Tumhaare Liye- Ek Prem Kahaani - SexBaba
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Tumhaare Liye- Ek Prem Kahaani

hotaks

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नमस्कार मित्रो और पाठको.

मैं एक छोटी सी प्रेम कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ आप सब दोस्तों के लिए. जिसमे भरपूर प्यार, नफरत, त्याग, रूठना, मानना सब कुछ मिलेगा. मेरी इस कहानी में prem/pyaar के साथ थोड़ा बहुत सस्पेंस और थोड़ा बहुत थ्रिलर भी पढ़ने को मिलेगा.

इस कहानी का नाम है


तुम्हारे लिए- एक प्रेम कहानी



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ये कहानी अनन्य जी की कहानी से प्रेरित है. इस कहानी के सभी पात्र और घटनाये काल्पनिक हैं. साथ hi साथ इस कहानी में लिखी गयी जगह भी काल्पनिक है, जिनका किसी भी व्यक्ति या घंटा से कोई lana-dena नहीं है. अगर कही भी इस कहानी के पात्र या घंटा या स्थान किसी व्यक्ति विशेष या स्थान से मेल कहते हैं तो आप खुद समझदार हैं की आपको क्या करना है. अरे मित्रो. उसे इग्नोर मरना है.

कहानी शुरू करने से पहले सभी Mitro/Pathko से एक बात कहना चाहती हूँ की अपडेट देने के लिए वो मुझे फाॅर्स नहीं करेंगे, क्योंकि जिन पाठकों ने मेरी पिछली सभी कहानिया पढ़ी हैं. उन्हें पता होगा की मेरे उपदटेस नियमित आते हैं, हाँ यदि कभी उपदटेस देने में विलम्ब होता है तो मैं पहले से hi सूचित कर दूँगी और यदि किसी कारणवश अगर मैं सूचित न कर पौन तो आप सभी समझ जाइएगा की मैं किसी अति आवश्यक कार्य में बिजी हूँ.



तो मित्रो. कहानी शुरू करते हैं आप सब की अनुमति के बाद.

साथ बने रहिये..
 
कहानी के कुछ अंश (सार संक्षिप्त)



सरिता जीवज ज्योति हॉस्पिटल के ऑपरेशन टेटर के परिसर में परेशानी की हालत में यहाँ से वह चक्कर काट रही थी. उसके शरीर पर खाकी रंग की वर्दी थी और चहरे पर पसीना था. उसकी आँखी आंशुओ से भरी हुई थी. पसीने से उसकी खाकी वर्दी भीगकर उसके जिस्म से चिपक गयी थी. वर्दी पर जगह जगह खून लगा हुवा था, लेकिन उसे इस बात का होश नहीं था. वही पास की बेंच पर 2 पुलिस वाले और भी बैठे हुवे थे. जो सरिता को इधर उधर चक्कर लगते हुवे देख रहे थे. वो कभी कभी अपनी हथेली मसलने लगती तो कभी कभी अपनी मुट्ठियां भीज लेती. उसके चेहरे के भाव हर सेकंड बदल रहा था. पास बैठा पुलिस वाले से जब ये न देखा गया तो उनमे से एक ने सरिता से कहा.

पुलिस 1- मैडम आप परेशां मत होइए. आपके भैया को कुछ नहीं होगा. वो बिलकुल ठीक हो जायेंगे. आप हिम्मत से काम लीजिए मैडम.

सरिता- कैसे हिम्मत से काम लून मैं हाँ कैसे हिम्मत से काम लून. मैं कैसी बहन हूँ. मैंने अपने इन्ही हांथो से अपने भैया को गोली मरी. जिस भाई के हांथो में हर साल राखी बांधती थी, जिसकी सलामती की भगवान् से दवा मांगती थी. उसी भाई को मैंने अपने इन्ही हैंतो से शूट किया है. जिस भाई को ढूंढने के लिए मैंने क्या नहीं किया. जिस भाई से मिलने के लिए din-raat मैं ठीक से सोई नहीं. उसी भाई को मैंने अपने इन्हीं हांथों से गोली मरी है. मैं बहन कहलाने लायक नहीं हूँ. बहन के नाम पर कलंक हूँ मैं.

इतना कहकर सरिता घुटनों के बल जमीन में बैठ गयी और जोर जोर से रोने लगी. ये देखकर एक पुलिस वाला उसके पास आया और उसके कंधे पर अपना हाथ रखकर कहा.

पुलिस 2- नहीं मैडम. आप ऐसे मत रोइये. आप चुप हो जाइये. आपने कुछ गलत नहीं किया. आपने अपना फर्ज निभाया है.

सरिता- अरे ऐसा फर्ज किस काम का जिसको निभाने के लिए मुझे अपने हांथो से अपने जान से प्यारे भैया को गोली मारनी पड़ी. धिक्कार है मुझे अपने आप पर. अगर मेरे भैया को कुछ हो गया तो मैं खुद को कभी माफ़ नहीं कर पाऊँगी. मर जाउंगी मैं.

तभी हॉस्पिटल के बहार एक ऑटो आकर रुकता है उस ऑटो से ऑटो ड्राइवर, एक महिला और एक लड़की उतारकर भागती हुई हॉस्पिलट में आती है, महिला ने आते hi सरिता के गाल पर एक झन्नाटेदार थप्पड़ मारा और रट हुवे बोलने लगी.

महिला- ये क्या किया सरिता तुमने ये क्या कर दिया. मेरे बेटे को मार दिया तुमने. अपने भाई को गोली मार दी तुमने. मेरी ममता का खून कर दिया तुमने. मेरी खोख उजाड़ने की कोशिश की है तुमने. अरे वो मेरा बीटा hi नहीं तेरा भाई भी है. और तूने अपने भाई के ऊपर hi गोली चला डीई. अगर मेरे बेटे को कुछ हो गया न सरिता तो मैं तुझी जीवन भर माफ़ नहीं करूंगी.

