Episode:42
गोवर्धन कोण था..
गोवर्धन का परिवार राजा ठाकुर के इलाके में रहा करता था. उस समय राजा ठाकुर के पिता रमाकांत ठाकुर सिंघासन पर बिराजमान थे.
गोवर्धन का परिवार पैसे वाला परिवार था. अच्छा रहन सहन था. इलाके में खूब इज़्ज़त भी थी उनकी. पर गोवर्धन का पिता ढके छुपे अंदाज़ में मज़े कर लिया करता था. उसके दोनों बेटे भी उसके जैसे hi बने..
गोवर्धन का एक बड़ा भाई था. जिसका नाम लक्समिकान्त था..
लक्समिकान्त ने अपने इलाके की एक लड़की के साथ ज़बरदस्ती करि.. उसे डरा धमका कर चुप भी करवा दिए.. वह बेचारी लड़की गरीब थी, बहुत ज़यादा दर गयी थी. अपने परिवार को या फिर रमाकांत ठाकुर को अपने साथ हुए ज़ुल्म बारे नहीं बता सकीय.
नियति का खेल..
लड़की प्रेग्नेंट हो गई. लड़की की माँ को पता चल गया. लड़की से पुछा तोह वह उसे दरी हुई लगी.. माँ ने उसे बड़े प्यार से पूछा तोह रट हुए लड़की ने सब अपनी माँ को बता दिए.. लड़की की माँ ने अपने पति को बता दिए..
लड़की के माता पिता रमाकांत ठाकुर के पास जा पोहंचे. रो रो अपना दुखड़ा सुनाया..
रमाकांत ठाकुर बड़े ग़ुस्से में आ गए.. लष्मीकंठ और उसके परिवार को फ़ौरन बुलाया गया. इलाके के सभी बड़ों को भी बुलाया गया.. वहीँ केस की सुनवाई हुई.. लक्समिकान्त और उसके माता पिता इंकार करते रहे. पर रमाकांत की गहरी नज़रों ने सब जांच लिया था. ऐसी ऐसी बातें करें, लक्समिकान्त अपनी बातों में फस गया. सब जान गए, लड़की के पेट में लक्समिकान्त का hi बच्चा है. रमाकांत ठाकुर वही सबके सामने लक्समिकान्त और लड़की की शादी करवा दी..
गोवर्धन उस समय शहर में पढ़ रहा था. वहीँ करणवीर भी पढता था.
अब के राजा ठाकुर अपने पिता के साथ रहा करते थे.
राजा ठाकुर की पावर के आगे लक्समिकान्त या उसका परिवार सर झुका गया. पर उन्हें राजा ठाकुर का ये फैसला मंज़ूर नहीं था.
वह कुछ कर नहीं सकते थे.
समय बीता और लड़की ने एक बच्ची को जनम दिए.. गोवर्धन भी इस बीच घर के चक्कर लगता रहा था. उसे भी वह गरीब लड़की पसंद नहीं आई थी. गोवर्धन भी एक घट्टिया लड़का था..
बाद में उस लड़की और बच्ची की हत्या करवा दी गयी. एक सांप उनके कमरे में तब्ब छोड़ दिए गया था. जब वह दोनों सो रही थी. जब सांप ने दोनों माँ बेटी को दस लिया तोह पुरे परिवार ने शोर मचा दिए.. सबसे ऐसे बोलने लगे सांप ने दोनों को दस लिया था..
रमाकांत ठाकुर को खबर मिली तोह उसने अपने अंदाज़ से इन्वेस्टीगेशन करि. रमाकांत ठाकुर के साथ थे राजा ठाकुर.. दोनों ने मिलकर असल बात का पता करवा लिया.
लक्समिकान्त दोषी सबत हुआ...
लक्समिकान्त को वहीँ एक सांप द्वारा मौत दे दी गयी.. लक्समिकान्त मारा गया.. बच्ची और लड़की मौत बहुत बड़ा पाप था.. राजा ठाकुर के कहने पर रमाकांत ठाकुर ने गोवर्धन के परिवार का सारा पैसे उस लड़की के परिवार को दे दिए गया.. उसकी दो बेटियां एक एक बीटा और भी थे.. पैसों से उनका कुछ भला हो गया.
