अपडेट- 02
सुबह सबसे पहले रानी जी की नींद खुली, उसने उठकर घर की साफ सफाई शुरी कर दी. थोड़ी देर बाद आनंद जी उठे. और उन्होंने अभिषेक, सरिता और मनीषा को उठाया. सभी ने उठकर नहाया और स्कूल जाने के लिए तैयार होने लगे. रानी जी ने सभी के लिए टिफिन पैक किया और अभिषेक को तैयार होने में मदद करने लगी. सरिता और मनीषा अपने से तैयार होने लगी. ये देखकर आनंद ने कहा.
आनंद जी- इस उम्र में भी तुम इसे तैयार करवा रही हो, जबकि तुम्हे सरिता और मनीषा को तैयार करना चाहिए. तुम्हे नहीं लगता की तुम अपने बेटे के चक्कर में अपनी बेटियों के साथ अन्याय कर रही हो.
रानी जी- अरे मेरी दोनों बेटियां बहुत समझदार हैं वो अपना ख़म खुद कर लेती हैं, लेकिन मेरा बीटा अभी नादाँ है. बिना मदद के ये कोई काम ठीक से नहीं कर पाटा है इसलिए मैं इसकी मदद कर रही हूँ.
आनंद जी- जब तुन उसे खुद से कुछ करने डौगी तभी तो उसे कुछ आएगा. बच्चो से दुलार करना बुरी बात नहीं हैं भाग्यवान, लेकिन इतना भी दुलार नहीं करना चाहिए. की उनकी आदत बिगड़ जाये.
रानी जी- आप सुबह सुबह फिर से शुरू हो गए. आपको तो बस हर समय मेरे बेटे को कुछ भी कहने का मौका मिलना चाहिए बस. चलो अब ज्यादा बात मत करो. याद है की नहीं आपको की हमें अभिषेक के स्कूल भी चलना है प्रिंसिपल से मिलने के लिए.
आनंद जी- हाँ याद है मुझे और मुझे पता है की प्रिंसिपल ने किसलिए बुलाया होगा. अगर आज इसकी कोई कम्प्लेन मिली तो मैं इसकी टंगे तोड़ दूंगा. देख लेना तुम.
रानी जी- ठीक है पहले चलो तो सही बाद में देख लेंगे की क्या करना है.
उसके बाद अभिषेक अपनी दोनों बहनो के साथ स्कूल चला गया. थोड़ी देर बाद रानी जी और आनंद जी भी उनके स्कूल चले गए और जाकर प्रिंसिपल सर से मिले.
आनंद जी- नमस्ते सर, मैं अभिषेक का पापा आनंद. अभिषेक ने बताया की आपने हमें बुलाया है.
प्रिंसिपल सर- अच्छा तो आप हैं उसके पापा, देखिये मर. आनंद. हम आपके बच्चे को अपने स्कूल में नहीं पढ़ा पाएंगे. हम उसको अपने स्कूल से निकल रहे हैं.
आनंद जी- लेकिन बात क्या है सर जी. उससे कोई गलती हुई है क्या.
प्रिंसिपल सर- गलती नहीं आनंद जी. गुनाह हुवा है. आपको पता है कल एक मामूली बात पर इसने अपनी कक्षा के एक लड़के का सर फोड़ दिया. एक तो पढ़ाई में भी बहुत कमजोर है. टीचर पढ़ते हैं तो वो ड्राइंग बनता रहता है. मुझे नहीं लगता की उसे पढ़ने का कोई फायदा होने वाला है. ऐसे बच्चे को मैं अपने स्कूल में रख कर और बच्चो के लिए खतरा नहीं उठाना चाहता. क्या पता कल को वो फिर किसी और के साथ ऐसा करे.
आनंद जी- लेकिन सर जी वो अभी बछ है. उसे इतनी समझ नहीं है अभी. आप आखिरी बार उसे माफ़ कर दीजिए. मैं उसे समझाऊंगा. मैं आपको भरोषा दिलाता हूँ की आपको दोबारा शिकायक का मौका नहीं मिलेगा.
प्रिंसिपल सर- देखिए आनंद जी. आपका बीटा समझने और समझने की साडी सिमा पार कर चूका है. मुझे नहीं लगता की उसे कोई फर्क पड़ने वाला है, फिर भी मैं आपको आखिरी मौका दे रहा हूँ. अगर इसके बाद उसने ऐसा कुछ किया तो मैं उसे अपने स्कूल से निकल डोंगा.
