बचाये. समुद्र में गिरी तोह समुद्री जीव उसका कीमा बना देंगे.

उसी समय पर माला चमकने लगी. अलका को सुकून मिला. वह समझ गई, माला के रहते उसे कुछ नहीं हो सकता.

अलका बड़ी स्पीड के साथ दूसरे बाओ के प्लेन के पास पोहंचती जा रही थी. दूसरे प्लेन के ऊपरी हिस्से में बने एक मिरर केबिन में तीन एजेंट्स हैवी गन्स लिए मौजूद थे. उन्हें आर्डर था, अलका को शूट कर दिए जाए. माला किसी भी हाल में हाथ से निकलने नहीं चाहिए.

जैसे hi अलका रेंज में आई. एजेंट्स अलका को शूट कर देना चाहते थे. अलका कुछ और करीब पोहंची तोह तीनो ने अलका की और गन्स सीधे करते हुए ट्रिगर दबा दिए.

उसी समय पर अलका को भी एक ज़ाब्रदास्त झटका लगा और अलका अपनी जगा से सेंकडो मीटर दूर जा पोहंची. कोई भी गोली अलका को छू नहीं सकीय थी. सभी एजेंट्स हैरान रह गए थे. ऐसे कैसे एकदुम्म से वह मुखालिफ साइड में दूर हो गई थी.

प्लेन के अंदर बैठा एक लीडर और कुछ एजेंट्स कैमरा व्यू देख रहे थे, वह भी चीख पड़े.

"ye..ye इतनी स्पीड से कैसे जा रही है"

कोई और चीखा




"ओह्ह्ह ये कैसे मुमकिन है... कैसे एक hi सेकंड में हमारी नज़रों से ओझल हो सकती है"


"इम्पॉसिबल"



हैरान तोह अलका भी हो गयी थी. उसे ऐसा लगा, जैसे किसी ने उसे थाम लिया हो. अपने बहन में जकड लिया हो. अलका बड़ी हैरान थी. पर दूसरे hi पल जब अलका फ़्लैश स्पीड के साथ उस एरिया से दूर होने लगी तोह अलका के लिए खुद को संभालना मुश्किल होने लगा.

अलका जानना चाहती थी, वह किसकी बहन में है. पर वह कुछ नहीं पूछ सकीय. उसके हवास काम छोड़ने लगे थे. माला उसके गले में न होती तोह शायद वह बेहोश हो चुकी होती. इतनी स्पीड के कारण उसका ब्लड प्रेशर उसकी रगों को पहाड़ भी चूका होता. पर वह सेफ रही थी.

जाने कितनी देर गुज़री.. अलका जो अपनी ऑंखें बंद कर चुकी थी. ऑंखें खोल कर देखने लगी तोह खुद को एक पेड़ की छाओं में लेते देख कर झटके से उठ कड़ी हुई.

"असंभव"

"ये कैसे मुमकिन है.. दूर दूर तक तोह पानी hi पानी था. फिर मैं कैसे इतनी जल्दी खुश्की पर आ गई"

अलका घूम फिर कर चरों और देखने लगी. उसे कुछ समझ नहीं आई तोह वह एक साइड में चल दी..

वही बाओ का एक प्लेन खुद से समुद्र में गिर कर डूब चूका था, तोह दूसरे प्लेन को उसी अननोन व्यक्ति ने अलका को साफल्य एक आइलैंड पर छोड़ कर ब्लास्ट कर दिए था. कोई भी बाओ एजेंट जीवट नहीं बचा था. प्लेन के टुकड़ो के साथ उसके भी टुकड़े समुद्र में गिर कर समुद्री जीवो के पेट में उतर चुके थे.



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वहीँ नताशा अपने आइलैंड पर थी.. उसे आइलैंड पर पोहंचे कुछ hi समय हुआ था. वह बहुत खुश थी. उसे गुरु जी की और से एक काम मिला था. जिसे अच्छे से अंजाम देकर उसे बेपनाह ख़ुशी प्राप्त हुई थी.

अलका को वही बचा कर एक आइलैंड पर छोड़ आई थी. किसकी मदद उसने की थी. नताशा नहीं जानती थी. वह नताशा के सम्राट की रानी अलका है. ये भी नहीं जानती थी. पर अलका को थमने हुए उसे बेहद सुकून महसूस हुआ था. अपनेपन का एहसास हुआ था.

अभी तक वह अलका के लम्स को महसूस कर प् रही थी. अपनी साँसों में उतर चुकी अलका की खुशबु को महसूस कर प् रही थी.

नताशा मसरूर हालत में बीएड पर लेती हुई छत को टेक जा रही थी. सोच रही थी, कैसी अजीब, कितने सुकून वाली लाइफ उसे मिल गयी है. एंटी अच्छी लाइफ के बारे में तोह उसने कभी सोचा भी नहीं था.

ऐसा सब सोचते हुए नताशा फिर अपने परिवार को सोचने लगी. उसी समय वह उठी और फैसला करने लगी. अब उसे अपने परिवार को एक नज़र देख लेना चाहिए. जैसे वह तड़प रही है. वैसे hi वह भी तोह बरसों से उसके लिए तड़प रहे होंगे.

और फिर उसके परिवार का दुश्मन भी तोह है. उसे भी तोह ख़तम करना था. जितना दर्द उस दुश्मन ने दिए था. उसे भी तोह उतना hi दर्द देना था.

दुश्मन के बारे में सोचते हुए नताशा के खून की रफ़्तार बढ़ने लगी. उसकी मुट्ठियां कस्ती चली गयी. बहुत ज़यादा ग़ुस्से में आ गयी थी वह. कैसा घट्टिया दुश्मन था उसके परिवार का. जो उसके परिवार को इतना बड़ा घाव दे गया था.



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विक्रम सिंह, विनय और परची दिल्ली वाली कोठी में थे. सब परेशान बैठे हुए थे.

रुपाली के चले जाने के बाद परची विनय से दूरी बना गई थी. विनय भी बहुत गिलटी फील कर रहा था. उसे अब तक यकीं नहीं आया था, उसने अपनी hi बेहेन को छोड़ दिए था. कभी कभी वह तेनसेद हो जाता था. घबरा जाता था. कभी कभी उसे ग़ुस्सा भी आने लगता था. पायल उसके हाथ आते आते रह गति थी. पायल उसके मंद से निकल hi नहीं रही थी.

