- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 117,168
अपडेट- 32(ा) (मेघा अपडेट)
अब अगर तुम मेरे बदन को भी चूना चाहो तो भी मैं अब तुम्हें मन नहीं karungi.................is बदन पर अब तुम्हारा उतना hi अधिकार हैं जितना की सैम ka.............tum इस जिस्म को भोगना चाहते हो naa.................to आवो मेरे पास और एक बार मुझसे कह के तो dekho.................main तुम्हारी ख़ुशी के लिए अपने आपको तुम्हारे क़दमों में बिछा दूँगी...............: और आसमा की आँखों से आंसूं चालक पड़ते हैं वहीँ वो हरी के लिए फिर से तड़प उठती hain.................aasma गुज़रते वक़्त के साथ बदल नहीं रही thi.................balki अब पूरी तरह से बदल चुकी थी.........................
अब आगे.....................................................................
वक़्त गुज़रता गया और देखते hi देखते शाम हो gayi........................aasma कई दफा हरी को अपना फ़ोन लगा चुकी थी और हर बार उसे बस एक hi जवाब मिलता tha............"Switch Off"........jissey सुनने के बाद उसके चेहरे पर और भी ज़्यादा मायूसी चा jati...................uska खूबसूरत और मासूम सा चेहरा और भी मुरझा सा jata..................shaam को जब वो नीचे बरामदे में जब गयी और अपने तंगी हुए कपड़े उतरने लगी तो उसकी नज़रें उसकी ब्रा और पंतय पर जैसे अटक सी gayi................wo अपने ब्रा और पंतय को अपने हाथों में लेती हुई उसे ाचे से छूने lagi............uspar कुछ महसूस करने लगी .................मगर जो चीज़ वो खोज रही थी वो उसे नहीं मिला tha...................aasma की ब्रा और पंतय को हरी ने टच भी नहीं किया tha..........jisey देखने के बाद आसमा का चेहरा और भी ज़्यादा मायूस हो गया था................
वो अपने कपड़े समेटती हुई अंदर आयी और आकर बिस्टेर पर चुप चाप से लेट gayi...............usney आज सुबह से खाना भी नहीं खाया tha...............na hi उसका किसी चीज़ में मुन्न लग रहा tha.................sara दिन वो बस बिस्टेर पर ऐसे hi गुमसुम सी लेती rahi..............shaam को सैम का जब फ़ोन आया तो उसने ठीक से सैम से भी बात नहीं ki..............tabiyat खबर का बहाना बनाकर वो बात ताल दी..................
इस वक़्त घडी में शाम के 7 बज रहे they............aasma का मोबाइल तकिये के पास पड़ा हुआ tha................wo वहीँ गुमसुम सी बैठी हुई thi.............tabhi उसका मोबाइल बज utha...............phone हरी का tha............jab आसमा की नज़रें अपने मोबाइल के स्क्रीन पर गयी उसके चेहरे पर आयी मायूसी जैसे पल भर में छु हो gayi.....................uska चेहरा ख़ुशी से खिल utha..............wo फ़ौरन अपना मोबाइल रइवे की और उधर से हरी फिर बोल पड़ा..............
" memsaheb......................jo हुआ उसके लिए मुझे आप माफ़ कर dijiye..............mujhe आपसे एक ज़रूरी बात करनी थी.................." और हरी धीरे से बोल pada.............uski आवाज़ में आज कठोरता स्पष्ट झलक रही थी................. वहीँ आसमा का कलेजा दुर्र से धड़क utha................uske मुन्न में अजीब तरह के विचार आने लगे जिससे उसका दुर्र और भी गहराता चला gaya...........wo हौले से बस hhhhhhnnnnnnnnnnn कहती हुई फिर से खामोश हो gayi......................magar इस वक़्त उसका दिल बहुत ज़ोरों से धड़क रहा था..............
