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Update-37(A) (महा Episode सुहागरात स्पेशल)
वो रांड जिसे वो अपनी हर इच्छा पूरी करवा sake......................uske एक इशारे पर वो अपनी टांगें हर वक़्त खोली खड़े rahe...............hari उसे जब जब chahe.........jitni देर तक chahe.................uski जवानी को भोगता rahe............wo उसे एक चुदाई की मशीन बनाना चाहता tha........................jo हर वक़्त उसके लिए हाज़िर rahe................har waqt.....har समय..............
अब आगे......................................................................
घडी में इस वक़्त शाम के 6.30 बज रहे they.................udher आसमा दुल्हन की लिबास mein..............apni घूंघट ओढ़े हरी के आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रही thi.............ya फिर शायद अपनी चुदाई ki...........is वक़्त उसका दिल बहुत ज़ोरों से धड़क रहा था और साथ hi साथ घबरा भी रहा tha.................uski नज़रें सामने के दरवाज़े पर तिकी हुई थी जो फिलहाल इस वक़्त बंद thi...................aasma के दिल और दिमाग में इस वक़्त बहुत से सवाल उठ रहे they.................kya होगा आज की raat...............jab हरी उसके पास आएगा to................kya वो उसे पूरी तरह से खुस रख पायेगी........
वो ये बात ाचे से जानती थी की हरी कैसे बेरहमी के साथ छोड़ता hain...............kya होगा जब हरी उसे भी बेरहमी के साथ छोड़ेगा tab..............itna तो आसमा निश्चित जान चुकी थी की आज की रात उसकी छूट की पूरी तरह से धाज्जियाँ उड़ने वाली hain...........aur उसकी छोटी सी छेद आज से छोटी नहीं रह jayegi..............hari अपने सरे अरमान एक एक कर आज की रात उसके साथ niklega..........wo अपने सरे सपने उसके साथ पूरा karega...............aasma एहि सब सोच रही थी तभी उसके कानों में दरवाज़ा खुलने की आहात सुनाई di............ek बार फिर उसका दिल ज़ोरों से धड़क उठा..................
उधर जैसे hi हरी आया उसके चेहरे पर खुशियां उमड़ padi.............uske हाथ में एक प्लास्टिक का थैला था जिसमें कुछ सामान they...............saath में एक 2 लीटर की बोतल भी थी जिसमें पानी भरा हुआ tha.................magar ये नार्मल पानी नहीं था ये उसने ख़ास तौर पे आसमा के लिए hi लाया था................
जेब में उसके वायग्रा और शिलाजीत की कई सरे पैकेट्स they.................jinhein वो अब आसमा और खुद पर भी इस्तेमाल करने वाला tha.......................waise हरी भी आज पूरी तैयारी के साथ आया tha....................jaise hi वो मैं दूर पर pahuncha...............bahar से दरवाज़ा सत्ता हुआ था और अंदर कमरे की लाइट्स भी बंद thi................jaisa आसमा ने उसे बताया tha................hari अंदर आते hi उस कमरे को ाचे से लॉक किया और बिना देर किये वो सीधा आसमा के कमरे की तरफ चल पड़ा.............
तेज़्ज़ तेज़्ज़ चलने से उसके क़दमों की आहात आसमा को साफ़ सुनाई दे रही thi...................us आहात को सुनकर उसकी सांसें तेज़ी से ऊपर नीचे की तरफ होने lagi.............wahin वो अपनी घूंघट ओढ़े बस हरी के इंतज़ार में बैठी rahi..................aab उसका इंतज़ार ख़तम हो गया tha..................hari कमरे में आ चूका था...............
जैसे hi हरी आसमा के बैडरूम में गया और जब उसकी नज़रें अंदर की जब सजावट पर padi................ek पल तो वो आश्चर्य से सब कुछ बड़े ध्यान से बस देखता hi raha.............sach तो ये था की उसे अपनी आँखों पर ज़रा भी यकीन नहीं हो रहा tha.................kamra पूरा परफ्यूम की महक से महक रहा tha...............aur चरों तरफ गुलाब और ढेर सरे फूल लगे हुए they..................ander आते hi उसने पहले उस कमरे की लाइट ों कर di............jissey आसमा का दिल एक बार फिर ज़ोरों से धड़क उठा...................
