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बर्थडे पार्टी
मई उस मूर्ति के पास गया और उसके ऊपर मई उस लिक्विड के बोतल को पूरा खली कर दिया जैसे hi लिक्विड उस गिरा उस मूर्ति से ताम्बे का कलर गायब होने लगा और जैसे जैसे उस मूर्ति से ताम्बे का कलर गायब हो रहा था वैसे वैसे उसके अंदर से चमकते हुए सोने के परत उभरती हुयी बहार आ रही थी जब उस मूर्ति से सारा ताम्बे के कलर गायब हो गया तो पूरा मूर्ति hi सोने के परत से चमकने लगा अब कोई भी देख कर बोल सकता था की ये मूर्ति पूरा का पूरा सोने से बना हुआ.
जैसे hi लोगो ने देखा की वो मूर्ति सच में सोने से बना हुआ है तो सब चौक गए और जो लोग मेरी और शनाया की मजाक उदा रहे थे उन लोगो की मुँह अपने आप hi बंद हो गया और सर शर्म से झुक गया.
इधर शनाया ने भी जब मूर्ति को देखा तो उसकी नखे फटी की फटी रह गयी वो आश्चर्य से कभी मुझे तो कभी उस मूर्ति को देख रही थी और पुस्पा की बात hi क्या करना उसकी तो बोलती hi बंद हो गयी थी इधर जितने भी लोग थे सब आपस में बाटे करने लगी.
~ अरे ये तो सच में सोने की मूर्ति है इसका मतलब प्रतिक सच बोल रहा था हम बेकार में hi न जाने इसे क्या क्या बोल रहे थे.
~ अरे सच में भाई ये मूर्ति सोने का है और काम से काम ये मूर्ति 2.5 कग सोने से बना होगा और ऊपर से ये मूर्ति एंटीक भी है तो काम से काम इसकी कीमत 7 से 8 करोड़ रूपए तो जरूर होंगे.
~ अजय मल्होत्रा को क्या दामाद मिला है ये तो एंटीक में एक्सपर्ट लगता है तभी तो ये ताम्बे के अंदर सोने को पहचान कर लिया मल्होत्रा परिवार किस्मत वाला है जो उसको एक एंटीक एक्सपर्ट दामाद मिला है.
~ और शनाया के दिल तो देखो अपने दादा जी को बर्थडे में 7 से 8 करोड़ के गिफ्ट ऐसे hi दे दिया और यहाँ कुछ ऐसे भी लोग है 20 लाख या 25 लाख के गिफ्ट दे कर ऐसा जाता रहे है जैसे न जाने दुनिया के कितना महंगा गिफ्ट दे दिए हो.
इन सरे लोगो के बात सुन कर शनाया का दिल गदगद हो गया आज उसे मन कर रहा था की वो भाग कर आये और मुझे गले लगा ले लेकिन वो ऐसा कर नहीं सकती थी इधर उन सरे लोगो के बात सुन कर अजय मल्होत्रा को भी मेरे ऊपर गर्व हो रहा था लेकिन मेरी इतनी बड़ाई सुन कर पुस्पा मन hi मन सोचे जा रही थी.
पुस्पा- (मन में) अरे ये मैंने क्या कर दिया खामखा उसको बाटे सुना दी लेकिन जब उसे पता था की ये मूर्ति सोने की बानी है तो इसे गिफ्ट देने की क्या जरुरत थी हम इस मूर्ति को अपने पास रख कर कुछ और गिफ्ट कर देते.
जहा शनाया के परिवार खुस था वही अपनी बेइज्जती होता देख कर अमृता और विक्की के सर निचे हो गया और वो दोनों घुसे से डट भिचने लगे फिर न जाने विक्की को क्या सुझा वो तुरंत hi बोलै.
विक्की- मन की ये मूर्ति सोने की है लेकिन आप सब ये कैसे बोल सकते हो की ये मूर्ति एंटीक है ऐसा भी तो हो सकता है की ये मूर्ति कुछ दिन पहले hi बनाया गया हो और इस्पे ताम्बे की पानी चढ़ा दिया गया हो ताकि ये हम सब को बेवकूफ बना सके.
अमृता- और ऐसा भी हो सकता है की ये मूर्ति असली सोने की नहीं हो बल्कि इसे नकली सोने से बनाया गया हो क्युकी इन लोगो के पास इतना पैसा आया कहा से की ये इतनी महंगी मूर्ति खरीद कर गिफ्ट दे सके.
इन दोनों के बात सुन कर आकाश ने भी सोचा की वो भी बहते हुए गंगा में हाथ धो ले एनी की उसने भी सोचा की चलो मई भी थोड़ा प्रतिक की बेइज्जती कर hi लेता हु.
आकाश- विक्की और अमृता सही बोल रहे है ये मूर्ति ओरिजिनल हो hi नहीं सकता क्युकी कोई भी सोने की मूर्ति पर ताम्बे की पानी क्यों चढ़ाएगा और मन लिया की इस मूर्ति पर ताम्बे की पानी चढ़ाया गया था तो ये इसको कैसे पता चला और ये आप लोगो को कहा से एक एंटीक एक्सपर्ट लग रहा है अगर ये एक एंटीक एक्सपर्ट होता तो इसका नाम पुरे सहर में होता न तो आप लोग hi बताइये की क्या आप लोगो ने कभी सुना है की कोई प्रतिक नाम का एंटीक एक्सपर्ट इस शहर में है नहीं न तो ये बात साफ है की ये हम लोगो को बेवकूफ बना रहा है.
इन तीनो के बात सुन कर सरे लोग सोच में पद गए और फिर से तरह तरह के बाटे करने लगे.
~ इन तीनो को बात में डैम तो है ये मूर्ति नकली hi होगी और ये हमें बेवकूफ बना रहा है.
~ मुझे लग रहा है की ये इस नकली मूर्ति को लेकर यहाँ अपना नाम बनाना चाहता होगा.
सरे लोग को फिर से मेरे खिलाफ देख कर अमृता विक्की और आकाश के फेस पर एक कामिनी मुस्कान आ गयी मई इन लोगो को ऐसे बात करता देख कर बोलै.
मई- आप लोगो को मेरी बातो पर अभी भी बिस्वास नहीं हो रहा है न तो ठीक है जब आप लोगो को कोई एंटीक एक्सपर्ट आ कर बताएगा तब तो बिस्वास होगा न.
मेरे बात को सुन एक आदमी मुझसे बोलै.
~है अगर कोई जाना मन एंटीक एक्सपर्ट हमें कन्फर्म करे को ये मूर्ति एक एंटीक है और ये सोने से बना हुआ है तो हम मन लेंगे की तुम सही थे और हम गलत.
मई- तो ठीक है मई अभी एक एंटीक एक्सपर्ट को यहाँ बुलाता हु शायद आप लोग उनको जानते भी होंगे उनका नाम रतन मिश्रा है अगर वो आप लोगो को आकर बोले की ये मूर्ति ओरिजिनल है तो उनकी बात को आप सब मानोगे.
मेरी बात को सुन कर विक्की हस्ते हुए बोलै.
विक्की- क्या बोलै रतन मिश्रा तुम उनको जानते भी हो या सिर्फ नाम hi सुना है रतन मिश्रा इस सहर के जाने मने एंटीक एक्सपर्ट है और वो तुम जैसे मामूली इंसान के बुलाने पर यहाँ क्यों आएंगे और क्या आप सब भी इसके बातो पर बिस्वास कर रहे है ये तो सिर्फ ऐसे hi हम सब का समय बर्बाद कर रहा है.
मई- मई रतन मिश्रा को जनता हु या नहीं वो तो अभी hi पता चल जायेगा.
इतना बोल कर मई अपना मोबाइल निकला और रतन मिश्रा को कॉल कर दिया थोड़ी देर में रतन मिश्रा मेरा कॉल उठा लिए और बोले.
रतन- है प्रतिक बोलो कुछ काम था क्या जो तुमने अभी इस वक़्त कॉल किया.
मई- है सर मुझे थोड़ा आपसे काम था क्या आप अभी फ्री है.
रतन- वैसे तो मई अपने एक दोस्त के साथ बहार डिनर करने आया था लेकिन तुम बोलो क्या बात है मई अपने दोस्त के साथ डिनर बाद में भी कर लूंगा.
मई- क्या आप अभी मल्होत्रा हाउस आ सकते है क्या.
रतन- हम तो अभी मल्होत्रा हाउस के पास के एक रेस्टोरेंट में hi है हम अभी आ जाते है लेकिन तुम पहले ये बताओ की आखिर बात क्या है.
रतन मिश्रा के बात सुन कर इस पार्टी में जो भी हुआ वो सब मई रतन मिश्रा को बताया तो रतन मिश्रा बोले.
रतन- मई बस 10 मिनट में वह पहुँचता हु और है मुझे तुम्हे अपने दोस्त से भी मिलाना था इस लिए मई उसे भी साथ में ले कर आता हु.
मई- ठीक है.
मई फ़ोन करने के बाद सबसे बोलै.
मई- आप सब बस 10 मिनट इंतजार कीजिये रतन मिश्रा जी 10 मिनट में यहाँ पहुंच जायेंगे.
मेरे बात को सुन कर सब चौक गए और फिर जो जोर से हसने लगे फिर अमृता आगे बढ़ी और मेरा मजाक उड़ाते हुए बोली.
अमृता- तुम्हारी औकात क्या है जो तुम मुंबई के जाने मने एंटीक एक्सपर्ट को यहाँ बुला सको तुम्हारी औकात सिर्फ और सिर्फ पुस्पा आंटी के गली सुन्ना और उनके घर पर बर्तन धोने के लिए hi है उसके आगे तुम कुछ नहीं कर सकते और तुम रतन मिश्रा को यहाँ बुलाने की बात करते हो.
अमृता के इतनी कड़वी बात सुन कर शनाया से बर्दास्त नहीं हुआ और वो घुसे से बोली.
