The Super Boy - Page 2 - SexBaba
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The Super Boy

अपडेट 9


नीरज के वह से जाने के बाद पायल शनाया से बोली.

पायल- तुम पागल हो क्या तुम्हे क्या जरुरत थी उसे है करने की तुम जानते नहीं को क्या की वो कैसा लड़का है वो जरूर पार्टी में कुछ न कुछ गड़बड़ करेगा.

Shanaya-Wo कुछ भी नहीं करेगा क्युकी वह पर बहुत सरे लोग होंगे और सबसे बड़ी बात वह पर तुम भी तो मेरे साथ होगी hi.

हलाकि शनाया ये तो बोल रही थी लेकिन उसे भी कही न कही ये लग रहा था की ये नीरज वह कुछ बखेड़ा जरूर खड़ा करेगा.

इधर मैंने जब सुना की नीरज ने शनाया को पार्टी में इन्विते किया है तो मई भी थोड़ा टेंशन में आ गया क्युकी जितना मैंने नीरज के बारे में सुना था उससे ये तो पका था की वो आज के पार्टी में कुछ न कुछ जरूर करेगा हलाकि मुझे अब ज्यादा टेंशन नहीं हो रहा था क्युकी सोनू ने वह जाने के लिए नीरज से परमिशन ले लिए था और नीरज ने खुद मुझे वह इन्विते किया था अभी मई ये सब सोच hi रहा था की तभी मेरे मोबाइल पर कॉल आने लगा जब मई अपना मोबाइल निकल कर देखा तो ये कॉल विशाल ओबेराय का आ रहा था.

मई- सोनू मेरा एक कॉल आ रहा है तुम यही बैठो मई कॉल अटेंड कर के आता हु.

इतना बोल कर मई कॉल रिसीव किया और वह से थोड़ी दूर जा कर बात करने लगा.

मई- है विशाल भी बोलिये कुछ काम था क्या.

विशाल- (घबराये हुए आवाज में) प्रतिक तुम कहा हो अभी.

मई जब विशाल को ऐसे घबराये हुए देखा तो उससे पूछा.

मई- क्या बात है विशाल भाई आप परेशां लग रहे है मई तो अभी सोल्लगे में हु.

विशाल- तुम मेरे घर अभी आ सकते हो क्या बहुत अर्जेन्ट है प्लीज.

मई- हां मई आ सकता हु लेकिन पहले आप मुझे ये बताइये की वह क्या हुआ है जो आप इतना घबराये हुए है वह सब ठीक तो है न.

विशाल- यहाँ कुछ ठीक नहीं है प्रतिक दरअसल बात ये है की मेरे पिता जी का कुछ दिन से तबियत ख़राब है इसलिए मई उनको डॉक्टर से इलाज करवा रहा था यहाँ तक की मई उनको देश के बड़े बड़े डॉक्टर को भी दिखा दिया लेकिन उनकी तबियत में कोई भी बदलाव नहीं हुआ लेकिन आज अचानक hi उनकी तबियत बहुत ज्यादा ख़राब हो गयी है इसलिए मैंने सिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. बीरेंद्र खुराना जो की देश के जाने मने डॉक्टर है उनको बुलाया लेकिन वो भी हाथ खड़ा कर दिए उनका कहना है की अब मेरे पिता जी के पास कुछ hi दिन बचा है प्लीज एक बार आप आ कर मेरे पिता जी को देख लेते तो सही था क्या आप अभी आ सकते है.

मई- ठीक है मई आता हु आप अपने घर का लोकेशन मुझे सेंड कीजिये.

इतना बोल कर मई कॉल कट कर दिया और फिर सोनू के पास आ गया और उसको बोलै.

मई- यार सोनू मुझे अभी एक अर्जेन्ट काम से बहार जाना है इसलिए मई अभी जा रहा हु तुमसे मई पार्टी में hi मिलूंगा.

सोनू- ठीक है तुम जाओ मई पार्टी में तुम्हारा इंतजार करूँगा.

फिर मई सोल्लगे से बहार आ कर ऑटो पकड़ता हु और उसको अड्रेस दे देता हु जब वो ऑटो वाला वो अड्रेस देखता है तो चौक जाता है फिर वो मुझे ऊपर से निचे तक देखता है फिर ऑटो स्टार्ट कर के चल देता है फिर वो रस्ते में मुझसे पूछता है.

ऑटो वाला- साहब आप कन्फर्म हो की आपको इसी अड्रेस पर जाना है.

मई- है मुझे इसी अड्रेस पर जाना है क्या कोई प्रॉब्लम है.

ऑटो वाला- नहीं साहब कोई प्रॉब्लम नहीं है वो क्या है न की आप जहा का अड्रेस मुझे दिए है वो इलाका रहिसो का इलाका है और वह पर कोई मिडिल क्लास आदमी नहीं रहता इस लिए मई ये सब आपसे पूछा.

मई- वह पर मेरा एक फ्रेंड रहता है मई उसी से मिलने जा रहा हु.

मेरा बात सुन कर ऑटो वाला फिर कुछ नहीं बोलै फिर करीब 1 ऑवर बाद मई ओबेराय मेंशन के पास पहुंच गया वह जाने के मई मेंशन के गेट पर गया तो गॉर्ड ने मुझसे पूछा.

गॉर्ड- किस्से मिलना है आपको.

मई- मुझे विशाल ओबेराय से मिलना है आप एक बार उनको इन्फॉर्म कर दीजिये की प्रतिक आया है.

गॉर्ड- विशाल सर अभी किसी से नहीं मिलेंगे वो अंदर किसी काम में ब्यस्त है आप अभी जाइये बाद में आइयेगा.

दरअसल जबसे विशाल के पिता जी का तबियत ख़राब हुआ था तब से ओबेराय मेंशन में सिर्फ फॅमिली मेंबर या फिर डॉक्टर hi आ सकते थे क्युकी विशाल को शक था की उसके पिता जी के तबियत ख़राब होने में उसके किसी दुश्मन का हाथ होगा इधर मई गॉर्ड को बहुत समझाया लेकिन गॉर्ड मेरा बात सुनाने के लिए तैयार hi नहीं था अभी मई गॉर्ड से बहस hi कर रहा था की तभी मेरा फ़ोन बजा मैंने देखा की फ़ोन विशाल का hi था इस लिए मई कॉल अटेंड किया तो उधर से विशाल का आवाज आया.

विशाल- आप अभी कहा पहुंचे है प्रतिक थोड़ा जल्दी आने की कोशिश कीजिये मेरे पिता जी का तबियत लगातार बिगड़ता जा रहा है.

मई- मई तो आपके मेन्शन के गेट पर कबसे खड़ा हु लेकिन मुझे आपका गॉर्ड अंदर hi नहीं आने दे रहे है.

विशाल- आप वही रुकिए मई अभी आ रहा हु.

इतना बोल कर विशाल कॉल कट कर दिया थोड़ी देर बाद विशाल वह पर आया और मुझसे बोलै.

विशाल- माफ़ करना आपको इतनी देर इंतजार करना पड़ा.

मई- कोई बात नहीं.

विशाल- चलिए हम अंदर चलते है (गार्ड से) सुनो ये मेरे खास मेहमान है अगर ये कभी यहाँ आये तो तुम लोग बिना कोई रोक टोक के इन्हे अंदर आने देना समझे.

गॉर्ड- जी साहब समझ गया अब ऐसी गलती दोबारा नहीं होगा.

फिर माँ और विशाल वह से मेन्शन के अंदर आ गए मई जैसे hi मेन्शन के अंदर आया तो मुझे अजीब सा अनुभूति हुआ मुझे ऐसा लगा की जरूर इस मेन्शन में कुछ गड़बड़ है यहाँ वाइब्स पॉजिटिव नहीं लग रहा था ऐसा लग हर था की यहाँ के हवाओ में नेगेटिव एनर्जी हो लेकिन ये एनर्जी बहुत काम था इस लिए मई कन्फर्म नहीं हो प् रहा था.

खैर मई इन सब चीजों से अपना ध्यान हटाया और विशाल के साथ उसके पिता जी के रूम में आ गया वह पर और भी लोग थे जिसमे से कुछ डॉक्टर तो कुछ नर्स थे मई जब रूम में एंटर किया तो सबका ध्यान मेरे ऊपर आ गया मुझे इस तरह से रूम आते देख कर एक डॉक्टर बोलै.

डॉक्टर- विशाल जी ये कोण है.

विशाल- डॉ. बीरेंद्र जी ये एक आयुर्वेदिक डॉ. है और ये यहाँ मेरे पिता जी को देखने आये है.

डॉ. बीरेंद्र- आप ये क्या बोल रहे है विशाल जी आपको पता है न की आपके पिता जी का कंडीशन क्या है उनको अगर एक भी गलत दवा दिया गया तो उनका जान भी जा सकता है.

विशाल- है मुझे सब पता है.

डॉ. बीरेंद्र- अगर आपको ये बात पता है तो आप कैसे किसी भी आदमी को अपने पिता जी के इलाज के लिए ला सकते है और ये तो देखने से डॉ. भी नहीं लग रहा है पका ये कोई बहुरुपिया है जो आपसे पैसा ठगने के लिए आया है.

विशाल- बस डॉ. बीरेंद्र आप प्रतिक के बारे में अब एक और शब्द भी नहीं बोलेंगे समझे मन की आप बहुत बड़े डॉ. है और हम आपका इज्जत भी करते है लेकिन आप किसी को भी बिना उसके बारे में जाने ऐसे hi कुछ नहीं बोल सकते समझे.

डॉ. बीरेंद्र- लेकिन मई तो आपके पिता जी के भलाई के लिए hi बोल रहा था वो क्या है न की हम लोग इतने दिनों से आपके पिता जी को जीवित रखे हुए है अगर कोई दूसरा आदमी आ कर कुछ गलत कर देता है तो हमारे इतने दिन का म्हणत बेकार हो जायेगा इस लिए मैंने बोलै.

विशाल- हम आपके बात को समझ रहे है लेकिन ये भी कोई मामूली डॉ. नहीं है आप एक बार इन्हे पिता जी को देखने दीजिये.

डॉ. बीरेंद्र- ठीक है जब आपका hi मन है तो अब मई क्या कर सकता हु.

विशाल- प्रतिक आप जाकर मेरे पिता जी को देख सकते है.

विशाल के बोलने के बाद मई उसके पिता जी के पास गया और उनको देखने लगा वो अपने बीएड पर बेहोश थे उनका शरीर धीरे धीरे सूखने लगा था ऐसा लग रहा था की उनके अंदर जीवन hi नहीं है उनका पूरा शरीर कला पद गया था फिर मैंने अपने दिव्या दृस्टि एक्टिव कर के उनको देखने लगा थोड़ी देर तक देखने के बाद मई उनके पास से हैट गया तो विशाल मेरे पास आया और मुझसे बोलै.

विशाल- कैसी कंडीशन है पिता जी का क्या वो ठीक हो सकते है.

मई- पहले मुझे आप ये बताइये की इनका इलाज यही डॉ. कर रहे थे.

विशाल- है इन्होने hi मेरे पिता जी का इलाज किया है ये सिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. बीरेंद्र खुराना है क्या कुछ गड़बड़ हो गया है.

मई- अभी ज्यादा तो नहीं हुआ लेकिन इनका अगर ऐसे hi इलाज चलता रहा तो कुछ देर बाद जरूर हो जायेगा.

मेरे बात को सुन कर डॉ. बीरेंद्र को गुसा आ गया और घुसे से मुझसे बोलै.

डॉ. बीरेंद्र- तुम कहना क्या चाहते हो की हमारा इलाज बेकार है हमारे इलाज से इनको कुछ हो जायेगा तुम जानते भी हो की मई कोण हु.

मई- आप कोई भी हो लेकिन जब आपका इलाज hi बेकार है तो मई उसे बेकार hi बोलूंगा न.

डॉ. बीरेंद्र- तुम जानते भी की मई सिटी हॉस्पिटल का डायरेक्टर हु और मई इस देश का जाने मने डॉ. भी हु मैंने आज तक न जाने कितने मरीजों का इलाज किया और उनको ठीक भी किया है तुम्हारी हिमत कैसे हुयी मेरे इलाज को बेकार बोलने की.

मई- मई आपको ये नहीं बोल रहा की आप बेकार डॉ. है या आपका इलाज बेकार होता है आप भले hi बहुतो का इलाज किया होगा और उनको ठीक भी किया होगा लेकिन यहाँ आपका इलाज बेकार है.

डॉ. बीरेंद्र- तुम मेरे ऊपर इल्जाम लगा रहे हो अगर तुम इसे साबित कर के नहीं बताये तो तुम्हारे लिए ठीक नहीं होगा.

अभी मेरे और डॉ. बीरेंद्र में बहस हो hi रहा था की तभी उस रूम का दरवाजा खुला और एक लड़की अंदर आयी और आते hi विशाल के पास गयी और उनसे पूछी.

लड़की- भैया अब कैसी है पापा की तबियत.

विशाल- कुछ ठीक नहीं है निधि पापा के हालत दिन पर दिन ख़राब होते जा रहे है.

निधि विशाल के छोटी बहन है जो यही पर हॉस्टल में रह कर पढ़ाई कर रही थी लेकिन जैसे hi उसको उसके पिता जी के बारे में पता चला वो तुरंत hi भागते हुए यहाँ आ गयी.

निधि- तो अपने किसी बड़े डॉ. को क्यों नहीं दिखाया.

विशाल- मैंने बहुत प्रयास कर लिया बहुत सरे डॉ. को भी दिखाया यहाँ तक की डॉ. बीरेंद्र जो की देश के जाने मने डॉ. है वो भी पापा के इलाज कर लिए लेकिन उनके बीमारी में थोड़ा भी सुधर नहीं हुआ.

निधि अपने भाई के बात सुन कर बहुत दुखी हो गयी और उसके आँखों से आंसू आने लगे तभी उसकी नजर डॉ. बीरेंद्र पर गयी जो अभी भी घुसे से मुझे घूरे जा रहे थे जब निधि ने डॉ. बीरेंद्र को वह देखा तो वो उनके पास गयी और उनसे हाथ जोड़ते हुए बोली.

निधि- प्लीज डॉ. बीरेंद्र आप तो देश के इतने बड़े डॉ. है प्लीज आप मेरे पिता जी को बचा लीजिये.

डॉ. बीरेंद्र मेरे तरफ देखते हुए मेरे ऊपर तंज कस्ते हुए बोले.

डॉ. बीरेंद्र- मई आपके पिता जी को कैसे बचा सकता हु मई तो एक बेकार डॉ. हु मेरी इलाज बेकार होता है.

निधि उनकी बात को सुन कर चौक जाती है और फिर चौकते हुए बोलती है.

निधि- ये आप क्या बोल रहे है किसने आपको बेकार बोलै अगर बेकार hi होते तो आपका नाम पूरा देश में नहीं होता आप एक महँ डॉ. है.

डॉ. बीरेंद्र- ऐसा आपका लगता है की मई एक अच्छा डॉक्टर हु लेकिन कुछ लोग है जो मेरे इलाज को बेकार बोल रहे है.

निधि- कोण है वो जिसने आपके इलाज को बेकार बोलै है आपका इलाज बेकार नहीं है वो आदमी hi बेकार होगा.

इन लोगो को ऐसे बात करता देख कर विशाल बिच में बोल पड़ा.

विशाल- आप लोग ये कैसी बाटे लेकर बैठ गए आप लोग ये बाटे छोड़िये और प्रतिक आप बताइये क्या आप मेरे पिता जी का इलाज कर सकते है.

मई- है मई कर सकता हु.

निधि अपने भाई के बात सुन कर मेरे तरफ देखती है और मुझे ऊपर से निचे तक देखने के बाद बोलती है.

निधि- भैया ये कोण है और आप इसे पापा के इलाज करने के लिए क्यों बोल रहे है.

विशाल- निधि ये है प्रतिक और ये एक आयुर्वेदिक डॉक्टर है.

निधि- भैया आपका दिमाग तो ख़राब नहीं हो गया है आप पापा का इलाज एक आयुर्वेदिक डॉक्टर से करवाएंगे और ये आपको कहा से एक डॉक्टर दिख रहा है.

विशाल- निधि तुम अभी इनके बारे में कुछ नहीं जानती इस लिए तुम चुप रहो.

डॉ. बीरेंद्र- है विशाल जी ठीक बोल रहे है प्रतिक एक अच्छा डॉक्टर है तभी तो ये मेरे इलाज को बेकार बोल रहा है.

निधि- क्या इसने आपके इलाज को बेकार बोलै.

डॉ. बीरेंद्र- और साथ में ये भी बोल रहा था की अगर मई आपके पिता जी का इलाज करते रहा तो वो ज्यादा समय तक जिन्दा नहीं रह सकते.

निधि- क्या इसने आपके इलाज को बेकार बोलै.

डॉ. बीरेंद्र- है इसी ने मेरे इलाज को बेकार बोलै है और अगर ये मुझे प्रूफ कर के नहीं बताया की मेरा इलाज बेकार है तो मई इसे यहाँ से सही सलामत जाने नहीं दूंगा.

मई- आपको प्रूफ चाहिए न ठीक है मई आपको प्रूफ देता हु आप मुझे सबसे पहले ये बताइये की इनको हुआ क्या है.

डॉ. बीरेंद्र- तुमको ये पता नहीं है की इनको हुआ क्या है तो तुम मेरे इलाज को बेकार कैसे बोल सकते हो.

मई- मई आपसे जितना पूछा आप सिर्फ उतना hi बताइये.

डॉ. बीरेंद्र- ये तो इनको देखने से hi लग रहा है की इनको कोई खतरनाक जहर दिया गया है जिसके कारन इनके शरीर का ऑर्गन काम करना बंद कर दिया है.

मई- है अपने ये सही बोलै की इनका ऑर्गन्स डैमेज हो गया है लेकिन ये गलत है की इनको पाइजन दिया गया है.

वह पर जितने भी लोग थे वो सब मेरी बात सुन कर चौक गए.

विशाल- अगर मेरे पिता जी को पाइजन नहीं दिया गया है तो इनका ऑर्गन्स डैमेज कैसे हो गया और इनका शरीर कैसे कला हो गया.

मई- आपके पिता जी का ऑर्गन डैमेज होने का कारण एक रेयर बीमारी है और रही बात इनके शरीर कला होने का तो इनको अभी तक जो भी इंजेक्शन दिया जा रहा था उससे इनके शरीर में टॉक्सिक जमा होते गया और वो टॉक्सिक इनके पुरे सरीर में फैल गया है जिसके कारन इनका शरीर कला हो गया.

डॉ. बीरेंद्र- तो आपके कहने का मतलब है की हम लोग जो इंजेक्शन इनको दे रहे थे वो इनके लिए खतरनाक था और वो इनको नुकसान पंहुचा रहा था.

मई- है एहि बात है अगर एक और इंजेक्शन इनको लगता तो इनके शरीर का सरे ऑर्गन्स फ़ैल हो जाते जिनके कारन इनका मृत्यु भी हो सकता था.

निधि- ये क्या नॉनसेंस बात तुम कर रहे हो ऐसा कुछ भी नहीं है मेरे पापा को पाइजन hi दिया गया है.

मई- अगर मेरे ऊपर आपको विश्वास नहीं है तो आप इनको एक और इंजेक्शन लगवा कर देख लो लेकिन अगर इनको कुछ भी होता है तो उसका रिस्पांसिबिलिटी मेरा नहीं होगा.

मेरे बात को सुन कर सब चुप हो गए फिर विशाल मेरे पास आ कर बोले.

विशाल- अगर ऐसा है तो प्लीज आप मेरे पिता जी को ठीक कर दीजिये.

मई- आप चिंता मत कीजिये मई आपके पिता जी को ठीक कर दूंगा आप एक काम कीजिये सिल्वर नीडल का एक सेट मंगवा लीजिये.

विशाल ने मेरे बात को सुन कर एक नौकर को बुलाया और उसको मार्किट से एक सिल्वर नीडल का सेट लेन को बोलै वो नौकर वह से तुरंत चला गया.

निधि- देखो तुम इलाज तो कर रहे हो लेकिन अगर मेरे पापा को कुछ हो गया तो मई तुम्हे जिन्दा नहीं छोडूंगी यद् रखना.

मई- आप विश्वास कीजिये आपके पिता जी को कुछ नहीं होगा.

फिर थोड़ी देर बाद नौकर सिल्वर नीडल लेकर वह आ गया और मुझे दे दिया फिर मई डॉ. बीरेंद्र को बोलै.

मई- डॉ. साहब प्लीज आप इन मचिनो को इनसे अलग कर सकते है.

डॉ. बीरेंद्र- तुम कही पागल तो नहीं हो गए अगर ये मशीन इनके शरीर से अलग हुआ तो इनको बचाना मुश्किल हो जायेगा.

मई- आप हटा दीजिये इनको कुछ नहीं होगा अगर इन्हे कुछ होता है तो उसका रिस्पांसिबिलिटी मेरा होगा.

मेरे बात को सुन कर डॉ. बीरेंद्र विशाल जी के तरफ देखने लगा तो विशाल ने उनको है में गर्दन हिला कर मशीन हटाने की अनुमति दे दिया फिर डॉ. बीरेंद्र ने वो सरे मशीन को जगमोहन ओबेराय के शरीर से अलग कर दिया जिसके कारन उनका हार्ट बीट धीरे धीरे काम होने लगा ये देख कर सरे लोग घबरा गए.

जब सरे मशीन वह से हटा दिए गए तो मई आगे बढ़ते हुए जगमोहन ओबेराय के बीएड के पास पंहुचा और उनके शरीर के उनका सारा कपडा निकल दिया फिर सिल्वर नीडल को उनके एक्यूपंक्चर पॉइंट पर डालने लगा जब मैंने सिल्वर नीडल को उनके बॉडी में दाल दिया तो फिर मई अपने योगिक शक्ति से उनके शरीर के ऑर्गन को ठीक करना स्टार कर दिया और साथ में हु अपने योगिक शक्ति को उनके पुरे शरीर में फैलाने लगा क्युकी जगमोहन के बीमारी नेगेटिव एनर्जी के चलते हुए था उनके ऊपर नेगेटिव एनर्जी का साया था और ये मुझे तब पता चला जब मैंने उनके शरीर को अपने दिव्या दृस्टि से देखा था.

जब मैंने उनके शरीर में योगिक शक्ति को डाला तो उसके थोड़ी देर बाद उनके मुँह से एक काली ऊर्जा निकला और गायब हो गे इसके बाद उनका ऑर्गन्स ठीक होना सुरु हो गया कुछ hi देर में उनके शरीर का डैमेज ऑर्गन पूरी तरह से ठीक हो गया.

इसके बाद मई उनके शरीर में फैले हुए पाइजन को एक जगह इक्क्ठा किया और उसके ऊपर प्रेशर दे कर मुँह के तरफ लाया जिसके कारन उनके मुँह से कला खून निकलने लगा ये देख कर सरे लोग चौक गए अब तो डॉ. बीरेंद्र को भी मेरे बातो पर विश्वास होने लगा था.

जब सारा टॉक्सिक जगमोहन ओबेराय के शरीर से बहार निकल गया तो उनके शरीर का कलर भी नार्मल इंसान के जैसे हो गया जब मेरा सारा काम ख़तम हो गया तो मई जगमोहन ओबेराय के शरीर से सरे सिल्वर नीडल को बहार निकल लिया और वह से हाथ कर साइड में खड़ा हो गया और जगमोहन ओबेराय को देखने लगा.

थोड़ी देर बाद जगमोहन ओबेराय की सांसे तेज़ चलने लगा ऐसा लग रहा था की उनको साँस लेने में प्रॉब्लम हो रहा है जिसे देख कर सरे लोग घबरा गए लेकिन फिर थोड़ी देर बाद उनकी साँस नार्मल हो गयी और वो होश में आ गए उनको होश में आया देख कर सरे लोगो के चेहरे पर खुसी आ गयी विशाल और निधि भागते हुए उनके पास गए तो मैंने उनसे बोलै.

