Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 179 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

महक की नींद खुली तो उसके शरीर पर भारी-भरकम वजन था और उसकी चूत में एक मोटा, गर्म लंड धीरे-धीरे घुस-घुसकर हिल रहा था। उसने आँखें खोलीं, भोसडीका बबलू फिर से उसे चोद रहा था।

“क्या राजा... एक बार में मन नहीं भरा...?” महक ने कूल्हे समायोजित करते हुए, नींद भरी आवाज में कहा। “वैसे तुम बढ़िया चुदाई करते हो...”
फनलवर की प्रस्तुति।

बबलू ने महक की कमर को कसकर पकड़ लिया और जोर से धक्का मारा। उसका मोटा लंड महक की चूत को पूरी तरह भर रहा था।

“रानी... तुझे कोई जिंदगी भर चोद दे तो भी मन नहीं भरेगा... सच कहता हूँ, तेरे जैसा मस्त माल कहीं नहीं है। मस्त गोलाई वाली चुचियाँ, भरे हुए कूल्हे, कसे हुए मस्त जाँघें... बहुत का तो तेरी मालपुए जैसी चूत देखकर ही पानी गिर जाएगा...”

बबलू ने और जोर से धक्का मारा। महक की चूत अब पूरी तरह गीली और चिपचिपी हो चुकी थी। हर धक्के के साथ चप-चप की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।

महक ने कूल्हे उचकाते हुए जवाब दिया,

“राजा... अभी तुमने माल देखा ही कहाँ है! मेरी माँ और एक सहेली को देखोगे तो तुम्हारा भी देखते ही पानी निकल जाएगा...”

उसने बबलू को चूमा और कहा, “5 बज गए हैं... जाना नहीं है क्या...?”

“सच बोलूँ... मन तो करता है कि न जाऊँ... बस तुम्हें प्यार करता रहूँ...” बबलू ने ज़ोर से धमाका किया।

बबलू ने महक को कुत्ते की तरह घुटनों पर मोड़ दिया। उसने महक की मोटी गांड को दोनों हाथों से फैलाया और अपना लंड गांड के छेद पर रख दिया।

“रानी... अब तेरी गांड भी फाड़ता हूँ...”

महक ने कूल्हे पीछे करके कहा, “हाँ... डाल दो... मेरी गांड में भी अपना लंड ठेल दो...”

बबलू ने धीरे-धीरे अपना मोटा लंड महक की गांड में घुसाया। महक दर्द और मजा के मिश्रण में चीखी,

“आह्ह्ह... बहुत मोटा है... फट जाएगी मेरी गांड... लेकिन मत रुको... चोदो... अपनी रंडी की गांड चोदो...” जूठ बोलने में माँ बेटी का जवाब नहीं।
लेखिका फनलवर है।

बबलू ने महक की कमर पकड़कर जोर-जोर से गांड मारना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ महक की गांड लहरा रही थी।

“तेरी गांड भी कितनी टाइट है... उफ्फ... बहुत मजा आ रहा है...” बबलू ने कहा और गति बढ़ा दी।

महक ने हाथ पीछे ले जाकर अपनी चूत को सहलाना शुरू कर दिया।

“बबलू... और जोर से... मेरी गांड फाड़ दो... आह्ह्ह... बहुत अच्छा लग रहा है...”

बबलू ने महक को फिर से ऊपर बिठाया। महक अब बबलू के लंड पर उछल-उछलकर चुद रही थी। उसके स्तन जोर-जोर से हिल रहे थे। बबलू नीचे से ऊपर की तरफ धक्के मार रहा था।

“रानी... तेरी चूत कितनी गर्म और टाइट है... मैं तो दिन-रात तेरी चूत में लंड रखना चाहता हूँ...”

महक ने बबलू की छाती पर हाथ रखकर तेजी से कूल्हे हिलाए,

“हाँ राजा... चोदो... मुझे रंडी बनाकर चोदो... मेरी चूत और गांड दोनों तुम्हारी हैं...”

आखिरकार बबलू ने जोर से गरज कर महक की चूत में दूसरी बार गरम वीर्य भर दिया।

दोनों थोड़ी देर लिपटे रहे। फिर महक ने बबलू को चूमते हुए कहा, “5 बज गए हैं... जाना नहीं है क्या...?”