" memsaheb...................aap अपने लिए कोई ाचा सा दूसरा नौकर तलाश lijiye...............main ये जगह छोड़कर हमेशा हमेशा के लिए अब गाँव जाना चाहता हूँ..........." और हरी जैसे आसमा के ऊपर बम फोड़ दिया जिसे सुनकर आसमा की बोलती hi नहीं बंद hui...............balki उसकी आँखों से आंसूं भी चालक pade..............ek पल तो उसे ऐसा लगा जैसे वो वहीँ चाकर खाकर गिर jayegi................magar वो इस वक़्त बिस्टेर पर थी .............अगर वो कड़ी होती तो हरी की ऐसी बातें सुनकर वो यकीनन जमीन पर गिर padti.................idher आसमा हिम्मत करती hui...............apne ज़ज़्बातैव को संभालती hui.............fir धीरे से बोल पड़ी................
"yyeeeeeeeee................tttttuummmmm kyyyaaaa........bbboboolllllllllllllll राहीही हूऊऊऊ.........." और आसमा रोटी हुई धीरे से बोल padi..........uski आँखों से आंसूं अब थमने का नाम नहीं ले रहे थे.................
" हाँ memsaheb................mera यहाँ से चले जाना hi सही rahega....................issey आप भी खुस रहेंगी और ............." और हरी इतना कहकर चुप हो गया वहीँ आसमा अपने आँखों से बहते उन आंसुओं को पूछती हुई फिर धीरे से बोल पड़ी.............
" haan.............khus तो मैं बहुत rahungi................jab तुम्हें जाना hi था तो तुम आये क्यों मेरी ज़िन्दगी mein................pehle hi चले jate................kum से कम ये तकलीफ तो मुझे नहीं hoti............theek हैं................ तुम अगर जाना चाहते हो तो मैं तुम्हें नहीं rokungi.............waise भी मैं होती कौन हूँ तुम्हें रोकने वाली..............." और आसमा इतना कहकर चुप हो जाती हैं वहीँ हरी की तो जैसे बोलती बंद हो गयी thi.............uska चलाया हुआ दांव उसे उल्टा पड़ता हुआ नज़र आ रहा tha..................wo फ़ौरन बात संभालता हुआ धीरे से बोल पड़ा.............
"आप hi बताइये मैं क्या करूँगा यहाँ पे rehkar..................aap मुझे किसी और के पास जाने नहीं dengi................na hi खुद आप मेरे पास कभी aayengi.....................chalo मान भी लिया की आप मेरे पास अगर आयी to......................fir मैं चाह कर भी आपके बदन को छु नहीं sakta..................aapse मैं गन्दी बातें कर नहीं sakta...............zyada मैं कुछ कहूंगा तो आप मुझे चुप रहने के लिए bolengi....................nahin तो आप मुझे अपने पास से भगा dengi.............is हाल में मैं क्या karun.....................aap hi बताइये........................" और हरी शिकायत के लहज़े से अपनी बात पे ज़ोर देता हुआ धीरे से बोल पड़ा ....................वहीँ आसमा बड़े गौर से उसकी एक एक बातें सुन रही thi............hari ने उससे जो कुछ भी कहा था सब सच hi तो था..................
" ठीक हैं हरी मैं मानती हूँ की मुझसे गलती hui................maine तुम्हें हर चीज़ के लिए रोका और toka..............magar मैं जिस माहोल में पड़ी बड़ी हूँ वहां ऐसी भासा को लोग पाप मानते hain..............magar फिर भी मैं तुम्हारी ख़ुशी के लिए तुम्हारी साडी बातें सुनती रही............ इतनी छोटी सी बात के लिए क्या तुम मुझे छोड़कर चले jawogey.................tum अपने साथ साथ मुझे भी तकलीफ दे रहे हो हरी................" और आसमा के आँखों से आंसूं जैसे सूख gaye....................wo भी आज जैसे ज़िद्द पर आ गयी thi............wahin हरी की एक बार फिर से जैसे बोलती बंद हो गयी thi.....................kuch देर की चुप्पी के बाद हरी फिर धीरे से बोल पड़ा.......................
