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नीरज के वह से जाने के बाद पायल शनाया से बोली.
पायल- तुम पागल हो क्या तुम्हे क्या जरुरत थी उसे है करने की तुम जानते नहीं को क्या की वो कैसा लड़का है वो जरूर पार्टी में कुछ न कुछ गड़बड़ करेगा.
Shanaya-Wo कुछ भी नहीं करेगा क्युकी वह पर बहुत सरे लोग होंगे और सबसे बड़ी बात वह पर तुम भी तो मेरे साथ होगी hi.
हलाकि शनाया ये तो बोल रही थी लेकिन उसे भी कही न कही ये लग रहा था की ये नीरज वह कुछ बखेड़ा जरूर खड़ा करेगा.
इधर मैंने जब सुना की नीरज ने शनाया को पार्टी में इन्विते किया है तो मई भी थोड़ा टेंशन में आ गया क्युकी जितना मैंने नीरज के बारे में सुना था उससे ये तो पका था की वो आज के पार्टी में कुछ न कुछ जरूर करेगा हलाकि मुझे अब ज्यादा टेंशन नहीं हो रहा था क्युकी सोनू ने वह जाने के लिए नीरज से परमिशन ले लिए था और नीरज ने खुद मुझे वह इन्विते किया था अभी मई ये सब सोच hi रहा था की तभी मेरे मोबाइल पर कॉल आने लगा जब मई अपना मोबाइल निकल कर देखा तो ये कॉल विशाल ओबेराय का आ रहा था.
मई- सोनू मेरा एक कॉल आ रहा है तुम यही बैठो मई कॉल अटेंड कर के आता हु.
इतना बोल कर मई कॉल रिसीव किया और वह से थोड़ी दूर जा कर बात करने लगा.
मई- है विशाल भी बोलिये कुछ काम था क्या.
विशाल- (घबराये हुए आवाज में) प्रतिक तुम कहा हो अभी.
मई जब विशाल को ऐसे घबराये हुए देखा तो उससे पूछा.
मई- क्या बात है विशाल भाई आप परेशां लग रहे है मई तो अभी सोल्लगे में हु.
विशाल- तुम मेरे घर अभी आ सकते हो क्या बहुत अर्जेन्ट है प्लीज.
मई- हां मई आ सकता हु लेकिन पहले आप मुझे ये बताइये की वह क्या हुआ है जो आप इतना घबराये हुए है वह सब ठीक तो है न.
विशाल- यहाँ कुछ ठीक नहीं है प्रतिक दरअसल बात ये है की मेरे पिता जी का कुछ दिन से तबियत ख़राब है इसलिए मई उनको डॉक्टर से इलाज करवा रहा था यहाँ तक की मई उनको देश के बड़े बड़े डॉक्टर को भी दिखा दिया लेकिन उनकी तबियत में कोई भी बदलाव नहीं हुआ लेकिन आज अचानक hi उनकी तबियत बहुत ज्यादा ख़राब हो गयी है इसलिए मैंने सिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. बीरेंद्र खुराना जो की देश के जाने मने डॉक्टर है उनको बुलाया लेकिन वो भी हाथ खड़ा कर दिए उनका कहना है की अब मेरे पिता जी के पास कुछ hi दिन बचा है प्लीज एक बार आप आ कर मेरे पिता जी को देख लेते तो सही था क्या आप अभी आ सकते है.
मई- ठीक है मई आता हु आप अपने घर का लोकेशन मुझे सेंड कीजिये.
इतना बोल कर मई कॉल कट कर दिया और फिर सोनू के पास आ गया और उसको बोलै.
मई- यार सोनू मुझे अभी एक अर्जेन्ट काम से बहार जाना है इसलिए मई अभी जा रहा हु तुमसे मई पार्टी में hi मिलूंगा.
सोनू- ठीक है तुम जाओ मई पार्टी में तुम्हारा इंतजार करूँगा.
फिर मई सोल्लगे से बहार आ कर ऑटो पकड़ता हु और उसको अड्रेस दे देता हु जब वो ऑटो वाला वो अड्रेस देखता है तो चौक जाता है फिर वो मुझे ऊपर से निचे तक देखता है फिर ऑटो स्टार्ट कर के चल देता है फिर वो रस्ते में मुझसे पूछता है.
ऑटो वाला- साहब आप कन्फर्म हो की आपको इसी अड्रेस पर जाना है.
मई- है मुझे इसी अड्रेस पर जाना है क्या कोई प्रॉब्लम है.
ऑटो वाला- नहीं साहब कोई प्रॉब्लम नहीं है वो क्या है न की आप जहा का अड्रेस मुझे दिए है वो इलाका रहिसो का इलाका है और वह पर कोई मिडिल क्लास आदमी नहीं रहता इस लिए मई ये सब आपसे पूछा.
मई- वह पर मेरा एक फ्रेंड रहता है मई उसी से मिलने जा रहा हु.
मेरा बात सुन कर ऑटो वाला फिर कुछ नहीं बोलै फिर करीब 1 ऑवर बाद मई ओबेराय मेंशन के पास पहुंच गया वह जाने के मई मेंशन के गेट पर गया तो गॉर्ड ने मुझसे पूछा.
गॉर्ड- किस्से मिलना है आपको.
मई- मुझे विशाल ओबेराय से मिलना है आप एक बार उनको इन्फॉर्म कर दीजिये की प्रतिक आया है.
गॉर्ड- विशाल सर अभी किसी से नहीं मिलेंगे वो अंदर किसी काम में ब्यस्त है आप अभी जाइये बाद में आइयेगा.
दरअसल जबसे विशाल के पिता जी का तबियत ख़राब हुआ था तब से ओबेराय मेंशन में सिर्फ फॅमिली मेंबर या फिर डॉक्टर hi आ सकते थे क्युकी विशाल को शक था की उसके पिता जी के तबियत ख़राब होने में उसके किसी दुश्मन का हाथ होगा इधर मई गॉर्ड को बहुत समझाया लेकिन गॉर्ड मेरा बात सुनाने के लिए तैयार hi नहीं था अभी मई गॉर्ड से बहस hi कर रहा था की तभी मेरा फ़ोन बजा मैंने देखा की फ़ोन विशाल का hi था इस लिए मई कॉल अटेंड किया तो उधर से विशाल का आवाज आया.
विशाल- आप अभी कहा पहुंचे है प्रतिक थोड़ा जल्दी आने की कोशिश कीजिये मेरे पिता जी का तबियत लगातार बिगड़ता जा रहा है.
मई- मई तो आपके मेन्शन के गेट पर कबसे खड़ा हु लेकिन मुझे आपका गॉर्ड अंदर hi नहीं आने दे रहे है.
विशाल- आप वही रुकिए मई अभी आ रहा हु.
इतना बोल कर विशाल कॉल कट कर दिया थोड़ी देर बाद विशाल वह पर आया और मुझसे बोलै.
विशाल- माफ़ करना आपको इतनी देर इंतजार करना पड़ा.
मई- कोई बात नहीं.
विशाल- चलिए हम अंदर चलते है (गार्ड से) सुनो ये मेरे खास मेहमान है अगर ये कभी यहाँ आये तो तुम लोग बिना कोई रोक टोक के इन्हे अंदर आने देना समझे.
गॉर्ड- जी साहब समझ गया अब ऐसी गलती दोबारा नहीं होगा.
फिर माँ और विशाल वह से मेन्शन के अंदर आ गए मई जैसे hi मेन्शन के अंदर आया तो मुझे अजीब सा अनुभूति हुआ मुझे ऐसा लगा की जरूर इस मेन्शन में कुछ गड़बड़ है यहाँ वाइब्स पॉजिटिव नहीं लग रहा था ऐसा लग हर था की यहाँ के हवाओ में नेगेटिव एनर्जी हो लेकिन ये एनर्जी बहुत काम था इस लिए मई कन्फर्म नहीं हो प् रहा था.
