The Super Boy - Page 5 - SexBaba
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The Super Boy

अपडेट 31

मंटू यादव की बर्बादी


मई और विशाल अग्रवाल ग्रुप से अग्रवाल मेन्शन जाने के लिए निकल गए थे करीब आधे घंटे के बाद हम लोग अग्रवाल मेन्शन पहुंच गए थे अग्रवाल मेन्शन के पहुंचने के बाद हम दोनों कार से बहार निकले और मेन्शन के अंदर जाने लगे तो वह के गॉर्ड ने हमें रोकते हुए बोले.

गॉर्ड- आप लोग अंदर कहा जा रहे है किस्से मिलना है आपको.

गॉर्ड के बात सुन कर विशाल उससे बोलता है.

विशाल- हमें यहाँ पर सूर्यदेव अग्रवाल ने बुलाया है आप उनसे इण्टरकॉम पर बात कर के बोलो की विशाल ओबेराय आया है.

विशाल के बात सुन कर गॉर्ड तुरंत इण्टरकॉम के पास गया और अंदर बात करने लगा थोड़ी देर बात करने के बाद वो हमारे पास आया और बोलै.

गॉर्ड- जी आप लोग अंदर जा सकते है.

गॉर्ड के बात सुन कर हम दोनों अंदर चले गए थोड़ी देर में हम ड्राइंग रूम के अंदर थे जहा पर सूर्यदेव अग्रवाल उदास बैठे हुए थे जब उन्हें एहसास हुआ की ड्राइंग रूम में कोई आया है तो पीछे मुद कर देखने लगे अपने सामने विशाल को देख कर वो अपने चेयर से खड़ा हो गए अपने उदासी को छुपाते हुए मुस्कुरा कर बोले.

सूर्यदेव- आइये आइये विशाल जी आपका अग्रवाल मेंशन में स्वागत है कहिये हम आपकी क्या सेवा कर सकते है आप यहाँ आने से पहले कुछ काम के बारे में बोल रहे थे आप बताइये हम आपका सहायता किस तरह से कर सकते है.

सूर्यदेव के बात सुन कर विशाल कुछ सोचते हुए बोलै.

विशाल- काम की बाटे तो बाद में भी होती रहेगी पहले आप मुझे ये बताइये की आपकी बेटी की तबियत कैसी है.

विशाल के बात सुन कर सूर्यदेव थोड़ा उदास हो जाते है और फिर वो विशाल से बोलते है.

सूर्यदेव- कुछ ठीक नहीं है डॉक्टर ने जबाब दे दिया अब मुझे समझ में नहीं आ रहा है की मई क्या करू कहा दिखाऊ अपनी बेटी को की वो ठीक हो जाये.

सूर्यदेव के बात सुन कर विशाल उनको सांत्वना देते हुए बोलै.

विशाल- आप चिंता मत कीजिये सब ठीक हो जायेगा और है मई अपने साथ में एक डॉक्टर भी ले कर आया हु आप एक बार इनसे अपनी बेटी की चेकउप करवा लीजिये भगवन चाहेंगे तो आपकी बेटी जरूर ठीक हो जाएगी.

विशाल के बात सुन कर सूर्यदेव अग्रवाल मुझे देखते हुए बोले.

सूर्यदेव- क्या ये सच में डॉक्टर है ये देखने से तो डॉक्टर नहीं लग रहा वैसे भी मेरी बेटी का इलाज बड़े बड़े डॉक्टर ने किया है लेकिन किसी ने भी उसे ठीक नहीं कर पाया तो भला ये क्या कर लेगा.

सूर्यदेव को इस तरह से मेरे ऊपर सवाल उठाना विशाल को अच्छा नहीं लगा लेकिन वो जनता था की कोई भी जब मुझे पहली बार देखता है तो वो ऐसे hi बोलता है क्युकी मई देखने से कोई डॉक्टर नहीं लगता इधर मई जब सूर्यदेव अग्रवाल के बात सुना तो मई उनसे बोलै.

मई- मई मंटा हु की मई देखने में डॉक्टर नहीं लगता लेकिन आप यकीं मानिये मई एक डॉक्टर hi हु और मई आपके बेटी का इलाज कर सकता हु.

मेरे बात को सुन कर सूर्यदेव अग्रवाल ने बोलै.

सूर्यदेव- जब इतने बड़े बड़े डॉक्टर मेरी बेटी का इलाज नहीं कर सके तो मई तुम पर कैसे बिस्वास कर लू.

मई- अगर आपको मुझ पर यकीं नहीं है तो आप सिटी हॉस्पिटल में पता कर लीजिये मई वह पर एक गेस्ट डॉक्टर हु और मेरा नाम डॉ. प्रतिक है.

मेरी बात को सुन कर वो कुछ सोचने लगे तभी उन्हें कुछ यद् आया और वो बोले.

सूर्यदेव- तुमने अपना नाम क्या बताया.

मई- जी मेरा नाम प्रतिक है.

सूर्यदेव- हम्म प्रतिक क्या तुम वही डॉ. प्रतिक हो जो संडे को सिटी हॉस्पिटल में मरीजों का इलाज किया था.

मई- जी मई वही डॉ. प्रतिक हु और आप मुझ पर बिस्वास कीजिये मई आपकी लड़की को ठीक कर सकता हु आप एक बार मुझे उसके पास ले कर चलिए.

मेरे बात को सुन कर सूर्यदेव कुछ देर के लिए सोच में पद गए फिर वो अपने सोच से बहार निकलते हुए बोले.

सूर्यदेव- मैंने इन कुछ दिनों में आपका नाम बहुत बार सुना है ठीक है आप एक बार मेरे बेटी को देख लीजिये अगर आप उसे बचा लिए तो मई अक एहसान जिंदगी भर नहीं भूलूंगा.

मई- ठीक है मुझे आप अपने बेटी के पास ले चलिए.

इसके बाद सूर्यदेव अग्रवाल ने हम दोनों को अपने साथ लेकर एक रूम में गए जहा पर एक लड़की अपने बीएड पर बेहोश पड़ी हुयी थी और उसके देख भल के लिए वह पर 2 नर्स भी थी मई उस रूम को चारो तरफ से घूम कर देखा तो पाया की उस रूम को पूरा हॉस्पिटल के रूम में बदल दिया था उस रूम में हर वो फैसिलिटी थी जो एक हॉस्पिटल में होता है.

फिर मई आगे बढ़ते हुए उस लड़की के बीएड के पास चला गया और उसे ध्यान से देखने लगा वो लड़की करीब 18 या 19 साल की होगी जो दिखने में एक डैम मासूम लग रही थी वो लड़की बीमारी के चलते एक डैम दुबली पतली हो गयी थी जिसके कारन उसके शरीर की हड़िया तक दिखने लगी थी.

फिर मई उस लड़की को जांचने के लिए अपने दिव्या दृस्टि को एक्टिवटे किया और उसे ध्यान से देखने लगा जब मई उसके बॉडी को अपने दिव्या दृस्टि से देखा तो चौक गया क्युकी उसकी बॉडी में बहुत साडी स्प्रिचैल एनर्जी थी और इतने सरे स्प्रिचैल एनर्जी होने का दो कारन हो सकता है या तो ये लड़की जन्मजात मार्टिकल योद्धा होगी जो होना असंभव है क्युकी जन्मजात मैरिटल योद्धा लाखो में एक होते है और अगर ये जन्मजात मार्टिकल आर्ट्स योद्धा होती तो इसका स्प्रिचैल एनर्जी बचपन में hi ट्रिगर हो जाती और दूसरा कारन ये है की ये कोई ऐसी चीज खायी होगी जिसमे बहुत साडी स्प्रिचैल एनर्जी होगी.

लेकिन मुझे ये समझ में hi नहीं आ रहा है की ये लड़की जन्मजात मैरिटल आर्ट्स योद्धा नहीं है फिर भी ये अभी तक जिन्दा कैसे है क्युकी इतने स्प्रिचैल एनर्जी के बॉडी में होने के कारन इसकी बॉडी कब के फैट जाना चाहिए था लेकिन अगर इस लड़की के बॉडी अभी तक सही सलामत है इसका मतलब ये है की इसकी बॉडी में स्प्रिचैल एनर्जी कुछ दिन पहले हे गया होगा और इसके बॉडी में स्प्रिचैल एनर्जी कुछ दिन पहले आने का मतलब है की ये लड़की जरूर कुछ ऐसा खायी होगी जिसमे बहुत साडी स्प्रिचैल एनर्जी होगा अगर इसके सरे स्प्रिचैल एनर्जी को इसके शरीर इतने स्प्रिचैल एनर्जी है की उन सरे स्प्रिचैल एनर्जी को इसके बॉडी में संतुलित कर दिया जाये तो ये मार्टिकल आर्ट्स रैंक में बहुत आगे तक जाएगी फिर मई उस लड़की के ऊपर से अपने दिव्या दृष्टि को वापस लिया और सूर्यदेव अग्रवाल के पास आ गया और उनसे बोलै.

मई- आप बता सकते है की आपकी बेटी कितने समय से बीमार है.

सूर्यदेव- है करीब 5 दिन से ये ऐसी हालत में है हलाकि ये बीमार तो लगभग 12 दिनों से है लेकिन इन 5 दिनों में इसकी हालत ज्यादा ख़राब हो गयी है.

सूर्यदेव अग्रवाल इतना बोल कर उदास हो गए उन इस तरह से उदास देख कर मुझे अच्छा नहीं लगा तो मई उनसे बोलै.

मई- आप टेंशन मत लीजिये आपकी बेटी को ठीक हो जाएगी.

मेरी बात को सुन कर सूर्यदेव अग्रवाल बहुत खुस हो गए और वो खुसी से मुझसे बोले.

सूर्यदेव- क्या सच में आप मेरी बेटी को ठीक कर देंगे.

मई- है सच में आपकी लड़की ठीक हो जाएगी और है आप बहुत किस्मत वाले है जो ये आपकी बेटी है ये आपके खंडन के नाम रौशन करेगी.

मेरे बातो को सुन कर सूर्यदेव अग्रवाल कंफ्यूज हो गए और वो उसे कन्फूसिओं में मुझसे पूछे.

सूर्यदेव- मई आपके बातो का मतलब समझा नहीं मेरी बेटी कैसे मेरे खंडन के नाम रौशन करेगी.

मई सूर्यदेव के बातो को सुन कर मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- थोड़ी देर बाद आप खुद hi देख लीजियेगा.

अभी हम बात कर hi रहे थे की तभी रूम का दरवाजा खुला और 2 लोग अंदर आये अंदर आने वाले में एक अधेड़ उम्र का आदमी था और दूसरा 24 या 25 साल का लड़का था उस लड़के का फेस थोड़ा बहुत सूर्यदेव अग्रवाल से मिल रहा था इसका मतलब था की वो सूर्यदेव अग्रवाल का बीटा धीरज था जैसे hi वो दोनों रूम के अंदर आये धीरज जल्दी से अपने डैड के पास आया है और बोलता है.

धीरज- डैड इनसे मिलिए ये है भारत के सबसे बड़े आयुर्वेदिक डॉक्टर मर. कैलाश मेहता इसे सब मेडिसिन सेंत के नाम से भी जानते है.

धीरज के बात सुन कर विशाल और सूर्यदेव दोनों हैरान हो गए क्युकी ये दोनों डॉ. कैलाश मेहता को जानते थे वो देश के सबसे बड़े आयुर्वेदिक डॉक्टर थे लोग बोलते थे इनके हाथो में जादू है ये एक बार किसी भी पेशेंट का इलाज कर देते तो फिर उसे दोबारा किसी भी डॉक्टर के पास जाने की जरुरत नहीं पड़ती थी इधर सूर्यदेव अग्रवाल डॉ. कैलाश मेहता के नाम सुन कर खुस हो गए थे इस लिए जल्दी से आगे बढे और डॉ. कैलाश मेहता से बोले.

सूर्यदेव- मेरे इस छोटे से गरीब खाने में आपका स्वागत है डॉ. कैलाश आपके यहाँ आ जाने भर से hi मुझे ऐसा लग रहा है की अब मेरी बेटी ठीक हो जाएगी क्युकी मई सुना हु की आपके हाथो में जादू है आप किसी भी मरीज कर एक बार इलाज कर देते है तो वो ठीक हो जाता है.

सूर्यदेव से अपनी तारीफ सुन कर डॉ. कैलाश के चेहरे पर घमंड दिखाई देने लगता है और फिर वो घमंड से मुस्कुराते हुए बोले.

डॉ. कैलाश- आपने ठीक सुना है मई जिस भी मरीज को छू भर लेता हु तो वो मरीज ठीक हो जाता है आप बेफिक्र रहिये आपको बेटी को मई बिलकुल पहले जैसा कर दूंगा.

इधर विशाल डॉ. कैलाश को देख कर कुछ ज्यादा hi एक्सीटेंड हो गया और वो आगे बढ़ कर बोलै.

विशाल- हैल्लो डॉ. कैलाश मई विशाल ओबेराय हु ओबेराय ग्रुप के सीईओ मैंने आपके बारे में बहुत सुना है आप एक कमल के डॉक्टर है.

विशाल के बात सुन कर डॉ. कैलाश एक बार उसे देखते है और फिर उसे इग्नोर कर देते है लेकिन इधर सूर्यदेव अग्रवाल के बीटा धीरज अग्रवाल मुझे सुर विशाल को देख कर विशाल से बोलता है.

धीरज- अरे विशाल जी आप आज इधर के रास्ता कैसे भूल गए और ये आपके साथ में कोण है.

विशाल धीरज के बात का जबाब देता उससे पहले hi सूर्यदेव अग्रवाल धीरज को बोलते है.

Suryadev-Ye भी एक डॉक्टर है और इनको विशाल यहाँ पर दामिनी के इलाज करने के लिए लाया है.

सूर्यदेव के बात सुन कर धीरज और डॉ. कैलाश दोनों मुझे एक बार घर कर देखते है फिर धीरज अपने डैड के पास जक कर बोलता है.

धीरज- डैड लगता है की दामिनी के बीमारी ने आपसे इंसान को पहचानने की छमता को छीन लिया है और आप विशाल जी आप भी इतने बड़े बिज़नेस मन हो कर के एक ठग के चाकर में पद गए ये आपको कहा से एक डॉक्टर लग रहा है ये जरूर आप दोनों को पागल बना कर पैसे लूटने के लिए आया होगा.

धीरज के बात सुन कर विशाल को बहुत गुसा आया और वो घुसे से बोलै.

विशाल- धीरज तुम ये क्या बोल रहे हो तुम जरा सोच समझ कर बोलो ये सच में एक बेहतरीन डॉक्टर है.

सूर्यदेव- विशाल सच बोल रहा है धीरज तुम ऐसी किसी का भी मजाक नहीं उदा सकते समझे ये सच में एक डॉक्टर है.

विशाल और अपने डैड के बात सुन कर धीरज कुछ सोचते हुए बोलै.

धीरज- ठीक है मई मन लिया की ये भी एक डॉक्टर है लेकिन अब इसका यहाँ पर कोई भी जरुरत नहीं इस लिए ये अब यहाँ से जा सकता है.

धीरज के बात सुन कर मुझे भी बहुत गुसा आ गया और मई वह से जाने के बारे में सोचने लगा तभी मुझे ध्यान आया की मई तो यहाँ पर कोई और भी काम से आया था इस लिए मई वो काम किये बिना यहाँ से नहीं जा सकता ये सोच कर मई धीरज से बोलै.

मई- धीरज मई यहाँ से चला तो जाऊंगा लेकिन मेरी एक आपसे रिक्वेस्ट है.

धीरज- है बोलो क्या रिक्वेस्ट है क्या तुम्हे पैसा चाहिए.

मई- अरे नहीं धीरज जी भगवन के कृपा से मेरे पास बहुत पैसे है लेकिन मई आपसे ये रेकुस्त करना चाहता हु की क्या मई यहाँ पर रुक कर डॉ. कैलाश को इलाज करते हुए देख सकता हु वो क्या है न की मई डॉ. कैलाश का बहुत नाम सुना है तो एक बार इनको इलाज करते हुए देखना चाहता हु.

धीरज कुछ सोचते हुए डॉ. कैलाश को देखता है डॉ. कैलाश भी मुझे वह पर रुकने का इजाजत दे देता है लेकिन मई देख प् रहा था की धीरज और डॉ. कैलाश मुझे हिन् भावना से देख रहे थे तभी डॉ. कैलाश मेरा मजाक बनाते हुए बोलै.

डॉ. कैलाश- ठीक किया जो तुम खुद रुकने के लिए तैयार हो गए तुम मुझे इलाज करते हुए देख कर कुछ तो सिख hi सकते हो वैसे भी तुम अपने आप को भाग्यशाली समझो की तुम्हे मुझे इलाज करते करते हुए देखने का मौका मिला.

डॉ. कैलाश के बात सुन कर धीरज उनका चापलूसी करते हुए बोलै.

धीरज- अपने ठीक बोलै डॉ. कैलाश सर इसे ऐसा मौका दुबारा कभी नहीं मिलेगा इसे तो आपका एहसान मंद होना चाहिए जो आप अपना स्किल इसे दिखाएंगे.

मई उन दोनों के बात सुन कर मन hi मन मुस्कुराने लगा लेकिन मई उन दोनों के बातो का कोई भी जबाब नहीं दिया.

इधर डॉ. कैलाश दामिनी के चेकउप करने के लिए उसके पास गए और उसके प्लस को चेक करने लगे थोड़ी देर तक चेक करने के बाद डॉ. कैलाश सूर्यदेव अग्रवाल के पास आये और बोले.

डॉ. कैलाश- आपकी बेटी की बहुत hi गंभीर बीमारी है मुझे इसके शरीर में बहुत साडी एनर्जी महसूस हो रही है और वो एनर्जी hi धीरे धीरे इसके शरीर को खाये जा रही है अगर इसके शरीर से वो एनर्जी बहार नहीं निकला तो ये मर जाएगी.

डॉ. कैलाश के बात सुन कर मई हैरान हो गया मेरे हैरान होने का कारन था की डॉ. कैलाश सच में एक अच्छा डॉक्टर थे वो बस दामिनी के पल्स चेक कर के hi ये पता लगा लिया की इसके शरीर में कोई एनर्जी है वही धीरज और सूर्यदेव ने जब सुना की दामिनी की जान भी जा सकती है तो दोनों बेचैन हो गए.

सूर्यदेव- डॉ. कैलाश क्या आप मेरी बेटी को ठीक कर सकते है अगर अपने मेरी बेटी को ठीक कर दिया तो मक आपके लिए वो सब करने के लिए रहूँगा जो आप मुझे बोलेंगे.

धीरज- है डॉ. कैलाश प्लीज किसी तरह से मेरी बेटी को ठीक कर दीजिये.

डॉ. कैलाश दोनों के बात सुन कर मुस्कुराते हुए बोले.

डॉ. कैलाश- मेरे यहाँ होते हुए आपको चिंता करने की जरुरत नहीं है मई आपकी बेटी को ठीक कर दूंगा और इसे ठीक करने के लिए मुझे बस इसके शरीर से उस एनर्जी को बहार निकलना है जो मई अपने एक्यूपंक्चर बिधि से निकलूंगा.

डॉ. कैलाश के बात सुन कर दोनों बाप बीटा खुद हो गए तो वही मई हैरान हो गया और डॉ. खुराना से बोलै.

मई- अपने ये सही बोलै की इस लड़की के शरीर में एनर्जी है लेकिन आप इस लड़की के शरीर से उस एनर्जी को बहार निकल तो इसकी तुरंत मौत हो जाएगी और मई एक और बात आपको बता दू की इस लड़की के शरीर में जो भी एनर्जी है उसका अगर सही से इस्तेमाल किया जाये तो उस एनर्जी से इस लड़की को बहुत ज्यादा फायदा होगा.

मेरे बात को सुन सब हैरान हो गए तो वही डॉ. कैलाश घुसे से मुझे घूरने लगे और घुसे से बोले.

डॉ. कैलाश- तुम जानते भी हो की तुम क्या बोल रहे हो तुम्हे डॉक्टर किसने बना दिया या फिर तुम सच में डॉक्टर न हो कर के कोई फ्रॉड हो तुम्हे खुद कुछ आता नहीं है और तुम मेरे इलाज पर सवाल उठा रहे हो.

डॉ. कैलाश के बात सुन कर धीरज भी मेरे ऊपर छीलते हुए बोलै.

धीरज- मैंने तुम्हे यहाँ रुकने के लिए बोलै वही मेरी गलती थी लेकिन अब नहीं तुम अभी के अभी यहाँ से बहार चले जाओ नहीं तो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा.

धीरज और डॉ. कैलाश के बाटे सुन कर मुझे भी गुसा आ गया और मई घुसे से बोलै.

मई- ठीक है मई चला जाता हु मुझे भी इनके जैसे डॉ. के इलाज करने का तरीका देखने का सुख नहीं है जो अपने घमंड में आ कर किसी के जान भी लेने से पीछे नहीं हटेंगे लेकिन मेरी बार को यद् रखना तुम जिस तरह से उस लड़की के इलाज करने जा रहे हो न उसके लड़की की जान भी हो सकती है चलो विशाल भाई हम यहाँ से चलते है मुझे इनके तमसा देखने का कोई सुख नहीं है.

इतना बोल कर हम वह से जाने लगे इधर डॉ. कैलाश मेरे बातो को सुन कर घुसे पागल होने लगे और जोर से छीलते हुए मुझसे बोले.

डॉ. कैलाश- तुम जहा हो वही खड़े रहे अगर तुम यहाँ से अपने कहे गए बातो को साबित किये बिना गए तो यद् रखना मई तुम्हारा जीना मुश्किल कर दूंगा सायद तुम मुझे अभी अच्छे से जानते नहीं हो या तो अपने बातो का प्रूफ दो या फिर मेरे पैरो में गिर कर मुझसे माफ़ी मांग लो.

इधर धीरज ने जब डॉ. कैलाश को इतने घुसे में देखा और उनकी बातो को सुना तो वो तुरंत अपने गॉर्ड को बोलै.

धीरज- इस लड़के को पकड़ लो इसे यहाँ से बहार मत जाने देना ये जब तक डॉ. कैलाश के ऊपर लगाए गए आरोप को साबित नहीं कर देता या फिर इनके सामने झुक कर माफ़ी नहीं मांग लेता तब तक ये यहाँ से जाना नहीं चाहिए.

इधर मेरी बात को सुन कर और डॉ. कैलाश और धीरज के मुझे बेइज्जती करते हुए देख सूर्यदेव को भी समझ में नहीं आ रहा था की वो किसका साथ दे लेकिन फिर वो कुछ सोच कर डॉ. कैलाश से बोले.

सूर्यदेव- इसके बोलने को वो मतलब नहीं था ये आपको निचा दिखाना नहीं चाहता था ये तो बस आपको एक सुग्गेस्टिव दे रहा था अगर आपको इसके बातो का बुरा लगा हो तो मई इससे बोलता हु ये आपसे माफ़ी मांग लेगा लेकिन प्लीज आप गुसा मत कीजिये (फिर मेरे तरह घूम कर बोले) डॉ. प्रतिक प्लीज आप इनसे माफ़ी मांग लीजिये और आप यहाँ से चले जाइये.

जब धीरज और डॉ. कैलाश ने सूर्यदेव के मुँह से डॉ. प्रतिक सुना तो दोनों चौक गए फिर डॉ. कैलाश सूर्यदेव से बोले.

डॉ. कैलाश- आप अभी इस लड़के का क्या नाम लिए.

सूर्यदेव- इनका नाम डॉ. प्रतिक है क्यों क्या हुआ कुछ बात है क्या.

सूर्यदेव के बात सुन कर डॉ. कैलाश कुछ सोचते हुए बोले.

डॉ. कैलाश- कही ये वही डॉ. प्रतिक तो नहीं हो कुछ दिन पहले सिटी हॉस्पिटल में मरीजों का इलाज किया था और लोग उसे चमत्कारी डॉक्टर के नाम से बुलाने लगे थे.

डॉ. कैलाश के बात सुन कर इस बार सूर्यदेव अग्रवाल भी चौक गए क्युकी उन्हें तो ये तो जानते hi नहीं थे की मई वही चमत्कारी डॉक्टर हु या फिर कोई दूसरा इस लिए वो चौक गए थे वो डॉ कैलाश के बातो का कुछ जबाब देते उससे पहले hi विशाल बोलै पड़ा.

विशाल- है अपने सही बोलै ये वही डॉक्टर है जिसे सब चमत्कारी डॉक्टर के नाम से जानते है.

विशाल के बात सुन कर वह मौजूद सरे लोग हैरान हो गए फिर अपने हैरानी को काबू करते हुए डॉ. कैलाश मुझसे बोलै.

डॉ. कैलाश- क्या तुम सच में डॉ. प्रतिक हो वही चमत्कारी डॉक्टर जो सिटी हॉस्पिटल में कुछ दिन पहले मरीजों का इलाज किया था.

मई- जी मई कोई चमत्कारी डॉक्टर नहीं हु लेकिन है मई hi वो डॉ. प्रतिक हु जो कुछ दिन पहले सिटी हॉस्पिटल में मरीजों का इलाज किया था वैसे आप ये सब क्यों पूछ रहे है.

डॉ. कैलाश- सॉरी डॉ. प्रतिक मुझे माफ़ कर दीजिये मुझे आपके साथ ऐसा बेहेवियर नहीं करना चाहिए था और रही बात की मई आपसे वो सब क्यों पूछ रहा था तो उसका कारन ये है की सरे लोग जानते है की आज तक मई जिसे भी इलाज किया वो पूरी तरह से ठीक हो गया लेकिन ये बात पूरी तरह से सच नहीं है क्युकी मैंने एक ऐसे मरीज का भी इलाज किया है जो मेरे इलाज से भी ठीक नहीं हो पाया यहाँ तक की मई उसके बीमारी को भी पकड़ नहीं पाया हु इसी लिए मई सिटी हॉस्पिटल आ रहा था तुमसे मिलने क्युकी मैंने तुम्हारे बारे में बहुत कुछ सुन रखा था लोग तुम्हे चमत्कारी डॉक्टर बोलते है तो मई सोचा की तुमसे मिल कर तुम्हे एक बार उस मरीज को इलाज करने के लिए रिक्वेस्ट करू.

डॉ. कैलाश के बात सुन कर सरे लोग हैरान हो गए किसी को उनके बातो पर बिस्वास hi नहीं हो रहा था की जो डॉ. आज तक किसी से सही से बात नहीं करता था वो आज डॉ. प्रतिक से मदत मांगने के लिए आये है तभी धीरज जल्दी से मेरे पास आया और मुझसे बोलै.

धीरज- मुझे भी माफ़ कर दीजियेगा डॉ. प्रतिक मई आपको पहचान नहीं पाया इसके चलते मई आपको भला बुरा बोल दिया दरअसल बात ऐसी है की जब से मेरी बहन का तबियत ख़राब हुआ है न जाने कितने डॉक्टर पैसे के लालच में आते है इस लिए मुझे लगा की आप भी उन्ही में से है इस लिए मई आपसे माफ़ी चाहता हु.

मई- कोई बात नहीं धीरज जी मई समझ सकता हु मुझे आपके बातो का बुरा नहीं लगा वैसे अब इन सब बातो को छोड़िये और मिस दामिनी का इलाज सुरु कीजिये.

मेरे बात को सुन कर सब डॉ. कैलाश के तरफ देखने लगे तभी डॉ. कैलाश मेरे पास आये और मुझसे बोले.

डॉ. कैलाश- डॉ. प्रतिक अब जब हम सब आपके बारे में जान hi गए है तो अब ाफी दामिनी का इलाज कीजिये और है आप अभी जो बोले थे की इस लड़की में जो एनर्जी है अगर उसे बहार निकला गया तो ये लड़की मर जाएगी तो क्या आप मुझे ये डिटेल्स में समझा सकते है की आखिर इसके शरीर से वो एनर्जी जो इसको नुकशान पंहुचा रहा है उसे निकलने के बाद ये क्यों मारेगी.

डॉ. कैलाश के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- जब आप इतना बोल रहे है तो मई इस लड़की का इलाज करने के लिए तैयार सबसे पहले आप दोनों (सूर्यदेव और धीरज) मुझे ये बताइये की मिस दामिनी बीमार होने से पहले कुछ ऐसी चीज खायी थी क्या जिसके बारे में आप सब नहीं जानते जैसे कोई जड़ी बूटी या कोई फ्रूट वगैरह.

मेरी बात को सुन कर सूर्यदेव अग्रवाल और धीरज अग्रवाल दोनों सोच में पद गए कुछ देर सोचने के बाद सूर्यदेव अग्रवाल बोले.

सूर्यदेव- मुझे तो कुछ ऐसा यद् नहीं आ रहा है शायद वो बहार कही खायी होगी.

धीरज- है वो बहार hi कुछ खायी हो क्युकी वो बीमार होने से पहले घूमने के लिए शिमला गयी थी लेकिन आप ये क्यों पूछ रहे.

मई- कोई बात नहीं आप सब को नहीं पता तो ये खुद दामिनी hi बता देगी वो क्या खायी थी और रही बात मई ये क्यों पूछ रहा हु तो मई आप लोगो को बता दू की दामिनी के शरीर में जो एनर्जी है वो कोई आम एनर्जी नहीं है बल्कि वो स्प्रिचैल एनर्जी है ये एनर्जी मार्टिकल आर्ट्स योद्धा के लिए एक वरदान है तो वही एक आम आदमी के लिए पोईसिओं क्युकी एक मार्टिकल आर्ट्स योद्धा अपना कल्टीवेशन कर एक स्प्रिचैल एनर्जी को काबू करते है जिससे उनकी शक्ति और लेवल दोनों बढ़ता है तो वही एक आम आदमी कल्टीवेशन नहीं कर पता जिससे उसके शरीर स्प्रिचैल एनर्जी को बर्दास्त नहीं कर पति है और वो स्प्रिचैल एनर्जी उस आदमी के शरीर को अंदर से hi खाने लगता है जिसके कारन उस आदमी के शरीर दुबला होते जाता है और आखिर में वो आदमी वही मर जाता है दामिनी के साथ भी यही हो रहा है अगर हम जबरदस्ती उस एनर्जी को बहार निकालेंगे तो वो एनर्जी और स्पीड में दामिनी के शरीर को नुकसान पहुंचाएगी और आखिर में इसका मौत हो जायेगा.

मेरे बात को सुन कर सब हैरान हो गए तो वही सूर्यदेव अग्रवाल और धीरज अग्रवाल दोनों दामिनी के मरने के बात सुन कर दर जाते है तभी सूर्यदेव अग्रवाल मेरे सामने अपने दोनों हाथ जोड़ कर मुझसे बोलते है.

सूर्यदेव- प्लीज आप मेरी बेटी को बचा लीजिये अगर अपने ऐसा कर दिया तो मई हमेशा आपका एहसान मंद रहूँगा और आप मुझे जो भी करने के लिए बोलेंगे मई खुसी खुसी वो करूँगा.

मई- आप चिंता मत कीजिये मई आपकी बेटी को कुछ भी नहीं होने दूंगा ये समय आपको दुखी होने का नहीं है आप तो खुसी मनाइये की आपके यहाँ पर जल्द hi एक ग्रांडमास्टर का जनम होने वाला है.

मेरे बात को सुन कर सब हैरान तो हुए hi लेकिन साथ में कंफ्यूज भी हो गए की मई किस बात के लिए खुशियां मानाने के लिए बोल रहा हु तभी धीरज मुझसे बोलै.

धीरज- आपके बोलने का मतलब मई समझ नहीं पाया आप कहना क्या चाहते है और हम किस बात के खुसी मनाये.

धीरज के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- अरे यार मई अभी hi तो बोलै की तुम्हारे घर जल्द hi एक मार्टिकल आर्ट्स के ग्रांडमास्टर का जनम होने वाला है.

इतना बोल मई उन लोगो के तरफ देखने लगा जब मई उनके चेहरा देखा तो पता चला की मेरी बात किसी को समझ में नहीं आया इस लिए मई फिर उनको समझते हुए बोलै.

मई- लगता है आप लोग मेरे बातो का मतलब समझे नहीं कोई बात नहीं मई अभी आप सब को समझाता हु दरअसल बात ऐसी है की आपके बेटी के शरीर में जो एनर्जी है वो स्प्रिचैल एनर्जी है और स्प्रिचैल एनर्जी से मार्टिकल आर्ट्स योद्धा के ताकत और लेवल बढ़ते है इस लिए मई दामिनी के अंदर जो स्प्रिचैल एनर्जी है उसे उसके शरीर में hi कैद कर दूंगा जिससे ये होगा की वो धीरे धीरे अभ्यास कर के थोड़ी थोड़ी एनर्जी को उस कैद से बहार निकलेगी और अपने मार्टिकल छमता को बढ़ाएगी ये एनर्जी इतना ज्यादा है की वो अगर सही से कल्टीवेशन करे तो ग्रांडमास्टर के ऊपर के लेवल पर भी जा सकती है इसी लिए मैंने आपको बोलै की आपके घर एक ग्रांडमास्टर को जनम होने वाली है.

मेरी बातो को सुन कर जहा सूर्यदेव अग्रवाल और धीरज अग्रवाल खुस थे तो वही डॉ. कैलाश और विशाल दोनों हैरान हो गए थे.

डॉ. कैलाश- क्या इस एनर्जी से ये भी हो सकता है ये तो मुझे पता hi नहीं था आप तो सच में एक महँ और चमत्कारी डॉक्टर है अब आप जल्दी से दामिनी का इलाज कीजिये मुझे भी आपको इलाज करते हुए देखने का बहुत मन है.

मई- ठीक है.

इतना बोल कर मई दामिनी के पास गया और अपने स्टोरेज रिंग से सिल्वर नीडल निकला और सरे नीडल को हवा में उछाल दिया फिर मई अपने शक्ति से उन सरे नीडल को कण्ट्रोल करते हुए दामिनी के एक्यूपंक्चर पॉइंट में डालने लगा थोड़ी देर में जब सरे नीडल दामिनी के एक्यूपंक्चर पॉइंट में लग गए तो फिर मई अपने शक्ति से दामिनी के शरीर में बाह रहे स्प्रिचैल एनर्जी को कण्ट्रोल करने लगा और उसको एक जगह पर इक्कठा करने लगा जब सरे एनर्जी एक जगह पर इक्कठा हो गयी तो मई उस पर एक सील चढ़ा दिया लेकिन मुझसे यहाँ पर एक गलती हो गया मई जब स्प्रिचैल एनर्जी पर सील चढ़ा रहा था तो ये ध्यान hi नहीं दिया की लगभग उन सरे स्प्रिचैल एनर्जी के 10% एनर्जी उस सील के बहार hi रह गया था खैर जब मेरा ध्यान सील के बहार वाले स्प्रिचैल एनर्जी पर गया तो मई उससे अपने शक्तियों से काबू करते हुए दामिनी के शरीर में चारो तरफ घूमना सुरु कर दिया जिसका कारन ये हुआ की वो स्प्रिचैल एनर्जी मेरे शक्तियों से मिल कर दामिनी के शरीर को अंदर से मजबूत करने लगे यहाँ तक की दामिनी के हड़िया भी मजबूत हो रही थी.

फिर उन सरे स्प्रिचैल एनर्जी जो की सील से बहार थी उनको दामिनी के शरीर की बोनस और मसल्स ने अपने अंदर सोख लिया इसके बाद मई दामिनी के शरीर से सरे सिल्वर नीडल को बहार निकल लिया इसके बाद मई ध्यान से दामिनी को देखने लगा जैसे hi दामिनी के शरीर में बाह रहे स्प्रिचैल एनर्जी पर सील चढ़ा तो दामिनी के चेहरे पर रौनक वापस आने लगी अब वो पहले से बेहतर लग रही थी फिर थोड़ी देर बाद hi दामिनी को होस आ गया दामिनी को होश आया देख कर दोनों बाप बेटे बहुत खुस हो गए और मेरे सामने अपने घुटनो पर बैठ कर बोले.

सूर्यदेव- आपका बहुत बहुत धन्यवाद् अपने मेरी बेटी को ठीक कर दिया मई आपके इस उपकार का बदला अपने जान दे कर भी चुकौ तो वो भी काम hi होगा आज से आपके लिए मेरे घर का दरवाजा हमेसा खुला रहेगा बस आप एक बार मुझे आवाज दीजियेगा मई आपके लिए वो सब करूँगा जो आप मुझे बोलेंगे.

धीरज- डॉ. प्रतिक मुझे माफ़ कर दीजिये मैंने आपके जैसे महँ डॉक्टर के इंसल्ट करने की कोशिश की.

मई- अरे आप लोग ये क्या कर रहे है प्लीज उठ जाइये ऐसे मेरे सामने झुक कर मुझे लज्जित न कीजिये और रही बात दामिनी के इलाज की तो एक डॉक्टर का धर्म होता है एक मरीज का इलाज करना इस लिए मई आप पर कोई उपकार नहीं किया है.

मेरे बात सुन कर सब मुझे गर्व के भाव से देखने लगे तभी डॉ. कैलाश मुझसे बोले.

डॉ. कैलाश- आप सच में एक महँ डॉक्टर है प्रतिक जी आज के ज़माने में ऐसा डॉक्टर मिलना बहुत मुश्किल है आपने आज ये साबित कर दिया की आपके जैसा महँ डॉक्टर अभी के ज़माने में कोई नहीं है आप जितना अच्छा डॉक्टर है उतना hi अच्छा इंसान भी है.

मई डॉ. कैलाश के मुँह से अपना तारीफ सुन कर शर्माने लगा क्युकी अपना तारीफ सुनने का मई अदि नहीं था खैर मई डॉ. कैलाश के बातो को इग्नोर करते हुए सूर्यदेव से बोलै.

मई- सूर्यदेव जी आपके बेटी को होश आ गया है अब आप जा कर उससे मिल सकते है और है मई आपको 1 गोली दे रहा हु आप अभी दामिनी को उस गोली को खिला दीजियेगा.

इसके बाद मई सबसे छुपा कर अपने स्टोरेज रिंग से इंस्टेंट रिकवरी पिल का 1 गोली निकला और सूर्यदेव अग्रवाल को दे दिया फिर सूर्यदेव अग्रवाल अपने बेटी के पास गए और उस गोली को उसे खिला दिए गोली खाने के करीब 5 मिनट बाद hi गोली अपना असर दिखाना सुरु कर दिया जिसके कारन दामिनी के शरीर में हुए सरे नुकशान धीरे धीरे कर के ठीक होने लगे जब वो पूरी तरह से ठीक हो गयी तो वो उठ कर अपने बीएड पर बैठ गयी ये देख कर सब हैरान हो गए और आँखे फाड् कर सब दामिनी को hi देखे जा रहे थे.

इधर दामिनी ने देख की सब उसे घर रहे है तो वो अपने डैड से बोली.

दामिनी- डैड आप सब इस तरह से मुझे क्यों घर कर देख रहे है क्या कोई बात है क्या और वैसे ये लोग कोण है और मेरे रूम में क्या कर रहे है.

दामिनी के बात सुन कर सूर्यदेव खुसी से दामिनी के पास गए और उसे देखते हुए बोले.

सूर्यदेव- बीटा तुम ठीक तो हो न तुम इस तरह से उठ कर बैठ क्यों गयी तुम अभी रेस्ट करो.

सूर्यदेव के बात सुन कर दामिनी बोली.

दामिनी- है डैड मई एकदम ठीक हो गयी हु अब मेरे शरीर में कोई दर्द भी नहीं है अब मई खुद पहले से भी ज्यादा ताकतवर महसूस कर रही हु मुझे ऐसा लग रहा है के मई अपने एक मुके से किसी पहाड़ को भी तोड़ सकती हु वैसे डैड अपने बताया नहीं की ये लोग कोण है और मेरे रूम में क्या कर रहे है.

सूर्यदेव- बीटा ये है डॉ. प्रतिक इन्होने hi तुम्हे ठीक किये है नहीं तो मई तो मन hi चूका था की तुम अब कभी ठीक नहीं होगी और ये भी एक डॉक्टर hi है इनका नाम है डॉ. कैलाश ये भी यहाँ पर तुम्हारा इलाज करने hi आये थे.

सूर्यदेव के बात सुन कर दामिनी मेरे सामने अपने हाथ जोड़ कर बोली.

दामिनी- थैंक यू डॉ. डॉक्टर प्रतिक आपने किसी फ़रिश्ते की तरह आ कर मेरी जान बचा ली.

मई- अरे इसमें थैंक यू वाली कोई बात नहीं है मेरा तो फ़र्ज़ hi है मरीजों को इलाज करना वैसे आप मुझे बता सकती है की आप बीमार होने से पहले ऐसा कुछ खायी थी जो आपको नहीं खाना चाहिए था.

मेरे बात को सुन कर दामिनी कुछ सोच में पद गयी फिर कुछ देर तक सोचने के बाद बोली.

दामिनी- है यद् आया जब मई अपने फ्रेंड्स के साथ शिमला गयी थी तब हम लोग एक पहाड़ पर घूमने के लिए गए थे वही पर मई अपने दोस्तों के साथ बिछड़ गयी थी और जंगल के अंदर चली गयी थी तब मुझे वह पर एक फल मिला था जो देखने में एक डैम एप्पल की तरह था तो मई उसे से एप्पल समझ कर खा गयी थी लेकिन मई जैसे hi मैंने वो फल खाया वैसे hi मुझे लगा की मेरे शरीर में कोई जलती हुयी लावा दाल दिया हो फिर मुझे पता hi नहीं चला की कब मई वह पर गिर कर बेहोश हो गयी फिर करीब 1 घंटे बाद मुझे होश आया तो सब कुछ सामान्य था अब मुझे न कोई दर्द हो रहा था और न hi जलन हो रही थी इस लिए मई उन सब बातो को वही पर छोड़ कर अपने दोस्तों को ढूंढा और फिर वापस मुंबई आ गयी.

दामिनी के बात सुन कर सबको समझ में आ गया था की उसकी शरीर में वो स्प्रिचैल एनर्जी कहा से आयी थी फिर मई उसे समझते हुए बोलै.

मई- देखो दामिनी अपने जो फल खाया था वो कोई आम फल नहीं था वो एक दिव्या फल था जिसमे बहुत साडी स्प्रिचैल एनर्जी थी ये तो अच्छा हुआ की मई समय रहते आपका इलाज कर दिया नहीं तो सायद आपका बचना भी मुश्किल हो जाता.

दामिनी- एक बार फिर से आपको थैंक यू अगर आप न होते तो मई जिन्दा नहीं रहती अगर आपको मुझसे या मेरे परिवार से कभी भी कोई भी काम होगा तो एक बार जरूर यार कीजियेगा.

मई- वैसे मई आपसे एक और बात बोलना तो भूल hi गया आपके से स्प्रिचैल एनर्जी निकली नहीं है बल्कि मई उसे अंदर hi सील कर दिया है अब आपको डेली मैडिटेशन करना होगा और मई आपको एक मैरिटल आर्ट्स का तकनीक दूंगा जिसे आपको डेली अभ्यास करना होगा जब आप डेली मैडिटेशन करने के बाद उस तकनीक का अभ्यास करेंगी तो धीरे धीरे आपके शरीर में सील हुआ स्प्रिचैल एनर्जी आपके शरीर से मिल जायेगा और आप बहुत ताकतवर हो जाएँगी और 1 साल के अंदर hi आप एक ग्रांडमास्टर बन जाएँगी.

मेरे बात को सुन कर दामिनी खुस हो गयी और वो फिर से मुझे थैंक यू बोलने लगी फिर मई धीरज से एक पेन और नोटबुक मंगाया और उस पर एक मार्टिकल आर्ट्स का तकनीक लिख कर दे दिया इधर डॉ. कैलाश कब से मुझसे बात करने की कोशिश कर रहे थे लेकिन वो पहले मुझसे जैसा बेहेवियर किया था उसे देख कर उनको मुझसे कुछ बोलने की हिम्मत नहीं हो रही थी फिर वो खुद में बहुत हिमत जूता कर मुझसे बोले.

डॉ. कैलाश- डॉ. प्रतिक जी मई यहाँ जिस काम से आया था वो तो आप कर दिए इस लिए अब मुझे यहाँ रुकने का कोई मतलब नहीं बनता इस लिए मई अब चलता हु लेकिन जाने से पहले क्या आप मुझे अपना no. दे सकते है दरअसल मुझे आपसे एक बहुत जरुरी काम था लेकिन मई उसे आपको यहाँ नहीं बता सकता.

मई- ठीक है.

फिर मई डॉ. कैलाश को अपना no. दे दिया इसके बाद वो वह से चले गए उनके जाने के बाद मई विशाल को इशारा किया तो विशाल सूर्यदेव अग्रवाल के पास जा कर बोलै.

विशाल- सूर्यदेव जी दरअसल मई और प्रतिक आपके पास किसी सुर काम से आये थे.

विशाल के बात सुन कर सूर्यदेव अग्रवाल चौक गए और फिर वो चौकते हुए बोले.

सूर्यदेव- है मुझे यद् आया अपने मेरे पास सायद उसी काम से रिलेटेड बात करने के लिए कॉल किया था लेकिन मई अपनी बेटी क्र बीमारी के टेंसन में था इस लिए आपसे बात नहीं कर पाया अब आप मुझे बता सकते है क्या काम था आपको मुझसे अगर मेरे बस में हुआ तो मई आपका मदत जरूर करूँगा.

सूर्यदेव अग्रवाल के बात सुन कर विशाल थोड़ी देर चुप रहा फिर वो कुछ सोचते हुए बोलै.

विशाल- दरअसल काम मुझे नहीं प्रतिक का था.

सूर्यदेव- है प्रतिक जी आप बताइये आपको मुझसे क्या काम था मुझसे आपका वो काम करने में बहुत खुसी होगी.

सूर्यदेव के बात सुन कर मई उनसे बोलै.

मई- दरअसल मई एक आपके पास इस लिए आया था की मुझे कुछ सामने का ऑक्शन करवाना था और मई चाहता हु की वो ऑक्शन इतना बड़ा हो की उसमे भाग लेने के लिए देश के हर कोने से आदमी आये.

मेरे बात को सुन कर सूर्यदेव अग्रवाल चौक गए फिर वो मुझसे बोले.

सूर्यदेव- क्या मई जान सकता हु की आप ऐसी कोण सी चीज का ऑक्शन करवाना चाहते है जिसमे आप पुरे देश भर से आदमी बुलाने के लिए बोल रहे है.

मई- है है क्यों नहीं दरअसल मई ऑक्शन में 5 चीजे ऑक्शन करवाना चाहता हु जिसमे पहला चीज है वो दवा है जो मई आपको दामिनी को खिलने के लिए बोलै था उस दवा को मई इंस्टेंट रिकवरी पिल बोलता हु इसको खाने से शरीर में अगर किसी तरह का कोई भी नुकसान हुआ है तो वो 5 मिनट के अंदर hi ठीक हो जाता है.

मई अभी बोल hi रहा था की तभी मेरे बात को बिछ में काट कर धीरज बोलै.

धीरज- क्या सच में वो दवा इतना खास है.

मई- है और उसका रिजल्ट आपके सामने है आपको क्या लगता है की आपकी बहन के शरीर में अंदर के इंटरनल झखम अपने आप भर नहीं वो सब मेरे दवा का कमल था और मेरी दूसरी चीज है है लेवल उप गोली इसको खाने से कोई योद्धा अपने लेवल एक इ स्टार ऊपर बढ़ा सकता है है लेकिन ये काम सिर्फ हाफ ग्रांडमास्टर तक hi करता है.

सूर्यदेव- क्या सच में आपके पास ऐसा दवा है.

मई- है सच में वो दवा मेरे पास है मई आपको सारा चीज दिखाऊंगा पहले आप मेरे सरे सामने के बारे में जान लीजिये मेरी तीसरी चीज है है संजीवनी गोली इसको खाने से आपके शरीर को बहुत तरह के फायदे मिलेंगे इसको खाने से लोग बूढ़ा नहीं होते है और बूढ़े लोगो के ऊपर जो झुरिया आ जाती है उसे भी ये दवा ठीक कर देगी और आपके सर से बल गायब हो गए है या विगत हो गए है तो ये दवा आराम से बल ऊगा देगी और कला कर देगी इसको खाने के बाद अगर आपकी उम्र 50 साल हो रहा है तो आपको इस दवा को खाने के बाद आप 50 साल की नहीं बल्कि 30 साल के लगेंगे और सबसे बड़ी बात की इस दवा को खाने के बाद आपको किसी भी तरह के बीमारी नहीं होगी इसका और भी कई तरह के फायदा है.

मेरे बातो को सुन कर वह पर मौजूद सरे लोग हैरान थे सिर्फ विशाल को छोड़ कर क्युकी उसे पहले से hi सब पता था खैर मई बात को आगे बढ़ाते हुए बोलै.

मई- मेरी चौथी चीज एक स्टोरेज रिंग है इस स्टोरेज रिंग के अंदर लगभग 30 फ़ीट जगह होगी जिसमे आप अपने सरे सामान को रख कर कही भी आ जा सकते है और मेरी पांचवी और आखरी चीज है एक दिव्या तलवार जिसमे आग की शक्ति है आप इस तलवार के वॉर से पूरी एक सेना को रख में बदल सकते है.

मेरे बात को सुन कर सूर्यदेव अग्रवाल धीरज अग्रवाल और दामिनी तीनो के तीनो हैरान हो गए उन्हें मेरी बातो पर यकीं hi नहीं हो रहा था तभी धीरज मुझसे बोलै.

धीरज- आप मुझसे मजाक कर रहे है न प्रतिक जी क्युकी ये स्टोरेज रिंग और दिव्या तलवार तो सिर्फ कहानियो में hi होते है असल जिंदगी में ये सब थोड़े न होता है.

धीरज के बात सुन कर दामिनी और अग्रवाल भी उसे है में है मिलाने लगे उन सब को मेरी बातो पर यकीं न करते हुए देख कर मई उनके सामने hi अपने स्टोरेज रिंग से एक लौ लेवल का स्टोरेज रिंग निकला और साथ में एक तलवार भी निकल लिया जिसमे एक तत्त्व की शक्ति थी.

जब उन लोगो ने मुझे एक अंगूठी के अंदर से ये सब निकलते हुए देखा तो सब हैरान हो गए और उन्हें मेरे बातो पर बिस्वास होने लगा फिर मई उस तलवार में सोने स्प्रिचैल एनर्जी को डाला तो वो तलवार एक्टिव हो गया और उसमे से आग निकलने लगी ये देख कर तो वो लोग और हैरान हो गए मई उनको इस तरह से हैरान देख कर मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- आपने देखा न की मई इन सब चीज कर अपने अंगूठी से निकला है दरअसल मेरी ये अंगूठी भी एक स्टोरेज रिंग है और आप सब इस दिव्या तलवार के करिश्मा भी देख लिया तो अब तो आपको मेरे बातो पर बिस्वास हो गया होगा न.

मेरी बात को सुन कर वो सब अपने होश में आये और सूर्यदेव अग्रवाल मुझसे बोले.

सूर्यदेव- आप सच में एक महँ आदमी है क्युकी ये सब दिव्या सामान तो सिर्फ एक महँ आदमी के पास hi होगा न लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा है जब आपके पास इतने अनोखे सामान है तो आप इसे ऑक्शन क्यों करवाना चाहते है.

मई सूर्यदेव के बाटे सुन कर कुछ सोचने लगा फिर उनको जबाब देते हुए बोलै.

मई- दरअसल मुझे बहुत सरे पैसे की जरुरत है इस लिए मई इसे ऑक्शन करवाना चाहता हु तो क्या आप मेरे इन सरे सामानों को ऑक्शन करवाने में मदत करेंगे आप चिंता मत कीजिये मेरे सामान चाहे जितने में भी ऑक्शन हो मई उसका 15% आपको दे दूंगा.

मेरे बात को सुन कर वो तीनो खुस हो गए फिर सूर्यदेव अग्रवाल मुझसे बोले.

सूर्यदेव- मई इनका ऑक्शन जरूर करवाऊंगा और मुझे इनको ऑक्शन करवाने के लिए कोई कमीशन फी भी नहीं चाहिए क्युकी अगर मई इनका ऑक्शन करवा दिया तो वैसे भी मेरे ऑक्शन बिज़नेस का नाम पुरे दुनिया में फैल जायेगा क्युकी आज तक किसी ने भी ऐसे सामने का ऑक्शन नहीं करवाया है.

मई- सॉरी सूर्यदेव जी लेकिन मई ये काम आपसे फ्री में नहीं करवाना चाहता हु इस लिए आपको 15% तो लेना hi होगा.

सूर्यदेव- जब आप इतना बोल रहे है तो ठीक है मई ऑक्शन करवाने के लिए तैयार हु अब आप इनका स्टार्टिंग प्राइस भी बता दीजिये.

मई- ठीक है दिव्या तलवार का स्टार्टिंग प्राइस 500 करोड़ और स्टोरेज रिंग का 200 करोड़ होगा रही बात उन गोलियों की तो संजीवनी गोली का 50 लाख और बक्ति दोनों का 30 30 लाख होगा.

मेरे बात को सुन कर वो लोग अपने गर्दन को है में हिलने लगे फिर सूर्यदेव अग्रवाल मुझसे बोले.

सूर्यदेव- मई आज hi पुरे इंडिया में ये खबर फैला दे रहा हु की आज से 10 दिन बाद अग्रवाल फॅमिली एक ऑक्शन ऑर्गेनिसे करेगा जिसमे एक दिव्या चीज भी होगा.

मई- ठीक है अब मेरे यहाँ का काम ख़तम हो गया है इस मई अब चलता हु.

फिर मई वह से जाने से पहले मई अपने रिंग से 3 संजीवनी गोली निकला और उन तीनो को दे दिया और बोलै.

मई- ये संजीवनी गोली है आप तीनि सोने से पहले इस गोली को खा लीजियेगा इससे आप तीनो को बहुत फायदा होगा ये मेरे तरफ हमारे डील फाइनल होने का आप सबके लिए गिफ्ट है.

इतना बोल कर मई और विशाल वह से निकल गए फिर रस्ते में मैंने देखा की बहुत सरे पुलिस वाले सभी आते जाते व्हीकल को चैक कर रहे थे ये देख कर मई विशाल से पूछा.

मई- विशाल भाई ये लोग आज इतने स्ट्रिक्टली व्हीकल क्यों चेक कर रहे है आज सहर में कुछ प्रॉब्लम हुयी है क्या.

मेरे बात को सुन कर विशाल उन पुलिस वालो को देखते हुए बोलै.

विशाल- अरे यार वो जतिन भानुशाली है न जिसने मुझसे स्टोन गैंबलिंग के समय चैलेंज लगाया था उसी के भाई का कल रत को उसी फार्महाउस पर मर्डर हो गया है और उसके साथ करीब 70 लोग थे जो आग में जल कर मरे गए सायद पुलिस वाले उसी का छानबीन कर रहे है.

मई- वह अच्छा ऐसा है क्या.

फिर मुझे यद् आया की जब मई रॉकी को मर रहा था तो उसने मंटू यादव के साडी गैरकानूनी धंधो के बारे में बताया था जिसे मई रिकॉर्ड कर लिया था फिर मई कुछ सोचते हुए विशाल से बोलै.

मई- विशाल भाई क्या आपके जान पहचान में कोई ऐसा पुलिस अफसर है जो ईमानदार हो और ुचे पद पर हो.

मेरे बात को सुन कर विशाल कुछ सोचने लगा फिर कुछ देर तक सोचने के बाद मुझसे बोलै.

विशाल- है एक है तो लेकिन तुमको उससे क्या काम है.

मई- मेरे पास किसी के गलत कारनामो का साबुत है और मई चाहता हु की उसे कड़ी से कड़ी सजा हो.

मेरे बात को सुन कर विशाल हैरान होते हुए बोलै.

विशाल- क्या तुम सच बोल रहे हो (फिर कुछ सोचते हुए) लेकिन वो है कोण जिसके गलत कारनामो का साबुत तुम्हारे पास है.

विशाल के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- उसका नाम मंटू यादव है और मेरे पास मंटू यादव और उसके बेटे के गैरकानूनी धंधो का सारा साबुत है और मई चाहता हु की उसे कड़ी से कड़ी सजा मिले.

मेरे बात को सुन कर विशाल हैरान हो गया और फिर कुछ सोचते हुए बोलै.

विशाल- ये कही वही मंटू यादव तो नहीं है जो पहले एक गैंगस्टर हुआ करता था और अब वो एक मला है.

मई- है वही मंटू यादव है.

मेरे बात को सुन कर विशाल कुछ सोचते हुए बोलै.

विशाल- हम्म मामला तो बहुत गंभीर है तुम्हे पुलिस के पास जाने से अच्छा है की उसके सरे साबुत को इंटरनेट पर दाल दी जिससे तुम्हारे बारे में किसी को पता भी नहीं चलेगा और पुलिस वाले मंटू को छोड़ेंगे भी नहीं.

मई- है तुमने सही बोलै मई ऐसा hi करता हु तुम एक काम करो मुझे एक अच्छे से शॉप पर ले कर चलो मुझे एक अच्छा सा लैपटॉप लेना है.

विशाल- ठीक है चलो.

इसके बाद हम दोनों एक लैपटॉप के शॉप पर गए वह से एक एप्पल का लैपटॉप लिया फिर वह से निकल गए इसके बाद मई अपने मोबाइल से लैपटॉप में नेट कनेक्ट किया और एक फेक ईद बना कर वो वीडियो उस पर दाल दिया और निचे लिखा मुंबई पुलिस वालो को सुपर बॉय का गिफ्ट जैसे hi वीडियो इंटरनेट पर आया तहलका माछ गया अब वो वीडियो इंटरनेट पर इतना छ गया की उसे हर कोई देख लिया था उस वीडियो को जो भी देख रहा था वो मंटू यादव को गली दे रहा था.

इधर मुंबई के कम हाउस में कम अपने चेयर पर बैठ कर कुछ काम कर रहे थे तभी उनका प् वह पर आया और उनको वीडियो दिखाया जिसे देख कर वो घुसे से बोले.

कम- इस मंटू यादव ने तो हद hi कर दिया अब अपपोसिशन पार्टी वाले इस बात को लेकर हंगामा मचाएंगे और अगर ये मेरे पार्टी में रहा तो हमारा पार्टी बदनाम हो जायेगा इस लिए इसे पार्टी से निकलना जरूर हो गया है तुम अभी के अभी मंटू यादव को मला पद से हटा दो और मंटू यादव और उसके बेटे खिलाफ अरेस्ट वारंट निकालो और है कमिश्नर को कॉल कर के बोलो की वो किसी भी हालत में गिरफ्तार हो जाना चाहिए.

कम के बात सुन कर उनका प् कुछ सोचते हुए बोलै.

प्- लेकिन सर अगर हम मंटू यादव को मला के पद से हटाएंगे तो बहुत प्रॉब्लम हो जाएगी क्युकी मंटू यादव के हाथ में हमारे पार्टी के 5 मला है और अगर हम मंटू यादव को निकल दिए तो वो सब हमारे पार्टी छोड़ कर ओप्पोसिशन के पार्टी में चले जायेंगे.

प् के बात सुन कर कम सोच में पद गया फिर वो थोड़ी देर सोचने के बाद बोलै.

कम- तुम उन सब की चिंता मत करो मई उन सब को संभल लूंगा.

प्- लेकिन सर आप उनको संभालेंगे कैसे क्युकी जहा तक मई जनता हु वो मंटू यादव के लिए बहुत वफादार है.

कम- वो चाहे कितने भी वफादार हो लेकिन जब उनके पास मला का पद या फिर दोस्ती चुनने का प्रस्ताव आएगा तो वो लोग अपना मला का पद hi एक्सेप्ट करेंगे और साथ में मई उन्हें बहुत सरे पैसा भी दूंगा.

कम के बात सुन कर वो प् बोलै.

प्- ठीक है सर लेकिन अब मुझे क्या करना है.

कम- तुम एक काम करो सबसे पहले तुम मंटू यादव के खिलाफ अरेस्ट वारंट निकालो और कमिश्नर को कॉल कर के उसे गिरफ्तार करने के लिए बोलो और है मंटू यादव को भी कॉल कर के बोल देना की उसे मला के पद से हटा दिया गया है और रही बात इसके दोस्तों की तो उन लोगो को कॉल कर के बोल दो की ये अगर उन्हें मला के पद पर बने रहना है तो वो लोग मंटू सिंह के साथ छोड़ दे इससे उन लोगो को न सिर्फ मला के कुर्शी बचेगी बल्कि पैसे भी मिलेंगे.

कम के बात सुन कर प् ने तुरंत कमिश्नर को कॉल लगाया और उसे कम का आर्डर सुना दिया जिसे सुन कर कम तुरंत अपने अधिकारियो को बुला कर मंटू यादव को गिरफ्तार करने के लिए बोल दिया इसके बाद वो मंटू यादव के दोस्तों को कॉल कर के पहले धमकाया फिर उन्हें फायदे की बात बताई जिससे वो लोग कम के साथ देने के लिए तैयार हो गए फिर प् ने आखिर में मंटू यादव को कॉल लगा दिया.

इधर एक बंगलो में मंटू यादव बैठ कर शराब पि रहा था तभी उसका एक आदमी भागते हुए आता है और बोलता है.

आदमी- बॉस बॉस एक गड़बड़ हो गयी है.

उस आदमी के बात सुन कर मंटू यादव झलते हुए बोलै.

मंटू- क्या आफत आ गयी जो तुम मुझे अभी डिस्टर्ब करने के आ गए तुम जानते हो न की मई इस समय किसी से भी मिलना पसंद नहीं करता फिर भी तुम यहाँ पर आ गए.

मंटू यादव के बात सुन कर वो आदमी डरते हुए बोलै.

आदमी- बॉस बात hi ऐसी है की मुझे इस वक़्त यहाँ पर आना पड़ा.

अपने आदमी के बात सुन कर मंटू यादव भी समझ गया की कोई सीरियस बात है तभी ये यहाँ पर आया है इस लिए उस आदमी से बोलै.

मंटू- ठीक है बताओ क्या बात है जो तुम इतना घबराये हुए हो.

आदमी- सर आपके खिलाफ एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमे रॉकी भानुशाली आपके सरे गैरकानूनी काम का पर्दाफाश कर रहा है.

अपने आदमी के बात सुन कर मंटू यादव के सारा नशा hi उतर गया और वो तुरंत अपने आदमी से बोलै.

मंटू- कहा है वो वीडियो मुझे दिखाओ.

आदमी मंटू सिंह के बात सुन कर तुरंत अपने मोबाइल में वो वीडियो प्ले कर देता है उस वीडियो में रॉकी ने मंटू यादव और उसके बेटे के खिलाफ बहुत साडी बाटे बताई थी और साथ में मंटू यादव और कुंदन यादव के कुछ गलत कारनामो के वीडियो भी चल रहा था जो मैंने रॉकी के मरने के बाद उसके मोबाइल से और लैपटॉप से निकला था उन सरे वीडियो को देख कर मंटू यादव घुसे से पागल हो गया और उस मोबाइल को जमीं पर पटकते हुए बोलै.

मंटू- मई उस रॉकी को और उसके परिवार को जिन्दा नहीं छोडूंगा सेल की हिमत कैसे हुयी मेरे खिलाफ ऐसा बोलने की.

मंटू के बात को सुन कर वो आदमी बोलै.

आदमी- बॉस रॉकी अब इस दुनिया में नहीं रहा उसे और उसके साथियो को किसी ने कल रत उसी के फार्महाउस में जला कर मर दिया और मुझे लगता है की रॉकी को जिसने भी मारा है उसी ने आपका वो वीडियो भी लीक किया है.

अभी ये लोग बात कर hi रहे थे की तभी मंटू यादव के मोबाइल पर किसी का कॉल आने लगा जब उसने देखा की कॉल पुलिस स्टेशन से आ रहा है तो वो तुरंत कॉल रइवे कर लिया और बोलै.

मंटू- हैल्लो है बोलो.

कॉल पर- बॉस आप अभी जहा कही भी हो तुरंत अंडरग्राउंड हो जाओ क्युकी आपके खिलाफ अरेस्ट वारंट निकला है और पुलिस कभी भी आपके घर पर पहुंच रही होगी.

इतना बोल कर वो आदमी कॉल कट कर देता है जैसे hi वो कॉल कट करता है फिर से उसके no. कॉल आने लगते जब वो अपना मोबाइल देखता है पता है की ये कॉल कम क्र प् का था इस लिए उसने तुरंत कॉल उठा लिया और बोलै.

मंटू- हैल्लो है बोलिये.

प्- पार्टी के हाई कमांड ने फैसला किया है की तुम्हे मला के पोस्ट से हटा दिया जाये इस लिए अभी से तुम मला नहीं रहे.

इतना बोल कर प् तुरंत कॉल कट कर दिया इधर प् के बात सुन कर मंटू यादव घुसे बौखला जाता है और घुसे से बोलता है.