मई- अभी वो कमजोर है इस लिए आप लोग उनको अभी रेस्ट करने दीजिये थोड़ी देर में वो बेहतर हो जायेंगे तब आप उनसे मिल लीजियेगा.

मेरे बोलने के बाद वो लोग वह से हाथ कर मेरे पास आ गए और निधि अपने घुटनो पर बैठ कर दोनों हाथ जोड़ते हुए बोली.

निधि- मैंने आपको बहुत गलत समझा इस लिए अपनी नासमझ में आपको बहुत कुछ बोल दिया इसके लिए मुझे माफ़ कर दीजियेगा अपने आज मेरे पापा को बचा कर हमारे परिवार पर एक अहसान कर दिया और ये अहसान हमारा परिवार मरते डैम तक नहीं भूलेगा.

मई- अरे ये आप क्या कर रही है प्लीज आप इस तरह से मेरे सामने घुटनो पर मत बैठिये और मैंने आप लोगो पर कोई अहसान नहीं किया है बल्कि मैंने अपना फ़र्ज़ निभाया है.

विशाल- अपने एक बार और मेरे ऊपर अहसान कर दिया मई तो आपके अहसानो के टेल दबा जा रहा हु मई कैसे आपका ये अहसान चुकाऊंगा.

मई- देखिये मैंने बोलै न की मई आप लोगो पर कोई अहसान नहीं किया है ये तो मेरा फ़र्ज़ था की मई आप लोगो की मदत करू.

निधि- एक बार और से क्या मतलब है भैया.

विशाल- सायद तुमको पता नहीं होगा लेकिन तुम्हारे भतीजे का भी जान इन्ही से बचाई थी उसको भी सिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर जबाब दे दिए थे तब ये फरिस्ता बन कर वह पर आये और मेरे बेटे की जान बचा ली.

ये सब वह खड़ा हो कर डॉ. बीरेंद्र खुराना भी सुन रहे थे जब उन्होंने सुना की विशाल के बेटे की जान भी मैंने hi बचाई थी तो वो समझ गए की मई कोई मामूली इंसान नहीं हु वो तुरंत hi मेरे पास आये और मुझसे हाथ जोड़ कर बोले.

डॉ. बीरेंद्र- प्रतीक जी मुझे भी माफ़ कर दीजिये मैंने न जाने आपको क्या क्या बोल दिया आप तो एक चमत्कारी डॉक्टर है.

मई- अरे अरे डॉक्टर साहब आप ये क्या कर रहे है आप मुझसे बड़े है आप मेरे सामने इस तरह हाथ मत जोड़िये प्लीज.

डॉ. बीरेंद्र- आप महँ है डॉक्टर प्रतिक आपका विद्या भी महँ है अपने आज वो कर दिखाया है जो हम लोग न जाने कितने समय से करना छह रहे थे मई आज hi आपके ऊपर एक आर्टिकल लिखूंगा जिससे आपका म्हणता पूरा देश जान सके.

मई- नहीं नहीं आप ये मत कीजियेगा मुझे लाइम लाइट में आना पसंद नहीं है मई लौ प्रोफाइल hi ठीक हु मुझे दूसरे लोगो के नजरो में महँ बनाने का कोई सुख नहीं है.

डॉ. बीरेंद्र- जब आप इतना बोल रहे है तो ठीक है मई आर्टिकल नहीं लिखूंगा लेकिन मेरी आपसे एक रिक्वेस्ट है.

मई- आप बोलिये मई किस तरह से आपका मदत कर सकता हु.

डॉ. बीरेंद्र- इस देश में न जाने कितने ऐसे लोग है जो लाइलाज बीमारी से ग्रस्त है और उनका इलाज आपके शिवा इस दुनिया में कोई नहीं कर सकता इस लिए क्या आप सिटी हॉस्पिटल में अस ा डॉक्टर काम करना चाहेंगे.

मई- नहीं मेरे पास उतना समय नहीं है की मई सिटी हॉस्पिटल में डॉक्टर का काम कर सकू क्युकी मई अभी मुंबई यूनिवर्सिटी से अपना पढाई कर रहा हु.

डॉ. बीरेंद्र- ऐसा है आप सप्ताह में सिर्फ एक दिन तो अस ा गेस्ट डॉक्टर काम कर hi सकते है इससे आपके पढाई में भी प्रॉब्लम नहीं होगा.

मई- ठीक है मई सोच कर आपको बता दूंगा एक काम कीजिये आप अपना नंबर मुझे दे दीजिये.

इसके बाद हम दोनों ने अपना नंबर एक्सचेंज किये और फिर डॉ. बीरेंद्र विशाल से बोले.

डॉ. बीरेंद्र- विशाल जी आपके पिता जी अब ठीक हो गए है तो मुझे अब यहाँ से जाने का आज्ञा दीजिये.

विशाल- ठीक है डॉ. साहब आप जा सकते है मई सैम में हॉस्पिटल आ कर आपसे मिलता हु.

इसके बाद डॉ. बीरेंद्र और उसके साथी डॉक्टर और नर्स सब वह से चले जाते है उनके जाने के बाद उस रूम में निधि मई और विशाल हु बचे थे जगमोहन तो आराम से सो रहे थे.

विशाल- जी आपके पिता जी के बीमारी के बारे में मुझे आपसे कुछ बाटे करनी थी.

विशाल- है बोलिये.

मई- आपके घर पर नेगेटिव एनर्जी का साया है जिसके चलते उस दिन आपके लड़के का तबियत ख़राब हुआ था और आज आपके पिता जी का ये हालत हुआ है.

विशाल- क्या ये आप क्या बोल रहे है आप पढ़े लिखे हो कर के आप इन सब बातो पर विश्वास करते है.

निधि- आज के मॉडर्न ज़माने में ये आप क्या अंधविश्वासों बलि काट करने लगे हम लोग इन सब बातो पर विश्वास नहीं करते.

मई- आप लोग भले hi इन सब बातो पर विश्वास नहीं करते है लेकिन ये हकीकत है अच्छा आप दोनों एक बात बताइये क्या आप लोग भगवन पर विश्वास रखते है.

विशाल- है हमलोग भगवन को मानते है.

मई- यदि इस संसार में भगवन का अस्तित्व है तो सैतान का भी अस्तित्व है अगर आप भगवन मानते है तो आपको सैतान भी मानना चाहिए क्युकी भगवन और सैतान दोनों एक दूसरे का पूरक है अगर इस दुनिया में रोशनी का अस्तित्व तभी है जबतक अँधेरा है अगर अँधेरा नहीं रहेगा तो रौशनी का नमो निशान hi नहीं रहेगा.

विशाल- मई आपके बातो को समझ रहा हु लेकिन मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है.

निधि- विश्वास कैसे होगा भैया बहुत प्रेत आत्मा ये सब सिर्फ किताबी बाटे है या फिर या सब फिल्मो में hi होता है इन सब चीजों का असलियत से कोई भी वास्ता नहीं है.

मई- लगता है आप दोनों को मई जब तक डेमो नहीं दिखाऊंगा तब तक आपको विश्वास hi नहीं होगा.
 
अपडेट 10


मैंने विशाल और निधि को बताया की आपके घर में नेगेटिव एनर्जी का साया है तो वो लोग मेरे बात पर विश्वास hi नहीं किये और बोलने लगे की 21सत सेंचुरी में रह कर भी तुम ऐसी बाटे कर रहे हो हम लोग इन सब बाटे में विश्वास नहीं रखते मैंने उन दोनों को बहुत समझाया लेकिन वो लोग मेरी बात समझने के लिए तैयार hi नहीं थे तो मैंने सोचा की ये दोनों ऐसे विश्वास hi नहीं करेंगे मुझे इन दोनों को डेमो दिखाना hi होगा.

मई- अगर आप दोनों को विश्वास नहीं हो रहा है तो मई आप दोनों को सीधा दिखा hi दे रहा हु ये आपके घर में जो भी नेगेटिव एनर्जी है वो बहुत खतरनाक है अगर इसे अभी नहीं हटाया गया और आने वाले कुछ hi दिन में आपके पुरे घर को बर्बाद कर देगा.

निधि- मुझे तो इन सब बातो पर कभी विश्वास नहीं होगा लेकिन यदि आप इतना बोल रहे है तो चलो एक बार आपके बात पर विश्वास कर के देख लेती हु.

विशाल- हम भी तैयार है आप क्या दिखाना चाहते है.

मई- ठीक है चलिए और है सबसे पहले आप मुझे अपना पूरा घर दिखा दीजिये.

विशाल- ठीक है चलो मई आपको अपना घर दिखा देता हु.

इसके बाद विशाल और निधि ने मुझे अपने साथ लेकर अपने पुरे घर को दिखने लगता है मई पुरे घर को देखते हुए घर के बैकयार्ड में गया और मई वह चारो तरफ देख hi रहा था की तभी मेरी नजर वह परे बने एक फाउंटेन ⛲ पर गया तो मुझे उस फाउंटेन में कुछ गड़बड़ लगी तो मई फाउंटेन के पास जेक उसको ध्यान से देखने लगा.

मुझे उसे फाउंटेन से खतरनाक नेगेटिव एनर्जी निकलती हुयी महसूस हो रही थी तो मैंने अपना दिव्या दृस्टि को जागृत किया और उस फाउंटेन को देखने लगा जब मई उस फाउंटेन को अपने दिव्या दृस्टि से देख रहा था तो मुझे उस फाउंटेन के अंदर कुछ ऐसा दिखा की मई चौक गया और फिर विशाल से पूछा.

मई- अपने ये फाउंटेन कब बनवाया है.

विशाल- इसको बनवाये हुए करीब 6 महीना हो रहा है लेकिन तुम ये क्यों पूछ रहे हो कुछ गड़बड़ है क्या.

मई- आपके घर में जो भी प्रॉब्लम हो रहा उसका कारन ये फाउंटेन hi है.

मेरा बात सुन कर निधि को गुसा आ गया हलाकि गुसा तो विशाल को भी आ रहा था लेकिन वो छुप hi रहा इन लोगो के गुसा होने का कारन था वो फाउंटेन क्यों ये फाउंटेन उनकी पिता जी का फेवरेट था वो जब घर पर रहते है तो यही इसी फाउंटेन के आगे घंटो बैठे रहते है और उस फाउंटेन के बारे में मई ऐसा बोल रहा था तो गुसा आना कम्पलसरी था.

निधि- ये क्या मजाक कर रहे हो मन की तुम एक अच्छे डॉक्टर हो और तुमने मेरे पिता जी का इलाज भी कर दिया जो सायद तुम्हारे आवला कोई और डॉक्टर न कर पता इस लिए मई आपको इज्जत करती हु लेकिन उसका ये मतलब नहीं है की आप कुछ भी बोलो मैंने एक बार आप से बोल दिया न की नेगेटिव एनर्जी जैसा कुछ नहीं होता फिर भी आप बार बार वही बोल रहे है.

मई- आपको मैंने या न मैंने से हकीकत नहीं बदल जायेगा मई जो बोल रहा हु वो सात प्रतिशत सही बोल रहा हु.

विशाल- आप जानते आप जिस फाउंटेन के बारे में ऐसा बोल रहे है वो मेरे पिता जी का फवौरीते फाउंटेन है उन्होंने इसे बहुत hi सूख से बनवाया था.

मई- अगर आप लोगो को मेरे बात का विश्वास नहीं हो रहा है तो इस फाउंटेन को तोड़ कर देख लीजिये.

निधि- ये आप क्या बोल रहे है आप जानते है न की ये फाउंटेन मेरे पापा का फवौरीते है फिर भी आप इसे तोड़ने के लिए बोल रहे है.

मुझे अब इन लोगो के बात सुन कर गुसा आ रहा था क्युकी मई इन लोगो की मदत करने की कोशिश कर रहा हु और ये लोग मुझसे hi बहस कर रहे है.

मई- आप लोग एक बार मेरे बात पर विश्वास कर में देखिये मई आप लोगो को कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहता अगर आप लोगो को मुझपे थोड़ा भी विश्वास है तो मेरी बात को मानिये और इस फाउंटेन को तोड़ दीजिये और अगर मेरे ऊपर आप लोगो को विश्वास नहीं है तो मई यहाँ से चला जाता हु अगर बाद में आप लोगो को कोई भी प्रॉब्लम होगा तो फिर मुझसे नहीं बोलियेगा.

विशाल- मुझे आपके ऊपर पूरा विश्वास है आप हम लोगो को नुकसान पहुंचने के बारे में सोच भी नहीं सकते ठीक है मई इस फाउंटेन को तोड़वा देता हु.

निधि- लेकिन भैया..

विशाल- नहीं निधि हमें ये रिस्क लेना hi होगा अगर प्रतिक के बात में थोड़ा भी सचाई होगा तो ये हमारे परिवार के लिए अच्छा नहीं होगा.

विशाल के बात सुन कर निधि चुप हो जाती है क्युकी कही न कही उसको भी यही दर लग रहा था की अगर मेरा बात सही हुआ तो उसके परिवार के ऊपर संकट मंडराता रहेगा.

इधर विशाल ने एक नौकर को बुलाया और उसे इस फाउंटेन को तोड़ने के लिए बोलै नौकर विशाल के बात सुन कर अंदर जाता है और एक लोहे का मोटा रोड लेकर आता है और उस फाउंटेन को तोड़ने के लिए उसपे चलता है जैसे hi वो रोड उस फाउंटेन से टकराता है इस फाउंटेन से काली रोशनी निकलती है और उस नौकर से टकरा जाता है जिसके कारन वो नौकर उड़ता हुआ पीछे जा गिरता है.

ये देख कर निधि और विशाल घबरा जाते है अभी अभी जो हुआ उसे देख कर उनको तो अपने आँखों पर विश्वास hi नहीं हो रहा था वो यही सोच रहे थे की कोई कैसे अपने आप उड़ कर पीछे गिर सकता है ये लोग अभी एहि सोच रहे थे की तभी उस नौकर को आवाज उन दोनों को सुनाई देता है जो दर्द में चीला रहा था जैसे उन दोनों को नौकर के आवाज सुनाई देता है वो दोनों अपने सोच से बहार आते है और भागते हुए उस नौकर के पास जाते है और उससे पूछते है.

विशाल- तुम ठीक तो हो न तुम ऐसे कैसे अचानक पीछे जा गिरे.

नौकर दर्द में कराहते हुए बोलै.

नौकर- साहब मई जब उस फाउंटेन पर रोड से वॉर किया तो मुझे एक तेज़ बिजली का झटका लगा और मई पीछे आ गिरा.

निधि- लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है मैंने तो फाउंटेन का पावर hi कट कर दिया था तो उसमे बिजली कैसे आ सकता है.

मई- मई आप लोगो को कब से समझा रहा हु की उसमे नेगेटिव एनर्जी है और जब ये उस फाउंटेन को तोड़ने गया तो ये उस नेगेटिव एनर्जी को पसंद नहीं आया इस लिए उसने इसे उठा कर पीछे फेक दिया.

मेरे बात कोण सुन कर उन दोनों को मेरे बात पर विश्वास होने लगा था और दोनों बुरी तरह से दर भी गए थे फिर डरते डरते विशाल बोलै.

विशाल- तो अब हम क्या करेंगे देखो प्रतिक तुम किसी तरह से हमें इस मुसीबत से बहार निकालो अगर तुम हमें इस मुसीबत से बहार निकल दिए तो हमारा परिवार तुम्हारा सदा आभारी रहेगा.

मई- ठीक है मई कोशिश कर के देखता हु.

फिर मैंने कुछ मंत्र पढ़ते हुए अपने पॉजिटिव एनर्जी को उस फाउंटेन में डालने लगा जैसे जैसे मेरा पॉजिटिव एनर्जी उस फाउंटेन में जा रहा था वैसे वैसे उस फाउंटेन से काली धुय निकलने लगा और पूरा आसमान में कला बदल चने लगा फिर थोड़ी देर बाद एक तेज़ आवाज के साथ वो फाउंटेन टूट कर धूल में बदल गया जैसे hi वो फाउंटेन टुटा वैसे hi पूरा का पूरा ओबेराय मेंशन हिल गया ऐसा लग रहा था जैसे अभी अभी वह पर भूकंप आया हो ओबेराय मेंशन के अंदर जितना भी नौकर चाकर और ओबेरॉय परिवार के मेंबर थे सरे लोग भागते हुए बैकयार्ड में पहुंच गए.

इधर उस फाउंटेन को टूटते hi उसमे से काली धुय निकल कर आसमान में जाने लगा और फिर ऊपर जाकर वो एक भयानक आकृति में बदल गया जो एक भयानक घोस्ट था जैसे hi घोस्ट वह प्रकट हुआ चारो तरफ भयंकर नेगेटिव एनर्जी फ़ैल गया उस घोस्ट को देख कर वह जितने भी लोग थे सरे दर से थार थार कपङे लगे कितने नौकर चाकर तो वही पर दर के कारन बेहोश हो कर गिर गए यहाँ तक की मधु ओबेराय भी बेहोश हो कर गिर गयी जब वो धुय पूरी तरह से एक भयानक घोस्ट में बदल गया तो घुसे से बोलै.

घोस्ट- तुम्हारी हिमत कैसे हुयी मेरा घर तोड़ने की और मेरे अक्का के कामो के बिच आने की आज मई तुम्हे जिन्दा नहीं छोडूंगा है है है है.

मई- मेरी हिमत का तो तुम बात hi मत करो अगर मई चहु तो तुम्हे पल भर में जला कर भस्म कर सकता हु.

घोस्ट- हाहाहाहा तुम हाहाहा तुम मुझे जला कर भस्म करोगे तुम अपने आप को बहुत बड़ा तांत्रिक समझते हो मई आज तुम्हे और इस पुरे परिवार को मर दूंगा.

मई- लगता है की तुम्हे अपनी शक्ति दिखानी hi पड़ेगी.

इतना बोल कर मई एक मंत्र पड़ता हु जैसे जैसे मई वो मंत्र पढता हु वैसे वैसे उस घोस्ट के बॉडी के अंदर जलन होने लगता है धीरे धीरे उसका जलन बढ़ने लगता है तो वो छीलते हुए बोलता है.

घोस्ट- बंद करो ये मंत्र पढ़ना मेरे शरीर में बहुत जलन हो रहा है.

मई- ठीक है मई मंत्र पढ़ना बंद कर देता हु लेकिन तुम्हे सच सच मेरे सवालों का जबाब देना होगा.

घोस्ट- ठीक ठीक मई देता हु तुम्हारे सरे सवालों का जबाब लेकिन पहले तुम मंत्र को पढ़ना बंद करो.

मई मंत्र को पढ़ना बंद कर देता हु जिसके कारन वो घोस्ट रहत का साँस लेता है.

मई- जो मई पूछूंगा उसे तुम मुझे सच सच बताना नहीं तो तुम्हे पता hi है की तुम्हारे साथ क्या हो सकता है.

घोस्ट- ठीक है पूछिए.

मई- तुम्हे यहाँ भेजा किसने है.

घोस्ट- मेरे अक्का ने.

मई- तुम्हारे अक्का का क्या नाम है और वो रहता कहा है.

घोस्ट- मेरे अक्का काम गोरखनाथ है लेकिन वो कहा रहता है ये मुझे नहीं पता.

मई- अच्छा तो गोरखनाथ को ओबेराय परिवार से क्या दुश्मनी है.

घोस्ट- मेरा अक्का का इन लोगो से कोई दुश्मनी नहीं है वो तो उनके पास कोई गया था और वो चाहता था की ओबेराय परिवार को बर्बाद कर दिया जाये इसलिए मुझे अक्का ने यहाँ भेजा.

मई- और वो लोग कोण थे जो ओबेराय परिवार को बर्बाद करना चाहते थे.

घोस्ट- मुझे नहीं पता की वो लोग कोण थे मैंने आपके सरे सवालो का जबाब दे दोय अब आप मुझे जाने दीजिये.

मई- तुम इस धरती पर रह कर बहुत भटक लिए अब मई तुम्हे इस इस दुनिया से मुक्त कर रहा हु.

इतना बोल कर मैंने कुछ मंत्र पढ़े जिसके कारन वो गोस्त जलने लगा और फिर कुछ hi देर में वो रख बन कर हवा में बिलिन हो गया ये देख कर वह पर जितने भी लोग थे सब खुस हो गए और मुझे आधार भाव से देखने लगे.

जैसे hi यहाँ पर वो गोस्त गायब हुआ तो यहाँ से दूर एक जंगल में एक तांत्रिक ध्यान कर रहा था अचानक hi उसका ध्यान भांग हो गया और वो जोर से चिलाय.

तांत्रिक- नहीं ये नहीं हो सकता कोण है कोण है वो जो मेरे इतने ताकतवर गुलाम को नस्ट कर दिया तू जो कोई भी हो बहुत जल्द मई तुम्हे इसकी सजा दूंगा.

इधर मई उस गोस्त को मुक्ति देने के बाद विशाल के पास गया और उनसे बोलै.

मई- विशाल भाई अब आपके यहाँ का सारा प्रॉब्लम सोल्वे हो गया अब वो घोस्ट भी जा चूका है.

विशाल- सबसे पहले आप मुझे माफ़ कीजियेगा की मई आपके बातो पर विश्वास नहीं किया लेकिन मुझे अभी तक समझ में नहीं आया की ये सब क्या था.

मई- विशाल जी ये नेगेटिव एनर्जी थी और इसी के कारन आपके घर पर इतना प्रॉब्लम हो रहा था अगर आज मई इस नेगेटिव को यहाँ से नहीं हटाता हो आने वाले कुछ hi दिनों में आपके परिवार की बर्बादी तय थी.

निधि जो ये सब देख कर सौक हो गयी थी वो मेरा बात सुन कर मुझसे माफ़ी मांगते हुए बोली.

निधि- मुझे माफ़ कर दीजिये मैंने आपकी बातो को न मन कर आपको बेइज्जती किया अगर आप नहीं होते तो पता नहीं मेरे परिवार के साथ क्या होता.

मई- इसमें माफ़ी मांगने वाली कोई बात नहीं है आज कल के लोग नेगेटिव एनर्जी पर विश्वास नहीं करते है इस लिए आपको भी मेरे बातो पर विश्वास नहीं हो रहा था तो इसमें आपको गलती नहीं बल्कि गलती इस आधुनिक दुनिया की है.

विशाल- मुझे ये समझ में नहीं आ रहा है की ये सब मेरे hi परिवार के साथ क्यों हुआ और ये आत्मा इस फाउंटेन में क्या कर रहा था.

मई- इस नेगेटिव एनर्जी को कोई इस फाउंटेन में डाला था और ये नेगेटिव एनर्जी इस फाउंटेन के जरिये आप सब को नुकसान पंहुचा रहा था.

निधि- लेकिन हमारे परिवार के साथ ये सब कोण कर रहा था.

मई- आपके किसी दुश्मन ने गोरखनाथ नाम के तांत्रिक के साथ मिल कर आपके यहाँ नेगेटिव एनर्जी भेजा था और वो ये काम जब ये फाउंटेन बन रहा था तभी किया होगा मुझे सिर्फ उस तांत्रिक का hi नाम पता चला है बाकि आपका दुश्मन कोण है ये आपको खुद hi पता करना होगा.

विशाल- उसका तो मई पता लगा hi लूंगा और पता लगाने के बाद उसकी इतनी दर्दनाक मौत दूंगा की वो दूसरा जनम लेने से पहले हजार बार सोचेगा.

निधि- अगर वो एक बार ये सब कर सकता है तो दुबारा भी जरूर करेगा.

मई- जहा तक मुझे लग रहा है की उसे ये पता चल गया होगा की उसका प्लान फ़ैल हो गया है और आप सब पर दोबारा जरूर अटैक करेगा.

विशाल- अगर ऐसा है तो बहुत प्रॉब्लम हो जायेगा क्युकी हम किसी इंसान से तो लड़ सकते है लेकिन किसी आत्मा से कैसे लड़ेंगे.