"memsaheb.....................sach तो ये हैं की मैं आपसे बहुत प्यार करता hoon.................aapko मैं अपना मंटा hoon................aur अपनों से hi तो लोग खुलकर साडी बातें किया करते hain................aapko कोई अगर आँख उठकर भी देखे तो मैं उसकी आँखें निकल loonga.................jab आपको भी मुझसे प्यार हैं तो फिर आप मुझसे बोल क्यों नहीं देती वो तीन shabdh...............mujhe भी इस बात की तसल्ली और सुकून मिल जाएगी..............." और हरी अपनी बात पर ज़ोर देता हुआ फिर से बोल पड़ा................ वहीँ आसमा अब पहले से बहुत ाचा महसूस कर रही thi...............wo बहुत हुड्ड तक अब नार्मल हो चुकी थी.............
" बस इतनी सी बात hain................main ये तीन शब्द तुम्हें तभी बोलूंगी जब तुम मेरे सामने aawogey................aise फ़ोन पर nahin..................tumhara दिया हुआ फूल मैंने बहुत संभलकर रखा हुआ hain..................aur उसे मैं अपनी जान से ज़्यादा संभलकर भी rakhungi.................dekho हरी............... मुझे सब कुछ मंज़ूर हैं मगर तुम्हारी ये नाराज़गी nahin...................tum चाहो तो मुझे गली दे dena..............maar लेना ..................मुझसे सब मंज़ूर hain..............magar मुझसे कभी खफा मुट्ठ hona................aur न hi मुझे छोड़कर जाने की बात करना................" और आसमा हौले से बोल पड़ी वहीँ हरी के चेहे पर एक विजयी मुस्कान फिर से तैर gayi.............wo आसमा पर अपना पूरा अधिकार जैसे हासिल कर चूका tha................ye उसकी आज सबसे बड़ी जीत थी.................
" तो फिर ठीक hain..............main आपसे वादा करता हूँ की मैं कभी आपसे नाराज़ नहीं howunga..........aur आपको कभी छोड़कर कहीं नहीं jawunga..............magar आप भी मुझे कभी गुस्सा मुट्ठ dilaiyega....................aaj के बाद मैं खुलकर आपसे गन्दी बातें भी करूँगा aur.................aap मेरा इसमें बराबर का साथ भी dengi..............aap भी मेरे साथ गन्दी बातें बोलेंगी....................." और हरी जैसे इस बार अपना फाइल्स सुनाता हैं वहीँ जवाब में आसमा धीरे से मुस्कुरा देती hain...............aaj सुबह से वो पहली दफा मुस्कुरा रही थी.............
" मैं वादा तो नहीं कर सकती magar...................jitna मुझसे हो पायेगा मैं तुमसे पूरी तरह खुलकर साडी बातें karungi...................tumhari ख़ुशी के लिए मुझसे जो बन पायेगा मैं वो सब कुछ करुँगी.................." और आसमा की सांसें एक बार फिर से जैसे भरी होने lagi...........aaj उसने हरी को ग्रीन सिग्नल दे दी thi.................aab हरी उस अप्सरा को जैसे आज अपनी मुट्ठी में कैद कर चूका tha.........magar एक दो चीज़ें और भी थी जिसे वो पूरी तरह से संतोष होना चाहता tha....................jo उसके दरमियान थोड़ी बहुत कसार हो वो भी आज पूरी हो जाये.................
" ठीक हैं memsaheb....................magar................... मेरा अगर मुन्न हुआ आपके बदन को छूने का तो....................." और हरी जैसे अपनी बात बीच में बोल pada..............aur आसमा के जवाब का इंतज़ार करने laga................aasma ने जो उसके बीच अपने बदन को छूने की जो भी रेस्ट्रिक्शन्स डाली थी वो अब उन्हें पूरी तरह से ख़तम करना चाहता tha...................jaisa उसे उम्मीद थी आसमा ने उसे कुछ वैसा hi जवाब दिया.................