मंटू- सालो को इतनी हिमत hi गयी की मुझे मला के पोस्ट से निकले मई किसी को भी नहीं छोडूंगा एक एक को देख लूंगा (फिर उस आदमी से) जाओ और जाकर कुंदन को बोल दो की वो कुछ दिन के लिए अंडरग्राउंड हो जाये और है वो रॉकी मारा है उसके परिवार वाले नहीं अपने आदमियों को ले कर जाओ सुर रॉकी के बाप और भाई को उठा कर अपने अड्डे पर ले कर आओ और है जिसने भी मेरी वीडियो लीक की है उसके बारे में पता लगाओ.

आदमी- जी बॉस हो जायेगा.

इतना बोल कर वो आदमी वह से चला जाता है इधर मंटू यादव घुसे से बगल हो रहा था वो घुसे में अपने आप से hi बोलै.

मंटू- ये जिसने भी किया है उसे और उसके परिवार को मई जिन्दा नहीं छोडूंगा और जिसने भी मेरे खिलाफ अरेस्ट वारंट निकला है उसके तो मई तड़पा तड़पा कर मरूंगा.

इतना बोल कर मंटू यादव अपने घर के पीछे के रस्ते से बहार निकल गया और अंडरग्राउंड हो गया उसके घर से जाने के करीब आधे घंटे बाद वह पर पुलिस आयी और पुरे घर को छान मारा लेकिन मंटू यादव और कुंदन यादव उसे कही भी नहीं मिला थक हर कर कमिश्नर ने कम के प् के पास कॉल लगाया और बोलै.

कमिश्नर- सर मंटू यादव अपने घर छोड़ कर भाग गया हमें न उसका बीटा मिला और न hi वो खुद तो अब मुझे क्या करना है सर.

कमिश्नर के बात सुन कर प् कुछ सोचते हुए बोलै.

प्- तुम लोग शहर से बहार जाने वाले रस्ते को ब्लॉक कर दो और है उसके जितने भी प्रॉपर्टी है चाहे वो घर हो फार्महाउस हो या फिर कंपनी सभी को सील कर दो.

प् के बात सुन कर कमिश्नर ok बोल कर कॉल कट कर दिया इसके बाद उसने वही किया जो उसे प् ने करने के लिए बोलै था पुरे न्यूज़ चैनल में ये बात फैल गयी की मंटू यादव को मला के पोस्ट से हटा दिया गया और उसके सरे सम्पति को जप्त कर लिया गया है.

इधर पुस्पा अपने घर से निकल कर मार्किट जा रही थी अभी वो कुछ दूर hi गयी थी की तभी रस्ते में तो वही रस्ते में एक साधु अपने आसान लगाए हुए बैठा था उस साधु ने जब पुस्पा को आये देखा तो उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गयी और वो पुस्पा को आवाज देते हुए बोलै.

साधु- बेटी तुम जरा इधर आना.

पुस्पा ने जब देखा की एक साधु उसे बुला रहा है तो वो चौक गयी पहले तो उसका मन हुआ की वो उस साधु के पास न जाये लेकिन पुस्पा इन साधु और बाबाओ को बहुत मंटू थी इस लिए वो देर सोचने के बाद उस साधु के पास चली गयी और अपने हाथ जोड़ते हुए बोली.

पुस्पा- जी बाबा अपने मुझे बुलाया कुछ काम था क्या मुझसे आपको.

साधु- नहीं बेटी मुझे तुमसे कुछ काम नहीं था लेकिन मई देख प् रहा हु की तुम्हारे परिवार पर एक बहुत बड़ा संकट आने वाला है इस लिए मई सोचा की तुम्हे उस संकट से पहले hi जगह कर दू.

उस साधु के बात सुन कर पुस्पा घबरा गयी और वो उस साधु के सामने अपना हाथ जोड़ते हुए बोली.

पुस्पा- मेरे परिवार पर कैसी संकट आने वाली है बाबा और मई इस संकट से अपने परिवार को कैसे बचा सकती हु.

पुस्पा के बात सुन कर वो बाबा अपने आँखे बंद कर के कुछ मंत्र पढ़ने लगा फिर कुछ देर बाद वो अपने आँखे खोलते हुए बोलै.

साधु- बेटी मुझे एक बात बताना क्या तुम्हारी बड़ी बेटी के सदी कुछ महीने पहले hi हुयी है क्या और तुम्हारा दामाद घरजमाई बन कर तुम्हारे यहाँ रहता है क्या.

पुस्पा ने जब उस साधु के मुँह से ये सुना तो हैरान हो गयी और वो मन hi मन सोचने लगी की इसे कैसे पता की मेरी बेटी के सदी कुछ महीने पहले hi हुयी है और मेरा दामाद घरजमाई बन कर मेरे hi घर ओर रहता है जरूर इस बाबा में कुछ शक्ति है.

पुस्पा- जी बाबा अपने सही बोलै लेकिन अपने ये बताया hi नहीं की मेरे परिवार पर संकट कैसे आने वाली है.

साधु- तुम्हारे उसी दामाद के कारन तुम्हारे परिवार पर संकट आने वाला है.

साधु के बात सुन कर पुस्पा हैरान हो गयी.

पुस्पा- क्या... मई जानती थी की वो एक no. का मनहूस है मई उसे अभी के अभी अपने घर से निकल दूंगी.

पुस्पा के बात सुन कर वो साधु बोलै.

साधु- बेसक तुम उसे अपने घर से निकल देना लेकिन अभी नहीं अभी तुम अपने घर में इस मूर्ति को रख देना जिससे तुम्हारे घर पर आये हुए संकट तक जायगा इसके बाद तुम उसे घर से निकल देना अगर तुम उसे पहले hi घर से निकल दी तो तुम्हारे घर का संकट और बढ़ जायेगा.

इतना बोल कर साधु अपने झोले से एक मूर्ति निकल कर पुस्पा को दे देता है जिसे पुस्पा अपने हाथो में पकड़ कर साधु के आगे घुटने पर बैठ कर बोलती है.

पुस्पा- थैंक यू बाबा इस मूर्ति के लिए.

फिर पुस्पा अपने पर्स से कुछ पैसे निकल कर साधु को देने लगता है तो वो साधु उससे वो पैसा नहीं लेता है और वो बोलता है.

साधु- मई तुम्हारा हेल्प पैसो के लिए नहीं किया है बल्कि इंसानियत के लिए किया है.

उस साधु के बात सुन कर पुस्पा को उसपे और भी ज्यादा बिस्वास हो जाता है इसके बाद वो साधु को प्रणाम कर के वह से निकल जाती है पुस्पा को वह से जाते hi वो साधु जोर जोर से हसने लगता है और बोलता है.

साधु- हाहाहाहा.. कितना आसान होता है इन जैसे औरतो को मुर्ख बनाना (फिर कुछ देर रुक कर) हाहाहा.. प्रतिक तुमने क्या सोचा की तुम अपने घर के बहार सुरक्षा कवच लगा डोज तो मई तुम्हारे घर वालो को और तुमको कुछ नहीं कर पाउँगा लेकिन तुमने गलत सोचा मई तांत्रिक गोरखनाथ हु मुझसे बचना इतना भी आसान नहीं है अब जल्द hi तुम और तुम्हारे परिवार वाले सरे के सरे मरे जाओगे हाहाहाहा.

इधर पुस्पा को तो मालूम hi नहीं था की वो जो अपने साथ ले कर जा रही है उससे उसके परिवार का संकट दूर नहीं होगा बल्कि उसके कारन उसका परिवार और भी मुसीबत में पड़ने वाली थी इन सब बातो से अनजान पुस्पा अपने घर पर आ कर उस मूर्ति को अपने घर में बने मंदिर में रख देता है जिसके कारन उसके उसके घर के ऊपर जो सुरक्षा कवच चढ़ा था वो टूट जाता है और पुरे घर में नेगेटिव एनर्जी फैल जाती है.

इधर मई वो सरे वीडियो सोशल मीडिया पर दाल डालने के बाद मई लैपटॉप को अपने स्टोरेज रिंग में रख दिया अब शाम होने को आ गयी थी इस लिए मई विशाल से बोलै.

मई- विशाल भाई मुझे किसी काम से कही और जाना है इस लिए आप मुझे यही पर उतर दीजिये.

मेरे बात को सुन कर विशाल कार को वही पर रोक देता है जब मई कार से उतर गया तो विशाल अपने कार को ले कर वह से चला गया विशाल के जाने के बाद मई अपने दोस्तों से मानसिक कनेक्शन किया और उनसे पूछा.

मई- तुम सब एक जगह पर आ गए हो.

मेरे बोलने के कुछ देर बाद उधर से रोहन के आवाज आया.

राहों- है हम एक एक जगह पर आ गए है.

मई- ठीक है मई कुछ सेकंड में वह पर आता हु तुम तैयार रहना आश्रम चलने के लिए.

इतना बोलने के बाद मई अपना मानसिक कनेक्शन कट किया और वह से गायब हो कर उन लोगो के पास पहुंच गया मई जब उनसे मानसिक कनेक्शन के द्वारा बात कर रहा था तभी मुझे उनका लोकेशन पता चल गया था जब मई उनके पास पंहुचा तो देखा की वो सब तैयार hi बैठे थे इस लिए मई अपने स्पेस शक्ति से वह पर एक पोर्टल खोला और उनसे बोलै.

मई- चलो चलते है गुरुदेव के पास.

इतना बोल कर मई उस पोर्टल के अंदर चला गया मेरे जाने के बाद कारन घुसे से बोलै.

कारन- साला कमीना न ही न हैल्लो सीधे यहाँ आया और हमें आर्डर देते हुए चला गया उसे ये नहीं लगा की इतने दिन के बाद अपने दोस्तों से मिला है तो थोड़ा बात hi कर ले सेल को तो मई आश्रम में बताऊंगा.

इतना बोल कर वो भी पोर्टल के अंदर चला गया ऐसे hi सब एक एक कर के पोर्टल के अंदर चले गए थोड़ी देर बाद हिमालय के एक आश्रम में एक पोर्टल खुला और उसमे से पहले मई बहार आया मुझे बहार आने के थोड़ी देर बाद मेरे सरे दोस्त बहार आ गए जब मैंने देखा की मेरे सरे दोस्त बहार आ गए है तो मई उनसे बोलै.

मई- मई जनता हु की तुम सब को मुझसे बहुत शिकायत है क्युकी हमलोगो को यहाँ से जाने के बाद मई तुम सब से एक बार भी नहीं मिला लेकिन अभी हमारे पास समय नहीं है इस लिए हम सबसे पहले गुरुदेव से मिलते है इसके बाद हम सब आपस में बैठ कर अपना अपना गिला सिकवा दूर करेंगे.

मेरी बात को सुन कर सबने अपना सर है में हिलाया और फिर हम सब आश्रम के अंदर आ गए और गुरुदेव के रूम के पास चले आये अभी हम दरवाजा खटखटाने वाले hi थे की तभी अंदर से गुरुदेव के आवाज आयी.

गुरुदेव- दरवाजा खुला है तुम सब अंदर आ सकते हो.

गुरुदेव के बात सुन कर हम सब अंदर आ गए इसके बाद हम सब ने अपने घुटनो पर आ कर गुरुदेव को प्रणाम किया.

हम सब- प्रणाम गुरुदेव.

गुरुदेव- आयुष्मान भाव पुत्रो और पुत्रियों. अपने लिए जगह देख कर तुम सब बैठ जाओ.

गुरुदेव के बात सुन कर हम सब अपने लिए जगह देख कर बैठ गए फिर मई गुरुदेव से पूछा.

मई- गुरुदेव यु अचानक हम सब को अपने क्यों बुलाया क्या कोई बड़ी समस्या आने वाला है क्या.

मेरे बात को सुन कर गुरुदेव कुछ सोचते हुए बोले.

गुरुदेव- समस्या आने वाली है नहीं बल्कि आ चुकी है अगर हम इसमें कुछ नहीं कर सके तो ये दुनिया तबाह हो जायेगा.

गुरुदेव के बात सुन कर हम सब हैरान हो गए तभी कारन गुरुदेव से बोलै.

कारन- ऐसी कोण सी समस्या धरती पर आयी है गुरुदेव जिसे अगर रोका नहीं गया तो दुनिया तबाह हो जाएगी.

कारन के बात सुन कर गुरुदेव कुछ सोचते हुए बोले.

गुरुदेव- अब समय आ गया है की तुम सब को सब कुछ बता दिया जाये तुम सब जानते हो तुम्हे ये शक्तियां क्यों मिली है.

रोहन- है गुरुदेव हम लोगो को ये शक्तियां इस लिए मिली है की हम इस धरती से बुराई को मिटा सके.

रोहन के बात सुन कर गुरुदेव बोले.

गुरुदेव- तुमने सही बोलै लेकिन तुम सब ाभु तक जिस बुराई से लड़ रहे हो वो बुराई का 1 अंश भर है अब तुम लोगो उससे लड़ना है जो इस धरती पर बुराई का साम्राज्य बनाने के लिए आया है जिसका नाम है अजातशत्रु और तुम सब को इसी अजातशत्रु से लड़ना है और उसके मनसूबे कामयाब नहीं होने देना है.

मई- ये अजातशत्रु कोण है गुरुदेव.

गुरुदेव- ये अजातशत्रु दर्कलोर्ड का एक सेनापति है जो धरती पर कुछ महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए आया है और वो यहाँ पर सोना साम्राज्य कायम करना चाहता है.

दीप्ती- लेकिन गुरुदेव उसका धरती पर महत्वपूर्ण कार्य क्या है और ये दर्कलोर्ड कोण है.

दीप्ती के बात सुन कर गुरुदेव कुछ देर तक सोचने लगे और फिर बोले.

गुरुदेव- तुम लोगो को अगर ये सब बाटे जननी है तो मई तुम सब को एक कहानी बताता हु ये कहानी है दर्कलोर्ड की.



वर्ड काउंट- 10700
 
ऐसा नहीं है मैंने इस कहानी में पहले hi बता दिया है की उस दिव्या तलवार को खुद प्रतिक ने बनाया है इस लिए उस तलवार पर और लोगो से ज्यादा प्रतिक के कंट्रोल है तो बताओ की अगर प्रतिक एक तलवार को शाले भी कर दे तो क्या हो जायेगा प्रतिक के पास ऐसे 50 तलवार और है अगर वो तलवार किसी बुरे आदमी के हाथ में चला गया और वो उस तलवार से कुछ किसी अच्छे आदमी को नुकशान पहुंचने की कोशिश करेगा तो प्रतिक उस तलवार पर अपना कण्ट्रोल बना लेगा और रही बात इंस्टेंट रिकवरी पिल की तो वो सिर्फ एक दवा है जो शरीर में किसी भी तरह के हुए नुकशान की तुरंत ठीक कर सकता है ये अमृत नहीं है की मरे हुए को भी जिन्दा कर देगा जिसका गलत फायदा बुरे लोग उठाएंगे और आप मुझे ये बताओ की अगर कोई ये सोच के किसी का मदत न करे की दुनिया में बुरे लोग है अगर हम मदत करेंगे तो कही बुरे लोगो की मदत न हो जाये तो अच्छे लोग तो बेमौत hi मरे जायेंगे न क्युकी बुरे लोगो के चलते उनको मदत नहीं मिलेगी प्रतिक इंस्टेंट रिकवरी पिल का ऑक्शन करवा कर एक तरह इस इसका पब्लिसिटी कर रहा है ताकि इस दवा के बारे में सरे लोग जान जाये और इससे सरे लोगो को फायदा पहुंचे दूसरा है लेवल उप पिल तो मई उनके बारे में पहले hi बता चूका हु की इस गोली को मार्टिकल आर्ट्स के योद्धा hi उसे कर सकते है और वो भी वो जो हाफ ग्रांडमास्टर से निचे हो और इस गोली को एक योद्धा दो बार hi उसे कर सकता है और लास्ट में बचा संजीवनी गोली तो इस गोली का काम है की लोगो के शरीर से साडी गन्दगी को बहार निकल कर उनको स्वतः करना इस लिए ये गोली चाहे अच्छे लोग खाये या बुरे लोग क्या hi फर्क पड़ता है और सबसे बड़ी बात बुरे लोग भी तो इंसान hi होते है और प्रतिक ने जिस गोली को बनाया है ये सोच कर नहीं बनाया की इस गोली को सिर्फ वो अच्छे लोगो के hi बिच में रखेगा नहीं ये गोली हर उस जरुरत मंद के पास जाएगी जिसको इसकी जरुरत होगी चाहे वो बुरे लोग हो या अच्छे लोग.
 
अपडेट 32

स्टोरी ऑफ़ दर्कलोर्ड एंड रूद्र


मई अपने दोस्तों के साथ आश्रम में आ कर गुरदेव से मिला तो गुरुदेव हम सब से बोले की ये पूरी दुनिया पर संकट आ गयी है एक अजातशत्रु नाम का काली शक्तियों का योद्धा अपने किसी महत्वपूर्ण काम से धरती पर आया है और अगर उसका वो काम हो गया तो फिर इस दुनिया पर काली शक्तियों का राज होगा क्युकी उसके बाद दुनिया का सबसे बड़ा सैतान दर्कलोर्ड कैद से आजाद हो जायेगा मई जब गुरुदेव के मुँह से दर्कलोर्ड का नाम सुना तो मई उनसे पूछा.

मई- गुरुदेव ये दर्कलोर्ड कोण है और वो कैद कैसे हुआ और अगर आजाद हो गया तो दुनिया संकट में क्यों पद जायेगा.

मेरे बात को सुन कर गुरुदेव कुछ सोचते हुए बोले

गुरुदेव- तुम लोगो को अगर दर्कलोर्ड के बारे में जननी है तो मई तुम सब को एक कहानी बताता हु ये कहानी है दर्कलोर्ड की.

यहाँ से हजारो प्रकाश मिल दूर एक प्लेनेट है जिसे असलंका प्लेनेट के नाम से जाना जाता है उस प्लेनेट पर भी हमारे पृथ्वी की तरह जीवन है ये कहानी उसी प्लेनेट की है आज से 1000 हजार साल पहले उस प्लेनेट पर एक लड़के का जनम हुआ था जिसका नाम कल्केश्वर था.

कल्केश्वर बचपन से hi मैरिटल आर्ट्स और दिव्या शक्तियों के साधना में माहिर था वो अपने 20 के उम्र तक आते आते सभी तरह के दिव्या शक्तियों में माहिर हो गया और साथ में वो मैरिटल आर्ट्स के सुप्रीम रैंक तक पहुंच गया था लेकिन उसके अंदर शक्ति की इतनी भूख थी की उसने काली शक्तियों का आराधना करना सुरु कर दिया वो धीरे धीरे काली शक्तियों में इतना गम हो गया की वो खुद को काली शक्तियों का बादशाह समझने लगा फिर उसने असलंका प्लेनेट पर अपने काली दुनिया का साम्राज्य बनाने लगा अपने साम्राज्य बनाने के लिए उसने बहुत सरे मासूम लोग को मौत के घाट उतर दिया था.

ऐसे hi धीरे धीरे अपने ताकत के नशे में चूर उसने न जाने कितने मासूम लोगो को मर दिया था उसका बढ़ता हुआ आतंक देख कर बहुत सरे राज्यों ने मिल कर कल्केश्वर से लड़ने के लिए एक गठबंधन तैयार किया और उस गठबंधन के संचालक थे आचार्य वसिष्ठ जो आचार्य होने के साथ साथ एक महँ योद्धा भी थे उन्होंने ने भी मार्टिकल आर्ट्स के सरे लेवल पर कर के सुप्रीम रैंक पर पहुंच गए थे और उनके पास बहुत साडी डिवीने शक्ति भी थी.

इधर जब कल्केश्वर को पता चला की उसके खिलाफ एक गठबंधन बनाया गया है तो वो घुसे से पागल हो गया और अपने सैनिको को अपने साथ मिलकर उस गठबंधन पर हमला कर दिया फिर दोनों तरफ से घमासान युद्ध हुआ जिसमे दोनों तरफ के बहुत सरे योद्धा मरे गए लेकिन आखिर में आचार्य वसिष्ठ को हर सामना करना पड़ा क्युकी वो कल्केश्वर के जितना ताकतवर नहीं थे.

जब आचार्य कल्केश्वर ने देखा की उनकी हर हो गयी है तो अपने साथियो को पीछे हटने के लिए बोल दिए और वह पर एक ताकतवर संरचना तैयार कर दिया जिससे उनके साथियो को वह से भागने के लिए कुछ समय मिल गया फिर वो वह अपने साथियो के साथ अपने राज्य में आये और अपने परिवार और कुछ जरुरी के सामान अपने साथ में लिया और एक पोर्टल खोल कर वह से जाने hi वाले थे की तभी उनकी नजर एक बचे पर बड़ी जो अपने माँ बाप के लाश के लिपट कर रो रहा था जब आचार्य वसिष्ठ ने उस लड़के को देखा तो चौक गए क्युकी इतनी काम उम्र में hi उसके पास बहुत साडी स्प्रिचैल एक जंगल में चले गए.

इधर जब कल्केश्वर ने देखा की आचार्य वसिष्ठ ने एक संरचना बना कर वह से अपने साथियो के साथ भाग गया है तो वो घुसे से पागल हो गया और फिर उस संरचना पर एक भयानक हमला कर के उसे तोड़ दिया फिर वो अपने सेनापति को बोलै की वो आचार्य और उसके साथी को कही से भी धुंध कर उनके सामने पेश किया जाये.

इधर आचार्य वसिष्ठ अपने साथियो के साथ वह से भाग कर एक जंगल में पहुंच गए ये जंगल असलंका प्लेनेट के आखरी छोर पर था इस लिए यहाँ पर कल्केश्वर के आना आशम्भव था आचार्य वसिष्ठ उस जंगल के एक बड़े भाग को एक अदृश्य संरचना से घेर दिए जिससे वो जगह असलंका प्लेनेट से बाहरी लोगो के लिए गायब हो गया इसके बाद वो वह पर एक बहुत hi मजबूत सुरक्षा कवच चढ़ा दिया जिसे तोडना आसान नहीं था फिर वो वही पर रहने के लिए कुछ जगह का इंतजाम किया और अपने घायल साथियो के इलाज करना सुरु कर दिया.

उस जंगल में जड़ी बूटियों की कोई कमी नहीं थी इस लिए आचार्य वसिष्ठ को अपने साथियो के इलाज करने में ज्यादा परेशानी नहीं हुयी जब आचार्य वसिष्ठ ने अपने सरे साथियो का इलाज कर दिया इसके बाद सरे लोग मिल कर वही पर रहने के लिए अपने अपने घर का निर्माण किया वो सरे घर जंगल के लकड़ियों से बनाया गया था फिर आचार्य वसिष्ठ ने वही पर एक गुरुकुल बनाया जिसमे यो योद्धाओ को ट्रेनिंग देने लगे और आचार्य वसिष्ठ के बाकि साथी थे वो लोग उस जगह से बहार निकल कर कल्केश्वर के विद्रोही लोगो को ढूंढते और उनको अपने साथ ले कर वह पर सा जाते थे.

धीरे धीरे वो जगह एक साम्राज्य में बदल गया और उस साम्राज्य का नाम रखा गया स्वतंत्र साम्राज्य ये नाम रखने का मुख्या कारन था की ये लोग अपने आजादी के लिए कल्केश्वर से लड़ने वाले थे लेकिन उस साम्राज्य का कोई राजा नहीं था बस वह पर आचार्य वसिष्ठ के बात सरे लोग मानते थे या ये कह लो की वह के नियम और कनुम सब आचार्य वसिष्ट hi थे लेकिन आचार्य वसिष्ठ इस बात का कभी फायदा नहीं उठाया और वो लोगो को अपने गुरुकुल में ट्रेनिंग देते रहे.

वही वो लड़का जिसे आचार्य वसिष्ठ अपने साथ ले कर आये थे उसको पता था की उसके माता पिता को कल्केश्वर के सैनिकों ने मारा है इस लिए वो कल्केश्वर से बहुत नफरत करता था और वो खुद को इतना ताकतवर बनाना चाहता था की एक दिन वो कल्केश्वर से बदला ले सके इस लिए वो दिन रत एक कर के कड़ी ट्रेनिंग कर रहा था उसको इस तरह से कड़ी ट्रेनिंग करता हुआ देख कर के आचार्य वसिष्ट भी बहुत खुस थे इस लिए वो भी अपने पुरे मन से उस लड़के को ट्रेनिंग दे रहे थे.

इधर कल्केश्वर के आदमी जब आचार्य वसिष्ठ और उनके आदमी को नहीं धुंध पाए तो कल्केश्वर भी अपना ध्यान उन सब से हटा दिया क्युकी कल्केश्वर चाहता था की अब उसका कब्ज़ा पुरे ब्रह्माण्ड पर हो और पुरे ब्रह्माण्ड पर सिर्फ और सिर्फ काली शक्तियों का राज्य हो इस लिए वो अपने सैनिको के साथ मिल कर दूसरे प्लेनेट पर भी हमला करना सुरु कर दिया ऐसे hi समय बीतता गया और पुरे 18 साल बिट गया इन 18 सालो में बहुत सरे प्लेनेट पर काली शक्तियों का राज्य हो गया था अब उन सब प्लेनेट का सिर्फ एक hi भगवन था और वो था दर्कलोर्ड.

अब लोग कल्केश्वर को कल्केश्वर के नाम से नहीं बुलाते थे बल्कि अब वो सभी जगह पर दर्कलोर्ड के नाम से प्रसिद्ध हो गया था इधर आचार्य वसिष्ट के गुरुकुल में भी बहुत सरे योद्धा तैयार हो गए थे और उन सब में सबसे ज्यादा शक्तिशाली योद्धा था रूद्र ये रूद्र वही था जिसे आचार्य वसिष्ट ने बचा कर गुरुकुल लाये थे रूद्र 18 सालो में खुद को बहुत ज्यादा शक्तिशाली बना लिया था अब वो मैरिटल आर्ट्स के सरे लेवल को पर कर के सुप्रीम लेवल पर पहुंच गया था और डिवीने शक्तियों में भी वो महारथ हासिल कर लिया था वो इतना शक्तिशाली हो गया था की आचार्य वसिष्ठ भी उसके हमले का सामना नहीं कर पते थे.

आचार्य वसिष्ठ के गुरुकुल में जो भी योद्धा ट्रेनिंग लेते थे सबका बस एक hi मकसद था की इस दुनिया से बुराई को नस्ट करना और दर्कलोर्ड को मौत के घाट उतरना ऐसे hi एक दिन आचार्य वसिष्ठ रूद्र को बुलाते है और बोलते है.

आचार्य- रूद्र अब समय आ गया है की हम सब मिल कर बुराई को इस दुनिया से ख़तम कर दे इस लिए हमें काली शक्तियों के साथ युद्ध सुरु कर देना चाहिए क्या तुम इसके लिए तैयार हो.

रूद्र- आचार्य मई तो कब से तैयार हु बस मुझे आपके आदेश का इंतज़ार था मई उस दर्कलोर्ड को अपने हाथो से तड़पा तड़पा कर मरना चाहता हु जिसने मुझे अनाथ बनाया है.

रूद्र के बात सुन कर आचार्य वसिष्ठ कुछ सोचते हुए बोलते है.

आचार्य- हम वो सब तो ठीक है लेकिन तुम्हे दर्कलोर्ड से युद्ध सुरु करने से पहले तुम्हे त्रिदेव और त्रिदेवियों का अर्धना करना होगा और उनसे कुछ शक्तिया हासिल करना होगा इस लिए तुम यहाँ से त्रिकूट पहाड़ पर जाओ और जाकर उनका आराधना करो.

रूद्र- जे आचार्य आप जैसा बोले.

इतना बोल कर रूद्र आचार्य वसिष्ठ को प्रणाम करता है और वह से त्रिकूट पहाड़ पर चला जाता है और वह जाकर त्रिदेव और त्रिदेवियों का आराधना करने लगता है करि 3 सालो तक कठिन तपस्या करने के बाद त्रिदेव और त्रिदेवियों ने उसे दरसन दिए फिर त्रिदेवो ने उसे बहुत साडी शक्तियां दी वही त्रिदेवियों ने उसे बोलै की उनका तीन अंश इस दुनिया में जनम लिए है तुम्हे उन तीनो से सदी करनी है जब तुम उन तीनो से शादी कर के पहली मिलान करोगे तब तुम्हे हम तीनो देवियो के शक्तिया मिल जाएगी इसके बाद तुम आसानी से दर्कलोर्ड को हरा सकते हो त्रिदेवियों के बात सुन कर रूद्र उनसे पूछता है की वो उन्हें कैसे पहचानेगा तो त्रिदेवियों उससे बोलती है की उन तीनो लड़कियों के बहो पर हम तीनो देवियों के निशान होगा और वो निशान होगा लोटस 🪷 वीणा 🎸 और त्रिशूल 🔱 का बस तुम्हे उन्ही तीनो निशान को ढूंढना होगा और जब तुम उन तीनो निशान वाली लड़कियों के पास जाओगे तो तुम्हे खुद पता चल जायेगा क्युकी उनकी जीवन के डोर तुमसे बंधा हुआ है और उनका जनम इस धरती पर तुम्हारे लिए hi हुआ है जनम इतना बोल कर त्रिदेव और त्रिदेवियाँ वह से गायब हो जाते है उनको गायब होने के बाद रूद्र वापस गुरुकुल आ जाता है और अपने आचार्य को सब कुछ बता देता है जिसे सुन कर आचार्य वसिष्ठ बहुत खुस होते है और मन hi मन बोलते है दर्कलोर्ड अब तुम्हारा समय बहुत नजदीक आ गया है तुम्हारा पाप का घड़ा भर चूका है और बहुत जल्द तुम्हे तुम्हारे पापो का सजा मिलेगा इसके बाद आचार्य रूद्र को उन लड़कियों को ढूंढने के लिए बोलते है.

रूद्र ने धीरे धीरे कर के तीनो लड़कियों को धुंध लिया और उनसे विवाह कर लिया और उनसे पहली मिलान में उसको त्रिदेवियों के शक्ति भी मिल गया इसके बाद वो अपने गुरुकुल के अपने साथियो को लेकर दर्कलोर्ड पर हमला कर दिया दोनों तरफ से भयानक युद्ध होने लगा लेकिन ये युद्ध में दर्कलोर्ड शामिल नहीं था ये युद्ध उसके सेनापति और उसके सैनिक hi लड़ रहे थे इस लिए रूद्र ने दर्कलोर्ड के सरे सैनिकों और सरे सेनापति को एक एक कर के मरना सुरु कर दिया जब ये बात दर्कलोर्ड को पता चला तो खुद रूद्र से युद्ध करने के लिए आ गया लेकिन 6 महीने तक युद्ध चलने के बाद भी जब कोई हरा या जीता नहीं तो दर्कलोर्ड ने एक चल चली और किसी तरह से स्वतंत्र साम्राज्य का पता निकल लिया इसके बाद वो अपने एक सेनापति जिसका नाम ेवलिश था उसे स्वतंत्र साम्राज्य जा कर रूद्र के तीनो पत्नियों को किडनैप करने के लिए बोल दिया.

रूद्र और आचार्य वसिष्ठ के साथ गुरुकुल के सभी साथी उसके साथ युद्ध में थे और उधर ेवलिश अपने सैनिको के साथ स्वतंत्र साम्राज्य पर हमला कर दिया क्युकी स्वतंत्र साम्राज्य से अधिकतर लोग रूद्र के साथ युद्ध में लड़ रहे थे तो यहाँ पर ज्यादा लोग नहीं थे इस लिए ेवलिश आराम से इस युद्ध को जीत लिया और रूद्र के तीनो पत्नियों को बंदी बना कर एक वीरान प्लेनेट पर ले गया और दृक्लोर्ड़ को इन्फॉर्म कर दिया की काम हो गया है जब दर्कलोर्ड ने ये सुना तो वो बहुत खुश हो गया और फिर उसने रूद्र को बोलै की उसको तीनो पत्निया उसके पास है अगर वो उन्हें बचाना चाहता है तो वो उस वीरान प्लेनेट पर आ जाये वो भी अकेला.

दर्कलोर्ड के बात सुन कर रूद्र को बहुत गुसा आया लेकिन वो कर भी क्या सकता था इस लिए वो आचार्य वसिष्ठ के पास गया और उनको साडी बाटे बताई जब आचार्य वसिष्ठ ने ये सुना तो वो घबरा गए और रूद्र से बोले की वो अकेले नहीं जायेगा वो भी उनके साथ जायेंगे लेकिन रूद्र इसके लिए तैयार नहीं हुआ और वह से अकेले hi उस वीरान प्लेनेट के लिए जाने लगा लेकिन वो जाते जाते आचार्य वसिष्ठ से बोलै

रूद्र- आचार्य अगर मई वह से जिन्दा वापस नहीं आया तो आप सरे लोगो को लेकर एअर्थ प्लेनेट पर चले जायेंगे.

रूद्र के बात सुन कर पहले तो आचार्य उसके बात मानाने से इंकार कर दिया लेकिन बहुत समझने के बाद वो रूद्र के बात मानाने के लिए तैयार हो गए रूद्र को कही न कही ये एहसास हो गया था की कुछ अनहोनी होने वाला है इस लिए वो पहले hi इन सब को सुरक्षित कर देना चाहता था इसके बाद वो उस वीरान प्लेनेट पर चला गया और वह पर जाने के बाद उसने देखा की उसके तीनो पत्निया एक काली शक्तियों से चैन ⛓️ से बंधी हुयी है ये देख कर रूद्र उनको छुड़ाने के लिए आगे बढ़ा तो उसके सामने दर्कलोर्ड आ गया और बोलै.

दर्कलोर्ड- इतनी भी क्या जल्दी है अपनी बीवियों से मिलने की पहले तुम मुझसे तो मिल लो.

दर्कलोर्ड के बात सुन कर घुसे रूद्र बोलै.

रूद्र- दर्कलोर्ड तुम इन तीनो को छोड़ नहीं तो आज तुम्हे मेरे हाथो से कोई नहीं बचा पायेगा.

दर्कलोर्ड- अच्छा ऐसी बात है तो ठीक है मई इन्हे नहीं छोड़ता हु तुम्हे जो करना है वो कर लो.

दर्कलोर्ड के बात सुन कर रूद्र घुसे से दर्कलोर्ड पर हमला कर देता है लेकिन दर्कलोर्ड बड़े आराम से उसके हमले को रोक लेता है फिर इसी तरह से दोनों तरफ से हमले होने लगते है धीरे धीरे उनको हमला इतना खतरनाक होने लगता है की उनके हमको को टकराने से वो वीरान प्लेनेट भी हिलने लगता है इधर जब रूद्र देखता है की दोनों में से कोई हर मानाने वाला नहीं है तो वो त्रिदेव के शक्तियों को आह्वाहन करता है और उस शक्ति से दर्कलोर्ड पर हमला कर देता है इधर दर्कलोर्ड ने जब देखता है की रूद्र उस पर बहुत खतरनाक हमला किया है तो वो भी अपने सबसे खतरनाक काली शक्तियों को इक्कठा कर के एक गोला बनता है और रूद्र पर हमला कर देता है फिर दोनों के हमले आपस में टकरा जाते है लेकिन रूद्र का हमला दर्कलोर्ड के हमले से ताकतवर था इस लिए वो हमला दर्कलोर्ड के हमले को नस्ट करते हुए सीधा जा कर उससे टकरा जाता है जिसके कारन दर्कलोर्ड उड़ते हुए बहुत पीछे जा कर गिरता है और उसके मुँह से खून निकलने लगता है दर्कलोर्ड इस हमले से बुरी तरह से घायल हो गया था.

इधर जब रूद्र देखता है की दर्कलोर्ड उसके हमले के कारन बुरी तरह से घायल हो गया है तो वो उसको वही पर छोड़ कर अपने पत्नियों को आजाद करने चला जाता है और फिर अपने दिव्या शक्तियों को इस्तेमाल करते हुए उस काली शक्तियों से बने जंजीर को तोड़ देता है और जैसे hi वो अपने तीनो पत्नियों को उठाने जाता है वैसे hi उसके पीछे से एक काली तलवार उसके दिल को चीरते हुए बहार निकल जाता है ये देख कर रूद्र के तीनो पत्नियों के होश hi उड़ जाता है वो तीनो जोर से छीलते है.

नहीं..... रूद्र.....

रूद्र ने जब देखा की एक तलवार उसके दिल कर चीरते हुए बहार निकल गया है तो वो पीछे मुद कर देखता है तो पता है की उसपर तलवार से हमला करने वाला कोई और नहीं बल्कि खुद दर्कलोर्ड hi था जो जोर जोर से है रहा था और बोल रहा था.

दर्कलोर्ड- है है है तुम्हे क्या लगा की तुम्हारी उस शक्ति के कारन मई मर जाऊंगा है है है आज तक इस दुनिया में कोई ऐसा पैदा नहीं हुआ जो मुझे मर सके..

दर्कलोर्ड के बात सुन कर रूद्र दर्द से कराहते हुए बोलै.

रूद्र- ठु है तुम जैसे कायर योद्धा पर तुम खुद को दुनिया के सबसे शक्तिशाली योद्धा समझते हो और पीठ पीछे छुप कर हमला करते हो.

रूद्र के बात सुन कर दर्कलोर्ड हस्ते हुए बोलता है.

दर्कलोर्ड- है है है मेरे शब्दकोष में कायर जैसे कोई शब्द नहीं है मई बस इतना जनता हु की अपने दुश्मनो को मरना है चाहे मई उसे कैसे भी मरू और वैसे तुम सरे इंसान बोलते हो न की जुंग और प्यार में सब जायज है तो बस वही समझ लो.

दर्कलोर्ड के बात सुन कर रूद्र अपने मुँह से खून को थूकते हुए बोलता है.

रूद्र- आज तुम मेरे पीठ पर हमला कर के अच्छा नहीं किया भले hi आज मेरी मृत्यु हो जाये लेकिन मई फिर दोबारा जनम लूंगा और तुम्हे एक दर्दनाक मौत दूंगा यद् रखना मई दोबारा आऊंगा तुमसे बदला लेने के लिए.

रूद्र के बात सुन कर दर्कलोर्ड जोर जोर से हस्ते हुए बोलै.

दर्कलोर्ड- है है है चाहे तुम जितना भी जनम लेलो तुम्हारा अंत मेरे hi हाथो से होगा हाहाहा.

इधर रूद्र के तीनो पत्नियों ने जब दर्कलोर्ड के बात सुनी तो घुसे से पागल हो गयी फिर रूद्र के एक पत्नी बोली.

रूद्र के पत्नी- तुम अपने आप को योद्धा समझते हो तुम कायर हो कायर तुमने रूद्र के पीठ पर वॉर किया है अगर तुम खुद को योद्धा समझते हो तो तुम्हे सामने से लड़ना चाहिए था न की पीठ के पीछे वॉर करना चाहिए था तुम क्या सोचते हो की तुम रूद्र पर हमला कर के बच जाओगे नहीं अब तुम्हे सालो साल यही पर कैद हो कर रहना होगा.

रूद्र के पत्नी के बात सुन कर दर्कलोर्ड जोर से हस्ते हुए बोलै.

दर्कलोर्ड- है है है है जब रूद्र मेरा कुछ बिगड़ नहीं सका तो तुम एक औरत हो कर मेरा क्या बिगड़ लोगी.

जान रूद्र के दोनों पत्नियों ने दर्कलोर्ड के बात सुनी तो वो भी रूद्र को छोड़ कर तीसरी पत्नी के पास आ गयी और बोली.

रूद्र के पत्नी- एक औरत में कितनी शक्ति होती है आज तुम्हे पता चलेगा आज हम तीनो अपनी प्राण को त्याग कर यहाँ एक ऐसा कवच बनाएंगे जिसे दुनिया के कोई भी शक्ति नहीं तोड़ सकता तुम अब सालो साल यही पर कैद हो कर रहोगे.

इतना बोल कर रूद्र के तीनो पत्नी अपने दोनों हाथ को आसमान के तरफ उठा कर बोलती है.

रूद्र के तीनो पत्नी- मई रूद्र के पत्नी त्रिदेवों और त्रिदेवियों को शाक्षी मन कर अपने प्राण की आहुति देती हु और मई चाहती हु की यहाँ पर एक ऐसा कवच बन जाये जिसे दुनिया के कोई भी शक्ति तोड़ न सके.

उन तीनो को इतना बोलना hi था की उन तीनो शरीर से तीन प्रकश के पुंज निकला और ऐसे hi एक प्रकाश के पुंज रूद्र के शरीर से निकला फिर चारो प्रकश के पुंज एक hi गए और उस वीरान प्लेनेट पर चारो तरफ फैल कर एक कवच के रूप में बदल गया इधर जैसे hi उन चारो के शरीर से प्रकश के पुंज निकला उन चारो के शरीर छोटे छोटे कानो में बिखर कर गायब हो गया.

इधर जब दर्कलोर्ड ने देखा की उस वीरान प्लेनेट के चारो तरफ एक कवच बन गया है तो वो घबरा गया और फिर उस कवच पर पागलो की तरह हमला करने लगा लेकिन उसके हमले से कवच पर जरा भी फरक नहीं पड़ा और वो हर मन कर एक जगह पर बैठ गया.

इधर रूद्र को मरते hi आचार्य वसिष्ठ को पता चल गया की रूद्र और उसकी तीनो पत्निया मरी गयी है तो वो बहुत दुखी हुआ फिर वो रूद्र के कहे अनुसार एक पोर्टल तैयार किया और सरे लोगो को लेकर पृथ्वी पर आ गए पृथ्वी पर आने के बाद आचार्य वसिष्ठ ने पृथ्वी पर दिव्या ऊर्जा वाले जगह की खोज की और उनको वो जगह मिला हिमालय में फिर वो लोग हिमालय में आ कर सभी को रहने के लिए अपने स्पेस शक्ति से एक जगह तैयार किया और उस जगह को संरचना और सुरक्षा कवच से घेर दिया जिसके चलते वो आम लोगो के नजरो से छुप गया वो जगह भले hi पृथ्वी पर था लेकिन वो पृथ्वी से बिलकुल हैट का था फिर उस जगह को वो लोग सीक्रेट स्पेस के नाम से बुलाने लगे.

उधर असलंका प्लेनेट पर दर्कलोर्ड को कैद होने के बाद उसका सेनापति ेवलिश वह का राजा बना और काली शक्तियों को आगे बढ़ने लगा और वो उस कवच तो तोड़ने का उपाय ढूंढने लगा जिसमे दर्कलोर्ड कैद था.

ऐसे hi समय बीतता गया और पुरे एक हजार साल बिट गए इन एक हजार सालो में सीक्रेट स्पेस में बहुत कुछ बदल गया था धीरे धीरे सीक्रेट स्पेस के लोग अपनी दिव्या शक्तिया खोते गए और अब उनकी हालत ये हो गयी है की वो लोग मार्टिकल आर्ट्स के उस मुकाम पर भी नहीं पहुंच पते जिस मुकाम पर वो पहले हुआ करते थे.

सीक्रेट स्पेस में धीरे धीरे पीढ़िया बदलती गयी और सरे लोग अलग अलग अपना परिवार बना कर रहने लगे कुछ लोग तो बाहरी दुनिया के भी संपर्क में आ गए कुछ परिवार ऐसा भी था जो सीक्रेट स्पेस छोड़ कर बहार दुनिया में रहने लगे.

दर्कलोर्ड के कहानी सुनाने के बाद गुरुदेव थोड़ी देर के लिए चुप हो गए हम सरे दोस्तों ने जब दर्कलोर्ड के कहानी सुनी तो बहुत हैरान हो गए और मुझे मन hi मन रूद्र और उसके पत्नियों के लिए बहुत बुरा लग रहा था फिर गुरुदेव ने हम सब से आगे बोले.

गुरुदेव- तुम सब सोच रहे होंगे की मई तुम्हे ये कहानी क्यों सुनाई तो तुम सब ये जान लो की तुम सब भी कही न कही इस कहानी से जुड़ चुके हो क्युकी ेवलिश को ये पता चल चूका है दर्कलोर्ड को कैसे आजाद होगा और वो उसको आजाद करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है और तुम सब को उसकी इस मनसूबे में कामयाब नहीं होने देना है.

मई- लेकिन गुरुदेव हम सब उसे ेवलिश को कैसे रोक सकते है क्युकी आपने अभी बोलै की ेवलिश तो असलंका प्लेनेट पर है तो क्या हम सब को असलंका प्लेनेट पर जाना होगा.

गुरुदेव- नहीं तुम सब को असलंका प्लेनेट पर जाने की जरुरत नहीं है क्युकी दृक्लोर्ड़ कैद से आजाद करने की चाभियाँ 3 लड़का और 3 लड़की है जो त्रिदेव और त्रिदेवियों के ाँस है उनके hi ब्लड से वो कवच टूट सकता है वो 6 लोग इसी पृथ्वी पर है और ये बात ेवलिश को पता चल गया है इस लिए उसने अपने सबसे खतरनाक सेनापति अजातशत्रु को उन 6 लोगो को ढूंढने के लिए भेजा है अगर अजातशत्रु उन सब को धुंध लिया तो ये पूरा ब्रह्माण्ड काली शक्तियों के गुलाम हो जायेगा इस लिए तुम सब को मिल कर उन 6 लोगो को ढूँढना है और उनको सुरक्षित रखना है.

गुरुदेव के बात सुन कर हम सब सोच में पद गए फिर कुछ देर सोचने के बाद दीपक बोलै.

दीपक- गुरुदेव हम इस ब्रह्माण्ड को काली शक्तियों का गुलाम कभी नहीं होने देंगे हम सब मिल कर उन 6 लोगो की रक्षा करेंगे चाहे उसके लिए हम सब को अपना जान hi क्यों न देना पड़े.

दीपक के बातो पर हम सब ने है में गर्दन हिलाया जिसे देख कर गुरुदेव बहुत खुस हुए और हमसे बोले.

गुरुदेव- मुझे तुम सब से यही उम्मीद थी पुत्र अब तुम लोगो काम ये है की तुम उन 6 लोगो को धुंध कर एक जगह पर ले कर आ जाओ ताकि उनकी रक्षा करने के लिए तुम सब को अलग अलग नहीं रहना पड़े क्युकी दुश्मन बहुत ताकतवर है इस लिए तुम सब को उनसे एक साथ मिल कर मुकाबला करना होगा.

कारन- आप चिंता मत कीजिये गुरुदेव दुश्मन चाहे जितना भी ताकतवर हो हम सब मिल कर उनकी योजना को कभी पूरा नहीं होने देंगे.

संध्या- गुरुदेव मुझे आपसे एक बात पूछनी थी.

गुरुदेव- है पूछो न पुत्री.

संध्या- गुरुदेव मई ये पूछना छह रही हु की क्या रूद्र और उनकी पत्नियों ने दोबारा जनम नहीं लिया और क्या आचार्य वसिष्ठ अभी भी जिन्दा है.

संध्या के बात सुन कर गुरुदेव कुछ सोचने लगे फिर वो हम सब के तरफ देखने लगे हम सब के मन में ये बात जानने की बहुत उत्सुकता थी और ये बात गुरुदेव को पता चल गया तो वो मुस्कुराते हुए बोले.

गुरुदेव- सबसे पहले मई तुम सब को ये बता दू की आचार्य वसिष्ठ अब जिन्दा नहीं है और मई उनका hi एक वंशज हु और दूसरी बात की रूद्र और उसकी पत्नियों का पुनर्जन्म हुआ है या नहीं तो है उनका जनम हो चूका है जिस तीन लड़कियों को तुम सब को ढूँढना है वही है रूद्र के पत्नी लेकिन रूद्र का जनम कहा हुआ है और वो इस जनम में किसके रूप में है ये मुझे भी पता नहीं है.

गुरुदेव के बात सुन कर हम सब हैरान हो गए और अपने hi बिचारो में खो गए खैर कुछ देर बाद मई कुछ सोचते हुए गुरुदेव से बोलै.

मई- गुरुदेव मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही है की हम सब उन्हें ढूंढेंगे कैसे.

गुरुदेव- उन सब को ढूँढना बहुत आसान हाउ क्युकी उनके शरीर पर निशान बिरथ मार्क के रूप में होगा जैसे त्रिदेवियों के ाँस के शरीर पर लोटस 🪷 वीणा 🎸 और त्रिशूल 🔱 का निशान बिरथ मार्क के रूप में होगा तो वही त्रिदेवो के ाँस पर सुदर्शन चक्र किताब 📖 और त्रिशूल 🔱 के साथ डमरू का निशान होगा.

गुरुदेव के बात सुन कर मई चौक पड़ा और मई मन hi मन सोचने लगा.

मई- (अपने मन में) ऐसा निशान तो मेरे शरीर पर भी तो कही उन ांसो में से मई भी तो एक नहीं हु नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता क्युकी गुरुदेव ने बताया की एक ाँस के शरीर पर एक निशान होगा लेकिन मेरे शरीर पर तो तीनो निशान जनम से hi है मेरे दाहिने हाथ पर सुदर्शन चक्र तो बाये हाथ पर बुक और मेरे पीठ पर त्रिशूल के साथ डमरू का निशान बिरथ मार्क के रूप में मौजूद है तो इसका मतलब है की मई hi वो रूद्र तो नहीं अरे नहीं नहीं ये मई क्या सोचने लगा मई रूद्र कैसे हो सकता हु वो तो बहुत शक्तिशाली था और उसने तो मार्टिकल आर्ट्स के सरे लेवल को पर कर के सुप्रीम बन गया था लेकिन मई तो अभी सुप्रीम लेवल से बहुत पीछे हु अरे यार ये सोच सोच कर मेरा दिमाग ख़राब हो जायेगा मुझे ये सब सोचने से अच्छा है की मई गुरुदेव से ये बात पूछ लेता हु की उन सरे बिरथ मार्क्स का मतलब क्या है जो मेरे शरीर पर मौजूद है.

गुरुदेव के बात सुन कर मई अपने ख्यालो में hi गम था की तभी गुरुदेव के बात सुन कर रोहन गुरुदेव से पूछता है.

रोहन- गुरुदेव वो सब तो ठीक है लेकिन मुझे एक बात समझ में नहीं आयी की हम उनके शरीर का वो बिरथ मार्क देखेंगे कैसे क्युकी वो मार्क्स तो उनके शरीर पर कही भी हो सकते है.

रोहन के बात सुन कर सभी गुरुदेव के तरफ प्रश्न भरी निगाहो से देखने लगे क्युकी रोहन के बातो में सचाई थी रोहन के बात सुन कर गुरुदेव भी सोच में पद गए कुछ देर सोचने के बाद गुरुदेव बोले.

गुरुदेव- मई तुम सब को अपने विद्या से सिद्ध कर के एक एक स्टोन दूंगा और उस स्टोन की खूबी ये होगी की जब वो स्टोन किसी बर्थमार्क वाले इंसान के संपर्क में आएगा तो वो गर्म हो जायेगा तुम सब यही पर बैठो मई अभी सरे स्टोन को सिद्ध कर के आता हु.

रोहन- ठीक है गुरुदेव.

इसके बाद गुरुदेव वह से चले जाते है उनके जाने के बाद सब रूद्र और उसकी पत्नियों के बारे में hi बाटे करने लगते है लेकिन मेरा ध्यान तो कही और था मई बार बार अपने शरीर के बिरथ मार्क्स के बारे में hi सोचे जा रहा था की आखिर वो मेरे शरीर पर क्यों है और वो भी वैसा जैसा गुरुदेव ने बताया था अगर एक बिरथ मार्क्स होता मन लेता की मई भी उन्ही ांसो में से एक हु लेकिन मेरे शरीर पर तो वो तीनो निशान बिरथ मार्क्स के रूप है अभी मई ये सब सोच hi रहा था की तभी मुझे रोहन की आवाज सुनाई दी.

रोहन- अरे भाई प्रतिक तुम कहा खोये हुए हो मई तुम्हे कबसे आवाज दे रहा हु तुम सुन क्यों नहीं रहे हो.

रोहन के बात सुन कर संध्या मेरी चुटकी लेते हुए बोली.

संध्या- ये और कहा खोया होगा ये पका शनाया के खयालो में खोया होगा क्यों प्रतिक मई सही बोल रही हु न.

संध्या के बात सुन कर सब हसने लगे वही मई झेप गया और फिर मई शंध्या के बातो का जबाब देते हुए बोलै.

मई- अरे नहीं ऐसी कोई बात नहीं है मई तो बस रूद्र और उसके तीनो पत्नियों के बारे में सोच रहा था.

दीप्ती- अच्छा थोड़ा हमें भी बताओ की तुम उनके बारे में क्या सोच रहे थे.

दीप्ती के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- मई बस ये सोच रहा था की रूद्र के पत्निया रूद्र को कितना प्यार करती होंगी की वो उनके लिए अपना जान देने से भी नहीं दरी.

कारन- है भाई ये तो है सच में रूद्र और उसके पत्नियों के बिछ बहुत प्यार होगा तभी वो एक दूसरे के लिए जान भी देने को तैयार हो गए.

दीपक- गुरुदेव ने बोलै की रूद्र और उनके तीनो पत्नियों का पुनर्जन्म हो गया है तो आखिर इस जनम में रूद्र किस रूप में होगा मुझे उसके जैसे योद्धा से एक बार मिलना है.

अभी हम सब बात कर hi रहे थे की तभी गुरुदेव उन सरे स्टोन को सिद्ध कर के ले आये गुरुदेव ने जैसे hi वो स्टोन के कर हमारे पास आये वो स्टोन पूरी तरह से गरम हो गया ये देख कर गुरुदेव चौक गए और अपने मन में बोले.

गुरुदेव- (अपने मन में) ये स्टोन इन सब के पास आते hi इतना गरम क्यों हो गया ये स्टोन तो मई त्रिदेव और त्रिदेवियों के ाँस का पता लगाने के लिए बनाया है तो कही ऐसा तो नहीं की इनमे से कोई एक त्रिदेव या त्रिदेवियों का अंश हो एक काम करता हु मई इनसे hi पूछ लेता हु.

गुरुदेव- तुम सब मुझे एक बताओ की अभी मई जो निशान के बारे में तुम सब को बताया वो तुम लोगो में से किसी के शरीर पर है क्या.

गुरुदेव के बात सुन कर किसी को कुछ समझ में नहीं आया तो कारन गुरुदेव से पूछा.

कारन- गुरुदेव आपके बातो का मतलब हम समझे नहीं आप कहना क्या चाहते है हम से वो निशान किसी के पास क्यों होगा.

गुरुदेव- मई ये बात तुम सब से इस लिए पूछ रहा हु क्युकी मई जब ये स्टोन को तुम सब के पास ले आया तो ये गरम हो गया और ये तभी होगा जब त्रिदेव और त्रिदेवियों में से किसी का अंश यहाँ पर मौजूद हो.

गुरुदेव के बात सुन कर मुझे छोड़ कर बाकि सब एक साथ बोले.

सब- नहीं गुरुदेव हमारे शरीर लार ऐसा कोई भी निशान मौजूद नहीं है.

सब के बात सुन कर गुरुदेव ने सबके एक नजर देखा और फिर उनकी नजर मुझ पड़ी तो मुझे कुछ न बोलता देख कर वो मुझसे बोले.

गुरुदेव- प्रतिक तुमने हमारे बात का कुछ जबाब नहीं दिया क्या तुम्हारे शरीर पर कोई निशान मौजूद है.

गुरुदेव के बात को सुन कर मई कुछ देर सोचने के बाद बोलै.

मई- गुरुदेव मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा आपने जैसा बोलै वैसा निशान मेरे शरीर पर मौजूद तो है लेकिन मुझे नहीं लगता है की मई त्रिदेवो का वो अंश हु जिसे आप धुंध रहे है क्युकी मेरे शरीर पर एक नहीं तीन निशान है और अपने बोलै था की त्रिदेव के 3 अंश होंगे और तीनो पर अलग अलग निशान होगा.

मेरे बात को सुन कर गुरुदेव के साथ साथ मरे सरे दोस्त चौक गए और मुझे घर कर देखने लगे उन्हें मेरे बातो पर विश्वास hi नहीं हो रहा था फिर गुरुदेव कुछ सोचते हुए मुझसे बोले.

गुरुदेव- नहीं ऐसा कैसे हो सकता है जहा तक मुझे पता है की इस जनम में त्रिदेवो के तीन अंश होंगे और वो तीन निशान उनके hi शरीर पर होगा तो ये कैसे हो सकता है की वो सरे निशान एक ब्यक्ति के शरीर पर हो.

इतना बोल कर गुरुदेव कुछ सोच में पद गए फिर वो कुछ यद् करते हुए बोले.

गुरुदेव- है मुझे यद् आया मैंने अपने पूर्वज आचार्य वसिष्ट के द्वारा लिखे गए बुक में पढ़ा था की रूद्र के शरीर पर भी तीन निशान थे दये हाथ पर सुदर्शन चक्र के निशान बाये हाथ पर पुस्तक का निशान और पीठ पर डमरू के त्रिशूल का निशान तुम एक काम करो मुझे वो सरे निशान दिखाओ तो अगर मई जो सोच रहा हु वो सही है तो फिर िश धरती पर रूद्र का जनम हो चूका है.

गुरुदेव के बात सुन कर मई हैरान हो गया क्युकी अभी अभी निशान के बारे गुरुदेव ने जो बोलै वैसा hi निशान मेरे शरीर पर उसी जगह है जहा रूद्र के शरीर पर था इसका मतलब की मई hi रूद्र हु फिर गुरुदेव के कहे अनुसार मैंने अपने शर्ट को उतर दिया और अपने शरीर बने निशान को गुरुदेव को दिखने लगा.

गुरुदेव ने जैसे hi मेरे शरीर के तीनो निशान देखे तो वो हैरान हो गए और वो तुरंत वह से उठ कर अंदर चले गए और अपने हाथ में एक पुराणी पुस्तक लेकर आये जिसमे रूद्र का इमेज बना हुआ था हलाकि उस इमेज में रूद्र के चेहरा क्लियर नहीं दिख रहा था लेकिन उसके निशान क्लियर दिख रहा था उस निशान को देख कर मेरे साथ मेरे सरे दोस्त हैरान हो गए फिर गुरुदेव खुसी से बोले.

गुरुदेव- मुझे अब समझ में आया की तुम इतने आसानी से सरे विद्या को कैसे सिख जाते थे जो विद्या आज तक कोई नहीं सिख पाया वो सरे विद्या तुम कैसे सिख लिए क्युकी तुम hi रूद्र का पुनर्जन्म हो.

गुरुदेव के बात सुन कर मेरे सरे दोस्त हैरान हो गए लेकिन मुझे गुरुदेव के बातो पर विस्वास hi नहीं हो रहा था इस लिए मैंने गुरुदेव से पूछा.

मई- गुरुदेव अगर आपकी बात सच है तो मुझे कुछ यद् क्यों नहीं है की मई hi रूद्र का पुनर्जन्म हु और मन लिए की मई hi रूद्र के पुनर्जन्म हु तो आप त्रिदेव के जिस अंश के बारे में बात कर रहे थे तो क्या वो भी मई hi हु.

गुरुदेव मेरे बात को सुन कर कुछ सोच में पद गए फिर थोड़ी देर सोचने के बाद बोले.

गुरुदेव- मुझे पूरा यकीं हो गया है की तुम hi रूद्र के पुनर्जन्म हो और रही बात कुछ यद् न होने की तो ये तुम्हारा पुनर्जन्म है इस लिए तुम्हे पिछले जनम के कुछ बह यद् नहीं है सायद पुनर्जन्म के बात तुम्हे धीरे धीरे कर के यद् आये और रही बात त्रिदेव के अंश की तो वो भी इस दुनिया में जनम लिए है और तुम्हारे शरीर पर ये तीन निशान इस लिए है क्युकी तुम्हारे अंदर त्रिदेवो की शक्ति है जो पिछले जनम में रूद्र के पास था.

गुरुदेव के बात सुन कद मेरे सरे दोस्त जो पहले से hi हैरान रहे वो और भी ज्यादा हैरान हो गए और मई गुरुदेव के बात सुन कर सोच में पद गया फिर मई कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- गुरुदेव अगर मई hi रूद्र का पुनर्जन्म हु तो क्या पिछले जनम की इस जनम में भी मेरी तीन पत्निया होंगी.

मेरे इस बात को सुन कर गुरुदेव को कुछ यद् आया और वो मुस्कुराने लगे और मुस्कुराते हुए बोले.

गुरुदेव- तुम्हारे बात को सुन कर मुझे कुछ बाटे यद् आ गयी जिससे मुझे पूरा यकीं हो गया की तुम hi रूद्र के पुनर्जन्म हो.

मई- ऐसी कोण सी बात यद् आयी गुरुदेव जिससे आपको ये यकीं हो गया की मई hi रूद्र का पुनर्जन्म हु.

गुरुदेव- तुम जानते हो मई तुम्हारा भाग्य पहले hi देख लिया था और तुम्हारे जीवन में तीन पत्निया है जैसे रूद्र के जीवन में तीन पत्निया थी और ये सब बातो को आपस में मिलने का मतलब है की तुम hi रूद्र का पुनर्जन्म हो.

गुरुदेव के बात सुन मई पूरी तरह से चौक गया और ये सोच कर की मेरी किस्मत में तीन पत्निया लिखी हुयी है मेरी हालत बुरी तरह से ख़राब हो गया मेरी हालत को देख कर जो दोस्त अभी तक सौक में थे वो सब मुस्कुराने लगे तभी दीप्ती कुछ सोचते हुए गुरुदेव से बोली.

दीप्ती- इसका मतलब है की शनाया पिछले जनम में रूद्र के वाइफ थी और वो भी त्रिदेवियों के एक अंश है.

गुरुदेव- है मुझे लगता है की शनाया भी त्रिदेवियों की एक अंश है लेकिन प्रतिक तुम एक बार स्टोन से उसे चेक कर के देख लेना अगर वो सच में त्रिदेवियों की अंश निकली तो तुम मुझे अपने बारे में बता देना और उसे लेकर आश्रम में आ जाना मई उसे सब कुछ समझा दूंगा.

मई- जी गुरुदेव

गुरुदेव- तुम सब ये स्टोन लो और उन 6 लोगो को ढूंढो जो त्रिदेव और त्रिदेवियों के अंश है और है उनको ढूंढने के बाद यहाँ ले आना क्युकी मई उनको यहाँ पर मैरिटल आर्ट्स और दिव्या शक्तियों का ज्ञान दूंगा.

सब- जी गुरुदेव हम उनको धुंध कर सकुशल यहाँ पर ले कर आएंगे.

गुरुदेव- ठीक है तुम सब अब जा सकते हो और है अपनी ट्रेनिंग बंद मत करना क्युकी बहुत जल्द तुम सब का काली शक्तियों के साथ युद्ध होने वाला है.

सब- जी गुरुदेव हम आपकी बातो को यद् रखेंगे.

इसके बाद हम सब गुरुदेव के मैडिटेशन रूम से बहार निकल जाते है और आश्रम में घूमने लगते है भले hi सब आश्रम में घूम रहे थे लेकिन मेरे मन में मेरे पिछले जनम को लेकर बहुत सरे सवाल चल रहे थे मुझे इस तरह से अपने में गम देख कर दीप्ती मुझे छेड़ते हुए बोली.

दीप्ती- कहा खो गए प्रतिक कही फिर से शनाया को यद् तो नहीं करने लगे.

दीप्ती के बात सुन कर सरे लोग हसने लगे तभी कारन मेरा चुटकी लेते हुए बोलै.

कारन- अरे अब ये शनाया भाभी के बारे में क्यों सोचेगा अभी अभी तो इसको पता चला है की इसकी दी और बीवी है तो ये उनके hi खयालो में खोया होगा.

मई कारन के बात सुन कर झेप गया और अपनी नजर निचे कर लिया हलाकि जब से मई सुना था की मेरे किस्मत में 3 बीवी है तब से मई कही न कही ये सोच रहा था की वो लोग कैसी होगी लेकिन मुझे बुरा भी बहुत लग रहा था की मई कैसे शनाया के साथ धोखा कर सकता हु क्युकी मई उससे बहुत प्यार करता हु.

मई- ऐसी कोई बात नहीं है मई बस अपने पिछले जनम में बारे में सोच रहा हु की मेरे पिछले जनम की जिंदगी कैसी होगी.

हम सब दोस्त बहुत दिनों बाद ऐसे हसी मजाक कर रहे थे तभी रोहन सीरियस फेस बना कर मुझसे बोलता है.

रोहन- है तो प्रतिक भाई अब तुम मुझे ये बताओ की तुम अपने बीवी में इतनी बिजी हो गए हो की तुम्हे अपने दोस्तों से मिलने का भी समय नहीं रहता है.

मई- ऐसी कोई बात नहीं है रोहन मई बस अपने जिंदगी में उलझ सा गया हु लेकिन तुम सब अब चिंता मत कर क्युकी अब से तुम लोग मेरे साथ में hi रहोगे

मेरे बात को सुन कर सब चौक गए तभी शंध्या मेरा मजाक उड़ाते हुए बोली.

