The Super Boy - Page 3 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

The Super Boy

अपडेट 14



बर्थडे पार्टी



मई उस मूर्ति के पास गया और उसके ऊपर मई उस लिक्विड के बोतल को पूरा खली कर दिया जैसे hi लिक्विड उस गिरा उस मूर्ति से ताम्बे का कलर गायब होने लगा और जैसे जैसे उस मूर्ति से ताम्बे का कलर गायब हो रहा था वैसे वैसे उसके अंदर से चमकते हुए सोने के परत उभरती हुयी बहार आ रही थी जब उस मूर्ति से सारा ताम्बे के कलर गायब हो गया तो पूरा मूर्ति hi सोने के परत से चमकने लगा अब कोई भी देख कर बोल सकता था की ये मूर्ति पूरा का पूरा सोने से बना हुआ.

जैसे hi लोगो ने देखा की वो मूर्ति सच में सोने से बना हुआ है तो सब चौक गए और जो लोग मेरी और शनाया की मजाक उदा रहे थे उन लोगो की मुँह अपने आप hi बंद हो गया और सर शर्म से झुक गया.

इधर शनाया ने भी जब मूर्ति को देखा तो उसकी नखे फटी की फटी रह गयी वो आश्चर्य से कभी मुझे तो कभी उस मूर्ति को देख रही थी और पुस्पा की बात hi क्या करना उसकी तो बोलती hi बंद हो गयी थी इधर जितने भी लोग थे सब आपस में बाटे करने लगी.

~ अरे ये तो सच में सोने की मूर्ति है इसका मतलब प्रतिक सच बोल रहा था हम बेकार में hi न जाने इसे क्या क्या बोल रहे थे.

~ अरे सच में भाई ये मूर्ति सोने का है और काम से काम ये मूर्ति 2.5 कग सोने से बना होगा और ऊपर से ये मूर्ति एंटीक भी है तो काम से काम इसकी कीमत 7 से 8 करोड़ रूपए तो जरूर होंगे.

~ अजय मल्होत्रा को क्या दामाद मिला है ये तो एंटीक में एक्सपर्ट लगता है तभी तो ये ताम्बे के अंदर सोने को पहचान कर लिया मल्होत्रा परिवार किस्मत वाला है जो उसको एक एंटीक एक्सपर्ट दामाद मिला है.

~ और शनाया के दिल तो देखो अपने दादा जी को बर्थडे में 7 से 8 करोड़ के गिफ्ट ऐसे hi दे दिया और यहाँ कुछ ऐसे भी लोग है 20 लाख या 25 लाख के गिफ्ट दे कर ऐसा जाता रहे है जैसे न जाने दुनिया के कितना महंगा गिफ्ट दे दिए हो.

इन सरे लोगो के बात सुन कर शनाया का दिल गदगद हो गया आज उसे मन कर रहा था की वो भाग कर आये और मुझे गले लगा ले लेकिन वो ऐसा कर नहीं सकती थी इधर उन सरे लोगो के बात सुन कर अजय मल्होत्रा को भी मेरे ऊपर गर्व हो रहा था लेकिन मेरी इतनी बड़ाई सुन कर पुस्पा मन hi मन सोचे जा रही थी.

पुस्पा- (मन में) अरे ये मैंने क्या कर दिया खामखा उसको बाटे सुना दी लेकिन जब उसे पता था की ये मूर्ति सोने की बानी है तो इसे गिफ्ट देने की क्या जरुरत थी हम इस मूर्ति को अपने पास रख कर कुछ और गिफ्ट कर देते.

जहा शनाया के परिवार खुस था वही अपनी बेइज्जती होता देख कर अमृता और विक्की के सर निचे हो गया और वो दोनों घुसे से डट भिचने लगे फिर न जाने विक्की को क्या सुझा वो तुरंत hi बोलै.

विक्की- मन की ये मूर्ति सोने की है लेकिन आप सब ये कैसे बोल सकते हो की ये मूर्ति एंटीक है ऐसा भी तो हो सकता है की ये मूर्ति कुछ दिन पहले hi बनाया गया हो और इस्पे ताम्बे की पानी चढ़ा दिया गया हो ताकि ये हम सब को बेवकूफ बना सके.

अमृता- और ऐसा भी हो सकता है की ये मूर्ति असली सोने की नहीं हो बल्कि इसे नकली सोने से बनाया गया हो क्युकी इन लोगो के पास इतना पैसा आया कहा से की ये इतनी महंगी मूर्ति खरीद कर गिफ्ट दे सके.

इन दोनों के बात सुन कर आकाश ने भी सोचा की वो भी बहते हुए गंगा में हाथ धो ले एनी की उसने भी सोचा की चलो मई भी थोड़ा प्रतिक की बेइज्जती कर hi लेता हु.

आकाश- विक्की और अमृता सही बोल रहे है ये मूर्ति ओरिजिनल हो hi नहीं सकता क्युकी कोई भी सोने की मूर्ति पर ताम्बे की पानी क्यों चढ़ाएगा और मन लिया की इस मूर्ति पर ताम्बे की पानी चढ़ाया गया था तो ये इसको कैसे पता चला और ये आप लोगो को कहा से एक एंटीक एक्सपर्ट लग रहा है अगर ये एक एंटीक एक्सपर्ट होता तो इसका नाम पुरे सहर में होता न तो आप लोग hi बताइये की क्या आप लोगो ने कभी सुना है की कोई प्रतिक नाम का एंटीक एक्सपर्ट इस शहर में है नहीं न तो ये बात साफ है की ये हम लोगो को बेवकूफ बना रहा है.

इन तीनो के बात सुन कर सरे लोग सोच में पद गए और फिर से तरह तरह के बाटे करने लगे.

~ इन तीनो को बात में डैम तो है ये मूर्ति नकली hi होगी और ये हमें बेवकूफ बना रहा है.

~ मुझे लग रहा है की ये इस नकली मूर्ति को लेकर यहाँ अपना नाम बनाना चाहता होगा.

सरे लोग को फिर से मेरे खिलाफ देख कर अमृता विक्की और आकाश के फेस पर एक कामिनी मुस्कान आ गयी मई इन लोगो को ऐसे बात करता देख कर बोलै.

मई- आप लोगो को मेरी बातो पर अभी भी बिस्वास नहीं हो रहा है न तो ठीक है जब आप लोगो को कोई एंटीक एक्सपर्ट आ कर बताएगा तब तो बिस्वास होगा न.

मेरे बात को सुन एक आदमी मुझसे बोलै.

~है अगर कोई जाना मन एंटीक एक्सपर्ट हमें कन्फर्म करे को ये मूर्ति एक एंटीक है और ये सोने से बना हुआ है तो हम मन लेंगे की तुम सही थे और हम गलत.

मई- तो ठीक है मई अभी एक एंटीक एक्सपर्ट को यहाँ बुलाता हु शायद आप लोग उनको जानते भी होंगे उनका नाम रतन मिश्रा है अगर वो आप लोगो को आकर बोले की ये मूर्ति ओरिजिनल है तो उनकी बात को आप सब मानोगे.

मेरी बात को सुन कर विक्की हस्ते हुए बोलै.

विक्की- क्या बोलै रतन मिश्रा तुम उनको जानते भी हो या सिर्फ नाम hi सुना है रतन मिश्रा इस सहर के जाने मने एंटीक एक्सपर्ट है और वो तुम जैसे मामूली इंसान के बुलाने पर यहाँ क्यों आएंगे और क्या आप सब भी इसके बातो पर बिस्वास कर रहे है ये तो सिर्फ ऐसे hi हम सब का समय बर्बाद कर रहा है.

मई- मई रतन मिश्रा को जनता हु या नहीं वो तो अभी hi पता चल जायेगा.

इतना बोल कर मई अपना मोबाइल निकला और रतन मिश्रा को कॉल कर दिया थोड़ी देर में रतन मिश्रा मेरा कॉल उठा लिए और बोले.

रतन- है प्रतिक बोलो कुछ काम था क्या जो तुमने अभी इस वक़्त कॉल किया.

मई- है सर मुझे थोड़ा आपसे काम था क्या आप अभी फ्री है.

रतन- वैसे तो मई अपने एक दोस्त के साथ बहार डिनर करने आया था लेकिन तुम बोलो क्या बात है मई अपने दोस्त के साथ डिनर बाद में भी कर लूंगा.

मई- क्या आप अभी मल्होत्रा हाउस आ सकते है क्या.

रतन- हम तो अभी मल्होत्रा हाउस के पास के एक रेस्टोरेंट में hi है हम अभी आ जाते है लेकिन तुम पहले ये बताओ की आखिर बात क्या है.

रतन मिश्रा के बात सुन कर इस पार्टी में जो भी हुआ वो सब मई रतन मिश्रा को बताया तो रतन मिश्रा बोले.

रतन- मई बस 10 मिनट में वह पहुँचता हु और है मुझे तुम्हे अपने दोस्त से भी मिलाना था इस लिए मई उसे भी साथ में ले कर आता हु.

मई- ठीक है.

मई फ़ोन करने के बाद सबसे बोलै.

मई- आप सब बस 10 मिनट इंतजार कीजिये रतन मिश्रा जी 10 मिनट में यहाँ पहुंच जायेंगे.

मेरे बात को सुन कर सब चौक गए और फिर जो जोर से हसने लगे फिर अमृता आगे बढ़ी और मेरा मजाक उड़ाते हुए बोली.

अमृता- तुम्हारी औकात क्या है जो तुम मुंबई के जाने मने एंटीक एक्सपर्ट को यहाँ बुला सको तुम्हारी औकात सिर्फ और सिर्फ पुस्पा आंटी के गली सुन्ना और उनके घर पर बर्तन धोने के लिए hi है उसके आगे तुम कुछ नहीं कर सकते और तुम रतन मिश्रा को यहाँ बुलाने की बात करते हो.

अमृता के इतनी कड़वी बात सुन कर शनाया से बर्दास्त नहीं हुआ और वो घुसे से बोली.

शनाया- अपनी जुबान पर लगाम दो अमृता नहीं तो बाद में तुम्हे पछताने का मौका भी नहीं मिलेगा और रही बात रतन मिश्रा को यहाँ आने की तो तुम चुप चाप 10 मिनट वेट कर के क्यों नहीं देखती वो यहाँ आते है या नहीं.

इधर शनाया के बात सुन कर अमृता चीड़ गयी और पलट कर कुछ जबाब देती उससे पहले hi आकाश बिच में शनाया से बोल पड़ा.

आकाश- अमृता ने गलत क्या बोलै है शनाया वो सही hi तो बोल रही है जो लड़का एक घर जमाई हो और जो अपने सास ससुर के टुकड़ो पर पल रहा हो उसके एक बात पर सहर के इतने बड़े एंटीक मास्टर कैसे आएंगे.

शनाया- बस बहुत हो गया आकाश मई तुम्हे अपना दोस्त मन कुछ नहीं बोल रही हु इसका मतलब ये नहीं है की तुम मेरे पति को कुछ भी बोल डोज अगर आज के बाद तुमने मेरे पति के बारे में एक शब्द भी गलत बोलै तो मई भूल जाउंगी की तुम कभी मेरे दोस्त थे.

मई- अरे छोडो शनाया कीचड़ में कंकड़ मरोगी तो वो तुम पर hi गिरेगा.

अभी हम सब में बहस चल hi रहा था की तभी वह पर रतन मिश्रा के एंट्री होती है जिसे देख कर सब चौक जाते है और सबकी मुँह अपने आप hi बंद हो जाता है फिर सरे लोग उनसे मिलने के लिए उनके तरफ बढ़ते है लेकिन रतन मिश्रा सबको इग्नोर करते हुए मेरे पास आते है और मुझसे बोलते है.

रतन- मुझे आने में देर तो नहीं हो गयी प्रतिक.

मई- नहीं सर आपको देर नहीं हुयी है बल्कि आप तो समय से पहले hi आ गए.

रतन मिश्रा को सबको इग्नोर कर के मेरे पास आ कर मुझसे बात करता देख सब समझ जाते है की मई सच बोल रहा था और ये सब देख कर अमृता विक्की और आकाश के सर शर्म से झुक जाता है क्युकी अब सब लोग उनके बारे में hi उल्टा सीधा बाटे करने लगे थे हलाकि लोगो को उनके बारे में बाटे करता सुन कर उन तीनो को गुसा बहुत आ रहा था लेकिन वो चुप hi रहे इधर रतन मिश्रा अपने दोस्त से मिलवाते हुए मुझसे बोले.

रतन- प्रतिक तुम इनसे मिलो ये है मेरे दोस्त मनोज सिंघानिया ये इस सहर के जाने मने बिज़नेस मन है और मनोज ये है प्रतिक जिसके बारे में मैंने तुम्हे पहले बताया था.

मनोज- तो ये है वो महँ एंटीक मास्टर जिसकी तुम तारीफ करते नहीं थक रहे थे कैसे हो यंग मन.

मई- मई अच्छा हु सर लेकिन आप ठीक नहीं लग रहे.

मनोज- तुम्हारे कहने का क्या मतलब है.

मई- मई आपसे इस बारे में बाद में बात करूँगा.

दरअसल बात ऐसी थी की मनोज सिंघानिया को एक रेयर बीमारी थी जो मई उनको देखते hi जान गया था इस लिए मेरे मुँह ये अचानक ये निकल गया.

रतन- है तो प्रतिक बताओ किस मूर्ति का जाँच करना है.

मई- वो सामने दिख रही है न उसी मूर्ति की जाँच करनी है.

मेरे बात को सुन कर रतन मिश्रा इस मूर्ति के तरफ बढ़ रहे थे तभी उनकी नजर उस छड़ी पर पड़ी जो ऐसे hi जमीं पर फेका हुआ था फिर वो उस मूर्ति के पास न जाकर उस छड़ी के पास गए और उसे उठा लिया और थोड़े घुसे से बोले.

रतन- प्रतिक तुमने इस छड़ी को ऐसे क्यों फेक दिया है तुमको तो इस छड़ी के बारे में सब कुछ पता है फिर भी तुमने ऐसी गलती कैसे की.

मई- नहीं रतन सर इसे मैंने नहीं फेका है मई ये छड़ी दादा जी को गिफ्ट में दिया था इनको ये छड़ी मामूली लगी तो इन्होने इस छड़ी को फेक दिया.

रतन मिश्रा मेरे बातो को सुन कर चौक गए वो थोड़े घुसे से बोलै.

रतन- क्या बोलै इस छड़ी को फेक दिया नारायण मल्होत्रा जी हमने तो सुना था की आप एंटीक के बहुत शौकीन है तो फिर आपसे ये गलती कैसे हो गयी.

नारायण- सॉरी रतन जी अगर आपको ये छड़ी को फेकने से बुरा लगा हो तो लेकिन आप कहना क्या चाहते है की मुझे एंटीक की कोई जानकारी नहीं है और ये छड़ी एंटीक है.

रतन- है मई यही बोलना चाहता था क्या आपको मेरी बातो पर कुछ शक है.

नारायण- नहीं नहीं मई ऐसा कैसे बोल सकता हु लेकिन आपसे एक गुजारिश है की आप इस छड़ी के बारे में मुझे डिटेल में बताये ताकि मई अपनी गलती को सुधर सकू.

रतन- खैर इसे ऐसे फेक कर अपने गलती तो की है लेकिन चलिए मई आपको इसके बारे में बता देता हु लेकिन आप अपने दिल को संभल कर रखियेगा.

ये छड़ी कोई मामूली छड़ी नहीं है बल्कि ये पोलमी के पेड़ के लकड़ी से बना हुआ है और इसमें जो स्टोन लगा हुआ है वो कोई आम स्टोन नहीं बल्कि नील मणि है अगर आप इसे हमेशा अपने साथ रखते है तो आपके ऊपर कभी कला शया या फिर किसी तरह की कोई भी बीमारी नहीं होगी और आप हमेसा सेहत मंद रहेंगे ये छड़ी 8000 साल पुराणी एंटीक है और इसकी कीमत अभी मार्किट में काम से काम 5 करोड़ है.

बस रतन का इतना hi बोलना था की सरे लोग सौक में चले गए नारायण मल्होत्रा को तो जैसे होश hi नहीं था अमृता विक्की और आकाश के तो बोलती hi बंद हो गयी थी इधर अजय और शनाया का भी वही हल था लेकिन पुस्पा तो अपना सर पकड़ कर वही बैठ गयी थी और सरे लोग बस मेरे hi बारे में सोचे जा रहे थे.

पुस्पा- (मन में) ये कमीना मुझसे कोण सी जनम की दुश्मनी निकल रहा है पहले वो मूर्ति क्या काम था जो अब ये 5 करोड़ की छड़ी भी गिफ्ट में दे दी अगर इसे गिफ्ट करना hi था तो मई क्या मर गयी थी.

अजय- (मन में) मई प्रतिक को कितना गलत समझ रहा था मेरा दामाद तो हीरा है हीरा उसने बिना सोचे समझे hi 5 करोड़ की एंटीक पिता जी को गिफ्ट कर दिया अगर उसके जगह पर कोई और होता तो ये कभी नहीं कर पता मई आज के बाद तुमसे अच्छे से पेश आऊंगा मेरे बेटे.

शनाया- (अपने मन में) इसको एंटीक के बारे में इतना जानकारी थी और मई तो एंटीक शॉप में बेकार में hi इस्पे इतना भड़क रही थी मैंने न जाने क्या क्या बोल दिया इसे लेकिन ये मुझे पलट कर एक जबाब भी नहीं दिया क्या सच में मुझसे इतना प्यार करता है ीीी अब मई ये क्या सोचने लगी.

ऐसे hi सरे लोगो को मन में तरह तरह के बिचार चल रहे थे लेकिन पुरे हॉल में पिन ड्राप साइलेंट था तभी सभी के ख़ामोशी को तोड़ते हुए दादा जी बोले.

नारायण- क्या आप सच बोल रहे है ये छड़ी 5 करोड़ की है.

रतन- नहीं ये छड़ी 5 करोड़ से ज्यादा की है मई तो एक अनुमान लगाया है अगर आपको मेरे बात पर बिस्वास नहीं है तो आप ये छड़ी मुझे दे दीजिये मई आपके अकाउंट में 5 करोड़ अभी के अभी ट्रांसफर कर दे रहा हु.

नारायण- नहीं नहीं ये मेरे बेटे के दामाद की तरफ से मुझे गिफ्ट मिला है मई इसे कैसे बेच सकता हु.

फिर अपने मन में.

नारायण- (अपने मन में) मई कितना बेवकूफ इंसान हु ये गुरुदेव का सबसे प्रिये शिस्य है तो इसमें उनका कुछ ज्ञान तो होगा hi मैंने इसे एक तुच्छ इंसान समझ कर गलती कर दी यानि की इसके पास गुरुदेव के जैसा आयुर्वेदिक ज्ञान भी होगा इसका मतलब है की वो मूर्ति भी ओरिजिनल है मई बेकार में hi इस पर शक कर रहा था.

रतन मिश्रा सबको सौक में देख कर बोले.

रतन- आप लोग अभी से hi सौक में चले गए अभी तो मूर्ति के बारे में जानना बाकि है.

इतना बोल कर वो मूर्ति के पास गए और उसे ध्यान से देखने लगे थोड़ी देर देखने के बाद वो अपनी मैग्नीफाइंग गिलास निकल कर उसे अच्छे से चेक करने लगे.

जब रतन मिश्रा उस मूर्ति को चेक कर रहे थे तब वह पर मौजूद सरे लोगो की डिल के धड़कन बढ़ा हुआ था इधर रतन मिश्रा उस मूर्ति को ध्यान से देखने के बाद बोले.

रतन- मई इस मूर्ति के बारे ज्यादा कुछ तो नहीं बोलूंगा बस मई इतना बोलना चाहता हु की मई इस मूर्ति का आपको पुरे 6 करोड़ दूंगा क्या आप इस मूर्ति को मुझे बेचेंगे.

बस रतन मिश्रा का इतना hi बोलना था की सरे लोग आपस में बाटे करने लगे.

~ रतन मिश्रा ने इस मूर्ति को 6 करोड़ में खरीदने की बात कर रहे है इसका मतलब प्रतिक सच बोल रहा था ये मूर्ति ओरिजिनल hi है.

ऐसे hi सरे लोग आपस में बाटे कर रहे थे प्रतिक के तीनो दुश्मनो की शकल उतरा हुआ था वो लोग बस मन hi मन प्रतिक को गली दिए जा रहे थे इन सब से अलग नारायण मल्होत्रा के चेहरे पर एक मुस्कान थी और उनकी छाती गर्व से फूली हुयी थी वो सबको संत करते हुए बोले.

नारायण- आपके बातो से तो मई इतना समझ गया की ये मूर्ति ओरिजिनल है लेकिन आप मुझे इसके बारे में थोड़ा डिटेल्स में बता देते तो अच्छा रहता.

नारायण के बात सुन कर रतन के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी फिर वो मुस्कुराते हुए बोले.

रतन- ये मूर्ति आज से 5000 हजार साल पहले की है ये मूर्ति चोल वंस का धरोहर है और ये सुध सोने के बना हुआ है चोल वंस में मन्ना था की इस मूर्ति को जो भी अपने घर में रखेगा उसके घर पर कभी भी कोई भी बुरी शक्ति वास् नहीं करेगी और उसके घर पर माता लक्ष्मी की कृपा हमेसा रहेगी उनका धन और बैभव दोनों बढ़ेगा इस मूर्ति को चोल वंस में सोमस्कन्द के नाम से जाना जाता था.

रतन के बात सुन कर नारायण मल्होत्रा के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी और वो कृषि से मुझे और शनाया को देखने लगे थोड़ी देर तक हम दोनों को ऐसे hi देखने के बाद वो बोले.

नारायण- प्रतिक और शनाया तुम दोनों को थैंक यू मुझे इतना अच्छा गिफ्ट देने के लिए तुम दोनों की लाइफ हमेसा खुशाल रहे और तुम दोनों हमेशा पति पत्नी की तरह रहो लेकिन तुम दोनों से एक गलती हुयी है और मई आज यहाँ सबके सामने तुम दोनों को उसकी सजा देना चाहता हु क्या तुम दोनों को मेरे द्वारा दिया गया सजा मंजूर है और अगर तुम दोनों को मंजूर नहीं भी होगा तब भी तुम्हे मेरे द्वारा सजा को मन्ना hi होगा.

दादा जी के बात सुन कर जहा मई और शनाया चौक गए और सोचने लगे की हमसे क्या गलती हुयी है वही अमृता विक्की और आकाश के चेहरे पर पहली बार खुसी आयी थी इधर दादा जी के बात सुन अजय और शनाया दोनों घबरा गए पुस्पा तो यहाँ तक सोचने लगी जरूर मैंने hi कुछ किया होगा दादा जी के बात सुन कर शनाया थोड़ी देर सोचने के बाद बोली.

शनाया- दादा जी मुझे ये तो पता नहीं की हम दोनों से क्या गलती हुयी है लेकिन आप बोल रहे है तो हम मैंने के लिए तैयार है की हमसे कोई गलती हुयी होगी इस लिए हम दोनों सजा के लिए तैयार है.

नारायण- तो ठीक है मई पहले तुम्हे तुम्हारी गलती के बारे में बता देता हु और उसके बाद तुम्हे सजा भी सुनाऊंगा तो तुम दोनों की गलती ये है की तुम दोनों ने अपने बजट से ज्यादा बड़ा गिफ्ट मुझे दिया है जो तुम्हे नहीं देना चाहिए था और इस लिए इसकी सजा तो तुम दोनों को मिलनी hi चाहिए और इसकी सजा ये है की मल्होत्रा ग्रुप के मल्होत्रा ब्यूटी एंड केयर कंपनी जिसकी मार्किट वैल्यू 50 करोड़ की है वो मई तुम दोनों के नाम पर कर रहा हु और तुम्हे ये सजा काबुल करना hi होगा.

इतना बोल कर दादा जी मुस्कुराने लगे और उनकी बात सुन कर सरे लोग चौक गए दादा जी के बात सुन कर अजय और पुस्पा दोनों खुस हो गए थे तो वही अमृता और विक्की दोनों घुसे से पागल हो गए.

अमृता- लेकिन दादा जी वो कंपनी मुझे देने के लिए अपने वडा किया था.

दादा जी- है मैंने तुम्हे बोलै था लेकिन उस कंपनी को तुमसे अच्छा शनाया संभालेगी और अब मई इसके आगे कुछ नहीं सुनूंगा समझी.

दादा जी के घुसे से भरे शब्द सुन कर अमृता वही चुप हो गयी हलाकि की बोलना तो विक्की भी कुछ चाहता था लेकिन वो दादा जी के गुसा देख कर संत hi रहा फिर मई कुछ सोचते हुए दादा जी से बोलै.

मई- दादा जी मई ये कंपनी नहीं ले सकता क्युकी मुझे अपने डैम पर कुछ कर के दिखाना है आप इस कंपनी को पूरा का पूरा शनाया को hi दे दीजिये.

दादा जी- मुझे तुम्हारी बात सुन कर खुसी हुयी की तुम अपने डैम पर कुछ करना चाहते हो तो ठीक है मई इस कंपनी को शनाया के नाम कर दूंगा.

इतना बोल कर दादा जी वह से अंदर गए और अपने हाथ में एक पेपर ले कर आये और उस पर शनाया के सिग्नेचर ले कर वो पेपर शनाया को दे दिया शनाया आज बहुत खुस थी और वो प्यार से बस मुझे hi देखे जा रही थी.

इधर सब काम निपटने के बाद रतन मिश्रा मेरे पास आये और मुझसे बोले.

रतन- अब तो तुम्हारा काम हो गया तो क्या मई अब जा सकता हु.

मई- नहीं आप अभी नहीं जा सकते चलिए पहले हम सब कुछ कहते है इसके बाद मुझे आपके दोस्त से कुछ बाटे करना है इसके बाद आप जा सकते है.

रतन- चलो ठीक है.

इसके बाद हम सब ने जाकर खाना खाया और फिर मई रतन मिश्रा और मनोज सिंघानिया के साथ एक कोने में आ गया तो मनोज सिंघानिया मुझसे बोले.

मनोज- है भाई प्रतिक बोलो मुझसे क्या बात करना चाहते थे.

मई- आपको तो यद् hi होगा की जब आप मुझसे मिले थे तब मई आपको बोलै था की आप ठीक नहीं लग रहे है.

मनोज- अरे है यद् आया मई भी ये बात तुमसे पूछना छह रहा था अच्छा चलो अब बता दो की तुमने मुझसे ऐसा क्यों बोलै था.

मई- ठीक है बताता हु उससे पहले आप मेरे कुछ प्रश्नों के उतर दीजिये.

मनोज- है पूछो.

मई- अच्छा आप सबसे पहले ये बताइये की क्या आप जब सोते है तो अचानक आधी रेट में आपको रीढ़ की हड्डी में बहुत तेज़ दर्द होता है और वो दर्द इतना बढ़ जाता है की आपसे बर्दास्त नहीं होता क्या ये बात सही है.

मेरी बात को सुन कर मनोज चौक गया और मुझे ध्यान से देखते हुए पूछा.

मनोज- तुम्हे कैसे पता की मेरे रीढ़ के हड्डी में दर्द रहता है.

मई- मुझे आपको देखते hi पता चल गया था की आप बीमार है तभी तो मई आपको बोलै था की आप ठीक नहीं लग रहे है वैसे क्या आप इसका इलाज करवाना चाहते है.

मनोज- है मई इसका इलाज करवाना चाहता तो हु लेकिन मई आज तक बहुत सरे डॉक्टर को दिखा लिया लेकिन किसी को मेरे बीमारी का कारन पता नहीं चल रहा है इस लिए आज तक कोई भी डॉक्टर मेरा इलाज नहीं कर पाया है.

मई- मुझे पता चल गया है आपके बीमारी का कारन क्या है और मई आपका इलाज कर सकता हु क्या आप मुझसे इलाज करवाना चाहेंगे.

मनोज मेरा बात को सुन कर चौक जाता है और फिर कुश होते हुए बोलता है.

मनोज- अरे भाई तुम तो किसी अंधे से पूछ रहे हो की उसको आँख चाहिए या नहीं अगर तुम मेरा इलाज कर सको तो मई बेशक तुमसे अपना इलाज करवाना चाहूंगा लेकिन तुम पहले मुझे ये बताओ की मेरे बीमारी का कारन क्या है.

मई- आप कभी मार्टिकल आर्ट्स प्रैक्टिशनर रह चुके है क्या.

मनोज- है मई जवानी के दिन में मार्टिकल आर्ट्स प्रैक्टिस करता था.

मई- जब आप मार्टिकल आर्ट्स प्रैक्टिस करते थे तो छोड़ क्यों दिए कही ऐसा तो नहीं की आपको मार्टिकल आर्ट्स प्रैक्टिस करते हुए रीढ़ की हड्डी पर चोट आ गयी थी.

मनोज- है तुम सही बोल रहे हो मई जब मार्टिकल आर्ट्स का प्रैक्टिस करता था तब गलती से से मेरे रीढ़ के हड्डी पर चोट आ गयी थी जिसके कारन मई बहुत दिन तक हॉस्पिटल में भर्ती भी रहा था लेकिन मेरा चोट तो उसी समय ठीक हो गया था.

मई- है वो चोट तो ठीक हो गया था लेकिन आपको जब रीढ़ के हड्डी में चोट लगा था तब उस चोट के कारन अपने हड्डी में बहने वाला बोन मेरो पर इफ़ेक्ट हुआ था लेकिन जब आपका इलाज हुआ तो वो ठीक तो हो गया लेकिन बोन मेरो में कुछ प्रॉब्लम रह गयी थी जो धीरे धीरे बढ़ते गया और वो इतना बढ़ आगया है की अपने हड्डी में बोन मेरो का बहाओ रुक रुक कर हो रहा है और जिस वक़्त बोन मेरो आपके रीढ़ के हड्डी में रुकता है उस समय आपको बहुत ज्यादा दर्द महसूस होता है.

मनोज- तो क्या मई ठीक हो सकता हु.

मई- है मई आपको पूरी तरह से ठीक कर दूंगा लेकिन मेरे पास अभी समय नहीं है मेरे पास कल शाम में समय है तो आप कल शाम को मुझसे संपर्क कीजिये.

मनोज- ठीक है तो फिर हम कल शाम में मिलते है.

इतना बोल कर वो दोनों वह से चले गए उनके जाने के बाद मई शनाया के पास गया और उससे बोलै.

मई- तो अब घर चले.

शनाया- है चलते है लेकिन पहले दादा जी से घर जाने का आज्ञा ले ले.

मई- ठीक है.

इसके बाद दादा जी से आज्ञा ले कर हम लोग गाड़ी में बैठे और वह से निकल गए रस्ते में शनाया मुझसे बोली.

शनाया- थैंक यू प्रतिक आज मुझे वो ब्यूटी एंड केयर कंपनी तुम्हारे चलते hi मिला है.

मई- इसमें थैंक यू की कोई बात नहीं शनाया मई अपने वाइफ के लिए ये सब तो कर hi सकता हु.

अभी हम लोग बात कर hi रहे थे की तभी कुछ गाड़ी हमारे गाड़ी को ओवरटेक करते हुए आगे निकली और जाकर बिच रस्ते को जैम करते हुए कड़ी हो गयी और गाड़ी से कुछ लोग निकले जो दिखने में hi गुंडे लग रहे थे अभी रत का समय था इस लिए ये अंदाजा नहीं लग प् रहा था की वह पर कितने गुंडे थे क्युकी गाड़ी के लाइट से सिर्फ आगे वाले hi गुंडे दिख रहे थे.

उनको अपने गाड़ी से ऐसे रोड जैम करता देख कर शनाया ने अपना गाड़ी को वही रोक दिया तो मई उससे बोलै.

मई- मई देखता हु उन लोगो को सायद वो लोग हमारे लिए hi यहाँ आये हज आप सब गाड़ी से बहार नहीं निकालिएगा और है शनाया अगर यहाँ कुछ गड़बड़ हो या फिर वो मुझ पर हमला करे तो तुम गाड़ी तो टर्न कर के दूसरे रस्ते से घर के लिए निकल जाना मई इन लोगो को ठिकाने लगा कर आ जाऊंगा.

शनाया- नहीं तुम कही नहीं जाओगे मई गाड़ी बैक कर रहा हु और हम सब साथ में दूसरे रस्ते से घर के लिए निकलेंगे समझ गया.

मई- नहीं शनाया तुम समझ नहीं रही हो अगर इन लोगो को यहाँ रोका नहीं गया तो ये लोग हमारा पीछा करते हुए घर तक पहुंच जायेंगे और वैसे भी तुम मेरी टेंसन मत लो मई इन लोगो को संभल लूंगा.

पुस्पा- ज्यादा हीरो बनाने की जरुरत नहीं है समझे अगर तुम्हे कुछ हो गया तो खामखा तुम्हे इलाज करवाना पड़ेगा.

अजय- पुस्पा तुम ये कैसी बाटे कर रही प्रतिक से प्रतिक बीटा तुम इस सब से लड़ नहीं पाओगे इस लिए तुम भी हमारे साथ चलो.

मई- नहीं अंकल अगर मई भी आपके साथ गया तो हम सब मुसीबत में पद जायेंगे और वैसे भी हमारा किसी से कोई दुश्मनी नहीं है तो मुझे लगता है की इन सब को कोई गलत फहमी हुयी है.

शनाया- ठीक है तो फिर मई भी तुम्हारे साथ चलूंगी.

मई- नहीं तुम नहीं जाओगी तुम बस चुप चाप यहाँ से जाओ.

इतना बोल कर मई गाड़ी से उतर गया मुझे इस तरह से उतरता देख कर शनाया भी गाड़ी से उतरने को हुयी की पुस्पा ने उसे डट दिया और गाड़ी घूमने को बोली शनाया पुस्पा के बात सुन कर तुरंत गाड़ी घुमा ली गाड़ी को घूमता देख कर गुंडे आगे बढ़ने लगे लेकिन उनके और गाड़ी के बिच में मई खड़ा था.

जब वो सरे गुंडे भागते हुए मेरे पास आये तो मई उनसे पूछा.

मई- है भाई तुम लोगो की क्या परेशानी है तुम लोग ऐसे क्यों बिच में गाड़ी को खड़ा कर के रोड जैम किये हुए हो.

मेरे बात को सुन कर गुंडों का लीडर जो को रघु था वो बोलै.

रघु- हमलोग तुम्हारा hi इंतजार कर रहे थे तुम उस दिन तो एंटीक शॉप से बच कर भाग गए थे लेकिन अब तुम कहा भागोगे.

मई- देखो मुझे लगता है की आज से पहले नाटो हम मिले है और न hi मेरी तुमसे कोई दुश्मनी है फिर तुम लोगो मेरे पीछे क्यों पड़े हो.

रघु- है सही बोलै की हमारी कोई दुश्मनी नहीं है लेकिन तुम्हे मरने का आर्डर मुझे मेरे बॉस ने दिया है और तुम्हे मर कर उस लड़की को उठाना है.

मई- कोण है तुम्हारा बॉस.

रघु- तुम तो मरने वाले हो तो तुम मेरे बॉस में बारे में जान कर क्या करोगे.

अभी हम लोग बात कर hi रहे थे की तभी एक गुंडा बोलै.

गुंडा- भाई वो लड़की गाड़ी को टर्न कर के जा रही है.

रघु- जाने दो पहले इसे ठिकाना लगते है इसके बाद हम उस लड़की को उठाएंगे वैसे भी वो जाएगी भी तो अपने घर hi न मुझे उसका घर पता है आज इसे ठिकाने लगाने के बाद हम उसके घर जा कर उसे उठा लेंगे.

मई- एक बात बताओ तुम लोग शनाया को क्यों किडनैप करना चाहते हो.

रघु- वो तो उस छमिया का नाम शनाया है अच्छा है वैसे कैसे फसाया तुमने इतने तगड़े मॉल को अच्छा एक बात बताओ वो तुम्हे मजा तो भरपूर देती होगी.

रघु को शनाया के लिए इतना गन्दा बोलता देख कर मुझे बहुत गुसा आया और फिर मई अपने पीछे एक माया जल फैलाया ताकि शनाया और उसके पेरेंट्स मुझे देखे तो लगे की मई अभी भी इसने बात hi कर रहा हु माया जल फ़ैलाने के बाद मैंने घुसे से रघु को बोलै.

मई- मई तुम सब को वार्निंग दे कर छोड़ देना चाहता था लेकिन तुमने शनाया के बारे में गलत बोल कर अपने मौत को दावत दे दिया है.

इतना बोल कर मैंने एक पंच उसके पेट में मारा जिससे रघु उड़ता हुआ पीछे जा गिरा और वो दर्द से कराहने लगा और बोलै.

रघु- मई तुम्हे असं मौत देना चाहता था लेकिन तुमने मेरे ऊपर हाथ उठा कर अच्छा नहीं किया मारो रे सेल को इसको इतना मारो की ये मरने के लिए तड़पे लेकिन मौत इसको न मिले.

रघु के बात सुन कर सरे गुंडे अपने अपने हथियार ले कर मेरे तरफ भागे मई जब उनको अपने तरफ आता देखा तो मई भी उनसे लड़ने के लिए तैयार हो गया और अपने ताकत को 10 परसेंट कर लिया और फिर टूट पड़ा उन गुंडों पर फिर क्या था किसी के हाथ टूटे तो किसी का पेअर 2 मिनट में hi सरे गुंडे निचे गिर कर दर्द से तड़प रहे थे मई उनको दर्द से तड़पता देख कर रघु के पास गया जो दर से थार थार कानो रहा था.

मई- है तो अब तुम मुझे बताओ की तुम्हे यहाँ मुझे मरने के लिए और शनाया को किडनैप करने के लिए किसने भेजा था.

मेरी बात को सुन कर भी रघु कुछ नहीं बोलै तो मई उसे खींच कर एक थपड मारा मेरे तपाद कहते hi उसके मुँह से खून निकलने लगा.

मई- अब बताओगे या फिर तुम्हे और मर खाना है अब अगर तुम अपना मुँह नहीं खोले तो मई तुम्हारी हाथ पेअर दोनों ऐसा तोडूंगा की वो कभी जुड़ नहीं पाएंगे तुम्हे पूरी जिंदगी विकलांग की तरह जीना पड़ेगा इस लिए मुझे सब सच सच बताओ.

मेरे बात को सुन कर रघु दर से थार थार कपङे लगा और डरते डरते बोलै.

रघु- मुझे मेरे बॉस ने भेजा था.

मई- क्या नाम है तुम्हारे बॉस का और वो कहा रहता है.

रघु- मेरे बॉस का नाम बलदेव सिंह है और वो इस एरिया के गैंगस्टर है.

मई- ठीक है अगर तुम जिन्दा रहना चाहते हो तो मुझे अपने बॉस बलदेव सिंह के पास ले कर चलो मुझे भी देखना है की किस्मे इतना डैम है की मेरी जान शनाया पर नजर रखे.
 
अपडेट 15

गैंगस्टर बलदेव सिंह


जब मई गाड़ी से उतर कर गुंडों के सामने गया तो वो गुंडे मेरे ऊपर अपने हथियार से हमला कर दिया किसी ने चैन से हमला किया तो किसी ने तलवार से मई सरे गुंडों के हमलो से बचते हुए उनको मरना स्टार्ट किया और उनको बुरी तरह से मरने के बाद मई रघु के पास गया और उससे बोलै.

मई- देखो अपने गुंडों की हालत अगर तुम चाहते हो की तुम्हारा हालत भी इन जैसे न हो तो तुम चुप चाप मुझे बताओ की तुम्हे यहाँ भेजा किसने है.

मेरे बात को सुन कर रघु दर से थार थार कपङे लगा और डरते डरते बोलै.

रघु- मुझे मेरे बॉस ने भेजा था.

मई- क्या नाम है तुम्हारे बॉस का.

रघु- मेरे बॉस का नाम बलदेव सिंह है और वो इस एरिया के गैंगस्टर है.

मई- ठीक है अगर तुम जिन्दा रहना चाहते हो तो मुझे अपने बॉस बलदेव सिंह के पास ले कर चलो मुझे भी देखना है की किस्मे इतना डैम है की मेरी जान शनाया पर नजर रखे.

रघु- ठीक है मई आपको अपने बॉस के पास लेकर चलता हु.

मई- पहले तुम अपने साथियो को हॉस्पिटल भेजने की तयारी करो नहीं तो ये लोग यही मर जायेंगे.

मेरे बात को सुन कर रघु ने किसी को फ़ोन किया थोड़ी देर में वह एम्बुलेंस आ गयी और सरे गुंडों को लेकर चली गयी इसके बाद मई रघु के साथ उसके गाड़ी में बैठ गया और वह से निकल गया थोड़ी देर बाद हम दोनों एक बंद फैक्ट्री के पास पहुंचे तो उसने गाड़ी वही रोक दी ये देख कर मई उससे बोलै.

मई- तुम मुझे ये कहा पर ले कर आ गए.

रघु- यही है मेरे बॉस का अड्डा वो अभी यही पर होंगे.

मई- क्या तुम्हारा बॉस इस बंद हुयी फैक्ट्री में रहता है.

रघु- नहीं बॉस यहाँ नहीं रहते है वो सिर्फ यहाँ पर काम के समय होते है और आज मुझे तुम्हे मरने के लिए और शनाया मैडम को किडनैप करने के लिए टारगेट दिया गया था तो जबतक वो ये सुन नहीं लेंगे की काम हो गया है तबतक वो यहाँ से नहीं जायेंगे.

मई- अच्छा है यानि की वो अपने काळा धंधे यहाँ से करता है ठीक hi है वो अपना गैर क़ानूनी धंधा करने के लिए अच्छा जगह चुना है ठीक है अब मुझे लेकर अंदर चलो और अपने बॉस से मिलवाओ.

मेरे बात को सुन कर रघु फैक्ट्री का दरवाजा खोला और हम अंदर आ गए जब हम अंदर आये तो देखा की अंदर बहुत सरे आदमी थे जो मुझे अंदर आते देख कर मुझे घूरे जा रहे थे तभी वह एक गुंडा आया और रघु से बोलै.

गुंडा- अरे रघु तुम बहुत जल्दी वापस आ गए तुम जो काम करने गया था वो हुआ या नहीं और ये कोण है तुम इसे यहाँ लेकर क्यों आये हो तुम्हे मालूम तो है न की यहाँ पर किसी अनजान आदमी को लाना मन है फिर भी तुम इसे लेकर यहाँ आ गए.

रघु- देखो कालिया मैंने इसे यहाँ ले कर नहीं आया बल्कि ये मुझे लेकर यहाँ आया है इसने हमारे सरे साथियो को मर मर कर घायल कर दिया और मुझे जबरदस्ती यहाँ लेकर आ गया ताकि मई इसे बॉस से मिलवा सकू लेकिन तुम इसे यहाँ से सही सलामत जाने मत देना.