“सच बोलूँ... मन तो करता है कि न जाऊँ... बस तुम्हें प्यार करता रहूँ...तू मेरे लंड से खेलती रहे.....मेरा लंड को कभी भी मन करे माल निकालती रहे.....” बबलू ने महक की चूत पर हाथ फेरते हुए कहा।

“जैसे भगवान ने अभी मिलाया, वैसे ही बाद में भी तुम्हें मुझे चोदने का मौका देंगे, बस चुदवाना हमारा काम है और तुम लोगो का चोदने का काम है।” महक ने मुस्कुराते हुए कहा।



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बाकी कल दे दूंगी अभी समय का अभाव है ......................................


Funlover की तरफ से जय भारत।।

387.

 
इस बार कुछ ज्यादा ही कामुक प्रदर्शन हो गया है । सिचुवेशन के हिसाब से माहौल बनाना और फिर सीन क्रिएट करना ही असली कलाकारी है । पाठक मंत्रमुग्ध हुए बिना नही रह पाते । इस बार मुनीम और बबलू का पुरुषार्थ और दोबारा से बबलू द्वारा महक के साथ डबल धमाल । मानो एक दलाल जब कमाई की जगह खर्च करने पर अमादा हो तो फिर वह पूरी कीमत वसूले बिना नही रहेगा । बहुत ही लाजवाब अपडेट । धन्यवाद ।
 
महक चाय लेकर लौटी। उसने ट्रे को टेबल पर रखा और घुटनों के बल ज़मीन पर बैठ गई। उसका पूरा शरीर अब भी नंगा था। उसने बबलू की कमर पकड़ी और दूसरे हाथ से उसके ढीले हो चुके, लेकिन अभी भी मोटे लंड को सहलाना शुरू कर दिया।

महक ने लंड की पूरी लंबाई पर अपनी गर्म जीभ फिराई, गोटियों को नरम हाथों से दबाया और चूसा। बबलू सिहर उठा। उसने अपनी कमर महक के मुँह की तरफ धकेल दी।
कहानी की रचयिता फनलवर है।

दूसरी तरफ बबलू ने सो रहे मुनीम की तरफ झुककर उनका शिथिल लंड मुंह में ले लिया। उसने मोटे, भारी सुपारे को चूसा, दबाया और धीरे-धीरे पूरी लंबाई मुंह में लेने की कोशिश की। मुनीम का मोटा सुपारा उसके मुंह को इतना भर रहा था कि बबलू को साँस लेने में तकलीफ हो रही थी।

महक यह सब देख रही थी। एक आदमी दूसरे आदमी का लंड चूस रहा था - यह उसके लिए बिल्कुल नया और हैरान कर देने वाला नजारा था। उसकी चूत फिर से गीली होने लगी।

कुछ मिनट तक बबलू दोनों लंडों को चूसता रहा। मुनीम सो रहे थे, लेकिन चूसने के असर से उनका लंड धीरे-धीरे कड़ा होने लगा। बबलू की चूसने की गति तेज हो गई।

महक अब और नहीं रुक सकी। उसने उठकर बबलू की गांड पर हाथ फेरा, फिर अपनी चूत से निकले रस को उँगलियों पर लिया और बबलू की गांड में लगाने लगी। उँगलियाँ आसानी से अंदर घुसने लगीं।

“साला गांडू... गांड भी मरवाता है...” महक ने फुसफुसाते हुए कहा।

बबलू ने मुनीम का लंड छोड़ा नहीं, लेकिन उसकी गांड महक की उँगलियों के आगे और पीछे हिल रही थी।

थोड़ी देर बाद महक ने बबलू को हटाया और मुनीम को जगाया।

मुनीम अब पूरी तरह होश में आ गए थे। उन्होंने देखा कि उनकी बेटी बबलू की गोद में नंगी बैठी है और बबलू उसकी जाँघों को सहला रहा है। महक ने जानबूझकर अपनी जाँघें चौड़ी कीं और बबलू की उँगली अपनी चूत में डाल ली।

चाय खत्म होने के बाद महक उठी। बबलू ने उसे गले लगाया, जोर से चूमा और मुनीम से कहा,

“मुनीमजी... लगता है मेरी गांड में अभी भी आपका प्यार फँसा हुआ है। मुझे चलने में काफी दिक्कत हो रही है... पर मजे की बात ये है कि मेरी गांड अभी भी आपके लंड के अंदर होने का एहसास दे रही है। काफी मजा आया मुझे आपसे गांड मरवाने में...”

