Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 118 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

फीर दुसरे दिन सबलोग चाइ नास्ता कर रहे थे तब दो दो बच्चे सम्हालनेमे तकलीफ ना हो इसीलीये पुनमने चंदाको भी कुछ दिन गांव आनेके लीये कहा.. तो चंदाका लखनकी ओर देखते चहेरा उतर गया.. लेकीन पुनमने उनके कानमे कुछ कहेते बात सम्हालली.. तो चंदा भी मुस्कुराते जानेके लीये राजी होगइ..

तभी देवायतके फोनपे भानुका फोन आगया.. ओर सबको गांव आनेके लीये कहा.. फीर देवायतने सबको भानुके घर सीफ्ट करनेकी खबर देदी.. ओर कहाकी कल सबको भानुके नये घरपे जाना हे.. वहा उसने वास्तु हवन ओर पुरे गांवको खानेके लीये न्योता दीया हे.. जीसे सुनकर नीलम बहुत खुस होगइ.. सबलोग अ‍ेक साथ जानेके लीये तैयार होगये.. ओर तैय हुआकी सब लोग आश्रम होकर जायेगे..

पुनमने दया ओर रजुको भी फोन कीया तो सीर्फ दया आनेके लीये तैयार होगइ.. ओर रजीया होस्टेलकी वजहसे नही आरही थी.. देवायत लखन ओर भावीका ओर सृतीने अपनी अपनी कार लेली.. सबलोग जानेकी तैयारीया कर रहे थे तब दया भी तैयार होकर आगइ.. फीर सबलोग घरको ताला लगाकर नीकल गये..

आश्रम पहोये तो आज आश्रममे अ‍ेक अलग ही रोनक थी.. बाबा सबको देखकर बहुत खुस होगये.. सबने उनका आशीर्वाद लीया ओर वही बैठ गये.. तब भावनाकी बच्ची रोने लगी.. तो बाबाने उसे देनेको कहा.. ओर जैसे ही बाबाने बच्चीको लीया वो सांत होगइ.. ओर बाबाके सामने पहेली बार हसने लगी..

जीसे देखकर बाबाकी आंखोमे भी हर्षके आसुं आगये.. जैसे ही बाबा उनके हाथको सहेलाने लगे बच्चीने बाबाकी उंगली पकडली.. भावनाकी पहेली बच्चीका नाम तो बाबाने पहेलेसे ही सख दीया था.. विभा.. फीर इस बचीने बाबाका दामन थामे रखा था तो बाबाने इनका ना दामीनी रख दीया..

पुनमकी बच्चीका नाम पुजा तो मंजु रखके ही गइ थी.. तो चंदाकी बच्चीका नाम साधना रखा.. फीर बाबाके साथ कुछ समय बीताके सबलोग गांव चले गये.. तो देवायतकी सभी बीवीया हवेलीपे आगइ.. साथमे वसुधा भी थी.. जो लखनको देखते ही सरमा गइ.. सबलोगोने बच्चोका अच्छेसे कलश घुमाकर स्वागत कीया..

फीर सबलोग बच्चोको गोदमे लेकर उनके साथ खेलने लगे.. इसी दौरान लखन खेतोकी ओर नीकल गया.. देखा तो वहा खटीयापे हरीया बैठा हुआ था.. ओर उनकी दुसरी बीवी रेणु अपने बच्चेको दुध पीलाते खटीयाके पास नीचे हरीयाके पास बैठी थी.. जैसे ही लखन आया वो सरमाकर बच्चेको लेकर चली गइ..

लखन : (हरीयाके पास बैठते) हरी.. भानुभाइ दीखाइ नही देते.. कही बहार गये हे क्या..?

हरीया : (देखते ही खटीयासे खडा होते) अरे छोटेमालीक आप..? आइअ‍े.. आइअ‍े.. बैठीये.. भानुभाइ तो घरपे हे.. कल नये घरपे हवन हेनां.. तो दो तीन मजदुरो ओर अपना टेम्पो लेकर सामान सीफ्ट कर रहे हे.. मे आपके लीये कुछ लाउ..?

लखन : (खडा होते) नही हरी.. मे वही चलता हु.. देखता हु कीतना सामान अभी बाकी हे..

फीर लखन नदीके उस पार भाजुके नये घरपे जाता हे.. वहा सीर्फ सरलाकाकी थी.. जो सामानके बीच अपनी वोही पुरानी खठीयापे बैठी थी.. जैसे ही सखन आया वो खडी होगइ.. ओर जटसे दरवाजा बंध करलीया.. फीर लखनको लेकर अ‍ेक खाली रुममे चली गइ.. ओर लखनके होठो चुमने लगी..

लखन : (हसते) अरे काकी क्या कर रही हो..? कोइ देख लेगा.. सबलोग कीधर हे..?

सरला : (मुस्कुराते) कोइ नही हे.. रमा वही हे.. सायद अब आखरी फेरा होगा.. भानुके साथ आयेगी.. वो सामान लेने गया हे.. अच्छा हुआ तु आगया.. चल देर मत कर.. अ‍ेक बार तेरी काकीको खुस करदे..

लखन : (मुस्कुराते) क्या काकी..? ये नया घर हे.. कुछ तो सरम करो.. मे अभी कुछ भी करने वाला नही हु.. क्या सारा दिन यही काम करता हु..? अ‍ेक बार हवन होजाने दो.. फीर तो यही मीलना हे.. तो फीर चलो मे वही जाता हु.. उनकी कुछ मदद करदु..

सरला : (हाथ पकडते) अरे कही नही जाना.. अब सबकुछ आ गया हे.. बस बचा कुचा सामान लेने गया हे.. हमारे लीये तो यही हवन हे.. जबसे तेरा बडा हथीयार लीया हे तबसे मे पागल हो रही हु.. मेरी काम वासना ओर बढ गइ हे.. चल नखरे मत कर.. नये घरमे उद्घाटन करदे.. ताकी ये घरभी उस घरकी तराह कामुक्तासे भरा रहे.. उस दिन आग लगाकर गया फीर तो दीखा ही नही.. कीतना इन्तजार कीया तेरा.. चल सुरु होजा.. देर मत कर..

लखन : (मुस्कुराते) अरे काकी.. मे कीतना काममे फसा था.. सुनो.. अभी भावना भाभी ओर चंदा भाभीको बेबी हुइ हे.. हमारी मंजुमोम वापस आगइ.. हम सबलोग आये हे.. सुना हे कल कुछ हवन बवन रखा हे आपने..?

सरला : (सारी कमर तक उची करते अ‍ेक बक्षेसे हाथ टीकाकर जुक गइ) हां.. इसीलीये तो तुम सबको बुलाया हे.. देर मत कर.. उनके आनेसे पहेले नीपट जायेगा.. चल सुरु होजा..

लखन : (हसते पेन्टकी क्लीप खोरते) आप मानोगी नही.. कीतनी चुखकड होगइ हो..

सरला : (पीछे देखते) अरे वोतो जवानीके दहेलीजपे कदम रखा तबसे ही मे बडी चुदकड हु.. चल सुरु होजा..

फीर लखन मुस्कुराते पेन्टकी जीप खोलता हे.. ओर सरलाके पीछे जाकर उनकी कमरको थाम लीया.. ओर अ‍ेक ही जटकेमे पुरा हथीयार सरलाकी चुतमे उतार दीया.. तो सरला हल्केसे मुहपे हाथ रखते चीख पडी.. फीर लखनने जोरोसे कमर हीलाते मोर्चा सम्हाल लीया.. पुरे कमरा सरलाकी कामुक सीसकारीयोसे गुंजने लगा..

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लखनको पता नही थाकी सरलाकाकी की इतनी उार होनेके बावजुद भी इतनी हवसी होगी.. वो खडा होते पीछेसे धनाधन सरलाको चोदता रहा.. ओर आखीर दोनो अपनी मंजीलपे पहोंच गये.. ओर भानुके वापस आनेके डरसे लखनने दुसरा राउन्ड नही लगाया.. उसने तो बस.. सरलाकी भावनाका सन्मान कीया.. सरलाकाकीने अ‍ेक कपडेसे अपनी चुतको साफ कीया.. फीर दोनो कपडे सही करते बहार आगये.. ओर खटीयापे बैठ गये..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु काकी.. मजा आया..?

सरला : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. बहुत.. जो मजा तु देता हे वो ओर कीसीके साथ नही आया.. कीतने दिनोके बाद मीला हे मुजे..

लखन : (मुस्कुराते) काकी.. इस उारमे भी आपके अंदर बहुत आग हे.. कीतनी होट हो आप..

सरला : (सरमाकर धीरेसे) लखन.. तु मेरे बारेमे सब जानता तो हे.. मे सुरुसे ही अ‍ेक कामी ओरत हु.. तेरे बापुके बाद देवुने भी मेरा खुब खयाल रखा हे.. अब तुजे रखना हे..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा वो सबतो ठीक हे.. क्या आप भानुभाइके साथ कुछ आगे बढी की नही..? मतलब उनको सेट कीयाकी नही..?

सरला : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हां.. कमीना मानता ही नही था.. बहोत बुध्धु हे.. उनको बहुत संकोच हो रहा था.. फीर मेने उसे कहाकी मे सुरुसे ही बहुत कामी ओरत हु अगर तु नही माना तो बहार कीसी ओरसे ठुकवानेकी बात कही.. तो फौरन मान गया.. तु कहेता था अ‍ैसा ही हे.. उनको वाकइ बडी उमरकी ओरते ही अच्छी लगती हे..

लखन : (मुस्कुराते) काकी.. आप वाकइ इतनी होट होकी वो आपके दीवाने हो जायेगे..

सरला : (मुस्कुराते) सच कहा तुने.. जब हम पहेली बार मीले फीर तो मेरा दिवाना हो गया हे.. देखना कीसीको पताना चले.. अब रमासे ज्यादा तो वो मेरे पीछे पडा हुआ हे.. लेकीन उनको कुछ प्रोबलेम लगता हे.. कमीना हर बार कोइ गोली खाता हे.. उनके बाद करता हे..

लखन : (मुस्कुराते) फीकर मत करो.. उनका कुछ इलाज चल रहा हे.. तो पहेलेकी तराह ठीक हो जायेगे.. अब तो आपका घरपे ही जुगाड होगया.. काकी.. आपके तो माजे ही मजे हे.. हें..हें..हें..

सरला : (मुस्कुराते) अरे क्या खाक मजे हे.. जो मजा तु देता हे वो भानुसे नही मीलता.. बस.. काम चल जाता हे.. अच्छा हुआ देवुने भावना ओर तुमने रमाको सम्हाल लीया.. वरना उसे सम्हालनेके लीये भानुके बसकी बात नही हे.. कमीनी मुजसे भी दो कदम आगे नीकली.. तु रमाको सम्हालले.. मे भानुको सम्हाल लुगी.. ओर कभी कभी तुभी आता जाता रहे.. वैसे क्या हुआ हे उनको..?

लखन : (मुस्कुराते) कुछ खास नही.. बस.. ज्यादा सेक्स करनेकी वजहसे कुछ नीजी प्रोबलेम.. आप फीकर मत करो.. बहुत ही जल्द सब ठीक होजायेगा..

सरला : (थोडे गुस्सेमे) हां तो होगा ही.. कमीना सारा दीन वो कलमुही रीटाके साथ ही लगा रहेता हे.. ये नही की कुछ घरकी ओरतोपे थोडा ध्यान दे..

तभी टेम्पोकी आवाज आती हेतो लखन दरवाजा खोल देता हे.. कुछ ही देरमे मजदुरो सामान लेकर अंदर आने लगे.. तभी पीछे भानु ओर रमा भी आगये.. तो भानु लखनको देखते ही खुसीके मारे उनके गले लग गया.. तो रमा लखनको देखते ही सरमा गइ.. ओर अपने बढे हुअ‍े पेटपे हाथ घुमाने लगी..

फीर लखनने भानु ओर रमाको भावना ओर चंदाकी बच्चीकी खुसखबर सुनाइ.. तो सरला ओर रमा बहुत ही खुस होगइ.. अब भानु भावनाको पुरी तराह भुल चुका था.. फीर सामान सेट करना था.. ओर कलके हवनकी तैयारीया भी करनी थी.. ज्यादातर उसने तैयारीया तो करली थी..

फीर भी भानु लखनके साथ हवनकी तैयारीया करने लगा.. ओर लखनने नीलम ओर लताको भी फोन करके वहा बुला लीया.. जैसे ही नीलम लता आइ तो नीलम लखनको देखकर सरमा गइ.. ओर ये बात रमाने नोटीस करली.. नीलमने रमाको ज्यादा पेट नीकलनेकी वजहसे अ‍ेक तरफ बीठा दीया.. ओर घरका सामान सेट करने लगी..

रमा नीलमको देखती रही.. क्युकी अब नीलमका सरीर काफी भर गया था.. वो अ‍ेक कुआरी लडकीसे ज्यादा अ‍ेक सादी सुधा ओरतकी तराह दीख रही थी.. फीर लखन ओर भानुने मीलकर हलवाइ वालोको ओर पंडाल वालोको बोल दीया फीर गांवके पंडीतसे भी बात करली.. ओर साथमे भानु सबको फोन करके न्योता भी देता रहा.. ओर बीच बीचमे लखन नीलम ओर लताकी मदद भी करता रहा..

वंदना ओर पुनमको पता चला तो वोभी आगइ ओर साम होते होते लगे हाथो बहुत कुछ सामान सेट करलीया जो कलके लीये जरुरी था.. आज कामकी वजहसे पुनमने सबके खानेका इन्तजाम हवेलीपे ही करलीया.. ओर काम खतम होते ही सबलोग हवेलीपे आ गये.. वहा रमाने चंदा ओर भावनाके बच्चेको सगुन दीया..

रातके खानेके बाद रश्मी चारु नीशा ओर वसुधा भी आगइ.. सबलोग भावना ओर चंदाकी बेटीको प्यार देते आपसमे मस्ती मजाक करते रहे.. अ‍ैसा लग रहा था सबकी लाइफ फीरसे पटरीपे आगइ थी.. सबको पता थाकी अब सबकी मंजील लखन ही हे.. तो सबने मीलकर लखनका खुब मजाक उडाया.. ओर मौका मीलते ही सब अ‍ेक दुसरेसे छीपकर लखनसे आंख मीचोली खेल लेती..

इस रात लखनको पुनम सृती भावीका ओर राधीकाने खुब प्यार दीया.. दुसरे दिन सबलोग भानुके घरपे तैयार होकर चले गये.. वहा भानु ओर रमा हवनमे बैठे तो साथमे सरलाकाकी ओर नीलम भी बैठी थी.. आज नीलम भी अच्छेसे तैयार होते बहुत ही जच रही थी.. ओर छुपकेसे लखनसे आंखोसे इसारा कर रही थी..

आखीर भानु इस गांजमे रहेने आही गया.. वहा लखनके सभी दोस्त अपनी फेमीलीके साथ आये थे.. सबलोग काममे बीजी थे.. लखनको पुनमके माध्यमसे पता चल गया था.. की उनके सभी दोस्तोकी कुछना कुछ नइ खीचडी पक रही हे.. तब लखन अ‍ेक अ‍ेक दोस्तको मीलकर उनका हाल चाल जानने लगा..

तो सबकी लाइफ अब मजेसे कट रही थी.. सभी दोस्तोमे अ‍ेक अच्छी अंडरसेन्डींग थी.. ज्यादातर अपना हर राज दोस्तोके बीच खुलकर बता देते थे.. ओर इस बातकी कीसी ओरको कानो कान खबर भी नही मीलती.. सब अ‍ेक दुसरेपे बहुत विस्वास करते थे.. लेकीन कुछ बाते अ‍ैसी थी जो सभी दोस्त अ‍ेक दुसरेसे अपने कुछ अफैर छीपाने लगे थे..

लखनने पहेले साहीलको पकडा.. तो साहीलने लखनको सबकुछ सच बता दीया.. क्युकी उसे पता था लखनको पुनमके माध्यमसे अ‍ैसे ही सबकुछ पता चल जाता हे.. साहीलने बतायाकी उस दिनके बाद वो सबानाको दो बार ओर बेंगलोर मीलकर आगया था.. क्युकी अब सबाना साहीलके लीये पुरी तराह पागल हो चुकी थी..

ओर जब भी कादीर टुरपे होता तो वो अक्सर सायराको मीलने उनके घर चला जाता.. ओर सायराकी जमकर लेता.. वो सायराको कइ बार मील चुका था.. ओर साथमे जरीनाके साथ अफैरकी बात भी बतादी.. येभी कहाकी सलमा ओर जरीना हर रात बारी बारी उनके साथ सोने लीगी हे.. जीससे जरीना भी उनसे सचे दिलसे प्यार करने लगी हे..

ओर ये भी बता दीयाकी दोनो मां बेटी उनको अपना खसम मानने लगी थी.. सायरा ओर जरीना दोनो अब उनसे प्रेगनेन्ट भी हो चुकी हे.. बस.. अब उसे सबानाके वापस आनेका इन्तजार था.. फीर साहीलने अपने चाचा ओर खेतोकी अ‍ेक मजदुर लडकीके बारेमे भी बता दीया.. साहीलने लखनको सबकुछ सच बता दीया.. फीर उसने श्रीधरसे भी अकेलेमे बातकी.. तब..
 
लखन : (सामने देखते) हां श्रीधर.. बोल.. नया क्या चल रहा हे..? तेरी सासको मीलने जाता हेकी नही..?

श्रीधर : (सरमाकर मुस्कुराते) क्या भाइ.. क्यु मजाक कर रहे हो.. मुजे पता हे आपको सबकुछ मालुम हे.. पुनम भाभीने जो बता दीया होगा..

लखन : (सामने देखते) हां कमीने.. तो फीर मुजे सच क्यु नही बताता..? खैर.. तेरे बडे पापाका सब कार्य नीपट गया..? मीन्स.. इस बारेमे तेरी साससे ओर कोइ बात हुइ..?

श्रीधर : (धीरेसे) हां भाइ.. पीछली बार मीलने गया तब मेरी सासने मुजे सबकुछ सच बता दीया.. उस रात मेरी सास बडे पापाके दुधमे नींदकी गोलीया डालना भुल गइ थी.. ओर देर रात उसने पापाको ओर मेरी सासको चुदाइ करते रंगे हाथो पकडलीया.. बस.. बडे पापा ये धोखा बरदास्त नही कर पाये.. ओर उसे दिलका दौरा पड गया..

