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थे ट्रीटमेंट ऑफ़ महेंद्र सिघ राठौर.
जब मई महिंद्रा सिंह राठौर को पूरी तरह से चेक कर लिया तो मई सिकेन्द्र और उनके परिवार के लोगो को बताया की महिंद्रा सिंह राठौर को एक ट्रांसपेरेंट कीड़े ने कटा है और उस कीड़े का जहर ऐसा होता है की अगर वो किसी के शरीर में चला जाये तो उस ब्यक्ति का शरीर ऊपर से तो अच्छा होता है लेकिन उसके अंदरूनी अंग गलने लगते है और वो जहर किसी भी मेडिकल इक्विपमेंट के नजर में भी नहीं आता है और इसके कारन डॉक्टर को भी पता नहीं चलता है की आखिर मरीज को हुआ क्या है और वो कीड़ा ऑरेंज जिनसेंग के आस पास hi पाए जाते है शायद ये बीमार होने से पहले ऑरेंज जिनसेंग के आस पास कही गए होंगे और सायद वही पर इनको उस कीड़े ने कटा होगा.
मेरी बात को सुन कर सब घबरा जाते है फिर संजय सिंह राठौर अपने घबराहट को काबू करते हुए मुझसे बोलते है.
संजय- तो क्या उस जहर को बहार निकलने का कोई उपाय नहीं है क्या मेरे डैड कभी ठीक नहीं हो सकते प्लीज आप किसी भी तरह से मेरे डैड को ठीक कर दीजिये बदले में आप चाहे तो हमारा सारा धन दौलत ले लीजिये लेकिन मेरे डैड को ठीक है दीजिये.
संजय सिंह राठौर के बात सुन कर मई कुछ देर सोचने के बाद बोलै.
मई- देखिये बात यहाँ पैसो की नहीं है और वैसे भी मैंने ये कब कहा की आपके डैड ठीक नहीं हो सकते है मई आपके डैड को ठीक कर तो सकता हु लेकिन एक प्रॉब्लम है.
मेरी बात को सुन कर पहले सब खुस हो जाते है लेकिन प्रॉब्लम वाली बात सुन कर सब टेंशन में आ जाते है तभी कौशल्या देवी मुझसे बोलती है.
कौशल्या- क्या प्रॉब्लम है बीटा तुम हमें बताओ हम उस प्रॉब्लम का हल जरूर निकल लेंगे.
मई- दरअसल बात ऐसी है की मई अभी उनके शरीर से जहर को कुछ हद का बहार निकल दूंगा जिससे इनको होश तो आ जायेगा लेकिन इनको पूरी तरह से ठीक होने के लिए हमें उसी ऑरेंज जिनसेंग की जरुरत पड़ेगी जिसके कारन इनको ये प्रॉब्लम हुयी है और हमें जो ऑरेंज जिनसेंग चाहिए वो काम से काम 300 साल पुराण होना चाहिए.
सिकेन्द्र- तो इसमें प्रॉब्लम क्या है आप बस डैड को किसी तरह से होश में ले आइये और रही बात ऑरेंज जिनसेंग की तो आप उसकी चिंता मत कीजिये ये औषधि मुझे चाहे जहा भी मिले और जितने में भी मिले मई उसे जरूर ले आऊंगा.
सिकेन्द्र सिंह राठौर के बात सुन कर मई निराशा से अपना सर हिलाते हुए बोलै.
मई- आप जितना बोल रहे है ऑरेंज जिनसेंग की लाना उतना भी आसान नहीं है क्युकी ऑरेंज जिनसेंग एक दुर्लभ जड़ी बूटी है ये जड़ी बूटी बहुत मुश्किल से मिलती है अगर ये जड़ी बूटी आपको मिलेगी भी तो 5 या 10 साल पुराण होगा लेकिन 300 साल पुराण ऑरेंज जिनसेंग मिलना नामुमकिन है.
मेरी बात को सुन कर सरे लोग उदाश हो गए मई उनको इस तरह से उदाश होता हुआ देख कर उनसे बोलै.
मई- आप सब ऐसे उदाश मत होइए मई सबसे पहले उनको होश में लेन की कोशिश करता हु फिर उनसे पूछूंगा की इनको वो कीड़ा कहा किस जगह पर कटा था हो सकता है की जहा इनको वो कीड़ा कटा हो वह पर ऑरेंज जिनसेंग अभी भी मौजूद हो और क्या पता हमें उस जगह पर hi 300 साल पुराण ऑरेंज जिनसेंग मिल जाये क्युकी मई जहा तक जनता हु की ये कीड़ा बहुत पुराने ऑरेंज जिनसेंग के आप पास hi मिलते है.
मेरी बात को सुन कर सब खुस हो जाते है उन लोगो के चेहरे पर एक उम्मीद की किरण दिखाई देने लगती है तभी कौशल्या देवी मुझे बोलती है.
कौशल्या- क्या तुम सच बोल रहे हो क्या ये सच में होश में आ जायेंगे देखो बीटा तुम मुझसे मजाक मत करना क्युकी मई कब से इनको होश में आने की इंतजार कर रही हु.
कौशल्या देवी के बात को सुन कर मई उन्हें हिमत देते हुए बोलै.
मई- आप चिंता मत कीजिये और मेरे बातो पर बिस्वास कीजिये आप जल्द hi इनको होश में देख पाएंगी आप सब एक काम कीजिये मुझे एक संत कमरे दे दीजिये ताकि मई कुछ दवाइया बना सकू.
मेरी बात को सुन कर सिकेन्द्र जल्दी से बोलै.
सिकेन्द्र- है है क्यों नहीं आप मेरे साथ आइये.
इसके बाद सिकेन्द्र मुझे एक कमरे में ले कर आ गया कमरे में आने के बाद वो मुझसे बोलै.
सिकेन्द्र- आप आराम से यहाँ पर दवा रेडी कर सकते है आपको यहाँ पर कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा.
इतना बोल कर सिकेन्द्र सिंह राठौर वह से चले जाते है उनके जाने के बाद मई अपने स्टोरेज रिंग से द्रोणपुष्पी औषधि नागकेशर औषधि वाच औषधि अश्वगंधा औषधि कुल मिला कर ऐसे hi 10 जड़ी बूटी निकला और उसको अपने शक्तियों से पाउडर बनाने लगा जब वो साडी जड़ी बुटिया पाउडर बन गयी तो मई उस रूम से बहार आ गया और महेंद्र सिंह राठौर के रूम में चला गया जब मई वह पर पंहुचा तो देखा की वह पर अभी भी सरे लोग मौजूद थे उन सरे लोगो को देख कर मई उन सब से बोलै.
मई- आप सब अब इस कमरे से चले जाइये क्युकी मई चाहता हु की जब मई महेंद्र सिंह राठौर का इलाज करू तो यहाँ पर मेरे के आलावा और कोई न हो.
मेरी बात को सुन कर सभी मुझे शक भरी निगाहों से देखने लगे उन सब को ऐसे मुझे देखता हुआ देख कर मई उन सब से बोलै.
मई- अरे आप सब मुझे ऐसे मत देखिये मई आप सब को इस लिए बहार जाने के लिए बोलै है की मई अपने पेशेंट का इलाज अकेले में hi करता हु अब अगर आप लोगो को मुझसे इनका इलाज करवाना है तो आप सब को यहाँ से जाना hi होगा.
मेरी बात को सुन कर सब सोच में पद गए फिर कुछ देर सोचने के बाद पायल मुझसे बोली.
पायल- मई तो तुम्हारी दोस्त हु न तो क्या यहाँ पर मई भी नहीं रुक सकती वो क्या है न की मुझे तुम्हे इलाज करते हुए देखना है प्लीज प्रतिक.
मई पायल के बात सुन कर कुछ सोच में पद गया फिर थोड़ी देर सोचने के बाद मई बोलै.
मई- ठीक है तुम यहाँ रुक सकती हो और बाकि आप सब अब यहाँ से जा सकते है.
मेरे बात को सुन कर पायल को छोड़ कर बाकि सब धीरे धीरे उस रूम से बहार निकल जाते है उनके जाने के बाद मई अपने हाथ अपने पॉकेट में डालता हु और अपने स्टोरेज रिंग से सिल्वर नीडल का दबा निकल लेता हु इसके बाद मई पायल को बोलता हु.
मई- पायल तुम अपने दादा जी के ऊपर के हिसे का सारा कपडा निकल दो और उनके शरीर पर लगे सरे इक्विपमेंट को भी हटा दो है अभी यहाँ पर जो कुछ भी होगा तुम उसे किसी को नहीं बताओगी.
मेरी बात को सुन कर पायल मुझे घूरते हुए बोली.
पायल- तुम इतना इक्विपमेंट क्यों निकलवा रहे हो अगर मई इक्विपमेंट निकल दिया तो फिर डैड जी को बहुत प्रॉब्लम होगी और तुम इक्विपमेंट निकलवा कर ऐसा क्या करने वाले हो जो मई किसी को नहीं बता सकती.
पायल के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.
मई- कुछ नहीं होगा तुम्हारे दादा जी को मई हु न यहाँ पर बस तुम देखती जाओ की मई क्या करने वाला हु बस तुम इतना यद् रखना की तुम इस कमरे में जो भी देखोगी वो किसी को मत बताना.
पायल- ठीक है मई किसी को नहीं बताउंगी.
इतना बोल कर पायल अपने दादा जी के पास गयी और वो पहले उनके शरीर पर लगे हुए सरे इक्विपमेंट को हटाई इसके बाद वो उनके ऊपर के सरे कपडे हटा दी जब मैंने देखा की महेंद्र सिंह राठौर के शरीर से सरे कपडे और इक्विपमेंट हटा दिए गए तो मई सिल्वर नीडल के दबे से सरे नीडल को निकला और उसे हवा में उछाल दिया और अपने स्प्रिचैल एनर्जी से सरे नीडल को हवा में काबू कर लिया जिसके कारन सरे नीडल हवा में hi रुक गया इसके बाद मई अपने सप्त हस्त ब्रह्मा धन्वंतरि तकनीक का इस्तेमाल करते हुयी सरे नीडल को एक एक कर के महेंद्र सिंह राठौर के शरीर के बिंदुओं में डालने लगा.
इधर पायल सरे नीडल को पहले हवा में रुकते देख इसके बाद एक एक नीडल को अपने दादा के शरीर में लगते हुए देख कर पायल हैरान हो गयी और आँखे फाड् कर कभी मुझे तो कभी सरे नीडल को देख रही थी इधर मई उन सरे नीडल को एक एक कर महेंद्र सिंह राठौर के शरीर के बिंदुओं में लगा दिया इसके बाद मई अपने पॉकेट से जड़ी बूटियों के पाउडर को निकला और उसे भी हवा में उछाल दिया इसके बाद मई अपने एक हाथ से अपने शरीर से योगिक शक्ति को निकल कर महेंद्र सिंह राठौर के श्री में फैले हुए जहर को एक जगह करने लगा और दूसरे हाथ से अपने स्प्रिचैल एनर्जी से जड़ी बूटी के पाउडर को महेंद्र सिंह राठौर के शरीर में लगे हुए नीडल के माध्यम में उनके शरीर में डालने लगा ऐसे hi मई लगभग 15 मिनट तक एक हाथ से उनके शरीर के अंदर के अपने योगिक शक्ति से सरे पाइजन को एक जगह जमा करता रहा और दूसरे हाथ से अपने स्प्रिचैल एनर्जी से जड़ी बूटी के पाउडर को उनके शरीर में डालता रहा जिसके कारन उनके शरीर में जो पाइजन था वो थोड़ा थोड़ा कर के ख़तम होते गए.
अब तक उनके शरीर से बहुत साडी पाइजन ख़तम हो चुकी थी लेकिन उनके शरीर के अंदरूनी जखम अभी भी वैसा hi था जब मैंने देखा की महेंद्र सिंह राठौर के शरीर के अंदर से लगभग 90% परसेंट जहर ख़तम हो गया है तो मई अपना नीडल उनके शरीर से बहार निकल लिया जैसे hi मई नीडल को बहार निकला तो उनके शरीर को एक झटका लगा और महेंद्र सिंह राठौर ने काळा खून की वोमिटिंग कर दी इधर पायल ने अपने दादा को खून के वोमिटिंग करते हुए देखा तो वो घबरा गयी जल्दी से वो मेरे पास आयी और हड़बड़ाते हुए मुझसे बोली.
पायल- ये ये दादा जी खून के वोमिटिंग क्यों कर रहे है वो वो ठीक तो है न.
मई- अब तुम्हे चिंता करने की जरुरत नहीं है उनके शरीर में जो जहर बच गया था वो वोमिटिंग के माध्यम से बहार आ गया है अब तुम्हारे दादा जी के शरीर से सरे जहर बहार निकल गया है कुछ देर बाद उनको होश आ जायेगा.
मेरी बात को सुन कर पायल खुस हो गयी और मुझसे बोली.
पायल- थैंक यू प्रतिक तुमने मेरे दादा जी की जान बचा ली अगर मेरे दादा जी को कुछ हो जाता तो सायद मेरे परिवार भी बर्बाद हो जाता.
मई- देखो पायल अभी तुम्हारे दादा जी पूरी तरह से ठीक नहीं हुए है अगर इनको पूरी तरह से ठीक करना है तो हमें 300 साल पुराणी ऑरेंज जिनसेंग चाहिए और है तुम अभी बहार जा कर सबको खुस खबरि दे दो और साथ में मेरे नहाने का भी बेवस्था करवा देना.
मेरी बात सुन कर पायल की ध्यान मेरे ऊपर गया तो वो चौक गयी क्युकी मेरे कपडे पर काळा रंग का खून लगा हुआ था जिसे देख कर वो मुझसे बोली.
पायल- अरे ये तुम्हारे कपडे पर क्या लग गया.
मई- जब तुम्हारे दादा जी ने वोमिटिंग किया तो मई उनके पास में hi खड़ा था इस लिए उनका थोड़ा वोमिटिंग मेरे ऊपर भी आ गया.
मेरे बात को सुन कर पायल जल्दी से बहार गयी और सबको बोली की दादा जी अब ठीक है उनको कुछ देर बाद होश आ जायेगा पायल के बात सुन कर सब खुस हो गए और जल्दी से महेंद्र सिंह राठौर के रूम में आ गए रूम में आने के बाद सब दादा जी के पास चले गए और उनको देखने लगे फिर मुझे थैंक यू बोलने के लिए मेरे तरफ मुड़े तो मेरी हालत देख कर सब घबरा गए फिर जल्दी से सिकेन्द्र सिंह राठौर मेरे पास आये और मुझे बोले.
सिकेन्द्र- अरे ये आपको क्या हुआ आपको ये खून कहा से लग गया.
सिकेन्द्र के बात सुन कर मई उनको सब बताया तब जाकर वो संत हुए और मुझे अपने साथ आने के लिए बोले तो मई उनके साथ जाने लगा थोड़ी देर बाद वो मुझे एक रूम में लेकर गए और मुझसे बोले आप इस रूम के बाथरूम में जाकर फ्रेश हो जाइये उनकी बात को सुन कर मई है में गर्दन हिलाया और अपना शर्ट निकल दिया जैसे hi मैंने अपना शर्ट निकला तो मई जो गले में लॉकेट पहना था (ये लॉकेट वही था जो आशाराम छोड़ते समय गुरुदेव ने मुझे दिया था और वो मुझसे बोले थे की ये लॉकेट बचपन से मेरे साथ है) वो लॉकेट मेरे गले में लटकता हुआ बहार दिखाई देने लगा और साथ में मेरे बहो में बना हुआ बिरथ मार्क सुदर्शन चक्र के निशान और वेद (किताब) के निशान भी दिखाई देने लगा.
इधर मुझे रूम में छोड़ कर सिकेन्द्र रूम से जाने hi वाले थे की तभी उनकी नजर मेरे लॉकेट पर गयी तो वो लॉकेट उनको जाना पहचाना लगा फिर उनका ध्यान मेरे बिरथ मार्क पर गया जिसे देख कर हैरान हो गए और अपने मन में सोचने लगे.
सिकेन्द्र- (अपने मन में) ये ये ये तो वही निशान है जो मेरे प्यारे भतीजे के जनम के समय उसके शरीर पर था और ये लॉकेट ये लॉकेट मुझे जाना पहचाना क्यों लग रहा है (फिर कुछ सोचते हुए) ये लॉकेट तो वही लॉकेट है जो मेरा भतीजा रूद्र को डैड ने बचपन में दिया था तो क्या ये मेरा वही भतीजा रूद्र है लेकिन ये वो कैसे हो सकता है वो तो उस हादसे में मारा गया था लेकिन अगर ये वो नहीं है तो इसके पास ये लॉकेट कहा से आयी और तो और इसके दोनों बहो पर वही निशान भी है लगता है की मुझे इससे इसके बारे में पूछना पड़ेगा.
ये सोच कर वो आगे बढ़ कर इसके बारे में अभी मुझे पूछना hi छह रहे थे की तभी मई अपना बनियान भी बहार निकल दिया जिसे देख कर वो और हैरान हो गए क्युकी मेरे शरीर से जैसे hi बनियान निकला तो मेरे पीठ पर बना हुआ त्रिशूल का निशान उनके सामने आ गया जिसे देख कर उनको और यकीं हो गया था की हो न हो मई hi उनका भतीजा रूद्र हु.
इधर मई इन सब बातो से अनजान अपना सर कपडा निकलने के बाद अपने शरीर पर एक टॉवल लपेटा और बाथरूम में गश गया मुझे बाथरूम में जाता हुआ देख कर वो भी बहार निकल गए और किसी सोच में गम होते हुए वो महेंद्र सिंह राठौर के रूम में चले गए जैसे hi सिकेन्द्र वह पंहुचा तो संजय और कौशल्या के नजर उस पर गयी तो दोनों ने देखा की सिकेन्द्र अपने hi सोच में गम है और उसके चेहरे पर कभी खुसी का भाव तो कभी चिंता का भाव आ रहा है तो संजय सिंह राठौर आगे बढ़ते हुए सिकेन्द्र को उसके सोच से बहार लेट है और उनसे बोलते है.
संजय- सिकेन्द्र तुम जब से प्रतिक को उस रूम में छोड़ कर आये हो तब से किसी सोच में पड़े हुए हो क्या बात है तुम क्या सोच रहे हो.
संजय के बात सुन कर सिकेन्द्र गंभीर आवाज में उनसे बोलै.
सिकेन्द्र- मुझे आप दोनों से कुछ जरुरी बात करनी है आप दोनों मेरे साथ मेरे रूम में चलिए.
सिकेन्द्र को इस तरह से बात करता हुआ देख कर कौशल्या देवी को उनकी चिंता होने लगी इस लिए वो उनसे बोली.
कौशल्या- क्या बात है सिकेन्द्र जब से तुम डॉ. प्रतिक को उस रूम में छोड़ कर आये हो तब से तुम परेशां हो क्या बात है.
सिकेन्द्र- माँ मई यहाँ अभी कुछ नहीं बता सकता इस आप और भैया प्लीज मेरे साथ आइये मुझे आप दोनों से एक जरूर बात करनी है.
सिकेन्द्र के बात सुन कर दोनों उनके साथ उनके रूम में आ गए रूम में आने के बाद संजय और कौशल्या देवी सिकेन्द्र के बोलने का इंतजार करने लगे लेकिन सिकेन्द्र अभी भी अपने सोच में hi गम था ये देख कर संजय सिंह राठौर सिकेन्द्र से बोले.
संजय- क्या बात है सिकेन्द्र तुम हमें यहाँ बुला खुद किस सोच में गम हो गए.
संजय में आवाज सुन कर सिकेन्द्र अपने होश में आता है और दोनों को देखते हुए बोलता है.
सिकेन्द्र- भैया और माँ मई आप दोनों से एक बात करना चाहता हु लेकिन समझ में hi नहीं आ रहा है की मई वो बात आप दोनों से कैसे बोलू क्युकी मैंने अभी अभी जो देखा है मुझे उस पर विस्वास hi नहीं हो रहा है.
सिकेन्द्र के बात सुन कर कौशल्या देवी झूल झूलते हुए उससे बोले.