सामने बीएड पर अपनी दुल्हन को ऐसे उसकी इंतज़ार में बैठा हुआ देखकर हरी अंदर hi अंदर मचल utha................magar आज उसे साबरा करके आसमा के इस जवानी का रूस बड़े आराम से जो पीना tha.......aur वो आने के पहले सब कुछ प्लान करके hi आया tha..............usey आसमा के साथ kab.........kya और कैसे .......किस तरह se.............kya करना हैं ये उसने सब कुछ पहले से सोच रखा tha.........aab उस कमरे में हरी आसमा के साथ पूरी रात ढेर सारा नंगापन का खेल जो खेलने वाला था......................
" memsaheb..............aap................mujhe यकीन नहीं हो रहा की जो मेरे सामने हैं wo................ek सपना hain.....ya फिर haqeeqat...............aapne तो मुझे खुस कर दिया..............." और हरी इतना कहता हुआ आसमा के करीब आया और उसके बिस्टेर पर सत्कार उसके पास बैठ gaya..............hari के पास बैठने से उसके बदन से उठने वाली वो स्मेल आसमा को एक बार फिर से बेचैन करने lagi..............hari उस बोतल को साइड में रखता hua...........apne साथ लाये उस पैकेट के थैली को खोने लगा और उसमें से उसने दो चीज़ सबसे पहले बहार nikali..................pehla एक सिन्दूर की dibiya.................aur दूसरा mangalsutra............jo शायद उसकी बीवी की थी.................
वो आगे बढ़ता हुआ आसमा के घूँघट को धीरे धीरे ऊपर की ओरे उठाने लगा वहीँ आसमा का कलेजा ज़ोरों से धड़क utha..................wo लुम्बी लुम्बी सांसें लेती हुई अपने बेचैनी को पल पल संभालने lagi...........magar अब उसकी ये बेचैनी कहाँ रुकने वाली thi..............jaise hi हरी ने आसमा का घूंघट ऊपर किया उसका मुँह हैरत से पूरा खुला का खुला रह gaya...............jis मालकिन को वो अब तक देखता आया था आज वहीँ उसकी मेमसाहेब एक सूंदर सी पारी की तरह अब नज़र आ रही thi..............ek पल तो हरी को अपनी आँखों पर यकीन hi नहीं हुआ मगर जब उसकी नज़रें आसमा के चेहरे पर गयी तो वो चाह कर भी अपनी नज़रियों को उसके खूबसूरत से चेहरे पर से न हटा saka...............aaj आसमा की खूबसूरती उसपर पूरी क़हर धा रही थी..............
" memsaheb................mujhe यकीन नहीं हो रहा ......................आप सच में आज बेहद खूबसूरत लग रही hain...................ye देखिये मैंने आपके लिए कुछ लाया हैं................" और हरी अपने हाथ को आगे बढ़ता hua...........aasma के चेहरे के पास ले गया और बड़े गौर से फिर उसके खूबसूरत से चेहरे को बस निहारता raha............wahin आसमा ख़ुशी से खिल uthi..............shayad वो भी कुछ ऐसा hi चाहती थी की हरी उसके साथ कुछ करे.........
" आज से मैं आपकी hoon..........jo आपकी पसंद वो मेरी pasand...................ye मगलसूत्र आप मुझे शौक से पहना dijiye...........aur ये सिन्दूर भी मेरी मांग में भर दीजिये.............." और आसमा धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में मुस्कुरा pada..................wo आगे बढ़ता हुआ पहले उस सिन्दूर की डिबिया को खोला और उसमें से ढेर सारा सिन्दूर वो आसमा की मांग में भरने laga...................jab तक उसकी मांग सिन्दूर से पूरी लाल नहीं हो gayi..............fir उसने मंगलसूत्र उसके गले में दाल diya................wahin आसमा फ़ौरन हरी के पवन को छूती हुई उसके तरफ बड़े गौर से देखने lagi............aasma के चेहरे पर एक अलग ख़ुशी थी..........................