शंध्या- क्यों हमलोग को भी अपने ससुर के घर में hi रखने का इरादा है क्या जो तुम बोल रहे हो की हम सब साथ में hi रहेंगे.

मई- अरे नहीं मई वह पर एक हवेली ख़रीदा है और उसका रिन्यूअल करवा रहा हु जैसे hi हवेली का रिन्यूअल पूरा होगा हम सब उसी हवेली में रहेंगे और मई हवेली को एक मार्टिकल आर्ट्स स्कूल भी बनाने वाला हु जाया ओर योद्धाओ को हम सब मिल कर ट्रेनिंग देंगे.

दीपक- हम्म ये तो अच्छी बात है वैसे कब तक हवेली का काम पूरा हो जायेगा.

मई- बस एक दो दिन में कम्पलीट हो जायेगा वैसे मैंने तुम सब को बोलै था की कुछ लड़के का इंतजाम करने के लिए जिसको मई मार्टिकल आर्ट्स की ट्रेनिंग दे सकू तो क्या तुम लोग उन लड़को का इंतेज़ाम किया.

कारन- है हमने अभी तक 300 के लगभग में लड़को का इंतेज़ाम कर लिया है और वो सब अपने आप में एक एक्स्ट्रा आर्डिनरी बचे है.

मई- बहुत अच्छा एक काम करना जब हवेली का काम पूरा हो जायेगा तो तुम लोग सरे लड़को को हवेली में hi शिफ्ट करवा देना.

कारन- ठीक है भाई.

मई- और है तुम लोग बिज़नेस के लिए अपने अपने कंपनी में एक नया जनरल मैनेजर रख लो और तुम सब कुछ दिनों के लिए काम से छुटकारा ले लो ताकि हम सब मिल कर उन लोगो को जल्द से जल्द धुंध ले जिसे ढूंढने के लिए गुरुदेव ने बोलै है.

कारन- ठीक है हम अपने किसी भरोसे मंद ब्यक्ति के ऊपर कुछ दिनों के लिए कंपनी के काम छोड़ देंगे और तुम्हारे साथ मिल कर उन सब को ढूंढने जायेंगे.

मई- ठीक है चलो अब हम वापस चलते है.

इसके बाद मई वह पर पोर्टल खोला और वही पर आ गया जहा से मई पोर्टल खोल कर उन सब को आशाराम में ले कर गया था वह आने के बाद सरे लोग मुझसे जिद करने लगे आज हम सब साथ में डिनर करते है इस लिए मई उन सब के बातो को मानते हुए एक रेस्टॉरेंट में आ गया और फिर सरे लोग साथ में बैठ कर वही पर डिनर किया इसके बाद मई सबसे बोल कर वह से अपने घर के लिए टेलिपोर्ट हो गया और घर के थोड़ी दूर सुनसान जगह पर प्रकट हुआ इसके बाद मई सीधा घर के दूर पर पहुंच कर बेल्ल बजाय तो थोड़ी देर में शनाया के मुंय यानि पुस्पा देवी ने दरवाजा खोला और मुझे दरवाजे पर देख कर अपने भौहे सिकुड़ते हुए मुझसे बोली.

पुस्पा- आ गए लेथ साहब आइये आइये घर के अंदर आइये ये घर आपके लिए धरम शाला है न की आपका जब मन चाहा आप बहार चले गए और आधी रत को घर आ गए.

पुस्पा के तने से भरे बात को सुन कर मई अपना सर नीचे झुका लिया और उनसे बोलै.

मई- सॉरी आंटी मुझे बहार थोड़ा काम था इस लिए लेट हो गया.

मेरे बात को सुन कर पुस्पा घुसे से भड़कते हुए मुझसे बोली.

पुस्पा- अच्छा ऐसा कोण सा काम तुम कर रहे थे की तुम इतनी रत को घर आ रहे हो कही किसी लड़की के साथ गुलछर्रे तो नहीं उदा रहे थे.

पुस्पा के बात सुन कर मुझे बहुत बुरा लगा लेकिन मई उनको कुछ बोल भी नहीं सकता था क्युकी ये शनाया की माँ थी इस लिए मई उनसे धीमे आवाज में बोलै.

मई- आप ये क्या बोल रही है आंटी मई किसी लड़की के साथ नहीं था बल्कि मुझे सच में कोई काम था इस लिए मुझे इतनी देर हो गयी.

पुस्पा- मई जानती हु तुम जैसे निकम्मे कामचोर और फटीचर आदमी को तुम्हे बहार कोई काम नहीं था बल्कि तुम घर पर खाना बनाने के चलते इतनी देर तक बहार रुके हुए थे.

पुस्पा के बात सुन कर मुझे बहुत गुसा आया मई अभी पुस्पा आंटी को घुसे में कुछ बोलने hi वाला था की तभी वह पर शनाया के डैड अजय मल्होत्रा आ गए और वो पुस्पा से बोले.

अजय- तुम प्रतिक को ये क्या बोले जा रही हो उसे काम होगा तभी उसे इतना लेट हो गया और वैसे भी ये तुम्हारा कोई नौकर नहीं है जो ये घर के काम करेगा ये इस घर का दामाद है समझी (फिर मुझसे) चलो प्रतिक बीटा तुम अंदर आ जाओ और इसके बातो को इग्नोर करो.

अजय के बात सुन कर पुस्पा को बहुत गुसा आया लेकिन वो कुछ बोली नहीं बस अपना पेअर पटकते हुए घर के अंदर चली गयी पुस्पा को अंदर जाने के बाद मई भी घर के अंदर एंटर किया जैसे hi मई घर के अंदर एंटर किया तो मुझे घर में से बहुत स्ट्रांग नेगेटिव एनर्जी आते हुए महसूस हुआ लेकिन मई पुस्पा आंटी के बातो से बहुत ज्यादा हर्ट हुआ था इस लिए मई नेगेटिव एनर्जी पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और सीधा शनाया के रूम में चला गया.

जैसे hi मई रूम में आया तो देखा की शनाया लैपटॉप में कुछ काम कर रही है तो मई उसे इग्नोर कर के स्नान करने के लिए बाथरूम में चला गया फिर थोड़ी देर बाद स्नान कर के माँ बाथरूम से बहार निकल गया इधर शनाया के भी काम ख़तम हो गया था और वो अपने स्टडी टेबल से उठ कर बाथरूम के तरफ hi आ रही थी वो अपने काम में इतना बिजी थी की मई जब रूम में आया था तो उसे पता भी नहीं चला था.

शनाया जैसे hi अपने स्टडी टेबल से उठ कर बाथरूम जाने के लिए मुड़ी उसी वक़्त मई भी बाथरूम का दरवाज़ा खोलते हुए बहार आया और शनाया के नजर मेरे शरीर पर गयी और वो एकटक मुझे घूरने लगी दरअसल इस वक़्त मई सिर्फ एक टॉवल में खड़ा था मेरे शरीर के ऊपर के हिंसा पूरा नंगा था शनाया मेरे शरीर के 8 पैक को देख कर उसी में खो गयी थी आज ये पहला मौका था जब मई शनाया के सामने बिना कपड़ो के आया था और शनाया मुझे इस तरह बिना कपडे के देख रही थी जब मेरा ध्यान शनाया पर गया तो उसे खुद को ऐसे घूरता देख कर मई हड़बड़ा गया और पीछे मुद गया जिससे शनाया को मेरे पीठ पर बने डमरू के साथ त्रिशूल का निशान दिख गया और मेरे इस तरह से मुड़ने के कारन शनाया भी होश में आ गयी थी इस लिए उसने मुझसे बोली.

शनाया- अरे प्रतिक तुम कब आये तुम रुको मई तुम्हारा कपडा निकल कर देती हु वैसे तुम्हारे बॉडी पर ये टैटू अच्छी लग रही है कहा से बनवाया है इसे.

मुझे बहुत शर्म आ रहा था की आज मुझे शनाया ने बिना कपडे के देख ली भले hi वो मेरी बीवी थी लेकिन ये मेरा पहला एक्सपीरियंस था की कोई मुझे बिना कपड़ो के देखा था इस लिए मुझे बहुत शर्म आ रहा था लेकिन मुझे शनाया के बातो का कुछ तो जबाब देना hi था इस लिए मई अपने शर्म को छोड़ कर शनाया से बोलै.

मई- ये कोई टैटू नहीं है बल्कि ये मेरे बिरथ मार्क्स है जो मेरे जनम के समय से hi मेरे शरीर पर है.

मेरे बात को सुन कर शनाया कुछ सोचते हुए हैरानी से बोली.

शनाया- सच में क्या ये सच में तुम्हारे शरीर पर जनम से है.

मई- है मई सच बोल रहा हु

शनाया- तुम जानते हो मेरे भी शरीर पर एक निशान है जो मेरे जनम के समय से hi है.

मई- अच्छा सच में तुम्हारे शरीर पर भी बिरथ मार्क है.

शनाया- है और वो भी लोटस 🪷 के निशान है.

शनाया के बात सुन कर मई हैरान हो गया लेकिन ज्यादा नहीं क्युकी मुझे कही न कही ये एहसास था की जब मई रूद्र का पुनर्जन्म हु तो शनाया भी त्रिदेवियों के hi एक अंश होगी लेकिन अब जब शनाया ने खुद hi बता दिया की उसके शरीर पर लोटस 🪷 के निशान है तो मुझे पूरा यकीं हो गया मई अभी अपने hi सोच में गम था की तभी मुझे शनाया के आवाज सुनाई दी.

शनाया- अरे यार मई किन बातो को लेकर बैठ गयी तुम थोड़ी देर रुको मई तुम्हारे लिए कपडे निकल दे रही हु.

मई- ठीक है

मेरे बात को सुन कर शनाया तुरंत कप्बोर्ड से मेरा कपडा निकलने लगी फिर थोड़ी देर में वो मेरे कपडे निकल कर मुझे दी फिर मैंने शनाया से कपडे को ले कर उसी के सामने पहनने लगा जिससे वो मेरे राइट हैंड और लेफ्ट हैंड पर बने निशान को भी देख ली जिसे देख कर वो और भी ज्यादा हैरान हो गयी लेकिन वो कुछ बोली नहीं शनाया को इस तरह से चुप देख कर मई उससे बोलै.

मई- यार तुम इतनी रत तक लैपटॉप में क्या कर रही थी तुम कंपनी में काम तो करती hi हो लेकिन घर पर आने के बाद भी लैपटॉप में घुसी हुयी थी काम से काम घर पर आने के बाद थोड़ा आराम तो कर लिया करो.

मेरे बात को सुन कर शनाया ने थोड़ी उत्सुकता से बोली.

शनाया- अरे ऐसी बात नहीं तुम्हे पता है आज मेरे कंपनी को एक इन्वेस्टर मिला है जो मेरे कंपनी में पुरे 80 करोड़ इन्वेस्ट किया है इसी लिए मई अपने लैपटॉप में कंपनी के कुछ काम कर रही थी और इतनी ज्यादा म्हणत कर रही हु ताकि अगले पार्टी को मेरे कंपनी में इन्वेस्ट करने का अफ़सोस न हो मई चाहती हु की इस इन्वेस्ट से मुझे और इन्वेस्टर दोनों को फायदा हो.

मई- कोंग्रटुलतिओन्स मैंने तुम्हे बोलै था न की तुम टेंसन मत लो तुम्हे कोई न कोई इन्वेस्टर जरूर मिल जायेगा आज के लिए काम बहुत हो जाओ जाकर फ्रेश हो कर आओ मुझे तुमसे कुछ जरुरी बात भी करनी है.

शनाया- ठीक है मई बस 10 मिनट में फ्रेश हो कर आती हु.

इतना बोल कर शनाया बाथरूम में चली गयी फिर करीब 10 मिनट में फ्रेश हो कर बहार आ गयी फिर बीएड पर आ कर बैठते हुए बोली.

शनाया- है बोलो प्रतिक तुम्हे मुझसे क्या बाटे करनी थी.

मई- मई तुमसे ये बाटे करना चाहता था की अब तुम्हे मार्टिकल आर्ट्स की ट्रेनिंग पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए क्युकी इन दिनों की भी तुम्हारे साथ हो रहा है उससे मुझे यही लग रहा है की तुम्हे अपनी ताकत को और बढ़ानी चाहिए क्युकी मई तुम्हे बचने के लिए हर वक़्त तुम्हारे साथ नहीं रह सकता था और कही इसी बिछ तुम्हारे साथ कुछ हो गया तो मई अपने आप को कभी माफ़ नहीं कर पाउँगा.

शनाया मेरे बात को सुन कर इमोशनल हो गयी फिर वो कुछ सोचते हुए बोली.

शनाया- बात तो तुम सही बोल रहे हो लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रही है की मई अपनी ताकत को और कैसे बढ़ाऊ और रही बात ट्रेनिंग की तो वो तो मई डेली कर hi रही हु लेकिन मेरी ताकत hi नहीं बढ़ रही है.

मई- उसका उपाय मेरे पास है मई तुम्हे 2 लेवल उप गोली दे रहा हु तुमको इसे सही समय पर खाना है पहली गोली तुम कल सुबह में खा लेना जिससे तुम 8तह लेवल में पहुंच जाओगी फिर तुम्हे 9तह लेवल में जाने के लिए कड़ी ट्रेनिंग करना हो फिर जब तुम 9तह लेवल में जाने के बाद उसके पिछ पर पहुंच जाओगी तब ये दूसरी गोली खा लेना इसके कहते hi तुम हाफ ग्रांडमास्टर में पहुंच जाओगी.

इतना बोल कर मई अपने पॉकेट में हाथ डाला और अपने स्टोरेज रिंग से 2 लेवल उप के गोली के साथ साथ कुछ तकनीक भी निकला और शनाया को देते हुए.

मई- और है ये कुछ तकनीक है जिससे तुम्हे अपने लेवल की बढ़ने और उसको पका करने में हेल्प करेगा इसमें कुछ फाइटिंग तकनीक भी है जिसे सिखने के बाद तुम आराम से अपने से एक लेवल ऊपर के योद्धा से लड़ सकती हो लेकिन तुम्हे इसे सिखने के लिए बहुत कड़ी ट्रेनिंग करनी होगी.

शनाया मेरे बात को सुन कर मुझे आश्चर्य सेदेखने लगी उसके मन में बहुत सरे सवाल आ रहे थे इस लिए वो मुझसे सवाल करते हुए पूछी.

शनाया- तुम्हारे पास ये गोली और ये तकनीक कहा से आयी क्या तुम सच में एक ग्रांडमास्टर मार्टिकल आर्ट्स योद्धा हो.

मई शनाया के बात सुन कर उसको देखते हुए मन hi मन सोचा.

मई- ( मन में ) मुझे शनाया को अभी जितनी जरुरत है उतनी hi सचाई बताना चाहिए बाकि का सच मई सही समय आने पर बता दूंगा.

मई- शनाया ये लेवल उप पिल मैंने hi बनाई है और रही बात तकनीक की तो ये तकनीक मेरे गुरुदेव ने मुझे दिया था और अब ये तकनीक मई तुम्हे दे रहा हु.

शनाया मेरे बात को सुन कर चौक गयी और मुझसे हैरानी से बोली.

शनाया- क्या ये गोली तुमने बनाई है लेकिन तुम ऐसे गोली कैसे बना सकते हो और तुमने गोली बनाना सीखा कहा से है.

मई शनाया के बात सुन कर कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- मई इस गोली को वैसे hi बनाया है जैसे जैसे मैंने संजीवनी गोली इंस्टेंट रिकवरी गोली और वो ब्यूटी क्रीम बनाया था जो मई पहले तुम्हे दिया था और रही बात की ये सब मुझे कैसे बनाने आता है तो मई तुम्हे बता दू की ये सब मई अपने गुरुदेव से सीखा है जिसके पास मई बचपन से रहा हु.

मेरी बात को सुन कर शनाया आश्चर्य चकित रह गयी फिर वो खुद को सँभालते हुए बोली.

शनाया- क्या तुम सच बोल रहे हो वो साडी दवाइया तुमने बनाई है.

मई- है मई सही बोल रहा हु वो साडी दवाइया मैंने hi बनाई है.

शनाया- लेकिन जब मैंने तुमसे पूछा था की ये दवाइया तुम्हारे पास कैसे आयी तो तुमसे मुझसे बोलै था की ये मेरे दोस्त ने दिया है तो क्या तुम मुझसे झूठ बोल रहे थे और ये तुम्हारे गुरुदेव कहा से आ गए तुमने मुझे गुरुदेव के बारे में पहले क्यों नहीं बताया.

शनाया के बात सुन कर मई कुछ देर के लिए चुप हो गया फिर मई कुछ सोचते हुए शनाया से बोलै.

मई- ऐसी बहुत साडी बाटे है शनाया जो मैंने तुम्हे नहीं बताया है क्युकी हर बात को बताने का सही समय होता है मई तुमसे वडा करता हु की सही समय आने पर मई तुमको साडी सचाई बता दूंगा.

शनाया मेरी बात को सुन कर कुछ नहीं बोली बस मुझे घूरती रही है फिर कुछ देर बाद वो मुझसे बोली.

शनाया- लेकिन वो समय कब आएगा मई कुछ नहीं जानती तुम मुझे अभी के अभी साडी सचाई बताओ.

मई- देखो शनाया ऐसी जिद अच्छी नहीं होती तुम मुझ पर विस्वास करो मई तुम्हे साडी सचाई जल्द hi बता दूंगा बस सही समय का इंतज़ार करो.

शनाया मेरी बात को सुन कर कुछ देर तक सोचती रही फिर मुझसे बोली.

शनाया- ठीक है प्रतिक मुझे तुम पर विस्वास है तुम मेरी विस्वास को टूटने मत देना और है मुझे साडी सचाई जल्द से जल्द बताने की कोशिश करना.

मई- थैंक यू मेरे ऊपर विस्वास करने के लिए अब छोडो ये सब और मैंने तुम्हे जो बताया उसको ध्यान में रखना कल सुबह में एक गोली खा लेना इसके बाद मैंने जो तकनीक तुम्हे दिया है उसका ट्रेनिंग करना और जब तुम 9तह लेवल के पिछ पर पहुंच जाओगी तब तुम दूसरी गोली को खा लेना जिससे तुम तुरंत hi हाफ ग्रांडमास्टर बन जाओगी.

शनाया- ठीक है मई तुम्हारी बात को यद् रखूंगी वैसे तुम मुझे एक बात बताओ जब तुम इतने सरे दवा बनाना जानते हो तो तुम अपना बिज़नेस क्यों नहीं सुरु करते अगर तुमने अपना बिज़नेस सुरु कर दिया तो माँ के साथ लगाए हुए शर्त को भी जल्दी hi पूरा कर लोगे.

शनाया के बात सुन कर मई मुस्कुराने लगा फिर मई शरारत भरी अंदाज में शनाया से बोलै.

मई- ोये होये बड़ी जल्दी है तुम्हे मेरी शर्त पूरा करवाने की कही तुम्हे मुझसे प्यार तो नहीं हो गया.

मेरी बात को सुन कर शनाया के होतो पर एक हलकी सी मुस्कान आ गयी फिर वो जल्दी से अपने मुस्कान को छुपाई और फिर अपने चेहरे पर थोड़ा बनावटी घुसे लती हुयी बोली.

शनाया- तुम कुछ ज्यादा नहीं बोलने लगे हो मई तो तुम्हारे hi भलाई के लिए बोल रही थी.

शनाया के बात सुन कर मई चुप हो गया फिर थोड़ी देर बाद मई शनाया को देखते हुए बोलै.

मई- ठीक है शनाया अब हमें सो जाना चाहिए क्युकी बहुत ज्यादा समय हो चूका है.

शनाया मेरे बात को सुन कर अपने सर को है में हिलती है इसके बाद हम दोनों बीएड पर अपने अपने ब्लैंकेट ओढ़ कर सो जाते है.



वर्ड काउंट 9.5क
 
अपडेट 33

शनाया और शनाया के कंपनी पर मुसीबत


मंटू अपने घर से निकलने के बाद सीधा अपने फार्महाउस पर चला गया ये फार्महाउस उसने दुनिया के नजरो से छिपने के लिए बनाया था इस फार्महाउस के बारे में सिर्फ मंटू यादव और उसका एक खास आदमी hi जनता था इस लिए यहाँ पर रहते हुए मंटू यादव को पकडे जाने का कोई दर नहीं था खैर थोड़ी देर बाद उसका बीटा कुंदन यादव भी वह पर आ गया उसे यहाँ पर लेन वाला मंटू यादव के खाश आदमी जैकी था कुंदन यादव ने जब अपने बेटे को देखा टी घुसे से उसके पास गया और खींच कर उसको 2 तपाद मारा और घुसे से उससे बोलै.

मंटू- तुम जैसा नालायक बीटा होने से अच्छा था की मेरा कोई बीटा hi नहीं होता.

अपने बाप से मर खा कर डट सुनने से कुंदन थोड़ा भायखला गया था क्युकी उसे तो कुछ पता hi नहीं था की आखिर हुआ क्या है और उसके बाप उस ओर हाथ क्यों उठा रहा है इस लिए उसने थोड़े घुसे से अपने मंटू यादव से बोलै.

कुंदन- ये क्या है डैड अपने मुझे मारा क्यों और मुझसे ऐसा क्या गलती हो गया जो आप मुझे नालायक बोल रहे है.

मंटू यादव ने जब कुंदन के बात सुना तो वो घुसे से बोलै.

मंटू- तुमने क्या गलती की है ये तुम्हे पता hi नहीं है वह बीटा वह यहाँ तुम्हारी गलती के कारन मेरा मला का पद मुझसे चीन गया पुलिस मुझे पागलो की तरह धुंध रही है और तुम बोलते हो की तुम्हे तुम्हारी गलती पता hi नहीं है.

मंटू के बात सुन कर कुंदन हैरान हो गया और वो उसी हैरानी से बोलै.

कुंदन- क्या आपका मला का पद छीन गया और पुलिस वाले आपको पागलो की तरह धुंध रहे है और वो भी मेरी वजह से लेकिन ये कैसे हो सकता है उस कम ने आपसे मला के पद छीन कर अच्छा नहीं किया और उन पुलिस वालो की इतनी औकात हो गयी की वो आपके पीछे पड़े अब लगता है की उन सब को उनकी औकात देखनी hi पड़ेगी और है डैड मुझे सच में नहीं पता की मुझसे ऐसी क्या गलती हुयी है.

कुन्दन के बात सुन कर मंटू यादव कुंदन को एक बार घर कर देखा और फिर घुसे से बोलै.

मंटू- तुम्हारी इसी मुर्ख बूढी के चलते आज मुझे यहाँ छिप कर रहना पद रहा है क्या जरुरत थी तुम्हे रॉकी के साथ सोल्लगे में जाकर उस लड़की की रपे करने की अगर वो तुम्हे इतना पसंद hi आ गयी थी तो तुम उसे अपने फार्महाउस पर ले आते लेकिन नहीं तुम्हे तो सोल्लगे में hi रंगरेलिया माननी थी और तुम्हारी इसी गलती के कारन आज हम सब इस मुसीबत में फेज है.

मंटू के बात सुन कर कुंदन को यकीं hi नहीं हुआ की आज उसका और उसके बाप की ये हालत मात्रा उसकी एक गलती के कारन हुआ है आज तक उसने न जाने कितने लड़कियों को रपे कर के मर दिया था लेकिन आज तक उसके साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था इस लिए वो अपने डैड से बोलै.

कुंदन- लेकिन डैड ये जैसे हो सकता है हमने तो उस लड़की के मर्डर को सुसडे दिखाया था तो पुलिस वाले को इस बारे पता कैसे चल गया.

मंटू- पुलिस वाले को ये बात तुम्हारे hi दोस्त रॉकी ने बताया है.

मंटू के बात सुन कर कुंदन हैरान हो गया और वो उसी हैरानी में बोलै.

कुंदन- नहीं ऐसा नहीं हो सकता रॉकी मुझे धोखा नहीं दे सकता.

मंटू ने जब कुंदन की बाटे सुनी तो वो उसको वो सारा वीडियो दिखाया जो मैंने इंटरनेट पर डाला था जिसे देख कर कुंदन हैरान हो गया और अपने सर पकड़ कर वही सोफे पर बैठ गया उसको इस तरह से परेशां देख कर मंटू का गुसा कुछ संत हुआ और वो कुंदन से बोलै.

मंटू- अब परेशां होने से क्या होगा जो होना था वो तो हो चूका है अब तुम सिर्फ ये करो की यहाँ के बारे में किसी को मत बताना और जब तक ये मामला ख़तम नहीं हो जाता तुम यही पर रहोगे यहाँ से तुम कही भी नहीं जाओगे समझ गए न.

कुंदन- जी डैड आप मुझे माफ़ कर दीजिये मेरी वजह से आपको इतनी परेशानी झेलनी पद रही है.

मंटू- कोई बात नहीं मई इस परेशानी से जल्द hi बहार आ जाऊंगा और फिर उन लोगो को देखूंगा जिसने भी मेरे खिलाफ जाने की कोशिश की है.

वही दूसरी तरफ मंटू के गुंडे रॉकी के भाई और बाप को किडनैप करने के लिए आधी रत को उसके घर आ गए थे जब वो लोग घर में एंट्री कर रहे थे उस वक़्त दोनों बाप बेटे अपने अपने रूम में सो रहे थे और गोरखनाथ कुछ तंत्र साधना के लिए सैमसन घाट गया हुआ था इस लिए मंटू के गुंडों ने बड़ी आसानी से जतिन भानुशाली और नागेंद्र भानुसाली के सरे गुंडों को बेहोश कर दिया इसके बाद वो लोग जतिन और नागेंद्र के रूम में गए और दोनों को सोते हुए hi बेहोशी के दवा सुंघा दिया जिसके कारन वो लोग और भी गहरी नींद में सो गया फिर उन लोगो ने दोनों को उठा कर बहार आ गए और उन दोनों को अपने गाड़ी में दाल दिया इसके बाद उन गुंडों के बॉस ने मंटू यादव के खास आदमी को कॉल किया जिसने इनलोगो को जतिन और नागेंद्र को किडनैप करने के लिए बोलै था फिर उस आदमी ने गुंडों को लीडर को एक अड्रेस दिया और बोलै की जतिन और नागेंद्र को वही पर छोड़ दे.

थोड़ी देर बाद वो लोग उस अड्रेस पर पहुंच गए इसके बाद जतिन और नागेंद्र को वही पर छोड़ कर चले गए उनके जाने के थोड़ी देर बाद वह पर एक गाड़ी आ कर रुकी और उसमे में मंटू यादव के खास आदमी बहार निकला और उन दोनों को उठा कर अपने गाड़ी में डाला और वह से फार्महाउस पर आ गया जहा इस वक़्त मंटू यादव और कुंदन रुके हुए थे फिर वो वह पर आ कर उन दोनों को कुर्सी पर बैठा कर अच्छी तरह से हाथ और पेअर बांध दिया इसके बाद वो वह से चला गया.

नेक्स्ट डे मॉर्निंग में पुरे शहर में सरे न्यूज़ चैनल पर बस स्नेहा के मर्डर के बारे में hi खबर आ रही थी जिसे देख कर सरे जनता आक्रोशित थे और न्याय के मांग कर रहे थे.

दरअसल मैंने जो वीडियो इंटरनेट पर डाला था उस वीडियो में रॉकी ने खुद काबुल किया था की स्नेहा का मर्डर रॉकी और कुंदन यादव दोनों ने मिल कर किया था पहले ये लोग उसे ड्रग्स दे कर उसके साथ रपे किया फिर ड्रग्स ओवरडोज़ होने के कारन उसकी मृत्यु हो गयी इस लिए लोग इस वीडियो को देख कर पुलिस पर भड़के हुए थे और अपने हाथो में जस्टिस फॉर स्नेहा और दोसियो को फांसी दो जैसे लिखा हुआ बैनर लेकर सड़क पर उतर आये थे इधर जैसे hi स्नेहा के माता पिता ने वो न्यूज़ देखा तो उनके आँखों में आंसू आ गए उन्हें पूरा विस्वास था की उनकी बेटी का मर्डर हुआ है और ये जानकर की उनकी बेटी के मर्डर के पीछे रॉकी और कुंदन यादव का हाथ है तो उन दोनों के आँखे घुसे से लाल हो गया वो अब किसी भी हालत में इन दोनों को सजा दिलवाना चाहते थे तभी टीवी में एक और न्यूज़ चलने लगी जिसमे रॉकी के मर्डर की खबर आ रही थी और साथ में ये भी बोलै जा रहा था की रॉकी का मर्डर सुपरबॉय ने किया है और उसने hi ये साबुत इंटरनेट पर डाला है जब स्नेहा के माता पिता को पता चला की उनके बेटी के एक कातिल को सुपर बॉय ने मर डाला है तो वो दोनों खुस हो गए और सुपर बॉय को दूवये देने लगे.

इधर जब जनता को ये बात पता चली की ये साबुत सुपर बॉय ने पब्लिक किया है और साथ में उसने स्नेहा के एक दोसी को मर भी डाला है तो सुपर बॉय के छवि उनलोगो के बिच एक हीरो की हो गयी थी और वो लोग सुपर बॉय के एक रुफ्फ़ इमेज बना कर उस पर लिखा की हमारा हेरा सुपर बॉय.

इधर जब सोनू ने वो न्यूज़ देखा तो वो हैरान हो गया और फिर खुसी से उछलने लगा फिर वो तुरंत मेरे पास कॉल किया लेकिन उस वक़्त मई किचन में सुबह का नास्ता रेडी कर रहा था इस लिए मई अपने मोबाइल को रूम में hi छोड़ दिया था इधर रूम में शनाया अभी भी सोई हुयी थी लेकिन अचानक मोबाइल रिंग होने से उसका नींद टूट गया और फिर वो मेरे फ़ोन को उठा कर देखि तो उस पर सोनू का कॉल आ रहा था शनाया सोनू के कॉल देख कर असमंजश में पद गया की वो कॉल उठाये या नहीं फिर वो कुछ सोच कर कॉल को रइवे कर ली और बोली.

शनाया- हैल्लो सोनू प्रतिक अभी बहार गया हुआ है तुमको उससे कुछ काम था क्या.

इधर सोनू ने जब देखा की कॉल प्रतिक ने नहीं बल्कि शनाया ने उठाया है तो वो बड़ी इज्जत से बोलै.

सोनू- गुड मॉर्निंग भाभी जी नहीं मुझे प्रतिक से कोई जरुरी काम तो नहीं था बस उसे एक न्यूज़ के बारे में बताना था.

शनाया- कैसी न्यूज़ है क्या ये सिर्फ प्रतिक के जानने लायक है या इसे मई भी जान सकती हु.

शनाया के बात सुन कर सोनू खुश होते हुए बोलै.

सोनू- है है भाभी ये न्यूज़ आपके भी जानने लायक है बल्कि मई ये कहु की ये न्यूज़ आपके लिए है अगर आप ये न्यूज़ के बारे में जानेंगी तो खुसी से उछाल जाएँगी.

सोनू के बात सुन कर शनाया एक्सीटेंड होते हुए बोली.

शनाया- अच्छा ऐसी भी क्या न्यूज़ है जिससे मई उछलने लगूंगी.

शनाया के बात सुन कर सोनू जल्दी से बोलै.

सोनू- भाभी आपकी जो दोस्त थी न स्नेहा उसके मर्डरर का पता चल गया है बल्कि उसके मर्डर के पीछे जो लोग थे उनमे से एक की मौत भी हो गयी है.

सोनू के बात सुन कर शनाया हैरान हो गयी और उसे उसके साथ उस दिन रॉकी के फार्महाउस जो भी हुआ था सब यद् आ गया और थोड़ा दर गयी की कही इन सब में प्रतिक का या उसका नाम न आ गया हो इस लिए वो थोड़ी परेशानी भरी आवाज में उससे बोली.

शनाया- अरे ये तो अच्छी बात हुयी इससे स्नेहा जे आत्मा को सन्ति मिलेगी लेकिन वो लोग है कोण जिसने स्नेहा के साथ ये सब किया था.

सोनू- भाभी वो और कोई नहीं बल्कि रॉकी और उसका एक दोस्त जो यहाँ के मला का बीटा था उसने किया था लेकिन इन लोगो के काळा कारनामे का पर्दाफाश हो गया है और ये सब करने वाला और कोई नहीं बल्कि सुपर बॉय है उसने hi इन सब के काळा कारनामो का पर्दाफाश किया और उसी के हाथो रॉकी मारा भी गया है अब बाकि है उस कुंदन यादव की जिसके कहने पर स्नेहा के साथ ये सब हुआ था.

सोनू के बात सुन कर शनाया रहत के साँस ली और फिर बोली.

शनाया- चलो ये तो अच्छा हुआ जो काम हम सब करना छह रहे थे वो काम सुपर बॉय ने कर दिया अब स्नेहा के आत्मा को सन्ति मिल जाएगी लेकिन कुछ भी उस बेचारी के साथ बहुत गलत हुआ.

सोनू- है भाभी आप सही बोल रही है उसके साथ hi क्या बल्कि ये सब किसी भी लड़की के साथ नहीं होना चाहिए था और है भाभी मई प्रतिक भाई के पास एक और काम से कॉल किया था वो क्या है न की अब सरे लोगो को पता चल गया की स्नेहा ने सुसाइड नहीं किया था बल्कि उसकी मर्डर हुयी थी इस लिए आज सोल्लगे में उसको श्रद्धांजलि दी जाने वाली है और साथ में उसके माँ और पापा को सोल्लगे के तरफ से कुछ डोनेशन भी दिया जायेगा ताकि वो अपने आगे के लाइफ अच्छे से बिता सके और इसमें आपको और प्रतिक दोनों को आना होगा.

सोनू के बात सुन कर शनाया ने कुछ सोचते हुए बोली.

शनाया- अरे ये भी कोई बोलने वाली बात है हम जरूर आएंगे आज स्नेहा के श्रद्धांजलि में और अपने तरफ से स्नेहा के माँ और डैड के लिए अच्छा डोनेशन भी देंगे आखिर वो मेरी दोस्त के माँ डैड है अब जब स्नेहा नहीं रही तो उनका ख्याल हमें hi तो रखना है.

सोनू शनाया के बात को सुन कर मन hi मन सोचता है.

सोनू-( अपने मन में) क्या किस्मत है प्रतिक भाई की जो ऐसी सुन्दर और सुशिल के साथ साथ नेकदिल बीवी मिली है सच में शनाया भाभी एक नेक दिल इंसान है और इनका दिल बहुत बड़ा है आज के ज़माने में इतना कोई अपनों के लिए भी नहीं सोचता है और ये अपने दोस्त के माँ डैड के लिए इतना सोच रही है.

फिर कुछ देर ऐसे hi बात करने के बाद सोनू शनाया से बोलै.

सोनू- ठीक है भाभी मई अब कॉल कट करता हु और है आप यद् से प्रतिक भाई को अपने साथ लेकर 11 बजे सोल्लगे आ जाइएगा क्युकी श्रद्धांजलि 11 बजे hi होगा.

शनाया- ठीक है मई आ जाउंगी.

इतना बोल कर शनाया ने कॉल कट कर दी फिर वो फ्रेश हो कर निचे आ गयी और मुझे साडी बाटे बताई मई उसके बात को सुन कर कुछ देर सोचने के बाद बोलै.

मई- ठीक है नास्ता रेडी है चलो पहले नास्ता कर लेते है इसके बाद हम सोल्लगे चलेंगे.

मेरे बात को सुन कर शनाया ने अपना गर्दन है में हिलाया और फिर हम सब नास्ता करने लगे नास्ते के टेबल पर सरे लोग मौजूद थे शिवाय शानवी को छोड़ कर फिर हम सब ने नास्ता किया और फिर रेडी हो कर सोल्लगे के लिए निकल गए.

इधर मंटू यादव के फार्महाउस पर जतिन और नागेंद्र भानुसाली को होश आ गया था जब वो लोग होश में आये तो खुद को एक अजान जगह पर प् कर घबरा गए और अपने चारो तरफ देखने लगे लेकिन उनको उस रूम में उनके अलावा और कोई नहीं दिखा ये देख कर वो मायूस हो गए तभी उस रूम का दूर खुला और उसमे से एक आदमी अंदर आया और जतिन और नागेंद्र को होश में देख कर बोलै.

आदमी- ो तो तुम दोनों को होश आ गया चलो अच्छी बात है अब हमको तुम दोनों को होश में लाना नहीं पड़ेगा.

इधर जतिन और नागेंद्र उस आदमी को अपने सामने देख कर समझ गए थे की उन दोनों को यहाँ लेन में इस आदमी का hi हाथ है इस लिए जतिन घुसे से उस आदमी से बोलै.

जतिन- कोण हो तुम और तुम्हारी हिमत कैसे हुयी हम दोनों को यहाँ लेन की शायद तुम हमें जानते नहीं हो इसी लिए तुमने ये गुस्ताखी की है अगर तुम हमें जान जाते तो हमें किडनैप करने की गलती नहीं करते अगर तुम अपनी भलाई चाहते हो तो हम दोनों को आजाद कर दो.

जतिन के बात सुन कर वो आदमी जोर जोर से हसने लगा और फिर वो डरने की नाटक करते हुए बोलै.

आदमी- (डरने का नाटक करते हुए.) ममम मुझे तुम्हारी बातो को सुन कर बहुत दर लग रहा है प्लीज मुझे कुछ मत करना मई अभी मरना नहीं चाहता हु प्लीज मुझे मत मरना प्लीज मुझे मत (इतना बोल कर जोर जोर से हसने लगा) है है है है है है तुम मुझे मुझे मरोगे है है है अपनी हालत देखि है अगर मई चहु तो अभी इसी वक़्त 2 मिनट में तुम दोनों की जान ले लूंगा लेकिन मई ऐसा करूँगा नहीं क्युकी मेरे मालिक ने तुम दोनों को जिन्दा रखने के लिए बोलै है.

उस आदमी के बात सुन कर जतिन और नागेंद्र दोनों बुरी तरह से दर गए और डरते डरते नागेंद्र बोलै.

नागेंद्र- तुम्हारे मालिक ने हमें किडनैप करवाया है लेकिन क्यों हमने उनका क्या बिगाड़ा है और वैसे तुम्हारे मालिक है कोण.

नागेंद्र के बात ख़तम होते hi कमरे में एक आवाज गूंज गयी.

आवाज- इसका मालिक मई हु.

जब दोनों बाप बेटे ने उस आवाज को सुना तो दोनों उस आवाज के तरफ घूम कर देखने लगे और अपने सामने मंटू यादव को खड़ा देख कर दोनों चौक गए तभी नागेंद्र मंटू यादव को देखते हुए बोलै.

नागेंद्र- आप लेकिन अपने हम दोनों को किडनैप क्यों करवाया है हम दोनों ने आपका क्या बिगाड़ा है और वैसे भी हम दोनों तो आपका बिज़नेस पार्टनर है तो भला आप हमें किडनैप क्यों करवाया.

नागेंद्र के बात सुन कर मंटू यादव घुसे से उसे घूरते हुए बोलै.

मंटू- क्या सच में तुम्हे पता नहीं है की मई तुम दोनों को यहाँ पर क्यों लाया हु या फिर तुम न जानने की एक्टिंग कर रहे हो.

जतिन- हमें सच में पता नहीं है की आप ने हमें यहाँ क्यों लाया है.

जतिन के बात सुन कर मंटू घुसे से उसके पास जाता है और उसे खींच कर एक थपड मरता है और बोलता है.

मंटू- तुम्हारे छोटे भाई ने मेरे गैर क़ानूनी कामो के साबुत इंटरनेट पर दाल कर मुझे बर्बाद कर दिया और तुम दोनों बोल रहे हो की तुम्हे कुछ पता hi नहीं है.

मंटू के बात सुन कर दोनों बाप बीटा हैरान हो गए दरअसल दोनों बाप बीटा को ये पता hi नहीं था की अभी इंटरेस्ट पर क्या बवाल मचा हुआ है क्युकी दोनों बाप बेटे तो रॉकी के गम में दुबे हुए थे इधर मंटू ने जब देखा की जतिन और नागेंद्र दोनों उसके बात को सुन कर हैरान है तो उसे कुछ दाल में कला लगा इस लिए वो अपने मन में सोचा.

मंटू- (अपने मन में) इन दोनों के चेहरा देख कर ऐसा क्यों लग रहा है की इन दोनों को सच में इस बारे में कुछ पता नहीं है कही ऐसा तो नहीं की ये काम रॉकी से किसी ने जबरदस्ती करवाया है और रॉकी दर के कारन इन लोगो को कुछ बताया भी नहीं हो.

इधर मंटू को सोच में पड़ा हुआ देख कर नागेंद्र उससे बोलै.

नागेंद्र- अगर आप जो बोल रहे है वो सच है तो आप हम दोनों को माफ़ कर दीजिये और आप हम पर विस्वास कीजिये हमें इस बारे में कुछ पता नहीं है और वैसे भी मुझे लगता है की जिसमे मेरे बेटे को मारा है ये उसी का काम है.

नागेंद्र के बात सुन कर मंटू यादव के कण खड़े हो जाते है और वो आश्चर्य से नागेंद्र से पूछता है.

मंटू- क्या कहा तुमने ये किसी और का काम है मुझे बिस्तर से बताओ की तुम्हारे बोलने का मतलब क्या है.

मंटू यादव के बात सुन कर नागेंद्र थोड़ी देर सोचता है और फिर बोलता है.

नागेंद्र- आपको तो ये खबर लग hi गयी होगी की रॉकी और उसके साथी मेरे फार्महाउस में आग में जल कर मरे गए है दरअसल वो आग अपने आप नहीं लगा था बल्कि किसी ने वो आग फार्महाउस में लगाया था और उन सरे लोगो को रॉकी के साथ आग में जलने पहले hi मारा गया था और मुझे ऐसा लगता है की जिसने रॉकी को मारा है वो जबरदस्ती रॉकी से वो सरे साबुत लेकर इंटरनेट पर डाला होगा अब ाफी बताइये की हम और हमारे परिवार आपके लिए इतना वफादार है की अगर आप बोलेंगे तो आपके लिए अपना जान भी दे देंगे तो हम आपके खिलाफ कैसे जा सकते है और रॉकी तो कुंदन का दोस्त था भला वो अपने दोस्त को क्यों फसायेगा अगर कुंदन इस केस में फास्ट तो रॉकी भी फास्ट तो वो खुद अपने पेअर पर कुल्हाड़ी क्यों मरेगा.

नागेंद्र के बात सुन कर मंटू यादव सोच में पद गया फिर कुछ देर सोचने के बाद वो बोलै.

मंटू- है तुम्हारी बात भी सही है लेकिन ये सब रॉकी ने नहीं किया है तो फिर किसने किया क्या तुम जानते हो की रॉकी को मरने वाला कोण है.

मंटू के बात सुन कर जतिन जल्दी से बोलै.

जतिन- है मुझे पता है की ये सब किसने किया है.

मंटू- ये सब किसने किया है किसकी इतनी हिमत हो गयी की वो मंटू यादव से पन्गा ले रहा है तुम मुझे उसके बारे में जल्दी से बताओ क्युकी मई जल्द से जल्द मुझे बर्बाद करने वाले और उसके पुरे परिवार को तड़पा तापदा कर जान से मरूंगा.

मंटू यादव के बात सुन कर जतिन थोड़ी देर सोचने के बाद बोलै.

जतिन- ये सब जिसने किया है उसका नाम प्रतिक है और वो मल्होत्रा परिवार के घर जमाई है लेकिन उसे मरना इतना आसान नहीं है उसे कोई भी मर नहीं सकता वो बहुत ताकतवर है.

जतिन के बात सुन कर मंटू यादव को बहुत गुसा आया और वो घुसे से जतिन से बोले.

मंटू- तुम्हारी हिमत कैसे हुयी मेरे होते हुए उसे ताकतवर बोलने की तुम सायद मुझे जानते नहीं हो मई उसके जैसे बहुत सरे ताकतवर लोगो को उनके घुटनो पर चलने के लिए मजबूर कर दिया हु और है तुम ये यद् रखो की तुम किसके सामने क्या बोल रहे हो.

मंटू यादव के बात सुन कर जतिन दर जाता है और फिर वो डरते डरते बोलते है.

जतिन- अगर आपको मेरी बात सुन कर बुरा लगा हो तो मुझे माफ़ कर दीजिये दरअसल मई आपसे ये सब इस लिए बोलै क्युकी मैंने उसे मरने के लिए बहुत सरे आदमी भेजे जिसमे मार्टिकल आर्ट्स एक्सपर्ट भी थे और तो और मैंने एक ऐसे शार्प शूटर को उसे मरने के लिए भेजा था जिसका निशाना आज तक नहीं चूका है लेकिन सब उसके सामने बेकार हो गए उसने सब को मर डाला.

जतिन के बात सुन कर मंटू यादव कुछ सोचने लगा फिर वो कुछ देर तक सोचने के बाद बोलै.

मंटू- वो भले hi कितने भी ताकतवर हो लेकिन वो मुझसे नहीं बच सकता उसे मरना hi होगा चाहे उसे मरने के लिए मुझे कुछ भी क्यों न करना पड़े (फिर अपने आदमी से) रखा जाओ और जाकर दिलावर को बुला कर लाओ.

मंटू यादव के बात सुन कर रखा नागेंद्र और जतिन तीनो हैरान हो गए क्युकी दिलावर कोई मामूली आदमी नहीं था बल्कि वो एक जीता जगता शैतान था उसे अपने शिकार के साथ पहले खेलता था फिर वो उसे तड़पा तड़पा कर मरता था अंडरवर्ल्ड के दुनिया में उसे मौत के सौदागर के नाम से जानते है और वो मार्टिकल आर्ट्स में एक ग्रांडमास्टर है.

रखा- मालिक उस जैसे मामूली इंसान को मरने के लिए दिलावर को बुलाने की क्या जरुरत है उसे तो मई भी अपने आदमियों के साथ मिल कर मर सकता हु और वैसे भी वो मर्डर करने के लिए बहुत चार्ज करता है.

रखा के बात सुन कर मंटू यादव मुस्कुराने लगा और फिर रखा से बोलै.

मंटू- जतिन ने प्रतिक के बारे में जो भी बताया है उसके अनुसार वो जरूर हाफ ग्रांडमास्टर होगा और उसे संभालना तुम्हारे बस की बात नहीं है और वैसे भी दिलावर अपने दुश्मनो को जैसे मौत देता है मई चाहता हु की प्रतिक और उसके फॅमिली को भी वैसा hi दर्दनाक मौत मिले जिससे मेरे मन को सन्ति मिलेगी.

मंटू के बात सुन कर दोनों बाप बेटे की रूह कम्प जाती है और दोनों मन hi मन सोचते है की चलो अच्छा है की मंटू यादव के साथ उनकी कोई भी दुश्मनी नहीं है और फिर वो दोनों ये सोच कर खुस हो जाते है की प्रतिक को अब कोई भी नहीं बचा सकता इधर रखा मंटू यादव के बात सुन कर अपना गर्दन है में हिलाया है और वह से चला जाता है.

इधर मई और शनाया नास्ता किया और सोल्लगे जाने के लिए रेडी होने लगा लेकिन आज मेरा मन न जाने क्यों बेचैन हो रहा था मुझे ऐसा लग रहा था की इस घर में कुछ प्रॉब्लम है और साथ में ऐसा भी लग रहा था की कोई मेरे ऊपर नजर रखे हुए है और मुझे देख रहा है लेकिन फिर मई सोचा की मैंने इस घर पर इतने ताकतवर सुरक्षा कवच लगाया है की कोई भी सैतान उसे आसानी से नहीं तोड़ सकता और बिना सुरक्षा कवच के तोड़े कोई भी शैतानी अंदर नहीं आ सकता जब तक की कोई घर के अंदर वाला उसे अंदर आने में मदत न करे इस लिए मई इस बात को अपने दिमाग से निकल दिया और रेडी हो कर शनाया के साथ सोल्लगे निकल गया.

इधर जैसे hi मई घर से निकला घर पर शैतानी शक्तियां एक्टिव हो गयी क्युकी जब तक मई घर पर तब तक शैतानी शक्ति मेरे शरीर से निकलती पॉजिटिव एनर्जी से दबी हुयी थी खैर जैसे hi घर में शैतानी शक्तियां एक्टिव हुयी तो घर में मौजूद अजय मल्होत्रा पुस्पा मल्होत्रा और शानवी के सर पर काली धुय मंडराने लगी.

इधर मई और शनाया इन सब से बेखबर सोल्लगे में आ गया जब हम वह पर पहुंचे तो मैंने देखा की वह पर बहुत सरे स्टूडेंट्स और टीचर जमा हो गए थे सामने एक टेबल पर स्नेहा के एक तस्वीर लगी हुयी थी जिसपर फूलो का एक माला डाला हुआ था और सामने धुप अगरबत्ती जल रही थी ये देख कर मई और शनाया स्नेहा के तस्वीर के पास गया और अपने हाथो में लिया हुआ फूलो का गुलदस्ता जो की हमने यहाँ आते वक़्त रस्ते में लिया था उसे स्नेहा के तस्वीर के पास रख दिया और उसको प्रणाम कर के वह से हैट गए तभी हमारे पास सोनू आ गया फिर हम तीनो वह से स्नेहा के माता और पिता के पास आ गए स्नेहा के माता और पिता शनाया को अच्छी तरह से पहचानते थे क्युकी शनाया कई बार स्नेहा के साथ उनके घर गयी हुयी थी इस लिए जैसे स्नेहा के माँ ने शनाया को देखा तो उनके आँखों से आंसू बहने लगे ये देख कर शनाया जल्दी से उनके पास गयी और उनको सँभालने लगी इधर मई भी स्नेहा के पापा के पास जाकर उनको दिलासा देने लगा उधर शनाया स्नेहा के माँ को समझती हुयी बोली.

शनाया- आंटी प्लीज आप चुप रहिये अगर आप ऐसे रोयेंगी तो आपकी तबियत ख़राब हो जाएगी अब जो होना था वो तो हो गया अब आपको इस तरह रोने से स्नेहा हमारे पास वापस नहीं आ जाएगी आप इस तरह से रो कर खुद को hi तकलीफ दे रही है.

शनाया के बात सुन कर स्नेहा के माँ रोटी हुयी hi बोली.

स्नेहा माँ- कैसे छुप राहु बीटा स्नेहा मेरी एकलौती बेटी थी उसके जाने से मेरे दिल पर क्या बिट रहा है ये तुम नहीं समझोगी मेरी बेटी ने उन दरिंदो को क्या बिगाड़ा था जो वो उसके साथ ऐसा किया.

स्नेहा के माँ के बात सुन कर शनाया के भी आँखों में आंसू आ गए लेकिन वो अपने आंसू को पोछते हुए बोली.

शनाया- मई जानती हु की स्नेहा अब हमारे बिच नहीं रही और उसके न रहने से आप दोनों के दिल पर क्या बिट रही होगी ये भी मई जानती हु लेकिन अब हम कर भी क्या सकते है जो होना था वो तो हो गया और रही बात उन दरिंदो की तो उनको सजा जरूर मिलेगी एक तो आग में जल कर मर गया लेकिन अब दूसरे की बरी है उसे भी अब पुलिस नहीं छोड़ेगी.

शनाया के बात सुन कर स्नेहा के माँ की आँखों में गुसा दिखने लगा और वो घुसे से बोली.

स्नेहा माँ- नहीं उसे जेल नहीं होना चाहिए उसे भी उसके साथी जैसा hi दर्दनाक मौत मिलनी चाहिए क्युकी अगर वो जेल गया तो पैसो के डैम पर बहार आ जायेगा और फिर वो मासूम लड़कियों की जिंदगी बर्बाद करेगा.

स्नेहा के माँ के बात सुन कर मेरे आँखों में एक अजीब सी चमक आ गयी मई स्नेहा के माँ से बोलै.

मई- आंटी आप चिंता मत कीजिये जैसे सुपर बॉय ने उसके साथी को मारा है एक दिन उसे भी मरेगा क्युकी जहा तक मई सुपर बॉय को समझ पाया हु वो किसी भी मुजरिम को जिन्दा नहीं छोड़ेगा.

शनाया- है आंटी आप चिंता मत कीजिये वो अब किसी के जिंदगी बर्बाद नहीं कर पायेगा और है अब आप छुप हो जाइये नहीं तो स्नेहा के आत्मा जहा भी होगी वो आपको इस तरह से रट हुए देख कर खुस नहीं होगी.

शनाया के बात सुन कर स्नेहा के माँ अपने आंसू पोछते हुए बोली.

स्नेहा माँ- मेरी बेटी बहुत तकलीफ झेली है अब मई और रो कर उसे और तकलीफ नहीं दूंगी.

स्नेहा के माँ में बात सुन कर मेरे चेहरे पर मुस्कान आ जाती है और फिर मई स्नेहा के माँ और डैड से बोलता हु.

मई- अंकल और आंटी आप दोनों कभी भी खुद को अकेला मत समझियेगा आज से मई और शनाया आपका ख्याल रखेंगे आपको अगर कभी भी किसी भी चीज की जरुरत हो तो आप एक बार हमें जरूर यद् कीजियेगा.

मेरे बात को सुन कर सोनू को की कब से हम सब की बाटे सुन रहा था वो बोल पड़ा.

सोनू- अरे यार मुझे कैसे भूल गए यहाँ मई भी तो हु अंकल आप चिंता मत कीजिये हम तीनो मिल कर आज से आपका ख्याल रखेंगे आज से आपका 2 बीटा और एक बेटी है.

मेरे और सोनू के बात को सुन कर स्नेहा के माँ डैड के आँखों में आंसू आ जाते है लेकिन वो दोनों तुरंत hi अपने आँखों से आंसू को पोछते लेते है इसके बाद स्नेहा के डैड बोलते है.

स्नेहा डैड- तुम तीनो को बहुत बहुत सुक्रिया बीटा आज के ज़माने में कोई अपना भी साथ नहीं देता लेकिन तुम तीनो पराया होते हुए भी हमारा साथ देने के लिए तैयार हो.

स्नेहा के डैड के बात सुन कर सोनू बोलै.

सोनू- ये क्या बात कर दी अपने अंकल आप हम तीनो को पल भर में hi पराया बना दिया हम अभी अभी hi तो आपसे बोले थे की आज से आपके 2 बीटा और एक बेटी है फिर भी आप पराया वाली बात कर रहे है.

सोनू के बात सुन कर स्नेहा के डैड बोले.

स्नेहा डैड- सॉरी बीटा अब से हम दोनों ऐसी बात नहीं करेंगे और है हमें किसी भी चीज की जरुरत होगी तो हम तुम तीनो को बोलूंगा.

स्नेहा के डैड के बात सुन कर हम तीनो के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी.

सोनू- ये हुयी न बात अब हमें जाना होगा अंकल क्युकी अब डोनेशन कर कार्य करम स्टार्ट होने वाला है.

इसके बाद वह पर थोड़ी देर डोनेशन का कार्य करम चला जिसमे जिसको जितना बना उतना पैसे डोनेट किया शनाया भी 1 लाख डोनेट की फिर मई भी सबसे छुपा कर 5 लाख डोनेट किया हमें डोनेट करता हुआ देख कर सोनू ने भी कुछ पैसे डोनेट कर दिए अब तक करीब 10 लाख रुपया डोनेशन में मिल चूका था फिर सोल्लगे के डीन ने वो सरे पैसे स्नेहा के डैड के अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया इसके बाद हम स्नेहा के माँ डैड से आज्ञा ले कर वह से निकल गए अभी हम थोड़ी hi दूर गए थे की तभी मेरे मोबाइल पर कॉल आने लगा जब मई मोबाइल निकल कर देखा तो बलदेव सिंह का कॉल आ रहा था मई बलदेव का कॉल आता देख कर कॉल रिसीव कर लिया और बोलै.

मई- है बोलो.

बलदेव- बॉस हवेली के रिन्यूअल का काम पूरा हो गया है और आपका ड्राइविंग लाइसेंस भी बन गया तो आप आ कर एक बार हवेली को देख लेते और ड्राइविंग लाइसेंस भी ले लेते.

मई- ठीक तुम एक काम कर क्सक्सक्स सोल्लगे के पास आ जाओ मई अभी वही पर हु.

बलदेव- ठीक है बॉस.

इतना बोल कर बलदेव कॉल कट कर देता है इसके बाद मई शनाया से बोलता हु.

मई- शनाया मुझे यह पर छोड़ दो क्युकी मुझे कुछ काम है.

मेरी बात को सुन कर शनाया गाड़ी को वही पर रोक देती है फिर मई गाड़ी से निचे उतर जाता हु इसके बाद शनाया वह से अपने कंपनी के लिए निकल जाती है.

इधर करीब 20 मिनट के बाद बलदेव अपने कार ले कर मेरे पास आ जाता है और फिर मई कार में बैठ कर हवेली के लिए निकल जाता हु करीब 1 घंटे के ड्राइव के बाद हम दोनों हवेली पहुंच जाते फिर मई गाड़ी से उतर कर हवेली को देखता हु तो उसे देखता hi रह जाता हु हवेली देखने में बहुत सुन्दर लग रही थी बलदेव ने हवेली के चारो तरफ के जमीं को खरीद लिया था और चारो तरफ से बॉउंड्री बना दिया था जो देखने में hi एक किला की तरह लग रहा था फिर मई और बलदेव दोनों हवेली के अंदर चले गए मई अंदर जा कर देखा तो हवेली के अंदर भी इंटीरियर का अच्छा काम हुआ था इसके बाद मई बैकयार्ड में जाकर देखा तो बैकयार्ड पहले से बहुत बड़ा हो गया था क्युकी हवेली के पीछे के जितना भी जमीं था बलदेव ने उसे भी खरीद लिया था और उसे हवेली के अंदर hi ले लिया था.

हवेली के पीछे जो जमीं बलदेव ने ख़रीदा था उसमे रहने के लिए घर बनाये गए थे वह पर एक खुला मैदान भी था जिसमे लोग मार्टिकल आर्ट्स की ट्रेनिंग कर सकते थे साथ में 2 एकर जमीं को खली रखा गया था ताकि उसमे जड़ी बुटिया उगाया जा सके ये सब हवेली के बॉउंड्री के अंदर में मौजूद था कुल मिला कर बोले तो हवेली का बॉउंड्री लगभग 50 एकर जमीं में फैली हुयी थी बलदेव ने अच्छा काम किया था फिर मई बलदेव के पास जा कर उससे बोलै.

मई- तुमने बहुत अच्छा काम किया है बलदेव अब हम यहाँ पर आराम से अपने साथियो का ट्रेनिंग कर सकते है और साथ में जड़ी बुटिया भी ऊगा सकते है.

बलदेव- मुझे ये जान कर बहुत खुसी हुयी की आपको ये सब पसंद आया और है ये रहा आपका ड्राइविंग लाइसेंस.

इसके बाद बलदेव ने मुझे मेरा ड्राइविंग लाइसेंस दिया इसके बाद मई बलदेव से बोलै.

मई- बलदेव ये सब करने में तो बहुत पैसे लग गए होंगे वैसे तुमने कितना पैसा इन सब पर खर्च किया है.

बलदेव- ज्यादा नहीं बॉस बस इन सब में 50 करोड़ रूपए खर्च हो गए है.

मई- क्या 50 करोड़.

बलदेव- है बॉस वो क्या है न की ये जगह सहर के नजदीक है इस लिए यहाँ के जमीं बहुत महंगा है इस लिए इतना पैसा खर्चा हो गया

मई- कोई बात नहीं अभी मेरे पास पैसे नहीं है लेकिन जैसे hi मेरे पास पैसे आएंगे मई तुम्हारे में ट्रांसफर कर दूंगा.

मेरी बात को सुन कर बलदेव ने है में सर हिला दिया फिर मई हवेली में आ कर सरे रूम को अंदर से देखने लगा तभी मेरे मोबाइल पर शनाया को कॉल आया तो मई कॉल रइवे किया तो शनाया तो शनाया के आवाज घबराई हुयी आयी और वह पर बहुत सरे लोगो के छिलने की भी आवाज आ रही थी.

शनाया- हैल्लो प्रतिक तुम अभी कहा हो.

शनाया के आवाज से मुझे लग गया की जरूर कुछ गड़बड़ है इस लिए मई उससे बोलै.

मई- हैल्लो क्या बात है शनाया तुम परेशां लग रही हो कुछ प्रॉब्लम हुयी है क्या.

मेरी बात को सुन कर शनाया ने कुछ सोचते हुए बोली.

शनाया- तुम अभी हो कहा.

मई- मई किसी काम से कही आया हुआ था क्या बात है बोलो.

शनाया- तुम जहा कही भी प्लीज जल्दी से मेरी कंपनी में आ जाओ यहाँ पर कुछ प्रॉब्लम हो गयी है.

शनाया के बात सुन कर मई चौक गया और फिर शनाया से बोलै.

मई- ठीक है मई तुरंत यहाँ से निकल रहा हु लेकिन वह पर हुआ क्या है.

शनाया- तुम यहाँ आ कर खुद देख लेना.

मई- ठीक है मई आ रहा हु.

इसके बाद मई कॉल कट किया और बलदेव से शनाया के कंपनी चलने के लिए बोलै इसके बाद हम वह से शनाया के कंपनी के लिए निकल गए जब हम शनाया के कंपनी के पास पहुंचे तो देखा की वह पर बहुत साडी औरतो और आदमियों की भीड़ लगी हुयी थी और वह पर मीडिया रिपोर्टर्स भी मौजूद थे.

मुझे यहाँ पर इन लोगो को देख कर समझ में आ गया की जरूर कुछ बड़ी गड़बड़ी हुयी है इस लिए मई तुरंत वह पर भीड़ को हटते हुए कंपनी के अंदर आ गया और सीधा शनाया के केबिन के पास आ कर दूर को नॉक किया तो अंदर से शनाया के घबराई हुयी सी आवाज आयी.

शनाया- कक्क कोण है.

मई- शनाया मई हु प्रतिक.

मेरे आवाज को सुन कर शनाया जल्दी से अपने केबिन के गेट खोल कर मुझे अंदर ले गयी अंदर आने के बाद मई शनाया से बोलै.

मई- शनाया यहाँ हो क्या रहा है यहाँ पर इतने औरतो और मीडिया वालो की भीड़ क्यों लगी हुयी है.

मेरी बात को सुन कर शनाया ने परेशानी भरी आवाज में बोली.

शनाया- इन लोग बोल रहे है की हमारी ब्यूटी प्रोडक्ट्स में केमिकल मिला हुआ है जिसके कारन इन सब की चेहरे को स्किन ख़राब हो गयी है और ये लोग इसी बात को ले कर यहाँ पर भीड़ जमा किये हुए है और साथ में मीडिया वालो को भी के कर आ आये हुए है अब मेरी कंपनी नहीं बचेगी ये लोग मीडिया वालो के सामने तमसा कर के मेरी रेपुटेशन ख़राब कर रहे है मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है की मई इन सब से कैसे निपातु.

शनाया के बात सुन कर मई हैरान हो गया और फिर उसको को संत करते हुए बोलै.

मई- कुछ नहीं होगा कोई रेपुटेशन ख़राब नहीं होगी पहले तुम संत हो जाओ मई यहाँ पर आ गया हु न तो मई सब देख लूंगा तुम टेंसन मत लो तुम मुझे पहले ये बताओ की तुमने अपने प्रोडक्ट को लैब में टेस्ट करवाया था या नहीं.

शनाया- है मैंने अपने प्रोडक्ट को सबसे पहले लैब में hi टेस्ट करवाया था इसके बाद hi मई इसे मार्किट में उतरी थी जब मई इसे टेस्ट करवाया था तो ये बिलकुल सही था यहाँ तक की मई भी इसी प्रोडक्ट को उसे करती हु लेकिन मुझे कुछ नहीं हुआ पता नहीं इन सब को ये प्रॉब्लम कैसे हो गयी.

शनाया के बात सुन कर मुझे कुछ गड़बड़ लगी इस लिए मई कुछ देर सोचने के बाद शनाया से बोलै.

मई- अच्छा वो प्रोडक्ट तो अभी भी कंपनी में होगी hi.

शनाया- है है लेकिन तुम ये क्यों पूछ रहे हो.

मई शनाया के बात सुन कर मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- कुछ नहीं बस मई एक बार उस प्रोडक्ट को देखना चाहता हु.

मेरी बात को सुन कर शनाया ने तुरंत अपनी प् वो प्रोडक्ट लेन के लिए बोलै फिर थोड़ी देर बाद शनाया के प् वो प्रोडक्ट लेकर हमारे पास आ गयी और मेरे हाथो में दे दी फिर मई उस प्रोडक्ट को अपने हाथो में लिया जो एक ब्यूटी क्रीम थी मई उस ब्यूटी क्रीम के अंदर से थोड़ा सा क्रीम निकला और उसे अपने हाथो पर लगा कर उसे सूंघ कर देखा और फिर मई शनाया को देखते हुए बोलै.

