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- Dec 5, 2013
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फीर दुसरे दिन सबलोग चाइ नास्ता कर रहे थे तब दो दो बच्चे सम्हालनेमे तकलीफ ना हो इसीलीये पुनमने चंदाको भी कुछ दिन गांव आनेके लीये कहा.. तो चंदाका लखनकी ओर देखते चहेरा उतर गया.. लेकीन पुनमने उनके कानमे कुछ कहेते बात सम्हालली.. तो चंदा भी मुस्कुराते जानेके लीये राजी होगइ..
तभी देवायतके फोनपे भानुका फोन आगया.. ओर सबको गांव आनेके लीये कहा.. फीर देवायतने सबको भानुके घर सीफ्ट करनेकी खबर देदी.. ओर कहाकी कल सबको भानुके नये घरपे जाना हे.. वहा उसने वास्तु हवन ओर पुरे गांवको खानेके लीये न्योता दीया हे.. जीसे सुनकर नीलम बहुत खुस होगइ.. सबलोग अेक साथ जानेके लीये तैयार होगये.. ओर तैय हुआकी सब लोग आश्रम होकर जायेगे..
पुनमने दया ओर रजुको भी फोन कीया तो सीर्फ दया आनेके लीये तैयार होगइ.. ओर रजीया होस्टेलकी वजहसे नही आरही थी.. देवायत लखन ओर भावीका ओर सृतीने अपनी अपनी कार लेली.. सबलोग जानेकी तैयारीया कर रहे थे तब दया भी तैयार होकर आगइ.. फीर सबलोग घरको ताला लगाकर नीकल गये..
आश्रम पहोये तो आज आश्रममे अेक अलग ही रोनक थी.. बाबा सबको देखकर बहुत खुस होगये.. सबने उनका आशीर्वाद लीया ओर वही बैठ गये.. तब भावनाकी बच्ची रोने लगी.. तो बाबाने उसे देनेको कहा.. ओर जैसे ही बाबाने बच्चीको लीया वो सांत होगइ.. ओर बाबाके सामने पहेली बार हसने लगी..
जीसे देखकर बाबाकी आंखोमे भी हर्षके आसुं आगये.. जैसे ही बाबा उनके हाथको सहेलाने लगे बच्चीने बाबाकी उंगली पकडली.. भावनाकी पहेली बच्चीका नाम तो बाबाने पहेलेसे ही सख दीया था.. विभा.. फीर इस बचीने बाबाका दामन थामे रखा था तो बाबाने इनका ना दामीनी रख दीया..
पुनमकी बच्चीका नाम पुजा तो मंजु रखके ही गइ थी.. तो चंदाकी बच्चीका नाम साधना रखा.. फीर बाबाके साथ कुछ समय बीताके सबलोग गांव चले गये.. तो देवायतकी सभी बीवीया हवेलीपे आगइ.. साथमे वसुधा भी थी.. जो लखनको देखते ही सरमा गइ.. सबलोगोने बच्चोका अच्छेसे कलश घुमाकर स्वागत कीया..
फीर सबलोग बच्चोको गोदमे लेकर उनके साथ खेलने लगे.. इसी दौरान लखन खेतोकी ओर नीकल गया.. देखा तो वहा खटीयापे हरीया बैठा हुआ था.. ओर उनकी दुसरी बीवी रेणु अपने बच्चेको दुध पीलाते खटीयाके पास नीचे हरीयाके पास बैठी थी.. जैसे ही लखन आया वो सरमाकर बच्चेको लेकर चली गइ..
लखन : (हरीयाके पास बैठते) हरी.. भानुभाइ दीखाइ नही देते.. कही बहार गये हे क्या..?
हरीया : (देखते ही खटीयासे खडा होते) अरे छोटेमालीक आप..? आइअे.. आइअे.. बैठीये.. भानुभाइ तो घरपे हे.. कल नये घरपे हवन हेनां.. तो दो तीन मजदुरो ओर अपना टेम्पो लेकर सामान सीफ्ट कर रहे हे.. मे आपके लीये कुछ लाउ..?
लखन : (खडा होते) नही हरी.. मे वही चलता हु.. देखता हु कीतना सामान अभी बाकी हे..
