Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge - Page 16 - SexBaba
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Samraat ..The Tales of Debauchery, Hate & Revenge

:thank_you:

अब होश आई है तोह कोई गलती नहीं करना चाहती..

सोचा तोह कुछ ऐसा hi है उनसे.. देखते हाँ. आगे कोई और काण्ड तोह नहीं होता उसके साथ..

पं देश भगत है तोह सम्राट की और दोनों की मदद मांग ली. देवधर का डर अब उसके अंदर से जाता रहा..

हाहाहा.. मज़े तोह अब लेगा वह भी बढिये से...

दक्ष के रेस्ट को पास करना आसान नहीं होगा ऋचा के लिए..

शुक्रिया भाई... ✨
 




Episode:42






गोवर्धन कोण था..




गोवर्धन का परिवार राजा ठाकुर के इलाके में रहा करता था. उस समय राजा ठाकुर के पिता रमाकांत ठाकुर सिंघासन पर बिराजमान थे.

गोवर्धन का परिवार पैसे वाला परिवार था. अच्छा रहन सहन था. इलाके में खूब इज़्ज़त भी थी उनकी. पर गोवर्धन का पिता ढके छुपे अंदाज़ में मज़े कर लिया करता था. उसके दोनों बेटे भी उसके जैसे hi बने..

गोवर्धन का एक बड़ा भाई था. जिसका नाम लक्समिकान्त था..

लक्समिकान्त ने अपने इलाके की एक लड़की के साथ ज़बरदस्ती करि.. उसे डरा धमका कर चुप भी करवा दिए.. वह बेचारी लड़की गरीब थी, बहुत ज़यादा दर गयी थी. अपने परिवार को या फिर रमाकांत ठाकुर को अपने साथ हुए ज़ुल्म बारे नहीं बता सकीय.

नियति का खेल..

लड़की प्रेग्नेंट हो गई. लड़की की माँ को पता चल गया. लड़की से पुछा तोह वह उसे दरी हुई लगी.. माँ ने उसे बड़े प्यार से पूछा तोह रट हुए लड़की ने सब अपनी माँ को बता दिए.. लड़की की माँ ने अपने पति को बता दिए..

लड़की के माता पिता रमाकांत ठाकुर के पास जा पोहंचे. रो रो अपना दुखड़ा सुनाया..

रमाकांत ठाकुर बड़े ग़ुस्से में आ गए.. लष्मीकंठ और उसके परिवार को फ़ौरन बुलाया गया. इलाके के सभी बड़ों को भी बुलाया गया.. वहीँ केस की सुनवाई हुई.. लक्समिकान्त और उसके माता पिता इंकार करते रहे. पर रमाकांत की गहरी नज़रों ने सब जांच लिया था. ऐसी ऐसी बातें करें, लक्समिकान्त अपनी बातों में फस गया. सब जान गए, लड़की के पेट में लक्समिकान्त का hi बच्चा है. रमाकांत ठाकुर वही सबके सामने लक्समिकान्त और लड़की की शादी करवा दी..

गोवर्धन उस समय शहर में पढ़ रहा था. वहीँ करणवीर भी पढता था.

अब के राजा ठाकुर अपने पिता के साथ रहा करते थे.

राजा ठाकुर की पावर के आगे लक्समिकान्त या उसका परिवार सर झुका गया. पर उन्हें राजा ठाकुर का ये फैसला मंज़ूर नहीं था.

वह कुछ कर नहीं सकते थे.

समय बीता और लड़की ने एक बच्ची को जनम दिए.. गोवर्धन भी इस बीच घर के चक्कर लगता रहा था. उसे भी वह गरीब लड़की पसंद नहीं आई थी. गोवर्धन भी एक घट्टिया लड़का था..

बाद में उस लड़की और बच्ची की हत्या करवा दी गयी. एक सांप उनके कमरे में तब्ब छोड़ दिए गया था. जब वह दोनों सो रही थी. जब सांप ने दोनों माँ बेटी को दस लिया तोह पुरे परिवार ने शोर मचा दिए.. सबसे ऐसे बोलने लगे सांप ने दोनों को दस लिया था..

रमाकांत ठाकुर को खबर मिली तोह उसने अपने अंदाज़ से इन्वेस्टीगेशन करि. रमाकांत ठाकुर के साथ थे राजा ठाकुर.. दोनों ने मिलकर असल बात का पता करवा लिया.

लक्समिकान्त दोषी सबत हुआ...

लक्समिकान्त को वहीँ एक सांप द्वारा मौत दे दी गयी.. लक्समिकान्त मारा गया.. बच्ची और लड़की मौत बहुत बड़ा पाप था.. राजा ठाकुर के कहने पर रमाकांत ठाकुर ने गोवर्धन के परिवार का सारा पैसे उस लड़की के परिवार को दे दिए गया.. उसकी दो बेटियां एक एक बीटा और भी थे.. पैसों से उनका कुछ भला हो गया.

गोवर्धन को खबर पोहंची तोह वह भी दौड़ा दौड़ा आया था. पर तब तक उसका सब कुछ ख़तम हो चूका था. दौलत उसके परिवार से छीन चुकी थी. उसका भाई मारा गया था. गोवर्धन ये सब सहन नहीं कर पाया. और रमाकांत के फैसले को गलत करार दे दिए..

गोवर्धन ने खूब हंगामा मचाया था. रमाकांत ठाकुर से वह इस सब का बदला लेगा. ऐसा बोलने लगा.. उस समय करणवीर यहाँ पर नहीं था..

गोवर्धन और उसका परिवार वहां से कहीं और चला गया.

गोवर्धन के दिल में अब बदले की आग जल चुकी थी. वह कैसे भी करके राजा ठाकुर या उसके परिवार से बदला लेकर hi दुम्म लेगा.. ऐसी उसने कसम खा ली थी..

करणवीर से उसकी दोस्ती थी. करणवीर इस घटना से अनजान था..

कुछ महीनो बाद करणवीर घर लौटा.

गोवर्धन भी गुप्त रहते हुए वहां पोहंच गया. करणवीर नहीं जनता था.. हर बस्ती में कोई न कोई बिकाऊ लड़की हुआ करती है. कोई न कोई पैसो के लिए कुछ भी कर जाया करती है.

राजा ठाकुर की बस्ती की लड़कियों के एक लड़की थी.. गौरी.. गौरी नाम की लड़की पहले से hi गोवर्धन की गुप्त रखेल थी. जब भी गोवर्धन बस्ती लौटा करता था. दोनों रंग रैलियां मनाया करते थे.

करणवीर को फंसने में गौरी ने गोवर्धन का साथ देने की हामी भर ली.. गौरी को गोवर्धन से मज़े तो मिल hi रहे थे. पैसा भी मिला तोह वह इंकार नहीं कर सकीय.

गोवर्धन पर जवानी भी टूट कर आई थी. गौरी भी खूब रास भरी थी. गोवर्धन के साथ उसकी खूब निभ रही थी.

करणवीर हवेली पोहंचा तोह गोवर्धन और उसके परिवार वाली घटना उसे मालूम नहीं पड़ी. सब उसकी पढाई को लेके बातें करने लगे. गोवर्धन वाला किस्सा सब भूले हुए थे. करणवीर कुछ दिन रहता तोह खुद जान जाता..

अगले दिन करणवीर बस्ती में निकला तोह गोवर्धन को पता चल गया. गोवर्धन ने एक लड़के से कह कर करणवीर को वहीँ बुलवा लिया.. वहां गौरी भी आ गई. उस समय गोवर्धन गौरी के साथ मस्ती कर रहा था. करणवीर वहां गोवर्धन को मज़े करते देख कर हसने लगा.

गोवर्धन ने करणवीर को भी साथ शामिल होने के लिए बोलै तोह करणवीर हैरान हो गया. करणवीर इंकार करने लगा. पर कैसे भी करके गोवर्धन ने करणवीर को गौरी के लिए राज़ी कर लिए..

गोवर्धन जनता था, करणवीर ज़यादा सोचने वाला लड़का नहीं है.. गोदरधान इस बात पर भी खुश था. करणवीर अभी उसके बारे में, उसके परिवार के बारे में कुछ नहीं जनता..

गोवर्धन गौरी को इशारा करके करणवीर से कुछ देर में आने का बोल कर निकल पड़ा..

करणवीर और गौरी बातें करने लगे.. धीरे धीरे गौरी भी करणवीर के साथ खुलने लगी. गौरी बड़ी रसभरी लड़की थी. रमाकांत ठाकुर के रहते करणवीर की हिम्मत नहीं थी. वह अपने इलाके की किसी लड़की के साथ मज़े कर सके. वह जनता था, गलती से भी पकड़ा गया तोह सजा बड़ी सख्त मिलेगी उसे..

पर गोवर्धन उसका दोस्त था. गौरी उसकी बस्ती की थी. वह समझा, सब रज़ामंदी से हो रहा है. इसलिए वह गौरी के साथ आगे बढ़ने लगा.. करणवीर नहीं जनता था, उसके साथ क्या खेल खेला जा रहा है..

गौरी और करणवीर आगे बढ़ पाते.. उससे पहले hi राजा ठाकुर वहां पोहंच गए.. उसे देह कर करणवीर घबरा गया..

करणवीर : भाई आप..??

करणवीर घबराया भी और हैरान भी बड़ा हुआ.. उसे अंदाज़ा hi नहीं था उसका भाई वहां पोहंच जाएगा..

राजा ठाकुर को करणवीर की रंगीनियो की खबर रहा करती थी. शहर की बात और थी, पर यहाँ बस्ती में.. राजा ठाकुर कैसे अपने भाई को ऐसे घटिया काम करते देख सकता था.. करणवीर नहीं जनता था. पर राजा ठाकुर हमेशा करणवीर पर नज़र बनाये रखता था. आज भी उसके दो आदमी करणवीर के पीछे थे..

जैसे hi करणवीर को एक लड़का गोवर्धन के पास ले गया. फ़ौरन hi राजा ठाकुर को खबर कर दी गयी थी.

राजा ठाकुर : किसी के रचाये षडयंत्र में फसने जा रहे थे. कितनी बार कहा है तुझे.. होश से काम लिया करो..

ये सुनकर करणवीर हैरान हो गया..

गौरी थार थार कांपने लगी थी..

वहीँ गोवर्धन कुछ फैसले पर उस माकन पर नज़र बनाये हुए था. जैसे hi उसे राजा ठाकुर आते दिखे वह समझ गया. उसका प्लान फ़ैल हो गया था. वह फ़ौरन वहां से भाग लिए था.. उसे ग़ुस्सा तोह बोहत आया था, राजा ठाकुर पर.. पर कर भी क्या सकता था.

फिर कभी सही.. ऐसा सोच कर वह वहां से खिसक लिए था.

करणवीर : (शॉकेड) षडयंत्र..??

राजा ठाकुर : हाँ! षडयंत्र!