मई- तुम्हे टेंसन लेने की जरुरत नहीं है तुम्हारी इस ब्यूटी क्रीम में कोई गड़बड़ नहीं है अगर इसे कोई लगता है तो उसे कुछ भी नुकसान नहीं होगा.

मेरे बात को सुन कर हैरान हो गयी और उसी हैरानी में मुझसे बोली.

शनाया- अगर इसमें कुछ भी प्रॉब्लम नहीं है तो उन लोगो की ये हालत कैसे हुयी और उन लोगो के चेहरे देख कर तो नहीं लग रहा है की वो कोई नाटक कर रहे है.

शनाया के बात सुन कर मई सोच में पद गया फिर थोड़ी देर सोचने के बाद मुझे कुछ समझ में आया और तुरंत hi मेरे चेहरे पर एक खतरनाक मुस्कान आ गयी मुझे इस तरह से मुस्कुराते हुए देख कर शनाया से रहा नहीं गया और वो तुरंत मुझसे बोली.

शनाया- मई ऐसी कोण सी बात बोल दी जिसे सुन कर तुम इस तरह से मुस्कुरा रहे हो अब बताओगे भी की तुम किस बात पर इतना मुस्कुरा रहे हो.

शनाया के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- मई क्यों मुस्कुरा रहा ये मई तुम्हे बताऊंगा नहीं बल्कि दिखाऊंगा चलो मेरे साथ.

इतना बोल कर मई शनाया के हाथ पकड़ा और उसे लेकर बहार जाने लगा जिसे देख कर शनाया दर गयी और वो डरते हुए बोली.

शनाया- प्रतिक तुम ये कर क्या रहे हो तुम मुझे बहार क्यों लेकर जा रहे हो छोडो मुझे बहार लोग पागल हो रखे है अगर मई बहार गयी और वो लोग मुझे बहार देख लिए तो मुझ पर और तुम पर दोनों पर हमला कर देंगे इस लिए अभी बहार जाना ठीक नहीं है.

शनाया के बात को सुन कर मई मुस्कुराते हुए उससे बोलै.

मई- कुछ नहीं होगा हम दोनों को वो लोग हम पर कोई हमला नहीं करेंगे तुम मुझ पर विस्वास रखो मई तुम्हे और तुम्हारे इस कंपनी को कुछ भी नहीं होने दंगे इस लिए तुम मुझ पर बिस्वास कर के मेरे साथ बहार चलो.

मेरे बात को सुन कर शनाया एक पल के लिए मेरे चेहरे को देखि और फिर वो चुप चाप मेरे साथ बहार आने लगी इधर बहार में सरे औरत और लड़किया घुसे से पागल हो गयी थी और वह पर हंगामा मचा रही थी वो लोग जैसे hi मुझे और शनाया को बहार आते हुए देखि तो उनका गुसा और बढ़ गया और वो चारो तरफ से हमें घेर कर खड़े हो गए उनमे से दो औरते सबसे आगे कड़ी थी जो अपने चेहरे को स्कार्फ्स से धक् राखी थी फिर उन दोनों में से एक औरत आगे बढ़ी और छीलते हुए बोली.

औरत- देख तेरे इस केमिकल वाले क्रीम से हम दोनों की क्या हालत हुयी है आज हम तुम्हे छोड़ेंगे नहीं आज हम तुम्हे और तुम्हारी इस गठिया कंपनी को बर्बाद कर देंगे.

पहली औरत के बात सुन कर दूसरी औरत बोली.

2ंद औरत- है हम तुम्हे और तुम्हारे इस कंपनी को नहीं छोड़ेंगे आज हम तुम्हे बर्बाद कर के रख देंगे तुम्हारे इस गठिया क्रीम ने मेरी इस चेहरे को ख़राब कर दिया इस लिए हम तुम्हे आसानी से नहीं छोड़ेंगे.

इतना बोल कर वो औरत अपने चेहरे से स्कार्फ्स को हटा दी उसके चेहरे पर बड़े बड़े लाल कलर के छले पड़े हुए थे उस औरत के चेहरे को देख कर शनाया दर गयी और कसके मेरे हाथ को पकड़ ली फिर थोड़ी हिमत जूता कर उन औरतो से बोली.

शनाया- देखिये आप सबको कोई गलत फहमी हुयी है हमारे क्रीम में कोई भी ऐसी केमिकल के मिलावट नहीं है जिससे लोगो के चेहरा ख़राब हो मई खुद भी उसी क्रीम को लगते है और हमने उस क्रीम को लैब में चेक करवाने के बाद hi मार्किट में शाले के लिया उतरी थी.

शनाया के बात सुन कर वो औरते और भड़क गयी और बोली.

औरत- तो क्या मई झूठ बोल रही हु तुम्हारे पास आँख नहीं है क्या तुम्हे दिख नहीं रहा है की मेरे चेहरे की क्या हालत हो राखी है ये सब तुम्हारे उस गठिया क्रीम के कारन hi हुआ है.

2ंद औरत- अब तुम खुद को बचने के लिए झूठ भी बोलने लगी तुम्हे क्या लगता है की तुम इस तरफ से खुद को इनोसेंट साबित करोगी तो लोग तुम पर बिस्वास कर लेंगे आप लोग देख रहे है न इस लड़की के कंपनी के क्रीम से हम दोनों के चेहरा ख़राब हुआ है और ये अब हमें hi गलत साबित कर रही है.

उस औरत के बात सुन कर भीड़ और भड़क गयी इधर शनाया ने भी जब उस औरत की बात सुनी तो वो खुद को सँभालते हुए बोली.

शनाया- देखिये मई पहले hi बोल दिया हु की मेरे क्रीम में कोई मिलावट नहीं है लेकिन अगर आप सब को ये लग रहा है की आप दोनों के चेहरा मेरे क्रीम के कारन ख़राब हुयी है तो मई आप दोनों को इसकी मुवाबजा देने के लिए तैयार हु बोलिये आप दोनों को कितने पैसे चाहिए.

शनाया के बात सुन कर उन दोनों के आँखों में एक चमक आ गयी फिर एक औरत झठ से शनाया के बातो का जबाब देते हुए बोली.

औरत- ठीक है अगर तुम हमें मुवाबजा देने के लिए तैयार हो तो हम दोनों इसके लिए तैयार है हम दोनों को तुम्हे एक एक करोड़ रुपये देने होने और साथ में तुम्हे ये कंपनी भी बंद करनी होगी अगर तुम मेरी इन दोनों बातो को मानाने के लिए तैयार हो तो ठीक है नहीं तो हम तुम्हारे चेहरे को भी अपने जैसे बना देंगे और साथ में तुम्हे जेल में भी भेज देंगे.

शनाया और मई दोनों उस औरत के बात को सुन कर हैरान हो गए और हम दोनों को उन औरतो पर गुसा आने लगा इधर शनाया अपने घुसे को कण्ट्रोल नहीं कर पायी और वो आगे बढ़ कर उस औरत को जबाब देने hi वाली थी की मई शनाया के हाथ को पकड़ कर उसे संत करवाया और उन दोनों औरत को ध्यान से देखते हुए बोलै.

मई- तो आप दोनों को एक एक करोड़ रुपया चाहिए और साथ में मेरे शनाया को कंपनी भी बंद करनी होगी यही शर्त है न आप दोनों की.

मेरी बात को सुन कर एक औरत बोली.

औरत- है हम दोनों की यही शर्त है अगर तुम दोनों ये मानते हो तो ठीक है नहीं तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना.

उन दोनों औरतो के बात सुन कर मई जोर जोर से हसने लगा मुझे इस तरफ से हस्ता हुआ देख कर वह पर मौजूद सरे लोग हैरान रह गए तभी वो औरत मुझे हस्ते हुए देख कर घुसे से बोली.

औरत- मई यहाँ कोई मजाक कर रही हु क्या जो तुम इस तरह से है रहे हो.

उस औरत के बात को सुन कर मई अपने हसी को दबाते हुए उनसे बोलै.

मई- सॉरी सॉरी मुझे आपकी बात पर नहीं बल्कि आपके नाटक देख कर हसी आ गयी.

मेरे बात को सुन कर वो दोनों औरत और शनाया तीनो हैरान हो गयी उन दोनों औरते तो मेरी बात को सुन कर एक पल के लिए दर hi गयी थी फिर उनमे से 2ंद औरत मुझसे बोली.

2ंद औरत- तुमने अभी क्या बोलै हम दोनों नाटक कर रही है तुम्हारी हिमत कैसे हुयी हम दोनों के ऐसी हालत देख कर इसे नाटक बोलने की.

मई- अच्छा तो मेरी बात सुन कर आप दोनों को गुसा आ रहा है ठीक है मई ये अभी साबित कर दे रहा हु की आप दोनों यहाँ आ कर नाटक कर रही है और है अभी आप दोनों शनाया को जेल भेजने वाली थी न अब आप दोनों जेल जाएँगी.

मेरी बात को सुन कर वो दोनों औरते हड़बड़ा गयी और उनके माथे पर पसीना आने लगा फिर उन दोनक औरत में से एक औरत अपने दर पर काबू करते हुए मुझसे बोली.

औरत- तुम ये क्या बकवास कर रहे हो और वैसे तुम हो कोण जो हमारे मामलो में तंग ऐडा रहे हो.

उस औरत के बात सुन कर शनाया आगे आयी और मेरे हाथो को पकड़ते हुए बोली.

शनाया- इनका नाम प्रतिक है और ये मेरे पति है इस हिसाब से इन्हे इस मामले में बोलने का पूरा हक़ है.

शनाया के मुँह से अपने लिए पति सब्द सुन कर मई अंदर hi अंदर बहुत खुस हुआ फिर मई इन सब बातो को इग्नोर करते हुए उसी भीड़ में खड़े एक आदमी को बोलै.

मई- क्या आप मेरी एक मदत कर सकते है.

मेरे बात सुन कर वो आदमी पहले तो चौक गया लेकिन फिर वो मुझसे बोलै.

आदमी- है जरूर बोलिये आपको मुझसे कैसी मदत चाहिए.

मई- देखिये मुझे आपसे बस एक काम है आप मार्किट में किसी भी शॉप पर जाकर इस क्रीम को खरीद कर ले आइये ताकि मई इन दोनों के नाटक को यही ख़तम कर दू.

मेरी बात को सुन कर वो आदमी अपने सर को है में हिलाया और वह से चला गया इधर उन दोनों औरत ने जब देखा की मई मार्किट से वही क्रीम मंगवा रहा हु तो वो दोनों कंफ्यूज हो गयी लेकिन दोनों में से कोई कुछ बोलै नहीं क्युकी वो दोनों अंदर हु अंदर बहुत दर रही थी इधर वो आदमी भी उस क्रीम को खरीद कर ले आया था मई उस क्रीम को अपने हाथ में ले कर भीड़ से बोलै.

मई- आप सब इस क्रीम को तो पहचानते hi होंगे ये वही क्रीम है जिसपर इन औरतो ने ये दवा किया है की इस क्रीम में केमिकल के मिलावट है जिसके चलते इन औरतो की चेहरा ख़राब हो गया है अगर ऐसी बात है तो इस क्रीम में भी वो केमिकल मिली होगी अगर इस क्रीम को भी कोई लगाएगा तो उसकी भी चेहरा ख़राब होनी चाहिए क्युकी ये भी मार्किट से hi ख़रीदा गया है आप लोगो के सामने ये क्रीम शनाया लगाएगी अगर इस क्रीम ने कोई प्रॉब्लम होगी तो शनाया के भी चेहरा ख़राब हो जनि चाहिए लेकिन अगर शनाया के चेहरा पहले जैसे hi रहा तो इसका मतलब है की ये दोनक औरते झूठ बोल रही है.

इतना बोल कर मई उस क्रीम को शनाया को दे कर उसे लगाने के लिए बोलै मेरी बात को मन कर शनाया उस क्रीम को अपने चेहरे पर लगाया क्रीम लगाने के बाद थोड़ी देर तक वैसे hi रहा लेकिन शनाया के चेहरे को कोई भी नुकशान नहीं हुआ ये देख कर मई भीड़ से बोलै.

मई- आप सबने देखा न की इस क्रीम को लगाने से शनाया को कुछ नहीं हुआ इसका मतलब तो आप सब जान hi गए होने की ये दोनों औरते झूठ बोल रही.

इधर उन दोनों औरतो ने देखा की उनकी पोल खुल चुकी है तो वो दोनों वह से भागने लगी तभी मैंने वह पर मौजूद गुर्दो को इशारा किया तो सरे गॉर्ड उन दोनों औरतो को पकड़ लिया और मेरे सामने ले जार आ गए मई उन दोनों औरतो को घूरते हुए बोलै.

मई- अब तुम्हारी ये नाटक पकड़ी गयी है इस लिए तुम दोनों चुप चाप मुझे ये बताओ की तुम दोनों ये सब किसके कहने पर और क्यों कर रही थी.

इधर मीडिया वालो को भी जब सचाई का पता चला तो वो लोग भी उन दोनों औरतो को घेर कर खड़े हो गए और उनसे तरह तरह के सवाल पूछने लगे.

रिपोर्टर- क्या आप हमें बताएंगी की आप दोनों की शनाया मल्होत्रा और उनके कंपनी से क्या दुश्मनी है आप दोनों उन पर गलत इल्जाम लगा कर क्या करना चाहती थी कही आप दोनों उनसे पैसे ैठने के फ़िराक में तो नहीं थी इस काम में आप दोनों के साथ और कोण कोण मिला हुआ है कही आप दोनों ये सब किसी के बोलने पर तो नहीं कर रही है.

ऐसी hi न जाने कितने सवाल उन दोनों से पूछे जा रहे थे लेकिन वो दोनों औरत अपने सर को निचे किये हुए थी और वो किसी भी रिपोर्टर का कोई जबाब नहीं दे रही थी ये देख कर रिपोर्टर उन दोनों के पास से हैट गए और कमरा मन के सामने जा कर अपना अपना रिपोर्ट बोलने लगी.

रिपोर्टर- आप सब ने अभी अभी देखा न की कैसे दो मासूम दिखने वाली औरतो ने शनाया मल्होत्रा और उसके कंपनी को बदनाम करने की कोशिश की है ये सब ये दोनों औरते खुद कर रही थी ये सब के पीछे कोई और मास्टर मंद है ये जानने के लिए बने रहे मेरे साथ मई जूही कमरा मन आसिष के साथ.

उधर रिपोर्टर अपना रिपोर्ट पढ़ रहे थे और इधर सचाई सामने आने के बाद शनाया बहुत घुसे में थी वो घुसे से उन औरतो के पास जा कर उन पर छीलते हुए बोली.

शनाया- तुम दोनों की हिमत कैसे हुयी मुझे और मेरे कंपनी को बदनाम करने के मई तुम दोनों को छोडूंगी नहीं मैंने पुलिस को कॉल कर दी है वो किसी भी समय यहाँ आते hi होंगे अब तुम दोनों को मई जेल भेज कर hi रहूंगी.

शनाया के बात सुन कर वो दोनों औरते दर गयी और वो दोनों शनाया के पैरो में गिर कर माफ़ी मांगने लगी.

दोनों औरत- प्लीज हमें माफ़ कर दीजिये हमसे गलती हो गयी अब से मई ऐसी गलती दोबारा नहीं करुँगी प्लीज मुझे आप जेल में मत भेजिए मई किसी के बातो में आ कर ये गलती कर बैठी उसने हम दोनों को पैसो की लालच दिया था इस लिए हम यहाँ पर आ गए प्लीज मुझे माफ़ कर दीजिये.

उन दोनों औरतो के बात सुन कर शनाया को और गुसा आ रहा था लेकिन मई उसको संत करते हुए उन औरतो से पूछा.

मई- तुम दोनों को ये सब करने के लिए किसने बोलै था और ये सब करने के लिए उसने तुम दोनों को कितना पैसा दिया था.

मेरी बात को सुन कर वो दोनों औरते चुप हो गयी उनको इस तरह से छुप होता हुआ देख कर मई फिर उनसे बोलै.

मई- देखो अगर तुम हमें सब सच सच बता दी तो हम तुम्हे जेल जाने से बचा लेंगे और साथ में तुम्हारे इस चेहरे को भी ठीक कर देंगे (फिर थोड़ा कठोर आवाज में) और अगर तुम दोनों मुझे साडी सचाई नहीं बताई तो तुम दोनों जेल तो जाओगी hi लेकिन तुम्हारे चेहरे की जो हालत हुयी है वो भी कभी ठीक नहीं होगा क्युकी तुम दोनों ने चाँद पैसो के कारन अपने चेहरे की जो हालत की है न उसे मेरे अलावा कोई और ठीक नहीं कर सकता है.

मेरी बात को सुन कर वो दोनों औरते दर गयी तभी एक औरत डरते हुए बोली.

औरत- आप सच बोल रहे है न अगर मई आपको साडी सचाई बता दिया तो आप मुझे जेल नहीं जाने देंगे और मेरे चेहरे को भी ठीक कर देंगे न.

मई- है मई सच बोल रहा हु अब तुम मुझे बताओ की ये सब किसने और क्यों किया है.

मेरी बात सुन कर वो औरत कुछ देर सोचने के बाद बोली.

औरत- हम दोनों को ये सब करने के लिए विक्की मल्होत्रा और अमृता मल्होत्रा ने बोलै था वो दोनों चाहती थी की हम दोनों मिल कर इस कंपनी को बंद करवा दू और शनाया को जेल भेजवा दू और ये सब करने के लिए उन्होंने हम दोनों को 10 लाख रूपए दिए थे और उन दोनों ने बोलै था की मई शनाया पर झूठा इल्जाम लगा कर उससे 1 करोड़ रुपया भी वसूल करना फिर उन दोनों ने आपके कंपनी के क्रीम में कुछ मिला कर हम दोनों को अपने चेहरे पर लगाने के लिए इतना पैसो के बारे में सुन कर हम दोनों के मन में लालच आ गयी थी इस उन दोनों ने जैसा बोलै हम दोनों ने वैसा hi किया प्लीज हम दोनों को माफ़ कर दीजिये.

मई और शनाया उन दोनों के बात सुन कर हैरान हो गए थे हम दोनों को hi उनके बातो पर बिस्वास नहीं हो रहा था तभी शनाया घुसे से अपने डट को भीचते हुए बोली.

शनाया- मई ये जानती थी की वो दोनों मुझे और मेरे परिवार को पसंद नहीं करते है लेकिन मई ये नहीं जानती थी की वो दोनों इतना निचे गिर जाएँगी मई उन दोनों को छोडूंगी नहीं.

हलाकि गुसा तो मुझे भी आ रहा था लेकिन मई इस वक़्त संत hi रहा और मन में कुछ सोचते हुए मुस्कुराने लगा फिर मई अपना मोबाइल निकल कर किसी को मस्सगे किया और शनाया को बोलै.

मई- है तुम सही बोल रही हो मई सोचता था की वो लोग इतना निचे नहीं गिर सकते है लेकिन आज मुझे पता चला की वो दोनों कितना गठिया इंसान है तुम चिंता मत करो उन दोनों को इनके किये की सजा जरूर मिलेगा.

मेरी बातो को सुन कर शनाया संत हो गयी वही जब वो औरत हमें विक्की और अमृता के बारे में बता रही थी तो उसकी बात को मीडिया रिपोर्टर भी सुन रहे थे जब उन सब को आज के इस कांड के मास्टरमाइंड के बारे में पता चला तो वो तुरंत ये सब रिकॉर्ड कर लिया और उसे न्यूज़ चैनल पर चला दिया.

इधर मई उन दोनों औरत के पास जा कर अपने जेब से एक क्रीम निकला और उन दोनों औरतो को देते हुए बोलै.

मई- तुम दोनों को मैंने वडा किया था की मई तुम दोनों के चेहरे को ठीक कर दूंगा इस लिए ये क्रीम लो और इसे अपने चेहरे पर लगा लो इसको लगाने से जो तुम्हारा चेहरा ख़राब हुआ है वो ठीक जायेगा.

मेरी बातो को सुन कर वो दोनों औरत हैरान हो गयी तभी उन दोनों में से एक औरत मुझसे बोली.

औरत- क्या आप सच बोल रहे है इसे लगाने से हम दोनों के चेहरा ठीक हो जायेगा.

मई- है मई सच बोल रहा हु तुम इस क्रीम को एक बार लगा कर तो देखो.

2ंद औरत- लेकिन ऐसा क्रीम क्र बारे में तो मई पहली बार सुन रही हु और जहा तक मुझे पता है की ऐसा क्रीम अभी तक मार्किट में आया भी नहीं है तो ये क्रीम आपके पास कहा से आया.

उस औरत के बात सुन कर मई कुछ देर सोचने के बाद बोलै.

मई- ये क्रीम भी इस कंपनी के द्वारा बनायीं गयी है लेकिन इसे अभी तक मार्किट में लांच नहीं किया गया है इस लिए तुम दोनों को इसके बारे में पता नहीं है जानती ये क्रीम एक रहस्यमयी क्रीम है जिसे लगाने से चेहरे पर किसी तरह से डेग और ढाबे को मिटा देता है यहाँ तक की अगर आपके चेहरे पर कोई चोट का निशान हो या फिर जला या कट लगा हुआ निशान हो उसे ये चुटकी में ठीक कर सकता है.

मेरी बात को सुन कर वह पर खड़े सरे लोग हैरान हो जाते है यहाँ तक की मीडिया रिपोर्टर भी ये सुन कर हैरान हो जाते है और उस क्रीम को ध्यान से देखने लगते है हलाकि मेरे बातो को सुन कर किसी को मेरे बातो पर बिस्वास नहीं हो रहा था.

जब मई अपनी बाटे बोल कर सरे लोगो के चेहरे को देखा तो मुझे लगा की उन्हें मेरे बातो पर बिस्वास नहीं हो रहा है तो मई उनको बिस्वास दिलाते हुए बोलै.

मई- मुझे लग रहा है की तुम दोनों को मेरे बातो पर बिस्वास नहीं हो रहा है तो तुम दोनों इसे आजमा कर देख लो.

मेरी बात को सुन कर वो दोनों औरते क्रीम को अपने चेहरे पर लगाने में हेसिटते कर रही थी वो दोनों सोच रही थी की कही इस क्रीम को लगाने के बाद उनका चेहरा और न ख़राब हो जाये उनको इस तरह से हेसिटते करते हुए देख कर मई फिर उनसे बोलै.

मई- क्या हुआ तुम दोनों को अपने चेहरे को ठीक नहीं करना है क्या अगर तुम दोनों को दर लग रहा है तो कोई बात नहीं तुम दोनों इसे मत लगाओ लेकिन मेरी बात यद् रखना ये तुम दोनों को अपने चेहरे को ठीक करने का आखिरी मौका है.

मेरी बात को सुन कर दोनों कुछ देर तक सोचते रही कुछ देर सोचने के बाद वो दोनों आखिर कर क्रीम को अपने चेहरे पर लगाने के लिए तैयार हो गयी फिर वो दोनों उस क्रीम को अपने चेहरे पर लगा ली जैसे hi दोनों ने क्रीम को अपने चेहरे पर लगाया तो उनका चेहरा पूरा कोल्ड हो गया फिर करीब पांच मिनट के बाद उनके चेहरे पर वो क्रीम पूरी तरह से सुख गया और उन दोनों के चेहरे पर सकब बन गया फिर मई गॉर्ड से दो बैटल पानी मंगवाया और उन दोनों को दे दिया और उन्हें अपने चेहरे को पानी से धोने के लिए बोलै जैसे hi वो दोनों पानी से अपने चेहरे को धोया तो सरे लोग उसके चेहरे को देख कर चौक गए क्युकी उन दोनों का चेहरा जो पहले ख़राब हो गया तो वो पूरी तरह से ठीक हो गया था और उनका चेहरा पहले से ज्यादा चमकने लगा था उन दोनों के चेहरा ग्लो करने लगा था.

इधर मीडिया वालो ने जब ये देखा तो वो भी हैरान हो गए और अपने न्यूज़ चैनल पर ये देखने लगे और उस क्रीम का अद्वेर्तिसेमेन्ट करने लगे इधर उन दोनों औरतो ने अपने चेहरे को पानी से धोने के बाद वह लगी कार के सीसे में अपने चेहरे को देखि तो दोनों खुसी से उछाल पड़े और मेरे सामने अपने हाथ जोड़ कर धन्यवाद् देने लगे.

मई- मई जो तुम दोनों से वडा किया था उसे पूरा कर दिया लेकिन तुम दोनों ने जो शनाया और उसे कंपनी के साथ करने की कोशिश की थी उसकी सहा तुम दोनों को जरूर मिलेगी.

मेरी बात को सुन कर वो दोनों औरते मेरे पैरो में गिर गयी और मुझसे माफ़ी मांगने लगी तो मई उनसे बोलै.

मई- मेरे सामने माफ़ी मांगने से कोई फायदा नहीं है तुम दोनों ने जिसके साथ गलती की है उससे माफ़ी मानगो अगर वो माफ़ कर देगी तो ठीक है नहीं तो तुम दोनों को सजा जरूर मिलेगी.

में बात को सुन कर दोनों शनाया के पैरो में गिर गयी और बोलने लगी.

दोनों औरते- प्लीज हम दोनों को माफ़ कर दीजिये शनाया जी हमसे बहुत बड़ी गलती हो गयी लेकिन मई आपसे वडा करती हु की ये गलती दोबारा नहीं होगी.

उन दोनों के बात सुन कर शनाया के दिल पिघल गया और वो उन दोनों से बोली.

शनाया- ठीक मई तुम दोनों को पहली गलती समझ कर माफ़ कर रही हु लेकिन यद् रखना आज के बाद तुम दोनों ये सब मेरे या किसी और के साथ की तब मई तुम दोनों को ऐसी सजा दिलवाऊंगी की तुम दोनों मरते डैम तक नहीं भूलेगी अब तुम दोनों जाओ यहाँ से.

शनाया के बातो को सुन कर वो दोनों औरते वह से तुरंत चली गयी उनको वह से जाते hi मीडिया रिपोर्टर तुरंत हमारे पास आ गए और हमसे सवाल पूछने लगे.

रिपोर्टर- आपने अभी अभी जो क्रीम उन दोनों औरतो को लगाने के लिए दिया था उस क्रीम का क्या नाम है और आप उसे मार्किट में कब लांच करने में बारे में सोच रहे है.

रिपोर्टर की बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए उससे बोलै.

मई- मैंने इस क्रीम का नाम नेचुरल ब्यूटी क्रीम रखा है और ये मार्किट कब लांच होगा ये हमने अभी डीडे नहीं किया है जब हम डीडे कर लेंगे तब आप सब को बता दिया जायेगा ठीक है अब हमें इजाजत दीजिये.

इतना बोल कर मई शनाया को ले कर कंपनी के अंदर जाने लगा इधर शनाया अभी तक जो भी हो रहा था बस वो सब वो चुप चल देख रही थी लेकिन हम दोनों जैसे hi कंपनी के अंदर आये की शनाया के सवाल सुरु हो गया.

शनाया- ये सब क्या था प्रतिक तुम उन दोनों को वो क्रीम क्यों दिया और तुम्हे पता कैसे चला की वो दोनों किसी साजिश के तहत यहाँ पर आये है.

शनाया के बात सुन कर उसे मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- जब तुम मुझे अपने कंपनी के क्रीम दी थी और मई उसे चेक किया था तभी मुझे सक हो गया था की वो दोनों यहाँ पर किसी के कहने पर तुम्हे और तुम्हारे कंपनी की बदनाम करने आयी है क्युकी जब मई तुम्हारे क्रीम को चेक किया तो उसमे ऐसा कुछ भी मिला हुआ नहीं था की इससे किसी को कोई नुकसान हो और जब मई उन दोनों को वह पर देखा और उनकी बाटे सुना तो मेरा सक यकीं में बदल गया इस लिए मैंने तुम्हारे कंपनी के क्रीम को बहार के स्टोर से मंगवाया था.

मेरी बात को सुन कर शनाया कुछ देर तक संत रही फिर वो बोली.

शनाया- या तो मई समझ गयी की तुमको उन पर सक कैसे हुआ लेकिन तुम उन दोनों को नेचुरल ब्यूटी क्रीम क्यों दिया जबकि तुम जानते थे की वो दोनों यहाँ पर मुझे और मेरी कंपनी को बदनाम करने आये थे.

शनाया के बात सुन कर मई उसे ध्यान से देखा और फिर बोलै.

मई- मई उनको वो क्रीम दो करने से दिया था पहला कारन ये था की वो दोनों ये काम किसी के बहकावे में आ कर रहे थे और मुझे इनके पीछे जो था उसका नाम जानना था और दूसरी बात ये है की मई अपनी बनाई हुयी नेचुरल ब्यूटी क्रीम और उसके फार्मूला तुम्हे देना चाहता था ताकि तुम्हारी ये कंपनी ब्यूटी प्रोडक्ट्स में इंडिया के no. 1 कंपनी बन जाये इसी लिए मैंने सोचा की क्यों न मई ये क्रीम इन लोगो को दे कर इसका अद्वेर्तिसेमेन्ट कर लू क्युकी यहाँ पर मीडिया वाले भी थे और जब वो इस क्रीम के खूबी को देखते तो उसका मुफ्त में hi अद्वेर्तिसेमेन्ट करते.

मेरी बात को सुन कर शनाया प्यार से मुझे देखने लगी और फिर मुझसे बोली.

शनाया- थैंक्स प्रतिक जो तुमने मेरे बारे में इतना सोचा.

मई- अरे इसमें थैंक्स की क्या बात हो गयी ये सब तुम्हारे लिए करना तो मेरा फर्ज है आखिर में तुम मेरी बीवी जो हो.

मेरी बात को सुन कर शनाया बहुत खुस हो गयी इसके बाद मई शनाया से एक पेज और पेन मंगवाया और उसे नेचुरल ब्यूटी क्रीम के फार्मूला लिख दिया इसके बाद मई अपने जेब में हाथ दाल कर अपने स्टोरेज रिंग से नेचुरल ब्यूटी क्रीम के 10 दबे निकला और शनाया को देते हुए बोलै.

मई- ये नेचुरल क्रीम के 10 बड़े है और ये उसका फार्मूला है तुम इस फॉर्मूले के मदत से इस क्रीम को बना सकती हो और मार्किट में शाले कर सकती हो लेकिन एक बात यद् रखना इस फॉर्मूले को अपने सबसे भरोसे मन आदमी के साथ hi शेयर करना नहीं तो कही ऐसा न हो की ये तुम्हारे रिवल्स कंपनी के हाथ लग जाये.

मेरे बातो को सुन कर और मुझे खुद के लिए इतना केयर करते देख कर शनाया के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी और वो मुझे प्यार से देखते हुए बोली.

शनाया- आज के लिए थैंक्स प्रतिक अगर आज तुम न होते तो पता नहीं मुझे और मेरे कंपनी को क्या क्या झेलना पड़ता और है इस क्रीम और इसके फार्मूला के लिए स्पेशल थैंक्स मई बहुत खुस नसीब हु की तुम मेरे जिंदगी में आये बस मुझे कभी छोड़ कर जाना मत क्युकी अब मुझे तुम्हारी आदत hi हो गयी है.

शनाया के बात सुन कर मई उसके आँखों में देखते हुए बोलै.

मई- तुम चिंता मत करो मई तुम्हे कभी छोड़ कर नहीं जाऊंगा और मई किसी दिन तुम्हे छोड़ कर चला भी गया तो वो मेरा आखिरी दिन होगा.

मेरे मुँह से आखिरी दिन सुन कर शनाया के दिल बेचैन हो गया और वो मेरे मुँह पर अपना हाथ रख दी और बोली.

शनाया- आज के बाद तुम कभी ऐसी बात मत बोलना क्युकी मई तुम्हारे बिना अब अकेले रहने के बारे में सोच भी नहीं सकती.

इतना बोल कर शनाया एक तक मेरे आँखों में देखने लगी और इधर मई भी उसकी नीली आँखों के गहराई में खोने लगा इस समय हम दोनों एक दूसरे में इतना खो गए की हम दोनों के होठ एक दूसरे के तरफ धीरे धीरे बढ़ने लगा अभी हम दोनों के होठ आपस में मिलने hi वाला था की तभी शनाया के मोबाइल पर कॉल आ गया मोबाइल के रिंग सुन कर हम दोनों एक दूसरे अलग हो गए इधर शनाया जैसे hi होश में आयी तो उसे इस वक़्त के परिस्थिति का अंदाजा हुआ तो वो शर्माने लगी और वह से थोड़ी दूर हाथ कर कॉल रइवे की जैसे hi वो कॉल रिसीव कर के अपने कण में लगाया और सामने वाले की बात को सुना तो उसके हाथ से मोबाइल छूट कर निचे गिर गया और उसके मुँह से एक जोरदार चीख निकल गयी.

शनाया- नहीं..... ऐसा..... नहीं.... हो .... सकता....



तो बे कंटिन्यू
 
अपडेट 34

एक्सीडेंट


मल्होत्रा हाउस में विक्की और अमृता सोफे पर बैठ कर स्नैक्स खा रहे थे और टीवी में न्यूज़ देख रहे थे उस न्यूज़ में शनाया और उसके कंपनी में जो हो रहा था उसे लाइव दिखाया जा रहा था वो दोनों औरत शनाया और उसके कंपनी पर इल्जाम लगा रहे थे जिसे देख कर अमृता और विक्की खुस हो रहे थे इस वक़्त अमृता के नजर शनाया पर थी शनाया को अपने कंपनी के लिए परेशां देख कर अमृता और विक्की खुस हो रहे थे तभी अमृता जोर से हस्ते हुए बोली.

अमृता- आज तो मजा hi आ गया मई कब से शनाया के ऐसे चेहरे को देखने के लिए परेशां थी इसने मुझसे पन्गा लिया था न अब देखो मई इसे किस तरह से बर्बाद करती हु अभी तो ये सिर्फ ट्रेलर है मई इसे और उस घरजमाई को चैन से जीने नहीं दूंगी.

अमृता के बात सुन कर विक्की मुस्कुराते हुए बोलै.

विक्की- अरे बहना अभी से hi इतना खुस मत हो जाओ अभी तो इन दोनों के साथ बहुत कुछ होने वाला है मैंने इन दोनों के लिए बहुत कुछ सोच रखा इस शनाया ने दादा जी के मदत से तुम्हारी कंपनी हथियाई थी न अब देखना मई इसके पास कुछ भी नहीं रहने दूंगा मई इन दोनों से भीख नहीं मंगवाया तो फिर बोलना.

अभी ये दोनों बात कर hi रहे थे की तभी इन दोनों के नजर टीवी पर गया और उन दोनों ने देखा की कैसे मैंने उन दोनों औरतो के पोल को खोला और उन दोनों औरतो को बेनकाब किया इसके बाद वो दोनों औरतो ने अपना गुनाह काबुल करते हुए विक्की और अमृता के नाम लिया था ये देख कर दोनों के होश उड़ गए और और उनके माथे से पसीने निकलने लगे फिर विक्की अपने डट को भीचते हुए घुसे से बोलै.

विक्की- इस प्रतिक को तो मई छोडूंगा नहीं मुझे किसी भी तरह से प्रतिक को अपने रस्ते से हटाना होगा तभी जा कर हम शनाया को नुकशान पंहुचा सकते है.

विक्की के बात सुन कर अमृता भी थोड़ी घुसे से बोली.

अमृता- है तुम ठीक बोल रहे हो हमें प्रतिक का कुछ न कुछ तो करना hi पड़ेगा नहीं तो हम उसके रहते कभी भी शनाया के कंपनी को हासिल नहीं कर सकते सबसे पहले हमें प्रतिक को शनाया के जिंदगी से बहार निकलना होगा और ये सब करने में हमारा साथ देगा आकाश.

विक्की- वो सब तो ठीक है लेकिन अब हम इस मुसीबत से कैसे निकालेंगे उन दोनों कामिनियों ने तो सबके सामने हमारा नाम ले लिया है.

विक्की के बात सुन कर अमृता भी टेंशन में आ गयी और इन सब से बहार निकलने के बारे में सोचने लगी अभी को इस बारे में कुछ सोच पति तभी बहार से एक नौकर भागते हुए आया और विक्की से बोलै.

नौकर- छोटे मालिक छोटे मालिक बहार पुलिस आयी हुयी है.

जब विक्की और अमृता ने ये सुना की बहार पुलिस आयी हुयी है तो दोनों के हाथ पेअर फूल गए और दोनों दर से थार थार कपङे लगे तभी वह पर अमृता और विक्की के माता पिता राजेश मल्होत्रा और राधिका मल्होत्रा आ गए जब दोनों विक्की और अमृता के पास आये तो उन्होंने देखा की दोनों टेंशन में वह पर बैठे हुए है और दोनों के माथे से पसीना निकल रहा है तो राजेश उनसे बोलै.

राजेश- तुम दोनों ने अपनी हालत ऐसी क्यों बना राखी है और तुम दोनों के माथे पर ये पसीना क्यों आ रहा है क्या बात है कुछ हुआ है क्या.

राजेश के बात सुन कर अमृता और विक्की एक दूसरे को देखते है फिर अमृता राजेश के बातो के जबाब देते हुए बोलती.

अमृता- वो वो डैड बहार पुलिस आयी हुयी है.

अमृता के बात सुन कर राजेश और राधिका दोनों हैरान हो जाते है फिर राधिका थोड़ा चिंतित आवाज में बोलती है.

राधिका- क्या पुलिस आयी हुयी है लेकिन पुलिस हमारे यहाँ क्यों आएगी कही तुम दोनों ने तो कुछ गड़बड़ नहीं किया है न.

राधिका के बात सुन कर अमृता और विक्की ने अपना सर निचे कर लिया जिसे देख कर राजेश और राधिका दोनों समझ गए की इन दोनों ने कुछ तो किया है जिसके चलते यहाँ पुलिस आयी हुयी है.

राजेश- क्या किया तुम दोनों ने जो यहाँ पर पुलिस आयी हुयी है.

राजेश के बात सुन कर विक्की डरते हुए बोलता है.

विक्की- वो डैड क्या है न की शनाया के कंपनी दिन प्रतिदिन तैराकी करती जा रही है और ये हमें बर्दास्त नहीं हुआ इस लिए हम दोनों उसके कंपनी को बंद करने के लिए एक चल चली थी लेकिन शनाया के कंपनी बंद करने के लिए जिन औरतो को हमने हिरे किया था वो पकड़ी गयी और हमारा नाम ले लिया इस लिए यहाँ पर पुलिस आयी हुयी है.

विक्की के बात सुन कर राजेश को बहुत गुसा आता है और वो घुसे से एक तपाद विक्की को मरता है और बोलता है.

राजेश- तुमने ये क्या किया तुम्हारी अकाल कहा गया था तुम जानते हो न की अगर ये बात तुम्हारे दादा जी को पता चल गया तो क्या होगा अगर तुम्हे शनाया और उसके कंपनी को नुकशान पहुंचना hi था तो कोई अच्छी प्लेन के साथ ये सब करता.

राजेश के बात सुन कर विक्की और अमृता के सर निचे हो गए अपनों दोनों बचो को ऐसे सर झुकाये हुए देख कर राधिका से रहा नहीं गया और वो राजेश से बोली.

राधिका- अरे तुम भी क्या इन बच्चो पर चीला रहे हो गलती हो गयी इनसे इन्हे थोड़े hi पता था की वो दोनों औरते पकड़ी जाएगी अब ये सब छोडो और ये सोचो की इस मुसीबत से कैसे बचा जाये.

अभी ये लोग बात कर hi रहे थे की तभी उनके घर में अंदर पुलिस आ गयी अपने सामने पुलिस को देख कर विक्की और अमृता के हालत ख़राब हो गए हलाकि हालत तो राधिका और राजेश का भी ख़राब हुआ लेकिन वो दोनों खुद को संभल लिए फिर राजेश आगे बढ़ते हुए पुलिस इंस्पेक्टर के पास गया और बोलै.

राजेश- अरे इंस्पेक्टर साहब आपने यहाँ क्यों आये है कुछ बात है क्या.

राजेश के बात सुन कर इंस्पेक्टर मुस्कुराते हुए बोलै.

इंस्पेक्टर- राजेश जी आप ऐसी बात कर रहे है जैसे आपको कुछ पता hi नहीं है आप सब जानते हुए भी अनजान बनाने की कोशिश क्यों कर रहे है हम यहाँ पर आपके बेटे और बेटी को गिरफ्तार करने आये है.

इंस्पेक्टर के बात सुन कर राजेश का चेहरा एक पल के लिए शर्म से लाल हो गया फिर वो खुद को शम्भालते हुए बोलै.

राजेश- देखिये इंस्पेक्टर सबह मेरे बीटा और बेटी ने कुछ भी गलत नहीं किया उन दोनों को फ़साने की कोशिश की जा रही आप पहले पुरे मामले की जाँच कर लीजिये इसके बाद आप यहाँ पर आइयेगा.

राजेश के बात सुन कर इंस्पेक्टर थोड़े कठोर आवाज में बोलै.

इंस्पेक्टर- हमें क्या चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए ये आप मुझे मत सिखाइये और रही बात आपके बेटे और बेटी की बेगुनाही की तो वो सब कोर्ट देख लेगा मुझे बस इन लोगो को गिरफ्तार करने का आर्डर मिला है और हम वही करने आये है.

इंस्पेक्टर के बात सुन कर चारो दर गए फिर राधिका आगे आते हुए बोली.

राधिका- देखिये आप मेरे रहते हुए मेरे बेटे और बेटी को गिरफ्तार नहीं कर सकते समझे आप चुप चाप चले जाइये इसी में आपकी भलाई है नहीं तो.

राधिका के बात सुन कर इंस्पेक्टर को गुसा आ जाता है और वो घुसे से बोलता है.

इंस्पेक्टर- नहीं तो आप क्या कर लेंगी मारेंगी हमें या फिर ससपेंड करवाएगी आपको जो करना है आप जार सकती है लेकिन आज हम इन दोनों को गिरफ्तार कर के ठाणे ले जायेंगे और अगर आप दोनों हमें रोकने की कोशिश की तो पुलिस के काम में बढ़ा डालने के जुर्म में आप दोनों को भी गिरफ्तार करना पड़ेगा.

इंस्पेक्टर के बात सुन कर चारो दर से कपङे लगते है फिर राजेश थोड़ा हिमत कर के बोलता है.

राजेश- तुम मेरे बेटे और बेटी को गिरफ्तार नहीं कर सकते तुम मुझे जानते नहीं हो मेरी तुम्हारे दिग से अच्छा सम्बन्ध है मई उनको बोल कर तुम्हे ससपेंड करवा दूंगा.

राजेश के बात सुन कर इंस्पेक्टर हस्ते हुए बोलै.

इंस्पेक्टर- है है है आप जानते हो मुझे दिग सर ने hi इन दोनों को गिरफ्तार करने के लिए बोलै है.

इंस्पेक्टर के बात सुनते hi राजेश हैरान हो जाता है अब उसको बोलती भी बंद हो जाती है क्युकी वो जिसपे भरोसा कर के बोल रहा था उसी ने उनके बच्चो को गिरफ्तार करने के लिए बोलै था इधर इंस्पेक्टर अपनी बात बोलने के बात हवलदारों को विक्की और अमृता को गिरफ्तार करने का इशारा करता है जिसे बाद एक लेडीज कांस्टेबल और एक जेन्स कांस्टेबल अपने हाथो में हथकड़ी ले कर आगे आते है और अमृता और विक्की के हाथो में हथकड़ी लगा देते है अपने हाथो में हथकड़ी देख कर विक्की और अमृता दोनों रोने लगते है और रोने में उनका साथ राधिका भी दे रही थी लेकिन राजेश की आँखे घुसे से लाल था इंस्पेक्टर दोनों को गिरफ्तार करने के बाद उन्हें लेकर वह से निकल जाता है उनके जाने के बाद राजेश घुसे से बोलता है.

राजेश- मई उस शनाया को छोडूंगा नहीं आज उस लड़की के चलते मेरे दोनों बेटे का जेल हो गया.

इधर मेरे और शनाया के घर से निकल सोल्लगे जाने के करीब 2 घंटे बाद शनाया के पापा अजय मल्होत्रा किसी काम से मार्किट जा रहे थे वो जैसे hi अपने घर से निकले तो उनके माथे पर एक कला धुय गोल सर्किल में मंडराने लगा लेकिन इसका पता उनको नहीं चला और वो अपने घर से अपने कार को खुद ड्राइव कर के मार्किट जा रहे थे वो मार्किट में पहुंचने hi वाले थे की तभी एक अनियंत्रित ट्रक आ कर उनके कार से टकरा जाता है जिससे उनके कार हवा में उछाल जाता है और 2 राउंड हवा में घूमने के बाद वो जमीं पर गिरता है जिसके कारन शनाया के पापा क बहुत बड़ा एक्सीडेंट हो जाता है जिसके कारन उनका सर फैट जाता है और उनके सर से बहुत ज्यादा ब्लड निकलने लगता जिससे वो वही बेहोश हो जाते है जब उनके कार का एक्सीडेंट हुआ उसी वक़्त वह से एक पुलिस का गाड़ी गुजर रहा था जो एक्सीडेंट होते देख कर वही रुक जाता है और उसमे बैठा हुआ पुलिस अफसर तुरंत एम्बुलेंस को कॉल कर देता है.

थोड़ी देर बाद एम्बुलेंस आती है और वो अजय मल्होत्रा को लेकर सिटी हॉस्पिटल के लिए निकल जाता है एम्बुलेंस के जाने के बाद पुलिस वाले वह पर छान बिन करते है तो वह पर पुलिस को अजय मल्होत्रा के मोबाइल मिलता है मोबाइल को अपने हाथो में लेने के उसे ओपन करता है और अजय मल्होत्रा के घर पर इन्फॉर्म करने के लिए उसमे no. ढूंढने लगता है थोड़ी देर ढूंढने के बाद पुलिस वालो को उस मोबाइल में एक no. मिलता है जो वाइफ से सेव था जिससे पुलिस वाले समझ जाते है की ये अजय मल्होत्रा के वाइफ का no. है जैसे hi उनको पुस्पा के no. मिला वो लोग तुरंत उस no. पे कॉल करते है इधर शनाया के माँ भी तैयार हो कर अपने कितय पार्टी में जाने के लिए अपने घर से निकल रही थी तभी उनके मोबाइल पर एक अननोन no. से कॉल आता है फिर वो उस कॉल को रिसीव कर के बोलती है.

पुस्पा- हैल्लो कोण बोल रहा है.

कॉल- हैल्लो मई अँधेरी पुलिस ठाणे का इंस्पेक्टर बोल रहा हु यहाँ पर आपके पति अजय मल्होत्रा का एक्सीडेंट हो गया आप जल्दी से सिटी हॉस्पिटल आ जाइये क्युकी उनको उसी हॉस्पिटल में भेजा गया है.

पुस्पा ने जैसे hi इंस्पेक्टर के बात को सुनी वो सदमे में चल जाती है और उनके हाथो से मोबाइल छूट कर नीचे गिर जाता है मोबाइल के निचे गिरने के तुरंत बाद वो भी बेहोश हो कर नीचे गिर जाती है जैसे hi पुस्पा नीचे गिरती है एक धड़ाम की आवाज आती है जिसे शानवी ने सुन लिया और भागकर बहार आयी तो देखि की उसकी माँ नीचे गिर कर बेहोश हो गयी है ये देख कर हो हड़बड़ा जाती है और तुरंत अपने माँ को उतने लगती है लेकिन जब पुस्पा नहीं उठती है तो वक घबरा जाती है और भागते हुए अंदर जाती है और एक गिलास में पानी ले कर आती है और उस गिलास से कुछ पानी के छींटे अपने माँ के मुँह पर मरती है जिससे धीरे धीरे कर के पुस्पा को होश आ जाता है जैसे hi पुस्पा होस में आती है वो जोर जोर से रोने लगती है अपने को इस तरह से रोटा हुआ देख कर शानवी घबरा जाती है और अपने माँ से पूछती है.

शानवी- माँ क्या हुआ आपको आप इस तरह से रो क्यों रही है और आप बेहोश क्यों हो गयी थी.

शानवी के बात सुन कर पुस्पा कोई जबाब नहीं देती है बस रोटी रहती है अपने माँ को जबाब न देता देख कर शानवी और घबरा जाती है और अपने माँ हिलाते से बोलती है.

शानवी- माँ आप बता क्यों नहीं रही है देखिये मेरे दिल घबरा रहा है.

शानवी के हिलने से पुस्पा होश में आती है जल्दी से उठ कर रट हुए बोलती है.

पुस्पा- हमको हॉस्पिटल जाना शानवी तुम्हारे पापा का एक्सीडेंट हो गया है.

अपने माँ के बात सुन कर शानवी हैरान हो जाती है और उसके आँखों से भी आंसू निकलने लगता है लेकिन वो किसी तरह खुद को संभालती है और अपने माँ से बोलती है.

शानवी- माँ आप चुप रहिये कुछ नहीं होगा दर को मई अभी तस्य बुलाती हु हम दोनों हॉस्पिटल चलेंगे वैसे अभी डैड किस हॉस्पिटल में है.

पुस्पा- सिटी हॉस्पिटल.

शानवी- ठीक है मई अभी तस्य बुलाती हु.

इतना बोल कर धन्वी एक तस्य बुलाती है फिर वो अपने माँ को उस तस्य में बैठती है और दोनों सिटी हॉस्पिटल के लिए निकल जाते है रस्ते में पुस्पा शानवी से बोलती है.

पुस्पा- तुम शनाया को भी कॉल कर के हॉस्पिटल बुला लो.

अपनी माँ के बात सुन कर शानवी तुरंत शनाया को कॉल लगाती है इधर शनाया के कंपनी में मई और शनाया बात कर hi रहे थे की तभी शनाया के मोबाइल पर शानवी का कॉल आता है शनाया अपने मोबाइल पर शानवी का कॉल आता देख कर तुरंत कॉल रइवे करती है और बोलती है.

शनाया- है शानवी बोलो.

शानवी- दी दी दी वो वो डैड डैड.

शानवी को इस तरह से घबराये हुयी आवाज में बात करता हुआ सुन कर शनाया भी घबरा जाती है और बोलती है.

शनाया- तुम इस तरह से क्यों बात कर रही हो क्या हुआ है डैड को.

शनाया के बात सुन कर शानवी रट हुए बोलती है.

शानवी- वो वो दी डैड का एक्सीडेंट हो गया वो अभी सिटी हॉस्पिटल में है.

शानवी के बात सुन कर शनाया की जोर से चीख निकलती है.

शनाया- नहीं ऐसा नहीं हो सकता डैड का एक्सीडेंट नहीं हो बोलो की तुम झूठ बोल रही हो.

शनाया के बात सुन कर शानवी रट हुए बोलती है.

शानवी- नहीं दीदी ये सच है डैड का एक्सीडेंट हो गया है मई और माँ अभी हॉस्पिटल जा रहे है आप जल्दी वह पर आइये.

शानवी के बात सुन कर शनाया के हाथ से मोबाइल छूट कर निचे गिर जाता है वो धाम के आवाज के साथ अपने कुर्सी पर बैठ जाती है और अपने आप से hi बड़बड़ाने लगती है.

शनाया- नहीं डैड को कुछ नहीं हो सकता.

शनाया जब शानवी से बात कर रही थी तो मई उसकी सरे बातो को सुन लिया था इस लिए मई जल्दी से शनाया के पास गया और उसको सँभालने लगा जैसे hi मई शनाया के पास गया तो वो मुझसे लिपट कर रोने लगी और रट हुए मुझसे बोली.

शनाया- प्रतिक डैड डैड का एक्सीडेंट हो गया है उनको कुछ होगा तो नहीं न.

शनाया के बात सुन कर मई उसको सँभालते हुए बोलै.

मई- नहीं शनाया डैड को कुछ नहीं होगा तुम टेंशन मत लो मई हु न मई डैड को कुछ नहीं होने दूंगा और वैसे भी सिटी हॉस्पिटल में मेरी अच्छी जान पहचान है मई अभी उनको कॉल कर के डैड के कंडीशन के बारे में पता करता हु

मेरी बात को सुन कर शनाया थोड़ी संत हुयी और फिर मुझसे बोली.

शनाया- सच में तुम्हारी जान पहचान सिटी हॉस्पिटल में है.

मई- है मई सच बोल रहा हु सच में सिटी हॉस्पिटल में मेरे कुछ जान पहचान वाले है रुको मई अभी हॉस्पिटल में कॉल कर के डॉक्टर से बात करता हु इसके बाद हम भी हॉस्पिटल चलेंगे.

इतना बोल कर मई शनाया से थोड़ी दूर हैट कर डॉ. खुराना के पास कॉल लगता हु थोड़ी देर रिंग जाने के बाद डॉ. खुराना मेरे कॉल को रइवे करते है और बोलते है.

डॉ. खुराना- है प्रतिक बोलो आज अपने इस गरीब को कैसे यद् कर लिया.

डॉ. खुराना के बात सुन कर उनसे बोलै.

मई- डॉ. खुराना क्या आपको हॉस्पिटल में अभी अभी एक एक्सीडेंट हुआ पेशेंट आया है क्या.

डॉ. खुराना- है अभी अभी ऐसा एक पेशेंट आया तो है लेकिन आप उसके बारे क्यों जानना चाहते है क्या वो आपका कोई जान पहचान वाला है.

मई- है वो मेरे ससुर अजय मल्होत्रा है और मई चाहता हु की उनकी इलाज में कोई कमी न रहे वैसे अभी उनकी कंडीशन कैसी है.

डॉ. खुराना- उनकी कंडीशन तो बहुत ख़राब है उनका बचना बहुत मुश्किल है हम लोग उनको बचने में लगे हुए है.

डॉ. खुराना के बात सुन कर मुझे टेंशन होने लग गया और मई अपने मन में hi शनाया के बारे में सोचने लगा.

मई- (अपने मन में) शनाया अपने डैड से बहुत प्यार करती है अगर शनाया के डैड को कुछ हो गया तो शनाया सह नहीं पायेगी और मई कभी भी शनाया को दुखी नहीं देख सकता मुझे किसी भी तरह से शनाया के डैड को ठीक करना होगा.

ये सब सोचने के बाद मई डॉ. खुराना को बोलै.

मई- डॉ. खुराना वो मेरे वाइफ के डैड है अगर उनको कुछ हुआ तो मेरी वाइफ उसे बर्दास्त नहीं कर पायेगी और मई अपने वाइफ को बहुत प्यार करता और मई उसी कभी भी दुखी नहीं देख सकता इसलिए आपको कुछ भी क्यों न करना पड़े आप उनको कुछ समय के लिए संभल लीजिये मई जल्द hi वह पर पहुंच रहा हु मेरे आने के बाद उनका इलाज मई खुद करूँगा.

मेरे बात को सुन कर डॉ. खुराना कुछ देर तक सोचते रहे फिर वो मुझसे बोले.

डॉ. खुराना- ठीक है प्रतिक मई उनको आपके आने तक किसी भी तरह से बचा कर रखूँगा लेकिन आप जल्द hi यहाँ पहुंचने की कोशिश कीजियेगा.

मई- थैंक यू डॉ. खुराना आप चिंता मत कीजिये मई वह पर एक घंटे में पहुंच जाऊंगा.

इतना बोल कर मई कॉल कट कर दिया फ़ोन कट करते hi शनाया मेरे पास आ गयी और मुझसे बोली.

शनाया- बात हो गयी डॉ. से क्या बोलै उन्होंने क्या डैड अभी ठीक है.

मई शनाया के इतने सरे सवाल को सुन कर परेशां हो गया मुझे समझ में नहीं आ रहा था की मई शनाया के सवालो का क्या जबाब दू क्युकी मई शनाया से झूठ नहीं बोल सकता था इस लिए मई शनाया से आधा सच बताते हुए बोलै.

मई- है मेरी बात डॉ. से हो गयी है अभी तुम्हारे डैड के कंडीशन स्टेबल नहीं है लेकिन डॉ. ने बोलै की चिंता करने की जरुरत नहीं है वो लोग उनके ट्रीटमेंट में लगे हुए है और वो डैड को कुछ भी नहीं होने देंगे ठीक है अब हमें भी हॉस्पिटल के लिए निकलना चाहिए.

मेरी बात को सुन कर शनाया थोड़ी रहत की साँस ली और मुझसे बोली.

शनाया- है जल्दी चलो मई और देर नहीं कर सकती मुझे डैड को जल्द से जल्द देखना है.

इतना बोल कर शनाया अपना हैंडबैग 👜 ली और बहार निकल गयी उसके जाते hi मई भी उसके पीछे पीछे जाने लगा थोड़ी देर बाद हम दोनों पार्किंग से गाड़ी निकल कर हॉस्पिटल के लिए निकल गए.

करीब 45 मिनट्स गाड़ी ड्राइव करने के बाद हम दोनों सिटी हॉस्पिटल में पहुंच गए सिटी हॉस्पिटल पहुंचने के बाद शनाया ने गाड़ी को पार्क किया गाड़ी पार्क करने के बाद शनाया जल्दी से गाड़ी से उतरी और भागते हुए हॉस्पिटल के अंदर चली गयी उसको इस तरह से भागते हुए देख कर मई भी उसके पीछे पीछे हॉस्पिटल के अंदर आ गया था इधर शनाया हॉस्पिटल के अंदर जाने के बाद वो सीधा रिसेप्शनिस्ट के पास गयी और उससे बोली.

शनाया- एक्सक्यूज़ में मम क्या आप बता सकते है की अजय मल्होत्रा अभी किस रूम में है.

शनाया के बात सुन कर रिसेप्शनिस्ट बोली.

रिसेप्शनिस्ट- एक मिनट मम

इतना बोल कर रिसेप्शनिस्ट अपने पास रखे एडमिशन नोटबुक में देखती है और अजय मल्होत्रा के नाम ढूंढती है जब उसको अजय मल्होत्रा के नाम उसे नोटबुक में मिल जाता है तो वो शनाया से बोलती है.

रिसेप्शनिस्ट- अजय मल्होत्रा 3रद फ्लोर पर िक में है मम.

रिसेप्शनिस्ट के बात सुन कर शनाया उसके थैंक यू बोलती है और फिर वो भागते हुए 3रद फ्लोर पर चली जाती है जब वो 3रद फ्लोर के लॉबी में पहुँचती है तो देखती है की वह पर उसकी माँ और शानवी दोनों बैठी हुयी है और दोनों के आँखे रो रो के लाल हो चुकी है अपनी माँ और बहन के ऐसी हालत देख कर शनाया के भी आँखों से आंसू आने लगते है शनाया के माँ और सिस्टर के हालत देख कर मुझे भी बहुत दुःख हो रहा था इस लिए मई वही पर रुक कर उन दोनों को देखने लगा और शनाया को उनके पास जाने के लिए बोलै.

मेरे बात को सुन कर शनाया अपने माँ के पास जाती है जैसे hi वो इन दोनों के पास जाती है तो पुस्पा की नजर उस पर पड़ती तो वो दोनों उसे गले लग कर रोने लगते है.

इधर जैसे धन्वी और पुस्पा शनाया के गले लगते है तो उनको देख कर मई एक डैम से हैरान हो गया और उन दोनों को ध्यान से देखने लगा मेरा इतना ज्यादा हैरान होने का कारन था की पुस्पा और शनाया के सर पर कला धुय गोल सर्किल में मंडरा रहा था और ये धुय कोई आम धुय नहीं था बल्कि ये एक सैतानी धुय था ये धुय एक मौत का धुय था मई उस धुएं को देख कर मन hi मन सोचने लगा.

मई- (अपने मन में) ये कला धुय इनके सर पर कैसे मंडरा रहा है इस धुएं के कारन तो इन दोनों के जान खतरे में है मैंने इन दोनों को कुछ नहीं होने दे सकता हु मुझे इन दोनों के ऊपर से मौत के साये को हटाना hi होगा लेकिन उससे पहले मुझे ये जानना होगा की ये कला धुय इन दोनों के सर के ऊपर आया कहा से वैसे मुझे ये लग रहा है की इन सब के पीछे तांत्रिक गोरखनाथ का काम है अगर ऐसा हुआ तो मई उसे जिन्दा नहीं छोडूंगा पहले मई शनाया के डैड को ट्रीटमेंट कर दू इसके बाद मई इस काळा धुएं को देखता हु.

मई अभी अपने में hi खोया हुआ था तो इधर शनाया अपने माँ और शानवी को इस तरह से रोटा देख कर शनाया के भी आँखों में आंसू आने लगते है लेकिन वो खुद को किसी तरह से संभालती है और उन दोनों से बोलती है.

शनाया- माँ प्लीज आप दोनों चुप हो जाइये अगर आप दोनों इसी तरह से रोटी रहेंगी तो आप दोनों की भी तबियत ख़राब हो जायेगा आप डैड को चिंता मत कीजिये डैड को कुछ नहीं होगा वैसे भी प्रतिक यहाँ के डॉक्टर से बात किया था तो उन्होंने बोलै है की पापा जल्द hi ठीक हो जायेंगे.

शनाया के बात सुन कर शानवी और पुस्पा चुप हो जाती है लेकिन जैसे hi शनाया के मुँह से पुस्पा मेरा नाम सुनती है तो वो गुसा हो जाती है और घुसे से शनाया से बोलती है.

पुस्पा- तुम नाम भी मत लो उस मनहूस की वो जब से मेरे घर में आया है हमारा चैन सुकून सब छीन लिया है ये जो भी हमारे साथ हो रहा है सब उसी के मनहूसियत के कारन हो रहा है.

पुस्पा के बात सुन कर शानवी और शनाया दोनों हैरान हो जाते है पुस्पा के बात सुन कर शनाया कुछ बोलती उससे पहले hi शानवी अपनी माँ से घुसे से बोलती है.

शानवी- माँ आप ये क्या बात कर रही है आप ऐसे कैसे प्रतिक को बोल सकती है वो आपका दामाद है और ऐसे hi किसी पर भी बिना साबुत के कोई इल्जाम नहीं लगा सकती और वैसे भी जब डैड का एक्सीडेंट हुआ उस समय प्रतिक दी के साथ था और आप अपने दामाद को मनहूस कैसे बोल सकते है.

शानवी के बात सुन कर शनाया भी उसके बातो से एग्री होते हुए बोली.

शनाया- बस माँ बहुत सुन लिया मैंने आपका बात अब मई प्रतिक के बारे में आपके मुँह से एक शब्द भी नहीं सुनूंगी आज सुबह से hi प्रतिक मेरे साथ था और आप उस पर झूठा इल्जाम लगा रही है आप यहाँ पर डैड का ट्रीटमेंट करवाने आयी है या फिर प्रतिक को कोशने के लिए आयी है.

अपनी दोनों बेटी के बात सुन कर पुस्पा पहले तो बहुत हैरान हुयी फिर वो घुसे से अपने डट भीचते हुए बोली.

पुस्पा- तुम दोनों अभी उसके बारे में कुछ जानते नहीं हो इस लिए बोल रही हो जब तुम दोनों उसके बारे में जान जाओगी तो तुम दोनों भी उससे नफरत करने लगोगी.

पुस्पा के बात सुन कर शनाया और शानवी हैरान हो गयी इस बार तो मई भी उनकी बात सुन कर हैरान हो गया और अपने मन hi मन सोचने लगा की मैंने ऐसा क्या किया है जो ये इस तरह से बात कर रही है फिर मई आगे बढ़ते हुए उन सब के पास गया और बोलै.

मई- देखिये आंटी मई हमेसा आपका इज्जत करता हु आप जो भी बोलती है उसे मई अपने सर झुका कर मन लेता हु मई कभी भी आपके बातो का पलट कर जबाब नहीं दिया लेकिन आप मुझ पर अगर इस तरह के गठिया इल्जाम लगाएंगी तो मई सह नहीं पाउँगा आज आप मुझे बता hi दीजिये की आपको मुझसे प्रॉब्लम क्या है.

मेरी बात को सुन कर पुस्पा घुसे से मेरे पास आयी और मुझसे बोली.

पुस्पा- मुझे तुमसे नहीं बल्कि तुम्हारी इस गरीबी से नफरत है तुम मेरे घर के नौकर भी बनाने लायक नहीं थे और मेरा दामाद बन कर बैठे हो ये प्रॉब्लम है और सबसे बड़ी बात की तुम मेरे घर पर हम सब को बर्बाद करने के लिए आये हो और मई अपने जीते जी तुम्हे ये सब करने नहीं दूंगी.

पुस्पा के बात सुन कर शनाया शानवी और मई तीनो चौक गए थे मुझे पुस्पा के बात सुन कर बहुत दुःख हुआ इस लिए मई उनसे बोलै.