गोवर्धन को खबर पोहंची तोह वह भी दौड़ा दौड़ा आया था. पर तब तक उसका सब कुछ ख़तम हो चूका था. दौलत उसके परिवार से छीन चुकी थी. उसका भाई मारा गया था. गोवर्धन ये सब सहन नहीं कर पाया. और रमाकांत के फैसले को गलत करार दे दिए..
गोवर्धन ने खूब हंगामा मचाया था. रमाकांत ठाकुर से वह इस सब का बदला लेगा. ऐसा बोलने लगा.. उस समय करणवीर यहाँ पर नहीं था..
गोवर्धन और उसका परिवार वहां से कहीं और चला गया.
गोवर्धन के दिल में अब बदले की आग जल चुकी थी. वह कैसे भी करके राजा ठाकुर या उसके परिवार से बदला लेकर hi दुम्म लेगा.. ऐसी उसने कसम खा ली थी..
करणवीर से उसकी दोस्ती थी. करणवीर इस घटना से अनजान था..
कुछ महीनो बाद करणवीर घर लौटा.
गोवर्धन भी गुप्त रहते हुए वहां पोहंच गया. करणवीर नहीं जनता था.. हर बस्ती में कोई न कोई बिकाऊ लड़की हुआ करती है. कोई न कोई पैसो के लिए कुछ भी कर जाया करती है.
राजा ठाकुर की बस्ती की लड़कियों के एक लड़की थी.. गौरी.. गौरी नाम की लड़की पहले से hi गोवर्धन की गुप्त रखेल थी. जब भी गोवर्धन बस्ती लौटा करता था. दोनों रंग रैलियां मनाया करते थे.
करणवीर को फंसने में गौरी ने गोवर्धन का साथ देने की हामी भर ली.. गौरी को गोवर्धन से मज़े तो मिल hi रहे थे. पैसा भी मिला तोह वह इंकार नहीं कर सकीय.
गोवर्धन पर जवानी भी टूट कर आई थी. गौरी भी खूब रास भरी थी. गोवर्धन के साथ उसकी खूब निभ रही थी.
करणवीर हवेली पोहंचा तोह गोवर्धन और उसके परिवार वाली घटना उसे मालूम नहीं पड़ी. सब उसकी पढाई को लेके बातें करने लगे. गोवर्धन वाला किस्सा सब भूले हुए थे. करणवीर कुछ दिन रहता तोह खुद जान जाता..
अगले दिन करणवीर बस्ती में निकला तोह गोवर्धन को पता चल गया. गोवर्धन ने एक लड़के से कह कर करणवीर को वहीँ बुलवा लिया.. वहां गौरी भी आ गई. उस समय गोवर्धन गौरी के साथ मस्ती कर रहा था. करणवीर वहां गोवर्धन को मज़े करते देख कर हसने लगा.
गोवर्धन ने करणवीर को भी साथ शामिल होने के लिए बोलै तोह करणवीर हैरान हो गया. करणवीर इंकार करने लगा. पर कैसे भी करके गोवर्धन ने करणवीर को गौरी के लिए राज़ी कर लिए..
गोवर्धन जनता था, करणवीर ज़यादा सोचने वाला लड़का नहीं है.. गोदरधान इस बात पर भी खुश था. करणवीर अभी उसके बारे में, उसके परिवार के बारे में कुछ नहीं जनता..
गोवर्धन गौरी को इशारा करके करणवीर से कुछ देर में आने का बोल कर निकल पड़ा..
करणवीर और गौरी बातें करने लगे.. धीरे धीरे गौरी भी करणवीर के साथ खुलने लगी. गौरी बड़ी रसभरी लड़की थी. रमाकांत ठाकुर के रहते करणवीर की हिम्मत नहीं थी. वह अपने इलाके की किसी लड़की के साथ मज़े कर सके. वह जनता था, गलती से भी पकड़ा गया तोह सजा बड़ी सख्त मिलेगी उसे..
पर गोवर्धन उसका दोस्त था. गौरी उसकी बस्ती की थी. वह समझा, सब रज़ामंदी से हो रहा है. इसलिए वह गौरी के साथ आगे बढ़ने लगा.. करणवीर नहीं जनता था, उसके साथ क्या खेल खेला जा रहा है..
गौरी और करणवीर आगे बढ़ पाते.. उससे पहले hi राजा ठाकुर वहां पोहंच गए.. उसे देह कर करणवीर घबरा गया..
करणवीर : भाई आप..??