राजा ठाकुर फिर गोवर्धन के परिवार बारे सब बताने लगे.. करणवीर सुनकर दहल उठा. लक्समिकान्त की मौत का सुनकर वह खुद को सांप से दस्ता हुआ महसूस करने लगा था. गौरी को देख कर गौरी के साथ शादी का सन भी वह पल भर में देख गया था..

करणवीर राजा ठाकुर को सॉरी बोलने लगा. उससे गले मिलके थैंक्स भी कहने लगा..

गौरी राजा ठाकुर के पैरों में गिर कर जान बख्शी की भीक मांगने लगी.. करणवीर ने गौरी को एक ठोकर मार कर दूर कर दिए.. उसे बड़ा ग़ुस्सा आ रहा था गौरी और गोवर्धन पर..

बाद में राजा ठाकुर ने गौरी के परिवार को घर और खेत के पैसे देकर वहां से चलता कर दिए था.. यहाँ रहती तोह किसी और के साथ कोई घटिया खेल खेल जाती.

उसके बाद भी गोवर्धन बाज़ नहीं आया. वह अपनी साज़िशों में लगा था..

करणवीर गोवर्धन से बच के रहने लगा. दिमाग में कम् था, पावर में नहीं.. गोवर्धन ने भी फिर कभी करणवीर का सामना नहीं किया.. करणवीर उसके काम का था.. अब डायरेक्ट तोह वह कुछ नहीं कर सकता था..

गोवर्धन प्लान में बदलाव ले आया..

उसी गाओं में रह रहे एक परिवार के दूर के रिश्तेदारों को अपने साथ मिलाया.. उनकी एक बेटी थी रेखा.. जो बाद में करणवीर की पहली पत्नी बानी.. उसे अपने साथ मिला कर करणवीर के लिए चारा बनाया जाने लगा.. रेखा को करणवीर के लिए उसी बस्ती में रहने को बोल दिए.. वही रह कर करणवीर पर डोरे डालने को बोल दिए.. इस काम में रेखा बहुत आगे थी.

रेखा बड़ी सुंदर लड़की थी. करणवीर उसपर सच में hi लट्टू होने लगा.. कुछ ऐसी hi कलाओं से भरी हुई थी रेखा..

इस बात के चलते घर पर करणवीर के साथ सख्ती बरती जाने लगी. बात ज़यादा गलत भी नहीं थी. बस करणवीर को समझा hi सकते थे. करणवीर इस बार राजा ठाकुर या किसी की भी नहीं सुन रहा था. वह किसी भी हाल में रेखा से शादी करना चाहता था. ऐसा hi रेखा ने उसे अपनी अदाओं में उलझा लिया था..

पर शादी तोह वह नहीं कर सकता था. ऐसा कोई भी होने नहीं दे सकता था.. वंश को आगे बढ़ने के लिए सामने वाला ठाकुर हो या न हो. पर नस्ली खंडन से ज़ररुई होना चाहिए.. ऐसा इसलिए था, क्यूंकि परिवार के सबसे बड़े बेटे को राजा ठाकुर बनना पड़ता था. लोगों की भलाई के लिए जीना मरना पड़ता था.

ऐसा hi नियम पुरजावू ने बनाया हुआ था.

ज़माना बदल रहा था. पर राजा ठाकुर परिवार में ऐसा कोई बदलाव नहीं आ रहा था. करणवीर बग़ावत पर उतर आया.. और रेखा के साथ सब छोड़ छड़ के निकल पड़ा..

गोवर्धन को आधी कामयाबी मिल गयी थी. पर पूरी नहीं मिल पायी.. करणवीर अपने हिस्से की दौलत को भी ठुकरा आया था. रेखा से शादी करि तोह बाद में रेखा ने बहुत कहा, वापिस लौट कर अपने हिस्से की दौलत वापिस ले ले.. पर करणवीर मंद बुद्धि hi नहीं, अड़ियल तत्तो भी था. वापिस नहीं लौटा.. रेखा के पीछे गोवर्धन था. पर रेखा करणवीर को अपनी अदाओं में तो फाँस गयी. करणवीर को वापिस लौट कर अपने हिस्से की जायदाद लेने पर मजबूर नहीं कर सकीय.

अगर ऐसा होता तोह गोवर्धन उसी पैसे से रातों रात अमीर हो जाता.. पर यहाँ आ कर गोवर्धन फ़ैल हो गया..

गोवर्धन के कहने से रेखा ने करणवीर को कुछ ऐसा खिला दिए.. जिसके खाने से 2 hi महीनो में करणवीर बाप बनने की क्षमता खो बैठा.. रेखा और उसका परिवार गोवर्धन के इशारों पर नाच रहा था. रेखा भी माँ बनने के लिए तरह तरह के लोगों से छोड़ने लगी.. ऐसा उसे गोवर्धन ने बोल दिए था. वह चाहे तोह किसी के भी बच्चे की माँ बन सकती है.

गोवर्धन को शकुंतला मिली तोह गोवर्धन का खेल बढ़िया से आगे बढ़ने लगा. शकुंतला बुद्धि में गोवर्धन से बढ़कर थी. शकुंतला रंडी नहीं थी. पर रंडियों से बढ़कर दिमाग उसके पास था. गोवर्धन और शकुंतला का साथ अच्छा चला..

फिर ऐसी चाल चली, शकुंतला की शादी करणवीर से करवा दी.. बिना शादी के करणवीर शकुंतला के कब्ज़े में नहीं आ सकता था..

गोवर्धन साला शादी नहीं कर सका था, फिर भी बाप बन गया था. बिना शादी के hi वह अपने असली बच्चू का बाप बनकर रहने लगा.. और ये बात शकुंतला के बच्चे जो गोवर्धन से थे.. सब जानते थे. वह भी उन दोनों के जैसे hi बने.. सब मिलकर फिर गोवर्धन के खेल को आगे बढ़ने लगे..

सोनाली कुछ काम दिमाग वाली थी. काम ज़हरीली थी.

रुपाली नंबर ले गयी तोह उसके लिए प्लान बना कर उसे राजा ठाकुर की बहु बना दिए गया..

गोवर्धन के शकुंतला से तीन बेटे थे.. जिनका ज़िक्र बाद में आएगा..



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सोनाली भी खून के आंसू रो रही थी. वह सोच भी नहीं सकती थी. उसकी आँखों के सामने उसके दोनों बेटों को जान से मार दिया जाएगा. वह भी इतने भयंकर अंदाज़ में. दोनों के सरों के चीथड़े उड़ा दिए थे दक्ष ने.

सोनाली एक माँ भी थी. कोई भी माँ अपने जिगर के टुकड़ो का ऐसा हाल नहीं देख सकती थी.

सोनाली के अंदर रुपाली जितनी सहन शक्ति नहीं थी. रुपाली जितना ज़हर भी नहीं था उसके अंदर.. पर थी वह भी एक सांप की बेटी, एक नागिन की बेटी.

करणवीर के बेटे (जो कह करणवीर का बीटा नहीं था) से मोहब्बत कर बैठी थी. अपने मिशन को अंजाम देने के लिए भी उसे शादी करनी पड़ी थी. बदला भी चाहिए था और राजा ठाकुर का पैसा भी.. इसलिए सब अपनी लाइफ मज़े से जीते हुए खेल में शामिल रहते हुए अपने अपने हिस्से का काम करते रहे..

उसका पति उसके परिवार के जैसा नहीं था. उसके बेटे भी उसके पिता के जैसे नहीं थे.

होते तोह ऐसे यौन लाचारों की तरह से नहीं मरते.

अब मर चुके थे तोह सोनाली के लिए सहन करना मुमकिन नहीं रहा था. जैसे मौत उसके बेटो को मिली थी. वह पागल हो गयी थी. उसके अंदर का ज़हर भी भयंकर हद तक बढ़ने लगा. वह खूंखार अंदाज़ में एक एक को देखने लगी..

पर आग तोह आज सब के अंदर जल उठी थी.. जिस जिस ने दक्ष को दोषी माना था. वह सब आज बदले विचारों के साथ खड़े थे..

करणवीर के नाम के बेटे और बेटियां, उनके बच्चे अब अपने अंजाम को सोच कर चिंतित थे.. जैसे मौत दो को मिल चुकी थी. उन्हें भी ऐसी hi मौत मिलेगी. सोच कर तोह कइयों का मूट hi निकल गया था..

राजा ठाकुर के परिवार के सभी सदस्य की हालत भी बहुत बुरी थी.

जैसा सब हुआ था. जैसा दक्ष ने कर दिखाया था, जैसे रूप में दक्ष उनके सामने आया था. किसी के लिए यकीं करने लायक नहीं था. दक्ष तोह एक प्यार करने वाला लड़का था. प्यार पाना और बाँटना उसका धरम था. लड़ना जनता था, शेरोन की तरह जीना जनता था. पर ऐसा तोह वह कभी नहीं था.. रुपाली वाले मटर को साइड कर दिए जाये तोह दक्ष बहुत ख़ास था. पर ऐसा दरिंदा तो वह नहीं था..

पायल सिंह, रोहिणी सिंह और सब दक्ष का दरिंदगी वाला रूप देख कर दहशत में आये हुए थे..

पायल सिंह, रोहिणी सिंह दक्ष के लिए नफरत भूल कर दक्ष के रूप को hi देखती रह गई थी.. कैसे दक्ष ने सबके सामने रुपाली को रंडी बोलै, कैसे उसे सबके सामने ज़लील किया.. कैसे उसके परिवार की पोल खोली, कैसे रुपाली की भाभी को रुपाली की बहन कहा.. कैसे रुपाली के भांजो के सर उड़ाए..

दक्ष को ऐसे रूप में देखने का तोह वह सोच भी नहीं सकते थे.

दक्ष षिमुना और रुपाली के साथ वहां से जा चूका था. पर सबके मोह अभी तक खुले हुए थे. सब के सब जैसे माहौल के ट्रांस में थे..

सोनाली और कुछ दूसरे रो रहे थे. राजा ठाकुर और करणवीर एक साथ खड़े हुए इस साडी सिचुएशन पर सदमे में थे..

बुआ, उसका बीटा और बेटियों की हालत भी बहुत पतली thi..woh भी दक्ष की दरिंदगी देख कर काँप उठे थे..

परिधि जो पहले दक्ष को देख के खुश थी. बाद में वह भी दक्ष की दरिंग्डी देख कर दहल उठी थी. पर वह जल्द hi नार्मल भी हो गयी.. जो देखा था, बहुत बहुत भयंकर था... दो दो सर उसके सामने hi उड़ाए गए थे. वह एक लड़की थी, नाज़ुक दिल वाली थी. उसके लिए ऐसे सन देखना आसान बात नहीं थी. पर पहले भी तोह इससे बदतर सन देख चुकी थी..

अपने भाई को ज़लील ो खुवार होक हवेली से निकलते देख चुकी थी.. जैसा उसका भाई के साथ हुआ था. जैसा अब्ब हुआ था, परिधि को ये सब पहले वाली घटना से बहुत काम लगा. वह जल्द नार्मल हो गई. वो बहुत ज़यादा ग़ुस्से में भी आ गई थी..