ऑटो ड्राइवर- ये क्या कह रही हूँ तुम भाग्यवान. तुम्हे तो अपनी बेटी पर गर्व होना चाहिए की वो कितनी बहादुर है. इतनी कठिनाइयों और परेशानियों के बावजूद भी वो अपने फ़र्ज़ और सच्चाई के रास्ते से नहीं भक्ति. उसने अपने फ़र्ज़ और रिश्ते में फ़र्ज़ को अहमियत दी. और तुम उसको hi दोष दे रही हो. एक बार पहले ये तो जान लेती की सरिता ने ऐसा क्यों किया. मुझे सरिता ने फ़ोन करके पहले hi सब कुछ बता दिया था.

महिला- अरे ऐसी कौन सी बात हो गयी जो इसने मेरे बेटे को गोली मार दी. अरे वो इसका भाई है. जिसकी याद में दिन रात रोटी रहती थी. जिसको कहा कहा नहीं ढूँढा हमने. काम से काम एक बार इसे अपने भाई से बात तो करनी चाहिए थी. लेकिन नहीं अब तो ये इंस्पेक्टर बन गई है न तो अपने मन का hi करेगी ये. तुमने बहुत गलत किया है सरिता. मैं तुझे कभी माफ़ नहीं करुँगी.

लड़की- ये क्या बोल रही हो मम्मी. आप दिदिया को देखो. इनको देखकर आपको लगता है की इन्होने जानबूझकर भैया पर गोली चलाई है, भैया को जान से मरने की कोशिश की है. अरे भैया को सबसे ज्यादा प्यार दिदिया hi करती हैं. फिर भी आप ऐसा बोल रही हैं. अरे कुछ तो मजबूरी रही होगी दिदिया की. मुझे अपनीइ दिदिया पर पूरा भरोषा है. दिदिया कोई गलत काम कर ही नही सकती.

इतना कहकर वो लड़की जाकर सरिता के गले लग जाती है. सरिता अपनी बहन के गले लगकर फूट फूट कर रोने लगती है. तभी ओप्रशन टेटर का दरवाज़ा खुलता है और डॉक्टर बहार आते हैं और जो बातें बताते हैं. उसे सुनकर सभी रहत की साँस लेते हैं.

डॉक्टर- घबराने की कोई बात नहीं है. मरीज को दो गोली लगी थी. हमने दोनों गोली निकल दी है और अब मरीज खतरे से बहार है. अभी उन्हें इंजेक्शन दे दिया है. तो अभी वो आराम कर रहे हैं. नींद से जागने के बाद आप सब लोग उनसे मिल सकते हैं.

इतना कहकर डॉक्टर वह से चले जाते है. सरिता एयर उसके घरवाले बहार लगी बेंच पर मनीष और हताश होकर बैठ जाते हैं.



साथ बने रहिये.
 
हमने ये लिखा है.

काफी सोच विचार के बाद मैंने ये सोचा की क्यों न कहानी की शुरुआत सस्पेंस से की जाए, क्योंकि कहानी तो बहुत साधारण है काम से काम इसी बहाने पाठको का ध्यान हमारी कहानी की तरफ आएगा.😂😁😂

सरिता गोली मरने के बाद खुद बहुत परेशां है. की उसने हे क्या कर दिया है. लेकिन माँ भी क्या करे आखिर माँ तो मान hi होती है चाहे संतान कितनी hi नालायक क्यों न हों.

डॉक्टर के पास ऐसे केस दिन भर आते रहते हैं तो वो कितना रिएक्शन दें.😃🤣

बाकि और बातें आपको कहानी के साथ hi पता चलती जाएगी.

साथ बने रहिए..
 
कहानी की शुरुआत करने से पहले कहानी के मुख्या पत्रों के बारे में जान लेना जरूरी है.



पत्र परिचय इन शार्ट.



आनंद जोशी- पेशे से ऑटो ड्राइवर हैं और हेरोइन के पिता हैं. बहुत hi ईमानदार और उसूलों के पक्के इंसान. सभी से मेल जॉल बढाकर रहना पसंद करते हैं.

रानी जोशी- हाउस वाइफ और हेरोइन की माँ हैं. पति की काम कमाई में भी पूरा घर अच्छे से संभालती हैं. अपने बेटे से बहुत प्यार करती हैं. बेटियों के लिए भी इनके दिल में प्यार है.

अभिषेक जोशी- आनंद जोशी और रानी जोशी का बड़ा बीटा है. अपनी दोनों बहनो से बहुत प्यार करता है. बहुत hi शरारती और नटखट है. इसके साथ hi बचपन से hi जल्दी गुस्सा और छोटी सी बात को दिल पर लगा लेना इसका स्वभाव है. जिसके कारन पूरे परिवार को परेशानी के दौर से गुजरना पड़ा.

सरिता जोशी- आनंद जोशी और रानी जोशी की बड़ी बेटी और कहानी की मैं हेरोइन. ख़ूबसूरती ऐसी की चाँद भी शर्मा जाये. तीखे नैन नक्श वाली लड़की. होंठ के निचे कला टिल सरिता की सुंदरता में चार चाँद लगते हैं. घर में सभी से प्यार करने वाली, लेकिन सबसे ज्यादा प्यार वो अपने भाई अभिषेक से करती है. अभिषेक में उसकी जान बस्ती है. पढ़ाई में बहुत होशियार और स्वाभाव से तेज़ गद्दार लड़की है.

मनीषा- आनंद जोशी और रानी जोशी की छोटी बेटी और कहानी की दूसरी हेरोइन. अपनी बहन और भाई से बहुत प्यार करती है. ये भी अपनी बहन की तरह खूबसूरत है. ये बहुत hi चुलबुली और शरारती है.