कालिया- क्या इसने हमारे साथियो को मारा है और उनको मरने के बाद ये यहाँ आ गया ये यहाँ आ तो गया है लेकिन अब ये यहाँ से जिन्दा वापस नहीं जा पायेगा.

इतना बोल कर उसने अपने साथी गुंडों को इशारा किया और फिर सब उसके इशारा समझ कर मुझ पर हमला करने के लिए टूट पड़े लेकिन मई भी यहाँ इनसे लड़ने के लिए तैयार था क्युकी मई जनता था की मई बलदेव सिंह से इतनी आसानी से नहीं मिल सकता.

इधर सरे गुंडे अपने हाथ में चाकू तलवार िरोनिक पाइप और हॉकी स्टिक लेकर मेरे तरफ बढ़ रहे थे तभी उन गुंडों में से 2 गुंडों भागते हुए मेरे पास आये और मुझ पर हमला कर दिया तो मई उनके हमले से बचते हुए निचे झुक गया और उन दोनों के हमले से बचते हुए एक गुंडा के पेट में लत मारा और दूसरे को मुँह पर एक पांच मर दिया जिसके कारन दोनों उड़ते हुए पीछे गए और दिवार से टकरा कर वही गिर गए और बेहोश हो गए मई अपने पूरी शक्ति के सिर्फ 5 परसेंट hi शक्ति उसे कर रहा था इस लिए ये लोग सिर्फ बेहोश हुए थे नहीं तो कबका भगवन को प्यारे हो जाते खैर जैसे hi बाकि सरे गुंडों ने अपने दोनों साथी के हल देखि वो दर गए अब उनमे आगे बढ़ने की हिमत नहीं हो रही थी हलाकि दर तो कालिया भी गया था लेकिन वो अपने दर को दबाते हुए बोलै.

कालिया- सेल तुम लोग इस पीढ़ी से दर क्यों रहे हो इसने सिर्फ दो को मारा है तुम लोग अभी 10 से भी ज्यादा हो सब एक साथ हमला करो जब तुम सब एक साथ हमला करोगे तो ये बच नहीं पायेगा.

कालिया के बात सुन कर उन गुंडों में कुछ हिमत आयी और फिर वो लोग मुझ पर एक साथ हमला कर दिया जैसे hi वो लोग मुझ पर हमला किया मई भी एक्शन मोड में आ गया.

सबसे पहले आगे वाले गुंडे को एक तपाद मारा जिसके कारन वो गोल गोल घूमता हुआ वही गिर कर बेहोश हो गया फिर मेरे पीछे से एक गुंडे ने आयरन रोड से मेरे सर पर हमला किया तो मई झुकते हुए उसके हमले से बचा और उसके पेअर को पकड़ कर उसको ऊपर फेक दिया वो किसी पतंग की तरह उड़ता हुआ जा कर दिवार से टकरा गया और वही बेहोश हो गया फिर दो और गुंडों ने मुझ पर दोनों तरफ से हमला कर दिया ये देख कर मई वह में उछला और अपने किक से दोनों के चेहरे पर मारा जिसके कारन वो वही पर गिर कर बेहोश हो गया.

इधर अपने आदमियों को एक एक कर मुझसे मर खा कर बेहोश होते देख कर कालिया घबरा गया और वो भागते हुए एक केबिन में गया उस केबिन के अंदर बलदेव सिंह बैठा हुआ था और अपने हाथो में सिगरेट 🚬 पकड़ कर पिटे हुए किसी से बात कर रहा था.

बलदेव- अरे तुम चिंता क्यों करते हो आज मेरे आदमी किसी भी हालत में उस लड़के को मर कर उस लड़की को उठा लेंगे और उसे अड्डे पर ले कर आ जायेंगे जब लड़की अड्डे पर आ जाएगी तो बाकि का बचा हुआ पैसा मुझे दे देना और लड़की को ले कर चले जाना.

इतना बोल कर वो फ़ोन कट कर देता है जैसे hi वो फ़ोन रखता है तभी उसके केबिन में कालिया भागता हुआ आता है और बोलता है.

कालिया- बॉस एक लड़का आया है और हमारे लोगो को बुरी तरह से मर रहा है.

बलदेव- क्या.... कोण है जिसकी मौत यहाँ मेरे आड़े पर खींच लायी है वो जनता नहीं है क्या की बलदेव सिंह कोण है उसकी हिमत कैसे हुयी मेरे आदमियों पर हाथ उठाने की.

इतना बोल कर बलदेव घुसे से बहार निकल जाता है और कालिया उसके पीछे पीछे भागते हुए बहार आता है इधर मई उन गुंडों से लड़ रहा था मैंने एक गुंडे के छाती पर अपने पंच से जैसे hi हमला किया वैसे hi एक पंच कही से आ कर मेरे पंच से टकरा गया और मई 2 कदम पीछे हो गया जो मेरे पंच को रोका था वो भी मेरे पंच के हमले से कुछ दूर पीछे चला गया.

मई जब उस हमले से दो कदम पीछे हुआ तो मई चौक गया क्युकी भले hi मई अपना 5 परसेंट स्ट्रेंथ लगा कर लड़ रहा था लेकिन मेरे इतने hi स्ट्रेंथ को रोकना किसी मामूली आदमी के बस की बात नहीं थी इस लिए मई चौकते हुए अपना सर ऊपर किया तो देखा की मुझसे कुछ दूर पर एक आदमी खड़ा था जो लगभग 35 या 40 साल का होगा वो मुझे घूरते हुए बोलै.

बलदेव- कोण हो तुम और यहाँ क्यों आये हो.

मई- तुम मुझे नहीं जानते हो फिर भी अपने गुंडों की मुझे मरने के लिए भेज दिया.

बलदेव- क्या बकवास कर रहे हो भला मई अपने आदमियों को तुम्हे मरने के लिए क्यों भेजूंगा.

मई- अच्छा तो तुमने मुझे मरने के लिए अपना आदमी नहीं भेजा था तो फिर (रघु के तरफ इशारा करते हुए) ये किसका आदमी है.

बलदेव सिंह रघु को देख कर सब समझ जाता है और फिर वो मुस्कुराते हुए बोलता है.

बलदेव- वो तो तुम प्रतिक हो मल्होत्रा परिवार के घर जमाई है तुम्हे मरने के लिए और तुम्हारी पत्नी को किडनैप करने के लिए मई hi इसे भेजा था और ये निकम्मा एक काम भी सही से नहीं कर पाया इसे तो मई बाद में देखूंगा अभी मई तुमसे निपट केता हु तुम आज यहाँ आ तो गए हो लेकिन अब तुम यहाँ से जिन्दा वापस नहीं जा पाओगे और यहाँ तुम्हे मरने के बाद तुम्हारी पत्नी को भी ुत्वा लूंगा.

बस बलदेव को इतना बोलना hi था की मेरा गुसा फुट पड़ा और मई एक पंच उसके मुँह पर दे मारा जिसके कारन वो उड़ता हुआ पीछे जा गिरा और उसके मुँह से खून निकलने लगा वो अपने खून को पोछते हुए खड़ा हुआ और मुझसे बोलै.

बलदेव- हम्म्म तो तुम एक मार्टिकल आर्टिस्ट हो अच्छा है आज पहली बार कोई तकर का मिला है तुमसे लड़ने में मज़ा आएगा.

इतना बोल का बलदेव मेरे तरफ आता है और उछालते हुए एक किक मेरे फेस पर मरता है जिसे मई बिच में hi पकड़ लेता हु और उसको घुमा कर दूसरी तरफ फेक देता हु जिससे वो जाकर एक दिवार से टकराता है और फिर दिवार को तोड़ते हुए दूसरे साइड जा गिरता है फिर किसी तरह से खुद को संभल कर खड़ा होता है और मेरे पास आ कर बोलता है.

बलदेव- आज पहली बार हुआ की कोई मेरे हमले को रोक कर मुझ पर हमला कर सके जरूर तुम मार्टिकल आर्ट्स के 7तह या 8तह लेवल पर होंगे इसी लिए तुम मेरे हमले को आसानी से रोक कर मुझ पर हमला कर पाए.

तुम बहुत काम उम्र में 7तह लेवल का मार्टिकल आर्टिस्ट बन गए तुम बहुत टैलेंटेड हो लेकिन इस टैलेंट का क्या फायदा जब तुम आज मरने hi वाले हो तो.

मई- देखो तुम क्या बोल रहे हो मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है लेकिन तेरी बातो से मुझे इतना तो समझ में आ गया है की तुम मुझे जान से मरने वाले हो जो तेरे बस की बात नहीं है अगर फिर भी तुम्हे मुझे मरने का प्रयास करना है तो मुझ पर हमला करो इस तरह से बाटे कर के मेरा समय बर्बाद मत करो क्युकी मेरी बीवी घर पर मेरा इंतजार कर रही होगी.

मेरे बात को सुन कर बलदेव हसने लगा और बोलै.

बलदेव- मई इतना तो समझ गया हु की मई अपने मार्टिकल आर्ट्स से तुम्हारा कुछ नहीं बिगड़ सकता (अपने पास से गन निकलते हुए) लेकिन ये तो बिगड़ सकता है न.

मई उसके हाथ में गैन देख कर हसने लगा और उससे बोलै.

मई- अगर तुमको यही सब खिलोने से खेलना है तो तुम मेरा कुछ नहीं बिगड़ सकोगे इस लिए बस तुम मुझे मेरे प्रश्नो का उतर दे दो मई चला जाऊंगा.

मुझे गन के सामने भी इस तरह निडर हो कर बात करता देख कर बलदेव हैरान रह गया.

बलदेव- तुम्हे अपनी जान का दर नहीं है क्या अरे यार बड़े बड़े लोगो को भी गन देख कर फटने लगती है लेकिन तुम तो आराम से खड़े हो लगता है की गन देख कर तुम्हारा दिमाग ख़राब हो गया.

मई- देखो मेरे पास ज्यादा समय नहीं है इस लिए तुम ये बकवास छोड़ कर मेरे प्रश्नो का उतर से दो अगर तुम मेरे प्रश्नो के उतर दे डोज तो मई तुम्हे जिन्दा छोड़ दूंगा नहीं तो आज तुम जरूर मरोगे.

मेरे बात को सुन कर बलदेव जोर जोर से हसने लगा और सीरियस चेहरे के साथ बोलै.

बलदेव- ठीक है देखते है कोण मरता है मई या तुम मई इस गन को तुम्हारे माथे के बीचो बिच शूट करूँगा और फिर देखता हु की तुम कैसे इसके गोली से बचते हो.

मई- ठीक है तो फिर मेरी भी बात सुन लो अगर तुम्हारे इस गोली से मुझे कुछ नहीं हुआ तो तुम आज जरूर मरोगे लेकिन मरने से पहले मेरे सवालो का जबाब डोज बोलो मंजूर है.

बलदेव- (हस्ते हुए) पहले तुम गोली से बच कर तो दिखाओ अगर तुम बच गए तो मई तुम्हारे सरे सवालो का जबाब जरूर दूंगा.

इतना बोल कर बलदेव ने गोली चला दी गोली गन से निकल सीधा मेरे पास आयी उस गोली का निशाना मेरा सर था अब बलदेव को पूरा बिस्वास हो गया था की मई मारा जाऊंगा लेकिन मई उसके बिस्वास पर पानी फेरते हुए उस गोली को अपने दो उंगलियों के बिच पकड़ लिया जिसे देख वो चौक गया और डरते डरते मस्से बोलै.

बलदेव- तुम तुम नहीं नहीं आप आप एक ग्रैंड मास्टर हो लेकिन ये कैसे संभव है आज तक पुरे इंडिया में सिर्फ 10 hi ग्रैंड मास्टर हुए है तो आप कैसे कोण है आप.

मई- मुझे नहीं पता की ये ग्रैंड मास्टर क्या है इस लिए बकवास बंद करो और मेरे सवालो का जबाब देने के बाद मरने के लिए तैयार हो जाओ क्युकी मई तुम्हे पहले hi वार्निंग दे दिया था.

बलदेव मेरे बात को सुन कर दर से थार थार कपङे लगता है और मेरे सामने घुटनो के बल गिर जाता है फिर अपने दोनों हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाते हुए मुझसे बोलै.

बलदेव- मुझे माफ़ कर दीजिये मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी मई आपको पहचान hi नहीं पाया अगर आज मुझे जिन्दा छोड़ देंगे तो कसम मुझे मेरे बीवी और बचो की मई हमेसा आपका गुलाम बन कर रहूँगा.

मई- मई तुम्हे माफ़ तो कर देता अगर तुम मुझ पर हमला करते तो लेकिन तुमने मेरी जान से प्यारी बीवी को हानि पहुंचने की कोशिश की है इस लिए मई तुम्हे जिन्दा नहीं छोड़ सकता और वैसे भी मई पहले hi तुम्हे जिन्दा रहने की बहुत मौका दिया लेकिन तुम मेरे बात को मने hi नहीं.

मेरे बात को सुन कर बलदेव रोने लगा और अपने गाल पर खुद थपड मरते हुए मुझसे बोलै.

बलदेव- मुझे गलती हो गयी मई पागल था की मैंने आपके बातो को नहीं मन मई पागल था जो किसी के बातो में आकर आपको और आपके फॅमिली को नुकसान पहुंचने की कोशिश की मई आपसे वडा करता हु की अगर आप मुझे छोड़ दिए तो जिसने भी मुझे ये काम दिया था मई उसे जिन्दा नहीं छोडूंगा.

बलदेव को ऐसे मेरे सामने रट और गिड़गिड़ाते देख कर मुझे उस दया आ गयी इस लिए मई उससे बोलै.

मई- अगर तुम मुझे मेरे सवालो का जबाब सच सच दिया तो मई तुम्हे छोड़ने के बारे में सोच सकता हु.

बलदेव- मई आपके हर सवालो का जबाब सच सच दूंगा आप पूछिए.

मई- ठीक है सबसे पहले मुझे बताओ की तुम्हे मुझे मरने के लिए और शनाया को किडनैप करने के लिए किसने बोलै था.

बलदेव- ठकराल परिवार का वरिष्ठ नीरज ठकराल ने मुझे ये सब करने के लिए बोलै था और उसने बोलै था की वो शनाया से प्यार करता है और आप उससे जबरदस्ती सदी कर लिए इस लिए वो चाहता था की मई आपको मर दू और शनाया को किडनैप कर के उसके पास भेज दू ताकि वो शनाया से सदी कर सके.

मई- मई जनता था की वही कमीना होगा.

बलदेव- आप बोलो तो मई उसे टपका दू.

मई- नहीं ऐसा करने की जरुरत नहीं है मई खुद उसे देख लूंगा.

इतना बोल कर मई वह से जाने लगा तो बलदेव मेरे सामने आ गया और अपने घुटनो पर बैठ कर बोलै.

बलदेव- प्लीज आप मुझे अपने अंदर में रख लीजिये मई वडा करता हु की मई सरे गलत काम छोड़ दूंगा और हमेशा आपका वफादार बांके रहूँगा.

मई- तुम हमेशा मेरा वफादार रहोगे मुझे तो ऐसा नहीं लगता.

बलदेव- आप एक बार आजमा कर देख लीजिये मई आपके लिए अपना जान भी दे दूंगा.

मई- अगर ऐसी बात है तो ठीक है मुझे तुम्हारी जान नहीं चाहिए बस तुम मुझे अपनी एक ऊँगली काट कर दे दो.

मेरे बात को सुन कर बलदेव चौक गया और फिर कुछ देर सोचने के बाद वो बोलै.

बलदेव- अगर मेरी वफादारी के साबुत में आपको मेरी ऊँगली hi चाहिए तो मई देने के लिए तैयार हु.

इतना बोल कर वो पास में hi पड़ा एक चाकू उठाया और अपने एक ूँगी पर चला दिया लेकिन चाकू ऊँगली को कट करती उससे पहले hi मई उसके हाथ को पकड़ लिया जब उसने देखा की वो मैंने उसके ऊँगली काटने से पहले hi उसके हाथ को पकड़ लिया तो वो आश्चर्य चकित हो कर मुझे देखने लगा मई उसे आश्चर्य चकित होता देख कर उससे बोलै.

मई- तुम्हे क्या लगा की मई अपने आदमी को कोई नुकसान होने दूंगा ये तुम्हारे लिए एक परीक्षा थी और तुम मेरी इस परीक्षा में पास हो गए.

बलदेव- (खुस होते हुए) तो अब मई आपके अंदर में रह कर काम कर सकता हु.

मई- है तुम मेरे अंदर में रह कर काम तो कर सकते हो लेकिन उसके लिए तुम्हे सबसे पहले अपने सरे काळा धंधे को बंद करने होंगे क्युकी मुझे लड़की को किडनैप करने वाले उनका रपे करने वाले ड्रग्स बेचने वाले और ह्यूमन ट्रैफिकिंग करने वाले बिलकुल पसंद नहीं है और अगर वो मेरे सामने आ जाये तो मई उनको नमो निशान इस दुनिया मिटा दूंगा.

बलदेव- भाई मई भी इन सब चीजों के खिलाफ हु वो तो नीरज ने झूठ बोलै था की शनाया मैडम उनसे प्यार करती है और आप शनाया मैडम से जबरदस्ती सदी किये है तब मई उसका काम करने के लिए तैयार हुआ था नहीं तो मई खुद इन सब कामो से नफरत करता हु.

मई- ठीक है तो अब से तुम जो जो इन सब चीजों का बिज़नेस कर रहे है उनको बर्बाद कर दो और मई इस काम में तुम्हारा हेल्प करूँगा जहा भी तुम्हे मेरी जरुरत हो बस मुझे फ़ोन कर देना.

बलदेव- ठीक है बॉस अब इस मुंबई सहर में कोई भी गैर क़ानूनी काम नहीं करेगा और मई यहाँ ह्यूमन ट्रैफिकिंग करते हुए किसी को पकड़ा तो मई उसे वही मर दूंगा.

मई- ठीक है तो अब तुम मुझे बताओ की मार्टिकल आर्ट्स के बारे में क्या क्या जानते हो.

बलदेव- मार्टिकल आर्ट्स के बारे में लेकिन आप ये क्यों रहे हो आप तो खुद एक ग्रैंड मास्टर हो तो आपको तो पता hi होगा.

मई- वो क्या है न की मई बचन से hi पहाड़ो के बिच पला बढ़ा हु और वही पर एक गुरु से ट्रेनिंग लिया है इस लिए मुझे पता नहीं है की मार्टिकल आर्ट्स में कोण कोण से लेवल होते है.

बलदेव- वह तो ऐसा है ठीक है मई आपको मार्टिकल आर्ट्स के बारे जितना मई जनता हु सब बताता हु मार्टिकल आर्ट्स में 1सत लेवल से ले कर 9तह लेवल आते है इसके बाद आता है हाफ ग्रैंड मास्टर और फिर हाफ ग्रैंड मास्टर के बाद आता है ग्रैंड मास्टर.

हाफ ग्रैंड मास्टर हवा में उड़ सकते है और हवा में hi लड़ाई भी कर सकते है लेकिन ग्रैंड मास्टर हवा को कण्ट्रोल कर सकते है ग्रैंड मास्टर का रफ़्तार बहुत ज्यादा होता है वो लोग 1 मिनट्स 1 कम की दुरी तय कर सकते है.

मई- और इसके आगे भी कोई लेवल है.

बलदेव- इसके आगे कोई लेवल है या नहीं ये मुझे पता नहीं लेकिन है इंडिया में अभी तक सिर्फ ग्रैंड मास्टर hi हुए है अगर इससे ऊपर भी कोई होगा तो मुझे पता नहीं है.

मई- (अपने मन में) अगर एक ग्रैंड मास्टर सिर्फ हवा को कण्ट्रोल कर सकता है तो मई तो पांचो तत्वों को कण्ट्रोल कर सकता हु और फिर मई अपनी रफ़्तार की बात करू तो मई अगर अपनी पूरी शक्ति का इस्तेमाल करू तो मई 1 सेकंड में 5 कम जा सकता हु तो फिर मई अभी किस लेवल पर हु छोडो मई भी क्या बेकार के बाटे सोचने लगा.

बलदेव- बॉस आप क्या सोच रहे है.

मई- कुछ नहीं वैसे तुम अभी किस लेवल पर हो.

बलदेव- मई अभी 7तह लेवल पर हु बॉस.

मई- तो क्या तुम 8तह लेवल पर जाना चाहते हो.

बलदेव- जाना तो चाहता हु लेकिन ये होगा कैसे.

बलदेव के बात सुन कर मई मुस्कुराने लगा और फिर मई अपने पैकेट से एक संजीवनी गोली को निकला और उसे देते हुए बोलै.

मई- ये गोली लो और इसे अपने घर जाने के बाद खा लेना.

बलदेव- ये कोण सी गोली है बॉस और इससे क्या फायदा होगा.

मई- ये संजीवनी गोली है इसको खाने से क्या फायदा होगा जब तुम इसे खाओगे तब पता चल जायेगा ठीक है अब मई चलता हु.

बलदेव- ठीक है बॉस लेकिन बॉस उस नीरज का क्या करना है.

मई- उसे अभी कुछ मत करो बस उसपे नजर रखो और उसके खिलाफ जितना हो सके उतना साबुत एकता करो जब साबुत एकता हो जायेगा तब मई बताऊंगा की आगे क्या करना है और है अपने गैंग में मार्टिकल आर्टिस्ट को शामिल करो और उनको शामिल करने से पहले उनका बैकग्राउंड चेक कर लेना और है किसी को बोल कर मुझे मेरे घर तक ड्राप करवा दो.

बलदेव- ठीक है बॉस हो जायेगा.

इसके बाद मई उसका नंबर लिया और अपना नंबर उसे दे दिया और फिर बलदेव ने कालिया को बोलै की वो मुझे मेरे घर तक छोड़ने के लिए बोलता है इधर जब मई बलदेव का नंबर अपने मोबाइल में सेव कर रहा था तो देखा की मेरा मोबाइल साइलेंट मोड पर था और उसमे शनाया के बहुत सरे मिस्स्कॉल थे मई शनाया के इतने सरे मिस्स्कॉल देख कर घबरा गया था इसलिए मई तुरंत उसके पास कॉल किया जब शनाया ने कॉल उठाया तो वो मुझसे बोली.

शनाया- हैल्लो कहा हो तुम तुम ठीक तो हो न तुम मेरा कॉल क्यों नहीं उठा रहे थे.

मई- अरे बस बस कितना बोल रही हो मई ठीक हु मेरा मोबाइल साइलेंट मोड में था इस लिए मुझे पता नहीं चला.

शनाया- उन गुंडों का क्या हुआ उन्होंने तुम्हारे साथ कुछ किया तो नहीं न.

मई- नहीं उन्होंने मेरे साथ कुछ नहीं किया वो लोग गलती से हमारा रास्ता रोक दिया था वो लोग वह किसी और का इंतजार कर रहे थे.

शनाया- जानते हो जब तुम कॉल नहीं उठा रहे थे तो मई कितना घबरा गयी थी.

मई- वोय होय मेरी फ़िक्र हो रही है कही मेरी बीवी को मुझसे प्यार तो नहीं हो गया.

शनाया मेरी बात सुन कर मुस्कुराने लगा फिर थोड़ी सीरियस टोन में मुझसे बोली.

शनाया- बकवास मत करो मुझे तुम्हारी फ़िक्र क्यों होगी और तुम ये गलती से भी मत सोचना की मुझे तुमसे प्यार हो गया है.

इतना बोल कर शनाया ने कॉल कट कर दिया मई जब बात कर रहा था तब तक कालिया गाड़ी लेकर वह आ गया और फिर मई उस गाड़ी में बैठ कर घर के लिए निकल गया जब मई घर पहुंच कर बेल्ल बजाय तो शनाया ने आ कर गेट खोली और फिर वो अपने रूम में सोने चली गयी इधर मई भी गेस्ट रूम में जाकर सो गया.

नेक्स्ट डे सुबह में उठा कर मई हवेली गया और अपना ट्रेनिंग कम्पलीट किया इसके बाद मई कुछ संजीवनी गोली को अपने पास रख कर जड़ी बूटी के बगीचे में चला गया जो मई खुद hi वह पर उगाया था वह जाकर जड़ी बूटियों के ग्रोथ को देखा और फिर टेलिपोर्ट हो कर सीधा घर आ गया.

इसके बाद सुबह का चाय सबके लिए रेड्डी किया और एक कप चाय लेकर शनाया के रूम में आ गया तो देखा की शनाया वह पर नहीं थी मई ये देख कर की शनाया वह पर नहीं है तो मई घबरा गया क्युकी जब से मई इस घर में आया हु तबसे मैंने देखा था की शनाया इस सोई हुयी रहती थी लेकिन वो अभी वह पर नहीं थी मई उसको पुरे घर में उसे ढूंढने लगा लेकिन वो मुझे कही नहीं मिली तो मई सोचा की एक बार ऊपर टेरेस पर जाकर देखु ये सोच कर मई टेरेस पर आ गया और टेरेस पर आ कर जो देखा उसे देख कर मई चौक गया क्युकी वह पर शनाया मार्टिकल आर्ट्स की ट्रेनिंग कर रही थी.

मई जहा था वही पर खड़ा खड़ा बस शनाया को ट्रेनिंग करते हुए देखे जा रहा था कुछ देर तक शनाया वैसे hi ट्रेनिंग करती रही फिर कुछ देर जब शनाया के ट्रेनिंग कम्पलीट हुआ तो उसकी नजर मुझ पर गयी और वो मुझे देखते hi वो मेरे पास आ गयी और मुझसे बोली.

शनाया- प्रतिक तुम.. तुम यहाँ क्या कर रहे हो

मई- वो मई चाय लेकर तुम्हारे रूम में आया था जब तुम मुझे वह नहीं मिली तो मई तुम्हे खोजते हुए ऊपर आ गया वैसे तुम मार्टिकल आर्ट्स की भी ट्रेनिंग करती हो क्या.

शनाया- है मई पिछले 3 सालो से मार्टिकल आर्ट्स की ट्रेनिंग कर रही हु.

मई- ये अच्छी बात है वैसे भी हर लड़की को सेल्फ डिफेन्स सीखना hi चाहिए अच्छा तुम अभी कोण से लेवल पर हो.

शनाया- मई अभी 5तह लेवल पर हु और मई 6 मंथ से इसी लेवल पर फांसी हुयी हु.

मई- अच्छा तो तुम अभी 5तह लेवल पर हो नीस लेकिन तुम 5तह लेवल से आगे क्यों नहीं बढ़ प् रही हो.

शनाया- पता नहीं प्रतिक मुझे ऐसा लगता है की मेरे अंदर कुछ ऐसा है जो मुझे आगे बढ़ने hi नहीं दे रहा है.

मई- हम्म तो जब तुम 5तह लेवल से आगे hi नहीं बढ़ पा रही हो तो अब तुम आगे क्या करोगी.

शनाया- मई जब तक अपने रुकावट को पर नहीं कर लेती मई हर नहीं मानूगी.

मई- अगर मई तुम्हारी मदत 5तह लेवल पर करने में करू तो इसमें मेरा क्या फायदा होगा.

शनाया- देखो प्रतिक मई पहले से hi टेंसन में हु इस लिए मुझे अभी तुम्हारा मजाक पसंद नहीं आ रहा है.

मई- मई मजाक नहीं कर रहा हु मई सच में तुम्हे आगे बढ़ने में मदत कर सकता हु.

शनाया- क्या तुम एक मार्टिकल आर्टिस्ट हो जो तुम मेरी मदत करोगे.

मई- नहीं मई कोई मार्टिकल आर्टिस्ट नहीं हु लेकिन मई फिर भी तुम्हारी मदत कर सकता हु.

शनाया- ठीक है लेकिन तुम मेरी मदत करोगे कैसे.

मई- तुम अपने रूम में चलो मई तोड़ी देर में आता हु.

शनाया- ठीक है.

इतना बोल कर शनाया अपने रूम में चली जाती है और मई गेस्ट रूम में आ जाता हु और फिर वह से एक संजीवनी गोली ले कर शनाया के रूम में जाता हु मुझे अपने रूम में आया देख कर शनाया मुझसे बोली.

शनाया- अब बताओ तुम मेरी हेल्प कैसे करोगे.

मई- मई नहीं तुम्हारी हेल्प ये गोली करेगी.

Shanaya-Ye कोण सी गोली है और ये मुझे लेवल पर करने में हेल्प कैसे करेगी.

मई- इस गोली का नाम संजीवनी गोली है इस गोली का का खोज अभी अभी हुआ है और ये अभी मार्किट में भी नहीं आया है जब तुम इसको खाओगी तो ये तुम्हारे शरीर के सरे गन्दगी को पसीने के रस्ते बहार कर देगा और इससे तुमको इतना शक्ति मिलेगा की तुम आसानी से अपने लेवल को पर कर लोगी इसका और भी फायदा है वो तुम्हे इसे खाने के बाद पता चलेगी.

शनाया- इस गोली का इतना फायदा है तो ये बहुत महंगा भी होगा और तुम मुझे ये बताओ की जब ये गोली मार्किट में आयी hi नहीं है तो तुम्हे ये कहा मिल गयी कही ऐसा तो नहीं की तुम मुझे कोई मामूली सी गोली खिला कर मुझे बेवकूफ बना रहे हो.

मई- पहली बात की मई तुम्हे कोई बेवकूफ नहीं बना रहा और दूसरी बात की इस गोली को जिसने बनाया है वो मेरा खास दोस्त है समझी.

शनाया- ाचा और वो खास दोस्त कोण है थोड़ा मुझे भी बताना.

मई- यार तुम सिर्फ आम खाओ न उसकी गुठली मत गिनो समझी मई यहाँ तुम्हारी हेल्प कर रहा हु और तुम सवाल पर सवाल पूछे जा रही हो एक बात यद् रखना चाहे दुनिया इधर का उधर की क्यों न हो जाये मई तुम्हे न कभी धोखा दूंगा और न hi कभी तुम्हे कोई नुकसान होने दूंगा अगर तुमको मुझ पर थोड़ा भी बिस्वास है तो ये दवा खा लो और अगर मुझ पर बिस्वास नहीं है बोल दो मई ये गोली के कर चला जाऊंगा.

शनाया- मई जानती हु की तुम मुझे कभी नुकसान नहीं होने देंगे और मुझे तुम पर पूरा बिस्वास है.

इतना बोल कर शनाया उस गोली को खा लेती है गोली खाने के कुछ देर बाद तक भी उसका असर नहीं होता देख कर शनाया मुझसे बोली.

शनाया- लगता है की तुम्हारा दोस्त तुम्हे बेवकूफ बना दिया क्युकी ये गोली खाने के इतने देर बाद भी कोई असर नहीं दिखा रहा है.

मई- अरे थोड़ा वेट करो गोली असर होने में थोड़ा टाइम लगता है.

अभी मई उसे बोल hi रहा था की तभी उसके शरीर के गर्मी बढ़ने लगती है धीरे धीरे उसके शरीर में गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है जिसके चलते उसके शरीर से काळा कलर का चिपचिपा पदार्थ निकलने लगता है और उसके पुरे शरीर पर एक परत जैसा बनाने लगता है और उस काळा कलर का चिपचिपा पदार्थ से बदबू भी बहुत खतरनाक आ रही थी.

शनाया- ये मेरे शरीर से काळा कलर का चिपचिपा पदार्थ क्यों आ रहा है और याक ये बदबू इसका बदबू कितना बेकार है लग रहा है मुझे उलटी आ जाएगी.

मई- ये चिपचिपा पदार्थ तुम्हारे शरीर के अंदर का गन्दगी है जो इस दवा के कारन बहार निकल रहा है बस थोड़ी देर और इस बदबू को बर्दास्त कर लो जब तुम्हारे शरीर से चिपचिपा पदार्थ आना बंद हो जायेगा तब तुम जा कर स्नान कर लेना और फिर तुम स्नान करने के बाद अपने ट्रेनिंग पर फोकस करना देखना तुम्हारा लेवल कैसे बढ़ता है.

इतना बोल कर मई वह से निकल गया और चला गया नास्ता रेड्डी करने के लिए इधर जब मई वह से गया तो शनाया भी अपने सरे कपडे निकल कर बाथरूम में चली गयी बाथरूम में जाने के बाद वो करीब 15 मिनट तक इंतजार करती है तब जा कर वो चिपचिपा पदार्थ निकलना बंद होता है और वो चिपचिपा पदार्थ शनाया के पुरे शरीर को धक् लेता है इसके बाद शनाया स्नान करती है और फिर बहार आ जाती है वो अब पहले से ज्यादा अपने शरीर को हल्का महसूस कर रही थी उसको ऐसा लग रहा था जैसे उसकी ये नया जनम हो उसकी लम्बाई भी कुछ इंच बढ़ गया था और वो अपने शरीर में इतना ताकत महसूस कर रही थी की उसको लग रहा था की वो अपने एक पंच में पत्थर को भी धूल बना देगी.

अपने शरीर में इतना ताकत देख कर वो बहुत कुश होती है वो खुसी से उछलने लगती है तभी उसकी नजर दीवाल पर लगे आईने पर जाता है वो आईने में अपने चेहरे को देख कर चौक जाती है और खुसी से छिलने लगती है और बोलने लगती है.

शनाया- थैंक यू थैंक यू थैंक यू प्रतिक तुम्हारी इस दवा ने तो सच में कमल कर दिया मेरा चेहरा तो बिना मेकअप के hi इतना सुन्दर लग रहा है मेरी बॉडी में ऐसा लग रहा है जैसे 10 हाथियों की ताकत आ गयी हो मई अब जा कर ट्रेनिंग कर के देखती हु.

इसके बाद शनाया ऊपर टेरेस पर जाकर ट्रेनिंग करने लगती है करीब आधा घंटा ट्रेनिंग करने के बाद वो 5तह लेवल पर करके 6तह लेवल में पहुंच जाती है पुरे 1 लेवल पर करने के बाद भी उसके शरीर की एनर्जी काम नहु हुयी थी इस लिए वो लगातार ट्रेनिंग करते रहती है करीब एक घंटा और ट्रेनिंग करने के बाद वो 6तह लेवल पर कर के 7तह लेवल में पहुंच जाती हैं जिसे देख कर वो बहुत कुश हो जाती है और वही छत पर hi बचो के जैसे उछलने लगती है.

इधर मई नास्ता रेड्डी करने के बाद शनाया को नास्ते के लिए बुलाने उसके रूम में गया तो वो वह पर नहीं थी तो मई समझ गया की वो ऊपर छत पर होगी इस लिए मई ऊपर छत पर चला गया तो देखा की शनाया बचो की तरह खुसी से उछाल रही है फिर जैसे hi उसकी नजर मुझ पर वो भागते हुए आयी और मेरे गले लग गयी और फिर मेरे गाल पर चूमते हुए बोली थैंक्स प्रतिक आज मई तुम्हारे वजह से 5तह लेवल पर कर के 7तह लेवल पर पहुंच गयी तुमने मुझे जो दवा दिया था वो दवा कमल का है उससे मुझे बहुत तरह के फायदा हुआ है.

मई- इसमें थैंक की क्या बात हो गयी मई तो वैसे भी अपनी प्यारी बीवी के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता हु तो ये दवा तो मामूली बात हो गयी.

शनाया मेरे बात को सुन कर मुझे देखने लगी फिर थोड़ी देर देखने के बाद वो बोली.

शनाया- तुम अपना सामान गेस्ट रूम से निकल कर मेरे रूम में शिफ्ट कर देना आज से तुम वही रहोगे.

शनाया के बात सुन कर पहले तो मई चौक गया फिर मई खुसी से उछाल पड़ा और शनाया को बोलै.

मई- थैंक शनाया आज तुमने मुझे अपने रूम में रहने की जगह दी उसके लिए मई आज बहुत खुस हु (फिर अपने मन में) आज तुमने जिस तरह से अपने रूम में रहने की इजाजत दी है वैसे hi एक दिन अपने दिल में भी रहने की इजाजत डौगी देख लेना.

Shanaya-Is तरह से ज्यादा खुस होने की जरुरत नहीं है मैंने तुम्हे सिर्फ अपने रूम में रहने के लिए बोलै है इसका मतलब ये मत समझना की मई तुम्हे अपने बीएड पर सोने दूंगी तुम्हे मेरे रूम में जो सोफे है उस पर सोना होगा मेरे बीएड पर आने के लिए तुम्हे अभी बहुत म्हणत करनी पड़ेगी समझे बच्चू.

मई- आज जिस तरह तुम्हारे रूम में घुस रहा हु न वैसे hi एक दिन तुम्हारे दिल में घुस कर तुम्हारे बीएड तक आ जाऊंगा देख लेना शनाया मई तुम्हे कुछ देना चाहता हु.

शनाया- क्या देना चाहते हो तुम.

फिर मैंने अपने जेब से लॉकेट निकला और शनाया के दे दिया ये वही लॉकेट था जो मई रतन मिश्रा से एंटीक शॉप में लिया था और मई इस लॉकेट में सुरक्षा कवच दाल दिया था जिसके चलते अब शनाया बिलकुल सेफ रहती उसके लॉकेट के रहते शनाया कोई कोई भी हानि नहीं पंहुचा सकता था अगर कोई गलत इरादे के साथ शनाया को छूना भी चाहता तो उसे बिजली के झटके लगते और उसके ऊपर किसी भी तरह एनर्जी चाहे वो नेगेटिव एनर्जी हो या पॉजिटिव एनर्जी से कोई अटैक करता तो भी शनाया को कुछ नहीं होता इधर वो लॉकेट देख कर शनाया खुस हो गयी और बोली.

शनाया- वाओ कितनी खूबसूरत पेन्डेन्ट है क्या ये तुम मेरे लिए आये हो.

मई- है मई ये तुम्हारे लिए hi लाया हु.

शनाया- लेकिन ये तो बहुत महंगा लग रहा है.

मई- मई पहली बार अपने वाइफ को कोई गिफ्ट दे रहा हु तो ये सस्ता कैसे गिफ्ट कैसे देता.

शनाया- लेकिन तुम्हारे पास इतना सारा पैसा आया कहा से.

मई- अरे तुम भूल गयी ये लॉकेट एंटीक शॉप में रतन मिश्रा से चलेंगे में जीता था इस लिए अब मई ये तुम्हे देना चाहता हु क्युकी ये खूबसूरत पेन्डेन्ट एक खूबसूरत लड़की के गले में hi अच्छा लगेगा.

मेरे बात को सुन कर शनाया बस मुस्कुरा दी लेकिन बोली कुछ नहीं और फिर वो पेन्डेन्ट ले कर गले में पहन ली फिर हमलोग वह से निचे आ गए नास्ता करने के लिए नास्ते के दौरान शनाया के पापा और मम्मी शनाया को बड़े गौर से देख रहे थे.

शनाया- माँ डैड आप दोनों मुझे इस तरह से घर कर क्यों देख रहे है.

पुस्पा- बीटा आज तुमने चेहरे पर कुछ लगाया है क्या आज तुम्हारा चेहरा खूब खिला खिला और सुन्दर लग रहा है.

अजय- और तुम्हारी हिघ्त भी पहले से कुछ बढ़ी हुयी लग रही है.
 
मेघा अपडेट

थे बोर्न ऑफ़ सुपर बॉय

संजीवनी गोली खाने के बाद शनाया में बहुत चेंज हुआ था अब वो पहले से कही ज्यादा सुन्दर हो गयी थी उसकी हिघ्त भी बढ़ गया था उसके शरीर के अंदर जो भी प्रॉब्लम या बीमारी था संजीवनी गोली के के कारन बहार निकल गया था और तो और वो अपने मार्टिकल आर्ट्स के 5तह को पर करते हुए 6तह लेवल और उसके बाद 7तह लेवल पर पहुंच गयी ठीक इस लिए आज वो बहुत खुद को बहुत ज्यादा ताकतवर महसूस कर रही थी.

इस लिए वो बहुत खुस थी और मन hi मन सोच रही थी की ये मेरी किस्मत अच्छा है की प्रतिक मेरे जीवन में आया और वो प्यार भी मुझसे बहुत करता है क्युकी जितना मेरे घरवाले उसको बेइज्जती करते है उसके बाद भी वो मेरे लिए बहुत कुछ कर रहा है अगर उसके जगह पर कोई दूसरा होता तो कबका हम सब को छोड़ कर चला जाता मई तो उसको रूम में रहने की परमिशन दे hi दिया है और वो बदमाश क्या बोल रहा था की जैसे मई तुम्हारे रूम में घुसा हु वैसे hi तुम्हारे दिल में भी एक दिन अपना जगह बना लूंगा अब उसको क्या पता की वो तो मेरे दिल में कब का जगह बना लिया है लेकिन मई उसे अभी बताउंगी नहीं इतनी आसानी से तो ये शनाया उसको मिलेगी नहीं मुझे पाने के लिए उसे पहले मेरी माँ को दिया हुआ प्रॉमिस पूरा करना होगा.

यही सब सोचते हुए वो नास्ता करने के लिए दिंनिंग टेबल पर आ गयी और बैठ कर नास्ता करने लगी इधर शनाया जब दिंनिंग टेबल पर आयी तो उसे देख कर शनाया के मम्मी और पापा चौक गए और उसे घर घर कर ध्यान से देखने लगे अपने माँ और डैड को इस तरह खुद को घूरता देख कर शनाया बोली.

शनाया- माँ डैड आप दोनों मुझे इस तरह से घर कर क्यों देख रहे है.

पुस्पा- बीटा आज तुमने अपने चेहरे पर कुछ लगाया है क्या आज तुम्हारा चेहरा खूब खिला खिला और सुन्दर लग रहा है.

अजय- और तुम्हारी हिघ्त भी पहले से कुछ बढ़ी हुयी लग रही है क्या बात है तुम कोई मेडिसिन ले रही हो क्या.

शनाया- माँ डैड आप ये क्या बाटे कर रहे है ऐसा कुछ भी नहीं है मई अपने चेहरे पर कुछ नहीं लगाया और न hi मई कोई मेडिसिन ले रही हु शायद आपको कोई भ्रम हो रहा है मई जैसे पहले दिखती थी वैसे hi अभी भी दिख रही हु मुझमे कोई फरक नहीं आया है.

हलाकि शनाया के बात सुन कर उन दोनों को उस पर बिस्वास तो नहीं हुआ लेकिन वो दोनों आगे कुछ नहीं बोले और चुप चाप नास्ता करने लगे इस तरह अपने माँ और डैड को चुप चाप नास्ता करते देख कर शनाया को थोड़ा गिल्ट महसूस हुआ तो वो अपने मन में बोली.

शनाया- (मन में) मुझे माफ़ कर दीजियेगा माँ डैड मई आपको सचाई नहीं बता सकती क्युकी मुझे प्रतिक ने सचाई बताने से मन किया है और मई उसका मेरे प्रति जो बिस्वास है वो मई नहीं तोड़ सकती.

अभी हम सब नास्ता कर hi रहे थे की तभी शनाया के मोबाइल पर नारायण मल्होत्रा के कॉल आया शनाया अपने दादा जी के कॉल देख कर वो वह से उठ कर एक साइड में जाकर तुरंत उनका कॉल रिसीव की और बोली.