खैर मई इन सब चीजों से अपना ध्यान हटाया और विशाल के साथ उसके पिता जी के रूम में आ गया वह पर और भी लोग थे जिसमे से कुछ डॉक्टर तो कुछ नर्स थे मई जब रूम में एंटर किया तो सबका ध्यान मेरे ऊपर आ गया मुझे इस तरह से रूम आते देख कर एक डॉक्टर बोलै.
डॉक्टर- विशाल जी ये कोण है.
विशाल- डॉ. बीरेंद्र जी ये एक आयुर्वेदिक डॉ. है और ये यहाँ मेरे पिता जी को देखने आये है.
डॉ. बीरेंद्र- आप ये क्या बोल रहे है विशाल जी आपको पता है न की आपके पिता जी का कंडीशन क्या है उनको अगर एक भी गलत दवा दिया गया तो उनका जान भी जा सकता है.
विशाल- है मुझे सब पता है.
डॉ. बीरेंद्र- अगर आपको ये बात पता है तो आप कैसे किसी भी आदमी को अपने पिता जी के इलाज के लिए ला सकते है और ये तो देखने से डॉ. भी नहीं लग रहा है पका ये कोई बहुरुपिया है जो आपसे पैसा ठगने के लिए आया है.
विशाल- बस डॉ. बीरेंद्र आप प्रतिक के बारे में अब एक और शब्द भी नहीं बोलेंगे समझे मन की आप बहुत बड़े डॉ. है और हम आपका इज्जत भी करते है लेकिन आप किसी को भी बिना उसके बारे में जाने ऐसे hi कुछ नहीं बोल सकते समझे.
डॉ. बीरेंद्र- लेकिन मई तो आपके पिता जी के भलाई के लिए hi बोल रहा था वो क्या है न की हम लोग इतने दिनों से आपके पिता जी को जीवित रखे हुए है अगर कोई दूसरा आदमी आ कर कुछ गलत कर देता है तो हमारे इतने दिन का म्हणत बेकार हो जायेगा इस लिए मैंने बोलै.
विशाल- हम आपके बात को समझ रहे है लेकिन ये भी कोई मामूली डॉ. नहीं है आप एक बार इन्हे पिता जी को देखने दीजिये.
डॉ. बीरेंद्र- ठीक है जब आपका hi मन है तो अब मई क्या कर सकता हु.
विशाल- प्रतिक आप जाकर मेरे पिता जी को देख सकते है.
विशाल के बोलने के बाद मई उसके पिता जी के पास गया और उनको देखने लगा वो अपने बीएड पर बेहोश थे उनका शरीर धीरे धीरे सूखने लगा था ऐसा लग रहा था की उनके अंदर जीवन hi नहीं है उनका पूरा शरीर कला पद गया था फिर मैंने अपने दिव्या दृस्टि एक्टिव कर के उनको देखने लगा थोड़ी देर तक देखने के बाद मई उनके पास से हैट गया तो विशाल मेरे पास आया और मुझसे बोलै.
विशाल- कैसी कंडीशन है पिता जी का क्या वो ठीक हो सकते है.
मई- पहले मुझे आप ये बताइये की इनका इलाज यही डॉ. कर रहे थे.
विशाल- है इन्होने hi मेरे पिता जी का इलाज किया है ये सिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. बीरेंद्र खुराना है क्या कुछ गड़बड़ हो गया है.
मई- अभी ज्यादा तो नहीं हुआ लेकिन इनका अगर ऐसे hi इलाज चलता रहा तो कुछ देर बाद जरूर हो जायेगा.
मेरे बात को सुन कर डॉ. बीरेंद्र को गुसा आ गया और घुसे से मुझसे बोलै.
डॉ. बीरेंद्र- तुम कहना क्या चाहते हो की हमारा इलाज बेकार है हमारे इलाज से इनको कुछ हो जायेगा तुम जानते भी हो की मई कोण हु.
मई- आप कोई भी हो लेकिन जब आपका इलाज hi बेकार है तो मई उसे बेकार hi बोलूंगा न.
डॉ. बीरेंद्र- तुम जानते भी की मई सिटी हॉस्पिटल का डायरेक्टर हु और मई इस देश का जाने मने डॉ. भी हु मैंने आज तक न जाने कितने मरीजों का इलाज किया और उनको ठीक भी किया है तुम्हारी हिमत कैसे हुयी मेरे इलाज को बेकार बोलने की.
मई- मई आपको ये नहीं बोल रहा की आप बेकार डॉ. है या आपका इलाज बेकार होता है आप भले hi बहुतो का इलाज किया होगा और उनको ठीक भी किया होगा लेकिन यहाँ आपका इलाज बेकार है.
डॉ. बीरेंद्र- तुम मेरे ऊपर इल्जाम लगा रहे हो अगर तुम इसे साबित कर के नहीं बताये तो तुम्हारे लिए ठीक नहीं होगा.
अभी मेरे और डॉ. बीरेंद्र में बहस हो hi रहा था की तभी उस रूम का दरवाजा खुला और एक लड़की अंदर आयी और आते hi विशाल के पास गयी और उनसे पूछी.
लड़की- भैया अब कैसी है पापा की तबियत.
विशाल- कुछ ठीक नहीं है निधि पापा के हालत दिन पर दिन ख़राब होते जा रहे है.
निधि विशाल के छोटी बहन है जो यही पर हॉस्टल में रह कर पढ़ाई कर रही थी लेकिन जैसे hi उसको उसके पिता जी के बारे में पता चला वो तुरंत hi भागते हुए यहाँ आ गयी.
निधि- तो अपने किसी बड़े डॉ. को क्यों नहीं दिखाया.
विशाल- मैंने बहुत प्रयास कर लिया बहुत सरे डॉ. को भी दिखाया यहाँ तक की डॉ. बीरेंद्र जो की देश के जाने मने डॉ. है वो भी पापा के इलाज कर लिए लेकिन उनके बीमारी में थोड़ा भी सुधर नहीं हुआ.
निधि अपने भाई के बात सुन कर बहुत दुखी हो गयी और उसके आँखों से आंसू आने लगे तभी उसकी नजर डॉ. बीरेंद्र पर गयी जो अभी भी घुसे से मुझे घूरे जा रहे थे जब निधि ने डॉ. बीरेंद्र को वह देखा तो वो उनके पास गयी और उनसे हाथ जोड़ते हुए बोली.
निधि- प्लीज डॉ. बीरेंद्र आप तो देश के इतने बड़े डॉ. है प्लीज आप मेरे पिता जी को बचा लीजिये.
डॉ. बीरेंद्र मेरे तरफ देखते हुए मेरे ऊपर तंज कस्ते हुए बोले.
डॉ. बीरेंद्र- मई आपके पिता जी को कैसे बचा सकता हु मई तो एक बेकार डॉ. हु मेरी इलाज बेकार होता है.
निधि उनकी बात को सुन कर चौक जाती है और फिर चौकते हुए बोलती है.
निधि- ये आप क्या बोल रहे है किसने आपको बेकार बोलै अगर बेकार hi होते तो आपका नाम पूरा देश में नहीं होता आप एक महँ डॉ. है.
डॉ. बीरेंद्र- ऐसा आपका लगता है की मई एक अच्छा डॉक्टर हु लेकिन कुछ लोग है जो मेरे इलाज को बेकार बोल रहे है.
निधि- कोण है वो जिसने आपके इलाज को बेकार बोलै है आपका इलाज बेकार नहीं है वो आदमी hi बेकार होगा.
इन लोगो को ऐसे बात करता देख कर विशाल बिच में बोल पड़ा.
विशाल- आप लोग ये कैसी बाटे लेकर बैठ गए आप लोग ये बाटे छोड़िये और प्रतिक आप बताइये क्या आप मेरे पिता जी का इलाज कर सकते है.
मई- है मई कर सकता हु.