मई- इसका उपाय मेरे पास है मई आपके घर पर एक सुरक्षा कवच लगा देता हु जिससे आपके घर पर कोई भी नेगेटिव एनर्जी पवेश नहीं कर पायेगा.

विशाल- अगर अपने ये कर दिया तो हमारे ऊपर आपका बहुत बड़ा अहसान होगा और उसके बदले में मई आपके लिए कुछ भी करने के लिए हमेसा तैयार रहूँगा.

मई- ठीक है तो उसके लिए आप सब इस घर से 5 मिनट के लिए बहार निकल होगा यहाँ तक की आपको आपके पिता जी को भी बहार निकलना होगा.

निधि- हमें बहार निकलना होगा लेकिन ऐसा क्यों.

मई- इसका दो कारन है पहला कारन ये है की मई इस घर में कुछ पूजा पथ कर के आपके घर को सुरक्षा कवच से बांधूंगा और उस समय मुझे मेरे आस पास कोई नहीं चाहिए और दूसरा कारन यह है की आप सब पर अभी नेगेटिव एनर्जी का साया है जब आप सब इस घर से बहार चले जाइएगा तो नेगेटिव एनर्जी भी आप सब के साथ बहार चला जायेगा और फिर जब इस घर पर सुरक्षा कवच लग कयेगा तब आप लोग अंदर आइयेगा तो नेगेटिव एनर्जी इस घर में नहीं आ पायेगा.

विशाल- ठीक है मई सबको बोलता हु यहाँ से निकलने के लिए.

मैंने ये सब इस लिए किया की कोई भी मेरे शक्ति को न देख सके जब सरे लोग बहार निकल गए तो मई पुरे घर के सेंटर में आ गया और अपने शक्तियों को जागृत कर के एक सुरक्षा कवच तैयार किया और उसे पुरे घर पर लगा दिया.

करीब 5 मिनट बाद सब कोई घर के अंदर आ गया और विशाल मेरे पास आ कर मुझसे पूछा.

विशाल- क्या अपने सुरक्षा कवच लगा दिया.

मई- है मई अपने घर पर सुरक्षा कवच लगा दिया है और साथ में आपके घर को पवित्र भी कर दिया है अब आपको किसी भी नेगेटिव एनर्जी के बारे में चिंता करने की जरुरत नहीं है अब कोई भी नेगेटिव एनर्जी इस घर में प्रवेश नहीं कर पायेगा.

विशाल- अपने आज हमारे लिए जो कुछ भी किया है वो ओबेराय परिवार कभी नहीं भूलेगा.

मई- ठीक है तो अब मई चलता हु.

विशाल- आप थोड़ी देर और रुकिए मई खाना रेडी करवाता हु आप खाना खा कर जाइएगा.

मई- अरे नहीं इसकी कोई जरुरत नहीं है ठीक है तो मई अब चलता हु.

इतना बोल कर मई वह से निकलने hi वाला था की तभी निधि मेरे पास आ गयी और मेरे हाथो में एक कार्ड देते हुए बोली.

निधि- आपने हमारे परिवार के लिए बहुत कुछ किया है इस लिए ये डायमंड कार्ड मेरे तरफ से आपके लिए एक छोटा सा गिफ्ट है.

मई- ये डायमंड कार्ड किस चीज का है.

निधि- ये मुंबई के सबसे बड़े क्लब स्काई मून क्लब का डायमंड कार्ड है.

मई- लेकिन मई इसे नहीं ले सकता क्युकी मई आपके फॅमिली का हेल्प सिर्फ इंसानियत के लिए किया है न की पैसो के लिए.

निधि- मई जानती हु की ये सब आप पैसो के लिए नहीं किया है इस लिए मई आपको कोई पैसा नहीं दे रही बस मई अपने तरफ से आपको इस डायमंड कार्ड को गिफ्ट के रूप में रही हु.

मई- ठीक है मुझे आपका गिफ्ट स्वीकार है.

अब मई चलता हु मुझे लेट हो रहा है.

निधि- अगर आपको कोई प्रॉब्लम न हो तो क्या मई आप जहा जा रहे है वह छोड़ दू.

मई- अरे नहीं आप क्यों परेशां होंग मई खुद चला जाऊंगा.

निधि- इसमें परेशानी वाली क्या बात है अब तो हम दोस्त है तो एक दोस्त दूसरे दोस्त को कुछ मदत भी नहीं कर सकता है क्या.

मई- ठीक है मुझे ओबेराय होटल एक पार्टी में जाना है आप मुझे वह तक छोड़ सकती है.

निधि- है है क्यों नहीं वो तो हमारा hi होटल है अगर वह पर आपको कुछ भी प्रॉब्लम हो तो मेरे पास कॉल कर लीजियेगा आपका प्रॉब्लम सोल्वे हो जायेगा.

मई- ठीक है.

इसके बाद निधि मेरा मोबाइल ले कर उसमे अपना नंबर सेव करती है और फिर मेरे मोबाइल से अपने नंबर पर कॉल लगाती है इसके बाद वो अपना गाड़ी निकलती है और हम ओबेराय होटल के लिए निकल जाते है.

इधर ओबेराय होटल के एक रूम में नीरज अपने कुछ दोस्तों के साथ बाटे कर रहा था.

नीरज- मई जो भी बोलै हु वो हो जाना चाहिए मुझे किसी भी तरह आज उसे अपने बिस्टेर तक लाना है मैंने उसे बहुत प्रपोज़ किया लेकिन वो कभी भी मेरे प्यार को एक्सेप्ट नहीं की मई उससे सदी करना चाहता था लेकिन वो मानाने के लिए तैयार hi नहीं है कोई बात नहीं एक बार वो मेरे बिस्टेर तक आ गयी तो खुद मुझसे सदी करने के लिए बोलेगी.

दोस्त- भाई सारा बेवस्था हो गया आप उसकी चिंता मत कीजिये.

नीरज- देखो आज बहुत दिनों बाद ऐसा मौका मिला है कोई भी गलती नहीं होनी चाहिए.

दोस्त- कोई भी गलती नहीं होगा भाई अब आप पार्टी में चलिए वह लगभग सरे लोग आ गए होंगे और आपका इंतजार कर रहे होंगे.

नीरज- ठीक है चलो.

फिर नीरज अपने दोस्तों के साथ पार्टी में आ जाता है इस पार्टी में सरे लोग आ गए थे शनाया भी अपने दोस्त पायल के साथ आयी हुयी थी और अपने दोस्त से बाटे कर रही थी सोनू भी वह आ गया था और वो मेरा इंतज़ार कर रहा था.

फिर मई भी थोड़ी देर बाद होटल ओबेराय पहुंच गया और गाड़ी को पार्किंग में पार्क करने के बाद हम लोग अंदर आ गए मई अभी भी नार्मल कपडे में hi था इस लिए होटल के गॉर्ड मुझे घर घर कर देख रहे थे लेकिन साथ में निधि को देख कर वो लोग कुछ नहीं बोले.

अंदर आने के बाद निधि मुझसे बोली.

निधि- मुझे यहाँ थोड़ा काम है इसलिए मई चलती हु आप जाइये पार्टी में इंजॉय कीजिये.

मई- ठीक है.

इसके बाद मई पार्टी में आ गया और सोनू को ढूंढने लगा तो देखा की सोनू गेट से थोड़ी दूर पर खड़े हो कर गेट के तरफ hi देख रहा है जैसे hi सोनू की नजर मुझ पर गयी वो हाथ हिला कर मुझे अपने पास बुलाया जब मई सोनू के पास गया तो देखा की वही कुछ दूर पर शनाया अपने दोस्त के साथ बाटे कर रही है.

शनाया आज बहुत सुन्दर लग रही थी वो पिंक कलर के पटियाला सूट पहनी हुयी थी मेरा नजर बार बार उस पर जा रहा था मई जब बार बार उसे देख रहा था तो उसकी भी नजर एक बार मेरे ऊपर पढ़ गयी और जब उसने नोटिस किया की मई उसे बार बार देख रहा हु तो वो घुसे से मुझे घूरने लगी उसको इस तरह घुसे में मेरे तरफ देखता देख कर मई सकपका गया और अपना नजर चुराने लगा.

इधर दूसरे तरफ नीरज जब पार्टी में आया तो सबसे पहले उसको नजर शनाया पर गया वो चलते हुए शनाया के पास आया और बोलै.

नीरज- मेरे बर्थडे पार्टी में आने के लिए थैंक्स शनाया.

शनाया- हमलोग दोस्त है इस जब तुमने बुलाया तो मुझे आना hi पड़ा

नीरज- वैसे आज तुम इस पटियाला सूट में बहुत सुन्दर लग रही हो.

शनाया- थैंक्स फॉर कॉम्पलिमेंट.

नीरज- चलो मेरे साथ वह केक काटने की तयारी चल रही है

शनाया ने नीरज के बात मन ली और उसके साथ कहा केक काटना था वह चली गयी साथ में उसके दोस्त भी गए वह जाने के बाद नीरज अपना बर्थडे केक कट करने का प्लान करने लगा फिर थोड़ी देर बाद सरे लोगो वह पर जमा हो गए इसके बाद उसने केक कट किया और सबसे पहले केक को शनाया के मुँह के तरफ बढ़ाया लेकिन शनाया ने उसे केक को मुँह में न ले कर हाथ में पकड़ ली और वह से हैट गयी जब नीरज ने देखा की शनाया उसके द्वारा दिया गया केक को हाथ में पकड़ ली तो उसे बहुत गुसा आया लेकिन वो घुसे को किसी तरह से संत कर लिया.

इधर मई नीरज के हर हरकत को ध्यान से देख रहा था मैंने जब देखा की शनाया ने नीरज के द्वारा दिए गए केक को नहीं खायी तो मुझे बहुत खुसी हुआ.

इधर नीरज केक कट करने के बाद एक माइक अपने हाथ में लिया और अनाउंसमेंट करते हुए बोलै.

नीरज- आज मेरा 21सत बर्थडे है और मई इस बर्थडे पर अपने सबसे प्यार इंसान जिसे मई दिलो जान से प्यार करता हु उसके लिए मई कुछ भी करने को तैयार हु उसे मई आज प्रपोज़ करने वाला हु आप सब भगवन से दया कीजियेगा की वो मेरे प्यार को एक्सेप्ट कर ले थैंक यू.

नीरज के बात को सुन कर शनाया को गबरा गयी क्युकी वो जानती थी की नीरज जो कुछ भी बोल रहा है वो उसके लिए बोल रहा है अब यहाँ पर उसका पका तमसा बनेगा.

शनाया- (मन में) मई जानती थी की ये कभी नहीं सुधरने वाला है मुझे यहाँ आना hi नहीं चाहिए था.

इधर शनाया अपने सोच में hi गम थी और उधर नीरज ने अपने पॉकेट से एक डायमंड रिंग निकला और वह से आगे बढ़ते हुए सीधा शनाया के पास आ गया और अपने घुटनो पर बैठ कर बोलै तो शनाया अपने सोच से बहार आयी और नीरज को देखने लगी.

नीरज- मई जबसे तुमको देखा है न जाने मेरे दिल कब तुम्हारा हो हाय अब तो ऐसा आलम है की हर जगह बस तुम hi तुम दिखाई देते हो मई तुम्हे दिलो जान से प्यार करता हु क्या तुम मेरी लाइफ पार्टनर बनोगी.

नीरज अपने घुटनो पर बैठ कर शनाया को प्रपोज़ कर दिया जिसे सुन कर शनाया घबरा गयी और इधर उधर देखने लगी तभी उसकी नजर मेरे ऊपर हो गया वो मुझे एक नजर देख कर अपना मुँह दूसरे तरफ फेर ली जब सबने देखा की नीरज शनाया को प्रपोज़ कर रहा है तो सब हूटिंग कर लगे और बोलने लगे.

~ शनाया से यस शनाया से यस.

कुछ लड़किया तो शनाया से जलने लगी और बोलने लगी.

1सत लड़की- क्या किस्मत है शनाया का उसे सोल्लगे के सबसे आमिर लड़का उसको प्रपोज़ कर रहा है उसे है बोल देना चाहिए.

2ंद लड़की- अरे ये शनाया के जगह मुझे प्रपोज़ करता तो मई तुरंत hi है बोल देती.

इसी तरह से सरे लोग बात कर रहे थे और हूटिंग कर रहे थे.

~ शनाया से यस शनाया से यस

इधर नीरज को शनाया को प्रपोज़ करते देख कर और सरे लोगो को इस तरह से हूटिंग करता देख कर मेरा खून खौल गया और मेरी आँखे घुसे से लाल हो गया लेकिन मई ये देखना चाहता था की शनाया क्या जबाब देती है तभी शनाया ने कुछ ऐसा बोलै की सब संत हो गए.

शनाया- No मई तुमसे प्यार नहीं करती मैंने तुमको कितने बार बोलै है की मई तुमसे प्यार नहीं करती तो तुम बार बार मुझे प्रपोज़ कर के अपने बेइज्जती क्यों करवाते हो.

जहा शनाया के बात सुन कर वह पर मजूद सरे लोग चौक गए वही शनाया के बात सुन कर मुझे अंदर hi अंदर बहुत खुसी महसूस हुयी जहा मुझे शनाया के बात से खुसी हो रही थी वही शनाया के बात सुन कर नीरज को गुसा आ रहा था और घुसे से शनाया से बोलै.

नीरज- आखिर क्यों क्यों तुम मुझसे प्यार नहीं करती मेरे में क्या कमी है मई पैसे वाला हु दिखने में स्मार्ट हु तो तुम्हे और क्या चाहिए तुम क्यों मेरा प्यार एक्सेप्ट नहीं कर रही हो.

शनाया- मई तुम्हे क्यों प्यार नहीं कर सकती ये बताना मई तुम्हे जरुरी नहीं समझती (पायल से ) बहुत हो गया पार्टी चलो अब हम घर जाते है.

पायल- ठीक है चलो मुझे भी ऐसी जगह पर नहीं रुकना.

नीरज- मेरे बातो का जबाब दिए तुम कही भी नहीं जा सकती और यहाँ जितने भी लोग है सब ये जानना चाहते है की तुम मेरा प्यार एक्सेप्ट क्यों नहीं की क्यों भाई लोग मई सही बोल रहा हु न आप लोग भी ये जानना चाहते हो न की आखिर क्या वजह है की शनाया ने मेरा प्यार एक्सेप्ट नहीं किया.

सब- है है हम जानना चाहते है.
 
अपडेट 11

दोस्ती की शुरुआत


नीरज ने शनाया को प्रपोज़ किया तो शनाया ने उसका प्रपोसल रिजेक्ट कर दिया जिसके कारन नीरज भायखला गया और उसने शनाया से पूछा की वो क्यों उसका प्यार एक्सेप्ट नहीं कर रही है है तो शनाया ने बोलै की वो उसका प्यार क्यों नहीं एक्सेप्ट कर रही है ये बताना वो जरुरी नहीं समझती है इतना बोलै कर शनाया पायल को लेकर वह से जाने लगती है तो नीरज उसका रास्ता रोक लेता है और बोलता है.

नीरज- तुम यहाँ से मेरे सवाल का जबाब दिए बिना नहीं जा सकती है तुम्हे बताना hi होगा की तुम मेरा प्यार क्यों एक्सेप्ट नहीं कर रही है और ये सिर्फ हम hi नहीं बल्कि यहाँ मौजूद सरे लोग भी जानना चाहते है.

नीरज के बात को सुन कर सरे लोग है में है मिलाने लगते है मुझे ये तमसा देख कर गुसा तो आ रहा था लेकिन मई भी ये जानना चाहता था की आखिर शनाया नीरज को क्या जबाब देती है इधर शनाया को भी नीरज के बात सुन कर गुसा आ रहा था वो घुसे से बोली.

शनाया- क्या बताऊ तुम्हे है तुम्हारा प्यार न एक्सेप्ट करने का एक रीज़न हो तब न मई तुम्हे बताऊ जानते हो तुम मुझे बिलकुल पसंद नहीं हो मुझे तुम्हारा ये गुंडे जैसे रवैया बिलकुल पसंद नहीं है और तुम लड़कियों को जिस नजर से देखते हो वो तो मुझे और भी पसंद नहीं है इतना रीज़न काफी है बताने के लिए की और बताऊ अगर तुम्हारे अंदर ये सब नहीं भी होता न तब भी मई तुम्हारे प्यार को एक्सेप्ट नहीं करती क्युकी... क्युकी मेरी सदी पहले hi हो चुकी है...

ये.... बूम 💥 💥 💥 और ये हुआ धमाका सरे के सरे लोगो जहा थे वही के वही पर खड़े रह गए कोई हिल तक नहीं रहा था सरे लोग सूक में चले गए और सबके मुँह आश्चर्य से खुले के खुले रह गए यहाँ तक की शनाया के बात सुन कर पायल की भी हालत इन लोगो जैसे hi हो गयी कुछ देर तक ऐसे hi सूक में रहने के बाद सब नार्मल हुए तो आपस में hi बाटे करने लगे तभी उन लोगो को नीरज की आवाज सुनाई देता है.

नीरज- नहीं ये झूठ है अगर तुम्हारी सदी हुयी होती तो पुरे शहर को पता चल जाता तुम झूठ बोल रही हो.

शनाया- भला मई तुमसे झूठ क्यों बोलूंगी अगर तुमको बिस्वास नहीं होता तो ये देखो मेरे गले में मंगलसूत्र.

इतना बोल कर शनाया अपने गले की मंगलसूत्र को सबको दिखती है तब जेक सबको बिस्वास होता है लेकिन नीरज को जान ये पता चला शनाया की सदी हो गयी है तो उसे बहुत गुसा आ रहा था लेकिन वो अपने घुसे को दबाते हुए बोलै.

नीरज- कोंग्रटुलतिओं शनाया मुझे तो ये पता hi नहीं था की तुम्हारी सदी हो गयी है और सॉरी जो अभी हुआ उसके लिए यकीं मनो अगर मुझे पहले से पता होता तो मई तुम्हे प्रपोज़ कभी नहीं करता वैसे क्या नाम है तुम्हारे हस्बैंड का और वो करते क्या है.

नीरज के बात को सुन कर शनाया एक बार मुझे घर कर देखती है और फिर बोलती है.

शनाया- कोई बात नहीं नीरज लेकिन आगे से यद् रखना की ऐसी गलती दोबारा न हो और मई अभी किसी को अपने हस्बैंड के बारे में बताना नहीं चाहती जब सही समय आएगा तो मई सबको बता दूंगी ठीक है अब मई चलती हु चलो पायल.

जब नीरज ने देखा की पायल जा रही है तो जल्दी से उसके पास गया और बोलै.

नीरज- लगता तुम मुझे अभी जो हुआ उसके लिए माफ़ नहीं की हो यार सॉरी न मई नहीं जनता था की तुम्हारा सदी हो गया है.

शनाया जो अभी घुसे में थी नीरज के बात को सुन कर उसका गुसा थोड़ा काम हुआ.

शनाया- मई तुम्हे माफ़ दिया.

नीरज- जब तुम मुझे माफ़ कर दी तो फिर जा क्यों रही हो अब पार्टी में आ गयी हो तो यहाँ से खाना खा के जाना.

नीरज के बहुत मानाने के बाद शनाया रुक जाती है लेकिन शनाया के साथ एक और प्रॉब्लम हो गया था और वो प्रॉब्लम था की पायल ने जब सुना की शनाया की सदी हो गयी है तो वो शनाया से गुसा हो गयी थी और उससे बात नहीं कर रही थी.

शनाया- क्या हुआ पायल तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रही हो.

पायल- मई हु कोण तुम्हारा जो तुमसे बात करू अगर मई तुम्हारी कुछ लगती तो तुम मुझे अपने सदी के बारे नहीं बताती और मुझसे छिपा कर सदी कर लेती.

शनाया- सॉरी न पायल ये सब इतनी जल्दी में hi गया की मुझे किसी को बताने का समय hi नहीं मिला और सबसे बड़ी बात मेरी सदी मेरे मन से नहीं हुआ है वो तो दादा जी का मन था उस लिए मई कोर्ट में जाकर सदी की है और उस सदी में सिर्फ घरवाले hi मौजूद थे.

पायल- वो ऐसा है तो ठीक चलो मई तुम्हे माफ़ किया लेकिन जीजू का नाम क्या है और वो दीखता कैसा है.

शनाया पायल के मुँह से मेरे लिए जीजू सुन कर गुसा हो जाती है और घुसे में पायल से बोलती है.

शनाया- तुम उसे जीजू नहीं बुलाओ उससे भले hi मेरी सदी हो गयी है लेकिन मई उसे कभी भी अपना पति नहीं मानूंगी और वो हैंडसम नहीं एक no. का गवर लगता है.

ऐसे hi बाटे करते करते खाने का समय आ गया तो सरे लोग खाना खाने लगे खाना खाने के बाद शनाया और पायल वाशरूम के लिए निकल गयी.

इधर जैसे hi नीरज ने देखा की शनाया और पायल दोनों बाथरूम के तरफ जा रही है तो नीरज ने किसी को मस्सगे किया और फिर खाना खाने लगा इधर शनाया और पायल दोनों वाशरूम में गयी और जैसे hi वाशरूम उसे कर के बहार आयी वैसे hi पीछे से एक हाथ जिसमे एक रुमाल था उन दोनों के मुँह पर आया और दोनों वही बेहोश हो कर गिर गयी.

दोनों को बेहोश होने के बाद कुछ लोग वह पर आये और दोनों को उठा कर होटल के hi एक रूम में लेके आ गया और किसी को कॉल कर के बोलै.

आदमी- काम तो हो गया लेकिन एक गड़बड़ भी हो गयी.

कॉल- कैसी गड़बड़ कही को देख तो नहीं लिया.

आदमी- नहीं कोई देखा नहीं है लेकिन उसके साथ में उसकी फ्रेंड भी थी तो दोनों को उठाना पड़ा.

आदमी के बात सुन कर कॉल वाला कुछ देर चुप रहा फिर बोलै.

कॉल- चलो कोई बात नहीं मई तो एक hi के बार में सोच रहा था अब दो दो हो गयी तो और मज़ा आएगा.

इधर सरे लोग खाना खा चुके थे तो नीरज ने पार्टी ख़तम होने का घोसना कर दिया और फिर सरे लोग एक एक कर के जाने लगे लेकिन मई वही रुका रहा मुझे ऐसे वही पर रुका देख कर सोनू बोलै.

सोनू- क्या बात है तुम्हे घर नहीं जाना है क्या.

मई- थोड़ी देर और रुको क्युकी मुझे यहाँ कुछ गड़बड़ लग रहा है.

सोनू- क्या गड़बड़ लग रहा है.

मई- शनाया और उसके दोस्त वाशरूम गयी थी अभी तक आयी नहीं है.

सोनू- तुम खामखा टेंशन ले रहे हो वो लोग अपने घर चली गयी होगी वैसे भी शनाया कब से घर जाने को बोल रही थी.

मई- नहीं ऐसा नहीं है कुछ तो गड़बड़ है.

इधर उस रूम में शनाया और पायल दोनों को होश आ गया था जब दोनों ने देखा की वो एक रूम में है तो दर गयी और डरते डरते अपना कपडा देखि जब उन्होंने देखा की उनका कपडा सही सलामत है तो थोड़ी रहत के साँस ली तभी उस रूम का दरवाजा खुला और कुछ लोग अंदर आये सबसे आगे नीरज चल रहा था ये सब प्लान नीरज का hi था नीरज को अपने सामने देख कर शनाया बोली.

शनाया- तुम मुझे मालूम hi था की तुम जैसा कुत्ता कभी सुधरने वाला नहीं है देखो मुझे जाने दो नहीं तो तुम्हारे लिया अच्छा नहीं होगा.

नीरज- है मई hi हु डार्लिंग मेरे शिवा और कोण हो सकता है मई कितने बार तुमको प्यार से समझाया की मेरे प्यार को एक्सेप्ट कर लो लेकिन नहीं तुम्हे तो मई पसंद hi नहीं हु जानती हो तुम सिर्फ मेरी हो और मेरे होते हुए तुमने सदी कैसे कर ली अब कर ली है तो इसकी सजा तो तुम्हे मिलेगा जो काम मई प्यार से करना चाहता था वो अब जबरदस्ती होगा.

