The Super Boy - Page 6 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

The Super Boy

अपडेट 38

थे ट्रीटमेंट ऑफ़ महेंद्र सिघ राठौर.
जब मई महिंद्रा सिंह राठौर को पूरी तरह से चेक कर लिया तो मई सिकेन्द्र और उनके परिवार के लोगो को बताया की महिंद्रा सिंह राठौर को एक ट्रांसपेरेंट कीड़े ने कटा है और उस कीड़े का जहर ऐसा होता है की अगर वो किसी के शरीर में चला जाये तो उस ब्यक्ति का शरीर ऊपर से तो अच्छा होता है लेकिन उसके अंदरूनी अंग गलने लगते है और वो जहर किसी भी मेडिकल इक्विपमेंट के नजर में भी नहीं आता है और इसके कारन डॉक्टर को भी पता नहीं चलता है की आखिर मरीज को हुआ क्या है और वो कीड़ा ऑरेंज जिनसेंग के आस पास hi पाए जाते है शायद ये बीमार होने से पहले ऑरेंज जिनसेंग के आस पास कही गए होंगे और सायद वही पर इनको उस कीड़े ने कटा होगा.

मेरी बात को सुन कर सब घबरा जाते है फिर संजय सिंह राठौर अपने घबराहट को काबू करते हुए मुझसे बोलते है.

संजय- तो क्या उस जहर को बहार निकलने का कोई उपाय नहीं है क्या मेरे डैड कभी ठीक नहीं हो सकते प्लीज आप किसी भी तरह से मेरे डैड को ठीक कर दीजिये बदले में आप चाहे तो हमारा सारा धन दौलत ले लीजिये लेकिन मेरे डैड को ठीक है दीजिये.

संजय सिंह राठौर के बात सुन कर मई कुछ देर सोचने के बाद बोलै.

मई- देखिये बात यहाँ पैसो की नहीं है और वैसे भी मैंने ये कब कहा की आपके डैड ठीक नहीं हो सकते है मई आपके डैड को ठीक कर तो सकता हु लेकिन एक प्रॉब्लम है.

मेरी बात को सुन कर पहले सब खुस हो जाते है लेकिन प्रॉब्लम वाली बात सुन कर सब टेंशन में आ जाते है तभी कौशल्या देवी मुझसे बोलती है.

कौशल्या- क्या प्रॉब्लम है बीटा तुम हमें बताओ हम उस प्रॉब्लम का हल जरूर निकल लेंगे.

मई- दरअसल बात ऐसी है की मई अभी उनके शरीर से जहर को कुछ हद का बहार निकल दूंगा जिससे इनको होश तो आ जायेगा लेकिन इनको पूरी तरह से ठीक होने के लिए हमें उसी ऑरेंज जिनसेंग की जरुरत पड़ेगी जिसके कारन इनको ये प्रॉब्लम हुयी है और हमें जो ऑरेंज जिनसेंग चाहिए वो काम से काम 300 साल पुराण होना चाहिए.

सिकेन्द्र- तो इसमें प्रॉब्लम क्या है आप बस डैड को किसी तरह से होश में ले आइये और रही बात ऑरेंज जिनसेंग की तो आप उसकी चिंता मत कीजिये ये औषधि मुझे चाहे जहा भी मिले और जितने में भी मिले मई उसे जरूर ले आऊंगा.

सिकेन्द्र सिंह राठौर के बात सुन कर मई निराशा से अपना सर हिलाते हुए बोलै.

मई- आप जितना बोल रहे है ऑरेंज जिनसेंग की लाना उतना भी आसान नहीं है क्युकी ऑरेंज जिनसेंग एक दुर्लभ जड़ी बूटी है ये जड़ी बूटी बहुत मुश्किल से मिलती है अगर ये जड़ी बूटी आपको मिलेगी भी तो 5 या 10 साल पुराण होगा लेकिन 300 साल पुराण ऑरेंज जिनसेंग मिलना नामुमकिन है.

मेरी बात को सुन कर सरे लोग उदाश हो गए मई उनको इस तरह से उदाश होता हुआ देख कर उनसे बोलै.

मई- आप सब ऐसे उदाश मत होइए मई सबसे पहले उनको होश में लेन की कोशिश करता हु फिर उनसे पूछूंगा की इनको वो कीड़ा कहा किस जगह पर कटा था हो सकता है की जहा इनको वो कीड़ा कटा हो वह पर ऑरेंज जिनसेंग अभी भी मौजूद हो और क्या पता हमें उस जगह पर hi 300 साल पुराण ऑरेंज जिनसेंग मिल जाये क्युकी मई जहा तक जनता हु की ये कीड़ा बहुत पुराने ऑरेंज जिनसेंग के आप पास hi मिलते है.

मेरी बात को सुन कर सब खुस हो जाते है उन लोगो के चेहरे पर एक उम्मीद की किरण दिखाई देने लगती है तभी कौशल्या देवी मुझे बोलती है.

कौशल्या- क्या तुम सच बोल रहे हो क्या ये सच में होश में आ जायेंगे देखो बीटा तुम मुझसे मजाक मत करना क्युकी मई कब से इनको होश में आने की इंतजार कर रही हु.

कौशल्या देवी के बात को सुन कर मई उन्हें हिमत देते हुए बोलै.

मई- आप चिंता मत कीजिये और मेरे बातो पर बिस्वास कीजिये आप जल्द hi इनको होश में देख पाएंगी आप सब एक काम कीजिये मुझे एक संत कमरे दे दीजिये ताकि मई कुछ दवाइया बना सकू.

मेरी बात को सुन कर सिकेन्द्र जल्दी से बोलै.

सिकेन्द्र- है है क्यों नहीं आप मेरे साथ आइये.

इसके बाद सिकेन्द्र मुझे एक कमरे में ले कर आ गया कमरे में आने के बाद वो मुझसे बोलै.

सिकेन्द्र- आप आराम से यहाँ पर दवा रेडी कर सकते है आपको यहाँ पर कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा.

इतना बोल कर सिकेन्द्र सिंह राठौर वह से चले जाते है उनके जाने के बाद मई अपने स्टोरेज रिंग से द्रोणपुष्पी औषधि नागकेशर औषधि वाच औषधि अश्वगंधा औषधि कुल मिला कर ऐसे hi 10 जड़ी बूटी निकला और उसको अपने शक्तियों से पाउडर बनाने लगा जब वो साडी जड़ी बुटिया पाउडर बन गयी तो मई उस रूम से बहार आ गया और महेंद्र सिंह राठौर के रूम में चला गया जब मई वह पर पंहुचा तो देखा की वह पर अभी भी सरे लोग मौजूद थे उन सरे लोगो को देख कर मई उन सब से बोलै.

मई- आप सब अब इस कमरे से चले जाइये क्युकी मई चाहता हु की जब मई महेंद्र सिंह राठौर का इलाज करू तो यहाँ पर मेरे के आलावा और कोई न हो.

मेरी बात को सुन कर सभी मुझे शक भरी निगाहों से देखने लगे उन सब को ऐसे मुझे देखता हुआ देख कर मई उन सब से बोलै.

मई- अरे आप सब मुझे ऐसे मत देखिये मई आप सब को इस लिए बहार जाने के लिए बोलै है की मई अपने पेशेंट का इलाज अकेले में hi करता हु अब अगर आप लोगो को मुझसे इनका इलाज करवाना है तो आप सब को यहाँ से जाना hi होगा.

मेरी बात को सुन कर सब सोच में पद गए फिर कुछ देर सोचने के बाद पायल मुझसे बोली.

पायल- मई तो तुम्हारी दोस्त हु न तो क्या यहाँ पर मई भी नहीं रुक सकती वो क्या है न की मुझे तुम्हे इलाज करते हुए देखना है प्लीज प्रतिक.

मई पायल के बात सुन कर कुछ सोच में पद गया फिर थोड़ी देर सोचने के बाद मई बोलै.

मई- ठीक है तुम यहाँ रुक सकती हो और बाकि आप सब अब यहाँ से जा सकते है.

मेरे बात को सुन कर पायल को छोड़ कर बाकि सब धीरे धीरे उस रूम से बहार निकल जाते है उनके जाने के बाद मई अपने हाथ अपने पॉकेट में डालता हु और अपने स्टोरेज रिंग से सिल्वर नीडल का दबा निकल लेता हु इसके बाद मई पायल को बोलता हु.

मई- पायल तुम अपने दादा जी के ऊपर के हिसे का सारा कपडा निकल दो और उनके शरीर पर लगे सरे इक्विपमेंट को भी हटा दो है अभी यहाँ पर जो कुछ भी होगा तुम उसे किसी को नहीं बताओगी.

मेरी बात को सुन कर पायल मुझे घूरते हुए बोली.

पायल- तुम इतना इक्विपमेंट क्यों निकलवा रहे हो अगर मई इक्विपमेंट निकल दिया तो फिर डैड जी को बहुत प्रॉब्लम होगी और तुम इक्विपमेंट निकलवा कर ऐसा क्या करने वाले हो जो मई किसी को नहीं बता सकती.

पायल के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- कुछ नहीं होगा तुम्हारे दादा जी को मई हु न यहाँ पर बस तुम देखती जाओ की मई क्या करने वाला हु बस तुम इतना यद् रखना की तुम इस कमरे में जो भी देखोगी वो किसी को मत बताना.

पायल- ठीक है मई किसी को नहीं बताउंगी.

इतना बोल कर पायल अपने दादा जी के पास गयी और वो पहले उनके शरीर पर लगे हुए सरे इक्विपमेंट को हटाई इसके बाद वो उनके ऊपर के सरे कपडे हटा दी जब मैंने देखा की महेंद्र सिंह राठौर के शरीर से सरे कपडे और इक्विपमेंट हटा दिए गए तो मई सिल्वर नीडल के दबे से सरे नीडल को निकला और उसे हवा में उछाल दिया और अपने स्प्रिचैल एनर्जी से सरे नीडल को हवा में काबू कर लिया जिसके कारन सरे नीडल हवा में hi रुक गया इसके बाद मई अपने सप्त हस्त ब्रह्मा धन्वंतरि तकनीक का इस्तेमाल करते हुयी सरे नीडल को एक एक कर के महेंद्र सिंह राठौर के शरीर के बिंदुओं में डालने लगा.

इधर पायल सरे नीडल को पहले हवा में रुकते देख इसके बाद एक एक नीडल को अपने दादा के शरीर में लगते हुए देख कर पायल हैरान हो गयी और आँखे फाड् कर कभी मुझे तो कभी सरे नीडल को देख रही थी इधर मई उन सरे नीडल को एक एक कर महेंद्र सिंह राठौर के शरीर के बिंदुओं में लगा दिया इसके बाद मई अपने पॉकेट से जड़ी बूटियों के पाउडर को निकला और उसे भी हवा में उछाल दिया इसके बाद मई अपने एक हाथ से अपने शरीर से योगिक शक्ति को निकल कर महेंद्र सिंह राठौर के श्री में फैले हुए जहर को एक जगह करने लगा और दूसरे हाथ से अपने स्प्रिचैल एनर्जी से जड़ी बूटी के पाउडर को महेंद्र सिंह राठौर के शरीर में लगे हुए नीडल के माध्यम में उनके शरीर में डालने लगा ऐसे hi मई लगभग 15 मिनट तक एक हाथ से उनके शरीर के अंदर के अपने योगिक शक्ति से सरे पाइजन को एक जगह जमा करता रहा और दूसरे हाथ से अपने स्प्रिचैल एनर्जी से जड़ी बूटी के पाउडर को उनके शरीर में डालता रहा जिसके कारन उनके शरीर में जो पाइजन था वो थोड़ा थोड़ा कर के ख़तम होते गए.

अब तक उनके शरीर से बहुत साडी पाइजन ख़तम हो चुकी थी लेकिन उनके शरीर के अंदरूनी जखम अभी भी वैसा hi था जब मैंने देखा की महेंद्र सिंह राठौर के शरीर के अंदर से लगभग 90% परसेंट जहर ख़तम हो गया है तो मई अपना नीडल उनके शरीर से बहार निकल लिया जैसे hi मई नीडल को बहार निकला तो उनके शरीर को एक झटका लगा और महेंद्र सिंह राठौर ने काळा खून की वोमिटिंग कर दी इधर पायल ने अपने दादा को खून के वोमिटिंग करते हुए देखा तो वो घबरा गयी जल्दी से वो मेरे पास आयी और हड़बड़ाते हुए मुझसे बोली.

पायल- ये ये दादा जी खून के वोमिटिंग क्यों कर रहे है वो वो ठीक तो है न.

मई- अब तुम्हे चिंता करने की जरुरत नहीं है उनके शरीर में जो जहर बच गया था वो वोमिटिंग के माध्यम से बहार आ गया है अब तुम्हारे दादा जी के शरीर से सरे जहर बहार निकल गया है कुछ देर बाद उनको होश आ जायेगा.

मेरी बात को सुन कर पायल खुस हो गयी और मुझसे बोली.

पायल- थैंक यू प्रतिक तुमने मेरे दादा जी की जान बचा ली अगर मेरे दादा जी को कुछ हो जाता तो सायद मेरे परिवार भी बर्बाद हो जाता.

मई- देखो पायल अभी तुम्हारे दादा जी पूरी तरह से ठीक नहीं हुए है अगर इनको पूरी तरह से ठीक करना है तो हमें 300 साल पुराणी ऑरेंज जिनसेंग चाहिए और है तुम अभी बहार जा कर सबको खुस खबरि दे दो और साथ में मेरे नहाने का भी बेवस्था करवा देना.

मेरी बात सुन कर पायल की ध्यान मेरे ऊपर गया तो वो चौक गयी क्युकी मेरे कपडे पर काळा रंग का खून लगा हुआ था जिसे देख कर वो मुझसे बोली.

पायल- अरे ये तुम्हारे कपडे पर क्या लग गया.

मई- जब तुम्हारे दादा जी ने वोमिटिंग किया तो मई उनके पास में hi खड़ा था इस लिए उनका थोड़ा वोमिटिंग मेरे ऊपर भी आ गया.

मेरे बात को सुन कर पायल जल्दी से बहार गयी और सबको बोली की दादा जी अब ठीक है उनको कुछ देर बाद होश आ जायेगा पायल के बात सुन कर सब खुस हो गए और जल्दी से महेंद्र सिंह राठौर के रूम में आ गए रूम में आने के बाद सब दादा जी के पास चले गए और उनको देखने लगे फिर मुझे थैंक यू बोलने के लिए मेरे तरफ मुड़े तो मेरी हालत देख कर सब घबरा गए फिर जल्दी से सिकेन्द्र सिंह राठौर मेरे पास आये और मुझे बोले.

सिकेन्द्र- अरे ये आपको क्या हुआ आपको ये खून कहा से लग गया.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई उनको सब बताया तब जाकर वो संत हुए और मुझे अपने साथ आने के लिए बोले तो मई उनके साथ जाने लगा थोड़ी देर बाद वो मुझे एक रूम में लेकर गए और मुझसे बोले आप इस रूम के बाथरूम में जाकर फ्रेश हो जाइये उनकी बात को सुन कर मई है में गर्दन हिलाया और अपना शर्ट निकल दिया जैसे hi मैंने अपना शर्ट निकला तो मई जो गले में लॉकेट पहना था (ये लॉकेट वही था जो आशाराम छोड़ते समय गुरुदेव ने मुझे दिया था और वो मुझसे बोले थे की ये लॉकेट बचपन से मेरे साथ है) वो लॉकेट मेरे गले में लटकता हुआ बहार दिखाई देने लगा और साथ में मेरे बहो में बना हुआ बिरथ मार्क सुदर्शन चक्र के निशान और वेद (किताब) के निशान भी दिखाई देने लगा.

इधर मुझे रूम में छोड़ कर सिकेन्द्र रूम से जाने hi वाले थे की तभी उनकी नजर मेरे लॉकेट पर गयी तो वो लॉकेट उनको जाना पहचाना लगा फिर उनका ध्यान मेरे बिरथ मार्क पर गया जिसे देख कर हैरान हो गए और अपने मन में सोचने लगे.

सिकेन्द्र- (अपने मन में) ये ये ये तो वही निशान है जो मेरे प्यारे भतीजे के जनम के समय उसके शरीर पर था और ये लॉकेट ये लॉकेट मुझे जाना पहचाना क्यों लग रहा है (फिर कुछ सोचते हुए) ये लॉकेट तो वही लॉकेट है जो मेरा भतीजा रूद्र को डैड ने बचपन में दिया था तो क्या ये मेरा वही भतीजा रूद्र है लेकिन ये वो कैसे हो सकता है वो तो उस हादसे में मारा गया था लेकिन अगर ये वो नहीं है तो इसके पास ये लॉकेट कहा से आयी और तो और इसके दोनों बहो पर वही निशान भी है लगता है की मुझे इससे इसके बारे में पूछना पड़ेगा.

ये सोच कर वो आगे बढ़ कर इसके बारे में अभी मुझे पूछना hi छह रहे थे की तभी मई अपना बनियान भी बहार निकल दिया जिसे देख कर वो और हैरान हो गए क्युकी मेरे शरीर से जैसे hi बनियान निकला तो मेरे पीठ पर बना हुआ त्रिशूल का निशान उनके सामने आ गया जिसे देख कर उनको और यकीं हो गया था की हो न हो मई hi उनका भतीजा रूद्र हु.

इधर मई इन सब बातो से अनजान अपना सर कपडा निकलने के बाद अपने शरीर पर एक टॉवल लपेटा और बाथरूम में गश गया मुझे बाथरूम में जाता हुआ देख कर वो भी बहार निकल गए और किसी सोच में गम होते हुए वो महेंद्र सिंह राठौर के रूम में चले गए जैसे hi सिकेन्द्र वह पंहुचा तो संजय और कौशल्या के नजर उस पर गयी तो दोनों ने देखा की सिकेन्द्र अपने hi सोच में गम है और उसके चेहरे पर कभी खुसी का भाव तो कभी चिंता का भाव आ रहा है तो संजय सिंह राठौर आगे बढ़ते हुए सिकेन्द्र को उसके सोच से बहार लेट है और उनसे बोलते है.

संजय- सिकेन्द्र तुम जब से प्रतिक को उस रूम में छोड़ कर आये हो तब से किसी सोच में पड़े हुए हो क्या बात है तुम क्या सोच रहे हो.

संजय के बात सुन कर सिकेन्द्र गंभीर आवाज में उनसे बोलै.

सिकेन्द्र- मुझे आप दोनों से कुछ जरुरी बात करनी है आप दोनों मेरे साथ मेरे रूम में चलिए.

सिकेन्द्र को इस तरह से बात करता हुआ देख कर कौशल्या देवी को उनकी चिंता होने लगी इस लिए वो उनसे बोली.

कौशल्या- क्या बात है सिकेन्द्र जब से तुम डॉ. प्रतिक को उस रूम में छोड़ कर आये हो तब से तुम परेशां हो क्या बात है.

सिकेन्द्र- माँ मई यहाँ अभी कुछ नहीं बता सकता इस आप और भैया प्लीज मेरे साथ आइये मुझे आप दोनों से एक जरूर बात करनी है.

सिकेन्द्र के बात सुन कर दोनों उनके साथ उनके रूम में आ गए रूम में आने के बाद संजय और कौशल्या देवी सिकेन्द्र के बोलने का इंतजार करने लगे लेकिन सिकेन्द्र अभी भी अपने सोच में hi गम था ये देख कर संजय सिंह राठौर सिकेन्द्र से बोले.

संजय- क्या बात है सिकेन्द्र तुम हमें यहाँ बुला खुद किस सोच में गम हो गए.

संजय में आवाज सुन कर सिकेन्द्र अपने होश में आता है और दोनों को देखते हुए बोलता है.

सिकेन्द्र- भैया और माँ मई आप दोनों से एक बात करना चाहता हु लेकिन समझ में hi नहीं आ रहा है की मई वो बात आप दोनों से कैसे बोलू क्युकी मैंने अभी अभी जो देखा है मुझे उस पर विस्वास hi नहीं हो रहा है.

सिकेन्द्र के बात सुन कर कौशल्या देवी झूल झूलते हुए उससे बोले.

कौशल्या- ऐसा क्या देख लिया तुमने की तुम्हे उस पर विस्वास hi नहीं हो रहा है अब साफ साफ बताओगे या यु hi अपनी आधी अधूरी बात बोल कर हमें भी परेशां करने की तुम्हारी मनसा है.

कौशल्या देवी के बात सुन कर सिकेन्द्र कुछ देर सोचने के बाद उन दोनों वो सब बात बताना सुरु किया जो उसने देखा था.

सिकेन्द्र- दरअसल बात ऐसी है की मई जब डॉ. प्रतिक को बाथरूम उसे करने के लिए एक रूम में ले कर गया और उनको बाथरूम उसे करने के लिए बोलै तो वो वही पर मेरे सामने hi अपना शर्ट निकल दिया और जब वो अपना शर्ट निकला तो मई उनके गले में एक लॉकेट देखा जो हु बहु वैसा hi था जैसा की डैड ने बचपन में रूद्र को दिया था और तो और उसके शरीर पर वो साडी बिरथ मार्क है जो रूद्र के शरीर पर जनम के समय से hi था.

सिकेन्द्र के बात सुन कर कौशल्या देवी और संजय सिंह राठौर दोनों हैरान हो गए कौशल्या देवी तो बहुत ज्यादा हैरान हो गयी थी और साथ में उन्हें सदमा भी लग गया था जिसके कारन वो वही पर रखे हुए सोफे पर धाम से गिर गयी और उनकी आँखों से खुसी के आंसू गिरने लगे वो कपट हुए आवाज में बोली.

कौशल्या- कककक क्या तट तुम सच बोल रहे हो क्या वो लॉकेट और वो बिरथ मार्क सच में उसके शरीर पर है क्या क्या वो वो मेरा गायब हुआ पोता रूद्र है.

कौशल्या देवी की बात सुन कर सिकेन्द्र कुछ सोचते हुए बोलै.

सिकेन्द्र- मुझे ये नहीं पता की वो हमारा रूद्र है या नहीं लेकिन मुझे पूरा बिस्वास है की मई जो लॉकेट उसके गले में देखा वो रूद्र का hi लॉकेट है और उसके शरीर पर निशान है ठीक वैसा hi निशान रूद्र के शरीर पर भी था.

सिकेन्द्र के बात सुन कर कौशल्या देवी के आँखों से लगातार खुसी के आंसू गिर रहा था वो बहुत ज्यादा खुस हो गयी थी तो वही सिकेन्द्र के बात सुन कर संजय भी सोच में पद गए फिर वो कुछ देर सोचने के बाद बोलै.

संजय- तुम्हारे बातो से तो लग रहा है की वो हमारा hi रूद्र है लेकिन ये कोई कोइंसिडेन्स भी हो सकता है या फिर ऐसा भी हो सकता है की इसे रूद्र के बारे में पहले से hi पता हो इस लिए वो हमारा रूद्र बन कर हमारे बिछ आने की कोशिश कर रहा हो.

संजय सिंह राठौर के बात सुन कर दोनों हैरान हो गए फिर सिकेन्द्र उनके बातो को जबाब देते हुए बोलै.

सिकेन्द्र- मुझे नहीं लगता की वो ये सब हमारे परिवार में आने के लिए नाटक कर रहा है क्युकी जब मई उसको यहाँ आने के लिए बोलै था तो पहले वो मुझे मन कर दिया था और तो और अगर उसे मेरे परिवार में आना होता तो वो ये सब साबुत लेकर अगर डायरेक्ट यहाँ आता तो भी हम उन सरे सबूतों के बिनाह पर उसे अपना रूद्र मन लेते तो उसे ये सब करने की क्या जरुरत है.

सिकेन्द्र के बात सुन कर जहा संजय सिंह राठौर कुछ सोचने लगे तो वही कौशल्या देवी को पूरा यकीं हो गया था की मई उनका hi पोता रूद्र हु इस लिए बोली.

कौशल्या- अब मुझे पूरा यकीं हो गया है की वो मेरा जान से प्यारा पोता रूद्र hi है क्युकी जब मई उसको पहली बार देखा था तो मुझे ये एहसास हो रहा था की वो मेरा कोई अपना hi है इसीलिए मई उससे उसके फॅमिली के बारे में पूछा था और उसने मुझे बताया था की वो बचपन में hi अपने फॅमिली से बिछड़ गया था और उसे उसके गुरुदेव ने पल पॉश कर बड़ा किया और ये सब कोई कोइंसिडेन्स नहीं हो सकता वो वो मेरा hi पोता रूद्र है.

अपनी माँ के बात सुन कर संजय सिंह राठौर बोले.

संजय- सिकेन्द्र के बात सुन कर मुझे भी लगता है की वो हमारा hi रूद्र है लेकिन हम कोई जल्दीबाजी नहीं कर सकते है क्युकी अगर उसमे हमारे दुश्मन की कोई चल हुयी तो हम सब बहुत बड़ी मुसीबत में फस सकते है इस लिए हमें पहले उसे अच्छे से जांचना होगा.

संजय के बात सुन कर सिकेन्द्र को उसकी बात अच्छी लगती है लेकिन कौशल्या इस बात पर संजय सिंह राठौर पर भड़क जाती है और उनसे बोलती है.

कौशल्या- तुम ये क्या बोल रहे हो मेरा पोता कितने दिनों बाद मुझे मिला है मई तो समझ गयी थी की मेरा रूद्र इस दुनिया में नहीं है लेकिन भगवन के कृपा से वो अभी जिन्दा है और मेरे पास है तो तुम चाहते हो की मई उसे अभी भी अपने से अलग राखु आखिर तुम चाहते क्या हो की उसका परिवार होते हुए भी वो एक अनाथ के जिंदगी जिए.

कौशल्या के बात सुन कर संजय हड़बड़ाते हुए बोलै.

संजय- नहीं माँ मई ये कभी नहीं चाहूंगा की हमारा रूद्र एक अनाथ के जिंदगी जिए आपकी तरह मई भी अपने भतीजे को गले लगाने के लिए इतना hi तड़प रहा हु जितना की आप तड़प रही बाई लेकिन आप मेरे बात को समझ नहीं रही है अगर ये हमारे किसी दुश्मन के चल हुयी तो हम क्या करेंगे.

संजय के बात सुन कर कौशल्या देवी अभी कुछ बोलने hi वाली थी की तभी सिकेन्द्र उनको समझते हुए बोले.

सिकेन्द्र- माँ भैया सही बोल रहे है मई जनता हु की प्रतिक hi हमारा रूद्र है लेकिन हमें इसकी जाँच करनी जरुरी है अगर वो हमारा रूद्र न हो कर हमारे किसी दुश्मन के चल हुयी तो हम सब बहुत बड़ी मुसीबत में फास जायँगे और वैसे hi जहा हम रूद्र के बिना इतने दिन रह गए वैसे hi कुछ दिन और रह लेंगे.

सिकेन्द्र के समझने के बाद कौशल्या देवी बोली.

कौशल्या- ठीक है तो हम उसे जचेंगे कैसे.

कौशल्या देवी के बात सुन कर संजय उनसे बोलै.

संजय- सबसे पहले तो हमें ये बात सिर्फ हम तीनो के बिच hi रखना होगा और बात प्रतिक को जांचने की तो हम उसको बिना बताये उसका डीएनए टेस्ट करवा लेंगे आप किसी तरह से प्रतिक के बल का एक टुकड़ा के आइये बाकि का काम मई कर लूंगा.

संजय के बात सुन कर कौशल्या देवी कुछ सोचते हुए बोली.

कौशल्या- ठीक है लेकिन जो भी करना जल्दी करना क्युकी अगर ये मेरा पोता रूद्र है तो मई इससे अब अलग नहीं रह सकती इसने बहुत दिन तक परिवार के रहते अनाथ के जिंदगी जी लिया अब नहीं.

इसके बाद सब उस रूम से निकल कर महेंद्र सिंह राठौर के रूम में आ जाते है अब तक महिंद्रा सिंह राठौर को होश आ चूका था लेकिन वो अभी भी बहुत कमजोर थे इस लिए वो हिल दल नहीं रहे थे बस हलकी आवाज में बात कर रहे थे उनको होश में आया हुआ देख कर सब बहुत खुस हो गए कौशल्या देवी को तो खुसी का कोई ठिकाना hi नहीं था खुसी के मरे उनके आँखों से आंसू आने लगे हलाकि वह पर मौजूद सभी लोगो के आँखों में आंसू थे लेकिन कौशल्या देवी के आँखों में आज कुछ जायदा hi आंसू था वो जल्दी से महेंद्र सिंह राठौर के पास चली गयी और उनके एक हाथ को पकड़ कर बोली.

कौशल्या- अब कैसी है आपकी तबियत आप जैसा फील कर रहे है.

कौशल्या देवी के बात सुन कर महेंद्र सिंह राठौर हलकी मुस्कान के साथ धीमी आवाज में बोले.

महेंद्र- जिसकी तुम जैसी बीवी हो उसे भला क्या हो सकता है मई ठीक हु इस लिए तुम अब रोना बंद करो तुम्हे पता है न की मुझे तुम्हारे आँखों में आंसू पसंद नहीं है.

महेंद्र सिंह राठौर के बात सुन कर सबके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है तो वही महेंद्र सिंह राठौर के बात सुन कर कौशल्या देवी शर्मा जाती है और फिर घुसे से बोलती है.

कौशल्या- आप अभी बीएड पर पड़े हुए है फिर भी आपकी मजाक करने की आदत नहीं गयी.

कौशल्या देवी के बात सुन कर महेंद्र सिंह राठौर अपने धीमी आवाज में बोले.

महेंद्र- क्या करू जब मई तुम्हे देखता हु तो खुद को कण्ट्रोल नहीं कर पता हु वैसे क्या तुम मुझे बता सकती हो की मुझे क्या हुआ था और किसने मुझे ठीक किया.

महेंद्र सिंह राठौर के बात को सुन कर कौशल्या देवी अभी कुछ बोलने hi वाली थी की तभी पीछे से एक आवाज आती है.

आवाज- आपको एक ऐसी कीड़े ने कटा था की आपको बचा पाना बहुत मुश्किल था लेकिन शुक्र है ऊपर वाले की की आप बच गए अगर आपको जब किसी चीज के बारे में जानकारी न हो तो उसे हाथ नहीं लगाना चाहिए वर्ण कभी कभी बात जान पर भी आ जाती है.

पीछे से आयी आवाज को सुन कर सब चौक जाते है और पीछे मुद उस आवाज वाले को देखते है तो पते है की वह पर मई खड़ा था दरअसल मई बाथरूम से नाहा कर अपना स्टोरेज रिंग से कपड़ा निकल और उसे पहन कर बहार आया तो देखा की उस रूम में कोई नहीं है तो मई सीधा महेंद्र सिंह राठौर के रूम में चला आया जहा मुझे महेंद्र सिंह राठौर की बात सुनाई दिया तो मई खुद को बोलने से रोक नहीं पाया इधर मेरे बात को सुन कर सब मुझे देखने लगे वही कौशल्या देवी के चेहरे पर मेरे लिए ममता दिखाई दे रहा था अगर उनका बस चलता तो वो तुरंत आ कर मुझे गले लगा लेती वही महेंद्र सिंह राठौर अपने घर में किसी अनजान को देख कर मुझसे बोले.

महेंद्र- वैसे तुम हो कोण और तुम्हारे बोलने का मतलब क्या है तुम मुझे ये क्यों बोले की मुझे किसी कीड़े ने कटा है, मुझे किस कीड़े ने कटा था बताओ मुझे.

महेंद्र सिंह राठौर के बात सुन कर सिकेन्द्र आगे आते हुए बोले.

सिकेन्द्र- डैड इन्होने hi आपकी जान बचाई है इनका नाम डॉ. प्रतिक है और ये एक आयुर्वेदिक डॉक्टर है.

सिकेन्द्र के बात सुन कर महिंद्रा सिंह राठौर मुझे ध्यान से देखते है और मन hi मन सोचते है.

महिंद्रा- (अपने मन में) इस लड़के को देख कर मुझे ऐसा क्यों लग रहा है की ये मेरा hi खून है और मुझे इससे अपनत्व का भाव आ रहा है और साथ में इस लड़के के चेहरे पर मेरे सूर्य जैसा झलक है जब सूर्य इसके उम्र का था तब ऐसा hi दीखता था कही ये मेरा खोया पूरा पोता तो नहीं है (फिर कुछ सोच कर) नहीं नहीं ये कैसे हो सकता है मई भी क्या क्या सोचने लगता हु.

फिर वो अपने ख्यालो से बहार आ कर सिकेन्द्र से बोलता है.

महिंद्रा- क्या तुम सच बोल रहे क्या मुझे इसी ने बचाया है लेकिन ये तो अभी बहुत छोटा है ये कैसे एक डॉक्टर hi सकता है.

महिंद्रा सिंह राठौर के बात सुन कर कौशल्या देवी बोली.

कौशल्या- सिकेन्द्र ठीक बोल रहा है आपको प्रतिक ने hi बचाया है और आप इसे छोटा मत समझिये ये एक बहुत बड़ा डॉक्टर है और लोग इसे चमत्कारी डॉक्टर भी कहते है.

कौशल्या देवी के बात सुन कर महिंद्रा सिंह राठौर को बिस्वास hi गया की उन्हें मैंने hi बचाया है तो मुझसे बोले.

महिंद्रा- थैंक यू डॉ. प्रतिक अपने तुमने मेरी जान बचा ली लेकिन आप अभी क्या बोल रहे थे मुझे किसी कीड़े ने कटा है लेकिन मुझे किस कीड़े ने कटा है और और अगर वो कीड़ा जहरीला था तो मई इतने दिन तक जिन्दा कैसे रहा.

मई- इसमें थैंक यू बोलने वाली क्या बात है आप मेरा पेशेंट है इस नाते आपका इलाज करना मेरा फर्ज है और रही बात कीड़े की तो आपको जिनसेंग के अस्स पास रहने वाली ट्रांसपेरेंट कीड़े ने कटा था जिसका जहर बहुत खतरनाक होता है हलाकि उसके काटने से आदमी तुरंत नहीं मरता है लेकिन उसके काटने के बाद आदमी जितना दिन जीता है उस आदमी के लिए उतना दिन नर्क से काम नहीं होता वैसे आप अभी पूरी तरह से ठीक नहीं हुए है आपको पूरी तरह से ठीक करने के लिए 300 साल पुराण ऑरेंज जिनसेंग की जरुरत होगी तो क्या आप बता सकते है की आपको उस कीड़े ने कहा कटा था.

मेरी बात को सुन कर महेंद्र सिंह राठौर पहले तो हैरान हो गए फिर कुछ सोचते हुए वो बोले.

महेंद्र- मुझे ये तो यद् नहीं है की मुझे उस कीड़े ने कहा कटा था लेकिन अगर वो कीड़ा जिनसेंग के पास होता है तो मुझे अंदाजा है की इस कीड़े ने मुझे कहा कटा होगा.

उनकी बात को सुन कर मई उत्साहित होते हुए पूछा

मई- ठीक है आपको इस बारे में जो भी पता है वो मुझे आप मुझे बता सकते है सायद वह पर मुझे वो जिनसेंग मिल जाये जिससे आप ठीक हो सके.

मेरी बात को सुन कर महेंद्र सिंह राठौर मुझे बताना सुरु किया.

महेंद्र- आज से 5 महीने पहले मुझे इस आइसलैंड के पुराने मालिक से मुलाकात हुआ था तो वो बात hi बात में मुझे बताया की इस आइसलैंड पर बहुत साडी औषधियां मौजूद है जिसमे सालो पुराण जिनसेंग भी है जब मैंने सुना की इस आइसलैंड पर सालो पुराण जिनसेंग है तो मेरे मन में लालच आ गया और मई इस आइसलैंड के दूसरी साइड उस जिनसेंग की खोज में चला गया और वह मुझे वो जिनसेंग मिला भी लेकिन वो 15 साल पुराण जिनसेंग hi था इस लिए मई उसे वही छोड़ दिया था.

महेंद्र सिंह राठौर के बात सुन कर मई सोच में पद गया फिर कुछ देर सोचने के बाद बोलै.

मई- अगर वह पर आपको 15 साल पुराण जिनसेंग मिला था तो मुझे पूरा यकीं है की वह पर जरूर 300 साल पुराण जिनसेंग भी होगा मुझे एक बार वह जा कर देखना चाहिए आप मुझे वह का लोकेशन बता दीजिये मई सुबह hi जा कर देखता हु.

मेरी बात को सुन कर वह मौजूद सरे लोग खुस हो गए लेकिन कौशल्या देवी थोड़ी चिंतित लग रही थी वो चिंतित आवाज में मुझसे बोली.

कौशल्या- नहीं तुम वह पर नहीं जाओगे मई किसी नौकर को वह पर भेज कर वो ऑरेंज जिनसेंग मंगवा लुंगी क्युकी वह पर जिनसेंग है तो वो कीड़े भी जरूर होंगे और मई नहीं चाहती की तुम हमारे लिए अपना जान खतरे में डालो.

कौशल्या देवी के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- दादी जी आप मेरी चिंता मत कीजिये मुझे कुछ नहीं होगा और वैसे भी 300 साल पुराण जिनसेंग को पहचानना सब के बस की बात नहीं है मई कुछ सोच समझ कर hi वह जाने का फैसला किया है.

मेरी बात को सुन कर कौशल्या देवी कुछ नहीं बोल पायी लेकिन उनके चेहरे पर अभी भी चिंता के लकीर दिखाई दे रहा था वही मेरी बात को सुन कर महेंद्र सिंह राठौर बोले.

महिंद्रा- ठीक है अगर आपको वह जाना है तो मई सुबह आपको इस आइसलैंड का एक नक्शा दूंगा और उस जगह का पता बता दूंगा अभी आप जाकर आराम कीजिये.

महेंद्र के बोलने बाद हम सब वह पर थोड़ी देर और रुके जिसमे सिकेन्द्र ने मुझसे पूछा की वो अपने डैड को खाने में कुछ दे सकता है या नहीं तो मई उन्हें हेअल्थी सोऊ देने के लिए बोलै फिर हम लोग वह से निकल कर दिंनिंग टेबल पर आ गए और खाना खाया इसके बाद सिकेन्द्र मुझे गेस्ट रूम में लेकर आ गया और मुझे आराम करने के लिए बोल कर चला गया.

नेक्स्ट डे सुबह शनाया सुबह सुबह hi रेडी हो कर हॉस्पिटल जा रही थी क्युकी आज उसे अपने डैड को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करना था तभी उसके पास शानवी आती है और शनाया से बोलती है.

शानवी- दी आप इतनी सुबह सुबह कहा जा रही है.

शनाया- शानवी मई अभी हॉस्पिटल जा रही हु आज डैड को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करवाना है.

शनाया के बात सुन कर शानवी कुछ सोचते हुए बोली.

शानवी- दी मई भी आपके साथ हॉस्पिटल चलूंगी क्युकी मुझे आज हॉस्टल वापस जाना है वो क्या है न की आज से मेरा कॉलेज स्टार्ट हो रहा है मई सोच रही हु की हॉस्टल जाने से पहले डैड से एक बार मिल लू.

शनाया- ठीक है तो तुम जल्दी रेडी हो कर आओ.

शानवी- Ok दी बस 10 मिनट आप वेट कीजिये.

इतना बोल कर शानवी जल्दी से अपने रूम में जाती है और रेडी होने लगती है करीब 20 मिनट बाद वो रेडी हो कर शनाया के पास गयी जिसे देख कर शनाया बोली.

शनाया- तुम्हारी 10 मिनट कुछ जल्दी नहीं हो गया.

शनाया के बात सुन कर शानवी बस मुस्कुरा देती है फिर दोनों वह से अपने अपने गाड़ी से हॉस्पिटल के लिए निकल जाते है करीब आधा घंटा के ड्राइव के बाद दोनों हॉस्पिटल पहुंचते है इसके बाद गाड़ी पार्क कर के दोनों अपने डैड के पास चले जाते वह जाने के बाद शानवी अपने माँ डैड से मिलती है तो वही शनाया अपने डैड के डिस्चार्ज के लिए बात करने डॉ. खुराना के केबिन में चली जाती है इधर शानवी अपने माँ डैड से मिल कर और उन्हें बता कर की उसकी सोल्लगे खुल गयी इस लिए वो वापस हॉस्टल जा रही है और वह से निकल जाती है जैसे hi वो हॉस्पिटल से बहार निकलती है वैसे hi एक आदमी अपने बॉस को कॉल करता है और बोलता है.

आदमी- बॉस प्रतिक की वाइफ की छोटी सिस्टर अभी अभी अकेले निकली है क्या हम उसे उठा ले.

उस आदमी के बात सुन कर उसका बॉस यानि की दिलावर बहुत खुस होता है और बोलता.

दिलावर- वह क्या खबर सुनाई है तुमने अगर वो सच में अकेले गयी है तो उसका पीछा करो और सुनसान जगह देख कर उसे उठा लो आज मई उस लड़की के साथ मजे करना चाहता हु.

आदमी- ठीक है बॉस.

इतना बोल कर वो आदमी अपने आदमियों को इशारा करता है और फिर सब शानवी के गाड़ी का पीछा करने लगते है इधर शानवी इन सब से बेखबर मस्ती में अपने गाड़ी को सोल्लगे के तरफ भगाये जा रही थी इधर वो सरे गुंडे भी शानवी के पीछा कर रहे थे लेकिन इन लोगो को ये मालूम नहीं था की कोई और भी था जो इन सब के पीछे पीछे आ रहा था खैर कुछ दूर आगे जाने के बाद एक सुनसान जगह आया जहा पर कोई भी नहीं था ये देख कर उन गुंडों के लीडर को ये जगह शानवी के किडनैप करने के लिए अच्छा लगा इस लिए वो अपने ड्राइव को शानवी के गाड़ी का ओवरटेक करने के लिए बोलै जिसे सुन कर वो ड्राइवर अपनी गाड़ी के स्पीड को और बढ़ा दिया और शानवी के गाड़ी को ओवरटेक करते हुए अपना गाड़ी शानवी के गाड़ी के सामने रोक दिया.

इधर जैसे hi शानवी ने देखा की एक गाड़ी उसकी गाड़ी को ओवरटेक कर के रोड बीचो बिच कड़ी हो गयी तो मजबूरन शानवी को अपना गाड़ी रोकना पड़ा और वो घुसे से अपने गाड़ी के गेट खोल के बाहर निकलने लगी तभी उसकी नजर उस हदी पर गयी जिसमे से 6 या 7 गुंडे बहार निकल रहे है ये देख कर शानवी के दर के मरे हालत ख़राब हो गया उसे ये अनुमान हो गया की ये लोग उसका किडनैप करने वाले जैसे hi शानवी को ये एहसास हुआ तो उसकी माथे से पसीना आने लगा और तुरंत अपने गाड़ी में बैठ कर अपनी गाड़ी का गेट बंद कर लिया इधर वो सरे गुंडे वह से चलते हुए शानवी के पास आये और उनका लीडर शानवी से बोलै.

लीडर- ये लड़की चल गाड़ी से निचे उतर मुझे तुमसे कुछ बात करना है.

लीडर के बात सुन कर शानवी थोड़ी दर गयी लेकिन वो दर को अपने चेहरे पर आने नहीं दिया और थोड़ी कड़क आवाज में उस गुंडे से बोली.

शानवी- कोण हो तुम लोग और ऐसे गाड़ी को बिच रस्ते में क्यों लगाए चुप चाप अपना गाड़ी हटाओ नहीं तो तुम्हारे साथ अच्छा नहीं होगा.

शानवी- के बात सुन कर सरे गुंडे हसने लगते है तभी उन गुंडों के लीडर बोलता है.

लीडर- है है क्या हिमत है तुम्हारी इस हिमत को तोड़ने में मजा आएगा और रही बात गाड़ी हटाने की तो जा नहीं हटाता क्या करेगी तू मारेगी चल चल मर के दिखा लेकिन मुझे मरने के लिए तुम्हे तो गाड़ी से निचे उतरना पड़ेगा (फिर थोड़े घुसे में बोलै) ये लड़की देख मेरे पास तेरे ये फालतू के बात सुनाने का समय नहीं है तुम चुप चाप गाड़ी से उतरती है या मई खुद तुम्हे उतारू.

उस लीडर के बात सुन कर शानवी बहुत दर जाती है और डरते डरते अपने मोबाइल से शनाया के पास कॉल करने लगती है लेकिन शनाया उस वक़्त डॉ. खुराना के केबिन में थी इस लिए वो कॉल नहीं उठती है इधर उस लीडर ने जब देखा की शानवी किसी को कॉल कर रही है तो उसे बहुत गुसा आता है और वो घुसे से बोलता है.

लीडर- लगता है की तू ऐसी नहीं मानेगी.

इतना बोल कर वो अपने हाथ में पकडे हुए हॉकी स्टिक से गाड़ी के सीसे पर मरने hi वाला था की तभी पीछे से एक आवाज आती है जो किसी और का नहीं बल्कि दीपक का था जब शानवी हॉस्पिटल से निकली थी तब से hi दीपक उनके सेफ्टी के लिए उनके पीछे था.

दीपक- तुम सब इस लड़की पर क्या जोर आजमा रहे हो अगर तुम सब में हिमत है तो मुझसे लड़ कर दिखाओ.

दीपक के आवाज सुन कर सरे गुंडे घूम कर दीपक के तरफ देखते है अपने सामने एक 20 साल के लड़के को देख कर वो सरे गुंडे जोर जोर से हसने लगते है तभी उन गुंडों का लीडर बोलता है.

लीडर- ये बचे जा चला जा यहाँ से क्यों बेकार में मरने के लिए यहाँ आ गया.

लीडर के बात सुन कर दीपक मुस्कुराते हुए उसे देखा उसकी मुस्कराहट इतनी खतरनाक थी की एक पल के लिए गुंडे की भी हालत ख़राब हो गयी इधर दीपक अपने चेहरे पर डेविल मुस्कान लेट हुए बोलै.

दीपक- क्या बोलै बच्चा हम्म अच्छा है अब अगर तुम लोगो को इस बचे से मर नहीं खाना है तो चुप चाप उस लड़की को छोड़ कर यहाँ से चले जाओ.

दीपक के बात सुन कर उस लीडर को गुसा आ जाता है वो घुसे से बोलता है.

लीडर- लगता है की हमें इस लड़की को उठाने से पहले तुम्हारा hi मरमत करना होगा (फिर अपने गुंडों से) तुम सब थोड़ा इस बचे की मरमत करो ये कुछ ज्यादा hi बोल रहा है और है इसे जान से नहीं मरना बस इसके हाथ पेअर तोड़ देना.

अपने लीडर के बात सुन कर एक गुंडा अपने हटो में एक हॉकी स्टिक ले कर दीपक को मरने के लिए उसके तरफ भागता है ये देख कर गुंडई के लीडर समझ जाता है की अब ये लड़का गया काम से ये सोच कर वो अपने गुंडों के साथ मिल कर शानवी के कार के गेट तोड़ने की कोशिश करने लगता है ये देख कर शानवी बुरी तरह से दर जाती है लेकिन अभी वो लीडर अपने हाथ में लिए हुए हॉकी स्टिक से कार के सीसे पर वॉर करता उससे पहले hi एक आदमी उड़ते हुए आता है और उससे टकरा जाता है जिसे देख कर लीडर हड़बड़ा जाता है और पीछे घूम कर देखने लगा जब वो पीछे घूम कर देखता है तो पता है की दीपक अपने जगह पर दोनों हाथ बंधे खड़ा खड़ा मुस्कुरा रहा था.

दरअसल हुआ ये था की जब वो योद्धा अपने हॉकी स्टिक से दीपक पर हमला करता है तो दीपक उसे हॉकी स्टिक को अपने हाथो से पकड़ लेता है और अपना एक लत उसके पेट में मरता है जिसके कारन वो गुंडा उड़ते हुए जा कर लीडर से टकरा जाता है और वही बेहोश हो जाता है इधर अपने आदमी के ऐसी हालत देख कर लीडर को बहुत गुसा आया है और वो घुसे से दीपक से बोलता है.

लीडर- मई तो तुम्हे बचा समझ कर सोच रहा था की तेरा हाथ पेअर तोड़ कर छोड़ दूंगा लेकिन तूने मेरे एक आदमी को मर कर अच्छा नहीं किया अब तुम्हे मुझसे कोई भी नहीं बचा सकता आज तुम यही इसी वक़्त जान से जायेगा मर डालो इस सेल को.

अपने लीडर के बात सुन कर सरे गुंडे अपने हथियार ले कर दीपक के ऊपर टूट पड़ते है किसी गुंडे के पास चाकू था तो किसी के पास चैन तो किसी के हॉकी स्टिक तभी दो गुंडा जो सबसे आगे थे वो दोनों दीपक के ऊपर हमला कर दिया एक ने चाकू से हमला किया तो एक हॉकी स्टिक से जैसे hi दोनों को हथियार दीपक के पास आया तो दीपक निचे झुक कर उनके हमको से बचा और चाकू वाले गुंडे का हाथ पकड़कर कर उसे उठा कर दूसरे गुंडे पर फेक देता है जिसके कारन दोनों गुंडे उड़ते हुए पीछे जा कर गिरते है और वही बेहोश हो जाते है अपने दो साथियो के हालत देख कर सरे गुंडे दर जाते है लेकिन अपने दर को अपने चेहरे पर न लाये हुए बाकि बचे गुंडे दीपक पर टूट पड़ते है इधर दीपक भी उनसे लड़ने के लिए तैयार था वो एक एक कर के सरे गुंडों को मरने लगता दीपक के हमको में इतना ताकत था की उसके एक वॉर से hi एक गुंडा बेहोश हो जा रहे थे उसने किसी भी गुंडे को जान से नहीं मारा बल्कि सबको बेहोश कर दिया था.

इधर अपने गुंडों की हालत को देख कर उनका लीडर दर से थार थार कम्प रहा था इधर सरे गुंडों को ठिकाने लगाने के बाद दीपक उस लीडर के तरफ बढ़ने लगा दीपक को अपने तरफ आता देख कर उस लीडर की हालत ख़राब हो गयी और वो डरते हुए बोलै.

लीडर- ड़ड़ड़ड़ देखो टट्ट्टी तुम मममम मेरे पोल्ल पास नहीं आना नहीं तो मममम मई तुम्हे जान से मर दूंगा.

लीडर के बात सुन कर दीपक मुस्कुराते हुए बोलै.

दीपक- राशि जल गयी लेकिन बल नहीं गया.

इतना बोल कर वो भागते हुए उस लीडर के पास गया और उसे खींच कर एक थपड मर दिया जिससे उस लीडर के मुँह से खून आने लगा लीडर दर के मरे अपने दोनों हाथ जोड़ कर दीपक से बोलै.

लीडर- प्लीज मुझे छोड़ दो मई आज के बाद किसी भी लड़की के तरफ आँख उठा कर नहीं देखूंगा.

लीडर के बात सुन कर दीपक हस्ते हुए बोलै.

दीपक- मई तुम्हे किसी लड़की पर आंख उठा कर देखने लायक छोडूंगा तब न तुम किसी को देखोगे.

इतना बोल कर दीपक उसे मरना सुरु कर दिया जिसके कारन उसे शरीर से खून निकलने लगा आखिर में वो मर कहते कहते बेहोश हो गया.

इधर शानवी दीपक को अकेले इतने गुंडों के साथ लड़ते हुए देख कर हैरान थी उसकी हैरानी तब टूटी जब दीपक उसके कार के गेट पर नोके करते हुए बोलै.

दीपक- अब आप सेफ है आप जा सकती है.

इधर दीपक को खुद से बात करता हुआ देख कर न जाने क्यों शानवी के दिल की धड़कन तेज़ हो गयी थी लेकिन वो खुद को सँभालते हुए दीपक से बोली.

शानवी- थैंक यू मुझे बचने के लिए अगर आप नहीं आते तो पता नहीं ये सब मेरे साथ क्या करते.

दीपक- अरे इसमें थैंक यू की क्या बात है ये तो मेरा इंसानियत के नाते मेरा फ़र्ज़ था आपको बचाना और वैसे ये सब कोण थे.

दीपक के बात सुन कर शानवी कुछ देर सोचने के बाद बोली.

शानवी- पता नहीं ये लोग कोण थे और क्यों मेरा पूछा कर रहे थे.

दीपक- ठीक है अब आप जाइये और है आगे से ध्यान रखियेगा.

दीपक के बात सुन कर शानवी उसको ध्यान से देखते हुए बोली.

शानवी- क्या मई मुझे बचने वाले मसीहा के नाम जान सकती हु.

शानवी के बात सुन कर दीपक कुछ सोचते हुए बोलै.

दीपक- आपकी जान तो बच गयी न तो अब आप मेरा नाम जान कर क्या करेंगी.

इतना बोल कर दीपक किसी हवा की तरह वह से तेज़ गति में निकल गया इधर दीपक के जाने के बाद शानवी अपने मन में hi सोचने लगी.

शानवी- पता नहीं ये खड़ूस कोण था हवा की तरह आया और मुझे बचा का हवा की तरह hi गायब हो गया वैसे मुझे समझ में नहीं आ रहा है की जब मई उसे देखि तो अचानक मेरे दिल की धड़कन तेज़ क्यों हो गयी थी और मुझे ऐसा क्यों लग रहा था की वो यही पर रुक कर मुझसे बात करता रहे पता नहीं मेरे साथ ये क्या हो रहा है मुझे लेट हो रहा है मुझे सोल्लगे जाना चाहिए.

इतना बोल कर शानवी भी वह से निकल गयी उसके जाने के कुछ देर बाद वह पर कुछ आदमी आये जब उन लोगो ने देखा की रोड पर कुछ आदमी घायल हालत में पड़े हुए है तो वो जल्दी से उनके पास गया और उनको ध्यान से देखने लगा जब वो इन आदमियों को पहचाना तो वो घुसे से बोलै.

आदमी- किसकी इतनी हिमत हो गयी की वो दिलवर भाई के आदमी पर हाथ उठाये उसको मई जिन्दा नहीं छोडूंगा पहले मई दिलावर भाई को इसकी खबर दे देता हु इसके बाद मई उस आदमी को धुंध निकलूंगा फिर मई उसे दर्दनाक मौत दूंगा.

इतना बोलने के बाद वो अपना मोबाइल निकलता है और दिलवर को कॉल करता है थोड़ी देर बाद दिलावर उसका कॉल रइवे करता है और बोलता है.

दिलावर- है रघु बोल क्यों कॉल किया इस समय कुछ काम था क्या.

रघु- भाई संत Xavier's गर्ल्स सोल्लगे जाने वाले रस्ते में पकिया और उसके साथी बेहोश मिले है किसी ने इनको बहुत बुरी तरह से मारा है.

रघु के बात सुन कर दिलावर घुसे से बोलता है.

दिलावर- किसकी इतनी हिमत हो गयी की वो दिलावर के आदमी पर हाथ उठाये तुम पता करो की किसने पकिया और उसके साथी को मारा है और पता कर के उसे कही से भी धुंध निकालो और उसे जान से मर दो.

रघु- जी भाई आप चिंता मत कीजिये जिसने भी हमारे आदमी को मारा है उसे मई तड़पा तड़पा के मरूंगा वैसे भाई इन लोगो का क्या करना है.

दिलावर- इन लोगो को हॉस्पिटल भेज दो और है ये लोग एक लड़की को उठाने वाले थे अब इनका काम तुम करोगे यद् रहे आज उन दोनों लड़कियों में से कोई एक मेरे बिस्तर में चाहिए इसके लिए तुम्हे जो भी करना है करो.

रघु- जी भाई आप चिंता मत कीजिये मई इस काम के लिए त्रिनेड मार्टिकल आर्ट्स फाइटर भेजता हु.

दिलावर- ठीक है.

इतना बोल कर दिलावर कॉल कट कर देता है तो वही शनाया अपने डैड का हॉस्पिटल से डिस्चार्ज करवा कर अपने घर के कर जा रही थी अब अजय मल्होत्रा 75% तक ठीक हो गए थे शनाया अपने माँ डैड के साथ हॉस्पिटल से सीधा घर के लिए निकल गयी जैसे hi उसका गाड़ी हॉस्पिटल से बहार निकला तो उसी वक़्त उनके पीछे 2 और गाड़ी जाने लगी इन दोनों गाड़ी में 6 लोग थे आगे वाले गाड़ी में दीप्ती और रोहन के साथ बलदेव सिंह था जो कार ड्राइव कर रहा था तो वही पीछे वाले गाड़ी में संध्या और कारन के साथ बलदेव सिंह का राइट हैंड तेजा था जो कार ड्राइव कर रहा था.

ये लोग करेफुल्ली शनाया और उसके माँ डैड को शाफेट्य दे रहे थे क्युकी शानवी पर जो हमला हुआ था वो इन लोगो को पता चल गया धीरे धीरे शनाया के गाड़ी उनके घर तक पहुंच कर रुक गयी शनाया के गाड़ी रुकते hi इन लोगो ने भी अपना गाड़ी रोके दिया इन लोगो का गाड़ी शनाया के गाड़ी से 200 मीटर पीछे थी जिसके कारन शनाया को ये शक नहीं हुआ की कोई उसके गाड़ी का पीछा कर रहा है.

इधर शनाया और पुस्पा गाड़ी से उतर का अजय मल्होत्रा को सहारा दे कर अपने घर में ले कर चले गए उनके जाने के बाद रोहन बलदेव सिंह से बोलता है.

रोहन- बलदेव जी आप एक काम कीजिये आप भाभी के घर के सामने वाले घर में और एक पीछे वाले घर में एक रूम ले लीजिये अब हम वही से इन पर निगरानी रखेंगे और है अपने आदमियों को भी अलर्ट कर देना की वो 24 हॉर्स इस घर पर नजर रखे.

बलदेव- ठीक है मई अभी सब इंतजाम करता हु.

इतना बोल कर बलदेव किसी को कॉल किया और कुछ देर बात करने के बाद बोलै.

बलदेव- मैंने रूम के लिए बोल दिया है 2 घंटे में हमें रूम मिल जायेगा और रही बात इन पर अपने आदमियों से निगरानी रखने की तो वो पहले से hi ये कर रहे है.

रोहन- गुड वर्क बलदेव जी.

फिर रोहन ने कारन को बुलाया और उससे बोलै.

रोहन- कारन मई भाभी के घर पर निगरानी करने के लिए भाभी के घर के आगे और पीछे वाले घर में एक एक रूम ले रहा हु ताकि हम आसानी से उस पर नजर रख सके

कारन- ये तुमने अच्छा किया अब हम आसानी से उन सब पर नजर रख सकेंगे.


इसके बाद बलदेव ने शनाया के घर के आगे और पीछे के घर में एक एक रूम ले लिया और एक रूम में रोहन दीप्ती के साथ और एक रूम में कारन संध्या के साथ रुक गए और फिर दोनों मिल कर शनाया के घर पर नजर रखने लगे.

इधर मृत्युंजय अपने डैड से 1 करोड़ के चेक ले कर सीधा बैंक गया और उस चेक के सरे पैसे अपने अकाउंट में ट्रांसफर करवा दिया इसके बाद वो वह से सीधा अनाथ आश्रम गया अनाथ आशाराम जाने के बाद वो वह के वार्डन से मिला और बोलै.

मृत्युंजय- मैंने इस अनाथ आश्रम को गॉड ले लिया है अब से इस आश्रम में जितने भी पैसे खर्च होंगे उसे मई दूंगा और आज के बाद यहाँ के कोई भी बचा बहार काम करने या भीख मांगने के लिए नहीं जायेगा आज से यहाँ के बचो को पढाई और भर पेट खाना मिलेगा.

मृत्युंजय के बात सुन कर वार्डन बहुत खुस हो जाता है और वो खुसी से मृत्युंजय से बोलता है.

वार्डन- आपका बहुत बहुत धन्यवाद् जी अपने इन अनाथ बचो के बारे में इतना कुछ सोचा.

मई- अरे इसमें धन्यवाद् की कोई बात नहीं है ये तो इन बचो का हक़ है की इनको भर पेट खाना के साथ साथ अच्छी एजुकेशन मिले और है मई अनाथ आश्रम के अकाउंट में 70 लाख रूपए सेंड कर रहा हु आज hi आप मार्किट जा कर इन बचो के लिए अच्छे कपडे और राशन ले आइये और साथ में इनको पढ़ने के लिए अचे अचे टीचर भी हिरे कीजिये.

वार्डन- ठीक है सर मई अभी सभी चीज का बेवस्था करता हु.

इसके बाद मृत्युंजय अनाथ आश्रम के अकाउंट में 70 लाख रूपए सेंड कर दिया और वह से जाने लगा लेकिन जाते जाते मृत्युंजय वार्डन को एक बात बोल कर गया.

मृत्युंजय- मई अभी जा रहा हु अगर ये पैसे काम पद जाये तो मेरे पास कॉल कर लेना और है अगर तुमने इन पैसे में हेरा फेरी की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.

इतना बोल कर मृत्युंजय वह से निकल गया और सीधा वह से बृद्धा आश्रम चला गया जैसे वो बृद्धा आश्रम पंहुचा तो वह के केयर टेकर उसको देखते hi उसको पहचान गया की इस सहर के सबसे आमिर आदमी का बीटा मृत्युंजय कुशवाहा है जैसे वो मृत्युंजय को पहचाना तो वो मृत्युंजय के पास आया और उससे बोलै.

केयर टेकर- इस बृद्धा आश्रम में आपका स्वागत है मृत्युंजय सर बताइये मई आपकी क्या सेवा कर सकता हु.

उस केयर टेकर के बात सुन कर मृत्युंजय कुछ सोचते हुए उससे बोलै.

मृत्युंजय- मई इस वृद्धा आशाराम को गॉड लेना चाहता हु और मई चाहता हु की आज के बाद इस आश्रम में रहने वाले लोगो को किसी भी तरह के कोई भी प्रॉब्लम न हो.

मृत्युंजय के बात सुन कर वो केयर टेकर खुस हो जाता है और भगवन से लाख लाख सुक्रिया करता है क्युकी इस आश्रम का सारा फण्ड ख़तम हो गया था और अब ऐसा नौबत आ गया था की ये बृद्धा आश्रम कभी भी बंद हो सकता है जिसके कारन केयर तकर को यहाँ पर रहने वाले वृद्ध लोगो की बहुत चिंता होती थी लेकिन जब उसने सुना की सहर के सबसे बड़े आदमी के बेटे ने इस आश्रम को गॉड लेने आया है तो वो बहुत खुस हो गया और इसी खुसी में वो मृत्युंजय से बोलै.

केयर तकर- आपका बहुत बहुत धन्यवाद् सर जो अपने इन बूढ़े लोगो के बारे में सोचा आज कल आपके जैसा आदमी मिलना बहुत मुश्किल है.

मई- मई आपके अकाउंट में अभी के लिए 30 लाख ट्रांसफर कर रहा हु आप इस आश्रम में रहने वाले लोगो के लिए जो भी आवश्यकता है वो ले आइये और इन सब को किसी भी तरह के प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए.

केयर टेकर- जी ठीक है जैसा आप चाहेंगे वैसा hi होगा.

इसके बाद मई उसके अकाउंट में 30 लाख सेंड कर दिया फिर थोड़ी देर उससे बात करने के बाद वह से जाने लगा तभी वह पर एक कार आ कर रुकी और उसमे से एक खूबसूरत लड़की बहार निकली जिसे देख कर एक पल के लिए मृत्युंजय उसमे खो सा गया लेकिन फिर खुद को सँभालते हुए वह से जाने लगा तभी वो लड़की केयर टेकर के पास आये हुए बोली.

लड़की- मई इस बृद्धा आश्रम को 20 लक्ष डोनेट करना चाहती हु ताकि इस बृद्धा आश्रम में रहने वाले लोग बेहतर जिंदगी जी सके.

उस लड़की के बात सुन कर मृत्युंजय के आगे बढ़ते हुए पेअर वही पर रुक गया और वो मन hi मन सोचने लगा.

मृत्युंजय- (अपने मन में) इंटरेस्टिंग जहा आज कल लोग अपनों की भी मदत नहीं करते वह ये इन बूढ़े लोगो को मदत करने के लिए आ गयी.

इधर उस लड़की के बात सुन कर केयर टेकर बोलै.

केयर तकर- है है क्यों नहीं मैडम आप हमारी बृद्धा आश्रम में डोनेट करेंगी तो ये तो हमारे लिए और भी बेहतर होगा हम यहाँ पर रहने वाले लोगो के लिए और भी बेहतर कर सकते है आप जानती है मैडम अभी अभी वो सर भी आपकी तरह वो भी यहाँ पर पैसे डोनेट कर के गए.

ये सुन कर वो लड़की एक बार मृत्युंजय के तरह मुस्कुरा कर देखि और उस केयर टेकर के अकाउंट में 20 लाख ट्रांसफर कर दी इसके बाद वो चलते हुए मेरे पास आयी और मुझसे बोली.

लड़की- ही मेरा नाम पूनम चौहान है क्या मई आपकी नाम जान सकती हु.

उस लड़की के बात सुन कर मृत्युंजय मुस्कुराते हुए बोलै.

मृत्युंजय- हैल्लो मिस पूनम मेरा नाम मृत्युंजय कुशवाहा है मुझे आपसे मिल कर खुसी हुयी पूनम जी.

पूनम- मुझे भी आपसे मिल कर खुसी हुयी मृत्युंजय जी वैसे मुझे ये जान कर अच्छा लगा की आपने इन लोगो के मदत के लिए पैसे डोनेट किये आज कल आपके जैसे लोग बहुत काम मिलते है.

मृत्युंजय- शामे हेरे मिस मुझे भी आपको देख कर यकीं करना मुश्किल हो रहा है क्युकी मई आज कल के लड़कियों को अपने पैसो पर घमंड करते देखा है लेकिन उन लड़कियों से बिलकुल अलग है.

मृत्युंजय के बात सुन कर पूनम मुस्कुराने लगती है और फिर वो मृत्युंजय से बोलती है.

पूनम- ठीक है मृत्युंजय जी हम अभी जा रहे है मुझे कुछ काम है तो क्या हम आज सैम में कॉफ़ी पर मिल सकते है.

मृत्युंजय- है क्यों नहीं.

इसके बाद दोनों वह से अपने अपने रस्ते निकल जाते है.

तो वही वह से बहुत दूर मुंबई के एक दूसरी आइसलैंड है ये आइसलैंड भी राठौर परिवार के आइसलैंड जैसा hi लेकिन ये उससे कुछ छोटा भी है इस आइसलैंड पर एक महल है उस महल के रूम में एक लड़की अपने हाथो में एक लड़के की फोटो ले कर वो उसे ध्यान से देख रही थी और वो अपने आँखों में आंसू लिए उस फोटो से बात कर रही थी.

लड़की- तुम मुझे छोड़ कर क्यों चले गए तुम्हे गए हुए पुरे 15 साल हो ये 15 साल तुम्हारे बिना मई कैसे निकली मई hi जानती हु प्लीज तू लौट आओ तुम जानते हो की लोग तुम्हारे बारे में कैसे कैसे बाटे करते है लोग बोलते है की तुम मर गए अब तुम कभी वापस नहीं आओगे लेकिन मई उनके बातो पर बिस्वास नहीं करती मुझे पूरा यकीं है की तुम जरूर आओगे एक बात और तुमसे बताना था मेरे घर वाले चाहते है की मई शादी कर लू मई तुम्हे छोड़ कर आगे बढ़ जाऊ लेकिन मई ऐसा नहीं कर सकती अब तुम्ही बताओ मुझे मेरी शादी तो आज से 15 साल पहले बचपन में तुम्हारे साथ हो गयी थी तो भला मई किसी और से शादी कैसे कर सकती हु प्लीज प्लीज रूद्र तुम वापस आ जाओ मई तुम्हारे बिना जी नहीं सकती.

अभी वो लड़की उस फोटो से बात कर hi रही थी की तभी बहार से एक औरत के आवाज आती है.

औरत- बेटी अनन्य क्या तुम अंदर हो.

दोस्तों मई अब थोड़ा इनलोगो के बारे में मई आप सब को बता दे रहा हु ये है सूर्यवंशी फॅमिली सूर्यवंशी फॅमिली वर्ल्ड के टॉप 10 फॅमिली में से एक है ये फॅमिली राठौर फॅमिली जितना आमिर तो नहीं लेकिन उससे काम भी नहीं है.

ये फॅमिली राठौर फॅमिली की hi तरह एक आइसलैंड पर रहता है और इसी फॅमिली की लड़की है अनन्य सूर्यवंशी.

इधर अपनी माँ के बात सुन कर अनन्य अपने आँखों से आंसू साफ करती है और अपनी माँ से बोलती है.

अनन्य- जी माँ मई अंदर hi हु आप अंदर आ जाइये.

अपनी बेटी के बात सुन कर सुनैना सूर्यवंशी गेट खोल कर अंदर आती है जैसे hi वो रूम में एंटर करती है तो उनको अनन्य के बीएड पर एक लड़के की फोटो दिखती है तो वो समझ जाती है की उनको आने से पहले अनन्य इस रूम में क्या कर रही होंगी इस लिए वो अनन्य को समझते हुए बोलते है.

सुनैना- मई तुमको बोल बोल कर थक गयी की अब ये कभी वापस नहीं आएगा खुद इसके परिवार वाले भी बोलते है की ये मर चूका है लेकिन पता नहीं तुम हमारी बात क्यों नहीं सुनती हो देखो अनन्य मेरी बात को समझो अब ये कभी वापस नहीं आने वाला है इस लिए तुम भी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाओ.

अपनी माँ की बाटे सुन कर अनन्य घुसे से उनको घूरती हुयी बोलती है.

अनन्य- माँ मई कितने बार आपको बोल चुकी हु की मेरे रूद्र को कुछ नहीं हुआ है वो मेरे लिए जरूर वापस आएगा और आप जानती है मई उससे इतना प्यार करती हु की अगर वो कभी वापस लौटा भी नहीं न तो मई उसकी यद् में hi पूरी जिंदगी गुजर दूंगी लेकिन कभी दुबारा शादी नहीं करुँगी.

अनन्य के बात सुन कर सुनैना को भी गुसा आ जाता है वो घुसे से अनन्य को बोलती है.

सुनैना- तुमको जो मन में आये तुम वो करो तुमको तो किसी की बात सुननी नहीं है मेरी मति मरी गयी थी जो मई तुम्हारी सदी बचन में उससे कर दी थी अगर तुम्हारी सदी उससे नहीं हुयी रहती तो आज हमें ये दिन नहीं देखना पड़ता.

इतना बोल कर वो वह से चली जाती है लेकिन उनके बात को सुन कर अनन्य को बहुत बुरा लगता है और फिर से उसके आँखों से आंसू गिरने लगते है इधर सुनैना अनन्य के रूम से घुसे निकल कर अपने रूम के तरफ जा रही थी की तभी रस्ते में उसे एक लड़का मिलता है वो लड़का अपने माँ के बात सुन कर उनसे बोलता है.

लड़का- क्या हुआ माँ आप इतने घुसे में क्यों है कही फिर से आपकी बहस अनन्य से तो नहीं हो गयी.

अपने लड़के के बात सुन कर वो उससे बोलती है.

सुनैना- पता नहीं क्या करू मई इस लड़की की ये तो मेरी बात सुनाने के लिए तैयार hi नहीं है बस दिन भर उस लड़के के फोटो ले कर उससे बाटे करती रहती है.

सुनैना की बाटे सुन कर वो लड़का जो की अनन्य के बड़ा भाई मुकेश सूर्यवंशी था वो बोलता है.

मुकेश- इसमें उसकी कोई गलती नहीं है साडी गलती आपकी और डैड की है क्या जरुरत थी उसकी बचपन में hi सदी करने की और तो और बचपन में शादी के बात वो भूल चुकी थी फिर अपने उसको वो सब क्यों यद् दिलाया और साथ में उस लड़के की तस्वीर भी ला कर दे दिया.

अपने बेटे की बात सुन कर सुनैना का गुसा थोड़ा संत होता है तो उससे वो बोलती है.

सुनैना- क्या करू हो गयी गलती मुझे पता नहीं था न की ये सब जानने के बाद उस लड़के की दीवानी हो जाएगी अब मुझे समझ में नहीं आ रहा है की मई क्या करू कैसे इस लड़की के दिमाग से उस लड़के को निकलू अगर वो लड़का जिन्दा होता तो कोई बात नहीं लेकिन वो अब मर चूका है लेकिन ये उस बात पर बिस्वास करने के लिए तैयार hi नहीं है और तो और मई इसके दिमाग से उसे निकलने के लिए इसे मार्टिकल आर्ट्स की ट्रेनिंग भी दिलवाई ताकि वो ट्रेनिंग में बिजी हो कर उसे भूल जाये लेकिन वो भूलने की जगह उसकी और दीवानी हो गयी.

अपने माँ के बात सुन कर मुकेश कुछ देर तक सोचने के बाद बोलै.

मुकेश- माँ मुझे मुंबई से मुझे एक ऑक्शन का इनविटेशन आया है मई उस इनविटेशन में अनन्य को भी ले कर जाता हु शायद वह जाने के बाद कोई चमत्कारी hi जाये और उसे वह पर कोई और पसंद आ जाये.

मुकेश के बात सुन कर सुनैना कुछ सोचते हुए बोलती है.

सुनैना- है ये ठीक रहेगा तुम उसे वह जाने के लिए मन लो.

मुकेश- ठीक है माँ मई अभी जाकर उसे मनाता हु.

इसके बाद मुकेश वह से अनन्य के रूम के पास आता है और दरवाजा खटखटाते हुए बोलता है.

मुकेश- अनन्य मेरी बहन क्या मई अंदर आ सकता हु.

इधर अनन्य जो अपने माँ के बात सुन कर रो रही थी वो जैसे hi अपने भाई के आवाज सुनती है तो वो झट से अपना आंसू पॉच कर खुद को सही करती है और उसको अंदर आने के लिए परमिशन दे देती है परमिशन मिलने के बाद मुकेश अंदर आता है तो वो अनन्य के उदास चेहरे को देख कर वो भी उदास हो जाता है मुकेश अपनी बहन से बहुत प्यार करता था इस लिए वो उसे उदास देख कर उससे बोलता है.

मुकेश- बहन कब तक ऐसे चलता रहेगा कमसे काम अब तो तुम सचाई को एक्सेप्ट करो.

अपने भाई के बात सुन कर अनन्य बात को दूसरी तरफ घूमते हुए बोलती है.

अनन्य- भाई आपको मुझसे कुछ काम था क्या जो आप इस वक़्त मेरे पास आये है.

अनन्य को इस तरह बात बदलता हुआ देख कर मुकेश समझ जाता है की अनन्य इस टॉपिक पर बात नहीं करना चाहती है इस लिए वो आगे कुछ नहीं बोलता है और अनन्य के बातो का जबाब देते हुए बोलता है.

मुकेश- अनन्य वो क्या है न की मुंबई से एक ऑक्शन का इनविटेशन आया है और उस ऑक्शन में कुछ चीजे बहुत कमल का है तो मई चाहता हु की तुम उस ऑक्शन में पार्टिसिपेट करो.

अनन्य- सॉरी भाई मई भी जा सकती क्युकी मुझे कही जाने का अभी मुद नहीं है आप hi चले जाओ.

अनन्य के बात सुन कर मुकेश थोड़ा परेशां हो गया क्युकी वो जनता था की जो आइटम वो ऑक्शन से खरीदने वाला है वो सिर्फ और सिर्फ अनन्य hi सही सलामत आइसलैंड ला सकती थी इस लिए वो अनन्य को समझते हुए बोलै.

मुकेश- अनन्य सुनो तो तुम्हारा वह जाना बहुत जरुरी है.

अनन्य- और मुझे वह जाना किस लिए जरुरी है.

मुकेश- तुम्हारा वह जाना इस लिए जरुरी है की वह पर जो आइटम नीलम होने वाला है वो बहुत hi दुर्लभ आइटम है और उस आइटम पर पुरे इंडिया का नजर है.

मुकेश के बात सुन कर अनन्य हैरान हो जाती है और सोचने लगती है की ऐसी कोण सी दुर्लभ आइटम है जिस पर पुरे इंडिया का नजर है.

अनन्य- भाई ऐसी कोण सी आइटम है जिसे पाने के लिए पूरा देश बेचैन है.

अनन्य के बात सुन कर मुकेश कुछ सोचते हुए बोलता है.

मुकेश- वह पर बहुत सरे ऐसे आइटम है जो दुर्लभ है लेकिन सबसे दुर्लभ आइटम जो है वो है एक तलवार जिसमे अग्नि विसेसता है उस तलवार के एक वॉर से पूरा देना ख़तम किया जा सकता है और दूसरी आइटम है एक स्टोरेज अंगूठी जिसमे कोई भी सामान स्टोर कर के रख सकते है और बाकि का जो आइटम है वो दुर्लभ मेडिसिन सुनाने में आया है की वह 2 तरह के मेडिसिन है एक मेडिसिन का खासियत यह है की कोई भी ग्रांडमास्टर के निचे के लेवल वाला योद्धा अगर उस मेडिसिन को खा ले तो उसका लेवल तुरंत बढ़ जाता है और दूसरा मेडिसिन है इंस्टेंट रिकवरी पिल जिसे खाने के बाद कोई भी जखम कुछ मिंटो में ठीक हो जाता है.

मुकेश के बात सुन कर अनन्य हैरान हो जाती है उसे मुकेश के बातो पर बिस्वास hi नहीं हो रहा था इस लिए वो मुकेश से बोली.

अनन्य- भाई क्या आप सच बोल रहे है क्या ऐसा भी हो सकता है मुझे तो आपके बातो पर बिस्वास hi नहीं हो रहा है.

अनन्य के बातो पर मुकेश मुस्कुराते हुए बोलै.

मुकेश- मई जनता था की तुम्हे मेरे बातो पर बिस्वास नहीं होगा और पहले मुझे भी इन सब बातो पर बिस्वास नहीं हुआ था लेकिन मैंने अपने सोर्स से पता किया तो मुझे पता चला की साडी बाटे सच है.

अनन्य- मुझे तो अब भी बिस्वास नहीं हो रहा है क्युकी मैंने ये सब किसे और कहानियो में सुना मुझे पता नहीं था की ये सब चीजे हकीकत में भी होगी.

अपनी बहन के बात सुन कर मुकेश एक्ससिटेमेंट के साथ बोलै.

मुकेश- इस लिए तो मई तुम्हे अपने साथ चलने के लिए बोल रहा हु तुम्हे वह के जाने का मेरा दो कारन है पहला कारन है की तुम बहार घूमोगी तो तुम्हारा मन फ्रेश रहेगा और दूसरी कारन है की ये सब आइटम नीलामी से खरीदना कोई भरी बात नहीं है लेकिन इसे शाफेट्य के आइसलैंड तक लाना मुश्किल है क्युकी उस आइटम को लोग खरीदने से ज्यादा छीनने के फ़िराक में रहेंगे और अगर तुम मेरे साथ रहोगी तो मुझे किसी भी बात का दर नहीं होगा क्युकी भला एक सुडो ग्रांडमास्टर से कोण भिड़ना चाहेगा.