शनाया- अपनी जुबान पर लगाम दो अमृता नहीं तो बाद में तुम्हे पछताने का मौका भी नहीं मिलेगा और रही बात रतन मिश्रा को यहाँ आने की तो तुम चुप चाप 10 मिनट वेट कर के क्यों नहीं देखती वो यहाँ आते है या नहीं.
इधर शनाया के बात सुन कर अमृता चीड़ गयी और पलट कर कुछ जबाब देती उससे पहले hi आकाश बिच में शनाया से बोल पड़ा.
आकाश- अमृता ने गलत क्या बोलै है शनाया वो सही hi तो बोल रही है जो लड़का एक घर जमाई हो और जो अपने सास ससुर के टुकड़ो पर पल रहा हो उसके एक बात पर सहर के इतने बड़े एंटीक मास्टर कैसे आएंगे.
शनाया- बस बहुत हो गया आकाश मई तुम्हे अपना दोस्त मन कुछ नहीं बोल रही हु इसका मतलब ये नहीं है की तुम मेरे पति को कुछ भी बोल डोज अगर आज के बाद तुमने मेरे पति के बारे में एक शब्द भी गलत बोलै तो मई भूल जाउंगी की तुम कभी मेरे दोस्त थे.
मई- अरे छोडो शनाया कीचड़ में कंकड़ मरोगी तो वो तुम पर hi गिरेगा.
अभी हम सब में बहस चल hi रहा था की तभी वह पर रतन मिश्रा के एंट्री होती है जिसे देख कर सब चौक जाते है और सबकी मुँह अपने आप hi बंद हो जाता है फिर सरे लोग उनसे मिलने के लिए उनके तरफ बढ़ते है लेकिन रतन मिश्रा सबको इग्नोर करते हुए मेरे पास आते है और मुझसे बोलते है.
रतन- मुझे आने में देर तो नहीं हो गयी प्रतिक.
मई- नहीं सर आपको देर नहीं हुयी है बल्कि आप तो समय से पहले hi आ गए.
रतन मिश्रा को सबको इग्नोर कर के मेरे पास आ कर मुझसे बात करता देख सब समझ जाते है की मई सच बोल रहा था और ये सब देख कर अमृता विक्की और आकाश के सर शर्म से झुक जाता है क्युकी अब सब लोग उनके बारे में hi उल्टा सीधा बाटे करने लगे थे हलाकि लोगो को उनके बारे में बाटे करता सुन कर उन तीनो को गुसा बहुत आ रहा था लेकिन वो चुप hi रहे इधर रतन मिश्रा अपने दोस्त से मिलवाते हुए मुझसे बोले.
रतन- प्रतिक तुम इनसे मिलो ये है मेरे दोस्त मनोज सिंघानिया ये इस सहर के जाने मने बिज़नेस मन है और मनोज ये है प्रतिक जिसके बारे में मैंने तुम्हे पहले बताया था.
मनोज- तो ये है वो महँ एंटीक मास्टर जिसकी तुम तारीफ करते नहीं थक रहे थे कैसे हो यंग मन.
मई- मई अच्छा हु सर लेकिन आप ठीक नहीं लग रहे.
मनोज- तुम्हारे कहने का क्या मतलब है.
मई- मई आपसे इस बारे में बाद में बात करूँगा.
दरअसल बात ऐसी थी की मनोज सिंघानिया को एक रेयर बीमारी थी जो मई उनको देखते hi जान गया था इस लिए मेरे मुँह ये अचानक ये निकल गया.
रतन- है तो प्रतिक बताओ किस मूर्ति का जाँच करना है.
मई- वो सामने दिख रही है न उसी मूर्ति की जाँच करनी है.
मेरे बात को सुन कर रतन मिश्रा इस मूर्ति के तरफ बढ़ रहे थे तभी उनकी नजर उस छड़ी पर पड़ी जो ऐसे hi जमीं पर फेका हुआ था फिर वो उस मूर्ति के पास न जाकर उस छड़ी के पास गए और उसे उठा लिया और थोड़े घुसे से बोले.
रतन- प्रतिक तुमने इस छड़ी को ऐसे क्यों फेक दिया है तुमको तो इस छड़ी के बारे में सब कुछ पता है फिर भी तुमने ऐसी गलती कैसे की.
मई- नहीं रतन सर इसे मैंने नहीं फेका है मई ये छड़ी दादा जी को गिफ्ट में दिया था इनको ये छड़ी मामूली लगी तो इन्होने इस छड़ी को फेक दिया.
रतन मिश्रा मेरे बातो को सुन कर चौक गए वो थोड़े घुसे से बोलै.
रतन- क्या बोलै इस छड़ी को फेक दिया नारायण मल्होत्रा जी हमने तो सुना था की आप एंटीक के बहुत शौकीन है तो फिर आपसे ये गलती कैसे हो गयी.
नारायण- सॉरी रतन जी अगर आपको ये छड़ी को फेकने से बुरा लगा हो तो लेकिन आप कहना क्या चाहते है की मुझे एंटीक की कोई जानकारी नहीं है और ये छड़ी एंटीक है.
रतन- है मई यही बोलना चाहता था क्या आपको मेरी बातो पर कुछ शक है.
नारायण- नहीं नहीं मई ऐसा कैसे बोल सकता हु लेकिन आपसे एक गुजारिश है की आप इस छड़ी के बारे में मुझे डिटेल में बताये ताकि मई अपनी गलती को सुधर सकू.
रतन- खैर इसे ऐसे फेक कर अपने गलती तो की है लेकिन चलिए मई आपको इसके बारे में बता देता हु लेकिन आप अपने दिल को संभल कर रखियेगा.
ये छड़ी कोई मामूली छड़ी नहीं है बल्कि ये पोलमी के पेड़ के लकड़ी से बना हुआ है और इसमें जो स्टोन लगा हुआ है वो कोई आम स्टोन नहीं बल्कि नील मणि है अगर आप इसे हमेशा अपने साथ रखते है तो आपके ऊपर कभी कला शया या फिर किसी तरह की कोई भी बीमारी नहीं होगी और आप हमेसा सेहत मंद रहेंगे ये छड़ी 8000 साल पुराणी एंटीक है और इसकी कीमत अभी मार्किट में काम से काम 5 करोड़ है.
बस रतन का इतना hi बोलना था की सरे लोग सौक में चले गए नारायण मल्होत्रा को तो जैसे होश hi नहीं था अमृता विक्की और आकाश के तो बोलती hi बंद हो गयी थी इधर अजय और शनाया का भी वही हल था लेकिन पुस्पा तो अपना सर पकड़ कर वही बैठ गयी थी और सरे लोग बस मेरे hi बारे में सोचे जा रहे थे.
पुस्पा- (मन में) ये कमीना मुझसे कोण सी जनम की दुश्मनी निकल रहा है पहले वो मूर्ति क्या काम था जो अब ये 5 करोड़ की छड़ी भी गिफ्ट में दे दी अगर इसे गिफ्ट करना hi था तो मई क्या मर गयी थी.
अजय- (मन में) मई प्रतिक को कितना गलत समझ रहा था मेरा दामाद तो हीरा है हीरा उसने बिना सोचे समझे hi 5 करोड़ की एंटीक पिता जी को गिफ्ट कर दिया अगर उसके जगह पर कोई और होता तो ये कभी नहीं कर पता मई आज के बाद तुमसे अच्छे से पेश आऊंगा मेरे बेटे.
शनाया- (अपने मन में) इसको एंटीक के बारे में इतना जानकारी थी और मई तो एंटीक शॉप में बेकार में hi इस्पे इतना भड़क रही थी मैंने न जाने क्या क्या बोल दिया इसे लेकिन ये मुझे पलट कर एक जबाब भी नहीं दिया क्या सच में मुझसे इतना प्यार करता है ीीी अब मई ये क्या सोचने लगी.
ऐसे hi सरे लोगो को मन में तरह तरह के बिचार चल रहे थे लेकिन पुरे हॉल में पिन ड्राप साइलेंट था तभी सभी के ख़ामोशी को तोड़ते हुए दादा जी बोले.
नारायण- क्या आप सच बोल रहे है ये छड़ी 5 करोड़ की है.
रतन- नहीं ये छड़ी 5 करोड़ से ज्यादा की है मई तो एक अनुमान लगाया है अगर आपको मेरे बात पर बिस्वास नहीं है तो आप ये छड़ी मुझे दे दीजिये मई आपके अकाउंट में 5 करोड़ अभी के अभी ट्रांसफर कर दे रहा हु.
नारायण- नहीं नहीं ये मेरे बेटे के दामाद की तरफ से मुझे गिफ्ट मिला है मई इसे कैसे बेच सकता हु.
फिर अपने मन में.
नारायण- (अपने मन में) मई कितना बेवकूफ इंसान हु ये गुरुदेव का सबसे प्रिये शिस्य है तो इसमें उनका कुछ ज्ञान तो होगा hi मैंने इसे एक तुच्छ इंसान समझ कर गलती कर दी यानि की इसके पास गुरुदेव के जैसा आयुर्वेदिक ज्ञान भी होगा इसका मतलब है की वो मूर्ति भी ओरिजिनल है मई बेकार में hi इस पर शक कर रहा था.
रतन मिश्रा सबको सौक में देख कर बोले.
रतन- आप लोग अभी से hi सौक में चले गए अभी तो मूर्ति के बारे में जानना बाकि है.
इतना बोल कर वो मूर्ति के पास गए और उसे ध्यान से देखने लगे थोड़ी देर देखने के बाद वो अपनी मैग्नीफाइंग गिलास निकल कर उसे अच्छे से चेक करने लगे.
जब रतन मिश्रा उस मूर्ति को चेक कर रहे थे तब वह पर मौजूद सरे लोगो की डिल के धड़कन बढ़ा हुआ था इधर रतन मिश्रा उस मूर्ति को ध्यान से देखने के बाद बोले.