फीर लखन नदीके उस पार भाजुके नये घरपे जाता हे.. वहा सीर्फ सरलाकाकी थी.. जो सामानके बीच अपनी वोही पुरानी खठीयापे बैठी थी.. जैसे ही सखन आया वो खडी होगइ.. ओर जटसे दरवाजा बंध करलीया.. फीर लखनको लेकर अेक खाली रुममे चली गइ.. ओर लखनके होठो चुमने लगी..
लखन : (हसते) अरे काकी क्या कर रही हो..? कोइ देख लेगा.. सबलोग कीधर हे..?
सरला : (मुस्कुराते) कोइ नही हे.. रमा वही हे.. सायद अब आखरी फेरा होगा.. भानुके साथ आयेगी.. वो सामान लेने गया हे.. अच्छा हुआ तु आगया.. चल देर मत कर.. अेक बार तेरी काकीको खुस करदे..
लखन : (मुस्कुराते) क्या काकी..? ये नया घर हे.. कुछ तो सरम करो.. मे अभी कुछ भी करने वाला नही हु.. क्या सारा दिन यही काम करता हु..? अेक बार हवन होजाने दो.. फीर तो यही मीलना हे.. तो फीर चलो मे वही जाता हु.. उनकी कुछ मदद करदु..
सरला : (हाथ पकडते) अरे कही नही जाना.. अब सबकुछ आ गया हे.. बस बचा कुचा सामान लेने गया हे.. हमारे लीये तो यही हवन हे.. जबसे तेरा बडा हथीयार लीया हे तबसे मे पागल हो रही हु.. मेरी काम वासना ओर बढ गइ हे.. चल नखरे मत कर.. नये घरमे उद्घाटन करदे.. ताकी ये घरभी उस घरकी तराह कामुक्तासे भरा रहे.. उस दिन आग लगाकर गया फीर तो दीखा ही नही.. कीतना इन्तजार कीया तेरा.. चल सुरु होजा.. देर मत कर..
लखन : (मुस्कुराते) अरे काकी.. मे कीतना काममे फसा था.. सुनो.. अभी भावना भाभी ओर चंदा भाभीको बेबी हुइ हे.. हमारी मंजुमोम वापस आगइ.. हम सबलोग आये हे.. सुना हे कल कुछ हवन बवन रखा हे आपने..?
सरला : (सारी कमर तक उची करते अेक बक्षेसे हाथ टीकाकर जुक गइ) हां.. इसीलीये तो तुम सबको बुलाया हे.. देर मत कर.. उनके आनेसे पहेले नीपट जायेगा.. चल सुरु होजा..
लखन : (हसते पेन्टकी क्लीप खोरते) आप मानोगी नही.. कीतनी चुखकड होगइ हो..
सरला : (पीछे देखते) अरे वोतो जवानीके दहेलीजपे कदम रखा तबसे ही मे बडी चुदकड हु.. चल सुरु होजा..
फीर लखन मुस्कुराते पेन्टकी जीप खोलता हे.. ओर सरलाके पीछे जाकर उनकी कमरको थाम लीया.. ओर अेक ही जटकेमे पुरा हथीयार सरलाकी चुतमे उतार दीया.. तो सरला हल्केसे मुहपे हाथ रखते चीख पडी.. फीर लखनने जोरोसे कमर हीलाते मोर्चा सम्हाल लीया.. पुरे कमरा सरलाकी कामुक सीसकारीयोसे गुंजने लगा..
लखनको पता नही थाकी सरलाकाकी की इतनी उार होनेके बावजुद भी इतनी हवसी होगी.. वो खडा होते पीछेसे धनाधन सरलाको चोदता रहा.. ओर आखीर दोनो अपनी मंजीलपे पहोंच गये.. ओर भानुके वापस आनेके डरसे लखनने दुसरा राउन्ड नही लगाया.. उसने तो बस.. सरलाकी भावनाका सन्मान कीया.. सरलाकाकीने अेक कपडेसे अपनी चुतको साफ कीया.. फीर दोनो कपडे सही करते बहार आगये.. ओर खटीयापे बैठ गये..
लखन : (मुस्कुराते) क्यु काकी.. मजा आया..?
सरला : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. बहुत.. जो मजा तु देता हे वो ओर कीसीके साथ नही आया.. कीतने दिनोके बाद मीला हे मुजे..
लखन : (मुस्कुराते) काकी.. इस उारमे भी आपके अंदर बहुत आग हे.. कीतनी होट हो आप..