मुकेश के बात सुन कर अनन्य मुस्कुराते हुए बोली.

अनन्य- ठीक है भाई मई चलने के लिए तैयार हु जब चलना होगा बता दीजियेगा.

मुकेश- ठीक है.

मई आप सब को इस स्टोरी में उसे होने वाले मार्टिकल आर्ट्स लेवल के बारे में बता दे रहा हु.

मार्टिकल आर्ट्स लेवल

सुण्या लेवल

जिसने लेवल 1 से 9 तक आता है

हाफ ग्रांडमास्टर

ग्रैंड मास्टर

सुडो ग्रैंड मास्टर

सम्राट लेवल

डेमी गॉड लेवल

गॉड लेवल

हाफ हैवन लेवल

हैवन लेवल

हाफ सुप्रीम लेवल

सुप्रीम लेवल

और लास्ट में एक और लेवल होता है जिसका खुलासा आगे चल कर स्टोरी में होगा.
 
अपडेट 39

बीस्ट स्टोन
राठौर आइसलैंड पर दूसरे दिन सुबह उठने के बाद मई फ्रेश हुआ और वही ध्यान करने लगा कुछ घंटे ध्यान करने के बाद मई अपने ध्यान से उठा तो उसी वक़्त दरवाजे पर नॉक हुआ इस लिए मई जाकर दरवाजा खोला तो देखा की सामने कौशल्या देवी कड़ी थी मई अपने सामने कौशल्या देवी को देखा तो बोलै.



मई- गुड मॉर्निंग दादी जी आप इतनी सुबह सुबह यहाँ क्या कर रहे है क्या कुछ प्रॉब्लम हुयी है क्या.

मेरी बात को सुन कर कौशल्या देवी मुझे स्नेह भरी नजरो से देखते हुए मुस्कुरा कर बोली.

कौशल्या- गुड मॉर्निंग रूद्र... ी मैं प्रतिक बीटा और बीटा अभी सुबह नहीं है 8 बजने वाले है बहार डाइनिंग टेबल पर नास्ते के लिए सब तुम्हारा इंतज़ार कर रहे है.

कौशल्या देवी के बात सुन कर मई चौक गया और अपने मोबाइल में समय देखा तो सच में 8 बज गए थे मुझे पता hi नहीं चला की मई 3 घंटे से ध्यान कर रहा था फिर मई बड़बड़ाते हुए कौशल्या देवी से बोलै.

मई- वो माफ़ कीजियेगा दादी जी मुझे सुबह सुबह उठ कर ध्यान लगाने की आदत है इसी लिए समय का पता नहीं चला आप बहार चलिए तब तक मई नाहा कर आता हु.

मेरी बात को सुन कर कौशल्या देवी बोली.

कौशल्या- ठीक है जल्दी आना क्युकी बहार सब तुम्हारा वेट कर रहे है.

इतना बोल कर वो बहार चली गयी उनके जाने के बाद मई जल्दी से अपना कपडा निकला और नहाने के लिए बाथरूम में चला गया मेरे जाने के बाद कौशल्या देवी दोबारा मेरे रूम में आयी और मेरे कपडे में कुछ ढूंढने लगी थोड़ी देर ढूंढने के बाद उनके चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी जो वो मेरे कपडे में धुंध रही थी वो मेरा बल (हेयर) था और उनको वो बल मिल गया था जिसे प् कर वो बहुत खुस हुयी और अपने मन hi मन बोली.

कौशल्या- (अपने मन में) जो मुझे चाहिए था वो मिल गया अब मई प्रतिक के बल से उसका डीएनए टेस्ट करवाऊंगा हलाकि मुझे पूरा यकीं है की ये मेरा hi पोता है लेकिन एक बार जाँच कर के देखना भी जरुरी है.

इसके बाद कौशल्या देवी मेरे रूम से चली जाती है इधर मई इन सब बातो से अजान थोड़ी से में नाहा कर बहार आया और रेडी हो कर बहार आ गया जब मई दिंनिंग रूम में आया तो देखा की सरे लोग दिंनिंग टेबल पर बैठ कर मेरा वेट कर रहे है तो मई सबके सामने अपना दोनों हाथ जोड़ कर माफ़ी मांगते हुए बोलै.

मई- मेरी वजह से आप सब को इतना वेट करना पड़ा इसके लिए मई आपसे माफ़ी चाहता हु.

मेरी बात को सुन कर सिकेन्द्र सिंह राठौर बोले.

सिकेन्द्र- अरे कोई बात नहीं वैसे भी हम लोग 8 बजे के बाद hi नास्ता करते है.

इसके बाद हम सब नास्ता किया और वह से उठ कर सीधा महेंद्र सिंह के रूम में चले गए वह जाने के बाद मई सबसे पहले अपना दिव्या दृस्टि से महेंद्र सिंह राठौर के पुरे बॉडी को स्कैन किया तो पाया की वो अब पहले से बेहतर है भले hi वो अभी चल फिर नहीं सकते थे लेकिन अपना हाथ हिला दुला सकते थे.

मई- अब आप कैसा महसूस कर रहे है सर.

मेरी बात को सुन कर महेंद्र सिंह राठौर मुस्कुराते हुए बोले.

महेंद्र- अब मई पहले से बेहतर महसूस कर रहा हु ये सब आपके hi वजह से हुआ है नहीं तो पता नहीं मई कब तक जी पता.

महेंद्र सिंह राठौर के बात सुन कर मई मुस्कुराने लगा फिर कुछ सोच कर मई उनसे बोलै.

मई- अगर आपको पूरी तरह से ठीक होना है तो हमें ऑरेंज जिनसेंग लाना hi होगा आप मुझे वह के बारे में बताने वाले थे.

मेरे बात को सुन कर महेंद्र सिंह राणा सोच में पद गए फिर वो कुछ देर सोचने के बाद बोले.

महेंद्र- मई आपको वह के बारे में बता तो दूंगा लेकिन मई आपको जगह करना चाहता हु की आप वह जाने से पहले एक बार सोच ले क्युकी वो जगह कोई मामूली जगह नहीं है बल्कि बहुत hi ज्यादा खतरनाक है उस जगह पर बहुत खतरनाक खतरनाक जानवर रहते है कुछ जानवर तो ऐसा भी है जिसे मैंने आज तक कभी नहीं देखा था इस लिए वह जाना मतलब अपने जान पर खेलना है.

महेंद्र सिंह के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- आप मेरी चिंता मत कीजिये मुझे कुछ भी नहीं होगा बस आप मुझे ये बताइये की वो जगह कहा है और हम उस जगह पर कैसे पहुंच पाएंगे.

मेरी बात को सुन कर महेंद्र सिंह राठौर अपने परिवार वालो से बोले.

महेंद्र- मुझे प्रतिक से अकेले में बात करना है इस लिए संजय और सिकेन्द्र को छोड़ कर बाकि सब बहार जाइये.

महेंद्र सिंह के बात सुन कर सरे लोग हैरान हो गए लेकिन फिर उनकी बात को मानते हुए सरे लोग बहार चले गए उस रूम में सिर्फ मई महेंद्र सिंह राठौर संजय सिंह राठौर और सिकेन्द्र सिंह राठौर hi रह गए थे जब सरे लोग चले गए तो महेंद्र सिंह राठौर ने संजय से बोले.

महेंद्र- संजय वो नक्शा ले कर आओ.

संजय- जी डैड

इसके बाद संजय सिंह राठौर वह से चले जाते है फिर थोड़ी देर बाद वो अपने हाथ में नक्शा ले कर रूम में एंटर करते है और अपने डैड के हाथो में वो नक्शा दे देते है अपने हाथ में वो नक्शा लेने के बाद महेंद्र सिंह राठौर मुझसे बोलते है.

महेंद्र- ये वो नक्शा है जिससे तुम उस जगह पर पहुंच सकते हो लेकिन वह जाने से पहले मई तुम्हे कुछ बताना चाहता हु मई तुम्हे आज जो भी बताऊंगा वो तुम सिर्फ अपने तक hi रखोगे.

महेंद्र सिंह राठौर के बात सुन कर मई कुछ सोच में पद गया फिर कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- ठीक है मई आपसे वडा करता हु की मई ये बात किसी से नहीं बताऊंगा.

महेंद्र- ठीक है तो सुनो इस आइसलैंड के कुल चार भाग है एक भाग में हम रहते है और बाकि के भागो में जंगल और पहाड़ है ये तो शायद तुम्हे पता hi होगा.

मई- जी ये सब मुझे सिकेन्द्र जी ने पहले hi बता दिया है आप आगे बताइये.

मेरी बात को सुन कर महेंद्र सिंह एक पल के लिए मुझे देखते है फिर वो कुछ सोचते हुए बोलते है.

महेंद्र- सिकेन्द्र ने आपको सही बताया है ये आइसलैंड 4 भागो में बता हुआ है लेकिन इस आइसलैंड का 3 भाग अभी हम जहा रहते है उसे भाग से बहुत बड़ा है इसके दो भाग में आपको जंगली जानवर मिलेंगे वो भी आम जंगली जानवर से ज्यादा ताकतवर और खतरनाक इस आइसलैंड पर पाए जाने वाले एक भेड़िया भी बहार के जंगल के 4 टाइगर 🐯 को अकेले संभल सकते है तो आप सोच लीजिये की बाकि के जानवर कितना ताकतवर होंगे.

महेंद्र के बात सुन कर मई हैरान हो गया मुझे यकीं hi नहीं हो रहा था की इस आइसलैंड पर इतना ताकतवर जानवर रहते होंगे लेकिन अगर महेंद्र सिंह राठौर अगर बोल रहे है तो सच hi बोल रहे होंगे फिर मई कुछ सोचते हुए महिंद्रा सिंह राठौर से बोलै.

मई- अगर इस आइसलैंड पर इतना ताकतवर जानवर है तो फिर आप लोग यहाँ इतने आराम से कैसे रहते है क्या वो जंगली जानवर आप लोगो पर अटैक नहीं करते.

मेरे बात को सुन कर तीनो मुस्कुराने लगे फिर मेरे बात का जबाब देते हुए सिकेन्द्र सिंह राठौर बोले.

सिकेन्द्र- नहीं वो सब छह कर भी हम पर अटैक नहीं कर सकते क्युकी ये पूरी जगह को हमले हाई वोल्टेज इलेक्ट्रिसिटी से घेर रखा है अगर वो सब यहाँ पर आये तो बे मौत मरे जायेंगे.

सिकेन्द्र सिंह राठौर के बात सुन कर मई समझ गया की ये लोग यहाँ पर फुल शेफेती के साथ रहते है.

मई- हम्म ये तो मई जान गया की आप सब यहाँ पर फुल शाफेट्य के साथ रहते है लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा है की इस आइसलैंड के जानवर इतना ताकतवर क्यों है.

मेरी बात को सुन कर वो लोग भी सोच में पद गए फिर संजय सिंह राठौर मुझसे बोले.

संजय- ये बात तो आज तक हम लोगो को भी समझ में नहीं आया हलाकि हमने ये जानने की बहुत कोशिश की लेकिन हमें कुछ भी पता नहीं चला.

संजय सिंह राठौर के बात सुन कर मई भी सोच में पद गया तभी मुझे ध्यान आया की मई जब यहाँ आ रहा था तो मुझे यहाँ पर बहुत साडी स्प्रिचैल स्टोन होने का आभास हुआ था और वो स्टोन जहा होगा वह की एनर्जी भी बहुत मजबूत होगी और उसी एनर्जी के कारन वो जानवर इतना ताकतवर हो गए होंगे मुझे ये समझ में आते hi मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी लेकिन मई अपने मुस्कान को छुपाते हुए उन लोगो से पूछा.

मई- अपने मुझे दूसरी और तीसरी भागो के बारे में तो बता दिया लेकिन चौथी भाग के बारे में कुछ भी नहीं बताया.

मेरी बात को सुन कर महेंद्र सिंह राठौर बोले.

महिंद्रा- हम्म बताता हु उसके बारे में भी बताता क्युकी तुमको जहा जाना है वो चौथी भाग hi है तुम जानते हो इस आइसलैंड का सबसे ज्यादा मिस्टीरियस भाग वही है और तो और उस भाग में बहुत सरे अनमोल खजाने भी है उस भाग से में एक दरवाजा है जो कहा जाता है किसी को पता नहीं है और आज तक उस दरवाजे को किसी ने भी नहीं खोल पाया है मैंने एक किताब में उस दरवाजे के बारे में पढ़ा था तो मुझे पता चला था की वो दरवाजा एक सीक्रेट भूमि का है लेकिन मुझे ये पता नहीं चला की उस सीक्रेट भूमि में क्या है और है मुझे वो जिनसेंग उसी दरवाजे के पास मिला था लेकिन उस दरवाजे तक जाना बहुत मुश्किल है क्युकी तीसरे भाग में दोनों भाग से ज्यादा खतरनाक जानवर रहते है उस भाग के जानवर इतना खतरनाक होते है की वो आसानी से किसी भी ग्रैंड मास्टर को मर सकते है मई जब वह गया था तो मेरे साथ 2 ग्रांडमास्टर थे लेकिन वापस कोई नहीं आया था और रही बात मेरी तो मई बीमार होने से पहले सुडो ग्रांडमास्टर लेवल पर था इस लिए मई खुद को बचा पाया था लेकिन शुक्र है की तीसरा भाग सबसे लास्ट में है इसलिए वह के कोई भी जानवर इधर नहीं आते है नहीं तो यहाँ पर रहना हमारे लिए बहुत मुश्किल हो जाता.

महेंद्र सिंह राठौर के बात सुन कर मई सोच में पद गया फिर कुछ देर सोचने के बाद मई बोलै.

मई- इस आइसलैंड के बारे में मुझे बताने के लिए और भी कुछ है क्या.

मेरी बात को सुन कर महिंद्रा सिंह राठौर बोले.

महेंद्र- नहीं अब इस आइसलैंड के बारे में और कुछ भी बताने लायक नहीं है एक बात यद् रखना मई तुम्हे इस आइसलैंड के बारे में जी भी बताया है उसे अपने पास hi रखना नहीं तो अगर ये बात बहार फ़ैल गयी तो इस आइसलैंड को हथियाने के लिए हमारे ऊपर हमले होने लगेंगे और मई नहीं चाहता की किसी की भी बुरी नजर मेरे इस आइसलैंड पर रहे.

मई- आप बेफिक्र रहिये ऐसा कुछ भी नहीं होगा और अब आप मुझे वो नक्शा दे दीजिये जिससे मई उस जगह तक पहुंच सकू और है मई अभी hi वह के लिए निकल रहा हु.

मेरी बात को सुन कर महिंद्रा सिंह ने है में गर्दन हिलाया और वो नक्शा मुझे दे दिया मई उस नक़्शे को लेने के बाद उसे ध्यान से देखने लगा तो मैंने देखा की जहा वो दरवाजा है वह पर रेड क्रॉस ❌ का मार्क लगाया हुआ है अभी मई उस नक़्शे को देख hi रहा था की तभी महेंद्र सिंह राठौर मुझसे बोले.

महेंद्र- तुम इस नक़्शे में वो रेड क्रॉस ❌ मार्क देख रहे हो न वही पर मुझे वो जिनसेंग मिला था और वो दरवाजा भी वही पर है.

मई- है मई समझ गया अब मुझे वह पर जाने की इजाजत दीजिये क्युकी मई जितना जल्दी आपको ठीक करूँगा उतना hi जल्दी मई घर जा पाउँगा.

इतना बोल कर मई वह से जाने लगा तभी महेंद्र सिंह राठौर मुझे बोले.

महिंद्रा- तुम्हे वह अकेले जाना ठीक नहीं है इस लिए मई चाहता हु की तुम सिकेन्द्र और सूर्य को अपने साथ लेकर जाओ.

महिंद्रा के बात सुन कर मई वही रुक गया और उनको ध्यान से देखने लगा फिर मई कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- देखिये अभी आप hi बोल रहे थे की वह पर बहुत खतरा है फिर आप इन लोगो को मेरे साथ क्यों भेज रहे है.

मेरी बात को सुन कर महेंद्र सिंह राठौर मुस्कुराते हुए बोले.

महेंद्र- वह पर खतरा है इस लिए तो मई इन दोनों को तुम्हारे साथ भेज रहा हु क्युकी सिकेन्द्र ग्रांडमास्टर लेवल के पिछ पर है वो कभी भी सुडो ग्रांडमास्टर लेवल में जा सकता है तो वही सूर्य भी ग्रांडमास्टर लेवल में मध्यम में है इस लिए ये लोग रस्ते में तुम्हे बहुत काम आएंगे.

महेंद्र सिंह के बात सुन कर मई कुछ देर तक सोचता रहा फिर अपना गर्दन है में हिला दिया इसके बाद अपने जेब में हाथ दाल कर अपने स्टोरेज रिंग से 2 संजीवनी गोली निकला सिकेन्द्र को देते हुए बोलै.

मई- ठीक है अगर आपको मेरे साथ चलना है तो चलिए लेकिन उससे पहले आप और सूर्य ये पिल खा लीजिये जिससे दोनों के लेवल और बढ़ जायेंगे.

मेरी बात को सुन वह मौजूद सरे लोग हैरान हो गए और ध्यान से संजीवनी पिल को देखने लगे तभी सिकेन्द्र उस पिल को देखते हुए मुझसे बोलै.

सिकेन्द्र- क्या सच में ये पिल मेरे लेवल को बढ़ा सकता है.

मई- है बिलकुल ये आपके लेवल को बढ़ा सकता है और सिर्फ आपकी लेवल hi नहीं बढ़ेगी बल्कि आपके अंदर मौजूद साडी गन्दगी को निकल देगी और आप पहले से ज्यादा जवान दिखने लगेंगे इस पिल की और भी बहुत खुबिया है जो आपको इसे खाने के बाद पता चलेगा.

मेरी बात को सुन कर सब कभी मुझे तो कभी उस पिल को देख रहे थे सबके मन में उस पिल को पाने की लालच थी लेकिन कोई कुछ बोलै नहीं तभी महेंद्र सिंह राठौर बोले.

महेंद्र- ुंबलीवबले ऐसा नहीं हो सकता मैंने अपनी इतनी उम्र में ऐसे किसी पिल के बारे में नहीं सुना.

संजय- है डैड आप सही बोल रहे है मैंने भी आज तक नहीं सुना की कोई पिल किसी की जवानी लौटा सके.

उन दोनों के बात सुन कर सिकेन्द्र कुछ सोचते हुए बोले.

सिकेन्द्र- लेकिन मुझे ऐसी hi एक पिल के बारे में पता है जो कुछ दिन बाद मुंबई में ऑक्शन होने वाला है कही वो यही पिल तो नहीं है.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- अपने बिलकुल ठीक बोलै वो यही पिल है दरअसल उस ऑक्शन में मई hi इस पिल को नीलम करने वाला हु.

मेरी बात को सुन कर वो सब और हैरान हो गए तभी महेंद्र सिंह राठौर मुझसे बोले.

महेंद्र- तो इसका मतलब की इस पिल को अपने hi बनाया है और वैसे इस पिल का नाम क्या है.

मई- है अपने सही बोलै इस पिल को मैंने hi बनाया है और मई इसका नाम संजीवनी गोली रखा है अब बाटे बहुत हो गयी (सिकेन्द्र से) आप ये दोनों पिल लीजिये एक पिल खुद खा लीजियेगा और एक पिल सूर्य को दे दीजियेगा ( फिर संजय और महेंद्र सिंह राठौर को देखते हुए) आप दोनों चिंता मत कीजिये मई वापस लौट कर आप दोनों को भी ये पिल दूंगा.

मेरी बात को सुन कर वो दोनों खुस हो गए फिर सिकेन्द्र मेरे पास आया और मेरे हाथ से दोनों पिल ले कर रूम से बहार चला गया इसके बाद वो सीधा सूर्य के पास गया और उसे साडी बाटे बता कर एक पिल उसे खाने के लिए दिया और एक पिल वो खुद खा लिया उस पिल के खाने के बाद दोनों वही पर ट्रेनिंग करने लगे करीब 1 घंटे बाद दोनों के शरीर से एक कांच टूटने की आवाज आयी और साथ hi साथ उस रूम में एक अजीब सी बदबू फैल गयी.

जैसे hi उन दोनों के नक् में वो बदबू गया तो दोनों की आंखे खुल गयी जब वो दोनों अपना अपना आँख खोल कर अपने आस पास देखा तो दोनों चौक गए क्युकी वो बदबू उन दोनों के hi शरीर से आ रही थी जब उन दोनों ने अपना ध्यान अपने शरीर पर दिया तो पाया की उनके शरीर से काळा रंग का चिप छिपा पदार्थ निकल रहा है और ये बदबू उसी जेली जैसे चिप छिपे पदार्थ से आ रहा है तो दोनों तुरंत भागते हुए अपने अपने रूम के बाथरूम में गए और नहाने लगे थोड़ी देर बाद दोनों नाहा कर बहार आये उन्होंने देखा की उनके शरीर पर पहले से ज्यादा चमक आ गया है और वो पहले से ज्यादा खुद को ताकतवर महसूस कर रहे थे जब दोनों ने अपना लेवल देखा तो दोनों के खुसी का ठिकाना नहीं रहा फिर दोनों जल्दी से रेडी हो कर बहार आये और महेंद्र सिंह के रूम में आ गए.

जब महेंद्र और संजय ने दोनों को देखा तो दोनों हैरान हो गए और बस आंखे फाडे फाडे उन दोनों को hi देखे जा रहे थे उन्होंने जो देखा उसे देख कर उन दोनों को बिस्वास hi नहीं हो रहा था दरअसल बात ऐसी थी की जब दोनों ने संजीवनी गोली खाया तो उनका लेवल बढ़ गया था जहा सूर्य ग्रांडमास्टर के मध्यम लेवल से सुडो ग्रांडमास्टर मास्टर के प्राइमरी लेवल पर आया था तो वही सिकेन्द्र ग्रांडमास्टर के पिछ से सीधा सुडो ग्रांडमास्टर के मध्यम लेवल में पहुंच गया था और साथ में उनके चेहरे का तेज़ भी बढ़ गया था अब वो पहले से और जवान दिखने लगे थे तभी सिकेन्द्र सिंह राठौर मेरे पास आये और मुझसे बोले.

सिकेन्द्र- आपका बहुत बहुत सुक्रिया डॉ. प्रतिक आज आपने मेरे लेवल को बढ़ा कर मेरे ऊपर एक अहसान चढ़ा दिया है पता नहीं मई और कितने दिन में सुडो ग्रांडमास्टर के लेवल पर पहुंच पता लेकिन आपके इस एक पिल ने मेरी किस्मत बदल दी मई आपके इस उपकार का बदला एक दिन जरूर चुकाऊंगा.

सूर्य- हलाकि सच कहु तो मई आपको बिलकुल पसंद नहीं करता था लेकिन आज अपने बिना कोई स्वार्थ के मेरी मदत कर के मेरे ऊपर एक उपकार कर दिया है आप जानते है मुझे लगा था की मई कभी भी सुडो ग्रांडमास्टर के लेवल पर नहीं पहुंच पाउँगा इस लिए आज से मई आपको अपना गुरु माँगा हु और आपके लिए मई कभी भी अपना जान देने के लिए तैयार रहूँगा.

महेंद्र- मन गया मई तुमको और तुम्हारे संजीवनी गोली को वो पिल सच में संजीवनी कहलाने लायक है पहले अपने मुझे ठीक कर के मेरे ऊपर एहसान किया था लेकिन अब आप मेरे बेटे और पोते की मदत कर के मेरे ऊपर सबसे बड़ी एहसान किया है इस लिए आप मुझे इस एहसान को उतरने का एक मौका दीजिये आप दिल खोल कर मांगिये आपको जो चाहिए होगा वो मई आपको देने का वडा करता हु.

संजय- है प्रतिक डैड सही बोल रहे है आज तक मेरे परिवार में डैड को और मेरे सबसे छोटे भाई को छोड़ कर कोई भी सुडो ग्रांडमास्टर लेवल पर नहीं पंहुचा था लेकिन तुमने मेरे परिवार में और दो सुडो ग्रांडमास्टर लेवल का योद्धा दे दिया तुम जानते हो प्रतिक हमारे परिवार के बहुत सरे दुश्मन है और हमें उन दुश्मनो से दर कर रहना पड़ता था लेकिन अब मेरे परिवार में 2 और सुडो ग्रांडमास्टर लेवल के योद्धा हो गए जिससे अब हमें किसी से डरना नहीं पड़ेगा काश की ये सब आज से 15 साल पहले हुआ होता तो मेरे भाई उसकी बीवी और मेरा भतीजा सब सही सलामत हमारे साथ होते.

संजय के बात सुन कर वह मौजूद सरे लोग चौक गए यहाँ तक की मई भी चौक गया था सरे लोगो के चौकने का कारन था की जो बात अभी संजय बोल गया था उस बात को किसी भी अनजान आदमी के सामने बोलना मन था इधर मुझे उस बात को सुन कर बड़ा अजीब लगा और मुझे कुछ देर के लिए धुंधला धुंधला का कुछ दृस्य दिखाई देने लगा और फिर वो सरे दृस्य गायब हो गए इस लिए मुझ कुछ समझ नहीं पाया की वो दृस्य क्या था इस लिए मई उस दृस्य से अपना ध्यान हटा का संजय सिंह से पूछा.

मई- ऐसा क्या हुआ था आपके परिवार के साथ 15 साल पहले.

मेरे बात को सुन के वह मौजूद सरे लोग घबरा गए वो नहीं चाहते थे की ये बात मुझे या किसी अनजान आदमी को पता चले इस लिए महेंद्र सिंह राठौर बात को बदलते हुए मुझसे बोले.

महेंद्र- अरे छोडो ये सब बात को और मुझे बताओ की तुम्हे क्या चाहिए तुम्हे जो भी चाहिए दिल खोल कर मांग सकते हो.

महेंद्र सिंह राठौर के बात सुन कर मई कुछ देर के लिए सोच में पद गया फिर मई कुछ देर तक सोचने के बाद बोलै.

मई- अभी हमें जिनसेंग खोजने जाना है इस लिए हमें देर हो रही है रही बात आपसे मांगे की तो अभी मुझे कुछ भी नहीं चाहिए जब मुझे किसी चीज की जरुरत होगी मई आपसे मांग लूंगा.

महेंद्र- ठीक है तो तुम्हारा मेरे ऊपर ये एक उधर रहा तुम्हे जब भी लगे की तुम्हे कुछ चाहिए तो बेझिझक मुझसे मांग लेना मई वडा करता हु की मई तुम्हे वो चीज देने से मन नहीं करूँगा.

मई- जी जरूर ठीक है अब हम चलते है.

इतना बोल कर मई सिकेन्द्र और सूर्य वह से जाने लगा तो महेंद्र सिंह राठौर हमसे बोले.

महेंद्र- तुम सब ध्यान से जाना और अपना ख्याल रखना अगर तुम लोगो को लगे की अब तुम्हारी जान पर खतरा है तो तुम सब वापस आ जाना.

मई- ठीक है.

इसके बाद हम सब वह से निकल गए वह से निकलने के बाद हम तीनो सीधा दूसरे भाग में जाने वाले रस्ते के पास तो वह पर एक गेट थे और उसके ऊपर बिजली तर लगे हुए थे जिसने हाई वोल्टेज करंट पास हो रहा था जब हम वह पर पहुंचे तो सिकेन्द्र जाकर वह के गॉर्ड के कुछ बात किया इसके बाद कुछ देर के लिए इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई की बंद कर दिया इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई बंद होते hi हमलोग उस गेट से बहार निकल गए हम लोग को बहार निकलते hi फिर से इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई चालू कर दिया गया.

इधर हम गेट से बहार निकल कर दूसरे भाग में जंगल के अंदर जाने लगे जंगल में जाने के लिए कोई रास्ता नहीं बना था इस लिए हम पैदल hi जा रहे थे जब हम जंगल में थोड़ी दूर अंदर आ गए तो मई सिकेन्द्र से बोलै.

मई- हम जंगल के काफी अंदर आ गए है अगर लोकेशन तक जल्दी पहुंचना है तो हमें यहाँ से उड़ कर जाना होगा.

मेरी बात को सुन कर दोनों ने अपना सर है में हिला दिया इसके बाद हम तीनो हवा में उड़ते हुए अंदर की और जाने लगे ऊपर से हमें जंगल के अंदर जंगली जानवर दिखाई दे रहे थे जो दिखने में बहुत खूंखार लग रहे थे मई उनको देख कर समझ गया की महेंद्र सिंह राठौर को बोल रहे थे वो बिलकुल सच बो रहे थे थोड़ी दूर तक आने के बाद हम तीसरे भाग में पहुंच गए तीसरे भाग में दूसरे भाग से ज्यादा खतरनाक जानवर दिख रहे थे लेकिन उनसे हमें कोई प्रॉब्लम नहीं हुयी क्युकी हम उस जंगल को उड़ कर पर कर रहे थे थोड़ी देर में हम तीसरे भाग को पर कर के चौथे भाग में पहुंच गए.

अब हम इस भाग में उड़ कर नहीं जा सकते थे क्युकी अब हमें इस भाग में नक़्शे के अनुसार चलना था इस लिए हम तीनो निचे उतर गए और पैदल hi आगे बढ़ गए इस जंगल में बहुत hi शुद एनर्जी बाह रही थी इससे ये पता चल रहा था की मई जो स्प्रिचैल स्टोन का पहाड़ इस आइसलैंड पर महसूस किया था वो इसी भाग में है मेरा मन तो हो रहा था की मई एक बार जा कर उस पहाड़ को धुन्धु लेकिन फिर सोचा की जिस काम से मई यहाँ आया हु पहले वो किया जाये ये सोच कर मई आगे बढ़ना hi सही समझा.

अभी हम उस जंगल में कुछ अंदर आये hi थे की तभी हमें एक तेज़ दहाड़ सुनाई दी जिसे सुन कर एक पल के लिए हम सब की हालत hi ख़राब हो गयी जब हम सब उस दहाड़ के तरफ घूम कर देखा तो सूर्य और सिकेन्द्र के हालत और ख़राब हो गयी थी हलाकि हालत तो मेरी भी ख़राब हुयी थी लेकिन मई उन दोनों से बेहतर कंडीशन में थे.

हमारी हालत ख़राब होने के कारन यह था की हमारे सामने एक विशालकाय टाइगर खड़ा था जिसकी लम्बाई काम से काम 12 से 15 फ़ीट होगा और उचाई किसी हठी के जैसा था ये देख कर तो हम सब की हालत ख़राब होनी थी क्युकी हमने आज से पहले इतने खतरनाक जानवर नहीं देखा था.

वो टाइगर हमें hi देख कर दहाड़ रहा था ऐसा लग रहा था की वो किसी भी वक़्त हम पर हमला कर सकता था हलाकि उसे देख कर पहली पहली बार हम तीनो hi दर गए थे लेकिन अब हमारे चेहरे पर दर नहीं दिखाई दे रहा था सूर्य तो कुछ ज्यादा hi एक्ससिटेड था वो एक्ससिटेमेंट के साथ बोलै.

सूर्य- ये बहुत सही समय पर मिला है मई सोच hi रहा था की मई अपने सुडो ग्रांडमास्टर की ताकत का कहा टेस्ट करू चलो अब ये मिल गया है तो मई इस पर hi टेस्ट कर ले रहा हु.

सूर्य के एक्ससिटेमेंट देख कर मई और सिकेन्द्र मुस्कुराने लगा तभी सिकेन्द्र सीरियस आवाज में सूर्य से बोलै.

सिकेन्द्र- थोड़ा संभल कर उससे लड़ना और है अगर तुम्हे लगे की तुम उसे संभल नहीं सकते तो मुझे आवाज लगा देना.

सूर्य- ठीक है.

इतना बोल कर सूर्य अपने सुडो ग्रांडमास्टर के शक्तिया जागृत करते हुए उस टाइगर के तरफ बढ़ गया उधर टाइगर ने जब देखा की एक लड़का उसके तरफ हमला करने आ रहा है तो वो घुसे से एक तेज़ दहाड़ लगाया और सूर्य पर हमला करने के लिए तेज़ी से उसके तरफ आने लगा उसकी स्पीड देख कर एक बार फिर हम लोग हैरान हो गए क्युकी उसका स्पीड किसी ग्रांडमास्टर लेवल के योद्धा से भी ज्यादा था इस लिए वो पालक झपकते hi सूर्य के पास पहुंच गया और एक छलांग लगते हुए सूर्य पर अटैक किया लेकिन सूर्य बड़ी आसानी से उससे बच गया.

इधर अपने हमले को खली जाता देख कर टाइगर को और गुसा आ गया और वो घुसे से एक तेज़ दहाड़ लगाया और फिर से सूर्य पर हमला करने के लिए उसके तरफ बढ़ गया िश बार टाइगर ने छलांग लगते हुए अपने पंजे से सूर्य पर अटैक किया इधर सूर्य पहले से hi उसके हमले के लिए तैयार था लेकिन वो उस टाइगर के स्पीड को को काम आंक लिया जिसके कारन उससे एक चूक हो गयी और उस टाइगर का पंजा आ कर उसके बाह से टकरा गया.

जैसे hi उस टाइगर का पंजा सूर्य के बाह से टकराया सूर्य उड़ते हुए थोड़ी दूर जा कर गिरा लेकिन उसे ज्यादा कुछ नहीं हुआ इस लिए वो तुरंत उठ कर खड़ा हो गया और उस टाइगर को देखते हुए बोलै.

सूर्य- बहुत हो गयी तेरी हमला अब मेरे हमले की हमला करो.

इतना बोल कर सूर्य भागते हुए उस टाइगर के तरफ जाने लगा सूर्य के स्पीड उस टाइगर से ज्यादा थी जिसके कारन वो पालक झपकते hi टाइगर के पास पहुंच गया और छलांग लगा कर एक मुका टाइगर के मुँह पर दे मारा टाइगर सूर्य के इस हमले के लिए तैयार नहीं था इस लिए वो सूर्य के मुके से उड़ता हु पीछे जा गिरा हलाकि सूर्य के इस हमले से टाइगर को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था लेकिन उसके घुसे को जरूर भड़का दिया था.

वो टाइगर समझ गया था की उसके सामने जो उसका दुश्मन खड़ा है वो कही से भी कमजोर नहीं है इस लिए वो एक तेज़ दहाड़ लगाया उस टाइगर के दहाड़ में इतनी ताकत थी की आस पास के पेड़ पौधे उखड कर उड़ने लगे इधर सूर्य पर भी उस दहाड़ का असर हुआ और वो उड़ते हुए पीछे जाने लगा लेकिन रस्ते में hi वो खुद को किसी तरह से संभाला और अपनी तलवार निकल ली अभी उसने जो तलवार निकली थी वो उस तलवार का हमेशा अपने साथ रखता था यह तलवार हाई कार्बन स्टील और स्प्रिंग स्टील के मिला कर बनाया गया था जिससे ये बहुत ज्यादा मजबूत था इसके एक वॉर से किसी लोहे को भी कटा जा सकता था.

सूर्य अपना तलवार निकल कर उस टाइगर के तरफ बढ़ गया सूर्य को अपने तरफ आता हुआ देख कर टाइगर एक तेज़ दहाड़ लगाया और वो भी सूर्य के तरफ बढ़ गया दोनों तेज़ी से एक दूसरे के तरफ बढ़ रहे थे फिर दोनों एक दूसरे के नजदीक पहुंचे तो दोनों हवा में छलांग लगा दिया इधर सूर्य मजबूती से अपने तलवार को पकड़ कर हवा में छलांग लगाया और अपने तलवार से टाइगर पर हमला कर दिया इधर वो टाइगर भी हवा में छलांग लगा कर अपने नुकीले पंजे से सूर्य पर हमला कर दिया लेकिन टाइगर के हमला सूर्य के हमले से थोड़ा स्लो था जिसके कारन सूर्य के तलवार उस टाइगर के गले को आधा काटते हुए पर वो गया और वो टाइगर धाम से वही गिर गया और तड़पते हुए मर गया.

उस टाइगर को मरते हुए सूर्य हवा से कलाबाजी करते हुए निचे जमीं पर आया और उस टाइगर के पास जा कर खड़ा हो गया और गर्व के साथ बोलै.

सूर्य- ये मामूली सा टाइगर मुझ जैसे सुडो ग्रांडमास्टर लेवल के योद्धा से लड़ने चला था बेचरा आखिर में मारा hi गया.

सूर्य के बात सुन कर मई और सिकेन्द्र दोनों मुस्कुराने लगे अभी मई मुस्कुरा hi रहा था की तभी मेरे विशंस में एक तस्वीर आया उस तस्वीर में ऐसे hi कोई एक जानवर से लड़ रहा था और आखिर में वो उस जानवर को मर दिया इसके बाद वो उस जानवर के छाती को फाड् कर एक स्टोन जैसा कुछ निकला जो चमक रहा था वो आदमी उस स्टोन को देख कर मुस्कुराते हुए बोलै बीस्ट स्टोन और फिर मेरा विज़न गायब हो गया मुझे पता hi नहीं चला की ये विज़न क्यों और कैसे आया और इस विज़न में जो आदमी था वो कोण था क्युकी उसका चेहरा मुझे नहीं दिखाई दे रहा था खैर मुझे उस विज़न को देख कर कुछ समझ में आया तो मई आगे बढ़ते हुए उस टाइगर के पास चला गया और अपना चाकू निकल कर उस टाइगर के छाती को फाड् दिया इधर सूर्य और सिकेन्द्र मुझे ऐसा करते हुए देख कर हैरान हो गए तभी सिकेन्द्र मेरे पास आये हुए बोलै.

सिकेन्द्र- अरे प्रतिक तुम ये क्या कर रहे हो ये तो मर चूका है फिर तुम इसके छाती पर वॉर क्यों कर रहे हो.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई कुछ नहीं बोलै बस अपना काम करते रहा मई उस टाइगर के छाती को कैसे hi फाड़ा तो उसमे से मुझे कुछ चमकता हुआ दिखाई दिया जिसे देख कर मई और वो दोनों यानि की तीनो हैरान रह गए फिर मई उस टाइगर के छाती से वो चमकते हुए स्टोन को उठा लिया ये स्टोन मेरे विज़न वाले स्टोन से काम चमकदार और छोटा था इधर दोनों मेरे मेरे हाथ में स्टोन को देख कर चौक गए तभी सूर्य मुझसे बोलै.

सूर्य- ये आखिर है क्या चीज और ये इस टाइगर के शरीर में कहा से आया.

सूर्य के बात सुन कर मई उस स्टोन को देखते हुए बोलै.

मई- मई ये तो नहीं जनता की ये स्टोन इस टाइगर के शरीर में कहा से आया लेकिन शायद मई इसका नाम जनता हु इसका नाम है बीस्ट स्टोन.

मेरे बात को सुन कर दोनों कन्फूसिओं से मुझे घूरने लगे तभी सिकेन्द्र मुझसे बोलै.

सिकेन्द्र- अगर तुम्हे ये नहीं पता की ये इसके शरीर में कैसे आया तो ये तो जरूर पता होगा की ये बीस्ट स्टोन किस काम में उसे होता है और इस स्टोन से जैसा एनर्जी आ रहा है उस हिसाब से कोई मामूली चीज नहीं लग रही है.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- आप वेट कीजिये मई अभी पता लगा कर बताता हु की ये इस जानवर के शरीर में कैसे आया और इसका इस्तेमाल क्या है.

ये बोल कर मई वही ध्यान में बैठ गया और गुरुदेव से मानसिक तरंगो द्वारा संपर्क किया जैसे hi मई अपने मानसिक तरंगो से गुरुदेव से बात करने की कोशिश की वैसे hi उधर से गुरुदेव का आवाज आया.

गुरुदेव- बोलो पुत्र प्रतिक तुम मुझे कैसे यद् किया.

मई- प्रणाम गुरुदेव.

गुरुदेव- यशस्वी भाव पुत्र.

मई- गुरुदेव मुझे एक टाइगर मिला है जो आम टाइगर से ज्यादा बड़ा और ताकतवर था वो इतना इतना ताकतवर था की एक सुडो ग्रांडमास्टर लेवल के योद्धा को कड़ी टक्कर दे रहा था लेकिन आखिर में वो मारा गया लेकिन गुरुदेव मुझे उसके अंदर से एक स्टोन मिला है जिसमे से चमक और शरिया निकल रही है तो क्या आप बता सकते है की वो स्टोन क्या है और वो उस टाइगर के अंदर कहा से आया.

मेरे बातो को सुन कर गुरुदेव थोड़ी देर तक हैरान रहे और फिर उत्साहित आवाज में मुझसे बोले.

गुरुदेव- तुम्हे ऐसा टाइगर कहा मिला क्या कही तुम मार्टिकल आर्ट्स की दुनिया में तो नहीं चले गए जिसे सब सीक्रेट स्पेस भी बोलते है.

मई- नहीं गुरुदेव मई किसी भी सीक्रेट स्पेस में नहीं गया बल्कि मई अभी मुंबई से थोड़ी दूर पर स्थित एक आइसलैंड पर हु और मुझे वो टाइगर यही पर मिला है.

मेरे बात को सुन कर गुरुदेव इस बार और हैरान हो गए और वो उसी हैरानी के साथ बोले.

गुरुदेव- ये आशम्भव है ऐसा नहीं हो सकता तुम जिस तरह के टाइगर की बात कर रहे हो वो ऐसा टाइगर और वैसा hi दूसरे जानवर ऐसे hi किसी भी जगह पर नहीं मिल सकते वो सब तो सिर्फ सीक्रेट स्पेस में hi मौजूद है तो ऐसा कैसे हो सकता है की तुम्हे ऐसा टाइगर कैसे मिल गया.

मई- गुरुदेव मई सच बोल रहा हु मई भला आपसे झूठ क्यों बोलूंगा और वैसे भी आप जानते है की मई आपसे कभी भी झूठ नहीं बोल सकता.

मेरी बात को सुन कर गुरुदेव कुछ देर के लिए चुप हो गए फिर वो मुझसे बोले.

गुरुदेव- अच्छा तुम मुझे एक बात बताओ क्या तुम अभी जहा हो वह का एनर्जी में स्प्रिचैल एनर्जी ज्यादा मात्रा में है क्या.

मई- जी गुरुदेव यहाँ का स्प्रिचैल एनर्जी बहुत शुद्ध है और यहाँ पर स्प्रिचैल स्टोन का एक पहाड़ भी है.

मेरी बात कोण सुन कर गुरुदेव खुसी के साथ बोले.

गुरुदेव- अगर तुम जो बोल रहे हो वह पर वैसा hi है तो वो जानवर स्प्रिचैल एनर्जी के चलते विक्षित हो गया है अब वो जानवर से एक बीस्ट में बदल गया है और तुम्हे जो उस टाइगर के अंदर से मिला है उसे बीस्ट स्टोन बोलते है ये बीस्ट स्टोन बीस्ट का नाभि में होता है जो एक बीस्ट को विक्षित होने के बाद उनके शरीर में बनता है और है अगर वह पर स्प्रिचैल स्टोन का पहाड़ है तो जरूर वह पर और भी विक्षित हुए बीस्ट होंगे वैसे तुम्हे डरने की जरुरत नहीं है क्युकी अगर उस बीस्ट को एक सुडो ग्रांडमास्टर लेबल के आदमी मर पाया है इसका मतलब है की वो अभी रैंक 1 का बीस्ट था लेकिन तुम सावधान रहना क्युकी वह पर रैंक 2 या उसके ऊपर के भी बीस्ट मिल सकते है.

गुरुदेव के बात सुन कर मई सब समझ गया और लेकिन मुझे ये जान कर हैरानी हुयी की ये जानवर स्प्रिचैल स्टोन के चलते विक्षित हुआ था.

मई- वह तो ऐसा है वैसे इस बीस्ट स्टोन का उपयोग क्या होता है गुरुदेव.

गुरुदेव- बीस्ट स्टोन का उपयोग हम बहुत तरह से कर सकते है जैसे हम इस स्टोन से इसकी शक्तियों को शोख कर अपना शक्ति को बढ़ा सकते है इससे हम आत्मिक हथियार भी बना सकते है और तो और इसका उपयोग बहुत तरह के दवा बनाने में भी होता है बीस्ट स्टोन रैंक 1 से ले कर रैंक 10 तक के होते है और इसका रैंक उस बीस्ट पर आधारित होता है जिस बीस्ट से ये निकलता है अगर बीस्ट रैंक 1 के है तो उसमे बीस्ट स्टोन रैंक 1 का hi होगा और मेरे हिसाब से अभी तुम्हारे सामने जो बीस्ट स्टोन है वो रैंक 1 का hi होगा क्युकी रैंक 2 या उसके ऊपर के रैंक के बीस्ट को मरना एक सुडो ग्रांडमास्टर के बस की बात नहीं है.

गुरुदेव से साडी बाटे जानने के बाद मई उनसे अपना संपर्क समाप्त कर दिया और फिर उन दोनों को साडी बाटे बता दिया जिसे सुन कर सूर्य बहुत खुस हो गया तो वही सिकेन्द्र उदास होते हुए बोले.

सिकेन्द्र- वह मेरे हाथ से अपना शक्ति बढ़ने का एक सुनहरा मौका छूट गया.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई और सूर्य दोनों मुस्कुराने लगे फिर मई उन दोनों से बोलै.

मई- सूर्य अभी हमारे पास थोड़ा समय है इस लिए तुम इस बीस्ट स्टोन के शक्तियों को शाखा कर अपना शक्ति बढ़ा लो लेकिन यद् रखना ये बीस्ट स्टोन के जानवर के अंदर से निकला है इस लिए इसका शक्ति भी जंगली hi होगा तुम्हे इस बीस्ट स्टोन से शक्ति को सोखने के बाद उसके जंगली शक्ति को अपने काबू में कर के नस्ट करना hi होगा और आप सिकेन्द्र जी आप चिंता मत कीजिये मेरे हिसाब से इस जंगल में ऐसे बहुत सरे बीस्ट होंगे तो आपको भी किसी न किसी जानवर से उसका बीस्ट स्टोन हासिल करने का मौका जरूर मिलेगा.

मेरे बात को सुन कर दोनों अपना सर है में हिला दिया इसके बाद सूर्य तुरंत वही ध्यान में बैठ गया और उस बीस्ट स्टोन से शक्तियों को अपने वणरवर लगा जब उस बीस्ट स्टोन के श्री शक्तिया सूर्य के शरीर में चला गया तो वो बीस्ट स्टोन धूल बन कर बिखर गया इसके बाद सूर्य अपने शरीर में गए हुए बीस्ट स्टोन के शक्तियों को अपने शरीर में बने शक्ति चक्र में भेजने लगा

( शक्ति चक्र- जब कोई योद्धा ग्रांडमास्टर लेवल पर पहुँचता है तो उसके शरीर में उसके नाभि के पास एक शक्ति चक्र बन जाता है अगर कोई योद्धा उस शक्ति चक्र को नस्ट कर दे तो जिस योद्धा के शक्ति चक्र नस्ट हुआ है वो पुनः हाफ ग्रांडमास्टर के लेवल पर आ जाता है और वो उसके आगे कभी भी अपना कल्टीवेशन नहीं कर सकता है लेकिन अगर किसी के शक्ति चक्र गोल्डन कलर में बदल जाये जो की नामुमकिन है उसे कोई भी मस्त नहीं कर सकता है और अगर वो किसी तरह से नस्ट भी हो यद् तो वो योद्धा पुनः अपना कल्टीवेशन कर सकता है.)

इधर सूर्य बीस्ट स्टोन के शक्ति को अपने शक्ति चक्र में भेजने लगा जैसे hi उस शक्ति को आभास हुआ की कोई उसे अपने काबू में कर रहा है और उसे अपने शक्ति चक्र में भेज रहा है तो वो बीस्ट स्टोन की शक्ति बेकाबू होने लगी और उसमे से खतरनाक जंगली शक्ति निकलने लगी और वो जंगली शक्ति सूर्य के शक्ति चक्र को नस्ट करने की कोशिश करने लगी जिसके कारन सूर्य के मुँह नक् और कण से खून निकलने लगा.

सूर्य के शरीर से खून निकलता देखा कर मई और सिकेन्द्र दोनों हैरान हो गए सिकेन्द्र तो सूर्य के शरीर से खून निकलता देख कर परेशां हो गया और उसे सूर्य की बहुत बहुत चिंता होने लगी इधर सूर्य के शरीर से खून निकल रहा था लेकिन वो अपना जिद नहीं छोड़ रहा था उसने सोच रखा था की चाहे आज उसके साथ कुछ भी हो जाये लेकिन वो इस शक्ति को अपने शक्ति चक्र में भेज कर hi रहेगा इस लिए वो इतना कष्ट सहते हुए भी ध्यान में बैठा रहा और उस जंगली शक्ति को काबू करने की कोशिश करता रहा.

उसकी इस तरह से अपने जिद पर ऐडा हुआ देख कर मई मुस्कुराने लगा और फिर धीरे धीरे सूर्य के पास गया और अपने अंदरूनी शक्ति को उसके शरीर में भेज कर जंगली शक्ति को काबू करने में उसको मदत करने लगा थोड़ी देर प्रयास करने के बाद आखिर में वो उस जंगली शक्ति को अपने शक्ति चक्र में भेज hi दिया जैसे hi वो जंगली शक्ति सूर्य के शक्ति चक्र में गया तो वो जंगली शक्ति एक शुद्ध शक्ति में बदल गयी और सूर्य के लेवल बढ़ने लगा उसका लेवल बढ़ कर सुडो ग्रांडमास्टर में के मध्यम लेवल में पहुंच गया इसके बाद सूर्य अपने ध्यान से उठा गया लेकिन वो अभी कमजोर लग रहा था क्युकी उस जंगली शक्ति ने उसे अंदरूनी जखम दे दिया था मैंने जब सूर्य के हालत को देखा तो अपने जेब में हाथ दाल कर उसमे से एक इंस्टेंट रिकवरी पिल निकला और उसे देते हुए बोलै.

मई- तुम इसे खा लो थोड़ी देर में तुम बिलकुल ठीक हो जाओगे.

मेरी बात को सुन कर सूर्य बिना कोई सवाल किये मेरे हाथ से वो पिल लिया और उसे खा लिए पिल खाने के करीब 10 मिनट बाद सूर्य के जखम बिलकुल ठीक हो गए इसके बाद हम तीनो वह से आगे बढ़ गए करीब दो घंटे चलने के बाद हम उस जंगल के बीचो बिच पहुंच गए थे हम सब को इस जंगल के सेण्टर तक पहुंचने में 2 घंटे इस लिए लग गए की हमें रस्ते में बहुत सरे जानवर मिले जिससे निपटने में हमें समय मिल गया हलाकि इस टाइगर के बाद हमें उसके जितना ताकतवर बीस्ट नहीं मिले थे जिसके कारन सूर्य और सिकेन्द्र उन सब को आसानी से निपटा दे रहे थे.

जंगल के सेण्टर में पहुंचने के बाद मैंने एक बार फिर से नक्शा निकला और उसे देखने लगा नक़्शे के हिसाब से वो जगह यहाँ से करीब 2 किलोमीटर के दुरी पर था अगर हम सब को रस्ते में कोई खतरनाक जानवर नहीं मिला तो हम 15 से 20 मिनट में उस जगह पर पहुंच जायेंगे ये सोच कर मई उन सब को चलने का इशारा किया और जिस तरफ वो गुफा था उसी तरफ जाने लगे अभी हम कुछ दूर चले hi थे की तभी मुझे पीछे से सिकेन्द्र के जोर से छिलने के आवाज आयी जैसे hi मैंने सिकेन्द्र के छिलने का आवाज सुना तो तुरंत मई पीछे मुद कर देखा तो जो मुझे दिखा उसे देख कर मई हैरान हो गया था क्युकी हमारे पीछे एक विशालकाय पाइथन अपने पूछ में सिकेन्द्र को जकड़े हुए खड़ा था और अपना मुँह खोल कर सिकेन्द्र को निगलने जा रहा था जैसे hi मैंने देखा की वो पाइथन किसी भी वक़्त सिकेन्द्र को निगल सकता है तो मई पालक झपकते hi उस पाइथन के पास पहुंच गया और उसके पूछ पर एक जोरदार मुझे से हमला किया मेरा मुजा लगते hi वो पाइथन सिकेन्द्र को छोड़ दिया और घुसे से मुझे देख कर फुफकारने लगा इधर मई सिकेन्द्र को उस पाइथन से छुट्टे देख कर उससे पूछा.

मई- क्या आप ठीक है.

सिकेन्द्र- है मई ठीक हु इस पाइथन ने पीछे से मेरे ऊपर अटैक कर दिया था नहीं तो मई इसे इसकी औकात देखा देता.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- जो आप पहले नहीं कर पाए वो अब कर लीजिये और दिखा दीजिये इस पाइथन को उसकी औकात.

मेरी बात को सुन कर सिकेन्द्र अपने शरीर से शक्तियां निकलते हुए उस पाइथन से भीड़ गया दोनों में भयंकर लड़ाई होने लगी लेकिन सिकेन्द्र को उस पाइथन से लड़ने में बहुत प्रॉब्लम हो रहा था क्युकी वो पाइथन उस टाइगर से ज्यादा ताकतवर लग रहा था मेरे हिसाब से ये पाइथन या तो दूसरे रैंक का जानवर था या फिर ये दूसरे रैंक पर पहुंचने वाला.

इधर पाइथन और सिकेन्द्र दोनों लड़ hi रहे थे तभी पाइथन ने अपने पूछ से सिकेन्द्र पर हमला किया सिकेन्द्र इस हमले के लिए तैयार नहीं था जिसके कारन जैसे पाइथन के पूछ सिकेन्द्र से टकराया सिकेन्द्र उड़ते हुए पीछे एक पेड़ से टकरा कर निचे गिर गया जिसके कारन सिकेन्द्र के मुँह से खून निकलने लगा फिर सिकेन्द्र अपने मुँह से खून पोछते हुए उठा और अपना तलवार निकल लिया ये तलवार भी सूर्य के तलवार जैसा hi था.

अपना तलवार निकलने के बाद सिकेन्द्र उस पाइथन के तरफ बढ़ने लगा इधर वो पाइथन ने जब देखा की सिकेन्द्र उसके हमले से बच गया है और उस पर हमला करने के लिए उसके तरह बढ़ रहा है तो वो पाइथन घुसे से तेज़ तेज़ फुफकारने लगा और अपने शरीर को अजीब तरह से घूमने के बाद वो सिकेन्द्र के तरफ अपने मुँह से कुछ लिक्विड के जैसे चीज से हमला किया जैसे hi मई उस लिक्विड को देखा तो मई तुरंत hi सिकेन्द्र को सावधान करते हुए बोलै.

मई- सिकेन्द्र जी इस लिक्विड से अपने आप को बचाइए क्युकी ये लिक्विड एक खतरनाक जहर है.

जैसे hi मैंने सिकेन्द्र को ये बोलै तो सिकेन्द्र के शरीर से एक पिले कलर के रौशनी निकलने लगी जो एक कवच के रूप ले कर उनके पुरे शरीर को धक् लिया ( मई आप सब को बता दू की जब कोई योद्धा ग्रांडमास्टर के लेवल पर पहुँचता है तो उसे ताकत के साथ साथ उड़ने की शक्ति मिलती है तो वही सुडो ग्रांडमास्टर के लेवल पर पहुंचने के बाद उसे अपने चारो तरफ एक कवच बनाने की शक्ति मिलती है).

इधर जैसे hi सिकेन्द्र के शरीर के चारो तरफ वो कवच बना वैसे hi पाइथन के द्वारा हमला किया गया जहर आ कर सीधा उस कवच से टकरा गया और वह एक तेज़ धमाका हुआ जिसके कारन वो पाइथन का जहर और सिकेन्द्र के कवच दोनों नस्ट हो गए उस जहर को नस्ट होता हुआ देख कर मई सिकेन्द्र से बोलै.

मई- सिकेन्द्र जी आपको इस पाइथन को मरने के लिए सिर्फ 5 मिनट hi है क्युकी ये पाइथन अपना जहर निकलने के बाद 5 मिनट तक कमजोर रहेंगे फिर 5 मिनट बाद ये ताकतवर हो कर दोबारा आप पर जहर से हमला कर सकता है.

मेरी बात को सुन कर सिकेन्द्र मुस्कुराते हुए बोले.

सिकेन्द्र- इसे मरने के लिए बस 5 मिनट hi काफी है.

इतना बोल कर सिकेन्द्र अपने हाथो में मजबूती से अपने तलवार को पकड़ा और हवा में उड़ गया इसके बाद वो अपने तलवार से एक खतरनाक हमला उस अजगर के गले पर किया तो अजगर को सँभालने का भी मौका नहीं मिला और उसका सर धड़ से अलग हो गया सिकेन्द्र उस अजगर को मरने के बाद उसके पास गया और उसके बॉडी को फाड् कर उसके अंदर से बीस्ट कोर निकल लिए और फिर वो भी वही पर बैठ कर अपने कल्टीवेशन करने लगे करीब एक घंटे के जातो जेहत के बाद वो उस बीस्ट स्टोन के शक्ति को काबू करने में कामयाब हो गए जिसके कारन वो सुडो ग्रांडमास्टर में पिछ लेवल पर पहुंच गए वो किसी भी वक़्त सम्राट लेवल में पहुंच सकते थे इसके बाद वो अपने ध्यान से उठ गए उनको ध्यान से बहार आया हुआ देख कर सूर्य जल्दी से उनके पास गया और उनसे बोलै.

सूर्य- आपको बहुत बहुत बधाई हो चाचा जी आप अब सुडो ग्रांडमास्टर लेवल के पिछ पर पहुंच गए है.

सिकेन्द्र- तुम्हे भी बधाई हो मेरे भतीजे क्युकी तुम भी सुडो ग्रांडमास्टर के मध्यम लेवल में पहुंच गए हो.

उन दोनों के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए उनसे बोलै.

मई- और मेरी तरफ से लेवल बढ़ने के लिए आप दोनों को बधाई.

मेरी बात को सुन कर सिकेन्द्र मेरे तरफ मुस्कुराते हुए देखते हुए बोले.

सिकेन्द्र- अगर तुम नहीं होते तो ये सब पॉसिबल नहीं था इसलिए तुम्हारा बहुत बहुत सुक्रिया प्रतिक आज मई तुम्हारे hi सुग्गेस्टिव के कारन उस पाइथन को मर पाया नहीं तो मई उसके जहर से कब का मर गया होता.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई उनको मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- अरे इसमें थैंक यू की क्या बात है हम तीनो एक टीम है और हमारा एक दूसरे की मदत फर्ज है इस लिए आप एहसान वाली बात अपने दिमाग से निकल दीजिये और अब हम आगे बढ़ते है क्युकी हमें यहाँ आये बहुत वक़्त हो गया है और अभी तक हमें वो जगह भी नहीं मिली है जहा पर जिनसेंग है.

सिकेन्द्र- ठीक है चलो चलते है.

इसके बाद हमलोग वह से तेज़ गति के साथ अपनी मंजिल की और निकल गया करीब 15 तक चलने के बाद हम उस नक़्शे में बताये हुए जगह पर पहुंच गए थे जब मई वह पहुंच देखा तो सामने एक पहाड़ था और उस पहाड़ से निचे की और झरना गिर रही थी जिससे वह एक बड़ा सा तालाब बन गया था अभी हम वह पर सब देख और समझ hi रहे थे की तभी सूर्य बोलै.

सूर्य- क्या हम नक़्शे में बताये हुए जगह पर पहुंच गए.

मई- है यही है वो जगह जहा हमें आना था अब हम तीनो तीन तरफ बात जाते है.

इसके बाद हमलोग वह से तेज़ गति के साथ अपनी मंजिल की और निकल गया करीब 15 तक चलने के बाद हम उस नक़्शे में बताये हुए जगह पर पहुंच गए थे जब मई वह पहुंच देखा तो सामने एक पहाड़ था और उस पहाड़ से निचे की और झरना गिर रही थी जिससे वह एक बड़ा सा तालाब बन गया था अभी हम वह पर सब देख और समझ hi रहे थे की तभी सूर्य बोलै.

सूर्य- क्या हम नक़्शे में बताये हुए जगह पर पहुंच गए.

मई- है यही है वो जगह जहा हमें आना था अब हम तीनो तीन तरफ बात जाते है और महेंद्र सिंह राठौर के द्वारा बताये हुए गुफा को ढूंढते है.

सिकेन्द्र- ठीक है चलो सूर्य चलते है.

इतना बोल कर वो लोग वह से जाने लगे तभी मई उन सबको रोकते हुए अपने जेब से इंस्टेंट रिकवरी पिल निकल कर उनको देते हुए बोलै.

मई- आप लोग अपना ध्यान रखना और है ये लीजिये ये 2 रिकवरी पिल है अगर आपको किसी जहरीले कीड़े ने कटा लिया तो आप इस गोली को खा लेना इससे उस कीड़े की जहर पुरे शरीर में नहीं फैलेगी और है अगर आप लोगो को वो गुफा मिले या न मिले लेकिन आप लोगो को 20 मिनट में इसी जगह पर आना होगा इसके बाद सब उस गुफा को ढूंढने लगते है लेकिन वो गुफा तीनो में से किसी को नहीं मिलता है आखिर में तीनो थक हर कर उसी जगह पर आ जाते है जहा से वो लोग उस गुफा को खोजने के लिए निकले थे फिर सिकेन्द्र मुझे पूछते है.

सिकेन्द्र- हमने इस जगह को बहुत अच्छी तरह से देख लिया लेकिन वो गुफा हमें कही नहीं मिला अब तुम्ही बताओ की हम क्या करे.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- अगर महेंद्र सिंह राठौर को वो गुफा और जिनसेंग यही पर मिला था तो वो गुफा भी यही होगा बस हम उसे सही से धुंध नहीं प् रहे है.

मेरी बात को सुन कर सूर्य झुंझलाते हुए बोलै.

सूर्य- हम और कैसे सही से ढूंढे हमने इस जगह को पूरी तरह से देख लिया लेकिन वो गुफा कही भी नहीं है मुझे तो लगता है की दादा जी ने उस गुफा को कही और देखा होगा.

मई- नहीं वो गुफा को यही पर देखा होगा वो हमसे झूठ नहीं बोल सकते है (फिर कुछ सोचते हुए) एक मिनट रुको मई कुछ करता हु.

इतना बोल कर मई अपने दिव्या दृस्टि को एक्टिवटे किया और उस जगह को अच्छे से देखने लगा मई उस जगह को अच्छे से देख hi रहा था की तभी मेरी नजर उस झरने के पीछे गयी जहा मुझे जिनसेंग के कुछ पौधे मिले जिसे देख कर मई उन दोनों से बोलै.

मई- मिल गया वो गुफा.

मेरी बात सुन कर दोनों चौक गए फिर सिकेन्द्र मुझसे बोले.

सिकेन्द्र- मिल गया लेकिन कैसे तुम तो अभी यही है तुम यहाँ से कही गए नहीं तो फिर तुम्हे वो गुफा मिला कैसे और वो गुफा है कहा.

मई- मुझे वो गुफा कैसे मिला ये मायने नहीं रखता मायने ये रखता है की वो गुफा हमें मिल गया और रही बात की वो गुफा कहा है तो उधर देखिये वो गुफा उस झरने के पीछे है इसलिए हमें वो इतना खोजने के बाद भी नहीं मिला क्युकी वो गुफा झरने से छुपा हुआ था.

जैसे hi दोनों ने उस झरने को देखा तो उन्हें मेरे बातो पर बिस्वास hi नहीं हुआ की जिस गुफा को हमलोग धुंध रहे थे वो उस झरने के पीछे है.

सूर्य- वो गुफा उस झरने के पीछे कैसे हो सकता है और तुमको कैसे पता की वो गुफा उसी झरने के पीछे है.

मई- यार ये तो सिंपल सी लॉजिक है हमने इस पहाड़ को चारो तरफ से देख लिए शिवाय उस झरने के पीछे लेकिन हमें गुफा कही नहीं मिला तो मुझे लगता है की हो न हो वो गुफा उसी झरने के पीछे है एक काम कीजिये आप लोग यही पर रुकिए मई वह देख कर आता हु.

इतना बोल कर मई वह में उड़ गया और उस झरने के पीछे जाने लगा जैसे hi मई उस झरने के पीछे पंहुचा तो देखा की वह पर सच में वो गुफा मौजूद था और महेंद्र सिंह राठौर के बताये अनुसार यहाँ पर बहुत साडी जिनसेंग के पौधे थी फिर मैंने सूर्य और सिकेन्द्र को आवाज देते हुए बोलै.

मई- मुझे वो गुफा मिल गया है सच में वो गुफा इस झरने के पीछे hi है आप दोनों यहाँ पर आ जाइये.

मेरी बात को सुन कर दोनों उड़ते हुए उस झरने के पीछे आ गए इसके बाद मैंने उस गुफा के पास वाले सरे जिनसेंग को देखने लगा लेकिन मुझे वह पर सिर्फ 💯 साल पुराण जिनसेंग hi मिला इस लिए मई उन जिनसेंग को हाथ भी नहीं लगाया और उस गुफा के पास पहुंच गया और उसे देखने लगा.

इधर पटना के एक रेस्टुरेंट में पूनम मृत्युंजय का इंतज़ार कर रही थी फिर थोड़ी देर बाद उसे मृत्युंजय आते हुए दिखाई दिया जिसे देख कर पूनम के चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान आ गयी और वो अपने टेबल से उठ कर मृत्युंजय को रइवे करने के लिए रेस्टुरेंट के गेट के पास आ गयी और मुस्कुराते हुए मृत्युंजय से बोली.

पूनम- अरे आप आ गए मई सोची थी की आप आएंगे hi नहीं.

पूनम के बात सुन कर मृत्युंजय उसको देख कर मुस्कुराते हुए बोलै.

मृत्युंजय- सॉरी पूनम जी किसी कारन बस आने में मुझे लेट हो गया.

पूनम- अरे कोई बात नहीं लेट होने के बाद भी आप आये तो सही इस लिए मुझे बुरा नहीं लगा अगर आप नहीं आते तो जरूर मुझे बुरा लगता चले अब टेबल पर.

पूनम के बात सुन कर मृत्युंजय मन hi मन मुस्कुराने लगा फिर वो पूनम के बातो का जबाब देते हुए बोली.

मृत्युंजय- है है चलिए चलते है.

इसके बाद दोनों वह से अपने बुकिंग किये हुए टेबल पर आ गए और दोनों बैठ गए इसके बाद पूनम ने कुछ खाने और पिने का सामान आर्डर किया इसके बाद दोनों आपस में बाटे करने लगे.

पूनम- मुझे अच्छा लगा ये देख कर की आप बेसहारा लोगो की मदत दिल से करते है वैसे आप ये सब कब से कर रहे है.

पूनम के बात सुन कर मृत्युंजय खुस हो गया सुर वो खुसी से बोलै.

मृत्युंजय- मुझे गरीब और बेसहारा लोगो को देख कर उन पर बहुत दया आती है इस लिए मई हमेशा ऐसे लोगो को मदत करता रहता हु और मुझे ये सब कर के मेरे दिल को बहुत सन्ति मिलती है और रही बात ये की मई ये सब कब से कर रहा हु तो मई बता दू की मई बचपन से hi ऐसा हु मुझसे किसी के तकलीफ देखि नहीं जाती इस लिए मई ऐसे लोगो का मदत बचपन से hi करते आया हु.

मृत्युंजय के बात सुन कर पूनम एक बार गौर से मृत्युंजय को देखती है और बोलती है.

पूनम- आप बहुत अच्छे इंसान है आज कल के दुनिया में आप जैसे निक दिल और सच्चा इंसान मिलना बहुत मुश्किल है.

पूनम के बात सुन कर मृत्युंजय मुस्कुराते हुए बोलै.

मृत्युंजय- मेरे जैसा आदमी मिलना इतना भी मुश्किल नहीं है क्युकी एक तो मेरे सामने hi बैठी है सच कहु तो आपको इस तरह से उन सब की मदत करता हुआ देख कर मुझे भी अच्छा लगा आप भी दिल के अच्छी और नेकदिल इंसान है.

मृत्युंजय के बात सुन कर पूनम के चेहरे पर एक पल के लिए एक खतरनाक मुस्कान आयी और फिर चली गयी इसके बाद पूनम मृत्युंजय से बोली.

पूनम- देखिये हम दोनों एक hi उम्र के है इस लिए आप मुझे आप कर नहीं बुलाइये अगर आप मुझे तुम कह कर बुलाएँगे तो मुझे अच्छा लगेगा.

पूनम के बात सुन कर मृत्युंजय एक बार गौर से पूनम को देखता है फिर वो मुस्कुराते हुए पूनम से बोलता है.

मृत्युंजय- ठीक है मई आज से आपको तुम कर के hi बुलाऊंगा लेकिन आपको भी मुझे तुम कर के hi बुलाना.

पूनम- ठीक है वैसे तुम अभी क्या करते हो.

मृत्युंजय- कुछ नहीं बस मेरी पढाई चल रही है वैसे तुम अपना बताओ.

पूनम- मई अभी अभी अब्रॉड से अपनी पढाई पूरी कर के लौटी हु वैसे तुम्हारे फॅमिली में कोण कोण है.

मृत्युंजय- मेरी फॅमिली में बस मई मेरे डैड और मेरे अंकल hi है और तुम्हारे फॅमिली में

पूनम- मेरे फॅमिली में भी 3 hi लोग है मई मेरी माँ और मेरे डैड.

मृत्युंजय- वैसे तुम्हारे डैड क्या करते है.

पूनम- मेरे डैड एक बिज़नेस मन है सायद तुम उनको जानते hi होंगे मेरे डैड का नाम है बसंत चौहा है.

मृत्युंजय- अच्छा तो तुम फेमस बिज़नेस मन बसंत चौहान की बेटी हो.

पूनम- है.

इसी तरह से दोनों ने वह घंटो बाटे की और इसके बाद दोनों फिर से मिलने का वडा कर के वह से निकल गए इसी तरह से दिन निकलता गया और मृत्युंजय और पूनम दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे मृत्युंजय पूनम से इतना प्यार करने लगा की वो उसके लिए कुछ भी करने के लिए तैयार था.

इधर बसंत चौहान और उनकी पत्नी दोनों अपने रूम में बैठे हुए थे तभी वह पर उनकी बेटी पूनम आयी और मुस्कुराते हुए अपने डैड से बोली.

पूनम- डैड मैंने अपना काम कर दिया है मई उस मृत्युंजय को अपने प्यार में इतना पागल कर दिया है की वो मेरे लिए कुछ भी कर गुजरेगा.

अपनी बेटी के बात सुन कर बसंत चौहान खुस हो गए और खुसी से मुस्कुराते हुए अपने बेटी से बोले.

बसंत- बहुत अच्छा पूनम मुझे तुमसे यही उम्मीद थी मई जनता था की तुम्ही इस काम को पर्फेक्ट्ली कर सकती हो अब अगर तुम्हारा काम हो गया है तो अब हमें अपने प्लान के दूसरे फेज को सुरु करने के बारे में प्लान करना चाहिए.

पूनम- जी डैड आप अपने प्लान का दूसरा फेज सुरु कीजिये मई इसमें आपका साथ देने के लिए तैयार हु.

इधर पूनम के माँ सरोजा देवी ने जब उन दोनों के बात सुनी तो उससे रहा नहीं गया और वो पूनम से बोली.

सरोजा- तुम ये अच्छा नहीं कर रही हो बेटी किसी के जायदाद हथियाने के लिए उसके साथ प्यार के नाटक करना ये बहुत गलत बात है.

सरोजा के बात सुन कर पूनम चुप हो गयी और अपना सर निचे कर ली वही बसंत चौहान की सरोजा के बात अच्छी नहीं लगी इस लिए वो घुसे से बोले.

बसंत- सरोजा तुमने ये बात अभी बोल दी लेकिन दोबारा नहीं बोलना नहीं तो हमसे बुरा कोई नहीं होगा हम क्या कर रहे है और क्या नहीं कर रहे है इसमें तुम्हे इंटरफेरे करने की जरुरत नहीं है समझी तुम बस अपने काम से काम रखो.

सरोजा अपने पति के घुसे को देख कर दर गयी और चुपचाप वह से उठ कर चली गयी सरोजा बहुत hi नेक दिल इंसान थी उसे किसी के बुरा होते हुए देखा नहीं जाता था इस लिए वो हर समय अपने पति को बुरे काम करने से रोकती थी लेकिन बसंत चौहान उसके को समझने के जगह उसे मरने लगते थे इस लिए बेचारी उनसे बहुत डर्टी थी.

इधर सरोजा को वह से जाने के बाद बसंत चौहान पूनम से बोलता है.

बसंत- तुम अपने माँ के बातो पर ध्यान मत देना आज के ज़माने में मांगने से कुछ नहीं मिलता है समझी इस लिए तुम्हे जो भी चीज चाहिए उसे दुसरो से छीन लिया करो यही आज का जमाना.

बसंत के बात सुन कर पूनम है में सर हिला देती है और अपने डैड से बोलती है.

पूनम- डैड अब आगे हमें क्या करना होगा.

पूनम के बात को सुन कर बसंत चौहान कुछ सोचने लगते है फिर कुछ देर सोचने के बाद वो पूनम को एक प्लान बताते है जिसे सुन कर पूनम पहले तो दर जाती है लेकिन फिर वो ये सोच कर की इस प्लान से कुशवाहा फॅमिली की साडी प्रॉपर्टी उसकी हो जाएगी वो खुस हो जाती है.

इधर पूनम को अपना प्लान बताने के बाद बसंत चौहान किसी को कॉल करते है और बोलते है.

बसंत- (कॉल पर) मुझे उसके बारे में साडी जानकारी चाहिए वो कब घर से निकलता है और कहा कहा जाता है मुझे उसकी एक एक डिटेल्स चाहिए.

कॉल- जी बॉस आप चिंता मत कीजिये मई अभी से hi उस पर नजर रखता हु और आपको उसके बारे में एक एक डिटेल्स बताता हु.

उस कॉलर के बात को सुन कर बसंत उसको ठीक है बोल कर कॉल कट कर देता है और हस्ते हुए बोलता है.

बसंत- है है है बहुत जल्द hi कुशवाहा परिवार के सरे प्रॉपर्टी मेरे और मेरी बेटी के नाम हो जायेगा.

इधर मुंबई में शनाया हॉस्पिटल से घर आने के बाद थोड़ी देर रेस्ट करती है और फिर अपने कंपनी के लिए निकल जाती है जैसे hi शनाया अपने घर से निकलती है उसके कुछ देर बाद एक और कार उसके पीछे निकलती है जिसमे रोहन और दीप्ती बैठे हुए थे इधर शनाया के कार एक चौराहे से निकलती है तो उसके पीछे 2 और कार लग जाती है जिसमे गुंडे बैठे हुए थे वो सरे गुंडे शनाया के कार का पीछा कर रहे थे लेकिन उन लोगो को मालूम नहीं था की उन लोगो के पीछे भी एक कार आ रही है जो इन लोगो पर नजर रखे हुए है खैर शनाया इन सब से बेखबर की कोई उसका पीछा कर रही है वो बेचारी अपने hi धुन में गाड़ी भगाये जा रही थी जब वो एक सिग्नल 🚦 पर पहुंची तो उस समय सिग्नल 🚥 येलो था इस लिए जल्दी से अपने कार को सिग्नल से बहार निकल लिया और साथ में आ रही दोनों कार भी सिग्नल से बहार निकल गयी लेकिन रोहन कार सिग्नल से बहार निकलता उससे पहले hi सिग्नल रेड लाइट हो गया था जिसके कारन उन लोगो को मज़बूरी में वह रुकना पड़ा लेकिन उन सब को शनाया की बहुत चिंता हो रही थी और वो लोग भगवन से प्राथना कर रहे थे की जल्दी से रेड लाइट ग्रीन हो जाये ताकि वो लोग जल्दी से शनाया के पीछे पंहुचा सके.

उधर शनाया सिग्नल क्रॉस करने के बाद सोल्लगे जल्दी पहुंचने के लिए वह से एक शॉर्टकट ले ली और जाने लगी वो अभी जिस रस्ते से सोल्लगे जा रही थी वो रास्ता आगे जा कर सुन सं हो जाता था इस लिए जब उन गुंडों ने देखा की शनाया खुद hi अपने गाड़ी को सुनसान रस्ते पर मोड़ लिया है तो वो लोग खुस हो गए इधर सिग्नल ग्रीन होने के बाद रोहन का कार सिग्नल को क्रॉस करते हुए सीधा जाने लगा क्युकी उसे पता hi नहीं था की शनाया ने अपने कार को शॉर्टकट वाले रस्ते पर ले ली है इस लिए वो लोग सीधा hi जा रहे है जब वो लोग कुछ दूर तक गए लेकिन जब उन लोगो को शनाया और गुंडों के कार नहीं दिखी तो उन सब को शनाया के चिंता होने लगा और वो लोग तुरंत hi बलदेव को कॉल कर के शनाया के लोकेशन ट्रैक करवाने के लिए बोल दिया और वो लोग आगे बढ़ते हुए शनाया के कार को ढूंढने लगे.

इधर शनाया जब उस सुन सं रस्ते पर पहुंची तो उसके दोनों साइड से दो कार आ कर उसके कार के साथ चलने लगी जिसे देख कर वो घबरा गयी और अपना कार के गिलास को निचे करते हुए उनसे बोली.

शनाया- ये क्या बतमीज़ी है तुम दोनों चुप चाप अपने कार को या तो आगे लो या पीछे नहीं तो तुम लोगो के साथ ठीक नहीं होगा समझे.



शनाया के बात सुन कर उन कार के ड्राइवर मुस्कुरा कर उसे देखने लगे फिर दोनों कार के ड्राइवर एक दूसरे को इशारा किया और फिर एक कार शनाया के कार के पीछे हो गया और एक कार तेज़ गति के साथ आगे निकल गया जब शनाया ने देखा की दोनों कार अब उसके कार के साइड में नहीं है तो रहत की साँस ली लेकिन जैसे hi वो अभी रहत की साँस ले पायी थी तभी उसने देखा की रोड के बीचो बिच एक कार खड़ा है तो शनाया एक डैम से अपने कार में ब्रेक लगा दी जिससे उसकी कार वही पर रुक गया अपने कार को रोकने के शनाया जब सामने वाली कार को देखि तो वो उस कार को तुरंत पहचान गयी की ये कार वही दोनों करो में से एक है जो उसके कार के साइड में चल रहे थे अभी वो उस कार को देख hi रही थी की तभी उसने देखा की उस कार के दरवाजा खुला और उस कार से 5 लोग बहार निकले जो देखने में hi गुंडे लग रहे थे.
 