इसके बाद जितने भी पात्र हैं सबका इंट्रोडक्शन शार्ट में है. विस्तृत इंट्रोडक्शन कहानी के बिच में आपको पता चलेगा.

महेंद्र सिंह राठोड- बहुत बड़े बिज़नेस मन और हीरो के पिता जी. धन दौलत की कोई कमी नहीं फिर भी साधारण जीवन जीने वाले नेक इंसान. समाज में अच्छी खासी पकड़ रखने वाले प्रभावशाली व्यक्ति.

नैना सिंह राठोड- हाउस वाइफ और हीरो की माँ. घर में इनकी hi चलती है. ये अपनी बेटी और अपने दुसरे बेटे से बहुत प्यार करती हैं.

सविता- महेंद्र और नैना जी की एकलौती बेटी और कहानी की तीसरी हेरोइन. प्यार से सभी इसे सवी बोलते हैं. बहुत hi मिलनसार और सरल स्वाभाव की लड़की. अपने घर में सबसे ज्यादा ये अपने दुसरे भाई रगाव से प्यार करती है.

निश्छल सिंह राठोड- महेंद्र जी और नैना जी का एकलौता बीटा और कहानी का मैं हीरो. सविता से बहुत प्यार करता है. साथ में राघव को जान से ज्यादा चाहता है.

राघव- ये कहानी का दूर हीरो है. इसके बारे मैं कहानी के मध्य में डिटेल्स मैं पता चलेगा.

शन्नो देवी- ये हैं कहानी की सबसे इंटरेस्टिंग पत्र. ये महेंद्र जी की बुवा और सविता, निश्छल और राघव की बुवा दादी हैं. पुराने खयालो की हैं. इनके सामने नैना जी और महेंद्र जी ज्यादा नहीं बोलते. इनका बहुत सम्मान करते हैं. ज्यादा जानकारी कहानी के मध्य में पता चलेगी.

अनंत- कहानी में इनका ज्यादा रोले नहीं है लेकिन ये कहानी के तीसरे हीरो हैं. इसलिए इनका जीकर होना जरूरी है.

चारु- अनंत की बहन. कहानी में इनका भी ज्यादा रोले नहीं है, लेकिन एक कारन है जिसके लिए इनका जीकर होना जरूरी है.

Sub-Inspector- मोहित सिंह, रंजना पाठक, विकास कुमार & जावेद अख्तर.

असिस्टेंट सुब इंस्पेक्टर- जान्हवी कपूर. कौशल शुक्ल और अमित रावत.

रावत सर- सरिता जोशी के ऑफिस इंचार्ज. कहानी में इनका बहुत hi इम्पोर्टेन्ट रोले है.

बॉस & सर्कार- कहानी में मैं विलने.

बच्चा सिंह- कहानी का खलनायक. इसने जीवन में बस एक hi अच्छा काम किया है. डिटेल्स कहानी के बिच में पता चलेगी.

रघु- बच्चा सिंह का भाई. बहुत hi हैंडसम और अट्रैक्टिव पर्सन. डिटेल्स कहानी के बिच में जब इसका रोले आएगा तब पता चलेगा.

कलुवा- ये भी कहानी में विलने hi है. बच्चा सिंह के निचे काम करता है. डिटेल्स बाद में पता चलेगा.

नेता- कहानी का विल्लने. इसकी कोई डिटेल्स नहीं है. बस ये एक लोकल नेता है, लेकिन इसके काम बहुत बड़े हैं.

इंस्पेक्टर प्रधान- सीबीआई अफसर.

इस कहानी में और भी पत्र आएंगे. जिनके छोटे छोटे रोले रहेंगे, जिनके इंट्रोडक्शन की जरूरत नहीं है. उनका जीकर कहानी में hi हो जायेगा.

एक बात और पाठको. कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है, इसलिए इसकी घटनाएं और पत्रों का वर्क भी काल्पनिक hi है. पूरी कहानी पुलिस ऑफिसर्स के इर्द गिर्द घूमती है तो वर्क प्रोफाइल पुलिसिया hi है, लेकिन उस वर्क प्रोफाइल में कुछ वर्क राइटर द्वारा डाला गया है. तो हो सकता है मेरे वो पाठक बंधू जो पुलिस की नौकरी करते हो या जिन्हे पुलिस के वर्क प्रोफाइल का नॉलेज हो. कहानी पढ़ने के बाद वो ये ऑब्जेक्शन न उठाये की ये काम और ये घंटा तो पुलिस की वर्क प्रोफाइल से मैच hi नहीं करती. ये सिर्फ कहानी के हिसाब से डाला गया है इसलिए वो इसे अन्यथा न ले. कहानी पूरी तरह से साफ़ सुथरी है. न hi इसमें सेक्स का कोई सीन है और न hi कोई एब्यूज लैंग्वेज है.

कहानी का पहला भाग कल आएगा.


साथ बने रहिये..
 
अपडेट- 01

बचपन के लेकर जवानी तक के कुछ अंश.

अल्लाहाबाद शहर के एक छोटे से कबसे में आनंद जोशी अपनी पत्नी रानी जोशी के साथ रहते थे. जो लोअर मिडिल क्लास से बिलोंग करते थे. उनका खुद का ऑटो रिक्शा था जिसे चलकर वो अपना और अपने परिवार का गुजरा करते थे. वो जिस माकन में रहते थे वो 3 कमरे के मकान था जिसे उनके पिताजी ने बनवाया था. जिनकी कुछ समय पहले hi मृत्यु हो चुकी है. माँ तो बचपन में hi चल बसी थी.