निधि अपने भाई के बात सुन कर मेरे तरफ देखती है और मुझे ऊपर से निचे तक देखने के बाद बोलती है.
निधि- भैया ये कोण है और आप इसे पापा के इलाज करने के लिए क्यों बोल रहे है.
विशाल- निधि ये है प्रतिक और ये एक आयुर्वेदिक डॉक्टर है.
निधि- भैया आपका दिमाग तो ख़राब नहीं हो गया है आप पापा का इलाज एक आयुर्वेदिक डॉक्टर से करवाएंगे और ये आपको कहा से एक डॉक्टर दिख रहा है.
विशाल- निधि तुम अभी इनके बारे में कुछ नहीं जानती इस लिए तुम चुप रहो.
डॉ. बीरेंद्र- है विशाल जी ठीक बोल रहे है प्रतिक एक अच्छा डॉक्टर है तभी तो ये मेरे इलाज को बेकार बोल रहा है.
निधि- क्या इसने आपके इलाज को बेकार बोलै.
डॉ. बीरेंद्र- और साथ में ये भी बोल रहा था की अगर मई आपके पिता जी का इलाज करते रहा तो वो ज्यादा समय तक जिन्दा नहीं रह सकते.
निधि- क्या इसने आपके इलाज को बेकार बोलै.
डॉ. बीरेंद्र- है इसी ने मेरे इलाज को बेकार बोलै है और अगर ये मुझे प्रूफ कर के नहीं बताया की मेरा इलाज बेकार है तो मई इसे यहाँ से सही सलामत जाने नहीं दूंगा.
मई- आपको प्रूफ चाहिए न ठीक है मई आपको प्रूफ देता हु आप मुझे सबसे पहले ये बताइये की इनको हुआ क्या है.
डॉ. बीरेंद्र- तुमको ये पता नहीं है की इनको हुआ क्या है तो तुम मेरे इलाज को बेकार कैसे बोल सकते हो.
मई- मई आपसे जितना पूछा आप सिर्फ उतना hi बताइये.
डॉ. बीरेंद्र- ये तो इनको देखने से hi लग रहा है की इनको कोई खतरनाक जहर दिया गया है जिसके कारन इनके शरीर का ऑर्गन काम करना बंद कर दिया है.
मई- है अपने ये सही बोलै की इनका ऑर्गन्स डैमेज हो गया है लेकिन ये गलत है की इनको पाइजन दिया गया है.
वह पर जितने भी लोग थे वो सब मेरी बात सुन कर चौक गए.
विशाल- अगर मेरे पिता जी को पाइजन नहीं दिया गया है तो इनका ऑर्गन्स डैमेज कैसे हो गया और इनका शरीर कैसे कला हो गया.
मई- आपके पिता जी का ऑर्गन डैमेज होने का कारण एक रेयर बीमारी है और रही बात इनके शरीर कला होने का तो इनको अभी तक जो भी इंजेक्शन दिया जा रहा था उससे इनके शरीर में टॉक्सिक जमा होते गया और वो टॉक्सिक इनके पुरे सरीर में फैल गया है जिसके कारन इनका शरीर कला हो गया.
डॉ. बीरेंद्र- तो आपके कहने का मतलब है की हम लोग जो इंजेक्शन इनको दे रहे थे वो इनके लिए खतरनाक था और वो इनको नुकसान पंहुचा रहा था.
मई- है एहि बात है अगर एक और इंजेक्शन इनको लगता तो इनके शरीर का सरे ऑर्गन्स फ़ैल हो जाते जिनके कारन इनका मृत्यु भी हो सकता था.
निधि- ये क्या नॉनसेंस बात तुम कर रहे हो ऐसा कुछ भी नहीं है मेरे पापा को पाइजन hi दिया गया है.
मई- अगर मेरे ऊपर आपको विश्वास नहीं है तो आप इनको एक और इंजेक्शन लगवा कर देख लो लेकिन अगर इनको कुछ भी होता है तो उसका रिस्पांसिबिलिटी मेरा नहीं होगा.
मेरे बात को सुन कर सब चुप हो गए फिर विशाल मेरे पास आ कर बोले.
विशाल- अगर ऐसा है तो प्लीज आप मेरे पिता जी को ठीक कर दीजिये.
मई- आप चिंता मत कीजिये मई आपके पिता जी को ठीक कर दूंगा आप एक काम कीजिये सिल्वर नीडल का एक सेट मंगवा लीजिये.
विशाल ने मेरे बात को सुन कर एक नौकर को बुलाया और उसको मार्किट से एक सिल्वर नीडल का सेट लेन को बोलै वो नौकर वह से तुरंत चला गया.
निधि- देखो तुम इलाज तो कर रहे हो लेकिन अगर मेरे पापा को कुछ हो गया तो मई तुम्हे जिन्दा नहीं छोडूंगी यद् रखना.
मई- आप विश्वास कीजिये आपके पिता जी को कुछ नहीं होगा.
फिर थोड़ी देर बाद नौकर सिल्वर नीडल लेकर वह आ गया और मुझे दे दिया फिर मई डॉ. बीरेंद्र को बोलै.
मई- डॉ. साहब प्लीज आप इन मचिनो को इनसे अलग कर सकते है.
डॉ. बीरेंद्र- तुम कही पागल तो नहीं हो गए अगर ये मशीन इनके शरीर से अलग हुआ तो इनको बचाना मुश्किल हो जायेगा.
मई- आप हटा दीजिये इनको कुछ नहीं होगा अगर इन्हे कुछ होता है तो उसका रिस्पांसिबिलिटी मेरा होगा.
मेरे बात को सुन कर डॉ. बीरेंद्र विशाल जी के तरफ देखने लगा तो विशाल ने उनको है में गर्दन हिला कर मशीन हटाने की अनुमति दे दिया फिर डॉ. बीरेंद्र ने वो सरे मशीन को जगमोहन ओबेराय के शरीर से अलग कर दिया जिसके कारन उनका हार्ट बीट धीरे धीरे काम होने लगा ये देख कर सरे लोग घबरा गए.
जब सरे मशीन वह से हटा दिए गए तो मई आगे बढ़ते हुए जगमोहन ओबेराय के बीएड के पास पंहुचा और उनके शरीर के उनका सारा कपडा निकल दिया फिर सिल्वर नीडल को उनके एक्यूपंक्चर पॉइंट पर डालने लगा जब मैंने सिल्वर नीडल को उनके बॉडी में दाल दिया तो फिर मई अपने योगिक शक्ति से उनके शरीर के ऑर्गन को ठीक करना स्टार कर दिया और साथ में हु अपने योगिक शक्ति को उनके पुरे शरीर में फैलाने लगा क्युकी जगमोहन के बीमारी नेगेटिव एनर्जी के चलते हुए था उनके ऊपर नेगेटिव एनर्जी का साया था और ये मुझे तब पता चला जब मैंने उनके शरीर को अपने दिव्या दृस्टि से देखा था.
जब मैंने उनके शरीर में योगिक शक्ति को डाला तो उसके थोड़ी देर बाद उनके मुँह से एक काली ऊर्जा निकला और गायब हो गे इसके बाद उनका ऑर्गन्स ठीक होना सुरु हो गया कुछ hi देर में उनके शरीर का डैमेज ऑर्गन पूरी तरह से ठीक हो गया.
इसके बाद मई उनके शरीर में फैले हुए पाइजन को एक जगह इक्क्ठा किया और उसके ऊपर प्रेशर दे कर मुँह के तरफ लाया जिसके कारन उनके मुँह से कला खून निकलने लगा ये देख कर सरे लोग चौक गए अब तो डॉ. बीरेंद्र को भी मेरे बातो पर विश्वास होने लगा था.