सरला : (सरमाकर धीरेसे) लखन.. तु मेरे बारेमे सब जानता तो हे.. मे सुरुसे ही अेक कामी ओरत हु.. तेरे बापुके बाद देवुने भी मेरा खुब खयाल रखा हे.. अब तुजे रखना हे..
लखन : (मुस्कुराते) अच्छा वो सबतो ठीक हे.. क्या आप भानुभाइके साथ कुछ आगे बढी की नही..? मतलब उनको सेट कीयाकी नही..?
सरला : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हां.. कमीना मानता ही नही था.. बहोत बुध्धु हे.. उनको बहुत संकोच हो रहा था.. फीर मेने उसे कहाकी मे सुरुसे ही बहुत कामी ओरत हु अगर तु नही माना तो बहार कीसी ओरसे ठुकवानेकी बात कही.. तो फौरन मान गया.. तु कहेता था अैसा ही हे.. उनको वाकइ बडी उमरकी ओरते ही अच्छी लगती हे..
लखन : (मुस्कुराते) काकी.. आप वाकइ इतनी होट होकी वो आपके दीवाने हो जायेगे..
सरला : (मुस्कुराते) सच कहा तुने.. जब हम पहेली बार मीले फीर तो मेरा दिवाना हो गया हे.. देखना कीसीको पताना चले.. अब रमासे ज्यादा तो वो मेरे पीछे पडा हुआ हे.. लेकीन उनको कुछ प्रोबलेम लगता हे.. कमीना हर बार कोइ गोली खाता हे.. उनके बाद करता हे..
लखन : (मुस्कुराते) फीकर मत करो.. उनका कुछ इलाज चल रहा हे.. तो पहेलेकी तराह ठीक हो जायेगे.. अब तो आपका घरपे ही जुगाड होगया.. काकी.. आपके तो माजे ही मजे हे.. हें..हें..हें..
सरला : (मुस्कुराते) अरे क्या खाक मजे हे.. जो मजा तु देता हे वो भानुसे नही मीलता.. बस.. काम चल जाता हे.. अच्छा हुआ देवुने भावना ओर तुमने रमाको सम्हाल लीया.. वरना उसे सम्हालनेके लीये भानुके बसकी बात नही हे.. कमीनी मुजसे भी दो कदम आगे नीकली.. तु रमाको सम्हालले.. मे भानुको सम्हाल लुगी.. ओर कभी कभी तुभी आता जाता रहे.. वैसे क्या हुआ हे उनको..?
लखन : (मुस्कुराते) कुछ खास नही.. बस.. ज्यादा सेक्स करनेकी वजहसे कुछ नीजी प्रोबलेम.. आप फीकर मत करो.. बहुत ही जल्द सब ठीक होजायेगा..
सरला : (थोडे गुस्सेमे) हां तो होगा ही.. कमीना सारा दीन वो कलमुही रीटाके साथ ही लगा रहेता हे.. ये नही की कुछ घरकी ओरतोपे थोडा ध्यान दे..
तभी टेम्पोकी आवाज आती हेतो लखन दरवाजा खोल देता हे.. कुछ ही देरमे मजदुरो सामान लेकर अंदर आने लगे.. तभी पीछे भानु ओर रमा भी आगये.. तो भानु लखनको देखते ही खुसीके मारे उनके गले लग गया.. तो रमा लखनको देखते ही सरमा गइ.. ओर अपने बढे हुअे पेटपे हाथ घुमाने लगी..
फीर लखनने भानु ओर रमाको भावना ओर चंदाकी बच्चीकी खुसखबर सुनाइ.. तो सरला ओर रमा बहुत ही खुस होगइ.. अब भानु भावनाको पुरी तराह भुल चुका था.. फीर सामान सेट करना था.. ओर कलके हवनकी तैयारीया भी करनी थी.. ज्यादातर उसने तैयारीया तो करली थी..
फीर भी भानु लखनके साथ हवनकी तैयारीया करने लगा.. ओर लखनने नीलम ओर लताको भी फोन करके वहा बुला लीया.. जैसे ही नीलम लता आइ तो नीलम लखनको देखकर सरमा गइ.. ओर ये बात रमाने नोटीस करली.. नीलमने रमाको ज्यादा पेट नीकलनेकी वजहसे अेक तरफ बीठा दीया.. ओर घरका सामान सेट करने लगी..