पिता की मृत्यु होने के बाद एकलौती संतान होने के कारन उनकी साडी जयेजत आनंद जी के नाम हो गयी. आनंद जी एक बीटा और दो बेतिया थी. बड़ी बेटी का नाम सरिता, छोटी बेटी का नाम मनीषा और उनके प्यारे बेटे का नाम अभिषेक था. आनंद जोशी के बेटियों की उम्र में 2 से 2.5 साल का अंतर था. लेकिन अभिषेक सरिता से 4 वर्ष बड़ा था. वो थोड़ा गुस्से वाला और छोटी सी बात को दिल पर लगा लेने वाला लड़का था. उसकी पढाई भी देर में शुरू हुई. पढ़ाई में अभिषेक कमजोर hi साबित हुवा.

अभिषेक दोनों बहनो से बड़ा था और बीटा होने के कारन अपनी माँ का लाडला था. ऐसा नहीं था की मर. और मसर. जोशी को अपनी बेटियों से प्यार नहीं था. वो अपनी बेटियों से भी बहुत प्यार करते थे, लेकिन अकेला बीटा होने के कारन वो उनका लाडला था. उनके साथ साथ अभिषेक दोनों बहनों का भी लाडला भाई था. दोनों बहाने हमेशा अभिषेक के आगे पीछे घूमती रहती थी. अभिषेक क्लास 6 में, सरिता क्लास 4 में और मनीषा क्लास 1 में पढ़ती थी. अभिषेक माँ बाप के ज्यादा लड़ प्यार की वजह से थोड़ा बिगड़ गया था और लड़ाई झगड़ा भी करने लगा था.

एक दिन इंग्लिश की क्लास चल रही थी और अभिषेक बैठा हुआ अपनी कॉपी में कुछ बना रहा था . अभिषेक पढाई लिखे में भले hi कमजोर था, लेकिन अभिषेक की ड्राइंग अपनी उम्र के और बच्चो के मुकाबले बहुत अच्छी थी. पढ़ाई लिखा से ज्यादा उसकी रूचि ड्राइंग में थी. तभी टीचर की नजर अभिषेक पर पड़ी. उन्होंने अभिषेक से कहा.

टीचर- अभिसेहक. राम ने श्याम को खाने के लिए 2 आम दिए. इसका अंग्रेजी में अनुवाद करो.

लेकिन अभिषेक तो अपनी hi धुन में ड्राइंग कर रहा था. उसने जैसे टीचर की बात सुनी hi नहीं हो या सुनकर भी अनसुना कर दिया हो. टीचर अभिषेक के पास आ गए ये देखने के लिए की अभिषेक क्या कर रहा है. अभिषेक टीचर को अपने पास खड़ा देख कर अपनी ड्रॉइंग छुपाने लगा. टीचर ने उसके हाँथ से पेपर चीन लिया और बोले.

टीचर- अभिषेक. क्या कर रहे हो. और ये इंग्लिश के सब्जेक्ट में तुम ये ड्राइंग कर रहे हो.

अभिषेक- वो सर मैं तो वो….

टीचर- अच्छा तो तुम मुझे बना रहे थे. वैसे ड्राइंग तो तुम बहुत अच्छी करते हो, लेकिन ये ड्राइंग की क्लास नहीं है. एक तो तुम पढाई में इतने कमजोर हो और ऊपर से क्लास में भी पढाई पर ड़याँ देने के बजाय ड्राइंग बना रहे हो. मैंने तुम्हे कितनी बार मना किया है लेकिन तुम हो की मानते hi नहीं हो. इसलिए तुम बेंच पर खड़े हो जाओ. और मेरी क्लास ख़तम होने तक बेंच पर hi खड़े रहो.

टीचर ने ड्राइंग देखते हुवे मुस्कुराते हुवे कहा, क्योंकि अभिषेक ने सच में ड्राइंग अच्छी बनाई थी. बस थोड़ी बहुत कमी थी. अभिषेक ने उनका कान और नाक कुछ लम्बा और बड़ा कर दिया था, जिसे देखकर टीचर के चेहरे पर मुस्कान फ़ैल गई थी.

अभिषेक को पनिशमेंट देकर टीचर फिर से बच्चो को पढ़ने लगे. इंग्लिश की क्लास ख़तम हो जाने के बाद टीचर बहार चले गए तो अभिषेक की पनिशमेंट भी ख़तम हो गयी. वो अपनी जगह पर वापस बैठ गया. टीचर के गए हुए कुछ hi देर हुई थी की एक लड़के ने उसकी ड्राइंग वाला पेपर ले लिया और फ्रंट में जाकर खड़ा हो गया और बोलै.

लड़का- ये देखो अभिषेक ने पढाई छोड़ कितनी घटिया ड्राइंग बनाई है.

अभिषेक- मेरी ड्राइंग दे यश. दे मेरी ड्राइंग.

लेकिन उस लड़के ने अभिषेक की बात नहीं मणि और पूरी क्लास में घूम घूम कर अभिषेक की ड्राइंग दिखने लगा. उसके बाद वो अपनी पेन निकलकर उसकी ड्राइंग पर अपनी पेन घूमने लगा. जिससे अभिषेक की ड्राइंग ख़राब हो गयी.

ड्राइंग ख़राब करने के बाद उस लड़के ने अभिषेक को वो पेपर वापस कर दिया. अपनी ड्राइंग ख़राब हो जाने पर अभिषेक को गुस्सा आ गया और उसने उस लड़के का सर पकड़कर 3-4 बार डेस्क पर पटक दिया. जिससे उसका सर फैट गया और खून निकलने लगा. वो लड़का जोर जोर से रोने लगा.

एक लड़का भाग कर बहार चला गया और प्रिंसिपल से अभिषेक की शिकायत कर दी की अभिषेक ने यश का सर फोड़ दिया. प्रिंसिपल और कुछ टीचर दौड़े दौड़े क्लास में पहुंचे. तो देखा की यश जमीन पर अपना सर पकड़कर भैठा हुवा है.