जब सारा टॉक्सिक जगमोहन ओबेराय के शरीर से बहार निकल गया तो उनके शरीर का कलर भी नार्मल इंसान के जैसे हो गया जब मेरा सारा काम ख़तम हो गया तो मई जगमोहन ओबेराय के शरीर से सरे सिल्वर नीडल को बहार निकल लिया और वह से हाथ कर साइड में खड़ा हो गया और जगमोहन ओबेराय को देखने लगा.
थोड़ी देर बाद जगमोहन ओबेराय की सांसे तेज़ चलने लगा ऐसा लग रहा था की उनको साँस लेने में प्रॉब्लम हो रहा है जिसे देख कर सरे लोग घबरा गए लेकिन फिर थोड़ी देर बाद उनकी साँस नार्मल हो गयी और वो होश में आ गए उनको होश में आया देख कर सरे लोगो के चेहरे पर खुसी आ गयी विशाल और निधि भागते हुए उनके पास गए तो मैंने उनसे बोलै.
मई- अभी वो कमजोर है इस लिए आप लोग उनको अभी रेस्ट करने दीजिये थोड़ी देर में वो बेहतर हो जायेंगे तब आप उनसे मिल लीजियेगा.
मेरे बोलने के बाद वो लोग वह से हाथ कर मेरे पास आ गए और निधि अपने घुटनो पर बैठ कर दोनों हाथ जोड़ते हुए बोली.
निधि- मैंने आपको बहुत गलत समझा इस लिए अपनी नासमझ में आपको बहुत कुछ बोल दिया इसके लिए मुझे माफ़ कर दीजियेगा अपने आज मेरे पापा को बचा कर हमारे परिवार पर एक अहसान कर दिया और ये अहसान हमारा परिवार मरते डैम तक नहीं भूलेगा.
मई- अरे ये आप क्या कर रही है प्लीज आप इस तरह से मेरे सामने घुटनो पर मत बैठिये और मैंने आप लोगो पर कोई अहसान नहीं किया है बल्कि मैंने अपना फ़र्ज़ निभाया है.
विशाल- अपने एक बार और मेरे ऊपर अहसान कर दिया मई तो आपके अहसानो के टेल दबा जा रहा हु मई कैसे आपका ये अहसान चुकाऊंगा.
मई- देखिये मैंने बोलै न की मई आप लोगो पर कोई अहसान नहीं किया है ये तो मेरा फ़र्ज़ था की मई आप लोगो की मदत करू.
निधि- एक बार और से क्या मतलब है भैया.
विशाल- सायद तुमको पता नहीं होगा लेकिन तुम्हारे भतीजे का भी जान इन्ही से बचाई थी उसको भी सिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर जबाब दे दिए थे तब ये फरिस्ता बन कर वह पर आये और मेरे बेटे की जान बचा ली.
ये सब वह खड़ा हो कर डॉ. बीरेंद्र खुराना भी सुन रहे थे जब उन्होंने सुना की विशाल के बेटे की जान भी मैंने hi बचाई थी तो वो समझ गए की मई कोई मामूली इंसान नहीं हु वो तुरंत hi मेरे पास आये और मुझसे हाथ जोड़ कर बोले.
डॉ. बीरेंद्र- प्रतीक जी मुझे भी माफ़ कर दीजिये मैंने न जाने आपको क्या क्या बोल दिया आप तो एक चमत्कारी डॉक्टर है.
मई- अरे अरे डॉक्टर साहब आप ये क्या कर रहे है आप मुझसे बड़े है आप मेरे सामने इस तरह हाथ मत जोड़िये प्लीज.
डॉ. बीरेंद्र- आप महँ है डॉक्टर प्रतिक आपका विद्या भी महँ है अपने आज वो कर दिखाया है जो हम लोग न जाने कितने समय से करना छह रहे थे मई आज hi आपके ऊपर एक आर्टिकल लिखूंगा जिससे आपका म्हणता पूरा देश जान सके.
मई- नहीं नहीं आप ये मत कीजियेगा मुझे लाइम लाइट में आना पसंद नहीं है मई लौ प्रोफाइल hi ठीक हु मुझे दूसरे लोगो के नजरो में महँ बनाने का कोई सुख नहीं है.
डॉ. बीरेंद्र- जब आप इतना बोल रहे है तो ठीक है मई आर्टिकल नहीं लिखूंगा लेकिन मेरी आपसे एक रिक्वेस्ट है.
मई- आप बोलिये मई किस तरह से आपका मदत कर सकता हु.
डॉ. बीरेंद्र- इस देश में न जाने कितने ऐसे लोग है जो लाइलाज बीमारी से ग्रस्त है और उनका इलाज आपके शिवा इस दुनिया में कोई नहीं कर सकता इस लिए क्या आप सिटी हॉस्पिटल में अस ा डॉक्टर काम करना चाहेंगे.
मई- नहीं मेरे पास उतना समय नहीं है की मई सिटी हॉस्पिटल में डॉक्टर का काम कर सकू क्युकी मई अभी मुंबई यूनिवर्सिटी से अपना पढाई कर रहा हु.
डॉ. बीरेंद्र- ऐसा है आप सप्ताह में सिर्फ एक दिन तो अस ा गेस्ट डॉक्टर काम कर hi सकते है इससे आपके पढाई में भी प्रॉब्लम नहीं होगा.
मई- ठीक है मई सोच कर आपको बता दूंगा एक काम कीजिये आप अपना नंबर मुझे दे दीजिये.
इसके बाद हम दोनों ने अपना नंबर एक्सचेंज किये और फिर डॉ. बीरेंद्र विशाल से बोले.
डॉ. बीरेंद्र- विशाल जी आपके पिता जी अब ठीक हो गए है तो मुझे अब यहाँ से जाने का आज्ञा दीजिये.
विशाल- ठीक है डॉ. साहब आप जा सकते है मई सैम में हॉस्पिटल आ कर आपसे मिलता हु.
इसके बाद डॉ. बीरेंद्र और उसके साथी डॉक्टर और नर्स सब वह से चले जाते है उनके जाने के बाद उस रूम में निधि मई और विशाल हु बचे थे जगमोहन तो आराम से सो रहे थे.
विशाल- जी आपके पिता जी के बीमारी के बारे में मुझे आपसे कुछ बाटे करनी थी.
विशाल- है बोलिये.
मई- आपके घर पर नेगेटिव एनर्जी का साया है जिसके चलते उस दिन आपके लड़के का तबियत ख़राब हुआ था और आज आपके पिता जी का ये हालत हुआ है.
विशाल- क्या ये आप क्या बोल रहे है आप पढ़े लिखे हो कर के आप इन सब बातो पर विश्वास करते है.
निधि- आज के मॉडर्न ज़माने में ये आप क्या अंधविश्वासों बलि काट करने लगे हम लोग इन सब बातो पर विश्वास नहीं करते.
मई- आप लोग भले hi इन सब बातो पर विश्वास नहीं करते है लेकिन ये हकीकत है अच्छा आप दोनों एक बात बताइये क्या आप लोग भगवन पर विश्वास रखते है.
विशाल- है हमलोग भगवन को मानते है.
मई- यदि इस संसार में भगवन का अस्तित्व है तो सैतान का भी अस्तित्व है अगर आप भगवन मानते है तो आपको सैतान भी मानना चाहिए क्युकी भगवन और सैतान दोनों एक दूसरे का पूरक है अगर इस दुनिया में रोशनी का अस्तित्व तभी है जबतक अँधेरा है अगर अँधेरा नहीं रहेगा तो रौशनी का नमो निशान hi नहीं रहेगा.
विशाल- मई आपके बातो को समझ रहा हु लेकिन मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है.
निधि- विश्वास कैसे होगा भैया बहुत प्रेत आत्मा ये सब सिर्फ किताबी बाटे है या फिर या सब फिल्मो में hi होता है इन सब चीजों का असलियत से कोई भी वास्ता नहीं है.
मई- लगता है आप दोनों को मई जब तक डेमो नहीं दिखाऊंगा तब तक आपको विश्वास hi नहीं होगा.
