Ufff......Ye Kaisi Pyaas...........(A Story Of Housewife) - Page 6 - SexBaba
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Ufff......Ye Kaisi Pyaas...........(A Story Of Housewife)

Update-27(A) (मेघा अपडेट)

कुछ दूर पर कड़ी आसमा के आँखों में भले hi आंसूं थे मगर वो अपनी नज़रें नीचे झुकाये उस भीड़ के बीचों बीच कड़ी thi..............hari कुछ देर तक ऐसे hi सबको घूरता रहा फिर सबको भागता हुआ आसमा के तरफ बड़े प्यार से देखने laga.................wo फिर हौले हौले आसमा के करीब गया और आसमा के सामने जाकर किसी गुनेहगार की तरह चुप चाप से खड़ा हो gaya...........uske हाथ में थमा लाठ अब छूटकर सड़क पर गिर चूका tha................dono के लैब खामोश they....................na हरी कुछ कह रहा tha.....................aur न आसमा..........................................



अब आगे..........................................................


हरी आसमा के करीब गया और उसके सर पर अपना हाथ धीरे धीरे बड़े hi प्यार से फेरने laga.....................jaise कोई माँ अपने बाचे को दुलारती ho..................aasma के आँखों से बहते उन आंसुओं को पूछने laga............wahin आसमा एक नज़र देखती हुई हरी के सीने से फ़ौरन लिपट गयी और फुट फुट कर रू padi................hari के लिए ये किसी बड़े सरप्राइज जितना tha..............magar वो एक बात जनता था की आसमा इस वक़्त बहुत दरी हुई thi........aur सदमे में thi................aur वो उसके अंदर के उस दुर्र को बहार निकलना चाहता tha...............us सड़क पर सबके बीच आसमा हरी के सीने से लिपटी हुई थी वहां मौजूद लोग उसके बारे में क्या कुछ सोच रहे होंगे अब उसे किसी चीज़ की परवाह नहीं thi....................aaj उसे हरी के सीने से लिपटकर एक सुकून मिल रहा tha...............wo सुकून जिसकी तलाश में वो न जाने कब से दर दर भटक रही थी............

" memsaheb.................sab लोग हमें देख rahe..............aap पहले अपने आंसूं poochiye............fir पानी पीजिये..............." और हरी आसमा को अपने से थोड़ा दूर करता हुआ................ उसकी आँखों में बड़े hi प्यार से देखने laga.........wahin आसमा एक नज़र हरी की तरफ देखती हुई.................... अपने आँखों से बहते उन आंसुओं को फिर पूछने lagi...............hari पास में रखा पानी की बोतल आसमा के तरफ बढ़ता हुआ बड़े गौर से देखने laga.............wahin जब आसमा की नज़रें उसके फाटे हुए हाथ पर जब गयी वो अंदर hi अंदर तड़प uthi..................kyon की उसका एक हाथ उसके खून से पूरी तरह रंगा हुआ tha............jo उसके कपड़ों पर भी कहीं कहीं लग गया tha..................khoon अब भी बेहटा हुआ नीचे सड़क पर टपक रहा था मगर हरी को उस दर्द की कोई परवाह नहीं थी................

" तुम्हारे हाथों से खून निकल रहा हैं..............." और आसमा हरी का वो हाथ थमती हुई बड़े गौर से देखने lagi.................hari का ज़ख्म गहरा था मगर उतना चोट उसे अक्सर लगता रहता था तो उसके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं thi.............magar आसमा के लिए तो थी naa..................wo हरी के उन ज़ख्मों को देखकर अंदर hi अंदर तड़प uthi.................issey पहले हरी कुछ समझता वो अपने साड़ी के एक कोना पकड़कर तेज़ी से फाड़ने लगी और जब साड़ी थोड़ी सी फुट गयी वो अपने साड़ी को और भी फाड़ती चली gayi...............uski बेशकंति साड़ी ख़राब हो गयी thi............magar उसके लिए ये सब चीज़ कोई मायने नहीं रखती थी..................

वो साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर हरी के कलाई पर बांधने लगी वहीँ हरी हैरत से आसमा को बस देखता raha.................aaj वाकई में उसकी किस्मत बुलंद thi...............aaj से पहले कभी उसके साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ tha.........jo आज हो रहा tha................itni हसीं लड़की आज उसके ज़ख्मों पर मरहम लगा रही थी क्या ये कम बात थी...................

" आपने ये क्या किया memsaheb................aapki इतनी महंगी saari.........aur आपने उसे फाड़ दी.............." और हरी आसमा को बड़े hi प्यार से देखने लगा वहीँ आसमा उसके हाथों पर अपनी साड़ी का टुकड़ा ाचे से लपेटती हुई ............... उसे बांधने लगी..............

" मैंने बाँध दिया हैं इससे तुम्हारा खून रुक jayega................hum चलते हैं यहीं पास के हॉस्पिटल में.............." और आसमा पानी की बोतल अपने हाथों में लेती हुई अपने आँख और मुँह को धोनी lagi............aab वो काफी हुड्ड तक नार्मल हो चुकी thi.............wo हरी को ज़बरदस्ती ले गयी और पास के क्लिनिक में उसके हाथों पर मरहम और पट्टी karwayi..............hari आसमा को बड़े प्यार से बस देख रहा था...................

" ये क्या memsaheb.....................main बिलकुल ठीक hoon........itne छोटे मोठे चोट तो अक्सर मुझे लगते hi रहते hain................aap ख्वामख्वाह परेशां हो रही............" और हरी धीरे से आसमा की तरफ देखता हुआ बोल pada...............wahin आज आसमा उसकी कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं thi................wo फिर वहीँ पास के शॉपिंग मॉल में गयी और अपने लिए दो तीन साड़ी सेलेक्ट की और हरी के लिए भी तीन चार सेट कपड़े खरीदने lagi.........wahin हरी बार बार आसमा को मन करता raha...........magar आसमा को उसकी एक न सुननी thi...............so वो न suni.........................aaj वो हरी पर अपना हुकुम nahin.................balki अपना हक़ जाता रही thi................aasma के अंदर हरी के लिए अब प्यार बेशुमार उमड़ पड़ा था..................

अब उसके अंदर की साडी झिझक हरी के लिए काफी हुड्ड तक ख़तम हो गयी thi...............usey हरी अब अपना लगने लगा tha..................yehi तो हर औरत चाहती हैं की मर्द हमेशा उसकी रक्षा kare............usey हर मुसीबत से bachaye...............hari भले hi उसका शौहर नहीं था मगर आज वो बीच बाजार में उसकी लाज और इज़्ज़त बचने वाला उसकी नज़र में हीरो ज़रूर बन गया tha.............bhale वो कैसा भी क्यों न ho..............aasma अब उसे दिल hi दिल में अपना सब कुछ मान चुकी थी..............

शॉपिंग करने के बाद हरी आसमा के साथ चलता हुआ कार में आया और सामने वाली सीट पर आकर बैठ gaya...................wahin आसमा भी सामान का पैकेट पिछली सीट पर रखती हुई ड्राइविंग सीट पर आकर बैठ गयी और कार स्टार्ट कर di..............kuch दूर जाने पर कुछ सुनसान एरिया में आसमा कार को साइड में पार्क करती hui............apni कार बंद कर दी और हरी की तरफ बड़े प्यार से देखने lagi.............wahin हरी अजीब सी नज़रियों से आसमा को देखे जा रहा tha...................aasma के मुन्न में क्या चल रहा था उसे थोड़ा भी अंदाज़ा नहीं था...........

" memsaheb..............aapne कार यहाँ क्यों रोक दी.....................!!!!!!!!!!!! " और हरी थोड़ा हैरान होता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा padi..............issey पहले वो कुछ कहती सैम का फ़ोन आ गया और उसने उससे ये कहकर बात ताल दी की वो अभी मार्किट में हैं और शॉपिंग कर रही ...............और सब कुछ ठीक hain........meri फ़िक्र करने की कोई बात nahin............jab वो घर जाएगी तो उससे बात karegi...............ye कहकर उसने फ़ोन काट di..........wahin हरी बड़े गौर से आसमा को बस देखे जा रहा था.................

" memsaheb.................aapne साहेब से झूठ क्यों bola...............ki आप अभी मार्किट में hain............market तो कब का हो चूका.............." और हरी आसमा के मुन्न में क्या चल रहा था वो कुछ समझ नहीं पा रहा tha................................wo बड़े गौर से आसमा के खूबसूरत से चेहरे को बस निहारता रहा...................

" hari.....................mujhse तुमसे कुछ बात करनी hain.....................is लिए मैंने यहाँ कार रोक di.................waise.....................main तुम्हें कैसी लगती hoon...............sach सच बताना................" और आसमा सीरियस होती हुई हरी के चेहरे की तरफ बड़े गौर से देखने lagi................wahin हरी की तो जैसे चंडी हो gayi..................aab वो ये बात बहुत ाचे से समझ चूका था की आसमा अब उसकी पूरी तरह से मुट्ठी में आ चुकी hain.................aaj के इस घटना ने हरी के लिए उसके दिल के सरे दरवाज़े खोल दिए थे वहीँ आसमा की सोच अब पूरी तरह से बदल चुकी थी...........

" आप तो बहुत खूबसूरत हैं memsaheb.................aapke आगे तो हीरोइन भी फीकी पढ़ जाती hain..............kasam से............." और हरी धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा टकटकी लगाए हरी के चेहरे को बस निहारती rahi...............shayad उसे जो सुनना था हरी ने उसे वैसा जवाब नहीं दिया था..............

" मैं खूबसूरत हूँ या nahin............maine ये नहीं पुछा tumse...............main ये पूछ रही की मैं तुम्हें कैसी लगती हूँ................." और आसमा बड़े गौर से हरी की तरफ फिर से देखती हुई बोल पड़ी.............

" आप मुझे बहुत ाची लगती हैं memsaheb.....................itni ाची की मैं बता नहीं सकता................." और हरी धीरे से बोल pada...........aaj आसमा के बदले हुए तेवर से हरी भी थोड़ा मुन्न hi मुन्न घबरा रहा था..................

" सच कह रहे हो naa..........fir तुम्हें शांति कैसी लगती hain...................wo भी तो तुम्हें ाची hi लगती होगी .........हैं ना................." और आसमा ताने मरती हुई हरी की तरफ अजीब नज़रियों से देखने lagi...............wahin हरी कुछ देर तक चुप raha..................wo ाचे से जनता था की उसने शांति को उससे चढ़ते हुए आज खुद देखा tha...........is लिए वो इस बात को झुटला नहीं सकता tha..............magar आसमा को नाराज़ भी तो नहीं कर सकता था...................

" आपके आगे सब फीकी हैं memsaheb.................aapse किसी का कोई मुक़ाबला nahin.................aap बेजोड़ hain............main तो बस उसके साथ टाइम पास करता hoon.............bus................wo मुझे ज़्यादा पसंद नहीं............." और हरी सफाई देते हुए बोल पड़ा ............... वहीँ आसमा बड़े गौर से हरी की आँखों में आँखें डेल उसे देख रही thi............shayad वो उसका झूठ पकड़ना चाहती हो............

" अगर वो तुम्हें पसंद नहीं फिर भी तुम उसके साथ अपना जिस्मानी सम्बन्ध कायम किये हुए ho................hain naa...............agar वो तुम्हें पसंद होती तो तुम क्या करते..............." और आसमा थोड़ी चिढ़ते हुए हरी की तरफ गुस्से से देखने लगती हैं वहीँ हरी एक शब्द कुछ नहीं कहता और बस खामोश रहता हैं..............

" देखो hari...........mujhe तुम्हारा शांति से मिलना जुलना अब पसंद nahin............haan..............pehle की बात कुछ और thi............magar आगे से ये सब नहीं चलेगा............." और आसमा जैसे हरी को हुकुम देती हैं वहीँ हरी अपने चेहरे पर थोड़ी सी उदासी लता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं................
 
Update-27(B) (मेघा अपडेट)

" मगर memsaheb................aapko मालूम हैं की मैं पिछले 20 सैलून से अकेला रहता आया hoon............kum से कम शांति के आ जाने से मेरी ये हवस की आग कुछ शांत तो हो जाती hain............main पहले की तरह बेचैन और तड़पता तो नहीं rehta.....................mujhe रात में सुकून की थोड़ी तो नींद आती हैं............" और हरी आसमा के सामने फिर से सफाई देने लगता hain.............usey ाचे से ये बात मालूम था की आसमा कभी दूसरी औरत को अब उसके साथ बर्दास्त नहीं karegi...............aur वो शांति को उसके खिलाफ बस अब तक इस्तेमाल करता आया था..............

"ाचा तो तुम्हारे हिसाब से औरतें बस कपड़े बदलने की चीज़ hain.................hain naa...................agar कल को तुम मुझे भी पा लोगे तो मुझे भी इस्तेमाल करके अपने से दूर फेंक dogey.............kyon मैंने सही कहा ना......................." और आसमा के चेहरे पर थोड़ी नाराज़गी झलक पड़ती हैं वहीँ हरी बिलकुल चुप हो जाता hain..............wo जनता था की ज़रा सी बात बिगड़ी की इतना मस्त आया हुआ माल उसके हाथों से निकल jayega.............aur अब वो आसमा जैसी माल को कभी सपने में भी खोना नहीं चाहता था..................

" मेमसाहेब ...............अगर आप ऐसा कुछ सोचती हैं तो मैं आपको कसम देता हूँ की मैं आज के बाद कभी किसी औरत के तरफ दुबारा पलटकर भी नहीं dekhunga..............siwaye आपके............" और हरी इस बार अपनी बात पूरी कॉन्फिडेंस से बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा टकटकी लगाए हरी के चेहरे को पढ़ने की लगातार कोशिश कर रही thi................kuch देर की चुप्पी के बाद वो उसके हाथों को देखती हैं तो वो अपने ज़ख़्मी हाथों को अब तक हवा में लटकाये हुआ tha............jissey उसे दर्द भी हो रहा tha............ye देखकर आसमा धीरे से बोल पड़ी............

" ठीक हैं hari........tum अगर कहते हो तो मैं तुमपर विश्वास कर लेती hoon..................magar मुझे कभी भी कुछ पता चला की तुम्हारा चक्कर किसी और औरत के साथ हैं तो मुझसे बुरा कोई नहीं hoga..........samajh गए ...........और ये अपने हाथ को हवा में क्यों ऐसे लटकाये हुए ho............is तरह इसे हवा में लटकाये रहोगे तो क्या तुम्हें तकलीफ नहीं hogi...........tum एक काम karo.................tum अगर चाहो तो तुम अपना ये हाथ मेरी जगहों पर रख सकते हो..................." और आसमा धीरे से बोल padi..................aab वो हरी के सामने बहुत हुड्ड तक ओपन हो चुकी thi............wahin हरी बात को ज़्यादा न खींचते हुए सीधा मुद्दे पर आता हैं................