शनाया- तुम मुझे हाथ भी नहीं लगा सकते तुम मुझे जानते नहीं हो मई मल्होत्रा खंडन की लड़की हु अगर तुम मेरे साथ कुछ भी किये तो मेरे दादा जी तुम्हे छोड़ेंगे नहीं समझे.

पायल- और मेरे पापा यहाँ कमिश्नर है समझे तुम चुप चाप हम दोनों को छोड़ दो नहीं तो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा.

नीरज को दोनों के बात सुन कर गुसा आ जाता है और वो घुसे में दोनों के गाल पर एक एक थपड मरता है और बोलता है.

नीरज- चुप एक डैम चुप अगर एक शब्द भी बोली तो तुम दोनों के लिए अच्छा नहीं होगा समझी और तुम मुझे धमकी दे रही हो तुम जानती हो अगर तुम दोनों के बाप दादा यहाँ के कमिश्नर और बिज़नेस मन है तो मेरे पापा भी यहाँ के बिजनेसमैन है समझी और मुझे किसी का दर नहीं है आज तुम दोनों के साथ यहाँ जो भी होगा उसे मई रिकॉर्डिंग कर लूंगा और जब तुम्हारा रिकॉर्डिंग मेरे पास होगा तो तुम मेरा कुछ भी नहीं बिगड़ पायेगी क्युकी उस वीडियो में ऐसा दिखेगा की तुम खुद मुझे ये सब करने के लिए बोल रही हो.

नीरज के बात सुन कर दोनों दर जाती है और डरते हुए पायल बोलती है.

पायल- देखो हम दोनों को छोड़ दो हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है.

नीरज- और तुम बिगड़ भी नहीं सकती वैसे तो मई तुम्हे कुछ भी नहीं करना चाहता था लेकिन तुमने इसके साथ में वाशरूम आ कर गलती कर दी अब गलती की है तो इसकी सजा भी मिलेगी इन दोनों को इंजेक्शन लगा दो.

नीरज के बात सुन कर उसके साथी में से एक आगे आया और दोनों को एक एक इंजेक्शन लगा देता है जिसे देख कर पायल और शनाया दोनों दर जाती है.

शनाया- ये तुमने कैसा इंजेक्शन हमें लगाया है देखो तुम हमारे साथ कुछ भी मत करो प्लीज.

नीरज- है है है है अभी तुम मुझे बोल रही हो की कुछ भी मत कर और 5 मिनट बाद बोलोगी की आओ और मेरी आग बुझा दो है है है है ये जो इंजेक्शन है न वो हाई दोसे सेक्स ड्रग्स से भरा हुआ है जैसे जैसे ये तुम्हारे बॉडी में अंदर घुलेगा वैसे वाइस तुम्हारे शरीर में सेक्स के लिए गर्मी बढाती जाएगी.

इधर मई सोनू को वही रुकने के लिए बोल कर वाशरूम के पास आया तो देखा की वाशरूम खुला हुआ है और वह पर कोई नहीं है ये देख कर मुझे कुछ गलत होने का आभास हो गया तो मई तुरंत hi अपने आँख बंद किया और दिव्या दृस्टि से पुरे होटल को देखने लगा जब मई पूरा होटल को देख रहा था तभी मुझे 20तह फ्लोर पर एक रूम में शनाया और पायल दिखी वह पर मुझे नीरज और उसके दोस्त भी दिखे जो अपने ऊपर के कपडा उतर कर शनाया और पायल के तरफ बढ़ रहे थे ये देख कर मुझे बहुत ज्यादा गुस्सा आया और मेरे आँखे घुसे से लाल हो गया.

मई भागते हुए लिफ्ट के पास गया तो देखा की दोनों लिफ्ट 35तह फ्लोर पर रुका हुआ है और वह से ग्राउंड फ्लोर पर आने में ज्यादा समय लग जायेगा और मेरे पास समय था नहीं तो मई तुरंत वह से टेलिपोर्ट हुआ और 20तह फ्लोर के गल्लारी में प्रकट हुआ जहा कोई भी नहीं था फिर मई भागते हुए उस रूम के पास गया जिस रूम में शनाया और पायल थी.

रूम के बहार नीरज के बॉडीगार्ड खड़े थे मुझे अपने तरफ आते देख बॉडीगार्ड सतर्क हो गए और मुझसे बोले.

बॉडीगार्ड- ये तुम इधर किधर आ रहे हो तुम चुप चाप यहाँ से चले जाओ नहीं तो तुम्हारा हाथ पेअर तोड़ कर तुम्हे बहार फेक दूंगा समझे.

मई- अगर तुम सब अपनी सलामती चाहते हो तो यहाँ से चुप चाप चले जाओ नहीं तो आज मई तुम सब को जान से मर दूंगा.

मेरे बात को सुन कर सरे गॉर्ड हसने लगे फिर उसमे से एक गॉर्ड आगे आया और बोलै.

गॉर्ड- बचे तुम चुप चाप यहाँ से चले जाओ तुम्हे दिख नहीं रहा है क्या की तुम अकेले हो और हम सब 8 लोग है तुम अकेला हम सब का क्या hi बिगड़ लोगे.

मई- शेर का मुकाबला कभी भी कुतो की फ़ौज नहीं कर सकता शेर अपना शिकार अकेले hi करता है.

गॉर्ड- लगता है तुम ऐसे नहीं मानोगे तुमको तो सबक शिकन hi पड़ेगा.

इतना बोल कर वो गॉर्ड भागते हुए मेरे तरफ आया और मुझ पर अपने मुके से हमला किया लेकिन मई उसका मुका मेरे तक पहुंचने से पहले hi मई अपना पेअर उठाया और उसके पेट पर दे मारा जिसके कारन वो उड़ता हुआ कुछ दूर जा कर गिरा मैंने अपने पावर को कण्ट्रोल करते हुए सिर्फ अपने पावर के 5% ताकत से hi हमला किया था जिसके कारन वो इतना दूर जाकर गिरा अगर मई अपनी पूरी पावर का उसे करता तो उसकी वही पर चीथड़े उड़ जाते.

अपने साथी को इस तरह से मर खाके पीछे जाता देख सरे गॉर्ड दर गए और अपने जेब से चाकू निकल कर सरे लोग एक साथ मुझ पर हमला कर दिए लेकिन मई 1 मिनट में hi सबको धूल छठा दिया मेरे मरने के कारन किसी का पेअर टुटा तो किसी का हाथ और किसी का गर्दन टुटा कोई भी वह पर सही सलामत नहीं था वह पर किसी न किसी को कुछ न कुछ टुटा hi था.

इधर नीरज को कुछ भी पता नहीं चला की बहार क्या हो रहा है क्युकी रूम साउंड प्रूफ था न अंदर का आवाज बहार जा सकता था और न hi बहार का आवाज अंदर आ सकता था इस लिए नीरज और उसके दोस्त अपने मस्ती में शराब पि रहे थे और दोनों को घूरे जा रहे थे इधर शनाया और पायल के शरीर में गर्मी बढ़ती जा रही थी उन दोनों के शरीर में इतना गर्मी बढ़ गया की दोनों अपने कपडा उतरने लगे लेकिन उन दोनों को अपना कपडा उतरने से पहले hi रूम का दरवाजा टुटा जिसके कारन सभी का ध्यान दरवाजे के तरफ चला गया वो लोग अभी संभाले भी नहीं थे की मई उन पर टूट पड़ा और उन्हें बुरी तरह से मरने लगा और मरते मरते बोले जा रहा था.

मई- तुम्हारी हिमत कैसे हुयी मेरी जान को हाथ लगाने की.

अभी मई इनलोगो को मर hi रहा था की तभी मेरी नजर शनाया और पायल पर पड़ी जो नशे के हालत में अपना कपडा खोलने की कोशिश कर रही थी ये देख कर मई भागते हुए उन दोनों के पास गया अपने और दोनों को की अकुपंक्चरे पॉइंट दबा कर बेहोश कर दिया लेकिन मेरी नजर अचानक उन दोनों के चेहरे पर तो देखा की उनके चेहरे पर थपड के निशान है ये देख मेरी आँखे घुसे से लाल हो गया इसके बाद मई भागते हुए नीरज और उसके दोस्तों के पास आया और उन्हें मरने लगा.

मई- तुम लोगो की इतनी हिमत की मेरे जान को तपाद मारा आज मई किसी को भी नहीं छोडूंगा आज मई तुम सब को जान से मर दूंगा.

नीरज- (दर्द से रट हुए) प्लीज हमें माफ़ कर आज के बाद हम ऐसा गलती कभी नहीं करेंगे और इन दोनों पर नजर उठा कर भी नहीं देखेंगे प्लीज हमें मत मारो माफ़ कर दो हमको.

मई- माफ़ी तुम जैसे हैवानो को मई माफ़ कैसे कर दू तुमने इसी हाथ से हाथ से उसे थपड मारा है न.

कद के आवाज के साथ मैंने उसका हाथ तोड़ दिया जिसके कारन वो जोर जोर से छिलने लगा नीरज के दोस्तों ने जब देखा की मई नीरज के हाथ तोड़ दिया है तो वो दर के कारन जोर जोर से रोने लगे.

नीरज दोस्त- प्लीज मुझे माफ़ कर दो मई नीरज के बातो में आ गया था आज के बाद मई ऐसा गलती कभी नहीं करूँगा.

कुछ देर तक मई उन सब को अच्छे से खातिरदारी करने के बाद बोलै.

मई- तुम लोग जल्दी यहाँ से भागो और है इसे कुत्ते नीरज को भी साथ में लेकर जाओ अगर तुम में से कोई भी मुझे कभी भी किसी लड़की को छेड़ते हुए मिल गए तो दोबारा नहीं छोडूंगा वही जान से मर दूंगा.

मेरा इतना बोलना था की वो लोग जल्दी से वह से निकले और भाग गए उन लोगो को जाने के बाद मई शनाया के पास गया और उसको अकुपंक्चरे पॉइंट बड़ा कर होस में लाया जैसे hi शनाया होश में आयी वो मुझे घूरने लगी उसकी आखे नशे की वजह से लाल हो गयी मई अभी कुछ समझता उससे पहले hi शनाया मुझे बीएड पर खींच ली और मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे किश करने लगी.

जैसे hi उसमे मुझे किश करना स्टार्ट किया मई उसमे खोने लगा लेकिन मुझे अचानक यद् आया की शनाया होश में नहीं है उसके ऊपर अभी ड्रग्स का नशा चढ़ा हुआ और वो जो भी कर रही ड्रग्स के नशे में कर रही है जैसे मुझे ये ध्यान में आया मई किसी तरह से उसको खुद से अलग किया और उसको उठा कर बाथरूम में ले गया इसके बाद मैंने उसके नाभि वाले अकुपंक्चरे पॉइंट को बढ़ाया तो उसकी वोमिटिंग हुआ और जितना भी ड्रग्स उसके बॉडी में था सब वोमिटिंग के वजह से बहार निकल गया.

जैसे hi उसके बॉडी से ड्रग्स निकला उसको होश आ गया होश आने के बाद अपने सामने मुझे देख कर चौक गयी और खुद को अच्छे से देखने लगी खुद को सही सलामत देख कर वो रहत के साँस ली और बहार निकलने के लिए आगे बढ़ी लेकिन ड्रग्स के वजह से उसके बॉडी में कमजोरी आ गया इस लिए वो चल नहीं पा रही थी.

मैंने देखा की उसको चलने में प्रॉब्लम हो रहा है तो मई उसे अपने गॉड में उठा लिया और उसे लेकर बहार आ गया और उसे बीएड पर सुला के ऊपर उतर दिया जैसे वो मेरे गॉड से निचे उत्तरी तो मेरे गलो पर एक थपड जड़ दी और बोली.

शनाया- तुम्हारी हिमत कैसे हुयी मुझे चुने की और तुम बताओ की तुम यहाँ पर कैसे कही तुम भी उन लोगो के साथ मिले हुए तो नहीं थे.

शनाया के हाथो थपड खा कर और शनाया के बात सुन कर मुझे बहुत दुःख हुआ मैंने सोचा की देखो भलाई का जमाना hi नहीं है मैंने इसे बचाया और ये मुझे hi गलत समझ रही है.

मई उसके बातो का कोई जबाब नहीं दिया और फिर पायल को होश में लाया और पायल भी होश में आने के बाद मुझे किश करने की कोशिश करने लगी लेकिन मई उसे खुद से दूर hi रखा और किसी तरह से उसे बाथरूम में ले गया और उसे भी उलटी करवाया फिर उसे भी अपने गॉड में उठा कर रूम में लेकर बीएड पर सुला दिया.

मई- अब तुम दोनों होश में आ गयी हो और तुम दोनों के अंदर से वो ड्रग्स भी मैंने निकल दिया है जब तुम खुद को बेहतर महसूस करो तो निचे आ जाना मई निचे hi तुम्हारा वेट कर रहा हु और अगर तुम दोनों को जब बेहतर न लगे तो मुझे कॉल कर देना (एक कागज पर no. लिख कर) ये रहा मेरा no. और है किसी पर सोच समझ कर ऊँगली उठाना चाहिए.

इतना बोल कर मई वह से निकल गया मेरे जाने के बाद पायल शनाया से बोली.

पायल- ये लड़का कोण था और वो कमीना नीरज और उसके दोस्त कहा गए.

शनाया- मुझे लग रहा है ये भी उन कमीनो के साथ मिला हुआ था.

पायल- नहीं ऐसा नहीं हो सकता अगर ऐसा होता तो ये हमें होश में नहीं लता और हम सही सलामत नहीं होते.

अभी ये लोग बात कर hi रहे थे की तभी पायल की नजर एक कैमरा पर गया जो वही पास में वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए लगाया गया था वो जल्दी से गयी और वो कैमरा ले कर आ गयी और उसमे से वीडियो ओपन कर के देखने लगी.

उन दोनों ने देखा की मई दरवाजा थोड़ कर अंदर आया और उन सब को मरने लगा और मेरे मुँह से मेरी जान सुन कर शनाया के आँखों में आंसू आ गया वो आंसू वो चुपके से साफ कर ली फिर सीन आगे बढ़ा और उन दोनों ने देखा की मई शनाया को होश में लाया तो शनाया जबरदस्ती मुझे किश करने लगी मई किसी तरह से उसको खुद से अलग किया और फिर बाथरूम में लेके गया इसके बाद बाथरूम से बहार निकल कर मई शनाया को अपने गॉड से उतरा तो शनाया मुझे तपाद मर दी ये देख कर न जाने क्यों पायल को शनाया पर गुसा आ गया और बोली.

पायल- छी तुम एहसान फरामोश हो उसने हम दोनों की जिंदगी बर्बाद होने से बचाया और तुमने उसी हर इल्जाम लगा दिया और हाथ भी उठाया मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी.

शनाया को पायल के बात सुन कर आँखों आंसू आ गया और बोली.

शनाया- मुझे माफ़ कर मैंने नहीं जानती थी की उसी ने हमें बचाया है मई तो सोची की ये भी उन्ही लोगो के साथ मिला हुआ है.

पायल- मुझसे माफ़ी मांगने से क्या होगा तुमने जिसपे हाथ उठाया है उसी से माफ़ी मांगी चलो छोडो थोड़ी देर रेस्ट करते है इसके बाद निचे जायेंगे तो तुम उससे माफ़ी मांग लेना.

शनाया- ठीक है.

इधर मई ग्राउंड फ्लोर पर आया और फिर सोनू के पास चला गया तो सोनू मुझसे पूछा.

सोनू- क्या हुआ भाई वो लोग मिले या नहीं.

मई- है यार वो लोग मिल गए.

सोनू- कहा चले गए थे वो दोनों.

सोनू के बात सुन कर मई उसे सब कुछ बता दिया जैसे hi सोनू ने सुना की शनाया को नीरज नशे का दवा देकर फायदा उठाना चाहता था तो वो घुसे में बोलै.

सोनू- साला कितना कमीना इंसान है वो तुम उसको छोड़े क्यों सेल को जान से मर देते.

मई- मई भी चाहता था की ऐसे लोगो को जान से मर दू लेकिन क्या करता अगर उसे मर देता तो पुलिस केस होता और फिर छान बिन में शनाया का नाम सामने आता मई नहीं चाहता की शनाया की बदनामी हो इस लिए उसे वार्निंग दे कर छोड़ दिया.

सोनू- है ये भी सही है ठीक किया छोड़ दिया तो नहीं तो बाद खामखा प्रॉब्लम होती वैसे अब क्या करना है.

मई- उन दोनों के शरीर में ड्रग्स के चलते कमजोरी है इस लिए मई उन्हें उसी रूम में छोड़ कर आ गया अब जब तक वो लोग नहीं आ जाते तब तक उनका वेट करते है.

करीब 1 घंटे बाद मुझे वो दोनों होटल से बहार आते हुए दिखाई दिए जैसे hi मैंने देखा की वो दोनों आ रहे है तो मई उनके पास गया और उनके पूछा.

मई- अब कैसी तबियत है आप दोनों का.

पायल- हम अभी ठीक हैं और थैंक्स हमें बचने के लिए अगर आप न होते तो पता नहीं आज क्या हो जाता.

मई- अरे इसमें टैंक यू की कोई बात नहीं है मई तो बस आप लोगो को इंसानियत के नाते मदत किया हु अगर आपके जगह पर कोई और होता तो मई उसका भी मदत करता वैसे तुम लोग गाड़ी तो चला लोगी न क्युकी हमें गाड़ी चलना नहीं आता.

शनाया- है मई चला लुंगी और सॉरी मई ऊपर तुमको जो बोलै उसके लिए.

मई- तुमने सिर्फ बोली hi नहीं थी बल्कि तपाद भी मरी थी.

शनाया- (शर्म से मुँह निचे करते हुए) उसके लिए भी सॉरी.

मई- कोई बात नहीं मई वो सब कबका भूल गया था.

शनाया- अब हमें चलना चाहिए.

मई- ठीक है तो आप लोग निकालिये हम टैक्सी से आ जायेंगे.

शनाया- टैक्सी से जाने की कोई जरुरत नहीं है तुम दोनों भी हमारे साथ चल सकते हो.

शनाया के बात सुन कर मई चुप चाप जेक गाड़ी में बैठ गया मुझे इस तरह से गाड़ी में बैठता देख कर सोनू भी आ कर बैठ गया इसके बाद हमलोग वह से निकल गए सबसे पहले सोनू को उसके घर पर छोड़ा गया इसके बाद पायल को लेकिन पायल जाते जाते बस घर घर कर मुझे hi देख रही थी गाड़ी में भी भर रास्ता बस मुझे hi चोरी छिपे देख रही थी.

खैर उसको छोड़ने के बाद शनाया ने गाड़ी आगे बढ़ा दी गाड़ी में पूरी तरह से सनता छाया हुआ था दोनों में से कोई भी कुछ नहीं बोल रहा था तभी शनाया ने अपनी छुपी तोड़ी और मुझसे बोली.

शनाया- थैंक यू आज तुमने मेरी इज्जत बचा ली

मई- कोई बात नहीं तुम्हे बचाना मेरा फ़र्ज़ था भले hi सिर्फ नाम की hi लेकिन तुम मेरी पत्नी हो और अपने पत्नी को बचन एक पति का फ़र्ज़ होता है तुम भले hi मुझे कुछ भी समझो लेकिन मैंने तुम्हे अपना पत्नी मन है और मेरी पत्नी पर कोई भी संकट आएगा तो उसे मुझसे होकर गुजरना होगा.

शनाया- सॉरी मैंने तुमको गलत समझा.

मई- तुम कब मुझे सही समझी हो जो आज समझती तुम टेंशन मत लो तुम्हारे बातो का मैंने बुरा नहीं मन है.

शनाया- वैसे हमलोग अभी सिर्फ

नाम का पति पत्नी है तो क्यों न हम दोस्त बन कर रहे क्या तुम मेरी दोस्त बनोगे.

मई- (कुछ सोचते हुए) ठीक है आज से हम तबतक दोस्त रहेंगे जबतक की तुम मुझे अपने जीवन में पति का दर्जा न देदो.

शनाया- ठीक है अच्छा आज जो भी हुआ उसे घर में किसी को मत बताना नहीं तो सब बेकार में टेंशन ले लेंगे.

मई- ठीक है.

ऐसे hi बाटे करते करते हम घर पहुंच गए आज मई बहुत खुस था क्युकी शनाया ने आज मुझे अपना दोस्त बनाया था और बहुत जल्द वो समय भी आ जायेगा जब वो मुझे अपने जीवन में पति की दर्जा देगी और ये मई बहुत जल्द कर के दिखाऊंगा.

घर पर पहुंच कर दुर्बल बजाय तो शनाया के मम्मी ने दरवाजा खोला और मुझे शनाया के साथ देख कर बोली.

पुस्पा- आ गए कामचोर घर पर खाना बनाना था तो तुम बहार आवारागर्दी कर रहे थे.

मई- सॉरी आंटी.

पुस्पा- तुम्हारे सॉरी का क्या मई अचार दालु अगर इस घर में रहना है तो तुम्हे सुबह और सैम समय पर खाना बनाना होगा.

शनाया- माँ आप ये कैसी बाटे कर रहे है प्रतिक से आज सोल्लगे के एक दोस्त ने पार्टी दिया था वही गए थे हम.

पुस्पा- तुम चुप रहो समझी.

पुस्पा के कड़क आवाज सुन कर शनाया चुप हो गयी फिर हम घर के अंदर आ गए इसके बाद सब अपने अपने रूम में चले गए और मई भी गेस्ट रूम में आ कर सो गया.

नेक्स्ट डे 4 ऍम को जागकर और टेलिपोर्ट हो कर मई सीधा हवेली पहुंच गया वह जाने के बाद मई ध्यान लगाया और अपने शक्तियों का ट्रेनिंग किया इसके बात मई वापस घर आ गया और फिर किचन में जाकर चाय बनाया और फिर सबको जगा कर चाय दिया इसके बाद नास्ता रेड्डी किया जब हम सब नास्ता करने के लिए बैठे थे तभी शनाया के डैड बोले.

अजय- शनाया आज तुम्हारे दादा जी का 75तह बर्थडे है इस लिए उनके लिए कुछ अच्छा सा गिफ्ट ले लेना और है उनको एंटीक आइटम बहुत पसंद है इस लिए तुम कोई एंटीक hi गिफ्ट में पैक करवा लेना.

शनाया- ठीक है डैड.

अजय- और प्रतिक तुमको भी साथ में चलना है और है तुम भी उनके लिए कोई गिफ्ट ले लेना लेकिन यद् रखना कुछ ऐसा मत दे देना की वह पर हमारा नक् कट जाये.

मई- ठीक है डैड आप चिंता मत कीजिये मई उनके लिए बेहतरीन गीरत ले कर जाऊंगा.

पुस्पा- आप इसको क्यों लेकर जाना चाहते है ये वह पर सरे मेहमानो के सामने हमारा बेइज्जती करवा देगा और इसके पास है हु क्या जो ये गिफ्ट खरीदेगा ये तो यहाँ हमारे टुकड़ो पर पल रहा है.

शनाया- माँ आप ये क्या हर बार एक hi बात ले कर बैठ जाती हो वो बोल रहा है न की वो कोई अच्छा सा अच्छा गिफ्ट ले लेगा.

पुस्पा- तुम लोग मेरे बात को मत मनो लेकिन देखना ये जरूर वह पर कोई न कोई हंगामा खड़ा करेगा.

शनाया- अब बस भी कीजिये माँ.

शनाया को इस तरह से मेरे लिए स्टैंड लेता देख कर मई मन hi मन बहुत खुस हो गया और मई सोचा की एक न एक दिन माँ भी मुझे अपना लेंगी बस समय का इंतजार है वैसे भी अजय मल्होत्रा मुझे ज्यादा कुछ नहीं बोलते थे अगर वो मुझे पसंद नहीं करते थे तो नापसंद भी नहीं करते थे.