महक ने बबलू को गले लगाया और चूमते हुए कहा, “कुछ और लोगों से गांड मरवा लेना...”

बबलू महक को सहलाता रहा और अचानक बोला, “महक... मुझे एक रात में तुमसे प्यार हो गया है... मुझसे शादी करोगी...?”

महक ने बबलू के हाथों को अपनी नंगी चूचियों पर रगड़ते हुए जवाब दिया, “कोलकाता आऊँगी तो बात करेंगे... तब तक रंडियों को खूब चोदो...”

बबलू बहुत खुश था। महक उसे विदा करने के लिए पूरी तरह नंगी बाहर तक आई। बबलू ने अंतिम बार उसे चूमा और कार में बैठ गया।

जैसे ही कार गेट से बाहर निकली, महक ने दरवाजा बंद किया और पिता की तरफ मुड़ी। दोनों के चेहरे पर रहस्यमयी मुस्कान थी।

“राजा... इस रंडी की आग ठंडी कर दो...” महक ने कहा और मुनीम को अपने ऊपर खींच लिया।

मुनीम ने बेटी को जोर से चूमते हुए उसे सोफे पर लिटा दिया। फिर उसने महक की टाँगें कंधों पर रखीं और अपना मोटा लंड एक झटके में पूरी तरह चूत में ठेल दिया।
निर्मात्री फनलवर है।

“आआह्ह्ह... बाबूजी... फाड़ दो अपनी बेटी की चूत...!”


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जुड़े रहिए दोस्तों।

Funlover.
 
दोनों नंगे ही बिस्तर पर थे। मुनीम ने महक को जोर से चूम लिया, उसकी जीभ बेटी के मुंह में घुसाकर लार चूसने लगा। महक भी पापा की जीभ को चूस रही थी। फनलवर निर्मित कहानी।

मुनीम ने महक को लिटाया, उसकी टाँगें फैलाईं और मिशनरी पोजीशन में उसके ऊपर चढ़ गया। अपना मोटा, नसों वाला लंड महक की चूत पर रगड़ते हुए बोला,

“बेटी... आज पापा तेरी चूत को अच्छे से फाड़ेंगे...”

“हाँ बाबूजी... फाड़ दो... अपनी रंडी बेटी की चूत फाड़ दो...” महक ने टाँगें और चौड़ी करते हुए कहा।

मुनीम ने एक जोरदार धक्का मारा। पूरा मोटा सुपारा महक की चूत में घुस गया।

“आआआह्ह्ह... बाबूजी... बहुत मोटा है... फट गई मेरी चूत...!” महक चीख उठी।

मुनीम ने रुककर नहीं, बल्कि तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ महक के भारी स्तन जोर-जोर से हिल रहे थे।

“हाँ... और जोर से... अपनी बेटी की चूत को फाड़ो... आह्ह्ह... गहरी मारो बाबूजी...” महक कराह रही थी।

मुनीम ने महक की टाँगें अपने कंधों पर रख लीं और और गहराई तक धक्के मारने लगे। कमरे में चप-चप... थप-थप की आवाज़ गूँज रही थी।

कुछ देर बाद मुनीम ने महक को घुटनों पर मोड़ दिया - डॉगी स्टाइल। महक की गोल, मोटी गांड ऊपर थी। मुनीम ने गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा और लंड को चूत में ठेल दिया।

“आह्ह्ह... इस पोजीशन में बहुत गहरा जा रहा है...!” महक चीखी।

मुनीम ने महक की कमर पकड़कर तेज़-तेज़ धक्के मारे। महक की गांड लहरा रही थी।

“तेरी गांड भी बहुत मस्त है बेटी...” मुनीम ने गांड पर थूक लगाया और अँगूठा गांड के छेद में डाल दिया।

“बाबूजी... गांड भी मारोगे...?” महक ने नशे और उत्तेजना में पूछा।

“हाँ रंडी... आज तेरी गांड भी फाड़नी है...”