उसके सर से खून निकल रहा है. वो जोर जोर से रो रहा है. अभिषेक अपनी सीट पर बैठा हुवा चॉकलेट खा रहा था. प्रिंसिपल सर को बहुत गुस्सा आया. वह अभिषेक के पास गए और एक जोर का झापड़ अभिषेक को रसीद कर दिया और बोले.

प्रिंसिपल- ये क्या किया तुमने. इसका सर फोड़ दिया और आराम से बैठकर चॉकलेट खा रहे हो. तुम्हारे अंदर दया और इंसानियत नाम की कोई चीज नहीं है क्या. कल तुम अपने पेरेंट्स को बुलाकर लाना. तुम जैसे शरारती बचे को मैं अपने स्कूल में नहीं रख सकता.

प्रिंसिपल सर ने अभिषेक को घर जाने के लिए बोलकर यश को हॉस्पिटल भिजवाया. अभिषेक अकेले hi घर पंहुचा तो उसकी माँ ने उससे कहा

रानी जी- अरे मेरा बीटा. आज तो बड़ी जल्दी घर आ गया. स्कूल की छुट्टी हो गयी क्या. और ये तेरे गाल क्यों लाल हो गए हैं. क्या तुमने फिर किसी से लड़ाई झगड़ा किया है.

अभिषेक- नहीं मां वो प्रिंसिपल सर ने मुझे मारा. प्रिंसिपल सर ने मेरी छुट्टी पहले hi कर दी. इसलिए मैं पहले घर आ गया.

रानी जी - ऐसे कैसे मारा उन्होंने तुझे. कोई ऐसे मरता है क्या बच्चे को. मैं बात करुँगी तेरे प्रिंसिपल से. चल हाँथ मुंह धो ले. मैं तेरे लिए खाना लगाती हूँ. तू खा ले. सरिता और मनीषा को आने के बाद खाना खिला दूंगी.

अभिषेक ने अपनी माँ को मार खाने की पूरी वजह नहीं बताई. इसलिए रानी प्रिंसिपल सर के उप्पर गुस्सा हो रही थी. तभी अभिषेक ने कहा.

अभिषेक- मम्मी. कल प्रिंसिपल सर ने आपको और पापा को स्कूल में बुलाया है कुछ काम से. वो बोल रहे थे की अगर आप दोनों उनसे मिलने नहीं गए तो वो मुझे स्कूल से निकल देंगे.

रानी जी- तूने कुछ उल्टा सिद्ध तो नहीं किया न स्कूल में. जिसकी वजह से प्रिंसिपल सर ऐसा बोल रहे थे.

अभिषेक- नहीं मम्मी. मैंने कुछ नहीं किया. वो यश है न उसने मेरी ड्राइंग ख़राब कर दी थी. इसलिए मैंने उसे मारा. इसी बात को लेकर प्रिंसिपल सर ने मुझे मारा और बोले की कल अपनी मम्मी पापा को लेकर hi स्कूल आना.

रानी जी- ठीक है मैं चलूंगी तेरे साथ. देखती हूँ कैसे निकलते हैं तुझे स्कूल से प्रिंसिपल सर.

थोड़ी देर बाद स्कूल की छुट्टी होने के बाद सरिता और मनीषा भी घर आ गए. रानी ने उन्हें भी प्यार से खाना खिलाया. खाना खाकर वो दोनों सो गए. शाम को दोनों सोकर उठी और अपने भाई अभिषेक के साथ खेलने लगी. आनंद जी के घर आने के बाद रात में खाने के समय रानी जी ने आनंद जी से कहा.

रानी जी- सुनिए जी. कल अभिषेक के प्रिंसिपल सर ने हमें स्कूल में बुलाया है. उन्हें कुछ जरुरी बात करनी है हमसे अभिषेक के बारे में.

आनंद जी- बात क्या करनी होगी. इसने फिर से किसी से झगड़ा किया होगा. इसी सिलसिले में उन्होंने बुलाया होगा. ये जैसे जैसे बड़ा होता जा रहा है वैसे वैसे इसकी शरारत बढ़ती जा रही है.

रानी जी- आप तो हर समय मेरे बच्चे को hi कोसते रहते हैं. अभी इसका बचपना है. अभी अगर शरारत नहीं करेगा तो क्या बुद्धा होने के बाद शरारत करेगा क्या. आपको तो हमेशा मेरे बेटे की hi गलती नजर आती है.

आनंद जी- तुम्हारे lad-pyaar ने hi इसे बिगड़ रखा है. आगे चलकर कही ऐसा न हो की तुम्हे अपने इस lad-pyaar की वजह से पछताना पद जाये. अभी भी समय है. उसे अचे और बुरे के बारे में समझाओ. मेरी तो वो सनटैन नहीं है. अगर मार पीट कर उसे कुछ समझाऊंगा तो हो सकता है वो और भी बिगड़ जाये और जिद्दी हो जाये. तुम्हारी सुनता है तो काम से काम तुम्ही उसे सही और गलत के बारे में बताओ.

रानी जी- आपको तो हमेशा मेरे बेटे की hi गलती दिखाई देती है. फिर भी मैं उसे समझाउंगी. चलो अब जल्दी से खाना ख़तम करो और सो जाओ. सुबह इसके स्कूल भी चलना है.