लखन : (सामने देखते) ओर तेरा बाप..? क्या उसे पता हे उनका हथीयार क्यु बेकार हो गया.. तुमने ओर ब्रीन्दा भाभीने उसे जडी बुटी पीलाइ थीनां..? उस दिन बंसीकी सादीमे दो लोगोको दी गइ थी.. बता..

श्रीधर : (पसीना पोछते) भाइ आप मीया बीवी बहुत डेन्जर हो.. क्या पुनम भाभीने सबकुछ बतादीया..?

लखन : (मुस्कुराते) तो कमीने इतना गभरा क्यु रहा हे.. मेतो बस पुछ रहा हु.. कमसे कम मुजे तो सच बता.. दुसरे भानुभाइ थेनां..?

श्रीधर : (मुस्कुराते धीरेसे) हां भाइ.. जडीबुटी सीर्फ भानुभाइके लीये ही थी.. उस दिज बडे भैयाके मना करनेके बावजुद भी वो बसंती भाभीको इसारा करते बुला रहे थे.. ओर ये सब मुनाने देख लीया.. तो उसने गुस्सेमे आकर हथीयार बेकार करनेवाली जडीबुटी मुजे छुपकसे भानुभाइको पीलाने दीथी.. ओर मैने भी अपने बापसे बदला लेनेके लीये उनमेसे आधी नीकालली.. ओर मम्मीको कहेकर मेरे बापको भी पीलादी..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा हुआ तुमने आधी करली.. वरना पुरी भानु भाइको देते तो उनका हथीयार बीलकुल बेकार हो जाता.. कमसे कम इनमे ठीक होनेके चान्सीस तो हे.. ओर बता.. क्या कहेती हे तेरी सास..

श्रीधर : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. जबसे हम दोनो रीलेशनमे आये हे तबसे तो वो मेरे पीछे पागल होगइ हे.. भाइ.. अभी कीसीको बताना नही.. वो मुजसे प्रेगनेन्ट होगइ हे.. ओर जबसे मुजसे प्रेगनेन्ट हुइ हे तबसे उसे पापाका डर भी नही हे.. वो अपनी बाकीकी लाइफ हमारे साथ बीताना चाहती हे.. कहेती थी मौका मीलते ही वो पापाको सब सच बता देगी.. पता नही आगे क्या होगा.. भाइ.. भाभीको तो सब पता होगा.. तो अ‍ेक बार पुछलोनां..

लखन : (सामने देखते) यार पुछतो लुगा.. क्या तेरे पापाको सब सच बताना जरुरी हे..?

श्रीधर : (धीरेसे) भाइ मेभी इसी उलजनमे हु.. पहेले तो मम्मी ओर मेरी सासके बीच बीलकुल नही जमती थी.. सच कहु तो ये मम्मीका ही प्लान थाकी मे मेरी सासको फसाउ.. उन्होने हम दोनोको पुरा स्पेस दीया..ओर अब देखो.. दोनो पकी सहेलीया बन गइ हे.. पता नही दोनो आपसमे क्या खीचडी पका रही हे.. सायद अ‍ेक दो दिनमे वो मम्मीको मीलने आ रही हे.. अब देखते हे आगे क्या होता हे.. आप अ‍ेक बार भाभीसे जानलो..

इनके बाद लखन मुनाको भी मीला.. तो मुनाने भी साहीलकी तराह लखनको सबकुछ सच बता दीयाकी उनसे अपनी मामी गीताको प्रेगनेन्ट करके अपनी मम्मीका बदला लेलीया हे.. लेकीन इसी जुठके रीस्तोसे दोनो अ‍ेक दुसरेको सचा प्यार करने लगे थे.. तो उसने अपनी पहेचान जाहीर करदी..

तब उसे पता चलाकी वो जीनके साथ सो रही थी.. ओर जीनसे प्रेगनेन्ट हुइ हे वो असलमे उनकी भांजीका बेटा हे.. पहेले तो खुब रोइ.. लेकीन हम दोनो अ‍ेक दुसरेसे सचा प्यार करने लगे थेतो वो माफी मांगकर सबसे छुपकर फीर भी ये रीस्ता जारी रखना चाहती हे.. मुनाने सबकुछ सच बता दीया.. सुनकर..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे मुना.. तु फीकर मतकर.. उनके सब पेपर सबमीट करवा दीये हे.. समजले उनकी नोकरी पकी.. दोनो मजे करो.. बता.. बंसीका क्या हाल हे..?

मुना : (हसते धीरेसे) भाइ जबसे सांतीभाभी प्रेगनेन्ट हे तबसे उनकी बहेनके साथ कुछ ज्यादाही मजे कर रहा हे.. ओर आजकल तो दोनो भाइ बहेन खुलकर प्यार करने लगे हे.. पता नही था.. जागृतीभाभी इतनी फोरवर्ड होगी.. बाइकमे भी उनके पीछे भी कैसे चीपकके बैठती हे.. हें..हें..हें..

फीर हवनका कार्य समाप्त हुआ तो सबलोग खानेके लीये बैठ गये.. तब खाना लेकर लखन बंसीके पास चला गया.. तो सांती लखनसे हसकर बाते करने लगी.. लेकीन जागृतीने लखनके सामने तक नही देखा.. वो बस सबलोग थे तो सीर्फ केज्युअली स्माइल करते वहासे चली गइ.. तब..

लखन : (मुस्कुराते) सांतीभाभी.. कैसी हो..? आप वहा पंदर दिन रुक कर चली गइ.. अ‍ेक बार भी हमारे घर नही आइ.. आइ तो बस गांव जानेके लीये.. आपको पता हेनां हम पीछेकी गली मेही रहेते हे..

सांती : (सरमाकर अ‍ेक नजर बंसीको देखते) नही लखन भैया.. बस.. वो.. मम्मी ओर बच्चेको सम्हालनेमे टाइम ही नही मीला.. अब आउगी तो बंसीके साथ.. सीधे आपहीके घर आउगी..

बंसी : (मुस्कुराते) लखन.. अगले महीने इनका रुटीन चेकअप हे.. तो मे ओर सांती दोनो आयेगे.. ओर खाना तेरे यहा पका..

लखन : (हाथ पकडकर बंसीको लेकर थोडा दुर चला गया) बंसी.. कहो कैसी चल रही हे लाइफ.. सबकुछ ठीक..?

बंसी : (मुस्कुराते) हां भाइ.. सबकुछ ठीक ही चल रहा हे.. कुछ खास हे क्या..?

लखन : (कुटील मुस्कानसे) कमीने खास हे इसीलीये तो पुछ रहा हु.. वो बात बता जो आज तक कीसीको नही मालुम.. तुजे पता हेना मेरी बीवी कौन हे..?

बंसी : (हसते हाथ पकडर थोडा ओर दुर लेजाते धीरेसे) क्या भाइ.. आपतो मरवाओगे.. आपको सब पता चल गया..? यार लाइफ अच्छेसे कट रही हे.. देखना कुछ गडबड मत करना.. कमीनी क्या कडक माल हे.. अ‍ेकदम वर्जीन..

लखन : (मुस्कुराते) कमीना.. क्या मे तुजे गडबड करनेवाला लगता हु.. सुरुसे बता.. कैसे फसी वो..?

बंसी : (आजुबाजु अ‍ेक नजर डालते धीरेसे मुस्कुराते) भाइ.. कुछ नही.. बस.. उनको अपने पतीसे वो संतुस्टी नही मीलती थी.. इसीलीये हम दोनोका छुपकर अफैर चल रहा हे.. पडोसी हे फीर भी मेरे सामने तक नही देखती.. बस.. मेरी बीवीओके साथ होता हु तब बडी मुस्कीलसे केज्युअली बात होती हे..

लखन : (मुस्कुराते) लेकीन तुमसे फसी कैसे..? दीखनेमे तो अ‍ेकदम भोली भाली गाय जैसी दीखती हे..

बंसी : (मुस्कुराते) भाइ.. ये साली चुतकी आग ही अ‍ैसी हे.. जीतनी भोली दीखती हे उनके अंदर उतनी ही आग होती हे.. बस अ‍ैसे ही अ‍ेक दिन सुबह मे छतपे टहेल रहा था.. तो वोभी कपडे सुखाने छतपे आइ थी.. पहेले सीर्फ हेलो हाइ हुआ.. तो मैने उनके चहेरेपे थोडी उदासी देखी.. पुछा तो मुस्कुराते बात टालदी.. फीर अ‍ैसे हम तीन चार बार ओर अ‍ैसे मीले.. ओर हमारी बात बढती गइ..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा.. तो मामला धीरे धीरे आगे बढा.. फीर..?

बंसी : (मुस्कुराते) फीर क्या भाइ.. बात करते करते हम अ‍ेक दुसरेकी मजाक करने लगे.. ओर अ‍ेक दिन मेरी कसम देकर पुछ लीया तो आंसु बहाने लगी.. फीर उसने बतायाकी उनके पतीकी उमरकी वजहसे वो उसे संतुस्ट नही कर पाते.. ओर उनके बेटेके छोडनेके बाद उसे सम्हाल लीया हे तो उसे धोखा भी नही देना चाहती..

लखन : (मुस्कुराते) तो फीर पटी कैसे..?

बंसी : (मुस्कुराते) बस.. कुछ नही.. मुजे थोडी महेनत करनी पडी.. उस दिनके बाद हम रेग्युलर अ‍ेक ही टाइमपे मीलने लगे.. ओर इस बातपे खुलकर चर्चा करने लगे.. हमने गांवके अफैर ओर आपसी रीस्तोके बारेमे बात कही.. तो बोली कास.. मेरा भी कोइ भाइ होता.. तो मेने मजाकमे केह दिया.. तो आजसे मुजे ही अपना भाइ समजलो.. तो वो बहुत सरमाइ.. ओर मुजे पीठमे अ‍ेक मुका मारते हसती हुइ चली गइ..

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा.. हसी तो फसी वाली बात.. फीर..?

बंसी : (मुस्कुराते) भाइ अ‍ेक दिन मेने अपने प्यारका इजहार करदीया.. तो वो बहुत डर रही थी.. खासकर वो मेरे सुखी संसारको बीगाडना नही चाहती थी.. फीर मेने उसे कहाकी हम उनके घरमे ओर यहा छतके अलावा ओर कही नही मीलीगे.. ओर वोभी देर रात तीनसे चार बजेके बीच.. मेने उनके पतीके लीये कुछ नींदकी गोलीया दी.. ओर सांती जागुको नीपटानेके बादका सेडयुल तैय करलीया..

बस.. उस रात हम दोनो देर रात पहेली बार मीले.. उसे नीचे खुन भी नीकला.. इसके बाद हप्तेमे तीन बार मीलनेका सुड्युल तैय कीया.. फीर हम तैय सेड्युलके हीसाबसे रेग्युलर मीलने लगे.. आप तो जानते हो वो जडीबुटीकी वजहसे हम सभी दोस्तोकी आदत.. कमसे कम बीना नीचे उतरे दो बार..

बस.. उसी आदतकी वजहसे वो मेरी दिवानी होगइ.. दुसरोके सामने हम सामान्य वहेवार ही करते.. कही बाजारमे मीलती तो मेरे सामने देखती तक नही.. हम दोनोने इतनी सावधानी बरती.. ओर आज वो मुजसे प्रेगनेन्ट हे.. उन्होने अपने पतीको कन्वीस करवालीया की वो बच्चा उनके पतीका ही हे..

लखन : (मुस्कुराते) तो क्या बनवारीलाल मान गये..?

बंसी : (मुस्कुराते) हां.. क्युकी वो कहेती थी बनवारीलाल हमेसा उनको सुरुसेही वायग्रा खाकर ही चोदते हे.. ताकी उनको संतुस्ट कर पाये.. लेकीन हकीकतमे अब उमरकी वजहसे बच्चा देनेमे सक्षम नही हे.. ये बात सीर्फ मे ओर बींन्दीया भाभी ही जानते हे.. ओर प्लीज.. आप भी ध्यान रखना.. वरना हम दोनोकी जींदगी खराब होजायेगी.. हमारे दोस्तो या हमारी बीवीओको भी नही.. हमारे बारेमे आज तक कीसीको भी नही पता..

लखन : (मुस्कुराते) कमीने.. क्या मे अ‍ैसी बात बताउगा क्या..? समजले ये राज राज ही रहेगा.. मे पुनोको भी बतादुगा की वो कीसी ओरको ना कहे.. अब खुस..? ओर सुना.. गांवमे नया कुछ..?

बंसी : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ नया तो हे.. आज ही हुआ हे.. जो मेरा बरसोसे अ‍ेक सपना था.. लेकीन अ‍ेक बार सृती भाभीसे चेक करवालु.. क्युकी आज सुबह जागु उल्टीया कर रही थी.. उनका पीरीयडमी इस महीने मीस होगया हे.. भाइ.. मेने अपनी बहेनको प्रेगनेन्ट करदीया हे.. अब वो पुरी तराह मेरी होगइ हे..

लखन : (मुस्कुराते) कमीने बात पकी ही समज.. कोन्ग्रेच्युलेशन..

साम होते ही सब महेमान जाने लगे.. दो आंखे आज फीरसे लखनकी ओर ही मंडरा रही थी.. क्युकी जबसे वो लखनसे पहेली बार फीजीकल हुइ तबसे उनके मनमे दुबारा लखनसे मीलनेकी लालसा जाग गइ थी.. इसीलीये वो बार बार लखनकी ओर देखते फीरसे मीलनेकी कोसीस कर रही थी.. ओर वो थी श्रीधरकी मम्मी ओर अब बीवी.. ब्रीन्दा.. जो लखनसे प्रेगनेन्ट होनेके बाद दुसरी बार मीलन करना चाहती थी..

जाते जाते वसुधाने भी लखनको घरपे आनेका इसारा कीया.. लेकीन लखनने घरके लोगोकी ओर इसारा करते मना करदीया.. तो चारुने तो खुलकर लखनको घरपे खानेके लीये आमंत्रीत कीया.. अब सीर्फ दोनो घरके लोग ही थे.. क्युकी अब स्कुल होस्पीटलका काम भी खतम होनेके कगारपे था.. तो वहा भी सभी रुमोका फनीर्चरका काम हो रहा था..

तो सृती भावीका रश्मी सभी लेडीस इनकी चर्चा कर रही थी.. तो वंदनाने भी नया अ‍ेडमीशन लेना सुरु करदीया था.. कुछ दिन चंदा यही रहेने वाली थी.. तो भावना अब हमेसाके लीये यहा रहेने वाली थी.. ताकी उनके बच्चेकी देखभाल अच्छेसे हो सके.. स्कुलकी वजहसे सृतीने विजयको अपने साथ लेलीया..

देर रात खाना खाकर लखन सृती भावीका राधीका नीलम ओर दयाको लेकर अपनी अपनी कार लेकर सहेरकी ओर चले गये.. लखनने दयाको उनके घरपे ही ड्रोप करदीया.. तो दयाने सरमाते लखनको आंखोसे इसारा करते बादमे घरपे आनेको कहा.. फीर सब अपने घरपे आगये.. अ‍ेबोर्सनकी वजहसे कुछ दिन नीलमको लखनसे दुर रहेनेको कहा.. ओर उस रात सृती भावीका ओर राधीकाने लखनके साथ खुब मजे कीये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९९

देर रात खाना खाकर लखन सृती भावीका राधीका नीलम ओर दयाको लेकर अपनी अपनी कार लेकर सहेरकी ओर चले गये.. लखनने दयाको उनके घरपे ही ड्रोप करदीया.. तो दयाने सरमाते लखनको आंखोसे इसारा करते बादमे घरपे आनेको कहा.. फीर सब अपने घरपे आगये.. अ‍ेबोर्सनकी वजहसे कुछ दिन नीलमको लखनसे दुर रहेनेको कहा.. ओर उस रात सृती भावीका ओर राधीकाने लखनके साथ खुब मजे कीये.... अब आगे

सबकी लाइफ रुटीन होगइ.. समय बीतने लगा.. दो महीने ओर गुजर गये.. लेकीन अ‍ेक दिन सुबह चार बजे सृतीको फोन आया.. तो देर रात तक जागनेकी वजहसे सृती लखनको सोते हुअ‍े ही छोडकर फटाफट भावीकाको लेकर क्लीनीकपे चली गइ.. जाते वक्त वो राधीकाको बताकर गइकी इमरजन्सी हे.. लताको लेकर नीर्मला पुनम ओर देवायत आ रहे हे..

राधीकाने लखनको जगाया.. ओर लताकी बात कही.. तो लखन फटाफट रेडी हो गया.. ओर चाइ नास्ता कीये बगैर ही क्लीनीक पहोंच गया.. तो वहा देवायत पुनम नीर्मला तीनोही मुरजाये हुअ‍े चहेरे लेकर बैठे थे.. लखनको देखते ही पुनम दोडकर आइ ओर लखनसे लीपटकर रोने लगी..

लखन : (सांत करते) दीदी.. सांत होजाओ.. क्या हुआ लताको..?

पुनम : (रोते हाथ पकडकर बहारकी ओर लेजाते) भाइ.. यहा नही चलो बहार.. वोही.. भुमी आंटीकी तराह.. लता सीडीयोसे गीर गइ.. सरपे चोट आइ हे.. गीर गइ तबसे बेहोस हे.. अंदर ओपरेशन चल रहा हे.. सृती दीदीने दीमागके डोक्टरको भी बुला लीया हे..

लखन : हे भगवान.. ये सब क्या हो रहा हे..? अ‍ेक मीनीट.. दीदी.. आपको तो सब पता चल जाता हेनां..?

पुनम : (हांमे गरदन हीलाते) हां भाइ.. लेकीन इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. सीर्फ हम दोनो होगे तब..

लखन : (सामने देखते) दीदी.. सीर्फ इतना बतादो.. लताको कुछ होगातो नही..? वो ठीक तो होजायेगीनां..?

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) हां भाइ.. मेरा यकीन मानो.. लताको कुछ नही होगा.. लेकीन..

लखन : (सामने देखते) लेकीन क्या..?

पुनम : (धीरेसे) भाइ.. हमे इस बच्चेकी उमीद नही हे.. आप समज गयेनां..?

लखन : (आंसु बहाते) दीदी.. ओर क्या कर सकते हे.. हमारे साथ ही ये सब क्यु हो रहा हे..?

पुनम : (सामने देखते) भाइ.. हमारे हाथमे कुछ नही हे.. हमारी दुनीया कोइ ओर चला रही हे..

लखन : (सामने देखते धीरेसे) कौन..?