वो जान चूका था की चिड़िया उसके जाल में फंस गयी hain....................aab उसे कैसे उसका शिकार करना हैं ये हरी से बेहतर और कौन जान सकता tha...............jab आसमा उसका हाथ अपने जांघों पर रखने को कह चुकी थी तो अब सब कुछ आईने की तरह साफ़ हो गया था..........

वो फिर से आसमा के साथ अब खुलकर गन्दी बातें करना चाहता था जिससे आसमा के अंदर शर्म और झिझक पूरी तरह से ख़तम हो जाये और वो आसमा के साथ वो सब कुछ करे जो वो बरसों से किसी सूंदर लड़की या औरत के साथ करना चाहता tha.............ye ख्याल आते hi उसके चेहरे पर एक कमीनी सी मुस्कान फिर से तैर gayi................wo हौले से अपना वहीँ ज़ख़्मी हाथ आसमा के जांघों पर रखता hua...................uske बदन की कोमलता को महसूस करने लगा जिससे उसका 10 इंच का लौड़ा अंगड़ाई लेता हुआ धीरे धीरे फुंकार मरने लगा.............

" memsaheb...............aap ये बात जानती हैं की मैं आपको कैसी नज़रियों से देखता hoon.................fir भी आप मेरे हाथ को अपने जांघों पर रखने को मुझसे कह rahi...............kahin मेरा हाथ इधर उधर फिसल गया और कहीं मैं आपके बदन के उन हिस्सों को छु लून............ जिनपर अधिकार सिर्फ आपके शौहर का hain............to fir..............kahin ऐसा न हो की उस दिन की तरह आप मुझे कसकर थप्पड़ मर दें................." और हरी भोलेपन से बोल पड़ा वहीँ आसमा जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ी.............

" ऐसा कुछ नहीं hoga..............main तुम्हें अब नहीं marungi............mera यकीन करो................." और आसमा हौले से बोल padi..............wahin हरी के हाथों का स्पर्श उसके जांघों पर उसके बदन में धीरे धीरे गर्मी भरता जा रहा tha............wo बड़े गौर से हरी के खुरदुरे हाथों को देख रही thi.................aur अपने बदन पर महसूस भी कर रही थी...........

" memsaheb................aapne मुझे शांति को छोड़ने के लिए तो मन कर दिया मगर आपने ये नहीं बताया की मैं अपने इस लुंड की प्यास को कहाँ जाकर अब शांत karunga.............kya मेरा सारा जीवन लुंड हिलने में hi बस निकल जायेगा................" और हरी बात बनता hua.........aasma के तन बदन में आग भरने laga..............wo आसमा को पूरी तरह से तैयार करना चाहता था ताकि कल को वो किसी भी चीज़ के लिए उसे रोक टोक न kare................wo उसके एक इशारे पर वो हर चीज़ करे जो हरी का सपना hain.................pehle हरी आसमा को शब्दों से छोड़ना चाहता tha.............fir तो वैसे भी आसमा उसके लुंड के नीचे आने hi वाली thi................ismein कोई शक की गुंजाइश नहीं थी.................

हरी के ऐसे सवालों को सुनकर आसमा का कलेजा ज़ोरों से धड़कने laga.................waise हरी ने उससे सच hi तो कहा tha................agar वो शांति को नहीं छोड़ेगा तो उसके लुंड की गर्मी को कौन शांत करेगा...................

" देखो hari...............wo सब मैं नहीं janti.................tum आज के बाद शांति के पास नहीं जाओगे............ तो नहीं jawogey..................ye मेरा हुकुम hi समझ लो............" और आसमा हरी की तरफ देखती हुई धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में आसमा को घूर रहा था..............

" ये कोई बात नहीं हुई memsaheb...............aap मुझे शांति के पास जाने नहीं dengi.................aur न आप खुद कभी मेरे पास aayengi...........to मेरा ये लुंड आखिर जायेगा kahan................agar आप मुझे इस बात का यकीन दिलाओ की आप मेरे लुंड से पानी निकल देंगी तो मैं आज के बाद कभी शांति के पास नहीं jawunga..........na hi कभी उसके आजु बाजु भी फटकूँगा............." और हरी जैसे अपनी बात रखते हुए धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा का दिल ज़ोरों से धड़कने लगा ...........वो चाहती थी की जो कुछ आज हरी ने शांति के साथ किया था वहीँ सब वो उसके साथ भी करे मगर ये सब कहने के लिए आसमा के पास हिम्मत नहीं thi.................sharam और लाज की दीवार उसे ऐसा करने से रोक रही thi................aasma को ऐसे खामोश बैठा हुआ देखकर हरी फिर अपनी बात आगे कहना शुरू करता हैं..........

" ठीक हैं memsaheb...................koi बात nahin..............magar आप मुझे दो चीज़ की इज़ाज़त dijiye................fir मैं शांति के पास कभी नहीं jawunga...............agar आपको ये मंज़ूर हो to........nahin तो आपको फिर मुझे रोकने का कोई हक़ नहीं बनता................" और हरी अपनी चाल फिर से चल देता हैं वहीँ आसमा जवाब में धीरे से हाँ में अपना सर हिलती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं...........

" मेरी पहली शर्त ये हैं ki.......................aab से मैं आपके सामने जितनी गन्दी बातें होगी मैं वो सब कुछ आपसे karunga.................aur आप मेरे उन बाटिओं का पूरा पूरा समर्थन karengi...........na hi मुझे कभी रोकेंगी और न किसी चीज़ को कहने के लिए कुझे कभी मन karengi.................main अगर चहु तो आपके साथ खूब गंदे गंदे मज़ाक भी कर सकता hoon......ussey आपको दिक्कत नहीं होनी चाहिए.............." और हरी एक hi सांस में बोल पड़ा वहीँ आसमा का दिल ज़ोरों से धड़कने laga...............wo धीरे से आगे बोल पड़ी...........

" और तुम्हारी दूसरी शर्त................" और आसमा हरी की तरफ बड़े गौर से देखने लगी वहीँ हरी फिर आगे कहना शुरू किया.............

" मैं आपके पास गन्दी गन्दी वीडियोस फोटोज वगैरह भी भेजा करूँगा उससे आपको दिक्कत नहीं होनी chahiye...............aur अगर मेरा जब मुन्न हुआ तो मैं आपके बदन को कभी भी छु सकता hoon............kahin भी हाथ लगा सकता hoon..............aap मुझे कुछ भी करने के लिए मन नहीं karengi...............ho सकता हैं आपके इस हसीं बदन को इस तरह से छूने से मेरे लुंड से पानी निकल jaye..........aur मुझे सुकून मिले.............." और हरी ने तो आसमा को अब पूरा नंगा करने का प्रोग्राम पहले hi सेट कर रखा था..................

वो ये बात ाचे से जनता था की आसमा सब कुछ उसके लिए बर्दास्त करेगी ..................मगर शांति के पास उसका यु जाना किसी भी कीमत पर उसे गंवारा नहीं tha...............is लिए वो अब आसमा के साथ सब कुछ खुले में करने की उससे परमिशन ले रहा था ............उधर आसमा भी ये बात ाचे से जानती थी की हरी को ऐसे पूरा चूत देने का मतलब किसी भूखे शेर के सामने खुद को परोसने जैसा हैं ............अब वो शेर जैसा चाहे वैसा उसे खाये या उसका शिकार kare..................aanth में उसे उस शेर का शिकार तो बनाना hi था............

" आप चुप क्यों हैं memsaheb.............bataiye naa............meri बाटिओं का जवाब dijiye...................aapko मेरी ये दोनों शर्तें मंज़ूर हैं की नहीं.........." और हरी फिर से बोल पड़ा वहीँ आसमा का कलेजा ज़ोरों से फिर धड़क utha...........wo आज बहुत असमंजश में थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो हरी के बाटिओं का क्या जवाब dein.............dekhna था आसमा हरी के सवालों का क्या जवाब देती हैं ये तो आने वाला वक़्त hi बता सकता था...........................

तो बे कॉन्टिनोएड......................................
 
Update-28(A) (मेघा अपडेट)

" आप चुप क्यों हैं memsaheb.............bataiye naa............meri बाटिओं का जवाब dijiye...................aapko मेरी ये दोनों शर्तें मंज़ूर हैं की नहीं.........." और हरी फिर से बोल पड़ा वहीँ आसमा का कलेजा ज़ोरों से फिर धड़क utha...........wo आज बहुत असमंजश में थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो हरी के बाटिओं का क्या जवाब dein.............dekhna था आसमा हरी के सवालों का क्या जवाब देती हैं ये तो आने वाला वक़्त बता सकता था...........................

अब आगे............................................................

कुछ देर की गहरी ख़ामोशी उन दोनों के बीच बानी rahi.......................na hi हरी कुछ कह रहा tha..................aur न hi aasma.....................is वक़्त आसमा के दिमाग में हज़ारों सवाल उठ रहे they...............wo फैसला नहीं कर पा रही थी की वो हरी के सवालों का क्या जवाब dein...................chahti तो वो भी ये सब थी मगर शर्म और लाज की दीवार उसे ऐसा करने से बार बार रोक रही thi....................thode देर की चुप्पी के बाद आसमा धीरे से बोल padi.................uski सांसें ज़ोरों से चलने लगी thi...........wahin उसके तन बदन में एक अजीब सी बेचैनी बार बार उठ रही थी.............

" ठीक हैं hari..................jab तुमने मुझे विश्वास दिलाया हैं तो मैं भी तुम्हें अब निराश नहीं karungi................mujhe तुम्हारी ये दोनों शर्तें मंज़ूर hain....................jab तुम मेरे साथ एहि सब करना चाहते हो तो तुम्हारे लिए एहि sahi................main तुम्हें अब किसी भी बात के लिए मन नहीं karungi............na कभी किसी चीज़ के लिए रोक टोक karungi..................jo तुम्हारा दिल करे वैसे मुझसे बात karna..............jab तुम्हारा मुन्न करे मुझे चूना magar.....................meri भी एक शर्त हैं............" और आसमा गहरी सांस लेती हुई धीरे से बोल padi..........is वक़्त उसका कलेजा बहुत ज़ोरों से धड़क रहा tha...............jism में अजीब सा रोमांच उठ रहा था वहीँ छूट में भी गीलापन बढ़ता जा रहा tha..........wahin हरी अपनी जीत पर मंद मंद मुस्कुरा रहा था.............

" मेरी ये शर्त हैं की ..................तुम मेरे बदन के उन हिस्सों को नहीं छुओगे जिनपर अधिकार सिर्फ और सिर्फ मेरे शोहर का hain.............yani की मेरे बूब्स............. मेरी ass...........meri vagina...........mere सरे प्राइवेट parts...................baki जहाँ तुम्हारा मुन्न करे तुम वहां मुझे छु सकते ho..................aur एक बात aur...................tum मेरे साथ तब तक सेक्स नहीं करोगे जब तक मैं खुद चलकर .............तुम्हारे पास आकर ...........तुमसे ये नहीं कह देती की मुझे तुमसे अब सेक्स करना hain............aur जिस दिन ऐसा हो गया उस दिन मैं आपने आपको तुम्हारे लिए खुद को समर्पित कर dungi..........fir उस दिन तुम मेरे साथ जो भी करना चाहो मैं कभी तुम्हें किसी भी चीज़ के लिए मन नहीं karungi...........tumhari हर एक ख्वाहिश मैं पूरी karungi..........wo चाहे जो ho............ye आसमा का तुमसे वादा हैं................." और आसमा का दिल ज़ोरों से धड़क utha..............wo hi जानती थी की उसने ये बात हरी से कैसे बोली thi.............ek अजीब सी सिरहन उसके तन बदन में दौड़ गयी थी..................

कहने को तो वो सब कुछ हरी से कह दी थी मगर वो ये नहीं जानती थी की हरी कितना पंहुचा हुआ खिलाडी hain............bhala उसे इस शर्त से कैसी दिक्कत हो सकती thi...............uske लिए तो और एक सुनेहरा मौका था की वो आसमा को इतना नंगा करे की उसकी शर्म लाज सब कुछ पीछे चूत jaye...........aur जब वो उसकी बाँहों में आये तो वो ..............सिर्फ और sirf.....................uski रांड बनकर aaye...............wo रांड जिससे वो सब कुछ करवा ले जो एक पेशावर रंडी भी करने से पहले कुछ सौ बार सोचती हैं..........................

आसमा की बातें सुनकर हरी की जैसे आँखें चमक गयी thi...................usey लगा की मंज़िल उसने पा लिया हैं मगर आसमा की ऐसी शर्त से फिलहाल उसे मंज़िल थोड़ी दूर नज़र आ रही thi...............aab उसे तय करना था की वो अपनी मंज़िल को कितनी जल्दी हासिल कर लेता hain................usey आसमा के इस शर्त से कोई आपत्ति नहीं thi..................waise भी वो आसमा के इस कमसिन जवानी का पूरे पूरे मज़े ले लेकर उसे तड़पा तड़पा के छोड़ना चाहता tha..............usey रात दिन इतना रगड़ना चाहता था की आसमा सिर्फ चुदाई के अलावा और कुछ न सोच sake...........har पल , हर वक़्त वो हमेशा गरम rahe..........har वक़्त वो अपनी छूट खोल के उसका लुंड लेने के लिए बस पागल रहे.............

" ठीक हैं memsaheb...............mujhe आपकी शर्त मंज़ूर hain.............magar एक बात केहनी थी aapse................wo अंग्रेजी में क्या कहते hain.............haan.......i लव you................mujhe आपसे प्यार हो गया हैं...................." और हरी आसमा की तरफ देखता हुआ धीरे से मुस्कुराने लगा वहीँ आसमा का चेहरा शर्म से लाल पढ़ gaya...............wo शर्म से अपनी नज़रें नीचे की तरफ झुका ली वहीँ हरी उसे देखकर बस मुस्कुराता रहा................

" आपने मेरी बाटिओं का जवाब नहीं diya............memsaheb.............." और हरी कुछ देर की ख़ामोशी के बाद दुबारा फिर से बोल पड़ा ............वहीँ आसमा लुम्बी लुम्बी सांसें लेती हुई खिड़की के बहार देख रही thi.............sach तो ये था की इस वक़्त उसका कलेजा ज़ोरों से धड़क रहा tha.....................hari हर पल हर वक़्त उसे बेचैन कर देता था...................