दक्ष जो शॉटगन वहीँ छोड़ गया था.. परिधि ने वह शॉटगन उठा ली.. परिधि को ऐसे रूप में आते देख कर सब फिरसे हैरान होने लगे..

सबकी तंत्र टूटी और अब सब परिधि को देखने लगे..

परिधि शॉटगन को लोड करने के बाद घूमी और अपनी माँ, दादी और पायल सिंह को देखने लगी. परिधि की ऑंखें नाम थी. एक दर्द भी था.

परिधि : (चीखती हुई) सूना आप सब ने.. sunaaaaa....aap...sab...ne.. अब आया यकीं मेरा भाई बेगुनाह था.. उसने कोई गुनाह नहीं किया था. हमारी चची वह नहीं है, जो दिखती थी.. वह प्लान से हमारे परिवार के शामिल हुई थी. प्लान से hi सब कुछ करती चली गयी थी. उस समय भी कुछ ऐसा hi हुआ था.. सूना आप सब ने. उस समय भी कुछ ऐसा hi खेल रचा गया था. एक खेल का पर्दा फर्श तोह कर दिए भाई ने.. रुपाली चची के खेल का पर्दा फाश मैं करुँगी...

परिधि की बातें सुनकर रोहिणी सिंह और पायल सिंह के साथ साथ दादी का सर भी झटका चला गया था.. वह भी अब समझ रहे थे.

पायल सिंह के साथ अलका की हवेली में एक खेल खेला जा चूका था. जिसमे वह बल बल बची थी.. अब उसे 100% यकीं होने लगा.. कुछः तोह गड़बड़ थी...

परिधि घूमी और शॉटगन का रुख विनय की और कर दिए.. विनय पहले hi पायल सिंह की मार के कारण लहुलहान था.. वह परिधि को अपनी और शॉटगन करते देख कर लड़खड़ा गया. उसे लगा अब उसका सर उड़ने वाला है.

परिधि : बोलल विणन्ननननननेयी... मैं फिरसे अपने सवाल को नहीं दोहराऊंगी. बोल दे.. जो भी जनता है.. सबब बोल दे.. warrrrna....warna तेरा सर मैं भी नहीं रहेगा तेरे कन्धुन पर...

परिधि ऐसी कभी नहीं थी.. गन चला लेती थी. पर ऐसे खूंखार रूप में वह कभी नहीं आयी थी..

विनय थार थार कांपने लगा : hhh..haaannn..haannnn...daksh ने कोई गलती नहीं करि थी.. ww..woh..woh..woh निर्दोष था. सब प्लांड था..

परिधि ने सुनकर सबको देखा.. सब को फिरसे शॉक लगा था. रोहिणी सिंह की आँखों से आंसू बहने लगे तोह पायल सिंह का झुका सर उठता चला गया. वह जहाँ शर्मसार थी, अपने भाई पर आरोप लगा कर उसे रेपिस्ट बोल गई थी. अब सब जान कर वह भी चंडी देवी के रूप में आने लगी.. वह आगे बढ़ी और एक गॉर्ड से गन लेकर विनय को शूट करने hi वाली थी..

परिधि ने एक हवाई फायर कर दिए.. पायल पलट कर उसे देखने लगी.. पायल सिंह की आँखों में खून उतर आया था..

परिधि : हाहाहा.. वाह्ह्ह्ह क्या बात है दीदी.. आप विनय को सजा देने जा रही हाँ.. विनय को सजा देंगी, परची, ऋचा या फिर चाचा जी को सजा देंगी.. किस किस को सजा देंगी आप.. इन सब को सजा देंगी आप... आप भी तोह सजा पाने वळून की लिस्ट में शामिल हाँ.

पायल सिंह ने सुना तोह गन उसके हाथ से छूट गयी.. वह वहीँ घुटनो पर गिर पड़ी.. उसका मैं होने लगा वह चीख चीख कर इतना रोये, इतना रोये, धरती पहात जाए..

पहले जैसे रुपाली और सोनाली ज़मीन पर तकरें मार रही थी. वैसे hi वह भी तकरें मारने लगे. ऐसा पायल सिंह का मैं होने लगा था. रुपाली और सोनाली तोह खुद को संभल गयी थी. पर पायल सिंह कैसे खुद को संभालती.. असली दर्द क्या होता है, आज उसे पता चल रहा था..

ऐसी hi हालत रोहिणी सिंह की भी थी.. वह एक माँ थी. अपने hi बेटे को बलात्कारी बोल गयी थी. उसे बेगुनाह होते हुए भी अपनी नज़रों से दूर होने के लिए बोल गयी थी.

अर्जुन सिंह और दक्ष के भाई अविराज, उन दोनों की आँखों में भी आंसू आ गए. झुके सर के साथ वह आंसू बहाने लगे.. वह अपना सर नहीं उठा प् रहे थे. अब सच सामने आया था तोह खून के आंसू रोने लगे थे..

वहीँ बुआ और उसके बच्चे खुश थे.. दादी की हालत भी बहुत ख़राब थी.. उसे भी अपनी सोच भी अफ़सोस होने लगा था.. कैसे वह अपने पोते पर इतना बड़ा आरोप लगा बैठी थी...

अर्जुन सिंह आगे बढ़ा और विक्रम सिंह के सामने जा पोहंचा...

अर्जुन सिंह : विललक्रममम मेरे भाई हो कर भी तुम मेरे साथ इतना घिनोना खेल खेल गए..

अर्जुन सिंह कुछ और बोलता.. परिधि बोल पड़ी...

परिधि : पापा आप पीछे हैट जाएँ. कोई भी सवाल मत करें आप या कोई भी..

अर्जुन सिंह ने ग़ुस्से से परिधि को देखा : तुम अपनी हद भूल रही हो परिधि.. बहुत बोलने लगी हो तुम आज कल..

परिधि ने राजा ठाकुर को देखा तोह राजा ठाकुर कुछ नहीं बोले. वह खली नज़रों से परिधि को देखने लगे... वह भी तोह बोलने लायक नहीं रहे थे.. वह भी तोह अपनी ज़िन्दगी की पहले और सबसे बड़ी गलती कर बैठे थे..

परिधि : उस दिन भी मुझे बोलने नहीं दिए गया था पापा. उस दिन मुझे खुल कर बोलने का मौका दिया जाता तोह आज ये दिन न देखना पड़ता..

परिधि गार्ड इंचार्ज से : मर्दों और महिलाओं को अलग खड़ा कर दिए जाए.. मर्दों के हाथ पीछे को बांध दिए जाए.

फ़ौरन hi हुकम की तामील की जाने लगी. कुछ देर में मर्द अलग और महिलाओं को अलग कर दिए गया..

वहीँ सब ने जाना गोवर्धन के बारे में..

रेखा को सब बोलना पड़ा.. साडी हक़ीक़त खोलनी पड़ी.

करणवीर सब जान कर खुद पर लानत भेजने लगा.. उम्र बिता दी, एक रंडी के लिए. अपने परिवार से भी दूर रहा.. बाप भी न बन सका.. कितना ज़ुल्म किया था उसने खुद पर..

राजा ठाकुर के पैरों में गिर कर उसने अपने सभी गुनहुन की माफ़ी मांगी.. राजा ठाकुर की नज़रों में करणवीर गुनहगार नहीं tha..karanveer तोह खुद गोवर्धन के ज़ुल्मो का शिकार होता आया था..

सब का फैसला बाद में करने के लिए सबको वहां से बंदी खाने ले जाया गया.. हवेली के अंदर hi एक मिनी जेल भी बानी हुई थी.. ऐसा इंतेज़ाम भी वहीँ मौजूद था..

विनय, विक्रम सिंह और परची को उनकी पहले वाली जगा पर भेज दिए गया...

वहां अब राजा ठाकुर और परिवार वाले hi खड़े रह गए थे.. सब एक दूसरे को देखने की ताक़त खो बैठे थे. कोई सुकून से था तोह बस परिधि और बुआ परिवार था...

परिधि ने राजा ठाकुर को इशारा किया.. राजा ठाकुर अपने भाई करणवीर को साथ लिए हवेली की और बढ़ गए..

परिधि ने अभी तक घुटनो पर बैठी पायल सिंह को देखा.. परिधि फिरसे हस्स कर पायल सिंह का मज़ाक उड़ने लगी.. उसके बाद परिधि ने अपनी माँ, दादी, पापा और भाई को देखा..

जिनके सर तोह अब नहीं झुके थे. पर उनकी ऑंखें अब परिधि की आँखों में देखने की ताक़त खो चुकी थी... सब के सब अपनी hi नज़रों में गिर चुके थे...

परिधि बुआ परिवार के साथ मिलकलर हवेली के अंदर जाने लगी...

रोहिणी सिंह मैं में.... परिधि तुम बहिन होकर जीत गयी.. और मैं माँ होकर भी हार गयी.. कितना अटूट विश्वास था तुम्हारा अपने भाई पर.. और मैं एक माँ होकर, वह भी दक्ष जैसे बेटे की माँ हो कर अंधी हो गयी.. अपने शेर जैसे बेटे पर विश्वास नहीं कर पाई.. क्यों मैं भूल गयी थी. बरसों hi तोह मैं दक्ष को देख कर कहती आई थी. भगवन ने दक्ष की माँ बना कर मुझे दुन्या भर की दौलत दे दी है. दक्ष जैसा बीटा भी तोह किस्मत वाली माओं को मिलता है.. काश मैं मंद बुद्धि न बनती.. काश मैं भी परिधि के तरह अपने बेटे पर विश्वास बनाये रखती तोह आज मैं अपने जीगढ़ के टुकड़े की नज़रों में न गिरती.. एक माँ होकर अपने hi बेटे की नज़रों का अब मैं कैसे सामना कर पाऊँगी..

रोहिणी सिंह को लगा.. जैसे उसके दिल में नन्हा सा खंजर बार बार उसके दिल में छेड़ कर रहा है.. ऐसा hi दर्द उसके दिल में होने लगा था..

ऐसा hi हाल अर्जुन सूंघ और अविराज का था.. जवान बीटा और जवान भाई तोह आइडियल हुआ करते हाँ. एक बाप के लिए बीटा जवान हो, काबिल हो, संस्कारों वाला हो. एक शेर जैसे कलेजे वाला हो. बाप का तोह सर गर्व से इतना ऊँचा हो जाता है... कैसे वह विश्वास नहीं बना पाए थे..

अर्जुन सिंह भी खून के आंसू रोने लगे..

अबिराज ने डायरेक्ट दक्ष को गलत नहीं कहा था. पर मन तोह था. उसके लिए फाइट तोह नहीं करि थी.. वह भी खुद को कसूरवार समझने लगा..

पायल सिंह की हालत शायद रोहिणी सिंह से भी बदतर थी.. उसकी आँखों से बहुत काम आंसू बाह रहे थे.. उसके आंसू तोह उसके दिल पर फिर रहे थे... देखने वाला ये कह सकता था. पायल सिंह को अपनी ज़िन्दगी के सबसे दर्द भरे पलों से गुज़रना पद रहा है..