पुनम : (हाथ पकडकर अंदर लेजाते) भाइ अभी कुछ नही.. अंदर चलो.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे..

पुनम ओर लखन अंदर आगये.. तभी सृती बहार नीकली.. तो लखन पुनमके साथ देवायत नीर्मला भी उनकी ओर दोड पडे.. देखा तो सृतीके चहेरेपे चीन्ता ओर राहत.. दोनो भाव साफ दीखाइ दे रहे थे.. सबलोग डरे हुअ‍े ओर चीन्तीत थे.. की कही लताका भी भुमीकाकी तराह हाल ना हो.. तभी..

नीर्मला : (जटसे) सृती.. क्या हाल हे लताका.. वो ठीक तो हेनां..?

सृती : (थोडी मायुस होते) हां मौसी.. लता खतरेसे बहार हे.. लेकीन..

देवायत : (उत्सुक्तासे) लेकीन क्या..?

सृती : (सामने देखते धीरेसे) बडे भैया.. हम बच्चेको नही बचा सके.. ओपरेशन करके बच्चेको नीकाला.. तब वो ओल रेडी इस दुनीयामे नही था..उनको मरे हुअ‍े दो दिन हो गया थे.. इसी वजहसे लताको चकर आगये होगे.. ओर वो सीडीयोसे गीर गइ.. भगवानका शुर्क हेकी उनको सरपे गंभीर चोट नही आइ..

नीर्मला : (उपर हाथ जोडते) हे भगवान तेरा बहुत बहुत धन्यवाद.. मे भुमीको तो खो चुकी हु.. अब कीसी ओरको अ‍ैसे खोना नही चाहती..

सृती : मौसी.. अब चीन्ताकी कोइ बात नही हे.. आप भैयाको लेकर वो स्पेसीयल रुममे चले जाइअ‍े.. लताको अभी वही ला रहे हे.. ओर लखन पुनमदी.. आप मेरी केबीनमे आइअ‍े.. मे कुछ बहारकी दवाइआ लीख देती हु..

इतना सुनते ही देवायत ओर नीर्मलाने राहतकी सास ली.. ओर दोनो रुममे चले गये.. वहा जाते ही सबसे पहेले देवायतने भानुको फोन करदीया.. ओर लताके बारेमे जानकारी देने लगा.. पहेलेतो सुनकर भानु थोडा गभरा गया.. लेकीन चीन्ताकी बात नही थी तो वो ओर सरला आ रहे हे.. कहेकर फोन काट दीया.. इधर सृती लखन ओर पुनम सृतीकी केबीनमे चले गये.. अंदर जाते ही..

सृती : (सामने देखते) पुनोदी.. क्या हे ये सब..? आपको तो सब पता चल जाता हेनां..?

लखन : (सृतीको) दीदी.. अभी पुनोको कुछ मत पुछो.. इस बारेमे हमारी बात हो चुकी हे.. हम इस बारेमे आरामसे बात करेगे.. हमारे लीये खतरा टल गया वोही बडी बात हे.. क्युकी अभी पुनोदी भी थोडी टेन्शनमे हे..

पुनम : (हाथोमे चहेरा छुपाते आंसु बहाते) मोमने मुजे कैसी शक्तिया दी हे.. मानो शक्तिया ना होते अ‍ेक अभीसाप बन गइ हे.. यार मे सीर्फ जान सकती हु.. हादसेको रोक नही सकती.. मे नीयतीको नही टाल सकती.. मोमने मना कीया हे..

सृती : (आते हग करते) सोरी दीदी.. अब नही पुछुगी.. आप सांत हो जाइअ‍े.. मेतो बस.. युही पुछ रही थी.. अगर आपको बुरा लगा तो अगेइन सोरी..

पुनम : (आंसु पोछते मुस्कुराते) यार माफी मत मागो.. मोमने कहा हे जो होता हे होने दो.. हमे उनकी नीयतीमे कोइ बाधा नही डालनी.. जो होता हे अच्छेके लीये होता हे..

भावीका : (अंदर आते मुस्कुराते) हेइ.. क्या हुआ..? रीलेक्ष.. लतादीदीको होस आगया हे.. उनको हम रुममे सीफ्ट कर रहे हे.. दीदी रो क्यु रही हे..? कुछ हुआ क्या..?

सृती : (मुस्कुराते) आ कमीनी तुभी बैठ.. बस.. कुछ नही.. थोडी बात कर रहे थे..

लखन : (हसते पुनमको) दीदी.. दोनो उठकर सीधी ही भाग गइ.. देखो कैसे भुतनीकी तरह लग रही हे.. हें..हें..हें..

भावीका : (लखनकी पीठमे अ‍ेक मुका जडते) तो क्या करती..? हमे अ‍ैसे ही भागना पडता हे.. अच्छा हुआ हम आगइ.. ओर लतादीदीका ओपरेशन करदीया.. वरना स्थीती थोडी ओर गंभीर हो जाती.. बच्चेकी वजहसे उनके सरीरमे जहेर फैलना सुरु हो गया था.. अब कोइ दीकत नही हे..

पुनम : (मुस्कुराते) सृतीदी.. आप पुछ रही थीना मेने लताको क्यु सावधान नही कीया.. कीया था.. उसे प्रेगनन्सीकी वजहसे नीचे सोनेके लीये कहा था.. उन्होने मेरी बात नही मानी.. अब मे उसे खुलकर तो नही बता सकती.. मानलो.. खुलकर बता भी दिया होता.. तो क्या होता.. तो वो कोइ ओर तरीकेसे लताको गीरा देती..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) कौन..?

पुनम : (मुस्कुराते) वही जो उनकी कोखसे जन्म लेने वाली हे.. जो इस वक्त वहा अप्सरा ओर परीलोक की महारानी हे.. ओर वो इस घरतीपे आनेके लीये अपनी भुमीका बना रही हे..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) कौन..? सभीतो यहा धरतीपे जनम लेकर आचुकी हे.. ओर कौन बाकी हे..?

पुनम : (रहस्य मुस्कानसे) सभी आगइ हे लेकीन अ‍ेक नही आइ.. वोही.. हमारे राजाकी चहीती रानी.. उनकी बडी बहेन.. जो इस वक्त वहा सब सम्हालके बैठी हे.. हमारी नेनुदीदी..

सृती : (अपना सर पकडते) अरे हांआआआ.. यार सबके बारेमे सुन रही हु.. लेकीन उनकी ओर तो ध्यान ही नही गया.. कब आयेगी वो..?

पुनम : (मुस्कुराते) काफी टाइम हे उनके आनेमे.. बस.. आप लोगोने भले ही लताका ओपरेशन अच्छेसे करदीया हो.. लेकीन अब लता कही साल तक मां नही बनेगी.. इसके लीये हमारे लखन भैयाको मुनाभाइकी मददसे काफी महेनत करनी पडेगी.. तब जाके वो मां बनेगी.. बस.. ये बात सीर्फ हम चारोके बीच ही रहेनी चाहीये..

लखन : (मुस्कुराते) ओह.. अब समजा.. मतलब अब लताका इलाज इन दोनोके पास नही हे.. मुजे मुनासे आयुर्वेदकी मदद लेनी पडेगी..

पुनम : (मुस्कुराते) अ‍ेक्जेटली.. भाइ आपने बीलकुल सही सोचा..

भावीका : (मुस्कुराते) दीदी.. लेकीन अ‍ेक बात समजमे नही आइ.. इन दोनो भाइकी जीतनी बीवीयोकी डीलीवरी हुइ इनमे ज्यादातर लडकीया ही पैदा हुइ.. अ‍ेक दोको ही लडके पैदा हुअ‍े.. अ‍ैसा क्यु..?

पुनम : (मुस्कुराते) क्युकी हमारी दुनीया ही लडकीयोकी हे.. अप्सराये ओर परीया.. ओर लडके वो दोनो (नेनु ओर देवयानी) अपनी इच्छासे पैदा करती हे.. वोभी अपनी कोखसे.. क्युकी उनकी कोखसे जन्मा लडका इतना सक्षम होता हेकी वो अ‍ेक ही लडका कइ परीया ओर अप्सराओको सम्हालनेम सक्षम होता हे.. ओर उनसे ही हम अपना वंस ओर परीया अप्सराये पैदा करके आगे बढा सकती हे..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? ओर ज्यादा लडके होगे तो वंस भी जटसे ज्यादा बढेगानां..?

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) हां बढेगा.. लेकीन यहा नही.. वहा.. हमारी उस दुनीयामे.. यहा धरतीपे हमारी दुनीया सयमीत रखनी हे.. यहा सबको पता हे हमे अ‍ेकही लडका सम्हालनेके लीये काफी हे.. जैसेकी पहेले हमारे बापु.. फीर बडे भैया.. ओर अब लखन.. फीर आगे जाकर हमारा विजय.. बाकी सब मोम बडी होजाये तब उनसे पुछ लेना.. हें..हें..हें..

उस साम भानु ओर सरला भी आगये.. ओर लताको ठीक देखकर राहतकी सास ली.. लखनने सबसे छुपकर सरलाको भानुकी ओर आंखसे इसारा कीया तो सरला सरमा गइ..उन्होने सबसे छुपकर लखनकी पीठमे मुका मारा.. इनके बाद लताको तीन दिन तक होस्पीटलमे रखा.. ओर बादमे उसे लखनके घरपे अ‍ेक महीने तक आराम करनेको कहा..

लताकी छुटीके बाद अ‍ेक दिन सबलोग लखनके घर रुके.. सामको नीलम कोलेजसे वापस आइ तो भानु सरला नीलमको देखकर दंग रेह गये.. क्युकी नीलमने बहुत ही मोर्डन ड्रेस पहेना हुआ था.. तो अ‍ेक पल भानु ओर सरला उनको नही पहेचान पाये.. तभी नीलम भानु सरलाको देखकर उनके गले लग गइ..

तो अ‍ैसे ड्रेसके लीये सरलाने थोडा नीलमको डांटा भी.. तो देवायत नीर्मला हसने लगे.. लताको नीचेके चंदा वाले रुममे रखा था.. उस रात खानेके बाद सरलाने उमरकी वजहसे मां बेटेके नीचे ही सोनेकी बातकी तो लखन सरलाकी ओर देखकर मुस्कुराने लगा.. तो सरला सबसे छुपकर बडी आंख करते लखनको नामे गरदन हीलाते रीक्वेस्ट करने लगी..

क्युकी सरला ओर भानुका राज पुनम लखनके सीवा कोइ नही जानते थे.. देवायत नीर्मला उपरके रुममे चले गये.. अब नीर्मला हमेसा देवायतके साथ ही रहेती ओर उनके साथ ही सोती.. पुनमभी गांवमे रहेनेकी वजहसे लखनको कम ही मीलती.. तो इस रात सृतीने नीलमको अपने साथ सोनेके लीये बुला लीया.. ओर लखन पुनमको अकेले सृतीने नीलमके रुममे भेज दीया..

रुममे जाते ही पुनम बेडपे बैठ गइ.. ओर बच्चीको अपनी गोदमे लेकर ब्लाउस उचा करते उसे दुध पीलाने लगी.. तबतक लखन भी चेन्ज करके आगया.. ओर पुनमसे सटकर उनको बाहोमे भीचता हे.. फीर उनके दोनो गाल ओर होठोको चुमकर पुनमकी गोदमे सर रखके मुस्कुराते पुनमके दुसरे बुब्सपे मुह लगाते दुध पीने लगा.. तो पुनम मुस्कुराते लखनके सरको भी सहेलाने लगी..
 
पुनम : (मुस्कुराते) अ..ले..ले.. मेला बे..बी.. भाइ.. बीलकुल मेरे छोटे बच्चे जैसे लग रहे हो.. अ‍ेकदम मासुम.. कास मेने पहेलेही आका चुनाव कीया होता.. तो आज हम दोनोका बच्चा होता..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. भुल जाइअ‍े सब.. देखीये आपके दुध काफी बडे हो गये हे.. आप कीतनी मस्त लग रही हो..

पुनम : (कातीलाना नजरोसे मुस्कुराते) भाइ.. कुछ आपकी महेनत.. ओर ये बच्ची आनेकी वजहसे.. सोरी.. कुछ जीम्वेवारीकी वजहसे मे ठीकसे अपना पत्नी धर्म नही नीभा रही हु.. मे आपको बहुत मीस कर रही हु..

लखन : (मुस्कुराते) दी.. जी छोटा मत करो.. मे आपसे आज भी इतना प्यार करता हु.. जीतना स्कुलके टाइम करता था.. आज भी मेरी पहेली चोइस आप हो.. आइ लव यु दीदी..

पुनम : (आंख गीली करते मुस्कुराते) लव यु टु भाइ.. मुजे आज भी आपकी फेन्टासी याद हे.. मेने आपको पती मानकर कभी प्यार नही कीया.. हमेसा मेरे भाइको ही प्यार कीया हे.. भाइ.. चलो आज फीरसे हमारे पहेले मीलनको याद करते हे.. उस दिन हम पुरी रात जागेथेनां..? हमारी सादी भी नही हुइ थी.. ओर मोमने हमारा पहेला मीलन करवाया था..

लखन : (मुस्कुराते) हां दीदी.. मे उस रातको कभी नही भुला.. हमारी मोम कीतनी प्यारी ओर समजदार थी..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. तो चलो आज फीरसे उस रातको दोहराते हे.. समजलो आज हमारा पहेला मीलन हे.. हमारी सुहागरात..

लखन : (होंठ चुमते) दीदी.. हम जब भी मीलते हे वो रात हमारी सुहागरात ही होती हे.. इसीलीये तो मे फटाफट सबको नीपटाकर आपके पास आजाता हु.. अब हमारी सृती भी आपकी तराह मुजे सम्हालती हे.. वो अब कीतनी समजदार होगइ हे.. आज भी उन्होने हमे अलग सोनेके लीये भेज दीया..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. अब वक्त आगया हे.. आप चंदाभाभीकी तराह भाइकी सभी बीवीयोको सम्हाललो.. बीना जीजकके.. कमीनी सबकी सब रेडी हे.. सीवाय नीर्मला आंटी.. उन्होने अब भाइको पुरी तराह सम्हाल लीया हे.. (बच्चीकी तरफ देखते) देखो.. बातो ही बातोमे येभी सो गइ.. मे इसे जुलेमे डालकर आती हु.. फीर आज हम पुरी रात प्यार करते खुब बाते करेगे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. मुजे आपको ओर कुछ भी बताना हे..

पुनम : (मुस्कुराते बचीको जुलेमे डालते) भाइ.. कुछ बतानेकी जरुरत नही.. मे सब जानती हु.. जो हो रहा हे होनेदो.. आपका आकर्सण ओर हथीयार ही इतना दमदार हेकी कोइ भी ओरत आसानीसे आपके नीचे लेटनेको तैयार होजायेगी.. मे ब्रीन्दा भाभी ओर सरलाकाकीके बारेमे भी सब जानती हु..

लखन : (सामने देखते) नही दीदी.. वो.. हमारी नीलु..

पुनम : (थोडी चीन्तासे) पता हे मुजे.. ये लडकी भीनां.. कीतनी लापरवाह हे.. भाइ.. अब वक्त दुर नही.. अब ये गलती दुबारा करे तब उसे अपने पती (धीरेन)के घर भेजदेना.. थोडा हंगामा होगा.. लेकीन भैया सबकुछ सम्हाल लेगे.. अब गांवमे भी सबकुछ सही चलने लगा हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. वो रजु ओर दया बहेनको भी मील चुका हु.. दोनो बहुत खुस हे..

पुनम : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. बस अब इसी तराह अपनी लाइफको अपनी बीवीओ ओर भाभीओके बीच रुटीन करदो.. ओर बाकी बची दुसरी भाभीओको भी सम्हाललो.. मे चाहती हुकी अब हमारे परीवारमे सेक्सको अ‍ेक रुटीन कार्यकी तराह लीया जाये.. क्या वो रश्मी भाभीकी सहेलीके भी अच्छे दिन चल रहे हेनां..? वो.. टीनादीदी..

लखन : (सरमाते) हां दीदी.. आपसे कुछ नही छीपा.. वोभी बहुत खुस हे.. आजतक वो अपने आपको बांज समज रही थी..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. धरती कभी बांज नही रहेती.. बस.. उनमे बीज बोनेवाला सही इन्सान होना चाहीये.. हम ओरतोका भी अ‍ैसाही हे.. अ‍ैसी कइ ओरते आयेगी.. बस.. आपको इसी तराह सबकी भावनाओका खयाल रखना हे.. समजलो अब आपका काम ही यही हे.. तभीतो हमारी घरकी इतनी ओरतोको सम्हाल पाओगे..

फीर बच्चीको सुलाकर पुनम लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनोके होठ मील गये.. दोनोकी आंखोमे ना कोइ वासना थी.. ओर नाही कोइ जल्दबाजी.. प्यार करते अ‍ेक के बाद अ‍ेक कपडे नीकलते गये.. आज लखन कुछ अलग ही जोसमे था.. ओर उपरसे पुनमका जोबन भी पहेलेसे काफी नीखर चुका था.. पुनम अ‍ेक अप्सराकी तरमह कयामत लग रही थी..

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कुछ देर फोर प्लेयके बाद पुरा कमरा पुनमकी हल्कीसी सीसकारीयोसे गुंजने लगा.. पीठके बल लेटे लखनका पुरा हथीयार पुनमने अपनी चुतमे नीगल लीया था.. ओर लखन होले होले कमर हीलाते पुनमको बडेही प्यारसे चोद रहा था.. पुनम भी आंधी आंख चडाते मदहोसीमे लखनका कमर हीलाते साथ दे रही थी..

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ठीक उसी वक्त नीचे देवायत भी नीर्मलाकी चुदाइ कर रहा था.. तब पुनमके अलावा कीसीको पता नही था.. की इस वक्त भानु भी वायग्रा खाकर अपनी मां सरलाके उपर सवार हो चुका था.. ओर उनकी जोरोसे कमर हीलाते चुदाइ कर रहा था.. जीनकी वजहसे सरला धीरेसे कामुक सीसकारीया करते भानुको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्सा रही थी..

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इस रात लखनने बीना नीचे उतरे पुनमकी चार बार चुदाइ करली.. चार बार चुदाइ करली कहेना बहुत ही आसान लगता हे.. लेकीन नोर्मल इन्शानके लीये ये पोसीबल नही हे.. इसीलीये तो मंजु ओर पुनमने मीलकर लखनको वो बाबाकी दी हुइ जडी बुटी पीलाइ थी.. जो लखनके लीये अ‍ेक साथ दस ओरतोको संतुस्ट करना पोसीबल था..