अपडेट 40



सीक्रेट भूमि


जो कार शनाया के कार के साइड से चल रहे थे उसमे से एक कार शनाया के कार के पीछे चला आया और दूसरा कार आगे जा कर रस्ते के बीचो बिच खड़ा हो गया जिसे देख कर शनाया समझ गयी की ये लोग उसका पीछा कुछ बुरे इरादे से कर रहे थे जैसे hi उसे ये एहसास हुआ तो वो एक पल के लिए दर गयी लेकिन फिर उसे यद् आया की वो एक मार्टिकल आर्ट्स योद्धा है और उसका लेवल एक दिन पहले hi बढ़ कर 9तह लेवल पर पहुंच गया है जैसे hi उसे ये यद् आया तो उसके अंदर से दर ख़तम हो गया और चेहरे पर एक खतरनाक मुस्कान आ गयी हलाकि की उसके चेहरे का खतरनाक मुस्कान भी बड़ी प्यारी लग रही थी.


इधर जब वो कार आगे जा कर रुकी तो उसमे से 5 गुंडे बहार निकले जैसे hi शनाया ने ये देखा तो वो तुरंत पीछे मुद कर पीछे वाले कार को देखा तो उसमे से भी 5 गुंडे बहार निकले जैसे hi शनाया ने देखा की उसका पीछा 10 गुंडे कर रहे थे तो उसके चेहरे पर अभी जो कॉन्फिडेंस था वो इतने सरे गुंडों को देख कर चला गया हलाकि वो अभी भी दरी हुयी नहीं थी बस उसे एक hi चीज की टेंशन थी की क्या वो इतने सरे गुंडों से अकेले लड़ पायेगी या नहीं खैर वो ये सब सोचना छोड़ कर अपने कार से बहार आ गयी इधर जब उन गुंडों ने देखा की शनाया कार से अपने आप बहार आ गयी है तो सब के चेहरे पर मुस्कान आ गयी फिर उनमे से एक गुंडा शनाया से बोलै.

गुंडा- बहुत अच्छा किया तुमने जो तुम अपने आप hi कार से उतर गयी अब तुम चुप चाप मेरे कार में बैठ जाओ और हमारे साथ चलो.

उस गुंडे के बात सुन कर शनाया उसे घूरते हुए उससे पूछी.

शनाया- तुम लोग कोण हो और मेरी रस्ते को क्यों रोक कर खड़े और ये तुम लोग क्या बाटे कर रहे हो तुम लोग मुझे कहा ले कर जाना चाहते हो.

गुंडा- हम सब कोण है ये सब तुम्हारे लिए जानना जरुरी नहीं है बस तुम इतना जान लो की हमरे बॉस का दिल तुम पर आ गया है और हम तुम्हे उन्ही के पास ले कर जाने वाले है.

उस गुंडे की बात सुन कर शनाया को बहुत गुसा आया लेकिन वो अपने घुसे को काबू करते हुए बोली.

शनाया- देखो मई तुम लोगो के साथ कही नहीं जाने वाली हु इस लिए तुम लोग मेरे रस्ते से हाथ जाओ.

शनाया के बात सुन कर सरे गुंडे जोर जोर से हसने लगते है और बोलते है.

गुंडा- तुम्हे क्या लगा की तुम हम सब को बोलोगी और हम यहाँ से चले जायेंगे देखो तुम चुप चाप आ कर मेरे गाड़ी में बैठ जाओ नहीं तो हमें तुम्हे जबरदस्ती यहाँ से ले कर जाना होगा और अगर हम तुम्हारे साथ जबरदस्ती करेंगे तो कही तुम्हारे कोमल जिस्म पर कही चोट न लग जाये अगर ऐसा होगा तो हमारे बॉस को तुम्हारे साथ मजा नहीं आएगा.

इतना बोल कर वो गुंडा और उसके साथी सब जोर जोर से हसने लगते है इधर शनाया ने जब उस गुंडे की इतनी गन्दी बाटे सुनी तो उसका गुसा बहुत बढ़ गया जिसके चलते उसकी आँखे हलकी काली होने लगी और उसके शरीर से भयानक एनर्जी निकलने लगी वो घुसे से गुरते हुए उन गुंडों से बोली.

शनाया- अगर तुम लोगो में हिमत है तो मुझे हाथ लगा कर दिखाओ मुझे कसम है मेरे आराध्य की की अगर मई तुम लोगो के हाथो को तुम्हारे बॉडी से अलग नहीं कर दिया तो मेरा नाम भी शनाया मल्होत्रा नहीं.

शनाया के शरीर निकलते हुए भयानक एनर्जी को देख कर और उसकी बातो को सुन कर एक पल के लिए सरे गुंडों के रूह कम्प गया लेकिन फिर थोड़ी देर सब खुद को ठीक किया इसके बाद उन गुंडों के लीडर जो अभी तक चुप चाप था वो आगे आ कर शनाया से बोलै.

लीडर- ठीक है तुम आसानी से हमारे साथ नहीं चलोगी हमें भी अपना बल प्रयोग करना होगा (इसके बाद अपने आदमियों से) पकड़ लो इस लड़की को और दाल दो गाड़ी में अगर ये आने में आनाकानी करे तो इसे बेहोश कर देना.

अपने लीडर के बात सुन कर दो गुंडा शनाया को पकड़ने के लिए उसके तरफ बढ़ गए इधर शनाया ने जब देखा की दो गुंडा उसके तरफ बढे आ रहे है तो वो भी उसने लड़ने के लिए खुद को तैयार कर ली और जोर से बोली.

शनाया- आ जाओ आज तुम लोगो को पता चलेगा की अगर एक नारी पर जब संकट आती है तो वो खुद को बचने के लिए काली माँ भी बन सकती है.

इतना बोल वो खुद उन गुंडों के तरफ स्पीड में दौड़ते हुए जाती है और हवा में उछालते हुए एक गुंडे के पेट में एक लत मरती है जिससे वो उड़ता हुआ कुछ दूर जाकर गिरता है और उसके मुँह से खून निकलने लगता इधर दूसरा गुंडा अपने साथी के हालत देख कर एक पल के लिए रुक जाता है फिर वो घुसे से आगे बढ़ते हुए शनाया पर अपने मुके से हमला करता है जिसे शनाया ने आसानी से पकड़ लिया और और उसके हाथ को मोड़ देती है जिसके कारन के क्रैक की आवाज के साथ उस गुंडे की हाथ टूट जाती है और उस गुंडे का एक दर्दनाक चीख निकल जाती शनाया उस गुंडे के हाथ तोड़ने के बाद उसके छाती पर एक मुका मरती है जिससे वो भी उड़ते हुए उस पहले गुंडे के पास गिरता है और वो वही बेहोश हो जाता है उन दोनों गुंडों को ठिकाने लगाने के बाद शनाया उन गुंडों के लीडर से बोलती है.

शनाया- तुम सब में से दो तो निपट गए अब 8 बचे है तो तुम एक काम करो अपने सरे साथियो को एक साथ भेज दो क्युकी मेरे पास तुम लोगो से एक एक कर के लड़ने के लिए फालतू समय नहीं है.

शनाया के बात सुन कर गुंडों के लीडर को गुसा आ गया और वो घुसे से बोलै.

लीडर- तुमने हमारे दो आदमियों को क्या मर दी तुम अपने आप को मार्टिकल आर्ट्स योद्धा समझने लगी अगर बॉस को तुम्हारे साथ मजे नहीं करने होते तो मई तुम्हे कब का मर देती.

इतना बोल कर वो अपने सरे आदमियों को शनाया को पकड़ने के लिए बजते हुए बोलै.

लीडर- तुम सब जाओ और उसे पकड़ लो लेकिन यद् रखना की तुम सब उसे सिर्फ बेहोश कर ज्यादा गंभीर जखम मत देना.

अपने लीडर के बात को सुन कर सरे गुंडे है में सर हिलाया और शनाया को पकड़ने के लिए उसके पास जाने लगे इधर शनाया ने जब देखा की उस लीडर को छोड़ कर बाकि सरे गुंडे उसके तरफ आ रहे है तो वो भी उनसे लड़ने के लिए तैयार हो गयी.

जब शनाया घुसे में आयी थी और उसकी आँखे हलकी काली हो गयी थी तब उसके अंश का 1% शक्ति जागृत हो गयी थी जिसके कारन हो हाफ ग्रांडमास्टर के लेवल पर पहुंच गयी थी और उसकी लड़ने की छमता भी बढ़ गयी थी लेकिन ये बात उसे पता नहीं चला था वो तो यही समझ रही थी की वो अभी भी 9तह लेवल पर hi मौजूद है.

इधर वो सरे गुंडे शनाया के पास आ कर शनाया को चारो तरफ से घेर कर खड़े हो गए और उस पर हमला कर दिए उन सरे गुंडों को एक साथ हमला करते हुए देख कर शनाया निचे झुक गयी और निचे झुके हुए hi उसने तेज़ी से सबके पेट में मुका मरने लगी जिसके कारन सरे गुंडे उड़ते हुए पीछे जा गिरे और वो वही बेहोश हो गए और बेहोश होते भी क्यों नहीं वो सरे गुंडे एक आम आदमी थे और शनाया एक हाफ ग्रांडमास्टर योद्धा हलाकि उन सब को शनाया के हमले से मर जाना चाहिए था लेकिन वो मरे नहीं सिर्फ बेहोश हो हुए इधर अपने सरे गुंडों के हालत देख कर उनके लीडर की पतलून गीली हो गयी और वो अपने सरे गुंडों को वही छोड़ कर अपना कार स्टार्ट किया और वह से भाग गया.

इधर शनाया उन गुंडों से लड़ रही थी तो वही शनाया से कुछ दुरी पर एक कार रुकी हुयी थी जिसमे एक लड़का और एक लड़की बैठी हुयी थी और शनाया को उन गुंडों से लड़ते हुए देख रहे थे ये लोग और कोई नहीं बल्कि रोहन और दीप्ती थे जो बलदेव से शनाया के लोकेशन ट्रैक करवाने के बाद यहाँ आये थे वो लोग जब यहाँ आये तो शनाया को उन गुंडों के साथ लड़ता हुआ देख कर वही पर रुक गए थे इधर शनाया को उन गुंडों से लड़ते हुए देख कर रोहन दीप्ती से बोलै.

रोहन- वह भाभी तो उन गुंडों को अच्छा सबक सिखाया हम तो बेकार में hi भाभी की चिंता कर रहे थे.

दीप्ती- है बात तो तुम्हारी सही है लेकिन भाभी को और ट्रेनिंग करने की जरुरत है क्युकी वो एक हाफ ग्रांडमास्टर के योद्धा है फिर भी उनके हमले से ये आम गुंडे सिर्फ बेहोश hi हुए है अगर भाभी के जगह पर कोई और हाफ ग्रांडमास्टर लेवल के योद्धा होता तो वो सरे गुंडे उसके एक हमले से मरे गए होते.

रोहन- है ये बात तो है लगता है की प्रतिक को आने के बाद हमें उसे भाभी को अच्छी ट्रेनिंग के साथ साथ अच्छी तकनीक भी देने के लिए बोलना होगा.

इधर शनाया उन गुंडों को निपटने के बाद अपने कंपनी के लिए निकल जाती है है तो वही रोहन और दीप्ती उसके कार के पीछे पीछे उसके कंपनी के पास पहुंच जाते है और कार में hi बैठ कर शनाया का वेट करने लगते है.

इधर जो उन गुंडों का लीडर जो शनाया से बच कर भाग गया था वो सीधा दिलावर के पास जा पंहुचा इधर दिलावर अपने साथी वो वह पर आया हुआ देख कर खुस हो गया और वो खुसी से बोलै.

दिलावर- है है तू ले आया उस लड़की को मई जनता था की कोई ये काम करे या न करे लेकिन तुम ये काम जरूर कर लोगे अब मुझे जल्दी से बताओ कहा है वो लड़की कब में मई उसकी जवानी के रास पिने के लिए बेताब हु.

दिलावर के बात सुन कर गुंडों का लीडर बहुत दर गया और अपने घुटनो के बल बैठ कर दोनों हाथ जोड़ते हुए बोलै.

लीडर- बबब बी बॉस ममम म मुझे ममम माफ़ कर दीजिये मई उउउ ु उस लड़की को उठाने में नाकामयाब हो गया www व वो लड़की बहुत ताकतवर थी शायद वो मार्टिकल आर्ट्स जानती थी इस लिए उसने मेरे सरे आदमियों को पिट पिट कर घायल कर दिया तो मई किसी तरह से अपना जान बचा कर आपके पास आया हु.

गुंडों के लीडर के बात सुन कर दिलावर एक पल के लिए हैरान हो गया फिर कुछ देर संत रहने के बाद दिलावर जोर जोर से हसने लगा और हस्ते हुए बोलै.

दिलावर- है है है है तुम है है तुम्हारे सरे आदमियों को उस लड़की ने है है है है उस अकेली लड़की ने मर कर घायल कर दिया है है है और और तुम है है है तुम उससे अपना जान बचा कर भाग आये है है है है अच्छा किया तुमने जो तुम उससे बच कर यहाँ भाग आये.

इतना बोल कर दिलावर धीरे धीरे उस लीडर के पास आया और अपने हाथ में पकडे हुए बात से उस लीडर के सर पर हमला किया जिसके कारन वो वही मर गया उसको मरने के बाद दिलावर घुसे से बोलै.

दिलावर- एक लड़की से दर कर भाग गए और मेरे पास चले आये क्या सोचा था की बॉस के पास जायेंगे तो बॉस सबसि देगा तुम जैसे कमजोरो को मेरी गैंग में कोई जगह नहीं है और रही बात इस लड़की और उसके परिवार की तो लगता है की फील्ड में अब मुझे hi उतरना पड़ेगा मुझे hi उसे और उसकी फॅमिली को संभालना होगा क्युकी मेरे सरे आदमी अब नाकारा हो गए है.

इतना बोल कर वो किसी को कॉल करता है और अपने रूम से निकल कर कही चला जाता है.

इधर राठौर आइसलैंड के जंगल के चौथे भाग में मई उस गुफा को खोज कर उसके पास चला गया था वह जाने के बाद मैंने देखा की वह पर बहुत सरे जिनसेंग के पौधे थे जो नए पौधे से लेकर 100 साल तक के पुराने पौधे थे लेकिन मुझे 300 साल पुराण जिनसेंग चाहिए थे इस लिए मई उस गुफा में जाने का डीडे किया इस लिए मई वह पर उस गुफा को ढूंढने लगा थोड़ी देर ढूंढने के बाद मुझे वो गुफा मिल गया तो मई सिकेन्द्र को आवाज लगते हुए बोलै.

मई- आप दोनों यहाँ पर आ सकते है मुझे वो गुफा यहाँ पर मिल गया है और यहाँ पर कोई भी खतरा नहीं है लेकिन है आप दोनों अपना शक्ति कवच पहन लीजियेगा क्युकी यहाँ पर एक अदृश्य कीड़े बहुत ज्यादा है.

मेरी बात को सुन कर उन दोनों ने अपने शरीर पर अपने सुडो ग्रांडमास्टर के शक्ति का कवच बनाया और उड़ते हुए मेरे पास आ गए जब वो वह पर पहुंचे तो वह पर जिनसेंग के इतने सरे पौधे को देख कर चौक गए तभी सूर्य मुझसे बोलै.

सूर्य- प्रतिक यहाँ पर तो बहुत सरे जिनसेंग के पौधे है तो क्या इससे दादा जी का इलाज नहीं हो सकता है.

मई- नहीं तुम्हारे दादा जी का इलाज इनसे नहीं हो सकता है क्युकी इनमे सबसे पुराण जिनसेंग भी 100 साल पुराण hi है और हमें उनका इलाज करने के लिए 300 साल पुराण चाहिए इस लिए हमें इस गुफा में जिनसेंग को ढूंढने के लिए जाना होगा.

मेरी बात को सुन कर सूर्य और सिकेन्द्र उस गुफा को देखने लगे थोड़ी देर गुफा को देखने के बाद सिकेन्द्र मुझसे बोलै.

सिकेन्द्र- लेकिन हम इस गुफा में जायेंगे कैसे इस गुफा के दरवाजे पर तो एक शक्तिशाली कवच लगा हुआ है जिसे तोडना बहुत मुश्किल है.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई उस कवच को देख कर मुस्कुराते हुए उनसे बोलै.

मई- हम्म ये कवच तो बहुत मजबूत लगता है लेकिन इसे तोडना मुश्किल है नामुमकिन नहीं.

इतना बोल कर मई उस गुफा के दरवाजे के पास गया और उस कवच को देखने लगा थोड़ी देर उस कवच को देखने के बाद मई उसके ऊपर अपने शक्ति का प्रयोग किया मैंने अपने अंदरूनी शक्ति से एक गोला बनाया और उस कवच पर हमला कर दिया लेकिन मेरे इस ताकतवर अंदरूनी शक्ति के गोले से उस कवच के ऊपर थोड़ा भी फरक नहीं पड़ा ये देख कर मई हैरान हो गया फिर मैंने अपने अंदरूनी शक्ति और स्प्रिचैल शक्ति दोनों को मिला कर हमला किया फिर भी उस कवच पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा तब मैंने अपने स्पेस शक्ति का इस्तेमाल किया लेकिन उससे भी कोई काम नहीं बना ये देख कर मई सोच में पद गया.

मई- (अपने मन में hi) ये इस गुफा पर इस कवच को आखिर किसने बनाया होगा अगर ये कवच इतना मजबूत है तो इसको बनाने वाला कितना ताकतवर होगा मुझे समझ में नहीं आ रहा है की मई इस कवच को कैसे तोडू मैंने इस कवच पर अपने सबसे ताकतवर हमले किये लेकिन ये कवच तस से मास नहीं हुआ (फिर कुछ सोचते हुए) एक काम करता हु मई इस गुफा के दरवाजे को पहले अपने दिव्या दृस्टि से अच्छे देखता हु अगर इस पर कवच लगाया गया है तो इसे खोलने का भी कोई के यहाँ पर जरूर होगा.

ऐसे hi अपने मन में सोचने के बाद मई अपना दिव्या दृस्टि एक्टिव करता हु और उस दरवाजे पर लगा कवच को देखने लगता हु लेकिन मुझे उस कवच में कुछ भी ऐसा नहीं मिला जिससे मई उस कवच को तोड़ सकू फिर मई उस दरवाजे को देखना सुरु किया तो मुझे वह पर बहुत hi छोटा सा बना हुआ एक पैटर्न दिखा.

जैसे hi मुझे वो पैटर्न दिखा तो मई उसे ध्यान से देखने लगा देखा की वह पर कुछ आकृतिया ाबनि हुयी थी जैसे की वह पर एक बूढ़े आदमी एक नौजत बालक एक 18 से 20 साल का नौजवान लड़का एक 5 से 7 साल का बचा तो एक 40 से 50 दाल का आदमी का चित्र था और लास्ट में एक बूढ़ा आदमी एक अर्थी पर सोया हुआ था उस तस्वीर को देख कर मई कुछ सोचने लगा तभी मुझे ध्यान आया की ये तो मनुस्यो के जीवन चक्र है जैसे एक बचा जनम लेता है तो वो सिसु अवस्था में होता है फिर वो सिसु अवस्था से बचपन में आता है इसके बाद वो किशोर अवस्था में आता है फिर वो किशोर अवस्था से नौजवान अवस्था में आता है इसके बाद वो नौजवान अवस्था के बाद वो अपने अधेड़ उम्र में जाता है फिर वो बृद्धा अवस्था में जाने के बाद मृत्युशैया पर चला जाता है.

ये बात ध्यान में आने के बाद मई उन सरे तस्वीरो को उसके hi अनुसार लगाने लगता हु जैसे की पहला तस्वीर नौबत बचा की फिर 5 से 7 साल के बचा इसके बाद 18 से 20 साल के नौजवान का फिर 40 से 50 साल के आदमी का इसके बाद वृद्ध आदमी का और लास्ट में मई उस वृद्ध आदमी का तस्वीर लगता हु जो अर्थी पर सोया हुआ था.

जैसे hi मई उन सरे तस्वीरो को उनके सही जगह पर लगाया हु वैसे hi वह से एक तेज़ रौशनी निकलती है और उस कवच पर पड़ती है जैसे वो रौशनी उस कवच पर पड़ती है तो वो कवच धीरे धीरे गायब हो जाता है जिसे देख कर सूर्य और सिकेन्द्र दोनों बहुत खुश हो जाते है तभी सूर्य मेरे पास आ कर मुझसे बोलता है.

सूर्य- वह प्रतिक तुमने तो कमल कर दिया जिस कवच को आज तक कोई भी तोड़ नहीं पाया उसे तुमने कुछ देर में तोड़ hi दिया मन गए गुरु तुमको.

सिकेन्द्र- मई तुम्हारे सामर्थ्य को देख कर बार बार हैरान हो रहा हु आखिर तुम्हारे अंदर कितनी खुबिया है तुम एक अद्भुत डॉक्टर के साथ साथ एक मार्टिकल आर्ट्स योद्धा hi वो हाई रैंक के और आज तुमने इस कवच को तोड़ कर ये साबित कर दिया किया तुम्हे कवच बनाने और तोड़ने का भी ज्ञान है.

उन दोनों को इस तरह से मेरा तरफ करना मुझे अच्छा नहीं लग रहा था क्युकी वो दोनों मेरा तारीफ काम और मेरा चापलूसी ज्यादा कर रहे थे इस लिए मई उन दोनों से बोलै.

मई- अब आप दोनों को अंदर भी चलना है या बस मेरी तारीफ hi करना है.

मेरी बात को सुन कर दोनों एक साथ बोले.

दोनों- है है क्यों नहीं हमें अंदर भी जाना है.

मई- तो ठीक है चलिए चलते है.

इसके बाद हम तीनो उस गुफा में अंदर जाने के लिए जैसे hi उस दरवाजे में अपना कदम रखा तो हम वह से गायब हो गए और एक मैदान में आ गए जब हम उस मैदान में पहुंचे तो हम तीनो हैरान हो गए क्युकी हम अभी कहा पहुंचे थे उस मैदान के आगे एक जंगल था और यहाँ का स्प्रिचैल एनर्जी इतना सुध था की अगर कोई यहाँ पर अपना कल्टीवेशन करे तो बहुत जल्द hi वो अपना रैंक बढ़ा सकता है ये सब देख कर सिकेन्द्र ने मुझसे बोलै.

सिकेन्द्र- प्रतिक अभी तो हम उस दरवाजे में अपना कदम hi रखे थे हम यहाँ कैसे आ गए क्या हम टेलिपोर्ट हो कर कही और पहुंच गए है.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- है अपने सही बोलै हम उस दरवाजे से टेलिपोर्ट हो कर hi यहाँ पहुंचे है और हम कही और नहीं बल्कि उसी सीक्रेट भूमि में आये है जिसके बारे में आपके डैड ने बताया था और है जिसने भी वो दरवाजा बनाया होगा उसके पास स्पेस की शक्ति होगी और वो अपने स्पेस की शक्ति से उस दरवाजे को टेलिपोर्ट बना दिया होगा ताकि कोई भी उस दरवाजे में अपना कदम रखे तो सीधा यही पर पहुंचे.

सूर्य- अगर ऐसी बात है तो फिर हम यहाँ से बहार कैसे निकालेंगे.

मई- वैसे hi जैसे हम यहाँ पर आये है मतलब की टेलिपोर्ट हो कर वो देखो सामने जो गुफा दिख रहा है उसमे भी मुझे स्पेस शक्ति का एहसास हो रहा है हो न हो वो यहाँ से बहार निकलने का hi रास्ता होगा.

सिकेन्द्र- अगर वो गुफा यहाँ से बहार निकलने का रास्ता है तो हमें एक बार चल कर उसे देखना चाहिए.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए उनसे बोलै.

मई- नहीं अभी हम यहाँ जिस काम के लिए आये है पहले उसे करते है जब हमारा वो काम हो जायेगा तब हम उस गुफा के जाँच करेंगे.

सिकेन्द्र- ठीक है तो फिर चलिए हम चलते है.

सूर्य- लेकिन हम यहाँ से किस तरफ जायेंगे क्युकी हमें तो पता hi नहीं है की हमें वो जिनसेंग कहा मिलेगा.

मई- भले hi हमें पता न हो की वो जिनसेंग हमें कहा मिलेगा लेकिन हम उसे खोज तो सकते hi है न इस लिए हमें उस जिनसेंग को ढूंढने के लिए जंगल और सामने दिख रहे पहाड़ो में जाना होगा.

सिकेन्द्र- ऐसा करते है की हम अलग अलग हो कर उस जिनसेंग को ढूंढते है ऐसे में हमें वो जल्दी मिल जायेगा.

मई- नहीं हम यहाँ अलग अलग नहीं घूम सकते है क्युकी हमें यहाँ के खतरे के बारे में पता नहीं है इस लिए हम तीनो को साथ में रहना hi अच्छा होगा और मुझे ऐसा लग रहा है की इस गुफा में बहार से भी ज्यादा खतरनाक बीस्ट हमें मिलेंगे क्युकी यहाँ का स्प्रिचैल एनर्जी बहुत घनी और सुध है.

सिकेन्द्र- ठीक है तुम जैसा बोल रहे हो हम वैसा hi करेंगे हम साथ में रह कर hi उस जिनसेंग को ढूंढेंगे.

इसके बाद हम वह से जंगल के अंदर निकल जाते है जैसे hi हम जंगल में एंटर करते है तो हमें वह पर जानवरो के खतरनाक दहाड़ सुनाई देती है जिसे सुन कर मई दोनों से बोलता हु.

मई- हम यहाँ पर रहने वाले जानवरो से बच कर रहना होगा अगर हमें वो कही पर दिख गए तो हम उन्हें बिना पता लगे अपना रास्ता बदल लेंगे.

सूर्य- ठीक है.

हम चलते चलते जंगल के बहुत अंदर आ गए थे लेकिन हमें वो 300 साल पुराण जिनसेंग कही भी नहीं मिला था इस लिए हम आगे बढ़ते जा रहे थे भले hi हमें वो जिनसेंग नहीं मिला था लेकिन मुझे वह पर बहुत सरे ऐसे जड़ी बूटियां मिली थी जो हिमालय पर भी बहुत मुश्किल से मिलता था और ये सब जड़ी बुटिया हाई लेवल के लेवल उप गोली बनाने में काम आते और अगर मई इन जड़ी बूटियों को अपने संजीवनी गोली के फार्मूले में मिला दूंगा तो वो और भी प्रभाव शैली हो जायेंगे ये सोच कर मई वह पर मिलने वाले सरे जड़ी बूटियों को इक्कठा कर के अपने स्टोरेज रिंग में सकते जा रहा था सूर्य और सिकेन्द्र मेरे पास स्टोरेज रिंग देख कर बहुत हैरान हो गए थे और मुझसे जलन भी महसूस कर रहे थे ये देख कर मई उनसे पूछा.

मई- क्या हुआ आप लोगो को आप मेरे अंगूठी को ऐसे क्यों घर कर देख रहे है.

मेरी बात को सुन कर वो दोनों हड़बड़ा गए फिर सिकेन्द्र खुद को सँभालते हुए मुझसे बोलै.

सिकेन्द्र- क्या ये स्टोरेज रिंग है.

मई- है ये स्टोरःगे रिंग hi है.

सूर्य- वाओ प्रतिक मैंने आज पहली बार एक स्टोरेज रिंग देखा है वैसे ये रिंग तुम्हारे पास कहा से आया.

मई- ये रिंग मुझे मेरे गुरुदेव ने दिया है.

सिकेन्द्र- वो ऐसा है क्या वैसे क्या तुम्हारे पास और भी स्टोरेज रिंग है क्या अगर है तो एक मुझे दे दो मई उसकी कीमत देने के लिए तैयार हु.

मई- है है तो लेकिन..

मई अभी आगे और कुछ बोलता उससे पहले hi सिकेन्द्र सिंह राठौर खुश हो गए और मुझे बिच में hi रोकते हुए बोले.

सिकेन्द्र- क्या सच में तुम्हारे पास एक और रिंग है अगर ऐसा है तो प्लीज वो स्टोरेज रिंग मुझे दे दो बदले में तुम्हे जितना भी पैसा चाहिए मई देने के लिए तैयार हु.

सिकेन्द्र के बात सुन कर सूर्य जल्दी से बोलै.

सूर्य- तुम्हारे पास सिर्फ एक hi एक्स्ट्रा स्टोरेज रिंग है अगर और भी है तो एक मुझे भी दे दो और उसके बदले में तुम जितना बोलोगे मई इतना पैसा तुम्हे दे दूंगा.

मई- ठीक है आप दोनों को एक एक रिंग से तो दूंगा लेकिन बदले में मुझे एक ऐसा चीज चाइये जो आपको मुझे देना होगा अगर आप देने के लिए तैयार है तो बोलिये.

मेरी बात को सुन कर वो दोनों ये जाने बिना की मई उनसे क्या मांगने वाला हु सूर्य और सिकेन्द्र जल्दी से बोले.

दोनों- मई वडा करता हु की इसके बदले में तुम जो भी मांगोगे वो मई तुम्हे देने के लिए तैयार हु.

उनके बातो को सुन कर मई मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- मुझे जो चाहिए वो आप दोनों मुझे नहीं दे सकते अगर कोई दे सकता है तो वो महेंद्र सिंह राठौर है अगर आप दोनों मुझे उनसे वो दिलवाने के लिए तैयार है तो मई अभी hi आप दोनों को एक एक स्टोरेज रिंग देने के लिए तैयार है.

मेरी बात को सुन कर दोनों सोच में पद गए कुछ देर सोचने के बाद सिकेन्द्र मुझसे बोलै.

सिकेन्द्र- ऐसा क्या है जो सिर्फ मेरे डैड hi तुमको दे सकते है हम नहीं दे सकते है.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए उनसे बोलै.

मई- मुझे इस आइसलैंड का तीसरा और चौथा भाग चाहिए जो सिर्फ आपके डैड hi दे सकते है बोलिये अगर आप उनसे इस आइसलैंड का तीसरा और चौथा भाग दिलवाने के लिए तैयार है तो मई आप दोनों को एक एक स्टोरेज रिंग देने के लिए तैयार हु.

मेरी बात को सुन कर दोनों हैरान हो गए और मुझे घर कर देखने लगे फिर कुछ देर ऐसे hi देखने के बाद सूर्य कुछ सोचते हुए बोलै.

सूर्य- आपको हमारे आइसलैंड का जंगल क्यों चाहिए कही आप यहाँ के जड़ी बूटियों के लिए तो ये जंगल नहीं लेना चाहते है.

मई- है तुमने सही बोलै मुझे यहाँ के जड़ी बुटिया चाहिए क्युकी मई इन जड़ी बूटियों से ऐसे ऐसे दवा बनाना चाहता हु जिससे मार्टिकल आर्ट्स के दुनिया में तहलका मच जाये और मार्टिकल आर्ट्स योद्धा को इससे फायदा हो और है साथ में मई सोच रहा हु की यहाँ पर एक मैरिटल आर्ट्स स्कूल बनाऊ जिसमे ग्रांडमास्टर लेवल के ऊपर के योद्धा ट्रेनिंग ले सके.

मेरी बात को सुन कर दोनों हैरान हो गए और मुझे ध्यान से देखने लगे की कही मई उनसे मजाक तो नहीं कर रहा हु न लेकिन उन दोनों ने देखा की मई मजाक नहीं कर रहा हु तो सिकेन्द्र मुझसे बोले.

सिकेन्द्र- आप मार्टिकल आर्ट्स योद्धा के बारे में इतना सोचते है ये जान कर मुझे अच्छा लगा लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा है की आप यहाँ पर मार्टिकल आर्ट्स स्कूल खोलना क्यों छह रहे जबकि आपको मुंबई में hi बहुत सरे ऐसे जगह मिल जायेंगे जहा आप मार्टिकल आर्ट्स स्कूल खोल सके.

सिकेन्द्र के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए उनसे बोलै.

मई- है अपने ये बात सच बोलै की मुझे मुंबई में बहुत सरे ऐसे जगह मिल जायेंगे जहा मई मार्टिकल आर्ट्स स्कूल खोल सकता हु और मैंने एक खिला भी है लेकिन मुझे यहाँ पर मार्टिकल आर्ट्स स्कूल खोलने का एक कारन है की यहाँ पर बहुत ज्यादा मात्रा में स्प्रिचैल एनर्जी से जिससे योद्धाओ को कल्टीवेशन करने बहुत मदत मिलेगी और वो लोग अपना लेवल को जल्दी जल्दी बढ़ा सकेंगे और यहाँ पर अगर मैरिटल आर्ट्स स्कूल खुल जाता है तो उससे आप लोगो को भी फायदा है और फायदा ये है की आप लोगो को जानवरो का कोई दर नहीं होगा नहीं तो आने वालो समय में ये जानवर इतना ताकतवर हो जायेंगे की उनको आपलोग या आपके गॉर्ड मिल कर भी नहीं रोक पाएंगे.

मेरी बात को सुन कर दोनों सोच में पद गए फिर कुछ देर सोचने के बाद सिकेन्द्र मुझसे बोले.

सिकेन्द्र- आप ठीक बोल रहे है आगे चल कर हमारे परिवार को इस आइसलैंड पर इन जानवरो से बहुत खतरा है और अगर यहाँ पर बहुत सरे मार्टिकल आर्ट्स योद्धा हो जायेंगे तो वो लोग अपना लेवल बढ़ने के लिए इन जानवरो का सीकर करेंगे जिसके कारन हमारे परिवार के ऊपर से खतरा ताल जायेगा इस लिए मई पूरी कोशिश करूँगा की ये जगह आपको मिल जाये.

मई सिकेन्द्र के बात को सुन कर खुस हो गया और फिर अपने स्टोरेज रिंग से दो लौ ग्रेड के स्टोरेज रिंग निकला और दोनों को दे दिया इसके बाद वह से आगे बढ़ गए और रस्ते में मिलने वाले जड़ी बूटियों को अपने स्टोरेज रिंग में डालते डालने लगा इधर सूर्य और सिकेन्द्र को जो भी जड़ी बूटी मिलता वो लोग उस जड़ी बूटी को मुझे दे दे रहे थे ऐसे चलते चलते हम उस जंगल के बीचो बिच पहुंच गए थे लेकिन अभी तक हमें वो जिनसेंग का पौधा नहीं मिला था लेकिन रस्ते में हमें बहुत सरे जानवर मिले थे जिससे बचते हुए हम यहाँ तक पहुंच गए थे हलाकि अभी तक जो भी बीस्ट मिले थे वो सरे बीस्ट लेवल एक के hi थे हम उन्हें आसानी से मर सकते थे लेकिन उनसे लड़ने में हमारा समय बहुत बर्बाद होता इस लिए हम उनसे बचते हुए आगे बढ़ रहे थे.

जब हम जंगल के बिच में पहुंचे तो वह पर हमें बहुत साडी दुर्लभ जड़ी बूटियां दिखाई दी जिसे देख कर हम तीनो उन जड़ी बूटियों को इक्कठा करने लगे तभी हमें वह पर किसी जानवर के गुरगुराने की आवाज सुनाई दी जिसे सुन कर हम तीनो सतर्क हो गए तभी हमें वह पर एक लेवल एक का भेड़िया दिखाई दिया जिसे देख कर सूर्य उसको मरने के लिए आगे बढ़ा तो मई उसे रोकते हुए बोलै.

मई- सूर्य आगे मत बढ़ो हमें यहाँ से जल्दी निकलना होगा.

मेरी बात को सुन कर सूर्य उस भेड़िये को घूरते हुए बोलै.

सूर्य- लेकिन हम यहाँ से इससे दर कर क्यों जाये यहाँ पर बहुत सरे दुर्लभ जड़ी बुटिया है हम उन्हें ऐसे hi छोड़ कर नहीं जा सकते और वैसे भी ये तो लेवल एक का भेड़िया है और मई इसे आसानी से संभल सकता हु.

मई- सूर्य हमें आगे और भी बहुत साडी दुर्लभ जड़ी बुटिया मिलेगी इस लिए इस जड़ी बूटी को छोडो और चलो यहाँ से.

सूर्य- लेकिन क्यों आप इस एक लेवल एक के भेड़िया से इतना क्यों दर रहे है.

मई- मई इससे दर नहीं रहा हु मई इसके जैसे कितने hi भेडियो को अकेले संभल सकता हु लेकिन उनसे लड़ने में हमारा समय बर्बाद होगा और वैसे भी ये अकेले नहीं है भेड़िया हमेशा झुंड में hi रहते है इस लिए इसके साथी भी अगले बगल में hi कही होंगे.

मेरी बातो को सुन कर सूर्य वह से जाने के लिए तैयार हो गया इसके बाद हम लोग वह से निकल गए इधर वो भेड़िया हमें वह से जाते हुए देख कर एक तेज़ आवाज लगाया हूउउउउउ जैसे hi उस भेड़िया ने चिलाय तो आस पास से वैसे बहुत सरे भेड़ियोंके आवाज सुनाई दी जिसे सुन कर मई बोलै.

मई- हम सब फास गए अब हम यहाँ से इनसे लाडे बिना नहीं जा सकते आप दोनों सावधान रहना क्युकी मुझे लग रहा है की हमारे ऊपर काम से काम 10 भेडियो का हमला होने वाला है.

अभी मई उन दोनों से बोल hi रहा था की तभी मैंने देख की हम तीनो को चारो तरफ से बहुत सरे भेडियो ने घेर लिया है ये देख कर मई उन दोनों से बोलै.

मई- बस आप दोनों खुद को इन भेडियो से बचा के रखना बाकि मई इन सब को देखता हु.

मेरी बात को सुन कर दोनों ने अपना अपना तलवार निकल लिया और उन भेडियो से लड़ने के लिए तैयार हो गए इधर मई भी अपने स्टोरेज रिंग से अपना चाकू निकल लिया जिसमे पांच तत्त्व की शक्ति थी फिर हम तीनो उन भेडियो से भीड़ गए सूर्य और सिकेन्द्र दोनों एक एक भेड़िया को संभल रहे थे और बाकि को मई सँभालने वाला था खैर मई अपने चाकू को अपने हाथो में कस्ते हुए उन भेडियो पर टूट पड़ा और करीब 5 मिनट में hi सरे भेडियो के मौत के घाट उतर दिया ये सरे भेड़िया रैंक एक के थे इस लिए ये मेरे लिए सिर्फ एक मामूली जानवर से ज्यादा नहीं थे इधर सूर्य और सिकेन्द्र ने भी उन दोनों भेडियो को मर दिया था.

सिकेन्द्र और सूर्य दोनों उन भेड़ियों को मरने के बाद उससे बीस्ट स्टोन निकला और मेरे पास आ गए और मैंने जिन भेड़ियों को मारा था उन से भी वो लोग बीस्ट स्टोन निकलने लगे अभी वो दोनों बीस्ट स्टोन निकल hi रहे थे की तभी वह पर एक बहुत hi खतरनाक गुरगुराने की आवाज आयी जिसे सुन कर उन दोनों के हालत ख़राब हो गए और दोनों अपने जगह पर खड़े हो कर उधर देखने लगे जिधर से गुरगुराने क्व आवाज आया था इधर मई भी उस आवाज को सुन कर उधर hi देखने लगा तो देखा की सामने एक विशालकाय भेड़िया खड़ा था वो भेड़िया दिखने में इतना खतरनाक था की अच्छे अच्छे योद्धाओ की हालत उसके देखने भर ख़राब हो जाये.

उस भेड़िये के सर पर एक सिंह था जिसमे से बिजली निकल रही थी उस भेड़िये में सबसे खतरनाक उसकी आँखे लगी रही थी वो एकदम खून जैसी लाल थी वो भेड़िया सबसे पहले अपने साथियो के तरफ देखा और उसे उसके सरे साथी मरे हुए दिखाई दिए तो वो एक तेज़ दहाड़ लगाया जिससे वो जंगल थरथरा गया फिर वो मुझे सूर्य और सिकेन्द्र को घुसे से घूरने लगा और वो धीरे धीरे हमारे तरफ बढ़ने लगा उसको अपने तरफ आता हुआ देख कर मई सूर्य और सिकेन्द्र से बोलै.

मई- आप दोनों मेरे पीछे hi रहिएगा और साथ में सावधान भी रहिएगा क्युकी ये भेड़िया रैंक 2 का बीस्ट है जो बहुत खतरनाक है इसे मई संभालता हु.

मेरी बात को सुन कर दोनों वह से थोड़ा पीछे हो गए उन दोनों को वह से हटने के बाद मई अपने चकतु को कास के पकड़ा और उस भेड़िया के तरफ बढ़ गया उस भेड़िया में जब देखा की मई उसके तरफ बेख़ौफ़ बढ़ रहा हु तो उसे और ज्यादा गुसा आ गया और वो घुसे से एक तेज़ दहाड़ गया लगाया और मुझसे हमला करने के लिए छलांग लगा दिया.

मई जैसे देखा की उस भेड़िये ने मुझ पर छलांग लगा दिया है तो मई जल्दी से एक तरफ हो गया जिससे वो मेरे पीछे जा गिरा लेकिन मुझसे यही पर एक गलती हो गयी क्युकी मेरे पीछे कुछ दुरी पर सूर्य और सिकेन्द्र खड़ा थे जिन पर उस भेड़िया के नजर पद गया और अब वो उन दोनों पर हमला करने की तयारी करने लगा इधर जब उन दोनों ने देखा की वो भेड़िया उन पर हमला करने वाला है तो दोनों दर गए.

सूर्य- प्रतिक हमें बचाओ ये भेड़िया हम पर हमला करने वाला है.

सूर्य में आवाज सुन कर मेरा ध्यान उन गया तो मैंने देखा की वो भेड़िया अपने तेज़ गति के साथ उन दोनों पर हमला करने के लिए आगे बढ़ रहा है ये देख कर मई हड़बड़ा गया और फिर बिना कुछ सोचे वह से टेलिपोर्ट हो कर उन दोनों के सामने आ कर खड़ा हो गया मुझे इस तरह से अचानक अपने सामने आते हुए देख कर दोनों हैरान हो गए हैरान तो वो भेड़िया भी हो गया था इस लिए वो एक पल के लिए अपने जगह पर hi रुक गया फिर वो अपने शिकार के सामने मुझे आते हुए देख कर घुसे से मुझ पर हमला करने के लिए तेज़ी से मेरे तरफ आने लगा इधर मई उस भेडियो को अपने तरफ आता हुआ देख कर उन दोनों से बोलै.

मई- आप दोनों चिंता मत कीजिये मेरे रहते ये भेड़िया आप दोनों का कुछ भी बिगड़ नहीं सकता बस आप दोनों यहाँ से कुछ दूर हैट जाइये.

मेरे बोलने के बाद दोनों अपने होश में वापस आये और फिर वो दोनों जल्दी से वह से कुछ दूर चले गए इधर वो भेड़िया तेज़ी से आकर मुझ पर हमला कर दिया लेकिन मई भी उसके हमले के लिए तैयार था इस लिए उसके हमले से खुद को बचते हुए अपने खंजर से उसके शरीर पर एक हमला किया जिससे उसके शरीर पर एक कट आ गया और वो मेरे हमले के कारन कुछ दूर जा कर गिरा और फिर तुरंत खड़ा हो गया और मुझे घुसे से घूरने लगा.

वो भेड़िया मुझे घुसे से घूरते हुए एक तेज़ दहाड़ लगाया तो उसके सिंह जिसमे से बिजली निकल रही थी वो चमकने लगा और उसके सिंह से खतरनाक बिजली निकले लगी जिसे देख कर मई हैरान हो गया फिर उसने अपने बिजली से मुझ पर हमला कर दिया जैसे hi उसने मेरे ऊपर अपने बिजली से हमला किया वैसे hi वो बिजली तेज़ गति से मेरे तरफ आने लगी ये देख कर मैंने अपने खंजर को उस बिजली की तरफ फेक दिया जिससे मेरा खंजर तेज़ गति के साथ जा कर उसके बिजली के हमले से टकरा गया और वह के तेज़ धमाके का आवाज गूंज गया जिसके कारन वह पर रौशनी फ़ैल गयी जिसके साथ साथ चारो तरफ हमले की खतरनाक शक्ति भी फ़ैल गयी जिसके कारन वह के पेड़ पौधे उस शक्ति के कारन नस्ट हो गए.

जब वो रौशनी ख़तम हुआ तो मैंने देखा की उस भेड़िये का हमला नस्ट हो गया था और मेरा खंजर तेज़ गति के साथ उस भेड़िये के तरफ बढ़ रहा था मेरे खंजर को अपने तरफ आता हु देख कर वो भेड़िया संभल पता उससे पहले hi मेरा खंजर उसका काम तमाम कर दिया था.

उस भेड़िये के मरने के बाद मई उसके शरीर से बीस्ट स्टोन निकला और अपने स्टोरेज रिंग में दाल लिया इधर सूर्य और सिकेन्द्र दोनों मेरे और उस भेड़िये के बिच हुए लड़ाई को देख कर हैरान थे तभी दोनों मेरे पास आये और सिकेन्द्र मुझसे बोलै.

सिकेन्द्र- ये भेड़िया तो बहुत खतरनाक था शुक्र है की तुम हमारे साथ थे वर्ण हम ऐसे खतरनाक बीस्ट के हमले से कब का मरे जाते.

सूर्य- है चाचा आप सही बोल रहे है ये भेड़िया बहुत खतरनाक था हमने पहले जिस भेड़िये से लाडे वो 1सत रैंक पर थे लेकिन ये भेड़िया 2ंद रैंक पर था शुक्र है की इस सीक्रेट भूमि के बहार 2ंद रैंक के बीस्ट नहीं थे वर्ण हमारा परिवार इस आइसलैंड पर जिन्दा नहीं बचता वैसे मुझे एक बात समझ नहीं आयी की इस भेड़िये अंदर बिजली शक्ति कहा से आयी.

उन दोनों के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए उनसे बोलै.

मई- इस भेड़िये के अंदर बिजली इस लिए थी क्युकी ये भेड़िया बिजली मूल तावता का बीस्ट था जैसे हम इंसानो में ग्रांडमास्टर रैंक के ऊपर जाने के बाद हमें कोई मूल तावता मिलता है वैसे hi बेअसतो में भी होता है अगर कोई बीस्ट 1सत रैंक पर के के 2ंद रैंक में जाता है तो उसके अंदर भी मूल तावता जागृत हो जाता है और रही बात इस भूमि से बहार 2ंद रैंक के बीस्ट न होने की तो अभी हमें बहार के जंगल को पूरी तरह से नहीं देखा है अगर बहार के जंगल में 1सत रैंक के बीस्ट है तो 2ंद रैंक के भी जरूर होंगे और मन की अगर 2ंद रैंक के बीस्ट यहाँ पर न भी हो लेकिन 1सत रैंक वाले बीस्ट को 2ंद रैंक में जाने में कितना समय लगेगा ये आज नहीं तो कल 2ंद रैंक में पहुंच hi जायेंगे तब आप सब क्या करेंगे इसलिए मई आपसे ये जगह मांग रहा हु ताकि मई यहाँ पर मार्टिकल आर्ट्स स्कूल खोल सकू और मेरे स्टूडेंट इन बेअसतो के शिकार कर के अपना लेवल बढ़ा सके.

मेरी बात को सुन कर उन दोनों ने कुछ देर सोचा फिर सूर्य मुझसे बोलै.

सूर्य- है तुम सही बोल रहे हो हम दादा जी से बात कर के तुम्हे किसी भी तरह से तीसरा और चौथा भाग दिलवा दूंगा.

फिर हम लोग वह थोड़ी देर रेस्ट किया और आगे बढ़ गए ऐसे hi उस जंगल में हमें बहुत सरे बीस्ट मिले जो रैंक 1 और रैंक 2 के बीस्ट थे रैंक 1 के बीस्ट से वो दोनों निपट रहे थे और रैंक 2 के बीस्ट से मई निपट रहा था वो लोग जिस भी बीस्ट को मर रहे थे उनका बीट कोर निकल के अपने पास रख ले रहे थे और मई भी वैसा hi कर रहा था मैंने अभी तक 5 रैंक 2 के बीस्ट को मारा था जिनका बीस्ट कोर मेरे स्टोरेज रिंग में था और साथ में हमें बहुत तरह के दुर्लभ जड़ी बुटिया भी मिली थी जिसे मई अपने स्टोरेज रिंग में डालते जा रहा था हलाकि हम जिस काम से यहाँ पर आये थे वो अभी तक हुआ नहीं था हमें रस्ते में बहुत सरे जिनसेंग मिले लेकिन कोई भी 300 साल पुराण ऑरेंज जिनसेंग नहीं था इस लिए अभी भी हमारा जिनसेंग का खोज चालू था.

ऐसे चलते चलते हम एक पहाड़ के पास पहुंच गए और वह पर हम जिनसेंग के पौधे को ढूंढने लगे ऐसे hi जिनसेंग को ढूंढते हुए हम आगे बढ़ hi रहे थे की तभी हमें वह पर एक गुफा दिखा गुफा देख कर मई उनसे बोलै.

मई- देखो सामने एक गुफा है चलो हम चल कर उस गुफा में देखते है सायद हमें वह पर वो 300 साल पुराण ऑरेंज जिनसेंग मिल जाये.

मेरी बात को सुन कर दोनों उस गुफा के तरफ देखने लगे कुछ देर उस गुफा को देखने के बाद सूर्य बोलै.

सिकेन्द्र- है तुम सही बोल रहे हो हमें एक बार इस गुफा में चल कर देखना चाहिए.

सूर्य- लेकिन अगर इस गुफा में कोई खतरनाक बीस्ट होगा तो हम क्या करेंगे.

मई- वही करेंगे जो अभी तक हम बस्ती के साथ करते आये है अगर अंदर हमें कोई बीस्ट मिला तो हम उसे मर देंगे.

सूर्य- ठीक है चलो हम अंदर चलते है.

इसके बाद हम सब उस गुफा के अंदर चले गए गुफा के अंदर बहुत अँधेरा था इस लिए हमें वह पर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था तो सिकेन्द्र ने अपने बैग से एक इमरजेंसी लाइट निकला (जो उसने यहाँ आने से पहले इमरजेंसी के लिए ले लिया था) और उसे ों कर दिया जैसे hi उसने लाइट ों किया तो गुफा में रौशनी फैल गयी फिर हम तीनो ने गुफा के अंदर के जहरीले कीड़ों के चलते अपने अपने शरीर पर अपने शक्ति से एक कवच बना लिया और आगे बढ़ने लगे अभी हम गुफा के अंदर कुछ दूर आये hi थे की तभी मुझे सिकेन्द्र के आवाज सुनाई दिया.

सिकेन्द्र- प्रतिक ये देखो ये क्या है इसमें से बहुत साडी एनर्जी निकल रही है.

प्रतिक के बोलने के बाद मई उसके पास गया और देखा तो मई चौक गया क्युकी प्रतिक जिस चीज को मुझे दिखा रहा था वो कुछ और नहीं बल्कि स्प्रिचैल स्टोन था जिसके अंदर से शुद्ध स्प्रिचैल एनर्जी निकल रहा था ये देख कर मई एक स्प्रिचैल स्टोन उठा कर देखा तो पाया की ये तो हाई ग्रैड के स्प्रिचैल स्टोन है और ऐसे स्टोन का वह पर पहाड़ लगा हुआ था मई इतने सरे हाई ग्रैड के स्प्रिचैल स्टोन देख कर बहुत खुस हो गया और सिकेन्द्र से बोलै.

मई- ये ये तो स्प्रिचैल स्टोन है वो भी हाई ग्रैड के इसे अपने पास रख लीजिये ये बहुत काम का चीज है.

मेरी बात को सुन कर सिकेन्द्र उस स्टोन को देखते हुए बोलै.

सिकेन्द्र- लेकिन इस स्टोन हम अपने पास रख कर क्या करेंगे ये किस काम में उपयोग होता है.

मई- इससे हम अपने शरीर का स्प्रिचैल एनर्जी बढ़ाते है जिसके कारन हमारे मार्टिकल आर्ट्स का रैंक बढ़ता है इसे हम अपने अपने स्टोरेज रिंग में रख लेते है और बहार जाने के बाद आपस में बटवारा कर लेंगे.

मेरी बात को सुन कर दोनों खुश हो गए और स्प्रिचैल स्टोन को अपने स्टोरेज रिंग में रखने लगे वह पर बहुत साडी स्प्रिचैल स्टोन था इस लिए मई भी बहुत साडी स्प्रिचैल स्टोन अपने स्टोरेज रिंग में रख लिया सरे स्प्रिचैल स्टोन को लेने के बाद हम आगे बढ़ गए करीब एक घंटा चलने के बाद हम उस गुफा के दूसरे छोर पर पहुंचे वह जाने के बाद हम देखा की वो जगह चारो तरफ से पहाड़ो से घिरा हुआ है

वह पर एक झरना भी गिर रहा था और वो झरना निचे गिरने के बाद एक तालाब में बदल रहा था जिसके कारन वो जगह देखने में बहुत सुन्दर लग रहा था फिर हम तीनो उस झरने के पास चले गए वह पहुंच कर मैंने देखा की उस जगह पर बहुत सरे रंग बिरंगे फ्लावर्स 🌺 उगे हुए थे जिससे वो जगह और भी सुन्दर और मनमोहक लग रहा था उस दृस्य को देख कर मन को बहुत सन्ति मिल रही थी फिर मई उस जगह को अच्छे से देखने लगा तभी मेरी नजर वह पर उगे हुए दुर्लभ जड़ी बूटियों पर और उन सरे जड़ी बूटियों के साथ 300 साल पुराण ऑरेंज जिनसेंग भी था जिसे देख कर मई बहुत खुस हो गया और जल्दी से उस जिनसेंग के पास चला गया और उसे ध्यान से देखने लगा फिर मई उस जिनसेंग को देखने के बाद तुरंत उन दोनों को अपने पास बुलाते हुए बोलै.

मई- हमें वो जिनसेंग का पौधा मिल गया जिसे ढूंढने के लिए हम यहाँ पर आये थे.

मेरी बात को सुन कर दोनों भागते हुए मेरे पास आये और उस जिनसेंग को देखने लगे मई उनको उस जिनसेंग को इस तरह से देखता हुआ देख कर उनसे बोलै.

मई- आप दोनों इस जिनसेंग के जड़ को खोद कर बहार निकालिये और अपने स्टोरेज रिंग में रख लीजिये तब तक मई आगे देखता हु शायद आगे हमें कुछ और जिनसेंग या फिर कोई दुर्लभ जड़ी बूटी मिल जाये और है इस जिनसेंग को निकलने के बाद आप लोग यहाँ पर और इसी तरह का जिनसेंग ढूंढिएगा अगर मिल जाये तो उसे भी निकल लीजियेगा.

मेरी बात को सुन कर दोनों है में सर हिलाया और अपने साथ लाये हुए चाकू से वह के जमीं खोद कर उस जिनसेंग के जड़ को निकलने लगे इधर मई उन दोनों को जिनसेंग खोद कर निकलता हुआ देख वह से आगे बढ़ गया मई वह से इस लिए जा रहा था की मई जब से उस गुफा में एंटर किया था तब से मुझे एक स्ट्रांग एनर्जी फील हो रहा था जो यहाँ आने के बाद और बढ़ गया था इस लिए मई इन दोनों को यहाँ जिनसेंग का रुट निकलने के लिए बोल कर मई उस एनर्जी को देखने के लिए जा रहा था मई देखना चाहता था की ऐसा क्या चीज है जिसमे से इतनी ज्यादा एनर्जी निकल रही है.

मई वह से सीधा उस रस्ते पर चलने लगा जिधर से वो स्ट्रांग एनर्जी मुझे आते हुए फील हो रही थी करीब 20 मिनट चलने के बाद मई एक ऐसे जगह पर पंहुचा जहा से एक गुफा अंदर की और जा रहा था मई उस गुफा को देख कर उसके अंदर जाने लगा अभी मई उस गुफा में थोड़ा hi अंदर गया था की तभी मुझे एक जगह पर पंहुचा जहा गुफा के छत से कोई हरे रंग का द्रव्य निचे टपक रहा था जिसके कारन वह पर उस द्रव्य का एक छोटा सा तालाब जैसा बना हुआ था जो लगभग 5 फ़ीट चौड़ा और 5 फ़ीट लम्बा जगह को घेरा हुआ था और जो स्ट्रांग एनर्जी मुझे बहार से फील हो रही थी वो नेचुरल एनर्जी उसी द्रव्य के छोटे तालाब से आ रहा था मई उस द्रव्य को देख कर सोच में पद गया.

मई- (अपने मन में) ये कोण सी द्रव्य है जिसमे से इतनी साडी नेचुरल एनर्जी निकल रही है मैंने इसके बारे में कही तो पढ़ा है लेकिन मुझे यद् क्यों नहीं आ रहा है (फिर कुछ देर सोचने के बाद) अरे है ये तो नेचुरल मिल्क है जो धरती पहाड़ और जड़ी बूटियों से हजारो साल में एक बार तैयार होता है और इसके एक बून्द से एक योद्धा को बहुत फायदा होता है वह यार क्या किस्मत है मेरी जो ये मुझे यहाँ पर अचानक मिल गयी मई एक काम करता हु मई इसमें से कुछ द्रव्य अपने पास रख लेता हु ये सोच कर मई अपने स्टोरेज रिंग से एक बोतल निकलता हु (ये बोत्तल मई हमेशा अपने पास रखता हु ) उसे निकला और उसमे अपने स्पेस शक्ति को दाल कर उस बोत्तल को स्टोरेज बोत्तल में बदलने लगा (स्पेस शक्ति के बढ़ने के बाद मई अब किसी भी वस्तु को स्टोरेज में बदल सकता हु) कुछ देर के म्हणत के बाद मई उस बोत्तल को स्टोरेज बोत्तल में बदल दिया हलाकि मैंने उस बोत्तल को जल्दी में स्टोरेज बोत्तल में बदला था इस लिए इसमें ज्यादा स्पेस नहीं था लेकिन जितना था उतना मेरे लिए काफी था इसके बाद मई आगे बढ़ते हुए नेचुरल मिल्क के तालाब के पास गया और मई जैसे hi अपने बोत्तल में नेचुरल मिल्क भरने वाला था की तभी मेरे पीछे से मुझे एक दहाड़ सुनाई दिया जिसे सुन कर मई पीछे मुदा तो चौक गया क्युकी मेरे सामने एक विशालकाय बिच्छू अपने डांक उठाये हुए घुसे से मुझे घर रहा था.

मई- मई जनता था की इतनी कीमती चीज यहाँ पर है तो उसका रखवाला भी होगा अब अगर मुझे इस नेचुरल मिल्क को लेना है तो इससे लड़ना होगा कोई बात नहीं अगर ऐसी चीज के लिए इसके जैसे 10 से भी लड़ना पड़े तो मई लड़ने के लिए तैयार हु.

उधर वो बिच्छू गुस्से से मुझे घूरे जा रहा था उसको ऐसे घूरता हुआ देख कर मई समझ गया की वो किसी भी वक़्त मेरे ऊपर हमला कर सकता है इस लिए मई भी अपना खंजर निकल कर उससे लड़ने के लिए तैयार हो गया उधर वो बिच्छू भी मेरे ऊपर अपने डांक से हमला करने के लिए मेरे तरफ तेज़ गति के साथ आने लगा ये देख कर मई सावधान हो गया और उसको अपने पास आने का इंतज़ार करने लगा थोड़ी देर बाद वो बिच्छू मेरे पास आया और अपने डांक से मेरे ऊपर हमला कर दिया जैसे hi उसने मेरे ऊपर हमला किया तो मई उछाल कर वह से एक साइड हो गया जिससे उस बिच्छू का हमला खली चला गया इससे उस बिच्छू को और गुसा आ गया तो उसने अपने पाइजन से मेरे ऊपर अटैक कर दिया.

जैसे hi उसने अपने पाइजन से मेरे ऊपर अटैक किया तो उसके मुँह से पाइजन का तेज़ लहार निकला और मेरे तरफ बढ़ने लगा उसका पाइजन इतना खतरनाक था की अगर वो मेरे ऊपर पड़ता तो तुरंत hi मेरा शरीर गाल जाता इस लिए मई अपने शरीर पर अपने शक्ति कवच को एक्टिवटे कर लिया इसके बाद उस बिच्छू के पाइजन आ कर मेरे कवच से टकरा गया और मेरे कवच को गलने लगा ये देख कर मई हैरान हो गया लेकिन फिर जल्दी से मई अपने शरीर के चारो तरफ एक आग का कवच बना लिया उधर उस बिच्छू के पाइजन मेरे शक्ति कवच को गलने के बाद मेरे अग्नि कवच से टकरा गया जिसके कारन वो पाइजन मेरे अग्नि से जल कर गायब होने लगा.

इधर मई उस बिच्छू के पाइजन को देख कर समझ गया की अगर मई इस बिच्छू को जल्दी hi नहीं मारा तो ये अपने पाइजन से मुझे नुकशान पंहुचा सकता है इस लिए मई अपने खंजर के सरे शक्ति को जागृत किया और उस बिच्छू पर चला दिया जैसे hi मई उस बिच्छू पर अपने खंजर से हमला किया तो मेरा खंजर तेज़ गति से उस बिच्छू के तरफ जाने लगा मैंने अपने खंजर में पांच तावता के सरे शक्तियों को एक्टिव कर दिया था जिसके कारन खंजर से पांच तावता के रौशनी निकल रहा था और साथ में भयानक शक्तिया भी निकल रहा था मई अपने खंजर के पूरा शक्तियों को इस लिए एक्टिवटे किया क्युकी मई उस बिच्छू को एक hi हमले में मरना चाहता था.

खैर मेरा खंजर तेज़ गति से जाकर उस बिच्छू से टकरा गया जिसके कारन वह पर एक बहुत hi बड़ा धमाका हुआ और उस बिच्छू के परखचे उड़ गए इधर खंजर उस बिच्छू में अंत करने के बाद वापस मेरे पास लौट आया था फिर मई आगे बढ़ कर उस बिच्छू के शरीर के टुकड़ो में से उसके बीस्ट कोर को बहार निकला और अपने स्टोरेज रिंग में रख लिया.

मई- हम्म चलो ये तो मारा गया अगर मई इसे मरने में ज्यादा समय लेता तो इस पाइजन जरूर मुझे कोई नुकशान पंहुचा देता वैसे ये अभी रैंक 3 पर hi था अगर ये रैंक 4 पर होता तो इसे मरने में मुझे बहुत प्रॉब्लम होती.

इसके बाद मई नेचुरल मिल्क के तालाब के पास गया और उसमे से नेचुरल मिल्क को अपने स्टोरेज बोत्तल में भरने लगा थोड़ी देर में उस तालाब से करीब आधा नेचुरल मिल्क को अपने बोत्तल में भरने के बाद मई उसको वैसे hi छोड़ कर वह से निकल गया और वापस उन दोनों के पास आ गया जब मई वह पंहुचा तो देखा की वो दोनों ऑरेंज जिनसेंग को निकल लिए थे और वही पर खड़ा हो कर मेरा इंतज़ार कर रहे थे.

मई- काम हो गया है या अभी बाकि है.

सिकेन्द्र- नहीं हम दोनों मिल कर यहाँ पर मजूद सरे ऑरेंज जिनसेंग उसके जड़ समेत बहार निकल लिया है.

मई- बहुत अच्छा काम किया है आप दोनों ने.

सूर्य- तुम जानते हो प्रतिक यहाँ पर हमें 6 ऑरेंज जिनसेंग मिले है.

मई- अच्छा ये तो बहुत अच्छी बात है ठीक है तो फिर हमारा यहाँ का काम ख़तम हो गया इस लिए अब हमें चलना चाहिए क्युकी यहाँ पर ज्यादा समय रुकना खतरे से खली नहीं है.

सिकेन्द्र- है तुम ये बात सही बोल रहे हो यहाँ पर बहुत खतरनाक खतरनाक जानवर है पता नहीं कोई जानवर कब यहाँ पर आ कर हम पर अटैक कर दे.

मई- ठीक है तो चलिए चलते है.

इसके बाद हम वह से निकल गए करीब 2 घंटा सफर करने के बाद हम उसी जगह पर पहुंच गए जहा हम टेलिपोर्ट हो कर आये थे फिर मई यहाँ से बहार निकलने वाले जगह पर गया तो वह भी एक बैरियर लगा हुआ था फिर मई उस बैरियर को कुछ देर के लिए बंद किया और हम तीनो दरवाजे के अंदर चले गए जैसे hi हम दरवाजे के अंदर गए तो वह से गायब हो कर सीधा बहार उसी झरने पर निकले इसके बाद हम वह से उड़ते हुए राठौर मेंशन के तरफ जाने लगे करीब 1.5 घंटा तेज़ रफ़्तार से उड़ने के बाद हम राठौर परिवार के गेट तक पहुंच गए इसके बाद सिकेन्द्र गेट पाव मौजूद गॉर्ड से बात किया तो उसने हम तीनो को अंदर आने के लिए वह पर लगे हुए बिजली को कुछ समय के लिए हटा दिया और गेट को खोल दिया.

इसके बाद हम लोग अंदर आ गए फिर थोड़ी देर चलने के बाद हम राठौर परिवार के मेन्शन में पहुंच गए जैसे hi वह पहुंचे तो हम तीनो को सही सलामत वापस लौटा हुआ देख कर वह मौजूद सरे लोग खुस हो गए.

मई- सिकेन्द्र जी मई फ्रेश होने के लिए गेस्ट में जा रहा हु और फ्रेश होने के बाद आ कर आपके डैड के लिए दवा रेडी करूँगा.

सिकेन्द्र- ठीक है आप जाकर फ्रेश हो जाइये और थोड़ा रेस्ट भी कर लीजियेगा क्युकी मई जनता हु इस सफर में आप भी हमारे तरह थक गए होंगे और रही बात दवा रेडी करने की तो थोड़ी देर रेस्ट करने के बाद दवा रेडी कर दीजियेगा.

सिकेन्द्र के बात सुन कर अपना सर है में हिलाया और उन दोनों को उन सब के पास छोड़ कर वह से सीधा गेस्ट रूम में चला आया और सीधा नहाने के लिए वाशरूम में चला गया इधर मेरे जाने के बाद कौशल्या देवी आगे बढ़ते हुए सूर्य और सिकेन्द्र के पास आयी और उनसे बोली.

कौशल्या- भगवन का शुक्र है की तुम लोग सही सलामत वापस आ गए नहीं मुझे तुम तीनो की बहुत चिंता हो रही थी.

कौशल्या देवी के बात सुन कर सूर्य मुस्कुराते हुए बोलै.

सूर्य- दादी जिसके साथ प्रतिक जैसा मार्टिकल आर्ट्स योद्धा हो तो भला कोई उसका क्या बिगड़ सकता है आप बेकार में hi हमारी इतना चिंता कर रही थी देखिये हम तीनो एकदम सही सलामत है.

सूर्य के बात सुन के सब हैरान हो गए तभी संजय सिंह राठौर ने सूर्य से बोलै.

संजय- सूर्य तुम ये क्या बोल रहे हो प्रतिक तो एक डॉक्टर है न तो तुम उसे मार्टिकल आर्ट्स योद्धा क्यों बोल रहे हो और इसने ऐसा क्या कर दिया जो तुम इसकी इतनी बड़ाई कर रहे हो.

संजय के बात सुन कर सूर्य कुछ बोलने hi वाला था की तभी सिकेन्द्र उसको रोकते हुए संजय से बोलै.

सिकेन्द्र- भैया सूर्य सही बोल रहा है प्रतिक डॉक्टर के साथ साथ एक मैरिटल आर्ट्स योद्धा भी है और सायद उसका रैंक सुडो ग्रांडमास्टर से ऊपर की है अगर वो हमारे साथ नहीं होता तो हम रस्ते में hi मरे जाते.

संजय- चलो अच्छा है जो तुम लोग सही सलामत आ गए वैसे तुम सब जिस काम के लिए गए थे वो हुआ या नहीं.

सूर्य- है डैड वो काम हो गया है हमें वो 300 साल पुराण ऑरेंज जिनसेंग मिल गया है अब दादा जी बिलकुल ठीक हो जायेंगे.

सूर्य के बात सुन कर सरे लोग खुस हो गए फिर सूर्य और सिकेन्द्र भी वह से अपने अपने रूम में चले गए इधर मई नहाने के बाद थोड़ी देर रेस्ट किया और फिर गेस्ट रूम से बहार आ कर वह मौजूद एक नौकर को सूर्य और सिकेन्द्र को बुलाने के लिए बोलै थोड़ी देर में दोनों मेरे पास आ गए.

सिकेन्द्र- है प्रतिक तुमने हम दोनों को बुलाया कुछ काम था क्या.

मई- नहीं मुझे आपसे कोई काम नहीं था बस मई सोच रहा था की आपके डैड के लिए दवा जल्दी से रेडी कर दू ताकि वो बिलकुल स्वस्थ हो जाये और जितनी जल्दी आपके डैड ठीक होंगे उतने hi जल्दी मई अपने घर वापस जा सकता हु वैसे भी मुझे घर से निकले हुए आज 3 दिन हो गए है.

मेरी बात को सुन कर सिकेन्द्र कुछ सोचते हुए बोले.

सिकेन्द्र- अगर तुम यही चाहते हो तो ठीक है बताओ तुम्हे दवा के लिए क्या क्या चाहिए केवल जिनसेंग से काम चल जायेगा या और भी कुछ चाहिए.

मई- नहीं आप मुझे वो जिनसेंग दे दीजिये बाकि के जड़ी बूटी मेरे पास पहले से मौजूद है और है मुझे दवा बनाने के लिए कोई खुली जगह चाहिए और वह पर मुझे डिस्टर्ब करने वाला भी कोई नहीं चाहिए.

सिकेन्द्र- ठीक है आप मेरे साथ आइये.

इतना बोलने के बाद सिकेन्द्र और सूर्य वह से चल दिए ये देख कर मई भी उनके साथ जाने लगा थोड़ी देर चलने के हम मेन्शन के पीछे आ गए जहा पर एक सुन्दर सा गार्डन था वह आने के बाद सिकेन्द्र मुझसे बोले.

सिकेन्द्र- तुम्हे दवा बनाने के लिए ये जगह सही रहेगी या मई दूसरा कोई जगह देखु.

मई- नहीं ये ठीक है मई अपना दवा यही बना लूंगा लेकिन ध्यान रखियेगा की कोई मुझे डिस्टर्ब न करे.

सिकेन्द्र- तुम उसकी चिंता मत करो यहाँ पर बिना तुम्हारे आज्ञा के कोई भी नहीं आएगा अब तुम आराम से यहाँ अपना दवा रेडी करो.

इसके बाद सूर्य अपने स्टोरेज रिंग से सरे जिनसेंग निकल कर मुझे दे दिया और फिर दोनों वह से चले गए उनके जाने के बाद मई अपने स्टोरेज रिंग से दवा बनाने वाला कड़ाही निकला और साथ में बहुत साडी जड़ी बूटी निकल कर दवा बनाने लगा करीब आधे घंटे के बाद दवा बन कर रेडी हो गया.

इस दवा को बनाने में एक पूरा जिनसेंग के रुट और साथ में 5 तरह के और भी जड़ी बूटी का उसे किया था जिसके कारन कड़ाही में अभी 4 गोली बन कर रेडी थी फिर मई उन सरे गोली को एक दबे में रख दिया इसके बाद मई सरे सामने को अपने स्टोरेज रिंग में दाल कर मेन्शन के अंदर आ गया जैसे hi मई मेन्शन के अंदर आया तो मुझे देख कर सूर्य मेरे पास आया और मुझसे बोलै.

सूर्य- क्या दवा रेडी हो गया

मई- है हो गया.

सूर्य- ठीक है तो चलो सब दादा जी के रूम में तुम्हारा इंतज़ार कर रहे है.

मई- है ठीक है चलो.

इसके बाद मई सूर्य के महेंद्र सिंह राठौर के रूम में चला गया जब मई वह पंहुचा तो देखा की सरे लोग वह पर मौजूद थे और महेंद्र सिंह राठौर अपने बीएड पर लेते हुए थे जैसे hi मई रूम में एंटर किया तो सिकेन्द्र सिंह राठौर मेरे पास आये और मुझसे बोले.

सिकेन्द्र- प्रतिक क्या तुमने दवा बना लिया.

मई- है सिकेन्द्र जी दवा रेडी हो गया.

सिकेन्द्र- ठीक है लेकिन अब आगे क्या करना है.

मई सिकेन्द्र के बात सुन कर दबा में से एक गोली निकला और सिकेन्द्र को बोलै.

मई- बस अब इस गोली को आपके डैड को खिलाना है और फिर कुछ देर बाद आपके डैड बिलकुल ठीक हो जायेंगे.

मेरी बात को सुन कर सरे लोग खुस हो गए फिर कौशल्या देवी मेरे पास आयी और मुझसे बोली.

कौशल्या- बीटा क्या सच में इस गोली को खाने से वो ठीक हो जायेंगे.

मई- है दादी जी वो इस दवा को खाने के बाद बिलकुल ठीक हो जायेंगे आप चिंता मत कीजिये.

इतना बोल कर मई सीधा महिंद्रा सिंह राठौर के बीएड के पास गया और वो गोली उनको देते हुए बोलै.

मई- आप इस गोली को खा लीजिये इसको खाने के बाद आपको थोड़ा चाकर आएगा और आपको वोमिटिंग होगा लेकिन आप घबराइयेगा नहीं क्युकी आपके अंदर जमा हुआ पाइजन वोमिटिंग के माध्यम से hi बहार आएगा.

महेंद्र- ठीक है बीटा तुम चिंता मत करो मई ऐसी छोटी मोती परेशानियों से नहीं घबराता.

इतना बोल कर महेंद्र सिंह राठौर ने गोली खा ली गोली खाने के कुछ देर तक कुछ भी नहीं हुआ लेकिन फिर अचानक महेंद्र सिंह राठौर को वोमिटिंग होना सुरु हो गया वो कुछ देर तक वोमिटिंग करते रहे इसके बाद वो सुस्त हो कर अपने hi बीएड पर लेट गए या सायद बेहोश हो गए थे उनको इस तरह से सुस्त पड़ता हुआ देख कर संजय सिंह राठौर मेरे पास आये और मुझसे बोले.

संजय- ये ऐसी क्यों पड़े हुए है कही तू हरे दवा खाने के बाद उनको कुछ हो तो नहीं गया न.

मई- अरे आप घबराइए नहीं उनको कुछ भी नहीं हुआ है उनकी ऐसी हालत इस लिए है की वो पहले से बहुत कमजोर थे और वो वोमिटिंग करते करते सुस्त पद गए है इस लिए सायद वो बेहोश हो गए है.

मेरी बात को सुन कर सब ने रहत की साँस ली फिर सिकेन्द्र मुझसे बोलै.

सिकेन्द्र- ठीक है लेकिन वो होश में कब तक आएंगे और उनकी ये कमजोरी कब तक रहेगी.

मई- वो कुछ देर में होश में आ जायँगे और रही बात उनकी कमजोरी की आप एक बाथ तब तैयार करवाइये जिसमे गर्म पानी हो और मई आपको एक लिक्विड दूंगा उस लिक्विड को उस पानी में मिला दीजियेगा जिससे वो पानी पूरी तरह से हरा हो जायेगा इसके बाद आप अपने डैड को उस पानी में तब तक रखियेगा जब तक की उस पानी से सारा हरा रंग ख़तम न हो जाये.

 
अपडेट 41

माँ से पहली मुलाकात

पटना के कुशवाहा मेंशन में इस वक़्त विनोद कुशवाहा कही जाने की तयारी कर रहे थे तभी उनके पास मृत्युंजय आता है अपने डैड को कही जाने की तयारी करते हुए देख कर बोलता है.

मृत्युंजय- डैड आप कही जा रहे है क्या.

विनोद- है आज मेरी एक इम्पोर्टेन्ट मीटिंग है और उस मीटिंग को अटेंड करना बहुत जरुरी है इस लिए मई आज दिल्ली के लिए निकल रहा हु.

विनोद के बात सुन कर मृत्युंजय के मन में अजीब सी बेचैनी होने लगी उसे लगने लगा की आज उसके डैड से उसका आखरी मुलाकात है इस लिए वो थोड़ा बेचैनी भरी आवाज में अपने डैड को बोलै.

मृत्युंजय- डैड आज सुबह से hi मुझे कुछ अजीब सा महसूस हो रहा है और आपको बहार जाने के बारे में सुन कर मेरी बेचैनी और बढ़ गयी मुझे लग रहा है डैड की कुछ गलत होने वाला है इस लिए डैड आप आज के मीटिंग को कैंसिल कर दिए और इस मीटिंग को किसी और दिन रख लीजिये.

मृत्युंजय के बात सुन कर विनोद उसको ध्यान से देखने लगते है फिर वो अचानक से हसने लगते है और हस्ते हुए बोलते है.

विनोद- ये आज तुम्हे क्या हो गया है मृत्युंजय तुम आज कैसी बहकी बहकी बातें कर रहे हो लगता है की तुमने रत को कोई बुरा सपना देखा है और उसका असर अभी तक तुम्हारे अंदर है इस लिए तुम दर रहे हो तुम चिंता मत करो मुझे कुछ नहीं होगा.

विनोद के बात सुन कर मृत्युंजय कुछ परेशां होते हुए बोलै.

मृत्युंजय- डैड मैंने कोई सपना नहीं देखा मई सच बोल रहा हु मुझे ऐसा लग रहा है की आज मेरा कोई अपना मुझसे बिछड़ने वाला है और आपके और चाचू के शिवा मेरा अपना है hi कोण.

मृत्युंजय के बात सुन कर विनोद इमोशनल हो जाते है फिर वो मृत्युंजय को समझते हुए बोलते.

विनोद- देखो बीटा ऐसी कोई बात नहीं है तुम्हारा कोई अपना तुमसे बिछड़ने वाला नहीं है बस तुम्हे ये इस लिए लग रहा है की मई आज तक तुमको छोड़ कर कही नहीं गया आज पहली बार मई तुमको अकेले छोड़ कर जा रहा हु इस लिए तुमको ऐसा लग रहा है.

मृत्युंजय- तो डैड आप आज क्यों मुझे अकेले छोड़ कर जा रहे है हमेशा की तरह इस बार भी आप मीटिंग के लिए अपने सेक्रेटरी को hi क्यों नहीं भेज दे रहे है.