रमा नीलमको देखती रही.. क्युकी अब नीलमका सरीर काफी भर गया था.. वो अेक कुआरी लडकीसे ज्यादा अेक सादी सुधा ओरतकी तराह दीख रही थी.. फीर लखन ओर भानुने मीलकर हलवाइ वालोको ओर पंडाल वालोको बोल दीया फीर गांवके पंडीतसे भी बात करली.. ओर साथमे भानु सबको फोन करके न्योता भी देता रहा.. ओर बीच बीचमे लखन नीलम ओर लताकी मदद भी करता रहा..
वंदना ओर पुनमको पता चला तो वोभी आगइ ओर साम होते होते लगे हाथो बहुत कुछ सामान सेट करलीया जो कलके लीये जरुरी था.. आज कामकी वजहसे पुनमने सबके खानेका इन्तजाम हवेलीपे ही करलीया.. ओर काम खतम होते ही सबलोग हवेलीपे आ गये.. वहा रमाने चंदा ओर भावनाके बच्चेको सगुन दीया..
रातके खानेके बाद रश्मी चारु नीशा ओर वसुधा भी आगइ.. सबलोग भावना ओर चंदाकी बेटीको प्यार देते आपसमे मस्ती मजाक करते रहे.. अैसा लग रहा था सबकी लाइफ फीरसे पटरीपे आगइ थी.. सबको पता थाकी अब सबकी मंजील लखन ही हे.. तो सबने मीलकर लखनका खुब मजाक उडाया.. ओर मौका मीलते ही सब अेक दुसरेसे छीपकर लखनसे आंख मीचोली खेल लेती..
इस रात लखनको पुनम सृती भावीका ओर राधीकाने खुब प्यार दीया.. दुसरे दिन सबलोग भानुके घरपे तैयार होकर चले गये.. वहा भानु ओर रमा हवनमे बैठे तो साथमे सरलाकाकी ओर नीलम भी बैठी थी.. आज नीलम भी अच्छेसे तैयार होते बहुत ही जच रही थी.. ओर छुपकेसे लखनसे आंखोसे इसारा कर रही थी..
आखीर भानु इस गांजमे रहेने आही गया.. वहा लखनके सभी दोस्त अपनी फेमीलीके साथ आये थे.. सबलोग काममे बीजी थे.. लखनको पुनमके माध्यमसे पता चल गया था.. की उनके सभी दोस्तोकी कुछना कुछ नइ खीचडी पक रही हे.. तब लखन अेक अेक दोस्तको मीलकर उनका हाल चाल जानने लगा..
तो सबकी लाइफ अब मजेसे कट रही थी.. सभी दोस्तोमे अेक अच्छी अंडरसेन्डींग थी.. ज्यादातर अपना हर राज दोस्तोके बीच खुलकर बता देते थे.. ओर इस बातकी कीसी ओरको कानो कान खबर भी नही मीलती.. सब अेक दुसरेपे बहुत विस्वास करते थे.. लेकीन कुछ बाते अैसी थी जो सभी दोस्त अेक दुसरेसे अपने कुछ अफैर छीपाने लगे थे..
लखनने पहेले साहीलको पकडा.. तो साहीलने लखनको सबकुछ सच बता दीया.. क्युकी उसे पता था लखनको पुनमके माध्यमसे अैसे ही सबकुछ पता चल जाता हे.. साहीलने बतायाकी उस दिनके बाद वो सबानाको दो बार ओर बेंगलोर मीलकर आगया था.. क्युकी अब सबाना साहीलके लीये पुरी तराह पागल हो चुकी थी..
ओर जब भी कादीर टुरपे होता तो वो अक्सर सायराको मीलने उनके घर चला जाता.. ओर सायराकी जमकर लेता.. वो सायराको कइ बार मील चुका था.. ओर साथमे जरीनाके साथ अफैरकी बात भी बतादी.. येभी कहाकी सलमा ओर जरीना हर रात बारी बारी उनके साथ सोने लीगी हे.. जीससे जरीना भी उनसे सचे दिलसे प्यार करने लगी हे..
ओर ये भी बता दीयाकी दोनो मां बेटी उनको अपना खसम मानने लगी थी.. सायरा ओर जरीना दोनो अब उनसे प्रेगनेन्ट भी हो चुकी हे.. बस.. अब उसे सबानाके वापस आनेका इन्तजार था.. फीर साहीलने अपने चाचा ओर खेतोकी अेक मजदुर लडकीके बारेमे भी बता दीया.. साहीलने लखनको सबकुछ सच बता दीया.. फीर उसने श्रीधरसे भी अकेलेमे बातकी.. तब..