जबभी दोनो साथमे जडते दोनो अ‍ेक दुसरेको अपनी बाहोमे भीच लेते.. फीर अ‍ैसे ही पडे रहेते दोनो बाते करते.. लखन पुनमको सबकुछ बता देता.. उनसे अ‍ेक भी बात नही छीपाता.. ओर पुनम भी उनको सजेसन देते गांवकी बाते करती.. पुनमने अब मंजुकी सब जीम्वेवारी अच्छी तराह सम्हाल लीथी..

बाते करते फीर दोनो उतेजीत होतेही सुरु होजाते.. अबतक पुनमने गांवकी सारी बाते लखनको बतादी.. ओर साथमे आगे भवीस्यकी बात भी बतादी.. ओर बातो ही बातोमे लखनने भावीका ओर उन वकील पंकजभाइ ओर उनकी पत्नी नयना ओर उनकी बेटी नेहाका जीक्र कीया.. जो नेहा भावीकाकी हम सकल थी..

तब पुनमने लखनको अ‍ेक रहस्य बताया.. जो आजतक कोइ नही जानता था.. सीवाय भावीकाके पापा.. ओर पंकजभाइकी बीवी नयना.. ओर ये बात भावीकाको ना बतानेकी सर्तपे लखनको कहा.. की नेहा भावीकाकी सौतेली बहेन हे.. दोनोका बाप अ‍ेक ही व्यक्ती हे.. भावीकाके पापा..

लखन : (होंठ चुमते) दीदी.. दोनोकी सकल अ‍ेक जैसी थी.. ओर जीस तराह नयना आंटीने बातको घुमाकर टाल दीया तो मुजे सकतो हुआ था.. लेकीन मे कुछ बोला नही..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. अच्छा हुआ आप कुछ नही बोले.. भावीकाकी मम्मीका उनके पापाके साथ अफैर हुआ उनसे पहेले ही वो अपने वकील दोस्तकी पत्नीके साथ रीलेशनमे थे.. इस बातका उनके दोस्तको भी कभी पता नही चला.. दोनो दोस्त थे तो घरपे बार बार मीलनेकी वजहसे दोनोकी आंख मील गइ.. ओर अपने दोस्तको बीजनेस टुरपे भेजते तब दोनो उनके घरपे ही मीलते.. ओर नतीजा वो भावीकाके पापासे प्रेगनेन्ट होगइ..

लखन : (सामने देखते) तो फीर भावीकाकी मम्मी..?

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ वोतो तब भी ओल रेडी उनके पापाकी पर्सनल सेके्रटरी बनकर उनकी जींदगीमे थी.. मतलब.. सेक्रेटरी कम.. ओर प्रेमीका ज्यादा.. दोनो अक्सर बीजनेस टुरपे साथ ही होते.. ओर अ‍ेकही कमरा अ‍ेकही बीस्तर साजा करते.. उनको नयना आंटीके बारेमे कभी पता नही चला.. फीर उसने भावीकाकी मम्मीसे सादी करली.. ठीक अ‍ेक साल बाद भावीकाका भी जन्म हुआ..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. आखरी बात.. वो श्रीधर.. अपनी सासके साथ भी रीलेशनमे हे.. ओर उनकी सास श्रीधरसे प्रेगनेन्ट भी हो गइ हे.. तो अब उनके पापाका क्या होगा..?

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ ओर क्या होगा..? ब्रीन्दा भाभीने अपना बदला लेलीया हे.. अपने पतीको नपुसक करके अपनी बडी बहेनको अपने ही बेटेसे रीलेशनमे फसाकर उनको प्रेगनेन्ट तक करवा दीया.. ब्रीन्दा आंटी सुरुसे ही दोनोके अफैरके बारेमे जानती थी.. ओर उन्होने जान बुजकर श्रीधर ओर वृन्दा आंटीको मीलने दीया.. ओर अपनी बहेनको अपनी ओर करलीया..

लखन : (सामने देखते) तो फीर अब उनके पापा..?

पुनम : (सामने देखते) भाइ.. वो जानते हेकी अब वो सेक्स करनेके काबील नही रहे.. जब उनको पता चलाकी वृन्दा आंटी भी प्रेगनेन्ट होगइ हे.. तो उनको वृन्दा आंटी ओर श्रीधर भैयापे सक हो गया हे.. श्रीधर भैयाको कहेना वो थोडी सावधानी बर्ते.. लेकीन वो वृन्दा आंटीसे डरते भी हे..

लखन : दीदी बात वो सककी नही हे.. जब उनको सचाइका पता चलेगा तो क्या होगा..?

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. जब उनको दोनो बहेनकी सचाइका पता चलेगा.. ओर अ‍ेक दिन अ‍ैसा भी आयेगा वृन्दा आंटी अपने नये पतीके सामने ही श्रीधरभैयाको लेकर बेडरुममे चली जायेगी.. ओर जीतु अंकल देखते रेह जायेगे वो घुटघुटके जलते रहेगे ओर वो दोनोको कुछ नही केह पायेगे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. वो ब्रीन्दा आंटी.. कही मेने श्रीधरको धोखा तो नही दीया..?

पुनम : (होंठ चुमते) नही भाइ.. आप गील्टी फील मत करो.. वो सब ब्रीन्दा भाभीकी इच्छा थी.. ओर आपको हर ओरतोकी इच्छाका सन्मान करना हे.. जब आप दोनो पहेली बार फीजीकल हुअ‍े तब ही वो आपसे प्रैगनेन्ेट होगइ थी.. भाइ.. ब्र्रीन्दा आंटी खुद आपका अंस चाहती थी.. उनके पेटमे आपहीका बच्चा पल रहा हे.. ओर ब्रीन्दा आंटी ये राजको राजही रखना चाहती हे..

देवायत ओर भानु दो राउन्ड लगाके सो चुके थे.. लेकीन इस रात पुनम ओर लखन अभी भी लगे हुअ‍े थे.. पुनमने लखनके हथीयारको अपनी चुतसे बहार नही नीकलने दीया.. मानो लखनसे चुदावानेकी अबतककी सारी कसर पुनम पुरी करना चाहती हो.. चार बार पुनमकी चुतको भरके बाथरुममे भी लखनने पुनको खडे खडे चोद लीया.. ओर देर रात दोनो अ‍ेक दुसरेसे नंगे ही चीपकके सो गये..

दुसरे दिन सबलोग देर सुबह तक सोते रहे.. पुनम पहेले ही जाग गइ थी.. ओर कंपलीट होकर अपनी बच्चीको दुध पीलाने लगी.. तबतक लखनभी जागकर नहाने चला गया.. फीर बहार आकर वोभी कंपलीट होगया.. तबतक पुनमने भी बच्चीको कंपलीट करदीया.. ओर वही लखनका इन्तजार करती रही..

जैसेही लखन कंपलीट हो गया पुनम लखनकी बाहोमे समा गइ.. दोनो ही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे काफी देर तक खडे रहे.. फीर पुनमने लखनके होठोपे होंठ रख दीया.. कुछ देर होंठ चुमते रहे तब अ‍ेक बार फीर पुनमने लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके सीनेपे सर छीपा लीया..

पुनम : (आंख गीली करते) भाइ.. आपके बीना जी नही लगता.. अ‍ैसा लगता हे मे आपसे कभी दुर ना रहु.. लेकीन मेरी मजबुरी भी हे.. सीर्फ कुछ दिन.. फीर तो ज्यादातर आप भी वहा रहोगे.. तब मे आपको खुब प्यार दुगी..

लखन : (पुनमका चहेरा थामते) आइ नो.. दीदी मुजे आपकी मजबुरीका पता हे.. कास सीर्फ हम दोनो ही पती पत्नी अकेले होते..

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) भाइ.. अब सबकुछ सही हो गया हे.. बस.. अब भाइकी सभी बीवीयोको सम्हाललो.. फीर हमे विजय ओर हमारे बाकी बच्चोकी ओर देखना हे.. उनके भविस्यके लीये काम करना हे.. ओर जरुरत हुइ तो हम दोनो हमारा खुदका बच्चा भी पैदा करेगे..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) ठीक हे दीदी.. अभी इनकी जरुरत नही हे.. वो हम आगे समय देखकर तैय करेगे.. आपने विजयके बारेमे काफी कुछ कहा हे.. अगर हमारी लडकी हइ तो मे नही चाहता वो हमारे विजयकी वासनाका सीकार होजाये..

पुनम : (मुस्कुराते) नही भाइ.. नीयतीको कोइ नही टाल सकता.. विजय जोभी कुछ करेगा वो सब हमारी नीयतीके हीसाबसे करेगा.. जैसे भैया ओर आपको कुछ जीम्वेवारी मीली हेतो विजयको भी कुछ जीम्वेवारी मीली होगी.. उनको आनेवाले वाले हमारे स्वामीके लीये रास्ता बनाना हे.. तब हम सभी ओरते ओर लडकीया उनके आधीन होगी.. अब चलीये सब हमारा इन्तजार करते होगे..

फीर कुछ देर ओर बाते करते दोनो नीचे आगये.. वहा सबलोग तैयार होकर लखन पुनमका ही इन्तजार कर रहे थे.. लताको कुछ दिन आराम करनेके लीये यही रुकना था.. फीर सुबह सब लोगोने चाइ नास्ता करने बैठ गये.. नीर्मला देवायतका अ‍ेक पतीकी हेसीयतसे पुरा खयाल रख रही थी.. तभी..
 
भावीका : (देवायतकी ओर देखते) भैया.. हमने मशीनरीका ओर्डर बहुत पहेले करदीया हे.. सायद अगले हप्ते सब मशीनरी आजायेगी.. तो आप ध्यानसे उतरवा लेना..

देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे.. लेकीन अ‍ैसेही थोडीना उतरेगी..? अगर तेरे नाम हेतो उनमे तेरी साइनभी चाहीये.. तुजेभी वहा आना पडेगा.. सायद हम अगले महीने होस्पीटल ओर हाइस्कुलका उद्घाटन कर पायेगे.. तो मे चाहता हु हमारे मुख्यमंत्रीके हाथो इतना उद्घाटन हो..

लखन : (मुस्कुराते) अरे वाह.. येतो बहुत बढीया होगा..

सृती : (मुस्कुराते) मशीने आयेगी तब हम सभी वहा आयेगे.. उद्घाटनके लीये कुछ प्लानभी सोचना पडेगा..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. आप लोग आइयेतो सही.. वो सब हम मेनेज करलेगे.. भैयाको ये सब कार्यक्रम सम्हालने दो.. हम वहा सबकुछ सम्हाल लेगे.. बस.. इनके बाद भावीकाको हमेसाके लीये वही रहेने आना पडेगा.. क्युकी अब अ‍ेक बार फीर हमे अपनी जीम्वेवारी तैय करनी हे.. ओर ये आखरी बार होगया.. फीर कोइ बदलाव नही..

नीर्मला : (मुस्कुराते) हां भैय तुजे सब पता चल जाता हे.. चलो अच्छा हे.. आखीर हम परीवारके सबलोग अच्छेसे सेट होगये हे.. अब हमारे बच्चोकी बारी..

सरला : (मुस्कुराते) हां.. हमारे भानुने भी गांवमे आकर अच्छा नीर्णय लीया.. अब हम भी आपके साथ रेह सकेगे.. (नीलमकी ओर देखते) नीलु बेटी.. पढाइके बाद तुमने क्या सोचा हे..? यही रहोगी की गांवमे..?

नीलम : (लखनकी ओर देखकर मुस्कुराते) दादी.. मेतो यही रहुगी.. बेंकमे जोब करुगी..

भानु : (हसते) मतलब हमे तेरे लीये लडका भी यही सहेरका ढुंढना पडेगा.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) भानु भैया आप नीलुकी चीन्ता मत करो.. इसे यही लडका मील जायेगा..

सरला : (मुस्कुराते) बेटी तुमतो सब जानती हो.. बतानां लडका कौन होगा..

पुनम : (सामने देखते) नही काकी.. मे ये नही बता सकती.. ये प्रकृतीके नीयमके खीलाफ हे.. मोमने मना कीया हे.. बस.. इतना केह सकती हु.. की नीलुकी जींदगीमे जोभी लडका होगा.. उसे आप सब लोगोको अ‍ेक्सेप्ट करना पडेगा.. कोइ हंगामा नही..

सरला : (नीलमकी ओर देखते) मतलब ये लडकी लव मेरेज करेगी.. देखना कही हमारी नाक मत कटवानां.. हें..हें..हें.. कोइ अच्छा लडका ढुंढना..

नीलम : (थोडी चीडते) क्या दादी.. आप अभीसे बातका बतंगड बना रही हो.. अ‍ैसा कुछभी नही होगा..

सरला : (राहतकी सांस लेते) तब तो ठीक हे बाबा.. देखना हमारी इजत रखना..

फीर सबलोगोने चाइ नास्ता करलीया.. ओर जानेकी तैयारी करने लगे.. आज पहेली बार सबके सामने पुनम खुलकर लखनके गले मीली.. फीर वो लताको मीलने चली गइ.. तो सरला भी सबको गले मीलकर आखीर लखनके गले लग गइ.. ओर लखनको थोडा ज्यादा भीच लीया.. फीर उनसे अलग होकर लखनको कहेने लगी..

सरला : (धीरेसे) लखन.. इस लडकीका थोडा खयाल रखना.. मुजे इनके चाल चलन कुछ ठीक नही लगते..

लखन : (मुस्कुराते) काकी इनकी चीन्ता मत करो.. अब नीलु पढी लीखी ओर बालीक हे.. इनका भला बुरा वो खुद सोच सकती हे.. जोभी होगा सब ठीक ही होगा.. फीर भी हम इनका खयाल रखेगे..

भानु : (मुस्कुराते) क्या मां.. तुम बेकारकी चीन्ता करती हो.. नीलु अब बडी ओर मेच्योर होगइ हे.. अब पहेले जैसा जमाना नही रहा की लडकीको हम बांधके रखे.. अगर लडका अच्छा हेतो हमे लव मेरीजमे भी कोइ प्रोबलेम नही हे..

नीलम : (हसते भानुके गले लगते) थेन्क्यु पापा.. दादीको समजाइअ‍े.. हें..हें..हें..

पुनम : (इसी दौरान लताके रुममे) लता.. अब कैसी हे तेरी तबीयत..?

लता : (मुस्कुराते धीरेसे) अब ठीक हु दीदी.. पहेलेसे बहेतर.. क्या आप लोग जा रहे हो..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. तुजे अ‍ेक महीना यही रहेना हे.. ताकी बार बार सृतीदीको दीखानेके लीये यहा आना ना पडे.. फीर हमेसाके लीये वहा गांवमे.. अब लखन भैयाभी वहा होगे..

लता : (सामने देखते) दीदी.. क्या मे आपको कुछ पुछ सकती हु..?

पुनम : (पास बैठते मुस्कुराते) पता हे मुजे.. की तु क्या पुछना चाहती हे.. फीर भी बोल..

लता : (सामने देखते धीरेसे) आपको ओर मोमको सब पता था तो फीर क्यु..? ये सब होना..था तो फीर बडे भैयासे क्यु सादी करवाइ..? अब तो लखन भी हम दोनोको बच्चा देनेमे सक्षम हेनां..?

पुनम : (सामने देखते) हां लता.. इस बारेमे पहेले भी हमारी बात हुइ हेनां..? फीर भी सुनना चाहती हे तो सुन.. सचाइ बहुत कडवी होती हे.. सुन पायेगी तु..?

लता : (नजरे चुराते) दीदी.. ये जींदगी भी कीतनी अजीब हे.. हमे जो चाहीये हमे हमारी मर्जीसे ओर सही समयपे कभी नही मीलता..

पुनम : (सामने देखते) तुजे क्या नही मीला..? सबकुछ तो मीला जो तुम चाहती थी.. हमे पता था लखन भैया भविस्यमे हमे बच्चा देनेमे सक्षम होगे.. तो क्या इनसे तेरी चाहत खतम होजाती..? नहीनां..? क्युकी तेरी पहेली चाहत लखन भैया नही.. हमेसा बडे भैया थे.. बोल.. क्या ये सच नही हे..?

लता : (नजरे जुकाते) हां हे.. लेकीन मे लखन भैयासे भी तो प्यार करती हु..

पुनम : (सामने देखते) नही लता.. लखन भैयासे तब प्यार हुआ.. जब तेरी सादी उनसे हुइ ओर उनको जडीबुटी पीलाइ.. इनसे पहेले तुमने जवानीके देहलीजपे कदम रखा तब तेरी चाहत हमेसा बडे भैया थे.. ओर इनके साथ फीजीकल रीलेशनमे आनेकी तुमने बहुत कोसीस भी कीथी.. येतो बडे भैयाने मना करदीया.. तब मजबुरीमे तुमने लखन भैयाको चुना.. ताकी तुम बडे भैयासे नजदीक रेह सके.. ओर उनको रीजाकर उनके साथ फीजीकल रीलेशन बना सके.. क्या ये सच नही हे..?

लता : (आंसु बहाते) हां हे.. दीदी तब मे नादान थी.. अच्छा बुरेका खयाल नही था.. मे बडे भैयाके साथ रेह सकु इसीलीये मेने लखन भैयासे सादी की.. ताकी मे उस घरपे रहेकर बडे भैयाको रीजा सकु.. क्युकी जबभी बडे भैया माको मीलने आते थे तब मे उन दोनोको छुपछुपके देखती थी.. ओर मुजे बडे भैयाका वो बहुत भा गया था.. ओर मे तबसे उनके साथ सारीरीक रीलेशन बनानेके लीये बेताब थी.. ओर मे ये सब लखन भैयासे सादीके बाद भी करना चाहती थी..

पुनम : (मुस्कुराते) यही तो तेरे सवालका जवाब हे.. तभीतो मंजुमोमने तेरी यही भावनाका तो खयाल रखा.. ओर जो तु चाहती थी वो होगया.. बडे भैयासे तुम्हारा सारीरीक संबध होगया.. ओर उन्होने तुजे प्रेगनेन्ट तक करदीया.. तो इसमे गलत कहा हुआ..? यही तो तुम चाहती थी..

लता : (नजरे जुकाते धीरेसे) लेकीन दीदी.. मे लखन भैयाको भी तो चाहती हु..