नीरज के वह से जाने के बाद पायल शनाया से बोली.
पायल- तुम पागल हो क्या तुम्हे क्या जरुरत थी उसे है करने की तुम जानते नहीं को क्या की वो कैसा लड़का है वो जरूर पार्टी में कुछ न कुछ गड़बड़ करेगा.
Shanaya-Wo कुछ भी नहीं करेगा क्युकी वह पर बहुत सरे लोग होंगे और सबसे बड़ी बात वह पर तुम भी तो मेरे साथ होगी hi.
हलाकि शनाया ये तो बोल रही थी लेकिन उसे भी कही न कही ये लग रहा था की ये नीरज वह कुछ बखेड़ा जरूर खड़ा करेगा.
इधर मैंने जब सुना की नीरज ने शनाया को पार्टी में इन्विते किया है तो मई भी थोड़ा टेंशन में आ गया क्युकी जितना मैंने नीरज के बारे में सुना था उससे ये तो पका था की वो आज के पार्टी में कुछ न कुछ जरूर करेगा हलाकि मुझे अब ज्यादा टेंशन नहीं हो रहा था क्युकी सोनू ने वह जाने के लिए नीरज से परमिशन ले लिए था और नीरज ने खुद मुझे वह इन्विते किया था अभी मई ये सब सोच hi रहा था की तभी मेरे मोबाइल पर कॉल आने लगा जब मई अपना मोबाइल निकल कर देखा तो ये कॉल विशाल ओबेराय का आ रहा था.
मई- सोनू मेरा एक कॉल आ रहा है तुम यही बैठो मई कॉल अटेंड कर के आता हु.
इतना बोल कर मई कॉल रिसीव किया और वह से थोड़ी दूर जा कर बात करने लगा.
मई- है विशाल भी बोलिये कुछ काम था क्या.
विशाल- (घबराये हुए आवाज में) प्रतिक तुम कहा हो अभी.
मई जब विशाल को ऐसे घबराये हुए देखा तो उससे पूछा.
मई- क्या बात है विशाल भाई आप परेशां लग रहे है मई तो अभी सोल्लगे में हु.
विशाल- तुम मेरे घर अभी आ सकते हो क्या बहुत अर्जेन्ट है प्लीज.
मई- हां मई आ सकता हु लेकिन पहले आप मुझे ये बताइये की वह क्या हुआ है जो आप इतना घबराये हुए है वह सब ठीक तो है न.
विशाल- यहाँ कुछ ठीक नहीं है प्रतिक दरअसल बात ये है की मेरे पिता जी का कुछ दिन से तबियत ख़राब है इसलिए मई उनको डॉक्टर से इलाज करवा रहा था यहाँ तक की मई उनको देश के बड़े बड़े डॉक्टर को भी दिखा दिया लेकिन उनकी तबियत में कोई भी बदलाव नहीं हुआ लेकिन आज अचानक hi उनकी तबियत बहुत ज्यादा ख़राब हो गयी है इसलिए मैंने सिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. बीरेंद्र खुराना जो की देश के जाने मने डॉक्टर है उनको बुलाया लेकिन वो भी हाथ खड़ा कर दिए उनका कहना है की अब मेरे पिता जी के पास कुछ hi दिन बचा है प्लीज एक बार आप आ कर मेरे पिता जी को देख लेते तो सही था क्या आप अभी आ सकते है.
मई- ठीक है मई आता हु आप अपने घर का लोकेशन मुझे सेंड कीजिये.
इतना बोल कर मई कॉल कट कर दिया और फिर सोनू के पास आ गया और उसको बोलै.
मई- यार सोनू मुझे अभी एक अर्जेन्ट काम से बहार जाना है इसलिए मई अभी जा रहा हु तुमसे मई पार्टी में hi मिलूंगा.
सोनू- ठीक है तुम जाओ मई पार्टी में तुम्हारा इंतजार करूँगा.
फिर मई सोल्लगे से बहार आ कर ऑटो पकड़ता हु और उसको अड्रेस दे देता हु जब वो ऑटो वाला वो अड्रेस देखता है तो चौक जाता है फिर वो मुझे ऊपर से निचे तक देखता है फिर ऑटो स्टार्ट कर के चल देता है फिर वो रस्ते में मुझसे पूछता है.
ऑटो वाला- साहब आप कन्फर्म हो की आपको इसी अड्रेस पर जाना है.
मई- है मुझे इसी अड्रेस पर जाना है क्या कोई प्रॉब्लम है.
ऑटो वाला- नहीं साहब कोई प्रॉब्लम नहीं है वो क्या है न की आप जहा का अड्रेस मुझे दिए है वो इलाका रहिसो का इलाका है और वह पर कोई मिडिल क्लास आदमी नहीं रहता इस लिए मई ये सब आपसे पूछा.
मई- वह पर मेरा एक फ्रेंड रहता है मई उसी से मिलने जा रहा हु.
मेरा बात सुन कर ऑटो वाला फिर कुछ नहीं बोलै फिर करीब 1 ऑवर बाद मई ओबेराय मेंशन के पास पहुंच गया वह जाने के मई मेंशन के गेट पर गया तो गॉर्ड ने मुझसे पूछा.
गॉर्ड- किस्से मिलना है आपको.
मई- मुझे विशाल ओबेराय से मिलना है आप एक बार उनको इन्फॉर्म कर दीजिये की प्रतिक आया है.
गॉर्ड- विशाल सर अभी किसी से नहीं मिलेंगे वो अंदर किसी काम में ब्यस्त है आप अभी जाइये बाद में आइयेगा.
दरअसल जबसे विशाल के पिता जी का तबियत ख़राब हुआ था तब से ओबेराय मेंशन में सिर्फ फॅमिली मेंबर या फिर डॉक्टर hi आ सकते थे क्युकी विशाल को शक था की उसके पिता जी के तबियत ख़राब होने में उसके किसी दुश्मन का हाथ होगा इधर मई गॉर्ड को बहुत समझाया लेकिन गॉर्ड मेरा बात सुनाने के लिए तैयार hi नहीं था अभी मई गॉर्ड से बहस hi कर रहा था की तभी मेरा फ़ोन बजा मैंने देखा की फ़ोन विशाल का hi था इस लिए मई कॉल अटेंड किया तो उधर से विशाल का आवाज आया.
विशाल- आप अभी कहा पहुंचे है प्रतिक थोड़ा जल्दी आने की कोशिश कीजिये मेरे पिता जी का तबियत लगातार बिगड़ता जा रहा है.
मई- मई तो आपके मेन्शन के गेट पर कबसे खड़ा हु लेकिन मुझे आपका गॉर्ड अंदर hi नहीं आने दे रहे है.
विशाल- आप वही रुकिए मई अभी आ रहा हु.
इतना बोल कर विशाल कॉल कट कर दिया थोड़ी देर बाद विशाल वह पर आया और मुझसे बोलै.
विशाल- माफ़ करना आपको इतनी देर इंतजार करना पड़ा.
मई- कोई बात नहीं.
विशाल- चलिए हम अंदर चलते है (गार्ड से) सुनो ये मेरे खास मेहमान है अगर ये कभी यहाँ आये तो तुम लोग बिना कोई रोक टोक के इन्हे अंदर आने देना समझे.
गॉर्ड- जी साहब समझ गया अब ऐसी गलती दोबारा नहीं होगा.
फिर माँ और विशाल वह से मेन्शन के अंदर आ गए मई जैसे hi मेन्शन के अंदर आया तो मुझे अजीब सा अनुभूति हुआ मुझे ऐसा लगा की जरूर इस मेन्शन में कुछ गड़बड़ है यहाँ वाइब्स पॉजिटिव नहीं लग रहा था ऐसा लग हर था की यहाँ के हवाओ में नेगेटिव एनर्जी हो लेकिन ये एनर्जी बहुत काम था इस लिए मई कन्फर्म नहीं हो प् रहा था.