तभी देवायतके फोनपे भानुका फोन आगया.. ओर सबको गांव आनेके लीये कहा.. फीर देवायतने सबको भानुके घर सीफ्ट करनेकी खबर देदी.. ओर कहाकी कल सबको भानुके नये घरपे जाना हे.. वहा उसने वास्तु हवन ओर पुरे गांवको खानेके लीये न्योता दीया हे.. जीसे सुनकर नीलम बहुत खुस होगइ.. सबलोग अेक साथ जानेके लीये तैयार होगये.. ओर तैय हुआकी सब लोग आश्रम होकर जायेगे..
पुनमने दया ओर रजुको भी फोन कीया तो सीर्फ दया आनेके लीये तैयार होगइ.. ओर रजीया होस्टेलकी वजहसे नही आरही थी.. देवायत लखन ओर भावीका ओर सृतीने अपनी अपनी कार लेली.. सबलोग जानेकी तैयारीया कर रहे थे तब दया भी तैयार होकर आगइ.. फीर सबलोग घरको ताला लगाकर नीकल गये..
आश्रम पहोये तो आज आश्रममे अेक अलग ही रोनक थी.. बाबा सबको देखकर बहुत खुस होगये.. सबने उनका आशीर्वाद लीया ओर वही बैठ गये.. तब भावनाकी बच्ची रोने लगी.. तो बाबाने उसे देनेको कहा.. ओर जैसे ही बाबाने बच्चीको लीया वो सांत होगइ.. ओर बाबाके सामने पहेली बार हसने लगी..
जीसे देखकर बाबाकी आंखोमे भी हर्षके आसुं आगये.. जैसे ही बाबा उनके हाथको सहेलाने लगे बच्चीने बाबाकी उंगली पकडली.. भावनाकी पहेली बच्चीका नाम तो बाबाने पहेलेसे ही सख दीया था.. विभा.. फीर इस बचीने बाबाका दामन थामे रखा था तो बाबाने इनका ना दामीनी रख दीया..
पुनमकी बच्चीका नाम पुजा तो मंजु रखके ही गइ थी.. तो चंदाकी बच्चीका नाम साधना रखा.. फीर बाबाके साथ कुछ समय बीताके सबलोग गांव चले गये.. तो देवायतकी सभी बीवीया हवेलीपे आगइ.. साथमे वसुधा भी थी.. जो लखनको देखते ही सरमा गइ.. सबलोगोने बच्चोका अच्छेसे कलश घुमाकर स्वागत कीया..
फीर सबलोग बच्चोको गोदमे लेकर उनके साथ खेलने लगे.. इसी दौरान लखन खेतोकी ओर नीकल गया.. देखा तो वहा खटीयापे हरीया बैठा हुआ था.. ओर उनकी दुसरी बीवी रेणु अपने बच्चेको दुध पीलाते खटीयाके पास नीचे हरीयाके पास बैठी थी.. जैसे ही लखन आया वो सरमाकर बच्चेको लेकर चली गइ..
लखन : (हरीयाके पास बैठते) हरी.. भानुभाइ दीखाइ नही देते.. कही बहार गये हे क्या..?
हरीया : (देखते ही खटीयासे खडा होते) अरे छोटेमालीक आप..? आइअे.. आइअे.. बैठीये.. भानुभाइ तो घरपे हे.. कल नये घरपे हवन हेनां.. तो दो तीन मजदुरो ओर अपना टेम्पो लेकर सामान सीफ्ट कर रहे हे.. मे आपके लीये कुछ लाउ..?
लखन : (खडा होते) नही हरी.. मे वही चलता हु.. देखता हु कीतना सामान अभी बाकी हे..
फीर लखन नदीके उस पार भाजुके नये घरपे जाता हे.. वहा सीर्फ सरलाकाकी थी.. जो सामानके बीच अपनी वोही पुरानी खठीयापे बैठी थी.. जैसे ही सखन आया वो खडी होगइ.. ओर जटसे दरवाजा बंध करलीया.. फीर लखनको लेकर अेक खाली रुममे चली गइ.. ओर लखनके होठो चुमने लगी..