शनाया- हैल्लो दादा जी अपने इतनी सुबह सुबह कॉल किया कुछ काम था क्या.

नारायण- क्यों कुछ काम होगा तभी मई तुम्हारे पास कॉल कर सकता हु क्या.

शनाया- नहीं दादा जी आपका जब भी मन हो आप मेरे पास कॉल कर सकते है.

नारायण- वैसे प्रतिक कैसा है ठीक तो है न वो.

शनाया- (मेरे तरफ देखते हुए) है दादा जी वो भी ठीक है.

नारायण- देखो शनाया मई जनता हु की तुम्हारी सदी उससे मैंने जोर जबरदस्ती से करवाया है लेकिन प्रतिक जैसा तुम सोचती हो वैसा लड़का नहीं है मई एक बात तुमको दावे के साथ बोल सकता हु की तुमको प्रतिक के जैसा पति कभी नहीं मिल सकता था इस लिए मई तुमको बोलूंगा की प्रतिक को समझो और कोशिश करना की तुम दोनों में जो भी प्रॉब्लम हो वो सोल्वे हो जाये.

शनाया- जी दादा जी मई पूरी कोशिश करुँगी की हमारा रिस्ता कभी न टूटे.

नारायण- गुड अरे मई तो भूल hi गया मई तुमसे ये पूछने के लिए कॉल किया था की तुम आज कंपनी में आ सकती हो मुझे तुम्हे तुम्हारे कंपनी के सरे एम्प्लॉय से मिलवाना था क्युकी अब से उस कंपनी को तुम्हे hi संभालना है.

शनाया- दादा जी अभी तो मई सोल्लगे जा रही हु लेकिन मई लंच के बाद कंपनी आ जाउंगी.

नारायण- ठीक है मई तुम्हारा इंतज़ार करूँगा.

इतना बोल कर दादा जी ने कॉल कट कर दिया इसके शनः हम सब के पास आ गयी तो पुस्पा उससे बोली.

पुस्पा- किसका कॉल था.

शनाया- दादा जी का कॉल था.

पुस्पा- क्या बोल रहे थे.

शनाया- वो पूछ रहे थे की मई कंपनी कब से ज्वाइन करूँगा.

पुस्पा- वो मई तो ये भूल hi गयी थी की अब तुम एक कंपनी के मालकिन हो तो कब से कंपनी ज्वाइन करने का इरादा है.

शनाया- माँ मैंने दादा जी को बोलै है की मई आज लंच के बाद कंपनी आ जाउंगी.

अजय- अच्छा किया जो तुम कंपनी ज्वाइन करने के बारे में सोची क्युकी तुम अभी से अगर कंपनी को ज्वाइन कर लेती हो तो तुम्हारी पढाई ख़तम होते होते कंपनी के सारा सिख जाओगी.

इतना बोल कर अजय चौप हो गए इसके बाद वह कोई कुछ नहीं बोलै और फिर सब अपना अपना नास्ता फिनिश किया फिर मई और शनाया सोल्लगे के लिए निकल गए जहा मई तस्य से सोल्लगे गया तो वही शनाया अपनी कार से सोल्लगे आयी थी.

सोल्लगे आने के बाद मई सीधा क्लास में आ गया और फिर पढाई करने लगा फिर लंच टाइम में मई और सोनू कैंटीन आ गए और एक खली टेबल देख कर वही बैठ गए तभी वह पर शनाया और पायल आ गयी और दोनों आ कर मेरे साथ बैठ गयी और फिर पायल मेरे तरफ देखते हुए बोली.

पायल- ही प्रतिक कैसे हो.

मई- मई तो ठीक हु तुम बताओ.

पायल- मई भी ठीक हु.

मई- (अपने मन में) ये लड़की जब जब मेरे पास आती है तो मुझे ऐसा क्यों लगता है की ये कोई मेरा अपना hi है मुझे ऐसा महसूस होता है की इससे मेरी कोई रिस्ता है कही ये मेरी फॅमिली में से तो नहीं है.

मई- तुम लोग बाटे करो तबतक मई लंच आर्डर कर के आता हु.

पायल- रुको मई भी चलती हु.

इतना बोल कर पायल भी मेरे साथ वह से उठ कर लंच आर्डर करने जाने लगाई इधर पायल जब से मेरे पास आयी थी बस मुझे hi देखे जा रही थी और बहाने से मुझसे बात करने की कोशिश कर रही थी ये देख कर शनाया बस जले hi जा रही थी और उसने मन hi मन सोची की अब तो पायल से बात करना hi होगा.

इधर हमदोनो खाना आर्डर कर के टेबल पर आ गए थे फिर कुछ देर बाद हमारा लंच आ गया तो हम लोग लंच करने लगे थोड़ी देर में लंच ख़तम करने के बाद मई वह से उठ कर वाशरूम चला गया मुझे वह से जाने के बाद पायल भी उठ कर मेरे पीछे आने लगी ये देख कर शनाया को कुछ शक हुआ तो वो भी हम दोनों के पीछे पीछे आने लगी.

इधर मई सीधा वाशरूम में गया और फ्रेस हो कर बहार निकला तो देखा की पायल वह पर कड़ी थी मई अभी इस समय यहाँ पर पायल को देख कर चौक गया और उससे पूछा.

मई- पायल यहाँ क्या कर रही हो.

पायल- मई यहाँ तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी मुझे तुमसे कुछ बात करना था.

हमलोग इधर बात कर रहे थे और हमसे थोड़ी hi दूर पर शनाया छुप कर हमारी बाटे सुन रही थी.

मई- है बोलो न क्या बात करनी थी.

पायल- वो वो बात ये है की वो वो मुझे समझ में नहीं आ रहा है की मई तुमसे कैसे बताऊ.

मई- क्या बताना है यार देखो जल्दी बोलो नहीं तो मई यहाँ से जा रहा अगर यहाँ पर हमें कोई देखेगा तो गलत सोचेगा.

पायल- नहीं रुको रुको मई बोलती हु (फिर हिमत जुटते हुए) मई तुमको जब से देखा है मुझे तुमसे प्यार हो गया है मई जहा भी देखती हु मुझे बस तुम hi नजर आते हो मई अब तुम्हारे बिना जीने की सोच भी नहीं सकती मई तुमसे बहुत बहुत बहुत ज्यादा प्यार करती हु ी लव यू.

मई- तुम होश में तो हो की तुम क्या बोल रही हो.

पायल- है मई होश में हु और सोच समझ कर बोल रही हु मई तुमसे बहुत प्यार करती हु और मई तुम्हारे बिना जिन्दा नहीं रह सकती.

मई- तुम पागल हो गयी हो क्या ये तुम क्या बोल रही हो मई तुम्हारे बारे में ऐसा नहीं सोचता क्युकी मई तुम्हे सिर्फ अपना दोस्त समझता हु.

पायल मेरी बात सुन कर टूट जाती है और वही पर बैठ कर रोने लगती है इधर जब शनाया पायल के बातो को सुनती है तो वो चौक जाती है और फिर अपने मन में बोलती है.

शनाया- (अपने मन में) मुझे लगा hi था की इसकी मन में कुछ तो चल रहा है तभी ये हमेशा प्रतिक को देखती रहती है ये पायल कितनी कामिनी है इसे मेरा hi पति मिला था डाका डालने के लिए.

मई पायल को इस तरह से रोटा देख कर उसको समझते हुए बोलता हु.

मई- देखो पायल तुम एक अच्छी लड़की हो और तुम मुझसे अच्छा लड़का डेसेर्वे करती हो और वैसे भी मई तुमसे प्यार नहीं करता.

पायल- (रट हुए) क्यों नहीं करते तुम मुझसे प्यार क्या मई सुन्दर नहीं हु क्या मेरे पास पैसे नहीं है.

मई- मैंने कब कहा की तुम सुन्दर नहीं हो तुम बहुत सुन्दर हो यहाँ तक की हर लड़का सोचता है की उसे तुम जैसी गर्लफ्रेंड या बीवी मिले इस लिए तुम अपने आप को काम मत समझो तुम्हे मुझसे भी अच्छा लड़का मिल जायेगा और तुम्हे मेरे पीछे पड़ने से कुछ नहीं मिलने वाला क्युकी मई तुमसे प्यार नहीं करती.

Payal-(rote हुए) जब तुम खुद hi बोल रहे हो की मई सुन्दर हु और सरे लोग मेरे जैसी hi गर्लफ्रेंड या बीवी चाहते है तो फिर तुम मुझे क्यों मन कर रहे हो तुम क्यों मुझसे प्यार नहीं करते.

मई- क्युकी मई किसी और से प्यार करता हु उसको अपनी दिलो जान से चाहता हु अगर वो है तो मई हु अगर वो नहीं तो मई भी नहीं मई उसके शिव किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकता और वैसे भी मई तुम्हे देखता हु तो मुझे तुममे अपनी बहन की झलक दीखता है पता नहीं मुझे ऐसा क्यों लगता है की जैसे हम कभी भाई बहन थे जो सालो से बिछड़ गए है.

मेरी बात सुन कर पायल चौक जाती है वो तो बस यही सुन कर चौक जाती है की मई किसी और से प्यार करता हु उसको तो मेरी बहन वाली बात सुनाई hi नहीं दिया था.

इधर शनाया मेरी बात सुन कर खुस हो गयी थी की मई पायल से प्यार नहीं करता फिर ये सोच कर मई किस लड़की से प्यार करता हु उससे या फिर मेरी जिंदगी में कोई और है ये सोच कर वो उदास हो जाती है इधर पायल मेरी बात सुन कर चौक जाती है और मुझसे बोलती है.

पायल- क्या मई जान सकती हु की वो लड़की कोण है जिसे तुम प्यार करते हो.

मई- मई तुम्हे उसका नाम तो नहीं बता सकता क्युकी मई उसका नाम लेकर उसको रुस्वा नहीं कर सकता लेकिन तुम इतना जान लो की मई जिससे प्यार करता हु वो मेरी वाइफ है मेरी बीवी है वो.

पायल- क्या तुम अपनी बीवी से प्यार करते हो इसका मतलब की तुम्हारी सदी हो गयी है.

मई- है मेरी सदी हो गयी है और मई अपने वाइफ से इस दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार कार्ट्स हु.

इधर शनाया ने जब सुना की मई उसी से प्यार करता हु न की किसी दूसरे लड़की से तो वो भी बहुत खुस हो गयी इधर पायल मेरी बात सुन कर बोली.

पायल- सॉरी प्रतिक मुझे पता नहीं था की तुम्हारी सदी हो गयी है मई बेकार में hi तुम दोनों पति पत्नी के बिच आ रही थी मुझे ये पहले पता होता तो मई मन hi मन तुमसे प्यार करते रहती लेकिन मई तुमको कभी प्रपोज़ नहीं करती.

इतना बोल कर पायल अपने आंसू को पोछते हुए वह से निकल गयी इधर शनाया ने जब पायल को यु रट हुए देखि तो उसको अच्छा नहीं लगा फिर वो मन hi मन सोची.

शनाया- (मन में) सब मेरी गलती है अगर मई पहले hi सबको अपनी और प्रतिक के सदी के बारे में बता देती तो सायद पायल प्रतिक के प्यार में न पड़ती और कोई दूसरा भी प्रतिक के प्यार में पड़े इससे पहले सबको ये पता होना चाहिए की प्रतिक सिर्फ और सिर्फ मेरा है अभी मई इस पायल से बात करती हु बेचारी का दिल टूट गया है मुझे उसके पास जाना चाहिए.

फिर शनाया वह से पायल के पीछे पीछे निकल गयी इधर मई भी पायल के जाने के बाद टेबल के पास गया जब मई वह पंहुचा तो देखा की वह पर न शनाया थी और न hi वह पर पायल थी.

इधर शनाया भागते हुए पायल के पास गयी तो देखि की पायल के आँखों से आंसू बाह रहा था जिसे उसने तुरंत hi पोछ लिया.

शनाया- पायल तुम रो रही हो. क्या बात है कुछ हुआ है क्या.

पायल- नहीं शनाया मई कहा रो रही हु वो तो कुछ आँखों में चला गया था इस लिए आँखों में आंसू आ गए.

शनाया- यही बात है न की कही तुम मुझसे झूठ बोल रही हो.

पायल- (झूठा हसी हस्ते हुए) हहहह अरे यार शनाया भला मई तुमसे क्यों बोलूंगी और तुम्हे ऐसा क्यों लगा की मई रो रही थी.

शनाया- मैंने तुम्हारे आँखों में आंसू देखा तो मुझे लगा की तुम रो रही थी पका न तुम रो नहीं रही थी.

पायल- अरे है यार मई रो नहीं रही थी वैसे तुम इधर क्या कर रही हो तुम तो वह टेबल पर बैठी हुयी थी न.

शनाया- है यार मई तो वही बैठी लेकिन जब तुमको आने में देर हो गयी तो मई तुम्हे देखने आ गयी वैसे मुझे आज तुमको कुछ बताना भी था.

पायल- है बोलो न क्या बताना था.

शनाया- तुमको मैंने बताया था न की मेरी सदी हो गयी है तो तुम जानना नहीं चाहोगी की मेरी सदी किसके साथ हुयी है.

पायल- अरे यार मई ये सवाल तुमसे कितनी बार पूछ चुकी हु लेकिन तुमने मुझे हमेसा से कोई बहाना बना कर ताल दिया वैसे कोण है वो खुसनसीब जो हमारे सोल्लगे के ब्यूटी क्वीन को उदा ले गया.

पायल यहाँ शनाया से बात करते हुए ये भूल hi गयी थी की अभी अभी उसका दिल टुटा है वो बस शनाया के पति के बारे में जानना चाहती थी.

Shanaya-tum उसे अच्छी तरह से जानती हो.

पायल- अगर तुमको बताना है तो तुम सीधा सीधा बताओ ऐसे पहेलियों में मत बात करो.

शनाया- अच्छा अच्छा बताती हु तुम गुसा क्यों कर रही हो वो और कोई नहीं बल्कि प्रतिक hi है है सही सुना तुमने मेरी सदी प्रतिक से हुयी है.

शनाया के बात सुन कर पायल स्टेचू की तरह जहा थी वही कड़ी रह जाती है उसके मुँह से एक शब्द भी नहीं निकलती है जब शनाया ने देखा की पायल कुछ भी नहीं बोल रही है तो शनाया उसको हिलती है तब जा कर वो होश में आती है और बोलती है.

पायल- ह ह बोलो क्या नाम बताया तुमने अपने हस्बैंड का.

शनाया- वो प्रतिक है तुम्हारा दोस्त दोस्त प्रतिक hi मेरा हस्बैंड है.

शनाया के बात सुन कर पायल के आँखों में आंसू आ गया पायल सोच रही थी की सायद प्रतिक उससे पीछा छुड़ाने के लिए उससे झूठ बोल रहा है की उसकी सदी हो गयी है उसे अभी भी कही न कही बिस्वास था की एक न एक दिन वो प्रतिक को मन hi लेगी लेकिन शनाया के बात सुन कर उसका दिल टूट गया था और उसके आँखों में आंसू आ गए पायल के आँखों में आंसू देख कर शनाया बोली.

शनाया- क्या हुआ पायल ये तुम्हारे आँखों में आंसू क्यों क्या तुमको मेरी और प्रतिक सदी के बात सुन कर अच्छा नहीं लगा या कुछ और बात है.

पायल- (अपने आंसू को पोछते हुए) नहीं नहीं मई बहुत खुश हु तुम दोनों के लिए प्रतिक एक अच्छा लड़का है वो तुमको बहुत खुस रखेगा अच्छा मुझे एक काम यद् आ गया है मई अभी चलती हु बाद में मिलूंगी.

इतना बोल कफ पायल वह से चली गयी लेकिन शनाया जानती थी की उसको कोई काम यद् नहीं आया था बल्कि वो अकेले में जा कर रोना चाहती थी लेकिन बेचारी वो भी क्या करती शनाया को पायल के लिए बहुत दुःख हो रहा था तो वो मन hi मन बोली.

शनाया- (मन में) मुझे माफ़ कर देना पायल अगर मई तुम्हे पहले hi बता देता तो सायद आज तुम्हे दुखी नहीं होना पड़ता.

पायल के जाने के बाद शनाया फिर से वही टेबल पर आ कर बैठ गयी जहा मई और सोनू बैठे हुए थे मई शनाया को अकेले आये देखा तो शनाया से पूछा.

मई- शनाया तुम अकेली क्यों आ रही हो पायल कहा है.

मेरी बात को सुन कर शनाया मुझे घर कर देखि और बोली.

शनाया- पायल की बड़ी टेंशन हो रही है काश की कोई मेरे लिए भी इतना टेंशन लेता वैसे पायल को कुछ काम आ गया था इस लिए वो घर चली गयी.

मई- कोई तुम्हारा लिए इससे भी ज्यादा टेंशन लेता है लेकिन तुमको उस पर ध्यान hi कहा है.

सोनू जो हमदोनो की बात को ध्यान से सुन रहा था इस लिए वो शनाया से बोलै.

सोनू- भाभी वह ी ऍम सॉरी मई आपको भाभी तो बोल सकता हु न.

शनाया- तुम प्रतिक के दोस्त हो तो तुम मुझे भाभी बोल सकते हो.

सोनू- भाभी वो क्या है न की आज मेरे माँ डैड ने प्रतिक को डिनर पर बुलाया है तो प्लीज आप भी साथ में आ जाइएगा.

शनाया- ठीक है मई कोशिश करुँगी आने की.

वही दूसरी तरफ कुछ गुंडे जैसे दिखने वाले आदमी अपने हाथ में एक47 गन लिए हुए एक स्कूल के जाते है और स्कूल के गॉर्ड को मर कर अंदर घुश जाते है इसके बाद सरे गुंडे पुरे स्कूल में फ़ैल जाते है जब स्कूल के बचे इतने खतरनाक गुंडों को अपने हाथ में गन लिए सामने देखते है तो दर से छिलने लगते है वही हल टीचर का भी था वो लोग भी बेहद डरे हुए थे बचो को दर कर ऐसे चिलता हुआ देख कर एक गुंडा कड़क आवाज में बोलै.

गुंडा- चिलाना बंद करो नहीं तो तुम सब को यही गोली मर दूंगा.

गुंडा को ऐसा बोलना hi था की सभी बचे एक डैम से चुप हो गए बचो को इस तरह से एक डैम चुप होता देख कर गुंडों के लीडर ने उस गुंडे से बोलै.

लीडर- बहुत खूब तुमने तो एक बार में hi इन सब को चुप करवा दिया अब एक काम करो इन सब को सबसे ऊपर वाले फ्लोर पर ले कर चलो और वही पर रखो ध्यान रखना की कोई बच न जाये सरे टीचर और सरे बचो को हम एक hi रूम में रखेंगे और इनमे से अगर कोई भी भागने की कोशिश करे तो उसे सीधा गोली मर देना.

गुंडा- जी बॉस.

इतना बोल कर सरे गुंडे उन सरे टीचर और बचो को सबसे ऊपर के फ्लोर पर ले कर चले गए टीचर और बचे कोई भी उनके विरुद्ध जाने की कोशिश नहीं की क्युकी वो जानते थे की अगर कोई उनकी बात को नहीं मन तो वो उसे मरने में थोड़ी भी देरी नहीं करेंगे उन लोगो का दर से हालत ख़राब थी लेकिन वो लोग उन गुंडों के आगे कर भी क्या सकते थे इधर सरे टीचर और बचे को बंदी बनाने के बाद बॉस ने अपने एक गुंडे को बोलै.

बॉस- मुंबई के सरे टीवी चैनल को हैक करो और उस पर लाइव जाओ मई सरे मुंबई वासियो से बात करना चाहता हु.

इधर सरे जगह जहा पर टीवी चल रहा था अचानक बंद हो गया और फिर कुछ देर बाद जब टीवी ों हुआ तो उसपर एक आदमी का चेहरा नजर आ रहा था जो अपने चेहरे को नकाब से धक् कर रखा हुआ था सरे लोग टीवी पर उस आदमी के चेहरे को देख कर चौक गए फिर वो आदमी बोलै.

आदमी- हैल्लो दोस्तों आप लोग मुझे टीवी पर अचानक देख कर चौक गए होंगे न तो चलो मई आप सब को अपना परिचय दे देता हु तो दोस्तों मेरा नाम अहमद कुरैशी है और मई आप सब को बताना चाहता हु की मई मुंबई इंटरनेशनल स्कूल के सरे बचो को उनके टीचर के साथ किडनैप कर लिया है ( फिर उसने कमरे को स्टूडेंट और टीचर के तरफ घुमा कर दिखाया ) आप लोग ये देख hi लिए की मई कोई झूठ नहीं बोल रहा हु तो अब मेरी बात कण खोल कर सुन लो मई मुंबई के सर्कार को 2 घंटे का समय दे रहा हु मुझे 100 करोड़ रूपए और जेल में बंद असलम खान चाहिए वो भी एक हेलीकाप्टर के साथ अगर 2 घंटे के अंदर मुझे ये सब नहीं तो मई एक एक टीचर और बचे को मरना स्टार्ट कर दूंगा मेरा मोबाइल no निचे दिया हुआ है और ये रहा अभी के लिए एक छोटा सा ट्रेलर.

इतना बोल कर उसने एक टीचर के सर पर गन रखा और ट्रिगर दबा दिया जिसके कारन उस टीचर की वही मौत हो गयी अपने आँखों से किसी आदमी का ऐसे मौत होता देख कर सरे लोग छिलने लगे.

इधर कैंटीन में बैठ कर मई भी उस लाइव को देखा था मुझे उन टीचर और बचो को बचने मन किया लेकिन फिर मई सोचा की पहले मई देखता हु की सर्कार इस मामले में क्या निर्णय लेता है.

इधर मुंबई शहर के कम के अवश्य में कम बैठे हुए टीवी देख रहे थे जब उन्होंने टीवी में में वो लाइव देखा तो तुरंत hi डगप को कॉल किया और एक इमरजेंसी मीटिंग रखने को बोलै थोड़ी देर बाद सहर के बड़े बड़े अधिकारी समेत होम मिनिस्टर चीफ मिनिस्टर सरे लोग मीटिंग में आ गए.

कम- ये हमारे सहर में क्या हो रहा है तुम लोगो के रहते दिन दहाड़े कोई स्कूल में घुस कर उस स्कूल के सरे टीचर और बचो को किडनैप कर लिया और तुम लोग यहाँ हाथ पर हाथ रख कर बैठे हुए हो.

डगप- सर हमें भी अभी hi पता चला है वो लोग अपने प्लेन का अंजाम बहुत hi स्लिंत तरीके से दिया है वो लोग किसी को भनक भी नहीं लगने दी और जैसे hi मुझे पता चला मई कुछ पुलिस अफसर को वह पर भेज दिया हु.

कम- मुझे तुम्हारी सफाई नहीं सुननी है डगप मुझे रिजल्ट चाहिए रिजल्ट तुमने देखा न की कैसे वो लाइव आ कर सबके सामने एक टीचर की जान ले ली और ये सब देख कर जनता हम पर भड़के हुए है.

हम- सर सबसे पहले हमें उनसे कुछ और समय ले लेना चाहिए ताकि हमारे अफसर को कुछ और समय मिल जाये.

कम- ठीक है तुम तो आप उसके पास कॉल लगा कर उससे बोलिये की वो कुछ समय और हमें दे.

हम- ठीक है सर मई अभी कॉल लगता हु.

इधर दूसरे तरफ स्कूल में सरे गुंडे बहार में नजर रखे हुए थे की तभी वह पर बहुत साडी पुलिस की गाड़ी आ गयी जिसे देख कर एक गुंडा अहमद कुरैशी के पास आकर बोलै.

गुंडा- बॉस यहाँ हमें चारो तरफ से पुलिस ने घेर लिया है अब हम क्या करे.

अहमद- लगता है की उन लोगो को एक ट्रेलर पसंद नहीं आया उन लोगो को और ट्रेलर दिखाना होगा.

इतना बोल कर अहमद अपने गन को हाथ में पकड़ कर एक टीचर के पास जाने hi वाला था की तभी उसके पास रखा हुआ फ़ोन बज उठा उसने तुरंत अपने फ़ोन को हाथ में उठा कर कॉल रिसीव किया और बोलै.

अहमद- हैल्लो कोण बोल रहा है.

हम- मई इस शहर का होम मिनिस्टर बोल रहा हु.

अहमद- कहिये होम मिनिस्टर साहब अपने हमें क्यों कॉल किया.

हम- देखो तुम ये अच्छा नहीं कर रहे तुम अभी उन टीचर और स्टूडेंट को वह से जाने दो नहीं तो तुम्हे इसकी कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी.

अहमद- देखिये होम मिनिस्टर साहब अगर आप हमें धमकाने के लिए फ़ोन किये है तो चुप चाप फ़ोन रख दीजिये नहीं तो आपको ट्रेलर दिखने के लिए मेरे पास बहुत सरे टीचर और स्टूडेंट है बोलिये तो मई आपको एक ट्रेलर दिखा दू.

हम- नहीं नहीं तुम ऐसा कुछ नहीं करना.

अहमद- अगर आप चाहते है की मई ऐसा कुछ न करू तो आप मुझे 2 घ ते के अंदर 100 करोड़ रूपए और असलम खान को मुझे दे दीजिये और साथ में एक हेलीकाप्टर भी मुझे चाहिए नहीं तो मई एक एक कर के सरे लोगो को मर दूंगा समझे आप.

हम- ठीक है मई तुम्हे सब देने के लिए तैयार हु लेकिन उन बचो और टीचर को कुछ नहीं होना चाहिए लेकिन एक प्रॉब्लम है जिसे सोल्वे करना तुम्हे है.

अहमद- कैसा प्रॉब्लम.

हम- प्रॉब्लम ये है की तुम 2 घंटे में 100 करोड़ और असलम खान दोनों को मांग रहे हो और ये सब होने में 2 घंटे से ज्यादा समय लग जायेगा क्युकी 100 करोड़ का इंतजाम करना बहुत मुश्किल है और असलम खान को जेल से निकलने के लिए भी बहुत साडी फॉर्मेलिटी से हो कर गुजरना होगा जिसमे समय लगेगा.

अहमद- तो आपको कितना समय चाहिए ये सब करने के लिए.

हम- काम से काम 5 घंटा तो चाहिए hi.

अहमद- ठीक है मई आपको 5 घंटे का समय देता हु तब तक आप यहाँ से अपने पुलिस ओफ्फिसरो को हटा लीजिये नहीं तो फिर आप जानते hi है की आगे क्या होगा.

हम- ठीक है मई अपने अफसर को वह से हत्ता लेता हु.

इधर मीटिंग रूम में जब हम अहमद से बात कर रहा था तब सरे लोग सुन रहे थे जैसे hi हम ने फ़ोन कट किया वैसे hi कम बोले.

कम- तुम्हे क्या जरुरत थी उसकी बात मैंने की अब हमें वह से अपने पुलिस फाॅर्स को हटाना पड़ेगा और जब हम वह से अपने पुलिस फाॅर्स को हटा लेंगे तो हम उन बचो और टीचर को कैसे बचाएंगे.

हम- अब कुछ नहीं हो सकता कम सर हमें उसकी बात को माननी hi होगी नहीं तो वो बचो और टीचरो में से किसी को नहीं छोड़ेगा.

डगप- हम उसे पैसे तो दे सकते है लेकिन हम असलम खान को नहीं छोड़ सकते क्युकी असलम खान ने हजारो लोगो की जान ली है अगर हम उसे ऐसे hi जाने देंगे तो वो और न जाने कितने लोगो की जान लेगा.

कम- तो अब हमारे पास कोई दूसरा ऑप्शन भी तो नहीं है.

डगप- हम वह पर ब्लैक कमांडो की भेज सकते है वो लोग आसानी से सबको बचा लेंगे और दुश्मनो को मर गिराएंगे.

हम- लेकिन ये बहुत रिस्की है.

डगप- हमें रिस्क तो लेना hi होगा.

हम- तो अब तुम ये भी बता दो की हम मीडिया वालो को क्या जबाब दे जो बहार कब से हमारा इंतज़ार कर रहे है.

डगप- हम उनसे बोल देंगे की हम आतंकवादियों के सरे शर्तो को मन लिया है लेकिन उन शर्तो को पूरा करने में हमें 5 घंटा का समय लगेगा और हमने उस आतंकवादी से 5 घंटे का टाइम ले लिया है.

इसके बाद ये लोग अपने प्लेन के बारे में बात किया और फिर वह से निकल गए रस्ते में उनसे मीडिया वालो ने पूछा तो वो पहले से तैयार किया हुआ जबाब बता दिए.

इधर सोल्लगे के कैंटीन में बैठ कर मई न्यूज़ देख रहा था जब कम ने मीडिया वालो को बताया की वो उस आतंकवादी के सरे शर्त मैंने के लिए तैयार है तो मुझे उसके बातो पर बिस्वास नहीं हुआ क्युकी उसकी आँखों में मुझे झूठ दिखाई दे रहा था.

मई- (मन में) ये लोग जरूर कुछ दूसरा प्लेन बना रहे है और मीडिया वालो को गुमराह करने के लिए झूठ बोल रहे है ये लोग ऐसा कैसे कर सकते है उन आतंकवादियों के हाथ में उन मासूमो के जान है और ये लोग उससे खिलवाड़ करने के बारे में सोच रहे है मुझे hi कुछ करना होगा.

इसके बाद मई शनाया और सोनू से बोलै.

मई- मुझे कुछ काम है इस लिए मई चलता हु सोनू मई तुमसे सैम को तुम्हारे घर पर मिलूंगा मुझे अपनी एड्रेस सेंड कर देना.

इतना बोल कर मई वह से निकलने लगा की तभी मुझे शनाया ने रोकते हुए बोली.

शनाया- रुको मई भी तुम्हारे साथ चलती हु क्युकी मुझे भी कंपनी के लिए जाना है.

मई शनाया के बात सुना तो चौक गया और अपने मन में सोचा.

मई- (अपने मन में) अरे यार अगर शनाया मेरे साथ जाएगी तो मई उन बचो को बचने कैसे जाऊंगा मुझे कोई बहाना बनाना होगा.

मई- शनाया तुम निकालो मैं चला जाऊंगा वैसे भी तुम्हे जहा जाना है मुझे उसके अपोजिट साइड जाना है तो बेकार तुम्हारा समय बर्बाद होगा और वह पर दादा जी तुम्हारा इंतज़ार भी कर रहे होंगे.

शनाया- ठीक है.

इतना बोल कर शनाया वह से निकल गयी और मई भी वह से निकल कर एक सुनसान जगह देखा और वह से गायब हो कर हवेली पहुंच गया मई हवेली में इस लिए आया था की मई यहाँ पर एक रूम में बहुत सरे कपडे देखे थे जो सायद इस हवेली के पुराने मालिक का था इस लिए मैंने सोचा की यहाँ आ कर उन कपड़ो में से कोई ऐसा कपडा पहन लूंगा जिससे मेरी पहचान सब से छुपी रहे अगर मई उन सब को बचने के लिए अपना पहचान नहीं छुपाया तो आगे चल कर मेरे और मेरे परिवार के लिए दिक्कत हो जायेगा.

मई हवेली में आ कर अपने लिए कोई सूटेबल कपडा ढूंढने लगा तो मुझे एक कोने में एक कपडा टेंगा हुआ दिखा जो बहुत लम्बा था मई उस कपडे को उठा कर उसे पहन का देखा तो वो कपडा मुझे बिलकुल फिट आ रहा था.

मई उस कपडे को पहन कर ऊपर से मास्क लगा लिया अब मई बिलकुल ऐसा दिख रहा था.

मई अपने हुलिया को चेंज करने के बाद वह से गायब हो कर सीधा उस स्कूल के पास पहुंच गया अब मुझे इस हुलिया में कोई नहीं पहचान सकता था इस लिए मई बेफिक्र हो कर उस स्कूल के पास खड़ा हो गया था और इधर उधर देख रहा था.

वह पर मेरे अलावा कोई नहीं था है वह से कुछ दुरी पर पुलिस वाले और उन बच्चो के जो किडनैप हो गए थे उनके पेरेंट्स मौजूद थे खैर मई उन सब को इग्नोर करते हुए वह से गायब हो कर अंदर चला गया और एक जगह छुप कर अपने दिव्या दृस्टि से अंदर देखने लगा.

मई जब पुरे स्कूल के बिल्डिंग को देख लिया तो मुझे पता चल गया की वह पर सिर्फ 10 hi आतंकवादी थे लेकिन वो सब अपने हाथ में आटोमेटिक मशीन गन लिए हुए थे हलाकि मुझ पर उनके गन देख कर कोई प्रभाव नहीं पड़ा क्युकी गोली मुझे कोई भी नुकसान नहीं पंहुचा सकता था.

हलाकि गोली से मुझे नुकसान नहीं पहुँचता लेकिन उन बचो और टीचर को जरूर पहुंच सकता था इस लिए मुझे जो भी करना था बहुत सोच समझ कर करना था फिर मैंने सोचा की सब से एक एक कर के निपटा हाय ये सोच कर मई स्कूल के छत पर चला गया जहा 2 स्नाइपर थे मई उनके पास पहुंच कर आसानी से उन्हें बेहोश कर दिया फिर मई गायब हो कर निचे 3रद फ्लोर पर आ गया.

मई आप सब को एक बात बताना भूल गया वो बिल्डिंग में टोटल चार फ्लोर थे सबसे ऊपर वाले फ्लोर पर 2 स्नाइपर थे जिनको मई निपटा दिया और 3रद फ्लोर पर 4 आतंकवादी अपने हाथ में गन लेकर पहरा दे रहे थे और बाकि के 4 आतंकवादी बचो और टीचरो के पास थे जिनमे से एक उनका बॉस अहमद कुरैशी भी था.

खैर मई 4तह फ्लोर पर उन स्नाइपर को बेहोश करने के बाद मई वह से गायब हो कर 3रद फ्लोर पर आगया जब मई वह पर आया तो देखा की दो आतंकवादी अपने हाथ में गन लिए हुए स्टैर्स के पास खड़े थे और 2 लोग 3रद फ्लोर पर hi इधर उधर घूम रहे थे मैंने सोचा की पहले जो घूम रहे है उनको बेहोश करना चाहिए क्युकी स्टैर्स के पास वाले गुंडों का ध्यान दूसरी तरफ था ये सोच कर मैंने वह से गायब हो कर सीधा उन दो आतंकवादी के पास पंहुचा जो अपने हाथ में गन लेकर घूम रहे थे और फिर दोनों के गर्दन पर एक एक हमला किया जिसके कारन वो वही पर बेहोश हो गए और निचे गिर गए लेकिन जैसे hi वो निचे गिरे तो उनको गिराने से आवाज पैदा हुआ जिसके कारन स्टैर्स के पास वाले गुंडों को सुनाई दे गया.

उन दोनों के गिराने से जो आवाज पैदा हुआ उसके कारन वो दोनों आतंकवादी जो की स्टैर्स के पास खड़े थे वो पीछे मुद कर देखा तो वह पर मई खड़ा था और उनके दोनों साथी निचे गिरे हुए थे अपने साथियो को निचे गिरा देख कर समझ गए की उनको मैंने मारा है तो वो तुरंत hi मेरे ऊपर गन तन दिए और मुझ पर फायर करने के लिए अपना ऊँगली ट्रिगर पर ले कर गए और वो जैसे hi फायर करने वाले थे मैंने अपने पास से 2 नीडल निकला और उनके तरफ उछाल दिया और दोनों नीडल सीधा जा कर उन दोनों के गर्दन में घुस गया और दोनों वही पर बेहोश हो कर गिर गए लेकिन तबतक एक आतंकवादी के गन से गोली चल गयी थी.

मई तो उस गोली से बच गया लेकिन 2ंद फ्लोर वाले आतंकवादियों को पता चल गया था की कुछ गड़बड़ है इस लिए वो सतर्क हो गए.

अहमद- लगता है ऊपर में कोई मेहमान आया है लेकिन 2ंद फ्लोर पर तो हम लोग थे तो वो ऊपर कैसे गया.

आतंकवादी 1- लगता है बॉस वो पाइप के सहर ऊपर गया होगा.

अहमद- चाहे वो जैसे भी आया हो उसे यहाँ उसकी मौत ले आयी है और साथ में इन सब का भी जाओ पहले जाकर तुम दोनों उसको धुंध कर मर दो हम दोनों यहाँ पर इनको देखते है.

आतंकवादी 1- ठीक है बॉस.

इतना बोल कर वो अपने एक साथी के साथ वह से चला लेकिन जैसे hi वो दोनों स्टैर्स चढ़ने वाले थे तभी 2 नीडल आ कर उनके गर्दन में घुस गया और वो दोनों वही पर बेहोश हो कर गिर गए ये देख कर अहमद के हालत hi ख़राब हो गया और वो भागते हुए गया और एक बचे को उठा कर उसके सर पर गन लगते हुए बोलै.

अहमद- तुम जो कोई भी हो सामने आ जायो नहीं तो इस पिले को यही गोली मर दूंगा.

मई- देखो उस बचे को छोड़ दो नहीं तो बहुत बुरी मौत मरोगे.

अहमद- देखो मई 3 तक गिनूंगा अगर तुम सामने नहीं आये तो मई इस बचे को गोली मर दूंगा 1 2...

मई- ठीक है ठीक है मई आ रहा हु तुम उस बचे को कुछ नहीं करना.

इतना बोल कर मई उसके सामने आ गया मुझे अपने सामने देख कर अहमद बोलै.

अहमद- कोण है रे तू और तू यहाँ कैसे आ गया और तुमने मेरे आदमियों को क्या किया है जल्दी बता नहीं तो तू अपनी जान से जायेगा.

मई- मई कोण हु और यहाँ कैसे आया हु ये सब जानना तुम्हारे लिए जरुरी नहीं है जो तुम्हारे लिए जानना जरुरी है वो सुन तुम चुप चाप इन सब को छोड़ दो नहीं तो तुम्हे आज मुझसे कोई भी बचा नहीं सकता और है तुम अपने आदमियों की चिंता मत कर वो सब मरे नहीं है बस सब आराम कर रहे है.

अहमद- क्या किया तूने मेरे आदमियों के साथ.

मई- कुछ नहीं बस उनको बेहोश किया है जब वो सब जेल में जायेंगे तो उनको होश आ जायेगा.

अहमद- मई तुम्हे जिन्दा नहीं छोडूंगा तुम यहाँ तो आ गए हो लेकिन यहाँ से जिन्दा नहीं जा पाओगे.

मई- देखो मई ऐसी धमकी बहुत बार सुन चूका हु लेकिन आज तक कोई भी मेरा कुछ बिगड़ नहीं पाया है इस लिए मई तुमको बोल रहा हु की इन सब को छोड़ दो.

अहमद- और अगर नहीं छोड़ा तो क्या करोगे.

मई- तो तुम यही पर मरे जाओगे.

अहमद- अच्छा (डरने का नाटक करते हुए) मई तो दर गया देखो देखो मुझे कुछ नहीं करना हहहहहह.

मई- तो तुम इन सब को नहीं छोड़ोगे.

अहमद- जा नहीं छोड़ता अब क्या करेगा तू मुझे मरेगा है है है है आ आ मर मुझे मर.

अभी हम सब बहस कर hi रहे थे की तभी हमारा बहस सुन कर दूसरा आतंकवादी घुसे से बोलै.

आतंकवादी- भाई आप इससे बहस क्या कर हो सेल को सीधा उदा क्यों नहीं देते एक काम करता हु सेल को मई hi उदा देता हु.

इतना बोल कर वो मुझ पर अपने गन से फायर कर दिया गोली उसके गन से निकल कर मेरे पास आयी तो मई उसे अपने दो उंगलियों से उस गोली को पकड़ लिया और घुसे से उस आतंकवादी को बोलै.

मई- तुम्हे ये नहीं करना चाहिए था.

इतना बोल कर मैंने अपने जेब से एक नीडल निकला और उस आतंकवादी के तरफ फेक दिया ये सब इतना जल्दी हुआ की उसे सँभालने का मौका भी नहीं मिला और वो नीडल उस आतंकवादी के सर को चीरते हुए पर हो गया और वही पर गिर कर मर गया ये देख कर अहमद दर गया और डरते हुए बोलै.

अहमद- ये तुमने सही नहीं किया मेरे एक साथी के मौत के बदले में मई इन सब को जान से मर दूंगा.

इतना बोल कर वो उस बचे को पीछे ढाका दिया जिसके कारन वो बचा उन सरे टीचर और बचो के पास जा गिरा और फिर अहमद ने अपने मशीन गन को उठाया और उन सब पर गोली बरसाना सुरु कर दिया लेकिन ये क्या गोली उन टीचर और बचो को लगाने के जगह हवा में रुक गया था और ये मैंने अपने इंटरनल एनर्जी से किया था.

हुआ ये की जब अहमद अपने मशीन गन को उठा कर उन पर फायर करने के लिए तैयार हुआ वैसे hi मैंने अपने इंटरनल एनर्जी को एक्टिव कर दिया और उन सरे गोली को हवा में hi रोक दिया अपने सामने गोली को यु हवा में रुका देख कर सरे टीचर और बचे चौक गए यहाँ तक की अहमद भी चौक गया और बस वो सब हवा में रुके गोली को hi देखे जा रहे थे.

अहमद- ये ये कैसे हो सकता है ये गोली हवा में hi कैसे रुक गयी.

मई- ये गोली हवा में ऐसे रुकी है.

इतना बोल कर मैंने अपना हाथ हिलाया तो सरे गोली निचे गिर गए और फिर मैंने अपने हाथ को हवा में उठाया तो इस बार अहमद हवा में उठ गया और मई अपने हाथ के इशारे से उसको कभी इस दीवाल पर तो कभी उस दीवाल पर मरने लगा जिसे देख कर सरे बचे और टीचर खुस हो गए बचे तो जोर जोर से चलने लगे.

बचे- ये मेरा सुपर हीरो मुझे बचने आ गया और इस बाद अंकल को और मारो सुपर हीरो इसने हमारे एक टीचर को गोली मर दिया इसे और मारो.

ऐसे बोल कर सरे बचे और टीचर जोर जोर से चीला रहे थे इधर अहमद दीवाल से टकराते टकराते बेहोश हो गया था जब मैंने देखा की वो बेहोश हो गया है तो फिर मई उसे वही जमीं पर फेक दिया इसके बाद मई सरे आतंकवादियों को यहाँ ला कर एक रोप से बांध दिया और फिर टीचर और बचो के पास चला गया.

मई- अब आप सबको डरने की जरुरत नहीं है मई इन सरे आतंकवादियों को बेहोश कर दिया है और इनको रोप से बांध दिया है अब आप सब आजाद हो.

मेरे बात को सुन कर वो सरे खुस हो गए तभी उनमे से एक बचा बहार आया और मेरे पास आकर बोलै.

बचे- अंकल आप सुपर हीरो हो न वो कार्टून वालो जैसा सुपर हीरो जैसा स्पाइडर मन बैटमैन सुपरमैन होता है वैसा.