मुनीम ने लंड चूत से निकाला, गांड के छेद पर रखा और धीरे-धीरे दबाव डालना शुरू किया। महक की गांड बहुत टाइट थी।

“आह्ह्ह... धीरे... बहुत मोटा है... फट जाएगी...” महक ने दाँत भींचकर कहा।

मुनीम ने कमर कस ली और एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड महक की गांड में घुस गया।

“मर गई... बाबूजी... मेरी गांड फट गई...!” महक चीखी।

मुनीम ने रुककर नहीं, धीरे-धीरे पूरा लंड गांड में ठेल दिया। फिर धीमी गति से चोदना शुरू किया। कुछ मिनट बाद गति बढ़ गई।

“अब मजा आ रहा है ना...?” मुनीम ने महक के बाल पकड़कर पूछा। मैत्री द्वारा एडिटेड।

“हाँ... बाबूजी... गांड भी बहुत मजा दे रही है... और जोर से चोदो... अपनी बेटी की गांड फाड़ दो...!” महक ने कूल्हे पीछे करके कहा।

मुनीम ने महक को फिर से ऊपर बिठाया (Cowgirl)। महक पापा के लंड पर उछल-उछलकर चुद रही थी। उसके स्तन जोर-जोर से हिल रहे थे। मुनीम नीचे से धक्के मार रहा था।

आखिरकार मुनीम ने महक को नीचे लिटाया, टाँगें कंधों पर रखीं और आखिरी जोरदार राउंड शुरू किया।

“बाबूजी... भर दो... अपनी बेटी की चूत में वीर्य भर दो...!” महक चीखी।

मुनीम गरजे और महक की चूत के सबसे गहरे हिस्से में गरम-गरम, मोटी धार छोड़ दी।

दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से कसकर लिपटे पड़े रहे। महक पापा की छाती पर सिर रखे हुए हाँफ रही थी।

“बाबूजी... आज बहुत जोरदार चोदा... मेरी चूत और गांड दोनों फट गईं...” महक ने संतुष्ट स्वर में कहा।

मुनीम ने बेटी के बाल सहलाते हुए बोला, “तू मेरी सबसे प्यारी रंडी है...” फन'लवर की रचना।

मुनीम ने महक को पूरे एक घंटे से ज्यादा समय तक बेरहमी से चोदा - कभी मिशनरी में, कभी कुत्ते की तरह, कभी महक को ऊपर बिठाकर। महक बार-बार झड़ गई। आखिर में मुनीम ने अपनी बेटी की चूत के अंदर गरम वीर्य की मोटी धार छोड़ दी।

दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे।



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जुड़े रहिये दोस्तों।

Funlover.
 
मुनीम ने महक को पूरे एक घंटे से ज्यादा बेरहमी से चोदा - कभी मिशनरी में, कभी डॉगी स्टाइल में, कभी महक को ऊपर बिठाकर। महक बार-बार झड़ गई, उसकी चूत और गांड दोनों लाल हो चुकी थीं। आखिरकार मुनीम गरज उठा और महक की चूत के सबसे गहरे हिस्से में गरम-गरम, मोटी वीर्य की धार छोड़ दी। फनलवर की प्रस्तुति।

दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से कसकर लिपटे पड़े रहे। महक पापा की छाती पर सिर रखे हुए हाँफ रही थी।

थोड़ी देर बाद महक ने धीमी, भावुक आवाज में कहा,

“बाबूजी... आज मैं कहीं नहीं जा सकूंगी... जब भी आपका लंड मेरी चूत में डूबता है, तब मैं ठीक से चल नहीं पाती... आपका यह लंड मेरी चूत के होंठों को मार-मार के सूजा देता है... मैं कहीं भी अपना माल दिखा नहीं सकती...”

महक ने पापा की छाती पर हाथ फेरते हुए आगे कहा,

“बाबूजी... मुझे बस परम और आपका लौड़ा ही मस्ती दे सकता है। और कोई नहीं। बाकी सब मेरी चूत मारते हैं और छूट जाते हैं। आवेश में मजा तो आता है... लेकिन मैं अपना दिल इस लंड से हार गई हूँ। परम भी नहीं जीत पाया मुझे। यह लंड जब भी मेरे अंदर जाता है, एक स्वर्ग-सी अनुभूति हो जाती है...”

मुनीम ने महक की गांड के छेद पर उँगली जमाते हुए पूछा,

“लेकिन बेटी, तुम मुझे किसी और से चोदने नहीं देती... कल भी तुमने बबलू की गांड मरवा दी मुझसे और मैं तुम्हें नहीं चोद पाया। ऐसा क्यों करती है मेरे लंड की रानी?”