" hari..................aabhi इसका सही वक़्त नहीं आया hain.........jab सही वक़्त aayega................tab मैं खुद तुमसे बोल dungi....................aab घर chale.............raat होने वाली हैं................" और आसमा हरी की तरफ एक नज़र देखती हुई धीरे से बोल पड़ी वहीँ जवाब में हरी बस खामोश raha...............aasma कार स्टार्ट की और फिर अपने घर की तरफ निकल padi................poorey रास्ते भर वो दोनों खामोश rahe............hari बार बार आसमा के खूबसूरत से चेहरे को बस देखे जा रहा tha.........wo ाचे से जनता था की अब आसमा उसे किसी भी चीज़ के लिए कभी रोक टोक नहीं karegi...................usey कभी कभी खुद पर यकीन नहीं हो रहा था की उसके बाजु में बैठी वो हुस्न की पारी .....वो खूबसूरत bala..........aab उसकी मुट्ठी में hain..............sach में आज उसे अपनी किस्मत पर फक्र हो रहा था.................

जैसे hi आसमा घर पहुंची वो सामान लेकर अपने कमरे की ओरे जाने lagi................aur हरी के कुछ कपड़े उसे थमती हुई उसकी तरफ देखकर धीरे से मुस्कुरा पड़ी..............

" memsaheb....................aaj रात को मैं आपके पास कॉल करूँगा.................." और हरी आसमा की तरफ देखता हुआ धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा उसके बाटिओं को नज़रअंदाज़ करती हुई अपने कार में रखे सामान को एक एक कर निकलने lagi............wo हरी के सामने ऐसा शो कर रही थी जैसे उसने हरी की बातें सुनी hi न हो.............

" hari................ho सके तो तुम एक दो दिन आराम कर lena..........tumhein काम करने की ज़रुरत नहीं hain................shanti तुम्हारा काम देख legi.............aur haan............kal सुबह मेरे पास चले आना मैं तुम्हारा ड्रेसिंग ( हाथों की पट्टी ) कर doongi..............aur haan..................har बात पूछनी ज़रूरी हैं kya............!!!!!!!!!.......tumhari मर्ज़ी जो मुन्न में आये सो karo.............main तुम्हें अब किसी भी बात के लिए मन नहीं करुँगी............." और इतना कहकर आसमा हरी के जवाब का बगैर इंतज़ार किये सीधा अपने कमरे में चली गयी वहीँ हरी बड़े गौर से आसमा की गांड को निहारता रहा..............

और अपने एक हाथ से अपने लुंड को धीरे धीरे मसलता raha.............usey पूरा यकीन था की एक न एक दिन उसका विशाल लुंड आसमा की गांड की उस छोटी सी सूराख में ज़रूर ghusega..............jiski उसे चाह hain..................kuch देर ऐसे hi खड़े रहने के बाद वो अपने उस हाथ को धीरे से चूमता हुआ धीरे से मुस्कुरा pada.................kyon की कुछ देर पहले उसका वहीँ हाथ आसमा के जांघों पर tha................aab तक वो उसके बदन के कोमलता के एहसास को भुला नहीं पाया था..............

हरी आज बहुत खुस tha......................uski बरसों की मुराद जैसे पूरी हो गयी thi................shanti जब उसके पास आयी तो उसके हाथों पर लगे उन ज़खम को बड़े गौर से देखने lagi..........par पता नहीं क्यों वो अब शांति में ज़रा भी इंट्रेस्ट नहीं ले रहा tha....................wo बक बक करती रही और हरी अपने ख्यालों की दुनिया में खोया raha.............waise हरी ने उसे बता दिया था की कैसे उसने आसमा की जान उन गुंडों से bachayi.............magar आसमा और उसके बीच की एक भी बात वो शांति से नहीं बताया tha.................aab वो कुछ बातें अपने तक राज़ hi रखना चाहता था.................

शाम से फिर रात hui.....................idher आसमा हरी के लिए पहले से कहीं ज़्यादा बेचैन thi..................raat को उसे नींद नहीं आ रही thi...............bister पर वो इधर से उधर बस करवटें बदल रही thi...............uski बेचैनी साफ़ उसकी हरकतों से पता चल रही thi................is बीच सैम का कॉल आया तो उसने आज की एक भी घटना सैम को नहीं batayi.............pata नहीं क्यों वो अब कोई भी बात किसी से ज़िकर नहीं करना चाहती thi..............khas कर हरी और उससे जुडी baatein.................ghadi में 10 बज रहे they...............neend उसे नहीं आ रही thi..........wo बार बार अपने मोबाइल को देख रही थी फिर उसे देखकर साइड में रख deti...............wo ऐसा कई बार कर चुकी thi.................shayad उसे हरी के कॉल का अब इंतज़ार था.................

थोड़े देर बाद उसके मोबाइल पर एक व्हाट्सप्प मश्ग aaya....................wo अपने मोबाइल को देखने लगी तो मश्ग हरी का tha.......................jab उसने हरी का मश्ग देखा उसकी आँखें चमक gayi..........khushi उसके चेहरे पर फिर से झलक padi.............wahin उसका दिल ज़ोरों से धड़क utha.............wo फ़ौरन अपने बिस्टेर से उठ गयी और अपना व्हाट्सप्प मश्ग ओपन करने lagi..............aur जैसे hi उसने व्हाट्सप्प मश्ग खोला हरी ने उसके लिए तीन फोटोज सेंड किया हुआ tha..............wahin फोटो जो उसका सपना tha..............jo वो आसमा के साथ अब सब कुछ करना चाहता tha................jaise hi आसमा की नज़र उन फोटोज पर पड़ी उसका कलेजा ज़ोरों से धड़क उठा................

उस फोटो में एक आदमी का लुंड करीब 10 इंच से भी ज़्यादा बड़ा रहा hoga..........aur करीब 3 इंच mota...........jo किसी घोड़े जितना लुम्बा और मोटा tha...............wo वहीँ लड़की को फर्श पर घुटनों के बल बैठाया हुआ tha.........uska एक पवन बिस्टेर पर था और वो अपना पूरा लुंड उस लड़की के गले तक दाल रखा tha...............usi पिक्स की दो तीन और भी फोटोज थी जिसमें वो लड़की एक दो स्टेप बी स्टेप उस आदमी का लुंड अपने हलक में ली हुई thi............pehle में aadha............fir दूसरे में उससे भी zyada.................aur तीसरे में पूरा अंदर tak...........bagal में उसके लुंड की पूरी फोटो थी..............." ये देखकर आसमा की छूट फिर से पनिया gayi.........wo बिस्टेर पर फिर से बेचैन होने lagi...................wo बड़े गौर से उस लुंड के फोटो को देख रही थी तभी हरी का कॉल उसके मोबाइल पर आने laga.............aasma धीरे से अपना फ़ोन रइवे की..........
 
Update-28(B) (मेघा अपडेट)

" memsaheb................kaisi hain..............aur क्या कर रही हैं............." उधर से हरी बोल pada.............wo तो जनता hi था की उसकी मेमसाहेब उसका भेजा हुआ फोटो देख रही hongi.............kyon की उसे पता चल चूका था की आसमा ने उसकी भेजी हुई पिक्स देख ली hain...............whasapp पे अभी भी वो ऑनलाइन दिख रही थी..............

" कुछ नहीं hari.........bus सोने की कोशिश कर रही थी....................." और आसमा धीरे से बोल padi........aabhi तक उसकी सांसें तेज़्ज़ चल रही थी जो हरी बहुत ाचे से फ़ोन में महसूस कर रहा था..............

" मैंने अभी अभी जो फोटोज भेजी थी वो कैसी thi....................ye मेरा सपना हैं की मैं भी अपना पूरा लुंड किसी लड़की की हलक में अंदर तक ऐसे hi पेलता rahun.............sach कहता हूँ memsaheb..............itna मज़ा आएगा की पूछो मुट्ठ............" और हरी अब आसमा को बाटिओं से छोड़ना शुरू कर दिया tha.....................wahin आसमा की सांसें धीरे धीरे फिर से बढ़ने लगी.............

" ाचा हैं बस............" और आसमा धीरे से बोल पड़ी............

" बस ाचा hain.............ye कोई बात hui................aapko क्या लुंड चूसना पसंद हैं मेमसाहेब....................." और हरी फिर से आसमा को धीरे धीरे गरम करने laga.............wahin आसमा फिर से धीरे धीरे बेचैन होने लगी.............

"nahin..........mujhe. ये सब पसंद नहीं............." और आसमा हौले से बोल padi............wahin हरी जवाब में मुस्कुरा पड़ा...............

" जैसे लड़कियों को अपनी बुर चटवाने ाचा लगता हैं ठीक वैसे hi मुझे भी अपना लुंड चुसवाना ाचा लगता हैं ..............memsaheb...............mera भी लुंड उस फोटो में उस आदमी जितना बड़ा और मोटा hain............aur मैं भी चाहता हूँ की जैसे वो लड़की उस तस्वीर में उसका लुंड अपने मुँह में पूरा ली हुई thi..............kuch वैसे hi मैं भी आपके मुँह और हलक़ तक अपना पूरा लुंड पेलता rahun.................poori गहरायी tak............poora अंदर tak..................tab देखिएगा memsaheb.......aapko भी मेरा लुंड लेने में कितना मज़ा आएगा.............

अंग्रेजी पिक्टरों में तो लड़के लड़कियों के मुँह के अंदर अपना सारा माल गिरा देते hain..........unse अपना माल उन्हें खिलते hain..........chatwate hain...............apna लुंड चाट चाट कर उनसे साफ़ करवाते hain...............aur सच कहूं मेमसाहेब तो ये देखकर मुझे बड़ा मज़ा आता हैं............" और हरी अब खुलकर गन्दी बातें आसमा से कर रहा था वहीँ आसमा का बदन पूरी तरह से सुलगता जा रहा tha................wo अपनी निघ्त्य को धीरे से निकलती हुई अपने ब्रा और पंतय को धीरे से नीचे की तरफ सरका देती हैं .......और धीरे धीरे अपने छूट के दानों को फिर रगड़ना शुरू करती हैं................

नशे से उसकी आँखें सुर्ख लाल होती जा रही thi...............wo एक बार फिर से मदहोशी के आलम में डूबती जा रही thi...............hari उससे खुल कर नंगी बातें कर रहा था जिससे आसमा की बेचैनी धीरे धीर बढ़ती जा रही thi................hari का यु उससे खुल्ला बोलना उसके तन बदन में आग भर्ती जा रही thi....................aasma एक बार फिर से पूरी तरह गरम हो चुकी thi......uski छूट से पानी फिर से बहने लगा था....................

"तू झूट बोलते हो .......किसी इंसान का उतना बड़ा हो hi नहीं सकता.............." और आसमा धीरे से अपने छूट के दानों को रगड़ती हुई बोल padi.......................wahin हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ा............

" एक मिनट रुकिए memsaheb...............aabhi आपको यकीन हो जायेगा..................." और हरी अपने पेण्ट कोहॉल से नीचे की तरफ सरकता hua................usey नीचे करने laga..............aur अपने खड़े लुंड की तस्वीर लेता हुआ उसे आसमा के पास दुबारा से व्हासप्प करने laga..............thode देर बाद आसमा को फिर से एक मश्ग रइवे हुआ...............

" मैंने अभी अभी अपने लुंड की एक तस्वीर आपको भेजी हैं memsaheb....................agar फिर भी आपको यकीन न आये तो मैं वीडियो कॉल करके आपको दिखा देता hoon............tab आपको मेरी बाटिओं पर यकीन हो जायेगा..............." और हरी आसमा को और भी गरम करने laga.............wo चाहता था की आज वो आसमा से बात करते करते उसका पानी निकल दें.............

इधर जैसे hi आसमा उस पिक्स को ओपन की एक काळा रंग का मोटा लुम्बा लुंड जो वाकई में हरी ने अभी कुछ देर पहले अपने मोबाइल से फोटो खींचकर उसके पास भेजी thi...........jisey देखने के बाद आसमा की रही सही सांसें भी उखाड़ने lagi..............uski बेचैनी फिर से बढ़ने lagi..............jissey उसका कलेजा ज़ोरों से धड़कने laga...................wo आज दोपहर में उसका लुंड देखि थी तो उसे मालूम था की हरी उससे झूट नहीं बोल raha.............ek बार फिर से जब वो हरी का लुंड देखने लगी उसकी छूट में गीलापन बहुत हुड्ड तक बढ़ने laga..................uski छूट इस वक़्त पानी पे पानी छोड़ रही thi.................wo एक हाथ की ऊँगली को अपने छूट पर ले गयी और धीरे धीरे उसमें ऊँगली करने lagi................hari से ओपन सेक्स चाट उसे बहुत मज़ा दे रहा था..............

"इतना bada....................ho hi नहीं सकता............." और आसमा जैसे अनजान बनती हुई धीरे से बोल padi...........wahin हरी जवाब में धीरे से हंस पड़ा............

" ठीक हैं अगर आपको यकीन नहीं होता तो मैं आपको अपना लुंड dikhaunga............fir तो आपको मेरी बाटिओं पर यकीन हो जायेगा ना............" और हरी फिर से बोल पड़ा वहीँ आसमा का अब बुरा हाल tha.............wo हरी से बात करती हुई अपने बुर में ऊँगली कर रही thi...........sansein उसकी बहुत ज़ोरों से चल रही thi.....wahin उसका बदन किसी आग के भाटी के सामान टप्प रहा था...............

" मेमसाहेब........ आपने पुछा था न की आप मुझे कैसी लगती hain............to इसका जवाब सुन lijiye..............sach तो ये हैं की मैं आपको हमेशा बिन कपड़ों के देखना चाहता hoon.............kaash आप मेरी बीवी होती तो कितना मज़ा आता.................." और हरी अपने लुंड पर हाथ फेरता हुआ धीरे से बोल pada...............usey ाचे से मालूम था की आसमा इस वक़्त बहुत गरम hain.............wahin आसमा धीरे से बोल padi.......usey भी हरी के साथ ऐसी बातें ाची लग रही थी.........

" अगर मैं तुम्हारी बीवी होती तो तुम क्या करते हरी....................." और आसमा धीरे से सिसकते हुए बोल padi..........uski छूट गीली पे गीली होती जा रही thi.........wahin हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा pada.........shayad वो एहि तो सुनना चाहता था...................

" सबसे पहले तो मैं आपको सुबह शाम रात दिन हर वक़्त पूरा नंगा rakha..............fir आपके तीनों सूराख में अपना हर वक़्त लुंड pelta.................shaam को आपको छोड़ना शुरू करता और सुबह तक आपको बस छोड़ते hi rehta.............aapke घर के हर कोने कोने में मैं आपकी चुदाई karta.................main आपको इतना रगड़ता की आपकी चाल ख़राब कर देता............" और हरी तेज़ी से अपना लुंड हिलाते हुए बोल पड़ता हैं वहीँ आसमा का अब बुरा हाल tha.............wo हुड्ड से ज़्यादा बेचैन हो छुई thi..hari की ऐसी बातें उसके बदन में आग लगा रही थी........