खैर मई इन सब चीजों से अपना ध्यान हटाया और विशाल के साथ उसके पिता जी के रूम में आ गया वह पर और भी लोग थे जिसमे से कुछ डॉक्टर तो कुछ नर्स थे मई जब रूम में एंटर किया तो सबका ध्यान मेरे ऊपर आ गया मुझे इस तरह से रूम आते देख कर एक डॉक्टर बोलै.
डॉक्टर- विशाल जी ये कोण है.
विशाल- डॉ. बीरेंद्र जी ये एक आयुर्वेदिक डॉ. है और ये यहाँ मेरे पिता जी को देखने आये है.
डॉ. बीरेंद्र- आप ये क्या बोल रहे है विशाल जी आपको पता है न की आपके पिता जी का कंडीशन क्या है उनको अगर एक भी गलत दवा दिया गया तो उनका जान भी जा सकता है.
विशाल- है मुझे सब पता है.
डॉ. बीरेंद्र- अगर आपको ये बात पता है तो आप कैसे किसी भी आदमी को अपने पिता जी के इलाज के लिए ला सकते है और ये तो देखने से डॉ. भी नहीं लग रहा है पका ये कोई बहुरुपिया है जो आपसे पैसा ठगने के लिए आया है.
विशाल- बस डॉ. बीरेंद्र आप प्रतिक के बारे में अब एक और शब्द भी नहीं बोलेंगे समझे मन की आप बहुत बड़े डॉ. है और हम आपका इज्जत भी करते है लेकिन आप किसी को भी बिना उसके बारे में जाने ऐसे hi कुछ नहीं बोल सकते समझे.
डॉ. बीरेंद्र- लेकिन मई तो आपके पिता जी के भलाई के लिए hi बोल रहा था वो क्या है न की हम लोग इतने दिनों से आपके पिता जी को जीवित रखे हुए है अगर कोई दूसरा आदमी आ कर कुछ गलत कर देता है तो हमारे इतने दिन का म्हणत बेकार हो जायेगा इस लिए मैंने बोलै.
विशाल- हम आपके बात को समझ रहे है लेकिन ये भी कोई मामूली डॉ. नहीं है आप एक बार इन्हे पिता जी को देखने दीजिये.
डॉ. बीरेंद्र- ठीक है जब आपका hi मन है तो अब मई क्या कर सकता हु.
विशाल- प्रतिक आप जाकर मेरे पिता जी को देख सकते है.
विशाल के बोलने के बाद मई उसके पिता जी के पास गया और उनको देखने लगा वो अपने बीएड पर बेहोश थे उनका शरीर धीरे धीरे सूखने लगा था ऐसा लग रहा था की उनके अंदर जीवन hi नहीं है उनका पूरा शरीर कला पद गया था फिर मैंने अपने दिव्या दृस्टि एक्टिव कर के उनको देखने लगा थोड़ी देर तक देखने के बाद मई उनके पास से हैट गया तो विशाल मेरे पास आया और मुझसे बोलै.
विशाल- कैसी कंडीशन है पिता जी का क्या वो ठीक हो सकते है.
मई- पहले मुझे आप ये बताइये की इनका इलाज यही डॉ. कर रहे थे.
विशाल- है इन्होने hi मेरे पिता जी का इलाज किया है ये सिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. बीरेंद्र खुराना है क्या कुछ गड़बड़ हो गया है.
मई- अभी ज्यादा तो नहीं हुआ लेकिन इनका अगर ऐसे hi इलाज चलता रहा तो कुछ देर बाद जरूर हो जायेगा.
मेरे बात को सुन कर डॉ. बीरेंद्र को गुसा आ गया और घुसे से मुझसे बोलै.
डॉ. बीरेंद्र- तुम कहना क्या चाहते हो की हमारा इलाज बेकार है हमारे इलाज से इनको कुछ हो जायेगा तुम जानते भी हो की मई कोण हु.
मई- आप कोई भी हो लेकिन जब आपका इलाज hi बेकार है तो मई उसे बेकार hi बोलूंगा न.
डॉ. बीरेंद्र- तुम जानते भी की मई सिटी हॉस्पिटल का डायरेक्टर हु और मई इस देश का जाने मने डॉ. भी हु मैंने आज तक न जाने कितने मरीजों का इलाज किया और उनको ठीक भी किया है तुम्हारी हिमत कैसे हुयी मेरे इलाज को बेकार बोलने की.
मई- मई आपको ये नहीं बोल रहा की आप बेकार डॉ. है या आपका इलाज बेकार होता है आप भले hi बहुतो का इलाज किया होगा और उनको ठीक भी किया होगा लेकिन यहाँ आपका इलाज बेकार है.
डॉ. बीरेंद्र- तुम मेरे ऊपर इल्जाम लगा रहे हो अगर तुम इसे साबित कर के नहीं बताये तो तुम्हारे लिए ठीक नहीं होगा.
अभी मेरे और डॉ. बीरेंद्र में बहस हो hi रहा था की तभी उस रूम का दरवाजा खुला और एक लड़की अंदर आयी और आते hi विशाल के पास गयी और उनसे पूछी.
लड़की- भैया अब कैसी है पापा की तबियत.
विशाल- कुछ ठीक नहीं है निधि पापा के हालत दिन पर दिन ख़राब होते जा रहे है.
निधि विशाल के छोटी बहन है जो यही पर हॉस्टल में रह कर पढ़ाई कर रही थी लेकिन जैसे hi उसको उसके पिता जी के बारे में पता चला वो तुरंत hi भागते हुए यहाँ आ गयी.
निधि- तो अपने किसी बड़े डॉ. को क्यों नहीं दिखाया.
विशाल- मैंने बहुत प्रयास कर लिया बहुत सरे डॉ. को भी दिखाया यहाँ तक की डॉ. बीरेंद्र जो की देश के जाने मने डॉ. है वो भी पापा के इलाज कर लिए लेकिन उनके बीमारी में थोड़ा भी सुधर नहीं हुआ.
निधि अपने भाई के बात सुन कर बहुत दुखी हो गयी और उसके आँखों से आंसू आने लगे तभी उसकी नजर डॉ. बीरेंद्र पर गयी जो अभी भी घुसे से मुझे घूरे जा रहे थे जब निधि ने डॉ. बीरेंद्र को वह देखा तो वो उनके पास गयी और उनसे हाथ जोड़ते हुए बोली.
निधि- प्लीज डॉ. बीरेंद्र आप तो देश के इतने बड़े डॉ. है प्लीज आप मेरे पिता जी को बचा लीजिये.
डॉ. बीरेंद्र मेरे तरफ देखते हुए मेरे ऊपर तंज कस्ते हुए बोले.
डॉ. बीरेंद्र- मई आपके पिता जी को कैसे बचा सकता हु मई तो एक बेकार डॉ. हु मेरी इलाज बेकार होता है.
निधि उनकी बात को सुन कर चौक जाती है और फिर चौकते हुए बोलती है.
निधि- ये आप क्या बोल रहे है किसने आपको बेकार बोलै अगर बेकार hi होते तो आपका नाम पूरा देश में नहीं होता आप एक महँ डॉ. है.
डॉ. बीरेंद्र- ऐसा आपका लगता है की मई एक अच्छा डॉक्टर हु लेकिन कुछ लोग है जो मेरे इलाज को बेकार बोल रहे है.
निधि- कोण है वो जिसने आपके इलाज को बेकार बोलै है आपका इलाज बेकार नहीं है वो आदमी hi बेकार होगा.
इन लोगो को ऐसे बात करता देख कर विशाल बिच में बोल पड़ा.
विशाल- आप लोग ये कैसी बाटे लेकर बैठ गए आप लोग ये बाटे छोड़िये और प्रतिक आप बताइये क्या आप मेरे पिता जी का इलाज कर सकते है.
मई- है मई कर सकता हु.