" मेरे इस बदन पर जितना अधिकार सैम का hain.................utna hi अधिकार अब तुम्हारा भी हैं hari.....................tum मेरे साथ वो सब कुछ कर सकते हो जो एक पति अपनी पत्नी के साथ करता हैं.................." और आसमा की सांसें और धड़कनें तेज़्ज़ होती चली gayi...............usney सारा अधिकार अब हरी को दे दिया tha.................wahin हरी मुन्न hi मुन्न ख़ुशी से झूम उठा ..........वो एहि चीज़ तो आसमा के मुँह से सुनना चाहता tha...................magar एक चीज़ और भी थी जो वो आसमा से पूरी तरह कन्फर्म करना चाहता tha................wo थी उसकी fantasy......................jiski बहुत साडी पिक्स वो अपने मोबाइल में रखा हुआ tha..................kuch फोटोज के रूप mein............aur कुछ छोटी छोटी वीडियोस के रूप mein....................jisey दिखने के बाद अब वो आसमा से पूरी तरह कन्फर्मेशन चाहता था...............
" ठीक हैं memsaheb..................magar एक बात और hain..............jo अब भी आपके और मेरे बीच आ रही ....................वो हैं मेरा sapna...............mere मोबाइल में बहुत सी ऐसी छोटी छोटी क्लिप्स और फोटोज हैं जो मैं किसी हसीं और जवान लड़की के साथ वो सब मैं बचपन से करना चाहता hoon...................jo आज भी बस मेरा एक सपना hain.............agar आप मेरे इन सपनों को पूरा कर देंगी तो ................" और हरी इतना बोलकर खामोश हो जाता हैं वहीँ आसमा का दिल ज़ोरों से धड़कने लगता हैं....................
अब अगर तुम मेरे बदन को भी चूना चाहो तो भी मैं अब तुम्हें मन नहीं karungi.................is बदन पर अब तुम्हारा उतना hi अधिकार हैं जितना की सैम ka.............tum इस जिस्म को भोगना चाहते हो naa.................to आवो मेरे पास और एक बार मुझसे कह के तो dekho.................main तुम्हारी ख़ुशी के लिए अपने आपको तुम्हारे क़दमों में बिछा दूँगी...............: और आसमा की आँखों से आंसूं चालक पड़ते हैं वहीँ वो हरी के लिए फिर से तड़प उठती hain.................aasma गुज़रते वक़्त के साथ बदल नहीं रही thi.................balki अब पूरी तरह से बदल चुकी थी.........................
अब आगे.....................................................................
वक़्त गुज़रता गया और देखते hi देखते शाम हो gayi........................aasma कई दफा हरी को अपना फ़ोन लगा चुकी थी और हर बार उसे बस एक hi जवाब मिलता tha............"Switch Off"........jissey सुनने के बाद उसके चेहरे पर और भी ज़्यादा मायूसी चा jati...................uska खूबसूरत और मासूम सा चेहरा और भी मुरझा सा jata..................shaam को जब वो नीचे बरामदे में जब गयी और अपने तंगी हुए कपड़े उतरने लगी तो उसकी नज़रें उसकी ब्रा और पंतय पर जैसे अटक सी gayi................wo अपने ब्रा और पंतय को अपने हाथों में लेती हुई उसे ाचे से छूने lagi............uspar कुछ महसूस करने लगी .................मगर जो चीज़ वो खोज रही थी वो उसे नहीं मिला tha...................aasma की ब्रा और पंतय को हरी ने टच भी नहीं किया tha..........jisey देखने के बाद आसमा का चेहरा और भी ज़्यादा मायूस हो गया था................