कौशल्या- ऐसा क्या देख लिया तुमने की तुम्हे उस पर विस्वास hi नहीं हो रहा है अब साफ साफ बताओगे या यु hi अपनी आधी अधूरी बात बोल कर हमें भी परेशां करने की तुम्हारी मनसा है.
कौशल्या देवी के बात सुन कर सिकेन्द्र कुछ देर सोचने के बाद उन दोनों वो सब बात बताना सुरु किया जो उसने देखा था.
सिकेन्द्र- दरअसल बात ऐसी है की मई जब डॉ. प्रतिक को बाथरूम उसे करने के लिए एक रूम में ले कर गया और उनको बाथरूम उसे करने के लिए बोलै तो वो वही पर मेरे सामने hi अपना शर्ट निकल दिया और जब वो अपना शर्ट निकला तो मई उनके गले में एक लॉकेट देखा जो हु बहु वैसा hi था जैसा की डैड ने बचपन में रूद्र को दिया था और तो और उसके शरीर पर वो साडी बिरथ मार्क है जो रूद्र के शरीर पर जनम के समय से hi था.
सिकेन्द्र के बात सुन कर कौशल्या देवी और संजय सिंह राठौर दोनों हैरान हो गए कौशल्या देवी तो बहुत ज्यादा हैरान हो गयी थी और साथ में उन्हें सदमा भी लग गया था जिसके कारन वो वही पर रखे हुए सोफे पर धाम से गिर गयी और उनकी आँखों से खुसी के आंसू गिरने लगे वो कपट हुए आवाज में बोली.
कौशल्या- कककक क्या तट तुम सच बोल रहे हो क्या वो लॉकेट और वो बिरथ मार्क सच में उसके शरीर पर है क्या क्या वो वो मेरा गायब हुआ पोता रूद्र है.
कौशल्या देवी की बात सुन कर सिकेन्द्र कुछ सोचते हुए बोलै.
सिकेन्द्र- मुझे ये नहीं पता की वो हमारा रूद्र है या नहीं लेकिन मुझे पूरा बिस्वास है की मई जो लॉकेट उसके गले में देखा वो रूद्र का hi लॉकेट है और उसके शरीर पर निशान है ठीक वैसा hi निशान रूद्र के शरीर पर भी था.
सिकेन्द्र के बात सुन कर कौशल्या देवी के आँखों से लगातार खुसी के आंसू गिर रहा था वो बहुत ज्यादा खुस हो गयी थी तो वही सिकेन्द्र के बात सुन कर संजय भी सोच में पद गए फिर वो कुछ देर सोचने के बाद बोलै.
संजय- तुम्हारे बातो से तो लग रहा है की वो हमारा hi रूद्र है लेकिन ये कोई कोइंसिडेन्स भी हो सकता है या फिर ऐसा भी हो सकता है की इसे रूद्र के बारे में पहले से hi पता हो इस लिए वो हमारा रूद्र बन कर हमारे बिछ आने की कोशिश कर रहा हो.
संजय सिंह राठौर के बात सुन कर दोनों हैरान हो गए फिर सिकेन्द्र उनके बातो को जबाब देते हुए बोलै.
सिकेन्द्र- मुझे नहीं लगता की वो ये सब हमारे परिवार में आने के लिए नाटक कर रहा है क्युकी जब मई उसको यहाँ आने के लिए बोलै था तो पहले वो मुझे मन कर दिया था और तो और अगर उसे मेरे परिवार में आना होता तो वो ये सब साबुत लेकर अगर डायरेक्ट यहाँ आता तो भी हम उन सरे सबूतों के बिनाह पर उसे अपना रूद्र मन लेते तो उसे ये सब करने की क्या जरुरत है.
सिकेन्द्र के बात सुन कर जहा संजय सिंह राठौर कुछ सोचने लगे तो वही कौशल्या देवी को पूरा यकीं हो गया था की मई उनका hi पोता रूद्र हु इस लिए बोली.
कौशल्या- अब मुझे पूरा यकीं हो गया है की वो मेरा जान से प्यारा पोता रूद्र hi है क्युकी जब मई उसको पहली बार देखा था तो मुझे ये एहसास हो रहा था की वो मेरा कोई अपना hi है इसीलिए मई उससे उसके फॅमिली के बारे में पूछा था और उसने मुझे बताया था की वो बचपन में hi अपने फॅमिली से बिछड़ गया था और उसे उसके गुरुदेव ने पल पॉश कर बड़ा किया और ये सब कोई कोइंसिडेन्स नहीं हो सकता वो वो मेरा hi पोता रूद्र है.
अपनी माँ के बात सुन कर संजय सिंह राठौर बोले.
संजय- सिकेन्द्र के बात सुन कर मुझे भी लगता है की वो हमारा hi रूद्र है लेकिन हम कोई जल्दीबाजी नहीं कर सकते है क्युकी अगर उसमे हमारे दुश्मन की कोई चल हुयी तो हम सब बहुत बड़ी मुसीबत में फस सकते है इस लिए हमें पहले उसे अच्छे से जांचना होगा.
संजय के बात सुन कर सिकेन्द्र को उसकी बात अच्छी लगती है लेकिन कौशल्या इस बात पर संजय सिंह राठौर पर भड़क जाती है और उनसे बोलती है.
कौशल्या- तुम ये क्या बोल रहे हो मेरा पोता कितने दिनों बाद मुझे मिला है मई तो समझ गयी थी की मेरा रूद्र इस दुनिया में नहीं है लेकिन भगवन के कृपा से वो अभी जिन्दा है और मेरे पास है तो तुम चाहते हो की मई उसे अभी भी अपने से अलग राखु आखिर तुम चाहते क्या हो की उसका परिवार होते हुए भी वो एक अनाथ के जिंदगी जिए.
कौशल्या के बात सुन कर संजय हड़बड़ाते हुए बोलै.
संजय- नहीं माँ मई ये कभी नहीं चाहूंगा की हमारा रूद्र एक अनाथ के जिंदगी जिए आपकी तरह मई भी अपने भतीजे को गले लगाने के लिए इतना hi तड़प रहा हु जितना की आप तड़प रही बाई लेकिन आप मेरे बात को समझ नहीं रही है अगर ये हमारे किसी दुश्मन के चल हुयी तो हम क्या करेंगे.
संजय के बात सुन कर कौशल्या देवी अभी कुछ बोलने hi वाली थी की तभी सिकेन्द्र उनको समझते हुए बोले.
सिकेन्द्र- माँ भैया सही बोल रहे है मई जनता हु की प्रतिक hi हमारा रूद्र है लेकिन हमें इसकी जाँच करनी जरुरी है अगर वो हमारा रूद्र न हो कर हमारे किसी दुश्मन के चल हुयी तो हम सब बहुत बड़ी मुसीबत में फास जायँगे और वैसे hi जहा हम रूद्र के बिना इतने दिन रह गए वैसे hi कुछ दिन और रह लेंगे.
सिकेन्द्र के समझने के बाद कौशल्या देवी बोली.
कौशल्या- ठीक है तो हम उसे जचेंगे कैसे.
कौशल्या देवी के बात सुन कर संजय उनसे बोलै.
संजय- सबसे पहले तो हमें ये बात सिर्फ हम तीनो के बिच hi रखना होगा और बात प्रतिक को जांचने की तो हम उसको बिना बताये उसका डीएनए टेस्ट करवा लेंगे आप किसी तरह से प्रतिक के बल का एक टुकड़ा के आइये बाकि का काम मई कर लूंगा.
संजय के बात सुन कर कौशल्या देवी कुछ सोचते हुए बोली.
कौशल्या- ठीक है लेकिन जो भी करना जल्दी करना क्युकी अगर ये मेरा पोता रूद्र है तो मई इससे अब अलग नहीं रह सकती इसने बहुत दिन तक परिवार के रहते अनाथ के जिंदगी जी लिया अब नहीं.
इसके बाद सब उस रूम से निकल कर महेंद्र सिंह राठौर के रूम में आ जाते है अब तक महिंद्रा सिंह राठौर को होश आ चूका था लेकिन वो अभी भी बहुत कमजोर थे इस लिए वो हिल दल नहीं रहे थे बस हलकी आवाज में बात कर रहे थे उनको होश में आया हुआ देख कर सब बहुत खुस हो गए कौशल्या देवी को तो खुसी का कोई ठिकाना hi नहीं था खुसी के मरे उनके आँखों से आंसू आने लगे हलाकि वह पर मौजूद सभी लोगो के आँखों में आंसू थे लेकिन कौशल्या देवी के आँखों में आज कुछ जायदा hi आंसू था वो जल्दी से महेंद्र सिंह राठौर के पास चली गयी और उनके एक हाथ को पकड़ कर बोली.
कौशल्या- अब कैसी है आपकी तबियत आप जैसा फील कर रहे है.
कौशल्या देवी के बात सुन कर महेंद्र सिंह राठौर हलकी मुस्कान के साथ धीमी आवाज में बोले.
महेंद्र- जिसकी तुम जैसी बीवी हो उसे भला क्या हो सकता है मई ठीक हु इस लिए तुम अब रोना बंद करो तुम्हे पता है न की मुझे तुम्हारे आँखों में आंसू पसंद नहीं है.
महेंद्र सिंह राठौर के बात सुन कर सबके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है तो वही महेंद्र सिंह राठौर के बात सुन कर कौशल्या देवी शर्मा जाती है और फिर घुसे से बोलती है.
कौशल्या- आप अभी बीएड पर पड़े हुए है फिर भी आपकी मजाक करने की आदत नहीं गयी.
कौशल्या देवी के बात सुन कर महेंद्र सिंह राठौर अपने धीमी आवाज में बोले.
महेंद्र- क्या करू जब मई तुम्हे देखता हु तो खुद को कण्ट्रोल नहीं कर पता हु वैसे क्या तुम मुझे बता सकती हो की मुझे क्या हुआ था और किसने मुझे ठीक किया.
महेंद्र सिंह राठौर के बात को सुन कर कौशल्या देवी अभी कुछ बोलने hi वाली थी की तभी पीछे से एक आवाज आती है.
आवाज- आपको एक ऐसी कीड़े ने कटा था की आपको बचा पाना बहुत मुश्किल था लेकिन शुक्र है ऊपर वाले की की आप बच गए अगर आपको जब किसी चीज के बारे में जानकारी न हो तो उसे हाथ नहीं लगाना चाहिए वर्ण कभी कभी बात जान पर भी आ जाती है.
पीछे से आयी आवाज को सुन कर सब चौक जाते है और पीछे मुद उस आवाज वाले को देखते है तो पते है की वह पर मई खड़ा था दरअसल मई बाथरूम से नाहा कर अपना स्टोरेज रिंग से कपड़ा निकल और उसे पहन कर बहार आया तो देखा की उस रूम में कोई नहीं है तो मई सीधा महेंद्र सिंह राठौर के रूम में चला आया जहा मुझे महेंद्र सिंह राठौर की बात सुनाई दिया तो मई खुद को बोलने से रोक नहीं पाया इधर मेरे बात को सुन कर सब मुझे देखने लगे वही कौशल्या देवी के चेहरे पर मेरे लिए ममता दिखाई दे रहा था अगर उनका बस चलता तो वो तुरंत आ कर मुझे गले लगा लेती वही महेंद्र सिंह राठौर अपने घर में किसी अनजान को देख कर मुझसे बोले.
महेंद्र- वैसे तुम हो कोण और तुम्हारे बोलने का मतलब क्या है तुम मुझे ये क्यों बोले की मुझे किसी कीड़े ने कटा है, मुझे किस कीड़े ने कटा था बताओ मुझे.
महेंद्र सिंह राठौर के बात सुन कर सिकेन्द्र आगे आते हुए बोले.
सिकेन्द्र- डैड इन्होने hi आपकी जान बचाई है इनका नाम डॉ. प्रतिक है और ये एक आयुर्वेदिक डॉक्टर है.
सिकेन्द्र के बात सुन कर महिंद्रा सिंह राठौर मुझे ध्यान से देखते है और मन hi मन सोचते है.
महिंद्रा- (अपने मन में) इस लड़के को देख कर मुझे ऐसा क्यों लग रहा है की ये मेरा hi खून है और मुझे इससे अपनत्व का भाव आ रहा है और साथ में इस लड़के के चेहरे पर मेरे सूर्य जैसा झलक है जब सूर्य इसके उम्र का था तब ऐसा hi दीखता था कही ये मेरा खोया पूरा पोता तो नहीं है (फिर कुछ सोच कर) नहीं नहीं ये कैसे हो सकता है मई भी क्या क्या सोचने लगता हु.
फिर वो अपने ख्यालो से बहार आ कर सिकेन्द्र से बोलता है.
महिंद्रा- क्या तुम सच बोल रहे क्या मुझे इसी ने बचाया है लेकिन ये तो अभी बहुत छोटा है ये कैसे एक डॉक्टर hi सकता है.
महिंद्रा सिंह राठौर के बात सुन कर कौशल्या देवी बोली.
कौशल्या- सिकेन्द्र ठीक बोल रहा है आपको प्रतिक ने hi बचाया है और आप इसे छोटा मत समझिये ये एक बहुत बड़ा डॉक्टर है और लोग इसे चमत्कारी डॉक्टर भी कहते है.
कौशल्या देवी के बात सुन कर महिंद्रा सिंह राठौर को बिस्वास hi गया की उन्हें मैंने hi बचाया है तो मुझसे बोले.
महिंद्रा- थैंक यू डॉ. प्रतिक अपने तुमने मेरी जान बचा ली लेकिन आप अभी क्या बोल रहे थे मुझे किसी कीड़े ने कटा है लेकिन मुझे किस कीड़े ने कटा है और और अगर वो कीड़ा जहरीला था तो मई इतने दिन तक जिन्दा कैसे रहा.
मई- इसमें थैंक यू बोलने वाली क्या बात है आप मेरा पेशेंट है इस नाते आपका इलाज करना मेरा फर्ज है और रही बात कीड़े की तो आपको जिनसेंग के अस्स पास रहने वाली ट्रांसपेरेंट कीड़े ने कटा था जिसका जहर बहुत खतरनाक होता है हलाकि उसके काटने से आदमी तुरंत नहीं मरता है लेकिन उसके काटने के बाद आदमी जितना दिन जीता है उस आदमी के लिए उतना दिन नर्क से काम नहीं होता वैसे आप अभी पूरी तरह से ठीक नहीं हुए है आपको पूरी तरह से ठीक करने के लिए 300 साल पुराण ऑरेंज जिनसेंग की जरुरत होगी तो क्या आप बता सकते है की आपको उस कीड़े ने कहा कटा था.
मेरी बात को सुन कर महेंद्र सिंह राठौर पहले तो हैरान हो गए फिर कुछ सोचते हुए वो बोले.
महेंद्र- मुझे ये तो यद् नहीं है की मुझे उस कीड़े ने कहा कटा था लेकिन अगर वो कीड़ा जिनसेंग के पास होता है तो मुझे अंदाजा है की इस कीड़े ने मुझे कहा कटा होगा.
उनकी बात को सुन कर मई उत्साहित होते हुए पूछा
मई- ठीक है आपको इस बारे में जो भी पता है वो मुझे आप मुझे बता सकते है सायद वह पर मुझे वो जिनसेंग मिल जाये जिससे आप ठीक हो सके.
मेरी बात को सुन कर महेंद्र सिंह राठौर मुझे बताना सुरु किया.
महेंद्र- आज से 5 महीने पहले मुझे इस आइसलैंड के पुराने मालिक से मुलाकात हुआ था तो वो बात hi बात में मुझे बताया की इस आइसलैंड पर बहुत साडी औषधियां मौजूद है जिसमे सालो पुराण जिनसेंग भी है जब मैंने सुना की इस आइसलैंड पर सालो पुराण जिनसेंग है तो मेरे मन में लालच आ गया और मई इस आइसलैंड के दूसरी साइड उस जिनसेंग की खोज में चला गया और वह मुझे वो जिनसेंग मिला भी लेकिन वो 15 साल पुराण जिनसेंग hi था इस लिए मई उसे वही छोड़ दिया था.
महेंद्र सिंह राठौर के बात सुन कर मई सोच में पद गया फिर कुछ देर सोचने के बाद बोलै.
मई- अगर वह पर आपको 15 साल पुराण जिनसेंग मिला था तो मुझे पूरा यकीं है की वह पर जरूर 300 साल पुराण जिनसेंग भी होगा मुझे एक बार वह जा कर देखना चाहिए आप मुझे वह का लोकेशन बता दीजिये मई सुबह hi जा कर देखता हु.
मेरी बात को सुन कर वह मौजूद सरे लोग खुस हो गए लेकिन कौशल्या देवी थोड़ी चिंतित लग रही थी वो चिंतित आवाज में मुझसे बोली.
कौशल्या- नहीं तुम वह पर नहीं जाओगे मई किसी नौकर को वह पर भेज कर वो ऑरेंज जिनसेंग मंगवा लुंगी क्युकी वह पर जिनसेंग है तो वो कीड़े भी जरूर होंगे और मई नहीं चाहती की तुम हमारे लिए अपना जान खतरे में डालो.
कौशल्या देवी के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.
मई- दादी जी आप मेरी चिंता मत कीजिये मुझे कुछ नहीं होगा और वैसे भी 300 साल पुराण जिनसेंग को पहचानना सब के बस की बात नहीं है मई कुछ सोच समझ कर hi वह जाने का फैसला किया है.
मेरी बात को सुन कर कौशल्या देवी कुछ नहीं बोल पायी लेकिन उनके चेहरे पर अभी भी चिंता के लकीर दिखाई दे रहा था वही मेरी बात को सुन कर महेंद्र सिंह राठौर बोले.
महिंद्रा- ठीक है अगर आपको वह जाना है तो मई सुबह आपको इस आइसलैंड का एक नक्शा दूंगा और उस जगह का पता बता दूंगा अभी आप जाकर आराम कीजिये.
महेंद्र के बोलने बाद हम सब वह पर थोड़ी देर और रुके जिसमे सिकेन्द्र ने मुझसे पूछा की वो अपने डैड को खाने में कुछ दे सकता है या नहीं तो मई उन्हें हेअल्थी सोऊ देने के लिए बोलै फिर हम लोग वह से निकल कर दिंनिंग टेबल पर आ गए और खाना खाया इसके बाद सिकेन्द्र मुझे गेस्ट रूम में लेकर आ गया और मुझे आराम करने के लिए बोल कर चला गया.
नेक्स्ट डे सुबह शनाया सुबह सुबह hi रेडी हो कर हॉस्पिटल जा रही थी क्युकी आज उसे अपने डैड को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करना था तभी उसके पास शानवी आती है और शनाया से बोलती है.
शानवी- दी आप इतनी सुबह सुबह कहा जा रही है.
शनाया- शानवी मई अभी हॉस्पिटल जा रही हु आज डैड को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करवाना है.
शनाया के बात सुन कर शानवी कुछ सोचते हुए बोली.
शानवी- दी मई भी आपके साथ हॉस्पिटल चलूंगी क्युकी मुझे आज हॉस्टल वापस जाना है वो क्या है न की आज से मेरा कॉलेज स्टार्ट हो रहा है मई सोच रही हु की हॉस्टल जाने से पहले डैड से एक बार मिल लू.
शनाया- ठीक है तो तुम जल्दी रेडी हो कर आओ.
शानवी- Ok दी बस 10 मिनट आप वेट कीजिये.
इतना बोल कर शानवी जल्दी से अपने रूम में जाती है और रेडी होने लगती है करीब 20 मिनट बाद वो रेडी हो कर शनाया के पास गयी जिसे देख कर शनाया बोली.
शनाया- तुम्हारी 10 मिनट कुछ जल्दी नहीं हो गया.
शनाया के बात सुन कर शानवी बस मुस्कुरा देती है फिर दोनों वह से अपने अपने गाड़ी से हॉस्पिटल के लिए निकल जाते है करीब आधा घंटा के ड्राइव के बाद दोनों हॉस्पिटल पहुंचते है इसके बाद गाड़ी पार्क कर के दोनों अपने डैड के पास चले जाते वह जाने के बाद शानवी अपने माँ डैड से मिलती है तो वही शनाया अपने डैड के डिस्चार्ज के लिए बात करने डॉ. खुराना के केबिन में चली जाती है इधर शानवी अपने माँ डैड से मिल कर और उन्हें बता कर की उसकी सोल्लगे खुल गयी इस लिए वो वापस हॉस्टल जा रही है और वह से निकल जाती है जैसे hi वो हॉस्पिटल से बहार निकलती है वैसे hi एक आदमी अपने बॉस को कॉल करता है और बोलता है.