पुनम : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. इसीलीये तो अब लखन भैया तुजे अच्छे लगने लगे.. क्युकी तुम उनको भी प्यार करने लगी हो.. ओर अब मोमके जानेके बाद बडे भैयाभी उनकी कीसीभी बीवीको नही मीलते.. ओर तुम इस सुखसे वंचीत होगइ.. इसीलीये अब तुजे लखन भैया चाहीये.. अच्छा हुआ मोमने रीस्तोमे बदलाव कीया.. वरना तेरा क्या होता..?

लता : (आंसु बहाते) सोरी दीदी.. आजके बाद इस बातकी चर्चा कभी नही करुगी.. मुजे सब बाते समजमे आगइ.. आइ अ‍ेम सोरी..

पुनम : (मुस्कुराते गालको सहेलाते) सोरी मत बोल.. बस.. मेरा काम ही परीवारको सम्हालना हे.. अभी तो तु सीर्फ दो मर्दोसे ही वीचलीत होगइ.. तब क्या होगा जब हमारा विजय भी बडा होकर हम सबको भोगेगा.. उनके बाद तो वो स्वयंम.. हमारे विजयका बेटा..

जो मंजुमोमकी कोखसे पैदा होगा.. तब भी हम सब अ‍ैसे ही जवान होगी.. ओर हम सबका इनके साथ फीजीकल रीलेशन होगा.. हमे वोही अनुभुती करवायेगा.. जो उस जमानेमे मोमके साथ ओर अपनी बहेनोके साथ संभोग करते सबको संभोगकी अनुभुती करवाता था..

लता : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. मे उस पलका बडी बेसब्रीसे इन्तजार कर रही हु.. मोमनेभी मुजे ये बात बताइ थी.. कब आयेगा वो..?

पुनम : (हसते धीरेसे) बडी जल्दी हे तुजे..? अभी मोमको तो बडी होने दे.. अभी अभी उनका जन्म हुआ हे.. लेकीन इनसे पहेले हम सबको हमारे विजसे नीपटना होगा.. वोभी कुछ कम नही होगा.. तब हम सब लखन भैयाको भी भुल जायेगी ओर विजयके पीछे पागल होगी..

लता : (सरमाकर हसते) ओह गोड.. हमे क्या क्या जेलना पडेगा.. ठीक हे दीदी.. आइ अ‍ेम फाइन.. मे ठीक होकर जल्द ही वहा आजाउगी..

पुनम : (खडी होते हसते) हां आजाना.. क्युकी अब ढाइ तीन महीने तो तु लखन भैयासे भी हाथ नही लगा पायेगी.. बस.. दोनो उपर उपरसे ही मजे करना.. चलो मे चलती हु.. तु अपना खयाल रखना बाय..

लता : (मुस्कुराते) बाय दीदी..

फीर भानु सरला ओर देवायत नीर्मला पुनम गांवकी ओर नीकल गये.. सृती भावीका भी लताको चेक करके लखनके होठोपे कीस करके अपनी क्लीनीकपे चली गइ.. राधीका लताकी देखभालके लीये घरपे ही रुक गइ.. अब उनकाभी पेट काफी बढ गया था.. ओर लखन नीलमको लेकर कोलेज छोडने चला गया.. सबकी लाइफ अ‍ैसेही चलने लगी..

अ‍ैसे ही अ‍ेक महीना बीत गया.. लता अब काफी ठीक हो गइ थी.. लखन ओर राधीका उनका हर दीन खयाल रखते.. वो अक्सर लता ओर राधीकाके होंठ चुम लेता.. ओर तीनो मस्ती मजाक करते रहेते.. लखन राधीकाको दिनमे ही नीपटा लेता.. ताकी राधीका रातमे लताके साथ उनका खयाल रखनेके लीये सो सके.. अ‍ेक बारतो लखनने लताके सामने ही राधीकाको दिनमे चोद लीया..

तब राधीका सर्मसार होते हसते हुअ‍े चुदवानेके बाद लखनको मारनेके लीये दोडी.. ओर लता जोरोसे हसने लगी.. ओर यही कीस्सा लताने रातके खानेपे सृती ओर भावीकाको बताया तो दोनो खुब ठहाका मारते हसने लगी.. ओर राधीका सर्मसार होते लखनकी पीठमे मुका मारती हे.. ओर अ‍ेक बार फीर सबलोग हसने लगे..

अ‍ैसेही मस्ती मजाक करते दिन बीतने लगे.. अब नीलम भी काफी बेहतर होगइ थी.. अब वो फीरसे अक्सर लखनको ललचाइ नजरोसे देख रही थी.. ओर अ‍ेक दिन लखन उनको कोलेज छोडने गया तो उनके साथ छेडछाड करने लगी.. फीर सामको जब सृती भावीका आइ तो सृती फ्रेस होकर कीचनमे चली गइ..

वहा सृतीको अकेली देखकर वोभी मदद करनेके बहाने कीचनमे चली गइ.. ओर मौका मीलते ही उन्होने धीरेसे हीमत करते सृतीको केह दीया.. की वो अब ठीक होगइ हे.. ओर लखनसे अब सारीरीक सुख चाहती हे.. जीसे सुनकर सृती हसने लगी.. फीर उसने लताके घरपे होनेकी बात कही..

सृती : (धीरेसे) नीलु.. क्या तेरी बुआ.. मीन्स लताको सब पता हे..? की तेरी धिरेनसे कोर्ट मेरीज हुइ हे.. ओर धिरेनके साथ साथ तेरा लखनके साथ भी फीजीकल रीलेशन हे..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) नही दीदी.. उनको धिरेनके बारेमे कुछ नही पता.. सीर्फ लखन जीजुके बारेमे ही पता हे.. जब वो बडे जीजुके साथ सादी करके वहा चली गइथी.. तब अ‍ेक बार मेने उसे लखन जीजुके बारेमे बतादीया था.. की मेरा लखन जीजुके साथ फीजीकल रीलेशन हे.. उनको हमारे बारेमे सब पता हे.. इन्फेक्ट लखन जीजुका मम्मीके साथ फीजीकल रीस्ता हे वोभी उनको पता हे..

सृती : (कातील मुस्कानसे) ठीक हे.. मतलब अभी धिरेनकी बात हमे छुपानी हे.. तेरी लता बुआ काफी मेच्योर ओर समजदार होगइ हे.. वो ओर राधीका दीदी तो नीचे होगी.. तो आज देर रात तु आजाना.. मे तुजे आइपील दुगी.. कलही लाइ हु.. फीर भी मे कोइ रीस्क लेना नही चाहती.. तेरे जीजुको कहेना कोन्डम युज करे.. ओर मेभी उसे केह दुगी..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी कोन्डम रहेने दीजीयेनां.. नइ आइपीलतो हे.. हम दोनोको ही कोन्डम युज करना अच्छा नही लगता..

सृती : (हसते नीलमकी पीठमे मुका जडते धीरेसे) बडी कमीनी हो तुम.. तुभी रमा भाभीकी तराह बडी वाली चुदकड होगइ हे.. इसीलीये तो सब पेट फुलाकर घुम रही हे.. तुजे पता हेना तुजे धिरेनके साथ रहेना हे..?

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) दीदी.. इनसे पहेले सादीतो मेने लखन भैयासे कीहे.. फीर भी मे खयाल रखुगी.. क्युकी धिरेनके साथ रहेना मेरी मजबुरी हे.. वो सब बाते तो आपको भी पता हे..

सृती : (मुस्कुराते) हंम.. आइ नो मुजे सब पता हे.. ठीक हे रातको देरसे आजाना.. मे तुम दोनोका मीलन करवा दुगी.. मजे कर.. हें..हें..हें..

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इस रात लखनने सृती ओर भावीकाकी धमाकेदार चुदाइ करली.. तब दरवाजा धीरेसे खुला.. ओर नीलम सरमाते मुस्कुराते हुअ‍े अंदर आगइ.. ओर अंदर आतेही धीरेसे दरवाजा लोक करदीया.. इस रात लखनने बीना नीचे उतरे नीलमको तीन बार चोद लीया.. तब सृतीने उसे आइपील खीलादी.. ओर नीलम अपने कमरेमे चली गइ..
 
अ‍ेक दिन गांवमे पंचायतकी ओफीसमे अ‍ेक लेटर आया.. गांवका स्कुलतो शीक्षण समीतीके अंडरमे था.. लेकीन होस्पीटलके लीये सीर्फ जमीन ओर कुछ पेसे ही सरकारकी ओर मीले थे.. बाकीका खर्चा देवायतकी ओरसे ओर सभी मशीनरी भावीकाकी ओरसे डोनेटमे मीली थी..

तो सरकारने होस्पीटलके लीये अ‍ेक अ‍ेन जी ओका रजीस्ट्रेशन करवानेका सुजाव दीया था.. ताकी उन अ‍ेन जी ओके माध्यामसे होस्पीटलके लीये सरकारकी ओरसे ग्रांट मीलती रहे.. ओर अ‍ेन जी ओ ही इस होस्पीटलका वहीवट करे.. उन अ‍ेन जी ओमे पुनमने वसुधा.. भावीका.. लखन.. नीशा.. ओर चारुका नाम सजेश कीया..

ओर इसी बीच जीतने भी लोगोने आवेदन कीया था इन सबको घरपे लेटर आगया.. लनके आजुबाजुके कुछ गांवके लडके लडकीया तो कुछ सहेरसे आवेदन आया था.. ओर इनमे कइ युवा युवतीया इस गांवकी भी थी.. ज्यादातर आवेदन स्कुलके सीक्षीकके लीये तो बहुत सारे नर्सींग स्टाफके लीये भीथा..

जीनमे मुनाकी मामी गीताके अलावा जागृती ओर जयश्रीके साथ गांवकी ओर लडकीया भी सामील थी.. जीनकी सीफारीस देवायत ओर लखनने पहेलेसे ही करदी थी.. ओर मुना बरखाके अलावा आरती ओर भावीकाकी दो ओर नर्सको भी होस्पीटलके लीये आवेदन दीया था.. जीनमे नर्सींगके लीये सहेर ओर दुसरे गांवकी बहुत सारी लडकीया सामील थी..

इनमे जीनकी नीयुक्ती हुइ थी इन सबके घरपे लेटर आ गया.. ओर इनमे लीखा थाकी उद्घाटनके दिन सबको मुख्यमंत्रीके हाथसे नीयुक्ती पत्र दीया जायेगा.. तो सभी बहुत ही उत्साहीत थे.. खास करके गीता ओर उनका पती.. जो सरकारी नोकरीमे सीलेक्शनकी वजहसे बार बार मुना ओर लखनका आभार जता रहे थे..

ओर गीताने तो उत्साहमे आकर अ‍ेक दिन मुनाको भी घरपे बुला लीया.. जब उनका पती बहारगांव था.. उस दिन गीताने मुनाके साथ फीजीकल होते खुब सेलीब्रेट कीया.. ओर अपने पेटमे मुनाका बच्चा होनेके बावजुद भी गीताने मुनाको खुस करदीया.. सभी आवेदनकर्ता सक्ुल होस्पीलसे संपर्क करने लगे..

अ‍ेक दिन दो बडे ट्रक गांवमे आगये.. उनमे छोटे बडे मशीन भरे हुअ‍े थे.. ओर सबकुछ भावीकाके नाम था.. तो पुनमका फोन आते ही लखनको भावीकाको लेकर गांव जाना पडा.. तो भावीकाके साथ घरके सबलोग गांव जानेके लीये तैयार होगये.. वहा जाकर भावीकाने साइन करदी.. ओर मजदुरोने सभी मशीन ध्यानसे ट्रकसे उतारा ओर नइ होस्पीटलमे रख दीया..

गांवके सभी लोग देखनेके लीये इकठा होगये.. सबलोग बहुत खुस दिख रहे थे.. ओर खुसभी क्युना हो.. आखीर इतने छोटे गांवमे इतनी बडी होस्पीटल जो बन गइ थी.. ओर साथमे बडी हाइस्कुल भी.. जो अब सीर्फ कोलेजके लीये ही सहेर पढने जाना था.. उनका भी काफी सामान आ चुका था..

बस अब देर थी तो सीर्फ इनके उद्घाटनकी.. फीर ट्रक वालेको वीदा करके सबलोग हवेलीपे आ गये.. आज देवायतकी सभी बीवीया ओर वसुधा भी थी.. लखनको देखते ही पुनम दोडकर उनके गले लग गइ.. तो सबलोग हसने लगे.. फीर सबलोग होलमे आकर बैठ गये.. तब देवायतने सबको बतायाकी अ‍ेक महीनेके बाद मुख्यमंत्रीकी डेट मील गइ हे..

तो सबने खुसीसे तालीया बजाइ.. फीर सबलोग मीलकर उद्घाटनकी आगेकी योजना बनाने लगे.. मुख्यमंत्रीका आना मतलब पंडालमे बहुत बडी संख्यामे लोग होना चाहीये.. ओर ये देवायतके लीये कोइ मुस्कील काम नही था.. क्युकी आजु बाजुके असी (८०) गांवमे कोइ बडी होस्पीटल या हाइस्कुल नही था.. ओर सबलोग इस बातपे बहुत उत्साहीत थे..

लखनके जीम्मे कुछ जीम्वेवारी आगइ.. उद्घाटनके नीमंत्रण कार्ड.. पंडाल.. सबके भोजनकी व्यवस्था.. सबकुछ लखन ओर उनके दोस्तोको सम्हालना था.. होस्पीटलकी अंदरुनी व्यवस्था सृती भावीका ओर वसुधाने सम्हाल ली.. तो हाइस्कुलकी व्यवस्था वंदना जागृती जयश्री ओर बनवारीलालकी बहु बिन्दीयाने सम्हालली..

देवायतके गांव ओर आजु बाजुके बहुत सारे गांवकी लडकीया ओर ओर कुछ ओरतोने नोकरीके लीये आवेदन कीया था.. इनमे मुना बरखा ओर गीताके अलावा जयश्री जागुती बनवारीलालकी बहु बीन्दीया के साथ नीशाभी सामील थी.. ओर देवायतने इन सभीकी वीसेस सीफारीस भी कीथी..

फीर देर रात लखन सृती राधीका भावीका ओर नीलमको लेकर वापस सहेर आगया.. लता अब ठीक होगइ थी तो पुनमने उसे वही रोक लीया.. इस रात सबलोग बहुत ही उत्साहीत थे.. तो जाहीर हे सबने मीलकर अ‍ेक साथ बेडपे तबाही मचाकर सेलीब्रेट भी कीया.. जीनमे आज लखनने सृती ओर भावीकाकी हालत खराब करदी..

दुसरे दिन सबलोग अपनी जीम्वेवारीके हीसाबसे कामपे लग गये.. चारु ओर रश्मीने वोट्सअ‍ेपपे लखनको नीमंत्रण कार्डका ड्राफ भी भेज दीया.. इनमे दो तीन सुधारके बाद फाइनल करदीया गया.. कार्डकी पसंदगी करनी थी.. तो इसी बहाने रश्मी ओर चारुने मजाकमे लखनके साथ खेला करदीया..

रश्मीने कार्ड देखकर पसंद करनेकी जीदकी.. ओर लखनको कहाकी कार्डका आल्बम लेकर गांव आये ओर उसे दीखाये.. तो लखन सुबह सुबह ही कार्डका आल्बम लेकर गांव चला गया.. ओर सीधे पंचायतकी ओफीमे चला गया जहा रश्मी ओर चारु बैठती थी.. वहा जाकर देखा तो दोनो ही नही थी.. वहा सीर्फ वंदना बैठी थी..

वंदना : (जैसेही लखन आया सरमाकर मुस्कुराते) अरे लखन भैया.. आप..? सुबह सुबह..?

लखन : (थोडे गुस्सेमे) भाभी.. कहा गइ आपकी वो दोनो कमीनी सौतने..? कल तो मेरा दिमाग खराब ही करदीया.. कार्डकी इनती डीजाइन मोबाइलपे भेजी फीर भी कहेती हे रुबरु आल्बम लेकर आओ.. कहा मर गइ दोनो..

वंदना : (जोरोसे हसते) अरे गुस्सातो मत करो.. दोनो अभी घरपे ही हे.. सायद कुछ कामकी वजहसे आज दोनो नही आयेगी.. कहेती थी घरपे ही रहेगी.. क्या चाइ पीओगे..?

लखन : (मुस्कुराते वही बैठते) नही भाभी.. घरपे चाइ नास्ता करके ही आया हु.. कहो.. कैसीहे आपकी ओर मेरी भतीजीकी तबीयत..?

वंदना : (सरमाकर मुस्कुराते) मेभी ठीक हु ओर बच्ची भी ठीक हे.. लखन भैया.. हम ओल मोस्ट हम उम्र ही हे.. तो मुजे नामसे बुलाओगे तोभी चलेगा.. क्युकी मे पुनोदी ओर आप साथमे ही पढे हे.. हें..हें..हें..

लखन : (सरारती मुस्कानसे) क्यु..? भाभीमे क्या प्रोबलेम हे..? ओर कीतना अच्छा लगता हे जब कोइ साथमे पढती लडकी मेरी भाभी हो.. फीर पताहेनां मंजु मोमने हमारे परीवारके लीये कुछ नीयम बनाये हे.. कही आप मुजे दोस्त बनाकर मुजसे दुर करनातो नही चाहती..? गभराइअ‍े नही अ‍ैसा कुछ नही होगा..

वंदना : (सर्मसार होते धीरेसे मुस्कुराते) अरे नही नही.. आप गलत समज रहे हे.. मीन्स.. मेतो अ‍ैसेही केह रही थी.. ठीक हे आप कुछभी मानीये.. मे आपकी भाभी ही ठीक हु..

लखन : (सरारती मुस्कानसे) तो फीर मे इसका मतलब क्या समजु..?

वंदना : (सर्मसार होते कातील नजरोसे फुसफुसाते) क्या मतलब..? मीन्स.. जाओ मुजे नही पता.. आप अभी भी इतने ही सरारती हो.. (कातीलाना नजरोसे मुस्कुराते धीरेसे) क्या हमारे परीवारकी सर्तोका हमारे रीस्तोमे कोइ मायना हे..?

लखन : (मुस्कुराते) पता नही भाभी आपकी सोच क्या हे.. वो सब आपके नीर्णय ओर आपकी सोचपे डीपेन्ड करता हे.. बस.. मुजे अभी इतना पता हे मुजे मेरी सभी बीवीयो ओर भाभीओको सम्हालनेका हुकुम मीला हे..