उसे भी अब दक्ष के साथ बिताया एक एक पल याद आ रहा था.. अब वह खुद को गलियां दे रही थी. दक्ष जैसे भाई की बहिन होने पर गर्व करने की बजाये उसे एक हवसी दरिंदा बोल दिए था.. पायल सिंह hi थी. जिसने दक्ष के मोह पर थूका था. इतना तोह अलका भी नहीं बोल पायी थी. जितना पायल सिंह बोली थी. इतने थप्पड़ तोह किसी ने नहीं लगाए थे दक्ष के गालों पर, जितने पायल सिंह ने लगाए थे..

दक्ष के साथ बुरा बर्ताव करते हुए वह होश में hi नहीं थी. उसे बड़ा दुःख हुआ था, उसका भाई इतना चीप निकलेगा. वह सोच भी नहीं सकती थी. सब लाइव भी तोह देखा था उसने .. कैसे उसपर यकीं कर पाती.. इसलिए वह सब कर गुज़री थी.. जो मैं में आया था बोल गयी थी..

अब सब सच पता चला तोह ऐसे दर्द में आने लगी.. जो वह या और सोच भी नहीं सकता था..

पायल सिंह उठी और सब को ऐसे देखने लगी.. जैसे वह पागल हो चुकी हो.. उसकी आँखों के आंसू बहार न बाह कर अंदर बाह रहे थे.. सबको लगा, जैसे पायल पागल हो गयी हो. पायल सच में hi होश मंदों की दुन्या की लड़की दिखाई hi नहीं दे रही थी.

पायल सिंह अपने पैरों को घसीटते हुए हवेली के सबसे वरन एरिया में जाने लगी.. उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी हवेली की और जाने की..

कैसे वह दक्ष का सामना कर सकेगी..

ये चाँद शब्द उसके ब्रैनवा में बार बार उभरने लगे.....



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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


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Episode:43


कोई भी बरसों बाद घर लौटे तोह उसे ख़ुशी मिलती है.

पारर.....

मैं मेरा मामला अलग था..

मेरे साथ जो घटना घाटी थी.. वह जयंती अजीब थी, जितनी मेरे लिए ज़िल्लत से भरी थी..

उतनी hi मेरे लिए मेरे लिए दर्दनाक भी थी.. अब सब को असल बात का पता चला था तोह सबके भी दर्द की लपेट में आ गए थे. सब आत्मग्लानि में व्यस्त हो गए थे.

मैं दर्द की लपेट में आते हुए भी अजीब से विचारों में था.. षिमुना के मेरी लाइफ में आने से पहले, मेरे टेम्पल पोहच के ट्रैंनिंग लेने से पहले, समुद्री जड़ीबूटियों के खाने से पहले मैं हवेली लौट आता तोह बात अलग होती. मेरे दर्द का हाल अलग होता.

पर अब मैं बदल गया था. मेरे अंदर का सारा सिस्टम बदल गया था.. पहले जहाँ मेरे अंदर सबको लेके जो आग थी, वह अब काम हो गयी थी.

मेरे अंदर की आग बढ़ भी गयी थी.

पारर....

पर वह आग अपणु के लिए नफरत की आग नहीं था. वह आग थी, रुपाली और उसके परिवार के लिए नफरत की आग.. सेक्स की आग.. मैं खुद से बहुत लड़ता आया हों.. जबसे मैं ट्रैंनिंग ले रहा था.. मेरे अंदर की हीट हर समय मुझे बेचैन भी रखती थी.

अपनी बेपनाह विल पावर के चलते मैं खुद पर कण्ट्रोल करने में भी सफल रहा था. पर अब जब मैं ट्रैंनिंग पूरी कर चूका था. तोह मेरा कण्ट्रोल मुझ पार्स काम हो गया था.. रुपाली को एक बार छोड़ने के बाद भी मैंने उसे फिरसे नहीं छोड़ा था. ऋचा को भी नहीं छोड़ा था.. वर्ण मेरा मैं हो रहा था. मैं 2 4 दिन रेगुलर सेक्स करूँ. शायद ऐसा करने से मुझे कुछ रहत मिले.. ऐसे नींद मैं फील कर रहा था..

मेरी रगों में लावा बन के दौड़ रहा खून जिसमे षिमुना की, मास्टर ची फांग की खिलाई जड़ीबूटियों की आग भी थी.. मेरे जिस्म में हर समय जैसे शरारे से दौड़ने लगे थे.

सेक्स का सोच कर hi मैं लज़्ज़तो के समुद्र में होते खाने लगता था.. सेक्स मेरे लिए किसी स्वीट डिश के जैसा होक रह गया था.. ऐसी स्वीट डिश, जिसे आप बार बार खाना चाहें..

एक बात जो मैंने अब तक नहीं कही. बेपनाह थकन पर hi मुझे थकन का कुछ hi एहसास होता था. टेलिपाथी के ज़यादा उपयोग पर मैं कुछ मेंटली थकन फील किया करता था. आम लोगों के जैसे मैं थकता नहीं था..

अब भी मैं कमरे में षिमुना के साथ लेता हुआ था. मैं थका हुआ नहीं था. ऐसे hi बीएड पर ा कर लेट गया था.. रुपाली रंडी कुछ दूरी पर कड़ी हम दोनों को घूर रही थी.. उसकी आँखों की आग आज हमेशा से बढ़कर थी आग..

पारर...

किसी काम की नहीं थी, उसकी आग..

रुपाली फिलहाल तोह मेरा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती थी...

मैं षिमुना के साथ लेता हुआ बहार के हालत पर भी नज़र बनाये हुए था.. परिधि ने जो भी कहा, किया मैं सब देख गया था.. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा था. जिस की जो भी हालत हुई थी. मुझे जैसे किसी से कोई लेना देना नहीं था..

वहां मेरी हक़ीक़त जान कर सब का क्या हाल हुआ था. ये देखने के लिए मैं वहां ज़यादा देर नहीं रुका था.. मैं षिमुना के पास एक्टिव हो गया था.. मैं जनता था, अब सबके विचारों में कैसी कैसी अँधियाँ चलने लगी होंगी..

वहां रहता तोह मुझे किसी पर ज़यादा तरस नहीं आता.. हाँ अपणु के लिए ज़रूर मेरे अंदर से काम हो गयी थी. मेरे अंदर की आग बढ़ी हुई थी. पर वह साली अपना रंग बदल चुकी थी. शरीर के अंदर खून के साथ शरारे दौड़ रहे हों तोह नफरत ज़यादा देर नहीं रहती.. वह भी अपणु के लिए..

परिधि को खवाब में अपने साथ मज़े करते देख कर भी मेरे अंदर की आग ने दिशा बदली थी.. मेरे अंदर की आग ऐसे रूप में न होती तोह मैं कभी भी खवाब में परिधि को देख कर मज़े में न होता..

जैसा व्यव्हार सबने मेरे साथ किया था. भुगतान तोह सब को भुगतना hi पड़ेगा. ये बात मेरे अंदर भी चल रही थी. अपणु को सजा दे जा सकती है. ऐसा बर्ताव नहीं किया जा सकता. जिससे आपके अपने आप से हमेशा के लिए दूर हो जाएँ.. मैं भी कुछ ऐसा hi सोच रहा था.. पूरा पूरा एहसास करवाना ज़रूरी था..

षिमुना : दक्ष किस सोच में गम हो.?

मैं षिमुना को देख कर : नहीं कुछ खास नहीं. बस ऐसे hi..

मेरी नज़र रुपाली पर पड़ी वह वहीँ कड़ी हुई हम दोनों को शोला बार नजरों से देख रही थी..

षिमुना ने भी रुपाली को देखा और फिर मेरे कान में बोली : इसे ट्रांस में ले आओ दक्ष. बड़ी खतरनाक है ये. किसी पल भी कुछ गड़बड़ कर सकती है. ऐसी औरत मैंने पूरी ज़िन्दगी में नहीं देखि.

षिमुना की बात पर मैं है पड़ा : हाँ, इतनी ज़हरीली नागिन मैंने भी पहले कभी नहीं देखि..

रुपाली के ब्रेन में कोडवर्ड्स बोलके उसे ट्रांस में ले आया. वह फिरसे मेरी घुलम बन गई. रुपाली एक बार तोह लहराई, बल खाई. रूम में चरों और देखा.. मुझे देखा तो उसके होंटो पर स्माइल आ गयी.. फिर वह दोनों हाथ बांध कर घुलमो के जैसे कड़ी हो गयी..

षिमुना : ेहेहेहे.. ऐसे ये कितनी सूंदर दिखती है. देखो तोह कैसे पल भर में इसकी आँखों का ज़हर भी चला गया..

दक्ष : चला नहीं गया.. ग़ुलामी की ारः में जा छुपा है.. जैसे hi ग़ुलामी से बहार आई तोह फिरसे ज़हरीली नागिन बन जाएगी.

षिमुना मेरे सीने पर उँगलियाँ फेर रही थी.. मुझे मस्ती चढ़ने लगी तोह मैंने षिमुना को अपनी बहन में भर लिया.. षिमुना मेरी आँखों में देखने लगी तोह मैंने उसे किश कर दिए..

षिमुना शर्मा गयी..

ओह्ह्ह मीय गॉड!!

ये देख कर मैं हैरान हो गया..

मैं षिमुना को हैरानगी से देखने लगा.

दक्ष : शिमि! तुम.. शिमि तुम शर्माना भी जानती हो.

षिमुना शर्मीली मुस्कान होंटो पर सजाये मुझे देखते हुए बोली : हाँ दक्ष! अब मैं एक पवित्र नारी बन गयी हों न. तोह मेरे अंदर की बेहयाई भी मर गयी है. पहले जैसे मैं अपने प्लेनेट पर रहा करती थी. अब मैं वैसी नहीं रही..

दक्ष : ये तोह ज़यादती है मेरे साथ शिमि.. मुझे ऐसी शिमि पसंद नहीं है.. तुम पहले जैसी अच्छी लगती थी..

षिमुना : (एंग्री) मतलब क्या है तुम्हारा.? क्या मैं पहले जैसी बेशरम बनकर रहूं..

दक्ष : हाहाहा! मैंने ऐसा कब कहा. पर इतनी भी शर्म वाली शिमि मुझे नहीं चाहिए , सुना तुमने..

षिमुना : अब तोह मैं ऐसे hi रहूंगी..

षिमुना के होंटो पर मुस्कान आई.. षिमुना मुझे बड़ी चाहत से देखने लगी.

मैंने षिमुना को और भी अपनी बहन में कास लिया.,..