वो अपने कपड़े समेटती हुई अंदर आयी और आकर बिस्टेर पर चुप चाप से लेट gayi...............usney आज सुबह से खाना भी नहीं खाया tha...............na hi उसका किसी चीज़ में मुन्न लग रहा tha.................sara दिन वो बस बिस्टेर पर ऐसे hi गुमसुम सी लेती rahi..............shaam को सैम का जब फ़ोन आया तो उसने ठीक से सैम से भी बात नहीं ki..............tabiyat खबर का बहाना बनाकर वो बात ताल दी..................
इस वक़्त घडी में शाम के 7 बज रहे they............aasma का मोबाइल तकिये के पास पड़ा हुआ tha................wo वहीँ गुमसुम सी बैठी हुई thi.............tabhi उसका मोबाइल बज utha...............phone हरी का tha............jab आसमा की नज़रें अपने मोबाइल के स्क्रीन पर गयी उसके चेहरे पर आयी मायूसी जैसे पल भर में छु हो gayi.....................uska चेहरा ख़ुशी से खिल utha..............wo फ़ौरन अपना मोबाइल रइवे की और उधर से हरी फिर बोल पड़ा..............
" memsaheb......................jo हुआ उसके लिए मुझे आप माफ़ कर dijiye..............mujhe आपसे एक ज़रूरी बात करनी थी.................." और हरी धीरे से बोल pada.............uski आवाज़ में आज कठोरता स्पष्ट झलक रही थी................. वहीँ आसमा का कलेजा दुर्र से धड़क utha................uske मुन्न में अजीब तरह के विचार आने लगे जिससे उसका दुर्र और भी गहराता चला gaya...........wo हौले से बस hhhhhhnnnnnnnnnnn कहती हुई फिर से खामोश हो gayi......................magar इस वक़्त उसका दिल बहुत ज़ोरों से धड़क रहा था..............
" memsaheb...................aap अपने लिए कोई ाचा सा दूसरा नौकर तलाश lijiye...............main ये जगह छोड़कर हमेशा हमेशा के लिए अब गाँव जाना चाहता हूँ..........." और हरी जैसे आसमा के ऊपर बम फोड़ दिया जिसे सुनकर आसमा की बोलती hi नहीं बंद hui...............balki उसकी आँखों से आंसूं भी चालक pade..............ek पल तो उसे ऐसा लगा जैसे वो वहीँ चाकर खाकर गिर jayegi................magar वो इस वक़्त बिस्टेर पर थी .............अगर वो कड़ी होती तो हरी की ऐसी बातें सुनकर वो यकीनन जमीन पर गिर padti.................idher आसमा हिम्मत करती hui...............apne ज़ज़्बातैव को संभालती hui.............fir धीरे से बोल पड़ी................
"yyeeeeeeeee................tttttuummmmm kyyyaaaa........bbboboolllllllllllllll राहीही हूऊऊऊ.........." और आसमा रोटी हुई धीरे से बोल padi..........uski आँखों से आंसूं अब थमने का नाम नहीं ले रहे थे.................
" हाँ memsaheb................mera यहाँ से चले जाना hi सही rahega....................issey आप भी खुस रहेंगी और ............." और हरी इतना कहकर चुप हो गया वहीँ आसमा अपने आँखों से बहते उन आंसुओं को पूछती हुई फिर धीरे से बोल पड़ी.............
" haan.............khus तो मैं बहुत rahungi................jab तुम्हें जाना hi था तो तुम आये क्यों मेरी ज़िन्दगी mein................pehle hi चले jate................kum से कम ये तकलीफ तो मुझे नहीं hoti............theek हैं................ तुम अगर जाना चाहते हो तो मैं तुम्हें नहीं rokungi.............waise भी मैं होती कौन हूँ तुम्हें रोकने वाली..............." और आसमा इतना कहकर चुप हो जाती हैं वहीँ हरी की तो जैसे बोलती बंद हो गयी thi.............uska चलाया हुआ दांव उसे उल्टा पड़ता हुआ नज़र आ रहा tha..................wo फ़ौरन बात संभालता हुआ धीरे से बोल पड़ा.............