आदमी- बॉस प्रतिक की वाइफ की छोटी सिस्टर अभी अभी अकेले निकली है क्या हम उसे उठा ले.
उस आदमी के बात सुन कर उसका बॉस यानि की दिलावर बहुत खुस होता है और बोलता.
दिलावर- वह क्या खबर सुनाई है तुमने अगर वो सच में अकेले गयी है तो उसका पीछा करो और सुनसान जगह देख कर उसे उठा लो आज मई उस लड़की के साथ मजे करना चाहता हु.
आदमी- ठीक है बॉस.
इतना बोल कर वो आदमी अपने आदमियों को इशारा करता है और फिर सब शानवी के गाड़ी का पीछा करने लगते है इधर शानवी इन सब से बेखबर मस्ती में अपने गाड़ी को सोल्लगे के तरफ भगाये जा रही थी इधर वो सरे गुंडे भी शानवी के पीछा कर रहे थे लेकिन इन लोगो को ये मालूम नहीं था की कोई और भी था जो इन सब के पीछे पीछे आ रहा था खैर कुछ दूर आगे जाने के बाद एक सुनसान जगह आया जहा पर कोई भी नहीं था ये देख कर उन गुंडों के लीडर को ये जगह शानवी के किडनैप करने के लिए अच्छा लगा इस लिए वो अपने ड्राइव को शानवी के गाड़ी का ओवरटेक करने के लिए बोलै जिसे सुन कर वो ड्राइवर अपनी गाड़ी के स्पीड को और बढ़ा दिया और शानवी के गाड़ी को ओवरटेक करते हुए अपना गाड़ी शानवी के गाड़ी के सामने रोक दिया.
इधर जैसे hi शानवी ने देखा की एक गाड़ी उसकी गाड़ी को ओवरटेक कर के रोड बीचो बिच कड़ी हो गयी तो मजबूरन शानवी को अपना गाड़ी रोकना पड़ा और वो घुसे से अपने गाड़ी के गेट खोल के बाहर निकलने लगी तभी उसकी नजर उस हदी पर गयी जिसमे से 6 या 7 गुंडे बहार निकल रहे है ये देख कर शानवी के दर के मरे हालत ख़राब हो गया उसे ये अनुमान हो गया की ये लोग उसका किडनैप करने वाले जैसे hi शानवी को ये एहसास हुआ तो उसकी माथे से पसीना आने लगा और तुरंत अपने गाड़ी में बैठ कर अपनी गाड़ी का गेट बंद कर लिया इधर वो सरे गुंडे वह से चलते हुए शानवी के पास आये और उनका लीडर शानवी से बोलै.
लीडर- ये लड़की चल गाड़ी से निचे उतर मुझे तुमसे कुछ बात करना है.
लीडर के बात सुन कर शानवी थोड़ी दर गयी लेकिन वो दर को अपने चेहरे पर आने नहीं दिया और थोड़ी कड़क आवाज में उस गुंडे से बोली.
शानवी- कोण हो तुम लोग और ऐसे गाड़ी को बिच रस्ते में क्यों लगाए चुप चाप अपना गाड़ी हटाओ नहीं तो तुम्हारे साथ अच्छा नहीं होगा.
शानवी- के बात सुन कर सरे गुंडे हसने लगते है तभी उन गुंडों के लीडर बोलता है.
लीडर- है है क्या हिमत है तुम्हारी इस हिमत को तोड़ने में मजा आएगा और रही बात गाड़ी हटाने की तो जा नहीं हटाता क्या करेगी तू मारेगी चल चल मर के दिखा लेकिन मुझे मरने के लिए तुम्हे तो गाड़ी से निचे उतरना पड़ेगा (फिर थोड़े घुसे में बोलै) ये लड़की देख मेरे पास तेरे ये फालतू के बात सुनाने का समय नहीं है तुम चुप चाप गाड़ी से उतरती है या मई खुद तुम्हे उतारू.
उस लीडर के बात सुन कर शानवी बहुत दर जाती है और डरते डरते अपने मोबाइल से शनाया के पास कॉल करने लगती है लेकिन शनाया उस वक़्त डॉ. खुराना के केबिन में थी इस लिए वो कॉल नहीं उठती है इधर उस लीडर ने जब देखा की शानवी किसी को कॉल कर रही है तो उसे बहुत गुसा आता है और वो घुसे से बोलता है.
लीडर- लगता है की तू ऐसी नहीं मानेगी.
इतना बोल कर वो अपने हाथ में पकडे हुए हॉकी स्टिक से गाड़ी के सीसे पर मरने hi वाला था की तभी पीछे से एक आवाज आती है जो किसी और का नहीं बल्कि दीपक का था जब शानवी हॉस्पिटल से निकली थी तब से hi दीपक उनके सेफ्टी के लिए उनके पीछे था.
दीपक- तुम सब इस लड़की पर क्या जोर आजमा रहे हो अगर तुम सब में हिमत है तो मुझसे लड़ कर दिखाओ.
दीपक के आवाज सुन कर सरे गुंडे घूम कर दीपक के तरफ देखते है अपने सामने एक 20 साल के लड़के को देख कर वो सरे गुंडे जोर जोर से हसने लगते है तभी उन गुंडों का लीडर बोलता है.
लीडर- ये बचे जा चला जा यहाँ से क्यों बेकार में मरने के लिए यहाँ आ गया.
लीडर के बात सुन कर दीपक मुस्कुराते हुए उसे देखा उसकी मुस्कराहट इतनी खतरनाक थी की एक पल के लिए गुंडे की भी हालत ख़राब हो गयी इधर दीपक अपने चेहरे पर डेविल मुस्कान लेट हुए बोलै.
दीपक- क्या बोलै बच्चा हम्म अच्छा है अब अगर तुम लोगो को इस बचे से मर नहीं खाना है तो चुप चाप उस लड़की को छोड़ कर यहाँ से चले जाओ.
दीपक के बात सुन कर उस लीडर को गुसा आ जाता है वो घुसे से बोलता है.
लीडर- लगता है की हमें इस लड़की को उठाने से पहले तुम्हारा hi मरमत करना होगा (फिर अपने गुंडों से) तुम सब थोड़ा इस बचे की मरमत करो ये कुछ ज्यादा hi बोल रहा है और है इसे जान से नहीं मरना बस इसके हाथ पेअर तोड़ देना.
अपने लीडर के बात सुन कर एक गुंडा अपने हटो में एक हॉकी स्टिक ले कर दीपक को मरने के लिए उसके तरफ भागता है ये देख कर गुंडई के लीडर समझ जाता है की अब ये लड़का गया काम से ये सोच कर वो अपने गुंडों के साथ मिल कर शानवी के कार के गेट तोड़ने की कोशिश करने लगता है ये देख कर शानवी बुरी तरह से दर जाती है लेकिन अभी वो लीडर अपने हाथ में लिए हुए हॉकी स्टिक से कार के सीसे पर वॉर करता उससे पहले hi एक आदमी उड़ते हुए आता है और उससे टकरा जाता है जिसे देख कर लीडर हड़बड़ा जाता है और पीछे घूम कर देखने लगा जब वो पीछे घूम कर देखता है तो पता है की दीपक अपने जगह पर दोनों हाथ बंधे खड़ा खड़ा मुस्कुरा रहा था.
दरअसल हुआ ये था की जब वो योद्धा अपने हॉकी स्टिक से दीपक पर हमला करता है तो दीपक उसे हॉकी स्टिक को अपने हाथो से पकड़ लेता है और अपना एक लत उसके पेट में मरता है जिसके कारन वो गुंडा उड़ते हुए जा कर लीडर से टकरा जाता है और वही बेहोश हो जाता है इधर अपने आदमी के ऐसी हालत देख कर लीडर को बहुत गुसा आया है और वो घुसे से दीपक से बोलता है.
लीडर- मई तो तुम्हे बचा समझ कर सोच रहा था की तेरा हाथ पेअर तोड़ कर छोड़ दूंगा लेकिन तूने मेरे एक आदमी को मर कर अच्छा नहीं किया अब तुम्हे मुझसे कोई भी नहीं बचा सकता आज तुम यही इसी वक़्त जान से जायेगा मर डालो इस सेल को.
अपने लीडर के बात सुन कर सरे गुंडे अपने हथियार ले कर दीपक के ऊपर टूट पड़ते है किसी गुंडे के पास चाकू था तो किसी के पास चैन तो किसी के हॉकी स्टिक तभी दो गुंडा जो सबसे आगे थे वो दोनों दीपक के ऊपर हमला कर दिया एक ने चाकू से हमला किया तो एक हॉकी स्टिक से जैसे hi दोनों को हथियार दीपक के पास आया तो दीपक निचे झुक कर उनके हमको से बचा और चाकू वाले गुंडे का हाथ पकड़कर कर उसे उठा कर दूसरे गुंडे पर फेक देता है जिसके कारन दोनों गुंडे उड़ते हुए पीछे जा कर गिरते है और वही बेहोश हो जाते है अपने दो साथियो के हालत देख कर सरे गुंडे दर जाते है लेकिन अपने दर को अपने चेहरे पर न लाये हुए बाकि बचे गुंडे दीपक पर टूट पड़ते है इधर दीपक भी उनसे लड़ने के लिए तैयार था वो एक एक कर के सरे गुंडों को मरने लगता दीपक के हमको में इतना ताकत था की उसके एक वॉर से hi एक गुंडा बेहोश हो जा रहे थे उसने किसी भी गुंडे को जान से नहीं मारा बल्कि सबको बेहोश कर दिया था.
इधर अपने गुंडों की हालत को देख कर उनका लीडर दर से थार थार कम्प रहा था इधर सरे गुंडों को ठिकाने लगाने के बाद दीपक उस लीडर के तरफ बढ़ने लगा दीपक को अपने तरफ आता देख कर उस लीडर की हालत ख़राब हो गयी और वो डरते हुए बोलै.
लीडर- ड़ड़ड़ड़ देखो टट्ट्टी तुम मममम मेरे पोल्ल पास नहीं आना नहीं तो मममम मई तुम्हे जान से मर दूंगा.
लीडर के बात सुन कर दीपक मुस्कुराते हुए बोलै.
दीपक- राशि जल गयी लेकिन बल नहीं गया.
इतना बोल कर वो भागते हुए उस लीडर के पास गया और उसे खींच कर एक थपड मर दिया जिससे उस लीडर के मुँह से खून आने लगा लीडर दर के मरे अपने दोनों हाथ जोड़ कर दीपक से बोलै.
लीडर- प्लीज मुझे छोड़ दो मई आज के बाद किसी भी लड़की के तरफ आँख उठा कर नहीं देखूंगा.
लीडर के बात सुन कर दीपक हस्ते हुए बोलै.
दीपक- मई तुम्हे किसी लड़की पर आंख उठा कर देखने लायक छोडूंगा तब न तुम किसी को देखोगे.
इतना बोल कर दीपक उसे मरना सुरु कर दिया जिसके कारन उसे शरीर से खून निकलने लगा आखिर में वो मर कहते कहते बेहोश हो गया.
इधर शानवी दीपक को अकेले इतने गुंडों के साथ लड़ते हुए देख कर हैरान थी उसकी हैरानी तब टूटी जब दीपक उसके कार के गेट पर नोके करते हुए बोलै.
दीपक- अब आप सेफ है आप जा सकती है.
इधर दीपक को खुद से बात करता हुआ देख कर न जाने क्यों शानवी के दिल की धड़कन तेज़ हो गयी थी लेकिन वो खुद को सँभालते हुए दीपक से बोली.
शानवी- थैंक यू मुझे बचने के लिए अगर आप नहीं आते तो पता नहीं ये सब मेरे साथ क्या करते.
दीपक- अरे इसमें थैंक यू की क्या बात है ये तो मेरा इंसानियत के नाते मेरा फ़र्ज़ था आपको बचाना और वैसे ये सब कोण थे.
दीपक के बात सुन कर शानवी कुछ देर सोचने के बाद बोली.
शानवी- पता नहीं ये लोग कोण थे और क्यों मेरा पूछा कर रहे थे.
दीपक- ठीक है अब आप जाइये और है आगे से ध्यान रखियेगा.
दीपक के बात सुन कर शानवी उसको ध्यान से देखते हुए बोली.
शानवी- क्या मई मुझे बचने वाले मसीहा के नाम जान सकती हु.
शानवी के बात सुन कर दीपक कुछ सोचते हुए बोलै.
दीपक- आपकी जान तो बच गयी न तो अब आप मेरा नाम जान कर क्या करेंगी.
इतना बोल कर दीपक किसी हवा की तरह वह से तेज़ गति में निकल गया इधर दीपक के जाने के बाद शानवी अपने मन में hi सोचने लगी.
शानवी- पता नहीं ये खड़ूस कोण था हवा की तरह आया और मुझे बचा का हवा की तरह hi गायब हो गया वैसे मुझे समझ में नहीं आ रहा है की जब मई उसे देखि तो अचानक मेरे दिल की धड़कन तेज़ क्यों हो गयी थी और मुझे ऐसा क्यों लग रहा था की वो यही पर रुक कर मुझसे बात करता रहे पता नहीं मेरे साथ ये क्या हो रहा है मुझे लेट हो रहा है मुझे सोल्लगे जाना चाहिए.
इतना बोल कर शानवी भी वह से निकल गयी उसके जाने के कुछ देर बाद वह पर कुछ आदमी आये जब उन लोगो ने देखा की रोड पर कुछ आदमी घायल हालत में पड़े हुए है तो वो जल्दी से उनके पास गया और उनको ध्यान से देखने लगा जब वो इन आदमियों को पहचाना तो वो घुसे से बोलै.
आदमी- किसकी इतनी हिमत हो गयी की वो दिलवर भाई के आदमी पर हाथ उठाये उसको मई जिन्दा नहीं छोडूंगा पहले मई दिलावर भाई को इसकी खबर दे देता हु इसके बाद मई उस आदमी को धुंध निकलूंगा फिर मई उसे दर्दनाक मौत दूंगा.
इतना बोलने के बाद वो अपना मोबाइल निकलता है और दिलवर को कॉल करता है थोड़ी देर बाद दिलावर उसका कॉल रइवे करता है और बोलता है.
दिलावर- है रघु बोल क्यों कॉल किया इस समय कुछ काम था क्या.
रघु- भाई संत Xavier's गर्ल्स सोल्लगे जाने वाले रस्ते में पकिया और उसके साथी बेहोश मिले है किसी ने इनको बहुत बुरी तरह से मारा है.
रघु के बात सुन कर दिलावर घुसे से बोलता है.
दिलावर- किसकी इतनी हिमत हो गयी की वो दिलावर के आदमी पर हाथ उठाये तुम पता करो की किसने पकिया और उसके साथी को मारा है और पता कर के उसे कही से भी धुंध निकालो और उसे जान से मर दो.
रघु- जी भाई आप चिंता मत कीजिये जिसने भी हमारे आदमी को मारा है उसे मई तड़पा तड़पा के मरूंगा वैसे भाई इन लोगो का क्या करना है.
दिलावर- इन लोगो को हॉस्पिटल भेज दो और है ये लोग एक लड़की को उठाने वाले थे अब इनका काम तुम करोगे यद् रहे आज उन दोनों लड़कियों में से कोई एक मेरे बिस्तर में चाहिए इसके लिए तुम्हे जो भी करना है करो.
रघु- जी भाई आप चिंता मत कीजिये मई इस काम के लिए त्रिनेड मार्टिकल आर्ट्स फाइटर भेजता हु.
दिलावर- ठीक है.
इतना बोल कर दिलावर कॉल कट कर देता है तो वही शनाया अपने डैड का हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करवा कर अपने घर के कर जा रही थी अब अजय मल्होत्रा 75% तक ठीक हो गए थे शनाया अपने माँ डैड के साथ हॉस्पिटल से सीधा घर के लिए निकल गयी जैसे hi उसका गाड़ी हॉस्पिटल से बहार निकला तो उसी वक़्त उनके पीछे 2 और गाड़ी जाने लगी इन दोनों गाड़ी में 6 लोग थे आगे वाले गाड़ी में दीप्ती और रोहन के साथ बलदेव सिंह था जो कार ड्राइव कर रहा था तो वही पीछे वाले गाड़ी में संध्या और कारन के साथ बलदेव सिंह का राइट हैंड तेजा था जो कार ड्राइव कर रहा था.
ये लोग करेफुल्ली शनाया और उसके माँ डैड को शाफेट्य दे रहे थे क्युकी शानवी पर जो हमला हुआ था वो इन लोगो को पता चल गया धीरे धीरे शनाया के गाड़ी उनके घर तक पहुंच कर रुक गयी शनाया के गाड़ी रुकते hi इन लोगो ने भी अपना गाड़ी रोके दिया इन लोगो का गाड़ी शनाया के गाड़ी से 200 मीटर पीछे थी जिसके कारन शनाया को ये शक नहीं हुआ की कोई उसके गाड़ी का पीछा कर रहा है.
इधर शनाया और पुस्पा गाड़ी से उतर का अजय मल्होत्रा को सहारा दे कर अपने घर में ले कर चले गए उनके जाने के बाद रोहन बलदेव सिंह से बोलता है.
रोहन- बलदेव जी आप एक काम कीजिये आप भाभी के घर के सामने वाले घर में और एक पीछे वाले घर में एक रूम ले लीजिये अब हम वही से इन पर निगरानी रखेंगे और है अपने आदमियों को भी अलर्ट कर देना की वो 24 हॉर्स इस घर पर नजर रखे.
बलदेव- ठीक है मई अभी सब इंतजाम करता हु.
इतना बोल कर बलदेव किसी को कॉल किया और कुछ देर बात करने के बाद बोलै.
बलदेव- मैंने रूम के लिए बोल दिया है 2 घंटे में हमें रूम मिल जायेगा और रही बात इन पर अपने आदमियों से निगरानी रखने की तो वो पहले से hi ये कर रहे है.
रोहन- गुड वर्क बलदेव जी.
फिर रोहन ने कारन को बुलाया और उससे बोलै.
रोहन- कारन मई भाभी के घर पर निगरानी करने के लिए भाभी के घर के आगे और पीछे वाले घर में एक एक रूम ले रहा हु ताकि हम आसानी से उस पर नजर रख सके
कारन- ये तुमने अच्छा किया अब हम आसानी से उन सब पर नजर रख सकेंगे.
इसके बाद बलदेव ने शनाया के घर के आगे और पीछे के घर में एक एक रूम ले लिया और एक रूम में रोहन दीप्ती के साथ और एक रूम में कारन संध्या के साथ रुक गए और फिर दोनों मिल कर शनाया के घर पर नजर रखने लगे.
इधर मृत्युंजय अपने डैड से 1 करोड़ के चेक ले कर सीधा बैंक गया और उस चेक के सरे पैसे अपने अकाउंट में ट्रांसफर करवा दिया इसके बाद वो वह से सीधा अनाथ आश्रम गया अनाथ आशाराम जाने के बाद वो वह के वार्डन से मिला और बोलै.
मृत्युंजय- मैंने इस अनाथ आश्रम को गॉड ले लिया है अब से इस आश्रम में जितने भी पैसे खर्च होंगे उसे मई दूंगा और आज के बाद यहाँ के कोई भी बचा बहार काम करने या भीख मांगने के लिए नहीं जायेगा आज से यहाँ के बचो को पढाई और भर पेट खाना मिलेगा.
मृत्युंजय के बात सुन कर वार्डन बहुत खुस हो जाता है और वो खुसी से मृत्युंजय से बोलता है.
वार्डन- आपका बहुत बहुत धन्यवाद् जी अपने इन अनाथ बचो के बारे में इतना कुछ सोचा.