दक्ष : मैं तोह ऐसे hi तुम्हे छेड़ रहा था.. तुम तोह मुझे ऐसा रूप में बहुत पसंद आई हो. जानती हो शिमि. तुम एक ठकुराइन के जैसे दिख रही हो. ऐसी ठकुराइन जो सख्त मिज़ाज भी होती है और संस्कारो वाली भी. जैसी शर्म तुम्हारे चेहरे पर, आँखों में अब मुझे दिख रही है. यही शतम ो हाय तो एक नारी का सबसे बड़ा गहना होते हाँ.. ऐसे hi रहना तुम सदा... ऐसे तुम बहुत पायरी लगती हो.

षिमुना अंदर तक खिल उठी. उसका गुलाबी चेहरा और भी दमकने लगा..

शिमि मेरे होंटो पर किश न करते हुए मेरे सीने पर किश करते हुए बोली : जानती हों दक्ष. तुम मेरे भी सम्राट हो.. और मैं अपने सम्राट की रानी.. एक रानी अपने सम्राट को नहीं जानेगी तोह और किसी जानेगी.. धरती पर आने के बाद अकेले तुम hi तोह हो, जिसे जान्ने की छह रही मुझे.. तुम मेरे तन्न मैं धनं में मालिक हो दक्ष. ी लव यू दक्ष.. ुम्मम्हा ी लव यू..

दक्ष : ऐसे प्यार का इज़हार मत करो मेरे से.. वर्ण..

षिमुना ने मेरे सीने को दांतो में चबा लिए..

षिमुना : तुझे इज़हार नहीं करना है, मत करो. मेरा मैं होता है करने को तोह मुझे रोका मत करो..

दक्ष : हाहाहा.. जंगली बिल्ली.. कच्चा गोश्त कहती है...

षिमुना : मेरा सम्राट.. ी लव यू.. उम्म्म्मः उम्म्म्मः ी लव यू..

षिमुना ी लव यू बोलती रही और मैं हसने लगा.. प्यार शब्द पर अब मुझे हसी hi आती थी..

पर षिमुना का अंदाज़ जुड़ा था..



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हवेली में कोई भी एक साथ नहीं रहा था.. सब क सब अपने अपने कमरों में थे. सब के सब अपने अपने विचारों में उलझे हुए थे.. दक्ष की हक़ीक़त खुलने पर खुद पर लानत भेज रहे थे. दक्ष को सबने गलत समझा था.. कितना गलत बोल गए थे सब उस समय.

अर्जुन सिंह एक मर्द था. दक्ष को अच्छे से जनता था. 6 साल से दसख को गलत मानता आया था. अब जाना उसका बीटा जो एक शेर था.. वह कभी गलत नहीं था.. अर्जुन सिंह एक कमरे में दूर बंद किये एक चेयर पर बैठे अपने सर को दोनों हथु से थामे हुए थे.

रोहिणी सिंह का हाल ऐसा था.. उसकी तोह जैसे सांस hi उखाड़ने लगी थी.. बंद कमरे में वह ऐसे बिलक बिलक कर रो रही थी.. ऐसे वह कभी नहीं रोइ थी.. तब भी इतनी नहीं रोइ थी. जब दक्ष पर रा** का आरोप लगा था. तब ग़ुस्से में थी..

पारर.....

अब्ब वह आत्मग्लानि में थी... ऐसी आत्मग्लानि.. जो उसके दिल को छलनी छलनी किये जा रही थी...

पायल सिंह हवेली में न घुस कर हवेली के पीछे बने हुए के सर्वेंट क्वार्टर के एक कमरे में थी.. वहां के कच्चे फर्श पर घुटनो पर बैठी वह जैसे सदमे में थी..

अपने बाल खेंच खेंच कर वह अपने अंदर हो रही हलचल पर काबू पाने की कोशिश में थी.. पर आज जैसे वह खुद से लड़ पाने में नाकाम हो रही थी..

कहते हाँ, कभी कभी बड़ी बहिन भी अपने से छोटे भाई को इतना प्यार दे जाती है. जितना प्यार कभी एक माँ नहीं दे पति.. पायल सिंह भी ऐसी hi एक बहिन थी. दक्ष उसकी जान hi नहीं था. एक एक पल दक्ष का, पायल सिंह का एक साथ बीता था.. इतना hi प्यार था दोनों में..

अब वही सरे बीते पल पायल सिंह की आँखों के सामने आ रहे थे.. दक्ष का बोलै गया एक एक शब्द उसके कानो में गूँज रहा था.. दक्ष पर कभी गर्व करते हुए पायल सिंह ने जो जो शब्द बोले थे. वह सरे शब्द भी एक गूँज की सूरत उसके कानो में सुनाई दे रहे थे.

अपने कहे हुए शब्द जब उसे याद आने लगे तोह उसकी हालत और भी बुरी होने लगी..

कैसे इतने स्ट्रॉन्ग्ली विश्वास को रुपाली जैसी नागिन के एक hi दो में आते हुए चकना छोर करवा बैठी थी.

परिधि और बुआ परिवार एक साथ बैठा हुआ था. वह सब खुश भी थे और दुखी भी..

खुश इसलिए आज दक्ष की सच्चाई सबको मालूम पद गयी थी.. एक बार फिरसे उसी घटना को दोहराया गया था..

परिधि और सब मिलकर उसी घटना को डिसकस कर रही थी.. एक एक बात जो किसी ने भी बोली थी.. वह खोली जा रही थी.. दक्ष किस दर्द से गुज़रा होगा.. ये जान कर सब रोइ भी थी..

दादी को जो झटके अब तक नहीं लगे थे. वह अब लग रहे थे.. दादी सब फ़ौरन hi नहीं समझी थी. दादी दक्ष और रुपाली वाली घटना तो नहीं देख सकीय थी. पर इमेजिन कर के दक्ष से नफरत करने लगी थी..

वह ये सब सोचती रही थी. ये वाला काण्ड और दक्ष का रुपाली वाला काण्ड दोनों अलग हाँ. रुपाली और उसके पिता गोवर्धन ने जो किया वह सब गलत था. पर जो दक्ष ने रुपाली के साथ किया था. वह भी सही नहीं था..

दादी अब अपने कमरे में आई तोह साडी बातों पर फिरसे सोचने बैठी.. जैसे जैसे उनकी बुद्धि में बातें उतरने लगी. वह भी आत्मग्लानि में डूबने लगी.. वह भी आंसू बहाने लगी...

दादी मैं में : हमारे खंडन में कोई मर्द चरित्र से बुरा नहीं गुज़रा तोह दसख कैसे बुरा हो सकता था.. कितनी बड़ी भूल हुई हम सबसे..

राजा ठाकुर अपने भाई के साथ अपने कमरे में थे.. राजा ठाकुर तोह कई महीनो से आत्मग्लानि में थे. आज फिरसे उनके दिल का दर्द बढ़ा हुआ था.. फिर भी अपने दर्द पर काबू रखते हुए अपने इकलौते भाई के दर्द को काम करने में लगे हुए थे..

करणवीर बेचारे का दर्द बहुत ज़यादा था.. 40 साल से भी ज़यादा वह धोके में जीते आये थे.. कितना बड़ा खेल उनके साथ रचा गया था.. करणवीर बहुत ज़यादा टूट गए थे.. ऐसे समय पर राजा ठाकुर hi एक ऐसी हस्ती थे. जिनके पास रह कर वह अपने दर्द पर काबू रख सकते थे.. वर्ण तोह राजा ठाकुर के बाद कोई भी नहीं था उनका अपना..

जिस बच्चू को वह अपना समझ रहे थे वह तोह नाम के बच्चे थे.. उनका खून तोह कोई भी नहीं था.. बहुत बड़ा घाव मिला था करणवीर को भी...



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संजना माँ काली के मंदिर में पोहंची तो उसपर फुलून की बारिश होने लगी.. संजना देख कर हैरान रह गयी.

सूरज निकलने वाला था. जब वह मंदिर में पोहंची थी. संजना का ख्याल था. वह माँ काली के मंदिर पुहंचेगी तोह किसी को पता नहीं होगा.. पर ऐसा नहीं हो पाया था..

मंदिर के पंडित जी भी एक ज्ञानी थे.. वह संजना के माँ काली के मंदिर आने को जान गए थे.

संजना MAA...SANJANA माँ.. से पूरा मंदिर गूँज उठा था..

पंडित जी खुद संजना का सवागत करने के लिए वहीँ मौजूद थे....

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अलका उसी लकड़ी के झंडे में कैद वेट करती रही. अलका कभी कभी झरि से ऑंखें लगा कर बहार भी देख लेती थी.

अलका को समय मिला था तोह अलका माला के बारे में सोचने लगी थी. माला उसके किस किस काम आ सकती है. इस बारे में घोर कर रही थी. माला को लेके सोचते समय उसके अंदर के विचारों में जो बदलाव आया करते थे. अलका उसपर धयान देने लगी थी..

3 घंटे बाद कुछ लोग एक जीप में आते हुए दिखे.. जीप में एक हैवी मशीन गन लगी हुई थी. एक आदमी उस मशीन के साथ खड़ा हुआ था..

अलका मैं में : ये तोह कोई बहुत बड़ा और खतरनाक गैंग दीखता है. कैसे एक भयंकर मच्चिने गन लिए घूम रहे हाँ..

कुछ देर में वह जीप अलका के कैद खाने के सामने थी.. झोंपड़ी का दरवाज़ा खुला और एक जंगली के अलका को बहार निकलने को बोलै.. अलका बड़ी शान से उठी और झोंपड़ी से बहार निकल पड़ी..

आने वाले अलका की सुंदरता देख कर hi मचल उठे. सब के सब घटिया सोच वाले थे. अलका को देख कर रेल टपकने लगे.. बस्ती वाले दूर खड़े होकर सब देखने लगे..

अलका मैं में माला से बोली : क्या तुम इन सब को भी मार सकती हो. मुझे बिना देरी के मेरे देशवासियो को बचाना है.

उसी समय माला के अलग अलग दानो से अलग अलग रंगों की रेज़ निकली. एक मशीन गन के साथ जीप पर खड़ा था.. एक रे उसकी सर पर घुसी वह वहीँ गिर कर तड़पने लगा..

दूसरे 4 जो जीप से उतर कर अलका की और बढ़ने लगे थे.. माला से निकली रेज़ उन चरों में समां गयी.. वह भी वहीँ गिर कर तड़पने लगे..

अलका खुश हुई तोह बस्ती वाले ये देख कर चीखने चिल्लाने लगे.. अलका ने सबको घुरा तोह वह दम दबा कर भाग खड़े हुए.. कई मायें तोह अपने बच्चू को छोड़ कर भाग कड़ी हुई थी..

अलका जीप के अंदर से मरे हुए गैंगस्टर को बहार फ़ेंक कर खुद ड्राइविंग सीट पर जा बैठी.. अलका ने जीप स्टार्ट करि और टैरो के निशान को फॉलो करते हुए एक और बढ़ने लगी..

अलका निशान पर जीप चलते हुए आगे बढ़ने लगी. एक जगा उसे ग्रास पर तीरों के सही से निशान नहीं मिले तोह माला स्टेरिंग पर आते हुए अलका को दिशा का बताने लगी.