खैर नास्ता करने के बाद सब उठ कर वह से चले जाते है इसके बाद मई सरे प्लेट को उठा कर किचन में रख आता हु और तैयार हो कर सोल्लगे के लिए निकल जाता हु शनाया भी सोल्लगे जाने के लिए तैयार हो कर बहार निकलती है और इधर उधर मुझे ढूंढती है जब मई उसे कही नहीं दीखता तो वो अपना कार निकल कर सोल्लगे निकल जाती है.

मई सोल्लगे में जाने के बाद सीधा क्लास रूम में जाता हु और लेक्चर अटेंड करता हु फिर लंच टाइम में सोनू के साथ कैंटीन में चला जाता हु जैसे hi मई कैंटीन में जाता हु तो देखता हु की पायल और शनाया दोनों वह पहले से hi बैठे हुए है.

मई भी एक खली टेबल देख कर बैठ जाता हु और कुछ खाने के लिए आर्डर करता हु फिर मई अभी बैठा हुआ hi था की तभी मेरे मोबाइल पर एक मस्सगे आता है जब मई मस्सगे खोल कर देखता हु तो उस पर लिखा हुआ था की.

मश्ग- क्या तुम मेरे साथ एंटीक शॉप पर चलोगे.

मई- पहले आप ये बताइये की आप कोण हो.

मश्ग- अरे नहीं पहचाने हम तुम्हारी नयी दोस्त.

मई- कही तुम शनाया तो नहीं हो.

मश्ग- है मई शनाया hi हु अब बताओ चलोगे या नहीं.

मई- ठीक है चलूँगा कब जाना है.

शनाया- बस थोड़ी देर बाद चलते है.

मई- ok

हमलोग अभी जो भी बाटे कर रहे थे वो मस्सगे से बात कर रहे थे तभी वह पर पायल आ गयी और मुझसे बोली.

पायल- ही कल हम लोगो के बिच ज्यादा बात चित नहीं हुयी थी इसलिए मई आपका नाम भी नहीं पूछ पायी वैसे मेरा नाम पायल है और आपका.

मई- हैल्लो मेरा नाम प्रतिक है.

पायल- कल के लिए आपका बहुत बहुत थैंक यू अगर कल आप न होते तो पता नहीं हमारे साथ वो लोग क्या क्या करते.

मई- अरे इसमें थैंक यू की कोई बात नहीं वो तो इंसानियत के नाते मेरा फ़र्ज़ था.

पायल- क्या हम दोस्त बन सकते है.

मई- है क्यों नहीं.

पायल- तो ठीक है चलिए आप दोनों हमारे टेबल पर हमारे साथ बैठिये.

मई- अरे नहीं मई यही ठीक हु.

पायल- अब तो हम दोस्त है न तो हम एक साथ बैठ कर लंच तो कर hi सकते है.

मई- ठीक है चलिए.

इसके बाद मई और सोनू पायल और शनाया के साथ बैठ गए और वही बाटे करते हुए लंच करने लगे लेकिन पायल का ध्यान लंच पर काम और मुझ पर ज्यादा था वो बार बार मुझे देखे जा रही थी ये बात शनाया ने भी नोटिस कर लिया लेकिन वो कुछ बोली नहीं.

तो अब आगे क्या होगा कहानी में क्या नीरज प्रतिक से बदला लेगा या फिर प्रतिक के दर से वो कुछ नहीं करेगा कही ऐसा तो नहीं की अजय नारायण के बर्थडे में ले जाकर प्रतिक को बेइज्जती करेंगे क्या शनाया के दिल में प्रतिक के लिए दोस्ती hi है या कही उसे प्रतिक से प्यार हो गया और ऐसा भी हो सकता है की पायल को प्रतिक से प्यार हो गया हो अगर सच में पायल को प्रतिक से प्यार हो गया तो कही प्रतिक शनाया को छोड़ कर पायल से प्यार करने न लगे.


होने के लिए तो कुछ भी हो सकता है और आपको ये सब जानना है तो पढ़ते रहिये थे सुपर बॉय स्फोरम पर
 
शनाया बहार और घर दोनों खुल कर इस लिए सपोर्ट नहीं कर रही है क्युकी वो अभी प्रतिक को अपना पति नहीं मानती है और जिस दिन वो प्रतिक को अपना पति मन लेगी वो उसके लिए पूरी दुनिया से लड़ जाएगी और पुस्पा में अकड़ इस बात की है की वो खुद पैसे वाली और प्रतिक को एक गरीब समझती है दूसरी बात वो मल्होत्रा हाउस से निकले जाने का कारन प्रतीक को hi मानती है.

वैसे थैंक्स फॉर कमेंट बीआरओ ऐसे hi साथ बने रहे
 
थैंक्स फॉर योर सुग्गेस्टिव बीआरओ.

बूत क्या है न की एक बार की गलती तो भगवन भी माफ़ कर देता है इस लिए प्रतिक रोहित को ज्यादा नहीं मारा और है प्रतिक ने अपना चेहरा इस लिए नहीं ढाका की उसका पूरा ध्यान शनाया पर था की कही उसे कुछ हो न जाये इस लिए उससे गलती हो गयी लेकिन एक और बात है रोहित प्रतिक का चेहरा देख लिया है इस लिए वो ऐसा कुछ करेगा की प्रतिक पुरे मुंबई पर राज करने लगेगा और वो कैसे करेगा ये आपको स्टोरी में पता चलेगा.

ये पुस्पा का ऐटिटूड नहीं बल्कि वो प्रतिक पर गुसा है क्युकी वो मल्होत्रा हाउस से निकलने का कारन प्रतिक को hi समझती है और उसे ऐसा लगता है की उसकी बेटी के सदी प्रतिक हो गयी है इस लिए उसकी बेटी के जिंदगी बर्बाद हो गया.

थैंक्स बीआरओ फॉर योर लवली कमैंट्स ऐसे hi साथ बने रहे
 
अपने सही कहा की दोस्ती की शुरुआत प्यार से hi होती है लेकिन प्रतिक के जिंदगी में प्यार इतनी आसानी से नहीं मिलेगी और रही बात पायल की तो पायल का प्यार अभी ओने साइडेड लव है देखते है आगे क्या होता है और नीरज की तो आप जानते hi हो की कुत्ते की दम कभी सीधा नहीं होता लेकिन इस बार नीरज कुछ हटके प्लान बनाएगा ताकि सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे वैसे नीरज hi वो कड़ी बाई जिसके चलते प्रतिक पूरा मुंबई को सुधरेगा वो कैसे सुधरेगा ये आपको स्टोरी में पता चलेगा.

थैंक्स बीआरओ फॉर योर लवली कमैंट्स ऐसे hi साथ बने रहे
 
अपडेट 12



मई और सोनू शनाया और पायल के साथ आ कर बैठ गए और वही पर बाटे करते हुए लंच करने लगे लेकिन पायल का ध्यान लंच पर काम और मुझ पर ज्यादा था वो बार बार मुझे hi देखे जा रही थी ये बात शनाया ने भी नोटिस कर लिया लेकिन वो कुछ बोली नहीं लेकिन अपने मन hi मन सोची.

शनाया- (मन में) ये पायल प्रतिक को ऐसे क्यों घूरे जा रही है लगता है कही इसके मन में प्रतिक को लेकर कुछ बात तो नहीं चल रही है अरे मई भी क्या सोचने लगी ऐसा कुछ भी नहीं होगा वो तो कल प्रतिक ने हम दोनों को बचाया था इस लिए शायद ये उसे इस तरह से देख रही है.

भले hi शनाया अपने आप को समझा रही थी लेकिन उसके मन में कही न कही ये भी चल रहा था की

शनाया- (मन में ) हो सकता है कल प्रतिक ने हमें बचाया तो पायल उससे प्यार करने लगी हो लेकिन ये तो गलत होगा न.... ये मई क्या सोचने लगी उसकी जिंदगी उसे जो भी करना है करे.

शनाया अभी ये सब बाटे सोचे hi जा रही थी की पायल उसको हिलाते हुए बोली.

पायल- क्या यार तुम तो दिन में hi सपने देखने लगी किसकी सपना देख रही थी कही ऐसा तो नहीं की तुम्हारे सपने में मेरे जीजू आये थे.

पायल के बात सुन कर शनाया एक बार मुझे देखि तो उसने पाया की मई भी उसे hi देखे जा रहा हु तो वो अपने नजर को मुझसे हटते हुए बोली.

शनाया- क्या यार तुम भी क्या बाटे कर रही हो मैंने तुमको पहले hi बताया था न की मेरी शादी सिर्फ नाम की hi हुयी है हम असली के पति पत्नी नहीं है.

शनाया के बात सुन कर मुझे थोड़ा बुरा लगा इस लिए मई वह से उठ कर सबसे बोलै.

मई- पायल और सोनू मुझे थोड़ा काम है इस लिए मई अभी जा रहा हु.

सोनू- भी मुझे तुमसे कुछ बात करनी थी.

मई- है बोल न सोनू क्या बात करनी थी.

सोनू- तुमको मेरे डैड ने खाने पर बुलाया है.

मई- वह सॉरी यार आज मेरे पास समय नहीं है मुझे कुछ काम से कही जाना तो तुम अपने डैड को बोल देना मई कल जरूर आऊंगा ठीक है.

सोनू- कोई बात नहीं भाई तुम जाकर अपना काम कर लो हम घर पर कल चलते है.

फिर मई वह से उठ का सोल्लगे के बहार निकल गया और शनाया को मश्ग किया की मई सोल्लगे के बहार खड़ा हु तुम आ जाओ.

शनाया ने मेरे मश्ग को पढ़ी तो उसने भी बोलै की मुझे भी कुछ काम यद् आ गया है इस लिए मुझे बहार जाना होगा और वो दोनों को ब्यय बोल कर सोल्लगे के पार्किंग में गयी और वह से अपना कार लेकर निकल गयी और मेरे पास आकर अपना कार रोकी तो मई उसमे बैठ गया और हम वह से निकल गए.

गाड़ी में पूरा सनता पसरा हुआ था दोनों में से कोई कुछ नहीं बोल रहा था तभी शनाया अपनी छुपी तोड़ते हुए बोली.

शनाया- सॉरी मुझे पायल से ऐसे नहीं बोलनी चाहिए थी.

मई- तुमने गलत कहा बोलै ठीक hi तो बोली थी तुम हम सिर्फ नाम के पति पत्नी है और हम असली के पति पत्नी नहीं है एक बात बोलू शनाया अगर तुमको मुझसे कुछ प्रॉब्लम है तो तुम मुझे तलाक दे सकती हो तुम्हे एक साल की इंतजार करने की जरुरत नहीं है.

मेरे बात को सुन कर शनाया को गुसा आ गया लेकिन वो अपने घुसे को दबती हुयी बोली.

शनाया- सॉरी तो मई तुम्हे बोल रही हु न क्या अब मई तुम्हारी पेअर पकड़ लू और है तुम न एक साल तक तलाक के बात करना भी नहीं क्युकी मई भी देखना चाहती हु की मेरा जिससे शादी हुआ है वो अपनी बातो का कितना पक्का है क्या उसने जो शर्त मणि है वो पूरी कर सकता है या नहीं.

मई- ठीक है जब तुमको यही देखना है तो देख लेना 1 साल बाद तुम खुद बोलोगी की मुझे मेरे पति पर गर्व है.

शनाया- अच्छा अब छोडो वो सब बाटे और ये बताओ की तुम्हे पता तो होगा hi की हम एंटीक शॉप क्यों जा रहे है.

मई- है दादा जी के लिए बर्थडे गिफ्ट लेने.

शनाया- बिलकुल सही तो मई क्या कह रही थी की मुझे कोई ऐसा गिफ्ट दादा जी को देना है की वो देखते hi खुस हो जाये.

हम दोनों बाटे करते करते एंटीक शॉप मार्किट में पहुंच गए यहाँ पर बहुत सरे एंटीक के शॉप थे हम दोनों गाड़ी से उतर कर के पाश वाली एंटीक शॉप में आ गए और शॉप में लगे हुए एंटीक को देखने लगे हम लोगो को इस तरह से सामान को देखता देख कर शॉपकीपर ने आ कर मुझसे पूछा.

शॉपकीपर- क्या चाहिए आपको.

मई शॉपकीपर के बात सुन कर अपने दिव्या दृस्टि से शॉप में चारो तरफ देखने लगा तभी मुझे एक मूर्ति दिखी तो मई शॉपकीपर से बोलै.

मई- मुझे वो मूर्ति दिखाना.

मेरे बोलने के बाद वो शॉपकीपर उस मूर्ति को देखते हुए वो अपने मन में सोचने लगा.

शॉपकीपर- (मन में ) ये उस ताम्बे वाले मूर्ति को लेना चाहता है जिसे कोई देखना भी नहीं चाहता लगता है आज बकरा अच्छा मिल गया है इसे उल्लू बना कर पैसे ैथ लेता हु.

शॉपकीपर ने तुरंत जाकर उस मूर्ति को मेरे पास ले कर आ गया और मुझसे चापलूसी भरे अंदाज में बोलै.

शॉपकीपर- साहब आपके नजरो की तो कोई तुलना hi नहीं है अपने क्या मूर्ति पसंद की है ये मूर्ति चोला वंस का है और उस समय इस मूर्ति को सोमस्कन्द के नाम से जाना जाता था ये मूर्ति उस समय लोग घर पर इस लिए रखते थे की इसको घर पर रखने से धन वैभव और प्रतिष्ठा बढ़ता है.





वो मूर्ति एक देवता का था जो अपने पत्नी और बेटे के साथ एक सिंघासन पर बैठे थे और उस मूर्ति के लम्बाई 2 फ़ीट थी शॉपकीपर सच hi बोल रहा था जब मैंने अपने दिव्या दृस्टि से उस मूर्ति को देखा था तो मुझे इसके बारे में सब पता चल गया था.

मई- इस मूर्ति के कीमत आपने कितना रखा है.

शॉपकीपर- ज्यादा नहीं सर वो क्या है न की ये मूर्ति एक एंटीक मूर्ति है और से शुद्ध ताम्बे से बना हुआ है इस लिए इसका कीमत बस 2 लाख है.

शॉपकीपर की बात सुन कर शनाया चौक गयी और वो घुसे से शॉपकीपर से बोली.

शनाया- तुम यहाँ लूट मचा राखी है क्या एक ताम्बे की मूर्ति का 2 लैस ये कुछ ज्यादा नहीं है.

शॉपकीपर- नहीं मैडम ये ज्यादा नहीं है अगर आपको लेना है तो लीजिये नहीं तो जाइये.

शनाया- प्रतिक हमें दादा जी के लिए कोई अच्छा सा गिफ्ट लेना है और ये वैसे भी दिखने में कोई खास नहीं लग रहा है चलो हम दूसरे शॉप में जाते है.

मई- नहीं शनाया हम इस मूर्ति को ले रहे है तुम्हारे दादा जी के लिए इससे अच्छा गिफ्ट और कोई हो hi नहीं सकता इस लिए मेरी बात मनो और तुम इसे ले लो.

शनाया- तुम ये क्या बोल रहे हो ये मूर्ति दादा जी के लिए सबसे अच्छा गिफ्ट होगा तुम्हे दिख नहीं रहा ये शॉपकीपर हमसे झूठ बोल कर हमें लूटना छह रहा है.

मई- तुम एक बार मुझपे बिस्वास कर के देखो ये तुम्हारे दादा जी को जरूर पसंद आएगा.

शनाया- ठीक है तुम अगर बोल रहे हो तो मई बिस्वास करती हु लेकिन मई इस मूर्ति का 1 लैस दूंगी इससे ज्यादा नहीं (शॉपकीपर से) अगर तुम मुझे ये मूर्ति 1 लैस में डोज तो मई लेने के लिए तैयार हु नहीं तो मई जा रही हु यहाँ से.

शॉपकीपर तो यही छह रहा था क्युकी उसने तो इस मूर्ति को सिर्फ 10 हजार में ख़रीदा था और उसे पुरे 1 लैस मिल रहे थे उसने तुरंत hi 1 लैस में मूर्ति देने के लिए तैयार हो गया जब मैंने देखा की शॉपकीपर ने मूर्ति 1 लैस में देने के लिए तैयार हो गया तो मई तुरंत hi शनाया को बोलै.

मई- शनाया तुम इसे पैसे दे दो.

शनाया- लेकिन प्रतिक.

मैंने देखा की शनाया अभी भी उस मूर्ति को लेने के लिए तैयार नहीं थी तो मई उसको समझते हुए बोलै.

मई- देखो शनाया मेरी बात मनो और तुम ये मूर्ति लेलो ये दादा जी को जरूर पसंद आएगा मेरा यकीं करो.

शनाया- ठीक है मई तुम्हारे कहने पर इसे ले रही हु लेकिन अगर ये दादा जी को पसंद नहीं आया तो तुम ये भूल जाना की हम कभी दोस्त भी बने थे.

इतना बोल शनाया ने शॉपकीपर को अपने कार्ड से पेमेंट किया और फिर हम उस मूर्ति को लेकर उस शॉप से निकल गए और फिर उस मूर्ति को शनाया के गाड़ी में रखने के बाद मई शनाया से बोलै.

मई- मुझे भी दादा जी के लिए गिफ्ट लेना है इस लिए हम अब दूसरी शॉप में चलेंगे.

शनाया- अगर तुम्हे भी गिफ्ट लेना था तो तुम उसी शॉप से क्यों नहीं ले लिए.

मई- उस शॉप में इस मूर्ति को छोड़ कर और कोई भाई ओरिजिनल एंटीक नहीं था इस लिए मैंने वह से कुछ नहीं लिया चलो अब हम दूसरे शॉप पर चलते है.

इतना बोल कर मई आगे बढ़ गया तो शनाया भी मेरे पीछे पीछे आने लगी कुछ देर चलने के बाद हम एक एंटीक शॉप में पहुंचे ये यहाँ का सबसे बड़ा एंटीक शॉप था जब हम दोनों उस शॉप में पहुंचे तो वह बहुत भीड़ लगी हुयी थी और सरे लोग एंटीक शॉप के दरवाजे के तरफ देख रहे थे मुझे ये देख कर थोड़ा अजीब लगा लेकिन मई उन सब को इग्नोर किया और शनाया के एंटीक देखने लगा अभी हम एंटीक देख hi रहे थे की तभी मुझे एक आदमी की आवाज सुनाई दी.

आदमी- वो देखो वो आ गए.

उस आदमी की आवाज सुन कर सरे लोगो में खलबली

मच गयी और फिर सरे लोग भाग कर दरवाजे के पास गए ये देख कर मई सोचने लगा की आखिर कोण आ रहा है जिसे देखने के लिए ये लोग इतने उतावले हो रहे है फिर मई वही पर खड़ा शॉपकीपर से पूछा.

मई- अरे भाई ऐसा कोण आ रहा है जिसे देखने के लिए लोगो का इतना भीड़ जमा है.

शॉपकीपर- आपको नहीं पता आज इस सहर के सबसे बड़े एंटीक मास्टर रतन मिश्रा आ रहे है.

मई- तो इसमें इतना उतावला होने की क्या जरुरत है.

शॉपकीपर- आपको नहीं पता रतन मिश्रा इस शहर के एक सेलिब्रिटी है एंटीक जगत में बस उनका नाम hi काफी है लोगो के दिलो में उनका इज्जत बनाने के लिए और वैसे भी आज वो अपने कुछ एंटीक ले कर हमारे शॉप में आ रहे है इस लिए ये लोग इतने उतावले हो रहे है ताकि वो उनसे एक दो एंटीक खरीद सके.

शॉपकीपर के बात ख़तम होते hi एक ब्यक्ति भीड़ को चीरते हुए शॉप के अंदर आया.

मई- क्या यही है एंटीक मास्टर.

शॉपकीपर- है यही है.

शॉपकीपर के बात को सुन कर मई ध्यान से उस आदमी को देखने लगा वो आदमी लगभग 55 ये 60 साल का होगा उसके चेहरे पर एक अलग hi गुरुर था वो शोपे में आने के बाद सबको संत करते हुए बोलै.

रतन- मई आज यहाँ पर अपना कुछ एंटीक लेकर आया हु मई चाहता हु की आप सब उस एंटीक को पहचान करे और उसके बारे में बताये मुझे जो भी आदमी जिस एंटीक के बारे में सही से बताएगा मई उसे वो एंटीक दे दूंगा.

इतना बोल कर वो अपने पास से बहुत सारा सामान निकला तो मई उन सामने को ध्यान से देखने लगा रतन लाल के पास जो सामान थी वो एक छड़ी थी जिसकी हैंडल पर पीकॉक का सर बना हुआ था वो आगे से मुदा हुआ था उसे पीकॉक के माथे पर एक डायमंड लगा हुआ था दूसरा सामान था एक पेन्डेन्ट जिस पर बहुत hi सुन्दर नकाशी की हुयी थी और देखने में भी बहुत सुन्दर था मैंने जब उन दोनों सामान को अपने दिव्या दृस्टि से देखा तो मुझे उन दोनों सामान का पाचन के साथ साथ उनकी पूरी हिस्ट्री भी मालूम चल गया हलाकि उसे आदमी के पास और भी सामान थी लेकिन उनमे सबसे बेस्ट था ये दोनों एंटीक और इनमे से मुझे वो छड़ी बहुत पसंद आयी थी मैंने सोचा की क्यों न मई इस छड़ी के बारे में बता कर इनसे ये छड़ी खरीद लू लेकिन फिर मई सोचा की पहले देखता हु की ये लोग जो इतने समय से रतन मिश्रा के इंतज़ार कर रहे थे वो इन सामने के बारे में क्या बताते है.

इधर सरे लोग उन सामने को देख कर आपस में बाटे करने लगे थे फिर सरे लोग एक एक कर के उन सामने के बारे में बताने लगे लेकिन कोई भी उन सामने को सही से नहीं पहचान प् रहा था लेकिन उन में से कुछ ऐसे भी थे जो एक दो सामान को पहचान कर उसकी हिस्ट्री अच्छे से बताया था लेकिन वो एंटीक छोटी मोती एंटीक थी जिसके बारे में जानना कोई बड़ी बात नहीं थी खैर जब सरे लोग अपना अपना जबाब दे दिए लेकिन कुछ को छोड़ कर बाकि कोई भी उन एंटीक को नहीं पहचान पाया तो ये देख कर रतन मिश्रा बोले.

रतन- आप सब ने बहुत प्रयास किया लेकिन कोई भी इन एंटीक को नहीं पहचान पाया है मई आप सब से बहुत नीरस हु क्या यहाँ पर कोई ऐसा नहीं है जो मेरे खजानो को पहचान सके क्या आज कल के नौजवान अपने हिस्ट्री को भूल गए क्या आज कल के नौजवान सिर्फ पब सिनेमा लड़कियों और पैसो के पीछे hi अपनी जिंदगी निकल रहे है शर्म आणि चाहिए आप सब को मेरे पास जितने भी खजाना है वो भारत के hi हिस्ट्री से जुड़ा हुआ है लेकिन इसे कोई भी पहचान नहीं पाया है.

मई वही पर खड़ा हो कर उन सब को देख रहा था जब रतन ने सरे लोगो को ये बात बोलै तो मई उसके पास जाका उसको बोलै.

मई- क्या मई एक बार तरय कर के देख सकता हु.

मुझे इस तरह से बोलने पर रतन मुझे ऊपर से निचे तक देखा और फिर बोलै.

रतन- जब इतने बड़े बड़े लोग जो न जाने कब से एंटीक की दुनिया में है वो जब पहचान नहीं पाए तो तुम कैसे पहचान पाओगे और क्या बोलै तुमने मई तरय करके देखता हु यहाँ सब्जी बिक रहा है क्या जो तुम्हे तरय कर के देखना है तुम्हारी उम्र अभी सोल्लगे जाने की जाओ और जाकर कुछ साल और पढाई करो इसके बाद मेरे पास आना.

