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शुक्रिया भाई पर मुझे उम्मीद कुछ ज्यादा ही थी
हमने श्री प्रदीप भौमिक की कहानी "कहीले लाज" की कहानी में थोड़ा अपना मसाला डाल कर नाटक किया था
असल में उनकी कहानी सिर्फ पच्चीस मिनट की थी l यह कहानी हमारे एच ओ डी को बेहद पसंद थी l उन्होंने मुझे दायित्व दिया था इसे एक घंटे का बनाने के लिए l इसलिए उस कहानी में अपना कुछ जोड़ने में व्यस्त रहा l जैसा कि मेरा ही निर्देशन में यह नाटक मंचन हुआ l
पर उम्मीद कुछ ज्यादा की थी पर जो मिला असंतुष्ट नहीं हूँ
फिर से धन्यवाद
हमने श्री प्रदीप भौमिक की कहानी "कहीले लाज" की कहानी में थोड़ा अपना मसाला डाल कर नाटक किया था
असल में उनकी कहानी सिर्फ पच्चीस मिनट की थी l यह कहानी हमारे एच ओ डी को बेहद पसंद थी l उन्होंने मुझे दायित्व दिया था इसे एक घंटे का बनाने के लिए l इसलिए उस कहानी में अपना कुछ जोड़ने में व्यस्त रहा l जैसा कि मेरा ही निर्देशन में यह नाटक मंचन हुआ l
पर उम्मीद कुछ ज्यादा की थी पर जो मिला असंतुष्ट नहीं हूँ
फिर से धन्यवाद