अलका के लिए फिर कोई मुश्किल नहीं रही.. अलका माला की मदद से गैंग्स के ठिकाने पर जा पोहंची. माला की मदद से वहां के गैंगस्टर्स को मार कर कैदियों को वहां से आज़ाद करवाया..

सब कैदी अपने देश की एक लड़की को देख कर हैरान हुए..

"आप कोण हाँ.. अकेले होते हुए आपने सबको मार दिए.. हमें भी बचा लिए"

अलका स्माइल के साथ : मैं अकेली कहाँ हों. भगवन है न मेरे साथ.

सब खुश हुए अलका की बात सुनकर..

सब वहां से निकले और एक साइड में चलने लगे. 1 घंटे में सब समुद्र के किनारे थे.

5 रॉ एजेंट्स.....

vinod..varun..subhash..shekhar और अजय..

विनोद : मैडम हम यहाँ से कैसे आगे बढ़ेंगे..

अलका यहाँ आ कर खुद से हैरान थी. माला उसे यहाँ पर क्यों लेके आई थी..

बाकि सब तोह अलका को फॉलो कर रहे थे. वह अलका को देखने लगे.. अलका कुछ जवाब देती. उससे पहले hi कुछ दूरी पर समुद्र में एक सबमरीन उभरती दिखाई दी..

उसे देख कर सब चीख पड़े..

"अरे ये तोह हमारे देश की सबमरीन है"

सुनकर अलका भी खुश हो गयी..

कुछ मिंटो से सबमरीन से एक बोट बहार निकली और साहिल hi और बढ़ने लगी..

अगले 25 मिंट में सब सबमरीन के अंदर थे.. सबमरीन में सब रॉ एजेंट्स hi थे.. सब अपने साथियों से मिलके बहुत खुश हुए..

वहां अलका को भी संजना माँ के जैसा सम्मान मिला.. देख कर अलका बड़ी खुश हुई..

फिर वहां से सबमरीन उसी दिशा में जाने लगी.. जहाँ उन 5 रॉ एजेंट्स ने कुछ पार्ट्स छुपा रखे थे..

वहां से वह पार्ट्स हासिल किये और इंडिया की और लौटने लगे..



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रॉ चीफ जहाँ बहुत ज़यादा खुश था.. वहीँ बहुत बड़ा हैरान भी था..

खुश इसलिए था, सम्राट इंडिया से था.. क्वीन भी इंडिया से थी. संजना माँ और अलका के होने से उसे बहुत ज़यादा ख़ुशी प्राप्त हो रही थी..

रॉ चीफ ने डीके के लिए बड़ी स्ट्रगल करि थी. पर डीके हाथ नहीं लगा था.. डीके हाथ लगता तोह देश के बहुत काम आ सकता था.. डीके के घर वळून को हिडन सिक्योरिटी दे रहा था रॉ चीफ.. पर अब रॉ का कोई भी एजेंट डीके हाउस के आस पास भी नहीं था..

गुरु जी आये थे रॉ चेइफ़ के दिमाग में....

गुरु जी : रंजन! डीके को तुम देश के लिए ख़ास समझ रहे हाँ. डीके के होने से देश और भी स्ट्रांग होगा.. ऐसा सोच कर डीके के परिवार को सुरक्षा प्रदान कर रहे हो. डीके अपने परिवार की रक्षा न सका तोह देश की रक्षा कैसे करेगा.. डीके खुद अपने परिवार की रक्षा कर सकता है.. वह देश भगत था और जीवन भर देश भगत hi रहेगा.. उसे अपने साथ मिलाने के लिए ये बच्चू वाला खेल मत खेलो.. देश के सैनिक हो तोह देश की सुरक्षा करो. डीके खुद अपने परिवार की सुरक्षा कर सकता है..

उस दिन से रॉ का कोई भी एजेंट डीके हाउस के आस पास भी नहीं दिखा था.. अब उस अनजान आइलैंड पर एक सबमरीन भेजने को भी गुरु जी ने कहा था..

अब रॉ चीफ को वहां अपने 5 फंसे हुए कैदी मिले तोह वह झूम उठा था.. उन 5 कड़ियों के बारे में उसका अनुमान था. वह सब मारे जा चुके होंगे. वह पार्ट्स दुश्मन के हाथ लग चुके होंगे..

पर ऐसा नहीं हुआ था.. सब के सब सेफ थे.. अलका ने सबको बचा लिया था.. सब के सब पार्ट्स के साथ देश लौट रहे थे.. ये खबर प् कर रॉ चीफ की ख़ुशी का कोई ठिकाना hi नहीं था..

संजना के बाद देश को अब अलका भी मिल गयी थी.

अभी तोह सब कोमल से अनजान थे.. कोमल तोह सब से बढ़ कर थी.. जब वह लौटती तोह जाने क्या कुछ कर जाती. कोमल तो असली देश भगत थी.. देश भगति उसकी नस नस में कूट कूट कर भरी हुई थी...

 
Episode:44

गोवर्धन पहले जो कुछ भी था.. जैसे भी था.. अब पहले जैसा नहीं रहा था..

गोवर्धन की बुद्धि भी अब बड़े काम की बुद्धि बन चुकी थी..

शकुंतला न तोह खुद बूढी हुई थी. और न hi गोवर्धन को बुद्धा होने दिए था..

कुछ ऐसी hi कमल की औरत थी शकुंतला..

शकुंतला आगे में तोह 70+ थी.. शकुंतला के ज़हरी रंग रूप की बात करि जाए तोह शकुंतला अब भी रुपाली की आगे की दिखती थी..

बात हैरानगी वाली है. पर शकुंतला ने ऐसा hi खुद को मेन्टेन करके रखा था. शकुंतला एक अनाथ लड़की थी. पर उसके विचार बहुत बड़े थे.. अपनी बस्ती के हकीम के पास रहा करती थी. वहीँ से शकुंतला को मिला वह ज्ञान जो उसमे जल्दी बूढा नहीं होने दे सकता था. उसके सारे सपने भी पुरे हो सकते थे..

शकुंतला ने उस हकीम से सारा ज्ञान लिया और दुन्या डिस्कवर करने निकल पड़ी.. शकुंतला एक रानी बनकर जीना चाहती थी. रानी बनकर मरना चाहती थी.

पर रानी बनने के लिए उसके पास कुछ नहीं था.. कुछ था तोह सबसे हसीं सुंदर बनकर रहने का ज्ञान..

ऐसे में शकुंतला को मिला गोवर्धन.. गोवर्धन से मिली शकुंतला को राजा ठाकुर के बारे में इनफार्मेशन.. गोवर्धन से मिल के शकुंतला को लगा, अब उसे रानी बनने से कोई नहीं रोक सकता..

गोवर्धन ने शकुंतला को नहीं फंसाया था. गोवर्धन खुद hi शकुंतला के चक्कर में फस गया था. गोवर्धन को मतलब था अपने बदले से.. शकुंतला का सपना था रानी बन्न कर जीने का.. दोनों की जोड़ी खूब बानी..

दोनों एक दूसरे का साथ देने लगे.. दोनों साथ रहकर प्लान पर प्लान बनाते रहे..

गोवर्धन से मिलने से पहले शकुंतला कइयों के साथ सो चुकी थी. गोवर्धन उसे मिला तोह शकुंतला ने अपने जिस्म की आग को बुझाने के लिए गोवर्धन को अपने ज्ञान से

ऐसी ऐसी जड़ी बूटियां खिलाई. गोवर्धन एक स्ट्रांग मन बन कर रह गया. गोवर्धन की सेक्स पावर कभी काम नहीं हुई.. सेक्स नीड्स के लिए शकुंतला के गोवर्धन सबसे बेस्ट था.

अपने प्लान को आगे बढ़ने के लिए गोवर्धन रेखा को आगे बढ़ा चूका था. शकुंतला सब जान गई थी. फिर शकुंतला ने गोवर्धन को बोल के करणवीर को जाल में फंसने को बोल दिए..

शकुंतला जैसी औरत को देख कर करणवीर पागल हो उठा.. रेखा से मोहब्बत की शादी करने के बाद भी करणवीर शकुंतला के लिए पागल हो गया. कुछ महीनो के चले शारीरिक सम्बन्ध में करणवीर शकुंतला से शादी के लिए बोल गया..

पर ये शादी सबके सामने खोली नहीं जा सकती थी. शकुंतला भी तोह यही चाहती थी. दोनों ने शादी कर ली. शकुंतला अपने इलाके में रहने लगी. करणवीर अपने इलाके में. वह हर महीने एक हफ्ते के लिए शकुंतला के पास रहने के लिए आने लगा..

ऐसे में शकुंतला से जाने बच्चे करणवीर अपने समझने लगा..

शकुंतला ने दो बेटियां और 3 बेटों को जनम दिए.. पांचू का बाप गोवर्धन बना.. शकुंतला इस मामले में असूलों पर चली थी. इस बात पर भी गोवर्धन शकुंतला से बहुत खुश था..

इस बीच गोवर्धन के माता पिता गुज़र चुके थे. वह गोवर्धन को बदला लेते हुए नहीं देख सके थे.. अपने बेटे की मौत का बदला देखे बिना hi दुन्या छोड़ कर चल बेस थे.

शकुंतला ने रानी बनने का सोचा तोह किस्मत और हालात भी उसका साथ देते चले गए..

शकुंतला इस बीच पूरा देश घूम चुकी थी. रानी रूप और पैसे से hi नहीं बन्ना चाहती थी. उसे पावर भी चाहिए थी.. ज्ञान जो उसके पास था, उसे और भी बढ़ाना था..

वह पूरा देश घूम कर अपने मतलब के लोगों को ढूंढा करती. जिससे जो ज्ञान मिलता ले लिया करती थी..

ऐसे hi एक बार शकुंतला को एक ऐसी औरत का पता चला. जो जंतर मंतर किया करती थी.. शकुंतला उसके पास गयी.. वह बुद्धि औरत थी. शकुंतला ने उसे उसके चेहरे और पुरे बदन की झुर्रियों को ख़तम करने का बोल दिए. सुनकर वह जादूगरनी बुढ़िया खुश हो गई. शकुंतला ने उसे कुछ समय अपने साथ रहने को बोलै.. वह मान गयी. शकुंतला उसे लेके अपने शहर आ गयी..

शकुंतला उस बुढ़िया को अपने ज्ञान मुताकिब हसीं बनाने लगी... 6 महीनो में hi वह बुढ़िया जवान तोह नहीं हुई. पर उसके चेहरे और पुरे बदन की स्किन बदल कर रह गयी.. वह बुढ़िया शकुंतला से बड़ी खुश हुई.. खुश होक उसने शकुंतला को कुछ जंतर मंतर सीखने का बोल दिए..

शकुंतला यही तोह चाहती थी.. इसी लिए तोह उसने ये सारा खेल रचा था..