महक ने शर्माते हुए लेकिन सच्चाई से कहा,

“सच कहूँ बाबूजी... मुझे अच्छा नहीं लगता कि आप मेरे इस लंड को किसी भी चूत या गांड को चोदो... मैं यह समझती हूँ कि यह सिर्फ मेरा और सुंदरी के लिए है। मुझे बहुत जलन महसूस होती है...”

मुनीम ने महक की गांड में उँगली हिलाते हुए मुस्कुराया,

“ठीक ही तो है बेटी... जलन होना हर महिला का स्वभाव है। अब मैं क्या कर सकता हूँ। लेकिन मुझे भी तो नई चूत चाहिए... जैसे तुम नए-नए लंड की शौकीन हो गई हो...”

महक ने पापा की छाती पर सिर रखकर कहा,

“समझ सकती हूँ पापा... कभी-कभी मुझे अपने किए पर पछतावा हो जाता है कि मैं चूत तो आपके लिए ले आती हूँ, पर जलन की वजह से ठीक व्यवहार नहीं कर पाती। मुझे माफ कर दीजिए बाबूजी... आगे से वादा करती हूँ कि आपको नई चूत मिलती रहेगी... और मेरा यह खजाना तो आपके लिए हमेशा खुला है... जब चाहे लूट लीजिए...”
फनलवर लिखित और रचित कहानी।

मुनीम ने महक की चूत पर हाथ फेरते हुए कहा,

“बेटी... आज का धंधा अच्छा हुआ है... बहनचोद को तुमने अच्छा लुटा...”

“हाँ पापा... कल रात को मेरा माल अच्छा बिक गया। इसी तरह मेरा माल बिकता रहे और आपकी तिजोरी भरती रहे... हम दोनों को और क्या चाहिए... सुंदरी का भी अच्छा माल बिकता है आजकल...”

दोनों ने पैसे गिने। बबलू ने 40,000 नहीं बल्कि 70,000 रुपये दिए थे। साथ में 100 से ज्यादा नंगी तस्वीरों वाला एल्बम भी था।

दोनों नंगे ही रहे और सुंदरी व परम का इंतजार करने लगे।

थोड़ी देर बाद मुनीम सो गए, लेकिन महक को नींद नहीं आ रही थी। उसकी चिंता बढ़ने लगी।

“मुझे... बबलू... एक अनजान आदमी से नहीं चुदवाना चाहिए था...” महक ने अपनी चूत को सहलाते हुए डरते हुए सोचा, “अगर कोई बीमारी लग गई तो... इस माल को कौन चोदेगा...?”

उसने सुबह डॉक्टर के पास जाने का फैसला कर लिया।

सुबह लगभग 8 बजे

सुंदरी परम के साथ लौटी। उसने दरवाजा खटखटाया। महक ने दरवाजा खोला। परम ने तुरंत दरवाजा बंद कर दिया।

सुंदरी ने मुस्कुराते हुए पति को देखा और डांटा,

“कैसे बाप हो... शादी के पहले ही बेटी को चोद-चोद कर चूत का भोसड़ा बना दोगे... एक तो लंड राक्षसी लेकर जन्मे हो...”

महक शर्म से लाल हो गई, लेकिन सुंदरी की बात सुनकर हँस पड़ी। फनलवर का निर्माण।



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यही तक दोस्तों।


आपके कॉमेंट्स की प्रतीक्षा सह........................


Funlover के जय भारत।।

390.
 
महक अभी भी पूरी तरह नंगी थी। उसकी चूत और गांड बुरी तरह सूजी हुई थीं, चलने में भी दर्द हो रहा था। सुंदरी और परम को देखते ही वह मुस्कुराई और माँ की तरफ देखते हुए शरारती स्वर में बोली,

“क्यों माँ...? अपना भूल गई क्या...? इसी लौड़े से पिछले 20 सालों से चुदवा रही हो... और आज भी सारे लोग तेरी चूत के दीवाने बने हुए हैं। देख... तेरी चूत आज भी कितनी टाइट और आकर्षक लग रही है... सेठजी, उनके दोस्त, परम... सब तेरी इसी चूत के गुलाम हैं।”
प्रस्तुतकर्ता फनलवर है।

सुंदरी शर्म से लाल हो गई। उसने महक की सूजी हुई चूत और गांड को देखा और बोली,

“चुप कर पागल... तू खुद कितनी बड़ी रंडी बन गई है... कल रात तेरे बाप ने तेरी चूत और गांड दोनों को फाड़ डाला... और तेरे बाप ने फिर से तेरी चूत का भोसड़ा बना दिया... अब तू चल भी ठीक से नहीं पा रही...”