" आज से मैं आपकी बीवी hoon..............aur आप मेरे pati..................aapko खुस rakhna..............aapki सेवा करना मेरा धर्म हैं................." और आसमा हौले से बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में बस मुस्कुरा पड़ा..............
" देख मेरी jaan......................main तेरे लिए कुछ लाया hoon..................ye वायग्रा और शिलाजीत की गोली मैंने ख़ास तेरे लिए और अपने लिए मंगवाई hain................tu तो जानती hi होगी की इसका इस्तेमाल किस लिए होता hain..................isko खाने के बाद इसका नशा पूरी रात तक रहता हैं जिससे तू पूरी रात मस्ती से मुझसे chudwayegi..............ek गोली तू खा ले और एक मैं खा लेता hoon...............aur ये ख़ास मीठा पानी भी तेरे लिए hi मैंने मंगवाया hain................isey पीते hi तेरे बुर में वो आग लगेगी की तू अपनी बुर की आग ठंडी करवाने के लिए कुछ भी कर jayegi..................kisi भी हुड्ड तक गिर jayegi............magar तेरी बुर की आग इतनी जल्दी ठंडी नहीं hogi.............maza आएगा इस खेल में...................." और हरी पास में रखे एक शीशे की गिलास को उठता हैं और उस पानी को पूरा भरता हुआ एक वायग्रा की गोली आसमा को देता हैं और दूसरा खुद खा लेता हैं................
आसमा बिना किसी सवाल जवाब के उस पानी को अपने हाथों में लेती हैं और उस गोली के साथ उस पानी को पूरा ख़तम कर देती hain................uska स्वाद मीठा सा था और ठंडा bhi...........jaise कोई शरबत ho.............aasma के पीते hi हरी भी वो पानी उस गिलास में डालता हैं और एक वायग्रा के साथ उस पानी को पूरा पीटा हुआ ख़तम कर देता हैं.........
" मेरी दुल्हन पूरी तरह से तैयार हैं naa....................mujhse छुड़वाने के liye...................kahin ऐसा न हो की बीच में तू मुझे रोक दे जिससे मेरा सारा मज़ा किरकिरा हो जाये.................." और हरी आसमा को फिर से याद दिलाता हुआ बोल पड़ा वहीँ जवाब में आसमा धीरे से मुस्कुरा दी................
" मैं पहले आपकी बीवी नहीं thi...............magar अब hoon...................biwi के नाते आपकी ख़ुशी के लिए मुझे जो कुछ भी करना pade...............main वो सब कुछ karungi...........jitna दर्द सहना hain.......sab sahungi..............magar आपको किसी भी चीज़ के लिए रोकूंगी nahin...........jab तक आपका दिल न भरे आप मेरे बदन से बस खेलते rahiyega..............main अपनी दोनों टांगें हर वक़्त आपके लिए खोलकर बस कड़ी रहूंगी..............." और आसमा इस बार पूरे कॉन्फिडेंस से बोल पड़ी वहीँ हरी ख़ुशी से झूम utha.................usey आसमा से कुछ ऐसे hi जवाब की उम्मीद थी........
" तो खेल फिर शुरू करे मेरी रानी................" और हरी इतना कहकर आसमा के और करीब गया और उसके सर पर से पल्लू को पूरा हटाता hua.............usey एक साइड पर रख diya............fir वो अपना हाथ उसके नाक के पास ले गया और उसकी नाथ उतरने laga...............fir कान की दोनों bali...........maang में लगा वो jwellery...............gale में की और जिस्म के सभी जगह ki...............ek एक कर साडी ज्वेल्लेरी को वो निकलता हुआ एक साइड में रख diya............sari ज्वेल्ली उतर जाने के बाद वो अपना होंठ हौले से आसमा के होंठों के एक दम करीब ले गया और एक नज़र उसकी आँखों में आँखें dale..............apne जलते होंठ को धीरे से आसमा के लबों पर रख diya..............aur बहुत आहिस्ता से उसके ऊपर और नीचले होंठों को चूसने और चटनी लगा............