शकुंतला ने उस बुढ़िया से कुछ जंतर मंतर सीख लिया.. शकुंतला को 8 मैहने लगे और शकुंतला कुछ जंतर मंतर सीख गयी..

बुढ़िया से शकुंतला को एक बुक भी मिली.. जिसमे बहुत कुछ था.. शकुंतला तोह वह बुक खुद भी पढ़ी और अपने पोतों को भी दी.. जिसे अपने मतलब का कुछ लगे, वह खतरे को समझते हुए कुछ भी प्राप्त करने की कोशिश कर सकता है..

बुढ़िया चली गयी.... जाते जाते शकुंतला को बहुत कुछ देर गयी..

शकुंतला ने जंतर मंतर वाली बात और बुक वाली बात अपने यहाँ के परिवार को अपनी हद रक् hi रखने का बोल दिए.. रुपाली या फिर सोनाली को भी पता न चले ऐसी बात बोल थी..

पदादि इलाके में भी शकुंतला ने अपनी कुछ प्रॉपर्टी बना ली थी.. शकुंतला के दो बड़े पोते और एक पोती उस बुक की कपीस बना कर वहां रहने के लिए चले गए.. पावर पाने के लिए वह भी पागल हो उठे थे.. ये सब बहुत रिस्की था. पर कुछ हटके पाने के लिए रिस्क तोह लेना hi पड़ता है......

सरे बच्चू की परवरिश शकुंतला ने की भी ऐसी थी. सब के सब एक दूसरे से बढ़कर थे..

जब डीके और ानोथेर प्लेनेट से आये हुओं की खबर चलने लगी तोह शकुंतला की बुद्धि ने उसे वारं करना शुरू कर दिए..

जितने जंतर मंतर वह जानती थी. उन सभी मन्त्रों का उपयोग किया शकुंतला ने..

पर वह असल बात की तह तक नहीं पोहंच सकीय..

शकुंतला जहाँ ये सोच गयी थी.. डीके अब ज़रूर हवेली लौट कर आएगा.. अगर डीके हवेली लौट कर आया तोह उसका खेल ख़तम हो सकता है.. उसके खतरनाक भी सबत हो सकता है..

दूसरा वह ये भी सोच गई थी. अगर उसे भी कुछ ज्ञान दूसरे प्लेनेट बारे मिल जाये तोह शायद कहीं कोई बात उसके काम की हो सकती है..

फिर नताशा वाला मटर हुआ तोह शूज वाली बात जान कर शकुंतला मचल उठी.. वह भी इस खेल में शामिल होने के लिए बेचैन हो उठी.. जवानी वह प् गयी थी. रानी भी वह बन गयी थी.. उसने अपने बच्चू को भी नताशा के लिए बोल दिए था.. शूज के लिए बोल दिए था..

जहाँ वह रहती थी, वहां राजा ठाकुर से हासिल किये पैसे से एक शानदार हवेली बना कर, कई कई नौकरानियां वहां रख कर वह एक रानी के जैसे hi जी रही थी..

अब उसके अंदर की हवस उसे और भी पॉवरफुल बनने के लिए बोलने लगी..

पर यहाँ मटर बदला हुआ था.. जहाँ उसका मैं मचल रहा था पावर पाने के लिए. शूज की एक जोड़ी अपने अंडर लेने के लिए. वहीँ वह डीके से दर भी गयी थी..

डीके समय के साथ साथ फेमस hi इतना ज़यादा हो गया था.. जगा जगा डीके का ज़िकर दूसरे प्लेनेट से आये हुओं के साथ जोड़ा जाने लगा था..

ऐसे में शकुंतला के लिए सतर्क होना बनता था.. उसने अपनी हवेली छोड़ी और पहाड़ी इलाके में बानी ख़ुफ़िया हवेली जा पोहंची.. बेपनाह दौलत उसके पास आ गयी थी. कई ठिकाने वह बना चुकी थी..

शकुंतला ने अपने सरे बेटो, पोतु और पोतियों की परवरिश राजाओं जैसे hi करि थी.. सब के सब ऐसे जीते थे, जैसे राजाओं के बेटे जिया करते थे.. सबके सब शानदार पर्सनालिटी के मालिक थे.. सब के सब लड़ने मरने वाले the..har किसम की गन और फाइटिंग वह सीख चुके थे..

अब दो पोते और एक पोती पिछले 3 सालों से इसी इलाके में उस बुक में मौजूद जंतर मंतर और दूसरी कलाओं को सीख रहे थे..

सकुंतला या कोई भी दक्ष के लिए आसान हरीफ़ नहीं था..

रुपाली सोनाली गन शूटिंग तक hi सीमित रही थी.. पर बाकि सब एक दूसरे से बढ़कर थे..

अलका वाली बस्ती में जो घटना घाटी थी. वहां से रिलेटेड बहुत साडी इन्फो शकुंतला के पास थी. वह सब समझ तोह नहीं पायी थी. पर अलका का पारिवारिक त्रैझ अब उसका नहीं हो सकेगा, ये बात वह जान गयी थी..

पायल अलका की हवेली से कैसे भागी.. परची की विनय से शादी हुई, ये डिटेल्ड बातें वह नहीं जान सकीय थी..

सम्राट और क्वीन के कारनामे खुल कर सामने आये तोह शकुंतला और भी सतर्क हो गयी.. वह जान गयी थी, ये सम्राट जो खेल भी खेल रहा है, सारा खेल टेलिपाथी का है. इतना ज्ञान उसके पास था..

पहाड़ी ठिकाने पर रहते हुए उसे बहार की साडी खरें मिल जाया करती थी..

टेलिपाथी से रिलेटेड जितना भी नॉलेज था.. उससे रिलेटेड जितनी भी बुक्स जहाँ से भी प्राप्त हो सकती थी. शकुंतला से अर्रंगे करवा ली थी.. वह और उसका सारा परिवार टेलिपाथी से रिलेटेड बुक्स को रीड करने में लगा रहा.

50 बरस से वह रानी बनने के सपने देख रही थी. कई बरसों से वह रानी बांके जीती आ रही थी.

सम्राट या क्वीन जैसे शकुंतला से रानी वाला सिंघसन नहीं छीन सकते थे.. शकुंतला कभी भी ऐसा होने नहीं दे सकती थी..

प्रेजेंट टाइम में राजा ठाकुर की हवेली में जो कुछ भी हुआ था.. उसी दिन की शाम से कुछ पहले दो बन्दे शकुंतला के पास पोहंचे.. उन दोनों से शकुंतला को राजा ठाकुर में रुपाली और सोनाली के दो बेटों के साथ जो हुआ वह पता चला..

सुनकर शकुंतला बहुत चीखी चिल्लाई..

"नहीं छोडूंगी.. किसी को भी नहीं छोड़ेंगी.. कुत्ते की मौत दूंगी मैं सबको"

फिर वह हैरान भी होने लगी. दक्ष को उनकी साडी असलियत कैसे मालूम पद गयी. जैसे खेल रचा था, दक्ष को कैसे पता चल सकता था. वह तोह अभी अभी लौटा है..

शकुंतला एक चेयर पर अपना सर थाम कर बेथ गयी. उसका तेज़ दिमाग चकराने लगा था.. जहाँ रुपाली और सोनाली के लिए वह चिंतित थी. अपने दो नातियों की हत्या पर दुखी थी.. वहीँ वह हैरान भी बहुत थी.. इतने दर्द में होने के बाद भी वह खुद पर काबू बनाते हुए विचारों में व्यस्त हो गयी थी.

गोवर्धन और उसके सरे बच्चे उसे देख रहे थे.. वह सब भी तैश में आये हुए थे. जो सुना था. सुनकर सबका दिमाग hi घूम गया था. दो जानो के सर उड़ाए गए थे.. जान कर किसी से भी सहन नहीं हुआ था..

शकुंतला कुछ देर में सबको देखने के बाद उठ कड़ी हुई..

शकुंतला : मैं नहीं जानती ये सब क्या है.. दक्ष को कैसे सब पता चल सकता है. पर एक बात है.. जब तक दक्ष की हक़ीक़त का पता नहीं चलता.. तब तक के लिए सब राब्ते ख़तम कर दो.. फिर गोवर्धन को इशारा किया. गोवर्धन हरामी था. शकुंतला की आँखों की जुम्बिश को भी जनता था..

दोनों आये खबरियों को उसी समय मार दिए गया..

शकुंतला : क्या इन दोनों के शिव कोई और बह जनता है, हम यहाँ हाँ..

"नहीं ये दोनों hi थे"

शकुंतला को जवाब मिला..

शकुंतला : मेरे अगले आर्डर तक कोई भी स्टेप मत लेना.. मैं सोचती हुई कुछ..

शकुंतला अपने ख़ास कमरे में जा घुसी और अपने जंतर मंतर में बिजी हो गयी..

अब उसके पास अपनी गुरु जादूगरनी से राब्ते के शिव कोई ऑप्शन नहीं बचा था.


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कोमल दिल्ली में पोहंची तोह एक लोकल होटल में घुस कर वह एक बार फिरसे अपना फेस बदल गयी..

वहां से निकली तोह के इंडियन लड़की के रूप में थी. शाम होने वाली थी. एक वरन एरिया में कोमल ने अपने सरे ID's जला दिए..

अब उसे उसे पहचानने वाला कोई नहीं था.. कोमल एक रिक्शा में बैठी और एक कोठी पर जा पोहंची..

वहां से रिक्शा वाले को चलता किया.. और गेट पर खड़े होकर बेल्ल बजायी.. गेट में एक छोटी खिड़की खुली और एक चेहरा कोमल को दिखाई दिए.. वह कुछ पूछता कोमल से.. कोमल ने दो उँगलियों को खड़ा किया और दोनों उँगलियाँ उसकी आँखों में घुसा दीं.. वह पीछे हटकर चीखता उससे पहले hi कोमल ने उसकी आंख से उँगलियाँ निकलकर उसकी गर्दन दबोच ली..

कोमल : निचे हाथ करके कुण्डी खोलो.. वर्ण..

चैकीदार दर्द से तड़प रहा था. फिर भी हाथ निचे करके उसने कुण्डी खोल दी.. गेट का साइड दूर उनलॉकेड हुआ तोह कोमल ने उसे पीछे को धक्का देकर दूर को ज़ोर की लात मार दी..

दूर और चैकीदार दोनों एक साथ पीछे को हुए थे.. चौकीदार पीछे गिरता, गेट बड़ी पावर के साथ उसे लगा. कोमल शेरनी के जैसे अंदर घुसी और एक hi नज़र में चरों और देख कर निचे लेट गयी.. उसी समय गार्ड केबिन से फायर हुआ था..

जितनी देर में वह सब समझे थे. उतनी देर में कोमल अंदर प्रवेश कर गयी थी..

कोमल जैसे सुपर एजेंट को शूट करना बच्चू का खेल hi था..

क्रोकोडाइल मूव में कोमल मास्टर थी.. पल भर में hi वह एक जगा से दूसरी जगा पोहंच कर सेफ हो गयी.