महक हँसते हुए माँ के पास आई, उसकी भारी चूचियों को दोनों हाथों से दबाते हुए बोली,

“हाँ माँ... मैं रंडी बन गई हूँ... लेकिन तुमसे तो बहुत कम... तुम तो 20 साल से एक ही लंड की गुलाम हो... परम का लंड देखते ही तुम्हारी चूत पानी छोड़ने लगती है... बोलो ना माँ... सच-सच बताओ... परम का लंड सबसे अच्छा लगता है ना?”

सुंदरी ने शर्माते हुए महक की चूत पर हाथ फेरते हुए कहा,

“हाँ बेटी... परम और तेरे बाप का लंड सबसे मस्त है... मोटा, लंबा और बहुत ताकतवर... जब ये मेरी चूत में घुसता है तो लगता है जैसे स्वर्ग में पहुँच गई हूँ...”

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बेटा-माँ का संवाद (परम और सुंदरी)

परम ने माँ का हाथ पकड़कर उन्हें अंदर खींच लिया और दरवाजा बंद कर दिया। सुंदरी को दीवार से सटाकर खड़ा करते हुए उसने उनकी साड़ी ऊपर कर दी।

“तू भी माँ बड़ी रंडी हो गई है... चल... 5 दिन से तू मेरे लंड से नहीं चुदी है... सुबह-सुबह सबसे प्यारी चूत का मजा ले लूँगा...”

परम ने सुंदरी की पेटीकोट खींचकर नीचे किया, अपना सख्त लंड निकाला और सीधे माँ की चूत पर रख दिया। एक जोरदार धक्के के साथ पूरा लंड अंदर चला गया।

“आआह्ह्ह... परम... धीरे बेटा... तेरी माँ की चूत अभी भी सेठजी के वीर्य से भरी हुई है...” सुंदरी कराह उठी।

परम तेज-तेज धक्के मारते हुए बोला,

“माँ... आज तेरी चूत बहुत ढीली लग रही है... कितने लंडों ने कल रात तेरी चूत मारी? बोल... कितने मर्दों ने तेरी चूत को भोसड़ा बनाया?”
फनलवर रचित।

सुंदरी ने परम की कमर पकड़कर कूल्हे हिलाते हुए शर्माते हुए जवाब दिया,

“चार... चार लंड ने मेरी चूत मारी बेटा... सेठजी ने सबसे पहले... फिर उनके दो दोस्तों ने... और आखिर में तू...”

परम ने और जोर से ठोका,

“माँ... तू अब पूरी रंडी बन गई है... तेरी चूत अब एक लंड से संतुष्ट नहीं होती... बोल... कितने लंड चाहिए तेरी चूत को...? सेठजी का... उनके दोस्तों का... या मेरा...?”

सुंदरी ने आँखें बंद करके कराहते हुए कहा,

“तेरा... और तेरे बाप का... बस ये दो ही काफी हैं... लेकिन जब-जब कोई नया मोटा लंड मिलता है... मेरी चूत पागल हो जाती है बेटा... मुझे रोक नहीं पाती...”

परम ने माँ को बिस्तर पर लिटाया, टाँगें कंधों पर रखीं और गहरी चुदाई करते हुए बोला,

“तो आज मैं तेरी चूत को इतना फाड़ दूँगा कि तीन दिन तक तू ठीक से चल नहीं पाएगी...”

सुंदरी ने परम की पीठ पर नाखून गड़ाते हुए चीखी,

“हाँ बेटा... फाड़ दो... अपनी रंडी माँ की चूत फाड़ दो... जितना जोर से मार सको... मारो...!”

परम तेज-तेज धक्के मारने लगा, लेकिन कुछ ही देर बाद उसे महसूस हुआ कि सुंदरी को पूरा मजा नहीं आ रहा है। उसकी चूत अभी भी सेठजी के वीर्य से भरी हुई थी और थोड़ी ढीली महसूस हो रही थी।

परम ने लंड निकालते हुए पूछा, “माँ... लौड़ा निकाल दूँ क्या? बाद में चोदूँगा...”