हरी के इस हरकत से आसमा तड़प उठी और हौले से अपनी आँखें बंद करती हुई अपना एक हाथ हरी के सर पर फेरती hui.......uska पूरा पूरा साथ देने lagi.............garam तो वो पहले से थी hi........upar से वायग्रा और वो पानी का असर अब धीरे धीरे उसपर होने लगा tha................hari उसके रसभरे होंठों को बड़े आराम से चूस और चाट रहा tha.............apna गन्दा होंठ वो आसमा के मुँह के पूरा अंदर ले जाता और उसके होंठों को फिर चूसने lagta...............thode देर तक तो हरी आसमा के होंठ नार्मल तरीके से चूसा.............
फिर उसने आसमा के साथ गन्दा खेल खेलना शुरू कर diya..................wo गन्दा खेल जो उसका सपना tha.............pehle वो उसके नीचले होंठों को धीरे धीरे चूसता hua.........usey काटने laga............fir वो अपना जीभ निकलता hua.............pehle उसके लबों को धीरे धीरे चाटता hua..............uske naak......kaan और गुर्दें पर अपना जीभ चलने laga.........jissey आसमा ज़ोरों से सिसक padi................magar हरी के चटनी का ये सिलसिला यु hi चलता raha.......................dheere धीरे कभी वो उसके कान को काट leta...........to कभी उसकी गुर्दें और कान के नीचे अपना जीभ फेर deta...........to कभी उसके नाक को चटनी lagta.............aasma का जिस्म धीरे धीरे अब गरम होता जा रहा tha..........wo हरी का खुलकर साथ दे रही thi................wo उसका होंठ चूसता हुआ अपना थूक आसमा के मुँह के अंदर दाल रहा था जिसे आसमा बिना सवाल जवळ ke.........bina किसी झिझक के पूरा लेती जा रही थी..............
वो रांड जिसे वो अपनी हर इच्छा पूरी करवा sake......................uske एक इशारे पर वो अपनी टांगें हर वक़्त खोली खड़े rahe...............hari उसे जब जब chahe.........jitni देर तक chahe.................uski जवानी को भोगता rahe............wo उसे एक चुदाई की मशीन बनाना चाहता tha........................jo हर वक़्त उसके लिए हाज़िर rahe................har waqt.....har समय..............
अब आगे......................................................................
घडी में इस वक़्त शाम के 6.30 बज रहे they.................udher आसमा दुल्हन की लिबास mein..............apni घूंघट ओढ़े हरी के आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रही thi.............ya फिर शायद अपनी चुदाई ki...........is वक़्त उसका दिल बहुत ज़ोरों से धड़क रहा था और साथ hi साथ घबरा भी रहा tha.................uski नज़रें सामने के दरवाज़े पर तिकी हुई थी जो फिलहाल इस वक़्त बंद thi...................aasma के दिल और दिमाग में इस वक़्त बहुत से सवाल उठ रहे they.................kya होगा आज की raat...............jab हरी उसके पास आएगा to................kya वो उसे पूरी तरह से खुस रख पायेगी........
वो ये बात ाचे से जानती थी की हरी कैसे बेरहमी के साथ छोड़ता hain...............kya होगा जब हरी उसे भी बेरहमी के साथ छोड़ेगा tab..............itna तो आसमा निश्चित जान चुकी थी की आज की रात उसकी छूट की पूरी तरह से धाज्जियाँ उड़ने वाली hain...........aur उसकी छोटी सी छेद आज से छोटी नहीं रह jayegi..............hari अपने सरे अरमान एक एक कर आज की रात उसके साथ niklega..........wo अपने सरे सपने उसके साथ पूरा karega...............aasma एहि सब सोच रही थी तभी उसके कानों में दरवाज़ा खुलने की आहात सुनाई di............ek बार फिर उसका दिल ज़ोरों से धड़क उठा..................