निधि अपने भाई के बात सुन कर मेरे तरफ देखती है और मुझे ऊपर से निचे तक देखने के बाद बोलती है.
निधि- भैया ये कोण है और आप इसे पापा के इलाज करने के लिए क्यों बोल रहे है.
विशाल- निधि ये है प्रतिक और ये एक आयुर्वेदिक डॉक्टर है.
निधि- भैया आपका दिमाग तो ख़राब नहीं हो गया है आप पापा का इलाज एक आयुर्वेदिक डॉक्टर से करवाएंगे और ये आपको कहा से एक डॉक्टर दिख रहा है.
विशाल- निधि तुम अभी इनके बारे में कुछ नहीं जानती इस लिए तुम चुप रहो.
डॉ. बीरेंद्र- है विशाल जी ठीक बोल रहे है प्रतिक एक अच्छा डॉक्टर है तभी तो ये मेरे इलाज को बेकार बोल रहा है.
निधि- क्या इसने आपके इलाज को बेकार बोलै.
डॉ. बीरेंद्र- और साथ में ये भी बोल रहा था की अगर मई आपके पिता जी का इलाज करते रहा तो वो ज्यादा समय तक जिन्दा नहीं रह सकते.
निधि- क्या इसने आपके इलाज को बेकार बोलै.
डॉ. बीरेंद्र- है इसी ने मेरे इलाज को बेकार बोलै है और अगर ये मुझे प्रूफ कर के नहीं बताया की मेरा इलाज बेकार है तो मई इसे यहाँ से सही सलामत जाने नहीं दूंगा.
मई- आपको प्रूफ चाहिए न ठीक है मई आपको प्रूफ देता हु आप मुझे सबसे पहले ये बताइये की इनको हुआ क्या है.
डॉ. बीरेंद्र- तुमको ये पता नहीं है की इनको हुआ क्या है तो तुम मेरे इलाज को बेकार कैसे बोल सकते हो.
मई- मई आपसे जितना पूछा आप सिर्फ उतना hi बताइये.
डॉ. बीरेंद्र- ये तो इनको देखने से hi लग रहा है की इनको कोई खतरनाक जहर दिया गया है जिसके कारन इनके शरीर का ऑर्गन काम करना बंद कर दिया है.
मई- है अपने ये सही बोलै की इनका ऑर्गन्स डैमेज हो गया है लेकिन ये गलत है की इनको पाइजन दिया गया है.
वह पर जितने भी लोग थे वो सब मेरी बात सुन कर चौक गए.
विशाल- अगर मेरे पिता जी को पाइजन नहीं दिया गया है तो इनका ऑर्गन्स डैमेज कैसे हो गया और इनका शरीर कैसे कला हो गया.
मई- आपके पिता जी का ऑर्गन डैमेज होने का कारण एक रेयर बीमारी है और रही बात इनके शरीर कला होने का तो इनको अभी तक जो भी इंजेक्शन दिया जा रहा था उससे इनके शरीर में टॉक्सिक जमा होते गया और वो टॉक्सिक इनके पुरे सरीर में फैल गया है जिसके कारन इनका शरीर कला हो गया.
डॉ. बीरेंद्र- तो आपके कहने का मतलब है की हम लोग जो इंजेक्शन इनको दे रहे थे वो इनके लिए खतरनाक था और वो इनको नुकसान पंहुचा रहा था.
मई- है एहि बात है अगर एक और इंजेक्शन इनको लगता तो इनके शरीर का सरे ऑर्गन्स फ़ैल हो जाते जिनके कारन इनका मृत्यु भी हो सकता था.
निधि- ये क्या नॉनसेंस बात तुम कर रहे हो ऐसा कुछ भी नहीं है मेरे पापा को पाइजन hi दिया गया है.
मई- अगर मेरे ऊपर आपको विश्वास नहीं है तो आप इनको एक और इंजेक्शन लगवा कर देख लो लेकिन अगर इनको कुछ भी होता है तो उसका रिस्पांसिबिलिटी मेरा नहीं होगा.
मेरे बात को सुन कर सब चुप हो गए फिर विशाल मेरे पास आ कर बोले.
विशाल- अगर ऐसा है तो प्लीज आप मेरे पिता जी को ठीक कर दीजिये.
मई- आप चिंता मत कीजिये मई आपके पिता जी को ठीक कर दूंगा आप एक काम कीजिये सिल्वर नीडल का एक सेट मंगवा लीजिये.
विशाल ने मेरे बात को सुन कर एक नौकर को बुलाया और उसको मार्किट से एक सिल्वर नीडल का सेट लेन को बोलै वो नौकर वह से तुरंत चला गया.
निधि- देखो तुम इलाज तो कर रहे हो लेकिन अगर मेरे पापा को कुछ हो गया तो मई तुम्हे जिन्दा नहीं छोडूंगी यद् रखना.
मई- आप विश्वास कीजिये आपके पिता जी को कुछ नहीं होगा.
फिर थोड़ी देर बाद नौकर सिल्वर नीडल लेकर वह आ गया और मुझे दे दिया फिर मई डॉ. बीरेंद्र को बोलै.
मई- डॉ. साहब प्लीज आप इन मचिनो को इनसे अलग कर सकते है.
डॉ. बीरेंद्र- तुम कही पागल तो नहीं हो गए अगर ये मशीन इनके शरीर से अलग हुआ तो इनको बचाना मुश्किल हो जायेगा.
मई- आप हटा दीजिये इनको कुछ नहीं होगा अगर इन्हे कुछ होता है तो उसका रिस्पांसिबिलिटी मेरा होगा.
मेरे बात को सुन कर डॉ. बीरेंद्र विशाल जी के तरफ देखने लगा तो विशाल ने उनको है में गर्दन हिला कर मशीन हटाने की अनुमति दे दिया फिर डॉ. बीरेंद्र ने वो सरे मशीन को जगमोहन ओबेराय के शरीर से अलग कर दिया जिसके कारन उनका हार्ट बीट धीरे धीरे काम होने लगा ये देख कर सरे लोग घबरा गए.
जब सरे मशीन वह से हटा दिए गए तो मई आगे बढ़ते हुए जगमोहन ओबेराय के बीएड के पास पंहुचा और उनके शरीर के उनका सारा कपडा निकल दिया फिर सिल्वर नीडल को उनके एक्यूपंक्चर पॉइंट पर डालने लगा जब मैंने सिल्वर नीडल को उनके बॉडी में दाल दिया तो फिर मई अपने योगिक शक्ति से उनके शरीर के ऑर्गन को ठीक करना स्टार कर दिया और साथ में हु अपने योगिक शक्ति को उनके पुरे शरीर में फैलाने लगा क्युकी जगमोहन के बीमारी नेगेटिव एनर्जी के चलते हुए था उनके ऊपर नेगेटिव एनर्जी का साया था और ये मुझे तब पता चला जब मैंने उनके शरीर को अपने दिव्या दृस्टि से देखा था.
जब मैंने उनके शरीर में योगिक शक्ति को डाला तो उसके थोड़ी देर बाद उनके मुँह से एक काली ऊर्जा निकला और गायब हो गे इसके बाद उनका ऑर्गन्स ठीक होना सुरु हो गया कुछ hi देर में उनके शरीर का डैमेज ऑर्गन पूरी तरह से ठीक हो गया.
इसके बाद मई उनके शरीर में फैले हुए पाइजन को एक जगह इक्क्ठा किया और उसके ऊपर प्रेशर दे कर मुँह के तरफ लाया जिसके कारन उनके मुँह से कला खून निकलने लगा ये देख कर सरे लोग चौक गए अब तो डॉ. बीरेंद्र को भी मेरे बातो पर विश्वास होने लगा था.