करणवीर घबराया भी और हैरान भी बड़ा हुआ.. उसे अंदाज़ा hi नहीं था उसका भाई वहां पोहंच जाएगा..
राजा ठाकुर को करणवीर की रंगीनियो की खबर रहा करती थी. शहर की बात और थी, पर यहाँ बस्ती में.. राजा ठाकुर कैसे अपने भाई को ऐसे घटिया काम करते देख सकता था.. करणवीर नहीं जनता था. पर राजा ठाकुर हमेशा करणवीर पर नज़र बनाये रखता था. आज भी उसके दो आदमी करणवीर के पीछे थे..
जैसे hi करणवीर को एक लड़का गोवर्धन के पास ले गया. फ़ौरन hi राजा ठाकुर को खबर कर दी गयी थी.
राजा ठाकुर : किसी के रचाये षडयंत्र में फसने जा रहे थे. कितनी बार कहा है तुझे.. होश से काम लिया करो..
ये सुनकर करणवीर हैरान हो गया..
गौरी थार थार कांपने लगी थी..
वहीँ गोवर्धन कुछ फैसले पर उस माकन पर नज़र बनाये हुए था. जैसे hi उसे राजा ठाकुर आते दिखे वह समझ गया. उसका प्लान फ़ैल हो गया था. वह फ़ौरन वहां से भाग लिए था.. उसे ग़ुस्सा तोह बोहत आया था, राजा ठाकुर पर.. पर कर भी क्या सकता था.
फिर कभी सही.. ऐसा सोच कर वह वहां से खिसक लिए था.
करणवीर : (शॉकेड) षडयंत्र..??
राजा ठाकुर : हाँ! षडयंत्र!
राजा ठाकुर फिर गोवर्धन के परिवार बारे सब बताने लगे.. करणवीर सुनकर दहल उठा. लक्समिकान्त की मौत का सुनकर वह खुद को सांप से दस्ता हुआ महसूस करने लगा था. गौरी को देख कर गौरी के साथ शादी का सन भी वह पल भर में देख गया था..
करणवीर राजा ठाकुर को सॉरी बोलने लगा. उससे गले मिलके थैंक्स भी कहने लगा..
गौरी राजा ठाकुर के पैरों में गिर कर जान बख्शी की भीक मांगने लगी.. करणवीर ने गौरी को एक ठोकर मार कर दूर कर दिए.. उसे बड़ा ग़ुस्सा आ रहा था गौरी और गोवर्धन पर..
बाद में राजा ठाकुर ने गौरी के परिवार को घर और खेत के पैसे देकर वहां से चलता कर दिए था.. यहाँ रहती तोह किसी और के साथ कोई घटिया खेल खेल जाती.
उसके बाद भी गोवर्धन बाज़ नहीं आया. वह अपनी साज़िशों में लगा था..
करणवीर गोवर्धन से बच के रहने लगा. दिमाग में कम् था, पावर में नहीं.. गोवर्धन ने भी फिर कभी करणवीर का सामना नहीं किया.. करणवीर उसके काम का था.. अब डायरेक्ट तोह वह कुछ नहीं कर सकता था..
गोवर्धन प्लान में बदलाव ले आया..
उसी गाओं में रह रहे एक परिवार के दूर के रिश्तेदारों को अपने साथ मिलाया.. उनकी एक बेटी थी रेखा.. जो बाद में करणवीर की पहली पत्नी बानी.. उसे अपने साथ मिला कर करणवीर के लिए चारा बनाया जाने लगा.. रेखा को करणवीर के लिए उसी बस्ती में रहने को बोल दिए.. वही रह कर करणवीर पर डोरे डालने को बोल दिए.. इस काम में रेखा बहुत आगे थी.
रेखा बड़ी सुंदर लड़की थी. करणवीर उसपर सच में hi लट्टू होने लगा.. कुछ ऐसी hi कलाओं से भरी हुई थी रेखा..
इस बात के चलते घर पर करणवीर के साथ सख्ती बरती जाने लगी. बात ज़यादा गलत भी नहीं थी. बस करणवीर को समझा hi सकते थे. करणवीर इस बार राजा ठाकुर या किसी की भी नहीं सुन रहा था. वह किसी भी हाल में रेखा से शादी करना चाहता था. ऐसा hi रेखा ने उसे अपनी अदाओं में उलझा लिया था..