रतन- मई इस मूर्ति के बारे ज्यादा कुछ तो नहीं बोलूंगा बस मई इतना बोलना चाहता हु की मई इस मूर्ति का आपको पुरे 6 करोड़ दूंगा क्या आप इस मूर्ति को मुझे बेचेंगे.
बस रतन मिश्रा का इतना hi बोलना था की सरे लोग आपस में बाटे करने लगे.
~ रतन मिश्रा ने इस मूर्ति को 6 करोड़ में खरीदने की बात कर रहे है इसका मतलब प्रतिक सच बोल रहा था ये मूर्ति ओरिजिनल hi है.
ऐसे hi सरे लोग आपस में बाटे कर रहे थे प्रतिक के तीनो दुश्मनो की शकल उतरा हुआ था वो लोग बस मन hi मन प्रतिक को गली दिए जा रहे थे इन सब से अलग नारायण मल्होत्रा के चेहरे पर एक मुस्कान थी और उनकी छाती गर्व से फूली हुयी थी वो सबको संत करते हुए बोले.
नारायण- आपके बातो से तो मई इतना समझ गया की ये मूर्ति ओरिजिनल है लेकिन आप मुझे इसके बारे में थोड़ा डिटेल्स में बता देते तो अच्छा रहता.
नारायण के बात सुन कर रतन के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी फिर वो मुस्कुराते हुए बोले.
रतन- ये मूर्ति आज से 5000 हजार साल पहले की है ये मूर्ति चोल वंस का धरोहर है और ये सुध सोने के बना हुआ है चोल वंस में मन्ना था की इस मूर्ति को जो भी अपने घर में रखेगा उसके घर पर कभी भी कोई भी बुरी शक्ति वास् नहीं करेगी और उसके घर पर माता लक्ष्मी की कृपा हमेसा रहेगी उनका धन और बैभव दोनों बढ़ेगा इस मूर्ति को चोल वंस में सोमस्कन्द के नाम से जाना जाता था.
रतन के बात सुन कर नारायण मल्होत्रा के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी और वो कृषि से मुझे और शनाया को देखने लगे थोड़ी देर तक हम दोनों को ऐसे hi देखने के बाद वो बोले.
नारायण- प्रतिक और शनाया तुम दोनों को थैंक यू मुझे इतना अच्छा गिफ्ट देने के लिए तुम दोनों की लाइफ हमेसा खुशाल रहे और तुम दोनों हमेशा पति पत्नी की तरह रहो लेकिन तुम दोनों से एक गलती हुयी है और मई आज यहाँ सबके सामने तुम दोनों को उसकी सजा देना चाहता हु क्या तुम दोनों को मेरे द्वारा दिया गया सजा मंजूर है और अगर तुम दोनों को मंजूर नहीं भी होगा तब भी तुम्हे मेरे द्वारा सजा को मन्ना hi होगा.
दादा जी के बात सुन कर जहा मई और शनाया चौक गए और सोचने लगे की हमसे क्या गलती हुयी है वही अमृता विक्की और आकाश के चेहरे पर पहली बार खुसी आयी थी इधर दादा जी के बात सुन अजय और शनाया दोनों घबरा गए पुस्पा तो यहाँ तक सोचने लगी जरूर मैंने hi कुछ किया होगा दादा जी के बात सुन कर शनाया थोड़ी देर सोचने के बाद बोली.
शनाया- दादा जी मुझे ये तो पता नहीं की हम दोनों से क्या गलती हुयी है लेकिन आप बोल रहे है तो हम मैंने के लिए तैयार है की हमसे कोई गलती हुयी होगी इस लिए हम दोनों सजा के लिए तैयार है.
नारायण- तो ठीक है मई पहले तुम्हे तुम्हारी गलती के बारे में बता देता हु और उसके बाद तुम्हे सजा भी सुनाऊंगा तो तुम दोनों की गलती ये है की तुम दोनों ने अपने बजट से ज्यादा बड़ा गिफ्ट मुझे दिया है जो तुम्हे नहीं देना चाहिए था और इस लिए इसकी सजा तो तुम दोनों को मिलनी hi चाहिए और इसकी सजा ये है की मल्होत्रा ग्रुप के मल्होत्रा ब्यूटी एंड केयर कंपनी जिसकी मार्किट वैल्यू 50 करोड़ की है वो मई तुम दोनों के नाम पर कर रहा हु और तुम्हे ये सजा काबुल करना hi होगा.
इतना बोल कर दादा जी मुस्कुराने लगे और उनकी बात सुन कर सरे लोग चौक गए दादा जी के बात सुन कर अजय और पुस्पा दोनों खुस हो गए थे तो वही अमृता और विक्की दोनों घुसे से पागल हो गए.
अमृता- लेकिन दादा जी वो कंपनी मुझे देने के लिए अपने वडा किया था.
दादा जी- है मैंने तुम्हे बोलै था लेकिन उस कंपनी को तुमसे अच्छा शनाया संभालेगी और अब मई इसके आगे कुछ नहीं सुनूंगा समझी.
दादा जी के घुसे से भरे शब्द सुन कर अमृता वही चुप हो गयी हलाकि की बोलना तो विक्की भी कुछ चाहता था लेकिन वो दादा जी के गुसा देख कर संत hi रहा फिर मई कुछ सोचते हुए दादा जी से बोलै.
मई- दादा जी मई ये कंपनी नहीं ले सकता क्युकी मुझे अपने डैम पर कुछ कर के दिखाना है आप इस कंपनी को पूरा का पूरा शनाया को hi दे दीजिये.
दादा जी- मुझे तुम्हारी बात सुन कर खुसी हुयी की तुम अपने डैम पर कुछ करना चाहते हो तो ठीक है मई इस कंपनी को शनाया के नाम कर दूंगा.
इतना बोल कर दादा जी वह से अंदर गए और अपने हाथ में एक पेपर ले कर आये और उस पर शनाया के सिग्नेचर ले कर वो पेपर शनाया को दे दिया शनाया आज बहुत खुस थी और वो प्यार से बस मुझे hi देखे जा रही थी.
इधर सब काम निपटने के बाद रतन मिश्रा मेरे पास आये और मुझसे बोले.
रतन- अब तो तुम्हारा काम हो गया तो क्या मई अब जा सकता हु.
मई- नहीं आप अभी नहीं जा सकते चलिए पहले हम सब कुछ कहते है इसके बाद मुझे आपके दोस्त से कुछ बाटे करना है इसके बाद आप जा सकते है.
रतन- चलो ठीक है.
इसके बाद हम सब ने जाकर खाना खाया और फिर मई रतन मिश्रा और मनोज सिंघानिया के साथ एक कोने में आ गया तो मनोज सिंघानिया मुझसे बोले.
मनोज- है भाई प्रतिक बोलो मुझसे क्या बात करना चाहते थे.
मई- आपको तो यद् hi होगा की जब आप मुझसे मिले थे तब मई आपको बोलै था की आप ठीक नहीं लग रहे है.
मनोज- अरे है यद् आया मई भी ये बात तुमसे पूछना छह रहा था अच्छा चलो अब बता दो की तुमने मुझसे ऐसा क्यों बोलै था.
मई- ठीक है बताता हु उससे पहले आप मेरे कुछ प्रश्नों के उतर दीजिये.
मनोज- है पूछो.
मई- अच्छा आप सबसे पहले ये बताइये की क्या आप जब सोते है तो अचानक आधी रेट में आपको रीढ़ की हड्डी में बहुत तेज़ दर्द होता है और वो दर्द इतना बढ़ जाता है की आपसे बर्दास्त नहीं होता क्या ये बात सही है.
मेरी बात को सुन कर मनोज चौक गया और मुझे ध्यान से देखते हुए पूछा.
मनोज- तुम्हे कैसे पता की मेरे रीढ़ के हड्डी में दर्द रहता है.
मई- मुझे आपको देखते hi पता चल गया था की आप बीमार है तभी तो मई आपको बोलै था की आप ठीक नहीं लग रहे है वैसे क्या आप इसका इलाज करवाना चाहते है.
मनोज- है मई इसका इलाज करवाना चाहता तो हु लेकिन मई आज तक बहुत सरे डॉक्टर को दिखा लिया लेकिन किसी को मेरे बीमारी का कारन पता नहीं चल रहा है इस लिए आज तक कोई भी डॉक्टर मेरा इलाज नहीं कर पाया है.
मई- मुझे पता चल गया है आपके बीमारी का कारन क्या है और मई आपका इलाज कर सकता हु क्या आप मुझसे इलाज करवाना चाहेंगे.
मनोज मेरा बात को सुन कर चौक जाता है और फिर कुश होते हुए बोलता है.
मनोज- अरे भाई तुम तो किसी अंधे से पूछ रहे हो की उसको आँख चाहिए या नहीं अगर तुम मेरा इलाज कर सको तो मई बेशक तुमसे अपना इलाज करवाना चाहूंगा लेकिन तुम पहले मुझे ये बताओ की मेरे बीमारी का कारन क्या है.
मई- आप कभी मार्टिकल आर्ट्स प्रैक्टिशनर रह चुके है क्या.
मनोज- है मई जवानी के दिन में मार्टिकल आर्ट्स प्रैक्टिस करता था.
मई- जब आप मार्टिकल आर्ट्स प्रैक्टिस करते थे तो छोड़ क्यों दिए कही ऐसा तो नहीं की आपको मार्टिकल आर्ट्स प्रैक्टिस करते हुए रीढ़ की हड्डी पर चोट आ गयी थी.
मनोज- है तुम सही बोल रहे हो मई जब मार्टिकल आर्ट्स का प्रैक्टिस करता था तब गलती से से मेरे रीढ़ के हड्डी पर चोट आ गयी थी जिसके कारन मई बहुत दिन तक हॉस्पिटल में भर्ती भी रहा था लेकिन मेरा चोट तो उसी समय ठीक हो गया था.