पहले जो परची को छोड़ कर, उसकी दोनों सील्स खुली जान कर पायल सिंह पर ग़ुस्से था. अब ये सोच कर "पायल सिंह के दोनों छेड़ अभी भी सेलेड हाँ" विनय बहुत खुश भी था. एक बार फिरसे वह पायल सिंह को सोचने लगा था.

दिल्ली पोहंच कर विनय और परची दोनों एक दूसरे से दूर hi रहे थे.

विक्रम सिंह : मुझे समझ नहीं आ रही, रुपाली ने हम तीनो को दिल्ली आने को hi क्यों बोलै था. ऋचा के साथ वह खुद कहाँ गयी है.

परची : डैड! माँ अपना मोबाइल भी साथ नहीं ले गयी हाँ.

विनय : डैड क्या कुछ जादू शादू वाला मटर नहीं हो सकता. जैसा सब हुआ है, मेरी शादी को लेकर के, मुझे लगता है, कुछ बहुत बड़ी गड़बड़ है डैड.

परची का सुनकर चेहरा लाल हो गया.

विक्रम ने परची को देखा तोह बोलै : मुझे सब शुरू से बताओ

परची विक्रम सिंह को सब बताने लगी.

विक्रम सिंह : विनय तुम कन्फर्म हो, शादी के समय पायल hi थी. और रूम में भी तुम्हरे साथ पायल थी.

विनय जो सोच चूका था, पायल सिंह कभी भी किसी मर्द के करीब नहीं गई. परची की दोनों खुली हुई सील्स याद आयी तोह वह बोल पड़ा

विनय : डैड मुझे लगता है, रूम में पायल सिंह नहीं थी. फेस वाला मामला मुझे कंफ्यूज कर रहा है. पर बाकि का कुछ भी मुझसे पायल सिंह वाला नहीं लगा.

परची ग़ुस्से से चीखते हुए : वह मैं थी. समझे, अब बोल रहे हो कुछ भी पायल का नहीं लगा था. जब लगा था तोह बोल देते, मेरे साथ इतना घट्टिया तोह न होता. पि कर भी तुम होश में थे तोह फिर क्यों किया मेरे साथ ये सब..

विनय शर्मसार हो गया.. विक्रम ने परची को चुप करवा दिए

विक्रम : कोई बहुत बड़ी बात है, जो हमारी समझ में नहीं आ रही. तुम दोनों की कोई गलती नहीं है.

परची लम्बी लम्बी साँसे लेकर खुद पर काबू पाते हुए विनय को ग़ुस्से से देखने लगी.

परची : माँ के बिहेवियर को लेके भी मुझे डाउट हो रहा है डैड. प्ल्ज़ कुछ कीजिये. सतीश भाई और अलका भाभी का भी कोई अत पता नहीं है.

विक्रम : चलो हम तुम्हारे नाना की हवेली चलते हाँ. अब वहीँ इस मटर को सोल्वे करना सही रहेगा. यहाँ रहे तोह कोई और गड़बड़ हो सकती है.

कुछ देर में सब गाडी में बैठे रुपाली के मायके की हवेली की और जा रहे थे.

गाडी विनय ड्राइव कर रहा था. पीछे वाली सीट्स पर बैठे परची और विक्रम सिंह को नींद आने लगी. वह बैठे बैठे hi सो गए.

गाडी जब हवेली पोहंची तोह दोनों की आंख खुल गयी.

गाडी रुक चुकी थी. विनय गाडी से उतर चूका था.

विक्रम सिंह और परची भी गाडी से उतरे तोह बहार निकल पर दोनों शॉकेड हो गए.

परची घबरा कर : डैड ये विनय हमें कहाँ ले आया है.

विक्रम भी खुद को राजा ठाकुर की हवेली में देख कर शॉकेड था..

कुछ फैसले पर एक बड़ी चेयर पर बैठे हुए राजा ठाकुर विक्रम सिंह को देख रहे थे.

विक्रम सिंह उन्हें देख कर परेशान हो गया.

विक्रम सिंह : विनय तुम हमें राजा ठाकुर के पास क्यों लेकर आये हो.

विनय जैसे होश में आ गया : ेंन! ओह्ह्ह्ह! mmm..main नहीं जनता डैड.. मैं यहाँ कैसे पोहंचा.

परची बहुत दर गयी थी. गाड़ी के दूर हैंडल को थाम कर खोलते हुए वह बोली.

"mmm..mujhe भी अब यकीन होने लगा है डैड. ज़रूर कोई भूत प्रीत का चक्कर है. mmm..mujhe यहाँ से जाना ha..mm.. मैं यहाँ नहीं रह सकती.. यहाँ पायल सिंह मेरी जान ले लेगी."

विनय भी पायल सिंह का सोच कर दर गया. यहाँ वह खुद को बचा नहीं सकता था. पायल वहां से ग़ायब थी तोह ज़रूर वह हवेली में hi होगी.. विनय हवेली की बिल्डिंग की और देखने लगा..

उसी समय पायल सिंह जो अपने कमरे की खिड़की में कड़ी हुई थी. उसकी नज़र भी तीनो पर पर गयी.. वह चीखते हुए गार्ड्स से : विनय कुत्ते को जाने मत देना.

विनय समझ गया वह चूहे दान में फस चूका है. विक्रम और परची गार्ड्स को भागते देख कर समझ गए.. वह अब यहाँ से नहीं जा सकते..

राजा ठाकुर बस तीनो को घूरे hi जा रहा था. वह कुछ भी नहीं बोल रहा था.. कुछ hi देर में गार्ड्स ने तीनो को घेर लिया..



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एक मंत्री अपने एक दोस्त के साथ अपने फार्महाउस पर बैठा हुआ था.

मंत्री : यार नंदू! हमारा खेल तोह बिगड़ hi गया. उस दो टेक की छोकरी ने हमारा सारा खेल बिगड़ दिए. वर्ण कुछ hi देर में हमारे साथी जेल से बहार होते. अगले कुछ दिनों में hi हम होते इस देश के मुख्य मंर्ती..