पर शादी तोह वह नहीं कर सकता था. ऐसा कोई भी होने नहीं दे सकता था.. वंश को आगे बढ़ने के लिए सामने वाला ठाकुर हो या न हो. पर नस्ली खंडन से ज़ररुई होना चाहिए.. ऐसा इसलिए था, क्यूंकि परिवार के सबसे बड़े बेटे को राजा ठाकुर बनना पड़ता था. लोगों की भलाई के लिए जीना मरना पड़ता था.
ऐसा hi नियम पुरजावू ने बनाया हुआ था.
ज़माना बदल रहा था. पर राजा ठाकुर परिवार में ऐसा कोई बदलाव नहीं आ रहा था. करणवीर बग़ावत पर उतर आया.. और रेखा के साथ सब छोड़ छड़ के निकल पड़ा..
गोवर्धन को आधी कामयाबी मिल गयी थी. पर पूरी नहीं मिल पायी.. करणवीर अपने हिस्से की दौलत को भी ठुकरा आया था. रेखा से शादी करि तोह बाद में रेखा ने बहुत कहा, वापिस लौट कर अपने हिस्से की दौलत वापिस ले ले.. पर करणवीर मंद बुद्धि hi नहीं, अड़ियल तत्तो भी था. वापिस नहीं लौटा.. रेखा के पीछे गोवर्धन था. पर रेखा करणवीर को अपनी अदाओं में तो फाँस गयी. करणवीर को वापिस लौट कर अपने हिस्से की जायदाद लेने पर मजबूर नहीं कर सकीय.
अगर ऐसा होता तोह गोवर्धन उसी पैसे से रातों रात अमीर हो जाता.. पर यहाँ आ कर गोवर्धन फ़ैल हो गया..
गोवर्धन के कहने से रेखा ने करणवीर को कुछ ऐसा खिला दिए.. जिसके खाने से 2 hi महीनो में करणवीर बाप बनने की क्षमता खो बैठा.. रेखा और उसका परिवार गोवर्धन के इशारों पर नाच रहा था. रेखा भी माँ बनने के लिए तरह तरह के लोगों से छोड़ने लगी.. ऐसा उसे गोवर्धन ने बोल दिए था. वह चाहे तोह किसी के भी बच्चे की माँ बन सकती है.
गोवर्धन को शकुंतला मिली तोह गोवर्धन का खेल बढ़िया से आगे बढ़ने लगा. शकुंतला बुद्धि में गोवर्धन से बढ़कर थी. शकुंतला रंडी नहीं थी. पर रंडियों से बढ़कर दिमाग उसके पास था. गोवर्धन और शकुंतला का साथ अच्छा चला..
फिर ऐसी चाल चली, शकुंतला की शादी करणवीर से करवा दी.. बिना शादी के करणवीर शकुंतला के कब्ज़े में नहीं आ सकता था..
गोवर्धन साला शादी नहीं कर सका था, फिर भी बाप बन गया था. बिना शादी के hi वह अपने असली बच्चू का बाप बनकर रहने लगा.. और ये बात शकुंतला के बच्चे जो गोवर्धन से थे.. सब जानते थे. वह भी उन दोनों के जैसे hi बने.. सब मिलकर फिर गोवर्धन के खेल को आगे बढ़ने लगे..
सोनाली कुछ काम दिमाग वाली थी. काम ज़हरीली थी.
रुपाली नंबर ले गयी तोह उसके लिए प्लान बना कर उसे राजा ठाकुर की बहु बना दिए गया..
गोवर्धन के शकुंतला से तीन बेटे थे.. जिनका ज़िक्र बाद में आएगा..
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सोनाली भी खून के आंसू रो रही थी. वह सोच भी नहीं सकती थी. उसकी आँखों के सामने उसके दोनों बेटों को जान से मार दिया जाएगा. वह भी इतने भयंकर अंदाज़ में. दोनों के सरों के चीथड़े उड़ा दिए थे दक्ष ने.
सोनाली एक माँ भी थी. कोई भी माँ अपने जिगर के टुकड़ो का ऐसा हाल नहीं देख सकती थी.
सोनाली के अंदर रुपाली जितनी सहन शक्ति नहीं थी. रुपाली जितना ज़हर भी नहीं था उसके अंदर.. पर थी वह भी एक सांप की बेटी, एक नागिन की बेटी.