मई- है वो चोट तो ठीक हो गया था लेकिन आपको जब रीढ़ के हड्डी में चोट लगा था तब उस चोट के कारन अपने हड्डी में बहने वाला बोन मेरो पर इफ़ेक्ट हुआ था लेकिन जब आपका इलाज हुआ तो वो ठीक तो हो गया लेकिन बोन मेरो में कुछ प्रॉब्लम रह गयी थी जो धीरे धीरे बढ़ते गया और वो इतना बढ़ आगया है की अपने हड्डी में बोन मेरो का बहाओ रुक रुक कर हो रहा है और जिस वक़्त बोन मेरो आपके रीढ़ के हड्डी में रुकता है उस समय आपको बहुत ज्यादा दर्द महसूस होता है.
मनोज- तो क्या मई ठीक हो सकता हु.
मई- है मई आपको पूरी तरह से ठीक कर दूंगा लेकिन मेरे पास अभी समय नहीं है मेरे पास कल शाम में समय है तो आप कल शाम को मुझसे संपर्क कीजिये.
मनोज- ठीक है तो फिर हम कल शाम में मिलते है.
इतना बोल कर वो दोनों वह से चले गए उनके जाने के बाद मई शनाया के पास गया और उससे बोलै.
मई- तो अब घर चले.
शनाया- है चलते है लेकिन पहले दादा जी से घर जाने का आज्ञा ले ले.
मई- ठीक है.
इसके बाद दादा जी से आज्ञा ले कर हम लोग गाड़ी में बैठे और वह से निकल गए रस्ते में शनाया मुझसे बोली.
शनाया- थैंक यू प्रतिक आज मुझे वो ब्यूटी एंड केयर कंपनी तुम्हारे चलते hi मिला है.
मई- इसमें थैंक यू की कोई बात नहीं शनाया मई अपने वाइफ के लिए ये सब तो कर hi सकता हु.
अभी हम लोग बात कर hi रहे थे की तभी कुछ गाड़ी हमारे गाड़ी को ओवरटेक करते हुए आगे निकली और जाकर बिच रस्ते को जैम करते हुए कड़ी हो गयी और गाड़ी से कुछ लोग निकले जो दिखने में hi गुंडे लग रहे थे अभी रत का समय था इस लिए ये अंदाजा नहीं लग प् रहा था की वह पर कितने गुंडे थे क्युकी गाड़ी के लाइट से सिर्फ आगे वाले hi गुंडे दिख रहे थे.
उनको अपने गाड़ी से ऐसे रोड जैम करता देख कर शनाया ने अपना गाड़ी को वही रोक दिया तो मई उससे बोलै.
मई- मई देखता हु उन लोगो को सायद वो लोग हमारे लिए hi यहाँ आये हज आप सब गाड़ी से बहार नहीं निकालिएगा और है शनाया अगर यहाँ कुछ गड़बड़ हो या फिर वो मुझ पर हमला करे तो तुम गाड़ी तो टर्न कर के दूसरे रस्ते से घर के लिए निकल जाना मई इन लोगो को ठिकाने लगा कर आ जाऊंगा.
शनाया- नहीं तुम कही नहीं जाओगे मई गाड़ी बैक कर रहा हु और हम सब साथ में दूसरे रस्ते से घर के लिए निकलेंगे समझ गया.
मई- नहीं शनाया तुम समझ नहीं रही हो अगर इन लोगो को यहाँ रोका नहीं गया तो ये लोग हमारा पीछा करते हुए घर तक पहुंच जायेंगे और वैसे भी तुम मेरी टेंसन मत लो मई इन लोगो को संभल लूंगा.
पुस्पा- ज्यादा हीरो बनाने की जरुरत नहीं है समझे अगर तुम्हे कुछ हो गया तो खामखा तुम्हे इलाज करवाना पड़ेगा.
अजय- पुस्पा तुम ये कैसी बाटे कर रही प्रतिक से प्रतिक बीटा तुम इस सब से लड़ नहीं पाओगे इस लिए तुम भी हमारे साथ चलो.
मई- नहीं अंकल अगर मई भी आपके साथ गया तो हम सब मुसीबत में पद जायेंगे और वैसे भी हमारा किसी से कोई दुश्मनी नहीं है तो मुझे लगता है की इन सब को कोई गलत फहमी हुयी है.
शनाया- ठीक है तो फिर मई भी तुम्हारे साथ चलूंगी.
मई- नहीं तुम नहीं जाओगी तुम बस चुप चाप यहाँ से जाओ.
इतना बोल कर मई गाड़ी से उतर गया मुझे इस तरह से उतरता देख कर शनाया भी गाड़ी से उतरने को हुयी की पुस्पा ने उसे डट दिया और गाड़ी घूमने को बोली शनाया पुस्पा के बात सुन कर तुरंत गाड़ी घुमा ली गाड़ी को घूमता देख कर गुंडे आगे बढ़ने लगे लेकिन उनके और गाड़ी के बिच में मई खड़ा था.
जब वो सरे गुंडे भागते हुए मेरे पास आये तो मई उनसे पूछा.
मई- है भाई तुम लोगो की क्या परेशानी है तुम लोग ऐसे क्यों बिच में गाड़ी को खड़ा कर के रोड जैम किये हुए हो.
मेरे बात को सुन कर गुंडों का लीडर जो को रघु था वो बोलै.
रघु- हमलोग तुम्हारा hi इंतजार कर रहे थे तुम उस दिन तो एंटीक शॉप से बच कर भाग गए थे लेकिन अब तुम कहा भागोगे.
मई- देखो मुझे लगता है की आज से पहले नाटो हम मिले है और न hi मेरी तुमसे कोई दुश्मनी है फिर तुम लोगो मेरे पीछे क्यों पड़े हो.
रघु- है सही बोलै की हमारी कोई दुश्मनी नहीं है लेकिन तुम्हे मरने का आर्डर मुझे मेरे बॉस ने दिया है और तुम्हे मर कर उस लड़की को उठाना है.
मई- कोण है तुम्हारा बॉस.
रघु- तुम तो मरने वाले हो तो तुम मेरे बॉस में बारे में जान कर क्या करोगे.
अभी हम लोग बात कर hi रहे थे की तभी एक गुंडा बोलै.
गुंडा- भाई वो लड़की गाड़ी को टर्न कर के जा रही है.
रघु- जाने दो पहले इसे ठिकाना लगते है इसके बाद हम उस लड़की को उठाएंगे वैसे भी वो जाएगी भी तो अपने घर hi न मुझे उसका घर पता है आज इसे ठिकाने लगाने के बाद हम उसके घर जा कर उसे उठा लेंगे.
मई- एक बात बताओ तुम लोग शनाया को क्यों किडनैप करना चाहते हो.
रघु- वो तो उस छमिया का नाम शनाया है अच्छा है वैसे कैसे फसाया तुमने इतने तगड़े मॉल को अच्छा एक बात बताओ वो तुम्हे मजा तो भरपूर देती होगी.
रघु को शनाया के लिए इतना गन्दा बोलता देख कर मुझे बहुत गुसा आया और फिर मई अपने पीछे एक माया जल फैलाया ताकि शनाया और उसके पेरेंट्स मुझे देखे तो लगे की मई अभी भी इसने बात hi कर रहा हु माया जल फ़ैलाने के बाद मैंने घुसे से रघु को बोलै.
मई- मई तुम सब को वार्निंग दे कर छोड़ देना चाहता था लेकिन तुमने शनाया के बारे में गलत बोल कर अपने मौत को दावत दे दिया है.
इतना बोल कर मैंने एक पंच उसके पेट में मारा जिससे रघु उड़ता हुआ पीछे जा गिरा और वो दर्द से कराहने लगा और बोलै.
रघु- मई तुम्हे असं मौत देना चाहता था लेकिन तुमने मेरे ऊपर हाथ उठा कर अच्छा नहीं किया मारो रे सेल को इसको इतना मारो की ये मरने के लिए तड़पे लेकिन मौत इसको न मिले.
रघु के बात सुन कर सरे गुंडे अपने अपने हथियार ले कर मेरे तरफ भागे मई जब उनको अपने तरफ आता देखा तो मई भी उनसे लड़ने के लिए तैयार हो गया और अपने ताकत को 10 परसेंट कर लिया और फिर टूट पड़ा उन गुंडों पर फिर क्या था किसी के हाथ टूटे तो किसी का पेअर 2 मिनट में hi सरे गुंडे निचे गिर कर दर्द से तड़प रहे थे मई उनको दर्द से तड़पता देख कर रघु के पास गया जो दर से थार थार कानो रहा था.
मई- है तो अब तुम मुझे बताओ की तुम्हे यहाँ मुझे मरने के लिए और शनाया को किडनैप करने के लिए किसने भेजा था.
मेरी बात को सुन कर भी रघु कुछ नहीं बोलै तो मई उसे खींच कर एक थपड मारा मेरे तपाद कहते hi उसके मुँह से खून निकलने लगा.
मई- अब बताओगे या फिर तुम्हे और मर खाना है अब अगर तुम अपना मुँह नहीं खोले तो मई तुम्हारी हाथ पेअर दोनों ऐसा तोडूंगा की वो कभी जुड़ नहीं पाएंगे तुम्हे पूरी जिंदगी विकलांग की तरह जीना पड़ेगा इस लिए मुझे सब सच सच बताओ.
मेरे बात को सुन कर रघु दर से थार थार कपङे लगा और डरते डरते बोलै.
रघु- मुझे मेरे बॉस ने भेजा था.
मई- क्या नाम है तुम्हारे बॉस का और वो कहा रहता है.
रघु- मेरे बॉस का नाम बलदेव सिंह है और वो इस एरिया के गैंगस्टर है.
मई- ठीक है अगर तुम जिन्दा रहना चाहते हो तो मुझे अपने बॉस बलदेव सिंह के पास ले कर चलो मुझे भी देखना है की किस्मे इतना डैम है की मेरी जान शनाया पर नजर रखे.