उसके बाद किसी ने कोई बात नहीं की और खाना खाकर आनंद जी अपने कमरे में सोने के लिए चले गए.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका महोदय।।

अब ये बाबू जी ने क्या किया था जिसके कारण उन्हें रिक्शा चलाना पड़ रहा है। इसलिए वो नहीं चाहते हैं कि उनका बेटा भी कुछ ऐसा ही करे।। इसलिए वो उसके प्रति सख्ती बरतते हैं।।

जब बचपन चल रहा होता है तो वही काम करने का मन करता है जिसके लिए मना किया जाता है, इसलिए अभिषेक वही कर रहा है जिसके लिए उसे मना किया जा रहा है।। लड़ाई झगड़े की शुरुआत तो आगे होगी।।

इसीलिए तो उनको माँ बोलते हैं वो अपने बच्चों की गलती को हमेशा छुपाती है। हमेशा लाड प्यार करती है। ये कहानी सरिता की तो है ही उसके संघर्ष की है साथ ही बेपनाह प्यार की भी है।

साथ बने रहिए।।
 
🙏👏👋🙏👋👏🙏👋

😂😃🤣😁

अब क्या करें महोदय,

5 महीने महेंद्र जी के परिवार के साथ वक्त गुजरने के बाद उनकी आदत सी पड़ गई है न, इसलिए वो यहां भी टपक गई।😃🤣🤣 अब नैना जी की बात का कब तक इनकार किया जाता इसलिए निश्चल भी आ गया, हेला का क्या होगा ये तो बाद में पता चलेगा।

कहानी दो परिवारों की भले ही है, लेकिन पूरी कहानी परिवारों के इर्द गिर्द नहीं घूमती। प्रेम तोदोनों परिवारों में होगा ही लेकिन उसका परिणाम क्या होता है ये बाद में पता चलेगा।

सही कहा आपने।

बच्चों को हर बात मारपीट कर या सख्ती से नहीं समझाई जा सकती है, इससे बच्चे बिगड़ सकते हैं। कुछ बातें प्यार से समझानी चाहिए, शायद यहीं पर कुछ गलती हो रही है आनंद और रानी से। जो आगे पता नहीं क्या रंग लाएगा।

धन्यवाद आपका महोदय,

साथ बने रहिए।।
 
👏👋🙏👋👏🙏

कोई नहीं मैडम जी।

उसकी भी बैंड बजाने का मौका मिलेगा आपको और भरपूर मौका मिलेगा। इसको फ़्लैशबैक नहीं कह सकते बस थोड़ा कहानी का बेस बनाने की कोशिश है।

सुखी जीवन जीने का यही मुख्य आधार है कि आपके पास जितना है उतने में ही संतुष्ट होने की कोशिश करे। आनद और रानी काम आय में भी संतुष्ट है और अपने बच्चों के साथ सुखी जीवन जी रही हैं। अभिषेक ज्यादा प्यार के कारण बिगड़ गया है।।

गलती चाहे यश की भी रही हो लेकिन इस समय यश का पड़ला भारी था क्योंकि सिर उसका फूटा था। अभिषेक तो चॉक्लेट खा रहा था। प्रिंसिपल भी क्या करे, यश के सिर से खून निकल रहा था यही सुबूत काफी था अभिषेक को थप्पड़ रसीद करने के लिए। वैसे प्रिंसिपल को एक बार अभिषेक आए पूछना चाहिए था।

रानी को पुरी बात पता ही नहीं है तो उसे ज्यादा टेंशन नहीं है। कल पूरी बात उसे प्रिंसिपल से मिलकर पता चलेगी।।

धन्यवाद आपका मैडम

निश्चल कहानी का एक विशेष पात्र है। तो उसका आगमन भी बहुत विशेष तरीके से होगा। सबसे अलग होगा। जिसकी कल्पना भी नहीं कि होगी आप सभी ने।।

साथ बनी रहिए।।
 
अपडेट- 02

सुबह सबसे पहले रानी जी की नींद खुली, उसने उठकर घर की साफ सफाई शुरी कर दी. थोड़ी देर बाद आनंद जी उठे. और उन्होंने अभिषेक, सरिता और मनीषा को उठाया. सभी ने उठकर नहाया और स्कूल जाने के लिए तैयार होने लगे. रानी जी ने सभी के लिए टिफिन पैक किया और अभिषेक को तैयार होने में मदद करने लगी. सरिता और मनीषा अपने से तैयार होने लगी. ये देखकर आनंद ने कहा.

आनंद जी- इस उम्र में भी तुम इसे तैयार करवा रही हो, जबकि तुम्हे सरिता और मनीषा को तैयार करना चाहिए. तुम्हे नहीं लगता की तुम अपने बेटे के चक्कर में अपनी बेटियों के साथ अन्याय कर रही हो.

रानी जी- अरे मेरी दोनों बेटियां बहुत समझदार हैं वो अपना ख़म खुद कर लेती हैं, लेकिन मेरा बीटा अभी नादाँ है. बिना मदद के ये कोई काम ठीक से नहीं कर पाटा है इसलिए मैं इसकी मदद कर रही हूँ.

आनंद जी- जब तुन उसे खुद से कुछ करने डौगी तभी तो उसे कुछ आएगा. बच्चो से दुलार करना बुरी बात नहीं हैं भाग्यवान, लेकिन इतना भी दुलार नहीं करना चाहिए. की उनकी आदत बिगड़ जाये.

रानी जी- आप सुबह सुबह फिर से शुरू हो गए. आपको तो बस हर समय मेरे बेटे को कुछ भी कहने का मौका मिलना चाहिए बस. चलो अब ज्यादा बात मत करो. याद है की नहीं आपको की हमें अभिषेक के स्कूल भी चलना है प्रिंसिपल से मिलने के लिए.

आनंद जी- हाँ याद है मुझे और मुझे पता है की प्रिंसिपल ने किसलिए बुलाया होगा. अगर आज इसकी कोई कम्प्लेन मिली तो मैं इसकी टंगे तोड़ दूंगा. देख लेना तुम.

रानी जी- ठीक है पहले चलो तो सही बाद में देख लेंगे की क्या करना है.

उसके बाद अभिषेक अपनी दोनों बहनो के साथ स्कूल चला गया. थोड़ी देर बाद रानी जी और आनंद जी भी उनके स्कूल चले गए और जाकर प्रिंसिपल सर से मिले.