नंदू : वह तो तुम अब भी बनोगे. देख लूंगा मैं उस छोकरी को भी. साडी गेम ख़राब कर दी उस हरामज़ादी ने. छोडूंगा नहीं मैं उसे.

मंत्री : धीरज.. मेरे मित्र धीरज.. देखा नहीं था, कैसे कम, िग और दूसरे मिनिस्टर्स उसके सामने हाथ जोड़ कर खड़े हो गए थे. वह लड़की कोई साधारण लड़की नहीं है नंदू. वर्ण हमारे इतने ख़ास आदमियों को वह अकेली छोकरी नहीं मार सकती थी.

नंदू ये सुनकर ठंडा हो गया.. वह भी संजना के बारे में घोर करने लगा. उसे लगा, संजना के मामले में जल्दबाज़ी सही नहीं रहेगी. जल्दी करेगा तोह कोई न कोई गड़बड़ हो जाएगी. अगर वह भी मारा गया तोह फिर कैसे वह अपना मिशन कैसे पूरा कर सकता था.



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धनञ्जय ठाकुर अपने कमरे में परेशान बैठा हुआ था. उसे अभी तक समझ नहीं आई थी. क्यों उसका आदमी उसके खिलाफ हो गया था. कैसे पुलिस उसके गुप्त स्थान पर जा पोहंची थी.

ऐसे समय पर मैं उसके दिमाग में था. साडी जानकारी मैंने उसके गंदे दिमाग से प्राप्त कर ली थी. धनञ्जय ठाकुर मेरे किसी काम का नहीं था. हाँ धरती पर बोझ था. जब तक ज़िंदा रहता, ऐसे hi घिनोने काम करता रहता. उसका मरना ज़रूरी थी. उसके जैसो का मरना ज़रूरी था.

वह एक सप्लायर था. उससे बड़े बड़े मौजूद थे. मुझे धनञ्जय को मार कर आगे बढ़ना था. धनञ्जय जिसे बच्चे और लड़कियां बेचा करता था. धनञ्जय से उसका नंबर डायल करवाया. फिर उसके दिमाग में पोहंच कर उसके बारे में जाना. उसका नाम विकास था.

मैं वापिस धनञ्जय के दिमाग में आया. वह कुर्सी पर बैठा हुआ सोचों में गम था. मैंने उसे अपने कण्ट्रोल में लिया. उसके कपडे उतरवा कर उसे नंगा किया. उसके कमरे में मौजूद एक अलमारी में एक मिनी मशीन गन मौजूद थी. धनञ्जय ने उस मशीन गन को उठा लिया.

कमरे के सेण्टर में पोहंचा तोह मैंने उसे आज़ाद छोड़ दिए. वह अपने हाथ में गन देख कर हैरान हुआ. जैसे hi उसे अपने नंगे होने का एहसास हुआ तोह मशीन गन फ़ेंक कर हैरानगी से खुद को देखने लगा. अपने हथु से अपने गंदे शरीर को छूने लगा.

"yy..ye मैं एकदुम्म से नंगा कैसे हो गया. मम.. मैं तोह कुर्सी पर बैठा हुआ था"

सम्राट.....

सम्राट का नाम नहीं सुना क्या तुमने धनञ्जय ठाकुर..

वह स्टुपिड कमरे में घूम घूम कर देखने लगा. मेरी आवाज़ सुनकर फ़ौरन झुक कर वह मशीन गन उठा गया था. मशीन गन हथु में लिए कमरे में घूम घूम कर देखने लगा.

"kkk..kon सम्राट"

HAHAHA...SAMRAT को तोह पूरी दुन्या जान चुकी है. तुमने भी तोह न्यूज़ सुनी थी. तुम्हारे पार्टनर्स ने तुम्हे खबर भी तोह दी थी. भूल गए क्या धनञ्जय ठाकुर.

"kk..kahan हो तुम.. ttt..tum नज़र क्यों नहीं आ रहे हो"

धनञ्जय ठाकुर पसीना में नहाने लगा था. वह बहुत दर गया था. उसे आवाज़ तोह सुनाई दे रही थी. पर कोई दिखाई नहीं दे रहा था.

HAHAHA...SAMRAT दिखाई नहीं देकता मूर्ख ठाकुर.. सम्राट की आवाज़ और कारनामे hi दिखाई देते हाँ. अमरीका में जो हुआ था. क्या तुमने वह देखा नहीं था.

"NNN..NNN..nahi...HHHHH...haaan देखा tha..PPP...par वह सच कैसे हो सकता ha.SAMRAT जैसा कुछ नहीं हो सकता.. ये सब मैं घडत है."

हाहाहा... तुम फिर गन तुम्हारे हाथ में है. मेरी आवाज़ तुम सुन रहे हो. शूट में.. देखो मैं कहीं तुम्हे दिखाई दे रहा हों तोह भून दो मुझे गोलियों से. पूरी दुन्या में बोल दो. तुमने सम्राट को मार दिया है. फिर पूरी दुन्या में तुम्हारे नाम का टूटी बोलने लगेगा.. तुम दुन्या के सबसे बड़े सूरमे बन जाओगे. के ों! शूट में!

धनञजय ठाकुर अब भी कमरे में चरों और घूम घूम कर मुझे तलाश कर रहा था. अब वह इन्तहा की दहशत में आया हुआ था. उसका पूरा वजूद कांपने लगा था. दिखाई देने वाले को मार कर शेर तोह बन सकता था धनञ्जय ठाकुर. पर दिखाई ने देने वाले को कैसे मारता.




"BHBH....BHOOOT..BHOOOOOOOOOOOOOTTT"




हाहाहाहा..

धनञ्जय ठाकुर मुझे भूत समझने लगा था.

मैंने फिरसे उसे अपने कण्ट्रोल में ले लिया. धनञ्जय सब समझ रहा था. उसके साथ क्या हो रहा था. वह क्या कर रहा था. ये भी जान प् रहा था. पर उसका खुद पर कण्ट्रोल नहीं रहा था. अपनी आँखों से सब देख कर बहुत ज़यादा बौखलाया हुआ था. बहुत ज़यादा दहशत में आया हुआ था.

मैं धनञ्जय ठाकुर को लेकर उसके परिवार के सामने ले गया. सब उसे नंगा देख कर चीख पड़े..