मई- क्या आपके नजर में पैसो के आगे इंसान की कोई वैल्यू नहीं है अगर आपके नजर में पैसा hi सब कुछ है तो मई आपसे वडा करता हु की आने वाले समय में मई इतना पैसा आपके कदमो में दाल दूंगा जितना आपने कभी देखा नहीं होगा और वैसे भी आप ने मुझे एक साल का समय दिया था तो फिर आप एक साल पूरा होने दीजिये आपने 1 साल में 1 करोड़ लेन के लिए बोलै था न तो आज मई इन दोनों के सामने आपसे बोलता हु की मई 1 साल के अंदर आपको 1 करोड़ नहीं बल्कि 10 करोड़ दूंगा और अगर मई आपको 10 करोड़ नहीं दिया तो मई शनाया से तलाक ले लूंगा और अपने क्या बोलै था की मई आपके घर को बर्बाद करने आया था अगर मुझे आप सब को बर्बाद hi करना होता तो मई ये सदी का नाटक नहीं करता बल्कि कबका बर्बाद कर के रख देता वैसे आपको किसने बोलै की मई आपके घर को बर्बाद करने के लिए आया हु क्या आपने मुझे ऐसा कुछ करते हुए देखा है.

मेरी बात को सुन कर वह खड़े तीनो हैरान हो गए सबसे ज्यादा हैरान तो पुस्पा हुयी थी वो अपने मन में सोचने लगी.

Puspa-(Apne मन में) ये आज तक तो मेरे सामने अपना जबान भी नहीं खोलता था आज इसे क्या हो गया है की ये मेरे से जबान लड़ा रहा है और तो और ये मुझसे बाबा के बारे में पूछ रहा है मुझे बताना चाहिए या नहीं अगर बाबा के बात सही हुआ तो इसे बता कर मई अपने hi पेअर पर कुल्हाड़ी मर लुंगी नहीं नहीं मुझे इससे कुछ भी बताना नहीं चाहिए.

अपने मन में इतना कुछ सोचने के बाद वो मुझसे बोली.

पुस्पा- तुम्हारी औकात 1 करोड़ की भी नहीं है और तुम मुझे 10 करोड़ रूपए डोज अगर तुम्हारी इतनी hi औकात रहती न तो तुम मेरे घर पर घर जमाई बन कर नहीं रहते कण खोल के सुन लो शनाया अगर ये मुझे 1 साल पूरा होने पर 10 करोड़ नहीं दिया न तो तुम चुप चाप इसे तलाक दे डौगी.

पुस्पा के बात सुन कर शनाया घबरा जाती है और घबराते हुए मुझसे बोलती है.

शनाया- तुमने ये क्या किया प्रतिक तुम ऐसे कैसे बिना सोचे समझे वडा कर सकते हो तुम जानते हो न की 10 करोड़ कितना होते तुम इतने पैसे कहा से लाओगे तुम्हे ये वडा नहीं करना चाहिए था.

शनाया के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- तुम चिंता मत करो शनाया मई तुम्हारे लिए 1 साल में 10 करोड़ तो क्या 100 करोड़ भी कमा सकता हु बस तुम मुझ पर बिस्वास रखो.

मेरे बात को सुन कर जहा शनाया को मन hi मन बहुत खुसी हुयी तो वही शानवी को मुझे शनाया के लिए इतना कुछ करते हुए देख कर बहुत जलन हुआ और वो घुसे से अपने हाथ के मुठी बंद कर ली लेकिन वो कुछ बोली नहीं इधर शनाया मेरे बात को सुनाने के बाद मुझसे बोली.

शनाया- मुझे तुम पर पूरा बिस्वास है और जानती हु की तुम मेरा बिस्वास कभी भी नहीं टूटने डोज फिर 10 करोड़ बहुत होते है इतना पैसा लाओगे कहा से.

शनाया के बात सुन कर पुस्पा मुस्कुराते हुए बोली.

पुस्पा- कहा से लाएगा इसके जैसे गरीब और घरजमाई इंसान के पास छोरी करने के अलावा और रास्ता hi क्या है ये कोई बड़े खंडन का बीटा थोड़े न है और न hi इसके पास पैसे छपने का मशीन है.

पुस्पा के बात सुन कर मुझे बहुत बुरा लगा लेकिन मई उसके बातो को इग्नोर करते हुए शनाया से बोलै.

मई- शनाया तुम तो मुझे जानती hi हो की मई कभी भी कोई भी गलत काम नहीं करूँगा मई जो भी पैसे लाऊंगा वो ईमानदारी से लाऊंगा.

मेरे बात को सुन कर शनाया ने मुझे प्यार भरी नजरो से देखि लेकिन कुछ बोली नहीं वही मेरे बात को सुन का पुस्पा अजीब सा मुँह बना ली जैसे वो कोई कड़वी चीज खा ली हो इधर शानवी कबसे हमारी बाटे सुन रही थी जब उसको बर्दास्त नहीं हुआ तो वो बोली.

शानवी- मुझे लगता है की आप सब को डैड की कोई फ़िक्र hi नहीं है इस लिए आप सब अपने बात को ले कर बैठ आप सब ये भूल hi गए की हम अभी हॉस्पिटल में है और डैड जिंदगी और मौत से झूल रहे है मुझे सरम आ रही आप में माँ अगर आपको यही सब बात करना था तो घर नहीं था क्या.

शानवी के बात सुन कर हम सब को रीलीज़ हुआ की हम अभी कहा है और किस काम से आये थे मुझे खुद पर गुसा आने लगा की मई तो यहाँ डैड को बचने के लिए आया था और पुस्पा से बहस करने लगा लेकिन मई कर भी क्या सकता था इनके रोज रोज के तने से मई भी परेशां हो गया था और आज तो इन्होने हद hi कर दी थी मुझ पर इल्जाम लगा कर इस लिए मई आप से बहार हो गया और मुझे ध्यान hi नहीं रहा की मई यहाँ किस लिए आया हु इधर शानवी के के बात सुन कर पुस्पा खुद को सही साबित करने के लिए बोली.

पुस्पा- ये सब इस कामचोर निघाला घर जमाई की गलती है यही हमसे बहस कर रहा था.

पुस्पा के बात सुन कर शनाया और शानवी दोनों को गुसा आ गया शनाया अभी उनको कुछ बोलती उससे पहले hi शानवी उनसे बोल पड़ी.

शानवी- अब बस भी करो माँ हम सबने देखा है की यहाँ पर कोण किस्से बहस कर रहा था.

अभी हमारे बिछ बहस चल hi रही थी की तभी हम लोगो ऑपरेशन रूम का दरवाजा खुलने का आवाज सुनाई दिया तो हम सब ने ऑपरेशन रूम के दरवाजे के तरफ देखा तो पाया की डॉ. खुराना एक नर्स के साथ बहार आ रहे थे डॉ. खुराना को देख कर हम सब उनके पास गए और मई उनसे बोलै.

मई- डॉ. खुराना अब उनकी कंडीशन कैसी है क्या वो ठीक है.

मेरी बात को सुन कर डॉ. खुराना एक बार हम सब को देखते है फिर वो मुझसे बोलते है.

डॉ. खुराना- मर. प्रतिक आप मेरे साथ आइये मुझे आपसे कुछ बात करनी है.

डॉ. खुराना के बार सुन कर पुस्पा उनके सामने आयी और बोली.

पुस्पा- आप इससे क्या बात करना चाहते है ये अनपढ़ गवर आपके बातो को क्या समझेगा आप हमें बताइये की मेरे हस्बैंड की कंडीशन क्या है.

पुस्पा के बात सुन कर डॉ. खुराना को उस पर बहुत गुसा आया और अपने मन में hi सोचने लगे.

डॉ. खुराना- (अपने मन में) ये कैसी औरत है जो अपने दामाद के बारे में ऐसा सोच रखती है ये जानती नहीं है की प्रतिक में कितना काबिलियत है अगर ऐसा दामाद मुझे मिला होता तो मई इसके पेअर धो कर पिता.

इधर डॉ. खुराना को अपने में hi खोया हुआ देख कर पुस्पा उनसे बोलती है.

पुस्पा- डॉ. साहब आप कहा खो गए अपने बताया नहीं की मेरे पति का कंडीशन कैसी है वो ठीक तो है न.

पुस्पा के बात सुन कर डॉ. खुराना होश ने आये और बोले.

डॉ. खुराना- मई तो सोचा था की ये बात मई केवल प्रतिक को hi बताऊ लेकिन आप चाहती है की मई वो बात आप सबके सामने बताऊ तो ठीक है आपके पति का कंडीशन बहुत ख़राब है उनके सर में चोट लगने के कारन उनके सर के एक हड्डी टूट गयी है और वो हड्डी उनके ब्रेन के पास चला गया है.

डॉ. खुराना के बात सुन कर सब हैरान हो गए वो अभी आगे कुछ बताते तभी पुस्पा बिच में बोल पड़ी.

पुस्पा- तो ठीक है आप ऑपरेशन कर के उस हड्डी को बहार निकल दीजिये आप पैसो की चिंता मत कीजिये चाहे जितना भी पैसा लगेगा हम उनके लिए लगाएंगे.

पुस्पा को इस तरह से अपनी बात को बिच में काटते हुए देख कर डॉ. खुराना को बहुत गुसा आया लेकिन वो मेरे कारन अपने घुसे को संत करते हुए बोले.

डॉ. खुराना- आप थोड़ी देर चुप रह सकती है मुझे पुरे बात को बताने दीजिये आप इस तरह से मेरे बात को बिच में मत काटिये.

डॉ. खुराना के बात सुन कर पुस्पा डरते हुए बोली.

पुस्पा- सॉरी डॉक्टर साहब अब मई आपके बात को बिछ में नहीं काटूंगी आप बोलिये क्या बोल रहे थे.

पुस्पा के बात सुन कर डॉ. खुराना थोड़ी देर संत रहे इसके बाद वो बोले.

डॉ. खुराना- है तो मई बता रहा था की उनकी हड्डी टूट कर उनके ब्रेन के पास चली गयी और उस हड्डी को ऑपरेशन कर के निकलना होगा लेकिन प्रॉब्लम ये है की वो हड्डी ब्रेन के इतना पास चली गयी है की अगर उस पर थोड़ा भी दबाव पड़ा तो वो हड्डी ब्रेन में गश जाएगी और फिर उनको बचाना मुश्किल हो जायेगा वैसे मैंने सहर के सबसे बड़े न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर को बुलाया है वो कुछ देर में आते hi होंगे.

अपने बात को बोल कर डॉ. खुराना वह से चले गए और जाते जाते मुझे केबिन में आने का इशारा कर के गए इधर डॉ. खुराना के बात सुन कर सरे लोग हैरान और परेशां हो गए शनाया तो रोने तक लगी शनाया को रोटा हुआ देख कर मई उसके पास गया और उससे बोलै.

मई- तुम चिंता मत करो डैड को कुछ भी नहीं होगा मई हु न मई सब ठीक कर दूंगा.

शनाया को बहुत समझने के बाद वो चुप हुयी लेकिन मेरी बात पुस्पा आंटी को पसंद नहीं आया और वो शनाया के पास आ कर बोली.

पुस्पा- देख रही हो शनाया अपने निकम्मे पति को कैसे बड़ी बड़ी बाटे कर रहा है ये बोल रहा है की ये सब ठीक कर देगा ये क्या खुद को बहुत बड़ा डॉक्टर समझता है.

पुस्पा के बात सुन कर शनाया कुछ नहीं बोली क्युकी वो जानती थी की उसकी माँ को तो बस मौका चाहिए मेरी बेइज्जती करने की इधर मई भी पुस्पा के बातो को इग्नोर कर के डॉक्टर के केबिन के तरफ जाने लगा पुस्पा ने जब देखा की मई उसके बातो को इग्नोर कर के वह से जा रहा हु उसे बहुत गुसा आया और वो मुझे बहुत अनाप सनाप बोलने लगी लेकिन मई उनको इग्नोर कर के डॉक्टर के केबिन में चला गया.

जैसे hi मई डॉ. खुराना के केबिन में गया तो देखा की वो किसी से फ़ोन पर बात कर रहे थे और थोड़ा परेशां लग रहे थे थोड़ी देर बात करने के बाद वो कॉल कट कर दिए कॉल कट करने के बाद उनका ध्यान मेरे ऊपर गया तो वो मुझसे बोले.

डॉ. खुराना- अरे प्रतिक जी आप आ गए आइये बैठिये.

डॉ. खुराना के बोलने के बाद मई उनके सामने रखे हुए चेयर पर बैठ गया और उनको परेशां देख कर बोलै.

मई- क्या बात है डॉ. खुराना आप परेशां लग रहे है और वो न्यूरो सर्जन आने वाले थे न वो अभी तक आये नहीं.

मेरी बात को सुन कर डॉ. खुराना और परेशां हो गए फिर वो थोड़ी देर सोचने के बाद मुझसे बोले.

डॉ. खुराना- देखिये प्रतिक जी मई अभी उन्ही से बात कर रहा था वो अभी किसी काम से फसे हुए है तो वो बोले की उनको आने में करीब 1 घंटा लग जायेगा.

डॉ. खुराना के बात को सुन कर मई हैरान हो गया फिर मई कुछ सोचते हुए डॉ. खुराना से बोलै.

मई- अगर न्यूरोलॉजिस्ट को आने में अभी एक 1 घंटा लगेगा तब तक क्या मेरे ससुर साहब का कैंडिडेट स्टेबल रहेगा.

मेरे बात को सुन कर डॉ. खुराना कुछ सोचते हुए बोले.

डॉ. खुराना- ये बोलना मुश्किल है की तब तक उनका कंडीशन ठीक रहेगा या नहीं क्यों सर में हड्डी फसे होने के कारन उनका ब्लूदिंग बहुत ज्यादा हो रहा है मुझे नहीं लगता है की तब तक वो संभल पाएंगे.

डॉ. खुराना के बात सुन कर मई कुछ देर तक सोचते रहा फिर उनसे बोलै.

मई- तब तो अब एक hi उपाय बच रहा है.

डॉ. खुराना- और वो उपाय क्या है.

मई- अब अपने ससुर का इलाज मई खुद करूँगा आप एक काम कीजिये आप एक सर्जन को इंतजाम कीजिये बाकि सब मई देख लूंगा.

मेरे बात को सुन कर डॉ. खुराना खुस हो गए और फिर वो मुझसे बोले.

डॉ. खुराना- सर्जन का इंतजाम क्यों करना है मई हु न आप बस मुझे गाइडेंस देंगे तो मई सब संभल लूंगा.

मई- ठीक है तो चलिए अब हमें देर नहीं करना चाहिए.

इतना बोल कर हम अभी डॉ. खुराना के केबिन से बहार निकलने hi वाले थे की तभी केबिन का दरवाजा खुला और पुस्पा शानवी और शनाया अंदर आयी और पुस्पा मुझे घुसे से घूरते हुए बोली.

पुस्पा- तुम्हारी हिमत कैसे हुयी की तुम मेरे पति का इलाज करने के बारे में सोचने लगे अगर तुम मेरे पति को हाथ भी लगाया तो ठीक नहीं होगा समझे तुम पहले hi मेरी बेटी के जिंदगी बर्बाद कर दिए और अब तुम मेरे पति को मरना चाहते हो.

दरअसल बात ऐसी हुयी थी की जब मई उन लोगो के पास से डॉ. खुराना के केबिन में आने के लिए निकला तो पुस्पा भी मेरे पीछे पीछे hi चुपके से आ गयी और केबिन के दरवाजे पर अपना काम लगा कर अंदर जो बाटे हो रही थी वो सुनाने लगी जैसे hi उसे पता चला की अजय मल्होत्रा का इलाज मई करने वाला हु वैसे hi वो घुसे से पागल हो गयी और शनाया और शानवी को सब बता कर आपने साथ लेकर आ गयी.

इधर पुस्पा के बात सुन कर शनाया मेरे पास आयी और मुझसे थोड़े घुसे में बोली.

शनाया- तुम ये क्या करने जा रहे थे तुम खुद को डॉक्टर समझने लगे हो क्या देखो प्रतिक मई जानती हु की तुम मेरे पति हो और मई तुम्हारी इज्जत भी करती हु लेकिन यहाँ बात मेरे डैड की जिंदगी का है और मई तुम्हे अपने डैड के जिंदगी के साथ खिलवाड़ नहीं करने दूंगी समझे.

पुस्पा और शनाया के बात सुन कर मई हैरान हो गया की इन्हे कैसे पता चला की मई अजय मल्होत्रा के इलाज करने जा रहा हु तभी मेरी नजर पुस्पा पर पड़ी और मई सब समझ गया जरूर ये हमारी बाटे चुपके से सुनी होगी अभी मई शनाया के बातो का जबाब देता उससे पहले hi पुस्पा बोल पड़ी.

पुस्पा- देख लिया न शनाया अपने पति के करतूत ये हमें अपना नहीं समझता तभी ये तुम्हारे पापा को मरने जा रहा था मई तो कहती हु की तुम इसे तलाक दे कर अपने जिंदगी से काट मर कर बहार निकल दो मई तुम्हारे लिए इस सहर के एक से बढ़कर एक पैसे वाला पति खोज कर लाऊंगा.

पुस्पा के बात सुन कर शनाया घुसे से उसे घूरती हुए बोली.

शनाया- माँ अब यहाँ पर तलाक की बात कहा से आ गयी मई आपको पहले hi बोली हु न की मई प्रतिक को तलाक नहीं दूंगी फिर आप एक hi बात को बार बार क्यों बोलती है.

शनाया के घुसे भरी बात को सुन कर पुस्पा चुप hi गयी पुस्पा को छुप होता देख कर शनाया मुझसे बोली.

शनाया- है तो अब तुम बताओ तुम अभी क्या करने जा रहे थे.

शनाया के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- शनाया जो न्यूरोलॉजिस्ट डैड का ऑपरेशन करने आने वाले थे वो किसी काम में फस गए है जिसके कारन उनको यहाँ आने में 1 या 2 घंटे लग जायेंगे और डैड के पास इतना समय नहीं है अगर उनको जल्दी hi इलाज नहीं किया गया तो उनकी कंडीशन और ख़राब हो जाएगी और वैसे भी तुम तो जानती hi हो न की मई एक आयुर्वेदिक डॉक्टर हु तुम चिंता मत करो मई डैड का अच्छे से इलाज कर दूंगा.

शनाया मेरे बात को सुन कर कुछ सोचने लगी तो वही पुस्पा मेरे बात को सुन कर घुसे से बोली.

पुस्पा- तुम एक डॉक्टर हो तुम्हे शर्म नहीं आती झूठ बोलने में (फिर डॉ. खुराना से) और तुम्हे किसने डॉक्टर बना दिया तुम्हे कोई भी आकर बोलेगा की वो एक डॉक्टर है तो तुम उसकी बात मन लोगे अगर मेरे पति को कुछ भी हुआ न तो मई तुम दोनों में से किसी को भी नहीं छोडूंगी.

इधर शनाया झल्लाते हुए पुस्पा को संत कराती है और मुझसे बोलती है.

शनाया- देखो प्रतिक मई जानती हु की तुम एक आयुर्वेदिक डॉक्टर हो और तुमने लोगो के छोटी मोती बीमारियों का इलाज भी किया है लेकिन मेरे डैड के केस में ऐसा नहीं है उनका एक्सीडेंट हुआ है और उनको सर में छोटे आयी है जिसका इलाज एक न्यूरोलॉजिस्ट hi कर सकता है.

मई- तुम चिंता मत करो चाहे डैड की कैसी भी कंडीशन क्यों न हो मई उसे ठीक कर दूंगा तुम मुझपे भरोसा रखो.

मेरी बात को सुन कर शानवी मेरे सामने आयी और मुझसे बोली.

शानवी- मुझे आप पर पूरा भरोसा है आप जाकर डैड का इलाज कीजिये मई माँ और दी को समझती हु.

शानवी के बात सुन कर शनाया और पुस्पा दोनों हैरान हो गए तभी पुस्पा घुसे से शानवी से बोलती है.

पुस्पा- तुम्हारा दिमाग ख़राब हो गया है क्या तुम जानती हो तुम क्या बोल रही है तुम इस निकम्मे इंसान को की हमारे घर पर बैठ कर मुफ्त के रोटियां तोड़ता है कैसे भरोसा कर सकती हो क्या तुम्हे अपने डैड से थोड़ा भी प्यार नहीं है क्या.

पुस्पा के बात सुन कर शानवी उनसे बोलती है.

शानवी- मुझे डैड से उतना hi प्यार है जितना की आप दोनों को है लेकिन आप दोनों शायद अभी तक प्रतिक को पहचाना नहीं है आप भले इन्हे निकम्मा कामचोर घरजमाई बोलती है लेकिन ये वैसा नहीं है जैसा आप सोचती है जब ये बोल रहा है की ये पापा को ठीक कर देगा तो पापा जरूर ठीक हो जायेंगे.

शानवी के बात सुन कर पुस्पा का गुसा और बढ़ जाता है अभी तो शानवी की बातो का उसे कुछ जबाब देती उससे पहले hi शनाया बोल पड़ी.

शनाया- ठीक है प्रतिक तुम डैड के इलाज कर सकते हो लेकिन मेरी एक बात यद् रखना अगर डैड को कुछ भी हुआ तो आज हमारे रिश्ते का आखरी दिन होगा.

शनाया और शानवी के बात सुन कर पुस्पा को बहुत गुसा आता है लेकिन वो अपने घुसे को दबा लेती है इधर जब मुझे शनाया के परमिशन मिल गया तो मई और डॉक्टर खुराना दोनों वह से ऑपरेशन रूम में तरफ जाने लगे और हमारे पीछे पीछे वो तीनो भी आ रही थी अभी हम सब केबिन के बहार hi निकले थे की तभी वह पर होम मिनिस्टर देशमुख प्रभाकर आ गए और जैसे hi उनकी नजर मुझ पर पड़ी वो जल्दी से मेरे पास आये और मुझसे बोले.

होम मिनिस्टर- अरे चमत्कारी डॉक्टर प्रतिक आप यहाँ पर है आज मेरी किस्मत बहुत अच्छी है जो मेरी मुलाकात आपसे यहाँ पर हो गयी.

इधर मई भी जब होम मिनिस्टर को देखा तो उनको नमस्ते करते हुए बोलै.

मई- अरे होम मिनिस्टर जी आप यहाँ कैसे आपकी तबियत ठीक है न.

मेरी बात को सुन कर होम मिनिस्टर मुस्कुराते हुए बोले.

होम मिनिस्टर- सब आपकी कृपा है अगर आप नहीं होते तो शायद मई अभी भी इसी हॉस्पिटल के किसी रूम में पड़ा होता और है आज मई यहाँ पर अपनी रूटीन चेक उप करवाने आया हु लेकिन आप यहाँ कैसे आप आज भी किसी पेशेंट को देखने आये है क्या.

होम मिनिस्टर के बात सुन कर मई कुछ देर सोचने के बाद उनसे बोलै.

मई- अरे यहाँ यहाँ किसी पेशेंट को देखने नहीं आया बल्कि मई तो यहाँ पर अपने ससुर को देखने के लिए आया दरअसल बात ऐसी है की आज मेरे ससुर का एक्सीडेंट हो गया है और वो इसी हॉस्पिटल में एडमिट है बस मई उन्ही को देखने आया हु इसलिए मई अभी थोड़ी जल्दीबाजी में आप मुझे इजाजत दीजिये मई अपने ससुर के ट्रीटमेंट कर के आपसे मिलता हु.

होम मिनिस्टर- सॉरी मेरे वजह से आपको देरी हो गयी ठीक आप पहले उनको देख लीजिये इसके बाद हम बैठ कर बाटे करेंगे.

मई- ठीक है

इतना बोल कर मई और डॉ. खुराना वह से निकल गए इधर होम मिनिस्टर को मुझे इतना सामान देते हुए देख कर पुस्पा शनाया और शानवी तीनो हैरान हो गए तभी पुस्पा अपने हैरानी से बहार निकलते हुए शनाया से बोली.

पुस्पा- ये तो होम मिनिस्टर देशमुख प्रभाकर है न लेकिन ये प्रतिक को कैसे जानते है और मन की ये उसे जानते है लेकिन ये उसे इतना सामान क्यों दे रहे थे.

पुस्पा के बात सुन कर शनाया थोड़ी देर सोचने के बाद उनसे बोली.

शनाया- मुझे भी नहीं पता माँ के प्रतिक होम मिनिस्टर को कैसे जनता है.

शानवी- एक काम कीजिये हम उनसे से hi पूछ कर देख लेते है.

पुस्पा- ठीक है चलो.

इसके बाद तीनो होम मिनिस्टर के पास जाने लगते है तो होम मिनिस्टर के बॉडीगॉर्ड उनको रोक लेते है और बोलते है.

बॉडीगार्ड- आप लोग इधर कहा चली आ रही है आप यहाँ नहीं आ सकती प्लीज आप लोग जाइये यहाँ से.

बॉडीगार्ड के बात सुन कर तीनो हैरान हो जाती है फिर पुस्पा कुछ सोचते हुए उनसे बोलती है.

पुस्पा- हम लोगो को होम मिनिस्टर से मिलना है आप उनसे बोलिये की प्रतिक के सासु माँ उनसे मिलने आयी है.

इधर जैसे hi होम मिनिस्टर ने सुना की मेरी सासु माँ आयी है तो तुरंत अपने बॉडीगार्ड को उन लोगो को आने देने के लिए बोलता है बॉडीगार्ड होम मिनिस्टर के बात सुन कर उन तीनो के सामने से हैट जाते है बॉडीगार्ड को अपने सामने से हटने के बाद तीनो सीधा होम मिनिस्टर के पास जाते है जैसे होम मिनिस्टर देशमुख प्रभाकर ने उनको अपने सामने देखा तो वो बोलै.

हम- तो आप है प्रतिक के सासु माँ.

पुस्पा- जी मई hi हु प्रतिक के सासु माँ और ये है शनाया मल्होत्रा प्रतिक की वाइफ और ये है शानवी मल्होत्रा मेरी सबसे छोटी बेटी.

पुस्पा के बात सुन कर हम मुस्कुराते हुए बोले.

हम- तो आप सब मल्होत्रा खंडन से है मुझे आप सब से मिल कर खुसी हुयी वैसे मई ताजुब हु की मर. प्रतिक की सदी हो गयी है अगर उनकी सदी नहीं हुयी होती तो मई उनकी सदी अपनी बहन से करवा देता अब लगता है मेरे हाथ से ये सुनहरा मौका चला गया वैसे आप सब बहुत खुश नसीब है जो आपको मर. प्रतिक जैसा दामाद मिला.

होम मिनिस्टर के बात सुन कर पुस्पा शनाया और शानवी तीनो हैरान हो गयी तभी शनाया कुछ सोचते हुए उनसे बोली.

शनाया- वैसे आप मेरे पति यानि की प्रतिक को कैसे जानते है.

शनाया के बात सुन कर होम मिनिस्टर मुस्कुराते हुए बोले.

हम- अरे इनको मई तो क्या पूरा देश जनता है अरे भाई जो खुद एक चमत्कारी डॉक्टर है भला उन्हें कोण नहीं जानेगा और वैसे भी मर. प्रतिक ने तो खुद मेरा इलाज किया था जो इलाज आज तक कोई भी डॉक्टर नहीं कर पाया उसे वो कुछ मिनटों में कर दिया वो तो मेरे लिए किसी फरिस्ता से काम नहीं है तो भला मई उन्हें कैसे नहीं जाऊंगा.

होम मिनिस्टर के बात सुन कर इस बार तीनो और हैरान हो गए सबसे ज्यादा हैरान तो पुस्पा हुयी थी पुस्पा को बिस्वास hi नहीं हो रहा था की मई एक डॉक्टर हु इस लिए वो होम मिनिस्टर से बोली.

पुस्पा- लगता है आपको कोई गलत फहमी हुयी है प्रतिक कोई डॉक्टर नहीं है बल्कि वो तो मेरे घर पर घर जमाई बन कर रहता है आपकी इलाज जरूर किसी और ने किया होगा.

पुस्पा के बात सुन कर इस बार हैरान होने की बरी होम मिनिस्टर की थी वो हैरान होते हुए बोले.

हम- क्या आप ये क्या बोल रही है भला उस जैसे चमत्कारी डॉक्टर को किसी के घर पर घर जमाई बन कर रहने की क्या जरुरत है अगर वो चाहे तो महीने के क्रोरो रूपए कमा सकते है तो फिर वो आपके घर पर घर जमाई बन कर क्यों रहेंगे और है मुझे कोई गलत फहमी नहु हुयी है मेरा और मेरे साथ साथ इस हॉस्पिटल के बहुत सरे ऐसे मरीजों की इलाज वो किया है जिसका इलाज कोई भी डॉक्टर नहीं कर पाया था शायद आपने संडे को न्यूज़ में एक चमत्कारी डॉक्टर के बारे में सुना hi होगा वो चमत्कारी डॉक्टर मर. प्रतिक hi है.

होम मिनिस्टर के बात सुन कर सबके मुँह खुले के खुले hi रह गए वो लोग आगे और कुछ बोलते उससे पहले hi होम मिनिस्टर बोल पड़े.

हम- इस मंथ के लास्ट में मेरी बहन का बर्थडे है आप सब उसमे जरूर आइयेगा अभी मुझे थोड़ा काम है इस लिए मई अभी चलता हु.

इतना बोल कर होम मिनिस्टर वह से चले गए होम मिनिस्टर के जाने के बाद शानवी बोली.

शानवी- मुझे तो बिस्वास hi नहीं हो रहा है की न्यूज़ में जिस चमत्कारी डॉक्टर के बारे में बाटे हो रहा था वो कोई और नहीं बल्कि हमारा प्रतिक है.

शनाया- है शानवी बिस्वास तो मुझे भी नहीं हो रहा है वैसे अब मुझे गिल्ट महसूस हो रहा है की वो डैड के इलाज करने के लिए बोल रहा था और हम सब उसके ऊपर शक कर रहे थे.

शनाया के बात सुन कर पुस्पा बोली.

पुस्पा- इसमें हमारी कोई गलती नहीं है साडी गलती उसकी hi है उसे हमें पहले hi बताना चाहिए था न की वो एक डॉक्टर भी है और तुम शनाया तुम तो उसके साथ हमेशा रहती हो तुम्हे तो इसके बारे में वो बताया hi होगा फिर तुम हमसे क्यों नहीं बताई की प्रतिक hi वो चमत्कारी डॉक्टर है.

पुस्पा के बात सुन कर शनाया कुछ देर के लिए संत हो गयी फिर वो कुछ सोचते हुए बोली.

शनाया- है उसने एक बार बताया तो था लेकिन मई उनके बातो को मजाक समझ कर इग्नोर कर दिया था वैसे मई जब से प्रतिक के साथ रह रही हु मुझे उसके बारे में बहुत कुछ जानने के लिए मिला है और चमत्कारी डॉक्टर के अलावा भी बहुत खुबिया है.

शनाया के बात सुन कर पुस्पा और धन्वी दोनों हैरान रह गयी फिर धन्वी अपने हैरानी को काबू करते हुए बोली.

शानवी- है मई भी उसकी एक खूबी के बारे में जानती हु.

शानवी के बात सुन कर इस बार चौकने की बरी शनाया की थी वो चौकते हुए शानवी से बोली.

शनाया- मई जहा तक जानती हु की तुम प्रतिक से कुछ दिन पहले hi मिली हो तो तुम्हे उसके बारे में कैसे पता चल गया.

पुस्पा- कही तुम दोनों पहले से hi तो एक दूसरे को नहीं जानती थी.

शानवी- है माँ मई प्रतिक से घर पर मिलने से पहले से hi उसे जानती हु लेकिन है मुझे ये नहीं पता था की ये मेरे जीजू भी है.

शानवी के बात सुन कर पुस्पा और शनाया दोनों चौक गयी फिर शनाया शानवी को घूरते हुए बोली.

शनाया- तुम उसे कैसे जानती हो और वो तुम्हे मिला कहा था.

शनाया के बात सुन कर शानवी कुछ देर चुप रही फिर वो उसके सोल्लगे में जो घटना घाटी थी वो सब शनाया और पुस्पा को बताया उसने बताया की कैसे प्रतिक उसके सोल्लगे में आया और उसको उस काली शक्ति से बचाया जब पुस्पा और शनाया ने ये सुना तो दोनों हैरान हो गयी फिर पुस्पा झट से शानवी के पास गयी और उससे बोली.

पुस्पा- तुम्हारे साथ इतना कुछ hi गया और तुमने मुझे बताया भी नहीं भगवन का लाख लाख सुक्रिया की वो सही वक़्त पर प्रतिक को भेज कर तुम्हे बचा लिया.

शानवी और पुस्पा के बात सुन कर शनाया भी कुछ सोचते हुए पुस्पा से बोली.

शनाया- माँ मुझे भी आपसे कुछ बताना था.

पुस्पा- है बोलो कही तुम मुझसे कुछ छुपा के तो नहीं राखी हो न.

पुस्पा के बात सुन कर शनाया अपना सर निचे कर लेती है और बोलती है.

शनाया- माँ सॉरी मई भी आपसे एक बात छुपाई है लेकिन मुझे आप सब को परेशां नहीं करना था इस लिए मई ये बात आप सब को नहीं बताई.

शनाया के बात सुन कर पुस्पा उसे घूरती हुयी बोली.

पुस्पा- अब बता भी दो की तुमने हमसे क्या बात छुपाई थी.

पुस्पा के बात सुन कर शनाया कुछ सोचते हुए वो साडी बाटे बता दी वो उसे रत उसके साथ बिता था जब उसे रॉकी ने किडनैप किया था बस उसने ये बात उन दोनों से छुपा ली की मैंने उन सब को जान से मर दिया था शनाया के बात सुन कर पुस्पा के आँखों में आंसू आ गए और वो भागते हुए शनाया के पास गयी और उसे अपने गले से लगा लिया फिर वो थोड़ी रुआँसी आवाज में बोली.

पुस्पा- मेरी दोनों बेटी के साथ इतना कुछ हो गया और मुझे ये पता भी नहीं था और मैंने अपने उस भगवन जैसे दामाद को हमेशा कोश्ते रही गली देते रही यहाँ तक की उसको बहुत बार जलील भी किया उसने मेरे दोनी बेटी के जान बचाया.

पुस्पा के बात सुन कर शनाया उससे बोली.

शनाया- यही नहीं माँ आज अमृता और विक्की ने मुझे और मेरे कंपनी को बदनाम करने के लिए एक जल बिछाया था अगर प्रतिक उस समय मेरे साथ नहीं होता तो अभी मई जेल में होती और मेरी कंपनी को टाला लग गया होता.

पुस्पा- क्या बोल रही हो तुम वो दोनों ऐसा क्या किया जो तुम जेल में रहती और तुम्हारी कंपनी पर टाला लग गया होता.

पुस्पा के बात सुन कर शनाया ने आज जो भी कंपनी में हुआ वो सब पुस्पा को बता देती है जिसे सुन कर पुस्पा के आँखे घुसे से लाल हो जाता है और वो घुसे से बोलती है.

पुस्पा- उन दोनों की इतनी हिमत की वो तुम्हारे साथ ऐसा कुछ किया मई उन दोनों को छोडूंगी नहीं अजय के ठीक होने के बाद मई पिता जी के पास जाउंगी और उनसे ये साडी बाटे बताउंगी.

पुस्पा के बात सुन कर शनाया मुस्कुराते हुए बोली.

शनाया- तुम उन दोनों की चिंता मत करो माँ उन दोनों को उनकी किये की सजा मिल गयी है प्रतिक ने उन दोनों को जेल भेजवा दिया है और उसने हमारे कंपनी के लिए एक ऐसा क्रीम बनाया है जिससे हमारी कंपनी अब आसमान की बुलंदिया छुएगी.

शनाया के बात सुन कर पुस्पा बहुत खुस होती है फिर वो कुछ सोचते हुए बोलती है.

पुस्पा- शनाया मैंने प्रतिक को बहुत गलत समझा मेरा दामाद सच में एक हिरा है हिरा मई उससे माफ़ी मांगना चाहती हु.

शनाया- माँ उसको डैड के इलाज करके बहार निकलने दीजिये इसके बाद आपको उससे जितना माफ़ी मांगना है मांग लीजियेगा और है मैंने भी सोचा है की प्रतिक को उस क्रीम के फार्मूला के बदले अपने कंपनी में 20% शेयर दे दू आप क्या कहती है.

पुस्पा- ये तो बहुत अच्छी बात है लेकिन तुम 20% शेयर उसे अभी मत देना ये शेयर उसे एक साल के बाद देना क्युकी मई देखना चाहती हु की मेरे दामाद के बातो में कितना डैम है वो 1 साल में 10 करोड़ रूपए खुद के डैम पर कमाता है या नहीं वैसे अगर वो नहीं भी कमा पाया तो कोई बात नहीं मई उसे अपना दामाद मन लिया है तो वो अब हमेसा मेरा दामाद hi रहेगा.

पुस्पा के बात सुन कर शनाया मुस्कुराने लगती है फिर वो अपने माँ से बोलती है.

शनाया- ठीक है माँ आपको जैसा ठीक लगे वैसे hi होगा.

शनाया के बात सुन कर पुस्पा मुस्कुराते हुए है में गर्दन हिला देती है और मन hi मन कुछ सोचने लगती है.

पुस्पा- (अपने मन में) उस बाबा ने जो बोलै था क्या वो सच था या मेरी बेतिया बोल रही है वो सच है मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है अगर बाबा के बात सच है तो प्रतिक मेरी बेटियों को क्यों बचा रहा है नहीं नहीं प्रतिक हमें कोई नुकशान नहीं पहुंचना चाहता है अगर वो हमें नुकशान पहुंचना चाहता तो वो मेरी दोनों बेटियों को नहीं बचता और अब वो मेरे पति को बचन गया है जरूर उस बाबा में hi कुछ गड़बड़ है या फिर हो सकता है की उसे प्रतिक से कोई प्रॉब्लम होगी इसी लिए वो प्रतिक के बारे में ऐसा बोल रहा था ताकि मई उसे अपने घर से बहार निकल दू जरूर वो कोई साजिश रच रहा होगा कही मेरे पति के एक्सीडेंट में उसी का हाथ तो नहीं है है अगर उस बाबा में hi प्रॉब्लम है तो ऐसा हो सकता है मुझे इसके बारे में प्रतिक से बात करनी चाहिए नहीं तो कही कुछ अनर्थ न हो जाये.

इधर मई शनाया शानवी और पुस्पा के पास से डॉ. खुराना के साथ ऑपरेशन रूम में आ गया था वह आने के बाद मैंने देखा की मेरे ससुर वह बीएड पर लेते हुए है और उनकी आँखे बंद है साथ में उनको ऑक्सीजन भी लगा हुआ है उनके पास कुछ डॉक्टर और नर्स भी मौजूद थे जब मई ध्यान से उनको देखा तो उनके सर पर भी कला धुंए मंडरा रहा था ये देख कर मई समझ गया की अजय अंकल के एक्सीडेंट में जरूर कोई काली शक्ति का हाथ है.

जैसे hi मई उस काळा धुंए को देखा तो मई अपने स्टोरेज रिंग से एक रेड कलर का धागा निकला और कुछ मंत्र पढ़ते हुए जाकर अजय अंकल के हाथ में बांध दिया जैसे मैंने वो ढंग उनके हाथो में बंधा वो धुंए धीरे धीरे गायब हो गया.

उस धुएं को गायब होने के बाद मई अपने दिव्या दृस्टि से उनके शरीर का एक्सामिने करने लगा जैसे मई उनके शरीर का एक्सामिने किया तो मई चौक गया क्यों उनके शरीर के बहुत साडी हड़िया टूट गयी थी और उनके सर में एक हदी टूट कर ब्रेन के पास चली गयी थी अगर उस हदी को निकला नहीं गया तो उनका बचना बहुत मुश्किल था.
 
अपडेट 35

थे एन्ड ऑफ़ गोरखनाथ


मैंने जैसे hi अपने दिव्या दृस्टि को एक्टिवटे किया तो देखा की शनाया के डैड के शरीर में बहुत साडी अंदरूनी छोटे आयी हुयी है और उनके कुछ हड़िया भी टूट गयी है यहाँ तक की उनके सर में एक हदी टूट कर उनके ब्रेन के पास चला गया है अगर उस हदी को बहार नहीं निकला गया तो उनका बचना बहुत मुश्किल है इस लिए मई देरी न करते हुए सीधा डॉ. खुराना से बोलै.

मई- डॉ. खुराना मई अपने एक्यूपंक्चर बिधि से सर के अंदर के हदय को वही पर रोके रखता हु और आप सब मिल कर उनका ऑपरेशन कीजिये और उनके सर से वो हदी को निकल लीजिये.

मेरे बात को सुन कर डॉ. खुराना के चेहरे पर थोड़ा टेंशन दिखाई देने लगा वो टेंशन से मुझसे बोले.

डॉ. खुराना- मई ऑपरेशन कर वो हदी निकल तो दूंगा लेकिन इसमें अगर थोड़ा भी गड़बड़ हुआ तो इनकी जान भी जा सकती है.

डॉ. खुराना के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- आप चिंता मत कीजिये मई हु न यहाँ पर तो कोई भी गड़बड़ नहीं होगी बस आप अपना काम ध्यान से कीजियेगा मई आपको जैसे जैसे इंस्ट्रक्शन दूंगा बस आप वैसे hi कीजियेगा.

मेरी बात को सुन कर डॉ. खुराना थोड़ी देर सोच में पद गए फिर वो मुझसे बोले.

डॉ. खुराना- ठीक है मई तैयार हु आप बताइये की मुझे क्या करना होगा.

डॉ. खुराना के बात सुन कर मई उनसे बोलै.

मई- बस आप थोड़ा सा वेट कीजिये.

इतना बोलने के बाद मई अपने स्टोरेज रिंग से सिल्वर नीडल का बॉक्स निकला और उसमे से मैंने सरे नीडल निकल कर हवा में उछाल दिया और अपने शक्तियों से सरे नीडल को काबू करते हुए एक एक नीडल को शनाया के डैड के सर में डालने लगा.

जब मैंने सरे नीडल को उनके सर में दाल दिया तब मई अपने स्प्रिचैल एनर्जी को उन सरे नीडल के माध्यम से शनाया के डैड के सर में भेजने लगा और उस हदी और ब्रेन के बिच में स्प्रिचैल एनर्जी का एक कवच बना दिया जिसके कारन अब उस हदी पर कितना भी दबाव पड़ता तो वो आगे नहीं बढ़ सकता था इसके बाद मई डॉ. खुराना को इंस्ट्रक्शन देते हुए बोलै.

मई- आप यहाँ पर एक छोटा सा कट लगाइये और फिर क्रॉस सीज़र्स से उस हदी को पकड़ कर आराम आराम से बहार निकालिये.

मेरे बात को सुन कर डॉ. खुराना ने अपना सर है में हिला दिया और फिर मई जैसे जैसे उनको बताते गया वो वैसे वैसे hi करते गए करीब 15 मिनट के ऑपरेशन के बाद आखिर में बिना कोई नुकशान के डॉ. खुराना ने वो हदी बहार निकल hi लिया हदी को बहार निकलने के बाद शनाया के डैड के सर को अच्छे से ड्रेसिंग किया गया सारा काम होने के बाद मई डॉ. खुराना से बोलै.

मई- डॉ. खुराना बाकि सरे डॉक्टर और नर्स को थोड़ी देर के लिए बहार जाने के लिए बोलिये अब यहाँ पर मेरे साथ सिर्फ आप hi रहेंगे.

मेरे बात को सुन कर डॉ. खुराना कंफ्यूज हो गए की मई सबको बहार जाने के लिए क्यों बोल रहा हु लेकिन वो मेरे बातो को ताल नहीं सकते थे इस लिए वो मेरे बात को मानते हुए सरे लोगो को बहार भेज दिए अब उस रूम में पेशेंट के साथ मई और डॉ. खुराना hi थे सरे लोगो के जाने के बाद मई डॉ. खुराना से बोलै.

मई- देखिये डॉ. खुराना अभी यहाँ पर जो कुछ भी होगा उसे आप सिर्फ अपने तक hi रखियेगा अन्यथा आपके साथ बहुत बुरा हो सकता है.

मेरे बात को सुन कर डॉ. खुराना दर गए और अपने गर्दन है में हिलने लगे मई उनके तरफ से है का इशारा देख कर शनाया के डैड के पास गया और अपने अपने हीलिंग पावर को निकलते हुए शनाया के डैड को हील करने लगा मई अपने हीलिंग पावर से उनको सिर्फ 50% hi हील किया ताकि किसी को कोई शक न हो 50% हीलिंग के बाद अब उनके ज्यादातर अंदरूनी जखम ठीक हो गया था लेकिन उनके ऊपरी छोटे अभी भी वैसे hi दिख रही थी अपना काम करने के बाद मई और डॉ. खुराना ऑपरेशन रूम से बहार निकल गए हमें बहार आते देख कर शनाया पुस्पा और शानवी भागते हुए मेरे पास आये और शनाया मुझसे बोली.

शनाया- प्रतिक अब डैड कैसे है वो ठीक तो है न.

मई- है अब डैड खतरे से बहार है उनको 1 घंटे में होश आ जायेगा.

मेरी बात को सुन कर सब खुस हो जाते है तभी पुस्पा मेरे पास आ कर मुझसे बोलती है.

पुस्पा- मुझे माफ़ कर देना बीटा मैंने तुमको न जाने क्या क्या बोल दिया और तो और मई हमेशा तुम्हारे साथ गलत बेवहार किया तुमको जलील किया फिर भी तुम हमारे लिए इतना सब कर रहे हो आज तुम मेरा दामाद नहु बल्कि मेरा बीटा हो तुम अपनी इस माँ को माफ़ कर देना जो अपने बेटे की काबिलियत न देख पायी और उसे हमेशा जलील करती रही.

पुस्पा के बात सुन कर मई हैरान हो गया और मई मन में hi सोचने लगा.

मई- अरे आज ये सूरज किधर से ऊगा है ये पुस्पा जिसको मई एक कामचोर गरीब और नाकारा लगता था आज ये मुझे अपना बीटा बोल रही है और मुझसे माफ़ी मांग रही है कही मई कोई सपना तो नहीं देख रहा.

मई ये सोचते हुए शनाया और शानवी को देखा तो वो दोनों मंद hi मंद मुस्कुरा रही थी तब मई इशारे से शनाया से पूछा.

मई- (इशारो में) ये सब क्या हो रहा है क्या हो गया है इनको जो ये ऐसे बाटे कर रही है.

मेरे इशारे को समझ कर शनाया भी मुझसे इशारे में hi बोली.

शनाया- (इशारो में) तुम उनसे खुद hi पूछ लो मई तो नहीं बताने वाली.

इतना बोल कर वो मुस्कुराने लगी इधर पुस्पा ने जब देख की मई उसके बातो का कोई जबाब नहीं दे रहा हु तो वो फिर से बोली.

पुस्पा- मई जानती हु प्रतिक की मेरी गलतिया माफ़ी के लायक नहीं है लेकिन फिर भी हो सके तो मुझे माफ़ कर देना.

इतना बोल कर वो माफ़ी मांगने के लिए मेरे सामने झुकने लगी तो मई उन्हें पकड़ लिया और बोलै.

मई- आंटी आप ये क्या कर रही है प्लीज आप ऐसे मेरे सामने झुकिए मत और वैसे भी मैंने कभी भी आपके बातो का बुरा नहीं मन क्युकी आप मुझसे जो भी बोलती थी वो मेरे भलाई के लिए hi बोलती थी और वैसे आपको मुझसे प्रॉब्लम नहीं था आपको तो ये टेंशन था की आपकी बेटी का एक गरीब आदमी के साथ सदी hi गया तो वो आदमी आपके बेटी को खुश रख पायेगा या नहीं अपने जो भी किया वो बेटी के प्यार में किया इस लिए मई आपके बातो का कभी बुरा मन hi नहीं.

मेरे बात को सुन कर पुस्पा के आँखों में आंसू आ गए और वो मुझसे बोली.

पुस्पा- मुझे आज रीलीज़ हुआ की मई तुमसे नफरत करके के क्या खो रही थी प्रतिक अगर तुम मुझसे नाराज नहीं हो तो आज तुम मुझे आंटी नहीं बल्कि माँ बोलोगे ठीक है.

मई- ठीक है आंटी ुफ्फस सॉरी माँ.

मेरी और पुस्पा के बाटे सुन कर शानवी बोल पड़ी.

शानवी- बहुत हो गयी माँ और बीटा का मेलोड्रामा मुझसे अब डैड से मिलना है (फिर डॉ. खुराना से) डॉक्टर साहब क्या हम डैड से मिल सकते है.

शानवी के बात सुन कर हम सब के चेहरे पर मुस्कान आ गयी फिर डॉ. खुराना शानवी के बातो का जबाब देते हुए बोले.

डॉ. खुराना- सॉरी आप सब उनसे अभी नहीं मिल सकते है क्युकी वो अभी बेहोश है कुछ देर बात हम उन्हें िक में शिफ्ट कर देंगे उसके 1 घंटे बाद आप उनसे मिल सकते है तब तक उनको होश भी आ जायेगा.

शानवी- (उदाश लहजे में) ठीक है.

इसके बाद डॉ. खुराना वह से चले जाते उनके जाने के बाद पुस्पा मुझसे बोलती है.

पुस्पा- प्रतिक मुझे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी है वो भी अकेले में.

पुस्पा के बात सुन कर हम तीनो हैरान हो गए और सब में मन में एक hi सवाल था की पुस्पा को प्रतिक से ऐसी क्या बात करनी है वो भी अकेले में फिर मई कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- ठीक है चलिए.

इतना बोल कर मई वह से जाने लगा तो पुस्पा भी अपनी दोनों बेटियों से वह रुकने के लिए बोल कर मेरे साथ जाने लगी कुछ दूर जाने के बाद हम सिटी हॉस्पिटल से बहार आ गए और फिर हॉस्पिटल के पास hi एक रेस्टोरेंट में चले गए वह जाने के बाद मई एक प्राइवेट रूम बुक किया और उसके अंदर चला गया वह जाने के बाद मई पुस्पा से बोलै.

मई- है माँ बताइये आपको मुझसे क्या बाटे करनी थी.

मेरी बाटे सुन कर पुस्पा थोड़ी देर संत रही फिर वो कुछ सोचते हुए बोली.

पुस्पा- मई तुमसे कैसे बोलू मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है (फिर थोड़ी हिमत जूता कर बोली) देखो प्रतिक तुम मेरी बातो का बुरा मत मन्ना लेकिन मुझे तुमसे ये बाटे करना बहुत जरुरी है क्युकी ये मेरे फॅमिली के जिंदगी का सवाल है.

पुस्पा के बात सुन कर हैरान हो गया और बड़बड़ाते हुए मई पुस्पा से पूछा.

मई- ऐसी क्या बात है माँ जिससे हमारे फॅमिली को कुछ नुकसान होगा आप बेफिक्र रहिये आप जितना अपनी फॅमिली से प्यार करती है उतना मई भी करता हु मई आप लोगो के लिए अपनी जान भी देव पर लगा सकता हु इस लिए आप बेफिक्र वो कर साडी बाटे बताइये.

मेरी बात को सुन कर पुस्पा के आँखों में आंसू आ जाती है फिर वो अपने आंसू को पोछते हुए बोलती है.

पुस्पा- देखो बीटा मई तुमसे जो भी सवाल पूछूँगी तुम उसका सही सही जबाब देना.

मई पुस्पा के बातो को सुन कर कुछ देर तक सोचता रहा फिर उनसे बोलै.

मई- आप पूछिए आपको क्या पूछना है मई आपको साडी बाटे सच सच बताऊंगा.

मेरी बात को सुन कर पुस्पा थोड़ी देर संत रही फिर वो मुझसे पूछी बोली.

पुस्पा- मई जानती हु की तुम मेरे परिवार को कोई भी नुकशान नहीं पंहुचा सकते हो लेकिन मुझे फिर भी ये जानना जरुरी है इस लिए तुम मुझे बताओ की क्या तुमने मेरे घर पर कोई तांत्रिक क्रिया किये है क्या जिससे की मेरे परिवार को कोई नुकशान पहुंचे.

पुस्पा अपने सवाल को पूछ कर मेरे चेहरे को देखने लगी जैसे की वो मेरे चेहरे को पढ़ कर hi मेरी सचाई जानना चाहती हो तो वही मई पुस्पा के बातो को सुन कर हैरान रह गया और उसी हैरानी में बोलै.

मई- आप ये क्या बोल रही हो माँ मई आपके परिवार को नुकशान पहुंचने के बारे में सोच भी नहीं सकता और रही बात तांत्रिक क्रिया की तो मई आपके घर पर तांत्रिक क्रिया नहीं किया हु बल्कि मई बुरी शक्तियों से बचने के लिए आपके घर पर एक सुरक्षा कवच जरूर लगाया हु जिससे जबतक कोई घर वाला खुद बुरी शक्ति को घर में न लाये तब तक कितना भी ताकतवर बुरी शक्ति हो वो उस सुरक्षा कवच के चलते घर में प्रवेश नहीं कर सकता.

मेरी बात को सुन कर वो हैरान हो गयी और वो मुझसे बोली.

पुस्पा- क्या तुम सच में तांत्रिक क्रिया करना जानते हो.

मई- माँ मई कोई तांत्रिक क्रिया नहीं जनता वो क्या न की मई बचपन से hi हिमालय में रहा हु और वह पर मेरे को गुरुदेव थे वो बहुत तरह के विद्या जानते थे बस मई उनसे hi कुछ विद्या सिख लिया है.

मेरी बात को सुन कर पुस्पा हैरान हो गयी फिर उन्हें रीलीज़ हुआ की उनसे कितनी बड़ी गलती हो गयी है इस लिए वो मन hi मन सोचने लागु.

पुस्पा- (अपने मन में) मई प्रतिक से इतना नफरत करने लगी की मई खुद hi अपने घर में मुसीबत लेकर आ गयी मुझे लग रहा है की वो बाबा के भेष में जो था वो जनता था की मेरे घर पर सुरक्षा कवच लगा हुआ है जिसके चलते उसकी बुरी सकतिया घर में प्रवेश नहीं कर सकती इस लिए वो मुझे अपने झांसे में ले कर बुरी शक्तियों को घर में प्रवेश करवा दिया जरूर उसकी हमसे या फिर प्रतिक से कोई दुश्मनी होगी जिसके चलते वो ऐसा कर रहा है मुझे उसके बारे में प्रतिक से बात करनी चाहिए.

पुस्पा- माफ़ कर बीटा की मैंने तुम पर शक किया अच्छा प्रतिक क्या तुम किसी बाबा या तांत्रिक को जानते हो क्या जो तुम्हे कोई नुकशान पहुंचना चाहता हो.

पुस्पा के बात सुन कर मई चौक गया फिर कुछ देर तक सोचने के बाद बोलै.

मई- है माँ एक तांत्रिक ऐसा है जो मुझे अपना दुश्मन समझता है क्युकी मई उसके प्लान को कामयाब होने से पहले hi उसका प्लान ख़राब कर दिया था.

मेरी बात को सुन कर पुस्पा कुछ देर तक सोचने के बाद बोली.

पुस्पा- तुमने उसका ऐसा कोण सा प्लान करब कर दिया जिससे वो तुमको अपना दुश्मन समझने लगा.

मई- माँ वो कुछ दिन पहले शानवी के सोल्लगे में एक बुरी शक्ति ने हमला किया था और शानवी अपने गिरफ्त में ले लिया था बस मई उसी बुरी शक्ति को नस्ट कर के शानवी को बचाया था बाद में मुझे पता चला की उस सोल्लगे पर एक गोरखनाथ नाम के तांत्रिक ने अपने कुछ गलत मंसूबा पूरा करने के लिए उस बुरी शक्ति को भेजा था और मई उसके मनसूबे पर पानी फेर दिया था इस लिए वो मुझे अपना दुश्मन समझता है (फिर कुछ देर रुक कर) लेकिन आप मुझसे ये सब क्यों पूछ रही है.

मेरी बात को सुन कर पुस्पा मुझे साडी बाटे बताती है की कैसे उसे एक बाबा मिले और उसे मेरे बारे में गलत गलत बात बोल कर भड़काया फिर वो उसे एक मूर्ति को अपने घर लेन के लिए दिया जिससे मेरे घर में सुख सन्ति बना रहे मई उसकी बातो में आ कर वो मूर्ति अपने घर ले आयी और उसे मंदिर के अंदर रख दिया.

पुस्पा के बात सुन कर मई हैरान हो गया अब मुझे साडी बाटे समझ में आ गयी की क्यों मई जब भी घर के अंदर जाता था तो मुझे नेगेटिव एनर्जी महसूस होता था और क्यों माँ डैड और शानवी के सर के ऊपर वो कला धुय मंडरा रहा था जैसे hi मुझे पूरी बात समझ में आया तो मुझे पुस्पा के ऊपर बहुत तेज़ गुसा आने लगा इस लिए मई घुसे उनसे बोलै.

मई- आपने ये क्या कर दिया आप किसी पर भी ऐसे कैसे बिस्वास कर सकती है आप जानती है की आपकी एक गलती के कारन आप सब की जान भी जा सकती है.

मेरी बात को सुन कर पुस्पा अपना सर झुका के बोलती है.

पुस्पा- मुझे माफ़ कर दो बीटा मई उसके बातो में बहक गयी थी.

मई- ठीक है अब जो हो गया सो हो गया लेकिन अब आप ऐसी hi किसी के बातो में आकर कुछ भी पर मत करियेगा और है आप हॉस्पिटल जाइये और मई घर पर जाता हु अब मुझे फिर से घर को सुरक्षित करना होगा.

मेरी बात सुन कर पुस्पा कुछ सोचते हुए बोली.

पुस्पा- नहीं प्रतिक मई भी तुम्हारे सात घर चलूंगी क्युकी मुझे भी देखना है तुम ये सब कैसे करते हो.

पुस्पा के बात सुन कर मई कुछ देर सोचने के बाद बोलै.

मई- नहीं आप मेरे साथ नहीं जा सकती है क्युकी जब मई उन बुरी शक्तियों को घर से बहार निकलूंगा उस समय आप वह पर रहेंगी तो आपके ऊपर खतरा हो सकता है.

मेरी बात को सुन कर पुस्पा मायूसी से अपना सर हां में हिलती है उनको अपना गर्दन है में हिलाया हुआ देख कर मई अपने जेब में हाथ दाल कर दो धागा और निकलता हु और कुछ मंत्र पड़ते हुए एक धागे को पुस्पा के हाथो में बांध देता हु और दूसरा धागा देते हुए उनसे बोलता हु.

मई- माँ ये धागा मंत्रो से अभिमंत्रित किया हुआ है आप इसे कभी भी अपने हाथो से मत उतारियेगा और दूसरा धागा आप शानवी के हाथो में बांध दीजियेगा.

पुस्पा मेरी बात सुन कर कुछ सोचते हुए बोलती है.

पुस्पा- ठीक है लेकिन तुमने मेरे लिए और शानवी के लिए धागा दिया लेकिन शनाया और डैड के लिए नहीं दिया.

पुस्पा के बात सुन कर मई मुस्कुराता हुआ बोलै.

मई- मई पहले hi शनाया को एक लॉकेट अभिमंत्रित कर के दे दिया हु और डैड को भी पहले hi मई अभिमंत्रित धागा बांध दिया हु.

मेरी बात को सुन कर पुस्पा कुछ नहीं बोलती है और वह से हॉस्पिटल के लिए निकल जाती है उनको जाने के बाद मई मन hi मन बोलता हु.

मई- (अपने मन में) तुमने ये अच्छा नहीं किया गोरखनाथ हमारी दुश्मनी में तुम्हे मेरे परिवार को नहीं लाना चाहिए था अब तुम्हे मुझसे कोई नहीं बचा सकता है.

इतना बोल कर मई एक तस्य बुक करता हु और घर के लिए निकल जाता हु करीब आधे घंटे बाद मई घर पहुंच गया.

घर पहुंचने के बाद मई घर के अंदर चला आया जैसे hi मई घर के अंदर आया तो मुझे इस बार बहुत साडी बुरी शक्तिया घर के अंदर महसूस हुआ जिससे मुझे समझ में आ गया की अगर जल्द hi कुछ नहीं किया गया तो किसी के कुछ भी घटना गाठ सकती है.

घर के अंदर आने के बाद मई सीधा चलते हुए मंदिर के पास पहुंच गया जैसे hi मई मंदिर के अंदर पास पंहुचा तो मुझे मंदिर के अंदर से बहुत ज्यादा नेगेटिव एनर्जी आते हुए महसूस हुआ तो मई समझ गया की पुस्पा ने मूर्ति को यही पर रखा है.

मई- इस मंदिर से इतना ज्यादा नेगेटिव एनर्जी आने का मतलब है की इस बार गोरखनाथ ने बहुत hi ज्यादा खतरनाक प्लान बनाया है मुझे जो भी करना है थोड़ा संभल कर करना होगा.

इतना बोलने के बाद मई मंदिर के अंदर जाने लगा जैसे hi मई मंदिर के गेट से अंदर जाने की कोशिश करने लगा तभी मंदिर के अंदर से के काळा धुएं को गोला आया और मुझसे टकरा गया मई इस हमले के लिए तैयार नहीं था जिसके कारन मई लड़खड़ाते हुए चार कदम पीछे चला गया जिससे मई हैरान हो गया फिर मई अपने हैरानी को काबू करते हुए खुद को ठीक किया और फिर से आगे बढ़ने लगा तभी मुझे किसी के जोर जोर से हसने की आवाज आने लगी.

आवाज- है है है है है आखिर कर तू आ hi गया मई कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा था तू बहुत दिन जी लिया आज तेरा मरने का दिन है है है है अब तुम्हे मुझसे कोई भी बचा नहीं पायेगा है है है है.

उस आवाज को सुन कर मई हैरान हो गया और सोचने लगा की ये किसका आवाज है क्युकी ये आवाज कुछ जनि पहचानी लग रही थी मैंने कही तो ये आवाज सुना था तभी मुझे यद् आया की मई ये आवाज शानवी के सोल्लगे में सुना था और ये आवाज और किसी की नहीं बल्कि गोरखनाथ की थी लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा था की ये गोरखनाथ यहाँ कैसे हो सकता और अगर वो यहाँ पर है तो मुझे पहले पता क्यों नहीं चला मई अभी यही सब सोच रहा था की तभी मुझे समझ में आया की ये गोरखनाथ बल्कि उसके आत्मा का एक टुकड़ा है जो इस नेगेटिव एनर्जी के साथ उसने यहाँ पर भेजा है ये समझ में आते hi मई थोड़ा घुसे से उससे बोलै.

मई- गोरखनाथ तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी तुम्हे तुम्हारी दुश्मनी मुझसे थी हमारी दुश्मनी के बिच परिवार को नहीं लाना चाहिए था.

मेरी बात को सुन कर गोरखनाथ जोर जोर से हसने लगा और हस्ते हुए बोलै.

गोरखनाथ- है है है तुम क्या सोचे की तुम मुझसे दुश्मनी करोगे और मई तुम्हे और तुम्हारे परिवार को छोड़ दूंगा नहीं कभी नहीं मेरा एक सिद्धांत है की जो भी मुझसे दुश्मनी करता है मई उसको मरने से पहले तड़पता हु और किसी को तड़पना है तो सबसे पहले उसके परिवार को मारो जिससे वो तड़प तड़प कर खुद मर जाये है है है है.

मुझे उसकी बातो को सुन कर बहुत गुसा आया इस लिए मई उससे घुसे से बोलै.

मई- मेरे रहते हुए कोई भी मेरे परिवार को नुकशान नहीं पंहुचा सकता और अब मई तुम्हे ये बताऊंगा की प्रतिक से दुश्मनी का अंजाम क्या होता है.

इतना बोल कर मई कुछ मंत्र पढ़ते हुए मंदिर के अंदर जाने लगा मई जैसे hi मंदिर के अंदर जाने वाला था तो फिर से एक काळा धुएं का गोला आया लेकिन मई इस बार सावधान था इस लिए मई कुछ मंत्र पढ़ने लगा जिससे मेरे हाथो से एक सफ़ेद रौशनी निकल और उस धुएं के गोले से टकरा गया जिसे कारन वो धुय वही नस्ट हो गया.

जैसे hi वो गोला नस्ट हुआ तो अंदर से एक आग का गोला आया जैसे hi मई उस आग के गोले को देखा तो मई अपने शक्ति से उस आग के गोले को वही पर गायब कर दिया इसके बाद मई कुछ मंत्र पढ़ते हुए मंदिर के अंदर प्रवेश कर गया जैसे hi मई मंदिर के अंदर गया तो वह मुझे वो मूर्ति दिख गयी वो मूर्ति काळा रंग का था जो दिखने में hi सैतान की मूर्ति लग रहा था मई कुछ मंत्र पढ़ते हुए उस मूर्ति के ऊपर एक कवच चढ़ा दिया जिससे अब उसके अंदर से काली एनर्जी निकलना बंद हो गये.