बर्थडे पार्टी
मई उस मूर्ति के पास गया और उसके ऊपर मई उस लिक्विड के बोतल को पूरा खली कर दिया जैसे hi लिक्विड उस गिरा उस मूर्ति से ताम्बे का कलर गायब होने लगा और जैसे जैसे उस मूर्ति से ताम्बे का कलर गायब हो रहा था वैसे वैसे उसके अंदर से चमकते हुए सोने के परत उभरती हुयी बहार आ रही थी जब उस मूर्ति से सारा ताम्बे के कलर गायब हो गया तो पूरा मूर्ति hi सोने के परत से चमकने लगा अब कोई भी देख कर बोल सकता था की ये मूर्ति पूरा का पूरा सोने से बना हुआ.
जैसे hi लोगो ने देखा की वो मूर्ति सच में सोने से बना हुआ है तो सब चौक गए और जो लोग मेरी और शनाया की मजाक उदा रहे थे उन लोगो की मुँह अपने आप hi बंद हो गया और सर शर्म से झुक गया.
इधर शनाया ने भी जब मूर्ति को देखा तो उसकी नखे फटी की फटी रह गयी वो आश्चर्य से कभी मुझे तो कभी उस मूर्ति को देख रही थी और पुस्पा की बात hi क्या करना उसकी तो बोलती hi बंद हो गयी थी इधर जितने भी लोग थे सब आपस में बाटे करने लगी.
~ अरे ये तो सच में सोने की मूर्ति है इसका मतलब प्रतिक सच बोल रहा था हम बेकार में hi न जाने इसे क्या क्या बोल रहे थे.
~ अरे सच में भाई ये मूर्ति सोने का है और काम से काम ये मूर्ति 2.5 कग सोने से बना होगा और ऊपर से ये मूर्ति एंटीक भी है तो काम से काम इसकी कीमत 7 से 8 करोड़ रूपए तो जरूर होंगे.
~ अजय मल्होत्रा को क्या दामाद मिला है ये तो एंटीक में एक्सपर्ट लगता है तभी तो ये ताम्बे के अंदर सोने को पहचान कर लिया मल्होत्रा परिवार किस्मत वाला है जो उसको एक एंटीक एक्सपर्ट दामाद मिला है.
~ और शनाया के दिल तो देखो अपने दादा जी को बर्थडे में 7 से 8 करोड़ के गिफ्ट ऐसे hi दे दिया और यहाँ कुछ ऐसे भी लोग है 20 लाख या 25 लाख के गिफ्ट दे कर ऐसा जाता रहे है जैसे न जाने दुनिया के कितना महंगा गिफ्ट दे दिए हो.
इन सरे लोगो के बात सुन कर शनाया का दिल गदगद हो गया आज उसे मन कर रहा था की वो भाग कर आये और मुझे गले लगा ले लेकिन वो ऐसा कर नहीं सकती थी इधर उन सरे लोगो के बात सुन कर अजय मल्होत्रा को भी मेरे ऊपर गर्व हो रहा था लेकिन मेरी इतनी बड़ाई सुन कर पुस्पा मन hi मन सोचे जा रही थी.
पुस्पा- (मन में) अरे ये मैंने क्या कर दिया खामखा उसको बाटे सुना दी लेकिन जब उसे पता था की ये मूर्ति सोने की बानी है तो इसे गिफ्ट देने की क्या जरुरत थी हम इस मूर्ति को अपने पास रख कर कुछ और गिफ्ट कर देते.
जहा शनाया के परिवार खुस था वही अपनी बेइज्जती होता देख कर अमृता और विक्की के सर निचे हो गया और वो दोनों घुसे से डट भिचने लगे फिर न जाने विक्की को क्या सुझा वो तुरंत hi बोलै.
विक्की- मन की ये मूर्ति सोने की है लेकिन आप सब ये कैसे बोल सकते हो की ये मूर्ति एंटीक है ऐसा भी तो हो सकता है की ये मूर्ति कुछ दिन पहले hi बनाया गया हो और इस्पे ताम्बे की पानी चढ़ा दिया गया हो ताकि ये हम सब को बेवकूफ बना सके.
अमृता- और ऐसा भी हो सकता है की ये मूर्ति असली सोने की नहीं हो बल्कि इसे नकली सोने से बनाया गया हो क्युकी इन लोगो के पास इतना पैसा आया कहा से की ये इतनी महंगी मूर्ति खरीद कर गिफ्ट दे सके.
इन दोनों के बात सुन कर आकाश ने भी सोचा की वो भी बहते हुए गंगा में हाथ धो ले एनी की उसने भी सोचा की चलो मई भी थोड़ा प्रतिक की बेइज्जती कर hi लेता हु.
आकाश- विक्की और अमृता सही बोल रहे है ये मूर्ति ओरिजिनल हो hi नहीं सकता क्युकी कोई भी सोने की मूर्ति पर ताम्बे की पानी क्यों चढ़ाएगा और मन लिया की इस मूर्ति पर ताम्बे की पानी चढ़ाया गया था तो ये इसको कैसे पता चला और ये आप लोगो को कहा से एक एंटीक एक्सपर्ट लग रहा है अगर ये एक एंटीक एक्सपर्ट होता तो इसका नाम पुरे सहर में होता न तो आप लोग hi बताइये की क्या आप लोगो ने कभी सुना है की कोई प्रतिक नाम का एंटीक एक्सपर्ट इस शहर में है नहीं न तो ये बात साफ है की ये हम लोगो को बेवकूफ बना रहा है.
इन तीनो के बात सुन कर सरे लोग सोच में पद गए और फिर से तरह तरह के बाटे करने लगे.
~ इन तीनो को बात में डैम तो है ये मूर्ति नकली hi होगी और ये हमें बेवकूफ बना रहा है.
~ मुझे लग रहा है की ये इस नकली मूर्ति को लेकर यहाँ अपना नाम बनाना चाहता होगा.
सरे लोग को फिर से मेरे खिलाफ देख कर अमृता विक्की और आकाश के फेस पर एक कामिनी मुस्कान आ गयी मई इन लोगो को ऐसे बात करता देख कर बोलै.
मई- आप लोगो को मेरी बातो पर अभी भी बिस्वास नहीं हो रहा है न तो ठीक है जब आप लोगो को कोई एंटीक एक्सपर्ट आ कर बताएगा तब तो बिस्वास होगा न.
मेरे बात को सुन एक आदमी मुझसे बोलै.
~है अगर कोई जाना मन एंटीक एक्सपर्ट हमें कन्फर्म करे को ये मूर्ति एक एंटीक है और ये सोने से बना हुआ है तो हम मन लेंगे की तुम सही थे और हम गलत.
मई- तो ठीक है मई अभी एक एंटीक एक्सपर्ट को यहाँ बुलाता हु शायद आप लोग उनको जानते भी होंगे उनका नाम रतन मिश्रा है अगर वो आप लोगो को आकर बोले की ये मूर्ति ओरिजिनल है तो उनकी बात को आप सब मानोगे.
मेरी बात को सुन कर विक्की हस्ते हुए बोलै.
विक्की- क्या बोलै रतन मिश्रा तुम उनको जानते भी हो या सिर्फ नाम hi सुना है रतन मिश्रा इस सहर के जाने मने एंटीक एक्सपर्ट है और वो तुम जैसे मामूली इंसान के बुलाने पर यहाँ क्यों आएंगे और क्या आप सब भी इसके बातो पर बिस्वास कर रहे है ये तो सिर्फ ऐसे hi हम सब का समय बर्बाद कर रहा है.
मई- मई रतन मिश्रा को जनता हु या नहीं वो तो अभी hi पता चल जायेगा.
इतना बोल कर मई अपना मोबाइल निकला और रतन मिश्रा को कॉल कर दिया थोड़ी देर में रतन मिश्रा मेरा कॉल उठा लिए और बोले.
रतन- है प्रतिक बोलो कुछ काम था क्या जो तुमने अभी इस वक़्त कॉल किया.
मई- है सर मुझे थोड़ा आपसे काम था क्या आप अभी फ्री है.
रतन- वैसे तो मई अपने एक दोस्त के साथ बहार डिनर करने आया था लेकिन तुम बोलो क्या बात है मई अपने दोस्त के साथ डिनर बाद में भी कर लूंगा.
मई- क्या आप अभी मल्होत्रा हाउस आ सकते है क्या.
रतन- हम तो अभी मल्होत्रा हाउस के पास के एक रेस्टोरेंट में hi है हम अभी आ जाते है लेकिन तुम पहले ये बताओ की आखिर बात क्या है.
रतन मिश्रा के बात सुन कर इस पार्टी में जो भी हुआ वो सब मई रतन मिश्रा को बताया तो रतन मिश्रा बोले.
रतन- मई बस 10 मिनट में वह पहुँचता हु और है मुझे तुम्हे अपने दोस्त से भी मिलाना था इस लिए मई उसे भी साथ में ले कर आता हु.
मई- ठीक है.
मई फ़ोन करने के बाद सबसे बोलै.
मई- आप सब बस 10 मिनट इंतजार कीजिये रतन मिश्रा जी 10 मिनट में यहाँ पहुंच जायेंगे.
मेरे बात को सुन कर सब चौक गए और फिर जो जोर से हसने लगे फिर अमृता आगे बढ़ी और मेरा मजाक उड़ाते हुए बोली.
अमृता- तुम्हारी औकात क्या है जो तुम मुंबई के जाने मने एंटीक एक्सपर्ट को यहाँ बुला सको तुम्हारी औकात सिर्फ और सिर्फ पुस्पा आंटी के गली सुन्ना और उनके घर पर बर्तन धोने के लिए hi है उसके आगे तुम कुछ नहीं कर सकते और तुम रतन मिश्रा को यहाँ बुलाने की बात करते हो.
अमृता के इतनी कड़वी बात सुन कर शनाया से बर्दास्त नहीं हुआ और वो घुसे से बोली.