"आप hi बताइये मैं क्या करूँगा यहाँ पे rehkar..................aap मुझे किसी और के पास जाने नहीं dengi................na hi खुद आप मेरे पास कभी aayengi.....................chalo मान भी लिया की आप मेरे पास अगर आयी to......................fir मैं चाह कर भी आपके बदन को छु नहीं sakta..................aapse मैं गन्दी बातें कर नहीं sakta...............zyada मैं कुछ कहूंगा तो आप मुझे चुप रहने के लिए bolengi....................nahin तो आप मुझे अपने पास से भगा dengi.............is हाल में मैं क्या karun.....................aap hi बताइये........................" और हरी शिकायत के लहज़े से अपनी बात पे ज़ोर देता हुआ धीरे से बोल पड़ा ....................वहीँ आसमा बड़े गौर से उसकी एक एक बातें सुन रही thi............hari ने उससे जो कुछ भी कहा था सब सच hi तो था..................
" ठीक हैं हरी मैं मानती हूँ की मुझसे गलती hui................maine तुम्हें हर चीज़ के लिए रोका और toka..............magar मैं जिस माहोल में पड़ी बड़ी हूँ वहां ऐसी भासा को लोग पाप मानते hain..............magar फिर भी मैं तुम्हारी ख़ुशी के लिए तुम्हारी साडी बातें सुनती रही............ इतनी छोटी सी बात के लिए क्या तुम मुझे छोड़कर चले jawogey.................tum अपने साथ साथ मुझे भी तकलीफ दे रहे हो हरी................" और आसमा के आँखों से आंसूं जैसे सूख gaye....................wo भी आज जैसे ज़िद्द पर आ गयी thi............wahin हरी की एक बार फिर से जैसे बोलती बंद हो गयी thi.....................kuch देर की चुप्पी के बाद हरी फिर धीरे से बोल पड़ा.......................
"memsaheb.....................sach तो ये हैं की मैं आपसे बहुत प्यार करता hoon.................aapko मैं अपना मंटा hoon................aur अपनों से hi तो लोग खुलकर साडी बातें किया करते hain................aapko कोई अगर आँख उठकर भी देखे तो मैं उसकी आँखें निकल loonga.................jab आपको भी मुझसे प्यार हैं तो फिर आप मुझसे बोल क्यों नहीं देती वो तीन shabdh...............mujhe भी इस बात की तसल्ली और सुकून मिल जाएगी..............." और हरी अपनी बात पर ज़ोर देता हुआ फिर से बोल पड़ा................ वहीँ आसमा अब पहले से बहुत ाचा महसूस कर रही thi...............wo बहुत हुड्ड तक अब नार्मल हो चुकी थी.............
" बस इतनी सी बात hain................main ये तीन शब्द तुम्हें तभी बोलूंगी जब तुम मेरे सामने aawogey................aise फ़ोन पर nahin..................tumhara दिया हुआ फूल मैंने बहुत संभलकर रखा हुआ hain..................aur उसे मैं अपनी जान से ज़्यादा संभलकर भी rakhungi.................dekho हरी............... मुझे सब कुछ मंज़ूर हैं मगर तुम्हारी ये नाराज़गी nahin...................tum चाहो तो मुझे गली दे dena..............maar लेना ..................मुझसे सब मंज़ूर hain..............magar मुझसे कभी खफा मुट्ठ hona................aur न hi मुझे छोड़कर जाने की बात करना................" और आसमा हौले से बोल पड़ी वहीँ हरी के चेहे पर एक विजयी मुस्कान फिर से तैर gayi.............wo आसमा पर अपना पूरा अधिकार जैसे हासिल कर चूका tha................ye उसकी आज सबसे बड़ी जीत थी.................