मई- नहीं बचा मई सुपर हीरो नहीं हु आप सब सुपर हीरो हो क्युकी आप सब ने किडनैप होने के बाद भी हिमत नहीं हरी और इस परिस्थिति में भी आप सब सहज रहे इस लिए आप सब सुपर हीरो हो.

बचा- नहीं हम सुपर हीरो नहीं है आप सुपर हीरो है क्युकी अपने इन सरे बाद अंकल को हरा कर हम सब को बचाया है इस लिए आप सुपर हीरो हो वैसे आपका नाम क्या है.

मई- अपने अभी मुझे सुपर हीरो बोलै तो सुपर हीरो से हीरो को हटा कर बॉय लगा दो वही मेरा नाम है.


बचा- (कुछ देर सोचने के बाद) इसका मतलब आपका नाम सुपर बॉय है यहु.. आज से मेरा हीरो सुपर बॉय है.
 
अपडेट 17



स्ट्रांग मेटल फ्रॉम ानोथेर प्लेनेट



मैंने सरे आतंकवादियों को बेहोश कर दिया था और बचो के साथ साथ टीचर को भी बचा लिया था तभी एक बचे ने मेरे से मेरा नाम पूछा तो मैंने उसे अपना नाम सुपर बॉय बोलै इसके बाद मैंने उन सरे टीचरो से बोलै.

मई- अब आप लोगे सेफ है अब आप सब इन बचो को लेकर बहार जा सकते है और है बहार जा कर पुलिस वालो को बोल दीजियेगा की यहाँ पर सरे आतंकवाद बेहोश पड़े है वो यहाँ आ कर इन्हे ले जाये ठीक तो ब्यय अब मई चलता हु.

इतना बोल कर मई वह से गायब हो गया मुझे इस तरह से गायब होता देख कर फिर से सरे लोग चौक गए.

टीचर- ये सच में हमारा सुपर हीरो है ये भगवन का भेजा हुआ कोई फरिस्ता है अब हमारा सहर और हमारा पूरा देश सुरक्षित है क्युकी इसके जैसे दिव्या पुरुष के रहते कोई भी हमारे देश को कुछ नुकसान नहीं पंहुचा सकता.

इतना बोल कर वो टीचर सरे बचो और टीचरो के साथ बहार निकल गया इधर उस स्कूल के बहार बहुत साडी भीड़ जमा हो गयी थी जिसमे बचो के पेरेंट्स के साथ साथ पुलिस वाले और मीडिया भी थी.

ये लोग स्कूल से कुछ दूर पर थे क्युकी पुलिस वालो को ऊपर से आर्डर मिला था की वो लोग स्कूल से दूर रहे और साथ में बचो के पेरेंट्स और मीडिया वालो को भी दूर रखे लेकिन जब स्कूल के अंदर से गोली चलने की आवाज आने लगे तो सरे पेरेंट्स घबरा गए और भागते हुए स्कूल के पास पहुंच गए फिर उनके पीछे पीछे पुलिस और मीडिया वाले भी वह पर पहुंच गयी गोली के आवाज सुन कर बचो के पेरेंट्स के साथ साथ पुलिस वाले भी घबराये हुए थे और मीडिया वाले इस इन्सिडेन्स को बढ़ा चढ़ा कर बताये जा रहे थे तभी एक मीडिया रिपोर्टर को कुछ लोग बहार आते हुए दिखाई दिए तो वो तुरंत हु उन सब पर कमरा फोकस कर के बोलने लगा.

रिपोर्टर- आप सब ने अभी अभी देखा की स्कूल के अंदर से गोली चलने की आवाज आयी और फिर अब कुछ लोग बहार निकल रहे है तो आइये हम देखते है की स्कूल से बहार आने वाले में कोण है क्या वो आतंकवादी है या फिर टीचर अरे ये तो टीचर और स्टूडेंट है जो बहार आ रहे है इन लोगो को आतंकवादियों ने छोड़ दिया या फिर ये लोग उनसे फाइट कर के बहार आ रहे है ये सब जानने के लिए हमसे जुड़े रहिये और देखते रहिये धमाका न्यूज़ मई मनीषा कमरा मन रमेश के साथ.

ऐसे न जाने मीडिया रिपोर्टर क्या क्या बोले जा रहे थे इधर सरे बचे और टीचर सब स्कूल में बहार आ गए थे उन बचो और टीचर को सही सलामत देख कर सरे पेरेंट्स और पुलिस वाले यहाँ तक की मीडिया वाली भी खुस हो गए फिर सरे पेरेंट्स भागते हुए जा कर अपने अपने बचो को गले लगा लिया उन सरे पेरेंट्स के आँखों में अपने बचो को सही सलामत देख कर खुसी के आंसू आ गए थे.

इधर उन सरे टीचर और स्टूडेंट को देख कर मीडिया वाले उनको चारो तरफ घेर लिए और तरह तरह के सवाल पूछने लगे.

रिपोर्टर- क्या सच में आप लोगो को आतंकवादियों ने बंदी बना लिया था और अगर आप उनके बंदी थे तो आप सब बहार कैसे आये क्या वो लोग आप सब को छोड़ दिया या कुछ और बात है.

मीडिया वालो के बात सुन कर एक टीचर आगे आया और बोलै.

टीचर- है हम सबको आतंकवादियों ने हु बंदी बनाया था और उन लोगो ने तो मेरे एक दोस्त को गोली भी मर दी वो लोग बहुत खतरनाक थे वो अपने शर्त मनवाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते थे तो वो लोग बिना अपने शर्त पुरे हुए हमें क्यों छोड़ते.

रिपोर्टर- अगर उन लोगो ने आप सब को नहीं छोड़ा तो आप बहार कैसे आये.

रिपोर्टर के बात सुन कर एक बचा आगे आया और बोलै.

बच्चा- हम सबको उस बाद अंकल से हमारा सुपर हीरो ने बचाया है हमारा सुपर हीरो वह आया और उसने सरे बाद अंकल को सजा दी.

रिपोर्टर- तुम्हारा सुपर हीरो.

दूसरा बचा- है हम सबका सुपर हीरो ने आपको पता है जब बाद अंकल ने हम सब पर गोली चलायी तो सुपर हीरो ने अपने शक्ति से सरे गोली को हवा में hi रोक लिया.

रिपोर्टर- बीटा ऐसा नहीं होता कोई भी गोली को हवा में नहीं रोक सकता (फिर कमरा के तरफ देखते हुए बोली) तो आप सब ने देखा की उन आतंकवादियों के दर से बचे सदमे में चले गए है और ये सब न जाने क्या क्या बाटे कर रहे है.

रिपोर्टर के बात सुन कर एक टीचर आगे आया और बोलै.

टीचर- नहीं वो बचा सदमे में नहीं है वो ठीक बोल रहा है वह पर सच में एक सुपर हीरो आया था और उसने सरे गोलियों को हवा में रोक लिया था फिर उसने सरे आतंकवादियों को बेहोश कर के एक रोप से वही पर बांध दिया है.

रिपोर्टर- क्या आप सच बोल रहे हो अगर वह सच में कोई सुपर हीरो था तो वो अब कहा गया.

टीचर- वो उन आतंकवादियों को रोप से बढ़ने के बाद गायब हो गया और जाते जाते बोल गया की हम सब पुलिस को ये इनफार्मेशन दे दे की सरे आतंकवादी वडा पर बंधे हुए है.

रिपोर्टर- तो आप सबका कहना है की आपको बचने वाला एक सुपर हीरो था तो उसका नाम भी आप सब को पता होगा.

सरे बचे एक साथ- है हमें उनका नाम पता है उनका नाम है सुपर बॉय.

रिपोर्टर- तो आप सब को उनका चेहरा यद् है.

बचे- नहीं वो अपने मुँह पर नकाब पहन कर आये थे.

फिर एक बचे ने अपने बैग से एक ड्रोनिंग पेपर और पेंसिल निकला और सुपर बॉय का इमेज बनाने लगा.

रिपोर्टर- तो आप सब ने देखा की इन बचो और टीचर को बचने वाला एक सुपर हीरो था जिसका नाम सुपर बॉय था क्या वो एक जादूगर था वो हम सब के लिए दोस्त है या दुसमन.

मीडिया रिपोर्टर अभी अपनी बात बोले hi जा रही थी की तभी ऊपर आसमान में एक आकृति प्रकट हुयी जिसे देख कर एक बचा बोलै.

बचा- वो देखो सुपर बॉय ऊपर आसमान में है.

सुपर बॉय को वह देख कर सरे रिपोर्टर एक्सीटेंड हो गए और सरे बचे खुसी से छिलने लगे.

सुपर बॉय सुपर बॉय सुपर बॉय हमारा हीरो सुपर बॉय.

अभी सरे बचे चीला hi रहे थे की तभी एक रिपोर्टर आगे आ कर बोलती है.

रिपोर्टर- तो आप है सुपर बॉय जिसने इन सरे टीचर और बचो को बचाया क्या मई आपसे कुछ सवाल पूछ सकती हु.

मई- है आप पूछिए क्या पूछना चाहते है.

रिपोर्टर- आप कोण है और आप कहा से आये है इन बच्चो को बचने के पीछे आपका क्या मकसद है.

मई- मई भी आप लोगो की तरह एक इंसान hi हु और मई यही मुंबई के hi रहने वाला हु और एक बात अपने सही बोली है की मुझे इन बचो के बचने के पीछे एक मकसद है और वो मकसद है की मई सरे गुंडों बदमाशों और गलत काम करने वाले को एक वार्निंग दे दू की आप इस सहर आपकी कोई मनमानी नहीं चलेगी अगर किसी से भी कोई भी गलत काम किया तो उसको मुझसे सामना होगा और फिर मई उसको इस पत्थर की तरह टुकड़ो में बदल दूंगा.

इतना बोल कर मई अपने हाथ से एक बिजली निकला और पड़े एक पत्थर के चेतन पर छोड़ दिया जिसके कारन वो पत्थर के चेतन टुकड़ो में बदल गया.

मई- मई सरे गलत काम करने वालो को एक आखरी मौका देना चाहता हु तुम सब सुधर जाओ और गलत काम छोड़ कर कोई अच्छा काम करो नहीं तो फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ क्युकी अब ये सुपर बॉय इस सहर में कोई भी गलत काम होने नहीं देगा.

इतना बोल कर मई वह से गायब हो गया और सीधा हवेली आ गया उधर मेरे जाने के बाद रिपोर्टर में बारे में बढ़ा चढ़ा कर बताने लगे अब इस सहर में क्या देश में बैश एक hi नाम गूंज रही थी और वो नाम थी सुपर बॉय सुपर बॉय को कोई ाचा तो कोई बुरा बता रहा था यहाँ तक की लोग उसे एलियन भी बोल रहे थे जो धरती पर कब्ज़ा करने आया है खैर लोगो का काम hi है बोलना चाहे वो जो भी बोले लेकिन एक बात और हो गयी थी सरे गुंडों के मन में सुपर बॉय का भय बैठ गया था इस लिए जो छोटे मोठे गुंडे थे वो अंडरग्राउंड हो गए थे और जो बड़े गुंडे थे जो कूद को hi भगवन समझते थे वो अपना काम चालू रखे थे.

मई वह से गायब हो कर हवेली में आ गया था अब मेरे पास कोई काम नहीं था क्युकी मई सोल्लगे से ये बोल कर निकल गया था की मुझे कोई काम है और मई सोनू के यहाँ सैम को जाने वाला था तो मई सोचा की अब क्या किया जय तभी मुझे मनोज सिंघानिया का यद् आया.

मई- अरे है मई मनोज सिंघानिया को वडा किया है की मई आज उनका इलाज करूँगा एक काम करता हु उनको कॉल कर लेता हु.

फिर मई अपने मोबाइल से मनोज सिंघानिया का नंबर निकला और उनकी कॉल लगा दिया थोड़ी देर रिंग जाने के बाद मनोज सिंघानिया ने मेरा कॉल रिसीव किये और बोले.

मनोज- हैल्लो प्रतिक कैसे हो कैसे यद् किया.

मई- मई ठीक हु मनोज जी मई अभी खली बैठा था तो सोचा की मई आपका इलाज hi कर देता हु तो क्या आप अभी मुझे लेने के लिए किसी को भेज सकते है.

मनोज- है है क्यों नहीं तुम बताओ कहा हो अभी तुम मई वही पर अपने ड्राइवर को तुम्हे लेने के लिए भेज देता हु.

मई कुछ देर सोचने के बाद बोलै.

मई- आप अपने ड्राइवर को मुंबई यूनिवर्सिटी के पास भेज दीजिये मई यही पर हु.

इतना बोलने के बाद मई कॉल कट कर दिया और फिर टेलिपोर्ट हो कर मई सीधा अपने सोल्लगे के पास पहुंच गया फिर वही पर थोड़ी देर इंतज़ार किया तो मनोज का ड्राइवर मुझे लेने के लिए आ गे.

फिर मई गाड़ी में बैठ कर थोड़ी देर बाद सिंघानिया मेन्शन में पहुंच गया फिर ड्राइवर ने गाड़ी को गेट के अंदर लिया इसके बाद मई गाड़ी से उतर गया और सिंघानिया मैंशन को देखने लगा ये मैंशन भी ओबेराय मैंशन की तरह संदर था अभी मई विला को देखने में हु बिजी था की तभी एक आदमी मेरे पास आया और मुझसे बोलै.

आदमी- क्या आप hi प्रतिक है.

मई- है मई hi प्रतिक हु लेकिन आप कोण है.

आदमी- जी मई सिंघानिया परिवार के हेड बॉडीगार्ड हु आपको सिंघानिया साहब ने अंदर बुलाया है.

मई- Ok चलिए चलते है.

इसके बाद वो हेड बॉडीगार्ड मुझे लेकर मेन्शन के अंदर आ गया वो मेन्शन अंदर से भी देखने बहुत सुन्दर लग रहा था मई अभी बांग्ला देखने में खोया हुआ hi था की तभी मुझे हेड बॉडीगार्ड की आवाज सुनाई दी.

हेड बी- सिंघानिया सर उस कमरे है आप अंदर जाइये वो आपका वही पर वेट कर रहे है.

मई- ठीक है.

इतना बोल कर उस कमरे के अंदर चला गया कमरे के अंदर 3 आदमी बैठे हुए थे जिसमे से मई सिर्फ एक को hi पहचान रहा था और मई जिनका पहचान रहा था वो थे मनोज सिंघानिया उनके अलावा उस रूम 2 और आदमी थे एक कोई 20 या 22 साल का लड़का था और एक अधेड़ उम्र के आदमी था जब मई उस कमरे आया तो सबकी नजर मेरे तरफ हो गयी मुझे वह पर इस तरह अचानक से आया देख कर वो लड़का मुझे घूरने लगा और थोड़ा गुस्से से बोलै.

लड़का- तुम्हे तमीज नहीं है क्या की किसी के रूम में बिना पूछे नहीं आना चाहिए वैसे तुम हो कोण और तुम यहाँ कैसे आ गए.

मनोज सिंघानिया जो वह पर प्रतिक को देख कर खुस हो गए थे वो जब उस लड़के की बात सुनी तो चौक गए और फिर उस लड़के से थोड़े कड़क आवाज में बोले.

मनोज- ये क्या बतमीज़ी है समर वो हमारा गेस्ट है और तुम उससे ये कैसी बाटे कर रहे हो (फिर मुझसे बोले) माफ़ करना प्रतिक ये मेरा बीटा है समर ये अभी तुमको जनता नहीं है न इस लिए ये गलती से बोल दिया समर तुम अभी के अभी प्रतिक से माफ़ी मानगो.

समर- मई इससे माफ़ी क्यों मांगू इसमें मेरी क्या गलती है मई इससे माफ़ी नहीं मांगूंगा.

मई- कोई बात नहीं सर मई इनके बातो का बुरा नहीं मन क्युकी ये अपनी जगह पर गलत नहीं है मुझे hi पूछ कर अंदर आना चाहिए था.

मनोज- मई इसे ऐसे कैसे छोड़ दू इसने तुम्हारे साथ बतमीज़ी की है तो इसे तुमसे माफ़ी मांगनी hi पड़ेगी. तुम्हे एक बार में सुनाई नहीं दिया चलो प्रतिक से माफ़ी मानगो नहीं तो तुम मेरे घुसे को जानते hi हो.

समर अपने पिता जी के बात सुन कर गुसा हो जाता है लेकिन वो अपने पिता जी के बात को काट भी नहीं सकता था इस लिए उसमे अनमने ढंग से मुझसे माफ़ी माँगा तो मैंने भी उसे माफ़ कर दिया इधर मनोज ने अपने बेटे को माफ़ी मांगते देख कर मुझसे बोले.

मनोज- प्रतिक मई तुमको इन दोनों से इंट्रो करवा देता हु ये मेरा बीटा है समर सिंघानिया और ये है इस सहर के मेयर राघवेंद्र कुमार और ये है डॉक्टर प्रतिक जिसने मेरे बीमारी को देखते hi पकड़ लिया और यहाँ मेरे इलाज करने आया है.

मनोज सिंघानिया के बात सुन कर राघवेंद्र कुमार और समर दोनों चौक गए और उन दोनों को मुझ पर शक होने लगा की मई सच में डॉक्टर हु या मई मनोज सिंघानिया को ठगने आया हु वैसे राघवेंद्र कुमार तो कुछ नहीं बोले लेकिन समर चुप नहीं रह सका और बोलै.

समर- क्या पापा आप भी किसी को भी डॉक्टर समझ कर उठा लेट है ये आपको कहा से डॉक्टर लग रहा है और वैसे भी आपका इलाज देश के बड़े बड़े डॉक्टर नहीं कर पाए तो ये आपका इलाज कैसे कर सकता है.

समर के बात सुन कर राघवेंद्र कुमार भी चुप नहीं रह सके और वो बोले.

राघवेंद्र- मेरे हिसाब से समर सही बोल रहा है क्युकी जब आपका इलाज देश के बड़े बड़े डॉक्टर नहीं कर पाए तो ये तो अभी बचा है ये आपका इलाज कैसे कर सकता है.

इन दोनों के बात सुन कर मई बोलै.

मई- जब मई इनके बीमारी को पकड़ कर उसके होने का कारन बता सकता हु तो मई इनका इलाज भी कर सकता हु.

मेरे बात को सुन कर समर घुसे से मुझसे बोलै.

समर- देखो मुझे तुम्हारी कोई सफाई नहीं सुननी है तुम चुप चाप यहाँ से चले जाओ नहीं तो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा.

समर के बात सुन कर मनोज उस पर भड़क जाते है और उससे बोलते है.

मनोज- समर क्या तुम साडी तमीज़ भूल गए हो तुम्हे ये भी पता नहीं की किसके साथ कैसी बाटे करनी चाहिए.

समर- मई जो भी कर रहा हु ठीक कर रहा हु पापा क्युकी ये मुझे सकल से hi ठग लग रहा है अपने इसके कपडे नहीं देखे अगर ये इतना hi महँ डॉक्टर होता तो सड़क से उठा कर कपडा नहीं पहनता आप बुढ़ापे के कारन धीरे धीरे आदमी को पहचानना भी भूल गए है ये आपको बेवकूफ बना रहा है.

समर के बात सुन कर मनोज को बहुत गुसा आया और घुसे से बोले.

मनोज- बस बहुत हो गया समर अब तुम एक शब्द भी बोले तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.

मनोज के बात सुन कर समर चुप हो गया और मुझे घुसे से घूरने लगा लेकिन इधर मुझको भी समर के बात सुन कर गुसा आ गया था इस लिए मई घुसे से बोलै.

मई- मनोज जी अब मई आपका इलाज नहीं कर सकता क्युकी यहाँ पर मेरी बहुत बेइज़्ज़ती हो गयी है अब मई चलता हु लेकिन मई आप सब को एक बात बता देना चाहता हु की मनोज जी के बीमारी का इलाज मेरे अलावा और कोई नहीं कर सकता.

इतना बोल कर मई वह से जाने लगा तभी मुझे रोकते हुए मनोज सिंघानिया बोले.

मनोज- देखो प्रतिक तुम इसके बात का बुरा मत मनो ये अभी तुरंत तुमसे माफ़ी मांगेगा प्लीज तुम मेरा इलाज कर दो तुम मुझे ऐसे बीमारी के हालत में छोड़ कर मत जाओ.

मई- इसके माफ़ी मांगने से इसने जो मेरा बेइज्जती की है वो वापस हो जायेगा नहीं न और क्या बोलै था इसने मुझे है यद् आया ये मुझे ठग बोल रहा था न तो ठीक है मई तो आपका इलाज फ्री में करने वाला था लेकिन आपके बेटे ने मुझे ठग बोल कर बेइज्जती किया है इस मई आपका इलाज करूँगा लेकिन उसके बदले में मई आपसे पुरे 5 करोड़ रूपए लूंगा बोलिये अगर आपको मंजूर है तो मई आपका इलाज सुरु करता हु वर्ण मई यहाँ से जा रहा हु.

मेरे बात को सुन कर सरे लोग शौक हो गए यहाँ तक की मनोज सिंघानिया के भी होश उड़ गए थे इधर जैसे hi समर ने मेरी बात को सुना उसने तुरंत बोलै.

समर- देखा अपने पापा इसने अपना रंग दिखा hi दिया न अब तो आपको विस्वास हो गया होगा की मई सही बोल रहा था की ये एक ठग है और हमें लूटने आया है.

राघवेंद्र- सुन लड़के तुम चुप चाप यहाँ से चले जाओ नहीं तो मई इस सहर में तुम्हारा जीना मुश्किल कर दूंगा.

इन दोनों के बात सुन कर मई वह से जाने लगा मुझे इस तरह से जाता देख कर मनोज तुरंत बोले.

मनोज- चुप रहो तुम दोनों मुझे प्रतिक पर पूरा विश्वास है वो मेरा इलाज कर देगा (फिर मुझसे बोले) ठीक है मुझे मंजूर है तुम मेरा इलाज कर दो मई तुम्हे 5 करोड़ देने के लिए तैयार हु.

मई- तो ठीक है मई आपका इलाज करने के लिए तैयार हु आप सोफे पर लेट जाइये.

इतना बोल कर मई मनोज के तरफ जाने लगा तभी मुझे रोकते हुए समर ने बोलै.

समर- जब पापा ने तुम्हे इलाज के लिए परमिशन दे दी है तो ठीक है तुम पापा के इलाज करो लेकिन मेरी एक बात यद् रखना अगर तुमने मेरे पापा के इलाज नहीं कर पाए तो मई तुम्हे जिन्दा नहीं छोडूंगा तुम सायद सिंघानिया परिवार को जानते नहीं हो मेरा परिवार बिज़नेस के मामले में मुंबई में नंबर 1 है और साथ में मेरे परिवार मार्टिकल आर्टिस्ट से भरा हुआ है इस लिए तुम सोच समझ कर आगे बढ़ना.

मई समर के बात को सुन कर बस मुस्कुरा दिया और मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- और अगर मई तुम्हारे पापा का इलाज कर दिया तो.

मई- तो मई हमेशा तुम्हारा गुलाम बन कर रहूँगा.

मई- ठीक है तो तुम मेरा गुलाम बनने के लिए तैयार हो जाओ.

समर- (घुसे से) तुम पहले मेरे पापा का इलाज तो करो इसके बाद पता चलेगा की तुम्हारी हड्डी टूटेगी या फिर मई तुम्हारा गुलाम बनूँगा.

मई समर के सुन कर मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गया इसके बाद मई सीधा मनोज के पास गया और उनसे बोलै.

मई- आप सोफे पर पेट के तरफ से लेट जाइये मई आपका इलाज एक्यूपंक्चर बिधि से करूँगा.

मेरे बात को सुन कर मनोज तुरंत जाकर सोफे पर पेट के बल लेट गया इसके बाद अपने अपने जेब से सिल्वर नीडल निकला और मनोज के रीढ़ के हड्डियों में सिल्वर नीडल को डालने लगा था थोड़ी देर में hi मई मनोज के शरीर में 9 सिल्वर नीडल दाल दिया था इसके बाद मई अपने एक्यूपंक्चर बिधि से उनका इलाज करने लगा और साथ में अपने एनर्जी से उनके रीढ़ के हड्डी के ब्लॉकेज को हटाने लगा जैसे जैसे ब्लॉकेज हाथ रहा था वैसे वैसे नीडल से काळा तरह द्रव्य बहार निकल रहा था .

मुझे उनके रीढ़ के हड्डी से ब्लॉकेज को हटाने में करीब 5 मिनट्स लग गए तब जा कर उनके रीढ़ के हड्डी के ब्लॉकेज पूरी तरह से हाथ गया जैसे hi उनके रीढ़ के हड्डी से ब्लॉकेज हेट उनका बोन मेरो सही तरह हड्डी में घूमने लगा जिसके कारन मनोज का दर्द धीरे धीरे काम होने लगा फिर मैंने उनके रीढ़ के हड्डी से सरे नीडल को निकल लिया इसके बाद मई उनसे बोलै.

मई- अब आप धीरे धीरे उठ सकते है.

मेरे बोलने के बाद मनोज धीरे धीरे सोफे से उठ कर बैठा गए और फिर धीरे धीरे खड़ा हो गए.

मई- अब आपको कैसा महसूस हो रहा है.

मेरे बात को सुन कर मनोज पहले अपने शरीर को हिलता है फिर जम्प करते हुए बोलता है.

मनोज- मई आज सालो बाद ऐसा महसूस कर रहा हु मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मुझे नया जीवन मिल गया तो तुमको नहीं पता प्रतिक मई आज कितना खुस हु सालो से मई ये दर्द सहते आ रहा हु और आज जा कर मुझे इस दर्द से छुटकारा मिला है थैंक यू थैंक यू प्रतिक.

मई- है तो समीर तुम कुछ गुलाम बनने की बात कर रहे थे तो अब क्या ख्याल है.

समर- देखो तुम मुझसे ऐसी बाटे नहीं कर सकते.

मई- अपने मालिक से ऐसे hi बात किया जाता है.

समर- तुम कुछ ज्यादा hi बोल रहे हो अगर तुम एक और सब्द बोले तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.

मई- अच्छा अगर मई ऐसे hi बोलता रहा तो फिर तुम मेरा क्या करोगे.

समर- मई तुम्हारी हड्डी पसली थोड़ दूंगा तुम मुझे जानते नहीं हो मई एक 7तह लेवल के मार्टिकल आर्ट्स योद्धा हु.

हम दोनों के बात सुन कर मनोज और राघवेंद्र दोनों चौक गए फिर मनोज थोड़े घुसे से समर से बोले.

मनोज- समर तुम प्रतिक पर हाथ उठाओगे क्या मैंने तुम्हे यही सिखाया है की घर आये मेहमान की बेइज्जती करो और उसपे अपना हाथ उठाओ देखो अगर तुम अपनी भलाई चाहते हो तो तुम अभी के अभी प्रतिक से माफ़ी मानगो.

मई- अरे नहीं मनोज जी आज इसे मुझे सबक सीखा hi लेने दीजिये मई भी तो देखु की ये 7तह लेवल मार्टिकल आर्ट्स योद्धा में कितनी ताकत है.

मेरे बोलने के बाद मनोज चौक गए और मुझे देखने लगे फिर थोड़ी देर बाद वो बोले.

मनोज- देखो प्रतिक ये बहुत ताकतवर है और तुम एक डॉक्टर हो इस लिए तुम इससे मुकाबला नहीं कर पाओगे.

मई- (मुस्कुराते हुए) आप मेरी चिंता मत कीजिये मुझे कुछ नहीं होगा है तो समर आओ और मुझे सबक सिखाओ मई भी तो देखु की तुम सिर्फ बाटे hi करते हो या तुम्हारे अंदर ताकत भी है.

मेरी बात को सुन कर समर घुसे से पागल हो गया और मुझ पर अटैक करने के लिए भागते हुए मेरे पास आने लगा मई जब देखा की समर मुझ पर हमला करने वाला है तो मई अपना हाथ हिलाया जिसके कारन वो उड़ता हुआ दूर जा गिरा जिसे देख कर मनोज और राघवेंद्र दोनों छुअक गए और समर के तो दर के मरे हालत hi ख़राब हो गयी और वो डरते हुए बोलै.

समर- तुम तुम ी मैं आप एक ग्रांडमास्टर है.

मनोज- ी don't बिलीव थिस तुम इतने काम उम्र में एक ग्रैंड मास्टर कैसे बन सकते हो.

राघवेंद्र- मुझे तो अपनी आँखों पर विश्वास hi नहीं हो रहा है की मई अपने सामने एक ग्रांडमास्टर को देख रहा हु.

मई- है आप सब ने ठीक सोचा मई एक ग्रांडमास्टर मास्टर hi हु और साथ में एक कुशल डॉक्टर भी मुझे इंसानो को तोड़ने से लेकर जोड़ने तक सब कुछ आता है.

मेरी बात को सुन कर तीनो के हालत ख़राब हो गए समर तो थार थार कपङे लगा और अपने घुटनो के बल बैठ कर मुझसे माफ़ी मांगने लगा.

समर- मुझे माफ़ कर दीजिये मर. प्रतिक मुझसे गलती हो गयी मई अपने ताकत और अमीरी के चलते घमंड में आ गया था इस लिए आपसे बतमीज़ी कर ली.

मई- अरे कोई बात नहीं समर जवानी में ये सब गलतिया होती रहती है मई तुम्हारे बात का कभी बुरा मन hi नहीं मई तो वो 5 करोड़ वाली बात भी बाद तुम्हे चिढ़ाने के लिए बोलै था मई तुम्हे लड़ाई के लिए इस लिए hi उकसाया की मुझे तुम्हारे अंदर के घामड़ को मरना था मई इस बात से खुस हु की तुम्हे अपनी गलती का एहसास हो गया.

राघवेंद्र- मुझे भी माफ़ कर दीजिये मर. प्रतिक मैंने भी आपसे बदतमीज़ी की उसके लिए.

मई- अरे नहीं सर आप ने कुछ भी बदतमीज़ी नहीं है क्युकी जब लोग मुझे पहली बार देखते है तो उनको मई एक मामूली इंसान hi लगता हु वाइस मुझे अपने भी कुछ प्रॉब्लम लग रहा है क्या आपको मिर्गी के बीमारी है क्या.

मेरी बात को सुन कर राघवेंद्र सौक रह गए और मुझसे बोले.

राघवेंद्र- है तुमने सही बोलै मुझे मिर्गी के बीमारी है लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा की तुम्हे कैसे पता चला की मुझे ये बीमारी है.

मई- मई एक डॉक्टर हु मेयर साहब मई देखते hi बीमारी का पता लगा लेता हु.

राघवेंद्र- तो क्या तुम्हारे पास इसका इलाज है.

मई- है मेरे पास इसका इलाज तो है लेकिन आपको इसकी जड़ी बूटियों के लिए बहुत सरे पैसे खर्च करने पड़ेंगे और साथ में आपके इलाज करने मुझे बहुत समय लगेगा आपको पूरी तरह से ठीक होने में लगभग 10 दिन लग जायेंगे.

मेरी बात को सुन कर मेयर राघवेंद्र बहुत खुस हो गए और खुसी से बोले.

राघवेंद्र- कोई बात नहीं चाहे जितना भी पैसा खर्च हो मई करने के लिए तैयार हु और रही बात समय लगने की तो जहा मई सालो से इस बीमारी से परेशां हु वह 10 दिन और सही.

मई- मई आपको कुछ जड़ी बूटियों के नाम लिख कर दे रहा हु आप इसे मंगवा लीजियेगा और जब आपके ये साडी जड़ी बुटिया आ जाइये तो आप मुझे कॉल कर लीजियेगा.

फिर मैंने उनको अपना मोबाइल no देता हु इसके बाद मई मनोज जी से जाने का इजाजत लेते हुए बोलता हु.

मई- तो ठीक है मनोज सर मई चलता हु.

मुझे वह से जाने के बात सुन कर मनोज जी समर के कानो में कुछ बोले तो समर वह से तुरंत hi बहार निकल गया और फिर कुछ देर बाद अपने हाथ में एक कार्ड ले कर वह आया और मनोज को दे दिया मनोज को कार्ड को मुझे देते हुए बोले.

मनोज- इसमें आपके पुरे 5 करोड़ है आप इसे अपने पास रख लीजिये.

मई- अरे ये आप क्या कर रहे है मई तो बस मजाक में बोलै था मई ये पैसा नहीं ले सकता.

मनोज- लेकिन जब मई आपको पैसे देने के लिए तैयार हो गया था तब मई मजाक नहीं कर रहा था आपको ये पैसा लेना hi होगा.

मई- मई ये काम पैसो के लिए नहीं करता मनोज जी आप मुझे पैसे दे कर मेरे विद्या को खरीद नहीं सकते इस लिए सॉरी मई ये पैसा नहीं ले सकता.

मनोज- आपको तो ये पैसा लेना hi होगा अगर आप इस पैसे को मेरे इलाज के बदले में नहीं लेना चाहते है तो ठीक है आप मेरे इस नालायक बेटे को अपना शिस्य बना लीजिये और इसे मार्टिकल आर्ट्स के ट्रेनिंग दे दीजिये और आप इस पैसे को ट्रेनिंग के फीस समझ कर रख लीजिये.

मैंने जब देखा की मनोज मुझे पैसे दिए बिना नहीं मानेगे तो मई उनसे बोलै.

मई- देखिये मनोज जी मेरे शिस्य बनने के लिए इसमें काबिलियत भी तो होनी चाहिए जो मुझे नहीं लग रहा है की इसमें है और वैसे भी आप इससे तो पूछ लीजिये की इसे मेरा शिस्य बनना है या नहीं.

मेरे बात को सुन कर समर तुरंत अपने घुटनो के बल जमीं पर बैठ गया और मुझसे बोलै.

समर- गुरुदेव मई आपका शिस्य बनाने के लिए तैयार हु आप मुझे अपना शिस्य बना लीजिये मई बहुत hi कड़ी मेहनत से ट्रेनिंग करूँगा और आपके हर बात को मानूंगा आप मुझ पर एक दिन फक्र करेंगे.

समर जनता था की मई एक ग्रांडमास्टर हु और उसके लिए एक ग्रांडमास्टर के शिस्य बनना गौरव की बात थी मुझे भी उसकी आँखों में सचाई नजर आयी तो मई उससे बोलै.

मई- ठीक है मई तुम्हे अपने शिस्य बनाने के बारे में सोचूंगा लेकिन मेरी एक शर्त है.

समर- और वो शर्त क्या है गुरु देव.

मई- पहली शर्त है की तुम मुझे गुरुदेव नहीं बोलोगे और दूसरी शर्त ये है की तुम्हे मई एक तकनीक दूंगा और तुम्हे उसका अभ्यास करना होगा तुम्हारे पास पुरे 15 दिन का समय है तुम्हे 15 दिन में 9तह लेवल पर पहुंचना है.

मेरी बात को सुन कर वह पर खड़े तीनो लोग चौक गए.

मनोज- लेकिन ये तो आशम्भव है मर. प्रतिक कोई कितना भी कठिन ट्रेनिंग कर ले लेकिन वो 15 दिन में 2 लेवल को पर नहीं कर सकता.

मई- कर सकता है क्युकी मई इसे तकनीक के साथ साथ एक दवा भी दूंगा जिसे खाने के बाद इसके शरीर के अंदर बहुत साडी शक्तियां आ जाएगी और इसकी इंटरनल एनर्जी भी बढ़ जायेगा जब इसकी इंटरनल एनर्जी बढ़ जायेगा तब ये उस तकनीक का ट्रेनिंग करेगा तो ये आराम से 9तह लेवल तक जा सकता है.

समर- ठीक है मर. प्रतिक मई तैयार हु अपने शर्त के लिए.

इसके बाद मैंने उससे एक कागज और पेन मंगवाया फिर उस कागज पर एक तकनीक को लिख कर उसे दे दिया इसके बाद मई अपने जेब से दो संजीवनी गोली निकला और एक गोली समर को और एक गोली मनोज को देते हुए बोलै.

मई- अगर मई गलत नहीं हु तो आपको जब छोट लगी थी तब आप 9तह लेवल पर थे और छोट लगने के बाद आप सीधे 5तह लेवल पर पहुंच गए है मैंने ठीक बोलै न.

मनोज- है आप सही बोल रहे है.

मई- आप इस गोली को सोते समय खा लीजियेगा और तुम भी समर इस गोली को सोते समय खा लेना और कल से तुम अपना ट्रेनिंग सुरु कर देना.

मनोज- लेकिन ये गोली का नाम क्या है मई ऐसी गोली आज तक मार्किट में नहीं देखि है कभी और इसको खाने से क्या क्या फायदा होता है.

मई- इस गोली को मैंने खुद बनाया है और अभी मई इसे मार्किट में नहीं उतरा है मैंने इस गोली का नाम संजीवनी गोली रखा है और इसको खाने के बाद क्या क्या फायदे है वो आपको खाने के बाद पता चलेगा ठीक है मई इस गोली की एक खासियत तो बता hi सकता हु मनोज अब आप जवान होने वाले है.

मेरे बात को सुन कर तीनो चौक और फिर उस गोली को ध्यान से देखने लगे इधर राघवेंद्र भी उस गोली को लालची नजर से देख रहा था जब उससे रहा नहीं गया तो वो बोलै.

राघवेंद्र- क्या एक गोली मुझे भी मिल सकती है.

मई- है मिल तो सकती है लेकिन आप इसे अभी नहीं खा सकते क्युकी आप अभी बीमार है और जबतक आपकी बीमारी ठीक नहीं हो जाती आप इस गोली को नहीं खा सकते लेकिन मई ये गोली आपको दे रहा हु आप इसे अपने परिवार में किसी को दे सकते है और रही बात आपकी तो मई आपके इलाज के बाद आपको भी एक गोली दे दूंगा.

राघवेंद्र- बहुत बहुत धन्यवाद् प्रतिक मई तुम्हे आज एक वचन देता की तुम्हे इस सहर में कुछ भी प्रॉब्लम होगा तुम मुझे बस एक बार यद् करना मई तुरंत hi वह पर हाज़िर हो जाऊंगा.

मनोज- मर. प्रतिक आप जैसा बोल रहे है अगर ये गोली सच में वैसा है तो आप इसे मार्किट में क्यों नहीं उतारते अगर ये संजीवनी गोली मार्किट में आ गया तो तहलका मचा देगा.

मई- मई इस बारे में अभी नहीं सोचा है लेकिन जल्द hi इसके बारे में सोच कर आपको बताऊंगा. तो ठीक है मनोज जी मई चलता हु और समर तुम अच्छे से ट्रेनिंग करना मई तुमसे 15 दिन बाद मिलूंगा और है मुझे तुम पर विश्वास है की तुम कर लोगे मेरे विश्वास को टूटने नहीं देना.

समर- मई पूरी कोशिश करूँगा की आपके विस्वास पर खरा उतरु.

मई- और है मेरे बारे में आप सब किसी को मत बताइयेगा की मई एक ग्रांडमास्टर हु.

मनोज- ठीक है मर. प्रतिक आपके बारे में हम किसी से कुछ नहीं बोलेंगे.

मई- तो ठीक है अब मई चलता हु मुझे इजाज़त दीजिये.

मनोज- ठीक है मई आपको जाने से नहीं रोक रहा लेकिन अब तो आप इस कार्ड को रख लीजिये.

मई उनकी बात को सुन कर मुस्कुराते हुए उस कार्ड को अपने पास रख लिया इसके बाद मई वह से निकल गया सिंघानिया मेन्शन से निकलने के बाद मई सबसे पहले एक तस्य बुक किया फिर शनाया को कॉल लगाया.

मई- हैल्लो शनाया क्या तुम ऑफिस से फ्री हो गयी.

शनाया- है प्रतिक मई फ्री हो गयी हु तुम बताओ तुम अभी कहा हो मई तुम्हे लेने वही आ जाती हु.

मई- नहीं तुम वही रुको मई आधे घंटे में वह पहुंच रहा हु.

शनाया- ठीक है मई यही पर तुम्हारा इंतज़ार कर रही हु.

शनाया से बात करने के बाद मई आज जो सिंघानिया मेन्शन में हुआ उसके बारे में सोचने लगा.

मई- (अपने मन में) चलो अच्छा हुआ जो मई मनोज सिंघानिया को ठीक कर दिया अब सिंघानिया परिवार के साथ साथ इस सहर के मेयर भी मेरे साथ है मेरे बिज़नेस ने ये लोग आगे चल कर मेरा बहुत काम आने वाले है और मई इनको अपनी शक्ति का छोटा सा नमूना भी दिखा दिया ताकि आगे चल कर ये मुझसे गाडरी न करे वैसे भी मैंने इनको पूरी सच बताया नहीं की मई ग्रांडमास्टर से कही आगे के लेवल का योद्धा हु नहीं तो इन सब को वही हार्ट अटैक आ जाता और इस समर में मुझे पुरे पॉजिटिव एनर्जी महसूस हुयी अगर में कड़ी ट्रेनिंग करेगा तो जल्द hi ये ग्रांडमास्टर के लेवल पर पहुंच जायेगा जो आगे चल कर मेरा बहुत काम आएगा.

खैर यही सब सोचते हुए मई कब शनाया के कंपनी के पास पंहुचा मुझे पता hi नहीं चला वह जाने के बाद मई तस्य से उतरा और तस्य वाले को पेमेंट किया hi था की तभी मुझे शनाया के कॉल आ गया.

शनाया- हैल्लो प्रतिक कहा पहुंचे हो अभी तुम

मई- मई तुम्हारे कंपनी के पास पहुंच गया हु और बहार तुम्हारा इंतज़ार कर रहा हु.

शनाया- ठीक है वही पर रुको मई 2 मिनट में आ राहु हु.

इतना बोल कर शनाया ने कॉल कट कर दिया थोड़ी देर बाद शनाया मुझे बहार आती हुयी दिखाई दी सनाया के चेहरे पर खुसी के भाव थे वो बहार आते मुझे देख कर मुझे गले लगा ली आज ये पहली बार हुआ था की शनाया ने मुझे गले लगाया था मेरा मन अभी खुसी के मरे नाचने का मन कर रहा था.

मई- क्या बात है शनाया आज तुम बहुत लग रही हो आज कंपनी में कुछ हुआ है क्या.

शनाया- है है आज मई बहुत खुस हु और इस खुसी के कारन तुम हो प्रतिक आज तुम्हारे वजह से hi मई इतने बड़े कंपनी के मालकिन बानी हु आज मुझे अपने ऑफिस में मद के केबिन में मद के चेयर 💺 पर बैठ कर इतनी खुसी हुयी की मई तुम्हे बता नहीं सकता जब से तुम मेरे जिंदगी में आये हो मुझे हमेसा खुसी hi मिल रही है थैंक प्रतिक तुम्हे मेरे जिंदगी में आने के लिए.