विनोद- बीटा आज के मीटिंग बहुत इम्पोर्टेन्ट है और मुझे उस मीटिंग में रहना जरुरी है और वैसे भी मेरी सेक्रेटरी 2 दिन के छूती पर गयी हुयी है समझे अब तुम छोटे बचे नहीं रह गए हो इस लिए मेरे बात को समझो और मुझे जाने दो.

विनोद के बात सुन कर मृत्युंजय अपने मन में hi सोचता है.

Mrityunjay-(apne मन में) शायद डैड ठीक बोल रहे है डैड मुझे छोड़ कर कभी भी बहार नहीं गए है और आज पहली बार जा रहे है इस लिए शायद मुझे ऐसा लग रहा है मई डैड को जाने के लिए बोल देता हु.

इतना सोचने के बाद मृत्युंजय अपने डैड से बोलता है.

मृत्युंजय- Ok डैड आप जा सकते है लेकिन आप कब तक वापस आइयेगा.

विनोद- मुझे दिल्ली में और भी कुछ काम है इस लिए मुझे वापस आने में 2 दिन लग जायेंगे तब तक तुम अपना ख्याल रखना.

अपने डैड के बात सुन कर मृत्युंजय दुखी मन से बोलता है.

मृत्युंजय- Ok डैड आप आराम से मीटिंग अटेंड कर के आओ यहाँ मई अपना और कंपनी का ख्याल अच्छे से रख लूंगा.

मृत्युंजय के बात सुन कर विनोद मुस्कुराते हुए बोलते है.

विनोद- चलो तुमने मेरी एक टेंशन काम कर दी अब मई कंपनी के टेंशन लिए बिना दो दिन तक आराम से दिल्ली में रहूँगा ठीक है मई अब निकलता हु.

इतना बोल कर वो एयरपोर्ट के लिए निकल गए उनके जाने के थोड़ी देर बाद बसंत चौहान के पास किसी का कॉल आता है.

बसंत- है बोलो तुम इतनी सुबह सुबह मेरे पास कॉल क्यों किया है.

कॉलर- हैल्लो सर अपने मुझे बोलै था न की विनोद कुशवाहा पर नजर रखने के लिए तो मई उन्ही के बारे में बताने के लिए कॉल किया है.

जैसे hi बसंत उस कॉलर के मुँह से विनोद कुशवाहा के नाम सुना तो वो एक डैम से सावधान हो गया और उससे बोलै.

बसंत- है बोलो क्या खबर है उसके बारे में.

कॉलर- सर मुझे अभी अभी पता चला है की आज बसंत कुशवाहा 2 दिन के लिए दिल्ली जा रहा है.

उस कॉलर के बात सुन कर बसंत चौहान खुश हो जाता है और उससे बोलता है.

बसंत- अच्छा क्या तुम सच बोल रहे हो.

कॉलर- यस सर ये 100% सच्ची बात है वो आज 10 बजे के फ्लाइट से दिल्ली जा रहा है.

बसंत- तुमने ये अच्छा किया जो मुझे बता दिया मई तुम्हारे इस काम के लिए मई तुम्हारे अकाउंट में 50 लाख ट्रांसफर कर रहा हु लेकिन यद् रखना की किसी को ये पता नहीं चलना चाहिए की मैंने तुम्हे विनोद कुशवाहा के इनफार्मेशन निकलने के लिए बोलै था नहीं तो तुम जानते hi हो की तुम्हारे साथ क्या हो सकता है.

बसंत के बात सुन कर कॉलर दर जाता है और डरते हुए बसंत से बोलता है.

कॉलर- आप चिंता मत कीजिये मई मर जाऊंगा लेकिन मई ये जुबान किसी के भी नहीं खोलूंगा.

बसंत- यही तुम्हारे लिए अच्छा होगा.

इतना बोल कर बसंत कॉल कट कर देता है और फिर किसी और आदमी के पास कॉल लगा कर बोलता है.

बसंत- विनोद आज दिल्ली जा रहा है तुम दिल्ली में अपने आदमी को कांटेक्ट करो और उससे बोलो की विनोद वह से वापस नहीं आना चाहिए और है तुम जो कुछ भी करना वो सब एक एक्सीडेंट लग्न चाहिए.

2ंद कॉलर- जी बॉस आप जैसा बोल रहे है हम वैसा hi करेंगे.

इधर विनोद कुशवाहा अपने घर से निकल कर सीधा एयरपोर्ट चले और वह से फ्लाइट पकड़ कर दिल्ली के लिए निकल गए करीब 1 घंटे के उड़न के बाद वो दिल्ली में लैंड हुए और एक तस्य पकड़ कर अपने अपने कंपनी के गेस्ट हाउस में चले गए फिर करीब एक घंटे बाद उनका जिस कंपनी के साथ मीटिंग था वो वह गए और मीटिंग अटेंड करने लगे.

ये मीटिंग करीब दो घंटे तक चला और आखिर में वो डील क्रेक कर hi लिया इसके बाद वो कंपनी के कार में hi ड्राइव के साथ गेस्ट हाउस के लिए निकल गए अभी वो कंपनी से लगभग 5 किलोमीटर दूर hi आये थे की तभी एक अनियंत्रित ट्रक आ कर उनके कार को थोक देता है जिसके कारन कार हवा में ऊपर hi चार राउंड घूमता है इसके बाद वो उल्टा हो कर निचे गिर जाता है जिसके चलते वो कार पूरा चिपटा हो जाता है और उस कार में बैठे विनोद कुशवाहा और ड्राइवर दोनों स्पॉट पर hi मर जाते है.

इधर मृत्युंजय अपने डैड के जाने के बाद खुद को किसी तरह से संत करता है हलाकि उसके दिल में अभी भी बेचैनी उठ रही थी लेकिन वो उसको इग्नोर कर के अपने डैड के जगह खुद hi कंपनी चला जाता है और वह का काम करने लगता है उसे ऑफिस आये हुए अभी 3 घंटे Hi हुए थे की अचानक उसकी दिल की बेचैनी बहुत ज्यादा और उसे कुछ बुरा होने का अहसास होने लगता जिसके कारन वो तुरंत अपने डैड को कॉल करता है लेकिन विनोद कुशवाहा का कॉल लग hi नहीं रहा था.

इधर विनोद कुशवाहा के कार एक्सीडेंट होने के कुछ देर बाद वह पर लोगो के भीड़ जमा होने लगता है उसी भीड़ में से किसी ने पुलिस को एक्सीडेंट के बारे में बताता है और साथ में एम्बुलेंस को भी कॉल कर देता है फिर कुछ देर बाद पुलिस और एम्बुलेंस वह पर आ जाती है इसके बाद विनोद और उस ड्राइवर के लाश को कार से बहार निकला जाता है फिर पुलिस विनोद की तलाशी लेते है तो उनके पास से एक टुटा हुआ मोबाइल मिलता है और साथ में उनका I'd कार्ड और एक डायरी मिलता है जिसमे मृत्युंजय का मोबाइल नंबर था ये देख कर पुलिस इंस्पेक्टर ने मृत्युंजय को कॉल लगाया इधर अपने मोबाइल पर किसी अननोन नंबर से कॉल आता हुआ देख कर मृत्युंजय ने पहले तो उसे इग्नोर कर दिया फिर कुछ सोच कर उसने कॉल रिसीव किया.

मृत्युंजय- हैल्लो कोण बोल रहा है.

इंस्पेक्टर- जी मई दिल्ली पुलिस से इंस्पेक्टर क्सक्सक्स बोल रहा हु क्या मेरी बात मर. मृत्युंजय से हो रही है.

जब इंस्पेक्टर के मुँह से दिल्ली पुलिस सुना तो वो घबरा गया लेकिन वो किसी तरह खुद को संत करते हुए बोलै.

मृत्युंजय- जी मई मृत्युंजय hi बोल रहा हु बताइये मई आपकी क्या मदत कर सकता हु.

मृत्युंजय के बात सुन कर इंस्पेक्टर कुछ देर के लिए चुप हो जाता है जैसे वो मृत्युंजय को वो सब बताने के लिए हिमत जूता रहा हो फिर वो मृत्युंजय से बोलता है.

इंस्पेक्टर- दरअसल मई आपके पास इस लिए कॉल किया हु की अभी अभी यहाँ पर एक कार एक्सीडेंट हुआ है और उस कार में बैठे सवारी और ड्राइवर दोनों मर गए है उनमे से एक आदमी के बास मुझे विनोद कुशवाहा का ईद कार्ड और आपका नंबर मिला है तो क्या आप विनोद कुशवाहा को जानते है.

जैसे hi मृत्युंजय उस इंस्पेक्टर के मुँह से अपने डैड का नाम सुना तो उसे सदमा लग गया और वो धाम से वही गिर गया उसके गिरने के आवाज सुन कर बहार काम कर रहा एक एम्प्लोयी अंदर आया और उसने देखा की मृत्युंजय सदमे में वजह से निचे गिरा हुआ है और फ़ोन पर हैल्लो हैल्लो का आवाज आ रहा है तो पहले मृत्युंजय को उठा कर सोफे पर लेटाया और फिर उसका मोबाइल अपने कण में लगाए हुए बोलै.

एम्प्लोयी- जी आप कोण बोल रहे है और आप ऐसा क्या बोल दिए की मेरे बॉस को सदमा लग गया है.

एम्प्लोयी के बात सुन कर इंस्पेक्टर समझ जाता है की मृत्युंजय सायद विनोद का कोई करीबी रिस्तेदार होगा जो विनोद के मरने की बात सुन कर उसे सदमा लग गया है फिर वो एम्प्लोयी को सारा बात बताना है जिसे सुन कर उस एम्प्लोयी को भी सदमा जैसा लगा लेकिन वो खुद को सँभालते हुए बोलै.

एम्प्लोयी- जी विनोद कुशवाहा हमारे बॉस है और वो मृत्युंजय सर का डैड है इसी लिए मृत्युंजय सर को सदमा लगा होगा.

इंस्पेक्टर- ठीक है आप उनके किसी रिश्तेदार को कॉल कर के जल्दी से दिल्ली आने के लिए बोलिये.

एम्प्लोयी- जी ठीक है.

इधर इंस्पेक्टर के बात सुन कर उस एम्प्लोयी के भी हालत ख़राब था उसको समझ में hi नहीं आ रहा था की वो क्या करे इस लिए तुरंत बहार गया और अपने साथी से साडी बाटे बताई जिसे सुन कर सब दुखी हो गए और उनके आँखों से आंसू आने गिरने लगा.

विनोद कुशवाहा अपने एम्प्लोयी को अपना परिवार मानते थे और किसी भी एम्प्लोयी को किसी चीज की जरुरत हो तो वो तुरंत आगे आ कर उस एम्प्लोयी के प्रॉब्लम को हल करते थे इस लिए सरे एम्प्लोयी उनको अपना मंटा था और जब उन्ही एम्प्लोयी ने सुना की उनका बॉस अब इस दुनिया में नहीं रहा तो वो सब रोने लगे इसके बाद धीरे धीरे ये बात पूरा पटना में फ़ैल गया की विनोद कुशवाहा का दिल्ली में एक्सीडेंट हो गया जिसके कारन अब वो इस दुनिया में नहीं रहे.

इधर मृत्युंजय को जब होश आया तो वो वही पर दहाड़ मर मर कर रोने लगा उसको इस तरह से रोटा हुआ देख कर सरे एम्प्लोयी उसके केबिन में आ गए और उसके समझने लगे वो लोग किसी तरह से समझा कर उसको उसके घर भेज दिया इधर मृत्युंजय घर आने के बाद सीधा अपने चाचा सुरेंद्र कुशवाहा के पास कॉल गया और अपने डैड के एक्सीडेंट के बार में बताया जिसे सुन कर सुरेंद्र उससे बोलै.

सुरेंद्र- मृत्युंजय तुम घर पे रुको और मई यहाँ से सीधा दिल्ली के लिए निकल रहा हु.

मृत्युंजय- ठीक है चाचा जी.

इधर जैसे hi पूरा पटना को पता चला की विनोद कुशवाहा अब इस दुनिया में नहीं रहे तो सरे लोग मृत्युंजय कुशवाहा के घर के पास जमा होने लगे तो वही पूनम चौहान भी मृत्युंजय के घर आ गयी और मृत्युंजय से बोली.

पूनम- मृत्युंजय मुझे अंकल के बारे में सुन कर बहुत बुरा लगा लेकिन तुम चिंता मत करो मई हु न तुम्हारे साथ मई तुम्हे छोड़ कर कही नहीं जाउंगी इस लिए तुम अब खुद को अकेला मत समझो और रही बात अंकल की तो उनको इतना hi दिन हमारे बिच रहना लिखा हुआ था.

पूनम को इस तरह के बात सुन कर मृत्युंजय के जो आंसू रुक चुके थे वो भी चलने लगा और वो पूनम के गले लिपट कर फुट फुट कर रोने लगा और बोलने लगा.

मृत्युंजय- सब मेरी गलती है मुझे डैड को जाने hi नहीं देना चाहिए थे मुझे सुबह से hi कुछ गलत होने का एहसास हो रहा था मैंने डैड को बहुत समझाया की आज वो कही बहार न जाये लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं सुनी.

मृत्युंजय को इस तरह से रोटा और बोलता हुआ देख कर पूनम झूठ मुठ के अपने आँखों में आंसू लेट हुए बोली.

पूनम- मृत्युंजय इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है जिसको इस दुनिया से जाना लिखा होता है वो कैसे भी चला hi जाता हज और तुम इस तरह से मत रोयो तुम बताओ की तुम्हारे आँखों में आंसू देख कर अंकल जहा भी होंगे वह उनको अच्छा लग रहा होगा इस लिए अपने आँखों के आंसू को पूछो और बहार चलो देखो बहार कितने आदमी तुम्हारा इंतजार कर रहा है.

पूनम के बाद सुन कर मृत्युंजय अपने आँख में आंसू को पोछा और फिर वो बहार निकल आया जब वो बहार आया तो बहार खड़े लोग उसको देख कर उसके साथ दुःख ब्यक्त करने लगे और साथ में उसे सांत्वना भी देने लगे ऐसे hi धीरे धीरे सैम होने लगी इधर सुरेंद्र भी विनोद के लाश को फ्लाइट से ले कर पटना आ गया था फिर विनोद के शरीर को अंतिम संस्कार किया गया.

इधर पूनम सुबह से ले कर विनोद के अंतिम संस्कार तक मृत्युंजय के साथ hi रहा धीरे धीरे समय बिताने लगा और फिर विनोद के तेरहवी भी बिट गया.

एक दिन ऐसी hi मृत्युंजय अपने चाचा सुरेंद्र कुशवाहा और पूनम के साथ बैठा हुआ था की वह विनोद के वकील आया और मृत्युंजय के हाथो में एक फाइल दिया उस फाइल को देख कर मृत्युंजय उस वकील से पूछा.

मृत्युंजय- अंकल ये क्या है और आप इसे मुझे क्यों दे रहे है.

मृत्युंजय के बात सुन कर वकील कुछ सोचते हुए बोलै.

वकील- बीटा ये तुम्हारे डैड का वसीहत है और उन्होंने मुझसे बोलै था की अगर किसी दिन उन्हें कुछ hi जाये तो मक इस वसीहत को तुम्हे सौप दू इसलिए अब आप इसे सम्भालिये.

उस वकील के बात सुन कर मृत्युंजय और सुरेंद्र दोनों हैरानी से कभी उस वसीहत को तो कभी उस वकील को देख रहे थे तो वही वसीहत के नाम सुन कर पूनम के आँखों में एक चमक आ गयी थी फिर वो मृत्युंजय और सुरेंद्र को हैरानी से बहार निकलते हुए बोली.

पूनम- मृत्युंजय तुम इस वसीहत को पढ़ो अंकल ने आखिर क्या लिखा है इस वसीहत में.

पूनम के बात सुन कर मृत्युंजय उस वसीहत को पढ़ने लगता है थोड़ी देर तक उस वसीहत को पढ़ने के बाद मृत्युंजय उन लोगो से बोलै.

मृत्युंजय- डैड ने इस वसीहत में पटना के सारा बिज़नेस जायदाद सब मेरे नाम कर दिए है और वाराणसी के सारा बिज़नेस और जायदाद अंकल के नाम कर दिए है.

मृत्युंजय के बात सुन कर पूनम खुश तो थी लेकिन ये सुन कर की वाराणसी का सारा बिज़नेस सुरेंद्र के नाम हो गया है वो थोड़ा दुखी हो गयी लेकिन वो अपना दुःख को अपने अंदर छुपाते हुए बोली.

पूनम- ठीक है मृत्युंजय मई अब चलती हु मई कल फिर तुमसे मिलने आउंगी.

मृत्युंजय- ठीक है ध्यान से जाना.

इसके बाद पूनम वह से चली गयी उसके जाने के बाद वकील भी वह से निकल गया इधर पूनम वह से सीधा अपने घर गयी और अपने डैड के रूम में जा कर उनसे बोली.

पूनम- इस बूढ़े ने मरते मरते भी हमसे अपना आधा सम्पति बचा कर चला गया.

पूनम के बात सुन कर बसंत बोलै.

बसंत- क्या बात है बेटी तुम किसके ऊपर इतना भड़क रही हो.

पूनम- डैड मई उस बूढ़े विनोद की बात कर रहा हु वो मरते मरते अपने जायदाद को दो हिसो में बात कर चला गया.

पूनम के बात सुन कर बसंत उसके बातो को समझने की कोशिश करने लगा जब उसे कुछ समझ में नहीं आया तो वो झुंझलाते हुए पूनम से बोलै.

बसंत- पूनम तुम इस तरह से पहेलियाँ क्यों बुझा रही हो तुम मुझे साफ साफ क्यों नहीं बताती की आखिर बात क्या है.

अपने डैड के बात सुन कर पूनम एक गहरी साँस छोड़ती है और अपने डैड से बोलती है.

पूनम- डैड उस विंडो ने यहाँ का सम्पति मृत्युंजय के नाम और वाराणसी के सम्पति को सुरेंद्र के नाम कर दिया है.

पूनम के बात सुन कर बसंत कुछ देर सोचने के बाद बोलै.

बसंत- है तो इसमें इतना गुसा होने वाली क्या बात है अभी हम उसकी पटना के सम्पति को hi हथियायेंगे बाद में वाराणसी के बारे में सोचेंगे.

पूनम- ठीक है डैड लेकिन सब आगे क्या करना है.

पूनम के बात सुन कर बसंत मुस्कुराते हुए बोलै.

बसंत- अब आगे तुम्हारे इंगेजमेंट होगी वो भी मृत्युंजय के साथ.

इधर राठौर आइसलैंड पर मई ऑरेंज जिनसेंग और कुछ जड़ी बूटियों को मिला कर एक दवा तैयार किया जिसको खाने के बाद महेंद्र सिंह राठौर वोमिटिंग करते करते बेहोश हो गए उनको बेहोश होने के बाद मई सिकंदरा से एक बाथटब 🛁 तैयार करने के लिए बोलै मेरी बात को सुन कर सिकंदरा तुरंत अपने नौकर को आर्डर दिया की वो जल्दी से एक बाथटब 🛁 तैयार करो जिसमे गर्म पानी हो थोड़ी देर बाद वो नौकर आ कर बताया की बाथटब तैयार है जिसे सुन कर मई सिकंदरा के साथ उस बाथरूम में गया जहा गर्म पानी वाला बाथटब तैयार किया गया था इसके बात मई अपने स्टोरेज रिंग से नेचुरल मिल्क निकला और उसका 10 बून्द मई उस पानी में दाल दिया जिसके कारन वो पानी पूरी तरह से हरा हो गया इसके बाद मई सिकंदरा से बोलै.

मई- मई अभी आपके डैड को होश में ले कर आता हु इसके बाद आप उनको इस बाथटब 🛁 में सुला दीजियेगा और उनसे बोलियेगा की वो सोये सोये थी अपने कल्टीवेशन पर ध्यान लगाए और तब तक ऐसा करे जब तक की ये हरा पानी फिर से नार्मल पानी में न बदल जाये.

मेरी बात सुन कर सिकंदरा है में गर्दन हिलाते हुए बोलै.

सिकंदरा- ठीक है तुम जैसा बोल रहे हो हम वैसा hi करेंगे लेकिन मुझे तुमसे एक बात पूछनी थी.

सिकंदरा के बात को सुन कर मई समझ गया की वो मुझसे क्या पूछना चाहता है लेकिन मई वो बात उसके hi मुँह से सुनना चाहता था इस लिए मई उससे बोलै.

मई- आपको मुझसे जो भी पूछना है पूछ सकते है अगर मेरे बस में होगा तो मई आपके बातो का जबाब जरूर दूंगा.

मेरी बात को सुन कर वो कुछ सोचते हुए मुझसे बोले.

सिकंदरा- अभी तुमने इस बाथटब में जो लिक्विड कोण सी थी और उससे मेरे डैड को क्या क्या फायदा हो सकता है.

सिकंदरा के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए उनसे बोलै.

मई- मई जनता था की आप यही सवाल मुझसे करने वाले है ठीक है मई बताता हु दरअसल इस लिक्विड को नेचुरल मिल्क बोलते है ये लिक्विड प्राकृतिक के सर जड़ी बुटिया और न जाने कैसे कैसे प्राकृतिक के दुर्लभ चीजों से हजारो साल में तैयार होता है अगर किसी को इसका 5 बून्द भी मिल जाये तो समझो की उसका किस्मत खुल गया दरअसल इससे बहुत फायदे है जैसे ये शरीर के नदियों में जमा हुए गंदगियों को साफ करता है और नदियों के ब्लॉकेज को भी हटा देता है अगर कोई स्वतः आदमी इसका इस्तेमाल करे तो वो अपना लेवल आराम से बढ़ा सकता है और रही बात आपके डैड की तो इस लिक्विड से उनको जो फायदा होगा वो किसी को भी नहीं होगा सबसे पहले तो उनकी साडी कमजोरी ठीक हो जाएगी इसके बाद इतने दिन से जहर के कारन इसके शरीर में जो नदिया डैमेज हो गया वो बिलकुल ठीक हो जायेंगे जिसके कारन ये फिर से अपने लेवल को प्राप्त कर लेंगे और आखिर में हो सकता है की वो अपने लेवल को पर कर के आगे भी बढ़ जाये.

मेरी बात को सुन कर पहले तो सिकंदरा हैरान हो गया और फिर खुसी के साथ मुझसे बोलै.

सिकंदरा- तुम और कितना उपकार करोगे हम सब पर प्रतिक हम लोग तो तुम्हारे उपकार के अंदर दबते hi चले जा रहे है पता नहीं हम सब तुम्हारे इस उपकार का बदला चूका पाएंगे भी या नहीं.

मई- अरे आप ये कैसी बाटे किये जा रहे है पायल मेरी दोस्त है और आप लोग पायल के फॅमिली इस नाते आप लोग हमारा भी फॅमिली हुए तो बताइये की क्या अपने फॅमिली पर भी कोई उपकार करता है क्या और वैसे भी मेरे जैसे अनाथ को दादी जी ने अपना नाती मन है तो मेरा भी तो इस परिवार के लिए कुछ फर्क बनता है.

मेरी बात को सुन कर सिकंदरा कुछ न बोले बस मुस्कुरा दिए लेकिन वो अपने मन में जरूर कुछ बोल रहे थे.

सिकंदरा- (अपने मन में) मुझे पूरा बिस्वास है की ये सिर्फ पायल की नहीं तुम्हारी भी फॅमिली है मुझे पूरा यकीं है की तुम hi हमारा रूद्र हो क्युकी अगर ऐसा न होता तो तुम्हारे शरीर पर वही निशान और गले में वही लॉकेट कैसे होता जो बचपन के रूद्र के पास था तुम जरूर हमारा रूद्र hi हो बस एक बार डीएनए टेस्ट कर के पता लगा लू अगर डीएनए मैच कर गया तो हम सब अब तुम्हे तू अंत के जिंदगी नहीं जीने देंगे.

मई इस तरह से सिकंदरा को खुद में hi गम देख कर उनसे बोलै.

मई- सिकंदरा जी आप कहा खो गए चलिए और चल कर आप अपने डैड को यहाँ के कर आइये ताकि वो जल्दी से ठीक हो सके.

मेरी बात को सुन कर सिकंदरा अपने होश में आया और हड़बड़ाते हुए बोले.

सिकंदरा- है है चलो चलते है.

इसके बाद हम दोनों महेंद्र सिंह राठौर के रूम में आ गए इसके बाद मई उनको होश में लेकर आया फिर उनको नौकरो के मदत से उठा कर सीधा बाथरूम में ले कर आ गए और उन्हें बाथटब 🛁 में सुलाने के बाद उनको मैडिटेशन करने के लिए बोल दिया फिर वो हमारी बात को मने हुए बाथटब में सोते हुए hi कल्टीवेशन करना सुरु कर दिया जिसके चलते गर्म पानी में मिक्स नेचुरल मिल्क उनके रोम छिद्रो के माध्यम से उनके शरीर में जाने लगा ऐसे hi लगभग दो घंटे है उसकी बाथ में ट्रेनिंग करते रहे जिसके चलते धीरे धीरे वो पानी हरे रंग से नार्मल हो गया.

पानी को नार्मल होने के बाद भी महेंद्र सिंह राठौर वैसे hi ध्यान में बैठे रहे करीब आधा घंटा बाद राठौर परिवार के मेन्शन के जिस हिसे में वो बाथरूम था उस हिसे के ऊपर स्प्रिचैल एनर्जी का बड़ा सा सैलाब सा आ गया जिसके चलते वह पर एक बवंडर सा उठने लगा और वो बवंडर उस बाथरूम में घुसने का प्रयास करने लगा तभी संजय सिंह राठौर के नजर उस बवंडर पर जाता है जिसे देख कर वो जल्दी से बाथरूम के अंदर जाते है.

जब वो बाथरूम में पहुंच कर अपने डैड को देखते है तो वो अपने डैड को देख कर चौक जाते है क्युकी इस वक़्त महेंद्र सिंह राठौर बिलकुल ठीक हो गए थे और उसी बाथटब में बैठ कर ध्यान कर रहे थे जिसके कारन उनके शरीर से हलकी रौशनी निकल रही थी ये सब देख कर वो जल्दी से मेरे पास आये और मुझसे बोले.

संजय- प्रतिक मेरे डैड जिस बाथरूम में ध्यान कर रहे है उस बाथरूम के ऊपर एक भयानक बवंडर बना हुआ है कही इसका कनेक्शन मेरे डैड के ध्यान करने से तो नहीं है.

संजय सिंह राठौर के बात सुन कर मई भी हैरान हो गया क्युकी मैंने ये नहीं सोचा था की इतनी जल्दी उनकी रैंक बढ़ जायेगा अगर मुझे ये पता होता तो मई उनको उस बाथरूम के जगह खुले मैदान में लेकर जाता अगर जल्दी hi उनको वह से हटाया नहीं गया तो उस स्प्रिचैल एनर्जी के बवंडर बाथरूम के छत को तबाह करते हुए अंदर आ जायेगा और बाथरूम के छत के मलबे से महेंद्र सिंह राठौर घायल भी हो सकते है इस लिए हमें जल्दी hi कुछ करना पड़ेगा नहीं तो बहुत प्रॉब्लम हो जाएगी फिर मई जल्दी से संजय सिंह राठौर को बोलै.

मई- आप एक काम कीजिये अपने डैड को उस बाथरूम से निकल कर एक खुले मैदान में ले जाइये लेकिन ये ध्यान रखियेगा की उनका ध्यान भांग न हो और ये सब जल्दी कीजिये नहीं तो वो बवंडर उस बाथरूम के छत को तोड़ कर अनादर आ सकता है जिससे आपके डैड घायल भी हो सकते है.

मेरी बात को सुन कर संजय सिंह जल्दी से कुछ नौकर को बुलाते है और अपने डैड को उस बाथरूम से बाथटब 🛁 के साथ उठा कर बैकयार्ड में बने गार्डन में ले कर चले जाते है जिसके कारन वो स्प्रिचैल एनर्जी का बवंडर भी उनके पीछे पीछे गार्डन में आ जाता है फिर संजय सिंह राठौर उस बाथटब को वही पर रख कर वह से हैट जाते है और उनसे कुछ दुरी बना कर खड़े हो जाते है इधर सरे घर वाले भी संजय सिंह राठौर के साथ साथ hi बहार आ गए थे क्युकी स्प्रिचैल एनर्जी के बवंडर के बारे में उन सब को भी पता चल गया था इस लिए सब महेंद्र सिंह राठौर के लिए परेशां थे और साथ में डरे हुए भी थे इस लिए वो भी बैकयार्ड में खड़े को कर चुपचाप सब कुछ होता हुआ देख रहे थे.

इधर वो बवंडर तेज़ गति से घूमते हुए महेंद्र सिंह राठौर के शरीर में सामने लगता है जिसके कारन वो 5 फ़ीट ऊपर हवा में ऊपर उठ जाते है फिर धीरे धीरे कर के वो सरे स्प्रिचैल एनर्जी उनके शरीर में चली जाती है जिसके चलते वो बवंडर भी संत हो जाता है.

जब साडी स्प्रिचैल एनर्जी महेंद्र सिंह राठौर के शरीर में चला जाता है इसके बाद वो अपनी आँखे खोलते है तो उनके चेहरे पर एक मुस्कान थी अब वो पहले से कुछ ज्यादा hi जवान लग रहे थे मई उनको इस तरह से मुस्कुराते हुए देख कर उनके पास गया और उनसे बोलै.

मई- मुबारक हो आप सम्राट रैंक पर पहुंच गए अब आपकी जिंदगी 100 साल और बढ़ गयी.

मेरी बात को सुन कर जहा महेंद्र सिंह मुस्कुरा रहे थे वही सरे घर वाले तो मेरी बात सुन कर कुछ देर के लिए हैरान हो गए थे फिर थोड़ी देर बाद सबके चेहरे पर खुसी नजर आने लगी तभी कौशल्या देवी मेरे पास आयी और अपना हाथ जोड़ कर मुझसे बोली.

कौशल्या- ये सब तुम्हारे चलते हुआ है बीटा तुम तो हमारे परिवार के लिए फरिस्ता बन आये हो तुम्हारे इस उपकार का बदला मेरा परिवार मरते डैम नहीं चूका पायेगा.

महेंद्र- कौशल्या सही बोल रही प्रतिक बीटा तुम सच में हमारे लिए एक फरिस्ता हो मई तो कभी सोचा भी नहीं था की मई एक दिन सम्राट रैंक पर पहुंच पाउँगा लेकिन तुम्हारे चलते आज मई सम्राट रैंक पर पहुंच गया अब मई 100 साल और hi सकता हु इसके लिए मई तुम्हे जितना भी धन्यवाद् करू वो काम है.

संजय- मई सच बोलू तो मुझे तुम पर बिस्वास hi नहीं था की तुम मेरे डैड को ठीक कर सकते हो लेकिन आज तुम मेरे डैड को ठीक कर के और उनका लेवल बढ़ा कर मुझे गलत साबित कर दिया आज से तुम भी मेरे परिवार का hi एक सदस्य हो इस लिए मई तुम्हे एक बचन देता हु की तुम्हे कभी भी कही चाहे कोई भी सिचुएशन हो मई तुम्हारा हमेसा मदत करूँगा.

सिकंदरा- भाई सही बोल रहे है प्रतिक तुम आज मेरे डैड को बचा कर और उनका लेवल बढ़ा कर तुमने हमरा दिल जित लिया है अब से तुम हमारे परिवार का hi एक हिंसा हो तुम्हे कभी भी किसी भी चीज की जरुरत हो तो बस एक बार हमें यद् कर के देखना हम तुम्हारी उस जरुरत को पूरा करने की कोशिश जरूर करेंगे.

मई- आप लोग बेकार में hi मेरी इतनी तारीफ कर रहे है मई तो बस वही किया जो एक डॉक्टर होने के नाते मेरा फ़र्ज़ था और मुझ जैसे अनाथ को अपने परिवार का हिंसा समझे उसके लिए आप सब को बहुत बहुत सुक्रिया.

मेरी बात को सुन कर कौशल्या देवी के दिल में एक तीस सी उठी और वो मुझसे बोली.

कौशल्या- प्रतिक आज तो तुम खुद को अनाथ बोल दिया लेकिन आज के बाद अगर तुम खुद को अनाथ बोलै तो तुम मुझे फिर कभी भी दादी मत बोलना.

कौशल्या देवी के बात सुन कर मई थोड़ा इमोशनल हो गया लेकिन फिर खुद को ठीक करते हुए उनसे बोलै.

मई- सॉरी दादी आज के बाद मई खुद को अनाथ नहीं बोलूंगा.

इधर हम सब के बात को सुन कर महेंद्र सिंह राठौर सब से बोले.

महेंद्र- तुम सब को यही खड़े खड़े बात करना है या अंदर भी चलना है पायल तुम जा कर देखा की खाना रेडी हुआ है या नहीं.

पायल- जी दादा जी.

इतना बोल कर पायल अंदर चली गयी उसके जाने के बाद हम सब भी बैकयार्ड से मेन्शन के अंदर आ गए फिर थोड़ी देर बाद आ कर पायल बोली की खाना रेडी है तो हम सब डाइनिंग टेबल पर खाना खाने के लिए आ गए आज राठौर परिवार के सरे मेंबर बहुत खुस थे क्युकी आज बहुत दिनों बाद राठौर परिवार के मुखिया महेंद्र सिंह राठौर उन लोगो के बैठ कर खाना का रहे थे जब सरे लोग दिंनिंग टेबल पर बैठ गए तब महेंद्र सिंह राठौर मुझसे बोले.

महेंद्र- प्रतिक मैंने सिकंदरा और सूर्य से सुना की तुम्हे उस आइसलैंड का तीसरा और चौथा भाग चाहिए वो बोल रहा था की तुम वह पर एक मैरिटल आर्ट्स स्कूल खोलना चाहते हो.

महेंद्र सिंह राठौर के बात सुन कर सिकंदरा और सूर्य के अलावा वह पर मौजूद सरे लोग चौक गए और मुझे देखने लगे तभी मई महिंद्रा सिंह राठौर के बातो का जबाब देते हुए बोलै.

मई- जी आपको सिकंदरा जी ने सही बोलै है मुझे वो जगह चाहिए अगर आप मुझे वो जगह दे देंगे तो आपकी बहुत मेहरबानी होगी.

मेरी बात को सुन कर महेंद्र सिंह राठौर कुछ सोचने लगे इधर मेरे बातो को सुन कर कौशल्या देवी मुझसे बोली.

कौशल्या- बीटा तुम इतने खतरनाक जगह पर मार्टिकल आर्ट्स स्कूल क्यों खोलना चाहते हो अगर उस जगह पर बचे मार्टिकल आर्ट्स की ट्रेनिंग लेंगे तो उनकी जान का खतरा वह पर ज्यादा होगा तुम उन मासूम बच्चो की जान को खतरा में क्यों डालना चाहते हो.

मई- जी दादी जी आप सही बोल रही है लेकिन वो यहाँ पर ट्रेनिंग लेने आएंगे वो कोई बचा नहीं होंगे बल्कि वो सब ग्रांडमास्टर के लेवल के ऊपर के योद्धा होंगे और रही बात खतरे की तो एक मार्टिकल आर्ट्स योद्धा बिना खतरों के मार्टिकल आर्ट्स योद्धा नहीं बनता है और यहाँ पर रहने के बाद उन सब की लेवल भी जल्दी बढ़ेगी क्युकी यहाँ पर बहुत सरे ऐसे जड़ी बूटियां मौजूद है जिनका उपयोग कर के वो लोग लेवल बढ़ा सकते है.

मेरी बात को सुन कर महेंद्र सिंह राठौर कुछ देर सोचने के बाद बोले.

महिंद्रा- देखो प्रतिक तुम मुझे ठीक कर के मेरी और मेरे परिवार को बहुत मदत किया है इस लिए मई तुम्हे वो जगह देने के लिए तैयार हु और साथ में मई तुम्हे यहाँ पर मार्टिकल आर्ट्स स्कूल तैयार करने और उसे सुरु करने में भी मदत करूँगा लेकिन मेरी तुमसे एक रिक्वेस्ट है.

महेंद्र सिंह राठौर के मुँह से मई रिक्वेस्ट वाली बात सुन कर हैरान हो गया क्युकी अगर महेंद्र सिंह राठौर मुझसे किसी बात को लेकर रिक्वेस्ट कर रहे है तो बात जरूर को गंभीर hi होगी इस लिए मई उनकी बातो के बारे में सोचते हुए उनसे बोलै.

मई- दादा जी आप सब ने मुझे अभी अभी अपने फॅमिली का मेंबर बनाया है और मुझसे रिक्वेस्ट कर रहे है मई भी अब आपके फॅमिली का एक मेंबर हु इस नाते आप मुझे आर्डर दीजिये इस तरह से मुझसे रिक्वेस्ट कर के आप मुझे पराया मत बनाइये है.

मेरी बात को सुन कर वह पर बैठे सरे लोग इमोशनल हो गए फिर महेंद्र सिंह राठौर मुस्कुराते हुए मुझसे बोले.

महेंद्र- तुमने ये बात बोल कर आज मेरा दिल जीत लिया लेकिन बीटा मई अपने फॅमिली वालो को भी आज तक आर्डर नहीं दिया तो तुमको कैसे दे सकता हु तो अब तुम मुझे बताओ की क्या तुम मेरी हेल्प करने के लिए तैयार हो.

मई- जी आप बताइये आपको मुझसे किस तरह का हेल्प चाहिए मई करने के लिए तैयार हु.

मेरी बात सुन कर वो कुछ देर के लिए संत रहे फिर वो मुझसे बोले.

महेंद्र- तुम जानते हो प्रतिक मई ये बात आज तक किसी भी बहार वाले को नहीं बताया लेकिन मई तुम्हे अपना मंटा हु इस लिए मई आज तुम्हे अपने परिवार का एक सचाई बता रहा हु मेरे इस फॅमिली में सबसे ज्यादा ताकतवर 2 लोग थे वो दोनों मुझसे भी ज्यादा ताकतवर थे वो दोनों कोई और बल्कि मेरा सबसे छोटा बीटा और छोटी बहु थी वो दोनों अपने 25 साल के उम्र में hi सुडो ग्रांडमास्टर के लेवल पर पहुंच गए थे लेकिन मेरे एक दुश्मन को ये रास नहीं आया और उसने धोखे से उन पर हमला कर दिया जिससे मेरा बीटा कही गायब हो गया और मेरी बहु कोमा में चली गयी और उनके साथ मेरा एक प्यारा पोता भी था जो उसी समय से गायब है मेरी बहु आज 15 साल से कोमा में मैंने उसे बहुत सरे डॉक्टर से दिखाया लेकिन आज किसी ने भी उसे ठीक नहीं किया इस लिए मई तुमसे रिक्वेस्ट कर रहा हु की मेरी बहु को ठीक कर दो अगर तुम उसे सही कर दिए तो मई उसके बदले में तुम्हे अपनी साडी प्रॉपर्टी भी देने के लिए तैयार हु.

मुझे ये बात बताते बताते हु महेंद्र सिंह राठौर के आँखों में आंसू आ गया था वही वह मौजूद सरे लोगो के भी आँखों में आंसू आ गया था ये देख कर hi लग रहा था की ये लोग अपने परिवार से कितना प्यार करते होंगे ये अपने परिवार के एक मेंबर के लिए अपना पूरा प्रॉपर्टी देव पर लगाने से भी पीछे नहीं हेट ये सब देख कर मेरे मन में एक तीस सी उठ गयी की क्या मेरे परिवार के लोग भी मुझे इतना hi प्यार करते होंगे क्या वो लोग मेरे लिए भी आंसू बहा रहे होंगे क्या मेरे माँ डैड मुझे यद् करते होंगे या नहीं ऐसे hi न जाने कितने सवाल मेरे मन में घूमने लगे फिर मई किसी तरह से अपने ख्यालो से बहार आया और महेंद्र सिंह राठौर को बोलै.

मई- आप चिंता मत कीजिये मई उनको ठीक करने की पूरी कोशिश करूँगा और इसके लिए मुझे आपसे कोई भी प्रॉपर्टी नहीं चाहिए वैसे भी अब मई इस परिवार का एक मेंबर हु इस नाते इस परिवार के लोगो को बचाना मेरा फ़र्ज़ है बस आप मुझे वह पर ले कर चलिए.

मेरी बात को सुन कर सब खुस हो गए वही महेंद्र सिंह राठौर के चेहरे पर एक उम्मीद नजर आने लगी लेकिन वो कुछ सोच कर मुझसे बोले.

महेंद्र- अभी रत हो गयी है इस लिए अभी खाना खाने कर रेस्ट करो हम तुम्हे सुबह में उसके पास ले कर चलेंगे वैसे भी तुम 300 साल पुराण जिनसेंग खोज कर लेन में बहुत थक गए होंगे.

मई- आप ठीक बोल रहे है मई उस सफर से सच थक गया हु इस लिए मई उनको कल सुबह hi देखूंगा.

इसके बाद हम सब ने खाना खाया फिर मई गेस्ट रूम जा कर आराम करने लगा नेक्स्ट डे सुबह उठ कर मई सबसे पहले फ्रेश हुआ इसके बाद मई बैकयार्ड में बने हुए गार्डन में आ गया और वह बैठ कर मैडिटेशन करने लगा करीब 1 घंटा मैडिटेशन करने के बाद मई उठा और फिर वह से गायब हो कर सीधा आइसलैंड के चौथे भाग में पहुंच गया वह पहुंचने के बाद मई वह पर अपने सरे शक्तियों का ट्रेनिंग करने लगा लगा करीब 2 घंटा ट्रेनिंग करने के बाद मई समय देखा तो 7 बजने वाले थे इस लिए मई वह से टेलिपोर्ट हो कर सीधा गेस्ट रूम में पहुंच गया इसके बाद बाथरूम में जाकर नहाया और फिर बहार आ गया मई जैसे hi बहार आया तो देखा की गेस्ट रूम के बहार पायल कड़ी थी जो मुझे देख कर मुस्कुराते हुए बोली.

पायल- तुम आ गए मई तुम्हे hi बुलाने के लिए आयी थी दिंनिंग टेबल पर नास्ते के लिए सब तुम्हारा इंतज़ार कर रहे है.

मई- वो अच्छा ठीक है चलो चलते है.

पायल- और प्रतिक शनाया कैसी है.

मई- वो तो बिलकुल ठीक है लेकिन वो तुमसे जरूर गुसा है तुम उसको बिना बताये hi आ गयी थी काम से काम अपने बेस्ट फ्रेंड को बताना तो चाहिए था न की तुम घर जा रही हो.

मेरी बात को सुन कर पायल उदास हो गयी फिर वो मुझसे बोली.

पायल- तुम तो जानते hi हो की मुझे यु अचानक वह से आने का कारन क्या था खैर छोडो ये सब बाटे और बताओ तुम्हारा और शनाया के बिच सब कुछ ठीक हुआ या फिर तुम दोनों अभी भी पहले के hi तरह रहते हो.

पायल के बात को सुन कर मई चौक गया मुझे समझ में नहीं आ रहा था की मई पायल के बातो का क्या जबाब दू इस लिए मई उसके बातो को इग्नोर कर के सीधा दिंनिंग रूम में अंदर आ गया जहा पर सरे लोग बैठे हुए थे मुझे वह आया देख कर महेंद्र सिंह राठौर मुझसे बोले.

महेंद्र- अरे प्रतिक तुम आ गए चलो आओ और यहाँ पर बैठ कर नाश्ता करो इसके बाद मई तुम्हे अपनी छोटी बहु के पास ले कर चलूँगा.

मई- जी ठीक है.

इतना बोल कर मई महेंद्र सिंह राठौर के चेयर के साइड में लगे हुए चेयर पर बैठ गया और ब्रेकफास्ट करने लगा ब्रेकफास्ट करने के बाद महेंद्र सिंह राठौर मुझे ले कर अपने मेन्शन के अंदरूनी हिसे में मुझे ले कर गए जहा एक रूम बना हुआ था हमारे साथ राठौर परिवार के सरे मेंबर भी थे खैर उस रूम के पास जाने के बाद महेंद्र सिंह राणा ने दरवाजे को खटखटाया तो अंदर से एक नर्स ने दरवाजा खोला.

दरवाजा खोलने के बाद उस नर्स ने देखा की सामने महेंद्र सिंह राठौर खड़े है तो वो दरवाजे से एक साइड हो गयी उनको साइड होने के बाद हम सब अंदर आ गए अंदर आने के बाद मैंने देखा की उस रूम को भी महेंद्र सिंह राठौर के रूम जैसे पूरा मेडिकल रूम बनाया हुआ था उस रूम वो सब फैसिलिटी थी जो एक हॉस्पिटल में होती है इसे देखते hi मुझे समझ में आ गया था की इस रूम में जो कोई भी है वो राठौर परिवार के लिए कितना महत्व रखता है.

मई उस रूम में चारो तरफ घूम कर देख hi रहा था की तभी मेरी नजर वह बीएड पर बेसुध पड़ी हुयी एक औरत पर गयी जैसे hi मई उस औरत को देखा तो मेरा दिल जोरो से धड़कने लगा और मेरी आँखों के सामने कुछ धुंधली सी तस्वीरें चलने लगी धीरे धीरे वो तस्वीर क्लियर होने लगी और उस तस्वीर में मुझे वो hi औरत दिखी जो अभी बीएड पर बेसुध लेती हुयी थी जब मेरे मन में वो तस्वीर क्लियर हुआ तो पता नहीं क्यों मेरे आँखों से आंसू निकलने लगा.

मई- (अपने मन में) ये मेरे आँखों से आंसू क्यों निकल रहे है और ये औरत को सायद महेंद्र सिंह राठौर के सबसे छोटी बहु है उसका तस्वीर मेरे दिमाग में क्यों है क्या मई इनसे पहले मिल चूका हु नहीं नहीं ऐसा कैसे हो सकता है की ये तो कब से कोमा में है तो मई इनसे पहले कैसे मिल सकता हु लेकिन फिर इनकी तस्वीर मेरे मन में क्यों है और इनको ऐसे हालत में देख कर मेरे दिल में दर्द क्यों हो रहा है मेरा इनसे क्या रिस्ता है कही यही तो मेरी माँ.... नहीं नहीं ऐसा कैसे हो लेकिन गुरुदेव भी मुझसे बोले थे की जब मेरी फॅमिली का कोई मेंबर मुझसे मिलेगा तो मुझे आभास हो जायेगा कही राठौर परिवार hi तो मेरी फॅमिली नहीं है क्युकी जब मई इन सब से मिला तो मुझे ऐसा लगा की इन सब से मेरी कोई रिस्ता है ये लोग मेरे अपने hi है और महेंद्र सिंह राठौर भी बोल रहे थे की उनका एक पोता कही खो गया था.

मई ये सब सोचे जा रहा था और बीएड पर लेती हुयी औरत को देखे जा रहा था जिसके कारन मेरे आँखों से आंसू गिर रहा था इधर जब सब की नजर मुझ पर तो मेरे आँखों में आंसू देख कर सब हैरान हो गए तभी कौशल्या देवी मेरे पास आ कर मुझसे बोली.

कौशल्या- क्या हुआ प्रतिक तुम तो क्यों रहे हो क्या हुआ है तुम्हे तुम ठीक तो हो न.

कौशल्या देवी के बात सुन कर मुझे लगा की मई उनसे लिपट कर खूब रौ लेकिन मई खुद को संत करते हुए उनसे बोलै.

मई- पता नहीं जब मई इनको इस हालत में बीएड पर लेता हुआ देखा तो अपने आप hi मेरे आँखों में आंसू आ गए मुझे इन्हे इस हालत में देखा नहीं जा रहा है.

इतना बोलने के बाद मई अपने मन में सोचा.

मई- (अपने मन में) अब मई इन लोगो को क्या बताऊ की मुझे ऐसा लग रहा है की इनसे मेरा कोई करीबी रिस्ता है अगर मई बोलूंगा की मुझे ऐसा लग रहा है की ये मेरी माँ है तो वो लोग यही सोचेंगे न की मई उनके परिवार में शामिल होने के लिए झूठ बोल रहा हु फिर वो सब मुझे गलत समझेंगे मुझे सबसे पहले ये पता करना पड़ेगा की ये मेरी फॅमिली है या नहीं और ये औरत जो अभी कोमा है वो मेरी माँ है या फिर उनके कोई जानने वाला क्युकी ऐसा भी हो सकता है की मई अपनी माँ या फॅमिली के साथ इनको पहले देखा हु इस लिए इनकी तस्वीर मेरे जेहन में है सबसे पहले मुझे पता करना पड़ेगा की आखिर सचाई क्या है.

इधर मेरी बात सुन कर सबने है में सर हिलाया वही कौशल्या देवी अपने मन में बोली.

Kaushalya-(Apne मन में) मुझे ऐसा क्यों लग रहा है की ये झूठ बोल रहा है कही इसे मेरी छोटी बहु को देख कर कुछ यद् तो नहीं आया अगर ये सच में मेरा वही पोता है जो सालो पहले खो गया था तो जरूर उसे अपनी माँ को देख कर कुछ यद् आया होगा लेकिन वो पूरा सचाई पता करना चाहता है अब मुझे जल्दी से जल्दी इसका डीएनए टेस्ट करवाना होगा.

इधर कौशल्या देवी अपने सोच में गम थी तो वही महेंद्र सिंह राठौर मुझसे बोले.

महेंद्र- प्रतिक ये मेरी छोटी बहु नंदनी सिंह राठौर है ये करीब 15 साल से इसी अवस्था है मैंने उसको बहुत सरे डॉक्टर को दिखाया लेकिन ये ठीक नहीं हो पायी.

मई- आप चिंता मत कीजिये अगर भगवन ने चाहा तो ये जल्दी hi ठीक हो जाएंगे मई इनका check-up कर के देखता हु.

इतना बोलने के मई अपने मन में बोलै.

मई- (अपने मन में) अगर मुझे सचाई जननी है तो उन्हें मुझे किसी भी हालत में ठीक करना hi होगा वैसे भी मुझे ऐसा लग रहा है की ये मेरी माँ है तो मई उनके लिए कुछ भी करूँगा.

इसके बाद मई नंदनी के बीएड के पास गया और उन्हें ध्यान से देखने लगा इतने दिन से कोमा में रहने के कारन उनका शरीर पूरा सुख चूका था ऐसा लग रहा था की उनके शरीर में सिर्फ हड़िया hi बची हुयी है थोड़ी देर देखने के बाद जब मुझे कुछ समझ में नहीं आया तो मैंने अपना दिव्या दृस्टि एक्टिव किया और उन्हें ध्यान से देखने लगा अपने दिव्या दृस्टि से देखने के बाद मैंने पाया की उनके शरीर में बहुत साडी अंदरूनी छोटे लगी है खास कर के उनके सर में जिसके वजह से वो कोमा में चली गयी है थोड़ी देर और उन्हें देखने के बाद मई अपना दिव्या दृस्टि वापस लिया और महेंद्र सिंह राठौर के पास आ गया.

महेंद्र- तुमको कुछ पता चला की ये कोमा में क्यों गयी है और ये कैसे कोमा से बहार आएँगी.

महेंद्र सिंह राठौर के बात सुनाने के बाद मई कुछ देर सोचने के बाद बोलै.

मई- है मुझे पता चल गया है की ये कोमा में कैसे गयी है और ये कैसे ठीक हो सकती है.

मेरे बात को सुन कर सब खुश हो गए तभी कौशल्या देवी मुझसे बोली.

कौशल्या- तो तुम हमें बताओ की ये कोमा में कैसे गयी है और इसे कोमा से बहार निकलने के लिए हमें क्या करना होगा.

मई- इनके शरीर में बहुत साडी अंदरूनी छोटे लगी हुयी है और इनका कोमा में जाने का मई कारन यह है की इनकी ब्रेन में एक बहुत बड़ी छोटी है जो समय के साथ और गहरा होते गया है अगर इनको कोमा से बहार लाना है तो सबसे पहले इनके अंदरूनी जखम को ठीक करना होगा इसके बाद उनके ब्रेन में लगी छोट को ठीक करना होगा जो बहुत मुश्किल है.

महेंद्र- इसको ठीक करने के लिए तुमको जो भी करना हो तुम करो इसे ठीक करने के लिए चाहे जितनी भी पैसा खर्च करना पड़ेगा मई करने के लिए तैयार हु.

मई- बात पैसो की नहीं है मई इनके अंदरूनी जखम को तो आराम से ठीक कर दूंगा लेकिन इनके ब्रेन के जखम को ठीक करने के लिए मुझे एक ऐसी औषधि चाहिए जो मिलना बहुत मुश्किल है.

महेंद्र- ऐसी कण सी औषधि है जो मिलना मुश्किल है तुम मुझे बताओ अगर वो औषधि इस दुनिया के किसी भी कोने में होगा तो मई उसे ले आऊंगा.

मई- हलाकि मुझे उम्मीद काम लग राहु है की आपको वो औषधि मिलेगी लेकिन अगर आपको उसे खोजने के कोशिश करना है तो एक बार कर के देख लीजिये वो औषधि सुनहरी कमल आप इस सुनहरी कमल को ढूंढिए अगर वो आपको मिल जाये तो ठीक है नहीं तो फिर मई कोई और उपाय देखूंगा वैसे मई अभी कुछ औषधियों को मिला कर एक लिक्विड तैयार कर देता हु जिसे आप स्लिने में मिला कर इनके बॉडी में इंजेक्ट कीजियेगा जिससे इनकी अंदरूनी जखम ठीक हो जायेगा और साथ में इनकी हेल्थ भी ठीक हो जाएगी.

महेंद्र- ठीक है.

इसके बाद मई वह से गेस्ट रूम में चला जाता हु और वह जाने के बाद मई कुछ जड़ी बूटियों को नेचुरल मिल्क के 2 बून्द के साथ मिला कर एक लिक्विड तैयार करता हु इस लिक्विड से नंदनी सिंह राठौर के अंदरूनी जखम के साथ साथ उनके शरीर के सरे कमजोरियों को भी ठीक हो जायेगा फिर मई उस लिक्विड को ले कर सीधा महेंद्र सिंह राठौर के पास गया और उनको वो लिक्विड देते हुए बोलै.

मई- आप इस लिक्विड को उनके शरीर में स्लिने के साथ इंजेक्ट कीजियेगा और है इस लिक्विड में से सिर्फ 5 मल hi स्लिने में डालियेगा और ये हर 2 दिन में एक बार उनके बॉडी में तब तक इंजेक्ट कीजियेगा जब तक की मई इनका इलाज पूरी तरह से न कर दू.

महेंद्र- ठीक है मई तुम्हारी बात को यद् रखूँगा और है मई इस आइसलैंड के तीसरे और चौथे भाग के डॉक्यूमेंट रेडी कर के कुछ दिन में तुम्हारे पास भेजवा दूंगा.

मई- ठीक है तो अब मई यहाँ से चलता हु जब आपको सुनहरी कमल के बारे में कोई इनफार्मेशन मिले तो आप मुझे बता दीजियेगा.

मेरे जाने के बात सुन कर महेंद्र सिंह राठौर चौक गए फिर वो मुझसे बोले.

महेंद्र- तुम इतना जल्दी जा रहे हो अरे भाई तुमने मेरी बीमारी को ठीक किया है तो कुछ दिन और यहाँ रुक कर हमारा मेहमान नवाजी का लिफ्ट उठाओ.

मई- नहीं दादा जी मई फिर कभी आपकी मेहमान नवाजी का लुफ्त उठाऊंगा लेकिन मुझे अभी जाना होगा क्युकी मई घर पर 3 दिन के लिए hi बता कर आया था और आज 3 दिन हो गए अगर मई आज घर नहीं पंहुचा तो सब टेंसन में आ जायेंगे और वैसे भी आपके बहु का इलाज करने के लिए दुबारा आना hi है.

मेरी बात को सुन कर महेंद्र सिंह राठौर कुछ देर सोचने के बाद मुझसे बोले.

महेंद्र- ठीक है अगर तुम अभी यहाँ नहीं रुकना चाहते हो तो कोई बात नहीं लेकिन तुम दोबारा यहाँ जरूर आना और है जाने से पहले सब से मिल कर जाना खास कर अपने दादी से.

मई- ठीक है.

इतना बोल कर मई वह से निकल कर सब से मिला और यहाँ से जाने की अनुमति मांगी तो कौशल्या देवी ने मुझसे बोली.

कौशल्या- अभी जाना जरुरी है कुछ दिन और यहाँ पर रुक जाते.

मई- नहीं दादी अब मई यहाँ पर नहीं रुक सकता मुझे मुंबई में कुछ जरुरी काम है इसलिए मुझे आज hi जाना होगा.

मेरी बात सुन कर कौशल्या देवी कुछ उदास हो गयी फिर वो मुझसे बोली.

कौशल्या- अगर तुम कुछ काम है तो मई तुम्हे भी रोकूंगी लेकिन मुझे वडा करो की तुम दुबारा यहाँ हमसे मिलने जरूर आओगे.

मई- मई वडा करता हु दादी की मई आपसे मिलने के लिए दोबारा जरूर आऊंगा अब मई चलता हु.

सिकंदरा- चलो मई तुम्हे मुंबई तक छोड़ देता हु.

इसके बाद मई सिकंदरा के साथ हेलीकाप्टर से मुंबई के लिए निकल गया इधर मुंबई में दिलावर ने करीब 200 गुंडे तैयार किये थे उसका प्लान था की वो इतने गुंडों के साथ शनाया और उसके परिवार पर हमला करेगा तो कोई भी उन्हें बचा नहीं पायेगा उन 200 गुंडों में 100 गुंडा मार्टिकल आर्ट्स योद्धा थे और 100 आम इंसान थे और उन सब गुंडों का जो लीडर था वो हाफ ग्रांडमास्टर लेवल के योद्धा था जो दिलावर के लिए काम करता था जिसका नाम जैक था जो एक फोरेनर था लेकिन उसे हिंदी बहुत अच्छी तरह से आता था वो दिलावर का सबसे वफादार आदमी था.

दिलावर- जैक तुम इन 200 आदमी को ले कर जाओ और जो शनाया और उसके परिवार की रक्षा कर रहे है उन्हें डाइवर्ट करो जब वो सब शनाया के घर के पास से चले जायेंगे तब मई अपने 10 मैरिटल आर्ट्स योद्धा के साथ शनाया के घर में एंटर करूँगा और उसे किडनैप कर के सीधा मंटू यादव के फार्महाउस पर ले कर आऊंगा तुम मेरा वही इंतजार करना.

जैक- लेकिन बॉस अगर हम इतने आदमी के साथ वह पर हमला करेंगे तो पुलिस वाले भी एक्शन में आ जायेंगे.

दिलवर- तुम पुलिस की टेंशन मत लो उस एरिया के इंस्पेक्टर अपना hi आदमी है मई उससे बात कर लूंगा.

जैक- Ok बॉस.

इतना बोल कर जैक अपने आदमियों को ले कर शनाया के घर के लिए निकल जाता है इधर जैक को वह से जाने के बाद दिलावर उस एरिया के पुलिस इंस्पेक्टर को कॉल करता है.

इंस्पेक्टर- हैल्लो है बॉस आज आप इतने दिन बाद अपने इस बन्दे के पास कॉल क्यों किया क्या कुछ होने वाला है.

दिलावर- है इंस्पेक्टर आज बहुत कुछ होने वाला है इस लिए मई चाहता हु की तुम 2 घंटो के लिए अपने पुलिस फाॅर्स को मल्होत्रा मेन्शन से दूर रखना चाहे वह पर जो भी हो तुम अपना आँख कण और मुँह सब बंद रखना.

इंस्पेक्टर- जी बॉस आप चिंता मत कीजिये आपको जो भी करना है आप कीजिये आपके काम में कोई भी पुलिस वाला इंटरफेरे नहीं करेगा बस अपने इस भक्त को प्रसाद देना मत भूलना.

दिलावर- ठीक है काम होने के बाद मई तुम्हारे पास 10 लाख भेज दूंगा लेकिन यद् रखना अगर कोई गड़बड़ हुयी तो तुम मुझे जानते hi हो.

इतना बोल कर दिलावर कॉल कट कर दिया और वो भी अपने 10 फाइटर के साथ शनाया के घर के लिए निकल गया इधर जैक अपने आदमियों के साथ शनाया के घर के पास चला आया था और वो अपने सरे आदमियों के साथ गाड़ी से निचे उतर गया इधर रोहन कारन दीप्ती संध्या और बलदेव ने जब शनाया के घर के पास इतने आदमियों को देखा तो वो लोग सतर्क हो गए और उनसे लड़ने के लिए तैयार हो गए.

इधर जैक को भी पता चल गया था की वो लोग जिसको डाइवर्ट करने के लिए आये है उनकी नजर उन सब पर hi है इस लिए वो उन सब को सुनते हुए अपने आदमियों से बोलै.

जैक- तुम सब इस घर को चारो तरफ से घेर लो आज हमें किसी भी हालत में शनाया और उसके परिवार को यहाँ से ले कर जाना है अगर हमारे रस्ते में कोई भी आये तो तुम सब उन पर कोई भी रहम नहीं करना सब को जान से मर देना.

जैक के बात सुन कर उसके सरे गुंडों ने शनाया के घर को चारो तरफ से घेर लिया इधर जब उन पांचो ने उन गुंडों को शनाया के घर को चारो तरफ से घेरते हुए देखा तो रोहन अपने साथियो से बोलै.

रोहन- ये सेल गुंडे नहीं मानाने वाले है ये लोग बार बार मर खा कर यहाँ से जाते है और फिर दोबारा मर खाने के लिए वापस आ जाते है इस बार हम इन लोगो को जाने hi नहीं देंगे अगर ये लोग भागने की कोशिश करेंगे तो हम इनका पीछा कर के इन सब को पकड़ लेंगे और हवेली में कैद कर देंगे जब प्रतिक भाई यहाँ पर आएंगे तो वही इन सब का हिसाब करेंगे.

कारन- ठीक है तो हम उस बार यही करते है इन सब को मर मर कर बेहोश कर देते है और सबको हवेली में कैद कर देंगे.

इतना बोलने के बाद पंछी शनाया के घर के तरफ बढ़ गए इधर जैक ने जब पांचो को अपने तरफ आता हुआ देखा तो वो अपने गुंडों को तैयार रहने के लिए बोल दिया थोड़ी देर में जब रोहन कारन दीप्ती संध्या और बलदेव उन सब गुंडों के सामने आये तो हैक ने अपने गुंडों को हमला करने के लिए इशारा कर दिया फिर क्या था उन पांचो पर करीब 100 गुंडा एक साथ टूट पड़े लेकिन उन 100 गुंडों को देख कर भी वो पांचो घबराये नहीं और उन सब से लड़ना सुरु कर दिया थोड़ी देर के लड़ाई के बाद 100 गुंडा बेहोश हो कर वही पर गिरे पड़े थे ये 100 गुंडा आम इंसान थे इस लिए पांचो ने इन सब को कुछ hi मिनट में धूल छठा दिया.

इधर जैक ने जब अपने 100 गुंडों की ऐसी हालत देखि तो वो बाकि बचे गुंडों को भी उनसे लड़ने के लिए भेज दिया बाकि बचे 100 गुंडा मार्टिकल आर्ट्स योद्धा थे लेकिन ये मार्टिकल आर्ट्स योद्धा भी उन पांचो के लिए कुछ भी नहीं थे इस लिए वो लोग भी सरे गुंडों को मरना सुरु कर दिया अभी वो लोग करीब 20 गुंडों को hi बेहोश किया था की सरे गुंडा वह से भागना सुरु कर दिया जिसे देख कर रोहन छीलते हुए बोलै.

रोहन- ये लोग यहाँ से भाग रहे है हमें इन सब को भागने नहीं देना है नहीं तो ये लोग फिर से शनाया के ऊपर हमला करने की कोशिश करेंगे हमें इनका पीछा कर के इन्हे पकड़ना होगा.

रोहन के बात सुन कर चारो रोहन के साथ उन गुंडों के पीछा करना सुरु कर दिया कुछ देर बाद सब शनाया के घर से काफी दूर निकल गए थे इधर शनाया जो अभी अपने घर में थी उसे अपने घर के बहार लड़ाई के आवाज सुनाई दिया जिसे सुन कर वो बहार देखने के लिए आ गयी की बहार क्या हो रहा है तभी उसे अपने सामने एक आदमी दिखाई दिया जो 10 गुंडों के साथ उसके दरवाजे पर खड़ा था और उसे देख कर मुस्कुरा रहा था ये और कोई नहीं बल्कि दिलावर था जो सरे गुंडे और रोहन कारन दीप्ती संध्या और बलदेव को वह से जाने के बाद यहाँ आया था दिलावर के चेहरे पर शनाया को देख कर एक कामिनी मुस्कान थी वो शनाया को देखते हुए अपने आप से बोलै.

दिलावर- जैसा मैंने अपने आदमी से सुना था ये तो उससे भी सुन्दर है इसे चखने में तो बहुत मजा आएगा.

इधर शनाया अपने सामने इतने सरे अनजान आदमी को देख कर वो उनसे बोली.

शनाया- कोण हो तुम लोग और यहाँ मेरे दरवाजे पर क्या कर रहे हो.

शनाया के बात सुन कर दिलावर मुस्कुराते हुए कुटिल अंदाज में उससे बोलै.

दिलावर- हम कोण है है है है हम तो तुम्हारे दीवाने है मैडम जी यहाँ तुम्हारे दरसन करने आये है.

दिलावर के बात सुन कर शनाया को बहुत गुसा आया और वो घुसे में उससे बोली.

शनाया- थोड़ा तमीज से बात करो क्या तुम्हारे माँ बाप ने तुम्हे ये नहीं सिखाया क्या की किसी भी लड़की से कैसे बात करना है तुम सब चुप चाप यहाँ से चले जाओ नहीं तो तुम्हारे साथ अच्छा नहीं होगा.

शनाया के बात सुन कर दिलावर अपने होतो पर कामिनी मुस्कान लेट हुए बोलै.

दिलावर- मेरे माँ ने मुझे सिखाया है न मैडम की लड़कियों से कैसे बात करते है लेकिन तुम जैसी कमसिन काली को देख कर मई उनका सिख भूल गया अब अपने इस भक्त को तुम्हारा थोड़ा प्रसाद मिल जाता तो मई धन्य हो जाता.

दिलावर के मुँह से ऐसी गन्दी बात सुन कर शनाया को बहुत गुस्सा आया और वो घुसे एक तपाद दिलावर के चेहरे पर मर दिया जिसके कारन दिलावर थोड़ा लड़खड़ा गया फिर वो घुसे से शनाया को घूरते हुए बोलै.

दिलावर- तुम ने मुझ पर हाथ उठा कर अच्छा नहीं किया अब मई तुम्हे ऐसा हल करूँगा की लोग तुम पर थूकेंगे भी नहीं (अपने आदमियों से) इस लड़की को कुछ ज्यादा hi गर्मी हो गया इसे उठा कर गाड़ी में डालो मई इसे फार्महाउस पर जा कर अच्छे से अपने तापस का हिसाब लूंगा.

दिलावर के बात सुन कर उसके साथ आये हुए 10 मैरिटल आर्ट्स फाइटर जो की लेवल 8 और लेवल 9 पर थे वो शनाया को पकड़ने के लिए उसके तरफ बढ़ने लगे इधर शनाया उन गुंडों को अपने तरफ आता हुआ देख कर उनसे लड़ने के लिए तैयार हो गयी जैसे hi वो गुंडे शनाया के पास आये तो शनाया उन पर टूट पड़ी और उनको एक एक कर के धोने लगी इधर जब दिलावर ने देखा की शनाया उसके आदमी को पिट रही है तो उसका गुसा और बढ़ गया और घुसे से अपने आदमियों को पीछे हटने के लिए बोलै और खुद शनाया से लड़ने के लिए आगे आ गया.

इधर जब शनाया ने देखा की सरे गुंडे पीछे हैट गए है और दिलावर खुद उससे लड़ने के लिए आगे आ रहा है तो थोड़ा सावधान हो गयी क्युकी दिलावर अभी अभी देखा था की शनाया ने कैसे उसके गुंडों को मर रही थी फिर भी वो उससे लड़ने के लिए आ रहा है इसका मतलब है की वो इन गुंडों से ज्यादा ताकतवर है इस लिए वो सावधान हो गयी लेकिन पीछे नहीं हटी फिर दोनों में लड़ाई स्टार्ट हो गया दोनों एक दूसरे पर हमला पे हमला करते जा रहे थे लेकिन कोई भी हर नहीं मन रहा था दिलावर भी हाफ ग्रांडमास्टर लेवल पर थे इस लिए वो शनाया से बराबर का मुकाबला कर रहा था.

कभी शनाया अपने पंच 👊 से दिलावर पर हमला करती दो दिलावर उसके पंच 👊 को रोके लेता तो कभी दिलावर शनाया पर हमला करता तो शनाया उसे रोक लेती इसी तरह दोनों आधे घंटे तक एक दूसरे से लड़ते रहे जिसके कारन दोनों थकने लगे थे तभी अचानक से शनाया के लॉकेट थोड़ा चमका और उसमे में रोशनी निकल कर शनाया के शरीर में चली गयी जिसके कारन शनाया के साडी थकावट दूर हो गयी और वो फिर से अपनी उसी शक्ति के साथ दिलावर से लड़ने लगी शनाया के थकावट दूर होने के कारन शनाया के हमले की ताकत भी बढ़ गयी थी जिसके कारन दिलावर उसके एक पंच से उड़ते हुए पीछे जा कर दिरा और उसके मुँह से हल्का खून निकलने लगा.

इधर शनाया के माँ किचन में कुछ काम कर रही थी तो उन्हें बहार से लड़ाई को शोरे सुनाई दिया जिसे सुन कर वो बहार देखने के लिए आ गयी की बहार क्या हो रहा है जब वो बहार आयी तो देखा की दरवाजे के बहार उसकी बेटी यानि शनाया किसी अनजान आदमी से लड़ रही है तो हैरान हो गयी इधर शनाया दिलावर को मरने के लिए आगे बढ़ रही थी तभी दिलावर के एक गुंडे की नजर शनाया के माँ पर पड़ी जिसे देख कर उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गया और वो जल्दी से अपने जेब से एक नाइफ 🗡️ निकला और जा कर पुस्पा के गर्दन पर लगा दिया और छीलते हुए शनाया से बोलै.

गुंडा- ये लड़की तुम जहा हो वही रुक जाओ अगर तुम हमारे बॉस के तरफ अब एक भी कदम बधाई तो मई तुम्हारे माँ के गर्दन काट दूंगा.

जैसे hi शनाया को उस गुंडे की आवाज सुनाई दिया तो पीछे मुद कर देखि तो हैरान रह गयी वो गुंडा उसके माँ के गले पर चाकू लगा कर खड़ा था और मुस्कुरा रहा था तो वही उसकी माँ दर से थार थार कैंप रही थी इधर दिलावर ने जब अपने गुंडे को शनाया के माँ के गले पर चाकू लगाया हुआ देखा तो वो अपने मुँह से खून पोछते हुए उस गुंडे से बोलै.

दिलावर- बहुत अच्छा काम किया जो तुम इस औरत के गले पर चाकू लगाया मई तुम्हे इसका इनाम जरूर दूंगा (फिर शनाया से) तुम जहा हो वही अपने घुटने पर बैठ जाओ नहीं तो मेरे आदमी तुम्हारी माँ के गर्दन को किसी तरबूजे की तरह काट देगा.

दिलावर के बात सुन कर शनाया दर गयी और अपने घुटने पर बैठते हुए बोली.

शनाया- नहीं नहीं मेरे माँ को कुछ मत करना मई अपने घुटने पर बैठ रही हु.

शनाया के बात सुन कर दिलावर जोर जोर से हस्ते हुए बोलै.

दिलावर- है है है ये हुयी न बात.


फिर अपने आदमी को अपने पास आने का इशारा किया जब उसका आदमी दिलावर के पास गया तो वो अपने पॉकेट से एक दवा निकल कर उस आदमी को दिया और उसके कण में कुछ बोलै जिसे सुन कर वो गुंडा शनाया के पास गया और उसके पास वो दवा रख कर वह से हैट गया.

दिलावर- चलो अब अच्छी बची की तरह वो गोली खा लो जो तुम्हारे सामने रखा हुआ है अगर नहीं खायी तो मेरा आदमी तुम्हारी माँ को मर देगा.

दिलावर के बात सुन कर शनाया दर गयी और बेबसी से कभी उस दवा को तो कभी अपनी माँ को देख रही थी इधर पुस्पा अपनी बेटी को इतना बेबस देखि तो वो शनाया से बोली.

पुस्पा- नहीं शनाया तुम उस दवा को मत खाना भले ये लोग मुझे मर दे मई नहीं चाहती की मेरे वजह से तुम्हे कुछ हो.

अपनी माँ के बात को सुन कर शनाया एक पल के लिए उनको देखि फिर वो दिलावर से बोली.

शनाया- तुम ये अच्छा नहीं कर रहे हो अगर मेरे पति को ये सब पता चला तो वो तुम्हे कही से भी धुंध कर जान से मर देगा.

शनाया के बात सुन कर दिलावर को गुसा आ जाता है और वो घुसे से अपने आदमी को बोलता है.

दिलावर- लगता है इसे अपनी माँ से प्यार नहीं है इस लिए मर दो इसकी माँ को.

दिलावर के बात सुन कर पुस्पा और शनाया दोनों दर गयी तभी शनाया जोर से छीलते हुए बोली.

शनाया- नहीं मेरी माँ को कुछ मत करना मई ये दवा खाने के लिए तैयार हु.

इतना बोल कर शनाया उस दवा को खा ली जिसके कारन वो कुछ hi देर में बेहोश हो गयी शनाया को बेहोश होता हुआ देख कर दिलावर अपने गुंडों से बोलै.

दिलावर- तुम सब इन दोनों को गाड़ी के अंदर दाल दो और है इसको बहन और बाप को भी घर के अंदर से ले आओ.


दिलावर के बात सुन कर उसके गुंडों ने पुस्पा को भी बेहोश कर दिया इसके बाद वो लोग पुस्पा और शनाया को गाड़ी में दाल दिया इसके बाद सब शनाया केक घर के अंदर चले गए कुछ देर बाद वो लोग शनाया के डैड को भी बेहोश कर के ले आये और उनको भी गाड़ी में दाल दिया इसके बाद वो लोग जल्दी से वह से निकल गए.
 
अपडेट 42

मंटू यादव और उसके साथियो का अंत


दिलावर शनाया और उसके माँ डैड को किडनैप करने के बाद वह से निकल गया था और रस्ते में उसने मंटू यादव के खास आदमी को कॉल कर के बता दिया की उसने शनाया और उसके माँ डैड को किडनैप कर लिया जिसे सुन कर मंटू यादव के खास आदमी बहुत खुस हो गया और उसे अपने अड्रेस पर आने के लिए बोल दिया ये फार्महाउस वही था जहा मंटू यादव छुप कर बैठा हुआ था.

मंटू यादव के खास आदमी से फार्महाउस का एड्रेस ले कर दिलावर 1 घंटे में वह पर पहुंच गया इसके बाद वो अपने आदमियों से बेहोश शनाया और उसके माँ डैड को एक रूम में डलवा दिया और खुद मानती यादव के पास चला गया.

इधर रोहन कारन दीप्ती संध्या और बलदेव ने सभी गुंडों को मर मर कर बेहोश कर दिया था लेकिन जैक उनसे किसी तरह बचने में कामयाब हो गया था सरे गुंडों को बेहोश करने के बाद रोहन बलदेव से बोलै.

रोहन- बलदेव भाई आप इन सब को हवेली में ले जाकर बंद कर दो अब इनका हिसाब प्रतिक hi करेगा.

बलदेव- लेकिन हम इनको प्रतिक भाई के लिए क्यों छोड़ रहे है आप बोलो तो मई इन सब को यही ठिकाने लगा दे रहा हु.

बलदेव के बात सुन कर कारन कुछ देर तक सोचने के बाद बोलै.

कारन- नहीं हम ऐसा नहीं कर सकते क्युकी इनमे सब गलत नहीं है इनमे से कुछ ऐसे भी है जो मज़बूरी में ये सब करते है.

दीप्ती- कारन सही बोल रहा है और वैसे भी गुरुदेव ने हमें सिखाया है की सब को एक बार सुधरने की मौका देना चाहिए.

बलदेव- आप दोनों ठीक बोल रहे है पहले मई तो इन्ही के जैसा था लेकिन प्रतिक भाई ने मुझे सुधरने का मौका दिया और अपने साथ रख लिया मई एक काम करता हु मई 2 ट्रक 🚛 मांगता हु और इन सब को हवेली ले कर जाता हु.

रोहन- ठीक है आप ऐसा hi कीजिये अब हम चलते है हमें शनाया भाभी को सुरक्षा भी देना है.

इसके बाद बलदेव किसी को कॉल कर के 2 ट्रक और कुछ लड़के को साथ आने के लिए बोलता है कुछ देर में वह पर 2 ट्रक आ कर खड़ा हो गया और उसमे से कुछ लड़के निकले ये लड़का सब बलदेव के गैंग के hi मेंबर थे फिर बलदेव उन लड़को के मदत से सरे गुंडों को ट्रक में डलवाता है और वह से चला जाता है बलदेव को वह से जाने के बाद रोहन सब को वह से चलने का इशारा करता है तभी उसकी नजर संध्या पर जाता है जो अपने hi किसी सोच में गम थी रोहन संध्या को इस तरह से सोचो में गम देख कर रोहन उससे बोलै.

रोहन- हे संध्या तुम किस सोच में डूबी हो.

रोहन के बात सुन कर संध्या अपने सोच से बहार आयी और रोहन से बोली.

संध्या- मुझे ऐसा लग रहा है की हमें डाइवर्ट किया गया है ताकि शनाया भाभी पर हमला किया जा सके.

संध्या के बात सुन कर सब हैरान हो गए और हैरानी से उसे देखने लगे तभी कारन उससे बोलै.

कारन- तुम्हे ऐसा क्यों लग रहा है की हमें डाइवर्ट किया गया है.

संध्या- तुम सब खुद सोचो की ये सरे गुंडे लगभग 200 के करीब थे और अगर ये सरे गुंडे शनाया पर हमला करने आये थे तो वह से भागे क्यों इन लोगो में से अगर 150 आदमी भी हमसे लड़ते तो हमें कुछ देर के लिए जरूर रोक लेते और बाकि के आदमी शनाया भाभी और उनके परिवार पर हमला कर सकते थे भले hi हम ये करने में उन्हें कामयाब नहीं होने देते लेकिन वो ऐसा कर सकते थे लेकिन फिर भी वो सब हमें यहाँ लड़ाई में उलझा कर अपने साथ वह से काफी दूर ले कर आ गए अब ताकि कोई और जो ये सब प्लान बनाया था वो भाभी और उनके फॅमिली पर अटैक कर सके.