आनंद जी- जी बहुत बहुत धन्यवाद आपका सर. मैं उसे समझाऊंगा. आगे से वो ऐसी शरारत नहीं करेगा.
प्रिंसिपल सर- जी जरूर. ऐसा हो जाये तो बहुत अच्छा है.
उसके बाद आनंद जी और रानी जी प्रिंसिपल सर के रूम से बहार आये और जाकर अपनी ऑटो में बैठ कर घर आ गए. घर आकर आनंद जोशी ने कहा.
आनंद जी- देख लिया तुमने भाग्यवान. इसीलिए मैं तुम्हे हमेशा समझाता रहता था की उसे अच्छे संस्कार दो. लेकिन तुमने हमेशा उसका बचपना समझ कर नजरअंदाज कर दिया. देखो आज क्या किया उसने. आज किसी एक का सर फोड़ा है उसने. कल किसी और के साथ ऐसा करेगा. फिर क्या करेंगे हम.
रानी जी- मुझे क्या पता था की वो ऐसा कुछ करेगा. मैं तो बस उसे दुलार करती थी. सोचती थी की धीरे धीरे खुद समझ जाएगा. लेकिन मुझे नहीं पता था की वो इतना बिगड़ जायेगा.
आनंद जी- आज तुम बिच में मत आना. आने दो आज उसे मैं अच्छे से खबर लेता हूँ उसकी.
इतना कहकर आनंद जी ऑटो लेकर सवारी के लिए चले जाते हैं. स्कूल की छुट्टी होने के बाद अभिषेक अपनी दोनों बहनो के साथ घर आ गया. घर आने के बाद रानी ने अभिषेक, सरिता और मनीषा को खाना खिलाया और उन्हें सोने के लिए भेज दिया. शाम को जब अभिषेक सो कर उठा तो रानी ने उसे अपने पास बैठाया और प्यार से समझाया.
Raani.Ji- बीटा ये तुमने क्या किया स्कूल माँ. यश का सर फोड़ दिया. ये बहुत गलत है बीटा. अगर वो उल्टा तुम्हारे साथ भी ऐसा करता तो.
अभिषेक- लेकिन मम्मी उसने मेरी ड्राइंग ख़राब कर दी थी. इसलिए मैंने उसे मारा.
रानी- लेकिन इतनी छोटी सी बात के लिए तुम्हे उसे नहीं मरना चाहिए बीटा. ड्राइंग तो तुम दुबारा बना सकते हो, लेकिन जो तुमने उस लड़के का सर फोड़ा है. इससे तो उसको दर्द हुवा होगा. अगर उसे ज्यादा चोट लग जाती तो उसे हॉस्पिटल ले जाना पड़ता. जिससे उसके मम्मी पापा बहुत परेशां होते. तुमने उसका सर फोड़ दिया है. वो स्कूल नहीं आ पायेगा. जिससे उसकी पढाई का बहुत नुकसान होगा. लड़ाई झगड़ा करना अच्छी बात नहीं हैं. अगर कोई तुम्हारे साथ ऐसा करे तो तुम्हे अच्छा लगेगा क्या. तुम्हारे मम्मी पापा अगर परेशां होंगे तो तुम्हे अच्छा लगेगा क्या.
अभिषेक- नहीं मुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगेगा.
रानी जी- तो फिर. जैसे तुमको अच्छा नहीं लगेगा. वैसे hi तुमने जिस लगके को मारा है उसको भी अच्छा नहीं लगेगा. क्या तुम फिर ऐसी सैतानी करोगी. किसी को परेशां करोगी. ये गलत बात है. कोई तुम्हे कुछ कहे तो तुम कोई जवाब hi मत दो. कुछ दिन बाद वो तुम्हे कुछ कहना hi बंद कर देगा. एक अच्छे बच्चे बनकर पढ़ाई करो. ताकि टीचर भी तुमसे प्यार करें.
अभिषेक- नहीं. मैं अब किसी को नहीं मरूंगा मम्मी. सब के साथ अचे से रहूँगा.