शनाया- अपनी जुबान पर लगाम दो अमृता नहीं तो बाद में तुम्हे पछताने का मौका भी नहीं मिलेगा और रही बात रतन मिश्रा को यहाँ आने की तो तुम चुप चाप 10 मिनट वेट कर के क्यों नहीं देखती वो यहाँ आते है या नहीं.
इधर शनाया के बात सुन कर अमृता चीड़ गयी और पलट कर कुछ जबाब देती उससे पहले hi आकाश बिच में शनाया से बोल पड़ा.
आकाश- अमृता ने गलत क्या बोलै है शनाया वो सही hi तो बोल रही है जो लड़का एक घर जमाई हो और जो अपने सास ससुर के टुकड़ो पर पल रहा हो उसके एक बात पर सहर के इतने बड़े एंटीक मास्टर कैसे आएंगे.
शनाया- बस बहुत हो गया आकाश मई तुम्हे अपना दोस्त मन कुछ नहीं बोल रही हु इसका मतलब ये नहीं है की तुम मेरे पति को कुछ भी बोल डोज अगर आज के बाद तुमने मेरे पति के बारे में एक शब्द भी गलत बोलै तो मई भूल जाउंगी की तुम कभी मेरे दोस्त थे.
मई- अरे छोडो शनाया कीचड़ में कंकड़ मरोगी तो वो तुम पर hi गिरेगा.
अभी हम सब में बहस चल hi रहा था की तभी वह पर रतन मिश्रा के एंट्री होती है जिसे देख कर सब चौक जाते है और सबकी मुँह अपने आप hi बंद हो जाता है फिर सरे लोग उनसे मिलने के लिए उनके तरफ बढ़ते है लेकिन रतन मिश्रा सबको इग्नोर करते हुए मेरे पास आते है और मुझसे बोलते है.
रतन- मुझे आने में देर तो नहीं हो गयी प्रतिक.
मई- नहीं सर आपको देर नहीं हुयी है बल्कि आप तो समय से पहले hi आ गए.
रतन मिश्रा को सबको इग्नोर कर के मेरे पास आ कर मुझसे बात करता देख सब समझ जाते है की मई सच बोल रहा था और ये सब देख कर अमृता विक्की और आकाश के सर शर्म से झुक जाता है क्युकी अब सब लोग उनके बारे में hi उल्टा सीधा बाटे करने लगे थे हलाकि लोगो को उनके बारे में बाटे करता सुन कर उन तीनो को गुसा बहुत आ रहा था लेकिन वो चुप hi रहे इधर रतन मिश्रा अपने दोस्त से मिलवाते हुए मुझसे बोले.
रतन- प्रतिक तुम इनसे मिलो ये है मेरे दोस्त मनोज सिंघानिया ये इस सहर के जाने मने बिज़नेस मन है और मनोज ये है प्रतिक जिसके बारे में मैंने तुम्हे पहले बताया था.
मनोज- तो ये है वो महँ एंटीक मास्टर जिसकी तुम तारीफ करते नहीं थक रहे थे कैसे हो यंग मन.
मई- मई अच्छा हु सर लेकिन आप ठीक नहीं लग रहे.
मनोज- तुम्हारे कहने का क्या मतलब है.
मई- मई आपसे इस बारे में बाद में बात करूँगा.
दरअसल बात ऐसी थी की मनोज सिंघानिया को एक रेयर बीमारी थी जो मई उनको देखते hi जान गया था इस लिए मेरे मुँह ये अचानक ये निकल गया.
रतन- है तो प्रतिक बताओ किस मूर्ति का जाँच करना है.
मई- वो सामने दिख रही है न उसी मूर्ति की जाँच करनी है.
मेरे बात को सुन कर रतन मिश्रा इस मूर्ति के तरफ बढ़ रहे थे तभी उनकी नजर उस छड़ी पर पड़ी जो ऐसे hi जमीं पर फेका हुआ था फिर वो उस मूर्ति के पास न जाकर उस छड़ी के पास गए और उसे उठा लिया और थोड़े घुसे से बोले.
रतन- प्रतिक तुमने इस छड़ी को ऐसे क्यों फेक दिया है तुमको तो इस छड़ी के बारे में सब कुछ पता है फिर भी तुमने ऐसी गलती कैसे की.
मई- नहीं रतन सर इसे मैंने नहीं फेका है मई ये छड़ी दादा जी को गिफ्ट में दिया था इनको ये छड़ी मामूली लगी तो इन्होने इस छड़ी को फेक दिया.
रतन मिश्रा मेरे बातो को सुन कर चौक गए वो थोड़े घुसे से बोलै.
रतन- क्या बोलै इस छड़ी को फेक दिया नारायण मल्होत्रा जी हमने तो सुना था की आप एंटीक के बहुत शौकीन है तो फिर आपसे ये गलती कैसे हो गयी.
नारायण- सॉरी रतन जी अगर आपको ये छड़ी को फेकने से बुरा लगा हो तो लेकिन आप कहना क्या चाहते है की मुझे एंटीक की कोई जानकारी नहीं है और ये छड़ी एंटीक है.
रतन- है मई यही बोलना चाहता था क्या आपको मेरी बातो पर कुछ शक है.
नारायण- नहीं नहीं मई ऐसा कैसे बोल सकता हु लेकिन आपसे एक गुजारिश है की आप इस छड़ी के बारे में मुझे डिटेल में बताये ताकि मई अपनी गलती को सुधर सकू.
रतन- खैर इसे ऐसे फेक कर अपने गलती तो की है लेकिन चलिए मई आपको इसके बारे में बता देता हु लेकिन आप अपने दिल को संभल कर रखियेगा.
ये छड़ी कोई मामूली छड़ी नहीं है बल्कि ये पोलमी के पेड़ के लकड़ी से बना हुआ है और इसमें जो स्टोन लगा हुआ है वो कोई आम स्टोन नहीं बल्कि नील मणि है अगर आप इसे हमेशा अपने साथ रखते है तो आपके ऊपर कभी कला शया या फिर किसी तरह की कोई भी बीमारी नहीं होगी और आप हमेसा सेहत मंद रहेंगे ये छड़ी 8000 साल पुराणी एंटीक है और इसकी कीमत अभी मार्किट में काम से काम 5 करोड़ है.
बस रतन का इतना hi बोलना था की सरे लोग सौक में चले गए नारायण मल्होत्रा को तो जैसे होश hi नहीं था अमृता विक्की और आकाश के तो बोलती hi बंद हो गयी थी इधर अजय और शनाया का भी वही हल था लेकिन पुस्पा तो अपना सर पकड़ कर वही बैठ गयी थी और सरे लोग बस मेरे hi बारे में सोचे जा रहे थे.
पुस्पा- (मन में) ये कमीना मुझसे कोण सी जनम की दुश्मनी निकल रहा है पहले वो मूर्ति क्या काम था जो अब ये 5 करोड़ की छड़ी भी गिफ्ट में दे दी अगर इसे गिफ्ट करना hi था तो मई क्या मर गयी थी.
अजय- (मन में) मई प्रतिक को कितना गलत समझ रहा था मेरा दामाद तो हीरा है हीरा उसने बिना सोचे समझे hi 5 करोड़ की एंटीक पिता जी को गिफ्ट कर दिया अगर उसके जगह पर कोई और होता तो ये कभी नहीं कर पता मई आज के बाद तुमसे अच्छे से पेश आऊंगा मेरे बेटे.
शनाया- (अपने मन में) इसको एंटीक के बारे में इतना जानकारी थी और मई तो एंटीक शॉप में बेकार में hi इस्पे इतना भड़क रही थी मैंने न जाने क्या क्या बोल दिया इसे लेकिन ये मुझे पलट कर एक जबाब भी नहीं दिया क्या सच में मुझसे इतना प्यार करता है ीीी अब मई ये क्या सोचने लगी.
ऐसे hi सरे लोगो को मन में तरह तरह के बिचार चल रहे थे लेकिन पुरे हॉल में पिन ड्राप साइलेंट था तभी सभी के ख़ामोशी को तोड़ते हुए दादा जी बोले.
नारायण- क्या आप सच बोल रहे है ये छड़ी 5 करोड़ की है.
रतन- नहीं ये छड़ी 5 करोड़ से ज्यादा की है मई तो एक अनुमान लगाया है अगर आपको मेरे बात पर बिस्वास नहीं है तो आप ये छड़ी मुझे दे दीजिये मई आपके अकाउंट में 5 करोड़ अभी के अभी ट्रांसफर कर दे रहा हु.
नारायण- नहीं नहीं ये मेरे बेटे के दामाद की तरफ से मुझे गिफ्ट मिला है मई इसे कैसे बेच सकता हु.
फिर अपने मन में.
नारायण- (अपने मन में) मई कितना बेवकूफ इंसान हु ये गुरुदेव का सबसे प्रिये शिस्य है तो इसमें उनका कुछ ज्ञान तो होगा hi मैंने इसे एक तुच्छ इंसान समझ कर गलती कर दी यानि की इसके पास गुरुदेव के जैसा आयुर्वेदिक ज्ञान भी होगा इसका मतलब है की वो मूर्ति भी ओरिजिनल है मई बेकार में hi इस पर शक कर रहा था.
रतन मिश्रा सबको सौक में देख कर बोले.
रतन- आप लोग अभी से hi सौक में चले गए अभी तो मूर्ति के बारे में जानना बाकि है.
इतना बोल कर वो मूर्ति के पास गए और उसे ध्यान से देखने लगे थोड़ी देर देखने के बाद वो अपनी मैग्नीफाइंग गिलास निकल कर उसे अच्छे से चेक करने लगे.
जब रतन मिश्रा उस मूर्ति को चेक कर रहे थे तब वह पर मौजूद सरे लोगो की डिल के धड़कन बढ़ा हुआ था इधर रतन मिश्रा उस मूर्ति को ध्यान से देखने के बाद बोले.