मई- अरे इसमें धन्यवाद् की कोई बात नहीं है ये तो इन बचो का हक़ है की इनको भर पेट खाना के साथ साथ अच्छी एजुकेशन मिले और है मई अनाथ आश्रम के अकाउंट में 70 लाख रूपए सेंड कर रहा हु आज hi आप मार्किट जा कर इन बचो के लिए अच्छे कपडे और राशन ले आइये और साथ में इनको पढ़ने के लिए अचे अचे टीचर भी हिरे कीजिये.
वार्डन- ठीक है सर मई अभी सभी चीज का बेवस्था करता हु.
इसके बाद मृत्युंजय अनाथ आश्रम के अकाउंट में 70 लाख रूपए सेंड कर दिया और वह से जाने लगा लेकिन जाते जाते मृत्युंजय वार्डन को एक बात बोल कर गया.
मृत्युंजय- मई अभी जा रहा हु अगर ये पैसे काम पद जाये तो मेरे पास कॉल कर लेना और है अगर तुमने इन पैसे में हेरा फेरी की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.
इतना बोल कर मृत्युंजय वह से निकल गया और सीधा वह से बृद्धा आश्रम चला गया जैसे वो बृद्धा आश्रम पंहुचा तो वह के केयर टेकर उसको देखते hi उसको पहचान गया की इस सहर के सबसे आमिर आदमी का बीटा मृत्युंजय कुशवाहा है जैसे वो मृत्युंजय को पहचाना तो वो मृत्युंजय के पास आया और उससे बोलै.
केयर टेकर- इस बृद्धा आश्रम में आपका स्वागत है मृत्युंजय सर बताइये मई आपकी क्या सेवा कर सकता हु.
उस केयर टेकर के बात सुन कर मृत्युंजय कुछ सोचते हुए उससे बोलै.
मृत्युंजय- मई इस वृद्धा आशाराम को गॉड लेना चाहता हु और मई चाहता हु की आज के बाद इस आश्रम में रहने वाले लोगो को किसी भी तरह के कोई भी प्रॉब्लम न हो.
मृत्युंजय के बात सुन कर वो केयर टेकर खुस हो जाता है और भगवन से लाख लाख सुक्रिया करता है क्युकी इस आश्रम का सारा फण्ड ख़तम हो गया था और अब ऐसा नौबत आ गया था की ये बृद्धा आश्रम कभी भी बंद हो सकता है जिसके कारन केयर तकर को यहाँ पर रहने वाले वृद्ध लोगो की बहुत चिंता होती थी लेकिन जब उसने सुना की सहर के सबसे बड़े आदमी के बेटे ने इस आश्रम को गॉड लेने आया है तो वो बहुत खुस हो गया और इसी खुसी में वो मृत्युंजय से बोलै.
केयर तकर- आपका बहुत बहुत धन्यवाद् सर जो अपने इन बूढ़े लोगो के बारे में सोचा आज कल आपके जैसा आदमी मिलना बहुत मुश्किल है.
मई- मई आपके अकाउंट में अभी के लिए 30 लाख ट्रांसफर कर रहा हु आप इस आश्रम में रहने वाले लोगो के लिए जो भी आवश्यकता है वो ले आइये और इन सब को किसी भी तरह के प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए.
केयर टेकर- जी ठीक है जैसा आप चाहेंगे वैसा hi होगा.
इसके बाद मई उसके अकाउंट में 30 लाख सेंड कर दिया फिर थोड़ी देर उससे बात करने के बाद वह से जाने लगा तभी वह पर एक कार आ कर रुकी और उसमे से एक खूबसूरत लड़की बहार निकली जिसे देख कर एक पल के लिए मृत्युंजय उसमे खो सा गया लेकिन फिर खुद को सँभालते हुए वह से जाने लगा तभी वो लड़की केयर टेकर के पास आये हुए बोली.
लड़की- मई इस बृद्धा आश्रम को 20 लक्ष डोनेट करना चाहती हु ताकि इस बृद्धा आश्रम में रहने वाले लोग बेहतर जिंदगी जी सके.
उस लड़की के बात सुन कर मृत्युंजय के आगे बढ़ते हुए पेअर वही पर रुक गया और वो मन hi मन सोचने लगा.
मृत्युंजय- (अपने मन में) इंटरेस्टिंग जहा आज कल लोग अपनों की भी मदत नहीं करते वह ये इन बूढ़े लोगो को मदत करने के लिए आ गयी.
इधर उस लड़की के बात सुन कर केयर टेकर बोलै.
केयर तकर- है है क्यों नहीं मैडम आप हमारी बृद्धा आश्रम में डोनेट करेंगी तो ये तो हमारे लिए और भी बेहतर होगा हम यहाँ पर रहने वाले लोगो के लिए और भी बेहतर कर सकते है आप जानती है मैडम अभी अभी वो सर भी आपकी तरह वो भी यहाँ पर पैसे डोनेट कर के गए.
ये सुन कर वो लड़की एक बार मृत्युंजय के तरह मुस्कुरा कर देखि और उस केयर टेकर के अकाउंट में 20 लाख ट्रांसफर कर दी इसके बाद वो चलते हुए मेरे पास आयी और मुझसे बोली.
लड़की- ही मेरा नाम पूनम चौहान है क्या मई आपकी नाम जान सकती हु.
उस लड़की के बात सुन कर मृत्युंजय मुस्कुराते हुए बोलै.
मृत्युंजय- हैल्लो मिस पूनम मेरा नाम मृत्युंजय कुशवाहा है मुझे आपसे मिल कर खुसी हुयी पूनम जी.
पूनम- मुझे भी आपसे मिल कर खुसी हुयी मृत्युंजय जी वैसे मुझे ये जान कर अच्छा लगा की आपने इन लोगो के मदत के लिए पैसे डोनेट किये आज कल आपके जैसे लोग बहुत काम मिलते है.
मृत्युंजय- शामे हेरे मिस मुझे भी आपको देख कर यकीं करना मुश्किल हो रहा है क्युकी मई आज कल के लड़कियों को अपने पैसो पर घमंड करते देखा है लेकिन उन लड़कियों से बिलकुल अलग है.
मृत्युंजय के बात सुन कर पूनम मुस्कुराने लगती है और फिर वो मृत्युंजय से बोलती है.
पूनम- ठीक है मृत्युंजय जी हम अभी जा रहे है मुझे कुछ काम है तो क्या हम आज सैम में कॉफ़ी पर मिल सकते है.
मृत्युंजय- है क्यों नहीं.
इसके बाद दोनों वह से अपने अपने रस्ते निकल जाते है.
तो वही वह से बहुत दूर मुंबई के एक दूसरी आइसलैंड है ये आइसलैंड भी राठौर परिवार के आइसलैंड जैसा hi लेकिन ये उससे कुछ छोटा भी है इस आइसलैंड पर एक महल है उस महल के रूम में एक लड़की अपने हाथो में एक लड़के की फोटो ले कर वो उसे ध्यान से देख रही थी और वो अपने आँखों में आंसू लिए उस फोटो से बात कर रही थी.
लड़की- तुम मुझे छोड़ कर क्यों चले गए तुम्हे गए हुए पुरे 15 साल हो ये 15 साल तुम्हारे बिना मई कैसे निकली मई hi जानती हु प्लीज तू लौट आओ तुम जानते हो की लोग तुम्हारे बारे में कैसे कैसे बाटे करते है लोग बोलते है की तुम मर गए अब तुम कभी वापस नहीं आओगे लेकिन मई उनके बातो पर बिस्वास नहीं करती मुझे पूरा यकीं है की तुम जरूर आओगे एक बात और तुमसे बताना था मेरे घर वाले चाहते है की मई शादी कर लू मई तुम्हे छोड़ कर आगे बढ़ जाऊ लेकिन मई ऐसा नहीं कर सकती अब तुम्ही बताओ मुझे मेरी शादी तो आज से 15 साल पहले बचपन में तुम्हारे साथ हो गयी थी तो भला मई किसी और से शादी कैसे कर सकती हु प्लीज प्लीज रूद्र तुम वापस आ जाओ मई तुम्हारे बिना जी नहीं सकती.
अभी वो लड़की उस फोटो से बात कर hi रही थी की तभी बहार से एक औरत के आवाज आती है.
औरत- बेटी अनन्य क्या तुम अंदर हो.
दोस्तों मई अब थोड़ा इनलोगो के बारे में मई आप सब को बता दे रहा हु ये है सूर्यवंशी फॅमिली सूर्यवंशी फॅमिली वर्ल्ड के टॉप 10 फॅमिली में से एक है ये फॅमिली राठौर फॅमिली जितना आमिर तो नहीं लेकिन उससे काम भी नहीं है.
ये फॅमिली राठौर फॅमिली की hi तरह एक आइसलैंड पर रहता है और इसी फॅमिली की लड़की है अनन्य सूर्यवंशी.
इधर अपनी माँ के बात सुन कर अनन्य अपने आँखों से आंसू साफ करती है और अपनी माँ से बोलती है.
अनन्य- जी माँ मई अंदर hi हु आप अंदर आ जाइये.
अपनी बेटी के बात सुन कर सुनैना सूर्यवंशी गेट खोल कर अंदर आती है जैसे hi वो रूम में एंटर करती है तो उनको अनन्य के बीएड पर एक लड़के की फोटो दिखती है तो वो समझ जाती है की उनको आने से पहले अनन्य इस रूम में क्या कर रही होंगी इस लिए वो अनन्य को समझते हुए बोलते है.
सुनैना- मई तुमको बोल बोल कर थक गयी की अब ये कभी वापस नहीं आएगा खुद इसके परिवार वाले भी बोलते है की ये मर चूका है लेकिन पता नहीं तुम हमारी बात क्यों नहीं सुनती हो देखो अनन्य मेरी बात को समझो अब ये कभी वापस नहीं आने वाला है इस लिए तुम भी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाओ.
अपनी माँ की बाटे सुन कर अनन्य घुसे से उनको घूरती हुयी बोलती है.
अनन्य- माँ मई कितने बार आपको बोल चुकी हु की मेरे रूद्र को कुछ नहीं हुआ है वो मेरे लिए जरूर वापस आएगा और आप जानती है मई उससे इतना प्यार करती हु की अगर वो कभी वापस लौटा भी नहीं न तो मई उसकी यद् में hi पूरी जिंदगी गुजर दूंगी लेकिन कभी दुबारा शादी नहीं करुँगी.
अनन्य के बात सुन कर सुनैना को भी गुसा आ जाता है वो घुसे से अनन्य को बोलती है.
सुनैना- तुमको जो मन में आये तुम वो करो तुमको तो किसी की बात सुननी नहीं है मेरी मति मरी गयी थी जो मई तुम्हारी सदी बचन में उससे कर दी थी अगर तुम्हारी सदी उससे नहीं हुयी रहती तो आज हमें ये दिन नहीं देखना पड़ता.
इतना बोल कर वो वह से चली जाती है लेकिन उनके बात को सुन कर अनन्य को बहुत बुरा लगता है और फिर से उसके आँखों से आंसू गिरने लगते है इधर सुनैना अनन्य के रूम से घुसे निकल कर अपने रूम के तरफ जा रही थी की तभी रस्ते में उसे एक लड़का मिलता है वो लड़का अपने माँ के बात सुन कर उनसे बोलता है.
लड़का- क्या हुआ माँ आप इतने घुसे में क्यों है कही फिर से आपकी बहस अनन्य से तो नहीं हो गयी.
अपने लड़के के बात सुन कर वो उससे बोलती है.
सुनैना- पता नहीं क्या करू मई इस लड़की की ये तो मेरी बात सुनाने के लिए तैयार hi नहीं है बस दिन भर उस लड़के के फोटो ले कर उससे बाटे करती रहती है.
सुनैना की बाटे सुन कर वो लड़का जो की अनन्य के बड़ा भाई मुकेश सूर्यवंशी था वो बोलता है.
मुकेश- इसमें उसकी कोई गलती नहीं है साडी गलती आपकी और डैड की है क्या जरुरत थी उसकी बचपन में hi सदी करने की और तो और बचपन में शादी के बात वो भूल चुकी थी फिर अपने उसको वो सब क्यों यद् दिलाया और साथ में उस लड़के की तस्वीर भी ला कर दे दिया.
अपने बेटे की बात सुन कर सुनैना का गुसा थोड़ा संत होता है तो उससे वो बोलती है.
सुनैना- क्या करू हो गयी गलती मुझे पता नहीं था न की ये सब जानने के बाद उस लड़के की दीवानी हो जाएगी अब मुझे समझ में नहीं आ रहा है की मई क्या करू कैसे इस लड़की के दिमाग से उस लड़के को निकलू अगर वो लड़का जिन्दा होता तो कोई बात नहीं लेकिन वो अब मर चूका है लेकिन ये उस बात पर बिस्वास करने के लिए तैयार hi नहीं है और तो और मई इसके दिमाग से उसे निकलने के लिए इसे मार्टिकल आर्ट्स की ट्रेनिंग भी दिलवाई ताकि वो ट्रेनिंग में बिजी हो कर उसे भूल जाये लेकिन वो भूलने की जगह उसकी और दीवानी हो गयी.
अपने माँ के बात सुन कर मुकेश कुछ देर तक सोचने के बाद बोलै.
मुकेश- माँ मुझे मुंबई से मुझे एक ऑक्शन का इनविटेशन आया है मई उस इनविटेशन में अनन्य को भी ले कर जाता हु शायद वह जाने के बाद कोई चमत्कारी hi जाये और उसे वह पर कोई और पसंद आ जाये.
मुकेश के बात सुन कर सुनैना कुछ सोचते हुए बोलती है.
सुनैना- है ये ठीक रहेगा तुम उसे वह जाने के लिए मन लो.
मुकेश- ठीक है माँ मई अभी जाकर उसे मनाता हु.
इसके बाद मुकेश वह से अनन्य के रूम के पास आता है और दरवाजा खटखटाते हुए बोलता है.
मुकेश- अनन्य मेरी बहन क्या मई अंदर आ सकता हु.
इधर अनन्य जो अपने माँ के बात सुन कर रो रही थी वो जैसे hi अपने भाई के आवाज सुनती है तो वो झट से अपना आंसू पॉच कर खुद को सही करती है और उसको अंदर आने के लिए परमिशन दे देती है परमिशन मिलने के बाद मुकेश अंदर आता है तो वो अनन्य के उदास चेहरे को देख कर वो भी उदास हो जाता है मुकेश अपनी बहन से बहुत प्यार करता था इस लिए वो उसे उदास देख कर उससे बोलता है.
मुकेश- बहन कब तक ऐसे चलता रहेगा कमसे काम अब तो तुम सचाई को एक्सेप्ट करो.
अपने भाई के बात सुन कर अनन्य बात को दूसरी तरफ घूमते हुए बोलती है.
अनन्य- भाई आपको मुझसे कुछ काम था क्या जो आप इस वक़्त मेरे पास आये है.
अनन्य को इस तरह बात बदलता हुआ देख कर मुकेश समझ जाता है की अनन्य इस टॉपिक पर बात नहीं करना चाहती है इस लिए वो आगे कुछ नहीं बोलता है और अनन्य के बातो का जबाब देते हुए बोलता है.
मुकेश- अनन्य वो क्या है न की मुंबई से एक ऑक्शन का इनविटेशन आया है और उस ऑक्शन में कुछ चीजे बहुत कमल का है तो मई चाहता हु की तुम उस ऑक्शन में पार्टिसिपेट करो.
अनन्य- सॉरी भाई मई भी जा सकती क्युकी मुझे कही जाने का अभी मुद नहीं है आप hi चले जाओ.
अनन्य के बात सुन कर मुकेश थोड़ा परेशां हो गया क्युकी वो जनता था की जो आइटम वो ऑक्शन से खरीदने वाला है वो सिर्फ और सिर्फ अनन्य hi सही सलामत आइसलैंड ला सकती थी इस लिए वो अनन्य को समझते हुए बोलै.
मुकेश- अनन्य सुनो तो तुम्हारा वह जाना बहुत जरुरी है.
अनन्य- और मुझे वह जाना किस लिए जरुरी है.
मुकेश- तुम्हारा वह जाना इस लिए जरुरी है की वह पर जो आइटम नीलम होने वाला है वो बहुत hi दुर्लभ आइटम है और उस आइटम पर पुरे इंडिया का नजर है.
मुकेश के बात सुन कर अनन्य हैरान हो जाती है और सोचने लगती है की ऐसी कोण सी दुर्लभ आइटम है जिस पर पुरे इंडिया का नजर है.
अनन्य- भाई ऐसी कोण सी आइटम है जिसे पाने के लिए पूरा देश बेचैन है.
अनन्य के बात सुन कर मुकेश कुछ सोचते हुए बोलता है.
मुकेश- वह पर बहुत सरे ऐसे आइटम है जो दुर्लभ है लेकिन सबसे दुर्लभ आइटम जो है वो है एक तलवार जिसमे अग्नि विसेसता है उस तलवार के एक वॉर से पूरा देना ख़तम किया जा सकता है और दूसरी आइटम है एक स्टोरेज अंगूठी जिसमे कोई भी सामान स्टोर कर के रख सकते है और बाकि का जो आइटम है वो दुर्लभ मेडिसिन सुनाने में आया है की वह 2 तरह के मेडिसिन है एक मेडिसिन का खासियत यह है की कोई भी ग्रांडमास्टर के निचे के लेवल वाला योद्धा अगर उस मेडिसिन को खा ले तो उसका लेवल तुरंत बढ़ जाता है और दूसरा मेडिसिन है इंस्टेंट रिकवरी पिल जिसे खाने के बाद कोई भी जखम कुछ मिंटो में ठीक हो जाता है.
मुकेश के बात सुन कर अनन्य हैरान हो जाती है उसे मुकेश के बातो पर बिस्वास hi नहीं हो रहा था इस लिए वो मुकेश से बोली.
अनन्य- भाई क्या आप सच बोल रहे है क्या ऐसा भी हो सकता है मुझे तो आपके बातो पर बिस्वास hi नहीं हो रहा है.
अनन्य के बातो पर मुकेश मुस्कुराते हुए बोलै.
मुकेश- मई जनता था की तुम्हे मेरे बातो पर बिस्वास नहीं होगा और पहले मुझे भी इन सब बातो पर बिस्वास नहीं हुआ था लेकिन मैंने अपने सोर्स से पता किया तो मुझे पता चला की साडी बाटे सच है.
अनन्य- मुझे तो अब भी बिस्वास नहीं हो रहा है क्युकी मैंने ये सब किसे और कहानियो में सुना मुझे पता नहीं था की ये सब चीजे हकीकत में भी होगी.
अपनी बहन के बात सुन कर मुकेश एक्ससिटेमेंट के साथ बोलै.
मुकेश- इस लिए तो मई तुम्हे अपने साथ चलने के लिए बोल रहा हु तुम्हे वह के जाने का मेरा दो कारन है पहला कारन है की तुम बहार घूमोगी तो तुम्हारा मन फ्रेश रहेगा और दूसरी कारन है की ये सब आइटम नीलामी से खरीदना कोई भरी बात नहीं है लेकिन इसे शाफेट्य के आइसलैंड तक लाना मुश्किल है क्युकी उस आइटम को लोग खरीदने से ज्यादा छीनने के फ़िराक में रहेंगे और अगर तुम मेरे साथ रहोगी तो मुझे किसी भी बात का दर नहीं होगा क्युकी भला एक सुडो ग्रांडमास्टर से कोण भिड़ना चाहेगा.
मुकेश के बात सुन कर अनन्य मुस्कुराते हुए बोली.
अनन्य- ठीक है भाई मई चलने के लिए तैयार हु जब चलना होगा बता दीजियेगा.
मुकेश- ठीक है.
मई आप सब को इस स्टोरी में उसे होने वाले मार्टिकल आर्ट्स लेवल के बारे में बता दे रहा हु.
मार्टिकल आर्ट्स लेवल
सुण्या लेवल
जिसने लेवल 1 से 9 तक आता है
हाफ ग्रांडमास्टर
ग्रैंड मास्टर
सुडो ग्रैंड मास्टर
सम्राट लेवल
डेमी गॉड लेवल
गॉड लेवल
हाफ हैवन लेवल
हैवन लेवल
हाफ सुप्रीम लेवल
सुप्रीम लेवल
और लास्ट में एक और लेवल होता है जिसका खुलासा आगे चल कर स्टोरी में होगा.