मई- आपको ये किसने बोल दिया की जो उम्र में बड़े है वही एंटीक को पहचान सकते है और जो उम्र में छोटे है वो एंटीक को नहीं पहचान सकते.

रतन- ये बात मुझे किसी ने नहीं बोलै लेकिन ये सच है की बिना तजुर्बा के कोई एंटीक को नहीं पहचान सकता और जितना ज्यादा उम्र होगी उतना ज्यादा तजुर्बा होगा.

मई- अगर ऐसा है तो यहाँ सबसे ज्यादा आपका उम्र है तो यहाँ सबसे ज्यादा आप तजुर्बेदार होंगे.

रतन- है तो मई हु hi तजुर्बेदार क्युकी यहाँ पर मुझसे ज्यादा एंटीक को कोई भी नहीं पहचान सकता और ये बात यहाँ खड़े सब लोग जानते है क्यों भाइयो.

रतन के बात सुन का सरे आदमी है में है मिलाने लगते है तभी उनमे से एक लड़का भीड़ से आगे आ कर बोलता है.

लड़का- तुम्हे सायद पता नहीं है ये रतन मिश्रा है ये पुरे मुंबई के जाने मने एंटीक एक्सपर्ट है अगर ये किसी भी चीज को छू कर बोल दे की वो एक एंटीक है तो सरे लोग उसे एंटीक hi मानेगे.

मई- मई मंटा हु की ये एक एंटीक एक्सपर्ट है लेकिन इनको किसी को भी अपने से काम नहीं समझना चाहिए.

मुझे इस तरह से सबसे बहस करता देख कर शनाया मेरे पास आयी और मुझसे बोली.

शनाया- प्रतिक तुम यहाँ तमसा क्यों खड़ा कर रहे हो चलो यहाँ से हम जिस चीज के लिए आये थे वो हम ले कर यहाँ से चले जाते है.

मई- नहीं शनाया ये आदमी कुछ ज्यादा hi घमंडी है इसको अपने आगे कोई नहीं दीखता आज मई इसका घमंड तोड़ कर hi रहूँगा.

शनाया- मुझे तुम्हारे साथ यहाँ आना hi नहीं चाहिए था देखो लास्ट बार बोल रही हु अगर तुम यहाँ से नहीं चले तो मई अकेले hi चली जाउंगी.

मई- बस मुझ पर यकीं कर के 5 मिनट और रुक जाओ इसके बाद मई खुद तुम्हारे साथ चलूँगा.

शनाया- (घुसे से) ठीक है जो तुम्हे करना है करो.

इतना बोल कर वो वह से आगे जाकर एंटीक देखने लगी तो मई इधर रतन से बोलै क्या अब मई आपके खजानो को देख सकता हु.

रतन- नहीं बिलकुल नहीं.

मई- क्यों नहीं देख सकता आपको कही ये तो दर नहीं लग रहा ह की मई खजानो को पहचान लूंगा तो आपको ये खजाने मुझे देने पद जायेंगे.

रतन- बहुत घमंड है न लड़के तुम्हे तो ठीक है तुम मेरे खजाने को देख सकते हो और इसे पहचान सकते हो अगर तुम इसे पहचान गए तो तुम जिस जिस खजाने को पहचानोगे वो खजाना मई तुम्हे दे दूंगा लेकिन अगर तुम नहीं पहचान पाए तो यही सबके सामने घुटनो पर बैठ कर मुझसे माफ़ी मांगना होगा.

मई- मुझे मंजूर है.

रतन- तो ठीक है तुम मेरे खजाने को देख सकते हो.

मई जाकर उन खजानो को ध्यान से देखने लगा हलाकि मुझे उसके बारे में पहले hi पता चल गया था लेकिन मई फिर भी उन खजानो को देखने की एक्टिंग कर रहा था.

मई- अपने इन सरे खजानो को तो पहले hi देखा होगा तो आपको क्या लगता है ये सरे खजाने असली है.

रतन- है मैंने खुद इसे अपनी आँखों से देखा है और अपने तजुर्बे से परखा भी है ये सरे खजाने असली है लेकिन तुम ये क्यों पूछ रहे हो कही तुम्हे ऐसा तो नहीं लग रहा की ये सरे खजाने नकली है अगर ऐसा है तो मई तुम्हे पहले hi बोल दे रहा हु अगर तुम बिना कोई साबुत के इन खजानो को नकली बोलै तो तुम्हारे लिए ये ठीक नहीं होगा.

मई- मैंने कब कहा की आपका सारा खजाना नकली है लेकिन इनमे से कुछ है जो नकली है लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा की इतने तजुर्बेदार आदमी से ऐसी गलती कैसे हो गयी.

मेरी बात को सुन कर वह मौजूद सरे लोग चौक गए और मुझे तरह तरह के बाटे सुनाने लगे कोई बोल रहा था की अरे ये तो पागल है जो रतन मिश्रा के परख को गलत बता रहा है तो कोई बोल रहा था अरे ये यहाँ लाइम लाइट पाने आया है इस लिए ये रतन मिश्रा को टारगेट कर रहा है तभी उन सब के बिच से एक नौजवान बहार निकला उसका भी आगे मेरे बराबर hi था वो आकर मुझसे बोलै.

लड़का- देख भाई अगर तुम यहाँ ये सोच कर आये हो की रतन मिश्रा को बदनाम कर के खुद का नाम करोगे तो तुम गलत जगह पर आ गए हो अगर तुम्हे यहाँ मर नहीं कहानी है तो चुप चाप रतन मिश्रा से माफ़ी मानगो और यहाँ से चले जाओ.

मई- मई भला क्यों माफ़ी मांगू मैंने क्या गलत किया है अगर जो चीज नकली है उसे मई नकली hi कहूंगा न तो इसमें मई गलत कहा से हो गया.

लड़का- बहुत घमंड है न तुमको खुद पर अगर तुम ये साबित नहीं कर पाए की इसमें से नकली क्या है और क्यों है तो तुम यहाँ से सही सलामत नहीं जा पाओगे.

रतन- (घुसे में ) बस बहुत हो गया तुम्हारा अब मुझे तुम चुप चाप ये बताओ की इनमे से तुम्हे क्या क्या नकली लग रहा है और क्यों मुझे साडी डिटेल्स में बताओ अगर तुम नहीं बता पाए तो यद् रखना.

मई- ठीक है मई सबसे पहले इस बाउल 🍜 के बारे में आपको बताता हु इसके पैटर्न और इस्पे जो कलाकृति किया हुआ है खास कर के ये सरे नाग की कलाकृति जो अपने फैन फैलाये हुए है ये देख कर आपको लग रहा होगा के ये 5000 हजार साल पहले के नागा समुदाय का बाउल है मई सही बोल रहा हु न.



रतन- है तुमने सही बोलै ये नागा समुदाय का hi बाउल है.

मई- नहीं ये आपको देखने में भले hi नागा समुदाय का बाउल लग रहा है लेकिन वो नागा समुदाय का है नहीं आपको पता 5000 हजार साल पहले किसी भी वास्तु को कलर करना होता था तो वो कैसे करते थे.

रतन- है मुझे पता है की 5000 हजार साल पहले फल फूल और औषधियों से उनके आरक को निकल कर उनसे कलर बनाया जाता था और उसी से वो किसी भी वास्तु को कलर करते थे.

मई- हम्म अपने सही बोलै पुराने ज़माने में फल फूल और औषधियों के आरक को गरम कर के उससे कलर बनाते थे वो कलर इतना पक्का होता था की जिस वास्तु पर उसका कलर लगा हो वो चाहे कितना भी पुराण क्यों न हो जाये वो कलर वैसा का वैसा hi रहता है वो कभी मिट नहीं पता है लेकिन उस कलर में एक कमी थी वो कलर अभी के कलर जितना शाइन नहीं करता था लेकिन इस बाउल पर जो कलर लगा है वो बहुत शाइन कर रहा है इसका मतलब है की ये नकली है ये हुयी मेरी पहली बात अब आप मेरी दूसरी बात सुनिए इस बाउल में जो 8 नागो की चित्र जो बानी है वो भी गलत है क्युकी नागा समुदाय के बाउल में 9 नाग बने होते है और सबका पूछ आपस में जुड़ा होता है अगर मेरी बात पर आप लोगो को यकीं नहीं होता तो नागा समुदाय के हिस्ट्री अपने मोबाइल में सर्च कर लो.

मेरी बात सुन कर सरे लोग अपने अपने मोबाइल में सर्च कर के देखने लगे जैसे जैसे वो नागा समुदाय के हिस्ट्री बढ़ रहे थे उनके चेहरे का रंग उड़ रहा था और ऐसा hi हल रतन मिश्रा का भी था क्युकी उनको ये सब बात पहले से hi पता थी लेकिन वो इन सब बातो पर ज्यादा ध्यान नहीं दिए थे और उनसे यही गलती हो गयी थी वो अपना सर पकड़ कर बोले.

रतन- मई इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकता हु मई कैसे नहीं इन सब बातो पर ध्यान दिया.

मई- आप से कोई गलती नहीं हुयी है ये बाउल जैसा दीखता है वैसा है नहीं वैसे आप इसे कितने में ख़रीदे थे.

रतन- मई इसे 20 लाख में ख़रीदा था.

मई- तो मई आपको अभी 20 लाख देता हु क्या आप इस बाउल को मुझे दे सकते है.

रतन मेरे बात को सुन कर चौक गया और फिर वो मुझसे बोलै.

रतन- ये जानते हुए की ये बाउल नकली है फिर भी तुम इसे क्यों खरीदना चाहते है और वैसे भी मैंने तुमको पहले hi बोल दिया था की अगर तुम मेरे किसी भी खजाने को पहचान लोगे तो मई तुम्हे अपना सारा खजान मुफ्त में दे दूंगा इस लिए अब ये सारा खजाना तुम्हारा हुआ मुझे तुमसे कोई पैसा नहीं चाहिए.

रतन मिश्रा के बात सुन कर मैंने शनाया को इधर उधर ूँढा तो देखा की वो मुझसे कुछ दूर पर कड़ी है और वो एंटीक देखने में ब्यस्त है तो मई धीरे से रतन मिश्रा से बोलै.

मई- नहीं मई इसे फ्री में नहीं लूंगा मई आपके सरे खजाने का 5 करोड़ देने के लिए तैयार हु अगर आप इसे मुझे देना चाहते है तो आपको पैसे लेने होंगे.

रतन- ठीक है लेकिन तुम मुझे दूसरी एंटीक के बारे में भी तो बता दो.

रतन के बात सुन कर मई मुस्कुरा दिया और अपना मोबाइल निकल कर विशाल ओबेराय के पास एक मस्सगे सेंड किया जिसमे मैंने लिखा था की मुझे 5 करोड़ रूपए अभी चाहिए आप अगर सेंड कर सकते हो तो कर दो मई शाम तक आपको रेतुर्न कर दूंगा मेरे मश्ग करने के कुछ hi देर बाद मेरे मोबाइल पर बैंक का मश्ग आया की मेरे अकाउंट में 5 करोड़ रूपए क्रेडिट हुए है.

मई- आपको दूसरे एंटीक के बारे में जानना है तो ठीक है अभी मई एक नकली एंटीक के बारे में बता कर आपका मुद ख़राब कर दिया इस लिए अब मई आपको आपके एक ओरिजिनल एंटीक के बारे में बताता हु और वो है ये छड़ी इसको बने हुए 5000 हजार साल हो गए है और ये छड़ी पोलमी के लकड़ी से बानी है





इसके हैंडल पर जो पीकॉक है उसे देख कर लग रहा है की ये भील जनजाति के समय का है और इस छड़ी की भील जनजाति के नेता उसे करते थे इस छड़ी पर जो पीकॉक बना है उसके माथे पर रत्न है वो रेयर डायमंड है और इस छड़ी की कीमत मार्किट में लगभग 5 करोड़ होगा.

मेरी बात सुन कर वह सब चौक गए यहाँ तक की रतन मिश्रा भी चौक गए क्युकी मैंने जी छड़ी की कीमत बताई थी उतना तो रतन मिश्रा कभी सपनो में भी नहीं सोच सकते थे.

मई- अब आते है इस पेन्डेन्ट पर तो ये भी एक रेयर एंटीक है





ये पेन्डेन्ट बुरहान घराने की एंटीक है आप लोगो को सायद ये पता होगा hi की बुरहान घराने के लोग अपने शरीर पर कपडे काम पहनते थे लेकिन अपने पुरे शरीर को टैटू से धक् कर रखते थे और साथ में अपने गले में एक पेन्डेन्ट

पहनते थे और ये पेन्डेन्ट वही है और वो लोग मानते थे की इस पेन्डेन्ट को पहनने से उनको ऊपर कोई भी नेगेटिव एनर्जी हावी नहीं हो सकता आप लोग देख सकते है की इस पेन्डेन्ट के बिच में एक ट्रांसपेरेंट मणि लगा हुआ है और इस मणि पर सूर्य बना हुआ है और इसके आस पास चन्द्रमा के पंद्रह कला के चित्र है और सबसे बड़ी बात की इस पेन्डेन्ट को वो लोग लाल धागे में पहनते थे.

मेरी बात को सुन कर सरे लोग मेरे लिए ताली बजने लगे और बोलने लगे की मुंबई सहर में एक और एंटीक एक्सपर्ट आ गया है आज रतन मिश्रा भी बहुत खुस थे क्युकी उनसे काम उम्र के लड़के में उनसे ज्यादा नॉलेज था वो सोच रहे थे की एंटीक के दुनिया मेरा आना एंटीक के दुनिया के लिए बहुत अच्छा है वो मेरे पास आये और मुझसे बोले.

रतन- तुम्हे एंटीक के बारे में बहुत जानकारी है ये जानकर मुझे बहुत खुसी हुयी की अब मेरे जाने के बाद भी कोई ऐसा होगा जो लोगो को एंटीक पहचानने में मदत करेगा वैसे तुम्हारा नाम क्या है

मई- जी मेरा नाम प्रतिक है आप मुझे अपना अकाउंट no दीजिये मई पैसे आपके अकाउंट में ट्रांसफर कर देता हु.

रतन- मैंने बोलै था न की वो सब मई तुम्हे ऐसे hi देना चाहता हु.

मई- लेकिन मैंने भी बोलै था न की मई आपसे फ्री में कुछ नहीं लूंगा अब आप अपना अकाउंट no. दीजिये मई पैसे ट्रांसफर कर दे रहा हु और ये सब उस लड़की को पता नहीं चलना चाहिए बस आप उससे यही बोलियेगा की आप अपनी शर्त हर गए है.

रतन- ठीक है वैसे तुम मुझे अपना no. दे दो हम तूच में रहेंगे.

मई फिर अपना नंबर रतन मिश्रा की दिया और उनका नंबर अपने मोबाइल में सेव किया फिर रतन ने मुझे अपना अकाउंट no दिया और मई उनके अकाउंट में 5 करोड़ रूपए दाल दिए इसके बाद रतन जी मुझसे जाने की अनुमति मांगी तो मई अपने हाथ झोड़ कर उन्हें जाने की अनुमति देने hi जा रहा था की तभी वह पर शनाया आ गयी और मुझे ऐसे हाथ जोड़े हुए देख कर घुसे में बोली.

शनाया- क्या हुआ पाचन लिए खजाने को मई तुम्हे पहले hi बोल रही थी की चलो यहाँ से खजाने को पहचानना तुम्हारे बस की बात नहीं है लेकिन तुमने मेरी बात नहीं मणि और देखो तुम्हे हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगना पद रहा है.

मई- शायद तुम्हे गलत फहमी हुयी है मैंने उन खजानो को पहचान लिया.

शनाया- क्या... तुम सच बोल रहे हो लेकिन अगर तुमने खजाने को पहचान लिया तो तुम इनसे माफ़ी क्यों मांग रहे हो.

मई- मई इनसे माफ़ी नहीं मांग रहा बल्कि इनका आभार व्यक्त कर रहा हु क्युकी ये शर्त के अनुसार अपने सरे खजाने को मुझे दे दिया.

शनाया- क्या सच में वो सरे खजाने तुम्हारे हो गए.

मई- है वो सरे खजाने मेरे हो गए.

शनाया- तुमने कोई तो काम अच्छा किया है चलो अब हम चलते है क्युकी मुझे बहुत लेट हो गया है.

मई- नहीं तुम घर चले जाओ मुझे थोड़ा काम है इसलिए मई वो काम ख़तम कर के आता हु.

शनाया- ठीक है.

इतना बोल कर शनाया वह से चली गयी शनाया के जाने के बाद रतन भी जाने के लिए बोलने लगे तो मई उनसे बोलै.

मई- आप अपने बाउल का कमल देखना चाहेंगे.

रतन- कैसा कमल ये बाउल तो नकली है न.

मई- है भी और नहीं भी.

रतन- मतलब मई समझा नहीं ये असली भी है और नकली भी ये कैसे हो सकता है.

मई- ये नकली इस लिए है की ये नागा समुदाय का नहीं है बल्कि मई कहु की ये एंटीक hi नहीं है फिर भी इसकी कीमत करोड़ में है.

रतन- अगर ये एंटीक नहीं है तो इसकी कीमत करोड़ में कैसे हुआ.

मई- ऐसे.

इतना बोल कर मई उस बाउल तो तोड़ दिया जब वो बाउल उठा तो सबकी आँखे फटी की फटी रह गयी क्युकी उस बाउल के टूटने के बाद उसमे से जो निकला उस पर किसी को बिस्वास नहीं हो रहा था सब बस अपनी आंखे फार कर उसे देखे जा रहे थे.





रतन- आशम्भव ये कैसे हो सकता है इसमें इतने सरे डायमंड कहा से आ गए.

जी है उस बाउल को टूटते hi उसके अंदर से छोटे छोटे कई सरे डायमंड निकला जिसकी कीमत मार्किट में लगभग 15 करोड़ के बराबर होगा और इन सब को बस इसी डायमंड को देख कर सौक लगा था.

मई- रतन जी ये बाउल नकली hi थी किसी ने इस बाउल को इन डायमंड को छुपाने के लिए बनाया था ऊपर से इस बाउल को देखने के बाद कोई नहीं कह सकता था की इसमें डायमंड होगा तो रतन जी अब आप ये बताइये की इन सरे डायमंड को आप लेना पसंद करेंगे.

रतन- है है क्यों नहीं मुझे कितना देना होगा इसका.

मई- मार्किट के हिसाब से इसका कीमत लगभग 15 करोड़ होगा तो आप मुझे 10 करोड़ दे कर इसे ले सकते है.

रतन ने तुरंत मेरा अकाउंट नंबर लिया और उसमे 10 करोड़ ट्रांसफर कर दिया फिर रतन उन सरे डायमंड को लिया और वह से निकल गए उनके जाने के बाद मेरे पास में जो सरे खजाने थे मई उनमे से छड़ी और पेन्डेन्ट को निकल कर बाकि सब को वही सेल्ल कर दिया जिसके कारन मेरे पास 5 करोड़ और आ गए फिर मई सबको बी बोल कर वह से निकल hi रहा था की तभी मेरी नजर वह पर राखी एक कुण्डी (आयुर्वेदिक दवा बनाने वाला) पर पड़ी





वो कुण्डी मुझे अपने तरफ खींच रही थी जब मई चलते हुए उस कुण्डी के पास पंहुचा तो मुझे उस कुण्डी से पॉजिटिव एनर्जी निकलते हुए महसूस हुयी ये देख कर मई मन बना लिया की मई उस कुण्डी को जरूर खरीदूंगा इस लिए मई शॉपकीपर से उसका डैम पूछा तो शॉपकीपर ने मुझे उस कुण्डी का डैम 50 हजार बताया.

50 हजार सुन कर मई खुस हो गया और तुरंत hi उसको पैसा ट्रांसफर किया और फिर कुण्डी ले कर वह से निकल गया.



लेकिन मई जा रहा था तो मुझे ऐसा आभास हुआ की कोई मुझे घर कर देख रहा है फिर मई पीछे पलट कर देखा तो मुझे किसी पर कोई शक नहीं हुआ इस लिए मई वह से जाने लगा जब मई वह से बहार निकला तो एक लड़का किसी को कुछ मस्सगे किया वो भी वह से निकल गया.
 
अपडेट 13

संजीवनी गोली

मई एंटीक शॉप से बहार निकल कर सबसे पहले विशाल को उसका 5 करोड़ वापस किया और उसको कॉल कर के बोल दिया की मैंने उसका 5 करोड़ वापस कर दिया है फिर मक वह एक सुनसान जगह देख कर वह जाकर इधर उधर की कोई वह है तो नहीं न जब मुझे तसल्ली हो गया की वह पर कोई नहीं है तो मई वह से टेलिपोर्ट होकर सीधा हवेली में आ गया.

मुझे वह से टेलिपोर्ट होने के कुछ देर बाद वह पर कुछ गुंडे आये और मुझे ढूंढने लगे लेकिन जब मई उन्हें नहीं मिला तो उनमे से एक गुंडा बोलै ये गुंडा वही था जिसने मुझ पर नजर राखी हुयी थी और किसी को मस्सगे किया था.

1सत गुंडा- साला वो लड़का कहा गया अभी तो वो यही पर था कही उसे शक तो नहीं हो गया की हम उसका पीछा कर रहे थे.

2ंद गुंडा- अगर उसे शक भी हो गया होगा तो वो हमारा क्या बिगड़ लेगा चलो उसे ढूंढते है वो यही कही पर छुपा होगा.

1सत गुंडा- आज हम उसे नहीं जाने देंगे आज हम किसी भी हल में उसको मर कर hi रहेंगे.

इसके बाद सरे गुंडा लोग मुझे ढूंढने लगे लेकिन मई वह रहता तब न उनको मिलता मई तो कब का वह से टेलिपोर्ट हो गया था वैसे अच्छा hi हुआ जो मई उनको नहीं मिला नहीं तो आप लोग जानते hi हो की उसके बाद क्या होता 🤣🤣🤣🤣

जब मई उन गुंडों को नहीं मिला तो वो बौखला गए और आपस में hi बहस करने लगे.

2ंद गुंडा- सब तेरी गलती है तुमने उसका पीछा सही से नहीं किया इसलिए उसे हम पर शक हो गया और वो यहाँ से भाग गया या कोई ऐसी जगह पर छुप गया जहा हम उसे धुंध नहीं पाएंगे.

1सत गुंडा- तुम ज्यादा बात मत बनाओ मई उसका पीछा अच्छे से hi किया था लेकिन किसको पता था की उसको शक हो जायेगा और वैसे hi अगर तुम लोग समय पर आ जाते तो वो भागता hi नहीं.

2ंद गुंडा- है इसमें भी मेरी hi गलती है जब बॉस को पता चलेगा न की वो हम सब को चकमा दे कर भाग गया तो बॉस हम दोनों की गांड मर लेंगे.

1सत गुंडा- अरे यार तो इसमें हमारी क्या गलती है मई तो उसका पीछा सोल्लगे से hi कर रहा था लेकिन ऐसा कोई मौका hi नहीं मिला की हम उसे मर सके मई तो सोच रहा था की ट्रक से उसे उड़वा दू लेकिन मई ऐसा नहीं कर पाया क्युकी उस कार में वो लड़की भी थी जिसे हमारे क्लाइंट ने स्पेशलय बोल रखा है की उसे कुछ नहीं होना चाहिए और ऊपर से बॉस भी बोल रखे है की अगर उस लड़की को कुछ हुआ तो वो हम सब को जिन्दा नहीं छोड़ेंगे.

ये लोग बात कर hi रहे थे की तभी 1सत गुंडा के मोबाइल पर एक कॉल आता हाउ जिसे देख कर वो दर से कपङे लगता और डरते डरते कॉल उठता है.

1सत गुंडा- हहह.. हल्लो बब्बूस.

बॉस- तुम जिस काम के लिए गए थे वो हुआ मर दिया उसे.

1सत गुंडा- ननननही बब्बूसस उसको हम लोगो पर शक हो गया था इसिलए वो पहले न जाने कहा भाग गया.