वंदना : (सरमाकर मुस्कुराते) मेभी तो आपकी भाभी हु.. ठीक हे मे दोस्तीके साथ साथ आपकी भाभीका फर्ज नीभाउगी.. क्युकी अब बडे भैयासे तो कइ उमीद नही हे.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे..

लखन : (खडा होते) ठीक हे वंदु.. हम दोनो फुरसतमे मीलेगे.. अभी तो इन दोनो भाभीओको नीपटालु..

कहेते लखन खडा होगया.. इस वक्त पंचायतकी ओफीसमे सीर्फ लखन ओर वंदनाही थे.. तभी लखनने कुछ अ‍ैसा कीया जीसे वंदना सर्मसार होगइ.. इनके तनसे अ‍ेक बीजलीकी लहेर दोड गइ.. क्युकी लखनने अचानक वंदनाके पास जाकर उनके होठ चुम लीये.. तो वंदना सर्मसार होते दुसरी ओर मुह करते मंद मंद मुस्कुराने लगी.. फीर लखनकी ओर कातील नजरोसे देखते धीरेसे फुसफुसाइ..

वंदना : (फुसफुसाते) लखन.. आइ लव यु.. मे आपका इन्तजार करुगी.. मुजे मंजुमोमकी सभी बाते मंजुर हे..

वंदनाकी सहेमती मीलते ही लखन मुस्कुराते वहासे चला गया.. ओर सीधा रश्मीके घर चला गया.. वहा देखा तो रश्मी ओर चारु लखनका इन्तजार करते वही गपसप कर रही थी.. जैसेही लखन आया दोनो उनकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराने लगी.. ओर आकर अ‍ेक अ‍ेक करते लखनके गले लग गइ..

लखन : (मुस्कुराते गले मीलते) दोनोकी दोनो भाभीया बहुत ही कमीनी हो.. आप मोबाइलसे भी कार्ड सीलेक्ट कर सकती थी.. मुजे यहा क्यु बुलाया..?

रश्मी : (हसते) अरे.. अभी आपने हम दोनोका कमीनेपन देखा ही कहा हे.. आइअ‍े बैठीये..

लखन : (सोफेपे बैठते) अगर नही देखा हेतो आज इसेभी दीखादो.. मेभी तो देखु दोनो कीतना कमीनापन दीखाती हो..

चारु : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) इसीलीये तो हमारा कमीनेपन दीखाने आज आपको यहा बुलाया हे.. हम देखती हे की मंजुदीदीने जो बात कही हे वो सीर्फ बाते ही हेकी इनपे आप अमल भी करते हो..?

लखन : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) आर यु स्योर..? देखना कही दोनोकी हालत ना बीगड जाये..

रश्मी : (सरमाकर मुस्कुराते लखनका हथीयार पेन्टके उपरसेही पकडते) बीगडने दो.. इसीलीये हम दोनो छुटी लेकर घरपे हे.. आज अपना जलवा दीखा ही दो.. देखते हे इनमे कीतना दम हे.. दोपहर तक इस घरसे बहार नीकलनेका मौका नही मीलेगा..

फीर रश्मीने लखनको पानी ओर चाइ पीलाइ.. ओर तीनोने मीलकर अ‍ेक कार्ड सीलेक्ट कीया.. जब कार्ड सीलेक्ट हो गया तो रशीने घरका दरवाजा अच्छेसे बंध करदीया.. तो लखन सबकुछ समज गया.. तभी चारु खडी होजाती हे ओर लखनका हाथ पकडकर उसे बेडरुममे ले गइ.. ओर पीछे पीछे रश्मीभी हसती हुइ आगइ..

लखनको लगा आजतो दोनो लगभग उनका बलात्कार ही करदेगी.. दोनोने देवायतके हथीयारको जेला था.. इसीलीये दोनो लखनको बहुतही हल्केमे ले रही थी.. लेकीन दोनोको नही पताथाकी लखन क्या चीज हे.. अंदर जातेही कमरा बंध करके दोनो फटाफट अपने कपडे नीकालने लगी.. तब चारुने नंगा होते ही लखनको अपने उपर खीच ही लीया..

तो कुछही देरके बाद कमरेसे अ‍ेक जोरोकी चीख सुनाइदी.. जो कमरा बंध होनेकी वजहसे बहार तक नही सुनाइदी.. चारु जोरोसे बेडपे पैर पटकते लखनसे छुटनेकी कोसीस करते आंसु बहा रही थी.. जीसे देखकर अ‍ेकपल तो रश्मी भी डर गइ.. क्युकी लखनका हथीयार ही इतना बडा दमदार ओर मोटा था जीसे देखकर अ‍ेकपल तो दोनोके पसीने छुट गये थे..

दोनोने लखनको बहुत ही हल्केमे लीया था.. इस वकत रश्मी भी अपने सभी कपडे नीकालकर बेडपे चारुके बगलमे लेटी हुइ अपनी चुतको सहेला रही थी.. ओर लखन जोरोसे कमर हीलाते चारुको चोद रहा था.. उसने आदतके अनुसार बीना लंड बहार नीकाले चारुको दो बार चोद लीया.. ओर चारुकी हालत खराब करदी..

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ओर ना जाने इसी बीच चारु कीतनी बार जडी होगी.. वो हर बार जडती तो लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती.. ओर अपनी कमरको आडी टेडी करते जटकने लगती.. लखनने चारुकी चुतको दो बार भरके हरी भरी करदी.. फीर रश्मी लखनके लीये बादाम वाला दुध लेकर आइ.. ओर तीनोने दुध पीकर कुछ देर आराम कीया..

फीर रश्मीकी बारी आइ.. तो वो लखनके लंडको बडी मुस्कीलसे जेल गइ.. उनकी आंखसे सीर्फ आंसुही नीकले.. फीर दोनोके बीच धमासान चुदाइ होने लगी.. चारुकी तराह लखनने रश्मीको भी दो बार चोद लीया.. फीर तीनो साथमे सावर लेने चले गये.. तो वहा भी लखनने अ‍ेक बार फीर चारुको खडे खडे चोद लीया..

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आखीर चारु ओर रश्मी लखनसे चुद ही गइ.. जीसकी चोजन दोनो कही दीनोसे बना रही थी.. लखनसे चुदवाकर दोनोही लखनकी दिवानी होगइ.. ओर दुसरी बार कब मीलेगे इनकी योजना बनाने लगी.. ओर चारुने लखनको येभी बतादीया की नीशा ओर वंदना भी इनसे चुदवानेके लीये इनका इन्तजार कर रही हे..
 
इनके बाद लखन वहासे चला गया ओर सीधा हवेलीपे आ गया.. ओर चारु रश्मी कुछ देरके लीये आराम करने वापस बेडपे चली गइ.. क्युकी लखनने दोनोके अ‍ेक अ‍ेक अंगको जंजोरके रखदीया था.. हवेलीपे आया तब देवायतभी आ चुका था.. फीर सबने मीलकर खाना खाया..

खानेके बाद सबलोग होलमे आगये.. वहा लखनने सबको कार्डका आल्बम दीखाया ओर सीलेक्ट कीया हुआ कार्ड भी दीखाया.. सबको कार्ड पसंद आया.. ओर देवायतने उसे जल्दसे जल्द प्रीन्ट करवानेको कहा.. फीर कुछ ओर बाते हुइ.. तब नीर्मला देवायतको लेकर रुममे आराम करने चली गइ..

तो पुनम लखनको लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करदीया.. कुछही देरमे बंध कमरेमे पुनमकी हल्कीसी सीसकारीया गुज रही थी.. आज लखन अकेला आया था तो वो बहुत ही खुस थी.. साम चार बजे तब सबलोग आराम करते रहे तबतक लखन पुनमके उपरही लेटा हुआ उनकी चुदाइ करता रहा..

साम छे बजे लखन वहासे नीकल गया.. ओर अपने कामपे लग गया.. इन प्रद्नह दिनोमे कइ बार लखन गांव ओर सहेरके बीच चकर काटता रहा.. ओर इसी बीच वंदना ओर नीशासे भी बाते करते मीलनेकी योजना बनाते काफी आगे बढा.. अ‍ेक बार तो उसे फीरसे वंदनाको ओफीसमे अकेलेमे मीलनेका मौका मीला..

तो वंदनाको लगभग दबोच ही लीया.. ओर उनके बुब्सके साथ खेलते अ‍ेक दुसरेको चुमते रहे.. वंदना बहुत ही उतेजीत हो चुकी थी.. ओर दोनोने अकेले मीलनेका प्लान भी बनाया.. फीर उसे दो बार ब्रीन्दासे अकेलेमे मीलनेका मौका भी मील गया.. अ‍ेक अपराध बोज महेसुस करते लखन ब्रीन्दासे फीजीकल होना टालता रहा.. लेकीन दोनो बार ब्रीन्दा नही मानी..

ओर उसने जबरदस्तीसे लखनके साथ फीरसे सारीरीक सबंध बनाये.. क्युकी जब लखनसे वो पहेली बार फीजीकल हुइ.. ओर उनसे प्रेगनेन्ट हुइ तबसे ही लखन उनके मनमे बस गया था.. ओर भानुके घरपे वोही लखनपे नजर गडाये अ‍ेक आस लेकर देखती थी.. की कब उसे दुबारा लखनको अकेलेमे मीलनेका मौका मीले..

ओर इन पंद्नह दीनमे ही उसे लखनसे अकेलेमे मीलनेका दो बार मौका मील गया.. जीनका ब्रीन्दाने लखनसे चुदवाकर खुब फायदा उठाया.. क्युकी दोनो बार श्रीधर जयश्री ओर बच्चेको लेकर मायके गया हुआ था.. ओर लखन श्रीधरको कामके सीलसीलेमे मीलने जाता उसे वहा ब्रीन्दा घरपे अकेली ही मीलती..

ओर ब्रीन्दा लखनसे जबरदस्तीसे फीजीकल होने मजबुर कर देती.. वो जानती थी.. की वो श्रीधरको धोखा दे रही हे.. फीर भी उसे लखनसे चुदवानेका कोइ अफसोस नही था.. क्युकी उन्होने खुद अपने पती श्रीधरको उनकी सास यानीकी वृन्दासे फीजीकल रीलेशनके लीये राजी कीया था.. ओर खुदभी लखनके साथ रीलेशन रखना चाहती थी..

लखनका हथीयार हमेसा खडा ही रहेता.. अब उनके लीये इतनी बीवीया ओर भाभीया थीकी लखनको कोइ तकलीफ नही थी.. इसके अलावा भी लखनके दुसरी कइ ओरतके साथ फीजीकल रीलेशन थे जो लखनको चाहती थी.. इनमे ब्रीन्दा टीना सरलाकाकीके अलावा रमा भी सामील थी..

लखन हर दिन कीसना कीसीको सारीरीक सुख देता रहा.. ओर अ‍ेक बार चारु पंचायतकी ओफीसमे थी तब वसुधाने लखनको घरपे बुला लीया.. उस दिन लखन कीसी कामसे गांवमे था तो वो वसुधाको मीलने उनके घरपे चला गया.. तब उसे वसुधाके साथ नीशाको भी चोदनेका मौका मील गया..

अ‍ेक जमानेमे नीशा ओर वसुधा.. दोनोही पती पत्नी थे.. अब जेन्डर चेन्ज करनेके बाद वसुधा भी अ‍ेक ओरत हो गइ थी.. ओर आज दोनोही लखनके साथ बीस्तर साजा कर रही थी.. वसुधा बहुत ही आसानीसे लखनको जेल रही थी.. उसने जान बुजकर नीशाकी मौजुदगीमे वसुधाको दो बार चोद लीया..

ताकी नीशा उतेजीत हो सके.. ओर हुआ बीलकुल वैसा ही.. नीशा वसुधा ओर लखनको फीजीकल होते देखती रही.. ओर अपनी चुतको सहेलाती रही.. फीर वसुधाको चोदलेनेके बाद कुछ ही देरमे नीशा आंसु बहाते मुह इधर उधर करते छटपटा रही थी.. ओर बेडपे दोनो पैर पटकते लखनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस कर रही थी..

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तब वसुधा नीशाके सरको सहेलाते उनके होंठ चुमने लगी.. ताकी नीशाका दर्द कम होजाये.. फीर तो बीना नीचे उतरे ही लखनने नीशाको लगातार तीन बार चोद लीया.. ओर नीशाकी हालत पतली करदी.. नीशाको लगा अबतककी सारी कशर लखनने अ‍ेक ही बारमे पुरी करदी.. फीर तीनो साथ नहाने चले गये.. तब लखनने वहा भी अ‍ेक बार खडे खडे वसुधाको चोद लीया..

फीर तीनो कंपलीट होकर बहार आगये.. वंदनाको छोडकर लखनकी बीवीओके अलावा अब उनकी सभी भाभीया.. ओर लखनके साथ जीनका अवैध रीस्ता था.. वो सभी ओरते हमेसा लखनको अकेलेमे मीलनेके लीये मौकेकी तलासमे रहेती.. फीर चाहे दीन हो या रात.. जबभी लखनको अकेलेमे मीलनेका मौका मीलता वो लखनके साथ फीजीकल रीलेशन बना लेती..

दीन बीतने लगे.. पता ही नही चला अ‍ेक महीना कैसे गुजर गया.. नीमंत्रण देनेका काम सबने मीलकर संम्हाल लीया.. देवायतने पुरे असी (८०) गांवको सम्हाला.. इनमे सभीके पंचायतके सदस्यो सरपंचो ओर गांवके कइ जमीनदार ओर प्रतीष्टीत व्यक्तीके साथ गांवके सभी लोग सामील थे..

सृती भावीका ओर लखनने मीलकर कइ डोक्टर उद्योगपती ओर पोलीटीशनके साथ सरकारी अधीकारीओ भी सामील थे.. पंडाल ओर भोजनका कार्य लखनके सभी दोस्तो ओर भानुके अलावा गांवके कइ युवाओने सम्हाल लीया था.. तो बाकी कुछ काम अ‍ेजन्सीको दे दीया गया था..

पंकजभाइ ओर नयनाको खुद भावीका ओर लखन उनके घरपे जाकर नीमंत्रण देकर आगये.. ओर दोनोको खास उपस्थीत रहेनेको कहा.. फीर भावीकाने अपनी बचपनकी सहेली नेहासे भी फोनपे बात करते आमंत्रीत कीया.. ठीक तीन दिन पहेले लखन सबको लेकर गांव चला गया.. इस बार साथमे दया ओर रजीया भी गइ थी..

गांवमे अ‍ेक उत्सव जैसा वातावरण हो गया.. पुरा गांव फुलो ओर जंडोसे सजाया गया था.. आजु बाजुके गांवके कइ युवा ओर सरपंचो मददके लीये आते जाते रहे.. सबकी भोजनकी व्यवस्था देवायतने अपने खेतोके पास खुले मेदानमे कीथी.. दुसरे गांवकी कइ लडकीया ओर ओरते लखनको देखकर सर्मा जाती..

ओर कइतो लखन ओर इनके सभी दोस्तोको अपनी ओर आकर्सीत करनेकी कोसीस भी करती.. ओर इनका श्रीधर बंसी मुना ओर साहीलने खुब लाभ भी उठाया.. लखनके सभी दोस्तो सेटींग होतेही लडकीको लेकर अपने खेतो या अ‍ेकांत जगहपे चले जाते.. ओर वहा उसे चोदकर वापस आजाते..

लेकीन अब लखन कीसी ओरपे ध्यान नही देता था.. क्युकी उनके पास जीतनी ओरते थी वो उनके लीये पर्याप्त थी.. इसी दौरान काम करते लखनका खयाल रखनेका जीमा पुनमने नीलमको दीया था.. तो नीलम लगभग लखनके साथ ही रहेती ओर उनके काममे उनकी मदद भी करती.. ओर लखनकी सारीरक जरुरतको पुरी भी करती..

पंडाल घरसे नजदीक था तो कइ बार नीलम लखनको लेकर अपने नये घरपे आराम करनेके बहाने उपरकी मंजीलपे चली जाती.. ओर लखनके साथ फीजीकल हो जाती.. ओर कभी कभी इनका लाभ रमाको भी मीलता.. क्युकी गांवमे आनेके बाद ज्यादातर सरला भानुके साथ खेतोपे ही रहेने लगी थी.. ओर इस बातका नीलमने खुब फायदा उठाया..

ओर अ‍ेक बार दोपरको सरला काकी सो रही थी.. ओर भानु काममे लगा हुआ था.. तब नीलमने मौका देखकर लखनको रमाके कमरेमे भेज दीया.. ओर वो खुद बहार नीगरानी रखने लगी.. उनको रमाकी हल्कीसी सीसकारीया बहार तक सुनाइ दे रही थी.. वो प्रेगनेन्ट होनेकी वजहसे खडे खडे ही जुक गइ.. ओर लखन खडेखडे ही उनकी पीछेकी ले रहा था..

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जब लखनने रमाको संतुस्ट कीया तो दोनो बहार आगये.. ओर रमा सरमाकर नीलमकी ओर देखते हसने लगी.. फीर नीलम लखनको लेकर उपरकी मंजीलपे अ‍ेक कमरेमे चली गइ.. तो रमा हसने लगी.. वहा नीलमने लखनकी सवारीकी.. जब अ‍ेक बार जड गइ तब वो लखनके नीचे लेट गइ.. ओर लखनने नीलमको खुब रगड रगडके उनके ही घरपे चोद लीया..

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अ‍ेक घंटे तक आराम करनेके बाद दोनो कंपलीट होकर नीचे आगये.. सरलाभी नीचे मौजुद थी.. तो लखनको देखते ही उनकी ओर कातीलाना हसने लगी.. इसी बीच नीलम सर्मसार होते रमाकी ओर देखते हस रही थी.. रमा सबकुछ समज गइ.. ओर इस बातसे बहुत खुसभी थी.. की लखनने उनको ओर उनकी बेटीको सम्हाल लीया था..

उधर श्रीधर ओर जयश्री भी अपने बच्चेको लेकर सहेर वृन्दाको मीलने गये थे.. तब वापसीमे वो वृन्दाको लेकर गांव आये थे.. अब श्रीधर हर हप्ते जयश्रीको लेकर सहेर चला जाता जीसे जयश्री भी मायके आकर बहुत खुस रहेती.. वो सोचती की श्रीधर उनका बहुत खयाल रख रहा हे.. जो उनको हर हप्ते मायके लेजाता हे..