थे ट्रीटमेंट ऑफ़ महेंद्र सिघ राठौर.
जब मई महिंद्रा सिंह राठौर को पूरी तरह से चेक कर लिया तो मई सिकेन्द्र और उनके परिवार के लोगो को बताया की महिंद्रा सिंह राठौर को एक ट्रांसपेरेंट कीड़े ने कटा है और उस कीड़े का जहर ऐसा होता है की अगर वो किसी के शरीर में चला जाये तो उस ब्यक्ति का शरीर ऊपर से तो अच्छा होता है लेकिन उसके अंदरूनी अंग गलने लगते है और वो जहर किसी भी मेडिकल इक्विपमेंट के नजर में भी नहीं आता है और इसके कारन डॉक्टर को भी पता नहीं चलता है की आखिर मरीज को हुआ क्या है और वो कीड़ा ऑरेंज जिनसेंग के आस पास hi पाए जाते है शायद ये बीमार होने से पहले ऑरेंज जिनसेंग के आस पास कही गए होंगे और सायद वही पर इनको उस कीड़े ने कटा होगा.
मेरी बात को सुन कर सब घबरा जाते है फिर संजय सिंह राठौर अपने घबराहट को काबू करते हुए मुझसे बोलते है.
संजय- तो क्या उस जहर को बहार निकलने का कोई उपाय नहीं है क्या मेरे डैड कभी ठीक नहीं हो सकते प्लीज आप किसी भी तरह से मेरे डैड को ठीक कर दीजिये बदले में आप चाहे तो हमारा सारा धन दौलत ले लीजिये लेकिन मेरे डैड को ठीक है दीजिये.
संजय सिंह राठौर के बात सुन कर मई कुछ देर सोचने के बाद बोलै.
मई- देखिये बात यहाँ पैसो की नहीं है और वैसे भी मैंने ये कब कहा की आपके डैड ठीक नहीं हो सकते है मई आपके डैड को ठीक कर तो सकता हु लेकिन एक प्रॉब्लम है.
मेरी बात को सुन कर पहले सब खुस हो जाते है लेकिन प्रॉब्लम वाली बात सुन कर सब टेंशन में आ जाते है तभी कौशल्या देवी मुझसे बोलती है.
कौशल्या- क्या प्रॉब्लम है बीटा तुम हमें बताओ हम उस प्रॉब्लम का हल जरूर निकल लेंगे.
मई- दरअसल बात ऐसी है की मई अभी उनके शरीर से जहर को कुछ हद का बहार निकल दूंगा जिससे इनको होश तो आ जायेगा लेकिन इनको पूरी तरह से ठीक होने के लिए हमें उसी ऑरेंज जिनसेंग की जरुरत पड़ेगी जिसके कारन इनको ये प्रॉब्लम हुयी है और हमें जो ऑरेंज जिनसेंग चाहिए वो काम से काम 300 साल पुराण होना चाहिए.
सिकेन्द्र- तो इसमें प्रॉब्लम क्या है आप बस डैड को किसी तरह से होश में ले आइये और रही बात ऑरेंज जिनसेंग की तो आप उसकी चिंता मत कीजिये ये औषधि मुझे चाहे जहा भी मिले और जितने में भी मिले मई उसे जरूर ले आऊंगा.
सिकेन्द्र सिंह राठौर के बात सुन कर मई निराशा से अपना सर हिलाते हुए बोलै.
मई- आप जितना बोल रहे है ऑरेंज जिनसेंग की लाना उतना भी आसान नहीं है क्युकी ऑरेंज जिनसेंग एक दुर्लभ जड़ी बूटी है ये जड़ी बूटी बहुत मुश्किल से मिलती है अगर ये जड़ी बूटी आपको मिलेगी भी तो 5 या 10 साल पुराण होगा लेकिन 300 साल पुराण ऑरेंज जिनसेंग मिलना नामुमकिन है.
मेरी बात को सुन कर सरे लोग उदाश हो गए मई उनको इस तरह से उदाश होता हुआ देख कर उनसे बोलै.
मई- आप सब ऐसे उदाश मत होइए मई सबसे पहले उनको होश में लेन की कोशिश करता हु फिर उनसे पूछूंगा की इनको वो कीड़ा कहा किस जगह पर कटा था हो सकता है की जहा इनको वो कीड़ा कटा हो वह पर ऑरेंज जिनसेंग अभी भी मौजूद हो और क्या पता हमें उस जगह पर hi 300 साल पुराण ऑरेंज जिनसेंग मिल जाये क्युकी मई जहा तक जनता हु की ये कीड़ा बहुत पुराने ऑरेंज जिनसेंग के आप पास hi मिलते है.
मेरी बात को सुन कर सब खुस हो जाते है उन लोगो के चेहरे पर एक उम्मीद की किरण दिखाई देने लगती है तभी कौशल्या देवी मुझे बोलती है.
कौशल्या- क्या तुम सच बोल रहे हो क्या ये सच में होश में आ जायेंगे देखो बीटा तुम मुझसे मजाक मत करना क्युकी मई कब से इनको होश में आने की इंतजार कर रही हु.
कौशल्या देवी के बात को सुन कर मई उन्हें हिमत देते हुए बोलै.
मई- आप चिंता मत कीजिये और मेरे बातो पर बिस्वास कीजिये आप जल्द hi इनको होश में देख पाएंगी आप सब एक काम कीजिये मुझे एक संत कमरे दे दीजिये ताकि मई कुछ दवाइया बना सकू.
मेरी बात को सुन कर सिकेन्द्र जल्दी से बोलै.
सिकेन्द्र- है है क्यों नहीं आप मेरे साथ आइये.
इसके बाद सिकेन्द्र मुझे एक कमरे में ले कर आ गया कमरे में आने के बाद वो मुझसे बोलै.
सिकेन्द्र- आप आराम से यहाँ पर दवा रेडी कर सकते है आपको यहाँ पर कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा.
इतना बोल कर सिकेन्द्र सिंह राठौर वह से चले जाते है उनके जाने के बाद मई अपने स्टोरेज रिंग से द्रोणपुष्पी औषधि नागकेशर औषधि वाच औषधि अश्वगंधा औषधि कुल मिला कर ऐसे hi 10 जड़ी बूटी निकला और उसको अपने शक्तियों से पाउडर बनाने लगा जब वो साडी जड़ी बुटिया पाउडर बन गयी तो मई उस रूम से बहार आ गया और महेंद्र सिंह राठौर के रूम में चला गया जब मई वह पर पंहुचा तो देखा की वह पर अभी भी सरे लोग मौजूद थे उन सरे लोगो को देख कर मई उन सब से बोलै.
मई- आप सब अब इस कमरे से चले जाइये क्युकी मई चाहता हु की जब मई महेंद्र सिंह राठौर का इलाज करू तो यहाँ पर मेरे के आलावा और कोई न हो.
मेरी बात को सुन कर सभी मुझे शक भरी निगाहों से देखने लगे उन सब को ऐसे मुझे देखता हुआ देख कर मई उन सब से बोलै.
मई- अरे आप सब मुझे ऐसे मत देखिये मई आप सब को इस लिए बहार जाने के लिए बोलै है की मई अपने पेशेंट का इलाज अकेले में hi करता हु अब अगर आप लोगो को मुझसे इनका इलाज करवाना है तो आप सब को यहाँ से जाना hi होगा.
मेरी बात को सुन कर सब सोच में पद गए फिर कुछ देर सोचने के बाद पायल मुझसे बोली.
पायल- मई तो तुम्हारी दोस्त हु न तो क्या यहाँ पर मई भी नहीं रुक सकती वो क्या है न की मुझे तुम्हे इलाज करते हुए देखना है प्लीज प्रतिक.
मई पायल के बात सुन कर कुछ सोच में पद गया फिर थोड़ी देर सोचने के बाद मई बोलै.
मई- ठीक है तुम यहाँ रुक सकती हो और बाकि आप सब अब यहाँ से जा सकते है.
मेरे बात को सुन कर पायल को छोड़ कर बाकि सब धीरे धीरे उस रूम से बहार निकल जाते है उनके जाने के बाद मई अपने हाथ अपने पॉकेट में डालता हु और अपने स्टोरेज रिंग से सिल्वर नीडल का दबा निकल लेता हु इसके बाद मई पायल को बोलता हु.
मई- पायल तुम अपने दादा जी के ऊपर के हिसे का सारा कपडा निकल दो और उनके शरीर पर लगे सरे इक्विपमेंट को भी हटा दो है अभी यहाँ पर जो कुछ भी होगा तुम उसे किसी को नहीं बताओगी.
मेरी बात को सुन कर पायल मुझे घूरते हुए बोली.
पायल- तुम इतना इक्विपमेंट क्यों निकलवा रहे हो अगर मई इक्विपमेंट निकल दिया तो फिर डैड जी को बहुत प्रॉब्लम होगी और तुम इक्विपमेंट निकलवा कर ऐसा क्या करने वाले हो जो मई किसी को नहीं बता सकती.
पायल के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.
मई- कुछ नहीं होगा तुम्हारे दादा जी को मई हु न यहाँ पर बस तुम देखती जाओ की मई क्या करने वाला हु बस तुम इतना यद् रखना की तुम इस कमरे में जो भी देखोगी वो किसी को मत बताना.
पायल- ठीक है मई किसी को नहीं बताउंगी.
इतना बोल कर पायल अपने दादा जी के पास गयी और वो पहले उनके शरीर पर लगे हुए सरे इक्विपमेंट को हटाई इसके बाद वो उनके ऊपर के सरे कपडे हटा दी जब मैंने देखा की महेंद्र सिंह राठौर के शरीर से सरे कपडे और इक्विपमेंट हटा दिए गए तो मई सिल्वर नीडल के दबे से सरे नीडल को निकला और उसे हवा में उछाल दिया और अपने स्प्रिचैल एनर्जी से सरे नीडल को हवा में काबू कर लिया जिसके कारन सरे नीडल हवा में hi रुक गया इसके बाद मई अपने सप्त हस्त ब्रह्मा धन्वंतरि तकनीक का इस्तेमाल करते हुयी सरे नीडल को एक एक कर के महेंद्र सिंह राठौर के शरीर के बिंदुओं में डालने लगा.
इधर पायल सरे नीडल को पहले हवा में रुकते देख इसके बाद एक एक नीडल को अपने दादा के शरीर में लगते हुए देख कर पायल हैरान हो गयी और आँखे फाड् कर कभी मुझे तो कभी सरे नीडल को देख रही थी इधर मई उन सरे नीडल को एक एक कर महेंद्र सिंह राठौर के शरीर के बिंदुओं में लगा दिया इसके बाद मई अपने पॉकेट से जड़ी बूटियों के पाउडर को निकला और उसे भी हवा में उछाल दिया इसके बाद मई अपने एक हाथ से अपने शरीर से योगिक शक्ति को निकल कर महेंद्र सिंह राठौर के श्री में फैले हुए जहर को एक जगह करने लगा और दूसरे हाथ से अपने स्प्रिचैल एनर्जी से जड़ी बूटी के पाउडर को महेंद्र सिंह राठौर के शरीर में लगे हुए नीडल के माध्यम में उनके शरीर में डालने लगा ऐसे hi मई लगभग 15 मिनट तक एक हाथ से उनके शरीर के अंदर के अपने योगिक शक्ति से सरे पाइजन को एक जगह जमा करता रहा और दूसरे हाथ से अपने स्प्रिचैल एनर्जी से जड़ी बूटी के पाउडर को उनके शरीर में डालता रहा जिसके कारन उनके शरीर में जो पाइजन था वो थोड़ा थोड़ा कर के ख़तम होते गए.
अब तक उनके शरीर से बहुत साडी पाइजन ख़तम हो चुकी थी लेकिन उनके शरीर के अंदरूनी जखम अभी भी वैसा hi था जब मैंने देखा की महेंद्र सिंह राठौर के शरीर के अंदर से लगभग 90% परसेंट जहर ख़तम हो गया है तो मई अपना नीडल उनके शरीर से बहार निकल लिया जैसे hi मई नीडल को बहार निकला तो उनके शरीर को एक झटका लगा और महेंद्र सिंह राठौर ने काळा खून की वोमिटिंग कर दी इधर पायल ने अपने दादा को खून के वोमिटिंग करते हुए देखा तो वो घबरा गयी जल्दी से वो मेरे पास आयी और हड़बड़ाते हुए मुझसे बोली.
पायल- ये ये दादा जी खून के वोमिटिंग क्यों कर रहे है वो वो ठीक तो है न.
मई- अब तुम्हे चिंता करने की जरुरत नहीं है उनके शरीर में जो जहर बच गया था वो वोमिटिंग के माध्यम से बहार आ गया है अब तुम्हारे दादा जी के शरीर से सरे जहर बहार निकल गया है कुछ देर बाद उनको होश आ जायेगा.
मेरी बात को सुन कर पायल खुस हो गयी और मुझसे बोली.
पायल- थैंक यू प्रतिक तुमने मेरे दादा जी की जान बचा ली अगर मेरे दादा जी को कुछ हो जाता तो सायद मेरे परिवार भी बर्बाद हो जाता.
मई- देखो पायल अभी तुम्हारे दादा जी पूरी तरह से ठीक नहीं हुए है अगर इनको पूरी तरह से ठीक करना है तो हमें 300 साल पुराणी ऑरेंज जिनसेंग चाहिए और है तुम अभी बहार जा कर सबको खुस खबरि दे दो और साथ में मेरे नहाने का भी बेवस्था करवा देना.
मेरी बात सुन कर पायल की ध्यान मेरे ऊपर गया तो वो चौक गयी क्युकी मेरे कपडे पर काळा रंग का खून लगा हुआ था जिसे देख कर वो मुझसे बोली.
पायल- अरे ये तुम्हारे कपडे पर क्या लग गया.
मई- जब तुम्हारे दादा जी ने वोमिटिंग किया तो मई उनके पास में hi खड़ा था इस लिए उनका थोड़ा वोमिटिंग मेरे ऊपर भी आ गया.
मेरे बात को सुन कर पायल जल्दी से बहार गयी और सबको बोली की दादा जी अब ठीक है उनको कुछ देर बाद होश आ जायेगा पायल के बात सुन कर सब खुस हो गए और जल्दी से महेंद्र सिंह राठौर के रूम में आ गए रूम में आने के बाद सब दादा जी के पास चले गए और उनको देखने लगे फिर मुझे थैंक यू बोलने के लिए मेरे तरफ मुड़े तो मेरी हालत देख कर सब घबरा गए फिर जल्दी से सिकेन्द्र सिंह राठौर मेरे पास आये और मुझे बोले.
सिकेन्द्र- अरे ये आपको क्या हुआ आपको ये खून कहा से लग गया.
सिकेन्द्र के बात सुन कर मई उनको सब बताया तब जाकर वो संत हुए और मुझे अपने साथ आने के लिए बोले तो मई उनके साथ जाने लगा थोड़ी देर बाद वो मुझे एक रूम में लेकर गए और मुझसे बोले आप इस रूम के बाथरूम में जाकर फ्रेश हो जाइये उनकी बात को सुन कर मई है में गर्दन हिलाया और अपना शर्ट निकल दिया जैसे hi मैंने अपना शर्ट निकला तो मई जो गले में लॉकेट पहना था (ये लॉकेट वही था जो आशाराम छोड़ते समय गुरुदेव ने मुझे दिया था और वो मुझसे बोले थे की ये लॉकेट बचपन से मेरे साथ है) वो लॉकेट मेरे गले में लटकता हुआ बहार दिखाई देने लगा और साथ में मेरे बहो में बना हुआ बिरथ मार्क सुदर्शन चक्र के निशान और वेद (किताब) के निशान भी दिखाई देने लगा.
इधर मुझे रूम में छोड़ कर सिकेन्द्र रूम से जाने hi वाले थे की तभी उनकी नजर मेरे लॉकेट पर गयी तो वो लॉकेट उनको जाना पहचाना लगा फिर उनका ध्यान मेरे बिरथ मार्क पर गया जिसे देख कर हैरान हो गए और अपने मन में सोचने लगे.
सिकेन्द्र- (अपने मन में) ये ये ये तो वही निशान है जो मेरे प्यारे भतीजे के जनम के समय उसके शरीर पर था और ये लॉकेट ये लॉकेट मुझे जाना पहचाना क्यों लग रहा है (फिर कुछ सोचते हुए) ये लॉकेट तो वही लॉकेट है जो मेरा भतीजा रूद्र को डैड ने बचपन में दिया था तो क्या ये मेरा वही भतीजा रूद्र है लेकिन ये वो कैसे हो सकता है वो तो उस हादसे में मारा गया था लेकिन अगर ये वो नहीं है तो इसके पास ये लॉकेट कहा से आयी और तो और इसके दोनों बहो पर वही निशान भी है लगता है की मुझे इससे इसके बारे में पूछना पड़ेगा.
ये सोच कर वो आगे बढ़ कर इसके बारे में अभी मुझे पूछना hi छह रहे थे की तभी मई अपना बनियान भी बहार निकल दिया जिसे देख कर वो और हैरान हो गए क्युकी मेरे शरीर से जैसे hi बनियान निकला तो मेरे पीठ पर बना हुआ त्रिशूल का निशान उनके सामने आ गया जिसे देख कर उनको और यकीं हो गया था की हो न हो मई hi उनका भतीजा रूद्र हु.
इधर मई इन सब बातो से अनजान अपना सर कपडा निकलने के बाद अपने शरीर पर एक टॉवल लपेटा और बाथरूम में गश गया मुझे बाथरूम में जाता हुआ देख कर वो भी बहार निकल गए और किसी सोच में गम होते हुए वो महेंद्र सिंह राठौर के रूम में चले गए जैसे hi सिकेन्द्र वह पंहुचा तो संजय और कौशल्या के नजर उस पर गयी तो दोनों ने देखा की सिकेन्द्र अपने hi सोच में गम है और उसके चेहरे पर कभी खुसी का भाव तो कभी चिंता का भाव आ रहा है तो संजय सिंह राठौर आगे बढ़ते हुए सिकेन्द्र को उसके सोच से बहार लेट है और उनसे बोलते है.
संजय- सिकेन्द्र तुम जब से प्रतिक को उस रूम में छोड़ कर आये हो तब से किसी सोच में पड़े हुए हो क्या बात है तुम क्या सोच रहे हो.
संजय के बात सुन कर सिकेन्द्र गंभीर आवाज में उनसे बोलै.
सिकेन्द्र- मुझे आप दोनों से कुछ जरुरी बात करनी है आप दोनों मेरे साथ मेरे रूम में चलिए.
सिकेन्द्र को इस तरह से बात करता हुआ देख कर कौशल्या देवी को उनकी चिंता होने लगी इस लिए वो उनसे बोली.
कौशल्या- क्या बात है सिकेन्द्र जब से तुम डॉ. प्रतिक को उस रूम में छोड़ कर आये हो तब से तुम परेशां हो क्या बात है.
सिकेन्द्र- माँ मई यहाँ अभी कुछ नहीं बता सकता इस आप और भैया प्लीज मेरे साथ आइये मुझे आप दोनों से एक जरूर बात करनी है.
सिकेन्द्र के बात सुन कर दोनों उनके साथ उनके रूम में आ गए रूम में आने के बाद संजय और कौशल्या देवी सिकेन्द्र के बोलने का इंतजार करने लगे लेकिन सिकेन्द्र अभी भी अपने सोच में hi गम था ये देख कर संजय सिंह राठौर सिकेन्द्र से बोले.
संजय- क्या बात है सिकेन्द्र तुम हमें यहाँ बुला खुद किस सोच में गम हो गए.
संजय में आवाज सुन कर सिकेन्द्र अपने होश में आता है और दोनों को देखते हुए बोलता है.
सिकेन्द्र- भैया और माँ मई आप दोनों से एक बात करना चाहता हु लेकिन समझ में hi नहीं आ रहा है की मई वो बात आप दोनों से कैसे बोलू क्युकी मैंने अभी अभी जो देखा है मुझे उस पर विस्वास hi नहीं हो रहा है.
सिकेन्द्र के बात सुन कर कौशल्या देवी झूल झूलते हुए उससे बोले.