धनञ्जय ठाकुर ने अपने बेटे की और मशीन गन सीढ़ी कर दी. धनञ्जय की पत्नी चीख पड़ी.

"पागल हो गए हो क्या.. अपने hi बेटे को क्यों मारना चाहते हो तुम"

धनञ्जय : हाहाहा... मैं पापी हों, मैं हथियार हों. तुम सब भी पापी हो, हथियार हो. पहले मैं तुम सब को मारूंगा, फिर खुद मर जाऊँगा. किसी को भी ज़िंदा नहीं छोडूंगा.

धनञ्जय ठाकुर बोल तोह रहा था. पर उसके अंदर हलचल मच उठी थी. वह कुछ भी अपनी मर्ज़ी से नहीं कर रहा था. मैं सब उससे करवा रहा था. न वह खुद मरना चाहता था, और न hi अपने परिवार में से किसी को मारना चाहता था.

धनञ्जय ठाकुर का बीटा भी बहुत बड़ा हरामी था. बहुत सी लड़कियों का रपे वह कर चूका था. वह अपने बाप के हथु में मशीन गन देख कर बहुत ज़यादा दर गया था. शायद मशीन गन देख कर न डरता. पर नंगा देख कर वह समझ गया था. उसका बाप पागल हो चूका है. पागल आदमी किसी को भी मार सकता है.

धनञ्जय का दूसरा बीटा कुछ दूरी पर खड़ा था. वह अपना पिस्तौल निकल कर धनञ्जय के हाथ पर फायर करने वाला था. उसका इरादा था, मशीन गन को धनञ्जय ठाकुर के हाथ से गिरा दे. फिर धनञ्जय ठाकुर को काबू में करना मुश्किल नहीं रहेगा.

पर उसी लम्हे धनञ्जय ठाकुर ने अपने हाथ को घुमा और मशीन गन का मिनी राउंड चला दिया.. कई गोलियां मशीन गन से निकली..




TAD.....TAD.....TAD.....TAD.....TAD.....TAD.....TAD.....TAD.....TAD.....TAD.....


की भयंकर आवाज़ के साथ AAAAAAAAAhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh की आवाज़ भी निकली और धनञ्जय ठाकुर के दूसरे बेटे के शरीर में अनगिनत छेड़ बन गए.

सब चीख पड़े तोह धनञ्जय ठाकुर ज़ोर ज़ोर से हसने लगा..

हहहहहहह..... कोई नहीं बचे, हराम का माल खा कर जीने वालो! सबको मार दूंगा मैं.

धनञ्जय ठाकुर का बड़ा बीटा कुछ भी नहीं कर पाया था. उसके पास कोई गन नहीं थी. धनञ्जय ठाकुर ने फिर उसे भी भूनना शुरू कर दिया. घर की औरतें गहरे सदमे में आने लगीं. पर ये भी ऐसी औरतें थी, जो ज़ुल्म की इन्तहा कर जाया करती थी. धनञ्जय ठाकुर उन सभी को भी शूट करने लगा.

किसी के सीने में तोह किसी के पैरों में फायर करने लगा..

धनञ्जय की एक बेटी काम आगे की थी. वह दर के वहीँ गिर पड़ी थी. उसे गोली नहीं मारी थी धनञ्जय ठाकुर ने.

हवेली में जितने भी बुरे थे. धनञ्जय ठाकुर ने सबको शूट कर दिए. ऐसे समय पर हवेली के कुछ नौकर और गार्ड्स दूर खड़े हुए ठाकुर को देख रहे थे. वह भी बहुत डरे हुए थे. उन्हें कुछ समझ नहीं आ रही थी. धनञ्जय ठाकुर ऐसा क्यों कर रहा था. कोई भी ठाकुर को रोक भी तोह नहीं सकता था.

ठाकुर फिर वापिस अपने आदमियों की और पलटा और मशीन गन का रुख उनकी और करते हुए एक सुपर एजेंट के जैसे स्टंट करता हुआ फायर करने लगा. देखते hi देखते कई नौकर और गुंडे खून में नहाने लगे..

ठाकुर फिर हवेली में घूम घूम कर मौत का खेल खेलने लगा.

मौत का नंगा नाच ख़तम हुआ तोह मैंने धनञ्जय ठाकुर को आज़ाद छोड़ दिए..

वह मशीन गन फ़ेंक कर वहीँ गिर पड़ा.. उसकी दिमागी हालत बहुत ज़यादा ख़राब थी. अपने hi हथुन से वह अपने परिवार को मूट के घात उतर चूका था. बहुत बड़ा झटका लगा था उसे..

मैं धनञ्जय ठाकुर के दिमाग में था. धनञ्जय ठाकुर ये सब सहन नहीं कर पा रहा था. मुझे लग गया था. वह पागल हो गया है. मैं धनञ्जय ठाकुर को फिर भी नहीं छोड़ सकता था. ऐसे घटिया इंसान को छोड़ कर मैं कोई गलती नहीं करना चाहता था. क्या पता, कभी ये ठीक हो जाए और फिर से पहले से भी बढ़कर बुरे करम करने लगे. हो सकता है, तब तक मैं इसे भूल जाऊं. मेरा मकसद बहुत बड़ा था. हो सकता था, मैं पलट कर न लौट सकूँ.. तब धनञ्जय ठाकुर कुछ ऐसा जुगाड़ भी कर सकता था. जिससे वह मेरी टेलिपाथी से बच सकता था.

उसी मशीन गन को उठा कर धनञ्जय ठाकुर ने अपनी चीन के निचे रखा और ट्रिगर दबा दिए..

हवेली में एक बच्ची के शिव कोई भी ज़िंदा नहीं बचा था. बचे थे तोह कुछ नौकर और कुछ महिलाएं बची थी.



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Episode:33






नताशा दिल्ली में थी.




दिल्ली पोहंची तोह चरों और स्कूल वाली घटना को लेकर संजना का hi ज़िक्र सुनने को मिल रहा था. सुनकर नताशा को बहुत ख़ुशी मिली..

वह भी तोह एक लड़की hi थी. एक लड़की ने अकेले खुद के दुम्म पर सभी टेर्रोरिस्ट्स को मार कर हज़ारों बच्चू को बचाया था. नताशा के दिल में संजना के लिए बड़ी प्यारे एहसासात जागने लगे.