रतन- मई इस मूर्ति के बारे ज्यादा कुछ तो नहीं बोलूंगा बस मई इतना बोलना चाहता हु की मई इस मूर्ति का आपको पुरे 6 करोड़ दूंगा क्या आप इस मूर्ति को मुझे बेचेंगे.
बस रतन मिश्रा का इतना hi बोलना था की सरे लोग आपस में बाटे करने लगे.
~ रतन मिश्रा ने इस मूर्ति को 6 करोड़ में खरीदने की बात कर रहे है इसका मतलब प्रतिक सच बोल रहा था ये मूर्ति ओरिजिनल hi है.
ऐसे hi सरे लोग आपस में बाटे कर रहे थे प्रतिक के तीनो दुश्मनो की शकल उतरा हुआ था वो लोग बस मन hi मन प्रतिक को गली दिए जा रहे थे इन सब से अलग नारायण मल्होत्रा के चेहरे पर एक मुस्कान थी और उनकी छाती गर्व से फूली हुयी थी वो सबको संत करते हुए बोले.
नारायण- आपके बातो से तो मई इतना समझ गया की ये मूर्ति ओरिजिनल है लेकिन आप मुझे इसके बारे में थोड़ा डिटेल्स में बता देते तो अच्छा रहता.
नारायण के बात सुन कर रतन के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी फिर वो मुस्कुराते हुए बोले.
रतन- ये मूर्ति आज से 5000 हजार साल पहले की है ये मूर्ति चोल वंस का धरोहर है और ये सुध सोने के बना हुआ है चोल वंस में मन्ना था की इस मूर्ति को जो भी अपने घर में रखेगा उसके घर पर कभी भी कोई भी बुरी शक्ति वास् नहीं करेगी और उसके घर पर माता लक्ष्मी की कृपा हमेसा रहेगी उनका धन और बैभव दोनों बढ़ेगा इस मूर्ति को चोल वंस में सोमस्कन्द के नाम से जाना जाता था.
रतन के बात सुन कर नारायण मल्होत्रा के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी और वो कृषि से मुझे और शनाया को देखने लगे थोड़ी देर तक हम दोनों को ऐसे hi देखने के बाद वो बोले.
नारायण- प्रतिक और शनाया तुम दोनों को थैंक यू मुझे इतना अच्छा गिफ्ट देने के लिए तुम दोनों की लाइफ हमेसा खुशाल रहे और तुम दोनों हमेशा पति पत्नी की तरह रहो लेकिन तुम दोनों से एक गलती हुयी है और मई आज यहाँ सबके सामने तुम दोनों को उसकी सजा देना चाहता हु क्या तुम दोनों को मेरे द्वारा दिया गया सजा मंजूर है और अगर तुम दोनों को मंजूर नहीं भी होगा तब भी तुम्हे मेरे द्वारा सजा को मन्ना hi होगा.
दादा जी के बात सुन कर जहा मई और शनाया चौक गए और सोचने लगे की हमसे क्या गलती हुयी है वही अमृता विक्की और आकाश के चेहरे पर पहली बार खुसी आयी थी इधर दादा जी के बात सुन अजय और शनाया दोनों घबरा गए पुस्पा तो यहाँ तक सोचने लगी जरूर मैंने hi कुछ किया होगा दादा जी के बात सुन कर शनाया थोड़ी देर सोचने के बाद बोली.
शनाया- दादा जी मुझे ये तो पता नहीं की हम दोनों से क्या गलती हुयी है लेकिन आप बोल रहे है तो हम मैंने के लिए तैयार है की हमसे कोई गलती हुयी होगी इस लिए हम दोनों सजा के लिए तैयार है.
नारायण- तो ठीक है मई पहले तुम्हे तुम्हारी गलती के बारे में बता देता हु और उसके बाद तुम्हे सजा भी सुनाऊंगा तो तुम दोनों की गलती ये है की तुम दोनों ने अपने बजट से ज्यादा बड़ा गिफ्ट मुझे दिया है जो तुम्हे नहीं देना चाहिए था और इस लिए इसकी सजा तो तुम दोनों को मिलनी hi चाहिए और इसकी सजा ये है की मल्होत्रा ग्रुप के मल्होत्रा ब्यूटी एंड केयर कंपनी जिसकी मार्किट वैल्यू 50 करोड़ की है वो मई तुम दोनों के नाम पर कर रहा हु और तुम्हे ये सजा काबुल करना hi होगा.
इतना बोल कर दादा जी मुस्कुराने लगे और उनकी बात सुन कर सरे लोग चौक गए दादा जी के बात सुन कर अजय और पुस्पा दोनों खुस हो गए थे तो वही अमृता और विक्की दोनों घुसे से पागल हो गए.
अमृता- लेकिन दादा जी वो कंपनी मुझे देने के लिए अपने वडा किया था.
दादा जी- है मैंने तुम्हे बोलै था लेकिन उस कंपनी को तुमसे अच्छा शनाया संभालेगी और अब मई इसके आगे कुछ नहीं सुनूंगा समझी.
दादा जी के घुसे से भरे शब्द सुन कर अमृता वही चुप हो गयी हलाकि की बोलना तो विक्की भी कुछ चाहता था लेकिन वो दादा जी के गुसा देख कर संत hi रहा फिर मई कुछ सोचते हुए दादा जी से बोलै.
मई- दादा जी मई ये कंपनी नहीं ले सकता क्युकी मुझे अपने डैम पर कुछ कर के दिखाना है आप इस कंपनी को पूरा का पूरा शनाया को hi दे दीजिये.
दादा जी- मुझे तुम्हारी बात सुन कर खुसी हुयी की तुम अपने डैम पर कुछ करना चाहते हो तो ठीक है मई इस कंपनी को शनाया के नाम कर दूंगा.
इतना बोल कर दादा जी वह से अंदर गए और अपने हाथ में एक पेपर ले कर आये और उस पर शनाया के सिग्नेचर ले कर वो पेपर शनाया को दे दिया शनाया आज बहुत खुस थी और वो प्यार से बस मुझे hi देखे जा रही थी.
इधर सब काम निपटने के बाद रतन मिश्रा मेरे पास आये और मुझसे बोले.
रतन- अब तो तुम्हारा काम हो गया तो क्या मई अब जा सकता हु.
मई- नहीं आप अभी नहीं जा सकते चलिए पहले हम सब कुछ कहते है इसके बाद मुझे आपके दोस्त से कुछ बाटे करना है इसके बाद आप जा सकते है.
रतन- चलो ठीक है.
इसके बाद हम सब ने जाकर खाना खाया और फिर मई रतन मिश्रा और मनोज सिंघानिया के साथ एक कोने में आ गया तो मनोज सिंघानिया मुझसे बोले.
मनोज- है भाई प्रतिक बोलो मुझसे क्या बात करना चाहते थे.
मई- आपको तो यद् hi होगा की जब आप मुझसे मिले थे तब मई आपको बोलै था की आप ठीक नहीं लग रहे है.
मनोज- अरे है यद् आया मई भी ये बात तुमसे पूछना छह रहा था अच्छा चलो अब बता दो की तुमने मुझसे ऐसा क्यों बोलै था.
मई- ठीक है बताता हु उससे पहले आप मेरे कुछ प्रश्नों के उतर दीजिये.
मनोज- है पूछो.
मई- अच्छा आप सबसे पहले ये बताइये की क्या आप जब सोते है तो अचानक आधी रेट में आपको रीढ़ की हड्डी में बहुत तेज़ दर्द होता है और वो दर्द इतना बढ़ जाता है की आपसे बर्दास्त नहीं होता क्या ये बात सही है.
मेरी बात को सुन कर मनोज चौक गया और मुझे ध्यान से देखते हुए पूछा.
मनोज- तुम्हे कैसे पता की मेरे रीढ़ के हड्डी में दर्द रहता है.
मई- मुझे आपको देखते hi पता चल गया था की आप बीमार है तभी तो मई आपको बोलै था की आप ठीक नहीं लग रहे है वैसे क्या आप इसका इलाज करवाना चाहते है.
मनोज- है मई इसका इलाज करवाना चाहता तो हु लेकिन मई आज तक बहुत सरे डॉक्टर को दिखा लिया लेकिन किसी को मेरे बीमारी का कारन पता नहीं चल रहा है इस लिए आज तक कोई भी डॉक्टर मेरा इलाज नहीं कर पाया है.
मई- मुझे पता चल गया है आपके बीमारी का कारन क्या है और मई आपका इलाज कर सकता हु क्या आप मुझसे इलाज करवाना चाहेंगे.
मनोज मेरा बात को सुन कर चौक जाता है और फिर कुश होते हुए बोलता है.
मनोज- अरे भाई तुम तो किसी अंधे से पूछ रहे हो की उसको आँख चाहिए या नहीं अगर तुम मेरा इलाज कर सको तो मई बेशक तुमसे अपना इलाज करवाना चाहूंगा लेकिन तुम पहले मुझे ये बताओ की मेरे बीमारी का कारन क्या है.
मई- आप कभी मार्टिकल आर्ट्स प्रैक्टिशनर रह चुके है क्या.
मनोज- है मई जवानी के दिन में मार्टिकल आर्ट्स प्रैक्टिस करता था.
मई- जब आप मार्टिकल आर्ट्स प्रैक्टिस करते थे तो छोड़ क्यों दिए कही ऐसा तो नहीं की आपको मार्टिकल आर्ट्स प्रैक्टिस करते हुए रीढ़ की हड्डी पर चोट आ गयी थी.
मनोज- है तुम सही बोल रहे हो मई जब मार्टिकल आर्ट्स का प्रैक्टिस करता था तब गलती से से मेरे रीढ़ के हड्डी पर चोट आ गयी थी जिसके कारन मई बहुत दिन तक हॉस्पिटल में भर्ती भी रहा था लेकिन मेरा चोट तो उसी समय ठीक हो गया था.