इसके बाद मई उस मूर्ति को अपने दिव्या शक्तियों से पकड़ कर अपने हाथो में लिया और उसे लेकर घर से बहार आ गया मई घर से बहार निकल कर बहार आया हु था की अचानक घर के अंदर जितना भी कला धुय था वो निकल कर उस मूर्ति से टकरा गया जिसके कारन उस मूर्ति पर लगाया हुआ कवच टूट गया और वो मूर्ति मेरे हाथो से छूट कर निचे गिर गया.

जैसे hi वो मूर्ति निचे गिरा तो उस मूर्ति से काळा धुएं निकलने लगे और वो धुय एक जगह पर जाकर जमा होने लगा और वो धुय एक विशालकाय पिसाच के रूप लेने लगा थोड़ी देर में वो कला धुय पूरी तरह से एक पिसाच में बदल गया मैंने जैसे और जोर जोर से हसने लगा और हस्ते हुए बोलै.

पिसाच- है है है है तुम्हे क्या लगा की तुम अपनी मामूली शक्तियों से मुझे कैद कर के इस घर से बहार निकल डोज है है है है जब तक मई इस घर में रहने वाले सभी को जान से नहीं मर देता मुझे कोई भी इस घर से नहीं निकल सकता.

उस पिसाच के आवाज सुन कर मई समझ गया की गोरखनाथ अपने आत्मा के टुकड़े को इसी पिसाच में दाल कर यहाँ भेजा है अगर मई इस पिसाच को ख़तम कर दिया तो गोरखनाथ बहुत कमजोर हो जायेगा क्युकी इस पिसाच के साथ उसके आत्मा के एक टुकड़ा भी ख़तम हो जायेगा फिर मैंने वह पर अदृश्य कवच बना दिया ताकि कोई भी हम दोनों को देख न सके और हम दोनों के बिच में लड़ाई हो तो उससे किसी को कोई नुकशान न हो इतना करने के बाद मैंने उस पिसाच से बोलै.

मई- मेरे परिवार को तू तब न कुछ कर पायेगा जब मई तुम्हे जिन्दा छोडूंगा गोरखनाथ आज मई तुम्हारे इस आत्मा के टुकड़े को नस्ट कर दूंगा और जल्द hi तेरी बरी होगी तुमने मासूमो पर बहुत अत्याचार कर लिया अब तुम्हे उन सब की सजा मिलेगी.

Pisach-Achha तो मुझे सजा देगा तो पहले मेरे हमले से बच कर तो दिखाओ.

इतना बोल कर वो पिसाच अपने हाथ को ऊपर उठाया तो उसके हाथ में एक अजीब तरह के हथियार आ गया और फिर हो उस हथियार को मेरे तरफ कर दिया जैसे उसने अपने हथियार को मेरे तरफ किया तो उस हथियार से आग का एक बड़ा सा गोला निकला और मेरे तरफ आने लगा मई अपने तरफ आते उस आग के गोले को देख कर अपने हाथ हाथ से इशारा किया तो गोला वही पर नस्ट हो गया ये देख कर पिसाच चौक गया मई पिसाच को ऐसे चौकते हुए देख कर बोलै.

मई- तुम इसी तरह के छोटे मोठे हमले का उसे कर के मुझे और मेरे परिवार को मरना चाहते थे तुम मुझे इस तरह के हमले से कोई भी नुकशान नहीं पंहुचा सकते इस लिए अब ऐसी बचकानी हमला बंद करो और मुझपे अपनी असली और ताकतवर हमला करो.

मेरी बात को सुन कर पिसाच जोर जोर से हसने लगा और मुझसे बोलै.

पिसाच- है है है मन गया तुझे तेरी अंदर डैम तो है चलो ठीक है अब तुम मेरे अगले हमले का सामना कर के दिखाओ.

इतना बोल कर वो पिसाच अपना हाथ आसमान में उठाया तो उसके हाथो से काली रौशनी निकल कर आसमान में गयी और पूरी आसमान उसी काली रौशनी से धक् गया फिर उस काली रौशनी से बड़े बड़े बात 🦇 निकल कर मेरे तरफ आने लगे उन बाद की संख्या बहुत ज्यादा थी और वो अपने मुँह से अजीब सी आवाजे निकल रही थी जैसे hi उनकी आवाजे मेरे कण तक आयी तो मेरे कण में भयानक दर्द सुरु हो गया.

जब मुझसे वो दर्द बर्दास्त नहीं हुआ तो मई चीखते हुए अपने कानो को धक् लिया मेरी ऐसी हालत देख कर वो पिसाच जोर जोर से हसने लगा और मुझसे बोलै.

पिसाच- हाहाहाहा बस यही तुम्हारी ताकत थी तुम तो मेरा एक मामूली हमले को भी संभल नहीं पाए अब मरने के लिए तैयार हो जाओ.

इतना बोल कर वो अपने दोनों हाथो आपस में जोड़ कर कुछ मंत्र पढ़ने तभी उसके हाथो से आग निकलने लगी और ये आग धीरे धीरे बढ़ते हुए एक तीर का रूप ले लिया और अपने तीब्र गति से मेरे तरफ आने लगा.

इधर मई उन सरे बात 🦇 के आवाजों से परेशां था और पिसाच ने एक और हमला मुझ पर कर दिया था मुझे समझ में नहीं आ रहा था की मई कैसे इन बात 🦇 के आवाज से खुद को बहार निकलू और उस पिसाच के हमले से खुद को बचाओ तभी मुझे यद् आया की अगर इन सरे बट्स 🦇 के आवाज अगर मुझे सुनाई न दे तो मुझे इनसे को भी प्रॉब्लम नहीं होगी जैसे hi मुझे ये यद् आया वैसे मैंने अपने शक्तियों से अपने दोनों कानो को धक् लिया जैसे hi मई अपने शक्तियों से अपने कण को ढाका तो उन बात 🦇 का आवाज सुनाई देना बंद हो गया जिसके कारन मुझे थोड़ी रहत महसूस हुयी इसके बाद मई अपने स्टोरेज रिंग से पांच तत्त्व तलवार और एक चाकू निकल लिए इस तलवार में पांचो तत्त्व की शक्ति थी जिसे मैंने और गुरुदेव ने मिल कर बनाया था फिर मई उस चाकू को अपने स्प्रिचैल एनर्जी से कण्ट्रोल करते हुए उन सरे बट्स 🦇 को ख़तम करने लगा.

इसके बाद मई अपने तलवार से पिसाच के ऊपर एक खतरनाक हमला किया जिसके कारन मेरे तलवार से भी एक पांच तत्त्व की रौशनी निकल कर एक तीर का रूप ले लिया और तीब्र गति से पिसाच के हमले के तरफ बढ़ने लगा थोड़ी देर में मेरा और उस पिसाच का तीर आपस में टकरा गया जिससे वह पर एक धमाका हुआ और उस पिसाच के तीर वही गायब हो गया लेकिन मेरे तलवार के शक्तियों से निकला वो पांच तत्त्व तीर पिसाच के तीर को नस्ट कर के उस पिसाच की तरफ बढ़ गया ये देख कर वो पिसाच घबरा गया और वह से भागने की कोशिश करने लगा अभी वो वह से भाग पता उससे पहले hi मेरा तीर जाकर उसके छाती से टकरा गया जिसके कारन उस पिसाच के शरीर धुय बन कर गायब हो गया.

जैसे hi वो पिसाच ख़तम हुआ वैसे hi गोरखनाथ के आत्मा के टुकड़ा उसके अंदर से निकल कर भागने की कोशिश करने लगा तभी मेरी नजर उस पर चली गयी जब मैंने देखा की उस पिसाच के ख़तम होने के बाद भी गोरखनाथ के आत्मा सही सलामत है तो मेरे चेहरे पर एक खतरनाक मुस्कान आ गया और मई अपने हाथो से योगिक शक्तियों को निकल कर उस आत्मा को अपने कब्जे में कर लिया हलाकि वो आत्मा मेरे शक्तियों से छूटने की बहुत प्रयास की लेकिन वो मेरे हाथो से छूट नहीं पायी फिर मई उस आत्मा से गोरखनाथ का आभा लिया और उसे वही ख़तम कर दिया मई उस आत्मा के आभा से गोरखनाथ तक पहुंच सकता था.

फिर मई उस आत्मा से लिए हुए आभा को महसूस करते हुए वह से गायब हो गया इधर मई जैसे hi गोरखनाथ के आत्मा के टुकड़े को ख़तम किया तो उधर ध्यान में बैठ कर मेरे घर के सरे नज़ारे को देखते हुए गोरखनाथ को एक तेज़ झटका लगा और वो उड़ते हुए दिवार से जाकर टकरा गया और उसके मुँह से खून निकलने लगा फिर वो खुद को किसी तरह से संभल कर जोर से छीलते हुए बोलै.

गोरखनाथ- नहीं ऐसा नहीं हो सकता वो मेरे आत्मा के टुकड़े को इतनी आसानी से ख़तम नहीं कर सकता (फिर जोर से छीलते हुए) प्रतिक मई तुम्हे जिन्दा नहीं छोडूंगा तुम क्या सोचते हो की तुम मेरे एक आत्मा के टुकड़े को नस्ट कर के मुझसे जीत गए मई तुम्हे कभी भी जीतने नहीं दूंगा अभी मई भले hi मेरे आत्मा के एक टुकड़ा नस्ट होने के कारन कमजोर हो गया हु लेकिन मई फिर से ताकतवर हो कर लौटूंगा तब मई तुम्हे तुम्हारे परिवार के साथ मौत के घाट उतर दूंगा.

गोरखनाथ इतना बोल कर वह से जाने hi वाला था की तभी मई वह पर आ गया और उससे बोलै.

मई- इतनी भी क्या जल्दी है जाने की गोरखनाथ पहले तुम अपने दुश्मन से तो मिल लो.

मेरी आवाज को सुन कर गोरखनाथ हड़बड़ा गया और हैरानी के साथ डरते हुए मुझसे बोलै.

गोरखनाथ- तुम तुम तुम यहाँ कैसे आ सकते हो तुम्हे यहाँ का पता कैसे चला और अगर तुम्हे यहाँ का पता चल भी गया तो तुम इतनी जल्दी यहाँ पर कैसे पहुंच गए तुम तो अभी अपने घर पर थे.

गोरखनाथ के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- अब तुम ये सब जान कर क्या करोगे तुम तो अब मरने वाले हो.

मेरे बात को सुन कर गोरखनाथ गुस्से से बोलै.

गोरखनाथ- तुम और वो भी मुझे मरोगे लड़के सपने देखना छोड़ दे तुम्हे क्या लगता है की तुम मेरे आत्मा के एक टुकड़े को ख़तम कर दिए तो तुम मुझे मर पाओगे मई भले hi कमजोर हो गया हु लेकिन मेरे अंदर अभी भी इतनी ताकत है की मई तुम्हे मर सकता हु.

गोरखनाथ के बात सुन कर मई हस्ते हुए बोलै.

मई- अच्छा अगर ऐसी बात है तो ठीक है मई अभी तुम्हारे सामने hi खड़ा हु आओ और आ कर मुझे मर डालो.

मेरी बात को सुन कर गोरखनाथ घुसे से बोलै.

गोरखनाथ- अगर तुम्हारी यही इक्छा है तो ठीक है अब मरने के लिए तैयार हो जाओ.

इतना बोल कर गोरखनाथ कुछ मंत्र पढ़ा और उसके हाथो से काली रौशनी निकली और एक महाप्रेत में बदल गया मई उस महाप्रेत को देख कर हस्ते हुए बोलै.

गोरखनाथ- अच्छा तो सच में तुम्हारी आत्मा के एक टुकड़े को नस्ट होने के बाद भी तुम्हारे अंदर ताकत बची है अच्छा है अब तुमसे लड़ने में मजा आएगा.

इतना बोल कर मैंने अपना तलवार निकला और एक वॉर में उस महाप्रेत के दो टुकड़े कर दिए जैसे महाप्रेत का दो टुकड़ा हुआ उसमे आग लग गयी और वो जल कर हवा में गायब हो गया.

इधर अपने महाप्रेत को इतनी आसानी से नस्ट होते देख कर गोरखनाथ बौखला गया और फिर उसने एक और मंत्र बढ़ा और अपने थैले से एक मीठी रख निकल कर हवा में फेक दिया वो रख हवा में जाने के बाद एक विशालकाय अजगर में बदल गया जो अपने मुँह से खतरनाक आग निकल रहा था मई इतना विशालकाय और खतरनाक अजगर को देख कर एक बार के लिए चौक गया और गोरखनाथ से बोलै.

मई- मन्ना पड़ेगा तुम्हारे आत्मा के एक टुकड़ा नस्ट होने में बाद भी तुम्हारी ताकत बची हुयी है लेकिन तुम मुझे ऐसे छोटे मोठे हमले से मर नहीं सकते तुम्हे मुझे मरने के लिए और भी ताकतवर हमला करना होगा.

मेरी बात को सुन कर गोरखनाथ जोर जोर से हस्ते हुए बोलै.

गोरखनाथ- है है है पहले तुम मेरे इस अजगर से तो बच के दिखाओ.

इतना बोल कर गोरखनाथ उस अजगर को मेरे ऊपर हमला करने के लिए बोलै तो वो अजगर अपने मुँह से आग निकलते हुए मेरे ऊपर अपने आगे से हमला करना लगा जैसे hi मैंने देखा की वो अजगर मुझ पर आग से हमला कर रहा है तो मई अपने आगे पांच तत्त्व तलवार को कर दिया मेरे पांच तत्त्व तलवार आगे करते hi तलवार से एक आग का गोला निकला और और उस अजगर के आग से टकरा गया जिससे वह पर एक विस्फोट हुआ और वो जगह विस्फोट के कारन पूरा हिल गया ये तो गनीमत है की मई पहले hi वह पर एक कवच लगा दिया था नहीं तो आस पास के सरे लोग दर जाते.

खैर जैसे hi मैंने उस अजगर के हमले को नस्ट किया तो अजगर घुसे से अपने मुँह से आग उगलते हुए तेज रफ़्तार में मेरे पास आया और मुझे अपने पूछ में लपेट लिया और अपने ताकत से मुझे दबाने लगा उसका दबाव इतना ज्यादा था की अगर कोई आम इंसान होता तो उसकी हडियो का चूरमा बन जाता लेकिन यहाँ पर मई था मैंने देखा की अजगर मुझे अपने पूछ में लपेट कर अपने दबाव बढ़ा कर मुझे मरना चाहता है तो मई अपने हाथ में पकडे हुए तलवार को ऊपर उछाल दिया और उसे अपने स्प्रिचैल एनर्जी से कण्ट्रोल करने लगा इसके बाद मई अपने ईशर से उस तलवार को अजगर के गर्दन पर वॉर किया जिससे उस अजगर के सर काट कर दूर जा गिरा जैसे hi मैंने उस अजगर का सर को कटा तो वो अजगर धुय में बदल कर गायब हो गया.

इधर अपने इतने ताकतवर हमला को इतनी आसानी से नस्ट होते हुए देख कर गोरखनाथ को बहुत गुस्सा आया और वो घुसे से छीलते हुए बोलै.

गोरखनाथ- बस बहुत हो गया अब मई तुम्हे जिन्दा नहीं छोडूंगा तुम मेरे hi हटो से मरोगे अब मरने के लिए तैयार हो जाओ.

गोरखनाथ के बात सुन कर मई हस्ते हुए बोलै.

मई- मुझे मरना तुम्हारे बस की बात नहीं मुझे मरने के लिए तुम्हे दोबारा जनम लेना होगा.

मेरे बात को सुन कर गोरखनाथ घुसे से पागल हो गया और पास में जलते हुए हवन कुंड के पास चला गया हवन कुंड के पास जाने के उसने एक चाकू उठाया और अपने हाथ काट कर अपने खून को हवन कुंड में डालने लगा जैसे hi गोरखनाथ का खून उस हवन कुंड में गिरा वैसे hi हवन कुंड से एक रौशनी निकल कर गोरखनाथ में समां गया.

जैसे hi वो रौशनी गोरखनाथ में समाया तो गोरखनाथ का हिघ्त बढ़ने लगा और इसके साथ hi उसका शरीर भी चेंज होने लगा थोड़ी देर बाद hi गोरखनाथ का हिघ्त 12 फ़ीट का हो गया और उसका शरीर भी बदल कर आधा इंसान और आधा भेड़िया हो गया.

जैसे hi मई देखा की गोरखनाथ एक नर भेड़िया में बदल गया है तो मई हैरान हो गया और ध्यान से उसे देखने लगा इधर गोरखनाथ नर भेड़िया में बदलने के बाद जोर से हस्ते हुए बोलै.

गोरखनाथ- है है है है मन गया मई तुमको की तुम्हारे अंदर बहुत शक्ति है इसी लिए मुझे इस रूप में आना पड़ा अब तुम मुझसे बच नहीं सकते.

इतना बोल कर वो तेज़ी से भागते हुए मेरे पास आया और अपने पंजे से मुझ पर हमला कर दिया मई उसके इस हमले के लिए तैयार नहीं था इस लिए उसका पंजा सीधा आकर मुझे लगा और मई उड़ते हुए दिवार से जा टकराया अभी मई इस हमले से उबार पता तभी गोरखनाथ ने मुझ पर दोबारा हमला कर दिया और मेरा पेअर पकड़ कर ऊपर उठा लिया और दूसरे तरफ फेक दिया जिसके कारन मुझे बहुत छोटे आयी थी जैसे hi मुझे चोट लगी तो मेरे अंदर का हीलिंग पावर एक्टिवटे हो गया और मेरे सरे जखन खुद बा खुद भरने लगा.

इधर गोरखनाथ फिर से मेरे ऊपर हमला करने के लिए आने लगा लेकिन इस बार मई तैयार था वो जैसे hi मुझ पर हमला किया तो मई उस हमले को अपने पांच तत्त्व तलवार से रोक लिया और उसे पीछे की और ढाका दे दिया जिसके कारन वो थोड़ा पीछे चला गया.

मई उसके हमले को देख कर समझ गया तह की गोरखनाथ नर भेड़िया में बदलने के बाद बहुत ताकतवर हो गया है इसलिए मई अब उसे दोबारा हमला करने नहीं दे सकता है इसलिए अपने उसके हमला करने से पहले hi अपने तलवार से उस पर हमला कर दिया.

लेकिन ये क्या उसने तो बड़ी आसानी से मेरे हमले को रोक दिया मेरे इतने ताकतवर हमले के बाद भी उसे कुछ नहीं हुआ ये देख कर मई सोच में पद गया की अब मई कैसे इस नरभेड़िये को हरौ तभी मेरे दिमाग में एक आईडिया आया और मई अपने अग्नि शक्ति का प्रयोग किया और आसमान से एक आग का विशाल हाथ बना दिया फिर वो हाथ धीरे धीरे निचे आते हुए नरभेड़िये को पकड़ लिया और उसे अपने हाथ में hi दबाने लगा.

एक तो वो हाथ आग से बानी थी और वो आग उस नरभेड़िये को जला रही थी और दूसरा की उस नरभेड़िये को पकड़ कर वो हाथ अपने दबाव से उसे मसल रहा था ये देख कर वो नर भेड़िया घबरा गया और उस हाथ से छूटने का प्रयास करने लगा जब वो बहुत प्रयास करने के बाद भी नहीं निकला तो वो जोर जोर से छिलने लगा.

जब गोरक्षनाथ को लगा की अब वो उस हाथ से नहीं छूट पायेगा तो वो एक डैम से अपने असली रूप में आ गया जिससे उसका साइज छोटा हो गया जिसके कारन वो मेरे बनाये हुए आग के हाथ से छूट कर निचे गिर गया.

निचे गिरने के बाद गोरखनाथ बहुत खुस हुआ वो समझ गया की वो मुझसे मुकाबला नहीं कर पायेगा इस लिए वह से भागने लगा मई उसको भागता हुआ देख कर बोलै.

मई- अब तुम मुझसे नहीं भाग सकते गोरखनाथ अब तुम्हारा खेल ख़तम हुआ.

इतना बोल कर मई अपने पांच तत्त्व तलवार से एक स्लाइस अटैक किया वो अटैक सीधा जा कर गोरखनाथ से टकरा गया और उसको बिच से hi दो भाग में काट दिया मई उसको मरने के बाद अपने अग्नि शक्ति से उसके लाश को जला दिया और उसके आत्मा को पकड़ कर नस्ट कर दिया इसके बाद मई वह से गायब हो कर सीधा घर आ गया.

घर आने के बाद मई पुरे घर पर एक सुरक्षा कवच लगाया और एक तस्य पकड़ कर हॉस्पिटल निकल गया कुछ hi देर में मई हॉस्पिटल के पास पहुंच गया था इसके बाद मई तस्य से उतरा और हॉस्पिटल में जाने लगा तभी मेरे नंबर पर निधि ओबेराय का कॉल आया ये देख कर मई तुरंत कॉल को रइवे किया और बोलै.

मई- है निधि जी बोलिये आज कैसे यद् किया कुछ काम था क्या.

मेरी बात को सुन कर निधि चीड़ कर थोड़ा घुसे से बोली.

निधि- मुझे आपसे कुछ काम होगा तभी कॉल करुँगी क्या ऐसे hi आपसे बात करने के लिए कॉल नहीं कर सकती क्या.

निधि के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- अरे नहीं ऐसी कोई बात नहीं है आप मेरे पास कभी भी कॉल कर सकती है.

मेरे बात को सुन कर निधि खुस हो गयी फिर वो कुछ सोचते हुए बोली.

निधि- मई आपके पास दो करने से कॉल की थी.

मई- हम्म ठीक है बताइये कोण से दो काम है.

निधि- पहला कारन ये है की हमने जो लैंड ख़रीदा था उसमे कंपनी बन के रेडी हो गया है और हमने एम्प्लोये के लिए अद्वेर्तिसेमेन्ट भी दे दिया बस अब प्रोडक्ट बनाना बाकि है.

मई- हम बहुत अच्छा किया है आपने और रही बात प्रोडक्ट की तो वो भी नेक्स्ट वीक में रेडी कर दूंगा और आपकी दूसरी कारन.

मेरे बात को सुन कर निधि कुछ देर तक संत रही इसके बाद वो मुझसे बोली.

निधि- दरअसल शानवी के सोल्लगे के प्रिंसिपल का मेरे पास कॉल आया था वो पूछ रहे थे की वो और कब तक ऐसे hi सोल्लगे को बंद रखेंगे आप जाकर एक बार देख लेते तो.

निधि के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- ठीक आप उनको कॉल कर के बोल दीजिये की मई आज hi उनका काम कर दूंगा और आप एक काम कीजिये आप आधे घंटे बाद सिटी हॉस्पिटल आ जाइये हम साथ में वह पर चलेंगे.

मेरी बात को सुन कर निधि खुस हो गयी और वो मुझसे बोली.

निधि- ठीक है प्रतिक जी हम अभी यहाँ से निकल रहे है वह आने में मुझे आधा घंटा लग जायेगा.

मई- ठीक है आइये.

इतना बोल कर मई कॉल कट कर दिया और हॉस्पिटल के अंदर आ गया और सीधा शनाया और शानवी के पास चला गया और शनाया से पूछा.

मई- शनाया क्या डैड को होश आ गया.

मेरी बात को सुन कर शनाया खुश होते हुए बोली.

शनाया- है डैड को होश आ गया है और हम सब डैड से मिल लिए तुम भी जाकर डैड से मिल लो.

मई- हम्म ठीक है.

इतना बोल कर मई िक में चला गया वह पर जाकर देखा तो डैड अपने आँख को बंद कर के लेते हुए थे मई उनके पास जाकर उनके सामने रखे टेबल पर बैठ गया जैसे hi मई उनके पास रखे टेबल पर बैठा तो उनको एहसास हो गया की कोई उनके पास आया है ये एहसास होते hi डैड ने अपना आंख खोल कर मुझे देखने लगे मई उनको जगता हुआ देख कर उनके हाथ को पकड़ कर उनसे बोलै.

मई- अब कैसी तबियत है डैड.

मेरे बात को सुन कर शनाया के डैड हल्का मुस्कुराते हुए कमजोर आवाज में बोले.

अजय- है अब मई पहले से बेहतर हु थैंक्स मुझे बचने के लिए मुझे शानवी और शनाया ने बताया की तुम कैसे मेरा इलाज किया.

मई- ये क्या बात हुयी डैड भला कोई अपनों को भी थैंक्स बोलता है क्या डैड आपका इलाज करना मेरा फर्ज था.

मेरी बात को सुन कर शनाया के डैड थोड़ा गंभीर आवाज में बोले.

अजय- तुम नहीं जानते बीटा जिस समय मेरी एक्सीडेंट हुआ था न उस समय मुझे ऐसा लगा था की वो पल मेरा आखरी पल है मुझे लगा hi नहीं था की मई जिन्दा बचूंगा लेकिन भगवन का शुक्र है की तुम मुझे बचा लिए सच कहु तो मई बहुत भाग्यशाली हु जो मुझे तुम्हारे जैसा दामाद मिला.

इसी तरह से मई और डैड कुछ देर तक बाटे करते रहे इसके बाद मई उनको आराम करने के लिए बोल कर िक से बहार आ गया बहार आने के बाद मई शनाया से बोलै.

मई- शनाया तुम और शानवी घर चले जाओ यहाँ पर मई और माँ रुकते है.

शनाया- ठीक है.

इतना बोल कर शनाया और शानवी वह से घर के लिए निकल जाती है उनको जाने के बाद तुरंत पुस्पा मेरे पास आती है और मुझसे बोलती है.

पुस्पा- प्रतिक तुम जिस काम के लिए गए थे वो हुआ की नहीं.

मई- माँ मई सब सही कर दिया है अब आप सब को कोई भी प्रॉब्लम नहीं होगा और है मई घर पर एक कवच भी लगा दिया है जिससे कोई भी बुरी शक्ति हमारे घर में प्रवेश नहीं करेगा लेकिन अब आप दोबारा वो गलती मत करना वो गलती आपने किया था.

मेरी बात को सुन पुस्पा शर्मिंदा हो गयी और उसी शर्मिंदगी के साथ मुझसे बोली.

पुस्पा- सॉरी बीटा अब मई दोबारा से ऐसी गलती नहीं करुँगी और वैसे भी वो गलती कुछ गलत फहमी के चलते हो गयी थी.

मई- ठीक है माँ आगे से ध्यान रखियेगा ठीक है माँ आप यहाँ पर रुकिए मई थोड़ा मंत्री जी से मिल कर आता हु.

मेरे बात को सुन कर पुस्पा अपना गर्दन है में हिला दी इसके बाद मई वह से निकल कर मंत्री जी के पास चला गया जो इस वक़्त डॉ. खुराना के केबिन में बैठे हुए थे और मेरा इंतज़ार कर रहे थे मई जैसे hi डॉ. खुराना के केबिन में गया तो होम मिनिस्टर प्रभाकर देशमुख मुझे देख कर खुश होते हुए बोले.

हम- बहुत लगा दी आने में प्रतिक जी.

मई हम प्रभाकर देशमुख के बात सुन कर माफ़ी मांगते हुए बोलै.

मई- माफ़ कीजिये हम साहब मई थोड़ा अर्जेन्ट काम में फास गया था.

हम- कोई बात नहीं वैसे अब आपके ससुर साहब की तबियत कैसी है.

मई- अब वो पहले से बेहतर है वैसे हम साहब आपको मुझसे काम था क्या जो आप मुझसे मिलने के लिए बोल रहे थे.

मेरी बात को सुन कर हम प्रभाकर देशमुख कुछ देर के लिए संत हो गए फिर वो कुछ सोचते हुए बोले.

हम- है मुझे आपसे एक काम था दरअसल एक मेरे पहचान वाले है जी बहुत दिनों से बीमार है तो मई चाहता था की आप एक बार उन्हें देख लेते तो.

मई- है क्यों नहीं वैसे वो कोण है जिनके लिए आप मुझे मिलने यहाँ पर आये है.

मेरी बात को सुन कर हम प्रभाकर देशमुख कुछ सोच में पद गए फिर वो थोड़ी देर बाद मुझसे बोले.

हम- माफ़ कीजियेगा डॉ. प्रतिक लेकिन मई अभी उनके बारे में आपको कुछ नहीं बता सकता दरअसल वो इंडियन डिफेन्स के बहुत बड़े अफसर है और उनकी आइडेंटिटी बहुत खाश है इस लिए मई आपसे अभी कुछ नहीं बता सकता.

मई- कोई बात नहीं हम साहब मई समझ सकता हु ऐसे ब्यक्ति की आइडेंटिटी बहुत खाश होती है अगर ऐसे ब्यक्ति की आइडेंटिटी सामने आ जाये तो देश पर खतरा भी आ सकता है.

HM-Ha अपने सही बोलै इसी लिए मई अभी आपसे कुछ नहीं बता रहा तो क्या आप एक बार चल कर उनकी बीमारी को देख सकते है.

मई- है क्यों नहीं लेकिन जाना कब है.

हम- दो दिन बात चलते है.

मई- ठीक है.

अभी हम बात कर hi रहे थे की तभी मेरे मोबाइल पर निधि का कॉल आ गया जिसे देख कर मई हम प्रभाकर देशमुख से बोलै.

मई- तो ठीक है हम साहब अभी मई चलता हु आपको जब भी वह जाना हो आप मुझे कॉल कर लीजियेगा.

हम- ठीक है.

इसके बाद मई वह से निकल बहार निकल गया और निधि के कॉल रिसीव कर के उसको कुछ देर में निचे आने के लिए बोल कर मई पुस्पा के पास चला आया पुस्पा के पास आने के बाद मई उनसे बोलै.

मई- माँ मुझे किसी काम से अभी बहार जाना है तब तक आप डैड का ध्यान रख लेंगी.

पुस्पा- है क्यों नहीं तुम जा सकते हो मई यहाँ सब संभल लुंगी.

मई- ठीक है माँ वैसे मई यहाँ पर अपने कुछ आदमियों को बुला लेता हु अगर आपको किसी चीज के जरुरत होगी तो आप उनको बोलियेगा वो ले आएंगे.

पुस्पा- ठीक है वो लोग कब तक आ जायेंगे.

मई- अभी उनको अभी कॉल कर के यहाँ आने के लिए बोल देता हु.

इतना बोल कर मई बलदेव के पास कॉल कर के यहाँ आने के लिए बोल दिया मेरे बात को सुन कर बलदेव अपने 2 आदमियों के साथ यहाँ के लिए निकल गया इसके बाद मई माँ से इजाजत ले कर वह से ग्राउंड फ्लोर पर आ गया जहा मुझे निधि मिल गयी इसके बाद मई और निधि शानवी के सोल्लगे के लिए निकल गए अभी हम रस्ते में जा hi रहे थे की तभी मेरे मोबाइल पर एक अननोन नंबर से कॉल आने लगा मई जब देख की अननोन नंबर से कॉल आ रहा है तो पहले मई उस कॉल को इग्नोर कर दिया लेकिन दोबारा उसी नंबर से कॉल आने लगा मई उसी नंबर से दोबारा कॉल आते हुए देख कर कॉल रिसीव कर लिया तभी उधर से आवाज आयी.

कॉल- हैल्लो क्या मेरी बात डॉ. प्रतिक से hi रही है.

मई- जी मई प्रतिक hi बोल रहा हु वैसे आप कोण बोल रहे है.

कॉल- जी मई सिकंदरा सिंह राठौर बात कर रहा हु.

मई- जी बोलिये सर आज आपने कैसे कॉल किया.

सिकंदरा- वो अपने बोलै था न की 2 दिन बाद आप मेरे डैड के इलाज करने के लिए मेरे आइसलैंड पर चलेंगे.

मई- अरे है मई तो भूल hi गया था वैसे आप अभी कहा पर है.

सिकंदरा- मई यही मुंबई में हु तो क्या आप अभी मेरे साथ चल सकते है.

मई- अभी मई किसी और काम के लिए कही जा रहा हु इस लिए मई आपके साथ आज शाम में चलूँगा.

सिकंदरा- ठीक है जब आप फ्री हो जाइएगा तो मेरे पास अपना लोकेशन सेंड कर दीजियेगा मई आपको लेने के लिए गाड़ी भेज दूंगा.

मई- ठीक है.

इतना बोल कर मई कॉल कट कर दिया फिर करीब 1 घंटे बाद मई और निधि शानवी के सोल्लगे में पहुंच गए इसके बाद कॉलेज के पार्किंग में गाड़ी पार्क करने के बाद हम दोनों प्रिंसिपल के ऑफिस में चले गए जैसे hi हम दोनों ऑफिस के अंदर आये तो हमें देख कर प्रिंसिपल बहुत खुस हो गए और मुझसे बोले.

प्रिंसिपल- अरे प्रतिक जी आप आ गए हम आपका इंतजार कब से कर रहा था.

प्रिंसिपल के बात सुन कर मुस्कुराते हुए उनसे बोलै.

मई- मैंने आपसे वडा किया था की मई यहाँ के प्रॉब्लम को सोल्वे कर दूंगा तो मुझे तो यहाँ ाँ hi था.

मेरी बात को सुन कर प्रिंसिपल मुस्कुराते हुए बोले.

प्रिंसिपल- आप एक महँ ब्यक्ति है जो अपना वडा कभी नहीं भूलता वैसे आप दोनों क्या लेंगे चाय कॉफी या कोल्डड्रिंक.

प्रिंसिपल के बात सुन कर अपना गर्दन न में हिलाते हुए बोलै.

मई- थैंक्स लेकिन मुझे कुछ भी नहीं चाहिए और है अब हमें लेट नहीं करना चाहिए हम यहाँ जिस काम से आये है उसे पहले उसे पूरा कर लेते है.

मेरी बात को सुन कर प्रिंसिपल अपना सर है में हिलाते है इसके बाद हम तीनो प्रिंसिपल ऑफिस बहार निकल जाते है बहार आने के बाद मई अपने सेंसेस को सोल्लगे में चारो तरह फैला देता ताकि मुझे उस नेगेटिव एनर्जी का पता लगा सकू थोड़ी देर तक अपने सेंसेस से उस नेगेटिव एनर्जी को ढूंढने के बाद मुझे एक तरह से बहुत hi खतरनाक नेगेटिव एनर्जी आते हुए महसूस हुआ तो मई दोनों को अपने साथ लेकर उस तरफ जाते हुए प्रिंसिपल से पूछा.

मई- सर क्या आप बता सकते है की इस तरफ कोई बिल्डिंग है क्या.

प्रिंसिपल- है इस तरफ तो गर्ल्स हॉस्टल है लेकिन आप ये क्यों पूछ रहे है कही गर्ल्स हॉस्टल में hi तो कोई प्रॉब्लम नहीं है.

मई- है अपने सही सोचा अभी मई जिस नेगेटिव एनर्जी को फील कर पा रहा हु वो सायद उसी गर्ल्स हॉस्टल से आ रही है.

मेरी बात को सुन कर प्रिंसिपल और निधि सोनी हैरान हो गए तभी निधि मुझसे बोली.

निधि- अगर वो नेगेटिव एनर्जी गर्ल्स हॉस्टल से आ रही है तो आपको किसी तरह से उस नेगेटिव एनर्जी को यहाँ से हटाना होगा नहीं तो बाद में यहाँ रहने वाली लड़कियों को बहुत ज्यादा खतरा होगा.

मई- हम्म तुम सही बोल रही हो लेकिन चिंता करने की कोई बात नहीं है आज मई इस नेगेटिव एनर्जी को यहाँ से हटा दूंगा.

ऐसे hi हम बात करते हुए गर्ल्स हॉस्टल के पास आ गया और अभी हम तीनो गर्ल्स हॉस्टल के अंदर जाने hi वाला थम की तभी वह पर एक ब्यक्ति आ जाता है और प्रिंसिपल से बोलता है.

आदमी- अरे प्रिंसिपल सर अभी तो कॉलेज बंद है न तो फिर ये लोग कोण है और यहाँ क्या कर रहे है.

प्रिंसिपल- ये लोग यहाँ पर पढ़ने के लिए नहीं आये है बल्कि ये लोग यहाँ पर कुछ काम से आये और है इनसे मिलो ये है मर. प्रतिक और ये है निधि मेरी बेटी का फ्रेंड और प्रतिक जी ये है कमलेश इस गर्ल्स हॉस्टल का वार्डन और है अगर आपको गर्ल्स हॉस्टल के बारे में कुछ पूछना है तो इनसे पूछ सकते हो.

प्रिंसिपल के बात सुन कर मई अपना गर्दन है में हिला दिया और कमलेश को देखने लगा लेकिन जब मई कमलेश को देखा तो मुझे बहुत गुसा आया क्युकी कमलेश अपने आँखों में हवस लिए निधि को घूरे जा रहा था प्रिंसिपल ने देखा की मई घुसे में हु तो वो मेरी नजरो कर पीछा किया तो कमलेश को देख कर उनको भी गुसा आ गया इस लिए वो थोड़े तेज़ आवाज में बोले.

प्रिंसिपल- कमलेश तुम्हे सुनाई नहीं दिया क्या तुम्हारा ध्यान किधर है.

प्रिंसिपल के बात सुन कर कमलेश निधि पर से अपना ध्यान हटाया और हड़बड़ाते हुए बोलै.

कमलेश- है है ठीक है ठीक है ये लोग मुझसे जो भी पूछेंगे मई इन लोगो को सब बता दूंगा वैसे ये लोग यहाँ पर किस काम से आये है.

कमलेश के बात सुन कर प्रिंसिपल के गुसा थोड़ा संत हुआ और कमलेश को मेरे यहाँ आने का कारन बताया जिसे सुन कर कमलेश एक पल के लिए दर गया लेकिन अपने दर को छुपाते हुए प्रिंसिपल से बोलै.

कमलेश- आप ये क्या बाटे कर रहे है आप इतने पढ़े लिखे और इतने बड़े सोल्लगे के प्रिंसिपल हो कर भी अन्धविश्वास पर यकीं करते है मुझे आपसे ये उम्मीद नहीं थी यहाँ पर कोई बहुत प्रेत या आत्मा नहीं है अगर आपलोग इसी काम के लिए यहाँ से आये है प्लीज आप लोग यहाँ से चले जाइये.

कमलेश के बात सुन कर प्रिंसिपल को उस पर बहुत गुसा आया इसलिए वो उसको घुसे से घूरते हुए बोले.

प्रिंसिपल- मई तुमसे जितना बोल रहा हु तुम उतना hi करो यहाँ पर क्या है क्या नहीं है वो हम देख लेंगे तुम चुप चाप गर्ल्स हॉस्टल का दरवाजा खोलो.

प्रिंसिपल के बात सुन कर कमलेश कर सर से पसीना आने लगा वो लेकिन वो अपने आप को मजबूत करते हुए बोलै.

कमलेश- सॉरी सर लेकिन मई गर्ल्स हॉस्टल का दरवाजा नहीं खोलूंगा क्युकी ये गर्ल्स हॉस्टल है और इसमें लड़को का जाना मन है है अगर ये लड़की जाना चाहती है तो जा सकती है और है आप प्रिंसिपल होंगे सोल्लगे के लेकिन ये गर्ल्स हॉस्टल मेरे अंदर में आता है और कोई भी मेरी मर्जी के बिना इसमें नहीं जा सकता है खास कर के लड़का समझे इस लिए आप सब चुप चाप यहाँ से चले जाइये.

कमलेश के इस तरह के बात सुन कर मुझे बहुत अजीब लगा तो वही अपनी बेइज्जती होता देख कर प्रिंसिपल घुसे से आग बबूला हो गए और वो घुसे से कमलेश को घूरते हुए बोले.

प्रिंसिपल- लगता है हम सबने तुम्हे बहुत छूट दे दी है इस लिए तुम हमारे सर पर खड़ा हो कर नाच रहे हो अब लगता है की तुम्हे यहाँ से निकलना hi होगा.

इतना बोल कर प्रिंसिपल ने किसी को कॉल किया तो कुछ देर बाद वह पर कुछ गॉर्ड भागते हुए आये और कमलेश को पकड़ लिया इसके बाद वो लोग उससे गर्ल्स हॉस्टल के चाभी ले कर दरवाजा खोल दिया.

इधर दरवाजा खुलता हुआ देख कर कमलेश को बहुत गुसा आ गया और वो घुसे से प्रिंसिपल पर छीलते हुए बोलै.

कमलेश- तुमने ये अच्छा नहीं किया प्रिंसिपल तुम मुझे अभी जानते नहीं हो इस सोल्लगे के ट्रस्टी का बीटा मेरा बहुत अच्छा दोस्त है अब तुम देखो की मई कैसे तुम्हे तुम्हारे नौकरी से निकलवाता हु (फिर मेरे तरफ घुसे घूरते हुए बोलै) ये लड़के तुम अंदर जाने के बारे में सोचना भी नहीं तो तुम जानते हो की तुम्हारे साथ क्या क्या हो सकता है.

कमलेश के बात सुन कर और उसे बार बार अंदर जाने से मन करते हुए देख कर मुझे उस पर शक होने लगा इस लिए मई प्रिंसिपल से धीरे से उनके कण में बोलै.

मई- (धीरे से प्रिंसिपल के कण me)Sir आप इस वार्डन को भी अपने साथ ले लीजिये क्युकी मुझे इस्पे कुछ सक हो रहा है मुझे ऐसा लग रहा है की आपके सोल्लगे में जो भी हो रहा है उसमे कही न कही इसका कुछ रोल है.

मेरी बात को सुन कर प्रिंसिपल कुछ देर के लिए सोच में पद गए फिर कुछ देर सोचने के बाद वो अपना गर्दन है में हिलाते हुए गॉर्ड से बोले.

प्रिंसिपल- इस भी हमारे साथ अंदर ले कर आओ.

गॉर्ड- जी सर.

इसके बाद हम सब हॉस्टल के अंदर आ जाते है सबसे आगे मई अपने सेंसेस को एक्टिवटे किये हुए चल रहा था मेरा सेंसेस मुझे एक तरफ लेकर जा रही थी जिधर से मुझे बहुत hi स्ट्रांग नेगेटिव एनर्जी आते हुए फील हो रहा था खैर ऐसे hi चलते चलते हम सब एक रूम के बहार आ कर रुक गया मुझे उस रूम के सामने रुकते हुए देख कर कमलेश के हालत और ख़राब हो गयी.

इधर मई उस रूम को बहुत ध्यान से देख रहा था क्युकी मुझे जो स्ट्रांग नेगेटिव एनर्जी फील हो रहा था वो इसी रूम से आ रहा था अभी मई उस रूम के दरवाजे को देख hi रहा था की तभी मेरी नजर उस रूम के दरवाजे पर लगे टाला पर गया उस टाला को देख कर लग रहा था की उस रूम को सालो से खोला नहीं गया था मई उस रूम को देखते हुए प्रिंसिपल से पूछा.

मई- सर आप मुझे बता सकते है की इस रूम में क्या है और ये कब से बंद है क्युकी इस रूम को देख मुझे ऐसा लग रहा है की ये रूम सालो से बंद है.

मेरी बात को सुन कर प्रिंसिपल कुछ सोचते हुए बोले.

प्रिंसिपल- है अपने सही अनुमान लगाया ये रूम सच में सालो से बंद है.

मई- लेकिन ये रूम इतने दिन से बंद क्यों है क्या इसमें कोई भी नहीं रहता.

प्रिंसिपल- नहीं इसमें कोई नहीं रहता दरअसल कुछ साल पहले इस रूम में एक लड़की फांसी लगा कर सुसाइड कर ली थी तब से कोई भी लड़की इस रूम में रहने के लिए तैयार नहीं हुआ इस लिए हमें इस रूम को बंद करना पड़ा.

मई- ठीक है एक काम कीजिये इस रूम का टाला तोड़वाइये हमें अंदर जाना होगा क्युकी इस सोल्लगे में जो भी प्रॉब्लम हो रही है उसका जड़ इसी रूम में है.

मेरे बात को सुन कर प्रिंसिपल ने अपना सर है में हिलाया और गॉर्ड को टाला तोड़ने के लिए आर्डर दिया प्रिंसिपल के आर्डर सुन कर गॉर्ड टाला तोड़ने के लिए आगे बढ़ा तो कमलेश जोर से चिलाय.

कमलेश- नहीं उस टाला को मत तोडना नहीं तो यहाँ पर मौजूद कोई भी नहीं बचेगा.

कमलेश को ऐसे छीलते हुए देख कर एक बार के लिए सरे लोग उसे घर कर देखा फिर प्रिंसिपल ने उसको बातो को इग्नोर कर के गॉर्ड को टाला तोड़ने का इशारा किया फिर वो गॉर्ड आगे बढ़ कर उस रूम के दरवाजे पर लगे हुए टेल को तोड़ दिया और धीरे से रूम का दरवाजा खोलने लगा एक चरररररर के आवाज के साथ वो दरवाजा धीरे धीरे खुल गया.

रूम के दरवाजा खुलने के बाद मई आगे बढ़ा और उस रूम में जाने लगा मुझे उस रूम में जाते हुए देख कर सरे लोग धीरे धीरे उस रूम में आने लगे लेकिन कमलेश इस रूम में आने के लिए तैयार hi नहीं था जैसे hi उसने देखा की सब उस रूम के अंदर जा रहे है तो वो गॉर्ड से खुद को छुड़ाने के लिए जबरदस्ती करने लगा.

उसको खुद को जबरदस्ती करता हुआ देख कर एक और गरुड़ वह आ कर उसको अच्छे से पकड़ लिया फिर दोनों गॉर्ड जबरदस्ती उसके ले के रूम में आ गए इधर जब मई उस रूम में आया तो देखा की उस रूम में अँधेरा है तो मई अपने सेंसेस से उस के लाइट के स्विच को ढूंढा और उसे ोंन कर दिया जैसे hi वो स्विच ोंन हुआ तो पुरे रूम में लाइट आ गयी जो धीरे धीरे फ्लिकर हो रहा था फिर भी रूम में सब साफ साफ दिख रहा था.

उस रूम को देख कर सब हैरान हो गए क्युकी वो रूम अंदर से पूरी तरह मकड़ी के जल धूल और गंदगी से भरी हुयी थी अभी हम सब रूम को hi देख रहे थे तभी वह पर एक कोण में रखे हुए अलमीरा से खत खत के आवाज आने लगी ऐसा लग रहा था की कोई उस अलमीरा के अंदर से उसे पिट रहा हो जिसे सुन कर सरे लोग गए दर गए सबसे ज्यादा तो कमलेश दर गया था.

मैंने जब देखा की सरे लोग दर गए है तो मई उन सब से बोलै.

मई- आप सब डरिये मत जब तक मई यहाँ हु किसी को कुछ नहीं होगा (फिर कुछ मंत्र पढ़ कर वह पर एक बड़ा सा गोला घेरा बनाया और उन लोगो से बोलै) आप सब इस घेरे में आ जाइये आप सब को कुछ भी नहीं होगा लेकिन है यहाँ पर कुछ भी हो जाये कोई भी इस घेरे से बहार नहीं निकलेगा और अगर कोई बहार आ गया तो वो अपने मौत का खुद जिम्मेवार होगा.

इतना बोल कर मई उस अलमीरा के तरफ बढ़ने लगा



जैसे hi मई उस अलमीरा के पास पंहुचा की तभी.
 
अपडेट 36

आत्मा शालिनी का बदला


एक कमरे में एक आदमी घुटनो के बल बैठा हुआ था उसके शरीर पर छोटो के निशान था ऐसा लग रहा था की उसे अभी अभी बहुत मारा गया है ठीक उसके बगल में hi एक नई मैरिड लड़की भी घुटनो के बल बैठी हुयी थी उस लड़की के आँखों रो रो कर लाल हो गयी थी इन दोनों को घेर कर लगभग 10 आदमी हथियार लिए खड़े थे और ठीक इन दोनों औरत और आदमी के सामने एक 30 या 40 साल का आदमी एक चेयर पर बैठा हुआ था उसने अपने हाथो में एक लोहे की हॉकी स्टिक 🏒 पकड़ा हुआ था और उस आदमी के हवस से भरी आँखे उस लड़की को घर कर देख रही थी उसके चेहरे पर एक कमीना मुस्कान था उसकी इस तरह के मुस्कान देख कर अच्छे अच्छे लोगो को भी पसीना आ जाये अभी वो आदमी उस औरत को देख hi रहा था की तभी वो घायल आदमी गिड़गिड़ाते हुए बोलै.

आदमी- प्लीज दिलावर भाई आपको जो भी करना है मेरे साथ कीजिये लेकिन मेरी बीवी को छोड़ दीजिये गलती तो मैंने की है न तो आप मेरी बीवी को क्यों पकड़ कर लाये है.

उस आदमी के बात सुन कर दिलावर जोर जोर से हस्ते हुए बोलै.

दिलावर- है है है है तुमने क्या सोचा था की दिलावर से गाडरी कर के तू बच जायेगा और तुम गाडरी की भी तो किसके लिए इस लड़की के लिए न तो सजा तो इसे भी मिलेगी.

दिलावर के बार सुन कर वो आदमी घबरा जाता है और घबराते हुए बोलता है.

आदमी- भाई आपका गैंग छोड़ना मेरा फैसला था इसमें मेरी बीवी की कोई गलती नहीं है और है मैंने आपके साथ कोई भी गाडरी नहीं की है मई सिर्फ आपका गैंग hi छोड़ा है.

उस आदमी के बात सुन कर दिलावर पहले जोर जोर से हस्ता है फिर एकदम से उसका चेहरा घुसे से लाल हो जाता है और वो घुसे से उस आदमी को बोलता है.

दिलावर- दिलावर का गैंग कोई ऐसा वैसा गैंग नहीं है की कोई भी जब चाहे आये और जब चाहे चला जाये मेरे गैंग में आने के लिए तो बहुत सारा रास्ता है लेकिन जाने के लिए सिर्फ एक hi रास्ता है और वो भी मौत का रास्ता है है है.

दिलावर के बात सुन कर आदमी और औरत दोनों दर जाते है वो आदमी रट गिड़गिड़ाते हुए दिलावर के पैरो में गिर जाता है और रट हुए बोलता है.

आदमी- ऐसा मत कीजिये दिलावर भाई मई हमेसा अपनी जान पर खेल कर आपका साथ दिया है प्लीज भाई आपको जो भी करना है मेरे साथ कीजिये लेकिन बीवी को छोड़ दीजिये.

उस आदमी के बात सुन कर दिलावर जोर जोर से हस्ते हुए बोलता है.

दिलावर- अरे ये तुम क्या बाटे कर रहे हो मई भला ऐसे कमसिन लड़की को कैसे छोड़ सकता हु आज तो मई इसकी जवानी को तुम्हारे सामने hi चाखुनागा ताकि तुमको पता चले की दिलवर से गाडरी करने का क्या अंजाम होता है.

इतना बोल कर दिलवर वही सबके सामने उस औरत को नागा करने लगता है जिसे देख कर वो आदमी अपने बीवी को बचने के लिए उसके तरफ भागता है तो दिलावर के आदमी उसको पकड़ लेते है और वो आदमी बेबसी से अपने बीवी के इज्जत लुटाते हुए देखता रहता है.

इधर दिलवर उस लड़की के पास जाकर उसको पहले जबरदस्ती सबके सामने नंगा करता है और सबके सामने hi उसकी इज्जत लूट लेता है दिलावर के इज्जत लूटने के बाद उसके आदमी भी एक एक कर के उस औरत के इज्जत को लुटाते है फिर दिलावर अपने हॉकी स्टिक से उस औरत के सर पर वॉर करता है जिससे उस औरत के सर पहात जाता और उसकी वही पर मौत हो जाता है.

इधर अपनी बीवी के ऐसी हालत देख कर उस आदमी का रो रो कर हालत ख़राब हो गया था अब उसके आँखों में एक आग नजर आ रहा था बदला लेने की आग और ये सायद दिलावर को उसके आँखों में दिख गया था इस लिए वो अपने आदमियों को उसे छोड़ने के लिए बोलता है जैसे hi दिलावर के आदमी उस आदमी को छोड़ते है वैसे वो आदमी दिलावर के एक आदमी के हटो से चाकू छींटा है और दिलावर को मरने के लिए उसके तरफ भागने लगता है लेकिन जैसे hi वो दिलावर के पास पंहुचा तो दिलवर अपने हॉकी स्टिक से उसके सर पर एक तगड़ा वॉर करता है जिसके कारन उसका सर भी पहात जाता है और वही पर गिर कर तड़पने लगता है और तड़पते हुए अपने टूटी फुटु आवाज से बोलता है.

आदमी- आअज टटुमने जो मेरे साथ किया है तुम्हारे साथ इससे भी बुरा होगा कोई ऐसा आएगा जो तुम्हे तड़पा तड़पा कर मरेगा भगवन के घर में देर है अंधेर नहीं यद् रखना दिलावर तू भी एक दिन मेरे hi तरह तड़प तड़प कर मरेगा.

इतना बोल कर वो आदमी वही मर जाता है इधर उस आदमी के बात को सुन कर दिलावर जोर जोर से हस्ते हुए बोलै.

दिलावर- है है है कोई मई का लाल ऐसा पैदा नहु हुआ जी दिलावर को मर सके अगर कोई ऐसा करने की भी कोशिश किया तो मई दिलावर उसका पूरा खंडन hi इस धरती से मिटा दूंगा ( फिर अपने आदमी से) इन दोनों के लाश को ठिकाने लगा दो किसी को भी इनकी साबुत नहीं मिलनी चाहिए.

आदमी- ok बॉस.

उसी समय वह पर दिलावर का एक आदमी आता है और दिलावर से बोलता है.

आदमी- बॉस बहार कोई आदमी आया है और वो आपसे मिलना चाहता है.

अपने आदमी के बात सुन कर दिलवर कुछ सोचते हुए उससे पूछता है.

दिलावर- कोण है वो आदमी और वो मुझसे क्यों मिलना चाहता है.

आदमी- पता नहीं बॉस वो आपसे क्यों मिलना चाहता है और न hi वो अपना नाम बताया बस उसने बोलै की उसे आपसे मिलना है कुछ जरुरी काम है.

उस आदमी के बात सुन कर दिलावर कुछ सोचते हुए बोलै.

दिलावर- ठीक है उसको बैठक रूम में लेकर आओ मई उससे वही मिलूंगा.

दिलावर के बात सुन कर वो आदमी वह से चला जाता है इधर दिलावर भी अपने बैठक रूम में चला जाता है कुछ समय बाद वह पर वही आदमी एक अनजान आदमी के साथ बैठक रूम में एंटर होता है.

दिलवर आदमी- बॉस यही वो है जो आपसे मिलना चाहते थे.

अपने आदमी के बात सुन कर दिलावर उस आदमी को ऊपर से निचे तक देखता है और उससे पूछता है.

दिलावर- है जी बोलिये आप हमसे क्यों मिलना चाहते थे.

दिलावर के बात सुन कर वो आदमी उसे देखते हुए हलकी मुस्कराहट के साथ बोलै.

आदमी- जी मुझे यहाँ पर मंटू यादव ने भेजा है.

जैसे hi दिलावर मंटू यादव के नाम सुन तो वो चौक गया फिर वो मुस्कुराते हुए उस आदमी से बोलै.

दिलावर- वो तो आपको बॉस ने भेजा है आज उनको मेरी यद् कैसे आ गयी और उनका मेरे लिया क्या आदेश है.

दिलावर के बात सुन कर वो आदमी कुछ देर तक सोचने के बाद वो दिलावर से बोलै.

आदमी- दरअसल एक आदमी है जो बॉस को परेशां कर के रखा इस लिए बॉस चाहते है की तुम उस आदमी का शिकार करो और इस काम के लिए तुमको मुँह मांगी कीमत मिलेगी.

उस आदमी के मुँह से मुँह मांगी कीमत सुन कर दिलावर के आँखों में चमक आ जाती है फिर वो कुछ सोचते हुए उस आदमी से पूछता है.

दिलावर- वैसे तो मई बॉस का ये काम कर दूंगा लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा है की ऐसा कोण आ गया है मुंबई सहर में जो बॉस को भी परेशां कर के रखा हुआ.

आदमी- उस आदमी का नाम प्रतिक है जिसने बॉस को परेशां कर के रखा हुआ है और वो मल्होत्रा परिवार का घरजमाई है लेकिन वो जैसा दीखता है वैसा है नहीं वो एक मार्टिकल आर्ट्स योद्धा है वो ग्रांडमास्टर लेवल का.

दिलावर ने जब सुना की मई एक मार्टिकल आर्ट्स योद्धा हु वो भी एक ग्रांडमास्टर लेवल का तो वो हैरान हो गया फिर वो कुछ सोचते हुए बोलै.

दिलावर- हम्म तो वो ग्रांडमास्टर लेवल पर है तब तो उसे मरने में और मजा आएगा तुम बॉस को बोल देना की उनका काम हो जायेगा मई उसे मर दूंगा.

दिलावर के बात सुन कर वो आदमी जल्दी से बोलै.

आदमी- नहीं नहीं उसे इतना आसान मौत नहीं देना है उसे तड़पा तड़पा के मरना है सबसे पहले उसे और उसके परिवार को उठाओ और बॉस के पास ले कर आना इसके बाद सबसे पहले तुम उसके फॅमिली को उसके सामने दर्दनाक मौत देना जब वो अपने फॅमिली को मरते हुए अपने आँखों से देखेगा तब वो बहुत तड़पेगा और उसे तड़पता देख कर बॉस को सन्ति मिलेगी.

दिलावर- ठीक है हो जायेगा बोल देना बॉस को.

दिलावर के बात सुन कर वो आदमी वह से चला जाता है उसके जाने के बाद दिलावर अपने एक आदमी को बुलाया है और बोलता है.

दिलावर- जाओ और जाकर प्रतिक के बारे में सब पता करो वो मल्होत्रा परिवार का घर जमाई है मुझे उसके बारे में पूरी जानकारी चाहिए.

आदमी- ठीक है बॉस मई अभी जाता हु.

इतना बोल कर वो आदमी वह से चला जाता है.

इधर मई शानवी के सोल्लगे में गर्ल्स हॉस्टल के एक रूम में था जहा से मुझे बहुत hi खतरनाक नेगेटिव एनर्जी फील हो रहा था वो नेगेटिव एनर्जी एक अलमीरा के अंदर से आ रहा था और उस अलमीरा के अंदर से खत खत के आवाज आ रहा था ऐसा लग रहा था की उस अलमीरा को कोई अंदर से पिट रहा है इस लिए मई वह पर मौजूद सबके एक सुरक्षा घेरा में खड़ा किया और खुद उस अलमीरा के पास जाने लगा.

जैसे hi मई उस अलमीरा के पास पंहुचा तो मेरी नजर एक ऐसी चीज पर पड़ी जिसे देख कर मई चौक गया क्युकी उस अलमीरा पर किसी ने तांत्रिक क्रिया कर के उस अलमीरा पर एक कला धागा बंधा हुआ था और उस अलमीरा को लॉक किया हुआ था उसे देख कर ऐसा लग रहा था की कोई जान भुज कर किसी नेगेटिव एनर्जी को इस अलमीरा में कैद कर के रखा हुआ हो अभी मई उस अलमीरा को देख hi रहा था की तभी उसके अंदर एक लड़की के भयानक गुरगुराने के आवाज आयी और वो अपने कर्कश आवाज में बोली.

आवाज- मुझे बहार निकालो वर्ण मई किसी को भी जिन्दा नहीं छोडूंगी.

उस आवाज को सुन कर वह मौजूद सबके हालत ख़राब हो गयी सब दर से जहा खड़े थे वही जैम गए कोई हिलने की भी कोशिश नहीं कर रहा था तो वही मई उस आवाज को सुन कर उससे बोलै.

मई- अच्छा तो तुम्हे बहार निकलना है लेकिन मई तुम्हे बहार क्यों निकलू अगर तुम बहार निकल कर मासूम लोगो को नुकशान पहुचायेगी तब.

मेरी बात को सुन कर वो आवाज कुछ देर के लिए चुप हो गयी फिर कुछ देर बाद उस अलमीरा से एक लड़की के मधुर आवाज आयी और वो लड़की रट हुए बोली.

लड़की- मुझे कुछ लोगो ने यहाँ कैद कर के रखा हुआ प्लीज मुझे यहाँ से बहार निकालो मुझे यहाँ कैद नहीं रहना है मुझे अपने दुश्मनो से बदला लेना मई किसी मासूम को कोई नुकशान नहीं पहुचाउंगी और यहाँ से चुप चाप चली जाउंगी.

मई उस लड़की के बात सुन कर सोच में पद गया फिर मई पीछे मुद कर उन सब को देखते हुए बोलै.

मई- मई इस अलमीरा को खोलने जा रहा हु जब तक मई न कहु आप सब उस सर्किल से बहार मत निकलना.

इतना बोल कर मई उस अलमीरा को खोलने के लिए आगे बढ़ने लगा तभी पीछे से कमलेश छीलते हुए बोलै.

कमलेश- नहीं उस अलमीरा को मत खोलना वर्ण यहाँ पर कोई भी जिन्दा नहीं बचेगा.

कमलेश चिलता रहा वो बार बार मन करता रहा की उस अलमीरा को मत खोलना लेकिन मई उसकी बातो को इग्नोर कर के कुछ मंत्र पढ़ते हुए उस अलमीरा पर लगे हुए काळा धागे को पकड़ कर तोड़ दिया जैसे hi वो धागा टुटा वैसे hi आसमान में काळा काळा बदल छाने लगे जिसके कारन वह पर पूरी तरह अँधेरा छ गया तेज़ तेज़ हवाएं चलने लगी आसमान में भयंकर रूप में बिजलिया कड़क रही थी.

ये सारा नजारा देख कर मई समझ गया की इसमें जो भी नेगेटिव एनर्जी कैद है वो बहुत खतरनाक है सायद आज तक मई जितने भी नेगेटिव एनर्जी से लगा हु ये उन सबसे ज्यादा ताकतवर है खैर अब जो होना है वो तो होकर hi रहेगा.

इधर मई जैसे hi वो काळा धागे को तोड़ कर उस अलमीरा के दरवाजा को खोलना चाहा तो वो खुला नहीं इस लिए मई थोड़ा ताकत लगा कर उसे खोलने की कोशिश की तो अचानक वो दरवाजा एक झटके के साथ खुल गया दरवाजा झटके के के साथ खुलने के कारन अलमीरा में रखे एक कलश निचे गिर कर टूट गया.

कलश के टूटते hi उसमे से एक काली छाया जोर जोर से हस्ते हुए बहार निकला और गायब हो गया जब सरे लोगो ने उस काली छाया को देखा तो सबको दर से हालत ख़राब हो गयी.

इधर वो कला छाया के गायब होने के बाद उसकी एक कर्कश आवाज पुरे रूम में गूंज गयी.

कला छाया- है है है है मई आजाद हो गया है है है मई कब से इस दिन का प्रतीक्षा कर रही थी लेकिन कोई नहीं अब मई बहार आ गयी हु तो अब यहाँ कोई भी जिन्दा नहीं बचेगा जितना मई इस आलमीरे में कैद हो कर तप्दी हु मई उससे ज्यादा तुम सब को तड़पाऊंगी है है है है.

उस काली छाया के बात को सुन कर सरे लोग दर गए और मन hi मन भगवन को यद् करने लगे तो वही कमलेश जोर जोर से छीलते हुए बोलने लगा.

कमलेश- मैंने बोलै था न की उस अलमीरा को मत खोला अब ये शैतान किसी को भी नहीं छोड़ेगी सब को मर देगी.

कमलेश के बात सुन कर सब और दर गए जब मैंने देखा की कमलेश सबको अपनी बातो से और डरा रहा है तो मई उससे घुसे से बोलै.

मई- चुप एकदम चुप तुम अगर एक शब्द और बोले तो वो आत्मा तुम्हे मरे या न मरे लेकिन मई तुम्हे जरूर मर दूंगा और आप लोग बिलकुल भी मत डरिये ये आत्मा मेरे रहते हुए आप सब को कोई भी नुकशान नहीं पंहुचा पायेगी.

मेरी बात को सुन कर सरे लोग थोड़ी रहत की साँस ली हलाकि वो लोग अभी भी डरे हुए थे लेकिन मेरे बातो को सुन कर उनलोगो के दिल से थोड़ी तो दर काम जरूर हुयी थी उनलोगो को संत होते देख कर मई उस आत्मा से बोलै.

मई- तुम जो कोई भी हो तुमने मुझसे वडा किया था की तुम बहार निकल कर इन लोगो को कोई नुकशान नहीं पहुचायेगी और तुम अब अपना वडा तोड़ रही हो ये अच्छी बात नहीं है.

काली छाया- वडा है है है कैसी वडा वडा तुम जैसे जिन्दा इंसान करते है हम जैसे मरे हुए आत्मा नहीं और भला मई इन लोगो को क्यों न मरू जब मई इस अलमीरा में सालो से बंद हो कर तपाद रही थी तब कोई भी आकर मुझे इस अलमीरा से आजाद नहीं किया तो अब मई क्यों इन पर रहम करू मरना होगा सबको मरना होगा और इन लोगो के साथ तू भी मरेगा सरे लोग मेरे इन्तेक़ाम के आग में जलेंगे है है है है.