सुंदरी ने तुरंत परम की कमर पकड़ ली और बोली,

“नहीं परम... तेरे लौड़े जैसा मजा तो किसी के साथ नहीं आता... चल... अपनी माँ की चूत को अच्छे से फाड़...”

सुंदरी ने कमर हिलानी शुरू कर दी और परम का लंड अपनी चूत में पंप करने लगी।

“कल से तेरा ये 5वाँ लंड है जो मुझे चोद रहा है... अब चुदाई का पूरा मजा दे और ले... मार अपनी प्यारी माँ की चूत को... और सुजा दे... अपने बाप की तरह... देख, तेरी बहन की चूत की हालत कैसी कर दी है तेरे बाप के लंड ने... बेचारी ठीक से चल नहीं सकती...”

परम ने जोर-जोर से ठुकाई शुरू कर दी। सुंदरी की चीखें कमरे में गूँजने लगीं।
एडिट मैत्री ने किया।

महक और मुनीम यह सब देख रहे थे। महक ने पापा का हाथ पकड़कर उन्हें दूसरे कमरे में ले गई।

अब परम और सुंदरी अकेले थे। परम ने माँ को बिस्तर पर लिटाया, टाँगें कंधों पर रखीं और गहरी चुदाई करने लगा।

“साले... कौन-कौन मादरचोद किस्मत वाले हैं जिन्होंने तेरी मस्त चूत का मजा लिया?” परम ने धक्के मारते हुए पूछा।

सुंदरी हाँफते हुए बोली, “बेटा... बहुत मजा आया... चार लोगों से एक साथ चुदवाने में... तू चुदाई का मजा ले, सब बताती हूँ...”



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Funlover.

 
दूसरे कमरे में

महक ने पापा का हाथ पकड़कर उन्हें दूसरे कमरे में खींच लिया। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ, महक ने मुनीम को जोर से दीवार से सटा दिया और उनकी छाती पर अपने नंगे स्तन दबाते हुए गहरी किस करने लगी।
मैत्री द्वारा डिटेड।

महक मुनीम को बिस्तर पर लिटाकर उनके ऊपर चढ़ गई। उसकी सूजी हुई चूत अभी भी पापा के वीर्य से चिपचिपी थी।

“बाबूजी... आज मैं कहीं नहीं जा रही... आपकी बेटी की चूत और गांड दोनों आपकी हैं... जब तक मन न भर जाए, चोदते रहो...”

मुनीम ने महक की कमर पकड़ ली और बोला,

“आज तेरी चूत को और फाड़ दूँगा...”

“बाबूजी... आज मैं कहीं नहीं जा रही... मेरी चूत और गांड दोनों आपकी हैं... जब तक आपका मन न भर जाए, मुझे चोदते रहो...” महक ने पापा के कान में फुसफुसाते हुए कहा।

मुनीम की आँखों में भूख जग गई। उन्होंने महक को उठाकर बिस्तर पर पटक दिया। महक की टाँगें अभी भी सूजी हुई थीं, चूत और गांड लाल और थोड़ी फूली हुई थीं।

मुनीम ने महक की टाँगें चौड़ी कीं और घुटनों के बल बैठकर अपनी बेटी की चूत को देखा।

“उफ्फ बेटी... तेरी चूत कितनी सूजी हुई है... बबलू और मेरे लंड ने मिलकर भोसड़ा बना दिया है...”

महक ने शर्माते हुए लेकिन कामुक स्वर में कहा, “हाँ बाबूजी... आपका लंड तो सबसे खतरनाक है... मेरी चूत अभी भी आपके वीर्य से भरी हुई है...”

मुनीम ने झुककर महक की सूजी चूत को चाटना शुरू कर दिया। जीभ से क्लिटोरिस को चूसते हुए, अंदर की गर्मी को चाटते हुए बोले,

“आज तेरी चूत और गांड दोनों को फिर से फाड़ दूँगा...”

महक ने पापा के सिर को अपनी चूत पर दबाते हुए कराहा, “हाँ बाबूजी... चाटो... अपनी बेटी की चूत चाटो... आह्ह्ह... जीभ अंदर डालो...”