लखन : (हसते) अरे काकी क्या कर रही हो..? कोइ देख लेगा.. सबलोग कीधर हे..?
सरला : (मुस्कुराते) कोइ नही हे.. रमा वही हे.. सायद अब आखरी फेरा होगा.. भानुके साथ आयेगी.. वो सामान लेने गया हे.. अच्छा हुआ तु आगया.. चल देर मत कर.. अेक बार तेरी काकीको खुस करदे..
लखन : (मुस्कुराते) क्या काकी..? ये नया घर हे.. कुछ तो सरम करो.. मे अभी कुछ भी करने वाला नही हु.. क्या सारा दिन यही काम करता हु..? अेक बार हवन होजाने दो.. फीर तो यही मीलना हे.. तो फीर चलो मे वही जाता हु.. उनकी कुछ मदद करदु..
सरला : (हाथ पकडते) अरे कही नही जाना.. अब सबकुछ आ गया हे.. बस बचा कुचा सामान लेने गया हे.. हमारे लीये तो यही हवन हे.. जबसे तेरा बडा हथीयार लीया हे तबसे मे पागल हो रही हु.. मेरी काम वासना ओर बढ गइ हे.. चल नखरे मत कर.. नये घरमे उद्घाटन करदे.. ताकी ये घरभी उस घरकी तराह कामुक्तासे भरा रहे.. उस दिन आग लगाकर गया फीर तो दीखा ही नही.. कीतना इन्तजार कीया तेरा.. चल सुरु होजा.. देर मत कर..
लखन : (मुस्कुराते) अरे काकी.. मे कीतना काममे फसा था.. सुनो.. अभी भावना भाभी ओर चंदा भाभीको बेबी हुइ हे.. हमारी मंजुमोम वापस आगइ.. हम सबलोग आये हे.. सुना हे कल कुछ हवन बवन रखा हे आपने..?
सरला : (सारी कमर तक उची करते अेक बक्षेसे हाथ टीकाकर जुक गइ) हां.. इसीलीये तो तुम सबको बुलाया हे.. देर मत कर.. उनके आनेसे पहेले नीपट जायेगा.. चल सुरु होजा..
लखन : (हसते पेन्टकी क्लीप खोरते) आप मानोगी नही.. कीतनी चुखकड होगइ हो..
सरला : (पीछे देखते) अरे वोतो जवानीके दहेलीजपे कदम रखा तबसे ही मे बडी चुदकड हु.. चल सुरु होजा..
फीर लखन मुस्कुराते पेन्टकी जीप खोलता हे.. ओर सरलाके पीछे जाकर उनकी कमरको थाम लीया.. ओर अेक ही जटकेमे पुरा हथीयार सरलाकी चुतमे उतार दीया.. तो सरला हल्केसे मुहपे हाथ रखते चीख पडी.. फीर लखनने जोरोसे कमर हीलाते मोर्चा सम्हाल लीया.. पुरे कमरा सरलाकी कामुक सीसकारीयोसे गुंजने लगा..
लखनको पता नही थाकी सरलाकाकी की इतनी उार होनेके बावजुद भी इतनी हवसी होगी.. वो खडा होते पीछेसे धनाधन सरलाको चोदता रहा.. ओर आखीर दोनो अपनी मंजीलपे पहोंच गये.. ओर भानुके वापस आनेके डरसे लखनने दुसरा राउन्ड नही लगाया.. उसने तो बस.. सरलाकी भावनाका सन्मान कीया.. सरलाकाकीने अेक कपडेसे अपनी चुतको साफ कीया.. फीर दोनो कपडे सही करते बहार आगये.. ओर खटीयापे बैठ गये..
लखन : (मुस्कुराते) क्यु काकी.. मजा आया..?
सरला : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. बहुत.. जो मजा तु देता हे वो ओर कीसीके साथ नही आया.. कीतने दिनोके बाद मीला हे मुजे..
लखन : (मुस्कुराते) काकी.. इस उारमे भी आपके अंदर बहुत आग हे.. कीतनी होट हो आप..
सरला : (सरमाकर धीरेसे) लखन.. तु मेरे बारेमे सब जानता तो हे.. मे सुरुसे ही अेक कामी ओरत हु.. तेरे बापुके बाद देवुने भी मेरा खुब खयाल रखा हे.. अब तुजे रखना हे..