"और जानती हैं सुबह जब मैं उठता तो क्या karta......................."aur हरी अपने लुंड को हिलता हुआ फिर बोल pada...........wahin आसमा की सांसें उखाड़ने lagi..........ab वो अपने मंज़िल के बेहद करीब थी............

"kyaaaaaaaaaa क्काररर्टीीीीे........... haaari...........baaatawwoo ना...................." और आसमा की सांस फूले lagi.........uski ऊँगली तेज़ी से उसके छूट के अंदर बहार हो रही थी..............

" आप मुझे नाश्ता karwati..............jo मेरा दिल करता वो मैं आपकी बुर और गांड में डालकर उसे आराम से बैठकर khata............aur तब तक खता जब तक मेरा नाश्ता से पेट नहीं भर jata..................chahe वो केला हो या angoor................butter हो या फिर chocolate...........ya फिर lolipop..............main हर दिन ऐसे hi नाश्ता करता.................." और हरी की ये बातें सुनकर आसमा का साबरा का बाँध टूट जाता हैं और वो वहीँ ज़ोरों से हफ्ते हुए चिल्ला पड़ती हैं और aaaaaaaaaaaaaassssssssssssssssssssssssssssssssmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmooooooooooooooooooooooo करती हुई ज़ोरों से झरने लगती hain...............wahin हरी समझ जाता हैं की आसमा फिराग हो गयी हैं...................

वो थोड़े देर तक फ़ोन पे hello hello करता हैं मगर उधर से आसमा की कोई आवाज़ नहीं aati.................wo जान गया था की आसमा अब सुकून की नींद सू चुकी hain................ussey अब बात करने का कोई फायदा nahin......magar हरी को आज बहुत ज़्यादा मज़ा आया tha................wo आज का यादगार दिन कभी नहीं भूल सकता था....................

तो बे कॉन्टिनोएड...................................................
 
Update-29(A) (मेघा अपडेट)

वो थोड़े देर तक फ़ोन पे hello hello करता हैं मगर उधर से आसमा की कोई आवाज़ नहीं aati.................wo जान गया था की आसमा अब सुकून की नींद सू चुकी hain................ussey अब बात करने का कोई फायदा nahin......magar हरी को आज बहुत ज़्यादा मज़ा आया tha................wo आज का यादगार दिन कभी नहीं भूल सकता था....................

अब आगे.....................................................................

आसमा सुबह तक बिन कपड़ों के ऐसे hi देर तक सोती rahi...................waise कल रात वो बहुत गहरी नींद में सोई हुई thi.....................bilkul रिलैक्स और टेंशन फ्री hokar........................jab सुबह उसकी आँख खुली उसके चेहरे पर शर्म और एक प्यारी सी मुस्कान फिर से तैर gayi.............fresh होकर उसने पहले अपने लिए नास्ता तैयार किया और हरी को याद करके फिर से वो मुस्कुरा uthi..................subeh के 8 बजे शांति अपने काम पे अकेली aayi..............hari आज उसके साथ नहीं आया tha.......................hari को न देखकर वो मुन्न hi मुन्न थोड़ी उदास और चिंतित होने lagi............magar उसे यकीन था की हरी उसके पास ज़रूर आएगा............

शांति आयी और हरी की तारीफें करने lagi.............do चार इधर उधर की बातें हुई और वो अपने काम पे लग gayi............kareeb 10 बजे तक शांति घर का सारा काम ख़तम करके वापस अपने कमरे में जाने lagi..............roz की तरह उसने आसमा का कपडा फिर वहीँ बरामदे में सूखने के लिए छोड़ रखा tha.............wahin आसमा अंदर hi अंदर हरी का इंतज़ार कर रही thi...........................dopahar होने को आयी और वो अब तक आया क्यों नहीं था एहि सवाल बार बार उसे अब परेशां कर रहा tha.................jaise जैसे वक़्त गुज़र रहा था आसमा हरी के लिए बेचैन होती जा रही thi........reh रहकर उसे हरी पर अब गुस्सा भी आ रहा tha................ek बात तो उसे ख्याल आया की वो हरी को फ़ोन करके पूछ ले मगर दुर्र और झिझक की वजह से वो ऐसा कर नहीं पायी.................

करीब 11 बजे उसके घर का दूर बेल्ल बजा और आसमा का जो चेहरा अब तक मुरझाया हुआ था अब उसके चेहरे पर फिर से एक प्यारी सी मुस्कान तैर gayi.................wo फ़ौरन जाकर दरवाज़ा खोली तो सामने हरी खड़ा था................ आपने हाथों में लाल गुलाब लिए hue................aasma की जब नज़र उसपर पड़ी उसकी पलकें शर्म से खुद बा खुद नीचे की तरफ झुक gayi.............hari मुस्कुराता हुआ अंदर आया और आसमा अपने घर का मैं दूर बंद करती हुई हाल में आयी और आकर वहीँ हरी के सामने कड़ी हो gayi..............kal रात की घटना को याद करके वो थोड़ी हरी से शर्मा रही thi..................magar हरी तो अब आसमा के सामने पूरी तरह से खुल चूका था..................

" ये लीजिये ......memsaheb.................phool..............ya ख़ास मैं आपके लिए hi लाया हूँ...................." और हरी इस बार आसमा के हाथों में वो लाल गुलाब धीरे से थमता hua............uski तरफ एक ऐडा से मुस्कुरा दिया वहीँ आसमा खुद को न रोक पायी और हरी के हाथों में थमा वो लाल गुलाब अपने पास रख liya...............wahin हरी अपनी जीत पर मुन्न hi मुन्न दुबारा से मुस्कुरा pada.................waise उसे पूरा यकीन था की आसमा उसके लाये हुए गुलाब को मन नहीं करेगी...............

" इन सब की क्या ज़रुरत थी हरी................" और आसमा धीरे से गुलाब की ओरे एक नज़र डालती हुई फिर हरी की तरफ बड़े प्यार से देखने लगी वहीँ हरी जवाब में बस मुस्कुरा pada....................wo फ़ौरन अपना एक हाथ आसमा के गोर हाथों पर रखता hua................us गुलाब को उसके चेहरे की तरफ ले जाने लगा और उसके गलों पर अपने गलों को रखता hua.............uske गुर्दें और कानों के उन हिस्सों पर अपने गरम गरम सांस छोड़ने लगा ..................हरी के बदन से उठने वाली गरम सांसें आसमा के तन बदन में जैसे फिर से आग लगा रही thi..............uski धड़कनें फिर से बेकाबू होती जा रही thi.................wahin उसका कलेजा एक बार फिर से ज़ोरों से धड़क उठा tha....................aaj पहली बार वो हरी को अपने इतने करीब महसूस कर रही थी............

अपने करीब एक मरदाना एहसास से आसमा का रोम रोम सिहर utha..........ander hi अंदर वो एक बार फिर से धीरे धीरे मचलने lagi..............hari के बदन से उठने वाली वो स्मेल फिर से आसमा को बेकाबू करती जा रही thi..............na hi अब वो हरी को रोकना चाहती thi........aur न hi अब खुद रुकना चाहती thi..............magar हरी का तो इरादा कुछ और hi tha................wo आसमा को पूरी तरह से हासिल करना चाहता tha.................usey अपने इशारों पर नाचना चाहता था .............अपनी रांड बनाना चाहता tha...............taki कल को आसमा बिना किसी झिझक के वो सब कुछ करे जो हरी उससे चाहता tha..................is लिए वो कोई भी कदम जल्दबाज़ी में नहीं उठाना चाहता था...................

" memsaheb................aap बहुत हसीं hain..............kasam से................." और हरी आसमा की आँखों में आँखें डालता हुआ धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा टकटकी लगाए हरी के मुन्न को पढ़ने की कोशिश कर रही thi...............magar वो उसका इरादा नहीं समझ पा रही thi.................hari की ऐसी बातें उसे रोमांचित कर रही थी.................

" तुम्हारा दर्द कैसा hain.........lawo अपना हाथ मैं अभी ड्रेसिंग कर देती हूँ...................." और आसमा हरी के हाथों की तरफ धीरे से इशारा करती हुई बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ा...............

" हाथों का दर्द तो ठीक हैं memsaheb...............magar जहाँ दर्द हैं उसका इलाज़ तो सिर्फ आप hi कर सकती hain...............kisi और के पास उस दर्द की दवा नहीं hain.............siwaye आपके.............." और हरी आसमा के तरफ बड़े गौर से देखने लगा वहीँ आसमा का कलेजा ज़ोरों से धड़क उठा.................

" तुम भी न hari...................kuch भी बोलते हो.............." और आसमा थोड़ी नार्मल होती हुई बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में आसमा की तरफ देखता हुआ मुस्कुराता रहा...............

" memsaheb....................main सच बोलता hoon..................waise..............main एक बात poochun......................aap सच कहेंगी ना.................." और हरी अपना ज़ख़्मी वाला हाथ धीरे से आसमा के तरफ बढ़ता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा उसके हाथों पर लगे उन ज़ख्मों पर ड्रेसिंग करने lagi.............ek नज़र वो हरी की तरफ देखती हुई धीरे से हाँ में अपनी गुर्दें हिला दी.................

" मालिक आपको खुस रखते हैं की नहीं!!!!!!!!!!!!..........." और हरी ने जैसे इस बार बम फोड़ di...............wahin वो बिलकुल खामोश होता हुआ आसमा के हसीं चेहरे की तरफ बड़े ध्यान से देखने laga.......jaise वो उसके दिल की बात जानना चाह रहा ho................wahin आसमा का चेहरा कुछ फीका पढ़ gaya,...........jawab में वो एक नज़र हरी की तरफ देखने लगी फिर वो अपनी नज़रें नीचे की तरफ झुकाती हुई हरी के पट्टी को बदलने लगी..............

" ये कैसा सवाल हैं hari................main उनके साथ बहुत खुस hoon...............aur वो मुझे बहुत खुस रखते हैं...................." और आसमा हौले से बोल पड़ी मगर उसकी नाज़े अभी भी नीचे की तरफ झुकी हुई hi थी................

" आप झूट बोल रही हैं memsaheb......................yehi बात आप मुझसे आँखों में आँखें डालकर kahiye...............ki मालिक आपको खुस रखते hain...............aapke जिस्म की गर्मी को वो ठंडा करते hain................fir मुझे यकीन हो jayega.................kyon की मुझे ऐसा नहीं lagta........ki आप जैसी गरम माल को वो संभल भी पाते होंगे........." और हरी पूरे कॉन्फिडेंस से बोल पड़ा वहीँ आसमा एक नज़र हरी के चेहरे की तरफ फिर से देखने लगी और बिना कुछ कहे वैसे hi चुप rahi................usey समझ में नहीं आ रहा था की वो हरी के इस सवाल का क्या जवाब dein.....................aaj पहली बार हरी ने आसमा को माल कहा था........................

" माँआंणणन्न............. खुस hoon............hari..............." और आसमा फिर से अपनी नज़रें नीचे की तरफ झुकाती हुई बोल पड़ी वहीँ हरी टकटकी लगाए बस आसमा के चेहरे को निहारता raha...............hari फ़ौरन अपना एक हाथ आसमा के चीन पर ले गया और उसके झुके हुए सर और नज़रियों को ऊपर की तरफ उठता hua.....................bade गौर से उसकी आँखों में एक तुक देखने laga.....................wahin आसमा भी हरी के आँखों में बस देखती rahi...............lab भले hi खामोश थे मगर नज़रें सब कुछ बयां कर रहे थे...................

हरी फ़ौरन अपना वहीँ हाथ धीरे से आसमा के कोमल और गुलाबी गलों को धीरे से छूटा हुआ ...............उसे सहलाता hua.............bade प्यार से उसकी जुल्फें जो उसके चेहरे की ओरे झुक रही थी ...........उसे ऊपर की ओरे करता hua.............aasma की आँखों में आँखें डेल बड़े गौर से देखने laga.................wahin आसमा बिलकुल खामोश thi.........uska दिल एक बार फिर ज़ोरों से धड़क उठा था................
 
अपडेट-29 (बी) (मेघास अपडेट)

" आप झूठ बोल रही hain........main जनता हूँ की आप मुझसे शर्म से साडी बातें छुपा rahi................aakhir मैं इस घर का नौकर हूँ naa..................aap अपने दिल का बात भला एक नौकर को क्यों batayengi..................hain ना...................." और हरी अपने चेहरे पर थोड़ा मायूसी लता हुआ आसमा के चेहरे की ओरे बड़े गौर से देखने लगा वहीँ आसमा अजीब कस्मकश में thi..............na hi वो हरी से कुछ बोल पा रही थी और न hi उससे कुछ छुपाना छह रही थी................

" hari..........aisi बात नहीं hain.....................ye मेरा पर्सनल मटर hain....................main जैसे भी हूँ खुस हूँ................" और आसमा लुम्बी सांस छोड़ती हुई धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी टकटकी लगाए आसमा के चेहरे को बस निहारता रहा..............

" मैं जनता हूँ की आप मुझसे शर्मा रही hain.........aur मुझसे शर्माना आपका जायज़ hain...............magar जिस प्यास के लिए आप तड़प रही हैं naa...............ek दिन मैं उस आग को ज़रूर थड़ी karunga.................main आपको और तकलीफ में नहीं देख sakta.................ye आग बहुत जल्द bujhegi...............zara मैं भी तो देखूं की आप अपने अंदर उस आग को आखिर कब तक रोक पति hain...............waise.............mujhse आपसे एक शिकायत हैं.................." और हरी आसमा की तरफ देखता हुआ फिर से मुस्कुरा pada................wahin आसमा अंदर hi अंदर फिर से बेचैन होने लगी thi................hari की बातें वो बहुत ाचे से समझ रही थी मगर फिलहाल उसके पास उसके इन सवालों का कोई जवाब नहीं था...................

" कैसी शिकयात................" और आसमा अनजान बनते हुए धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी उसके हाथों का नरम स्पर्श पाकर बेचैन होता जा रहा tha................wo hi जनता था की वो खुद को कैसे रोका हुआ हैं.........................

" आप मुझे शांति के पास जाने नहीं dengi.............na hi आप खुद मेरे पास aayengi..................na hi आप अपने बदन को छूने dengi..............to मेरे इस लुंड का क्या hoga...................kaise मैं अपने इस लुंड का पानी nikaunga...................aur जब तक मेरे इस लुंड का पानी नहीं निकलेगा मुझे चैन और सुकून नहीं milega..............aap hi बताइये की मैं क्या karun....................kahan जावून........!!!!!!!!!!!!!" और हरी आसमा को फिर से गरम करता हुआ बोल pada...............aab वो बेझिझक गंदे वर्ड्स बोल रहा था जिससे आसमा फिर से बेचैन होने लगी thi..................wo जनता था की आसमा अब उसे किसी भी बात के लिए रोक टोक नहीं करने wali..................is लिए वो मौके का पूरा पूरा फायदा उठा रहा था................