लेकीन असली बात तो सीर्फ ब्रीन्दा श्रीधर ओर जयश्रीकी मम्मी वृन्दाही जानते थे.. जयश्रीको आज तक पता नही चलाकी उनके पतीका अनकी मांके साथ यानीकी सास दामादके बीच नाजायज रीस्ता पल रहा हे.. जयश्रीने वृन्दाको अपनी स्कुलमे नीयुक्तीकी खबर सुनाइ जीसे सुनकर वृन्दा बहुत खुस हुइ..

ओर जयश्रीने उसे भी उत्सवमे आनेका न्योता दीया.. तो वृन्दा साथ चलनेको तैयार होगइ.. ओर दो पहोर जब खानेके लीये जीतुलाल घरपे आया तो वो जीतुको कुछ दिन अकेला खानेका प्रबंध करलेनेको कहेकर श्रीधर जयश्रीके साथ गांव जानेको तैयार होगइ.. तो श्रीधर जीतुलालकी ओर देखते कातील मुस्कान करता हे..

जीसे जीतुलाल मन ही मन श्रीधरसे ओर चीडने लगा ओर मनमे गालीया देने लगा.. जयश्री नोकरी मीलनेकी वजहसे बच्चीको अपनी मांके पास छोडकर जागृतीके साथ स्कुलमे मदद करने चली जाती.. तब दोनो बहेने खुब बाते करते बच्चीको सम्हालती.. जीसे दोनो बहेने ओर करीब आगइ.. ओर अपनी अंतरंग बाते भी सेर करने लगी..

अ‍ेक दिन बसंती भी ब्रीन्दाको जबरदस्तीसे मदद करनेका बहाना बनाकर साथ लेकर चली गइ.. तब श्रीधरको मौका मील गया.. वो सबके साथ कामपे जयश्री ओर ब्रीन्दाको देखकर छुपकेसे मुनाको कामका बहाना बनाकर घरपे चला गया.. वहा जाकर देखा तो घरपे सीर्फ वृन्दा बच्चीको जुलेमे जुला रही थी..

घरमे श्रीधरको देखते ही वृन्दा सर्मसार होगइ.. ओर श्रीधरकी ओर कातील नजरोसे देखते मुस्कुराने लगी.. श्रीधरने घरमे आकर धीरेसे दरवाजा बंध करदीया.. तो वृन्दा सबकुछ समज गइ.. उनकी चुत पानीयाते पानी छोडने लगी.. ओर सरमाकर श्रीधरकी ओर देखते मुस्कुराने लगी..

वृन्दा : (धीरेसे सरमाकर) आगया मेरा आसीक.. क्या वोदो वहा हे..? देखना कही वो दोनो आना जाये..

श्रीधर : (मुस्कुराते) नही डार्लींग.. वो दोनो वहा काममे बीजी हे.. इसीलीये तो मौका देखकर आया हु.. यहा की रुमके अंदर..?

वृन्दा : (सर्मसार होते धीरेसे फुसफुसाते) नही.. अंदर होगे ओर कोइ आगया तो हमपे सक करेगा.. यही करलो.. मे यही लेट जाती हु..

श्रीधर : (वही बेठते होठोको चुमते) डार्लींग.. तुमने क्या जादु करदीया.. तुम्हारी लेनेके लीये तो तरसता हु..

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कहेते श्रीधरने वही सोफेपे वृन्दाको दबोच लीया.. ओर उसे नंगी करके खुदभी नंगा हो गया.. कुछ ही देरमे वृन्दाकी कामुक सीसकारीया होलमे गुंजने लगी.. उन्होने जोरोसे श्रीधरको अपनी बाहोमे भीच लीया था.. ओर उनके दोनो पैर श्रीधरकी कमरपे आटी लगाये हुअ‍े थे.. ओर श्रीधर होले होले वृन्दाको चोद रहा था..
 
ओर इसी बातका बंसी ओर मुनाने भी फायदा उठा लीया था.. मौका मीलते ही कामके बहाने मुनाभी गीताको अ‍ेक दुरके लास्ट वाले क्लासमे लेकर चला गया.. ओर गीताको वही खडे खडे चोदलीया.. तो सांती जागृती सबकी मदद करनेमे बीजी थी तब बंसीने भी छुपकेसे इसारा करते बीन्दीयाको घरपे आनेका इसारा कीया.. तो बीन्दीया भी बहाना बनाकर वहासे सरक गइ..

वो अपने घरपे चली गइ.. देखा तो बनवारी लाल भी सबके साथ पंडालमे बैठे गपे लगा रहे थे.. बीन्दीयाने घरपे जाकर अंदरसे लोक करदीया.. ओर धीरेसे घरकी सीडीथोकी ओर देखने लगी.. तब बंसी उनकी छतसे होते बनवारीलालके घरमे घुस गया.. देखा तो बीन्दीया अपने बेडरुममे कंपलीट होते बंसीका इन्तजार कर रही थी..

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ओर कुछही देरमे दोनो अ‍ेक होगये.. बीन्दीयाकी अपने ही घरपे बंसीने जमकर चुदाइ कर डाली.. जबसे बीन्दीयाके गर्भमे बंसीका बच्चा पल रहा था तबसे बीन्दीया बंसीको दीलसे प्यार करने लगी थी.. मंजु ओर पुनमने रीस्तोमे बदलावकी चलाइ मुहीम काफी रंग लाइ.. सबलोग सेक्सका मजा लेते काम करते रहे..

श्रीधर वृन्दा जैसे कइ रीस्ते गांवमे ही नही.. बल्की आजु बाजुके कइ गांव मे पनप रहे थे.. ओर अब इनकी हवा सहेरमे भी फैलने लगी थी.. जीनकी मीसाल धृवके जैसे कइ परीवार थे.. जहा अ‍ैसे आपसी रीस्तोमे अवैध रीस्ता पल रहा था.. धृवकी मम्मी ओर उनकी बहेनके अलावा धृवका रीस्ता उनकी मौसी.. यानीकी उनकी बहेनकी सासके साथ भी ओर गहेरा हो गया था..

मंजुकी मुहीम ओर उनकी अंतीम विदाइसे देवायतका गांव पुरे भारतमे मसहुर हो गया था.. ओर उद्घाटनमे मुख्यमंत्रीके आनेकी वजहसे अ‍ेक बार फीर इस गांव चर्चाकी सुर्खीयोपे आगया.. उद्घाटनके ठीक अ‍ेक दिन पहेले ही इनकी नेशनल न्युजपे डीबेट सुरु होगइ.. ओर आखीर वो दिन भी आगया..

भावीका लखनने डोक्टर उद्योगपती ओर खास महेमानोके लीये वीसेस व्यवस्था कीथी.. पंकजभाइ ओर नयनाको भावीकाने अपनी हवेलीमे ही ठहेराया था.. नयना हवेली देखकर ही दंग रेह गइ.. वो बार बार विडीयो कोलपे अपनी बेटी नेहाको सबकुछ दीखाती रही.. जीसे देखकर नेहा भी खुस थी.. अ‍ेक बार उसने भावीकासे भी बातकी..

आजु बाजुके सभी गांव वाले होस्पीटल ओर स्कुल देखने घरसे नीकल गये थे.. देवायतको भी इतनी संख्या होनेकी उमीद नही थी.. मुख्यमंत्री खुद इतनी मेदनी देखकर खुस होगये.. उन्होने स्कुल ओर होस्पीटलका उद्घाटन कीया ओर अंदर देखने चले गये.. ओर देखती ही दंग रेह गये.. क्युकी स्कुलमे बहुत ही आधुनीक सुवीधा थी..

हर क्लासमे इलेक्ट्रोनीक्स डीस्पलेय बोर्डके साथ कोम्टुटर थे.. स्टुडन्टके लीये बैठनेकी बहुत ही आधुनीक सुवीधाये थी.. ओर होस्पीटलमे भी बहुत ही आधुनीक मशीनररी लगी हुइ थी.. मुख्यमंत्रीने सोचा थाकी की गांवकी कोइ छोटी मोटी स्कुल ओर होस्पीटल होगी.. लेकीन इसके बजाये ये सब देखकर वो दंग रेह गये..

फीर मंचपे आकर उन्होने जब भासण दीया.. ओर विसेस अ‍ैसी सुवीधाके लीये भावीका चारु वंदना ओर रश्मी वसुधाके साथ पुनमका भी सन्मान कीया तो पंकजभाइ ओर नयनाकी आंख खुसीके मारे गीली होगइ.. ओर मुख्यमंत्रीने होस्पीटल ओर स्कुलके लीये वीसेस फंड देनेके साथ गांवको तालुकाका दरजा देनेकी घोसज्ञा की..

जीनकी उमीद देवायत पुनम चारु ओर रश्मीको भी नही थी.. तो पब्लीकमे तालीओकी गडगडाट होने लगी.. ओर लोग मुख्यमंत्रीके जयकारेकी घोस करने लगे.. फीर मुख्यमंत्रीने सभी आवेदनकर्ता जीनको सरकारी नोकरीया मीली थी उन सभीको नीचुक्ती पत्र अर्पण कीया.. तब गीताके साथ वीनोद बहुत खुस था..

आज आधीकारीक रुपसे सबको सरकारी नोकरीया मील गइ थी.. ओर जीनको नोकरी मीली उनके परीवार वालेभी बहुत खुस थे.. फीर महेमानोके लीये वीसेस जगाहपे भोजनकी व्यवस्था की गइ थी.. मुख्यमंत्रीने पुरे कार्यक्रमके दौरान देवायतको अपने साथ ही रखा ओर उनका आभार जताया..

फीर देवायतने कुछ उद्योगपतीके साथ पंकजभाइको भी मीलवाया तो पंमजभाइ बहुत खुस हो गये.. सबको अपने बीजनेस बढनेकी उमीद जग गइ.. ओर कइ डोक्टरने वहा आकर मुफ्तमे सेवा देनेकी पेसकस की.. जीसे सुनक भावीका ओर सृती बहुत खुस हो गइ.. फीर वसुधाने सबका कोन्टेक्ट नंबर लेलीया..

गांव वालोभी स्कुल होस्पीटल देखने लगे.. ओर साथमे भोजन करते देवायत लखनसे भी मीलते उनकी सराहना करने लगे.. ओर अपने अपने गांवकी ओर चल पडे.. पुरा घटनार्कम मीडीयाने अच्छेसे कवर कीया.. पुरे गांवमे अ‍ेक उत्सव जैसा माहोल हो गया था.. ओर आखीर ये कायर्कम सम्पन हुआ..

जाते समय पंकजभाइ ओर नयना भावीकाको गले मीलते लगभग रोही पडे.. उन्होने लखन ओर भावीकाको खुब आशीर्वाद दीये.. ओर घरपे आनेका न्योता देकर फीर चले गये.. सभी कार्यकर्ताने बहुत महेनत कीथी.. तो सामको देवायतने इनके लीये वीसेस भोजनकी व्यवस्था कीथी.. इनमे कार्यकर्ताके रुपमे कुछ दुसरे गांवके लडका लडकीया सामील थे..

सबके भोजनके पहेले देवायतने सबको अ‍ेक साथ बीठाया.. ओर सबका आभार जताया.. तब कीसीको पता नही थाकी उनके लीये अ‍ेक सरप्राइज हे.. जीनकी व्यवस्था लखन पुनम ओर सृतीने मीलकर कीथी.. पुनमने अ‍ेक अ‍ेक कार्यकर्ता ओर जीन्होने इनमे महेनतकी थी.. सबके लीये उपहार लीये थे..

तब पुनमने सबका आभार जताते धोसणा की तो सबके चहेरेपे खुसीकी लहेर दौड गइ.. ओर पुनमने ये उपहार देवायत ओर नीर्मलाके हाथोसे दीलवाया.. जीनमे लडके ओर लडकीओके लीये अलग अलग अ‍ेक गोल्डन घडी थी.. जीसे देखकर सबलोग खुस होगये.. फीर सबके लीये भोनज हुआ.. ओर सबलोग अपने अपने घर चले गये..

उस रात जीनको भी नोकरी मीलीथी सबने अपने अपने पार्टनरके साथ सेलीब्रेट कीया.. जीनमे ज्यादातर जोडे सगे भाइ बहेन ओर भाभी देवर ही थे.. तो कइ कजीन भाइ बहेन.. ओर अ‍ेक जोडा अ‍ैसा था.. जीनका इस दुनीयामे कोइ नही था.. वो लडका जो उनकी विधजा मांके साथ रेह रहा था..

लडकेको उनकी मांने अपना मंगलसुत्र बेचकर ओर गांवके दुसरे घरोमे बर्तन मांजनेके साथ दुसरेके खेतोमे मजदुरी करके पढाया लीखाया.. ओर अपने लडकेको पढाकर बादमे नर्सींगका कोर्स करवाया.. जीनकी वजहसे वो लडका उनकी मांको बहुत प्यार करता था.. गरीबीकी वजहसे सादीके बारेमे सोचता भी नही था..

ओर अपने बेटेकी इस तकलीफसे उनकी मांको अपने बेटेकी चीन्ता होने लगी.. फीर इस रीस्तोके बदलावके बारेमे सुनकर धीरे धीरे आगे बढते दोनो मां बेटे आपसी रीस्तोके बंधनमे बंध गये.. उनकी मां अपने बेटेके तनकी जरुरतको पुरी करने लगी.. जीसे वो अपनी प्यास भी बुजाते खुस रहेने लगी..

रातके अंधेरेमे बंध कमरेमे दोनो अ‍ेक पती पत्नीकी तराह रहेने लगे थे.. जीनके बारेमे आजतक कीसीको कुछ पता नही चला.. सबकुछ अ‍ेक कीरायेकी रुममे ही चल रहा था.. ओर आज सरकारी नोकरी मीलनेकी वजहसे सबसे ज्यादा वो दोनो खुस थे.. दोनो घर जाकर अ‍ेक दुसरेसे लीपटकर खुब रोये.. ओर खुसीसे आंसु बहाये..

फीर दोनोने अ‍ेक दुसरेको मीठाइ खीलाकर मुह मीठा कीया.. फीर दोनोके होठ मील गये.. बादमे लडकेने उसी दिन अपनी माको दुसरोके यहा काम करनेको मना करदीया.. ओर उनके लीये वो रात कभी ना थमने वाली रात साबीत हुइ.. उस रात मांने अ‍ेक दुल्हनकी तराह शींगार कीया.. ओर अपने बेटेको अ‍ेक पत्नीका खुब सुख दीया..

दुसरे ही दिन गांवका माहोल बदल गया.. सबलोग अपनी अपनी नोकरीपे आने लगे.. दो दिन तक स्कुल ओर होस्पीटलका बहार वालेके लीये कार्य बंध रखा गया.. ताकी अंदरकी व्यवस्था बहाल हो सके.. सुबह सुबह चाइ नास्तेके बाद सबलोग कामपे लग गये.. सृती भावीकाके साथ पुनम ओर लखन भी होस्पीटल पहोंच गये.. तो वहा पहेलेसे ही वसुधा ओर नीशा आ चुकी थी..

रश्मी वंदना चारु जयश्री ओर जागृती बीन्दीया ओर गीता स्कुलपे पहोंच गइ.. ओर सबने मीलकर स्कुलका सेड्युल तैय कर लीया.. होस्पीटलमे डीपार्टमेन्टके हीसाबसे सबको जीम्वेवारीया बांटदी गइ.. मुनाको मेडीकल स्टोर सम्हालनेका स्वतंत्र हवादा देदीया गया.. वसुधा भावीकाने मीलकर अलग अलग डोक्टरोका सेड्युअल तैय करलीया..

नीशा बर्खाने मीलकर सभी नर्सोकी ड्युटी ओर दुसरी व्यव्सथा तैय करली.. आरतीको दर्दीके केस रीसेपनीस्ट सम्हालने देदीया.. इन दो दिनमे सबकुछ तैय होगया.. अब भावीकाको हमेसाके लीये यही रहेना था.. आरती ओर उनकी बुढी मां.. ओर भावीकाकी दो स्टाफकी नर्सोके लीये पुनमने रश्मीके पुराने घरपे रहेनेकी व्यवस्था करदी.. जो घर बहुत बडा था..

सबकुछ तैय होनेके बाद लखन सृती राधीका नीलमके साथ दया ओर रजीयाको लेकर सहेर जानेको तैयार हो गया.. तो चंदा भी अब सहेरमे लखनके साथ जाना चाहती थी.. तो लखन सबको लेकर सहेर चला गया.. ओर सब लोग अपने अपने काममे बीजी होगये.. अब सृती पहेलेकी तराह अकेली ही अपनी क्लीनीकपे जाने लगी.. वहा उनको अब भावीकाके पेसन्ट भी मील गये थे..

वृन्दा कार्यक्रम समाप्त होनेके बाद अ‍ेक दिन ओर रुक गइ.. तभी उसे अपने दिमागमे अ‍ेक योजना बनाइ.. उन्होने सुबह नास्तेके साय श्रीधरको अब घरपे छोडनेके लीये कहा.. ओर कुछ लीगल पेपरको सही करनेके लीये उसे दो तीन दीन श्रीधरकी मदद हे कहेते ब्रीन्दासे श्रीधरको तीन दिन लेजानेकी पेसकस की..

र्ब्रीन्दा सबकुछ समज गइ थी.. फीर भी वो श्रीधरको वृन्दाके साथ भेजनेको राजी होगइ.. ओर जयश्री जोबपे जानेसे पहेले वृन्दाको गले लग गइ.. ओर बच्चीको ब्रीन्दाके सहारे छोडकर नइ स्कुलकी नोकरीपे चली गइ.. फीर चाइ नास्तेके बाद वृन्दाने अपना सामान बटोरा ओर ब्रीन्दाको गले मीलकर दोनो कार लेकर नीकल गये..

सहेर पहोचते दोनोने पुरे रास्ते मस्तीया की.. अभी जीतुलाल अपने धंधेपे था.. तो घर पहोंचते ही वृन्दाने फटाफट अ‍ेक बेग पेक करना सुरु करदीया.. ओर उनमे अपने कुछ लेटेस्ट कपडे डाले.. श्रीधर पुरे रास्ते उनसे छेडछाड कर रहा थातो उनसे रहा नही गया.. ओर वृन्दाको वही बेडपे गीराते दबोच लीया..

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वृन्दा बहुत ही कामुन नीगाहोसे श्रीधरको देखते उनका साथ देने लगी.. ओर कुछही देरमे दोनो अ‍ेक हो गये.. श्रीधर बहुतही जोसमे वृन्दाको चोद रहा था.. ओर वृन्दा वासनाभरी नजरोसे श्रीधरको देखते उनका तगडा लंड जेलती रही.. आखीर दो बार चुत भरनेके बाद श्रीधर सांत हुआ तब वृन्दाने बम फोड दीया..
 