बॉस- तुम लोगो से एक काम भी ढंग से नहीं होता पता नहीं मई क्यों तुम लोगो को पल रहा हु.

1सत गुंडा- सॉरी बॉस गलती हो गयी अब दुबारा से ये गलती नहीं होगी इस बार मई उसे धुंध कर पका मर दूंगा.

बॉस- अब उसकी जरुरत नहीं है तुम लोग वापस आ जाओ.

1सत गुंडा- लेकिन बॉस हम उस लड़के को कैसे छोड़ सकते है हमारे क्लाइंट ने बोलै है की किसी भी कीमत पर वो लड़का जिन्दा नहीं बचना चाहिए.

बॉस- तुम उसकी चिंता मत करो वो लड़का जरूर मरेगा और आज hi मरेगा बस प्लान चेंज हो गया है तुम आड़े पर आओ इसके बाद हम उस प्लान के बारे में बात करेंगे.

इतना बोल कर उस गुंडे के बॉस ने फ़ोन को कट कर दिया.

1सत गुंडा- हस्सस बचा गया आज बॉस का मुद आज ठीक था नहीं तो जाने मेरा क्या होता चलो रे बॉस ने आड़े पर बुलाया है सबको.

फिर वह से वो लोग आड़े के लिए निकल जाते है इधर शनाया उस मूर्ति को न चाहते हुए एक दुकान में जाकर गिफ्ट के देबे में पैक करवा ली फिर अपने मन में सोची.

शनाया- (अपने मन में) मैंने प्रतिक के मन कर ये मूर्ति दादा जी के लिए पैक करवा कर ठीक तो किया न कही ऐसा न हो की ये मूर्ति दादा जी अच्छा न लगे और वो हमसे गुसा हो जाये अगर ऐसा हुआ न तो मई प्रतिक को छोडूंगी नहीं.

ये सब सोचते हुए शनाया अपने घर आ गयी उसे घर आया देख कर उसके डैड ने उससे पूछा.

अजय- क्या तुमने अपने दादा जी के लिए गिफ्ट ले लिया.

शनाया- जी पिता जी मैंने गिफ्ट भी ले लिया और उसे पैक hi करवा लिया है.

अजय- गुड अब ये बताओ की तुमने गिफ्ट में क्या लिया है.

शनाया- जी पिता जी वो मैंने गिफ्ट में एक मूर्ति लिया है जो चोल वंस से सम्बंधित है सोमस्कन्द मूर्ति है.

अजय- ये तुमने अच्छा किया देखना वो मूर्ति तुम्हारे दादा जी को जरूर पसंद आएंगे लेकिन तुमने मूर्ति hi क्यों लिया तुम्हे कैसे पता की तुम्हारे दादा जी को एंटीक मूर्ति बहुत पसंद है.

शनाया- क्या दादा जी एंटीक मूर्ति पसंद है लेकिन ये तो मुझे पता नहीं था वो तो साथ में प्रतिक गया तो वो hi बोलै की ये मूर्ति तुम दादा जी के लिए ले लो उन्हें ये मूर्ति बहुत पसंद आएगा.

शनाया के बात सुन कर अजय कुछ नहीं बोले लेकिन पुस्पा भड़क गयी और घुसे से शनाया को बोली.

पुस्पा- सबसे पहले तुम मुझे ये बताओ की तुम उस कामचोर फटीचर और मुफ्त के रोटी खाने वाले के साथ क्यों गयी थी और गयी तो गयी लेकिन उसके पसंद की कोई चीज तुम कैसे ले सकती हो तुम जानती हो न की हमें उस घर को उसके लिए hi छोड़ना पड़ा था और दूसरी बात वो एक गरीब और फटीचर आदमी है उसे एंटीक के बारे में क्या पता है उसने तो आज तक ये देखा भी नहीं होगा के एंटीक होती कैसी है लेकिन फिर भी तुम उसके बात मन कर वो मूर्ति ले ली इस बार जरूर पार्टी में हमारी बहुत बदनामी होगी.

शनाया- ऐसी कोई बात नहीं है माँ उसको एंटीक के बारे में बहुत जानकारी है और हम इस घर से उसके चलते नहीं निकले है इसमें उसकी कोई गलती नहीं है बल्कि हमें उस घर से निकलने का सबसे बड़ा हाथ बड़े पापा का है वो लोग कब ये प्लान बना रहे थे की हमें इस घर से बहार निकल दे बस इस बार उन लोगो को प्रतिक के रूप में एक हथियार मिल गया इन सब में प्रतिक की कोई गलती नहीं है आप उसे दोस मत दीजिये.

शनाया के बात सुन कर अजय और पुस्पा दोनों चौक गए क्युकी ये दोनों ये कभी नहीं सोचा था की शनाया प्रतिक के स्टैंड ले कर उनसे बहस करेगी.

पुस्पा- तुम बदल गयी हो शनाया सायद तुम पर प्रतिक ने कोई जादू किया है जो तुम उसका स्टैंड ले रही हो.

इतना बोल कर वो वह से चली गयी इधर उसको जाने के बाद अजय ने शनाया को बोलै.

अजय- जाओ तुम सब तैयार हो जाओ हम डैड के बर्थडे पार्टी में जाना है और मई नहीं चाहता की हम वाला लेट से पहुंचे वैसे ये प्रतिक कहा रह गया उसे तो अबतक आ जाना चाहिए थे.

शनाया- डैड प्रतिक को कुछ काम था इस लिए वो बोलै की हम दादा जी के बर्थडे में चले जाये वो हमें वही मिलेगा.

अजय- ठीक तो तुम जाकर तैयार हो जाओ.

इतना बोल कर वो भी अपने कमरे में चला गए अजय के जाने के बाद शनाया अपने मन में बोली.

शनाया- (अपने मन में) प्रतिक मैंने तो यहाँ सब को समझा दिया है लेकिन अगर ये तुम्हारा गिफ्ट दादा जी को पसंद नहीं आया तो वह पर तुम्हारी बेइज्जती होने से मई भी नहीं बचा पाऊँगी और वह पर तुम्हारे साथ साथ हमारा भी बेइज्जती हो जायेगा इस लिए मई भगवन से प्रार्थना करुँगी की ये गिफ्ट दादा जी को पसंद आये.

इसके बाद वो भी अपने रूम में तैयार होने चली गयी इधर मई हवेली पहुंचने के बाद उस कुण्डी को बहार निकल कर उसे ध्यान से देखने लगा मुझे उस कुण्डी से पॉजिटिव एनर्जी निकलते हुए महसूस हो रही थी.

मई- हम्म ये कोई खास कुण्डी है तभी इसमें से पॉजिटिव एनर्जी निकल रही है मुझे इसे अपने दिव्या दृस्टि से देखना होगा की इसमें खास क्या है.

इतना बोल कर मई अपने दिव्या दृस्टि से उस कुण्डी को देखने लगा और मई उस कुण्डी के बारे में जो जाना वो जान कर चौक गया दरसल ये कुण्डी रामायण कल के समाया का है और ये एक दिव्या कुण्डी है है इसे भगवन धन्वन्तरि ने सुषेण बैध को दिए थे ये सुषेण बैध लंका का बैध था जिसने रामायण में हनुमान जी को संजीवनी बूटी के बारे में बताया था ये बैध जाती के नै था लेकिन पेशे से एक बैध और इसने भगवन धन्वन्तरि को खुस कर के इस दिव्या कुण्डी को वरदान के रूप में प्राप्त किया था.

इस कुण्डी में दिव्या शक्तियां थी और इसकी खास बात ये थी की इसमें दवा बनाने के लिए आग की जरुरत नहीं पड़ती थी अगर इसमें जड़ी बूटियों को दाल कर इसे हिलाया जाये जो ये खुद गरम हो कर जड़ी बूटियों को गोली का आकर दे देता था और सबसे बड़ी बात जड़ी बूटियों से संख्या के अनुसार इसका आकर छोटा और बड़ा भी हो सकता था और ये दवा बनाने में ज्यादा समय भी नहीं लेता था बहुत hi काम समय में ये दवा को तैयार कर देता था.

लेकिन इस कुण्डी को जागृत करने के लिए एक मंत्र बोलना पड़ता था जो इस कुण्डी के ऊपर लिखा हुआ था और उस मात्रा को सिर्फ योगिक शक्ति के द्वारा hi पढ़ा जा सकता था.

मैंने अपने योगिक शक्ति को जागृत किया और उस मंत्र को पढ़ने लगा थोड़ी देर बाद मेरे शरीर से एक रौशनी निकल कर उस कुण्डी में चली गयी और वो कुण्डी जागृत हो गया उसके जागृत होने से पुरे रूम में रोशनी फ़ैल गया फिर थोड़ी देर वो सारा रोशनी उस कुण्डी में शमा गया अब वो कुण्डी पूरी तरह से जागृत हो गया था जिसे देख कर मई बहुत खुस हुआ और अपने मन में बोलै.

मई- वह क्या किस्मत है मेरी मुझे धन्वन्तरि देव के द्वारा वरदान में दिया गया ये कुण्डी मुझे मिल गया अब मई इसमें जितना चहु उतना दवा बना सकता हु मई एक काम करता हु मई एक दवा बना कर देखता हु लेकिन मई दवा किस बीमारी का बनाऊ (कुछ देर तक सोचने के बाद) मई एक ऐसा दवा बनता हु की वो साडी बीमारियों में काम आये उसको खाने से किसी भी मनुष्य के अंदर कोई बीमारी न रहे साथ में वो ताकतवर भी हो जाये और उसकी उम्र भी थोड़ा काम हो जाये और अगर ये दवा कोई बूढ़ा आदमी खाये तो उसके चेहरे की झुरिया भी सख्त हो जाये और वो अपने आयु से थोड़ा काम देखे यानि की वो देखने में जवान लगे.

मई- लेकिन मुझे इस दवा को बनाने के लिए जो जड़ी बूटियां लगेगी वो मेरे पास है या नहीं मई एक मिनट यद् करता हु की मुझे कोण कोण सी जड़ी बूटी लगेगी.

नाग केशर जड़ी बूटी

नाग छतरी जड़ी बूटी

यार्सागुम्बा जड़ी बूटी

रिद्धि बृद्धि जड़ी बूटी

ऋषभक जड़ी बूटी

जीवक जड़ी बूटी

मेदा जड़ी बूटी

महामेदा जड़ी बूटी

काकोली जड़ी बूटी

छिर्केकोली जड़ी बूटी

अकरकरा जड़ी बूटी

मुझे इतने सरे जड़ी बूटियों की जरुरत होगी और साथ में कुछ बून्द प्राकृतिक जीवन सर की भी जरुरत होगी क्युकी वो दवा मई तैयार करने का सोच रहा हु वो दवा सरे बीमारियों में काम आएगा और साथ में इस दवा से कुछ उम्र भी काम होगा तो इसमें प्राकृतिक जीवन सर भी जरुरी था और साथ में ऐसा दवा बनाने के लिए मुझे इतने सरे जड़ी बूटियों की भी जरुरत होगी मेरे पास तो सारा जड़ी बूटी मौजूद है और मई इनके बीजो को लगा कर खेती भी कर रहा हु तो आगे भी मुझे इन जड़ी बूटियों को खोजने के लिए म्हणत नहीं करनी पड़ेगी.

एक बात जो मई बताना भूल गया था वो मई बता दे रहा हु मैंने हिमालय से बहुत तरह के जड़ी बूटी बहुत ज्यादा मात्रा में लेकर आया था और साथ में उनका बीज भी लाया था इस लिए मई उन बीजो से जड़ी बूटी का खेती कर रहा था.

इसके बाद मई अपने बैग से उन सरे जड़ी बूटियों की निकला जो दवा बनाने में काम आने वाले थे और उसको उस किंदी में दाल दिया और फिर अपने मन में बोलै हे प्राकृतिक जीवन सर मुझे आपकी जरुरत है मुझे बस इतना hi बोलना था की प्राकृतिक जीवन सर का कलश मेरे हाथो में प्रकट हो गया और फिर मई उस कलश से प्राकृतिक जीवन सर के 5 बून्द कुण्डी में दाल दिया इसके बाद वो कलश गायब हो गया.

इसके बाद मई उस कुण्डी को अपने शक्तियों के दवारा हिलने लगा जिसके कारन वो कुण्डी गरम होने लगी कुण्डी को हिलने से साडी जड़ी बूटियां भी हिल रही थी जैसे जैसे कुण्डी गरम होते गया वैसे वैसे वो जड़ी बुटिया लिक्विड में बदलते है और थोड़ी देर बाद वो सारा जड़ी बूटी लिक्विड में बदल गया उन जड़ी बूटियों को लिक्विड में बदलने के बाद भी मई कुण्डी को हिलाते रहा जिसका परिणाम यह हुआ की वो लिक्विड गोली के रूप लेने लगे थोड़ी देर बाद कुण्डी में 50 गोली बन कर तैयार हो गए थे.

मैंने जड़ी बूटी जितना डाला था उससे तो मुझे लगा था की ज्यादा से ज्यादा 35 या 40 गोली hi बनेगा लेकिन ये दिव्या कुण्डी था जो उन गोलियों के मात्रा को बड़ा कर 50 गोली तैयार कर दिया था वो भी परफेक्ट गोली इन गोलियों की कलर पर्पल 🟣 था और ये देखने में भी सुन्दर लग रहे थे और साथ में इनके अंदर से मनमोहक खुसबू भी आ रहा था.

मई इन गोलियों के बनाने के बाद बहुत खुस था क्युकी इन गोलियों के बनाने के बाद मुझे एक बहुत अच्छा बिज़नेस आईडिया भी आ गया था मैंने सोचा की क्यों न इस गोलियों की बिज़नेस सुरु किया जाये मई अगर चहु तो इस कुण्डी के मदत एक एक घंटे में हजारो गोलिया तैयार कर सकता हु खैर मई इन सब के बारे में बाद में सोचूंगा पहले मई इस दवा के लिए कोई अच्छा सा नाम सोचता हु फिर इस तरय कर के देखूंगा मि ये दवा काम मरता है या नहीं वैसे ये दवा तो काम करना hi चाहिए क्युकी इसमें इतने सरे जड़ी बूटी के साथ साथ प्राकृतिक जीवन सर भी मिला हुआ है लेकिन एक बार तरय कर के देखना बनता है इसके बाद hi इसका कोई अच्छा सा नाम सोचूंगा.

इसके बाद मई उस सरे गोलियों को एक दबे में बंद कर के वही पर अच्छे से रख दिया फिर उसमे से एक गोली को निकला और वह से गायब हुआ और सीधा गेस्ट रूम में प्रकट हुआ जब मई वह पंहुचा तो देखा की सब वह से पार्टी में जाने के लिए निकल रहे थे मुझे आने का उनको पता नहीं था और न hi मई उनको बताना चाहता था क्युकी वो लोग गेट पर hi खड़े थे और मई उनको बताता की मई आ गया हु तो मुझसे 10 सवाल करते इस लिए मई चुप रहा जब तीनो वह से चले गए तो मई रहत की साँस ली और फिर एक गोली खा कर देखा गोली खाने के बाद कुछ देर तक मुझे कुछ महसूस नहीं हुआ फ्री मेरे शरीर के अंदर धीरे धीरे गर्मी बढ़ने लगी कुछ देर बाद मेरा शरीर आगे की भाठी की तरह तपने लगा और मेरे शरीर से काळा रंग का पसीना बहार आने लगा और वो मेरे शरीर पर पपड़ी की तरह बनाने लगा वो पसीना जो की मेरे शरीर पर पपड़ी का रूप ले लिया था वो इतना बदबू दे रहा था की मुझे लगा की अब मुझे वोमिटिंग हो जायेगा इस लिए मई तुरंत hi बाथरूम में गया और अपने सरे कपडे निकल कर शावर 🚿 के निचे खड़ा हो कर शावर 🚿 को चालू कर दिया जैसे जैसे पानी मेरे शरीर पर गिरती गयी वो सारा पसीना जो की पपड़ी के रूप में मेरे शरीर पर था वो साफ होने लगा जब मेरे शरीर से पूरी गन्दगी साफ हो गयी तो मई अच्छे से स्नान किया और फिर बहार आ गया.

बहार आ कर मई खुद को आईने में देखा तो मई चौक गया क्युकी मेरा स्किन और भी ज्यादा सॉफ्ट हो गया था और चेहरा पूरा गोरा हो गया था मई दिखने में एक डैम सुन्दर लग रहा था मेरे चेहरे पर एक अलग hi चमक आ गयी थी मई सबसे बड़ी बात की अब मेरा शरीर पहले से ज्यादा फिट मजबूत और हल्का लग रहा था ये देख कर मई बहुत खुस हुआ.

मई- मेरा बनाया हुआ दवा काम कर रहा है जब ये मुझपे इतना काम कर रहा है तो आम लोगो पर कितना काम करेगा क्युकी मई तो पहले से hi मजबूत और फिर था मेरे शरीर में अंदर कोई भी बीमारी नहीं थी फिर भी ये दवा मुझ पर असर किया और मुझे और भी मजबूत और फिट कर दिया ये गोली सच मच बहुत अद्भुत है ये किसी संजीवनी से काम नहीं है इस लिए मई इसका नाम संजीवनी गोली रख रहा हु.

इसके बाद मई तैयार हुआ और फिर एंटीक छड़ी और उस पेन्डेन्ट को अपने पास रखते हुए टेलिपोर्ट हो कर सीधा मल्होत्रा हाउस के पास आ गया जब मई वह पंहुचा तो देखा की शनाया और उसके मम्मी पापा भी अभी अभी वह पहुंचे थे मई चलते हुए उनके पास गया मुझे वह देख कर पुस्पा ने अपना मुँह टेढ़ा कर लिया अजय ने मुझे देख कर एक हल्का सा मुस्कान दिया और शनाया मुझे देखा तो देखती hi रह गयी फिर शनाया मुझसे बोली.

शनाया- तुम आ गए मई तो सोची थी हमें अंदर जाने के बाद तुम आओगे चलो अच्छा hi हुआ जो तुम हमें अंदर जाने से पहले आ गए अब हम साथ में अंदर चल सकते है.

मई- वो क्या है की मेरा काम जल्दी ख़तम हो गया था इस लिए मई जल्दी आ गया.

शनाया- आज तुमने अपने चेहरे पर कुछ लगाया है क्या.

मई- नहीं तो तुम ऐसा क्यों पूछ रही हो.

शनाया- आज तुम बाकि दिन से ज्यादा स्मार्ट लग रहे हो इस लिए पूछ लिया.

मई- नहीं ऐसा कोई बात नहीं मई जैसे पहले दीखता था वैसे hi अभी भी दिखा रहा हु.

खैर हमलोग बात करते हुए मल्होत्रा हाउस के अंदर आ गए अंदर अभी ज्यादा गेस्ट नहीं आये थे जैसे hi हम अंदर आये तो हमें एक आवाज सुनाई दी.

आवाज- लो आ गए मुफ्त के दावत उड़ने साथ में अपने निकम्मे और मुफ्तखोर घर जमाई को भी लेकर आ गए तुम लोगो की हिमत कैसे हुयी यहाँ आने की.

हम जब ने जिधर से आवाज आया था उधर देखा तो पाया की बोलने वाली और कोई नहीं बल्कि अमृता मल्होत्रा थी उसे इस तरह हम सब का अपमान करते देख कर शनाया से बर्दास्त नहीं हुआ और वो घुसे से बोली.

शनाया- तुम्हारी हिमत कैसे हुयी हमें मुफ्त के दावत खाने वाला बोलने की ये घर सिर्फ तुम्हारा नहीं है इस घर पर जितना तुम्हारा हक़ है उतना hi हमारा भी है और तुम होती कोण हो हमें रोकने वाली तुम क्या खुद इस घर के मालकिन समझती हो.

मई- अरे यार शनाया तुम क्या बाटे ले कर बैठ गयी तुम जानती हो न की जो खुद दुसरो के टुकड़ो पर पालते है वो दुसरो को भी वैसा hi समझते है अगर तुम कीचड़ में कंकर मरोगी तो वो तुम hi पड़ेगा इस लिए तुम चुप चाप चलो यहाँ से क्युकी कुतो का काम hi होता है दुसरो को देख कर भोकना.

और ये हुआ दमका सरे लोग आश्चर्य से बस मुझे hi देखे जा रहे थे यहाँ तक की शनाया अजय और पुस्पा भी पुस्पा तो अपने आँखों को फाडे बस मुझे hi देखे जा रही और सोच रही थी की मई इसका इतना बेइज्जती करती हु फिर भी ये चुप रहता है लेकिन यहाँ कैसे इसका मुँह खुल गया बोलने के लिए.

इधर सरे लोग बस आपस में बाटे कर रहे थे की ये लड़का कोण है जो मल्होत्रा परिवार के लड़की को बेइज्जती किया उसको इतना कुछ बोल दिया जो भी लेकिन इस लड़के में डैम तो है अभी ले लोग बात कर hi रहे थे की तभी सरे लोगो को अमृता की घुसे से भरी हुयी आवाज आयी.

अमृता- दो कौड़ी के इंसान तुम्हारी हिमत कैसे हुयी मुझे कुत्ता कीचड़ और दुसरो के टुकड़ो पर पलने वाली बोलने की आज मई तुम्हे छोडूंगी नहीं.

इतना बोल कर वो मेरे पास आयी और मुझे तपाद मरने की कोशिश की लेकिन उसकी तपाद को शनाया ने बिच में hi रोक लिया और बोली.

शनाया- ऐसी गलती दोबारा नहीं करना नहीं तो तुम्हारी ये हाथ है न वो सही सलामत नहु रहेगी और तुम जब दुसरो की बेइज्जती करती हो तो उसमे तुम्हे मज़ा आता है और अब जब कोई तुम्हे कुछ बोल दिया तो तुम्हे गुसा आ रहा है.

अमृता- हैट छोडो मेरा मई तुम लोगो को देख लुंगी.

शनाया उसकी हाथ को छोड़ देती है तो अमृता अपना पेअर पटकती हुयी वह से चली जाती है अमृता के जाने के बाद वह पर विक्की आता है और बोलता है.

विक्की- आप सब जानना नहीं चाहेंगे की ये है कोण जिसने मेरी बहन की बेइज्जती किया और उसे दुसरो के टुकड़ो पर पलने वाली बोलै.

विक्की के बात सुन कर अजय पुस्पा और शनाया तीनो घबरा गए क्युकी वो नहीं चाहते थे की शनाया की सदी का सच अभी सबके सामने आये इस लिए अजय बोले.

अजय- विक्की तुम क्यों बात के बतंगड़ बना रहे हो देखो गलती तुम्हारी बहन की थी उसने सबसे पहले हम सब की बेइज्जती की थी इस लिए शनाया और प्रतिक ने उसका जबाब दिया था इस तुम अब बात को आगे न बढ़ाओ.

विक्की- हम बात कहा बढ़ा रहे है चाचा जी हम तो इन सब को प्रतिक के हैसियत के बारे में बता रहे है. है तो आप सब जानते है जिसने मेरी बहन को न नाज़े क्या क्या बोलै वो खुद दुसरो के टुकड़ो पर पलटा है और जो खुद दुसरो के टुकड़ो पर पलटा हो उसे किसी को कुछ बोलने का हक़ नहीं है आप जानते है ये प्रतिक कोण है ये मेरे चाचा जी का निकम्मा दामाद है जो अपने सास ससुर और बीवी के टुकड़ो पर पलटा है ये मेरे चाचा जी का घर जमाई है.

प्रतिक के बात सुन कर सब चौक गए और आपस में बाटे करने लगे क्या शनाया की सदी हो गयी अगर इनको अपनी बेटी का सदी hi करना था तो क्या शहर में सरे लड़के मर गए थे जो इस निकम्मे के साथ अपनी बेटी की सदी कर दी अरे है भाई सदी भी कर दी और किसी को बताया भी नहीं चुपके चुपके सदी हो गया मुझे तो लगता है की इनकी बेटी के कुछ उच्च नीच हो गया होगा तभी ये अपनी बेटी के सदी सबसे छुपा कर इस निकम्मे से कर दिए.