करणवीर के बेटे (जो कह करणवीर का बीटा नहीं था) से मोहब्बत कर बैठी थी. अपने मिशन को अंजाम देने के लिए भी उसे शादी करनी पड़ी थी. बदला भी चाहिए था और राजा ठाकुर का पैसा भी.. इसलिए सब अपनी लाइफ मज़े से जीते हुए खेल में शामिल रहते हुए अपने अपने हिस्से का काम करते रहे..
उसका पति उसके परिवार के जैसा नहीं था. उसके बेटे भी उसके पिता के जैसे नहीं थे.
होते तोह ऐसे यौन लाचारों की तरह से नहीं मरते.
अब मर चुके थे तोह सोनाली के लिए सहन करना मुमकिन नहीं रहा था. जैसे मौत उसके बेटो को मिली थी. वह पागल हो गयी थी. उसके अंदर का ज़हर भी भयंकर हद तक बढ़ने लगा. वह खूंखार अंदाज़ में एक एक को देखने लगी..
पर आग तोह आज सब के अंदर जल उठी थी.. जिस जिस ने दक्ष को दोषी माना था. वह सब आज बदले विचारों के साथ खड़े थे..
करणवीर के नाम के बेटे और बेटियां, उनके बच्चे अब अपने अंजाम को सोच कर चिंतित थे.. जैसे मौत दो को मिल चुकी थी. उन्हें भी ऐसी hi मौत मिलेगी. सोच कर तोह कइयों का मूट hi निकल गया था..
राजा ठाकुर के परिवार के सभी सदस्य की हालत भी बहुत बुरी थी.
जैसा सब हुआ था. जैसा दक्ष ने कर दिखाया था, जैसे रूप में दक्ष उनके सामने आया था. किसी के लिए यकीं करने लायक नहीं था. दक्ष तोह एक प्यार करने वाला लड़का था. प्यार पाना और बाँटना उसका धरम था. लड़ना जनता था, शेरोन की तरह जीना जनता था. पर ऐसा तोह वह कभी नहीं था.. रुपाली वाले मटर को साइड कर दिए जाये तोह दक्ष बहुत ख़ास था. पर ऐसा दरिंदा तो वह नहीं था..
पायल सिंह, रोहिणी सिंह और सब दक्ष का दरिंदगी वाला रूप देख कर दहशत में आये हुए थे..
पायल सिंह, रोहिणी सिंह दक्ष के लिए नफरत भूल कर दक्ष के रूप को hi देखती रह गई थी.. कैसे दक्ष ने सबके सामने रुपाली को रंडी बोलै, कैसे उसे सबके सामने ज़लील किया.. कैसे उसके परिवार की पोल खोली, कैसे रुपाली की भाभी को रुपाली की बहन कहा.. कैसे रुपाली के भांजो के सर उड़ाए..
दक्ष को ऐसे रूप में देखने का तोह वह सोच भी नहीं सकते थे.
दक्ष षिमुना और रुपाली के साथ वहां से जा चूका था. पर सबके मोह अभी तक खुले हुए थे. सब के सब जैसे माहौल के ट्रांस में थे..
सोनाली और कुछ दूसरे रो रहे थे. राजा ठाकुर और करणवीर एक साथ खड़े हुए इस साडी सिचुएशन पर सदमे में थे..
बुआ, उसका बीटा और बेटियों की हालत भी बहुत पतली thi..woh भी दक्ष की दरिंदगी देख कर काँप उठे थे..
परिधि जो पहले दक्ष को देख के खुश थी. बाद में वह भी दक्ष की दरिंग्डी देख कर दहल उठी थी. पर वह जल्द hi नार्मल भी हो गयी.. जो देखा था, बहुत बहुत भयंकर था... दो दो सर उसके सामने hi उड़ाए गए थे. वह एक लड़की थी, नाज़ुक दिल वाली थी. उसके लिए ऐसे सन देखना आसान बात नहीं थी. पर पहले भी तोह इससे बदतर सन देख चुकी थी..
अपने भाई को ज़लील ो खुवार होक हवेली से निकलते देख चुकी थी.. जैसा उसका भाई के साथ हुआ था. जैसा अब्ब हुआ था, परिधि को ये सब पहले वाली घटना से बहुत काम लगा. वह जल्द नार्मल हो गई. वो बहुत ज़यादा ग़ुस्से में भी आ गई थी..
दक्ष जो शॉटगन वहीँ छोड़ गया था.. परिधि ने वह शॉटगन उठा ली.. परिधि को ऐसे रूप में आते देख कर सब फिरसे हैरान होने लगे..