" तुम्हारे पास हाथ हैं naa.................hila लिया karo..........ussey तुम्हारी प्यास बुझ जाएगी................." और आसमा हौले से बोल पड़ी वहीँ उसे एक बार फिर से अपनी गलती का एहसास hua................wahin हरी जवाब में मुस्कुरा पड़ा.....................

" हिला तो मैं खुद लूँगा memsaheb.....................magar हिलने का मज़ा तो तब आएगा जब मेरे इस लुंड को आप खुद अपने हाथों से पकड़कर hilayengi...................ussey मज़ा दोगुना हो जायेगा.................." और हरी आसमा की तरफ देखता हुआ धीरे से एक आँख मार दिया वहीँ आसमा का चेहरा शर्म से लाल पढ़ गया................

"naaaa...............naa..........ye मुझसे नहीं hoga...............tumhari चीज़ हैं तुम खुद हिला लो................" और आसमा का दिल ज़ोरों से धड़क utha...............wahin उसके टांगों के बीच गीलापन भी बढ़ने लगा..............

" मेरा माल ऐसे नहीं निकलता memsaheb...........aur ऐसे अपना लुंड हिलने में मज़ा भी नहीं aayega...................aap एक काम क्यों नैन karti.......................aap अपना कुछ सामान मुझे दे dijiye.........jisey मैं अपने पास रख sakun.................chahe वो कुछ देर के लिए hi sahi...............jaise आपकी panty........aur bra..................jisey मैं अपने लुंड पर लपेटकर आपको याद करते हुए मुट्ठ मरूंगा जिससे मेरा माल जल्दी निकल jayega................aur मेरे भी मज़े हो jayegey................aur आपकी बात भी रह जाएगी....................." और हरी इस बार बेशर्मी के साथ आसमा के बदन को ाचे से स्कैन करता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा चुप thi....................usey समझ में नहीं आ रहा था की वो हरी के बाटिओं का क्या जवाब dein............magar कहीं न कहीं उसे हरी का ये आईडिया बुरा नहीं लगा...................

" ठीक hain..........hari...............agar तुम्हारी एहि ख्वाहिश हैं तो तुम्हारे लिए एहि सही................" और आसमा हरी के हाथों पर पट्टी लगाती हुई अपनी जगह से उठ गयी और अंदर कमरे की ओरे चल पड़ी वहीँ हरी बड़े गुजर से आसमा की थिरकी हुई गांड को घूरे जा रहा tha.................ek बार फिर से उसका एक हाथ अपने लुंड पर चला गया ............आसमा की गांड को देखता हुआ वो अपने लुंड को दुबारा से मसलने लगा..............

" बस थोड़ा सा और इंतज़ार मेरे sher.........................fir ये शिकार तेरा hoga.............aab वो दिन दूर नहीं जब ये हसीना मेरे इस लौड़े के नीचे hogi................aur जिस दिन ये नीचे होगी उस दिन मैं एक एक कर अपने सरे अरमान पूरी karunga...............fir रात क्या और दिन क्या..................24 घंटे मेरा ये लौड़ा इसके तीनों छेद में दिन रात घुसा rahega.............isey छोड़ छोड़ के वो हाल करूँगा की ये सब कुछ भूल jayegi...................yaad रखेगी तो सिर्फ .......और सिर्फ मेरा लौड़ा.................." और हरी अपने लुंड को मसलता हुआ सब कुछ सोचने लगा वहीँ वो अपने मंज़िल के बेहद करीब था.................

थोड़े देर बाद आसमा अपने हाथों में एक ब्रा और पंतय लेती आयी और हरी की तरफ धीरे से उसे देती हुई शर्म से अपनी नज़रें नीचे की तरफ झुका li....................wahin हरी जवाब में मुस्कुराता hua...............aasma के हाथ से वो ब्रा और पंतय को लेता hua..............usey फ़ौरन अपने चेहरे के पास ले गया और उसमें से उठ रही उस खुसबू को धीरे धीरे फिर सूंघने laga.............magar उसमें से कोई खुसबू नहीं आ रही thi..........kyon की ब्रा और पंतय दोनों धूलि हुई थी................

" ये क्या memsaheb.....................mujhe आपके ये ब्रा और पंतय नहीं चाहिए....................." और हरी आसमा के ब्रा और पंतय को अपने दोनों हाथों में आसमा के सामने झूलता हुआ उसे देखकर बोल पड़ा वािण आसमा शर्म से गाड़ी जा रही thi....................uska चेहरा शर्म से लाल पढ़ चूका tha..................wahin वो हरी के बाटिओं का मतलब नहीं समझ पा रही थी की क्यों हरी उसके इस ब्रा और पंतय को लेने से अब इंकार कर रहा हैं..............

" तुमने माँगा तो मैं तुम्हारे लिए ले aayi..............aab क्या हुआ................." और आसमा हरी की तरफ सवाल भरी नज़रियों से देखती हुई बोल पड़ी वहीँ हरी किसी छोटे बाचे की तरह मुँह फूलता हुआ उस ब्रा और पंतय को आसमा के पैरों के सामने फेंक दिया..............

" ये ब्रा और पंतय आपकी धूलि हुई hain...............aur इसमें से आपके बदन की खुसबू नहीं आ rahi..................mujhe आपकी पहनी हुई ब्रा और पंतय chahiye..................jo इस वक़्त आप पहनी हुई हैं वो मुझे उतारकर dijiye...................mere लुंड से पानी अपने आप चूत जायेगा................" और हरी मासूमियत के साथ बोल pada...............wo भी जैसे आज ज़िद्द पर उतर आया tha.............wahin आसमा का दिल ज़ोरों से फिर धड़क utha................wahin उसके छूट में गीलापन अब बढ़ता hi जा रहा था.....................

" magar........is वक़्त................." और आसमा के चेहरे पर हैरानी के बदल उमड़ pade.......................wahin हरी हाँ में सर हिलता हुआ आसमा की ओरे देखता raha...........aasma जैसे hi नीचे की तरफ झुकी और जैसे hi अपने ब्रा और पंतय को उठाने लगी हरी ने उसे एक बार फिर से रोक दिया...................

" इसे आपको पहनने की ज़रुरत नहीं हैं memsaheb.................aap बाथरूम में जाइये और अपने पहने हुए ब्रा और पंतय को निकलकर मुझे dijiye..............main इसे 1 घंटे के अंदर आपको वापस कर doonga...........fir आप दुबारा से इसे पहन lijiyega.................tab तक आप बिन ब्रा और पंतय के ऐसे hi rahiyega..............."aur इस बार जैसे हरी आसमा पर हुकुम जताता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा कुछ देर तक वहां कड़ी सोचती रही फिर वो फ़ौरन अपने ब्रा और पंतय को वहीँ छोड़कर सीधा बाथरूम में चली गयी और अपने एक एक कर सरे कपड़े उतरने लगी...................

हरी की बातें उसके तन बदन में आग लगाती जा रही थी वहीँ उसे अब मज़ा भी आ रहा tha...............wo अब हरी को किसी भी बात के लिए मन नहीं करना चाहती thi.........balki वो उसकी हर एक इच्छा को अब पूरा करना चाहती thi....................wo भी जानती थी की हरी औरत के बिना कितना अकेला hain..............wo उसकी तन्हाई को मिटाना चाहती thi...............usey औरत का सुख देना चाहती thi................hari की ख़ुशी के लिए उसे कुछ भी करना अब मंज़ूर tha............agar हरी उससे कहता तो वो उसके क़दमों में बिच jati.............aab आसमा खुद को हरी के लिए पूरी तरह से समर्पित होना चाहती thi............usey वो सब सुख देना चाहती थी जिस सुख के लिए हरी आज इतने सैलून से तरसता आया हैं................

ये सब ख्याल आते hi आसमा अपने कपड़े उतरती जा रही thi................uske दिमाग में हज़ारों सवाल तूफ़ान बनकर उठ रहे they...............aab उसके जेहन में सिर्फ और सिर्फ हरी था..................

" तुम अगर मुझसे ये कहते की मैं बिन कपड़ों के तुम्हारे सामने आ जावून तो मैं तुम्हारी ख़ुशी के लिए वो भी कर deti.................waise मैं जानती हूँ की तुम मुझे बिन कपड़ों के हमेशा देखना चाहते ho..........main तुम्हारी नज़रें बहुत ाचे से पहचानती hoon...............main तुम्हारी ये इच्छा भी बहुत जल्द पुअर karungi...............magar उससे पहले मुझे तुम्हें अपना जलवा दिखाना padega................taki तुम मेरे लिए हर वक़्त पागल रहो..............." ये ख्याल आते hi आसमा के चेहरे पर एक मुस्कान तैर जाती हैं ..............वो फ़ौरन अपनी ब्रा और पंतय निकलती हैं और एक बार फिर सर से लेकर पवन तक पूरी नंगी हो जाती हैं..............

वो फिर अपने ब्लू रंग के सूट को पहनने लगती हैं और फिर अपनी टाइट सफ़ेद रंग की लग्गी को पहन लेती hain.............halanki उसे थोड़ा अजीब लग रहा था क्यों की आज से पहले वो कभी बिन ब्रा और पंतय के कपड़े नहीं पहनी thi...........magar आज हरी की ये ख्वाहिश वो ज़रूर पूरा करना चाहती thi...............wo अपने ब्रा और पंतय को अपने हाथों में लेती हैं और उसे अपने नाक के पास ले जाती हुई उसमें से उठ रही उसके बदन की खुसबू को सूंघने लगती hain..............jaise उसने सोचा था कुछ वैसा hi पाया................

वो अपने सूट को और नीचे की तरफ खींचती हुई अपने पीठ पर लगे डोर को कसकर बंधे लगी ................सूट का गाला काफी बड़ा था जिससे उसकी भरी भरी गोल और टाइट चूचियां बहार की तरफ झलक रही thi......jissey उसका क्लेवराज बहुत हुड्ड तक दिख रहा tha................wo अपने सीने पर दुपटा हटा दी और ऐसे hi अपने ब्रा और पंतय को हाथों में लेती हुई बहार की तरफ चल padi.........uski पंतय छूट रूस से थोड़ी भीगी हुई थी जिससे वो गीलापन अपने उँगलियों पर महसूस कर रही thi...............pehli बार उसने आज दुपटा नहीं लिया था.............

जैसे hi हरी की नज़रें आसमा पर गयी उसकी आँखें फटी की फटी रह gayi...............jin चूचियों का नाप वो अक्सर आसमा के चुनरी के ऊपर से लेता था आज आसमा खुद hi अपने चूचियों की साइज उसे दिखा रही thi...............aasma की क्लेवराज और टाइट चूचियों की गोलाई को देखकर हरी का लुंड जैसे फड़क utha..............kuch देर के लिए तो हरी अपनी पलकें भी झपकना भूल सा गया tha.............wahin आसमा अपने हाथों में थामे अपने काळा ब्रा और पंतय को हरी की तरफ देती हुई एक ऐडा सा मुस्कुरा di...................bra न पहनने की वजह se...............aur सूट काफी टाइट होने से उसकी मटर बराबर दो छोटे छोटे निप्पल्स उस कपड़े के ऊपर से दिखाई दे रहे थे जिसे हरी ललचायी हुई नज़रियों से घूर रहा था..............

उसके लुंड में जैसे आग लग गयी thi..........uska दिल मचल उठा tha.............uska दिल में आया की वो अभी आसमा को धार दबोच lein......magar जल्दबाज़ी से कोई फायदा नहीं होने वाला tha.............jab उसे ख्याल आया की आसमा इस वक़्त बस सूट और लग्गी में हैं तो वो एक बार फिर मचल utha................wo अपने हाथ में आये इस शिकार को बड़े आराम के साथ मज़े ले लेकर शिकार करना चाहता tha............dekhna था हरी अपने शिकारी का शिकार कैसे करता हैं.......................

तो बे कॉन्टिनोएड.......................................................
 
अपडेट-30 (ा) (मेघा अपडेट)

उसके लुंड में जैसे आग लग गयी thi..........uska दिल मचल उठा tha.............uska दिल में आया की वो अभी आसमा को धार दबोच lein......magar जल्दबाज़ी से कोई फायदा नहीं होने वाला tha.............jab उसे ख्याल आया की आसमा इस वक़्त बस सूट और लग्गी में हैं तो वो एक बार फिर मचल utha................wo अपने हाथ में आये इस शिकार को बड़े आराम के साथ मज़े ले लेकर शिकार करना चाहता tha............dekhna था हरी अपने शिकारी का शिकार कैसे करता हैं.......................

अब आगे.........................................................................

हरी की नज़रें अभी भी आसमा के 36 साइज की चूचियों पर hi तिकी हुई thi.................jo पूरे गोलाई में और ऊपर की तरफ उठी हुई ....................बेहद टाइट और आकर्षक नज़र आ रही thi........mano अभी सूट फाड़कर बहार निकल jayengey.......................dono चूचियों के बीच गहरी घाटी ऊपर से क्लीवेज पर एक काळा रंग की छोटी सी til...............jo किसी भी मर्द के नियत को पल भर में ख़राब कर सकती thi............wahin आसमा बहुत ाचे से जान रही थी की हरी इस वक़्त क्या देख रहा hain.......magar वो हरी को अपना जलवा hi तो दिखा रही थी तो उससे भला कैसे परेशानी हो सकती thi..................wo तो खुद चाहती थी की हरी उसे हर वक़्त ऐसे hi देखता rahe............apni गन्दी नज़रियों से उसे हर पल नंगा करता rahe..........aab उसे हरी का यु देखना बिलकुल भी बुरा नहीं लग रहा था...................

हरी अपने हाथों में आसमा की पहनी हुई ब्रा और पंतय को दुबारा से लेता hua...............usey अपने नाक के पास ले गया और उसमें से उठ रही उसके बदन की भीनी भीनी खुशबूओं को धीरे धीरे फिर सूंघने laga..............pehle एक लुम्बा सा काश खींचता hua................ek पाक के लिए तो जैसे उसकी आँखें नशे की वजह से बंद हो गयी ho.............wo उस खुसबू में जैसे खो सा गया tha.................aasma के बदन से उठने वाली हर एक खुसबू को वो अपने सांसों के ज़रिये अपने बदन में उतर लेना चाहता tha...................ek बार फिर से हरी मदहोश होता जा रहा tha...............uska लुंड अब खड़ा हो चूका था जो उसके लोअर में साफ़ फूला हुआ नज़र आ रहा tha...............wahin आसमा हरी के इन हरकतों को देखकर अंदर hi अंदर मचल उठी thi...........sharam से उसका चेहरा लाल पढ़ गया था वहीँ छूट में सेंसेशन होना फिर से शुरू हो गया था.......................