उधर जैसे hi हरी आया उसके चेहरे पर खुशियां उमड़ padi.............uske हाथ में एक प्लास्टिक का थैला था जिसमें कुछ सामान they...............saath में एक 2 लीटर की बोतल भी थी जिसमें पानी भरा हुआ tha.................magar ये नार्मल पानी नहीं था ये उसने ख़ास तौर पे आसमा के लिए hi लाया था................
जेब में उसके वायग्रा और शिलाजीत की कई सरे पैकेट्स they.................jinhein वो अब आसमा और खुद पर भी इस्तेमाल करने वाला tha.......................waise हरी भी आज पूरी तैयारी के साथ आया tha....................jaise hi वो मैं दूर पर pahuncha...............bahar से दरवाज़ा सत्ता हुआ था और अंदर कमरे की लाइट्स भी बंद thi................jaisa आसमा ने उसे बताया tha................hari अंदर आते hi उस कमरे को ाचे से लॉक किया और बिना देर किये वो सीधा आसमा के कमरे की तरफ चल पड़ा.............
तेज़्ज़ तेज़्ज़ चलने से उसके क़दमों की आहात आसमा को साफ़ सुनाई दे रही thi...................us आहात को सुनकर उसकी सांसें तेज़ी से ऊपर नीचे की तरफ होने lagi.............wahin वो अपनी घूंघट ओढ़े बस हरी के इंतज़ार में बैठी rahi..................aab उसका इंतज़ार ख़तम हो गया tha..................hari कमरे में आ चूका था...............
जैसे hi हरी आसमा के बैडरूम में गया और जब उसकी नज़रें अंदर की जब सजावट पर padi................ek पल तो वो आश्चर्य से सब कुछ बड़े ध्यान से बस देखता hi raha.............sach तो ये था की उसे अपनी आँखों पर ज़रा भी यकीन नहीं हो रहा tha.................kamra पूरा परफ्यूम की महक से महक रहा tha...............aur चरों तरफ गुलाब और ढेर सरे फूल लगे हुए they..................ander आते hi उसने पहले उस कमरे की लाइट ों कर di............jissey आसमा का दिल एक बार फिर ज़ोरों से धड़क उठा...................
सामने बीएड पर अपनी दुल्हन को ऐसे उसकी इंतज़ार में बैठा हुआ देखकर हरी अंदर hi अंदर मचल utha................magar आज उसे साबरा करके आसमा के इस जवानी का रूस बड़े आराम से जो पीना tha.......aur वो आने के पहले सब कुछ प्लान करके hi आया tha..............usey आसमा के साथ kab.........kya और कैसे .......किस तरह se.............kya करना हैं ये उसने सब कुछ पहले से सोच रखा tha.........aab उस कमरे में हरी आसमा के साथ पूरी रात ढेर सारा नंगापन का खेल जो खेलने वाला था......................
" memsaheb..............aap................mujhe यकीन नहीं हो रहा की जो मेरे सामने हैं wo................ek सपना hain.....ya फिर haqeeqat...............aapne तो मुझे खुस कर दिया..............." और हरी इतना कहता हुआ आसमा के करीब आया और उसके बिस्टेर पर सत्कार उसके पास बैठ gaya..............hari के पास बैठने से उसके बदन से उठने वाली वो स्मेल आसमा को एक बार फिर से बेचैन करने lagi..............hari उस बोतल को साइड में रखता hua...........apne साथ लाये उस पैकेट के थैली को खोने लगा और उसमें से उसने दो चीज़ सबसे पहले बहार nikali..................pehla एक सिन्दूर की dibiya.................aur दूसरा mangalsutra............jo शायद उसकी बीवी की थी.................