मई- नहीं तुम इन्हे कुछ भी नहीं कर सकती और मई तुम्हे ऐसा करने भी नहीं दूंगा मेरे रहते हुए तुम इन्हे मरना तो दूर तुम इन सब को हाथ भी नहीं लगा सकती.

काली छाया- अच्छा तो तुम इन लोगो को मुझसे बचाएगा तुम्हे अपने शक्तियों पर कुछ ज्यादा hi घमंड नहीं है.

मई- है मई इन लोगो को बचाऊंगा और मुझे मेरे शक्तियों पर घमंड नहीं बल्कि बिस्वास है मुझे बिस्वास है खुद पर की मई तुम जैसे नेगेटिव एनर्जी को आराम से संभल सकता हु.

काली छाया- अच्छी बात है तो फिर तुम इन लोगो को और खुद को मुझसे बचा कर दिखाओ.

इतना बोल कर वो काली छाया चुप हो गयी फिर उस कमरे में तेज़ तेज़ हवाएं चलने लगी हवाएं इतना तेज़ चल रही थी की उस रूम में रखे सरे सामान हवा के साथ ऊपर उड़ने लगा लेकिन उस हवा के असर मेरे बनाये गए घेरे नहीं था नहीं तो वो लोग भी उन सरे सामान के जैसे हवा में उड़ने लगते.

इधर उन लोगो को सही सलामत वही पर खड़ा देख कर वो छाया हैरान हो गया तभी उसकी नजर उस घेरे पर जाती है वो उस घेरे को देख कर समझ जाती है की मई उन लोगो को अपने मंत्रो से उस घेरे में सुरक्षित रखा हु ये देख कर वो छाया घुसे से मुझसे बोली.

काली छाया- अच्छा तो तुम कुछ मंत्र भी जानते हो कोई बात नहीं मई भी देखती हु की तुम्हारे मंत्र कब तक इन लोगो को मुझसे बचा कर रखता है.

इतना बोल कर वो उस घेरे पर आग से हमला किया जिसे देख कर सरे लोग दर गए उन लोगो को डरता देख कर मई उन सब से बोलै.

मई- आप सब अपनी आँखे बंद कर के अपने वही पर बैठ जाइये लेकिन ये यद् रखियेगा की आप में से कोई भी उस घेरे से बहार न निकले वर्ण उसको मई भी नहीं बचा सकता.

मेरा इतना बोलना hi था की वो लोग जहा खड़े थे वही पर अपनी आँखे बंद कर के बैठ गए इधर काली छाया के द्वारा छोड़ी गयी आग जा कर उस घेरे से टकरा गया लेकिन उस घेरे को थोड़ा भी नुकसान नहीं हुआ बल्कि वो आग घेरे से टकराते hi ख़तम हो गया दरअसल मई जो घेरा बनाया था वो कोई मामूली घेरा नहीं था बल्कि वो एक सुरक्षा कवच था जिसे मेरे शिवा कोई और नहीं तोड़ सकता था.

अपनी आग के शक्ति को भी बेकार जाते देख कर वो काली छाया बौखला गयी और लगातार उस घेरे पर हमला करने लगी कभी वो उसपर काली शक्ति से हमला करती तो कभी हवा से तो कभी बिजली से ऐसे लगातार हमला करने बाद भी जब वो घेरा नहीं टुटा तो वो काली छाया मेरे तरफ घूम गयी और मुझसे घुसे से बोली.

काली छाया- मैंने सोचा था की तुम मुझे आजाद किया है तो मई तुम्हे जाने दूंगी नहीं मरूंगी तुम्हे लेकिन तुम इन लोगो को मुझसे बचा कर मेरे इन्तेक़ाम में बढ़ा दाल रहे हो इस लिए अब तुम्हारा मरना जरुरी है अब मई सबसे पहले तुम्हे मरूंगी इसके बाद इन लोगो को.

इतना बोल कर वो मुझ पर हमला कर दी उसका हमला मुझसे लगता उससे पहले की वो किसी अदृस्य दिवार से टकरा कर नस्ट हो गया दरअसल मैंने पहले hi अपने चारो तरफ एक अदृस्य सुरक्षा कवच बना लिया जिससे उस काली छाया का हमला मुझ तक नहीं पंहुचा.

अपने हमले को ऐसे बेकार जाते देख कर वो काली छाया और घुसे में आ गयी और मुझ पर लगातार हमला करने लगी ऐसी hi वो मुझ पर काफी देर तक हमला करती रही अब मई उसके इस नौटंकी से बोर होने लगा था इस लिए मई सोचा की अब खेल ख़तम किया जाये इस लिए मई उसे थोड़े कठोर आवाज से बोलै.

मई- बस बहुत हो गया मैंने तो सोचा था की तुम इतने दिन से इस अलमीरा में कैद हो इस लिए तुम्हारे अंदर गुसा भरा हुआ है लेकिन नहीं तुम तो अपने इन्तेक़ाम में इतनी अंधी हो गयी हो की तुम्हे मासूम लोग भी दिखाई नहीं दे रहे है इसलिए अब तुम फिर से कैद होने के लिए तैयार हो जाओ.

इतना बोल कर मई अपने दोनों हाथो को आपस में मिला कर कुछ मंत्र बढ़ते हुए अपने स्प्रिचैल एनर्जी और स्पेस शक्ति से एक जल तैयार किया और उस जल को काली छाया के तरफ उसे कैद करने के लिए भेज दिया.

इधर मेरे बात को सुन कर काली छाया हैरान थी की तभी उसे अपने तरफ एक जल बढ़ते हुए दिखाई दिया जिसे देख कर वो दर गयी और अपने शक्तियों से उस जल को नस्ट करने की कोशिश करने लगी लेकिन वो जल उससे नस्ट नहीं हुआ ये देख कर उस काली छाया के दर से हालत ख़राब हो गयी और वो जोरो से चीखने लगा उसकी चीख इतना खतरनाक था की उस रूम के सरे खिड़की जो सीसे से बानी हुयी थी वो टूट कर बिखरी गयी यहाँ तक की कुछ देर के लिए मेरे कण भी सुन पद गए थे इधर वो काली छाया चीखते हुए बोली.

काली छाया- नहीं नहीं मुझे दोबारा कैद नहीं होगा है प्लीज तुम ऐसा मत करो मुझे कैद मत करो अब मई किसी को भी कोई नुकशान नहीं पहुचाउंगी.

उस काली छाया के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए उससे बोलै.

मई- मई एक बार तुम्हारी बात मन कर गलती कर दी अब मई वही गलती दोबारा नहीं करूँगा.

मेरी बात को सुन कर काली छाया रोने और गिड़गिड़ाने लगी लेकिन मई उसके तरह ध्यान नहीं दिया और अपने जल को उसके तरफ बढ़ाते रहा थोड़ी देर में वो जल जाकर उस काली छाया को कैद कर लिया जब वो काली छाया मेरे शक्तियों के जल में कैद हो गयी तो उसकी शक्तिया भी बांध गयी क्युकी मई जो जल बनाया था उसमे कैद होने वाले का कोई भी शक्ति उस जल के अंदर काम नहीं करती जैसे hi उस काली छाया के शक्ति काम करना बंद किया वो काली छाया एक आत्मा के रूप में आयी वो आत्मा एक लड़की की थी.

जब सरे लोगो की नजर उस आत्मा पर गयी तो सब हैरान हो गए और उस आत्मा को देखने लगे वो लड़की एक बाला की खूबसूरत थी भले वो मर गयी थी और एक आत्मा में बदल गयी थी लेकिन उससे उसकी खूबसूरती में कोई कमी नहीं आयी थी सरे लोग उस लड़की को देख hi रहे थे की तभी प्रिंसिपल ने उस आत्मा को पहचानते हुए बोले.

प्रिंसिपल- अरे ये ये ये तो शालिनी है.

प्रिंसिपल के मुँह से उस आत्मा के नाम सुन कर सब हैरान हो गए तभी मई प्रिंसिपल के पास जाते हुए बोलै.

मई- आप इसे पहचानते है क्या.

प्रिंसिपल- है मई इसे बहुत अच्छी तरह से पहचानता हु ये मेरे कॉलेज की एक बहुत hi होनहार लड़की थी ये जितना देखने में खूबसूरत थी उतना hi पढ़ने में भी तेज़ थी लेकिन पता नहीं इसे क्या हुआ ये एक दिन अपने hi रूम में फांसी लगा कर ख़ुदकुशी दे दी.

प्रिंसिपल के बात सुन कर मई हैरान हो गया यहाँ पर मई hi हैरान नहीं हुआ था बल्कि सरे लोग हैरान थे मई सोच रहा था की इतनी खूबसूरत लड़की जो पढ़ने में भी तेज़ थी भला उसके साथ ऐसा क्या हुआ की वो ख़ुदकुशी कर ली इधर प्रिंसिपल के बात सुन कर उस शालिनी नाम के आत्मा की आँखे घुसे से खून जैसी लाल हो गयी और वो जोर से छीलते हुए बोली.

आत्मा- नहीं ये झूठ है मैंने कोई ख़ुदकुशी नहीं की थी बल्कि मेरा मर्डर हुआ था.

उस आत्मा के बात सुन कर सरे लोग हैरान हो गए और उस आत्मा के तरफ देखने लगे वही कमलेश ने जब उस आत्मा के बात को सुना तो उसकी दर के मरे हालत ख़राब हो गयी तभी मई उस जल के पास जा कर उस आत्मा से बोलै.

मई- अगर सच में तुमने ख़ुदकुशी नहीं की बल्कि तुम्हारा मर्डर हुआ था तो मई तुम्हे न्याय जरूर दिलवाऊंगा बस उस दिन तुम्हारे साथ क्या हुआ तुम वो सब कुछ हमें बताओ.

मेरी बात को सुन कर वो आत्मा कुछ बोलती तभी कमलेश जोर से छीलते हुए बोलै.

कमलेश- नहीं ये आत्मा झूठ बोल रही है इसकी कोई मर्डर नहीं हुआ था ये खुद फांसी लगा कर आत्महत्या की थी और ये इसने इस लिए की थी क्युकी सरे लोग जान गए थे की ये अपने खूबसूरती के जल में लोगो को फसा कर पैसा लुटाती है.

कमलेश के बात सुन कर हम लोग हैरान हो गए और इसी हैरानी ने हम कभी कमलेश को देखते तो कभी शालिनी के आत्मा को लेकिन शालिनी के आत्मा ने जब कमलेश के मुँह से ये बात सुनी तो उसकी आँखे घुसे से लाल हो गयी और वो कमलेश को घूरते हुए बोली.

शालिनी- ठु है तुम जैसे इंसान पर तुम अपनी गलती छुपाने के लिए और कितना घटिया इल्जाम मुझ पर लगाएगा.

शालिनी के बात सुन कर कमलेश लड़खड़ाने लगा और वो अपने लड़खड़ाती जुबान से बोलै.

कमलेश- मई मई क्या अपनी गलती छुपा रहा हु तुमने इस सोल्लगे में जो किया मई वही तो बता रहा हु.

इधर कमलेश के लड़खड़ाते आवाज को सुन कर सरे लोग समझ गए की कमलेश झूठ बोल रहा है लेकिन ये झूठ क्यों बोल रहा है ये किसी को समझ में नहीं आ रहा था इस लिए मई कमलेश को छुप करते हुए उससे बोलै.

मई- छुप एकदम छुप तुम अगर बिछ में एक शब्द भी बोलै तो मई इस आत्मा को इस जल से मुक्त कर के तुम्हारे ऊपर छोड़ दूंगा.

मेरी बात को सुन कर कमलेश के दर के मरे हालत ख़राब हो गयी और एकदम से चुप चाप अपने जगह पर बैठ गया उसको छुपा चाप बैठा देख कर मई शालिनी से बोलै.

मई- है तो अब तुम अपनी कहानी बताओ.

मेरी बात को सुन कर शालिनी कुछ देर चुप रही इसके बाद वो बोलना सुरु किया.

शालिनी- ये बात उस समय की है जब मई इस सोल्लगे में एडमिशन ली थी मेरा गाओं यहाँ से बहुत दूर था इस लिए मई यही हॉस्टल में रह कर पढाई करने की सोची इस लिए मई हॉस्टल में hi रहने लगी ऐसे hi दिन बीतने लगे और मुझे सोल्लगे ज्वाइन किये हुए पुरे एक साल हो गए इन एक सालो में मेरे बहुत सरे दोस्त बने और बहुत सरे ऐसे भी लड़के थे जिन्होंने मुझे प्रपोज़ किया लेकिन मई सबका प्रपोसल रिजेक्ट कर दिया क्युकी मई यहाँ पर पढाई कर के कुछ बनाने के लिए आयी थी ऐसे hi एक दिन एक लड़का मेरे पास आया और मुझे प्रपोज़ किया लेकिन मई उसका प्रपोसल रिजेक्ट कर दिया ये देख कर वो लड़का मेरा हाथ पकड़ लिया तो मई उसे थपड मर थपड पड़ने के कारन वो लड़का गुसा हो गया और वो मुझे मरने के लिए आगे बढ़ा तभी वह पर प्रिंसिपल आ गए (प्रिंसिपल से) आपको तो यद् hi होगा प्रिंसिपल अपने आ कर मुझे उस लड़के से बचाया था.

शालिनी के बात सुन कर प्रिंसिपल कुछ देर तक यद् करते रहे इसके बाद उन्हों वो बात यद् आयी तो वो शालिनी से बोले.

प्रिंसिपल- है मुझे यद् आया उस दिन किसी लड़के ने आ कर मुझे बताया था की कोई लड़का एक लड़की के साथ सरेयाम छेड़खानी कर रहा है इस लिए मई वह पर आया था जब मई वह पर आया तो देखा की वो लड़का कोई और नहीं बल्कि हमारे सोल्लगे के ट्रस्टी के बीटा विकाश था.

प्रिंसिपल अभी आगे और बोलने hi वाले थे की तभी शालिनी उनकी बात को बिच में काट कर बोली.

शालिनी- है अपने सही बोलै वो ट्रस्टी का बीटा विकाश hi था लेकिन जब आप वह आये तो आपसे डरकर वह से चला गया लेकिन वो मुझसे खाये हुए थपड को नहीं भूल पाया और मुझसे बदला लेने के लिए प्लानिंग करने लगा और उसके प्लानिंग में साथ दिया हमारे गर्ल्स हॉस्टल के इस दरिंदे कमलेश ने जिसे यहाँ पर हमारी सुरक्षा के लिए रखा गया था वही हमारी भक्षक बन गया.

शालिनी के बात सुन कर हम सब हैरान हो गए और कमलेश को घर कर देखने लगे सबकी नजर अपनी तरफ देख कर कमलेश के हालत ख़राब हो गए और वो हकलाते हुए बोलै.

कमलेश- ये ये ये झु झु झूठ बोल रही है है हाहाहा आप सब देख रहे है न की ये मरने के बाद भी नहीं सुधरी ये मुझे और विकाश भाई को बदनाम कर रही है.

कमलेश के बात सुन कर शालिनी घुसे से गुरगुरते हुए बोली.

शालिनी- मई झूठ बोल रही हु ठु है तुम जैसे इंसान पर तुमने यहाँ पर कितने गलत काम किये है आज मई सबको बताती हु तूने कैसे यहाँ पर रहने वाली लड़कियों के बाथरूम में कैमरा लगा कर उनके नहाते हुए वीडियो बनाते हो फिर उस लड़की के उसी वीडियो के जरिये ब्लैकमेल कर के तुम और विकाश मिल कर उसे बर्बाद करते हो और वो लड़किया अपनी बदनामी और तुम दोनों के दर से ये बात किसी को बताती भी नहीं है और तुम्हारे जुल्म सहती सहती है.

शालिनी के बात सुन कर कमलेश के बोलती hi बंद हो गयी थी इधर प्रिंसिपल ने जब सुना की कमलेश यहाँ पर रहने वाले लड़कियों के साथ कैसी हरकत करता था तो उन्हें कमलेश पर बहुत गुसा आया और वो वही पर उसे पीटने लगे फिर वो अपने दो गॉर्ड को भेज कर पूरा गर्ल्स हॉस्टल के बाथरूम चेक करने के लिए बोलै इधर मई उनके तरफ से अपना ध्यान हटा कर शालिनी से बोलै.

मई- है तो शालिनी अब तुम आगे बताओ तुम्हारे साथ क्या हुआ था.

मेरी बात को सुन कर शालिनी आगे बताना सुरु किया.

शालिनी- कमलेश और विकाश मिल कर मेरे खिलाफ एक षड़यंत्र तैयार किया और उसका अंजाम दिया इन लोगो ने फेयरवेल पार्टी के रत उस रत इन दोनों ने मिल कर मेरे ड्रिंक्स में कुछ मिला दिया जिससे मेरी तबियत थोड़ी ख़राब जैसी लड़ने लगी तो मई अकेले hi गर्ल्स हॉस्टल के लिए निकल गयी और अपने रूम में आ गयी लेकिन यही पर मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गयी मुझे उस रत अपने रूम में आना hi नहीं चाहिए था लेकिन मई भी क्या करती मुझे थोड़े hi पता था की मेरे रूम में पहले से hi विकाश मेरे इंतजार में बैठा हुआ है जैसे hi मई रूम में आया तो विकाश मुझे पीछे से पकड़ लिया अपने ऊपर इस तरह के अचानक हमले से मई घबरा गयी और उससे छूटने की प्रयास करने लगी बहुत कोशिश करने के बाद आखिर कर मई उससे छूट hi गयी और वह से बहार भागने लगी अभी मई अपने रूम से बहार निकल पति तभी मेरे रूम के दरवाजे पर मुझे कमलेश दिखाई दिया जो मुझे अपने कामिनी मुस्कान के साथ देख रहा था फिर वो आगे बढ़ते हुए मुझे पकड़ लिया फिर दोनों ने मिल कर मुझे बीएड पर पटक दिया और मेरे सरे कपडे निकल दिए इसके बाद इन दोनों ने मेरे साथ तबतक जबरदस्ती की जब तक की इन दोनों के मन नहीं भर गया मई रोटी रही चिलाती रही लेकिन इन दरिंदो ने मेरी एक नहीं सुनी और नहीं तो मेरे छिलने में इनको मजा आ रहा था फिर अपने कपडे पहन कर दोनों वह से जाने लगे तभी विकाश को पता नहीं क्या हुआ की वो मेरे पास आया और मेरा गाला दबाने लगा और मेरा गाला तबतक दबाता रहा जबतक की मई मर नहीं गयी फिर इन लोगो ने मुझे कपडे पहना कर मेरी दुपटा को पंखे में बांध कर मुझे फांसी पर लटका दिया और बहार सबको ये बोल दिया की मई फांसी लगा कर आत्महत्या की है और न जाने कैसे कैसे अफवाह फैला कर मुझे बदनाम कर दिया इन दरिंदो ने.

शालिनी के बाटे सुन कर हम सब की आँखों में आंसू आ गया मुझे तो विकाश और कमलेश दोनों पर बहुत ज्यादा गुसा आ रहा था मई घुसे से उठते हुए बोलै.

मई- इन जैसे दरिंदो को जीने का कोई हक़ नहीं है आज मई इस कमलेश को मर कर इस धरती से एक बोझ काम कर दूंगा.

मेरे बात को सुन कर सब छिलने लगे.

सब- है है इसके जैसे दरिंदे को इस धरती पर जीने का कोई हक़ नहीं है मर डालो इसे मर डालो.

इधर सबकी बात सुन कर कमलेश के हाथ पाव कंपनी लगे तो वही शालिनी सबकी बात सुन कर बहुत खुस हो गयी और उसके आँखों से आंसू गिरने लगे लेकिन थोड़ी देर बाद वो घुसे से गरजते हुए बोली.

शालिनी- नहीं इसे कोई नहीं मरेगा इसे और उस विकाश को मई अपने हाथो से सजा देना चाहती हु ताकि मेरे आत्मा को सन्ति मिल सके और जब तक मेरे आत्मा को सन्ति नहीं मिली मई इस गर्ल्स हॉस्टल को छोड़ कर नहीं जाउंगी.

शालिनी के बात सुन कर मई वही रुक गया और फिर कुछ सोचते हुए शालिनी से पूछा.

मई- ठीक है इसे कोई हाथ नहीं लगाएगा इसे तुम्ही सजा देना लेकिन तुम मुझे एक बात बताओ अगर तुम्हे इन दोनों से बदला लेना hi था तो तुम इनदोनो को पहले hi क्यों नहीं मर दिया जहा तक मई देख पा रहा हु की तुम्हारे पास बहुत साडी शक्तिया है फिर भी ये दोनों अभी तक जिन्दा कैसे है और तुम उस अलमीरा में कैसे कैद हो गयी.

मेरी बात को सुन कर शालिनी उदास हो गयी वो वही उदासी में मुझे बताना सुरु किया.

शालिनी- जब इन लोगो ने मुझे मर कर फांसी पर लटका दिया तब मेरी आत्मा मेरे शरीर से निकल गया था मेरे मन में इन दोनों से प्रतिशोध लेने की भावना आने लगी इस लिए मई इन लोगो को मरने के लिए इन्हे खोजने लगी लेकिन मेरी मृत्यु इस गर्ल्स हॉस्टल में होने के कारन मई यही पर बांध कर रह गयी थी मई इस हॉस्टल को छोड़ कर बहार नहीं जा सकती थी ऐसे hi एक दिन मेरी नजर इस कमलेश पर गयी तो मई इसे मरने के लिए इसके पास गयी और जब मई इसे मरने वाली थी तभी मुझे ये एहसास हुआ की इसने अपने शरीर पर एक ताबीज बांध कर रखा हुआ है जिसके कारन मई इसे छू नहीं पायी मई हमेशा इसे किसी न किसी तरह से मरने की कोशिश करती लेकिन ये बार बार बच जाता इस लिए मेरे मन में इसके प्रति और गुसा बढ़ता जा रहा था ऐसे hi एक दिन घुसे में मई इसके सामने आ गयी और इस्पे हमला कर दिया लेकिन ये फिर से अपने ताबीज के कारन मेरे हमले से बच गया लेकिन इसे मेरे होने का पता चल गया था इस लिए ये विकाश को साडी बाटे बताता है फिर दोनों मिल कर एक दिन एक तांत्रिक को यहाँ पर लेकर आ गए और उस तांत्रिक ने मुझे इस अलमीरा में कैद कर दिया अलमीरा में कैद होने के बाद मई बहुत मायूस हो गयी की अब मई इनसे अपना बदला नहीं ले पाऊँगी इस लिए मुझे धीरे धीरे अब सभी से नफरत होने लगी फिर मई प्राण लिया की मई अब यहाँ पर किसी को नहीं छोडूंगी और फिर मई उस कैद में hi खुद को ताकतवर बनाने लगी और आज मई इतना ताकतवर हु की मई चहु तो अपने एक चुटकी में इस पुरे सोल्लगे को ख़तम कर सकती हु.

शालिनी के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए उससे बोलै.

मई- देखो मन की इन दोनों ने तुम्हारे साथ गलती की है और उसकी सजा भी इन लोगो को मिलेगा लेकिन इसमें इस सोल्लगे के मासूम स्टूडेंट्स और टीचर की क्या गलती है तुम्हारे साथ विकाश और कमलेश ने हैवानियत किया है तो तुम इन दोनों को सजा दो और इस सोल्लगे के मासूम स्टूडेंट्स और टीचर को छोड़ दो अगर तुम मेरी बात मानाने के लिए तैयार हो तो मई तुम्हे अपने कैद से आजाद कर सकता हु.

मेरी बात को सुन कर शालिनी खुस होते हुए बोली.

शालिनी- मई भी नहीं चाहती हु की मेरे हाथ से किसी मासूम को जान जाये मई तो बस इस कमलेश और उस विकाश को तड़पा तड़पा कर मरना चाहती मई इन्हे उस दर्द का एहसास दिलाना चाहती हु जो दर्द इन दोनों ने मुझे दिया है.

शालिनी के बात सुन कर मई उसे अपने गंभीर आवाज में बोलै.

मई- ठीक है मई तुम्हे अपने कैद से आजाद कर रहा हु लेकिन मेरी बात यद् रखना अगर तुमने कमलेश और विकाश को छोड़ कर किसी और को कोई भी नुकशान पहुंचाया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.

इतना बोल कर मई उसे अपने कैद से आजाद कर दिया इसके बाद मई अपने घेरे से कमलेश के पास गया और उसे हाथ में बंधे हुए ताबीज की निकल दिया इसके बाद मई कमलेश को अपने घेरे से निकल कर शालिनी के पास फेक दिया जैसे hi कमलेश शालिनी के पास गया तो शालिनी उसे अपने शक्तियों से पकड़ पर हवा में उठा लिया और उसे एक दिवार पर फेक दिया जिसके कारन कमलेश उड़ता हुआ एक दिवार से टकरा कर निचे गिर गया जिसके कारन उसके मुँह से खून निकलने लगा और वो दर्द से छिलने लगा वो दर्द से छीलते हुए अपने दोनों हाथ जोड़ कर शालिनी से बोलै.

कमलेश- प्लीज मुझे माफ़ कर दो अब मई दोबारा ऐसी गलती कभी नहीं करूँगा मुझे मरना नहीं है प्लीज मुझे माफ़ कर दो.

कमलेश के दर्द भरी आवाज सुन कर शालिनी किसी शैतान की तरह हस्ते हुए बोली.

शालिनी- है है है है मई तुम छोड़ दू है है है क्या मेरी मिनट करने के बाद भी तुम दोनों ने मुझे छोड़ा था नहीं न तो फिर मई तुम्हे कैसे छोड़ दू तुझे इस तरह से तड़पते हुए देख कर मेरी आत्मा को बहुत सुकून मिल रहा है.

इतना बोल कर शालिनी कमलेश को फिर से हवा में उठा लेता है है और उसे दूसरी तरफ फेक देता है इस बार कमलेश रूम में रखे हुए टेबल और कुर्सी पर गिरता है जिससे उसे और भी छोटे आयी है लेकिन इतना चोट लगने के बाद भी कमलेश अपने दर्द के परवाह न करते हुए शालिनी के पास घुटनो के बल बैठ कर गिड़गिड़ाते हुए बोलता है.

कमलेश- प्लीज मुझे माफ़ कर दो मई उस कमीने विकाश के बातो में आ गया था इन सब के पीछे उस विकाश का हाथ था अगर तुम किसी को सजा देना चाहती हो तो विकाश को दो.

कमलेश के बात सुन कर शालिनी कुछ सोचने लगी और फिर वो कमलेश से बोली.

शालिनी- ठीक है तुम अगर दर्दनाक मौत नहीं मरना चाहते हो तो विकाश को यहाँ किसी भी बहाने से बुलाओ लेकिन यद् रखना अगर वो यहाँ नहीं आया तो मई तुम्हे तड़पा तड़पा कर मरूंगी.

शालिनी के बात सुन कर कमलेश बड़बड़ाते हुए अपने पॉकेट से मोबाइल निकलता है और विकाश को कॉल लगता है थोड़ी देर रिंग जाने के बाद विकाश कॉल रइवे करता है और बोलता है.

विकाश- है कमलेश बोलो आज तुम मुझे कैसे यद् किया.

विकाश के बात सुन कर कमलेश अपने दर्द को छुपाते हुए विकाश से बोलै.

कमलेश- विकाश भाई आज मैंने गर्ल हॉस्टल में एक लड़की को बुलाया है अगर आप मजा लेना चाहते है तो यहाँ आ जाइये.

कमलेश के बात सुन कर विकाश खुश हो जाता है है और वो कमलेश से बोलता.

विकाश- वह यार तुमने तो दिल खुस कर दिया है है है तुम वही रुको मई वह 10 मिनट में पहुँचता हु.

इतना बोल कर विकाश कॉल कट कर दिया इधर जब मैंने विकाश के बात सुना तो मेरे मुँह से बरबस hi निकल गया.

मई- साला कमीना कही का ऐसे लोगो को तो मर जाना hi इस दुनिया के लिए बेहतर है.

मेरी बात को सुन कर प्रिंसिपल भी अपने है में हिलाते हुए बोले.

प्रिंसिपल- है तुमने सही बोलै अगर मेरा बैश चले तो मई ऐसे लोगो को बिच चौराहे पर गोली मर दू.

इधर जब विकाश वह आने के लिए बोलै तो शालिनी खुस होते हुए मुझसे बोली.

शालिनी- है है है आ रहा है वो कमीना अब मई उसे भी वैसे दर्दनाक मौत दूंगी जैसे उसने मुझे दिया था तुम इन लोगो को यहाँ से ले कर चले जाओ मई इन दोनों से अपना हिसाब अकेले में पूरा करना चाहती हु.

शालिनी के बात सुन कर मई अपना गर्दन है में हिलाया और वह से सबको लेकर जाने लगा तभी कमलेश रट हुए प्रिंसिपल से बोलै.

कमलेश- प्लीज प्रिंसिपल सर आप मुझे यहाँ उसके पास अकेले छोड़ कर मत जाइये ये मुझे मर डालेगी और मई अभी मरना नहु चाहता प्लीज आप मुझे बचा लीजिये अब आप मुझे जो भी बोलेंगे मई वही करूँगा लेकिन प्लीज आप मुझे बचा लीजिये.

कमलेश के बात सुन कर प्रिंसिपल घुसे से अपना डट पिस्टे हुए उससे बोले.

प्रिंसिपल- मई तुम्हे बचा लू है है है क्या मजाक है तुमने इस लड़की के साथ जो किया उसके बाद भी तुम बोल रहे हो की मई तुम्हे बचा लू तुम जैसे इंसान को जितना दर्दनाक मौत मिले उतना काम है और है तुम इसके पास अकेले नहीं रहने वाले वो कुछ देर बात तुम्हारा साथी विकाश भी यहाँ आने वाला है दोनों साथ में अपने मौत का इंजॉय करना (फिर शालिनी से) बेटी हो सके तो मुझे माफ़ कर देना क्युकी कुछ गलती तो मेरी भी है की मई अपने सोल्लगे में इसके जैसे दरिंदे को रखा था.

प्रिंसिपल के बात सुन कर शालिनी उनसे बोली.

शालिनी- इसमें आपकी कोई गलती नहीं है सर आप थोड़े न जान रहे थे की ये किस तरह का आदमी है है और वैसे भी मई जानती हु की आप अपने सोल्लगे के लड़कियों को अपनी बेटी hi समझते है मैंने देखा है की आप किसी गरीब लड़की को कितना सपोर्ट करते है.

शालिनी के बात सुन कर प्रिंसिपल बोले.

प्रिंसिपल- फिर भी बेटी मुझे माफ़ कर देना क्युकी गलती मेरी हो या न हो लेकिन तुम मेरी सोल्लगे के स्टूडेंट थी और तुम्हारी सेफ्टी की जिमेवारी मेरी थी और मई तुम्हारी रक्षा नहीं कर पाया.

इतना बोल कर प्रिंसिपल वह से चले जाते है उनके जाने के बाद मई निधि और गॉर्ड के साथ निचे जाने लगता हु लेकिन जाते जाते मई शालिनी को बोलता हु.

मई- शालिनी तुम मेरी एक बात मानोगी.

शालिनी- तुमने मेरी बहुत मदत की है इस लिए मई तुम्हारा बात मानाने के लिए तैयार हु लेकिन अगर तुम इन दोनों को छोड़ने के लिए बोलोगे तो ये मई नहीं कर सकती.

मई- मई तुम्हे उन लोगो को छोड़ने के लिए नहीं बोल रहा हु मई बस तुमसे ये चाहता हु इन दोनों के करतूत पूरी दुनिया के सामने आये जिससे आम जनता और खास कर के लड़किया इन जैसे दरिंदो से सावधान हो जाये.

मेरी बात को सुन कर शालिनी कुछ सोच में पद गयी फिर वो थोड़ी देर सोचने के बाद बोली.

शालिनी- तुम बोल तो सही रहे हो लेकिन इन लोगो के सचाई दुनिया के सामने कैसे आएगा.

मई- तुम इन दोनों को इतना डरा दो की ये दोनों मीडिया वालो के सामने अपना गुनाह काबुल करने के लिए तैयार हो जाये और जब ये दोनों अपना गुनाह काबुल कर ले तो तुम इन दोनों को वही सबके सामने मर देना इससे इन दोनों के मर्डर का शक भी किसी पर नहीं जायेगा अगर तुम इन दोनों को यहाँ अकेले में मरती हो तो बेचारा प्रिंसिपल पहाड़ जायेगा.

मेरी बात को सुन कर शालिनी मुझसे बोली.

शालिनी- ठीक है मई तुम्हारी बात मानाने के लिए तैयार हु लेकिन तुम्हे भी मेरा एक काम करना होगा.

मई- है बोलो अगर मेरी बस में होगा तो मई जरूर करूँगा.

शालिनी- ठीक है पहले मई अपना बदला ले लू इसके बाद मई तुमसे बात करुँगी अब तुम जा सकते हो.

मई- ठीक है.

इतना बोल कर मई और निधि वह से निकल कर सीधा प्रिंसिपल के केबिन में आ जाते है इधर जो गॉर्ड गर्ल्स हॉस्टल के बाथरूम में कैमरा ढूंढने के लिए गए थे वो भी आ चुके थे और वो लोग अपने साथ में बहुत सरे कैमरा लेकर आये थे जिससे हमलोग समझ गए की शालिनी जो बोल रही थी वो सच बोल रही थी उनके हाथो में कैमरा देख कर प्रिंसिपल बोले.

प्रिंसिपल- ये कमलेश कितना कमीना इंसान था मई तो जनता था की ये थोड़ा बत्तमीज है लेकिन मई ये नहीं जनता था की ये इतना गठिया इंसान होगा मुझे तो पहले अफ़सोस हो रहा था की शालिनी उसे जान से मर देगी लेकिन अब ये सब देखने के बाद मुझे खुसी hi रही है की मेरे सोल्लगे से एक ऐसे इंसान को खत्म hi जायेगा जो इंसान कहलाने के लायक भी नहीं है.

इधर विकाश कॉलेज के पास आ चूका था फिर उसने अपना गाड़ी कॉलेज के बहार कड़ी की और सोल्लगे के अंदर आ गया सोल्लगे के अंदर आने के बाद वो सीधा गर्ल्स हॉस्टल के पास पहुंच गया और कमलेश को कॉल लगाया थोड़ी देर कॉल जाने के बाद कमलेश उसका कॉल रइवे किया और उसे 2ंद फ्लोर पर आने के लिए बोलै कमलेश के बात सुन कर वो जैसे hi 2ंद फ्लोर पर आया तो अचानक उसे किसी अदृस्य शक्ति ने पकड़ कर शालिनी वाले रूम में फेक दिया.

जैसे hi वो शालिनी वाले रूम में आया तो वो दर गया और वो सोचने लगा की वो यहाँ पर कैसे आ गया तभी उसकी नजर कमलेश पर गया जो अधमरी हालत में वही पड़ा हुआ था कमलेश को ऐसी हालत में देख कर वो दर गया उसे समझ में आ गया की यहाँ पर कुछ न कुछ गड़बड़ है इस लिए वो उठ कर दरवाजे के तरफ भागने लगा लेकिन वो जैसे hi दरवाजे के पास पंहुचा तो वो दरवाजा अपने आप बंद हो गया तभी वह पर एक लड़की के डरावनी आवाज उसे सुनाई दिया.

आवाज- इतनी भी क्या जल्दी है जाने की विकाश पहले मुझसे तो मिल लो.

विकाश जैसे hi उसे आवाज को सुना तो उसकी दर से हालत ख़राब हो गयी वो अपने जगह पर दर से थार थार कम्प रहा था हलाकि उसे पता नहीं चला था की ये आवाज किसकी है लेकिन वो आवाज hi इतनी डरावनी थी की उसे सुनते hi विकाश अपना पेंट गीली कर चूका था फिर वो डरते डरते इस आवाज वाले से बोलै.

विकाश- कककक कोण हो तत्तत तुम आए और ममम मुझे यह कक्क क्यों रोके हुए हो.

विकाश के दर भरी आवाज सुन कर शालिनी जोर से हस्ते हुए बोली.

शालिनी- है है है है तुम मुझे पहचाने नहीं तुम मेरे साथ ऐसे कैसे कर सकते हो मई तो तुम्हारी जानेमन थी न है है है है.

शालिनी के बात सुन कर विकाश डरते हुए बोलै.

विकाश- ददद देखो तट तुम मुझे इस तरह से डरा नहीं सकती तट तुम जो कोई भी सामने आओ नहीं तो मुझे यहाँ से जाने दो.

विकाश के बात सुन कर शालिनी और तेज़ आवाज में हस्ते हुए बोली.

शालिनी- है है है तो तुम मुझे अपने सामने बुलाना चाहते हो तो ठीक है मई भला अपने तुम्हे कैसे इंतजार करवा सकती हु.

इतना बोल कर शालिनी विकाश के सामने प्रकट हो गयी जैसे hi विकाश के नजर शालिनी पर गया वो जोर से चीखते हुए पीछे हुआ जिससे उसका बैलेंस सही से नहीं बना और वो निचे गिर गया फिर वो डरते हुए शालिनी से बोलै.

विकाश- सससस शालिनी तत्तत तुम न्नन्न नहीं नहीं ये तुम नहीं हो सकती तुम तो उस अलमीरा में बंद थी न तो तुम बहार कैसे आयी (फिर वो कमलेश के तरफ देखते हुए) वो तो ये सब तुम्हारा चल था तुम मुझे मरना चाहते हो लेकिन तुम ये कैसे भूल गए की इसके साथ मई जो भी किया था उसमे तुम भी शामिल थे और ये मेरे साथ तुम्हे भी नहीं छोड़ेगी.

विकाश के बात सुन कर कमलेश अभी उसका जबाब देता उससे पहले hi शालिनी उससे बोली.

शालिनी- बस बहुत हो गयी बाटे अब तुम मरने के लिए तैयार हो जाओ.

शालिनी के बात सुन कर विकाश दर जाता है और वो डरते हुए शालिनी से बोलता है.

विकाश- देखो देखो तट तुम मुझे नहीं मर सकती ममम मई मई मरना नहीं चाहता प्लीज मुझे माफ़ कर दो.

विकाश के बात सुन कर शालिनी जोर जोर से हस्ते हुए अपने भयंकर आवाज में बोली.

शालिनी- है है है गिड़गिड़ा और गिड़गिड़ा तुम्हे इस तरह से अपनी जान के भीख मंगाते देख कर मुझे सुकून मिल रहा है तुम्हे पता तो होगा hi की मई भी तुम दोनों के सामने ऐसे hi अपनी इज्जत के लिए भीख मांग रही थी लेकिन तुम दोनों दरिंदो ने मुझ पर थोड़ा भी रहम नहीं किया अब तुम दोनों मरने के लिए तैयार हो जाओ.

इतना बोल कर शालिनी विकाश और कमलेश दोनों को अपने शक्तियों से उठा उठा कर पटाने लगी जिससे दोनों का हालत ख़राब हो जाता है दोनों के पूरा शरीर खून से लाल हो गया था लेकिन शालिनी इतने पर भी नहीं रुकी वो अपने शक्तियों से 2 राशि बनाई और दोनों के गले में दाल कर उन्हें ऊपर उठा दी जिसके कारन दोनों छटपटाने लगे.

उस राशि से दोनों के गाला कस्ते जा रहा था जिसके कारन दोनों के चेहरा लाल होने लगा और दोनों के आँखे बहार निकलने लगा वो लोग कभी भी मर सकते थे ये देख कर शालिनी उन दोनों को छोड़ देती है जिससे वो दोनों निचे गिर जाते है निचे गिरने के बाद दोनों लम्बी लम्बी ससे लेने लगते है उन दोनों के ऐसी हालत को देख कर शालिनी जोर जोर से हस्ते हुए अपने भयंकर आवाज में बोली.

शालिनी- है है है नहीं नहीं तुम दोनों को मई इतनी आसान मौत नहीं दूंगी मई तुम दोनों को पहले तड़पा तड़पा कर अपना मनोरंजन करुँगी इसके बाद आहिस्ता आहिस्ता मरूंगी है है है है.

शालिनी के बात सुन कर दोनों के हालत और भी ख़राब हो जाते है फिर दोनों अपने घुटनो के बल बैठ कर शालिनी से अपनी गलतियों के बार बार माफ़ी मांगने लगते है जिसे देख कर शालिनी मुस्कुराते हुए बोलती है.

शालिनी- अच्छा ठीक है अगर तुम दोनों को मरना नहीं है तो तुम दोनों मीडिया को यहाँ बुलाओ और आज तक तुमने जो भी गलतिया की है उसे उनको बताओ इसके बाद मई तुम्हे छोड़ने के बारे में सोच सकती हु.

शालिनी के बात सुन कर दोनों खुस हो जाते है फिर विकाश तुरंत अपने मोबाइल से मीडिया को कॉल कर के सोल्लगे में बुलाता फिर करीब आधे घंटे बाद मीडिया वाले वह पर आ जाये है उनके आने के बाद विकाश और कमलेश मीडिया वालो को वो सब बताते है जो उनलोगो ने आज तक किया था फिर वो शालिनी के बारे में भी बताते है जिसे सुन कर मीडिया वालो को भी उन दोनों पर बहुत गुसा आता है लेकिन वो लोग कुछ कर नहीं सकते थे जब विकाश और कमलेश ने जब अपना सारा गुनाह काबुल कर लिया तो वह पर एक भयंकर आवाज चारो तरफ गूंज गयी ये आवाज किसी और की नहीं बल्कि शालिनी की थी.

शालिनी- मई शालिनी आज आप सभी लोगो के सामने इन दोनों दरिंदो को मेरी इज्जत लूट कर मुझे जान से मरने के सजा दूंगी और आप सब यहाँ जो कुछ भी होगा उसे लाइव दिखाएंगी मई चाहती हु की इन दोनों दरिंदो के अंजाम देख कर लोग ऐसी गलती करने से पहले अपने अंजाम के बारे में सोच ले.

जैसे hi शालिनी के आवाज वह गुंजी हम सबने शालिनी की आवाज को सुन कर प्रिंसिपल के केबिन से निकल कर बहार आ गए और वह के दृस्य को देखने लगे इधर शालिनी अपनी बात बोलने के बाद हवा में प्रकट हुयी जिसे देख कर वह मौजूद सरे मीडिया वालो के हालत ख़राब हो गयी वो लोग दर से थार थार कपङे लगे उनको डरता हुआ देख कर शालिनी उनसे बोली.

शालिनी- आप लोगो को मुझसे डरने की जरुरत नहीं है मई यहाँ पर किसी को कोई भी नुकसान नहीं पहुचाउंगी बल्कि मई यहाँ अपने दोनों मुजरिमो सजा दूंगी और आप सब उसे लाइव जनता को दिखाएंगी.

शालिनी के बात सुन कर सरे मीडिया वाले थोड़ी रहत की साँस ली और वह को भी हो रहा था उसे रिकॉर्डिंग करने लगे इधर शालिनी अपनी बात बोलने के बाद अपने शक्ति से दो रसिया प्रकट की और कमलेश और विकाश के गले में दाल कर उन दोनों को हवा में झूला दी थोड़ी देर तक दोनों वैसे हवा में लटके रहे जिसके बाद दोनों के जान चले गए जब दोनों मरे गए तो शालिनी उन दोनों को छोड़ दी और वह से गायब हो गयी उसको वह से जाने के बाद धीरे धीरे मीडिया वाले भी वह से चले गए.

मीडिया वालो को वह से जाने के बाद शालिनी फिर से वह प्रकट हुयी और मेरे पास आ कर मुझसे अपने दोनों हाथ जोड़ कर बोली.

शालिनी- बहुत बहुत सुक्रिया आपका अगर आप न होते तो मई उस अलमीरा में कैद हो कर अपने बदले की आगे में जलती रहती.

मई शालिनी के बात सुन कर मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- इसमें सुक्रिया की क्या बात है ये तो मेरा फ़र्ज़ था.

मेरी बात सुन कर शालिनी इमोशनल हो गयी फिर वो खुद को सँभालते हुए बोली.

शालिनी- ये तो आपकी बड़ापन है की आप मेरी इतनी बड़ी मदत करने के बाद भी उसका श्रेय नहीं ले रहे है अब आपसे मेरी एक और रिक्वेस्ट है की आप मुझे इस प्रेत योनि मुक्ति दिला दे.

शालिनी के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- ठीक है मई तुम्हे इस प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने में मदत कर देता हु और मई भगवन से प्राथना करूँगा की जल्द hi तुम्हे पुनर जनम मिले और इस जनम में जो तुम दुःख झेली हो वो अगले जनम में न खेलो.

इतना बोल कर मई कुछ मंत्र बढ़ पर हवा में एक आग का सर्किल बना दिया और शालिनी को उस सर्किल में जाने के लिए बोलै मेरी बात को सुन कर शालिनी उस सर्किल में प्रवेश कर गयी जैसे hi वो उस सर्किल में प्रवेश की तो वो एक रौशनी में बदल कर आसमान में गायब हो गयी.

शालिनी को गायब होने के बाद मई प्रिंसिपल के पास गया और उनसे बोलै.

मई- सर मई आपके सोल्लगे के प्रॉब्लम को सोल्वे कर दिया है अब आप अपना सोल्लगे ओपन कर सकते है.

मेरी बात को सुन कर प्रिंसिपल मेरे आगे अपना हाथ जोड़ते हुए बोले.

प्रिंसिपल- आपका बहुत बहुत सुक्रिया प्रतिक जी अपने आज मुझ पर और मेरे सोल्लगे पर बहुत बड़ा एहसान किया है अगर आप न होते तो न जाने यहाँ पर कितने बचो की जाने जाती मई आपका ये एहसान जिंदगी भर नहीं भूलूंगा अगर किसी भी चीज की जरुरत हो तो आप एक बार बस मुझे यद् कीजियेगा.

मई- अरे नहीं प्रिंसिपल सर मई आप पर कोई एहसान नहीं किया है बल्कि आपने ये काम मुझसे करवा कर मेरे हाथो से एक पुण्य का काम करवा दिया आज मुझे इस लड़की की मदत कर के जितना खुसी मिली है उतना मुझे किसी और काम से कभी नहीं मिली इस लिए आपको और निधि को मुझे यहाँ बुलाने के लिए स्पेशल थैंक्स आप दोनों अगर मुझे यहाँ नहीं बुलाते तो मई एक पुण्य का काम करने से चूक जाता.

मेरी बात को सुन कर प्रिंसिपल और निधि के मन में मेरे लिए और इज्जत बढ़ गयी अभी उन दोनों में से कोई मेरी बात का जबाब देता उससे पहले hi मई प्रिंसिपल से बोलै.

मई- सर अब मुझे आज्ञा दीजिये मुझे और भी कुछ काम है.

मेरी बात को सुन कर प्रिंसिपल थोड़ा मायूस होते हुए बोले.

प्रिंसिपल- अरे आप इतनी जल्दी जाना चाहते है मई सोच रहा की आज हम सब साथ में डिनर करेंगे.

प्रिंसिपल के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए उनसे बोलै.

मई- अरे नहीं हम डिनर किसी और दिन करेंगे मुझे किसी जरुरी काम से कही जाना है इस लिए मुझे इजाजत दीजिये.

प्रिंसिपल- ठीक है अगर आपको कोई जरुरी काम से कही जाना है तो मई आपको नहीं रोकूंगा लेकिन है जब आप वापस लौटेंगे तो आपको मेरे साथ डिनर करना होगा.

मई- ठीक है मई आपसे वडा करता हु की जब मई वापस लौटूंगा तो आपके साथ डिनर जरूर करूँगा.

इतना बोलने के बाद मई निधि को चलने का इशारा करता हु और वह से निकल जाता हु रस्ते में मई निधि से बोलता हु की वो मुझे हॉस्पिटल के पास hi छोड़ दे थोड़ी देर बाद हम दोनों हॉस्पिटल के पास पहुंच जाते है इसके बाद निधि मुझे हॉस्पिटल के पास छोड़ देती है है और मुझे बी बोल कर वह से चली जाती है.

निधि के जाने के बाद मई भी हॉस्पिटल के अंदर चला जाता हु जहा पर मुझे शनाया और शनाया के माँ दोनों मिल जाते है मुझे दोनों वह पर आये हुए देख कर खुस हो जाते है.

मई- माँ अब डैड की तबियत कैसी है.

मेरी बात सुन कर माँ मुझसे बोली.

पुस्पा- वो अब ठीक है डॉक्टर बोल रहे थे की कल तक उनको डिस्चार्ज मिल जायेगा.

मई- ये तो अच्छी बात है (फिर कुछ सोचते हुए) माँ और शनाया मुझे आप दोनों से कुछ बताना था.

मेरी बात को सुन कर शनाया मुझे देखती हुयी बोली.

शनाया- है बोलो क्या बात करनी है.

मई- वो बात दरअसल ऐसी है की मुझे कुछ दिनों के लिए सिटी से बहार जाना है.

मेरी बात सुन कर दोनों चौक जाते है फिर माँ मुझसे बोलती है.

पुस्पा- ये अचानक तुमने कहा जाने का प्लान बना लिया.

माँ के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- माँ आप तो जानती है की मई एक आयुर्वेदिक डॉक्टर हु तो मुझे किसी के इलाज करने के लिए जाना है.

मेरी बात सुन कर शनाया मुझसे बोली.

शनाया- तुम्हे किसकी इलाज करने के लिए जाना है और क्या तुम्हे वह जाना जरुरी है वो यहाँ पर नहीं आ सकते है क्या.

मई- नहीं वो यहाँ पर नहीं आ सकते है दरअसल उनकी कंडीशन इतनी ख़राब है की वो ट्रेवल नहीं कर सकते है.

शनाया- वो ऐसी बात है तो फिर ठीक है लेकिन तुम वह कितने दिन लग जायेंगे.

शनाया के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- मुझे वह पर शायद दो या तीन दिन लग सकते है.

शनाया- कब निकलना है.

मई- आज शाम में निकलूंगा.

शनाया- ठीक है.

मई- वैसे मई अभी जा रहा हु मुझे जाने से पहले कुछ काम करने है आप दोनों डैड का ख्याल रखियेगा और है मई 1 घंटे के बाद घर पर hi मिलूंगा.

इतना बोल कर मई हॉस्पिटल से बहार आ गया जब मई बहार आया तो देखा की हॉस्पिटल के गेट के पास बलदेव सिंह मेरा इंतज़ार कर रहा था दरअसल मई बलदेव को पहले hi मस्सगे कर के यहाँ आने के लिए बोल दिया था.

इसके बाद मई बलदेव के गाड़ी में बैठता हु और उसे हवेली चलने के लिए बोलता हु मेरी बात को सुन कर बलदेव गाड़ी स्टार्ट करता है और हम दोनों हवेली के लिए निकल जाते है.

दरअसल मई हवेली इस लिए जा रहा था की मई अपने दोस्तों को वह पर ला सकू ताकि मई जब यहाँ न राहु तो वो लोग शालिनी और उसके परिवार के रक्षा कर सके इस लिए मई तुरंत रोहन को कॉल लगा दिया थोड़ी देर कॉल जाने के बाद रोहन कॉल रिसीव किया और बोलै.

रोहन- हैल्लो है भाई कैसे हो.

मई- मई ठीक हु रोहन तुम बता.

रोहन- बस जैसे तुम मुझे छोड़ कर गए थे वैसा hi हु.

मई- एयर बाकि सब कैसे है.

रोहन- यहाँ सरे लोग ठीक है पहले तुम मुझे ये बताओ की तुम आज मेरे पास कॉल कैसे कर दिए

मई- बस भाई तुम लोगो की यद् आ रही थी इस लिए कॉल कर लिया.

रोहन- अच्छा मुझे तो ऐसा नहीं लगता अब चल छोड़ ये सब बात और बता की क्यों कॉल किया है कोई काम था क्या.

मई- मई बस तुम लोगो को ये बोलने के लिए कॉल किया था की तुम सब अपना अपना सामान पैक कर लो मई कुछ देर बाद वह आऊंगा और तुम लोगो को अपने साथ यहाँ पर ले आऊंगा अब से तुम लोग वह पर नहीं बल्कि यहाँ पर रहोगे और यही से अपना सारा काम देखोगे.

मेरी बात को सुन कर रोहन खुस हो गया और वो खुसी से बोलै.

रोहन- क्या तुम सच बोल रहे हो क्या हम सब साथ में रहेंगे.

मई रोहन के बात सुन कर कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- हम सब साथ में तो नहीं रहेंगे लेकिन है यहाँ पर मई तुम लोगो से डेली मिलूंगा और तुम सब को तुम्हारी भाभी से भी मिलवा दूंगा.

रोहन- (खुसी से) ये तो बहुत अच्छी बात है वैसे तुम हमें लेने के लिए कब आ रहे हो क्युकी मुझे सबको रेडी रहने के लिए बोलना होगा.

मई- तुम उन लोगो को बोलो की जितना जल्दी हो सके सब रेडी हो जाये मई वह पर आधा घंटा में पहुँचूँगा.

रोहन- ठीक है भाई मई सब को बोल देता हु.

इतना बोल कर रोहन कॉल कट कर देता है इधर मई भी हवेली पहुंच जाता हु हवेली पहुंचने के बाद मई गाड़ी से उतर कर बलदेव से बोलता हु.

मई- बलदेव तुम अब जा सकते हो मुझे यहाँ पर कुछ काम है.

बलदेव- Ok बॉस.

मई- और है बलदेव मई कुछ दिनों के लिए सिटी से बहार जा रहा हु तब तक तुम्हे मेरी फॅमिली का 24 हॉर्स शाफेट्य देना है मुझे दर है की मंटू यादव जरूर कुछ न कुछ करेगा क्युकी उसे अब तक पता चल गया होगा की उसके खिलाफ सरे साबुत मीडिया को मैंने दिया था.

बलदेव- बॉस आप बेफिक्र हो कर जाइये मई यहाँ पर सब संभल लूंगा मेरे रहते आपके फॅमिली को कोई छू भी नहीं सकता है.

मई- गुड मुझे तुमसे यही उम्मीद थी (फिर अपने स्टोरेज रिंग से लेवल उप पिल 💊 निकल कर बलदेव को देते हुए) बलदेव मई देख प् रहा हु की तुम्हारी लेवल बढ़ कर लेवल 9 हो गया है इस लिए तुम ये पिल 💊 लो और इसे खा कर प्रैक्टिस करो तुम आज hi हाफ ग्रांडमास्टर के लेवल पर ब्रेकथ्रू कर लोगे.

मेरी बात को सुन कर कर बलदेव मेरे हाथ से वो पिल 💊 ले लेता है और खुस होते हुए मुझसे बोलता है.

बलदेव- आपका बहुत बहुत धन्यवाद् बॉस.

इतना बोल कर बलदेव गाड़ी स्टार्ट करता है और वह से निकल जाता है उसके जाने के बाद मई हवेली के अंदर जाता हु और वह पर एक पोर्टल बना कर सीधा रोहन के पास पहुंच जाता हु.
 
अपडेट 36

अपडेट पोस्टेड गाइस मस्ती में बढ़ने का और लिखे और कमेंट पेलने का

और है दोस्तों कुछ लोग है यहाँ पर जो अफवाह फैला रहे है की राइटर भाग गया और ये स्टोरी अधूरी रह गयी आप लोगो से रिक्वेस्ट है की ऐसे लोगो के बातो को इग्नोर करे मई जब बोल दिया है की ये स्टोरी पूरी करूँगा तो जरूर करूँगा बस आप लोग पेशेंस रखे धन्यवाद्
 
अपडेट 37

राठौर आइसलैंड
बलदेव के जाने के बाद मई भी हवेली में आ गया था हवेली में आने के बाद मई एक पोर्टल तैयार किया और पहुंच गया अपने दोस्तों के पास जहा पर रोहन कारन दीपक दीप्ती और संध्या मेरा इंतज़ार कर रहे थे जैसे hi मई वह पंहुचा तो मुझे वह पर देख कर सब खुस हो गए और मुझे सबने बरी बरी से गले लगाया सबसे गले मिलने के बाद मई सबको देखते हुए बोलै.

मई- तो क्या तुम रेडी हो यहाँ से चलने के लिए.

मेरी बात को सुन कर कारन कुछ सोचते हुए बोलै.

कारन- है हम सब रेडी है लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा है की हम सब वह से अपने बिज़नेस को कैसे संभालेंगे क्युकी तुम जहा रहते हो वो जगह यहाँ से बहुत दूर है और हमारी कार भी यही पर रहेगा तो हम यहाँ आएंगे जायेंगे कैसे.

Mai-Uske लिए तुम्हे चिंता करने की जरुरत नहीं है तुम सब अपने आदमियों को वह का अड्रेस दे देना वो लोग गाड़ी वह पर पंहुचा देंगे अब जल्दी करो मुझे कही जाना है इस लिए मई लेट हो रहा हु.

मेरी बात को सुन कर दीप्ती मुस्कुराते हुए बोली.

दीप्ती- हम सब रेडी है बस तुम hi लेट कर रहे हो.

मई दीप्ती के बात सुन कर उस पोर्टल के अंदर चला गया मेरे जाने के बाद मेरे रस्ते दोस्त भी उस पोर्टल के अंदर चले गए फिर कुछ देर बाद हम सब हवेली के अंदर पहुंच गए थे जब सरे लोग हवेली के अंदर आये तो हवेली क्र सुंदरता देख कर सब हैरान हो गए और ध्यान से उसे देखने लगे तभी शंध्या खुस होते हुए बोली.

शंध्या- क्या आज से हम सब यहाँ रहने वाले है.

मई- है आज से तुम सब यही पर रहने वाले हो.

मेरी बात को सुन कर दीप्ती खुस होते हुए बोली.

दीप्ती- वाओ कितना सुन्दर हवेली है मुझे यकीं hi नहीं हो रहा है की हम यहाँ रहने वाले है.

दीप्ती के बात सुन कर रोहन भी उसके है में है मिलते हुए बोलै.

रोहन- है तुम सही बोल रही हो ये हवेली बहुत सुन्दर है.

उन सब की बाटे सुन कर मई मुस्कुराते हुए उनसे बोलै.

मई- अरे अब से तुम सब यही रहने वाले हो इस लिए इस हवेली के जितनी भी तारीफ करना है वो बाद में कर लेना मई पहले तुम लोगो को यहाँ पर लेन का कारन बता देता हु.

मेरी बात को सुन कर दीपक जो कब से चुप चाप सबके बाटे सुन रहा था वो बोलै.

दीपक- इन लोगो को छोडो भाई ये तो ऐसे hi गैप सैप करते रहेंगे तुम मुझे बताओ की हमें यहाँ पर लेन का कारन क्या है.

मेरी और दीपक की बाटे सुन कर सब संत हो गए और मेरे बोलने का इंतज़ार करने लगे.

मई- देखो मेरा इस हवेली को लेने का एक कारन है मई चाहता हु की यहाँ पर मई एक मैरिटल आर्ट्स स्कूल बनाऊ और मार्टिकल आर्ट्स योद्धाओ का एक सेना तैयार करू इस लिए मई तुम लोगो को टैलेंटेड बचे को खोजने के लिए बोलै था और यही कारन है की मई तुम लोगो को यहाँ लेकर आया हु मई चाहता हु की तुम लोग यहाँ आने वाले स्टूडेंट्स को मार्टिकल आर्ट्स की ट्रेनिंग दो और उन लोगो को एक योद्धा बनाओ.

मेरी बात सुन कर कारन कुछ सोचते हुए बोलै.

कारन- हम्म तुमने अच्छा सोचा है लेकिन हम इतने सरे लोगो को लाएंगे कहा से और सबसे बदु बात की हम यहाँ पर जिन लोगो को ट्रेनिंग देंगे वो आगे चल कर क्या हमारी बाटे मानेगे और वो लोग क्या हमारा साथ देंगे.

मई- जरूर देंगे क्युकी हमें यहाँ उन लोगो को hi लाना है जो गरीब और अनाथ हो जो लोग गरीब और अनाथ होते है वो ईमानदार भी होते है अगर हम उनको आर्थिक स्थिति में मदत करेंगे और साथ में ट्रेनिंग भी देंगे तो वो लोग हमारी बाटे जरूर मानेगे और वैसे भी हम उन लोगो को अपने फायदे के लिए नहीं बल्कि इस ब्रह्माण्ड को बचने के लिए ट्रेनिंग देंगे.

दीपक- वो सब तो ठीक है लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा है की हम केवल अनाथ और गरीब लोगो hi क्यों भर्ती करेंगे हमें उन लोगो को भी भर्ती करना चाहिए जो दिल के अच्छे हो जो हमेसा सचाई का साथ देते हो चाहे वो गरीब हो या आमिर इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए.

मई दीपक के बात सुन कर कुछ देर तक सोचने के बाद बोलै.

मई- है दीपक तुमने सही बोलै हमें गरीब या आमिर नहीं देखना है हमें बस दिल के अच्छे और सच्चे इंसान को खोजना है चाहे वो गरीब हो या आमिर.

दीप्ती- वो सब तो ठीक है लेकिन हम ये कैसे जानेंगे की वो दिल का बुरा है और कोण दिल का अच्छा है कोण सच्चा है और कोण झूठा है.

मई- हमें ये सब जांचने के लिए एक यहाँ पर स्टूडेंट्स के लिए एक परीक्षा रखना होगा और है यद् रखना यहाँ पर एडमिनिस्ट्रेशन लेने वाले स्टूडेंट्स का उम्र 18 सा 20 साल के बिच होना चाहिए.

रोहन- समझ गया भाई वैसे हम सबने पहले hi 2 हजार के लगभग बचो को धुंध कर रखा हुआ है और उनका उम्र भी यही कोई 18 या 19 साल के बिच होगा.

रोहन के बात सुन कर मई खुश हो गया और उससे बोलै.

मई- गुड बहुत अच्छा काम किया है तुम लोगो ने अब तुम में से कोई एक कल जाकर उन सरे बचो को यहाँ पर ले कर आ जाओ अब से वो सब भी यही पर रहेंगे.

रोहन- ठीक है हम उन लोगो को लेकर यहाँ आ तो जायेंगे लेकिन एक समस्या है.

मई- कैसी समस्या है.

रोहन- हम उन लोगो को यहाँ पर रखेंगे कहा.

रोहन के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- उन सब के रहने की चिंता करने की जरुरत नहीं है तुम लोग आओ मेरे साथ मई तुम लोगो को कुछ दिखता हु.

इतना बोल कर मई वह से हवेली के बैकयार्ड के तरफ जाने लगा मुझे बैकयार्ड के तरफ जाते हुए देख कर वो सब भी मेरे पीछे पीछे आने लगे जब हम बैकयार्ड में पहुंचे तो वह पर औषधियों के गार्डन देख कर सब हैरान हो गए और सभी उन औषधियों को ध्यान से देखने लगे जैसे जैसे उनकी नजर वह पर लगे औषधियों पर जा रही थी वैसे वैसे उन लोगो की आँखे आश्चर्य से फैलते जा रहे थे तभी शंध्या आश्चर्य के साथ उन सब से बोली.

संध्या- अरे यहाँ तो हर वो औषधि मौजूद है जो हमने हिमालय पर देखा था लेकिन ये औषधि यहाँ पर कैसे आयी और आयी तो आयी लेकिन ये यहाँ पर लगी कैसे.

शंध्या के बात सुन कर कारन बोलै.

कारन- अब ये तो हमें प्रतिक hi बताएगा की ये सब औषधि यहाँ कैसे आयी.

मई उन दोनों के बाटे सुन कर मन hi मन सोचा.

मई- (अपने मन में) ये सब इन औषधियों को hi देख कर इतना हैरान है तो मई जिन औषधियों के आगे भ्रम जल लगा कर छुपा दिया है उसे देखते तो इनका क्या हल होता.

मई ये सब अपने मन में hi सोच रहा था लेकिन उन सब से कुछ भी नहीं बोलै फिर हम सब उस गार्डन को पर कर के आगे बढ़ गए जब हम उसे गार्डन के लास्ट में पहुंचे तो वह आगे हवेली का बॉउंड्री था और उसे बॉउंड्री में बहार निकलने के लिए एक दरवाजा लगा हुआ था.


फिर मई उस दरवाजे को खोल कर बहार निकला तो सब मेरे पीछे पीछे hi बहार आ गए जब वो लोग बहार आये तो बहार का नजारा देख कर चौक गए क्युकी बहार में बहुत साडी बिल्डिंग बानी हुयी थी और उन सरे बिल्डिंग के बिच में एक बड़ा सा खली मैदान था मई अपने दोस्तों के चेहरे पर हैरानी वाली भाव देख कर उनसे मुस्कुराते हुए पूछा.

मई- अब बताओ इतने सरे बिल्डिंग में तो वो सब रह सकते है न.

मेरे बात सुन कर दीप्ती अपने हैरानी को काबू करते हुए मुझसे बोली.

दीप्ती- इसमें वो बचे तो क्या अगर हम और बचो को भी ले कर आये तो वो सब भी रह लेंगे.