मई- इसमें थैंक की क्या बात हुयी शनाया मैंने जो भी किया वो अपने परिवार और अपने वाइफ के लिए किया भले hi तुम्हारी माँ डैड मुझे अपना नहीं मानते भले hi तुम मुझे अपना पति नहीं मानती लेकिन मई तुम्हारे माँ डैड को अपना परिवार मंटा हु और तुम्हे अपना बीवी और अपने के लिए हर आदमी वही करेगा जो मैंने तुम्हारे लिए किया है.

शनाया मेरी बात को सुन कर इमोशनल हो गयी और उसके आँखों में थोड़ा आंसू आ गए वो भरे हुए गले से मुझसे बोली.

शनाया- सॉरी प्रतिक मेरे माँ डैड के बेहेवियर के लिए वैसे मई तुमको बता दू की मेरे माँ डैड दिल के बुरे नहीं है बस वो लोग मेरे लिए कुछ ज्यादा hi पोस्सेसिवे है इस लिए तुम उनके बातो को बुरा मत मन्ना और उनके दिल में अपने लिए जगह बनाने की कोशिश करो देखना एक दिन वो तुमको इतना प्यार करेंगे जितना वो लोग मुझे भी नहीं करते.

मई- मई उनके बात का आज तक कभी बुरा नहीं मन शनाया क्युकी वो लोग तुम्हारे माँ डैड है इसका मतलब है की वो मेरे भी माँ डैड हुए तो भला अपने माँ डैड के बातो कोई बुरा मंटा है क्या.

शनाया मेरी बात सुन कर मुस्कुराते हुए मुझे देखने लगी और फिर बोली.

शनाया- थैंक्स अगेन प्रतिक मेरे जिंदगी में आने के लिए.

इतना बोल कर शनाया में गलो पर एक किश कर दी मई समझ गया था की अब शनाया भू मुझसे प्यार करने लगी है लेकिन वो मुझसे बोलने में हिचकिचा रही है कोई बात नहीं एक न एक दिन ये जरूर मुझसे अपने प्यार का इजहार करेगी.

मई- ठीक है शनाया तो अब हम चलते है क्युकी सोनू के पेरेंट्स हमारा इंतजार कर रहे होंगे.

शनाया- है चलो.

इसके बाद शनाया ने अपनी कार निकली और फिर हम सोनू के घर के तरफ निकल गए हमें उसके घर तक पहुंचने में ज्यादा प्रॉब्लम नहीं हुयी क्युकी सोनू ने पहले hi अपना एड्रेस मुझे सेंड कर दिया था खैर मई जब उसके घर के पास पंहुचा तो देखा की उसका घर ज्यादा बड़ा तो नहीं था लेकिन देखने में बहुत सुन्दर लग रहा था खैर हम उसके दरवाजे पर पहुंच कर दुर्बल बजाय तो कुछ देर बाद एक छोटी लड़की ने आकर दरवाजा खोली और हमें सामने देख कर पूछी.

लड़की- जी आप कोण है और आपको किस्से मिलना है.

मई- जी मेरा नाम प्रतिक है और मुझे सोनू से मिलना है क्या वो अंदर है.

मई अभी उस लड़की से बात कर hi रहा था की तभी मुझे अंदर से सोनू के आवाज सुनाई दी.

सोनू- कोण है पूजा दरवाजे पर.

पूजा- कोई प्रतिक नाम का आदमी है और उनके साथ एक लड़की भी वो तुमसे मिलना आये है.

सोनू ने जैसे मेरा नाम सुना वो भागते हुए आया और मुझे गले लगा लिया और बोलै.

सोनू- तुम आ गए भाई मई कब से तुम दोनों का इंतजार कर रहा था चलो अंदर चलते है आइये भाभी.

फिर मई और शनाया घर के अंदर आ गए घर के हॉल में सोनू के पापा विजय वर्मा बैठे हुए थे जब मैंने उनको देखा तो मई और शनाया ने उनको नमस्ते किये.

विजय- खुसी रहो बीटा आज बहुत दिन बाद तुम्हे देख रहा हु वैसे ये लड़की कोण है.

मई- जी ये मेरी पत्नी शनाया है.

विजय- वो तो आज मेरे घर पर बेटे के साथ साथ बहुरानी भी आयी है पूजा जाओ और जाकर अपनी मौसी को बोलो की उसका बीटा प्रतिक और उसकी बहु शनाया घर पर आये है ये औरत जब से हॉस्पिटल से घर आयी है तब से बस एक hi रत लगाए हुए है की मेरे दो बेटे है एक वो जिसको मैंने जनम दिया और दूसरा वो जिसने मुझे नया जीवन दिया है मुझे दूसरे बेटे से मिलना है.

इतना बोल कर विजय हसने लगे उधर पूजा जाकर गीता वर्मा को ये बताती है की प्रतिक आया है तो वो अपने कमरे से बहार आती है और मुझे देखते hi मुझे अपने गले लगा लेती है और बोलती है.

गीता- तू आ गया बीटा जब से तुम हॉस्पिटल में मेरा इलाज कर के गए हो तब से ये देखने भू नहीं आये की तुम्हारी आंटी जिन्दा है या नहीं.

मई- सॉरी आंटी वो क्या है न की मुझे आपसे मिलने का समय hi नहीं मिला लेकिन मई आपके बारे में हमेसा सोनू से पूछता रहा था.

गीता- ये लड़की कोण है प्रतिक बीटा.

मई- वो आंटी ये मेरी वाइफ है और आपकी बहु शनाया है.

मेरे बात सुन कर गीता आंटी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ी और शनाया को गले लगते हुए बोली.

गीता- बहुत प्यारी बची है और सुन्दर भू बहुत है जानती हो शनाया तुम बहुत किस्मत वाली हो जो तुम्हे प्रतिक मिला ये लाखो में एक है आज मई जिन्दा हु तो इसके वजह से hi हु इसने मेरी इलाज कर के मुझे जीवन दान दिया है तब से मई इसे अपना दूसरा बीटा मैंने लगी है.

शनाया गीता के बात सुन कर कंफ्यूज हो गयी और मेरे तरफ देखने लगी फिर वो गीता को देखते हुए बोली.

शनाया- आंटी आपको गलत फहमी हुयी है प्रतिक कोई डॉक्टर नहीं है वो तो सोनू के साथ सोल्लगे में पढता है इस लिए ये आपका इलाज कैसे कर सकता है.

शनाया के बात सुन कर इस बार गीता आंटी चौक गयी मुझे देखते हुए बोली.

गीता- प्रतिक क्या तुमने शनाया को नहीं बताया की तुम एक चमत्कारी डॉक्टर हो.

मई- नहीं आंटी मुझे कभी ऐसा मौका मिला हु नहीं की मई शनाया को ये सब बता सकू.

शनाया अभी भी कन्फूसिओं में कभी मुझे तो कभी गीता आंटी को घूरे जा रही थी जब शनाया से रहा नहीं गया तो वो बोली.

शनाया- यहाँ क्या चल रहा है प्रतिक तुम मुझे क्या नहीं बताये और ये अनूठी क्या कह रही है तुमने इनका इलाज किया है.

मई- शनाया वो दरअसल बात ऐसी है की मई एक कुशल बैध हु और मई लोगो को एक्यूपंक्चर बिधि से इलाज करता हु मैंने hi आंटी को अपने एक्यूपंक्चर बिधि से hi ठीक किया था.

मेरी बात को सुन कर एक डैम से सौक हो गयी और मन hi मन सोचने लगी.

शनाया- (मन में) और कितने टैलेंट है इसके अंदर पहले तो मुझे पता चला की ये एक एंटीक एक्सपर्ट है और अब पता चल रहा है की ये एक डॉक्टर भी है हम सब कितना गलत थे प्रतिक के बारे में ये तो कही से गवर नहीं है है लेकिन ये कपडे गवर जैस पहनता हाउ कोई बात नहीं ये शनाया के पति है इसको ड्रेस सेन्स भी मई चेंज करवा दूंगी.

शनाया को जब मेरी एक और काबिलियत के बारे में पता चला तो वो पहले सौक हो गयी थी लेकिन अब वो अब बहुत खुस थी हमलोग बात कर hi रहे थे तब तक पूजा ने हम सब के लिए डाइनिंग टेबल पर डिनर लगा दिया और हम सब बात करते हुए डिनर करने लगे.

थोड़ी देर ऐसे hi डिनर करने के बाद हम सब वह से उठ कर अपने अपने हाथ को वाश किया और फिर मई विजय वर्मा से बोलै.

मई- अंकल बहुत समय हो गया है अब हम दोनों को जाना चाहिए.

विजय- अभी थोड़ी देर रुको बीटा मुझे तुम्हे कुछ देना भी है.

मई- क्या देना है अंकल.

विजय- यद् है बीटा जब तुम हॉस्पिटल में गीता के इलाज किया था तो मई तुम्हे कुछ देने का वडा किया था अब वो समय आ गया है की मई अपना वडा पूरा करू.

मई- आप ये क्या बोल रहे है अंकल मई आपसे उस समय भी कुछ लेने से मन किया था और अब भी मई आपसे कुछ नहीं ले सकता क्युकी आंटी का इलाज करना मेरा फ़र्ज़ था और वैसे भी आंटी मुझे अपना बीटा मानती है तो क्या पैसे या फिर कुछ सामान के लिए एक बीटा अपनी का इलाज करेगा नहीं न अंकल तो मई आपसे कुछ कैसे ले सकता हु.

विजय- ठीक है तो तुम इलाज के बदले में नहीं लेकिन ले सकते लेकिन एक बाप अपने बेटे को तो दे सकता है न और वैसे भी जो कुछ भी मई तुम्हे देने वाला हु वो मेरा किसी काम का नहीं है ऐसे hi मेरे पास पड़ा हुआ है इस लिए वो चीज़ मई तुमको देने वाला हु.

मई- ऐसा कोण का चीज़ है अंकल जो आपके किसी काम का नहीं है.

विजय- आओ मेरे साथ मई तुम्हे दिखता हु.

फिर अंकल मुझे और शनाया को ले कर एक रूम में आ गए जब मई रूम में आया तो मेरा ध्यान एक पत्थर पर और एक अजीब तरह के धातु पर गया फिर मई उन दोनों चीज़ को अपने दिव्या दृस्टि से देखा तो चौक गया इधर शनाया भी उस धातु और पत्थर को देख कर चौक गयी थी फिर उसने अंकल से पूछी.

शनाया- अंकल ये पत्थर और ये अजीब तरह का धातु क्या है.

विजय- ये तो मुझे नहीं पता बीटा की ये क्या है लेकिन ये मेरे परिवार के पास सदियों से है.

मई- मई जनता हु की ये क्या है.

शनाया- तुम जानते हो की ये क्या है लेकिन तुम्हे कैसे पता की ये क्या है.

मई- शायद तुम भूल गयी हो शनाया की मई एंटीक को पहचान सकता हु तो इसे पहचानने में मुझे क्या प्रॉब्लम होगी.

शनाया- तो मुझे भी बताओ की ये क्या है.



मई- ये जो पत्थर तुम्हे दिख रहा है न ये कोई मामूली पत्थर नहीं है बल्कि ये एक स्टोरेज पत्थर है और ये धातु किसी दूसरे प्लेनेट के धातु है जो सायद उल्का पिंड गिरने के कारन धरती पर आ गया है अगर हम इसका उपयोग कर एक हथियार बनाये तो उस हथियार इतना मजबूत होगा की उसे कुछ भी काट नहीं सकता.
 
अपडेट 18

Stone's गैंबलिंग


सहर के बहार एक जंगल के एक गुफा में तांत्रिक गोरखनाथ हवन कुंड के आगे बैठा हुआ कुछ मंत्र पढ़ रहा था और हवन कुंड में खून का आहुति दे रहा था जब उसका मंत्रो उच्चारण ख़तम हुआ तभी वह पर एक साया प्रकट हुआ जिसे देख कर तांत्रिक गोरखनाथ ने उससे पूछा.

गोरखनाथ- क्या खबर है उस आदमी का कुछ पता चला जिसने मेरे शक्तिशाली गुलाम को ख़तम किया था.

साया- मालिक मैंने बहुत प्रयास किया लेकिन मई उसका पता नहीं लगा पाया ऐसा लग रहा है की उस आदमी को कोई शक्ति रक्षा कर रहा है या तो वो आदमी खुद इतना शक्तिशाली है की मई उस तक पहुंच नहीं पाया या फिर ऐसा हो सकता है की उस आदमी के पीछे कोई ताकतवर इंसान हो.

गोरखनाथ उस साया के बात सुन कर घुसे से पागल हो जाता है और दहाड़ते हुए बोलता है.

गोरखनाथ- तुम एक मेरा एक छोटा सा काम भी नहीं कर पाया और यहाँ आ कर मेरे दुश्मन की बड़ाई कर रहा है अब तुम्हे जिन्दा रहने का कोई हक़ नहीं है मई तुम्हे जला कर मर दूंगा.

गोरखनाथ के बात सुन कर वो शया थार थार कपङे लगा और बोलै.

शया- छमा मालिक छमा मुझे माफ़ कर दीजिये मालिक अब से ऐसा गलती दोबारा नहीं होगा.

गोरखनाथ- मेरे पास माफ़ी नाम के कोई मंत्र नहीं है इस आज तुमने जो गलती की है उसके लिए तुम्हे मरना hi होगा.

इतना बोल कर गोरखनाथ ने वह पर पड़े हुए भभूत को उठाया और कुछ मंत्र पढ़ते हुए उस साये पर दाल दिया जिसके कारन वो साया जलने लगा फिर थोड़ी देर बाद वो साया पूरी तरह से जल कर गायब हो गया जिसे देख कर गोरखनाथ जोर से हस्ते हुए बोलै.

गोरखनाथ- है है है है जैसे मैंने इस साये को जला कर मारा है वैसे hi तुझे भी मरूंगा चाहे तू जो कोई भी हो तुम्हे मरना hi होगा मेरे ये साया निकम्मा निकला जो तुम्हे धुंध नहीं पाया लेकिन अब मई अपने सबसे शक्तिशाली महाप्रेत को काम पर लगाऊंगा तब मई देखता हु की तुम उससे कैसे बचते हो.

इतना बोल कर वो फिर से कुछ मंत्र पढ़ने लगा और हवन कुंड में खून के आहुति देने लगा फिर वो खंजर निकल कर अपने दाहिने हाथ की अंगूठे पर एक चीरा लगाया और उसमे से कुछ खून के बून्द हवन कुंड में डाला जैसे hi उसका खून हवन कुंड में गिरा हवन कुंड के आग और भड़क गयी तभी उस हवन कुंड से एक आकृति अट्ठास करते हुए बहार आया और बोलै.

आकृति- है है है है है है मालिक अपने मुझे कैसे यद् किया आपका ये गुलाम महाप्रेत आपके काम करने के लिए तत्पर है आप आदेश दीजिये.

गोरखनाथ- मुझे अपने एक ऐसे दुश्मन को ढूँढना है जिसके बारे में मई कुछ नहीं जनता बस तुम्हे उसे किसी तरह से धुंध कर मेरे पास लाना होगा.

महाप्रेत- आपका ये गुलाम आपके काम को जरूर पूरा करेगा मई आपके वो दुश्मन चाहे पटल में भी छुपा हो आपके ये गुलाम उसको वह से भी उसे धुंध कर लाएगा.

गोरखनाथ- तुम मेरे दुश्मन को कमजोर मत समझो वो तुम्हे ऐसे hi नहीं मिलेगा क्युकी उसके पास कुछ ऐसी शक्तियां है जिसके कारन उसे ढूँढना मुश्किल है इस लिए तुम्हे उसे ढूंढने के लिए एक जल बिछाना होगा.

महाप्रेत- ठीक है मालिक मई ऐसा जल बिछाऊंगा की वो उसमे जरूर फास जायेगा.

इतना बोल कर वो महाप्रेत वह से गायब हो गया उसको गायब होते hi गोरखनाथ जोर जोर से हसने लगा और बोलै.

गोरखनाथ- है है है है अब तुम मेरे इस हमले से कैसे बचोगे रक्षक मेरे इस महाप्रेत के सडयंत्र के कारन तुम्हे बहार आना hi होगा और जब तुम बहार आओगे तो मई तुम्हारे बारे में सब जान जाऊंगा और तब होगा मेरा बदला पूरा है है है है है.

इधर सोनू के घर पर सोनू के पापा विजय वर्मा मुझे और शनाया को एक रूम में ले कर जाते है जहा मुझे स्टोरेज पत्थर और एक दूसरे गृह के धातु दीखता है उस पत्थर और धातु को देख कर शनाया विजय से पूछती है.

शनाया- अंकल ये पत्थर और अजीब तरह के दिखने वाला धातु कोण सा है मैंने आज तक ऐसा धातु और पत्थर नहीं देखा.

विजय- ये तो मुझे भी नहीं पता है बीटा क्युकी ये दोनों चीज़ मेरे पूर्वजो के समय से चला आ रहा है.

मई- मुझे पता है की ये क्या है.

शनाया- क्या तुम्हे पता है तो ठीक है तुम्ही बता दो की ये क्या है.

मई- ठीक है बताता हु ये जो तुम पत्थर देख रही हो न इसे स्टोरेज पत्थर बोलते है और इस पत्थर का क्या उसे होता है ये तुम्हे बाद में पता चलेगा और ये अजीब तरह का दिखने वाला धातु कोई आम धातु नहीं बल्कि ये इस दुनिया के सबसे मजबूत धातु है अगर इस धातु के कोई हथियार बनाया जाये तो उस हथियार का मुकाबला कोई नहीं कर सकता इससे बना हथियार एक ग्रांडमास्टर को आराम से मर सकता है और जब तुम एक मार्टिकल आर्टिस्ट हो तो तुम्हे पता hi होगा की एक ग्रांडमास्टर के शरीर कितना मजबूत होता है.

शनाया- क्या तुम सच बोल रहे हो क्या इससे बना हथियार इतना मजबूत होता है.

मई- है मई सच बोल रहा हु.

विजय- तो बीटा मई तुम्हे यही दोनों चीज़ देना चाहता हु क्युकी ये मेरे किसी भी काम का नहीं है.

मई- लेकिन अंकल मई इसे नहीं ले सकता क्युकी ये बहुत महंगा है अगर आप इसे मार्किट में सेल तो आपको क्रोरो रूपए मिलेंगे.

विजय- नहीं बीटा ये मेरे पूर्वजो की अमानत है इस लिए मई इसे पैसो के लिए बेच सकता इस लिए मई तुम्हे ये उपहार के रूप में दे रहा हु.

मई- ठीक है मई इसे लेने के लिए तैयार हु.

इतना बोल कर मई उस धातु और पत्थर को उठा लिया वो पत्थर यही को टेनिस बोलल के जितना बड़ा था और वो धातु लगभग इतना बड़ा था की उससे 20 तलवार आराम से बनाई जा सकती थी वो धातु भले बड़ा था लेकिन उसकी वजन ज्यादा नहीं था.

यही तो खासियत थी इस धातु का ये धातु जितना मजबूत होता है उतना hi हल्का भी होता है खैर मई वो दोनों चीज़ को उठाया और दोनों को बहार जाकर गाड़ी के डिकी में रख दिया और फिर घर के अंदर आ गया इसके बाद मैंने अपने जेब से 2 संजीवनी गोली निकला और विजय अंकल को देते हुए बोलै.

मई- अंकल ये दो गोली मई आपको दे रहा हु एक गोली आप सोते समय खुद खा लीजियेगा और एक आंटी को दे दीजियेगा.

विजय- ये किस चीज़ की दवा है बीटा इसको खाने से क्या होगा.

मई- अंकल आप इसे खा लीजियेगा इसके बाद सुबह में बाद खुद इसका रिजल्ट देख लीजियेगा की ये गोली क्या करता है ठीक है अंकल तो अब हम दोनों निकलते है क्युकी रत ज्यादा हो गयी है घर पे मम्मी पापा इंतजार कर रहे होंगे.

विजय- ठीक है बीटा तुम जाओ लेकिन तुम दोनों यहाँ आये जाते रहना.

मई- ठीक है अंकल.

इतना बोल कर मई और शनाया वह से निकल गए रस्ते में शनाया मुझसे बोली.

शनाया- तो तुम एक डॉक्टर भी हो.

मई- है वो मई जब गाओ में था तब वह पर मेरा एक गुरुदेव थे जो मुझे आयुर्वेदिक चिकित्षा सिखाया करते थे मई उन्ही से सब कुछ सीखा है.

शनाया- और वो जो गोली तुमने अंकल को दी वो वही गोली थी न जो तुमने मुझे दी थी.

मई- है ये वही गोली थी.

शनाया- तो तुम मुझे सच सच बताओ की वो गोली किसने बनाई है क्युकी मुझे लग रहा है की ये गोली भी तुमने hi बनाया है.

मई- है ये गोली मैंने hi बनाया है सॉरी तुमसे झूठ बोलने के लिए.

शनाया- और क्या क्या झूठ बोले हो तुम मुझसे.

मई- मैंने तुमसे कोई झूठ नहीं बोलै है बस सच को तुमसे छुपाया है.

शनाया- तो अब तुम ये भी बता दो की और क्या क्या तुम मुझसे छुपाये हो.

मई- ऐसी बहुत सी चीज़ है जो मैंने तुमको नहीं बताया है लेकिन सही समय आने पर मई तुमको सब कुछ बता दूंगा और जब तक मई तुम्हे सब सच न बता दू तुम मुझसे कुछ नहीं पूछोगी.

शनाया- ठीक है लेकिन मई तुम पर अब बहुत विस्वास करने लगी हु तुम कभी मेरे विस्वास को मत तोडना.

मई- मई वडा करता हु की कभी भी मई तुम्हारा विस्वास नहीं तोडूंगा.

हम दोनों बाटे करते करते कब घर पहुंच गए पता hi नहीं चला घर पहुंचने के बाद मई दुर्बल बजाय तो शनाया के मम्मी ने दरवाजा खोला और मुझे देखते hi मुझ पर भड़क गयी और बोली.

पुस्पा- आ गया कामचोर यहाँ घर पर खाना तुम्हारा बाप बनाएगा जो ऐसे इतने रत तक बहार घूम रहे हो.

पुस्पा के बात सुन कर मई चुप रहा लेकिन शनाया से पुस्पा के बात बर्दास्त नहीं हुआ और वो तुरंत पुस्पा को जबाब देते हुए बोली.

शनाया- माँ आप प्रतिक से ये कैसी बाटे कर रही है वो हमारे घर का नौकर नहीं है वो मेरा पति है समझी आप उससे इस लहजे में बात नहीं कर सकती.

मई- क्या यार शनाया तुम माँ को क्यों कुछ बोल रही हो मेरी hi गलती है मुझे समय पर आ जाना चाहिए था.

शनाया- नहीं प्रतिक तुम्हारी कोई गलती नहीं है तुम मेरे घर के नौकर नहीं हो तुम मेरे पति हो और तुमसे मेरे सामने कोई भी बदतमीज़ी से बात नहीं कर सकता चाहे वो मेरे घरवाले hi क्यों न हो और माँ आपको अगर खाना का hi प्रॉब्लम है तो मई कल hi एक नौकर रख लेती हु जो आपको समय पर खाना बना कर दे देगा.

पुस्पा शनाया के बात सुन कर हैरान रह गयी थी क्युकी शनाया आज तक उससे ऐसे लहजे में बात नहीं की थी शनाया के बात सुन कर पुस्पा के आँखों में आंसू आ गया और वो रट हुए बोली.

पुस्पा- शनाया आज तुमने इस दो कौड़ी के इंसान के लिए मुझे बाटे सुनाई क्या हो गया है तुम्हे कही ये तुम पर कोई जादू तो नहीं कर दिया देखो शनाया ये लड़का तुम्हारे लिए सही नहीं है तुम इससे तलाक ले लो.

शनाया- बस माँ आप बहुत बाटे बोल दी मई प्रतिक से कभी भी तलाक नहीं लुंगी और वो कोई दो कौड़ी इंसान नहीं है आप अभी उसे जानते नहीं है.

पुस्पा- मई कुछ नहीं सुन्ना चाहती आज तुमने इस लड़के के लिए मुझे बाटे सुनाई है तुम्हे तो अब इससे तलाक लेना hi होगा मई भी देखती हु की तुम इससे तलाक कैसे नहीं लेती.

इतना बोल कर पुस्पा अपने पेअर पटकती हुयी घर के अंदर चली गयी पुस्पा के बात सुन कर शनाया को भी टेंशन हो गया था इस लिए वो भी रूम में चली गयी उसके रूम में जाते hi मैंने कार के डिकी से दोनों चीज़ को बहार निकला और फिर शनाया के पीछे पीछे उसके रूम में आ गया और सोफे पर जा कर सो गया.

नेक्स्ट डे 4 बजे सुबह में मई जग गया तो देखा की शनाया अभी भी सो रही है तो मई वह से टेलिपोर्ट हो कर हवेली आ गया और ट्रेनिंग करने लगा 1 घंटा ट्रेनिंग करने में बाद मई फिर से टेलिपोर्ट हो कर घर आ गया जब मई रूम में पंहुचा तो देखा की शनाया अभी भी सो रही थी तो मई जाकर उसे जगाया और उससे बोलै.

मई- अगर तुम रोज इतने देर तक सोती रही तो तुम बन गए ग्रांडमास्टर चलो अब उठो और जाकर ट्रेनिंग करो मई तुम्हारे लिए चाय बना कर लता हु.

इतना बोल कर मई किचन में गया और चाय बनाने लगा फिर दो कप में चाय को डाला और शनाया के रूम में पहुंच गया अब तक शनाया उठ कर फ्रेश हो गयी थी और रूम में मेरा इंतज़ार कर रही थी फिर मई उसको चाय दिया चाय पिने के बाद शनाया ऊपर छत पर ट्रेनिंग करने चली गयी और मई किचन में नास्ता बनाने.

सुबह के नास्ता करने के बाद मई तैयार हो कर बहार निकला तो शनाया भी आ गयी और मुझसे बोली.

शनाया- आज से तुम सोल्लगे मेरे साथ चलोगे.

मई- सॉरी शनाया मुझे थोड़ा काम है इस लिए मई आज सोल्लगे नहीं जा पाउँगा लेकिन मई कल से तुम्हारे साथ hi चलूँगा.

शनाया- ठीक है.

इतना बोल कर शनाया वह से अपने कार लेकर निकल गयी उसके जाते hi मैंने बलदेव सिंह को कॉल किया थोड़ी देर रिंग जाने के बाद बलदेव ने कॉल उठाया तो मई बोलै.

मई- हैल्लो बलदेव क्या तुम आज फ्री हो.

बलदेव- जी बॉस मई फ्री हु आपको मुझसे कुछ काम था क्या.

मई- है तुम एक काम करो मई तुम्हे एक अड्रेस भेज रहा हु वह पर आ जाओ.

बलदेव- ठीक है बॉस आप अड्रेस सेंड कीजिये.

बलदेव से बात करने के बाद मैंने कॉल की कट किया और उसके पास यहाँ का अड्रेस सेंड कर दिया करीब आधे घंटे बाद बलदेव मेरे पास तो फिर मई शनाया के रूम में जाकर पत्थर और धातु ले आया और बलदेव के गाड़ी के डिकी में दाल दिया इसके बाद मई उसके गाड़ी में जाकर बैठ गया और उसे गाड़ी चलने के लिए बोलै और उसको हवेली जाने का रास्ता बताने लगा तभी मुझे कुछ यद् आया तो मई बलदेव से पूछा.

मई- मैंने तुम्हे एक काम दिया था क्या वो काम हो गया.

बलदेव मेरी बात सुन कर सोचने लगा की मैंने उसे क्या काम दिया था तभी उसे यद् यहाँ की मैंने उसे नीरज के साबुत इक्क्ठा करने के लिए बोलै था.

बलदेव- है बॉस हो गया है मुझे नीरज और उसके पिता के खिलाफ बहुत सरे साबुत हाथ लगे है.

मई- तो ठीक है तुम आज वो साबुत मीडिया वालो को दे देना मुझे उसको बर्बादी देखनी है.

बलदेव- जी बॉस मई आज सरे साबुत मीडिया की दे दूंगा.

मई- वैसे तुम्हे देख कर लग रहा है की तुम 8तह लेवल पर पहुंच गए.

बलदेव- ये सब तो आपके उस दवाई का कमल है बॉस.

मई- है सही बोलै लेकिन एक बात यद् रखना तुम अपने ट्रेनिंग करते रहना क्युकी उस गोली में बहुत एनर्जी होती है अगर तुम उस एनर्जी के साहू से इस्तेमाल करोगे तो तुम बहुत जल्द 9तह लेवल पर भी पहुंच जाओगे मुझे तुम्हे किसी भी हालत में 6 महीने के अंदर एक ग्रांडमास्टर बनते हुए देखना है.

मेरी बात को सुन कर बलदेव खुस हो गया और उसके दिल में मेरे लिए इज्जत और बढ़ गयी

बलदेव- ठीक है बॉस मई और कड़ी म्हणत करूँगा और आपको निराश नहीं होने दूंगा.

इसके बाद हमारे बिच कुछ बाटे नहीं हुयी और हम थोड़ी देर बाद हवेली में पहुंच गया बलदेव उस हवेली को देख कर पहले तो हैरान हो गया फिर बाद में उसकी दर के मरे हालत ख़राब हो गयी क्युकी उसे भी पता था की ये हवेली एक भूतिया हवेली है और इसके अंदर आज तक जो भी गया हो कभी बहार नहीं आया वो डरते हुए बोलै.

बलदेव- बॉस आप ये मत कहना की हमें इस हवेली के अंदर जाना है.

मई- क्यों तुम्हे इस हवेली में जाने में दर लग रहा है क्या.

बलदेव- बॉस आपको सायद पता नहीं है की इस हवेली में शैतानी शक्ति रहती है और आज तक जो भी इस हवेली में गया वो कभी जिन्दा बहार नहीं निकला है.

मई- मई जनता हु लेकिन मैंने उस शैतानी शक्ति को कब का ख़तम कर दिया है अब ये हवेली पूरी तरह से सुरक्षित है.

मेरी बात को सुन कर बलदेव हैरान हो गया और वो मुझसे हैरानी से पूछा.

बलदेव- बॉस आप मजाक कर रहे है न.

मई- (सीरियस फेस बना कर) मुझे देख कर तुम्हे लग रहा है की मई मजाक कर रहा हु यहाँ सच में अब कोई भी शैतानी शक्ति नहीं रहती इस लिए तुम डरना बंद करो और अंदर चलो.

हलाकि बलदेव को मेरे बातो पर विश्वास तो नहीं हुआ लेकिन फिर भी वो डरते डरते मेरे साथ हवेली के अंदर आ गया मैंने वो दोनों सामान गाड़ी के डिकी से बहार निकल लिया था उसे अपने साथ hi रखा था खैर हवेली में आने के बाद मई एक कमरे में गया और दोनों सामान को वह पर रख दिया इसके बाद मई रूम से बहार आया और बलदेव से बोलै.

मई- बलदेव अब आप डरो नहीं अब यहाँ पर कोई भी सैतानी शक्ति नहीं है क्युकी मई उस सैतानी शक्ति को यहाँ से भगा दिया है और इस हवेली पर एक सुरक्षा कवच लगा दिया है जिसके कारन अब कोई भी सैतानी शक्ति इसके अंदर नहीं आ सकती.

बलदेव- तो क्या आप तांत्रिक भी हो.

मई- नहीं मई कोई तांत्रिक नहीं हु लेकिन मुझे कुछ ऐसी विद्या आती है जिसके कारन मई सैतानी शक्ति से लड़ सकता हु और उसकी आराम से हरा भी सकता हु.

मेरी बात सुन कर बलदेव मुझे गर्व से देखने लगा और बोलै.

बलदेव- आज मई बहुत खुस हु बॉस की अपने मुझे अपना सेवक बना लिया मुझे फक्र हो रहा है की मई आपके साथ काम करूँगा.

Mai-Dekho बलदेव भाई तुम अपने आप को मेरा सेवक मत बोलो हम दोनों दोस्त है समझे.

बलदेव- जी बॉस समझ गया.

मई- ठीक है समझ गया तो अब मेरी बात सुनो तुमको मई यहाँ इस लिए लेकर आया हु की तुम इस हवेली को रिकंस्ट्रक्शन करवाओ मुझे इसके आउटर और इंटीरियर डिज़ाइन बहुत अच्छा चाहिए तुम पैसो का टेंशन मत लेना चाहे जितना भी पैसा लगे मई खर्च करने के लिए तैयार हु बस मुझे बेस्ट डिज़ाइन चाहिए और है तुम इस हवेली में सिक्योरिटी सिस्टम भी लगवा देना.

बलदेव- जी बॉस हो जायेगा.

मई- और है आज से तुम अपने पल्टन के साथ यही पर रहोगे और इस हवेली के पीछे जितना भी जमीं है उसे अपने अंदर में लेलो और उसे इस हवेली से जोड़ देना क्युकी मई यहाँ पर एक मार्टिकल आर्ट्स ट्रेनिंग सेण्टर खोलना चाहता हु ताकि मेरे साथी यहाँ पर ट्रेनिंग कर सके.

बलदेव- हो जायेगा बॉस.

मई- है मैंने तुम्हे मार्टिकल आर्ट्स योद्धा को खोजने के लिए बोलै था जो 5तह लेवल के ऊपर है वो काम कहा तक पंहुचा है.

बलदेव- बॉस उस काम में थोड़ा समय लगेगा.

मई- ठीक है तुम्हे जितना समय लेना है लेलो लेकिन यद् रखना की वो सब ईमानदार होने चाहिए.

बलदेव- ठीक है बॉस.

मई और बलदेव अभी बात hi कर रहे थे की तभी मेरे मोबाइल पर कॉल आने लगा जब मैंने मोबाइल निकल कर देखा तो ये विशाल ओबेराय का कॉल था फिर मई कॉल रिसीव करते हुए बोलै.

मई- हैल्लो विशाल भाई आज अपने मुझे कैसे यद् किया.

विशाल- क्या तुम आज फ्री हो.

मई- है लेकिन बात क्या है.

विशाल- वो आज तुम्हे लंच पर पिता जी ने बुलाया है.

मई- अरे है मई तो भूल hi गया था अब उनकी तबियत कैसी है.

विशाल- अब वो बिलकुल ठीक है बस वो तुमसे मिलना चाहते है तो क्या तुम अभी मेरे घर आ सकते हो.

मई- ठीक है मई आता हु.

इतना बोल कर मैंने कॉल कट कर दिया और फिर बलदेव से बोलै.

मई- अब हमें यहाँ से चलना चाहिए लेकिन मई जो तुमको बोलै हु वो सब हो जाना चाहिए (फिर अपने जेब से एक कार्ड निकल कर बलदेव को देते हुए) इसमें 5 करोड़ रूपए है ये लो और इस हवेली को अच्छे से रिन्यूअल करवाओ और है यहाँ पर हाई क्वालिटी के सिक्योरिटी सिस्टम मुझे चाहिए और इस हवेली के पीछे जो जगह है उसको चारो तरफ से घेराव कर लेना और उसको इस हवेली से जोड़ देना और उस सब करने में अगर और पैसे लगेंगे तो मुझे बताना.

बलदेव- ठीक है बॉस सारा काम हो जायेगा.

मई- ठीक है अब तुम मुझे ओबेराय मेंशन छोड़ दो.

इतना बोल कर मई एक रूम में गया और वह से कुछ संजीवनी गोली को लिया और अपने जेब में रख लिया और फिर हवेली से बहार निकल गया और फिर जाकर गाड़ी में बैठ गया फिर बलदेव ने गाड़ी स्टार्ट किया और भगा दिया ओबेराय मेंशन की और कुछ देर में हम ओबेराय मेंशन के गेट पर पहुंच गए फिर मई गाड़ी से उतर कर बलदेव को जाने के लिए बोलै और ओबेराय मेंशन के अंदर जाने लगा इस बार मुझे किसी गॉर्ड ने नहीं रोका इस लिए मई सीधा अंदर चला गया.

जब मई मेंशन के अंदर आया तो मुझे वह पर एक नौकर मिला जो मुझे देखते hi मेरे पास आया और मुझसे बोलै.

नौकर- आप आ गए चलिए अंदर विशाल सर आपका अंदर इंतजार कर रहे है.

मई- है ठीक है चलो.

इसके बाद मई मेंशन के अंदर हॉल में आ गया वह आकर देखा की विशाल और उसके पिता जगमोहन ओबेराय हॉल में बैठे हुए थे और बाटे कर रहे थे जैसे hi विशाल का नजर मुझ पर पड़ी वो अपने चेयर से उठ गया और मेरे पास आते हुए बोलै.

विशाल- अरे प्रतिक तुम आ गए चलो अच्छा वैसे तुम्हे यहाँ आने में कोई प्रॉब्लम तो नहीं हुयी.

मई- नहीं विशाल भाई मुझे यहाँ आने में कोई प्रॉब्लम नहीं हुयी.

विशाल- ठीक है चलो मई तुम्हे अपने पिता जी से मिलवाता हु.

इतना बोल कर विशाल मुझे ले कर अपने पिता जी के पास गया और बोलै.

विशाल- पापा यही है प्रतिक जिसने आपकी जान बचाई थी और उस काली शक्ति को हमारे घर से निकला था और प्रतिक तुम तो इनको जानते hi होंगे ये है मेरे पिता जी जगमोहन ओबेराय.

मई- नमस्ते अंकल.

जगमोहन- नमस्ते बीटा और बीटा तुमको बहुत बहुत धन्यवाद् तुमने मेरी जान बचाई उसके लिए.

मई- इसमें धन्यवाद् की क्या बात हुयी अंकल ये तो मेरा फ़र्ज़ था और वैसे भी विशाल भाई मुझे अपना भाई मानते है इस रिश्ते से आप मेरे अपने हुए तो भला अपनों को बचने के लिए कोई किसी को थैंक यू बोलता है क्या.

जगमोहन- तुम सच में एक नेकदिल और सच्चे इंसान हो बीटा आज से तुम मेरा दूसरे बेटे हो आज से अगर इस सहर में तुमको थोड़ा भी प्रॉब्लम हो तो अपने इस अंकल को एक बार यद् कर लेना.

मई- उसकी कोई जरुरत नहीं पड़ेगी अंकल बस मेरे लिए इतना hi काफी है की अपने मुझे अपना मन और मुझे मन सामान दिया यही मेरे लिए काफी है.

जगमोहन- अच्छा बीटा एक बात पुछु.

मई- है अंकल पूछिए न.

जगमोहन- तुम ऐसी विद्या कहा से सीखा की तुम सैतानी शक्तियों से भी लड़ सकते हो.

मई- अंकल मुझे मेरे गुरुदेव ने ये विद्या मुझे सिखाया है.

जगमोहन- और तुम्हारे गुरु कोण है.

मई- मेरे गुरु का नाम महर्षि निकेतन है और वो हिमालय पर रहते है.

जगमोहन- क्या तुम महर्षि निकेतन के शिस्य हो.

मई- जी अंकल क्या आप मेरे गुरुदेव को जानते है.

जगमोहन- उनको कोण नहीं जनता जो इंसान मार्टिकल आर्ट्स के बारे में जनता है वो उनको भी जनता होगा मुझे यकीं hi नहीं हो रहा की तुम महर्षि निकेतन जैसे दिव्या ऋषि के शिस्य हो तभी तो तुम्हारे अंदर इतनी साडी शक्तिया है.

मई जगमोहन के मुँह से अपने गुरदेव के बारे में सुन कर बहुत खुस हो गया क्युकी मई अपने गुरुदेव को अपने ईश्वर के जैसे मंटा हु खैर ऐसे hi बाटे करते करते लंच करने का टाइम हो गया तो विशाल ने अपने नौकर को बोल कर दिंनिंग टेबल पर सके लिए लंच लगाने को बोलै और हम सब वही बैठ कर लंच करने लगे.

लंच करने के बाद मई अपने हाथ को वाश करने के लिए वाशरूम में गया तो मेरे जाने के बाद जगमोहन विशाल से बोले.

जगमोहन- अगर प्रतिक सच से दिव्या ऋषि निकेतन का शिस्य है तो फिर ये बहुत शक्तिशाली होगा चाहे कैसी भी परिस्थिति हो तुम इससे अपना रिस्ता कभी ख़राब नहीं होने देना अगर इसको जहा भी तुम्हारी मदत की जरुरत होगा तुम उसे मदत कर देना अगर ये हमारे साथ है तो दुनिया के कोई भी शक्ति हमें कुछ नुकसान नहीं पंहुचा सकता.

विशाल- जी पिता जी मई ये बात ध्यान में रखूँगा की हमारे बिच कभी भी कोई भी प्रॉब्लम न हो.

अभी ये लोग बात कर hi रहे थे की तभी मई अपने हाथ वाश करने के बाद उनके पास आ गया और बोलै.

मई- ठीक है अंकल अब मई चलता हु और जाने से पहले मई आपको कुछ गिफ्ट देना चाहता हु.

इतना बोल कर मैंने एक संजीवनी गोली निकल कर उनको दे दिया और बोलै.

मई- मई ये गोली आपको देना चाहता हु इसका नाम संजीवनी गोली है आज रत को आप सोते समय खा लीजियेगा.

जगमोहन- ये किस बीमारी का दवा है बीटा.

मई- अंकल इस दवा को खाने के आपके अनादर भरपूर मात्रा में ताकत आ जाएगी और आपके अंदर के साडी बीमारी भी ठीक हो जाएगी और सबसे बड़ी बात की आपके चेहरे पर कभी भी झुरिया नहीं आएगी इसके और भी बहुत फायदे है अंकल लेकिन वो सब फायदा आपको गोली खाने के बाद पता चलेगा.

मेरी बात को सुन कर विशाल और जगमोहन दोनों हैरान हो गए और उसी हैरानी में विशाल मुझसे बोलै.

विशाल- ये दवा तो बहुत यूनिक है ये तुमको कहा से मिला.

विशाल के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- इसे मैंने hi बनाया है.

मेरा बात को सुन कर वो दोनों और हैरान हो गए फिर और अपनी हैरानी को काबू करते हुए जगमोहन ओबेराय मुझसे बोले.

जगमोहन- तुम जिस तरह इस दवा के खूबी बता रहे हो उसके अनुसार से तो ये बहुत यूनिक दवा है और ऐसा दवा मार्किट में नहीं है तो तुम इस दवा का बिज़नेस क्यों नहीं करते अगर ये दवा मार्किट में आ गया तो तहलका मचा देगा.

मई- मई भी चाहता हु की इसका बिज़नेस करू लेकिन वो क्या है न की मुझे बिज़नेस में थोड़ा एक्सपीरियंस नहीं है इस लिए मई अभी तक इसे मार्किट में नहीं उतरा.

मेरे बात को सुन कर विशाल मुस्कुराते हुए बोलै.

विशाल- अगर ऐसा है तो फिर मई कब काम आऊंगा मई तुम्हे बिज़नेस सीखा दूंगा और रही बात फण्ड की तो मई तुम्हे इसमें मदत कर दूंगा.