हरी मांझा हुआ खिलाडी tha.......................wo बहुत ाचे से जनता था जो वो हरकतें इस वक़्त आसमा के सामने कर रहा था उसे देखने के बाद आसमा की क्या हालत हो रही होगी उससे इस बात का पूरा पूरा अंदाज़ा tha............magar वो ये भी जनता था की अगर वो बेशर्मी न करे तो आसमा कभी उसके पास ऐसे नहीं aayegi..............upar से उसके अंदर जो संस्कार कूट कूट कर भरे हैं वो उससे कभी बहार नहीं निकल payegi..............is लिए उसे सबसे पहले उसके अंदर की शर्म हाय झिझक को दूर करना tha.................is लिए वो उसके अंदर की शर्म को अब ख़तम करना चाहता tha................khud उसके सामने बेशरम बांके.................

एक्ससिटेमें की वजह से हरी का लौड़ा टैंकर खड़ा हो गया था जो उसके लोअर में अब साफ़ नज़र आ रहा tha................jo अब आसमा की नज़रियों से भी नहीं छुपा tha...............waise भी हरी अपना लुंड छुपाना नहीं चाहता tha......................balki वो तो एहि चाहता था की आसमा भी उसके लुंड का पल पल एहसास kare............uske लम्बाई और मोटाई को महसूस kare...........uske लुंड के साइज का अंदाज़ा lagaye...............idher आसमा फिर से गरमा होने लगी thi................uski सांसें फिर से तेज़्ज़ हो चली थी.................

" waaaaahhhhhhhhhhhhhhhh...........kya खुसबू hain...............jee तो करता हैं की मैं इसे हमेशा अपने सांसों में कैद कर loon.............aur हर पल इस खुसबू में डूबा rahun...........jab आपकी पंतय से इतनी मादक खुसबू आ रही हैं तो फिर आपकी छूट से कितनी मादक खुसबू आती होगी............." और हरी आसमा की पंतय के वो हिस्से पर अपना जीभ फेरने लगा जहाँ उसकी छूट रूस से वो जगह भीगी हुई thi...........wo उस हिस्से को ऐसे चाट रहा था जैसे कोई सेहद ho...............wahin आसमा शर्म से लाल होती जा रही thi................wahin उसकी छूट में गीलापन फिर से बढ़ने लगा tha..............aur उसके दोनों निप्पल्स टैंकर फिर से खड़े हो गए थे जो उसके नीले सूट के ऊपर से अब बहार की तरफ साफ़ नज़र आ रहे they...............koi भी आसानी से अंदाज़ा लगा सकता था की आसमा के निप्पल्स कितने बड़े हैं...............

" hari........................bus भी karo.................mujhe शर्म आ रही hain..............plsssssssssssss.............." और आसमा जैसे तड़प उठी वहीँ हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ा.................

" अब इसमें कहे की शर्म memsaheb..............aur अपनों से भला को शर्माता हैं kya!!!!!!!!!!!.............aap तो मेरी अपनी हैं..................." और हरी मज़े से फिर आसमा के ब्रा और पंतय को दुबारा से चाहते हुए उसकी तरफ देखता हुआ धीरे से हंस pada..............wahin आसमा की सांसें तेज़्ज़ तेज़्ज़ चलने lagi............jissey उसकी बड़ी बड़ी चूचियां तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी जिसे हरी बड़े गौर से देखे जा रहा tha...............hari आज आसमा को कहाँ इतनी आसानी से अब छोड़ने वाला tha...................wo तो अब आसमा को इतना मज़बूर कर देना चाहता था की आसमा खुद चलकर उसके पास आये और अपनी चुदाई के लिए उसके सामने भीख mange....................magar ये सब हरी के लिए भी इतना आसान नहीं tha............magar उसकी कोशिश जारी thi..........kehtey हैं न ................कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती...............

" memsaheb.........................ek बात पूछों.................................." और हरी आसमा के पंतय और ब्रा को दुबारा से सूंघता hua............uspar अपना जीभ चलता hua........fir धीरे से बोल pada............wahin आसमा का अब बुरा हाल tha................wo उसे एक पल और संभालने नहीं देना चाहता था.............

" हूउउउउउउनंनंन्न.........." और आसमा अपनी बेकाबू हो रही सांसों को संभालती हुई धीरे से बोल padi..................wahin हरी जवाब में अपने काळा पीले दांत दिखता हुआ धीरे से हंस पड़ा.........

" memsaheb..............aapke इन दोनों दुढवून की साइज कितनी हैं.........................." और हरी आसमा के ब्रा को हवा में झूलता hua.............uske सामने धीरे से मुस्कुरा पड़ा वहीँ आसमा का कलेजा ज़ोरों से धड़क utha..............sharam से आसमा का अब बुरा हाल था मगर वो हरी को मन भी तो नहीं कर सकती थी................

" harriiiiiiiiiii.......muujhheee nanaahhhniiinnnnnnnnnnn पहाता..............." और आसमा का चेहरा शर्म से नीचे की तरफ झुक gaya.........wahin हरी जवाब में फिर धीरे से हंस pada...................aur उसके ब्रा को ऐसे hi हवा में झूलता रहा.................

" आपको नहीं पता तो किसी पता होगा memsaheb..................bataiye naa......................aap झूट बोल रही hain............agar कहिये तो मैं खुद आकर आपका नाप पता कर loon.................ki आपके इन दोनों दूधवों की साइज कितनी हैं...................." और हरी गन्दी मुस्कान के साथ फिर बोल पड़ा और वो इस बार आसमा के ब्रा के एक कप अपने मुँह में लेकर फिर से उसके चूसने और चटनी लगा वहीँ आसमा का अब बुरा हाल tha..............wo हरी के बाटिओं का न hi जवाब दे पा रही thi,..............aur न hi उसे मन कर पा रही thi............wahin हरी उसकी शर्म को पल पल तोड़ता जा रहा था...................

" इसकी कोई ज़रुरत नहीं हैं .................." और आसमा धीरे से बोल padi..........wahin उसके टांगों के बीच गीलापन फिर से बढ़ने लगा...............
 
अपडेट-30 (बी) (मेघा अपडेट)

" बताइये न memsaheb....................aab मुझसे कैसी शर्म................." और हरी इस बार आसमा के सामने फर्याद करता हुआ धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा लुम्बी लुम्बी सांसें लेती हुई हरी के तरफ तिरछी नज़रियों से देख रही thi.................kuch देर की चुप्पी के बाद आसमा धीरे से बोल पड़ी..........

" तुम्हारे हाथ में मेरी ब्रा hain............usi पर उसका साइज लिखा हुआ hain...........khud hi देख lo...........tumhein पता चल जायेगा.............." और आसमा धड़कते दिल से हौले से बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में फिर से मुस्कुरा पड़ा...........

" अब कौन पढ़ने लिखने की झंझट kare....................aap खुद बता देंगी तो ज़्यादा ाचा rahega...............khair अभी नहीं तो फिर कभी ...................मैं आपकी इन दूधवों की साइज आपसे कभी पूछ hi loonga...............waise अगर आपको शर्म आ रही तो मैं अपने लुंड का साइज अभी बता देता hoon.............fir आप बताएंगी न आपने size.................dekhiye ये आपको देखकर कैसे खड़े होकर सलामी दे रहा ......................" और हरी इस बार अपने लोअर के ऊपर से अपने लुंड पर हाथ फेरता हुआ........... अपने लुंड को हिलता हुआ ........आसमा के सामने उसे बेशर्मों की तरह दिखने लगा .................वहीँ आसमा की रही सही हिम्मत भी जवाब देने lagi................uski सांसें ज़ोरों से चलने लगी जिससे उसकी धड़कनों की रफ़्तार भी और तेज़्ज़ हो gayi.................aaj हरी आसमा को पल पल नंगा करता जा रहा था....................

" मेरा लौड़ा पूरे 10 इंच का हैं memsaheb................aapko मैंने कल इसकी फोटो तो भेजी थी na..............agar आपको नहीं हैं यकीन तो मैं अभी अपना लोअर नीचे करके आपको दिखा देता hoon........................tab आपको यकीन हो jayega....................waise ये 4 इंच मोटा भी हैं memsaheb..................jab ये किसी औरत की बुर में घुसता हैं तो ............औरत की चीख के साथ saath......................uski मूट भी निकल जाती hain...................aur जब ये पूरा अंदर जाता हैं तो सीधा बच्चेदानी में जाकर दस्तक देता हैं जिससे औरत को दर्द के साथ साथ मज़ा भी बहुत आता hain.................................agar मेरी बाटिओं पर आपको यकीन न हो तो ये बात आप शांति से पूछ lijiyega.................ki कैसे मैं उसे हर बार छोड़ते हुए उसकी बुर से मूट निकलवा देता हूँ............." और हरी अपने लुंड पर धीरे से हाथ फेरता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा का गाला सूखने laga...............uske टांगों के बीच का हिस्सा बहुत तेज़ी से गिला होने लगा जिससे उसका वहां और खाना रहना मुस्खिल होता जा रहा था.........................

हरी की गरम बातें उसके तन बदन में आग लगा दी thi...............aasma का तो एक बार मुन्न हुआ की वो फ़ौरन आपने आपको हरी के हवाले कर दें और उसे अपने बदन पर पूरी मनमानी करने de.................jo वो उसके साथ करना चाहता hain...............magar आसमा के अंदर न hi ऐसा कुछ करने की हिम्मत hui..........kyon की एक बार फिर से उसके बीच उसका संस्कार उसके रास्ते आ रहा tha................sach तो ये था की वो अब खुद रुकना नहीं चाहती thi..............aur न hi हरी को कुछ करने से मन करना चाहती थी मगर हरी तो न hi उसे छु रहा tha.......aur न कुछ कर रहा tha.................bus उसे बाटिओं से गरम कर रहा tha.......................aur आसमा के साबरा का बाढ़ धीरे धीरे अब टूटता जा रहा था....................

" hari......................khuda के लिए चुप हो jawo.................mujhe अब और नहीं sunana........busssssssssssss.............tum यहाँ से अभी चले jawo..........plssssssssssssssss.............." और आसमा पूरी तरह से बेचैन हो uthi...............wo लुम्बी लुम्बी सांसें ले रही थी जिससे उसकी दोनों बड़ी बड़ी चूचियां तेज़ी से ऊपर नीचे की तरफ हो रही थी वहीँ हरी अपनी जीत पर मुन्न hi मुन्न मुस्कुरा रहा tha.......................usey यकीन हो चूका था की अब मंज़िल ज़्यादा दूर nahin................loha गरम हैं बस सही मौके पर हथौड़े मरने की बस देर hain................baki काम अपने आप हो jayega.................yehi सोचकर वो चुप हो जाता हैं और आसमा के तरफ बिना कुछ कहे फ़ौरन बहार निकल जाता hain....................usey आग लगनी थी सो लगा दी thi...........uska काम हो गया tha.................to वहां अब रुकने का कोई सवाल hi नहीं था.............

हरी के इस तरह अचानक बहार जाने से आसमा फिर से अंदर hi अंदर बेचैन हो uthi................kyon की उसे अब दुर्र लगने लगा था की कहीं उसने हरी को फिर से नाराज़ तो नहीं कर diya.................hari पहले से hi बहुत परेशां हैं और अब वो उसे और दुखी नहीं करना चाहती thi...................usey ऐसे नहीं बोलना चाहिए tha.................hari को ज़रूर उसकी बात बुरी लगी hogi.............tabhi तो वो मेरी तरफ बिना dekhey...........bina कुछ कहे सीधा अपने कमरे की तरफ चला gaya..............ye मैंने क्या कर diya.......oooofffff................mujhe अभी हरी के पास चले जाना चाहिए..................

मुझे उसे कैसे भी मानना chahiye.................wo मुझसे बातें hi तो कर रहा था bus..........na hi वो मेरे पास आया ...............और न hi उसने मुझे छूने की कोशिश ki..............agar वो मेरी साथ गन्दी बातें करके आपने आपको संतुष्ट कर सकता हैं तो फिर इसमें बुराई क्या hain..................yehi ख्याल आते hi वो फ़ौरन आगे बढ़ी और जब उसके कदम दरवाज़े के चहकत पर gaye................uske बढ़ते कदम खुद बा खुद रुक gaye...............chahtey हुए भी वो अपने दहलीज़ को ना लांघ saki............aur कुछ सोचकर वापस मुद gayi.............aur आकर वहीँ सोफे पर बैठ गयी...............

जब उसकी नज़रें फर्श पर पड़ी अपने ब्रा और पंतय पर gayi..................uska चेहरा एक दम से उदास हो gaya..................hari ने जान बूझकर आज उसकी पंतय और ब्रा नहीं ले गया tha................issey साफ़ ज़ाहिर हो रहा था की वो इस वक़्त गुस्से में hain................magar आसमा भोली थी और नादान thi.............ye सब हरी की सोची समझी प्लान thi..............wo अब आसमा को ेमोटिनॉली ब्लैकमेल करना चाहता tha...................kyon की वो ये बात ाचे से जनता था की आसमा भावनाओं में बहकर ज़रूर कुछ ऐसा कर जाएगी जो वो उसके साथ चाहता हैं................

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इधर हरी बिलकुल नार्मल tha................wo अपने कमरे में आया तो शांति बैठी हुई उसे hi बड़े गौर से देखे जा रही thi...............wo भी उसके चेहरे के भावों को पढ़ने की कोशिश कर रही थी और ये जानना चाह रही थी की वो अपने प्लान में किस हुड्ड तक कामयाब हुआ .................हैं भी या nahin...................wahin हरी अपने लोअर को शांति के सामने उतरता हुआ जमीन पर फेंक दिया और सामने पड़े बिस्टेर पर जाकर पीठ के बल लेट gaya.........aur शांति की तरफ अजीब नज़रियों से देखने लगा..................

" क्या हुआ हैं hari...................jab से तू मेमसाहेब के चकार में पड़ा हैं तू तो मुझे भूल hi gaya..............sach में तू बहुत मतलबी इंसान हैं re...................tu सिर्फ अपना hi फायदा सोचता हैं bus........mera nahin...............aabhi तो तुझे मेमसाहेब नहीं मिली तो तेरा ये हाल हैं जब मिल जाएगी तो तू मुझे भूल hi jayega.................hain ना............." और शांति हरी को ताने मरती हुई बोल पड़ी वहीँ हरी अपने जेब से बीड़ी निकलता हुआ................. उसे अपने मुँह में रखता hua.............maachis से आग जलाता हुआ............. एक लुम्बी सी काश लेता हुआ .............धीरे से अपनी आँखें बंद करता हैं और एक लुम्बा सा धुवां ऊपर की तरफ धीरे धीरे छोड़ने लगता हैं..................