सबकी तंत्र टूटी और अब सब परिधि को देखने लगे..
परिधि शॉटगन को लोड करने के बाद घूमी और अपनी माँ, दादी और पायल सिंह को देखने लगी. परिधि की ऑंखें नाम थी. एक दर्द भी था.
परिधि : (चीखती हुई) सूना आप सब ने.. sunaaaaa....aap...sab...ne.. अब आया यकीं मेरा भाई बेगुनाह था.. उसने कोई गुनाह नहीं किया था. हमारी चची वह नहीं है, जो दिखती थी.. वह प्लान से हमारे परिवार के शामिल हुई थी. प्लान से hi सब कुछ करती चली गयी थी. उस समय भी कुछ ऐसा hi हुआ था.. सूना आप सब ने. उस समय भी कुछ ऐसा hi खेल रचा गया था. एक खेल का पर्दा फर्श तोह कर दिए भाई ने.. रुपाली चची के खेल का पर्दा फाश मैं करुँगी...
परिधि की बातें सुनकर रोहिणी सिंह और पायल सिंह के साथ साथ दादी का सर भी झटका चला गया था.. वह भी अब समझ रहे थे.
पायल सिंह के साथ अलका की हवेली में एक खेल खेला जा चूका था. जिसमे वह बल बल बची थी.. अब उसे 100% यकीं होने लगा.. कुछः तोह गड़बड़ थी...
परिधि घूमी और शॉटगन का रुख विनय की और कर दिए.. विनय पहले hi पायल सिंह की मार के कारण लहुलहान था.. वह परिधि को अपनी और शॉटगन करते देख कर लड़खड़ा गया. उसे लगा अब उसका सर उड़ने वाला है.
परिधि : बोलल विणन्ननननननेयी... मैं फिरसे अपने सवाल को नहीं दोहराऊंगी. बोल दे.. जो भी जनता है.. सबब बोल दे.. warrrrna....warna तेरा सर मैं भी नहीं रहेगा तेरे कन्धुन पर...
परिधि ऐसी कभी नहीं थी.. गन चला लेती थी. पर ऐसे खूंखार रूप में वह कभी नहीं आयी थी..
विनय थार थार कांपने लगा : hhh..haaannn..haannnn...daksh ने कोई गलती नहीं करि थी.. ww..woh..woh..woh निर्दोष था. सब प्लांड था..
परिधि ने सुनकर सबको देखा.. सब को फिरसे शॉक लगा था. रोहिणी सिंह की आँखों से आंसू बहने लगे तोह पायल सिंह का झुका सर उठता चला गया. वह जहाँ शर्मसार थी, अपने भाई पर आरोप लगा कर उसे रेपिस्ट बोल गई थी. अब सब जान कर वह भी चंडी देवी के रूप में आने लगी.. वह आगे बढ़ी और एक गॉर्ड से गन लेकर विनय को शूट करने hi वाली थी..
परिधि ने एक हवाई फायर कर दिए.. पायल पलट कर उसे देखने लगी.. पायल सिंह की आँखों में खून उतर आया था..
परिधि : हाहाहा.. वाह्ह्ह्ह क्या बात है दीदी.. आप विनय को सजा देने जा रही हाँ.. विनय को सजा देंगी, परची, ऋचा या फिर चाचा जी को सजा देंगी.. किस किस को सजा देंगी आप.. इन सब को सजा देंगी आप... आप भी तोह सजा पाने वळून की लिस्ट में शामिल हाँ.
पायल सिंह ने सुना तोह गन उसके हाथ से छूट गयी.. वह वहीँ घुटनो पर गिर पड़ी.. उसका मैं होने लगा वह चीख चीख कर इतना रोये, इतना रोये, धरती पहात जाए..
पहले जैसे रुपाली और सोनाली ज़मीन पर तकरें मार रही थी. वैसे hi वह भी तकरें मारने लगे. ऐसा पायल सिंह का मैं होने लगा था. रुपाली और सोनाली तोह खुद को संभल गयी थी. पर पायल सिंह कैसे खुद को संभालती.. असली दर्द क्या होता है, आज उसे पता चल रहा था..
ऐसी hi हालत रोहिणी सिंह की भी थी.. वह एक माँ थी. अपने hi बेटे को बलात्कारी बोल गयी थी. उसे बेगुनाह होते हुए भी अपनी नज़रों से दूर होने के लिए बोल गयी थी.