वो आगे बढ़ता हुआ आसमा के घूँघट को धीरे धीरे ऊपर की ओरे उठाने लगा वहीँ आसमा का कलेजा ज़ोरों से धड़क utha..................wo लुम्बी लुम्बी सांसें लेती हुई अपने बेचैनी को पल पल संभालने lagi...........magar अब उसकी ये बेचैनी कहाँ रुकने वाली thi..............jaise hi हरी ने आसमा का घूंघट ऊपर किया उसका मुँह हैरत से पूरा खुला का खुला रह gaya...............jis मालकिन को वो अब तक देखता आया था आज वहीँ उसकी मेमसाहेब एक सूंदर सी पारी की तरह अब नज़र आ रही thi..............ek पल तो हरी को अपनी आँखों पर यकीन hi नहीं हुआ मगर जब उसकी नज़रें आसमा के चेहरे पर गयी तो वो चाह कर भी अपनी नज़रियों को उसके खूबसूरत से चेहरे पर से न हटा saka...............aaj आसमा की खूबसूरती उसपर पूरी क़हर धा रही थी..............
" memsaheb................mujhe यकीन नहीं हो रहा ......................आप सच में आज बेहद खूबसूरत लग रही hain...................ye देखिये मैंने आपके लिए कुछ लाया हैं................" और हरी अपने हाथ को आगे बढ़ता hua...........aasma के चेहरे के पास ले गया और बड़े गौर से फिर उसके खूबसूरत से चेहरे को बस निहारता raha............wahin आसमा ख़ुशी से खिल uthi..............shayad वो भी कुछ ऐसा hi चाहती थी की हरी उसके साथ कुछ करे.........
" आज से मैं आपकी hoon..........jo आपकी पसंद वो मेरी pasand...................ye मगलसूत्र आप मुझे शौक से पहना dijiye...........aur ये सिन्दूर भी मेरी मांग में भर दीजिये.............." और आसमा धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में मुस्कुरा pada..................wo आगे बढ़ता हुआ पहले उस सिन्दूर की डिबिया को खोला और उसमें से ढेर सारा सिन्दूर वो आसमा की मांग में भरने laga...................jab तक उसकी मांग सिन्दूर से पूरी लाल नहीं हो gayi..............fir उसने मंगलसूत्र उसके गले में दाल diya................wahin आसमा फ़ौरन हरी के पवन को छूती हुई उसके तरफ बड़े गौर से देखने lagi............aasma के चेहरे पर एक अलग ख़ुशी थी..........................
" आज से मैं आपकी बीवी hoon..............aur आप मेरे pati..................aapko खुस rakhna..............aapki सेवा करना मेरा धर्म हैं................." और आसमा हौले से बोल पड़ी वहीँ हरी जवाब में बस मुस्कुरा पड़ा..............
" देख मेरी jaan......................main तेरे लिए कुछ लाया hoon..................ye वायग्रा और शिलाजीत की गोली मैंने ख़ास तेरे लिए और अपने लिए मंगवाई hain................tu तो जानती hi होगी की इसका इस्तेमाल किस लिए होता hain..................isko खाने के बाद इसका नशा पूरी रात तक रहता हैं जिससे तू पूरी रात मस्ती से मुझसे chudwayegi..............ek गोली तू खा ले और एक मैं खा लेता hoon...............aur ये ख़ास मीठा पानी भी तेरे लिए hi मैंने मंगवाया hain................isey पीते hi तेरे बुर में वो आग लगेगी की तू अपनी बुर की आग ठंडी करवाने के लिए कुछ भी कर jayegi..................kisi भी हुड्ड तक गिर jayegi............magar तेरी बुर की आग इतनी जल्दी ठंडी नहीं hogi.............maza आएगा इस खेल में...................." और हरी पास में रखे एक शीशे की गिलास को उठता हैं और उस पानी को पूरा भरता हुआ एक वायग्रा की गोली आसमा को देता हैं और दूसरा खुद खा लेता हैं................
आसमा बिना किसी सवाल जवाब के उस पानी को अपने हाथों में लेती हैं और उस गोली के साथ उस पानी को पूरा ख़तम कर देती hain................uska स्वाद मीठा सा था और ठंडा bhi...........jaise कोई शरबत ho.............aasma के पीते hi हरी भी वो पानी उस गिलास में डालता हैं और एक वायग्रा के साथ उस पानी को पूरा पीटा हुआ ख़तम कर देता हैं.........