मई- है वो चोट तो ठीक हो गया था लेकिन आपको जब रीढ़ के हड्डी में चोट लगा था तब उस चोट के कारन अपने हड्डी में बहने वाला बोन मेरो पर इफ़ेक्ट हुआ था लेकिन जब आपका इलाज हुआ तो वो ठीक तो हो गया लेकिन बोन मेरो में कुछ प्रॉब्लम रह गयी थी जो धीरे धीरे बढ़ते गया और वो इतना बढ़ आगया है की अपने हड्डी में बोन मेरो का बहाओ रुक रुक कर हो रहा है और जिस वक़्त बोन मेरो आपके रीढ़ के हड्डी में रुकता है उस समय आपको बहुत ज्यादा दर्द महसूस होता है.
मनोज- तो क्या मई ठीक हो सकता हु.
मई- है मई आपको पूरी तरह से ठीक कर दूंगा लेकिन मेरे पास अभी समय नहीं है मेरे पास कल शाम में समय है तो आप कल शाम को मुझसे संपर्क कीजिये.
मनोज- ठीक है तो फिर हम कल शाम में मिलते है.
इतना बोल कर वो दोनों वह से चले गए उनके जाने के बाद मई शनाया के पास गया और उससे बोलै.
मई- तो अब घर चले.
शनाया- है चलते है लेकिन पहले दादा जी से घर जाने का आज्ञा ले ले.
मई- ठीक है.
इसके बाद दादा जी से आज्ञा ले कर हम लोग गाड़ी में बैठे और वह से निकल गए रस्ते में शनाया मुझसे बोली.
शनाया- थैंक यू प्रतिक आज मुझे वो ब्यूटी एंड केयर कंपनी तुम्हारे चलते hi मिला है.
मई- इसमें थैंक यू की कोई बात नहीं शनाया मई अपने वाइफ के लिए ये सब तो कर hi सकता हु.
अभी हम लोग बात कर hi रहे थे की तभी कुछ गाड़ी हमारे गाड़ी को ओवरटेक करते हुए आगे निकली और जाकर बिच रस्ते को जैम करते हुए कड़ी हो गयी और गाड़ी से कुछ लोग निकले जो दिखने में hi गुंडे लग रहे थे अभी रत का समय था इस लिए ये अंदाजा नहीं लग प् रहा था की वह पर कितने गुंडे थे क्युकी गाड़ी के लाइट से सिर्फ आगे वाले hi गुंडे दिख रहे थे.
उनको अपने गाड़ी से ऐसे रोड जैम करता देख कर शनाया ने अपना गाड़ी को वही रोक दिया तो मई उससे बोलै.
मई- मई देखता हु उन लोगो को सायद वो लोग हमारे लिए hi यहाँ आये हज आप सब गाड़ी से बहार नहीं निकालिएगा और है शनाया अगर यहाँ कुछ गड़बड़ हो या फिर वो मुझ पर हमला करे तो तुम गाड़ी तो टर्न कर के दूसरे रस्ते से घर के लिए निकल जाना मई इन लोगो को ठिकाने लगा कर आ जाऊंगा.
शनाया- नहीं तुम कही नहीं जाओगे मई गाड़ी बैक कर रहा हु और हम सब साथ में दूसरे रस्ते से घर के लिए निकलेंगे समझ गया.
मई- नहीं शनाया तुम समझ नहीं रही हो अगर इन लोगो को यहाँ रोका नहीं गया तो ये लोग हमारा पीछा करते हुए घर तक पहुंच जायेंगे और वैसे भी तुम मेरी टेंसन मत लो मई इन लोगो को संभल लूंगा.
पुस्पा- ज्यादा हीरो बनाने की जरुरत नहीं है समझे अगर तुम्हे कुछ हो गया तो खामखा तुम्हे इलाज करवाना पड़ेगा.
अजय- पुस्पा तुम ये कैसी बाटे कर रही प्रतिक से प्रतिक बीटा तुम इस सब से लड़ नहीं पाओगे इस लिए तुम भी हमारे साथ चलो.
मई- नहीं अंकल अगर मई भी आपके साथ गया तो हम सब मुसीबत में पद जायेंगे और वैसे भी हमारा किसी से कोई दुश्मनी नहीं है तो मुझे लगता है की इन सब को कोई गलत फहमी हुयी है.
शनाया- ठीक है तो फिर मई भी तुम्हारे साथ चलूंगी.
मई- नहीं तुम नहीं जाओगी तुम बस चुप चाप यहाँ से जाओ.
इतना बोल कर मई गाड़ी से उतर गया मुझे इस तरह से उतरता देख कर शनाया भी गाड़ी से उतरने को हुयी की पुस्पा ने उसे डट दिया और गाड़ी घूमने को बोली शनाया पुस्पा के बात सुन कर तुरंत गाड़ी घुमा ली गाड़ी को घूमता देख कर गुंडे आगे बढ़ने लगे लेकिन उनके और गाड़ी के बिच में मई खड़ा था.
जब वो सरे गुंडे भागते हुए मेरे पास आये तो मई उनसे पूछा.
मई- है भाई तुम लोगो की क्या परेशानी है तुम लोग ऐसे क्यों बिच में गाड़ी को खड़ा कर के रोड जैम किये हुए हो.
मेरे बात को सुन कर गुंडों का लीडर जो को रघु था वो बोलै.
रघु- हमलोग तुम्हारा hi इंतजार कर रहे थे तुम उस दिन तो एंटीक शॉप से बच कर भाग गए थे लेकिन अब तुम कहा भागोगे.
मई- देखो मुझे लगता है की आज से पहले नाटो हम मिले है और न hi मेरी तुमसे कोई दुश्मनी है फिर तुम लोगो मेरे पीछे क्यों पड़े हो.
रघु- है सही बोलै की हमारी कोई दुश्मनी नहीं है लेकिन तुम्हे मरने का आर्डर मुझे मेरे बॉस ने दिया है और तुम्हे मर कर उस लड़की को उठाना है.
मई- कोण है तुम्हारा बॉस.
रघु- तुम तो मरने वाले हो तो तुम मेरे बॉस में बारे में जान कर क्या करोगे.
अभी हम लोग बात कर hi रहे थे की तभी एक गुंडा बोलै.
गुंडा- भाई वो लड़की गाड़ी को टर्न कर के जा रही है.
रघु- जाने दो पहले इसे ठिकाना लगते है इसके बाद हम उस लड़की को उठाएंगे वैसे भी वो जाएगी भी तो अपने घर hi न मुझे उसका घर पता है आज इसे ठिकाने लगाने के बाद हम उसके घर जा कर उसे उठा लेंगे.
मई- एक बात बताओ तुम लोग शनाया को क्यों किडनैप करना चाहते हो.
रघु- वो तो उस छमिया का नाम शनाया है अच्छा है वैसे कैसे फसाया तुमने इतने तगड़े मॉल को अच्छा एक बात बताओ वो तुम्हे मजा तो भरपूर देती होगी.
रघु को शनाया के लिए इतना गन्दा बोलता देख कर मुझे बहुत गुसा आया और फिर मई अपने पीछे एक माया जल फैलाया ताकि शनाया और उसके पेरेंट्स मुझे देखे तो लगे की मई अभी भी इसने बात hi कर रहा हु माया जल फ़ैलाने के बाद मैंने घुसे से रघु को बोलै.
मई- मई तुम सब को वार्निंग दे कर छोड़ देना चाहता था लेकिन तुमने शनाया के बारे में गलत बोल कर अपने मौत को दावत दे दिया है.
इतना बोल कर मैंने एक पंच उसके पेट में मारा जिससे रघु उड़ता हुआ पीछे जा गिरा और वो दर्द से कराहने लगा और बोलै.
रघु- मई तुम्हे असं मौत देना चाहता था लेकिन तुमने मेरे ऊपर हाथ उठा कर अच्छा नहीं किया मारो रे सेल को इसको इतना मारो की ये मरने के लिए तड़पे लेकिन मौत इसको न मिले.
रघु के बात सुन कर सरे गुंडे अपने अपने हथियार ले कर मेरे तरफ भागे मई जब उनको अपने तरफ आता देखा तो मई भी उनसे लड़ने के लिए तैयार हो गया और अपने ताकत को 10 परसेंट कर लिया और फिर टूट पड़ा उन गुंडों पर फिर क्या था किसी के हाथ टूटे तो किसी का पेअर 2 मिनट में hi सरे गुंडे निचे गिर कर दर्द से तड़प रहे थे मई उनको दर्द से तड़पता देख कर रघु के पास गया जो दर से थार थार कानो रहा था.
मई- है तो अब तुम मुझे बताओ की तुम्हे यहाँ मुझे मरने के लिए और शनाया को किडनैप करने के लिए किसने भेजा था.
मेरी बात को सुन कर भी रघु कुछ नहीं बोलै तो मई उसे खींच कर एक थपड मारा मेरे तपाद कहते hi उसके मुँह से खून निकलने लगा.
मई- अब बताओगे या फिर तुम्हे और मर खाना है अब अगर तुम अपना मुँह नहीं खोले तो मई तुम्हारी हाथ पेअर दोनों ऐसा तोडूंगा की वो कभी जुड़ नहीं पाएंगे तुम्हे पूरी जिंदगी विकलांग की तरह जीना पड़ेगा इस लिए मुझे सब सच सच बताओ.
मेरे बात को सुन कर रघु दर से थार थार कपङे लगा और डरते डरते बोलै.
रघु- मुझे मेरे बॉस ने भेजा था.
मई- क्या नाम है तुम्हारे बॉस का और वो कहा रहता है.
रघु- मेरे बॉस का नाम बलदेव सिंह है और वो इस एरिया के गैंगस्टर है.
मई- ठीक है अगर तुम जिन्दा रहना चाहते हो तो मुझे अपने बॉस बलदेव सिंह के पास ले कर चलो मुझे भी देखना है की किस्मे इतना डैम है की मेरी जान शनाया पर नजर रखे.