अर्जुन सिंह और दक्ष के भाई अविराज, उन दोनों की आँखों में भी आंसू आ गए. झुके सर के साथ वह आंसू बहाने लगे.. वह अपना सर नहीं उठा प् रहे थे. अब सच सामने आया था तोह खून के आंसू रोने लगे थे..
वहीँ बुआ और उसके बच्चे खुश थे.. दादी की हालत भी बहुत ख़राब थी.. उसे भी अपनी सोच भी अफ़सोस होने लगा था.. कैसे वह अपने पोते पर इतना बड़ा आरोप लगा बैठी थी...
अर्जुन सिंह आगे बढ़ा और विक्रम सिंह के सामने जा पोहंचा...
अर्जुन सिंह : विललक्रममम मेरे भाई हो कर भी तुम मेरे साथ इतना घिनोना खेल खेल गए..
अर्जुन सिंह कुछ और बोलता.. परिधि बोल पड़ी...
परिधि : पापा आप पीछे हैट जाएँ. कोई भी सवाल मत करें आप या कोई भी..
अर्जुन सिंह ने ग़ुस्से से परिधि को देखा : तुम अपनी हद भूल रही हो परिधि.. बहुत बोलने लगी हो तुम आज कल..
परिधि ने राजा ठाकुर को देखा तोह राजा ठाकुर कुछ नहीं बोले. वह खली नज़रों से परिधि को देखने लगे... वह भी तोह बोलने लायक नहीं रहे थे.. वह भी तोह अपनी ज़िन्दगी की पहले और सबसे बड़ी गलती कर बैठे थे..
परिधि : उस दिन भी मुझे बोलने नहीं दिए गया था पापा. उस दिन मुझे खुल कर बोलने का मौका दिया जाता तोह आज ये दिन न देखना पड़ता..
परिधि गार्ड इंचार्ज से : मर्दों और महिलाओं को अलग खड़ा कर दिए जाए.. मर्दों के हाथ पीछे को बांध दिए जाए.
फ़ौरन hi हुकम की तामील की जाने लगी. कुछ देर में मर्द अलग और महिलाओं को अलग कर दिए गया..
वहीँ सब ने जाना गोवर्धन के बारे में..
रेखा को सब बोलना पड़ा.. साडी हक़ीक़त खोलनी पड़ी.
करणवीर सब जान कर खुद पर लानत भेजने लगा.. उम्र बिता दी, एक रंडी के लिए. अपने परिवार से भी दूर रहा.. बाप भी न बन सका.. कितना ज़ुल्म किया था उसने खुद पर..
राजा ठाकुर के पैरों में गिर कर उसने अपने सभी गुनहुन की माफ़ी मांगी.. राजा ठाकुर की नज़रों में करणवीर गुनहगार नहीं tha..karanveer तोह खुद गोवर्धन के ज़ुल्मो का शिकार होता आया था..
सब का फैसला बाद में करने के लिए सबको वहां से बंदी खाने ले जाया गया.. हवेली के अंदर hi एक मिनी जेल भी बानी हुई थी.. ऐसा इंतेज़ाम भी वहीँ मौजूद था..
विनय, विक्रम सिंह और परची को उनकी पहले वाली जगा पर भेज दिए गया...
वहां अब राजा ठाकुर और परिवार वाले hi खड़े रह गए थे.. सब एक दूसरे को देखने की ताक़त खो बैठे थे. कोई सुकून से था तोह बस परिधि और बुआ परिवार था...
परिधि ने राजा ठाकुर को इशारा किया.. राजा ठाकुर अपने भाई करणवीर को साथ लिए हवेली की और बढ़ गए..
परिधि ने अभी तक घुटनो पर बैठी पायल सिंह को देखा.. परिधि फिरसे हस्स कर पायल सिंह का मज़ाक उड़ने लगी.. उसके बाद परिधि ने अपनी माँ, दादी, पापा और भाई को देखा..
जिनके सर तोह अब नहीं झुके थे. पर उनकी ऑंखें अब परिधि की आँखों में देखने की ताक़त खो चुकी थी... सब के सब अपनी hi नज़रों में गिर चुके थे...
परिधि बुआ परिवार के साथ मिलकलर हवेली के अंदर जाने लगी...