" तो फिर ठीक hain..............main आपसे वादा करता हूँ की मैं कभी आपसे नाराज़ नहीं howunga..........aur आपको कभी छोड़कर कहीं नहीं jawunga..............magar आप भी मुझे कभी गुस्सा मुट्ठ dilaiyega....................aaj के बाद मैं खुलकर आपसे गन्दी बातें भी करूँगा aur.................aap मेरा इसमें बराबर का साथ भी dengi..............aap भी मेरे साथ गन्दी बातें बोलेंगी....................." और हरी जैसे इस बार अपना फाइल्स सुनाता हैं वहीँ जवाब में आसमा धीरे से मुस्कुरा देती hain...............aaj सुबह से वो पहली दफा मुस्कुरा रही थी.............
" मैं वादा तो नहीं कर सकती magar...................jitna मुझसे हो पायेगा मैं तुमसे पूरी तरह खुलकर साडी बातें karungi...................tumhari ख़ुशी के लिए मुझसे जो बन पायेगा मैं वो सब कुछ करुँगी.................." और आसमा की सांसें एक बार फिर से जैसे भरी होने lagi...........aaj उसने हरी को ग्रीन सिग्नल दे दी thi.................aab हरी उस अप्सरा को जैसे आज अपनी मुट्ठी में कैद कर चूका tha.........magar एक दो चीज़ें और भी थी जिसे वो पूरी तरह से संतोष होना चाहता tha....................jo उसके दरमियान थोड़ी बहुत कसार हो वो भी आज पूरी हो जाये.................
" ठीक हैं memsaheb....................magar................... मेरा अगर मुन्न हुआ आपके बदन को छूने का तो....................." और हरी जैसे अपनी बात बीच में बोल pada..............aur आसमा के जवाब का इंतज़ार करने laga................aasma ने जो उसके बीच अपने बदन को छूने की जो भी रेस्ट्रिक्शन्स डाली थी वो अब उन्हें पूरी तरह से ख़तम करना चाहता tha...................jaisa उसे उम्मीद थी आसमा ने उसे कुछ वैसा hi जवाब दिया.................
" मेरे इस बदन पर जितना अधिकार सैम का hain.................utna hi अधिकार अब तुम्हारा भी हैं hari.....................tum मेरे साथ वो सब कुछ कर सकते हो जो एक पति अपनी पत्नी के साथ करता हैं.................." और आसमा की सांसें और धड़कनें तेज़्ज़ होती चली gayi...............usney सारा अधिकार अब हरी को दे दिया tha.................wahin हरी मुन्न hi मुन्न ख़ुशी से झूम उठा ..........वो एहि चीज़ तो आसमा के मुँह से सुनना चाहता tha...................magar एक चीज़ और भी थी जो वो आसमा से पूरी तरह कन्फर्म करना चाहता tha................wo थी उसकी fantasy......................jiski बहुत साडी पिक्स वो अपने मोबाइल में रखा हुआ tha..................kuch फोटोज के रूप mein............aur कुछ छोटी छोटी वीडियोस के रूप mein....................jisey दिखने के बाद अब वो आसमा से पूरी तरह कन्फर्मेशन चाहता था...............
" ठीक हैं memsaheb..................magar एक बात और hain..............jo अब भी आपके और मेरे बीच आ रही ....................वो हैं मेरा sapna...............mere मोबाइल में बहुत सी ऐसी छोटी छोटी क्लिप्स और फोटोज हैं जो मैं किसी हसीं और जवान लड़की के साथ वो सब मैं बचपन से करना चाहता hoon...................jo आज भी बस मेरा एक सपना hain.............agar आप मेरे इन सपनों को पूरा कर देंगी तो ................" और हरी इतना बोलकर खामोश हो जाता हैं वहीँ आसमा का दिल ज़ोरों से धड़कने लगता हैं....................