आनंद जी- नमस्ते सर, मैं अभिषेक का पापा आनंद. अभिषेक ने बताया की आपने हमें बुलाया है.

प्रिंसिपल सर- अच्छा तो आप हैं उसके पापा, देखिये मर. आनंद. हम आपके बच्चे को अपने स्कूल में नहीं पढ़ा पाएंगे. हम उसको अपने स्कूल से निकल रहे हैं.

आनंद जी- लेकिन बात क्या है सर जी. उससे कोई गलती हुई है क्या.

प्रिंसिपल सर- गलती नहीं आनंद जी. गुनाह हुवा है. आपको पता है कल एक मामूली बात पर इसने अपनी कक्षा के एक लड़के का सर फोड़ दिया. एक तो पढ़ाई में भी बहुत कमजोर है. टीचर पढ़ते हैं तो वो ड्राइंग बनता रहता है. मुझे नहीं लगता की उसे पढ़ने का कोई फायदा होने वाला है. ऐसे बच्चे को मैं अपने स्कूल में रख कर और बच्चो के लिए खतरा नहीं उठाना चाहता. क्या पता कल को वो फिर किसी और के साथ ऐसा करे.

आनंद जी- लेकिन सर जी वो अभी बछ है. उसे इतनी समझ नहीं है अभी. आप आखिरी बार उसे माफ़ कर दीजिए. मैं उसे समझाऊंगा. मैं आपको भरोषा दिलाता हूँ की आपको दोबारा शिकायक का मौका नहीं मिलेगा.

प्रिंसिपल सर- देखिए आनंद जी. आपका बीटा समझने और समझने की साडी सिमा पार कर चूका है. मुझे नहीं लगता की उसे कोई फर्क पड़ने वाला है, फिर भी मैं आपको आखिरी मौका दे रहा हूँ. अगर इसके बाद उसने ऐसा कुछ किया तो मैं उसे अपने स्कूल से निकल डोंगा.

आनंद जी- जी बहुत बहुत धन्यवाद आपका सर. मैं उसे समझाऊंगा. आगे से वो ऐसी शरारत नहीं करेगा.

प्रिंसिपल सर- जी जरूर. ऐसा हो जाये तो बहुत अच्छा है.

उसके बाद आनंद जी और रानी जी प्रिंसिपल सर के रूम से बहार आये और जाकर अपनी ऑटो में बैठ कर घर आ गए. घर आकर आनंद जोशी ने कहा.

आनंद जी- देख लिया तुमने भाग्यवान. इसीलिए मैं तुम्हे हमेशा समझाता रहता था की उसे अच्छे संस्कार दो. लेकिन तुमने हमेशा उसका बचपना समझ कर नजरअंदाज कर दिया. देखो आज क्या किया उसने. आज किसी एक का सर फोड़ा है उसने. कल किसी और के साथ ऐसा करेगा. फिर क्या करेंगे हम.

रानी जी- मुझे क्या पता था की वो ऐसा कुछ करेगा. मैं तो बस उसे दुलार करती थी. सोचती थी की धीरे धीरे खुद समझ जाएगा. लेकिन मुझे नहीं पता था की वो इतना बिगड़ जायेगा.

आनंद जी- आज तुम बिच में मत आना. आने दो आज उसे मैं अच्छे से खबर लेता हूँ उसकी.

इतना कहकर आनंद जी ऑटो लेकर सवारी के लिए चले जाते हैं. स्कूल की छुट्टी होने के बाद अभिषेक अपनी दोनों बहनो के साथ घर आ गया. घर आने के बाद रानी ने अभिषेक, सरिता और मनीषा को खाना खिलाया और उन्हें सोने के लिए भेज दिया. शाम को जब अभिषेक सो कर उठा तो रानी ने उसे अपने पास बैठाया और प्यार से समझाया.

Raani.Ji- बीटा ये तुमने क्या किया स्कूल माँ. यश का सर फोड़ दिया. ये बहुत गलत है बीटा. अगर वो उल्टा तुम्हारे साथ भी ऐसा करता तो.

अभिषेक- लेकिन मम्मी उसने मेरी ड्राइंग ख़राब कर दी थी. इसलिए मैंने उसे मारा.

रानी- लेकिन इतनी छोटी सी बात के लिए तुम्हे उसे नहीं मरना चाहिए बीटा. ड्राइंग तो तुम दुबारा बना सकते हो, लेकिन जो तुमने उस लड़के का सर फोड़ा है. इससे तो उसको दर्द हुवा होगा. अगर उसे ज्यादा चोट लग जाती तो उसे हॉस्पिटल ले जाना पड़ता. जिससे उसके मम्मी पापा बहुत परेशां होते. तुमने उसका सर फोड़ दिया है. वो स्कूल नहीं आ पायेगा. जिससे उसकी पढाई का बहुत नुकसान होगा. लड़ाई झगड़ा करना अच्छी बात नहीं हैं. अगर कोई तुम्हारे साथ ऐसा करे तो तुम्हे अच्छा लगेगा क्या. तुम्हारे मम्मी पापा अगर परेशां होंगे तो तुम्हे अच्छा लगेगा क्या.

अभिषेक- नहीं मुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगेगा.

रानी जी- तो फिर. जैसे तुमको अच्छा नहीं लगेगा. वैसे hi तुमने जिस लगके को मारा है उसको भी अच्छा नहीं लगेगा. क्या तुम फिर ऐसी सैतानी करोगी. किसी को परेशां करोगी. ये गलत बात है. कोई तुम्हे कुछ कहे तो तुम कोई जवाब hi मत दो. कुछ दिन बाद वो तुम्हे कुछ कहना hi बंद कर देगा. एक अच्छे बच्चे बनकर पढ़ाई करो. ताकि टीचर भी तुमसे प्यार करें.