लखन : (मुस्कुराते) अच्छा वो सबतो ठीक हे.. क्या आप भानुभाइके साथ कुछ आगे बढी की नही..? मतलब उनको सेट कीयाकी नही..?
सरला : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हां.. कमीना मानता ही नही था.. बहोत बुध्धु हे.. उनको बहुत संकोच हो रहा था.. फीर मेने उसे कहाकी मे सुरुसे ही बहुत कामी ओरत हु अगर तु नही माना तो बहार कीसी ओरसे ठुकवानेकी बात कही.. तो फौरन मान गया.. तु कहेता था अैसा ही हे.. उनको वाकइ बडी उमरकी ओरते ही अच्छी लगती हे..
लखन : (मुस्कुराते) काकी.. आप वाकइ इतनी होट होकी वो आपके दीवाने हो जायेगे..
सरला : (मुस्कुराते) सच कहा तुने.. जब हम पहेली बार मीले फीर तो मेरा दिवाना हो गया हे.. देखना कीसीको पताना चले.. अब रमासे ज्यादा तो वो मेरे पीछे पडा हुआ हे.. लेकीन उनको कुछ प्रोबलेम लगता हे.. कमीना हर बार कोइ गोली खाता हे.. उनके बाद करता हे..
लखन : (मुस्कुराते) फीकर मत करो.. उनका कुछ इलाज चल रहा हे.. तो पहेलेकी तराह ठीक हो जायेगे.. अब तो आपका घरपे ही जुगाड होगया.. काकी.. आपके तो माजे ही मजे हे.. हें..हें..हें..
सरला : (मुस्कुराते) अरे क्या खाक मजे हे.. जो मजा तु देता हे वो भानुसे नही मीलता.. बस.. काम चल जाता हे.. अच्छा हुआ देवुने भावना ओर तुमने रमाको सम्हाल लीया.. वरना उसे सम्हालनेके लीये भानुके बसकी बात नही हे.. कमीनी मुजसे भी दो कदम आगे नीकली.. तु रमाको सम्हालले.. मे भानुको सम्हाल लुगी.. ओर कभी कभी तुभी आता जाता रहे.. वैसे क्या हुआ हे उनको..?
लखन : (मुस्कुराते) कुछ खास नही.. बस.. ज्यादा सेक्स करनेकी वजहसे कुछ नीजी प्रोबलेम.. आप फीकर मत करो.. बहुत ही जल्द सब ठीक होजायेगा..
सरला : (थोडे गुस्सेमे) हां तो होगा ही.. कमीना सारा दीन वो कलमुही रीटाके साथ ही लगा रहेता हे.. ये नही की कुछ घरकी ओरतोपे थोडा ध्यान दे..
तभी टेम्पोकी आवाज आती हेतो लखन दरवाजा खोल देता हे.. कुछ ही देरमे मजदुरो सामान लेकर अंदर आने लगे.. तभी पीछे भानु ओर रमा भी आगये.. तो भानु लखनको देखते ही खुसीके मारे उनके गले लग गया.. तो रमा लखनको देखते ही सरमा गइ.. ओर अपने बढे हुअे पेटपे हाथ घुमाने लगी..
फीर लखनने भानु ओर रमाको भावना ओर चंदाकी बच्चीकी खुसखबर सुनाइ.. तो सरला ओर रमा बहुत ही खुस होगइ.. अब भानु भावनाको पुरी तराह भुल चुका था.. फीर सामान सेट करना था.. ओर कलके हवनकी तैयारीया भी करनी थी.. ज्यादातर उसने तैयारीया तो करली थी..
फीर भी भानु लखनके साथ हवनकी तैयारीया करने लगा.. ओर लखनने नीलम ओर लताको भी फोन करके वहा बुला लीया.. जैसे ही नीलम लता आइ तो नीलम लखनको देखकर सरमा गइ.. ओर ये बात रमाने नोटीस करली.. नीलमने रमाको ज्यादा पेट नीकलनेकी वजहसे अेक तरफ बीठा दीया.. ओर घरका सामान सेट करने लगी..