मई- ठीक है तो हम कल इस पर मीटिंग कर लेते है मेरे साथ और भी कुछ लोग है जिन्हे मई अपने बिज़नेस से जोड़ना चाहता हु ताकि मुझे आगे जा कर प्रॉब्लम न हो.

विशाल- ठीक है तो हम कल इस पर मीटिंग करते है वैसे मुझे तुमसे एक और काम था.

मई- है बोलिये न क्या काम था.

विशाल- वो क्या है न की आज सहर में एक stone's गैंबलिंग हो रहा है और मई वह जा रहा हु तो सोचा की तुम्हे भी अपने साथ लेते चालू.

मई- ये stone's गैंबलिंग में क्या होता है.

विशाल मेरी बात सुन कर चौक गया और फिर मुझसे बोलै.

विशाल- क्या तुम्हे सच में नहीं पता की stone's गैंबलिंग में क्या होता है.

मई- नहीं मुझे सच में नहीं पता.

विशाल- ठीक है मई तुम्हे बताता हु असल में stone's गैंबलिंग एक जुवा की तरह होता है वह पर बहुत साडी पत्थर रखे हुए होते है और तुम्हे उनमे से अपने लिए पत्थर चुन कर उसको कट करवाना होता है और जिसका किस्मत अच्छा होता है उसे उस पत्थर में से बहुमूल्य चीजे निकलती है जैसे की हीरो जवाहरात एक्सपेंसिव स्टोन और जिसका किस्मत ख़राब होता है उसे कुछ भी नहीं निकलता है.

मई- ओह तो ऐसा है अब मई समझ गया चलिए मई वह चलने के लिए तैयार हु (फिर अपने मन में) अगर ऐसा है तो मई तो उस पत्थर में क्या है वो पहले hi अपने दिव्या दृष्टि से पता कर सकता हु.

इसके बाद मई और विशाल वह से stone's गैंबलिंग के लिए निकल गए 2 घंटा घंटा कंटिन्यू गाड़ी चलने के बाद हम दोनों जहा पर stone's गैंबलिंग हो रहा था वह पहुंच गए उसके बाद गाड़ी पार्क कर के हम stone's गैंबलिंग के हॉल में पंहुचा गए जब हम स्टोन गैंबलिंग के हॉल के अंदर आये तो देखा की वह पर बहुत साडी भीड़ लगी हुयी थी वह पर बहुत सरे आमिर लोग stone's गैंबलिंग करने के लिए आये हुए थे.

जब मई अंदर आया तो देखा की अंदर बहुत साडी पत्थर एक लाइन में लगा कर काउंटर पर रखा हुआ है और सरे पत्थर के आगे एक कागज पर उनका प्राइस लिखा हुआ है मई और विशाल दोनों घूम घूम कर पथरो को देख रहा था stone's गैंबलिंग बहुत दूर में फैला हुआ था इस लिए वह पर बहुत साडी दुकाने थी जो stone's गैंबलिंग कर रही थी.

इधर मई और विशाल साडी दुकानों पर घूम घूम कर स्टोन को देख रहा था तभी हम दोनों को एक आवाज सुनाई दी.

आवाज- क्या बात है यहाँ तो ओबेराय फॅमिली से भी कोई stone's गैंबलिंग करने आया अच्छा है अब तो और मज़ा आएगा.

आवाज को सुन कर हम दोनों रुक गए और जिधर से आवाज आया था उधर घूम कर देखने लगे सामने कोई आदमी खड़ा था जिसकी उम्र लगभग विशाल के बराबर hi था विशाल उस आदमी को देखते hi चौक गया और बोलै.

विशाल- तुम.. तुम यहाँ क्या कर रहे हो.

आदमी- जब तुम्हारे जैसा आदमी यहाँ आ सकता है तो मई क्यों नहीं.

विशाल- देखो जतिन मुझे तुमसे कोई बहस नहु करनी है तुम यहाँ जो काम करने आये हो वो करो और मुझे माफ़ करो.

इतना बोल कर विशाल मुझे वह से चलने का इशारा किया और मई उसके साथ अगले दुकान की और बढ़ गया लेकिन जैसे hi हम वह से जाने लगे जतिन ने फिर से बोलै.

जतिन- क्यों डरपोक मुझसे दर कर कहा भाग रहे हो अब तुम्हारे अंदर हिमत नहीं बची है क्या मेरा सामना करने के लिए.

जतिन के बात सुन कर विशाल को गुसा आ गया हलाकि गुसा तो मुझे भी आया लेकिन ये मेरा मटर नहीं था इस लिए मई चुप रहा लेकिन विशाल चुप नहीं रह सका और बोलै.

विशाल- मुझे दर लग रहा है और वो भी तुमसे यद् नहीं है क्या की पिछले बार के stone's गैंबलिंग में तुम्हारे साथ क्या हुआ था.

मई- (धीरे से ) विशाल है ये है कोण जो इतना बदतमीज़ी से आपसे बात कर रहा है.

विशाल- ये मेरे कॉम्पिटिटर फॅमिली भानुसाली फॅमिली के वरिष्ठ है और मैंने इसे पिछले stone's गैंबलिंग में बुरी तरह से हराया था इस लिए ये यहाँ पर मुझसे बदला लेने आये है.

इधर विशाल के बात सुन कर जतिन घुसे से आग बबूला हो गया लेकिन फिर अपने घुसे को काबू कर के मुस्कुराते हुए बोलै.

जतिन- मुझे अच्छी तरह यद् है की पिछले stone's गैंबलिंग में मेरे साथ क्या हुआ था और तुम सब ने मिल कर कैसे चीटिंग कर के मुझे हराया था लेकिन इस बार के stone's गैंबलिंग में वही सब तुम्हारे साथ होगा.

विशाल- ये तुम्हारा सपना है की तुम मुझे कभी हरा सकोगे तुम पहले भी मुझसे हरे थे और अब भी हारोगे.

जतिन- अच्छा ऐसी बात है तो लगे शर्त अगर मई इस बार हर गया तो भानुसाली ग्रुप का ज्वेल्लेरी कंपनी मई तुम्हारे नाम कर दूंगा और अगर तुम हरे तो तुम्हे अपने ज्वेल्लेरी कंपनी मेरे नाम करना होगा अगर मंजूर है तो बोलो.

जतिन के बात सुन कर विशाल हैरान रह गया क्युकी भानुशाली ग्रुप के ज्वेल्लेरी कंपनी से भानुशाली ग्रुप को बहुत इनकम होता था और वही बात ओबेराय फॅमिली के भी साथ था हलाकि दोनों परिवार के और भी बहुत साडी कंपनी थी लेकिन उनका 25 % इनकम ज्वेल्लेरी कंपनी से hi आता था विशाल जतिन के बात सुन कर चुप हो गया था जिसे देख कर जतिन उसका मजाक उड़ाते हुए बोलै.

जतिन- क्यों बोलती बंद हो गयी न तुम जानते हो की इस बार तुम जित नहीं सकते इस लिए तुम्हारे अंदर मेरा शर्त एक्सेप्ट करने की हिमत नहीं है अरे जाओ और जाकर अपने बीवी के पलु में छुप जाओ.

जतिन के इस तरह के बात सुन कर मुझसे रहा नहीं गया तो मई बोलै.

मई- देखो तुम कुछ ज्यादा hi बोल रहे हो अगर विशाल भाई चुप है तो इसका मतलब ये नहीं की वो तुमसे दर गए है बल्कि वो तो ये सोच रहे है की अगर तुम शर्त हर जाने के बाद ज्वेल्लेरी कंपनी देने से इंकार कर दो तब.

मेरी बात को सुन कर जतिन तिलमिला गया और थोड़े घुसे से बोलै.

जतिन- ये लड़के तू कोण है क्या तू विशाल का चमचा है सुन बे लौंडे अपनी औकात देख कर बाटे किया कर ये मेरे और विशाल के बिच का मामला है समझा और तुम्हारी औकात नहीं है की तुम मुझसे बात भी कर सको.

मई- मेरी औकात क्या है और क्या नहीं ये तुम्हे बाद में पता चलेगा लेकिन तुम पहले मेरे बात का जबाब दो अगर तुम हर गए और फिर कंपनी देने से इंकार कर दिए तो.

जतिन- पहली बात तो की मई तुम जैसे फालतू लोगो से बात नहीं करता लेकिन तुम यहाँ पर मेरे ऊपर सवाल उठाये हो तो मुझे उस सवाल का जबाब देना hi होगा तो सुनो मई अपने वकील को कॉल कर के अभी बुलाता हु और एक बांड पेपर तैयार करने के लिए बोलता हु तब तो तुम सब को विस्वास होगा न.

मई- ठीक है तो विशाल भाई भी अपने वकील को बुला कर बांड पेपर रेड्डी करवाते है.

इधर विशाल मेरी बात को सुन कर घबरा गया और मुझसे धीरे से बोलै.

विशाल- प्रतिक तुम ये क्या कर रहे हो तुम जानते नहीं हो उसे हम उससे नहीं जित सकते क्युकी उसके पास भारत का no. 1 स्टोन गैंबलिंग का मास्टर है.

मई- विशाल भाई आप चिंता क्यों कर रहे हो आपके साथ मई हु न देखिएगा आप hi जीतेंगे आप चुप चाप शर्त मन लीजिये.

विशाल मेरे बात को सुन कर कुछ देर सोचने लगा और फिर मुझसे बोलै.

विशाल- देखो प्रतिक मई तुम पर विस्वास कर के इससे शर्त लगा रहा हु तुम मेरे विस्वास को टूटने मत देना.

मई- मई आपसे वडा करता हु की ये स्टोन' गैंबलिंग आप hi जीतोगे.

मेरी बात को सुन कर विशाल के चेहरे पर मुस्कान आ गया क्युकी वो जनता था की जपताक मई कोई बात के लिए कन्फर्म न हो जाऊ मई किसी से वडा नहीं करता अगर मई उससे वडा किया है तो वो hi जीतेगा.

विशाल- ठीक है जतिन मई तुम्हारे शर्त को मैंने के लिए तैयार हु लेकिन मेरी भी कुछ शर्त है.

जतिन- क्या शर्त है तुम बोलो.

विशाल- अगर जो इस stone's गैंबलिंग को हारेगा वो अपने कंपनी देने के साथ साथ यहाँ सबके सामने जितने वाले के जुटे पर अपना नक् घिसेगा बोलो मंजूर है.

विशाल के बात सुन कर जतिन के चेहरे पर मुस्कान आ गया क्यों की वो कन्फर्म था की ये stone's गैंबलिंग वही जीतेगा क्युकी उसके पास भारत का सब बेस्ट गैंबलिंग मास्टर था.

जतिन- है मुझे भी तुम्हारी शर्त मंजूर है लेकिन तुम अपने hi शर्त से पीछे मत हैट जाना.

इसके बाद विशाल और जतिन ने अपने अपने वकील को कॉल कर के बुलाया और बांड पेपर रेड्डी किया इसके बाद Stone's गैंबलिंग के नियम तय हुआ जो इस तरह से था.

1सत नियम- दोनों सिर्फ 7 स्टोन hi खरीद सकते थे.

2ंद नियम- स्टोन को सबके सामने कटा जायेगा.



3रद नियम- और जिसके स्टोन से जो भी निकलेगा उसको यही पर सबके सामने बोली लगायी जाएगी और जिसके सामान का सबसे ज्यादा बोली लगेगा वही जीतेगा.
 
अपडेट 19

Stone's गैंबलिंग 2


जतिन और विशाल के बिच Stone's गैंबलिंग को लेकर एक शर्त लगता है जिसमे जो भी जीतेगा उसको हरने वाले की ज्वेल्लेरी कंपनी मिलेगा और हरने वाले को जितने वाले के झुटो पर अपना नक् रगड़ना होगा जिसपर दोनों राजी हो गए फिर दोनों अपने अपने वकील को बुला पर एक बांड पेपर तैयार किया फिर दोनों ने मिल कर Stone's गैंबलिंग के नियम बनाया जो इस प्रकार था.

1सत नियम- दोनों सिर्फ 7 स्टोन hi खरीद सकते थे.

2ंद नियम- स्टोन को सबके सामने कटा जायेगा.

3रद नियम- और जिसके स्टोन से जो भी निकलेगा उसको यही पर सबके सामने बोली लगायी जाएगी और जिसके सामान का सबसे ज्यादा बोली लगेगा वही जीतेगा.

नियम तय होने के बाद सब वह से पत्थर खरीदने के लिए निकल गए तभी विशाल मुझसे बोलै.

विशाल- मई चैलेंज तो लगा लिया लेकिन मुझे पथरो को बारे में कुछ भी पता नहीं है मुझे समझ में नहीं आ रहा है की हम पत्थर कहा से और कोण सा पत्थर ख़रीदे.

मई- पत्थर खरीदने में हमें जल्दी बाजु नहीं करना चाहिए सबसे पहले हम घूम कर सरे पत्थर को देख लेते है इसके बाद हम पत्थर को खरीदेंगे.

विशाल- ठीक है चलो.

इसके बाद मई और विशाल पुरे दुकान में घूम घूम कर पत्थर देखने लगा लेकिन इस बार मई पत्थर को अपने दिव्या दृस्टि से देख रहा था जब हम दोनों ने सरे दुकान को घूम कर सरे पथरो को देख लिया तो विशाल मुझसे बोलै.

विशाल- अब तो हम सरे पथरो को देख लिए तो अब बताओ की हमें कोण कोण से पत्थर खरीदने चाहिए.

विशाल के बात सुन कर मई सोच में पद गया फिर उसको देखते हुए बोलै.

मई- सबसे पहले आप ये बताइये की आपको मेरे ऊपर विस्वास है या नहीं.

विशाल- यार तुम ये कैसी बाटे कर रहे हो अगर मुझे तुम पर विस्वास नहीं होता तो मई जतिन से कभी शर्त नहीं लगता.

मई- ठीक अगर आपको मेरे ऊपर विस्वास है तो मई जिस जिस पत्थर को आपको खरीदने के लिए बोलूंगा आप बिना कोई सवाल किये उस पत्थर को खरीद लेंगे.

विशाल- ठीक है तुम बताओ हमें कोण कोण से पत्थर खरीदने चाहिए.

विशाल के बात सुन कर मई आगे बढ़ गया और फिर मुझे आगे बढ़ते देख कर विशाल भी मेरे पीछे पीछे आने लगा थोड़ी देर चलने के बाद मई Stone's गैंबलिंग के पहले दुकान पर आया और एक पत्थर को उठा लिया ये पत्थर दिखने में एक डैम मामूली लग रहा था और इसका डैम भी बहुत काम था.

इधर विशाल ने मुझे एक मामूली पत्थर को उठाते देखा तो वो हैरान रह गया हैरान सिर्फ विशाल hi नहीं था बल्कि उस दुकान पर जितने भी लोग थे सब हैरान रह गए और मेरे ऊपर हसने लगे फिर उनमे से एक आदमी हस्ते हुए बोलै.

आदमी- है है देखो इसको इसने क्या पत्थर चुना है है है है इसमें तो डायमंड निकलेगा डायमंड (फिर मुझसे बोलै) अरे भाई अगर तुम्हे कोई पत्थर लेना hi था तो अच्छा पत्थर लेता ये बेकार सा पत्थर क्यों लिया.

मई- भाई आपके एडवाइस के लिए सुक्रिया लेकिन मुझे यही पत्थर लेना है.

आदमी- भाई मई तो तुम्हारे भलाई के लिए बोल रहा था अगर तुमको यही पत्थर लेना है तो लो नुकशान तुम्हारा होगा मेरा नहीं.

इतना बोल कर वो आदमी चुप हो गया लेकिन उसके बात को सुन कर विशाल थोड़ा टेंशन में आ गया क्युकी उसे भी समझ में नहीं आ रहा था की मैंने ये मामूली पत्थर क्यों लिया इस लिए वो मुझसे बोलै.

विशाल- भाई प्रतिक अगर तुम पैसा बचने के लिए इस स्टोन को लिया है तो तुम चिंता मत करो मेरे पास बहुत पैसे है तुम दूसरा स्टोन ले सकते हो.

मई- अरे नहीं विशाल भाई ये स्टोन बहुत खास है इस लिए मई इसे लिया है आप मुझ पर विस्वास कीजिये मई आपका कभी नुकसान नहीं होने दूंगा.

मेरे बात को सुन कर विशाल चुप हो गया फिर हम दोनों दुकानों पर घूम घूम कर 7 स्टोन खरीद लिए और हम जतिन के पास चले गए इधर जतिन ने भी अपने लिए पत्थर ले लिया था जतिन हम दोनों को अपने पास आता देख कर बोलै.

जतिन- तो तुमने पत्थर ले लिया या अभी लेना बाकि है.

विशाल- नहीं मैंने पत्थर ले लिया है चलो अब इसको कटवाते है.

जतिन- बड़ा जल्दी है तुम्हे हरने की कोई बात नहीं चलो चले.

इसके बाद हम सब स्टोन कटर शॉप के पास आ गए इसके बाद जतिन ने उस शॉप वाले से पत्थर को सबके सामने काटने के लिए बोलै तो वो मन गया इसके बाद जतिन ने विशाल से बोलै.

जतिन- ठीक है तो पहले कोण अपने स्टोन को कट करवाएगा.

विशाल- पहले तुम hi अपने स्टोन को कटवा लो.

विशाल के बात सुन कर जतिन मुस्कुराते हुए अपने सभी स्टोन उस शॉप वाले को दे दिया फिर शॉप वाले ने एक एक कर के सरे स्टोन को काटना सुरु किया जब उसने पहले स्टोन को कट किया तो उसमे से एक ग्रीन डायमंड निकला जिसे देख कर वह खड़े सरे लोग चौक गए और जतिन ने जब देखा की उसके स्टोन से ग्रीन डायमंड निकला है तो वो खुस हो गया और मुस्कुराते हुए विशाल से बोलै.

जतिन- तुम इस ग्रीन डायमंड को देख कर कही अभी से hi तो हर नहीं मन गए अगर ऐसा है तो अपने कंपनी को मेरे नाम कर दो और मेरे झूठे पर नक् को रगड़ लो नहीं तो बाद में तुम्हे मेरे स्टोन को देख कर हार्ट अटैक न जाये और तुम कही ऊपर न चल जाओ.

उसकी इस तरह की बात सुन कर विशाल के खून खौल गया और वो मेरे तरफ देखने लगा मई उसको अपने आँखों से इसरा किया की उसको चिंता करने की जरुरत नहीं है जीतेंगे तो हम hi विशाल मेरे इशारा को समझ कर जतिन से बोलै.

विशाल- अभी तुम्हे जितना भी खुसी मानना है मन लो क्युकी जब मेरा स्टोन कट होगा तब तुम्हे रोने से hi फुर्सत नहीं मिलेगा.

जतिन- बहुत घमंड है न तुम्हे अपने आप पर देखना आज तुम्हारा घमंड मई जरूर तोडूंगा.

इधर दूसरा स्टोन भी कट हो गया था जिसमे एक रेड कलर कर डायमंड निकला था ये वाला डायमंड ग्रीन डायमंड से भी ज्यादा बहुमूल्य था इस लिए उसे देख कर जतिन और भी खुस हो गया लेकिन इधर विशाल के चेहरे पर चिंता बढ़ता hi जा रहा था.

ऐसे hi जतिन के सरे स्टोन कट हो गए और सरे स्टोन में से कुछ न कुछ बहुमूल्य चीज़ hi निकली थी जिसे देख कर जतिन खुसी के मरे पागल हो रहा तह और विशाल को अपनी कंपनी अपने हाथ से जाते हुए दिख रहा था मई विशाल को ऐसे परेशां देख कर उससे बोलै.

मई- विशाल भाई आप परेशां मत होइए मई बोल रहा हु न की ये Stone's गैंबलिंग ाफी जीतोगे.

विशाल- मई कैसे चिंता न करू प्रतिक जतिन को सरे स्टोन में से कुछ न कुछ निकला hi है जो बहुमूल्य है अगर उन सरे चीज़ो का बोली लगेगा तो उन सब की बोली 15 करोड़ के ऊपर hi जायेगा.

मई- ठीक है अगर आपको हम पर विस्वास नहीं हो रहा है तो आप हमारे स्टोन कट होने का इंतज़ार कीजिये जब स्टोन कट हो जायेगा तो आपको खुद hi पता चल जायेगा की हम जीतेंगे या हारेंगे.

मेरे बात को सुन कर विशाल कुछ नहीं बोलै लेकिन उसकी टेंशन अभी भी काम नहीं हुआ था खैर जतिन के स्टोन कट होने के बाद अब हमारी स्टोन को कट होना था इस लिए मई अपने पास से सरे स्टोन को निकल कर शॉप वाले को दे दिया लेकिन जैसे hi सब ने मेरे पास मामूली स्टोन को देखा सब जोर जोर से हसने लगे और साथ में जतिन भी मेरे पास मामूली स्टोन को देख कर खुश हो गया अब उसको अपने जीत पर पूरा यकीं हो गया था.

जतिन- ये मामूली स्टोन लेकर मुझसे जितने चले थे अभी भी समय है हर मन लो नहीं तो यहाँ तुम्हारी साडी इज्जत उतर जाएगी.

मई- ज्यादा जीत का सपना मत देखो नहीं तो अगर हारोगे तो कही तुम्हारा दिल धड़कना hi न भूल जाये और लोगो के सामने अपना बड़ाई इतना hi करो जितना चल सके नहीं तो बाद में तुम कही मुँह छुपाने लायक भी नहीं रहोगे.

मेरे बात को सुन कर जतिन घुसे से आग बबूला हो गया और वो अपने मन में सोचा.

जतिन- (मन में) उड़ ले बीटा उड़ ले तुमको जितना उड़ना है उड़ ले लेकिन यहाँ से निकलने के बाद तेरी साडी पंख कट जाएगी आज तक मेरा बेइज्जती कर के कोई भी जिन्दा नहीं बचा है.

इधर जतिन मुझे मरने के बारे में सोच रहा था और उधर भीड़ में लोग मेरी स्टोन को देख कर तरह तरह के बात कर रहे थे अब तक जितना भी Stone's गैंबलिंग में लोग सब को जतिन और विशाल के शर्त के बारे में पता चल गया था इस लिए सरे लोग वही पर आ गए थे उस स्टोन कटर वाले के पास बहुत भीड़ लग गया था जबसे मई अपने स्टोन को शॉप वाले दिया था तब से सब हमारे बारे में hi बाटे कर रहे थे.

1सत आदमी- मामूली पत्थर लेकर ये लोग जतिन से जितने चले है आज तो इस लड़के के कारन विशाल को अपनी ज्वेल्लेरी कंपनी से हाथ धोना पड़ेगा.

2ंद आदमी- मैंने तो इस स्टोन को लेने से पहले hi इन लोगो को मन किया था लेकिन ये मने नहीं.

3रद आदमी- लेकिन जो भी हो मजा आने वाला है क्युकी हरने वाला जितने वाले के जुटे पर अपना नक् रगड़ेगा और वो देख कर हमें बहुत मज़ा आएगा.

इधर सरे लोगो के बात को सुन कर विशाल की चिंता बढ़ती जा रही थी और मई आराम से बैठ कर सबके बातो को इग्नोर कर रहा था.

इधर शॉप वाले ने पहले स्टोन को काटना सुरु कर दिया जैसे जैसे वो स्टोन कट हो रहा था वैसे वैसे सबके दिल का धड़कन भी बढ़ रहा था और सब बड़े ध्यान से उस स्टोन को कट होते हुए देख रहे थे जैसे hi वो स्टोन कट हुआ और उसमे से जो निकला उसे देख कर सरे लोग हैरान हो गए और आंखे फाडे बस उस स्टोन से जो निकला था उसे hi देखे जा रहे थे यही हल जतिन का भी था उसको तो जैसे उस स्टोन को देख कर विस्वास hi नहीं हो रहा था तभी एक आदमी छीलते हुए बोलै.

1सत आदमी- अरे ये तो ये तो बहुत hi दुर्लभ जेमस्टोन है और ये बहुत बड़ा भी है.

2ंद आदमी- है यार तुम सच बोल रहे हो ये जेमस्टोन तो बहुत मुश्किल से देखने को मिलता है आज मेरी किस्मत अच्छी थी जो इसे मई देख पाया.

3रद आदमी- मुझे लग hi नहीं रहा है की ये उस मामूली पत्थर से निकला है क्या किस्मत है इनलोगो का.

उस मामूली पत्थर से जो निकला था वो ग्रे कलर का एक दुर्लभ जेमस्टोन था जो प्रिस्लेस था उस जेमस्टोन को देख कर विशाल बहुत खुस हुआ और जतिन से बोलै.

विशाल- है तो तुम क्या बोल रहे थे अब बोलो.

जतिन- एक दुर्लभ जेमस्टोन निकलने से तुम शर्त नहीं जीत गए इस लिए चुप रहो नहीं तो कही ऐसा न हो की दूसरा पत्थर जब कट होगा तो तुम्हे रोना पड़े.

जतिन के बात सुन कर विशाल चुप हो गया और शॉप वाले को देखने लगा जो दूसरे पत्थर को काटने की तयारी कर रहा था खैर दूसरा पत्थर भी कट होने लगा जिसे देख कर सरे लोग संत हो गए और एक तक उस कट होते पत्थर को देख रहे थे थोड़ी देर बाद दूसरा पत्थर भी कट हो गया और उसमे से जो निकला उसे देख कर वह हंगामा मच गया क्युकी दूसरे पत्थर से रेयर डायमंड निकला था जिसे रेड डायमंड भी कहा जाता है ब्लू डायमंड रेड डायमंड में सबसे महंगा होता है और ये रेयर भी होता है.

सरे लोग उस डायमंड को देख कर हैरान हो गए और यहाँ जतिन का चेहरा तो देखने लायक था विशाल आज बहुत खुस था और बस कभी मुझे तो कभी उस डायमंड को देख रहा था और अपने मन में सोच रहा था.

विशाल- (मन में) पिता जी ठीक hi बोल रहे थे ये प्रतिक में जरूर कोई शक्ति है क्युकी इतनी छोटी सी उम्र में इतना काबिलियत होना कोई आम बात नहीं है अब तो चाहे जो भी हो जाये ये मेरे परिवार के लिए सबसे खास होगा अगर इसके चलते मुझे पुरे दुनिया से भी बगावत करना पद जाये तो मई उसके लिए भी तैयार हु.

फिर उस शॉप वाले ने तीसरे पत्थर को कट किया जिसमे से ब्लू डायमंड निकला ये डायमंड भी बहुत महंगा होता है अभी तक जो तीन चीज़ निकला था वो जतिन के निकले सतो सामने से महंगा था इसका मतलब की विशाल पहले hi ये शर्त जीत चूका था इधर जब जतिन ने देखा की इस बार ब्लू डायमंड निकला है तो उसके सर से पसीना निकलने लगा और वो घुसे से मुझे घूरने लगा क्युकी वो जनता था की इन सरे पथरो को मैंने hi चुना है वो अपने मन में ये सोच लिया था की आज चाहे जो भी हो जाये वो मुझे यहाँ से निकलने के बाद जिन्दा नहीं छोड़ेगा.

जब मैंने देखा की जतिन मुझे घुसे से घर रहा है तो मई उसे देख कर मुस्कुराने लगा जिससे उसका गुसा और बढ़ गया लेकिन वो यहाँ और ज्यादा तमसा नहीं करना चाहता था इस लिए चुप hi रहा खैर कुछ देर बाद सरे पथरो को शॉप वाले ने कट कर दिया सरे पथरो से कुछ कुछ रेयर आइटम hi लिकला था जिसे देख कर वह पर सरे लोग हैरान हो गए थे विशाल तो खुसी के मरे उछाल रहा था लेकिन जतिन का हालत ठीक नहीं था उसके सर से पसीना निकल रहा था उसने अपने मन में सोचा.

जतिन- (अपने मन में) ये क्या इसके पत्थर से तो बहुत बी रेयर आइटम निकलने है मुझे कुछ करना होगा नहीं तो मई अपने कंपनी को गवा दूंगा इसके स्टोन को देख कर तो लग रहा है की इसके स्टोन की बोली 20 से 25 करोड़ तक जायेगा लेकिन मेरे स्टोन के बोली ज्यादा से ज्यादा 15 करोड़ तक जायेगा मुझे अपने स्टोन की बोली इसके बोली से ज्यादा लगवाना होगा.

इतना सोचने के बाद जतिन किसी के पास कॉल करता है और फिर वो उसको कुछ समझाता है इसके बाद वो मन hi मन मुस्कुराने लगता है.

इसके बाद सरे स्टोन कट होने के बाद उसमे से निकले हुए रेयर आइटम को लेकर विशाल और जतिन ऑक्शन स्टेज पर जाते है और उसका ऑक्शन करने लिए बोलते है जिसमे ये तय होता है की पहले जतिन के आइटम का ऑक्शन होगा फिर वो दोनों स्टेज निचे उतर जाते है.

इसके बाद ऑक्शन स्टार्ट होता है जिसमे जतिन के सरे आइटम 31 करोड़ 75 लाख में सेल होता है और उन सरे आइटम को खरीदने वाले जतिन के hi आदमी थे लेकिन ये बार जतिन के अलावा और कोई नहीं जनता था.

इसके बाद बरी आती है विशाल के रेयर आइटम के ऑक्शन की तो सबसे पहले नीलामी के लिए सामने रेयर जेमस्टोन को लाया जाता है जिसकी शुरुआती बोली 7 करोड़ से सुरु होती है और धीरे धीरे बढ़ाते हुए हुए बोली 13 करोड़ 50 लाख तक पहुंच जाती है और आखिर में वी रेयर जेमस्टोन 13 करोड़ 75 लाख में सेल होती है एक जेमस्टोन की इतनी कीमत में शाले होता देख कर सरे लोग हैरान हो जाते है और फिर दिलचस्पी से दूसरे आइटम के ऑक्शन होने का इंतजार कर रहे थे फिर 2 आइटम भी सबके सामने लगाया गया जो एक रेड कलर का रेयर डायमंड था इसका बोली 7 करोड़ से सुरु हुआ और 19 करोड़ में जा कर सेल हुआ ऐसा hi सरे आइटम धीरे धीरे सेल होने लगे जब सारा आइटम सेल हो गया तो उन सरे आइटम का फाइनल प्राइस 71 कोर 35 लाख हुआ जिसे देख कर वह सरे लोग हैरान रह गए क्युकी आज तक इस Stone's गैंबलिंग में कोई भी एक साथ इतने का Stone's गैंबलिंग नहीं कर पाया था.

इधर विशाल भी हैरान रह गया वो बस एक जगह खड़ा हो कर सरे आइटम के फाइनल प्राइस के बारे में hi सोचे जा रहा था फिर वो अपने मन में सोचा.

विशाल- (अपने मन में) ये प्रतिक है क्या चीज़ मुझे समझ में नहीं आ रहा ये बस 2 घंटो में hi मुझे लगभग 65 करोड़ का प्रॉफिट करवा दिया और साथ में एक कंपनी भी मुझे दिलवा दिया मुझे इसके साथ अपनी दोस्ती को और खास बनाना होगा और इसके लिए मुझे ये कंपनी इसके नाम करना होगा.

इधर विशाल बस मेरे hi बारे में सोचे जा रहा था और उधर जतिन ने जब सरे आइटम के फाइनल प्राइस देखा तो उसके पैरो के टेल जमीं hi खिसक गयी और वो वही बैठ कर रोने लगा और खुद में बड़बड़ाने लगा.

जतिन- ये मैंने क्या कर दिया मई क्यों विशाल से शर्त लगाया अगर मेरी कंपनी इसके नाम हो गयी तो मेरे डैड मुझे घर से बहार निकल देंगे ये सब इस प्रतिक के कारन हुआ है मई इसे जिन्दा नहीं छोडूंगा.

इतना बोल कर आस पास देखने लगा तो उसे पास में स्टोन कटर शॉप पर एक चाकू दिखा वो भाग कर उस शॉप पर गया और वह से उस चाकू को अपने हाथ में उठा लिया और मेरे तरफ भागते हुए आने लगा इधर मुझे जतिन के मंसूबो के बारे में कुछ भी पता नहीं था.

इधर जब सरे लोगो ने स्टोन से निकले रेयर आइटम के प्राइस के बारे में सुना तो सब मुझे और विशाल को कोंग्रटुलते कर रहे थे और मेरे पास भीड़ लगा कर खड़े थे मई अभी सब से बाटे कर hi रहा था की तभी मुझे खतरे का आभास हुआ तो मई पीछे मुद कर देखा जैसे hi मई पीछे मुदा तो देखा की जतिन पागलो की तरह अपने हाथो में चाकू लिए मेरे तरफ भागते हुए आ रहा था ये देख कर मई हैरान रह गया इधर विशाल ने भी जतिन को चाकू लेकर मेरे तरफ भाग कर आते हुए देख लिया था विशाल ने जैसे hi देखा की जतिन अपने हाथ में चाकू लेकर मुझे मरने के लिए आ रहा है तो वो तुरंत hi अपने गार्ड को चीला कर मेरी रक्षा करने के लिए बोलै.

(मई आपको एक बात बताना भूल hi गया था विशाल कही भी बहार जाता है तो उसके साथ कुछ स्पेशल बॉडीगार्ड होते है).

उसके गार्ड विशाल के आवाज सुन कर तुरंत हरकत में आ गए और जतिन को रस्ते में hi रोक लिया और उसे अच्छे से पकड़ कर घुटनो के बल बैठा दिया हलाकि जतिन के साथ भी बॉडीगार्ड थे और जतिन को बचने के लिए आगे बढे भी लेकिन विशाल के बॉडीगार्ड ने उन सब को पहले hi रोक लिया था इधर विशाल ने देखा की जतिन को उसके बॉडीगार्ड ने काबू में कर लिया है तो वो उसके पास चलते हुए आया और बोलै.

विशाल- तू इतना नीच होगा मैंने सोचा भी नहीं था तुमने खुद शर्त लगाया था मई तुम्हारे पास शर्त लगाने नहीं गया था और मुझे ये समझ में नहीं आ रहा है की शर्त तुमने मुझसे लगाया और शर्त मैंने जीता तो तुम प्रतिक पर हमला क्यों किया उसने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था.

जतिन- इसने मेरा क्या बिगड़ है सब इसी के वजह से हो रहा है अगर ये तुम्हारे साथ नहीं होता तो तू कभी शर्त नहीं जीत पते और फिर कभी भी मेरी ज्वेल्लेरी कंपनी तुमको नहीं मिलता इस लिए साडी गलती इसकी hi है और मई इसे जिन्दा नहीं छोडूंगा आज तो तुमने इसे बचा लिया लेकिन तुम कब तक इसको बचाओगे कभी न कभी तो मुझे ऐसा मौका मिलेगा hi और जब मुझे ऐसा मौका मिलेगा तब मई इसे तड़पा तड़पा के करूँगा.

जतिन के बात सुन कर विशाल को गुसा आ जाता है और वो खींच कर दो तपाद जतिन को मरता है फिर वो मुझसे बोलता है.

विशाल- प्रतिक ये तुम्हारा गुनहगार है इसने तुम पर हमला किया था इस लिए अब तुम बताओ की इसके साथ क्या किया जाये.

मई- ये तो पहले hi शर्त हर कर पागल हो गया है और ऐसे पागल को मरने से क्या फायदा इसको कंपनी के डाक्यूमेंट्स पर सिग्नेचर करवा कर छोड़ दीजिये.

विशाल- लेकिन अगर हम इसे ऐसे hi छोड़ डंडे तो ये तुम पर आगे भी हमला करेगा.

मई- कोई बात नहीं इसको मुझ पर जितना हमला करना है करे मई सब संभल लूंगा.

विशाल- ठीक है तुम बोल रहे हो तो मई इसे छोड़ दे रहा हु.

इतना बोल कर विशाल अपने वकील को बुलाता है और जतिन के ज्वेल्लेरी कंपनी के डाक्यूमेंट्स रेडी करने के लिए बोलता है फिर थोड़ी देर बाद वकील डॉक्यूमेंट रेडी कर लेता है जिसपर विशाल जतिन से सिग्नेचर करवा लेता है और उसे छोड़ देता है जतिन को जब बॉडीगार्ड ने उसे छोड़ दिया तो वो वह से मुझे घूरता हुआ निकल गया जतिन के वह से जाने के बाद मई विशाल के पास गया और बोलै.

मई- कोंग्रटुलतिओन्स विशाल जी ज्वेल्लेरी कंपनी के लिए.

विशाल- ये सब तुम्हारे कारन हुआ है अगर तुम न होते तो मई ये stone's गैंबलिंग कभी नहीं जीत पता इस लिए मैंने कुछ सोचा और मई जो सोचा वो तुम्हे मन्ना hi होगा.

विशाल के बात मुझे समझ में नहीं आया तो मई कन्फूसिओं में विशाल से पूछा.

मई- अपने क्या सोचा है और मुझे क्या मन्ना होगा मुझे कुछ समझ में नहीं आया आप कहना क्या चाहते है.

विशाल- आज हमने जो Stone's गैंबलिंग से पैसे कमाए है उसमे मई बस स्टोन खरीदने में जो पैसा लगा है वही रखूँगा बाकि मई तुम्हे दे दूंगा और Stone's गैंबलिंग जीतने के बाद शर्त से जो कंपनी मुझे मिला है उस कंपनी में भी तुम्हारा शेयर 70% का होगा और मेरा शेयर 30% का.

मई विशाल के बात सुन कर हैरान हो गया और उसी हैरानी में विशाल से बोलै.

मई- ये आप क्या बो रहे है स्टोन खरीदने में आपका पैसा लगा था और शर्त भी अपने hi जीता था तो मई ये सब कैसे ले सकता हु.

विशाल- मई जनता हु की स्टोन खरीदने में मैंने पैसा लगाया था लेकिन स्टोन के ऑक्शन से जो पैसा हमें मिला वो अगर तुम न होते तो मुझे इतने पैसे नहीं मिलता या हो सकता था की मई जो स्टोन को खरीदने में पैसा लगाया वो भी दुब जाता और रही बात शर्त का तो वो शर्त भी मई तुम्हारे कारन hi जीता था इस लिए तुम्हे ये सब लेना hi होगा अगर तुम ये नहीं लिए तो इसे मई भी नहीं रखूँगा.

विशाल के बात सुन कर मई सोच में पद गया फिर कुछ देर सोचने के बाद मई बोलै.

मई- ठीक है मई आपके बात मैंने के लिए तैयार हु लेकिन मई इतना नहीं ले सकता आप एक काम करो हम दोनों मिल कर कंपनी और पैसो में फिफ्टी फिफ्टी कर लेते है अगर आपको मंजूर है तो ठीक है नहीं तो फिर मई भी कुछ नहीं लूंगा.

मेरे बात को सुन कर विशाल मुस्कुराने लगा और फिर मुस्कुराते हुए बोलै.

विशाल- ठीक है मुझे मंजूर है.

इसके बाद विशाल ने Stone's गैंबलिंग से कमाए पैसे में से 40 करोड़ मेरे अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया फिर अपने वकील को बोल कर ज्वेल्लेरी कंपनी का एक और डॉक्यूमेंट रेडी करने के लिए बोलै जिसमे 50% शेयर मेरा भी हो कुछ hi देर में डॉक्यूमेंट रेडी हो गया जिसपर मेरा सिग्नेचर लिया गया सरे काम होने के विशाल मुझसे बोलै.

विशाल- प्रतिक यार एक प्रॉब्लम हो गयी है.

मई- क्या प्रॉब्लम हो गयी.

विशाल- यार यहाँ से स्टोन अपने ज्वेल्लेरी कंपनी के लिए खरीदना था लेकिन इस जतिन के चाकर में हमने जो स्टोन ख़रीदा था उसे तो बेच दिया अब हम क्या करेंगे.

मई- करना क्या है चलिए हम फिर से स्टोन को चूसे करते है.

मेरी बात सुन कर विशाल खुस हो गया इसके बाद हमने फिर से stone's गैंबलिंग के दुकान पर घूम कर स्टोन खरीदने लगे करीब आधे घंटे में हमने 20 करोड़ में 50 स्टोन ख़रीदे और फिर उन सरे स्टोन को कट करवाया इस बार भी पहले की hi तरह उन सरे स्टोन से बहुत सरे बहुमूल्य आइटम निकले जिसे देख कर विशाल खुस हो गया और मुझसे बोलै.

विशाल- इस बार इस Stone's गैंबलिंग से मुझे बहुत फायदा हुआ है और ये सब तुम्हारे कारन हुआ है इस लिए तुम्हे बहुत बहुत धन्यवाद् प्रतिक भाई मई इन सरे आइटम की सही कीमत आंकने के बाद उसका 30% तुम्हे दे दूंगा और वो तुम्हे लेना hi होगा क्युकी अगर तुम्हारे जगह मई किसी दूसरे stone's गैंबलिंग मास्टर को लता तो वो भी मुझसे 30% लेता hi.

मई विशाल के बात सुन कर कुछ नहीं बोलै क्युकी मई जनता था की विशाल मेरे बात तो मानाने वाला नहीं है इसलिए मई उसे है बोल दिया.

मई- अब हमें यहाँ से चलना चाहिए क्युकी हमें जितना स्टोन खरीदना था खरीद लिया अब यहाँ पर हमर लायक कुछ भी नहीं है.

मेरा बात सुन कर विशाल बोलै.

विशाल- ठीक है चलो चलते है.

इसके बाद विशाल ने सरे स्टोन को उठाया और अपने बॉडीगार्ड को दे दिया और बोलै.

विशाल- इसको अच्छे से गाड़ी में रख दो.

विशाल के बात सुन कर वो बॉडीगार्ड तुरंत वो सरे स्टोन लेकर वह से निकल गया और उसके पीछे पीछे हम भी वह से निकल गए हलाकि वह पर बहुत सरे लोग मुझसे ये चाहते थे की मई उनके लिए भी स्टोन सेलेक्ट करू लेकिन मई उन लोगो के बातो को अनसुना कर के वह से निकल गया और फिर जाकर विशाल के साथ गाड़ी में बैठ गया और वह से चल दिया अभी मई वह से थोड़ा hi दूर गया था की तभी मेरे मोबाइल पर किसी का कॉल आने लगा जब मई अपना मोबाइल निकल कर देखा तो पाया की ये कॉल डॉ. बीरेंद्र खुराना का था तो मई मन hi मन सोचने लगा.

मई- (अपने मन में) ये मेरे पास कॉल क्यों कर रहा है कही ये मुझे अपने हॉस्पिटल में अस ा गेस्ट डॉक्टर बनाने के लिए तो कॉल नहीं कर रहा चलो कॉल उठा कर उससे hi पूछ लेता हु की ये मेरे पास कॉल क्यों कर रहा है.

फिर मैंने डॉ. बीरेंद्र खुराना का कॉल रिसीव किया और बोलै.

मई- हैल्लो डॉ. खुराना कैसे है आप बताइये अपने मुझे कॉल क्यों किया कुछ काम था क्या.