रोहिणी सिंह मैं में.... परिधि तुम बहिन होकर जीत गयी.. और मैं माँ होकर भी हार गयी.. कितना अटूट विश्वास था तुम्हारा अपने भाई पर.. और मैं एक माँ होकर, वह भी दक्ष जैसे बेटे की माँ हो कर अंधी हो गयी.. अपने शेर जैसे बेटे पर विश्वास नहीं कर पाई.. क्यों मैं भूल गयी थी. बरसों hi तोह मैं दक्ष को देख कर कहती आई थी. भगवन ने दक्ष की माँ बना कर मुझे दुन्या भर की दौलत दे दी है. दक्ष जैसा बीटा भी तोह किस्मत वाली माओं को मिलता है.. काश मैं मंद बुद्धि न बनती.. काश मैं भी परिधि के तरह अपने बेटे पर विश्वास बनाये रखती तोह आज मैं अपने जीगढ़ के टुकड़े की नज़रों में न गिरती.. एक माँ होकर अपने hi बेटे की नज़रों का अब मैं कैसे सामना कर पाऊँगी..
रोहिणी सिंह को लगा.. जैसे उसके दिल में नन्हा सा खंजर बार बार उसके दिल में छेड़ कर रहा है.. ऐसा hi दर्द उसके दिल में होने लगा था..
ऐसा hi हाल अर्जुन सूंघ और अविराज का था.. जवान बीटा और जवान भाई तोह आइडियल हुआ करते हाँ. एक बाप के लिए बीटा जवान हो, काबिल हो, संस्कारों वाला हो. एक शेर जैसे कलेजे वाला हो. बाप का तोह सर गर्व से इतना ऊँचा हो जाता है... कैसे वह विश्वास नहीं बना पाए थे..
अर्जुन सिंह भी खून के आंसू रोने लगे..
अबिराज ने डायरेक्ट दक्ष को गलत नहीं कहा था. पर मन तोह था. उसके लिए फाइट तोह नहीं करि थी.. वह भी खुद को कसूरवार समझने लगा..
पायल सिंह की हालत शायद रोहिणी सिंह से भी बदतर थी.. उसकी आँखों से बहुत काम आंसू बाह रहे थे.. उसके आंसू तोह उसके दिल पर फिर रहे थे... देखने वाला ये कह सकता था. पायल सिंह को अपनी ज़िन्दगी के सबसे दर्द भरे पलों से गुज़रना पद रहा है..
उसे भी अब दक्ष के साथ बिताया एक एक पल याद आ रहा था.. अब वह खुद को गलियां दे रही थी. दक्ष जैसे भाई की बहिन होने पर गर्व करने की बजाये उसे एक हवसी दरिंदा बोल दिए था.. पायल सिंह hi थी. जिसने दक्ष के मोह पर थूका था. इतना तोह अलका भी नहीं बोल पायी थी. जितना पायल सिंह बोली थी. इतने थप्पड़ तोह किसी ने नहीं लगाए थे दक्ष के गालों पर, जितने पायल सिंह ने लगाए थे..
दक्ष के साथ बुरा बर्ताव करते हुए वह होश में hi नहीं थी. उसे बड़ा दुःख हुआ था, उसका भाई इतना चीप निकलेगा. वह सोच भी नहीं सकती थी. सब लाइव भी तोह देखा था उसने .. कैसे उसपर यकीं कर पाती.. इसलिए वह सब कर गुज़री थी.. जो मैं में आया था बोल गयी थी..
अब सब सच पता चला तोह ऐसे दर्द में आने लगी.. जो वह या और सोच भी नहीं सकता था..
पायल सिंह उठी और सब को ऐसे देखने लगी.. जैसे वह पागल हो चुकी हो.. उसकी आँखों के आंसू बहार न बाह कर अंदर बाह रहे थे.. सबको लगा, जैसे पायल पागल हो गयी हो. पायल सच में hi होश मंदों की दुन्या की लड़की दिखाई hi नहीं दे रही थी.
पायल सिंह अपने पैरों को घसीटते हुए हवेली के सबसे वरन एरिया में जाने लगी.. उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी हवेली की और जाने की..
कैसे वह दक्ष का सामना कर सकेगी..
ये चाँद शब्द उसके ब्रैनवा में बार बार उभरने लगे.....
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आज के लिए इतना Hi मित्रो! मिलते हाँ अगले Episode के साथ जल्द Hi..
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