अजय और पुस्पा के मुँह लोगो के बात सुन कर शर्म से झुक गए उनको विक्की पर बहुत गुसा आ रहा था और सबसे ज्यादा गुसा मुझपे आ रहा था वो सोच रहे थे की अगर ये अमृता को कुछ बोलता hi नहीं तो विक्की सदी के बात किसी को नहीं बताता.

भला बताइये ये लोग यहाँ भी मुझे hi गलत ठहरा रहे थे सायद इन लोगो को पता hi नहीं था की आज अगर मई कुछ नहीं भी बोलता तो भी ये लोग हमारी सदी की सचाई सबको बता देते.

सरे लोग आपस में बाटे कर hi रहे थे की तभी एक दमदार आवाज सबको सुनाई दी ये आवाज थी दादा जी की.

दादा जी- बस बहुत हो गया अब कोई भी हमारी पोती के बारे में कुछ भी बोलै तो ठीक नहीं होगा शनाया और प्रतिक की सदी मैंने करवाई थी क्युकी मई किसी को वचन दिया था और ये बेचारी तो मेरी वचन के लिए सूली पर चढ़ गयी और तुम विक्की तुम यहाँ मेरा बर्थडे पार्टी ख़राब करने के लिए आये थे.

विक्की अपने दादा जी को इतने घुसे में देख कर दर गया और डरते हुए बोलै.

विक्की- सॉरी दादा जी मुझसे गलती हो गयी लेकिन ये सब इस प्रतिक ने hi सुरु किया था उसने hi सबसे पहले अमृता की बेइज्जती किया था.

दादा जी- मैंने बोलै न की चुप हो जाओ तुम्हे एक बार में बात समझ में नहीं आती है क्या.

विक्की- सॉरी दादा जी.

दादा जी- सॉरी मुझसे नहीं अजय पुस्पा शनाया और प्रतिक से मानगो.

विक्की- दादा जी मई इनसे माफ़ी नहीं मांगूंगा.

दादा जी- ठीक है तो फिर तुम इस पार्टी से चले जाओ.

विक्की दादा जी के बात सुन कर घुसे में वह से जाने लगता है तभी उससे दादा जी बोलते है.

दादा जी- और है मेरी एक और बात सुनते जाओ अगर आज तुमने माफ़ी नहीं मांगी तो मई तुम्हे अपने जायदाद से

बेदखल कर दूंगा फिर तुम सड़को पर भीख मांगते रहना.

दादा जी के बात सुन कर विक्की जहा था वही जैम गया फिर वो अपने घुसे को काबू करते हुए हम लोगो के सामने आया और फिर सबसे माफ़ी माँगा लेकिन मुझसे माफ़ी मांगने के बाद मुझे घुसे से घर कर देखा और मन में बोलै.

विक्की- आज मुझे तुम लोगो के चलते सबके सामने बेइज्जती होना पड़ा और तुम सब से माफ़ी भी मांगना पड़ा मई तुम लोगो को खून के आंसू न रुला दिए तो फिर मेरा नाम विक्की मल्होत्रा नहीं.

इधर पार्टी में कोई और भी था जिसने जब से सुना की शनाया की सदी हो गयी वो भी प्रतिक जैसे मामूली लड़के से तो वो घुसे से आग बबूला हो गया.

ये लड़का शनाया के बचपन के दोस्त आकाश शेरगिल है ये बचपन से hi शनाया को बहुत पसंद करता था ये शनाया से सदी करना चाहता था ये 2 साल पहले अपनी पढाई के लिए अब्रॉड चला गया था अब ये अपनी पढाई पूरी कर के इंडिया वापस आया है और ये इस पार्टी में खास कर के शनाया से hi मिलने आया था लेकिन जैसे hi उसको पता चला की शनाया की सदी किसी और से हो गयी तो वो टूट गया और वो घुसे से अपने मन में बोलै.

आकाश- (अपने मन में) शनाया तुमने ये अच्छा नहीं किया तुम कैसे किसी और से सदी कर सकती हो मई तुमसे बहुत प्यार करता हु और मई तुम्हे किसी hi हालत में अपना बना कर रहूँगा चाहे उसके लिए मुझे किसी जान hi क्यों न लेना पड़े और तुम प्रतिक तुमने मेरी शनाया को मुझसे चीन कर अच्छा नहीं किया मई तुम्हे भी कही का नहीं रहने दूंगा बस तुम्हारे पास कुछ दिन है बचे है जीने के लिए क्युकी मई तुम्हे कुछ दिन बाद ऐसा मौत देने वाला हु की तुम्हे भी पता नहीं चलेगा की तुम्हारी मौत कैसे हुयी ये आकाश का तुमसे वडा है.

इसके बाद वो अपने चेहरे पर आये घुसे को छुपाते हुयी एक मुस्कान लाया और हम लोगो के पास गया और बोलै.

आकाश- ही शनाया.

आकाश के आवाज सुन कर शनाया पीछे घुमा तो आकाश को देख कर चौक गया और वो उससे तुरंत गले लग गया.

शनाया- अरे आकाश तुम तो अब्रॉड गए थे न पढाई करने कब वापस आये तुम.

आकाश- मई तो आज hi अब्रॉड से आया हु और मुझे यहाँ आने के बाद पता चला की आज तुम्हारे दादा जी का बर्थडे है तो मई यहाँ तुमसे मिलने आ गे.

शनाया से मिलने के बाद आकाश जा कर पुस्पा और अजय के पेअर छू कर प्रणाम किया जैसे hi आकाश ने पुस्पा पेअर छू कर प्रणाम किया पुस्पा ने तो आकाश को गले hi लगा लिया.

ये इस लिए की आकाश जब इंडिया में था तो वो हमेशा शनाया के साथ उसके घर आता जाता रहता था और पुस्पा ये जानती थी की आकाश शनाया को पसंद करता है आकाश था भी शेरगिल परिवार का वारिस इस लिए आकाश पुस्पा को शनाया के लिए बेस्ट लगता था और वो सोच भी राखी थी की जब शनाया की पढाई कम्पलीट हो जायेगा तो वो उसकी सदी आकाश से करवा देगी लेकिन उसे ये नहीं पता था की शनाया के सदी प्रतिक से हो जाएगी.

पुस्पा- जीते रहो बीटा और बीटा तुम अकेले आये हो या तुम्हारे पेरेंट्स भी आये है.

आकाश- नहीं आंटी मई अकेले hi आया हु.

पुस्पा- अच्छा किया जो तुम आ गए वैसे कभी मेरे घर पर भी आओ.

आकाश- अब तो आपके घर आते जाते hi रहूँगा अनूठी वैसे ये है कोण है.

अजय- ये प्रतिक है शनाया के हस्बैंड.

आकाश मेरे पास आया और मुझसे हाथ मिलते हुए बोलै.

आकाश- हिज मई आकाश शनाया के बचन का दोस्त

मई- हैल्लो मेरा नाम प्रतिक है आपसे मिल कर खुसी हुयी

आकाश- ( अपने मन में) लेकिन ज्यादा दिन तक खुस नहीं रहोगे.

मई- (अपने मन में) ये जिस तरह से शनाया को घर रहा है मुझे उसमे कुछ गड़बड़ लग रहा है और इसके अंदर से मेरे लिए दुश्मनी विवे आ रहा है ऐसा लग रहा है की ये मुझे कोई नुकसान पहुंचना चाहता है मुझे इस पर नजर रखनी पड़ेगी खास कर के तब जब ये शनाया के आस पास हो.

पुस्पा- वैसे आकाश बीटा तुम कल क्या कर रहे हो.

आकाश- कुछ भी नहीं आंटी लेकिन ये आप क्यों पूछ रही हो.

पुस्पा- अगर कल तुम कुछ नहीं कर रहे हो तो कल शाम को आओ हमारे यहाँ हम साथ में डिनर करेंगे.

आकाश- खुस होते हुए है है आंटी मई जरूर आऊंगा वैसे भी शनाया से बात किये हुए मुझे सालो हो गए है हम वही पर बैठ कर बाटे कर लेंगे वैसे मेरे आने से कही आपके दामाद को बुरा न लगे.

पुस्पा- उसे क्यों बुरा लगेगा तुम टेंशन मत लो वो सिर्फ नाम के शनाया के पति है बाकि तुम ये समझो की वो मेरे घर में उसका एक सर्वेंट बराबर वलु है.

पुस्पा के बात सुन कर मुझे बहुत दुःख हुआ मई जनता था की वो मुझे पसंद नहीं करती लेकिन किसी दूसरे के सामने मुझे बेइज्जती कर रही थी हलाकि उनका बात का बुरा सिर्फ मुझे hi नहीं लगा था बल्कि बुरा तो शनाया और अजय को भी लगा था लेकिन अजय तो चुप रहे लेकिन शनाया चुप न रह सकीय और वो बोली.

शनाया- आप ये क्या बोल रही है माँ आप सोच समझ कर बोलिये प्रतिक जैसा भी वो मेरा पति है आप मेरे पति को ऐसे किसी गैर के सामने बेइज्जती नहीं कर सकती समझी.

आकाश ने शनाया के बात को सुना तो वो सोचा की चलो ये अच्छा मौका है पुस्पा के नजरो में ऊपर उठने का तो उसने झठ से शनाया को बोल उठा.

आकाश- शनाया क्या तुम अपना तमीज़ भूल गयी हो तुम अपनी माँ से ऐसे कैसे बात कर सकती हो.

आकाश के बात शनाया अच्छा नहीं लगा और वो घुसे में उससे बोली.

शनाया- आकाश तुम अपने काम से काम रखो तो तुम्हारे लिए अच्छा होगा तुम्हे हमारी फॅमिली मटर में बोलने का कोई हक़ नहीं है इस लिए तुम अपना मुँह बंद रखो और प्लीज तुम जाओ यहाँ से.

शनाया आकाश को इतने घुसे में इस लिए बोली क्योकि उसने आकाश के घूरते नजरो को देख लिया उसने देख लिया था की आकाश उसे कितनी बुरी तरह से घर रहा है और वो समझ गयी की ये आकाश अब पहले वाला उसका दोस्त आकाश नहीं रह गया है बल्कि अब वो एक घटिया इंसान बन गया है इधर शनाया के बात सुन कर आकाश को बहुत गुसा आया था उसका मन किया की वो शनाया को तापस लगा दे लेकिन वो अपने घुसे को किसी तरह काबू कर के मन hi मन बोलै.

आकाश- (मन में) तुम्हे अभी के कहे गए बातो का बहुत पछतावा होगा शनाया मई इस बेइज्जती का 10 गुना तुमसे वसूल करूँगा.

ाक्षा- सॉरी मुझे ऐसे नहीं बोलना चाहिए था.

इतना बोल कर वो वह से जाने लगा ये देख कर पुस्पा शनाया पर भड़क गयी और बोली.

पुस्पा- शनाया तुम इतना बद्तमीज़ कब से हो गयी तुम मुझे बोली तो बोली तुम आकाश को क्यों बोली उसने गलत क्या बोलै था चलो उसको सॉरी बोलो.

शनाया पुस्पा के बात सुनी तो घुसे में मेरा हाथ पकड़ी और वह से दूसरे जगह आ गयी इस लिए मई उसके घुसे को संत करते हुए बोलै.

मई- चलो उधर देखो दादा जी केक कट करने वाले है तुम्हे उनको गिफ्ट भी देना है न.

मेरे बात को सुन शनाया उधर देखने लगी वह सच में दादा जी केक कट करने वाले थे फिर थोड़ी देर में केक कट हो गया तो सब अपना अपना गिफ्ट दादा जी को देने लगे शनाया भी अपना गिफ्ट गाड़ी से निकल कर ले आयी और इसे दादा जी को दे दिया जब सभी ने अपना अपना गिफ्ट दादा जी को दे दिया तो फिर मई आगे बढ़ कर अपना गिफ्ट दादा जी को दिया और उनसे बोलै.

मई- दादा जी ये छड़ी आपको मेरी तरफ से गिफ्ट.

मुझे छड़ी दादा जी को गिफ्ट देता देख कर सरे लोग हसने लगे लेकिन कोई कुछ बोलै नहीं इधर दादा जी को भी मेरा गिफ्ट कोई खास पसंद नहीं आया था इस लिए उन्होंने मेरे द्वारा दिए गए छड़ी को साइड में रख दिया इसके बाद अमृता उनके पास गयी और बोली.

अमृता- दादा जी प्लीज गिफ्ट को ओपन कीजिये न हमें देखना है की किसने कोण सा गिफ्ट दिया है.

दादा जी- अरे नहीं मई बाद में गिफ्ट को ओपन कर के देख लूंगा.

अमृता- नहीं दादा जी प्लीज न गिफ्ट को खोलिया न मुझे देखना है.

इतना बोल कर उसने अपने भाई विक्की को आंख मरी तो विक्की भी दादा जी को रिक्वेस्ट करने लगा गिफ्ट खोलने का इनलोगो को ऐसे मिनट करते देख दादा जी ने भी मन गए और बोले.

दादा जी- ठीक है एक काम करो तुम दोनों hi गिफ्ट को खोल कर देख लो.

बस अमृता तो यही चाहती hi थी क्युकी उसका पहला प्लान शनाया को बेइज्जती करने का फ़ैल हो गया था तो उसने और विक्की ने मिल कर गिफ्ट वाला प्लान बनाया उसने सोचा की शनाया कोई मामूली गिफ्ट दी होगी तो उसे गिफ्ट को लेकर उसका बेइज्जती करेंगे फिर अमृता ने ने पहला गिफ्ट विक्की का ओपन किया तो उसमे से एक पेंटिंग निकला नई दिखने में बहुत खूबसूरत लग रहा था जब विक्की ने अपना गिफ्ट देखा तो वो आगे बढ़ कर दादा जी से बोलै.

विक्की- दादा जी आपको पेंटिंग पसंद थी इस लिए मई 25 लाख खर्च कर के इसे लन्दन से मंगवाया है स्पेशलय आपको गिफ्ट देने के लिए.

दादा जी- मुझे तुम्हारी गिफ्ट बहुत पसंद आयी.

विक्की- पसंद क्यों नहीं आएगी दादा जी मैंने आपको लड़की का छड़ी थोड़े न दिया है.

मई समझ गया था की ले लोग अब हमको और शनाया को बेइज्जती करेंगे लेकिन मई और शनाया दोनों चुप hi रहे.

फिर अमृता ने दूसरी गिफ्ट खोली जो खुद उसका hi था वो गिफ्ट ने एक एंटीक लायी थी वो एक तलवार थी.

अमृता- दादा जी मैंने सुना था की आपको एंटीक तलवार भी बहुत पसंद है इस लिए मई 10 लाख में ये तलवार आपके गिफ्ट के लिए ख़रीदा है.

फिर अमृता ने एक और गिफ्ट उठा कर खोली ये गिफ्ट शनाया के द्वारा दिया गया था गिफ्ट को खोलते hi उसमे से मूर्ति निकली उस मूर्ति को देख कर अमृता जोर जोर से हसने लगी और बोली.

अमृता- दादा जी देखिये आपकी लाड़ली पोती ने आपको ताम्बे की मूर्ति गिफ्ट की है क्या बात है शनाया तुम खुद को दादा जी के लाड़ली पोती बोलती हो और गिफ्ट में 5000 हजार के मूर्ति ले कर आ गयी क्या करोगी इतना पैसा बचा कर यूपीएस मई तो भूल hi गयी थी की अब तुम अकेली नहीं हो अब तुम सदी सुदा हो इस लिए तुमको अपने पति को भी पालन पोषण करना पड़ता है.

अमृता के बार सुन कर सरे लोग हसने लगे सबको इस तरह से हस्ता देख कर शनाया अपना मुड़ी निचे कर ली फिर वो मेरे तरफ घुसे से देखि इधर सबको हस्ता देख कर अजय और पुस्पा को भी मेरे ऊपर गुसा आ रहा था पुस्पा घुसे से मेरे पास आयी और मुझसे बोली.

पुस्पा- करवा दी न हमारी बेइज्जती तुम में थोड़ा भी लाज शर्म नहीं है तुम क्या सोच कर ये मूर्ति लेकर आये थे और तुम शनाया तुमको क्या हो गया था जो तुम इस निकम्मे के बातो में आ कर ये मूर्ति ले ली अरे मूर्ति hi लेना था तो कोई अच्छा सा एंटीक मूर्ति लेती.

शनाया- माँ मैंने तो बस प्रतिक के बात मन कर ये मूर्ति ले ली थी मैंने इसे लेने से मन भी किया था लेकिन प्रतिक ने बोलै की एक बार मेरे ऊपर बिस्वास करो और ये मूर्ति ले लो ये मूर्ति दादा जी को पसंद जरूर आएगी.

शनाया में बात सुन मर सरे लोग फिर से बाटे करने लगे सच में ये घर जमाई नालायक है इसमें थोड़ी भी दिमाग नहीं है ये क्या सोच कर ये मूर्ति ले कर आया है अरे गरीब आदमी है तो इसकी सोच भी गरीब hi होगी न.

ऐसे hi न जाने वो लोग क्या क्या बाटे कर रहे थे सबकी बात सुन कर अजय पुस्पा और शनाया के सर शर्म से झुक गया इधर हमारा तमसा बनता देख कर अमृता और विक्की को मजा आ रहा था.

विक्की- अरे प्रतिक जी काम से काम ये तो सोच लेते की आप जिसके लिए ये गिफ्ट ले रहे है वो शनाया के दादा जी है और वो मल्होत्रा परिवार के लीडर है आपको थोड़ा भी शर्म नहीं आयी ऐसी गिफ्ट लेने में.

शनाया- मुझे तो लगता है की ये जानबूझ कर ये मूर्ति लाया है ताकि वो दादा जी की बेइज्जती करवा सके ऐसे आदमी को टी ढके मर कर बहार निकल देना चाहिए पता नहीं कैसे शनाया और चाचा चची इसको बर्दास्त करते है.

इतनी साडी बाटे सुन कर अब दादा जी से भी बर्दास्त नहीं हुआ और वो मुझसे बोले.

दादा जी- तुमने मेरे लिए ये गिफ्ट पसंद किया है और तुम्हे ये क्यों लगा की मुझे ये गिफ्ट पसंद आएगी मेरा टेस्ट इतना भी ख़राब नहीं है की मई ताम्बे की पुराणी मूर्ति को पसंद करू.

मई कब से सरे लोगो की बात को सुन रहा था और अब दादा जी भी वही बात बोले तो मुझे थोड़ा गुसा आ गया और मई दादा जी के बात का जबाब देते हुए बोलै.

मई- आपको अगर लगता है की ये मूर्ति ताम्बे की है तो आप गलत है आप जानते है की ये मूर्ति किस चीज से बानी है.

विक्की- अरे ये तो सबको दिख रहा है की ये मूर्ति ताम्बे से बानी है.

मई- नहीं तुम सब गलत हो ये मूर्ति सुध सोने की बानी हुयी है और ये मूर्ति चोल वंस का है इस मूर्ति को सोमस्कन्द के नाम से जाना जाता है.

मेरे बात को सुन कर एक पल के लिए सब संत हो गए लेकिन फिर जोर जोर से हसने लगे और बोलने लगे.

मई तो सोचता था की ये सिर्फ निकम्मा है लेकिन अब मुझे पता चला की ये तो बेवकूफ भी है अरे यहाँ सबको दिख रहा है की ये मूर्ति ताम्बे की है.

मई- आप सब बिस्वास नहीं हो रहा है तो ठीक है मई आपको दिखता हु.

मई बो कर मई अपने जेब से एक बोटा निकला जिसमे लिक्विड भरा हुआ था मई जनता था की इस मूर्ति को लेकर कुछ न कुछ हंगामा जरूर होगा इस लिए मैंने अपने साथ इस लिक्विड को भी ले कर आया था ये लिक्विड ऐसा था की किसी भी चीज पर अगर ताम्बे की पानी को चढ़ाया गया है तो आप इस लिक्विड से उस ताम्बे की पानी को उस पर से उतर सकते है.

मई उस मूर्ति के पास गया और उसके ऊपर मई उस लिक्विड के बोतल को पूरा खली कर दिया जैसे hi लिक्विड उस गिरा उस मूर्ति से ताम्बे का कलर उतरने लगा जब उस मूर्ति से ताम्बे का कलर गायब हुआ तो सरे लोग चौक गए.

वही दूसरी तरफ एक रूम में कुछ आदमी बैठे हुए ये सब दिखने में गुंडा लग रहे थे सामने एक चेयर पर एक 30 या 35 साल का आदमी बैठा हुआ था तभी उस रूम में कुछ और गुंडे आये और चेयर पे बैठे आदमी के सामने खड़े हो गए फिर उसमे से एक गुंडा अपने सर को झुकाते हुए बोलै.

गुंडा- बॉस मुझे माफ़ कर दीजिये मैंने वो काम नहीं कर पाया जो अपने मुझे दिया था.

बॉस- देखो रघु मैंने तुमको पहले hi बोलै था की भूल जाओ उस बात को मैंने प्लान चेंज कर दिया है.

रघु- लेकिन बॉस दूसरा प्लान क्या है एक और बात बॉस वो लड़का बहुत चालक है क्युकी मई जब उसका पीछा कर रहा था तो वो मेरे सामने hi था लेकिन फिर वो सुन सं गली में चला गया और वह से न जाने कहा गायब हो गया की पता hi नहीं चला इसलिए आप जो भी प्लान कीजियेगा सोच समझ कर कीजियेगा.

बॉस- मैंने इस बार बहुत सॉलिड प्लान बनाया है और क्लाइंट का भी आर्डर है की इस बार सिर्फ उस लड़के को मरना hi नहीं बल्कि उस लड़की को भी किडनैप करना है.

रघु- लेकिन बॉस ये होगा कैसे.

बॉस- होगा इस बार जरूर होगा आज उस लड़की के दादा जी का बर्थडे है तो वो लोग अपने दादा जी के बर्थडे पार्टी में गए है और वह से आने में उनको रत हो जायेगा तुम रस्ते में उनका इंतजार करना और जब वो तुम्हारे पास से गुजरेंगे तो उन पर हमला कर देना और उस लड़के को मर कर उस लड़की को किडनैप कर लेना.

रघु- वो तो ठीक है बॉस लेकिन उनके साथ उनके माँ बाप भी होंगे तो उनका क्या करेंगे.

बॉस- उनको बेहोश कर के गाड़ी में hi छोड़ देना.

रघु- ठीक है बॉस इस बार ये काम जरूर हो जायेगा.

बॉस- अगर नहीं हुआ तो इस बार तुम्हे मई छोडूंगा नहीं समझा जा अब उनपर हमला करने के लिए तयारी कर.


रघु- जी बॉस इस बार कोई गलती नहीं होगा
 
पहली बात भाई की गुरूजी के कहे अनुसार प्रतिक ने शनाया से सदी कर तो ली लेकिन अगर ये खुद जाकर शनाया से डाइवोर्स लेता है तो गुरु जी का वचन टूट जायेगा और दूसरी बात प्रतिक को शनाया से प्यार हो गया है इस लिए इन सब की बतमीज़ियो को बर्दास्त कर रहा है की कभी न कभी तो शनाया उसके प्यार को समझेगी और रही बात शनाया के माँ पुस्पा के बतमीज़ियो की तो वो अगर पुस्पा के बतमीज़ियो का जबाब देगा तो शनाया के दिल दुःख सकता है इस लिए वो शनाया के डिल दुखाना नहु चाहता.
 
अब ये कोण आ गया है जो प्रतिक को मरवाना चाहता है तो इसका भेद भी आगे जा कर खुल जायेगा और बर्थडे पार्टी में शनाया के परिवार की बेइज्जती हो रही है लेकिन अगले अपडेट में उन सब को मुँह तोड़ जबाब भी मिलेगा और मूर्ति का सचाई जब सब के सामने आएगा तो सब को बोलती hi बंद हो जाएगी.

थैंक्स बीआरओ फॉर योर लवली कमैंट्स ऐसे hi साथ बने रहे
 
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