कौशल्या- ऐसा क्या देख लिया तुमने की तुम्हे उस पर विस्वास hi नहीं हो रहा है अब साफ साफ बताओगे या यु hi अपनी आधी अधूरी बात बोल कर हमें भी परेशां करने की तुम्हारी मनसा है.
कौशल्या देवी के बात सुन कर सिकेन्द्र कुछ देर सोचने के बाद उन दोनों वो सब बात बताना सुरु किया जो उसने देखा था.
सिकेन्द्र- दरअसल बात ऐसी है की मई जब डॉ. प्रतिक को बाथरूम उसे करने के लिए एक रूम में ले कर गया और उनको बाथरूम उसे करने के लिए बोलै तो वो वही पर मेरे सामने hi अपना शर्ट निकल दिया और जब वो अपना शर्ट निकला तो मई उनके गले में एक लॉकेट देखा जो हु बहु वैसा hi था जैसा की डैड ने बचपन में रूद्र को दिया था और तो और उसके शरीर पर वो साडी बिरथ मार्क है जो रूद्र के शरीर पर जनम के समय से hi था.
सिकेन्द्र के बात सुन कर कौशल्या देवी और संजय सिंह राठौर दोनों हैरान हो गए कौशल्या देवी तो बहुत ज्यादा हैरान हो गयी थी और साथ में उन्हें सदमा भी लग गया था जिसके कारन वो वही पर रखे हुए सोफे पर धाम से गिर गयी और उनकी आँखों से खुसी के आंसू गिरने लगे वो कपट हुए आवाज में बोली.
कौशल्या- कककक क्या तट तुम सच बोल रहे हो क्या वो लॉकेट और वो बिरथ मार्क सच में उसके शरीर पर है क्या क्या वो वो मेरा गायब हुआ पोता रूद्र है.
कौशल्या देवी की बात सुन कर सिकेन्द्र कुछ सोचते हुए बोलै.
सिकेन्द्र- मुझे ये नहीं पता की वो हमारा रूद्र है या नहीं लेकिन मुझे पूरा बिस्वास है की मई जो लॉकेट उसके गले में देखा वो रूद्र का hi लॉकेट है और उसके शरीर पर निशान है ठीक वैसा hi निशान रूद्र के शरीर पर भी था.
सिकेन्द्र के बात सुन कर कौशल्या देवी के आँखों से लगातार खुसी के आंसू गिर रहा था वो बहुत ज्यादा खुस हो गयी थी तो वही सिकेन्द्र के बात सुन कर संजय भी सोच में पद गए फिर वो कुछ देर सोचने के बाद बोलै.
संजय- तुम्हारे बातो से तो लग रहा है की वो हमारा hi रूद्र है लेकिन ये कोई कोइंसिडेन्स भी हो सकता है या फिर ऐसा भी हो सकता है की इसे रूद्र के बारे में पहले से hi पता हो इस लिए वो हमारा रूद्र बन कर हमारे बिछ आने की कोशिश कर रहा हो.
संजय सिंह राठौर के बात सुन कर दोनों हैरान हो गए फिर सिकेन्द्र उनके बातो को जबाब देते हुए बोलै.
सिकेन्द्र- मुझे नहीं लगता की वो ये सब हमारे परिवार में आने के लिए नाटक कर रहा है क्युकी जब मई उसको यहाँ आने के लिए बोलै था तो पहले वो मुझे मन कर दिया था और तो और अगर उसे मेरे परिवार में आना होता तो वो ये सब साबुत लेकर अगर डायरेक्ट यहाँ आता तो भी हम उन सरे सबूतों के बिनाह पर उसे अपना रूद्र मन लेते तो उसे ये सब करने की क्या जरुरत है.
सिकेन्द्र के बात सुन कर जहा संजय सिंह राठौर कुछ सोचने लगे तो वही कौशल्या देवी को पूरा यकीं हो गया था की मई उनका hi पोता रूद्र हु इस लिए बोली.
कौशल्या- अब मुझे पूरा यकीं हो गया है की वो मेरा जान से प्यारा पोता रूद्र hi है क्युकी जब मई उसको पहली बार देखा था तो मुझे ये एहसास हो रहा था की वो मेरा कोई अपना hi है इसीलिए मई उससे उसके फॅमिली के बारे में पूछा था और उसने मुझे बताया था की वो बचपन में hi अपने फॅमिली से बिछड़ गया था और उसे उसके गुरुदेव ने पल पॉश कर बड़ा किया और ये सब कोई कोइंसिडेन्स नहीं हो सकता वो वो मेरा hi पोता रूद्र है.
अपनी माँ के बात सुन कर संजय सिंह राठौर बोले.
संजय- सिकेन्द्र के बात सुन कर मुझे भी लगता है की वो हमारा hi रूद्र है लेकिन हम कोई जल्दीबाजी नहीं कर सकते है क्युकी अगर उसमे हमारे दुश्मन की कोई चल हुयी तो हम सब बहुत बड़ी मुसीबत में फस सकते है इस लिए हमें पहले उसे अच्छे से जांचना होगा.
संजय के बात सुन कर सिकेन्द्र को उसकी बात अच्छी लगती है लेकिन कौशल्या इस बात पर संजय सिंह राठौर पर भड़क जाती है और उनसे बोलती है.
कौशल्या- तुम ये क्या बोल रहे हो मेरा पोता कितने दिनों बाद मुझे मिला है मई तो समझ गयी थी की मेरा रूद्र इस दुनिया में नहीं है लेकिन भगवन के कृपा से वो अभी जिन्दा है और मेरे पास है तो तुम चाहते हो की मई उसे अभी भी अपने से अलग राखु आखिर तुम चाहते क्या हो की उसका परिवार होते हुए भी वो एक अनाथ के जिंदगी जिए.
कौशल्या के बात सुन कर संजय हड़बड़ाते हुए बोलै.
संजय- नहीं माँ मई ये कभी नहीं चाहूंगा की हमारा रूद्र एक अनाथ के जिंदगी जिए आपकी तरह मई भी अपने भतीजे को गले लगाने के लिए इतना hi तड़प रहा हु जितना की आप तड़प रही बाई लेकिन आप मेरे बात को समझ नहीं रही है अगर ये हमारे किसी दुश्मन के चल हुयी तो हम क्या करेंगे.
संजय के बात सुन कर कौशल्या देवी अभी कुछ बोलने hi वाली थी की तभी सिकेन्द्र उनको समझते हुए बोले.
सिकेन्द्र- माँ भैया सही बोल रहे है मई जनता हु की प्रतिक hi हमारा रूद्र है लेकिन हमें इसकी जाँच करनी जरुरी है अगर वो हमारा रूद्र न हो कर हमारे किसी दुश्मन के चल हुयी तो हम सब बहुत बड़ी मुसीबत में फास जायँगे और वैसे hi जहा हम रूद्र के बिना इतने दिन रह गए वैसे hi कुछ दिन और रह लेंगे.
सिकेन्द्र के समझने के बाद कौशल्या देवी बोली.
कौशल्या- ठीक है तो हम उसे जचेंगे कैसे.
कौशल्या देवी के बात सुन कर संजय उनसे बोलै.
संजय- सबसे पहले तो हमें ये बात सिर्फ हम तीनो के बिच hi रखना होगा और बात प्रतिक को जांचने की तो हम उसको बिना बताये उसका डीएनए टेस्ट करवा लेंगे आप किसी तरह से प्रतिक के बल का एक टुकड़ा के आइये बाकि का काम मई कर लूंगा.
संजय के बात सुन कर कौशल्या देवी कुछ सोचते हुए बोली.
कौशल्या- ठीक है लेकिन जो भी करना जल्दी करना क्युकी अगर ये मेरा पोता रूद्र है तो मई इससे अब अलग नहीं रह सकती इसने बहुत दिन तक परिवार के रहते अनाथ के जिंदगी जी लिया अब नहीं.
इसके बाद सब उस रूम से निकल कर महेंद्र सिंह राठौर के रूम में आ जाते है अब तक महिंद्रा सिंह राठौर को होश आ चूका था लेकिन वो अभी भी बहुत कमजोर थे इस लिए वो हिल दल नहीं रहे थे बस हलकी आवाज में बात कर रहे थे उनको होश में आया हुआ देख कर सब बहुत खुस हो गए कौशल्या देवी को तो खुसी का कोई ठिकाना hi नहीं था खुसी के मरे उनके आँखों से आंसू आने लगे हलाकि वह पर मौजूद सभी लोगो के आँखों में आंसू थे लेकिन कौशल्या देवी के आँखों में आज कुछ जायदा hi आंसू था वो जल्दी से महेंद्र सिंह राठौर के पास चली गयी और उनके एक हाथ को पकड़ कर बोली.
कौशल्या- अब कैसी है आपकी तबियत आप जैसा फील कर रहे है.
कौशल्या देवी के बात सुन कर महेंद्र सिंह राठौर हलकी मुस्कान के साथ धीमी आवाज में बोले.
महेंद्र- जिसकी तुम जैसी बीवी हो उसे भला क्या हो सकता है मई ठीक हु इस लिए तुम अब रोना बंद करो तुम्हे पता है न की मुझे तुम्हारे आँखों में आंसू पसंद नहीं है.
महेंद्र सिंह राठौर के बात सुन कर सबके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है तो वही महेंद्र सिंह राठौर के बात सुन कर कौशल्या देवी शर्मा जाती है और फिर घुसे से बोलती है.
कौशल्या- आप अभी बीएड पर पड़े हुए है फिर भी आपकी मजाक करने की आदत नहीं गयी.
कौशल्या देवी के बात सुन कर महेंद्र सिंह राठौर अपने धीमी आवाज में बोले.
महेंद्र- क्या करू जब मई तुम्हे देखता हु तो खुद को कण्ट्रोल नहीं कर पता हु वैसे क्या तुम मुझे बता सकती हो की मुझे क्या हुआ था और किसने मुझे ठीक किया.
महेंद्र सिंह राठौर के बात को सुन कर कौशल्या देवी अभी कुछ बोलने hi वाली थी की तभी पीछे से एक आवाज आती है.
आवाज- आपको एक ऐसी कीड़े ने कटा था की आपको बचा पाना बहुत मुश्किल था लेकिन शुक्र है ऊपर वाले की की आप बच गए अगर आपको जब किसी चीज के बारे में जानकारी न हो तो उसे हाथ नहीं लगाना चाहिए वर्ण कभी कभी बात जान पर भी आ जाती है.
पीछे से आयी आवाज को सुन कर सब चौक जाते है और पीछे मुद उस आवाज वाले को देखते है तो पते है की वह पर मई खड़ा था दरअसल मई बाथरूम से नाहा कर अपना स्टोरेज रिंग से कपड़ा निकल और उसे पहन कर बहार आया तो देखा की उस रूम में कोई नहीं है तो मई सीधा महेंद्र सिंह राठौर के रूम में चला आया जहा मुझे महेंद्र सिंह राठौर की बात सुनाई दिया तो मई खुद को बोलने से रोक नहीं पाया इधर मेरे बात को सुन कर सब मुझे देखने लगे वही कौशल्या देवी के चेहरे पर मेरे लिए ममता दिखाई दे रहा था अगर उनका बस चलता तो वो तुरंत आ कर मुझे गले लगा लेती वही महेंद्र सिंह राठौर अपने घर में किसी अनजान को देख कर मुझसे बोले.
महेंद्र- वैसे तुम हो कोण और तुम्हारे बोलने का मतलब क्या है तुम मुझे ये क्यों बोले की मुझे किसी कीड़े ने कटा है, मुझे किस कीड़े ने कटा था बताओ मुझे.
महेंद्र सिंह राठौर के बात सुन कर सिकेन्द्र आगे आते हुए बोले.
सिकेन्द्र- डैड इन्होने hi आपकी जान बचाई है इनका नाम डॉ. प्रतिक है और ये एक आयुर्वेदिक डॉक्टर है.
सिकेन्द्र के बात सुन कर महिंद्रा सिंह राठौर मुझे ध्यान से देखते है और मन hi मन सोचते है.
महिंद्रा- (अपने मन में) इस लड़के को देख कर मुझे ऐसा क्यों लग रहा है की ये मेरा hi खून है और मुझे इससे अपनत्व का भाव आ रहा है और साथ में इस लड़के के चेहरे पर मेरे सूर्य जैसा झलक है जब सूर्य इसके उम्र का था तब ऐसा hi दीखता था कही ये मेरा खोया पूरा पोता तो नहीं है (फिर कुछ सोच कर) नहीं नहीं ये कैसे हो सकता है मई भी क्या क्या सोचने लगता हु.
फिर वो अपने ख्यालो से बहार आ कर सिकेन्द्र से बोलता है.
महिंद्रा- क्या तुम सच बोल रहे क्या मुझे इसी ने बचाया है लेकिन ये तो अभी बहुत छोटा है ये कैसे एक डॉक्टर hi सकता है.
महिंद्रा सिंह राठौर के बात सुन कर कौशल्या देवी बोली.
कौशल्या- सिकेन्द्र ठीक बोल रहा है आपको प्रतिक ने hi बचाया है और आप इसे छोटा मत समझिये ये एक बहुत बड़ा डॉक्टर है और लोग इसे चमत्कारी डॉक्टर भी कहते है.
कौशल्या देवी के बात सुन कर महिंद्रा सिंह राठौर को बिस्वास hi गया की उन्हें मैंने hi बचाया है तो मुझसे बोले.
महिंद्रा- थैंक यू डॉ. प्रतिक अपने तुमने मेरी जान बचा ली लेकिन आप अभी क्या बोल रहे थे मुझे किसी कीड़े ने कटा है लेकिन मुझे किस कीड़े ने कटा है और और अगर वो कीड़ा जहरीला था तो मई इतने दिन तक जिन्दा कैसे रहा.
मई- इसमें थैंक यू बोलने वाली क्या बात है आप मेरा पेशेंट है इस नाते आपका इलाज करना मेरा फर्ज है और रही बात कीड़े की तो आपको जिनसेंग के अस्स पास रहने वाली ट्रांसपेरेंट कीड़े ने कटा था जिसका जहर बहुत खतरनाक होता है हलाकि उसके काटने से आदमी तुरंत नहीं मरता है लेकिन उसके काटने के बाद आदमी जितना दिन जीता है उस आदमी के लिए उतना दिन नर्क से काम नहीं होता वैसे आप अभी पूरी तरह से ठीक नहीं हुए है आपको पूरी तरह से ठीक करने के लिए 300 साल पुराण ऑरेंज जिनसेंग की जरुरत होगी तो क्या आप बता सकते है की आपको उस कीड़े ने कहा कटा था.
मेरी बात को सुन कर महेंद्र सिंह राठौर पहले तो हैरान हो गए फिर कुछ सोचते हुए वो बोले.
महेंद्र- मुझे ये तो यद् नहीं है की मुझे उस कीड़े ने कहा कटा था लेकिन अगर वो कीड़ा जिनसेंग के पास होता है तो मुझे अंदाजा है की इस कीड़े ने मुझे कहा कटा होगा.
उनकी बात को सुन कर मई उत्साहित होते हुए पूछा
मई- ठीक है आपको इस बारे में जो भी पता है वो मुझे आप मुझे बता सकते है सायद वह पर मुझे वो जिनसेंग मिल जाये जिससे आप ठीक हो सके.
मेरी बात को सुन कर महेंद्र सिंह राठौर मुझे बताना सुरु किया.
महेंद्र- आज से 5 महीने पहले मुझे इस आइसलैंड के पुराने मालिक से मुलाकात हुआ था तो वो बात hi बात में मुझे बताया की इस आइसलैंड पर बहुत साडी औषधियां मौजूद है जिसमे सालो पुराण जिनसेंग भी है जब मैंने सुना की इस आइसलैंड पर सालो पुराण जिनसेंग है तो मेरे मन में लालच आ गया और मई इस आइसलैंड के दूसरी साइड उस जिनसेंग की खोज में चला गया और वह मुझे वो जिनसेंग मिला भी लेकिन वो 15 साल पुराण जिनसेंग hi था इस लिए मई उसे वही छोड़ दिया था.
महेंद्र सिंह राठौर के बात सुन कर मई सोच में पद गया फिर कुछ देर सोचने के बाद बोलै.
मई- अगर वह पर आपको 15 साल पुराण जिनसेंग मिला था तो मुझे पूरा यकीं है की वह पर जरूर 300 साल पुराण जिनसेंग भी होगा मुझे एक बार वह जा कर देखना चाहिए आप मुझे वह का लोकेशन बता दीजिये मई सुबह hi जा कर देखता हु.
मेरी बात को सुन कर वह मौजूद सरे लोग खुस हो गए लेकिन कौशल्या देवी थोड़ी चिंतित लग रही थी वो चिंतित आवाज में मुझसे बोली.
कौशल्या- नहीं तुम वह पर नहीं जाओगे मई किसी नौकर को वह पर भेज कर वो ऑरेंज जिनसेंग मंगवा लुंगी क्युकी वह पर जिनसेंग है तो वो कीड़े भी जरूर होंगे और मई नहीं चाहती की तुम हमारे लिए अपना जान खतरे में डालो.
कौशल्या देवी के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.
मई- दादी जी आप मेरी चिंता मत कीजिये मुझे कुछ नहीं होगा और वैसे भी 300 साल पुराण जिनसेंग को पहचानना सब के बस की बात नहीं है मई कुछ सोच समझ कर hi वह जाने का फैसला किया है.
मेरी बात को सुन कर कौशल्या देवी कुछ नहीं बोल पायी लेकिन उनके चेहरे पर अभी भी चिंता के लकीर दिखाई दे रहा था वही मेरी बात को सुन कर महेंद्र सिंह राठौर बोले.
महिंद्रा- ठीक है अगर आपको वह जाना है तो मई सुबह आपको इस आइसलैंड का एक नक्शा दूंगा और उस जगह का पता बता दूंगा अभी आप जाकर आराम कीजिये.
महेंद्र के बोलने बाद हम सब वह पर थोड़ी देर और रुके जिसमे सिकेन्द्र ने मुझसे पूछा की वो अपने डैड को खाने में कुछ दे सकता है या नहीं तो मई उन्हें हेअल्थी सोऊ देने के लिए बोलै फिर हम लोग वह से निकल कर दिंनिंग टेबल पर आ गए और खाना खाया इसके बाद सिकेन्द्र मुझे गेस्ट रूम में लेकर आ गया और मुझे आराम करने के लिए बोल कर चला गया.
नेक्स्ट डे सुबह शनाया सुबह सुबह hi रेडी हो कर हॉस्पिटल जा रही थी क्युकी आज उसे अपने डैड को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करना था तभी उसके पास शानवी आती है और शनाया से बोलती है.
शानवी- दी आप इतनी सुबह सुबह कहा जा रही है.
शनाया- शानवी मई अभी हॉस्पिटल जा रही हु आज डैड को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करवाना है.
शनाया के बात सुन कर शानवी कुछ सोचते हुए बोली.
शानवी- दी मई भी आपके साथ हॉस्पिटल चलूंगी क्युकी मुझे आज हॉस्टल वापस जाना है वो क्या है न की आज से मेरा कॉलेज स्टार्ट हो रहा है मई सोच रही हु की हॉस्टल जाने से पहले डैड से एक बार मिल लू.
शनाया- ठीक है तो तुम जल्दी रेडी हो कर आओ.
शानवी- Ok दी बस 10 मिनट आप वेट कीजिये.
इतना बोल कर शानवी जल्दी से अपने रूम में जाती है और रेडी होने लगती है करीब 20 मिनट बाद वो रेडी हो कर शनाया के पास गयी जिसे देख कर शनाया बोली.
शनाया- तुम्हारी 10 मिनट कुछ जल्दी नहीं हो गया.
शनाया के बात सुन कर शानवी बस मुस्कुरा देती है फिर दोनों वह से अपने अपने गाड़ी से हॉस्पिटल के लिए निकल जाते है करीब आधा घंटा के ड्राइव के बाद दोनों हॉस्पिटल पहुंचते है इसके बाद गाड़ी पार्क कर के दोनों अपने डैड के पास चले जाते वह जाने के बाद शानवी अपने माँ डैड से मिलती है तो वही शनाया अपने डैड के डिस्चार्ज के लिए बात करने डॉ. खुराना के केबिन में चली जाती है इधर शानवी अपने माँ डैड से मिल कर और उन्हें बता कर की उसकी सोल्लगे खुल गयी इस लिए वो वापस हॉस्टल जा रही है और वह से निकल जाती है जैसे hi वो हॉस्पिटल से बहार निकलती है वैसे hi एक आदमी अपने बॉस को कॉल करता है और बोलता है.