डॉ. खुराना- मई तो ठीक हु प्रतिक बस मई तुम्हे इस लिए कॉल किया था की गेस्ट डॉक्टर के बारे में तुमने क्या सोचा क्युकी कल संडे है.

डॉ. खुराना के बात सुन कर मई सोच में पद गया.

मई- (अपने मन में) अरे यार ये तो मुझे अपने हॉस्पिटल के गेस्ट डॉक्टर बनाने के लिए मेरे पीछे hi पद गए है अब मई क्या करू क्या मई इनको मन कर दू लेकिन अगर मई इनको मन करूँगा तो न जाने कितने मरीज बिना इलाज के मर जायेंगे... एक काम करता हु मई इनको है बोल देता हु.

मई अभी अपने सोच में hi पड़ा था की तभी मुझे डॉ. खुराना के आवाज सुनाई दी.

डॉ. खुराना- आप क्या सोच रहे है आप सीधा सीधा बोल दीजिये अगर सैप गेस्ट डॉक्टर नहीं बनाना चाहते है तो खुल कर बोल सकते है मुझे बुरा नहीं लगेगा.

मई- अरे नहीं ऐसी बात नहीं दरसल बात ये है की मेरे पास बिलकुल समय नहीं है इस लिए मई सोच रहा था की मई आपके हॉस्पिटल में केवल संडे को मई अपनी सर्विस दे सकता हु और वो सिर्फ 5 घंटा अगर आप चाहते है की मई आपके हॉस्पिटल में अपना सर्विस दू तो आपको मेरी बात मन्ना होगा और है मुझे साथ में एक असिस्टेंस भी चाहिए जो मरीजों के इलाज करने में मेरा मदत करेगा.

मेरे बात को सुन कर डॉ. खुराना बहुत खुस हो गए और मुझसे बोले.

डॉ. खुराना- मुझे तुम्हारा शर्त मंजूर है तो क्या तुम कल हॉस्पिटल में पेशेंट के इलाज करने आ सकते हो.

मई- ठीक है मई कल आ जाऊंगा.

इतना बोल कर मई कॉल कट कर दिया और कुछ सोचने लगा मुझे इस तरह से सोच में गम देख कर विशाल बोलै.

विशाल- क्या बात है प्रतिक क्या सोच रहे हो.

मई विशाल के बात सुन कर अपने सोच से बहार आते हुए बोलै.

मई- कुछ नहीं विशाल भाई बस मई ये सोच रहा था की सप्ताह में बस संडे hi एक ऐसा दिन है जिस दिन मुझे थोड़ा समय मिलता लेकिन कल से वो भी नहीं मिलेगा.

विशाल- क्यों ऐसा क्या हो गया जो तुम संडे को भी बिजी रहने वाले हो.

मई- क्या बताऊ भाई अभी डॉ. बीरेंद्र खुराना का मेरे पास कॉल आया था उन होने मुझे सिटी हॉस्पिटल में अस ा गेस्ट डॉक्टर अपॉइंटमेंट किया है और मुझे हर संडे 5 घंटा सिटी हॉस्पिटल में पेशेंट को देखना होगा.

विशाल में बात को सुन कर हसने लगता है और फिर बोलता है.

विशाल- है है है भाई कोंग्रटुलतिओन्स गेस्ट डॉक्टर बनाने के लिए.

मई- क्या विशाल भाई आप भी मेरा मजाक उदा रहे है.

विशाल- मई मजाक नहीं उदा रहा हु मई सच में तुम्हे दिल से कॉंग्रट्स कर रहा हु और तुमने ये अच्छा फैसला लिया तुम नहीं जानते तुम्हारे इस फैसले से कितने घर में खुशिया आएगी मुझे पता है जब घर में अपना कोई बीमार होता है और उसका इलाज नहीं हो पता तो दिल पर क्या गुजरती है.

मई- मई आपके बात को समझ रहा हु विशाल भाई इस लिए मैंने डॉ. खुराना को है बोलै है.

इधर हम दोनों बाटे करते हुए जा रहे थे तो वही बलदेव सिंह हवेली से निकलने के बाद सीधा अपने घर गया और फिर अपने ड्रावर से एक फाइल और एक पेण्ड्रीवे निकल कर किसी को कॉल किया और बोलै.

बलदेव- हैल्लो मेरे एक इनफार्मेशन है अगर तुम्हे चाहिए तो बोलो.

सामने से- तुम कोण बोल रहे हो और तुम्हारे पास कैसी इनफार्मेशन है.

बलदेव- मई कोण बोल रहा हु वो सब छोडो और तुम मुझे ये बताओ की तुम्हे अपने कंपनी के टॉप बढ़ाना है या नहीं अगर तुम्हे अपने कंपनी के टॉप बढ़ाना है तो मेरे पास तुम्हारे लिए कुछ है जिसे तुम अपने चैनल पर दिखा कर खूब टॉप बटोर सकते हो.

सामने से- क्या है तुम्हारे पास जिससे मेरे चैनल की टॉप बढ़ेगी.

बलदेव- मेरे पास ठकराल परिवार के सरे काळा कारनामो के साबुत है अगर ये तुम्हे चाहिए तो बोलो.

सामने से- और बदले में तुम्हे क्या चाहिए.

बलदेव- मुझे बदले में कुछ नहीं चाहिए मुझे बस ठकराल परिवार की बर्बादी चाहिए.

सामने से- ठीक है हो जायेगा तुम मेरे पास ठकराल परिवार के जितने भी काळा कारनामे है सब मेल कर दो आज इस ठकराल परिवार की बर्बादी तय है.

बलदेव- ठीक है मई तुम्हे भेज रहा हु लेकिन यद् रखना अगर तुमने मेरे साथ धोका करने की कोशिश की तो अच्छा नहीं होगा.



इसके बाद उस आदमी ने बलदेव पास अपना ईमेल ईद सेंड किये फिर बलदेव ने सरे फाइल को लैपटॉप में सकें किया और फिर पेण्ड्रीवे में जो था उसको कॉपी कर के सरे फाइल को उसके ईमेल ईद पर सेंड कर दिया.
 
अपडेट 20

राठौर फॅमिली


बलदेव सिंह मीडिया वालो को ठकराल परिवार के खिलाफ सरे साबुत दे दिया था जिसमे उनके इललीगल बिज़नेस जैसे की ड्रग्स ह्यूमन ट्रैफिकिंग जैसे बहुत सरे इललीगल बिज़नेस के साबुत थे और साथ में नीरज ठकराल के खिलाफ भी बहुत साडी लड़कियों के रपे करने का साबुत मीडिया वालो को मिल गया था.

मीडिया वाले तो ऐसे साबुत के तलाश में hi रहते है जैसे hi उनको वो साडी साबुत हाथ लगी वो तुरंत चैनल पर टेलीकास्ट करने लगे अब ठकराल परिवार के काळा करतूत पूरा सहर देख रहा था जैसे hi पुलिस के अधिकारियो ने ये टेलीकास्ट देखा तुरंत hi उन दोनों बाप बेटे को गिरफ्तार करने का वारंट निकल दिया और उसके साडी कंपनी को सील करने का आर्डर दे दिया.

ठकराल परिवार का यहाँ किसा hi ख़तम हो गया था इधर विशाल ने मेरे बोलने के बाद मुझे शनाया के कंपनी के पास छोड़ दिया था क्युकी मई जनता था की शनाया अभी इस वक़्त कंपनी में hi होगी फिर मई कंपनी के गेट के पास से अंदर जाने लगा तो मुझे गॉर्ड ने रोक लिया तो मई शनाया को कॉल किया.

शनाया- हैल्लो प्रतिक कहा हो तुम क्या तुम्हारा काम हो गया.

मई- है मेरा काम हो गया और मई अभी तुम्हारे कंपनी के पास hi हु.

शनाया- क्या तुम यहाँ हो लेकिन तुम यहाँ कब आये.

मई- मई बस अभी आया हु.

शनाया- ठीक है मुझे निचे आने में थोड़ा लेट होगा क्युकी मई अभी एक इन्वेस्टर के साथ मीटिंग में हु एक काम करो तुम अंदर आ कर वेटिंग एरिया में मेरा वेट करो मई थोड़ी देर में मीटिंग कम्पलीट कर के आती हु.

मई- लेकिन मुझे ये गॉर्ड अंदर आने hi नहीं दे रहा है.

शनाया- ठीक है तुम मुझे गॉर्ड से बात करवाओ मई उसको बोल देती हु.

शनाया के बात सुन कर मई मोबाइल गॉर्ड की दे दिया और उसे बात करने के लिए बोलै गॉर्ड मेरे हाथ से मोबाइल ले कर थोड़ी देर बात किया और मुझे सॉरी बोलते हुए अंदर जाने के लिए बोलै फिर मई अंदर जाकर वेटिंग एरिया में बैठ कर शनाया का वेट करने लगा फिर थोड़ी देर बाद मुझे शनाया आती हुयी दिखाई दी उसके साथ एक आदमी भी था जिसके साथ शनाया मुस्कुराते हुए बात करते करते आ रही थी और वो आदमी भी उसके साथ मुस्कुरा के बात कर रहा था मई उस आदमी को शनाया के साथ इस तरह से मुस्कुरा के बात करता देख कर चौक गया और उस आदमी को ध्यान से देखने लगा वो आदमी बार बार शनाया को घर घर कर देख रहा था उसकी आँखों में शनाया के लिए हवस साफ दिख रहा था ये देख कर मुझे बहुत गुसा आया और उठ कर उसके तरफ बढ़ने hi वाला था की फिर कुछ सोच कर मई वही बैठा रहा.

फिर शनाया उस आदमी को बी बोल कर चलते हुए मेरे पास आ गयी और फिर मेरे पास आ कर बोली.

शनाया- मुझे आने में ज्यादा देर तो नहीं हुयी.

मई- अरे नहीं मई तुम्हारे लिए पूरा जिंदगी इंतजार करने के लिए तैयार हु फिर ये तो कुछ hi घंटा हुआ है.

शनाया मेरे बात को सुन कर मुस्कुराने लगी और फिर मुस्कुराते हुए बोली.

शनाया- क्या तुम मेरे साथ फ़्लर्ट करने की कोशिश कर रहे हो.

मई- अरे ऐसी कोई बात नहीं है मई तो बस ऐसे बोल रहा था.

शनाया- है तो करना भी मत क्युकी यहाँ तुम्हारी दाल नहीं गलने वाली समझा.

मई- जी समझ गया वैसे वो आदमी कोण था जिसके साथ तुम अभी बाटे करते हुए बहार आ रही थी.

शनाया- क्यों तुम्हे जलन हो रही थी क्या.

मई- नहीं भला मुझे क्यों जलन होगी (फिर थोड़ी देर चुप रहने के bad)!Are बताओ न वो कोण था.

शनाया- वो वो तो मेरा एक इन्वेस्टर था वो मेरे कंपनी में इन्वेस्ट करना चाहता है.

मई- हम्म अच्छा है लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा की तुम्हे इन्वेस्टर की क्या जरुरत पद गयी.

मेरे बात को सुन कर शनाया गंभीर हो गयी और मुझसे बोली.

शनाया- मेरा कंपनी अभी लोस्स में चल रहा है मेरे कंपनी के अकाउंट में थोड़ा भी पैसा नहीं बचा इस लिए मुझे एक इन्वेस्टर की जरुरत पद गयी ताकि वो मेरे कंपनी में इन्वेस्ट कर सके.

शनाया के बात को सुन कर मई चौक गया और बोलै.

मई- क्या... तुम्हारी कंपनी लोस्स में चल रही है लेकिन ये कैसे हुआ अगर ये लोस्स में चल रही थी तो दादा जी ने ये तुम्हे क्यों दिया.

शनाया- ये बात दादा जी को भी नहीं पता की कंपनी लोस्स में चल रही है क्युकी इस कंपनी को अमृता मैनेज कर रही थी और मुझे लगता है की वही कुछ गड़बड़ की होगी और दादा जी को कुछ भी नहीं बताई होगी.

मई- तो अब तुम्हे कितने फण्ड की जरुरत है कंपनी रन करने के लिए.

शनाया- 50 करोड़ की जरुरत है और उसी सिलसिले में मैंने आज इस इन्वेस्टर के साथ मीटिंग राखी थी.

मई- तो क्या हुआ बता बना या नहीं.

शनाया- बात ऑलमोस्ट बन hi गया है आज वो डॉक्यूमेंट ले कर नहीं आया था इस लिए वो मुझे मंडे को स्काई मून क्लब में लंच पर बुलाया और उसने बोलै की हम डॉक्यूमेंट भी वही पर सिग्नेचर कर लेंगे.

शनाया के बात सुन कर मुझे कुछ गड़बड़ लगा क्युकी अगर वो यहाँ इन्वेस्टमेंट करने आया था तो ऐसा हो hi नहीं सकता की वो डॉक्यूमेंट लेकर नहीं आया हो फिर वो झूठ क्यों बोलै की उसने डॉक्यूमेंट लेकर नहीं आया इस लिए मई उससे पूछा.

मई- अच्छा उसका नाम क्या है और वो किस कंपनी से आया था.

शनाया- उसका नाम विपिन ठाकुर है और वो ठाकुर एंड son's कंपनी का सीईओ है क्या बात है तुम उसके बारे में बहुत तहकीकात कर रहे हो.

मई- अरे कुछ बस मई ऐसे hi तुमसे पूछ लिया ठीक है चलो अब चलते है.

हम अभी वह से निकल hi रहे थे की तभी शनाया के मोबाइल पर उसकी माँ का कॉल आया तो वो कॉल रिसीव करते हुए बोली.

शनाया- हैल्लो माँ आप अभी कॉल क्यों किया कुछ काम था क्या.

पुस्पा- (घुसे से) तुम अभी कहा हो और वो नालायक कामचोर घर जमाई कहा है.

शनाया अपने माँ की घुसे से भरी आवाज सुन कर घबरा जाती है और बोलती है.

शनाया- क्या बात है माँ वो अभी मेरे साथ में hi है और हम घर hi आ रहे है.

पुस्पा- ठीक है तुम लोग जल्दी घर आओ घर पर वक मेहमान आया है और उसके लिए उस कामचोर को खाना भी बनाना है.

इतना बोल कर पुस्पा कॉल कट कर दी शनाया को पुस्पा के बात सुन कर बहुत गुसा आता है लेकिन वो कुछ कर भी नहीं सकती थी क्युकी वो उसकी माँ थी इस लिए वो अपने घुसे को काबू कर के कंपनी से बहार निकल गयी.

इधर मुंबई के hi दूसरे छोर पर 5 लोग बैठ कर मीटिंग कर रहे थे जिसमे 3 लड़का और 2 लड़की भी थे ये लोग और कोई नहीं बल्कि मेरे hi साथी कारन रोहन दीपक शंध्या और दीप्ती थे इन लोगो ने मिल कर एक कंपनी सुरु की थी जिसका नाम था P&S ग्रुप ऑफ़ कंपनी P&S ग्रुप के अंदर बहुत साडी बिज़नेस थी जैसे की होटल & रेस्टुरेंट बिज़नेस मोल का बिज़नेस कंस्ट्रक्शन बिज़नेस यहाँ तक की इन लोगो ने फिल्म इंडस्ट्री में भी अपने पैसे को इन्वेस्ट कर के रखा हुआ है और सारा काम ये 5 लोग मिल कर hi देखते है अब आप सोच रहे होंगे की इनके पास इतना पैसा कहा से आया तो मई बता दू की ये लोग अपने एरिया के अंडर वर्ल्ड को ख़तम कर के उनके सरे पैसे को अपने पास रख लिया था और उसी से ये लोग ये कंपनी खड़ा किया था और ये लोग उस कंपनी में सिर्फ एक एम्प्लोयी के तरह काम करते थे और इस पुरे कंपनी को मेरे नाम कर रखा था.

हलाकि P&S ग्रुप ऑफ़ कंपनी अभी अभी बानी थी इस लिए ये कंपनी अभी ज्यादा विकाश नहीं किया था लेकिन ये लोग जिस तरह से म्हणत कर रहे थे उससे यही लग रहा था की आने वाले 2 महीनो में इस कंपनी का नाम पुरे मुंबई में मशहूर हो जायेगा और 6 महीने जाते जाते इस कंपनी के बारे में पुरे इंडिया के लोग जान जायेंगे और आज ये लोग यही सब बात को लेकर एक मीटिंग रखा था मीटिंग रूम में सबको आ जाने के के बाद कारन बोलै.

कारन- हम सब आज यहाँ किस लिए जमा हुए है ये तो तुम सब को मालूम है न.

रोहन- है पता है तो अब हम काम जे बाटे करे.

कारन- है तो मई ये बोल रहा था की हम सब ने मिल कर बिज़नेस के फाउंडेशन तो रख दिया है लेकिन अब हमें कुछ ऐसा करना होगा की आने वाले 6 महीनो में हमारा कंपनी पुरे इंडिया के टॉप 10 में आ जाये.

दीप्ती- लेकिन ये हम करेंगे कैसे.

दीपक- इसको करने के लिए सबसे पहले हम में से किसी एक को P&S ग्रुप के सरे कामो पर ध्यान देना होगा और उसे मैनेज करना होगा अभी तक हम सब बस अपना अपना एक एक काम पर hi फोकस कर रहे थे लेकिन अब हमें सरे कामो को एक साथ मैनेज करना होगा.

शंध्या- लेकिन अगर हम सरे कामो को एक साथ मैनेज करेंगे तो बहुत प्रॉब्लम होगा क्युकी हम एक साथ इतने सरे कामो को मैनेज नहीं कर सकते.

रोहन- है तुम सही बोल रही हो लेकिन जब दीपक ने ये बोलै है तो कुछ सोच समझ कर hi बोलै होगा इस लिए अब दीपक hi बताएगा की हम एक साथ सरे कामो को कैसे मैनेज करेंगे.

दीपक- मई सब को एक साथ सरे कामो को मैनेज करने के लिए नहीं बोल रहा हु हम सब जो काम पहले देखते थे वही देखेंगे लेकिन हम में से कोई एक होगा जो P&S ग्रुप के जनरल मैनेजर बन कर सरे कामो पर ध्यान देगा इस से ये होगा की हमें पता चलता रहेगा की हमें किस काम में ज्यादा एफर्ट लगाना होगा.

शंध्या- है दीपक सही बोल रहा है.

कारन- तो मई चाहता हु की दीपक तुम hi P&S ग्रुप क्र जनरल मैनेजर बनो क्युकी हम सब में बिज़नेस का सबसे ज्यादा नॉलेज तुम्हारे पास hi है.

रोहन- है दीपक कारन सही बोल रहा है तुम्हे hi जनरल मैनेजर बनाना चाहिए.

दीप्ती & शंध्या- है हम भी कारन के बात से सहमत है.

दीपक- तो ठीक है मई P&S ग्रुप के जनरल मैनेजर के पद के लिए तैयार हु लेकिन मेरी एक शर्त है.

रोहन- क्या शर्त है.

दीपक- मेरी ये शर्त है की मई तुम सब से बिज़नेस से रिलेटेड जो भी बोलूंगा तुम सब को मन्ना होगा.

कारन- ठीक मुझे मंजूर है.

रोहन- वैसे तुम ये शर्त नहीं रखते तब भी हम तुम्हारे बात को मानते.

दीपक- तो ठीक है अभी हम सिर्फ कंस्ट्रक्शन मोल होटल & रेस्टोरेंट के बिज़नेस पर ध्यान देंगे तो मुंबई में गवर्नमेंट के तरफ से नई सिटी डेवलपमेंट के लिए टेंडर निकलने वाला है तो मई चाहता हु की कारन और शंध्या तुम लोग एक ऐसा प्रोजेक्ट तैयार करो की ये टेंडर हमें hi मिले रोहन तुम्हारे लिए भी एक काम है तुम एक अच्छा सा अद्वेर्तिसेमेन्ट कंपनी से संपर्क कर के होटल और मोल कर उनसे अद्वेर्तिसेमेन्ट करवाओ और निधि मई चाहता हु की तुम मुंबई के हर कोने में P&S ग्रुप के मोल्ल ओपन करो और इसके लिए तुम्हारे पास सिर्फ ओने मंथ का टाइम है.

दीपक के बात सुन कर सब चौक जाते है और मन hi मन दीपक के बिज़नेस सेन्स को देख कर तारीफ करते है फिर सब एक साथ बोलते है.

सब- ठीक है हम तैयार है सारा काम हो जायेगा.

दीपक- और है ये सब करते हुए हमें बचो को भी ढूँढना है यद् है न भी ने क्या बोलै था.

कारन- है यार यद् है.

रोहन- वैसे तुम सब को भाई से बात हुआ था क्या.

शंध्या- नहीं यार ऐसा लग रहा है की वो तो हमें भूल hi गया है इतना दिन हो गया वो अभी तक हमसे एक बार भी बात नहीं किया.

दीप्ती- हम उसके पास कॉल करे क्या उसने तो हमें अपना no. भी दे दिया है.

दीपक- कल संडे है हम कल ग्रुप कालिंग कर के उससे बात करेंगे.

दीप्ती- ठीक है.

इधर मुंबई से दूर समुन्द्र में एक आइलैंड था जहा पर भारत का सबसे आमिर परिवार रहता था जिसका नाम था राठौर परिवार,

राठौर परिवार भारत का नंबर ओने परिवार था और ये परिवार पुरे वर्ल्ड के 5 टॉप आमिर परिवारों में से एक था ये परिवार करीब 15 साल से इस आइलैंड पर रह रहा था और ये यही से अपना सारा बिज़नेस ऑपरेट करता था.

राठौर परिवार का बिज़नेस पुरे दुनिया में फैला हुआ था ये आइलैंड मुंबई से बहुत दूर था और ये बहुत बड़ा था यहाँ पर हर उस चीज़ का बेवस्था था वो एक मनुस्य को चाहिए इस आइलैंड पर हॉस्पिटल से लेकर सोल्लगे और मोल्ल तक सारा चीज़ था और इस आइलैंड के बीचो बिच एक बहुत बड़ा हवेली बना हुआ था और इस हवेली में राठौर फॅमिली रहता था वैसे इस हवेली में हमेसा सन्ति hi रहता था लेकिन आज इस हवेली में बहुत हलचल हो रही थी.

अंदर बहुत सरे डॉक्टर और नर्स भाग दौड़ कर रहे थे हवेली के अंदर एक कमरे में एक बूढ़ा आदमी बेहोश पड़ा हुआ था और उसको कुछ डॉक्टर इलाज कर रहे थे बहुत देर तक इलाज करने के बाद भी उस आदमी को होश नहीं आया तो सरे डॉक्टर निराश हो कर बहार निकले और एक आदमी के पास जा कर बोले.

डॉक्टर- सॉरी सर लेकिन उनका कंडीशन बहुत ख़राब हो चूका है इस लिए अब उनको बचाना बहुत मुश्किल है अब उनके पास कुछ hi दिन बचा है.

डॉक्टर के बात सुन कर उस आदमी को गुसा आ जाता है और वो डॉक्टर पर छीलते हुए बोलता है.

आदमी- डॉक्टर तुम जानते हो तुम क्या बोल रहे हो अगर मेरे पिता जी को कुछ भी हुआ न तो मई किसी को नहीं छोडूंगा तुम सब सिर्फ नाम के वर्ल्ड के बेस्ट डॉक्टर हो मई कुछ नहीं जनता तुम्हे किसी भी तरह से मेरे पिता जी को बचाना hi होगा नहीं तो मई तुम सब को जान से मर दूंगा.

डॉक्टर- देखिये सिकेन्द्र सर हम सब पर ऐसे गुसा करने से कुछ नहीं होगा हम सब भगवन नहीं है और वैसे भी आपके पिता जी के पास काम hi दिन बचे है इस लिए आप उनका अच्छे से ध्यान रखिये और आप बात को भी समझने की कोशिश कीजिये क्युकी उनको जो बीमारी हुयी है उसका इलाज हमारे पास नहीं है हमें तो पता hi नहीं चल प् रहा की उनको आखिर हुआ क्या है तो हम उनका इलाज कैसे कर सकते है.

सिकेन्द्र- जब तुम लोग उनका इलाज कर hi नहीं सकते तो तुम सब का यहाँ पर क्या काम है अभी के अभी निकलो यहाँ से नहीं तो आज मई सब को जान से मर दूंगा.

सिकेन्द्र के बात सुन कर सरे डॉक्टर और नर्स दर जाते है और वह से जाने लगते है तभी उनको वह से जाता देख कर एक आदमी वह पर आता है और बोलता है.

आदमी- क्या हुआ सिकेन्द्र तुम इन सब पर गुसा क्यों हो रहे हो.

सिकेन्द्र- गुसा न करू तो क्या करू भैया ये लोग कब से यहाँ पर आ कर पिता जी का इलाज कर रहे है और अब जा कर बोल रहे है की हमारे पिता जी के पास कुछ hi दिन का समय बचा है.

सिकेन्द्र के बात सुन कर वो आदमी हैरान हो जाता है और उसके आँखों से आंसू गिरने लगते है फिर वो अपने आंसू को पोछते हुए बोलता है.

आदमी- जब हमारे पिता जी के पास समय hi नहीं बचा है तो ये लोग भी क्या कर सकते है तुम इन सब पर गुसा मत हो और जितने दिन पिता जी हमारे साथ रहेंगे इन सब को बोल दो की उनका अच्छे से देख भल करे.

अभी ये लोग बात कर hi रहे थे की तभी वह पर एक औरत आती है जिसकी उम्र लगभग 70 साल होगी और वो आने के साथ hi उस आदमी से पूछती है.

औरत- क्या बात है संजय बीटा तुम लोगो के चेहरे पर इतना उदासी क्यों है.

ये औरत थी कौशल्या देवी और वो संजय और सिकेन्द्र की माँ थी कौशल्या देवी के बात सुन कर उन दोनों के आँखों ने आंसू आ जाता फिर वो लोग अपने आंसू को पोछ कर उस औरत को साडी बाटे बताते है जिसे सुन कर औरत वही जमीं पर गिर जाती है और रट हुए बोलती है.

कौशल्या देवी - (रट हुए) पता नहीं किसकी नजर लग गयी हमारी फॅमिली को पहले छोटी बहु और अब ये.. मई कुछ नहीं जानती तुम सब चाहे जो करो जहा से भी डॉक्टर लाना है लाओ लेकिन मेरे पति को कुछ नहीं होना चाहिए.

कौशल्या देवी के बात को सुन कर सिकेन्द्र और संजय ने मायूसी में अपना गर्दन हिलाया और फिर संजय ने अपने फॅमिली गॉर्ड के हेड को बुलाया और बोलै.

संजय- तुम पुरे दुनिया में ये ऐलान कर दो की जिसने भी मेरे पिता जी यानि की महेंद्र सिंह राठौर के बीमारी को ठीक कर दिया हम उसे अपने परिवार के आधी सम्पति दे देंगे.

संजय के बात सुन कर गॉर्ड हेड के साथ साथ सिकेन्द्र और कौशल्या देवी दोनों चौक गए लेकिन वो दोनों कुछ बोले नहीं.

गॉर्ड हेड- ठीक है बॉस हो जायेगा लेकिन मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही की एक इलाज के बदले आधे सम्पति क्यों देना.

संजय- मेरे पिता जी से बढ़ ये सम्पति मेरे या मेरे परिवार वालो के लिए नहीं है इस लिए मई तुम्हे जितना बोलै है उतना करो.

राठौर फॅमिली इंट्रोडक्शन.

महेंद्र सिंह राठौर - फॅमिली हेड

कौशल्या देवी - महेंद्र सिंह राठौर के वाइफ

इनके 3 बीटा और 1 बेटी है

संजय सिंह राठौर- बड़ा बीटा

शालिनी सिंह राठौर- संजय के वाइफ

सिकेन्द्र सिंह राठौर- मंझला बीटा

पूजा सिंह राठौर- सिकेन्द्र के वाइफ

प्रताप सिंह राठौर - छोटा बीटा

नदिनी सिंह प्रताप सिंह राठौर के वाइफ.

इनके भी बचे है लेकिन उनके बारे में आपको कहानी में पता चलेगा.

इधर मई और शनाया दोनों जब घर पहुंचे तो देखा की सामने सोफे पर पुस्पा और उसके साथ एक अनचाहा मेहमान बैठा हुआ था जो और कोई नहीं बल्कि आकाश शेरगिल था जैसे hi मई उसे देखा मेरे तो मई सोचने लगा.

मई- (मन में) वो ये है पुस्पा आंटी के मेहमान पुस्पा आंटी के मन में इसको लेकर जरूर कोई खिचड़ी पाक रही है मुझे देखना पड़ेगा.

इधर शनाया ने जैसे hi आकाश को देखा वो बहुत खुस हो गयी क्युकी उसे तो आकाश के मन में क्या चल रहा है ये पता नहीं था वो तो आकाश को अपना दोस्त समझती थी.

शनाया- ही आकाश कैसे हो.

आकाश- मई ठीक हु तुम अपना बताओ.

इतना बोल कर आकाश आगे बढ़ा और शनाया को गले लगा लिया और मेरे तरफ देख कर मुस्कुराने लगा उसे ऐसा करते देख कर मेरे तन बदन में आग लग गयी और मई घुसे से मुठी भींच लिया लेकिन मई आंटी के सामने उसका कुछ कर नहीं सकता था इधर शनाया भी इसके लिए तैयार नहीं थी वो आकाश को इस तरह खुद को गले लगाने पर हैरान रह गयी और वो तुरंत आकाश को खुद से अलग की और फिर बोली.

शनाया- मई भी ठीक हु आज तुम इधर के रास्ता कैसे भूल गए.

ाक्षा- वो मैंने सोचा की अंकल और आंटी से मिले बहुत दिन हो गए तो सोचा की एक बार मिल hi लेता हु.

पुस्पा- अच्छा किया ाक्षा जो तुम आ गए (फिर मुझसे) तुम खड़े खड़े मेरा मुँह क्या देख रहे हो तुम्हे दिख नहीं रहा की घर में मेहमान आये है जाओ और जा कर खाना रेडी करो आज आकाश यहाँ से खाना खा कर जायेगा.

पुस्पा को मुझे इस तरह से बेइज्जती करता देख कर आकाश के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी.

आकाश- नहीं आंटी इसको कोई जरुरत नहीं है मई घर जा कर खाना खा लूंगा.

पुस्पा- नहीं बीटा मई अपने मेहमान को ऐसे कैसे अपने घर से खली पेट जाने दूंगी प्रतिक तुम्हे एक बार में सुनाई नहीं देता है की मई क्या बोल रही हु जाओ और जाकर खाना रेडी करो.

मई- जी आंटी अभी जाता हु.

इतना बोल कर मई किचन में चला गया और खाना रेडी करने लगा इधर मेरे जाने के बाद शनाया भी अपने रूम में चली गयी इधर मई किचन में काम करते हुए अपने दूर तक सुनाने की शक्ति को एक्टिव कर के बहार पुस्पा और आकाश के बात को सुन रहा था इधर आकाश भी समझ गया था की मई पुस्पा को बिलकुल पसंद नहीं हु इस लिए वो चापलूसी करते हुए बोलै.

आकाश- वैसे आंटी प्रतिक को देख कर नहीं लग रहा है की वो भविस्य में आगे भी कुछ कर पायेगा इसी लिए वो शनाया से सदी कर के घर जमाई बन गया ताकि उसे आगे चल कर कोई दिक्कत न हो लेकिन मुझे या समझ में नहीं आ रहा है अपने उससे अपनी बेटी की शादी कैसे कर दी.

आकाश के बात सुन कर मुझे बहुत गुसा आया और मई मन में hi सोचा साला ये तो मेरे खिलाफ आंटी के कण भर रहा है वैसे भी आंटी मुझे पसंद नहीं करती और ये ऊपर से उनको और भड़का रहा है मई इसे छोडूंगा नहीं इधर पुस्पा आकाश के बात सुन कर घुसे से किचन के तरफ देखती है और बोलती है.

पुस्पा- क्या करू बीटा मेरा किस्मत hi ख़राब है मुझे तो थोड़ा भी पसंद नहीं है लेकिन मई पिता जी के फैसले के खिलाफ नहीं जा सकती थी वर्ण वो हमें जायदाद से अलग कर देते.

आकाश- तो आप सब ने शनाया के दादा जी के बातो में आके शनाया के जिंदगी बर्बाद कर दी आप सब ये नहीं सोचा की ये लड़का जो एक घर जमाई बनने के लिए तैयार हो गया वो शनाया को खुश कैसे रख सकेगा.

पुस्पा- अगर हम शनाया के सदी अगर इससे नहीं करते तो वैसे भी हमारी जिंदगी बर्बाद हो hi जाती लेकिन मैंने अपने दिमाग को लगते हुए एक शर्त रख दिया की अगर ये 1 साल में काम कर के अगर इसने 5 करोड़ रुपया नहीं काया तो इसे शनाया को तलाक देना होगा.

आकाश- नहीं आंटी 1 साल बहुत हो जायेगा आप ऐसा कीजिये की जितनी जल्दी हो सके आप इससे शनाया के तलाक करवा दीजिये और आप शनाया के चिंता मत कीजियेगा शनाया से सदी करने के लिए मई तैयार हु और वैसे भी मई शेरगिल परिवार के वारिस हु तो आप सब को किसी भी बात के चिंता भी करने की जरुरत नहीं है.

पुस्पा- सच में तुम शनाया से शादी करोगे.

आकाश- जी आंटी मई सच बोल रहा हु मई शनाया से सदी जरूर करूँगा क्युकी मई शनाया से बचन से hi प्यार करता हु.

पुस्पा आकाश के बात सुन कर बहुत खुस हो गया और वो उसे अपने गले लगा ली और बोली.

पुस्पा- थैंक्स बीटा तुमने ये बोल कर मेरे मन को हल्का कर दिया नहीं तो मुझे अपने बेटी को लेकर बहुत चिंता हो रहा था.

आकाश- अब आप शनाया के चिंता छोड़ दीजिये मई मंडे से hi शनाया के सोल्लगे ज्वाइन कर रहा हु अब मई सोल्लगे में भी शनाया के साथ hi रहूँगा और उसकी दिल जितने की कोशिश करूँगा आप सिर्फ किसी तरह से शनाया और प्रतिक के डाइवोर्स करवा दीजिये बस.

पुस्पा- तुम उसकी चिंता मत करो मई कुछ न कुछ कर के शनाया और प्रतिक के डाइवोर्स करवा hi दूंगी.

इन लोगो के बात सुन कर तो मेरे पैरो के निचे से जमीं hi निकल गयी थी और मेरे हाथ के मुठी घुसे से बंद हो गयी मुझे इतना गुसा आ रहा था की मेरे घुसे से मेरे शरीर से भयानक एनर्जी निकलने लगी लेकिन मई किसी तरह खुद को संत किया.

मई- ये आकाश तो मेरे पीछे hi पद गया लगता है इसका कुछ तो करना पड़ेगा.

थोड़ी देर बाद खाना रेडी हो गया था फिर मई खाने को दिंनिंग टेबल पर सर्वे किया और शनाया को बुलाने उसके रूम में गया जब मई रूम में पंहुचा तो देखा की शनाया रेडी हो कर दिंनिंग होल में hi आने वाली थी फिर मई उसको खाने के लिए बोल कर शनाया के डैड को बुलाने चला गया.

इतने देर में शनाया भी दिंनिंग होल में आ गयी और दिंनिंग टेबल के पास लगे एक चेयर पर बैठ गयी फिर मई जाकर शनाया के पास बैठने लगा तो मेरे बैठने से पहले hi आकाश वह आ कर बैठ गया और मुस्कुरा कर मुझे देखने लगा उसको इस तरह से खुद के पास बैठते देख कर शनाया मुझे देखने लगी और आँखों hi आँखों में मुझे इशारा किया की मई आज कही और अर्जेस्ट कर लू फिर सरे लोग खाना खाया खाना खाने के बाद आकाश उठा और उठने के बाद उसने अपने जेब से 1 नेकलेस निकला और शनाया को देते हुए बोलै.

आकाश- शनाया मई तुम्हारे लिए ये नेकलेस गिफ्ट के रूप में लाया हु प्लीज तुम मेरे गिफ्ट को एक्सेप्ट कर लो.

पुस्पा के आँखों में आकाश के द्वारा लाया गया नेकलेस देख कर चमक आ गयी और वो खुस होते हुए बोली.

पुस्पा- वाओ आकाश ये नेकलेस कितना सुन्दर और मंहगा लग रहा है ये तुम शनाया के लिए लाये हो.

आकाश- जी आंटी ये मई शनाया के लिए hi लाया हु और ये पुरे 25 लाख का है.

आकाश के बात को सुन कर पुस्पा चौक गयी और बोली.

पुस्पा- क्या 25 लाख ये इतना महंगा है वाओ मेरी बेटी कितनी लकी है की उसको तुम जैसा दोस्त है नहीं तो यहाँ कुछ ऐसे भी लोग है जो गिफ्ट तो बहुत दूर की बात अपने hi बीवी के पैसो पर ऐश करते है.

पुस्पा के बात कर मेरे मन में आया की मई बोल दू की मई आपके बेटी को पुरे 5 करोड़ के पेन्डेन्ट गिफ्ट में दिया हु लेकिन मई चुप रहा कुछ नहीं बोलै नहीं तो मेरे और आकाश में फरक hi क्या रह जाता इधर आकाश पुस्पा के बात सुन कर मुस्कुराते हुए बोलै.

आकाश- क्या आंटी आप भी किसकी बात लेकर बैठ गए किसी की औकात भी तो होनी चाहिए गिफ्ट देने की शनाया तुम मेरे गिफ्ट को एक्सेप्ट करो और ये पेन्डेन्ट निकल कर इसे पहन लो ये पेन्डेन्ट जरूर तुम्हे प्रतिक ने hi दिया होगा है न ये पेन्डेन्ट तुम्हारे ऊपर अच्छा नहीं लग रहा है तुम जैसे लड़की के लिए इस पेन्डेन्ट से अच्छा ये नेकलेस है इसे उतरो और मेरा नेकलेस ले लो.

आकाश के बात सुन कर शनाया को बहुत गुसा आया और वो अपने घुसे को दबती हुयी बोली.

शनाया- सॉरी आकाश मई तुमसे इतनी महंगी गिफ्ट नहीं ले सकता और वैसे भी मेरे लिए ये पेन्डेन्ट hi सही है क्युकी इस पेन्डेन्ट को जिसने भी दिया है उसका प्यार इस पेन्डेन्ट में मेरे साथ है और ये पेन्डेन्ट एक रूपए का भी क्यों न हो लेकिन मेरे लिए यही सबसे अच्छा गिफ्ट है इस लिए सॉरी मई तुम्हारे गिफ्ट को एक्सेप्ट नहीं कर सकती.

शनाया के बात सुन कर आकाश और पुस्पा दोनों चौक गए उन दोनों को hi बिस्वास नहीं हो रहा था की कोई इतना महंगा गिफ्ट भी लेने से इंकार कर सकता है इधर मेरे होठो पर भी एक गहरी मुस्कान आ गयी थी लेकिन शनाया को यु गिफ्ट लेने से इंकार करना पुस्पा को पसंद नहीं आया तो वो बोली.

आकाश- तुम ये क्या बोल रही हो शनाया हम दोस्त है और दोस्ती में सस्ता या महंगा नहीं देखा जाता मई ये गिफ्ट प्यार तुम्हारे लिए आया हु प्लीज इस गिफ्ट को एक्सेप्ट कर लो.

शनाया- सॉरी आकाश लेकिन मई ये गिफ्ट तुमसे नहीं ले सकती.

पुस्पा- ये क्या बतमीज़ी है शनाया वो इतना प्यार से तुम्हारे लिए गिफ्ट ले कर आया है और तुम उसे लेने से मन कर रही है लगता है तुम इस निकम्मे के साथ रह रह कर इसके जैसे hi बन गयी हो.

पुस्पा के बात सुन कर शनाया थोड़े घुसे से बोली.

शनाया- माँ ये आप कैसी बात कर रही है मई इससे इतना महंगा गिफ्ट कैसे ले सकती हु और वो भी आकाश से मन की वो मेरा फ्रेंड है लेकिन हम इतने भी करीब नहीं है की मई उससे इतना महंगा गिफ्ट ले लू.

शनाया के बात सुन कर आकाश के चेहरा लटक गया वही पुस्पा को शनाया पर बहुत गुसा आ रहा था इस लिए वो घुसे से बोली.

पुस्पा- आज तुम्हे क्या हो गया है शनाया तुम तो कभी मुझे मेरे बात से इंकार नहीं करती थी आज तक तुम्हे कोई इतना महंगा गिफ्ट दिया नहीं न और आज तुम्हे आकाश इतना महंगा गिफ्ट प्यार से दे रहा है तो तुम उसे मन कर रही हो.

पुस्पा के बात सुन कर अजय जो कब से इन तीनो के बात सुन रहा था वो बोलै.

अजय- जब शनाया को वो गिफ्ट लेना hi नहीं है तो तुम उसे इतना फाॅर्स क्यों कर रही है और वो ठीक hi तो बोल रही है किसी पराये मर्द से इतना महंगा गिफ्ट लेना एक संस्कारी लड़की को सोभा नहीं देता और वो भी वो लड़की शादी सुदा हो तो इस लिए उसे फाॅर्स करना बंद करो समझी.

अजय के बात को सुन कर पुस्पा घुसे से बोलती है.

पुस्पा- अरे आप तो चुप hi रहो आप देख नहीं रहे है की आकाश कितने प्यार से शनाया के लिए वो नेकलेस लाया है और आप ये क्या बोल रहे है शादीशुदा होक पराये मर्द से कोई गिफ्ट नहीं लेना चाहिए तो आप बताइये की ये निकम्मा तो कभी मेरी बेटी को कोई गिफ्ट नहीं देगा क्युकी इसकी इतना औकात hi नहीं है की वो शनाया को 25 लाख के गिफ्ट दे अरे 25 लाख छोड़िये इसकी औकात 25 हजार के बराबर भी नहीं तो क्या इसके चलते शनाया बाकि लोगो से भी गिफ्ट लेना बंद कर देगी.

पुस्पा के बात सुन कर शनाया को बहुत गुसा आया और उसने घुसे से बोली.

शनाया- माँ बस बहुत हो गया तमाशा अब आप प्रतिक के बारे में कुछ भी नहीं बोलेंगी अगर प्रतिक मुझे 1 रुपया का भी गिफ्ट देगा न तो वो मेरे लिए क्रोरो से काम नहीं होंगी और आपको इस गिफ्ट ज्यादा प्यार आ रहा है न तो इसे आप hi रख लीजिये.

इतना बोल कर शनाया वह से उठी और अपने रूम में चली गयी शनाया के जाने के बाद अजय मल्होत्रा भी वह से उठ कर अपने रूम में चले गए इधर शनाया को इस तरह से गुसा हो कर जाते देख मई भी उसके पीछे जाने लगा तभी पुस्पा के कड़कती हुयी आवाज मुझे सुनाई दी.