मुनीम ने महक को चारों खाने चित्त लिटाया, टाँगें कंधों पर रखीं और मिशनरी पोजीशन में लंड को चूत पर रखा। एक जोरदार धक्के के साथ पूरा मोटा लंड अंदर चला गया।

“आआआह्ह्ह... बाबूजी... फट गई... बहुत गहरा जा रहा है...!” महक चीख उठी।

मुनीम ने तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ महक के भारी स्तन उछल रहे थे।
फनलवर की प्रस्तुति।

“तेरी चूत आज भी कितनी टाइट और गर्म है बेटी... परम और बबलू के लंड के बावजूद भी...” मुनीम ने हाँफते हुए कहा।

कुछ देर बाद मुनीम ने महक को घुटनों पर मोड़ दिया - डॉगी स्टाइल। महक की मोटी, गोल गांड ऊपर थी। मुनीम ने गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा और लंड को गांड के छेद पर रख दिया।

“आज तेरी गांड भी फाड़नी है...”

“हाँ बाबूजी... फाड़ दो... अपनी बेटी की गांड को भी अपना बना लो...” महक ने कूल्हे पीछे करके कहा।

मुनीम ने लंड पर थूक लगाया और धीरे-धीरे पूरा लंड महक की गांड में ठेल दिया। महक दर्द और मजा के मिश्रण में चीख रही थी।

“आह्ह्ह... बहुत मोटा है... मेरी गांड फट गई... लेकिन मत रुको... जोर से चोदो...”

मुनीम ने महक की कमर पकड़कर तेज-तेज धक्के मारे। गांड की चुदाई के बाद फिर से चूत में लंड डाला और महक को ऊपर बिठाकर (Cowgirl) चोदा। महक पापा के लंड पर उछल-उछलकर खुद चुद रही थी।

आखिरकार मुनीम ने महक को नीचे लिटाया, टाँगें कंधों पर रखीं और अंतिम जोरदार राउंड शुरू किया।

“बाबूजी... भर दो... अपनी बेटी की चूत में अपना गरम वीर्य भर दो...!” महक चीखी।

मुनीम ने जोर से गरज कर महक की चूत के गहरे हिस्से में मोटी-मोटी धारें छोड़ दीं।

दोनों थके हुए, पसीने से तर, एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। महक पापा की छाती पर सिर रखे हुए हाँफ रही थी।

“बाबूजी... आपका लंड ही सबसे अच्छा है... मुझे सिर्फ आपका और परम का लंड चाहिए...”

मुनीम ने बेटी के बाल सहलाते हुए मुस्कुराया।
रचयिता फनलवर है।



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यही तक दोस्तों।

आपके कोमेंट की प्रतीक्षा सह।


Funlover की ओर से जय भारत।।
 
काफी गर्मागर्म अपडेट दिए है । बबलू के जाने के बाद पहले मुनीम और महक का रस टपकाने वाला अपडेट और फिर सुन्दरी और परम के आने पर महक और सुन्दरी की कामुक बातों से फिर से घर मे सैक्स का माहौल बन गया और अपनी माँ सुन्दरी के लिए कई दिनों से तरसता परम ने मौका ताड़ लिया और सुन्दरी को कमरे में लेजाकर समागम शुरू कर दिया उधर पूरी रात और सुबह तक संभोग रत रही जवान लड़की अपने भाई और माँ का जलवा देख कर जलन में ही सही अपने बाप को फिर से कमरे में लेजाकर कॉम्पिटिशन करने लगी । घरेलू चुदाई समारोह शुरू हो गया । आगे देखना रोचक रहेगा यह कहाँ तक जाता है और इसका क्या अंजाम होता है । पिछले कई एपिसोड बहुत ही कामुक, लंबे और कुछ ज्यादा ही नयापन लिए हुए है । बहुत ही उम्दा काम किया गया है । मेरी एक इच्छा थी कि जो मैंने बहुत पहले शादी समाहरोह शुरू होने पर जाहिर की थी कि एक अपडेट महक सुन्दरी परम और मुनीम को लेकर घरेलू माहौल में एकसाथ लिखना । आपने काफी हद तक वह कार्य कर दिया है बाकी इच्छा अनुरूप अगर फ्यूचर में कभी इन चारों को एक ही मंच पर दिखा सके तो बहुत खुशी होगी ।
Pics और GIF की बात को लेकर आपका स्टेटमेंट एकदम सही है पाठक अपनी अपनी इमेजिनेशन से उस सीन को इमेजिन करे तो ज्यादा अच्छा रहेगा । और आपकी स्टोरी pics और GIF की मोहताज नही है । शानदार एपिसोड्स लिखने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद ।
 
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