जब सारा टॉक्सिक जगमोहन ओबेराय के शरीर से बहार निकल गया तो उनके शरीर का कलर भी नार्मल इंसान के जैसे हो गया जब मेरा सारा काम ख़तम हो गया तो मई जगमोहन ओबेराय के शरीर से सरे सिल्वर नीडल को बहार निकल लिया और वह से हाथ कर साइड में खड़ा हो गया और जगमोहन ओबेराय को देखने लगा.
थोड़ी देर बाद जगमोहन ओबेराय की सांसे तेज़ चलने लगा ऐसा लग रहा था की उनको साँस लेने में प्रॉब्लम हो रहा है जिसे देख कर सरे लोग घबरा गए लेकिन फिर थोड़ी देर बाद उनकी साँस नार्मल हो गयी और वो होश में आ गए उनको होश में आया देख कर सरे लोगो के चेहरे पर खुसी आ गयी विशाल और निधि भागते हुए उनके पास गए तो मैंने उनसे बोलै.
मई- अभी वो कमजोर है इस लिए आप लोग उनको अभी रेस्ट करने दीजिये थोड़ी देर में वो बेहतर हो जायेंगे तब आप उनसे मिल लीजियेगा.
मेरे बोलने के बाद वो लोग वह से हाथ कर मेरे पास आ गए और निधि अपने घुटनो पर बैठ कर दोनों हाथ जोड़ते हुए बोली.
निधि- मैंने आपको बहुत गलत समझा इस लिए अपनी नासमझ में आपको बहुत कुछ बोल दिया इसके लिए मुझे माफ़ कर दीजियेगा अपने आज मेरे पापा को बचा कर हमारे परिवार पर एक अहसान कर दिया और ये अहसान हमारा परिवार मरते डैम तक नहीं भूलेगा.
मई- अरे ये आप क्या कर रही है प्लीज आप इस तरह से मेरे सामने घुटनो पर मत बैठिये और मैंने आप लोगो पर कोई अहसान नहीं किया है बल्कि मैंने अपना फ़र्ज़ निभाया है.
विशाल- अपने एक बार और मेरे ऊपर अहसान कर दिया मई तो आपके अहसानो के टेल दबा जा रहा हु मई कैसे आपका ये अहसान चुकाऊंगा.
मई- देखिये मैंने बोलै न की मई आप लोगो पर कोई अहसान नहीं किया है ये तो मेरा फ़र्ज़ था की मई आप लोगो की मदत करू.
निधि- एक बार और से क्या मतलब है भैया.
विशाल- सायद तुमको पता नहीं होगा लेकिन तुम्हारे भतीजे का भी जान इन्ही से बचाई थी उसको भी सिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर जबाब दे दिए थे तब ये फरिस्ता बन कर वह पर आये और मेरे बेटे की जान बचा ली.
ये सब वह खड़ा हो कर डॉ. बीरेंद्र खुराना भी सुन रहे थे जब उन्होंने सुना की विशाल के बेटे की जान भी मैंने hi बचाई थी तो वो समझ गए की मई कोई मामूली इंसान नहीं हु वो तुरंत hi मेरे पास आये और मुझसे हाथ जोड़ कर बोले.
डॉ. बीरेंद्र- प्रतीक जी मुझे भी माफ़ कर दीजिये मैंने न जाने आपको क्या क्या बोल दिया आप तो एक चमत्कारी डॉक्टर है.
मई- अरे अरे डॉक्टर साहब आप ये क्या कर रहे है आप मुझसे बड़े है आप मेरे सामने इस तरह हाथ मत जोड़िये प्लीज.
डॉ. बीरेंद्र- आप महँ है डॉक्टर प्रतिक आपका विद्या भी महँ है अपने आज वो कर दिखाया है जो हम लोग न जाने कितने समय से करना छह रहे थे मई आज hi आपके ऊपर एक आर्टिकल लिखूंगा जिससे आपका म्हणता पूरा देश जान सके.
मई- नहीं नहीं आप ये मत कीजियेगा मुझे लाइम लाइट में आना पसंद नहीं है मई लौ प्रोफाइल hi ठीक हु मुझे दूसरे लोगो के नजरो में महँ बनाने का कोई सुख नहीं है.
डॉ. बीरेंद्र- जब आप इतना बोल रहे है तो ठीक है मई आर्टिकल नहीं लिखूंगा लेकिन मेरी आपसे एक रिक्वेस्ट है.
मई- आप बोलिये मई किस तरह से आपका मदत कर सकता हु.
डॉ. बीरेंद्र- इस देश में न जाने कितने ऐसे लोग है जो लाइलाज बीमारी से ग्रस्त है और उनका इलाज आपके शिवा इस दुनिया में कोई नहीं कर सकता इस लिए क्या आप सिटी हॉस्पिटल में अस ा डॉक्टर काम करना चाहेंगे.
मई- नहीं मेरे पास उतना समय नहीं है की मई सिटी हॉस्पिटल में डॉक्टर का काम कर सकू क्युकी मई अभी मुंबई यूनिवर्सिटी से अपना पढाई कर रहा हु.
डॉ. बीरेंद्र- ऐसा है आप सप्ताह में सिर्फ एक दिन तो अस ा गेस्ट डॉक्टर काम कर hi सकते है इससे आपके पढाई में भी प्रॉब्लम नहीं होगा.
मई- ठीक है मई सोच कर आपको बता दूंगा एक काम कीजिये आप अपना नंबर मुझे दे दीजिये.
इसके बाद हम दोनों ने अपना नंबर एक्सचेंज किये और फिर डॉ. बीरेंद्र विशाल से बोले.
डॉ. बीरेंद्र- विशाल जी आपके पिता जी अब ठीक हो गए है तो मुझे अब यहाँ से जाने का आज्ञा दीजिये.
विशाल- ठीक है डॉ. साहब आप जा सकते है मई सैम में हॉस्पिटल आ कर आपसे मिलता हु.
इसके बाद डॉ. बीरेंद्र और उसके साथी डॉक्टर और नर्स सब वह से चले जाते है उनके जाने के बाद उस रूम में निधि मई और विशाल हु बचे थे जगमोहन तो आराम से सो रहे थे.
विशाल- जी आपके पिता जी के बीमारी के बारे में मुझे आपसे कुछ बाटे करनी थी.
विशाल- है बोलिये.
मई- आपके घर पर नेगेटिव एनर्जी का साया है जिसके चलते उस दिन आपके लड़के का तबियत ख़राब हुआ था और आज आपके पिता जी का ये हालत हुआ है.
विशाल- क्या ये आप क्या बोल रहे है आप पढ़े लिखे हो कर के आप इन सब बातो पर विश्वास करते है.
निधि- आज के मॉडर्न ज़माने में ये आप क्या अंधविश्वासों बलि काट करने लगे हम लोग इन सब बातो पर विश्वास नहीं करते.
मई- आप लोग भले hi इन सब बातो पर विश्वास नहीं करते है लेकिन ये हकीकत है अच्छा आप दोनों एक बात बताइये क्या आप लोग भगवन पर विश्वास रखते है.
विशाल- है हमलोग भगवन को मानते है.
मई- यदि इस संसार में भगवन का अस्तित्व है तो सैतान का भी अस्तित्व है अगर आप भगवन मानते है तो आपको सैतान भी मानना चाहिए क्युकी भगवन और सैतान दोनों एक दूसरे का पूरक है अगर इस दुनिया में रोशनी का अस्तित्व तभी है जबतक अँधेरा है अगर अँधेरा नहीं रहेगा तो रौशनी का नमो निशान hi नहीं रहेगा.
विशाल- मई आपके बातो को समझ रहा हु लेकिन मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है.
निधि- विश्वास कैसे होगा भैया बहुत प्रेत आत्मा ये सब सिर्फ किताबी बाटे है या फिर या सब फिल्मो में hi होता है इन सब चीजों का असलियत से कोई भी वास्ता नहीं है.
मई- लगता है आप दोनों को मई जब तक डेमो नहीं दिखाऊंगा तब तक आपको विश्वास hi नहीं होगा.