इसी मूव के बीच में कोमल ने अपनी एक ऊँगली को फायर करने वाले गार्ड की और झटक दिए था. उसका एक नाख़ून उसकी ऊँगली से अलग होकर उस गार्ड के माथे में जा घुसा था.. नाख़ून बेहद ज़हरीला था.. वह गार्ड दूसरा सांस नहीं ले पाया और गिर पड़ा.

कोमल ने उसका हशर देखा तोह उसके पास पोहंच कर गन उठाई. नाख़ून बी उसके माथे से निकल फिरसे अपनी फिंगर पर एडजस्ट कर गयी..

इतनी देर में सब सतर्क हो चुके थे.. कोई कोमल पर फिरसे फायर करता.. कोमल कोठी के अंदर की और दौड़ पड़ी..

एक जगा उसे एक और गार्ड उसे शूट करता हुआ दिखाई दिए.. वह कोमल को शूट करता.. उससे पहले hi कोमल की गुणसे एक बुलेट निकली और उसके गॉर्ड के सर में जा घुसी..

कोमल बड़ी स्पीड से दौड़ती हुई कोठी के अंदर जा घुसी. कोमल ने अंदर घुसते hi एक फायर कर दिए..

फायर की आवाज़ पर कोठी के अंदर कुछ महिलाओं के चीखने चिल्लाने की आवाज़ें सुनाई देने लगी..


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रुपाली घाघरा चोली में थी..

षिमुना उसे देख कर बहुत है रही थी.. रुपाली षिमुना को हस्ते देख कर आँखों से ज़हर उगल रही थी. उसका बस चलता तोह षिमुना को कच्चा hi खा जाती.

चोली का साइज काम था. आधे बूब्स नज़र आ रहे थे. निप्पल भी चोली में साफ़ मालूम पद रहे थे.. घागरा को काट कर उसके घुटनो से 4" ऊपर कर दिए था..

बड़ी अजीब दिख रही थी रुपाली..

षिमुना : ेहेहेहे! दक्ष मैंने ऐसी सुंदर ड्रेसिंग आज तक नहीं देखि.

मैं भी स्माइल करता रुपाली को देख रहा था.

दक्ष : ऐसे कपडे अब इसका नसीब हाँ..

षिमुना : बेचारी को पंतय तोह पहन लेने देते.. कहीं बैठी तोह बेचारी की पारी कहीं किसी को दिखाई न देने लगे.. ेहेहेहे

दक्ष : चलो रूम से बहार चलते हाँ. देखते हाँ सब क्या कर रहे हाँ..

षिमुना : वो तो तुम ऐसे hi जान सकते हो

दक्ष : डिनर भी तोह करना है न याद.. बड़ी भूक लगी है.

षिमुना हस्ते हुए : रुपाली को hi खा जाओ.

दक्ष : खाने को तुम भी तोह एक स्वादिष्ट डिश हो.. तुझे भी तोह एक बार चख चूका हों. तुझ जितनी स्वादिष्ट तोह ये नहीं है.

षिमुना : मेरी बात मत करो. मैं अब खाने की चीज नहीं रही. मैं तोह प्यार करने की चीज बन गई हों.

मैंने षिमुना को बहन में भर लिया और एक किश करदी : और प्यार करना मैं भूल चूका हों. टास्ते कर सकता हों, जितनी बार कहूँगी. कच्चा भी खा जाऊँगा तुझे मैं.

षिमुना : बस बस.. ज़यादा खाना सेहत के लिए अच्छा नहीं होता. अब चलो बहार.. देखें तोह सही, सब के चेहरे कैसे दीखते हाँ अब..

राइट हैंड षिमुना की कमर में डाले, लेफ्ट हैंड रुपाली की कमर में डाले में कमरे से निकलने लगा.. रुपाली का मैं नहीं था, मेरे साथ ऐसे बहार जाने में. एक तोह वह बड़े hi घटिया किसम के कपड़ो में थी. दूसरे वह मेरी बहन में लिपटी बहार नहीं जाना चाहती थी. एक बार चुद के भी वह मेरे साथ उनकंफर्टबले फील कर रही थी..

किस्मत की बात..

जैसे hi मैं एक कॉरिडोर से गुज़र कर निचे जाने लगा.. उसी पल बुआ एक रूम से निकलती हुई मुझे दिखी.. रुपाली बुआ को देख कर नज़रें झुका गयी..

मैं बुआ को देख कर स्माइल करने लगा : कैसी हो जाने मैं..

मैं बदल गया था तोह मेरा अंदाज़ भी बदल गया था. बुआ को देख कर बुआ को छेड़ने का मैं हुआ तोह बुआ को जाने मैं बोल दिए.

बोल तोह हम तीनो को hi देखती रह गयी..

बुआ ने रुपाली को नज़र भर कर देखा. फिर मुझे देख कर ख़ुशी का इज़हार करते हुए मेरे पास आई और मेरे सीने से लग कर मुझसे बोली : तुझे खुश देख कर मैं बहुत हुई हुई दक्ष बीटा.. वर्ण मैं बड़ी दर रही थी. सोच रही थी--

दक्ष : छोड़ें बुआ जनि.. चलें निचे चलते हाँ. वैसे आप कहाँ जा रही थी.

बुआ : मैं भी निचे hi जा रही थी. सब निचे hi हाँ..

बुआ एक बार फिरसे रुपाली को निचे से ऊपर तक देखते हुए बोली.. रुपाली का बस नहीं चल रहा था, ज़मीन फटे और वह उसमे समां जाए.. पर शायद मैं गलत था. रुपाली रंडी को इतनी शर्म भी नहीं आ सकती थी.

हम भी निचे जाने के लिए स्ट्रिस उतरने लगे.. स्ट्रिस एक सामने hi सोफों पर पायल दी को छोड़ कर सब बैठे हुए थे..

हमें आते देख कर सब खड़े हो गए थे.. कइयों की नज़रें झुक गयी तोह परिधि मुझे देख के खिल उठी. बुआ के बेटी देविका ने तो मुझे देख कर सीटी मार दी..

देविका : वहहहह क्या महाराजाओं का सा अंदाज़ है..

परिधि : एक रानी दिख रही है, और एक दासी..

उर्वशी अपनी माँ को देख कर शरारत से बोली : माँ भी तोह भाई के साथ आती हुई किसी महारानी से काम नहीं दिख रही हाँ..

जो खुश थे मेरे आने से. वह सब खिखिला कर है पड़े.. बुआ षिमुना के साथ लगी चल रही थी. सुनकर वह भी हसने लगी...


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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..


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ईद पर लिखी Himmat-Wala स्टोरी का.... Himmat-Wala Part 2 ईद द्वारा शुरू कर दिए गया है.. बहुत ने चाहने वळून ने मुझसे बोलै था. कितना समय बीत चूका .. अब तोह part 2 शुरू कर दो. तोह कर दिए है part 2 शुरू.. 👇👇👇👇

👉Himmat-Wala Part 2👈
 
अपणु को अपनेपन तोह दिखाना hi पड़ता है भाई..

डीके वाला मटर बहुत पहले पब्लिक्ली खुल गया tha..shakuntla तब hi जान गई थी.. तब hi वह सतर्क हो गई था. डीके तब चीन में ट्रैंनिंग में बिजी रहा.. डीके पहले टेलिपाथी नहीं जनता था. इसलिए शकुंतला से अनजान रहा. अब पता चलेगा.. रुपाली और जो हाथ लगे हाँ. उनके ब्रेन से डीके को क्या क्या इन्फो हाथ लगी है

♥️♥️

आत्मग्लानि में हुए हाँ तोह ये भी उनके लिए एक सजा hi है.. अपणु न विश्वाश न किया जाये.. उनपर आरोप लगाया जाये. बाद में पता चले, वह सब झूट था.. तोह ये भी काम सजा नहीं होती.

षिमुना का नया अनजान सबको पसंद आएगा..

दक्ष के साथ जुड़ने वाली है पांच पवित्र आत्माएं.. शकुंतला के पास है कला ज्ञान .. जो दक्ष के किसी काम का नहीं..

बहुत बहुत शुक्रिया भाई....♥️♥️

सॉरी फॉर लेट एंड इन्कम्प्लीट रिप्लाई
 
ये एक लांगेस्ट टेल है भाई... और इसे लिखने के लिए मुझे ज़यादा म्हणत करनी पद रही है...

Himmat-Wala Part 2 अंडर 100 उपदटेस की स्टोरी होगी.. और सम्राट वाली 300+

तोह आप खुद hi बताएं व्हाट ी दो.. आप जैसों के लिए hi तोह मैं लिख रहा हों.. और इस स्टोरी की अपडेट रूटीन अपनी रूटीन पर परफेक्ट जा रही है भाई.. कभी देरी होती है तोह दो दो उपदटेस एक साथ भी पोस्ट कर देता हों...

ग़म न करें, निराशा नहीं मिलेगी... स्पीड तब hi बढ़ती है, जब स्टोरी एक रिधम के साथ आगे बढ़ने लगती है. जहाँ ज़यादा म्हणत करनी पड़े, वहां स्पीड कुछ काम हो जाया करती है... कभी मेंटली बाँदा थक जाता है.. तो कहीं और मंद लगाने की कोशिश भी करता है.... बस यही समझ लें, मैं भी खुद को रिलैक्स hi करने के लिए इतर स्टोरी को आगे बढ़ने लगता हों.. ी ऍम विथ यू आल एंड ष्प.....
 
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इन्सेस्ट - Himmat-wala (इन्सेस्ट .. अडुल्टेरी .. एक्शन .. थ्रिलर) (कम्प्लेटेड)

HIMMAT-WALA Part 2 स्टार्ट कर दिए गया है..

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ऐसा माहौल तो बनना hi था.. पहले जहाँ खुशियां हुआ करती थी.. चहरों और चाहकर हुआ करती थी. दक्ष पे आरोप लगा के, उसे रेपिस्ट घोषित करके सब बदल दिए. अब सब सच सामने आया है तोह ऐसा माहौल तोह बने गए hi

करणवीर को बड़ी चोट पोहंची :साद:

हम्म सही कहा. उसके साथ तो होनी है वह तोह होती hi रहेगी. अब दुसरो की बरी है

:)

:लाफ:

यो बात तो थी सही लागे

बहुत बहुत शुक्रिया भाई... ♥️♥️
 
ये तो आम बात हो गई है.. पहले किसी को अंदाज़ा भी नहीं होता. चोट लगे तोह दर्द को सोचते हुए सब भूल जाते हाँ. बाद में सच पता चलने पे शर्मसार हो जाते हाँ

रुपाली भी तोह घर की सदस्य थी.. कैसे रुपाली के साथ हुए काण्ड को गलत मानते.. खेल बड़ा था. सब फास्ट चले गए

देखते हाँ अलका और दक्ष की मुलाक़ात कब और कहाँ होती है. कैसे होती है.. देखना तो इंटरेस्टिंग रहेगा... ♥️♥️
 
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