वृन्दा : (मुस्कुराते) श्रीधर.. चलो फटाफट कंपलीट होजाओ.. तेरे बापके आनेसे पहेले हमे यहासे नीकलना हे.. कपडेतो पेक हो गये सीर्फ तैयार होना हे..

श्रीधर : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? हम कही जा रहे हे..? वो लीगल पेरपके लीये..?

वृन्दा : (कातील मुस्कानसे) नही.. कोइ लीगल पेपर नही.. मेने र्बीन्दासे जुठ बोला था.. ताकी हम दोनो अकेलेमे दो तीन दिन कही टाइम स्पेन्ड कर सके.. समजलो ये हमारा छोटासा पहेला हनीमुन हे.. तुम समज गयेनां..? चलो फटाफट रेडी होजाओ..

श्रीधर : (सामने देखते) लेकीन..

वृन्दा : (बीचमेही बात काटते) लेकीन वेकीन कुछ भी नही.. अगर तुम्हारा बाप आगया तो लफडा होजागा.. वैसेभी ये बच्चेकी वजहसे सकतो हम दोनोपे पहेलेसीहे करता हे.. अगर हम दोनोको इस वक्त साथ देखलीया तो हंगामा करेगा.. इनको कुछ मालुम पडे इनसे पहेले ही हमे यहासे नीकलना हे..

श्रीधर : (सामने देखते) यार उसे पता तो चलही जायेगा.. चलो घरपे तुमने मम्मीको बहाना बनाकर समजा दीया.. लेकीन पापाको क्या कहोगी..?

वृन्दा : (मुस्कुराते फोन हाथमे लेते) तुमभी नां..? बहुत चीन्ता करतेहो उनकी.. तेरीमांकी चीन्ता नही हे.. हम भी तेरी मांको ओर तेरे बडे पापाको चकमा देकर अ‍ैसेही नीकल जाते थे.. ओर वोभी पुरे अ‍ेक हप्तेके लीये.. ठहेर.. मे तेरे सामनेही उसे फोन करके बता देती हु..

वृन्दा : (जीतुलालको फोन लगाते) हां जीतु.. मे वृन्दा बोल रही हु.. हमारी जयश्रीको सरकारी स्कुलमे नोकरी मील गइ हे.. बस.. उनके बच्चेके लीये मुजे दो तीन दिन ओर यहा रुकना पडेगा.. फीर श्रीधर मुजे घर छोडदेगा..

जीतुलाल : (थोडा चीडते) यार कीतने दिन होगये..? ओर मुजे फोन करना.. मेही तुजे वहा लेने आउगा..

वृन्दा : (थोडी नाराजगीसे) क्यु..? अगर श्रीधर मुजे छोडने आ रहा हे.. तो तुजे क्या प्रोबलेम हे..? अपनेही बेटेपे सक कर रहे हो..?

जीतुलाल : (थोडा चीडते) यार सक नही कर रहा.. बस.. वो हमेसा तुमसे चीपका रहेता हे.. ओर तुजे जीस नजरोसे देखता हे तो मुजे अच्छा नही लगता.. इसीलीये केह रहा हु..

वृन्दा : (थोडी सख्तीसे) क्यु..? भुल गया तु सबकुछ..? जब तेरे बडे भाइ ओर तेरी पत्नीके होते हुअ‍े भी तु मौका देखकर मेरे उपर चड जाता था.. तबतो कोइ सक नही था.. तबतो सब कुछ अच्छा था.. ओर मत भुल.. वो मेरे बेटेके साथ मेरा भांजा भी हे.. ओर अबतो हमारा दामाद हो गया हे..

जीतुलाल : (चीडते) यार तु मेरे साथ बहेस मत कर.. धंधेपे ध्यान देने दे.. तुजे जैसा मन करे कर.. मे मेरे खानेका इन्तजाम करलुगा.. चल फोन रखदे..

कहा तो वृन्दा फोन काटते ही श्रीधरकी ओर देखते जोरोसे हसने लगी.. वृन्दाने पुरी तराह जीतुको अपने वसमे करलीया था.. इसे जीतुका कोइ डर नही था.. ओर वो अब खुलकर श्रीधरके साथ जींदगी जीना चाहती थी.. लेकीन वृन्दाको पता नही थाकी सबकुछ उनके मुताबीक नही उनकी बहेन ब्रीन्दाके मुताबीक हो रहा था..

फीर दोनो घरको ताला लगाकर वहासे नीकल गये.. दो दिन थातो ज्यादा दुर जाना मुमकीन नही था.. वृन्दाके कहेनेपे दोनो दिवकी ओर नीकल गये.. ओर वहा दोनोने अ‍ेक बडीयासी होटेलमे अ‍ेक अ‍ेसी कमरा बुक करलीया.. वहा जातेही फ्रेस होतेही दोनो अ‍ेक होगये.. ओर श्रीधरने वृन्दाको जमकर दो बार चोद लीया..

तब वृन्दाको पता नही थाकी श्रीधर उनकी हर बाते ब्रीन्दाके साथ सेर करता हे.. वहा पहोंचतेही श्रीधरने ब्रीन्दाको अपना लोकेशन सेर करदीया था.. तो ब्रीन्दा कातील मुस्कान करने लगी.. दिवमे वृन्दा ओर श्रीधरने खुब अ‍ेन्जोय कीया.. मुस्कीलसे ही दोनो बहार नीकलते थे.. पुरा दिन ओर रात सीर्फ कमरेमे..

बच्चे देनेकी वजहसे वृन्दा श्रीधरके साथ सेलीब्रेट करना चाहती थी.. ओर इस सेलीब्रेटमे उन्होने जमकर खुब श्रीधरके साथ सेक्स कीया.. ओर उसे पता भी नही चलाकी उनकी सेक्स करते विडोयो फील्म बन रही हे.. जो श्रीधरने वृन्दासे छीपकर अपना मोबाइल सेट कीया था.. फीर दोनो दो दिन मजे करके वापस आगये.. ओर श्रीधर वृन्दाको घर छोडकर वापस गांव चला गया..

तो अब राधीका पेट बढनेकी वजहसे कभी कभार ही होस्टेलपे जाती.. वो ज्यादातर बच्चो ओर घर सम्हालती.. ओर उनमे चंदा विजय ओर अपनी बच्चीको सम्हालते राधीकाका हाथ बटाती.. क्युकी अब वहा दया ओर रजीयाने प्रेगनेन्ट होनेके बावजुद मीलकर पुरी होस्टेल सम्हाल लीया था..

तो नीलम भी कोइ बहाना बनाकर हर सेटरडे सन्डे धिरेनके घरपे चली जाती.. ओर उनकी पत्नी होनेका हक अदा करती.. अब धिरेन भी नीलमको हमेसाके लीये घर आनेका फोर्स करने लगा.. जो नीलम उनकी ग्रेज्युअ‍ेशन खतम होने तक ना आनेका बहाना बनाकर बातको टाल देती.. ताकी उसे लखनके घरपे रहेते लखनका प्यार मील सके.. सबकी लाइफ रुटीन हो गइ.. समय बीतने लगा..

लखन अ‍ेक दिन सहेरमे ओर अ‍ेक दिन गांवमे रहेता.. ओर हप्तेके कइ सेटरडे सन्डे सबको लेकर गांव चला जाता.. वहा लखनकी सभी बीवीया ओर भाभीया मीलकर रातमे लखनको सोने तक नही देती.. ओर दिनमे भी मौका मीलतेही चारु रश्नी नीशा वंदना लखनको पकड लेती.. ओर स्कुल होस्पीटलके खाली कमरेमे लेकर चली जाती..

अब देवायतकी सभी बीवीओने लखनको अपने पतीकी तराह अ‍ेक्सेप्ट करलीया था.. स्कुलके उद्घाटनके ठीक अ‍ेक महीनेके बाद वंदनाको मौका मील गया.. नीशा चारु वसुधा ओर रश्मीका लखनके साथ अनुभव सुना था इसीलीये उन्होने दो दिनकी छुटी लेली.. ताकी दुसरे दिन वो आराम कर सके..

ओर हुआ भी वही.. फोनपे बात होनेके बाद लखन सीधाही रश्मीके घर चला गया.. उस दिन वंदना अ‍ेक दुल्हकी तराह सजके लखनका इन्तजार कर रही थी.. ओर दोनोने पुरा दिन अ‍ेक नये सादी सुधा जोडेकी तराह बीताया.. जब लखन वहासे नीकला तब वंदनाकी हीलनेकी भी स्थीती नही थी..

लखनने वंदनाका अ‍ेक अ‍ेक अंग जंजोरके रख दीया था.. वंदना भाभीके साथ उनकी दोस्त भी थी.. तो लखन वंदना दोनोको जोस कुछ ज्यादाही चडा हुआ था.. ओर पहेले मीलनमे ही लखनने बीना नीचे उतरे वंदनाको जमकर चार बार चोद लीया.. ओर चारो बार उनकी चुतको पुरी भरके फीरसे हरी भरी करदी..

विजयके साथ चंदा पुनम भावनाकी बच्चीया भी बडी होने लगी.. सहेरमे अब चंदा राधीका ओर सृती नीलम ही थी.. जब सेटरडे सन्डे नीलम घरका बहाना बनाकर धिरेनके घर चली जाती तब सृती चंदाको भी अपने साथ सोनेके लीये बुला लेती.. पहेलेतो चंदा बहुत ही सरमाइ.. फीर सबकुछ रुटीन होगया.. ओर लखन तीनोको अच्छी तरनह संतुस्ट करता..

गांवमे अब स्कुल ओर होस्पीटल धम धमने लगी.. आजु बाजुके गांवसे स्कुलमे बच्चे आर पेसन्ट आने लगे.. वहा कइ महीलाओका पेट अब काफी बढ गया था.. तो कीसीका डीलीवरीना वक्त भी आगया था.. अ‍ैसेही सांती ओर सलमाकी डीलीवरी गांवकी होस्पीटलमे ही होगइ.. सांतीने अ‍ेक सुंदर बच्चीको जन्म दीया था.. तो सलमाने भी अ‍ेक बच्चेको जन्म दीया..

जीसे दो महीनेके लीये फीरोजको सलमासे दुर रहेना था.. तो अब फीरोज जरीनाके साथ सोनेकी जीद करने लगा.. तो जरीनाने भी अपनी प्रेगनन्सीकी वजहसे फीरोजको छुनेसे मना करदीया.. जीसे फीरोज बहुत ही चीड गया.. ओर अपना रातका समय भी ज्यादातर खेतोपे ही बीताने लगा.. ताकी वो अपनी मजदुरके साथ अपनी सारीरीक जरुरतको पुरा कर सके..

लेकीन उनको कभी पता नही चलाकी जरीनाकी प्रेगनन्सी सीर्फ अ‍ेक बहाना थी.. क्युकी सलमाकी डीलीवरीकी वजहसे अब ज्यादातर जरीनाको ही साहीलका खयाल रखना था.. ओर मौका मीलतेही साहीलसे दिनमे भी अपनी प्यास बुजा लेती.. ओर जब फीरोज रातपे खेतपे रुकता तब जरीना पुरी रात साहीलके साथ उनका बीस्तर गरम करती..

अब जरीनाने साहीलको पुरी तराह अपना पती मानलीया था.. ओर उसे जो मजा साहीलसे मील रहा था वो मजा कभी फीरोज ओर कादीरसे नही मीला.. वही हाल सहेरमे सायराका था.. वो अब पतीके रुपमे कादीरसे ज्यादा साहीलको तवजो देने लगी थी.. उनको साहीलके साथ सेक्स करनेमे बहुत मजा आ रहा था..

तो साहील भी रेग्युलर सहेर जाकर सायराको मीलकर आता.. ओर कभी कभी कादीरकी टुरकी वजहसे वही दो तीन दीनके लीये रुक जाता.. तब साहील सायरा मीया बीवीकी तराह रहेते खुब मजा करते.. अब हर तीन चार महीनेमे सबाना भी साहीलको बेंगलोर बुला लेती.. ओर अपनी प्यास बुजवाने लगी..

समयके साथ अब सृती राधीका भावीका ब्रीन्दा वृन्दा बसंती जरीना गीता जागृती बीन्दीयाके साथ रजीया ओर दयाका पेट भी काफी बढ गया था.. होस्पीटलपे अब भावीका बहुत बीजी होगइ थी.. उन्होने दो ओर सहायक लेडी डोक्टरको रख लीया था.. वो हर दिन चारसे पांच डीलीवरी करती.. ओर लेडीसको चेक करती.. वसुधाने जनरल डोक्टरका काम सम्हाल लीया था.. वहा ओथोपेडीक वोर्ड भी था..

राधीका दयाका पेट बढ गया था तो अ‍ेक फ्राइडे सामको राधीकाको लेबर पेइन हुआ. ओर सृतीने उनकी डीलीवरीकी.. राधीकाने अ‍ेक सुंदर बच्चीको जन्म दीया.. तब कुछ दिनके लीये पुनमने लताको वही सहेर भेज दीया.. अब लता काफी कंपलीट होगइ थी.. ओर उनको भावीकाने सेक्स करनेकी छुट देदी थी..

सहेर ओर गांवमे अब बच्चोकी कीलकीलाट सुनाइ देने लगी थी.. पहेले विजय फीर चंदाकी बच्ची ओर अब राधीकाकी बच्ची.. लता ओर चंदा राधीकाका बहुत खयाल रखती.. ओर मौका मीलतेही लखनके साथ बीस्तर गरम करती.. अब उन सबके लीये सेक्स करना आम बात होगइ थी.. कभी कभी सबके होते हुअ‍े भी चंदा सृती ओर लताकी कुटाइ अ‍ेक साथ अ‍ेकही बीस्तरपे हो जाती..

तो स्कुलमे अब काफी संख्या हो गइ थी.. गीता हर दिन गांवसे अपडाउन करती.. कभी कभी मोका मीलता तो मुना उसे गांव छोडने चला जाता.. ओर गीताको संतुस्ट करते वापस आजाता.. सबका अफैर चलता रहा.. अ‍ैसेही अ‍ेक साल बीत गया कीसीको पता भी नही चला.. ओर इन अ‍ेक सालमे ना जाने क्या क्या हुआ..

सृतीका पेट बढ गया तब चंदा ओर लताने लखनको सम्हाल लीया.. जबसे राधीकाकी डीलीवरी हुइ तबसे लता सहेरमे रुक गइ थी.. ताकी लखनको कोइ तकलीफ ना हो.. विजय अब बडा होगया थातो चंदाको ही अपनी मां मानकर मम्मी कहेकर बुलाने लगा.. ओर चंदा भी विजयका अपने बेटेकी तराह खयाल रखती..

ज्यादातर विजय चंदाके साथ ही सोता.. ओर कभी कभी चंदा अपनी बेबीको दुध पीलाती तो दुसरी ओर विजय भी चंदाका दुध पीनेकी जीद करता.. ओर चंदा उसे अपना दुध पीलाती.. विजय अब थोडा बडा होगया तो कभी नीलमके साथ तो कभी सृती राधीकाके पास सो जाता.. तब लखन नीचे चंदाके रुममे चला जाता.. वहा चंदा ओर लता दोनो ही लखनका इन्तजार करती..

लखन दोनोको दो दो तीन तीन बार जमकर पेलता ओर दोनोको संतुस्ट करते वही सो जाता.. तो कभी कभी लखन चंदा लताकी वजहसे हप्तेमे तीन चार बार दिनमे अ‍ेक बार कोलेजसे बंक मरवाते या छुटीके दिन नीलमको लेकर भुमीका वाले घरपे चला जाता.. ओर नीलमको जमकर पेलता.. जीसे नीलम भी बहुत खुस रहेती..

अ‍ेक सालमे समयके साथ सबकी डीलीवरी हो चुकी थी.. सृतीकी कोखमे फीरसे भुमीका जन्म लेकर आगइ थी.. तो भावीकाने भी अ‍ेक बच्चीको जन्म दीया था.. दयाको अ‍ेक लडका तो रजीयाने अ‍ेक लडकी पैदा करली थी.. ओर दोनोमे समजोता भी करलीयाकी अपने बच्चोकी आपसमे सादी करवायेगी..

गांवमे रमा भी अ‍ेक बच्चीको जन्म देती हे.. भानुको आजतक पता नही चला की वो बच्ची लखनकी हे.. वो आज भी अपनी मां सरला ओर रीटाके पीछे पागल हे.. अब उमरकी वजहसे सरला भानुको कम ही हाथ लगाने देती हे.. लेकीन लखनसे मौका मीलते ही आज भी अपनी प्यास बुजा लेती हे.. ओर रमाको आज भी लखनका प्यार रेग्युलर मील रहा हे..

सलमाने अपने बच्चेको जन्म देनेके बाद फीर सात महीनेके बाद जरीनाने भी अ‍ेक बच्चीको जन्म दीया.. जो बच्ची अपने ही बेटे साहीलकी थी.. ओर इस बारेमे फीरोजको आज भी नही पता ये राज सीर्फ सरलमा जरीना ओर साहील ही जानते थे.. तो समयके साथ बसंतीने भी अ‍ेक सुंदर लडकेको जन्म दीया..

बखेडा तो तब हुआ जब अ‍ेक दिन सुबह सुबह श्रीधर वृन्दाको लेने सहेर गया था.. तब जीतुलाल भी घरपे था.. सुबह सुबह श्रीधरको देखते ही वृन्दाके चहेरेपे अ‍ेक अलग ही खुसी छागइ.. ओर वो दोडकर श्रीधरको गले लग गइ.. फीर श्रीधरके गालको चुम लीया.. ओर श्रीधरको कुछ अलग ही नजरोसे देखने लगी..

जो वो अपनी जवानीमे जीतुके साथ अफैर हुआ तब देखती थी.. फीर हाथ पकडकर उसे चाइ नास्तेके लीये अपने बगलमे ही बीठा दीया.. फीर श्रीधरकी ओर कातील नजरोसे मुस्कुराने लगी.. ओर अ‍ेक नीवाला श्रीधरको खीलाया.. तो जीतुलाल दोनोकी ओर देखता ही रेह गया.. ओर मनही मन श्रीधर वृन्दाको कोसने लगा.. वृन्दा ओर ब्रीन्दाके बीच अगले ही दिन फोनसे बातचीत हो चुकी थी.. तब बैठते ही..

कन्टीन्यु
 
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