पुस्पा- अरे वो कामचोर तू किधर जा रहा दिंनिंग टेबल से ये बर्तन कोण उठाएगा चल चुप चाप बर्तन उठा और इसे किचन में रख समझा.

पुस्पा के बात सुन कर आकाश मुस्कुराने लगा और मेरे पास आ कर बोलै.

आकाश- तेरा औकात सिर्फ खाना बनाना और बर्तन धोने भर hi है तू शनाया के लायक नहीं है देखना एक दिन मई तुम्हे उसकी जिंदगी से निकल कर बहार फेक दूंगा देख लेना.

मई- अच्छा तुम्हारे अंदर इतना डैम है ठीक है तो फिर चल निकल कर दिखा मई भी देखने के लिए तैयार हु की तू कैसे मुझे शनाया के जिंदगी से बहार निकलता है.

इतना बोल कर मई भी सरे बर्तन उठा कर किचन में रखा और फिर बहार आकर आकाश को मुस्कुरा कर देखते हुए पुस्पा से बोलै.

मई- और कोई काम आंटी.

पुस्पा- (मुँह बनाते हुए) नहीं.

मई- ठीक है तो फिर मई शनाया के रूम में जा रहा हु अगर कोई काम होगा तो आवाज लगा दीजियेगा.

इतना बोल कर मई आकाश को मुस्कुराते हुए देखा और शनाया के रूम में जाने लगा मुझे इस तरह शनाया के रूम में जाते देख कर आकाश जल भून गया और घुसे से पेअर पटकता हुआ बहार निकल गया.

इधर मई शनाया के रूम में गया तो देखा की वो अपने बीएड पर बैठ कर कुछ सोच रही थी जैसे hi मई उसके रूम में अन्तर हुआ उसका ध्यान मेरे तरफ गया तो वो उदासी लहजे में मुझसे बोली.

शनाया- सॉरी प्रतिक आज जो तुम्हारे साथ हुआ वो नहीं होना चाहिए था.

मई- अरे नहीं छोडो उन सब बातो को मई तो उन सब बातो को निचे hi भुला दिया था ाचा मुझे एक बात बताओ.

शनाया- है बोलो न.

मई- ये आकाश जैसा लड़का तुम्हारा दोस्त कैसे बन गया.

शनाया- आकाश पहले ऐसा नहीं था पता नहीं इस जब से वो अब्रॉड से पढ़ कर आया है उसमे सब कुछ चेंज हो गया ऐसा लगता है जैसे ये आकाश है hi नहीं बल्कि उसके भेस में कोई और है.

मई- मई तुमसे सिर्फ एक बात बोलूंगा की ये लड़का सही नहीं है तुम इसके साथ जायदा घुलना मिलना नहीं.

शनाया- ठीक है.

शनाया से बात करने के बाद मई सोफे पर जा कर सो गया और शनाया अपने बीएड पर सो गयी.

इधर मुंबई यूनिवर्सिटी के गर्ल्स हॉस्टल के छत पर एक लड़की इधर उधर भाग रही थी और चीला रही थी.

लड़की- बचाओ बचाओ कोई तो मुझे इन दरिंदो से बचाओ.

वो ऐसे hi छीलते हुए भागे जा रही थी वो लड़की भागते भागते छत के एक कोण में आ गयी जहा उस लड़की को भागने के लिए कही भी रास्ता नहीं दिख रहा था इस लिए वो लड़की वही रुक गयी जैसे hi वो लड़की वह रुकी उसके पीछे से कुछ लड़के भागते हुए उसके पास आ गए और एक लड़का हफ्ते हुए बोलै.

लड़का- अब तुम हमसे बच कर कहा जाएगी मैंने तुमसे कहा था न की हमसे बच कर भागना इम्पॉसिबल है.

उस लड़के के बात सुन कर वो लड़की दर से थार थार कपङे लगी और गिड़गिड़ाते हुए बोली.

लड़की- प्लीज मुझे छोड़ दो मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है प्लीज मुझे छोड़ दो.

Ladka-(Haste हुए) छोड़ दू है है है है अगर तुम्हे छोड़ना hi होता तो मई तुम्हे पकड़ता क्यों मई तुम्हे पहले hi बोलै था न की मेरी बात मन ले लेकिन नहीं तुम्हे तो भागने का सुख है तो ठीक है भाग न रुक क्यों गयी अब तुम्हे हमसे कोई नहीं बचा सकता.

इतना बोल कर वो लड़का उस लड़की के तरफ जाने लगा जिसे देख कर वो लड़की बोली.

लड़की- देखो देखो तुम आगे मत बढ़ना नहीं तो मई यहाँ से कूद जाउंगी.

लड़का- और तुम्हे क्या लगता है की हम बिना मजा किये hi तुम्हे यहाँ से कूदने देंगे.



इतना बोल कर वो लड़का अपने जेब से एक इंजेक्शन निकलता है और उस लड़की के तरफ बढ़ने लगता है जब वो लड़की देखती है की वो लड़का उसके तरफ बढ़ रहा है तो वो लड़की छत से कूदने की कोशिश करती है मगर तब तक देर हो चुकी थी क्युकी वो जैसे hi कूदने के लिए आगे बढ़ी वैसे hi दो लड़को ने उस लड़की को दोनों तरफ से पकड़ लिया और जिस लड़के के पास इंजेक्शन था उसने उस लड़की के बहो में वो इंजेक्शन लगा दिया.
 
भाई ये कहानी hi एक घर जमाई की है तो आप hi बताओ की घर जमाई को कहा इज्जत मिलता है लेकिन है जब घर जमाई एक्स्ट्राऑर्डिनरी हो तो बात hi अलग है अगर प्रतिक अपना सच बताने में जल्दीबाज़ी करेगा तो उस पर बहुत सरे सवाल उठेंगे इस लिए वो अपनी बेइज्जती को सहते हुए सही समय का इंतज़ार कर रहा है.

ठकराल परिवार को बर्बाद तो होना hi था क्युकी उसने पन्गा भी तो अपने हीरो से लिया था और रही बात शनाया के कंपनी में जो इन्वेस्ट करना चाहता है उसका तो उसका भी कोई न कोई इंतजाम होगा hi.

वैसे थैंक्स बीआरओ फॉर योर लवली कमैंट्स ऐसे hi साथ बने रहे
 
है बता तो सकता है लेकिन अभी बताने में मजा नहीं आएगा क्युकी आकाश जो बिछ में आ रहा है वो भी पुस्पा के मदत से तो अगर अभी प्रतिक कुछ बताएगा तो पुस्पा को यही लगेगा की आकाश से जलन के कारन प्रतिक उससे झूठ बोल रहा है इस लिए आप सही समय का इंतज़ार कीजिये क्युकी सही समय आने पर सबका हिसाब होगा और बराबर हिसाब होगा😁😁😁
 
अपडेट 21



स्टोरेज रिंग और दिव्या तलवार



Aak Sunday tha is liye Mujhe jaldi nasta ready karne ki jarurat nhi thi is liye mai subah me uth kar Teleport ho kar haweli gaya aur waha par sabse pahle apna traning complete kiya daily traning karne se mere skill me kafi improvement huya tha space shakti par meri pakad bahut achha ho gaya tha.

Traning complete karne ke bad maine socha ki abhi mere pass bahut samay hai to kyu na Storage ring banane ki kosish kiya jaye lekin mujhe storage ring banane ke liye gurudev ke margdarshan ki jarurat hogi is liye mai wahi par dhyan me baith gaya aur apne man ke tarang se gurudev ke bat karne ki kosish karne laga thodi der me hi mujhe gurudev ki awaj sunayi di.

Gurudev- Bolo putra kaise yad kiya mujhe.

Mai- Pranam Gurudev.

Gurudev- Ayushman bhava putra.

Mai- Gurudev mai storage ring banana chahta hu aur uske liye mujhe apke margdarshan ki jarurat hai gurudev.

Gurudev- Lekin putra storage ring banane ke liye storage pathar ke sath sath ek kathore dhatu ki jarurat hogi jo is prithvi par nhi milta.

Mai- Gurudev apke ashirwad se mujhe storage pathar aur uske sath sath ek bahut majbut dhatu bhi mil gaya hai.

Gurudev- (Hairan hote huye) Kya sach me tumhe Storage pathar aur ek dhatu mil gaya hai.

Mai- Ha gurudev.

Gurudev- Thik hai to tum ek kam karo tum waha se teleport ho kar himalay me mere pass aa jao aur ha sath me storage pather aur wo dhatu lana nhi bhulna.

Mai- Thik hai gurudev.

Itna bol kar mai ek room me gaya aur waha se storage pathar aur wo dhatu ko liya aur teleport ho kar gurudev ke pass himalay pahuch gaya jaise hi mai gurudev ke pass gaya to gurudev ke pair ko chhu kar pranam kiya.

Gurudev- Aa gaye putra aur wo pathar aur Dhatu bhi sath laye ho na.

Mai- Jee gurudev mai dono chij apne sath lekar aaya hu.

Gurudev- Thik hai to tum mere sath mere room me chalo.

Itna bol kar gurudev apne room me jane lage unko apne room me jata dekh kar mai bhi unke pichhe pichhe unke room me aa gaya jaise hi mai gurudev ke room me pahucha gurudev bole.

Gurudev- Mujhe wo pathar aur Dhatu ko dikhao.

Mai gurudev ke bat ko sun kar wo pathar aur Dhatu ko gurudev ke samane rakh diya jise gurudev bade dhayan se dekhne lage thodi der tak un dono chij ko dekhne ke bad gurudev muskurate huye bole.

Gurudev- Hmm Bahut achha ye to sach me ek storage pathar aur duniya ke sabse majbut dhatu hai is pathar se tum 35 se 40 storage ring bana sakte ho storage ring banane ke bad bhi tumhare pass ye dhatu bahut sari matra me bach jayega jisse tum apne sathiyo ke liye talwar bhi bana sakte ho to kya tum sirf storage anguthi hi banana chahte ho ya fir apne sathiyo ke liye talwar bhi banaoge.

Mai- Jee gurudev mai to talwar bhi banana chahta hu lekin mere pass jyada samay nhi hai.

Gurudev- Tum samay ke chinta mat karo mai tumhe ek aisi jagah par lekar chalunga jaha tumhe dharti ke 2 ghanta waha par 20 din ke barabar hoga aur tumhe sirf 10 din hi chahiye storage ring aur talwar banane ke liye.

Iske bad gurudev ne kuchh mantra ko padhte huye apne hath ko hilaya to unke hath se roshni nikal kar samne gayi aur samne ek darwaja prakat ho gaya iske bad gurudev bole.

Gurudev- Aao andar chalte hai.

Mai gurudev ke bat sun kar unke sath us darwaje ke andar chala gaya jaise hi mai us darwaje ke andar gaya to charo taraf sirf roshani hi roshani thi mujhe us roshani ke karan kuchh dikhai nhi de raha tha is liye mai apne aankho ko band kar liya.

Jaise hi maine apne aankh band kiya mujhe aisa laga ki koi mujhe khich raha hai achanak mai us khichao ke chalte apne aap aage badhne laga aur fir kuchh dur aage jane ke bad niche girne laga jaise hi mujhe abhas huya ki mai niche gir raha hu mere muh se joro ki chikh nikal gayi lekin ye kuchh hi chhan huya fir mai wahi behosh ho gaya.

Jab mujhe hos aaya to mai ek maidan me leta huya tha aur gurudev mujhe jaga rahe the mai hos me aake apne samne jaise hi gurudev ko dekh mai hadbadate huye uth khada huya aur fir apne charo taraf dekhte huye gurudev se puchha.

Mai- Gurudev ye kon si jagah hai.

Gurudev- Putra ye mere dwara banaya gaya space ki duniya hai yaha ke 20 din bahari duniya ke sirf 2 hi ghante ke barabar hai is liye tum yaha par storage anguthi aur talwar bana sakte ho yaha par tumhe lane ka ek aur karan hai.

Mai- Aur wo karan kya hai gurudev.

Gurudev- Wo karan yah hai putra ki tumhe aage chal kar jis shakti ka samna karna hai us shakti ke aage koi mamuli talwar kam nhi karega is liye tumhe Divya talwar ki jarurat hogi aur us Divya talwar ko banane ke liye tumhe aise hi jagah ki jarurat thi nhi to agar tum divya talwar agar dharti par banate to us buri shakti ko pata chal jati aur wo us talwar ko pane ke liye kisi bhi had tak ja sakta tha halaki ye talwar us buri shakti ka kuchh bhi bigad nhi sakti lekin is Divya talwar se tumhare sathi uske sena ko jarur nast kar sakte hai.

Mai- Aur wo buri shakti kon hai gurudev jiske bare me aap bat kar rahe hai.

Gurudev- Putra ye janana abhi tumhe jaruri nhi hai kyuki usse tumhara samna hone me abhi bahut waqt hai is liye tum us buri shakti ka chinta mat karo aur apne kartavya ke marg par aage badhte raho jab us shakti se tumhara samana hone ka samay aayega tab tumhe uske bare me khud pata chal jayega.

Mai- Thik hai gurudev aab aage kya karna hai.

Mere bat ko sun kar gurudev ne apne hath ko hawa me lahraya to mere samne ke kadahi aa gayi.

Gurudev- Ye kadahi ek Divya kadahi hai is kadahi ko koi bhi aag chahe wo narak ke hi aag kyu na ho nhi pighla sakta ab tumhe karna ye hai ki is kadahi me tum storage pathar ko dal do aur sath me ek tukda us dhatu ke bhi dalo aur ha tum us dhatu ko katne ke liye apne kali aag ka prayog karo.

Gurudev ke bat sun kar mai turant hi us pathar ko kadahi me dal diya aur fir apne hath me kali aag ko jalaya jise black flame bhi bolte hai is black flame ko bahut kathin traning kar ke maine prapt kiya tha agar iski ek ans bhi kisi manusya ke upar pada to wo wahi jal kar rakh ho jayega.

Maine apne hath par black flame ko jalaya aur use ek talwar ka rup de diya iske bad maine black flame ke talwar se us dhatu ke ek hise ko katne laga thodi der bad jab wo hisa cut gaya to mai use bhi kadahi me dal diya iske bad maine gurudev se puchha.

Mai- Gurudev maine dono chij kadahi me dal diya hai aab aage kya karna hai.

Gurudev- Ab tum un dono ko apne Balck flame se Pighalane ki kosish karo aur jab wo pathar aur Dhatu dono puri tarah se pighal kar liquid me badal jaye to tum apne space ke shakti ke jariye dhatu aur storage pathar ke liquid ko apas me milane ki kosish karo isse ye hoga ki us storage pathar me tumhara space shakti bhi chala jayega jiske karan uski chhamta aur badh jayeg pahle tum itna kar lo iske bad mai tumhe aage batata hu.

Mai- Thik hai gurudev.

Itna bol kar mai us kadahi ke andar apne black flame ko dal diya jiske karan wo pathar aur Dhatu dono pighalne lage lekin jaise jaise dono pighal kar liquid ban rahe the waise waise dono ke liquid ek dusre se alaga hote ja rahe the aisa lag raha tha ki dono aapas me milna hi nhi chahte ho khiar kuchh der tak apne black flame ko us kadahi ke andar dalte raha jiske karan wo dono chij puri tarah se pighal kar liquid me badal gaya tha aur kadahi me hi ek dusre se alag alag pada huya tha ab mujhe apne space shakti ke dwara un dono liquid ko aapas me milana tha is liye maine apne space shakti ko active kiya to mere hatho se blue colour ki roshani nikalne lagi.

Mai apne hath se nikalte blue colour ke roshni ko us kadahi me dal diya aur apne space shakti se un dono pighle huye storage pathar aur Dhatu ke liquid ko apas me milane laga bahut der tak aise hi milane ke bad mai akhir kar dono liquid ko puri tarah se mila diya fir dono liquid mil kar ek ho gaye ab isme mera space shakti bhi achhe se mil gaya hai jiske karan usme se ek roshani nikalne lagi jab gurudev ne dekha ki mai us dhatu aur pathar ko achhe se pighla kar ek dusre se mila diya to gurudev ne kuchh mantra badhe aur unke samne hawa me ek board aa gaya jisme bahut tarah ke anguthi banane wale sanche the.

Gurudev- Pratik putra ab tum apne space shakti se thoda thoda liquid ko utha kar in sare sancho me dalo jab ye sare sanche bhar jayenge to tumhara storage ring taiyar ho jayega aur ha ye sancha ek jadui sancha hai is sanche ke andar tumhe anguthi ke size ke bare me aur banawat ke bare sochne ki jarurat nhi hai ye pahanane wale ke upar hai uske man me jis tarah ke ring ki kamana hogi wo waise hi ring me badal jayega lekin ye sirf ek bar hi hoga.

Maine wahi kiya jo gurudev ne mujhe bataya maine apne space shaktiyo ke madat se sare liquid ko us board me bane ring ke Sanche me dalte gaya thodi der me mai sare sanche ko liquid se bhar diya iske bad gurudev ne us board ko gayab kar diya us board ko gayab karne ke bad gurudev mujhse bole.

Gurudev- Maine is board ko gayab kar diya hai ab ye borad punah tab hi dikhega jab sare ring ban kar taiyar ho jayenge is board ke sanche me 3 tarah ke ring banenge jaise ki high grade mudium grade aur low grade.

Ye storage ring ka chhamta iske grade ke anusar hoga jaise ki high grade me tum sabse jyada saman store kar sakte ho isme 100 feet jagah hogi aur medium grade me usse thoda kam medium grade me tumhe 50 feer jagah milegi lekin low grade me tum sirf jarurat ke saman hi store kar ke rakh sakte ho low grade ring me sirf 25 se 39 feet hi jagah hoga.

Mai- Mai samajh gaya gurudev kya aap bata sakte hai ki isme kitne high grade medium aur low grade ring banenge.

Gurudev- Nhi putra wo to tumhe jab wo ring puri tarah se taiyar ho jayega tab hi pata chalega.

Mai- Thik hai gurudev aab aage kya karna hai.

Gurudev- Hamare pass abhi bahut samay hai to kyu na tum Divya talwar bhi bana lo.

Mai- Lekin gurudev mujhe to talwar banana nhi aata hai to mai kaise talwar bana sakta hu.

Gurudev- Uske liye tumhe bhagwan Shilpeswar ko prasan karna hoga.

Mai- Lekin mai Bhagwan Shilpeswar ko kaise prasan karunga.

Gurudev- Tumhe bhagwan Shilpeswar ko prasan karne ke liye apne dhyan me baith kar in mantro ka jap karna hoga.

नमस्ते विश्वकर्माय, त्वमेव कर्तृता सदा

शिल्पं विधाय सर्वत्र, त्वं विश्वेशो नमो नमः

ॐ विश्वकर्माय नमः

Aur is mantra ka tumko tabtak jap karna hai jabtak ki bhagwan Viswakarma Prasan nhi ho jate.

Mai- Thik hai gurudev.

Itna bol kar mai wahi dhyan me baith gaya aur

नमस्ते विश्वकर्माय, त्वमेव कर्तृता सदा

शिल्पं विधाय सर्वत्र, त्वं विश्वेशो नमो नमः

ॐ विश्वकर्माय नमो नमः

Is Mantra ka jap karne laga aise hi jap karte karte samay bitane laga aur 10 din bit gaye in 10 dino me mai lagatar bina khaye piye dhyan me baith kar mantro ka jap karte raha lekin in 10 dino me bhi mujhe bhagwan Shilpeswar ka darsan nhi huya lekin mai lagatar mantro ka jap karta raha aise hi ek din aur bit gaye aaj mujhe is jagah par aaye huye 12 din ho gaye the aur mai lagatar 11 din se mantro ka jap kar raha tha tabhi waha par ek roshni fail gayi aur us roshani se awaj aaya.

Awaj- Apne aankh ko kholo putra mai tumhare bhakti se bahut prasan huya is liye mai tumhe darsan dene aaya hu.

Mai us awaj ko sun kar bahut khus ho gaya aur apne aankh ko kholte huye unse bola.

Mai- Apko meri koti koti naman prabhu apne mujh jaise ek tuchh insan ko darsan de kar bhagyashali bana diya.

Shilpeswar- Tum apne aap ko tuchh mat samjho putra tumne is duniya burai ke ant karne ke liye janam liya hai is liye kisi bhi tarah se tuchh nhi ho mai aaj tumhare bhakti se bahut prasan hu is liye mai tumhe ek bardan dena chahta hu is liye tum mujhe koi ek bardan mango.

Mai- Prabhu mujhe apka darsan ho gaya yahi mere liye kafi hai lekin agar aap mujhe kuchh dena chahte hai to mujhe divya shilpkar ki sari gyan de dijiye.

Shilpeswar- Thik hai putra mai tumhe Divya shilpkar ki sari gyan de deta hu tathastu.

Itna bol kar bhagwan Shilpeswar waha se gayab ho gaye iske bad mai waha se utha kar gurudev ko awaj lagaya jo mujhe dhyan me baithte hi waha se bahar chale gaye the maine jab gurudev ko awaj diya to gurudev turant waha par prakat ho gaye aur mujhse puchhe.

Gurudev- To tumhe bhagwan Shilpeswar ka darsan ho gaya.

Mai- Jee gurudev aur unhone mujhe divya shilpkar ki sari gyan de diye.

Gurudev- Bahut achha putra tumne wo kar dikhaya jo aaj tak is kalyug me koi nhi kar paya hai.

Mai- Gurudev kya storage anguthi ban kar taiyar ho gayi.

Gurudev mere bat ko kar turant hi sari ring ko mere samne rakh diye aur bole.

Gurudev- Putra Us storage pathar aur Dhatu ko mila kar lagbhag 54 storage ring bani hai jisne 15 high grade 20 medium grade aur 19 low grade ke storage ring bane hai

Gurudev ke bat ko sun kar mai bahut khus ho gaya aur ek high grade ke anguthi ko apne hath me lekar dekhne laga fir usko apne ek ungli me pahan liya iske bad mai man me ek anguthi ke bare me socha to wo usi tarah ke anguthi me badal gaya iske bad mai ek high level ke anguthi ko gurudev ko dene laga to wo lene se inkar karne lage to mai bola.

Mai- Gurudev ye apka shisya apko ek chhoti si uphar de raha hai aur apko ise lena hi hoga.

Mere bat ko sun kar gurudev muskurane lage aur fir mere hath se wo anguthi ko lekar kar pahan liye unke anguthi ko pahante hi anguthi turant change ho gayi fir gurudev mujhse bole.

Gurudev- Putra tumhe yaha aaye bahut din ho gaye hai aur ab tumhare pass jyada samay nhi hai to ab tumhe Divya talwar bana lena chahiye.

Mai- Thik hai gurudev mai divya talwar banane ke liye taiyar hu bas apke ek anurodh hai ki jabtak mai talwar bana raha hu tab tak aap mere sath baith kar panch tatva ke mantro ka jap karte rahiye jisse wo mantra un sare talwaro me sama jayega jiske karan unne panch tatvon ki shakti aa jayegi.

Gurudev- Thik hai tum talwar ko banana suru karo mai mantro ka jap start karta hu.

Itna bol kar gurudev mantro ka jap karne lage aur mai shilpkar ke gyan ke anusar talwar banana suru kar diya mai sabse pahle us dhatu ko apni black flame se pighlane laga jab sare dhatu pighal gaye to mai unhe apne shaktiyo se talwar ka ka rup dene laga dhire dhire kar ke mane 20 talwar bana li iske bad mai 5 dhanush banaya aur 2 khanjar banaya yani ki us dhatu se mai total 27 hathiyar bana liya.

Mai jab talwar bana raha tha to gurudev panchtatva ke mantra ka jap kar rahe the jiske karan sare talwar me panch tatva ke gun aa gaye the wo 20 talwar ek sath bane the jiske karan sabme alag alag tatva ki shakti thi 20 talwar mese 5 talwar aise the jisme 3 tatvo ke shakti tha aur 5 me 2 tatvo ki shakti baki ke bache huye 10 talwaro me 1 tatva ki shakti thi.

Aur maine jo dono khanjar banaya tha usme panch tatvo ki shakti thi aur jo dhanus banaya tha Usme bhi panch tatva ki sari sakti thi is dhanus ki khasiyat ye thi isne kisi bhi tarah ke teer ki jarurat nhi thi balki iska dharak jis tatva ke teer chahe us tatva ka teer apne aap dhanus me aa jayega.

Mai in talwar khanjar aur dhanus ko bana kar bahut khus tha mere pass divya shilpkar ki sari gyan thi jiske chalte mai kabhi bhi kahi bhi divya hathiyar bana sakta tha mai is gyan se ek tinke ko bhi hathiyar me badal kar kisi par bhi hamla kar sakta tha mai un sare hathiyaro me se ek khanjar apne liye rakh liya aur fir sare hathiyar ko ring ke andar dal diya iske bad mai aur gurudev waha se bahar nikal gaye bahar aane ke bad mai gurudev se bola.

Mai- Bahut bahut sukriya gurudev aap nhi hote to mai ye divya hathiyar aur storage ring kabhi nhi bana sakta tha.

Gurudev- Isme sukriya ki kya bat ho gayi putra ek shisya ke madat karna ek guru ka dharm hota hai aur ha putra tumne mujhe jo gift diya hai usse mujhe bahut khusi huyi hai is liye mai bhi tumhe kuchh dena chahta hu is liye tum mere sath aao.

Itna bol kar gurudev mujhe apne sath lekar ek room me chale gaye jaha par bahut sare jadi buti aur unke beej rakhe huye the aisa kah lo ki wo pura room hi jadi buti aur uske beej se bhara huya tha.

Gurudev- Putra maine ye sab tumhare liye ikktha karwaya hai is liye jate samay ise bhi apne sath lekar jana ye sab tumhe aage ke safar me bahut kam aayenge aur in sare beej ko laga kar kahi par kheti kar lena jisse tumhe kabhi bhi jadi butiyon ke liye bhatakna nhi padega.

Mai- Jee gurudev aap kaisa bol rahe hai waisa hi hoga ab mujhe yaha se jane ki aagya dijiye.

Gurudev- Thik hai putra jao yashasvi bhava lekin jane se pahle meri ek bat sunte jao.

Mai- Jee gurudev agya kijiye.

Gurudev- Tumne yaha aa kar jo hathiyar banaye hai unko kabhi bhi galat hath me nhi jane dena nhi to is dharti ka vinash ho jayega aur ha ye sare Hathiyar ek Divya hathiyar hai is liye ye apna dharak bhi khud chunenge.

Mai- Thik hai gurudev mai apke bato ko yad rakhunga.

Fir mai gurudev se agya lekar un sare jadi butiyon aur unke beezo ko apne storage ring me rakha aur waha se gayab ho kar sidha ghar par aa gaya aur ghar par aane ke bad mai sabko dekhne laga ki koi jaga to nhi hai hai lekin sukra hai ki aaj Sunday ke wajah se sab soye huye the ye dekh kar mai jaldi se kitchan me gaya aur sabke liye nasta ready karne laga thodi der me nasta ready kar ke sabko jagaya aur fir sabke sath nasta kar ke mai waha se jane laga to Shanaya ne mujhse puchhi.

Shanaya- Tum aaj Sunday ko kaha Jaa rahe ho.

Mai- Mai abhi city hospital jaa raha hu.

Shanaya- Kyu kya ho gaya jo tum city hospital ja rahe ho.

Mai- Mujhe city hospital me kuchh kam tha is liye mai waha jaa raha hu waise tumhe kuchh kam tha kya.

Shanaya- Nhi waise to mujhe kuchh kam nhi tha lekin mere school ke dosto ne ek reunion party rakhi hai is liye maine socha ki tum bhi sath me chalte to achha rahta.

Mai- Thik hai tum mujhe jagah aur samay bata dena mai waha samay par pahuch jaunga.

Shanaya- (Khus hote huye) Sach me tum waha aaoge.

Mai- Are ha baba mai sach me aaunga.

Shanaya- Thik hai lekin thoda dhang ke kapda pahan kar aana please.

Mai- is kapde me kya problem hai ye bhi thik hi to hai.

Shanaya- Ye kapde tumhe kaha se thik lag rahe hai ek kam tum na mujhe party me jane se 1 ghante pahle milo mai khud tumhare liye kapde lungi nhi to pata nhi tum kis tarah ka kapda apne liye chun lo aur party me mera majak ban jaye.

Mai- Thik hai jab meri begam sahiba ka yahi hukum hai to mai aur kar bhi kya sakta hu.

Itna bol kar mai muskurane laga aur meri bat sun kar Shanaya bhi muskurane lagi fir mai shanaya ko by bol kar city hospital ke liye nikal gaya gahr se bahar aane ke bad maine ek auto pakda aur waha se nikal gaya raste me mujhe sahar ke mayar raghvendra prajapat ka call aaya to mai unko call ko recieve kar ke bola.

Mai- Ha mayar sahab boliye kya bat hai aaj itni subah subah mere call kiye hai.

Mayar- Wo Pratik bat aisi hai ki tumne mujhe jo jo jadi buti lane ke liye bola tha mai wo sab lekar aa gaya hu to kya tum aaj mere ghar par mera ilaz karne aa sakte ho.

Mai- Sorry mayar sahab mai aaj to nhi aa paunga kyuki mai aaj city hospital me guest Doctor ke roop me patient dekhne Jaa Raha hu is liye mere pass aaj samay nhi hai.

Mere bat ko sun kar pahle to mayar raghvendra prajapat hairan ho gaye fir thodi khusi ke sath bole.

Mayar- To mai wahi par aa jata hu aap wahi par mera bhi ilaz kar dijiyega.

Mai- Ha ye thik rahega aap wahi aa jao.

Mere bat ko sun kar mayar khus ho gaya aur wo turant phone ko cut kar diya iske bad wo jaldi se ready huya aur city hospital ke liye nikal gaya.

Idhar karib adhe ghante bad mai city hospital pahuch gaya waha jane ke bad mai sidha director ke cabin me gaya to dekha ki waha par dr. Birendra khurana baithe huye the jaise hi mai cabin ke darwaja khol kar andar dakhil huya unki bhi najar mujh par gayi to khusi se apne chair se khade ho gaye aur bole.

Dr. khurana- hii pratik kaise ho tumhe yaha aane me koi problem to nhi huyi na.

Mai- nhi doctor sahab mujhe yaha aane me koi dikkat nhi huyi.

Dr. Khurana- chalo achhi bat to tum aaj se hi hospital join kar rahe ho na.

Mai- Jee doctor lekin sirf Sunday ko hi.

Dr. Khurana- Ha ha bhai mujhe tumhari sari sharte yad hai chalo koi bat nhi tumhara saptah me ek din hi hamare liye kafi hai waise ye lo tumhara I'd card tum aaj se city hospital ke guest Doctor ho.

Fir dr. Khurana ne bell ko bajaya to ek lady doctor andar aayi fir Dr. Khurana mujhe us doctor se parichay karwate huye bole.

Dr. Khurana- Pratik tum Inse milo ye hai Dr. Mamta aaj se ye tumhare assistant hai aur Dr. Mamta ye hai chamatkari dr. Pratik aaj se tum inko asist karogi.

Dr. Khurana ke bat sun kar jaha mai Mamta ko dekhne laga Dr. Mamta ki umra lagbhag 35 sal ki hogi khair Dr. Khurana ke bat sun kar Dr. Mamta hairan rah gayi aur mujhe uper se niche tak ghurte huye boli.

Dr. Mamta- Apko ye bacha kaha se ek chamatkari doctor lagta hai aap kya soch kar mujh jaise senior doctor ko is jaise mamuli dr. Ka asistent bana diya mai iska assistant kabhi nhi banungi.

Dr. Mamta ke bat sun kar mujhe bahut bura laga wahi dr. Khurana mamta ke bat sun kar gusa ho gaye aur wo guse se boli.

Dr. Khurana- Ye kya batmizi hai mamta tum jante bhi ho ko pratik kitna bada doctor hai aur ise mujhe is Hospital me bulane ke liye kya kya karna pada hai chalo tum chup chap inse mafi mango abhi ke abhi samjhi.

Dr. Khurana ke bat sun kar mamta ne guse se mujhe dekhte huye boli.

Dr. Mamta- sorry sir lekin mai isse mafi kyu mangu jabki mai kuchh galat bola hi nhi hu to apko kya lagta hai ki ye itni si umra me mujhse bhi achha doctor hai lagta hai apko galat fahmi ho gayi hai sir.

Mai- Jane dijiye dr. Khurana aap mere liye koi dusra assistant dhundh lijiye waise bhi ab mai nhi chahta ki itna experience Doctor mera assistant bane aap ek kam kijiye koi tranee doctor ko mera asistent bana dijiye wo inke jaise nakhre nhi karegi.

Mere bat ko sun kar Dr. Mamta aur bhadak gayi aur guse se wo kuchh bolne hi wali thi ki tabhi Dr. Khurana bole.

Dr. Khurana- Thik hai pratik jee mai abhi ek tranee doctor ko apka assistant banata hu lekin usse pahle dr. Mamta ne jo apke sath kiya uske liye use apse mafi mangana hi hoga nhi to aaj iska is hospital me last din hoga.

Dr. Khurana ke bat sun kar mai aur Mamta dono chauk gaye wahi Mamta ko thoda dar bhi lagne laga kyuki agar uski ye job hath se gayi to uske liye problem ho jayegi wo apne man hi man sochne lagi.

Dr. Mamta- (Man me) Agar meri ye job gayi to mai fir kaise apne pati ko ilaz karwaungi mere pati ka ilaz isi hospital me ho raha hai aur mai yaha ke doctor hu is liye unhe ilaz me 50% Ki chhut mili huyi hai agar mere hath se ye job gaya to mere pati ka ilaz nhi ho payega mai aisa nhi hone de sakti mujhe is ladke se mafi mang leni chahiye.

Mai apko ek bat bata du ki darasal Dr. Mamta ke pati ko cancer hai aur unka ilaz isi Hospital me chal raha hai wo apne pati ke bimari ko lekar hamesa tension me rahti hai is liye wo itna jyada chid chidi ho gayi hai.

Dr. Mamta- Sorry mujhe galti ho gayi mujhe apke sath aise bat nhi karni chahiye thi.

Mai- Koi bat nhi mai apke bato ka bura nhi mana kyuki aksar logo ko galat fahmi ho jati hai.

Iske bad dr. Mamta waha se chali jati hai uske jane ke bad dr. Khurana kisi ko call kar ke cabin me aane ke liye bolte hai thodi der bat cabin me ek ladki enter hoti hai wo ladki karib 20 ya 21 sal ki hogi.

Ladki- Sir Apne mujhe bulaya kuchh kam tha kya sir.

Dr. Khurana- Ha divya inse milo ye Hamare city hospital ke Guest Doctor hai Dr. Pratik aur ye yaha sirf Sunday ko hi duety denge to aaj se tum inki asistent ho aur pratik ye hai Dr. Divya ye abhi yaha par tranee doctor hai.

Divya pahle to mere bare sun kar hairan ho jati hai fir mujhse hath milate huye bolti hai.

Divya- Nice to meet you sir mujhe apke sath kam kar ke khusi hogi.

Mai- Aur mujhe bhi tumhare sath kam kar ke khusi hogi.

Dr. Khurana- Divya tumhe pratik ke har bat ko manna hoga tumhe unke sath man laga kar kam karna hoga tumhe inse bahut kuchh sikhne ko milega.

Divya- Thik hai sir mai puri kosish karungi ki inhe mere kam se khusi mile.

Mai- Thik hai dr. Khurana ab aap mujhe mera cabin bata dijiye jaha mai patient ki ilaz kar saku.

Dr. Khurana- Thik hai aaiye mere sath.

Itna bol kar wo apne kabin se bahar nikal gaye aur mai aur divya unke pichhe pichhe jane lage thodi der chalne ke bad ham sab ek room me gaye jaha par ek chair aur ek table laga huya tha aur sath me patient keliye ek medical bed bhi laga huya tha jis par mariz ko sula kar uska ilaz kiya ja sake.

Mai room me andar aa kar charo taraf dhyan se dekhne laga aur fir ja kar ek chair par baith gaya aur fir dr. Khurana ko bola.

Mai- Dr. Khurana aap Marij ko yaha par bhej sakte hai aur ha aap sabse pahle unhi marij ko bhejiyega jo jyada critical isthiti me ho aur jinka ilaz is hospital ke doctor kar nhi paa rahe ho.

Dr. Khurana mere bat ko sun kar khus ho gaye to wahi Dr. Divya mere bat sun kar hairan ho gayi aur man hi man sochne lagi.

Divya- (Man Me ) Ye mai kaha fass gayi Doctor khurana to iska bahut gungan kar rahe the lekin ye bhi sabke jaise feku nikla dekho to kya bol raha hai unhi marij ko bhejiyega jo jyada critical isthiti me ho aur jinka ilaz is hospital ke doctor kar nhi paa rahe ho huh..

Idhar dr. Divya apne hi soch me dubi huyi thi aur udhar Dr. khurana mere bat ko sun kar khus ho gaye aur waha se bahar chale gaye mai unko jata dekh kar divya se bola.

Mai- Divya jee aap ek kam kijiye aap silver needle ka ek set lete aaiye kyuki mai apna silver needle ke set ko ghar hi bhul gaya hu.

Divya mere bat ko sun kar hairan ho gayi ab to use pura yakin ho gaya tha ki mai ek jalsaj doctor hu.

Divya-(Apne man me) Dikhawa karne ka bhi had hota hai mai yaha ye soch kar aayi thi ki mujhe kuchh sikhne ko milega lekin ye doctor to ek no. Ka jalsaj aur feku nikla Mujhe kuchh bhi kar ke isko marijon ke ilaz karne se rokna hoga nhi to kahi ye kisi marij ke jan na lele.

Idhar divya apne socho me gum thi ye dekh kar usko fir se bola.

Mai- Kya huya Divya jee aap kish soch me dubi huyi hai.

Mere bat ko sun kar divya apne soch se bahar aa gayi aur hadbadate huye boli.

Divya- Kk kk kya huya sir aaa aap kuchh bol rahe the kya.

Mai- Maine bola ki 2 dabe silver needle ke lete aana taki tum bhi kuchh practice kar sako.

Divya- Jjj jee sir mm mai abhi lati hu.

Itna bol kar divya turant us room se bahar nikal gayi divya ko is tarah se badbadate huye dekh kar mujhe us par shak huya lekin mai apne shak ko darkinar kar diya.

Idhar Divya room se nikal kar bahar aa gayi aur khud me hi hadbadate huye boli.

Divya- Khud to kuchh aata nhi aur chale hai mujhe sikhane mai abhi director sir se bat karti hu mujhe is jaise insan ke sath nhi rahna hai.

Itna bol kar divya waha se ja hi Rahi thi ki tabhi us dr. Khurana ek marij ke sath udhar hi aate huye dikhayi diye to wo bhagte huye unke pass gayi aur boli.

Divya- Sir aap mujhe kish doctor ke assistant bana diye hai.

Dr. Khurana- Kya huya huya tum aise kyu bol rahi ho.

Divya- Sir wo ek no. Ka fraud doctor hai aap hi bataiye ki aaj ke jamane me bhi koi silver needle se marijon ka ilaz karta hai kya mai uske jaise doctor ka asistent nhi banungi.

Divya ke bat sun kar dr. Khurana ko gusa aa gaya aur wo guse se chilate huye divya se bole.

Dr. Khurana- Tumhe samajh bhi aa rahi hai ki tum kiske bare me bol rahi ho agar tumhe uska asistent nhi Banna hai to tum abhi ke abhi is hospital ko chhod kar jaa sakti ho.

Dr. Khurana ke bat sun kar divya dar jati hai wo yaha se jana nhi chahti thi kyuki ye hospital Mumbai ke best hospitalo me se ek thi lekin fir bhi wo darte darte dr. Khurana se puchhti hai.

Divya- Lekin sir aap mujhe us jaise adami ke liye kyu nikal rahe hai aahi bataiye ki aapko wo kaha se ek doctor lagta hai.

Dr. Khurana- Mai tumhare bato ke jabab dene ke liye badhya nhi hu fir bhi tumne pratik par sawal uthaya hai is liye mai tumhe batata hu pratik jaisa doctor is city me to kya pure desh me bhi tumhe nhi milenge maine khud apne aankho se usko ek marte huye adami ko jinda karte dekha hai aur tum mujhe ek bat batao agar mai pratik ko achhe se nhi janta to kya mai use apne hospital me guest Doctor ke roop me appointment karta dekho divya tum mere dost ki beti ho is liye mai tumhe ek salah deta hu ki pratik ke asistent banna tumhare liye ek oportunity hai tum mere bat ko ek bar man kar dekho.

Divya- Thik hai sir agar aap bol rahe ho to mai ek bar uska asistent banne ke liye taiyar hu.

Itna bol kar wo waha se chali jati hai idhar dr. Mamta director ke cabin se nikal kar apne pati wale ward me jati hai aur unka condition check karti hai tabhi waha par ek doctor aata hai ye wahi doctor tha jo mamta ke pati ka ilaz kar raha tha mamta us doctor ko dekh kar bolti hai.

Mamta- Doctor sunil ab mere pati ka kya condition hai kya wo recover kar rahe hai.

Dr. Sunil- Sorry mamta jee lekin apne pati ke condition din par din aur kharab hote jaa rahe hai mai to bolta hu ki aap unko apne ghar le kar chale jaiye aur unke sath samay bitaiye kyuki inke condition ko dekhte huye lagta hai ki inke pass jyada samay nhi bacha hai.

Divya- Nhi dr. Sunil agar aap hi aise bolenge to mai inko aur kiske pass lekar jaungi please aap hi kuchh kijiye.

Dr. Sunil- Dekhiye mamta jee mujhse jitna Bana mai utna kar diya hai ab inka ilaz karna mere bas ki bat nhi hai aap inhe yaha se lekar chale jaiye.

Dr. Sunil ke bat sun kar mamta ke aankho me aansu aa jata hai aur wo waha se apne pati ko lekar apne ghar chali jati hai.

Idhar dr. Khurana us patient ko lekar mere room me aa jate hai aur mujhse bolte hai.

Dr. Khurana- Dr. Pratik ye hai apke pahle patient aap inka ilaz kijiye tabtak mai baki patient ko dekhta hu.

Itna bol kar dr. Khurana waha se jane lage tabhi wo patient dr. Khurana se bola.

Patient- Dr. Khurana aap ye kya kar rahe hai mai yaha aapse ilaz karwane aaya tha na ki kisi nausikhiye se.

Dr. Khurana- Dekhiye prabhakar jee ye mujhse achhe doctor hai aur ye apka ilaz mujhse achha karenge aur waise bhi jo apka bimari hai us bimari ka ilaz inke alawa aur koi nhi kar sakta hai.



प्रभाकर- ठीक है मई तुम्हारे बात को मन कर इससे इलाज करने के लिए तैयार हु लेकिन मेरी बात यद् रखना मई इस राज्य का होम मिनिस्टर हु और मेरा नाम देशमुख प्रभाकर है अगर मुझे कुछ हुआ न तो तुम भी नहीं बचोगे.
 
Back
Top