आदमी- बॉस प्रतिक की वाइफ की छोटी सिस्टर अभी अभी अकेले निकली है क्या हम उसे उठा ले.
उस आदमी के बात सुन कर उसका बॉस यानि की दिलावर बहुत खुस होता है और बोलता.
दिलावर- वह क्या खबर सुनाई है तुमने अगर वो सच में अकेले गयी है तो उसका पीछा करो और सुनसान जगह देख कर उसे उठा लो आज मई उस लड़की के साथ मजे करना चाहता हु.
आदमी- ठीक है बॉस.
इतना बोल कर वो आदमी अपने आदमियों को इशारा करता है और फिर सब शानवी के गाड़ी का पीछा करने लगते है इधर शानवी इन सब से बेखबर मस्ती में अपने गाड़ी को सोल्लगे के तरफ भगाये जा रही थी इधर वो सरे गुंडे भी शानवी के पीछा कर रहे थे लेकिन इन लोगो को ये मालूम नहीं था की कोई और भी था जो इन सब के पीछे पीछे आ रहा था खैर कुछ दूर आगे जाने के बाद एक सुनसान जगह आया जहा पर कोई भी नहीं था ये देख कर उन गुंडों के लीडर को ये जगह शानवी के किडनैप करने के लिए अच्छा लगा इस लिए वो अपने ड्राइव को शानवी के गाड़ी का ओवरटेक करने के लिए बोलै जिसे सुन कर वो ड्राइवर अपनी गाड़ी के स्पीड को और बढ़ा दिया और शानवी के गाड़ी को ओवरटेक करते हुए अपना गाड़ी शानवी के गाड़ी के सामने रोक दिया.
इधर जैसे hi शानवी ने देखा की एक गाड़ी उसकी गाड़ी को ओवरटेक कर के रोड बीचो बिच कड़ी हो गयी तो मजबूरन शानवी को अपना गाड़ी रोकना पड़ा और वो घुसे से अपने गाड़ी के गेट खोल के बाहर निकलने लगी तभी उसकी नजर उस हदी पर गयी जिसमे से 6 या 7 गुंडे बहार निकल रहे है ये देख कर शानवी के दर के मरे हालत ख़राब हो गया उसे ये अनुमान हो गया की ये लोग उसका किडनैप करने वाले जैसे hi शानवी को ये एहसास हुआ तो उसकी माथे से पसीना आने लगा और तुरंत अपने गाड़ी में बैठ कर अपनी गाड़ी का गेट बंद कर लिया इधर वो सरे गुंडे वह से चलते हुए शानवी के पास आये और उनका लीडर शानवी से बोलै.
लीडर- ये लड़की चल गाड़ी से निचे उतर मुझे तुमसे कुछ बात करना है.
लीडर के बात सुन कर शानवी थोड़ी दर गयी लेकिन वो दर को अपने चेहरे पर आने नहीं दिया और थोड़ी कड़क आवाज में उस गुंडे से बोली.
शानवी- कोण हो तुम लोग और ऐसे गाड़ी को बिच रस्ते में क्यों लगाए चुप चाप अपना गाड़ी हटाओ नहीं तो तुम्हारे साथ अच्छा नहीं होगा.
शानवी- के बात सुन कर सरे गुंडे हसने लगते है तभी उन गुंडों के लीडर बोलता है.
लीडर- है है क्या हिमत है तुम्हारी इस हिमत को तोड़ने में मजा आएगा और रही बात गाड़ी हटाने की तो जा नहीं हटाता क्या करेगी तू मारेगी चल चल मर के दिखा लेकिन मुझे मरने के लिए तुम्हे तो गाड़ी से निचे उतरना पड़ेगा (फिर थोड़े घुसे में बोलै) ये लड़की देख मेरे पास तेरे ये फालतू के बात सुनाने का समय नहीं है तुम चुप चाप गाड़ी से उतरती है या मई खुद तुम्हे उतारू.
उस लीडर के बात सुन कर शानवी बहुत दर जाती है और डरते डरते अपने मोबाइल से शनाया के पास कॉल करने लगती है लेकिन शनाया उस वक़्त डॉ. खुराना के केबिन में थी इस लिए वो कॉल नहीं उठती है इधर उस लीडर ने जब देखा की शानवी किसी को कॉल कर रही है तो उसे बहुत गुसा आता है और वो घुसे से बोलता है.
लीडर- लगता है की तू ऐसी नहीं मानेगी.
इतना बोल कर वो अपने हाथ में पकडे हुए हॉकी स्टिक से गाड़ी के सीसे पर मरने hi वाला था की तभी पीछे से एक आवाज आती है जो किसी और का नहीं बल्कि दीपक का था जब शानवी हॉस्पिटल से निकली थी तब से hi दीपक उनके सेफ्टी के लिए उनके पीछे था.
दीपक- तुम सब इस लड़की पर क्या जोर आजमा रहे हो अगर तुम सब में हिमत है तो मुझसे लड़ कर दिखाओ.
दीपक के आवाज सुन कर सरे गुंडे घूम कर दीपक के तरफ देखते है अपने सामने एक 20 साल के लड़के को देख कर वो सरे गुंडे जोर जोर से हसने लगते है तभी उन गुंडों का लीडर बोलता है.
लीडर- ये बचे जा चला जा यहाँ से क्यों बेकार में मरने के लिए यहाँ आ गया.
लीडर के बात सुन कर दीपक मुस्कुराते हुए उसे देखा उसकी मुस्कराहट इतनी खतरनाक थी की एक पल के लिए गुंडे की भी हालत ख़राब हो गयी इधर दीपक अपने चेहरे पर डेविल मुस्कान लेट हुए बोलै.
दीपक- क्या बोलै बच्चा हम्म अच्छा है अब अगर तुम लोगो को इस बचे से मर नहीं खाना है तो चुप चाप उस लड़की को छोड़ कर यहाँ से चले जाओ.
दीपक के बात सुन कर उस लीडर को गुसा आ जाता है वो घुसे से बोलता है.
लीडर- लगता है की हमें इस लड़की को उठाने से पहले तुम्हारा hi मरमत करना होगा (फिर अपने गुंडों से) तुम सब थोड़ा इस बचे की मरमत करो ये कुछ ज्यादा hi बोल रहा है और है इसे जान से नहीं मरना बस इसके हाथ पेअर तोड़ देना.
अपने लीडर के बात सुन कर एक गुंडा अपने हटो में एक हॉकी स्टिक ले कर दीपक को मरने के लिए उसके तरफ भागता है ये देख कर गुंडई के लीडर समझ जाता है की अब ये लड़का गया काम से ये सोच कर वो अपने गुंडों के साथ मिल कर शानवी के कार के गेट तोड़ने की कोशिश करने लगता है ये देख कर शानवी बुरी तरह से दर जाती है लेकिन अभी वो लीडर अपने हाथ में लिए हुए हॉकी स्टिक से कार के सीसे पर वॉर करता उससे पहले hi एक आदमी उड़ते हुए आता है और उससे टकरा जाता है जिसे देख कर लीडर हड़बड़ा जाता है और पीछे घूम कर देखने लगा जब वो पीछे घूम कर देखता है तो पता है की दीपक अपने जगह पर दोनों हाथ बंधे खड़ा खड़ा मुस्कुरा रहा था.
दरअसल हुआ ये था की जब वो योद्धा अपने हॉकी स्टिक से दीपक पर हमला करता है तो दीपक उसे हॉकी स्टिक को अपने हाथो से पकड़ लेता है और अपना एक लत उसके पेट में मरता है जिसके कारन वो गुंडा उड़ते हुए जा कर लीडर से टकरा जाता है और वही बेहोश हो जाता है इधर अपने आदमी के ऐसी हालत देख कर लीडर को बहुत गुसा आया है और वो घुसे से दीपक से बोलता है.
लीडर- मई तो तुम्हे बचा समझ कर सोच रहा था की तेरा हाथ पेअर तोड़ कर छोड़ दूंगा लेकिन तूने मेरे एक आदमी को मर कर अच्छा नहीं किया अब तुम्हे मुझसे कोई भी नहीं बचा सकता आज तुम यही इसी वक़्त जान से जायेगा मर डालो इस सेल को.
अपने लीडर के बात सुन कर सरे गुंडे अपने हथियार ले कर दीपक के ऊपर टूट पड़ते है किसी गुंडे के पास चाकू था तो किसी के पास चैन तो किसी के हॉकी स्टिक तभी दो गुंडा जो सबसे आगे थे वो दोनों दीपक के ऊपर हमला कर दिया एक ने चाकू से हमला किया तो एक हॉकी स्टिक से जैसे hi दोनों को हथियार दीपक के पास आया तो दीपक निचे झुक कर उनके हमको से बचा और चाकू वाले गुंडे का हाथ पकड़कर कर उसे उठा कर दूसरे गुंडे पर फेक देता है जिसके कारन दोनों गुंडे उड़ते हुए पीछे जा कर गिरते है और वही बेहोश हो जाते है अपने दो साथियो के हालत देख कर सरे गुंडे दर जाते है लेकिन अपने दर को अपने चेहरे पर न लाये हुए बाकि बचे गुंडे दीपक पर टूट पड़ते है इधर दीपक भी उनसे लड़ने के लिए तैयार था वो एक एक कर के सरे गुंडों को मरने लगता दीपक के हमको में इतना ताकत था की उसके एक वॉर से hi एक गुंडा बेहोश हो जा रहे थे उसने किसी भी गुंडे को जान से नहीं मारा बल्कि सबको बेहोश कर दिया था.
इधर अपने गुंडों की हालत को देख कर उनका लीडर दर से थार थार कम्प रहा था इधर सरे गुंडों को ठिकाने लगाने के बाद दीपक उस लीडर के तरफ बढ़ने लगा दीपक को अपने तरफ आता देख कर उस लीडर की हालत ख़राब हो गयी और वो डरते हुए बोलै.
लीडर- ड़ड़ड़ड़ देखो टट्ट्टी तुम मममम मेरे पोल्ल पास नहीं आना नहीं तो मममम मई तुम्हे जान से मर दूंगा.
लीडर के बात सुन कर दीपक मुस्कुराते हुए बोलै.
दीपक- राशि जल गयी लेकिन बल नहीं गया.
इतना बोल कर वो भागते हुए उस लीडर के पास गया और उसे खींच कर एक थपड मर दिया जिससे उस लीडर के मुँह से खून आने लगा लीडर दर के मरे अपने दोनों हाथ जोड़ कर दीपक से बोलै.
लीडर- प्लीज मुझे छोड़ दो मई आज के बाद किसी भी लड़की के तरफ आँख उठा कर नहीं देखूंगा.
लीडर के बात सुन कर दीपक हस्ते हुए बोलै.
दीपक- मई तुम्हे किसी लड़की पर आंख उठा कर देखने लायक छोडूंगा तब न तुम किसी को देखोगे.
इतना बोल कर दीपक उसे मरना सुरु कर दिया जिसके कारन उसे शरीर से खून निकलने लगा आखिर में वो मर कहते कहते बेहोश हो गया.
इधर शानवी दीपक को अकेले इतने गुंडों के साथ लड़ते हुए देख कर हैरान थी उसकी हैरानी तब टूटी जब दीपक उसके कार के गेट पर नोके करते हुए बोलै.
दीपक- अब आप सेफ है आप जा सकती है.
इधर दीपक को खुद से बात करता हुआ देख कर न जाने क्यों शानवी के दिल की धड़कन तेज़ हो गयी थी लेकिन वो खुद को सँभालते हुए दीपक से बोली.
शानवी- थैंक यू मुझे बचने के लिए अगर आप नहीं आते तो पता नहीं ये सब मेरे साथ क्या करते.
दीपक- अरे इसमें थैंक यू की क्या बात है ये तो मेरा इंसानियत के नाते मेरा फ़र्ज़ था आपको बचाना और वैसे ये सब कोण थे.
दीपक के बात सुन कर शानवी कुछ देर सोचने के बाद बोली.
शानवी- पता नहीं ये लोग कोण थे और क्यों मेरा पूछा कर रहे थे.
दीपक- ठीक है अब आप जाइये और है आगे से ध्यान रखियेगा.
दीपक के बात सुन कर शानवी उसको ध्यान से देखते हुए बोली.
शानवी- क्या मई मुझे बचने वाले मसीहा के नाम जान सकती हु.
शानवी के बात सुन कर दीपक कुछ सोचते हुए बोलै.
दीपक- आपकी जान तो बच गयी न तो अब आप मेरा नाम जान कर क्या करेंगी.
इतना बोल कर दीपक किसी हवा की तरह वह से तेज़ गति में निकल गया इधर दीपक के जाने के बाद शानवी अपने मन में hi सोचने लगी.
शानवी- पता नहीं ये खड़ूस कोण था हवा की तरह आया और मुझे बचा का हवा की तरह hi गायब हो गया वैसे मुझे समझ में नहीं आ रहा है की जब मई उसे देखि तो अचानक मेरे दिल की धड़कन तेज़ क्यों हो गयी थी और मुझे ऐसा क्यों लग रहा था की वो यही पर रुक कर मुझसे बात करता रहे पता नहीं मेरे साथ ये क्या हो रहा है मुझे लेट हो रहा है मुझे सोल्लगे जाना चाहिए.
इतना बोल कर शानवी भी वह से निकल गयी उसके जाने के कुछ देर बाद वह पर कुछ आदमी आये जब उन लोगो ने देखा की रोड पर कुछ आदमी घायल हालत में पड़े हुए है तो वो जल्दी से उनके पास गया और उनको ध्यान से देखने लगा जब वो इन आदमियों को पहचाना तो वो घुसे से बोलै.
आदमी- किसकी इतनी हिमत हो गयी की वो दिलवर भाई के आदमी पर हाथ उठाये उसको मई जिन्दा नहीं छोडूंगा पहले मई दिलावर भाई को इसकी खबर दे देता हु इसके बाद मई उस आदमी को धुंध निकलूंगा फिर मई उसे दर्दनाक मौत दूंगा.
इतना बोलने के बाद वो अपना मोबाइल निकलता है और दिलवर को कॉल करता है थोड़ी देर बाद दिलावर उसका कॉल रइवे करता है और बोलता है.
दिलावर- है रघु बोल क्यों कॉल किया इस समय कुछ काम था क्या.
रघु- भाई संत Xavier's गर्ल्स सोल्लगे जाने वाले रस्ते में पकिया और उसके साथी बेहोश मिले है किसी ने इनको बहुत बुरी तरह से मारा है.
रघु के बात सुन कर दिलावर घुसे से बोलता है.
दिलावर- किसकी इतनी हिमत हो गयी की वो दिलावर के आदमी पर हाथ उठाये तुम पता करो की किसने पकिया और उसके साथी को मारा है और पता कर के उसे कही से भी धुंध निकालो और उसे जान से मर दो.
रघु- जी भाई आप चिंता मत कीजिये जिसने भी हमारे आदमी को मारा है उसे मई तड़पा तड़पा के मरूंगा वैसे भाई इन लोगो का क्या करना है.
दिलावर- इन लोगो को हॉस्पिटल भेज दो और है ये लोग एक लड़की को उठाने वाले थे अब इनका काम तुम करोगे यद् रहे आज उन दोनों लड़कियों में से कोई एक मेरे बिस्तर में चाहिए इसके लिए तुम्हे जो भी करना है करो.
रघु- जी भाई आप चिंता मत कीजिये मई इस काम के लिए त्रिनेड मार्टिकल आर्ट्स फाइटर भेजता हु.
दिलावर- ठीक है.
इतना बोल कर दिलावर कॉल कट कर देता है तो वही शनाया अपने डैड का हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करवा कर अपने घर के कर जा रही थी अब अजय मल्होत्रा 75% तक ठीक हो गए थे शनाया अपने माँ डैड के साथ हॉस्पिटल से सीधा घर के लिए निकल गयी जैसे hi उसका गाड़ी हॉस्पिटल से बहार निकला तो उसी वक़्त उनके पीछे 2 और गाड़ी जाने लगी इन दोनों गाड़ी में 6 लोग थे आगे वाले गाड़ी में दीप्ती और रोहन के साथ बलदेव सिंह था जो कार ड्राइव कर रहा था तो वही पीछे वाले गाड़ी में संध्या और कारन के साथ बलदेव सिंह का राइट हैंड तेजा था जो कार ड्राइव कर रहा था.
ये लोग करेफुल्ली शनाया और उसके माँ डैड को शाफेट्य दे रहे थे क्युकी शानवी पर जो हमला हुआ था वो इन लोगो को पता चल गया धीरे धीरे शनाया के गाड़ी उनके घर तक पहुंच कर रुक गयी शनाया के गाड़ी रुकते hi इन लोगो ने भी अपना गाड़ी रोके दिया इन लोगो का गाड़ी शनाया के गाड़ी से 200 मीटर पीछे थी जिसके कारन शनाया को ये शक नहीं हुआ की कोई उसके गाड़ी का पीछा कर रहा है.
इधर शनाया और पुस्पा गाड़ी से उतर का अजय मल्होत्रा को सहारा दे कर अपने घर में ले कर चले गए उनके जाने के बाद रोहन बलदेव सिंह से बोलता है.
रोहन- बलदेव जी आप एक काम कीजिये आप भाभी के घर के सामने वाले घर में और एक पीछे वाले घर में एक रूम ले लीजिये अब हम वही से इन पर निगरानी रखेंगे और है अपने आदमियों को भी अलर्ट कर देना की वो 24 हॉर्स इस घर पर नजर रखे.
बलदेव- ठीक है मई अभी सब इंतजाम करता हु.
इतना बोल कर बलदेव किसी को कॉल किया और कुछ देर बात करने के बाद बोलै.
बलदेव- मैंने रूम के लिए बोल दिया है 2 घंटे में हमें रूम मिल जायेगा और रही बात इन पर अपने आदमियों से निगरानी रखने की तो वो पहले से hi ये कर रहे है.
रोहन- गुड वर्क बलदेव जी.
फिर रोहन ने कारन को बुलाया और उससे बोलै.
रोहन- कारन मई भाभी के घर पर निगरानी करने के लिए भाभी के घर के आगे और पीछे वाले घर में एक एक रूम ले रहा हु ताकि हम आसानी से उस पर नजर रख सके
कारन- ये तुमने अच्छा किया अब हम आसानी से उन सब पर नजर रख सकेंगे.
इसके बाद बलदेव ने शनाया के घर के आगे और पीछे के घर में एक एक रूम ले लिया और एक रूम में रोहन दीप्ती के साथ और एक रूम में कारन संध्या के साथ रुक गए और फिर दोनों मिल कर शनाया के घर पर नजर रखने लगे.
इधर मृत्युंजय अपने डैड से 1 करोड़ के चेक ले कर सीधा बैंक गया और उस चेक के सरे पैसे अपने अकाउंट में ट्रांसफर करवा दिया इसके बाद वो वह से सीधा अनाथ आश्रम गया अनाथ आशाराम जाने के बाद वो वह के वार्डन से मिला और बोलै.
मृत्युंजय- मैंने इस अनाथ आश्रम को गॉड ले लिया है अब से इस आश्रम में जितने भी पैसे खर्च होंगे उसे मई दूंगा और आज के बाद यहाँ के कोई भी बचा बहार काम करने या भीख मांगने के लिए नहीं जायेगा आज से यहाँ के बचो को पढाई और भर पेट खाना मिलेगा.
मृत्युंजय के बात सुन कर वार्डन बहुत खुस हो जाता है और वो खुसी से मृत्युंजय से बोलता है.
वार्डन- आपका बहुत बहुत धन्यवाद् जी अपने इन अनाथ बचो के बारे में इतना कुछ सोचा.