संध्या के बात सुन कर सब और ज्यादा हैरान हो गए तभी दीप्ती सब से बोली.

दीप्ती- हम सब ने ये पहले क्यों नहीं सोचा अगर संध्या के बात में थोड़ी भी सचाई होगा तो जरूर इस वक़्त भाभी संकट में होंगी हमें यहाँ से जल्दी चलना चाहिए.

दीप्ती के बात सुन कर सब वह से अपने फुल स्पीड में शनाया के घर के लिए निकल गए करीब 10 मिनट बाद वो लोग मल्होत्रा मेन्शन में पास पहुंच गए जैसे hi वो सब वह पर पहुंचे तो देखा की शनाया के घर का दरवाजा खुला हुआ था ये देख कर वो सब चौक गए क्युकी शनाया के घर के दरवाजा हमेशा बंद रहता था अगर वो लोग बहार जाते थे तो बहार से बंद रहता था और अगर अंदर रहते थे तो अंदर से बंद रहता था.

जैसे उन सब ने देखा की शनाया के घर के दरवाजा खुला हुआ है तो उन लोगो को कुछ गड़बड़ होने का एहसास हुआ तो वो लोग जल्दी से शनाया के घर के अंदर चले गए जब वो लोग वह पर पंहुचा तो उन्हें वह पर कोई भी नजर नहीं आया ये देख कर वो सब परेशां hi गए और शनाया और उसके परिवार को पुरे घर में ढूंढने लगे जब शनाया या उसके माँ डैड ने से कोई भी उनको नहीं मिला तो वो सब परेशां हो गए रोहन अपने हाथ दीवाल पर मरते हुए जोर से चीखता है और बोलता है.

रोहन- अह्हह्ह्ह्ह ये हमने क्या क्या कर दिया हमारे वजह से शनाया भाभी और उनके माता पिता संकट में आ गए हमने पहले क्यों नहीं सोचा की ये कोई चल भी हो सकता है.

दीप्ती- हमें किसी भी तरह से भाभी और उनके माता पिता को बचाना होगा नहीं तो हम प्रतिक भाई को क्या जबाब देंगे कितना बिस्वास कर के वो इन सब के रक्षा की जिमेवारी हम सबको दिया था.

संध्या- सबसे पहले हमें दीपक को कॉल कर के यहाँ के सिचुएशन के बारे में बताना होगा और उससे बोलना होगा की वो करेफ़ुल रहे क्युकी शानवी पर भी हमला हो सकता है.

दीप्ती- और हमें प्रतिक को भी सब बता देना चाहिए क्युकी वो तीन दिन बोल कर गया था और आज तीन दिन हो गया है तो वो आने hi वाला होगा.

दीप्ती के बात सुन कर सब टेंशन में आ गए फिर रोहन कुछ सोचते हुए बोलै.

रोहन- तुम सही बोल रही हो दीप्ती हमें प्रतिक को सब बता देना चाहिए लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा है की मई उससे कैसे बोलू की जिस भाभी और उनके परिवार के रक्षा के जिमेवारी हमें दिया था वो किडनैप हो गए है.

संध्या- हमें किसी भी तरह से उसे बताना hi होगा.

कारन- ये सब जिसने भी किया है न उन सालो को मई जिन्दा नहीं छोडूंगा एक एक को मई जान से मर दूंगा.

इसके बाद कारन दीपक के पास कॉल कर के उसे सब बता देता है जिससे वो भी टेंशन में आ जाता है.

दीपक- तुम सब इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकते हो तुम लोगो ने ये भी नहीं सोचा की अगर तुम सब वह से जाओगे तो भाभी और उनका परिवार वह अकेले हो जायेंगे.

दीपक के बात सुन कर कारन के सर शर्म से झुक जाता है फिर कुछ देर बात वो दीपक से बोलै.

कारन- हम सब से बहुत बड़ी गलती हो गयी हमें इस बात का ध्यान hi नहीं रहा की अगर हम यहाँ से जायेंगे तो शनाया भाभी के ऊपर हमला भी हो सकता है और है तुम भी वह सावधान रहना क्युकी हो सकता है की वो लोग वह शनाया पर भी हमला करे.

दीपक- तुम सब शानवी की चिंता मत करो मई शानवी को कुछ नहीं होने दूंगा बस तुम लोग शनाया भाभी और उनके माता पिता को जल्दी से ढूंढो और उन्हें बचाओ क्युकी प्रतिक ने बहुत बिस्वास कर के हमारे ऊपर उनको जिमेवारी दी थी अगर उनको या उनके फॅमिली में से किसी को कुछ हो जाता है तो उसका हम सब पर से बिस्वास उठ जायेगा और है प्रतिक को कॉल कर के सब बता देना.

दीपक के बात सुन कर कारन ने है बोल बोलै और कॉल को कट कर दिया इधर रोहन भी प्रतिक के कॉल लगा रहा था लेकिन उसका कॉल लग नहीं रहा था क्युकी मई इस वक़्त हेलीकाप्टर पर आसमान का सैर कर रहा था रोहन ने मेरे पास बहुत कॉल लगाया लेकिन उसका एक कॉल भी नहीं लगा जब उसका कॉल मेरे पास नहीं लगा तो वो परेशां हो गया उसको परेशां देख कर दीप्ती उससे बोली.

दीप्ती- क्या बात है रोहन प्रतिक कॉल नहीं उठा रहा है.

दीप्ती के बात सुन रोहन अपना सर न में हिलाते हुए बोलै.

रोहन- नहीं दीप्ती प्रतिक का कॉल लग hi नहीं लग रहा है उसका मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा है मुझे समझ में नहीं आ रहा है की अब हम क्या करे.

रोहन के बात सुन कर दीप्ती कुछ देर सोचने के बाद बोली.

दीप्ती- अगर प्रतिक का कॉल नहीं लग रहा है इसका मतलब की या तो वो उस आइसलैंड पर है या फिर हेलीकाप्टर में इस लिए उसका मोबाइल ऑफ आ रहा तुम एक काम करो उसके पास एक मस्सगे कर दो की मुझे कॉल करो अर्जेन्ट है वो जब अपना मोबाइल ोंन करेगा तो मस्सगे देख कर तुम्हारे पास कॉल जरूर करेगा तब तुम उसे सब बता देना अभी फ़िलहाल हम सब शनाया भाभी को ढूंढने चलते है.

दीप्ती के बात सुन कर रोहन तुरंत मेरे पास एक मस्सगे कर दिया इसके बाद वो बलदेव को अपने पास बुला कर उसे साडी बात बताते है और फिर शनाया को ढूंढने के लिए निकल जाते है शनाया और उसके माँ डैड के पास कोई मोबाइल नहीं था जिसके कारन वो लोग उसका लोकेशन भी ट्रैक नहीं कर प् रहे थे.

इधर मई करीब एक घंटे के बाद मुंबई में लैंड कर चूका था जैसे hi मई हेलीकाप्टर से बहार निकल कर अपना मोबाइल ों किया तो मेरे पास बहुत सरे कॉल के मस्सगे आने लगे तभी मेरे मोबाइल में रोहन का एक मस्सगे आया और मेरे मोबाइल में सबसे ज्यादा कॉल का मस्सगे उसी का था इस लिए मई उसका मस्सगे निकल के पढ़ा और उसके पास कॉल लगा दिया थोड़ी देर रिंग जाने के बाद रोहन कॉल उठा कर बोलै.

रोहन- हैल्लो प्रतिक भाई.

मई रोहन के आवाज सुन कर चौक गया क्युकी उसकी आवाज सुन कर ऐसा लग रहा था की वो किसी बात को ले कर बहुत परेशां है इस लिए मई उससे बोलै.

मई- हैल्लो है रोहन क्या बात है तुम बहुत परेशां लग रहे कही कुछ बात हुयी है क्या.

मेरी बात को सुन कर रोहन थोड़ी देर संत रहा और फिर मुझसे बोलै.

रोहन- प्रतिक हमें माफ़ कर देना हम सब से यह बहुत बड़ी गलती हो गयी है.

रोहन के बात सुन कर कुछ अनहोनी होने के दर से मेरा दिल कम्प गया और मई जल्दी से उससे बोलै.

मई- रोहन तुमने ऐसा क्या गलती कर दिया है जो तुम मुझसे माफ़ी मांग रहे हो एक मिनट कही शनाया को तो कुछ.. मुझे जल्दी से बताओ की शनाया और उसके माँ डैड सब कैसे है कही उन्ही लोगो को कुछ नहीं हुआ है न.

रोहन- Www वो शनाया भाभी और उनके माँ डैड किडनैप हो गए है.

रोहन के बात सुन कर मुझे एक झटका लगा और मई जोर से छीलते हुए रोहन से बोलै.

मई- क्या...??

मेरे जोर से छिलने के आवाज सुन कर सिकंदरा भी चौक गए और वो मुझसे बोले.

सिकंदरा- क्या बात है प्रतिक कुछ बात हुयी है क्या.

मई- है कुछ तो हुआ है आप एक काम कीजिये आप कार को रोकने के लिए बोलिये मई कार के बहार से बात कर के आता हु.

मेरी बात को सुन कर सिकंदरा ने तुरंत ड्राइवर को गाड़ी रोकने के लिए बोलै तो ड्राइवर ने गाड़ी रोक दी ड्राइवर के गाड़ी रोकते hi मई गाड़ी से निकल कर बहार आ गया और रोहन से बोलै.

मई- रोहन तुम ये क्या बोल रहे हो तुम लोगो के रहते हुए कोई कैसे शनाया और उसके परिवार को किडनैप कर सकता है देखो अगर ये मजाक है तो तुम्हारे साथ बहुत बुरा होने वाला है.

मेरी बात को सुन कर रोहन से हालत ख़राब हो गया फिर वो खुद को ठीक करते हुए मुझसे बोलै.

रोहन- भाई मई कोई मजाक नहीं कर रहा हु शनाया भाभी और उनके माँ डैड तीनो सच में किडनैप हो गए है.

रोहन के बात सुन कर मुझे बहुत गुसा आ रहा था और साथ में शनाया और उसके माँ डैड की चिंता भी हो रहा था इस लिए मई रोहन से बोलै.

मई- ये सब कब और कैसे हुआ जब वो लोग शनाया को किडनैप कर रहे थे तब तुम लोग कहा थे तुम लोगो को रहते हुए ये सब कैसे हो गया.

मेरी बात को सुन कर रोहन कुछ देर संत रहा फिर वो मुझसे बोलै.

रोहन- भाई हमें माफ़ कर दो हम सबके गलती के चलते भाभी किडनैप हुयी है दरअसल बात ऐसी है की दुश्मनो ने हमारे साथ छल किया और करीब 200 आदमी हम सब को डाइवर्ट करने के लिए भेजा और हम सब मुर्ख की उनकी चल को समझ नहीं पाया और उन गुंडों से लड़ते हुए काफी दूर निकल गया इसी भी वो लोग भाभी को किडनैप कर लिए प्रतिक हमसे बहुत बड़ी गलती हो गयी हमें उन गुंडों के पीछे जाना hi नहीं चाहिए था.

रोहन के बात सुन कर मुझे सब समझ में आ गया की वह पर क्या हुआ होगा इस लिए मई उसे संत करते हुए उससे बोलै.

मई- देखो रोहन इसमें तुम सब को गलती नहीं है क्युकी तुम लोगो के जगह पर कोई भी होता तो वो भी धोखा खा जाता खैर तुम मुझे ये बताओ की शनाया के किडनैपर का कोई सुराग मिला है या नहीं.

रोहन- नहीं भाई अभी तक हमें कुछ भी पता नहीं चला है हम उन सब का पता जल्द hi लगा लेंगे.

मई- ठीक है तुम सब हवेली पर चले जाओ मई वही पर आ कर तुमसे बात करता हु और है अब तुम लोगो को शनाया और उसके परिवार को ढूंढने की जरुरत नहीं है अब मई सब कुछ संभल लूंगा.

इतना बोल कर मई फ़ोन कट कर दिया मेरे फ़ोन कट करने के बाद रोहन के हालत ख़राब हो गया था वो बस यही सोचे जा रहा था की पता नहीं प्रतिक हम सब को क्या सजा देता है फिर वो सबको मेरी बाटे बताई जिसे सुन कर सब परेशां हो गए लेकिन फिर वो लोग सोचे की जब मई उनके पास आऊंगा तब देखा जायेगा ये सोच कर वो लोग हवेली के लिए निकल गए इधर मई जब रोहन के मुँह से शनाया और उसके माँ डैड के किडनैप होने के बात सुना तो मेरा चेहरा घुसे से लाल हो गया और मेरे आँखों से अंगारे निकलने लगे मई घुसे से दहाड़ते हुए बोलै.

मई- बस बहुत जी लिया तुमने मंटू यादव अब तेरा मरने का समय आ गया है तूने खुद अपनी मौत शनाया के रूप में अपने पास बुलाया है अब तुम्हे मुझसे कोई भी नहीं बचा सकता है.

इधर जब से मई कार से बहार आया था तब से सिकंदरा सिंह राठौर भी टेंशन में थे और वो ध्यान से मेरे बात को सुन रहे थे उन्हें जैसे hi पता चला की कोई मेरा अपना किडनैप हो गया है तो उन्हें भी बहुत गुसा आया इस लिए वो मेरे पास आ कर मुझसे बोले.

सिकंदरा- माफ़ करना प्रतिक को मैंने तुम्हारी बाटे सुन ली मुझे ये जान कर बहुत दुःख के साथ गुसा भी आ रहा है की तुम्हारा कोई अपना किडनैप हो गया है अगर तुम्हे मुझसे कोई मदत चाहिए तो तुम मुझे बता सकते हो.

मई- आपके इस मेहरबानी के लिए धन्यवाद लेकिन मुझे आपसे कोई भी मदत नहीं चाहिए क्युकी ये लड़ाई मेरी है और मई खुद इस लड़ाई को लड़ना चाहता तू अब आप यहाँ से जा सकते है मई अभी कुछ समय के लिए यही पर रुकूंगा.

मेरी बात को सुन कर सिकंदरा समाज गए की मई उनसे कोई भी मदत नहीं लूंगा तो वह से चले गए उनके जाने के बाद मई कुछ देर वही पर सोच में खड़ा रहा इसके बाद मई वही ध्यान में बैठ कर अपने अंदरूनी शक्ति के मदत से शनाया के गले में पहने हुए लॉकेट को ढूंढने लगा करीब आधा घंटा ढूंढने के बाद मुझे उस लॉकेट का लोकेशन मिल गया जो शहर से बहार के तरफ जंगल में दिख रहा था.

मई उस लॉकेट के मदत से शनाया के लोकेशन को इस लिए धुंध पाया क्युकी मई शनाया के लॉकेट को अपने शक्तियों से सिद्ध कर के उसमे अपने अंदरूनी शक्ति के एक अंश को दाल दिया था ताकि वो लॉकेट समय समय पर शनाया के रक्षा कर सके और साथ में कुछ प्रॉब्लम होने पर मुझे उसका लोकेशन आराम से पता चल जाये जैसे hi मुझे शनाया के लोकेशन का पता चला तो मई जोर से छीलते हुए बोलै.

मई- मई आ रहा हु मंटू यादव अगर तुम खुद को मेरे कहर से बचा सको तो बचा लेना तुमने मेरे वाइफ और उसके माँ डैड को किडनैप करवा कर अपनी मौत तय कर ली है आज मई तुम सब में से किसी को नहीं छोडूंगा.

इतना बोल कर मई वह से गायब हो गया.

इधर पटना में कुशवाहा मेन्शन के हॉल में इस वक़्त सुरेंद्र कुशवाहा बैठे हुए थे और उनके सामने इस वक़्त पूनम और उसके पिता बसंत चौहान बैठा हुए थे बसंत चौहान यहाँ पूनम और मृत्युंजय के सदी की बात करने के लिए आया था वो अभी कुछ बोलता उससे पहले hi सुरेंद्र ने बसंत चौहान से पूछा.

सुरेंद्र- बसंत जी आप इस तरह से अचानक यहाँ कैसे कुछ काम था क्या आपको हमसे.

सुरेंद्र के बात सुन कर बसंत चौहान कुछ देर संत रहा फिर वो दुःख जताते हुए सुरेंद्र से बोलै.

बसंत- मुझे विनोद जी के जाने का बहुत दुःख हुआ है इस लिए मैंने सोचा की एक बार आपसे और मृत्युंजय बीटा से मिल लू और विनोद जी के एक आखरी इक्छा थी उसे भी पूरा कर दू.

बसंत के बात सुन कर मृत्युंजय और सुरेंद्र कुशवाहा को कुछ समझ में नहीं आया इस लिए मृत्युंजय बसंत चौहान से बोलै.

मृत्युंजय- अंकल आप इस दुःख के घडी में मुझसे मिलने आये ये देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा लेकिन मुझे आपकी एक बात समझ में नहीं आया की मेरे डैड की ऐसी कोण सी आखरी इक्छा थी जो पूरी नहीं हुयी और ये आपको कैसे पता चला की मेरे डैड की कोई आखरी इक्छा भी थी जो पूरी नहीं हुयी है.

मृत्युंजय के बात सुन कर सुरेंद्र बसंत चौहान को देखने लगा उसके भी मन में यही सवाल चल रहा था और वो इसका जबाब बसंत चौहान से जानना चाहते थे इधर मृत्युंजय के बात सुन कर बसंत चौहान कुछ देर तक संत रहे फिर एक लम्बी साँस ले कर मृत्युंजय से बोले.

बसंत- मई जनता हु की ये बात इस वक़्त करना सही नहीं है लेकिन मई भी क्या करू ये विनोद भाई साहब के आखरी इक्छा थी विनोद भाई साहब को कही से तुम्हारे और पूनम के प्यार के बारे में पता चल गया था इस लिए एक दिन वो मुझसे मिलने के लिए मेरे घर आये और मुझसे पूनम का हाथ तुम्हारे लिए माँगा हलाकि उस समय मुझे पूनम और तुम्हारे प्यार में बारे पता नहीं था लेकिन जब उन्होंने ने मुझे बताया की तुम और पूनम एक दूसरे से बहुत प्यार करते हो तो मई भी तुम दोनों के शादी के लिए तैयार हो गया लेकिन हम इन दोनों को साडी कर पते उससे पहले hi विनोद भाई साहब इस दुनिया से चल बेस.

इतना बोल कर बसंत चौहान दुखी होने की नाटक करने लगा इधर बसंत चौहान के बात सुन कर मृत्युंजय और सुरेंद्र दोनों हैरान थे मृत्युंजय के हैरानी के कारन था की डैड को कब पता चला की मई और पूनम एक दूसरे से प्यार करते है तो वही सुरेंद्र सोच रहा था की भैया इतनी बड़ी बात हमसे छुपा कर अकेले hi मृत्युंजय के शादी के बात करने के लिए चले गए उसे इस बात पर बिस्वास hi नहीं हो रहा था इस लिए वो मृत्युंजय से बोलै.

सुरेंद्र- मृत्युंजय क्या ये सच है की तुम और पूनम एक दूसरे से प्यार करते हो और भैया तुम दोनों को शादी करना चाहते थे.

सुरेंद्र के बात सुन कर मृत्युंजय शर्मा जाता है और शरमाते हुए उनसे बोलता है.

मृत्युंजय- जी चाचा जी मई और पूनम एक दूसरे से बहुत प्यार करते है लेकिन मुझे ये पता नहीं था की डैड हमारी शादी के बात करने के लिए पूनम के घर गए हुए थे.

मृत्युंजय के बात सुन कर सुरेंद्र कुछ बोलते उससे पहले hi बसंत चौहान जल्दी से बोल पड़े.

बसंत- विनोद भाई साहब तुमसे बहुत प्यार करते थे इस लिए वो तुम्हे सरप्राइज देना चाहते थे.

बसंत के बात सुन कर मृत्युंजय को अपने डैड की यद् आ गयी और उसके आँखों में आंसू आ गए लेकिन वो जल्दी hi अपने आँख से आंसू पोछ लिया इधर जब सुरेंद्र ने मृत्युंजय और बसंत के बात को सुना तो वो कुछ देर सोचने के बाद बोलै.

सुरेंद्र- अगर मेरे भैया की यही ख्वाहिश थी की मृत्युंजय और पूनम के शादी हो तो हम इन दोनों के शादी जरूर करेंगे लेकिन अभी भी क्युकी अभी अभी भैया का देहांत हुआ है इस लिए इतनी जल्दी कोई सुबह काम हम नहीं कर सकते है इस लिए हम इस पर बाद में बात करेंगे.

सुरेंद्र के बात सुन कर मृत्युंजय भी उनके है में है मिलते हुए बोलै.

मृत्युंजय- है चाचा जी आप सही बोल रहे है और वैसे भी मई इतनी जल्दी शादी नहीं करना चाहता हु क्युकी मुझे अभी डैड के कंपनी को और बड़ा बना है मई चाहता हु की डैड के कंपनी का नाम पुरे इंडिया में हो.

सुरेंद्र और मृत्युंजय के बात सुन कर बसंत को अपने प्लेन पर पानी फिरता हुआ नजर आया इस लिए वो जल्दी से बोलै.

बसंत- आप दोनक ठीक बोल रहे है हम साडू 1 साल बाद करेंगे लेकिन सहगाई तो हम कर hi सकते है मई चाहता हु की हम पूनम और मृत्युंजय के सहगाई कर दे और शादी का हम बाद में सोचेंगे.

बसंत के बात सुन कर मृत्युंजय और सुरेंद्र दोनों सोच में पद गए उन दोनों को hi सोचता हुआ देख कर बसंत आगे बोलै.

बसंत- हम एक काम करते है आज से 10 दिन बाद हम इन दोनों का सहगाई करवा देते है और ये सहगाई एक डैम सिंपल होगा इसमें हम सिर्फ अपने रिश्तेदारों को hi बुलाएँगे इस बारे में आप दोनों क्या कहते है.

बसंत के बात सुन कर मृत्युंजय और सुरेंद्र दोनों सोच में पद जाते है थोड़ी देर सोचने के बाद सुरेंद्र बोलै.

सुरेंद्र- आप बात सही बोल रहे है अगर भैया के ये आखरी इक्छा थी तो हम फ़िलहाल इन दोनों के सहगाई करवा देते है इसमें तुम क्या बोलते हो मृत्युंजय.

मृत्युंजय- अब इसमें मई क्या hi बोल सकता हु अगर आपको ये सही लग रहा है और आप सहगाई करवाने के लिए तैयार है तो मई भी सहगाई करने के लिए तैयार हु.

बसंत इन दोनों के बात सुन कर बहुत खुस हो गया और इसी खुसी में वो बोलै.

बसंत- फिर ये तय रहा आज से ठीक 10 दिन बाद हम इन दोनों की सहगाई कर देंगे.

बसंत के बात सुन कर सुरेंद्र अपना गर्दन है में हिला दिया इसके बाद कुछ समय तक वो लोग इधर उधर की बाटे की और फिर बसंत और पूनम वह से चले गए उनके जाने के बाद मृत्युंजय और सुरेंद्र अपने अपने काम में लग गए हलाकि मृत्युंजय को आज अपने डैड का बहुत यद् आ रहा था और उसे खुसी भी हो रहा था की उसके डैड उसके बारे में कितना सोचते थे की उसके बिना कुछ बोले hi उसके दिल की बात समझ गए और पूनम के डैड से उसका और पूनम के शादी की बात करने चले गए.

कुशवाहा मेंशन से निकलने के बाद बसंत बहुत लग रहा था अपने डैड को इतना खुस देख कर पूनम उनसे बोली.

पूनम- डैड क्या आप सच में मेरी शादी मृत्युंजय से करवा दीजियेगा.

पूनम के बात सुन कर बसंत के चेहरे पर एक कामिनी मुस्कान आ गयी और वो पूनम से बोले.

बसंत- है तो इसमें प्रॉब्लम क्या है मृत्युंजय एक अच्छा लड़का है पैसे वाला है देखने में भी सुन्दर है और सबसे बड़ी बात वो तुम्हे और तुम उसे पसंद भी करते हो तो भला तुम्हे उससे शादी करने में क्या दिक्कत है.

बसंत के बात सुन कर पूनम को बहुत गुसा आया और वो घुसे से अपने डैड से बोली.

पूनम- आप ये बात कर रहे है डैड मई भला उसके जैसे चिपकू इंसान को पसंद कैसे कर सकती हु वो तो अपने बोलै था इस लिए मई उससे प्यार की नाटक कर रही थी नहीं तो मई उसके जैसे इंसान को देखना भी पसंद नहीं करती और आप तो जानते hi है की मई मुंबई में एक लड़के से प्यार करती हु और उसी से सदी करुँगी फिर आप इस मृत्युंजय से मेरे सदी के बारे में सोच भी कैसे सकते है.

पूनम के बात सुन कर बसंत जोर जोर से हसने लगता है और हसते हुए बोलता है.

बसंत- है है है है देखो देखो तुम्हारा चेहरा कैसा हो गया मृत्युंजय से शादी के बात सुन कर है है है है (फिर सीरियस होते हुए) मेरे खंडन में दुश्मनो के यहाँ लड़की नहीं दी जाती है बल्कि उनकी मौत दिया जाता है और तुम चिंता मत करो तुम्हारी शादी उसी मुंबई वाले लड़के से hi होगा रही बात मृत्युंजय की तो उसका तुम्हारे साथ सगाई नहीं हो रही है बल्कि उसके मौत पर हस्ताक्षर हो रहा है.

अपने डैड के बात सुन कर पूनम के दिल में थोड़ी रहत महसूस हुयी लेकिन जब उसने सुना की उसके डैड सगाई के बहाने मृत्युंजय को मरवाना चाहते है तो ये उसे अच्छा नहीं लगा इस लिए वो अपने डैड से बोली.

पूनम- डैड क्या मृत्युंजय को मरना जरुरी है हम उससे उसका सारा जायदाद ले कर उसे छोड़ नहीं सकते है.

पूनम के बात सुन कर बसंत को गुसा आ जाता है और वो घुसे से पूनम से बोलता है.

बसंत- अभी तुमने ये बात बोल दी लेकिन दुबारा मत बोलना नहीं तो मई भूल जाऊंगा की तुम मेरी बेटी हो और रही बात उसको जिन्दा छोड़ने की तो एक बात यद् रखना अपने दुश्मनो पर कभी भी रहम मत करना नहीं तो वो लोग दुबारा ताकतवर हो कर तुम्हे कुचलने की कोशिश जरूर करेंगे.

अपने डैड को घुसे में देख कर पूनम कम्प गयी और वो डरते हुए अपना सर है में हिला दी फिर दोनों चुप चाप अपने घर चले गए.

इधर सिकंदरा सिंह राठौर मुझे उस जगह पर छोड़ने के बाद वो सीधा एक हॉस्पिटल के तरफ अपने कार को मोड़ लिया था ये हॉस्पिटल मुंबई के no. 1 हॉस्पिटल में से एक था और उस हॉस्पिटल का अप्पोलो हॉस्पिटल था वो अपने कार को सीधा अप्पोलो हॉस्पिटल के पार्किंग में जा कर रोका और फिर कार से उतर कर हॉस्पिटल के अंदर चले गए हॉस्पिटल के अंदर जाने के बाद वो रिसेप्शन पर जा कर रिसेप्शनिस्ट से बोले.

सिकंदरा- एक्सक्यूज़ में मम क्या मई डॉ. देवेंद्र से मिल सकता हु.

सिकंदरा के बात सुन कर वो लड़की एक बार उनको देखि फिर उनसे बोली.

रिसेप्शनिस्ट- क्या अपने उनसे मिलने के लिए कोई अपॉइंटमेंट लिया है.

सिकंदरा- जी नहीं लेकिन आप उनसे एक बार कॉल कर बोल दीजिये की उनसे मिलने के लिए सिकंदरा सिंह राठौर आये है वो खुद मुझे बुला लेंगे.

सिकंदरा के मुँह से सिकंदरा सिंह राठौर सुन कर वो लड़की हड़बड़ा जाती है क्युकी मुंबई में कोण ऐसा आदमी नहीं था जो सिकंदरा सिंह राठौर को नहीं जनता होगा फिर वो लड़की जल्दी से डॉ. देवेंद्र के पास कॉल लगा कर बोली.

रिसेप्शनिस्ट- हैल्लो सर आपसे मिलने के लिए सिकंदरा सिंह राठौर आये हुए है और वो आपसे मिलने के लिए परमिशन चाहते है.

जैसे hi डॉ. देवेंद्र ने सुना की उनसे मिलने के लिए खुद सिकंदरा सिंह राठौर आये हुए है तो डॉ. देवेंद्र बहुत खुस हो जाते है और उस रिसेप्शनिस्ट पर भड़कते हुए बोलते है.

देवेंद्र- तो तुम उनको वह पर टोक कर क्यों राखी हो उनको जल्दी से मेरे केबिन में ले कर आओ एक मिनट रुको मई खुद उनको रइवे करने के लिए आता हु.

इतना बोल कर डॉ. देवेंद्र फ़ोन काट देते है और जल्दी से अपने केबिन से निकल कर रिसेप्शन एरिया में आये है और सिकंदरा के सामने अपने दोनों हाथ जोड़ कर बोलता है.

डॉ. देवेंद्र- हमें माफ़ कीजियेगा सर आपको मेरे वजह से इतनी देर इंतज़ार करना पड़ा.

सिकंदरा- कोई बात नहीं मुझे यहाँ आये हुए ज्यादा समय नहीं हुआ.

डॉ. देवेंद्र- ठीक है तो चलिए हम केबिन में बैठ कर बात करते है.

इसके बाद दोनों डॉ. देवेंद्र के केबिन में आ जाते है और वह लगे हुए चेयर पर बैठ जाते है इसके बाद डॉ. देवेंद्र सिकंदरा सिंह राठौर को बोलते है.

देवेंद्र- मुझे बहुत खुसी हुयी सर की आप जैसे महँ व्यक्ति आज मेरे इस छोटे से हॉस्पिटल में आये है कहिये मई आपकी कैसे मदत कर सकता हु.

सिकंदरा- जी मुझे एक डीएनए टेस्ट करवाना है क्या आप मेरा काम कर सकते है.

डॉ. देवेंद्र- है क्यों नहीं मेरा तो काम hi यही है क्या सैंपल लाये है.

सिकंदरा- है ये लीजिये.

इतना बोल कर सिकंदरा अपने पॉकेट से एक छोटा सा दबा निकलते है जिसमे मेरा और प्रताप सिंह राठौर के बल का एक एक टुकड़ा रखा हुआ था उस दबा को डॉ. देवेंद्र को देने के बाद सिकंदरा सिंह राठौर उनसे बोले.

सिकंदरा- रिपोर्ट आने में कितना समय लग जायेगा.

डॉ. देवेंद्र- जी रिपोर्ट आर में लगभग 5 दिन लग जायँगे.

सिकंदरा- क्या...? 5 दिन लेकिन मेरे पास इतना समय नहीं है तो क्या आप और जल्दी कोशिश नहीं कर सकते है.

डॉ. देवेंद्र- मई पूरी कोशिश करूँगा की रिपोर्ट आने में काम से काम समय लगे.

सिकंदरा- थैंक्स वैसे मुझे आपसे एक बात कहनी थी.

डॉ. देवेंद्र- है है बोलिये न आपको मुझसे क्या कहना था.

सिकंदरा- मुझे आपसे ज्यादा कुछ नहीं बोलना था बस मई ये चाहता हु की आप डीएनए टेस्ट के बारे में किसी को कुछ नहीं बताऊंगा.

सिकंदरा- ठीक है तो अब मई चलता हु आप मुझे जल्द से जल्द वो रिपोर्ट मेरे पर भेज दीजियेगा.

डॉ. देवेंद्र- ठीक है.

इसके बाद सिकंदरा सिंह राठौर वह से चले जाते है.

इधर मंटू यादव के फार्महाउस में मंटू यादव उसका बीटा कुंदन यादव और उनके साथ नागेंद्र भानुशाली जतिन भानुशाली और दिलावर बैठे हुए थे मंटू यादव के चेहरे पर खुसी के भाव थे वो खुस होते हुए दिलावर से बोलै.

मंटू- तुमने प्रतिक के फॅमिली को किडनैप कर के बहुत अच्छा काम किया है अब उस प्रतिक को हमारे पास आना hi होगा और जब वो यहाँ आएगा तो हम उसे तड़पा तड़पा कर मरेंगे उसने जैसे मेरे करार को बर्बाद किया है वैसे hi मई उसके सामने hi उसके पुरे परिवार को बर्बाद करूँगा इसके बाद उसे जान से मर दूंगा.

मंटू यादव के बात सुन कर सभी के चेहरे पर एक कामिनी मुस्कान आ गयी तो वही दिलावर मंटू यादव से बोलै.

दिलावर- सर आप प्रतिक को कमजोर मत समझियेगा वो बहुत चालक और ताकतवर है उसने अपने फॅमिली के सेफ्टी के लिए बहुत hi ज्यादा ताकतवर लोगो को लगा रखा था अगर मई उन सब को डाइवर्ट नहीं करता तो मई कभी भी इन लोगो को किडनैप नहीं कर सकता था.

दिलावर के बात सुन कर मंटू यादव जोर जोर से हस्ते हुए बोलै.

मंटू- है है है मुझे यकीं नहीं हो रहा है की तुम जैसा आदमी भी उस दो कौड़ी के इंसान से दर गए तुम तो अपने ताकत के लिए पुरे मुंबई में फेमस हो लोग तुम्हारे नाम सुन कर कम्प जाते है तो आज क्या हुआ की आज तुम एक बचे से इतना दर रहे हो.

मंटू यादव के बात सुन कर दिलावर को बहुत बुरा लगा इस लिए वो मंटू यादव से बोलै.

दिलावर- मई उससे डरा नहीं हु मई आज भी वही दिलावर हु जिसके नाम सुन कर लोगो के पेशाब निकल जाते है मई बस आपको सावधान करना चाहता था और वैसे भी जब वो यहाँ आएगा तो उसे मई hi मरूंगा.

मंटू- ठीक है तो तुम उसे मर कर मुझे ये साबित कर देना की तुम अभी भी वो hi दिलावर हो और रही बात उसके आदमियों की तो उनके लिए मेरे पास कुछ खास इंतजाम है जो समय आने पर तुम खुद देख लोगे.

इधर मंटू यादव के बीटा जो कब से अपने बाप और दिलावर के बाटे सुन रहा था वो दोनों से बोलै.

कुंदन- आप दोनों अब संत रहिये जब प्रतिक यहाँ आएगा उस समय देखा जायेगा की उसके साथ क्या करना है लेकिन उससे पहले मई उसके बीवी को देखना चाहता हु मैंने सुना है की वो बहुत सुन्दर है इस लिए मई उसके पास जा रहा हु.

कुंदन के बात सुन कर दिलावर उससे बोलै.

दिलावर- आपको वह जाने की जरुरत नहीं है मई अपने आदमियों को उन सब को यही लेन के लिए बोल देता हु.

कुंदन- ठीक है.

कुंदन के बात सुन कर दिलावर अपने आदमियों को कॉल करता है और उन तीनो को हॉल में लेन के लिए बोल देता है थोड़ी देर में उसके आदमी शनाया और उसके माँ डैड को हॉल में लेकर आ जाते है जैसे शनाया और उसके माँ डैड हॉल में आते है तो कुंदन के नजर शनाया पर चला जाता है जिसे देख कर वो देखता hi रह जाता है और उसे हवश भरी निगाहो से घूरने लगता है.

जब दिलावर देखता है की कुंदन शनाया को हवस भरी नजरो से घर रहा है तो उसके चेहरे पर एक सैतानी मुस्कान आ जाता है और वो कुंदन से बोलता है.

दिलावर- कैसी लगी तुम्हे प्रतिक की बीवी.

दिलावर के बात सुन कर कंदन यादव शनाया को हवस भरी नजरो से देखते हुए बोलै.

कुंदन- क्या लड़की है यार उस सेल प्रतिक की किस्मत बहुत अच्छी है उसको इसके जैसे नाजुक और कमसिन लड़की मिली मुझसे तो रहा नहीं जा रहा है.

दिलावर- तुम सही बोल रहे हो कुंदन भाई ये लड़की कमल की है मई भी जबसे उसे देखा हु मुझसे भी नहीं रहा जा रहा है तो क्या बोलते हो चख लिया जय.

कुंदन- अरे है भाई ये भी कोई पूछने वाली बात है.

इतना बोल कर दोनों हसने लगते है इधर मंटू यादव और नागेंद्र भानुशाली उन दोनों के बाटे सुन कर मुस्कुरा रहे थे तभी जतिन भानुशाली कुंदन से बोलता है.

जतिन- प्रतिक ने मेरे भाई को भी मारा है इस लिए मुझे भी उससे बदला लेना तो क्या मई भी तुम दोनों के साथ शामिल हो सकता हु.

जतिन के बात सुन कर कुंदन बोलै.

कुंदन- है है क्यों नहीं गैंग बंग करने में और मजा आएगा.

कुंदन के बात सुन कर मंटू यादव कामिनी मुस्कान के साथ बोलै.

मंटू- ठीक तो तुम तीनो इसे लेकर रूम में जाओ और एन्जॉय करो लेकिन ध्यान रखना की ये मरे नहीं क्युकी हम भी बहते गंगा में नहाना चाहते चाहते है.

नागेंद्र- आप सही बोले मंटू भाई अगर मुझ जैसे बूढ़े को ऐसी लड़की मिल जाये तो हमारा सारा पाप धूल जायेगा.

नागेंद्र भानुशाली के बात सुन कर सब जोर जोर से हसने लगते है इसके बाद कुंदन आगे बढ़ कर शनाया को पकड़ने के लिए जैसे hi अपना हाथ बढ़ता है की तभी एक उड़ता हुआ खंजर आता है और कुंदन यादव के उस हाथ को काट देता है जिसके कारन कुंदन यादव के एक जोरदार चीख से वो पूरा फार्महाउस गूंज जाता है.

जैसे hi कुंदन के दर्द भरा आवाज वह गूंजा तो सबका ध्यान उसके तरफ गया तो सबने देखा की कुंदन का एक हाथ उसके शरीर से काट कर निचे फर्श पर गिरा हुआ है ये देख कर सब हैरान हो गए और इधर उधर उस खंजर फेकने वाले को देखने लगे तो वही मंटू यादव जल्दी से भागते हुए अपने बेटे के पास गया और उसका हाथ देखने लगा फिर वो जोर से छीलते हुए बोलै.

मंटू- ये क्या हो गया तुम्हे बीटा किसकी इतनी हिमत हो गयी की वो मंटू यादव के बेटे पर हमला करे (फिर अपने आदमियों से) अरे कोई है जल्दी से गाड़ी निकालो मेरे बेटे को ले कर हॉस्पिटल हॉस्पिटल जाओ और कुछ लोग उस आदमी को ढूंढो जिसने मेरे बेटे के हाथ को कटा है (फिर घुसे से) मई उसके दोनों हाथ और दोनों पेअर अपने hi हाथो से काटना चाहता हु.

मंटू यादव के बात सुन कर सरे गुंडे उस आदमी को ढूंढने लगते है तभी उन सब को एक आवाज सुनाई देती है.

आवाज- तुम्हे मुझे ढूंढने के लिए अपने आदमियों को भेजने की कोई जरुरत नहीं है मंटू यादव क्युकी मई खुद तुम्हारे सामने आ रहा हु अगर तुममे डैम है तो मेरा हाथ और पेअर काट कर दिखाओ.

ये आवाज फार्महाउस के मैं दरवाजे के बहार से आया था इसका मतलब था की जिसने भी कुंदन के हाथ को कटा था वो अभी फार्महाउस के बहार था जैसे hi मंटू यादव ने उस आवाज को सुना तो वो जल्दी से अपने आदमियों को बहार जाने का इशारा किया मंटू यादव के इशारा समझ कर सरे करीब 10 गुंडे फार्महाउस के मैं दरवाजा को खोलते हुए बहार निकले उन लोगो को अभी बहार निकले हुए कुछ सेकंड हुए थे की तभी एक तेज़ आवाज के साथ वो दरवाजा टूट गया और उसमे से 10 गुंडा उड़ते हुए मंटू यादव के पास आ कर गिरे जिसे देख कर मंटू यादव दर से 2 कदम पीछे हो गया और अपने आँखे फाडे फाडे उस दरवाजे के तरफ देखने लगा.

तभी उस दरवाजे से एक 6 फ़ीट का इंसान अंदर आया जिसे देख कर मंटू यादव उससे बोलै.

मंटू- कोण हो तुम और तुम्हारी हिमत कैसे हुयी मेरे आदमियों पर हमला करने की.

मंटू यादव के बात सुन कर वो इंसान कुछ बोलता उससे पहले hi जतिन पीछे से जोर से बोलै.

जतिन- ये ये तो प्रतिक है लेकिन ये इतनी जल्दी यहाँ कैसे.

जी है दोस्तों कुंदन यादव के हाथ काटने वाला कोई और नहीं बल्कि मई hi था जब मई टेलिपोर्ट हो कर मंटू यादव के फार्महाउस के बहार पंहुचा तो मई अपने दिव्या दृष्टि से पुरे फार्महाउस को सकने करने लगा तभी मैंने देखा की कुंदन यादव के बुरी नजर शनाया पर है और वो गलत मनसूबे से शनाया को छूने वाला है तो मई अपने स्टोरेज रिंग से पंचतत्व खंजर निकला और उसे कुंदन के तरफ फेक दिया और वो खंजर तीब्र गति से आगे बढ़ते हुए जिस हाथ से कुंदन मेरे वाइफ को छूने वाला था उस हाथ को काट दिया.

इधर जतिन के बात सुन कर वह मौजूद सभी हैरान हो गए और मुझे ध्यान से देखने लगे तभी दिलावर मुझे देखते हुए बोलै.

दिलावर- ये कैसे हो सकता है अगर ये वही प्रतिक है तो ये यहाँ कैसे पहुंच गया अभी तो हम इसके पास कॉल hi नहीं किये तो इसे कैसे पता चला की मैंने इसके परिवार को यहाँ के कर आया है.

दिलावर के बात सुन कर सब सोच में पद गए फिर मंटू यादव उसके बातो के जबाब देते हुए बोलै.

मंटू- चलो अच्छा हुआ की हमें इसे बुलाने के लिए म्हणत नहीं करनी पड़ी ये खुद यहाँ आ गया ये यहाँ आ तो गया है लेकिन अब ये यहाँ से जिन्दा नहीं जायेगा (फिर अपने आदमियों से) तुम सब मिल कर इसे पकड़ लो और इसे भी इसके परिवार के साथ बांध दो हम सबसे पहले इसके सामने इसके बीवी के माँ बाप को मरेंगे फिर इसके बीवी के साथ खेलेंगे अपने सामने अपने परिवार को मरते हुए देख कर ये तड़पेगा तो मेरे दिल को बहुत सुकून मिलेगा.

मंटू के बात सुन कर उस हॉल में करीब 100 गुंडे जमा हो गए उन सरे गुंडों ने अपने हाथ में तलवारे ले राखी थी और सरे गुंडे मार्टिकल आर्ट्स योद्धा लग रहे थे जो मार्टिकल आर्ट्स के पाचवे छठे और सातवे लेवल के योद्धा थे मई उन सरे गुंडों को देख कर मंटू यादव से बोलै.

मई- मंटू यादव तुम्हारी दुश्मनी मुझसे थी तो तुम्हे मेरे घरवालों को उसके बिच नहीं लाना चाहिए था तुमने मेरे परिवार को किडनैप कर के अपने मौत को निमंत्रण दिया है अब तुम सब को मुझसे कोई नहीं बचा सकता इस लिए मई तुम्हे एक चांस देता हु की तुम्हारे पास जितने भी आदमी है सब को बुला लो क्युकी ये चाँद आदमी तुम सब को मुझसे नहीं बचा सकते है.

मेरी बात को सुन कर वह मौजूद सरे लोगो को बहुत गुसा आया फिर मंटू यादव घुसे से मुझसे बोलै.

मंटू- बहुत घमंड है लड़के तुम्हे अपने शक्तियों पर लेकिन आज मई तुम्हारी ये घमंड को तोड़ कर hi रहूँगा तुम्हे और रही बात और आदमियों की तो पहले तुम इन्हे तो हरा को (फिर अपने आदमियों को) टूट पदों इसके लेकिन यद् रखना ये मरना नहीं चाहिए बस तुम लोग इसका हाथ पेअर तोड़ दो इसे तो मई खुद अपने हाथो से तड़पा तड़पा कर मरना चाहता हु.

अपने बॉस के बात सुन कर सरे गुंडे मुझ पर टूट पड़े उन सरे गुंडों को अपने तरफ आता हुआ देख कर मई अपने हाथ में खंजर को मजबूती से पकड़ा और उन सरे गुंडों को अपने पास आने का इंतज़ार करने लगा.

थोड़ी hi देर में वो सरे गुंडे मेरे पास आ गए और 10 गुंडों ने अपने तलवार से मुझ पर हमला कर दिया उनका निशाना मेरा सर था वो लोग मेरे सर को मेरे धड़ से अलग कर देना चाहते थे लेकिन उन लोगो को मालूम नहीं था की मेरा सर काटना उन लोगो के बाद की बात नहीं है.

जैसे hi उन 10 गुंडों में अपने तलवार में मेरे सर पर हमला किया वैसे hi मैंने निचे झुक गया जिसके कारन वो 10 तलवार मेरे सर के ऊपर से निकल गया फिर मैंने अपने स्पीड का इस्तेमाल करते हुए अपने खंजर से उन देशो पर एक साथ हमला किया और उन लोगो के सर धड़ से अलग कर दिया.

जैसे hi उन गुंडों कर सर उनके धड़ से अलग तो मेरे तरफ बढ़ रहे गुंडों के कदम अचानक रुक गया उन गुंडों के चेहरे पर दर साफ दिख रहा था यही हल मंटू यादव दिलावर नागेंद्र और जतिन का भी था लेकिन फिर मंटू यादव अपने दर पर काबू करते हुए अपने गुंडों के ऊपर छीलते हुए बोलै.

मंटू- अरे मूर्खो तुम सब इस तरह से उससे दर कर रुक क्यों गए अगर तुम लोग उसके ऊपर हमला नहीं करोगे तो मई तुम लोगो को जान से मर दूंगा और अगर जिसने भी इस लड़के के साडी को कटा उसे मई 10 करोड़ रूपए दूंगा अब तुम लोग सोच लो की उसे मर कर 10 करोड़ लेना है या पीछे हाथ कर मेरे हाथो से दर्दनाक मौत लेना है.

मंटू यादव के बात सुन कर सरे गुंडे कुछ पल के लिए सोच में पद गए उन गुंडों के आगे कुवा था तो पीछे खाई इस लिए उन गुंडों ने सोचा की अगर मरना hi है तो लड़ कर मरेंगे इतना सोचने के बाद वो गुंडों दुबारा मेरे ऊपर हमला करने के लिए आने लगे फिर क्या था वह पर एक खुली जुंग सुरु हो गया और मई उन गुंडों को गाजर मूली के तरह काटना सुरु कर दिया जिसके कारन वो पूरा फार्महाउस इन गुंडों के दर्द भरी चीखो से गूंजने लगा.

करीब 10 मिनट के बाद मैंने उन सरे गुंडों को गाजर मूली के तरह काट दिया पूरा हॉल में उन लोगो के खून से रंग गया था वो हॉल अब किसी जुंग की मैदान की तरह दिख रही थी अपने सरे गुंडों के ऐसी हालत देख कर मंटू यादव मरे खौफ के थार थार कम्प रहा था उसे यकीं hi नहीं हो रहा था की मैंने उसके इतने सरे मार्टिकल आर्ट्स योद्धा को बस कुछ hi मिनट में गाजर मूली की तरह काट दिया था वो इन गुंडों के हालत को देख कर इतने सदमे में था की वो ये भूल hi गया था की उसके बेटे का हाथ काट गया है अगर उसे जल्दी से ट्रीटमेंट नहीं मिला तो वो मर जायेगा मंटू यादव के जैसे hi बाकि सब का भी हालत ख़राब था वो सब दर से थार थार कम्प रहे थे.

इधर मई उन गुंडों को ठिकाने लगाने के बाद मंटू यादव के तरफ बढ़ने लगा ये देख कर वो लोग और भी दर गए तभी दिलावर के नजर शनाया पर गया और वो जल्दी से अपने जेब से एक खंजर निकला और शनाया के गर्दन पर लगते हुए मुझसे बोलै.

दिलावर- मई जनता हु की तुम हम में से किसी को जिन्दा नहीं छोड़ोगे क्युकी हम में से यहाँ मौजूद कोई भी तुमसे लड़ कर तुम्हे हरा नहीं सकता है और वैसे भी मई मरने से नहीं डरता लेकिन मई मरने से पहले तुम्हे ऐसी जखम दूंगा की तुम न तो जी पाओगे और न hi मर पाओगे मई तुम्हारे सामने hi तुम्हारी बीवी के गले को काट दूंगा.

इतना बोल कर वो जोर जोर से हसने लगा उसकी बात सुन कर मई दर गया और मेरे दिल के धड़कन तेज़ हो गयी और मई जोर से छीलते हुए दिलावर से बोलै.

मई- नहीं तुम ऐसा नहीं कर सकते मई तुम शनाया को कुछ भी नहीं करोगे अगर उसे एक खरोच भी आया तो यद् रखना मई तुम्हे ऐसी मौत दूंगा की तुम दोबारा जनम लेने से पहले 100 बार सोचोगे तुम मेरी बात मनो और उसे छोड़ दो मई तुमसे वडा करता हु की मई तुम्हे यहाँ से जिन्दा जाने दूंगा मई तुम्हे कुछ भी नहीं करूँगा.

मेरी बात को सुन कर दिलावर हस्ते हुए बोलै.

दिलावर- है है है तुम्हे क्या लगता है की मई मरने से डरता हु नहीं बिलकुल नहीं मुझे मरने का कोई दर नहीं है क्युकी मई जनता हु की मई जिस लाइन में हु उस लाइन में मई कभी भी मारा जा सकता हु लेकिन मरने से पहले मुझे तुम्हारे इन आँखों में दर देख कर बहुत मजा आ रहा है जरा तू सोच अपने बीवी के मरने से पहले तुम्हारी ये हालत है तो वो मर जाएगी तब तुम्हारा क्या हल होगा.

इतना बोलै कर वो शनाया को मरने के लिए अपने खंजर को जैसे hi उसके गर्दन के तरफ के जाता है वैसे hi शनाया के लॉकेट हल्का सा चमकता है और दिलावर को एक तेज़ झटका लगता है जिसके कारन वो उड़ता हुआ पीछे दिवार से टकरा जाता है और वही बेहोश हो कर निचे गिर जाता है.

दिलावर को इस तरह से बिना कोई वजह के अपने आप उड़ कर पीछे जाता हुआ देख कर सरे लोग हैरान हो जाते है और दर से थार थार कंपनी लगते है तो वही दिलावर को इस तरह से उड़ता हुआ देख कर मेरे होतो पर एक रहस्यमयी मुस्कान आ जाती है और मेरा नजर शनाया के गले में पहने हुए लॉकेट पर चला जाता है फिर मई आगे बढ़ते हुए शनाया और उसके माँ डैड के पास जाता हु और उन लोगो को ध्यान से देखता हु की उन लोगो को कही कुछ हुआ तो नहीं है लेकिन मई ये देख कर रहत के साँस लेता हु की उन तीनो को कुछ भी नहीं हुआ था वो लोग बस बेहोश थे.

फिर मई उन तीनो के ऊपर एक अदृस्य कवच बना देता हु ताकि उन लोगो को कोई नुकसान न पंहुचा दे ये सब करने के बाद मई मंटू यादव के तरफ देखते हुए उससे बोलै.

मई- मंटू यादव तुम्हे मेरे साथ जो भी करना था कर सकते थे लेकिन तुम्हे हम दोनों के दुश्मनी के बिच में मेरे फॅमिली को नहीं लाना चाहिए था और तुमने ये गलती कर के अपने मौत को बुला लिया है अब तुम्हे मुझसे कोई भी नहीं बचा सकता.

मेरे बात को सुन कर मंटू यादव एक पल के लिए दर गया था लेकिन फिर वो गुस्से से मुझसे बोलै.

मंटू- तुम मेरे इन कमजोर आदमियों को मर कर अपने आप को बहुत बड़ा योद्धा समझ रहे हो तो ठीक है मेरे इन आदमियों से बच कर दिखाओ.

इतना बोल कर वो किसी को फ़ोन कर के बहार आने के लिए बोलता है फिर थोड़ी देर बाद उसी फार्महाउस के 2 रूम में से करीब 30 लोग निकल कर बहार आते है वो लोग देखने से hi साउथ अफ्रीका के ब्लैक नीग्रो लग रहे थे क्युकी सब 7 7 फ़ीट लम्बा और काळा थे उनके बॉडी ऐसी थी की अगर कोई मामूली आदमी उनको देख ले तो वही दर से मर जाये खैर वो लोग बहार आ कर खड़े हो गए उन लोगो को देख कर मंटू यादव घमंड से मुझसे बोलै.

मंटू- ये है मेरे असली आदमी तुम इन से बच कर दिखाओ (फिर उन आदमियों से) तुम सब इस लड़के को ठिकाने लगा दो अगर जो कोई भी इस लड़के को मरेगा मई उसे (शनाया के तरफ इशारा करते हुए) इस लड़की को मस्ती करने के लिए दे दूंगा.

मंटू यादव के बात सुन कर सरे ब्लैक नीग्रो शनाया के तरफ हवस भरी नजरो से देखने लगे फिर वो लोग मुझे देख कर अजीब तरह से मुस्कुराते हुए मेरे तरफ आने लगे उनको अपने तरफ आता हुआ देख कर मई भी अपने हाथो में खंजर को मजबूती से पकड़ते हुए उनसे लड़ने के लिए तैयार हो गया.

इधर उन 30 बैक नीग्रो में से 4 नीग्रो अपने तेज़ रफ़्तार के साथ मेरे तरफ दौड़ कर आने लगे उनको स्पीड इतनी थी की मई भी एक पल के लिए उनके स्पीड को देख कर हैरान हो गया क्युकी उनकी स्पीड कोई मामूली इंसान जैसे नहीं थी बल्कि उनकी स्पीड को देख कर ऐसा लग रहा था की वो सुडो ग्रांडमास्टर लेवल के योद्धा हो फिर देखते hi देखते वो चारो मेरे पास पहुंच गए थे और फिर चारो अपने पंच से मेरे ऊपर चारो तरफ से हमला कर दिया.

जैसे hi मैंने उनके पंच को अपने तरफ आता हुआ देखा तो मई जल्दी से उनके पंच को ब्लॉक करने लगा मैंने आसानी से तीन आदमियों के पंच को ब्लॉक कर दिया लेकिन मई चौथे आदमी के पंच को ब्लॉक करने से चूक गया जिसका नतीजा ये हुआ की उस नीग्रो का पंच आ कर सीधा मेरे पीठ से टकरा गया और मई उड़ते हुए कुछ दूर जा कर गिरा ये पंच मुझे इस लिए लगा क्युकी मई इस वक़्त अपना सिर्फ 25% ताकत का hi उसे कर रहा था अगर मई अपने 50% ताकत का उसे करता तो ये लोग मुझे छू भी नहीं सकते है.

इसके बाद मई खुद को सँभालते हुए फिर से खड़ा हो गया और उनको अपने तरफ आने का इशारा किया मुझे िश तरह से खड़ा को कर अपने तरफ आने का इशारा करता हुआ देखा कर उन नीग्रो को बहुत गुसा आया और तुरंत मुझे मरने के लिए दौड़ते हुए मेरे तरफ आने लगे उनको अपने तरफ आता हुआ देख कर मई अपने खंजर को मजबूती से पकड़ा और फिर मई भी उनके तरफ दौड़ने लगा और उछालते हुए एक नीग्रो के कंधे में अपने खंजर को उतर दिया जिससे उस नीग्रो के भयंकर चीख उस पुरे फार्महाउस में गूंज गयी फिर मई पीछे मुड़ते हुए दूसरे नीग्रो के गर्दन में इस खंजर को आर पर कर दिया जिसके वो नीग्रो बिना कोई आवाज किये वही ढेर हो गया तभी मेरे पीछे से एक नीग्रो ने मेरे ऊपर हमला किया लेकिन मई उसके हमले को चकमा देते हुए अपने खंजर से उसका सर धड़ से अलग कर दिया फिर देर न करते हुए बचा हुआ एक नीग्रो के तरफ मई अपना खंजर फेका तो वो खंजर सीधा जाकर उस नीग्रो के एक आँख में लगा और वो खंजर उसके आँख को चीरते हुए उसके सर के पर hi गया.

मई उन चार ब्लैक नीग्रो को निपटने के बाद बाकि नीग्रो के तरफ मुस्कुराते हुए देखा और उनको अपने तरफ आने का इशारा किया इधर बचे हुए सरे ब्लैक नीग्रो अपने साथियो के ऐसी हालत देख कर घुसे से दहाड़ने लगे फिर सब एक साथ hi मेरे ऊपर टूट पड़े फिर क्या था मैंने भी वह कतलयाम मचा दिया मैंने उन ब्लैक नीग्रो में से किसी कर सर धड़ से लगा किया तो किसी का हाथ काट दिया करीब 15 मिनट में मैंने उन सरे नीग्रो को मौत के नींद सुला दिया था.

इधर अपने इतने खतरनाक आदमियों को ऐसी हालत देख कर मंटू यादव दर से थार थार कम्पनी लगा था हलाकि उसकी ऐसी हालत अकेले की नहीं थी बल्कि उसके साथ नागेंद्र जतिन और दिलावर को अब होश में आ गया था सब के हालत दर से ख़राब हो गया था नागेंद्र भानुशाली ने तो दर से अपने पेंट में hi पेशाब कर दिया था इधर मई उन सरे नीग्रो को निपटने के बाद मंटू यादव से बोलै.

मई- अगर तुम्हारे पास और आदमी है तो तुम उन्हें भी बुला लो कही ऐसा न हो की मरने के बाद तुम्हारी आत्मा इस अफ़सोस में रहे की मई और आदमी बुला लेता तो मेरी जान बचा जाता.

मेरी बात को सुन कर मंटू यादव दर से हकलाते हुए मुझसे बोलै.

मंटू- ददद देखो तत्तत्त तुम ममम मुझे नहीं मर सकते अगर तुम मुझे हाथ भी लगाया तो पुलिस तुम्हे छोड़ेगी नहीं.

मई- तुम्हे ये सब मेरे फॅमिली को किडनैप करने से पहले सोचना चाहिए था और रही बात पुलिस की तो उनको कोई साबुत मिलेगा तब न वो मुझे पकड़ पाएंगे वैसे तुम टेंशन मत लो मई पहले तुम्हे नहीं मरूंगा क्युकी तुम तो मैं विलन हो न इस लिए तुम सबसे आखरी में करोगे मई सबसे पहले तुम्हारे इन प्यादो को तो रस्ते से हटाऊँगा और आखिर में तुम्हे मरूंगा तब तक तुम अपने साथियो को मरते हुए देख कर एन्जॉय करो.

इतना बोल कर मई दिलावर के पास पहुंच गया और उसके पास जा कर उससे बोलै.

मई- तुम्हे मरने से दर नहीं लगता है न तो मई तुम्हे आज ऐसा मौत दूंगा की तुम दोबारा जनम लोगे तो मरने के नाम पर hi तुम्हारा रूह कम्प जायेगा.

मेरी बात को सुन कर दिलावर दर से कम्पनी लगा अब उसमे इतनी भी हिमत नहीं बची थी की वो मुझ पर हमला करे वो दर से कंपते हुए मुझसे बोलै.

दिलावर- देखो प्रतिक मेरी तुमसे कोई दुश्मनी नहीं है मई तो बस मंटू यादव के कहने पर तुम्हारे परिवार को किडनैप किया था मई तुम्हारे परिवार को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचना चाहता था.

दिलावर के बात सुन कर मई जोर जोर से हसने लगा और हस्ते हुए उससे बोलै.

मई- अच्छा तुम्हारा मेरी फॅमिली को कोई भी नुकसान पहुंचने का इरादा नहीं था तो तुम कुछ समय पहले मेरे वाइफ के गले पर चाकू लगा कर क्या कर रहे थे तुमने आज तक न जाने कितने मासूमो को जान से मारा होगा आज मई उन सब का हिसाब तुमसे लूंगा आज तुम्हे मेरे हाथो से कोई नहीं बचा सकता है.

मेरे बात को सुन कर दिलावर समझ गया की उसका कोई भी पैतरा मेरे ऊपर काम नहीं करेगा तो वो अपने जेब से रिवाल्वर निकल कर मेरे ऊपर तानते हुए बोलै.

दिलावर- तुम मुझे मरना चाहते हो न तो ठीक है पहले तुम मेरे गन से बच कर दिखाओ.

इतना बोल कर उसने मेरे ऊपर अपने गन से फायर कर दिया जैसे hi वो मेरे ऊपर फायर किया तो उसके गन से गोली निकल कर मेरे तरफ आने लगा ये देख कर मई मुस्कुराने लगा फिर जैसे hi वो गोली मुझे लगने वाली थी वैसे hi मई उस गोली को रस्ते में hi पकड़ लिए जिसे देख कर वो सब हैरान हो गए सबसे ज्यादा हेयर्स तो दिलावर हो गया था वो मुझे गोली को अपने हाथो से पकड़ता हुआ देख कर बुरी तरह से दर गया था और वो डरते हुए बोलै.

दिलावर- ये ये ये ये असंभव है कोई अपने हाथो से गोली जैसे पकड़ सकता है.

दिलावर के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए उससे बोलै.

मई- इस दुनिया में ऐसी कोई भी गोली नहीं बानी है जो मुझे कोई नुकसान पंहुचा सके (फिर मई घुसे से उसके तरफ बढ़ते हुए बोलै) अब बहुत हो गया तुम्हारा खेल अब तुम मरने के लिए तैयार हो जाओ.

इतना बोल कर मई उसके पेट में एक पंच मारा जिसके कारन वो उड़ता हुआ पीछे जा कर गिरा और दर्द से कराहने लगा उसके मुँह से खून निकलने लगी थी फिर मई उसके पास गया और उसके एक हाथ को पकड़ कर उससे बोलै.

मक- तुमने इसी हाथ से खंजर को मेरी शनाया के गर्दन पर लगाया था न.

इतना बोल कर मई उसके उस हाथ को अपने खंजर से काट देता हु जिसके कारन उसके मुँह से एक दर्दनाक चीख निकलती है जिससे पूरा फार्महाउस गूंज जाता है और दर्द के कारन वही बेहोश हो जाता है.

दिलावर के ऐसी हालत देख कर जतिन नागेंद्र और मंटू यादव के दर के कारन हालत ख़राब हो गयी थी वो मन hi मन सोच रहे थे की उन लोगो ने किस हैवान से पन्गा ले लिया है.

नागेंद्र- ये ये तो पूरा हैवान है हमें इस जैसे हैवान से दुश्मनी नहीं करनी चाहिए थी.

जतिन- आप ठीक बोल रहे हो डैड अगर हम दोनों को इसके हाथो से बचना है तो हमें यहाँ से भागना होगा ये सोच कर वो दोनों वह से भागने लगे.

इधर मई दिलवर के हाथ को जैसे hi कटा तो वो बेहोश हो गया था उसको बेहोश होता हुआ देख कर मई अपने आप से बोलै.

मई- अरे ये तो इतने में hi बेहोश हो गया कोई बात नहीं मई अभी इसे होश में लता हु.

इतना बोल कर मई उसके गर्दन का एक नाश दबाया जिसके कारन वो होश में आ गया और होश में आये hi जोर जोर से छिलने लगा उसको इस तरह से चिलता हुआ देख कर मई गंभीर आवाज में उससे बोलै.

मई- क्या हुआ दर्द हो रहा है ऐसे hi दर्द मुझे भी हुआ था जब तुम मेरी शनाया के गर्दन पर खंजर लगाया था.

मेरी बात को सुन कर दिलावर दर्द से गिड़गिड़ाते हुए मुझसे बोलै.

दिलावर- मुझसे गलती हो गयी मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था प्लीज मुझे माफ़ कर दो और अगर मुझे मरना है तो एक hi बार में जान से मर दो भगवन के लिए मुझे ऐसे मत तड़पाओ.

दिलावर के बात सुन कर मुझे उसपर दया आ गया इस लिए मैंने सोचा की चलो इसे जितना दर्द देना था दे दिया अब मई उसको इसके दर्द से मुक्त कर देता हु इतना सोचने के बाद मई अपने खंजर को उसके गले पर चला दिया जिसके कारन दिलावर थोड़ी देर तड़पने के बाद वही मर गया दिलावर को मरने के बाद मई मंटू यादव के तरफ मुद गया तो देखा की 2 लोग वह से भाग गए थे और मंटू यादव अपने बेटे को घसीटते हुए वह से भागने का प्रयास कर रहा था.

जब मैंने देखा की जतिन और नागेंद्र वह पर नहीं है तो मेरा ध्यान फार्महाउस के गेट के तरफ गया तो देखा की दोनों वह से भागने की कोशिश कर रहे है ये देख कर मैंने अपने स्टोरेज रिंग से 2 सिल्वर नीडल निकला और उनके तरफ उछाल दिया जिसके कारन वो दोनों सिल्वर नीडल बिजली के गति से जा कर जतिन और नितिन के गले में पर हो गया और वो दोनों वही पर निर्जीव हो कर गिर गए.

मई पहले तो इन दोनों को मरना नहीं चाहता था लेकिन फिर मुझे ध्यान में आया की इन दोनों ने hi मेरे बारे में मंटू यादव को बताया होगा ये ध्यान में आते hi मुझे उन दोनों पर भी गुसा आने लगा था और ऊपर से ये दोनों भागने की कोशिश कर रहे थे अगर ये भाग जाते तो जरूर मेरे बारे में पुलिस को बता देते की मैंने hi मंटू यादव और उसके आदमियों को मारा है इस लिए मई उन दोनों को वही अपने सिल्वर नीडल से मर डाला.

इधर जैसे मंटू यादव ने नागेंद्र और जतिन को मरते हुए देखा तो उसका पेअर लड़खड़ा गया और वो वही जमीं पर धाम से गिर गया मई उसको जमीं पर गिरता हुआ देख कर मुस्कुराते हुए उसके पास गया और उससे बोलै.

मई- मैंने तुम्हे बोलै था न की आज तुम्हे और तुम्हारे आदमियों को मुझसे कोई भी बचा नहीं पायेगा.

मेरी बात को सुन कर मंटू यादव गिड़गिड़ाते हुए मुझसे बोलै.

मंटू- प्लीज मुझे और मेरे बेटे को छोड़ दो मई आज और अभी से सरे बुरे काम छोड़ दूंगा प्लीज मुझे मत मारो तुम बोलो दो इसके बदले में मई तुम्हे बहुत सरे पैसे देने के लिए तैयार हु.

मंटू यादव के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए उसके तरफ देखा और उससे बोलै.

मई- तुम अपना और अपने बेटे के जान के बदले मुझे कितना पैसा डोज.

मंटू- मई अपना और अपने बेटे के बदले तुम्हे पुरे 1000 करोड़ रूपए दूंगा.

मई- बस तुम्हारा और तुम्हारे बेटे की जान की कीमत 1000 करोड़ hi है वैसे तुम इतना पैसा लाओगे कहा से तुम्हारा बैंक अकाउंट तो फ्रीज़ हो गया है.

मंटू- मेरे पास बहुत सरे कॅश है और वो इसी फार्महाउस में है तुम बोलो तो मई अभी ला कर तुम्हे देता हु.

मई- नहीं अब उसकी जरुरत नहीं है मई उन पैसो को खुद hi ले लूंगा और है उन पैसो के बदले मई तुम दोनों को आसान मौत दूंगा.

इतना बोल कर मई अपने खंजर के एक वॉर से दोनों बाप बेटे का गाला काट दिया था मंटू यादव जो मेरे बातो को सुन कर सौक में था वो वैसे hi सौक में hi मरे गया खैर मई इन दोनों को मरने के बाद अपने दिव्या दृस्टि से पुरे फार्महाउस को देखने लगा तो मुझे उस फार्महाउस के लास्ट में एक तहखाना दिखाई दिया जिसे देख कर मई समझ गया की मई जो खोज रहा हु वो वही पर होगा इस लिए मई उस तहखाने के तरफ जाने लगा

थोड़ी देर चलने के बाद मई उस रूम में पहुंच गया जहा से अंदर तहखाने में जाने के लिए रास्ता था लेकिन उसका दरवाजा छुपा हुआ था अगर मेरे पास दिव्या दृस्टि न होती तो मई भी उस छुपे हुए दरवाजे को नहीं देख पता वो छुपा हुआ दरवाजा एक अलमीरा के पीछे था.

मई उस अलमीरा को उसके जगह से हटाया तो निचे तहखाने में जाने के लिए सीढियाँ दिखने लगी फिर मई उन सीढ़ियों से होता हुआ निचे चला गया जब मई निचे तहखाने में पंहुचा तो देखा की सामने दो रूम थे और उन दोनों रूम के दरवाजे पर डिजिटल लॉक लगा हुआ था जो की डिजिटल पासवर्ड से या फिंगर प्रिंट से अनलॉक हो सकता था ये देख कर मई तुरंत वह से गायब हुआ और सीधा मंटू यादव के लाश के पास पहुंच गया और फिर उसे अपने साथ ले कर वापस तहखाने में आ गया.

तहखाने में आने के बाद मई मंटू यादव के अंगूठे को उस डिजिटल लॉक के फिंगर स्कैनर के ऊपर रखा तो उस लॉक से एक लाइट निकली और मंटू यादव के अंगूठे को स्कैन किया इसके बाद वो लॉक खुल गया लॉक खुलने के बाद मई उस रूम का दरवाजा खोला और अंदर देखने लगा जैसे मेरी नजर अंदर उस रूम में गयी तो मई हैरान हो गया क्युकी अंदर 2000 के नोटों का पहाड़ लगा हुआ था फिर मैंने अपने दिव्या दृष्टि से उन नोटों को काउंट किया तो मुझे पता चला की वह पर 2500 करोड़ रखे हुए थे.

मई वह पर 2500 करोड़ रुपया देख कर खुस हो गया क्युकी मुझे राठौर आइसलैंड पर मार्टिकल आर्ट्स स्कूल बनाने में पैसो की जो दिक्कत होने वाली थी अब नहीं होती फिर मई उन सरे नोटों पर अपना हाथ घुमाया तो वो सरे नोट वह से गायब हो कर मेरे स्टोरेज रिंग में चले गए.

उस रूम में सरे पैसे लेने के बाद मई दूसरे रूम के डिजिटल लॉक को भी मंटू यादव के फिंगर से खोला और उसके अंदर चला आया दूसरे रूम में आने के बाद मई और हैरान हो गया क्युकी वह पर बहुत सरे गोल्ड का ब्रिक्स और रेयर डायमंड 💎 थे इनकी कीमत भी मार्किट में लगभग 2000 करोड़ से काम नहीं होगा.

मई- मुझे विस्वास hi नहीं हो रहा है की एक मंत्री के पास इतना सारा दौलत भी हो सकता है मुझे लग रहा है की ये सरे पैसे उसने गैर क़ानूनी ढंग से कमाए होंगे कोई न भले hi ये गैर क़ानूनी ढंग से कमाए हुए पैसे है लेकिन मई इसे अच्छे जगह उसे करूँगा.

इतना बोल कर मई वो सरे डायमंड और गोल्ड को अपने स्टोरेज रिंग में दाल लिया इसके बाद मई तहखाने से बहार आ गया बहार आने के बाद मई यहाँ से शनाया के घर के लिए एक पोर्टल तैयार किया और फिर सबको घर पर पंहुचा कर मई फिर से फार्महाउस पर आ गया और उस फार्महाउस को आग के हवाले कर दिया.

....................................................................

तो बे कंटिन्यू


....................................................................
 
अपडेट 43

थे रक्षक मार्टिकल आर्ट्स स्कूल

सरे कॅश गोल्ड और डायमंड को अपने स्टोरेज रिंग में डालने के बाद मई उस तहखाने के बहार आ गया बहार आने के बाद मैंने देखा की शनाया और उसके माँ डैड अभी भी बेहोश है तो मई उनको होश में लाये बिना पोर्टल के माध्यम से एक एक कर के तीनो को घर पंहुचा दिया और उनके रूम में सुला दिया फिर मई वापस उसी पोर्टल के जरिये उस फार्महाउस में आ गया और उस फार्महाउस को अपने अग्नि शक्ति से आग के हवाले कर दिया जिसके कारन वो पूरा फार्महाउस धु धु कर के जलने लगा करीब आधे घंटे में hi वो फार्महाउस पूरी तरह से जल कर खाक हो गया.

ये फार्महाउस सहर से बहुत दूर जंगल के बीचो बिच था और इस जंगल के आस पास कोई गाओ भी नहीं था इस लिए किसी को कुछ पता भी नहीं चला उस जगह से सरे साबुत मिटने के बाद मई फिर से गायब हो कर शनाया के घर पहुंच गया और सबको बरी बरी से चेक करने लगा.

जब मई तीनो को चेक किया तो पता चला की तीनो को ड्रग्स के हाई दोसे दिया गया है जिसके चलते ये लोग अभी भी बेहोश है ये पता लगने के बाद मई उस ड्रग्स का एंटीडोट तैयार किया और उन तीनो को लगा दिया अब वो लोग खतरे से तो थे लेकिन उनको होश आने में काम से काम 2 या 3 घंटा लगने वाला था इस लिए मई उन तीनो को वही छोड़ कर वह से गायब हो कर हवेली पहुंच गया वह पर दीपक को छोड़ कर मेरे सरे दोस्त मौजूद थे यहाँ तक की बलदेव सिंह भी वही पर था.

जैसे hi मई वह पंहुचा तो मुझे अपने सामने देख कर उन सबका सर सरम से निचे झुक गया बलदेव तो मेरे सामने अपने घुटनो पर आ गया था मुझे उन सब को ऐसे देख कर बुरा तो लगा लेकिन इन सब को इनकी गलतियों का एहसास भी करवाना जरुरी था इस लिए मई उन सब से बोलै.

मई- तुम सब मुझे आज ये एहसास करवा दिया की मई तुम सब के भरोसे अपने फॅमिली को छोड़ कर गलत किया था तुम लोगो के इस गलती का तुमलोगो के पास है कोई जबाब बोलो.

मेरी बात को सुन कर सब अपना सर निचे झुकाये रहे कोई भी कुछ नहीं बोल रहा था उन लोगो को यु चुप चाप अपना सर झुकाये देख कर मुझे और भी गुसा आने लगा तो मई घुसे से बोलै.

मई- तुम सब जानते को की तुम लोगो ने कितनी बड़ी गलती की है अगर मई समय पर वह नहीं पहुँचता तो मेरे फॅमिली के साथ वह पर कुछ भी हो सकता था बताओ अगर उन्हें कुछ हो जाता तो इसका जिमेवारी कोण लेता (फिर कुछ देर रुक कर) जब तुम लोगो से एक फॅमिली की रक्षा नहीं हो पाया तो तुम सब इस ब्रह्माण्ड को कैसे बचाओगे.

मेरी बात को सुन कर उन लोगो को बहुत बुरा लग रहा था हलाकि बुरा तो मुझे भी उन लोगो को ऐसे डाटने से लग रहा था लेकिन उन्हें उनकी जिमेवारी भी यद् दिलाना जरुरी था क्युकी वो लोग ऐसी hi गलतिया करते रहे तो ब्रह्माण्ड पर जो खतरा आ रहा उससे ये लोग कैसे निपटेंगे इधर मेरे बात को सुन कर उन सब के आँखों में आंसू आ गया था तभी रोहन मेरे पास आया और मुझसे बोलै.

रोहन- भाई इसमें इन लोगो की कोई गलती नहीं है सारा गलती मेरा है क्युकी टीम को लीड मई hi कर रहा था और मुझे ये समझ में hi नहीं आया की उन लोगो ने जल बिछा कर रखा है हम सब को बेवकूफ बना कर शनाया भाभी को किडनैप करने का प्लान है अगर हमें इसका थोड़ा भी एहसास होता तो हम उन लोगो को भाभी को हाथ भी नहु लगाने देता.

मई- तुम लोग बचे हो जो उन लोगो ने तुम सब को बेवकूफ बना दिया उस समय तुम सब का दिमाग कहा गया था उन 200 मामूली गुंडों के लिए तुम मेसे 1 या 2 hi काफी थे फिर उनके पीछे सरे लोगो को जाने की क्या जरुरत थी.

मेरी बात सुन कर दीप्ती मुझसे बोली.

दीप्ती- सॉरी भाई गलती हो गयी अब हम सब ऐसी गलती दोबारा नहीं करेंगे हमें इस बार माफ़ कर दो.

उन सब को अपने गलती का एहसास हो गया था इस लिए वो लोग मुझसे माफ़ी मांग रहे थे बस मुझे उन सब से यही तो चाहिए था की उन लोगो को ये एहसास हो की उन लोगो ने कहा गलती की थी इस लिए मई अपना गुसा संत करते हुए उनसे बोलै.

मई- ठीक है मई तुम लोगो को इस बार तो माफ़ कर रहा हु लेकिन अगर तुम लोगो ने ऐसी गलती दोबारा किया तो फिर तुम सब सीधा गुरुदेव से बात करने के लिए तैयार रहना और है अब तुम लोगो को शनाया के चिंता करने की जरुरत नहीं है मई उसे सकुशल घर पर ले कर आ गया हु और उसके किडनैपर को उसकी सजा मिल गया है और है दीपक को भी कॉल कर के यहाँ बुला लो अब उसका वह का काम ख़तम हो गया है.

मेरे मुँह से गुरुदेव का नाम सुन कर चारो कम्प गए थे क्युकी गुरुदेव ऐसी गलतियों के लिए माफ़ नहीं करते थे बल्कि सीधा सजा देते थे लेकिन जब उन लोगो ने सुना की शनाया और उसके माँ डैड ठीक है और मई उनको वापस ले कर आ गया हु वो लोग खुश हो इधर मई उन लोगो को डाटने के बाद मई बलदेव से बोलै.

मई- बलदेव सिंह मुझे तुमसे भी ये उम्मीद नहीं थी तुम तो पहले गैंगेस्टर रह चुके हो तो तुम्हे तो उन गुंडों के पैतरे तो पता लग जाना चाहिए था तो फिर तुमसे चूक कहा हो गयी.

मेरी बात को सुन कर बलदेव सिंह वैसे hi घुटनो के बल बैठे hi मुझसे बोलै.