" मेरी दुल्हन पूरी तरह से तैयार हैं naa....................mujhse छुड़वाने के liye...................kahin ऐसा न हो की बीच में तू मुझे रोक दे जिससे मेरा सारा मज़ा किरकिरा हो जाये.................." और हरी आसमा को फिर से याद दिलाता हुआ बोल पड़ा वहीँ जवाब में आसमा धीरे से मुस्कुरा दी................
" मैं पहले आपकी बीवी नहीं thi...............magar अब hoon...................biwi के नाते आपकी ख़ुशी के लिए मुझे जो कुछ भी करना pade...............main वो सब कुछ karungi...........jitna दर्द सहना hain.......sab sahungi..............magar आपको किसी भी चीज़ के लिए रोकूंगी nahin...........jab तक आपका दिल न भरे आप मेरे बदन से बस खेलते rahiyega..............main अपनी दोनों टांगें हर वक़्त आपके लिए खोलकर बस कड़ी रहूंगी..............." और आसमा इस बार पूरे कॉन्फिडेंस से बोल पड़ी वहीँ हरी ख़ुशी से झूम utha.................usey आसमा से कुछ ऐसे hi जवाब की उम्मीद थी........
" तो खेल फिर शुरू करे मेरी रानी................" और हरी इतना कहकर आसमा के और करीब गया और उसके सर पर से पल्लू को पूरा हटाता hua.............usey एक साइड पर रख diya............fir वो अपना हाथ उसके नाक के पास ले गया और उसकी नाथ उतरने laga...............fir कान की दोनों bali...........maang में लगा वो jwellery...............gale में की और जिस्म के सभी जगह ki...............ek एक कर साडी ज्वेल्लेरी को वो निकलता हुआ एक साइड में रख diya............sari ज्वेल्ली उतर जाने के बाद वो अपना होंठ हौले से आसमा के होंठों के एक दम करीब ले गया और एक नज़र उसकी आँखों में आँखें dale..............apne जलते होंठ को धीरे से आसमा के लबों पर रख diya..............aur बहुत आहिस्ता से उसके ऊपर और नीचले होंठों को चूसने और चटनी लगा............
हरी के इस हरकत से आसमा तड़प उठी और हौले से अपनी आँखें बंद करती हुई अपना एक हाथ हरी के सर पर फेरती hui.......uska पूरा पूरा साथ देने lagi.............garam तो वो पहले से थी hi........upar से वायग्रा और वो पानी का असर अब धीरे धीरे उसपर होने लगा tha................hari उसके रसभरे होंठों को बड़े आराम से चूस और चाट रहा tha.............apna गन्दा होंठ वो आसमा के मुँह के पूरा अंदर ले जाता और उसके होंठों को फिर चूसने lagta...............thode देर तक तो हरी आसमा के होंठ नार्मल तरीके से चूसा.............
फिर उसने आसमा के साथ गन्दा खेल खेलना शुरू कर diya..................wo गन्दा खेल जो उसका सपना tha.............pehle वो उसके नीचले होंठों को धीरे धीरे चूसता hua.........usey काटने laga............fir वो अपना जीभ निकलता hua.............pehle उसके लबों को धीरे धीरे चाटता hua..............uske naak......kaan और गुर्दें पर अपना जीभ चलने laga.........jissey आसमा ज़ोरों से सिसक padi................magar हरी के चटनी का ये सिलसिला यु hi चलता raha.......................dheere धीरे कभी वो उसके कान को काट leta...........to कभी उसकी गुर्दें और कान के नीचे अपना जीभ फेर deta...........to कभी उसके नाक को चटनी lagta.............aasma का जिस्म धीरे धीरे अब गरम होता जा रहा tha..........wo हरी का खुलकर साथ दे रही thi................wo उसका होंठ चूसता हुआ अपना थूक आसमा के मुँह के अंदर दाल रहा था जिसे आसमा बिना सवाल जवळ ke.........bina किसी झिझक के पूरा लेती जा रही थी..............