" ये पेण्ट मैंने कहे को खोला hain.......................bus देखने के वास्ते kya................dimag में साला बहुत टेंशन hain..............chal मेरा काचा उतर और सामने रखा तेल लेकर मेरे लुंड की ाचे से मालिश kar..............aur हाँ मालिश करते वक़्त तेरे बदन पर एक भी कपड़े नहीं रहने chahiye...............nahin तो आज मैं तेरी माँ छोड़ dunga...............waise तेरी बुर में बहुत खुजली मची हैं naa..............aaj मैं इसकी खुलजी ाचे से दूर करता hoon............aaj मैं तुझे हर तरीके से chodunga.............uthakar ke..............letakar ke...............baithakar ke.........ghodi banakar...........chal फटाफट रेडी हो जा.................." और हरी धुवां छोड़ता हुआ शांति की तरफ देखता हुआ धीरे से हंस पड़ा वहीँ शांति अपने साड़ी का पल्लू धीरे से नीचे करती hui..............apni साड़ी उतरने lagi............fir अपना पेटीकोट और लास्ट में ब्लाउज...............

एक बार फिर वो सर से लेकर पवन तक हरी के सामने पूरी नंगी thi.................hari की ऐसी बातें उसके छूट को गिला करने के लिए बस काफी thi................wo फ़ौरन पास में रखा सरसो का तेल अपने हाथों में लेती हैं और हरी का काचा धीरे से नीचे की तरफ सरकती hui................usey पूरा उतर देती hain............hari का फनफनाता हुआ लौड़ा फिर से सर उठाकर खड़ा होने लगता hain................wahin शांति हरी को उसका शर्ट भी उतरवा देती hain.....fir उसका banyaan..................aaj हरी सर से लेकर पवन तक पूरा नंगा था................

शांति तेल लेती हुई धीरे धीरे हरी के लौड़े पर गिरने लगती हैं वहीँ हरी शांति को अपने करीब खींच लेता हैं और उसकी चूचियों को कसकर मसलने लगता hain.........pehle धीरे धीरे फिर ज़ोरो ज़ोर se..........wahin शांति मज़े और दर्द से सिसक पड़ती hain.............magar वो हरी को इंकार नहीं karti........aur उसे पूरी मनमानी करने देती hain.............shanti उसके लुंड पर तेल ाचे से गिरती hui..............jab तक उसका लुंड तेल में पूरी तरह सं नहीं जाता वो उसपर तेल गिरती रहती hain................fir तेल को साइड में रखती हुई अपने हाथों से उसके लुंड पर मालिश करना शुरू करती हैं वहीँ हरी भी मज़े से सिसक पड़ता हैं..............

वो अब मज़े की दुनिया में पहुंचा hi था की तभी उसका मोबाइल बज utha.................usey गुस्सा तो बहुत आया मगर वो झल्लाता हुआ अपना मोबाइल उठककर देखने laga.........aur जब उसकी नज़रें अपने मोबाइल के स्क्रीन पर पड़ी उसके चेहरे पर एक कमीनी सी मुस्कान फिर से तैर gayi.............phone आसमा का tha....................wahin कुछ देर तक उसके मोबाइल में रिंग बजती रही फिर दुबारा से जब आसमा का कॉल आया हरी ने उस कॉल को काट diya...............tabhi थोड़े देर बाद फिर से आसमा का फिर फ़ोन आया और उसने फिर से उसका कॉल काट कर मोबाइल इस बार स्विच ऊफ करके वहीँ साइड में फेंक दिया...............

शांति बड़े गौर से ये सब नज़ारा देख रही thi.................wo समझ गयी थी की फ़ोन उसकी मेमसाहेब hi कर रही hain...............magar हरी क्यों बार बार उसका फ़ोन काट raha..........ye उसकी समझ में नहीं आ रहा tha................aakhirkaar शांति हरी का लुंड ाचे से सहलाती हुई धीरे से बोल पड़ी..............

" बात क्या हैं hari................tu मेमसाहेब का फ़ोन कहे काट raha........kuch हुआ हैं क्या!!!!!!!!!!! " और शांति सवाल भरे नज़रियों से हरी के चेहरे की तरफ देखने लगी वहीँ हरी कुछ देर चुप रहा और फिर धीरे से बोलना शुरू किया..............

" फ़ोन मेमसाहेब hi कर rahi...............agar मैं इस वक़्त उनसे बात कर लूँगा तो मेरी साडी मेहनत बेकार चली jayegi..............unhein भी तो लग्न चाहिए की मैं उनसे गुस्से में hoon........unse नाराज़ hoon...............waise मैंने उन्हें इतना बेचैन कर दिया हैं की वो मुझे मानने ज़रूर aayegi................aur मैंने सोच लिया हैं की मुझे बोलना क्या hain..............aur करना क्या hain..............aab तो मेमसाहेब मेरे लिए वो सब कुछ करेगी जो मैं उससे करवाना चाहता hoon.................bus कुछ समय की देर hain.........fir ये पारी मेरी मुट्ठी में होगी.........................." और हरी की आँखें चमक जाती हैं वहीँ शांति अजीब नज़रियों से हरी की तरफ बस देख रही thi.............dekhna था आगे वक़्त कौन सी करवट बदलने वाला था..................

तो बे कॉन्टिनोएड..........................................................
 
Update-31(A) (मेघा अपडेट)

" फ़ोन मेमसाहेब hi कर rahi...............agar मैं इस वक़्त उनसे बात कर लूँगा तो मेरी साडी मेहनत बेकार चली jayegi..............unhein भी तो लग्न चाहिए की मैं उनसे गुस्से में hoon........unse नाराज़ hoon...............waise मैंने उन्हें इतना बेचैन कर दिया हैं की वो मुझे मानने ज़रूर aayegi................aur मैंने सोच लिया हैं की मुझे बोलना क्या hain..............aur करना क्या hain..............aab तो मेमसाहेब मेरे लिए वो सब कुछ करेगी जो मैं उससे करवाना चाहता hoon.................bus कुछ समय की देर hain.........fir ये पारी मेरी मुट्ठी में होगी.........................." और हरी की आँखें चमक जाती हैं वहीँ शांति अजीब नज़रियों से हरी की तरफ बस देख रही thi.............dekhna था आगे वक़्त कौन सी करवट बदलने वाला था..................



अब आगे..................................................................


हरी अपना मोबाइल स्विच ऑफ करके एक कोने में फेंक चूका tha...................aab उसे अपने मोबाइल से जैसे कोई ज़रुरत नहीं thi....................ye सब उसने आसमा को और परेशां करने के लिए hi किया tha..................wo बहुत ाचे से जनता था की आसमा अंदर hi अंदर उसके लिए कितनी बेचैन हो रही hogi................aur वो उसकी पल पल बेचैनी को hi तो बढ़ा रहा tha..................uska सोचना वाकई सही था उधर आसमा हरी के लिए बहुत परेशां thi...................aur उसकी परेशानी तब और बढ़ गयी जब हरी ने उसका फ़ोन काट कर स्विच ऑफ कर दिया tha.........................issey आसमा जान चुकी थी की हरी आज उससे बेहद गुस्सा हैं................

मगर वो कैसे भी करके हरी को मन legi...............zyada देर तक वो उसे गुस्से में नहीं रहने degi...................is बात का आसमा को यकीन tha..............magar हरी से बात हो तब न वो कुछ kare...............uske मुन्न में ये भी ख्याल आ रहे थे की वो फ़ौरन हरी के कमरे में चली aaye................aur उसे मन lein..................magar शांति भी तो वहां होगी और वो क्या सोचेगी उसके बारे mein..........................ye ख्याल आते hi उसके बढ़ते कदम फिर से वहीँ थम gaye...............wo आज हरी के लिए जितना परेशां थी उतना तो वो कभी अपने शौहर सैम के लिए भी नहीं हुई thi.................is बात का एहसास आसमा को भी हो रहा tha.....................ki वो अब हरी को चाहने लगी थी..........

उधर हरी बड़े मज़े से शांति के हाथों से अपने लुंड की मालिश करवा रहा tha..............uska लुंड फनफनाता हुआ पूरा अकड़ गया tha.................aasma को गरम करते करते वो खुद इतना गरम हो गया था की अगर उसके अंदर साबरा नहीं होता तो वो आज वहीँ आसमा को पटककर कब का छोड़ चूका hota..............usey आसमा को एक या दो बार नहीं छोड़ना tha........balki हर बार बार baar..............har रात........... सुबह shaam.............raat दिन ..............वो उसकी इस कमसिन जवानी का रूस पूरी तरह से निचोड़ लेना चाहता tha............taki आसमा हर वक़्त उसका लुंड लेने के लिए बस पागल रहे................

वो उसके लुंड को पाने के लिए किसी भी हुड्ड तक गिर jaye...............kuch भी कर jaye..............apni शर्म हाय लाज, ....मान मर्यादा सब कुछ पीछे छोड़कर वो उसकी बाँहों में चली aaye...................aur हरी आसमा को बहुत हुड्ड तक इन सब के लिए उसे तैयार कर hi चूका tha..................bus थोड़ी बहुत कसार बाकि थी जो आज वो भी पूरी कर देने वाला था..............

" एक बात पूछूं hari.....................agar मेमसाहेब तेरे इस लुंड के नीचे आ गयी तो तू क्या karega..................main जानती हूँ की तू उन्हें बहुत बुरी तरह से chodega.................unhein मेरी तरह घंटों घंटों रगड़ता रहेगा हैं ना........................" और शांति हरी का लुंड हिलाते हुए धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ा.................

" ये भी कोई पूछे वाली बात hain....................tujhe मैंने कहाँ ठीक से कभी रगड़ा हैं ....................रगडूंगा तो आज मेरी jaan...............aakhir तुझे भी तो पता चले की असली चुदाई होती कैसी hain..................jab मैं घंटों तेरी माँ छोडूंगा तब तुझे भी पता चलेगा की बुर जब फटती हैं तो कैसा महसूस होता hain...............ek हफ्ते तक तू न सही से मूट पायेगी और न hi मुझसे छुड़वा payegi...............teri चाल आज मैं ख़राब जो करने वाला हूँ............." और हरी अपनी जगह से खड़ा होता हुआ................. शांति को वहीँ खड़ा करता हैं............... उसका एक पवन फर्श पर रखता hua...................aur दुरसा पवन ताखकत par.....................fir वो शांति के पीछे आता हैं और अपने तेल से साणे हुए लुंड को उसकी छूट के छेद पर धीरे से सेट करता हैं और बिना देर किये अपना लुंड एक hi झटके में तेज़ी से अंदर कर देता हैं जिससे उसका लुंड एक hi बार में शांति के छूट के अंदर पूरा घुस जाता हैं .............वहीँ शांति के मुँह से एक दर्द भरी चीख निकल जाती हैं................

वहीँ हरी उसके बालों को कसकर अपने मज़बूत हाथों में जकड लेता हैं और उसके बालों को तेज़ी से खींचते हुए अपने लुंड को तेज़ी से आगे पीछे रगड़ना शुरू करता hain.................hari के उस हमले से शांति ज़ोरों से दर्द से और तड़प उठती हैं मगर आज हरी इंसान नहीं बल्कि हैवान ज़्यादा नज़र आ रहा tha..................uske अंदर का वहशी दरिंदा आज जग गया था जो वो अपनी साडी कसार शांति पर निकलने वाला tha.....................halanki शांति जानती थी की हरी जब उसे छोड़ता हैं तो हैवान बन जाता हैं मगर वो आज उसका कुछ अलग hi रूप देख रही थी............

वो ढ़ाके पर ढ़ाके मरे जा रहा था वहीँ शांति के बालों को भी कसकर मरोड़ रहा tha......kheech रहा tha..............usney कसकर एक ज़ोर का शांति के गांड पर छाता लगाया जिससे उसकी गांड लाल हो gayi................uske हाटों की पाँचों उंगलियां जैसे उसपर चाप सी gayi................wahin शांति दर्द से फिर चीख padi............magar हरी को न रुकना था सो न ruka..............wo बीच बीच में शांति के गांड पर कहते लगता रहा और उसके बालों को ज़ोरों से खींचता raha.............marodata raha..........kabhi कभी वो उसके दोनों चूचियों को अपने उँगलियों के बीच कसकर दबा देता जिससे शांति और भी ज़ोरों से सिसक पड़ती............

वहीँ शांति दर्द से चीखती चिलाती rahi.................wo भी हरी को आज नहीं रोकना चाहती thi...................wo भी देखना चाहती थी की हरी हवस में कितना बड़ा हैवान बन सकता hain..............shanti की छूट पनिया गयी थी उसकी छूट से पानी बह रहा था वहीँ हरी की स्पीड कम नहीं हो रही thi...............wo लगातार ढ़ाके पे ढ़ाके लगाए जा रहा था और शांति की बुर की धाज्जियाँ उदा रहा tha...............ek hi बार में वो अपने विशाल लुंड पूरा अंदर की तरफ ghusata................aur एक hi बार में उसे पूरा बहार निकल देता जिससे शांति दर्द और मज़े से चीख पड़ती.............

" तू आज पागल हो गया हैं क्या hari...................aise लग रहा हैं जैसे तू आज पूरा जानवर बज गया hain...............arey मैं तो तुझे सेह भी ले रही हूँ magar..............jispar तेरा दिल आया हैं वो................ तेरी memsaheb..............wo तो एक काची काली hain.................uske बस का नहीं हैं तुझ जैसे सांड को काबू में karna..................mujhe नहीं लगता की वो तुझे झेल भी payegi...............ek तो तेरा लौड़ा इतना मोटा और बड़ा हैं ऊपर से उसकी कमसिन choot...............tu तो उसकी पुअर फ़ायद dega.....................aaaaaaaaaaassssssssssshhhhhhhhhhhh.............." और शांति चुड़ते हुए बीच में बोल पड़ी वहीँ हरी कसकर उसके गांड पर एक ज़ोर का चांटा मरता हुआ फिर बोल पड़ा.....................

" मैं जनता हूँ मेरी मेमसाहेब क्या चीज़ hain.......................bhale hi तू एक औरत हैं तो क्या hua...................magar जितने ाचे से मैं उसे समझता हूँ उतने ाचे से तू उसे नहीं janti................maine तुझे दिखाई थी न वो साडी tasveerein...............jo मेरा सपना hain...................dekh लेना मेरा एक एक सपना मेरी मेमसाहेब hi पूरा karegi...........dusara कोई नहीं.............." और हरी शांति को अपने लुंड पर चढ़ाता हुआ खुद फर्श पर पीठ के बल लेट गया और शांति उसके ऊपर चढ़कर धीरे धीरे उसका मोटा लुंड अपने छूट के अंदर लेने लगी.....................