रमा नीलमको देखती रही.. क्युकी अब नीलमका सरीर काफी भर गया था.. वो अेक कुआरी लडकीसे ज्यादा अेक सादी सुधा ओरतकी तराह दीख रही थी.. फीर लखन ओर भानुने मीलकर हलवाइ वालोको ओर पंडाल वालोको बोल दीया फीर गांवके पंडीतसे भी बात करली.. ओर साथमे भानु सबको फोन करके न्योता भी देता रहा.. ओर बीच बीचमे लखन नीलम ओर लताकी मदद भी करता रहा..
वंदना ओर पुनमको पता चला तो वोभी आगइ ओर साम होते होते लगे हाथो बहुत कुछ सामान सेट करलीया जो कलके लीये जरुरी था.. आज कामकी वजहसे पुनमने सबके खानेका इन्तजाम हवेलीपे ही करलीया.. ओर काम खतम होते ही सबलोग हवेलीपे आ गये.. वहा रमाने चंदा ओर भावनाके बच्चेको सगुन दीया..
रातके खानेके बाद रश्मी चारु नीशा ओर वसुधा भी आगइ.. सबलोग भावना ओर चंदाकी बेटीको प्यार देते आपसमे मस्ती मजाक करते रहे.. अैसा लग रहा था सबकी लाइफ फीरसे पटरीपे आगइ थी.. सबको पता थाकी अब सबकी मंजील लखन ही हे.. तो सबने मीलकर लखनका खुब मजाक उडाया.. ओर मौका मीलते ही सब अेक दुसरेसे छीपकर लखनसे आंख मीचोली खेल लेती..
इस रात लखनको पुनम सृती भावीका ओर राधीकाने खुब प्यार दीया.. दुसरे दिन सबलोग भानुके घरपे तैयार होकर चले गये.. वहा भानु ओर रमा हवनमे बैठे तो साथमे सरलाकाकी ओर नीलम भी बैठी थी.. आज नीलम भी अच्छेसे तैयार होते बहुत ही जच रही थी.. ओर छुपकेसे लखनसे आंखोसे इसारा कर रही थी..
आखीर भानु इस गांजमे रहेने आही गया.. वहा लखनके सभी दोस्त अपनी फेमीलीके साथ आये थे.. सबलोग काममे बीजी थे.. लखनको पुनमके माध्यमसे पता चल गया था.. की उनके सभी दोस्तोकी कुछना कुछ नइ खीचडी पक रही हे.. तब लखन अेक अेक दोस्तको मीलकर उनका हाल चाल जानने लगा..
तो सबकी लाइफ अब मजेसे कट रही थी.. सभी दोस्तोमे अेक अच्छी अंडरसेन्डींग थी.. ज्यादातर अपना हर राज दोस्तोके बीच खुलकर बता देते थे.. ओर इस बातकी कीसी ओरको कानो कान खबर भी नही मीलती.. सब अेक दुसरेपे बहुत विस्वास करते थे.. लेकीन कुछ बाते अैसी थी जो सभी दोस्त अेक दुसरेसे अपने कुछ अफैर छीपाने लगे थे..
लखनने पहेले साहीलको पकडा.. तो साहीलने लखनको सबकुछ सच बता दीया.. क्युकी उसे पता था लखनको पुनमके माध्यमसे अैसे ही सबकुछ पता चल जाता हे.. साहीलने बतायाकी उस दिनके बाद वो सबानाको दो बार ओर बेंगलोर मीलकर आगया था.. क्युकी अब सबाना साहीलके लीये पुरी तराह पागल हो चुकी थी..
ओर जब भी कादीर टुरपे होता तो वो अक्सर सायराको मीलने उनके घर चला जाता.. ओर सायराकी जमकर लेता.. वो सायराको कइ बार मील चुका था.. ओर साथमे जरीनाके साथ अफैरकी बात भी बतादी.. येभी कहाकी सलमा ओर जरीना हर रात बारी बारी उनके साथ सोने लीगी हे.. जीससे जरीना भी उनसे सचे दिलसे प्यार करने लगी हे..
ओर ये भी बता दीयाकी दोनो मां बेटी उनको अपना खसम मानने लगी थी.. सायरा ओर जरीना दोनो अब उनसे प्रेगनेन्ट भी हो चुकी हे.. बस.. अब उसे सबानाके वापस आनेका इन्तजार था.. फीर साहीलने अपने चाचा ओर खेतोकी अेक मजदुर लडकीके बारेमे भी बता दीया.. साहीलने लखनको सबकुछ सच बता दीया.. फीर उसने श्रीधरसे भी अकेलेमे बातकी.. तब..