नताशा इनविजिबल थी. वह अपनी खानदानी कोठी जा पोहंची. वही कोठी उसकी यादों में थी. वहां पोहंची तोह उसे वह कोठी वरन दिखी. सभी दीवारें ऐसी ख़राब हालत में थी. देख कर नताशा के दिल में बहुत दर्द होने लगा. नताशा कोठी के अंदर पोहंची तोह अंदर का नज़ारा देख कर उसका दिल खून खून होने लगा. पूरी कोठी में ग्रास इतनी बड़ी बड़ी थी. देख कर लगता था. बरसों से किसी ने काटी hi न हो.

नताशा को अपने अर्ली 1.5 इयर्स के सभी सीन्स याद आने लगे. साथ hi नताशा की आँखों से आंसू भी बहने लगे.

नताशा धीमे क़दमों से चलती हुई आगे बढ़ने लगी. जहाँ भी उसकी नज़र पड़ती, कोई न कोई सन उसे याद आ जाता. अपने मम्मी की गॉड में होती तोह पापा उसके गालों से खेलते दीखते. उसे प्यार करते दीखते. उसकी मम्मी उसके पापा को ख़ुशी से देखती.

कितने खुश थे सब नताशा को प् कर.

कभी नताशा को अपने दादा दादी दिखाई देते.. जो एक दूसरे से बहस कर रहे होते नताशा को अपनी गॉड में लेने के लिए. कभी चाचा चची अपने बच्चू को भूल कर नताशा के लिए लड़ते दिखाई देते..

नताशा सारे मनज़र देखते हुए हलकी आवाज़ में रोने लगी. उसके भाई उसके चाचा के बेटे, उसकी बुआ के बेटे, उसके खानदान के दूसरे सभी लोग कैसे उसके लिए पागल थे. कितना प्यार करते थे उससे.. नताशा के दिल का दर्द बढ़ने लगा.

सुनसान कोठी में नताशा के क़दमों की आवाज़ थी या फिर उसके रोने की आवाज़.. नताशा दरवाज़े पर पोहंची और फिर वहीँ बेथ कर ज़ोर ज़ोर से रोने लगी.




"mummmmmmmmmmmmyyyyyyyyyy"

"paaaaaaaaaaapppaaaaaaaaaa"

"daaaaaaaaaaadddaaaaaaaaaa"

"daaaaaaaaaaadddiiiiiiiiii"

"chaaaaaaaaaachhiiiiiiiiii"

"chaaaaaaaaachhhuuuuuuuuuu"

"bhaaaaaaaaaaaaiiiiiiiiiii"




नताशा अपने पहले परिवार के मरने पर भी इतना नहीं रोइ थी. जितना अब रो रही थी. आंसू थे, रुकने का नाम hi नहीं ले रहे थे. सभी दृश्य थे hi इतने स्ट्रांग. नताशा को एक एक सन ऐसे दिखाई दे रहा था. जैसे अभी कुछ देर पहले hi सभी मनज़र कुछ समय पहले के हों.

कुछ देर रोने के बाद नताशा उठी.. दूर को चूमती हुई दूर खोलने लगी. पर वह लॉक था. नताशा घूम कर कोठी की बैक साइड पर बानी एक टूटी खिड़की से अंदर जा घूमी.. अंदर का हाल भी बहुत ख़राब था. दीवारों पर प्लास्टर टूटा हुआ था. सभी रूम्स के दरवाज़े टूटे हुए थे. अजीब सी स्मेल आ रही थी.

लाइट का इंतेज़ाम नहीं था. अंदर अँधेरा था. पर सूरज की रौशनी कुछ कुछ अंदर पोहंच रही थी.

नताशा पूरी कोठी को घूम फिर कर देखने लगी.. कुछ देर में नताशा को एक और से अट्रैक्शन आने लगी. वह समझ नहीं पायी.. नताशा उसी और जाने लगी.

कोठी बड़ी थी. बहुत से रूम्स थे.. एक रूम के पास पोहंची तोह टूटे दूर से अंदर जा पोहंची.

नताशा को अंदर एक अलमारी दिखी.. अलमारी लोहे की थी. नताशा उस अलमारी के पास गयी.. हैंडल को पकड़ कर खेंचा तोह वह नहीं खुला gaya..natasha ने घुमा कर खोलने की कोशिश करि तोह भी नहीं खुला.. लॉक अंदर से जैम था.

नताशा को लगा. इस अलमारी में उसके मतलब का कुछ है... नताशा ने थोड़ा सा पीछे को हुई और पुरे ज़ोर से हथेली हैंडल पर मार दी. फिर हैंडल को घुमाया तोह वह घूम गया..

नताशा ने पैट खोला तोह पुराने जंग लगे दूर के खुलनी की आवाज़ आई.. बरसों बाद वह अलमारी का पैट खुला था..

अंदर नताशा को एक एल्बम मिला.. साथ hi एक लेटर भी था..

नट्सः एल्बम और लेटर उठा कर वापिस लौटी.. कोठी के लॉन के पास आ कर वह एक जगा बैठी और एल्बम खोल कर देखने लगी. एल्बम देख कर फिरसे उसकी आँखों में आंसू आ गए..

एल्बम में उसके पुरे परिवार की पिक्स थी. नताशा एक एक पिछ को देख कर उसपर हाथ फेर कर आंसू बहा रही थी.

"आप सबकी तारा लौट आई है"

"माँ आपकी तारा आपके दर्द को ख़तम करने के लिए लौट आई है"

"पापा आप अपने जिस दुश्मन को मार नहीं सके.. आपकी बेटी आपके उस दुश्मन का सर आपके क़दमों में फेंकने के लिए आ गई है.. उस कुत्ते का सर आपके क़दमों में फ़ेंक कर आप की तारा आपसे कहेगी.. पापा आपकी बेटी आपकी तारा लौट आई है, लीजिये अपने दुश्मन का सर्र.. दुश्मन के सर के साथ साथ आप अपनी बेटी के मिलने की भी ख़ुशी मनाएं"

सभी की पिक्स देख कर नताशा ने लेटर खोला और पढ़ने लगी..