मई- अरे इसमें धन्यवाद् की कोई बात नहीं है ये तो इन बचो का हक़ है की इनको भर पेट खाना के साथ साथ अच्छी एजुकेशन मिले और है मई अनाथ आश्रम के अकाउंट में 70 लाख रूपए सेंड कर रहा हु आज hi आप मार्किट जा कर इन बचो के लिए अच्छे कपडे और राशन ले आइये और साथ में इनको पढ़ने के लिए अचे अचे टीचर भी हिरे कीजिये.
वार्डन- ठीक है सर मई अभी सभी चीज का बेवस्था करता हु.
इसके बाद मृत्युंजय अनाथ आश्रम के अकाउंट में 70 लाख रूपए सेंड कर दिया और वह से जाने लगा लेकिन जाते जाते मृत्युंजय वार्डन को एक बात बोल कर गया.
मृत्युंजय- मई अभी जा रहा हु अगर ये पैसे काम पद जाये तो मेरे पास कॉल कर लेना और है अगर तुमने इन पैसे में हेरा फेरी की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.
इतना बोल कर मृत्युंजय वह से निकल गया और सीधा वह से बृद्धा आश्रम चला गया जैसे वो बृद्धा आश्रम पंहुचा तो वह के केयर टेकर उसको देखते hi उसको पहचान गया की इस सहर के सबसे आमिर आदमी का बीटा मृत्युंजय कुशवाहा है जैसे वो मृत्युंजय को पहचाना तो वो मृत्युंजय के पास आया और उससे बोलै.
केयर टेकर- इस बृद्धा आश्रम में आपका स्वागत है मृत्युंजय सर बताइये मई आपकी क्या सेवा कर सकता हु.
उस केयर टेकर के बात सुन कर मृत्युंजय कुछ सोचते हुए उससे बोलै.
मृत्युंजय- मई इस वृद्धा आशाराम को गॉड लेना चाहता हु और मई चाहता हु की आज के बाद इस आश्रम में रहने वाले लोगो को किसी भी तरह के कोई भी प्रॉब्लम न हो.
मृत्युंजय के बात सुन कर वो केयर टेकर खुस हो जाता है और भगवन से लाख लाख सुक्रिया करता है क्युकी इस आश्रम का सारा फण्ड ख़तम हो गया था और अब ऐसा नौबत आ गया था की ये बृद्धा आश्रम कभी भी बंद हो सकता है जिसके कारन केयर तकर को यहाँ पर रहने वाले वृद्ध लोगो की बहुत चिंता होती थी लेकिन जब उसने सुना की सहर के सबसे बड़े आदमी के बेटे ने इस आश्रम को गॉड लेने आया है तो वो बहुत खुस हो गया और इसी खुसी में वो मृत्युंजय से बोलै.
केयर तकर- आपका बहुत बहुत धन्यवाद् सर जो अपने इन बूढ़े लोगो के बारे में सोचा आज कल आपके जैसा आदमी मिलना बहुत मुश्किल है.
मई- मई आपके अकाउंट में अभी के लिए 30 लाख ट्रांसफर कर रहा हु आप इस आश्रम में रहने वाले लोगो के लिए जो भी आवश्यकता है वो ले आइये और इन सब को किसी भी तरह के प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए.
केयर टेकर- जी ठीक है जैसा आप चाहेंगे वैसा hi होगा.
इसके बाद मई उसके अकाउंट में 30 लाख सेंड कर दिया फिर थोड़ी देर उससे बात करने के बाद वह से जाने लगा तभी वह पर एक कार आ कर रुकी और उसमे से एक खूबसूरत लड़की बहार निकली जिसे देख कर एक पल के लिए मृत्युंजय उसमे खो सा गया लेकिन फिर खुद को सँभालते हुए वह से जाने लगा तभी वो लड़की केयर टेकर के पास आये हुए बोली.
लड़की- मई इस बृद्धा आश्रम को 20 लक्ष डोनेट करना चाहती हु ताकि इस बृद्धा आश्रम में रहने वाले लोग बेहतर जिंदगी जी सके.
उस लड़की के बात सुन कर मृत्युंजय के आगे बढ़ते हुए पेअर वही पर रुक गया और वो मन hi मन सोचने लगा.
मृत्युंजय- (अपने मन में) इंटरेस्टिंग जहा आज कल लोग अपनों की भी मदत नहीं करते वह ये इन बूढ़े लोगो को मदत करने के लिए आ गयी.
इधर उस लड़की के बात सुन कर केयर टेकर बोलै.
केयर तकर- है है क्यों नहीं मैडम आप हमारी बृद्धा आश्रम में डोनेट करेंगी तो ये तो हमारे लिए और भी बेहतर होगा हम यहाँ पर रहने वाले लोगो के लिए और भी बेहतर कर सकते है आप जानती है मैडम अभी अभी वो सर भी आपकी तरह वो भी यहाँ पर पैसे डोनेट कर के गए.
ये सुन कर वो लड़की एक बार मृत्युंजय के तरह मुस्कुरा कर देखि और उस केयर टेकर के अकाउंट में 20 लाख ट्रांसफर कर दी इसके बाद वो चलते हुए मेरे पास आयी और मुझसे बोली.
लड़की- ही मेरा नाम पूनम चौहान है क्या मई आपकी नाम जान सकती हु.
उस लड़की के बात सुन कर मृत्युंजय मुस्कुराते हुए बोलै.
मृत्युंजय- हैल्लो मिस पूनम मेरा नाम मृत्युंजय कुशवाहा है मुझे आपसे मिल कर खुसी हुयी पूनम जी.
पूनम- मुझे भी आपसे मिल कर खुसी हुयी मृत्युंजय जी वैसे मुझे ये जान कर अच्छा लगा की आपने इन लोगो के मदत के लिए पैसे डोनेट किये आज कल आपके जैसे लोग बहुत काम मिलते है.
मृत्युंजय- शामे हेरे मिस मुझे भी आपको देख कर यकीं करना मुश्किल हो रहा है क्युकी मई आज कल के लड़कियों को अपने पैसो पर घमंड करते देखा है लेकिन उन लड़कियों से बिलकुल अलग है.
मृत्युंजय के बात सुन कर पूनम मुस्कुराने लगती है और फिर वो मृत्युंजय से बोलती है.
पूनम- ठीक है मृत्युंजय जी हम अभी जा रहे है मुझे कुछ काम है तो क्या हम आज सैम में कॉफ़ी पर मिल सकते है.
मृत्युंजय- है क्यों नहीं.
इसके बाद दोनों वह से अपने अपने रस्ते निकल जाते है.
तो वही वह से बहुत दूर मुंबई के एक दूसरी आइसलैंड है ये आइसलैंड भी राठौर परिवार के आइसलैंड जैसा hi लेकिन ये उससे कुछ छोटा भी है इस आइसलैंड पर एक महल है उस महल के रूम में एक लड़की अपने हाथो में एक लड़के की फोटो ले कर वो उसे ध्यान से देख रही थी और वो अपने आँखों में आंसू लिए उस फोटो से बात कर रही थी.
लड़की- तुम मुझे छोड़ कर क्यों चले गए तुम्हे गए हुए पुरे 15 साल हो ये 15 साल तुम्हारे बिना मई कैसे निकली मई hi जानती हु प्लीज तू लौट आओ तुम जानते हो की लोग तुम्हारे बारे में कैसे कैसे बाटे करते है लोग बोलते है की तुम मर गए अब तुम कभी वापस नहीं आओगे लेकिन मई उनके बातो पर बिस्वास नहीं करती मुझे पूरा यकीं है की तुम जरूर आओगे एक बात और तुमसे बताना था मेरे घर वाले चाहते है की मई शादी कर लू मई तुम्हे छोड़ कर आगे बढ़ जाऊ लेकिन मई ऐसा नहीं कर सकती अब तुम्ही बताओ मुझे मेरी शादी तो आज से 15 साल पहले बचपन में तुम्हारे साथ हो गयी थी तो भला मई किसी और से शादी कैसे कर सकती हु प्लीज प्लीज रूद्र तुम वापस आ जाओ मई तुम्हारे बिना जी नहीं सकती.
अभी वो लड़की उस फोटो से बात कर hi रही थी की तभी बहार से एक औरत के आवाज आती है.
औरत- बेटी अनन्य क्या तुम अंदर हो.
दोस्तों मई अब थोड़ा इनलोगो के बारे में मई आप सब को बता दे रहा हु ये है सूर्यवंशी फॅमिली सूर्यवंशी फॅमिली वर्ल्ड के टॉप 10 फॅमिली में से एक है ये फॅमिली राठौर फॅमिली जितना आमिर तो नहीं लेकिन उससे काम भी नहीं है.
ये फॅमिली राठौर फॅमिली की hi तरह एक आइसलैंड पर रहता है और इसी फॅमिली की लड़की है अनन्य सूर्यवंशी.
इधर अपनी माँ के बात सुन कर अनन्य अपने आँखों से आंसू साफ करती है और अपनी माँ से बोलती है.
अनन्य- जी माँ मई अंदर hi हु आप अंदर आ जाइये.
अपनी बेटी के बात सुन कर सुनैना सूर्यवंशी गेट खोल कर अंदर आती है जैसे hi वो रूम में एंटर करती है तो उनको अनन्य के बीएड पर एक लड़के की फोटो दिखती है तो वो समझ जाती है की उनको आने से पहले अनन्य इस रूम में क्या कर रही होंगी इस लिए वो अनन्य को समझते हुए बोलते है.
सुनैना- मई तुमको बोल बोल कर थक गयी की अब ये कभी वापस नहीं आएगा खुद इसके परिवार वाले भी बोलते है की ये मर चूका है लेकिन पता नहीं तुम हमारी बात क्यों नहीं सुनती हो देखो अनन्य मेरी बात को समझो अब ये कभी वापस नहीं आने वाला है इस लिए तुम भी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाओ.
अपनी माँ की बाटे सुन कर अनन्य घुसे से उनको घूरती हुयी बोलती है.
अनन्य- माँ मई कितने बार आपको बोल चुकी हु की मेरे रूद्र को कुछ नहीं हुआ है वो मेरे लिए जरूर वापस आएगा और आप जानती है मई उससे इतना प्यार करती हु की अगर वो कभी वापस लौटा भी नहीं न तो मई उसकी यद् में hi पूरी जिंदगी गुजर दूंगी लेकिन कभी दुबारा शादी नहीं करुँगी.
अनन्य के बात सुन कर सुनैना को भी गुसा आ जाता है वो घुसे से अनन्य को बोलती है.
सुनैना- तुमको जो मन में आये तुम वो करो तुमको तो किसी की बात सुननी नहीं है मेरी मति मरी गयी थी जो मई तुम्हारी सदी बचन में उससे कर दी थी अगर तुम्हारी सदी उससे नहीं हुयी रहती तो आज हमें ये दिन नहीं देखना पड़ता.
इतना बोल कर वो वह से चली जाती है लेकिन उनके बात को सुन कर अनन्य को बहुत बुरा लगता है और फिर से उसके आँखों से आंसू गिरने लगते है इधर सुनैना अनन्य के रूम से घुसे निकल कर अपने रूम के तरफ जा रही थी की तभी रस्ते में उसे एक लड़का मिलता है वो लड़का अपने माँ के बात सुन कर उनसे बोलता है.
लड़का- क्या हुआ माँ आप इतने घुसे में क्यों है कही फिर से आपकी बहस अनन्य से तो नहीं हो गयी.
अपने लड़के के बात सुन कर वो उससे बोलती है.
सुनैना- पता नहीं क्या करू मई इस लड़की की ये तो मेरी बात सुनाने के लिए तैयार hi नहीं है बस दिन भर उस लड़के के फोटो ले कर उससे बाटे करती रहती है.
सुनैना की बाटे सुन कर वो लड़का जो की अनन्य के बड़ा भाई मुकेश सूर्यवंशी था वो बोलता है.
मुकेश- इसमें उसकी कोई गलती नहीं है साडी गलती आपकी और डैड की है क्या जरुरत थी उसकी बचपन में hi सदी करने की और तो और बचपन में शादी के बात वो भूल चुकी थी फिर अपने उसको वो सब क्यों यद् दिलाया और साथ में उस लड़के की तस्वीर भी ला कर दे दिया.
अपने बेटे की बात सुन कर सुनैना का गुसा थोड़ा संत होता है तो उससे वो बोलती है.
सुनैना- क्या करू हो गयी गलती मुझे पता नहीं था न की ये सब जानने के बाद उस लड़के की दीवानी हो जाएगी अब मुझे समझ में नहीं आ रहा है की मई क्या करू कैसे इस लड़की के दिमाग से उस लड़के को निकलू अगर वो लड़का जिन्दा होता तो कोई बात नहीं लेकिन वो अब मर चूका है लेकिन ये उस बात पर बिस्वास करने के लिए तैयार hi नहीं है और तो और मई इसके दिमाग से उसे निकलने के लिए इसे मार्टिकल आर्ट्स की ट्रेनिंग भी दिलवाई ताकि वो ट्रेनिंग में बिजी हो कर उसे भूल जाये लेकिन वो भूलने की जगह उसकी और दीवानी हो गयी.
अपने माँ के बात सुन कर मुकेश कुछ देर तक सोचने के बाद बोलै.
मुकेश- माँ मुझे मुंबई से मुझे एक ऑक्शन का इनविटेशन आया है मई उस इनविटेशन में अनन्य को भी ले कर जाता हु शायद वह जाने के बाद कोई चमत्कारी hi जाये और उसे वह पर कोई और पसंद आ जाये.
मुकेश के बात सुन कर सुनैना कुछ सोचते हुए बोलती है.
सुनैना- है ये ठीक रहेगा तुम उसे वह जाने के लिए मन लो.
मुकेश- ठीक है माँ मई अभी जाकर उसे मनाता हु.
इसके बाद मुकेश वह से अनन्य के रूम के पास आता है और दरवाजा खटखटाते हुए बोलता है.
मुकेश- अनन्य मेरी बहन क्या मई अंदर आ सकता हु.
इधर अनन्य जो अपने माँ के बात सुन कर रो रही थी वो जैसे hi अपने भाई के आवाज सुनती है तो वो झट से अपना आंसू पॉच कर खुद को सही करती है और उसको अंदर आने के लिए परमिशन दे देती है परमिशन मिलने के बाद मुकेश अंदर आता है तो वो अनन्य के उदास चेहरे को देख कर वो भी उदास हो जाता है मुकेश अपनी बहन से बहुत प्यार करता था इस लिए वो उसे उदास देख कर उससे बोलता है.
मुकेश- बहन कब तक ऐसे चलता रहेगा कमसे काम अब तो तुम सचाई को एक्सेप्ट करो.
अपने भाई के बात सुन कर अनन्य बात को दूसरी तरफ घूमते हुए बोलती है.
अनन्य- भाई आपको मुझसे कुछ काम था क्या जो आप इस वक़्त मेरे पास आये है.
अनन्य को इस तरह बात बदलता हुआ देख कर मुकेश समझ जाता है की अनन्य इस टॉपिक पर बात नहीं करना चाहती है इस लिए वो आगे कुछ नहीं बोलता है और अनन्य के बातो का जबाब देते हुए बोलता है.
मुकेश- अनन्य वो क्या है न की मुंबई से एक ऑक्शन का इनविटेशन आया है और उस ऑक्शन में कुछ चीजे बहुत कमल का है तो मई चाहता हु की तुम उस ऑक्शन में पार्टिसिपेट करो.
अनन्य- सॉरी भाई मई भी जा सकती क्युकी मुझे कही जाने का अभी मुद नहीं है आप hi चले जाओ.
अनन्य के बात सुन कर मुकेश थोड़ा परेशां हो गया क्युकी वो जनता था की जो आइटम वो ऑक्शन से खरीदने वाला है वो सिर्फ और सिर्फ अनन्य hi सही सलामत आइसलैंड ला सकती थी इस लिए वो अनन्य को समझते हुए बोलै.
मुकेश- अनन्य सुनो तो तुम्हारा वह जाना बहुत जरुरी है.
अनन्य- और मुझे वह जाना किस लिए जरुरी है.
मुकेश- तुम्हारा वह जाना इस लिए जरुरी है की वह पर जो आइटम नीलम होने वाला है वो बहुत hi दुर्लभ आइटम है और उस आइटम पर पुरे इंडिया का नजर है.
मुकेश के बात सुन कर अनन्य हैरान हो जाती है और सोचने लगती है की ऐसी कोण सी दुर्लभ आइटम है जिस पर पुरे इंडिया का नजर है.
अनन्य- भाई ऐसी कोण सी आइटम है जिसे पाने के लिए पूरा देश बेचैन है.
अनन्य के बात सुन कर मुकेश कुछ सोचते हुए बोलता है.
मुकेश- वह पर बहुत सरे ऐसे आइटम है जो दुर्लभ है लेकिन सबसे दुर्लभ आइटम जो है वो है एक तलवार जिसमे अग्नि विसेसता है उस तलवार के एक वॉर से पूरा देना ख़तम किया जा सकता है और दूसरी आइटम है एक स्टोरेज अंगूठी जिसमे कोई भी सामान स्टोर कर के रख सकते है और बाकि का जो आइटम है वो दुर्लभ मेडिसिन सुनाने में आया है की वह 2 तरह के मेडिसिन है एक मेडिसिन का खासियत यह है की कोई भी ग्रांडमास्टर के निचे के लेवल वाला योद्धा अगर उस मेडिसिन को खा ले तो उसका लेवल तुरंत बढ़ जाता है और दूसरा मेडिसिन है इंस्टेंट रिकवरी पिल जिसे खाने के बाद कोई भी जखम कुछ मिंटो में ठीक हो जाता है.
मुकेश के बात सुन कर अनन्य हैरान हो जाती है उसे मुकेश के बातो पर बिस्वास hi नहीं हो रहा था इस लिए वो मुकेश से बोली.
अनन्य- भाई क्या आप सच बोल रहे है क्या ऐसा भी हो सकता है मुझे तो आपके बातो पर बिस्वास hi नहीं हो रहा है.
अनन्य के बातो पर मुकेश मुस्कुराते हुए बोलै.
मुकेश- मई जनता था की तुम्हे मेरे बातो पर बिस्वास नहीं होगा और पहले मुझे भी इन सब बातो पर बिस्वास नहीं हुआ था लेकिन मैंने अपने सोर्स से पता किया तो मुझे पता चला की साडी बाटे सच है.
अनन्य- मुझे तो अब भी बिस्वास नहीं हो रहा है क्युकी मैंने ये सब किसे और कहानियो में सुना मुझे पता नहीं था की ये सब चीजे हकीकत में भी होगी.
अपनी बहन के बात सुन कर मुकेश एक्ससिटेमेंट के साथ बोलै.
मुकेश- इस लिए तो मई तुम्हे अपने साथ चलने के लिए बोल रहा हु तुम्हे वह के जाने का मेरा दो कारन है पहला कारन है की तुम बहार घूमोगी तो तुम्हारा मन फ्रेश रहेगा और दूसरी कारन है की ये सब आइटम नीलामी से खरीदना कोई भरी बात नहीं है लेकिन इसे शाफेट्य के आइसलैंड तक लाना मुश्किल है क्युकी उस आइटम को लोग खरीदने से ज्यादा छीनने के फ़िराक में रहेंगे और अगर तुम मेरे साथ रहोगी तो मुझे किसी भी बात का दर नहीं होगा क्युकी भला एक सुडो ग्रांडमास्टर से कोण भिड़ना चाहेगा.
मुकेश के बात सुन कर अनन्य मुस्कुराते हुए बोली.
अनन्य- ठीक है भाई मई चलने के लिए तैयार हु जब चलना होगा बता दीजियेगा.
मुकेश- ठीक है.
मई आप सब को इस स्टोरी में उसे होने वाले मार्टिकल आर्ट्स लेवल के बारे में बता दे रहा हु.
मार्टिकल आर्ट्स लेवल
सुण्या लेवल
जिसने लेवल 1 से 9 तक आता है
हाफ ग्रांडमास्टर
ग्रैंड मास्टर
सुडो ग्रैंड मास्टर
सम्राट लेवल
डेमी गॉड लेवल
गॉड लेवल
हाफ हैवन लेवल
हैवन लेवल
हाफ सुप्रीम लेवल
सुप्रीम लेवल
और लास्ट में एक और लेवल होता है जिसका खुलासा आगे चल कर स्टोरी में होगा.