बलदेव- बॉस मैंने तो वही किया जो आप बोल कर गए थे आपने मुझसे बोलै था की मुझे इन लोगो के आदेश मानना है तो मई ज्यादा दिमाग न चलते हुए इन लोगो के आदेश मन कर इन सब के साथ में चला गया था.

मई- ठीक है लेकिन आगे से ऐसे सिचुएशन में अपना दिमाग भी लगाया करना केवल दुसरो के बात सुन कर उनके बातो का पालन मत करना.

बलदेव- जी बॉस मई आगे से आपके बातो को यद् रखूँगा.

मई- ठीक है अब खड़ा हो जाओ और मुझे ये बताओ की ब्लैक मार्किट तुम्हारी कोई लिंक है क्या.

बलदेव मेरे बात को सुन कर कुछ सोचते हुए बोलै.

बलदेव- है बॉस मेरे एक लिंक तो ब्लैक मार्किट में लेकिन आप ब्लैक मार्किट के बारे में क्यों पूछ रहे है.

मई- मेरे पास कुछ गोल्ड और डायमंड है जिसे मई सेल करना चाहता हु तो क्या तुम ब्लैक मार्किट में संपर्क कर सकते हो.

बलदेव- जी बॉस मई बालक मार्किट में संपर्क करने की कोशिश करता हु वैसे बॉस अगर मुझे उन डायमंड और गोल्ड का एक पिक्चर मिल जाती तो उनसे डील करने में आसानी होती है.

मई- ठीक है मई कुछ देर बाद तुम्हारे मोबाइल पर उनका पिक्चर सेंड करता हु.

बलदेव- बॉस मुझे आपसे एक और बात करनी थी.

मई- है बोलो न क्या बात करनी है.

बलदेव- वो बॉस ऐसा है की हमें जो 200 गुंडों ने चकमा दे कर शनाया मैडम के घर से दूर ले कर आ गए थे हमने उन सब को कैद कर के हवेली ले कर आ गए.

मई- क्या..? लेकिन तुम उन सब को यहाँ क्यों ले कर आ गए उन्हें वही पर मर देना चाहिए था.

बलदेव- बॉस उन लोगो में बहुत सरे बेकसूर लोग भी है जो अपने परिवार के पेट पलने के लिए इस लाइन में आये है बॉस मेरे हिसाब से उन सब को सुधरने का एक मौका तो जरूर मिलना चाहिए बाकि आपको मर्जी.

बलदेव के बात सुन कर मई सोच में पद गया आखिर बलदेव बोल तो सच hi रहा था उन सब को एक चांस तो मिलना hi चाहिए.

मई- ठीक है मई एक बार इन सब से बात कर के देखता हु वैसे तुमने उन लोगो को रखा कहा है तुम मुझे उनके पास ले कर चलो.

बलदेव- ok बॉस आप मेरे साथ आइये.

इसके बाद मई बलदेव के साथ हवेली के अंदर के तरफ बने हुए नई बिल्डिंग में आ गया जहा पर स्टूडेंट्स के रहने के लिए बिल्डिंग बनाया हुआ था बलदेव ने उन सरे लोगो को इस बिल्डिंग में बंद कर के रखा हुआ था वह पर पहुंचने के बाद बलदेव उस रूम के दरवाजा को खोला इसके बाद हम अंदर आ गए जब मई अंदर आया तो देखा की सरे लोग इस रूम में थे इसे रूम कहना गलत होगा क्युकी ये 40/30 का एक बड़ा सा होल था.

हम लोग जैसे hi उस रूम में पहुंचे तो वो लोग हमें देख कर दर गए.

मई- तो यही है वो लोग जिन्होंने मेरे वाइफ को किडनैप करने की कोशिश कर रहे थे.

बलदेव- जी बॉस ये लोग वही है.

मई- है तो अब तुम लोग मुझे बताओ की तुम्हारी उस गलती के लिए तुम सब को क्या सजा दिया जाये मई ऐसा करता हु की तुम लोगो का एक एक हाथ और एक एक पेअर काट देता हु ताकि तुम लोग दोबारा ऐसी गलती न करो.

मेरी बात को सुन कर सरे आदमी दर से थार थार कम्पनी लगे तभी उनमे से एक आदमी मेरे पास आया और अपने घुटनो के बल बैठ कर मुझसे बोलै.

आदमी- हम सब को माफ़ कर दीजिये सर हम आज के बाद ऐसा गलती दोबारा नहीं करेंगे और है सर हम सब आपके वाइफ को किडनैप करने नहीं आये थे बल्कि हम सब आपके आदमियों को डाइवर्ट करने के लिए आये था.

मई- है तो वो सब कर के तुम लोग कोण सा सही काम किया है तुम लोगो के चलते hi मेरी वाइफ किडनैप हुयी थी इस लिए मई तुम सब को छोड़ने वाला नहीं हु.

तभी दूसरा आदमी आगे आते हुए बोलै.

2ंद आदमी- सर इसमें हम सब की कोई गलती नहीं है हम तो बस अपना और अपने परिवार के पेट पलने के लिए ये सब करते है अगर हम उनके बातो को नहीं मानते तो वो लोग हमरे परिवार को जान से मर देते या फिर हम सब का परिवार भूखा मर जाता इस लिए हम सब अपना और अपने परिवार को जिन्दा रखने के लिए ये सब करते है.

मई उनकी बातो को सुन कर कुछ देर सोचने के बाद उनसे बोलै.

मई- अगर ऐसी बात है तो ठीक है मई तुम लोगो को एक hi शर्त पर छोडूंगा की आज से तुम सब ऐसे काम नहीं करोगे अगर मंजूर है तो बोलो नहीं तो मई अपना काम करता हु.

मेरी बात को सुन कर वो लोग कुछ देर सोचने के बाद उनमे से एक आदमी हमसे बोलै.

आदमी- अगर ऐसी बात है तो आप हम सब को जान से मर दीजिये क्युकी हमें कोई और काम करना नहीं आता और अगर हम ये काम नहीं करेंगे तो हम सब के परिवार भूखे मर जायेंगे उनको मरते हुए देखने से अच्छा है की आप हम सब को अभी उसी वक़्त मर दीजिये.

मई- तुम लोगो को काम hi चाहिए न तो ठीक है आज से तुम सब मेरे लिए काम करोगे जिसके बदले मई तुम लोगो को अच्छी खासी सैलरी भी दूंगा बोलो क्या तुम लोग मेरे लिए काम करना चाहोगे.

आदमी- काम क्या होगा सर.

मई- तुम लोगो को अभी के लिए यहाँ पर गॉर्ड के काम करना होगा और है तुम सब को यहाँ पर रहने के लिए एक एक फ्लैट भी दिया जायेगा इस लिए तुम अपने अपने फॅमिली के साथ आज से hi यहाँ पर रहना सुरु कर दो.

मेरी बात को सुन कर वी सरे आदमी खुस हो गए और अपने घुटनो पर आ कर मुझे बार बार थैंक यू बोलने लगे.

मई- ठीक है मई तुम सब को एक एक मंथ का सैलरी एडवांस में दे रहा हु तुम उस पैसे को लो और जा कर अपना अपना इलाज करवाओ इसके बाद तुम सब अपने अपने फॅमिली के साथ आज hi यहाँ रहने के लिए आ जाना और है तुम सब को एक बात और बता दू ये एक मार्टिकल आर्ट्स स्कूल है इस लिए तुम सब को यहाँ पर मार्टिकल आर्ट्स की भी ट्रेनिंग दी जाएगी जिसे तुम लोग और मजबूत हो सको और यहाँ के सुरक्षा अच्छे से कर सको.

सब एक साथ- हम सब आपको शिकायत का मौका नहीं देंगे आप हमारे लिए भगवन है हम सब आज से आपके लिए अपना जान भी दे देंगे.

मई- ठीक है थोड़ी देर बाद तुम लोगो को एडवांस सैलरी मिल जायेगा.

इतना बोल कर मई और बलदेव वह से निकल कर हवेली में आ गए फिर मई उस हवेली में अपने लिए जो रूम रखा था उसमे आ गया और फिर अपने स्टोरेज रिंग से 50 लाख रूपए निकल और फिर अपने स्टोरेज रिंग से कुछ डायमंड और गोल्ड निकल कर उनका एक पिक्चर लिया इसके बाद मई बहार बलदेव के पास आ गया और उससे बोलै.

मई- बलदेव ये लो पैसे और उन आदमियों को 25 25 जहर रूपए दे दो आज से उनका सैलरी 25000 पर मंथ होगा और बलदेव तुम्हे उन लोगो पर नजर भी रखना होगा क्युकी मई इन लोगो पर इतनी जल्दी बिस्वास नहीं कर पाउँगा.

बलदेव- जी बॉस और कुछ आज्ञा बॉस.

मई- पहले तुम उन लोगो को पैसे दे कर आओ इसके बाद मुझे तुम सब से कुछ और भी बाटे करनी है.

बलदेव- ठीक है बॉस.

इतना बोल कर बलदेव वह से उन आदमियों के पास चला जाता है और थोड़ी देर बाद वो पैसे दे कर वापस आ जाता है फिर मई उससे अपने चारो दोस्तों को बुलाने के लिए बोलता हु मेरी बात को सुन कर बलदेव मेरे दोस्तों को बुला कर मेरे पास ले आता है उन सब को आने के बाद मई उन सब से बोलता हु.

मई- तुम सब ने जिन अनाथ लड़के और लड़कियों को खोजे हो उन सब को 2 दिन में यहाँ पर ले कर आ जाओ क्युकी मई 10 दिनों में मार्टिकल आर्ट्स स्कूल का उद्घाटन करने वाला हु.

सब- ठीक है हम उन सब बचो को ले कर आ जायेंगे.

मई- गुड तुम लोगो के लिए एक और काम है क्या तुम लोग इस मार्टिकल आर्ट्स स्कूल के नाम रखने में मेरी मदत कर सकते हो.

मेरी बात को सुन कर दीप्ती बोली.

दीप्ती- हम सब का इस मैरिटल आर्ट्स स्कूल खोलने का मकसद इस दुनिया का रक्षा करना है इस लिए मेरे हिसाब से इस स्कूल का नाम रक्षक मार्टिकल आर्ट्स स्कूल अच्छा रहेगा.

मई- हम्म ये अच्छा है हम अपने मार्टिकल आर्ट्स स्कूल का नाम यही रखते है बलदेव तुम इस हवेली के बहार रक्षक मार्टिकल आर्ट्स स्कूल का एक बोर्ड लगा दो और इस हवेली के पास में hi हमारे गॉर्ड और स्कूल के ट्रेनर को उनके फॅमिली के साथ रुकने के लिए एक अपार्टमेंट रेडी करो ताकि वो लोग यहाँ पर आराम से रह सके और है इस हवेली के एक किलोमीटर के अंदर के सरे जमीं खरीद लो और उसे बॉउंड्री करवा देना.

बलदेव- लेकिन बॉस इतना सारा जमीं खरीदने में बहुत पैसे लग जायेंगे.

मई- कितना पैसा लगेगा.

बलदेव- यही कोई 300 या 400 करोड़ रूपए लग जायेंगे.

मई- कोई बात नहीं तुम बस उन सरे जमीं के मालिकों से बात करो बाकि पैसो का मई देख लूंगा.

बलदेव- ठीक है बॉस हो जायेगा.

मई- और है मैंने तुम्हारे मोबाइल पर गोल्ड और डायमंड का एक पिक्चर सेंड किया हु तुम ब्लैक मार्किट के पता करो की मुझे इसका कितना पैसा मिलेगा.

बलदेव- ठीक है बॉस मई पता कर के आपको बता दूंगा.

फिर मैंने अपने स्टोरेज रिंग से नेचुरल मिल्क निकल कर उन सब को फाइव फाइव बून्द देते हुए बोलै.

मई- ये है नेचुरल मिल्क इसके बहुत फायदे है इसके मदत से तुम लोगो को अपनी लेवल बढ़ने में मदत मिलेगी मई तुम सब को इसका फाइव फाइव बून्द दे रहा हु तुम लोग बाथ टब में हल्का गरम पानी कर के इस नेचुरल मिल्क के 2 बून्द मिला देना उसके बाद उसमे बैठ कर ट्रेनिंग करना इससे तुम लोगो को अपने बढ़ने में बहुत ज्यादा फायदा होगा सबसे ज्यादा फायदा तो बलदेव तुमको होगा क्युकी तुम अभी हाफ ग्रांडमास्टर लेवल पर हो और है इसमें दीपक का भी हिंसा है तो जब वो आये तो उसे फाइव बून्द दे देना ठीक है अब मई चलता हु तुम सब अपना अपना काम पर ध्यान दो.

मेरी बात सुन कर सब खुस हो गए और मुझसे वो नेचुरल ले लिया इसके बाद मई

उन लोगो को अलविदा बोल कर मई हवेली से निकल कर बहार आया और वह से गायब हो कर सीधा शनाया के घर पहुंच गया जब मई वह पंहुचा तो देखा की वो सब अभी भी बेहोश थे इस लिए मई शनाया के पास गया और उसके गर्दन का एक नाश दबा दिया जिसके बाद शनाया को धीरे धीरे होश आने लगा जैसे hi शनाया पूरी तरह से होश में आयी तो वो चारो तरफ देखने लगी तभी उसकी नजर मुझ पर गयी तो वो रट हुए मुझसे लिपट गयी और बोलने लगी.

शनाया- प्रतिक माँ डैड कुछ गुंडे कुछ गुंडे... गले पर खंजर....

शनाया इतना घबराई हुयी थी की वो सही से बोल भी नहीं प् रही थी शनाया जब बेहोश हुयी थी तब गुंडों ने पुस्पा और अजय के गले पर खंजर लगा के रखे थे बस शनाया को वही बात यद् थी इस लिए जब वो होश में आयी तो इतना दरी हुयी थी मई शनाया को इतना सारा हुआ और घबराया हुआ देख कर उसको संत करवाते हुए बोलै.

मई- संत हो जाओ शनाया सब ठीक है किसी को कुछ नहीं हुआ है यहाँ पर सिर्फ मई और तुम हो कोई गुंडा नहीं है यहाँ पर तुम संत रहो हम अभी घर है तो भला यहाँ कोई गुंडा कैसे आ सकता है.

मेरी बात को सुन कर शनाया थोड़ी संत हुयी और चारो तरफ देखने लगी जब उसे ये एहसास हो गया की उसके पास मेरे शिवा और कोई नहीं है और वो अभी अपने घर पर hi है तो वो बिलकुल संत हो गयी और मुझसे बोली.

शनाया- तुम जानते हो प्रतिक हमारे घर पर कुछ गुंडों ने हमला किया था और वो माँ डैड के गले पर खंजर लगा के रखे थे( फिर उसको अपने माँ डैड का यद् आता है तो वो उनको चारो तरफ खोजते हुए बोली) माँ डैड कहा है कही उनको उन गुंडों ने कुछ कर तो नहीं दिया न.

मई- नहीं ऐसा नहीं है माँ डैड बिलकुल सही है और वो अपने रूम में आराम कर रहे है मेरे होते हुए तुम सब को कोई छू भी नहीं सकता है वैसे शनाया यहाँ पर हुआ क्या था कुछ यद् है तुम्हे.

मेरी बात को सुन कर शनाया अपने दिमाग पर जोर दाल कर कुछ यद् करते हुए मुझसे बोली.

शनाया- उस समय मुझे बहार से लड़ाई की आवाज सुनाई दे रही थी इस लिए मई बहार देखने गया की मेरे दरवाजे के पास कोण लड़ रहा जैसे मई बहार गया की तभी एक गुंडे ने मेरा रास्ता रोक लिया और मुझे अपने साथ चलने के लिए बोलने लगा जब मई जाने के लिए तैयार नहीं हुयी तो वो अपने साथियो से मुझ पर हमला करने के लिए बोलै लेकिन मई उन सब को मर मर कर हालत ख़राब कर दी तभी माँ डैड भी लड़ाई के आवाज सुन कर बहार आ गए जिन्हे देख कर उस गुंडे ने उनके गले पर खंजर लगा कर मुझे सरेंडर करने के लिए बोलै मई भी अपने माँ डैड के गले पर खंजर लगा हुआ देख कर दर गयी और खुद को उनके हवाले कर दिया फिर उस गुंडे ने मुझे एक इंजेक्शन देते हुए खुद को लगाने के लिए बोलै फिर मई उसके बात को मानते हुए वो इंजेक्शन लगाया तो मई वही बेहोश हो गयी उसके बाद मुझे अभी होश आ रहा है.

शनाया के बात सुन कर मई उससे बोलै.

मई- चलो जो होना था वो हो गया भगवन का लाख लाख शुक्र है की तुम और माँ डैड सही है.

मेरी बात को सुन कर शनाया कुछ सोचते हुए बोली.

शनाया- लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा की जब उन गुंडों ने मुझे किडनैप कर ले गए थे तो मई यहाँ कैसे आयी.

मई- वो क्या है न की इस सहर में मेरे कुछ दोस्त है मई यहाँ से जाने से पहले उनको तुम सब के रक्षा करने के लिए बोल कर गया था और जब तुम किडनैप हुयी तो वो लोग मुझे कॉल कर के बता दिया फिर मई वह से तुमको और माँ डैड को बचा लिया.

शनाया- अच्छा ऐसी बात है लेकिन उन गुंडों का क्या हुआ.

मई- बुरे कर्म करने वालो के साथ hi होता है वही हुआ छोडो इन सब बातो को तुम जाओ और जाकर फ्रेश हो लो.

शनाया- ठीक है इतना बोल कर शनाया बाथरूम में चली गयी उसको बाथरूम जाने के बाद मैंने अपने स्टोरेज रिंग से नेचुरल मिल्क के 2 बून्द निकला और शनाया को आवाज लगते हुए बोलै.

मई- शनाया थोड़ा सुनो मुझे तुमको कुछ देना था.

मेरी बात सुन कर शनाया बाथरूम के दरवाजा खोली और बोली.

शनाया- है क्या देना था देखो मई अभी स्नान करने जा रही हु तुम्हे जो भी देना होगा वो मुझे बाथरूम से निकलने के बाद दे देना.

मई- अरे नहीं मई जो तुमने देने वाला हु वो तुम्हे स्नान करने में उसे करना है.

इतना बोल कर मई बाथरूम में चला गया और बाथटब में गर्म पानी वाला नल खोल दिया थोड़ी देर में वो बाथटब पूरी तरह से भर गया इसके बाद मई उसमे नेचुरल मिल्क के 2 बून्द दाल दिया जिसके कारन वो पानी पूरी तरह से ग्रीन हो गया जिसे देख कर शनाया हैरान हो गयी और मुझसे बोली.

शनाया- ये क्या मिलाया तुमने जिससे पानी का कलर ग्रीन हो गया.

मई- ये नेचुरल मिल्क है इससे तुम्हारे शरीर की मजबूती बढ़ेगी और साथ में तुम्हारा लेवल भी बढ़ेगा मई देख प् रहा हु की तुम हाफ ग्रांडमास्टर के लेवल में पहुंच गयी हो तुम अगर इस पानी में बैठ कर ध्यान करोगी तो तुम्हारा लेवल बढ़ कर ग्रांडमास्टर के लेवल तक पहुंच जायेगा.

मेरी बात को सुन कर शनाया पहले तो हैरान हो गयी फिर खुसी से बोली.

शनाया- क्या सच में ऐसा hi सकता है.

मई- है हो सकता है बस तुम ये ध्यान रखना की जब तक इस पानी का कलर हरा से नार्मल न हो जाये तुम इस पानी से बहार मत निकलना.

सहने- ठीक है.

इतना बोल कर शनाया उस बाथटब में बैठ कर ध्यान करने लगी उसको ध्यान करता हुआ देख कर मई बाथरूम से निकल कर रूम में आ गया और और वही पर बैठ कर गुरुदेव के साथ बाथ करने के लिए टेलिपाथी का उसे करने लगा थोड़ी देर बाद गुरुदेव के आवाज मेरे दिमाग में गूंजने लगी.

गुरुदेव- कहो प्रतिक मुझे कैसे यद् किया कुछ काम था क्या तुम्हे मुझसे.

मई- प्रणाम गुरुदेव.

गुरुदेव- आयुष्मान भाव पुत्र बोलो मुझे क्यों यद् किया प्रतिक.

मई- गुरुदेव मई यहाँ पर एक मार्टिकल आर्ट्स स्कूल खोल रहा हु इस लिए मुझे कुछ ट्रेनर को जरुरत थी तो क्या गुरुदेव आप मुझे ऐसे ट्रेनर की बेवस्था कर सकते है जो सभी बिद्या में निपुण हो.

मेरे बात को सुन कर गुरुदेव सोच में पद गए फिर कुछ देर सोचने के बाद वो मुझसे बोले.

गुरुदेव- पुत्र ऐसा ट्रेनर तो मिलना मुश्किल है जो सभी विद्या में निपुण हो लेकिन मई ऐसा कर सकता हु की सुडो ग्रांडमास्टर लेवल के 5 ट्रेनर तुम्हारे पास भेज सकता हु जिनके पास एक एक तत्त्व का ज्ञान हो.

मई- ठीक है गुरुदेव आप उनको कल hi यहाँ के लिए भेज दीजियेगा और है साथ में गुरु मंगल को भी भेज दीजिये ताकि वो यहाँ की ट्रेनिंग अपने देख रेख में करवा सके.

गुरुदेव- तुम एक काम करो कल तुम खुद यहाँ आ जाओ मुझे भी तुमसे कुछ बात करनी थी तो हमारी बाटे भी हो जाएगी और तुम खुद उन लोगो को अपने साथ ले कर यहाँ से जा भी सकते हो.

मई- ठीक है गुरुदेव मई कल आपसे मिलने के लिए आता हु प्रणाम.

इतना बोल कर मई अपने ध्यान से उठ गया और निचे किचन में चला गया ताकि सबके लिए खाना रेडी कर सकू इधर शनाया करीब 1 घंटे तक ध्यान में बैठ कर अपने लेवल को बढ़ने के लिए ट्रेनिंग करती रही थी आखिर में उसका लेवल बढ़ hi गया वो हाफ ग्रांडमास्टर से सीधा ग्रांडमास्टर लेवल के मध्यम लेवल में पहुंच गयी थी.

जब शनाया का ट्रेनिंग ख़तम हुआ तो उसने देखा की वो हवा में 2 फ़ीट ऊपर बिना कोई सहारे के बैठी हुयी है ये देख वो दर गयी जिसके कारन वो ुनबलने हो गयी और वो निचे गिर गयी जिसके कारन उसके मुँह से एक जोरदार चीख निकल गयी इधर मई जैसे hi शनाया के चीख सुना तो मई दर गया और जल्दी से भागते हुए शनाया के पास गया तो देखा की वो बाथरूम के फरसे पर गिरी हुयी थी ये देख कर मई जल्दी से उसके पास गया और उसे उठाते हुए बोलै.

मई- तुम ठीक तो हो न तुम ऐसे फरसे पर क्यों गिरी हुयी हो तुम तो ध्यान कर रही थी न.

मेरी बात को सुन कर शनाया मुझसे बोली.

शनाया- है मई ठीक हु वो वो मई दर गयी थी तुम विस्वास नहीं करोगे जानते हो मई ध्यान करते करते hi हवा में चली गयी थी जब मेरा ध्यान टुटा तो मई खुद को हवा में बिना कोई सहारे के बैठी हुयी थी ये देख कर मई दर गयी थी.

शनाया के बात सुन कर मई उसे गौर से देखने लगा फिर मई उस पानी को देखा जिसका कलर अब एकदम नार्मल हो गया था ये देख कर मई मुस्कुराने लगा मुझे इस तरह से मुस्कुराते हुए देख कर शनाया मुझसे बोली.

शनाया- मई जानती थी की तुम्हे मेरे बातो पर बिस्वास नहीं होगा.

मई- अरे नहीं नहीं मुझे तुम्हारे बातो पर पूरा बिस्वास है.

शनाया- तो फिर तुम मुझे देख कर है क्यों रहे थे.

मई- मई तुम्हे देख कर नहीं बस रहा था मई तो इस लिए है रहा था की मई आज बहुत खुस हु क्युकी तुम ग्रांडमास्टर लेवल में पहुंच गयी हो वो भी मध्यम लेवल में.

मेरी बात सुन कर शनाया हैरान हो गयी और साथ में खुस भी वो खुसी से मेरे गले लगते हुए मुझसे बोली.

शनाया- क्या तुम सच बोल रहे हो क्या मई ग्रांडमास्टर लेवल में पहुंच गयी.

मई- है इसी लिए तुम हवा में बैठी हुयी थी बिना कोई सहारे के क्युकी जो भी आधा ग्रांडमास्टर लेवल में पहुंचते है उनको उड़ने की शक्ति के साथ साथ पांच तत्वों में से एक तत्त्व भी मिलता है.

शनाया- (खुसी के साथ) क्या सच में मई ग्रांडमास्टर लेवल में पहुंच गयी अब मई उस भी शक्ति हु और मुझे कोण सी शक्ति मिली है ये मुझे कैसे पता चलेगा.

मई- ये जानने के लिए तुम्हे अपने अंतर्मन पर ध्यान केंद्रित करना पड़ेगा तब तुम्हे पता चलेगा की तुम्हे कोण सी शक्ति मिली है.

शनाया- तो ठीक है मई अभी ध्यान लगा कर देखती हु की मुझे कोण सी शक्ति मिली है.

मई- अरे अरे इतनी भी क्या जल्दी है चलो पहले हम सब खाना खा लेते है इसके बाद मई तुम्हे एक ऐसी जगह पर ले कर चलूँगा जहा तुम आराम से अपने शक्तियों पर ध्यान लगा सकती हो और इससे किसी का कोई नुकसान भी नहीं होगा अगर तुम अभी यहाँ पर अपने शक्तियों पर ध्यान लगाओगी तो ये घर बर्बाद हो जायेगा क्युकी अभी तुम्हे तुम्हारे शक्तियों पर काबू नहीं है.

शनाया- ठीक है और है थैंक यू मुझे यहाँ तक पहुंचने के लिए और मेरी लाइफ में आने के लिए अगर तुम मेरी लाइफ में नहीं आते तो मई कभी भी यहाँ तक नहीं पहुंच पति.

इतना बोल कर शनाया मेरे गले लग गयी और फिर मेरे गाल पर किश कर के जल्दी से निचे दिंनिंग होल में चली गयी.

उसको इस तरह से मेरे गलो पर किश करता देख कर पहले तो मई हैरान हो गया था फिर मेरे चेहरे पर एक प्यारी से मुस्कान आ गयी इसके बाद मई भी शनाया के पीछे पीछे निचे आ दिंनिंग होल में आ गया.

अभी तक शनाया के माँ डैड को होश नहीं आया था इस लिए मई उनके रूम में जाकर उनको होश में लाया तो वो भी पहले मुझसे बहुत सवाल किये जैसे की वो गुंडे कहा गए वो लोग कोण थे और हमें क्यों किडनैप करना चाहते थे तो मई उनको आधी सच्ची तो आधी झूठी एक कहानी बता दिया जिसे सुन कर वो दोनों संत हो गए इसके बाद हम दिंनिंग होल में आ गए हलाकि अजय मल्होत्रा अभी तक पूरी तरह से ठीक नहीं हुए थे इस लिए मई उनको शहर दे कर अपने साथ लाया था फिर हम लोग दिंनिंग टेबल पर एक साथ बैठ कर खाना खाया इसके बाद मई एक संजीवनी गोली माँ को दिया और उनसे बोलै.

मई- माँ आप नहाने के आधा घंटा पहले इस गोली को खा लीजियेगा.

मेरी बात को सुन कर पुस्पा माँ संजीवनी गोली को अपने हाथ में ले लिए और उसे देखते हुए मुझसे बोली.

पुस्पा- ये किस चीज की गोली है प्रतिक बीटा इसको खाने से मुझे क्या फायदा होगा.

मई- माँ इस गोली के बहुत फायदे है मई आपको क्या क्या बताऊ बस आप इसे खा कर खुद आजमा लीजिये.

पुस्पा- ठीक है.

हम सब वह खाना कहते हुए बात कर रहे थे और साथ में टीवी पर न्यूज़ भी देख रहे थे तभी टीवी में एक न्यूज़ आने लगी जिसमे एंकर जोर जोर से चीला के बोल रही थी.

एंकर- आज के तजा खबर मुझे सूत्रों से पता चला है की इस सहर में मुंबई में आज तक का सबसे बड़ा ऑक्शन होने जा रहा है जिसमे इंडिया के सभी बड़े बिजनेसमैन को इन्विते किया जा रहा है और ये ऑक्शन ऑर्गेनिसे मुंबई के मशहूर बिज़नेस फॅमिली ने की है जो ऑक्शन की दुनिया के बेताज बादशाह है और उस फॅमिली का नाम है अग्रवाल फॅमिली जी है आप सही सुने इस ऑक्शन को अग्रवाल फॅमिली के सूर्यदेव अग्रवाल करवा रहे है.

मुझे सूत्रों से ये भी पता चली है की ऑक्शन ऐसी ऐसी चीज ऑक्शन होने वाली है जो आज तक किसी भी ऑक्शन में नहीं हुआ है और मुंबई के बहुत ऐसे छोटे मोठे बिजनेसमैन जो किसी बड़े बड़े कंपनी से जुड़ना चाहते है या फिर उनके साथ बिज़नेस करना चाहते उन लोगो के लिए ये सुनहरा मौका है क्युकी आज तक कभी भी ऐसा नहीं हुआ है की इंडिया के सरे बड़े फॅमिली और बिजनेसमैन एक साथ कही दिखे हो इस लिए लोग उस ऑक्शन के टिकट के लिए क्रोरो रूपए भी खर्च करने के लिए तैयार है लेकिन उस ऑक्शन में सिर्फ वही जा सकता है जिसे मर. अग्रवाल ने खुद इन्विते किया है क्युकी उस ऑक्शन होल की साडी टिकट बुक हो चुकी है और उस ऑक्शन में जाने के लिए टोटल चार तरह के टिकट है सिल्वर टिकट डायमंड टिकट और आखरी में है प्लैटिनम टिकट मुझे सुनाने में आया है प्लैटिनम टिकट सिर्फ एक hi है और वो भी विप मेंबर के लिए जो इस ऑक्शन का मुख्या अतिथि होंगे.

ऐसे hi उस एंकर ने न जाने क्या क्या बोले जा रही थी इधर उस न्यूज़ को देख कर शनाया और उसके माँ डैड हैरान हो गए तभी शनाया बोली.

शनाया- वाओ मुंबई में ऑक्शन हो रहा है वो भी इतने बड़े लेवल पर काश की मई भी वह जा पति.

शनाया के बात सुन कर पुस्पा माँ बोली.

पुस्पा- इतने बड़े ऑक्शन में पार्टिसिपेट करने के लिए हमारे पास पैसे भी तो होने चाहिए शनाया ये ऑक्शन बड़े लोगो के लिए इसमें हम जैसे मामूली लोग पार्टिसिपेट नहीं कर सकते.

शनाया- माँ ये जरुरी थोड़ी न है की उस ऑक्शन में जो जायेगा उसे वह से सामान खरीदना hi खरीदना है इस ऑक्शन में बहुत सरे ऐसे लोग भी जायेंगे जो वह कुछ खरीदने नहीं बल्कि बड़े लोगो से पहचान बनाने जायेंगे ताकि वो लोगो वह मौजूद बड़े लोगो से जान पहचान बढ़ा कर अपना बिज़नेस एक्सपैंड कर सके.

अजय- शनाया सही बोल रही है वह पर जो भी जायेगा वो कुछ न कुछ हासिल कर के hi वापस आएगा शनाया तुम भी वह जाने की कोशिश करो.

शनाया- आप बोल तो सही रहे है डैड लेकिन वह जाना बहुत मुश्किल है क्युकी वह के साडी टिकट पहले hi बुक हो चुकी है और अब वह पर वही जा सकता है जिसको खुद सूर्यदेव अग्रवाल इन्विते करेंगे.

अभी ये लोग बात कर hi रहे थे की तभी घर के दूर बेल्ल बजी जिसे सुन कर मई वह से दूर ओपन करने चला गया जब मई दूर ओपन किया तो वह पर आकाश शेरगिल अपने बड़ी सी मुस्कान लिए मौजूद था.

मई जैसे hi दूर खोला तो वो मुझे देख कर एक कामिनी मुस्कान दिया फिर वो मुझे एक तरफ धकेलते हुए अंदर चला गया उसके जाने के बाद मई दूर बंद किया और मई वापस दिंनिंग होल में आ गया जब मई दिंनिंग होल में आया तो देखा की आकाश शनाया के माँ डैड को पेअर छू कर प्रणाम किया तो उसे देख कर पुस्पा माँ बोली.

पुस्पा- अरे आकाश बीटा तुम आज इधर के रास्ता कैसे भूल गए तुम तो यहाँ आना जाना hi छोड़ दिया था.

पुस्पा माँ के बात सुन कर आकाश एक नजर मुझे और फिर शनाया को देखा इसके बाद वो अपने चापलूसी भरे आवाज में पुस्पा माँ से बोलै.

आकाश- वो क्या है न पुस्पा अनूठी की मई अभी एक नया नया बिज़नेस सुरु किया है इसलिए मई उसी में थोड़ा ज्यादा ब्यस्त हु इसलिए मुझे आप सब से मिलने का मौका नहीं मिला आज बहुत दिनों बाद मुझे समय मिला था और वैसे भी मुझे आप सब मिले हुए भी बहुत वक़्त हो गया था इस लिए सोचा की चलो आपसे एक बार मिल लिया जाये वैसे आंटी मई यहाँ आ कर अच्छा तो किया न कही आपको मेरा आना बुरा तो नहीं लगा न.

पुस्पा- अरे नहीं नहीं बीटा मुझे कोई बुरा नहीं लगा बल्कि मुझे तो खुसी हुयी की तुम इतने दिन बाद hi सही लेकिन मिलने तो आये और मुझे ये जानकर बहुत खुसी हुयी की तुम अब अपने पेअर पर खड़े हो गए और खुद का बिज़नेस सुरु कर दिया.

आकाश- बिज़नेस तो सुरु करना hi था आंटी क्युकी मई कुछ लोगो की तरह बेशर्म थोड़े hi न हु की दुसरो के घर में रह कर मुफ्त के रोटियां तोडू.

मई समझ गया था की आकाश का सीधा सीधा इशारा मेरे तरफ है वो मुझे hi टारगेट कर के वो बाटे बोल रहा है लेकिन मई उसके बातो को इग्नोर कर दिया लेकिन उसकी बाटे सुन कर जहा पहले पुस्पा माँ को खुसिया होती थी वही अब उन्हें उसकी बातो को सुन कर गुसा आने लगा था लेकिन वो भी संत hi रही इधर शनाया भी समझ गयी थी आकाश सीधा मुझे टारगेट कर रहा है इस लिए वो घुसे से उससे कुछ बोलने hi वाली थी की तभी मई उसे न में गर्दन हिला कर संत कर दिया और आकाश को देखने लगा.

इधर सबको संत हो कर उसकी बात सुनता देख कर आकाश के चेहरे पर घमंड के भाव आ गए और वो अपने जेब से एक पेन्डेन्ट निकल कर शनाया के तरफ बढ़ाते हुए बोलै.

आकाश- शनाया तुम्हे पता है मई अपनी पहली कमाई से तुम्हारे लिए ये पेन्डेन्ट ख़रीदा है तुम जानती हो इसका कीमत 20 लाख है और मई ये तुम्हे देना चाहता हु.

आकाश के बात सुन कर शनाया उसे न में गर्दन हिलाते हुए बोली.

शनाया- सॉरी आकाश मेरे पास पहले से hi एक पेन्डेन्ट है इस लिए मई तुम्हारा पेन्डेन्ट नहीं ले सकती.

शनाया के बात सुन कर आकाश हैरान हो गया और फिर वो शनाया को मानते हुए बोलै.

आकाश- देखो शनाया मैंने ये गिफ्ट बहुत प्यार से तुम्हारे लिए लिया है प्लीज तुम इसे एक्सेप्ट कर लो.

शनाया- मैंने एक बार बोल दिया न आकाश की मुझे तुम्हारी इस पेन्डेन्ट में कोई दिलचस्पी नहीं तो तुम्हे मेरी बात समझ में नहीं आ राहु है.

शनाया के बात सुन कर आकाश के तन मन में आग लग गया लेकिन वो खुद को संत करते हुए पुस्पा माँ से बोलै.

आकाश- आंटी आप hi समझाइये इसे ये इस मामूली पेन्डेन्ट के लिए मेरे 20 लाख के पेन्डेन्ट को लेने से मन कर रही है.

आकाश के बात सुन कर पुस्पा माँ उससे बोली.

पुस्पा- वो सही बोल रही है आकाश उस वो पेन्डेन्ट प्रतिक ने दिया है इस लिए वो पेन्डेन्ट उसके लिए दुनिया के सबसे कीमती वस्तु है और वैसे तुमने अपनी पहली कमाई से कुछ लिया है तो तुमसे उसे सबसे पहले अपने पेरेंट्स को देना चाहिए.

पुस्पा के बात सुन कर आकाश को बहुत गुसा आता है लेकिन वो अपने घुसे को काबू करते हुए शनाया से बोलता है.

आकाश- ठीक है शनाया अगर तुम इस पेन्डेन्ट को नहीं लेना चाहती तो कोई बात नहीं लेकिन अब मई तुम्हे जो गिफ्ट देने वाला हु उसे तुम कभी मन नहीं करोगी.

आकाश के बात सुन कर शनाया मुस्कुराते हुए बोली.

शनाया- अच्छा जरा हमें दिखाओ की ऐसी कोण सी गिफ्ट है जिसे देख कर मई लेने से मन नहीं करुँगी.

शनाया के बात सुन कर आकाश मुस्कुराते हुए अपने जेब से एक टिकट निकला और सबके तरफ मुस्कुरा कर देखते हुए बोलै.

आकाश- मेरे हाथ में जो है वो 2 दिन बाद होने वाले ऑक्शन के टिकट है और मई जनता हु की तुम्हे वह जाना है ताकि तुम वह जाकर अपना बिज़नेस को एक्सपैंड कर सको इस लिए मई तुम्हारे लिए ये टिकट ख़रीदा है ताकि मई और तुम दोनों साथ में ऑक्शन में चलेंगे.

आकाश के बात सुन कर एक पल के लिए शनाया और पुस्पा माँ के आँखों में चमक आयी लेकिन फिर वो तुरंत चली गयी फिर शनाया मेरे तरफ देखने लगी तो मई उसे न में गर्दन हिला कर समझा दिया इसके बाद वो आकाश से बोली.

शनाया- थैंक्स आकाश मेरे बारे में इतना सोचने के लिए लेकिन मई तुम्हारे साथ ऑक्शन में नहीं जा सकती.

शनाया के बात सुन कर आकाश हैरान हो गया और साथ में गुसा भी क्युकी वो इस टिकट को खरीदने में बहुत पैसा खर्च किया था ताकि वो शनाया को अपने साथ ऑक्शन में ले जा सके लेकिन शनाया ने उसे मन कर दिया इस लिए आकाश घुसे से उससे बोलै.

आकाश- तुम इतनी बड़ी ओप्पोर्तुनिटी टुकड़ा कर अच्छा नहीं कर रही हो तुम जानती नहीं हो की अगर तुम उस ऑक्शन में जा कर कोई बड़ी पार्टी से जान पहचान बढ़ा कर अपने बिज़नेस को कहा से कहा ले कर जा सकती हो.

आकाश को इस तरह से शनाया से घुसे में बात करता हुआ देख कर मुझे बहुत गुसा आया और मई घुसे से उसे घूरते हुए बोलै.

मई- बस आकाश बहुत हो गया शनाया ने तुम्हे एक बार बोलै न की उसे तुम्हारे साथ नहीं जाना है तो फिर तुम उसके साथ बहस क्यों कर रहे हो तुम क्या सोचते हो की तुम ये चाँद रूपए दिखा कर शनाया को पा सकोगे तो ये तुम्हारी भूल है समझा.

मेरी बात को सुन कर आकाश को बहुत गुसा आया और मुझ पर छीलते हुए बोलै.

आकाश- तुम्हारी हिमत कैसे हुयी हम दोनों के बिच में बोलने की तुम्हारी औकात भी है यहाँ पर बैठने की ये तो भला है आंटी और अंकल का जो तुम्हे मुफ्त के रोटियां तोड़ने दे रहे है नहीं तो कोई हुए होता तो तुम्हे लत मर कर इस घर से बहार निकल सकता है अपनी बीवी को एक अच्छा पेन्डेन्ट नहीं दिलाया जा रहा है और बाटे बड़ी बड़ी करते हो.

आकाश के ऐसी बात सुन कर वह मौजूद सरे लोगो को उस पर बहुत गुसा आया वो लोग घुसे से उसका जबाब देते उससे पहले hi मई उसे बोलै पड़ा.

मई- तुम मेरे औकात के बात कर रहे हो अगर मई चहु तो एक मिनट में तुम्हारी खंडन को मिटी में मिला सकता हु और क्या बोले तुम मई शनाया को एक अच्छा सा पेन्डेन्ट नहीं दिला पाया तुम जानते हो अभी जो वो पेन्डेन्ट पहनी है है उस पेन्डेन्ट के कीमत में तुम्हारे इस पेन्डेन्ट जैसे 25 पेन्डेन्ट आ जायेंगे क्युकी इसका कीमत 5 करोड़ रूपए है समझा.

मेरी बात को सुन कर वह मौजूद सरे लोग हैरान हो गए उन सब को मेरी बातो पर बिस्वास नहीं हो रहा था की शनाया के गले में पहने हुआ पेन्डेन्ट 5 करोड़ के होंगे.

पुस्पा- क्या तुम सच बोल रहे हो प्रतिक क्या शनाया ने जो पेन्डेन्ट पहनी है वो सच में 5 करोड़ का है.

मई- है माँ मई सच बोल रहा हु अगर आप सब को बिस्वास नहीं है तो आप इसको नेट पर सर्च कर के इसका प्राइस देख सकते है.

मेरी बात को सुन कर वह मौजूद सरे लोग अपने अपने मोबाइल पर उस पेन्डेन्ट का प्राइस सर्च करने लगे लेकिन जब उन्होंने देखा की वो पेन्डेन्ट सच में 5 करोड़ का था इस लिए सब हैरानी में मुझे देखे जा रहे थे.

इधर आकाश ने देखा की मई एक बार फिर उसे हरा दिया है तो वो बौखला गया और वो घुसे से मुझसे बोलै.

आकाश- तूने जरूर इस पेन्डेन्ट को चोरी किया होगा क्युकी तुम्हारी औकात hi नहीं है इसे खरीदने के लिए.

आकाश के बात सुन कर हम सब को बहुत गुसा आया लेकिन पुस्पा माँ को आकाश के ऊपर कुछ ज्यादा hi गुसा आ गया और वो घुसे से आकाश से बोली.

पुस्पा- बस बहुत हो गया आकाश मई तुम्हे अपना मेहमान समझ कर कुछ नहीं बोल रही हु तो तुम मेरे सर पर खड़े हो कर नाच रहे हो तुम्हारी हिमत कैसे हुयी मेरे दामाद का बेइज्जती करने की तुम चुप चाप यहाँ से चले जाओ और है अब दोबारा यहाँ कभी नहीं आना.

पुस्पा के बात सुन कर हम सब हैरान हो गए सबसे ज्यादा हैरान तो आकाश हो गया था क्युकी उसे बिस्वास hi नहीं हो रहा था की पुस्पा माँ उसे ऐसे भी बोल सकती है इस लिए वो वह से उठ कर बहार जाते हुए मन hi मन बोलै.

Akash-(apne मन में) मई तो शनाया को प्यार से पाना चाहता था लेकिन इन लोगो के मन में मेरी बात जा hi नहीं रही थी अब मई इन लोगो को बताऊंगा की आकाश शेरगिल क्या चीज है और उस कमीने प्रतिक को तो मई तड़पा तड़पा कर मरूंगा.

ये सब सोचते हुए वो शनाया के घर से बहार चला गया उसके जाने के करीब 5 मिनट बाद फिर से दूर बेल्ल बजी जिसे सुन कर मई दरवाजा खोलने जाने लगा तभी शनाया मुझे रोकते हुए बोली.

शनाया- अरे यार अब कोण आ गया प्रतिक तुम यही बैठो मई देख कर आती हु की कोण आया है.

इतना बोल कर शनाया दरवाजा खोलने के लिए चली जाती है वह पहुंच कर जब वो दरवाजा खोलती है तो देखती है की दरवाजे के सामने एक अधेड़ उम्र का आदमी फॉर्मल ड्रेस में खड़ा था उस आदमी को देख कर शनाया उससे पूछती हुयी बोलती है.

शनाया- है जी बोलिये किससे मिलना है

शनाया के बात सुन कर वो आदमी शनाया से बोलै.

आदमी- जी क्या मर. प्रतिक यही पर रहते है.

किसी अनजान आदमी के मुँह से मेरा नाम सुन कर शनाया चौक गयी और उस आदमी को शक भरी निगाहों से देखने लगी थोड़ी देर उसको ऐसे घूरने के बाद शनाया सतर्कता से उस आदमी से पूछी.

शनाया- आप कोण है और आपको प्रतिक से क्या काम है.

शनाया के बात सुन कर उस आदमी को ऐसा लगा की शनाया उसपे शक कर रही है तो वो हड़बड़ाते हुए बोलै.

आदमी- वो वो मई यहाँ पर प्रतिक जी को ये कार्ड देने आया था दरअसल मई अग्रवाल कंपनी का एक एम्प्लोयी हु और मुझे मेरे बॉस ने ये कार्ड प्रतिक जी को देने के लिए बोलै है.

शनाया- वैसे ये कार्ड है किस चीज का और आपके बॉस ने इसे प्रतिक को क्यों देने के लिए बोलै है.

आदमी- मैडम मई ये तो नहीं जनता की बॉस ने ये कार्ड मर. प्रतिक को क्यों देने के लिए बोलै है लेकिन मई आपको ये बता सकता हु की ये कार्ड 2 दिन बाद होने वाला ऑक्शन का एंट्री कार्ड है.

शनाया उस आदमी के बात सुन कर हैरान हो गयी और वो मन hi मन सोचने लगी की आखिर सूर्यदेव अग्रवाल प्रतिक को कैसे जानते है और जो कार्ड बड़े बड़े लोगो को लाखो और क्रोरो खर्च करने के बाद भी नहीं मिल रहा था उस कार्ड को सूर्यदेव अग्रवाल ने इतनी आसानी से प्रतिक को कैसे दे दिया.

शनाया को अपने सोच में hi गम देख कर वो आदमी उनसे बोलै.

आदमी- मैडम आप क्या सोचने लगी प्लीज मैडम मुझे और भी काम है इस लिए क्या आप मर. प्रतिक को बुला देंगी प्लीज.

उस आदमी के बात सुन कर शनाया अपने सोच से बहार आयी और अपना गर्दन है में हिला कर प्रतिक को आवाज लगते हुए बोली.

शनाया- प्रतिक तुमसे मिलने के लिए कोई बहार आया है तुम आ कर उससे मिल लो.

शनाया के आवाज जैसे hi मेरे कानो में गया तो मई सोचने लगा की आखिर कोण हो सकता है जो मुझसे मिलने आया अब को भी हो उससे मिलना तो पड़ेगा hi.

इतना सोचने के बाद मई वह से उठ कर दरवाजे पर गया तो देखा की एक 45 46 साल का आदमी था उसे देख कर मई उससे बोलै.

मई- जी बोलिये आपको मुझसे क्या काम था.

आदमी- जी मुझे मेरे बॉस यानि की सूर्यदेव अग्रवाल ने आपको ये कार्ड देने के लिए भेजा है.

उस आदमी के बात सुन कर मई उसके हाथो से वो कार्ड ले लिया और उसे देखा तो समझ में आ गया की ये कार्ड ऑक्शन के चिफे गेस्ट का प्लैटिनम कार्ड था ये देखा मुझे हैरानी तो हुयी लेकिन फिर मई खुद को संत करते हुए उस आदमी से बोलै.

मई- आप मेरे तरफ से मर. अग्रवाल को थैंक यू बोल दीजियेगा.

आदमी- ठीक है मई बोल दूंगा.

इतना बोल कर वो आदमी वह से चला गया इधर शनाया ने जब देखि की मई बिना कोई रियेक्ट किये hi उस कार्ड को ले लिया है तो वो मुझे ध्यान से देखते हुए मन hi मन सोचने लगी.

शनाया- ( अपने मन में) प्रतिक को देख कर तो ऐसा लग रहा है की इसे पहले से पता था की मर. अग्रवाल इसको ऑक्शन के एंट्री कार्ड भेजने वाले है लेकिन मुझे ये समझ में नहीं आ रहा है की मर. अग्रवाल ने ये कार्ड प्रतिक को क्यों दिया क्या रिस्ता है प्रतिक का सूर्यदेव अग्रवाल के साथ कुछ न कुछ तो बात है जो हमें नहीं पता.

उस आदमी को वह से जाने के बाद हम भी डाइनिंग टेबल पर आ गए थे जब हम वह पहुंचे तो पुस्पा माँ ने शनाया से बोली.

पुस्पा- शनाया दरवाजे पर कोण आया था और वो प्रतिक से क्यों मिलना छह रहा था.

शनाया- माँ दरवाजे पर वो मर. अग्रवाल का एक एम्प्लोयी आया था वो प्रतिक को ऑक्शन में जाने के लिए एंट्री कार्ड देने आये थे.

शनाया के बात सुन कर अजय मल्होत्रा और पुस्पा माँ दोनों हैरान हो गए फिर उसी हैरानी के साथ अजय मल्होत्रा बोले.

अजय- लेकिन ये कैसे हो सकता है जिस कार्ड को को लेने के लिए लोग क्रोरो देने के लिए तैयार है उस एंट्री कार्ड को वो ऐसे hi प्रतिक को क्यों दे दिए.

अजय मल्होत्रा के बात सुन कर शनाया कुछ सोचते हुए बोली.

शनाया- यही तो मई कब से सोच रही हु की प्रतिक को वो कार्ड इतनी आसानी से कैसे मिल गयी और वो भी खुद सूर्यदेव अग्रवाल के हाथो आपको ये सब प्रतिक hi बता सकता है की वो कार्ड मर. अग्रवाल ने इसे कैसे दी.

शनाया के बात सुन कर शनाया के माँ डैड मेरे तरफ देखने लगे उन सब को अपने तरफ देखता हुआ देख कर मई समझ गया की ये सब जाने बिना नहीं मानेंगे तो मई भी उनको बताते हुए बोलै.

मई- डैड और माँ आपको तो पता hi है की मई एक आयुर्वेदिक डॉक्टर हु तो मैंने एक दिन सूर्यदेव अग्रवाल के बेटी की इलाज कर के उसकी जान बचाई थी और साथ में मई अपना बनाया हुआ दवा भी उस ऑक्शन में नीलम करने के लिए उनको दिया है इस लिए उन्होंने मुझे ये कार्ड दिया है.

मेरे बातो को सुन कर सब को बिस्वास हो गया की मई सच बोल रहा हु इस लिए सबके चेहरे पर खुसी नजर आने लगी तभी पुस्पा माँ शनाया से बोली.

पुस्पा- देखा तुमने शनाया भगवन भी चाहता है की तुम दोनों उस ऑक्शन में जाओ और वह पर अपना जान पहचान बनाओ सायद कोई बिजनेसमैन तुम्हारे कंपनी में इन्वेस्ट करने के लिए तैयार हो जाये.

शनाया- है माँ आप सही बोल रही है ये मेरे लिए एक सुनहरा मौका है मई प्रतिक के साथ उस ऑक्शन में जरूर जाउंगी प्रतिक तुम मुझे अपने साथ ले कर चलोगे न.

शालिनी के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए उससे बोलै.

मई- मई तुम्हे hi नहीं बल्कि माँ डैड को भी अपने साथ ले कर चलूँगा मई चाहता हु की माँ और डैड भी इतने बड़े ऑक्शन का एक्सपीरियंस ले.

पुस्पा- क्या ऐसा हो सकता है क्या हम दोनों भी तुम्हारे साथ चल सकते है लेकिन मैंने सुना है की एक एंट्री कार्ड पर 2 लोग hi ऑक्शन में जा सकते है तो फिर हम दोनों कैसे जायेंगे.

मई- आप उसकी चिंता मत कीजिये बस आप वह जाने के लिए रेडी रहिये बाकि का मई देख लूंगा.

मेरे बात को सुन कर तीनो खुस हो गए फिर माँ डैड वह से उठ कर अपने रूम में चले उनको जाने के शनाया मेरे पास आयी और मुझसे बोली.

शनाया- तो चले मुझे अपने अपने पावर को कण्ट्रोल करना सीखना है.

मई- है ठीक है चलो चलते है.

इसके बाद मई और शनाया वह से शनाया के कार में बैठ कर हवेली के लिए निकल गया करीब आधा घंटा गाड़ी ड्राइव करने के बाद हवेली पहुंच गए जब हम हवेली पहुंचे तो शनाया उस हवेली को देख कर आश्चर्य चकित हो गयी और उसे हवेली की ध्यान से देखने लगी फिर कुछ देर हवेली को ऐसे घूरने के बाद शनाया मुझसे बोली.

शनाया- प्रतिक तुम मुझे यहाँ क्यों ले कर आये हो और ये इतनी सुन्दर हवेली किसकी है ऐसा लग रहा है जैसे मई किसी राजमहल के पास आ गयी हु.

शनाया के बात सुन कर प्रतिक मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- तुम खुद अंदाजा लगाओ की ये हवेली किसकी हो सकती है.

मेरी बात को सुन कर शनाया कुछ देर के लिए सोच में पद गयी फिर अचानक से वो मुझे देखते हुए बोली.

शनाया- नहीं नहीं ये नहीं हो सकता है ये हवेली तुम्हारी कैसे हो सकती है.

मई- मेरी क्यों नहीं हो सकती.

शनाया- अगर ये हवेली सच में तुम्हारी है तो तुम जब मुझसे सदी करने के लिए आये थे तब तुमने क्यों नहीं बताया था.

मई- मई उस इस लिए नहीं बताया था की उस समय सच में मेरे पास कोई घर या हवेली नहीं थी मैंने इस हवेली को सदी के बाद ख़रीदा था.

शनाया- तो फिर तुम बाद में मुझे क्यों नहीं बताय

मई- (बहुत कुछ ऐसी बाटे है जो अभी तुम्हे पता नहीं है शनाया लेकिन मई जल्द hi तुम्हे सब कुछ बता दूंगा जिस दिन मेरी फॅमिली मुझे मिल गयी उसके बाद मई तुम्हे सब सच बता दूंगा) अरे यार जब मई इस हवेली को ख़रीदा था तब ये हवेली पूरी तरह से जार जार थी इस लिए मैंने सोचा की जब मई इस हवेली को ठीक करवा लूंगा तब मई तुम्हे सरप्राइज दूंगा.

मेरी बात सुन कर शनाया बहुत खुस हो गयी और वो मुझसे बोली.

शनाया- तो ये तुम्हारा सरप्राइज था वैसे मुझे तुम्हारा ये सरप्राइज बहुत अच्छा लगा चलो अंदर चलते है मुझे इस हवेली को अंदर से देखना है.

मई- ठीक है चलो.

इसके बाद हम दोनों हवेली के गेट पास पहुंच गए वह पहुंचने के बाद मैंने रोहन को कॉल कर के गेट को खोलने के लिए बोलै तो रोहन जल्दी से आकर हवेली के गेट खोला और मुझे और शनाया को वह देख कर चौक गया लेकिन वो कुछ बोलै नहीं और हमें अंदर आने के लिए रास्ता दे दिया इसके बाद हम दोनों रोहन के साथ हवेली के अंदर आ गए अंदर आने में बाद मई रोहन से बोलै.

मई- रोहन क्या दीपक आ गया है.

रोहन- है प्रतिक वो आ गया है.

मई- ठीक है तुम सरे लोगो को यहाँ बुला कर ले आओ.

मेरे बात को सुन कर रोहन जल्दी से अंदर गया और सबको बुला कर लाया जब सरे लोग वह आ गए तो मई शनाया से बोलै.

मई- शनाया इनसे मिलो ये रोहन दीपक कारन दीप्ती और संध्या है ये सब मेरे दोस्त है या यु कह लो की ये सब मेरे लिए मेरे दोस्त से भी बढाकर है ये पांचो मेरे भाई और बहन भी है क्युकी हम सब बचपन से साथ में पीला बढे है और साथ में गुरुकुल में शिक्षा भी लिए है तुम सब इससे मिलो ये मेरी जान मेरी वाइफ शनाया है.

सब एक साथ- हैल्लो भाभी मुझे आपसे मिल कर बहुत खुसी हुयी.

शनाया- मुझे भी आप सब से मिल कर बहुत खुसी हुयी.

मई- और शनाया इससे मिलो ये है बलदेव सिंह मेरा खास आदमी और ये मेरे बड़े भाई जैसे है अगर तुम्हे कही भी कोई भी प्रॉब्लम हो तो तुम बस एक बार इनसे बोल देना तुम्हारा काम सोल्वे हो जायेगा.

मेरे मुँह से अपने लिए बड़ा भाई सुन कर बलदेव सिंह के आँखों में आंसू आ गया और उन्होंने अपने भरे हुए गले से बोले.

बलदेव- आप बहुत महँ है बॉस आपने मुझ जैसे एक गैंगस्टर को सुधर कर एक अच्छा इंसान बनाया और अपने साथ रखा और आपने आज मुझे बड़ा भाई बोल कर मुझे हमेसा के लिए खरीद लिया है आज मई बलदेव सिंह आपसे वडा करता हु की आज से मई जरुरत पड़ी तो आपके और आपके फॅमिली के लिए अपना जान भी दे दूंगा और मैडम बॉस सही बोल रहे है आप मेरा no. ले लीजिये अगर आपको कभी भी मेरी जरुरत होगी तो आपका ये बड़ा भाई सदा उसके लिए तैयार रहेगा.

बलदेव सिंह के बात सुन कर शनाया बनावटी घुसे से उनसे बोली.

शनाया- नहीं मुझे आपसे कोई काम नहीं है और न मई चाहती हु की मई आपके जैसे आदमी से कोई काम करवौ.

शनाया के बात सुन कर हम सब हैरान हो गए और शनाया के तरफ देखने लगे इधर बलदेव सिंह जब शनाया के बात सुना तो वो वह से जाने लगा तभी शनाया उनसे बोली.

शनाया- मैंने आपको यहाँ से जाने के लिए बोलै की आप जा रहे है अपने जो गलती की है अगर आप उसे नहीं सुधरेंगे तो मई आपको यहाँ से नहीं जाने दूंगी.

शनाया के बात सुन कर बलदेव रुक गया और अपना दोनों हाथ जोड़ कर शनाया से बोलै.

बलदेव- मैंने ऐसा क्या गलती कर दिया मैडम आप मेरे गलती के बारे मुझे बताइये मई जरूर अपने गलती को सुधारूंगा.

शनाया- आपका गलती ये है की अपने खुद को मेरा बड़ा भाई बोलै इसका मतलब हुआ की मई आपकी बहन हो गयी तो क्या आप अपनी बहन को मैडम कह कर बुलाते है.

पहले तो बलदेव को शनाया के बात समझ में नहीं आया लेकिन जब उसे शनाया के बात समझ में आया तो वो जल्दी से बोलै.

बलदेव- सॉरी बहन गलती हो गयी अब से ऐसी गलती नहीं होगी.

शनाया- मई आपके गलती को इस बार माफ़ कर रही हु लेकिन आप अगर दोबारा ऐसी गलती करेंगे तो मई आपको माफ़ नहीं करूँगा इस लिए कण खोल कर सुन लीजिये आज से आप मुझे शनाया बोलेंगे ठीक है.

बलदेव- जैसी मेरी बहन की इक्छा आज से मई तुम्हे शनाया hi बुलाऊंगा.

बलदेव और शनाया के बात सुन कर वह मौजूद सरे लोग हसने लगे तभी मई सबको संत करवाते हुए बोलै.

मई- मई तुम सब से एक और बात करना चाहता हु दरअसल शनाया ग्रांडमास्टर लेवल पर पहुंच गयी है इस लिए मई आज यहाँ शान्या को उड़ने की ट्रेनिंग देने आया और मई चाहता हु की तुम पांचो मिल कर इसे वो सब ट्रेनिंग दो जो तुम्हे गुरुकुल में मिला है.

मेरी बात को सुन कर सब हैरान हो गए और साथ में सब खुस भी हो गए फिर कारन मुझसे बोलै.

कारन- है क्यों नहीं हम सब मिल कर शनाया भाभी को वो सब सीखा देंगे जो हमें आता है.

दीप्ती- तुम देखना शनाया भाभी कुछ hi दिन में हमसे भी ज्यादा ताकतवर बन जाएगी.

उन दोनों के बात सुन कर शनाया खुस हो गयी और उन सब से बोली.

शनाया- मुझे भी खुसी होगी आप सब से सिख कर.

इधर मैं भी उन सब के बातो को सुन कर खुस था फिर मई उन सब से बोलै.

मई- और है मई कल गुरुदेव से मिलने जा रहा हु और मई वह से अपने साथ 5 ट्रेनर ले कर आऊंगा जो यहाँ मार्टिकल आर्ट्स स्कूल में योद्धाओं को ट्रेनिंग देंगे और है कल से hi तुम सब उसको ट्रेनिंग देना सुरु कर दो.

सब- ठीक है.

इधर मेरी मेरी बात को सुन कर शनाया अजीब नजरो से मुझे घूरते हुए बोली.

शनाया- मार्टिकल आर्ट्स स्कूल क्या तुम मार्टिकल आर्ट्स स्कूल भी चलते हो.

शनाया के बात सुन कर मुझे ध्यान आया की मई तो उसे मार्टिकल आर्ट्स स्कूल के बारे में बताया hi नहीं इस लिए मई उससे बोलै.

मई- अरे है मई तुम्हे बताना hi भूल गया दरअसल मई इस हवेली के पीछे साइड में एक मार्टिकल आर्ट्स स्कूल खोल रहा हु ताकि मई यहाँ के लोग मार्टिकल आर्ट्स में निपुण हो सके.

मृ बात को सुन कर शनाया हैरान हो गयी और वो उसी हैरानी के साथ बोली.

शनाया- तुम और कितनी बाटे मुझसे छुपाये हो.

शनाया के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- शनाया मुझे माफ़ करना अभी कुछ ऐसी बाटे है जो मैंने अभी भी तुमसे छुपाया है लेकिन मुझपे विस्वास करो जब सही वक़्त आएगा तो मई तुम्हे जरूर बताऊंगा.

मेरी बात को सुन कर शनाया एक तक मुझे देखने लगी उसको मुझे इस तरह से देखता हुआ देख कर मेरे माथे पर पसीना आने लगा इधर शनाया थोड़ी देर तक मुझे ऐसे hi देखने के बाद बोली.

शनाया- ठीक है मुझे तुम पर पूरा बिस्वास है चलो अब हम ट्रेनिंग करने चलते है नहीं तो घर वापस लौटने में बहुत ज्यादा समय हो जायेगा.

शनाया के बात सुन कर मई है में गर्दन हिलाया और फिर हम हवेली के बैकयार्ड से होते हुए बहार निकल गया जहा मार्टिकल आर्ट्स स्कूल बनाया हुआ था वह पर योद्धाओं को ट्रेनिंग करने के लिए एक ट्राइंग ग्राउंड भी बनाया हुआ था इस लिए हम सब उसी ग्राउंड में आ गए.

मई- तो तुम तैयार हो हवा में उड़ने के लिए.

शनाया- है बिलकुल.

मई- तो ठीक है अब मेरी बात को ध्यान से सुनो मई तुम्हे ऊपर हवा में ले कर चलूँगा जहा तुम्हे सबसे पहले अपने मन को संत करना होगा और फिर अपने शरीर के सरे प्राण वायु को इकठा कर के अपने नवी के चारो तरह घुमा कर अपने शरीर को हवा में संतुलित कर के अपने शरीर को हल्का बनाना होगा इसके बाद तुम्हे अपने शरीर को हवा में साथ मिला कर गुरुत्वाकर्षण को अपने काबू में करना होगा जैसे hi तुम गुरुत्वाकर्षण को काबू करोगी तुम हवा में उड़ने लगोगी.

मेरी बात को सुन कर शनाया अपना गर्दन है में हिलती है जिसे देख कर मई उसके तरफ अपना हाथ बढ़ा कर उसकी आँखों में देखते हुए बोलै.

मई- इजाजत है तुम्हे हाथ लगाने की.

शनाया मेरे इस तरह से पूछने पर शर्मा गयी और मेरे आँखों में देखते हुए धीरे आवाज में ऐसे बोली जैसे आज हमारी सुहागरात हो.

शनाया- (धीरे से प्यार भरी आवाज में) इजाजत है.

इतना बोल कर वो अपना हाथ मेरे हाथो में रख दी इसके बाद मैंने अपना एक हाथ से उसका कमर पकड़ा और धीरे धीरे ऊपर उठाने लगा कुछ hi सेकंड में हम दोनों लगभग 100 फ़ीट ऊपर आसमान में आ गए लेकिन शनाया को पता नहीं चला की हम आसमान में आ गए है क्युकी वो तो मेरी नीली आँखों में खोयी हुयी थी मई उसको मुझमे इस तरह से खोया हुआ देख कर उसे प्यार से बोलै.

मई- शनाया हम ऊपर आसमान में आ गए है अब तुम अपने मन को संत करने की कोशिश करो.

जैसे hi मेरा आवाज शनाया के कानो में पड़ी तो हड़बड़ा गयी और इधर उधर देखने लगी तभी उसकी नजर निचे गयी और जैसे उसने देखा की वो आकाश में इतने ऊपर आ गए है तो वो दर गयी और मुझसे चिपक गयी फिर वो डरते डरते बोली.

शनाया- प्रतिक मुझे छोड़ना नहीं नहीं तो मई निचे गिर जाउंगी.

शनाया को इस तरह से डरता हुआ देख कर मई मुस्कुराते हुए उससे बोलै.

मई- तुम डरो नहीं जब तक मई तुम्हारे साथ हु तुम्हे कुछ नहीं होगा बस मुझपे भरोषा रखा और जो जो करने के लिए मई तुमसे बोलूंगा तुम वैसे वैसे करते जाओ देखना तुम भी मेरी तरह आकाश में उड़ने लग जाओगी.

मेरी बात को सुन कर शनाया ने बस अपना गर्दन है में हिला दिया इसके बाद मई उससे बोलै.

मई- तुम अपने मन को संत कर के अपने शरीर को संतुलित करने की कोशिश करो.

मेरे बात को सुन कर शनाया ने सबसे पहले अपने मन को संत किया फिर वो अपने शरीर को संतुलित करने लगी बहुत प्रयास करने के बाद भी जब वो अपने शरीर को संतुलित नहीं कर पायी तो मई उससे बोलै.

मई- तुम्हे अगर अपने शरीर को संतुलित करना है तो सबसे पहले अपने शरीर के सरे प्राण वायु को अपने नवी के पास लेकर आओ और फिर उसे नवी के चारो तरफ घुमाओ.

मेरी बात को सुन कर उसने अपने शरीर के प्राण वायु को अपने नवी के पास ला कर उसके चारो तरफ घूमने लगी जिसके कारन उसका शरीर हल्का हो गया और धीरे धीरे हवा में संतुलित होने लगा करीब एक घंटे के प्रयास के बाद वो पूरी तरह से हवा में संतुलित हो गयी जिसे देख कर मई खुद hi गया और उससे बोलै.

मई- बहुत अच्छा तुम्हे प्राण वायु को सही तरह से इस्तेमाल कर के अपने शरीर को हवा के तरह हल्का कर लिया है और अब तुम्हारी शरीर हवा में संतुलित हो गया इस लिए मई तुम्हे छोड़ रहा हु.

इतना बोल कर मई शनाया को धीरे धीरे छोड़ दिया और उसे देखने लगा तो देखा की उसकी आँखे अभी भी बंद है और वो हवा में किसी मूर्ति की तरह कड़ी है उसे इस तरह से अपनी आँखे बंद कर के हवा खड़ा देख कर मई उसे बोलै.

मई- अब तुम अपने आँखे खोल कर देख सकती हो तुम पूरी तरह से हवा में बिना कोई सहर के कड़ी हो अब तुम अपने आँखे खोल कर धीरे धीरे आगे बढ़ने की कोशिश करो.

मेरी बात को सुन कर शनाया धीरे धीरे अपने आँखे खोली और खुद को देखने लगी जब उसने देखा की वो बिना किसी सहारे के हवा में कड़ी है तो उसे बहुत खुसी हुआ और प्यार भरी नजरो से मुझे देखने लगी मई उसे अपने तरफ देखता हुआ पाया तो उससे बोलै.

मई- शनाया अब तुम धीरे धीरे उड़ने की कोशिश करो.

मेरी बात को सुन कर शनाया धीरे धीरे उड़ने की कोशिश करने लगी थोड़ी देर में hi वो आसानी से उड़ने लगी उसको इस तरह से आसानी से उड़ता हुआ देख कर मई उससे बोलै.

मई- शनाया अब तुम्हे उड़ने आ गया है अब तुम जब चाहो तब अपने मन में उड़ने के बारे सोचना तुम उड़ने लग जाओगी चलो अब हम निचे चलते है.

मेरी बात को सुन कर शनाया मेरे साथ निचे आ गयी निचे आने के बाद वो खुसी से मेरे गले लग गयी और मुझसे बोली.

शनाया- तुमने देखा न प्रतिक मई मई उड़ सकती हु या... हु.... मई उड़ सकती हु और ये सब तुम्हारे कारन हुआ है प्रतिक है.

मई- है शनाया मैंने देखा तुम उड़ सकती हो लेकिन मेरी एक बात यद् रखना शनाया अपने शक्तियों का उसे बहुत ज्यादा जरुरत हो तभी करना.

शनाया- ठीक है.

मई- ठीक है चलो अब हम घर चलते है क्युकी रत ज्यादा हो गयी है.

शनाया- ठीक है चलो.

इसके बाद मई और शनाया सबको बी बोल कर वह से घर आ गया घर आने के बाद दोनों सो गए.

नेक्स्ट डे मॉर्निंग में उठ कर मैंने सबके लिए नास्ता रेडी किया और फिर सबके साथ बैठ कर नास्ता किया नास्ता करने के बाद मई अपने रूम में आ गया मेरे रूम में आने के थोड़ी देर बाद शनाया भी रूम में आ गयी जैसे hi मैंने शनाया को रूम में देखा तो मई उससे बोलै.

मई- शनाया मई किसी काम से गुरुदेव से मिलने जा रहा हु इस लिए मई वापस शाम तक आऊंगा.

शनाया- ठीक है.

फिर मई वह से निकल कर बहार आया और एक सुनसान जगह देख कर वह गया और फिर वह से टेलिपोर्ट हो कर गुरुदेव के आश्रम में पहुंच गया.

........................................................

तो बे कंटिन्यू

........................................................
 
अपडेट 44



समय की शक्ति और प्रतिक की परीक्षा



मई गुरुदेव के आश्रम में पहुंच गया था और इस वक़्त गुरुदेव अपना आसान लगाए ध्यान में बैठे हुए थे और मई उनके सामने बैठ कर गुरु के ध्यान से उठाने का इंतज़ार कर रहा था करीब 1 घंटा इंतज़ार करने के बाद आखिर कर गुरुदेव अपने ध्यान से बहार आये और उनकी नजर मुझ पर पड़ी मुझे अपने सामने बैठे हुए देख कर गुरुदेव मुझसे बोले.

गुरुदेव- अरे पुत्र प्रतिक तुम कब आये.

गुरुदेव के बात सुन कर मई उनको प्रणाम करते हुए बोलै.

मई- प्रणाम गुरुदेव.

गुरुदेव- यशस्वी भाव पुत्र.

मई- गुरुदेव मई यहाँ पर एक घंटे पहले hi आ गया था और आपका ध्यान से बहार आने का इंतज़ार कर रहा था.

गुरुदेव- क्या एक घंटा पहले आ गए थे तो तुमने मुझे ध्यान से क्यों नहीं उठाया.

मई- गुरुदेव मई नहीं चाहता था की आपका ध्यान भांग हो इस लिए मई आपको ध्यान से नहीं उठाया वैसे गुरुदेव अपने मुझे यहाँ पर क्यों बुलाया था कुछ खास वजह है क्या.

गुरुदेव- है पुत्र तुम्हे यहाँ बुलाने का एक खास वजह है दरअसल मुझे कुछ दिन पहले यहाँ पर एक छुपी हुयी जगह मिली है जहा पर बहुत hi ज्यादा स्प्रिचैल एनर्जी के साथ साथ वह पर स्त्री और पुरुष एनर्जी बहुत ज्यादा मात्रा में मौजूद है अगर कोई मार्टिकल आर्ट्स योद्धा उस जगह पर कल्टीवेशन करे तो उसका स्प्रिचैल एनर्जी के साथ साथ उसके अंदर स्त्री एनर्जी और पुरुष एनर्जी भी बढ़ेगा जिससे उस योद्धा का नीव बहुत ज्यादा मजबूत हो जायेगा और साथ में उसका लेवल भी जल्दी जल्दी बढ़ेगा और है वह पर एक और शक्ति है और वो शक्ति है समय की शक्ति मई उस शक्ति को बहुत बार हासिल करने की कोशिश की लेकिन मई हर बार नाकामयाब रहा इस लिए मई तुमको यहाँ बुलाया है ताकि तुम उस समय की शक्ति को हासिल कर सको.

गुरुदेव के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए बोलै.

मई- गुरुदेव ये स्त्री एनर्जी और पुरुष एनर्जी क्या है मई तो इस एनर्जी के बारे में पहली बार सुन रहा हु और सबसे बड़ी बात की अगर आप खुद उस शक्ति को हासिल करने में नाकामयाब हो गए तो भला मई उसे कैसे हासिल कर पाउँगा.

मेरे बात को सुन कर गुरुदेव मुस्कुराते हुए बोले.

गुरुदेव- पुत्र स्त्री और पुरुष एनर्जी स्त्री और पुरुष का एक अहम् हिंसा है है एक औरत या लड़की स्त्री एनर्जी के बिना अधूरी होती है अगर उनमे स्त्री एनर्जी न हो तो वो कभी भी मार्टिकल आर्ट्स में आगे नहीं बढ़ सकती वैसे hi पुरुष एनर्जी भी है अगर कोई पुरुष में पुरुष एनर्जी hi न हो तो वो पुरुष कभी भी कल्टीवेशन नहीं कर सकता इस लिए ये दोनों एनर्जी स्त्री और पुरुष के लिए बहुत जरुरी है इस एनर्जी से एक योद्धा का नीव मजबूत होता है जिसके अंदर जितना ज्यादा स्त्री और पुरुष एनर्जी होगा उसका नीव उतना hi ज्यादा मजबूत होगा और रही बात तुम्हारी दूसरी सवाल की तो मई तुमको बता दू की ये जरुरी नहीं की जो काम मई नहीं कर पाया उसे तुम भी नहीं कर पाओगे मुझे तुम पर पूरा बिस्वास है की तुम उस समय की शक्ति को जरूर हासिल कर लोगे.

मई- गुरुदेव मुझे समय की शक्ति के बारे में बिस्तर से बताइये की ये शक्ति किस तरह से कार्य करती है.

मेरे बात को सुन कर कुछ देर के लिए गुरुदेव सोच में पद गए फिर वो मेरे तरफ देखते हुए मुझसे बोले.

गुरुदेव- समय की शक्ति से तुम समय यानि की टाइम को कण्ट्रोल कर सकते हो और टाइम कण्ट्रोल करने के बाद तुम इसका बहुत तरह से उपयोग कर सकते हो जैसे की तुम समय को स्लो और फ़ास्ट कर सकते हो जैसे तुम किसी से लड़ाई कर रहे हो तो समय को स्लो कर के तुम अपने दुश्मन के हमले को आराम से रोक सकते हो और फिर समय को फ़ास्ट कर के अपने हमले को और भी ताकतवर हमला बना सकते हो दूसरी बात तुम किसी जगह के समय को काम या फिर ज्यादा कर सकते हो मन को की तुम्हे काम समय में ज्यादा अभ्यास करना है तो तुम समय के शक्ति से किसी भी जगह के समय को कई गुना तेज़ कर सकते हो और आखिर में तुम समय को कण्ट्रोल कर के पास्ट या फ्यूचर में भी जा सकते हो लेकिन इसके लिए तुम्हे बहुत कठिन परिश्रम करना होगा तो क्या तुम समय शक्ति को हासिल करने के लिए तैयार हो.

गुरुदेव के बात सुन कर मई उत्साहित होते हुए बोलै.

मई- जी गुरुदेव मई समय शक्ति को हासिल करने के लिए तैयार हु आप मुझे उस जगह पर ले कर चलिए.

गुरुदेव- ठीक है यदि तुम उस शक्ति को हासिल करने के लिए तैयार हो तो तुम मेरे साथ आओ.

फिर गुरुदेव मुझे अपने साथ ले कर वह से गायब हो गए कुछ देर बाद हम दोनों एक जगह पर प्रकट हुए जहा बर्फ से ढाका हुआ एक बहुत बड़ा मैदान था वह पर उस खली मैदान के शिवा कुछ भी नहीं था मई उस खली मैदान को देखते हुए गुरुदेव से बोलै.

मई- गुरुदेव आप जैसा बता रहे थे वैसा छुपा हुआ जगह यहाँ पर दिखाई नहीं दे रहा है.

मेरे बात को सुन कर गुरुदेव मुस्कुराते हुए मुझसे बोले.

गुरुदेव- वो जगह यही पर पुत्र बस तुम्हे दिखाई नहीं दे रहा है क्युकी उस छुपी हुयी जगह को एक फार्मेशन द्वारा छुपाया हुआ है.

इतना बोल कर गुरुदेव एक जगह पर अपने शक्तियों से हमला किये जैसे hi वो हमला किये तो उनके हाथ से एक रोशनी निकल कर उस जगह पर चली गयी और वह पर एक छोटा सा विस्फोट हो गया और वह पर एक पारदर्शी दीवाल दिखने लगी जो पहले अदृस्य थी.

ये पारदर्शी दीवाल एक फार्मेशन था इस पारदर्शी दीवाल के आगे एक बहुत बड़ा दरवाजा था जो एक पाथेर का बना हुआ था गुरुदेव के हमले से वो पारदर्शी दीवाल धीरे धीरे हटने लगा क्युकी गुरुदेव ने जिस जगह पर हमला किया था वो जगह उस फार्मेशन का सेण्टर पॉइंट था इस लिए वो फार्मेशन धीरे धीरे कर के बंद हो गया.