"तारा बेटी.. अगर कभी तुम खुद को पहचान सको.. तुम्हे कभी पता चले, तुम हमारी बेटी हो.. कभी अपने जनम स्थान पर लौटो तोह ये जान कर हमसे नफरत मैट करना. हम अपने दुश्मन की चाल के आगे फ़ैल होते हुए तुम्हे खुद से दूर जाने से नहीं रोक सके.. हम नहीं जानते थे. हमारा दुश्मन इतना नीच भी हो सकता है तारा बेटी.. हम खुद को तुम्हारा कसूरवार मानते हाँ तारा बेटी.. हम hi तुम्हारी रक्षा नहीं कर पाए. तुम तोह हम सब की आँखों का तारा थी.. फिर भी हम तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर पाए.

अगर कभी ये लेटर तुम्हे मिले तोह हमारे दर्द को समझ जाना. हमें माफ़ कर देना. तारा बेटी हम सब आज भी तुम से उतना hi प्यार करते हाँ. जितना तुम्हारे जनम लेने पर तुमसे करते थे. आज भी हम तुम्हारे इंतज़ार में हाँ. जब तक तुम लौट कर नहीं आओगी. हमारी ज़िन्दगी की सभी खुशियां अधूरी रहेंगी..

एक महान ज्ञानी ने कहा था.. तुम एक दिन ज़रूर लौट कर आओगी. उस दिन से हमें लगा, जैसे हमें जीने की आस मिल गयी हो.. तारा बेटी तुमसे hi हमने अपनी साँसे जोड़ ली थी. तुम्हारे चेहरे को देख कर हमारा समय कट्टा था. तुम नहीं रही हमारे पास तोह न हमारा समय कटा और न hi कभी चैन की नींद आई.

ये लेटर और एल्बम यहीं छोड़ कर जा रहे हाँ.. वर्ण शायद हम ऐसा न करते.. हम तोह सोच भी नहीं सकते थे. एक डेढ़ साल की बच्ची की यादें भी हो सकती हाँ. पर भगवन ने हमारे नसीब में सारे hi दर्द नहीं लिखे थे.. खुशियां भी लिखी थी.. तुम एक दिन लौट कर आओगी. ये हमें एक महान ज्ञानी ने बताया था तारा बेटी..

तब से हमारी नज़रें घर की चोकट पर hi लगी रहती हाँ. पता नहीं तुम कब लौट कर आओगी.. जल्दी से लौट आओ तारा बेटी. इस से पहले हमारी ऑंखें बंद हो जाएँ, लौट आओ तारा बेटी.. हमारी आँखों का तारा हो तुम.. हमारी आँखों की रौशनी हो तुम.. हम सब तुम्हारे लिए रोज़ रट हाँ. पल पल रट हाँ.. आ जाओ हमारी आँखों की रौशनी बनकर तारा बेटी. इससे पहले कह हमारी ऑंखें हमेशा के लिए बंद हो जाएँ..

नताशा बुरी तरह से रो रही थी. उसके आंसू उस लेटर पर गिर रहे थे. बरसों पुराण कागज़ नताशा के आंसू से भीग कर और भी ख़राब होने लगा था.

नताशा कुछ देर रोटी रही...

फिर एक ज्वालामुखी की तरह फट पड़ने को बेताब हो गयी..

नताशा अब एक खूंखार बाला के रूप के रूप में कोठी से बहार निकल रही थी.

लेटर पर लिखे एड्रेस से वह जान गयी थी. उसका परिवार अब कहाँ रहता है. क्यों ये हवेली छोड़ कर वह यहाँ से चला गया था. ये भी वह जान गयी थी. ये कोठी उसके परिवार को पूरी पूरी सिक्योरिटी नहीं दे पा रही थी. इसलिए सभी को यहाँ से जाना पड़ा था.

नताशा अंधी तूफ़ान की तरह शहर की फ़िज़ाओं में फ्लाई करने लगी.. नताशा के अंदर का ज्वालमुखी फट पड़ने के लिए तैयार था..

सबसे पहले नताशा अपनी पारिवारिक कोठी पोहंची.. वहीँ एक नौकरानी उसे दिखी.. नताशा उसके पास पोहंच कर वह एल्बम और लेटर उस नौकरनी के हाथ में थमा कर बोली.

"सबसे बोल do..TARA लौट आई है.."

नताशा वहां नहीं रुकी थी. नौकरानी जो पहले दर गई थी. वहीँ तारा के बारे में जान कर वह चीखती हुई अंदर की और भागने लगी.

नताशा एक 25 मंज़िला ईमारत के पास जा पोहंची.. ईमारत के गिर्द फ्लाई करते हुए वह कोई खुली खिड़की देखने लगी. एक खुली खिड़की मिली तोह नताशा अंदर घुसती चली गयी..

ये बिल्डिंग उसके परिवार के दुश्मनो की थी.. नताशा को दिखाई दिए जाने वाले दृश्य में ये बिल्डिंग भी शामिल थी. यहीं नताशा को उसके परिवार से अलग करने के बाद लाया गया था.. यही से उसे कहीं और ले जाया जा रहा था. जब वह इन्सिडेंटली अपने पुराने मर चुके परिवार से जा मिली थी.

नताशा अपने दुश्मन के ऑफिस के सामने जा पोहंची.. पूरी ताकत के साथ दूर को लात मार कर दूर को hi तोड़ दिए.. अंदर बैठे हुए सभी हड़बड़ा कर उठ खड़े हुए.

नताशा अंदर प्रवेश करती चली गयी.. उसके क़दमों की थक थक थक पर अंदर बैठे हुए घबरा कर एक दूसरे को देखने लगे.



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नौकरानी भगति हुई अंदर पोहंची और सबको चीख चीख कर तारा के बारे में बताने लगी.

कुछ hi देर में नताशा के परिवार की महिलाएं वहीँ आ गई..

नौकरानी हप्ते हुए सब तारा की बात बताने लगी. कैसे तारा उसे एल्बम और लेटर थमा कर गई थी. क्या बोल रही थी, ये भी बता दिए नौकरानी ने.

सुनकर नताशा की मम्मी तोह गिरते गिरते बची..

नताशा मम्मी ने एल्बम और लेटर लिया और चूमने लगी. वह रोने लगी थी.