रानी जी- ये हुई न अचे बच्चो वाली बात. चलो अब जाकर पढाई करो. तुम्हारे प्रिंसिपल सर कह रहे थे की तुम पढाई बिलकुल भी नहीं करते. दिन भर बस ड्राइंग hi करते रहते हो. बीटा ड्राइंग करनी अच्छी बात है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है की तुम पढ़ाई करना hi बंद कर दो. अगर पढाई नहीं करोगे तो तुम फ़ैल हो जाओगे. अगर तुम फ़ैल हो जाओगे तो तुम्हारे पापा को और मुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगेगा. अगर तुम फ़ैल हो गए तो पापा तुम्हें मरेंगे भी.
अभिषेक- नहीं मम्मी. पापा को बोलना की वो मुझे न मरे. मैं खूब मन लगाकर पढ़ाई करूँगा. और ाहहए नंबर लाऊंगा.
रानी- ठीक है बीटा अगर तुम अच्छे से पढाई करोगे तो पापा तुम्हे नहीं मरेंगे. अब जाओ पढाई करो. और अपनी बहनो को भी पढ़ने के लिए बोल दो.
रानी जी की बात सुनकर अभिषेक अपनी किताब लेकर पढ़ने बैठ गया और साथ में सरिता और मनीषा को भी अपने साथ पढ़ने बैठा लिया. लेकिन अभिषेक ठहरा मोती बुद्धि का लड़का, उसे पढ़ने में बिलकुल रूचि नहीं रहती थी. 10 मिनट पढ़ने के बाद उसने अपनी पेंचील और कॉपी निकली और ड्राइंग बनाने लगा. उसे ड्राइंग बनाते देख सरिता ने कहा.
सरिता- भैया आप पढ़ क्यों नहीं रहे हो. मम्मी ने पढ़ने के लिए बोलै है और आप ड्राइंग बना रहे हैं. ऐसे तो आप फ़ैल हो जायेंगे.
अभिषेक- मैं क्या करू सरिता. मुझे पढ़ना बिलकुल भी ाचा नहीं लगता. पढाई के नाम पर मेरा शरीर कम्पनी लगता है. मुझे ड्राइंग करना बहुत अच्छा लगता है.
सरिता- लेकिन भैया. ये तो गलत है. मम्मी को झूठ बोलकर आप ड्राइंग कर रहे हो. जबकि टीचर ने बताया है की मम्मी पापा से झूठ नहीं बोलना चाहिए.
अभिषेक- तू नहीं समझेगी सरिता. जो टीचर ने बताया है वो पढाई के लिए नहीं था. वो किसी दुसरे चीज के लिए बताया होगा.
सरिता- हाँ भैया तुम ठीक कह रहे हो. अच्छा आप ड्राइंग करो, लेकिन पापा से बचकर करना ड्राइंग नहीं तो पापा ने देख लिया तो बहुत मार पड़ेगी आपको.
अभिषेक- मैं तो पापा से छुपकर hi ड्राइंग करता हूँ, लेकिन तुम पापा को मत बता देना इसके बारे में. नहीं तो सच में पापा मुझे मरेंगे.
उसके बाद सरिता और मनीषा अपना होमवर्क करने लगे और अभिषेक तरह तरह के ड्राइंग बनाने लगा. इसी तरह एक हॉर्स तक तीनो अपनी किताब कापियों में घुसे रहे. पढाई ख़तम हो जाने के बाद तीनो घर में hi खेलने लगे. रात 8 बजे तक आनंद जी ऑटो लेकर घर आ जाते हैं.
रानी जी उन्हें पिने के पिने के लिए पानी देती है. पानी पिने के बाद आनंद जी रानी जी से पूछते हैं.
आनंद जी- अभिषेक कहा है भाग्यवान. दिखाई नहीं दे रहा है.
रानी जी- वो तीनो बगल वाले कमर में खेल रहे हैं. एक बात और कहनी है आपसे. अभिषेक को मारिएगा मत. मैं उसको अच्छी तरह से समझा दिया है. वो बोल रहा था की अब वो किसी के साथ maar-pit नहीं करेगा. इस बार जाने दीजिए उसे.
आनंद जी - अरे भाग्यवान. मैं उसका दुश्मन नहीं हूँ. मुझे भी अपने बेटे की फ़िक्र है. बस थोड़ा सख्ती करनी पड़ती है की कही बचा हाँथ से न निकल जाये. इसलिए मैं उससे सख्ती से पेश आता हूँ. अब अगर तुमने बात कर hi ली है तो ठीक है.
उसके बाद सभी मिलकर खाना कहते हैं और बच्चो को सुलाकर रानी जी किचन समेत कर सोने के लिए अपने कमरे में चली जाती हैं..
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..