अभिषेक- नहीं. मैं अब किसी को नहीं मरूंगा मम्मी. सब के साथ अचे से रहूँगा.

रानी जी- ये हुई न अचे बच्चो वाली बात. चलो अब जाकर पढाई करो. तुम्हारे प्रिंसिपल सर कह रहे थे की तुम पढाई बिलकुल भी नहीं करते. दिन भर बस ड्राइंग hi करते रहते हो. बीटा ड्राइंग करनी अच्छी बात है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है की तुम पढ़ाई करना hi बंद कर दो. अगर पढाई नहीं करोगे तो तुम फ़ैल हो जाओगे. अगर तुम फ़ैल हो जाओगे तो तुम्हारे पापा को और मुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लगेगा. अगर तुम फ़ैल हो गए तो पापा तुम्हें मरेंगे भी.

अभिषेक- नहीं मम्मी. पापा को बोलना की वो मुझे न मरे. मैं खूब मन लगाकर पढ़ाई करूँगा. और ाहहए नंबर लाऊंगा.

रानी- ठीक है बीटा अगर तुम अच्छे से पढाई करोगे तो पापा तुम्हे नहीं मरेंगे. अब जाओ पढाई करो. और अपनी बहनो को भी पढ़ने के लिए बोल दो.

रानी जी की बात सुनकर अभिषेक अपनी किताब लेकर पढ़ने बैठ गया और साथ में सरिता और मनीषा को भी अपने साथ पढ़ने बैठा लिया. लेकिन अभिषेक ठहरा मोती बुद्धि का लड़का, उसे पढ़ने में बिलकुल रूचि नहीं रहती थी. 10 मिनट पढ़ने के बाद उसने अपनी पेंचील और कॉपी निकली और ड्राइंग बनाने लगा. उसे ड्राइंग बनाते देख सरिता ने कहा.

सरिता- भैया आप पढ़ क्यों नहीं रहे हो. मम्मी ने पढ़ने के लिए बोलै है और आप ड्राइंग बना रहे हैं. ऐसे तो आप फ़ैल हो जायेंगे.

अभिषेक- मैं क्या करू सरिता. मुझे पढ़ना बिलकुल भी ाचा नहीं लगता. पढाई के नाम पर मेरा शरीर कम्पनी लगता है. मुझे ड्राइंग करना बहुत अच्छा लगता है.

सरिता- लेकिन भैया. ये तो गलत है. मम्मी को झूठ बोलकर आप ड्राइंग कर रहे हो. जबकि टीचर ने बताया है की मम्मी पापा से झूठ नहीं बोलना चाहिए.

अभिषेक- तू नहीं समझेगी सरिता. जो टीचर ने बताया है वो पढाई के लिए नहीं था. वो किसी दुसरे चीज के लिए बताया होगा.

सरिता- हाँ भैया तुम ठीक कह रहे हो. अच्छा आप ड्राइंग करो, लेकिन पापा से बचकर करना ड्राइंग नहीं तो पापा ने देख लिया तो बहुत मार पड़ेगी आपको.

अभिषेक- मैं तो पापा से छुपकर hi ड्राइंग करता हूँ, लेकिन तुम पापा को मत बता देना इसके बारे में. नहीं तो सच में पापा मुझे मरेंगे.

उसके बाद सरिता और मनीषा अपना होमवर्क करने लगे और अभिषेक तरह तरह के ड्राइंग बनाने लगा. इसी तरह एक हॉर्स तक तीनो अपनी किताब कापियों में घुसे रहे. पढाई ख़तम हो जाने के बाद तीनो घर में hi खेलने लगे. रात 8 बजे तक आनंद जी ऑटो लेकर घर आ जाते हैं.

रानी जी उन्हें पिने के पिने के लिए पानी देती है. पानी पिने के बाद आनंद जी रानी जी से पूछते हैं.

आनंद जी- अभिषेक कहा है भाग्यवान. दिखाई नहीं दे रहा है.

रानी जी- वो तीनो बगल वाले कमर में खेल रहे हैं. एक बात और कहनी है आपसे. अभिषेक को मारिएगा मत. मैं उसको अच्छी तरह से समझा दिया है. वो बोल रहा था की अब वो किसी के साथ maar-pit नहीं करेगा. इस बार जाने दीजिए उसे.

आनंद जी - अरे भाग्यवान. मैं उसका दुश्मन नहीं हूँ. मुझे भी अपने बेटे की फ़िक्र है. बस थोड़ा सख्ती करनी पड़ती है की कही बचा हाँथ से न निकल जाये. इसलिए मैं उससे सख्ती से पेश आता हूँ. अब अगर तुमने बात कर hi ली है तो ठीक है.

उसके बाद सभी मिलकर खाना कहते हैं और बच्चो को सुलाकर रानी जी किचन समेत कर सोने के लिए अपने कमरे में चली जाती हैं..



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
🙏👏👋🙏👏👋

अभी वो छोटा है मतलब 10 से 12 साल का है तो उसमें बदलाव संभव है लेकिन तब जब उसे सही मार्गदर्शन मिले, लेकिन रानी जी ये नहीं समझ पा रही है। इसलिए वो उसकी नादानियों और गलतियों पर पर्दा डाल रही है। आंनद जी का कहना सही है कि कहीं ऐसे न हो कि जब तक बात समझ मे आए तब तक बहुत देर हो जाए। जो शायद हो भी सकती है।।

बाकी ट्यूशन भी कर लेगा अभिषेक तो भी मुझे नहीं लगता कि उसमें ज्यादा परिवर्तन आने वाला है। अगले भाग में सब पता चल जाएगा। बाकी उसके नसीब में क्या है वो तो बाद में पता चलेगा।

धन्यवाद आपका इस खूबसूरत समीक्षा के लिए मैडम।

साथ बनी रहिए।।
 
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