तारा तारा बोलने लगी थी. नताशा की चची, दादी और 4 भाभियाँ भी वहीँ थी. चची दादी भी रोने लगी थी. पर भाभियाँ बेचारी इस सब पर यकीं नहीं कर प् रही थी..

बड़ी भाभी ने घर के मर्दों को कॉल करके सब बता दिए. मम्मी चची और दादी लेटर और फोटो एल्बम देख कर रोने लगी थी.

एक नौकरानी एक व्हील चेयर भी घसीटते हुए वहीँ ले आई टी. व्हील चेयर पर नताशा के दाद्दु बैठे हुए थे.

वह भी जान गए थे.. उनकी आँखों से भी आंसू जारी थे.

मम्मी उनके पैरों से लिपट गयी. सर उनके घुटनो पर रख दिए..

मम्मी : बाबा! हमारी तारा लौट आई है.

बाबा : हाँ मेरी बच्ची! भगवन दुःख देता है तोह सुख भी देता है. भगवन जो भी करता है. हमारे भले के लिए करता है. मुझे यकीं था, भगवन हमें हमारी तारा ज़रूर लौटाएगा..

मम्मी : बाबा! तारा आ कर चली क्यों गयी. वह मुझसे मिलने क्यों नहीं आई. क्या वह नहीं जानती उसकी मम्मी कितनी बेताब है उसे एक नज़र देखने के लिए.

बाबा : रो मत मेरी बच्ची! जिस अंदाज़ में वह आई है. मुझे लगता है, भगवन की उसपर बड़ी कृपा है. सुना नहीं है क्या तुमने मेरी bachhi.hamari तारा दिखाई नहीं दी थी.

मम्मी : हाँ बाबा सुना है..

मम्मी धीरे से बोली.. वह अब हैरान होने लगी थी. तारा नज़र क्यों नहीं आई थी नौकरानी को. और ऐसे कैसे वह कोठी पर आ गई थी.

भाभियाँ खुसर फुसर करने लगी.. वह अब भी यकीं नहीं कर प् रही थी.

दादी : हमारी तारा भगवन का अवतार है.. देखना वह ज़रूर कुछ ख़ास करके लौटेगी.

बाबा : सही कहा आपने bhagyawan..hamari तारा ज़रूर कुछ ख़ास करने गयी है. शुक्र है भगवन का. मेरे इस दुन्या से जाने से पहले तारा लौट आई है.

मम्मी ने बाबा के हथु को चुम लिया

मम्मी : बाबा ऐसे मत बोलेन. भगवन हमारी उम्र भी आपको लगा दे. सो साल और जियें आप..

उसी पल घर कर सरे मर्द भी वहीँ ाँ पोहंचे.. उन्हें जैसे hi खबर मिली थी. सब दौड़े दौड़े चले आये थे.

नताशा भाई : दाद्दु! अभी हमें आपकी बहुत ज़रूरत है. हमारी तारा ने भी तोह आपके साथ समय बिताना है. आपको घोडा बना कर आपकी पीठ पर बेथ कर आपको पूरी कोठी में घूमना है.

सबके होंटो पर स्माइल आ गयी..

मम्मी उठी और अपने बेटे के गले से लग गयी : बीटा! हमारी तारा लौट आई है.

नताशा भाई : मम्मी! इसी विश्वास पर तोह हम जी रहे हाँ. अन्धविश्वाश है हमारा हमारी तारा के लिए. पर अटूट विश्वाश है मम्मी! हमारा हमारी तारा के लिए. एक दिन वह ज़रूर लौटेगी. ये मुझे भी यकीन था. सच कहूं तोह मुझे मेरी बेहेन की खुशबु आने लगी है.

मम्मी खुश हो गयी. सब खुश हो गए. भाभियाँ किसी के यकीन को झुटला नहीं सकती थी. ऐसी बात पर यकीं करना आसान नहीं था. बहरहाल वह भी सबको खुश देख कर बहुत खुश थी..

नताशा पापा भी अपने पापा के पैरों में बेथ गए. साथ hi अपनी माँ का हाथ थाम लिया.

पापा : पापा! आपको बहुत बहुत बधाई हो. हम सब की आँखों की रौशनी हमारी तारा लौट आई है. देखना बाबा! तारा के आते hi आप भी घोड़े जैसे हो जायेंगे. आप फिरसे अच्छे हो जायेंगे.. अब भगवन ने हमें हमारी खुशियां लौटानी शुरू कर दी हाँ. तोह सब अच्छा हो जायेगा.



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नताशा जिस ऑफिस में घुसी थी. वह ऑफिस नारायण मिश्रा का था. नताशा के परिवार के सबसे बड़े दुश्मन का.

75 साल का नारायण मिश्रा आज भी 50-55 का दिखाई देता था. उसके साथ उसके दो बेटे बेटे हुए थे..

नताशा सीढ़ी नारायण के सामने जा पोहंची..

नारायण और उसके बेटे को नताशा दिखाई नहीं दे रही थी. वह कुछ घबरा गए थे. क़दमों की थक थक की आवाज़ उनके अंदर दहशत पैदा कर रही थी. वर्ण आज तक ये सभी किसी से डरे नहीं थे.

नताशा ने टेबल पर पड़ा हुआ ऐश ट्रे उठाया और नारायण के घुटने पर दे मारा..

aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh वह चीख पड़ा. उसका घुटना चकना चूर हो गया था. वह चीखा तोह उसके बेटे भी दर के मारे चीख पड़े.. उन्हें बास ऐश ट्रे hi उठता और नारायण मिश्रा के घुटने पर पड़ता दिखाई दिया था..

नताशा : क्वीन! नाम तोह सुना hi होगा..

नताशा खूंखार लहजे में बोली

नारायण का बड़ा बीटा : kk...kon QQ...QUEEN..??

नताशा : हाहाहाहा भूल गए क्याआआआ.. दिन hi कितने हुए हाँ, क्वीन वाली न्यूज़ को.

न्यूज़ वाली क्वीन बारे तो पूरी दुन्या जान चुकी थी. अब तक नारायण और उसके बेटे इसे सच नहीं मान रहे थे.

नारायण भी अपना दर्द भूल कर क्वीन के नाम की दहशत में आने लगा.