संध्या- है नहीं तो क्या इसमें हम अगर एक रूम में बचो को रखेंगे तो काम से काम 10 हजार बचे रह लेंगे.

कारन- भाई प्रतिक तुम मुझे एक बात बताओ तुमने ये सब कब कर लिया और ये सब करने के लिए तुम्हारे पास पैसे कहा से आये.

कारन के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए उन्हें सब कुछ बता देता हु की कैसे मई पैसे कमाए फिर हवेली ख़रीदा इसके बाद बलदेव को बोल कर कैसे मई यहाँ के जमीं ख़रीदा और उसपे बिल्डिंग्स बनाई हवेली को रेनेवते करवाया जब मई साडी बात उन लोगो को बताया तो सब मुझे आचार्य से देखने लगे.

इसके बाद मक मई बलदेव को मस्सगे कर के हवेली आने के लिए बोल दिया था और उन लोगो को लेकर हवेली में आ गया वह आने के बाद मई उन सब से बोलै.

मई- मुझे तुम लोगो से एक और काम था.

मेरी बात सुन कर रोहन मुझे घूरते हुए बोलै.

रोहन- लगता है की तुमको मुझे मर खाना है अगर तुम्हे हम सब से कोई काम है तो तुम सीधा बताओ न ऐसे परमिशन लेने की क्या जरुरत है.

रोहन के बात सुन कर मई कुछ देर सोचने के बाद बोलै.

मई- वी बात ऐसी है की मई कुछ दिनों के लिए बहार जा रहा हु और यहाँ पर मेरी फॅमिली अकेले हो जाएगी तो मई चाहता हु की तुम लोग उन सब की शाफ्टी का ध्यान रखो क्या तुम सब ये कर सकते हो.

दीपक- ये भी कोई बोलने वाली बात है तुम्हारी फॅमिली मतलब की हम सब की फॅमिली और अपने फॅमिली के शाफेट्य के लिए हम कुछ भी करेंगे वैसे उन लोगो को शाफेट्य की क्या जरुरत है उनके पास गॉर्ड तो होंगे hi.

दीपक के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- दरसल मुझे यहाँ पर मंटू यादव नाम के गैंगेस्टर से पन्गा हो गया है और मुझे लग रहा है की मई जब यहाँ पर नहीं रहूँगा तो वो मेरे फॅमिली को निशाना बना सकता है इस लिए मई अपने फॅमिली के शाफेट्य को ले कर चिंता में हु.

कारन- तुम चिंता मत करो हम सब के होते हुए भाभी और उनकी फॅमिली पर कोई आंख भी उठा कर नहीं देख सकता.

मई- मुझे तुम सब से यही उम्मीद थी.

रोहन- वैसे प्रतिक भाई तुम हमें भाभी से कब मिलवा रहे हो.

मई- अभी तो मई किसी काम से सिटी से बहार जा रहा हु लेकिन जब मई वापस आऊंगा तो तुम सब को शनाया से जरूर मिलाऊँगा.

अभी हम बात कर hi रहे थे तभी वह पर बलदेव आ गया और आते के साथ मुझसे बोलै.

बलदेव- बॉस मई आ गया आपको कही चलना था क्या.

मई- है मुझे जाना तो है लेकिन मई अकेले hi जाऊंगा मई तुम्हे यहाँ पर इन सब से मिलवाने के लिए बुलाया हु तुम इनसब से मिलो ये सब मेरे फ्रेंड है ये कारन है ये रोहन है ये दीपक है ये दीप्ती है और ये है संध्या आज से ये लोग यही पर रहेंगे (फिर अपने दोस्तों से) और तुम सब इससे मिलो ये है बलदेव ये यहाँ का सारा काम देखता तुम सब ये समझ लो की ये भी मेरा एक दोस्त hi है.

मेरे मुँह से अपने लिए दोस्त सुन कर बलदेव खुस हो गया इधर मई जब उन सब को बलदेव से परिचय करवा दिया तो वो लोग बलदेव से ही हैल्लो करने लगे फिर मई उन सब का ध्यान अपनी तरफ करते हुए बोलै.

मई- बलदेव तुम इन सब को ले जाकर मेरे फॅमिली को और उनके घर को दिखा देना और है आज से ये लोग तुम्हे जो भी बोलेंगे तुम्हे वही करना है.

बलदेव- जी बॉस मई ध्यान रखूँगा.

मई- है और एक बात मई तुम्हे जो गोली दिया है तुम उसे आज hi खा लेना और यही पर रह कर ट्रेनिंग करना ये सब तुम्हारे ट्रेनिंग में मदत कर देंगे आज तुम्हे किसी भी तरह से हाफ ग्रांडमास्टर रैंक में अन्तर करना hi होगा.

बलदेव- ठीक है बॉस आप जैसा बोल रहे है मई वैसा hi करूँगा.

इसके बाद मई अपना मोबाइल निकल कर एक तस्य बुक किया और फिर मई अपने औसधियो के गार्डन में चला गया और अपना भ्रम जल हटा कर अंदर गया और वह से कुछ जड़ी बुटिया लिया इसके बाद वह पर भ्रम जल लगा कर हवेली से बहार आ गया फिर थोड़ी देर बाद वह पर तस्य आ गयी और मई उसमे बैठ कर घर के लिए निकल गया.

यहाँ से हजारो किलोमीटर दूर एक राज्य है जिसका नाम बिहार है बिहार राज्य के राजधानी पटना है पटना एक विक्षित शहर है इस शहर पर 2 परिवारों का राज्य चलता है और उन परिवारों का नाम है चौहान परिवार और कुशवाहा परिवार.

िश शहर में कुशवाहा परिवार का बहुत बोल बाला था क्युकी यहाँ पर कुशवाहा परिवार का बिज़नेस चौहान परिवार से ज्यादा था इस लिए कुशवाहा परिवार no.1 पर आता था और 2ंद no. पे चौहान परिवार आता था कुशवाहा परिवार के लीडर का नाम विनोद कुशवाहा है और विनोद कुशवाहा का एक बीटा है जिसका नाम मृत्युंजय कुशवाहा है विनोद कुशवाहा के एक छोटा भाई भी है जो वाराणसी में रह कर वह बिज़नेस संभालता है और उसके नाम सुरेंद्र कुशवाहा है.

मृत्युंजय कुशवाहा एक मार्टिकल आर्ट्स योद्धा है ये अभी लेवल 9 पर है लेकिन लेवल नाइन hi इस शहर का सबसे बड़ा लेवल है आज तक यहाँ पर 2 लोग hi लेवल 9 पर पहुंचे है पहला है चौहान परिवार का लीडर बसंत चौहान और दूसरा है कुशवाहा परिवार से मृत्युंजय कुशवाहा.

विनोद कुशवाहा और मृत्युंजय कुशवाहा दोनों बहुत अच्छे इंसान थे ये लोग गरीबो और मजबूर इंसान की बिना कोई शर्त के मदत करते थे जिससे लोग इन दोनों को भगवन की तरह पूजते थे लेकिन एहि बात बसंत चौहान के लिए नहीं बोलै जा सकता था क्युकी वो एक लालची और कमीना टाइप का इंसान था उसकी नजर में गरीब एक कूड़ा कचरा से ज्यादा नहीं है वो बस किसी तरह से अपना बिज़नेस बढ़ना चाहता था इस लिए उसका नजर हमेशा कुशवाहा फॅमिली के बिज़नेस पर रहता था वो मन hi मन सोच रखा था की चाहे कुछ भी हो जाये लेकिन उसे किसी भी तरह से कुशवाहा फॅमिली के बिज़नेस टेकओवर करना था चाहे ऐसे करने के लिए उसे ताकत या छल का hi प्रयोग क्यों न करना पड़े.

एक जगह पर दो लोग बैठे हुए थे और वो आपस में बाटे कर रहे थे उनको देख कर लग रहा था की दोनों बाप बीटा है ये लोग और कोई नहीं बल्कि मृत्युंजय और विनोद कुशवाहा थे तभी मृत्युंजय अपने डैड से बोलता है.

मृत्युंजय- डैड मुझे कुछ पैसा चाहिए थे.

मृत्युंजय के बात सुन कर विनोद सोच में पद जाता है फिर वो कुछ सोचते हुए बोलता है.

विनोद- मृत्युंजय मैंने तो तुम्हे पहले hi पैसे दे रखे है क्या वो सब पैसे तुम खर्च कर दिए.

अपने डैड के बात सुन कर मृत्युंजय शर्म से अपना झुकाते हुए बोलै.

मृत्युंजय- वो क्या है डैड की आपने मुझे जो पैसा दिया था वो पैसा कही खर्च हो गए.

अपने बेटे के बात सुन कर विनोद घुसे से उससे बोलता है.

विनोद- खर्च हो गए लेकिन इतने सरे पैसे तुम ऐसे hi कैसे खर्च कर दिए मैंने तुम कुछ पहले hi 50 लाख रुपये दिया था देखो बीटा अगर तुम इस तरह से पैसे खर्च करोगे तो हम जल्द hi सड़क पर आ जायेंगे वैसे मई जान सकता हु की तुम इतना सारा पैसा कहा खर्च कर दिए.

अपने डैड के बात सुन कर मृत्युंजय अपना सर निचे झुका लेता है और सिर्फ एक hi शब्द बोलता है.

मृत्युंजय- सॉरी डैड.

अपने बेटे के मुँह से सॉरी सुन कर विनोद कुछ संत हो जाता है लेकिन फिर भी उसे ये जानना था की मृत्युंजय इतना पैसा कहा खर्च कर दिया है इस लिए वो दोबारा अपने बेटे से पूछता है.

विनोद- मई तुम्हारे सॉरी का क्या अचार डालूंगा तुम मुझे साफ साफ बताओ की तुम इतने पैसे कहा खर्च किया.

अपने डैड के बात सुन कर उसने अपना सर निचे किये हुए कुछ बोलने hi वाला था की तभी वह पर एक नौकर आ गया और वो नौकर डैड से बोलै.

नौकर- मालिक बहार बहुत सरे लोग आये हुए है और वो आपसे और छोटे मालिक से मिलना चाहते है.

नौकर के बात सुन कर विनोद और मृत्युंजय दोनों चौक गए फिर विनोद नौकर से पूछता है.

विनोद- वो लोग हमसे क्यों मिलना चाहते है.

नौकर- पता नहीं मालिक वो बस बोले की उन्हें आप दोनों से मिलना है इस लिए हम यहाँ आपको बुलाने आ गए.

विनोद- ठीक है तुम चलो हम आ रहे है.

विनोद के बात सुन कर नौकर वह से चला जाता है उसके जाने के बाद विनोद मृत्युंजय को साथ लेकर बहार आता है तो देखता है की बहुत सरे औरत और मर्द वह पर जमा हुए है उनके साथ में नए नए शादी हुए जोड़े भी थे विनोद और मृत्युंजय दोनों उन सब को देख कर हैरान थे विनोद हैरान थे की ये लोग कोण है और यहाँ क्यों आये है तो वही मृत्युंजय हैरान था की ये इन लोगो को अपने अपने घर रहना चाहिए था तो ये लोग यहाँ क्यों आ गए.

इधर जैसे hi विनोद और मृत्युंजय अपने घर से बहार आये तो वह पर मौजूद सरे औरत और मर्द उनके सामने हाथ जोड़ लिए और झुक कर उन दोनों को प्रणाम करने लगे तभी उनमे से एक आदमी सामने आया और बोलै.

आदमी- मालिक अपने इस गरीब के बिटिया के शादी करा कर मुझ पर बहुत बड़ा उपकार किया है मालिक अगर आप लोग न होते तो हमारी बिटिया की शादी न हो पति मालिक मई आपके इस उपकार के लिए अपना सर काट कर आपको दे दू वो भी काम होगा.

उस आदमी के बात सुन कर दूसरा आदमी आगे आता है और बोलता है.

2ंद आदमी- मालिक आज कल कोई अपनों के लिए भी इतना नहीं करता जितना अपने हम सब के लिए किया है आप हमारे लिए सच में भगवन है.

इन लोगो के बात सुन कर विनोद कुशवाहा कंफ्यूज हो गए की ये लोग क्या बोल रहे है तभी उनका ध्यान अपने बेटे पर जाता है और वो उसके तरफ देखते हुए बोलते है.

विनोद- मई अब समझा की तुम इतने सरे पैसे कहा खर्च किये हो वो तुम hi हो न जी इन सब की लड़कियों के सदी करवाई है.

अपने डैड के बात सुन कर मृत्युंजय अपना सर निचे झुका कर बोलै.

मृत्युंजय- मुझे माफ़ कर दीजियेगा डैड लेकिन मई क्या करता मुझे इन सब की मज़बूरी देखि नहीं गयी तो मई सोचा की मेरे पास इतना पैसा है अगर उसमे से कुछ पैसे से इन सब की प्रॉब्लम दूर हो जाती है क्या प्रॉब्लम है इस लिए मई बिना कुछ सोचे इन सब की मदत कर दी.

अपने बेटे के बात सुन कर विनोद कुशवाहा के सर गर्व से ुचा हो गया आज उन्हें अपने बेटे पर प्राउड फील हो रहा था.

विनोद- बीटा तुम मुझ से माफ़ी क्यों मांग रहे हो तुमने कोई गलत काम नहीं किया मुझे तुम पर गर्व है बीटा की तुमने इन सब की मदत की मई बहुत खुसनसीब हु की मुझे तुम जैसा बीटा मिला.

अभी ये दोनों बात कर hi रहे थे की उन लोगो में से एक आदमी आगे आ कर बोलै.

आदमी- मालिक मई बहुत गरीब हु इस लिए मई अपनी बिटिया के शादी नहीं करवा पा रहा था लेकिन अपने मेरी बिटिया के शादी करवा कर मेरी इज्जत जाने से बचा लिया.

इतना बोल कर वो आदमी विनोद के पैरो में गिर गया ये देख कर विनोद तुरंत पीछे हटते हुए उस आदमी को उठाया और उनसे बोलै.

विनोद- आप ये क्या कर रहे है आप मुझसे बड़े है और इस तरह मेरे पैरो में गिर कर मुझे पाप के भागीदार मत बनाइये और रही बात आपकी बिटिया की शादी करवाने की तो भगवन के कृपा से मेरे पास बहुत साडी धन दौलत है अगर उसमे से कुछ पैसे खर्च कर के किसी के चेहरे पर मुस्कान लाया जा सकता है तो मई और मेरा बीटा ये काम बार बार करेंगे क्युकी लोगो के चेहरे पर मुस्कान ला कर मेरी दिल को सुकून मिलता है और ये काम मैंने नहीं बल्कि मेरे बेटे ने किया है अगर आप किसी को धन्यवाद् देना चाहते है तो मेरा बीटा मृत्युंजय कुशवाहा को दीजिये.

विनोद के बात सुन कर वह मौजूद सरे लेडीज एंड गेट्स मृत्युंजय के सामने अपने हाथ जोड़ देते है और उसे झुक कर प्रणाम करने लगते है ये देख कर मृत्युंजय उन सब के सामने जाता है और बोलता है.

मृत्युंजय- अरे अरे आप सब ये क्या कर रहे है आप लोगो मेरे सामने इस तरह से झुक मुझे शर्मिंदा कर रहे है अगर आप लोगो को किसी के पास झुकना hi वो भोलेनाथ के सामने झुकिए क्युकी यहाँ जो भी होता है उनके hi इक्छा से होता है आप सब को जो भी मिला वो सब ऊपर वाले ने hi दिया है बस वो बिच में मुझे माध्यम बना दिए.

मृत्युंजय के बात सुन कर वह मौजूद सरे लोगो के दिल में कुशवाहा परिवार और खास कर के मृत्युंजय के लिए इज्जत बढ़ गयी तभी उनमे से hi एक आदमी बहार निकल कर बोलै.

आदमी- आप लोग सच में महँ है आप हमारी मदत भी कर दिए और उसका श्रेय भी नहीं ले रहे है आज कल के ज़माने में आप जैसा आदमी मिलना भी मुश्किल है.

इसके बाद वो सरे वह से चले जाते है उनके जाने के बाद विनोद मृत्युंजय से बोलते है.

विनोद- तुम मुझे ये सब पहले नहीं बता सकते थे खामखा मई तुम्हे डट दिया वैसे तुम मुझसे और पैसे मांग रहे थे वो किस लिए मांग रहे थे.

विनोद के बात सुन कर मृत्युंजय कुछ सोचते हुए बोलै.

मृत्युंजय- डैड वो क्या है न की मई एक बृद्धा आश्रम और एक अनाथ आश्रम को गीध लिया है बस उसी के लिए मई आपसे पैसे मांग रहा था.

मृत्युंजय के बात सुन कर विनोद कुछ नहीं बोले बस अपने रूम में गए और एक चेक सिग्नेचर कर के ले आये वो चेक 1 करोड़ का था वो चेक मृत्युंजय को देते हुए बोले.

विनोद- इतना में हो जायेगा या और चाहिए.

मृत्युंजय- नहीं डैड अभी के लिए इतना काफी है.

वही पटना शहर के दूसरे साइड चौहान विला में बसंत चौहान बैठ कर सरब पि रहा था तभी वह पर एक आदमी आया जिसे देख कर बसंत हलके नशे के आवाज में उस आदमी से बोलै.

बसंत- क्या खबर है कुशवाहा परिवार का.

बसंत के बात सुन कर वो आदमी थोड़ी देर चुप रहा इसके बाद वो बोलै.

आदमी- बॉस विनोद कुशवाहा और उसका बीटा कुछ ज्यादा hi उड़ रहे है विनोद के बीटा अभी अभी एक अनाथ आश्रम और एक वृद्धा आश्रम गिर लिया है और साथ में उसने 21 लड़कियों की शादी करवाई है जिसका सारा खर्चा मृत्युंजय कुशवाहा ने hi दिया है जिससे सरे जनता खुस है और कुशवाहा परिवार को मसीहा मन रहे है.

उस आदमी के बात सुन कर बसंत घुसे से शराब से भरे गिलास को टेबल पर पटक देता है और घुसे से बोलता है.

बसंत- उन लोगो को जितना पैसा उड़ाना है उदा ले क्युकी कुछ दिनों बाद hi उनका सारा प्रॉपर्टी मेरा होने वाला है और मई उस प्रॉपर्टी को अपने नाम करवा कर उन दोनों बाप बेटे को इतनी दर्दनाक मौत दूंगा की उन्स्की लाश देख कर hi लोगो के हालत ख़राब हो जायेंगे.

बसंत के बात सुन कर उनके पास में बैठी हुयी एक लड़की उनसे बोलती है.

लड़की- लेकिन पिता जी ये हम करेंगे कैसे.

उस लड़की के बात सुन कर बसंत चौहान हस्ते हुए बोलता है.

बसंत- ये हम नहीं सिर्फ और सिर्फ तुम करोगी.

इतना बोल कर बसंत चौहान अपनी बेटी के जान में कुछ बोलते है जिसे सुन कर वो लड़की खुस हो जाती है और अपने पिता जी से बोलती है.

लड़की- अपने क्या प्लेन बनाया है पिता जी इससे तो हम आराम से उनसे साडी प्रॉपर्टी अपने नाम करवा लेंगे.

अपनी बेटी के बात सुन कर बसंत चौहान जोर जोर से हस्ते हुए बोलै.

बसंत- है है है ऐसे hi नहीं मई इस सहर का दूसरा सबसे बड़ा आदमी बना हु अब ये सब बात छोडो और तुम अपने काम पर लग जाओ तुम अपने काम को जितनी जल्दी ख़तम करोगी उतनी hi जल्दी हमें कुशवाहा परिवार का प्रॉपर्टी मिलेगा.

इधर मई हवेली से निकल कर सीधा घर पहुंच गया जब मई वह पंहुचा तो देखा की घर पर शनाया पहले hi आ गयी थी जैसे hi उसकी नजर मुझ पर पड़ी वो मेरे पास आयी और मुझसे बोली.

शनाया- आ गए तुम.

मई- है आ गया वैसे तुम कब आयी.

शनाया- मई भी अभी hi आयी हु वैसे तुम्हे निकलना कब है.

मई- बस कुछ देर में निकलूंगा.

मेरी बात को सुन कर शनाया कुछ सोचते हुए मुझसे बोली.

शनाया- ठीक है फिर जाओ जाकर रेडी हो जाओ.

इतना बोल कर वो जाने लगती है लेकिन जाते जाते फिर से रुक कर मुझे देखती है और बोलती है.

शनाया- जल्दी वापस आना मुझे यहाँ तुम्हारे बिना मन नहीं लगेगा और है वह पर अपना ध्यान रखना और खाना समय पर खाना.

शनाया के बात सुन कर मई मुस्कुराने लगा और फिर शनाया को छेड़ते हुए बोलै.

मई- मेरी बहुत फ़िक्र की जा रही है और क्या बोलै तुमने तुम्हे मेरे बिना मन नहीं लगेगा कही ऐसा तो नहीं की तुम्हे मुझसे प्यार हो गया है.

मेरी बात को सुन कर शनाया शर्माने लगती है लेकिन फिर अपने शर्म को छुपाते हुए मुझसे बोली.

शनाया- तुम कुछ ज्यादा नहीं सोचने लगे हो मुझे तुमसे कोई प्यार बयार नहीं हुआ है वो तो मई तुमको इस लिए जल्दी आने को बोल रही थी की 3 दिन बाद कॉलेज में रीयूनियन पार्टी है और हम सब को उसमे शामिल होना जरुरी है समझे.

शनाया के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए उससे बोलै.

मई- बस यही बात है न और कोई बात तो नहीं है न.

मेरी बात को सुन कर शनाया कुछ नहीं बोलती है और वह से चली जाती है उसके जाने के बाद मई सिकंदरा सिंह राठौर को कॉल कर के यहाँ आने के लिए बोल देता हु और यहाँ का अड्रेस भी उनको सेंड कर देता हु इसके बाद मई अपने रूम में जा कर नहाने लगता हु फिर कुछ देर में जब मई नाहा कर बहार निकला तो देखा की शनाया ने पहले hi मेरे कपडे निकल कर रख दी थी मई बहार निकले हुए कपडे को देख कर मुस्कुराने लगा फिर मई उस कपडे को पहन कर तैयार हुआ और रूम से बहार आ गया जब मई रूम से बहार हॉल में आया तो देखा की शनाया खाना रेडी कर रही थी और शानवी वही पर बैठ कर टीवी देख रही थी.


जब मई हॉल में आया तो शानवी के नजर मुझ पर तो वो मेरे में भी खो गयी मई उसको मुझमे इस तरह से खोया हुआ देख कर मई उसको आवाज लगाया तो वो हड़बड़ा गयी फिर वो अपने हड़बड़ाहट को काबू करते हुए मुझसे बोली.

शानवी- आप कही जा रहे हो क्या.

मई- है वो किसी काम से कुछ दिनों के लिए आउट ऑफ सिटी जा रहा हु.

मेरी बात को सुन कर संवी मुस्कुराते हुए बोली.

शानवी- तभी तो मई सोचु की आज आप इतना सजे सवेरे क्यों है.

शानवी के बात सुन कर मुझे शर्म आ रहा था लेकिन मई अपने शर्म को छुपाते हुए शानवी से बोलै.

मई- क्यों मई पहलने नहीं इस तरह से रेडी होता था क्या.

शानवी- होते होंगे रेडी लेकिन मैंने तो आज पहली बार आपको इस तरह से देख रही हु. (अपने मन में) और लग रहा है की मई आपको ऐसे hi जिंदगी भर देखती राहु लेकिन आप है की मुझे देखते hi नहीं है मई ऐसा क्या करू की आप मुझे भी उस नजर से देखे जैसे दीदी को देखते है.

हलाकि शानवी ये बात बोलना तो मुझसे चाहती थी लेकिन उसकी हिमत hi नहीं हुयी की वो ये सब मुझे बोल सके इधर मई शानवी के बातो को इग्नोर करते हुए उससे बोलै.

मई- मैंने तुम्हारे सोल्लगे के मटर सोल्वे कर दिए है और कल से तुम्हारा सोल्लगे खुल रहा है इस लिए तुम इन सब बातो से ध्यान हटाओ और पढ़ने पर ध्यान दो.

मेरी बात को सुन कर शानवी कुछ नहीं बोली सिर्फ अपनी गर्दन को है में हिला था अभी मई शानवी को और कुछ बोलने hi वाला था की तभी मेरे मोबाइल पर एक मस्सगे आ गया मई उस मस्सगे को ओपन कर के देखा तो ये मस्सगे सिंकन्दरा सिंह राठौर का था और उन्होंने मस्सगे में लिखा था की मई लोकेशन पर पहुंच गया हु और आपका वेट कर रहा हु.

मई सिकेन्द्र के मस्सगे पढ़ कर वह से किचन में आगया और शनाया से बोलै.

मई- शनाया वो लोग मेरा इंतज़ार कर रहे है इस लिए मई जा रहा हु.

मेरी बात को सुन कर शनाया बिना पीछे मुड़े hi मुझसे बोली.

शनाया- ठीक है तुम जाओ और है अपना ख्याल रखना और जल्दी hi लौटने की कोशिश करना.

मई- ठीक है मई जल्द hi लौटने की कोशिश करूँगा और है तुम भी अपनी और अपनी फॅमिली का ध्यान रखना ब्यय.

इतना बोल कर मई किचन से बहार निकल गया मेरे बहार निकलते hi शनाया पीछे मुड़ी तो उसकी आँखों में आंसू थी वो अपने मन में hi बोली.

शनाया- (अपने मन में) तुम जा तो रहे हो लेकिन मई यहाँ तुम्हारे बिना अकेले कैसे रहूंगी तुम इतने दिनों में hi मुझे अपना आदत लगा दिया है.

इधर मई इस सब से बेखबर मल्होत्रा हाउस से बहार निकला तो देखा की बहार गाड़ियों का अम्बर लगा हुआ था बहार में करीब 15 लक्ज़री कार कड़ी थी जैसे hi मई बहार आया था सबसे आगे वाली कार का दरवाजा खुला और उसमे से सबसे पहले सूर्य सिंह राठौर बहार निकला और फिर सिकेन्द्र सिंह राठौर बहार निकले उन दोनों को कार से बहार निकलते hi उनके पीछे कड़ी सरे करो का दरवाजा खुला और उनमे से बहुत सरे हथियार बंद काळा कपडे पहले हुए आदमी निकले मई इतना सरे आदमियों को देख कर चौक गया और सिकेन्द्र सिंह राठौर के तरफ देखने लगा मुझे अपने तरफ इस तरह से देखता हु पा कर सिकेन्द्र सिंह राठौर घबरा गए और घबराते हुए बोले.

सिकंदरा- अरे अरे प्रतिक जी आप इन लोगो का चिंता मत कीजिये ये लोग राठौर परिवार का अंगरक्षक है दरअसल बात ऐसी है की इन लोगो को ये आर्डर मिला है की हम जहा भी जायेंगे ये लोग मेरे और मेरे परिवार के शाफेट्य के लिए वह मौजूद रहेंगे.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई हैरान नहीं हुआ क्युकी मई जनता था की जो जितना बड़ा आदमी होता है उसका उतना ज्यादा दुश्मन भी होते है इस लिए मई उन गुर्दो के तरफ से अपना नजर हटा कर सिकेन्द्र से बोलै.

मई- ठीक तो फिर हम चलते है अब यहाँ पर रुकने से कोई फायदा नहीं है.

मेरी बात को सुन कर सिकेन्द्र है में अपना गर्दन हिलाया और फिर एक कार का दरवाजा मेरे लिए खुलवा दिया और वो खुद मेरे साथ उस कार में बैठ गया इधर सूर्य अकेले hi आगे वाले कार में बैठा जब सरे लोग कार में बैठ गए तो सिकेन्द्र सबको चलने का इशारा किया सिकेन्द्र का इशारा मिलते hi सरे कार वह से चल दिया करीब 2 घंटे गाड़ी चलने के बाद एक जगह पर रुकी मैंने जब सामने देखा तो वह पर एक गेट था और गेट पर कुछ गॉर्ड मौजूद थे कार रुकने के बाद आगे वाले कार से सूर्य बहार निकला और उन गुर्दो से कुछ बात किया इसके बाद वो फिर से कार में बैठ गया सूर्य के कार में बैठने के बाद कार फिर से चल पड़ी.

सरे कार उस गेट को पर करते हुए एक फील्ड में जा कर रुकी कार को रुकते hi सिकेन्द्र मुझे नीचे उतरने का इशारा किया सिकेन्द्र के इशारा समझ कर मई कार से निचे उतर गया मेरे उतरने के बाद सिकेन्द्र भी मेरे पीछे पीछे कार से बहार आ गया जब मई कार से बहार आया तो देखा हम सब एक बाहत बड़े फील्ड में थे जहा करीब 10 हेलिपैड बने हुए थे और वह पर 5 हेलीकाप्टर 🚁 भी मौजूद था मई वह पर बने हुए हेलिपैड और हेलीकाप्टर को ध्यान से देख रहा था क्युकी ये मेरी पहली बार था जब मई इतने नजदीक से हेलिपैड और हेलीकाप्टर को देखा था इधर जैसे hi सिकेन्द्र के नजर मुझ पर गयी और मुझे हेलिपैड और हेलीकाप्टर को क्यूरोसिटी से देखते हुए पाया तो वो बोलै.

सिकेन्द्र- ये हेलिपैड और हेलीकाप्टर सारा का सारा राठौर परिवार का है या यु कहु तो ये पूरा का पूरा जगह hi राठौर परिवार के अंदर आता है दरअसल बात ऐसी है की हमारा राठौर फॅमिली एक आइसलैंड पर रहता है और अगर हम लोगो को कही बहार जाना होता है तो हेलीकाप्टर से hi आते जाते है इस लिए भारत के हर सहर में हमारा एक ऐसी hi जगह आरक्षित है जिसमे 8 से 20 हेलिपैड और 4 से 5 हेलीकाप्टर है और इन सब की सुरक्षा हमारे गरुडो द्वारा होता है वो गॉर्ड भी कोई मामूली गॉर्ड नहीं बल्कि एक से बढाकर एक मार्टिकल आर्ट्स योद्धा है.

सिकेन्द्र बात सुन कर मई समझ गया की राठौर परिवार को क्यों इंडिया के no.1 फॅमिली बोलै जाता है राठौर फॅमिली के पास न पैसो की कमी है और न hi आदमियों की मई एक आह भरते हुए खुद से बोलै.

मई- (खुद से) खैर मुझे इससे क्या लेना देना ये आमिर हो या गरीब मई तो बस राठौर परिवार में एक मरीज का िल्ला करने जा रहा हु.

इधर मुझे खुद से hi बाटे करता देख कर सिकेन्द्र को समझ में आ गया की मई उनके बातो पर कोई ध्यान नहीं रहा हु तो वो भी चुप हो गए इसके बाद हम एक हेलिपैड के पास गए जहा पर एक हेलीकाप्टर खड़ा था फिर हम उस हेलीकाप्टर के पास आ गए इसके बाद सिकेन्द्र ने मुझे उसमे बैठने का इशारा किया सिकेन्द्र के इशारा समझ कर मई उस हेलीकाप्टर में बैठ गया मेरे बैठने के बाद सूर्य और सिकेन्द्र भी उस हेलीकाप्टर में बैठ गए और हम वह से राठौर फॅमिली के आइसलैंड के लिए निकल गए ये मेरी पहली बार था की मई हेलीकाप्टर पर बैठा था इस लिए मई कुछ ज्यादा hi एक्सीटेंड था खैर रस्ते में मैंने सिकेन्द्र से पूछा.

मई- सर हमें आइसलैंड पहुंचने में कितना समय लगेगा.

मेरी बात को सुन कर सिकेन्द्र ने मुस्कुराते हुए मुझे बताया.

सिकेन्द्र- मुंबई से राठौर फॅमिली का आइसलैंड करीब 3 घंटे के दुरी पर है इस लिए हमें वह पहुंचने में 3 घंटे लगेंगे.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई मई ok बोलै और फिर हेलीकाप्टर पर से नीचे का नजारा देखने लगा.

इधर मई जब घर से निकला था तो मैंने बलदेव और रोहन को मस्सगे कर दिया था की मई घर से निकल गया हु और वो लोग अभी से hi शनाया के फॅमिली के शाफेट्य पर लग जाये.

मेरे मस्सगे को पढ़ कर रोहन सबको बुलाया यहाँ तक की उसने बलदेव को भी बुला लिया और मेरी मस्सगे के बारे में सबको बताया तो बलदेव ने बोलै.

बलदेव- है बॉस ने मुझे भी मस्सगे किये है तो आप लोग बताइये की अब हमें क्या करना चाहिए.

बलदेव के बात सुन कर दीपक बोलै.

दीपक- बलदेव तुम हम सब को शनाया और उसके फॅमिली के नजदीक ले कर चलो लेकिन है उन्हें ये पता नहीं चलना चाहिए कारन और शंध्या तुम लोग हॉस्पिटल में शनाया के डैड को शाफेट्य डोज दीप्ती और रोहन तुम दोनों शनाया के शाफेट्य देना और मई शनाया के सिस्टर को शेफ्टी दूंगा और बलदेव तुम अपने कुछ आदमियों को लेकर शनाया के माँ को शेफ्टी देना सब समझ गए.

सब एक साथ- है हम समझ गए.

दीपक- ठीक है तो फिर ध्यान रहे हमसे उन सब को शेफ्टी देने में कोई चूक नहीं होनी चाहिए नहीं तो प्रतिक हम में से किसी को नहीं छोड़ेगा उसने बहुत बिस्वास कर के हमारे ऊपर ये जिमेवारी दी है.

रोहन- तुम चिंता मत करो दीपक हम कोई भी ऐसी गलती नहीं करेंगे जिससे शनाया भाभी या उनके परिवार को कोई खतरा हो.

दीपक- ठीक है तो बलदेव अब तुम हम सब को उनके पास लेकर चलोगे लेकिन सब यद् रखना हमें उन सब को शाफेट्य दूर से hi करनी है जब ज्यादा जरुरी होगा तब hi हम उनके सामने आएंगे.

कारन- ठीक है समझ गया.

इसके बाद बलदेव इन पांचो को लेकर वह से निकल गया दरअसल इन पांचो में दीपक के पास बहुत तेज़ दिमाग था वो रणनीति बनाने में एक्सपर्ट था और तो और वो इन पांचो से सबसे ज्यादा शक्तिशाली भी था इस लिए ये लोग किसी भी मिशन में जाते थे तो दीपक को hi अपना लीडर बनाते थे और दीपक के बातो आसानी से मन कर वही करते थे जो दीपक बोलता था.

बलदेव उन सब को शनाया और उसके फॅमिली को दिखा देता है इसके बाद सब वही करते है जो दीपक उनको करने के लिए बोलै था.

इधर दिलावर का वो आदमी जिसे दिलावर ने मेरे बारे में पता लगाने के लिए भेजा था वो वापस आ गया था और वो अभी दिलावर के सामने hi खड़ा था उस आदमी को देख कर दिलावर उससे पूछता है.

दिलावर- क्या तुमने उस लड़के के बारे में पता लगा लिया.

आदमी- जी बॉस मैंने उसके बारे में सब पता लगा लिया है.

दिलावर- तो ठीक है तुम मुझे उसके बारे में सब बताओ वो कब क्या करता है कहा जाता है और उसके फॅमिली वाले कब कब बहार निकलते है मुझे उसके बारे में साडी जानकारी चाहिए.

दिलावर के बात सुन कर वो आदमी कुछ सोचते हुए बोलता है.

आदमी- बॉस हम उस लड़के को जितना मामूली समझ रहे थे वो इतना मामूली नहीं है उसका संपर्क इस सहर के बड़े बड़े लोगो से है यहाँ तक की उसका इस सहर के मेयर से भी अच्छा बनता है और वो अभी किसी काम से सहर से बहार गया हुआ है और रही उसकी फॅमिली की बात तो उसके ससुर का एक्सीडेंट हो गया था इस लिए वो अभी हॉस्पिटल में एडमिट है और उसकी सास ससुर के देखभाल के लिए हॉस्पिटल में रहती है और उसकी बीवी अपने घर से खाना बना कर हॉस्पिटल पहुँचती है और उसकी एक साली भी है जो अभी घर पर रहती है.

उस आदमी के बात सुन कर दिलावर कुछ सोच में पद जाता है फिर थोड़ी देर सोचने के बाद वो उस आदमी से बोलता है.

दिलावर- हम्म तुमने बहुत अच्छा काम किया जो उसके बारे में इतना जानकारी ले कर आ गए अगर हम उस पर सीधा हाथ डालते तो हम प्रॉब्लम में पद जाते अब हमें ये काम को ध्यान से करना होगा ताकि किसी को पता न चले की ये सब हमने किया है और है अब हम जो भी करेंगे उस लड़के को वापस आने के बाद hi करेंगे.

दिलावर के बात सुन कर वो आदमी अपना सर है में हिलाते हुए बोलै.

आदमी- जी बॉस आप जैसा बोल रहे है वैसा hi होगा बॉस मई आपसे एक और बात बताना चाहता हु.

दिलावर- है बोलो तुम और क्या बताना चाहते हो.

आदमी- बॉस उस लड़के की बीवी और साली बहुत खूबसूरत है माँ कसम मैंने आज तक उनके जैसी लड़की कभी नहीं देखि है बॉस अगर आप उन लड़कियों को एक बार देख लेंगे तो आपकी नजर hi इन पर से नहीं हटेगी.

उस आदमी के बात सुन कर दिलावर एक्ससिटेड हो जाता है और जल्दी से उस आदमी से पूछता है.

दिलावर- क्या तुम सच बोल रहे हो क्या सच में वो दोनों इतनी खूबसूरत है.

आदमी- जी बॉस मई एक डैम सच बोल रहा हु.

उस आदमी के बात सुन कर दिलावर जोर से हस्ते हुए बोलै.

दिलावर- है है है है तब तो उस लड़के का शिकार करने में और मजा आएगा मुझे दो कच्ची कलियों के साथ खेलने का मौका मिलेगा तुम्हारे मुँह से उन दोनों लड़कियों के बड़ाई सुन कर रहा नहीं जा रहा है है तुम एक काम करो तुम उन दोनों पर नजर रखो अगर वो दोनों तुम्हे कही अकेले में दिखी तो तुम उन्हें किडनैप कर के यहाँ ले आना मई उनके जवानी के रास चूसने के लिए बेताब हो रहा हु.

आदमी- ठीक है बॉस.

इतना बोल कर वो आदमी वह से चला जाता है इधर मई सूर्य और सिकेन्द्र हेलीकाप्टर से आइसलैंड के लिए निकल गए थे करीब तीन घंटे के उड़न के बाद हम सब को एक आइसलैंड दिखने लगा था ये आइसलैंड hi राठौर परिवार का आइसलैंड था ये आइसलैंड चारो तरफ से समुन्दर से घिरा हुआ था और साथ में चारो तरफ से बर्फ भी इस आइसलैंड को घेरा हुआ था ये आइसलैंड दूर से भी देखने पर बहुत खूबसूरत लग रही थी ये आइसलैंड बहुत दूर में फैला हुआ था और राठौर परिवार इस आइसलैंड के एक hi भाग में रहते थे बाकि के भाग में पहाड़ और जंगल थी.

खैर थोड़ी देर में हम आइसलैंड पर पहुंच गए जैसे hi मई आइसलैंड के ऊपर आया तो मुझे आइसलैंड से बहुत hi ज्यादा सुध स्प्रिचैल एनर्जी आते हुए महसूस हुयी जिसे देख कर मई हैरान हो गया ये स्प्रिचैल एनर्जी हिमालय के स्प्रिचैल एनर्जी जितना सुध तो नहीं था लेकिन उससे काम भी नहीं था.

जैसे hi मुझे वह पर सुध स्प्रिचैल एनर्जी महसूस हुआ तो मई अपने दिव्या दृस्टि को एक्टिवटे कर के उस आइसलैंड को देखने लगा जैसे जैसे मई अपने दिव्या दृस्टि से उस आइसलैंड को देख रहा था मेरी हैरानी बढ़ती जा रही थी क्युकी मुझे अपने दिव्यादृस्ति से उस आइसलैंड पर बहुत साडी बहुमूल्य आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां दिख रही थी और साथ में मुझे वह पर एक स्प्रिचैल स्टोन का पहाड़ भी दिखा जो की धरती के अंदर दबा हुआ था और ये सुध स्प्रिचैल एनर्जी उसी स्प्रिचैल स्टोन के पहाड़ से आ रही थी.

शायद इन सब के बारे में यहाँ रह रहे लोगो को पता नहीं था नहीं तो इतनी साडी बेशकीमती जड़ी बूटियां और स्प्रिचैल स्टोन के पहाड़ यहाँ पर सही सलामत नहीं रहती ये सब देख कर मई सिकेन्द्र से कुछ पूछना चाहता था उससे पहले hi हम उस आइसलैंड पर लैंड कर गए थे.

हेलीकाप्टर लैंड होने के बाद सिकेन्द्र सबसे पहले हेलीकाप्टर से बहार निकला और मुझे बहार आने के लिए बोलै इसके बाद मई भी हेलीकाप्टर से बहार निकले गया और हम वह से राठौर परिवार के मेन्शन के तरफ जाने लगे रस्ते में सिकेन्द्र बड़े अदब के साथ मुझसे बोलै.

सिकेन्द्र- राठौर परिवार के इस आइसलैंड पर आपका स्वागत है डॉ. प्रतिक कैसा लगा आपको मेरा ये आइसलैंड.

मई- हम्म ये आइसलैंड तो बहुत खूबसूरत वैसे क्या आपका परिवार इस आइसलैंड को पूरा खरीद लिया है या फिर आप जहा रहते हो सिर्फ वही ख़रीदा है.

मेरी बात को सुन कर सिकेन्द्र सिंह राठौर ने कुछ सोचते हुए बोलै.

सिकेन्द्र- वैसे तो हमने इस आइसलैंड को पूरा hi खरीद लिया है लेकिन हम इस आइसलैंड के एक भी भाग में रहते है क्युकी इस आइसलैंड के बाकि के भाग में जंगल और पहाड़ है.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- तो क्या आप लोग कभी भी उस जंगल के तरफ जा कर नहीं देखा की वह पर क्या है.

मेरी बात को सुन कर सिकेन्द्र बड़े गौर से मुझे देखा और फिर मुझसे बोलै.

सिकंदरा- नहीं हमने उस तरफ जाने की कोशिश hi नहीं की क्युकी इस आइसलैंड के मालिक ने हम सबको पहले hi बता दिया था की उस तरफ के एरिया में बहुत सरे जंगली जानवर रहते है और वैसे भी हम सब के पास इतना समय hi नहीं है की हम उस तरफ जा कर देखे वैसे आप ये सब क्यों पूछ रहे है.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- है एक वहज आपसे ये पूछने की लेकिन मई आपको वो वजह अभी नहीं बता सकता मई पहले आपके डैड का इलाज कर देता हु जब आपके डैड ठीक हो जायेंगे तो मई आपको बता दूंगा की मई इस आइसलैंड के बारे में आपसे इतना क्यों पूछ रहा हु.

मेरी बात को सुन कर सिकेन्द्र अपना गर्दन है में हिला दिया इसके बाद हम सब चुप चाप मेन्शन की तरफ जाने लगे कुछ समय बाद हम मेन्शन के गेट पर पहुंच गए जब हम वह पहुंचे तो मैंने देखा की वह पर बहुत सरे गॉर्ड हाथो में हथियार लिए पहरा दे रहे थे.

मई इस आइसलैंड पर आने के बाद एक बात नोटिस किया की यहाँ पर करीब 5000 से भी ज्यादा गॉर्ड थे जो इस आइसलैंड का सुरक्षा कर रहे थे या यु कहु की ये सब गॉर्ड राठौर परिवार के सुरक्षा कर रहे थे और वो सरे गॉर्ड कोई मामूली गरुड़ नहीं बल्कि सरे के सरे मार्टिकल आर्ट्स एक्सपर्ट थे यहाँ पर जितने भी गॉर्ड थे सब मार्टिकल आर्ट्स के लेवल 5 के ऊपर hi थे ये देख कर मई हैरान हो गया अपने आप से hi बोलने लगा.

मई- (अपने आप से) क्या रहीसी है इन लोगो का ये लोग तो 5000 हजार से ऊपर मार्टिकल आर्ट्स योद्धा को अपना गॉर्ड बना के रखा है और ऊपर से इन लोगो को hi-tech आटोमेटिक गन भी दे रखा है और ये लोग देखने से hi फुल त्रिनेड लग रहे है ऐसे योद्धाओ से तो एक पूरी जुंग जीती जा सकती है अब मुझे राठौर फॅमिली को देख कर लग रहा है की मुझे अपने मार्टिकल आर्ट्स स्कूल में काम से काम 20 हजार मार्टिकल आर्ट्स योद्धा को भर्ती लेना होगा हलाकि राठौर परिवार में अभी जितना भी योद्धा है उनसे लड़ने के लिए मेरा एक दोस्त hi काफी है लेकिन फिर भी अगर मुझे आगे चल कर अगर डार्क लार्ड से लड़ना है तो मुझे अपना सेना भी बनाना होगा वो ऐसी सेना की इस दुनिया में मेरे सेना के नाम सुन कर बुरा काम करने वाले लोगो को रूह कम्प जाये.

ऐसे hi सोचते सोचते कब मई राठौर मेन्शन के अंदर आ गया मुझे पता hi नहीं चला अभी मई अपने सोचो में गम hi था की तभी मुझे एक लड़की की आवाज सुनाई दी.

लड़की- प्रतिक तुम ! तुम यहाँ क्या कर रहे हो.

उस लड़की के आवाज से मई अपने सोच से बहार आया और इधर उधर देखने लगा तभी मेरी नजर वह कड़ी एक लड़की और उनके साथ एक आदमी और तीन औरतो पर गयी मई उस लड़की को देख कर चौक गया और उससे बोलै.

मई- पायल तुम मई सोचा नहीं था की मेरी तुमसे यहाँ मुलाकात हो जाएगी वैसे तुम यहाँ क्या कर रही हो.

मेरी बात सुन कर वह मौजूद सरे लोग हैरान थे मेरी बात को सुन कर सिकेन्द्र पायल को देखते हुए उससे बोले.

सिकेन्द्र- पायल क्या तुम डॉ. प्रतिक को पहले से जानती हो.

सिकेन्द्र के मुँह से डॉ. प्रतिक सुन कर इस बार पायल भी हैरान हो गयी थी और पायल के साथ साथ उसके साथ आये 2 औरते और एक आदमी भी हैरान था.

पायल- आप ये क्या बोल रहे है ये और वो भी डॉ. प्रतिक लेकिन ये कैसे हो सकता है ये तो मेरे साथ अभी सोल्लगे में पढता है और ये मेरी बेस्ट फ्रेंड के हस्बैंड भी है मई इसे अच्छे से जानती हु ये वो डॉ. प्रतिक नहीं है जिसका हम सबको जरुरी है.

पायल के बात सुन कर सब मुझे घर कर देखने लगे शिवाय सूर्य और सिकेन्द्र के सबको मुझे इस तरह से घूरता हुआ देख कर सिकेन्द्र पायल से बोले.

सिकेन्द्र- तुम्हे गलत फहमी हुयी है सायद तुम्हे इनके बारे में ज्यादा कुछ पता hi नहीं है ये hi डॉ. प्रतिक है क्युकी मुझे खुद इनसे डॉ. खुराना ने मिलवाया था.

सिकेन्द्र के बात सुन कर सबको यकीं हो गया की मई hi डॉ. प्रतिक हु लेकिन पायल को अभी भी विस्वास नहीं हो रहा था वो मेरे पास आयी और मुझसे बोली.

पायल- प्रतिक हम तो अच्छे दोस्त थे न तो तुम ये सब मुझे पहले क्यों नहीं बताया.

मई- तुमने मुझसे कभी पूछा hi नहीं और वैसे तुमने भी तो मुझे नहीं बताई थी की तुम दुनिया के 5 टॉप फॅमिली में से एक फॅमिली राठौर फॅमिली के मेंबर हो.

पायल- चलो कोई बात नहीं एक बात मई तुमसे छुपाई और एक बात तुमने मुझसे छुपाई हिसाब बराबर हुआ वैसे ये बात शनाया को पता है या फिर तुम उससे भी छुपाया है.

मई- नहीं उसे सब पता है.

मेरी बात को सुन कर पायल मुस्कुराते हुए बोली.

पायल- अच्छा है तब तो तुम बच गए अगर तुम उससे ये बात छुपाया होता तो शनाया तुम्हे कभी माफ़ नहीं करती क्युकी उसे झूठ बोलने वाले से नफरत है ठीक है बहुत हो गयी बाटे आओ मई तुम्हे अपने फॅमिली मिलवाता हु (सिकेन्द्र और सूर्य के तरफ इशारा करते हुए) तुम इन दोनों से तो मिल hi लिए हो सिकेन्द्र मेरे चाचा है और सूर्य मेरा बड़ा भाई इनसे मिलो ये है कौशल्या देवी मेरी प्यारी दादी.

पायल के बात सुन कर मई ध्यान से कौशल्या देवी को देखा तो पता नहीं मुझे उनको देख कर ऐसा लगा की मई इन्हे पहले से जनता हु ये मेरी कोई अपनी है इस लिए मुझे उनको प्रणाम करने का मन किया तो मई आगे बढ़ कर उनके पेअर छू कर प्रणाम करते हुए बोलै.

मई- पायल मेरी दोस्त है और आप पायल के दादी है इस नाते आप भी मेरी दादी हुयी तो क्या मई आपको दादी बोल सकता हु.

मुझे इस तरह से कौशल्या देवी को प्रणाम करता देख कर सब खुस हो गए खास कर के पायल खुस हो गयी वही कौशल्या देवी को पता नहीं क्या हुआ उनके आँखों से आंसू आने लगे और वो अपने मन में hi सोचने लगी.

कौशल्या- (अपने मन में) ये मुझे इस लड़के को देख कर ऐसा क्यों लग रहा है की ये मेरा hi खून है ये मेरा अपना hi कोई है क्या ऐसा hi सकता है की मेरा वही प्यारा नाती हो जो खो गया था (फिर कुछ सोचते हुए) नहीं नहीं ऐसा कैसे हो सकता है वो तो कब का मर चूका है लेकिन जब ये मुझे प्रणाम किया तो मुझे ऐसा क्यों लगा की मुझे मेरे सबसे छोटे बेटे ने प्रणाम किया हो और मुझे इसके यहाँ होने से ऐसा लग रहा है की मेरा छोटा बीटा मेरे पास है क्या ये वही हो सकता है मुझे उसके बारे में पूरी जानकारी जुटानी hi पड़ेगी.

इधर मैंने देखा की कौशल्या देवी खुद में hi खोयी हुयी है तो मुझे लगा की उनके मेरे बातो का बुरा लगा है इस लिए मई थोड़ा मायूस हो कर उनसे बोलै.

मई- सॉरी अगर आपको मेरे बातो का बुरा लगा हो तो.

जैसे मई अपनी बाटे पूरी की वैसे hi कौशल्या देवी अपने सोच से बहार आयी और मेरी बात को सुन कर उन्हें बुरा लगा इस लिए वो मुझसे बोले.

कौशल्या- अरे माफ़ करना बीटा तुम्हे देख कर मुझे किसी अपने का ध्यान आ गया था वैसे तुम मुझे दादी बोलोगे तो मुझे बहुत खुसी होगी वैसे क्या मई तुमसे कुछ पर्सनल बाटे पूछ सकता हु.

कौशल्या देवी के बात सुन कर सब आचार्य चकित हो गए फिर संजय सिंह राठौर कौशल्या देवी से बोलता है.

संजय- ये आप क्या कर रही है माँ आप कैसे किसी अनजान से उनके पर्सनल बाटे पूछ सकती है और मुझे ये समझ में नहीं आ रहा है की आपकी डॉ. प्रतिक के पर्सनल बात जानने की क्या जरुरत पद गयी.

संजय के बात सुन कर कौशल्या देवी उड़द हो गयी उनको इस तरह से उदास होता देख कर मुझे अच्छा नहीं लगा इस लिए मई उनसे बोलै.

मई- जी आप पूछिए क्या पूछना चाहती है अगर मेरे बस में होगा तो मई आपके बातो का जबाब जरूर दूंगा क्युकी मुझे भी आपको देख कर ऐसा लग रहा है की आप मेरी कोई अपनी hi है.

मेरी बात को सुन कर कौशल्या देवी खुस हो गयी और मुझसे बोली.

कौशल्या- जैसा की मैंने तुम्हारे बारे में सुना है की तुम अपने ससुराल में घर जमाई बन कर रहते हो तो मुझे ये जानना है तुम्हारे परिवार में कोण कोण है मेरा मतलब है की तुम जब अपने ससुराल में रहते हो तो तुम्हारे माँ और डैड और बाकि परिवार वाले कहा रहते है.

कौशल्या देवी के बात सुन कर मई उदास हो गया मुझे इस तरह से उदास होता देख कर पायल तुरंत अपने दादी को बोली.

पायल- दादी आप प्रतिक से ये कैसी सवाल पूछ रही है आपको उससे ऐसी बात नहीं पूछनी चाहिए थी क्युकी...

पायल इससे आगे कुछ बोलती उससे पहले hi मई उसे चुप करते हुए बोलै.

मई- कोई बात नहीं पायल जब दादी को मेरे बारे में जानना hi है मई उनको सब बता देता हु दादी दरअसल मेरे परिवार के नाम पर सिर्फ मेरी वाइफ और उसकी फॅमिली hi है बस.

मेरी बात को सुन कर दादी मुझे देखते हुए बोली.

कौशल्या- इसका मतलब की तुम एक अनाथ हो.

मई- है दादी आप एक तरह ये बोल सकती है की मई अनाथ हु क्युकी मई बचपन में hi अपनी फॅमिली से बिछड़ गया था तब से मेरे गुरुदेव ने hi मुझे पल पॉश कर बड़ा किया है और साथ में मुझे बहुत साडी ज्ञान भी दिया.

कौशल्या- वह मुझे ये जानकर बहुत दुःख हुआ कोई बात नहीं बीटा तुम आज से मेरे परिवार को hi अपना परिवार मन सकते ho(fir अपने मन में) इसका बोलने के अनुसार ये अपने फॅमिली से बचपन में hi बिछड़ गया था तो क्या ऐसा हो सकता है की ये मेरे बिछड़ा हुआ पोता हो.

इधर हम दोनों को इस तरह से बात करता हुआ देख कर पायल थोड़ा चिढ़ते हुए बोली.

पायल- अब बस भी करो डैड अब और कितना सवाल पूछोगी प्रतिक से अभी मुझे प्रतिक को बाकि सब से भी मिलवाना है.

पायल के बात सुन कर सब हसने लगे इसके बाद पायल मुझे एक एक कर के सब से मिलवाया उसने सबसे पहले अपने डैड से मिलवाया तो मई उनका भी पेअर छू कर प्रणाम किया इसके बाद मई पायल के माँ से मिला और आखिर में मई सिकेन्द्र के वाइफ से मिला मई सबसे मिल कर सबको प्रणाम किया मुझे इन सब से मिल कर ऐसा लग रहा था की मई इन सब को पहले से hi जनता हु लेकिन मुझे कुछ यद् नहीं आ रहा था वही उन सब को भी मुझसे मिल कर वैसा hi लग रहा था खैर मई उन सब बातो को इग्नोर कर के सिकेन्द्र से बोलै.

मई- आप एक बार मुझे अपने डैड को दिखा दीजिये मई उनको जाँच कर के पता लगा लूंगा की उनको क्या हुआ है इसके बाद मई उनके बीमारी के अनुसार दवा तैयार करूँगा.

मेरी बात को सुन कर कौशल्या देवी बोली.

कौशल्या- अरे बीटा तुम आते आते बहुत थक गए होंगे और वैसे hi रत ज्यादा हो गयी है तो चलो पहले खाना खा लो और आज रत को रेस्ट कर लो तुम उनको कल सुबह में भी देख सकते हो.

मई- आप बात तो सही बोल रही है दादी जी लेकिन मई एक बार पायल के दादा जी को देखना चाहता हु अगर हम सुबह तक रुके तो कही देर न हो जाये.

मेरी बात सुन कर सिकेन्द्र जल्दी से बोलै.

सिकेन्द्र- सुबह सुबह बोलिये डॉ. प्रतिक मेरे डैड को कुछ नहीं होगा अगर आप उन्हें अभी देखना चाहते है तो ठीक है हम अभी hi आपको उनके पास ले कर चलते है.

सिकेन्द्र के बात सुन कर संजय सिंह राठौर ने भी उनके बातो में है से है मिलते हुए बोले.

संजय- है तुम सही बोल रहे हो सिकेन्द्र भगवन न करे के की डैड को कुछ हो जाये वर्ण हम सब अनाथ हो जायेंगे आप अभी साथ चलिए डॉ. प्रतिक और मेरे डैड को एक बार देख लीजिये वैसे भी मैंने सुना है की आप आयुर्वेदिक डॉक्टर है तो आपको उनको देखने के बाद उनके बीमारी के अनुसार जड़ी बूटियों से दवा भी बनाना होगा.

इसके बाद सब मुझे ले कर महेंद्र सिंह राठौर के रूम के तरफ जाने लगे थोड़ी देर बाद हम महिंद्रा सिंह राठौर के रूम में थे जहा महिंद्रा सिंह राठौर बेहोशी के हालत में बीएड पर लेते हुए थे और उनके शरीर पर बहुत साडी मेडिकल मशीन लगी हुयी साथ में वह पर 2 नर्स और एक डॉक्टर भी महिंद्रा सिंह राठौर के देख भल के लिए मौजूद थे.

मैंने जब महिंद्रा सिंह राठौर के शरीर को देखा तो चौक गया क्युकी उनको देख कर लग रहा था की वो बीमार hi नहीं है ऐसा लग रहा था की वो अभी सो रहे है लेकिन है उनके चेहरे पर थोड़ा पीलापन आ गया था उनको इस हालत में देख कर मई कुछ सोच में पद गया कुछ देर सोचने के बाद मई अपने दिव्या दृस्टि से उनके पुरे शरीर को देखने लगा जैसे hi मई उनके शरीर को देखा तो चौक गया क्युकी महेंद्र सिंह राठौर को कोई बीमारी नहीं हुयी थी बल्कि उनको एक ऐसा जहर दिया गया था जिसका कोई रंग नहीं होता और अगर वो शरीर में चला जाये तो इससे शरीर के बाहरी हिसे पर कोई फर्क नहीं पड़ता बल्कि शरीर अंदरूनी अंग को धीरे धीरे नुकशान पहुँचता है और इस जहर का कोई रंग न होने के कारन कोई भी मेडिकल मशीन या डॉक्टर इसका पता नहीं लगा सकता ये जहर इतना खतरनाक होता है की अगर ये किसी ग्रांडमास्टर या उसके ऊपर के लेवल वाले योद्धा के शरीर में भी चला जाये तो वो भी इसी हालत में पहुंच जायेगा और करीब 6 मंथ बीएड पर रहने के बाद उसकी मौत हो जायेगे मई महिंद्रा सिंध राठौर को देखने के बाद कुछ सोच में पद गया था मुझे इस तरह से सोच में पड़ा हुआ देख कर सिकेन्द्र मुझसे बोले.

सिकेन्द्र- क्या हुआ डॉ. प्रतिक क्या आपको डैड की बीमारी के बारे में कुछ पता चला.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई अपने सोच से बहार आया और उनके बातो का जबाब देते हुए बोलै.

मई- है मुझे उनकी बीमारी के बारे में पता चल गया दरअसल इनको कोई बीमारी नहीं हुआ है बल्कि इनके शरीर में एक ऐसा जहर गया है जिसका कोई रंग रूप या अस्तित्व नहीं है वो जहर इतना खतरनाक होता है की अगर वो किसी के शरीर में जाये तो उसका पता कोई भी नहीं लगा सकता ये जहर जिसके भी शरीर में जाता है उसकी बॉडी ऊपर से एकदम सही होता है लेकिन शरीर के अंदर की साडी अंदरूनी अंग धीरे धीरे कर के उस पोईसिओं से गलने लगता है और वो ब्यक्ति 6 मंथ के अंदर hi अपना जान हवा देता है.

मेरे बात को सुन कर वह मौजूद किसी को मेरे बातो पर बिस्वास नहीं हो रहा था तभी संजय सिंह राठौर मुझसे बोले.

संजय- ये आप क्या बोल रहे है क्या इस दुनिया में ऐसी कोई पाइजन भी हो सकता है क्या कही आपको देखने में तो भूल नहीं हो गयी.

मई- नहीं मुझसे देखने में कोई भूल नहीं हुआ है बल्कि मई जो भी बोल रहा हु वो 100% सच है अगर आपके डैड को जल्दी hi इलाज नहीं किया गया तो उनको बचाना मुश्किल है.

मेरी बात को सुन कर सब हैरान हो गए फिर सब किसी तरह से खुद को संत किया और फिर सिकेन्द्र सिंह राठौर मुझसे बोले.

सिकेन्द्र- लेकिन उनके शरीर में वो पाइजन गया कैसे क्युकी वो बहार का कुछ कहते पिटे नहीं थे और घर पर भी उनका खाना पीना हमारी घर के औरते hi देखती थी तो आखिर उनके शरीर में वो जहर गया तो गया कैसे.

उनकी बातो को सुन कर कुछ सोच में पद गया फिर थोड़ी देर सोचने के बाद मई उनसे बोलै.

मई- आपके डैड के शरीर में जो जहर गया है वो किसी खाने पिने की सामान से नहीं गया बल्कि ये जहर एक कीड़े के काटने से इनके शरीर में गया है और जो कीड़ा इनको कटा है वो ट्रांसपेरेंट होता है उसको कोई मामूली इंसान अपनी आँखों से देख भी नहीं पता है और जो कीड़ा इनको कटा है वो कीड़ा ऑरेंज जिनसेंग के फूल में पाया जाता है तो क्या आपके डैड कही ऐसी जगह पर गए थे जहा ऑरेंज जिनसेंग पाया जाता हो.

मेरी बात को सुन कर सरे लोग सोच में पद गए तभी कौशल्या देवी को कुछ यद् आता है और तुरंत बोल पड़ती है.

कौशल्या- है मुझे यद् आया ये आज से 5 महीने पहले इस आइसलैंड के दूसरे भाग में एक जड़ी बूटी के तलाश में गए थे और वह से वापस लौटने के बाद hi इनकी ऐसी हालत हो गयी थी.

कौशल्या देवी के बात को सुन कर मई कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- तो जरूर ये ऑरेंज जिनसेंग के फूल के लिए hi वह पर गए होंगे क्युकी मई जहा तक जनता हु ऑरेंज जिनसेंग फूल एक ऐसा औषदि है जिसको उपयोग में लेन के बाद कोई भी आदमी की जिंदगी कुछ सालो के लिए बढ़ जाता है और साथ hi वो अपने मार्टिकल आर्ट्स के अगले लेवल में ब्रेकथ्रू भी कर सकता है और ये बात इनकी कही से पता चला होगा इस लिए ये वह पर गए होंगे लेकिन उनको ये पता नहीं होगा की उस जिनसेंग के फूल के आस पास एक ऐसा जहरीला कीड़ा होता है जो किसी को दिखाई नहीं देता है.

मेरे बात को सुन कर सभी हैरान हो गए थे तभी कौशल्या देवी मेरे पास आयी और अपना दोनों हाथ जोड़ कर मुझसे बोली.

कौशल्या- बीटा क्या तुम मेरे पति को बचा सकते हो अगर तुम मेरे पति को बचा लिया तो मई तुम्हे मुँह माँगा इनाम दूंगा.

कौशल्या देवी के बात सुन कर मई उनके पास गया और उनको दोनों हाथो को निचे करते हुए बोलै.


मई- आप ये क्या कर रही है प्लीज आप मेरे सामने अपना हाथ मत जोड़िये आप मुझे बड़े है और वैसे भी अपने मुझे अपना पोता मन है तो क्या एक दादी अपने पोते के सामने हाथ जोड़ती है और रही बात इनके इलाज की तो मई अभी उनके शरीर से सरे जहर को निकल दूंगा जिनसे इनको होश तो आ जायेगा लेकिन इनको पूरी तरह से ठीक करने के लिए हमें उस ऑरेंज जिनसेंग की जरुरत होगी जो लगभग 300 साल पुराणी होनी चाहिए.
 
थैंक्स बीआरओ फॉर योर लवली कमैंट्स ऐसे hi साथ बने रहिये.

है भाई पटना बिहार वह सन ऐड करना जरुरी था क्युकी अब कहानी में त्रिदेव के ाँस को आना जरुरी हो गया था क्युकी धीरे धीरे hi सरे ाँस को ाँस को ऐड करूँगा इस लिए ये वाला सन ऐड किया आपको एक बता दे रहा हु मृत्युंजय भी त्रिदेवो के ाँस में से एक है बाकि आपको आगे में स्टोरी में पढ़ने को मिल जायेगा
 
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