जैसे जैसे वो उसके लुंड पर बैठती जा रही थी वैसे वैसे शांति का मुँह पूरा खुलता जा रहा tha......................jab आधा से ज़्यादा लुंड उसकी छूट के अंडे घुसा शांति के मुँह से एक ज़ोरों की चीख निकल padi................dard और मज़े से उसका बुरा हाल था मगर हरी का मोटा लुंड अब उसकी छूट को पूरी तरह से फाड़ता हुआ अब उसकी बाछेदनी तक दस्तक दे रहा था जिससे शांति दर्द और मज़े से सिसक रही thi................wahin हरी उसके दोनों चूचियों को कसकर मसल रहा था और उसे अपने लुंड पर दबाव देता जा रहा tha..................aakhirkaar शांति के बुर में हरी का विशाल लुंड पूरा घुस hi गया था जिससे शांति की छूट एक दम से फ़ैल गयी थी................

" ये हुई न baat...............chal अब तू छोड़ mujhe................yaad रहे तेरी कूदने की स्पीड कम नहीं होनी चाहिए नहीं तो मैं आज तेरी गांड मार लूँगा...................." और हरी कसकर शांति के दोनों चूचियों को बेरहमी से मसलता हुआ बोल पड़ा वहीँ शांति धीरे से अपने दोनों टांगों को और फैलाती hui...............uske लुंड को अपने छूट के अंदर ली हुई ............धीरे धीरे उसपर कूदने lagi................wahin उसका मुँह लजात और मज़े से पूरा खुल रहा tha..............uske हर ढ़ाके से हरी का मोटा लुंड उसकी बाछेदनी से जाकर टकराता जिससे शांति दर्द और मज़े से चीख padti..................poorey कमरे में फ्फअछछःह फाआछह और शन्ति की मादक सिसकियाँ गूँज रही थी................

" और तेज़्ज़ कूद मेरी raaannnnnnnnnnnnnnnnddddddddddd................." और हरी सिसकते हुए मज़े से बोल पड़ा वहीँ शांति धीरे धीरे अपने कूदने की रफ़्तार बढ़ाने lagi................wo पूरा एक hi बार में उसका लुंड बहार की तरफ निकलती और एक hi बार में उसके लुंड पर पूरा बैठती चली जाती जिससे हर बार उसकी चीख निकल padti...............hari शांति का छूट छोड़ छोड़कर उसका भोसड़ा बना चूका tha...............wo उसकी छूट को इतना खोल चूका था की उसकी छूट में एक साथ दो लुंड आसानी से घुस jate..................kareeb 10 मिनट तक शांति इसी पोजीशन में हरी से चुदवाती रही और जैसे hi वो उसके लुंड से उठी वैसे hi उसकी बुर से ढेर सारा मूट बहार निकल पड़ा जो हरी के लुंड और जांघों को पूरा गिला करता हुआ नीचे फर्श को भिगोने laga..........ye देखकर हरी के चेहरे पर एक गन्दी सी मुस्कान तैर गयी............

" फिर से तेरी मूट निकल gayi................main जनता था की तू ज़रूर mootegi..............chal फटाफट घोड़ी ban............main तेरी पीछे से लूँगा................." और शांति अपनी पोजीशन बदलती हुई चुप चाप घोड़ी बन गयी और हरी उसके पीछे आया और हर बार की तरह अपना मोटा लुंड शांति के छूट के अंदर एक hi बार में पूरा पेलता hua........fir से उसके बालों को खींचता हुआ ............दो तीन थप्पड़ फिर से उसके गांड पर लगता हुआ उसकी छूट बेरहमी से छोड़ने laga................aur हर बार उसके ढाकों की रफ़्तार और तेज़्ज़ होती jati................wahin शांति का अब बुरा हाल tha.............ek बार वो फिराग हो चुकी थी और अब फिर से वो दुबारा गरम हो रही thi..........kareeb 40 ,50 ढाकों के बाद शांति फिर से मूतने लगी मगर हरी इस बार नहीं ruka...........wo उसकी बुर को ऐसे hi छोड़ता raha............wahin शांति दर्द और मज़े से सिसकती और चीखती rahi.............chudayi का खेल करीब 45 मिनट से चल रहा था वहीँ शांति अब थकती जा रही थी मगर हरी का जोश बढ़ता hi जा रहा था...................

उसके दिल और दिमाग में बस आसमा thi...................wo अपनी आँखें बंद करता हुआ उसकी को याद करके शांति को छोड़ रहा tha.....................halanki वो शांति के साथ तो बस सिंपल सा सेक्स कर रहा tha.................na hi उसने शांति के होंठों को कभी चूमा था और न hi उसके बदन के किसी भी हिस्से पर अपना जीभ फेरा tha.................wajah ये भी थी की शांति उसे ज़्यादा पसंद नहीं thi.............halanki शांति दिखने में सूंदर थी उसका फसकट ाचा था मगर वो थोड़ी सांवली thi....................aur सबसे बड़ी बात हरी तो बस उसके साथ टाइम पास कर रहा tha.........................agar शांति के जगह आज अगर आसमा होती तो वो उसके साथ वो गंदे भरे खेल खेलता जो वो हर एक हसीं और जवान लड़की के साथ खेलना चाहता tha................magar उसके ये सरे अरमान अब जल्दी hi पूरे होने वाले they..................aasma के रूप में.........

" aaaahhhhhhhhhhhhh.................jo तू चाह रहा हैं ना हरी................ वो नहीं hoga...................mujhe नहीं लगता की मेमसाहेब तेरे साथ ऐसे घटिया और गंदे खेल कभी khelegi...............itna hi ऊपर वाले से तू दवा कर ले की वो बस तेरे लुंड के नीचे कैसे भी आ jaye.......issey ज़्यादा तू उनसे उम्मीद भी मुट्ठ karna...................kyon की कहाँ वो पाक साफ़ और कहाँ तू निहायती ganda...............jo तू चाहता हैं वो तो बाजार में बिकने वाली सस्ती रंडियां भी नहीं कर sakengi................maine वो साडी तसवीरें देखती थी............. chee.................kitni गन्दी थी..........." और शांति छोड़वाते hue..........maze से सिसकते hue.........................aur हरी को समझते हुए............ धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी मुन्न hi मुन्न बहुत कुछ सोच रहा tha................sach तो ये था की उसे शांति की बाटिओं का कोई असर नहीं पढ़ रहा था...........................

" वो मेरी दिक्कत hain..........teri nahin..................meri मेमसाहेब मेरे साथ क्या karegi........aur क्या nahin..................ismein तू अपना ज़्यादा दिमाग मुट्ठ chala..............waise भी उन्होंने मुझे तेरे पास आने को मन किया tha..........janti हैं kyon!!!!!!!!!!!!!!..............kyon की वो अब मुझे चाहती hain.................agar मुझे वो प्यार नहीं करती तो ऐसे वो मुझे तेरे पास आने के लिए कभी रोक टोक नहीं karti....................kyon की एक औरत सब कुछ बर्दास्त कर सकती हैं मगर जिसे वो चाहती हैं उसे किसिस के साथ बांटना कभी nahin....................itna मैं भी समझता हूँ...............
 
Update-31(A) (मेघा अपडेट)

वो तो मैं आज तेरे पास जान बूझकर इस लिए आया क्यों की मैं उनसे गुस्सा hoon................aur उन्हें चिड़ाना चाहता hoon.............main ये भी जनता हूँ की वो जब ये बात जानेंगी तो मुझपर और भड़क jayegi.............aur सच तो ये हैं की मैं एहि चाहता हूँ की वो मुझपर और भड़के..............." और हरी तेज़ी से शांति की छूट छोड़ते हुए फिर बोल पड़ता हैं वहीँ शांति की आहें तेज़्ज़ होती जा रही thi........uska जिस्म थकने लगा tha........pichey 1 1/2 घंटों से वो लगातार हर पोजीशन में अपनी ठुकाई हरी से करवा रही थी साथ hi मूट भी रही थी जिससे उसकी छूट पावरोटी के सामान सूझकर फूल गयी थी और लाल हो गयी thi....................aab उसकी छूट में तेज़्ज़ दर्द होना शुरू हो गया tha..............wahin हरी के अंदर उसका कोई असर नहीं हो रहा tha..............wo तो बस शांति को पेले जा रहा था.................

" बस कर hari.................aab मुझे मेरी छूट का दर्द और नहीं सहा जाता......................2 घंटे होने को आये और तू मेरी छूट मरे hi जा raha.......dekha न ये कैसे सूजकर लाल हो गयी hain.............ab क्या इसे तू छोड़ छोड़कर फाड़ डालेगा क्या!!!!!!!!!!!!!............" और शांति इस बार दर्द से तड़प उठी वहीँ हरी जवाब में धीरे से हंस पड़ा...................

" बस निकल गयी तेरी साडी हेकड़ी............................1 1/2 घाना बर्दास्त करने में तेरी फुट gayi................agar तेरी जगह मेरी मेमसाहेब अगर होती तो वो मुझे कभी नहीं rokti.......bus एहि फर्क हैं तुझमें और उनमें................" और हरी अपने ढाकों की स्पीड और तेज़्ज़ करने लगा वहीँ शांति की चीखें और भढ़ती चली gayi....................wo कितने बार मूट चुकी थी उसका कोई अंदाज़ा नहीं था क्यों की वहां का पूरा फर्श उसकी मूट से गिला हो गया tha................aab तो उसके बुर से मूट भी सूख चुकी थी जिससे हरी का लुंड पूरा टाइट रगड़ता हुआ पल पल उसकी छूट की धाज्जियाँ उदा रहा tha..............aab शांति को ऐसा लगने लगा था की वो अब हरी को ज़्यादा देर तक और बर्दास्त नहीं कर पायेगी..................

" haaan..........nikal gayi.................aab बस भी kar.............mere बस का और नहीं हैं तुझे jhelna..............agar तेरी मेमसाहेब इतनी hi प्यारी हैं तो जा अपना ये मूसल उनकी की छूट के अंदर dal.......aur रात दिन उनकी छूट फाड़ता reh..................tu भी एहि हैं और मैं bhi.......main भी देखूंगी की वो तुझे कितने देर तक बर्दास्त कर पति हैं.................." और शांति हरी को ताने देती हुई अपनी चुदाई करवाते हुए बोल padi................uske पवन अब थार थार काँप रहे they................wahin छूट के अंदर एक तेज़्ज़ दर्द होना शुरू हो गया था वहीँ हरी लगातार उसकी छूट को मरे जा रहा था................

" ठीक हैं तू कहती हैं तो मैं अपना माल निकल देता hoon............fir आगे से मुट्ठ कहना मेरी मेमसाहेब के बारे में kuch......................nahin तो .................." और हरी के ढाकों की स्पीड अचानक से तेज़्ज़ हो gayi.......wo फ़ौरन अपनी आँखें बंद करता हुआ शांति को और भी ब्राम्ही से छोड़ने laga.......................kuch धक्के लगाने के बाद आखिरककर हरी का जिस्म अकड़ने laga.............uski सांसें अचानक से तेज़्ज़ हो gayi...........wo शांति के दोनों चूचियों को कसकर मसलता हुआ उसके जिस्म को तेज़ी से जकड़ने laga..............do चार ढाकों के बाद आखिर उसका साबरा का बाँध टूट गया और पिछले 2 घंटों से वो शांति की जो ठुकाई कर रहा था अब शांति को अपने छूट के अंदर गरमा गरम वीर्य गिरता सा महसूस हुआ जिसे महसूस करते hi शांति एक बार फिर से पूरी तरह तृप्त हो गयी....................

हरी उसके ऊपर लेता हुआ था और शांति ककसकार हरी को अपनी बाँहों में जकड़ी हुई thi......................hari हांफता हुआ लुम्बी लुम्बी सांसें ले रहा था वहीँ शांति अपने बेकाबू हुए सांसों को दुरुस्त कर रही thi.............uski आँखें नशे से लाल हो चुकी thi...............aur पूरी तरह से मदमाष नज़र आ रही thi...............mano जैसे उसने कोई शराब का नशा किया हुआ ho................hari कुछ देर बाद उसके ऊपर से हटा और वहीँ फर्श पर लुम्बी लुम्बी सांसें लेता हुआ अपने आपको नार्मल करने laga.................thode देर बाद शांति अपने छूट को साफ़ करती हुई उठी और अपने कपड़े पहनकर सीधा बाथरूम की तरफ चल di...............waise सच में हरी ने आज उसकी चाल ख़राब कर दी thi..........wo थोड़ी लचकती hui...........dheere धीरे चल रही thi.............uski छूट सूझकर लाल हो गयी thi...............aab धीरे धीरे उसमें दर्द होना शुरू हो रहा था...................

हरी मस्ती से घंटों सोता रहा और उधर शांति की भी आँख लग gayi..............wo दोनों बहुत देर तक सुकून से सोये they...............magar बेचैन थी तो aasma................na hi उसे नींद आ रही थी .........और न hi chain......................wo अपने बिस्टेर पर गुमसुम लेती हुई इधर से उधर बस करवटें बदल रही thi.................hari के इस बर्ताव से वो बहुत परेशां thi...............wo हरी को अब कैसे भी मन लेना चाहती थी................

" मैंने सच में तुम्हारे साथ गलत किया hari.................mujhe ऐसा नहीं करना चाहिए tha...................main आज के बाद अब तुम्हें कभी किसी चीज़ के लिए रोक टोक नहीं karungi................ye मेरी भूल थी जो मुझसे ये गलती hui................aagey से नहीं hogi..................aab तुम मेरे साथ जितनी भी गन्दी बातें करोगे मैं तुम्हें मन नहीं karungi.............balki तुम्हारा साथ doongi................bhale मुझे लाख शर्म आये तो क्या hua........magar तुम्हारी ख़ुशी और सुकून के लिए मुझे अब सब मंज़ूर hain...............main सब कुछ बर्दास्त कर सकती हूँ मगर अब तुमसे दूर नहीं रह सकती......................

अब अगर तुम मेरे बदन को भी चूना चाहो तो भी मैं अब तुम्हें मन नहीं karungi.................is बदन पर अब तुम्हारा उतना hi अधिकार हैं जितना की सैम ka.............tum इस जिस्म को भोगना चाहते हो naa.................to आवो मेरे पास और एक बार मुझसे कह के तो dekho.................main तुम्हारी ख़ुशी के लिए अपने आपको तुम्हारे क़दमों में बिछा दूँगी...............: और आसमा की आँखों से आंसूं चालक पड़ते हैं वहीँ वो हरी के लिए फिर से तड़प उठती hain.................aasma गुज़रते वक़्त के साथ बदल नहीं रही thi.................balki अब पूरी तरह से बदल चुकी थी.........................

तो बे कॉन्टिनोएड.....................................................
 
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