जैसे hi फार्मेशन बंद हुआ था हमारे सामने एक गुफा था और उस गुफा में एक बहुत बड़ा पत्थर का दरवाजा लगा हुआ था खैर उस फार्मेशन के हटने के बाद मई और गुरुदेव उस दरवाजे के पास पहुंचे इसके बाद गुरुदेव ने उस दरवाजे के साइड से निकलने हुए एक पत्थर को दबाया जिसके कारन वह एक गड़गड़ाहट का तेज़ आवाज हुआ और वो दरवाजा खुलने लगा जब वो दरवाजा पूरी तरह से खुल गया तो गुरुदेव मुझसे बोले.

गुरुदेव- पुत्र अब यहाँ से अंदर तुम्हे अकेले hi जाना होगा क्युकी ये सफर तुम्हारे अकेले का है और तुम्हे उस शक्ति को अकेले hi अपनी बूढी शक्ति और सामर्थ्य से हासिल करना होगा.

मई- जी गुरुदेव मई किसी भी कीमत पर उस शक्ति को हासिल कर के hi रहूँगा.

गुरुदेव- ठीक है पुत्र लेकिन आगे बढ़ने से पहले मेरे बात को ध्यान से सुन लो अंदर की दुनिया में समय बहुत फ़ास्ट है अगर तुम अंदर 100 दिन रुकते हो तो बहार सिर्फ एक दिन hi होगा और तुम्हे उस शक्ति को हासिल करने के लिए बहुत साडी परीक्षाएं देनी पड़ेगी इस लिए तुम्हे समय शक्ति को अपने बूढी विवेक और पराक्रम से हासिल करना है मेरी बात समझ गए न.

मई- जी गुरुदेव मई समझ गया.

गुरुदेव- अच्छा है अगर तुम्हे मेरी बात समझ में आ गयी है तो अब तुम अंदर जा सकते हो.

इतना बोल कर गुरुदेव वह से गायब हो कर वापस आश्रम चले गए उनके वह से जाने के बाद मई उस दरवाजे से अंदर चला गया जैसे hi मई अंदर आया तो वो दरवाजा अपने आप बंद हो गया.

इधर मई अंदर आने के बाद अपने सामने देखा तो वह चारो तरह बहुत घाना कोहरा फैला हुआ था जिसके कारन सामने देखना भी मुश्किल था और अंदर से बहुत hi सुध और शक्तिशाली स्प्रिचैल एनर्जी आते हुए महसूस हो रही थी खैर मई इन सब चीजों को इग्नोर करते हुए आगे बढ़ना hi सही समझा अभी मई आगे बढ़ने hi वाला था की तभी मुझे एक दिव्या आवाज सुनाई दिया.

आवाज- तुम्हारा स्वागत है मेरे इस आभासी दुनिया है जहा तक मुझे पता है की तुम यहाँ पर समय की शक्ति हासिल करने के लिए आये हो मैंने सही बोलै न.

मई उस दिव्या आवाज को सुन कर हैरान हो गया मई पहले तो हैरान इस लिए हो गया की आखिर ये आवाज किसकी है लेकिन फिर उस आवाज ने मुझे बताया की मई यहाँ किस लिए आया हु तो मई और हैरान हो गया इस लिए मई उस आवाज वाले इंसान से पूछा.

मई- आप कोण है और आपको कैसे पता की मई यहाँ क्यों आया हु.

मेरी बात को सुन कर वो आदमी जोर जोर से हस्ते हुए बोलै.

आवाज- है है है है मई कैसे जनता हु की तुम यहाँ क्यों आये हो है है है क्या मजाक करते हो लड़के मुझे तो क्या सभी को पता है की यहाँ जो भी आता है समय शक्ति को हासिल करने के लिए hi आता है और रही बात मेरी तो मेरा नाम अमरनाथ है और ये आभासी दुनिया मेरी hi बनायीं हुयी है और तुम जिस शक्ति को हासिल करने के लिए यहाँ आये हो वो शक्ति भी मेरा hi था.

मई अमरनाथ के बात को सुन कर कुछ सोचते हुए बोलै.

Mai-Ye आप क्या बोल रहे है वो शक्ति आपका है लेकिन मैंने तो सुना था की उस शक्ति का कोई भी मालिक नहीं है और न hi इस आभासी दुनिया का कोई मालिक है तो फिर आप कैसे इसका मालिक हो गए.

अमरनाथ- तुमने सही सुना है अब इस शक्ति और इस आभासी दुनिया का कोई भी मालिक नहीं है क्युकी मई बहुत हजारो साल पहले hi इस दुनिया को छोड़ कर जा चूका हु बस यहाँ मेरी आत्मा का एक टुकड़ा रह गया है जो इस आभासी दुनिया और समय शक्ति का रक्षा कर रहा है ताकि मई इन दोनों चीजों को किसी सच्चे और और अच्छे योग्य ब्यक्ति के हाथ में सौप सकू ताकि कोई इस शक्ति का गलत उपयोग न कर सके.

अमरनाथ के बात सुन कर मई कुछ देर के लिए सोच में पद गया फिर अपने सोच से बहार निकलते हुए अमरनाथ से बोलै.

मई- मई यहाँ पर समय शक्ति को hi हासिल करने आया हु तो क्या आप बता सकते है की मई आपके उस शक्ति को कैसे हासिल कर सकता हु.

मेरी बात को सुन कर अमरनाथ मुस्कुराते मुझसे बोलै.

अमरनाथ- है क्यों नहीं मई यहाँ पर इसी लिए तो हु अगर तुम्हे समय शक्ति को हासिल करना है तो तुम्हे 5 परीक्षा देनी पड़ेगी और तुम्हे उन पाछो परीक्षा में पास होना होगा.

मई- मई वो पांचो परीक्षा देने के लिए तैयार हु तो क्या आप बता सकते है की वो पांच परीक्षा क्या क्या और कैसे होंगे.

अमरनाथ- है क्यों नहीं तुम्हारी पहली परीक्षा धैर्य की है जिसमे तुम्हे अपने सहन शक्ति और धैर्य का परीक्षा देना होगा दूसरी परीक्षा न्याय की होगी तुम्हे इस परीक्षा में अपने सच्चे दिल से न्याय करना होगा तीसरा परीक्षा लोभ की होगी तुम्हे इस परीक्षा में ये साबित करना होगा की तुम्हारे अंदर किसी प्रकार का कोई लोभ नहीं है चौथा परीक्षा में तुम्हारे आत्मा के सुधता को देखा जायेगा और पांचवी परीक्षा में तुम्हे वासना की परीक्षा देना होगा और तुम इन 5 परीक्षाओं में पास हो जाओगे तो आखिर में तुम्हे मुझसे लड़ कर मुझे हराना होगा अगर तुम इन पांचो परिखा को पास करने के बाद मुझे हरा दिया तो ये आभासी दुनिया के साथ साथ समय शक्ति भी तुम्हारी हो जाएगी तो क्या तुम तैयार हो परीक्षा देने के लिए.

मई- है मई तैयार हु.

मेरा इतना बोलना hi था की वह पर फैला हुआ सारा कोहरा आ कर मुझसे लिपटने लगा जिसके कारन मेरे ऊपर बेहोशी हावी होने लगी फिर थोड़ी देर में मई बेहोश हो कर वही पर गिर गया.

जब मेरी आँखे खुली और मई होश में आया तो मई खुद को एक बिराने जगह पर आया जहा पर जमीं को छोड़ कर कुछ भी नहीं था वो उस जगह में न कोई एनर्जी थी और थी भी तो वो सुध एनर्जी नहीं थी वह पर कुछ था तो वो सिर्फ सूर्य की तपती हुयी रोशनी थी अभी मई चारो तरफ घूम कर उस जगह का जायजा ले hi रहा था की तभी मुझे फिर से अमरनाथ के आवाज सुनाई दी.

अमरनाथ- तुम्हे इस बिराने जगह में 1000 साल तक अभ्यास करना होगा यहाँ तुम्हारा मार्टिकल आर्ट्स का लेवल सुण्या हो जायेगा इस लिए तुम्हे इस बिराने जगह में रह कर जहा न कोई खाने पिने की चीज है और न hi किसी तरह की कोई सुध एनर्जी है तुम्हे इस दुसित एनर्जी को सुध कर अपने सुण्या लेवल को 1000 साल में सुडो ग्रांडमास्टर के लेवल तक ले कर जाना है और ध्यान रहे इस बिच तुम्हारे दिमाग में बहुत तरह के भावनाये उठेगी और वो भावनाये तुम्हे विचलित करेगी ताकि तुम अपना लेवल न बढ़ा सको लेकिन तुम्हे उन सभी भावनाये को पछाड़ते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करना होगा तभी तुम धैर्य के परीक्षा पर कर सकोगे और है तुम्हे यहाँ पर भूख और प्यास भी परेशां करेगी लेकिन तुम्हे अपने भूख और प्यास पर भी काबू पाना होगा.

जब मई अमरनाथ के बात सुना तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए और मई सोचने लगा की मई बिना खाये पिए इतने दिन तक कैसे जीवित रह पाउँगा और अगर यहाँ कोई सुध एनर्जी नहीं है तो भला मई अपना लेवल कैसे बढ़ा पाउँगा जब मुझे कुछ समझ में नहीं आया तो मई अमरनाथ से पूछा.

मई- अगर यहाँ पर किसी तरह के कोई सुध एनर्जी hi नहीं है तो भला मई अपना लेवल कैसे बढ़ा पाउँगा और मई बिना खाये इतने दिन तक जिन्दा कैसे रहूँगा.

मेरी बात को सुन कर अमरनाथ जोर जोर से हसने लगे और हस्ते हुए बोले.

अमरनाथ- है है है है तो तुम क्या सोचे थे की तुम्हे इतनी आसानी से समय शक्ति मिल जाएगी तुम्हे बिना कुछ खाये पिए और और अपने कठिन परिश्रम से इस दुसित एनर्जी को hi सुध कर के अपने लेवल बढ़ना पड़ेगा और रही बात खाने पिने का तो मई तुम्हे बता दू की ये ऐसी जगह है की तुम यहाँ बिना कुछ खाये पिए भी लाखो साल तक जीवित रह सकते हो लेकिन तुम्हे भूख और प्यास तड़पायेगी जरूर (फिर कुछ सोचते हुए) चलो मई तुम्हारा एक काम आसान कर देता हु मई तुम्हे एक मंत्र देता हु इस मंत्र से तुम्हारा भूख और प्यास मिट जाएगी लेकिन तुम इस मंत्र को 100 बार hi उसे कर सकते हो इस लिए तुम इसे सोच समझ कर उसे करना और तुम मार्टिकल आर्ट्स के लेवल को दूषित एनर्जी को सुध कर के भी बढ़ा सकते हो लेकिन इससे लेवल बढ़ने की गति बहुत स्लो हो जाएगी लेकिन तुम्हे चिंता करने की जरुरत नहीं है तुम्हारे पास पुरे 1000 साल है तुम अगर म्हणत करोगे और धैर्य रखोगे तो तुम जरूर सुडो ग्रांडमास्टर लेवल तक पहुंच जाओगे लेकिन यद् रखना इस दुसित एनर्जी को सुध करना तुम्हारे लिए आसान नहीं होगा.

अमरनाथ के बात सुन कर मेरा मन करने लगा की मई अभी इस परीक्षा से बहार निकल जाऊ लेकिन फिर मुझे गुरुदेव के एक बात यद् आयी.

फ्लैशबैक

गुरुदेव- पुत्र तुम्हे किसी भी हालत में समय शक्ति को प्राप्त करना hi होगा क्युकी आगे तुम्हे जिस बुरी शक्ति से लड़ना है उस बुरी शक्ति को हारने में ये शक्ति बहुत मदत करेगी अगर तुम उस शक्ति को हासिल नहीं कर पाए तो तुम उस बुरी शक्ति को नहीं हरा पाओगे और उस बुरी शक्ति के जितने का मतलब होगा पूरी दुनिया की तबाही जिसमे तुम्हारे अपने भी होंगे.

गुरुदेव के बात सुन कर मई कम्प गया था फिर मई अपने दृढ निश्चय के साथ गुरुदेव से बोलै.

मई- गुरुदेव मई अपने लोगो के लिए कुछ भी करूँगा अगर इस शक्ति से मेरे अपनों का भविस्य जुड़ा हुआ है तो मई किसी भी हालत में समय शक्ति को हासिल कर hi रहूँगा.

फ्लैशबैक एन्ड

जैसे hi मुझे गुरुदेव की वो बाटे यद् आयी तो मेरे दिल में आग सी जलने लगी और मई खुद से hi बोलै.

मई- (खुद से) मुझे किसी भी हालत में समय शक्ति हासिल करना hi होगा चाहे उसके लिए मुझे कितना भी कष्ट क्यों न सहना पड़े मई अपने लोगो को कुछ भी नहीं होने दूंगा.

ये सब सोचने के बाद मई पूरी तरह से इस धैर्य की परीक्षा देने के लिए तैयार हो गया जैसे hi मई धैर्य की परीक्षा देने के लिए तैयार हुआ तो मेरे शरीर से श्री शक्तिया निकल कर आशमान में चली गयी अब मई बिलकुल एक मामूली इंसान बन गया था अब मेरे पास कोई भी शक्ति नहीं थी मैंने जब देखा की मेरे पास कोई भी शक्ति नहीं बची है तो मई मज़बूरी में अपना गर्दन न में हिलने लगा और उस बिराने में एक ध्यान करने लायक जगह ढूंढने लगा थोड़ी देर ढूंढने के बाद मुझे एक जगह मिल गया जहा मई ध्यान लगाने के साथ साथ ट्रेनिंग भी कर सकता था.

मई उस जगह पर जाकर मैडिटेशन करने लगा मैडिटेशन करते हुए दुसित एनर्जी को अपने पास खींचने की कोशिश करने लगा लेकिन ये क्या बहुत प्रयास करने के बाद भी मई दुसित एनर्जी के एक काम को hi खींच पाया जिसके कारन मई निराशा हो गया तभी मेरे मन में अजीब अजीब सी ख्याल आने लगे मुझे लग रहा था की मई अब कभी भी इस परीक्षा से बहार नहीं निकल पाउँगा मई हमेशा के लिए यही फसा हुआ रह जाऊंगा.

मेरा एक मन बोल रहा था की मई इस परीक्षा को यही छोड़ दू तो दूसरा मन बोल रहा था की क्या करना है इतना कास्ट सब कर के अगर मेरे पास कोई शक्ति न भी होगी तो मई आराम से शनाया के साथ जिंदगी बिता सकता हु.

ऐसे ऐसे बहुत सरे भ्रम मेरे दिमाग में आ रहे थे जो मुझे इस परीक्षा को छोड़ने के लिए उकसा रहे थे लेकिन मई अपने कर्तव्य के आगे उन सरे भावनाओ को पीछे छोड़ कर फिर से मैडिटेशन करने लगा और दुसित एनर्जी को अपने पास खींच कर उसे सुध करने लगा.

आज मुझे इस जगह पर आये हुए पुरे 10 दिन हो गए थे लेकिन मई उस दुसित एनर्जी के थोड़े hi मात्रा को सुध कर के अपने अंदर सोख पाया था इन 10 दिनों में मेरे अंदर के भावनाये मुझे तोड़ने को बहुत कोशिश की लेकिन मई मैडिटेशन करता रहा इन 10 दिनों में मुझे भूख प्यास भी बहुत तड़पाया लेकिन मई मई उसे नजरअंदाज कर दिया लेकिन आज पुरे 10 दिन बिताने के बाद मेरा भूख और प्यास बहुत हद तक बढ़ गया था जिसके कारन मेरे शरीर भी धीरे धीरे कमजोर होने लगे थे लेकिन मुझे किसी तरह से अपने भूख और प्यास पर कण्ट्रोल करना होगा हलाकि मेरे पास उस मंत्र का उसे करने का चांस था लेकिन मई उसे सही समय आने पर hi उसे कर करूँगा क्युकी उस मंत्र को मई 100 बार hi उसे कर सकता हु.

ऐसे अपने भूख प्यास और अपने भावनाओ को काबू करते हुए दुसित एनर्जी को सुध कर के अपने शरीर में सोख्ता रहा लेकिन उसका लेवल 0 पर hi अटका हुआ था आज इस बिराने में आये हुए मुझे 10 साल हो गए थे लेकिन मई इन 10 सालो में बहुत तरह के यातनाये सही भूख और पाए के कारन मेरा शरीर बहुत दुबला पतला हो गया था इन 10 सालो में मुझे बहुत तरह के भावनाये आये लेकिन मई उन सरे भावनाओ को इग्नोर करते हुए ट्रेनिंग करता रहा लेकिन मेरा लेवल बढ़ने का नाम hi नहीं ले रहा था इस लिए मेरा मन मायूस सा हो गया था.

इन 10 सालो में मैंने एक बार भी उस मंत्र का प्रयोग नहीं किया था इस लिए सोचा की आज कर के देखता हु ये सोचने के बाद मई वही ध्यान में बैठ गया और उस मंत्र का उच्चारण करने लगा मई जैसे जैसे उस मंत्र का उच्चारण करता जा रहा था वैसे वैसे मेरे शरीर जो की भूख और प्यास के कारन कमजोर हो गया था वो ठीक होने लगा और करीब एक घंटे तक मंत्र उच्चारण करने के बाद मई पूरी तरह से ठीक हो गया था अब मुझे ऐसा लग रहा था की मई और 10 साल तक बिना खाये पिए आराम से रह सकता हु.

जब मई पूरी तरह से ठीक हो गया तो मई दोबारा मैडिटेशन करने के लिए बैठ गया और दुसित एनर्जी को सुध कर के अपने शरीर में सिखने लगा ऐसे hi समय बीतता रहा और पुरे 100 साल बिट गए इन 100 सालो में मैंने बहुत साडी सुध एनर्जी जमा कर ली थी फिर भी मेरा लेवल 0 का 0 hi था मेरा लेवल बढ़ने का नाम hi नहीं ले रहा था इस लिए मई मायूस हो गया मैंने इन 100 सालो को बहुत hi दर्दनाक परिस्थिति से निकला था मैंने इन 100 सालो में सिर्फ 10 बार hi उस मंत्र का प्रयोग किया था जिससे भूख मिट जाती है.

मुझे समझ में नहीं आ रहा था की मेरा लेवल बढ़ क्यों नहीं रहा है इस लिए मई मायूस हो कर वही पर बैठ गया मुझे शनाया और मेरे दोस्तों का भी बहुत यद् आ रहा था खास कर के शनाया के इसलिए अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था मेरा मन कर रहा था की भाड़ में जाये ये समय शक्ति मुझे भी चाहिए ऐसी शक्ति जिसके कारन मई शनाया से इतने दिनों से दूर हु लेकिन फिर एक मन बोलता की नहीं अगर मई अभी यहाँ से गया तो मई शनाया और अपने सभी चाहने वाले को एक दिन खो दूंगा इससे अच्छा है की मई ये परीक्षा किसी तरह से दे कर समय शक्ति को हासिल कर लू.

फिर मई अपने दिमाग से साडी बातो को निकल कर ट्रेनिंग करना सुरु कर दिया ऐसे hi समय बिताते गए और आज पुरे 300 साल हो गए आज मई मैडिटेशन में hi था की तभी मेरे शरीर में के अंदर से किसी अंडे के टूटने जैसा आवाज आया जिससे मई समझ गया की आज मई 0 लेवल को पर कर के लेवल 1 पर पहुंच गया हु.

ये जान की मेरा लेवल बढ़ गया है मई बहुत खुस हो गया ऐसी खुसी तो मुझे मेरे पुरे जीवन में कभी नहीं हुआ था मई इस लेवल को पाने के लिए पुरे 300 साल तक ट्रेनिंग किया था लेकिन आखिर में मेरा म्हणत काम किया और मई लेवल 1 में पहुंच गया फिर मई उत्साहित होते हुए मैडिटेशन करने लगा अब मई पहले से दोगुना जोश के साथ ट्रेनिंग कर रहा था.

भले hi मुझे लेवल 1 में पहुंचने के लिए 300 साल लगे लेकिन लेवल मई 50 साल में प् लिया था ऐसे hi समय बीतता गया और मई अपने कठिनाई और भावनाओ से लड़ते हुए और अपना लेवल बढ़ाते हुए 1000 साल इस बिराने जगह में गुजर दिए आज मुझे इस बिराने जगह में आये hi पुरे 1000 साल हो गया था और मई आज hi सुडो ग्रांडमास्टर लेवल पर पंहुचा था जैसे hi मई सुडो ग्रांडमास्टर लेवल पर पंहुचा तो मुझे अमरनाथ के आवाज सुनाई दिया.

अमरनाथ- बहुत अच्छा तुमने अपना पहला परीक्षा पर कर के ये साबित कर दिया की तुम्हारे अंदर धैर्य और सहनशीलता मौजूद है तुम समय की शक्ति हासिल करने के एक कदम आगे बढ़ गए हो अब तुम्हे आगे बढ़ने के लिए दूसरी परीक्षा देनी पड़ेगी जो है न्याय की तो क्या तुम तैयार हो अपनी दूसरी परीक्षा देने के लिए.

मई- जी मई तैयार हु.

मेरा इतना बोलना hi था की वह चारो तरफ कोहरा फ़ैल गया फिर थोड़ी देर बाद वो कोहरा छटा तो मई वह के दृस्य देख कर चौक गया क्युकी मई इस वक़्त एक गुफा के अंदर था तभी मुझे अमरनाथ के आवाज सुनाई दी.

अमरनाथ- तुम्हे अपने दूसरे परीक्षा को इस गुफा में देना होगा तुम जब इस गुफा में आगे बढ़ोगे तो तुम्हे इस गुफा में 2 मोड़ मिलेंगे और तुम्हे उन दोनों मोड़ पर hi न्याय की परीक्षा देना होगा तुम्हे उन दोनों मोड़ पर एक उचित न्याय करना होगा तभी तुम इस परीक्षा को पास कर पाओगे.

अमरनाथ के बात सुन कर मई समझ गया की मई यहाँ पर क्यों आया हु इस लिए मई आत्मविश्वास के साथ उनसे बोलै.

मई- मई तैयार हु दूसरी परीक्षा देने के लिए.

इतना बोल कर मई उस गुफा में आगे बढ़ गया थोड़ी देर चलने के बाद मई उस गुफा के एक मोड़ पर गया तो अचानक से मई वह से गायब हो कर एक जंगल में पहुंच गया जैसे hi मई वह पंहुचा तो देखा की एक 25 से 30 साल का आदमी एक टाइगर से अपना जान बचते हुए भाग रहा है और टाइगर उस आदमी को खाने के लिए उसका पीछा कर रहा है ये देख कर मई चौक गया और मेरे मन में तुरंत एक ख्याल आया की मुझे किसी भी तरह से इस आदमी को बचाना होगा मेरे पास इतनी शक्ति रहते हुए भी अगर मई इस आदमी को नहीं बचा पाया तो मेरे पास शक्ति होने का मतलब hi क्या है अभी मई ये सब सोच hi रहा था की तभी उस आदमी के नजर मुझ पर पड़ी और वो भागते हुए मेरे पास आया और मुझसे बोलै.

आदमी- प्लीज मुझे इस टाइगर से बचा लीजिये नहीं तो ये मुझे मर कर खा जायेगा अगर मई मर गया तो मेरे घर पर 2 बचे है वो अनाथ हो जायेंगे और भूख से तड़प तड़प कर मर जायेंगे क्युकी उनको मेरे शिवा कोई और नहीं है मेरी बीवी मुझे और मेरे बचे को छोड़ कर 1 साल पहले hi मर गयी है इस लिए आप मुझे इस टाइगर से बचा लीजिये.

उस आदमी के बात सुन कर मुझे उस पर बहुत दया आया और मई पका मन बना लिया की मुझे किसी भी तरह से इस आदमी को बचाना hi होगा नहीं तो उसके साथ इसके बचे भी मर जायेंगे ये सोचते हुए मई उस आदमी को अपने पीछे कर लिया और उस टाइगर से लड़ने के लिए तैयार हो गया.

इधर उस टाइगर ने देखा की मई उसके और उसके शिकार के बिच में आ गया हु तो वो गुस्से से तेज़ दहाड़ लगाया और मुझे मरने के लिए वो अपने तेज़ रफ़्तार में मेरे पास आने लगा इधर मैंने जब देखा की वो टाइगर मुझ पर हमला करने के लिए मेरे तरफ बढ़ रहा है तो मई भी उससे लड़ने के लिए तैयार हो गया.

इधर वो टाइगर भागते हुए मेरे पास आया और मुझ पर हमला करने के लिए छलांग लगा दिया मई उसके हमले से खुद को बचाया और उस टाइगर के जबड़े पर एक पंच मर दिया जिससे वो टाइगर कुछ दूर जा कर गिरा मेरे ताकतवर पंच के कारन उस टाइगर के मुँह से खून आने लगा था वो टाइगर किसी तरह से खड़ा हुआ और मेरे पास आ कर इंसानी आवाज में मुझसे बोलै.

टाइगर- वह रे इंसान यही तुम्हारी न्याय है की एक भूखे के मुँह से उसका निवाला छीन लो.

मई उस टाइगर को इंसानी भासा में बात करते हुए सुन कर हैरान हो गया लेकिन मुझे तुरंत यद् आया की मई अभी समय शक्ति के लिए परीक्षा दे रहा हु और इस परीक्षा में कुछ भी होना संभव है इस लिए मई तुरंत उस टाइगर के बातो का जबाब देते हुए बोलै.

मई- तुम इस जंगल में जाकर किसी और जानवर का शिकार कर लो लेकिन मई तुम्हे इस आदमी को कुछ भी करने नहीं दूंगा क्युकी पहली बात तो ये है की ये अभी मेरे शरण में है और मेरा उसूल कहता है की मई अपने शरण में आये हुए किसी भी जानवर या इंसान को कुछ भी न होने दू और दूसरी बात की अगर इसे कुछ हो गया तो उसके घर पर 2 बचे है वो भी इसी के साथ मर जायेंगे इस लिए तुम अपने लिए कोई दूसरा शिकार धुंध लो.

मेरे बात को सुन कर टाइगर हस्ते हुए मुझसे बोलै.

टाइगर- वह रे इंसान तुझे तो ये दिख गया की उसे कुछ होगा तो इसके साथ इसके बचे मर जायेंगे लेकिन मेरे बचो का क्या जो अभी मेरे मंद भूख से तड़प रहे है अगर मई इसे मर कर अपने बचो को खाने के लिए नहीं दूंगा तो वो भी भूख से मर जायेंगे तो क्या तुम इस और इसके बचो को बचने के लिए मेरे बचो को मरोगे.

मई- मई इसी लिए तो बोल रहा हु की तुम इस आदमी को छोड़ दो और दूसरे जानवर का शिकार कर लो.

मेरे बात सुन कर टाइगर निराशा से अपना सर न में हिलाते हुए मुझसे बोलै.

टाइगर- इस जंगल में मेरे अलावा कोई और जानवर नहीं है इस लिए मेरे बचे काफी दिनों से भूखे है आज मई जंगल में शिकार धुंध रहा था तो मेरी नजर उस इंसान पर पड़ी तो मई सोचा की आज मेरे बचो का भूख मिट जायेगा लेकिन तुम बिच में आ कर इस इंसान को बचा रहे हो इस लिए अब तुमसे मुझे न्याय चाहिए या तो तुम इस इंसान के बदले मुझे कोई और शिकार का कर दो या फिर मुझे मेरे बचो के साथ जान से मर दो.

मई उस टाइगर के बात सुन कर सोच में पद गया मुझे समझ में hi नहीं आ रहा था की मई क्या करू इस लिए मई उस टाइगर से बोलै.

मई- मई तुम्हे इस इंसान को कोई नुकसान नहीं पहुंचने दूंगा और मई न hi तुम्हे और तुम्हारे बचो को भूख से मरने देना चाहता हु इस लिए अब तुम hi मुझे कोई उपाय बताओ की मई तुम्हे और तुम्हारे बचो का पेट कैसे भरु.

मेरे बात को सुन कर वो टाइगर कुछ देर के लिए संत रहा और फिर मुझसे बोलै.

टाइगर- इस जंगल में कोई और दूसरा शिकार मौजूद नहीं है इसलिए अगर तुम इस इंसान को बचाना चाहते हो तो तुम्हे खुद मेरा और मेरे बचो का भोजन बनना होगा अगर तुम इसके लिए तैयार हो तो ठीक है वर्ण तुम खुद मेरे साथ चलकर अपने हाथो से मुझे और मेरे बचो को मर दो.

उस टाइगर के बात सुन कर मेरा हालत hi ख़राब हो गया मुझे समझ में नहीं आ रहा था की मई क्या करू मई इस आदमी को कुछ होने भी नहीं दे सकता था और अपने हाथो से इस टाइगर और इसके बचो को कोई नुकसान भी नहीं पंहुचा सकता था बहुत सोचने के बाद आखिर में मई उस टाइगर से बोलै.

मई- ठीक है यदि तुमको और तुम्हारे बचो को मुझे खाने के बाद पेट भर जायेगा तो मई तुम्हारा भोजन बनाने के लिए तैयार हु आओ और आकर मुझ पर हमला करो और अपना भोजन बना लो.

मेरे बात को सुन कर उस टाइगर के होतो पर एक रहस्यमयी मुस्कान आ गयी और वो मेरे ऊपर हमला करने के लिए अपने मुँह को पूरा खोल कर छलांग लगा दिया जैसे hi मेरा सर उसके मुँह में जाने वाला था की अचानक मई वह से गायब हो गया और फिर से उस गुफा के पहले मोड़ पर आ गया तभी मुझे अमरनाथ की आवाज सुनाई दी.

अमरनाथ- बहुत अचे तुम अपने न्याय से इस गुफा के पहला मोड़ को पर कर लिया है अब तुम दूसरे मोड़ के लिए आगे बढ़ सकते हो.

अमरनाथ के बात सुन कर मई आगे बढ़ गया और थोड़ी hi देर में मई दूसरे मोड़ पर पहुंच गया जैसे hi मई दूसरे मोड़ पर अपना पहला कदम रखा वैसे hi मई बेहोश हो कर वही गिर गया फिर जब मुझे होश आया तो मई एक आलीशान कमरे के आलीशान बीएड पर सोया हुआ था और मेरे बगल में शनाया सोई हुयी थी मई शनाया को देख कर चौक गया क्युकी शनाया इस वक़्त राजशी पोशाक पहनी हुयी थी उसे देख कर लग रहा था की वो कही के महारानी है

अभी मई उसे देख कर हैरान hi था की तभी मेरी नजर सामने लगा हुआ बड़ा सा आइना पर गया उस आइना में मई खुद को देख कर और भी हैरान हो गया क्युकी मई इस वक़्त रहा महाराजाओ वाला कपडा पहना हुआ था फिर मई मुद कर शनाया को देखने लगा फिर सोचने लगा की मई तो अभी न्याय की परीक्षा दे रहा था तो मई यहाँ कैसे आ गया और फिर मेरे परीक्षा में शनाया क्या कर रही है.

अभी मई अपने सोचो में खोया हुआ hi था की तभी मुझे शनाया के आवाज सुनाई दी.

शनाया- महाराज आप क्या सोच रहे है.

शनाया के मुँह से खुद के लिए महाराज सुन कर मई समझ गया की इस न्याय के परीक्षा में मई किसी देश का राजा हु और शनाया मेरी रानी है फिर मई अपने सोच से बहार निकल कर शनाया से बोलै.

मई- कुछ नहीं महारानी बस ऐसी hi मई आपके बारे में सोच रहा था.

मेरी बात सुन कर शनाया उत्साहित हो गयी और ये जानने के लिए बेताब हो गयी की आखिर मई उसके बारे में क्या सोच रहा था इस लिए वो मुझसे बोली.

शनाया- आप मेरे बारे में क्या सोच रहे थे महाराज.

शनाया के बात सुन कर मई उसके आँखों में देखते हुए मुस्कुरा कर बोलै.

मई- बस मई तुम्हे देख कर ये सोच रहा था की मई कितना किस्मत वह इंसान हु की मुझे तुम जैसी बीवी मिली है मई सच कहु तो महारानी मई तुम्हे प् कर धन्य हो गया.

मेरी बात सुन कर शनाया शर्मा गयी और शरमाते हुए मुझसे बोली.

शनाया- आप मुझसे इतना प्यार करते है अगर किसी दिन मुझे कुछ हो गया या कोई मर दिया तो.

मई शनाया के बात सुन कर विचलित सा हो गया और तुरंत अपना हाथ शनाया के मुँह पर रखते हुए बोलै.

मई- सुबह सुबह बोलिये महारानी आपको कुछ भी नहीं हो सकता और किसी के मजाल नहीं है की मेरे रहते हुए कोई आपको कुछ नुकसान पंहुचा दे.

मेरी बात सुन कर खुस हो गयी फिर कुछ सोचते हुए मुझसे बोली.

शनाया- फिर भी महाराज अगर कोई मुझे कुछ हानि पहुंचना चाहे तो आप क्या करोगे.

मई- शनाया ऐसा तो कुछ होगा नहीं लेकिन कभी ऐसा परस्थिति आयी तो मई तुम्हे बचने देता हु की मेरे जीवित रहते तुम्हे कोई भी हानि नहीं पंहुचा सकता चाहे वो कोई भी हो.

मेरी बात को सुन कर शनाया मुस्कुराते हुए मेरे गले लग गयी फिर दोनों वैसे hi सो गए दूसरे दिन सुबह उठ कर मई और शनाया फ्रेश हुआ और फिर मई शनाया को वही छोड़ कर राजदरबार में आ गया जब मई राजदरबार में आया तो देखा की वह पर मंत्री लोग पहले hi आ चुके थे.

इधर मई जैसे hi राजदरबार में एंटर किया तो सरे मंत्री मेरे सामान में खड़े हो कर अपना सर झुका लिए जिसे देख कर मई उनको अपना सर उठाने के लिए इशारा किया और मई अपने सिंघासन पर जा कर बैठ गया और सिंघासन पर बैठने के मई अपने मंत्रियों को बोलै.

मई- आप सब बैठ जाइये प्रधान मंत्री जी आज हमारे दरबार में कितने लोग न्याय के लिए आये हुए है.

मेरे बात को सुन कर प्रधान मंत्री अपना सर झुकाते हुए बोले.

प्रधानमंत्री- महाराज आज हमारे राजदरबार में एक hi औरत आयी है जिसे आपसे न्याय चाहिए.

मई- ठीक है उन्हें राजदरबार में पेश किया जाये.

मेरे बात को सुन कर प्रधानमंत्री एक सैनिक को इशारा किया तो वो सैनिक वह से बहार चला गया कुछ देर बाद वो सैनिक एक औरत के साथ अंदर आया वो औरत अपने गॉड में एक बचा ली हुयी थी.

वो औरत राजदरबार में आने के बाद अपने दोनों हाथ जोड़ कर मुझे प्रणाम किया तो मई उससे पूछा.

मई- तो वो आप है जिसने न्याय चाहिए.

औरत- जी महाराज मुझे hi आपसे न्याय चाहिए लेकिन मई अपना बात बताने से पहले आपसे बचन चाहता हु की आप मुझे न्याय जरूर करेंगे चाहे वो न्याय आपके hi खिलाफ क्यों न हो.

उस औरत के बात सुन कर मई उसे मुस्कुराते हुए बोलै.

मई- मई आपको वचन देता हु की आपको न्याय जरूर मिलेगा चाहे वो न्याय राज परिवार या मेरे hi खिलाफ क्यों न हो तो अब आप बेझिझक बताइये की आपके साथ क्या हुआ है और आप किस बात के लिए न्याय मांग रही है.

मेरी बात को सुन कर वो औरत कुछ देर के लिए चुप रही फिर वो मुझसे बोली.

औरत- महाराज मई आपके राज्य के सिमा से लगे एक गाओं की किशन हु मेरा गाओं आपके पडोसी राज्य में आता है आज से पांच दिन पहले मेरे पति अपने खेतो में काम कर रहे थे तभी आपके hi राज्य के किसी अपने तीर से मेरे पति का हत्या कर दिया है इस लिए मई आपके पास न्याय मांगने आयी हु तो क्या आप मेरे प्रति निष्ठां से न्याय करेंगे.

उस औरत के बात सुन कर दरबार में मौजूद सरे लोग हैरान हो गए तभी प्रधानमंत्री उस औरत पर गुसा होते हुए बोलै.

प्रधानमंत्री- तुम ये कैसी बाटे कर रही हो भला हमारे राज्य के किसी को तुम्हारे पति से क्या दुश्मनी है जो वो तुम्हारे पति की हत्या किया है और वैसे तुम्हारे पास साबुत क्या है जिस आधार पर तुम ये बोल रही हो.

प्रधानमंत्री के बात सुन कर वो औरत अपने अचल से एक तीर निकली जो उसने सबसे छुपा कर राखी थी ताकि कोई इस तीर को पहचान कर उससे वो तेरे छीन न ले उस औरत ने वो तीर मुझे दिखते हुए बोली.

औरत- महाराज ये देखिये ये वही तीर है जिससे मेरे पति का हत्या हुआ था और इस तीर पर आपके राज्य के चिन्ह है अब आप बताइये की आपके राज्य का कोई मेरे पति की हत्या नहीं किया है तो ये तीर मेरे पति के पास कैसे आया है.

उस औरत के बात सुन कर मई प्रधानमंत्री को देखते हुए बोलै.

मई- प्रधानमंत्री जी आप इस तीर को अच्छे से जाँच कर बताइये की क्या वो तीर सच में हमारे राज्य का hi है.

प्रधानमंत्री- जी महाराज मई अभी पता लगता हु.

इतना बोल कर प्रधानमंत्री उस तीर को ध्यान से देखते है और उसपर पर बने हुए चिन्ह को देख कर वो मुझसे बोले.

प्रधानमंत्री- जी महाराज हे औरत सही बोल रही है ये तीर हमारे hi राज्य का है और सबसे खास बात ये है की इस तीर को चलने का अधिकार सिर्फ राजघराने को hi है.

प्रधानमंत्री के बात सुन कर वो औरत मुझसे बोली.

औरत- आप इस धरती पर सबसे न्याय प्रिये राजा के रूप में जाने जाते है तो अब आप मुझे न्याय कीजिये और मेरे पति के कातिल को सजा दे कर मुझे न्याय दीजिये.

मई उस औरत के बात सुन कर मई कुछ देर के लिए संत हो गया फिर मई उस औरत से बोलै.

मई- आप चिंता मत कीजिये आपको न्याय जरूर मिलेगा और मई आपके पति के हत्यारे को सजा जरूर देंगे.

फिर मई प्रधानमंत्री के तरफ देखते हुए बोलै.

मई- आप ब्यक्तिगत रूप से जाकर पता कीजिये की ये तीर किसकी है और इसे किसने चलाया है.

प्रधानमंत्री- जैसी आपकी आज्ञा महाराज.

इतना बोल कर प्रधानमंत्री वह से चले जाते फिर करीब 1 घंटे बाद वो दरबार में आते है आकर मेरे कानो में धीरे से बोलते है.

प्रधानमंत्री- महाराज मैंने इस तीर को चलने वाले का पता लगा लिया है.

मई- कोण है वो दोषी जिसने इस औरत के मांग को उजड़ा है.

प्रधानमंत्री- महाराज जिसने इस तीर को चलाया था वो कोई और नहीं बल्कि महारानी शनाया है.

जैसे प्रधानमंत्री के बात मैंने सुना तो मुझे बिस्वास hi नहीं हुआ इस लिए मई प्रधानमंत्री से थोड़े घुसे से बोलै.

मई- आप क्या बोल रहे है ये आपको पता है न अगर आपकी बात झूठी निकली तो आपको मौत की सजा भी हो सकती है.

मेरे बात को सुन कर प्रधानमंत्री दर गए और डरते हुए मुझसे बोले.

प्रधानमंत्री- माफ़ी चाहूंगा महाराज अगर आपको मेरी बात बुरी लगी हो तो लेकिन मैंने जो भी आपको बताया वो सब सच है.

प्रधानमंत्री के बात सुन कर मेरा दिल अंदर hi अंदर टूट रहा था लेकिन मई किसी तरह खुद को सँभालते हुए उस औरत को बोलै.

मई- अपने पति के कातिल मिल गया है लेकिन मई कोई फैसला सुनाने से पहले दोषी का भी बात सुन्ना चाहुगा प्रधानमंत्री जी दोषी को हमारे सामने लाया जाये

मेरी बात को सुन कर प्रधानमंत्री जी गया महाराज बोल कर कुछ सैनिक अपने साथ लिए और वह से महारानी को लेन के लिए चले गए.

इधर शनाया अपने रूम में बैठ कर दसियो से अपना श्रीनगर करवा रही थी तभी एक दासी अंदर आयी और बोली.

दासी- महारानी प्रधानमंत्री आपसे मिलने के लिए अंदर आना चाहते है.

दासी के बात सुन कर शनाया सोच में पद गयी की प्रधानमंत्री आखिर उससे मिलने क्यों आये है फिर वो कुछ सोचते हुए दासी से बोली.

शनाया- उनको अंदर ले कर आओ.

दासी- जी महारानी.

इतना बोल कर दासी बहार चली गयी और थोड़ी hi देर में प्रधानमंत्री और कुछ सैनिकों के साथ अंदर आ गयी इधर प्रधानमंत्री अंदर आते hi महारानी के आगे अपना सर झुकाया और फिर शनाया से बोलै.

प्रधानमंत्री- महाराज ने आपको पडोसी राज्य के एक किशन के हत्या के मामले में आपको गिरफ्तार कर के दरबार में लेन को बोलै है इस लिए कृपया आप हमारे साथ आइये.

जैसे hi शनाया ने प्रधानमंत्री के बात सुनी तो वो हैरान हो गयी लेकिन वो मेरे आज्ञा तक नहीं सकती थी इस लिए वो प्रधानमंत्री के साथ दरबार में आ गयी जैसे hi वो दरबार में आयी तो उसको नजर उस औरत के हाथ में पकडे हुए तीर पर गया जिसे देख कर वो हैरान हो गयी और थोड़ा दर भी गयी.

इधर जैसे शनाया दरबार में आयी तो मेरी नजर शनाया पर गयी जिसके माथे से पसीना निकल रहा था फिर मई कुछ सोचते हुए शनाया से बोलै.

मई- महारानी क्या ये तीर आपका है.

मेरी बात को सुन कर शनाया हकलाते हुए बोली.

शनाया- जज्ज जी ममम महाराज ययय ये तट तीर मेरा hi है.

शनाया के बात सुन कर मई धाम से अपने सिंघासन पर hi गिर जाता हु मुझे समझ में नहीं आ रहा था की मई कैसे इस औरत को न्याय दू मैंने शनाया को रत में बचन दिया था की मई उसे कुछ नहीं होने दूंगा और आज मई इस औरत को भी बचन दे दिया की मई उसके पति के कातिल को सजा दे कर उसे नये दूंगा मुझे समझ में नहीं आ रहा था की मई क्या करू फिर मैंने सोचा की मई पहले शनाया से साडी बात जान लेता हु इसके बाद इसके बारे में सोचूंगा.

मई- आप मुझे बताएंगी की आपका ये तीर इस औरत के पति को कैसे लगा.

मेरी बात को सुन कर शनाया डरते हुए बोली.

शनाया- महाराज www वो मई कुछ दिन पहले शिकार पर गयी थी और मैंने इस तीर को एक हिरन पर चलाया था लेकिन मुझे न तो वो हिरन मिला और न hi ये तीर मुझे नहीं पता था की मेरे तीर से किसी की जान चली जाएगी मुझे माफ़ कर दीजिये महाराज वह जो भी हुआ वो अनजाने में हुआ.

शनाया के बात सुन कर मई समझ गया की शनाया से उस किसान की हत्या गलती से hi गया है फिर मई उस औरत को देखने लगा जिसके चेहरे पर मुझे शनाया के लिए नफरत दिखाई दे रही थी मुझे इन दोनों को देख कर समझ नहीं प् रहा था की मई क्या करू बहुत देर तक ऐसे hi सोचने के बाद मैंने सोचा की मुझे अपने बचन से ज्यादा न्याय पर ध्यान देना चाहिए अगर मई आज अपने पत्नी को कोई सजा नहीं देता हु तो सदा के लिए मेरे ऊपर पक्षपात का इल्जाम लग जायेगा इस लिए मई उस औरत को देखते हुए उस औरत से बोलै.

मई- आपका दोषी अपने सामने कड़ी है तो अब आप बताइये की आपको मुझसे किस तरह का न्याय चाहिए आप जैसा बोलेंगी मई वैसा hi करूँगा.

मेरी बात सुन कर वो औरत शनाया को नफरत से देखते हुए बोली.

औरत- मई चाहती हु की जिस तरह से मई अपने पति के वियोग में तड़प रही हु वैसे ये भी तड़पे जैसे इसने मेरे पति की हत्या की है वैसे hi मई भी उसके पति का हत्या अपने हाथो से करना चाहती हु.

उस औरत के बात सुन कर दरबार में बैठे सरे लोग हैरान हो गए सबसे ज्यादा हैरान तो शनाया हो गयी थी शनाया जल्दी से अपने घुटनो के बल गिर कर उसको औरत से गिड़गिड़ाते हुए बोली.

शनाया- कृपया आप मेरे साथ ऐसा मत कीजिये आपके पति की हत्या मुझसे अनजाने में हो गया है अगर गलती किसी से हुयी है तो वो मुझसे हुयी है इसमें मेरे पति का कोई दोष नहीं है इसलिए अगर आपको सजा देना है तो मुझे दीजिये मेरे पति को नहीं.

शनाया के बात सुन कर उस औरत ने उसके तरफ से अपना मुँह फेर लिया और मुझसे बोली.

औरत- अगर आपको मेरे साथ न्याय करना है तो मई जो चाहती आप वैसा hi कीजिये अन्यथा मई यहाँ से बिना न्याय के hi चली जाउंगी.

उस औरत के बात सुन कर मई उस औरत से गंभीर आवाज में बोलै.

मई- आपको कही जाने की जरुरत नहीं है आपकी न्याय जरूर मिलेगा (फिर प्रधानमंत्री से) आप इस औरत को एक तीर और कमान दीजिये ये मेरी आज्ञा है.

मेरे आज्ञा को सुन कर प्रधानमंत्री तुरंत एक तीर और कमान लेकर वह आ गए और उस औरत को दे दिया वो और उस तीर और कमान को लेकर मुझसे बोली.

औरत- अपने मुझे तीर और धनुष तो दे दिया लेकिन मेरी दोषी कहा है.

उस औरत के बात सुन कर मई उसके सामने आते हुए बोलै.

मई- मई hi हु इस औरत का पति जिसे आप अपने हाथो से मरना चाहती है इस लिए आप मेरे ऊपर तीर चला कर मेरी हत्या करके अपना बदला ले लीजिये.

मेरी बात सुन कर उस औरत को एक झांकता लगा और वो हैरानी में मुझे देखने लगी फिर वो मुझे और शनाया को घुसे से घूरते हुए बोली.

औरत- आप महाराज हो या कोई और मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता आपके पत्नी के मेरा सुहाग उजाड़ कर मुझे विधवा बना दिया और अब मई भी आपको मर कर उसे विधवा बनाउंगी ताकि उसे भी ये महसूस हो की जब पति का छाया सरे से उठ जाता है तो कैसा महसूस होता है.

इतना बोल कर उस औरत ने अपने हाथ में पकडे हुए धनुष पर बन संधान किया और मेरे तरफ निशाना लगा दिया इधर जैसे hi उस औरत ने मेरे तरफ निशाना लगाया शनाया के साथ साथ दरबार में मौजूद सरे लोगो के शरीर की खून hi सुख गया लेकिन मई अभी भी शान से अपना सर उठाये उस औरत के सामने खड़ा था मेरे चेहरे पर दर का कोई नमो निशान नहीं था बल्कि मेरे चेहरे पर गर्व दिखाई दे रहा था जब उस औरत ने देखा की मेरे चेहरे पर दर का कोई भाव नहीं है बल्कि मई गर्व से उसके सामने सर उठा कर खड़ा हु तो वो औरत मुझसे पूछ बैठी.

औरत- महाराज क्या आपको मरने से दर नहीं लगता है क्या जो आप इस तरह से गर्व से अपने मौत के सामने खड़े है.

उस औरत के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए उससे बोलै.

मई- मई भला क्यों डरने लगा मुझे मौत से कोई दर नहीं बल्कि मुझे अपने आप पर गर्व महसूस हो रहा है की मई अपने न्याय के लिए बलिदान दे रहा हु मुझे गर्व है खुद पर की मई मरते समय भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटा.

मेरी बात सुन कर उस औरत के चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी और वो मुझसे बोली.

औरत- आप धन्य है महराज मैंने आज तक आपके जैसा न्याय प्रिये राजा न कभी देखा है और न hi सुना है आप जीते जागते न्याय के एक मूर्ति है.

उस औरत का इतना hi बोलना था की वह का सारा दृस्य गायब हो गया और मई खुद को उसी गुफा के दूसरे मोड़ पर पाया अभी अभी जो मेरे साथ हुआ मई उसके बारे में hi सोच रहा था की तभी मुझे अमरनाथ के आवाज सुनाई दिया.

अमरनाथ- बहुत अच्छा बचे तुमने दूसरे परीक्षा न्याय को भी सफलता पूर्वक पर कर लिया है तुम समय शक्ति के तरफ एक कदम और बढ़ गए हो अब बरी है तीसरे परीक्षा की जो है लोभ की परीक्षा तो क्या तुम लोभ का परीक्षा देने के लिए तैयार हो.

मई- जी मई लोभ के परीक्षा देने के लिए तैयार हु.

मेरे इतना बोलना hi था की वह पर चारो तरफ कोहरा फ़ैल गया और और वो कोहरा मुझे चारो तरफ से घेरने लगा जब वो कोहरा मुझे चारो तरफ से घेर लिया इसके बाद मेरी आँखे धीरे धीरे बंद होने लगी और कुछ hi पल में मेरी आंख पूरी तरह से बंद हो गयी फिर मई दोबरा अपनी आँखे खोला तो मई हैरान हो गया था क्युकी अब मेरे सामने का सीन बिलकुल बदल गया था अब मई कोई गुफा में नहीं था बल्कि एक खुले जगह पर खड़ा था और मेरे सामने एक बहुत बड़ी बड़ी थी जिसके लहरे उफान मर रहा था अभी मई उस नदी को देख hi रहा था की तभी मुझे अमरनाथ की आवाज सुनाई दी.

अमरनाथ- बचे इसी नदी में तुम्हारी लोभ का परीक्षा हो होगा ये नदी लोभ का नदी है इस परीक्षा में तुम्हे इस नदी को पर करना होगा जब तुम इस नदी में उतरोगे तो ये नदी तुम्हे लोभ देना सुरु कर देगा अगर तुम इस नदी के दिए गए लोभ में नसी फेज तो तुम आसानी से इस नदी को पर कर जाओगे लेकिन अगर तुम्हारे अंदर कोई भी लोभ उत्पन हुआ तो ये नदी सदा के लिए तुम्हे अपने अंदर समां लेगा इस लिए तुम सोच समझ कर ये परीक्षा देना क्युकी यहाँ तुम्हारी जान भी जा सकती है तो क्या तुम तैयार हो तीसरे परीक्षा के लिए.

मई- जी मई बिलकुल तैयार हु.

अमरनाथ- अगर तुम तैयार हो तो तुम आगे बढ़ सकते हो लेकिन एक बात मेरी यद् रखना तुम अगर लोभ करोगे तो इसी नदी में मरे जाओगे और है एक बात और है जैसे hi तुम इस नदी में अपना पहला कदम रखोगे वैसे hi तुम ये भूल जाओगे की तुम इस वक़्त लोभ का परीक्षा दे रहे हो.

अमरनाथ के बात सुन कर मई अपना गर्दन है में हिलाया और उस नदी के तरफ बढ़ गया.

इधर पटना शहर में आज कुशवाहा मेंशन को बहुत अच्छी तरह से सजाया हुआ था क्युकी आज मृत्युंजय कुशवाहा का सगाई पूनम से होने वाली थी इधर मृत्युंजय अपने सगाई के लिए रेडी हो रहा था लेकिन उसका मन थोड़ा उदास था वो उदास इस लिए था की आज इतने सुबह दिन पर उसके डैड उसके साथ नहीं थे वो किसी तरह से अपने आप को संत कर के रेडी हुआ और अपने रूम में लगे अपने डैड के फोटो के सामने जा कर दोनों हाथ जोड़ कर प्रणाम करते हुए बोलै.

मृत्युंजय- आशीर्वाद दीजिये डैड आज आपका ये बीटा आपकी आखरी खवाइश पूरी करने जा रहा है.

इतना बोलने के बाद मृत्युंजय के आँखों में आंसू आ गया और वो रट हुए बोलै.

मृत्युंजय- अपने ये अच्छा नहीं किया डैड पहले माँ छोड़ कर गयी और अब आप चले गए मई आपके बिना कैसे रह पाउँगा डैड आज मेरी खुसी में आप शामिल नहीं है ये जान कर मेरे दिल में कितना दर्द हो रहा है ये मई आपको कैसे बताऊ डैड मई आपसे एक बात बोलू डैड पता नहीं क्यों आज सुबह से hi मेरा दिल बेचैन हो रहा है ऐसा लग रहा है डैड की कुछ गलत हो वाला है मुझे समझ में नहीं आ रहा है डैड की मई क्या करू मेरा एक मन बोल रहा है की मई अभी ये सगाई नहीं करू तो एक मन बोल रहा है की ये आपकी आखरी खवाहिश है तो मुझे इसे पूरा करना hi होगा और सच कहु तो डैड मई पूनम से बहुत प्यार करता हु और मई उसे खोने से डरता हु.

अभी मृत्युंजय अपने डैड के फोटो से बात कर hi रहा था की तभी दरवाजा खटखटाने का आवाज आया जिसे सुन कर मृत्युंजय अपने आँखों से निकलने वाला आंसू पोछा और बोलै.

मृत्युंजय- कोण है.

मृत्युंजय के बात सुन कर बहार खड़ा आदमी जो की मृत्युंजय के चाचा सुरेंद्र कुशवाहा थे वो बोले.

सुरेंद्र- मृत्युंजय मई हु सुरेंद्र.

अपने चाचा के आवाज सुन कर मृत्युंजय उनसे बोलै.

मृत्युंजय- क्या चाचा आप भी आपको कब से दरवाजा खटखटाने की जरुरत पद गयी आप डायरेक्ट भी अंदर आ सकते थे.

मृत्युंजय के बात सुन कर सुरेंद्र मुस्कुराते हुए अंदर आ गए और मृत्युंजय से बोले.

सुरेंद्र- अब तुम अकेले नहीं रहने वाले हो बीटा अब तुम एक से दो होने वाले हो इस लिए मई दरवाजा खटखटाने का आदत दाल रहा हु.

सुरेंद्र के बात सुन कर मृत्युंजय थोड़ा सा शर्मा गया फिर वो बात को बदलते हुए बोलै.

मृत्युंजय- अंकल आप यहाँ क्यों आये कुछ काम था क्या.

मृत्युंजय के बात सुन कर सुरेंद्र अपने सर पर चपत लगते हुए बोलता है.

सुरेंद्र- अरे यार मई तो भूल hi गया था की यहाँ मई किस काम से आया था वो दरअसल बहार सगाई के लिए सब तुम्हारा इंतज़ार कर रहे है तुम जल्दी चलो.

मृत्युंजय- ठीक है अंकल आप चलिए मई थोड़ी देर में आता हु.

मृत्युंजय के बात सुन कर सुरेंद्र वह से बहार जाते हुए बोलता है.

सुरेंद्र- लेट नहीं करना क्युकी बहार सब तुम्हारा इंतज़ार कर रहे है.

इतना बोल कर वो वह से चले उनके जाने के बाद मृत्युंजय एक नजर अपने डैड और माँ के फोटो पर डालता है और फिर रेडी हो कर बहार आ जाता है जब वो सीढ़ियों से निचे उतर रहा था तो वह मौजूद सरे लड़किया मृत्युंजय के पर्सनालिटी और उसकी खूबसूरती में खो जाते है तो वही जितने भी लड़के मृत्युंजय के सगाई में आये थे वो मृत्युंजय को देख कर अपने दिल में जलन और ईर्ष्या महसूस करते है.

इधर पूनम के नजर जब मृत्युंजय पर पड़ता है तो वो मृत्युंजय को देख कर उसे देखते hi रह जाती है मृत्युंजय इतना हैंडसम लग रहा था की वो एक पल के लिए ये भूल hi गयी की वो किस मकसद से मृत्युंजय से इंगेजमेंट कर रही है इधर बसंत के नजर पूनम पे पड़ा तो वो ये देख कर हैरान हो गया की पूनम मृत्युंजय को बड़े ध्यान से देख रही है इस लिए वो चलते हुए पूनम के पास आया और उससे बोलै.

बसंत- अब ये तुम्हे पसंद आने लगा है क्या जो तुम इतने ध्यान से इसे देख रही हो.

अपने डैड के बात सुन कर पूनम हड़बड़ा गयी और अपने गर्दन न में हिलाते हुए बोली.

पूनम- नहीं डैड ऐसी कोई बात नहीं है और आपको तो पता hi है की मेरे दिल में कोई और है तो भला मई इसे कैसे पसंद कर सकती हु.

बसंत- और ऐसा होना भी नहीं चाहिए मई अपने मकसद के बहुत करीब हु और मई नहीं चाहता की तुम्हारी एक भूल के कारन मई अपने मकसद से दूर हो जाऊ अगर ऐसा हुआ तो तुम्हारे लिए मुझसे बुरा कोई नहीं होगा समझी.

बसंत के बात सुन कर पूनम दर गयी और डरते हुए बसंत से बोली.

पूनम- आप चिंता मत कीजिये डैड ऐसा कुछ भी नहीं होगा हम अपने मकसद में कामयाब जरूर होंगे.

इसके बाद पूनम और मृत्युंजय को स्टेज पर बुलाया जाता फिर दोनों एक दूसरे को रिंग पहनते है है हलाकि रिंग पहनते हुए मृत्युंजय खुश नहीं दिख रहा था उसके मन में बार बार कोई अनहोनी होने का संकेत आ रहा था लेकिन वो समझ नहीं पा रहा था की ऐसा क्यों हो रहा है इस लिए वो चुप चाप पूनम को रिंग पहना दिया इसके बाद वह थोड़ा बहुत डांस का प्रोग्राम हुआ और फिर सब खाना खाने के बाद अपने अपने घर के लिए निकल गए इधर पूनम और उसके माता पिता मृत्युंजय और सुरेंद्र के पास आये है और बसंत सुरेंद्र से बोलता है.

बसंत- अब हमें भी इजाजत दीजिये मई जल्द hi शादी के दिन निकलवा कर आपको से संपर्क करूँगा.

सुरेंद्र- जी ठीक है जैसा आप चाहे.

इसके बाद पूनम और उसके फॅमिली सब वह से अपने घर के लिए निकल जाते है रस्ते में बसंत पूनम से बोलता है.

बसंत- अब समय आ गया है की हम अपने प्लान का दूसरा फसे सुरु करे.

पूनम- जी डैड आपको जैसा ठीक लगे आप वैसा कीजिये मई आपके साथ हु.

इधर मृत्युंजय अपने रूम में उदास बैठा हुआ था आज पता नहीं क्यों उसे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था इस लिए वो आराम करने के लिए अपने बीएड पर लेट गया और उसे लेटते hi नींद आ गया करीब 5 घंटा सोने के बाद उसका नींद उसके मोबाइल के रिंग से टुटा उसके मोबाइल पर बसंत चौहान का कॉल आ रहा था अपने मोबाइल पर बसंत चौहान का कॉल देख कर वो हैरान हो गया क्युकी बसंत चौहान आज पहली बार उसे कॉल कर रहे थे इसलिए वो जल्दी से कॉल उठाया और बोलै.

मृत्युंजय- हैल्लो है अंकल बोलिये.

बसंत- बीटा मई तुम्हारे पास इस लिए कॉल किया हु की पूनम अपने दोस्तों से मिलने के लिए बोल कर घर गयी थी लेकिन अभी तक लौटी नहीं है तो मैंने सोचा की सायद वो तुमसे मिलने के लिए तुम्हारे पास चली गयी होगी इस लिए मैंने तुम्हे कॉल किया है अगर पूनम तुम्हारे साथ है तो उसे घर भेज दो.

बसंत के बात सुन कर मृत्युंजय चौक गया और उनसे बोलै.

मृतुन्जय- नहीं अंकल पूनम मेरे पास नहीं आयी है वो अपने किसी दोस्त के पास गयी हो आप उनसे कॉल कर के एक बार पूछ लीजिये.

बसंत- मैंने उसके सभी दोस्तों बात कर लिया लेकिन सब बोल रहे है की वो उनके पास नहीं आयी है.

बसंत के बात सुन कर मृत्युंजय घबरा गया और बसंत से बोलै.

मृत्युंजय- जब वो अपने किसी दोस्त के पास नहीं गयी है तो फिर आखिर वो गयी कहा आप चिंता मत कीजिये मई उसको ढूंढने के लिए जा रहा हु वो जैसे hi मुझे मिलेगी मई उसे ले कर आपके घर आ जाऊंगा.

इतना बोल कर मृत्युंजय कॉल काट दिया और जल्दी से रेडी होने लगा अभी वो रेडी हो कर बहार निकलने hi वाला था की तभी उसके मोबाइल पर एक पूनम के नंबर से कॉल आया पूनम के कॉल अपने मोबाइल पर आते हुए देख कर मृत्युंजय रहत की साँस लिया और कॉल रिसीव कर लिया और बोलै.

मृत्युंजय- पूनम तुम इस वक़्त कहा हो.

मृत्युंजय के आवाज सुन कर उधर से एक आदमी के हसने की आवाज आयी फिर वो आदमी मृत्युंजय से बोलै.

आदमी- है है है है तुम्हारी पूनम मेरे पास है और अगर तुम अपनी पूनम को बचाना चाहता है तो 20 करोड़ रूपए ले कर मई जहा आने के लिए बोलता हु वह आ जाओ और है कोई होसियार नहीं ये बात सिर्फ तुम्हारे hi तक रहनी चाहिए तुम ने बात किसी को भी नहीं बताओगे अगर तुमने ऐसा किया तो समझ लेना की तुम्हारी पूनम के साथ क्या क्या हो सकता है वैसे भी वो देखने में बहुत खूबसूरत है और खूबसूरत लड़किया मेरी कमजोरी है.

उस आदमी के बात सुन कर मृत्युंजय के हालत hi ख़राब हो गयी फिर वो डरते हुए उस आदमी से बोलै.

मृत्युंजय- देखो तुम तुम उसे कुछ मत करना मई किसी को कुछ नहीं बताऊंगा और तुम्हे 20 करोड़ hi चाहिए न तो ठीक है मई जल्द hi 20 करोड़ रूपए ले कर आता हु तबतक तुम पूनम को हाथ भी नहीं लगाओगे.

आदमी- ठीक है तुम 20 करोड़ ले कर आओ और है तुम्हारे पास सिर्फ 2 घंटे मुझे इन 2 घंटो में 20 करोड़ चाहिए नहीं तो फिर जानते hi हो की क्या होगा.

मृत्युंजय- नहीं नहीं मई तुम्हे 2 घंटे के अंदर 29 करोड़ देता हु बस तुम पूनम को कुछ मत करना.

आदमी- ठीक है मई तुम्हे अगल कॉल 2 घंटे बाद करूँगा तब तक तुम 20 करोड़ का इंतजाम करो.

इतना बोल कर वो कॉल कट कर देता है इधर कॉल काटने के मृत्युंजय को समझ hi नहीं आ रहा था की वो क्या करे क्युकी 2 घंटे में 20 करोड़ कॅश इंतजाम करना बहुत मुश्किल था अगर ये ऑनलाइन ट्रांसफर करने की बात होती तो कोई बात नहीं थी लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था की वो 20 करोड़ कॅश कैसे इंतजाम करे तभी उसका ध्यान एक के पर जाता है ये की उसके घर के सीक्रेट चेम्बर की थी जो उसके डैड दिल्ली जाने से पहले उसे दे कर गए थे.

मृत्युंजय उस के को लेता है और सीक्रेट चेम्बर के दरवाजे पर जा कर उसका दरवाजा खोलता है और अंदर चला जाता है इस सीक्रेट चेम्बर के बारे में सिर्फ दो लोग hi जानते थे एक मृत्युंजय के डैड और दूसरा मृत्युंजय दरअसल ये सीक्रेट चेम्बर इस घर के सबसे सीक्रेट जगह पर बनाई गयी थी जो सिर्फ इन दोनों बाप बेटे को hi मालूम था यहाँ ताकि की घर के कोई नौकर या सुरेंद्र भी इस जगह के बारे में नहीं जनता था लेकिन मृत्युंजय आज पहली बार इस सीक्रेट चेम्बर के अंदर आ रहा था नहीं तो आज तक उसे कभी मौका hi नहीं मिला था इस सीक्रेट चेम्बर में आने का.

वो जैसे hi सीक्रेट चेम्बर के अंदर आया तो वो ये देख कर हैरान हो गया की अंदर बहुत साडी कॅश गोल्ड और डायमंड रखे हुए थे इतने सरे पैसे देख कर मृत्युंजय के होश hi उड़ गए फिर वो अपने आप से बोलै.

मृत्युंजय- (खुद से) इसी लिए डैड कभी मुझे इस चैम्बर में नहीं ले कर आये ताकि मई इस चेम्बर के सीक्रेट के बारे में किसी से बता न दू.

इतना बोलने के बाद मृत्युंजय एक बैग में 20 करोड़ रूपए भरा और फिर वह से निकल गया चेंबर से बहार आने के बाद मृत्युंजय उस किडनैपर के फ़ोन का इंतजार करने लगा करीब 2 घंटा इंतजार करने के बाद उस किडनैपर का कॉल आया और उसने बोलै.

किडनैपर- पैसे का इंतजाम हो गया.

मृत्युंजय- है हो गया तुम मुझे जगह बताओ मई पैसे ले कर वह आता हु.

किडनैपर- वह बहुत जल्दी तुमने पैसे का इंतजाम कर लिया लगता है की तुम इस लड़की से बहुत प्यार करते हो.

मृत्युंजय- अपनी बकवास बंद करो और मुझे कहा आना है ये बताओ.

किडनैपर- ठीक है तो सुनो.....

इसके बाद उस किडनैपर ने मृत्युंजय को एक लोकेशन बताया जहा उसे पैसे ले कर जाना था उस किडनैपर के बाद सुन कर मृत्युंजय तुरंत पैसो से भरा हुआ बैग लिया और किडनैपर द्वारा बताया हुआ लोकेशन के लिए निकल गया किडनैपर ने जो लोकेशन बताया था वो मृत्युंजय के घर से आधे घंटे के दुरी पर था वो लोकेशन गंगा नदी के किनारे पर मौजूद था.

मृत्युंजय आधे घंटे बाद उस लोकेशन पर पहुंच गया तो उसने देखा की ये एक बहुत पुराण आइस फैक्ट्री थी जो बहुत साल पहले hi बंद हो गया था उस आइस फैक्ट्री के बहार करीब 10 गुंडे अपने हाथ में हथियार पकड़ कर उस जगह को गॉर्ड कर रहे थे जब उन गुंडों ने देखा की मृत्युंजय वह आ गया है तो एक गुंडा उसके पास गया और उसे अच्छे से तलाशी लिया इसके बाद वो उसे फैक्ट्री के अंदर जाने का इशारा किया.

उस गुंडे का इशारा मिलते hi मृत्युंजय उस फैक्ट्री के अंदर चला गया जब वो उस फैक्ट्री अंदर आया तो देखा की वह भी करीब 10 गुंडे थे और उन गुंडों ने पूनम को एक कुर्शी से बांध कर रखा था जैसे hi मृत्युंजय पूनम को देखा तो वो भागकर उसके तरफ जाने लगा तभी उन गुंडों के लीडर आगे आया और मृत्युंजय से बोलै.

G.leader- अरे इतनी भी क्या जल्दी है अपने मासूका के पास जाने की पहले तुम मेरे पैसे तो मुझे देते जाओ.

उस गुंडों लीडर के बात सुन कर मृत्युंजय पैसो से भरा हुआ बैग उसके तरफ भेज देता है और जल्दी से जाकर पूनम के राशि खोलता है और उससे बोलता है.

मृत्युंजय- तुम ठीक तो हो न पूनम तुम्हे इन गुंडों ने कुछ किया तो नहीं न.

अपने सामने मृत्युंजय को देख कर पूनम उसके गले लग गयी और रट हुए बोली.

पूनम- ये लोग बहुत खतरनाक है मृत्युंजय इन्होने मुझे किडनैप कर लिया और ये लोग बोल रहे थे की अगर तुम पैसे नहीं ले कर आये तो ये लोग मेरे साथ...

इतना बोल कर पूनम और जोर जोर से रोने लगी तभी मृत्युंजय उसको संत करते हुए बोलै.

मृत्युंजय- सससस संत हो जाओ पूनम मेरे रहता कोई भी तुम्हारा कुछ बिगड़ नहीं सकता चलो अब हम यहाँ से चलते है.

मृत्युंजय के बात सुन कर पूनम अपना सर है में हिलती है फिर दोनों वह से जाने लगते है तभी उन गुंडों के लीडर आगे आते हुए बोलै.

ग. लीडर- अरे इतनी भी क्या जल्दी है जाने की पहले पहले तुम इस डॉक्यूमेंट में सिग्नेचर तो करते जाओ.

उस गुंडे की बात सुन कर मृत्युंजय न समझने वाली भाव से बोलै.

मृत्युंजय- ये सब क्या है तुमने तो बोलै था की मई तुम्हे 20 करोड़ रूपए दे दूंगा तो तुम पूनम को छोड़ डोज फिर ये डॉक्यूमेंट क्यों सिग्नेचर करवाना चाहते हो और वैसे ये डॉक्यूमेंट है क्या.

मृतुन्जय के बात सुन कर वो गुंडा लीडर जोर जोर से हसने लगा और बोलै.

ग. लीडर- मैंने तुमसे झूठ बोलै था मई तुम्हे यहाँ पैसो के लिए बल्कि तुम्हारी प्रॉपर्टी के लिए बुलाया अब तुम चुप चाप इस पर सिग्नेचर कर दो और अपने मासूका को ले कर चले जाओ नहीं तो.

मृत्युंजय- नहीं तो क्या तुम्हे जो करना है करो लेकिन मई इस डॉक्यूमेंट पर सिग्नेचर नहीं करूँगा क्युकी ये प्रॉपर्टी मेरे डैड की आखरी निशानी है मेरे पास.

मृतुन्जय बात को सुन कर वो गुंडा लीडर जोर जोर से हसने लगा और फिर अपने एक साथ को इशारा किया उसका इशारा समझ कर उसका साथी जल्दी से पूनम के पास गया और उसके सर पर गन पॉइंट करते हुए बोलै.

G.leader- चुप चाप इस डॉक्यूमेंट पर सिग्नेचर करो नहीं 59 मेरा आदमी तुम्हारी इस मासूका के भेजा उदा देगा समझा.

उस गुंडे को पूनम के सर पर गन पॉइंट करते देख कर मृत्युंजय घबरा गया और उससे बोलै.

मृत्युंजय- ठीक है ठीक है मई डॉक्यूमेंट पर सिग्नेचर करने के लिए तैयार हु लेकिन प्लीज तुम पूनम को कुछ मत करना.

मृत्युंजय के बात सुन कर पूनम बोली.

पूनम- नहीं मृत्युंजय तुम ऐसा नहीं कर सकते तुम मेरे लिए अंकल के आखरी निशानी इन लोगो के नाम नहीं कर सकते अगर तुम अपनी प्रॉपर्टी इन लोगो को दे दिया तो तुम्हारे पास कुछ भी नहीं बचेगा.

पूनम के बात सुन कर मृत्युंजय उसके तरफ देखते हुए बोलै.

मृत्युंजय- पूनम मई तुम्हे नहीं खोना चाहता भले hi उसके बदले मुझे इन लोगो को अपनी साडी प्रॉपर्टी hi क्यों न देना पड़े.

इतना बोल कर मृत्युंजय उस गुंडा लीडर से डॉक्यूमेंट लेता है और उस पर अपना सिग्नेचर कर देता है जैसे hi वो सिग्नेचर किया वैसे hi उसके पीठ में एक खंजर आ कर लगा और वो खंजर उसके पीठ से होते हुए पेट से बहार निकल गया इसी के साथ मृत्युंजय की एक जोरदार चीख उस वीरान फैक्ट्री में गूंज गयी aahhhhhhhhhhhhhhhhhhh.

........................................................

तो बे कंटिन्यू..

........................................................

 
अपडेट 45

धोखा और समय शक्ति की परीक्षा

गुंडा लीडर ने पूनम के गले पर चाकू लगा कर मृत्युंजय को प्रॉपर्टी के डाक्यूमेंट्स पर सिग्नेचर करने के लिए बोलता है तो मृत्युंजय उस लीडर के बात मन कर प्रॉपर्टी के डाक्यूमेंट्स पर सिग्नेचर करने लगता है जैसे hi वो उस डॉक्यूमेंट पर सिग्नेचर करता है वैसे hi पीछे से उसके पीठ में आकर एक खंजर लगता है जिससे मृत्युंजय के मुँह से एक जोरदार चीख निकलता है और वो वीरान फैक्ट्री गूंज जाता है और साथ में उसके मुँह से खून भी निकलने लगता है.

इधर मृत्युंजय को जब खंजर लगा तो वो दर्द से तड़प गया और फिर किसी तरह से पीछे मुद कर उसको खंजर मरने वाले इंसान को देखने लगा जैसे hi उसकी नजर खंजर मरने वाला इंसान पर गया तो हैरानी से उसकी आँखे बाद हो गयी क्युकी खंजर मरने वाला इंसान और कोई नहीं बल्कि पूनम के डैड बसंत चौहान अपने हाथ में एक खून से सनी खंजर लिए मुस्कुरा रहा था.

मृत्युंजय जब बसंत को देखा तो वो हैरान हो गया उसे यकीं hi नहीं हो रहा था की उसे खंजर मरने वाला इंसान कोई और नहीं बल्कि बसंत चौहान था वो अपने मुँह से खून को थूकने के बाद दर्द से कराहते हुए बसंत से बोलै.

मृतुन्जय- क्यों क्यों किया अपने ऐसा आपको मुझसे क्या दुश्मनी थी जो आप मेरे ऊपर हमला किया आखिर मैंने आपका क्या बिगाड़ा था और वैसे भी मई और पूनम तो सदी करने वाले थे फिर क्यों किया आपने ऐसा क्यों दिया मुझे धोखा.

मृत्युंजय के बात सुन कर बसंत चौहान जोर जोर से हस्ते हुए बोलै.

बसंत- तुम्हे मरने का कारन हमारी कोई दुश्मनी नहीं है बल्कि वो तुम्हारी जायदाद है वो क्या है न की मेरी नजर कबसे तुम्हारे जायदाद पर थी और मई उसे किसी भी कीमत पर हासिल करना चाहता था इस लिए मैंने अपने बेटी का किडनैप करवाया ताकि तुम उसे बचने यहाँ आओ और मई तुमसे डॉक्यूमेंट पर सिग्नेचर करवा कर तुझे जान से मर सकू.

बसंत के बात सुन कर मृत्युंजय हैरान हो गया और वो उसी हैरानी में बोलै.

मृत्युंजय- तो अपने ये सब मेरे जायदाद पाने के लिए किया है ठु है तुम जैसे घटिया इंसान पर जो तुम बाद कुछ जायदाद के लिए किसी के भी जान ले लेते हो लेकिन मई ऐसा होने नहीं दूंगा.

इतना बोल कर मृत्युंजय अपने हाथ में पकडे हुए डॉक्यूमेंट को फर कर वही फेक देता है है और अपने लत से बसंत के छाती पर एक जोरदार हमला करता है जिससे बसंत उड़ते हुए पीछे जा कर दिवार से टकरा जाता है एक hi लत में मृत्युंजय बसंत चौहान के हालत ख़राब कर देता है.

मृत्युंजय- तुमने मेरे पीठ पर खंजर से हमला कर के अच्छा नहीं किया आज मई अगर मरूंगा तो तुम्हे भी अपने साथ ले कर मरूंगा.

इतना बोल कर मृत्युंजय बसंत को मरने के लिए आगे बढ़ता है तभी फिर से उसके शरीर में एक खंजर आ कर लगता है जिससे मृत्युंजय के हालत और ख़राब हो जाती है और वो घुटनो के बल वही गिर जाता है फिर वो किसी तरह अपना गर्दन पीछे कर के देखता है तो उसके आँखों से आंसू गिरने लेट है और उसके मुँह से बस इतना hi निकलता है.

मृत्युंजय- तुम भी अपने बाप के तरह धोखे बज निकली आखिर मेरे प्यार में क्या कमी रह गया था की तुम मेरे साथ ऐसा की क्यों किया तुमने ऐसा.

मृत्युंजय पर हमला करने वाला कोई और नहीं बल्कि खुद पूनम hi थी पूनम के इस धोखे से मृतुन्जय पूरी तरह से टूट चूका था उसके शरीर में खंजर लगने के कारन बहुत साडी खून निकल गयी थी जिसके कारन उसको बेहोशी छाने लगा था लेकिन खुद को किसी तरह से होश में रखते हुए वो पूनम से बोलै.

मृत्युंजय- बताओ मुझे तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया तुम तो मुझसे प्यार करती थी न तो क्या तुम्हारा वो प्यार जो तुम मुझसे करती थी वो सब एक नाटक था क्या तुम भी अपने बाप के साथ मिल कर मेरा जायदाद पाना चाहती थी.

मृत्युंजय के बात सुन कर पूनम अपने चेहरे पर एक कामिनी मुस्कान लेट हुए बोली.

पूनम- तुमने ठीक बोलै वो सब एक नाटक था मई तो तुमसे कभी कोई प्यार किया हु नहीं मेरा प्यार तो मुंबई में है और वो तुमसे लाखो गुना अच्छा है और पैसो वाला है तुम उसके पैरो के धूल के बराबर भी नहीं हो मई बस किसी तरह से तुमसे तुम्हारा जायदाद पाना चाहता था लेकिन तुम इस डॉक्यूमेंट को फाड् कर अच्छा नहीं किया.

इतना बोल कर पूनम घुसे से मृत्युंजय के पेट में एक लत मरती है जिससे मृत्युंजय के जोरदार चीख निकल जाता है मृत्युंजय को इस तरह दर्द में तड़पता हुआ देख कर पूनम बोली.