नारायण : मैंने आपका क्या बिगाड़ा है क्वीन.. मेरे साथ ऐसा सलूक क्यों कर रही हाँ आप..

नताशा : वह तोह तुझे बताना hi पड़ेगा नारायण.. याद कर, बरसों पहले तुमने एक बच्ची को उसके परिवार से अलग कर दिए था. उसे उसके परिवार से दूर करके तुम इसी बिल्डिंग में लाये थे ना.. याद है या भूल गए हो तुम नारायण मिश्रा..

नारायण के सामने फिल्म सी चलने लगी.. कैसे भूल सकता था वह. एक hi तोह बच्ची को वह इस बिल्डिंग में लाया था. जिसे एक कोठे वाली के हवाले करना चाहता था. पर कर नहीं पाया था. वह बच्ची उसके आदमियों के चुंगल से निकल कर जाने कहाँ गम हो गई थी.

नारायण : tt...tumm...wohh..

नताशा ने ऐश ट्रे नारायण के दूसरे घुटने पर मार दिए..

नताशा : हाँ मई hi वही बच्ची हों. तुम जैसे घट्टिया लोग भी इस दुन्या में होते हाँ भला. बेमतलब का बदला लेने के लिए तुमने एक मासूम बच्ची को उसके परिवार से दूर कर दिए.

नारायण का बीटा घंटी बजने वाला था. पर नताशा ने ऐश ट्रे उसके सर पर मार दिए. वह वहीँ लुढ़क गया.

नताशा : मेरे पास समय नहीं है.. मुझे जल्द hi अपने परिवार से जा मिलना है. और तुम सबब का भी वहीँ काउंटडाउन होगा..

नताशा तीनो के सर पर मार कर तीनो को बेहोश करने लगी.. अभी तीन hi मिले थे नताशा को. यही बड़े दुश्मन थे. इनके बेटे भी नताशा के भाइयो से दुश्मनी में बहुत आगे निकल चुके थे. नताशा ने उन्हें बाद में देखने का सोच लिया.

नताशा तीनो को बारी बारी उस कोठी से कुछ दूरी पर एक वरन जगा पर ले जाने लगी.. ऐसा करने से पहले वह अच्छे से कक्तव रिकॉर्ड को ख़तम कर गयी थी.

एक गाडी का अर्रंगे करने के बाद वह विज़िबल हुई और गाडी में तीनो को दाल कर निकल पड़ी अपने परिवार से मिलने के लिए.



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नताशा की बुआ का पूरा परिवार भी वहीँ आ गया था. खंडन के और भी कई वहीँ आ गए थे. सबको खबर कर दी गयी थी. तारा जल्द लौटने वाली है. ऐसा सबको बता दिए गया था.

कोठी पर मेले का सा माहौल बन गया था. नताशा के सरे भाई बड़े खुश थे. उन सब की इकलौती बेहेन आज मिल गयी थी. उनकी जान उनकी बेहेन कुछ देर में लौट रही थी.



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संजना स्कूल प्रिंसिपल की गाड़ी लेकर अपने परिवार से मिलने के लिए निकल पड़ी थी.

उससे और सबर नहीं हो रहा था. परिवार दिल्ली में था. कुछ hi दूरी पर उनकी कोठी थी. कैसे संजना और टाइम वास्ते करती.

बड़ी स्पीड के साथ वह गाडी दौड़ती हुई अपने परिवार के पास पोहंच रही थी.

कुछ देर में संजना एक बड़ी कोठी पर जा पोहंची.. संजना को देख कर गेट कीपर के साथ खड़े हुए एक गार्ड्स के मोह से निकला




"संजना माँ"




सुनकर फ़ौरन hi गेट कीपर ने गेट खोल दिए.. वहीँ से अंदर कोठी के अंदर संजना माँ के बारे में भी बोल दिए.

संजना माँ आयी है कोठी पर.. जान कर सब मिलने के लिए बहार आने लगे. कुछ hi देर में संजना पुरे देश में फेमस हो गई थी. उसकी न्यूज़ सभी ने सुनी थी. वीडियो भी वायरल हो गई थी. जिसने न्यूज़ नहीं देखि थी. वह मोबाइल में वीडियो द्वारा संजना को जान गया था..

संजना गाडी अंदर ले गयी.. पोर्च में गाडी कड़ी करके संजना बड़ी बेताबी के साथ दूर खोल कर बहार निकली..

बड़ी मुश्किल से खुद पर काबू बनाये हुए थी..

संजना के सामने बहुत से लोग थे. संजना इतने लोगों को देख कर हैरान हो गई. क्या ये सब उसका परिवार था. संजना सोच कर हैरान हो गई थी.

सब संजना को देख कर खुश हो गए.. संजना माँ बड़बड़ने लगे..

वहीँ संजना एक एक का चेहरा देखने लगी. संजना की नज़र फिर एक चेहरे पर ठहर गयी.

उस चेहरे को देखते hi संजना की आँखों से आंसू बहने लगे. सब संजना के आंसू देख कर हैरान हो गए. संजना के लैब थरथराने लगे थे.

कोई कुछ बोलता. उसी समय गेट खुला और एक और गाडी अंदर दाखिल हुई.. अंदर आने वाली गाडी की फीमेल ड्राइवर रेगुलर हॉर्न बजा कर सबका धयान अपनी और आकर्षित कर रही थी.

संजना भी खुद पर काबू प् कर गाडी की और देखने लगी.. गाडी दूर खुला और एक लड़की बहार निकली.

लड़की के चेहरे को देख कर वहीँ कड़ी एक औरत चीख पड़ी...




"TAAAAAAAAAAARRAAAAAAAAAAAAAAAAAAAA"




आने वाली नताशा थी और उसे पुकारने वाली उसकी मम्मी.. मम्मी नताशा को देख कर भागने लगी तोह सब भी नताशा को देख कर भाग खड़े हुए.. नताशा की सूरत अपनी माँ से बहुत मिलती थी.

जैसे hi पास पोहंचे.. नताशा ने अपने हाथ उठा कर सबको रुकने को बोल दिए...

नताशा : हाँ! मैं hi तारा हों. आप सबकी तारा.. किसी से भी मिलने से पहले मुझे एक काम करना है.. आप सब प्ल्ज़ पीछे खड़े हो जाएँ..


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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


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