पूनम- तुम्हे इस तरह से तड़पता हुआ देख कर दिल को बहु सुकून मिल रहा है तुम जानते हो जब तुम मुझे किश करते थे तब मेरे ऊपर क्या बिताती थी मन करता था की तुम्हे वही पर जान से मर दू लेकिन क्या करता मुझे तुम्हारे जायदाद जो पाने थे लेकिन तुमने उस पर भी पानी फिरा दिया मई और डैड ने तुम्हारे जायदाद पाने के लिए क्या क्या नहीं किया मैंने तुमसे प्यार के नाटक किया फिर तुम्हारे बूढ़े बाप को अपने रस्ते से हटाया फिर तुमसे झूठा सगाई की अपने अपने किडनैप का बहाना बनाया इतना म्हणत करने के बाद हमें तुम्हारा जायदाद नहीं मिला.

इधर मृत्युंजय ने जब पूनम के मुँह अपने डैड के बारे में सुना तो उसको बहुत जायदा गुसा आने लगा वो घुसे से इतना पागल हो गया की वो अपना दर्द भी भूल गया और जोर से छीलते हुए पूनम से बोलै.

मृत्युंजय- तुम लोगो ने मेरे डैड को मारा आज मई तुम्हे जिन्दा नहीं छोडूंगा मई तुम्हारे पुरे खंडन को इस धरती से मिटा दूंगा.

इतना बोल कर मृत्युंजय जल्दी से उठा और पूनम के गर्दन पकड़ लिया और उसे जोर से दबाने लगा इधर बसंत चौहान ने जब देखा की मृत्युंजय पूनम के गर्दन पकड़ कर उसे दबा रहा है तो वो हड़बड़ा गया और एक गुंडे के हाथ से तलवार छीन कर भागते हुए मृत्युंजय के पास गया और उस तलवार को मृत्युंजय के पेट के आर पर कर दिया जिसके कारन मृत्युंजय की एक जोरदार चीख निकली और वो बेहोश हो कर वही गिर गया मृत्युंजय को इस तरह से बेहोश हो कर निचे गिरते हुए देख कर पूनम अपने डैड से बोली.

पूनम- डैड अपने ये क्या किया आप इसे जान से क्यों मर दिए अभी तो इससे हमें डॉक्यूमेंट पर सिग्नेचर करवाने थे अब ये मर गया तो हम इसके जायदाद को कैसे हासिल करेंगे.

पूनम के बात सुन कर बसंत उससे बोलै.

बसंत- अगर मई इसे नहीं मरता तो ये तुम्हे मर देता इस लिए तुम्हे बचने के लिए इसे मरना जरुरी था और रही बात इसकी जायदाद की तो हम किसी न किसी तरह उसे हासिल कर के hi रहेंगे.

बसंत के बात सुन कर पूनम कुछ सोचते हुए बोली.

पूनम- डैड एक और प्रॉब्लम है अगर ये अपने घर पर नहीं मिला तो उसके घरवाले पुलिस कंप्लेंट जरूर करेंगे और अगर छान बिन में कही हमारा नाम आ गया तो फिर हम लोग फास भी सकते है.

पूनम के बात सुन कर बसंत चौहान सोच में पद जाता है फिर वो कुछ देर सोचने के बाद वो बोलै.

बसंत- तुम ठीक बोल रही हो पूनम मैंने इस बारे में कुछ सोचा hi नहीं मई एक काम करता हु इसके मोबाइल एक मस्सगे टाइप कर के इसके चाचा को भेज देता हु ताकि वो इसको खोजने की कोशिश न करे.

इतना बोलने के बाद वो मृत्युंजय के मोबाइल लेता है और उसमे एक मस्सगे टाइप करता है जिसमे वो लिखता है है की (चाचा आप मुझे माफ़ कर दीजियेगा मई आपको बिना बताये घर छोड़ कर जा रहा हु वो क्या है न चाचा की मई पूनम से सदी नहीं करना चाहता हु क्युकी मई किसी और से प्यार करता हु और मई उसी के साथ यहाँ से बहुत दूर जा रहा हु आप मुझे खोजने की कोशिश मत कीजियेगा. इतना मस्सगे टाइप करने के बाद वो पूनम से बोलै.

बसंत- लो हो गया हमारा काम अब इस मस्सगे को इसके चाचा के पास भेज देंगे जिससे वो इसको खोजना छोड़ देगा (फिर अपने आदमियों से) तुम सब इस लाश को ले कर जाओ और गंगा नदी में भेक देना साथ में इसके मोबाइल भी गंगा नदी में फेक देना लेकिन मोबाइल फेकने से पहले इसमें मई एक मस्सगे टाइप किया हु उसे इसके चाचा के पास भेज देना.

बसंत के बात सुन कर गुंडा लीडर बोलै.

G.leader- जी बॉस आप और मम यहाँ से जाइये मई इस लाश को ठिकाने लगा कर आता हु.

बसंत- और है यहाँ से निकलने से यहाँ का सारा साबुत मिटा देना.

ग. लीडर- Ok बॉस हो जायेगा अब आप यहाँ से आराम से जा सकते है मई यहाँ का सारा काम संभल लूंगा.

ग. लीडर के बात सुन कर पूनम और बसंत वह से चले जाते है उन दोनों के जाने के बात ग. लीडर मृत्युंजय को उठा कर एक गाड़ी में डालता है और गंगा नदी के पास जा कर अपने गाड़ी को रोकता है और मृत्युंजय के शरीर को बहार निकल कर गंगा नदी में भेक देता है.

सूर्यवंशी आइसलैंड

सूर्यवंशी आइसलैंड के सूर्यवंशी विला में इस वक़्त सरे लोग दिंनिंग टेबल पर बैठ कर नास्ता कर रहे थे तभी मुकेश सूर्यवंशी अपने डैड सतीशचंद्र सूर्यवंशी से बोलता है.

मुकेश- डैड मुंबई से हमारे पास एक ऑक्शन का इनविटेशन आया है इस लिए मई और अनन्य आज मुंबई के लिए निकल रहे है.

मुकेश के बात सुन कर सतीशचंद्र खुश होते हुए बोले.

सतीशचंद्र- ये तो बहुत अच्छी बात है आज ऑक्शन के बहाने hi सही अनन्य को अपने घर से बहार निकलता हुआ देख कर मुझे बहुत खुसी हुयी मुझे बहुत दुःख होता था जब मई अनन्य को उदास अपने घर में बैठा हुआ देखता था तो.

सतीशचंद्र के बात सुन कर सुनैना सूर्यवंशी उनसे बोलती है.

सुनैना- ये तो आज भी बहार नहीं जाने वाली थी शुक्र है मुकेश का की इसने जबरदस्ती इसे ऑक्शन में जाने के लिए तैयार किया.

सतीशचंद्र- कुछ भी हो लेकिन ये आज बहार जा रही है ये जान कर मुझे बहुत खुसी हुयी वैसे उस एक्शन में मुखर्जी परिवार का बड़ा बीटा संजीत मुखर्जी भी आ रहा है तो मई चाहता हु की अनन्य तुम उससे मिलो और एक दूसरे को जानने की कोशिश करो.

सतीशचंद्र के बात सुन कर अनन्य हैरान हो गयी और वो थोड़े रूखे आवाज में बोली.

अनन्य- डैड मई वह ऑक्शन अटेंड करने जा रही हु न की किसी को जानने मिझे कोई सुख नहीं है को मई किसी लड़के से जान पहचान बढ़ाऊ.

अनन्य के बात सुन कर सतीशचंद्र थोड़े कड़े आवाज में बोले.

सतीशचंद्र- मई तुम्हे ये बता नहीं रहा हु बल्कि ये मेरा आर्डर है समझी वैसे भी तुम कबतक उस लड़के का इंतज़ार करेगी जो पता नहीं जिन्दा भी है या मर गया है इस लिए मई चाहता हु की तुम संजीत से जान पहचान बढ़ाओ क्युकी संजीत मुखर्जी के डैड ने मुझसे तुम्हारे और संजीत के सदी के बात कर रहे थे लेकिन मई अभी के लिए उनको रोक कर रखा हु तुम उस संजीत से मिलो और देखो की वो कैसा लड़का है समझी.

सतीशचंद्र के बात सुन कर अनन्य घुसे से बोली.

अनन्य- मई आपसे एक बार बोल दी न की मुझे किसी से नहीं मिलना है.

सतीशचंद्र- देखो अनन्य मई नहीं चाहता हु की तुम जिंदगी भर ऐसे hi उस लड़के का इंतज़ार करो और वैसे भी मुखर्जी परिवार दुनिया के टॉप 10 बिज़नेस परिवार के साथ साथ इंडिया के no. 1 मार्टिकल आर्ट्स परिवार है इंडिया में राठौर परिवार को छोड़ कर ऐसा कोई भी परिवार नहीं है जो उस परिवार से पन्गा ले अगर तुम्हारी सदी उस परिवार में हो जाती है तो समझो तुम्हारी किस्मत खुल जाएगी.

सतीशचंद्र के बात सुन कर अनन्य वह से उठ कर अपने कमरे में जाते हुए बोली.

अनन्य- अगर आप ऐसे hi मुझे किसी से मिलने के लिए जबरदस्ती करेंगे तो मई ऑक्शन में जाउंगी hi नहीं.

इतना बोल कर अनन्य वह से अपने रूम में चली जाती है उसको इस तरह से जाता हुआ देख कर सुनैना घुसे से बोलती है.

सुनैना- क्या करू मई इस लड़की का इसे ये नहीं समझ में आ रहा है की हम जो भी कर रहे है इसी के भलाई के लिए कर रहे है.

सतीशचंद्र- सब तुम्हारी गलती है तुम hi इसे अपना सर पर चढ़ा कर राखी हो और मुझे सबसे ज्यादा गुसा तो उस रूद्र पर आ रहा है जो खुद तो चला गया लेकिन मेरी बेटी का जिंदगी बर्बाद कर के गया.

मुकेश अपने डैड और माँ को इस तरह गुसा करता हुआ देख कर बोलै.

मुकेश- डैड आप चिंता मत कीजिये मई जा कर उसे समझाया हु.

इतना बोल कर वो अनन्य के रूम के में चला जाता है इधर अनन्य वह से उठा कर जब अपने रूम में गयी तो रूद्र के बचपन के फोटो अपने हाथो में ले कर रट हुए बोलने लगी.

अनन्य- तुम देख रहे हो रूद्र ये सब लोग हम दोनों को अलग करना चाहते है रूद्र मई तुम्हारे बिना नहीं रह सकती प्लीज रूद्र तुम वापस आ जाओ नहीं तो कही ऐसा न हो की तुम्हारे आने में देर हो जाये और ये लोग मेरी सदी जबरदस्ती किसी और से करवा दे अगर ऐसा हुआ न रूद्र तो तुम देख लेना मई अपना जान से दूंगी.

अनन्य रूद्र के बचपन के फोटो के कर ऐसे hi रट हुए उससे शिकायत कर रही थी तो इधर मुकेश भी उसके रूम में पहुंच गया था और चुपचाप अनन्य को मेरे फोटो से बाटे करता हुआ सुन रहा था जब उसने अनन्य के बारे सुनी तो उसके आँखों में आंसू आ गए फिर वो अपना आंसू साफ करते हुए अनन्य के बीएड के पास गया और प्यार से उसके सर पर हाथ फेरते हुए बोलै.

मुकेश- प्लीज अनन्य तुम चुप हो जाओ तुमको रूद्र से कोई अलग नहीं करेगा और मई हु न तुम्हारे साथ मई हमेसा तुम्हारा साथ दूंगा और रही बात संजीत मुखर्जी से मिलने की तो तुम चिंता मत करो तुम ऑक्शन में जब जाओगी तो उससे थोड़ा फॉर्मेलिटी के लिए ही हेलो कर देंगे और फिर जब हम वापस लौटेंगे तो डैड से बोल देंगे की हमें वो लड़का पसंद नहीं आया वैसे भी डैड उससे मिल कर उसे जानने के लिए बोले है तो हम कह देंगे की वो अच्छा लड़का नहीं है.

मुकेश के बात सुन कर अनन्य थोड़ा संत हो गयी और फिर मुकेश के तरफ देखते हुए बोली.

अनन्य- पका न भैया आप मेरा हमेशा साथ डोज न.

मुकेश- है मेरी प्यारी बहना मई हमेशा तुम्हारा साथ दूंगा.

मुकेश के बात सुन कर अनन्य उसके गले लग गयी और उससे बोली.

अनन्य- थैंक्स भैया आप इस दुनिया के सबसे बेस्ट भाई हो.

अनन्य के बात सुन कर मुकेश हस्ते हुए बोलै.

मुकेश- अब मुझे माखन लगाना बंद कर और जल्दी से मुंबई चलने की तयारी कर.

अनन्य- ठीक है भाई आप बहार चलिए मई रेडी हो कर बहार आती हु.

अनन्य के बात सुन कर मुकेश वह से बहार चला गया और जाकर अपने डैड को बोलै की अनन्य मुंबई जाने के लिए रेडी है आप संजीत मुखर्जी के डैड से बात कर लीजिये फिर थोड़ी देर बाद अनन्य रेडी हो कर बहार आ गयी इसके बाद मुकेश और अनन्य अपने कुछ बॉडीगार्डों के साथ हेलीकाप्टर में बैठ कर मुंबई के लिए निकल गए.

इधर मुंबई सहर में एक बहुत बड़ा बंगलो या यु कह लो की एक बहुत बड़ा हवेली बना हुआ था उस हवेली के चारो तरफ बहुत सरे गार्ड अपने हाथो में आटोमेटिक गन लिए हुए उस हवेली का सुरक्षा कर रहे थे इस हवेली को देखने से hi लग रहा था की ये किसी बहुत बड़े परिवार का हवेली है और उस हवेली के गेट के पास एक बहुत बड़ा बोर्ड लगा हुआ था जिस पर लिखा हुआ था मुखर्जी विला जी है दोस्तों ये मुखर्जी परिवार का hi हवेली था था.

मुखर्जी परिवार दुनिया के जाने मने परिवारों में से एक थे ये परिवार एक मार्टिकल आर्ट्स योद्धाओ का परिवार है ऐसा कहा जाता है की इस परिवार में सरे लोग मार्टिकल आर्ट्स योद्धा है ये परिवार सिर्फ मार्टिकल आर्ट्स में hi no. 1 नहीं है बल्कि ये परिवार दुनिया के 5 आमिर परिवार में से भी एक में आता है.

इस परिवार में 4 सुडो ग्रांडमास्टर लेवल के योद्धा है और एक सम्राट लेवल के योद्धा है इस लिए इंडिया में कोई भी परिवार इस परिवार से पन्गा नहीं लेना चाहता है अगर इंडिया में कोई परिवार इनसे टकरा सकता है तो वो परिवार है राठौर परिवार क्युकी राठौर परिवार के पास बहुत पैसा है और वो अपने पैसो के डैम पर बहुत सरे सुडो ग्रांडमास्टर लेवल के योद्धा को हिरे कर रखा है और इन दोनों परिवारों में हमेशा से दुश्मनी रही है.

इधर मुखर्जी परिवार के विला के मैं होल में एक सिंघासन की तरह दिखने वाले चेयर पर एक बूढ़ा आदमी बैठा हुआ था वो आदमी देखने में कोई 70 या 80 साल के बुजुर्ग लग रहा था ये बूढ़ा आदमी कोई और नहीं बल्कि मुखर्जी परिवार के पुराने मुखिया सुखदेव मुखर्जी थे हलाकि उनका आगे 80 साल जरूर हो रहा था लेकिन वो दिखने में 45 या 50 साल के hi लगते थे और मुखर्जी परिवार के यही वो मैरिटल आर्ट्स योद्धा है जो सम्राट रैंक पर पहुंच गए है.

सुखदेव मुखर्जी अपने विला के मैं होल में लगे सिंघासन नुमा कुर्सी पर बैठे हुए थे और उनके सामने 2 लो और बैठे हुए थे एक तो उनका बीटा यानि की मुखर्जी परिवार के नया मुखिया शैलेन्द्र मुखर्जी वह पर बैठा हुआ और दूसरा उनका बड़ा पोता संजीत मुखर्जी भी वह मौजूद था ये लोग यहाँ किसी विषेस मुङो पर बात कर रहे थे.

सुखदेव- मुंबई में जो नीलामी होने वाली है उसमे इस बार कुछ बहुमूल्य चीजे आयी हुयी है और हमें किसी भी कीमत पर उन सरे सामने को नीलामी में जितना hi होगा खास कर के वो तलवार जिसमे से आगे निकलती है अगर हम उस तलवार को हासिल कर लिए तो फिर हमें इस दुनिया में कोई भी हरा नहीं सकता हमारा परिवार इंडिया के सरे परिवारों पर रह करेगी.

शैलेन्द्र- आप चिंता मत कीजिये डैड हम उस तलवार को किसी भी कीमत पर अपना बना के hi रहेंगे अगर हम उस तलवार को हासिल कर लिए तो इस बार मई उस राठौर परिवार को जड़ से hi ख़तम कर दूंगा.

शैलेन्द्र के बात सुन कर सुखदेव कुछ सोचते हुए बोले.

सुखदेव- राठौर परिवार को ख़तम करना इतना भी आसान नहीं है अगर हमें राठौर परिवार को ख़तम करना है तो हमें किसी और परिवार की मदत भी लेनी पड़ेगी.

शैलेन्द्र- है डैड अपने ये बात सही बोली हमें राठौर परिवार को ख़तम करने के लिए किसी और परिवार को मदत लेनी होगी इसी लिए मैंने एक प्लान बनाया है.

सुखदेव- कैसा प्लान.

शैलेन्द्र- मैंने सूर्यवंशी परिवार के मुखिया सतीशचंद्र सूर्यवंशी से मदत लेने की सोची है.

शैलेन्द्र के बात सुन कर सुखदेव सोच में पद गए बहुत देर तक सोचने के बाद वो बोले.

सुखदेव- तुम्हे ये सही सोचा है अगर सूर्यवंशी परिवार हमारे साथ मिल जाये तो हम आराम से राठौर परिवार को मिटा सकते है लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा है सतीशचंद्र सूर्यवंशी हमारी मदत क्यों करेगा.

संजीत जो चुप चाप अपने बाप और दादा जी के बात सुन रहा था वो आखिर में अपने डैड से बोलै.

संजीत- है डैड दादा जी ठीक बोल रहे है आखिर सूर्यवंशी परिवार हमारी मदत क्यों करेगा और वैसे भी मैंने सुना है की सूर्यवंशी परिवार और राठौर परिवार एक दूसरे के मित्र है तो भला एक मित्र दूसरे मित्र के दुश्मनो का साथ क्यों देगा.

संजीत के बात सुन कर शैलेन्द्र मुखर्जी मुस्कुराते हुए बोलै.

शैलेन्द्र- वो हमारी मदत जरूर करेगा क्युकी मैंने जो प्लान बनाया है उसके हिसाब से उसे हमारी मदत करना hi होगा.

सुखदेव- ऐसा क्या प्लान बनाया है तुमने.

शैलेन्द्र- मैंने सतीशचंद्र सूर्यवंशी से उनकी बेटी अनन्य सूर्यवंशी और संजीत की सदी की बात की है जिसके लिए वो मन भी गए है अगर एक बार अनन्य और संजीत की सदी hi गयी तो उसे राठौर परिवार को डिस्ट्रॉय करने में हमारी मदत करनी hi होगी क्युकी उसके पास दूसरा कोई ऑप्शन होगा hi नहीं.

शैलेन्द्र के बात सुन कर सुखदेव और संजीत दोनों खुस हो जाते है फिर संजीत खुसी से अपने डैड से बोलता है.

संजीत- डैड अपने ये सही किया वैसे भी मई अनन्य को बहुत पसंद करता हु हलाकि मई उसे एक बार hi देखा हु लेकिन उस एक बार में hi मुझे उससे प्यार हो गया अब अनन्य भी मेरी होगी और हम राठौर परिवार को भी डिस्ट्रॉय कर देंगे.

संजीत के बात सुन कर शैलेन्द्र कुछ सोचते हुए बोले.

शैलेन्द्र- है ये बात सही की मैंने तुम्हारी सदी तय कर दी है लेकिन इसमें एक प्रॉब्लम भी है.

सुखदेव- जब तुम संजीत और अनन्य की सदी तय कर hi दिया है तो अब बिच में प्रॉब्लम कहा से आ गयी.

संजीत- है डैड अपने अभी अभी बोलै की आप सतीशचंद्र सूर्यवंशी से मेरी और अनन्य की सदी के बात कर लिए है तो फिर अब क्या प्रॉब्लम है.

सुखदेव और संजीत के बात सुन कर शैलेन्द्र कुछ देर के लिए चुप हो गया फिर कुछ देर बाद वो बोलै.

शैलेन्द्र- दरअसल बात ऐसी है की सतीशचंद्र सूर्यवंशी सदी के लिए तैयार तो है लेकिन साथ में उन्होंने एक कंडीशन भी रखा है और वो कंडीशन ये है की संजीत तुम्हे किसी भी तरह से अनन्य को अपने प्यार में फसाना होगा दरअसल क्या है न की अनन्य इस सदी के लिए तैयार नहीं है इस लिए सतीशचंद्र सूर्यवंशी ने मुझसे बोलै है की अनन्य आज ऑक्शन के लिए मुंबई आ रही है और तुम्हे किसी भी तरह से अनन्य के दिल जितना होगा तब hi ये सदी hi सकती है अन्यथा तुम ये सदी भूल hi जाना.

शैलेन्द्र के बात सुन कर वह पर कुछ देर के लिए सन्ति छ जाती है फिर कुछ देर बात संजीत उस सन्ति को तोड़ते हुए बोलता है.

संजीत- डैड आप चिंता मत कीजिये मई अनन्य के दिल को किसी न किसी तरह से जीत कर hi रहूँगा और अगर वो प्यार से नहीं मणि तो मई कुछ ऐसा करूँगा की वो मुझसे सदी करने के लिए मजबूर हो जाएगी.

सुखदेव- तो ठीक है तुम जाओ और जाकर उसको रइवे करो और आज से hi तुम उसका दिल जितने की कोशिश करो अब हमें उस नीलामी में नीलम होने वाले बहुमूल्य सामने के साथ साथ अनन्य भी इस घर के बहु के रूप में चाहिए और इन सब के लिए तुम्हे जो भी करना है करो मेरी तरफ से पूरी छूट है लेकिन यद् रखना तुम जो भी करो किसी को पता न चले.

संजीत- आप चिंता मत कीजिये दादा जी अब तो मई अनन्य को किसी भी तरह से अपना बीवी बना के hi रहूँगा अगर वो प्यार से मन जाये तो ठीक नहीं तो फिर उसे अपना असली रूप दिखाना होगा और रही बात ऑक्शन में नीलम होने वाले सामने की तो इंडिया में कोई भी ऐसा नहीं है जो हमारे परिवार को नाराज कर के हमसे ज्यादा बोली लगा सके इस लिए आप उसकी भी चिंता मत कीजिये ऑक्शन में नीलम होने वाली सरे बहुमूल्य चीजे हमारी hi होगी.

सुखदेव- मुझे तुमसे यही उम्मीद है और तुम मेरी उम्मीद को टूटने मत देना.

अपने दादा के बात सुन कर संजीत वह से चला जाता है उसके जाने के बाद सुखदेव शैलेन्द्र से बोलता है.

सुखदेव- तुम इस पर नजर रखना कही ऐसा न हो की ये कुछ गड़बड़ कर दे और हमारा प्लान फ़ैल हो जाये.

शैलेन्द्र- आप चिंता मत कीजिये डैड मेरी नजर हमेशा इस पर hi रहेगी.

सुखदेव- और है इसके साथ 2 सुडो ग्रांडमास्टर लेवल के योद्धा भी भेज दो अगर कुछ प्रॉब्लम होगी तो ये लोग उसे संभल लेंगे.

शैलेन्द्र- Ok डैड मई अभी भेजता हु.

इतना बोल कर शैलेन्द्र भी वह से चला जाता है उसके जाने के बाद सुखदेव हस्ते हुए बोलता है.

सुखदेव- है है है अगर मेरी प्लान कामयाब हो गयी तो इस बार मई तुम्हे नहीं छोडूंगा महेंद्र सिंह राठौर तुम अब अपनी बर्बादी की गिनती गुणा सुरु कर दो है है है.

इधर मई लोभ के परीक्षा देने के लिए तैयार था लेकिन अंदर से दर भी लग रहा था क्युकी अगर मई इस नदी को पर करूँगा और रस्ते में मेरे मन में लोभ जग गया तो मेरा प्राण चला जायेगा लेकिन मुझे खुद पर बिस्वास था की ऐसी कोई चीज नहीं है जो मुझे अपने लोभ में फसा ले.

मई आगे बढ़ते हुए उस नदी के सतह पर चला गया और धीरे धीरे अपना पेअर आगे बढ़ा कर उस नदी में उतर गया और आगे बढ़ने लगा उस नदी का पानी मेरे घुटनो तक hi आ रहा था हलाकि उस नदी में बहुत गहरा पानी था लेकिन पता नहीं ये कैसा जादू था की वो पानी मेरे घुटनो तक hi आ रहा था.

मई जैसे उस नदी में उतरा तो मई सब भूल गया की मई यहाँ किस काम से आया था मुझे बस इतना यद् था की ये नदी एक मयाबी नदी है और मुझे किसी भी तरह से इस नदी को पर कर के दूसरे तरफ जाना है अभी मई उस नदी में कुछ hi आगे आया था की तभी मेरे सामने का दृस्य बदल गया और मेरे सामने एक आलीशान महल आ गया वो महल इतना सुन्दर और भव्य था की मेरा आँख hi उस पर से नहीं हैट रहा था उस महल को देख कर मई मन hi मन बोलै.

मई- कितना सुन्दर महल है काश की ये महल मेरा होता तो मई इस महल में रहता मई यहाँ से कभी नहीं जाता भला इतना सुन्दर महल को छोड़ कर कोण जाता है.

मेरा इतना सोचना hi था की तभी उस नदी का पानी बढ़ने लगा और धीरे धीरे मेरे कमर तक आ कर रुका इधर मई अपने hi सोचो में गम था तभी मुझे किसी का आवाज सुनाई दिया.

आवाज- अगर तुम्हे ये महल और ये राज्य चाहिए तो तुम्हे इस राज्य के राजा जो की इसी महल में रहता है उसे चुनौती देना होगा और उसे हराकर उसको जान से मरना होगा अगर तुम ऐसा कर दिए तो ये राज्य ये महल और यहाँ के शानो शौकत सब तुम्हे मिल जाएगी.

उस आवाज के बात सुन कर मई हैरान हो गया गया और फिर उस आवाज से पूछा.

मई- आप कोण है और कहा है मुझे आप कही दिखाई क्यों नहीं दे रहे है.

मेरे बात को सुन कर वो आवाज जोर जोर से हसने लगा फिर वो मुझसे बोलै.

आवाज- मई कोण हु तुम्हे ये भी पता नहीं है अच्छा कोई बात नहीं मई hi तुम्हे बता देता हु मई हु इस महल का रक्षक और साथ में मेरा काम इस महल के लिए उसका उत्तराधिकारी ढूँढना भी इस लिए मुझे पता है की तुम कैसे इस महल को अपना बना सकते हो तो क्या तुम इस राज्य के राजा को मरने के लिए तैयार हो.

उस आवाज के बात सुन कर मई अपने मन में सोचने लगा.

मई- ये महल तो बहुत सुन्दर है मेरा मन कर रहा है की मई इस महल का मालिक बन जाऊ और यही पर हमेशा के लिए रुक जाऊ लेकिन उसके लिए मुझे यहाँ के राजा को मरना होगा लेकिन क्या मई एक महल के लिए एक निर्दोष का जान ले सकता हु नहीं नहीं मई ऐसा नहीं कर सकता मई अपने लोभ में किसी का जान नहीं ले सकता.

मेरा इतना सोचना hi था की नदी को को पानी मेरे कमर तक आ गया था वो पुनः मेरे घुटनो तक आ गया.

इधर जैसे मेरे मन से लालच कर प्रदा हटा तो बोदरा मेरे सामने का दृस्य बदल गया और फिर से मई वही नदी में आगे बढे जा रहा था लेकिन मई फिर से वो सब भूल गया था जो अभी अभी मेरे साथ हुआ था मुझे बस इतना hi यद् था की मुझे किसी तरह से इस मयाबी नदी को पर करना है.

मई उस नदी में चलते चलते नदी के सेण्टर में आ गया था मई जैसे hi नदी के सेण्टर में पंहुचा तो फिर से मेरे सामने का दृस्य चेंज हो गया अब मेरे सामने मुंबई का दृस्य था जिसमे मई एक गार्डन में जॉगिंग कर रहा था उस पार्क में बहुत सरे लोग थे जो वह जॉगिंग करने आये थे.

अभी मई जॉगिंग करते हुए आगे बढ़ा hi था की मैंने देखा की एक जगह पर बहुत सारा भीड़ जमा हो रखा है मई उस भीड़ को देख कर कोतुहल बस उस भीड़ के पास आ गया और एक आदमी से पूछा.

मई- भाई यहाँ क्या हुआ है आप लोग यहाँ पर ऐसे भीड़ लगा कर क्यों खड़े हो.

मेरे बात को सुन कर वो आदमी मुझे ऊपर से ले कर निचे तक घुरा और फिर वो मुझसे बोलै.

आदमी- यहाँ पर एक आदमी जॉगिंग करते करते बेहोश हो कर गिर गया है.

उस आदमी के बात सुन कर मई जल्दी से उस भीड़ के आगे गया तो देखा की एक 60 या 70 साल का बूढ़ा आदमी वह पर बेहोश हो कर गिरा हुआ था सरे लोग बस वह खड़ा हो कर तमसा देख रहे है मई ये देख कर मई अपने आगे खड़े आदमियों को साइड करते हुए आगे जाने लगा तभी वो आदमी जिसे मई साइड कर के बूढ़े आदमी के पास जा रहा था वो आदमी घुसे से मुझे घूरते हुए बोलै.

आदमी- ये तुम मुझे साइड कर के आगे कहा जा रहे हो तुम तो आगे ऐसे बढ़ रहे हो जैसे तुम कोई डॉक्टर हो और इस मरते हुए बूढ़े को बचा लोगे.

उस आदमी के बात सुन कर मई उससे बोलै.

मई- अपने सही बोलै मई एक डॉक्टर hi हु और मई उस आदमी को बचा सकता हु.

इतना बोल कर मई आगे बढ़ने लगा तभी वो आदमी वह खड़े लोगो से जोर से बोलै.

आदमी- आप लोग देख रहे हो न भाई ये बिखरी अपने आप को डॉक्टर बोल रहा है ये आप सब को कहा से देखने में डॉक्टर लग रहा है ये जरूर कोई चोर है जो ऐसे सिचुएशन का फायदा उठाना चाहता है.

उस आदमी के बात सुन कर एक और आदमी मुझे घूरते हुए बोलै.

आदमी- ये लड़के तुम जहा हो वही पर खड़े रहे अगर तुम उस बूढ़े के पास जाने की भी कोशिश की न तो हम तुम्हे नहीं छोड़ेंगे और तुम क्या सोचते हो की तुम हमलोगो के रहते हुए चोरी कर सकते हो.

उस आदमी के बात सुन कर मुझे बहुत गुस्सा आया और मई गुस्से से उस आदमी से बोलै.

मई- तुम सब ये क्या बाटे कर रहे हो मई तुम लोगो को चोर दीखता हु क्या शर्म आणि चाहिए तुम लोगो को जो यहाँ खड़ा हो कर तमसा देख रहे हो और अगर कोई उसे बचने की कोशिश कर रहा है तुम सब उसे भी आगे नहीं जाने दे रहे हो मई जा रहा हु इस आदमी का इलाज करने अगर किसी ने डैम है तो मुझे रोक कर दिखाए.

मेरे बात को सुन कर और मेरा गुसा देख कर सरे आदमी दर से एक कदम पीछे हैट गए जब मैंने देखा की उस बूढ़े आदमी के पास से सरे लोग हैट गए है तो मई चलते हुए उस बूढ़े आदमी के पास गया और फिर उसे जाँच करने लगा जब मई उसे अच्छी तरह से जाँच कर लिया तो फिर मई उसके शरीर के कुछ एक्यूपंक्चर पॉइंट को प्रेस किया जिसके कारन वो आदमी धीरे धीरे होश में आ गया.

जब उस आदमी को पूरी तरह से होश आ गया तो मई रहत की साँस ली तो वही तमसा देख रहे भीड़ ने जब उस आदमी को होश आते देखा तो सब के सब हैरान हो गए इधर जब उस बूढ़े आदमी को होश आया तो वो खुद को जमीं पर प् कर हैरान हो गया और वो मुझसे बोलै.

बूढ़ा आदमी- मई निचे जमीं पर क्या कर रहा हु और मुझे हुआ क्या है कुछ यद् क्यों नहीं है मुझे.

उस बूढ़े आदमी के बात सुन कर मई उनको संत करते हुए बोलै.

मई- आप वाकिंग करते हुए बेहोश हो कर गिर गए थे लेकिन टेंसन वाली कोई बात नहीं है मई आपको होश में ले आया हु और आप मुझे अपने घर का अड्रेस बताइये मई आपको आपके घर तक छोड़ देता हु.

बूढ़ा आदमी- थैंक यू बीटा मेरी जान बचने के लिए लेकिन बीटा मुझे हुआ क्या है.

मई- आप पहले घर चलिए मई आपको वही सब बता दूंगा.

इतना बोल कर उस बूढ़े आदमी को सहारा दे कर उठाया और उसके बताये हुए अड्रेस पर उसको छोड़ने के लिए जाने करीब 10 मिनट चलने के बाद मई एक आलीशान कोठी के सामने पहुंच गया उस कोठी के मैं गेट पर कुछ गार्ड खड़े थे जब उन गुआर्दो के नजर उस आदमी पर गया तो वो लोग हड़बड़ाते हुए मेरे पास आये और उस आदमी को सहारा देते हुए उस आलीशान कोठी के अंदर ले कर जाने लगे थोड़ी देर बाद हम लोग उस कोठी के अंदर आ गए थे कोठी में आने के बाद उस आदमी ने मुझसे बोलै.

बूढ़ा आदमी- अब आप बता सकते है की मुझे क्या हुआ है और मई वह बेहोश क्यों हो गया था.

उस बूढ़े आदमी के बात सुन कर मई उनसे बोलै.

मई- आपको किसी ने कुछ महीनो से स्लो पाइजन दे रहा है और अब वो पाइजन आपके शरीर में इतना फैल गया है की आपका कभी भी मौत हो सकता है जब आप वाकिंग कर रहे थे उस समय उस पाइजन ने आपके बॉडी पर अटैक किया था जिसके कारन आप बेहोश हो गए थे आप शुक्र मनाइये की उस समय मई वह पर मौजूद था इस लिए मई आपके शरीर के एक एक्यूपंक्चर पॉइंट को प्रेस कर के उस पोसिओं के अटैक को रोक दिया नहीं तो आपका उसी समय डेथ हो जाता.

मेरे बात को सुन कर वो बूढ़ा आदमी हैरान हो गया और उसी हैरानी में मुझसे बोलै.

बूढ़ा आदमी- क्या कोई मुझे स्लो पाइजन दे रहा था लेकिन कभी मुझे पता क्यों नहीं चला की मुझे स्लो पाइजन दिया जा रहा है.

मई- आपको पता इस लिए नहीं चला की ये स्लो पाइजन था और स्लो पाइजन इसी लिए दिया जाता है की विक्टिम को पता न चल सके.

बूढ़ा आदमी- तो अब मई मरने वाला हु क्या अब इसका कोई इलाज नहीं हो सकता है वैसे तो मई मरने से नहीं डरता हु लेकिन मेरी एक क्सक्सक्स साल का पोता है अगर मुझे कुछ हो गया तो मेरे दुश्मन उसे भी नहीं छोड़ेंगे इस लिए अगर मेरे बचने का चांस 1 % भी है तो आप मेरा इलाज कीजिये बदले में चाहे आपको जितना भी पैसा चाहिए मई देने के लिए तैयार हु.

उस बूढ़े आदमी के बात सुन कर मई मुस्कुराते हुए उनसे बोलै.

मई- आप चिंता मत कीजिये मई आपका इलाज कर दूंगा आप ठीक हो जायेंगे और है बदले मुझे आपसे कुछ चाहिए भी नहीं लेकिन आपका इलाज करने के लिए मुझे कुछ जड़ी बूटी चाहिए जो मेरे घर पर hi मिलेंगे इस लिए मई अभी अपने घर जा रहा हु मई आज शाम में आ कर आपका इलाज कर दूंगा.

इतना बोल कर मई वह से बहार निकल गया अभी मई उस आलीशान कोठी से कुछ दूर hi गया था की तभी एक आदमी आ कर मुझसे बोलै.

आदमी- देख लड़के तुम उस आदमी से दूर रहो मई जनता हु की तुम उसका इलाज कर सकते हो लेकिन अगर तुम उसका इलाज करने की कोशिश की तो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा.

उस आदमी के बात सुन कर मुझे समझ में आ गया की इस बूढ़े आदमी कोई स्लो पाइजन देने वाला कोई और नहीं बल्कि यही आदमी है इस लिए मई उसे थोड़े सख्त आवाज में बोलै.

मई- अगर मई तुम्हारी बात नहीं मन तो तुम क्या कर लोगे मेरा.

मेरी बात को सुन कर वो आदमी घुसे से अपना डट पिस्टे हुए बोलै.

आदमी- अगर तुम मेरा बात नहीं मन तो तुम भी उस बूढ़े की तरह मरे जाओगे और अगर तुम मेरा बात मन लिया तो मई तुम्हे दुनिया के सबसे आमिर आदमी बना दूंगा इस बूढ़े के पास बहुत पैसे है इस बूढ़े के मरते hi सारा पैसा मेरा hi जायेगा और मई उसमे से आधा पैसा तुम्हे दे दूंगा.

उस आदमी के बात सुन कर मई कुछ सोचते हुए उससे बोलै.

मई- उस आदमी के मरने के बाद उसका सारा पैसा तुम्हारा कैसे हो जायेगा क्युकी उसका पोता अभी भी जिन्दा है और उस बूढ़े आदमी के मरने के बाद उसका सारा दौलत उसके पोते के नाम हो जायेगा.

मेरी बात को सुन कर उस आदमी ने मुझसे बोलै.

आदमी- तुम उसके बचे की चिंता मत करो मेरे पास उसका भी जुगाड़ है बस तुम ऐसा कर दो की ये बूढ़ा आज hi मर जाते अगर ऐसा हुआ तो मई तुम्हे एक सप्ताह के अंदर दुनिया के सबसे बड़े अमीरो में से एक बना दूंगा.

उस आदमी के बात सुन कर मेरे मन में एक पल के लिए लालच आ गया था लेकिन फिर मैं अपने लालच को कंट्रोल करते हुए मई इस आदमी को उस बूढ़े के पास बेनकाब करने की सोचा और फिर एक प्लान बना कर उसे आदमी से बोलै.

मई- मुझे तुम्हारी शर्त मंजूर है मई आज hi इस बूढ़े का काम तमाम कर देता हु वैसे तुम्हारा नाम क्या है और तुम इस बूढ़े का क्या लगते हो.

आदमी- मेरा नाम मनोहर है और मई इसे बूढ़े का चिफे बॉडीगार्ड हु.

मई- अच्छा तो आप उस बूढ़े आदमी का बॉडीगार्ड है नीस.

इतना बोलने के बाद मई अपने आप से hi बोलै.

मई- (अपने मन में) कितना निचे गिर गए है आज कल के लोग अपने लोभ और लालच के चलते इंसानियत hi भूल गए है जिस सुरक्षा गार्ड का काम लोगो को बचाना होता है वही अपने लोभ के कारन लोगो को मरने के लिए भी तैयार है कुछ पल के लिए तो मई भी उसके बातो में आ गया था लेकिन सुकर है ऊपर वाले का जो मई इसके बातो में नहीं आया नहीं तो अनर्थ हो जाता अगर कोई मुझे दुनिया के सबसे आमिर आदमी भी बना दे तब भी मई ऐसी घटिया काम नहीं करूँगा.

ये सब सोचते हुए मई वह से अपना हवेली गया और वह से कुछ जड़ी बूटी अपने साथ ले कर मई उस बूढ़े आदमी के कोठी में आ गया इसके बाद मई उस बूढ़े आदमी का इलाज किया और उसे सारा सचाई बता दिया.

जैसे hi मई उस बूढ़े आदमी को सब बताया तो उसने तुरंत पुलिस को कॉल कर के बुलाया और उसे गिरफ्तार करवा दिया इतना सब होने के बाद मई अपने आप hi वह से गायब हो गया और फिर से मई उसी लोभ के नदी बिच में खड़ा था जहा से मेरा दूसरा लोभ कर परीक्षा सुरु हुआ था मई तीन लोभ के परीक्षा में से 2 में उत्तीर्ण हो गया था अब आखरी यानि की तीसरा परीक्षा बाकि था लेकिन मुझे ये सब यद् नहीं था की मई यहाँ लोभ का परीक्षा दे रहा हु इस लिए मई फिर से उस नदी में आगे बढ़ने लगा जबा उस नदी के आखरी छोर पर पंहुचा तो फिर से मेरे सामने का दृस्य बदल गया अब मेरे सामने जो दृस्य था वो अन्सिएंट ज़माने का दृस्य था.

मई इस अन्सिएंट दुनिया में अपने बीवी के साथ रहता था इस दुनिया में जादुई शक्तियां hi सर्वापरि थी जिसके पास जादुई शक्ति नहीं होती थी उसका इस दुनिया में कोई वैल्यू नहीं था लोग उसे नाकारा समझते थे या ये कहलो की इस दुनिया में जिसके पास भी जादुई शक्ति थी यहाँ पर उसी का राज चलता था यहाँ पर लोग शक्तियों को पूजते थे और जिनके पास शक्तिया नहीं होती थी उन पर यहाँ के लोग अत्याचार करते थे.

इस दुनिया में मेरे और मेरी वाइफ के पास कोई भी शक्ति नहीं थी इस लिए हम आम लोगो से दूर एक बस्ती में रहते थे इस बस्ती में सिर्फ ऐसे hi लोग रहते थे जिनके पास कोई भी शक्ति नहीं होती थी मई और मेरी शक्ति न होने के बाद भी दोनों खुसी खुसी इस जगह पर अपना जीवन बिता रहे थे.

हम जिस बस्ती में रहते थे वो बस्ती शालीमार राज्य के राजा के अधीन था और शालीमार राज्य के राजा बड़ा hi अत्याचारी और डस्ट था उसे बिना शक्तियों वाले लोगो को तड़पने में मजा आता था हम जिस बस्ती में रहते थे उस बस्ती एक जंगल से लगा हुआ था इस जंगल में जादुई जानवर के साथ साथ बहुत साडी जड़ी बूटी भी मिलती थी इस लिए हमारा रोजी रोटी इसी जंगल से चलता था दरअसल मई और मेरी वाइफ दोनों इन जंगल से जड़ी बूटियां खोज कर लेट थे और उसे सहर में बेच कर अपने लिए जरुरत के सामान ले आते थे.

रोज की तरह आज भी मई और मेरी बीवी जंगल में जड़ी बूटी खोजने के लिए आये थे और हम जड़ी बूटी खोजते खोजते जंगल के अंदर पहुंच गए थे तो वही इस जंगल में आज शालीमार राज्य के राजा के बड़ा बीटा भी जरुरी जानवरो का शिकार करने के लिए आया हुआ था तभी उस राजकुमार के नजर मेरी वाइफ पर गयी और जब वो उसे देखा तो उसके अंदर का वासना जग गया और सीधा हमारे पास आ गया और आते hi मुझसे बोलै.

राजकुमार- ये लड़के देख मुझे तुम्हारी वाइफ पसंद आ गयी है इस लिए ये मुझे आज रत के लिए चाहिए इस लिए तुम इसे यही पर छोड़ कर चले जाओ कल सुबह ये तुम्हारे पास पहुंच जाएगी.

राजकुमार के बात सुन कर मुझे बहुत गुसा आया लेकिन मई अपने घुसे को दबाते हुए बोलै.

मई- राज कुमार आप ये क्या बाटे कर रहे है देखिये राज कुमार हम यहाँ अपनी रोजी रोटी के लिए आये है इस लिए आप हमें परेशां मत कीजिये हमें जाने दीजिये.

मेरी बात सुन कर राजकुमार हस्ते हुए बोलै.

राजकुमार- अच्छा तो तुम गरीब हो कोई बात नहीं मई तुम्हारे वाइफ के बदले में तुम्हे कुछ धन दे देता हु तुम इस धन से आराम से एक साल तक बिना काम किये अपना भजन का बेवस्था कर सकते है.

मई- राज कुमार हम बिकाऊ नहीं है समझे आप चुप चाप हमारा रास्ता छोड़िये और हमें जाने दीजिये.

मेरी बात को सुन कर राज कुमार थोड़ा घुसे से बोलै.

राजकुमार- देखि मई तुम्हे प्यार से समझा रहा हु तुम मेरी बात मन लो अन्यथा मुझे जोर जबरदस्ती करने भी आती है समझा.

मई- अगर आपने मेरी वाइफ को हाथ भी लगाया तो ये आपके लिए अच्छा नहीं होगा.

राजकुमार- अच्छा अगर तुम्हारे वाइफ को हाथ लगाया तो तुम मेरा क्या बिगड़ लोगे.

इतना बोल कर वो मेरी वाइफ के तरफ बढ़ने लगा उसको अपने वाइफ के तरफ बढ़ता हुआ देख कर मई उसके सामने आ गया और अपने हाथ में खंजर पकड़ कर दहाड़ते हुए बोलै.

मई- आप राजकुमार है इस लिए मई आपका इज्जत कर रहा था लेकिन अगर आप मेरी वाइफ को हाथ भी लगाने की कोशिश की तो मई इस खंजर से आपको चिर फाड् दूंगा समझे.

मेरी बात को सुन कर राजकुमार को बहुत गुसा आया और घुसे से मुझसे बोलै.

राजकुमार- तुम एक मामूली आदमी और मुझे धमकी दे रहा है लगता है की तुम्हे मरने की बहुत जल्दी है इतना बोल कर उसने अपने हाथ में पकडे हुए तलवार को मेरे तरफ फेक दिया जिसके कारन वो तलवार सीधा आ कर मेरे पेट में गश गया और मई जोर से छीलते हुए वही गिर कर बेहोश हो गया इधर जब मेरी वाइफ ने देखा की मई वही गिर कर बेहोश हो गया हु तो उसे लगा की मई मर गया हु इस लिए वो जोर से रट हुए बोली.

वाइफ- ये अपने क्या किया मुझे बचने के लिए खुद hi मरे गए अब मई आपके बिना कैसे जिन्दा रहूंगी आपके शिवा मेरा इस दुनिया में है hi कोण अब मई भी जिन्दा नहीं रहना चाहती हु.

इतना बोल कर मेरी वाइफ ने मेरे पास गिरे हुए खंजर को उठाया और अपने गले को काट लिया और वही पर मर गयी इधर जब उस राजकुमार ने देखा की मेरी वाइफ भी मर गयी है तो वो अपना मन मसोसते हुए वह से चला गया जैसे hi वो वह से गया तो वह पर एक काळा वस्त्र पहना हुआ आदमी प्रकट हुआ और मेरे और मेरी वाइफ के शरीर को ले कर वह से गायब हो गया.

इधर जब मेरी आँख खुली तो मई एक गुफा में था और मेरे सामने एक काळा कपडे पहना हुआ आदमी हवं कुंड के पास बैठ कर मंत्रोचारण कर रहा था मई जैसे hi उस आदमी को देखा तो मुझे उसके अंदर से नकारात्मक ऊर्जा निकलती हुयी महसूस हुयी तो मई घबरा गया लेकिन अपने घबराहट को छुपाते हुए उस आदमी से बोलै.

मई- मई यहाँ कैसे आ गया मई तो जंगल में था और मुझे और मेरी वाइफ को उस डस्ट राजकुमार ने घेर कर रखा था और मेरी वाइफ कहा है क्या हुआ उसके साथ कही उस कमीने ने उसके साथ कुछ किया तो नहीं न.

मेरी बात को सुन कर उस आदमी का ध्यान टुटा और वो मुझे देखते हुए अपने गंभीर आवाज में बोलै.

आदमी- तुम अभी मेरे स्थान पर हो और मुझे अफ़सोस के साथ कहना पद रहा है की उन लोगो ने तुम्हारे वाइफ को जान से मर दिया है.

उस आदमी के मुँह से मैंने जैसे hi सुना की मेरी वाइफ मर गयी है और उसे राजकुमार ने मारा है तो मेरे आँखों से आंसू आने लगा और साथ में मुझे खुद पर hi गुसा आने लगा की मई इतना कमजोर क्यों हु मई रट हुए जोर से बोलै.

मई- मेरे जैसे कमजोर आदमी का जीने का कोई हक़ नहीं है मई इतना कमजोर हु की मई अपने बीवी को भी नहीं बचा पाया.

इतना बोल कर मई जोर जोर से रोने लगा मुझे इस तरह से रोटा हुआ देख कर उस आदमी ने अपने पास से खंजर निकल कर मेरे तरफ फेकते हुए मुझसे बोलै.

आदमी- है तुम सही बोल रहे हो तुम जैसे कमजोर आदमी को मर hi जाना चाहिए ये लो खंजर और खुद को ख़तम कर लो लेकिन मरने से पहले मेरी एक सवाल का जबाब दे कर मरना तो बताओ क्या तुम मरने के बाद भी सन्ति से रह पाओगे क्या तुम्हारे आत्मा को सन्ति मिल जाएगी क्या तुम्हारी आत्मा ये सोच कर तड़पती नहीं रहेगी की तुमने अपने वाइफ के कातिलों से बदला नहीं लिया.

उस आदमी के बात सुन कर मेरी आँखों से आंसू गिरने लगा और मई लाचारी से वही घुटनो के बल गिर गया और जोर से छीलते हुए बोलै.

मई- तो आखिर मई मरने की शिवा कर hi क्या सकता हु मेरे जैसा कमजोर आदमी उस राजकुमार से अपना बदला कैसे ले सकता है अगर वो चाहे तो अपने एक हमले से मुझ जैसे आदमी को 100 बार मर सकता है तो आप hi बताइये की मई उससे अपना वाइफ का बदला कैसे लूंगा.

मेरी बातो को सुन कर उस आदमी के चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान आ गया और वो मुझसे बोलै.

आदमी- कोई भी आदमी अपने माँ के पेट से hi ताकतवर हो कर बहार नहीं आता बल्कि वो अपने म्हणत और लगन से शक्तिशाली बनता है अगर तुम चाहो तो मई तुम्हे ताकतवर बनाने में तुम्हारी मदत कर सकता हु.

उस आदमी के बात सुन कर मई उसे हैरानी से देखते हुए बोलै.

मई- क्या मई सच में ताकतवर बन सकता हु क्या मेरे पास भी जादुई शक्ति होगी.

आदमी- है तुम भी ताकतवर बन सकते हो और तुम इतना ताकतवर बन सकते हो की तुम्हारा मुकाबला इस दुनिया में कोई नहीं कर पायेगा.

उस आदमी के बात सुन कर मई सोच में पद गया फिर कुछ सोचते हुए मई उस आदमी से बोलै.

मई- आप है कोण और आप मेरी मदत क्यों करना चाहते है जहा तक मई जनता हु की इस दुनिया में कोई भी बिना मतलब के किसी का मदत नहीं करता है तो आपको मेरी मदत कर के क्या फायदा होगा.

मेरी बात को सुन कर वो आदमी थोड़ा संत हो गया और फिर मुझसे बोलै.

आदमी- मेरा नाम तांत्रिक जगरनाथ है और मई तुम्हारी मदत इस लिए करना चाहता हु की मुझे भी इस दोस्तो से बदला लेना है इन लोगो ने मेरी भी बेटे और बहु की जान की है तो अब तुम बताओ क्या तुम तैयार हो शक्तियां प्राप्त करने के लिए.

तांत्रिक जगरनाथ के बात सुन कर मई कुछ सोच में पद गया फिर कुछ देर सोचने के बाद मई बोलै.

मई- है मई तैयार हु ताकतवर बनाने के लिए और मई इतना ताकतवर बनाना चाहता हु की मेरा नाम सुन कर मेरे दुश्मनो के रूह तक कप जाये.

जगरनाथ- तो ठीक है तुम सबसे पहले अपने वाइफ का अंतिम संकर करो इसके बाद मई तुम्हे आगे बताऊंगा की तुम्हे क्या करना है.

मई- ठीक है

इतना बोल कर मई अपने बीवी के शरीर को लिया और उस गुफा से बहार निकल गया उस गुफा से थोड़ी दूर पर hi एक बड़ी बाह रहा था मई उस नदी के पास जा कर अपने बीवी का अंतिम संस्कार किया और फिर नदी में स्नान कर के जगरनाथ के पास उसी गुफा में वापस आ गया मुझे वापस आया हुआ देख कर जगरनाथ मुझसे बोलै.

जगरनाथ- तो तुम आ गए अपने बीवी के अंतिम संस्कार कर के.

मई- जी मई आ गया अब मुझे आगे क्या करना होगा मुझे जल्द से जल्द बहुत ताकतवर होना है मुझे इतना ताकतवर बनाना है की मई अपने शक्तियों से इस दुनिया के बुराई को ख़तम कर सकू.

मेरी बात को सुन कर जगरनाथ के चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान आ गयी फिर वो मुस्कुराते हुए मुझसे बोलै.

जगरनाथ- मई तुम्हे इतना शक्तिशाली बना दूंगा की इस दुनिया में कोई भी तुम्हे हरा नहीं पायेगा और तुम इस दुनिया पर रह करोगे लेकिन तुम्हे उसके लिए मेरी साडी बाटे माननी होगी.

जगरनाथ के बात सुन कर मई खुस हो गया और उसी खुसी के साथ मई उससे बोलै.

मई- ठीक है आप बताओ की मुझे क्या करना होगा मई ताकतवर बनाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हु.

मेरी बात सुन कर जगरनाथ मुस्कुराते हुए मुझसे बोलै.

जगरनाथ- तुम्हे अपने गाओं में जा कर 9 कुवारी लड़कियों को ले कर यहाँ आना होगा वो भी बिना किसी को बताये.

जगरनाथ के बात सुन कर मई हैरान हो गया मेरे मन में न जाने कैसे कैसे ख्याल आने लगे इस लिए मई हकलाते हुए.

मई- आप उन 9 लड़कियों के साथ क्या करेंगे कही आप उनके साथ कुछ गलत तो नहीं करने वाले है न.

मेरी बात को सुन कर जगरनाथ के चेहरे पर एक पल के लिए हवइया उड़ने लगी लेकिन फिर खुद को संभल कर मुस्कुराते हुए मुझसे बोलै.

जगरनाथ- अरे ये तुम कैसी बाटे कर रहे हो भला मई उन लड़कियों के साथ क्या गलत करूँगा मई तो बस उन लड़कियों को इस लिए लेन को बोल रहा हु क्युकी मई उन लड़कियों के साथ हवन कर के माँ दुंर्गा के 9 रूपों को प्रसन कर के तुम्हर शक्ति दिलाना चाहता हु.

जगरनाथ के बात सुन कर मई सोच में पद गया फिर मई कुछ सोचते हुए जगरनाथ से बोलै.

मई- अगर ऐसी बात है तो फिर आप उन 9 लड़कियों को बिना किसी को बताये क्यों लेन को बोल रहे है.

जगरनाथ- मई जो हवन करने वाला हु वो एक गोपनीय है इस हवन के बारे सिर्फ तुम्हे और मुझे hi पता होना चाहिए अगर किसी और को इस बारे में पता चल गया तो ये हवन बेकार हो जाती है इस लिए तुम्हे किसी को बताने से मन किया है समझे अब अगर तुम्हे ताकतवर बनाना है तो बिना किसी सवाल के को मई बोलै हु वो करो.

जगरनाथ के बात सुन कर मई सोच में पद गया की मुझे जगरनाथ के बात मानना चाहिए या फिर नहीं तभी मेरे सामने मेरी वाइफ के चेहरा नजर आने लगा और साथ में उस डस्ट राजकुमार के घमंड से हस्ता हुआ चेहरा दिखने लगा जिसके कारन मेरे शरीर में घुसे का एक तेज़ लहार दौड़ गया और मई मन बना लिया की जगरनाथ जी भी बोल रहा है मई वो सब करूँगा और ताकतवर बन कर अपने वाइफ का बदला लूंगा.

इतना सोचने के बात मई जगरनाथ से बोलै.

मई- ठीक है मई अभी गाओं के लिए जाता हु और वह से 9 कुवारी लड़कियों को लेकर आता हु.

मेरी बात को सुन कर जगरनाथ के चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान छ गयी और वो अपने मन में hi बोलै.

जगरनाथ- (अपने मन में) मेरे प्लान का पहला फेज कम्पलीट हो गया अब ये किसी तरह से उन लड़कियों को ले कर यहाँ आ जाये उसके बाद मई अपने प्लेन का दूसरा फेज सुरु करूँगा.

इतना बोल कर जगरनाथ अपने मन मन hi जोर जोर से है रहा था इधर मई जगरनाथ के प्लान से बेखबर था हलाकि मेरा दिल बोल रहा था की कही न कही कुछ तो गलत हो रहा है लेकिन मेरे दिमाग में इस वक़्त दुनिया के सबसे ताकतवर बनाने का बहुत सवार था इस लिए मुझे कुछ भी गलत सही नहीं दिखा रहा था इधर लोभ के नदी में पानी धीरे धीरे बढ़ने लगी थी नदी का पानी बढ़ते हुए मेरे घुटनो तक आ गया था क्युकी कही न कही मेरे मन में दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान बनाने का लालच आ गया था.

इधर इन सब खतरों से बेखबर मई गाओं की तरफ बढ़ते जा रहा था इस वक़्त मेरे दिमाग में बस यही चल रहा था की मुझे किसी भी तरह से 9 कुवारी लड़कियों को ले कर आना है और दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान बनाना है करीब एक घंटा चलने के बाद मई अपने गाओं के नदी के पास पहुंच गया था जब मई नदी के पास पंहुचा तो देखा की नदी में 3 लड़किया कपडा धो रही है तो मई छुपाते हुए उन लड़कियों के पास चला गया और आस पास देखने लगा की कही को आस पास है तो नहीं न लेकिन जब मैंने देखा की उन 3 लड़कियों के अलावा वह पर और कोई नहीं है तो मई धीरे धीरे उन लड़कियों के नजदीक चला गया और फिर अपने पॉकेट से एक जड़ी बूटी निकला और अपने मुँह पर एक कपडा बांध कर उस जड़ी बूटी को जला दिया.

मुझे जड़ी बूटियों के बारे में बहुत ज्ञान था क्युकी मई बचपन से hi जंगल में जा कर जड़ी बूटी लता था और उसे मार्किट में बेच कर अपना रोजी रोटी चलता था इस लिए मई जड़ी बूटी को आसानी से पहचान लेता था अभी मई जिस जड़ी बूटी को जलाया था वो एक नशीली जड़ी बूटी थी अगर इस नशीली जड़ी बूटी के धुय किसी के नक् में चला जाये तो वो 5 घंटो के लिए बेहोश हो जाता है.

मई जैसे hi अपने मुँह पर कपडा बांध का उस जड़ी बूटी को जलाया वैसे hi उस जड़ी बूटी के धुय उन लड़कियों के पास पहुंच गया और वो तीनो लड़की उस जड़ी बूटी के असर में आ कर वही बेहोश हो गयी उनको बेहोश होता हुआ देख कर मई आस पास देखा तो वह दूर दूर तक कोई नहीं था ये देख कर मई उन तीनो लड़कियों को उठाया और उनको लेकर उसी गुफा में आ गया.

उन तीनो लड़कियों को गुफा में छोड़ने के बाद मई फिर से गाओं के तरफ निकल गया और ऐसे सैम से सुबह तक मई गाओं से और 6 लड़कियों को उठा कर गुफा में ले आया उन लड़कियों को गुफा में लेन के बाद मई सीधा तांत्रिक जगरनाथ के पास गया और उससे बोलै.

मई- अपने जैसा बोलै था मैंने 9 कुवारी लड़कियों को ले कर आ गया हु.

मेरी बात को सुन कर जगरनाथ खुश हो गया और वो खुसी से बोलै.

जगरनाथ- बहुत अच्छा किया तुमने अब तुम्हे इस दुनिया में सबसे ताकतवर इंसान बनाने से कोई नहीं रोक सकता है.

जगरनाथ के बात सुन कर मई भी खुश हो गया इसके बाद मई जगरनाथ से बोलै.

मई- अब हमें आगे क्या करना है.

जगरनाथ- आज अमावस्या की रत है आज हम इन 9 लड़कियों की बलि देंगे.

जगरनाथ के बात सुन कर मई हैरान हो गया और मुझे जगरनाथ पर बहुत गुसा आने लगा मई घुसे से जगरनाथ से बोलै.

मई- आप ये क्या बोल रहे है हम इन मासूम लड़कियों के बलि देंगे.

मेरे बात को सुन कर जगरनाथ जोर जोर से हस्ते हुए बोलै.

जगरनाथ- है है है तुमने ठीक सुना हम इन लड़कियों के बलि देंगे जिससे सैतान खुश हो जायेंगे और इन लड़कियों के बलि के बदले तुम्हे इस दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान बना देंगे.

जगरनाथ के बात सुन कर मुझे बहुत गुसा आने लगा सबसे ज्यादा गुसा तो मुझे खुद पर आ रहा था की मई कैसे इस तांत्रिक के बातो में आ गया.

मई- (घुसे से) तुमने मेरे साथ धोखा किया है अगर तुम मुझे ये बात पहले hi बता देते तो मई इन मासूम लड़कियों को यहाँ लेकर कभी नहीं आता अगर इन मासूम लड़कियों को बलि दे कर hi मई ताकतवर बनूँगा तो मुझे नहीं बनाना है ताकतवर मई इन लड़कियों को ले कर जा रहा हु.

इतना बोल कर मई उन लड़कियों के पास जाने लगा तभी जगरनाथ मेरे सामने आते हुए मुझसे बोलै.

जगरनाथ- तुम ये क्या करने जा रहे हो अगर तुम इन लोगो को यहाँ से ले कर गए तो तुम कभी भी ताकतवर नहीं बन पाओगे और अगर तुम ताकतवर नहीं बन पाए तो अपने वाइफ का बदला कैसे लोगे और अगर तुम अपने वाइफ का बदला नहीं ले पाए तो क्या तुम सुकून से जी पाओगे.

जगरनाथ के बात सुन कर मई सोच में पद गया.

मई- (अपने मन में) ये तांत्रिक कह तो ठीक hi रहा है अगर मई अपने वाइफ का बदला नहीं ले पाया तो मई सुकून से कैसे जी पाउँगा लेकिन मई अपने बदले के चाकर में इन मासूम लड़कियों का बाकि नहीं चढ़ा सकता आखिर इन लड़कियों को गलती hi क्या है.

इतना सोचने के बाद मई तांत्रिक जगरनाथ से बोलै.

मई- है अपने सही बोलै मुझे उन सब से बदला लेना है लेकिन मई अपना बदला इन लड़कियों के बलि दे कर नहीं ले सकता इस लिए मई इन लड़कियों को वापस इनके घर छोड़ने जा रहा हु.

मेरी बात सुन कर तांत्रिक जगरनाथ को गुसा आ गया और वो घुसे से मुझे बोलै.

जगरनाथ- लड़के तुम भावनाओ में बाह कर बहुत बड़ी गलती कर रहे हो तुम इन लड़कियों को लेकर अब वापस नहीं जा सकते हो लड़कियों इन गुफा में बलि के लिए लायी जाती है उनका लाश hi इस गुफा से बहार जाता है समझे इस लिए तुम व्यर्थ की कोशिश करना छोड़ा और इन लड़कियों का बलि देने के लिए तैयार हो जाओ अगर तुम्हे मेरी बातो पर बिस्वास नहीं है तो तुम इनको यहाँ से बहार ले जा कर देख सकते हो.

इतना बोल कर जगरनाथ ने चुपके से कुछ मंत्र पढ़ा और अपने हाथ में पकडे हुए भभूत को हवा में फेक दिया जिसके कारन वह एक अदृस्य कवच बन गया इधर मई उस तांत्रिक जगरनाथ के बातो को सुन कर अपने मन में सोचने लगा.

मई- (अपने मन में) क्या ये तांत्रिक सच बोल रहा है अगर ये झूठ भी बोल रहा है तो मई एक साथ इतने लड़कियों को ले कर नहीं जा सकता हु और अगर मई कुछ लड़कियों को लेकर यहाँ से बहार गया तो ये बाकि बचे हुए लड़कियों के साथ कुछ भी कर सकता है क्युकी मई इस तांत्रिक के बातो से hi समझ गया की ये तांत्रिक सही नहीं है जरूर इस तांत्रिक के मन में जरूर कुछ खतरनाक चल रहा है मुझे इस संभल कर रहना होगा और फ़िलहाल मई इसका बात मानाने का नाटक करता हु.

मई- क्या आप सच बोल रहा है.

जगरनाथ- है मई सच बोल रहा हु अगर तुम्हे बिस्वास नहीं है तो यहाँ से इन्हे ले जार कर देखो.

मई कुछ सोचने का नाटक करते हुए जगरनाथ से बोलै.

मई- अगर आज मई इन लड़कियों का बलि दे दूंगा तो क्या मई सच में दुनिया के सबसे ताकतवर इंसान बन जाऊंगा.

जगरनाथ- है बिलकुल अगर तुम इन लड़कियों की बलि दे डोज तो तुम इतना ताकतवर बन जाओगे की इस दुनिया में तुम्हारा कोई सामना नहीं कर पायेगा

मई- अगर मई सच में दुनिया के ताकतवर इंसान बन जाऊंगा और अपने वाइफ का बदला ले पाउँगा तो मई और बदले के लिए कुछ भी करने को तैयार हु.

मेरी बात सुन कर तांत्रिक जगरनाथ के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गया और मुस्कुराते हुए मुझसे बोलै.

जगरनाथ- ये तुमने अच्छा फैसला किया है अब सुनो तुम्हे क्या करना है सबसे पहले तुम्हे इन लड़कियों को हवन के बेदी के पास बैठना है इसके बाद मई सैतान की पूजा और हवन करूँगा मई हवन करते हुए तुम्हे जैसे hi इशारा करूँगा तुम इन लड़कियों का बलि देना होगा और बाकि देने के बाद इन लड़कियों के खून को एक पत्र में जमा कर के पहले सैतान का भोग लगाना हो फिर भोग लगाने के बाद उस खून को खुद पीना होगा जैसे जैसे तुम खून पिटे जाओगे तुम्हारे अंदर शक्तिया आती जाएगी.

मई- ठीक है मई इन लड़कियों को हवन कुंड के पास ले कर जाता हु आप हवन के तयारी कीजिये.

मेरी बात सुन कर तांत्रिक जगरनाथ मुस्कुराते हुए हवन कुंड के पास जा कर बैठ गया और फिर वो अपने पास से एक खतरनाक दिखने वाला काली तलवार निकल और उसपे कुछ मंत्र पढ़ कर भभूत डाला और फिर अपना आँख बंद कर के मंत्रोचारण करने लगा इधर मई तांत्रिक जगरनाथ के कहे अनुसार साडी लड़कियों को हवन कुंड के पास बने बलि वेदी के पास ले कर आ गया.

इधर तांत्रिक जगरनाथ कुछ देर तक मंत्र पढ़ने के बाद अपने पास रखा हुआ तलवार और एक पत्र उठाया और मुझे देते हुए बोलै.

जगरनाथ- ये तलवार लो और मई जैसे hi तुम्हे इशारा करूँगा तुम्हे एक लड़की का बलि देना होगा और उसके खून को इस पत्र में जमा करना होगा.

जगरनाथ के बात सुन कर अपना गर्दन है में हिला दिया और उसके हाथ से तलवार और वो पत्र के लिया मुझे तलवार और वो पत्र देने के बाद वो हवन करने लगा तांत्रिक जगरनाथ अपने आंख को बंद कर के मंत्र पढ़ रहा था और अपने हाथ से कुछ हवन कुंड में दाल रहा था वो जैसे जैसे मंत्र पढ़ रहा था वैसे वैसे मेरे दिल के धड़कन बढ़ते जा रहा था.

मई- (अपने मन में) मुझे जल्दी hi कुछ करना होगा नहीं तो ये मुझसे इन मासूम लड़कियों का बलि दिलवा देगा मई क्या करू मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है (फिर कुछ देर सोचने के बाद) ये अगर सैतान के भक्त है तो आज तक न जाने कितने मासूम लड़कियों का बलि दिया होगा इस लिए आज मुझे कुछ भी कर के इसे मरना hi होगा अगर ये जिन्दा रहा तो मई इन लड़कियों को ले कर यहाँ से बहार नहीं जा सकता.

इतना सोचने के बाद मई उस तलवार को मजबूती से अपने हाथ में पकड़ा और धीरे धीरे तांत्रिक जगरनाथ के पास पहुंच गया तांत्रिक जगरनाथ के पास जाने के बाद मई अपने हाथ में पकड़ा हुआ तलवार ऊपर उठाया और जोर से छीलते हुए बोलै.

मई- तांत्रिक जगरनाथ तुमने आज तक न जाने कितने मासूम लड़कियों की बलि दी होगी लेकिन अब नहीं अब तुम्हारी बलि की बरी है आज मई तुम्हे मर कर उन साडी लड़कियों का बदला ले लिंगा.

इतना बोलने के मई अपने हाथ में पकड़े हुए तलवार से एक hi वॉर में तांत्रिक जगरनाथ के गाला काट दिया बेचारे को पता hi नहीं चला की कब उस पर अटैक हुआ और कब उसकी मृत्यु हो गयी.

इधर मई जैसे hi तांत्रिक जगरनाथ का सर उसके धड़ से अलग किया वैसे hi वह का माया धीरे धीरे ख़तम होने लगा वो लड़कियों तांत्रिक जगरनाथ का शरीर सरे के सरे वह से गायब हो गया और उन सब को वह से गायब होने के बाद मई भी धीरे धीरे वह से गायब हो गया और जब मई दोबारा प्रकट हुआ तो मई वही धुन से भरी हुयी इलाके में खड़ा था जहा से मेरा परीक्षा सुरु हुआ था अभी मई खुद इस जगह पर संतुलित कर hi रहा था की तभी मुझे अमरनाथ के आवाज सुनाई दिया.

अमरनाथ- तुमने तीसरा परीक्षा लोभ के परीक्षा में ये साबित कर दिया की तुम्हारे अंदर ऐश्वर्या धन और शक्तियों का कोई लोभ नहीं है इस लिए तुम तीसरा परीक्षा लोभ की परीक्षा में उत्तीर्ण कर गए अब तुम्हारा चौथा परीक्षा है आत्मा की सुधता की तो इस परीक्षा में मई एक यन्त्र के द्वारा तुम्हारी आत्मा के शुद्धता की जाँच करूँगा तो क्या तुम तैयार हो.

मई- जी मई तैयार हु.

मेरा इतना बोलना hi था की तभी अमरनाथ ने अपना हाथ हिलाया तो वह पर खम्भे जैसे आकर का एक यन्त्र आ गया जैसे hi वो यन्त्र में सामने आया तो मई उसे बड़े गौर से देख रहा था तभी मुझे अमरनाथ ने बोलै.

अमरनाथ- इस यन्त्र को आत्मा जाँच यन्त्र बोलते है इसी यन्त्र से तुम्हारी आत्मा की जाँच होगी अगर तुम्हारे आत्मा के लेवल 50 से ज्यादा आएगा तो तुम इस परीक्षा में भी पास हो जाओगे इस लिए अब तुम आगे बढ़ो और अपना दाहिना हाथ इस यन्त्र पर रखो.

अमरनाथ के बात मन कर मई उस आत्मा जाँच यन्त्र के पास आ गया और फिर अपना दाहिना हाथ मई उस यन्त्र पर रख दिया जैसे hi मैंने अपना हाथ उस यन्त्र पर रखा तो उस यन्त्र से एक रोशनी निकल कर मेरे पुरे शरीर को स्कैन करने लगी बहुत देर तक मेरे शरीर को स्कैन करने के बाद भी उस यन्त्र पर कोई no. नहीं आया ये देख कर मई परेशां हो गया तो वही जब उस यन्त्र पर मेरे हाथ रखने के बाद भी कोई no. नहीं आया तो अमरनाथ भी सोच में पद गए.

अमरनाथ- (अपने मन में) ऐसा कैसे हो सकता है इस यन्त्र पर कोई न कोई no. तो आना hi चाहिए था अगर इस लड़के का आत्मा असुद्ध भी हुआ तब भी no. माइनस में आना चाहिए था लेकिन यहाँ तो कोई no. Hi नहीं आया कही इस यन्त्र में कोई गड़बड़ तो नहीं hi गयी है.

अभी वो सोच hi रहे थे की तभी अचानक से उस यन्त्र से तेज़ रोशनी निकलने लगी उस यन्त्र से इतनी ज्यादा मात्रा में रोशनी निकल रही थी की वह के धुन भी छटने लगे थे वो रोशनी करीब 5 मिनट तक वैसे hi रही फिर वो रोशनी धीरे धीरे छाती तो उस यन्त्र पे एक ऐसा no. लिखा हुआ आया जिसे देख कर मई और अमरनाथ हैरान हो गए क्युकी उस यन्त्र पर 100 no. लिखा हुआ था उस no. को देख कर मई हैरान के साथ साथ खुस भी था की मई इस परीक्षा को भी पास कर गया तो वही अमरनाथ उस no. को अपना आँखे फाड् कर देख रहे थे जब मेरी नजर उन पर गयी और मैंने देखा की वो अपना आँखे फाडे बाद उस यन्त्र पर लिखे हुए no. को hi घूरे जा रहे थे तब मई उनसे बोलै.

मई- आप इस यन्त्र को इस तरह से क्यों घर कर देख रहे है कही कुछ गलत है क्या कही मई फ़ैल तो नहीं हो गया न.

मेरी बात सुन कर अमरनाथ अपने होश में आये और खुसी के साथ मुझे देखते हुए बोले.

अमरनाथ- तुम कोण हो तुम कोई इंसान नहीं हो सकते क्युकी कोई भी इंसान की आत्मा का लेवल 100 का नहीं होता ये लेवल तो सिर्फ देवताओ के पास hi होती है फिर ये लेवल तुम्हे कैसे मिल गया.

अमरनाथ के बात सुन कर मुझे कुछ समझ में नहीं आया इसलिए मई बात को बदलते हुए उनसे बोलै.

मई- तो क्या मई पास हो गया.

अमरनाथ- अरे है भाई तुम पास हो गए तुमने वो कर दिखाया है जो कोई मामूली इंसान के बस की बात नहीं है क्युकी आत्मा का लेवल 100 सिर्फ और सिर्फ देवताओ के पास hi होता है.

अमरनाथ के बात सुन कर मई खुस हो गया फिर मई उनसे बोलै.

मई- अगर मई इस परीक्षा को भी पास कर गया तो अब मेरे पांचवा वासना की परीक्षा सुरु कीजिये.

अमरनाथ- ठीक है.

इतना बोल कर अमरनाथ अपना हाथ घुमाया तो मई वह से गायब हो गया और जब मई प्रकट हुआ तो मई एक बगीचे में था जैसे hi मई उस बगीचे को देखा तो मई उसी बगीचे में खो गया क्युकी वो बगीचा बहुत सुन्दर था उसमे तरह तरह के सुन्दर फूल लगे हुए थे और उन सरे फूलो से एक अजीब सी सुगंध आ रही थी जिससे रोम रोम में रोमांस भर रहा था और मन में वासना के तेज लहार दौड़ रहा था अभी मई बगीचा के खूबसूरती में खोया हुआ hi था की तभी मुझे वह पर बहुत साडी लड़कियों के हसने की आवाज सुनाई दी.

......................................................

तो बे कंटिन्यू

......................................................
 
थैंक्स बीआरओ फॉर योर लवली कमैंट्स ऐसे hi साथ बने रहिये

सबसे पहले मई आपको धन्यवाद देना चाहता हु अपने इस स्टोरी पर अभी तक के सब कमैंट्स से अच्छा कमैंट्स किया है वन्स अगेन थैंक्स.

और रही आपके के पॉइंट की बात तो मई आपको आपके के पॉइंट का जबाब दे देता हु.

1. मृत्युंजय इस स्टोरी के लीड हीरो में से एक है तो उसका मृत्यु इतनी जल्दी कैसे हो सकती है वो त्रिदेवो के अंशो में से एक है इस लिए वो इस स्टोरी के लास्ट तक आपको देखने को मिलेगा.

2. जल्द hi प्रतिक को अपना परिवार मिलने वाला है बस आप साथ बने रहे रहिये.

3. शनाया को अनन्य और प्रतिक के सरे वाइफ को एक्सेप्ट करना पड़ेगा और वो करेगी भी लेकिन कैसे करेगी ये आपको आगे स्टोरी में पता चलेगा और रही बात शनाया के बहन शानवी की तो उसे प्रतिक के प्रति सिर्फ अट्रैक्शन हुआ था और उसे जल्द hi किसी और से प्यार होने वाला है इस लिए प्रतिक के वाइफ में इसका no नहीं है और शनाया के बेस्ट फ्रेंड राठौर परिवार के बेट है इसका मतलब आप समझ hi गए होंगे.

4. जल्द hi आपको सुपर बॉय के कारनामे देखने को मिलेगा बस आप हमारे साथ बने रहिये.

5. प्रतिक के माँ को ठीक होने में समय लगेगा.

6. प्रतिक के पापा कहा है ये आपको आगे स्टोरी में पता चलेगा बस मई आपको इतना बता सकता हु की प्रतिक के डैड यानि की प्रताप सिंह राठौर अभी भी जिन्दा है लेकिन ये कहा है ये आपको स्टोरी में पता चलेगा.
 
भाई मृत्युंजय इस स्टोरी में महादेव का अंश है वो इतनी आसानी से कैसे मर सकता है

अनन्य के भाई तो सिर्फ एक माध्यम है उसको मुंबई लेन में बल्कि अनन्य को तो उसकी किस्मत मुंबई रही है

आपको आगे के अपडेट में पता चल जायेगा की संजीत क्या करता है अनन्य के साथ

और रही बात प्रतिक की आखरी परीक्षा की तो वो आपको नेक्स्ट अपडेट में hi मिल जायेगा.

थैंक्स फॉर योर लवली कमैंट्स ऐसे hi साथ बने रहिये
 
Back
Top